MP Board Class 7th Social Science Solutions Chapter 3 उत्तर भारत के राज्य (800 ई. से 1200 ई. तक)

MP Board Class 7th Social Science Chapter 3 उत्तर भारत के राज्य (800 ई. से 1200 ई. तक)

MP Board Class 7th Social Science Chapter 3 अभ्यास प्रश्न

प्रश्न 1.
निम्नलिखित प्रश्नों के सही विकल्प चुनकर लिखिए –
(1) पाल वंश का मूल स्थान क्या था ?
(अ) कन्नौज
(ब) जोधपुर
(स) ग्वालियर
(द) बंगाल।
उत्तर:
(द) बंगाल

(2) राजा मिहिरभोज किस वंश का सर्वाधिक प्रतापी शासक था ?
(अ) पाल वंश
(ब) गुर्जर प्रतिहार वंश
(स) राष्ट्रकूट वंश
(द) राजपूत वंश।
उत्तर:
(ब) गुर्जर प्रतिहार वंश।

प्रश्न 2.
रिक्त स्थानों की पूर्ति कीजिए(कोष्ठक में दिए गए शब्दों में से सही शब्द चुनें –
(1) खजुराहो के प्रसिद्ध मन्दिर ……….. शासकों ने बनवाये।(पाल, चन्देल, गुर्जर प्रतिहार)
(2) दिल्ली नगरी …………. वंश के शासकों ने बसाई।(तोमर, पाल, गुर्जर)
(3) 8वीं सदी से 12वीं सदी के मध्य शिक्षा का प्रमुख केन्द्र …………. था। (विक्रमशिला, दिल्ली, अजमेर)
उत्तर:
(1) चन्देल
(2) तोमर
(3) विक्रमशिला।

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प्रश्न 3.
निम्नलिखित की सही जोड़ियाँ बनाइए –
MP Board Class 7th Social Science Chapter 3 उत्तर भारत के राज्य (800 ई. से 1200 ई. तक)
उत्तर:
(1) (c) गुर्जर प्रतिहार वंश का शासक
(2) (a) पृथ्वीराज रासो
(3) (b) राजतरंगिणी
(4) (e) रूगविनिश्चय
(5) (d) गोमतेश्वर की जैन मूर्ति।

MP Board Class 7th Social Science Chapter 3 लघु उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 4.
(1) कन्नौज पर अधिकार करने के लिए किन – किन प्रमुख शक्तियों के मध्य संघर्ष हुआ?
उत्तर:
कन्नौज पर अधिकार करने के लिए राष्ट्रकूट, पालवंश, गुर्जर प्रतिहार तथा अन्य राजपूत वंशों के मध्य संघर्ष हुआ।

(2) महमूद गजनवी के भारत आक्रमण का मुख्य कारण क्या था?
उत्तर:
महमूद गजनवी अति महत्त्वाकांक्षी था। उसे एक विशाल सेना की आवश्यकता थी और सेना के लिए धन की आवश्यकता थी। अतः धन प्राप्त करने के उद्देश्य से उसने भारत पर 17 बार आक्रमण किए।

(3) दक्षिण भारत की वास्तुकला के उत्कृष्ट उदाहरण लिखिए (कोई चार)।
उत्तर:

  •  कंदरिया महादेव मन्दिर, खजुराहो
  • लिंगराज मन्दिर, भुवनेश्वर
  • विमला बासाही मन्दिर, माउंट आबू
  • पुरी का जगन्नाथ मन्दिर।

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MP Board Class 7th Social Science Chapter 3 दीर्घ उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 5.
(1) परमार वंश के प्रसिद्ध राजा भोजदेव के कार्यों का वर्णन कीजिए।
उत्तर:
परमार वंश के राजा भोजदेव के कार्य –

  • राजा भोजदेव उच्चकोटि के लेखक, कवि और विद्वान थे। उन्होंने कुछ ग्रन्थ लिखे।
  • उन्होंने अनेक राजप्रासादों, मन्दिरों और तालाबों आदि का निर्माण कराया।
  • भोपाल से 35 किमी दूर दक्षिण-पूर्व में भोजपुर नगर | बसाया। यहाँ का शिव मन्दिर प्रसिद्ध है।

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MP Board Class 7th Social Science Solutions Chapter 5 मौलिक अधिकार और कर्त्तव्य

MP Board Class 7th Social Science Chapter 5 मौलिक अधिकार और कर्त्तव्य

MP Board Class 7th Social Science Chapter 5 अभ्यास प्रश्न

प्रश्न 1.
निम्नलिखित प्रश्नों के सही विकल्प चुनकर लिखिए –
(1) भारत के संविधान द्वारा नागरिकों को कुल कितने मौलिक अधिकार प्राप्त हैं?
(अ) तीन अधिकार प्राप्त हैं।
(ब) चार अधिकार प्राप्त हैं।
(स) पाँच अधिकार प्राप्त हैं।
(द) छः अधिकार प्राप्त हैं।
उत्तर:
(द) छः अधिकार प्राप्त हैं

(2) इनमें से कौन-सी बात सही नहीं है?
(अ) भारत के समस्त नागरिक बिना किसी भेदभाव के कानून के समक्ष बराबर हैं।
(ब) शासकीय नौकरियों में सभी को समान अवसर प्राप्त हैं।
(स) शासन जाति, लिंग, भाषा, राज्य के आधार पर कोई भेदभाव नहीं करेगा।
(द) अस्पृश्यता को जातिगत आधार पर मान्यता प्राप्त है।
उत्तर:
(द) अस्पृश्यता को जातिगत आधार पर मान्यता प्राप्त है

(3) 14 वर्ष से कम आयु के बच्चों से माचिस उद्योग में काम करवाना किस अधिकार का हनन है?
(अ) समता का अधिकार
(ब) स्वतन्त्रता का अधिकार
(स) शोषण के विरुद्ध अधिकार
(द) संस्कृति और शिक्षा का अधिकार।
उत्तर:
(स) शोषण के विरुद्ध अधिकार,

(4) इनमें से कौन-सा हमारा मौलिक कर्तव्य है?
(अ) प्राकृतिक सम्पदा, जल, नदी, तालाब, वन्य प्राणियों की रक्षा करना और उन्हें संरक्षण प्रदान करना
(ब) पंचायत और नगरपालिकाओं में आरक्षण के लिए आवाज उठाना
(स) रोजगार के समान अवसरों की माँग करना
(द) अल्पसंख्यक वर्गों को शिक्षण संस्थाओं में प्रवेश देना।
उत्तर:
(अ) प्राकृतिक सम्पदा जल, नदी, तालाब, वन्य प्राणियों की रक्षा करना और उन्हें संरक्षण प्रदान करना।

प्रश्न 2.
कोष्ठक में दिए गए शब्दों में से सही शब्द चुनकर रिक्त स्थानों की पूर्ति कीजिए –
(संपत्ति, अधिकारों, शोषण, विचार अभिव्यक्ति, कर्त्तव्य)
(1) समान कार्य के लिए समान मजदूरी नहीं दिया जाना ……………….. है।
(2) अखबार छापना ……………….. की स्वतंत्रता का अधिकार
(3) राष्ट्रध्वज के प्रति सम्मान हमारा ……………….. है।
(4) हमें सार्वजनिक …………………. की रक्षा करनी चाहिए।
(5) हमारा कर्त्तव्य है कि हम दूसरे के …………….. का हनन न करें।
उत्तर:
(1) शोषण
(2) विचार अभिव्यक्ति
(3) कर्त्तव्य
(4) सम्पत्ति
(5) अधिकारों।

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MP Board Class 7th Social Science Chapter 5 लघु उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 3.
(1) हमें कौन-कौन से मौलिक अधिकार प्राप्त हैं ?
उत्तर:
हमें निम्नलिखित मौलिक अधिकार प्राप्त हैं –

  • समता का अधिकार
  • स्वतन्त्रता का अधिकार
  • शोषण के विरुद्ध अधिकार
  • धार्मिक स्वतन्त्रता का अधिकार
  • संस्कृति और शिक्षा का अधिकार
  • संवैधानिक उपचारों का अधिकार।

(2) समता के अधिकार पर चार वाक्य लिखिए।
उत्तर:

  • सभी नागरिक बिना किसी भेदभाव के कानून के समक्ष समान हैं।
  • शासकीय नौकरियों में चयन के लिए सभी को समान अवसर प्राप्त हैं।
  • शासन द्वारा जाति, धर्म, लिंग, भाषा एवं राज्य के आधार पर कोई भेदभाव नहीं किया जाता।
  • छुआछूत मानना एक अपराध है।

(3) शोषण के विरुद्ध अधिकार हमें शोषण से बचाता है, कैसे ?
उत्तर:
शोषण के विरुद्ध अधिकार हमें निम्न प्रकार से शोषण से बचाता है –

  • किसी व्यक्ति से जोर-जबरदस्ती से काम नहीं लिया जा सकता है।
  • एक व्यक्ति एक काम छोड़कर दूसरा काम कर सकता है।
  • उसे नियम से कम मजदूरी अथवा खराब परिस्थितियों में जबरदस्ती काम करने पर मजबूर नहीं किया जा सकता।
  • चौदह वर्ष से कम उम्र के बच्चों से कारखानों, खदानों अथवा अन्य कोई खतरे वाले कार्य नहीं करवाए जा सकते।

(4) महिलाओं हेतु तीन विशेष प्रावधान लिखिए।
उत्तर:
महिलाओं हेतु तीन विशेष प्रावधान निम्न हैं –

  • रोजगार के समान अवसर।
  • समान कार्य के लिए समान वेतन।
  • महिलाओं के सम्मान के विरुद्ध गतिविधियों को रोकना।

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MP Board Class 7th Social Science Chapter 5 दीर्घ उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 4.
(1) किन्हीं दो मौलिक अधिकारों पर टिप्पणी लिखिए।
उत्तर:
(i) धार्मिक स्वतन्त्रता का अधिकार:
सभी नागरिकों को अपने – अपने धर्म का पालन करने तथा उसका प्रचार करने का अधिकार है। किसी भी व्यक्ति को उसके धार्मिक रीति-रिवाजों का पालन करने से रोका नहीं जा सकता है। सभी को अपने – अपने तरीके से उपासना करने की स्वतन्त्रता है।

(ii) संस्कृति और शिक्षा का अधिकार:
भारत में विभिन्न भाषा बोलने वाले लोग रहते हैं, उनकी अपनी-अपनी संस्कृति है। भारत का संविधान सभी को अपनी संस्कृति, भाषा और लिपि को सुरक्षित रखने का अधिकार देता है। धर्म अथवा भाषा पर आधारित अल्पसंख्यक वर्गों को भी अपनी शिक्षण संस्थाएँ खोलने का अधिकार है। विभिन्न संस्थाओं को बिना किसी भेदभाव के सरकारी सहायता प्राप्त होती है।

(2) नागरिकों को प्राप्त स्वतन्त्रताओं में से किन्हीं दो का वर्णन कीजिए।
उत्तर:
नागरिकों को प्राप्त स्वतन्त्रताएँ –

  • विचार व्यक्त करने की स्वतन्त्रता – सभी नागरिकों को विचार व्यक्त करने, भाषण देने और अपने तथा दूसरे व्यक्तियों के विचारों को जानने और प्रचार करने की स्वतन्त्रता है। नागरिकों को समाचार – पत्र में लेख आदि लिखने की भी स्वतन्त्रता है।
  • व्यापार व व्यवसाय की स्वतन्त्रता – प्रत्येक नागरिक को कानूनी सीमा में रहकर अपनी इच्छानुसार कार्य तथा व्यवसाय करने की स्वतन्त्रता है।

(3) मूल कर्तव्यों को लिखिए।
उत्तर:
हमारे मूल कर्त्तव्य निम्नलिखित हैं –

  • प्रत्येक नागरिक को संविधान, राष्ट्र के आदर्शों, संस्थाओं, राष्ट्रीय ध्वज, राष्ट्रीय गान का आदर करना चाहिए।
  • अपनी स्वतन्त्रता को सुदृढ़ रखने के लिए राष्ट्रीय आन्दोलनों को प्रेरित करने वाले आदर्शों का पालन करना चाहिए।
  • भारत देश की रक्षा करनी चाहिए।
  • भारत की संप्रभुता और अखण्डता की रक्षा करनी चाहिए तथा उसे एकता के सूत्र में बाँधे रखना चाहिए।
  • सभी देशवासी धर्म, भाषा, जाति एवं वर्ग से ऊपर उठकर राष्ट्रभक्त बनें।
  • प्राकृतिक सम्पदा-जल, नदी, तालाब, वन्य प्राणियों की रक्षा करनी चाहिए तथा उन्हें संरक्षण प्रदान करना चाहिए।
  • भाईचारे एवं एकता की भावना का विकास करना चाहिए। संस्कृति एवं परम्पराओं का महत्व समझकर उनकी रक्षा करनी चाहिए।
  • हिंसा से दूर रहकर सार्वजनिक सम्पत्ति की रक्षा। करनी चाहिए।
  • राष्ट्रहित में बढ़-चढ़कर भाग लेना चाहिए।
  • वैज्ञानिक दृष्टिकोण एवं मानवता की भावना को बढ़ाना। चाहिए।

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MP Board Class 7th Maths Solutions Chapter 2 भिन्न एवं दशमलव Ex 2.5

MP Board Class 7th Maths Solutions Chapter 2 भिन्न एवं दशमलव Ex 2.5

प्रश्न 1.
कौन बड़ा है ?
(i) 0.5 अथवा 0.05
(ii) 0.7 अथवा 0.5
(iii) 7 अथवा 0.7
(iv) 1.37 अथवा 1.49
(v) 2.03 अथवा 2.30
(vi) 0.8 अथवा 0.88
हल:
(i) 0.5 अथवा 0.05
दशांश अंक की तुलना करने पर, हम पाते हैं :
5 >0
∴ 0.5 >0.05

(ii) 0.7 अथवा 0.5 दशांश अंक की तुलना करने पर, हम पाते हैं :
7 > 5
∴ 0.7 > 0.5

(iii) 7 और 0.7 इकाई स्थान के अंकों की तुलना करने पर, हम पाते हैं :
7 > 0
∴ 7 >0.7

(iv) 1.37 अथवा 1.49
चूँकि, यहाँ इकाई स्थान के अंक समान हैं।
∴ दशांश स्थान के अंकों की तुलना करने पर, हम पाते हैं :
3 < 4
∴ 1.37 < 1.49

(v) 2:03 अथवा 2.30
चूँकि, यहाँ इकाई स्थान के अंक समान हैं।
∴ दशांश स्थान के अंकों की तुलना करने पर, हम पाते हैं :
0 <3
∴ 2.03 < 2.30

(vi) 0.8 अथवा 0.88 यहाँ हम 0.8 को 0-80 भी लिख सकते हैं
चूँकि, यहाँ दशांश स्थान के अंक समान हैं।
∴ शतांश स्थान के अंकों की तुलना करने पर, हम पाते हैं :
0 < 8
∴ 0.8 <0.88

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प्रश्न 2.
दशमलव का उपयोग करते हुए निम्नलिखित को रुपये के रूप में व्यक्त कीजिए-
(i) 7 पैसे
(ii) 7 रुपये 7 पैसे
(iii) 77 रुपये 77 पैसे
(iv) 50 पैसे
(v) 235 पैसे
हल:
1 रुपया = 100 पैसे, 1 पैसा = \(\frac { 1 }{ 100 }\) रुपये
(i) 7 पैसे = 7 x \(\frac { 1 }{ 100 }\) रुपये = \(\frac { 7 }{ 100 }\) रुपये = 0.07 रुपये
(ii) 7 रुपये 7 पैसे = 7 रुपये + 0.07 रुपये = 7.07 रुपये
(iii) 77 रुपये 77 पैसे = 77 रुपये + 77 x \(\frac { 1 }{ 100 }\) रुपये = 77 रुपये + 0.77 रुपये = 77.77 रुपये
(iv) 50 पैसे = 50 x \(\frac { 1 }{ 100 }\) रुपये = 0-50 रुपये
(v) 235 पैसे = 200 पैसे + 35 पैसे = 2 रुपये + 35 x \(\frac { 1 }{ 100 }\) रुपये = 2.35 रुपये

प्रश्न 3.
(i) 5 cm को m एवं km में व्यक्त कीजिए।
(ii) 35 mm को cm, m एवं km में व्यक्त कीजिए।
हल:
(i) 1 मीटर = 100 सेण्टीमीटर, 1 किमी = 1000 मीटर, 1 सेमी = 10 मिमी 5 सेमी = 5 x \(\frac { 1 }{ 100 }\) मीटर = 0.05 मीटर
5 सेमी = 5 x \(\frac { 1 }{ 100000 }\) किमी = 0.00005 किमी

(ii) 35 मिमी = 35 x \(\frac { 1 }{ 10 }\) सेमी = 3.5 सेमी 35 मिमी = 35 x \(\frac { 1 }{ 1000 }\) मीटर = 0.035 मीटर 35 मिमी = 35 x \(\frac { 1 }{ 1000000 }\) = 0.000035 मीटर

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प्रश्न 4.
निम्नलिखित को kg में व्यक्त कीजिए :
(i) 200gm
(ii) 3470gm
(iii)4 kg 8g
हल:
∵ 1 किलोग्राम = 1000 ग्राम, 1 ग्राम = \(\frac { 1 }{ 1000 }\) किलोग्राम
(i) 200 ग्राम = \(\frac { 200 }{ 1000 }\) किलोग्राम = 0.200 किलोग्राम
(ii) 3470 ग्राम = \(\frac { 3470 }{ 1000 }\) किलोग्राम = 3.470 किलोग्राम
(iii) 4 किलोग्राम + 8 ग्राम = 4 किलोग्राम + 8 ग्राम = 4 किलोग्राम + 500 किलोग्राम = 4.008 किलोग्राम

प्रश्न 5.
निम्नलिखित दशमलव संख्याओं को विस्तारित रूप में लिखिए-
(i) 20.03
(ii) 2.03
(iii) 200.03
(iv) 2.034
हल:
(i) 20.03 = 2 x 10 + 0 x 1 + 0 x \(\frac { 1 }{ 10 }\) + 3 x \(\frac { 1 }{ 100 }\)
(ii) 2.03 = 2 x 1 +0 x \(\frac { 1 }{ 10 }\) + 3 x \(\frac { 1 }{ 100 }\)
(iii) 200.03 = 2 x 100 + 0 x 10 +0 x 1 + 0 x \(\frac { 1 }{ 10 }\) + 3 x \(\frac { 1 }{ 100 }\)
(iv) 2.034 = 2 x 1 + 0 x \(\frac { 1 }{ 10 }\) + 3 x \(\frac { 1 }{ 100 }\) + 4 x \(\frac { 1 }{ 1000 }\)

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प्रश्न 6.
निम्नलिखित दशमलव संख्याओं में 2 का स्थानीय मान लिखिए
(i) 2.56
(ii) 21.37
(iii) 10.25
(iv) 9.42
(v) 63.352
हल:
(i) 2.56 में 2 इकाई स्थान पर है। अत: 2 का स्थानीय मान = 2 x 1 = 2
(ii) 21.37 में 2 दहाई के स्थान पर है। अतः 2 का स्थानीय मान = 2 x 10 = 20
(iii) 10.25 में 2 दशांश के स्थान पर है। अत: 2 का स्थानीय मान = 2 x \(\frac { 1 }{ 10 }\) = \(\frac { 2 }{ 10 }\)
(iv) 9.42 में 2 शतांश के स्थान पर है। अतः 2 का स्थानीय मान = 2 x \(\frac { 1 }{ 100 }\) = \(\frac { 2 }{ 100 }\)
(v) 63.352 में 2 सहस्त्रांश के स्थान पर है। अतः 2 का स्थानीय मान = 2 x \(\frac { 1 }{ 1000 }\) = \(\frac { 2 }{ 1000 }\)

प्रश्न 7.
दिनेश स्थान A से B तक गया और वहाँ से स्थान C तक गया। A से B की दूरी 7.5 km है और B से C की दूरी 12.7 km है। अयूब स्थान A से स्थान D तक गया और वहाँ से वह स्थान C तक गया। A से D की दूरी 9.3 km है और D से C की दूरी 11.8 km है। किसने ज्यादा दूरी तय की और वह दूरी कितनी अधिक थी? हल:
यहाँ AB = 7.5 km, BC = 12.7 km, AD = 9.3 km, DC = 11.8 km
दिनेश द्वारा चली गई दूरी = AB + BC = 7.5km + 12.7km = 20.2 km
MP Board Class 7th Maths Solutions Chapter 2 भिन्न एवं दशमलव Ex 2.5
अयूब द्वारा चली गई दूरी = AD + CD = 9.3km + 11.8 km = 21.1km
∵ 21.1 km – 20.2 km = 0.900 km = 900 m
अयूब ने अधिक यात्रा की,
उसने 900 m अधिक यात्रा की।

प्रश्न 8.
श्यामा ने 5 kg 300 g सेब और 3 kg 250g आम खरीदे। सरला ने 4 kg 800 g संतरे और 4 kg 150g केले खरीदे। किसने अधिक फल खरीदे?
हल:
श्यामा द्वारा खरीदे गए कुल फल = 5 kg 300 g + 3 kg 250g = 8 kg 550g
सरला द्वारा खरीदे गए कुल फल = 4 kg 800 g + 4 kg 150 g = 8 kg 950g
∵ 8 kg 950 g > 8 kg 550 g
अतः सरला ने अधिक फल खरीदे।

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प्रश्न 9.
28 km, 42.6 km से कितना कम है?
हल:
चूँकि 42.6 km – 28 km = 14.6 km
∴ 28 km, 42.6 km से 14.6 km कम है।

पाठ्य-पुस्तक पृष्ठ संख्या # 50

प्रश्न 1.
(i) 1.5 x 1.6, (ii) 2.4 x 4.2 ज्ञात कीजिए।
हल:
(i) 1.5 x 1.6
∵ 15 x 16 = 240
यहाँ दशमलव बिन्दु के दाहिनी ओर 1 + 1 = 2 अंक होंगे।
∴ 1.5 x 1.6 = 2-40

