MP Board Class 7th Hindi Sugam Bharti Solutions Chapter 17 जीवन दीप

MP Board Class 7th Hindi Sugam Bharti Solutions Chapter 17 जीवन दीप

MP Board Class 7th Hindi Sugam Bharti Chapter 17 प्रश्न-अभ्यास

वस्तुनिष्ठ प्रश्न

Mp Board Solution Class 7 Chapter 17 जीवन दीप प्रश्न 1.
(क) सही जोड़ी बनाइए
1. चित्र = (क) कारागार
2. कैदी = (ख) पतवार
3. जीवन नौका = (ग) चित्रकार
4. क्रूरता = (घ) राजा
5. विनयी = (ङ) कुसंगति
उत्तर-
1. – (ग)
2. – (क)
3. – (ख)
4. – (ङ)
5. – (घ)

Mp Board Solution 7 Chapter 17 जीवन दीप प्रश्न (ख)
दिए गए शब्दों में से उपयुक्त शब्द का चयन कर रिक्त स्थानों की पूर्ति कीजिए

1. चित्र को देखकर कैदी …………. रोने लगा। (फूट-फूटकर/डरकर)
2. यात्रियों ने कहा………….. किस काम का? (लूट का माल/पराया धन)
3. रास्ते के एक किनारे पर एक …………… बैठा था। (भिखारी/साधु)
4. आदमी अपनी …………… से खुद अपनी पहचान बता देते हैं। (वाणी/शक्ल)
उत्तर-
1. फूट-फूटकर,
2. पराया धन,
3. भिखारी,
4. वाणी।

MP Board Class 7th Hindi Sugam Bharti Chapter 17 अति लघु उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 2.
निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर एक-एक वाक्य में लिखिए

(क) चित्रकार का कौन-सा चित्र सबसे ज्यादा पसंद किया गया?
उत्तर-
जिस चित्र में बालक के मुख से भोलेपन, सरलता और दीनता के भाव उजागर हो रहे थे वह चित्र चित्रकार सबसे अधिक पसंद किया गया।

(ख) चित्रकार किस तलाश में कारगार गया था?
उत्तर-
चित्रकार ऐसे व्यक्ति का चित्र बनाना चाहता था जिसके मुख से धूर्तता, क्रूरता और स्वार्थ लिप्सा फूट पड़ती हो।

(ग) पहले यात्री ने अपने दोनों झोलों में क्या भरकर रखा था?
उत्तर-
पहले यात्री के आगे के झोले में बुराई तथा पीछे के झोले में अच्छाई थी।

(घ) महाराज! आपने इधर से किसी जानवर के भागने की आवाज सुनी? यह विनम्र वाणी किस व्यक्ति की थी?
उत्तर-
महाराज! आपने इधर से किसी जानवर के भागने की आवाज सुनी? वह विन्रम वाणी राजा की थी।

MP Board Class 7th Hindi Sugam Bharti Chapter 17 लघु उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 3.
निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर तीन से पाँच वाक्यों में लिखिए

(क) चित्रकार किस प्रकार का चित्र बनाना चाहता था?
उत्तर-
चित्रकार ऐसे व्यक्ति का चित्र बनाना चाहता था जिसके मुख से धूर्तता, क्रूरता और स्वार्थ लिप्सा फूट पड़ती हो।

(ख) अपना पहला चित्र देखकर कैदी क्यों रोने लगा?
उत्तर-
अपना पहला चित्र देखकर कैदी इसलिए रोने लगा कि मैं पहले कितना भोला था और अब यह दशा मेरी कुसंगति के कारण ही हुई है।”

(ग) तीसरे यात्री ने झोलों में रखी सामग्री के बारे में क्या स्पष्टीकरण दिया?
उत्तर-
तीसरे यात्री ने कहा कि पीछे वाले झोले में दूसरों की जो बुराइयाँ मुझे मिलती हैं, उन्हें डाल देता हूँ। उसमें नीचे मैंने बड़ा छेद बना दिया है, जिसमें से वे बुराइयाँ गिरती जाती हैं और उन्हें भूल जाता हूँ ‘इस तरह दूसरों के उपकार और उनकी अच्छाइयाँ ही मेरे सामने रहती है और मेरा जीवन उत्साह से भरा रहता है।

(घ) वाणी से आदमी की पहचान किस प्रकार होती है? पाठ के आधार पर इसका उत्तर दीजिए।
उत्तर-
साधु ने कहा-“भाई, आदमी अपनी वाणी से खुद अपनी पहचान बता देता है। जो जितना बड़ा होता है वह उतना ही उम्र और विनयी होता है और दूसरों का सम्मान करता है।”

(ङ) “यह भार मेरे लिए वैसे ही है, जैस चिड़ियों के लिए पंख।’ इस कथन में कौन सा भाव झलकता है?
उत्तर-
तीसरा यात्री कहता है कि इस पीछे वाले झोले में दूसरों की जो बुराइयाँ मुझे मिलती हैं, उन्हें डाल देता हूँ। उसमें नीचे मैंने बड़ा छेद बना दिया है, जिसमें से वे बुराइयाँ गिरती जाती हैं।

भाषा की बात

प्रश्न 4.
नीचे दिए गए शब्दों के शुद्ध उच्चारण कीजिएविक्रय, क्रूरता, वाणी, चित्र, गुण
उत्तर-
छात्र स्वयं करें।

प्रश्न 5.
निम्नलिखित शब्दों की वर्तनी शुद्ध कीजिए-
प्रतिया, अभिपराय, आशचर्य, कुसंगति, कुटुम्बीयों, अच्छाईयां
उत्तर-
शब्द शुद्ध वर्तनी
प्रतिया = प्रतियाँ
अभिपराय = अभिप्राय
आशचर्य = आश्चर्य
कुसंगति = कुसंगति
कुटुंबीयों = कुटुंबियों
अच्छाईयाँ = अच्छाइयाँ

प्रश्न 6.
पाठ में आई लोकोक्तियों का अर्थ बताते हुए नए वाक्य बनाइए
(i) अब पछताय होत क्या, जब चिड़ियां चुग गई। खेत।
(ii) जाके पांव न फटी बिबाई, सो क्या जाने पीर पराई।
(iii) तुम डाल-डाल, हम पात-पात।
उत्तर-
(i) अब पछताय होत क्या, जब चिड़ियां चुग गईं खेत।
अर्थ-अवसर चूकने के बाद पछताने से कोई लाभ नहीं होता।
वाक्य-पूरे वर्ष तो परिश्रम नहीं किया। परीक्षा में फेल हो जाने पर अब क्यों रो रहे हो? अरे, अब पछताए होत क्या जब चिड़िया चुग गई खेत।

(ii) जाके पैर न फटी बिवाई, सो क्या जाने पीरपराई।
अर्थ-कष्ट सहन करने वाले ही दूसरों के कष्ट का अनुभव कर सकते हैं।
वाक्य-आलीशान बंगलों में रहने वाले धनाढ्य लोग गरीबों के दुखों को क्या समझे? किसी ने सही ही कहा है-जाके पैर न फटी बिवाई, सो क्या जाने पीर पराई।

(iii) तुम डाल-डाल, हम पात-पात।
अर्थ-किसी की चाल का जवाब देना।
वाक्य-तुमने क्या सोचा था, हमारे पास कोई जवाब नहीं था, तुम डाल-डाल, हम पात-पात।

प्रश्न 7.
निम्नलिखित रेखांकित शब्दों में विशेषण कौन-कौन से प्रकार है, लिखिए।
(क) पहले यात्री ने अपने झोले में अच्छाइयाँ भर रखी थी।
(ख) मुझे थोड़ा पानी पिला दो।
(ग) इस भारी थैले को अपने पास रखिए।
(घ) रास्ते के किनारे एक दुबला व्यक्ति बैठा था।
उत्तर-
1. संख्यावाचक विशेषण
2. परिमाणवाचक विशेषण
3. सार्वनामिक विशेषण
4. गुणवाचक विशेषण

कुसंगति का फल

चित्रकार ऐसे व्यक्ति का चित्र बनाना चाहता है जो भोलेपन, सरलता और दीनता के भाव लिए हो। कठिन परिश्रम के बाद उसे एक बालक मिलता है जिसमें उपर्युक्त सारे भाव थे। चित्रकार ने उसका चित्र बनाया तथा उसकी ढेरसारी प्रतियाँ बेची। देखते-ही-देखते वह धनवान बन जाता है। कुछ समय पश्चात् चित्रकार को एक क्रूर, स्वार्थी और लालची व्यक्ति का चित्र बनाने की सूझती है। तब वह जेल पहुँचता है, वहाँ उसे वैसा ही क्रूर व्यक्ति मिलता है। चित्रकार उसे बताया है कि पंद्रह वर्ष पहले उसने एक भोले बच्चे की तस्वीर बनाई थी। तब कैदी घूट-फूट कर रोने लगा। उसने चित्रकार को बताया कि वही बचपन का भोला था। उसने बताया कि गलत संगत के कारण ऐसी हालत हुई है।

जीवन दीप संदर्भ-प्रसंग सहित व्याख्या

एक चित्रकार ऐसे ……………… नाना चाहता हूँ। (पृ. 97)

शब्दार्थ-दीनता = दुःखी; बिक्री = बेचना; मालामाल = धनी; पुष्टता = बुरा भाव, क्रूरता = निर्दयता, लिप्सा = लालच, कारागार = जेल।

संदर्भ-प्रस्तुत पंक्तियाँ हमारी पाठ्य-पुस्तक ‘सुगम-भारती (हिंदी सामान्य) भाग-7 के पाठ-17 ‘जीवन दीप’ में उद्धत ‘कुसंगति का फल’ से ली गई हैं।

प्रसंग-इमसें कुसंगति का परिणाम दिखाया गया है। व्याख्या-चित्रकार को एक भोली और दीन दिखने वाली सूरत की जरुरत होती है। मेहनत से उसे एक बालक में ये सारी छवियाँ दिख जाती हैं। वह उसका चित्र बनाकर तथा उसकी अनेक प्रतिलिपियाँ बेचकर मालामाल हो जाता है। दस-पंद्रह साल बाद चित्रकार एक ऐसे चेहरे को ढूँढता है जिसमें से धूर्तता, क्रूरता और स्वार्थ लिप्सा झलकती हो। अतंतः उसे ऐसा चेहरा एक कारागार में, एक कैदी में मिल गया। चित्रकार उसे कहता है कि वह उसका चित्र बनाना चाहता है।

विशेष-

  • भाषा का सरल रुप है।

वाणी से आदमी की पहचान

एक बार किसी राज्य में राजा, मंत्री, हवलदार और सिपाही शिकार पर निकले। रास्ते में पेड़ के नीचे एक . साधु बैठा था। सिपाही ने साधु से पूछा-अरे! ओ साधु! ‘किसी जानवर भागने की आवाज तुमने सुनी?’ साधु ने मना कर दिया। फिर हवलदार ने पूछा- “क्यों साधु, तुमने किसी जानवर के भागने की आवाज सुनी?’ साधु ने नहीं कह दिया। उसके बाद राजा के मंत्री ने साधु से पूछा-महाराज! आपने इधर से किसी जानवर की भागने की आवाज सुनी?” साधु ने हाथ जोड़ कर कहा-नहीं राजा जी, मैंने नहीं सुनी।” एक आदमी पास में खड़ा था, उसने साधु से पूछा-बिना देखे आपने कैसे पहचान लिया कि कौन हवलदार है, कौन मंत्री और कौन राजा?” साधु ने कहा-जो जितना बड़ा होता है वह उतना ही नम्र और विनयी होता है और दूसरों का सम्मान करता है।”

जीवन दीप संदर्भ-प्रसंग सहित व्याख्या

एक बार राजा……………….सम्मान करता है। (पृ. 98)

शब्दार्थ-अभिप्राय = मतलब, अर्थ;

संदर्भ-प्रस्तुत पंक्तियाँ हमारी पाठ्य-पुस्तक ‘सुगम-भरती’ (हिंदी सामान्य) भाग-7 के पाठ-17 ‘जीवन दीप’ की ‘वाणी से आदमी की पहचान’ से ली गई हैं।

प्रसंग-इसमें लोगों की वाणी से आदमी की पहचान के बारे में बताया गया है।

व्याख्या-इस बार राजा अपने मंत्री, हवलदार और सिपाही के साथ शिकार पर निकला। रास्ते में एक पेड़ के नीचे एक अंधा साधु बैठा था। सिपाही ने साधु से पूछा-अरे! ओ साधु-किसी जानवर के भागने की आवाज तुमने सुनी?’ साधु ने उसे विनम्रता से ना कह दिया। फिर हवलदार ने साधु से पूछा-“क्यों साधु, तुमने किसी जानवर के भागने की आवाज सुनी?” साधु ने कहा-“हवलदार जी, मैंने नहीं सुनी।” उसके बाद मंत्री ने पूछा- “सूरदासजी, तुमने किसी के भागने की आवाज सुनी?” साधु ने कहा-“नहीं मंत्री जी हमने नहीं सुनी।” – उसके बाद राजा ने पूछा- “महाराज! आपने इधर से किसी जानवर के भागने की आवाज सुनी?” साधु ने आदरपूर्वक ना कह दिया। पास से खड़े व्यक्ति ने साधु से कहा कि वे देखे कैसे जान गए कि कौन राजा है और कौन सिपाही? साधु से कहा-आदमी की बोली से पता चल जाता है कि जो जितना नम्र और विनयी होता है, दूसरों का उतना ही सम्मान करता है।

अच्छाइयाँ-बुराइयाँ

एक चौराहे पर तीन यात्री मिले। तीनों के कंधे पर आगे और पीछे दो पोटली लटकी थीं। पहले यात्री की आगे की पोटली में बुराइयाँ और पीछे कुटुंबियों और उपकारी मित्रों की भलाइयाँ भरी थी। उसकी नजर सदैव आगे की झोली पर रहती थी इसलिए उसका मन कुढ़ता रहता था। दूसरे की झोली में आगे अच्छाइयाँ और पीछे बुराइयाँ थी। इसलिए वह आगे की झोली देखकर खुश होता रहता था। उसकी नजर पीछे नहीं जाती थी। तीसरे यात्री के आगे का झोला काफी भारी है, उसमें दूसरों के गुण, उपकार और भलाइयाँ थी जबकि पीछे के झोली हल्की थी और उसमें वह कहता, मेरा जीवन उत्साह से भरा रहता था।

जीवन दीप संदर्भ-प्रसंग सहित व्याख्या

एक चौराहे……………………से भरा रहता है। (पृ. 99)

शब्दार्थ- पराया = दूसरे की संपत्ति; पतवार = नाव को खेने वाली लकड़ी, जिसका एक सिरा चपटा होता है। (चप्पू)। माजरा = घटना, दृश्य, घटना क्रम, वृत्तांत।

संदर्भ-प्रस्तुत पंक्तियाँ हमारी पाठ्य-पुस्तक ‘सुगम-भारती’ (हिंदी सामान्य) भाग-7 के पाठ-17 ‘जीवन दीप’ की ‘अच्छाइयाँ-बुराइयाँ’ से ली गई हैं।

प्रसंग-इसमें अच्छाई एवं बुराई के संदर्भ में कहा गया है।

व्याख्या-तीन यात्री एक चौराहे पर मिलते है। तीनों के काव्य पर लाठी है जिसमें आगे और पीछे झोला लटक रहा है। पहले यात्री के आगे के झोले में बुराइयाँ थीं ओर पीछे अच्छाइयाँ, इसलिए मन स्वार्थी और कपटी था। दूसरे यात्री के आगे के झोले में अच्छाइयाँ और पीछे के झोले में बुराइयाँ थी, अतः उसकी नजर सदैव तीसरे यात्री का आगे का झोला भारी था तथा पीछे का झोला हल्का था, ऐसा इसलिए क्योंकि आगे के झोले में अच्छाइयाँ तथा पीछे बुराइयाँ थी, उसने बुराइयों के झोले में छेद इसीलिए उसका जीवन उत्साह से भरा रहता है।
विशेष-अच्छाइयों और बुराइयों के बारे में बताया गया है।

MP Board Class 7th Hindi Solutions

MP Board Class 6th Hindi Sugam Bharti Solutions Chapter 7 वृक्ष निभाता रिश्ता-नाता

MP Board Class 6th Hindi Sugam Bharti Solutions Chapter 7 वृक्ष निभाता रिश्ता-नाता

MP Board Class 6th Hindi Sugam Bharti Chapter 7 प्रश्न-अभ्यास

वस्तुनिष्ठ प्रश्न

वृक्ष ना हो तो पर्यावरण पर क्या प्रभाव पड़ेगा MP Board Class 6th Hindi प्रश्न 1.
(क) सही जोड़ी मिलाइए
1. देवदार, इमली – (क) माम-मामी
2. पीपल, तुलसी – (ख) दादा-दादी
3. आम, खिरनी – (ग) पिता-माता
4. महुआ, मेंहदी – (घ) मामा-मामी
उत्तर
1. (ख), 2. (ग), 3. (घ), 4. (क)

वृक्ष निभाता रिश्ता नाता MP Board Class 6th Hindi प्रश्न (ख)
दिए गए शब्दों में से उपयुक्त शब्द चुनकर रिक्त स्थानों की पूर्ति कीजिए
1. नीम…..सा लेकिन रोगों का त्राता। (ननद-ननदोइ/सास-ससुर)
2. गुलमोहर…….सा जिसकी रंगत हरे उदासी। (नाना/चाचा)
3. अशोक…….सा रिश्तों की नैया खेता। (भ्राता/परनाना)
4. वृक्ष निभाता आज भी…….रिश्ता नाता। (सामाजिक पारिवारिक)
उत्तर
1. ननद-ननदोई
2. चाचा
3. परनाना
4. पारिवारिक

MP Board Class 6th Hindi Sugam Bharti Chapter 7 अति लघु उत्तरीय प्रश्न

Mp Board Class 6 Hindi Solution प्रश्न 2.
निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर एक-एक वाक्य में दीजिए

(क) कवि तुलसी को किस रूप में स्मरण करता है?
उत्तर
कवि तुलसी को माता के रूप में स्मरण करता

(ख) आम से हमारा कौन-सा रिश्ता है?
उत्तर
आम हमारे नाना सदृश है।

(ग) जामुन किस रोग की दवा है?
उत्तर
जामुन मधुमेह की दवा है।

(घ) अशोक के वृक्ष को परनाना क्यों कहा है?
उत्तर
अशोक के वृक्ष को परनाना इसलिए कहा गया है क्योंकि वह काफी पुराना वृक्ष होता है।

(ङ) पौधों के प्रति हमारे क्या कर्त्तव्य हैं?
उत्तर
हमें पौधों की रखवाली करनी चाहिए। समय-समय पर पानी और खाद देते रहना चाहिए।

MP Board Class 6th Hindi Sugam Bharti Chapter 7 लघु उत्तरीय प्रश्नोत्तर

Class 6 Hindi MP Board प्रश्न 3.
निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर तीन-से-पाँच वाक्यों में दें

(क) किन्हीं दो वृक्षों की उपमा किन-किन रिश्तों से की गई है? बताइए।
उत्तर
ये दो वृक्ष हैं-पीपल और तुलसी । पीपल हमारे पिता के समान है और तुलसी हमारी माता के सदृश ।

(ख) किन-किन वृक्षों से औषधियाँ बनती हैं?
उत्तर
निम्न वृक्षों से औषधियाँ बनती हैं-त्रिफला, जामुन, तुलसी।

(ग) वृक्ष न हों तो पर्यावरण पर क्या प्रभाव पड़ेगा?
उत्तर
वृक्षों की अनुपस्थिति में पर्यावरण में असंतुलन आ जाएगा। कार्बन की अधिकता और ऑक्सीजन की कमी हो जाएगी। ऐसी स्थिति में मानव जीवन का अस्तित्व ही संकट में पड़ जाएगा। वृक्ष बादल लाते हैं, जिससे वर्षा होती है। वृक्षों के नहीं रहने से वर्षा नहीं होगी। पृथ्वी पर विद्यमान सभी नदी-नाले सूख जाएँगे।।

(घ) ‘आओ आनंद उलीचें से कवि का क्या तात्पर्य है?
उत्तर
‘आओ आनंद उलीचें’ से कवि का तात्पर्य है पेड़ लगाकर खुशियाँ बाटें। पेड़-पौधे हमारे जीवन को आनंदमय बनाते हैं। हमें पेड़ लगाने चाहिए, क्योंकि तभी हमारा जीवन आनंदित होगा।

(ङ) कविता के माध्यम से कवि क्या कहना चाहता है?
उत्तर
कविता के माध्यम से कवि यह बताना चाहता है कि पेड़-पौधे हमारे जीवन के अति महत्त्वपूर्ण अंग हैं। पेड़-पौधों से हमारा पारिवारिक नाता है। अतः ज्यादा से ज्यादा पौधों को लगाना चाहिए। उनकी कटाई नहीं करनी चाहिए। पेड़-पौधे जीवनदायी होते हैं। उनको बचाने में हमारी भलाई है।

भाषा की बात

प्रश्न 4.
निम्नलिखित शब्दों के शुद्ध उच्चारण कीजिए
त्रिफला, औषधियाँ, पारिवारिक, जीवनदायी, नाता, वैद्य।
उत्तर
छात्र स्वयं करें।

प्रश्न 5.
निम्नलिखित शब्दों की शुद्ध वर्तनी पर गोला लगाइए
उत्तर
MP Board Class 6th Hindi Sugam Bharti Solutions Chapter 7 वृक्ष निभाता रिश्ता-नाता 1

प्रश्न 6.
उदाहरण के अनुसार स्त्रीलिंग रूप लिखिए
उत्तर
MP Board Class 6th Hindi Sugam Bharti Solutions Chapter 7 वृक्ष निभाता रिश्ता-नाता 2

प्रश्न 7.
वाक्यों को शुद्ध कीजिए
नदियाँ में बढ़ा आ गई है।
आप क्या काम करेगा?
बच्चों काम कर रहे हैं।
कइयों लोगों ने कोशिश की है
तुम कब आया?
उत्तर

नदियों में बाढ़ आ गई है।
आप क्या काम करेंगे।
बच्चे काम कर रहे हैं।
कई लोगों ने कोशिश की है।
तुम कब आए?

प्रश्न 8.
निम्नलिखित शब्दों के तत्सम रूप लिखिए
पिता, माता, आम, ससुर
उत्तर
पितृ, मातृ, आम्र, श्वसुर

वृक्ष निभाता रिश्ता-नाता प्रसंग सहित व्याख्या

1. पीपल पावन पिता सरीखा, तुलसी जैसे माता
‘त्रिफला’ वहन-बहू-विटिया-सा, बेर सरीखा भ्राता,
महुआ मामा जैसा लगता, बन उपवन महकाता
आम-वृक्ष नाना-सा वत्सल, मीठे फल बरसाता
पोषक, रक्षक, जीवनदायी औषधियों का दाता।
वृक्ष निमाता आज भी पारिवारिक रिश्ता-नाता।
पौधों को रो-सींचें।।
आओ! आनन्द उलीचें।

शब्दार्थ-पावन पवित्र । सरीखा=समान । भ्राता=भाई। उपवन-बाग=बगीचा । महकता = सुगंध फैलाता । वत्सल= पुत्रवत् प्रेम करने वाला। औषधि =दवा।

प्रसंग-प्रस्तुत पंक्तियाँ हमारी पाठ्य पुस्तक सुगम भारती-6 में संकलित कविता ‘वृक्ष निर्माता रिश्ता-नातासे ली गई हैं।

ब्याख्या-पीपल पिता के समान और तुलसी माता के समान है। त्रिफला बहन, बहू या बिटिया जैसी है जबकि बेर भाई के समान है। महुआ बिल्कुल मामा जैसा है, जिसकी सुगंध चारों तरफ फैली होती है। आम का पेड़ विल्कुल नाना की तरह है जो मीठे फल के रूप में आम बाँटकर अपना प्रेम दिखाता है। इन वृक्षों में कई तरह के पोषक तत्त्व और जीवनरक्षक तत्त्व मिले हैं। ये हमें जीवन देते हैं। अतः कवि कहता है कि हमें ज्यादा-से-ज्यादा पेड़ लगना चाहिए। क्योंकि तभी हमारा जीवन आनंदित होगा।
इस प्रकार इन पंक्तियों में पेड़-पौधों की महत्ता को उजागर किया गया है। हम इनकी महत्ता समझनी चाहिए और पेड़-पौधे लगाकर जीवन को आनंदित बनाना चाहिए।

2. मौलसिरी यानी ज्यों मौसी मोहक ममता बाली
मेंहदी मामी-सी है किंतु अद्भुत क्षमता वाली
है अशोक परनाना-सा, रिश्तों की नैया खेता
शीशम शगुन श्वसुर-सा देता, नहीं कभी कुछ लेता
मधुमेह का कुशल वैद्य है जामुन ज्यों जामाता।
वृक्ष निभाता आज भी पारिवारिक रिश्ता-नाता।
पौधों को रोपें-सींचें।।
आओ आनन्द उलीचें।।

शब्दार्थ-मोहक = आकर्षक। अद्भुत= विचित्र, विलक्षण । नैया = नाव। कुशल=निपुण । वैद्य = डाक्टर। जमाता = दामाद। मधुमेह एक प्रकार की बीमारी जिसमें शरीर में चीनी की अधिकता हो जाती है।

प्रसंग-पूर्ववत्

व्याख्या-मौलसिरि मौसी की तरह ममतामयी हैमेंहदी अद्भुत गुणों वाली मामी जैसी है। अशोक का पेड़ परनाना की तरह सभी संबंधों को आगे बढ़ाता है। शीशम का पेड़ सब गुणों से भरा हुआ श्वसुर समान है। वह सिर्फ देता है, लेता नहीं है। जामुन का पेड़ वैद्य की तरह है जो मधुमेह का इलाज करता है। कवि उसकी तुलना जामाता (दामाद) से करता है। इस प्रकार पेड़-पौधों से हमें कुछ न कुछ मिलता |ही है। वे हमसे लेते कुछ नहीं हैं, सिर्फ देते हैं। वे जीवनदायी हैं। हमारे जीवन को आनंदमय बनाते हैं। अतः हमें ज्यादा से ज्यादा पेड़ लगाने चाहिए।

MP Board Class 6th Hindi Solutions

MP Board Class 6th Hindi Sugam Bharti Solutions Chapter 11 नई सुबह

MP Board Class 6th Hindi Sugam Bharti Solutions Chapter 11 नई सुबह

MP Board Class 6th Hindi Sugam Bharti Chapter 11 प्रश्न-अभ्यास

वस्तुनिष्ठ प्रश्न

Mp Board Solution Class 6 Hindi प्रश्न 1.
(क) सही जोड़ी बनाइए
1. सगे – (क) संवरी
2. सजी – (ख) प्रार्थी
3. क्षमा – (ग) अप्रत्यक्ष
4. प्रत्यक्ष – (घ) संबंधी
उत्तर
1. (घ), 2. (क), 3. (ख), 4. (ग)

Nai Subah Kahani Ka Saransh Likhiye MP Board प्रश्न (ख)
कोष्टक में दिए गए विकल्पों में से उपयुक्त विकल्प चुनकर वाक्य को पूरा कीजिए
1. जो कुछ है हमारा…….तो गीता ही है। (मन/धन)
2. …….. हैं, थोड़ा बहुत तो तंग करते हैं। (घराती/बाराती)
3. थोड़ी देर पहले जो रौनक थी वह……..हो गई। (समाप्त/आरंभ)
4. सब तरफ……..हुई सो अलग। (प्रशंसा/बदनामी)
उत्तर
1. धन
2. बराती
3. समाप्त
4.बदनामी।

MP Board Class 6th Hindi Sugam Bharti Chapter 11 अति लघु उत्तरीय प्रश्न

Nai Subah Kahani Ka Saransh MP Board प्रश्न 2.
निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर एक-एक वाक्य में दीजिए

(क) गीता क्यों अनमनी थी?
उत्तर
गीता अनमनी इसलिए थी क्योंकि उसे स्पष्ट नजर आ रहा था कि उसकी शादी जिस घर में हो रही थी, उस घर के लोग, दहेज के लालची थे।

(ख) महिलाएँ गीता के भाग्य को क्यों सराह रही थीं?
उत्तर
महिलाएँ गीता के भाग्य को इसलिए सराह रहीं थीं क्योंकि गीता की शादी इंजीनियर लड़के से हो रही थी।

(ग) शंभुपुरा वालों का रिश्ता किस कारण ठुकराया गया था?
उत्तर
शंभुपुरा वालों का रिश्ता इसलिए ठुकराया गया क्योंकि वे लोग गरीब थे।

(घ) ‘हम दहेज के खिलाफ हैं।’ यह किसने कहा?
उत्तर
‘हम दहेज के खिलाफ हैं’-ऐसा लड़के के पिता ने कहा।

(ङ) रघुनाथ जी का स्वभाव कैसा था?
उत्तर
रघुनाथ जी मिलनसार और मानवतावादी थे।

MP Board Class 6th Hindi Sugam Bharti Chapter 11 लघु उत्तरीय प्रश्न

Mp Board Class 6th Hindi Solution प्रश्न 3.
निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर तीन-से-पाँच वाक्यों में दीजिए

(क) गीता के घर शादी के दिन कैसा वातावरण था?
उत्तर
गीता के घर शादी के दिन आनंद एवं खुशी का वातावरण था।

(ख) गीता को किनकी बातों में छलावा नजर आ रहा था, वह छलावा क्या था?
उत्तर
गीता को इंजीनियर लड़के के पिता की बातों में छलावा नजर आ रहा था। यह छलावा उनके दहेज के प्रति लालच का था जो वे स्पष्ट नहीं कर पा रहे थे।

(ग) “अगर आप बुरा न माने” कहकर गीता ने पिताजी से कौन-सी बात कही?
उत्तर
गीता ने पिताजी से शंभुपरा के रघुनाथ जी के घर फिर से जाकर शादी का प्रस्ताव करने को कहा।

(घ) शंभुपरा पहुँचकर गीता के चाचा ने रघुनाथ जी को कौन-सी घटना बताई?
उत्तर
गीता के चाचा ने रघुनाथ जी से दहेज के लोभी | परिवार वालों के आचरण की घटना बताई।

(ङ) “अपमान का दहेज” लेकर कौन लौटा तवा क्यों?
उत्तर
इंजीनियर के पिता और उसके परिवार के लोग अपमान का दहेज लेकर लौटे क्योंकि उन्हें अपने नीच,कार्य कर पुरस्कार मिल चुका था।

भाषा की बात

Mp Board Solution Class 6th Hindi प्रश्न 4.
निम्नलिखित शब्दों का शुद्ध उच्चारण कीजिए दहेज, इंजीनियर, सुसंस्कारी, सन्नाटा
उत्तर
छात्र स्वयं करें।

Class 6 Hindi Mp Board Solution प्रश्न 5.
शुद्ध वर्तनी पर सही का (✓)का निशान लगाइए
रिस्ता/रीश्ता/रिश्ता
व्यसत/व्यस्त/वयस्त
बिलकुल/बिलकूल /विलकुल
सनाटा/संनाटा/सन्नाटा
सहर्ष/सर्हष/सहर्से
उत्तर
रिश्ता, व्यस्त, बिलकुल, सन्नाटा, सहर्ष

Class 6th Hindi Sugam Bharti MP Board प्रश्न 6.
निम्नलिखित शब्दों के ‘विलोम’ शब्द लिखिए
मंगल, मान, दण्ड, बेचैन, प्रसन्न
उत्तर
अमंगल, अपमान, पुरस्कार, चैन, दुखी, अप्रसन्न

नई सुबह प्रसंग सहित व्याख्या

1. गीता ने विवशता से कहा, “माँ, सब साधनों से सुख नहीं मिलता। लोग अच्छे होने चाहिए। आपने शंभुपरा वालों का रिश्ता उनकी गरीबी के कारण ठुकराया, पर मुझे लगता है कि वे लोग अच्छे हैं।

शब्दार्थ-विवशता = मजबूरी। रिश्ता=संबंध ठुकराना= इंकार करना।

प्रसंग-प्रस्तुत पंक्तियाँ हमारी पाठ्य पुस्तक सुगम भारती-6 में संकलित कहानी ‘नई सुबह से ली गई हैं। इसमें दहेज जैसी समस्या को उठाया गया है।।

व्याख्या-रामनाथ जी अपनी बेटी गीता की शादी इंजीनियर लडका से तय कर दी है। परिवार में सभी खश हैं। एक तो लड़का इंजीनियर और ऊपर से बिल्कुल राजकुमार जैसा। आखिर लोग खुश क्यों न हों। लेकिन लड़का का पिता लालची निकला। उसे अपने इंजीनियर बेटे पर घमंड है। उसे अच्छा-खासा दहेज चाहिए। रामनाथ जी के लिए दहेज जुटाना मुश्किल है। गीता को लालची लोग बिल्कुल पसंद नहीं। वह माँ से इस बारे में बात करती है।

लेकिन माँ उसकी बात नहीं सुनती है। माँ की नजरों में हर बेटा वाला थोड़ा नाज-नखरा दिखाता है। वह गीता को समझाती है कि वह बहुत किस्मत वाली है जो उसे इतना अच्छा घर-बर मिल रहा है। सुख के सभी साधन । लंडका वालों के यहाँ है। गीता वास्तविकता में जीती है। वह कहती है कि सुश-शांति से जीवन जीने के लिए अच्छे लोगों की जरूरत है न कि धन-दौलत और सब तरह के साधनों की। वह बाप से विनती करती है कि वे उसका रिश्ता इन लालची लोगों के यहाँ न कर शंभुपुरा बालों से करें। वे गरीब जरूर हैं लेकिन सही मायने में मानव हैं। इस प्रकार इन पंक्तियों में यह बताया गया है कि सुख-शांति के लिए व्यक्ति का भला होना आवश्यक है। लालची व्यक्ति कभी किसी चीज का सुख नहीं दे सकता।

2. रघुनाथ जी बहुत ही मिलनसार मानवतावादी थे। वे गीता जैसी सुशील, सुंदर बहू पाने की सोचकर बहुत खुश हुए। उन्होंने सहर्ष यह, रिश्ता स्वीकार कर लिया
और अपने कुछ सगे-संबंधियों को लेकर लग्न मंडप में पहुँच गए।

शब्दार्थ-मानवतावादी मनुष्यों के प्रति सहानुभूति रखने वाला रिश्ता-संबंध। सहर्ष तत्क्षण।

Class 6th Mp Board Hindi Solution प्रसंग-पूर्ववत्

व्याख्या-रामनाथ जी ने अपनी बेटी गीता की शादी इंजीनियर लड़का से तय किया है। लड़के का पिता दहेज का लालची है। उसे अच्छा-खासा दहेज चाहिए। रामनाथजी के लिए यह काम बिल्कुल असंभव-सा प्रतीत होता है। गीता भी नहीं चाहती कि लालची लोगों के घर में उसकी शादी हो। आखिरकार बारातियों के नाज-नखरे उठाते-उठाते सभी परेशान हो गए। गीता यह सब देखदेखकर अलग दुखी हो रही थी। अंत में उसे मुंह खोलना ही पड़ा। उसने पिताजी से शंभुपुरा वालों के घर जाने का अनुरोध किया। यहीं पर गीता की शादी की बात पहले-पहल चली थी।

लेकिन गीता के घर वालों ने गीता की शादी यहाँ करने से इसलिए इंकार कर दिया क्योंकि यह लोग गरीब थे। रामनाथ ने गीता की बात चुपचाप मान ली। वे तुरंत शंभुपुरा पहुँच गए और रघुनाथ जी से गीता को बहू बना लेने का अनुरोध किया । रघुनाथ ने रामनाथजी का अनुरोध तुरंत स्वीकार कर लिया। वे तत्क्षण अपने सगे-संबंधियों को लेकर लग्न मंडप में पहुँच गए और गीता को अपनी बहू बना लिया।

MP Board Class 6th Hindi Solutions

MP Board Class 10th English The Rainbow Solutions Chapter 7 Report of An Adjudged Case

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MP Board Class 10th English The Rainbow Solutions Chapter 7 Report of An Adjudged Case (William Cowper)

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Report of An Adjudged Case Textbook Exercises

Report of An Adjudged Case Vocabulary

I. Point out the important characteristics of the following words:
spectacles, news, trousers, scissors.
Answer:
Spectacles—A pair of lenses set in frame for the use of defective eyes.
Trousers—A piece of dress worn on the legs from the waist to the ankles.
Scissors—An instrument consisting of two blades joined in the , middle and used for cutting.

II. A. Here are some words/phrases which are generally used by the lawyers. Write their meanings and use them in your own sentences.
dispute, argument, laws, lordship, amounts to, observe, case, condemn, shifting his side, plead, decreed.
Answer:

WordMeaningUsage
1. DisputeArgument and discussion.Their conclusions are open to dispute.
2. ArgumentsDiscussion based on reasoning.He agreed to stay with me without much argument.
3. LawsRules established by authority.You should obey the laws of the land.
4. LordshipA title used in speak­ing to a man of title.Your  Lordship should listen to the case heedfully.
5. Amounts toIs equal to.His crime amounts
6. ObserveTo see minutely, to watch and note.He has filed a case against Ramesh.
7. CaseA lawsuit.He was condemned for murder.
8. CondemnTo pronounce punish­ment.She shifted side to his business rival.
9. Shifting his sideSpeaking in favour, of other party.He pleaded guilty.
10. PleadTo present a case to a court of law.The court had decreed only after a logn trial.
11. DecreedGave a lawful decision.

