MP Board Class 7th Social Science Solutions Chapter 12 Administration and Life of the People during the Sultanate Period

MP Board Class 7th Social Science Solutions Chapter 12 Administration and Life of the People during the Sultanate Period

MP Board Class 7th Social Science Chapter 12 Text Book Questions

Choose the correct alternatives from the following:

Mp Board Class 7th Social Science Chapter 12 Question 1.
The number of departments in the administration during the Sultanate period were.
(a) two
(b) five
(c) four
(d) seven
Answer:
(c) four

Class 7 Social Science Chapter 12 MP Board Question 2.
The main center of trade where goods from all over the country was brought was.
(a) Delhi
(b) Bengal
(c) Gujarat
(d) Multan
Answer:
(d) Multan

Fill in the blanks from the words given in the brackets:

  1. A new language ……………. developed by mixing Hindi and Persian. (Tamil, Urdu, Kannada).
  2. The famous philosopher, thinker and writer of this period ……………. wrote in Urdu, Persian and Hindi.(Amir Khusro, Kabirdas, Nahak, Chisti)
  3. In the field of surgery …………….. and …………… were famous. (Sadruddin and Aimuddin, Machendra and Jog, Vaduruddin and Bami).

Answer:

  1. Urdu
  2. Amir Khusro
  3.  Machendra and Jog

Match the following column A and B L
img
Answer:
1. (b) Delhi
2. (a) Bijapur
3. (d) Tried to remove the diffrences between Hindus and Muslims.
4. (c) Founder of Sikhism

MP Board Class 7th Social Science Chapter 12 Short Answer Type Questions

Class 7 Social Science Chapter 12 Question Answer MP Board Question 1.
Write any two points regarding the social system during the Sultanate period.
Answer:

  • The caste rules were strictly followed. The women did not enjoy much freedom and the purdah system became very common.
  • The practice of child marriage, polygamy and sati stystem was prevalent in the society.

Mp Board Solution.Com Class 7 Question 2.
What were the main sources of income during the Sultanate Period?
Answer:
The main sources of income during the Sultanate period was tax on land which was 1/2, or 1/3 rd of the total produce. The other source of income was tax on irrigation, toll tax, mineral extraction, property tax and tax on pilgrimage.

Mp Board Solution Class 7 Social Science Question 3.
Write two features of the architecture during the Sultanate period with examples.
Answer:
Pointed arches, domes and lean miners are the main features of architecture of the period.

Mp Board Solution Class 7 Question 4.
What were the main teachings of the Bhakti Saints?
Answer:
All the saints of the Bhakti movement preached universal brotherhood and love. They- preached oneness of God for all religions. The couplets of do has of Kabirdas preached Hindu- Muslim unity and denounced all forms of rituals, sacrifices and religious fanaticism.

MP Board Class 7th Social Science Chapter 12 Long Answer Type Questions

Mp Board Solution Class 7th Question 1.
Describe the language, literature and scientific progress during the Sultanate period.
Answer:
Language, literature and scientific progress during the Sultanate period are:

  • The temples and mosques were the primary educational centers. In some places, primary schools were also established.
  • There were provisions for higher education.
  • The main language was Persian. Many Persian words began to be used in Indian languages.
  • A new language Urdu developed during this period, which was a mixture of Hindi and Persian language.
  • During Sultanate period the regional languages flourished and excellent literary work was created.
  • In some Hindu Kingdoms like Vijayanagar Sanskrit was the court language. Various Sanskrit books were translated in various Indian as w ell as Arabic and Persian languages also.
  • With the introduction of paper, the oldest available texts were reproduced during fins period throughout the country.

Medicines:
During the Sultanate period Maulana Badmddin, Maulana Sadruddin and Azimuddin were famous physicians. Machandra and Jog were famous surgeons.

MP Board Class 7th Social Science Solutions

MP Board Class 10th Sanskrit Solutions Chapter 18 महाराजः छत्रसालः

MP Board Class 10th Sanskrit Solutions Durva Chapter 18 महाराजः छत्रसालः (गद्यम्) (सङ्कलितम्)

MP Board Class 10th Sanskrit Chapter 18 पाठ्यपुस्तक के प्रश्न

Mp Board Class 10th Sanskrit Chapter 18 प्रश्न 1.
एकपदेन उत्तरं लिखत-(एक पद में उत्तर लिखिए)।
(क) छत्रसालस्य पितुः नाम किम्? (छत्रसाल के पिता का क्या नाम था?)
उत्तर:
श्रीचम्पतरायः (श्री चम्पतराय जी)

(ख) छत्रसालस्य जन्म कस्मिन् ग्रामे अभवत्? (छत्रसाल का जन्म किस गाँव में हुआ था?)
उत्तर:
ककरकचनयग्रामे (ककरकचनय गाँव में)

(ग) ‘बुन्देलकेसरी’ इति नाम्ना कः प्रसिद्धः? (‘बुन्देलकेसरी’ नाम से कौन प्रसिद्ध था?)
उत्तर:
छत्रसालः (छत्रसाल)

(घ) शिववीरः छत्रसालाय किं नामक कृपाणम् अयच्छत्? (शिववीर ने छत्रसाल को किस नाम की कृपाण दी?)
उत्तर:
‘भवानीति’ (भवानी)

(ङ) भूषणः कस्याः भाषायाः महाकविः आसीत्? (भूषण किस भाषा का महाकवि था?)
उत्तर:
हिन्दीभाषायाः (हिन्दी भाषा का)

Mp Board Class 10 Sanskrit Chapter 18 प्रश्न 2.
एकवाक्येन उत्तरं लिखत-(एक वाक्य में उत्तर लिखिए-)
(क) योद्धारः किमर्थं सर्वस्वं हुतवन्तः? (योद्धाओं ने किसलिए अपना सब कुछ जला दिया?)
उत्तर:
योद्धारः मातृभूमि पराधीनतापाशात् विमुक्तये सर्वस्वं हुतवन्तः। (योद्धाओं ने मातृभूमि को गुलामी के जाल से मुक्त करने के लिए अपना सब कुछ जला (बलिदान कर) दिया।

(ख) छत्रसालस्य जन्म कस्मिन् जनपदे अभवत्? (छत्रसाल का जन्म किस जनपद में हुआ?)
उत्तर:
छत्रसालस्य जन्म ‘टीकमगढ़’ जनपदे अभवत्। (छत्रसाल का जन्म टीकमगढ़ जनपद में हुआ।)

(ग) छत्रसालः कस्य शिष्यः आसीत्? (छत्रसाल किसका शिष्य था?)
उत्तर:
छत्रसालः स्वामिप्राणनाथस्य शिष्यः आसीत्।। (छत्रसाल स्वामीप्राणनाथ का शिष्य था।)

(घ) कान् पराजित्य छत्रसालः पन्नानगरं राजधानीम् अकरोत्? (किनको हराकर छत्रसाल ने पन्नानगर को राजधानी बनाया?)
उत्तर:
पन्नाजनपदस्य गोंडजातीयान् राज्ञः पराजित्य छत्रसालः पन्नानगरं राजधानीम् अकरोत्। (पन्नाजनपद की गोंड जाति के राजा को हराकर छत्रसाल ने पन्नानगर को राजधानी बनाया।)

(ङ) गुरुणा छत्रसालः केन उपाधिना विभूषितः? (गुरु के द्वारा छत्रसाल को किस उपाधि से विभूषित किया गया?)
उत्तर:
गुरुणा छत्रसालः ‘महाराज’ इत्युपाधिना विभूषितः (गुरु के द्वारा छत्रसालः “महाराज” नामक उपाधि से विभूषित किया गया।)

कक्षा 10 संस्कृत पाठ 18 MP Board प्रश्न 3.
अधोलिखितप्रश्नानाम् उत्तराणि लिखत-(नीचे लिखे प्रश्नों के उत्तर लिखिए)
(क) के के वीराः भारतस्वतन्त्रतायै मुगलैः सह अयुध्यन्? (कौन से वीरों ने भारत की स्वतन्त्रता के लिए मुगलों से युद्ध किया?)
उत्तर:
महाराजशिववीरः, महाराणाप्रतापः, राज्ञी लक्ष्मीबाई, वीरपुङ्गवा छत्रसालः प्रभृतयः अनेकाः वीराः भारतस्वतन्त्रतायै मुगलै, सह अयुध्यन्। (महाराज शिववीर, महाराणाप्रताप, रानी लक्ष्मीबाई, वीरश्रेष्ठ छत्रसाल आदि अनेक वीरों ने भारत की स्वतन्त्रता के लिए मुगलों से युद्ध किया।)

(ख) बाल्यकालादेव छत्रसालः किमर्थं प्रयतते स्म? (बचपन से ही छत्रसाल किसके लिए प्रयास कर रहा था?)
उत्तर:
बाल्यकालादेव छत्रसालः भारतमातरं मुगलशासनात् विमोक्तुं प्रयतते स्म। (बचपन से ही छत्रसाल भारतमाता को मुगल शासन से मुक्त करने का प्रयास कर रहे थे।)

(ग) छत्रसालस्य साहित्यिकं प्रेम कथं ज्ञायते? (छत्रसाल का साहित्यिक प्रेम कैसे पता चलता है?)
उत्तर:
छत्रसालः काव्यसाहित्यशास्त्रसम्मानार्थ भूषणमहाकवेः शिविकाम् अपि उतोलयत्। एतेन तस्य साहित्यिकं प्रेम ज्ञायते। (छत्रसाल ने काव्यसाहित्यशास्त्र के सम्मान के लिए महाकवि भूषण की पालकी को भी उठाया। इससे उनके साहित्यिक प्रेम का पता चलता है।)

Class 10 Sanskrit Chapter 18  प्रश्न 4.
प्रदत्तशब्दैः रिक्तस्थानानि पूरयत (दिए गए शब्दों से रिक्त स्थान भरिए-)
(छत्रसालदशक, द्वयशीतिः, छत्रसालः, सूबेदारी, भवानी)
(क) मुगल शासकः इमं …………….. इति दातुम् ऐच्छत्।
(ख) शिववीरः तस्मै …………….. इति नामकं कृपाणं समर्पितवान्।
(ग) भूषणः …………….. इति काव्यरचनाम् अकरोत्।
(घ) भारतमातृभूः संरक्षकः …………….. आसीत्।
(ङ) छत्रसालः …………… वर्षपर्यन्तम् अजीवत्।
उत्तर:
(क) सूबेदारी
(ख) भवानी
(ग) छत्रसालदशक
(घ) छत्रसालः
(ङ) द्वयशीतिः।

Sanskrit Class 10 Chapter 18 Mp Board प्रश्न 5.
यथायोग्यं योजयत्-(उचित क्रम से जोड़िए-)
Mp Board Class 10th Sanskrit Chapter 18
उत्तर:
(क) 3
(ख) 1
(ग) 2
(घ) 5
(ङ) 4

Class 10 Sanskrit Chapter 18 Mp Board प्रश्न 6.
निम्नलिखितक्रियापदानां धातुं, लकारं, पुरुष, वचनं च लिखत
(नीचे लिखे क्रियापदों के धातु, लकार, पुरुष और वचन लिखिए-)
Mp Board Class 10 Sanskrit Chapter 18
उत्तर:
कक्षा 10 संस्कृत पाठ 18 MP Board

10th Class Sanskrit Book Mp Board प्रश्न 7.
अधोलिखितपदानां सन्धिविच्छेदं कृत्वा सन्धिनाम लिखत
(नीचे लिखे पदों के संधिविच्छेद करके सन्धिनाम लिखिए-)
Class 10 Sanskrit Chapter 18
उत्तर:
Sanskrit Class 10 Chapter 18 Mp Board

Class 10 Sanskrit Mp Board प्रश्न 8.
अधोलिखितपदानां समासविग्रहं कृत्वा समासनाम लिखत
(नीचे लिखे पदों के विग्रह कर समास का नाम लिखिए-)
(क) महाराजः
(ख) क्षेत्रपतिः
(ग) वीरपुरुषः
(घ) राष्ट्रभक्तिः
(ङ) यशः शरीरम्
उत्तर:
Class 10 Sanskrit Chapter 18 Mp Board

Mp Board Class 10th Sanskrit Solution प्रश्न 9.
उदाहरणानुसारं पर्यायशब्दान् लिखत
(उदाहरणानुसार पर्यायवाची शब्द लिखिए-.)
उदाहरणम् – केसरी (रिन्) – सिंहः
(क) स्वतन्त्रः
(ख) कृपाणः
(ग) युद्धम्
(घ) तनयः
(ङ) जन्मभूमिः
उत्तर:
(क) स्वतन्त्रः मुक्तिः
(ख) कृपाणः – खड्गः
(ग) युद्धम् – समीरः, संग्रामम्
(घ) तनयः – पुत्रः
(ङ) जन्मभूमिः – मातृभूमिः

Class 10th Sanskrit Mp Board प्रश्न 10.
रेखांकितपदान्याधृत्य प्रश्ननिर्माणं कुरुत
(रेखांकित पदों के आधार पर प्रश्न बनाइए-)
(क) स्वातन्त्र्यनायकाः स्वकीयं सर्वस्वं हुतवन्तः। (स्वतन्त्रता के नायकों ने अपना सब कुछ जला दिया।)
उत्तर:
के स्वकीयं सर्वस्वं हुतवन्तः? (किन्होंने अपना सब कुछ जला दिया?)

(ख) छत्रसालः शिववीरं महाराजं मिलितवान्। (छत्रसाल शिववीर महाराज से मिला।)
उत्तर:
छत्रसालः कं महाजं मिलितवान्। (छत्रसाल किस महाराज से मिला?)

(ग) अयं बाल्यकालात एव भारतमातरं विमोक्तुं प्रयतते स्म। (यह बचपन से ही भारतमाता को मुक्त करने का प्रयास कर रहा था।)
उत्तर:
अयं कस्मात् एवं भारतमातरं विमोक्तुं प्रयतते स्म? (यह कब से ही भारत माता को मुक्त करने के प्रयास कर रहा था?)

(घ) छत्रसालः भूषणस्य शिविकाम् उत्तोलयत्। (छत्रसाल ने भूषण की पालकी उठाई।)
उत्तर:
छत्रसालः कस्य शिविकाम् उत्तोलयत्? (छत्रसाल ने किसकी पालकी उठाई?)

(ङ) ‘मऊसहानिया’ स्थले सः प्राणान् अत्यजत्। (‘मऊसहानिया स्थल’ पर उसने प्राण त्याग दिए।)
उत्तर:
कस्मिन् स्थले सः प्राणान् अत्यजत्? (किस जगह पर उसने प्राण छोड़े?)