(ii) 2.4 x 4.2
∵ 24 x 42 = 1008
यहाँ, दशमलव बिन्दु के दाहिनी ओर 1 + 1 = 2 अंक होंगे।
∴ 2.4 x 4.2 = 10.08

पाठ्य-पुस्तक पृष्ठ संख्या # 51

प्रश्न 1.
2.7 x 1.35 ज्ञात कीजिए।
हल:
2.7 × 1.35
27 x 135 = 3645
यहाँ, दशमलव बिन्दु के दाहिनी ओर 1 + 2 = 3 अंक होंगे।
∴2.7 x 1.35 = 3.645

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प्रयास कीजिए

प्रश्न 1.
ज्ञात कीजिए-
(i) 2.7 x 4
(ii) 1.8 x 1.2
(iii) 2.3 x 4.35
हल:
(i) 2.7 x 4
∵ 27 x 4 = 108,
यहाँ 27 में दशमलव बिन्दु के दाहिनी ओर एक अंक है।
∴ 2.7 x 4 = 10.8

(ii) 1.8 x 12
∵ 18 x 12 = 216,
यहाँ, दशमलव बिन्दु के दाहिनी ओर अंक = 1 + 1 = 2
∴1.8 x 1.2 = 2.16

(iii) 23 x 4.35
∵ 23 x 435 = 10005,
यहाँ दशमलव बिन्दु के दाहिनी ओर अंक = 1 + 2 = 3
∴ 2.3 x 4:35 = 10:005

प्रश्न 2.
प्रश्न 1 में प्राप्त गुणनफलों को अवरोही क्रम में क्रमबद्ध कीजिए।
हल:
गुणनफल हैं-10.8, 2.16, 10:005
10.8 और 10:005 को तुलना करने पर, 10 = 10, 8 > 0 अर्थात् 10.8 > 10.005
∴ अभीष्ट अवरोही क्रम = 10.8, 10.005, 2.16

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दशमलव संख्याओं का 10,100 और 1000 से गुणा

प्रश्न 1.
रिक्त स्थानों की पूर्ति कीजिए-
हल:
2.35 x 10 = 23.5 | 12.356 x 10 = 123.56
2.35 x 100 = 235 | 12.356 x 100 = 1235.6
2.35 x 1000 = 2350 | 12.356 x 1000 = 12356
0.5 x 100 = 50 | 0.5 x 1000 = 500

पाठ्य-पुस्तक पृष्ठ संख्या # 52

प्रश्न 1.
क्या आप बता सकते हैं कि 2.97 x 10 = ?, 2.97 x 100 = ?, 2.97 x 1000 = ?
हल:
2.97 x 10 = 29.7
2.97 x 100 = 297
2.97 x 1000 = 2970

प्रश्न 2.
क्या अब आप रेश्मा द्वारा भुगतान किए जाने वाली राशि अर्थात् ₹ 8.50 x 150 ज्ञात करने में उसकी सहायता कर सकते हैं?
हल:
∵ 850 x 150 = 127500
∴ 8.50 x 150 = ₹ 1275.00

प्रयास कीजिए
ज्ञात कीजिए-
(i) 0.3 x 10
(ii) 1.2 x 100
(ii) 56.3x 1000
हल:
(i) 0.3 x 10 =3
(∵10 में एक 0 है ∴ दशमलव बिन्दु दाहिनी ओर 1 स्थान आगे विस्थापित होगा)

(ii) 1.2 x 100 = 120
(∵ 100 में 2 शून्य हैं, ∴ दशमलव बिन्दु दाहिनी ओर 2 स्थान आगे विस्थापित होगा)

(iii) 56.3 x 1000 = 56300
(∵1000 में 3 शून्य हैं ∴ दशमलव बिन्दु दाहिनी ओर 3 स्थान आगे विस्थापित होगा)

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MP Board Class 7th Social Science Solutions Chapter 4 हमारा संविधान

MP Board Class 7th Social Science Chapter 4 हमारा संविधान

MP Board Class 7th Social Science Chapter 4 अभ्यास प्रश्न

प्रश्न 1.
निम्नलिखित प्रश्नों के सही विकल्प चुनकर लिखिए –
(1) संविधान सभा का गठन हुआ था
(अ) दिसम्बर, 1946
(ब) जनवरी, 1947
(स) नवम्बर, 1945
(द) जनवरी, 19501
उत्तर:
(अ) दिसम्बर, 1946

(2) संविधान प्रारूप समिति के अध्यक्ष थे –
(अ) डॉ. राजेन्द्र प्रसाद,
(ब) डॉ. भीमराव अम्बेडकर
(स) डॉ. हरी सिंह गौर
(द) पं. जवाहरलाल नेहरू
उत्तर:
(ब) डॉ. भीमराव अम्बेडकर

(3) भारतीय संविधान सभा ने संविधान को अपनी स्वीकृति प्रदान की –
(अ) 26 नवम्बर, 1946
(ब) 26 जनवरी, 1950
(स) 26 नवम्बर, 1949
(द) 26 जनवरी, 1930
उत्तर:
(स) 26 नवम्बर, 1949

प्रश्न 2.
रिक्त स्थानों की पूर्ति कीजिए –
(1) संविधान सभा के अध्यक्ष ………….. थे।
(2) भारतीय संविधान ………….. एवं निर्मित संविधान है।
(3) भारत में ………………. एवं शक्तिशाली न्यायपालिका है।
उत्तर:
(1) डॉ. राजेन्द्र प्रसाद
(2) लिखित
(3) स्वतन्त्र।

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MP Board Class 7th Social Science Chapter 4 लघु उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 3.
(1) भारतीय संविधान सभा के किन्हीं तीन सदस्यों के नाम लिखिए।
उत्तर:
भारतीय संविधान सभा के तीन सदस्य डॉ. राजेन्द्र प्रसाद, पं. जवाहरलाल नेहरू एवं सरदार वल्लभ भाई पटेल थे।

(2) “सम्पूर्ण प्रभुत्व सम्पन्न” से क्या तात्पर्य है ?
उत्तर:
“सम्पूर्ण प्रभुत्व सम्पन्न” से तात्पर्य है-भारत एक स्वतन्त्र राष्ट्र है, यह शक्तियों से सम्पन्न एवं सर्वोच्च है। किसी अन्य बाहरी शक्ति का इस पर कोई नियन्त्रण नहीं है।

(3) भारत के संविधान को लिखित एवं निर्मित संविधान क्यों कहते हैं ?
उत्तर:
भारत का संविधान लिखित संविधान है तथा इसका निर्माण संविधान सभा द्वारा हुआ है। अतः इसे लिखित एवं निर्मित संविधान कहते हैं।

(4) संसदीय प्रणाली क्या है ?
उत्तर:
संसदीय प्रणाली में शासन की वास्तविक शक्तियाँ संसद में निहित होती हैं। शासन की शक्तियों का प्रयोग मन्त्रिपरिषद् करती है। मन्त्रिपरिषद् संसद के प्रति उत्तरदायी है।

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MP Board Class 7th Social Science Chapter 4 दीर्घ उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 4.
(1) भारतीय संविधान की किन्हीं तीन विशेषताओं का वर्णन कीजिए।
उत्तर:
भारतीय संविधान की तीन विशेषताएँ –

  • संघात्मक शासन व्यवस्था – भारत के संविधान में संघात्मक शासन व्यवस्था को अपनाया गया है। इस व्यवस्था के कारण केन्द्र और राज्यों के बीच शक्तियों का विभाजन है।
  • केन्द्र एवं राज्यों की अलग-अलग सरकारें हैं।
  • पंथ निरपेक्ष-पंथ निरपेक्ष का तात्पर्य है कि राज्य की दृष्टि से सभी धर्म समान हैं और राज्य के द्वारा विभिन्न धर्मावलम्बियों में कोई भेदभाव नहीं किया जाएगा।

विस्तृत एवं व्यापक संविधान – भारतीय संविधान अन्य देशों के संविधानों की तुलना में बहुत विस्तृत एवं व्यापक है। भारत में अनेक जातियों, धर्मो और भाषाओं के बोलने वाले निवास करते हैं। उनकी अपनी संस्कृतियाँ हैं। अनेकता में एकता की भावना को सुदृढ़ करने के लिए संविधान में विस्तारपूर्वक उल्लेख है।

(2) टिप्पणी लिखिए –
(अ) पंथ निरपेक्षता,
(ब) संघात्मक शासन व्यवस्था,
(स) मौलिक अधिकार एवं कर्त्तव्य।
उत्तर:
(अ) पंथ निरपेक्षता – पंथ निरपेक्षता भारतीय संविधान की एक प्रमुख विशेषता है। इसके अनुसार राज्य की दृष्टि से सभी धर्म समान हैं और राज्य के द्वारा विभिन्न धर्मावलम्बियों में कोई मतभेद नहीं किया जाता है। राज्य किसी भी धर्म के लिए पक्षपातपूर्ण कार्य व हस्तक्षेप नहीं करेगा।

(ब) संघात्मक शासन व्यवस्था – भारत के संविधान में इस व्यवस्था को अपनाया गया है। इस व्यवस्था के अन्तर्गत केंद्र अर्थात् संघ और राज्यों के बीच शक्तियों का विभाजन है। केंद्र और राज्यों की सरकारें भी अलग-अलग हैं।

(स) मौलिक अधिकार एवं कर्त्तव्य – भारतीय संविधान में नागरिकों को कुछ मूल अधिकार दिए गए हैं, इन अधिकारों | की रक्षा का दायित्व सर्वोच्च न्यायालय का है। भारतीय संविधान में अधिकारों के साथ – साथ नागरिकों के कर्त्तव्यों का भी उल्लेख किया गया है।

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MP Board Class 9th Social Science Solutions Chapter 17 भारत में उद्योगों की स्थिति

MP Board Class 9th Social Science Solutions Chapter 17 भारत में उद्योगों की स्थिति

MP Board Class 9th Social Science Chapter 17 पाठान्त अभ्यास

MP Board Class 9th Social Science Chapter 17 वस्तुनिष्ठ प्रश्न

सही विकल्प चुनकर लिखिए

प्रश्न 1.
लघु औद्योगिक इकाइयों की अधिकतम विनियोग सीमा है
(i) 1 करोड़ रुपये
(ii) 5 करोड़ रुपये
(iii) 3 करोड़ रुपये
(iv) 7 करोड़ रुपये।
उत्तर:
(ii) 5 करोड़ रुपये

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प्रश्न 2.
विश्व में कुल जूट उत्पादन का भारत में पैदा होता है
(i) 25 प्रतिशत
(ii) 10 प्रतिशत
(iii) 50 प्रतिशत
(iv) 35 प्रतिशत।
उत्तर:
(iii) 50 प्रतिशत

प्रश्न 3.
इनमें से किसका सम्बन्ध सूचना प्रौद्योगिकी से है?
(i) मोटर कार
(ii) सुन्दर कपड़े
(iii) कम्प्यू टर
(iv) सोना चाँदी।
उत्तर:
(iii) कम्प्यू टर

MP Board Class 9th Social Science Chapter 17 अति लघु उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 1.
भारत में काँच निर्मित वस्तुओं का निर्यात किन देशों में किया जाता है?
उत्तर:
भारत में निर्मित काँच से बनी वस्तुओं का निर्यात पाकिस्तान, श्रीलंका, नेपाल, अफगानिस्तान, कुवैत, ईरान, इराक, सऊदी अरब, म्यांमार व मलेशिया आदि देशों में किया जाता है।

प्रश्न 2.
भारत में असली रेशम उत्पादन के प्रमुख क्षेत्र कौन से हैं?
उत्तर:

  1. कश्मीर घाटी
  2. पूर्वी कर्नाटक व तमिलनाडु के पठारी व पहाड़ी क्षेत्र
  3. पश्चिमी बंगाल का हुगली क्षेत्र
  4. असम का पर्वतीय भू-भाग।

प्रश्न 3.
भारत में उत्पादित लाख के.प्रमुख ग्राहक देश कौन से हैं?
उत्तर:
भारत की लाख के प्रमुख ग्राहक चीन, अमेरिका, रूस और ब्रिटेन हैं। इसके अलावा जर्मनी, ब्राजील, इटली, फ्रांस तथा जापान हैं।

प्रश्न 4.
कृषि आधारित उद्योग कौन से हैं? (2008, 13)
उत्तर:
वस्त्र उद्योग, चीनी उद्योग, कागज उद्योग, पटसन उद्योग, वनस्पति उद्योग कृषि पर आधारित उद्योग हैं।

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प्रश्न 5.
देश में स्थापित सीमेण्ट कारखानों की उत्पादन क्षमता कितनी है?
उत्तर:
वर्तमान में देश में 190 बड़े सीमेण्ट कारखाने हैं जिनकी उत्पादन क्षमता 324.5 मिलियन टन है। इसके अलावा देश में 360 लघु सीमेण्ट कारखाने हैं जिनकी उत्पादन क्षमता 11.10 मिलियन टन है।

प्रश्न 6.
भारत में रेशम उत्पादन की दृष्टि से कौन से राज्य महत्त्वपूर्ण हैं?
उत्तर:
भारत में असली रेशम उत्पादन के चार प्रमुख क्षेत्र हैं-

  1. कश्मीर घाटी
  2. पूर्वी कर्नाटक व तमिलनाडु के पठारी व पहाड़ी क्षेत्र
  3. पश्चिमी बंगाल का हुगली क्षेत्र
  4. असम का पर्वतीय भू-भाग।

MP Board Class 9th Social Science Chapter 17 लघु उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 1.
भारत में विभिन्न उद्योगों को किन-किन आधारों पर वर्गीकृत किया गया है? समझाइए।
उत्तर:
उद्योगों को हम उनके स्वामित्व, उपयोगिता, आकार, माल की प्रकृति एवं कच्चे माल की उपलब्धता के आधार पर विभिन्न भागों में बाँट सकते हैं। जैसा कि नीचे दिये गये चार्ट से स्पष्ट है –
उद्योगों का वर्गीकरण
MP Board Class 9th Social Science Solutions Chapter 17 भारत में उद्योगों की स्थिति - 1
प्रश्न 2.
भारत के प्रमुख कुटीर उद्योगों की स्थिति का विवरण दीजिए। (2009, 14)
उत्तर:
भारत के प्रमुख कुटीर उद्योग
रेशम उद्योग :
रेशम एक कृषि आधारित उद्योग है और भारत जैसे कृषि प्रधान देश के लिए यह एक उपयुक्त उद्योग है। यह गाँव एवं श्रम आधारित उद्योग है, जो न्यूनतम निवेश पर अधिकतम लाभ की वापसी देता है। विश्व में भारत दूसरा बड़ा रेशम उत्पादक है और विश्व के कुल कच्चे रेशम उत्पादन का 18 प्रतिशत पूरा करता है। इस उद्योग में 78.50 लाख लोगों को रोजगार मिला हुआ है, जिसमें अधिकांश ग्रामीण क्षेत्रों के हैं। इस उद्योग को प्रोत्साहन देने के लिए सन् 1949 में केन्द्रीय रेशम बोर्ड की स्थापना की गई।

लाख उद्योग :
भारत लाख का प्रमुख उत्पादक राष्ट्र है। सन् 1950 से पहले केवल भारत में ही लाख साफ की जाती थी, परन्तु अब थाईलैण्ड में भी यह काम होता है। इसका भारत के लाख उद्योग पर प्रभाव पड़ा है। पहले विश्व की 85 प्रतिशत लाख भारत में तैयार होती थी, जो वर्तमान में घटकर 50 प्रतिशत रह गई है। भारत में लाख का सबसे अधिक उत्पादन छोटा नागपुर पठार में होता है। यहाँ देश का 50 प्रतिशत उत्पादन होता है। इसके अतिरिक्त छत्तीसगढ़, मध्य प्रदेश, पश्चिम बंगाल, महाराष्ट्र, उड़ीसा, गुजरात व उत्तर प्रदेश का मिर्जापुर जिला लाख के प्रमुख उत्पादक केन्द्र हैं। इस उद्योग से लगभग 10,000 लोगों को रोजगार प्राप्त है।

काँच उद्योग :
कुटीर उद्योग के रूप में यह उद्योग प्रमुख रूप से फिरोजाबाद व बेलगाँव में केन्द्रित हैं। फिरोजाबाद में काँच के 225 से भी अधिक छोटे-बड़े कारखाने हैं काँच की विभिन्न प्रकार की चूड़ियाँ बनाई जाती हैं। एटा, शिकोहाबाद, फतेहाबाद व हाथरस में भी यह उद्योग कुटीर उद्योग के रूप में संचालित हैं।

प्रश्न 3.
भारत में चर्म उद्योग में किन वस्तुओं का निर्माण होता है?
उत्तर:
यह एक पारम्परिक उद्योग है। चमड़े से कई प्रकार की वस्तुएँ; जैसे-कोट, जर्सी, पर्स, बटुए, थैले, खेल का सामान, खिलौने, कनटोपं, बेल्ट, दस्ताने, जूते व चप्पल आदि बनाये जाते हैं। देश में चमड़े की वस्तुओं का सर्वाधिक उत्पादन तमिलनाडु, कोलकाता, कानपुर, मुम्बई, औरंगाबाद, कोल्हापुर, देवास, जालंधर और आगरा में होता है। चमड़े की वस्तुओं के उत्पादन का 75 प्रतिशत भाग लघु और कुटीर उद्योगों द्वारा उत्पादित किया जाता है।

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प्रश्न 4.
भारत में कागज उद्योग की स्थिति समझाइए।
उत्तर:
कागज उद्योग-भारत में कुटीर उद्योग के अन्तर्गत कागज-निर्माण का इतिहास पुराना है। भारत में आधुनिक ढंग की पहली कागज मिल बालीगंज (कोलकाता) में 1870 में स्थापित की गयी। देश में पहला अखबारी कागज उद्योग मध्य प्रदेश के नेपानगर में 1947 में स्थापित किया गया था। कागज बनाने के लिए कच्चे माल के रूप में लकड़ी की लुग्दी, घास, बाँस, कपड़े व चिथड़े, जूट आदि का प्रयोग होता है। भारत के कागज उद्योग को विश्व के 20 बड़े कागज उद्योगों में से गिना जाता है। यहाँ 16,000 करोड़ रुपये का उत्पादन होता है, प्रत्यक्ष रूप से 3 लाख और परोक्ष रूप से 10 लाख लोगों को रोजगार मिलता है। भारत में प्रति व्यक्ति कागज की खपत सिर्फ 7-2 किलोग्राम है जोकि विश्व औसत (50 किग्रा) से बहुत कम है।

भारत में कागज के प्रमुख उत्पादक राज्य आन्ध्र प्रदेश, महाराष्ट्र, पश्चिम बंगाल, ओडिशा, कर्नाटक, मध्य प्रदेश, गुजरात, तमिलनाडु, हरियाणा, उत्तर प्रदेश, बिहार तथा केरल हैं।

प्रश्न 5.
भारत में काँच उद्योग पर टिप्पणी लिखिए।
उत्तर:
काँच उद्योग-काँच उद्योग भारत का प्राचीन उद्योग है, किन्तु भारत में विकसित काँच उद्योग की शुरूआत द्वितीय विश्वयुद्ध के पश्चात् ही सम्भव हो सकी। वर्तमान में इस उद्योग में आधुनिक एवं नवीनतम तकनीकों से काँच का उत्पादन किया जा रहा है। देश में इस समय काँच के 56 बड़े कारखानों में से 15 ऐसे आधुनिक कारखाने हैं, जो उत्तम किस्म के काँच के सामान का निर्माण पूर्णतः मशीनों द्वारा करते हैं।

आधुनिक उद्योग के रूप में यह उत्तर प्रदेश, महाराष्ट्र, पश्चिमी बंगाल, पंजाब, मध्य प्रदेश, बिहार, तमिलनाडु व ओडिशा में केन्द्रित हैं। देश में काँच बनाने के सबसे अधिक कारखाने पश्चिम बंगाल में हैं। कुटीर उद्योग के रूप में यह उद्योग प्रमुख रूप से फिरोजाबाद व बेलगाँव में केन्द्रित है।

प्रश्न 6.
सूचना प्रौद्योगिकी उद्योग भारत का सबसे तेज बढ़ता हुआ उद्योग है। समझाइए। (2008, 09, 13, 14)
उत्तर:
सूचना एवं प्रौद्योगिकी उद्योग :
सूचना एवं प्रौद्योगिकी उद्योग से आशय उस उद्योग से है, जिसमें कम्प्यूटर और उसके सहायक उपकरणों की सहायता से ज्ञान का प्रसार किया जाता है। इसके अन्तर्गत कम्प्यूटर, संचार, प्रौद्योगिकी और सम्बन्धित सॉफ्टवेयर को शामिल किया जाता है। इसके अन्तर्गत उस सम्पूर्ण व्यवस्था को शामिल किया जाता है, जिसके द्वारा संचार माध्यम और उपकरणों की सहायता से सूचना पहुँचाई जाती है। यह ज्ञान आधारित उद्योग है। वर्ष 2000-01 में इलेक्ट्रॉनिक्स निर्यात 33,138 करोड़ रुपये था जो 2008-09 में बढ़कर 2,35,300 करोड़ रुपये पहुँच गया। भारत में सकल घरेलू उत्पाद में उद्योग का योगदान वर्ष 1999-2000 में 1.2 प्रतिशत से बढ़कर वर्ष 2013 में 8 प्रतिशत हो गया है। इससे ज्ञात होता है कि यह उद्योग भारत का सबसे तेज गति से बढ़ता हुआ उद्योग है।

MP Board Class 9th Social Science Chapter 17 दीर्घ उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 1.
भारत में वृहद् उद्योगों की स्थिति का वर्णन कीजिए।
उत्तर:
भारत में वृहद् उद्योग
सूती वस्त्र उद्योग :
भारत में सूती वस्त्रों की अत्यन्त पुरानी परम्परा है। देश की प्रथम सूती कपड़ा मिल सन् 1818 में कोलकाता में स्थापित की गई थी। देश की सूती कपड़ा मिलें मुख्य रूप से महाराष्ट्र, तमिलनाडु और गुजरात में हैं। यह उद्योग भारत का सबसे बड़ा एवं व्यापक उद्योग है। देश के औद्योगिक उत्पादन में इसका योगदान 14 प्रतिशत है, जबकि देश के कुल निर्यात आय में इसका हिस्सा 19 प्रतिशत है। आयात में इसका हिस्सा 3 प्रतिशत है। यह उद्योग लगभग 9 करोड़ लोगों को प्रत्यक्ष एवं अप्रत्यक्ष रूप से रोजगार प्रदान कर रहा है। इस उद्योग में लगभग 5,000 करोड़ रुपये की पूँजी लगी है। सरकार ने कपड़ा आदेश (विकास एवं विनिमय)1993 के माध्यम से कपड़ा उद्योग को लाइसेन्स मुक्त कर दिया।