B. Read the following sentences and consult the dictionary to know the meaning of the word CONTEST in these sentences.
(i) I intend to contest the Judge’s decision in another court.
(ii) There is a contest for the leadership of the party.
(iii) There is going to be a beauty contest in our school.
(iv) As a protest, the party has decided not to contest this election.
(v) Cricket is a hotly contested game.
Answer:
(i) challenge
(ii) struggle
(iii) event in which people compete
(iv) fight
(v) debated/indulged in.

III. Say the following and point out the difference
Report Of An Adjudged Case Summary MP Board Class 10th English
Answer:
Word – Meaning
can’t test – unable to examine
contest – a dispute / struggle / competition etc.
nose – a limb of the face with smelling powers
knows – possesses the knowledge
I scream – I moan/yell
ice cream – ice-candy/frozen sweet ice for eating
a gain – some profit
a gain – once more
lawyer – A person who practices law
Liar – one who this lies
Law – a rule established by authority below the usual, normal or avenge level
low – a thing on which something is mounted ‘death for murder
amount – sum of money moment a short period
movement – an act of changing position forward march

Report of An Adjudged Case Comprehension

A. Answer the following questions in about 25 words:

Report Of An Adjudged Case Summary MP Board Class 10th English Question 1.
What was the point of dispute between Nose and Eyes?
Answer:
There was a strange contest between Nose and Eyes. It was over the spectacles. Nose called the spectacles as his. Similarly the eyes expressed their claim over the spectacles.

Mp Board Class 10 English Chapter 7 Question 2.
Explain:
So Tongue was the lawyer, and argued the case with a great deal of skill, and a wig full of learning; While chief baron Ear sat to balance the laws, so famed for his talent in nicely discerning.
Answer:
A lawyer is needed to argue the case on behalf of the claimant. So the tongue assumed the role of the lawyer. The tongue was both skilled in expression and learned. The ear was talented for perception of right or wrong. It sat to weigh the laws.

Class 10 English Chapter 7 Mp Board Question 3.
What were the arguments given by the lawyer in favour of the Nose as the owner of the spectacles?
Answer:
The lawyer gave the following arguments in favour of the Nose as the owner of the spectacles:

  1. The Nose had been wearing the spectacles since times immemorial.
  2. The spectacles with their straddle are fitted on the straddle of the Nose.
  3. Any face without a Nose cannot wear spectacles.

Report Of An Adjudged Case MP Board Class 10th English Question 4.
Who pleaded the case on behalf of the Eyes and to what effect?
Answer:
The same lawyer (tongue) shifted his side and pleaded the case on behalf of the Eyes. The court refuted the argument because the previous arguments of the tongue in favour of the nose were far wiser than them.

Report Of An Adjudged Case Poem MP Board Class 10th English Question 5.
In whose favour did the judge decide the case and how did he do so?
Answer:
The judge decided the case in favour of the Nose. He considered the tongue’s arguments in favour of the Eyes as not so wise. He advised that Eyes should be shut whenever the Nose puts his spectacles on.

B. Answer the following questions in about 50 words.

Mp Board Class 10 English Workbook Solutions Chapter 7 Question 1.
“In this poem Cowper has used the language and background of the courtroom to provide humorous effects.” Explain.
Answer:
In this poem Cowper has used the language and background of the courtroom. He desires to provide humorous effects. The Nose and the Eyes are the rival parties. A strange dispute arose between them. Both of them claimed their sole right over the spectacles. The Tongue acted like a lawyer. The talented Ear sat like the chief baron to balance the law. He used words/phrases like point in dispute, argued the cause, on behalf of, your lordship etc.

Report Of An Adjudged Case Meaning In Hindi Mp Board Class 10 Question 2.
What do you understand by the title “Report of an Adjudged Case”?
Answer:
The title ‘Report of an Adjudged Case’ says that justice is not done in the court of law. The lawyers have no character. They speak in favour of both the rival parties with similar zeal. They are hired to fight false cases. They do not feel shy even if they lose the case. They cannot be relied on. They charge money from both the rival parties. They be fool the clients with only words and rob them of their hard earned money. They give vague arguments. The judges also give random (unlawful) justice.

Speaking Skill

I. Form groups of four. Play the roles of the spectacles, Eye, Nose, Ear and Tongue using the language of the court. Start your argument with:

Question 1.
My Lord! I beg to say .
Answer:
Tongue My Lord! I beg to say that the spectacles and the Nose are meant for each other.

Question 2.
Objection My Lord! My dear friend has forgotten the fact that
Answer:
Spectacles Objection My Lord! My dear friend has forgotten the fact that spectacles help the eyes to see clearly.

Question 3.
It is pleaded to the honourable court that
Answer:
Ear It is pleaded to the honourable court that balanced judgement should be given.
Spectacles My Lord! should the eyes remain shut whenever the nose puts his spectacles on

II. In this world no two leaves are identical. In the same way we can see that though we live together affectionately in a family, yet sometimes we quarrel.
Talk about a quarrel and start as follows:

  • It must have been my mistake that I could not make him
  • I am sorry to have behaved that way and

Answer:
Every action has a reaction, I had provoked my brother with some bitter words and he reacted sharply. I told him that it was a joke. But he took it seriously and called me abusive names. I could not tolerate his words. We came to a quarrel and then to. blows. The ugly matter reached our parents. It was a quarrel over a canvas ball. My parents intervened and the matter finished when we were sent outside to play with the same ball.

Writing Skill

Question 1.
Imagine you are a judge and a theft case has been put up before you. What steps will you take to judge the case? Write. (50 words)
Answer:
I am a judge. A case of theft has been put before me. I shall take the thief into confidence. I shall ask him number of questions. The questions will include his family and parentage. What made him a thief? Who were his accomplices? In which area was he committing theft? Was he supported by some policemen? Was any policeman against him? He will furnish vague answers. In the, end I shall give him a word of honour to acquit him in case he spoke the truth. This will make him confess his crime. His true information will make my case easy to judge.

Question 2.
Suppose you are the captain of a team. Draft a speech for your team members for a better co-ordination and team spirit. (150 words)
Answer:
Dear team members,
For two decades, I was also a team member like you. My sportsmanship raised me to the position of the captain of this team. I shall narrate before you about the magical effects of sportsmanship. As most of you know that I was known for my sincerity, discipline, punctuality and obedience, I shall seek your co-operation by dint of my brotherly conduct with you. I cannot achieve single handedly without your good wishes, devotion, dedication and co-operation. Sincerity is the most essential part of sportsmanship. The attempts become half-hearted in its absence. Discipline makes a man more systematic. Punctuality is the essence of sportsmanship. If it is not followed, chaos will reign. Obedience is the last dimension of sportsmanship. You have to obey the principles of the job. It also means trusting the judgements of the captain for the final achievement of the goal. I hope you will show a better co-ordination and team spirit.

Think It Over

Question 1.
It is nice to be important, but it is more important to be nice. Think and elaborate the statement.
Answer:
Most of the thugs, murderers, kidnappers and robbers become important because they’have a large number of supporters: The people are afraid of their kicks and blows. They are worshipped like savages. Power, pelf and prosperity make them important personalities. The people are their yes-men in their presence. On their back, they are abused. A nice person becomes more important by virtue of his nobility of mind, speech and action. Such a person remains important even after his death. A nice person is fearless, indifferent and bold. He is far more important than the so called important ones. I give more importance to a sincere, courteous, truthful and useful, good mannered and disciplined nice person.

Question 2.
When a problematic situation arises, one should ask oneself. “Am I part of the problem or part of the solution?” Think and apply this principle to yourself and write your views briefly.
Answer:
Once a quarrel arose between my elder brother and my younger brother over the division of lands. I was also an equal sharer. Law allowed me to be a part of the problem. I could side with either of my brothers or quarrel with both of them. I gave the situation a deep thought and became the part of the solution. I met both of my brothers one after the other. Then I assessed their problem. I found a healthy solution. Both of my brothers agreed to my suggestion/solution. The problem was finished once for all.

Things To Do

We send different greeting cards to our relatives and friends on different occasions. Prepare a greeting card for ’the Republic Day’ having patriotic message on it.
Answer:
For self-attempt.

Report of An Adjudged Case Additional Important Questions

A. Read the stanzas and answer the questions that follow:

1. ‘In behalf of the Nose, it will quickly appear,
And your lordship,’ he said, ‘will undoubtedly find
That the Nose has had spectacles always in wear,
Which amounts to possession time out of mind.’ (Page 59)

Questions:
(a) The poet of these lines is
(i) John Keats
(ii) William Cowper
(iii) Robert Frost
(iv) Rabindranath Tagore
Answer:
(ii) William Cowper

(b) The word used for ‘with no doubt’ in the above stanza is
(i) quickly
(ii) undoubtedly
(iii) amounts
(iv) possession
Answer:
(ii) Undoubtedly

(c) What does the nose do for spectacles?
Answers:
(c) The spectacles have always been put on nose.

I. Match the following:
1. A strange contest arose – (a) The Ear
2. Tongue – (b) with a straddle
3. The chief baron was – (c) between Nose and Eyes
4. The spectacles are made – (d) for the spectacles
5. Nose was plainly intended
Answer:
1. (c), 2. (e), 3. (a), 4. (b), 5. (d)

II. Pick out the correct choice.

(i) The poem ’Report of an Adjudged Case’ is written by:
(a) William Wordsworth
(b) Willian Shakespeare
(c) Thomas Gray
(d) Willian Cowper

(ii) A. The spectacles set them unhappily ………… (foul/wrong).
B. Ear sat to ……………. (measure/balance) the laws.
C. Which amounts to possession time out of ……………….. (mind/ gear).
D. That the Nose was (virtually/plainly) intended for them ……………………. (the spectacles).
Answers:
A. wrong
B. balance
C. mind
D. plainly.

III. Write ‘True’ or ‘False’:
1. A strange contest arose between Ears and Nose.
2. The chief baron Ear sat to balance the laws.
3. The Nose has had spectacles always in wear.
4. The judge decreed in favour of the Eyes.
5. The lawyer’s arguments were equally wise in case of the Nose and both Eyes.
Answers:

  1. False
  2. True
  3. True
  4. False
  5. False

IV. Fill in the following blanks:
1. Tongue was the ………………. in the case.
2. The spectacles are made with a ……………
3. Who would wear spectacles if the …………….. had not a Nose.
4. His …………. decreed, with a grave solemn tone.
5. Whenever the Nose put his spectacles on Eyes should be
Answers:

  1. lawyer
  2. straddle
  3. visage/countenance.
  4. lordship
  5. shut.

B. Short Answer Type Questions (In about 25 words)

Question 1.
Give a brief description of the poet ‘William Cowper’.
Answers:
William Cowper was a poet. He was also a qualified lawyer. An attack of madness interrupted his legal career. After some years, he recovered his mental health. He returned to the country. There he lived a quiet life. He wrote poetry in a simple and gentle style.

Question 2.
Give the theme of the poem ‘Report of an Adjudged Case.
Answers:
The theme of the poem is a dispute between the Eyes and the Nose. Both of them went to the court. The Tongue acted as a lawyer. The judge heard the lawyer’s arguments and decreed in favour of the Nose.

Question 3.
How did the eyes, the real claimant of the spectacles lose their claim in the court?
Answers:
It is an admitted fact that the spectacles are meant, for the eyes. They are called ‘eye glasses’ since the glasses are meant for the eyes. However, the lawyer gave wise arguments and won the case in favour of the Nose. The poor eyes lost the case.

Question 4.
Give examples of humour in the poem ‘Report of an Adjudged Case’.
Answers:
The poem is full of humour. The Nose wrongly claimed itself to be the possessor of spectacles. The lawyer too justified his claim. It is humorous that the same lawyer acted as judge for both the rival parties. The judge gave the judgement in favour of the Nose (the wrong claimant).

Question 5.
Give the rhyme scheme of the poem ‘Report of an Adjudged Case’.
Answers:
The poem ‘Report of an Adjudged Case’ is written in a simple and gentle style. Its rhyme scheme is a b a b. The rhyme and rhythm are perfect. The rhyming words are correctly arranged without breaking the flow of ideas.

C. Long Answer Type Questions (In about 50 words)

Question 1.
How did the Tongue prove to be a skilled lawyer?
Answers:
The tongue was the lawyer when the dispute between the Nose and the Eyes came to the court. It was a dispute about the possession of spectacles. The tongue proved a skilled lawyer of great learning. It gave cogent and convincing arguments in favour of the Nose. It also gave arguments in favour of the Eyes but they were too weak. On the basis of the tongue’s arguments, the judge decreed in favour of the Nose.

Question 2.
Why did the Eyes lose the case?
Answers:
The Eyes claimed themselves as possessors of spectacles. The Nose refuted their claim. A dispute arose between the two. Their case was sent to the court. The eyes engaged the same lawyer who had pleaded for the Nose. He gave cogent arguments in favour of the nose. He pleaded in favour of the eyes in a weaker and not so wise a tone. The judge gave his decision in favour of the Nose on the basis of the lawyer’s arguments. The eyes lost the case. It justifies the saying ’Courts deliver decisions and not justice’.

Report of An Adjudged Case Introduction

A dispute arose between the Nose and the Eyes. Both claim their sole right over the spectacles. The tongue acted as a lawyer and the Ear as the chief baron to balance the laws. The poem presents a background of the courtroom to provide humorous effects.

Report of An Adjudged Case Summary in English

Once a contest arose between the nose and eyes about the ownership of spectacles. The tongue acted as the lawyer. The chief baron (Ear) sat to balance the laws. He was well known for his talent and sense of perception. The lawyer addressed the judge as ‘My Lord’. He said that there is no doubt that the nose has had its claim on the spectacles since times immemorial. Spectacles are made with a bridge which settles itself properly on the bridge of the nose. A man without a nose cannot wear spectacles. In a nutshell, the nose and the spectacles are meant for each other only.

Then the same lawyer pleaded on behalf of the eyes. His arguments favouring the eyes were not judged to be so wise. The judge seriously gave his judgement in favour of the nose. He said that eyes should be shut whenever the nose put his spectacles on.

Report of An Adjudged Case Summary in Hindi

एक बार चश्मों की मल्कियत की बारे में नाक और आँखों के बीच झगड़ा हो गया। जीभ ने वकील का काम किया। मुख्य सामंत (कान), कानून का संतुलन करने के लिए बैठ गया। वह अपनी प्रतिभा और विवेक के लिए प्रसिद्ध था।

वकील ने ‘माई लॉर्ड’ कहकर जज को सम्बोधित किया। उसने कहा, “इसमें संशय नहीं है कि चिरकाल से नाक की ही चश्मों पर मल्कियत रही है। चश्मों में एक खाँचा बना होता है जो नाक के खाँचे पर सही बैठता (जमता) है। बिना नाकवाला व्यक्ति चश्मे नहीं पहन सकता है। संक्षिप्त रूप में यों कहिए कि नाक और चश्मे एक-दूसरे के लिए ही बने हैं।

फिर उसी वकील ने आँखों की तरफ से दलील की। आँखों के विषय में उसके द्वारा दिए गए तर्कों को कम बुद्धिमत्तापूर्ण माना गया। जज ने बड़ी संजीदगी से नाक के पक्ष में अपना निर्णय सुनाया। उसने कहा कि जब कभी नाक, चश्मे को पहने तो आँखों को बन्द कर लेना चाहिए।

Report of An Adjudged Case Word-Meanings

Mp Board Class 10 English Chapter 7
Class 10 English Chapter 7 Mp Board

Some Important Pronunciations

Report Of An Adjudged Case MP Board Class 10th English

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MP Board Class 7th Hindi Sugam Bharti Solutions Chapter 10 बने और बिखरे

MP Board Class 7th Hindi Sugam Bharti Solutions Chapter 10 बने और बिखरे

MP Board Class 7th Hindi Sugam Bharti Chapter 10 प्रश्न-अभ्यास

वस्तुनिष्ठ प्रश्न
Mp Board Class 7th Hindi Chapter 10 प्रश्न 1.
(क) सही जोड़ी बनाइए
1. सुख = (क) प्यास
2. रेशमी = (ख) संन्यासी
3. भूखा = (ग) सुविधा
4. बैरागी = (घ) पगड़ी
उत्तर
1. (ग), 2. (घ), 3. (क), 4. (ख)

Mp Board Class 7th Hindi Sugam Bharti प्रश्न (ख)
दिए गए शब्दों से उपयुक्त शब्द चुनकर रिक्त स्थानों की पूर्ति कीजिए
1. शिष्य सामान समेटकर ……………… बांध रहा है। (पोटली बिस्तर)
2. यह व्यक्ति तो बड़ा ……………. निकला। (सभ्य/असभ्य)
3. हम ……………. से ही पैदल चल रहे हैं। (सुबह/शाम)
4. तुम्हें इतना …………… नहीं होना चाहिए। (अधीर/विकल)
5. महिला …………. पर घड़ा रखे आ रही है। (सिर/कंधे)
6. शिष्य, गाँव चलकर थोड़ा ……………… कर लें। (भोजन/विश्राम)
उत्तर
1. पोटली
2. असभ्य
3. सुबह
4. अधीर
5. सिर
6. विश्राम।

MP Board Class 7th Hindi Sugam Bharti Chapter 10 अति लघु उत्तरीय प्रश्न

7th Class Hindi Chapter 10 Question Answer MP Board प्रश्न 2.
निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर एक-एक वाक्य में लिखिए

(क)
शिष्य किसे रोकने के लिए खड़ा रहा?
उत्तर
शिष्य प्यास से व्याकुल था, इसलिए वह किसी गाँववासी से पानी प्राप्त करने के लिए खड़ा रहा।

(ख)
शिष्य गुरु से बैठने के लिए क्यों कहता है?
उत्तर
शिष्य थककर चूर हो गया, वह आराम करने के लिए गुरु से बैठने के लिए कहता है।

(ग)
मार्ग में मिलने वाले व्यक्ति की वेश-भूषा कैसी थी?
उत्तर
मार्ग में मिलने वाला व्यक्ति रेशमी पगड़ी, मोतियों की माला, कीमती जूतियाँ और सुंदर रेशमी वस्त्र पहने था।

(घ)
संतों को किसकी उपेक्षा नहीं करना चाहिए?
उत्तर
संतों को असभ्यो और कुसंस्कृतियों की उपेक्षा नहीं करनी चाहिए।

(ङ)
गुरु और शिष्य किस बात की शिक्षा देने निकले थे?
उत्तर
गुरु और शिष्य लोगों को सन्मार्ग की शिक्षा देने निकल थे।

MP Board Class 7th Hindi Sugam Bharti Chapter 10 लघु उत्तरीय प्रश्न

कक्षा 7 के लिए अनदेखी मार्ग MP Board प्रश्न 3.
निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर तीन से पाँच वाक्यों में लिखिए

(क)
साधना के मार्ग में आने वाली मुश्किलों को कैसे जीता जा सकता है?
उत्तर
गुरु कहते हैं हम, लोगों को सन्मार्ग की शिक्षा देने निकले हैं आराम करने के लिए नहीं साधना के मार्ग में ऐसी कठिनाइयाँ आती ही हैं। धैर्य और संयम से इनको जीतना होगा। संतों को सुख-सुविधाओं की अपेक्षा नहीं करनी चाहिए।

(ख)
गुरुजी ने सभ्य व असभ्य गाँववासियों के लिए ईश्वर से क्या प्रार्थना की?
उत्तर-गुरु ने असभ्य गाँववासियों के लिए ईश्वर से माँगा कि इन लोगों पर कृपा करना। ये सदा इसी गाँव में बने रहे। जबकि सभ्य गाँव के लिए कहा-इस गाँव के लोग अत्यंत सभ्य और सुशील गाँव के लिए कहा-इस गाँव के लोग अत्यंत सभ्य औरा सुशील हैं। इन्हें सारे संसार में बिखरा दे।

(ग)
शिष्य के जल पिलाने की बात पर महिला ने क्या कहा?
उत्तर
शिष्य के जल पिलाने की बात पर महिला ने कहा-घड़ा मेरा, कुएँ से जल मैंने भरा, तुम्हें क्यों दे दूं? जाओ, खुद निकालो और पियो आलसी कहीं के…।

(घ)
एकांकी में आए पात्रों में से जिस पात्र से आप अधिक प्रभावित हुए हैं, उसके बारे में तीन वाक्य लिखिए।
उत्तर
एकांकी में सबसे प्रभावी व्यक्तित्व गुरु जी हैं-उनकी तीन विशेषताएँ हैं :

  • वे कठिन स्थिति में भी मुस्कराते रहते थे।
  • उन्होंने सभ्य-असभ्य सभी प्रकार के लोगों के लिए ईश्वर से प्रार्थना करते थे।
  • वे सर्वदा सन्मार्ग पर चलते रहते हैं।

(ङ)
“हे, ईश्वर हमारी गलतियों को क्षमा करें” किसने, किससे, क्यों कहा?
उत्तर
‘हे ईश्वर, हमारी गलतियों को क्षमा करें…’ ये शब्द गुरु जी ने ईश्वर के समक्ष कहे और इसलिए | कहे ताकि उनके हृदय में करुणा, संतोष, प्रेम, सहिष्णुता
और विनय का वास हो।

भाषा की बात

Class 7 Hindi Chapter 10 MP Board प्रश्न 4.
निम्नलिखित शब्दों का शुद्ध उच्चारण कीजिए
हृदय, वस्त्र, संस्कृति, स्पर्श, विश्राम, भ्रष्ट
उत्तर
छात्र स्वयं करें।

Mp Board Class 7th Hindi Solution प्रश्न 5.
निम्नलिखित शब्दों में शुद्ध वर्तनी पर गोला लगाइए
उत्तर
Class 7 Chapter 10 Hindi MP Board

Mp Board Solution Class 7th Hindi प्रश्न 6.
निम्नलिखित शब्दों के वचन परिवर्तन कीजिए
गलती, संन्यासी, शिष्य, यात्रियों, व्यक्ति, पुत्र, गाड़ियाँ, टुकड़ा
उत्तर
शब्द – वचन परिवर्तन
गलती = गलतियाँ
संन्यासी = संन्यासियों
शिष्य = शिष्यों
यात्रियों = यात्री
व्यक्ति = व्यक्तियों
पुत्र = पुत्रों
गाड़ियाँ = गाड़ी
टुकड़ा = टुकड़े

Mp Board Class 7th Hindi प्रश्न 7.
उपर्युक्त उदाहरण के अनुसार ‘आ’ उपसर्ग का प्रयोग करते हुए पाँच नए शब्द बनाइए।
उत्तर
“आ’ उपसर्ग का प्रयोग करके पाँच नए शब्द :

  • आवृत्ति = आ-वृत्ति
  • आसक्त = आ+सक्त
  • आरोही = आ+रोही
  • आखेट = आ+खेट
  • आसमान = आ+समान

Mp Board Solution 7th प्रश्न 8.
निम्नलिखित शब्दों के विलोम शब्द लिखिए
सभ्य, शांत, न्याय, अनुकूल, बल।
उत्तर

  • शब्द – विलोम
  • सभ्य = असभ्य
  • शांत = अशांत
  • न्याय = अन्याय
  • अनुकूल = प्रतिकूल
  • बल = निर्बल

बने और बिखरे पाठ का परिचय

प्रस्तुत एकांकी में लेखक ने अलग उदाहरणों से लोगों की प्रवृत्ति को उजागर किया है। गुरु और शिष्य अपने पथ पर चले जा रहे हैं। शिष्य का प्यास से बुरा हाल है। उन्हें एक व्यक्ति मिलता है। शिष्य उसे पूछता है कि कहीं कुँआ या सरोवर मिलेगा। व्यक्ति घूरकर चला जाता है। आगे उन्हें एक औरत मिलती है। जिसके सिर पर पानी का घड़ा है। शिष्य बड़े आग्रह से पानी के लिए कहता है। वह औरत भी उन्हें कामचोर कहकर चली जाती है। आगे एक संपन्न व्यक्ति मिलता है, वह भी गुरु और शिष्य को अनदेखा करके चला जाता है। वे दोनों अपने पथ पर बढ़ते रहते हैं। गुरु अपनी प्रार्थना में कहता है कि इस गाँव के लोग सदा बने रहें। शिष्य हैरान होता है। आगे जाकर वे अन्य गाँव में पहुँचते है, जहाँ उनका बड़ा मान किया जाता है तथा उनकी वंदना की जाती है। गुरु अपनी प्रार्थना में कहते हैं कि पहले गाँव के बरे लोगों के लिए आपने दिया जबकि इस भले गाँव के लिए बिखरने का। गुरु कहते हैं बरे लोगों का नहीं फैलना ही समाज के लिए उचित है।

MP Board Class 7th Hindi Solutions

MP Board Class 12th Special Hindi गद्य साहित्य की विभिन्न विधाएँ

MP Board Class 12th Special Hindi गद्य साहित्य की विभिन्न विधाएँ

गद्य वह वाक्यबद्ध विचारात्मक रचना है, जिसमें हमारी चेष्टाएँ, हमारी कल्पनाएँ, हमारे मनोभाव और हमारी चिन्तनशील मनःस्थितियाँ सरलतापूर्वक अभिव्यक्त की जा सकती हैं। वास्तव में आधुनिक युग गद्य साहित्य के विकास का युग है। अभिव्यक्ति का सशक्त माध्यम होने के कारण गद्य साहित्य अपनी विभिन्न विधाओं के माध्यम से वर्तमान युग में अत्यधिक लोकप्रिय होता जा रहा है।

 

गद्य की विभिन्न विधाएँ

गद्य साहित्य की विभिन्न विधाओं को निम्नलिखित दो श्रेणियों में विभक्त किया जा सकता है
(1) गद्य की प्रमुख विधाएँ इसके अन्तर्गत निबन्ध,कहानी,नाटक, एकांकी एवं उपन्यास जैसी लोकप्रिय विधाएँ आती हैं।
(2) गद्य की लघु विधाएँ – हिन्दी गद्य ने पुराने रूपों में परिवर्तन कर नए रूपों को अपनाया, जिनमें रिपोर्ताज, संस्मरण, जीवनी, आत्मकथा, आलोचना, रेखाचित्र, यात्रावृत्त (यात्रा साहित्य), गद्य – काव्य, भेटवार्ता,डायरी एवं पत्र – साहित्य जैसी विधाएँ सम्मिलित हैं।

गद्य की प्रमुख विधाएँ

गद्य साहित्य का विकास सही जोड़ी MP Board Class 12th 1. निबन्ध

हिन्दी गद्य साहित्य में निबन्ध एक महत्त्वपूर्ण विधा है। हिन्दी में निबन्ध का आविर्भाव आधुनिक युग में ही हुआ। हिन्दी निबन्ध साहित्य के विकास को निम्नलिखित चार वर्गों में विभाजित किया गया है –
गद्य साहित्य का विकास सही जोड़ी MP Board Class 12th

1. भारतेन्दु युग (1850 – 1900)
भारतेन्दुयुगीन निबन्धों की सामान्य विशेषताएं इस प्रकार हैं –
(1) इतिहास, धर्म,समाज, राजनीति, आलोचना, यात्रा, प्रकृति वर्णन, आत्मचरित, व्यंग्य – विनोद आदि विषयों पर लिखा गया।
(2) इस युग में राजनीति और समाज – सुधार के निबन्ध अधिक लिखे गये।
(3) प्रायः व्यंग्यात्मक शैली के सहारे कटु सत्य का वर्णन किया गया।
(4) कहावतों और मुहावरों का अधिक प्रयोग हुआ।
(5) गम्भीर विषयों को भी इस युग के लेखकों ने सरल, सुबोध एवं मनोरंजक शैली में प्रस्तुत किया।
(6) इनके निबन्ध शुष्क वैज्ञानिक नहीं, वरन् आदर्श साहित्यिक निबन्ध हैं।
(7) इन निबन्धों में ज्ञानवर्द्धन और रसानुभूति दोनों विद्यमान हैं।
(8) लोक प्रचलित शब्दों का प्रयोग है।

प्रमुख रचनाकार – भारतेन्दु हरिश्चन्द्र, बालकृष्ण भट्ट, बदरीनारायण चौधरी ‘प्रेमघन, प्रतापनारायण मिश्र, बालमुकुन्द गुप्त, राधाचरण गोस्वामी आदि उल्लेखनीय एवं प्रमुख नाम हैं।

भारतेन्दु हरिश्चन्द्र के निबन्ध – कश्मीर कुसुम’, ‘उदय – पुरोदय’, ‘कालचक्र’, ‘बादशाह दर्पण’, ‘स्वर्ग में विचार सभा का अधिवेशन’, ‘वैष्णवता’ और ‘भारतवर्ष’ हैं। इनमें ऐतिहासिक, धार्मिक एवं राजनीतिक समस्याओं के साथ व्यंग्य और आलोचना भी हैं।

बालकृष्ण भट्ट ने “हिन्दी प्रदीप’ पत्रिका में वर्णनात्मक, भावात्मक, विवरणात्मक और विचारात्मक सभी प्रकार के निबन्ध समाविष्ट किये। ‘मेला ठेला’, वकील’, सहानुभूति’,’आशा’, ‘खटका’, ‘इंगलिश पढ़े तो बाबू होय’, ‘माधुर्य’, ‘शब्द की आकर्षण शक्ति’, ‘आत्म – निर्भरता’, ‘रोटी तो किसी भाँति कमा खाय मुछन्दर’, भट्टजी के निबन्ध हैं, जिनमें विचारों की मौलिकता, विषय की व्यापकता,शैली की रोचकता आदि गुण हैं।

प्रतापनारायण मिश्र ने ‘ब्राह्मण’ पत्रिका का सम्पादन किया और अनेक निबन्ध लिखे। भौं. दाँत,पेट, मुच्छ,नाक आदि पर विनोदपूर्ण निबन्ध लिखे। ‘बुद्ध’, प्रताप’,’चरित’,’दान’, ‘जुआ, ‘अपव्यय’, ‘नास्तिक’, ‘ईश्वर की मूर्ति’, ‘शिवमूर्ति’, ‘सोने का डण्डा’,’मनोवेग’, ‘समझदार की मौत’ आदि विचारात्मक निबन्ध लिखे। इनके निबन्धों में मुहावरों का प्रयोग अत्यधिक मात्रा में हुआ है।

बदरीनारायण ‘प्रेमघन’ ने दो पत्रों का सम्पादन किया – ‘आनन्द कादम्बिनी’ और ‘नागरी – नीरद’। इनके प्रमुख निबन्ध हैं – ‘हिन्दी भाषा का विकास’, ‘उत्साह – आलम्बन’, ‘परिपूर्ण – प्रवास’। इनकी भाषा में आलंकारिकता और चमत्कार के दर्शन होते हैं।

बालमुकुन्द गुप्त और राधाचरण गोस्वामी भारतेन्दु युग और द्विवेदी युग के बीच की कड़ी थे। गुप्तजी ‘शिवशम्भु’ उपनाम से लिखते थे। ‘शिवशम्भु का चिट्ठा’ में उनके अनेक प्रसिद्ध निबन्ध संग्रहीत हैं। गोस्वामीजी का ‘यमपुर का चिह्न’ हास्य – व्यंग्य का काल्पनिक लेख है।
गद्य साहित्य का विकास MP Board Class 12th

2. द्विवेदी युग (1900 – 1920)
इस युग का प्रारम्भ महावीर प्रसाद द्विवेदी ने ‘सरस्वती’ पत्रिका के सम्पादक के रूप में किया। कवि और कविता’, ‘प्रतिभा’,’कविता’, ‘साहित्य की महत्ता’, ‘क्रोध आदि रोचक निबन्धों की रचना आचार्य महावीर प्रसाद द्विवेदी ने की।

इस यग के प्रमख निबन्धकार थे – माधव प्रसाद मिश्र गोविन्दनारायण मिश्र श्यामसुन्दर दास, पदमसिंह शर्मा, अध्यापक पूर्णसिंह एवं चन्द्रधर शर्मा ‘गुलेरी’। माधवप्रसाद मिश्र के निबन्ध ‘धृति’ और ‘सत्य’ गम्भीर शैली के निबन्ध हैं। गोविन्दनारायण मिश्र की शैली आलंकारिक थी। श्यामसुन्दर दास ने आलोचनात्मक निबन्ध लिखे। ‘भारतीय साहित्य की विशेषताएँ’, ‘समाज और साहित्य’, ‘हमारे साहित्योदय की प्राचीन कथा’, ‘कर्त्तव्य और सत्यता’, आदि उनके प्रसिद्ध निबन्ध हैं। पदमसिंह शर्मा के दो निबन्ध संकलन प्रकाशित हुए ‘पद्म पराग’ और ‘प्रबन्ध मंजरी’। इनमें महापुरुषों का जीवन – चित्रण, समकालीन व्यक्तियों के संस्मरण, श्रद्धांजलि एवं साहित्य समीक्षा आदि विषय संग्रहीत हैं।

अध्यापक पूर्णसिंह और चन्द्रधर शर्मा गुलेरीजी की विशिष्ट शैली थी। इन दोनों ने कम निबन्ध लिखे,पर उनमें प्राचीन और नवीन का समन्वय था। ‘आचरण की सभ्यता’ और ‘कछुआ धर्म’ क्रमशः पूर्णसिंह और गुलेरीजी के प्रसिद्ध निबन्ध हैं।

द्विवेदी युग के निबन्धकारों ने विचार – प्रधान निबन्ध लिखे। ये निबन्ध मौलिकता लिये हुए नवीन विषयों पर थे और गम्भीर निबन्धों की कोटि में आते हैं।
हिंदी गद्य के विकास पर आधारित प्रश्न Class 12 MP Board

3. शुक्ल युग (1920 – 1940)
आचार्य रामचन्द्र शुक्ल के नाम पर यह युग ‘शुक्ल युग’ कहलाया। गद्य के क्षेत्र में निबन्ध की विधा में सबसे अधिक समृद्धि शुक्लजी ने ही की।

‘चिन्तामणि’ में शुक्लजी के प्रौढ़तम निबन्ध संग्रहीत हैं। उनके निबन्ध साहित्यिक और आलोचनात्मक हैं। ‘साधारणीकरण’, ‘व्यक्ति वैचित्र्यवाद’, ‘रसात्मक बोध के विविध रूप’, ‘काव्य में लोकमंगल की साधनावस्था’ आदि अनेक चिन्तापूर्ण एवं मौलिक विचारों वाले निबन्ध हैं।

शुक्ल युग के अन्य निबन्धकारों में डॉ. गुलाबराय, पदुमलाल पुन्नालाल बख्शी, माखनलाल चतुर्वेदी, डॉ. रघुवीर सिंह, वियोगी हरि, रायकृष्ण दास, वासुदेवशरण अग्रवाल, शान्तिप्रिय द्विवेदी के नाम उल्लेखनीय हैं।

गुलाबरायजी के अनेक निबन्ध संग्रह हैं। ‘फिर निराश क्यों?’, ‘मेरी असफलताएँ’,’मेरे निबन्ध’ आदि। पदुमलाल पुन्नालाल बख्शी के निबन्ध हैं—’उत्सव’, रामलाल पण्डित’, समाज सेवा’, ‘विज्ञान’ आदि। डॉ. वासुदेवशरण अग्रवाल ने सांस्कृतिक विरासत और संस्कृत साहित्य पर निबन्ध लिखे। डॉ. रघुवीर सिंह ने इतिहास पर निबन्ध लिखे। ‘ताज’, ‘फतेहपुर सीकरी’ उनके प्रसिद्ध निबन्ध हैं।

इस युग में साहित्य,मनोविज्ञान, संस्कृति, इतिहास जैसे गम्भीर विषयों पर प्रचुर संख्या में उच्चकोटि के निबन्धों की रचना हुई। इन निबन्धों की भाषा गम्भीर और क्लिष्ट है तथा तत्सम शब्दों का अधिक प्रयोग हुआ है।
हिंदी गद्य साहित्य का इतिहास कक्षा 12 MP Board

4. शुक्लोत्तर युग (1940 से अब तक)
इस युग के निबन्धकारों में आचार्य हजारीप्रसाद द्विवेदी, नन्ददुलारे वाजपेयी, वासुदेवशरण अग्रवाल, शान्तिप्रिय द्विवेदी, डॉ. नगेन्द्र, जैनेन्द्र कुमार, डॉ. विनयमोहन शर्मा, प्रभाकर माचवे,रामवृक्ष बेनीपुरी, रामधारीसिंह ‘दिनकर’, शिवदान सिंह चौहान, प्रकाशचन्द्र गुप्त, देवेन्द्र सत्यार्थी, कन्हैयालाल मिश्र ‘प्रभाकर’, डॉ. भगवतशरण उपाध्याय, डॉ. भगीरथ मिश्र, डॉ. रामविलास शर्मा, धर्मवीर भारती, विद्यानिवास मिश्च एवं अज्ञेय प्रमुख हैं।

इस युग के निबन्धकारों में आचार्य हजारी प्रसाद द्विवेदी का स्थान प्रमुख है। उनके निबन्ध संग्रह, अशोक के फूल’,’आलोक पर्व’, ‘कल्पलता’,’विचार और वितर्क’, विचार प्रवाह’, कुटज’ आदि हैं। इनका विषय क्षेत्र अत्यन्त व्यापक है तथा उनमें चिन्तन की गहराई और विचारों की सघनता मिलती है। अधिकांश निबन्ध ललित या कलात्मक निबन्धों की कोटि में आते हैं।

