MP Board Class 8th Science Solutions Chapter 4 पदार्थ: धातु और अधातु

MP Board Class 8th Science Solutions Chapter 4 पदार्थ: धातु और अधातु

MP Board Class 8th Science Chapter 4 पाठ के अन्तर्गत के प्रश्नोत्तर

पाठ्य-पुस्तक पृष्ठ संख्या # 44

प्रश्न 1.
पदार्थों की दिखावट और कठोरता के आधार पर सारणी पूर्ण कीजिए।
उत्तर:
MP Board Class 8th Science Solutions Chapter 4 पदार्थ धातु और अधातु 1

प्रश्न 2.
क्या आप उन पदार्थों के नाम बता सकते हैं जो धातु हैं?
उत्तर:
हाँ, आयरन (लोहा), ऐलुमिनियम, कॉपर (ताँबा) आदि धातुएँ हैं।

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प्रश्न 3.
क्या आपने लोहार को लोहे के टुकड़े अथवा लोहे से निर्मित वस्तु, जैसे-फावड़ा, बेलचा, कुल्हाड़ी आदि को पीटते हुए देखा है? क्या इन वस्तुओं के पीटने पर आप इनके आकार में कोई परिवर्तन पाते हैं? क्या कोयले के टुकड़े को पीटने पर भी वैसे ही परिवर्तन की अपेक्षा करते हैं?
उत्तर:
हाँ, हमने लोहार को लोहे के टुकड़े/लोहे से निर्मित वस्तु को पीटते हुए देखा है। हाँ, हम इन वस्तुओं के पीटने पर उनके आकार में परिवर्तन पाते हैं। कोयले के टुकड़े को पीटने पर हम वैसे ही परिवर्तन की अपेक्षा नहीं करते। यदि कोयले के टुकड़े को पीटा जाता है, तो उसके आकार में परिवर्तन नहीं होगा बल्कि उसके टुकड़े-टुकड़े हो जाएँगे।

क्रियाकलाप 4.1

प्रश्न 1.
अपने प्रेक्षणों को निम्नांकित सारणी में रिकॉर्ड करिए।
उत्तर:
सारणी: पदार्थों की आघातवर्धनीयता:

वस्तु/पदार्थआकार में परिवर्तन (चपटा हो गया/टुकड़े हो गए)
लोहे की कीलचपटी हो गई
कोयले का टुकड़ाटुकड़े हो गए
ऐलुमिनियम की तारचपटा हो गया
पेन्सिल लेडटुकड़े हो गए

पाठ्य-पुस्तक पृष्ठ संख्या # 45-46

प्रश्न 1.
क्या आप कोयला और पेन्सिल लेड जैसे पदार्थों को धातु कह सकते हैं?
उत्तर:
नहीं, हम इन्हें धातु नहीं कह सकते हैं।

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प्रश्न 2.
क्या आप बिना प्लास्टिक या लकड़ी के हत्थे वाले गर्म धातु के पात्र को, स्वयं को बिना आघात पहुँचाए पकड़ सकते हैं? शायद नहीं! क्यों?
उत्तर:
नहीं, हम बिना प्लास्टिक या लकड़ी के हत्थे वाले गर्म धातु के पात्र को बिना आघात (बिना जले) पहुँचाए नहीं
पकड़ सकते हैं। प्लास्टिक और लकड़ी ऊष्मा के कुचालक हैं। इनके लगे होने से गर्मी धातु के पात्र से हमारे हाथों तक नहीं आएगी इससे हमारे हाथ नहीं जलेंगे।

प्रश्न 3.
कुछ अनुभवों की सूची बनाने का प्रयास कीजिए जिसमें एक लकड़ी या प्लास्टिक का हत्था आपको घायल होने से बचाता है। इन अनुभवों के आधार पर आप लकड़ी, प्लास्टिक द्वारा ऊष्मा के चालन के विषय में क्या कह सकते हैं?
उत्तर:
केतली, तवा, फ्राई पेन इत्यादि। इस आधार पर हम कह सकते हैं कि धातुओं द्वारा ऊष्मा का चालन होता है तथा ऊष्मा की कुचालक वस्तुओं द्वारा ऊष्मा का चालन नहीं होता है।

प्रश्न 4.
आपने एक विद्युत् कमी को पेचकस से काम करते देखा होगा। उसका हत्था किस प्रकार का होता है? क्यों?
उत्तर:
पेचकस का हत्था प्लास्टिक का होता है क्योंकि यह विद्युत् का कुचालक है। इसमें होकर विद्युत् का प्रवाह उसके शरीर में नहीं होगा।

प्रश्न 5.
आप ऐलुमिनियम और ताँबे के तारों का उपयोग कहाँ देखते हैं? क्या आपने कोयले की तारें देखी हैं?
उत्तर:
हम ऐलुमिनियम और ताँबे के तारों का उपयोग घरेलू विद्युत् फिटिंग में देखते हैं, नहीं, हमने कोयले की तारें नहीं देखी हैं।

प्रश्न 6.
क्या आपने कभी लोहे की शीट/प्लेट, धातु का सिक्का और एक कोयले का टुकड़ा फर्श पर गिराकर उनसे उत्पन्न ध्वनि के अन्तर पर ध्यान दिया है? क्या आप उत्पन्न ध्वनियों में अन्तर पाते हैं?
उत्तर:
हाँ, उनसे उत्पन्न ध्वनि के अन्तर पर ध्यान दिया है। लोहे की शीट/प्लेट और धातु के सिक्के को जब फर्श पर गिराया जाता है तो वे निनाद ध्वनि (ringing sound) उत्पन्न करते हैं। लेकिन जब कोयले को फर्श पर गिराते हैं तो वह ध्वनि उत्पन्न नहीं करता। हाँ, हम उत्पन्न ध्वनियों में अन्तर पाते हैं।

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प्रश्न 7.
क्या आपने मन्दिरों में लकड़ी की घन्टियाँ देखी हैं? क्या आप इसका कारण बता सकते हैं?
उत्तर:
नहीं, हमने मन्दिरों में लकड़ी की घन्टियाँ नहीं देखी हैं क्योंकि ये निनाद ध्वनि (ringing sound) उत्पन्न नहीं करती हैं।

प्रश्न 8.
माना कि आपके पास दो समान दिखने वाले डिब्बे हैं, एक लकड़ी से निर्मित और दूसरा धातु से। क्या आप दोनों डिब्बों पर चोट करके बता सकते हैं कि कौन-सा डिब्बा धातु का बना हुआ है?
उत्तर:
हाँ, जब हम डिब्बों पर चोट करते हैं तो धातु के डिब्बे पर चोट मारने पर हमें गायन ध्वनि सुनाई पड़ती है जबकि लकड़ी के डिब्बे पर चोट मारने से हमें गायन ध्वनि सुनाई नहीं पड़ती है।

क्रियाकलाप 4.2

प्रश्न 1.
प्रेक्षण लीजिए और इन पदार्थों को सुचालकों और कुचालकों में वर्गीकृत करिए।
उत्तर:

पदार्थसुचालक/कुचालक
लोहे की छड़/कीलसुचालक
गन्धककुचालक
कोयलाकुचालक
ताँबे के तारसुचालक

धातुओं और अधातुओं के रासायनिक गुण

प्रश्न 1.
जंग लगने की अभिक्रिया का स्मरण करिए।
उत्तर:
आयरन में जंग तब लगता है जबकि वह वातावरण की वायु की नमी के सम्पर्क में आता है। अभिक्रिया –
MP Board Class 8th Science Solutions Chapter 4 पदार्थ धातु और अधातु 2
Fe3O4 आयरन पर जंग के रूप में रहता है।

प्रश्न 2.
आयरन और मैग्नीशियम की ऑक्सीजन के साथ अभिक्रियाओं को पूरा करिए।
आयरन (Fe) + ऑक्सीजन (O2) + जल (H2O)?
मैग्नीशियम (Mg) + ऑक्सीजन (O2) →?
उत्तर:
3Fe + O2 + 2H2O → Fe3O4 + 2H2
2Mg + O2 → 2MgO

क्रियाकलाप 4.3

प्रश्न 1.
आप क्या देखते हैं? विलयन अम्लीय है या क्षारीय?
उत्तर:
हम देखते हैं कि लाल लिटमस पत्र विलयन में डालने पर नीला हो जाता है। इससे निष्कर्ष निकलता है कि विलयन क्षारीय प्रकृति का है।

पाठ्य-पुस्तक पृष्ठ संख्या # 47

प्रश्न 1.
क्या कॉपर में भी जंगलगता है? मैंने कॉपर के बर्तनों की सतह पर हरा पदार्थ जमा हुआ देखा है।
उत्तर:
नहीं, कॉपर में जंग नहीं लगती है। कॉपर को नम वायु में खुला रखने पर उस पर एक हल्की हरी परत जम जाती है। यह हरा पदार्थ कॉपर हाइड्रॉक्साइड और कॉपर कार्बोनेट का मिश्रण होता है।
MP Board Class 8th Science Solutions Chapter 4 पदार्थ धातु और अधातु 3

प्रश्न 2.
विलयन अम्लीय है या क्षारीय? आप इसको किस प्रकार सुनिश्चित करेंगे?
उत्तर:
यदि विलयन में लाल लिटमस पेपर नीला हो जाता है, तो विलयन की प्रकृति क्षारीय है और यदि नीला लिटमस पेपर लाल हो जाए तो विलयन की प्रकृति अम्लीय होगी।

पाठ्य-पुस्तक पृष्ठ संख्या # 48

क्रियाकलाप 4.4

प्रश्न 1.
विलयन का परीक्षण क्रमशः लाल और नीले लिटमस पत्रों से कीजिए।
उत्तर:
अम्लों और क्षारों में धातु और अधातु:
MP Board Class 8th Science Solutions Chapter 4 पदार्थ धातु और अधातु 4

क्रियाकलाप 4.5

प्रश्न – आप क्या अनुभव करते हैं? क्या बीकर गर्म हो गया? विलयन का लाल और नीले लिटमस पत्रों से परीक्षण कीजिए। विलयन अम्लीय है या क्षारीय?
उत्तर:
हाँ, बीकर बहुत गर्म हो जाता है। विलयन क्षारीय है।

पाठ्य-पुस्तक पृष्ठ संख्या # 49

क्रियाकलाप 4.6

प्रश्न – निम्न सारणी को पूरा कीजिए।
उत्तर:
MP Board Class 8th Science Solutions Chapter 4 पदार्थ धातु और अधातु 5a

प्रश्न 1.
क्या धातु और अधातु अम्लों से भिन्न प्रकार से अभिक्रिया करते हैं? परखनलियों के मुँह के पास जलती हुई माचिस की तीली लाने पर कुछ में ‘पॉप’ ध्वनि क्यों उत्पन्न हुई थी?
उत्तर:
हाँ, धातु और अधातु अम्लों से भिन्न प्रकार से अभिक्रिया करती हैं। सामान्यतः अधातु अम्लों से अभिक्रिया नहीं करी परन्तु धातु अम्लों से अभिक्रिया करती हैं और हाइड्रोजन गैस उत्पन्न करती हैं जो परखनली के मुख पर जलती हुई माचिस की तीली लाने पर ‘पॉप’ ध्वनि के साथ जलती है।

पाठ्य-पुस्तक पृष्ठ संख्या # 50

प्रश्न 1.
‘पॉप’ ध्वनि क्या दर्शाती है?
उत्तर:
‘पॉप’ ध्वनि हाइड्रोजन की उपस्थिति दर्शाती है।

पाठ्य-पुस्तक पृष्ठ संख्या # 51

प्रश्न 1.
मैंने बीकर A और B में होने वाली अभिक्रियाओं को समझ लिया है। परन्तु मैं अभी भी भ्रमित हूँ कि बीकर C, D और E में कोई परिवर्तन क्यों नहीं हुआ?
उत्तर:
बीकर C में कॉपर, जिंक सल्फेट से जिंक को प्रतिस्थापित करने में सक्षम नहीं है क्योंकि जिंक कॉपर से अधिक अभिक्रियाशील है। बीकर D में कॉपर, आयरन सल्फेट से आयरन को प्रतिस्थापित करने में सक्षम नहीं है क्योंकि आयरन, कॉपर से अधिक अभिक्रियाशील है।

बीकर E में आयरन, जिंक सल्फेट से जिंक को प्रतिस्थापित करने में सक्षम नहीं है क्योंकि जिंक आयरन से अधिक अभिक्रियाशील है। यहाँ जिंक, आयरन और कॉपर से अधिक अभिक्रियाशीलहै तथा आयरन कॉपर से अधिक अभिक्रियाशील है। अतः बीकर C, D और E में कोई परिवर्तन नहीं हुआ।

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प्रश्न 2.
क्या आप जिंक, आयरन और कॉपर के मध्य अधिक अभिक्रियाशील से कम अभिक्रियाशील धातु के क्रम का अनुमान लगा सकते हैं?
उत्तर:
हाँ, अधिक अभिक्रियाशील से क्रम अभिक्रियाशील धातु का क्रम है –
Zn > Fe > Cu
धातु और अधातुओं के उपयोग

प्रश्न 3.
यहाँ कुछ रोचक उपयोग दिए जा रहे हैं। हमें विश्वास है कि आप उनका सही अनुमान लगा पायेंगे –

  1. अधातु जो हमारे जीवन के लिए आवश्यक है और जिसे सभी सजीव श्वसन के समय अन्दर लेते हैं।
  2. अधातु जिनका उपयोग उर्वरकों में पौधों की वृद्धि हेतु किया जाता है।
  3. अधातु जिसका उपयोग जल शुद्धिकरण प्रक्रम में किया जाता है।
  4. अधातु जिसका बैंगनी रंग का विलयन एंटीबायोटिक के रूप में घावों पर लगाया जाता है।
  5. पटाखों में प्रयुक्त होने वाले अधातु।

उत्तर:

  1. ऑक्सीजन।
  2. सल्फर, पोटैशियम, नाइट्रोजन।
  3. क्लोरीन।
  4. पोटैशियम परमैंगनेट।
  5. सल्फर, पोटैशियम।

पाठ्य-पुस्तक पृष्ठ संख्या # 52

प्रश्न 1.
मैंने सना है कि पौधों में मैग्नीशियम पाया जाता है। यह उनमें किस रूप में पाया जाता है?
उत्तर:
पौधों में मैग्नीशियम फलों और तरकारी के रूप में पाया जाता है।

प्रश्न 2.
डॉक्टर ने मेरे शरीर में आयरन की कमी बताई है। मेरे शरीर में आयरन कहाँ है?
उत्तर:
मेरे शरीर में आयरन लाल रक्त कणिकाओं में है।

MP Board Class 8th Science Chapter 4 पाठान्त अभ्यास के प्रश्नोत्तर

प्रश्न 1.
निम्नलिखित में से किसको पीटकर पतली चादर में परिवर्तित किया जा सकता है?
(क) जिंक।
(ख) फॉस्फोरस।
(ग) सल्फर।
(घ) ऑक्सीजन।
उत्तर:
(क) जिंक को पीटकर पतली चादर में परिवर्तित किया जा सकता है।

प्रश्न 2.
निम्नलिखित में से कौन-सा कथन सही है?
(क) सभी धातुएँ तन्य होती हैं।
(ख) सभी अधातुएँ तन्य होती हैं।
(ग) सामान्यतः धातुएँ तन्य होती हैं।
(घ) कुछ अधातुएँ तन्य होती हैं।
उत्तर:
(ग) सामान्यतः धातुएँ तन्य होती हैं।

प्रश्न 3.
रिक्त स्थानों की पूर्ति कीजिए –

  1. फॉस्फोरस बहुत ………. अधातु है।
  2. धातुएँ ऊष्मा और ………. की ………… होती हैं।
  3. आयरन, कॉपर की अपेक्षा ………. अभिक्रियाशील
  4. धातुएँ, अम्लों से अभिक्रिया कर ……… गैस बनाती हैं।

उत्तर:

  1. सक्रिय।
  2. विद्युत्, सुचालक।
  3. अधिक।
  4. हाइड्रोजन।

प्रश्न 4.
यदि कथन सही है तो “T” और यदि गलत है तो कोष्ठक में “F” लिखिए।

  1. सामान्यतः अधातु अम्ला स आभाक्रया करते है। ( )
  2. सोडियम बहुत अभिक्रियाशील धातु है। ( )
  3. कॉपर, जिंक सल्फेट के विलयन से जिंक विस्थापित करता है। ( )
  4. कोयले को खींचकर तारें प्राप्त की जा सकती हैं। ( )

उत्तर:

  1. ‘F’
  2. ‘T’
  3. ‘F’
  4. ‘F’

प्रश्न 5.
नीचे दी गई सारणी में गुणों की सूची दी गई है। इन गुणों के आधार पर धातुओं और अधातुओं में अन्तर कीजिए –
उत्तर:
MP Board Class 8th Science Solutions Chapter 4 पदार्थ धातु और अधातु 6

प्रश्न 6.
निम्नलिखित के कारण दीजिए –

  1. ऐलुमिनियम की पन्नी का उपयोग खाद्य सामग्री को लपेटने में किया जाता है।
  2. निमज्जन छड़ें (इमरशन रॉड) धात्विक पदार्थों से निर्मित होती हैं।
  3. कॉपर, जिंक को उसके लवण के विलयन से विस्थापित नहीं कर सकता।
  4. सोडियम और पोटैशियम को मिट्टी के तेल में रखा जाता है।

उत्तर:

  1. ऐलुमिनियम की पन्नी का उपयोग खाद्य सामग्री को लपेटने में इसलिए किया जाता है क्योंकि इसे आसानी से मोड़कर खाने को अच्छी तरह बन्द किया जा सकता है जिससे बाहरी वायु एवं संदूषक पदार्थों का भोजन पर कोई दुष्प्रभाव नहीं होता। इससे भोजन सुरक्षित एवं कुछ देर तक गर्म रहता है।
  2. निमज्जन छड़ें धातु से निर्मित होती हैं क्योंकि धातु विद्युत की सुचालक होती हैं और इनमें विद्युत् प्रवाह करने पर ये जल्दी गर्म हो जाती हैं।
  3. कॉपर, जिंक से कम अभिक्रियाशील हैं। अतः यह जिंक को उसके लवण के विलयन से विस्थापित नहीं कर सकता। केवल अधिक अभिक्रियाशील धातु ही कम अभिक्रियाशील धातु को विस्थापित कर सकती है।
  4. सोडियम और पोटैशियम अत्यधिक क्रियाशील धातुएँ हैं और ये ऑक्सीजन और जल के साथ अत्यन्त तीव्र अभिक्रिया करती हैं। अभिक्रिया में बहुत अधिक ऊष्मा उत्पन्न होती है। इसलिए इन्हें मिट्टी के तेल में रखा जाता है।

प्रश्न 7.
क्या आप नींबू के अचार को ऐलुमिनियम के पात्रों में रख सकते हैं? स्पष्ट करिए।
उत्तर:
नहीं, नींबू के अचार को हम ऐलुमिनियम के पात्रों में नहीं रख सकते क्योंकि जब हम कोई अचार आदि इसमें डालते हैं तो वह अभिक्रिया करता है और भोजन/अचार को विषाक्त बना देता है, जिसको खाने से मृत्यु तक हो सकती है।

प्रश्न 8.
नीचे दी गई सारणी के कॉलम-I में कुछ पदार्थ दिये गये हैं।
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उत्तर:

  1. → (d)
  2. → (e)
  3. → (c)
  4. → (f)
  5. → (b)
  6. → (a)

प्रश्न 9.
क्या होता है जब –

  1. तनु सल्फ्यूरिक अम्ल कॉपर प्लेट पर डाला जाता है?
  2. लोहे की कील, कॉपर सल्फेट के विलयन में रखी जाती है।
  3. सम्बन्धित अभिक्रियाओं के शब्द समीकरण लिखिए।

उत्तर:
1. जब तनु सल्फ्यूरिक अम्ल को कॉपर प्लेट पर डाला जाता है तो कॉपर सल्फेट बनता है व हाइड्रोजन गैस निकलती है।
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2. जब लोहे की कील कॉपर सल्फेट के विलयन में रखी जाती है तो लोहा कॉपर सल्फेट विलयन से कॉपर को विस्थापित कर देता है।
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प्रश्न 10.
सलोनी ने लकड़ी के कोयले का एक जलता हुआ टुकड़ा लिया और उससे उत्सर्जित होने वाली गैस को एक परखनली में इकट्ठा किया?