लोहा तथा इस्पात उद्योग :
लोहा-इस्पात उद्योग देश का एक आधारभूत उद्योग है। विनियोग की दृष्टि से यह संगठित क्षेत्र के सबसे महत्त्वपूर्ण एवं विशालतम उद्योगों में से एक है।

भारत में यह उद्योग अति प्राचीन है लेकिन आधुनिक तरीके से लोहे का उत्पादन 1875 में आरम्भ हुआ, जब बंगाल आयरन वर्क्स कम्पनी ने कुल्टी (पश्चिम बंगाल) में अपने संयन्त्र की स्थापना की। परन्तु बड़े पैमाने पर उत्पादन 1907 में जमशेदपुर में टाटा आयरन इण्डस्ट्रीज कम्पनी (टिस्को) की स्थापना के साथ आरम्भ हुआ। भारत में कुल 10 कारखाने हैं जिसमें से 9 सार्वजनिक क्षेत्र में एवं केवल एक निजी क्षेत्र (टाटा आयरन एण्ड स्टील कम्पनी, जमशेदपुर, पश्चिमी बंगाल) में है। सार्वजनिक क्षेत्र के कारखाने भिलाई, दुर्गापुर, राउरकेला, बोकारो, विशाखापट्टनम् एवं सलेम में है।

इस समय देश में 196 लघु इस्पात संयन्त्र हैं। इनमें से 179 इकाइयाँ चालू हैं तथा शेष बन्द हैं। वर्तमान में इस उद्योग में 90,000 करोड़ रुपये की पूँजी लगी है तथा इसमें 5 लाख लोगों को रोजगार प्राप्त है।

जूट उद्योग :
वर्ष 1859 में कलकत्ता के निकट पहली जूट मिल स्थापित हुई थी। इस उद्योग में करीब – 4 लाख श्रमिकों को प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रोजगार मिला हुआ है। भारत की 90% जूट मिलें पश्चिम बंगाल में कोलकाता के समीप हुगली नदी के किनारे स्थित हैं। इस राज्य की जलवायु तथा उपजाऊ भूमि जूट-उत्पादन के अनुकूल है। देश में 83 पटसन मिलें हैं जिनमें से 6 कपड़ा मन्त्रालय के अधीन सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रम राष्ट्रीय पटसन उत्पाद निगम की हैं। पटसन उत्पादनों का वार्षिक निर्यात 1400-1500 करोड़ रुपये के बीच है। घरेलू खपत और निर्यात का अनुपात 80 : 20 हैं।

चीनी उद्योग :
चीनी उद्योग के विकास का प्रारम्भ 1903 से होता है और 1931 में भारत में चीनी बनाने के 29 कारखाने स्थापित हो गये थे 1950-51 में इनकी संख्या बढ़कर 139 हो गयी थी 1995 में भारत में 435 कारखाने थे जिनकी स्थापना मुख्यतः गन्ना उत्पादक क्षेत्रों या उसके समीपवर्ती क्षेत्रों में ही की गयी थी। चूंकि गन्ना शीघ्र ही सूख जाता है, इसलिए इसको शीघ्रता से कारखानों तक पहुंचाने एक अनिवार्यता होती है।

सीमेण्ट उद्योग :
भारत में संगठित रूप से समुद्री सीपियों से सीमेण्ट तैयार करने का प्रथम कारखाना सन् 1904 में मद्रास में स्थापित किया गया था, लेकिन वह असफल हो गया। इसके पश्चात् 1913 में टाटा एण्ड सन्स कम्पनी के निर्देशन में पोरबन्दर (गुजरात) में इण्डियन सीमेण्ट कम्पनी लिमिटेड की स्थापना की गयी जिसकी सफलता से प्रेरित होकर सन् 1914 तक देश में 5 सीमेण्ट कारखाने स्थापित किये गये, जिनका कुल उत्पादन 76 हजार टन वार्षिक था।

वर्तमान स्थिति-वर्तमान में 190 बड़े सीमेण्ट संयन्त्र हैं, जिनकी संस्थापित क्षमता करीब 324.5 मिलियन टन है। इसके अलावा देश में करीब 360 लघु सीमेण्ट संयन्त्र भी हैं जिनकी अनुमानित क्षमता 11-10 मिलियन टन है। वर्तमान समय में सीमेण्ट उद्योग में 800 करोड़ रुपये से भी अधिक पूँजी विनियोजित है तथा तीन लाख लोगों को रोजगार प्राप्त है। मार्च 1989 से सीमेण्ट उद्योग को मूल्य तथा विक्रय से नियन्त्रण मुक्त करने और उदार नीतियाँ अपनाये जाने के कारण इसमें उत्पादन वृद्धि के साथ-साथ तकनीक क्षेत्र में भी उल्लेखनीय प्रगति हुई है।

सूचना एवं प्रौद्योगिकी उद्योग :
सूचना एवं प्रौद्योगिकी उद्योग से आशय उस उद्योग से है, जिसमें कम्प्यूटर और उसके सहायक उपकरणों की सहायता से ज्ञान का प्रसार किया जाता है। इसके अन्तर्गत कम्प्यूटर, संचार, प्रौद्योगिकी और सम्बन्धित सॉफ्टवेयर को शामिल किया जाता है। इसके अन्तर्गत उस सम्पूर्ण व्यवस्था को शामिल किया जाता है, जिसके द्वारा संचार माध्यम और उपकरणों की सहायता से सूचना पहुँचाई जाती है। यह ज्ञान आधारित उद्योग है। वर्ष 2000-01 में इलेक्ट्रॉनिक्स निर्यात 33,138 करोड़ रुपये था जो 2008-09 में बढ़कर 2,35,300 करोड़ रुपये पहुँच गया। भारत में सकल घरेलू उत्पाद में उद्योग का योगदान वर्ष 1999-2000 में 1.2 प्रतिशत से बढ़कर वर्ष 2013 में 8 प्रतिशत हो गया है। इससे ज्ञात होता है कि यह उद्योग भारत का सबसे तेज गति से बढ़ता हुआ उद्योग है।

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प्रश्न 2.
लघु उद्योगों को बढ़ावा देने के लिए सरकार द्वारा क्या-क्या प्रयास किये गये हैं? लिखिए। (2008)
उत्तर:
लघु उद्योगों के विकास के लिए किये गये सरकारी प्रयास
(1) निगमों एवं मण्डलों की स्थापना केन्द्रीय सरकार ने विभिन्न निगमों एवं मण्डलों की स्थापना की है। इनसे कुटीर व लघु उद्योगों के विकास को बहुत प्रोत्साहन मिला है। इनमें –

  • अखिल भारतीय कुटीर उद्योग मण्डल, 1948
  • केन्द्रीय सिल्क बोर्ड 1950
  • अखिल भारतीय हस्तकला बोर्ड 1952
  • अखिल भारतीय हथकरघा बोर्ड, 1952
  • अखिल भारतीय खादी एवं ग्रामोद्योग बोर्ड, 1953
  • लघु उद्योग मण्डल, 1954
  • नारियल-जूट मण्डल, 1954
  • राष्ट्रीय लघु उद्योग निगम, 1955, तथा
  • भारतीय दस्तकारी विकास निगम, 1958 आदि प्रमुख हैं। ये अखिल भारतीय संस्थाएँ अपने-अपने क्षेत्रों में उद्योगों के विकास हेतु राज्य सरकारों एवं उद्योग संगठनों के सहयोग से तकनीकी शिक्षा, विपणन सुविधाओं तथा वस्तुओं के प्रमापीकरण की व्यवस्था कर रही है।

(2) वित्तीय सहायता :
लघु कुटीर उद्योगों को पूँजी तथा अन्य आर्थिक सहायता प्रदान करने के क्षेत्र में भी सरकार ने महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाई है। सरकार द्वारा जिन साधनों से लघु एवं कुटीर उद्योगों को वित्तीय सहायता प्रदान कराई गई है, वे निम्न हैं –

  • स्टेट बैंक ऑफ इण्डिया द्वारा ऋण योजना चालू करना।
  • रिजर्व बैंक द्वारा गारण्टी की योजना चालू करना।
  • राज्य वित्त निगमों द्वारा ऋण प्रदान करना।
  • राष्ट्रीय लघु उद्योग निगम द्वारा किराया क्रय पद्धति के आधार पर यन्त्रों के खरीदने की सुविधाएँ प्रदान किया जाना।
  • सहकारी बैंकों और अनुसूचित बैंकों द्वारा ऋण की सहायता प्रदान करना।
  • राज्य सरकारों द्वारा आर्थिक सहायता प्रदान करना।

(3) व्यापक सहायता कार्यक्रम :
भारत सरकार ने छोटे उद्यमियों की सहायतार्थ हेतु एक व्यापक सहायता कार्यक्रम बनाया है। लघु उद्योग विकास संगठन (SIDO) के अन्तर्गत लघु उद्योग सेवा संस्थान, शाखा संस्थान एवं विस्तार केन्द्र हैं, जिनके द्वारा आर्थिक, तकनीकी व प्रबन्धकीय सेवाएँ उपलब्ध कराई जाती हैं। राज्यों के उद्योग निदेशालय भूमि या फैक्ट्री शेड आबंटित करते हैं तथा इनके लिए कच्चा माल तथा पूँजी उपलब्ध कराने में सहायता देते हैं।

(4) सरकार द्वारा क्रय में प्राथमिकता :
सरकार ने स्वयं भी लघु उद्योगों से अधिक मात्रा में वस्तुएँ क्रय करके उनके विकास में सहायता दी है। सरकार कुछ वस्तुओं का क्रय पूर्ण रूप से लघु उद्योगों से करती है।

(5) दुर्लभ कच्चे माल का आबंटन :
सरकार दुर्लभ देशी तथा विदेशी कच्चे माल के आबंटन में लघु उद्योगों के हितों का विशेष ध्यान रखती है और उन्हें प्राथमिकता देती है। 1991 की नई आयात नीति में सरकार द्वारा लघु इकाइयों को आयात लाइसेंस देने में अधिक उदारता बरती गई थी। अब इन्हें 5 लाख रुपये तक के आयात के लाइसेंस स्वतन्त्र विदेशी मुद्रा से प्राप्त हो सकेंगे।

(6) सम्मिलित उत्पादन कार्यक्रम :
सरकार ने बड़े तथा लघु एवं कुटीर उद्योगों के लिए एक सम्मिलित उत्पादन कार्यक्रम की योजना बनाई है। इस योजना के अनुसार लघु उद्योगों का उत्पादन क्षेत्र सीमित रखा गया है। बड़े उद्योगों की उत्पादन क्षमता में विस्तार पर रोक लगाने की व्यवस्था है। बड़े उद्योगों पर उत्पादन कर लगाया जाता है जबकि, लघु व कुटीर उद्योगों के उत्पादन को कर-मुक्त रखा गया है। बड़े उद्योगों से प्राप्त उत्पादन कर को लघु व कुटीर उद्योगों के विकास पर खर्च किया जाता है तथा अनुसन्धान एवं प्रशिक्षण में आदान-प्रदान का समन्वय स्थापित किया जाता है।

(7) विपणन सम्बन्धी सुविधाएँ :
केन्द्र सरकार ने एक केन्द्रीय कुटीर उद्योग एम्पोरियम की स्थापना की है जो देश-विदेश में कुटीर उद्योगों द्वारा निर्मित वस्तुओं के विक्रय की व्यवस्था करता है। उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, पंजाब, महाराष्ट्र, असम, जम्मू कश्मीर तथा तमिलनाडु आदि राज्यों में भी कुटीर उद्योग एम्पोरियम स्थापित किये गये हैं। औद्योगिक सहकारी संस्थाओं द्वारा निर्यात एवं थोक बाजार में इसकी विक्रय व्यवस्था करने के लिए सन् 1966 में औद्योगिक सहकारी संस्थाओं का महासंघ स्थापित किया गया था।

(8) तकनीकी सहायता :
लघु उद्योगों को तकनीकी सहायता प्रदान करने के लिए केन्द्रीय सरकार ने केन्द्रीय लघु उद्योग संगठन के अधीन एक औद्योगिक विस्तार सेवा प्रारम्भ की है। इस योजना के अन्तर्गत 28 लघु उद्योगशालाएँ, 31 प्रादेशिक सेवाशालाएँ और 37 प्रसार उत्पादन प्रशिक्षण केन्द्र स्थापित किये गये हैं। लघु उद्योगों को तकनीकी परामर्श देने के लिए विदेशी विशेषज्ञ बुलाये जाते हैं तथा फोर्ड फाउण्डेशन ऑफ इण्डिया की सहायता से भारतीय विशेषज्ञ प्रशिक्षण के लिए विदेश भेजे जाते हैं।

(9) औद्योगिक बस्तियों का निर्माण :
लघु उद्योगों के विकास हेतु देश के विभिन्न भागों में औद्योगिक बस्तियाँ स्थापित की गयी हैं। इसके लिए केन्द्रीय सरकार द्वारा राज्य सरकारों को ऋण दिया जाता है। इनका प्रमुख उद्देश्य उद्योगों को शहरी क्षेत्रों से हटाकर उचित स्थान पर ले जाना है।

(10) जिला उद्योग केन्द्र :
इन केन्द्रों की स्थापना मई, 1978 में प्रारम्भ की गयी। इनकी स्थापना का मुख्य उद्देश्य ग्रामीण तथा अर्द्ध-शहरी क्षेत्रों में व्यापक रूप से फैले छोटे और अत्यन्त छोटे ग्रामीण और कुटीर उद्योगों को बढ़ावा देने के लिए जिला स्तर पर एक केन्द्र स्थापना करना है। इसका एक अन्य उद्देश्य पूँजी निवेश के दौरान तथा पूँजी निवेश के पश्चात् जहाँ तक सम्भव हो सभी अनिवार्य सेवाएँ और सहयोग जिला स्तर पर भी उपलब्ध कराना है। इस कार्यक्रम में ग्रामीण क्षेत्रों और छोटे कस्बों में ऐसे उद्योगों की स्थापना पर अधिक जोर दिया जाता है जिनसे इन इलाकों में रोजगार के ज्यादा अवसर उपलब्ध कराये जा सकें।

प्रश्न 3.
लघु एवं कुटीर उद्योगों का महत्त्व लिखिए। (2009)
अथवा
भारतीय अर्थव्यवस्था में लघु उद्योगों का महत्त्व लिखिए। (2017)
उत्तर:
भारतीय अर्थव्यवस्था में कुटीर एवं लघु उद्योगों का महत्त्व :
महात्मा गाँधी के अनुसार, “भारत का कल्याण उसके कुटीर उद्योगों में निहित है।” भारतीय योजना आयोग के अनुसार, “लघु एवं कुटीर उद्योग हमारी अर्थव्यवस्था के महत्त्वपूर्ण अंग हैं जिनकी कभी उपेक्षा नहीं की जा सकती।” भारतीय अर्थव्यवस्था में लघु एवं कुटीर उद्योगों का महत्त्व निम्नलिखित तथ्यों से स्पष्ट किया जा सकता है-

  • रोजगार का सृजन :
    इन उद्योगों का सबसे महत्त्वपूर्ण लाभ यह है कि इनसे रोजगार के अधिक अवसर विकसित होते हैं, क्योंकि इन उद्योगों में प्रायः श्रम प्रधान तकनीक का प्रयोग किया जाता है। इन उद्योगों में कम पूँजी लगाकर अधिक लोगों को रोजगार के अवसर प्राप्त होते हैं।
  • कलात्मक वस्तुओं का निर्माण :
    कुटीर उद्योगों में अधिकांश कार्य हाथों द्वारा किया जाता है जो कलात्मक वस्तुओं को सम्भव बनाते हैं; जैसे-ऊनी, रेशमी वस्त्रों पर कढ़ाई, कालीन व गलीचों का निर्माण, हाथी दाँत का सामान आदि ऐसे कुटीर उद्योग हैं जिनसे काफी मात्रा में विदेशी मुद्रा अर्जित की जाती है। इस प्रकार का उत्पादन वृहत् उद्योगों में सम्भव नहीं है।
  • शीघ्र उत्पादक उद्योग :
    लघु एवं कुटीर उद्योग शीघ्र उत्पादक उद्योग होते हैं आशय यह है कि इन उद्योगों में विनियोग करने और उत्पादन आरम्भ होने में अधिक समयान्तर नहीं होता।
  • आयातों में कमी :
    लघु एवं कुटीर उद्योगों का विकास प्रायः श्रम प्रधान तकनीक के आधार पर किया जाता है। इस कारण इन उद्योगों के विकास के लिए आयातों पर निर्भर नहीं रहना पड़ता है और राष्ट्र के मूल्यवान विदेशी विनिमय-भण्डारों की बचत होती है।
  • उद्योगों का विकेन्द्रीकरण :
    इन उद्योगों से देश में उद्योगों के विकेन्द्रीकरण में सहायता मिलती है। बड़े उद्योग कुछ विशेष कारणों से एक ही स्थान पर केन्द्रित हो जाते हैं, लेकिन लघु एवं कुटीर उद्योगों को गाँवों और छोटे कस्बों में भी स्थापित किया जा सकता है।
  • कम पूँजी व अधिक श्रम की स्थिति में उपयुक्त :
    भारत में पूँजी का अभाव है जबकि श्रम शक्ति का बाहुल्य है। चूँकि कुटीर उद्योग में कम पूँजी से ही काम चल जाता है और अधिक लोगों को रोजगार उपलब्ध हो जाता है, इसलिए भारत में कुटीर उद्योगों का विकास किया जाए तो स्त्री-श्रम का भी उपयोग हो सकेगा तथा देश की सम्पत्ति में भी वृद्धि होगी।
  • कृषकों के खाली समय का सदुपयोग :
    देश में कृषि द्वारा केवल विशेष मौसम के लिए रोजगार मिल पाता है। वर्ष में 3-4 महीने तक कृषक लोग बेकार बैठे रहते हैं। यदि कुटीर एवं लघु उद्योगों का विकास हो जाए तो इससे न केवल कृषकों के खाली समय का सदुपयोग होगा वरन् उनकी आय में वृद्धि होगी।।
  • सरल कार्य-प्रणाली :
    कुटीर उद्योगों की स्थापना तथा कार्य-प्रणाली बहुत ही सरल होती है। इनके लिए उच्च कोटि के तकनीकी विशेषज्ञों, प्रबन्धकों, विशाल भवन, विशेष प्रशिक्षण तथा विस्तृत हिसाब-किताब की आवश्यकता नहीं पड़ती है।
  • बड़े पैमाने के उद्योगों के पूरक :
    लघु एवं कुटीर उद्योग बड़े पैमाने के उद्योगों को कच्ची सामग्री एवं अर्द्ध-निर्मित माल उपलब्ध कराते हैं। इस प्रकार इन उद्योगों का विकास बड़े पैमाने के उद्योगों के विकास .. के लिए भी आवश्यक है।
  • निर्यात व्यापार में महत्त्व :
    विगत वर्षों में हथकरघा वस्त्र, हाथी दाँत की वस्तुएँ, ताँबे व पीतल की कलात्मक बर्तन, दरियाँ, कालीन तथा गलीचे, चमड़े के जूते, सिलाई की मशीनें, बिजली के पंखे, साइकिलें आदि कुटीर व लघु उद्योगों द्वारा उत्पादित माल के निर्यात में काफी वृद्धि हुई है। वर्ष 2005-06 में इन उद्योगों का निर्यात में योगदान 1,50,242 करोड़ रुपये रहा है।
  • आर्थिक विकास में योगदान :
    लघु उद्यम क्षेत्र का देश के सामाजिक-आर्थिक विकास में महत्त्वपूर्ण योगदान है। औद्योगिक उत्पादन में 39 प्रतिशत से अधिक और राष्ट्रीय निर्यात से 33 प्रतिशत से अधिक योगदान करके इस क्षेत्र ने राष्ट्र के आर्थिक विकास में महत्त्वपूर्ण भागीदारी निभाई है। अनुमान है कि इस क्षेत्र में 3 करोड़ 10 लाख लोगों को रोजगार मिला हुआ है।

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प्रश्न 4.
टिप्पणी लिखिए

  1. चमड़ा उद्योग
  2. लोहा इस्पात उद्योग(2009)
  3. सूती वस्त्र उद्योग, (2008, 09)
  4. सूचना एवं प्रौद्योगिकी।

उत्तर:
1. चमड़ा उद्योग :
यह एक पारम्परिक उद्योग है। चमड़े से कई प्रकार की वस्तुएँ; जैसे-कोट, जर्सी, पर्स, बटुए, थैले, खेल का सामान, खिलौने, कनटोपं, बेल्ट, दस्ताने, जूते व चप्पल आदि बनाये जाते हैं। देश में चमड़े की वस्तुओं का सर्वाधिक उत्पादन तमिलनाडु, कोलकाता, कानपुर, मुम्बई, औरंगाबाद, कोल्हापुर, देवास, जालंधर और आगरा में होता है। चमड़े की वस्तुओं के उत्पादन का 75 प्रतिशत भाग लघु और कुटीर उद्योगों द्वारा उत्पादित किया जाता है।