आचार्य नन्ददुलारे वाजपेयी ने मूलतः आलोचनात्मक निबन्ध लिखे हैं। उनके निबन्ध संग्रह हैं – ‘हिन्दी साहित्य बीसवीं सदी’, आधुनिक साहित्य’, ‘नया साहित्य : नये प्रश्न’।

इस युग के निबन्धकारों ने भावात्मक एवं आत्मपरक निबन्ध लिखे जिनमें विषय – वस्तु की विविधता सन्निहित थी। शैली विचारात्मक, भावात्मक एवं समीक्षात्मक रही।
Hindi Gadya Sahitya Ki Dharohar MP Board

अन्य निबन्धकार और उनकी रचनाएँ
(1) शान्तिप्रिय द्विवेदी – ‘जीवनयात्रा’, ‘साहित्यिक’, ‘हमारे साहित्य निर्माता’, ‘कवि और काव्य’, ‘संचारिणी’, ‘युग और साहित्य’,’सामयिकी’ आदि।
(2) डॉ. नगेन्द्र – विचार और विवेचना’, ‘विचार और अनुभूति’, ‘कामायनी के अध्ययन की समस्याएँ।
(3) जैनेन्द्र कुमार – ‘जड़ की बात’, ‘जैनेन्द्र के विचार’, ‘साहित्य का श्रेय और प्रेय’, ‘प्रस्तुत दर्शन’, ‘सोच – विचार’, मन्थन’।
(4) डॉ. विनयमोहन शर्मा – ‘साहित्यावलोकन’, ‘दृष्टिकोण’, ‘कलाकार और सौन्दर्य बोध’।
(5) प्रकाश चन्द्रगुप्त ‘नया हिन्दी साहित्य एक भूमिका’, साहित्यधारा’।
(6) शिवदानसिंह चौहान – साहित्यानुशीलन’ और ‘आलोचना के मान’।
(7) डॉ. भगवतशरण उपाध्याय – भारत की संस्कृति का सामाजिक विश्लेषण’, ‘इतिहास के पृष्ठों पर’,’खून के धब्बे’, सांस्कृतिक निबन्ध।
(8) रामधारीसिंह ‘दिनकर’ – ‘मिट्टी की ओर’, अर्द्धनारीश्वर’,रती के फूल’।
(9) रामवृक्ष बेनीपुरी – माटी की मूरतें’, ‘गेहूँ और गुलाब’।
(10) अज्ञेय’त्रिशंकु’।
(11) प्रभाकर माचवे – ‘मुँह’, ‘गला’, ‘गाली’, ‘बिल्ली’, मकान’।
(12) देवेन्द्र सत्यार्थी – ‘एक युग एक प्रतीक’, रेखाएँ बोल उठी’, ‘क्या गोरी क्या साँवरी’, कला के हस्ताक्षर।
(13) कन्हैयालाल मिश्र ‘प्रभाकर’ – ‘जिन्दगी मुस्करायी’, ‘बाजे पायलिया के घुघरू’, ‘दीप जले शंख बजे’,’क्षण बोले कण मुस्कराये।
(14) डॉ. विद्यानिवास मिश्र – तुम चन्दन हम पानी’।
(15) हरवंशराय बच्चन’ ने ‘क्या भूलूँ, क्या याद करूँ’ आदि चार खण्डों में जीवन के मर्मस्पर्शी संस्मरण प्रस्तुत किए हैं।

गद्य साहित्य का विकास MP Board Class 12th 2. कहानी

कहानी का शाब्दिक अर्थ है, कहना। जो कुछ भी कहा जाय, कहानी है; किन्तु विशिष्ट अर्थ में किसी रोचक घटना का वर्णन कहानी है। कहानी के अनिवार्य लक्षण हैं –
(1) गद्य में रचित होना।
(2) मनोरंजक या कौतूहलवर्द्धक होना।
(3) अन्त में किसी चमत्कारपूर्ण घटना की योजना।

हिन्दी गद्य में कहानी शीर्षक से प्रकाशित होने वाली रचना है – रानी केतकी की कहानी’ जो 1803 में लिखी गयी। इसके बाद राजा शिवप्रसाद ‘सितारे हिन्द’ की ‘राजा भोज का सपना’, भारतेन्दु हरिश्चन्द्र का अद्भुत अपूर्व स्वप्न’ है।

‘सरस्वती’ नामक पत्रिका में कहानी का विकास – क्रम इस प्रकार दिया गया है :
(1) ‘इन्दुमती’ – किशोरीलाल गोस्वामी (1900 ई)।
(2) ‘गुलबहार – किशोरी लाल गोस्वामी (1902 ई)।
(3) ‘प्लेग की चुडैल’ – मास्टर भगवान दास (1902)।
(4) ग्यारह वर्ष का समय’ – आचार्य रामचन्द्र शुक्ल (1903)।
(5) ‘पण्डित और पण्डितानी’ – गिरिजादत्त वाजपेयी (1903)।
(6) ‘दुलाईवाली’ – बंग महिला (1907)।

ये सभी कहानियाँ ‘सरस्वती’ में प्रकाशित हुईं। इस प्रकार प्रथम कहानीकार किशोरीलाल गोस्वामी सिद्ध होते हैं।

(1) प्रथम युग – इसके बाद हिन्दी में अनेक उच्चकोटि के कहानीकारों ने कहानियाँ लिखीं। जयशंकर प्रसाद,प्रेमचन्द, चन्द्रधर शर्मा ‘गुलेरी’,विश्वम्भरनाथ शर्मा कौशिक’, सुदर्शन ‘पाण्डेय, बेचन शर्मा ‘उग्र’, आचार्य चतुरसेन शास्त्री आदि।

जयशंकर प्रसाद की कहानी ‘ग्राम’ सन् 1909 ई. में प्रकाशित हुई। इसके बाद इनके अनेक कहानी संग्रह प्रकाशित हुए –
(1) ‘छाया’,
(2) ‘प्रतिध्वनि’,
(3) ‘आकाशदीप’,
(4) ‘आँधी’,
(5) ‘इन्द्रजाल’।

प्रेमचन्द द्वारा रचित कहानियों की संख्या तीन सौ से अधिक है,जो ‘मानसरोवर’ नामक ग्रन्थ के आठ भागों में संग्रहीत हैं। उनके कुछ स्फुट संग्रह – ‘सप्त सरोज’, ‘नवनिधि’, ‘प्रेम पच्चीसी’, ‘प्रेम पूर्णिमा’, ‘प्रेम द्वादसी’, ‘प्रेम तीर्थ’, ‘सप्त सुमन’ हैं। उनकी पहली कहानी ‘पंच परमेश्वर 1916 में प्रकाशित हुई थी। उनकी प्रसिद्ध कहानियाँ हैं –
(1) ‘आत्माराम’,
(2) ‘बड़े घर की बेटी’,
(3) ‘शतरंज के खिलाड़ी’,
(4) ‘वज्रपात’,
(5) ‘रानी सारन्धा’,
(6) ‘अलग्योझा’,
(7) ‘ईदगाह’,
(8) ‘कफन’,
(9) ‘पूस की रात’।

चन्द्रधर शर्मा ‘गुलेरी’ ने केवल तीन कहानियाँ लिखी और अमर हो गये। उनकी प्रथम कहानी ‘उसने कहा था’ (1915) में प्रकाशित हुई थी,उनकी अन्य दो कहानियाँ
(1) ‘सुखमय जीवन’ और
(2) ‘बुद्धू का काँटा’ हैं।

विश्वम्भरनाथ शर्मा ‘कौशिक’ ने पहली कहानी ‘रक्षाबन्धन’ 1913 में लिखी। उनकी लगभग 300 कहानियाँ इन दो कहानी संग्रहों में संग्रहीत हैं—
(1) ‘कल्प – मन्दिर’ और
(2) ‘चित्रशाला’।

बद्रीनाथ भट्ट ‘सुदर्शन’ ने पहली कहानी ‘हार की जीत’ 1920 में लिखी। उनके कहानी संग्रह इस प्रकार हैं –
(1) ‘सुदर्शन सुधा’,
(2) सुदर्शन सुमन’,
(3) ‘तीर्थ – यात्रा’,
(4) ‘पुष्पलता’,
(5) ‘गल्प मंजरी’,
(6) ‘सुप्रभात’,
(7) ‘झरोखा’,
(8) ‘चार कहानियाँ’,
(9) ‘नगीना’,
(10) ‘पंचवटी’।

आचार्य चतुरसेन शास्त्री के कहानी संग्रह हैं—
(1) ‘रजकण’,
(2) अक्षत’,
(3) ‘ककड़ी की कीमत’,
(4) ‘भिक्षुराज’,
(5) ‘दे खुदा की राह पर’,
(6) ‘दुखवा मैं कासे कहूँ मोरी सजनी’।

(2) द्वितीय युग – हिन्दी कहानी का द्वितीय युग जैनेन्द्र कुमार से प्रारम्भ होता है। उनकी कहानियों के संग्रह हैं –
(1) ‘वातायन’,
(2) स्पर्धा’,
(3) ‘फाँसी’,
(4) पाजेब’,
(5) ‘वयःसन्धि’,
(6) “एक रात’,
(7) ‘दो चिड़ियाँ।

वृन्दावनलाल वर्मा, गोविन्दबल्लभ पन्त, सियारामशरण गुप्त और हृदयेश भी इस युग के अच्छे कहानीकार हैं। वृन्दावनलाल वर्मा की कहानियाँ कलाकार का दण्ड’ नामक शीर्षक संग्रह में प्रकाशित हैं।

(3) तृतीय युग – हिन्दी कहानी के तीसरे युग में भगवतीप्रसाद वाजपेयी ने अपनी कहानियों को मनोवैज्ञानिक ढंग से लिखा। इनके अनेक कहानी संग्रह (1) ‘हिलोर’, (2) पुष्करिणी’, (3) ‘खाली बोतल’ हैं। इनकी प्रसिद्ध कहानी ‘मिठाईवाला’, ‘वंशी वादन’, ‘झाँकी’ और ‘त्याग’ हैं। भगवतीचरण वर्मा के कहानी संग्रह ‘खिलते फूल’ तथा ‘दो बाँके’ हैं।

अज्ञेय के कहानी संग्रह हैं—
(1) ‘विपथगा’,
(2) ‘परम्परा’,
(3) ‘कोठरी की बात’,

(4) ‘जयदोल’। इलाचन्द्र जोशी ने
(1) रोमांटिक छाया’,
(2) ‘आहुति’,
(3) ‘दीवाली और होली’ नामक कहानी संग्रह लिखे।

। उपेन्द्रनाथ ‘अश्क’, चन्द्रगुप्त ‘विद्यालंकार’ ने भी अच्छी कहानियाँ लिखीं। यशपाल ने साम्यवादी विचारधारा से प्रभावित होकर सामाजिक कहानियाँ लिखीं।
हास्य कहानियों में जी.पी.श्रीवास्तव, कृष्णदेव प्रसाद गौड़ ‘बेढब बनारसी’, अन्नपूर्णानन्द, जयनाथ नलिन के नाम प्रसिद्ध हैं।

महिला कहानी लेखिकाओं में सुभद्राकुमारी चौहान, शिवरानी देवी, उषादेवी मित्रा, सत्यवती मलिक, चन्द्रकिरण सौनरिक्सा आदि के नाम प्रम –

(4) वर्तमान युग – सन् 1950 से कहानी के क्षेत्र में अतियथार्थवादी दृष्टिकोण आया। नये कहानीकारों में राजेन्द्र यादव, मोहन राकेश, कमलेश्वर, मार्कण्डेय, अमरकान्त, धर्मवीर भारती,निर्मल वर्मा, ज्ञानरंजन, भीष्म साहनी, शैलेश मटियानी, फणीश्वरनाथ रेणु’, राजेन्द्र अवस्थी, शरद जोशी, हरिशंकर परसाई,रवीन्द्रनाथ त्यागी आदि प्रमुख हैं।

नयी उभरती प्रतिभाओं में कहानी लेखिकाओं का योगदान भी उल्लेखनीय है। इनमें प्रमुख हैं – मनू भण्डारी, रजनी पणिक्कर, उषा प्रियम्वदा, मृदुला गर्ग, कृष्णा सोबती, मृणाल पाण्डे, मंजुला भगत, मालती जोशी, शिवानी, ममता कालिया, सूर्यबाला, कुसुम अंसल। इन लेखिकाओं ने कथा साहित्य के इतिहास में नया मोड़ दिया है। नारी मन के अन्तर्द्वन्द्व को समझकर मनोवैज्ञानिक विश्लेषण कर जो समस्याएँ समाज को जाग्रत करें, झकझोर कर रख दें, ऐसी कहानियाँ इन महिला लेखिकाओं ने लिखकर नयी कहानी के युग को समृद्ध किया है।
Hindi Gadya Sahitya Ka Itihas Class 12 MP Board

हिंदी गद्य के विकास पर आधारित प्रश्न Class 12 MP Board 3. नाटक

नाटक एक प्रमुख दृश्य काव्य है। यह एक ऐसी अभिनयपरक विधा है, जिसमें सम्पूर्ण मानव जीवन का रोचक वर्णन होता है। [2015]
नाटक के प्रमुख तत्व हैं –
(1) कथावस्तु,
(2) पात्र एवं चरित्र – चित्रण,
(3) संवाद या कथोपकथन,
(4) भाषा – शैली,
(5) देशकाल एवं वातावरण,
(6) उद्देश्य,
(7) संकलनत्रय,
(8) अभिनेयता आदि।

वैसे तो नाटक के भी वे ही तत्त्व होते हैं जो कहानी, उपन्यास आदि के होते हैं, किन्तु नाटकों में रस की प्रधानता होती है। वास्तव में, नाटक काव्य की वह विधा है जिसमें लोक – परलोक की घटित – अपघटित घटनाओं का दृश्य दिखाने का आयोजन किया जाता है। इस कार्य के लिए अभिनय की सहायता ली जाती है। शास्त्रीय परिभाषा में नाटक को रूपक कहा जाता है। एक सफल नाटक के प्रदर्शन के लिए उसका रूप और आकार, दृश्यों और अंकों का उपयुक्त विभाजन, रस का साधारणीकरण, क्रिया व्यापार, प्रवेग तथा प्रवाह, अनुभावों और सात्विक भावों का निदर्शन, संवादों की कसावट, नृत्य और गीत, भाव, भाषा और साहित्यिक अलंकरण,वर्जित दृश्यों का अप्रदर्शन,सुरुचिपूर्ण प्रदर्शन,आलेखन,अलंकरण तथा परिधान और प्रकाश की व्यवस्था आवश्यक होती है।

हिन्दी नाटक साहित्य का काल विभाजन विद्वानों ने अनेक प्रकार से किया है, लेकिन निम्नलिखित विभाजन को सर्वमान्य रूप से स्वीकारा गया है-
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1. भारतेन्दु काल (1837 – 1904)
हिन्दी में रंगमंच नाटकों का आरम्भ भारतेन्दु हरिश्चन्द्र से माना गया है। भारतेन्दु के साथ हिन्दी नाट्य – साहित्य की परम्परा प्रारम्भ हुई,जो अब तक चली आ रही है। इस काल में नाटकों की रचना का मूल उद्देश्य मनोरंजन के साथ – साथ जनमानस को जाग्रत करना था। इस काल के नाटककारों में भारतेन्दु का सर्वाधिक महत्त्वपूर्ण स्थान है। __ भारतेन्दु के अतिरिक्त इस काल के अन्य प्रमुख नाटककारों में बालकृष्ण भट्ट, राधाचरण गोस्वामी, लाला श्री निवासदास, राधाकृष्ण दास, किशोरी लाल गोस्वामी इत्यादि के नाम प्रमुख हैं।

2. संधि काल (1904 – 1915)
इस काल में भारतेन्दु काल की धाराओं के साथ – साथ नवीन धाराओं का आविर्भाव भी हुआ। इस काल में बंगाली, अंग्रेजी, संस्कृत नाटकों के हिन्दी अनुवाद हुए। बदरीनाथ भट्ट, जयशंकर प्रसाद आदि इस काल के प्रमुख नाटककार थे। करुणालय’ जैसी रचना इसी काल में सृजित हुई।

3. प्रसाद युग (1915 – 1933)
जयशंकर प्रसाद के नाम पर इस युग को ‘प्रसाद युग’ कहा गया। इस युग को हिन्दी नाटक साहित्य के विकास युग की संज्ञा प्रदान की गई है। हिन्दी नाटक साहित्य को सुदृढ़ बनाने में प्रसाद का महत्त्वपूर्ण एवं उल्लेखनीय योगदान रहा है। इस युग के नाटकों में ऐतिहासिक नाटकों की अधिकता रही। इस युग के प्रमुख नाटककारों में दुर्गादत्त पांडे,वियोगी हरि, कौशिक, सुदर्शन, गोविन्द वल्लभ पंत, पांडेय बेचन शर्मा ‘उग्र’, सेठ गोविन्द दास, लक्ष्मी नारायण मिश्र जैसे बड़े नाम शामिल हैं।

4. वर्तमान युग (1933 – अब तक)
इस युग को प्रसादोत्तर युग भी कहा गया। इस युग में समस्या – प्रधान एवं नए पुराने जीवन मूल्यों पर आधारित नाटक लिखे गये। इस युग में कई प्रतिभाशाली नाटककारों ने अपनी प्रबल लेखनी और कल्पनाशीलता से हिन्दी नाटक की विधा को और भी परिष्कृत किया।
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हिंदी गद्य साहित्य का इतिहास कक्षा 12 MP Board 4. एकांकी

एकांकी एक अंक का वह दृश्य काव्य है जिसमें एक कथा तथा एक उद्देश्य को कुछ पात्रों के माध्यम से प्रस्तुत किया जाता है।
एकांकी के प्रमुख तत्त्व हैं –
(1) कथावस्तु,
(2) पात्र एवं चरित्र – चित्रण,
(3) संकलन – त्रय,
(4) द्वन्द्व संघर्ष,
(5) संवाद या कथोपकथन,
(6) भाषा – शैली,
(7) अभिनेयता आदि।

हिन्दी एकांकी का आरम्भ भारतेन्दु युग से होता है। भारतेन्दुजी ने ‘अन्धेर नगरी’, ‘विषस्य विषमौषधम्’, ‘वैदिकी हिंसा – हिंसा न भवति’ आदि की रचना की। भारतेन्दु हरिश्चन्द्र के
अतिरिक्त निम्नलिखित लेखकों के एकांकी भी प्रसिद्ध हैं
(1) ‘तन, मन, धन, गुसाईजी के अर्पण’ – राधाचरण गोस्वामी,
(2) कलयुगी जनेऊ’ देवकीनन्दन त्रिपाठी,
(3) ‘शिक्षादान’ – बालकृष्ण भट्ट,
(4) ‘दुखिनी बाला’ – रायकृष्ण दास,
(5) रेल का विकट खेल’ – कार्तिक प्रसाद,
(6) ‘चौपट – चपेट’ – किशोरीलाल गोस्वामी।

द्विवेदी युग में हिन्दी एकांकियों पर पाश्चात्य प्रभाव पड़ने लगा। इनका प्रमुख उद्देश्य समाज – सुधार था। ऐसे एकांकी एवं एकांकीकार इस प्रकार हैं :
(1) ‘शेरसिंह’ – मंगलाप्रसाद विश्वकर्मा,
(2) ‘कृष्ण’ – सियारामशरण गुप्त,
(3) रेशमी’ – रामसिंह वर्मा,
(4) ‘भयंकर भूल’ – सरयूप्रसाद मिश्र,
(5) ‘चार बेचारे’–पाण्डेय बेचन शर्मा ‘उग्र’,
(6) ऑनरेरी मजिस्ट्रेट’ – सुदर्शन।

जयशंकर प्रसाद ने 1930 के लगभग प्रसिद्ध एकांकी ‘एक घुट’ की रचना की,जो एकांकी तकनीक की दृष्टि से सर्वश्रेष्ठ माना गया है।

मौलिक एकांकियों की परम्परा में डॉ. रामकुमार वर्मा ने ‘बादल की मृत्यु’ सर्वप्रथम एकांकी लिखा। उनके कुछ सफल एकांकी हैं—
(1) ‘पृथ्वीराज की आँखें’,
(2) रेशमी टाई’,
(3) ‘चारुमित्रा’,
(4) ‘विभूति’,
(5) ‘सप्तकिरण’,
(6) ‘रूपरंग’,
(7) ‘कौमुदी – महोत्सव’,
(8) ‘ध्रुवतारिका’,
(9) ऋतुराज’,
(10) ‘रजत रश्मि’,
(11) ‘दीपदान’,
(12) ‘काम कंदला’,
(13) ‘बापू’,
(14) ‘इन्द्रधनुष’,
(15) ‘रिमझिम’।

उपेन्द्रनाथ ‘अश्क’ के सामाजिक, प्रतीकात्मक और मनोवैज्ञानिक एकांकी सर्वाधिक लोकप्रिय हुए। उनके एकांकी इस प्रकार हैं –
(1) पासी’,
(2) लक्ष्मी का स्वागत’,
(3) ‘आपस का समझौता’,
(4) ‘स्वर्ग की झलक’,
(5) ‘विवाह के दिन’,
(6) ‘जोक’,
(7) ‘चरवाहे’,
(8) ‘चिलमन’,
(9) ‘चमत्कार’,
(10) ‘सूखी डाली’,
(11) ‘अन्धी गली’,
(12) ‘भँवर’,
(13) ‘जीवन साथी’।

उदयशंकर भट्ट ने अनेक एकांकी लिखे –
(1) ‘नकली और असली’,
(2) ‘आदमी की मृत्यु’,
(3) ‘विष की पुड़िया’,
(4) ‘मुंशीलाल अनोखेलाल’,
(5) ‘समस्या का अन्त’,
(6) ‘पिशाचों का नाच’,
(7) ‘वापसी’,
(8) ‘नये मेहमान’,
(9) ‘पर्दे के पीछे’,
(10) ‘दो अतिथि’,
(11) ‘विस्फोट’,
(12) ‘धूम्र – शिखा’,
(13) ‘एकला चलो रे’,
(14) ‘अमर अर्चना’,
(15) ‘मालती माधव’,
(16) ‘मदन – दहन’,
(17) ‘वन महोत्सव’,
(18) ‘धर्म परम्परा’ आदि।

सेठ गोविन्ददास ने सभी विषयों पर नाटक और एकांकी लिखे,जो संख्या में 100 से भी अधिक हैं। कुछ एकांकी इस प्रकार हैं :
(1) ऐतिहासिक एकांकी –
(1) ‘बुद्ध की एक शिष्या’,
(2) ‘बुद्ध के सच्चे स्नेही कौन’,
(3) ‘नानक की नमाज’,
(4) तेगबहादुर की भविष्यवाणी’,
(5) ‘परमहंस का पत्नी – प्रेमी’।

(2) सामाजिक एकांकी–
(1) ‘स्पर्द्धा’
(2) ‘मानव – मन’,
(3) ‘मैत्री’,
(4) ‘ईद और होली’,
(5) जाति उत्थान’,
(6) वह मरा क्यों?’।

(3) राजनैतिक एकांकी–’सच्चा काँग्रेसी’।
(4) पौराणिक – ‘कृषि – यज्ञ’ आदि।

जगदीशचन्द्र माथुर का प्रथम एकांकी ‘मेरी बाँसुरी’ 1936 में प्रकाशित हुआ। माथुरजी ने रंगमंच की दृष्टि से बड़े सफल एकांकी लिखे। उन्होंने समस्या उठाकर समाधान भी प्रस्तुत किये। उनके एकांकियों में हास्य – व्यंग्य का पुट भी है। उनके एकांकी इस प्रकार हैं –
(1) ‘भोर का तारा’,
(2) ‘कलिंग विजय’,
(3) रीढ़ की हड्डी’,
(4) ‘मकड़ी का जाला’,
(5) ‘खण्डहर’,
(6) ‘खिड़की राह’,
(7) ‘घोंसले’,
(8) ‘कबूतरखाना’,
(9) भाषण’,
(10) ‘ओ मेरे सपने’,
(11) ‘शारदीया’,
(12) ‘बन्दी’।

हरिकृष्ण प्रेमी और वृन्दावनलाल वर्मा ने उत्कृष्ट एकांकियों की रचना की। इनके बाद जो और एकांकीकार हुए, उनके नाम इस प्रकार हैं – भगवतीचरण वर्मा, डॉ. लक्ष्मीनारायण लाल, विनोद रस्तोगी, चिरंजीत, सत्येन्द्र शरत, देवराज दिनेश, विष्णु प्रभाकर, मन्नू भण्डारी आदि।
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Hindi Gadya Sahitya Ki Dharohar MP Board 5. उपन्यास

उपन्यास शब्द दो शब्दों से मिलकर बना है जिसका अर्थ है – ‘उप’ + ‘न्यास’ अर्थात् ‘पास रखा हुआ’। उपन्यास गद्य की एक महत्त्वपूर्ण विधा है। उपन्यास एक वृहत् आकार का आख्यान या वृत्तान्त है जिसके अन्तर्गत वास्तविक जीवन के पात्रों और कार्यों का चित्रण किया जाता है।

उपन्यास के प्रमुख तत्त्व हैं –
(1) कथावस्तु,
(2) पात्र या चरित्र – चित्रण,
(3) कथोपकथन या संवाद,
(4) देशकाल – परिस्थिति,
(5) शैली,
(6) उद्देश्य।

शैली की दृष्टि से उपन्यासों में भेद हैं—
(1) आत्मकथात्मक शैली,
(2) कथात्मक शैली,
(3) पत्र शैली,
(4) डायरी शैली।

हिन्दी उपन्यासों के विकास में तीन लेखकों को श्रेय है –
(1) देवकीनन्दन खत्री,
(2) गोपालराम गहमरी,
(3) किशोरीलाल गोस्वामी।

खत्रीजी ने ‘चन्द्रकान्ता सन्तति’ और ‘भूतनाथ’ तक एक लम्बी उपन्यास की श्रृंखला लिखी, जो बेहद लोकप्रिय हुई। गोस्वामीजी ने 65 छोटे – बड़े उपन्यास लिखे। गहमरीजी ने ‘जासूस’ नाम की पत्रिका निकालकर 60 से भी अधिक जासूसी उपन्यास लिखे।

प्रेमचन्दजी का नाम ‘उपन्यास सम्राट’ के रूप में जाना जाता है। इन्होंने अनेक प्रसिद्ध उपन्यास लिखे। जिनमें ‘गोदान’, ‘गबन’, ‘निर्मला’, ‘कर्मभूमि’ प्रसिद्ध हैं। जयशंकर प्रसाद ने ‘तितली और कंकाल’ नामक उपन्यास की रचना की।

इसके बाद आचार्य चतुरसेन शास्त्री, वृन्दावनलाल वर्मा और उपेन्द्रनाथ ‘अश्क’ आये। बाद के प्रसिद्ध उपन्यास लेखक जैनेन्द्र कुमार, यशपाल, भगवतीचरण वर्मा, इलाचन्द्र जोशी, भगवती प्रसाद वाजपेयी, अज्ञेय, राहुल सांकृत्यायन, रांगेय राघव, भीष्म साहनी, फणीश्वरनाथ ‘रेणु’, नागार्जुन, अमृतलाल नागर, श्रीलाल शुक्ल, राजेन्द्र यादव, कमलेश्वर, मोहन राकेश, नरेश मेहता, शानी, शैलेश मटियानी, धर्मवीर भारती, निर्मला वर्मा, श्रीलाल शुक्ल, राही मासूम रजा, मनोहरश्याम जोशी, रमेश बक्षी, रामदरश मिश्र, मन्नू भण्डारी और शिवानी प्रसिद्ध उपन्यासकार हैं। डॉ. हजारीप्रसाद द्विवेदी ने ‘बाणभट्ट की आत्मकथा’,’चारु – चन्द्रलेख’ तथा ‘अनामदास का पोथा’ नामक उपन्यासों की रचना की।
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गद्य की लघु विधाएँ

Hindi Gadya Sahitya Ka Itihas Class 12 MP Board 1. रिपोर्ताज

गद्य की इस विधा में किसी विषय का आँखों देखा या कानों सुना वर्णन इतने प्रभावशाली ढंग से किया जाता है कि उसकी अमिट छाप हृदय – पटल पर अंकित हो जाती है। रिपोर्ताज में तथ्य वर्णन पर बल होता है, उसमें कलात्मकता पर ध्यान नहीं दिया जाता है।।

इस विधा का आरम्भ शिवदानसिंह चौहान की ‘लक्ष्मीपुरा’ से हुआ। रांगेय राघव द्वारा बंगाल के दुर्भिक्ष एवं महामारी के बारे में लिखे गये रिपोर्ताज काफी मार्मिक बन पड़े हैं। इनका संकलन ‘तूफानों के बीच’ नामक रचना में हुआ है। प्रकाशचन्द्र गुप्त, उपेन्द्रनाथ ‘अश्क’, . रामनारायण उपाध्याय, अमृतराय, निर्मल वर्मा, विष्णु प्रभाकर, कुबेरनाथ राय, प्रभाकर माचवे के रिपोर्ताज भी प्रसिद्ध हैं। भदन्त आनन्द कौसल्यायन देश की मिट्टी बोलती है’, शिवसागर मिश्र ‘वे लड़ेंगे हजारों साल’,धर्मवीर भारती ‘युद्ध यात्रा’, कन्हैयालाल मिश्र ‘प्रभाकर’ ‘क्षण बोले कण मुस्काए’ तथा शमशेर बहादुर सिंह ‘प्लाट का मोर्चा’ इस विधा की समर्थ रचनाएँ हैं।

इस विधा के विकास में पत्र – पत्रिकाओं ने महत्त्वपूर्ण योगदान दिया है। ‘हंस’ के ‘समाचार विचार’ तथा ‘धर्मयुग’,’हिन्दुस्तान’, ‘दिनमान’, रविवार में जगदीश प्रसाद चतुर्वेदी, निर्मल वर्मा, कमलेश्वर, विष्णुकान्त शास्त्री, उदयन शर्मा, लक्ष्मीकान्त वर्मा ने रिपोर्ताज लिखे हैं।

2. संस्मरण

संस्मरण जीवनी लेखन का एक विशेष रूप है। इसमें लेखक अपने जीवन के विशेष प्रसंगों और अनुभवों का उल्लेख करता है। जीवन की मर्मस्पर्शी स्मृतियों के आधार पर प्रभावशाली भाषा का लेखन ही संस्मरण है। संस्मरण का अर्थ है – भलीभाँति याद करना। जीवन में कभी कोई विशिष्ट व्यक्ति,घटना या वस्तु इस प्रकार प्रभाव डालती है कि हम उन्हें कभी भी भूल नहीं पाते। संस्मरण लिखते समय लेखक अपने बारे में अधिक लिखता है। उसका विशिष्ट स्वरूप, आकृति, आचार – विचार, रंग, रूप, उसका कौशल, उसकी भावना, उसके आस – पास के अन्य लोगों पर किस प्रकार प्रभाव डालता है; इस सबका मनोयोगपूर्वक वर्णन ही संस्मरण है। इसमें या तो व्यक्तिपरकता या प्राकृतिक सौन्दर्य उपादान या घटना विशेष की मर्मस्पर्शी छवि लेखक के मन में पूरे समय रहती है और लेखक संस्मरण लिखते समय पूर्ण रूप से उसी पर केन्द्रित रहता है और उससे सम्बन्धित छोटी से छोटी बात या घटना लिखना नहीं भूलता। यह यथार्थपरक होती है। संस्मरण लेखन में श्री पदमसिंह शर्मा ने साहित्यकारों और रसिकों के लिए आकर्षक और रोचक संस्मरण लिखकर अपना स्थान अग्रणी रखा है। महादेवी वर्मा ने ‘अतीत के चलचित्र’ और ‘स्मृति की रेखाएँ’ नामक संस्मरण लिखे हैं। श्री बनारसीदास चतुर्वेदी, नगेन्द्र, यशपाल, श्रीनारायण चतुर्वेदी, उपेन्द्रनाथ ‘अश्क’ आदि अनेक लेखकों ने संस्मरण लिखे हैं।

3. जीवनी

जीवनी में लेखक इतिहासकार की तरह पूरी सच्चाई से किसी व्यक्ति के जीवन की जन्म से लेकर मृत्यु तक सभी घटनाओं के बारे में लिखता है। वह व्यक्ति विशेष के जीवन का परिचय इस तरह प्रस्तुत करता है कि उसके जीवन के सभी अच्छे – बुरे पहलू सामने आयें और जीवनी पढ़ते – पढ़ते हम उस व्यक्ति से अपनापन अनुभव करने लगते हैं। जीवनी लेखन में लेखक तटस्थ रहकर लिखता है। वह अपने विचार और प्रतिक्रियाएँ नहीं दर्शाता। उसके जीवन के उन तथ्यों पर विशेष ध्यान देता है जिससे हमें कुछ प्रेरणा प्राप्त हो सके। उसके जीवन की उस घटना से हम अपने जीवन में उन्नति कर सकते हैं। साहित्यिक विधा के रूप में जीवनी लेखन की शुरूआत भारतेन्दु युग से ही हुई। जीवनी का प्रामाणिक होना आवश्यक है। इस युग में प्राचीन सन्तों, महापुरुषों, कवियों और साहित्यकारों की जीवनियाँ लिखी गयीं। बाद में राष्ट्रीय महापुरुषों और नेताओं की जीवनियाँ लिखी गयीं।

4. आत्मकथा

आत्मकथा में लेखक स्वयं अपने जीवन की कथा पाठकों के समक्ष प्रस्तुत करता है। वह पूरी निष्पक्षता और सच्चाई से अपने जीवन में घटित प्रत्येक घटना का वर्णन अपनी स्मरण शक्ति के आधार पर प्रस्तुत करता है। जब वह अपनी कहानी कहता है तब उसके जीवन में आने वाले हर पहलू का वह चित्रण करता है। अपने जीवन पर जिन व्यक्तियों, पुस्तकों की छाप है, जिससे उसे प्रेरणा मिली यह सब भी वह लिखता है। जब वह अपनी आत्मकथा लिखता है तो उस समय उसके जीवन काल में जो भी पारिवारिक, सामाजिक, आर्थिक, राजनैतिक घटनाक्रम होते हैं उसके भी दर्शन होते हैं। उसके जीवन काल में क्या नैतिक मूल्य थे, क्या परम्पराएँ थीं, क्या अन्धविश्वास थे,कौन – से सामाजिक बन्धन थे, यह सब हमें उसकी आत्मकथा से पता चलता है। भारतेन्दु हरिश्चन्द्र ने – ‘कुछ आप बीती कुछ जग बीती’ नामक आत्मकथा लिखी। श्यामसुन्दर दास, वियोगी हरि, गुलाबराय, यशपाल आदि ने भी आत्मकथाएँ विभिन्न रूप में लिखीं।

महात्मा गाँधी की आत्मकथा’, जवाहरलाल नेहरू की ‘मेरी कहानी’, ‘राजेन्द्र प्रसाद की आत्मकथा’ श्रेष्ठ साहित्य हैं। चतुरसेन शास्त्री तथा सेठ गोविन्ददास ने भी आत्मकथा लिखीं। आधुनिक काल में श्री हरिवंशराय बच्चन ने चार भागों में अपनी आत्मकथा लिखी जो लोकप्रिय हुई।

5. आलोचना

आलोचना साहित्य का इतिहास आधुनिक काल से ही प्रारम्भ हुआ है। डॉ. श्यामसुन्दर दास के अनुसार, “आलोचना किसी भी साहित्यिक कृति या रचना को भली – भाँति पढ़कर उसका मूल्यांकन करना है। यदि साहित्य जीवन की व्याख्या है तो आलोचना उस व्याख्या की व्याख्या है। आलोचना लेखक की रचना और पाठक के बीच पुल का काम करती है। आलोचना किसी भी रचना का सही मूल्यांकन करके पाठकों तक उसकी विशेषता और गहराई प्रस्तुत कर उस कृति को पढ़ने की प्रेरणा देती है।।

भारतेन्दु युग में वास्तविक समीक्षा का विकास नहीं हो पाया था। प्रारम्भ अवश्य हो गया था। पत्र – पत्रिकाओं में समीक्षात्मक निबन्धों का प्रकाशन प्रारम्भ हुआ था। आलोचना की दृष्टि से द्विवेदी युग महत्त्वपूर्ण है। स्वयं द्विवेदीजी ने आलोचना लिखी। इनमें भाषा के शुद्ध रूप और विचारों को व्यवस्थित रूप से अभिव्यक्त करने की प्रेरणा दी गयी।

आचार्य रामचन्द्र शुक्ल सर्वश्रेष्ठ आलोचक माने गये। बाद में बाबू गुलाबराय, आचार्य नन्ददुलारे वाजपेयी, डॉ. नगेन्द्र आदि समीक्षक हुए।

6. रेखाचित्र

इसे अंग्रेजी में ‘स्कैच’ कहा जाता है। चित्रकार जिस प्रकार अपनी तूलिका से चित्र बनाता है उसी प्रकार लेखक अपने शब्दों के रंगों के द्वारा ऐसे चित्र उपस्थित करता है जिससे वर्णन योग्य वस्तु की आकृति का चित्र हमारी आँखों के सामने घूमने लगे। चित्रकार की सफलता उसके रेखांकन तथा रंगों के तालमेल पर निर्भर करती है, जबकि रेखाचित्र के लेखक की उसके शब्दों को गूंथने की कला पर। रेखाचित्र का लेखक अपने शब्दों में ऐसा चित्र बनाता है जो हमारे मानस पटल पर उभरकर मूर्त रूप धारण कर लेता है। इस विधा के प्रमुख लेखक हैं श्रीराम शर्मा, बनारसीदास चतुर्वेदी, रामवृक्ष बेनीपुरी, कन्हैयालाल मिश्र ‘प्रभाकर’, निराला तथा महादेवी वर्मा।