  1. वह गैस की प्रकृति कैसे ज्ञात करेगी?
  2. इस प्रक्रम में होने वाली सभी अभिक्रियाओं के शब्द समीकरण लिखिए।

उत्तर:
1. वह इस गैस की जाँच निम्न प्रकार करेगी –
वह इस गैस को एक नली के माध्यम से चूने के पानी में प्रवाहित करेगी। इससे चूने के पानी का रंग दूधिया हो जाएगा। चूने के पानी का रंग कैल्सियम कार्बोनेट बनने के कारण दूधिया हो जाता है जो कार्बन डाइऑक्साइड और चूने के पानी की प्रतिक्रिया से बनता है। इससे स्पष्ट होता है कि परखनली में एकत्रित की गई गैस कार्बन डाइऑक्साइड है।

2.
MP Board Class 8th Science Solutions Chapter 4 पदार्थ धातु और अधातु 10

प्रश्न 11.
एक दिन रीता अपनी माँ के साथ आभूषण विक्रेता की दुकान पर गई। उसकी माँ ने सुनार को पॉलिश करने हेतु सोने के पुराने आभूषण दिए। अगले दिन जब वह आभूषण वापस लाई तो उन्होंने पाया कि उनका भार कुछ कम हो गया है। क्या आप भार में कमी का कारण बता सकते हैं?
उत्तर:
सुनार ने आभूषण को पॉलिश करने के लिए सल्फ्यूरिक अम्ल में डाल दिया होगा जिसके कारण आभूषण से सोने का कुछ अंश इस अम्ल से क्रिया करके विलयन में घुल गया होगा। इस कारण आभूषण के भार में कमी आ गयी।
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MP Board Class 8th Science Solutions Chapter 3 संश्लेषित रेशे और प्लास्टिक

MP Board Class 8th Science Solutions Chapter 3 संश्लेषित रेशे और प्लास्टिक

MP Board Class 8th Science Chapter 3 पाठ के अन्तर्गत के प्रश्नोत्तर

पाठ्य-पुस्तक पृष्ठ संख्या # 32

प्रश्न 1.
क्या आप कुछ प्राकृतिक रेशों के नाम बता सकते हैं?
उत्तर”
हाँ, प्राकृतिक रेशे कपास, रेशम और ऊन आदि हैं।

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प्रश्न 2.
निम्नांकित सारणी को भरिए –
उत्तर:
प्राकृतिक और कृत्रिम रेशे –

वस्तु का नामरेशे का प्रकार
प्राकृतिक/कृत्रिम
सूती कपड़ेप्राकृतिक रेशे
ऊनी स्वेटरप्राकृतिक रेशे
नाइलॉन कीसाड़ी कृत्रिम रेशे
साडी सिल्क कीप्राकृतिक रेशे
बरसातीकृत्रिम रेशे

प्रश्न 3.
आपने कुछ वस्तुओं को कृत्रिम चिह्नित क्यों किया है?
उत्तर:
क्योंकि ये प्राकृतिक रेशे नहीं हैं। इन्हें मनुष्यों द्वारा बनाया गया है। ये कृत्रिम रूप से बनाए गए हैं। अतः मानव द्वारा निर्मित होने के कारण इन वस्तुओं को कृत्रिम चिह्नित किया है।

पाठ्य-पुस्तक पृष्ठ संख्या # 33

नाइलॉन

प्रश्न 1.
क्या नाइलॉन के रेशे सचमुच इतने मजबूत होते हैं कि हम उससे पैराशूट और चट्टानों पर चढ़ने की रस्सी का निर्माण कर सकते हैं?
उत्तर:
हाँ, नाइलॉन के रेशे सचमुच बहुत मजबूत होते हैं। हम इनसे पैराशूट और चट्टानों पर चढ़ने की रस्सी का निर्माण कर सकते हैं।

पाठ्य-पुस्तक पृष्ठ संख्या # 34

क्रियाकलाप 3.1

प्रश्न 1.
आँकड़ों को निम्नांकित सारणी की भाँति सारणीबद्ध करिए।
उत्तर:
प्रेक्षण सारणी

धागे/रेशे के प्रकारधागे को तोड़ने हेतु आवश्यक कुल भार
कपास50 ग्राम
ऊन100 ग्राम
रेशम120 ग्राम
नाइलॉन200 ग्राम

पाठ्य-पुस्तक पृष्ठ संख्या # 35

प्रश्न 1.
मेरी माँ सदैव पेट (PET) बोतलें और चावल तथा चीनी संचयन के लिए पेट जार खरीदती हैं। मैं जानने के लिए उत्सुक हूँ कि आखिर यह पेट क्या है?
उत्तर:
पेट (PET) एक प्रकार का पॉलिएस्टर है। इसका उपयोग बोतलें, बर्तन, फिल्म, तार तथा अन्य उपयोगी वस्तुओं के निर्माण हेतु किया जाता है।

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प्रश्न 2.
चारों ओर दृष्टि घुमाइए और पॉलिएस्टर से निर्मित वस्तुओं की सूची बनाइए।
उत्तर:
पॉलिएस्टर से निर्मित वस्तुएँ-कमीज, पेण्ट, साड़ी, धागे, छाते, चादर, स्वेटर आदि।

प्रश्न 3.
ओह! अब मैं समझी कि मेरी माँ रसोई में काम . करते समय पॉलिएस्टर से बने वस्त्र क्यों नहीं पहनतीं?
उत्तर:
पॉलिएस्टर से बने वस्त्र गर्म करने पर पिघल जाते हैं। ये आग को शीघ्र पकड़ लेते हैं। रसोई घर में इन वस्त्रों में आग लगने का खतरा रहता है। आग लगने पर कपड़ा पिघल जाता है और पहनने वाले व्यक्ति के शरीर से चिपक जाता है। ये स्थिति बहुत कष्टदायक होती है। यही कारण है कि वह पॉलिएस्टर से बने वस्त्र रसोईघर में काम करते समय नहीं पहनी।

प्रश्न 4.
कल्पना करिए कि आज वर्षा का दिन है। आप किस प्रकार का छाता प्रयोग में लाएँगे और क्यों?
उत्तर:
हम संश्लेषित कपड़े से बना छाता प्रयोग में लायेंगे क्योंकि ये शीघ्र सूखते हैं, अधिक समय तक चलते हैं, कम महँगे होते हैं तथा आसानी से उपलब्ध और रख-रखाव में सुविधाजनक हैं।

पाठ्य-पुस्तक पृष्ठ संख्या # 36

प्रश्न 1.
क्या संश्लेषित रेशे प्राकृतिक रेशों की अपेक्षा कम जल सोखते हैं? क्या वे सूखने में कम समय लेते हैं?
उत्तर:
हाँ, संश्लेषित रेशे प्राकृतिक रेशों की अपेक्षा कम जल सोखते हैं। हाँ, वे सूखने में कम समय लेते हैं।

प्रश्न 2.
यह क्रियाकलाप आपको संश्लेषित कपड़ों के गुणधर्मों के बारे में क्या बतलाता है?
उत्तर:
यह बतलाता है कि संश्लेषित रेशों से बने कपड़े सूखने में कम समय लेते हैं जबकि प्राकृतिक रेशों से बने कपड़े सूखने में अधिक समय लेते हैं। इसी प्रकार प्राकृतिक रेशों से बने कपड़े अधिक जल सोखते हैं जबकि संश्लेषित रेशों से बने कपड़े कम कम जल सोखते हैं।

प्रश्न 3.
अपने माता-पिता से इन कपड़ों के प्राकृतिक रेशों की तुलना में चिरस्थायित्व (टिकाऊपन), मूल्य और रख-रखाव के विषय में जानकारी प्राप्त कीजिए।
उत्तर:
संश्लेषित रेशों से बने कपड़े, प्राकृतिक रेशों से बने कपड़ों की तुलना में अधिक टिकाऊ, सस्ते और रख-रखाव में सुविधाजनक हैं।
प्लास्टिक

प्रश्न 4.
क्या आपको आश्चर्य नहीं होता कि यह कैसे सम्भव है?
उत्तर:
नहीं, क्योंकि प्लास्टिक को आसानी से साँचों में ढाला जा सकता है और इसका पुनःचक्रण हो सकता है। इसे पुनः प्रयुक्त किया जा सकता है। इसे रंगा और पिघलाया जा सकता है। इसे किसी भी रूप में ढालकर उपयोग में लाया जा सकता है।

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प्रश्न 5.
क्या सभी प्लास्टिक वस्तुएँ सरलतापूर्वक मोड़ी जा सकती हैं?
उत्तर:
नहीं, सभी प्लास्टिक वस्तुएँ मोड़ी नहीं जा सकती।

पाठ्य-पुस्तक पृष्ठ संख्या # 37

प्लास्टिक, हल्का, प्रबल और चिरस्थायी है –

प्रश्न 1.
किस पदार्थ की बनी बाल्टियाँ और मग आज आप उपयोग में ले रहे हैं?
उत्तर:
आजकल हम प्लास्टिक की बनी बाल्टियाँ और मग उपयोग में ले रहे हैं।

प्रश्न 2.
प्लास्टिक पात्रों को उपयोग में लाने के क्या लाभ हैं?
उत्तर:
प्लास्टिक पात्रों को उपयोग में लाने के निम्नलिखित लाभ हैं –

  1. प्लास्टिक पात्र बहुत हल्के, प्रबल और चिरस्थायी होते
  2. ये विभिन्न आकारों और साइजों में ढाले जा सकते हैं।
  3. ये धातुओं को पात्रों की अपेक्षा सस्ते होते हैं।
  4. ये उद्योगों और घरेलू कार्यों में विभिन्न उद्देश्यों हेतु उपयोग में लाए जा सकते हैं।

प्रश्न 3.
विभिन्न प्रकार के प्लास्टिक पात्रों की सूची बनाइए जिन्हें आप दैनिक जीवन में उपयोग में लाते हैं।
उत्तर:
प्लास्टिक पात्र-बाल्टी, मग, गंगा सागर, पानी की टंकी, सामान ले जाने वाली थैलियाँ (कैरी बैग), पाइप, बर्तन, डस्टबिन, मेज, कुर्सी आदि।

पाठ्य-पुस्तक पृष्ठ संख्या # 38

प्रश्न 1.
प्लास्टिक का निस्तारण एक प्रधान समस्या है। क्यों?
उत्तर:
प्लास्टिक एक जैव अनिम्नीकरणीय पदार्थ है जो प्राकृतिक प्रक्रियाओं (जैसे-जीवाणुओं) द्वारा विघटित नहीं होता। इसलिए प्लास्टिक का निस्तारण एक प्रधान समस्या है।

पाठ्य-पुस्तक पृष्ठ संख्या # 39

प्रश्न 1.
कुछ और तरीके भी सुझाइए जिनके द्वारा आप प्लास्टिक पदार्थों के उपयोग को कम करने में सहयोग दे सकते हैं।
उत्तर:
प्लास्टिक पदार्थों के उपयोग को कम करने के लिए हम 4R सिद्धान्त को अपना कर सहयोग दे सकते हैं। उपयोग करिए, पुनः उपयोग करिए, पुनः चक्रित करिये और पुनः प्राप्त करिए। हमें इस प्रकार की आदतें विकसित करनी चाहिए जो पर्यावरण हितैषी हों।

MP Board Class 8th Science Chapter 3 पाठान्त अभ्यास के प्रश्नोत्तर

प्रश्न 1.
कुछ रेशे संश्लेषित क्यों कहलाते हैं?
उत्तर:
कुछ रेशे संश्लेषित इसलिए कहलाते हैं क्योंकि ये मनुष्यों द्वारा बनाए जाते हैं।

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प्रश्न 2.
सही उत्तर को चिह्नित (✓) कीजिए –
रेयॉन एक संश्लेषित रेशा नहीं है, क्योंकि –
(क) इसका रूप रेशम समान होता है।
(ख) इसे काष्ठ लुग्दी से प्राप्त किया जाता है।
(ग) इसके रेशों को प्राकृतिक रेशों के समान बुना जा सकता है।
उत्तर:
(ख) इसे काष्ठ लुग्दी से प्राप्त किया जाता है।

प्रश्न 3.
उचित शब्दों द्वारा रिक्त स्थानों की पूर्ति कीजिए –

  1. संश्लेषित रेशे ……. अथवा ……… रेशे भी कहलाते हैं।
  2. संश्लेषित रेशे कच्चे माल से संश्लेषित किए जाते हैं, है जो ……. कहलाता है।
  3. संश्लेषित रेशे की भाँति प्लास्टिक भी एक ………. है।

उत्तर:

  1. कृत्रिम, मानव निर्मित।
  2. संश्लेषण।
  3. बहुलक।

प्रश्न 4.
नाइलॉन रेशों से निर्मित दो वस्तुओं के नाम बताइए जो नाइलॉन रेशे की प्रबलता दर्शाती हों।
उत्तर:

  1. पैराशूट।
  2. चट्टानों पर चढ़ने वाली रस्सी।

प्रश्न 5.
खाद्य पदार्थों का संचयन करने हेतु प्लास्टिक पात्रों के उपयोग के तीन प्रमुख लाभ बताइए।
उत्तर:
प्लास्टिक पात्रों के उपयोग के प्रयुक्त लाभ:

  1. ये हल्के होते हैं।
  2. ये प्रबल होते हैं।
  3. ये चिरस्थायी होते हैं।

प्रश्न 6.
थर्मोप्लास्टिक और थर्मोसेटिंग प्लास्टिक के मध्य अन्तर को स्पष्ट कीजिए।
उत्तर:
थर्मोप्लास्टिक और थर्मोसेटिंग प्लास्टिक में अन्तर:

थर्मोप्लास्टिकथर्मोसेटिंग प्लास्टिक
यह ऐसा प्लास्टिक है जो गर्म करने पर आसानी से विकृत हो जाता है और सरलतापूर्वक मुड़ जाता है।ये ऐसे प्लास्टिक हैं जिन्हें एक बार साँचे में ढाल दिया जाता है तो इन्हें ऊष्मा देकर नर्म नहीं किया जा सकता। जैसे – पॉलीथीन, पी.वी.सी. जैसे-बैकेलाइट, मेलामाइन। (PVC)

प्रश्न 7.
समझाइए,थर्मोसेटिंगप्लास्टिक से निम्नलिखित क्यों बनाए जाते हैं?

  1. डेगची के हत्थे।
  2. विद्युत् प्लग/स्विच/प्लग बोर्ड।

उत्तर:

  1. डेगची के हत्थे: थर्मोसेटिंग प्लास्टिक ऊष्मा का कुचालक है, इसलिए डेगची के हत्थे थर्मोसेटिंग प्लास्टिक के बनाए जाते हैं।
  2. विद्युत् प्लग/स्विच/प्लग बोर्ड: क्योंकि थर्मोसेटिंग प्लास्टिक विद्युत् का कुचालक है, इसलिए विद्युत् प्लग/स्विच/ प्लगबोर्ड थर्मोसेटिंग प्लास्टिक के बनाए जाते हैं।

प्रश्न 8.
निम्नलिखित पदार्थों को “पुनः चक्रित किए जा सकते हैं” और “पुनः चक्रित नहीं किए जा सकते हैं” में वर्गीकृत कीजिए –
टेलीफोन यन्त्र, प्लास्टिक के खिलौने, कुकर के हत्थे, सामग्री लाने वाले थैले, बॉल प्वॉइंट पेन, प्लास्टिक के कटोरे, विद्युत् तारों के प्लास्टिक आवरण, प्लास्टिक की कुर्सियाँ, विद्युत् स्विच।
उत्तर:
पदार्थ जो पुनः चक्रित किए जा सकते हैं – प्लास्टिक खिलौने, सामग्री लाने वाले थैले, बॉल प्वॉइंट पेन, प्लास्टिक के कटोरे, विद्युत् तारों के प्लास्टिक आवरण, प्लास्टिक की कुर्सियाँ। पदार्थ जो पुनः चक्रित नहीं किए जा सकते हैं – टेलीफोन यन्त्र, कुकर के हत्थे, विद्युत् स्विच।

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प्रश्न 9.
राणा गर्मियों के लिए कमीजें खरीदना चाहता है। उसे सूती कमीजें खरीदनी चाहिए या संश्लेषित? कारण सहित राणा को सलाह दीजिए।
उत्तर:
राणा को गर्मियों के लिए सूती कमीजें खरीदनी चाहिए क्योंकि संश्लेषित कमीजें जल्दी गर्म हो जाती हैं और शरीर से चिपकने लगती हैं। इनके पहनने से पसीना भी अधिक आता है। ये हवा को अन्दर-बाहर नहीं आने देती हैं। इसके विपरीत सूती कमीजों से हवा अन्दर-बाहर आती-जाती है और पसीना सुखा देती है।

प्रश्न 10.
उदाहरण देकर प्रदर्शित कीजिए कि प्लास्टिक की प्रकृति असंक्षारक होती है।
उत्तर:
प्लास्टिक जल और वायु से अभिक्रिया नहीं करते, अतः इनका संक्षारण आसानी से नहीं होता। अतः इनकी प्रकृति असंक्षारक होती है।

उदाहरण:
घर में उपयोग में आने वाले प्लास्टिक के डिब्बे, बाल्टियाँ आदि को कई महीनों तक उपयोग में लाया जाता है उनमें न तो जंग लगती है और न ही उनके सामान्य रूप में बदलाव आता है।

प्रश्न 11.
क्या दाँत साफ करने के ब्रुश का हैण्डल और शूक (ब्रिस्टल) एक ही पदार्थ के बनाने चाहिए? अपना उत्तर स्पष्ट करिये।
उत्तर:
नहीं, दाँत साफ करने के ब्रुश का हैण्डल और शूक एक ही पदार्थ के नहीं बनाने चाहिए क्योंकि दाँत साफ करने के लिए नर्म वस्तु (नाइलॉन) की आवश्यकता होती है जिससे कि दाँत साफ करते समय दाँत और मसूड़ों को कोई नुकसान न हो। इसके विपरीत ब्रुश का हैण्डल सख्त वस्तु (प्लास्टिक) का होना चाहिए ताकि उसे आसानी से सही ढंग से पकड़ा जा सके।

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प्रश्न 12.
“जहाँ तक सम्भव हो प्लास्टिक के उपयोग से बचिए”, इस कथन पर सलाह दीजिए।
उत्तर:
प्लास्टिक अनभिक्रियाशील, हल्का, प्रबल और चिरस्थायी होता है। यह ऊष्मा और विद्युत् का कुचालक है, इसलिये यह बहुत उपयोगी है, परन्तु प्लास्टिक जैव अनिम्नीकरणीय है यह प्राकृतिक प्रक्रियाओं द्वारा सरलता से विघटित नहीं होता है। इसलिए इसका प्रयोग करते समय 4R सिद्धान्त को ध्यान में रखना चाहिए:

  1. उपयोग कम करिए (Reduce)
  2. पुनः उपयोग करिए (Reuse)
  3. पुनः चक्रित करिए (Recycle)
  4. पुनः प्राप्त करिए (Recover)

प्रश्न 13.
कॉलम A के पदों का कॉलम B में दिए गए वाक्य खण्डों से सही मिलान कीजिए –
MP Board Class 8th Science Solutions Chapter 3 संश्लेषित रेशे और प्लास्टिक 1
उत्तर:

  1. → (d)
  2. → (c)
  3. → (a)
  4. → (b)

प्रश्न 14.
“संश्लेषित रेशों का औद्योगिक निर्माण | वास्तव में वनों के संरक्षण में सहायक हो रहा है।” टिप्पणी कीजिए।
उत्तर:
संश्लेषित रेशों को पौधों और जन्तुओं से प्राप्त नहीं किया जाता है। इन्हें रासायनिक पदार्थों का उपयोग करके बनाया जाता है। ये मानव निर्मित कृत्रिम रेशे हैं। इसलिए इनके निर्माण में पेड़-पौधों को काटने की आवश्यकता नहीं होती जबकि प्राकृतिक रेशों को प्राप्त करने के लिए पेड़-पौधों को काटना पड़ता है वहीं संश्लेषित रेशों के लिए इनकी आवश्यकता नहीं होती। अतः यह कहा जा सकता है कि संश्लेषित रेशों का औद्योगिक निर्माण वास्तव में वनों के संरक्षण में सहायक हो रहा है।

प्रश्न 15.
यह प्रदर्शन करने हेतु एक क्रियाकलाप का वर्णन करिए कि थर्मोप्लास्टिक विद्युत् का कुचालक है।
उत्तर:
थर्मोप्लास्टिक ऐसे प्लास्टिक हैं जो गर्म करने पर आसानी से विकृत हो जाते हैं और मुड़ जाते हैं। जैसे-पॉलिथीन, पीवीसी (PVC)। सर्वप्रथम हम थर्मोप्लास्टिक से बनी वस्तु, एक सेल और एक टॉर्च बल्ब लेकर विद्युत् परिपथ बनाते हैं। जब हम एक सेल के साथ एक बल्ब और एक थर्मोप्लास्टिक की वस्तु को चित्रानुसार जोड़ते हैं, तो हम देखते हैं कि बल्ब नहीं जलता है। यदि हम इस परिपथ में से थर्मोप्लास्टिक की वस्तु को हटा देते हैं तो बल्ब जलने लगता है। अतः इससे निष्कर्ष निकलता है कि थर्मोप्लास्टिक विद्युत् का कुचालक है इसमें होकर विद्युत् प्रवाहित नहीं होती है।
MP Board Class 8th Science Solutions Chapter 3 संश्लेषित रेशे और प्लास्टिक 2

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MP Board Class 8th Science Solutions Chapter 2 सूक्ष्मजीव: मित्र एवं शत्रु

MP Board Class 8th Science Solutions Chapter 2 सूक्ष्मजीव: मित्र एवं शत्रु

MP Board Class 8th Science Chapter 2 पाठ के अन्तर्गत के प्रश्नोत्तर

पाठ्य-पुस्तक पृष्ठ संख्या # 17

प्रश्न 1.
क्या आप जानते हैं ये संरचनाएँ क्या हैं? यह कहाँ से आई हैं?
उत्तर:
हाँ, हम जानते हैं, ये संरचनाएँ सूक्ष्मजीव हैं। ये नम वातावरण से आई हैं।

पाठ्य-पुस्तक पृष्ठ संख्या # 19

प्रश्न 1.
हमने अपनी माँ को गर्म (गुनगुने) दूध में थोड़ा-सा दही मिलाते हुए देखा है जिससे दही जम जाता है। हमें आश्चर्य हुआ ऐसा क्यों?
उत्तर:
जब गुनगुने दूध में थोड़ा-सा दही मिलाकर रखते हैं, तो उसमें लैक्टोबैसिलस जीवाणु उत्पन्न हो जाते हैं, जो दूध को दही में परिवर्तित कर देते हैं।

प्रश्न 2.
रवा (सूजी), इडली एवं भटूरे का एक महत्वपूर्ण संघटक दही है। क्या आप अनुमान लगा सकते हैं कि ऐसा क्यों है?
उत्तर:
दही में लैक्टोबैसिलस नामक जीवाणु पाए जाते हैं जो किण्वन (फर्मेंटेशन) की क्रिया करते हैं।

पाठ्य पुस्तक पृष्ठ संख्या # 21

प्रश्न 1.
शिशु एवं बच्चों को टीका क्यों लगाया जाता है?
उत्तर:
शिशु एवं बच्चों के शरीर में प्रतिरक्षी उत्पन्न करके रोगकारक सूक्ष्मजीवों को नष्ट करने के लिए टीका लगाया जाता है। टीके द्वारा अनेक बीमारियों को रोका जा सकता है।

पाठ्य-पुस्तक पृष्ठ संख्या # 22

प्रश्न 1.
पहेली और बूझो जानना चाहते हैं कि यह किस प्रकार हुआ?
उत्तर:
सूक्ष्मजीवों द्वारा पादप अपशिष्ट एवं फल-सब्जियों के कचरे का अपघटन करके उसे खाद में बदल दिया जाता है।

पाठ्य-पुस्तक पृष्ठ संख्या # 23

प्रश्न 1.
तब आप संचरणीय रोगों का फैलना किस प्रकार रोकते हैं?
उत्तर:
संचरणीय रोगों का फैलना हम निम्न प्रकार रोकते हैं –

  1. छींकते एवं खाँसते समय अपने मुँह एवं नाक पर रूमाल रख लेते हैं।
  2. संक्रमित व्यक्ति से दूर रहते हैं।
  3. भोजन को ढककर रखते हैं।

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प्रश्न 2.
अध्यापक हमसे ऐसा क्यों कहते हैं कि अपने आस-पास पानी एकत्रित न होने दें।
उत्तर:
अध्यापक हमसे अपने आस-पास पानी एकत्रित न होने के लिए इसलिए कहते हैं क्योंकि सभी मच्छर जल में उत्पन्न होते हैं जो मलेरिया आदि बीमारी फैलाते हैं। ऐसा करने से मलेरिया, डेंगू आदि को फैलने से रोका जा सकता है।

पाठ्य-पुस्तक पृष्ठ संख्या # 25

प्रश्न 1.
पहेली को आश्चर्य होता है कि भोजन ‘विष’ कैसे बन सकता है?
उत्तर:
हमारे भोजन में उत्पन्न होने वाले सूक्ष्मजीव कभी-कभी विषैले पदार्थ उत्पन्न करते हैं जिससे भोजन ‘विष’ बन जाता है।

पाठ्य-पुस्तक पृष्ठ संख्या # 26

प्रश्न 1.
थैलियों में आने वाला दूध संदूषित क्यों नहीं होता? मेरी माँ ने बताया कि यह दूध ‘पॉश्चरीकृत’ है। पॉश्चरीकरण क्या है?
उत्तर:
इस प्रक्रिया में दूध को पहले 70°C पर 15 – 30 सेकण्ड तक गर्म किया जाता है फिर एकाएक ठण्डा करके उसे थैलियों में भण्डारण करते हैं। ऐसा करने से सूक्ष्मजीवों की वृद्धि रुक जाती है और दूध सन्दूषित नहीं होता। इस प्रक्रिया की खोज वैज्ञानिक लुई पॉश्चर ने की थी, इसीलिए इसे पॉश्चरीकरण कहते हैं।

MP Board Class 8th Science Chapter 2 पाठान्त अभ्यास के प्रश्नोत्तर

प्रश्न 1.