योग्यताविस्तारः –

महाराजछत्रसालसादृशाः येऽन्ये स्वातन्त्र्यनायकाः मध्यप्रदेशे अभवत् तेषां नामानि लिखत।
महाराज छत्रसाल जैसे अन्य स्वतंत्रता सेनानियों के जो मध्यप्रदेश में हुए, नाम लिखो।

महाराजः छत्रसालः पाठ का सार

प्रस्तुत पाठ में ‘महाराज छत्रसाल’ का जीवन-चरित्र वर्णित किया गया है, जिससे छात्रों को बलिदान, पराक्रम और राष्ट्र-भक्ति की सीख मिल सके तथा वे भी ऐसे वीरों की भाँति अपने देश के लिए बलिदान की भावना उत्पन्न कर सकें।

महाराजः छत्रसालः पाठ का अनुवाद

1. सम्प्रति अस्माकं देशोऽयं स्वतन्त्रोऽस्ति। किन्तु स्वतन्त्रताप्राप्त्यै परतन्त्रताकालादेव समये-समये राष्ट्रभक्तैः अनेकैः वीरपुरुषैः स्वस्य जीवनस्य आहुतिरपि प्रदत्तेति। गौराङ्गवैदेशिकेश्यः पूर्वं यदा भारतदेशः मुगलैः आक्रान्तः आसीत् तदा मुमलैः सह ये पराक्रमशालिनः युद्धं कृतवन्तः तेषु महाराजशिववीरः, महाराणाप्रतापः, राज्ञीलक्ष्मीबाई, वीरः वाः छत्रसालप्रभृतयः अप्रतिमाः योद्धारः आसन्। एते मातृभूमिं पराधीनतापाशात् विमुक्तये स्वीयं सर्वस्वं हुतवन्तः।।

Sanskrit Class 10th Mp Board शब्दार्थाः :
सम्प्रति-इस समय-now;आक्रान्तः-अधिकार में किया हुआ-control; वीरपुङ्गवाः-वीरों में श्रेष्ठ-bravest; पाशात्-जाल में-snare, clutches.

कक्षा 10 संस्कृत पाठ 6 महाराणा प्रताप MP Board अनुवाद :
इस समय हमारा यह देश आजाद है। किन्तु स्वतन्त्रता प्राप्त करने के लिए गुलामी के समय से ही समय-समय पर अनेक राष्ट्रभक्त वीर-पुरुषों के द्वारा अपने जीवन की आहुति भी दी गई। विदेशी अंग्रेजों से पहले जब भारत देश पर मुगलों का अधिकार था तब मुगलों के साथ जिन पराक्रमशालियों ने युद्ध किए, उनमें से महाराज शिववीर, महाराणा प्रताप, रानी लक्ष्मीबाई, वीरों में श्रेष्ठ महाराज छत्रसाल आदि अनेक अद्वितीय योद्धा थे। इन्होंने मातृभूमि को गुलामी के जाल से मुक्त कराने के लिए अपना सर्वस्व जला दिया ‘समर्पित कर दिया।

Sanskrit 10th Class Mp Board English :
Brave patriots made sacrifices to liberate India during Mughal rule-heroic persons like Maharaja Shiv Veer, Maharana Pratap, Rani Laxmi Bai, bravest emperor Chhatrasala were unique soldiers- Sacrificed their all to seek freedom for country.

2. “बुन्देलकेसरी” इति विख्यातस्य छत्रसालस्य जन्म (1649) एकोनपञ्चाशदुत्तरषोडशशततमे ईस्वीये मध्यप्रदेशस्य ‘टीकमगढ़’ जनपदस्य मयूरपर्वतीयक्षेत्रे वर्तमानलिधौराविकासखण्डे “ककरकचनयग्रामे” अभवत्। छत्रसालस्य मातुर्नाम सारन्धादेवी पितु म च श्रीचम्पतरायः इत्यासीत्। अयं वीरः बाल्यकालादेव भारतमातरं मुगलशासनात् विमोक्तुं प्रयतते स्म। यथासमये एतदर्थम् एव छत्रसालः शिववीरमहाराजम् अपि मिलितवान्। तस्मै शिववीरोऽपि सर्वविधं साहाय्यं कर्तुं वचनम् अयच्छत्। तथा च स्वतन्त्रतायै योद्धं स्वाशीर्वादस्वरूपं “भवानीति” नामकं कृपाणम् अपि दत्तवान्।

शब्दार्थाः :
विमोक्तुम्-मुक्त करने के लिए-to liberate;प्रयतते-प्रयास कर रहा है-making efforts; सर्वविधम्-सब प्रकार की-of all sorts.

Sanskrit Class 10 Mp Board अनुवाद :
‘बुन्देलकेसरी’ नाम से विख्यात छत्रसाल का जन्म 1649 ई. में मट यप्रदेश के ‘टीकमगढ़’ जनपद के मयूर पर्वतीय क्षेत्र में वर्तमान में लिधौरा विकास खण्ड में “ककरकचनयग्राम में हुआ। छत्रसाल की माता का नाम सारन्धादेवी और पिता का नाम श्री चम्पतराय था। यह वीर बचपन से ही भारतमाता को मुगलों से मुक्त करने (कराने) के लिए प्रयास कर रहा था। उचित समय आने पर इसके लिए ही छत्रसाल, शिववीर महाराज से भी मिला। उसे शिववीर ने भी हर तरह की सहायता करने के लिए वचन दिया। और आजादी के लिए युद्ध करने के लिए अपने आशीर्वाद के रूप में ‘भवानी’ नाम की कृपाण भी दी।

Mp Board Class 10 Sanskrit Solution English :
Chhatrasala was known as Lion of Bundel–made efforts to liberate India from the trammels of the Mughals since childhood-met emperor Shiv Vira for the same and sought promise of help-Shiv Vira gave him a sword along with his blessings.

3. औरङ्गजेबस्य, अन्येषां राज्ञां च शक्ति अविगणय्य जनसहयोगेन छत्रसालः युद्धं कृतवान् विजयश्रियम् अपि अवाप्तवान्। असौ सेनानी सर्वप्रथमं युद्धे चित्रकूटात् गोपाचलनगरं (ग्वालियरम्) यावत् तथा च कालपीतः गढ़ाकोटा यावत् निजं प्रभुत्वं संस्थापयामास। अनन्तरं सः पन्नाजनपदस्य गोंडजातीयान् राज्ञः पराजित्य पन्नानगर राजधानीम् अकरोत्।

प्रसिद्धः स्वामिप्राणनाथः अस्य गुरुः आसीत्। प्रसन्नः गुरुः छत्रसालं “महाराज” इत्युपाधिना विभूष्य आशीर्वादं प्रदत्तवान्, यत्

राज्ये त्वदीये नृप! छत्रसाल! क्षोणिस्सदा कम्पमयी विभातु।

अश्वः त्वदीयः समियात् तु यत्र, भोस्तत्र साफल्यमवाप्नुहि त्वम्।।

Mp Board Solution Class 10 Sanskrit शब्दार्थाः :
अविगणय्य-बिना गणना करके-not caring (ignoring); अवाप्तवान्-प्राप्त किया-obtained; प्रभुत्वम्-शासक त्व-lordship; संस्थापयामास-स्थापित किया-established; विभूष्य-विभूषित करके- embellishing; क्षोणिः-पृथ्वी-earth; विभातु-प्रकाशित हो-shine; त्वदीयः-तुम्हारा-yours; समियात्-जाये-proceed, so; अवाप्नुहि-प्राप्त करो-ohtain.

Mp Board Class 10 Sanskrit Book Pdf अनुवाद :
औरङ्गजेब के और अन्य राजाओं की शक्ति की बिना गणना किए, जन सहयोग से छत्रसाल ने युद्ध किया और विजय भी प्राप्त की। इस सेनानी ने सबसे पहले युद्ध में चित्रकूट से गोपालनगर (ग्वालियर) तक तथा कालपीत गढ़ाकोटा तक अपना शासनत्व स्थापित किया। इसके बाद उसने पन्ना जनपद की गोंडीय जाति के राजा को हराकर पन्नानगर को राजधानी बनाया।

प्रसिद्ध स्वामीप्राणनाथ इनके गुरु थे। खुश होकर गुरु ने छत्रसाल को ‘महाराज’ की उपाधि से विभूषित कर आशीर्वाद दिया कि-“हे राजा छत्रसाल! तुम्हारे राज्य में कांपती हुई धरती सदा प्रकाशित हो। तुम्हारा घोड़ा जहाँ भी जाए, वहीं तुम सफलता प्राप्त करो।”

Class 10 Mp Board Sanskrit Solution English :
Ignored strength of Aurangzeb and others fought and won victory-Set up his rule from Chitrakoot to Gwalior and Kalpita Garhakata-defeated king of Pannagarh and made it his kingdom.

His guru Swami Pran Natl. embellished him with the title “Maharaja’ and blessed him to win victory wherever his horse happened to go.

4. यदा औरङ्गजेबः दक्षिणभारते व्यापृतः आसीत् तदा युद्धकौशलेन असौ बघेलखण्ड-मालव-राजस्थान-पञ्चाम्बुप्रदेशपर्यन्तं क्षेत्रं स्वाधिपत्ये कृतवान्। मुगलशासकः इमं मानिनं प्रान्ताधिपतित्वं “सूबेदारी” इति दातुम् ऐच्छत् तदा अयं न्यषेधयत्। एकदा महोबा-“जैतपुरनगरयोः मुगलशासने जाते सत्ययं पेशवाबाजीरावाय सहायतार्थम् एकं पत्रं प्रेषितवान्। बाजीरावसाहाय्येन सः पराजितं भूभागं विजितवान्। विजयेन आह्लादितोऽयं पेशवाबाजीरावम् औरसपुत्रमिव मत्वा विजितराज्यस्य तृतीयभागं तस्मै सहर्ष प्रदात्।”

Mp Board Sanskrit Book Solution Class 10 शब्दार्थाः :
व्यापृतः-व्यस्त-busy; न्यषेधयत्-मना कर दिया- refused; ऐच्छत्-इच्छा की-desired.

अनुवाद :
जब औरङ्गजेब दक्षिण भारत में व्यस्त था, तब युद्ध कौशल से इन्होंने बधेलखण्ड मालव, राजस्थान, पांच अम्बु प्रदेश तक के क्षेत्र पर अपना अधिकार किया। मुगलशासक ने इनका मान करने के लिए पान्तों का अधिपतित्व ‘सूबेदारी’ देनी चाही तो इन्होंने मना कर दिया। एक बार महोबा ने- “जैतपुरनगर से मुगलशासन होने पर सत्यय को पेशवा-बाजीराव की सहायता के लिए एक पत्र भेजा। बाजीराव की सहायता से उन्होंने हारा हुआ क्षेत्र जीत लिया। विजय से खुश होकर इन्होंने पेशवा बाजीराव को औरसपुत्र के समान मानकर जीते हुए राज्य का तीसरा भाग उसे खुशी से दे दिया।

English :
Won victory over many regions when Aurangzeb was busy in Southern India–Mughal emperor offered him ‘Subedari’ of certain provinces. He declined the offer.

Recaptured lost regions with the help of Bajirao offered one-third of won over kingdom of Bajirao, considering him as adopted son.

5. छत्रसालस्य शौर्यण, राष्ट्रभक्त्या, उदारतया च प्रभावितो हिन्दीभाषायाः महाकविः भूषणः “छत्रसालदशक” इति वीररसनिबद्धां काव्यरचनाम् अकरोत्। छत्रसालः काव्यसाहित्यशास्त्रसम्मानार्थं भूषणमहाकवेः शिविकाम् अपि उत्तोलयत्। द्वयशीतिवर्षस्य अवस्थायाम् एकत्रिंशदुत्तरसप्तदशशततमे (1731) खीस्ताब्दे दिसम्बरमासस्य चतुः तारिकायां “मऊसहानिया” इत्यस्य तालपरिसरे एषः क्षणभङ्गनिष्ठं शरीरम् अत्यजत्। अधुना सः पाञ्चभौतिकशरीरेण नास्ति परन्तु यशः शरीरेण सर्वदा अस्मान् भारतीयान् प्रेरयन् राष्ट्रभक्तिभावंच शिक्षयन् तिष्ठति एव। अयं देशः जन्मभूमिसंरक्षक्स्य महापराक्रमशालिनः छत्रसालस्य सदैव ऋणी अस्ति। विजयतेतरां महाराजः छत्रसालः।

शब्दार्थाः :
शिविकाम्-पालकी को-palanquin; उत्तोलयत्-उठाया-raised; क्षणभङ्गनिष्ठम्-क्षण भर में नष्ट होने वाला-transitory, fragile; शिक्षयन्-सिखाते हुए-teaching.

अनुवाद :
छत्रसाल के शौर्य, राष्ट्रभक्ति और उदारता से प्रभावित होकर हिन्दी भाषा के कवि भूषण ने ‘छत्रसालदशक’ नामक वीररस से युक्त काव्य की रचना की। छत्रसाल ने काव्यसाहित्यशास्त्र के सम्मान के लिए महाकवि भूषण की पालकी को भी उठाया। बयासी (82) वर्ष की आयु में सन् 1731 ई. में दिसम्बर मास की चार तारीख को ‘मऊसहानिया’ तालाब के परिसर में इन्होंने क्षणभर में नष्ट होने वाले शरीर को त्याग दिया। अब वह पञ्चभूत रूपी शरीर से नहीं हैं पर यश रूपी शरीर से हमेशा हम भारतीयों को प्रेरित करते हुए और राष्ट्रभक्ति का भाव सिखाते हुए रहेंगे। यह देश जन्मभूमि की रक्षा करने वाले महापराक्रमी छत्रसाल का हमेशा ऋणी रहेगा। महाराजा छत्रसाल विजयी हो।

English :
Bhushar composed a literary piece named ‘Chhatrasala Dashak’. Chhatrasala raised Bhushan’s palanquin to honour him.

Died at the age of 82. His heroic death will go on inspiring us with his patriotic feelings. The country will ever remain indebted to Chhatrasala.

MP Board Class 10th Sanskrit Solutions

MP Board Class 8th Social Science Solutions Chapter 25 Antarctica

MP Board Class 8th Social Science Solutions Chapter 25 Antarctica

MP Board Class 8th Social Science Chapter 25 Antarctica Text Book Exercise

MP Board Class 8th Social Science Chapter 25 Antarctica Very Short Answer Type Questions

Mp Board Class 8 Social Science Solution Chapter 25 Question 1.
In which hemisphere Antarctica is located?
Answer:
Antarctica lies completely in the Southern Hemisphere with the South Pole almost in its centre.

Mp Board Class 8 Social Science Chapter 25 Question 2.
What is the place of Antarctica in size in the world?
Answer:
In size, it is the fifth largest continent.

Class 8 Social Science Chapter 25 MP Board Question 3.
What is a iceberg?
Answer:
A large mass of ice floating in the sea. It is at least five metres high above the sea level.

Mp Board Solution Class 8 MP Board Question 4.
What is ice cap?
Answer:
An area of a few square kilometres which is covered with snow and ice permanently is called ice caps.

Mp Board Solution Class 8th Social Science Question 5.
What is a Krill?
Answer:
Krill is a fish found in Antarctica. Krills are very smaller fish. They are found in swarms which are the food of whale, real, penguins and birds. They provide a variety of products such as fish meat, krill meat paste and krill protein.

MP Board Class 8th Social Science Chapter 25 Antarctica Short Answer Type Questions

Mp Board Solution Class 8 Social Science Question 1.
Describe about the exploration of Antarctica continent?
Answer:
The mainland of Antarctica Continent firs discovered in 1820 but real exploration began only in the Twenties century. After captain Cook one by one travellers went in reach of this snow filled continent and many teams among them wire buried under the sheet of ice.

Captain Robert Falcon Scot of British Navy was successful. He left for Antarctica in 1910 with his team and reached there in 1912 but there he found the flag of Norway which was hoisted by first Norwegian traveller Roald Amansen who had reached there on 20 Oct. 1911. The India has also sent team of scientists to this continent. The Indian team has explored a sea mountain.