7. यात्रावृत्त (यात्रा साहित्य)। यह साहित्य की एक रोचक तथा मनोरंजन – प्रधान विधा है। इसमें लेखक विशेष स्थलों की यात्रा का सरस तथा सुन्दर वर्णन इस दृष्टि से करता है कि जो पाठक उन स्थलों की यात्रा करने में समर्थ न हों वे उसका मानसिक आनन्द उठा सकें और घर बैठे ही उन स्थलों के प्राकृतिक दृश्यों, वहाँ के निवासियों के आचार – विचार,खान – पान, रहन – सहन आदि से परिचित हो सकें। इस विधा का यह लक्ष्य रहता है कि लेखक अपनो यात्रा में प्राप्त किये हुए आनन्द तथा ज्ञान को पाठकों तक पहुँचा सकें। यह विधा आत्मपरक, अनौपचारिक,संस्मरणात्मक तथा मनोरंजक होती है। इसकी सफलता लेखक के स्वरूप – निरीक्षण तथा उसकी वर्णन – शैली के सौष्ठव एवं सौन्दर्य पर अधिक निर्भर रहती है। इसमें लेखक अपनी यात्रा की कठिनाई,सम्बन्धों तथा उपलब्धियों का रोचक विवरण पाठकों के समक्ष रखता है। यात्रा साहित्य की रचना की दृष्टि से राहुल सांकृत्यायन, अज्ञेय, देवेन्द्र सत्यार्थी, डॉ. नगेन्द्र, यशपाल और विनय मोहन शर्मा के नाम उल्लेखनीय हैं। इस संकलन में विनयमोहन शर्मा का ‘दक्षिण भारत की एक झलक’ यात्रा वत्तान्त पर्याप्त रोचक और ज्ञानवर्धक होने के कारण सफल यात्रा वृत्तान्त का एक उत्कृष्ट उदाहरण है।

8. गद्य – काव्य

गद्य – काव्य,गद्य तथा काव्य के बीच की विधा है। इसमें गद्य के माध्यम से किसी भावपूर्ण विषय की काव्यात्मक अभिव्यक्ति होती है। इसका गद्य भी सामान्य गद्य से अधिक सरस, भावात्मक, अलंकृत, संवेदनात्मक तथा संगीतात्मक होता है। इसमें लेखक अपने हृदय की संवेदना की अभिव्यक्ति इस प्रकार करता है कि पाठक उसे पढ़कर रसमय हो जाता है। इसमें विचारों की अभिव्यक्ति की अपेक्षा भावों की सरस अभिव्यक्ति की ओर लेखक का अधिक ध्यान रहता है। यह निबन्ध की अपेक्षा संक्षिप्त,वैयक्तिक तथा एकतथ्यता लिए होता है। इसका ध्येय प्रायः निश्चित होता है तथा इसमें केवल केन्द्रीय भाव की प्रधानता होती है। इसकी शैली प्रायः चमत्कारपूर्ण एवं कवित्वपूर्ण होती है तथा विचारों का समावेश भी प्रायः भावों के ही रूप में होता है। गद्य – काव्य के लेखकों में वियोगी हरि तथा रामवृक्ष बेनीपुरी के नाम उल्लेखनीय हैं।

9. भेटवार्ता

भेंटवार्ता वह रचना है जिसमें लेखक किसी व्यक्ति विशेष से साक्षात्कार करके उसके सम्बन्ध में कतिपय जानकारियों को तथा उसके सम्बन्ध में अपनी क्रिया – प्रतिक्रियाओं को अपनी पूर्व धारणाओं,आस्थाओं और रुचियों से रंजित कर सरस एवं भावपूर्ण शैली में व्यक्त करता है। यह एक प्रकार से संस्मरण का ही रूप है। पद्मसिंह शर्मा ‘कमलेश’ और रणवीर रांगा ने वास्तविक भेंटवार्ताएँ लिखी हैं। राजेन्द्र यादव तथा लक्ष्मीचन्द जैन ने कल्पना के आधार पर भेंटवार्ताएँ लिखी हैं।

10. डायरी

अपने जीवन के दैनिक प्रसंगों को या किसी प्रसंग विशेष को डायरी के रूप में लिखा जाता है। इनमें जीवन की यथार्थ घटनाओं का वर्णन संक्षेप में रहता है। व्यंजना, व्यंग्य और वर्णन डायरी की विशेताएँ हैं।

हिन्दी में डायरी विधा में लेखन को आरम्भ करने का श्रेय डॉ. धीरेन्द्र वर्मा की ‘मेरी कॉलेज डायरी’ नामक रचना को है। इस विधा में रामधारी सिंह दिनकर, शमशेर बहादुर सिंह, इलाचन्द्र जोशी,सुन्दरलाल त्रिपाठी तथा मोहन राकेश के नाम महत्त्वपू हैं।

11. पत्र – साहित्य

पत्र – साहित्य भी गद्य की एक सशक्त विधा है : उर्दू में ‘गुबारे खातिर’ (आजाद का पत्र संग्रह) और रूसी भाषा में ‘टालस्टाय की डायरी’ स्थायी साहित्य की निधि हैं। पत्र के द्वारा आत्म – प्रदर्शन, विचारों की अभिव्यक्ति को अच्छी दिशा प्राप्त होती है। हिन्दी में ‘द्विवेदी पत्रावली’, ‘द्विवेदी युग के साहित्यकारों के पत्र’, ‘पिता के पत्र पुत्री के नाम’ आदि रचनाएँ उल्लेखनीय हैं। इस विधा के प्रवर्तन में बैजनाथ सिंह, विनोद, बनारसीदास चतुर्वेदी, जवाहरलाल नेहरू आदि का योगदान महत्त्वपूर्ण है।

(क) वस्तुनिष्ठ प्रश्न

  • बहु – विकल्पीय प्रश्न

1. गद्य साहित्य के विकास का युग माना जाता है –
(अ) आधुनिक युग, (ब) भारतेन्दु युग, (स) द्विवेदी युग, (द) कहानी।

2. गद्य की प्रमुख विधा है
(अ) रिपोर्ताज, (ब) संस्मरण, (स) पत्र – साहित्य, (द) शुक्ल युग।

3. गद्य की लघु विधा है
(अ) कहानी, (ब) जीवनी, (स) उपन्यास, (द) निबन्ध।

4. हिन्दी निबन्ध साहित्य के विकास को कितने वर्गों में बाँटा गया है?
(अ) एक, (ब) दो, (स) चार, (द) छः।

5. भारतेन्दुयुगीन सुप्रसिद्ध निबन्धकार हैं
(अ) बालकृष्ण भट्ट, (ब) श्यामसुन्दर दास, (स) डॉ.वासुदेवशरण अग्रवाल, (द) प्रेमचन्द।

6. भारतेन्दु काल के नाटककार हैं [2009]
(अ) जयशंकर प्रसाद, (ब) बालकृष्ण भट्ट, (स) शम्भूनाथ सिंह, (द) डॉ.रामकुमार वर्मा।

7. प्रसादजी ने लगभग कहानियाँ लिखी हैं [2009]
(अ) 49, (ब) 59, (स) 69, (द) 79.

8. ‘आचरण की सभ्यता’ है, एक
(अ) कहानी, (ब) उपन्यास, (स) निबन्ध, (द) एकांकी।

9. ‘राजा भोज का सपना’ कहानी के कहानीकार हैं
(अ) राजा शिवप्रसाद सितारे हिन्द’, (ब) जयशंकर प्रसाद, (स) प्रेमचन्द, (द) मास्टर भगवान दास।

10. एक प्रमुख दृश्य – काव्य है
(अ) नाटक, (ब) उपन्यास, (स) कहानी, (द) जीवनी।

11. एकांकी में अंकों की संख्या होती है
(अ) एक, (ब) दो, (स) तीन, (द) कई।

12. सुप्रसिद्ध उपन्यास ‘चन्द्रकान्ता सन्तति’ के उपन्यासकार हैं [2013]
(अ) प्रेमचन्द, (ब) यशपाल, (स) वृन्दावनलाल वर्मा, (द) देवकीनन्दन खत्री।
उत्तर–
1. (अ), 2. (द), 3. (ब), 4. (स), 5. (अ), 6. (स), 7. (स), 8. (स), 9. (अ), 10. (अ), 11. (अ), 12. (द)।

  • रिक्त स्थानों की पूर्ति

1. हिन्दी में निबन्ध का आविर्भाव ….. युग में हुआ।
2. ‘भारतवर्ष’ नामक निबन्ध के निबन्धकार ……… हैं।
3. प्रतापनारायण मिश्र ने ……… नामक पत्रिका का सम्पादन किया।
4. जयशंकर प्रसाद की कहानी ‘ग्राम’ सन् ……. ई.में प्रकाशित हुई।
5. नाटक एक प्रमुख ……… काव्य है।
6. सुप्रसिद्ध नाटक ‘आधे – अधूरे’ के लेखक ……. हैं।
7. हिन्दी एकांकी का आरम्भ … युग से माना गया है।
8. ……. एक वृहत् आकार का आख्यान या वृत्तान्त है, जिसके अन्तर्गत वास्तविक जीवन के पात्रों और कार्यों का चित्रण किया जाता है।
9. प्रेमचन्द को ….की उपाधि प्रदान की गई है। [2015]
10. ….. में लेखक स्वयं अपने जीवन की कथा पाठकों के समक्ष प्रस्तुत करता है। (2009, 11)
11. आलोचना के क्षेत्र में वरदानस्वरूप …….का आगमन हुआ। [2009]
12. …… के आगमन के साथ ही हिन्दी आलोचना का आरम्भ माना जाता है। [2013]
उत्तर–
1. आधुनिक,
2. भारतेन्दु हरिश्चन्द्र,
3. ब्राह्मण,
4. 1909,
5. दृश्य,
6. मोहन राकेश,
7. भारतेन्दु,
8. उपन्यास,
9. उपन्यास सम्राट,
10. आत्मकथा,
11. आचार्य रामचन्द्र शुक्ल,
12. भारतेन्दु हरिश्चन्द्र।

  • सत्य/असत्य

1. रेखाचित्र गद्य साहित्य की एक मख्य विधा है।
2. हास्य – व्यंग्य भारतेन्दुयुगीन निबन्धों की एक प्रमुख विशेषता है।
3. ‘हिन्दी प्रदीप’ नामक पत्रिका का सम्पादन बालकृष्ण भट्ट ने किया।
4. यशपाल ने साम्यवादी विचारधारा से प्रभावित होकर सामाजिक कहानियाँ लिखीं।
5. ‘अभिनेयता’ नाटक का एक प्रमुख तत्त्व है।
6. हिन्दी रंगमंचीय नाटकों का आरम्भ उपेन्द्रनाथ अश्क’ से माना जाता है।
7. ‘प्रसाद युग’ का नामकरण जयशंकर प्रसाद के नाम पर हुआ।
8. नाटक और एकांकी में कोई अन्तर नहीं है। [2010]
9. प्रेमचन्द ने ‘तितली और कंकाल’ नामक उपन्यास की रचना की।
10. ‘टालस्टाय की डायरी’ पत्र – साहित्य का एक उत्कृष्ट उदाहरण है।
11. एकांकी दृश्य काव्य का रूप होता है। [2009]
12. ‘रानी केतकी की कहानी’ को हिन्दी का सर्वप्रथम लघु उपन्यास मानते हैं। [2011]
13. ‘चिन्तामणि’ के लेखक आचार्य हजारी प्रसाद द्विवेदी हैं। [2012]
14. जीवनी सत्य घटनाओं पर आधारित होती है। [2015]
उत्तर–
1. असत्य,
2. असत्य,
3. सत्य,
4. सत्य,
5. सत्य,
6. असत्य,
7. सत्य,
8. असत्य,
9. असत्य,
10. सत्य,
11. सत्य,
12. असत्य,
13. असत्य,
14. सत्य।

  • सही जोड़ी मिलाइये

I. ‘क
(1) शिव शम्भू का चिट्ठा – (अ) कहानी
(2) बड़े घर की बेटी – (ब) एकांकी आषाढ़ का एक दिन
(स) निबन्ध –
(4) दीपदान – (द) उपन्यास
(5) गोदान – (इ) नाटक
(6) आत्मकथा के क्षेत्र से निकली विधा [2009] – (ई) निबन्ध
(7) हिन्दी गद्य साहित्य की धरोहर [2009] – (उ) संस्मरण
उत्तर–
(1) → (स),
(2) → (अ),
(3) → (इ),
(4)→ (ब),
(5) → (द),
(6) → (उ),
(7) → (ई)।

‘ख’
(1) संवदिया [2012] – (अ) धर्मवीर भारती
(2) पिता के पत्र पुत्री के नाम – (ब) फणीश्वरनाथ रेणु
(3) युद्ध यात्रा – (स) पं.जवाहर लाल नेहरू
(4) समाज और साहित्य – (द) जयशंकर प्रसाद
(5) एक घुट – (इ) बाबू श्यामसुन्दर दास
उत्तर–
(1) → (ब),
(2) → (स),
(3) →(अ),
(4) → (इ),
(5) → (द)।

  • एक शब्द/वाक्य में उत्तर

प्रश्न 1.
एक अंक वाली नाट्य कृति क्या कहलाती है?
उत्तर–
एकांकी।

प्रश्न 2.
हिन्दी की प्रथम कहानी कौन – सी मानी गयी है?
उत्तर–
इन्दुमती।

प्रश्न 3.
चन्द्रगुप्त किसकी नाट्य – रचना है? [2015]
उत्तर–
जयशंकर प्रसाद की।

प्रश्न 4.
‘आनन्द कादम्बिनी’ नामक पत्र का सम्पादन किसने किया था?
उत्तर–
बदरीनारायण ‘प्रेमधन’।

प्रश्न 5.
महावीर प्रसाद द्विवेदी ने किस पत्रिका का सम्पादन किया?
उत्तर–
सरस्वती।

प्रश्न 6.
ऐतिहासिक पृष्ठभूमि पर निबन्ध लिखने वाले निबन्धकार कौन थे?
उत्तर–
डॉ. रघुवीर सिंह।

प्रश्न 7.
यशपाल ने साम्यधारी विचारधारा से प्रभावित होकर किस प्रकार की कहानियाँ लिखीं? [2013]
उत्तर–
सामाजिक कहानियाँ।

प्रश्न 8.
‘मुक्ति पथ’ नामक नाटक के लेखक कौन हैं?
उत्तर–
उदयशंकर भट्ट।

प्रश्न 9.
जगदीश चन्द्र माथुर का प्रथम एकांकी (1936 में प्रकाशित) कौन – सा था?
उत्तर–
मेरी बाँसुरी।

प्रश्न 10.
‘दक्षिण भारत की एक झलक’, हिन्दी साहित्य की किस विधा का उदाहरण है?
उत्तर–
यात्रावृत्त (यात्रा साहित्य)।

प्रश्न 11.
‘गणेश शंकर विद्यार्थी’ साहित्य की किस विधा में लिखा गया है? [2010]
उत्तर–
संस्मरण विधा में।

प्रश्न 12.
संकलन त्रय क्या है? [2012]
उत्तर–
देश, काल और घटनाओं को संकलन त्रय कहा जाता है।

  • (ख) अति लघु उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 1.
हिन्दी की आधुनिक कहानी का विकास कब से माना जाता है?
उत्तर–
हिन्दी की आधुनिक कहानी का विकास सन् 1900 से माना जाता है।

प्रश्न 2.
नाटक के चार तत्त्व लिखिए।
उत्तर–
(1) कथावस्तु,
(2) चरित्र – चित्रण,
(3) संवाद,
(4) अभिनेयता।

प्रश्न 3.
उपन्यास के कोई चार तत्त्व बताइये।
उत्तर–
(1) कथावस्तु,
(2) पात्र या चरित्र – चित्रण,
(3) कथोपकथन या संवाद,
(4) भाषा – शैली।

  • (ग) लघु उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 1.
निबन्ध की परिभाषा देते हुए दो निबन्धकारों के नाम लिखिए तथा उनकी एक – एक निबन्ध रचना का नाम लिखिए।
उत्तर–
निबन्ध की परिभाषा – “निबन्ध उस गद्य रचना को कहते हैं, जिसमें सीमित आकार के भीतर किसी विषय का वर्णन या प्रतिपादन एक विशेष निजीपन,स्वच्छन्दता, सौष्ठव और सजीवता तथा आवश्यक संगति और सम्बद्धता के साथ किया गया हो।”

निबन्धकार तथा उनकी निबन्ध रचना –
(1) डॉ. नन्ददुलारे वाजपेयी – राष्ट्रीय साहित्य’,
(2) डॉ. नगेन्द्र ‘आलोचक की आस्था’।

प्रश्न 2.
निबन्ध लेखन की व्यास तथा समास शैली में अन्तर स्पष्ट कीजिए। [2009]
उत्तर–
व्यास शैली में विषय का विस्तार से विवेचन प्रस्तुत किया जाता है, जबकि समास शैली में सूत्ररूप से विषय – वस्तु प्रस्तुत कर दी जाती है।

प्रश्न 3.
डॉ. भगीरथ मिश्र के अनुसार निबन्ध की परिभाषा दीजिए।
उत्तर–
डॉ. भगीरथ मिश्र के अनुसार, “निबन्ध वह गद्य रचना है, जिसमें लेखक किसी भी विषय पर स्वच्छन्दतापूर्वक परन्तु एक सौष्ठव सहित सजीवता और वैयक्तिकता के साथ अपने भावों, विचारों और अनुभवों को व्यक्त करता है।”

प्रश्न 4.
निबन्ध को गद्य की कसौटी क्यों कहा गया है? [2011]
उत्तर–
इस कथन का तात्पर्य यह है कि पद्य की तुलना में गद्य रचना सम्पन्न करना दुष्कर कार्य है,क्योंकि अगर आठ पंक्तियों वाली कविता में यदि एक भी पंक्ति भावपूर्ण लिख जाती है तो कवि प्रशंसा का भागी होता है,परन्तु गद्य के सन्दर्भ में ऐसा नहीं देखा जाता। गद्यकार को एक – एक वाक्य सुव्यवस्थित एवं सोच – विचारकर लिखना होता है। उसी स्थिति में गद्यकार प्रशंसनीय है। गद्य में निबन्ध लेखन बहुत ही दुष्कर कार्य है। निबन्ध को सुरुचिपूर्ण, आकर्षक एवं व्यवस्थित होना चाहिए। इसी हेतु निबन्ध को गद्य की कसौटी कहा गया है।

प्रश्न 5.
“भावों की पूर्णाभिव्यक्ति का विकास निबन्ध में ही सबसे अधिक सम्भव होता है।” इस कथन का आशय समझाइए।
उत्तर–
निबन्ध गद्य लेखन की एक उत्कृष्ट विधा है। भावों की सम्पूर्ण अभिव्यक्ति का विकास निबन्ध में ही सम्भव होता है, क्योंकि निबन्ध व्यक्ति – सापेक्ष्य होता है। वैयक्तिकता ही निबन्ध का प्रधान गुण है। लेखक के व्यक्तित्व का प्रभाव ही निबन्ध में परिलक्षित होता है। भावों के प्रकाशन (अभिव्यक्ति) का सबसे उपयुक्त साधन निबन्ध हैं, क्योंकि इसका विकास निबन्ध में ही सम्भव है।

प्रश्न 6.
आचार्य रामचन्द्र शुक्ल और गुलाबराय द्वारा दी गयी निबन्ध की परिभाषाएँ लिखिए।
उत्तर–
(1) आचार्य रामचन्द्र शक्ल – “यदि गद्य लेखकों की कसौटी है. तो निबन्ध गद्य की कसौटी है।” प्रस्तुत कथन का आशय है कि निबन्ध से ही गद्यकार के लेखन की उत्कृष्टता का ज्ञान होता है।
(2) गुलाबराय–“निबन्ध उस गद्य रचना को कहते हैं, जिसमें एक सीमित आकार के भीतर किसी विषय का वर्णन या प्रतिपादन एक विशेष निजीपन, स्वच्छन्दता, सौष्ठव और सजीवता तथा आवश्यक संगति और सम्बद्धता के साथ किया गया हो।”

प्रश्न 7.
आचार्य रामचन्द्र शुक्ल के अनुसार ‘निबन्ध’ की परिभाषा देते हुए बताइए कि हिन्दी निबन्ध साहित्य को किन – किन वर्गों में विभाजित किया गया है? [2009]
उत्तर–
आचार्य रामचन्द्र शुक्ल के अनुसार, “यदि गद्य लेखकों की कसौटी है, तो निबन्ध गद्य की कसौटी है।”

हिन्दी निबन्ध साहित्य को निम्नलिखित चार वर्गों में विभाजित किया गया है-
MP Board Class 12th Special Hindi गद्य साहित्य की विभिन्न विधाएँ img-12

प्रश्न 8.
द्विवेदीयुगीन निबन्धों की चार प्रमुख विशेषताएँ बताते हुए इस युग के दो प्रमुख निबन्धकारों के नाम उनकी एक – एक रचना के साथ लिखिए। [2013]
उत्तर–
विशेषताएँ–
(1) विषय – वस्तु की गम्भीरता,
(2) राष्ट्रीय भावना,
(3) समाज सुधार,
(4) हास्य – व्यंग्यात्मकता।

प्रमुख निबन्धकार – रचनाएँ
महावीर प्रसाद द्विवेदी – साहित्य की महत्ता, विचार वीथी
सरदार पूर्णसिंह – कन्यादान, आचरण की सभ्यता

प्रश्न 9.
द्विवेदीयुगीन गद्य की कोई चार विशेषताएँ लिखिए। [2012]
उत्तर–
द्विवेदीयुगीन गद्य की प्रमुख विशेषताएँ निम्नलिखित हैं
(1) विषय – वस्तु को व्यवस्थित ढंग से प्रभावी शैली में प्रस्तुत करने पर बल दिया गया।
(2) भाषा को परिमार्जित एवं परिष्कृत किया गया।
(3) नैतिकता, राष्ट्रीयता, समाज – सुधार जैसे विषयों पर लिखा गया।
(4) इस युग के गद्य, विशेषकर निबन्धों में हास्य – व्यंग्यात्मक शैली को अपनाया गया।

प्रश्न 10.
भारतेन्दू युग और द्विवेदी युग के निबन्धों का अन्तर स्पष्ट कीजिए।
अथवा
भारतेन्दु युग के निबन्धों की दो विशेषताएँ बताइए। [2014]
उत्तर–
भारतेन्दुयुगीन निबन्ध रोचक ही नहीं, प्रेरक भी थे। निबन्धों का मूल स्वर समाज – सुधार की भावना, राजनीतिक तथा सांस्कृतिक चेतना पर आधारित था। इस युग के निबन्धों में वैयक्तिकता की झलक और हास्य – व्यंग्य का समावेश विशेष रूप से लक्षित होता है।

द्विवेदी युग में भाषा, भाव – विचार के विस्तार की अपेक्षा परिष्कार पर अधिक ध्यान दिया गया। इसलिए इस युग के निबन्ध भाव, विचार और भाषा की दृष्टि से अपेक्षाकृत अधिक परिष्कृत हैं तथा उनमें स्वछन्दता के स्थान पर गम्भीरता अवलोकनीय है।

प्रश्न 11.
शुक्लयुगीन निबन्धों की तीन विशेषताएँ बताइए तथा यह भी बताइए कि निबन्ध का स्वर्णकाल’ किस युग को कहा गया है? [2009]
अथवा
शुक्ल युग के निबन्धों की दो विशेषताएँ तथा इस युग के दो लेखकों एवं उनके निबन्धों के नाम लिखिए। [2016]
उत्तर–
शुक्ल युग के निबन्धों की विशेषताएँ –
(1) साहित्य और जीवन के विविध विषयों पर विचारात्मक तथा विश्लेषणात्मक निबन्धों की रचना,
(2) निबन्धों में भाव – पक्ष की अपेक्षा चिन्तन पक्ष की प्रधानता,
(3) भाषा और शैली में परिष्कार तथा लालित्य। ‘शुक्ल युग’ को ही हिन्दी निबन्ध का स्वर्णकाल माना गया है।

प्रमुख लेखक एवं उनके निबन्ध
(1) आचार्य रामचन्द्र शुक्ल – क्रोध,उत्साह,भय।
(2) बाबू गुलाबराय – मेरी असफलताएँ, सिद्धान्त और अध्ययन।

प्रश्न 12.
शुक्लोत्तर युग के निबन्धों की चार विशेषताएँ लिखिए। [2017]
उत्तर–
शुक्लोत्तर युग निबन्ध के विकास की चरम सीमा का युग है। इस युग में विषय वैविध्य अपेक्षाकृत अधिक दृष्टिगत होता है। इस युग के निबन्ध लेखक की अपनी निजी विशेषताएँ हैं।
विशेषताएँ –
(1) भावनात्मक एवं आत्मपरक निबन्ध,
(2) विषय – वस्तु की विविधता,
(3) विचारात्मक, भावात्मक,समीक्षात्मक शैली,
(4) निबन्धों के विकास का चरमोत्कर्ष।।

प्रश्न 13.
प्रेमचन्द के अनुसार कहानी की परिभाषा लिखते हुए बताइए कि सुविधा की दृष्टि से कहानी को किन – किन वर्गों में बाँटा गया है? [2009]
उत्तर–
प्रेमचन्द के अनुसार, “कहानी एक ऐसी रचना है जिसमें जीवन के किसी एक अंश या मनोभाव को प्रदर्शित करना ही कहानीकार का उद्देश्य होता है।”

सुविधा की दृष्टि से कहानी को निम्नलिखित चार वर्गों में बाँटा जा सकता है-
MP Board Class 12th Special Hindi गद्य साहित्य की विभिन्न विधाएँ img-13

प्रश्न 14.
श्रेष्ठ कहानी की कोई चार विशेषताएँ लिखिए।
उत्तर–
(1) जीवन के सुन्दर एवं महत्त्वपूर्ण पहलुओं का वर्णन,
(2) जिज्ञासा एवं कौतूहल का समावेश,
(3) कथानक का अप्रत्याशित (चरम) विकास तथा प्रभावपूर्ण अन्त,
(4) संक्षिप्तता।

प्रश्न 15.
कहानी के तत्त्व लिखिए। [2015]
उत्तर–
कहानी के छः तत्त्व हैं –
(1) कथानक,
(2) पात्र या चरित्र – चित्रण,
(3) कथोपकथन या संवाद,
(4) देशकाल वातावरण,
(5) भाषा – शैली,
(6) उद्देश्य।

प्रश्न 16.
कहानी में कथोपकथन या संवाद की कोई चार विशेषताएँ लिखिए।
उत्तर–
(1) कथोपकथन स्पष्ट हों,
(2) छोटे – छोटे सरल वाक्यों में लिखे गये हों,
(3) भाषा सीधी,चुटीली एवं मर्मस्पर्शी हो,
(4) पात्रानुकूलता हो।

प्रश्न 17.
नाटक किसे कहते हैं? नाटक और एकांकी में क्या अन्तर है?
उत्तर–
नाटक शब्द ‘नट’ से बना है जिसका अर्थ भावों का अभिनय है। इस प्रकार नाटक का सम्बन्ध रंगमंच से है। इसमें रंगमंच और अभिनय का ध्यान रखा जाता है। नाटक का कथानक कुछ अंकों और दृश्यों में विभाजित होता है।

नाटक का लघु आकार एकांकी है। इसमें मात्र एक अंक में कथावस्तु प्रस्तुत की जाती है। इस प्रकार नाटक में जीवन का वृहद् चित्रण होता है और एकांकी में एक अंश चित्रित किया जाता है।

प्रश्न 18.
हिन्दी में नाटक सम्राट किसे कहा गया है? उनके दो नाटकों के नाम लिखिए। [2009]
उत्तर–
हिन्दी में नाटक साहित्य को उत्कर्ष पर पहुँचाने का श्रेय जयशंकर प्रसाद को है। उन्होंने भारतीय तथा पाश्चात्य शैलियों का समन्वय करके एक नवीन शैली का प्रारम्भ किया। प्रसाद ने इतिहास के स्वर्णिम पृष्ठों को अपने नाटकों का आधार बनाया। इतिहास के कथानकों में उन्होंने वर्तमान का सन्देश दिया। राष्ट्रीयता,सांस्कृतिक – प्रेम तथा नारी के प्रति सहानुभूति का भाव आपके नाटकों में स्पष्ट दिखाई पड़ता है। ‘चन्द्रगुप्त’ एवं ‘ध्रुवस्वामिनी प्रसाद जी के प्रसिद्ध नाटक हैं।

प्रश्न 19.
हिन्दी नाट्य परम्परा में भारतेन्दु हरिश्चन्द्र का योगदान बताइए।
उत्तर–
आधुनिक युग में नाट्य परम्परा का विकास भारतेन्दु हरिश्चन्द्र से माना जाता है। उन्होंने पूर्व परम्पराओं से हटकर नाटक को नया रूप दिया। उन्होंने ही सर्वप्रथम नाटक को रंगमंचीय रूप प्रदान किया। उन्होंने मौलिक नाटकों की रचना के साथ – साथ संस्कृत,बंगला और अंग्रेजी के नाटकों का अनुवाद किया।

प्रश्न 20.
एकांकी किसे कहते हैं? हिन्दी के दो प्रमुख एकांकीकारों के नाम लिखिए।
उत्तर–
एक अंक वाले नाटक को एकांकी कहते हैं। ये आकार में छोटे होते हैं तथा लगभग आधा घण्टे में समाप्त हो जाते हैं। इसमें जीवन का खण्ड चित्र प्रस्तुत होता है। आधुनिक युग में एकांकी पर्याप्त मात्रा में लिखे गये हैं। डॉ. रामकुमार वर्मा तथा उपेन्द्रनाथ अश्क’ के नाम प्रमुख दो एकांकीकारों में गिनाये जा सकते हैं।

प्रश्न 21. नाटक एवं एकांकी के चार अन्तर बताइए। [2014]
अथवा
गद्य की नाटक विधा की तीन विशेषताएँ लिखिए।
उत्तर–
(1) नाटक में एक मुख्य कथा के साथ – साथ अन्य प्रासंगिक कथाएँ होती हैं, जबकि एकांकी में एक ही कथा होती है। प्रासंगिक कथाएँ नहीं होती।
(2) नाटक में अनेक घटनाएँ तथा कार्य – व्यापार होते हैं, जबकि एकांकी में एक ही घटना तथा एक ही कार्य व्यापार होता है।
(3) नाटक में अनेक अंक होते हैं, जबकि एकांकी में एक ही अंक होता है। (4) नाटक में विस्तार होता है, जबकि एकांकी में संक्षिप्तता होती है।

प्रश्न 22.
भारतेन्दु युग तथा प्रसाद युग के तीन – तीन प्रमुख एकांकीकारों के नाम एवं प्रत्येक के एक – एक उल्लेखनीय एकांकी के शीर्षक बताइए।
उत्तर–
भारतेन्दु युग
(1) भारतेन्दु हरिश्चन्द्र – ‘अंधेर नगरी’,
(2) राधाकृष्णदास ‘दुःखिनी बाला’,
(3) प्रतापनारायरण मिश्र ‘कलि कौतुक’।

प्रसाद युग –
(1) जयशंकर प्रसाद – एक घूट’,
(2) वृन्दावनलाल वर्मा – राखी की लाज’,
(3) सुदर्शन – ‘ऑनरेरी मजिस्ट्रेट’।

प्रश्न 23.
रेखाचित्र किसे कहते हैं? हिन्दी के दो प्रसिद्ध रेखाचित्रकारों के नाम लिखिए। रेखाचित्र की तीन विशेषताएँ लिखिए।
उत्तर–
रेखाचित्र रेखाचित्र में शब्दों की कलात्मक रेखाओं के द्वारा किसी व्यक्ति, वस्तु अथवा घटना के बाह्य तथा आन्तरिक स्वरूप का सजीव तथा वास्तविक रूप प्रस्तुत किया जाता है।
रेखाचित्रकार – दो प्रसिद्ध रेखाचित्रकार हैं –
(1) महादेवी वर्मा,
(2) रामवृक्ष बेनीपुरी।

रेखाचित्र की विशेषताएँ –
(1) रेखाचित्र कल्पना प्रधान हो सकता है।
(2) रेखाचित्र के लिये किसी भी विषय को अपनाया जा सकता है।
(3) रेखाचित्र की विषय – वस्तु विस्तृत होती है।

प्रश्न 24.
रेखाचित्र और संस्मरण में दो अन्तर [2014]
स्पष्ट करते हुए अपनी पाठ्य – पुस्तक में संकलित दोनों विधाओं की एक – एक रचना का नाम लिखिए। [2010]
अथवा
रेखाचित्र एवं संस्मरण में कोई चार अन्तर लिखिए। [2016] \
उत्तर–
रेखाचित्र और संस्मरण में अन्तर –
(1) रेखाचित्र सामान्य से सामान्य व्यक्ति का हो सकता है,जबकि संस्मरण महान व्यक्ति का ही होता है।
(2) रेखाचित्र कल्पना प्रधान होता है, जबकि संस्मरण वास्तविक होता है।
(3) रेखाचित्र में चित्रात्मक शैली प्रयुक्त होती है, जबकि संस्मरण में विवरणात्मक शैली का प्रयोग होता है।
(4) रेखाचित्र में भाषा सांकेतिक होती है, जबकि संस्मरण में भाषा अभिधामूलक होती है।

पाठ्य – पुस्तक में संकलित रचनाएँ –
(1) रेखाचित्र – गौरा (महादेवी वर्मा)।
(2) संस्मरण – गणेश शंकर विद्यार्थी (भगवतीचरण वर्मा)।

प्रश्न 25.
गद्य काव्य किसे कहते हैं? हिन्दी के दो प्रमुख गद्य संग्रहों के नाम लिखिए।
उत्तर–
गद्य काव्य में गद्य के माध्यम से किसी भावपूर्ण विषय की काव्यात्मक अभिव्यक्ति होती है। इसमें केवल एक ही भाव की प्रधानता होती है। इसकी भाषा – शैली अलंकृत, संवेदनात्मक, चमत्कारपूर्ण एवं कवित्वपूर्ण होती है। दो प्रमुख गद्य संग्रह हैं—
(1) ‘साधना’,
(2) ‘अन्तर्नाद’।

प्रश्न 26.
गद्य काव्य की विशेषताओं का उल्लेख कीजिए।
उत्तर–
किसी अनुभूति का कलात्मक लय से गद्य में प्रस्तुत किया जाना गद्य काव्य है। गद्य काव्य की प्रमुख विशेषताएँ इस प्रकार हैं : भावात्मक – भावना की गहनता ही इस रचना का स्रोत है। अनुभूति की प्रबलता से प्रेरित लेखक ही सफल गद्य काव्यकार हो सकते हैं। प्रवाहपूर्णता – – गद्य काव्य में कविता की सी प्रवाहपूर्णता अपेक्षित है। यह प्रवाहात्मकता भाव तथा भाषा दोनों में ही होती है। लयात्मकता – गद्य युक्त होती है। सघनता – इसमें लेखक की तन्मयता तथा भाव सघनता के सर्वत्र दर्शन होते हैं। इसके अतिरिक्त गद्य – काव्य में व्यक्त अनुभूति विचारों से युक्त होती है।

प्रश्न 27.
यात्रा – साहित्य से आप क्या समझते हैं? किसी एक यात्रा – साहित्य लेखक तथा उसके एक यात्रा – वृत्तान्त का नामोल्लेख कीजिए।
उत्तर–
यात्रावृत्त में लेखक यात्रा के किसी स्थान, घटना विशेष का सजीव एवं आकर्षक वर्णन करता है। इसमें लेखक की व्यक्तिगत विशेषताएँ भी प्रतिभाषित हो जाती हैं। यात्रा सम्बन्धी साहित्य में राहुल सांस्कृत्यायन, काका कालेलकर,श्रीराम शर्मा, अज्ञेय’,धर्मवीर भारती, मोहन राकेश,विनय मोहन शर्मा आदि के नाम उल्लेखनीय हैं। राहुल जी की ‘अथातो घुमक्कड़ जिज्ञासा’ श्रेष्ठ यात्रा वृत्तान्त है।

प्रश्न 28.
रिपोर्ताज का क्या अर्थ है? हिन्दी के दो प्रमुख रिपोर्ताज लेखकों के नाम उनकी एक – एक रचना सहित लिखिए। [2010]
उत्तर–
रिपोर्ताज में किसी विषय का आँखों देखा या कानों सुना वर्णन इतने प्रभावशाली ढंग से किया जाता है कि उसकी अमिट छाप हृदय – पटल पर अंकित हो जाती है। रिपोर्ताज में तथ्य वर्णन पर बल होता है, उसमें कलात्मकता पर ध्यान नहीं दिया जाता है। रिपोर्ताज में सूचना के अतिरिक्त साहित्यिकता भी होती है। रिपोर्ताज का सम्बन्ध वर्तमान से होता है।