2. लोहा तथा इस्पात उद्योग एवं :
लोहा-इस्पात उद्योग देश का एक आधारभूत उद्योग है। विनियोग की दृष्टि से यह संगठित क्षेत्र के सबसे महत्त्वपूर्ण एवं विशालतम उद्योगों में से एक है।
भारत में यह उद्योग अति प्राचीन है लेकिन आधुनिक तरीके से लोहे का उत्पादन 1875 में आरम्भ हुआ, जब बंगाल आयरन वर्क्स कम्पनी ने कुल्टी (पश्चिम बंगाल) में अपने संयन्त्र की स्थापना की। परन्तु बड़े पैमाने पर उत्पादन 1907 में जमशेदपुर में टाटा आयरन इण्डस्ट्रीज कम्पनी (टिस्को) की स्थापना के साथ आरम्भ हुआ। भारत में कुल 10 कारखाने हैं जिसमें से 9 सार्वजनिक क्षेत्र में एवं केवल एक निजी क्षेत्र (टाटा आयरन एण्ड स्टील कम्पनी, जमशेदपुर, पश्चिमी बंगाल) में है। सार्वजनिक क्षेत्र के कारखाने भिलाई, दुर्गापुर, राउरकेला, बोकारो, विशाखापट्टनम् एवं सलेम में है।

इस समय देश में 196 लघु इस्पात संयन्त्र हैं। इनमें से 179 इकाइयाँ चालू हैं तथा शेष बन्द हैं। वर्तमान में इस उद्योग में 90,000 करोड़ रुपये की पूँजी लगी है तथा इसमें 5 लाख लोगों को रोजगार प्राप्त है।

3. सूती वस्त्र उद्योग :
भारत में सूती वस्त्रों की अत्यन्त पुरानी परम्परा है। देश की प्रथम सूती कपड़ा मिल सन् 1818 में कोलकाता में स्थापित की गई थी। देश की सूती कपड़ा मिलें मुख्य रूप से महाराष्ट्र, तमिलनाडु और गुजरात में हैं। यह उद्योग भारत का सबसे बड़ा एवं व्यापक उद्योग है। देश के औद्योगिक उत्पादन में इसका योगदान 14 प्रतिशत है, जबकि देश के कुल निर्यात आय में इसका हिस्सा 19 प्रतिशत है। आयात में इसका हिस्सा 3 प्रतिशत है। यह उद्योग लगभग 9 करोड़ लोगों को प्रत्यक्ष एवं अप्रत्यक्ष रूप से रोजगार प्रदान कर रहा है। इस उद्योग में लगभग 5,000 करोड़ रुपये की पूँजी लगी है। सरकार ने कपड़ा आदेश (विकास एवं विनिमय)1993 के माध्यम से कपड़ा उद्योग को लाइसेन्स मुक्त कर दिया।

4. सूचना एवं प्रौद्योगिकी :
सूचना एवं प्रौद्योगिकी उद्योग से आशय उस उद्योग से है, जिसमें कम्प्यूटर और उसके सहायक उपकरणों की सहायता से ज्ञान का प्रसार किया जाता है। इसके अन्तर्गत कम्प्यूटर, संचार, प्रौद्योगिकी और सम्बन्धित सॉफ्टवेयर को शामिल किया जाता है। इसके अन्तर्गत उस सम्पूर्ण व्यवस्था को शामिल किया जाता है, जिसके द्वारा संचार माध्यम और उपकरणों की सहायता से सूचना पहुँचाई जाती है। यह ज्ञान आधारित उद्योग है। वर्ष 2000-01 में इलेक्ट्रॉनिक्स निर्यात 33,138 करोड़ रुपये था जो 2008-09 में बढ़कर 2,35,300 करोड़ रुपये पहुँच गया। भारत में सकल घरेलू उत्पाद में उद्योग का योगदान वर्ष 1999-2000 में 1.2 प्रतिशत से बढ़कर वर्ष 2013 में 8 प्रतिशत हो गया है। इससे ज्ञात होता है कि यह उद्योग भारत का सबसे तेज गति से बढ़ता हुआ उद्योग है।

MP Board Class 9th Social Science Chapter 17 अन्य परीक्षोपयोगी प्रश्न

MP Board Class 9th Social Science Chapter 17 वस्तुनिष्ठ प्रश्न

बहु-विकल्पीय प्रश्न

प्रश्न 1.
अति लघु उद्योग इकाइयों की अधिकतम विनियोग सीमा है
(i) 5 लाख रुपये
(ii) 15 लाख रुपये
(iii) 20 लाख रुपये
(iv) 25 लाख रुपये
उत्तर:
(iv) 25 लाख रुपये

प्रश्न 2.
वर्तमान में चीनी उत्पादन में भारत का विश्व में कौन-सा स्थान है?
(i) पहला
(ii) दूसरा
(iii) तीसरा
(iv) चौथा।
उत्तर:
(ii) दूसरा

प्रश्न 3.
विश्व में सीमेण्ट उत्पादन में भारत का कौन-सा स्थान है?
(i) तीसरा
(ii) चौथा
(iii) पाँचवाँ
(iv) छठा।
उत्तर:
(iii) पाँचवाँ

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रिक्त स्थान की पूर्ति

  1. कुटीर उद्योग सिर्फ …………. में चलाये जाते हैं।
  2. ………. उद्योग भारत का सबसे प्राचीन और प्रमुख उद्योग है।
  3. जूट के उत्पादन में भारत का विश्व में ………… स्थान है।
  4. भारत की लगभग …………. प्रतिशत कार्यशील जनसंख्या कृषि पर निर्भर है।
  5. वर्तमान में लघु उद्योगों की वस्तुओं का देश के कुल निर्यात में ……… प्रतिशत हिस्सा है।

उत्तर:

  1. ग्रामों
  2. सूती वस्त्र
  3. पहला
  4. 58.4
  5. 35

सत्य/असत्य

प्रश्न 1.
देश की प्रथम सूती कपड़ा मिल सन् 1818 में कोलकाता में स्थापित की गई थी। (2014)
उत्तर:
सत्य

प्रश्न 2.
जिन औद्योगिक इकाइयों में 50 लाख रुपये तक की पूँजी लगी हो उन्हें अति उद्योग की श्रेणी में रखा जाता है।
उत्तर:
असत्य

प्रश्न 3.
नेशनल न्यूज प्रिण्ट एण्ड पेपर मिल लिमिटेड नेपानगर (म. प्र.) में है।
उत्तर:
सत्य

प्रश्न 4.
भारत में लाख का सबसे अधिक उत्पादन छोटा नागपुर पठार में होता है।
उत्तर:
सत्य

प्रश्न 5.
अनुमान है कि विश्व के चमड़े की कुल आपूर्ति का 20 प्रतिशत चमड़ा भारत में तैयार होता है।
उत्तर:
असत्य

सही.जोड़ी मिलाइए
MP Board Class 9th Social Science Solutions Chapter 17 भारत में उद्योगों की स्थिति - 2
उत्तर:

  1. →(घ)
  2. →(ग)
  3. →(क)
  4. →(ङ)
  5. →(ख)

एक शब्द/वाक्य में उत्तर

प्रश्न 1.
लोहा इस्पात उद्योग को किस वर्ष में लाइसेंस मुक्त कर दिया?
उत्तर:
1991 में

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प्रश्न 2.
चीनी उत्पादन में किन दो राज्यों का महत्त्वपूर्ण स्थान है?
उत्तर:
उत्तर प्रदेश एवं महाराष्ट्र

प्रश्न 3.
हथकरघा, खादी उद्योग तथा रेशम उद्योग को किस उद्योग की श्रेणी में रखा गया है?
उत्तर:
ग्राम उद्योग

प्रश्न 4.
देश में काँच बनाने के कारखाने किस राज्य में हैं?
उत्तर:
पश्चिम बंगाल

प्रश्न 5.
भारत में लाख का उत्पादन सबसे अधिक कहाँ होता है?
उत्तर:
छोटा नागपुर का पठार।

MP Board Class 9th Social Science Chapter 17 अति लघु उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 1.
उद्योगों का क्या महत्त्व है?
उत्तर:
किसी देश के आर्थिक विकास में उद्योगों की भूमिका अत्यन्त महत्त्वपूर्ण होती है। उद्योग देश के तीव्र आर्थिक विकास में सहायक होते हैं। उद्योगों के विकास के बिना कोई राष्ट्र समृद्ध नहीं हो सकता है।

प्रश्न 2.
वृहत् उद्योग किसे कहते हैं?
अथवा
बडे पैमाने के उद्योग से क्या आशय है?
उत्तर:
जिन उद्योगों में कारखाना अधिनियम लागू होता है अर्थात् जहाँ अधिक संख्या में श्रमिक कार्य करते हैं व अधिक मात्रा में पूँजी लगी होती है वे उद्योग वृहत् (या बड़े) उद्योग कहलाते हैं।

प्रश्न 3.
मध्यम उद्योगों से क्या आशय है?
उत्तर:
जिन औद्योगिक इकाइयों में प्लाण्ट एवं मशीनरी में पाँच से दस करोड़ रुपये तक की पूँजी लगी होती है, वे औद्योगिक इकाइयाँ मध्यम उद्योगों की श्रेणी में आती हैं। सेवा क्षेत्र वाली इकाइयों के लिए यह सीमा 5 करोड़ रुपये तक रखी गयी है। उदाहरणार्थ-चमड़ा उद्योग, रेशम उद्योग।

प्रश्न 4.
लघु उद्योग किसे कहते हैं?
उत्तर:
वर्तमान में वे सभी औद्योगिक इकाइयाँ लघु उद्योग के अन्तर्गत आती हैं जिनकी अचल सम्पत्ति, संयन्त्र एवं मशीनरी में सीमित तथा सरकार द्वारा स्वीकृत से अधिक पूँजी न लगी हो, साथ ही जिनमें कारखाना अधिनियम लागू नहीं होता।

प्रश्न 5.
कुटीर उद्योगों से क्या आशय है?
उत्तर:
कुटीर उद्योग से आशय ऐसे उद्योगों से है जो पूर्णतया या मुख्यतया परिवार के सदस्यों की सहायता से पूर्णकालिक या अंशकालिक व्यवसाय के रूप में चलाये जाते हैं। ये प्रायः ग्रामीण एवं अर्द्ध-शहरी क्षेत्रों में स्थापित होते हैं तथा अंशकालीन रोजगार प्रदान करते हैं।

प्रश्न 6.
ग्राम उद्योग से आप क्या समझते हैं?
उत्तर:
ये उद्योग ग्रामीण क्षेत्रों में स्थापित किये जाते हैं। ग्रामीण उद्योग दो श्रेणियों में विभाजित किये जा सकते हैं-एक वे हैं जो किसानों द्वारा सहायक धन्धे के रूप में चलाये जाते हैं; जैसे-मुर्गी पालन, करघों पर बुनाई, गाय-भैंस पालन, टोकरियाँ बनाना, रेशम के कीड़े पालना, मधुमक्खियाँ पालना आदि। दूसरे वे हैं जो ग्रामीण कौशल से सम्बन्धित होते हैं; जैसे-मिट्टी के बर्तन बनाना, चमड़े के जूते बनाना, हथकरघा पर कपड़े बुनना आदि।

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प्रश्न 7.
देश की प्रथम सूती कपड़ा मिल कब और कहाँ स्थापित की गयी थी?
उत्तर:
देश की प्रथम सूती कपड़ा मिल 1818 में कोलकाता में स्थापित की गई थी।

प्रश्न 8.
सार्वजनिक क्षेत्र में स्थापित भारत के चार लौह-इस्पात केन्द्र कौन-कौन से हैं ?
उत्तर:

  1. भिलाई (मध्य प्रदेश)
  2. दुर्गापुर (पश्चिम बंगाल)
  3. राउरकेला (उड़ीसा)
  4. बोकारो (बिहार)।

MP Board Class 9th Social Science Chapter 17 लघु उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 1.
उद्योग से क्या आशय है? स्पष्ट कीजिए।
उत्तर:
उद्योगों से आशय-जब किसी एक जैसी वस्तु या सेवा का उत्पादन अनेक फर्मों के द्वारा किया जाता है तब ये सभी फर्म मिलकर उद्योग कहलाते हैं; जैसे-लोहा-इस्पात उद्योग के अन्तर्गत दुर्गापुर, राउरकेला, बोकारो तथा टाटा आयरन एण्ड स्टील कम्पनी सभी शामिल हैं।

‘उद्योग’ की परिधि में वे समस्त उपक्रम आते हैं जिनमें नियोजकों एवं नियोजितों के सहयोग से मानवीय आवश्यकताओं तथा आकांक्षाओं की सन्तुष्टि के लिए एक व्यवस्थित गतिविधि के रूप में वस्तुओं या सेवाओं के उत्पादन का कार्य सम्पन्न किया जाता है।

प्रश्न 2.
भारत में चीनी उद्योग का संक्षिप्त वर्णन कीजिए।
उत्तर:
चीनी उद्योग-भारत विश्व में गन्ने का सबसे बड़ा उत्पादक देश है। चीनी के उत्पादन में भी भारत का दूसरा स्थान है। 30 जून, 2016 तक देश में 719 चीनी कारखाने स्थापित हो चुके थे, जबकि वर्ष 1950-51 में इनकी संख्या मात्र 138 थी। स्थापित चीनी मिलों में 326 सहकारी क्षेत्र के अन्तर्गत हैं। चीनी उत्पादन जो 1950-51 में 11.3 लाख टन था, वर्ष 2016-17 में 225-21 लाख टन पहुँच गया। यह मौसमी उद्योग है, अत: इसके लिए सहकारी क्षेत्र उपयुक्त है। देश में चीनी उत्पादन में उत्तर प्रदेश एवं महाराष्ट्र का महत्त्वपूर्ण स्थान है।

MP Board Class 9th Social Science Chapter 17 दीर्घ उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 1.
उद्योग से क्या आशय है? देश के आर्थिक विकास में उद्योगों की भूमिका क्या है?
उत्तर:
उद्योगों से आशय :
उद्योगों से आशय-जब किसी एक जैसी वस्तु या सेवा का उत्पादन अनेक फर्मों के द्वारा किया जाता है तब ये सभी फर्म मिलकर उद्योग कहलाते हैं; जैसे-लोहा-इस्पात उद्योग के अन्तर्गत दुर्गापुर, राउरकेला, बोकारो तथा टाटा आयरन एण्ड स्टील कम्पनी सभी शामिल हैं।

‘उद्योग’ की परिधि में वे समस्त उपक्रम आते हैं जिनमें नियोजकों एवं नियोजितों के सहयोग से मानवीय आवश्यकताओं तथा आकांक्षाओं की सन्तुष्टि के लिए एक व्यवस्थित गतिविधि के रूप में वस्तुओं या सेवाओं के उत्पादन का कार्य सम्पन्न किया जाता है।

आर्थिक विकास में उद्योगों की भूमिका :
किसी देश के आर्थिक विकास में उद्योगों की भूमिका अत्यन्त महत्त्वपूर्ण होती है। उद्योग देश के तीव्र आर्थिक विकास में सहायक होते हैं। बी.एच.येमे के अनुसार, “औद्योगीकरण व्यापक रूप में आर्थिक विकास तथा रहन-सहन की कुंजी माना जाता है। निर्माणी उद्योगों के रूप में, प्रचलित विचारधारा के अनुसार औद्योगीकरण को आर्थिक अस्थिरता एवं निर्धनता को दूर करने की संजीवनी माना गया है।” प्रो. बाइस ने कहा है, “विकास के किसी भी सुदृढ़ कार्यक्रम में औद्योगिक विकास को आवश्यक और अन्तिम रूप से एक महत्त्वपूर्ण भूमिका निभानी होती है।” अर्थात् उद्योगों के विकास के बिना कोई देश समृद्ध नहीं हो सकता।

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MP Board Class 7th Maths Solutions Chapter 2 भिन्न एवं दशमलव Ex 2.4

MP Board Class 7th Maths Solutions Chapter 2 भिन्न एवं दशमलव Ex 2.4

प्रश्न 1.
ज्ञात कीजिए:
MP Board Class 7th Maths Solutions Chapter 2 भिन्न एवं दशमलव Ex 2. 4 1
हल:
MP Board Class 7th Maths Solutions Chapter 2 भिन्न एवं दशमलव Ex 2. 4 1a

प्रश्न 2.
निम्नलिखित भिन्नों में से प्रत्येक का व्युत्क्रम ज्ञात कीजिए। व्युत्क्रमों को उचित भिन्न, विषम भिन्न एवं पूर्ण संख्या के रूप में वर्गीकृत कीजिए :
MP Board Class 7th Maths Solutions Chapter 2 भिन्न एवं दशमलव Ex 2. 4 2
हल:
MP Board Class 7th Maths Solutions Chapter 2 भिन्न एवं दशमलव Ex 2. 4 2a
MP Board Class 7th Maths Solutions Chapter 2 भिन्न एवं दशमलव Ex 2. 4 2b

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प्रश्न 3.
ज्ञात कीजिए:
MP Board Class 7th Maths Solutions Chapter 2 भिन्न एवं दशमलव Ex 2. 4 3
हल:
MP Board Class 7th Maths Solutions Chapter 2 भिन्न एवं दशमलव Ex 2. 4 3a

प्रश्न 4.
ज्ञात कीजिए:
MP Board Class 7th Maths Solutions Chapter 2 भिन्न एवं दशमलव Ex 2. 4 4
हल:
MP Board Class 7th Maths Solutions Chapter 2 भिन्न एवं दशमलव Ex 2. 4 4a

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पाठ्य-पुस्तक पृष्ठ संख्या # 47

दशमलव संख्याएँ

निम्नलिखित सारणी को देखिए और रिक्त स्थानों की पूर्ति कीजिए।
हल:
MP Board Class 7th Maths Solutions Chapter 2 भिन्न एवं दशमलव Ex 2. 4 5

संख्याओं की तुलना

प्रश्न 1.
अब 35.63 और 35.67; 20.1 और 20.01; 19 : 36 और 29 : 36 की तुलना कीजिए।
हल:
(i) 35.63 और 35.67
इन संख्याओं में पूर्णांश वाले भाग समान हैं।
इनके दशांश भाग भी समान हैं।
इन संख्याओं में दूसरी का शतांश भाग पहली के शतांश भाग से बड़ा है। 3 < 7
∴ 35.63 < 35.67 (ii) 20.1 और 20.01 इन संख्याओं में पूर्णाश समान हैं। इनके दशांश भागों में पहली संख्या का दशांश भाग दूसरी संख्या के दशांश भाग से बड़ा है। 1 > 0
∴ संख्या 20-1> 20.01.

(ii) 19.36 और 29.36
इन संख्याओं में पहली संख्या का पूर्णांश दूसरी संख्या के पूर्णांश से छोटा है। 1 < 2
∴ 19 : 36 < 29 : 36

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प्रश्न 2.
75 पैसे = ₹ ………….. , 250 g = …. kg, 85 cm = …. m लिखिए।
उत्तर:
75 पैसे = ₹0.75, 250g = 0.250 kg, 85 cm = 0.85 m.

पाठ्य-पुस्तक पृष्ठ संख्या # 48

प्रश्न 1.
0.19 + 2.3 का मान क्या है ?
हल:
MP Board Class 7th Maths Solutions Chapter 2 भिन्न एवं दशमलव Ex 2. 4 6
अतः 0.19 + 2.3 = 2.49

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प्रश्न 2.
39.87 – 21:98 का मान क्या है ?
हल:
MP Board Class 7th Maths Solutions Chapter 2 भिन्न एवं दशमलव Ex 2. 4 6a
अत: 39.87 – 21.98 = 17.89

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MP Board Class 9th Science Solutions Chapter 12 ध्वनि

MP Board Class 9th Science Solutions Chapter 12 ध्वनि

MP Board Class 9th Science Chapter 12 पाठ के अन्तर्गत के प्रश्नोत्तर

प्रश्न श्रृंखला-1 # पृष्ठ संख्या 182

प्रश्न 1.
किसी माध्यम में ध्वनि द्वारा उत्पन्न विक्षोभ आपके कानों तक कैसे पहुँचता है?
उत्तर:
ध्वनि द्वारा उत्पन्न विक्षोभ माध्यम (वायु) के सम्पीडनों एवं विरलनों के द्वारा हमारे कानों तक पहुँचता है।

प्रश्न श्रृंखला-2 # पृष्ठ संख्या 182

प्रश्न 1.
आपके विद्यालय की घण्टी, ध्वनि कैसे उत्पन्न करती है?
उत्तर:
जब हम विद्यालय की घण्टी पर हथौड़े से चोट मारते हैं तो वह कम्पन करने लगता है जिससे विक्षोभ उत्पन्न होता है। इस प्रकार ध्वनि उत्पन्न होती है।

प्रश्न 2.
ध्वनि तरंगों को यान्त्रिक तरंगें क्यों कहते हैं?
उत्तर:
ध्वनि तरंगों को यान्त्रिक तरंगें कहते हैं क्योंकि इसके संचरण के लिए माध्यम की आवश्यकता होती है।

प्रश्न 3.
मान लीजिए आप अपने मित्र के साथ चन्द्रमा पर गए हुए हैं? क्या आप अपने मित्र द्वारा उत्पन्न ध्वनि को सुन पायेंगे?
उत्तर:
नहीं।

प्रश्न श्रृंखला-3 # पृष्ठ संख्या 186

प्रश्न 1.
तरंग का कौन-सा गुण निम्नलिखित को निर्धारित करता है?
1. प्रबलता
2. तारत्व
उत्तर:

  1. आयाम
  2. आवृत्ति।

प्रश्न 2.
अनुमान लगाइए कि निम्न में से किस ध्वनि का तारत्व अधिक है?
(a) गिटार
(b) कार का हॉर्न।
उत्तर:
(a) गिटार का।

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प्रश्न श्रृंखला-4 # पृष्ठ संख्या 186

प्रश्न 1.
किसी ध्वनि तरंग की तरंगदैर्घ्य, आवृत्ति, आवर्तकाल तथा आयाम से क्या अभिप्राय है?
उत्तर:
तरंगदैर्घ्य:
“दो क्रमागत सम्पीडनों अथवा दो क्रमागत विरलनों के मध्य की दूरी तरंग की तरंगदैर्घ्य कहलाती है।” इसे लैम्डा (λ) से निरूपित करते हैं।

आवृत्ति:
“प्रति एकांक समय में पूर्ण किए गए दोलनों (अर्थात् गुजरने वाले संपीडनों तथा विरलनों) की संख्या को तरंग की आवृत्ति कहते हैं।” इसे न्यू (ν) से प्रदर्शित करते हैं।”

आवर्तकाल:
“दो क्रमागत संपीडनों या दो क्रमागत विरलनों को किसी निश्चित बिन्दु से गुजरने में लगे समय को तरंग का आवर्तकाल कहते हैं।” इसे T से प्रदर्शित करते हैं।

आयाम:
“किसी माध्यम में मूल स्थिति के दोनों ओर अधिकतम विक्षोभ को तरंग का आयाम कहते हैं।” इसे a से प्रदर्शित करते हैं।

प्रश्न 2.
किसी ध्वनि तरंग की तरंगदैर्घ्य तथा आवृत्ति उसके वेग से किस प्रकार सम्बन्धित है?
उत्तर:
ध्वनि तरंग का वेग (v) = तरंग की आवृत्ति (ν) x तरंगदैर्घ्य (λ)।

प्रश्न 3.
किसी दिए हुए माध्यम में एक ध्वनि तरंग की आवृत्ति 220 Hz तथा वेग 440 ms-1 है। इस तरंग की तरंगदैर्घ्य का परिकलन कीजिए।
हल:
∵ ज्ञात है:
आवृत्ति ν = 220
वेग v = 440 m s-1
ज्ञात करना है:
तरंगदैर्घ्य λ = ?
v = νλ
⇒ 440 = 220 λ
λ = \(\frac{440}{220}\) = 2 m
अतः अभीष्ट तरंगदैर्घ्य = 2 m.