Class 8 Sst Mp Board Solution  Question 2.
Describe the physical structure of Antarctica?
Answer:
About ninety-eight percent of Antarctica is permanently covered by ice. It has an average thickness of two to five kilometres. A Greater part of Antarctica is rugged and mountainous. Shores are steep. Queen Maud Range divides the continent in almost two halves. Mt. Erebus a five volcano is the most picturesque land-mark on the continent.

Class 8th Sst Mp Board Solution Question 3.
Why Antarctica is called the White Continent?
Answer:
It is the only continent in the world, which remains completely frozen throughout the year. An endless white sheet of ice covers the continent hence it is also known as the white continent.

Question 4.
Write about the resources of Antarctica.
Answer:
The land surface in Antarctica is mostly barren and is very cold desert. The sea is very generous and bountiful. Penguins, the sea birds and seals are abundant. Whales are also found here. The international law prohibits killing of these sea animals on large scale to preserve the environment.

A small fish called Krill is found in swarns extending upto 100 metres or more. They may provide a variety of products such as fish meat. Krill is full of protein and is also used as meat paste.

It is believed that precious animals are hidden below the surface of ice sheet in Antarctica deposits of coal, iron ore and copper have been found but due to severe hindrance there minerals have been not utilized till today.

MP Board Class 8th Social Science Chapter 25 Antarctica Long Answer Type Questions

Question 1.
Describing the vegetation and life of Antarctica explain why people cannot lives permanently here?
Answer:
The land surface is mostly barren and is very cold. The paucity of sun rays creates hurdles in growth in trees so there is little vegetation here and the area where vegetation grow in few weeks of summer. Lichens, watergrass and fungus are the vegetation here.

There are over 200 species of lichens in this continent. The insects on the land are minute invertebrate but sea is bountiful. Penguins, blue whales, seal, albastross and Krill fish the prominently found. Antarctica is the most coldest and isolated continent. The fast ice winds blow and there is ice everywhere. In such harsh climate life is impossible so the human beings cannot live here permanently.

Question 2.
Why Antarctica is called the dedicated continent for science? Write about the camps established by Indian in Antarctica?
Answer:
Though Antarctica is a vast size but it has little offer by way of material resources but it provides unique opportunities to scientists to learn more about the earth. This continent, therefore, is also called a continent dedicated for science. People have created liveable environments whether the stations established by them.

Since 1982 to 2006 Indian scientists have been visiting Antarctica continent. They have established a unmanned permanent base camp ‘Dakshin Gangotri’ for this purpose in 1992. Indian scientists have also explored a sea mountain during their visit and they have named it ‘Indra’. In 1988-89 the VIIIth Indian team established a manned friendship camp, 70 km far from‘Dakshin Gangotri’.

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MP Board Class 12th Special Hindi Sahayak Vachan Solutions Chapter 1 उत्तराखंड की यात्रा

MP Board Class 12th Special Hindi सहायक वाचन Solutions Chapter 1 उत्तराखंड की यात्रा (यात्रा, सेठ गोविन्द दास)

उत्तराखंड की यात्रा अभ्यास प्रश्न

उत्तराखंड की यात्रा का वर्णन MP Board Class 12th प्रश्न 1.
उत्तराखंड के अन्तर्गत कौन-कौन से तीर्थ हैं? उत्तराखंड की यात्रा में शारीरिक कष्ट के विपरीत किस प्रकार का आनंद मिलता है और क्यों?
उत्तर:
उत्तराखंड के अन्तर्गत हिन्दुओं के पवित्र चार धाम तीर्थ-यमुनोत्तरी, गंगोत्तरी, केदारनाथ एवं बद्रीनाथ हैं। उत्तराखंड की यात्रा अत्यन्त दुर्गम एवं शारीरिक कष्ट प्रदान करने वाली है, किन्तु इसके विपरीत उत्तराखंड के प्राकृतिक सौन्दर्य से परिपूर्ण दश्य एवं धार्मिक महानता एक विशिष्ट प्रकार का मानसिक आनन्द प्रदान करती है, जिससे मार्ग अथवा यात्रा के कष्टों की तीव्रता क्षीण-सी हो जाती है।

Mp Board Solution Class 12 प्रश्न 2.
उत्तराखंड के चारों धाम किन चार पवित्र नदियों के किनारे स्थित हैं? (2009, 13, 15, 17)
उत्तर:
उत्तराखंड के सुप्रसिद्ध चार धाम पवित्र नदियों के तट पर स्थित हैं। यमुनोत्तरी का मार्ग यमुना नदी के किनारे-किनारे,गंगोत्तरी का मार्ग गंगा नदी के किनारे-किनारे, केदारनाथ का मार्ग मन्दाकिनी के किनारे-किनारे तथा बद्रीनाथ का मार्ग अलकनन्दा नामक पवित्र नदी के किनारे-किनारे गया है।

Mp Board Class 12 Hindi Book Makrand Pdf  प्रश्न 3.
उत्तराखंड के प्राकृतिक दृश्य श्रद्धालुओं को क्यों आकर्षित करते हैं?
उत्तर:
उत्तराखंड के प्राकृतिक दृश्यों के सौन्दर्य के सामने न तो काश्मीर के दृश्य ठहरते हैं और न ही स्विट्जरलैण्ड के। स्वच्छ जल समेटे कल-कल करती पवित्र नदियाँ, वर्ष भर बर्फ से आच्छादित रहने वाली पर्वत-चोटियाँ, हरे-भरे वृक्षों से भरे घने जंगल, चारों ओर फैली हरियाली, घाटी की मनोहारी वादियाँ, चीड़ और देवदारु के ऊँचे-ऊँचे वृक्ष, गगनचुम्बी ऊँचाई से गिरते जल-प्रपात और शान्त-मनोरम वातावरण, सब कुछ ऐसा लगता है मानो किसी दूसरे लोक में आ गये हों। यही कारण है कि इस प्रदेश की यात्रा के कष्टकारक होने के बाद भी श्रद्धालु उत्तराखंड के प्राकृतिक दृश्यों के प्रति अत्यधिक आकर्षित हो, अपूर्व मानसिक आनन्द प्राप्त करते हैं।

प्रश्न 4.
ज्योतिर्मठ के विषय में संक्षिप्त जानकारी लिखिए।
उत्तर:
आज भी उत्तराखंड में शंकराचार्य जी के कार्यों एवं उनके निवास स्थान के प्रत्यक्ष दर्शन किये जा सकते हैं । ज्योतिर्मठ में आज भी वह शहतूत का वृक्ष है, जिसके नीचे बैठकर तपोभूत शंकराचार्य जी को ज्योति के दर्शन हुए। इस स्थान के निकट ही उनकी वह शंकर गुफा भी देखी जा सकती है, जिसमें वे निवास किया करते थे। इसी वृक्ष के नीचे भगवान शंकराचार्य ने तत्त्वज्ञान के महान् ग्रन्थ ‘शांकर भाष्य’ की रचना की थी। ज्योतिर्मठ का सेब, नाशपाती, अखरोट आदि फलों से लदे पौधों का बगीचा, संस्कृत का विद्यालय, आज भी जगत् गुरु शंकराचार्य जी के पवित्र प्रयलों और संकल्पों को दुहरा रहा है, जिसके दर्शन मात्र से संसार ने महान् प्रेरणा पाई थी।

प्रश्न 5.
“हमारे ऋषि-मुनियों ने तपोवनों में भारत की एकता पर चिंतन किया है।” समझाइए।
उत्तर:
हमारे ऋषि-मुनियों ने गाँव-शहर के कोलाहल और आकर्षण से दूर तपोवनों में एकान्त साधना द्वारा सदैव भारत की जो एकता तथा हित की चिन्ता की है, वह उनके कार्यों द्वारा सिद्ध हो जाती है। उपर्युक्त कथन की पुष्टि के लिए मात्र यह उदाहरण पर्याप्त होगा। भारत के उत्तर में स्थित चार धाम में से दो देव मन्दिरों-केदारनाथ और बद्रीनाथ के पुजारी,जिन्हें ‘रावल’ कहा जाता है, उत्तर के न होकर केदारनाथ के कर्नाटक से और बद्रीनाथ के केरल से आते हैं। आज तक उनके द्वारा निर्धारित की गई पूजा-पद्धति और नियम का पूर्णतया पालन हो रहा है। भारत को एकता के सूत्र में बाँध कर रखने की भावना का इससे अच्छा भला क्या उदाहरण होगा?

प्रश्न 6.
लेखक ने उत्तराखंड के प्राकृतिक संसाधनों के बारे में क्या लिखा है? अपने शब्दों में वर्णन कीजिए।
उत्तर:
लेखक के अनुसार उत्तराखंड में शक्ति और ऊर्जा के अपार स्रोतों के साथ-साथ विशाल प्राकृतिक संसाधन मौजूद हैं। जीवन के मूल आधार ‘जल’ की इतनी प्रचुरता एवं शुद्धता में उपस्थिति. इस प्रदेश को दनिया के अन्य किसी भी स्थान से अलग करती है। इस प्रमुख प्राकृतिक संसाधन का उपयोग कृषि कार्यों,बिजली उत्पादन इत्यादि में और प्रभावी और विशाल स्तर पर किया जा सकता है। उत्तराखंड के विशाल भू-भाग में फैले घने जंगल, अपने आप में बहुउपयोगी वृक्षों को समेटे हुए हैं।

विविध प्रकार के इन वृक्षों से प्राप्त होने वाली विभिन्न वस्तुओं का उपयोग भी जन-हित एवं देश-हित में किया जा सकता है। विशाल पर्वतों के अन्दर मौजूद खनिज पदार्थों के अक्षय भण्डारों को खोजने एवं उन्हें बाहर निकालने की दिशा में प्रयास होने चाहिए, जिससे उनका व्यावसायिक रूप से उपयोग कर इस प्रदेश के विकास में योगदान दिया जा सके। पशु-पालन एवं वन आधारित कुटीर उद्योगों से सम्बन्धित परियोजनाओं को बनाने एवं उन्हें सफलतापूर्वक लागू करवाने की दिशा में प्रयास होने चाहिए। अन्ततः, यह कहा जा सकता है कि प्राकृतिक संसाधनों की दृष्टि से उत्तराखंड एक सम्पन्न प्रदेश है।

प्रश्न 7.
इस यात्रा-वृत्तांत को पढ़कर आपके मन में कौन-कौन-सी प्रेरणाएँ जागती हैं? लिखिए।
उत्तर:
उत्तराखंड से सम्बन्धित इस यात्रा-वर्णन को पढ़कर सर्वप्रथम उत्तराखंड के शीघ्र-से-शीघ्र भ्रमण की भावना जाग्रत होती है। इस यात्रा वृत्तांत में वर्णित स्थानों,वस्तुओं इत्यादि को जीवंत देखना एवं उनकी उपस्थिति को अनुभव करना,इन सबके सोचने मात्र से ही रोमांच का अनुभव होता है। उत्तराखंड की देवभूमि, जहाँ हमें प्रकृति से तालमेल बनाकर, प्रकृति-प्रदत्त संसाधनों का जन-हित में उपयोग करने की प्रेरणा देती है, वहीं यह हमारी महान् धार्मिक एवं सांस्कृतिक विरासत पर अभिमान करने,किन्तु उसके संरक्षण के लिए भी प्रेरित करती है। यह हमें हमारे उस सुन्दर अतीत में झाँकने का अवसर प्रदान करती है,जब हमारे महान् संत-महात्माओं, तपस्वियों एवं विभूतियों ने निःस्वार्थ सेवा-भाव से अनूठे कार्य सम्पादित किये थे।

उत्तराखंड की यात्रा अति लघु उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 1.
केदारनाथ की हिमानी पर संक्षिप्त टिप्पणी लिखिए।
उत्तर:
केदारनाथ स्थित हिमानी की शोभा अवर्णनीय है। इस हिमानी की ऊँचाई लगभग तेइस हजार फुट है। इस प्रकार की इतनी विशाल, भव्य और ऊँची हिमानी संभवतया विश्व में कहीं और नहीं है।

प्रश्न 2.
लेखक सेठ गोविन्दास के अनुसार धर्म के विकास का एक बहुत बड़ा साधन क्या है?
उत्तर:
लेखक सेठ गोविन्द दास के अनुसार सगुणोपासना और मन्दिरों की मूर्तियाँ धर्म के विकास का एक बहुत बड़ा साधन हैं।

उत्तराखंड की यात्रा पाठ का सारांश

‘सेठ गोविन्द दास’ द्वारा लिखित प्रस्तुत यात्रा वर्णन ‘उत्तराखंड की यात्रा’ में उत्तराखंड की प्राकृतिक एवं सांस्कृतिक धरोहर का मनोहारी चित्र अंकित किया गया है।

लेखक के अनुसार, भारत के उत्तर भाग में स्थित उत्तराखंड राज्य को सदियों से ‘देवभूमि’ का स्थान प्राप्त है। हिन्दुओं के सुप्रसिद्ध एवं पवित्र चार धाम तीर्थ-यमुनोत्तरी, गंगोत्तरी, केदारनाथ एवं बद्रीनाथ यहीं पर स्थित हैं। यद्यपि इन तीर्थों तक की यात्रा अत्यन्त दुर्गम एवं कष्टकारी है, किन्तु यहाँ का प्राकृतिक सौन्दर्य एवं धार्मिक महानता सहज ही यात्री को मानसिक आनन्द से भर देती है।

उत्तराखण्ड के चारों धाम,चार पवित्र नदियों-यमुना, गंगा,मन्दाकिनी एवं अलकनन्दा के तट पर स्थित हैं। वर्ष-भर बर्फ से ढंकी ऊँची-ऊँची पर्वत चोटियाँ, चीड़, देवदारु इत्यादि वृक्षों से भरे घने जंगल, ऊँचे-ऊँचे पर्वत-शिखरों से गिरते असंख्य झरने, इस प्रदेश की शोभा को स्वर्ग-सरीखा बनाते हैं।

केदारनाथ एवं बद्रीनाथ के मन्दिरों में वैदिक मंत्रोच्चार के साथ होने वाले धार्मिक अनुष्ठान और विधि-विधान से पूर्ण पूजा-अर्चना, एक विशिष्ट एवं आकर्षक सांस्कृतिक एवं धार्मिक वायुमण्डल का निर्माण करते हैं। महर्षि वेदव्यास और शंकराचार्य आदि की कर्मस्थली रहा यह भू-भाग, आज भी समस्त संसार को प्रेरित-सा करता प्रतीत होता है।

प्राकृतिक सौन्दर्य से भरा-पूरा यह प्रदेश आध्यात्मिक प्रेरक के साथ-साथ औद्योगिक एवं विकास की दृष्टि से भी स्वयं में अपार सम्भावनाएँ समेटे हुए हैं। आवश्यकता मात्र इस बात की है कि इस प्रदेश के भौगोलिक एवं प्राकृतिक स्रोतों का सुनियोजित तरीके से प्रभावी उपयोग प्रदेश-हित एवं देश-हित में किया जाये।

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MP Board Class 7th Social Science Solutions Chapter 8 Atmosphere

MP Board Class 7th Social Science Solutions Chapter 8 Atmosphere

MP Board Class 7th Social Science Chapter 8 Text Book Questions

Choose the correct alternatives from the following:

Mp Board Class 7th Social Science Chapter 8 Question 1.
In which layer of the atmosphere does weather phenomenon take place?
(a) Troposphere
(b) Stratosphere
(Q) Mesosphere
(d) Outer space
Answer:
(a) Troposphere

Mp Board Class 7 Social Science Chapter 8 Question 2.
Which gas is found the most in atmosphere?
(a) Ozone
(b) Oxygen
(c) Carbon-di-oxide
(d) Nitrogen
Answer:
(d) Nitrogen

Fill in the blanks:

  1. Ozone gas protects the earth from the harmful ……………….. rays.
  2. ……………. is a life going gas for humans.
  3. Temperature is found constant in …………….. layer of atmosphere.
  4. Electrically charged particles are found in ……………..
  5. The atmosphere extends to a height of ……………. km from sea level.