हिन्दी के प्रमुख रिपोर्ताज लेखकों के नाम एवं उनकी रचनाएँ –
(1) शिवदान सिंह चौहान (‘लक्ष्मीपुरा),
(2) रांगेय राघव (‘तूफानों के बीच),
(3) उपेन्द्रनाथ अश्क (रेखाएँ तथा चित्र),
(4) धर्मवीर भारती (‘युद्ध यात्रा),
(5) शमशेर बहादुर सिंह (‘प्लाट का मोचा),
(6) शिवसागर मिश्र (‘वे लड़ेंगे हजारों साल) आदि।

प्रश्न 29.
रिपोर्ताज से क्या आशय है? रिपोर्ताज की विशेषताएँ लिखिए। [2012]
उत्तर–
रिपोर्ताज में किसी विषय का आँखों देखा या कानों सुना वर्णन इतने प्रभावशाली ढंग से किया जाता है कि उसकी अमिट छाप हृदय – पटल पर अंकित हो जाती है। रिपोर्ताज में तथ्य वर्णन पर बल होता है, उसमें कलात्मकता पर ध्यान नहीं दिया जाता है। रिपोर्ताज में सूचना के अतिरिक्त साहित्यिकता भी होती है। रिपोर्ताज का सम्बन्ध वर्तमान से होता है।

हिन्दी के प्रमुख रिपोर्ताज लेखकों के नाम एवं उनकी रचनाएँ –
(1) शिवदान सिंह चौहान (‘लक्ष्मीपुरा),
(2) रांगेय राघव (‘तूफानों के बीच),
(3) उपेन्द्रनाथ अश्क (रेखाएँ तथा चित्र),
(4) धर्मवीर भारती (‘युद्ध यात्रा),
(5) शमशेर बहादुर सिंह (‘प्लाट का मोचा),
(6) शिवसागर मिश्र (‘वे लड़ेंगे हजारों साल) आदि।

रिपोर्ताज की विशेषताएँ –
(1) यह किसी घटना का वास्तविक वर्णन या विवरण होता है।
(2) घटना का विवेचन तथा विश्लेषण होता है।
(3) रिपोर्ताज में रेखाचित्र,कहानी तथा निबन्धों की भी विशेषताएँ पायी जाती हैं।
(4) सरलता,रोचकता, प्रभावपूर्णता एवं आत्मीयता के गुण पाये जाते हैं।

प्रश्न 30.
उपन्यास किसे कहते हैं? तीन प्रसिद्ध उपन्यासों के नाम लिखिए।
उत्तर–
उपन्यास शब्द का अर्थ है – ‘जीवन के निकट’। इस तरह उपन्यास मानव जीवन को निकटता से प्रस्तुत करता है। इसमें जीवन का विस्तृत रूप प्रस्तुत किया जाता है। उपन्यास के विस्तृत कथानक में अनेक पात्र, घटनाएँ आदि होती हैं। हिन्दी में यह विधा बड़ी लोकप्रिय तथा विकसित है। उपन्यास सामाजिक, ऐतिहासिक, राजनीतिक आदि विविध विषयों पर लिखे जाते हैं। हिन्दी के अनेक महत्त्वपूर्ण उपन्यासों में ‘गोदान’, ‘चित्रलेखा’ तथा ‘पुनर्नवा’ तीन के नाम प्रमुख हैं।

प्रश्न 31.
हिन्दी में ‘उपन्यास सम्राट’ किसे कहा गया है? उनके दो उपन्यासों के नाम लिखिए।
अथवा [2809, 14]
हिन्दी उपन्यास साहित्य के विकास में प्रेमचन्द के योगदान का निरूपण कीजिये। [2011]
उत्तर–
हिन्दी में प्रेमचन्द को ‘उपन्यास सम्राट’ कहा गया है। वास्तव में, प्रेमचन्द के अवतरण के साथ ही हिन्दी उपन्यास को सशक्त प्रतिभा का सम्बल मिला। प्रेमचन्द ने नवजात उपन्यास विधा को पूर्ण विकास तक पहुँचाया। गोदान, कर्मभूमि, रंगभूमि, सेवासदन, प्रेमाश्रय, निर्मला, गबन आदि आपके उत्कृष्ट उपन्यास हैं। विषय तथा शिल्प दोनों दृष्टियों में आपने उपन्यास साहित्य को पुष्ट किया। आप यथार्थवादी लेखक हैं। राजनीति,समाज तथा मानव की समस्याओं को उभारकर उनके समाधान दिये गये हैं।

प्रश्न 32.
कहानी और उपन्यास के तीन प्रमुख अन्तर स्पष्ट कीजिए। साथ ही, दो प्रमुख कहानीकारों तथा दो उपन्यासकारों के नाम लिखिए। [2013]
अथवा
कहानी और उपन्यास में कोई चार अन्तर लिखिए। [2017]
उत्तर–
कहानी और उपन्यास में प्रमुख अन्तर –
(1) कहानी जीवन के किसी एक खण्ड का चित्रण करती है जबकि उपन्यास में सम्पूर्ण जीवन का चित्रण होता है।
(2) कहानी में एक ही कथा होती है, उपन्यास में मुख्य कथा के साथ – साथ अन्य प्रासंगिक कथाएँ जुड़ी होती हैं।
(3) कहानी में सीमित पात्र तथा घटनाएँ होती हैं जबकि उपन्यास में अनेक पात्र एवं घटनाओं का वर्णन होता है।
(4) कहानी का कथानक संक्षिप्त होता है किन्तु उपन्यास का कथानक अत्यन्त विस्तृत होता है।

दो प्रमुख कहानीकार
(1) प्रेमचन्द,
(2) जयशंकर प्रसाद।

दो प्रमुख उपन्यासकार –
(1) प्रेमचन्द,
(2) जैनेन्द्र कुमार।

प्रश्न 33.
एकांकी के चार तत्त्व लिखिए।
उत्तर–
एकांकी के चार तत्त्व
(1) कथावस्तु,
(2) पात्र – योजना,
(3) संवाद एवं
(4) अभिनेयता।

प्रश्न 34.
जीवनी और आत्मकथा में तीन अन्तर स्पष्ट करते हुए दोनों विधाओं की एक – एक रचना लिखिए। [2009]
अथवा
जीवनी और आत्मकथा में अन्तर लिखिए। [2011]
उत्तर–
(1) जीवनी में लेखक इतिहासकार की तरह पूरी सच्चाई से किसी व्यक्ति के जीवन की जन्म से लेकर मृत्यु तक सभी घटनाओं के बारे में लिखता है जबकि आत्मकथा में लेखक स्वयं अपने जीवन की कथा पाठकों के समक्ष प्रस्तुत करता है।
(2) जीवनी लेखन में लेखक तटस्थ रहकर लिखता है। आत्मकथा में लेखक अपने जीवन की घटना का वर्णन अपनी स्मरण शक्ति के आधार पर करता है।
(3) जीवनी में लेखक अपने विचार और प्रतिक्रिया नहीं दर्शाता है। आत्मकथा में लेखक अपने परिवार, समाज,आर्थिक दशा,राजनैतिक घटनाक्रम का बराबर दर्शन कराता रहता है।
जीवनी – कलम का सिपाही’ (अमृतलाल)।
आत्मकथा – ‘मेरी कहानी’ (जवाहरलाल नेहरू)।

प्रश्न 35.
आलोचना का क्या अर्थ है? हिन्दी के दो आलोचकों के नाम लिखिए। [2009]
उत्तर–
आलोचना विधा अथवा समीक्षा आधुनिक काल की देन है। गद्य साहित्य के क्षेत्र में इसका महत्त्वपूर्ण स्थान है। हिन्दी में आलोचकों का शुभारम्भ भारतेन्दु युग से ही प्रारम्भ हो
चुका है।
(1) बालकृष्ण भट्ट,
(2) चौधरी बदरी नारायण प्रेमघन’ सुप्रसिद्ध आलोचक थे।

MP Board Class 12th Hindi Solutions

MP Board Class 8th Hindi Sugam Bharti Solutions Chapter 24 कैसे रहें पूर्ण स्वस्थ

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MP Board Class 8th Hindi Sugam Bharti Solutions Chapter 24 कैसे रहें पूर्ण स्वस्थ

प्रश्न अभ्यास

अनुभव विस्तार

Mp Board Class 8 Hindi Chapter 24 प्रश्न 1.
वस्तुनिष्ठ प्रश्न
(क) सही जोड़ी बनाइए
(अ) शरीर के आंतरिक अंग – 1. योग, ध्यान, प्राणायाम
(ब) नकारात्मक भावनाएँ – 2. शारीरिक, मानसिक व भावनात्मक स्वास्थ्य
(स) सफलता अर्नित करने – 3. हृदय, वृक्क, हेतु आवश्यक पाचन-तंत्र, कंकाल
(द) मानसिक स्वास्थ्य के लिए – 4. क्रोध, ईर्ष्या, द्वेष, किए गए प्रयास तनाव, चिंता, अंहकार, निर्दयता।
उत्तर-
(अ) – 3
(ब) – 4
(स) – 2
(द) – 1

(ख) सही विकल्प चुनकर रिक्त स्थान की पूर्ति कीजिए
(अ) भावनात्मक एवं मानसिक स्वास्थ्य का शारीरिक स्वास्थ्य पर गहरा ……………….पड़ता है। (परिणाम/प्रभाव)
(ब) एक्सरे से और ………………. से शरीर के भीतरी अंगों के बारे में पता चलता है। (सोनोग्राफी/रेडियोग्राफी)
(स) मनुष्य तभी पूर्ण रूप से स्वस्थ हो सकता है जब परिस्थितियों का ……………….के साथ सामना करे। (आत्म-विश्वास/अटल विश्वास)
(द) भावनात्मक रूप से परिपक्व व्यक्ति अपनी भावनाओं ……………….कर विवेकपूर्ण कार्य करता है। (अनियंत्रण/नियंत्रण)
उत्तर-
(अ) प्रभाव,
(ब) सोनोग्राफी,
(स) आत्मविश्वास,
(द) नियंत्रण।

अति लघु उत्तरीय प्रश्नोत्तर

Class 8 Hindi Chapter 24 Mp Board प्रश्न 1.
(अ) बौद्धिक स्वास्थ्य से लेखक का क्या आशय है?
(ब) व्यक्ति पूर्ण रूप से स्वस्थ कब कहा जा सकता है?
(स) व्यक्ति कब हर्ष का अनुभव करता है?
(द) आध्यात्मिक स्वास्थ्य के अच्छे बने रहने के कौन-कौन से लाभ हैं?
उत्तर-
(अ) बौद्धिक स्वास्थ्य से लेखक का आशय है-बुद्धि से संबंधित स्वास्थ्य।
(ब) व्यक्ति पूर्ण रूप से स्वस्थ तब कहा जा सकता है, जब परिस्थितियों का आत्म-विश्वास के साथ सामना करे और भावनात्मक रूप से विचलित न हो।
(स) व्यक्ति इच्छानुसार परिणाम प्राप्त होने पर हर्ष का अनुभव करता है।
(द) अध्यात्मिक स्वास्थ्य के अच्छे बने रहने के कई लाभ हैं, जैसे-विशेष आनंद अनुभव, भावनात्मक संवेगों पर नियंत्रण, शारीरिक व्याधियों पर नियंत्रण आदि।

लघु उत्तरीय प्रश्नोत्तर

(अ) सफलता अर्जित करने के लिए भावनात्मक स्वास्थ्य अच्छा होना क्यों आवश्यक है?
उत्तर-
सफलता अर्जित करने के लिए भावनात्मक स्वास्थ्य अच्छा होना आवश्यक है। यह इसलिए कि संयम और धैर्य अच्छे भावनात्मक स्वास्थ्य के सूचक होते हैं, जो पूर्ण स्वस्थ रहने के लिए भावनाओं के वेग को नियंत्रित करते हैं।

(ब) “भावनात्मक एवं मानसिक स्वास्थ्य का शारिरिक स्वास्थ्य पर गहरा प्रभाव पड़ता है।” इस कथन को स्पष्ट कीजिए।
उत्तर-
“भावनात्मक एवं मानसिक स्वास्थ्य का शारीरिक स्वास्थ्य पर गहरा प्रभाव पड़ता है।” इस कथन के द्वारा लेखक ने यह कहना चाहा है कि एक अच्छे शारीरिक स्वास्थ्य के लिए भावनात्मक मानसिक स्वास्थ्य का होना बहुत आवश्यक है।

(स) शरीर में हारमोन असंतुलित क्यों हो जाते हैं?
उत्तर-
क्रोध, ईर्ष्या, द्वेष आदि से रक्त-दाब बढ़ जाता है। इससे शरीर में हारमोन असंतुलित हो जाते हैं।

(द) चिंता और तनाव से कौन-कौन से रोग हो सकते हैं?
उत्तर-
चिंता और तनाव से पेट में अम्लता, अल्सर, हृदय रोग, सिर दर्द, थकान आदि रोग हो सकते हैं।

भाषा की बात

Mp Board Solution Class 8 Hindi प्रश्न 1.
बोलिए और लिखिएसंयम, ईर्ष्या, द्वेष, दृष्टि, स्वास्थ्य, धैर्य।
उत्तर-
संयम, ईर्ष्या, द्वेष, दृष्टि, स्वास्थ्य, धैर्य ।

Class 8th Hindi Solution Mp Board प्रश्न 2,
निम्नलिखित शब्दों की शुद्ध वर्तनी पर गोला लगाइए-
अनूभूति, अनुभुति, अनुभूती, अनुभूति। शंतोष, संतोष, सम्तोष, संतोश विषेश, विशेष, विशष्य, विशेश परीणाम, परिनाम, परिणाम, परीनाम।
उत्तर-
अनुभूति, संतोष, विशेष, परिणाम।

Class 8 Mp Board Solution प्रश्न 3.
निम्नलिखित शब्दों का वाक्यों में प्रयोग कीजिएहृदयाघात, आत्मविश्वास, असंतुलित, परिस्थिति।
उत्तर-
शब्द – वाक्य प्रयोग
हृदय – अत्यधिक खुशी पर दुखी होने से हृदयाघात हो जाता है।
आत्मविश्वास – स्वस्थ व्यक्ति में आत्मविश्वास भरा होता है।
असंतुलित – स्वस्थ व्यक्ति संतुलित व्यवहार करता है।
परिस्थिति – जीवन में कभी-कभी कठिन परिस्थिति भी आ जाती है।

Mp Board Solution Hindi Class 8 प्रश्न 4.
निम्नलिखित शब्दों से उर्दू, अंग्रेजी और हिंदी (तत्सम) शब्द छाँटकर क्रम से लिखिए अखबार, समाचार, एक्सरे, मस्तिष्क, खराबी, खुशी, कंकाल, कमजोर, सोनोग्राफी, हारमोन, मृत्यु, दिल, दिमाग, व्यक्ति, करुण, अल्सर, ब्लडप्रेशर, डायबिटीज।।
उत्तर-
उर्दू के शब्द-अखबार, खराबी, खुशी, कमजोर, दिल, दिमाग। अंग्रेजी के शब्द-एक्सरे, सोनोग्राफी, हारमोन, अल्सर, ब्लडप्रेशर, डायबिटिज। हिंदी (तत्सम) शब्द-समाचार, मस्तिष्क, कंकाल, मृत्यु, व्यक्ति, करुण।

Mp Board Solution Class 8 प्रश्न 5.
निम्नलिखित शब्दों में से मूल शब्द और प्रत्यय अलग करके लिखिए-
चारित्रिक, धार्मिक, योग्यता, अम्लता, कुशलता, सहायता, निर्दयता, आंतरिक, पारिवारिक, मानसिक।
उत्तर-
Class 8 Hindi Mp Board Solution

♦ गद्यांशों की संदर्भ-प्रसंग सहित व्याख्याएँ

1. स्वस्थ व्यक्ति वही होगा जो नकारात्मक भावनाओं यथा क्रोध, ईर्ष्या, द्वेष, तनाव, चिंता, अंहकार निर्दयता, डर आदि को त्यागकर संतुलित व्यवहार करे और चिंता, तनावों से दूर रहकर साहस के साथ अपने जीवन की समस्याओं का सामना करे। पूर्ण स्वस्थ व्यक्ति भावनात्मक रूप से परिपक्व माना जाता है। वह जल्दी में कोई दिशाहीन कदम नहीं उठाता, छोटी-छोटी बातों का मन पर बोझ रखकर अपने लक्ष्य से नहीं भटकता है, तथा उन बातों के लिए भी चिंतित नहीं होता, जो उसकी क्षमता के बाहर हैं। भावनात्मक रूप से परिपक्व व्यक्ति अपनी भावनाओं पर नियंत्रण कर विवेकपूर्ण कार्य करता है।

शब्दार्थ- नकारात्मक-विपरीत। परिपक्व-पका हुआ, अनुभवी। लक्ष्य-उद्देश्य । क्षमता-शक्ति।

संदर्भ- प्रस्तुत पंक्तियाँ हमारी पाठ्य-पुस्तक ‘सुगम भारती’ (हिंदी सामान्य) के भाग-8 के पाठ 24 के ‘कैसे रहें पूर्ण स्वस्थ’ से ली गई हैं। इन पंक्तियों के लेखक डॉ. एस. सी. पुरोहित हैं।

प्रसंग- प्रस्तुत पंक्तियों में लेखक ने पूर्णस्वस्थ रहने के उपाय बतलाते हुए कहा है कि-

व्याख्या-पूर्ण स्वस्थ व्यक्ति की अलग ही पहचान होती है। इस प्रकार के व्यक्ति किसी प्रकार की विपरीत सोच-समझ जैसे-क्रोध, ईर्ष्या, द्वेष, तनाव, चिंता, अंहकार, कठोरता, भय आदि को अपने पास नहीं आने देता है। इस प्रकार वह संतुलित और सीमित बातचीत और क्रिया-व्यापार करता है। इससे वह निश्चिंत होकार साहसपूर्वक अपने जीवन की कठिन – से -कठिन समस्याओं का सामना कर लेता है। इस प्रकार वह भावनात्मक रूप से पूरा अनुभवी समझा जाता है। यही कारण है कि वह कोई भी कदम नाप-तौलकर उठाता है। फलस्वरूप उसके मन मस्तिष्क पर किसी प्रकार की हल्की भी बातों को असर नहीं पड़ता है। इसलिए वह उन बातों से बहुत दूर रहता है जिन्हें वह करने में असमर्थ होता है। इस प्रकार वह अपने भावनाओं में बहकता नहीं है। वह तो अपनी भावनाओं पर अपनी बुद्धि-समझ से अकुंश लगाकर अपने लक्ष्य-पथ पर बढ़ता ही जाता है।

विशेष-

  • पूर्ण स्वस्थ व्यक्ति की पहचान ज्ञानवर्द्धक रूप में दी गई है।
  • यह अंश प्रेरणादायकस्वरूप है।

MP Board Class 12th Chemistry Solutions Chapter 3 वैद्युतरसायन

MP Board Class 12th Chemistry Solutions Chapter 3 वैद्युतरसायन

वैद्युतरसायन NCERT पाठ्यनिहित प्रश्नोत्तर

प्रश्न 1.
निकाय Mg2+|Mg का मानक इलेक्ट्रोड विभव आप कैसे ज्ञात करेंगे?
उत्तर-
Mg2+ |Mg इलेक्ट्रोड को मानक हाइड्रोजन इलेक्ट्रोड से जोड़कर E0Mg2+ /Mg का निर्धारण किया जा सकता है।
Mg(s)|Mg+2(1M)||H+(1M)|H2(1 atm)Pt

प्रश्न 2.
क्या आप एक जिंक के पात्र में कॉपर सल्फेट का विलयन रख सकते हैं ?
हल
जिंक का मानक अपचयन विभव ( \(\mathrm{E}_{\mathrm{Zn}^{2+} / \mathrm{Z} \mathrm{n}}^{\circ} \) = -0.76V), कॉपर के मानक अपचयन विभव ( \(\mathrm{E}_{\mathrm{Zn}^{2+} / \mathrm{Z} \mathrm{n}}^{\circ} \) = +0-34V) से कम है अतः जिंक कॉपर आयनों को अपचयित कर देगा। अत: हम कॉपर सल्फेट को जिंक के पात्र में नहीं रख सकते हैं।
Zn + Cu2+→ Zn2+ + Cu.
Ecell= Ecathode – Eanode = 0.034 – (-0.76) = +1.1 V.

प्रश्न 3.
मानक इलेक्ट्रोड विभव की तालिका का निरीक्षण कर तीन ऐसे पदार्थों के नाम बताइए जो अनुकूल परिस्थितियों में फेरस आयनों को ऑक्सीकृत कर सकते हैं ?
उत्तर
फेरस आयनों को केवल वे तत्व ऑक्सीकृत कर सकते हैं जिनके मानक अपचयन विभव \(\mathrm{E}_{\mathrm{Fe}^{2+} / \mathrm{Fe}}^{\circ}\) = 0.77 से ज्यादा धनात्मक होंगे, अत: F2, Cl2, B2 फेरस आयनों को ऑक्सीकृत कर सकते हैं।

प्रश्न 4.
pH = 10 के विलयन के सम्पर्क वाले हाइड्रोजन इलेक्ट्रोड के विभव का परिकलन कीजिए।
हल
MP Board Class 12th Chemistry Solutions Chapter 3 वैद्युतरसायन - 1
प्रश्न 5.
एक सेल के EMF का परिकलन कीजिए, जिसमें निम्नलिखित अभिक्रिया होती है। दिया गया है
Ecell = 1.05V.
Ni(s)h + 2Ag+(0.002 M) →Ni2+(0.160 M) + 2Ags
हल
MP Board Class 12th Chemistry Solutions Chapter 3 वैद्युतरसायन - 2

प्रश्न 6.
एक सेल जिसमें निम्नलिखित अभिक्रिया होती है –
2Fe3+(aq) + 2I(aq) →2Fe2+(aq)) + I2(s)
का 298 K ताप पर E0cell = 0.236V है। सेल अभि-क्रिया की मानक गिब्स ऊर्जा एवं साम्य स्थिरांक का परिकलन कीजिए।
हल
ΔG° =-nFE° = -2 × 96,500 × 0.236J
= -45548J = – 45.548kJ.
K = \(Antilog\left[\frac{n \mathrm{E}^{\circ}}{0.059}\right] \)
= \(Antilog \frac{2 \times 0.236}{0.059}=10^{8} \)

प्रश्न 7.
किसी विलयन की चालकता तनुता के साथ क्यों घटती है ? ‘
उत्तर
विलयन की तनुता बढ़ाने पर विलयन के इकाई आयन में उपस्थित आयनों की संख्या घटती है। अत: चालकता भी घटती है।

प्रश्न 8.
जल की \(\Lambda_{m}^{\mathbf{o}}\) ज्ञात करने का एक तरीका बताइये।
हल
MP Board Class 12th Chemistry Solutions Chapter 3 वैद्युतरसायन - 3

प्रश्न 9.
0.025 mol L-1 मेथेनोइक अम्ल की चालकता 46.1S cm mol-1 है। इसकी वियोजन मात्रा एवं वियोजन स्थिरांक का परिकलन कीजिए।
दिया गया है कि \(\lambda_{\left(\mathrm{H}^{*}\right)}^{\circ}\) = 349.6 S cm2 mol-1एवं \(\lambda_{\left(H \subset O O^{-}\right)}^{0}\) = 54.6 S cm2 mol-1.
हल
MP Board Class 12th Chemistry Solutions Chapter 3 वैद्युतरसायन - 4
प्रश्न 10.
यदि एक धात्विक तार में 0-5 ऐम्पियर की धारा 2 घण्टों के लिए प्रवाहित होती है तो तार में से कितने इलेक्ट्रॉन प्रवाहित होंगे?
हल
MP Board Class 12th Chemistry Solutions Chapter 3 वैद्युतरसायन - 5

प्रश्न 11.
उन धातुओं की सूची बनाइए जिनका वैद्युत अपघटनी निष्कर्षण होता है।
उत्तर
Na, K, Mg, AI, Ca इत्यादि सक्रिय धातुओं का निष्कर्षण वैद्युत अपघटनी विधि से किया जाता है।

प्रश्न 12.
निम्नलिखित अभिक्रिया में Cr2O72- आयनों के एक मोल के अपचयन के लिए कूलॉम में विद्युत् की कितनी मात्रा की आवश्यकता होगी?
Cr2O72- +14H+ + 6e → 2Cr+3 +8H2O.
उत्तर-
मोल Cr2O72- आयनों के अपचयन के लिए 6 मोल इलेक्ट्रॉन आवश्यक है। अतः आवश्यक आवेश = 6F
= 6 × 96,500 कूलॉम।

प्रश्न 13.
चार्जिंग के दौरान प्रयुक्त पदार्थों का विशेष उल्लेख करते हुए लेड संचायक सेल की चार्जिंग क्रियाविधि का वर्णन रासायनिक अभिक्रियाओं की सहायता से कीजिए।
उत्तर
व्यापारिक सेल या बैटरी में देखिए।

प्रश्न 14.
हाइड्रोजन को छोड़कर ईंधन सेलों में प्रयुक्त किये जा सकने वाले दो अन्य पदार्थों के नाम बताइए।
उत्तर
मेथेन एवं मेथेनॉल।

प्रश्न 15.
समझाइये कि कैसे लोहे पर जंग लगने का कारण एक वैद्युत रासायनिक सेल बनना माना जाता है ?
उत्तर
लोहे की सतह पर जल एवं CO2 से कार्बोनिक अम्ल बनना है –

H2O(l) + CO2(g) →H2CO3 ⇋ 2H+ + CO32-
H+ आयनों की उपस्थिति में लोहे का ऑक्सीकरण होता है।
Fe(s) → Fe2+(aq) +2e
दूसरे भाग पर इन इलेक्ट्रॉनों का उपयोग अपचयन में होता है।
O2(g) + 4H+(aq) + 4e →2H2O(l)
कुल अभिक्रिया,
2Fe(s) + O2(g) + 4H+(aq) ⇋ 2Fe+2(aq)+ 2H2O(l)

NCERT पाठ्य-पुस्तक प्रश्नोत्तर

प्रश्न 1.
निम्नलिखित धातुओं को उस क्रम में व्यवस्थित कीजिए जिसमें वे एक दूसरे को उनके लवणों के विलयनों में से प्रतिस्थापित करती हैं।
AI, Cu, Fe, Mg एवं Zn.
उत्तर
वह धातु जिसका मानक अपचयन विभव तुलनात्मक रूप से कम होगा वह ज्यादा सक्रिय होगी एवं अन्य को उसके विलयन से विस्थापित कर देगी।
MP Board Class 12th Chemistry Solutions Chapter 3 वैद्युतरसायन - 6

प्रश्न 2.
नीचे दिए गए मानक इलेक्ट्रोड विभवों के आधार पर धातुओं को उनकी बढ़ती हुई .. अपचायक क्षमता के क्रम में व्यवस्थित कीजिए –
K+/K = -2.93V, Ag+/Ag = 0.80V, Hg 2+/Hg = 0.79V, Mg2+/Mg =-2.37V, Cr3+/Cr = -0.74V.
उत्तर
जिस धातु का मानक इलेक्ट्रोड विभव कम होगा वे तुलनात्मक रूप से प्रबल अपचायक होंगे। अतः दी गई धातुओं की अपचायक क्षमता का बढ़ता क्रम
Ag < Hg < Cr < Mg <K

प्रश्न 3.
उस गैल्वेनीक सेल को दर्शाइए जिसमें निम्नलिखित अभिक्रिया होती है –
Zn(s)+2Ag+(aq) → Zn+2(aq) + 2Ag(s), अब बताइए –
(i) कौन-सा इलेक्ट्रोड ऋणात्मक आवेशित है ?
(ii) सेल में विद्युत्-धारा के वाहक कौन से हैं ?
(iii) प्रत्येक इलेक्ट्रोड पर होने वाली अभिक्रिया क्या है ?
उत्तर
Zn(s) | Zn2+(aq) || Ag+(aq) | Ag(s)
एनोड पर Zn → zn2++ 2e (ऑक्सीकरण)
कैथोड पर Ag+ + e →Ag (अपचयन)
(i) यहाँ Zn एनोड है जो कि ऋणात्मक इलेक्ट्रोड होगा।
(ii) सेल में इलेक्ट्रॉन, विद्युत्-धारा के वाहक हैं।

प्रश्न 4.
निम्नलिखित अभिक्रियाओं वाले गैल्वेनीक सेल का मानक सेल-विभव परिकलित कीजिए –
(i) 2Cr(s) + 3Cd+2(aq) → 2Cd+3(aq)+3Cd
(ii) Fe+2(aq) + Ag+(aq) → F+3(aq)+ Ago(s) उपरोक्त अभिक्रियाओं के लिए ΔrG° एवं साम्य स्थिरांकों की भी गणना कीजिए।
हल
(i) E°cell = E°cathode-E°anode
= -0.40- (-0.74) = + 0.34V
AG° = -nFE° = -6 × 96500 × 0.34
= -19686J = -196.86kJmol-1
ΔG° = -2.303 RT log K
– 19686 = -2.303 × 8.314 × 298 log K
या log K = 35.5014
या K = Antilog 35.5014 = 3.19 × 1034.

(ii) E°cell = E°Cathode– E°anode
= 0.80 – (0.77) = +0.03V
ΔG° = -nFE = -1 × 96500 × 0.03
= -2895Jmol-1
=-2.895 kJmol-1
∴ ΔG° = – 2.303 RT log K
– 2895 Jmol-1= – 2.303 × 8:314 × 298 log K
या log K = 0.5074
K = Antilog 0.5074 = 3.22.

प्रश्न 5.
निम्नलिखित सेलों की 298K पर ननस्ट समीकरण एवं emf लिखिए।
(i) Mg(s) | Mg 2+ (0.001M) || Cu 2+ (0.0001 M) |Cu (s)
(ii) Fe(s) | Fe2+ (0.001M)|| H+ (1M) |H2(g) (1bar)|Pt(s)
(iii) Sn(s)|Sn+2 (0.050 M) || H+ (0.020 M) |H2(g)) (1 bar) |Pt(s)
(iv) Pt(s) |Br2(l) | Br (0-010 M) ||H+ (0.030 M) | H2(g) (1 bar) | Pt(s) .
हल-
(i)
MP Board Class 12th Chemistry Solutions Chapter 3 वैद्युतरसायन - 51
(ii)
MP Board Class 12th Chemistry Solutions Chapter 3 वैद्युतरसायन - 8
(iii)
MP Board Class 12th Chemistry Solutions Chapter 3 वैद्युतरसायन - 9
(iv)
MP Board Class 12th Chemistry Solutions Chapter 3 वैद्युतरसायन - 10

प्रश्न 6.
घड़ियों एवं युक्तियों में अत्यधिक उपयोग में आने वाली बटन सेलों में निम्नलिखित अभिक्रिया होती है –
MP Board Class 12th Chemistry Solutions Chapter 3 वैद्युतरसायन - 11
अभिक्रिया के लिए ΔrG° एवं E° ज्ञात कीजिए।
उत्तर
Zn(s)→zn2+ +2e ; E° =-0.76V
Ag2O+H2O+2e → 2Ag + 20H ; E° = + 0.34 V
cell = E°cathode – E°anode
= 0.34 – (-0.76) = 1.10 v
ΔG° = -nFE°
=-2 × 96500 × 1.10 = – 2.123 × 105J.

प्रश्न 7.
किसी वैद्युत-अपघट्य के विलयन की चालकता एवं मोलर चालकता की परिभाषा दीजिए। सान्द्रता के साथ इनके परिवर्तन की विवेचना कीजिए।
उत्तर
मोलर चालकता (Molar conductance) – स्थिर ताप एवं मिश्चित सान्द्रण (या तनुता) पर किसी विलयन की मोलर चालकता, उस विलयन की चालकता होती है जिसमें पदार्थ का एक मोल उपस्थित होता है। इसे \(\wedge_{m}\) से प्रदर्शित किया जाता है –
या
“किसी विलयन की मोलर चालकता पदार्थ के एक ग्राम मोल को Vघन सेमी में विलेय करने से उत्पन्न हुए सभी आयनों की चालकता होती है।” तुल्यांकी चालकता के समान ही मोलर चालकता भी विलयन की विशिष्ट चालकता से संबंधित होती है।

सान्द्रता का प्रभाव-सान्द्रता या तनुता के साथ-साथ विलयन में आयनों की संख्या तथा आयनिक गतिशीलता में परिवर्तन होता है। अतः सान्द्रता से विलयन की चालकता में परिवर्तन होता है, इसी प्रकार सान्द्रता बढ़ाने या कम करने पर विलयन में आयनों की संख्या बढ़ती है। अर्थात् मोलर चालकता में वृद्धि होती है।

प्रश्न 8.
298K पर 0.20M KCI विलयन की चालकता 0.0248 S cm-1 है। इसकी मोलर चालकता का परिकलन कीजिए।
हल
MP Board Class 12th Chemistry Solutions Chapter 3 वैद्युतरसायन - 12

प्रश्न 9.
298K पर एक चालकता सेल जिसमें 0.001M KCl विलयन है, का प्रतिरोध 15000Ω है। यदि 0.001M KCI विलयन की चालकता 298K पर 0-146 x 10-3s cm-1 हो तो सेल स्थिरांक क्या है ?
हल
G* = \(\frac{\kappa}{G} \) =k × R = (0.146 × 10-3) × 1500
= 0.219cm-1 .