प्रश्न 4.
किसी ध्वनि स्त्रोत से 450 m दूरी पर बैठा हुआ कोई मनुष्य 500 Hz की ध्वनि सुनता है। स्रोत से मनुष्य के पास तक पहुँचने वाले दो क्रमागत संपीडनों में कितना समय अन्तराल होगा?
उत्तर:
मान लीजिए दो क्रमागत संपीडनों के मध्य समय अन्तराल (आवर्तकाल) = T
ध्वनि की आवृत्ति ν = 500 (दिया है)
अब T = \(\frac{1}{ν}\) = \(\frac{1}{500}\) = 0.002 s
अत: अभीष्ट समय 0.002 s लगेगा।

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प्रश्न शृंखला-5 # पृष्ठ संख्या 187

प्रश्न 1.
ध्वनि की प्रबलता तथा तीव्रता में अन्तर बताइए।
उत्तर:
प्रबलता ध्वनि के लिए कानों की संवेदनशीलता की माप है, जबकि तीव्रता एकांक क्षेत्रफल से प्रति सेकण्ड गुजरने वाली ध्वनि ऊर्जा है। दो ध्वनियों की समान तीव्रता होते हुए भी उनकी प्रबलता अलग-अलग हो सकती है।

प्रश्न शृंखला-6 # पृष्ठ संख्या 188

प्रश्न 1.
वायु, जल या लोहे में से किस माध्यम में ध्वनि सबसे तेज चलती है?
उत्तर:
लोहे में।

प्रश्न श्रृंखला-7 # पृष्ठ संख्या 189

प्रश्न 1.
कोई प्रतिध्वनि 3 s पश्चात् सुनाई देती है। यदि ध्वनि की चाल 342 m s-1 हो तो स्रोत तथा परावर्तन पृष्ठ के बीच कितनी दूरी होगी?
हल:
ज्ञात है:
ध्वनि की चाल v = 342 m s-1
समय-अन्तराल t = 3 s
माना स्रोत एवं परावर्तक तल के बीच की ध्वनि = x m
तो ध्वनि द्वारा चली गई कुल दूरी s = 2x
तो 2x = चली दूरी (S) = वेग (v) x समय अन्तराल (t)
⇒ 2x = 342 x 3 = 1026
⇒ x = 1026/2 = 513 m
अत: अभीष्ट दूरी = 513 m.

प्रश्न श्रृंखला-8 # पृष्ठ संख्या 190

प्रश्न 1.
कंसर्ट हॉल की छतें वक्राकार क्यों होती है?
उत्तर:
कंसर्ट हॉल की छतें वक्राकार बनाई जाती हैं जिससे कि परावर्तन के पश्चात् ध्वनि हॉल के सभी भागों में पहुँच जाय।

प्रश्न श्रृंखला-9 # पृष्ठ संख्या 191

प्रश्न 1.
सामान्य मनुष्य के कानों के लिए श्रव्यता परिसर (सीमा) क्या है?
उत्तर:
20 Hz से लेकर 20 हजार Hz तक।

प्रश्न 2.
निम्न से सम्बन्धित आवृत्तियों का परिसर क्या है?
1. अवश्रव्य ध्वनि
2. पराश्रव्य ध्वनि।
उत्तर:

  1. 20 Hz से कम
  2. 20 हजार Hz से अधिक।

प्रश्न श्रृंखला-10 # पृष्ठ संख्या 193

प्रश्न 1.
एक पनडुब्बी सोनार स्पन्द उत्सर्जित करती है, जो पानी के अन्दर एक खड़ी चट्टान से टकराकर 1.02 5 के पश्चात् वापस लौटता है। यदि खारे पानी में ध्वनि की चाल 1531 m s-1 हो, तो चट्टान की दूरी ज्ञात कीजिए।
हल:
ज्ञात है:
ध्वनि की चाल y = 1531 m s-1
एवं समय अन्तराल t = 1.02 s
माना चट्टान की दूरी = x m
तो चली गई कुल दूरी = 2x m
दूरी 2x = वेग (v) x समय अन्तराल (t)
⇒ 2x = 1531 x 1.02
⇒ \(x=\frac{1531 \times 1 \cdot 02}{2}\)
⇒ 780.81 m
अतः चट्टान की अभीष्ट दूरी = 780.81 m.

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MP Board Class 9th Science Chapter 12 पाठान्त अभ्यास के प्रश्नोत्तर

प्रश्न 1.
ध्वनि क्या है? यह कैसे उत्पन्न होती है?
उत्तर:
ध्वनि:
“ऊर्जा का एक रूप जो हमारे कानों में श्रवण का संवेदन उत्पन्न करती है, ध्वनि कहलाती है।” ध्वनि स्रोत के कम्पन करने से उत्पन्न होती है।

प्रश्न 2.
एक चित्र की सहायता से वर्णन कीजिए कि ध्वनि के स्रोत के निकट वायु में सम्पीडन एवं विरलन कैसे उत्पन्न होते हैं?
उत्तर:
जब कोई ध्वनि स्रोत कम्पन करता है तो वह अपने सामने की वायु को धक्का देकर सम्पीडित करती है और एक उच्च दाब का क्षेत्र उत्पन्न होता है। इस क्षेत्र को सम्पीडन (C) कहते हैं। यह सम्पीडन कम्पमान वस्तु से आगे की ओर गति करता है। जब स्रोत पीछे की ओर कम्पन करता है तो एक निम्न दाब का क्षेत्र उत्पन्न होता है जिसे विरलन (R) कहते हैं। इस प्रकार स्रोत के निकट वायु में सम्पीडन एवं विरलन उत्पन्न होते हैं।
MP Board Class 9th Science Solutions Chapter 12 ध्वनि image 1

प्रश्न 3.
किस प्रयोग से यह दर्शाया जा सकता है कि ध्वनि संचरण के लिए एक द्रव्यात्मक माध्यम की आवश्यकता होती है?
उत्तर:
“ध्वनि संचरण के लिए द्रव्यात्मक माध्यम की आवश्यकता होती है” दर्शाने हेतु प्रयोग:
प्रयोग:
एक बेलजार लेकर चित्रानुसार उसका सम्पर्क निर्वात पम्प से कर देते हैं तथा कॉर्क की सहायता से उसमें एक विद्युत घण्टी लटका देते हैं।
MP Board Class 9th Science Solutions Chapter 12 ध्वनि image 2
जब हम घण्टी का स्विच दबाते हैं तो घण्टे के बजने की स्पष्ट आवाज सुनाई देती है। अब पम्प द्वारा धीरे-धीरे वायु निकालते हैं तो देखते हैं कि स्विच दबाने पर आवाज धीमी होती जाती है और जब बेलजार में पूर्ण निर्वात हो जाता है तब घण्टी की आवाज सुनाई देना बन्द हो जाता है। इससे स्पष्ट होता है कि ध्वनि के संचरण के लिए माध्यम की आवश्यकता होती है।

प्रश्न 4.
ध्वनि तरंगों की प्रकृति अनुदैर्घ्य क्यों होती है?
उत्तर:
ध्वनि तरंगों का संचरण सम्पीडनों एवं विरलनों के माध्यम से होता है तथा संचरण माध्यम में दाब तथा घनत्व में परिवर्तन होता है और ये अनुदैर्घ्य तरंगों के अभिलक्षण (प्रगुण) हैं। इसलिए ध्वनि तरंगों की प्रकृति अनुदैर्घ्य होती है।

प्रश्न 5.
ध्वनि का कौन-सा अभिलक्षण किसी अन्य अंधेरे कमरे में बैठे आपके मित्र की आवाज पहचानने में आपकी सहायता करता है?
उत्तर:
ध्वनि की गुणता वह अभिलक्षण है जो मित्र की आवाज को पहचानने में हमारी मदद करता है।

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प्रश्न 6.
तड़ित की चमक तथा गर्जन साथ-साथ उत्पन्न होते हैं लेकिन चमक दिखाई देने के कुछ सेकण्ड पश्चात् गर्जन सुनाई देती है। ऐसा क्यों होता है?
उत्तर:
चमक (प्रकाश) का वेग गर्जन (ध्वनि) के वेग से पर्याप्त मात्रा में अधिक होता है। इसलिए चमक (प्रकाश) हम तक पहले पहुँच जाती है तथा गर्जन (ध्वनि) को पहुँचने में कुछ समय अधिक लग जाता है।

प्रश्न 7.
किसी व्यक्ति का औसत श्रव्य परिसर 20 Hz से 20 kHz है। इन दो आवृत्तियों के लिए ध्वनि तरंगों की तरंगदैर्घ्य ज्ञात कीजिए। वायु में ध्वनि का वेग 344 m s-1 लीजिए।
हल:
ज्ञात है:
निम्न परिसर की आवृत्ति ν(l) 20 Hz
उच्च परिसर की आवृत्ति νu = 20 kHz
ध्वनि का वेग v = 344 m s-1
हम जानते हैं कि
v = νλ
MP Board Class 9th Science Solutions Chapter 12 ध्वनि image 3
अतः अभीष्ट तरंगदैर्घ्य क्रमशः 17.2 m एवं 17.2 x 10-3m है।

प्रश्न 8.
दो बालक किसी ऐलुमिनियम पाइप के दो सिरों पर हैं। एक बालक पाइप के एक सिरे पर पत्थर से आघात करता है। दूसरे सिरे पर स्थित बालक तक वायु तथा ऐलुमिनियम से होकर जाने वाली ध्वनि तरंगों द्वारा लिए गए समय का अनुपात ज्ञात कीजिए।
हल:
ऐलुमिनियम में ध्वनि का वेग v(Al) = 6420 m s-1 एवं
वायु में ध्वनि का वेग v(a) = 346 m s-1
मान लीजिए कि ऐलुमिनियम के पाइप की लम्बाई x m है तथा ध्वनि द्वारा वायु एवं ऐलुमिनियम में लिया गया समय क्रमशः t(a) एवं t(Al) है तो
दूरी x = वेग x समय = v x t
v(a) x t(a) = v(Al) x t(Al)
MP Board Class 9th Science Solutions Chapter 12 ध्वनि image 4
अतः लिए गए समयों में अभीष्ट अनुपात 18.55 : 1 है।

प्रश्न 9.
किसी ध्वनि स्रोत की आवृत्ति 100 Hz है। एक मिनट में यह कितनी बार कम्पन करेगा?
हल:
कम्पनों की कुल संख्या = आवृत्ति x समय (सेकण्ड में)
= 100 x 60 = 6000 कम्पन
अतः अभीष्ट कम्पनों की संख्या = 6000.

प्रश्न 10.
क्या ध्वनि परावर्तन के उन्हीं नियमों का पालन करती है जिनका पालन प्रकाश की तरंगें करती हैं? इन नियमों को बताइए।
उत्तर:
हाँ, ध्वनि तरंगें भी परावर्तन के उन्हीं नियमों का पालन करती हैं जिनका पालन प्रकाश की तरंगें करती हैं।
परावर्तन के नियम:

  1. आपतन कोण = परावर्तन कोण
  2. आपाती किरण, परावर्तित किरण एवं अभिलम्ब तीनों एक ही तल में होते हैं।

प्रश्न 11.
ध्वनि का एक स्रोत किसी परावर्तक पृष्ठ के सामने रखने पर उसके द्वारा प्रदत्त ध्वनि तरंग की प्रति ध्वनि सुनाई देती है। यदि स्रोत तथा परावर्तक पृष्ठ की दूरी पर स्थिर रहे तो किस दिन प्रतिध्वनि अधिक शीघ्र सुनाई देगी –
1. जिस दिन ताप अधिक हो,
2. जिस दिन ताप कम हो।
उत्तर:
1. जिस दिन ताप अधिक हो।

प्रश्न 12.
ध्वनि तरंगों के परावर्तन के दो व्यावहारिक उपयोग लिखिए।
उत्तर:
ध्वनि तरंगों के परावर्तन के व्यावहारिक उपयोग –

  1. मेगाफोन, लाउडस्पीकर आदि द्वारा ध्वनि विस्तारण में।
  2. स्टेथोस्कोप द्वारा हृदय की धड़कनों को डॉक्टर के कानों तक पहुँचाने में।

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प्रश्न 13.
500 मीटर ऊँची किसी मीनार की चोटी से एक पत्थर मीनार के आधार पर स्थित एक पानी के तालाब में गिराया जाता है। पानी में उसके गिरने की ध्वनि चोटी पर कब सुनाई देगी? (g = 10 m s-1 तथा ध्वनि की चाल = 340 m s-1)
हल:
ज्ञात है:
मीनार की ऊँचाई h = 500 m
पत्थर का प्रारम्भिक वेग u = 0 m s-1
गुरुत्वीय त्वरण g = 10 m s-2
ध्वनि की चाल v = 340 m s-1
पत्थर को जल तक पहुँचने में लगा समय = t1 है तो पत्थर के मुक्त पतन में,
h = ut1 + 2gt12
500 = 0 (t1) + \(\frac{1}{2}\) x 10 x t12
⇒ t12 = 100 ⇒ t1 = \(\sqrt{100}\) = 10 s
माना ध्वनि को चोटी तक पहुँचने में लगा समय t2 है तो
दूरी = वेग x समय
500 = 340 x t2
⇒ t2 = 500/340 = 1.47 s
कुल समय t = t1 + t2 = 10 s + 1-47 s = 11.47 s
अत: अभीष्ट ध्वनि 11.47 5 बाद सुनाई देगी।

प्रश्न 14.
एक ध्वनि तरंग 339 m s-1 की चाल से चलती है। यदि इसकी तरंगदैर्घ्य 1.5 cm हो, तो तरंग की आवृत्ति कितनी होगी? क्या यह श्रव्य होगी?
हल:
ज्ञात है:
ध्वनि की चाल v = 339 m s-1
तरंगदैर्घ्य λ = 1.5 cm
MP Board Class 9th Science Solutions Chapter 12 ध्वनि image 5
अतः तरंग की अभीष्ट आवृत्ति = 22,600 Hz होगी तथा यह श्रव्य नहीं पराश्रव्य होगी।

प्रश्न 15.
अनुरणन क्या है ? इसे कैसे कम किया जा सकता है? (2018)
उत्तर:
अनुरणन:
“किसी बड़े हॉल की दीवारों से ध्वनि के बार-बार परावर्तन के कारण ध्वनि काफी समय तक बनी रहती है। इस प्रकार क्रमिक परावर्तनों के फलस्वरूप सुनी गयी ध्वनि अर्थात् ध्वनि, निर्बन्ध अनुरणन कहलाता है।”

अनुरणन को कम करने के उपाय:
इसे कम करने के लिए हॉल की दीवारों एवं छतों पर ध्वनि अवशोषक लगाये जाते हैं।

प्रश्न 16.
ध्वनि की प्रबलता से क्या अभिप्राय है? यह किन कारकों पर निर्भर करती है?
उत्तर:
ध्वनि की प्रबलता:
“अधिक ऊर्जा युक्त ध्वनि तरंगें अधिक दूरी तक जाती हैं। ध्वनि के इस गुण को ध्वनि की प्रबलता कहते हैं।” ध्वनि की प्रबलता इसके आयाम पर निर्भर करती है।

प्रश्न 17.
चमगादड़ अपना शिकार पकड़ने के लिए पराध्वनि का उपयोग कैसे करते हैं? वर्णन कीजिए।
उत्तर:
चमगादड़ द्वारा अन्धकार में अपना शिकार ढूँढ़ने की युक्ति:
चमगादड़ अन्धकार में अपना शिकार ढूँढ़ने के लिए सोनार युक्ति का उपयोग करते हैं। वे उड़ते समय पराध्वनि तरंगें उत्सर्जित करते हैं जो उच्च आवृत्ति के कारण अवरोधों एवं कीटों से परावर्तित होकर चमगादड़ के कानों तक पहुँचती हैं जिनका चमगादड़ संसूचन करते हैं। इन परावर्तित स्पन्दों की प्रकृति से चमगादड़ को पता चल जाता है कि उसका शिकार कहाँ है तथा किस प्रकार का है।

प्रश्न 18.
वस्तुओं को साफ करने के लिए पराध्वनि का उपयोग कैसे करते हैं?
उत्तर:
वस्तुओं को साफ करने के लिए पराध्वनि का उपयोग:
पराध्वनि प्रायः उन भागों को साफ करने में उपयोग में लाई जाती है जिन तक पहुँचना बहुत कठिन होता है। जिन वस्तुओं की सफाई करनी होती है उन्हें साफ करने वाले विलयन में रखकर उसमें पराध्वनि प्रेषित की जाती है। उच्च आवृत्ति के विक्षोभ के कारण चिकनाई, धूल कण एवं गन्दगी के कण अलग होकर विलयन में आ जाते हैं और इस प्रकार वस्तु पूर्णतया साफ हो जाती है। इस विधि का उपयोग प्रायः विषम आकार के पुर्जे, इलेक्ट्रॉनिक अवयव आदि को साफ करने में किया जाता है।

प्रश्न 19.
सोनार की कार्यविधि तथा उपयोगों का वर्णन कीजिए।
उत्तर:
सोनार की कार्यविधि:
सोनार में एक प्रेषित्र एवं एक संसूचक लगा होता है। जहाज पर लगे प्रेषित्रों द्वारा नियमित समय अन्तरालों पर पराश्रव्य ध्वनि के शक्तिशाली स्पन्दों अर्थात् सिग्नलों को लक्ष्य तक भेजा जाता है। ये तरंगें जल में गति करती हैं तथा लक्ष्य से टकराने के बाद परावर्तित होकर संसूचक द्वारा ग्रहण कर ली जाती हैं। संसूचक पराध्वनि को विद्युत संकेतों में बदल देता है जिनकी व्याख्या कर ली जाती है। जल में ध्वनि की चाल तथा पराध्वनि के प्रेषण एवं अधिग्रहण के समय को ज्ञात करके लक्ष्य की दूरी की गणना कर ली जाती है।

सोनार के उपयोग:
सोनार के निम्नांकित प्रमुख उपयोग हैं –

  1. चमगादड़ द्वारा अन्धकार में अपना शिकार ढूँढ़ने में।
  2. चमगादड़ का रात्रि में उड़ते समय अवरोधों से टकराने से बचाव करने में।
  3. पॉरपॉइस मछलियों द्वारा अंधेरे में अपने भोजन की खोज करने में।
  4. समुद्र में डूबे हुए जहाज एवं पनडुब्बियों का पता लगाने में तथा समुद्र की गहराई ज्ञात करने में।
  5. समुद्र के अन्दर स्थित चट्टानों, घाटियाँ, हिम शैलों एवं अन्य अवरोधों की स्थिति पता करने में।

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प्रश्न 20.
एक पनडुब्बी पर लगी सोनार युक्ति, संकेत भेजती है और उनकी प्रतिध्वनि 5 s पश्चात् ग्रहण करती है। यदि पनडुब्बी से वस्तु की दूरी 3625 m हो तो ध्वनि की चाल की गणना कीजिए।
हल:
ज्ञात है:
पनडुब्बी से वस्तु की दूरी d=3625 m
प्रतिध्वनि में लगा समय t=5 s
MP Board Class 9th Science Solutions Chapter 12 ध्वनि image 6
अतः ध्वनि की अभीष्ट चाल = 1450 m s-1.