  1. रिक्त स्थानों की पूर्ति कीजिए(क) सूक्ष्मजीवों को ……… की सहायता से देखा जा सकता है।
  2. नीले-हरे शैवाल वायु से ……… का स्थिरीकरण करते हैं जिससे मिट्टी की उर्वरता में वृद्धि होती है।
  3. ऐल्कोहॉल का उत्पादन …… नामक सूक्ष्मजीव की सहायता से किया जाता है।
  4. हैजा …….. के द्वारा होता है।

उत्तर:

  1. सूक्ष्मदर्शी।
  2. नाइट्रोजन।
  3. यीस्ट।
  4. जीवाणु।

प्रश्न 2.
सही शब्द के आगे (✓) का निशान लगाइए –
(क) यीस्ट का उपयोग निम्न के उत्पादन में होता है –

  1. चीनी।
  2. ऐल्कोहॉल।
  3. हाइड्रोक्लोरिक अम्ल।
  4. ऑक्सीजन।

(ख) निम्न में से कौन-सा प्रतिजैविक है?

  1. सोडियम बाइकार्बोनेट।
  2. स्ट्रेप्टोमाइसिन।
  3. ऐल्कोहल।
  4. यीस्ट।

(ग) मलेरिया परजीवी का वाहक है?

  1. मादा एनॉफिलीज मच्छर।
  2. कॉकरोच।
  3. घरेलू मक्खी।
  4. तितली।

(घ) संचरणीय रोगों का सबसे मुख्य कारक है?

  1. चींटी।
  2. घरेलू मक्खी।
  3. ड्रेगन मक्खी।
  4. मकड़ी।

(ङ) ब्रेड अथवा इडली फूल जाती है, इसका कारण है?

  1. उष्णता।
  2. पीसना।
  3. यीस्ट कोशिकाओं की वृद्धि।
  4. माड़ने के कारण।

(च) चीनी को ऐल्कोहॉल में परिवर्तित करने के प्रक्रम का नाम है –

  1. नाइट्रोजन स्थिरीकरण।
  2. मोल्डिंग।
  3. किण्वन।
  4. संक्रमण।

उत्तर:
(क) ऐल्कोहॉल।

(ख) स्ट्रेप्टोमाइसिन।

(ग) मादा एनॉफिलीज मच्छ।

(घ) घरेलू मक्खी।

(ङ) यीस्ट कोशिकाओं की वृद्धि।

(च) किण्वन।

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प्रश्न 3.
कॉलम-I के जीवों का मिलान कॉलम-II में दिए गए उनके कार्य से कीजिए –
MP Board Class 8th Science Solutions Chapter 2 सूक्ष्मजीव मित्र एवं शत्रु 1
उत्तर:
(क) → (v)
(ख) → (i)
(ग) → (ii)
(घ)  → (iii)
(ङ) → (iv)
(च) → (vi)

प्रश्न 4.
क्या सूक्ष्मजीव बिना यन्त्र की सहायता से देखे जा सकते हैं? यदि नहीं तो वे कैसे देखे जा सकते हैं?
उत्तर:
नहीं, सूक्ष्मजीव बिना यन्त्र की सहायता से नहीं देखे जा सकते। इन्हें सूक्ष्मदर्शी एवं आवर्धक लेन्स की सहायता से देख सकते हैं।

प्रश्न 5.
सूक्ष्मजीवों के मुख्य वर्ग कौन-कौन से हैं?
उत्तर:
सूक्ष्मजीवों के मुख्य वर्ग निम्नलिखित हैं –

  1. जीवाणु।
  2. कवक।
  3. प्रोटोजोआ।
  4. शैवाल।
  5. विषाणु।

प्रश्न 6.
वायुमण्डलीय नाइट्रोजन का मिट्टी में स्थिरीकरण करने वाले सूक्ष्मजीवों के नाम लिखिए।
उत्तर:
वायुमण्डलीय नाइट्रोजन का मिट्टी में स्थिरीकरण करने वाले सूक्ष्मजीव हैं – राइजोबीय जीवाणु, मिट्टी में उपस्थित जीवाणु तथा नीले-हरे शैवाल।

प्रश्न 7.
हमारे जीवन में उपयोगी सूक्ष्मजीवों के बारे में 10 पंक्तियाँ लिखिए।
उत्तर:

  1. सूक्ष्मजीवों का उपयोग पर्यावरण को स्वच्छ रखने में किया जाता है।
  2. जीवाणुओं का उपयोग औषधि बनाने में किया जाता है।
  3. इनका उपयोग टीका बनाने में किया जाता है।
  4. ये कृषि में मृदा की उर्वरता में वृद्धि करने में सहायक
  5. इनका उपयोग ब्रेड, केक एवं दही आदि बनाने में किया जाता है।
  6. ये पौधों को रोगों से बचाने में भी सहायक हैं।
  7. ये जन्तुओं को बीमारी से बचाने में सहायक हैं।
  8. ये किण्वन प्रक्रिया में सहायक हैं।
  9. ये शराब, ऐल्कोहॉल, ऐसीटिक अम्ल आदि बनाने में सहायक है।
  10. अचार, पनीर तथा अन्य खाद्य पदार्थ भी इनकी सहायता से बनाये जाते हैं।

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प्रश्न 8.
सूक्ष्मजीवों द्वारा होने वाले हानिकारक प्रभावों का संक्षिप्त विवरण दीजिए।
उत्तर:
सूक्ष्मजीवों द्वारा होने वाली हानियाँ निम्नलिखित हैं –

  1. सूक्ष्मजीव संक्रमित व्यक्ति से स्वस्थ व्यक्ति में संचरणीय रोग फैलाते हैं। जैसे-क्षयरोग, हैजा आदि।
  2. कुछ सूक्ष्मजीव जन्तुओं में रोग उत्पन्न करते हैं। जैसे-जीवाणु द्वारा एंथ्रेक्स।
  3. कुछ सूक्ष्मजीव भोजन को विषाक्त कर देते हैं जिसके खाने से मनुष्य की मृत्यु तक हो सकती है।
  4. कुछ जीव पौधों में रोग उत्पन्न करते हैं। जैसे-गेहूँ की रस्ट कवक से, नींबू कैंकर जीवाणु से तथा भिण्डी की पीत विषाणु से आदि।

प्रश्न 9.
प्रतिजैविक क्या हैं? प्रतिजैविक लेते समय कौन-सी सावधानियाँ रखनी चाहिए?
उत्तर:
ऐसी औषधियाँ जो बीमारी पैदा करने वाले सूक्ष्मजीवों को नष्ट कर देती हैं अथवा उनकी वृद्धि को रोक देती हैं, प्रतिजैविक कहलाती हैं। ऐसी औषधियों का स्रोत सूक्ष्मजीव होते हैं।

प्रतिजैविक लेते समय सावधानियाँ:

  1. प्रतिजैविक दवाएँ डॉक्टर की सलाह के अनुसार ही लेनी चाहिए और उस दवा का पूरा कोर्स करना चाहिए।
  2. आवश्यकता न होने पर प्रतिजैविक का उपयोग नहीं करना चाहिए। अनावश्यक रूप से प्रतिजैविक का उपयोग उतना प्रभावी नहीं होता।
  3. अनावश्यक रूप से ली गई प्रतिजैविक शरीर में उपस्थित उपयोगी जीवाणुओं को नष्ट कर देती है।
  4. सर्दी-जुकाम एवं फ्लू में प्रतिजैविक का उपयोग नहीं करना चाहिए।

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MP Board Class 8th Science Solutions Chapter 1 फसल उत्पादन एवं प्रबंध

MP Board Class 8th Science Solutions Chapter 1 फसल उत्पादन एवं प्रबंध

MP Board Class 8th Science Chapter 1 पाठ के अन्तर्गत के प्रश्नोत्तर

पाठ्य-पुस्तक पृष्ठ संख्या # 01

प्रश्न 1.
मैं जानना चाहता हूँ कि हम इन औजारों का उपयोग कहाँ और कैसे करते हैं?
उत्तर:
हम इन औजारों का उपयोग कृषि से सम्बन्धित विभिन्न कार्यों में करते हैं; जैसे-मिट्टी तैयार करना, जुताई करना, बुआई करना, कटाई करना इत्यादि।

प्रश्न 2.
हरे पौधे अपना भोजन किस प्रकार संश्लेषित करते हैं?
उत्तर:
हरे पौधे अपना भोजन सूर्य के प्रकाश, वायु और मिट्टी से प्राप्त नमी द्वारा संश्लेषित करते हैं।

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प्रश्न 3.
जन्तुओं के भोजन का स्त्रोत क्या है?
उत्तर:
जन्तुओं के भोजन का स्रोत हरे पेड़-पौधे और अन्य जन्तु हैं।

प्रश्न 4.
हम भोजन ग्रहण ही क्यों करते हैं?
उत्तर:
हम शारीरिक क्रियाओं हेतु ऊर्जा प्राप्त करने के लिए भोजन ग्रहण करते हैं। प्राप्त ऊर्जा का उपयोग विभिन्न जैविक प्रक्रमों, जैसे-पाचन, श्वसन एवं उत्सर्जन के सम्पादन में करते हैं।

पाठ्य-पुस्तक पृष्ठ संख्या # 02

प्रश्न 1.
धान को शीत ऋतु में क्यों नहीं उगाया जा सकता?
उत्तर:
धान को उगाने के लिए बहुत अधिक पानी की आवश्यकता होती है, अतः इसे शीत ऋतु में नहीं उगाया जा सकता। इसे केवल वर्षा ऋतु में ही उगाया जा सकता है।

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प्रश्न 2.
पोली मिट्टी किस प्रकार पौधों की जड़ों को सरलता से श्वसन कराने में सहायक है?
उत्तर:
पोली मिट्टी में वायु अधिक गहराई तक जा सकती है इसलिए गहराई में फँसी जड़ें भी सरलता से श्वसन कर सकती हैं।

प्रश्न 3.
मिट्टी को पलटना और पोला करना क्यों आवश्यक है?
उत्तर:
मिट्टी को पलटने और पोला करने से पोषक तत्व ऊपर आ जाते हैं और पौधे इन पोषक तत्वों का उपयोग कर सकते हैं। अतः मिट्टी को उलटना-पलटना एवं पोला करना फसल उगाने के लिए आवश्यक है।

पाठ्य-पुस्तक पृष्ठ संख्या # 04

प्रश्न 1.
एक दिन मैंने अपनी माँ को देखा कि माँ चने के कुछ बीज एक बर्तन में रखकर उसमें कुछ पानी डाल रही हैं। कुछ मिनट पश्चात् कुछ बीज पानी के ऊपर तैरने लगे। मुझे आश्चर्य हुआ कि कुछ बीज पानी के ऊपर क्यों तैरने लगे?
उत्तर:
यह अच्छे तथा स्वस्थ बीजों को क्षतिग्रस्त बीजों से अलग करने की एक विधि है। कुछ बीज पानी में इसलिए तैरने लगे क्योंकि वे हल्के, क्षतिग्रस्त व खोखले थे।

पाठ्य-पुस्तक पृष्ठ संख्या # 05

प्रश्न 1.
मेरे विद्यालय के समीप एक पौधशाला (नर्सरी) है। मैंने देखा कि पौधे छोटे-छोटे थैलों में रखे हैं। वे इस प्रकार क्यों रखे गए हैं?
उत्तर:
धान जैसे कुछ पौधों के बीजों तथा वनीय एवं पुष्पी पौधों को पौधशाला में उगाया जाता है। जब पौध तैयार हो जाती है तो इन्हें नष्ट होने से बचाने के लिए छोटे-छोटे थैलों में रख देते हैं। फिर जहाँ खेतों में इन्हें रोपित करना होता है, तब इन्हें थैलों से निकाल कर हाथों से खेत में रोपित कर देते हैं।

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प्रश्न 2.
मैंने एक खेत में उगने वाली स्वस्थ फसल के पौधों को देखा जबकि पास के खेत में पौधे कमजोर थे। कुछ पौधे अन्य पौधों की तुलना में ज्यादा अच्छी तरह से क्यों उगते हैं?
उत्तर:
जिन पौधों को पोषक तत्व, जल, खाद और उर्वरक पर्याप्त मात्रा में मिलते हैं, वे पौधे उन पौधों की तुलना में ज्यादा अच्छी तरह से उगते हैं जिन्हें खाद्य पदार्थ, जल, खाद और उर्वरक उचित मात्रा में न मिले हों।

प्रश्न 3.
खेत कभी खाली नहीं छोड़े जाते। कल्पना कीजिए कि पोषकों का क्या होता है?
उत्तर:
लगातार फसलों के उगने से मिट्टी में कुछ पोषकों की कमी हो जाती है। इस क्षति को पूरा करने के लिए किसान खेतों में खाद देते हैं।

पाठ्य-पुस्तक पृष्ठ संख्या # 10

प्रश्न 1.
क्या ये अन्य पौधे विशेष उद्देश्य के लिए उगाए गए हैं?
उत्तर:
नहीं, ये पौधे विशेष उद्देश्य के लिए नहीं उगाए गए हैं। ये पौधे अवांछित हैं और प्राकृतिक रूप से फसल के साथ उग आते हैं। इन पौधों को खरपतवार कहते हैं।

प्रश्न 2.
क्या खरपतवारनाशी का प्रभाव इसको छिड़कने वाले व्यक्ति पर भी पड़ता है?
उत्तर:
हाँ,खरपतवारनाशी का प्रभाव इसको छिड़कने वाले व्यक्ति पर भी पड़ता है। अतः छिड़काव करते समय इन्हें अपना मुँह और नाक कपड़े से ढक लेना चाहिए।

पाठ्य-पुस्तक पृष्ठ संख्या # 11

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प्रश्न 1.
मैंने अपनी माँ को अनाज रखे लोहे के ड्रम में नीम की सूखी पत्तियाँ रखते देखा। मुझे आश्चर्य हुआ क्यों?
उत्तर:
माँ ने अनाज रखे लोहे के ड्रम में नीम की सूखी पत्तियाँ इसलिए रखी हैं, जिससे कि अनाज कीटों से सुरक्षित रहे। इसमें आश्चर्य होने की कोई बात नहीं है।

MP Board Class 8th Science Chapter 1 पाठान्त अभ्यास के प्रश्नोत्तर

प्रश्न 1.
उचित शब्द छाँटकर रिक्त स्थानों की पूर्ति कीजिए –
तैरने, जल, फसल, पोषक, तैयारी।

  1. एक स्थान पर एक ही प्रकार की बड़ी मात्रा में उगाए गए पौधों को ……….. कहते हैं।
  2. फसल उगाने से पहले प्रथम चरण मिट्टी की ……….. होती है।
  3. क्षतिग्रस्त बीज जल की सतह पर ……….. लगेंगे।
  4. फसल उगाने के लिए पर्याप्त सूर्य का प्रकाश एवं मिट्टी से ………. तथा ……….. आवश्यक है।

उत्तर:

  1. फसल।
  2. तैयारी।
  3. तैरने।
  4. जल, पोषक।

प्रश्न 2.
‘कॉलम A’ में दिए गए शब्दों का मिलान ‘कॉलम B’ से कीजिए।
MP Board Class 8th Science Solutions Chapter 1 फसल उत्पादन एवं प्रबंध 1
उत्तर:

  1. → (e)
  2. → (d)
  3. → (b)
  4. → (c)

प्रश्न 3.
निम्न के दो-दो उदाहरण दीजिए –

  1. खरीफ फसल।
  2. रबी फसल।

उत्तर:

  1. खरीफ फसल-कपास, मक्का।
  2. रबी फसल-गेहूँ, चना।

प्रश्न 4.
निम्न पर अपने शब्दों में एक-एक पैराग्राफ लिखिए

  1. मिट्टी तैयार करना।
  2. बुआई।
  3. निराई।
  4. शिंग।

उत्तर:
1. मिट्टी तैयार करना:
फसल उगाने से पहले यह प्रथम चरण है। इस प्रक्रिया में प्रथम कार्य मिट्टी को पलटना तथा इसे पोला बनाना है। इससे जड़ें भूमि में गहराई तक चली जाती हैं। पोली मिट्टी में जड़ें सरलता से श्वसन कर सकती हैं। पोली मिट्टी में केंचुओं और सूक्ष्मजीवों की वृद्धि होती है जो मिट्टी को ओर पलटकर पोला करते हैं तथा ह्यूमस बनाते हैं। मिट्टी को उलटने-पलटने एवं पोला करने की प्रक्रिया जुताई कहलाती है। खेतों में हल चलाकर जुताई की जाती है। इसके बाद बुआई हेतु खेत को पाटल की सहायता से समतल किया जाता है।

2. बुआई:
यह खेतों में बीज डालने की विधि है। इसके लिए अच्छी गुणवत्ता वाले बीजों का चयन किया जाता है। अच्छी गुणवत्ता वाले बीज अच्छी किस्म के साफ एवं स्वस्थ बीज होते हैं। ये बीज अधिक उपज देते हैं। बीजों की बोआई के लिए परम्परागत औजार को उपयोग में लाते हैं। यह कीप के आकार का होता है। इसमें होकर बीज दो-तीन नुकले सिरे वाले पाइपों से होकर गुजरते हैं। ये सिरे मिट्टी को भेदकर बीज को स्थापित कर देते हैं। आजकल बोआई ट्रैक्टर द्वारा संचालित सीड-ड्रिल से की जाती हैं। इससे बीज समान दूरी और गहराई पर रहते हैं तथा मिट्टी द्वारा ढ़क जाते हैं।

3. निराई:
खेतों में फसल के साथ कई अवांछित पौधे प्राकृतिक रूप से उग आते हैं। ये अवांछित पौधे खरपतवार कहलाते हैं। खरपतवार हटाने को निराई कहते हैं। निराई न करने से फसल की वृद्धि पर प्रभाव पड़ता है। खरपतवार के होने से
फसल को जल, जगह, पोषक तत्व तथा प्रकाश पूर्ण रूप से नहीं मिल पाता। ये कटाई में भी बाधा डालते हैं। कुछ खरपतवार मनुष्य एवं पशुओं के लिए विषैले भी हो सकते हैं। फसल को उगाने से पहले खेत जोतने से खरपतवार आसानी से हट जाते हैं। ये सूखकर मिट्टी में मिल जाते हैं। खरपतवार हटाने का उचित समय पुष्पन एवं बीज बनने से पहले का होता है। खरपतवार पौधों को हाथ से जड़ सहित उखाड़कर अथवा भूमि के निकट से काटकर किया जाता है। इस कार्य को खुरपी या हैरो की सहायता से किया जाता है।

4. श्रेशिंग:
जब फसल पक जाती है तो उसे काटा जाता है। फसल को काटना कटाई कहलाता है। काटी गई फसल से बीजों/दानों को अलग किया जाता है। इसे श्रेशिंग कहते हैं। थ्रेशिंग का कार्य कॉम्बाइन मशीन द्वारा किया जाता है, जो वास्तव में हार्वेस्टर और थ्रेशर का संयुक्त रूप है।

प्रश्न 5.
स्पष्ट कीजिए कि उर्वरक खाद से किस प्रकार भिन्न है?
उत्तर:
उर्वरक और खाद में भिन्नता –
MP Board Class 8th Science Solutions Chapter 1 फसल उत्पादन एवं प्रबंध 2