Answer:

  1. ultra violet
  2. Oxygen
  3. stratosphere
  4. thermosphere
  5. 1600

MP Board Class 7th Social Science Chapter 8 Short Answer Type Questions

Class 7 Social Science Chapter 8 MP Board Question 1.
What is atmosphere?
Answer:
The cover of the air around the earth is called the atmosphere. It has many gases, dust particles and poisonous gas.

Social Science Class 7 Chapter 8 MP Board Question 2.
Name the gases found in atmosphere.
Answer:
The different gases found in the atmosphere are:
Nitrogen, Oxygen, Carbon dioxide, Hydrogen, Ozone and Helium. Nitrogen is found in the largest quantity.

Class 7 Chapter 8 Social Science MP Board Question 3.
Which are the layers of atmosphere? Name them.
Answer:
The layers of atmosphere:

  1. Troposphere
  2. Stratosphere
  3. Mesosphere
  4. Thermosphere
  5. Exosphere.

MP Board Class 7th Social Science Chapter 8 Long Answer Type Questions

Atmosphere Chapter Class 7 Pdf MP Board Question 1.
Describe the structure of atmosphere.
Answer:
The changes in temperature at various attitudes divide the atmosphere into 5 layers.

  1. Troposphere
  2. Stratosphere
  3. Mesosphere
  4. Thermosphere
  5. Exosphere

1. Troposphere:
It extends to a height of 8 km at the poles and 18 km on equator. Dust particles and water vapor are found in this layer. All kinds of weather phenomenon like clouds, rainstorm etc. is observed in this layer. All types of life forms are found in this layer. This layer is also known as dynamic layer.

2. Stratosphere:
The second layer of the atmosphere is known as stratosphere. The temperature in this layer is constant till 20 kms. height and then slowly increases.

3. Mesosphere:
The height of this layer is 50 to 80 km from the sea level. The variation in temperature is less in this layer as water vapor, clouds and dust are found less and fast wind blows here.

Atmosphere Chapter Class 7 MP Board

4. Thermosphere:
The thermosphere starts from the height of 80 km from sea level. The density of air is very less in this layer. The temperature increases with height in this layer. Two layers of gases are found here. One is the ozone layer and the other is the ion layer.

The ozone layer is spread at a height of 32 to 80 km from the earth. The ion layer is found at a height of 80 to 400 km. from earth. The electrically charged particles stop the radio waves transmitted from the earth and return it back to the earth. In this way we can listen to various radio programmers.

5. Exosphere:
This is the outermost layer of die atmosphere the upper limit of this layer is uncertain. The density of air is the least here.

Mp Board Class 8 Social Science Chapter 7 Question 2.
What is the importance of atmosphere?
Answer:
The atmosphere is very important to us. It protects the life on earth by reflecting back the harmful ultra violet rays of the sun. It controls die extremes of temperature because of which moderate temperature is experienced in many parts of earth; It acts as the medium to send radioactive rays from one place to another on earth.

It is atmosphere, which makes possible earth movement of the airplanes. The seasonal changes on earth like balance of temperature, movement of wind, rain etc. is possible due to atmosphere. The atmosphere also contains life giving and life protecting gases. Thus, our atmosphere is of great importance.

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MP Board Class 6th Special English Solutions Chapter 14 My Plan (Poem)

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MP Board Class 6th Special English Solutions Chapter 14 My Plan (Poem)

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My Plan (Poem) Text Book Exercise

Word Power

Complete the poem with appropriate words.

I’ll have ……… cabin
All …………. white and ……………
With ………… for the …………….
And ………….. for the …………….
I’ll have a little …………….
On which to ………….. my ……………
And all the ……………
In which to ………….. my ……………
Answer:
a little, painted, red, shutters, window, curtains, bed, cook stove, fry, fishes, Hudson river, wash, dishes.

Comprehension

Answer these questions.

Class 6 English Chapter 14 MP Board Question 1.
What does the poet plan to do when he is a little older?
Answer:
The poet plans to buy a boat when he is a little older.

My Plan Poem Summary MP Board Question 2.
Who are ‘the two of us’?
Answer:
‘The two of us’ refers to the poet and his boat.

My Plan Poem Class 6 MP Board Question 3.
What will he do with the cook stove?
Answer:
He will fry his fishes on the cooking stove.

Chapter 14 English Class 6 MP Board Question 4.
Where will he wash his dishes?
Answer:
He will wash his dishes in the water of the big Hudson River.

My Plan (Poem) Word Meanings

Plan – to have a scheme, योजना बनाना। Float – to sail on water, वानी पर इधर-उधर चलना। Cabin – a small room, कोठरी। Dishes – utensils, बर्तन।

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MP Board Class 7th Sanskrit Solutions Chapter 6 प्रयत्नो विधेयः

MP Board Class 7th Sanskrit Solutions Surbhi Chapter 6 प्रयत्नो विधेयः

MP Board Class 7th Sanskrit Chapter 6 अभ्यासः

Mp Board Class 7th Sanskrit Chapter 6 प्रश्न 1.
एक शब्द में उत्तर लिखो
(क) जनानां सद्बुद्धिवृद्धिः केन भवति? [मनुष्यों में सद्बुद्धि की वृद्धि किससे होती है?]
उत्तर:
प्रयत्नेन

(ख) प्रयत्नेन वीराः कान् लङ्घयन्ति? [प्रयत्न से वीर किनको लाँघ जाते हैं?]
उत्तर:
गिरीन्

(ग) प्रयत्नेन के वियत्युत्पतन्ति? [प्रयत्न से कौन आकाश में उड़ते हैं?]
उत्तर:
विज्ञाः

(घ) प्रयत्नेन के विश्वप्रियाः? [प्रयत्न से विश्व में कौन प्रिय हैं?]
उत्तर:
भारतीयाः

(ङ) प्रयत्नादयोग्याः कीदृशाः भवन्ति? [प्रयत्न से अयोग्य कैसे हो जाते हैं?]
उत्तर:
योग्याः।

Mp Board Class 7 Sanskrit Chapter 6 प्रश्न 2.
एक वाक्य में उत्तर लिखो
(क) प्रयत्नेन भारतीयाः कां गताः? [प्रयत्न करने से भारतीयों ने क्या प्राप्त किया?]
उत्तर:
प्रयत्नेन भारतीयाः ऋद्धिं गताः। [प्रयत्न करने से भारतीयों ने वैभव को प्राप्त किया।]

(ख) प्रयत्नात् कः मृदुत्वं प्रयाति? [कैसे प्रयत्न से कोमलता प्राप्त हो जाती है?]
उत्तर:
कठोरः प्रयत्नात् मृदुत्वं प्रयाति। [कठोर प्रयत्न से कोमलता प्राप्त हो जाती है।]

(ग) अस्माभिः कः विधेयः? [हम सबको क्या करना चाहिए?]
उत्तर:
अस्माभिः प्रयत्नो विधेयः। [हम सबको प्रयत्न करना चाहिए।]

(घ) प्रयत्नेन कुत्र जनानां जयः स्यात्? [प्रयत्न करने से मनुष्यों की कहाँ विजय होती है?]
उत्तर:
प्रयत्नेन युद्धे जनानां जयः स्यात्। [प्रयत्न करने से मनुष्यों की युद्ध में विजय होती है।]

(ङ) प्रयत्नेन भारतीयाः कां श्रिताः? [प्रयत्न करने से भारतीय किससे युक्त हो जाते हैं?]
उत्तर:
प्रयत्नेन भारतीयाः मुक्तिं श्रिताः। [प्रयत्न करने से भारतीय मुक्ति से युक्त हो जाते हैं]

Prayatno Vidheya MP Board प्रश्न 3.
शुद्ध वाक्यों के समक्ष ‘आम्’ और अशुद्ध वाक्यों के समक्ष ‘न’ लिखो
(क) प्रयत्नेन भारतीयाः मुक्ताः न अभवन्।
(ख) धीराः परिश्रमेण समुद्रं तरन्ति।
(ग) वैज्ञानिकाः प्रयत्नेन आकाशे उड्डयन्ति
(घ) प्रयत्नेन वीराः गिरीन् न लङ्घयन्ति।
(ङ) प्रयत्नेन असाध्यं साध्यं भवति।
उत्तर:
(क) न
(ख) आम्
(ग) आम्
(घ) न
(ङ) आम्

संस्कृत सुरभि कक्षा 7 MP Board प्रश्न 4.
उचित शब्दों से रिक्त स्थानों को भरो
(क) प्रयत्नेन …………. सिद्धिर्जनानाम्।
(ख) …………. धीराः समुद्रं तरन्ति।
(ग) प्रयत्नेन वीराः ………….।
(घ) प्रयत्नेन ………… भारतीयाः।
(ङ) कठोरः ……….. मृदुत्वं प्रयाति।
उत्तर:
(क) कार्येषु
(ख) प्रयत्नेन
(ग) गिरीन् लङ्घयन्ति
(घ) विश्वप्रियाः
(ङ) प्रयत्नात्।

Mp Board Solution Class 7 Sanskrit प्रश्न 5.
उदाहरण के अनुसार अधोलिखित शब्दों को एकवचन में बदलो
(क) वीराः
(ख) धीराः
(ग) अयोग्याः
(घ) विश्वप्रियाः
(ङ) श्रिताः
(च) गिरीन्
(छ) कार्येषु।
उत्तर:
(क) वीरः
(ख) धीरः
(ग) अयोग्यः
(घ) विश्वप्रियः
(ङ) श्रितः
(च) गिरि
(छ) कार्ये।

Class 7 Sanskrit Chapter 6 MP Board प्रश्न 6.
निम्नलिखित शब्दों के मूलशब्द, विभक्ति और वचन लिखो
(क) युद्धे
(ख) जनानाम्
(ग) प्रयत्नात्
(घ) जयः
(ङ) कठोरः
(च) विज्ञाः
(छ) गिरीन्।
उत्तर:
(क) युद्ध-सप्तमी-एकवचन
(ख) जनषष्ठी-बहुवचन
(ग) प्रयत्न-पंचमी-एकवचन
(घ) जयप्रथमा-एकवचन
(ङ) कठोर-प्रथमा-एकवचन
(च) विज्ञप्रथमा-बहुवचन
(छ) गिरि-द्वितीया-बहुवचन।

कक्षा 7 संस्कृत पुस्तक Mp Board प्रश्न 7.
निम्नलिखित शब्दों के विलोम शब्द लिखो
(क) कठोरः
(ख) अयोग्याः
(ग) सद्बुद्धिः
(घ) धीराः
(ङ) विज्ञाः
(च) गताः।
उत्तर:
(क) मुदः
(ख) योग्याः
(ग) दुर्बुद्धिः
(घ) अधीराः
(ङ) अवज्ञिाः
(च) अगताः।।

Prayatnam Sarva Siddhi Sadhanam In Sanskrit MP Board प्रश्न 8.
निम्नलिखित शब्दों के समानार्थक शब्द लिखो-
(क) परिश्रमेण
(ख) मूर्खाः
(ग) पर्वतान्
(घ) युद्धे
(ङ) प्रयत्नः।
उत्तर:
(क) प्रयत्नेन
(ख) निर्बुद्धयः
(ग) गिरीन्
(घ) संग्रामे
(ङ) प्रयासः।

कक्षा 7 संस्कृत पाठ 6 MP Board प्रश्न 9.
उदाहरण के अनुसार अन्वय की पूर्ति करो
(क) प्रयत्नेन ………. समुद्रं ………. , प्रयत्नेन वीराः ……… लङ्घयन्ति, ………. विज्ञाः वियति ……… , प्रयत्नः ………. , ……… विधेयः।
(ख) प्रयत्नेन जनानां ……. , सिद्धिः …….. जनानां …….. वृद्धि, प्रयत्नेन ……. युद्धे …….. स्यात्, …….. विधेयः, प्रयत्नः ……..।
उत्तर:
(क) धीरा, तरन्ति, गिरीन्, प्रयत्नेन, उत्पतन्ति, विधेयः, प्रयत्नः।
(ख) कार्येषु, प्रयत्नेन, सद्बुद्धिः, जनानां, जयः, प्रयत्नाः, विधेयः।

प्रयत्नो विधेयः हिन्दी अनुवाद

Sanskrit Class 7 Ch 6 MP Board रविः :
श्याम! एषा अतिगभीरा नदी। नद्याम् अपारं जलम् अस्ति मम च भ्राता मोहनः तरति।

श्यामः :
नद्यां मोहनः कथं तरति ? तरणं तु अतिकठिनम्। सः अपारे जले कथं न मज्जति?

रविः :
त्वम् उचितं वदसि यत् तरणम् अतिकठिनं, किन्तु मोहनः तरणस्य प्रयत्नं करोति अतः सः न मज्जति। प्रयत्ने कृते कठिनकार्याणि अपि सरलानि भवन्ति। यथा-

  • प्रयत्नेन एव महाभारतयुद्धे पाण्डवाः जयं प्राप्तवन्तः।
  • अस्माकं भारतदेशः प्रयत्नेन एव परतन्त्रतापाशात् मुक्तः।
  • प्रयत्नेन एव जनाः उत्तुङ्गपर्वतेषु अपि आरोहणं
  • कुर्वन्ति। – प्रयत्नेन एव छात्रः परीक्षायाम् अधिकान् अङ्कान् प्राप्नोति।
  • अतः अस्माभिः पुनः पुनः प्रयत्नः विधेयः। प्रत्यनेन जनाः किं-किं कुर्वन्ति अद्य वयं पाठे पठामः।

अनुवाद :
रवि-श्याम! यह नदी बहुत गहरी है। नदी में अपार जल है और मेरा भाई मोहन तैरता है।

श्याम :
नदी में मोहन कैसे तैरता है? तैरना तो बहुत कठिन है। वह अपार जल में क्यों नहीं डूबता है?