प्रश्न 21.
किसी धातु के ब्लॉक में दोषों का पता लगाने के लिए पराध्वनि का उपयोग कैसे किया जाता है? वर्णन कीजिए।
उत्तर:
धातु के ब्लॉक में दोषों का पता लगाने में पराध्वनि का उपयोग-पराध्वनि तरंगों को धातु ब्लॉक से प्रेषित किया जाता है और प्रेषित तरंगों का पता लगाने के लिए संसूचकों का उपयोग किया जाता है। दोष होने पर पराध्वनि परावर्तित होकर दोष की उपस्थिति को दर्शाती है।

प्रश्न 22.
मनुष्य का कान किस प्रकार कार्य करता है? विवेचना कीजिए।
उत्तर:
निर्देश:
परीक्षोपयोगी अतिरिक्त प्रश्नोत्तर का दीर्घ उत्तरीय प्रश्न 3 देखिए।

MP Board Class 9th Science Chapter 12 परीक्षोपयोगी अतिरिक्त प्रश्नोत्तर

MP Board Class 9th Science Chapter 12 वस्तुनिष्ठ प्रश्न

बहु-विकल्पीय प्रश्न

प्रश्न 1.
स्वर एक ऐसी ध्वनि है –
(a) जिसमें कई आवृत्तियाँ होती हैं
(b) जिसमें केवल दो आवृत्तियाँ होती हैं
(c) जिसमें एकल आवृत्ति होती है
(d) जिसको सुनना सदैव दुखद होता है
उत्तर:
(c) जिसमें एकल आवृत्ति होती है

प्रश्न 2.
यान्त्रिक पियानो की किसी कुंजी को पहले धीरे से और फिर जोर से दबाया गया। दूसरी बार उत्पन्न ध्वनि –
(a) पहली ध्वनि से प्रबल होगी लेकिन इसका तारत्व भिन्न नहीं होगा
(b) पहली ध्वनि से प्रबल होगी और इसका तारत्व भी अपेक्षाकृत उच्च होगा
(c) पहली ध्वनि से प्रबल होगी परन्तु इसका तारत्व अपेक्षाकृत निम्न होगा
(d) प्रबलता और तारत्व दोनों ही प्रभावित नहीं होंगे
उत्तर:
(a) पहली ध्वनि से प्रबल होगी लेकिन इसका तारत्व भिन्न नहीं होगा

प्रश्न 3.
सोनार (SONAR) में हम उपयोग करते हैं –
(a) पराश्रव्य तरंगें
(b) अवश्रव्य तरंगें
(c) रेडियो तरंगें
(d) श्रव्य तरंगें
उत्तर:
(a) पराश्रव्य तरंगें

प्रश्न 4.
ध्वनि वायु में गमन करती है यदि –
(a) माध्यम के कण एक स्थान से दूसरे स्थान पर गमन कर रहे हों
(b) वायुमण्डल में आर्द्रता न हो
(c) विक्षोभ गमन करे
(d) कण एवं विक्षोभ दोनों ही एक स्थान से दूसरे स्थान को गमन करें
उत्तर:
(c) विक्षोभ गमन करे

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प्रश्न 5.
किसी क्षीण ध्वनि को प्रबल ध्वनि में परिवर्तित करने के लिए किसमें वृद्धि करनी होगी?
(a) आवृत्ति
(b) आयाम
(c) वेग
(d) तरंगदैर्घ्य
उत्तर:
(b) आयाम

प्रश्न 6.
दर्शाए गए वक्र में आधी तरंगदैर्घ्य है –
MP Board Class 9th Science Solutions Chapter 12 ध्वनि image 7
(a) AB
(b) BD
(c) DE
(d)AE
उत्तर:
(b) BD

प्रश्न 7.
भूकम्प मुख्य प्रघाती तरंगों से पहले किस प्रकार की ध्वनि उत्पन्न करते हैं?
(a) पराश्रव्य तरंगें
(b) अवश्रव्य तरंगें
(c) श्रव्य ध्वनि
(d) इनमें से कोई नहीं
उत्तर:
(b) अवश्रव्य तरंगें

प्रश्न 8.
निम्नलिखित में से कौन अवश्रव्य ध्वनि सुन सकता है?
(a) कुत्ता
(b) चमगादड़
(c) राइनोसेरस (गैंडा)
(d) मनुष्य
उत्तर:
(c) राइनोसेरस (गैंडा)

प्रश्न 9.
किसी संगीत समारोह में वृंद वाद्य बजाने से पूर्व कोई सितार वादक तनाव को समायोजित करते हुए डोरी को उचित प्रकार से झंकृत करने का प्रयास करता है। ऐसा करके वह क्या समायोजित करता है?
(a) केवल ध्वनि की तीव्रता
(b) केवल ध्वनि का आयाम
(c) सितार की डोरी की आवृत्ति को अन्य वाद्य यन्त्रों की आवृत्ति के साथ
(d) ध्वनि की प्रबलता
उत्तर:
(c) सितार की डोरी की आवृत्ति को अन्य वाद्य यन्त्रों की आवृत्ति के साथ

प्रश्न 10.
v, ν एवं 2 में सम्बन्ध है –
(a) v = νλ
(b) ν = vλ
(c) λ = vλ
(d) v νλ = 1
उत्तर:
(a) v = νλ

प्रश्न 11.
चमगादड़ द्वारा उत्सर्जित तरंग होती है – (2018, 19)
(a) अवश्रव्य
(b) श्रव्य
(c) पराध्वनि
(d) प्रतिध्वनि
उत्तर:
(c) पराध्वनि

प्रश्न 12.
सोनार तकनीक में किस प्रकार की ध्वनि तरंगों को प्रयोग में लाया जाता है?
(a) श्रव्य
(b) अवश्रव्य
(c) पराश्रव्य
(d) इनमें से कोई नहीं
उत्तर:
(c) पराश्रव्य

प्रश्न 13.
पराश्रव्य तरंगों की आवृत्ति होती है –
(a) 20 Hz से कम
(b) 20 से 20,000 Hz के बीच
(c) 20,000 Hz से अधिक
(d) शून्य
उत्तर:
(c) 20,000 Hz से अधिक

प्रश्न 14.
ध्वनि तरंगें होती हैं – (2018, 19)
(a) चुम्बकीय तरंगें
(b) विद्युत तरंगें
(c) विद्युत चुम्बकीय तरंगें
(d) यान्त्रिक तरंगें
उत्तर:
(d) यान्त्रिक तरंगें

प्रश्न 15.
अधिकतम सहनीय ध्वनि है –
(a) 0 db
(b) 10 db
(c) 60 db
(d) 120 db
उत्तर:
(d) 120 db

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प्रश्न 16.
ध्वनि का वेग सबसे अधिक होता है – (2019)
(a) ठोस में
(b) द्रव में
(c) गैस में
(d) इन सभी में
उत्तर:
(a) ठोस में

रिक्त स्थानों की पूर्ति

1. ध्वनि तरंगें ……………. तरंगें होती हैं।
2. एक दोलन में लिया गया समय …………….. कहलाता है।
3. एक सेकण्ड में पूर्ण दोलनों की संख्या ……………. कहलाती है।
4. ……………. तरंगें श्रृंग एवं गर्त के द्वारा आगे बढ़ती हैं।
5. …………….. तरंगें सम्पीडन एवं विरलन के द्वारा आगे बढ़ती हैं।
6. प्रतिध्वनि, अवरोधक पृष्ठों से ध्वनि के …………… के कारण होती है।
7. ध्वनि मापन की …………… इकाई है। (2019)
8. श्रव्य तरंगों की परास …………….. होती है। (2019)
उत्तर:

  1. यान्त्रिक
  2. दोलन काल
  3. आवृत्ति
  4. अनुप्रस्थ
  5. अनुदैर्घ्य
  6. परावर्तन
  7. डेसीबल
  8. 20 Hz से 20,000 Hz.

सही जोड़ी बनाना
MP Board Class 9th Science Solutions Chapter 12 ध्वनि image 8
उत्तर:

  1. → (iii)
  2. → (vi)
  3. → (v)
  4. → (i)
  5. → (ii)
  6. → (iv).

सत्य/असत्य कथन

1. पराश्रव्य तरंगों को कुत्ते सुन लेते हैं।
2. चमगादड़ अवश्रव्य तरंगें उत्पन्न करती है तथा सुनती है।
3. यान्त्रिक तरंगों के संचरण के लिए माध्यम आवश्यक है।
4. वायु में अनुप्रस्थ एवं अनुदैर्घ्य दोनों प्रकार की तरंगें संचरित होती हैं।
5. किसी द्रव्यात्मक माध्यम में उत्पन्न विक्षोभ को तरंग कहते हैं।
6. अनुप्रस्थ व अनुदैर्घ्य तरंगों को प्रगामी तरंग कहते हैं।
उत्तर:

  1. सत्य
  2. असत्य
  3. सत्य
  4. असत्य
  5. सत्य
  6. सत्य।

एक शब्द/वाक्य में उत्तर

प्रश्न 1.
ध्वनि तरंगें किस प्रकार की तरंगें होती हैं?
उत्तर:
अनुदैर्घ्य यान्त्रिक तरंगें।

प्रश्न 2.
ठोस, द्रव एवं गैस किसमें ध्वनि वेग सर्वाधिक होता है?
उत्तर:
ठोस में।

प्रश्न 3.
आवर्तकाल (T) एवं आवृत्ति (ν) में सम्बन्ध लिखिए।
उत्तर:
Tν = 1.

प्रश्न 4.
तरंग वेग (v), आवृत्ति (ν) एवं तरंगदैर्घ्य (λ) में सम्बन्ध लिखिए।
उत्तर:
v = νλ.

प्रश्न 5.
तरंग वेग (v), आवर्तकाल (T) एवं तरंगदैर्घ्य (λ) में सम्बन्ध लिखिए।
उत्तर:
vT = 2.

प्रश्न 6.
प्रतिध्वनि के लिए ध्वनि उत्पादक एवं परावर्तक तल के बीच न्यूनतम कितनी दूरी होगी?
उत्तर:
17.2 m.

प्रश्न 7.
अवश्रव्य तरंगों को सुनने वाले जन्तु का नाम लिखिए।
उत्तर:
गेंडा।

प्रश्न 8.
पराश्रव्य (पराध्वनि) को सुनने वाले जन्तु का नाम लिखिए।
उत्तर:
चमगादड़ अथवा कुत्ता।

प्रश्न 9.
श्रव्य तरंगों की परास लिखिए।
उत्तर:
20 Hz से 20 हजार Hz।

प्रश्न 10.
अवश्रव्य तरंगों की परास लिखिए।
उत्तर:
20 Hz से कम।

प्रश्न 11.
पराश्रव्य तरंगों की परास लिखिए।
उत्तर:
20 हजार Hz से अधिक।

प्रश्न 12.
SONAR का पूरा नाम लिखिए।
उत्तर:
Sound Navigation And Ranging.

प्रश्न 13.
SONAR में किस प्रकार की तरंगें प्रयोग की जाती हैं?
उत्तर:
पराश्रव्य (पराध्वनिक)।

प्रश्न 14.
कौन-सी तरंगें दाब तरंगें कहलाती हैं?
उत्तर:
ध्वनि तरंगें।

प्रश्न 15.
निर्वात में ध्वनि की चाल कितनी होती है?
उत्तर:
शून्य (0)।

प्रश्न 16.
यदि किसी झील की तली में कोई विस्फोट हो तो जल में किस प्रकार की प्रघात तरंगें उत्पन्न होंगी?
उत्तर:
अनुदैर्घ्य तरंगें।

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MP Board Class 9th Science Chapter 12 अति लघु उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 1.
यान्त्रिक तरंगें किन्हें कहते हैं?
उत्तर:
यान्त्रिक तरंगें:
“जो तरंगें किसी द्रव्यात्मक माध्यम में उसके कणों के दोलन करने के कारण उत्पन्न होती हैं, वे यान्त्रिक तरंगें कहलाती हैं।

प्रश्न 2.
अनुदैर्घ्य तरंगें किसे कहते हैं?
उत्तर:
अनुदैर्घ्य तरंगें:
“वे तरंगें जिनमें माध्यम के कणों के दोलन की दिशा एवं तरंगों के संचरण की दिशा एक ही होती है, अनुदैर्घ्य तरंगें कहलाती हैं।

प्रश्न 3.
अनुप्रस्थ तरंगें किसे कहते हैं?
उत्तर:
अनुप्रस्थ तरंगें:
“वे तरंगें जिनमें माध्यम के कणों के दोलन की दिशा तरंग संचरण की दिशा के लम्बवत् होती है, अनुप्रस्थ तरंगें कहलाती हैं।”

प्रश्न 4.
पराश्रव्य ध्वनि या पराध्वनि क्या है?
उत्तर:
पराश्रव्य ध्वनि या पराध्वनि:
“जिन ध्वनियों की आवृत्ति 20 हजार Hz से अधिक होती है, वे पराश्रव्य ध्वनि या पराध्वनि कहलाती हैं।”

प्रश्न 5.
अवश्रव्य ध्वनि क्या है?
उत्तर:
अवश्रव्य ध्वनि:
वह ध्वनि जिसकी आवृत्ति परिसर 20 Hz से कम होती है, अवश्रव्य ध्वनि कहलाती है।”

प्रश्न 6.
श्रव्य ध्वनि किसे कहते हैं?
उत्तर:
श्रव्य ध्वनि:
“वह ध्वनि जिसको सुनने के लिए हमारे कान संवेदनशील होते हैं तथा जिनकी आवृत्ति परिसर 20 Hz से 20 हजार Hz होती है, श्रव्य ध्वनि कहलाती है।”

प्रश्न 7.
ध्वनि के परावर्तन से आप क्या समझते हैं?
उत्तर:
ध्वनि का परावर्तन:
“जब कोई ध्वनि तरंग एक माध्यम में संचरण करते हुए किसी पृष्ठ से टकराकर उसी माध्यम में वापस लौट आती है तो इस घटना को ध्वनि का परावर्तन कहते हैं।”

प्रश्न 8.
प्रतिध्वनि किसे कहते हैं?
उत्तर:
प्रतिध्वनि:
“ध्वनि के परावर्तन के कारण ध्वनि के बार-बार सुनाई देने की घटना प्रतिध्वनि ‘कहलाती है।”

प्रश्न 9.
पराध्वनिक से क्या समझते हो?
उत्तर:
पराध्वनिक:
“जब कोई पिण्ड ध्वनि की चाल से अधिक चाल से चलता है तो उस पिण्ड को पराध्वनिक कहते हैं।”

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प्रश्न 10.
ध्वनि बूम से क्या तात्पर्य है? (2019)
उत्तर:
ध्वनि बूम:
“जब कोई पिण्ड पराध्वनिक चाल से चलता है तो प्रघाती तरंगें उत्पन्न होती हैं। इन तरंगों के कारण वायुदाब में अत्यधिक परिवर्तन के कारण एक प्रकार का विस्फोट या कड़क ध्वनि उत्पन्न होती है, जिसे ध्वनि बूम कहते हैं।”

प्रश्न 11.
ध्वनि बूम के क्या परिणाम हैं? (2019)
उत्तर:
ध्वनि बूम के परिणाम:
ध्वनि बूम के कारण आस-पास रखी काँच की वस्तुएँ एवं खिड़कियों के शीशे टूट जाते हैं।

प्रश्न 12.
सोनार (SONAR) क्या है?
उत्तर:
“एक ऐसी औद्योगिक युक्ति जिसमें ध्वनि की पराश्रव्य तरंगों का उपयोग करके जल में स्थित पिण्डों की दूरी, दिशा तथा स्थिति का पता लगाया जाता है, सोनार कहलाती है।”

प्रश्न 13.
ध्वनि को दाब तरंगें क्यों कहते हैं?
उत्तर:
ध्वनि के संचरण से माध्यम में दाब विभिन्नता उत्पन्न हो जाती है इसलिए ध्वनि को दाब तरंगें कहते हैं।

प्रश्न 14.
संलग्न ग्राफ चित्र में 1500 m s-1 वेग से गतिमान किसी विक्षोभ का विस्थापन-समय सम्बन्ध दर्शाया गया है। इस विक्षोभ की तरंगदैर्घ्य परिकलित कीजिए।
MP Board Class 9th Science Solutions Chapter 12 ध्वनि image 9
हल:
ग्राफ से,
दिया है:
आवर्तकाल T = 2 x 10-6 s
ध्वनि का वेग v = 1500 m s-1
हम जानते हैं कि
तरंगदैर्घ्य (λ) = वेग (v) x आवर्तकाल (T)
= 1500 x 2 x 10-6 = 3 x 10-3 m
अतः अभीष्ट तरंगदैर्घ्य = 3 x 10-3 m.

प्रश्न 15.
संलग्न चित्र में दर्शाए गए दो ग्राफों (a) अथवा (b) में निरूपित मानव ध्वनियों में से कौन-सी ध्वनि पुरुष की हो सकती है? अपने उत्तर का कारण दीजिए।
MP Board Class 9th Science Solutions Chapter 12 ध्वनि image 10
हल:
ग्राफ से प्रकट हो रहा है कि ग्राफ a का आवर्तकाल b से अधिक है। अत: a की आवृत्ति b से कम है। इसलिए ग्राफ a की ध्वनि पुरुष की है। क्योंकि पुरुष के स्वर का तारत्व (आवृत्ति) स्त्रियों के स्वर के तारत्व (आवृत्ति) से कम होता है।

प्रश्न 16.
हम भिनभिनाती मधुमक्खी की ध्वनि सुन लेते हैं, जबकि हमें लोलक के दोलन की ध्वनि सुनाई नहीं देती। क्यों?
उत्तर:
भिनभिनाती मधुमक्खियाँ अपने पंखों को फड़फड़ाकर जो ध्वनि उत्पन्न करती है वह श्रव्य ध्वनि की परिसर में होती हैं। इसलिए हम उसे सुन लेते हैं जबकि लोलक के दोलन की आवृत्ति अवश्रव्य ध्वनि की परिसर में आती है अर्थात् उसकी आवृत्ति 20 Hz से कम होती है इसलिए हमें सुनाई नहीं देती।

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प्रश्न 17.
किसी तड़ित झंझा द्वारा उत्पन्न ध्वनि तड़ित दिखाई देने के 10 s बाद सुनाई देती है। गर्जन मेघ की सन्निकट दूरी परिकलित कीजिए। दिया है-ध्वनि की चाल = 340 m s-1
हल:
ज्ञात है:
ध्वनि की चाल v =340 m s-1
समय अन्तराल t = 10 s
गर्जन मेघ की दूरी
S = ध्वनि की चाल v x समय t
= दूरी S = 340 m s-1 x 10 s
= 3400 m = 3.4 km
अत: गर्जन मेघ की सन्निकट अभीष्ट दूरी = 3400 m अर्थात् 3.4 km.

प्रश्न 18.
संलग्न चित्र में कान द्वारा घड़ी की टिक-टिक की प्रबलतम ध्वनि सुनने के लिए कोण r ज्ञात कीजिए।
MP Board Class 9th Science Solutions Chapter 12 ध्वनि image 11
हल:
परावर्तन के नियम से
कोण r = कोण i
⇒ ∠r = 90° – 50° (चित्रानुसार)
= 40°
अतः r का अभीष्ट मान = 40°.

प्रश्न 19.
अच्छे सम्मेलन कक्षों अथवा कंसर्ट हॉलों की छत तथा मंच के पीछे की दीवारें वक्राकार क्यों बनाई जाती हैं?
उत्तर:
अच्छे सम्मेलन कक्षों अथवा कंसर्ट हॉलों की छत तथा मंच के पीछे की दीवारें वक्राकार इसलिए बनाई जाती हैं ताकि इनसे परावर्तन के पश्चात् ध्वनि हॉल में बैठे सभी दर्शकों तक सुस्पष्ट रूप से पहुँच सके।

MP Board Class 9th Science Chapter 12 लघु उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 1.
किसी तरंग की गुणधर्म लिखिए।
उत्तर:
किसी तरंग के गुणधर्म-किसी तरंग के गुणधर्म निम्न हैं –

  1. तरंग, कम्पन करते स्रोत द्वारा आवर्ती (Periodic) विक्षोभ के कारण होता है।
  2. तरंग के कारण ऊर्जा का स्थानान्तरण होता है, न कि पदार्थ का।
  3. तरंग के माध्यम के कण संचरित नहीं होते, वे अपनी मूल स्थिति में ही कम्पन करते हैं एवं अपने आस-पास के कणों में ऊर्जा का स्थानान्तरण करते हैं।
  4. तरंग की गति माध्यम की प्रकृति पर निर्भर करती है, तरंग स्रोत की गति या कम्पन पर नहीं।
  5. यदि तरंग स्रोत के चारों तरफ का माध्यम एकसमान (समांगी) है तो तरंग गति भी सभी दिशाओं में समान रहती है।

प्रश्न 2.
अनुप्रस्थ तरंग को रेखाचित्र बनाकर समझाइए।
उत्तर:
अनुप्रस्थ तरंगें:
“वे तरंगें जिनमें माध्यम के कणों की गति की दिशा तरंग संचरण की दिशा के लम्बवत् होती है, अनुप्रस्थ तरंगें कहलाती हैं।” ये तरंगें श्रृंग और गर्त के रूप में संचरण करती हैं।

किसी रस्सी का एक सिरा किसी जगह बाँध कर उसके दूसरे सिरे को हाथ से ऊपर नीचे हिलाने पर रस्सी में अनुप्रस्थ तरंगें उत्पन्न होती हैं।
MP Board Class 9th Science Solutions Chapter 12 ध्वनि image 12

प्रश्न 3.
अनुप्रस्थ तथा अनुदैर्ध्य तरंगों में अन्तर लिखिए। (2019)
उत्तर:
अनुप्रस्थ एवं अनुदैर्घ्य तरंगों में अन्तर:
MP Board Class 9th Science Solutions Chapter 12 ध्वनि image 13

प्रश्न 4.
ध्वनि के परावर्तन के व्यावहारिक उपयोग लिखिए। (2019)
उत्तर:
ध्वनि के परावर्तन के व्यावहारिक उपयोग-ध्वनि के परावर्तन के प्रमुख व्यावहारिक उपयोग अग्रलिखित हैं –

  1. मेगाफोन, लाउडस्पीकर, हॉर्न, तुरही तथा शहनाई जैसे वाद्ययन्त्रों द्वारा ध्वनि विस्तार में।
  2. स्टेथोस्कोप द्वारा हृदय की धड़कनों को डॉक्टर के कानों तक पहुँचाने में।
  3. बड़े हॉलों एवं सभाकक्षों में वक्राकार छठों द्वारा ध्वनि को परावर्तित करके कक्षों के प्रत्येक हिस्से में ध्वनि को प्रेषित करने में।
  4. कर्ण, तुरही जैसी श्रवण सहाय युक्तियों के कार्य करने में।

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प्रश्न 5.
ध्वनि का वेग या चाल v, आवृत्ति ν एवं तरंगदैर्घ्य 2 में सम्बन्ध स्थापित कीजिए।
उत्तर:
∵ 1 कम्पन में तरंग चली दूरी = λ
ν कम्पन में तरंग द्वारा चली दूरी = νλ
चूँकि ν आवृत्ति है अत: यह 1 सेकण्ड में कम्पनी की संख्या है।
इसलिए 1 सेकण्ड में तरंग द्वारा चली गई दूरी = νλ
चूँकि 1 सेकण्ड में चली गई दूरी को वेग कहते हैं।
अतः v = νλ

प्रश्न 6.
यदि ध्वनि का वायु में वेग 340 m s-1 हो, तो
(a) 256 Hz आवृत्ति के लिए तरंगदैर्घ्य तथा
(b) 0.85 m तरंगदैर्घ्य के लिए आवृत्ति परिकलित कीजिए।
हल:
ज्ञात है:
ध्वनि का वेग = 340 m s-1
MP Board Class 9th Science Solutions Chapter 12 ध्वनि image 14
अत: अभीष्ट आवृत्ति = 400 Hz.