प्रश्न 6.
सिंचाई किसे कहते हैं? जल संरक्षित करने वाली सिंचाई की दो विधियों का वर्णन कीजिए।
उत्तर:
उचित समय एवं विभिन्न अन्तराल पर खेत में जल देना सिंचाई कहलाता है। जल संरक्षित करने वाली सिंचाई की दो विधियाँ हैं –
(1) छिड़काव तन्त्र:
इस विधि का उपयोग असमतल भूमि, जहाँ जल कम मात्रा में उपलब्ध हो, किया जाता है। इस विधि में पाइपों के ऊपर घूमने वाले नोजल लगे होते हैं। ये पाइप निश्चित दूरी पर मुख्य पाइप से जुड़े रहते हैं। जब पम्प द्वारा जल को मुख्य पाइप में भेजा जाता है, तो यह घूमते हुए नोजल से बाहर
निकल कर पौधों पर वर्षा की भाँति छिड़काव करता है। बलुई । मिट्टी के लिए यह विधि अत्यन्त उपयोगी है।

(2) ड्रिप तन्त्र:
इस विधि में जल बूंद-बूंद करके पौधों पर गिरता है। इस विधि का उपयोग करने से जल व्यर्थ नहीं जाता। यह विधि फलदार पौधों, बगीचों एवं वृक्षों को पानी देने के लिए सर्वोत्तम विधि है। यह जल की कमी वाले क्षेत्रों के लिए अधिक उपयुक्त है।

प्रश्न 7.
यदि गेहूँ को खरीफ ऋतु में उगाया जाए तो क्या होगा? चर्चा कीजिए।
उत्तर:
गेहूँ रबी की फसल है। इसे शीत ऋतु में उगाया जाता है। खरीफ की फसल जून से सितम्बर तक होती है। इस समय वर्षा काफी अधिक मात्रा में होती है। यदि गेहूँ को इस समय उगाया जाये तो गेहूँ के पौधे अधिक मात्रा में पानी मिलने की वजह से सडकर खराब हो जायेंगे और फसल नष्ट हो जाएगी।

प्रश्न 8.
खेत में लगातार फसल उगाने से मिट्टी पर क्या प्रभाव पड़ता है? व्याख्या कीजिए।
उत्तर:
खेत में लगातार फसल उगाने से मिट्टी में पोषक तत्वों की कमी हो जाती है। इस कमी को पूरा करने के लिए किसान खेतों में खाद तथा उर्वरक डालते हैं। इससे किसान एक फसल के बाद दूसरी किस्म की फसल उगाते हैं। खेत में अपर्याप्त खाद होने से पौधे कमजोर हो जाते हैं।

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प्रश्न 9.
खरपतवार क्या है? हम उनका नियन्त्रण कैसे कर सकते हैं?
उत्तर:
खेत में फसल के साथ कुछ अवांछित पौधे उग आते हैं, इन पौधों को खरपतवार कहते हैं। इनको हटाना आवश्यक होता है अन्यथा ये फसल की वृद्धि में बाधा डालते हैं। पशुओं और मनुष्यों के लिए ये विषैले/हानिकार भी हो सकते हैं। इनका नियन्त्रण निम्न प्रकार किया जा सकता है –

  1. फसल उगाने से पहले खेत जोतकर इन्हें नष्ट किया जा सकता है। खेत जोतने पर ये सूखकर नष्ट हो जाते हैं।
  2. पुष्पन एवं बीज बनने से पहले इन्हें हाथ से, खुरपी से या हैरो की सहायता से हटाया जा सकता है।
  3. खेतों में खरपतवारनाशी रसायनों का उपयोग करके इन पर नियन्त्रण किया जा सकता है।

प्रश्न 10.
निम्न बॉक्स को सही क्रम में इस प्रकार लगाइए कि गन्ने की फसल उगाने का रेखाचित्र तैयार हो जाए –
MP Board Class 8th Science Solutions Chapter 1 फसल उत्पादन एवं प्रबंध 4
उत्तर:
MP Board Class 8th Science Solutions Chapter 1 फसल उत्पादन एवं प्रबंध 3

प्रश्न 11.
नीचे दिए गए संकेतों की सहायता से पहेली को पूरा कीजिए –
ऊपर से नीचे की ओर:
1. सिंचाई का एक पारस्परिक तरीका।
2. बड़े पैमाने पर पालतू पशुओं की उचित देखभाल करना।
3. फसल जिन्हें वर्षा ऋतु में बोया जाता है।
6. फसल पक जाने के बाद काटना।

बाई से दाईं ओर:
1. शीत ऋतु में उगाई जाने वाली फसलें।
4. एक ही किस्म के पौधे जो बड़े पैमाने पर उगाए जाते हैं।
5. रासायनिक पदार्थ जो पौधों को पोषक प्रदान करते हैं।
7. खरपतवार हटाने की प्रक्रिया।
MP Board Class 8th Science Solutions Chapter 1 फसल उत्पादन एवं प्रबंध 5

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MP Board Class 10th Science Solutions Chapter 16 प्राकृतिक संसाधनों का संपोषित प्रबंधन

MP Board Class 10th Science Solutions Chapter 16 प्राकृतिक संसाधनों का संपोषित प्रबंधन

MP Board Class 10th Science Chapter 16 पाठान्तर्गत प्रश्नोत्तर

प्रश्न श्रृंखला-1 # पृष्ठ संख्या 302

प्रश्न 1.
पर्यावरण-मित्र बनने के लिए आप अपनी आदतों में कौन-से परिवर्तन ला सकते हैं?
उत्तर:
पर्यावरण-मित्र बनने के लिए हम अपनी आदतों में निम्न प्रकार परिवर्तन ला सकते हैं –

  1. हम प्राकृतिक संसाधनों (प्राकृतिक सम्पदा) का संरक्षण के लिए कम उपयोग’, ‘पुनः चक्रण’ एवं ‘पुनः उपयोग’ की नीति अपनाकर पर्यावरण पर पड़ने वाले दबाव को कम कर सकते हैं।
  2. हम जल, वायु, मृदा आदि को स्वयं भी प्रदूषित नहीं करेंगे और न औरों को करने देंगे।
  3. पर्यावरण के प्रति जनजागरण (जागरूकता) की अलख जगाएँगे।

प्रश्न 2.
संसाधनों के दोहन के लिए कम अवधि के उद्देश्य से परियोजना के क्या लाभ हो सकते हैं?
उत्तर:
अगर संसाधनों के दोहन के लिए कम अवधि के उद्देश्य से परियोजना वर्तमान पीढ़ी के लिए बहुत लाभदायक होगी क्योंकि आर्थिक विकास की दर तीव्र होगी।

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प्रश्न 3.
यह लाभ लम्बी अवधि को ध्यान में रखकर बनाई गई परियोजनाओं के लाभ से किस प्रकार भिन्न है?
उत्तर:
अगर हम संसाधनों के दोहन के लिए कम अवधि के उद्देश्य से परियोजनाएँ तैयार करते तो उसका लाभ वर्तमान पीढ़ी अपनी आवश्यकतानुसार उठा सकती है लेकिन लम्बी अवधि की परियोजनाओं से वर्तमान पीढ़ी भी लाभान्वित होगी साथ ही साथ भावी पीढ़ी भी इसका लाभ उठाएगी।

प्रश्न 4.
क्या आपके विचार में संसाधनों का समान वितरण होना चाहिए? संसाधनों के समान वितरण के विरुद्ध कौन-कौन ताकतें कार्य कर सकती हैं?
उत्तर:
पृथ्वी के सभी प्राकृतिक संसाधनों का सम्पूर्ण मानव समुदाय में समान वितरण होना चाहिए जिससे प्रत्येक व्यक्ति उस साधन का उपयोग कर सके। मनुष्य का लालच, भ्रष्टाचार, समृद्धशाली एवं शक्तिशाली लोगों का दल इस समान वितरण के विरुद्ध कार्य कर सकता है।

प्रश्न श्रृंखला-2 # पृष्ठ संख्या 306

प्रश्न 1.
हमें वन एवं वन्य जीवन का संरक्षण क्यों करना चाहिए?
उत्तर:
हमें वन एवं वन्य जीवन का संरक्षण करना चाहिए क्योंकि वन एवं वन्य जीव हमारे लिए बहुत उपयोगी होते हैं।

  1. वनों से हमें भोजन, ईंधन, इमारती लकड़ी, औषधियाँ आदि अनगिनत उपयोगी सामग्री प्राप्त होती है।
  2. वन हमारे पर्यावरण को शुद्ध करते हैं। हमें प्राण वायु ऑक्सीजन प्रदान करते हैं, भूमि क्षरण रोकते हैं तथा वर्षा को आमंत्रित करते हैं।
  3. वन्य जीवों से हमको बहुकीमती वस्तुएँ एवं औषधियाँ प्राप्त होती हैं; जैसे-हाथी दाँत, कस्तूरी, लाख, चमड़ा आदि।

प्रश्न 2.
संरक्षण के लिए कुछ उपाय सुझाइए।
उत्तर:
वन एवं वन्य जीव संरक्षण के उपाय:

  1. वनों के अतिदोहन पर अंकुश लगाकर तथा वृक्षारोपण के द्वारा वनों का संरक्षण किया जा सकता है।
  2. वन्य जीवों के शिकार (वध) पर रोक लगाकर एवं अभयारण्यों द्वारा उनका संरक्षण किया जा सकता है।

प्रश्न श्रृंखला-3 # पृष्ठ संख्या 310

प्रश्न 1.
अपने निवास क्षेत्र के आस-पास जल संग्रहण की परम्परागत पद्धति का पता लगाइए।
उत्तर:
हमारे क्षेत्र के आस-पास जल संग्रहण की परम्परागत पद्धति तालाब (पोखर) है।

प्रश्न 2.
इस पद्धति की पेय जल व्यवस्था पर्वतीय क्षेत्रों में, मैदानी क्षेत्र अथवा पठार क्षेत्र से तुलना कीजिए।
उत्तर:
मैदानी क्षेत्र अथवा पठार क्षेत्र में निचले स्थानों पर जल का संग्रहण एक तालाब या पोखर या झील के रूप में होता है तथा पर्वतीय क्षेत्र में जल के बहाव को रोकने के लिए छोटे बाँध बनाने पड़ते हैं जिससे जल का संग्रहण किया जा सके।

प्रश्न 3.
अपने क्षेत्र में जल के स्रोत का पता लगाइए। क्या इस स्रोत से प्राप्त जल उस क्षेत्र के सभी निवासियों को उपलब्ध है?
उत्तर:
हमारे क्षेत्र में जल का प्रमुख स्रोत भौम जल है जो कुओं या नलकूपों के माध्यम से उस क्षेत्र के सभी निवासियों को उपलब्ध है।

MP Board Class 10th Science Chapter 16 पाठान्त अभ्यास के प्रश्नोत्तर

प्रश्न 1.
अपने घर को पर्यावरण-मित्र बनाने के लिए आप उसमें कौन-कौन से परिवर्तन सुझा सकते हैं?
उत्तर:
अपने घर को पर्यावरण-मित्र बनाने के लिए हम निम्न परिवर्तन सुझाएँगे:

  1. सौर ऊर्जा उपकरणों का अधिकाधिक प्रयोग करना।
  2. किचन गार्डन बनाना तथा पौधारोपण करना।
  3. घरेलू कचरे को दो अलग-अलग पात्रों में रखना एक में जैव निम्नीकरणीय एवं दूसरे में अजैव निम्नीकरणीय।
  4. फल-सब्जियों के छीलन एवं अवशेषों को किचन गार्डन में पौधों में डालना।
  5. वर्षा जल संग्रहण करना।
  6. पॉलीथीन एवं प्लास्टिक की थैलियाँ एवं बर्तनों के स्थान पर कपड़े, कागज एवं पत्तों से बने थैले एवं बर्तनों को उपयोग में लाना।
  7. घर के अन्दर एवं बाहर की सफाई व्यवस्था बनाए रखना।
  8. संसाधनों का न्यूनतम मितव्ययिता के साथ उपयोग करना।

प्रश्न 2.
क्या आप अपने विद्यालय में कुछ परिवर्तन सुझा सकते हैं जिनसे इसे पर्यानुकूलित बनाया जा सके?
उत्तर:
हाँ, हम अपने विद्यालय को पर्यानुकूलित बनाने हेतु निम्न सुझाव दे सकते हैं –

  1. विद्यालय के रिक्त स्थानों एवं प्रवेश मार्ग के दोनों ओर पौधारोपण करना तथा घास के मैदानों (लॉन) का प्रबन्ध करना।
  2. कूड़ा-करकट इत्यादि कूड़ेदान में डालना।
  3. शौचालय एवं पेशाबघरों की उचित व्यवस्था करना।
  4. शान्ति का वातावरण बनाए रखना।
  5. जल का अपव्यय नहीं करना।
  6. जहाँ आवश्यकता हो वहीं पर पंखे एवं बल्बों को चलाना।
  7. व्यर्थ विद्युत का अपव्यय नहीं करना।
  8. विद्यालय परिसर की स्वच्छता एवं सफाई का ध्यान रखना।

प्रश्न 3.
इस अध्याय में हमने देखा कि हम हम वन एवं वन्य जन्तुओं की बात करते हैं तो चार मुख्य दावेदार सामने आते हैं। इनमें से किसे वन उत्पाद प्रबन्धन हेत निर्णय लेने के अधिकार दिए जा सकते हैं? आप ऐसा क्यों सोचते हैं?
उत्तर:
हमारे विचार से वन उत्पाद प्रबन्धन हेतु निर्णय लेने का अधिकार स्थानीय निवासियों को दिया जा सकता है। इससे खाद्य पदार्थ, चारा, औषधि आदि की आवश्यकताओं की पूर्ति तो होती रहेगी, साथ ही ईंधन भी मिलता रहेगा, लेकिन पेड़ों का निर्ममता के साथ कटान नहीं होगा और अन्य वन उत्पादों का दोहन नहीं होगा तथा वन्य जीवों का अपनी स्वार्थ पूर्ति के लिए वध भी नहीं होगा। इससे वन एवं वन सम्पदा दोनों ही संरक्षित रहेंगे।

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प्रश्न 4.
अकेले व्यक्ति के रूप में आप निम्न के प्रबन्धन में क्या योगदान दे सकते हैं?
(a) वन एवं वन्य जन्तु।
(b) जल संसाधन।
(c) कोयला एवं पेट्रोलियम।
उत्तर:
अकेले व्यक्ति के रूप में हम विभिन्न क्षेत्रों में प्रबन्धन के लिए निम्न योगदान दे सकते हैं –
(a) वन एवं वन्य जन्तु:

  1. अतिदोहन को रोकना।
  2. वन एवं वन्य जन्तुओं का संरक्षण करना।
  3. वृक्षारोपण एवं उनकी देखभाल करना।

(b) जल संसाधन:

  1. जल संसाधनों को प्रदूषण से बचाना।
  2. जल संसाधनों में कचरे, वाहित मलमूत्र आदि को प्रवाहित न करना।
  3. जल के दुरुपयोग को रोकना।
  4. वर्षा जल संग्रहण करना।

(c) कोयला एवं पेट्रोलियम:

  1. ईंधन एवं ऊर्जा के वैकल्पिक साधनों का अत्याधिक प्रयोग करना।
  2. साइकिल/बस से अथवा पैदल चलना।
  3. घरों में CFL एवं फ्लोरोसेण्ट ट्यूब तथा एल.ई.डी. लाइट का प्रयोग करना।
  4. सर्दियों में हीटर का प्रयोग न करके गर्म कपड़ों के द्वारा ठण्ड से बचना।
  5. मकान में लिफ्ट के स्थान पर सीढ़ियों का प्रयोग करना।

प्रश्न 5.
अकेले व्यक्ति के रूप में आप विभिन्न प्राकृतिक उत्पादों की खपत कम करने के लिए। क्या कर सकते हैं?
उत्तर:
अकेले व्यक्ति के रूप में हम विभिन्न प्राकृतिक उत्पादों की खपत कम करने के लिए निम्न कदम उठाएँगे –

  1. उत्पादों को मितव्ययिता के साथ उपयोग करेंगे।
  2. उत्पादों को बर्बादी से रोकेंगे।
  3. इनकी बचत के लिए हम वैकल्पिक मार्ग चुनेंगे।
  4. अपनी आवश्यकताओं को सीमित करेंगे।

प्रश्न 6.
निम्न से सम्बन्धित ऐसे पाँच कार्य लिखिए जो आपने पिछले एक सप्ताह में किए हैं –
(a) अपने प्राकृतिक संसाधनों का संरक्षण।
(b) अपने प्राकृतिक संसाधनों पर दबाव को और बढ़ाया है।
उत्तर:
[निर्देश- इस प्रश्न का उत्तर छात्र स्वयं लिखें।

प्रश्न 7.
इस अध्याय में उठाई गई समस्याओं के आधार पर आप अपनी जीवन-शैली में क्या परिवर्तन लाना चाहेंगे जिससे हमारे संसाधनों के सम्पोषण को प्रोत्साहन मिल सके?
उत्तर:
अध्याय में दी गई समस्याओं के आधार पर अपने संसाधनों के सम्पोषण के लिए हम अपनी जीवन-शैली निम्न प्रकार बदलेंगे –

  1. ऐसी वस्तुओं के उपयोग कम कर देंगे जिनसे वन एवं वन्य जीवों तथा वन सम्पदा को क्षति पहुँचती है।
  2. अपनी आवश्यकताओं पर नियन्त्रण रखेंगे।
  3. ऊर्जा के वैकल्पिक स्रोतों का उपयोग अधिकाधिक करेंगे।
  4. जीवाश्म ईंधन (खनिज तेलों) के उपयोग को कम करने के लिए अधिकतर पैदल, साइकिल या बसों का उपयोग करेंगे।
  5. जल की बचत करेंगे तथा प्रयुक्त जल को दूसरे भागों में उपयोग में लाएँगे।
  6. कम खर्च, पुनःचक्रण एवं पुन:उपयोग के सिद्धान्त को अपनाएँगे।

MP Board Class 10th Science Chapter 16 परीक्षोपयोगी अतिरिक्त प्रश्नोत्तर

MP Board Class 10th Science Chapter 16 वस्तुनिष्ठ प्रश्न

बहुविकल्पीय प्रश्न

प्रश्न 1.
निम्न में प्राकृतिक स्रोत कौन-सा नहीं है?
(a) मृदा।
(b) जल।
(c) विद्युत्।
(d) वायु (पवन)।
उत्तर:
(c) विद्युत्।

प्रश्न 2.
विश्व में सबसे तेजी से कम होने वाला प्राकृतिक संसाधन है –
(a) जल।
(b) वन।
(c) पवन।
(d) सौर प्रकाश।
उत्तर:
(b) वन।

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प्रश्न 3.
प्राकृतिक स्रोतों की सर्वश्रेष्ठ परिभाषा है, प्राकृतिक स्रोत वे वस्तुएँ हैं जो –
(a) केवल भूमि पर मौजूद हैं।
(b) प्रकृति का एक उपहार है जो मानव जाति के लिए बहुत लाभदायक होता है।
(c) मानव निर्मित वस्तुएँ हैं जो प्रकृति में रखी गई हैं।
(d) केवल जंगलों में मिलती हैं।
उत्तर:
(b) प्रकृति का एक उपहार है जो मानव जाति के लिए बहुत लाभदायक होता है।

प्रश्न 4.
गंगा नदी में प्रचुर मात्रा में कॉलीफॉर्म बैक्टीरियों के पाये जाने का मुख्य कारण है –
(a) अधजले शवों को जल में प्रवाहित करना।
(b) इलेक्ट्रोप्लेटिंग उद्योग के अपशिष्ट को बहाना।
(c) कपड़े धोना।
(d) भस्म एवं अस्थियाँ का विसर्जन।
उत्तर:
(a) अधजले शवों को जल में प्रवाहित करना।

प्रश्न 5.
एक नदी के जल का नमूना अम्लीय पाया गया जिसकी pH मान का परिसर 3.5 से 4.5 थी। नदी के किनारे बहुत-सी फैक्टरियाँ थीं जो अपने अपशिष्टों को नदी में बहा देती थीं। किन फैक्टरियों में से किसका वाहित अपशिष्ट नदी के जल के pH मान को कम करने का मुख्य कारण है?
(a) साबुन एवं डिटर्जेण्ट बनाने वाली फैक्टरी।
(b) लैड बैटरी बनाने वाली फैक्टरी।
(c) प्लास्टिक के कण बनाने वाली फैक्टरी।
(d) ऐल्कोहॉल बनाने वाली फैक्टरी।
उत्तर:
(b) लैड बैटरी बनाने वाली फैक्टरी।

प्रश्न 6.
फ्रैशवाटर पौधे एवं जन्तुओं के जीवन संचालन के लिए सर्वश्रेष्ठ pH रैंज होगी –
(a) 6.5 – 7.5
(b) 2.0 – 3.5
(c) 3.5 – 5.0
(d) 9.0 – 10.5
उत्तर:
(a) 6.5 – 7.5

प्रश्न 7.
लम्बे समय तक प्राकृतिक संसाधनों के उपयोग के लिए तीन ‘री’ हैं –
(a) री-साइकिल, री-जेनेरेट, री-यूज।
(b) री-डयूस, री-जेनेरेट, री-यूज।
(c) री-डयूस, री-यूज, री-डिस्ट्रीब्यूट।
(d) री-डयूस, री-साइकिल, री-यूज।
उत्तर:
(d) री-डयूस, री-साइकिल, री-यूज।