रवि :
तुम उचित कहते हो कि तैरना बहुत कठिन होता है। किन्तु मोहन तैरने का प्रयत्न करता है, अत: वह नहीं डूबता है। प्रयत्न करने पर कठिन कार्य भी सरल हो जाते हैं। जैसे-

  • प्रयत्न करने से ही महाभारत युद्ध में पाण्डवों ने विजय प्राप्त की।
  • हमारा भारत देश प्रयत्न करने से ही पराधीनता के बन्धन से मुक्त हुआ।
  • प्रयत्न से ही लोग ऊँचे पर्वतों पर भी चढ़ाई करते हैं।
  • प्रयत्न से ही छात्र परीक्षा में अधिक अंक प्राप्त करता हैं।
  • इसलिए हमें बार-बार प्रयत्न करना चाहिए। प्रयत्न करने से लोग क्या-क्या करते हैं-आज हम इस पाठ में पढ़ेंगे।

प्रयत्नेन कार्येषु सिद्धिर्जनानां,
प्रयत्नेन सद्बुद्धिवृद्धिर्जनानां।
प्रयत्नेन युद्धे जयः स्याज्जनानां,
प्रयत्नो विधेयः प्रयत्नो विधेयः॥१॥

अनुवाद :
मनुष्यों को प्रयत्न करने से कार्यों में सफलता मिलती है। प्रयत्न करने से मनुष्यों में सद्बुद्धि की वृद्धि होती है। प्रयत्न करने से मनुष्यों को युद्ध में विजय प्राप्त होती है। (इसलिए) प्रयत्न करना चाहिए, प्रयत्न करना चाहिए।

प्रयत्नेन धीराः समुद्रं तरन्ति,
प्रयत्नेन वीराः गिरीन् लङ्घयन्ति।
प्रयत्नेन विज्ञाः वियत्युत्पतन्ति,
प्रयत्नो विधेयः प्रयत्नो विधेयः॥२॥

अनुवाद :
प्रयत्न करने से धैर्यशाली व्यक्ति समुद्र को तैरकर पार कर जाते हैं। प्रयत्न करने से वीर पुरुष पर्वतों को भी लाँघ जाते हैं। प्रयत्नपूर्वक विशेष ज्ञान वाले व्यक्ति आकाश में उड़ते हैं। इसलिए प्रयत्न करना चाहिए, प्रयत्न करना चाहिए।

कठोरः प्रयत्नात् मृदुत्वं प्रयाति,
प्रयत्नादसाध्यं भवत्येव साध्यम्।
प्रयत्नादयोग्याः सुयोग्या भवन्ति,
प्रयत्नो विधेयः प्रयत्नो विधेयः॥३॥

अनुवाद :
कठोर प्रयत्न करने से मनुष्य कोमलता को प्राप्त हो जाता है। प्रयत्न करने से असाध्य भी साध्य हो जाता है। प्रयत्न करने से अयोग्य व्यक्ति भी योग्य हो जाते हैं। इसलिए प्रयत्न करना चाहिए, प्रयत्न करना चाहिए।

प्रयत्नेन मुक्तिं श्रिताः भारतीयाः,
प्रयत्नेन ऋद्धिं गताः भारतीयाः।
प्रयत्लेन विश्वप्रियाः भारतीयाः,
प्रयत्नो विधेयः प्रयत्नो विधेयः॥४॥

अनुवाद :
प्रयत्न करने से भारतीय लोग मुक्ति से युक्त हो जाते हैं। प्रयत्न करने से भारतीयों ने ऋद्धि (वैभव) को प्राप्त किया। प्रयत्न करने से भारतीय विश्व में प्रिय बन गये। इसलिए प्रयत्न करना चाहिए, प्रयत्न करना चाहिए।

प्रयत्नो विधेयः शब्दाथा:

मज्जति = डूबता है। विधेयः = करना चाहिए। धीराः = धैर्यशाली लोग। विज्ञाः = बुद्धिमान लोग। वियति = आकाश में। मृदुत्वं = कोमलता। असाध्यम् = कठिन। सिद्धिम् = सम्पन्नता को। ऋद्धिम् = वैभव को। सद्बुद्धिवृद्धि = अच्छी बुद्धि की वृद्धि। लङ्घयन्ति = पार कर जाते हैं। उत्प्रतन्ति = उड़ते हैं। प्रयाति = प्राप्त हो जाता है। परतन्त्रतापाशात् = पराधीनता के बन्धन से। उत्तुङ्गपर्वतेषु = ऊँचे पर्वतों पर। स्यात् = होती है।

MP Board Class 7th Sanskrit Solutions

MP Board Class 8th Sanskrit Solutions Chapter 19 प्रियदर्शिनी इन्दिरा

MP Board Class 8th Sanskrit Solutions Surbhi Chapter 19 प्रियदर्शिनी इन्दिरा

MP Board Class 8th Sanskrit Chapter 19 अभ्यासः

Class 8 Sanskrit Chapter 19 MP Board प्रश्न 1.
एकपदेन उत्तरं लिखत(एक शब्द में उत्तर लिखो-)
(क) इन्दिरायाः भाषणानि कीदृशानि आसन्? (इन्दिरा के भाषण कैसे थे?)
उत्तर:
ऊर्जस्वलानि। (तेजस्वी)

(ख) इन्दिरायाः उच्चशिक्षा कुत्र अभवत्? (इन्दिरा की उच्च शिक्षा कहाँ हुई?)
उत्तर:
ऑक्सफोर्ड विश्वविद्यालये। (ऑक्सफोर्ड विश्वविद्यालय में।)

(ग) नेहरूः स्वपुत्रीं कथं द्रष्टुमैच्छत्? (नेहरू अपनी पुत्री को कैसा देखना चाहते हैं?)
उत्तर:
ऊर्जस्वलाम्। (तेजस्वी)

(घ) इन्दिरा कुत्र भारतीयसेनाम् प्रेषितवती? (इन्दिरा ने कहाँ भारतीय सेना को भेजा?)
उत्तर:
बङ्ग्लादेशम्। (बंग्लादेश में)

(ङ) इन्दिरायाः का उद्घोषणा आसीत्? (इन्दिरा की क्या उद्घोषणा थी?)
उत्तर:
दरिद्रतामपनय। (दरिद्रता हटाओ)

Sanskrit Class 8 Chapter 19 MP Board प्रश्न 2.
एकवाक्येन उत्तरं लिखत(एक वाक्य में उत्तर लिखो-)
(क) दिवङ्गतापि का अस्माकं कृते वर्तमानेवास्ति? (मरकर भी कौन हमारे लिए उपस्थित ही है?)
उत्तर:
दिवङ्गतापि इन्दिरा अस्माकं कृते वर्तमानेवास्ति। (मरकर भी इन्दिरा हमारे लिए उपस्थित ही है।)

(ख) इन्दिरायाः जन्म कदा अभवत्? इन्दिरा का जन्म कब हुआ?)
उत्तर:
इन्दिरायाः जन्म १९१७ तमे ख्रिस्ताब्दे अभवत् (इन्दिरा का जन्म 1917 वीं ईस्वी में हुआ।)

(ग) इन्दिरायाः जन्म कुत्र अभवत्? (इन्दिरा का जन्म कहाँ हुआ?)
उत्तर:
इन्दिरायाः जन्म प्रयागनगरे अभवत्। (इन्दिरा का जन्म प्रयाग नगर में हुआ।)

(घ) जवाहरलालनेहरुः किं कुर्वन् कारागारमगच्छत्? (जवाहरलाल नेहरू क्या करते हुए जेल गये?)
उत्तर:
जवाहरलालनेहरुः स्वतन्त्रतायै आन्दोलनं कुर्वन् कारागारमगच्छत्। (जवाहरलाल नेहरू स्वतन्त्रता के लिए आन्दोलन करते हुए जेल गए।)

(ङ) इन्दिरायाः समाधिस्थलं केन नाम्ना प्रसिद्धमस्ति? (इन्दिरा का समाधि स्थल किस नाम से प्रसिद्ध है?)
उत्तर:
इन्दिरायाः समाधिस्थलं ‘शक्तिस्थलम्’ इति नाम्ना प्रसिद्धमस्ति। (इन्दिरा का समाधिस्थल ‘शक्तिस्थल’ नाम से प्रसिद्ध है।)

Mp Board Class 8 Sanskrit Solution Chapter 19 प्रश्न 3.
रिक्तस्थानानि पूरयत(रिक्त स्थान भरो-)
(क) ………. इन्दिरायाः पिता आसीत्।
(ख) सर्वे ………. तत्रागच्छन्।
(ग) तया ……….. नाम्नी बालकानां सङ्घटना कृता।
(घ) ……… सहयोगेन बङ्ग्लादेशः स्वतन्त्रः जातः।
(ङ) सर्वे जनाः तां ……… इति रूपेण स्मरन्ति।
उत्तर:
(क) जवाहरलाल नेहरु
(ख) राष्ट्रियाः नेतारः
(ग) वानरसेना इति
(घ) भारतस्य
(ङ) शान्तिदूती।

Mp Board Class 8 Sanskrit Chapter 19 प्रश्न 4.
नामोल्लेखपूर्वकं समासविग्रहं कुरुत(नाम का उल्लेख करते हुए समास-विग्रह करो-)
(क) पुष्पमालाः
(ख) देशभक्तेः
(ग) सीमानिर्धारणम्
(घ) वीरगतिम्।
उत्तर:
Class 8 Sanskrit Chapter 19 MP Board

Class 8 Sanskrit Chapter 19 Mp Board प्रश्न 5.
नामोल्लेखपूर्वकं सन्धिविच्छेदं कुरुत(नाम का उल्लेख करते हुए सन्धि-विच्छेद करो-)
(क) दर्शनमनेकधा
(ख) स्वतन्त्रतान्दोलनस्य
(ग) तत्रागच्छन्
(घ) दरिद्रतामपनय
(ङ) द्रष्टुमैच्छत्।
उत्तर:
Sanskrit Class 8 Chapter 19 MP Board

Mp Board 8th Class Sanskrit  प्रश्न 6.
अधोलिखितशब्दान् आधृत्य वाक्यरचनां कुरुत (नीचे लिखे शब्दों के आधार पर वाक्य रचना करो-)
(क) कृते
(ख) समाप्य
(ग) कुर्वन्
(घ) सह
(ङ) अङ्गीकृत्य।
उत्तर:
Mp Board Class 8 Sanskrit Solution Chapter 19

8 वीं कक्षा संस्कृत गाइड 2021 MP Board प्रश्न 7.
उचितं योजयत(उचित को जोड़ो-)
Mp Board Class 8 Sanskrit Chapter 19
उत्तर:
(क) → (v)
(ख) → (iii)
(ग) → (iv)
(घ) → (ii)
(ङ) → (i)

Surbhi Sanskrit Book Class 8 Pdf Download MP Board प्रश्न 8.
भिन्नप्रकृतिकं शब्दं चिनुत (भिन्न प्रकृति के शब्द को चुनो-)
(क) इन्दिरा, पार्वती, अहिल्या, लक्ष्मीबाई।
(ख) अक्टूबरमासः, अगस्तमासः, चैत्रमासः, जूनमासः।
(ग) जलसेना, वानरसेना, थलसेना, वायुसेना।
(घ) प्रधानमन्त्री, वित्तमन्त्री, रक्षामन्त्री, महामन्त्री।
उत्तर:
(क) पार्वती
(ख) चैत्रमासः
(ग) वानरसेना
(घ) महामन्त्री।

प्रियदर्शिनी इन्दिरा हिन्दी अनुवाद

अस्माभिः प्रियदर्शिन्याः इन्दरायाः दर्शनमनेकधा कृतम्। कोटिजनैः तस्या ऊर्जस्वलानि भाषणानि श्रुतानि। सहस्रैः बालकैः तस्याः हस्ताभ्यां सस्नेहं प्रदत्ताः पुष्पमाला: गृहीता अतः दिवङ्गतापि सा देवी अस्माकं कृते वर्तमानेवास्ति।

तस्याः जन्म प्रयागनगरे १९१७ तमे ख्रिस्ताब्दे आनन्दभवनामके पैतृकगृहे अभवत्। जवाहरलाल नेहरुः तस्याः पिता कमलानेहरु च जननी अभवत्।

अनुवाद :
हम सबके द्वारा सुन्दर इन्दिरा का दर्शन कई बार किया गया। करोड़ों लोगों के द्वारा उनके तेजस्वी भाषणों को सुना गया। हजारों बालकों के द्वारा उनके हाथों से प्रेमपूर्वक दी गयी पुष्पमाला ली गई, इसलिए मरकर भी वह देवी हमारे लिए उपस्थित ही है।

उनका जन्म प्रयाग (इलाहाबाद) नगर में 1917 ईस्वी में आनन्दभवन नामक पैतृक घर पर हुआ। जवाहरलाल नेहरू उनके पिता और कमला नेहरू माता थीं।

इन्दिरायाः प्रारम्भिकी शिक्षा प्रयागे पूनानगरे चाभवत्। तेषु दिवसेषु आनन्दभवनं स्वतन्त्रतान्दोलनस्य केन्द्रमासीत्। सर्वे राष्ट्रियाः नेतारः तत्रागच्छन्। इन्दिरा तेभ्यः देशभक्तेः सङ्घर्षशीलतायाश्च संस्कारानगृह्णात्। प्राथमिकी शिक्षा समाप्य सा शान्तिनिकेतनमगच्छत्। तत्र गुरुदेवस्य रवीन्द्रनाथठाकुरस्य सान्निध्ये भारतीयसंस्कृतेः मानवप्रेम्णः च महतीं शिक्षाम् प्राप्नोत्। तस्याः उच्चशिक्षा इङ्ग्लैण्डदेशे आक्सफोर्डविश्वविद्यालये सम्पन्ना।

अनुवाद ;
इन्दिरा की प्रारम्भिक शिक्षा प्रयाग और पूना नगर में हुई। उन दिनों में आनन्दभवन स्वतन्त्रता आन्दोलन का केन्द्र था। सभी राष्ट्रीय नेता वहाँ आते थे। इन्दिरा ने उनसे देशभक्ति और संघर्षशीलता के संस्कारों को ग्रहण किया। प्राथमिक शिक्षा को समाप्त करके वह शान्ति निकेतन गयीं। वहाँ गुरुदेव रवीन्द्रनाथ ठाकुर के पास से भारतीय संस्कृति और मानव प्रेम की महान् शिक्षा प्राप्त की। उनकी उच्च शिक्षा इंग्लैण्ड देश में ऑक्सफोर्ड विश्वविद्यालय में सम्पन्न हुई।

जवाहरलालनेहरुः बहुधा स्वतन्त्रतायै आन्दोलनं कुर्वन् कारागारमगच्छत्। कारागारात् सः इन्दिरायै अनेकपत्राणि प्रेषितवान्। एतानि पत्रााणि ‘पुत्र्याः कृते पितुः पत्राणि’ इति नाम्ना पुस्तकरूपेण प्रसिद्धानि सन्ति। तेभ्यः ज्ञायते यत् नेहरुः स्वपुत्रीं विदुषीं दूरदर्शिनी ऊर्जस्वलां च द्रष्टुमैच्छत्।

अनुवाद :
जवाहरलाल नेहरू बहुत बार स्वतन्त्रता के लिए आन्दोलन करते हुए जेल गये। जेल से उन्होंने इन्दिरा के लिए अनेक पत्र भेजे। ये पत्र ‘पुत्री के लिए पिता के पत्र’ इस नाम से पुस्तक के रूप में प्रसिद्ध हैं। उनसे जाना जाता है कि नेहरू अपनी पुत्री को विदुषी, दूरदर्शिनी और तेजस्वी देखना चाहते थे।

इन्दिरायाः एते गुणाः प्रसिद्धाः सन्ति। स्वमातु: कमलानेहरुतः सत्यस्य शुद्धान्तःकरणस्य च शिक्षामलभत्। बाल्यकाले एव तया ‘वानरसेना’ इति नाम्नी बालकानां सङ्घटना कता। – तस्याः विवाहः फिरोजगान्धिना सहाभवत्। तौ दम्पती स्वाधीनतान्दोलने कारागारं गतवन्तौ। १९६० तमे खिस्ताब्दे तस्याः पतिः स्वर्गमगच्छत्।

अनुवाद :
इन्दिरा के ये गुण प्रसिद्ध है। अपनी माता कमला नेहरू से सत्य और शुद्ध अन्त:करण (मन) की शिक्षा को प्राप्त किया। बाल्यकाल में ही उनके द्वारा ‘वानरसेना’ नाम से बच्चों का संघटन किया गया।