प्रश्न 10.
298K पर सोडियम क्लोराइड की विभिन्न सान्द्रताओं पर चालकता का मापन किया गया जिसके आँकड़े निम्नलिखित हैं –
MP Board Class 12th Chemistry Solutions Chapter 3 वैद्युतरसायन - 13

सभी सान्द्रताओं के लिए \(\Lambda_{m} \) का परिकलन कीजिए एवं \(\Lambda_{m} \) तथा C1/2 के मध्य एक आरेख खींचिए। \(\Lambda_{m}^{\mathbf{o}} \) का मान ज्ञात कीजिए।
उत्तर
MP Board Class 12th Chemistry Solutions Chapter 3 वैद्युतरसायन - 14
MP Board Class 12th Chemistry Solutions Chapter 3 वैद्युतरसायन - 15

प्रश्न 11.
0.00241M ऐसीटिक अम्ल की चालकता 7.896 × 10-5 S cm-1 है। इसकी मोलर चालकता को परिकलित कीजिए। यदि ऐसीटिक अम्ल के लिए \(\Lambda_{m}^{\mathbf{o}} \) का मान 390.5S cm” mor’हो तो वियोजन स्थिरांक क्या है?
हल
MP Board Class 12th Chemistry Solutions Chapter 3 वैद्युतरसायन - 16

प्रश्न 12.
निम्नलिखित के अपचयन के लिए कितने आवेश की आवश्यकता होगी?
(i) 1 मोल Al3+को Al में
(ii) 1 मोल Cu2+ को Cu में
(iii) 1 मोल MnO4 को Mn2+ में।
हल
MP Board Class 12th Chemistry Solutions Chapter 3 वैद्युतरसायन - 17

प्रश्न 13.
निम्नलिखित को प्राप्त करने में कितने फैराडे विद्युत् की आवश्यकता होगी?
(i) गलित CaCl2 से 20.0 gm Ca
(ii) गलित Al2O3 से 40.0 gm Al.
हल
(i) Ca2+ + 2e →Ca
1 मोल 2F
40 ग्राम 2F
∴ 20 ग्राम Ca2+ आयन के लिए 1F कूलॉम की आवश्यकता होगी।
(iii) Al3+ + 3e →Al
∴ 27 ग्राम Al के लिए 3F की आवश्यकता होगी।
अत: 40g Al के लिए \(\frac{3 \times 40}{27} \) = 4.44F की आवश्यकता होगी।

प्रश्न 14.
निम्नलिखित को ऑक्सीकृत करने के लिए कितने कूलॉम विद्युत् आवश्यक है –
(i) 1 मोल H20 को O2 में,
(ii) 1 मोल Fe0 को Fe203 में।
हल
(i)
MP Board Class 12th Chemistry Solutions Chapter 3 वैद्युतरसायन - 18
अतः 1 मोल जल को ऑक्सीकृत करने के लिए 2F = 2×96,500 कूलॉम की आवश्यकता होगी।
(ii)
MP Board Class 12th Chemistry Solutions Chapter 3 वैद्युतरसायन - 19

प्रश्न 15.
Ni(NO3)2 के एक विलयन का प्लैटिनम इलेक्ट्रोडों के बीच 5 ऐम्पियर की धारा प्रवाहित करते हुए 20 मिनट तक विद्युत्-अपघटन किया गया।Ni की कितनी मात्रा कैथोड पर निक्षेपित होगी?
हल
∵ \(\mathrm{W}=\frac{\mathrm{I} t \mathrm{E}}{96,500} \)
= \(\frac{5 \times 20 \times 60 \times 58.7112}{96,500} \) = 3.65ग्राम।

प्रश्न 16.
ZISO4, AgNO3 एवं Cuso, विलयन वाले तीन वैद्युत्-अपघटनी सेलों A, B, C के श्रेणीबद्ध किया गया एवं 1.5 ऐम्पियर की विद्युत् धारा, सेल B के कैथोड पर 1.45g सिल्वर निक्षेपित होने तक लगातार प्रवाहित की गई। विद्युत् धारा कितने समय तक प्रवाहित हुई ? निक्षेपित कॉपर एवं जिंक का द्रव्यमान क्या होगा?
हल
फैराडे के प्रथम नियम से \(\mathrm{W}=\frac{\mathrm{I} t \mathrm{E}}{96,500} \)
∴ 1-45 = \(\frac{1.5 \times t \times 108}{96,500} \)
या t= 863.7 sec = 14.4min.
फैराडे के द्वितीय नियम से,
MP Board Class 12th Chemistry Solutions Chapter 3 वैद्युतरसायन - 20

प्रश्न 17.
सारणी 3.1 में दिए गए मानक इलेक्ट्रोड विभवों की सहायता से अनुमान लगाइए कि क्या निम्नलिखित अभिकर्मकों के बीच अभिक्रिया संभव है ?
(i) Fe3+(aq) और I(aq)
(ii) Ag+(aq) और Cu (s)
(iii) Fe3+(aq) और Br (aq)
(iv) Ags और Fe3+(aq)
(v) Br2(aq) और Fe2+(aq)
हल
नोट-सारणी के लिए NCERT पाठ्य-पुस्तक देखें।
यदि सेल का EMF धानत्मक हो तो अभिक्रिया संभव होगी।
कैथोड पर अपचयन एवं एनोड पर ऑक्सीकरण होता है।
MP Board Class 12th Chemistry Solutions Chapter 3 वैद्युतरसायन - 21
MP Board Class 12th Chemistry Solutions Chapter 3 वैद्युतरसायन - 22
प्रश्न 18.
निम्नलिखित में से प्रत्येक के लिए वैद्युत-अपघटन से प्राप्त उत्पाद बताइए।
(a) सिल्वर इलेक्ट्रोडों के साथ AgNO3 का जलीय विलयन
(b) प्लैटिनम इलेक्ट्रोडों के साथ AgNO3 का जलीय विलयन
(c) प्लैटिनम इलेक्ट्रोडों के साथ H2SO4 का तनु विलयन
(b) प्लैटिनम इलेक्ट्रोडों के साथ CuCl2 का जलीय विलयन।
हल
(a) Ag इलेक्ट्रोड के साथ AgNO3 के जलीय विलयन में Ag* का कैथोड पर अपचयन होगा क्योंकि \(\mathrm{B}_{\mathrm{A}_{8}}^{\circ}>\mathrm{E}_{\mathrm{H}, \mathrm{O}}^{\circ} \)
अतः कैथोड पर Ag+(aq) + e→ Ag(s)
एनोड पर Ag(s) → Ag+(aq)taa) + e
चूंकि Ag का एनोड NO3 आयनों से प्रभावित होता है एनोड पर Ag धुलकर Ag+ आयन बनायेगा। Ag(s) कैथोड पर जमा होगा।

(b) Pt इलेक्ट्रोड के साथ AgNO3 के जलीय विलयन में Pt के एनोड NO3 से क्रिया नहीं करेंगे।
कैथोड पर Ag+(aq) + e →Ag(s) (Ag का जमाव होगा।)
एनोड पर OH (aq)→ OH + e
4OH → 2H2O(l) + O2 (O2 गैस मुक्त होगी।)

(c) Pt इलेक्ट्रोड के साथ H2SO4 के तनु विलयन में H2SO4 एवं H2O दोनों का निम्नानुसार आयनन होगा।
MP Board Class 12th Chemistry Solutions Chapter 3 वैद्युतरसायन - 23
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वैद्युतरसायन अन्य महत्वपूर्ण प्रश्नोत्तर

वैद्युतरसायन वस्तुनिष्ठ प्रश्न

1. सही विकल्प चुनकर लिखिए

प्रश्न 1.
यदि विशिष्ट चालकता = K; R = प्रतिरोध, L = इलेक्ट्रॉनों के बीच की दूरी, A = किसी इलेक्ट्रोड के अनुप्रस्थ काट का क्षेत्रफल हो Cm = mole L-1, Ceg = g eq L-1 हो तो किसी विद्युत्-अपघट्य का विशिष्ट प्रतिरोध बराबर होगा –
(a) \( \frac{\mathbf{1}}{R}\)
(b) \(\frac{\mathbf{A}}{l}\)
(c) \(\frac{1}{\mathrm{R}} \cdot \frac{l}{\mathrm{A}}\)
(d) \(\frac{1000 \mathrm{K}}{\mathrm{C}_{m}}\)
उत्तर
(b) \(\frac{\mathbf{A}}{l}\)

प्रश्न 2.
K बराबर है –
(a) \(\frac{\mathbf{A}}{T}\)
(b) \(\frac{1}{\mathrm{R}} \cdot \frac{\mathrm{A}}{l}\)
(c) \(\frac{1}{\mathrm{R}} \cdot \frac{l}{\mathrm{A}}\)
(c) \(\frac{\mathbf{l}}{A}\)
उत्तर
(c) \(\frac{1}{\mathrm{R}} \cdot \frac{l}{\mathrm{A}}\)

प्रश्न 3.
मोलर चालकता Am बराबर है –
(a) \(\frac{10000 K}{C_{e q}} \)
(b) \(\frac{K}{C_{e q}} \)
(c) \(\frac{\mathrm{K}}{\mathrm{C}_{m} \times 1000} \)
(d) \(\frac{1000 \mathrm{K}}{\mathrm{C}_{m}} \)
उत्तर
(d) \(\frac{1000 \mathrm{K}}{\mathrm{C}_{m}} \)

प्रश्न 4.
सेल-स्थिरांक है –
(a) \(\frac{\mathbf{A}}{l} \)
(b) \(\frac{\mathbf{l}}{A} \)
(c) lA
(d) e \(\frac{\mathbf{l}}{A} \)
उत्तर
(b) \(\frac{\mathbf{l}}{A} \)

प्रश्न 5.
1-1 विद्युत्-अपघट्य (V+ = V = 1) जैसे NaCI के लिए –
(a) \(\wedge_{m}^{\infty}=\lambda_{e q}^{\infty} \)
(b) \(\wedge_{m}^{\infty}>\wedge_{e q}^{\infty} \)
(c) \(\wedge_{m}^{\infty}<\wedge_{e q}^{\infty} \)
(d) \(\wedge_{m}^{\infty}=2 \wedge_{e q}^{\infty} \)
उत्तर
(a) \(\wedge_{m}^{\infty}=\lambda_{e q}^{\infty} \)

प्रश्न 6.
इनमें से कौन विद्युत् का सुचालक नहीं है –
(a) NaCl(eq)
(b) NaCl(s)
(c) NaCl(mdxn)
(d) Ag.
उत्तर
(b) NaCl(s)

प्रश्न 7.
विलयन के प्रतिरोध को निम्नलिखित में किससे गुणा करने पर सेल-स्थिरांक प्राप्त होता है –
(a) विशिष्ट चालकता (K)
(b) मोलर चालकता ( \(\wedge_{m} \))
(c) तुल्यांक चालकता ( \(\wedge_{e q} \))
(d) इनमें से कोई नहीं।
उत्तर
(a) विशिष्ट चालकता (K)

प्रश्न 8.
एक विद्युत्-अपघट्य विलयन की तुल्यांकी चालकता में तनुकरणे द्वारा वृद्धि का कारण है –
(a) आयनिक आकर्षण में वृद्धि
(b) आण्विक आकर्षण में वृद्धि
(c) विद्युत्-अपघट्य के संगुणन की मात्रा में वृद्धि
(d) विद्युत्-अपघट्य के आयनन की मात्रा में वृद्धि।
उत्तर
(d) विद्युत्-अपघट्य के आयनन की मात्रा में वृद्धि।

प्रश्न 9.
यदि किसी विलयन की विशिष्ट चालकता तथा प्रेक्षित चालकता समान है, तो इसका सेल स्थिरांक होगा –
(a) 1
(b) 0
(c) 10
(d) 1000.
उत्तर
(a) 1

प्रश्न 10.
सेल-स्थिरांक की इकाई है –
(a) ohm-1cm-1
(b) cm
(c) ohm cm
(d) cm-1
उत्तर
(d) cm-1

प्रश्न 11.
विशिष्ट चालकता की इकाई है –
(a) ohm-1
(b) ohm-1 cm-1
(c) ohm-2cm1 equirulenr-1
(d) ohm-1cm-2.
उत्तर
(b) ohm-1 cm-1

प्रश्न 12.
यदि किसी विलयन की सान्द्रता cg equi/lion तथा विशिष्ट प्रतिरोध A हो, तो तुल्यांकी चालकता होगी –
(a) \(\frac{1000 \mathrm{A}}{\mathrm{C}} \)
(b) \(\frac{\mathrm{A} \times \mathrm{C}}{1000} \)
(c) \(\frac{1000}{\mathrm{A} \times \mathrm{C}} \)
(d) \(\frac{1000}{\mathrm{A} \times \mathrm{C}} \)
उत्तर
(a) \(\frac{1000 \mathrm{A}}{\mathrm{C}} \)

प्रश्न 13.
लोहे को संक्षारित होने से बचाने के लिए उस पर जिंक की परत चढ़ाना कहलाता है –
(a) गैल्वेनीकरण
(b) कैथोडिक रक्षण
(c) विद्युत्-अपघटन
(d) प्रकाश विद्युत्-अपघट्य।
उत्तर
(a) गैल्वेनीकरण

प्रश्न 14.
लवण-सेतु बनाने के लिए KNOJ के संतृप्त विलयन का उपयोग किया जाता है क्योंकि –
(a) K+ का वेग NO3 से ज्यादा होता है
(b) NO3 का वेग K+ से ज्यादा होता है
(c) दोनों का वेग लगभग बराबर होता है
(d) KNO3 की जल में विलेयता उच्च होती है।
उत्तर
(c) दोनों का वेग लगभग बराबर होता है

प्रश्न 15.
शुष्क सेलों में द्विध्रुवक का कार्य करता है –
(a) NH4 CI
(b) Na2 CO3
(c) PbSO4
(d) MnO2 .
उत्तर
(d) MnO2 .

प्रश्न 16.
अपचयन को कहते हैं –
(a) इलेक्ट्रॉनीकरण
(b) विइलेक्ट्रॉनीकरण
(c) प्रोटॉनीकरण
(d) विप्रोटॉनीकरण।
उत्तर
(a) इलेक्ट्रॉनीकरण

प्रश्न 17.
जब डेनियल सेल में Zn तथा Cu इलेक्ट्रोडों को जोड़ा जाता है तो विद्युत् धारा का मार्ग क्या होता है –
(a) सेल में Cu से Zn की ओर
(b) सेल के बाहर Cu से Zn की ओर
(c) सेल के अन्दर Zn से Cu की ओर
(d) सेल के बाहर Zn से Cu की ओर।
उत्तर
(d) सेल के बाहर Zn से Cu की ओर।

प्रश्न 18.
एक सेल जिसमें Zn इलेक्ट्रोड तथा नॉर्मल हाइड्रोजन इलेक्ट्रोड (NHE) हो, इसमें Zn इलेक्ट्रोड किसकी भाँति कार्य करते हैं –
(a) एनोड
(b) कैथोड
(c) न कैथोड, न एनोड
(d) दोनों एनोड व कैथोड।
उत्तर
(a) एनोड

प्रश्न 19.
यदि अर्द्ध-सेलों के बीच से लवण-सेतु हटा दिया जाए तो वोल्टेज –
(a) घटकर शून्य हो जाती है
(b) बढ़ जाती है
(c) शीघ्रता से बढ़ती है
(d) परिवर्तित नहीं होती है।
उत्तर
(a) घटकर शून्य हो जाती है

प्रश्न 20.
जब लेड स्टोरेज बैटरी को विसर्जित किया जाता है –
(a) SO2 उत्सर्जित होती है
(b) Pb का निर्माण होता है
(c) PbSo4 का व्यय होता है
(d) H2 SO4 का व्यय होता है।
उत्तर
(d) H2 SO4 का व्यय होता है।

प्रश्न 21.
लोहे में जंग लगने की क्रिया है –
(a) ऑक्सीकरण
(b) अपचयन
(c) संक्षारण
(d) बहुलीकरण।
उत्तर
(c) संक्षारण

प्रश्न 22.
हाइड्रोजन इलेक्ट्रोड के मानक विभव का मान होगा –
(a) धनात्मक
(b) ऋणात्मक
(c) शून्य
(d) कोई मान निश्चित नहीं।
उत्तर
(c) शून्य

2. रिक्त स्थानों की पूर्ति कीजिए

  1. एसीटिक अम्ल एक ……………….. विद्युत्-अपघट्य है।
  2. ताप बढ़ाने पर विद्युत्-अपघट्य की चालकता …….. जाती है।
  3. तनुता बढ़ाने पर विलयन की विशिष्ट चालकता का मान …………….. हो जाता है।
  4. आयन का आकार बड़ा होने से ……………….. घट जाती है।
  5. प्रतिरोधकता की इकाई ……………….. है।
  6. प्राथमिक सेल को पुनः ……………. नहीं किया जा सकता हैं।
  7. वह युक्ति जो रासायनिक ऊर्जा को विद्युत् ऊर्जा में परिवर्तित करती है, उसे ………सेल कहते हैं।
  8. विद्युत् धारा की वह मात्रा जो किसी पदार्थ का एक ग्राम तुल्यांक उत्पन्न करती है ……… कहलाती है।
  9. धात्विक चालन में ………. गुण अपरिवर्तित रहते हैं।
  10. प्रतिरोध का व्युत्क्रम …………….. कहलाता है।
  11. किसी चालक के एक घन सेमी की चालकता …….. ……… कहलाती है।
  12. एक फैराडे विद्युत् का मान ……….. कूलॉम होता है।
  13. लोहे पर जंग लगना एक ………….. का उदाहरण है।
  14. मानक हाइड्रोजन इलेक्ट्रोड का विभव ……….. माना गया है।
  15. लोहे पर जंग लगना ……….. का उदाहरण है।

उत्तर

  1. दुर्बल
  2. बढ़
  3. कम
  4. चालकता
  5. ओम सेमी
  6. आवेशित
  7. विद्युत् रासायनिक
  8. फैराडे
  9. रासायनिक
  10. चालकता
  11. विशिष्ट चालकता
  12. 96500 कूलॉम
  13. संक्षारण क्रिया
  14. 0-0 वोल्ट
  15. विद्युत् रासायनिक सेल।

3. उचित संबंध जोडिए –
I.
MP Board Class 12th Chemistry Solutions Chapter 3 वैद्युतरसायन - 26
उत्तर
1. (d), 2. (a), 3. (b) 4. (e) 5. (c)

II.
MP Board Class 12th Chemistry Solutions Chapter 3 वैद्युतरसायन - 27
उत्तर
1. (c), 2. (d), 3. (b), 4. (a), 5. (e), 6. (f).

4. एक शब्द/वाक्य में उत्तर दीजिए

  1. प्रबल विद्युत्-अपघट्य के दो उदाहरण दीजिए।
  2. दुर्बल विद्युत्-अपघट्य के दो उदाहरण दीजिए।
  3. विद्युत्-अपघटनी चालकता पर ताप का क्या प्रभाव पड़ता है ?
  4. कोलरॉश नियम का सूत्र लिखिए।
  5. तुल्यांकी चालकता का सूत्र लिखिए।
  6. आण्विक चालकता का सूत्र लिखिए।
  7. एक ऐसा उपकरण जिसमें विद्युत् ऊर्जा का रासायनिक ऊर्जा में परिवर्तन होता है, क्या कहते हैं ?
  8. सेल के दोनों इलेक्ट्रोडों के विभवान्तर जिसके कारण सेल में विद्युत् धारा बहती है, उसे क्या कहते हैं ?
  9. किसी धातु के इलेक्ट्रोड एवं उसके आयनों के मध्य सम्पन्न हुई रेडॉक्स अभिक्रिया के कारण उत्पन्न हुआ विभव क्या कहलाता है ?
  10. विभवांतर की इकाई क्या है ?
  11. सेल-स्थिरांक का सूत्र लिखिए।
  12. पुनः आवेशित करने योग्य सेल कहलाते हैं।
  13. तुल्यांकी चालकता की इकाई बताइए।
  14. जंग का रासायनिक सूत्र लिखिए।
  15. किसी सेल के विद्युत्-वाहक बल एवं साम्यावस्था स्थिरांक में संबंध लिखिए।
  16. वह अभिक्रिया क्या कहलाएँगी, जिसमें ऑक्सीकरण एवं अपचयन एक साथ होता है ?

उत्तर

  1. प्रबल विद्युत्-अपघट्य-HCl, NaOH, NaCl
  2. CH3COOH, H2CO3
  3. चालकता बढ़ जाती है
  4. कोलरॉश नियम \(\wedge_{m}^{\infty}=v_{+} \lambda_{+}^{\infty}+v_{-} \lambda_{-}^{\infty} \)
  5. तुल्यांक चालकता ( \(\wedge_{e q}) =\frac{1000 \times V_{1}}{C_{e q}} \) ohm-1cm2gmeq-1
  6. \(\wedge_{m}=\frac{1000 \mathrm{V}_{1}}{\mathrm{C}_{m}}\)ohm-1cm2mol-1
  7. विद्युत्-अपघटनी सेल,
  8. विद्युत् वाहक बल,
  9. इलेक्ट्रोड विभव,
  10. वोल्ट,
  11. सेल स्थिरांक = \(\frac{l}{\mathrm{A}} \)
  12. द्वितीयक सेल,
  13. ohm-1cm2gmeq-1
  14. Fe2O3.xH2O
  15. \(\log \mathrm{K}_{c}=\frac{\mathrm{mF}^{\circ} \mathrm{cell}}{0.0591}\) mFocell
  16. रेडॉक्स अभिक्रिया।

वैद्युतरसायन अति लघु उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 1.
विद्युत्-रासायनिक सेल की परिभाषा लिखिए।
उत्तर
ऐसा निकाय जिसमें ऑक्सीकरण-अपचयन अभिक्रिया द्वारा रासायनिक ऊर्जा को विद्युत् ऊर्जा में परिवर्तित किया जाता है। विद्युत्-रासायनिक सेल या वोल्टीय सेल कहलाता है।

प्रश्न 2.
विद्युत्-अपघट्य सेल किसे कहते हैं ?
उत्तर
वह पात्र या.निकाय जिसमें विद्युत् धारा प्रवाहित करने पर रासायनिक अभिक्रिया होती है अर्थात् विद्युत् ऊर्जा को रासायनिक ऊर्जा में परिवर्तित किया जाता है, उसे विद्युत्-अपघट्य सेल कहते हैं।

प्रश्न 3.
इलेक्ट्रोड विभव किसे कहते हैं ?
उत्तर
किसी वैद्युत रासायनिक सेल में इलेक्ट्रोड तथा वैद्युत अपघट्य के मध्य विभव के अंतर को इलेक्ट्रोर्ड विभव कहते हैं।

प्रश्न 4.
प्रबल विद्युत्-अपघट्य किसे कहते हैं ? दो उदाहरण लिखिए।
उत्तर
वे विद्युत्-अपघट्य जो जलीय विलयन में पूर्णत: आयनित हो जाते है। प्रबल विद्युत्-अपघट्य कहलाते हैं।
उदाहरण-NaCl, KCI, NH4Cl इत्यादि।

प्रश्न 5.
दुर्बल विद्युत्-अपघट्य किसे कहते हैं ? दो उदाहरण लिखिए।
उत्तर
वे विद्युत्-अपघट्य जिनका जलीय विलयन में बहुत कम आयनन होता है तथा अत्यधिक तनु करने पर भी पूर्ण आयनन नहीं होता, दुर्बल विद्युत्-अपघट्य कहलाते है।
उदाहरण-NH4OH, CH3COOH, HCN इत्यादि।

प्रश्न 6.
मानक इलेक्ट्रोड विभव से क्या अभिप्राय है ?
उत्तर
मानक इलेक्ट्रोड विभव-किसी अर्द्ध-सेल (इलेक्ट्रोड) का मानक इलेक्ट्रोड विभव (Eo), वह विभवान्तर है, जो किसी इलेक्ट्रोड को उसके अपने ही आयनों के एक मोलर सान्द्रता के विलयन में 298 K ताप पर डुबाने से उत्पन्न होता है।
यदि इलेक्ट्रोड गैसीय है, तो गैस का दाब एक वायुमण्डलीय होना चाहिए अर्थात् मानक ताप और मानक दाब में प्राप्त विभवान्तर मानक इलेक्ट्रोड विभव कहलाता है। IUPAC प्रणाली में अपचयन विभव को ही मानक इलेक्ट्रोड विभव माना जाता है।

प्रश्न 7.
ओम का नियम लिखिए।
उत्तर
इस नियम के अनुसार-किसी धातु चालक अथवा विलयन में बहने वाली विद्युत् धारा की प्रबलता चालक के सिरो या विलयन के डूबे हुये दोनों इलेक्ट्रोडों के मध्य लगाये गये विभवान्तर के समानुपाती होती है।
यदि इलेक्ट्रोडों के मध्य विभवान्तर V वोल्ट तथा विलयन में बहने वाली विद्युत् धारा की प्रबलता I हो, तो
V ∝ I
V=RI
जहाँ, R एक स्थिरांक है, जिसे चालक का प्रतिरोध कहा जाता है।

प्रश्न 8.
सेल-स्थिरांक किसे कहते हैं ?
उत्तर
किसी चालकता सेल के इलेक्ट्रोडों के बीच की दूरी । तथा किसी एक इलेक्ट्रोड के अनुप्रस्थ क्षेत्रफल का अनुपात एक स्थिरांक होता है, जिसे सेल-स्थिरांक कहते हैं तथा x से दर्शाते हैं।
x = \(\frac{l}{a} \)
सेल-स्थिरांक का मात्रक = cm-1.

प्रश्न 9.
गैल्वेनीकरण क्या है ? समझाइए।
उत्तर
लोहे पर जंग लगने की क्रिया को रोकने के लिए उस पर जिंक की तह लगायी जाती है। यह प्रक्रम गैल्वेनीकरण (Galvanizing) कहलाती है। गैल्वेनाइज्ड आयरन के जिंक फिल्म के ऊपर भास्मिक जिंक कार्बोनेट (ZnCO3) Zn(OH)2 की अदृश्य सतह होती है, जिसके कारण गैल्वेनाइज्ड आयरन की चमक कायम रहती है।

प्रश्न 10.
विद्युत्-रासायनिक तुल्यांक किसे कहते हैं ?
उत्तर
किसी पदार्थ का विद्युत्-रासायनिक तुल्यांक, किसी पदार्थ का वहे द्रव्यमान है, जो एक ऐम्पियर की विद्युत् धारा को एक सेकण्ड तक प्रवाहित करने पर इलेक्ट्रोड पर मुक्त या जमा होता है। लघु

वैद्युतरसायन  लघु उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 1.
लवण-सेतु क्या है ? इसके दो कार्य लिखिए।
उत्तर
लवण-सेतु (Salt bridge)-KCI या KNO3 या Na2 SO4 तथा अगर–अगर (agar-agar) विलयन की जेली से भरी हुई यू-आकार की नली को लवण-सेतु कहते हैं।
कार्य – (1) इसके द्वारा दो विलयनों के मध्य विद्युत् सम्पर्क होता है तथा विद्युत् परिपथ पूर्ण होता है।
(2) इसके कारण दोनों विलयन आपस में नहीं मिलते।
(3) दोनों विलयनों की विद्युत् उदासीनता बनाये रखता है।

प्रश्न 2.
मानक विद्युत्-वाहक बल तथा साम्य स्थिरांक के संबंध दर्शाइये।
उत्तर
मानक मुक्त ऊर्जा परिवर्तन तथा साम्य स्थिरांक उसके अग्र और पश्च अभिक्रियाओं के वेग स्थिरांक का अनुपात होता है। इसे Kc से दर्शाते हैं।
A+B ⇌ C+D
\(\mathbf{K}_{C}=\frac{[\mathrm{C}][\mathrm{D}]}{[\mathrm{A}][\mathrm{B}]} \)
मानक मुक्त ऊर्जा की सहायता से हम किसी अभिक्रिया के लिये साम्य स्थिरांक की गणना कर सकते हैं।
ΔG° = -RTIn Kc
तथा -ΔG° = -nFE0cell
nFE0cell = RT In Kc
E0cell  = \(\frac{2.303 \mathrm{RT}}{n \mathrm{F}} \) log10 Kc

प्रश्न 3.
ऑक्सीकरण-अपचयन अभिक्रिया से आप क्या समझते हैं ?
उत्तर
ऑक्सीकरण-अपचयन अभिक्रियाएँ-वह रासायनिक अभिक्रिया जिसमें तत्वों की संयोजकता परिवर्तित होती है, ऑक्सीकरण-अपचयन अभिक्रिया कहलाती है। इस क्रिया में ऑक्सीकरण और अपचयन दोनों प्रक्रियाएँ साथ-साथ होती हैं, जिसमें एक पदार्थ का ऑक्सीकरण और दूसरे पदार्थ का अपचयन होता है, जैसे –
MP Board Class 12th Chemistry Solutions Chapter 3 वैद्युतरसायन - 28
इस अभिक्रिया में FeCl3 का FeCl2 में अपचयन और SnCl2 का SnCl4 में ऑक्सीकरण होता है। अभिक्रिया में Fe की संयोजकता घटती है और Sn की संयोजकता बढ़ती है।

प्रश्न 4.
धात्विक चालन तथा विद्युत्-अपघटनी चालन में कोई चार अन्तर लिखिए ।
उत्तर
धात्विक चालन तथा विद्युत्-अपघटनी चालन में अन्तर-
MP Board Class 12th Chemistry Solutions Chapter 3 वैद्युतरसायन - 29

प्रश्न 5.
विद्युत्-वाहक बल तथा विभवान्तर में अन्तर लिखिए।
उत्तर
विद्युत्-वाहक बल और विभवान्तर में अन्तर –
MP Board Class 12th Chemistry Solutions Chapter 3 वैद्युतरसायन - 30

प्रश्न 6.
विशिष्ट चालकता क्या है ? इसकी इकाई बताइए।
उत्तर
“किसी विद्युत्-अपघट्य (चालक) के एक घन सेमी विलयन की चालकता को विशिष्ट चालकता कहते हैं।”
इसे K (Kappa) द्वारा व्यक्त करते हैं।
यह विशिष्ट प्रतिरोध ρ (Rho) का व्युत्क्रम होता है।
अतः
k = \(\frac{1}{\rho} \), ( ∵ \( \rho=\frac{\mathrm{RA}}{l}\))
k = \(\frac{1}{R} \times \frac{l}{\mathrm{A}} \)
जहाँ, R= प्रतिरोध, A = इलेक्ट्रोडों का अनुप्रस्थ क्षेत्रफल व 1 = इलेक्ट्रोडों के बीच की लम्बाई है।
MP Board Class 12th Chemistry Solutions Chapter 3 वैद्युतरसायन - 31
S.I. इकाई S cm-1 या Ohm-1 cm-1 है।

प्रश्न 7.
किसी विलयन की प्रतिरोधकता क्या है ?
उत्तर
प्रतिरोधकता (Resistivity) – किसी विलयन में दो इलेक्ट्रोड लगाकर विद्युत् धारा प्रवाहित करने पर प्रतिरोध, (धात्विक चालकों के समान ही) लम्बाई (इलेक्ट्रोडों के बीच की दूरी ।) के समानुपाती तथा अनुप्रस्थ काट के क्षेत्रफल (A) के व्युत्क्रमानुपाती होता है । अर्थात्
R ∝ \(\frac{l}{\mathrm{A}} \)
या R = ρ \(\frac{l}{\mathrm{A}} \)
या ρ = \(\frac{\mathrm{R} \times \mathrm{A}}{l}\)
स्थिरांक p(रो-Rho) को प्रतिरोधकता (Resistivity) कहा जाता है। (पूर्व में इसे विशिष्ट प्रतिरोध कहा जाता था ।)
प्रतिरोधकता (Resistivity) की इकाई –
यदि / को cm तथा A को cm2 में तथा R को ohm में दर्शाया जाए तो प्रतिरोधकता है ρ की इकाई \(\frac{\mathrm{cm}^{2} \mathrm{ohm}}{\mathrm{cm}} \) या ohm cm होगी ।
समी. (1) में A = 1 cm2 तथा l = 1 रखने पर,
ρ = R
अतः किसी विलयन की प्रतिरोधकता उसके 1 घन सेमी. (one cube cm) का प्रतिरोध है ।

प्रश्न 8.
विद्यत-रासायनिक सेल तथा विद्युत्-अपघटनी सेल में अन्तर बताइए।
उत्तर
विद्युत्-रासायनिक सेल (गैल्वेनिक सेल) और विद्युत्-अपघटनी सेल में अन्तर –
MP Board Class 12th Chemistry Solutions Chapter 3 वैद्युतरसायन - 32
MP Board Class 12th Chemistry Solutions Chapter 3 वैद्युतरसायन - 33

प्रश्न 9.
तुल्यांकी चालकता किसे कहते हैं ?
उत्तर
तुल्यांकी चालकता-“किसी विलयन की तुल्यांकी चालकता उन समस्त आयनों की चालकता है, जो एक ग्राम तुल्यांक विद्युत्-अपघट्य को V ml में विलेय करने से उत्पन्न होती है।”
इसे \(\wedge_{e q}^{c} \) (लेम्ब्डा ) λ से प्रदर्शित करते हैं।
MP Board Class 12th Chemistry Solutions Chapter 3 वैद्युतरसायन - 34
जहाँ, k = विशिष्ट चालकता है।
\(\wedge_{e q}^{c} \) = K × V
यदि C ग्राम तुल्यांक (Ceq) 1000 cm3 में विलेय है, तो 1 ग्राम तुल्यांक \(\frac{1000 \mathrm{cm}^{3}}{\mathrm{C}_{e q}} \) में विलेय होगा |
MP Board Class 12th Chemistry Solutions Chapter 3 वैद्युतरसायन - 35

प्रश्न 10.
आण्विक चालकता किसे कहते हैं ?
उत्तर
आण्विक चालकता-“किसी विद्युत्-अपघट्य विलयन की आण्विक चालकता उन समस्त आयनों की चालकता है, जो एक ग्राम मोल विद्युत्-अपघट्य को Vml में विलेय करने से उत्पन्न होती है।” इसे ∧m से प्रदर्शित करते हैं । यह विलयन की विशिष्ट चालकता K व आयतन V के गुणनफल के बराबर होता है, जिसमें विलेय के 1 ग्राम-मोल उपस्थित हो।
अर्थात् ∧m = K x V
यदि M ग्राम-मोल 1000 cm3 में विलेय हो,
MP Board Class 12th Chemistry Solutions Chapter 3 वैद्युतरसायन - 36

प्रश्न 11.
सेल-स्थिरांक किसे कहते हैं ? विशिष्ट चालकता वसेल-स्थिरांक के बीच क्या सम्बन्ध है?
उत्तर
सेल-स्थिरांक-किसी चालकता सेल के इलेक्ट्रोडों के बीच की दूरी (l) तथा किसी एक इलेक्ट्रोड के तल का क्षेत्रफल (A) निश्चित रहता है, अतः इनका अनुपात एक स्थिरांक होता है जिसे सेल स्थिरांक कहते हैं तथा x से दर्शाते हैं।
x = \(\frac{l}{a} \)
सेल-स्थिरांक का मात्रक = cm-1.
विशिष्ट चालकता व सेल-स्थिरांक में सम्बन्ध – किसी चालक पदार्थ के लिये प्रतिरोध R का मान, लम्बाई (l) के समानुपाती तथा अनुप्रस्थ परिच्छेद (A) के व्युत्क्रमानुपाती होता है।
R ∝ \(\frac{l}{a} \)
या \(\mathrm{R}=\rho \times \frac{l}{a} \)
या R = ρ × x,
MP Board Class 12th Chemistry Solutions Chapter 3 वैद्युतरसायन - 37
प्रश्न 12.
विद्युत्-अपघट्य पदार्थ की विद्युतीय चालकता को प्रभावित करने वाले कारक कौनकौन से हैं ?
उत्तर
विद्युत्-अपघट्य पदार्थों की विद्युतीय चालकता को प्रभावित करने वाले कारक निम्नलिखित हैं
(1) अन्तर आयनिक आकर्षण (Inter ionic attraction)—यह विलेय-विलेय अन्योन्य क्रिया पर निर्भर होता है, जो विलेय के आयनों के मध्य उपस्थित होता है।
(2) आयनों का सॉल्वेशन (Solvation of ions)-यह भी विलेय-विलायक अन्योन्य क्रिया पर निर्भर करता है, जो विलेय के आयनों के मध्य उपस्थित होता है।
(3) विलायक की विस्कासिता (Viscosity of the solvent)–यह विलायक-विलायक अणुओं की अन्योन्य क्रिया पर निर्भर करता है, विलायक के अणु ही आपस में सम्बन्धित होते हैं।
ताप वृद्धि से ये तीनों प्रभाव कम हो जाते हैं। अतः विद्युत्-अपघट्य के आयनों की औसत गतिज ऊर्जा ताप वृद्धि के साथ बढ़ जाती है। अत: ताप वृद्धि से विद्युत्-अपघट्य के विलयन का प्रतिरोध कम हो जाता है अर्थात् चालकता बढ़ जाती है। इसके विपरीत धात्विक चालक का ताप बढ़ने से उसकी चालकता कम हो जाती
है।

प्रश्न 13.
किसी विद्युत्-अपघट्य के विलयन की विभिन्न चालकताएँ किन कारकों पर निर्भर करती हैं ?
उत्तर
विद्युत्-अपघट्य के विलयन की चालकताएँ निम्नलिखित कारकों पर निर्भर करती हैं
(1) तनुता- विलयन की तनुता बढ़ने पर विशिष्ट चालकता का मान कम होता है, तुल्यांकी चालकता और मोलर चालकता के मान बढ़ते हैं ।
(2) विलायक की प्रकृति-विलायक का डाइ-इलेक्ट्रिक स्थिरांक अधिक होने पर चालकता का मान अधिक तथा स्थिरांक कम होने पर चालकता का मान कम होता है ।
(3) विलयन में उपस्थित आयनों की संख्या-प्रबल विद्युत्-अपघट्यों की चालकता दुर्बल विद्युत्अपघट्यों की चालकता से अधिक होती है ।
(4) आयन का आमाप जलीय विलयन में छोटे आयन अधिक जलयोजित होने के कारण उनके आमाप में वृद्धि होती है, जिससे चालकता कम हो जाती है ।
(5) ताप का प्रभाव-ताप बढ़ने से चालकता में वृद्धि होती है ।

प्रश्न 14.
तनुता में वृद्धि के साथ-साथ विशिष्ट चालकता, तुल्यांकी चालकता तथा आण्विक चालकता के मान किस प्रकार परिवर्तित होते हैं ?
उत्तर
तनुता में वृद्धि से विशिष्ट चालकता का मान कम हो जाता है। इसका कारण यह है कि तनुता में वृद्धि से 1 घन सेमी विलयन में उपस्थित आयनों की संख्या कम हो जाती है।
किन्तु, तुल्यांक चालकता ∧eq = K x V
तथा मोलर चालकता ∧m = K x V.
तुल्यांक चालकता तथा मोलर चालकता, विशिष्ट चालकता तथा तनुता के गुणनफल हैं । तनुता वृद्धि (या सान्द्रण में कमी) से x का मान कम होता है, किन्तु V के मान में वृद्धि होती है।
K के मान की कमी की अपेक्षा V के मान में वृद्धि बहुत अधिक होती है। अतः दोनों का संयुक्त प्रभाव यह होता है कि तनुता वृद्धि से ∧eq और ∧m के मान बढ़ जाते हैं।

प्रश्न 15.
विद्युत्-अपघटनी सेल क्या है तथा किस प्रकार कार्य करता है ?
उत्तर
विद्युत्-अपघटनी सेल (Electrolytic Cells)- इन सेलों में विद्युत् धारा बाहरी स्रोत से भेजी जाती है, इसके फलस्वरूप सेल में अपघटन आदि रासायनिक अभिक्रियाएँ होती हैं, जिन्हें विद्युत्-अपघटन (Electrolysis) कहा जाता है। जैसे-जल, NaCl, AIO, इत्यादि का विद्युत्-अपघटन। उदाहरणार्थसॉल्वे ट्रफ सेल में सोडियम क्लोराइड विलयन में इलेक्ट्रोड लगाकर विद्युत् धारा प्रवाहित करने से NaCl
अपघटित हो जाता है। पारा (Mercury) के कैथोड पर सोडियम मुक्त होता है और ऐनोड पर क्लोरीन मुक्त होती है। पारा के साथ सोडियम, अमलगम बनाकर सेल से बाहर आता है।
MP Board Class 12th Chemistry Solutions Chapter 3 वैद्युतरसायन - 38
विद्युत्-अपघटन NaCl → Na+ + Cl
कैथोड पर, Na+ + e → Na
Na + Hg → (Na-Hg) अमलगम
ऐनोड पर, Cl + e → Cl
Cl + Cl → Cl2
विद्युत्-अपघटनी सेल में विद्युत् बाहर से दी जाती है। अतः धन ध्रुव ऐनोड और ऋण ध्रुव कैथोड होता है।

प्रश्न 16.
किसी विद्युत्-रासायनिक सेल का विद्युत्-वाहक बल क्या है ?
उत्तर
“किसी विद्युत्-रासायनिक सेल के दोनों इलेक्ट्रोडों के इलेक्ट्रोड विभवों का अन्तर विद्युत्वाहक बल (Electromotive force) या सेल विभव (Cell potential) कहलाता है।” इसे वोल्ट (Volt) में दर्शाते हैं।
विभवान्तर के कारण निम्न अपचयन विभव वाले इलेक्ट्रोड से उच्च अपचयन विभव वाले इलेक्ट्रोड की ओर विद्युत् धारा बहती है। सेल के E.M.FE को अपचयन विभवों के अन्तर के रूप में निम्न प्रकार से दर्शाया जा सकता है –
सेल का सेल विभव = R.H.S. इलेक्ट्रोड का मानक अपचयन विभव
L.H.S. इलेक्ट्रोड का मानक अपचयन विभव