प्रश्न 8.
जैव-विविधता के सन्दर्भ में निम्न कुछ कथन दिए गए हैं। उन कथनों का चयन कीजिए जो जैव-विविधता की अवधारणा की सही व्याख्या करते हैं –
(i) जैव-विविधता किसी क्षेत्र में उपस्थिति जन्तु एवं वनस्पतियों की विभिन्न समष्टियों से सम्बन्ध रखती है।
(ii) जैव-विविधता केवल किसी क्षेत्र के पौधों से सम्बन्ध रखती है।
(iii) जैव-विविधता जंगलों में अधिक पायी जाती है।
(iv) जैव-विविधता किसी क्षेत्र में रहने वाले किसी समष्टि के कुल जीवों की संख्या से सम्बन्धित है।
(a) (i) एवं (ii)
(b) (ii) एवं (iv)
(c) (i) एवं (iii)
(d) (ii) एवं (iii)
उत्तर:
(c) (i) एवं (iii)

प्रश्न 9
निम्न दिए गए कथनों में से उन कथनों का चयन कीजिए जो संपोषणीय विकास की सही व्याख्या करते हैं –
(i) पर्यावरण को कम से कम हानि पहुँचाने वाला नियोजित विकास।
(ii) विकास पर्यावरण को चाहे कितनी भी हानि क्यों न पहँचाए।
(iii) पर्यावरण के संरक्षण के लिए सभी विकास कार्यों को रोकना।
(iv) सभी दावेदारों द्वारा स्वीकार्य विकास।
(a) (i) एवं (iv)
(b) (ii) एवं (iii)
(c) (ii) एवं (iv)
(d) केवल (iii)
उत्तर:
(a) (i) एवं (iv)

प्रश्न 10.
हमारे देश में विस्तृत वनों का सफाया कर दिया गया है और केवल एक समष्टि के पौधे उगाए गए हैं। यह आदत प्रोत्साहन देती है-
(a) उस क्षेत्र की जैव-विविधता को।
(b) क्षेत्र में एकल फसल को।
(c) प्राकृतिक वनों के विकास को।
(d) क्षेत्र के पारितन्त्र का संरक्षण करती है।
उत्तर:
(b) क्षेत्र में एकल फसल को।

प्रश्न 11.
सफल वन संरक्षण कूटनीति में सम्मिलित होना चाहिए-
(a) उच्चतम पोषी स्तर के जन्तुओं का संरक्षण।
(b) केवल उपभोक्ताओं का संरक्षण।
(c) केवल शाकाहारी उपभोक्ताओं का संरक्षण।
(d) सभी भौतिक एवं जैवीय घटकों के संरक्षण की विशद् योजना।
उत्तर:
(d) सभी भौतिक एवं जैवीय घटकों के संरक्षण की विशद् योजना।

प्रश्न 12.
चिपको आन्दोलन का प्रमख सन्देश है –
(a) वन संरक्षण के प्रयासों में सामूहिक सामुदायिक भागीदारी।
(b) वन संरक्षण के प्रयासों में सामुदायिक भागीदारी को पृथक रखना।
(c) विकास कार्यों के लिए वनों के वृक्षों को काट डालना।
(d) सरकारी एजेन्सियों को बिना जवाबदेही के वनों को नष्ट करने का आदेश देने का अधिकार।
उत्तर:
(a) वन संरक्षण के प्रयासों में सामूहिक सामुदायिक भागीदारी।

प्रश्न 13.
हमारे देश में अनेक स्थापित बाँधों की ऊँचाई बढ़ाने के प्रयास किए गए जैसे टेहरी एवं अल्मेरी बाँध नर्मदा से होकर। निम्न में से सही कथनों का चयन कीजिए जो बाँधों की ऊँचाई बढ़ाने के दुष्परिणाम होंगे –
(i) क्षेत्र के सभी भू-पादप एवं जन्तुओं का समूह नाश हो जाएगा।
(ii) क्षेत्र में रहने वाले सभी निवासी एवं घरेलू पशु विस्थापित हो जाएँगे।
(iii) कीमती कृषि भूमि का स्थायी नाश हो सकता है।
(iv) यह मनुष्यों के लिए स्थायी रोजगार सृजित होंगे।
(a) (i) एवं (ii)
(b) (i), (ii) एवं (iii)
(c) (ii) एवं (iv)
(d) (i), (iii) एवं (iv)
उत्तर:
(b) (i), (ii) एवं (iii)

प्रश्न 14.
संक्षिप्त शब्द GAP का विस्तृत रूप लिखिए –
(a) Government Agency for Pollution Control
(b) Gross Assimilation by Photosynthesis
(c) Ganga Action Plan
(d) Government Agency for Animal Protection
उत्तर:
(c) Ganga Action Plan

प्रश्न 15.
असत्य कथन का चयन कीजिए –
(a) आर्थिक विकास पर्यावरण संरक्षण से जुड़ा है।
(b) संपोषणीय विकास वर्तमान पीढ़ी के विकास को तो प्रोत्साहित करता ही है साथ ही भावी पीढ़ी के लिए संसाधनों का संरक्षण भी करता है।
(c) संपोषणीय विकास दावेदारों की विचारधारा को महत्व नहीं देता।
(d) संपोषणीय विकास दीर्घकालीन योजना और स्थायी विकास है।
उत्तर:
(c) संपोषणीय विकास दावेदारों की विचारधारा को महत्व नहीं देता।

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प्रश्न 16.
निम्न में कौन प्राकृतिक संसाधन नहीं है?
(a) आम का पेड़।
(b) सर्प (साँप)।
(c) पवन।
(d) लकड़ी का घर।
उत्तर:
(d) लकड़ी का घर।

प्रश्न 17.
असत्य कथन का चयन कीजिए –
(a) वनों से हमको विभिन्न प्रकार के उत्पाद मिलते हैं।
(b) वनों में अधिकतर पादप विविधता मिलती है।
(c) वन मृदा का संरक्षण नहीं करते हैं।
(d) वन जल का संरक्षण करते हैं।
उत्तर:
(c) वन मृदा का संरक्षण नहीं करते हैं।

प्रश्न 18.
बंगाल के अराबाढ़ी वन क्षेत्र में अधिकता है –
(a) टीक वृक्षों की।
(b) साल वृक्षों की।
(c) बाँस वृक्षों की।
(d) मेंग्रूव की।
उत्तर:
(b) साल वृक्षों की।

प्रश्न 19.
भूमि जल स्तर क्षीण नहीं होगा-
(a) वनों के विकास एवं वृद्धि से।
(b) ताप विद्युत घरों से।
(c) वनों की क्षति एवं वर्षा की कमी से।
(d) उच्च जल माँग वाली फसलों के उगाने से।
उत्तर:
(a) वनों के विकास एवं वृद्धि से।

प्रश्न 20.
बड़े बाँध बनाने का विरोध इसलिए है –
(a) सामाजिक कारण।
(b) आर्थिक कारण।
(c) पर्यावरणीय कारण।
(d) उपर्युक्त सभी।
उत्तर:
(d) उपर्युक्त सभी।

प्रश्न 21.
खादिन, बंधिस, अहार एवं कट्टा आदि प्राचीन परम्परागत संरचनाएँ हैं जो निम्न का उदाहरण –
(a) अन्न भण्डारण।
(b) काष्ट भण्डारण।
(c) जल संग्रहण।
(d) मृदा संरक्षण।
उत्तर:
(c) जल संग्रहण।

प्रश्न 22.
निम्न में से पदों का सही संयोग (युग्म) चुनिए जिसमें जीवाश्म ईंधन नहीं है –
(a) पवन, समुद्र (सागर) एवं कोयला।
(b) कैरोसीन, पवन एवं ज्वार।
(c) पवन, लकड़ी एवं सूर्य।
(d) पेट्रोलियम, लकड़ी, सूर्य।
उत्तर:
(c) पवन, लकड़ी एवं सूर्य।

प्रश्न 23.
निम्न में से पर्यावरण-मित्र क्रियाकलाप का चयन कीजिए –
(a) आवागमन के लिए कार का उपयोग करना।
(b) खरीददारी के लिए पॉलीथीन की थैलियों का उपयोग।
(c) कपड़ों को रंगने के लिए रासायनिक रंगों (डाई) का इस्तेमाल करना।
(d) सिंचाई के लिए ऊर्जा उत्पन्न करने हेतु पवनचक्की का उपयोग करना।
उत्तर:
(d) सिंचाई के लिए ऊर्जा उत्पन्न करने हेतु पवनचक्की का उपयोग करना।

प्रश्न 24.
बाढ़ प्रभावित खड्डों या नालियों में चैकडेम बनाना आवश्यक है क्योंकि वे –
(i) सिंचाई के लिए जल संग्रह करते हैं।
(ii) जल संचय करते हैं तथा मृदा अपरदन को रोकते हैं।
(iii) भू-जल संग्रह करते हैं।
(iv) जूल को स्थायी रूप से संग्रह कर लेते हैं।
(a) (i) एवं (iv)
(b) (ii) एवं (iii)
(c) (iii) एवं (iv)
(d) (ii) एवं (iv)
उत्तर:
(b) (ii) एवं (iii)

रिक्त स्थानों की पूर्ति

  1. ………. हेतु अमृता देवी विश्नोई राष्ट्रीय पुरस्कार की व्यवस्था भारत सरकार ने की।
  2. सुन्दरलाल बहुगुणा के नेतृत्व में …… आन्दोलन का काफी प्रचार-प्रसार हुआ।
  3. वर्षा के जल को एकत्रित करके भूमि के अन्दर संग्रहण करने की प्रक्रिया …….. कहलाती है।
  4. जल को नष्ट होने या समाप्त होने तथा प्रदूषित होने से बचाने की प्रक्रिया ……. कहलाती है।
  5. कुआँ …….. का स्रोत है।

उत्तर:

  1. जीव संरक्षण।
  2. चिपको।
  3. वर्षा जल संग्रहण (रेनवाटर हार्वेस्टिंग)।
  4. जल संरक्षण।
  5. जल।

जोड़ी बनाइए
MP Board Class 10th Science Solutions Chapter 16 प्राकृतिक संसाधनों का संपोषित प्रबंधन 1
उत्तर:

  1. → (c)
  2. → (d)
  3. → (e)
  4. → (a)
  5. → (b)

सत्य/असत्य कथन

  1. वनों के कटान से आर्थिक लाभ तो होता ही है, लेकिन पर्यावरण को कोई हानि नहीं पहुँचती।
  2. जल जीवन है।
  3. जंगली जन्तुओं का संरक्षण मानव के लिए खतरनाक हो सकता है।
  4. वन वर्षा को आमन्त्रित करते हैं तथा मृदा अपरदन को रोकते हैं।
  5. बाँधो से पर्यावरण को कोई हानि नहीं होती।

उत्तर:

  1. असत्य।
  2. सत्य।
  3. असत्य।
  4. सत्य।
  5. असत्य।

एक शब्द/वाक्य में उत्तर

  1. जीवाश्म ईंधन का उदाहरण दीजिए।
  2. गंगा प्रदूषण का प्रमुख एक कारण बताइए।
  3. बंगाल के उस वन का नाम क्या है जिसको संरक्षित सर्वश्रेष्ठ वन का उदाहरण माना जाता है?
  4. अमृता देवी विश्नोई राष्ट्रीय पुरस्कार की व्यवस्था किस कार्य के लिए की गई?
  5. वनों को अंधाधुन्ध कटाव से बचाने के लिए चलाए गए आन्दोलन का क्या नाम है?

उत्तर:

  1. कोयला एवं पेट्रोलियम
  2. अधजले शवों का विसर्जन
  3. अराबाड़ी साल वन
  4. जीव संरक्षण हेतु
  5. चिपको आन्दोलन।

MP Board Class 10th Science Chapter 16 अति लघु उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 1.
जल संरक्षण किसे कहते हैं?
उत्तर:
जल संरक्षण: “जल को नष्ट होने या समाप्त होने तथा प्रदूषित होने से बचाने की प्रक्रिया जल संरक्षण कहलाती है।”

प्रश्न 2.
“वर्षा जल संग्रहण” या “रेनवाटर हार्वेस्टिंग” किसे कहते हैं?
उत्तर:
“वर्षा जल संग्रहण” या “रेनवाटर हार्वेस्टिंग”:
“वर्षा के जल को एकत्रित करके भूमि के अन्दर संग्रह करने की प्रक्रिया “वर्षा जल संग्रहण” या “रेनवाटर हार्वेस्टिंग” कहलाती है।”

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प्रश्न 3.
“ग्राउण्ड वाटर रिचार्जिंग” किसे कहते हैं?
उत्तर:
ग्राउण्ड वाटर रिचार्जिंग:
“रेनवाटर हार्वेस्टिग एवं जल संरक्षण” की विधियों द्वारा जल का भूमि में पुनः संग्रहण करना ग्राउण्ड वाटर रिचार्जिंग कहलाता है।

प्रश्न 4.
गंगा नदी के जल प्रदूषण के दो मुख्य कारकों की सूची बनाइए। उल्लेख कीजिए कि किसी नदी के जल का प्रदूषण और संदूषण होना आस-पास के क्षेत्रों में रहने वाले लोगों के स्वास्थ्य के लिए हानिकारक क्यों सिद्ध होता है?
उत्तर:
गंगाजल को प्रदूषित करने वाले दो मुख्य कारक –

  1. अधजले शवों को गंगा में प्रवाहित करना।
  2. औद्योगिक अपशिष्टों एवं घरेलू अपशिष्टों को गंगा में प्रवाहित करना।
  3. किसी नदी के जल का प्रदूषित एवं संदूषित होना आस-पास के निवासियों के स्वास्थ्य के लिए बहुत हानिकारक है। यह विभिन्न बीमारियों को जन्म देता है।

प्रश्न 5.
चिपको आन्दोलन क्या था? इस आन्दोलन से अन्ततः स्थानीय लोगों और पर्यावरण को किस प्रकार लाभ हुआ?
उत्तर:
चिपको आन्दोलन:
“हिमालय की ऊँची पर्वत श्रृंखलाओं वाले गढ़वाल के रेनी नामक ग्राम में पुरुषों की अनुपस्थिति में जब ठेकेदार अपने आदमियों को लेकर वृक्षों को काटने आया तो गाँव की स्त्रियाँ वहाँ पहुँचकर वृक्षों के तनों से चिपककर खड़ी हो गयीं। इस कारण ठेकेदार के आदमी वृक्षों को काट नहीं सके।

इस प्रकार उन स्त्रियों ने वन एवं वन्यजीव एवं पर्यावरण की रक्षा की। यह आन्दोलन चिपको आन्दोलन के नाम से प्रसिद्ध हुआ तथा सुन्दरलाल बहुगुणा के नेतृत्व में खूब फला-फूला।” इस आन्दोलन से वहाँ के निवासियों को अत्यन्त लाभ मिला, वे अपनी आवश्यकताओं की पूर्ति के लिए ईंधन तथा अन्य सामग्री प्राप्त कर सके तथा पर्यावरण संरक्षित हुआ।

प्रश्न 6.
(i) वनों एवं (ii) वन्य जीवन के संरक्षण के दो-दो लाभ लिखिए।
उत्तर:
(i) वनों के संरक्षण के लाभ:

  1. इससे पर्यावरण सन्तुलित एवं प्रदूषण रहित रहता है जो वहाँ के निवासियों के लिए स्वास्थ्यप्रद है।
  2. वनों से विविध खाद्य सामग्री एवं औषधियाँ मिलती हैं।

(ii) वन्य जीवन के संरक्षण के लाभ:

  1. वन्य जीवों से हमें अनेक औषधियाँ तथा अन्य लाभदायक सामग्री मिलती है।
  2. वन्य जीव पर्यावरण सन्तुलन को बनाए रखते हैं।

प्रश्न 7.
कोई पाँच वस्तुओं की एक लिस्ट बनाइए जिनका उपयोग आप प्रतिदिन विद्यालय में करते हैं। उस लिस्ट में से उन वस्तुओं की पहचान कीजिए जिनका पुनर्चक्रण सम्भव है।
उत्तर:
विद्यालय में प्रतिदिन प्रयुक्त पाँच वस्तुएँ –
(1) प्लास्टिक बॉक्स।

  1. रेक्सिन बैग।
  2. प्लास्टिक स्केल।
  3. स्टील चम्मच।
  4. कागज की नोटबुक एवं बुक्स।

निम्न का पुनर्चक्रण सम्भव है –

  1. प्लास्टिक बॉक्स।
  2. प्लास्टिक स्केल।
  3. स्टील चम्मच।
  4. कागज की नोटबुक एवं बुक्स।

प्रश्न 8.
यद्यपि कोयला एवं पेट्रोलियम जैव-मात्रा या जैव अवशेषों के अपघटन (नवीकरण) से उत्पन्न होते हैं, फिर भी हम उनका संरक्षण आवश्यक क्यों समझते हैं?
उत्तर:
दोनों ऊर्जा स्रोत कोयला एवं पेट्रोलियम बनने में लाखों-करोड़ों वर्ष का समय लेते हैं तथा इन स्रोतों के उपयोग (दोहन) की दर उनके उत्पादन की दर से कहीं अधिक है तथा प्रकृति में इनका भण्डारण भी सीमित है तथा इन्हें आसानी से उत्पन्न भी नहीं किया जा सकता। इसलिए जिस तरह इनका उपयोग हो रहा है, ये निकट भविष्य में समाप्त हो जाएँगे। इसलिए इनका संरक्षण आवश्यक है ताकि हमारी भावी पीढ़ी को उपयोग के लिए ये मिल सकें।

प्रश्न 9.
सामुदायिक स्तर पर जल संग्रहण के दो लाभ लिखिए।
उत्तर:
सामुदायिक स्तर पर जल संग्रहण के दो लाभ:

  1. पृथ्वी का भूजल स्तर बढ़ जाता है।
  2. वर्षा ऋतु में संग्रह किया हुआ जल जब आवश्यकता हो तब प्रयोग में लाया जा सकता है।

MP Board Class 10th Science Chapter 16 लघु उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 1.
वन संरक्षण के लिए किये जाने वाले प्रयासों का उल्लेख कीजिए।
उत्तर:
वन संरक्षण के लिए प्रयास-वन संरक्षण के लिए राष्ट्रीय एवं अन्तर्राष्ट्रीय स्तर पर प्रयास किये जा रहे हैं। प्रमुख प्रयास अग्रांकित हैं –

  1. वृक्षारोपण को प्रोत्साहन देना।
  2. आनुवंशिक आधार पर वृक्षों को तैयार करना।
  3. रोग प्रतिरोधी एवं कीट प्रतिरोधी वृक्षों को तैयार करना।
  4. सामाजिक वानिकी को प्रोत्साहित करना।
  5. वन एवं वन्य जीवों के संरक्षण के कार्यों को जन-आन्दोलन का रूप देना।
  6. मध्य प्रदेश सरकार द्वारा जलाई, 1987 में मुख्य वन संरक्षक के आधीन एक अलग प्रकोष्ठ की स्थापना की गई, जो वन संरक्षण तथा इसके विकास कार्यों की देखरेख करता है।

प्रश्न 2.
भूमिगत जल स्तर गिरने के कारण लिखिए। घर में वर्षा के जल के संग्रहण की विधि लिखिए।
उत्तर:
भूमिगत जल स्तर गिरने के प्रमुख कारण:

  1. हैण्डपम्प या सबमर्सीबल पम्पों की सहायता से भूमिगत जल का अत्यधिक दोहन।
  2. वर्षा जल की कमी।
  3. स्थानीय स्तर पर जल के अन्य स्रोतों नदी, तालाबों की उपलब्ध में कमी।

घर में वर्षा जल के संग्रहण की विधि:
घर की छतों को इस प्रकार बनाना चाहिए कि उस पर वर्षा के जल का बहाव एक ही दिशा में हो। पाइप लाइन की सहायता से इस पानी को जमीन के अन्दर पहुँचाना चाहिए जहाँ से यह जल कुओं एवं हैण्डपम्प वाले जल-स्रोतों में संग्रहित हो जाये।

प्रश्न 3.
वर्षा जल संग्रहण के मुख्य उद्देश्य लिखिए।
उत्तर:
वर्षा जल संग्रहण के मुख्य उद्देश्य:

  1. भूमिगत जल के गुणों में सुधार लाना।
  2. अति दोहन के कारण रिक्त हुए जलस्रोतों में जलापूर्ति बनाये रखना।
  3. वाहित मल-जल एवं औद्योगिक अपशिष्ट जल का पुनः चक्रण करना।
  4. जल के अति प्रवाह एवं भूमि क्षरण को रोकना।
  5. आगामी समय (भविष्य) के लिए जल का संग्रहण करना।

प्रश्न 4.
कर्नाटक के एक गाँव में वहाँ के किसानों ने एक झील के चारों ओर फसल उगाना प्रारम्भ कर दिया। वह झील सदैव जल से भरी रहती थी। फसल उत्पादन बढ़ाने के लिए वे अपने खेतों में उर्वरकों का प्रयोग करते थे। शीघ्र ही उन्होंने देखा कि वह झील पूर्णतया हरे तैरते पौधों से भर गयी है तथा मछलियों ने बड़ी तेजी से मरना प्रारम्भ कर दिया है। स्थिति का विश्लेषण कीजिए तथा झील में हरे पौधों की अत्यधिक वृद्धि एवं मछलियों की मृत्यु के कारणों पर प्रकाश डालिए।
उत्तर:
चूँकि किसानों ने अपनी फसल के उत्पादन के लिए अत्यधिक मात्रा में उर्वरकों का प्रयोग किया। वे उर्वरक वर्षा ऋतु में वर्षा के जल के साथ बहकर उस झील में पहुँच गए। चूँकि बहुत से उर्वरकों में फॉस्फेट एवं नाइट्रेटस होते हैं। इसलिए झील इन रसायनों से परिपूर्ण हो गयी। इन रसायनों ने जलीय पौधों की वृद्धि को प्रोत्साहित किया। इसलिए झील की सतह हरे तैरते जलीय पौधों से भर गयी। हरे पौधों से झील के जल की सतह पूर्णतया ढक जाने से जलीय जीवों को सूर्य का प्रकाश नहीं मिल सका तथा जल में घुली ऑक्सीजन की अपर्याप्त मात्रा मछलियों के तेजी से मरने का कारण बनी।