प्रश्न 7.
12 m x 12 m साइज के किसी पार्क के मध्य में कोई लड़की बैठी है। इस पार्क के दाहिनी ओर लगा हुआ भवन है तथा पार्क के बाँई ओर एक सड़क है। सड़क पर पटाखा फटने की ध्वनि होती है। क्या लड़की इस ध्वनि की प्रतिध्वनि सुन सकती है? अपना उत्तर स्पष्ट कीजिए।
हल:
भवन से टकराकर लड़की तक पहुँचने के लिए ध्वनि द्वारा चली कुल अतिरिक्त दूरी = 6 m + 6 m = 12 m.
MP Board Class 9th Science Solutions Chapter 12 ध्वनि image 15
चूँकि प्रतिध्वनि सुनने के लिए आवश्यक है कि मूल ध्वनि और परावर्तित ध्वनि के मध्य आवश्यक समय अन्तराल = 0.1 s हो। इसलिए प्रतिध्वनि निर्मित होने के लिए परावर्तित ध्वनि तरंग द्वारा चली गई आवश्यक न्यूनतम दूरी –
= ध्वनि वेग x समय अन्तराल
= 344 x 0.1 = 34.4 मीटर
इस प्रकरण में परावर्तित ध्वनि तरंग द्वारा चली गई कुल दूरी 12 मीटर है जो आवश्यक दूरी से बहुत कम है। अतः प्रतिध्वनि सुनाई नहीं देगी।

प्रश्न 8.
ध्वनि द्वारा उत्पन्न विक्षोभ के लिए दूरी के सन्दर्भ में दाब या घनत्व के परिवर्तनों को दर्शाने के लिए कोई वक्र खींचिए। इस वक्र पर संपीडन एवं विरलन की स्थितियाँ दर्शाइए। इस वक्र का उपयोग करके तरंगदैर्घ्य एवं आवर्तकाल की परिभाषा दीजिए।
हल:
दूरी के सन्दर्भ में दाब या घनत्व परिवर्तन दर्शाने के लिए ग्राफ:
MP Board Class 9th Science Solutions Chapter 12 ध्वनि image 16
तरंगदैर्घ्य:
“दो क्रमागत सम्पीडनों अथवा दो क्रमागत विरलनों के बीच की दूरी तरंगदैर्घ्य होती है।”

आवर्तकाल:
“दो क्रमागत सम्पीडनों अथवा दो क्रमागत विरलनों के बीच की दूरी को तय करने में लगने वाला समय आवर्तकाल होता है।

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MP Board Class 9th Science Chapter 12 दीर्घ उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 1.
ध्वनि संचरण की सचित्र व्याख्या कीजिए।
उत्तर:
ध्वनि के संचरण की व्याख्या-ध्वनि के संचरण के लिए वायु अच्छा माध्यम है। जब कोई कम्पायमान वस्तु आगे की ओर कम्पन करती है तो वह अपने सामने की वायु को संपीडित करती है और इस
MP Board Class 9th Science Solutions Chapter 12 ध्वनि image 17
प्रकार एक उच्च वायुदाब का क्षेत्र उत्पन्न होता है। इस क्षेत्र को सम्पीडन (Compression) कहते हैं। यह सम्पीडन कम्पायमान वस्तु के आगे की ओर गति करता है। जब कम्पायमान वस्तु पीछे की ओर कम्पन करती है तो आगे की ओर एक निम्न दाब का क्षेत्र उत्पन्न होता है जिसे विरलन (Rarefaction) कहते हैं। ये संपीडन और विरलन ही तरंग बनाते हैं जो वायु (माध्यम) से होकर हमारे कानों तक पहुँचते हैं। इस प्रकार संचरण से माध्यम में दाब विभिन्नता उत्पन्न हो जाती है।

प्रश्न 2.
पराध्वनि (पराश्रव्य ध्वनि) के कोई चार अनुप्रयोग लिखिए। (2018, 19)
उत्तर:
पराध्वनि (पराश्रव्य ध्वनि) के अनुप्रयोग-पराध्वनि (पराश्रव्य ध्वनि) के प्रमुख अनुप्रयोग निम्नलिखित हैं –

  1. विषम आकार के पुर्जे, इलेक्ट्रॉनिक अवयव आदि की सफाई करने में इनका उपयोग किया जाता है।
  2. चमगादड़ इनका उपयोग रात्रि विचरण में अपने को अवरोधों से टकराने से बचाने में करता है।
  3. अन्धकार में चमगादड़ एवं पॉरपॉइस मछलियाँ अपना भोजन या शिकार की खोज करने में इन ध्वनियों का उपयोग करती है।
  4. इन ध्वनियों का उपयोग समुद्र में डूब जहाजों, चट्टानों, पनडुब्बियों का पता लगाने में किया जाता है।
  5. समुद्र की गहराई ज्ञात करने में इनका उपयोग होता है।
  6. इन तरंगों का उपयोग हृदय रोगी की जाँच के लिए इलेक्ट्रोकार्डियोग्राफी नामक तकनीक में किया जाता है।
  7. अल्ट्रासोनोग्राफी का उपयोग यकृत, पित्ताशय, गुर्दे, गर्भाशय आदि की जाँच में तथा गर्भकाल में भ्रूण की जाँच करने में किया जाता है।
  8. चिमनियों की सफाई करने में इनका उपयोग होता है।
  9. जासूसी के कार्यों में इनका उपयोग गुप्त संकेत भेजने में किया जाता है।
  10. भवनों, पुलों, बाँधों, मशीनों, वैज्ञानिक उपकरणों के दोषों का पता लगाने में इनका उपयोग किया जाता है।
  11. बहुमूल्य धातुओं, रत्नों, जवाहरातों के दोषों का पता लगाने में इनका उपयोग किया जाता है।

प्रश्न 3.
मानव कर्ण की संरचना एवं क्रियाविधि का सचित्र वर्णन कीजिए। (2019)
उत्तर:
मानव कर्ण की संरचना एवं क्रियाविधि-मानव कर्ण (कान) श्रवणेन्द्रिय है। इसको प्रमुखतः निम्नलिखित तीन भागों में विभाजित किया जाता है –

1. बाहरी कर्ण (External Ear):
बाहरी कर्ण को कर्ण पल्लव या पिन्ना (Ear Flap) कहते हैं जो परिवेश से ध्वनि को एकत्रित करने का कार्य करता है। एकत्रित ध्वनि श्रवण नलिका (Auditory Canal or Ear Canal) से होती हुई कर्ण पट्ट से टकराती है जिससे कर्णपट्ट (Diaphragm) कम्पन करने लगता है।
MP Board Class 9th Science Solutions Chapter 12 ध्वनि image 18
2. मध्य कर्ण (Mid Ear):
मध्य कर्ण में तीन अस्थियाँ होती हैं जिन्हें मेलियस (Malleus), इन्कस (Incus) एवं स्टैप्स (Stapes) कहते हैं। ये अस्थियाँ ध्वनि कम्पनों को कई गुना बढ़ा देती है। मध्य कर्ण इन तरंगों को आन्तरिक कर्ण तक पहुँचा देता है।

3. आन्तरिक कर्ण (Internal Ear):
आन्तरिक कर्ण में कर्णावर्त (Cochlea) द्वारा दाब परिवर्तनों को विद्युत संकेतों से परिवर्तित कर दिया जाता है। ये संकेत श्रवण तन्त्रिकाओं (Auditory nerves) द्वारा मस्तिष्क को प्रेषित कर दिये जाते हैं। इस प्रकार मस्तिष्क के द्वारा ध्वनि का अनुभव होता है।

प्रश्न 4.
निम्नलिखित प्रकरणों को दो पृथक् आरेखों द्वारा ग्राफीय रूप में निरूपित कीजिए –
1. दो ध्वनि तरंगें जिनके आयाम समान परन्तु आवृत्तियाँ भिन्न हों।
2. दो ध्वनि तरंगें जिनकी आवृत्तियाँ समान परन्तु आयाम भिन्न हों।
3. दो ध्वनि तरंगें जिनके आयाम एवं तरंगदैर्घ्य दोनों भिन्न हों।
हल:
1. समान आयाम तथा भिन्न आवृत्ति:
MP Board Class 9th Science Solutions Chapter 12 ध्वनि image 19
2. समान आवृत्ति तथा भिन्न आयाम:
MP Board Class 9th Science Solutions Chapter 12 ध्वनि image 20
3. भिन्न आयाम एवं भिन्न तरंगदैर्घ्य (आवृत्ति):
MP Board Class 9th Science Solutions Chapter 12 ध्वनि image 20

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MP Board Class 7th Social Science Solutions Chapter 2 दक्षिण भारत के राज्य (800 ई. से 1200 ई. तक)

MP Board Class 7th Social Science Solutions Chapter 2 दक्षिण भारत के राज्य (800 ई. से 1200 ई. तक)

MP Board Class 7th Social Science Chapter 2 अभ्यास प्रश्न

प्रश्न 1.
निम्नलिखित प्रश्नों के सही विकल्प चुनकर लिखिए –
(1) पल्लव वंश के किस शासक ने राजा पुलकेशिन द्वितीय को हराकर वातापीकोंड’ की उपाधि धारण की थी?
(अ) महेन्द्र वर्मन
(ब) नरसिंह वर्मन प्रथम
(स) अपराजित वर्मन
(द) यशोवर्मन।
उत्तर:
(ब) नरसिंह वर्मन प्रथम

(2) राष्ट्रकूट वंश के किस शासक ने एलोरा की गुफा में कैलाश मंदिर का निर्माण करवाया ?
(अ) कृष्ण प्रथम
(ब) राजा ध्रुव
(स) कृष्ण द्वितीय
(द) राजेन्द्र प्रथम।
उत्तर:
(अ) कृष्ण प्रथम

(3) तमिल भाषा में रामायण के रचयिता कौन थे ?
(अ) वाल्मीकि
(ब) तुलसीदास
(स) कंबन
(द) आदि शंकराचार्य।
उत्तर:
(स) कंबन।

प्रश्न 2.
कोष्ठक में दिए गए शब्दों में से सही शब्द चुनकर रिक्त स्थानों की पूर्ति कीजिए –
(1) पल्लव राज्य की राजधानी ……………… थी। (तिरुअनंतपुरम, तंजौर, कांचीपुरम्)
(2) चोल शासकों द्वारा बनवाया गया राजराजेश्वर (वृहदेश्वर) मन्दिर …………….. में स्थित है। (तिरुअनंतपुरम, तंजौर, कांचीपुरम्)
(3) चोल प्रशासन में प्रांत को ……….. कहा जाता है। (उर, मंडलम्, नगरम्)
उत्तर:
(1) कांचीपुरम्
(2) तंजौर
(3) मंडलम्।

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MP Board Class 7th Social Science Chapter 2 लघु उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 3.
(1) उत्तर भारत व दक्षिण भारत के बीच निकटता बढ़ने का एक प्रमुख कारण बताइए।
उत्तर:
उत्तर भारत व दक्षिण भारत के बीच निकटता बढ़ने का एक प्रमुख कारण दक्षिण भारत के विभिन्न शासकों द्वारा धार्मिक कर्मकाण्डों और अध्ययन – अध्यापन के लिए उत्तर भारत के ब्राह्मण वर्ग को दक्षिण भारत में बसने के लिए आमंत्रित करना था।

(2) ‘मुम्मादी चोल मंडलम’ चोल साम्राज्य के किस प्रांत का नाम था ?
उत्तर:
चोल साम्राज्य के केरल, मदुरै तथा श्रीलंका के उत्तरी भाग का नाम ‘मुम्मादी चोल मंडलम’ था।

(3) चोलकालीन स्थापत्य कला के दो प्रमुख उदाहरण दीजिए।
उत्तर:
चोलकालीन स्थापत्य कला के उदाहरण

  • राजराजेश्वर मन्दिर के अहाते में ‘गोपुरम’ नामक विशाल प्रवेश द्वार का निर्माण कराना।
  • तंजौर में राजराजेश्वर मन्दिर तथा गंगेकोंड चोलपुरम में अनेक भव्य मन्दिरों का निर्माण कराना।

(4) राष्ट्रकूट वंश के किन्हीं तीन शासकों के नाम बताइए।
उत्तर:
राष्ट्रकूट वंश के तीन शासक कृष्ण प्रथम, राजा ध्रुव व अमोघवर्ष थे।

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MP Board Class 7th Social Science Chapter 2 दीर्घ उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 4.
(1) चोल प्रशासन की विशेषताओं का वर्णन कीजिए।
उत्तर:
चोल प्रशासन की विशेषताएँ –

  1. चोल प्रशासन की प्रशासनिक व्यवस्था में राजा ही राज्य की सर्वोच्च शक्ति होता था। वह मन्त्रिपरिषद् की सहायता से शासन चलाता था।
  2. सम्पूर्ण साम्राज्य प्रान्तों (मंडलम) में विभक्त था तथा प्रान्त जिलों (वलनाडुओं) में विभक्त थे।
  3. प्रशासन की सबसे छोटी इकाई ग्राम होते थे। प्रत्येक ग्राम की ग्राम सभा होती थी। ये ग्राम सभाएँ तीन भागों में विभक्त थीं।
    • उर – ये ग्राम के आम लोगों की सभा होती थी।
    • सभा या महासभा – इस सभा में विद्वान ब्राह्मण होते थे।
    • नगरम् – इसमें व्यापारी, दुकानदार और शिल्पी प्रमुख रूप से होते थे।
  4. गाँव की प्रशासनिक व्यवस्था के लिए अनेक समितियों का गठन किया जाता था, जो न्याय, शिक्षा, संचार साधन, जलाशय, धार्मिक समारोहों, मन्दिर तथा दान आदि की देखभाल का कार्य करती थीं।

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MP Board Class 9th Sanskrit Solutions Chapter 21 सूक्तयः

MP Board Class 9th Sanskrit Solutions Durva Chapter 21 सूक्तयः (स्फुट)

MP Board Class 9th Sanskrit Chapter 21 पाठ्य पुस्तक के प्रश्न

प्रश्न 1.
एक पदेन उत्तरं लिखत (एक शब्द में उत्तर लिखो)
(क) सत्य क्षमाभ्यां कस्य सिद्भिः? (सत्य के क्षमाभ्यास से किसकी सिद्धि होती है?)
उत्तर:
सकलार्थः। (सभी प्रकार की)

(ख) मे मनः कीदृशः अस्तु? (मेरः मन किस तरह का हो?)
उत्तर:
शिव संकल्पमस्तु। (शिव संकल्प वाला हो)।।

(ग) कर्मसु कौशलम् किम्? (कर्म में कुशलता किससे आती है?)
उत्तर:
योगः। (योग से)

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(घ) प्रमाद कस्मात् न कर्त्तव्यः? (किसमें प्रमाद नहीं करना चाहिए?)
उत्तर:
स्वाध्याय। (स्वाध्याय में)

(ङ) कः रक्षितः रक्षति? (किसकी रक्षा ही रक्षा है?)
उत्तर:
धर्मा। (धर्म की)

प्रश्न 2.
एक वाक्येन उत्तर लिखत (एक वाक्य में उत्तर लिखो)
(क) सर्वारम्भः कः? (सबसे पहले क्या आरम्र होता है?)
उत्तर:
सर्वारम्भा मन्त्रमूलाः। (सबसे पहले मूल मंत्र आरंभ होता है।)

(ख) नरः कथं सुखी भवति? (व्यक्ति सुखी कैसे होता है?)
उत्तर:
नरः आहारे व्यवहारे च त्यक्तलज्जः सुखी भवेत्। (जो व्यक्ति भोजन और शिष्टाचार में लज्जा को त्यागने वाला है, वही सुखी रहता है)

(ग) सकलं कदा नष्टं भवति? (सम्पूर्ण कब नष्ट हो जाता है?)
उत्तर:
यदि आचरणं मलिनं भ्रष्टम् तदा सकलं नष्टं भवति। (यदि आचरण सन्तोषप्रद नहीं है तो सम्पूर्ण नष्ट हो जाता है।)

प्रश्न 3.
उचितमेलनं कुरुत-
MP Board Class 9th Sanskrit Solutions Chapter 21 सूक्तय img-1

प्रश्न 4.
रेखांवित शब्दार आधृत्य प्रश्ननिर्माणं कुरुत
(क) धर्मो रक्षितः रक्षति
प्रश्न : धर्मों कः रक्षति?

(ख) भ्रष्टाचारण सर्वं नष्टंपति।
प्रश्न : केन आचरेण सर्वं नष्टं भवति?

(ग) द्यिा मुक्तिप्रदा अस्ति।
प्रश्न : विद्या का अस्ति?

प्रश्न 5.
रक्तस्थानानि पूरयत
(श) सा विद्या या विमुक्तये।
(ष) स्वाध्याय न प्रमदितव्यम्।
(स) आहारे व्यवहारे च त्यक्तलज्जः सुखी भवेत्।।
(ह) सत्यश्रमाभ्याम् सकलार्थ सिद्धिः।

प्रश्न 6.
सन्धि विच्छेदं कुरुत-
तन्न – तत्+न।
धर्मोरक्षति – धर्मः+रक्षति।
स्वाध्यायान्मा – स्वाध्याय+अयान्मा।

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प्रश्न 7.
कोष्ठकात् शब्द चित्वा सूक्तिं रचयत
धर्मो, योगः, यत्र, सकलम्
यथा-
धर्मो – धर्मो रक्षति रक्षितः।
योगः – योगः कर्मसु कौशलम्।
यत्र – यत्र नारयस्तु पूजयन्ते रमन्ते तत्र देवता।
सकलम् – सत्यश्रमाभ्याम् सकलार्थ सिद्धिः।

प्रश्न 8.
सूक्त्या पूर्ति करोतु-(सूक्ति द्वारा)
MP Board Class 9th Sanskrit Solutions Chapter 21 सूक्तय img-2

प्रश्न 9.
संस्कृतवाक्येषु प्रयोगं कुरुत
यत्र, तत्र, हि, च, या
यत्र – यत्र धूम्रः तत्र अग्नि।
तत्र – तत्र खगाः सन्ति।
हि – मानो हि महताम धनम।
च – अन्नं, जलं च सुभाषितम् पृथ्वियां श्रेष्ठः रत्नाः सन्ति।
या – सा विद्या या विमुक्तये।

प्रश्न 10.
समानार्थक शब्दं लिखत
लज्जा – व्रीड़ा
ल कष्टं – दुःखं
स्वाध्याय – अध्ययनम्।

प्रश्न 11.
अधोलिखित प्रश्नानाम् उत्तराणि लिखत-
(क) योगस्याशयः स्पष्टं करोतु?
उत्तर:
कर्मस्य कौशलम्।।

(ख) कुत्र कुत्र प्रमादः न कर्त्तव्यम्?
उत्तर:
देव पितृकार्याभ्यां।

(ग) धर्मः कथं रक्षति?
उत्तर:
सर्व प्रकारेण, धर्म क्षेत्रे, कर्म क्षेत्रे धर्मः रक्षति।

(घ) कीदृशी विद्या मुक्तिं ददाति?
उत्तर:
तपः शालिनी विद्या मुक्तिं ददाति।

(ङ) भ्रष्टाचारेण किं किं भवति?
उत्तर:
भ्रष्टाचारेण सर्वं नष्टं भवति।

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सूक्तयः पाठ-सन्दर्भ/प्रतिपाद्य

सुंदर उक्ति अर्थात् कथन ही सूक्ति कहलाता है। अनुभव पूर्ण हितकारक वचन ही सूक्ति कहलाता है। सूक्ति मानव स्वभाव को शोध कर सन्मार्ग पर अग्रसर करती है और श्रेष्ठ आचार-व्यवहार का उपदेश देती है। अतः शिक्षण में भी सूक्तियों का विशेष महत्त्व है। प्रस्तुत पाठ में विभिन्न ग्रन्थों से सूक्तियों का संकलन कर यहाँ प्रस्तुत किया गया है।

शब्दार्थ :
सत्यश्रमाभ्याम्-सत्य और श्रम द्वारा-through truth and labour; विमुक्तये-मुक्ति के लिए-for finished for the freedom; प्रमदितव्यम्-प्रमाद करना चाहिए-intoxication self; रमन्ते-निवास करते हैं-lives; सर्वारम्भाः-सभी कार्यों का आरम्भ-start of all work; अन्तःकरणम्-मन बुद्धि आदि-mind, wisdom; भव-होओ (हे)-happen; देवपितृकार्याभ्यां-देव और पितृ कार्यों में-God and sons work; प्रमदः-आलस्य-Ideal;,laziness; त्यक्त लज्जः-जिसने लज्जा को त्याग दिया हो-wicked; वस्तुषु-वस्तुओं में-In things;सुखी भवेत्-सुखी होता है-Happy;शक्यं-शक्ति-power.