अर्थात् Ecell= Eredn(right) – Eredn (left)
Ecell= Eredn(cathode) – Eredn (anode)

सेल के दोनों इलेक्ट्रोडों के मध्य एक वोल्टमीटर जोड़कर सेल का E.M.F. मापते हैं। किसी सेल का E.M.E. दोनों इलेक्ट्रोडों की प्रकृति तथा दोनों अर्द्ध-सेलों के विलयनों के सान्द्रण पर निर्भर होता है। उदाहरणार्थडेनियल सेल के अर्द्ध-सेलों में CuSO4 एवं ZnSO4 विलयनों के सान्द्रण 1 M होते हैं तथा 298 K पर इस सेल का E.M.E 1.10 वोल्ट होता है।

वैद्युतरसायन दीर्घ उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 1.
मानक हाइड्रोजन इलेक्ट्रोड क्या है ? यह कैसे बनाया जाता है ?
उत्तर
मानक हाइड्रोजन इलेक्ट्रोड-इसमें प्लैटिनम ब्लैक की परत चढ़ी हुई प्लैटिनम की एक पतली पत्ती का इलेक्ट्रोड हाइड्रोजन आयन (H+) के एक मोलर सान्द्रता के विलयन में डुबाकर रखा जाता है । यह काँच की एक नली से ढंका रहता है। नली में से एक वायुमण्डलीय दाब पर शुद्ध हाइड्रोजन गैस प्रवाहित की जाती है। जैसा कि चित्र में दिखाया गया है।

प्लैटिनम पर हाइड्रोजन गैस अवशोषित होती है तथा शीघ्र ही H2 तथा H2O+ आयनों के बीच साम्य स्थापित हो जाता है। परिस्थिति के अनुसार हाइड्रोजन इलेक्ट्रोड ऐनोड एवं कैथोड दोनों की भाँति कार्य करते हैं।
MP Board Class 12th Chemistry Solutions Chapter 3 वैद्युतरसायन - 39
मानक हाइड्रोजन इलेक्ट्रोड (SHE) ऐनोड होने पर सेल अभिक्रिया –
H2 → 2H+ + 2e
इस इलेक्ट्रोड को सेल में बायीं ओर निम्न प्रकार दर्शाया जाता है-
H2 (1atm)Pt |H+ (1.0M)
SHE कैथोड होने पर सेल अभिक्रिया –
2H + 2e → H2
इसे सेल में दायीं ओर निम्न प्रकार दर्शाया जाता है
H+(1.0M)| H2(g)28) (1 atm)Pt
इस इलेक्ट्रोड का मानक इलेक्ट्रोड विभव स्वेच्छा से शून्य माना जाता है।

प्रश्न 2.
एकल इलेक्ट्रोड विभव के लिए नर्नस्ट समीकरण व्युत्पन्न कीजिए।
उत्तर
विद्युत्-रासायनिक श्रेणी में दिए गये मानक इलेक्ट्रोड विभव मानक अवस्था के लिए जब विद्युत् अपघट्य विलयन का सान्द्रण 1 M तथा ताप 298 K हो, परन्तु विद्युत्-रासायनिक सेलों में विद्युत्-अपघट्य विलयन का सान्द्रण हमेशा निश्चित नहीं होता तथा इलेक्ट्रोड विभव विद्युत्-अपघट्य को सान्द्रण तथा ताप पर निर्भर करता है। ऐसी स्थिति में एकल इलेक्ट्रोड विभव ननस्ट समीकरण द्वारा दर्शाया गया है। किसी अपचयन अर्द्ध-अभिक्रिया के लिए नर्नस्ट समीकरण को निम्न प्रकार से दर्शाया/प्रदर्शित करते हैं –
MP Board Class 12th Chemistry Solutions Chapter 3 वैद्युतरसायन - 40
प्रश्न 3.
फैराडे के विद्युत्-अपघटन के नियम लिखिए।
उत्तर
सन् 1832 में माइकल फैराडे ने विद्युत्-अपघटन के दो नियम दिये –
(1) प्रथम नियम–“विद्युत्-अपघटन से किसी इलेक्ट्रोड पर मुक्त होने वाले पदार्थ की मात्रा प्रवाहित विद्युत् धारा की मात्रा के समानुपाती होती है।”
माना i ऐम्पियर की धारा : सेकण्ड तक प्रवाहित करने पर इलेक्ट्रोड पर W ग्राम पदार्थ मुक्त होता है, तो इस नियम से,
W ∝ Q
या . W ∝ i x j (∵ Q = it कूलॉम में विद्युत् की मात्रा)
या W = Zi.t
जहाँ z विद्युत्-रासायनिक तुल्यांक है।

(2) द्वितीय नियम-“जब श्रेणीक्रम में लगे हुए विभिन्न विद्युत-अपघट्यों के विलयनों से होकर विद्युत् की समान मात्रा प्रवाहित की जाती है, तो इलेक्ट्रोड पर एकत्रित विभिन्न पदार्थों की मात्राएँ उनके रासायनिक तुल्यांक के समानुपाती होती हैं।”
माना, श्रेणी क्रम में जुड़े हुए दो विद्युत्-अपघट्यों में विद्युत् की समान मात्रा प्रवाहित करने पर विक्षेपित पदार्थ की मात्राएँ क्रमशः W1 व W2 हैं तथा उनके रासायनिक तुल्यांक क्रमशः E1 व E2 हैं तो
MP Board Class 12th Chemistry Solutions Chapter 3 वैद्युतरसायन - 41
W ∝ E अथवा \(\frac{W}{E} \) = स्थिरांक
या W1 & E1 तथा W2 & E2
या \(\frac{\mathrm{w}_{1}}{\mathrm{w}_{2}}=\frac{\mathrm{E}_{1}}{\mathrm{E}_{2}} \)

प्रश्न 4.
संक्षारण किसे कहते हैं ? जंग लगने का विद्युत्-रासायनिक सिद्धान्त समझाइए।
उत्तर
वायुमण्डल में उपस्थित गैसों तथा नमी द्वारा धातुओं के धीमी गति से अवांछित यौगिकों में बदल जाने की प्रक्रिया संक्षारण कहलाती है। लोहे में जंग लगना इसका प्रमुख उदाहरण है।
जंग लगने का विद्युत्-रासायनिक सिद्धान्त-इस सिद्धान्त के अनुसार, अशुद्ध लोहे की सतह एक विद्युत्-रासायनिक सेल की भाँति व्यवहार करती है। ऐसे सेल को संक्षारण सेल भी कहते हैं। इन सेलों में शुद्ध लोहा ऐनोड तथा अशुद्ध लोहा कैथोड का कार्य करता है। नमी जिसमें O2 और CO2 विलेय है, विद्युत्-अपघट्य का कार्य करता है।
ऐनोड पर-Fe, Fe+2 आयनों के रूप में विलयन में चला जाता है।
कैथोड पर-Fe →Fe+2 + 2e
ऑक्सीजन की उपस्थिति में ये इलेक्ट्रॉन जल के अणुओं द्वारा ले लिये जाते हैं तथा OF आयन बनाते हैं।
2H2+O2 +4e →4OH
ऐनोड पर बने Fe+2 आयन OH आयनों से क्रिया करके Fe(OH)2, बनाते हैं। यह आयरन (II) हाइड्रॉक्साइड वायुमण्डल के ऑक्सीजन द्वारा नमी की उपस्थिति में हाइड्रेटेड आयरन (III) ऑक्साइड बनाता है।
2Fe(OH)2 + \(\frac{1}{2} \) O2(aq) + H2O(l) →Fe2O3. xH2O
यही हाइड्रेटेड फेरिक ऑक्साइड जंग है।

प्रश्न 5.
संक्षारण किसे कहते हैं ? इसे प्रभावित करने वाले तीन कारकों को लिखकर इससे बचाव के कोई तीन उपाय लिखिए।
उत्तर
संक्षारण – प्रश्न क्रमांक 4 देखिए।
संक्षारण को प्रभावित करने वाले कारक –
(1) धातु की प्रकृति-अधिक क्रियाशील धातु जल्दी संक्षारित होती है।
(2) धातु में अशुद्धियाँ-अशुद्ध धातु जल्दी और अधिक संक्षारित होती है।
(3) वातावरण-धातु के आस-पास के वातावरण में उपस्थित ऑक्सीजन, कार्बन डाइ-ऑक्साइड, नमी, खारापन या लवणों की उपस्थिति तथा SO2, SO3 आदि गैसें संक्षारण को बढ़ावा देते हैं।
संक्षारण से बचाव (Prevention)—संक्षारण को कई विधियों द्वारा रोका जाता है, जिनमें प्रमुख निम्नलिखित हैं
(i) रोधिका (Barrier) स्थापित करना-लोहे पर पेण्ट लगाकर या सतह पर ग्रीस या तेल की पतली पर्त लगाकर या टिन, निकिल, क्रोमियम, जिंक आदि की विद्युत् प्लेटिंग करके लोहे की सतह पर रोधिका बना देते हैं।
(ii) समर्पित बचाव (Sacrificial protection)—इस विधि में लोहे के ऊपर इससे अधिक क्रियाशील धातु की तह चढ़ा देते हैं, इससे लोहे पर कोई संक्षारण प्रभाव होने से पूर्व यह धातु नष्ट होती है और लोहे के पदार्थ बचे रहते हैं इसलिए इसे समर्पित बचाव कहते हैं। जैसे-गैल्वेनीकरण।
लोहे पर जिंक की पर्त चढ़ाना गैल्वेनीकरण कहलाता है। लोहे की सतह पर कोई खरोंच आने पर भी संक्षारण नहीं होता है, क्योंकि Zn और Fe दोनों में से Zn का ऑक्सीकरण पहले होता है।

प्रश्न 6.
सीसा-संचायक सेल की क्रिया को समझाइए।
उत्तर
सीसा-संचायक सेल-इस बैटरी का उपयोग मुख्य रूप से मोटर गाड़ियों में होता है। प्रत्येक बैटरी कई वोल्टीय सेलों को श्रेणी क्रम में जोड़कर बनी होती है। इस प्रकार के सेल से 2-0V की विद्युत् धारा प्राप्त होती है। 3 अथवा 6 ऐसे सेलों को आपस में जोड़ने पर 6 अथवा 12 वोल्ट की बैटरी प्राप्त होती है। प्रत्येक सेल में लेड (Pb) का एक ऐनोड होता है, जिसमें स्पंजी लेड भरा रहता है और कैथोड के रूप में Pb-Sb मिश्र धातु की जाली में PbO2का महीन चूर्ण भरा रहता है। H2SO4 का जलीय विलयन विद्युत्-अपघट्य का कार्य करता है, जिसमें 38 % H2SO4 तथा घनत्व 1.38 ग्राम/धन सेमी होता है। इस प्रकार सीसा संचायक सेल तैयार हो जाता है। जब सेल से विद्युत् धारा ली जा रही हो, तो सेल निम्न प्रकार से कार्य करता है, ऐनोड पर Pb का Pb2+ आयन में ऑक्सीकरण होता है, जो अविलेय PbSo4 में बदल जाता है तथा कैथोड पर PbO2 का Pb2+ में अपचयन होकर PbSO4 बनता है।
MP Board Class 12th Chemistry Solutions Chapter 3 वैद्युतरसायन - 42
ऐनोड और कैथोड की अभिक्रियाओं से स्पष्ट है कि सेल के कार्य करने पर प्रत्येक इलेक्ट्रोड पर PbSO4(s) जमा होने लगता है, जिससे H2SO4 का सान्द्रण और घनत्व कम हो जाता है, अब बैटरी को पुनः आवेशित करके बार-बार उपयोग में लाया जा सकता है। बैटरी को पुनः आवेशित करने के लिए उपयुक्त वोल्टेज वाली विद्युत् धारा विपरीत दिशा में प्रवाहित की जाती है। जिससे इलेक्ट्रॉन प्रवाह के साथ-साथ इलेक्ट्रोड अभिक्रियाएँ भी विपरीत दिशा में होने लगती हैं अतः
ऐनोड पर Pb एवं कैथोड पर PbO2 जमा हो जाता है। H2SO4 के उत्पादन होने से उसका घनत्व बढ़ जाता है और यह क्रिया चलती रहती है।
रिचार्ज होते समय सेल में होने वाली रासायनिक अभिक्रियाएँऐ –
MP Board Class 12th Chemistry Solutions Chapter 3 वैद्युतरसायन - 43

प्रश्न 7.
शुष्क सेल का सचित्र वर्णन कीजिए।
उत्तर
शुष्क सेल (Dry cell)-इनका उपयोग टॉर्च, टेपरिकॉर्डर, रेडियो, खिलौने, कैलकुलेटर आदि में होता है। ये लेकलांशी सेल के सिद्धान्त पर कार्य करते हैं। लेकलांशी सेल का आविष्कार जी. लेकलांशी (G. Lechlanche) द्वारा सन् 1868 में किया गया। शुष्क सेल में Zn का एक खोखला आवरण रहता है, जिसके ऊपर NH4Cl और कम मात्रा में ZnCl2 का जल में बना पेस्ट लगा रहता है। जिंक सिलिण्डर ऐनोड का कार्य करता है। कैथोड एक कार्बन की छड़ होती है। कार्बन की छड़ के चारों ओर MnO2 तथा कार्बन चूर्ण का काला पेस्ट भरा रहता है। जस्ते के खोखले आवरण के ऊपर मोटे कागज का आवरण लगा रहता है। लीक-प्रूफ शुष्क सेलों में Zn के आवरण के ऊपर आयरन या स्टील का आवरण लगा रहता है।

MP Board Class 12th Chemistry Solutions Chapter 3 वैद्युतरसायन - 44

जब सेल कार्य करता है, तो Zn धातु इलेक्ट्रॉन खोकर Zn2+ आयनों के रूप में विद्युत्-अपघट्य NH4C1 में विलेय हो जाता है। इलेक्ट्रॉन बाह्य परिपथ में गमन करते हैं तथा कैथोड द्वारा ग्रहण कर लिये जाते हैं। इससे विद्युत्-अपघट्य से NH+4 आयमों का विसर्जन (discharge) होता है। इलेक्ट्रोड पर होने वाली अभिक्रियाएँ इस प्रकार हैं –
MP Board Class 12th Chemistry Solutions Chapter 3 वैद्युतरसायन - 45

कैथोड अभिक्रिया में मैंगनीज का +4 ऑक्सीकरण अवस्था से +3 ऑक्सीकरण अवस्था में अपचयन हो जाता है। अमोनिया गैस के रूप में बाहर नहीं निकलती है, किन्तु ऐनोड में बने Zn2+ की कुछ मात्रा से संयुक्त होकर जटिल आयन बना लेती है, जिससे सेल के भीतर का दाब बढ़ नहीं पाता –
Zn+ +4NH3 >[Zn(NH3)4]2+
शुष्क सेल का वोल्टेज 1.25 V से 1.5 V के मध्य होता है।
दोष-NH4Cl की अम्लीय प्रकृति के कारण जिंक पात्र का संक्षारण होकर उसमें छिद्र हो जाते हैं । इन छिद्रों से अन्य रासायनिक यौगिक रिसकर बाहर आने लगते हैं। .
आजकल शुष्क सेलों को सुधारकर लीक रोधी बना दिया गया है। इसमें NHCl4 के स्थान पर KOH का उपयोग किया जाता है, जिससे जिंक का संक्षारण नहीं होता है।

प्रश्न 8.
कोलरॉश का नियम क्या है ? इसके दो अनुप्रयोग दीजिए।
उत्तर
कोलरॉश नियम-किसी विद्युत्-अपघट्य की अनन्त तनुता पर मोलर चालकता दो मानों का – योग है, जिसमें एक मान धनायन पर तथा दूसरा मान ऋणायन पर निर्भर करता है।
m= V+λ+ + Vλ
जिसमें λ+ और λ क्रमशः धनायन और ऋणायन की आयनिक चालकताएँ (Ionic conductances) तथा V+ और v विद्युत्-अपघट्य की प्रति फॉर्मूला इकाई में धनायन और ऋणायन की संख्याएँ हैं।
“किसी विद्युत्-अपघट्य की अनन्त तनुता पर तुल्यांक चालकता उसकी आयनिक चालकताओं के योगफल के बराबर होती है।”
 = λ c + λd
जहाँ, λ c और λd अनन्त तनुता पर धनायन एवं ऋणायन की आयनिक चालकताएँ हैं।

कोलरॉश के नियम का अनुप्रयोग – (i) दुर्बल विद्युत्-अपघट्यों की अनन्त तनुता पर तुल्यांक चालकता या आण्विक चालकता का निर्धारण-इस नियम के उपयोग से दुर्बल विद्युत्-अपघट्यों की तुल्यांक चालकता और आण्विक चालकता, प्रबल विद्युत्-अपघट्यों में धनायनों और ऋणायनों की चालकता के मानों का गणितीय समायोजन कर ज्ञात की जाती है । जैसे-CH3COOH की अनन्त तनुता पर आण्विक (या मोलर) चालकता की गणना –
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प्रश्न 9.
विद्युत्-रासायनिक सेल एवं उसकी क्रिया-विधि डेनियल सेल का उदाहरण देकर समझाइए।
उत्तर
विद्युत्-रासायनिक सेल-रेडॉक्स अभिक्रियाओं में ऑक्सीकारकों और अपचायकों के मध्य इलेक्ट्रॉनों का स्थानान्तरण अप्रत्यक्ष रूप से, जैसे तार जोड़कर करने पर रासायनिक ऊर्जा का परिवर्तन विद्युत् ऊर्जा में होने लगता है। इस प्रकार की गई व्यवस्था विद्युत्-रासायनिक सेल कहलाती है। इसे गैल्वेनिक या वोल्टाइक सेल भी कहते हैं। इसकी क्रिया, विधि को डेनियल के उदाहरण से समझा जा सकता है।

‘डेनियल सेल-इस सेल में Zn धातु की छड़ ZnSO4 के विलयन में तथा Cu धातु की छड़ CuSO4 के विलयन में अलग-अलग पात्रों में डुबाकर रखी जाती है। दोनों विलयनों को KNO, लवण-सेतु द्वारा जोड़ दिया जाता है। Zn और Cu इलेक्ट्रोडों को किसी धातु के तार और गैल्वेनोमीटर सिरे से जोड़ने पर इलेक्ट्रॉनों का प्रवाह Zn से Cu की ओर बाह्य परिपथ में होने लगता है। Zn<sup>2+</sup> इलेक्ट्रोडों पर जिंक परमाणु Zn2+ आयन बनाकर विलयन में चले जाते हैं। यहाँ उपस्थित इलेक्ट्रॉन बाह्य परिपथ से Cu इलेक्ट्रोड पर पहुँचकर CuSO4 विलयन में उपस्थित Cu2+ आयनों को Cu धातु में बदल देते हैं, जो Cu इलेक्ट्रोड पर जमा होता जाता है। इस सेल में ऐनोड Zn इलेक्ट्रोड है, क्योंकि इसमें ऑक्सीकरण होता है –
MP Board Class 12th Chemistry Solutions Chapter 3 वैद्युतरसायन - 47

Zn(s) ⇌ Zn+2(aq) +2e
इसमें Cu इलेक्ट्रोड कैथोड है, क्योंकि उस पर अपचयन होता है- .
Cu+2(aq) + 2e  ⇌ Cu(s)
सम्पूर्ण सेल अभिक्रिया निम्न प्रकार प्रदर्शित की जा सकती है –
Zn(s)+ Cu+2(aq) ⇌ Cu(s) +Zn+2(aq)
इस सेल में ऋण ध्रुव ऐनोड तथा धन ध्रुव कैथोड है, क्योंकि कैथोड पर दूसरे ध्रुव से इलेक्ट्रॉन आते हैं। · अतः डेनियल सेल को निम्न प्रकार प्रदर्शित कर सकते हैं
Zn(s)|(ZnSO4(aq)||CuSO4(aq)||Cu(s)

वैद्युतरसायन संख्यात्मक प्रश्न

प्रश्न 1.
0.02molL-1KCI विलयन की 298 K पर विशिष्ट चालकता 2.48 x 10-2-1cm-1 हो, तो मोलर चालकता की गणना कीजिए।
हल
K = 2.48 x 10-2ohm-1cm-1, C = 0.02molL-1
\(\wedge_{m}=\frac{1000 \kappa}{C_{m}} \)
= \(\frac{1000 \times 2 \cdot 48 \times 10^{-2}}{0 \cdot 02} \)
=124Scm2 mol-1

प्रश्न 2.
5 ऐम्पियर विद्युत् धारा 30 मिनट तक AgNO3 से भरे पात्र में प्रवाहित करने पर 10.07 ग्राम चाँदी जमा होती है, तो चाँदी का विद्युत्-रासायनिक तुल्यांक निकालिए। यदि हाइड्रोजन का विद्युत्-रासायनिक तुल्यांक 0-00001036 है, तो चाँदी का तुल्यांक भार निकालिए।
हल
फैराडे के प्रथम नियमानुसार W = ZIt
दिया गया है : W = 10.07 ग्राम, I = 5 ऐम्पियर, t= 30 x 60 सेकण्ड
10.07 =z x 5 x 30 x 60
या
\(\mathrm{Z}=\frac{10.07}{5 \times 30 \times 60} =0:001118 \)
तथा \(\frac{\mathrm{W}_{1}}{\mathrm{W}_{2}}=\frac{\varepsilon_{1}}{\varepsilon_{2}}=\frac{\mathrm{Z}_{1}}{\mathrm{Z}_{2}} \)
MP Board Class 12th Chemistry Solutions Chapter 3 वैद्युतरसायन - 48
प्रश्न 3.
(a) दुर्बल विद्युत्-अपघट्य किसे कहते हैं ? एक उदाहरण दीजिए।
(b) LiBr के जलीय विलयन की अनंत तनुता पर मोलर चालकता ज्ञात कीजिए, जबकि Li+ आयन व Br आयन की आयनिक चालकताएँ क्रमश: 38.7Scm2 mol-1 एवं 78.40S cm+ mol-1 है।
उत्तर
(a) दुर्बल विद्युत्-अपघट्य-वे विद्युत्-अपघट्य, जो विलयन में अल्प आयनित होते हैं, दुर्बल विद्युत्-अपघट्य कहलाते हैं। उदाहरण-CH3 COOH

(b)
LiBr = ∧Li+ + ∧Br
दिया है- ∧Li+ = 38.7Scm2mol-1
Br = 78.40S cm2mol-1
LiBr = 38.7 + 78.40
LiBr =117.10 Scm2 mol-1.

प्रश्न 4.
(a) प्रबल विद्युत्-अपघट्य किसे कहते हैं ?
(b) BaCl2 के जलीय विलयन की अनंत तनुता पर मोलर चालकता ज्ञात कीजिए, जबकि Ba+2 आयन व Cl आयन की आयनिक चालकताएँ क्रमशः 127.30 Scm2 mol-1 एवं 76-34S cm2 mol-1है |
उत्तर
(a) प्रबल विद्युत्-अपघट्य-वे विद्युत्-अपघट्य जो विलयन में पूर्णतः आयनित होते हैं, .. प्रबल विद्युत्-अपघट्य कहलाते हैं । दिया है- .
उदाहरण-NaCl.
(b)
BaCl2 =∧ Ba2+ +2∧Cl
दिया है – ∧ Ba2+ = 127-30 S cm2 mol-1
Cl = 76.34 S cm2 mol-1
∴ ∧BaCl2 = 127:30 + 2(76-34)
=127.30 + 152.68 = 279.98 S cm2 mol-1.

प्रश्न 5.
यदि λ (Al3+)= 189Ω-1cm2mor-1, λ(SO4-2) = 160-1cm2 mor-1 हो, तो Al2(SO4)3 की आण्विक चालकता की गणना कीजिए।
हल
Al2(SO4)3 के विलयन के आयनन से,
Al2(SO4)3 ⇌ 2Al3++3 So4-2
V+ = 2,V =3
कोलरॉश नियम से, ∧m = V+λ+ + Vλ+
= 2 (189) + 3 (160)
= 378 + 480
= 858Ω-1cm2 mol-1

प्रश्न 6.
\(\frac{\mathbf{M}}{30}\) CH3 COOH की आण्विक चालकता 9.625 mho तथा अनन्त तनुता पर आण्विक . चालकता 385 mho है । M/30 CH3COOH के वियोजन की मात्रा की गणना कीजिए।
हल:
MP Board Class 12th Chemistry Solutions Chapter 3 वैद्युतरसायन - 49

प्रश्न 7.
ऐसीटिक अम्ल के लिए ∧m ज्ञात कीजिए।
दिया गया है-, ∧m(HCI) = 426Ω-1cm2 mol-1
m(NaCl) =126Ω-1cm2mol-1
m(CH3 COONa) = 91Ω-1cm2mol-1
हल : ऐसीटिक अम्ल दुर्बल विद्युत्-अपघट्य तथा HCI, NaCl और CH3 COONa प्रबल विद्युत्अपघट्य हैं । अतः कोलरॉश नियम से,
MP Board Class 12th Chemistry Solutions Chapter 3 वैद्युतरसायन - 50

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MP Board Class 6th Hindi Bhasha Bharti Solutions Chapter 9 पद और दोहे

MP Board Class 6th Hindi Bhasha Bharti Solutions Chapter 9 पद और दोहे

MP Board Class 6th Hindi Bhasha Bharti Chapter 9 पाठ का अभ्यास

पद और दोहे MP Board Class 6th Hindi प्रश्न 1.
सही विकल्प चुनकर लिखिए

(क) मीरा ने आँसुओं के जल से सींचकर बोई है
(i) प्रेम की बेल
(ii) मोती की बेल,
(iii) मूंगे की बेल
(iv) फूल की बेल।
उत्तर
(i) प्रेम की बेल

(ख) भूखे को भीख देने की बात कही है
(i) रहीम ने
(ii) कबीर ने,
(iii) मीरा ने
(iv) कमाल ने।
उत्तर
(ii) कबीर ने

(ग) जहाँ काम आवे सुई, कहा करै
(i) त्रिशूल
(ii) फूल
(iii) तलवारि
(iv) सम्पत्ति
उत्तर
(iii) तलवारि

पाठ 9 पद और दोहे MP Board Class 6th Hindi प्रश्न 2.
रिक्त स्थानों की पूर्ति कीजिए

(क) छौड़ दई कुल की ………… कहा करै कोई।
(ख) घृत-घृत सब काढ़ि लियो …………….. पियो कोई।
(ग) कर ….. की बंदगी भूखे को दै भीख।
(घ) जो रहीम उत्तम ……….. का करि सकत कुसंग।
उत्तर
(क) कानि
(ख) छाछ
(ग) साहब
(घ) प्रकृति।

Pad Aur Dohe MP Board Class 6th Hindi  प्रश्न 3.
निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर लिखिए

(क) मीराबाई ने श्रीकृष्ण की किस रूप में उपासना की है?
उत्तर
मीराबाई ने श्रीकृष्ण की पति रूप में उपासना की है।

(ख) कबीर ने किन दो बातों की सीख दी है?
उत्तर
कबीर ने साहब (ईश्वर) की वन्दना करने और भूखे को भीख (भिक्षा) देने की सीख दी है।

(ग) कल का काम आज ही क्यों कर लेना चाहिए?
उत्तर
कल का काम आज ही कर लेना चाहिए, क्योंकि क्षण भर में ही मृत्यु हो सकती है। मृत्यु हो जाने पर काम न किया हुआ ही रह जाएगा।

(घ) रहीम ने उत्तम प्रकृति का महत्व किस उदाहरण से स्पष्ट किया है ?
उत्तर
रहीम ने उत्तम प्रकृति का महत्व यह उदाहरण देते हुए स्पष्ट किया है कि शीतलता देने वाले चन्दन के वृक्ष पर अनेक सर्प लिपटे रहते हैं, फिर भी उस पर साँपों के जहर का प्रभाव नहीं होता है।

(ङ) सच्चे मित्र की क्या पहचान है ?
उत्तर
सच्चे मित्र की यह पहचान है कि वह अपने मित्र का साथ विपत्ति काल में भी नहीं छोड़ता। विपरीत परिस्थितियों में भी वह साथ देता है।

पाठ पद और दोहे MP Board Class 6th Hindi प्रश्न 4.
निम्नलिखित पद्यांशों के भाव स्पष्ट कीजिए

(क) भगत देखि राजी भई, जगत देखि रोई।
दासी ‘मीरा’ लाल गिरधर, तारो अब मोही॥

(ख) कबिरा सोई पीर है, जो जाने पर पौर।
जो पर पोर न जानई, सो काफिर बेपीर ।

(ग) एक साधे सब सधै, सब साधे सब जाय।
रहिमन मूलहि सीचिवो, फूलै फलै अघाय।
उत्तर
‘सम्पूर्ण पद्यांशों की व्याख्या’ के अन्तर्गत पद्यांश संख्या 1, 2, व 3 की व्याख्या देखें।

भाषा की बात

पाठ पद और दोहे में MP Board Class 6th Hindi प्रश्न 1.
निम्नलिखित शब्दों का शुद्ध उच्चारण कीजिए
भ्रात, धृत, प्रकृति, सम्पत्ति, भुजंग, व्याप्त।
उत्तर
अपने अध्यापक महोदय की सहायता से शुद्ध उच्चारण करना सीखें और अभ्यास करें।

Kabir Ke Dohe In Hindi Class 6 MP Board प्रश्न 2.
निम्नलिखित शब्दों के मानक रूप लिखिएअंसुअन, भगत, जाके, तिरसूल, परलै, अब्ब, कब्ब, विपति।
उत्तर
अश्रुओं, भक्त, जिसके, त्रिशूल, प्रलय, अब, कब, विपत्ति।

प्रश्न 3.
निम्नलिखित शब्दों के सामने उनके पर्याय लिखे हैं। इनमें एक शब्द पर्यायवाची शब्द नहीं है, उसे चुनकर लिखिए
(क) देवता = सुर, असुर, देव।
(ख) पति = प्राणनाथ, कंत, तनय।
(ग) अभिलाषा = लोभ, इच्छा, चाह।
(घ) सज्जन सभ्य, शिष्ट, अशिष्ट। ।
(ङ) फूल = पुष्प, कुसुम, पुरुष।
उत्तर
(क) असुर
(ख) तनय
(ग) लोभ
(घ) अशिष्ट
(ङ) पुरुष

प्रश्न 4.
निम्नलिखित पंक्तियों में अनुप्रास अलंकार है। प्रत्येक पंक्ति में पहचान स्पष्ट कीजिए
(i) जाके सिर मोर मुकुट, मेरो पति सोई।
(ii) एकै साधे सब सधै, सब साधे सब जाए।
(iii) कहि रहीम सम्पत्ति सगै बनत बहुत बहुरीत।
(iv) जो पर पीर न जानई, सो काफिर बेपौर।
उत्तर-
(i) ‘मोर-मुकुट-मेरो’ शब्दों में ‘म’ वर्ण की कई बार आवृति होने पर अनुप्रास अलंकार है।
(ii) साधे, सब, सधै, सब, साधे, सब’ शब्दों में ‘स’ वर्ण की कई बार आवृति होने से अनुप्रास अलंकार है।
(ii) सम्पति, बनत, बहुत, रीत’ शब्दों में ‘त’ वर्ण की कई बार आवृति होने से अनुप्रास अलंकार है।
(iv) पर, पीर, काफिर, बेपीर’ शब्दों में ‘प’ और ‘र’ वर्ण की कई बार आवृति होने से अनुप्रास अलंकार है।

प्रश्न 5.
तालिका में दिए गए शब्दों की सही जोड़ी बनाइएशब्द
विलोम – शब्द
(i) पण्डित – (क) घृणा
(ii) देव – (ख) दुःख
(iii) प्रेम – (ग) रात
(iv) सुख – (घ) थल
(v) जल – (ङ) दानव
(vi) दिन – (च) मूर्ख
उत्तर
(i)→ (च), (ii)→ (ङ), (iii) → (क), (iv)→ (ख),(v)→(घ), (vi)→ (ग)

प्रश्न 6.
उपसर्ग जोड़कर नए शब्द बनाइए
(i) परा + जय
(ii) परा + भव
(iii) परा + क्रम
(iv) नि +रंजन
(v) नि+ वेश
(vi) नि+ दान।
उत्तर
(i) पराजय
(ii) पराभव
(iii) पराक्रम
(iv) निरंजन
(v) निवेश
(vi) निदान

प्रश्न 7.
निम्नलिखित शब्दों में आवट और आहट प्रत्यय जोड़कर नए शब्द बनाइए
(i) सजाना + आवट
(ii) बनाना + आवट
(iii) लिखना + आवट
(iv) मुस्कराना + आहट
(v) टकराना + आहट
(vi) चिल्लाना + आहट
(vii) घबराना + आहट
उत्तर
(i) सजावट
(ii) बनावट
(iii) लिखावट
(iv) मुस्कराहट
(v) टकराहट
(vi) चिल्लाहट
(vii) घबराहट।

पद और दोहे सम्पूर्ण पद्यांशों की व्याख्या

(1) मेरे तो गिरधर गोपाल, दूसरो न कोई॥
जाके सिर मोर मुकुट, मेरो पति सोई।
तात मात भ्रात बंधु, आपनों न कोई॥
छाँड़ि दई कुल की कानि, कहा करै कोई।
सन्तन डिंग बैठि-बैंठि लोक-लाज खोई॥
चूनरी के किये टूक, ओढ़ लीन्हीं लोई।
मोती मूंगे उतारि, वन-माला पोई।
अंसुअन जल सींच-सींच, प्रेम बेलि बोई।
अब तो बेलि फैल गई आनन्द फल होई॥
प्रेम की मथनियाँ बड़े, जतन से बिलोई।
घृत-घृत सब काढ़ि लियो, छाछ पियो कोई॥
भगत देखि राजी भई, जगत देखि रोई।
दासी ‘मीरा’ लाल गिरधर, तारो अब मोही।

शब्दार्थ-आपनों = अपना। छाँड़ दई = छेड़ दी। कुल = परिवार । कानि = इज्जत, कुल मर्यादा। हिंग=पास। खोई = मिटा दी। लाजशर्म, लज्जा। चूनरी=चूंदरी, चादर।  लोई = लोई नामक वस्त्र जिसे प्राय: त्यागी, साधु-सन्त ओढ़ते हैं। वन-माला = वन के फूल और पत्तियों की माला। पोई = पिरो कर। प्रेम बेलि-प्रेम की लता। होई = लग रहे हैं। मथनियाँ = मथानी, रई। बिलोई=दही मथने का काम किया। जतन से = प्रयत्न से। काढ़ि लियो = निकाल लिया। छछ = मट्ठा। पियो कोई = कोई भी पीता रहे। राजी भई = प्रसन्न हुई। जगत देखि रोई = संसार के बन्धनों को देखकर दु:खी होने लगी। तारो = उद्धार करो। मोही = मेरा, या मुझे।

सन्दर्भ-प्रस्तुत पद ‘पद और दोहे’ नामक पाठ से लिया गया है। यह पद मीराबाई की रचना है।

प्रसंग-मीरा ने स्वयं को श्रीकृष्ण की भक्ति में लीम कर दिया है। वह चाहती है कि उसके इष्ट भगवान कृष्ण उसका भवसागर से उद्धार कर दें।

व्याख्या-मीराबाई कहती है कि मेरे प्रभु, तो गोवर्धन पर्वत को धारण करने वाले, गौ का पालन करने वाले श्रीकृष्ण हैं। उनके अतिरिक्त मेरा कोई अन्य प्रभु नहीं है। अपने सिर पर जो मोर-मुकुट धारण करते हैं, वही मेरे पति हैं। माता-पिता, भाई-बन्धु (सरो सम्बन्धी) अपने तो कोई भी नहीं हैं। मैंने कुल मर्यादा छोड़ दी है, मेरा कोई क्या कर सकेगा। साधु-सन्तों की संगति में बैठना शुरू कर दिया है, मैंने लोक-लाज भी खो दी है। प्रतिष्ठित घर की बहू जिस चादर को ओढ़ कर चलती है, उस चादर के मैंने दो टुकड़े कर दिए हैं, (फाड़ दी है)। लोई पहन ली है। मोती-मूंगे धारण करना छोड़ दिया है।

वन के फूलों की माला (सहज में प्राप्त फलों की माला) पिरो कर पहनने लगी हैं। भगवान श्रीकृष्ण की भक्ति में आँसू बहाते हुए, उनके प्रति प्रेम की बेलि को बोया है और लगातार सचिा है। वह बाल अब फूलकर फैल चुकी है। उस पर अब तो आनन्द के फल लगने शुरू हो गए हैं। प्रेम की मथानी से प्रयत्नपूर्वक बिलोने पर (अमृत रूपी) सम्पर्ण घी निकाल लिया है।

शेष छाछ (मट्ठा) रह गया है, उसे कोई भी पीता रहे (संसार छोड़ा हुआ मट्ठा है-तत्वहीन पदार्थ है। जो उसे पीना चाहे वह पीता रहे।) में प्रभु भक्तों की संगति में आनन्दित हो रही हूँ। संसार को देखकर अत्यधिक दु:खी होती हूँ। मीराबाई वर्णन करती हैं कि मैं तो गिरधर लाल श्रीकृष्ण की दासी हूँ। हे प्रभो आप मेरा उद्धार कीजिए।