प्रश्न 5.
अपने घरों में विद्युत ऊर्जा के संरक्षण के लिए क्या उपाय करेंगे?
उत्तर:
घरों में विद्युत ऊर्जा के संरक्षण के उपाय –

  1. जब आवश्यकता न हो तो बिजली के पंखे एवं बल्ब आदि को बन्द कर देंगे, उनको तभी प्रयोग में लाएँगे जब आवश्यकता हो।
  2. सौर ऊर्जा का अधिकाधिक उपयोग करेंगे।
  3. प्रकाश के लिए कम शक्ति के फ्लोरोसेण्ट ट्यूब CFL एवं LED बल्बों का उपयोग करेंगे।
  4. जाड़े के दिनों में जल को गर्म करने के लिए सौर तापन युक्तियों को प्रयोग में लाएँगे।

प्रश्न 6.
वायुमण्डल में कार्बन डाइऑक्साइड के स्तर को कम करने के लिए कुछ उपाय सुझाइए।
उत्तर:
वायुमण्डल में कार्बन डाइऑक्साइड का स्तर कम करने के उपाय –

  1. जीवाश्म ईंधन (खनिज ईंधन) की स्वचालित वाहनों में खपत कम करके अर्थात् इनका न्यूनतम उपयोग करना तथा साइकिल, बस आदि वैकल्पिक साधनों का अधिकतम उपयोग करना।
  2. स्वचालित वाहनों में पेट्रोल डीजल के स्थान पर CNG एवं अन्य स्वच्छ ईंधन का उपयोग करके।
  3. घरों में ईंधन के रूप में लकड़ी, कोयला आदि का उपयोग न करके LPG सौर ऊर्जा एवं विद्युत ऊर्जा का उपयोग करके।
  4. कचरे (कूड़ा करकट) को जलाने के बजाय उसका खाद बनाकर।
  5. औद्योगिक धुएँ को वायुमण्डल में छोड़ने से पहले उसका उपचार करके।
  6. अधिकाधिक पौधारोपण द्वारा।

प्रश्न 7.
क्या जल संरक्षण आवश्यक है? कारण दीजिए।
उत्तर:
प्रकृति में उपलब्ध शुद्ध एवं ताजा जल मानव जाति की आवश्यकताओं की पूर्ति के लिए पर्याप्त है। लेकिन इसके असमान वितरण, मौसम में परिवर्तन, वर्षा का कम होना, जल का अपदोहन एवं जल की बर्बादी के कारण विश्व के विभिन्न भागों में जल का अभाव एक गम्भीर समस्या है। इस समस्या के निदान के लिए जल संरक्षण आवश्यक है क्योंकि जल ही जीवन है। जल के बिना जैवजगत (वनस्पति एवं जन्तुओं) का जीवन कठिन हो जायेगा।

प्रश्न 8.
अपशिष्ट जल के उपयोग के कुछ उपाय बताइए।
उत्तर:
अपशिष्ट जल के उपयोग के उपाय:

  1. अपशिष्ट जल का उपयोग भू-गर्म जल का स्तर बढ़ाने में किया जा सकता है।
  2. इसका उपयोग सिंचाई के लिए किया जा सकता है।
  3. प्रदूषित एवं संदूषित जल का उपयोग विभिन्न फसलों के लिए उर्वरक का कार्य कर सकता है।
  4. उपचारित जल का उपयोग वाहनों की सफाई तथा बागवानी में किया जा सकता है।

प्रश्न 9.
बंगाल के अराबाड़ी जंगल (वन) संरक्षित वनों का एक अच्छा उदाहरण है क्यों?
उत्तर:
वन विभाग के एक दूरदर्शी अधिकारी ने बंगाल के अराबाड़ा के क्षतिग्रस्त साल वन के संरक्षण की एक योजना बनायी। वहाँ ग्रामवासियों को अपनी इस योजना में सम्मिलित किया और उनके सामूहिक प्रयासों से वह साल वन समृद्ध हो गया जो पहले बेकार पड़ा था। इसके बदले में उन ग्रामवासियों को, जिनको उस वन की देखभाल की जिम्मेदारी सौंपी थी, अपने पशुओं को चराने तथा कम मूल्य पर ईंधन के लिए लकड़ी एकत्रित करने की अनुमति दे दी गयी। इससे ग्रामवासियों को रोजगार के साथ-साथ फसल का 25 प्रतिशत के उपयोग का अधिकार मिला।

MP Board Class 10th Science Chapter 16 दीर्घ उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 1.
वन्य संसाधनों के अनियन्त्रित दोहन से क्या हो रहा है?
उत्तर:
वन्य संसाधनों के अनियन्त्रित दोहन के प्रभाव-वन्य संसाधनों में वन्य जीव-जन्तु एवं पेड़-पौधे आते हैं।

  1. जलवायु में परिवर्तन हो रहा है।
  2. वायुमण्डल में CO2 की मात्रा बढ़ने से वायु प्रदूषण, ग्लोबल वार्मिंग, अम्ल वर्षा आदि की समस्याओं से जूझना पड़ रहा है क्योंकि CO2 को पेड़-पौधे
  3. प्रकाश-संश्लेषण की क्रिया द्वारा प्राणवायु ऑक्सीजन में बदलते रहते हैं।
  4. वर्षा की कमी, भूमिगत जल स्तर में कमी तथा सतही जल का अभाव हो रहा है।
  5. पशुओं के लिए चारागाहों की कमी हो रही है।
  6. मरुस्थलीय भूमि में वृद्धि हो रही है।
  7. जन्तुओं (पशु एवं पक्षियों) के आवास नष्ट हो रहे हैं।
  8. वन सम्पदा की हानि हो रही है।
  9. भूमि क्षरण बढ़ रहा है।
  10. खाद्य श्रृंखला अव्यवस्थित हो रही है।

प्रश्न 2.
वनों की एक संसाधन के रूप में क्या महत्ता है?
उत्तर:
वन संरक्षण की मानव जीवन में उपयोगिता-वन मानव जीवन के लिए अत्यन्त उपयोगी हैं –

  1. ये पर्यावरण को सन्तुलित एवं प्रदूषण रहित रखते हैं।
  2. पशु-पक्षियों को आवास उपलब्ध कराते हैं।
  3. वर्षा को प्रोत्साहित करते हैं।
  4. वनों से विभिन्न प्रकार की खाद्य सामग्री प्राप्त होती है।
  5. वनों से फल, मेवे इत्यादि प्राप्त होते हैं।
  6. वनों से विभिन्न प्रकार की औषधियाँ मिलती हैं।
  7. वनों से उपयोगी इमारती लकड़ी प्राप्त होती है।
  8. वन पशुओं के लिए चारागाह का कार्य करते हैं। इस प्रकार वनों का संरक्षण करना मानव जीवन के लिए लाभदायक है।

प्रश्न 3.
जल प्रबन्धन एवं जल संरक्षण की विधियाँ लिखिए।
अथवा
जल प्रबन्धन एवं जल संरक्षण के उपायों का उल्लेख कीजिए।
उत्तर:
जल प्रबन्धन एवं जल संरक्षण की विधियाँ एवं उपाय:

  1. जलीय चक्र को पूरा करने के लिए वनों के विनाश को रोककर नया वृक्षारोपण करना।
  2. घास की अनेक जातियाँ उगाकर सतही जल को बनाये रखना।
  3. जल को सभी प्रकार के प्रदूषण से बचाना।
  4. घरेलू, नगरीय एवं औद्योगिक वाहित अपशिष्टों को जलाशयों में मिलने से रोकना या उपचारित करना।
  5. जल को मितव्ययिता से व्यय करना।
  6. पक्के जलाशय बनाना।
  7. रेन वाटर हार्वेस्टिंग एवं अण्डरग्राउण्ड वाटर रिचार्जिंग की विधियों का उपयोग करना।
  8. वृक्षारोपण करना।
  9. बाढ़ प्रबन्धन के उपाय द्वारा अतिरिक्त जल का उपयोग करके सतही जल का संरक्षण करना।
  10. बाढ़ के प्रकोप से बचने के लिए नदियों के दोनों ओर पक्के कुओं का निर्माण करके पक्की नालियों द्वारा उन्हें नदी से जोड़ना।

प्रश्न 4.
(A) संलग्न चित्र (a) एवं (b) जल संग्राहकों (जल संग्रहण युक्तियों) की पहचान कीजिए तथा उनके नाम लिखिए।
(B) निम्न में कौन दूसरे से अधिक लाभदायक है और क्यों?
MP Board Class 10th Science Solutions Chapter 16 प्राकृतिक संसाधनों का संपोषित प्रबंधन 2
उत्तर:
(A) चित्र (a) में जल संग्राहक (जल संग्रहण युक्ति) एक तालाब (पोखर) है जबकि (b) में जल संग्राहक (जल संग्रहण युक्ति) भू-गर्भ जल संग्राहक या जल संग्रहण युक्ति (Under ground water reservoir) है।
(B) चित्र (a) की अपेक्षा चित्र (b) का जल संग्रहण अधिक लाभप्रद है क्योंकि भूमि के अन्दर जल संग्रहण के अनेक लाभ हैं जोकि मुख्यतः निम्न प्रकार हैं –

  1. यह ऊर्ध्वपातन द्वारा नष्ट नहीं होता।
  2. यह पृथ्वी के अन्दर सभी जगह बहकर कुओं के जल स्तर को बढ़ाता है।
  3. यह पेड़-पौधों के बड़े क्षेत्र को नमी उपलब्ध कराता है।
  4. यह मानवीय अपशिष्टों एवं पशुओं द्वारा जल को प्रदूषित एवं संदूषित होने से रोकता है।
  5. यह कीड़े-मकोड़ों के प्रजनन एवं संपोषण को रोकता है।

प्रश्न 5.
प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण के सम्बन्ध में निम्न पदों की व्याख्या कीजिए –
(a) मितव्यय अर्थात् कम उपयोग (Reduced use)।
(b) पुनः चक्रण (Recycle)।
(c) पुनः उपयोग (Reuse)। हमारे दैनिक जीवन में प्रयुक्त पदार्थों में से उपर्युक्त प्रत्येक कोटि के दो पदार्थों के नाम लिखिए।
उत्तर:
मितव्यय अर्थात् कम उपयोग (Reduced use):
मितव्यय अर्थात् कम उपयोग का मतलब है कि हम किसी संसाधन का कम से कम उपयोग करें।

उदाहरण:

  1. जल एवं।
  2. विद्युत ऊर्जा।

(b) पुनः चक्रण-पुन:
चक्रण का अर्थ है जिस पदार्थ का हम उपयोग कर चुके हैं उस प्रयुक्त अपशिष्ट पदार्थ को किसी भी प्रक्रिया द्वारा उपयोगी पदार्थ में बदलना।

उदाहरण:

  1. प्लास्टिक या पॉलीथीन से बनी वस्तुएँ।
  2. कागज से बनी वस्तुएँ।

(c) पुनः उपयोग:
किसी वस्तु को उपयोग के बाद फेंकने के बजाय उसका बार-बार उपयोग करना। इसमें किसी भी रूप में पुन:चक्रण न तो छोटे स्तर पर और न ही बड़े स्तर पर सम्मिलित हैं। अर्थात् उस वस्तु को पुनः उसी रूप में प्रयुक्त करना है।

उदाहरण:

  1. प्रयुक्त खाली बोतलें।
  2. प्रयुक्त प्लास्टिक या पॉलीथीन की थैलियाँ।

प्रश्न 6.
अपने प्रतिदिन के क्रियाकलापों की एक लिस्ट बनाइए जिनसे प्राकृतिक संसाधनों का संरक्षण हो सके अथवा ऊर्जा का उपयोग कम हो सके।
उत्तर:
प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण एवं ऊर्जा की बचत हेतु दैनिक क्रियाकलाप:

  1. पानी की बोतल में बचे पानी का उपयोग बागवानी में करना।
  2. पौधों में जल पाइप से न देकर हजारे आदि से देना।
  3. वाहनों को प्रतिदिन धोने के बजाय उन्हें तभी धोना जब वे गन्दे हो अथवा इसकी आवश्यकता हो।
  4. कपड़ों के धोवन से घर की सफाई करना अथवा टॉयलेट को साफ करना।
  5. बिजली के पंखों एवं बल्बों का आवश्यकतानुसार उपयोग करना।
  6. सौर जल ऊष्मक का उपयोग जल गर्म करने के लिए तथा सौर कुकर का उपयोग भोजन पकाने के लिए करना।
  7. परम्परागत बल्बों के स्थान पर CFL एवं LED बल्बों को उपयोग में लाना।
  8. चलने के लिए पैदल या साइकिल का उपयोग तथा यात्रा के लिए यात्री बसों का उपयोग करना।

प्रश्न 7.
(a) जल एक महत्वपूर्ण प्राकृतिक संसाधन है, जो जीवन के लिए अमृत है। आपके विज्ञान के शिक्षक यह चाहते हैं कि आप रचनात्मक मूल्यांकन क्रियाकलाप के लिए “प्राणाधार प्राकृतिक सम्पदा-जल को कैसे बचाएँ” विषय पर कोई योजना बनाइए। “जल को कैसे बचाएँ” के बारे में अपने पड़ोस में जागरूकता उत्पन्न करने के लिए कोई दो उपाय सुझाइए।
(b) किसी एक उपाय का नाम और उसकी व्याख्या कीजिए जिसके द्वारा भौम जल स्तर को नीचे गिरने से रोका जा सके।
उत्तर:
(a) “प्राणाधार प्राकृतिक सम्पदा-जल को कैसे बचाएँ” विषय पर योजना: निर्देश- इस योजना का छात्र अपने विज्ञान शिक्षक के सहयोग से स्वयं तैयार करें।

“जल को कैसे बचाएँ” के बारे में पड़ौस में जागरूकता पैदा करने के उपाय:

  1. जल के अपव्यय एवं दुरुपयोग को रोकने एवं मितव्ययता बरतने के लिए प्रोत्साहित करेंगे।
  2. वर्षा जल संग्रहण के लिए उन्हें प्रोत्साहित करेंगे।

(b) भौम जल स्तर को नीचे गिरने से रोकने के उपाय – घर में वर्षा जल संग्रहण की विधि – भूमिगत जल स्तर गिरने के प्रमुख कारण:

  1. हैण्डपम्प या सबमर्सीबल पम्पों की सहायता से भूमिगत जल का अत्यधिक दोहन।
  2. वर्षा जल की कमी।
  3. स्थानीय स्तर पर जल के अन्य स्रोतों नदी, तालाबों की उपलब्ध में कमी।

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MP Board Class 10th Science Solutions Chapter 15 हमारा पर्यावरण

MP Board Class 10th Science Solutions Chapter 15 हमारा पर्यावरण

MP Board Class 10th Science Chapter 15 पाठान्तर्गत प्रश्नोत्तर

प्रश्न शृंखला-1 # पृष्ठ संख्या 289

प्रश्न 1.
क्या कारण है कि कुछ पदार्थ जैव निम्नीकरणीय होते हैं और कुछ अजैव निम्नीकरणीय?
उत्तर:
कुछ पदार्थों का मृतोपजीवियों या मृतजीवी अथवा अपघटक एवं जीवाणुओं द्वारा अपघटन या पाचन हो जाता है। इसलिए वे पदार्थ जटिल में सरल में अपघटित हो जाते हैं अथवा जैव निम्नीकरणीय होते हैं लेकिन कुछ पदार्थों का अपघटन नहीं होता इसलिए वे अजैव निम्नीकरणीय होते हैं।

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प्रश्न 2.
ऐसे दो तरीके सुझाइए जिनमें जैव निम्नीकरणीय पदार्थ पर्यावरण को प्रभावित करते हैं।
उत्तर:
जैव निम्नीकरणीय पदार्थों का पर्यावरण पर प्रभाव:

  1. अगर जैव निम्नीकरणीय पदार्थों की मात्रा इतनी हो कि वे सूक्ष्मजीवी अपघटकों द्वारा विघटित किए जा सकें तो वे पारिस्थितिक तन्त्र को न केवल सन्तुलित रखते हैं अपितु उपयोगी सिद्ध होते हैं।
  2. अगर जैव निम्नीकरणीय पदार्थों की मात्रा इतनी अधिक हो कि वे सूक्ष्मजीवी अपघटनों द्वारा विघटित न हो सकें तो ऐसे पदार्थ पर्यावरण को प्रदूषित करने लगते हैं।

प्रश्न 3.
ऐसे दो तरीके बताइए जिनमें अजैव निम्नीकरणीय पदार्थ पर्यावरण को प्रभावित करते हैं।
उत्तर:
अजैव निम्नीकरणीय पदार्थों का पर्यावरण पर प्रभाव:

  1. ये पदार्थ कचरे की तरह एकत्रित होते रहते हैं तथा इनका प्रबन्धन करना कठिन होता है तथा ये प्रदूषण पैदा करते हैं।
  2. ये पदार्थ खाद्य श्रृंखला में एक पोषण स्तर से दूसरे पोषण स्तर तक स्थानान्तरित होने के कारण इनका जैविक आवर्धन होता है।

प्रश्न श्रृंखला-2 # पृष्ठ संख्या 294

प्रश्न 1.
पोषी स्तर क्या है? एक आहार श्रृंखला का उदाहरण दीजिए तथा इसमें विभिन्न पोषी स्तर बताइए।
उत्तर:
पोषी स्तर:
“खाद्य शृंखला (आहार श्रृंखला) के विभिन्न चरणों को जहाँ पर भोजन अथवा ऊर्जा का स्थानान्तरण होता है, पोषी स्तर कहते हैं।”
आहार श्रृंखला एवं पोषी स्तर का उदाहरण –
MP Board Class 10th Science Solutions Chapter 15 हमारा पर्यावरण 1

प्रश्न 2.
पारितन्त्र में अपमार्जकों की क्या भूमिका है?
उत्तर:
पारितन्त्र में अपमार्जकों की भूमिका-अपमार्जक (अपघटक सूक्ष्मजीवी) उत्पादकों एवं विभिन्न प्रकार के उपभोक्ताओं के मृत शरीर का अपघटन करके जटिल कार्बनिक पदार्थों को सरल कार्बनिक पदार्थों में परिवर्तित कर देते हैं जिनको उत्पादकों (पौधों) द्वारा मृदा में पोषण के लिए अवशोषण कर लिया जाता है।

प्रश्न श्रृंखला-3 # पृष्ठ संख्या 296

प्रश्न 1.
ओजोन क्या है? यह किसी पारितन्त्र को किस प्रकार प्रभावित करती है?
उत्तर:
ओजोन:
ओजोन ऑक्सीजन का एक अपररूप है जिसके एक अणु में ऑक्सीजन के तीन परमाणु होते हैं। इस गैस का अणुसूत्र O3 होता है। ओजोन का पारितन्त्र पर प्रभाव-ओजोन वायुमण्डल में एक सुरक्षात्मक परत का निर्माण करती है जो सूर्य से आने वाली घातक पराबैंगनी किरणों को रोकती है तथा वैश्विक ऊष्मण (ग्लोबल वार्मिंग) पौधाघर प्रभाव (ग्रीन हाउस प्रभाव) आदि से बचाव करती है। पराबैंगनी किरणों से होने वाले घातक रोगों त्वचा कैन्सर, आँख के रोग (मोतियाबिन्द, आँख के घाव) आदि से बचाव करती है।

प्रश्न 2.
आप कचरा निपटान की समस्या को कम करने में क्या योगदान कर सकते हैं? किन्हीं दो तरीकों का वर्णन कीजिए।
उत्तर:
कचरा निपटान प्रबन्धन में योगदान:

  1. अजैव निम्नीकरणीय पदार्थों; जैसे-प्लास्टिक एवं पॉलीथीन आदि के उपयोग को बन्द करके जैव निम्नीकरणीय पदार्थों; जैसे-कागज, मिट्टी आदि की बनी वस्तुओं का उपयोग करना चाहिए।
  2. कचरे का पुनः चक्रण करके पुनः उपयोग में लाना चाहिए।

MP Board Class 10th Science Chapter 15 पाठान्त अभ्यास के प्रश्नोत्तर

प्रश्न 1.
निम्न में से कौन-से समूहों में केवल जैव निम्नीकरणीय पदार्थ हैं?
(a) घास, पुष्प तथा चमड़ा।
(b) घास, लकड़ी तथा प्लास्टिक।
(c) फलों के छिलके, केक तथा नींबू का रस।
(d) केक, लकड़ी एवं घास।
उत्तर:
(a) घास, पुष्प तथा चमड़ा।
(c) फलों के छिलके, केक एवं नींबू का रस।
(d) केक, लकड़ी तथा घास।

प्रश्न 2.
निम्न में से कौन आहार श्रृंखला का निर्माण करते हैं? (2019)
(a) घास, गेहूँ तथा आम
(b) घास, बकरी तथा मानव
(c) बलरी, गाय तथा हाथी
(d) घास, मछली तथा बकरी।
उत्तर:
(b) घास, बकरी तथा मानव।

प्रश्न 3.
निम्न में से कौन पर्यावरण-मित्र व्यवहार कहलाते हैं?
(a) बाजार जाते समय सामान के लिए कपड़े का थैला ले जाना।
(b) कार्य समाप्त हो जाने पर लाइट (बल्ब) तथा पंखे का स्विच बन्द करना।
(c) माँ द्वारा स्कूटर से विद्यालय छोड़ने के बजाय तुम्हारा विद्यालय तक पैदल जाना।
(d) उपर्युक्त सभी।
उत्तर;
(d) उपर्युक्त सभी।

प्रश्न 4.
क्या होगा यदि हम एक पोषी स्तर के सभी जीवों को समाप्त कर दें (मार डालें)?
उत्तर:
यदि हम एक पोषी स्तर के सभी जीवों को समाप्त कर दें (मार डालें) तो उसके ऊपर वाले पोषी स्तर के जीव पोषण के अभाव में धीरे-धीरे नष्ट हो जाएँगे तथा नीचे वाले पोषी स्तर में जीवों की संख्या अत्यधिक बढ़ती जायेगी फिर उनमें जीवन संघर्ष होगा।