उनका विवाह फिरोज गान्धी के साथ हुआ। वे दोनों पति-पत्नी स्वाधीनता के आन्दोलन में जेल गये। 1960 वीं ईस्वी में उनके पति (फिरोज गान्धी) स्वर्गवासी हो गये।

लालबहादुरशास्त्रिणः मृत्योरनतरं सा भारतस्य। ‘प्रधानमन्त्री’ अभवत्। तत्पदमङ्गीकृत्य सा देशसेवायां। सर्वभावेन संलग्ना जाता। अधिकोषाणां राष्ट्रियकरणम् भूतपूर्वराज्ञां विशिष्टाधिकाराणां समाप्तिः तेषां नैजधनदानस्य (प्रिवीपस) अन्तः भूमिसम्पत्योः सीमानिर्धारणं चेत्यादीनि कार्याणि तस्याः महत्त्वम् उद्भासयन्ति। बङ्ग्लादेशस्य मुक्तिसङ्ग्रामे भारतीयसेनां प्रेष्य तया अपूर्वसाहसे कृतम्। भारतस्य सहयोगेनैव बङ्गलादेशः स्वतन्त्रः जातः। सा जीवनपर्यन्तम् भारतस्य कल्याणाय निर्धानानामुत्थानाय च प्रयत्नमकरोत्। दरिद्रतामपनय इति तस्या उद्घोषणासीत्।

अनुवाद :
लालबहादुर शास्त्री की मृत्यु के बाद वह भारत की ‘प्रधानमन्त्री’ हुईं। उस पद को स्वीकार करके वह देश सेवा में पूर्णरूप से संलग्न हो गयीं। बैंकों का राष्ट्रीयकरण, भूतपूर्व राजाओं के विशिष्ट अधिकारों की समाप्ति, उनके अपने धन के दान का (प्रिवीपर्स) अन्त, भूमि और सम्पत्ति की सीमा का निर्धारण इत्यादि कार्य उनके महत्व को प्रकट करते हैं। बांग्लादेश की मुक्ति संग्राम में भारतीय सेना को भेजकर उनके द्वारा अपूर्व साहस किया गया। भारत के सहयोग से ही बांग्लादेश स्वतन्त्र हुआ। उन्होंने जीवन पर्यन्त भारत के कल्याण और निर्धनों के उत्थान के लिए प्रयत्न किया। दरिद्रता को दूर हटाओ’ यह उनका नारा था।

१९८४ तमस्य ख्रिस्ताब्दस्य अक्टूबरमासे एकत्रिंशदिनाङ्के सा एकस्य स्वरक्षकस्यैव गोलिकाभिः वीरगतिम् प्राप्नोत्।

सर्वे जनाः तां ‘शान्तिदूती’ इति रूपेण श्रद्धया स्मरन्ति। तस्याः समाधिस्थलं शक्तिस्थलमिति नाम्ना प्रसिद्धमस्ति।

अनुवाद :
1984 वी ईस्वी की अक्टूबर महीने की इक्तीस दिनांक की वह अपने एक रक्षक की ही.गोलियों से वीरगति को प्राप्त हुईं।

सभी लोग उनको ‘शान्तिदूती’ के रूप में श्रद्धा से याद करते हैं। उनका समाधि स्थल ‘शक्तिस्थल’ नाम से प्रसिद्ध है।

प्रियदर्शिनी इन्दिरा शब्दार्थाः

अनेकधा = कई बार। अधिकोषः = बैंक। कोटिजनैः = करोड़ों लोगों के द्वारा। सान्निध्ये = पास में। उर्जस्वलानि = तेजस्वी/तेजपूर्ण। उद्भासयन्ति = प्रगट करते हैं। सर्वभावेन = पूर्णरूप से। अपनय = दूर करो/हटाओ। अङ्गीकृत्य = स्वीकार करके। अवहन् ले जाते थे। अतीताः= भूतकाल की। उद्घोषणा = नारा।

MP Board Class 8th Sanskrit Solutions

MP Board Class 12th Hindi Swati Solutions गद्य Chapter 4 अध्यक्ष महोदय

MP Board Class 12th Hindi Swati Solutions गद्य Chapter 4 अध्यक्ष महोदय (व्यंग्य, शरद जोशी)

अध्यक्ष महोदय अभ्यास

अध्यक्ष महोदय अति लघु उत्तरीय प्रश्न

Adhyaksh Mahoday MP Board Class 12th Hindi प्रश्न 1.
पेशेवर अध्यक्ष किस विशेष प्रकार के वस्त्र पहनते हैं?
उत्तर:
पेशेवर अध्यक्ष शेरवानी नाम का विशेष वस्त्र पहनते हैं।

अध्यक्ष महोदय MP Board Class 12th Hindi प्रश्न 2.
अध्यक्ष को गम्भीर किस्म का प्राणी क्यों कहा गया है? (2015, 17)
उत्तर:
गम्भीर किस्म का प्राणी ही सभा में मनहूस सूरत बना कर बैठता है और अच्छा अध्यक्ष होने की पहली शर्त है-गम्भीर-मनहूस सूरत।

Adhyaksh Mahoday Summary In Hindi MP Board प्रश्न 3.
रेडीमेड अध्यक्ष किसे कहा जाता है?
उत्तर:
रेडीमेड अध्यक्ष वह है जो सब विषयों पर एक ही अन्दाज से, एक ही बात करता है और उसे सब में एक-सा आनन्द आने लगता है।

प्रश्न 4.
पुराने अध्यक्ष की शेरवानियों में से किस प्रकार की गन्ध आती है?
उत्तर:
पुराने अध्यक्ष की शेरवानियों में से एक विशेष प्रकार की गन्ध आती है और वह है-अध्यक्षता की गन्ध।

प्रश्न 5.
अध्यक्षता करने को मर्ज क्यों कहा है?
उत्तर:
अध्यक्षता करने को मर्ज इसलिए कहा गया है, क्योंकि यह शौक एक बार लग जाने पर हमेशा के लिए लग जाता है।

अध्यक्ष महोदय लघु उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 1.
अध्यक्ष के बारे में सामान्य धारणाएँ क्या हैं?
उत्तर:
अध्यक्ष के बारे में सामान्य धारणाएँ हैं कि अध्यक्ष पैदा होता है, गम्भीर व मनहूस किस्म का होता है, उसके अन्दर अध्यक्षता का मर्ज होता है, वह पेट से आता है, रेडीमेड होता है, प्रमुख वक्ता से असहमत होते हुए उसकी प्रशंसा करता है और अन्त में मुस्कराता है और अध्यक्षता करने के बाद सुख की नींद सोता है।

प्रश्न 2.
अध्यक्ष के देर से आने के कारणों पर प्रकाश डालिए।
उत्तर:
अध्यक्ष की एक विशेषता होती है कि वह देर से आता है,क्योंकि वह एक अत्यन्त व्यस्त प्राणी होता है। वह अपने महत्व को दिखाना चाहता है। वक्ता का भाषण एक खुले माल की बिक्री की दुकान की तरह होता है, जिससे श्रोता रूपी ग्राहक देर से आते हैं तो अध्यक्ष बिना श्रोता के क्या करेगा, अतः वह भी देर से आता है।

प्रश्न 3.
अध्यक्ष बनने वाले कितनी तरह से अध्यक्ष बनते हैं? स्पष्ट कीजिए।
उत्तर:
अध्यक्ष बनने वाले कई तरह से अध्यक्ष बनते हैं। कुछ चौंककर अध्यक्ष बनते हैं, कुछ सहज अध्यक्ष बन जाते हैं, कुछ दूल्हे की तरह लजाते-मुस्कराते अध्यक्ष बनते हैं। कुछ यों अध्यक्ष बनते हैं, जैसे शहीद होने जा रहे हों। कुछ हेडमास्टर की अदा से अध्यक्ष बनते हैं।

प्रश्न 4.
अध्यक्षीय दायित्व का निर्वहन करने के पश्चात् अध्यक्ष घर जाकर सुख की नींद क्यों सोता है?
उत्तर:
अध्यक्षता करने के बाद अध्यक्ष सुख की नींद सोता है। नये-नये अध्यक्ष को घर जाकर पत्नी को अध्यक्षता काल के विषय में दोहराते हुए सुख प्राप्त होता है। थोड़े समय बाद पत्नी भी सामान्य श्रोताओं के समान चुप रहने लगती है,तो अध्यक्ष देर रात तक अपने भाषण पर खुद मोहित हो सो जाते हैं। उस उम्र तक उसकी बौद्धिक नपुंसकता ‘अहं’ में बदल जाती है। वह सोचता है रात के बाद सुबह होगी फिर कोई बुलाने आयेगा। इसी कल्पना में वह सुख से सो जाता है।

प्रश्न 5.
अच्छे अध्यक्ष के मस्तिष्क की हालत कैसी होती है?
उत्तर:
अच्छे अध्यक्ष के मस्तिष्क की हालत उस नौ रतन चटनी की तरह हो जाती है जिसके काजू और किशमिश का स्वाद एक हो जाता है। सब में एक-सा मजा आने लगता है।

अध्यक्ष महोदय दीर्घ उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 1.
अध्यक्षता करते समय अध्यक्ष की गतिविधियों पर प्रकाश डालिए।
उत्तर:
अध्यक्षता करते समय अध्यक्ष की गतिविधियाँ बड़ी विचित्र होती हैं। अध्यक्षता करता अध्यक्ष हर पाँचवें मिनट पर मुस्कराता है, जबकि उसके मुस्कराने का कोई कारण नहीं होता। हर ढाई मिनट पर वह जनता की तरफ देखता है। हर एक मिनट बाद सामने की पंक्ति में बैठे लोगों को और हर दो मिनट बाद महिलाओं को और बीच-बीच में छत की तरफ देखता है। ठड्डी पर उँगलियाँ फेर सोचता है कि शेव कैसी बनी है? लगातार बदन खुजलाता है। बार-बार टोपी सिर पर रखता और उतारता है। वक्ताओं को निरन्तर आश्चर्य से देखते हुए दिखावा करता है कि वह ध्यानपूर्वक वक्ता की बातों को सुनकर समझ रहा है। वक्ता तर्क-वितर्क क्यों कर रहा है? गर्दन हिलाकर वक्ता की बात का समर्थन करता भी है और नहीं भी। कभी-कभी अध्यक्ष सम्पूर्ण सभा को देखकर मुस्कराता है कि इस जनसमूह का वह चालक है। अपने पद पर अहम् भी करता है। अधिकतर अध्यक्ष घुमा-फिरा कर बातें कहते हैं और मूल बिन्दु पर कभी नहीं आते। अपनी वक्ता से असहमति प्रकट करने पर भी सहमत हो जाता है। लेखक ने अध्यक्ष की गतिविधियों पर आदि से अन्त तक व्यंग्य किया है।

प्रश्न 2.
अच्छे अध्यक्ष की विशेषताएँ बताइए। (2010)
उत्तर:
व्यंग्यकार शरद जोशी ने अपने निबन्ध अध्यक्ष महोदय’ में अच्छे अध्यक्ष की अनेक विशेषताएँ बताई हैं, जो निम्नलिखित हैं-

  1. अच्छे अध्यक्ष होने की पहली शर्त है-मनहूस होना। एक अच्छा अध्यक्ष मनहूस होता है बल्कि कहना होगा कि मनहूस ही अच्छा अध्यक्ष होता है।
  2. अध्यक्ष गम्भीर किस्म का प्राणी होता है या उसमें यह भ्रम बनाये रखने की शक्ति होती है कि वह गम्भीर है।
  3. अध्यक्ष एक प्रकार का रोगी होता है, उसे रोग होता है। भीड से अलग बैठने अपने को श्रोता दिखाने, तकल्लुफ प्रदर्शन करने और अन्त में माइक के साथ फिट होने का।
  4. अध्यक्ष पद की घोषणा करने पर कभी चौंकता है,कभी दूल्हे की तरह लजाता है.तो कभी शहीदों की तरह बहादुरी दिखाता है। साथ ही, कभी-कभी हेड-मास्टर की तरह अदा भी दिखाता है।
  5. अध्यक्ष के स्थान पर बैठकर विभिन्न मुख मुद्राएँ बनाता रहता है।
  6. अध्यक्ष देर से आता है, क्योंकि वह अति व्यस्त प्राणी है।
  7. उसका अध्यक्षीय भाषण स्पष्ट न होकर गोल-मोल होता है। विषय से इतर जाने क्या-क्या कहता रहता है।
  8. अच्छे अध्यक्ष रेडीमेड होते हैं तथा सर्वत्र होने के कारण एक ही अन्दाज में एक ही बात कहते रहते हैं।
  9. अच्छे अध्यक्ष के मस्तिष्क की हालत नौ रतन चटनी जैसी होती है, जिसमें विभिन्न विचार एक-सा आनन्द देते हैं।
  10. अच्छा अध्यक्ष प्रमुख वक्ता से असहमत होता है। बाद में वक्ता की अस्पष्ट रूप से प्रशंसा करके उससे सहमत हो जाता है।
  11. सभा के अन्त में गम्भीरता का नकाब उतार कर मुस्कराते हुए घर जाकर सुख की नींद सो जाता है।

प्रश्न 3.
“अच्छे अध्यक्ष प्रमुख वक्ता से असहमत होते हैं” कारण सहित स ए कीजिए।
उत्तर:
अच्छा अध्यक्ष प्रमुख वक्ता से असहमत होता है। जैसे वक्ता कहता है कि इस समय रात है तो अध्यक्ष महोदय गोल-मोल बातों से सिद्ध करना चाहता है कि इस समय रात नहीं है। यह सच है कि सूर्य डूब गया है और अन्धकार है, पर यही पर्याप्त आधार नहीं कि हम कह दें कि यह रात है। अध्यक्ष तुरन्त विषय को बदल कर देश की स्थिति से जोड़ देता है। वक्ता के भाषण को ओजस्वी बताकर सामाजिक समस्याओं से जोड़ देता है। अन्त में वक्ता को धन्यवाद देता है। उसके भाषण की प्रशंसा करता है। अपने को अध्यक्ष बनाने के लिए कृतज्ञता प्रकट करता है। अब रात काफी हो गई है,कह कर भाषण समाप्त कर देता है।

एक ओर तो वक्ता के कथन ‘इस समय रात है’ को काट रहा है दूसरी ओर स्वयं स्वीकार कर रहा कि ‘अब रात काफी हो गई है।’ इस प्रकार, अध्यक्ष प्रमुख वक्ता की बात से असहमत होने पर भी पूर्ण सहमत है। महज वक्ता का विरोध करना या उससे असहमत होना उसकी आदत होती है। उसके लिए एक ख्याति की बात बन जाती है। अन्त में स्वयं उसे मान लेता है। इस प्रकार,अध्यक्ष असहमत होने और सहमत होने में भेद नहीं कर पाता है। यह उसकी बौद्धिक अक्षमता का प्रतीक तथा विसंगतियों का प्रतीक है। यह विरोध वह अपनी प्रतिष्ठा को बढ़ाने के लिए करता है,जबकि यह विरोध केवल शाब्दिक छल मात्र रहता है। अध्यक्ष की वक्तव्य क्षमता की कलई खोल देता है।