(2) कबिरा कहै कमाल सौं, दो बातें लै सीख।
कर साहब की बन्दगी, भूखे को दें भीख॥1॥
बुरा जो देखन मैं चला, बुरा न मिलिया कोय।
जो दिल खोजां आपना, मुङ्गा सा बुरा न कोय॥2॥
कबिरा सोई पीर है, जो जाने पर पीर।
जो पर पीर न जानई, सो काफिर बेपीर ॥3॥
जो तोको काँटा बुवै, ताहि बोव तू फूल।
तोहि फूल को फूल हैं, वाको है तिरसूल ॥4॥
काल्ह करें सो आज कर, आज कर सो अव्व।
पल में परलै होयगी, बहुरि करैगो कब्ध ॥5॥

शब्दार्थ-सीख = शिक्षा ग्रहण कर ले। बन्दगी = प्रार्थना, भक्ति। साहब= स्वामी, ईश्वर। भीख = भिक्षा। न मिलिया कोय = कोई नहीं मिला। खोजां = ढूँढ़ने पर। पर-पीर-दूसरे की पीड़ा। जानै = जानता है।
काफिर = विधर्मी। बेपीर = किसी की पीड़ा को न समझने वाला। तोको = तेरे लिए। बुवै = बोता है।
ताहि = उसको। तोहि = तेरे लिए। वाको = उसके लिए। तिरसूल = त्रिशूल (बड़े-बड़े काँट)। काल्ह = कल। अब्ब-अभी-अभी, इसी समय। परलै = प्रलय। बहुरि = फिर।

सन्दर्भ-प्रस्तुत दोहे ‘पद और दोहे’ नामक पाठ से लिए गए हैं। इनकी रचना कबीर ने की है।

प्रसंग-कबीर ने लोगों को सलाह दी है कि उन्हें देखना चाहिए कि समाज में कोई व्यक्ति दुःखी, भूखा या किसी भी तरह के कष्ट से पीड़ित तो नहीं है। यदि ऐसा है तो प्रत्येक को सहायता के लिए उठ खड़ा होना चाहिए।

व्याख्या-

  • कबीर अपने पुत्र कमाल को समझाते हुए कहते हैं कि तुम्हें दो बातों की शिक्षा ग्रहण कर लेनी चाहिए। पहली यह है कि तुम्हें ईश्वर की वन्दना करना सीख लेना चाहिए और दूसरी बात यह कि भूखे व्यक्ति को भिक्षा देनी चाहिए।
  • कबीर कहते हैं कि संसार में बुरे व्यक्ति की जाँच करने के लिए मैं निकला, तो मुझे कोई भी व्यक्ति बुरा नहीं मिला।
    परन्तु जब मैंने अपने हृदय में झाँका और देखा, तो मुझे यह बात ज्ञात हुई कि स्वयं मुझसे बढ़कर बुरा कोई अन्य व्यक्ति नहीं है।
  • कबीर कहते हैं कि वही सच्चा पीर (ईश का भक्त) है जो दूसरों के कष्ट को अच्छी तरह जानता है। जो दूसरों की पीड़ा को समझ नहीं सकता, वह निश्चय ही विधर्मी है, बेपीर है अर्थात् उसे किसी के भी प्रति किसी भी तरह की सहानुभूति नहीं है।
  • कबीर कहते हैं कि जो भी कोई व्यक्ति तुम्हारे लिए काँटा बोता है, अर्थात् तुम्हारे लिए किसी भी प्रकार की विपत्तियाँ
    (कष्ट) देता है, तो तुम्हें उसके बदले में फूल ही बोने चाहिए। प्रतिकार में काँट (कष्ट) नहीं बोना चाहिए, बाधाएँ नहीं डालनी चाहिए। क्योंकि अन्त में तुम्हारे लिए फूल ही फूल रहेंगे (अर्थात् किसी भी तरह का कष्ट नहीं होगा)। उसके लिए (काँटे बोने वाले के लिए) तो बड़े-बड़े (त्रिशूल जैसे) काँट ही पैदा होंगे।
  • कबीर ने अपना कार्य करने की सलाह देते हुए उपदेश दिया है कि जो काम कल किया जाना है, उसे आज ह और जो काम आज करना है, उसे अभी-अभी पूरा कीजिए क्योंकि, पल (क्षण) भर में ही प्रलय (मृत्यु) हो गई, तो फिर उस काम को कब कर सकोगे।

(3) एक साधे सब सधै, सब साधे सब जाय।
रहिमन मूलहि सींचिबो, फूलै फलै अघाय॥1॥
रहिमन देखि बड़ेन को, लघु न दीजिए डारि।
जहाँ काम आवै सुई, कहा करै तरवारि॥2॥
रहिमन चुप है बैठिए, देखि दिनन के फेर।
जब नीके दिन आइहैं, बनत न लगिहें बेर॥ 3 ॥
जो रहीम उत्तम प्रकृति, का करि सकत कुसंग।
चन्दन विष व्यापत नहीं, लिपटे रहत भुजंग॥4॥
कहि रहीम सम्पति सगे, बनत बहुत बहुरीत।
बिपति कसौटी जे कसे, ते ही साँचे मीत॥5॥

शब्दार्थ-एकै साधे = एक की साधना करने पर। जाय = चला जाता, नष्ट हो जाता है। सीचिबो सींचने मात्र से। मूलहि = मूल में,जड़ में। अघाय-पूर्ण तृप्ति तक। बड़ेन-बड़े लोगों को। डारि = फेंकना। तरवारि = तलवार। दिनन के फेर बदले हुए समय को। नीके = अच्छे। बेर – देर। प्रकृति = स्वभाव। कुसंग- बुरी संगति। व्यापत = समा जाना। भुजंग = जहरीले साँप। सम्पति- सम्पत्ति काल में। बहु रीत- अनेक रीतियों से (किसी भी प्रकार से)। बिपति-कसौटि = विपत्ति जैसी कसौटी पर। कसे = कसने पर। जे कसे = जो कस दिए जाते हैं। ते ही = वे ही। साँचे मीत सच्चे मित्र।

सन्दर्भ-प्रस्तुत पंक्तियाँ हमारी पाठ्यपुस्तक भाषा भारती’ के पाठ ‘पद और दोहे’ नामक पाठ से ली गई हैं। ये दोहे रहीम की रचना हैं।

प्रसंग-इन दोहों में रहीम ने सत्संगति, गुण ग्रहण करना तथा विषम स्थिति में मौन धारण करके रहने का उपदेश किया है।

व्याख्या

  • रहीम जी कहते हैं कि एक ईश्वर की साधना करने से सब कुछ प्राप्त करने में सफलता मिल जाती है। सब (ईश्वर और संसार) की साधना करने से सब कुछ मिट जाता है। इसलिए मूल (जड़) की सिंचाई करने से वृक्ष पर फूल-फल पूर्ण सन्तुष्ट करने के लिए लगना प्रारम्भ हो जाता है।
  • रहीम जी सलाह देते हैं कि बड़े लोगों को संगति पाकर छोटे आदमियों का अपमान कभी भी नहीं करना चाहिए। उदाहरण देते हुए कि जो काम (सिलाई आदि) छोटी सी सुई से किया जा सकता है, वही काम तलवार (बड़ी वस्तु) से नहीं किया जा सकता अर्थात् छोटे आदमी ही कभी-कभी महत्वपूर्ण होते हैं।
  • रहीम जी कहते हैं कि दिनों के परिवर्तन से (समय के बदल जाने पर-विपरीत समय पर) किसी भी कार्य की सिद्धि न हो सकने की दशा में शान्तिपूर्वक बैठ जाना चाहिए। (खराब समय में शान्ति से विचार करने लग जाना चाहिए, अधीर नहीं होना चाहिए, क्योंकि जब अच्छा समय आएगा, तो बात बनते (काम होने में) देर नहीं लगती।
  • रहीम जी कहते हैं कि जो व्यक्ति अच्छे स्वभाव का होता है, उसके ऊपर बुरी संगति का कोई प्रभाव नहीं पड़ता। देखिए चन्दन के वृक्ष पर अनेक सर्प लिपटे रहते हैं, लेकिन उस वृक्ष पर उन सपों के जहर का कोई भी प्रभाव नहीं पड़ता। चन्दन वृक्ष शीतलता और शीलवानपन का प्रतीक है।
  • रहीम जी कहते हैं कि सम्पत्ति काल में बहुत से लोग अनेक तरह से सगे-सम्बन्धी बनने लगते हैं। (परन्तु सच्चे मित्र सिद्ध नहीं होते)। सच्चे मित्र तो वही होते हैं जो विपत्ति रूपी कसौटी पर कसे जाने पर साथ रहते हैं। अर्थात् विपत्ति में जो साथ देते हैं, वे ही सच्चे मित्र होते हैं।

MP Board Class 6th Hindi Solutions

MP Board Class 10th English The Rainbow Solutions Chapter 20 Teaching in the Tolstoy Farm

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MP Board Class 10th English The Rainbow Solutions Chapter 20 Teaching in the Tolstoy Farm (M.K. Gandhi)

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Teaching in the Tolstoy Farm Textbook Exercises

Teaching in the Tolstoy Farm Vocabulary

Teaching In The Tolstoy Farm Summary MP Board Class 10th Question 1.
Say the following words:
form – from
foam – firm
Answer:
Form _ form
From – from
Foam _ faum
Firm –  f3:m

Mp Board Class 10 English Chapter 20 Question 2.
Which word in the group is different from others? Give your reason.
(a) Urdu, Tamil, Persian, Gujarati, English, Rajasthani
(b) Reading, Writing, Arithmetic, Listening, Speaking
(c) Teacher, pupil, textbook,, training, cuckoo
(d) Indian, African, American, German, Tolstoy
(e) money, Economics, capital, business, gardening
Answer:
(a) Rajasthani
(b) Arithmetic
(c) Cuckoo
(d) Tolstoy
(e) Gardening.

comprehension

A. Answer the following questions in about 25 words.

Mp Board Class 10th English Chapter 20 Question 1.
Why was it not possible for Gandhiji to engage Indian teachers?
Answer:
Qualified Indian teachers were less at that time. If they were available, none of them was ready to work on a small salary. Besides, they were not having enough money. Moreover the Tolstoy Farm was at a distance of 21 miles from Johannesburg.

Teaching In The Tolstoy Farm MP Board Class 10th Question 2.
What was the objective of Gandhiji in setting up Tolstoy Farm? (M.P. Board 2009)
Answer:
Gandhiji did not believe in the existing system of education. The objective of Gandhiji in setting up Tolstoy Farm was to find out the true system of education through his personal experience and experiment. He desired to show that true education could be imparted without textbooks through the parents without the least help from outside.

Chapter 20 English Class 10 Mp Board  Question 3.
What were the flaws that Gandhiji had to face in the beginning?
Answer:
Gandhiji had to face the following flaws in the beginning:

  1. The youngsters had not been with him since their childhood.
  2. They had been brought up in different conditions and environments.
  3. They did not belong to the same religion.
  4. There were problems of teachers and lack of funds.

Tolstoy Farm Meaning In Hindi MP Board Class 10th Question 4.
What did Gandhiji give priority to at the Tolstoy Farm?
Answer:
At the Tolstoy Farm, Gandhiji gave priority to the culture of the heart. Gandhiji termed it as ‘building of character’. He also felt confident that moral training could be given to all alike irrespective of age and upbringing.

Question 5.
Why did Gandhiji regard character building as the proper foundation of education?
Answer:
Gandhiji regarded character building as the proper foundation of education. He firmly believed that the children could learn all other things themselves if a firm foundation was laid. Friends will also assist them.

Question 6.
How did the inmates of Tolstoy Farm get their physical training exercise?
Answer:
The Tolstoy Farm was a Community Farm. Some people worked in the kitchen. Those who were not engaged in the kitchen had to devote their time to gardening. In this way, they got their physical training exercise.

Question 7.
What were the problems Gandhiji faced in imparting literary training at Tolstoy Farm? How did he manage to overcome these?
Answer:
Gandhiji faced many problems in imparting literary training at the Tolstoy Farm. He had neither the resources nor the literary equipment. He was short of time. Only three periods could be allotted to literary training. The pupils were aware of Gandhiji’s ignorance in languages. Gandhiji managed to overcome the problems by never disguising his ignorance from his pupils. Therefore, he earned their love and respect.

Question 8.
Name the languages and subjects taught at Tolstoy Farm.
Answer:
Hindi, Tamil, Gujarati, Urdu, English and Sanskrit were the languages taught at Tolstoy Farm. Elementary history, geography and arithmetic were the subjects that were also taught at Tolstoy Farm.

Question 9.
What is the true textbook for a pupil?
Answer:
Gandhiji never felt the want of textbooks. He did not make much use of the available books. He did not find it necessary to load the pupils with books. He himself had read more by listening to teachers than by reading books. The teacher is the true textbook for a pupil.

Question 10.
‘Schools play a vital role in forming the character of a pupil.’ Examine this statement in the light of the method adopted by Gandhiji. (M.P. Board 2016)
Answer:
Being the Father (Head Teacher) of the Farm, Gandhiji lived with the pupils in the Farm. He checked their activities and supervised them at every moment. He acquainted them with the elements of their religions through their own scriptures. Like all schools, the Tolstoy Farm also developed their spirit to build their character.

B. Answer the following questions in about 50 words.

Question 1.
Describe some of the activities that the inmates at Tolstoy Farm took up for physical exercise.
Answer:
The youngsters had to do a lot of work at the Tolstoy Farm. They dug pits, felled timber and lifted loads. There were many fruit trees in the farm. They had to look after them. The inmates did enough gardening also. It was obligatory for all, young and old to give some time to gardening. Only those youngsters were spared who were engaged in the kitchen work. These activities gave them ample physical exercise. Normally through daily routine, they didn’t need other games or exercises.

Question 2.
Explain the vocational training introduced at Tolstoy Farm,
Answer:
It was Gandhiji’s intention to teach some useful manual vocation to all the youngsters. Therefore, Mr. Kallenbech was sent to Trappist monastery. He learnt shoe-making there. When he returned, Gandhiji learnt shoe-making from him. Then Gandhiji taught shoe-making to such youngsters as were ready to learn .it. Kallenbech and another inmate had some experience of carpentry. They had a small class in carpentry at Tolstoy Farm with their help. Almost all the youngsters knew cooking.

Question 3.
Describe briefly the innovative methods that Gandhiji introduced at Tolstoy Farm.
Answer:
Gandhiji introduced many innovative methods at Tolstoy Farm. He engaged the youngsters gainfully. The teachers had to stay all time with the pupils. They did everything that was required to be done by the pupils. They acted as role models for the pup<ls. He did not load the students with books. He intended to teach every one some useful manual vocation. He started teaching languages so that the pupils might develop communication skills. Moral and spiritual training were given a due place besides physical and vocational training.

Question 4.
Describe the problems faced by Gandhiji in Tolstoy Farm. How did he overcome them?
Answer:
Gandhiji was scarce of both the resources and the money. No one would be prepared to work on a small salary at a long distance. He did not have adequate literary equipment. He had shortage of time. As such he could allot only three periods to literary training. Gandhiji had scanty knowledge of languages. The pupils judged his ignorance. Besides, he could not do full justice to the students belonging to different religions. He had to learn shoe-making to teach it to his pupils. He had to stay with the pupils all the time and keep himself disciplined. He overcame all the problems by making self-sacrifice and personal involvement.

Teaching in the Tolstoy Farm Grammar

Nominalisation

A. (i) Study the following words in the sentences:
1. As the Farm grew, it was found necessary to make some provision for the education of it’s boys and girls.
2. I did not think it necessary to engage special teachers for them.
3. It was not possible, for qualified Indian teachers were scarce.
4. I did not believe in the existing system of education.
5. I fully appreciated the necessity of a literary training in addition.

(ii) We can nominalise the aforesaid verbs and adjectives as nouns and change the sentences in the following way:
1. After the growth of farm it was found necessary to make some provision for the education of its. boys and girls.
2. I did not think it necessary for engaging teachers who had got specialization for them.
3. It was not possible for Indian teachers having qualification.
4. I had no belief in the system of education which was in existence.
5. I have full appreciation for the necessity of a training in literalness in addition.

(iii) Convert the following sentences as above changing verbs and adjectives with their respective noun forms without changing the meaning:
1. I decided to live amongst them all the twenty-four hours of the day as their father.
2. They did not generally need any other exercise or games.
3. Sometimes I connived at their pranks, but often I was strict with them.
4. I dare say they did not like the strictness, but I do not recollect their having resisted it.
5. It was my invention to teach every one of the youngsters some useful manual vocation.
6. I learnt it from him and taught the art to such as were ready to take it up.
7. I do not remember having read any book from cover to cover with my boys.
Answer:

  1. I made a decision to live amongst them all the twenty- four hours of the day as their father.
  2. Generally they had no need for any other exercise or games.
  3. Sometimes I showed connivance at their pranks but often I had strictness with them.
  4. I dare say they had dislike for the strictness but I have no recollection of their resistance to it.
  5. I intended teaching every one of the youngsters some useful manual vocation.
  6. I had its learning from him and started teaching the art to such as showed readiness in taking it up.
  7. I have no membrance of reading any book cover to cover with my boys.

B. (i) Study the following sentences:

  1. As the farm grew, it was found necessary to make some provision for the education of its boys and girls.
  2. None would be ready to go to a place 21 miles distant from Johannesburg on a small salary.
  3. I decided to live amongst them all the twenty-four hours of the day as their father. The underlined words are Determiners. They are words (or word-groups) that can occur in the positions occupied by words.

Example: We can place any one of them in utterances like:

The
A/An
My
Two
No
(old) ‘man (men)’ survived.
(young) ‘girl (girls)’ lived.

(ii) The most important determiners are:

MP Board Class 10th English The Rainbow Solutions Chapter 20 Teaching in the Tolstoy Farm 1

(iii) Find out Determiners in the following sentences:
1. All the young people had not been with me since their childhood.
2. I started some classes with the help of Mr. Kallenbech and Smt. Pragji Desai.
3. This they got in the course of their daily routine.
4. Of course some of them, and sometimes all of them, malingered and shirked.
5. Good air and water and regular hours of food were not a little responsible for this.
6. It was my intention to teach every one of the youngsters some useful manual vocation.
7. There was no other time suitable for the school.
Answer:
The words in italics are determiners in the following sentences:

  1. All the young people had not been with me since their childhood.
  2. I started some classes with the help of Mr. Kallenbech and Smt. Pragji Desai.
  3. This they got in the course of their daily routine.
  4. Of course some of them, and sometimes all of them, malingered and shirked.
  5. Good air and water and regular hours of food were not a little responsible for this.
  6. It was my intention to teach every one of the youngsters some useful manual vocation.
  7. There was no other time suitable for the school.

Speaking Skill

Enact the conversation given below with your friend:
Kishan—Oh, Hari, you have given me another present. It is very sweet of you, but I wish you wouldn’t give me so many presents.
Hari—Kishan, I have been thinking. I should not have asked you to help me. I wish now I hadn’t asked you.
Kishan—Now, you are talking nonsense, I wish you wouldn’t talk nonsense.
Hari—I am not an ignornat man. I wish I was an ignorant man.
Kishan—Why don’t you listen? If only you would listen.
Hari—Why couldn’t we have met before? I wish I had met you.
Practise the conversation at least five times.
Answer:
Kishan—Oh, Hari, I wish you wouldn’t give me so many presents.
Hari—Kishan, I shouldn’t have asked you for help.
Kishan—No, nonsense, please.
Hari—Oh! If I were an ignorant man.
Kishan—Please listen to me.
Hari—Oh, if we had met before.
For Practice

Writing Skill

Question 1.
Write in your own words Mahatma Gandhi’s view on education. (50 words)
Answer:
Gandhiji was staying in the Tolstoy Farm in South Africa. There were some boys and girls in that Farm. They were young and belonged to different religions. Gandhiji and his two colleagues decided to educate the children. Gandhiji regarded the formal education as defective. He had different views on education. By education he meant all round development.

He paid equal attention to character formation and body building. He did not attach importance to textbooks. It was his firm conviction that the teacher is the true textbook for the pupils. For him, education sought through listening was more effective than the education acquired through seeing (reading). Culture of the heart was the basic aim of Gandhiji’s education. He was in favour of vocational training.

Question 2.
‘Mahatma Gandhi was a great social reformer’ Write your views. (150 words)
Answer:
Gandhiji held different religions in equal regard. He dominated the Indian scene from 1919 to 1948. His ideas influenced almost every aspect of national life. He gave courage, confidence and social unity to the people. He worked zealously, and sometimes he risked his life for the cause of the Harijans and communal harmony. He did intensive work for Harijan upliftment in 1930. He also launched an all India tour for Hqrijan work and set up Harijan Sevak Sangh to promote their welfare and upliftment. He wanted to apprise the upper caste Hindus to atone for their sins against the HarijAnswer:

He also advised Harijans to reform their social and personal life first. He made the people realise that even the poorest of the poor was the product of the Indian soil. He embraced every class in Indian society. He loosened the strong caste ties. He brought equality for women. He believed in Hindu Muslim unity. He made the village the core of Indian life. He made India conscious of social reforms. His idea of religious unity made new India to be a secular state.

Think It Over

Question 1.
If you think education is expensive, try ignorance. And the truth, you will come to know.
Think and express your opinion.
Answer:
Ignorance is a curse. An ignorant man remains unhappy even though he has opulent wealth. Even an ignorant man would like his son or daughter to be well educated. He would promptly get ready to spend a lot on his/her education. If you try ignorance you will feel that education is not expensive. Every penny spent on education yields its own fruit. Money spent on education is well utilised. It never goes waste. To hell with ignorance!

He worked by day
and toiled by night.
He gave up play
And some delight
Dry books he read,
New things to learn.
And forged ahead,
Success to earn.
He plodded on with
faith and pluck;
and when he won
Men called it luck.
Do you think so? Ponder.

[Hints: Hard work brings magical effects. It brings sure success. Luck is another name/word for hardwork. Hard work alone ensures luck]
Answer:
For self-attempt.

Things To Do

Question 1.
We learn so many things from our parents. Make a list of ten things that you learnt from your mother and your father.
Answer:
I learnt the following things from my mother and father.

  1. Getting up early in the morning.
  2. Going out for a walk daily.
  3. Taking a bath in cold water.
  4. Doing the home task regularly.
  5. Never to copy in the examination.
  6. Obedience to teachers and elderly people.
  7. Reading the scriptures everyday.
  8. Never to shirk the assigned work.
  9. Serving the grandparents and touching their feet every morning and evening.
  10. Never to tell a lie or bluff anybody.

Teaching in the Tolstoy Farm Additional Important Questions

A. Read the passages and answer the questions that follow:

1. But I had always given the first place to the culture of the heart
or the building of character, and as I felt confident that moral training could be given to all alike, no matter how different their ages and their upbringing, I decided to live amongst them all the twenty four hours of the day as their father. I regarded character building as the proper foundation for their education and, if the foundation firmly laid, I was sure that the children could learn all the other things themselves or with the assistance of friends. (Page 166)

Questions:
(a) What was Gandhiji’s view on the culture of the heart?
(b) What did Gandhiji think about moral training?
(c) What did Gandhiji decide to do?
(d) Find a word from the passage which means ‘trustful’.
Answers:
(a) Gandhiji gave the first place to the culture of the heart.
(b) Gandhiji thought that moral training could be given to all alike.
(c) Gandhiji decided to live amongst the boys and girls every time as their father.
(d) ‘Confident’.

2. I had undertaken to teach Tamil and Urdu. The little Tamil I knew as acquired during the voyages and in jail. I had not got beyond Pope’s excellent Tamil handbook. My knowledge of the Urdu script was all that I had acquired on a single voyage, and my knowledge of the language was confined to the familiar Persian and Arabic words that I had learnt from contact with Musalman friends. Of Sanskrit I knew no more than I had learnt at the high school, even my Gujarati was no better than that which one acquires at the school. (Page 167)

(a) What had he undertaken to teach?
(b) Did Gandhiji know perfect Tamil?
(c) How had Gandhiji learnt Persian and Arabic words?
(d) Find a word from the above passage used in the sense that means ‘a sea journey’.
Answers:
(a) He had undertaken to.teach Tamil and Urdu.
(b) No, Gandhiji knew only a little Tamil.
(c) Gandhiji had learnt Persian and Arabic words from his contact with Musalman friends.
(d) ‘Voyage’

I. Match the following:
1. Mahatma Gandhi was staying – (a) textbook for the pupil.
2. The young boys and girls – (b) body and character building.
3. Gandhiji’s two colleagues were – (c) belonged to different religions.
4. Attention was paid both to – (d) in the Tolstoy Farm in South Africa
5. Teacher was true – (e) Mr. Kallenbech and Smt Pragji Desai.
Answer:
1. (d), 2. (c), 3. (e), 4. (b), 5. (a).

II. Pick up the correct choice.
(i) ‘Teaching in the Tolstoy Farm’ was written by:
(a) Mr. Kallenbech
(b) Smt. Pragji Desai
(c) Mr. Desai
(d) Mahatma Gandhi
Answer:
(d) Mahatma Gandhi

(ii) (a). There were some ………………. (Musalman/Hindu) girls in the farm.
(b) The …………… (notion/conception) no doubt was not without its flaws
(c) Nor did I …………. (undermine/underrate) the building up of the body.
(d) I had a ……………. (measure/judgement) of their power of understanding.
Answer:
(a) Hindu
(b) conception
(c) underrate
(d) measure.

III. Write ’True’ or ‘False’:
1. The Tolstoy Farm was overflowing with money.
2. Gandhiji did not believe in the present system of education.
3. Gandhiji gave the first place to the culture of the heart.
4. There was scarcely any illness on the farm.
5. Whatever the youngsters learnt, they learnt unwillingly.
Answer:

  1. False
  2. True
  3. True
  4. True
  5. False.

IV. Fill up the following blanks:
1. It was found necessary to make ……………… for the education of boys and girls.
2. Gandhiji did not think it necessary to ……………. teachers from outside the Farm.
3. It was Gandhiji’s intention to teach everyone of the youngsters some useful ……………. vocation.
4. We gave three periods at- the most to ………………. training.
5. Gandhiji did not find it at all necessary to load the boys with …………….. of books.
Answer:

  1. provision
  2. import
  3. manual
  4. literary
  5. quantities.

B. Short Answer Type Questions (In about 25 words)

Question 1.
What do you know about the Tolstoy Farm? Who decided to educate the children of the Farm?
Answer:
Gandhiji established the Tolstoy Farm in South Africa. It was located at a distance of twenty one miles from Johannesburg. Gandhiji and his two coleagues Mr. Kallenbech and Smt. Pragji Desai decided to educate the children of the Farm.

Question 2.
What were Gandhiji’s views about oral learning?
Answer:
Gandhiji never felt the need of textbooks. He did not long to load the boys with a number of books. His firm belief was that the true text book for the pupil was his teacher. He taught the boys not through books but through the word of mouth. Listening gave them more pleasure than reading.

Question 3.
What was the speciality of the Tolstoy Farm?
Answer:
Gandhiji established a Tolstoy Farm near Johannesburg in South Africa. It was about 21 miles from Johannesburg. It was like a family. Gandhiji occupied the place of the father at the Farm.

Question 4.
What was Gandhiji’s plan for the Tolstoy Farm? What were the hindrances to it?
Answer:
Gandhiji’s plan was to educate the children (boys and girls) of the Tolstoy Farm. The plan was fraught with many hindrances. The children had been brought up differently. Their social, cultural and religious backgrounds were also different.

Question 5.
What did the children do at the Tolstoy Farm?
Answer:
The entire work of the Tolstoy Farm was done by the inmates. Gardening was made compulsory for all except those who worked in the kitchen. The children took utmost delight in doing most of the gardening work. They dug pits, felled trees and lifted loads.

Question 6.
How did the children build up fine physique at the Tolstoy Farm?
Answer:
The children did most of the gardening work. It made them tired because it was like physical exercise. There were good air, fresh water and regular food. There was hardly any disease in the Farm. Therefore, the children built up fine physique.

Question 7.
Why did the children learn everything cheerfully?
Answer:
The students at the Farm did the same thing that the teachers did there. The teachers not only co-operatedwith the pupils but also actually shared the work with them. Therefore, whatever the children learnt, theylearnt cheerfully.

Question 8.
Why were the school hours kept in the afternoon? What was its effect?
Answer:
Work on the farm and domestic duties consumed most of the morning hours. Therefore, the school hours had to be kept in the afternoon, after the mid day meal. As the effect of hard labour, everybody was exhausted and feeling sleepy at night.

Question 9.
How did Gandhiji pull on with the teaching of languages?
Answer:
Gandhiji undertook to teach Tamil and Urdu. He knew little of Tamil. He had picked up some Tamil during his voyage and in jail. His knowledge of Urdu was confined to some Urdu and Persian words. He had heard some words from his Muslim friends. Gandhiji’s love for languages, his confidence and devotion to the work compensated everything.

Question 10.
What was the role of Mr. Kallenbech in running the Tolstoy Farm?
Answer:
Mr. Kallenbech was Gandhiji’s colleague at the Tolstoy Farm. He was very helpful it\ imparting vocational training to boys at the Tolstoy Farm. He had some experience of gardening and carpentry. He had learnt shoe-making from a monastery. He taught shoe-making to Gandhiji and gardening to the boys.

C. Long Answer Type Questions (In about 50 words)

Question 1.
How was Gandhiji successful as the father of the family at the Tolstoy Farm?
Answer:
Gandhiji was the founder of the Tolstoy Farm. It was like a big family Naturally, he had to assume the role of the father of the family. He gave top-priority to the education of boys and girls. He laid stress on character building of the inmates of the Farm. He gave some useful vocational training to every youngster. Gardening, shoe-making and carpentry were taught at the farm. He made the pupils learn languages and their scripts. Though he was not skilled at languages yet he guided the pupils to learn the basics of these languages. He was fully successful as he involved the youngsters in useful engagements. He won their love and claimed fatherly respect.

Question 2.
How did Gandhiji create interest in his teaching? (M.P. Board 2009)
Answer:
Gandhiji didn’t make much use of the books available at the Farm. He was not in favour of loading the children with bocks. His firm conviction was that the true textbook for the pupil was his teacher. They learnt more through their ears (listening) than through their eyes (reading). Gandhiji mostly taught through vernaculars. The students considered reading as a task and hated it. Listening to Gandhiji was a pleasure to them. .He never delivered dull lectures. He prompted the pupils to ask questions and created curiosity and interest in them

Teaching in the Tolstoy Farm Introduction

Mr. M.K. Gandhi was a true nationalist as well as a humanist. He dedicated his life for the mass. He had a natural instinct to sense people. Here he shares his experience of Tolstoy Farm in South Africa and says how he changed the life of students there.

Teaching in the Tolstoy Farm Summary in English

Mahatma Gandhi was staying in the Tolstoy Farm in South Africa. There were some young boys and girls in that farm. They belonged to different religions. It became necessary for Gandhiji to make provision for their education. It was neither possible nor necessary to engage special teachers for them. Indian teachers were not ready to go there on a meager salary. They were short of money. Gandhiji desired to find the true system of education. He occupied the place of a father in the farm. He himself took the responsibility of the training of the young boys and girls.

The young people were brought up in different conditions. Gandhiji gave the top place to the building of character. He felt that moral training should be given to all alike. He was also in favour of giving literary training without underrating the building up of the body. The inmates did all the work from cooking down to scavenging. Everybody had to give time to gardening. Mr. Kallen¬bech was also trained in gardening. It provided them enough exercise. Sometimes they shirked. Then Gandhiji got strict with them. Good air and water were in plenty there. Everybody built up fine physique. There was no illness in the farm.

Gandhiji intended to teach manual vocation to every youngster. Kallenbech and Gandhiji taught shoe making to those who were ready to learn it. Kallenbech also took a small class in carpentry. All the youngsters had learnt cooking. Indian children received training in three R’s. Teachers also did whatever the youngsters were required to do. Morning hours were devoted to work on the Farm and domestic duties. The school hours had to be kept in the afternoon. Three periods were given to literary training. Hindi, Tamil, Gujarati and Urdu were all taught through vernaculars. English and Sanskrit were also taught. Besides, elementary history, geography and arithmetic were also taught to all the children.

Gandhiji had scanty knowledge of Tamil and Urdu. He had learnt Sanskrit and Gujarati at school levels. Still he had undertaken to teach languages to the youngsters and got success. He taught Tamil script and basic grammar to the Tamil boys. They served as interpreters to non-English Tamilians. The pupils were aware of Gandhiji’s ignorance of the language. Still they loved and respected him. He tried to create interest in Muslim boys for Urdu and improved their reading and handwriting.

The youngsters were mostly unlettered and unschooled. Gandhiji supervised their studies. He never felt the want for Textbooks. He himself was taught independent of books. The pupils also loved to be taught orally. They took pleasure in listening. They raised questions which confirmed their understanding.

Teaching in the Tolstoy Farm Summary in Hindi

महात्मा गांधी दक्षिणी अफ्रीका में टालस्टॉय फार्म में रहते थे। उस फॉर्म में कछ यवा लड़के और लडकियां थीं। वे विभिन्न धर्मों से सम्बधित थे। उनकी शिक्षा का प्रबन्ध करना गांधीजी के लिए अनिवार्य बन गया। उनके लिए विशिष्ट अध्यापक नियक्त करना न सम्भव था और न ही अनिवार्य। भारतीय अध्यापक, कम वेतन पर वहाँ जाने के लिए तैयार नहीं थे। उनके पास धनराशि का अभाव था। गांधीजी. शिक्षा की सच्ची प्रणाली को ढूंढ़ना चाहते थे। फॉर्म के भीतर उनका पिता का स्थान था। युवकों के प्रशिक्षण की उन्होंने स्वयं जिम्मेदारी ली।

युवा लोगों का लालन-पालन भिन्न-भिन्न दशाओं में हआ था। गांधी चरित्र-निर्माण को सर्वोपरि स्थान देते थे। वे महसूस करते थे कि सभी को समान रूप से नैतिक शिक्षा दी जानी चाहिए। शरीर की रचना का अवमूल्यन किए बिना शैक्षिक प्रशिक्षण देने के भी वे पक्ष में थे। फार्म में रहने वाले भोजन पकाने से लेकर गंदगी साफ करने तक का समूचा काम करते थे। बागवानी के लिए सभी को समय देना पड़ता था। मि. कालेनबेच भी बागवानी में प्रशिक्षित थे। इससे उनकी काफी कसरत हो जाती थी। कई बार वे काम से जी चुराते थे। तब गांधीजी उनके साथ सख्ती बरतते थे।

अच्छी हवा और पानी वहां काफी मात्रा में थे। सभी का स्वास्थ्य बढ़िया हो गया। फार्म के भीतर किसी प्रकार की कोई बीमारी नहीं थी। गांधीजी प्रत्येक युवा को कोई-न-कोई दस्तकारी सिखाना चाहते थे। कालेनबेच ने और गांधीजी ने उन्हें जते बनाना सिखाया जो सीखने के लिए तैयार थे। कालेनबेच ने छोटी कक्षा को बढ़ई का काम भी सिखाया। भोजन पकाना सभी नवयुवकों ने सीख लिया था। भारतीय बच्चों ने पढ़ने, लिखने तथा गणित का प्रशिक्षण लिया। अध्यापक भी वह सभी कुछ करते थे जो युवाओं से कराया जाता था। प्रातःकाल का समय फार्म पर काम करने और घरेल कायों में बिताया जाता था। स्कूल का समय दोपहर के बाद रखा जाता था। शैक्षिक प्रशिक्षण को तीन पीरियड दिए जाते थे।

हिन्दी, तमिल, गुजराती और उर्दू, सभी मातृभाषा के माध्यम से पढ़ाए जाते थे। अंग्रेजी और संस्कृत भी पढ़ाई जाती थीं। साथ-साथ, सभी बच्चों को प्रारम्भिक इतिहास, भूगोल और गणित भी पढ़ाए जाते थे। गांधीजी को तमिल और उर्दू का अल्प ज्ञान था। उन्होंने स्कूली स्तर पर संस्कत और गजराती पढ़ी थी।
फिर भी गांधी जी ने यवाओं को भाषाएं पढ़ाने की जिम्मेदारी ली और सफलता प्राप्त की। उन्होंने तमिल लड़कों को तमिल लिपि तथा मौलिक व्याकरण सिखाई। वे उन तमिलभाषियों का अनुवाद करते थे जिन्हें अंग्रेजी का ज्ञान नहीं था। छात्रों को भाषाओं से सम्बन्धित गांधी जी की अज्ञानता का बोध (ज्ञान) था।

फिर भी वे उनसे प्यार करते थे और उनका सम्मान करते थे। उन्होंने मुस्लिम लड़कों में रुचि पैदा करने का प्रयत्न किया और उन के पढ़ने और लेख को सुधारा। युवा, अधिकांश अशिक्षित थे और कभी स्कल नहीं गए थे। गांधी जी उन के अध्ययन का निरीक्षण करते थे। उन्होंने पाठ्य-पुस्तक की कभी भी आवश्यकता महसूस नहीं की। उन्होंने स्वयं भी पुस्तकों के आधार के बिना शिक्षा प्राप्त की थी। विद्यार्थी भी मौखिक रूप से पढ़ाया जाना पसन्द करते थे। वे सुनने में आनन्द लेते थे। वे प्रश्न करते थे जिससे यह पुष्टि हो जाती थी कि उनकी समझ में आ रहा है।

Teaching in the Tolstoy Farm Word-Meanings
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Teaching in the Tolstoy Farm Some Important Pronunciations

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