प्रश्न 5.
क्या किसी पोषी स्तर के सभी सदस्यों को हटाने का प्रभाव भिन्न-भिन्न पोषी स्तरों के लिए अलग-अलग होगा? क्या किसी पोषी स्तर के जीवों को पारितन्त्र को प्रभावित किए बिना हटाना सम्भव है?
उत्तर:
हाँ, किसी पोषी स्तर के सभी सदस्यों को हटाने पर उससे नीचे के पोषी स्तरों एवं ऊपर के पोषी स्तरों के लिए अलग-अलग होगा। हाँ, किसी पोषी स्तर के जीवों को पारितन्त्र को प्रभावित किए बिना हटाना सम्भव है यदि हम उच्चतम पोषी स्तर को हटा दें अर्थात् अपमार्जकों को हटाना पारितन्त्र को प्रभावित करेगा क्योंकि फिर मृतजीवों का अपघटन नहीं होगा।

प्रश्न 6.
जैविक आवर्धन (Biological magnification) क्या है? क्या पारितन्त्र के विभिन्न स्तरों पर जैविक आवर्धन का प्रभाव भी भिन्न-भिन्न होगा?
उत्तर:
जैविक आवर्धन (Biological magnification):
“पौधों एवं फसलों को रोग मुक्त रखने एवं पीड़कों से बचाने के लिए विभिन्न प्रकार के कीटनाशी, फफूंदनाशी, खरपतवारनाशी एवं पीड़कनाशी आदि रसायनों का प्रयोग किया जाता है। इन रसायनों का अत्यधिक मात्रा में प्रयोग करना पौधों के माध्यम से खाद्य श्रृंखला के विभिन्न पोषण स्तरों में प्रवेश कर जाते हैं तथा वहाँ संचित होने लगते हैं। इस परिघटना को जैविक आवर्धन कहते हैं।” हाँ, पारितन्त्र के विभिन्न स्तरों पर जैविक आवर्धन का प्रभाव भिन्न-भिन्न होता है। चूँकि मनुष्य आहार श्रृंखला में शीर्षस्थ होता है अतः मनुष्य के जैविक आवर्धन सर्वाधिक होता है।

प्रश्न 7.
हमारे द्वारा उत्पादित अजैव निम्नीकरणीय कचरे से कौन-सी समस्याएँ उत्पन्न होती हैं?
उत्तर:
हमारे द्वारा उत्पादित अजैव निम्नीकरणीय कचरे से उत्पन्न समस्याएँ:
हमारे द्वारा उत्पादित अजैव निम्नीकरणीय कचरा जैसे पॉलीथीन आदि एवं विभिन्न रसायनों का जैव अपघटकों द्वारा अपघटन एवं अपमार्जन नहीं होता। अतः ये पर्यावरण में एकत्रित होते जाते हैं और चारों ओर इस कचरे के ढेर लग जाते हैं। पर्यावरण प्रदूषित होता है। प्रमुखतः मृदा प्रदूषण, वायु प्रदूषण एवं जल प्रदूषण की समस्याएँ उत्पन्न होती हैं, परिणामस्वरूप विभिन्न प्रकार की बीमारियाँ पैदा होती हैं। कचरे के ढेर की वजह से भू-भाग बेकार हो जाते हैं। जैविक आवर्धन होता है। जब इस कचरे को गाय आदि पशु खाते हैं तो उनके मरने की सम्भावनाएँ बढ़ जाती हैं।

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प्रश्न 8.
यदि हमारे द्वारा उत्पादित सारा कचरा जैव निम्नीकरणीय हो तो क्या इसका हमारे पर्यावरण पर कोई प्रभाव नहीं पड़ेगा?
उत्तर:
हमारे द्वारा उत्पादित जैव निम्नीकरणीय कचरा यदि अल्पमात्रा में हो तो उसका सूक्ष्मजीवियों द्वारा अपघटन हो जाता है और अमूल्य खाद्य का निर्माण होता है जिसका पुनः उपयोग पोषण के लिए पौधों द्वारा कर लिया जाता है, हालांकि इससे दुर्गन्ध युक्त गैसों का निर्माण होता है जो वातावरण को दुर्गन्ध से भर देती हैं और यदि कचरा अत्यधिक है तो उसका अपघटन एवं निपटान कठिन ही नहीं अपितु असम्भव हो जाता है जिससे पर्यावरण प्रदूषित हो जाता है और विभिन्न बीमारियों को आमन्त्रित करता है।

प्रश्न 9.
ओजोन परत की क्षति हमारे लिए चिन्ता का विषय क्यों है? इस क्षति को सीमित करने के लिए क्या कदम उठाए गए हैं?
उत्तर:
ओजोन परत की क्षति (क्षरण) हमारे लिए चिन्ता का विषय इसलिए है क्योंकि इसके अनेक दुष्परिणाम हैं, जो निम्नलिखित हैं –

  1. ओजोन परत के क्षरण के कारण सूर्य से आने वाली हानिकारक पराबैंगनी विकिरण वायुमण्डल में प्रवेश कर जाती है जिससे त्वचा कैन्सर हो जाता है।
  2. मनुष्य की त्वचा की ऊपरी सतह की कोशिकाएँ क्षतिग्रस्त हो जाती हैं। क्षतिग्रस्त कोशिकाओं से हिस्टामिन नामक रासायनिक पदार्थ स्रावित होता है, जिससे शरीर की प्रतिरोधक क्षमता नष्ट हो जाती है। फलस्वरूप अल्सर, निमोनिया, ब्रोन्काइटिस जैसी भयानक बीमारियाँ होने की सम्भावनाएँ बढ़ जाती हैं।
  3. इससे आनुवंशिक विकृतियाँ उत्पन्न हो जाती हैं तथा चिरकालिक रोग उत्पन्न हो जाते हैं।
  4. पराबैंगनी विकिरण से आँख के घातक रोग, मोतियाबिन्द, आँख में घाव एवं सूजन हो जाती है।
  5. ओजोन क्षरण से वायुमण्डल का ताप बढ़ जाता है।
  6. इसके सूक्ष्मजीवी एवं वनस्पतियों पर घातक प्रभाव पड़ते हैं। वनस्पतियों में प्रोटीन की कमी हो जाती है। प्रकाश-संश्लेषण एवं चयापचय क्रियाएँ प्रभावित होती हैं।
  7. इसके कारण खाद्य श्रृंखला प्रभावित होती है। उत्पादक शैवाल नष्ट हो जाते हैं। शैवालों के नष्ट होने से जलीय जीव मछलियाँ, जलीय पक्षी, समुद्र में रहने वाले स्तनी जीव आदि प्रभावित होते हैं।
  8. ओजोन परत की क्षति को सीमित करने के लिए उठाए गए कदम-ओजोन परत की क्षति क्लोरोफ्लोरो-कार्बन, नाइट्रस ऑक्साइड तथा मीथेन गैसों के कारण होती है। क्लोरोफ्लोरो-कार्बन सर्वाधिक क्षति पहुँचाता है। इसका विकल्प तलाशा जा रहा है तथा ऊर्जा के वैकल्पिक स्रोतों के उपयोग पर जोर दिया जा रहा है।

MP Board Class 10th Science Chapter 15 परीक्षोपयोगी अतिरिक्त प्रश्नोत्तर

MP Board Class 10th Science Chapter 15 वस्तुनिष्ठ प्रश्न

बहुविकल्पीय प्रश्न

प्रश्न 1.
निम्न में कौन-सा मानव रचित (कृत्रिम) पारितन्त्र है –
(a) पोखर।
(b) खेत।
(c) झील।
(d) जंगल।
उत्तर:
(b) खेत।

प्रश्न 2.
किसी आहार श्रृंखला में तृतीय पोषण स्तर पर सदैव होते हैं –
(a) माँसाहारी।
(b) शाकाहारी।
(c) अपघटक।
(d) उत्पादक।
उत्तर:
(a) माँसाहारी।

प्रश्न 3.
एक पारितन्त्र में होते हैं –
(a) सभी सजीव।
(b) सभी अजैव वस्तुएँ।
(c) सभी सजीव एवं अजैव वस्तुएँ।
(d) कभी सजीव कभी अजैव वस्तुएँ।
उत्तर:
(c) सभी सजीव एवं अजैव वस्तुएँ।

प्रश्न 4.
एक दी हुई खाद्य श्रृंखला में मान लीजिए चतुर्थ पोषण स्तर पर 5 k J ऊर्जा की मात्रा है तो उपभोक्ता स्तर पर कितनी ऊर्जा उपलब्ध होगी?
घास → टिड्डे → मेंढक → सर्प → चील (गिद्ध)
(a) 5 k J
(b) 50 k J
(c) 500 k J
(d) 5000 k J
उत्तर:
(d) 5000 k J

प्रश्न 5.
अजैव निम्नकरणीय पीड़कनाशकों का आहार श्रृंखला के प्रत्येक पोषण स्तर पर बढ़ती मात्रा में संचयन कहलाता है –
(a) पोषण।
(b) प्रदूषण।
(c) जैव-आवर्धन।
(d) सम्मिश्रण।
उत्तर:
(c) जैव-आवर्धन।

प्रश्न 6.
ओजोन परत का क्षरण मुख्य रूप से इस कारण है –
(a) क्लोरोफ्लोरो-कार्बन।
(b) कार्बन मोनोऑक्साइड।
(c) मीथेन।
(d) पीड़कनाशक।
उत्तर:
(a) क्लोरोफ्लोरो-कार्बन।

प्रश्न 7.
वे जीव जो अकार्बनिक यौगिकों से विकिरण ऊर्जा का प्रयोग करके कार्बोहाइड्रेट्स में संश्लेषण करते हैं, कहलाते हैं –
(a) अपघटक।
(b) उत्पादक।
(c) शाकाहारी।
(d) माँसाहारी।
उत्तर:
(b) उत्पादक।

प्रश्न 8.
पारितन्त्र में 10% ऊर्जा उपलब्ध होती है। एक पोषण स्तर से दूसरे पोषण स्तर में स्थानान्तरण हेतु निम्न के रूप में –
(a) ऊष्मीय ऊर्जा।
(b) प्रकाश ऊर्जा।
(c) रासायनिक ऊर्जा।
(d) यान्त्रिक ऊर्जा।
उत्तर:
(c) रासायनिक ऊर्जा।

प्रश्न 9.
उच्चतर पोषण स्तर के जीव जो निम्न पोषण स्तर के अनेक प्रकार के जीवों पर पोषण के लिए निर्भर होते हैं, बनाते हैं –
(a) आहार (खाद्य) जाल।
(b) पारितन्त्र का पिरामिड।
(c) पारितन्त्र।
(d) आहार (खाद्य) शृंखला।
उत्तर:
(a) आहार (खाद्य) जाल।

प्रश्न 10.
पारितन्त्र में ऊर्जा का प्रवाह सदैव होता है –
(a) एकदैशिक।
(b) द्वि-दैशिक।
(c) बहु-दैशिक।
(d) कोई निश्चित दिशा नहीं।
उत्तर:
(a) एकदैशिक।

प्रश्न 11.
अधिक देर तक मनुष्य का पराबैंगनी विकिरण में खुले रहने का परिणाम होता है –
(i) प्रतिरक्षण तन्त्र का नष्ट होना
(ii) फेफड़ों का नष्ट होना
(iii) चर्म कैंसर
(iv) आमाशयिक अल्सर।
(a) (i) एवं (ii)
(b) (ii) एवं (iv)
(c) (i) एवं (iii)
(d) (iii) एवं (iv)
उत्तर:
(c) (i) एवं (iii)

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प्रश्न 12.
वस्तुओं के निम्न समूहों में से किनमें अजैव निम्नीकरणीय पदार्थ हैं?
(i) लकड़ी, कागज, चमड़ा।
(ii) पॉलीथीन, डिटर्जेण्ट, PVC।
(iii) प्लास्टिक, डिटर्जेण्ट, घास।
(iv) प्लास्टिक, बैकेलाइट, DDT।
(a) (iii)
(b) (iv)
(c) (i) एवं (iii)
(d) (ii), (iii) एवं (iv)
उत्तर:
(d) (ii), (iii) एवं (iv)

प्रश्न 13.
एक खाद्य श्रृंखला में पोषण स्तरों को कौन सीमित करता है?
(a) उच्चतर पोषण स्तर में ऊर्जा का कम होना।
(b) अपर्याप्त खाद्य आपूर्ति।
(c) प्रदूषित वायु।
(d) जल।
उत्तर:
(a) उच्चतर पोषण स्तर में ऊर्जा का कम होना।

प्रश्न 14.
निम्न में कौन-सा कथन असत्य है?
(a) सभी हरे पेड़-पौधे एवं हरी-नीली ऐल्गी उत्पादक होते हैं।
(b) हरे पौधे अपना भोजन कार्बनिक यौगिकों से लेते हैं।
(c) उत्पादक अपना भोजन अकार्बनिक पदार्थों से प्राप्त करते हैं।
(d) पौधे सौर ऊर्जा को रासायनिक ऊर्जा में परिवर्तित कर देते हैं।
उत्तर:
(b) हरे पौधे अपना भोजन कार्बनिक यौगिकों से लेते हैं।

प्रश्न 15.
कौन-से जैव समूह आहार श्रृंखला का निर्माण नहीं करते?
(i) घास, शेर, खरगोश, भेड़िया।
(ii) जलीय पौधे, मनुष्य, मछली, टिड्डे।
(iii) भेड़िया, घास, सर्प, चीता।
(iv) मेंढक, सर्प, चील, घास, टिड्डे।
(a) (i) एवं (iii)
(b) (iii) एवं (iv)
(c) (ii) एवं (iii)
(d) (i) एवं (iv)
उत्तर:
(c) (ii) एवं (iii)

प्रश्न 16.
हरे पौधों द्वारा प्रकाश-संश्लेषण के लिए सौर विकिरण की ऊर्जा का निम्न प्रतिशत भाग अवशोषित किया जाता है –
(a) 1%
(b) 5%
(c) 8%
(d) 10%
उत्तर:
(a) 1%

प्रश्न 17.
संलग्न चित्र के विभिन्न पोषण स्तर दिखाए गए हैं। एक पिरामिड के रूप में किस पोषण स्तर में सर्वाधिक ऊर्जा उपलब्ध होती है?
MP Board Class 10th Science Solutions Chapter 15 हमारा पर्यावरण 2
(a) T4
(b) T2
(c) T1
(d) T3
उत्तर:
(c) T1

प्रश्न 18.
क्या होगा यदि दी हुई आहार (खाद्य) श्रृंखला से हिरन गायब हो जाएँ –
घास → हिरन → चीता
(a) चीतों की जनसंख्या बढ़ जायेगी।
(b) घास की मात्रा (जनसंख्या) बढ़ जाएगी।
(c) चीते घास खाना प्रारम्भ कर देंगे।
(d) चीतों की जनसंख्या घट जाएगी और घास की जनसंख्या बढ़ जाएगी।
उत्तर:
(d) चीतों की जनसंख्या घट जाएगी और घास की जनसंख्या बढ़ जाएगी।

प्रश्न 19.
किसी पारितन्त्र में अपघटक –
(a) अकार्बनिक पदार्थों को सरल पदार्थों में परिवर्तित करते हैं।
(b) कार्बनिक पदार्थों को अकार्बनिक रूप में परिवर्तित करते हैं।
(c) अकार्बनिक पदार्थों को कार्बनिक पदार्थों में परिवर्तित करते हैं।
(d) कार्बनिक पदार्थों को अपघटित नहीं करते।
उत्तर:
(b) कार्बनिक पदार्थों को अकार्बनिक रूप में परिवर्तित करते हैं।

प्रश्न 20.
यदि एक टिड्डे को मेंढक खा जाता है तब ऊर्जा का स्थानान्तरण होगा –
(a) उत्पादक से अपघटक को।
(b) उत्पादक से प्राथमिक उपभोक्ता को।
(c) प्राथमिक उपभोक्ता से द्वितीयक उपभोक्ता को।
(d) द्वितीय उपभोक्ता से प्राथमिक उपभोक्ता को।
उत्तर:
(c) प्राथमिक उपभोक्ता से द्वितीयक उपभोक्ता को।

प्रश्न 21.
डिस्पोजेवल प्लास्टिक प्लेटों का उपयोग नहीं करना चाहिए क्योंकि –
(a) वे हल्के वजन के पदार्थों से बने होते हैं।
(b) वे विषाक्त पदार्थों से बने होते हैं।
(c) वे जैव निम्नीकरणीय पदार्थों से बने होते हैं।
(d) वे अजैव निम्नीकरणीय पदार्थों से बने होते हैं।
उत्तर:
(d) वे अजैव निम्नीकरणीय पदार्थों से बने होते हैं।

रिक्त स्थानों की पूर्ति

  1. एक पोषण स्तर से दूसरे पोषण स्तर के लिए ऊर्जा का स्थानान्तरण …….प्रतिशत होता है। (2019)
  2. हरे पौधे प्रकाश-संश्लेषण के लिए सौर विकिरण ऊर्जा का केवल ……….. प्रतिशत भाग अवशोषित करते हैं।
  3. एक पोषण स्तर से दूसरे पोषण स्तर को ऊर्जा का भाग ………. जाता है।
  4. मनुष्य …….. जीव है।
  5. किसी आहार (खाद्य) श्रृंखला में केवल ……….. पोषण स्तर ही हो सकते हैं।

उत्तर:

  1. दस।
  2. एक।
  3. घटता।
  4. सर्वाहारी।
  5. चार-पाँच।

जोड़ी बनाइए
MP Board Class 10th Science Solutions Chapter 15 हमारा पर्यावरण 3
उत्तर:

  1. → (c)
  2. → (d)
  3. → (e)
  4. → (a)
  5. → (b)

सत्य/असत्य कथन

  1. कुत्ता सर्वाहारी है।
  2. मनुष्य अपना भोजन स्वयं पकाता है, इसलिए उत्पादक है।
  3. क्लोरोफ्लोरो-कार्बन ओजोन परत को क्षीण करती है।
  4. पृथ्वी की सतह से ऊपर वायु से घिरा क्षेत्र पर्यावरण कहलाता है।
  5. ओजोन परत पराबैंगनी विकिरण को रोकता है।

उत्तर:

  1. सत्य।
  2. असत्य।
  3. सत्य।
  4. असत्य।
  5. सत्य।

एक शब्द/वाक्य में उत्तर

  1. जो पदार्थ सूक्ष्मजीवों द्वारा अपघटित होते हैं, क्या कहलाते हैं?
  2. जो पदार्थ सूक्ष्मजीवों द्वारा अपघटित नहीं होते हैं, क्या कहलाते हैं?
  3. पौधे अपना भोजन किस प्रक्रिया द्वारा बनाते हैं?
  4. अपघटक मृतजीवों को किस प्रकार के पदार्थों में अपघटित करते हैं?
  5. अनेक आहार श्रृंखलाओं का एक संयुक्त समूह क्या कहलाता है?