सूक्तयः पाठ का हिन्दी अर्थ

1. मे मनः शिवसङ्कल्पमस्तु।
मेरा मन शुभ संकल्प वाला हो।

2. सत्यश्रमाभ्याम् सकलार्थः सिद्धिः।
सत्य एवं परिश्रम से सकलार्थ (सभी कार्यों की) सिद्धि होर्तः है।

3. सा विद्या या विमुक्तये।
विद्या वह है जो मुक्ति प्रदान करे।

4. ये.गः कर्मसु कौशलम्।
योग से कर्म करने की कुशलता आती है।

5. स्वाध्यायान्मा प्रमदः।
स्वाध्याय में प्रमाद न करें।

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6. देवपितृकार्याभ्यां न प्रमदितव्यम्।
देव और पितृकार्य में भी आलस्य न करें।

7. धर्मो रक्षति रक्षितः।
धर्म की रक्षा से ही स्व रक्षा होती है।

8. मन्त्रमूलाः सर्वारम्भाः।
सभी कार्यों का मूल मंत्र प्रारंभ करना है।

9. आहारे व्यवहारे च त्यक्तलज्जः सुखी भवेत्।
भोजन और शिष्टाचार में लज्जा का त्याग करने वाला ही सुखी रहता है।

10. सतां हि सन्देहपदेषु वस्तुषु प्रमाणमन्तःकरणप्रवृत्तयः।
संदेह होने पर अंतःकरण की वृत्ति ही प्रमाण होती है।

11. सकलं कष्टं निखिलं नष्टं यदि आचरणं मलिनं भ्रष्टम्।
यदि आचरण दूषित हो तो वह समस्त कष्टों को देने वाला है एवं सम्पूर्ण को नष्ट करके वाला होता है।

12. उपायेन हि यच्छक्यं तन्न शक्यं पराक्रमः।
उपाय से ही यथा शक्ति पराक्रम प्राप्त होता है।

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MP Board Class 9th Sanskrit Solutions Chapter 20 वेधशाला

MP Board Class 9th Sanskrit Solutions Durva Chapter 20 वेधशाला (पत्रम्)

MP Board Class 9th Sanskrit Chapter 20 पाठ्य पुस्तक के प्रश्न

प्रश्न 1.
एक पदेन उत्तरं लिखत (एक शब्द में उत्तर लिखो)
(क) उज्जयिनी कस्याः विद्यायाः प्रमुखं केन्द्रमस्ति? (उज्जैन किस विद्या का प्रमुख केन्द्र था?)
उत्तर:
ज्योतिषादयः। (ज्योतिष विद्या का)।

(ख) वेधशाला कस्याः नद्याः तटे स्थिता अस्ति? (यंत्रशाला किस नदी के तट के किनारे स्थित है?)
उत्तर:
क्षिप्रा। (क्षिप्रा।)

(ग) उज्जयिनीतः का रेखा निर्गता? (उज्जैन से होकर कौन-सी रेखा गुजरती है?)
उत्तर:
भूमध्य रेखा। (भूमध्य रेखा)।

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(घ) कस्य प्रयत्नेन वेधशालायाः जीर्णोद्धारो जातः? (किसके प्रयत्न से यंत्रशाला का जीर्णोद्धार हुआ?)
उत्तर:
पं. सूर्यनारायण व्यासस्य। (पं. सूर्यनारायण व्यास के)

(ङ) वेधशालायां कास्य विज्ञानस्य बोधं भवति? (यंत्रशाला से कौन-से विज्ञान का बोध होता है?)
उत्तर:
ज्योतिष। (ज्योतिष का)

प्रश्न 2.
एकवाक्येन उत्तरं लिखत (एक वाक्य में उत्तर लिखो)
(क) केन यन्त्रेण दिगंशः ज्ञायते? (किस यंत्र के द्वारा दिशाओं की गणना की जाती है?)
उत्तर:
दिगंशयन्त्रेण दिगंशः ज्ञायते। (दिशासूचक यंत्र के द्वारा दिशाओं की गणना की जाती है।)

(ख) वेधशालानिर्माणं कदा केन च कारितम्? (यंत्रशाला का निर्माण कब और किसके द्वारा किया गया?)
उत्तर:
वेधशालानिर्माणं अष्टादशशताब्दयां राजा जयसिंहेन च कारितम्। (वेधशाला का निर्माण 18वीं सताब्दी में राजा जयसिंह के द्वारा किया गया।)

(ग) सम्राट् यन्त्रेण कः लभ्यते? (सम्राट यंत्र से क्या जानकारी मिलती है?)
उत्तर:
सम्राट्यन्त्रेण सूर्योदयात् सूर्यास्तं यावत् स्पष्ट समयो लभ्यते। (सम्राट यंत्र के द्वारा सूर्योदय और सूर्यास्त के स्पष्ट समय की जानकारी मिलती है।)

(घ) नाडिवलययन्त्रेण कः ज्ञायते? (नाडिवलय यंत्र से क्या ज्ञान प्राप्त होता है?)
उत्तर:
नाडिवलंययन्त्रेण ग्रहनक्षत्राणां दक्षिणायन विज्ञातं। (नाडिवलय यंत्र के द्वारा ग्रह-नक्षत्रों का तथा दिशाओं का ज्ञान होता है।)

(ङ) पलभायन्त्रेण कस्य ज्ञानं भवति? (पलभा यंत्र द्वारा किसका ज्ञान होता है?)
उत्तर:
पलभायंत्रेण छायायामपि समयस्य ज्ञानं भवति। (पलभा यंत्र के द्वारा छाया से भी समय का ज्ञान होता है।)

प्रश्न 3.
अधोलिखितप्रश्नानाम् उत्तराणि लिखत
(क) उज्जयिन्यां वेधशाला कुत्र स्थितास्ति? (उज्जैन की यंत्रशाला कहाँ पर स्थित है?)
उत्तर:
एषा वेधशाला उज्जयिन्याः दक्षिणभागे क्षिप्रायाः दक्षिण तटे स्थितास्ति। (यह वेधशाला उज्जैन के दक्षिण में क्षिप्रा नदी के दक्षिण तट में स्थित है।)

(ख) जयसिंहेन किमर्थं वेधशालानिर्माणं कारितम्? (जयसिंह ने किसलिए यंत्रशाला का निर्माण कराया?)
उत्तर:
जयसिंहेन ज्योतिषानुरागवशात् वेधशाला निर्माणं कारितम्। (जयसिंह ने ज्योतिष के वशीभूत होकर यंत्रशाला का निर्माण करवाया।)

(ग) उज्जयिन्यां कानि-कानि स्थलानि दर्शनीयानि सन्ति? (उज्जैन में कौन-कौन से स्थान देखने योग्य हैं?)
उत्तर:
उज्जयिन्यां महाकालेश्वर मन्दिरम् महर्षेः सान्दीपनेः आश्रमम्, गढ़कालिका मन्दिरम् आदयः स्थलानिदर्शनीयानि सन्ति।
(उज्जैन में महाकालेश्वर का मन्दिर, महर्षि सांदिपनि का आश्रम गढ़कालिका मन्दिर आदि स्थान देखने योग्य हैं।)

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(घ) दिगंशयन्त्रेण दक्षिणोत्तरभित्तियन्त्रेण च कस्य बोधः भवति? (दिक्यंत्र और दक्षिणोत्तर दीवाल यंत्र के द्वारा किसका ज्ञान होता है?)
उत्तर:
दिगंशयन्त्रेण दक्षिणोत्तर भित्तियन्त्रेण च नक्षत्राणाञ्चापि दिगंशोच ग्रहनक्षत्राणां मध्याह्नवृत्ता गमनसमये नतोन्नतांशयोः बोधः भवति। (दिक यंत्र और दक्षिणोत्तर दीवाल यंत्र के द्वारा नक्षत्रों के दिशाओं का, ग्रहों का तथा समयादि का ज्ञान होता है।)

(ङ) उज्जयिन्याः प्राचीननामानि लिखित्वा प्राचीनवैभवमपि वर्णयत? (उज्जैन का प्राचीन नाम लिखकर प्राचीनकालीन वैभव को भी वर्णित करें?)
उत्तर:
उज्जयिन्याः प्राचीननामानि अवन्तिका आसीत् च सर्वत्र पुरातात्त्विकं वैभवं, ज्योतिष-गणित आदयः आसीत्। (उज्जैन का प्राचीन नाम अवन्तिका था जहाँ पुरातात्त्विक वैभव के साथ-साथ ज्योतिष एवं गणित का अध्ययन केन्द्र था।)

प्रश्न 4.
रिक्तस्थानानि पूरयत
(क) राजा जयसिंहेन वेधशालानिर्माणं कारितम्।
(ख) आङ्ग्लभाषायां वेधशालां अब्जर्वेटरी इति वदन्ति।
(ग) एषा अवन्तिका नाम्नापि शास्त्रेषु वर्णिता अस्ति।
(घ) भूमध्य रेखा इतः एव निर्गता।
(ङ) एतद् ज्योतिष ज्ञानं विज्ञानस्य उत्तमम् उदाहरणम् अस्ति।

प्रश्न 5.
शुद्धवाक्यानां समक्षम् “आम्” अशुद्धवाक्यानां समक्षं “न” इति लिखत
उदाहरणम् –
वेधशाला क्षिप्रायाः उत्तरतटे स्थिता अस्ति। – न
उज्जयिनी ज्योतिषविद्याया प्रमुख केन्द्रमस्ति। – आम्
(क) वेधशालायाः निर्माणम् अष्टादशशताब्याम् अभवत्।
(ख) जयसिंहेन वेधशालायाः जीर्णोद्धारं कारितम्।
(ग) पलभायन्त्रेण रात्रौ समयस्य ज्ञानं भवति।
(घ) उज्जयिनी विशाला इति नाम्नापि शास्त्रेषु वर्णिता।
(ङ) उज्जयिनीतः कर्करेखा निर्गता।
उत्तर:
(क) आम्
(ख) न
(ग) न
(घ) न
(ङ) न

प्रश्न 6.
सन्धिविच्छेदं कृत्वा सन्धेः नाम लिखत
(क) पुरीयम् – पुर+इयम् = स्वरसन्धिः।
(ख) सर्वेऽपि – सर्व+अपि = पूर्व रूप स्वर सन्धिः।
(ग) कुशलताञ्च – कुशलता+च = व्यंजन संन्धिः।
(घ) दृष्टव्येति – दृष्टव्य+इति = स्वर सन्धिः।
(ङ) कालेऽपि – काल:+अपि = पूर्व रूप स्वर सन्धिः।

प्रश्न 7.
उदाहरणानुसारं शब्दानां धातुं प्रत्ययं च पृथक कुरुत-
MP Board Class 9th Sanskrit Solutions Chapter 20 वेधशाला img-1

प्रश्न 8.
अव्ययैः वाक्यनिर्माणं कुरुत-
यथा :
जनाः वेधशालां यन्त्रभवनम् अपि वदन्ति।
(क) सर्वत्र – सर्वत्र शिक्षकाः सन्ति।
(ख) सम्यक् – सः सम्यक् पठितुम् भोपाल नगरम् आगच्छत्।
(ग) अधुना – अधुना उज्जैनयाम् वेधशाला पुरातात्त्विक धरोहरः अस्ति।
(घ) यावत् – यावत् सः अगमिष्यसि तावत् अहम् पठिष्यामि।
(ङ) यदा – यदा पं. सूर्यनारायण व्यासेन वेधशाला जीर्णोद्धारं कारितवान्।

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प्रश्न 9.
उदाहरणनुसारं शब्दानां विभक्तिं वचनं च लिखत-
MP Board Class 9th Sanskrit Solutions Chapter 20 वेधशाला img-2

प्रश्न 10.
यथायोग्यं योजयत-
MP Board Class 9th Sanskrit Solutions Chapter 20 वेधशाला img-3

वेधशाला पाठ-सन्दर्भ/प्रतिपाद्य

पत्रलेखन भाषण कला के समान एक लेखक कला है। लिखिन रूप में कहा गया अंश थोड़े में लिखते हैं। सरल, सुंदर विन्यास में संक्षिप्त किन्तु सम्पूर्ण लेख लेखन के महत्त्व को बताते हैं। व्यक्ति विशेष के अनुसार भूमिका, उपसंहार, पत्रलेखन की विशेषता होती है। प्रस्तुत पाठ में पत्र के माध्यम से उज्जैन की वेधशाला की विशेषता बताई गई है

वेधशाला पाठ का हिन्दी अर्थ

1.

शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालयः
शामगढ़नगरम् (मध्यप्रदेशः)

प्रियमित्र! तपन!
नमस्ते
अहमत्र कुशली, भवतः कुशलताञ्च कामये। मम अध्ययनं सम्यक् प्रचलति। मम विद्यालयस्य त्रैमासिकी परीक्षायाः परिणामः आगतः। मम परिणामः उत्तमः।

विगतसप्ताहे विद्यालयस्यैका शैक्षणिकयात्रांप्रवृत्ता। अहम् संस्कृतशिक्षकस्य निर्देशने छात्रैः सह उज्जयिनी गतवान्। उज्जयिनी भारतस्य अत्यंतं प्राचीनतम् इतिहासधर्म-दर्शन-कला-साहित्य-योग-ज्यौतिषादीनां च केन्द्रमासीत्। एषा अवन्तिका, विशाला नाम्नापि शास्त्रेषु वर्णिता अस्ति। अत्र सर्वत्र पुरातात्विकं वैभवं दृष्ट्वा मनसि आनन्दो जायते। भगवतःमहाकालस्य पुरीयं देशे श्रद्धायाः केन्द्रमस्ति। अत्र भव्यं महाकालेश्वरमन्दिरम्, हरसिद्धिमंदिरम्, गोपालमन्दिरम्, महर्षेः सान्दीपनेः आश्रमम्, गढ़कालिकामन्दिरम् कालभैरवमंदिर अन्यानि चापि सिद्धवट-अङ्कपात-मङ्गलनाथ-कालियादाहंभवनमित्यादि दिव्यस्थानानि अस्माभिः अवलोकितानि। किन्तु वेधशालां दृष्ट्वा वयं सर्वेऽपि आश्चर्यचकिताः सजाताः।

शब्दार्थ :
अहमत्र-मैं यहां हूं-I am hear; कामये-काम-disire/wish; अगतः-आया-come; विगतसप्ताहे-पिछले सप्ताह-last weak; प्रवृत्ता-प्रवृत्त-to go ahead; संस्कृत शिक्षकस्य-संस्कृत शिक्षक-Sanskrit teacher; वापि-और भी-and also; अस्माभिः-हमारे-our; सजाताः-हुए-happend; ज्यौति-ज्यौति-astrology.
हिन्दी अर्थ :

शासकीय उच्चतर माध्यमिक
विद्यालय, शामगढ़नगर (म. प्र.)

प्रिय मित्र तपन!
नमस्ते!
मैं यहाँ कुशलपूर्वक हूँ तथा आपकी कुशलता की कामना करता हूँ। मेरा अध्ययन ठीक से चल रहा है। मेरे विद्यालय की त्रैमासिक परीक्षा का परिणाम आ गया है। मेरा परिणाम उत्तम है।

पिछले सप्ताह विद्यालय की ओर से एक शैक्षणिक यात्रा सम्पन्न हुई। मैं भी संस्कृत के आचार्य महोदय व छात्रों के साथ उज्जैन गया। उज्जयिनी भारत के अत्यन्त प्राचीन इतिहास, धर्म, दर्शन, कला, साहित्य योग और ज्योतिष आदि का केन्द्र था। शास्त्रों में इस नगर को अवन्तिका के नाम से भी जाना जाता है। यहाँ सर्वत्र पुरातात्त्विक सम्पन्नता को देखकर मन में आनन्द की लहरें हिलारें लेने लगती हैं। यहाँ का प्राचीन कालेश्वर मन्दिर, हरसिद्ध मंदिर, गोपाल मंदिर, महर्षि संदीपन आश्रम, गढ़ कालिका मन्दिर, काल भैरव मंदिर आदि अनेक दर्शनीय स्थल हैं। इसके अतिरिक्त अन्य और भी दर्शकीय स्थल है जैसे-सिद्धवट, अंक पात, मंगलनाथ, कालिया दाह भवन आदि । किन्तु वेधशाला को देखकर हम सभी आश्चर्य चकित हो गए।

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2. मित्र! आङ्ग्लभाषायां वेधशालाम् “ऑब्जर्वेटरी” इति वदन्ति । जनाः वेधशालां “यन्त्रभवनम्” अपि वदन्ति । एषा वेधशाला उज्जयिन्याः दक्षिणभागे क्षिप्रायाः दक्षिणतटे उन्नत-भू-भागे स्थिता अस्ति। प्राचीनकालत् एव उज्जयिनी ज्यौतिषविद्यायाः प्रमुखं केन्द्रम् । भूमध्यरेखा इतः एव निर्गता। इदं स्थानं गणितस्यापि आधारस्थलम् अस्ति। अष्टादशशताब्यां राज्ञा जयसिहेन ज्यौतिषानुरागवशात् वेधशालानिर्माणं कारितम् । ग्रहाणां प्रत्यक्षवेधनाय जयसिंहः उज्जयिन्या, काश्या, देहल्या, जयपुरे च वेधशालाना निर्माणं कृतवान्। सः वेधज्यौतिषमधिकृत्य एक ग्रन्थम् अपि रचितवान् इति श्रूयते। तेन अत्र एकम् उपनगरम् अपि निर्मितम् अधुना अपि जयसिंहपुरा इति नाम्ना तद् विख्यातमेव।

इयं वेधशाला जीर्णशीर्णा आसीत् परं 1961 तमे खीष्टाब्देः पं. सूर्यनारायणव्यासस्य प्रयत्नेन वेधशालायाः जीर्णोद्धारो जातः। अत्र विद्यते सम्राट्यन्त्रम् एतेन सूर्योदयात् सूर्यास्तं यावत् स्पष्टसमयो लभ्यते। अत्र स्थितेन दिगंशयन्त्रेण ग्रहाणां नक्षत्राणाञ्चापि दिगशो ज्ञायते। “नाडिवलययन्त्रेण” ग्रहनक्षत्राणां दक्षिणायन विज्ञातं भवति।

शब्दार्थ :
अब्जर्वेटरी-अब्जर्वेटरी-observatary; वदन्ति-कहते हैं-say; एषा-यह-this; निर्गता-जाती है-goes; इदं-यह-this; ज्यौतिषानुरागवशात्-ज्योतिष के अनुराग से-fond of astrology, astronomer; कारितम्-कराया-done; वेधज्योतिष्मधिकृत्य-यंत्र ज्योतिष पर आधारित-instrument lasred on astrology; श्रूयते-सुना जाता है-is listen; रचिवान्-रचा-create; एकम्-एक-one; निर्मितम्-जाता है-goes; अधुना-आज-today; विख्यातमेव-प्रसिद्ध-famous; प्रयत्नेन-प्रयत्न से-for try; जीर्णोद्धार-जीर्णोद्धार-repair; विद्यते-विद्यमान-wish man; यावत-जब तक-till that; लभ्यते-प्राप्त होता है-receives; ग्रहाणां-नक्षत्रों का-planets; ज्ञायते-ज्ञाता होता है-happens; ग्रह नक्षत्राणां-ग्रह नक्षत्रों का-planets.

हिन्दी अर्थ :
मित्र! आंग्ल भाषा में वेध शाला को ‘आब्जर्वेटरी’ कहते हैं। लोग वेधशाला को ‘यंत्र शाला’ भी या ‘यंत्र भवन’ भी कहते हैं। यह ‘यंत्र भवन’ उज्जैन के दक्षिणी भाग में शिप्रा के दक्षिण तट पर स्थित ऊँचे भू-भाग पर स्थापित की गई है। उज्जैन प्राचीन काल से ही ज्योतिष विद्या का केन्द्र रहा है। यहाँ से कर्क रेखा भी गुजरती है इसलिए यह स्थान गणित का भी प्रमुख आधार स्थल रहा है। अठारहवीं शताब्दी में राजा जयसिंह ज्योतिष प्रेम के वशीभूत एक यंत्र भवन का निर्माण कराया गया। ग्रहों के सम्यक् ज्ञान के लिए राजा जयसिंह ने उज्जैन, काशी, दिल्ली और जयपुर नगर में वेधशालाओं का निर्माण करया। ऐसा प्रचलित है कि उन्होंने वेध, ज्योतिष के आधार पर एक उपनगर भी बसाया जो आज भी जयसिंह पुरा के नाम से जाना जाता है।

यह यंत्र भवन जीर्ण हो गया था किन्तु सन् 1961 में पं. सूर्यनारायण व्यास के प्रयत्न से वेधशाला का जीर्णोद्धार का कार्य पूर्ण हुआ। इस वेधशाला में स्थापित यंत्र से सूर्योदय से लेकर सूर्यास्त वेला तक समय स्पष्ट दिखाई देता है। यहाँ की स्थिति से दिशा सूचक यंत्र द्वारा ग्रह और नक्षत्र आदि की गणना ज्ञात होती है। नाडि वलय यंत्र द्वारा ग्रह-नक्षत्रों के दक्षिणायन होने का विशेष ज्ञान होता है।

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3. “दक्षिणोत्तरभित्तियन्त्रेण” ग्रहनक्षत्राणां मध्याहूनवृत्तागमनसमये नतोन्नतांशयोः परिज्ञानं सञ्ज्ञायते। “पलभायन्त्रेण” छायायामपि समयस्य सम्यक ज्ञानं भवति।

वस्तुतः वेशधालां वीक्ष्य मनसि गौरवमनुभवामि यत् प्राचीनकालेऽपि अस्माकं पूर्वजनां गणितस्य, ग्रहनक्षत्राणाञ्च ज्ञानम् अद्भुतं वैज्ञानिकञ्चासीत्।

इदानीं पत्रं समापयामि। यदा अवसरः लभ्यते तदा एकवारं ज्ञानविज्ञानस्य पुरीयम् उज्जयिनी अवश्यमेव दृष्टव्येति।
शम्।

भवतः कुशलापेक्षी
राजेशः

शब्दार्थ :
मध्याहनवृत्तागमनसमये-दोपहरी के समय-In the time of afternoon; छायायामपि-छाया भी-sadow also; वैज्ञानिकञ्चासीत्-वैज्ञानिक थे-was scientist; इदानीं-इस समय-this time; पुरीयम्-प्राचीन (नगर में)-old, ancient; परिज्ञान-विशेष ज्ञान-special knowledge; ज्ञानविज्ञानस्य-ज्ञान-विज्ञान के-knowledge of science.

हिन्दी अर्थ :
“दक्षिण-उत्तर दीवार के यंत्र के द्वारा ग्रह-नक्षत्रों के दोपहर के आगमन के समय विभिन्न भू-भाग का ज्ञान प्राप्त होता है। पलभ यन्त्र द्वारा छाया से भी सम्यक् ज्ञान प्राप्त होता है।
वस्तुतः वेधशाला को देखकर मैं गौरव की अनुभूति कर रहा हूँ कि प्राचीनकाल में भी हमारे पूर्वजों को गणित और ग्रह-नक्षत्रों का ज्ञान अद्भुत और वैज्ञानिक था।

अब इस समय पत्र समाप्त कर रहा हूँ। जब भी समय मिले, एक बार इस ज्ञान-विज्ञान के नगर उज्जैन को अवश्य देखना।

आपका कुशलापेक्षी
राजेश

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