प्रश्न 4.
भाव स्पष्ट कीजिए
(1) “नरगिस जब बेनूरी पर काफी रो लेती है, तब आप शहर में जन्म लेते हैं।”
(2) “पचास-सौ वर्षों बाद तो अध्यक्षता इतनी विकसित हो जाएगी कि खुद माइक वाला अपने साथ अध्यक्ष लाएगा और मंच पर फिट कर देगा।”
(3) “लोग मरते जाते हैं और अध्यक्ष जीवित रह शोक-सभाओं में बोलता रहता है।”
उत्तर:
उपरोक्त गद्यांशों की व्याख्या पाठ के ‘व्याख्या हेतु गद्यांश’ भाग में देखिए।

प्रश्न 5.
‘अध्यक्ष महोदय’ शरद जोशी का राजनीतिक और सामाजिक व्यंग्य है इस विषय पर अपने विचार लिखिए।
उत्तर:
आधुनिक युग के प्रसिद्ध हास्य-व्यंग्य लेखक श्री शरद जोशी ने ‘अध्यक्ष महोदय’ व्यंग्य निबन्ध में राजनैतिक और सामाजिक विसंगतियों पर चुटीला व्यंग्य किया है। दोनों प्रकार की सभाओं व गोष्ठियों में अध्यक्ष का होना एक अनिवार्य औपचारिकता है। सभा में अध्यक्ष अवश्य होगा, उसका विशेष पहनावा व मुख मुद्रा होगी। वह गंभीर व मनहूस होगा। वह सर्वज्ञ होगा, व्यर्थ के अहम् को पालने वाला होगा। राजनैतिक नेता भी अध्यक्ष की तरह गम्भीर,मनहूस, विरोध व सहमति में अन्तर करने में असमर्थ,गोल-मोल बात कहने वाले, जनता के साथ छल करने वाले होते हैं। जनता के सामने स्वयं को श्रेष्ठ प्रदर्शित करना उनका प्रमुख कर्त्तव्य होता है। नेता अपने व्यर्थ के अहम् को पाते रहते हैं। सभाओं में देर से आना, अन्त में सबको धन्यवाद देना। इन सब घटनाओं पर आद्योपांत व्यंग्य समाहित है। अतः यह निबन्ध राजनीतिक और सामाजिक व्यंग्य है,जो पाठक को कुछ सोचने के लिए मजबूर करता है।

अध्यक्ष महोदय भाषा अध्ययन

प्रश्न 1.
नीचे दिए शब्दों में से मूल शब्द, उपसर्ग और प्रत्यय अलग कीजिए
अध्यक्षता, अनुकरण, सम्माननीय, गम्भीरता, असामान्य, विदेशी।
उत्तर:
Adhyaksh Mahoday MP Board Class 12th Hindi

प्रश्न 2.
वाक्य शुद्ध कीजिए

  1. ग्राहक लापरवाह हो जाती है।
  2. केवल मात्र अध्यक्षता के लिए शेरवानी सिलवाते हैं।
  3. वह सप्रमाण सहित पत्र लेकर उपस्थित हो गया।
  4. गांधीजी का देश सदा आभारी रहेगा। (2010)
  5. आपका भवदीय। (2010)

उत्तर:

  1. ग्राहक लापरवाह हो जाता है।
  2. मात्र अध्यक्षता के लिए शेरवानी सिलवाते हैं।
  3. वह प्रमाण सहित पत्र लेकर उपस्थित हो गया।
  4. देश गाँधीजी का सदा आभारी रहेगा।
  5. भवदीय।

प्रश्न 3.
निम्नांकित शब्दों के विलोम शब्द लिखिए-
लाभ, विकसित,उपाय, मर्यादित, समस्या, पर्याप्त।
उत्तर:
हानि, अविकसित, निरुपाय, अमर्यादित, समाधान, अपर्याप्त।

प्रश्न 4.
निम्नलिखित वाक्यों को पढ़कर अर्थ के आधार पर वाक्य भेद लिखिए

  1. शायद आप परेशान हो जाएँ।
  2. क्या यही रात है?
  3. अध्यक्ष गम्भीर किस्म का प्राणी होता है।
  4. आप इस पर विचार करें।
  5. आएगा नहीं तो जाएगा कहाँ।
  6. वे अध्यक्षता करने नहीं जाते हैं।
  7. यदि सूर्य हमारे देश में पहले उगता है तो रात भी पहले यहाँ होती है।
  8. ईश्वर आपका भला करे।

उत्तर:

  1. संदेहवाचक वाक्य
  2. प्रश्नवाचक वाक्य
  3. विधानवाचक वाक्य
  4. आज्ञावाचक वाक्य
  5. संकेत वाचक वाक्य
  6. निषेधवाचक वाक्य
  7. संकेतवाचक वाक्य
  8. इच्छावाचक वाक्य।

प्रश्न 5.
निम्नलिखित वाक्यों को निर्देशानुसार बदलिए-
(1) अध्यक्ष महोदय मुस्कराने लगे। (प्रश्नवाचक में)
(2) अध्यक्ष सुख की नींद सोता है। (निषेधात्मक में)
(3) आप परेशान हो जाएँगे। (सन्देहवाचक में)
(4) अच्छे अध्यक्ष प्रमुख वक्ता से असहमत होते हैं। (संकेतवाचक में)
(5) कितना अद्भुत दृश्य है। (विस्मयवाचक में)
उत्तर:
(1) अध्यक्ष महोदय क्यों मुस्कराने लगे?
(2) अध्यक्ष सुख की नींद नहीं सोता है।
(3) शायद आप परेशान हो जायेंगे।

अध्यक्ष महोदय पाठ का सारांश

सुप्रसिद्ध हास्य-व्यंग्य लेखक ‘शरद जोशी’ द्वारा लिखित प्रस्तुत निबन्ध ‘अध्यक्ष महोदय में लेखक ने आधुनिक युग में आयोजित कार्यक्रमों में अध्यक्ष पद के ऊपर करारा व्यंग्य किया है।

प्रत्येक सभा या गोष्ठी में एक अध्यक्ष होता है। अध्यक्ष वह होता है, जिसके पास शेरवानी होती है. जिसमें अध्यक्षता की गन्ध आती है। अध्यक्ष पैदा होता है। वह लम्बे समय तक चलता है। वह गम्भीर होने का नाटक करता है। अच्छे अध्यक्ष की पहचान होती है कि वह मनहूस होता है। अध्यक्षता एक प्रकार का रोग है, जो लग जाये तो जीवन-भर चलता रहता है। सभा में माइक के समान अध्यक्ष भी फिट किये जाते हैं। अध्यक्ष अनेक प्रकार के बनते हैं, जैसे-चौंककर,दूल्हे की तरह लजाकर, शहीद की तरह शहीद होकर या हैडमास्टर की सी अदाएँ दिखाकर। गोष्ठी के सम्पूर्ण काल में वे ऐसा प्रदर्शन करते हैं जैसे वह गोष्ठी व उपस्थित जनता के ध्यान देने की वस्तु हैं।

अध्यक्ष की सबसे बड़ी विशेषता होती है, देर से आना तथा अपनी व्यस्तता का प्रदर्शन करना। अच्छे अध्यक्ष रेडीमेड होते हैं,जो सब विषय पर खूब बोल सकते हैं। चाहे उनके भाषण में दो शब्द भी सारगर्भित न हों। अच्छे अध्यक्ष की एक और विशेषता होती है कि वह प्रमुख वक्ता से असहमत ही रहता है। असहमत होने के अनर्गल तर्क देकर अन्त में वक्ता से पूर्ण सहमत हो जाता है। उसे धन्यवाद देता है और सभा की कार्यवाही को समाप्त कर देता है। तत्पश्चात् गम्भीर मुस्कान के साथ अपने घर चला जाता है। वहाँ सुख की नींद सोता है। नया अध्यक्ष घर आकर अपनी पत्नी को सब बता देता है। कालान्तर में पत्नी इस सब की अभ्यस्त हो जाती है। तब अध्यक्ष महोदय अपने भाषण पर खुद मोहित होकर सो जाते हैं। अध्यक्ष एक व्यर्थ के ‘अहं’ को पाले रहता है।

इन सब घटनाओं में आरम्भ से लेकर अन्त तक व्यंग्य छिपा हुआ है। अध्यक्ष, वक्ता, आयोजनकर्ता और कार्यक्रम सब पर व्यंग्य है। इसी कारण सम्पूर्ण निबन्ध में रोचकता व उत्सुकता बनी रहती है। भाषा उर्दू शब्दावली व उदाहरणों से भरपूर है।

अध्यक्ष महोदय कठिन शब्दार्थ

साइज = आकार। पेशेवर = व्यवसायी। बेनूरी = बदसूरती। मनहूस = अशुभ। मर्ज = रोग। महज = केवल। श्रोता = सुनने वाला। तकल्लुफ = परहेज। प्रदर्शन = दिखावा। वजह = कारण। निरन्तर = लगातार। तय = निश्चय। कंट्रोल = नियंत्रण। शख्स = व्यक्ति। अन्दाज = अनुमान। मजा = आनन्द। किस्म = प्रकार। परखा = जाँचा। सदैव = हमेशा। पर्याप्त = काफी। ओजस्वी = जोश से भरा। सारगर्भित = सारयुक्त।

अध्यक्ष महोदय संदर्भ-प्रसंग सहित व्याख्या

(1) नरगिस जब बेनूरी पर काफी रो लेती है तब आप शहर में जन्म लेते हैं।

सन्दर्भ :
प्रस्तुत पंक्ति हमारी पाठ्य-पुस्तक के ‘अध्यक्ष महोदय’ नामक पाठ से अवतरित है। इसके लेखक ‘शरद जोशी’ हैं।

प्रसंग :
लेखक का कथन है कि अध्यक्ष न बनाया जाता है और न चुना जाता है। वह तो दुःखों का अन्त होने पर जन्म लेता है।

व्याख्या :
दुःख रूपी रात का अन्त होने पर ही सुख रूपी सूर्य का जन्म होता है। नरगिस का पौधा देखने में खूबसूरत नहीं होता तथा लम्बे समय तक फूल रहित रहता है। बरसात के आने पर ही सुन्दर रंगों के फूल खिलते हैं। इसी प्रकार, जब माँ कष्ट सहती है और बदसूरत हो जाती है तब ही सन्तान रूपी पुष्प को जन्म देती है। इसी प्रकार, कष्ट व बदसूरती के परिणामस्वरूप अध्यक्ष का जन्म होता है।

विशेष :

  1. प्रयुक्त युक्ति में जीवन का कटु सत्य है।
  2. भाषा सरल उर्दू के शब्दों से भरपूर है।
  3. सूत्रात्मक शैली का प्रयोग है।

(2) लोग मरते जाते हैं और अध्यक्ष जीवित रह शोक-सभाओं में बोलता रहता है।

संदर्भ :
पूर्ववत्।

प्रसंग :
अध्यक्ष कोई व्यक्ति विशेष न होकर एक पद है जो सदैव जीवित रहेगा।

व्याख्या :
इस एक ही वाक्य में जोशी जी ने बताया है कि पीढ़ियाँ बदलती जाती हैं, लेकिन अध्यक्ष पद तो सभा व गोष्ठी को सजाता ही रहेगा। उस सुशोभित स्थान पर बैठकर भाषण देने वाला। इस प्रकार, एक खुशी की गोष्ठी भी शोक सभा में परिवर्तित हो जायेगी। जनता इस नीरसता का सामना करती रहेगी। अध्यक्ष पद की कुर्सी सदैव जीवित रहेगी।

विशेष :

  1. अध्यक्ष पद की निस्सारता का चित्र है।
  2. भाषा सरल,खड़ी बोली है।
  3. वाक्य रचना भावानुकूल है।
  4. चुटीला व्यंग्य है।

(3) हर सभा में जब तक माइक और अध्यक्ष फिट नहीं होते, सभा ठिठकी रहती है। माइक के सामने तक अध्यक्ष फिट किया जाना जरूरी है। पचास-सौ वर्षों बाद तो अध्यक्षता इतनी विकसित हो जायेगी कि खुद माइक वाला अपने साथ अध्यक्ष लायेगा और मंच पर फिट कर देगा।

सन्दर्भ :
पूर्ववत्।

प्रसंग :
हर सभा में जैसे प्रत्येक श्रोता तक वक्ता की आवाज को पहुँचाने के लिए माइक आवश्यक होता है, उसी प्रकार सभा के कार्यक्रम को आगे बढ़ाने के लिए अध्यक्ष अनिवार्य है। इन दोनों,माइक और अध्यक्ष के मंच पर आने पर ही सभा की पूर्णता मानी जाती है।

व्याख्या :
शरद जी सभा की कार्यविधि पर जायकेदार व्यंग्य करते हए कहते हैं कि हर सभा के दो अनिवार्य तत्व हैं,माइक व अध्यक्ष। दोनों के फिट होने पर सभा की गरिमा है। इनके बिना सभा झिझकी-झिझकी, रुकी-रुकी तथा गतिहीन प्रतीत होती है। जब अध्यक्ष के स्थान पर बैठे व्यक्ति के मुँह के सामने माइक रखा होता है तब ही लगता है कि गोष्ठी चल रही है। आज यह दोनों अलग-अलग हैं, परन्तु आने वाली अर्द्ध-शताब्दी के बाद जैसे निर्जीव माइक को बिजली वाला लाता है, उसी प्रकार, निर्जीव अध्यक्ष को भी माइक वाला लायेगा। जैसे माइक में से वही प्रतिध्वनि आती है, जो माइक के पीछे बैठा व्यक्ति बोलता है, ऐसे ही अध्यक्ष बोलेगा जैसा नेपथ्य में से उसे बताया जायेगा। दोनों के मंच पर आसीन होते ही सभा का संचालक मात्र ही वास्तविकता होगा।

विशेष :

  1. अध्यक्ष पद पर व्यंग्य है।
  2. भाषा सरल है,जिसमें अंग्रेजी शब्दों, जैसे-माइक व फिट का उपयोग किया गया है।
  3. देशज शब्द-ठिठकी तथा उर्दू शब्दों का प्रयोग है।

(4) उनके दिमाग की हालत उस नौ रतन चटनी की तरह हो जाती है जिसके काजू और किशमिश का स्वाद एक हो जाता है। सब में एक-सा मजा आने लगता है।

सन्दर्भ :
पूर्ववत्।

प्रसंग :
अच्छा अध्यक्ष वह है जो विषय की गहराई व उसके मूल भाव को समझे विना हर विषय पर एक ही प्रकार की गोल-गोल बात कहकर अपनी जिम्मेदारी की इतिश्री मान लेता है।

व्याख्या :
जोशी जी ने अध्यक्ष के ज्ञान भंडार व भाषण योग्यता पर व्यंग्य करते हुए कहा है कि जो अध्यक्ष सर्वज्ञ ईश्वर के समान ज्ञानवान बन कर हर विषय पर अपने भाषण को एक ही ईश्वर का रूप प्रदान कर देता है। जैसे ईश्वर एक है-उसका भाषण विषय अलग होने पर भी एक है। उस बात को स्पष्ट करने के लिये लेखक ने नौ रतन चटनी का उदाहरण दिया कि चटनी के पिस जाने पर उसमें पड़े सब मसालों का स्वाद अलग-अलग न आकर एक साथ विशिष्ट स्वाद आता है। अध्यक्ष का मस्तिष्क भी उस पिसी नौ रतन चटनी की तरह ही है, जिसमें कोई बात स्पष्ट नहीं है। हर बात का उत्तर एक है। चौराहे पर एक दाम पर मिलने वाले माल की तरह उसका भाषण होगा। हर भाषण का आनन्द भी एक-सा होगा। भगवान की एकरूपता का कितना सुन्दर उदाहरण होगा, उस अध्यक्ष का भाषण?

विशेष :

  1. अध्यक्ष के ज्ञान पर तीखा कटाक्ष।
  2. उदाहरण शैली के द्वारा भाषा को सरल बनाया गया है।
  3. उर्दू शब्दों का बाहुल्य तथा भाषा की बोधगम्यता है।

MP Board Class 12th Hindi Solutions

MP Board Class 6th General English Solutions Chapter 4 My Childhood

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MP Board Class 6th General English Solutions Chapter 4 My Childhood

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My Childhood Textual Exercise

Word Power
(शब्द सामर्थ्य)

Choose from the given words and fill in the blanks
(दिये गये शब्दों में से छाँटकर रिक्त स्थान भरो)
(impression, lie, reality, copied, power.)
Answer:
The life of Mahatma Gandhi left a lasting impression on my mind. Till today Gandhiji is a living reality for Indians. He is an example to be copied. He did not remember having told a lie during his school days. He taught us the power of nonviolence and non-cooperation.

Comprehension Questions
(बोध प्रश्न) :

Answer these questions
(इन प्रश्नों के उत्तर दीजिए )

My Childhood Class 6 MP Board Question 1.
What was the task that Mr. Giles set?
(व्हॉट वॉज़ द टास्क दैट मि. गाइल्स सैट?)
मि. गाइल्स ने क्या कार्य करने को दिया?
Answer:
Mr. Giles gave five words to write as spelling test.
(मि. गाइल्स गेव फाइव वर्ड्स टू राइट एज स्पैलिंग टेस्ट।)
मि. गाइल्स ने शब्द-ज्ञान देखने के लिए पाँच शब्द लिखने को दिए।

Class 6 English Chapter 4 My Childhood MP Board Question 2.
Why didn’t Gandhiji copy?
(व्हाय डिण्ट गाँधीजी कॉपी?)
गाँधीजी ने नकल क्यों नहीं की?
Answer:
Gandhiji did not copy because he did not want to use unfair means.
(गाँधीजी डिड नॉट कॉपी बिकॉज ही डिड नॉट वॉण्ट टू यूज अनफेयर मीन्स।)
गाँधीजी अनुचित साधनों का प्रयोग नहीं करना चाहते थे अतः उन्होंने नकल नहीं की।

Lesson 4 My Childhood MP Board Question 3.
What left a lasting impression on Gandhiji’s mind?
(व्हॉट लैफ्ट अलास्टिंग इम्प्रेशन ऑन गाँधीजी’ ज़माइण्ड?)
किस चीज ने गाँधीजी के दिमाग पर गहरा प्रभाव छोड़ा?
Answer:
The plays ‘Harish Chandra’ and ‘Shravana Kumar’ left a lasting impression on his mind.
(द प्लेज ‘हरिश्चन्द्र’ एण्ड ‘श्रवण कुमार’ लैफ्ट अ लास्टिंग इम्प्रेशन ऑन हिज माइण्ड।)
‘हरिश्चन्द्र’ और ‘श्रवण कुमार’ नाटकों ने उनके दिमाग पर गहरा प्रभाव छोड़ा।

Mp Board Class 6 English Solution Question 4.
What were the two only companions of Mahatma Gandhi?
(व्हॉट वर द टू ऑनली कम्पेनियन्स ऑफ महात्मा गाँधी?)
महात्मा गाँधी के दो साथी कौन थे?
Answer:
His books and his lessons were the two only companions of Mahatma Gandhi.
(हिज बुक्स एण्ड हिज लैसन्स वर द टू ऑनली कम्पेनियन्स ऑफ महात्मा गाँधी।)
उनकी पुस्तकें और उनके पाठ ही महात्मा गाँधी के साथी थे।

Mp Board Solution Class 6 English Question 5.
At what age Mahatma Gandhi left Porbandar for Rajkot?
(एट व्हॉट एज महात्मा गाँधी लेफ्ट पोरबन्दर फॉर राजकोट?)
महात्मा गाँधी ने किस उम्र में राजकोट के लिए पोरबन्दर छोड़ा?
Answer:
Mahatma Gandhi left Porbandar for Rajkot at the age of seven years.
(महात्मा गाँधी लेफ्ट पोरबन्दर फॉर राजकोट एट द एज ऑफ सेवन ईयर्स।)
महात्मा गाँधी ने 7 वर्ष की आयु में राजकोट के लिए पोरबन्दर छोड़ा।

Grammar in Use
(व्याकरण प्रयोग)

1. Make sentences of your own using the past tense of the verbs given
(दी गई क्रियाओं (Verbs) को भूतकाल (Past Tense) में प्रयोग कर अपने वाक्य बनाओ।)

Mp Board Class 6 English Chapter 4 Question 1.
cook, play, clean, wash.
Answer:

  1. My mother cooked food.
  2. We played in the field.
  3. The maid cleaned my room.
  4. I washed my clothes.

English Reader Class 6 MP Board Question 2.
make, write, ride, give.
Answer:

  1. He made a fool of you.
  2. I wrote a letter.
  3. I rode a bicycle.
  4. I gave you a pen.

Question 3.
try, fry, copy.
Answer:

  1. He tried his best.
  2. My mother fried peanuts.
  3. He copied my home work.

Question 4.
put, hit, read.
Answer:

  1. He put the bag on the table.
  2. He hit the ball.
  3. I read the Ramayana.

2. Here are a few sentences written in simple present tense. Read them and change into simple past tense.
(यहाँ कुछ वाक्य Simple Present Tense में दिये गये हैं उन्हें Simple Past Tense में बदलिए।)
[Ramu says this about his grandfather.]
Answer:
My grandfather woke up early in the morning. He went to market. He bought fruits, chocolates and vegetables. He came home. Then he had lunch and rested for a while. In the evening he told us stories from the Panchatantra. He related to us several events from his life. We like our grandfather.

3. Complete the following chart:
(निम्न चार्ट को पूरा कीजिए )
Write three forms of the verbs given below
(नीचे दी गई Verbs की तीनों forms लिखिए)
Answer:
My Childhood Class 6 MP Board

Let’s Talk
(आओ, बात करें)

[Work in pairs] (समूहों में कार्य करें।)
Discuss is pairs and find answers to the following questions.
Hint : Raju asks questions and Sonu answers them.
Raju : When was Mahatma Gandhi born?
Sonu : Mahatma Gandhi was born on 2nd October.
Raju : What was his father’s name?
Sonu : His father’s name was Karamchand Gandhi.
Raju : What was his mother’s name?
Sonu : His mother’s name was Putlibai.
Raju : When did he go to London?
Sonu : He went to London in 1888 to study law.
Raju : Why did he go to South Africa?
Sonu : He went to South Africa for a case.

Let’s Read
(आओ पढ़ें)

See the passage and questions in the book.
(गद्यांश एवं प्रश्नों को पुस्तक से देखें।)
Answers :

1. Abraham Lincoln was born in a log cabin in Kentucky, America, on 12 February, 1809.
2. In 1816. Lincoln moved to Indiana.
3. Abe wanted to shoot the bird because he hoped to give the bird to his mother so that she could cook it for dinner.
4. After picking the dead bird Abe decided not to shoot another bird in his life, and he never did so.
5. (a) Abraham Lincoln’s father was a rich man. (F)
(b) The bird lay there was still. (T)

Let’s Write
(आओ लिखें)

Talk to your friend about Gandhiji and his life and write things that you would like to follow. Choose from the given words.
(Self-help, simplicity, truthfulness, nonviolence, vegetarianism)
Answer:
I am greatly impressed by Gandhiji’s simplicity and truthfulness. I would like to follow them. I also like his principle of non-violence and his practice of vegetarianism. They are difficult to follow, yet I’ll try to follow them.

Let’s Do
(आओ करें)

Draw the picture of three monkeys according to the quotations. Write these three quotations · below the appropriate picture.

  1. See no evil.
  2. Speak no evil.
  3. Listen no evil.

Answer:
Students can draw the pictures themselves and write below these three quotations.

My Childhood Difficult Word Meanings

Bought (बॉट)-खरीदकर लाए, Intense (इण्टेन्स)-अत्यधिक, Interest (इण्टरेस्ट)-ध्यान, Lasting (लास्टिंग)-अन्त तक रहने वाला, Impression (इम्प्रेशन)-प्रभाव, Captured (कैप्चर्ड)-पकड़, पूरी तरह प्रभावित, example (एक्जाम्पिल)-उदाहरण, realities (रीयलिटिज)-सत्यता, Moved (मूव्ड)-दिल से प्रभावित होना, Remember (रिमैम्बर)-याद रखना, Shy (शाइ)-शर्मीला, Avoided (अवॉइडिड)-कटना, दूर रहना, Companions (कम्पैनियन्स)-साथी, Inspection (इन्सपेक्शन)-निरीक्षण, Propmt (प्रॉम्प्ट)-प्रेरित किया, Copy (कॉपी)-नकल, Stupid (स्टुपिड)-मूर्ख, Pointed out (पॉइण्टिड आउट)-बताया, Effect (इफैक्ट)-असर।

My Childhood Summary, Pronunciation & Translation

1. Do you know any stroy from Mahatma Gandhi’s life ? My father bought a book named “Shravan Pitrabhakti Natak”. I read it with intense interest. I was shown the picture of Shrvana carrying his blind parents in a ‘Kanwar”. The book and the picture left a lasting impression on my mind. “Here is an example for you to copy”. I said to myself. The play “Harishchandra” also captured my heart. I was never tired of watching it. Still both Harishchandra and Shravana are living realities for me. I am always moved if I read those plays.
(डू यू नो ऐनी स्टोरी फ्रॉम महात्मा गाँधी ज लाइफ? माई फादर बॉट अ बुक नेम्ड “श्रवण पितृभक्ति नाटक”। आई रेड इट विद इन्टेंस इण्टरेस्ट। आई वाज शोन द पिक्चर ऑफ श्रवण कैरिंग हिज ब्लाइण्ड पेरेन्ट्स इन अ ‘कांवर’। द बुक एण्ड द पिक्चर लैफ्ट अ लास्टिंग इम्प्रेसन ऑन माई माइण्ड: “हीयर इज एन एक्जाम्पल फॉर यू टू कॉपी”। आई सैड टू माईसैल्फ। द प्ले “हरिशचन्द्र” ऑल्सो कैप्चर्ड माई हार्ट। आई वाज नैवर टायर्ड ऑफ वाचिंग इट। स्टिल बोथ हरिश्चन्द्र एण्ड श्रवण आर लिविंग रियलिटीज फॉर मी। आई एम आल्वेज मूव्ड इफ आई रीड दोज प्लेज।)

अनुवाद:
क्या आपको महात्मा गाँधी के जीवन से कोई कहानी याद है? मेरे पिताजी ने “श्रवण-पितृभक्ति नाटक” नामक एक पुस्तक खरीद कर दी। मैंने इसे अत्यन्त रुचि के साथ पढ़ा। मुझे श्रवण को एक कांवर में अपने अन्धे माता-पिता को ले जाते हुए की तस्वीर दिखाई दी थी। पुस्तक और चित्र ने मेरे मस्तिष्क पर गहरा प्रभाव छोड़ा। मैंने स्वयं से कहा, “यह तुम्हें अनुकरण करने के लिए एक उदाहरण है।” नाटक हरिशचन्द्र ने भी मेरे हृदय को जीत लिया। मैं इसे देखते हुए कभी नहीं थकता था। अभी भी हरिश्चन्द्र और श्रवण मेरे लिए जीवित सत्यता थीं। यदि मैं इन नाटकों को पढ़ता हूँ तो सदैव भावनात्मक हो जाता हूँ।

2. I was about seven when my father left Porbander for Rajkot. There I was put in a primary school. I do not remember having ever told a lie during my school days, either to my teachers or to my schoolmates. I was very shy and avoided all company. My books and my lessons were my only companions.
(आई वाज अबाउट सेवन व्हैन माई फादर लैफ्ट पोरबन्दर फॉर राजकोट । देयर आइ वाज पुट इन अ प्राइमरी स्कूल। आई डू नॉट रिमेम्बर हैविंग ऐवर टोल्ड अ लाई ड्यूरिंग माई स्कूल डेज आइदर टू माई टीचर्स ऑर टू माइ स्कूलमेट्स। आइ वाज वैरी शाइ एण्ड अवोइडेड ऑल कम्पनी। माइ बुक्स एण्ड माइ लैसन्स वर माइ ऑनली कम्पनियन्स।)

अनुवाद:
मैं लगभग सात वर्ष का था जब मेरे पिता पोरबन्दर से राजकोट आ गये थे। वहाँ मुझे एक प्राथमिक विद्यालय में रखा गया। मुझे याद नहीं है कि मैंने अपने स्कूल के दिनों में अपने शिक्षकों या सहपाठियों से कभी-झूठ बोला हो। मैं बहत शर्मिला था और सबसे दूर रहता था। मेरी पुस्तकें और मेरे पाठ ही मेरे साथी थे।

3. Once Mr. Giles came for inspection. He gave us five words to write as a spelling exercise. One of the words was ‘kettle’. I misspelt it. The teacher tried to prompt me but I didn’t want to be prompted. I didn’t copy the spelling from my neighbour’s slate. All students spelt every word correctly, only I was stupid. After the inspection was over, the teacher pointed out my stupidity. Why didn’t I copy from my neighbor? This had no effect on me.
(वन्स मि. जाइल्स केम फॉर इन्सपेक्शन। ही गेव अस फाइव वर्ड्स टू राइट एज अ स्पैलिंग एक्सरसाइज। वन ऑफ द वर्ड्स वाज ‘केटल। आइ मिसंस्पेल्ट इट। द टीचर ट्राइड टु प्रॉम्प्ट मी बट आइ डिडन्ट वान्ट टु बी प्रॉम्प्टेड। आइ डिडन्ट कॉपी द स्पैलिंग फ्रॉम माइ नेबर्स स्लेट। ऑल स्टूडेन्ट्स स्पैल्ट ऐवरी वर्ड करैक्टली, ओनली आई वाज स्टुपिड। आफ्टर द इन्सपेक्शन वाज ओवर, द टोचर पॉइन्टेड आउट माई स्टूपिडिटी। व्हाइ डिडन्ट आइ कॉपी फ्रॉम माइ नेबर? दिस हैड नौ इफेक्ट ऑन मी।)

अनुवाद:
एक बार मि. जाइल्स निरीक्षण के लिए आये। उन्होंने हमें स्पैलिंग के अभ्यास के लिए 5 शब्द लिखने को दिये। उन शब्दों में से एक शब्द ‘कैटल’ था। मैने इसकी स्पैलिंग गलत लिख दी। शिक्षक ने मुझे प्रेरित करने का प्रयत्न किया परन्तु मैं प्रेरित नहीं होना चाहता था। मैंने अपने पड़ोसी की स्लेट से नकल नहीं की। सभी विद्यार्थियों ने प्रत्येक शब्द की वर्तनी सही लिखी थी। केवल मैं ही मूर्ख था। जब निरीक्षण समाप्त हो गया शिक्षक ने मेरी बेवकूफी की ओर इशारा किया। मैंने अपने पड़ोसी की नकल क्यों नहीं की? इसका मुझे पर कोई प्रभाव नहीं पड़ा।

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