उत्तर:

  1. जैव निम्नीकरणीय।
  2. अजैव निम्नीकरणीय।
  3. प्रकाश-संश्लेषण।
  4. सरल अकार्बनिक।
  5. आहार (खाद्य) जाल।

MP Board Class 10th Science Chapter 15 अति लघु उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 1.
पर्यावरण क्या है?
उत्तर:
पर्यावरण:
“चारों ओर की उन बाहरी दशाओं का सम्पूर्ण योग, जिसके अन्दर एक जीव या समुदाय रहता है, पर्यावरण कहलाता है।”

प्रश्न 2.
जैव निम्नीकरणीय पदार्थ क्या होते हैं? उदाहरण दीजिए।
उत्तर:
जैव निम्नीकरणीय पदार्थ:
“वे पदार्थ जो सूक्ष्मजीवों द्वारा आसानी से अपघटित हो जाते हैं तथा अपघटन के बाद हानिकारक पदार्थ नहीं बनते, जैव निम्नीकरणीय पदार्थ कहलाते हैं।”

उदाहरण:
घरेलू अपशिष्ट, मलमूत्र, वाहितमल, कृषि एवं जन्तु अपशिष्ट आदि।

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प्रश्न 3.
अजैव निम्नीकरणीय पदार्थ क्या होते हैं? उदाहरण दीजिए।
उत्तर:
अजैव निम्नीकरणीय पदार्थ-“वे पदार्थ जो सूक्ष्मजीवों द्वारा अपघटित नहीं होते, अजैव निम्नीकरणीय पदार्थ कहलाते हैं।” ।

उदाहरण:
विभिन्न कृषि रसायन, पॉलीथीन, कृत्रिम रेशे आदि।

प्रश्न 4.
अपशिष्ट किन्हें कहते हैं? उदाहरण दीजिए।
उत्तर:
अपशिष्ट:
“उपयोग के बाद त्यागा गया पदार्थ जो वातावरण को प्रदूषित करता है, अपशिष्ट कहलाता है।”

उदाहरण:
घरेलू अपशिष्ट, कृषि अपशिष्ट, पॉलीथीन आदि।

प्रश्न 5.
पारिस्थितिकी क्या है? पारिस्थितिक तन्त्र के प्रमुख घटक कौन-कौन से हैं?
उत्तर:
पारिस्थितिकी:
“विज्ञान की वह शाखा, जिसमें पारिस्थितिक तन्त्र का अध्ययन किया जाता है, पारिस्थितिकी कहलाती है।”

पारिस्थितिक तन्त्र के प्रमुख घटक-इसके दो घटक हैं –

  1. जैविक घटक।
  2. अजैविक घटक।

प्रश्न 6.
जैविक घटक क्या हैं? कार्य के आधार पर जैविक घटकों को कौन-कौन से भागों में बाँटा गया है?
उत्तर:
जैविक घटक:
“पारिस्थितिक तन्त्र के वे घटक जो सजीव होते हैं, जैविक घटक कहलाते हैं।”

जैविक घटकों को कार्य के आधार पर निम्न तीन भागों में बाँटा गया है –

  1. उत्पादक।
  2. उपभोक्ता।
  3. अपघटक (अपमार्जक)।

प्रश्न 7.
उत्पादक किन्हें कहते हैं? उदाहरण दीजिए।
उत्तर:
उत्पादक:
“जो जीव अपने पोषण के लिए सौर ऊर्जा एवं क्लोरोफिल की उपस्थिति में कार्बन डाइऑक्साइड एवं जल को प्रकाश-संश्लेषण प्रक्रिया द्वारा कार्बोहाइड्रेट में परिवर्तित कर देते हैं, उन्हें उत्पादक कहते हैं।”

उदाहरण: हरे पेड़-पौधे और हरी, नीली शैवाल (ऐल्गी)।

प्रश्न 8.
उपभोक्ता किन्हें कहते हैं? उदाहरण दीजिए।
उत्तर:
उपभोक्ता:
“वे जीव जो प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से अपने पोषण के लिए पौधों (उत्पादकों) पर निर्भर करते हैं तथा अपना भोजन स्वयं नहीं बनाते, उपभोक्ता कहलाते हैं।

उदाहरण: सभी प्रकार के जन्तु।

प्रश्न 9.
पोषण के आधार पर उपभोक्ताओं को किन-किन भागों में बाँटा गया है?
उत्तर:
पोषण के आधार पर उपभोक्ताओं को निम्न तीन भागों में बाँटा गया है –

  1. शाकाहारी।
  2. माँसाहारी।
  3. सर्वाहारी।

प्रश्न 10.
शाकाहारी से क्या समझते हो? उदाहरण दीजिए।
उत्तर:
शाकाहारी: “वे उपभोक्ता जो अपने पोषण के लिए केवल पेड़-पौधों पर निर्भर रहते हैं, शाकाहारी कहलाते हैं।”

उदाहरण: भेड़-बकरी प्रायः सभी पालतू पशु एवं खरगोश आदि।

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प्रश्न 11.
माँसाहारी किन्हें कहते हैं? उदाहरण दीजिए।
उत्तर:
माँसाहारी:
“वे जन्तु जो अपने पोषण के लिए केवल जन्तुओं पर निर्भर करते हैं अर्थात् उनके माँस का भक्षण करते हैं, माँसाहारी कहलाते हैं।”

उदाहरण: भेड़िया, शेर, बिल्ली आदि।

प्रश्न 12.
सर्वाहारी क्या होते हैं? उदाहरण दीजिए।
उत्तर:
सर्वाहारी:
“वे जन्तु जो अपने पोषण के लिए पेड़-पौधों एवं जन्तुओं दोनों पर निर्भर रहते हैं, सर्वाहारी कहलाते हैं।”

उदाहरण: मनुष्य, कुत्ता, कौआ आदि।

प्रश्न 13.
अजैविक घटक क्या होते हैं? उदाहरण दीजिए।
उत्तर:
अजैविक घटक:
“पारितन्त्र के कार्बनिक एवं अकार्बनिक पदार्थ तथा भौतिक वातावरण आदि सभी अजैव पदार्थ अजैविक घटक कहलाते हैं।”

उदाहरण:
कार्बनिक पदार्थ – कार्बोहाइड्रेट, वसा, प्रोटीन आदि।
अकार्बनिक पदार्थ – हाइड्रोजन, ऑक्सीजन, नाइट्रोजन आदि।
भौतिक वातावरण – प्रकाश, ताप आदि।

प्रश्न 14.
आहार श्रृंखला (खाद्य श्रृंखला) किसे कहते हैं?
उत्तर:
आहार श्रृंखला (खाद्य श्रृंखला):
“भोजन रूपी ऊर्जा की जीवों में क्रमिक रूपान्तरण की श्रृंखला आहार श्रृंखला (खाद्य श्रृंखला) कहलाती है।”

प्रश्न 15.
खाद्य जाल (आहार जाल) किसे कहते हैं?
उत्तर:
आहार जाल (खाद्य जाल):
“जब अनेक खाद्य शृंखलाएँ परस्पर मिलकर एक जटिल पथ बनाती है तो एक जाल-सा बनता है, जिसे आहार जाल (खाद्य जाल) कहते हैं।”

प्रश्न 16.
ग्रीन हाउस गैसें किन्हें कहते हैं? उनके नाम लिखिए।
उत्तर:
ग्रीन हाउस गैसें:
“जो गैसें पौधा घर प्रभाव (ग्रीन हाउस प्रभाव) उत्पन्न करती हैं, ग्रीन हाउस गैसें कहलाती हैं।”

उदाहरण:
कार्बन डाइऑक्साइड, मीथेन, नाइट्रोजन के ऑक्साइड एवं क्लोरोफ्लोरो-कार्बन आदि।

प्रश्न 17.
ग्लोबल वार्मिंग से क्या समझते हो?
उत्तर:
ग्लोबल वार्मिंग:
“मानव के क्रियाकलापों के फलस्वरूप ग्रीन हाउस प्रभाव के कारण सम्पूर्ण पृथ्वी का तापमान बढ़कर सामान्य तापमान से अधिक हो रहा है, यह घटना ग्लोबल वार्मिंग कहलाती है।”

प्रश्न 18.
ओजोन परत क्या है? यह क्यों क्षीण हो रही है?
उत्तर:
ओजोन परत:
“हमारे वायुमण्डल में समुद्र सतह से 32 से 80 किमी तक ओजोन की एक मोटी परत पाई जाती है, जिसे ओजोन परत कहते हैं।” ओजोन परत ऐरोसॉल (क्लोरोफ्लोरो-कार्बन) जैसे प्रदूषकों की उपस्थिति के कारण क्षीण हो रही है।

प्रश्न 19.
अम्ल वर्षा किसे कहते हैं?
उत्तर:
अम्ल वर्षा:
वायुमण्डल में जब अम्लीय गैसें; जैसे-CO2, SO2, SO3 एवं नाइट्रोजन के ऑक्साइड एकत्रित हो जाते हैं तो वर्षा के जल में घुलकर अम्ल बनकर बरसते हैं, जिसे अम्ल वर्षा कहते हैं।

प्रश्न 20.
यदि किसी खाद्य श्रृंखला के प्रथम पोषी स्तर पर 10,000 जूल ऊर्जा उपलब्ध है, तो द्वितीय पोषी स्तर के जीवों को कितनी ऊर्जा उपलब्ध होगी?
उत्तर:
द्वितीय पोषी स्तर के जीवों के लिए उपलब्ध –
MP Board Class 10th Science Solutions Chapter 15 हमारा पर्यावरण 4

प्रश्न 21.
ओजोन परत की क्षति चिन्ता का विषय है, क्यों?
उत्तर:
ओजोन परत की क्षति (क्षरण) हमारे लिए चिन्ता का विषय इसलिए है क्योंकि इसके अनेक दुष्परिणाम हैं, जो निम्नलिखित हैं –

  1. ओजोन परत के क्षरण के कारण सूर्य से आने वाली हानिकारक पराबैंगनी विकिरण वायुमण्डल में प्रवेश कर जाती है जिससे त्वचा कैन्सर हो जाता है।
  2. मनुष्य की त्वचा की ऊपरी सतह की कोशिकाएँ क्षतिग्रस्त हो जाती हैं। क्षतिग्रस्त कोशिकाओं से हिस्टामिन नामक रासायनिक पदार्थ स्रावित होता है, जिससे शरीर की प्रतिरोधक क्षमता नष्ट हो जाती है। फलस्वरूप अल्सर, निमोनिया, ब्रोन्काइटिस जैसी भयानक बीमारियाँ होने की सम्भावनाएँ बढ़ जाती हैं।
  3. इससे आनुवंशिक विकृतियाँ उत्पन्न हो जाती हैं तथा चिरकालिक रोग उत्पन्न हो जाते हैं।
  4. पराबैंगनी विकिरण से आँख के घातक रोग, मोतियाबिन्द, आँख में घाव एवं सूजन हो जाती है।
  5. ओजोन क्षरण से वायुमण्डल का ताप बढ़ जाता है।
  6. इसके सूक्ष्मजीवी एवं वनस्पतियों पर घातक प्रभाव पड़ते हैं। वनस्पतियों में प्रोटीन की कमी हो जाती है। प्रकाश-संश्लेषण एवं चयापचय क्रियाएँ प्रभावित होती हैं।
  7. इसके कारण खाद्य श्रृंखला प्रभावित होती है। उत्पादक शैवाल नष्ट हो जाते हैं। शैवालों के नष्ट होने से जलीय जीव मछलियाँ, जलीय पक्षी, समुद्र में रहने वाले स्तनी जीव आदि प्रभावित होते हैं।
  8. ओजोन परत की क्षति को सीमित करने के लिए उठाए गए कदम-ओजोन परत की क्षति क्लोरोफ्लोरो-कार्बन, नाइट्रस ऑक्साइड तथा मीथेन गैसों के कारण होती है। क्लोरोफ्लोरो-कार्बन सर्वाधिक क्षति पहुँचाता है। इसका विकल्प तलाशा जा रहा है तथा ऊर्जा के वैकल्पिक स्रोतों के उपयोग पर जोर दिया जा रहा है।

प्रश्न 22.
निम्नलिखित खाद्य श्रृंखला में, शेर को 100 J ऊर्जा उपलब्ध है। उत्पादक स्तर पर कितनी ऊर्जा उपलब्ध थी?
पादप → हिरण → शेर
उत्तर:
उत्पादक स्तर (पादपों) के लिए –
उपलब्ध ऊर्जा = 100 J × (10)2 = 10.000 J

प्रश्न 23.
अनुचित तरीके से कचरे (अपशिष्ट) का फेंकना पर्यावरण के लिए अभिशाप क्यों है?
उत्तर:
अनुचित तरीके से फेंके गए कचरे (अपशिष्ट) का उचित विस्तारण न होने के कारण यह वातावरण को प्रदूषित करता है। इससे वायु प्रदूषण, मृदा प्रदूषण एवं जल प्रदूषण होता है जो सभी जीवधारियों के लिए हानिकारक होते हैं।

प्रश्न 24.
एक पोखर (तालाब) की सामान्य आहार श्रृंखला (खाद्य श्रृंखला) लिखिए।
उत्तर:
पोखर (तालाब) की एक सामान्य आहार श्रृंखला (खाद्य श्रृंखला) –
जलीय पौधे → छोटे जलीय जन्तु, लार्वा, कीड़े-मकोड़े आदि → मछलियाँ → जलीय पक्षी।

प्रश्न 25.
फसल वाले क्षेत्र (खेत) कृत्रिम पारितन्त्र माने जाते हैं, क्यों?
उत्तर:
फसल वाले क्षेत्र (खेत) मनुष्य द्वारा उत्पन्न किए जाते हैं, प्राकृतिक रूप से नहीं बनते, इसलिए इन्हें कृत्रिम पारितन्त्र माना जाता है।

प्रश्न 26.
निम्न में से गलत जोड़ी को छाँटिए एवं इसका संशोधन कीजिए –
MP Board Class 10th Science Solutions Chapter 15 हमारा पर्यावरण 5
उत्तर:
गलत जोड़ी है –
(b) पारितन्त्र – पर्यावरण के जैवीय घटक

संशोधित रूप
(b) पारितन्त्र – पर्यावरण के जैवीय एवं अजैवीय घटक

प्रश्न 27.
हम तालाबों एवं झीलों की सफाई नहीं करते जबकि जल जीवशाला की सफाई करनी पड़ती है, क्यों?
उत्तर:
तालाब एवं झीलें प्राकृतिक पारितन्त्र हैं जो पूर्ण हैं तथा परस्पर अन्योन्य क्रियाओं को करने में सक्षम हैं जबकि जल जीवशाला एक कृत्रिम एवं अपूर्ण मानवनिर्मित पारितन्त्र है जिसमें परस्पर अन्योन्य क्रियाओं की क्षमता नहीं इसलिए जल जीवशाला को सफाई की आवश्यकता होती है जबकि तालाब एवं झीलों की नहीं।

प्रश्न 28.
उर्वरक उद्योग (कारखानों) के कचरे के निस्तारण की तकनीक सुझाइए।
उत्तर:

  1. वायु प्रदूषण का नियन्त्रण करना चाहिए।
  2. वाहित कचरे को पर्यावरण में बहाने से पहले उपचारित करना चाहिए।

प्रश्न 29.
उर्वरक उद्योग के उप-उत्पाद क्या हैं? वे पर्यावरण को किस प्रकार प्रभावित करते हैं?
उत्तर:
उर्वरक उद्योग के उप-उत्पाद हानिकारक वायु प्रदूषण गैसें; जैसे-सल्फर डाइऑक्साइड (SO2) एवं नाइट्रिक ऑक्साइड (NO) आदि हैं जो वायु प्रदूषक हैं तथा अम्ल वर्षा के कारक हैं।

MP Board Class 10th Science Chapter 15 लघु उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 1.
कचरे के प्रबन्धन की तकनीक पर प्रकाश डालिए।
उत्तर:
कचरे के प्रबन्धन की तकनीक:

  1. कचरे का वर्गीकरण विघटनीय-अविघटनीय; ज्वलनशील-अज्वलनशील इत्यादि में करना।
  2. स्थान-स्थान पर कूड़ेदान रखवाना।
  3. अपशिष्ट को डम्पिंग स्थल तक पहुँचाने की उत्तम व्यवस्था करना।
  4. ठोस जैविक अपशिष्ट को वर्मीकम्पोस्टिंग विधि द्वारा खाद में परिवर्तित करना।
  5. अनुपयोगी अजैविक अपशिष्ट को पुन:चक्रण द्वारा उपयोगी पदार्थों में बदलना।

प्रश्न 2.
अजैविक तथा जैविक घटकों की परस्पर अन्तक्रिया का वर्णन कीजिए।
उत्तर:
अजैविक एवं जैविक घटकों की अन्तक्रिया:
जैविक घटक के उत्पादक (हरे पौधे) वातावरण से अजैविक अकार्बनिक पदार्थ कार्बन डाइ-ऑक्साइड एवं जल लेकर सूर्य के प्रकाश की उपस्थिति में प्रकाशसंश्लेषण के द्वारा अपना भोजन बनाते हैं। वे उत्पादक एवं स्वपोषी होते हैं। अत: उत्पादकों को कार्बनिक एवं अकार्बनिक पदार्थों एवं भौतिक वातावरण (अजैविक घटकों) की आवश्यकता होती है।

उपभोक्ता अपने पोषण के लिए प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से पौधों पर निर्भर करते हैं तथा उन्हें वातावरण के अजैविक घटकों (प्रकाश, ताप, जल एवं वायु) की भी आवश्यकता होती है। अतः कह सकते हैं कि सजीवों की प्रथम अन्तक्रिया वातावरण के तत्वों से तथा द्वितीय अन्तक्रिया सजीवों के साथ परस्पर होती है। जैविक तत्वों की मृत्यु के बाद सूक्ष्मजीवी अपघटकों के द्वारा उनका अपघटन कर दिया जाता है। उनमें व्याप्त मूल खनिज पदार्थ तथा कार्बनिक एवं अकार्बनिक पदार्थों को अजैविक वातावरण में मिला दिया जाता है।

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प्रश्न 3.
एक खाद्य श्रृंखला को चित्र द्वारा प्रदर्शित कीजिए।
उत्तर:
खाद्य श्रृंखला का चित्र द्वारा प्रदर्शन –
MP Board Class 10th Science Solutions Chapter 15 हमारा पर्यावरण 6

प्रश्न 4.
एक खाद्य जाल को चित्र द्वारा प्रदर्शित कीजिए।
उत्तर:
खाद्य जाल का चित्र द्वारा प्रदर्शन –
MP Board Class 10th Science Solutions Chapter 15 हमारा पर्यावरण 7

प्रश्न 5.
पर्यावरण संरक्षण क्या है? पर्यावरण संरक्षण के उद्देश्य लिखिए।
उत्तर:
पर्यावरण संरक्षण:
“प्राकृतिक संसाधनों को संरक्षित करके पर्यावरण को प्रदूषण रहित एवं स्वस्थ बनाना, पर्यावरण संरक्षण कहलाता है।”

पर्यावरण संरक्षण के उद्देश्य –

  1. प्राकृतिक सम्पदाओं को निरन्तर बनाये रखना, उनका सदुपयोग करना तथा उनकी वृद्धि करना।
  2. नवीनीकरणीय एवं अनवीनीकरणीय संसाधनों का उपयोग विवेक एवं मितव्ययिता के साथ करना।
  3. प्राकृतिक संसाधनों (जल, मृदा, वन, खनिज, सम्पदा, जन्तुओं एवं ऊर्जा) का संरक्षण करके पर्यावरण का संरक्षण करना।

प्रश्न 6.
पर्यावरण संरक्षण पर प्रकाश डालिए।
अथवा
प्राकृतिक सम्पदा एवं संसाधन के संरक्षण का वर्णन कीजिए।
उत्तर:
पर्यावरण एवं प्राकृतिक सम्पदा का संरक्षण –

  1. जल संरक्षण: जल को प्रदूषण से बचाना, उसके अतिव्यय को रोकना, उसका उपयुक्त तरीके से संग्रहण करना। इन सब क्रियाकलापों से जल का संरक्षण किया जा सकता है।
  2. मृदा संरक्षण: इसके संरक्षण के लिए खेतों पर मेंड बनाना, जैविक खाद का प्रयोग करना, वृक्षारोपण करना आदि।
  3. वन संरक्षण: वन के संरक्षण के लिए वनों का रखरखाव ठीक से करना, वृक्षारोपण, राष्ट्रीय उद्यान एवं अभ्यारण्यों की स्थापना करना आदि।
  4. खनिज: इनके संरक्षण के लिए इनका मितव्ययिता के साथ सीमित प्रयोग करना।
  5. ऊर्जा: इसके संरक्षण के लिए वैकल्पिक ऊर्जा स्रोतों का अधिकाधिक उपयोग करना तथा परम्परागत ऊर्जा स्रोतों के प्रयोग में मितव्ययिता रखना।

प्रश्न 7.
पर्यावरण संरक्षण हेतु जागरूकता क्यों आवश्यक है?
उत्तर:
पर्यावरण संरक्षण हेतु जागरूकता की आवश्यकता:
पर्यावरण संरक्षण एक बहुत बड़ा प्रोजेक्ट है। इसे अकेले न तो शासन एवं प्रशासन पूर्ण कर सकता है और न कोई व्यक्ति। यह संयुक्त रूप से प्रयत्न करने पर ही सम्भव है। इसके लिए आवश्यक है जनता को जागरूक बनाया जाए। उसे पर्यावरण के नष्ट होने के कारणों, उसके प्रभावों की जानकारी देना आवश्यक है।

जनजागरण के द्वारा ही वे अपने पर्यावरण की वास्तविक स्थितियों से भलीभाँति परिचित हो सकेंगे और पर्यावरण के संरक्षण में अपना क्रियात्मक योगदान दे सकेंगे। इसलिए पर्यावरण संरक्षण के लिए समग्र जागरूकता आवश्यक है।

प्रश्न 8.
ग्रीन हाउस प्रभाव को समझाइए।
उत्तर:
ग्रीन हाउस प्रभाव (Green House Effect):
ठण्डे प्रदेशों में पौधों को ठण्ड से बचाने के लिए काँच या फाइबर ग्लास के बने पौधाघरों में रखा जाता है। सूर्य से निकलने वाली छोटी तरंगदैर्घ्य की विकिरण काँच से होकर इसमें प्रवेश कर जाती है तथा वहाँ ये बड़ी तरंगदैर्घ्य की विकिरणों में बदल जाती है जिनको काँच बाहर आने से रोकता है।

इस प्रकार पौधाघर का ताप वायुमण्डल के ताप से अधिक रहता है। इस घटना को पौधाघर प्रभाव या ग्रीन हाउस प्रभाव कहते हैं। काँच की जगह यही कार्य पर्यावरण में कार्बन डाइ-ऑक्साइड, मीथेन, नाइट्रोजन के ऑक्साइड, ओजोन, क्लोरोफ्लोरोकार्बन आदि गैसें करती हैं, जिन्हें ग्रीन हाउस गैसें कहते हैं। इससे पृथ्वी का ताप बढ़ जाता है।

प्रश्न 9.
ग्लोबल वार्मिंग को समझाइए।
उत्तर:
ग्लोबल वार्मिंग की व्याख्या-मनुष्य के क्रियाकलापों से वायुमण्डल में ग्रीन हाउस गैसों की मात्रा में वृद्धि हो रही है। ये गैसें कम्बल का कार्य करती हैं तथा ग्रीन हाउस के प्रभाव के कारण ये सूर्य के प्रकाश की ऊष्मा को पृथ्वी पर आने देती हैं लेकिन पृथ्वी की ऊष्मा को अन्तरिक्ष में नहीं जाने देती। ज्यों-ज्यों ग्रीन हाउस गैसों की मात्रा में वृद्धि होती जा रही है, त्यों-त्यों पृथ्वी पर ऊष्मा की मात्रा में वृद्धि होती जा रही है। इससे वैश्विक ताप में भी वृद्धि होती जा रही है। इस तरह ग्लोबल वार्मिंग की समस्या खड़ी हो रही है। इससे पृथ्वी का सामान्य ताप पहले से काफी बढ़ गया है।

प्रश्न 10.
ग्लोबल वार्मिंग के मुख्य कारण लिखिए।
उत्तर:
ग्लोबल वार्मिंग के मुख्य कारण:

  1. वृक्षों के अत्यधिक कटान से कार्बन डाइ-ऑक्साइड गैस की वातावरण में वृद्धि होना।
  2. जीवाश्म ईंधन (कोयला, पेट्रोलियम) आदि के आंशिक या पूर्ण दहन से कार्बन मोनो-ऑक्साइड एवं कार्बन डाइ-ऑक्साइड एवं नाइट्रोजन के ऑक्साइडों की मात्रा में वृद्धि।
  3. रेफ्रिजरेटरों एवं एयर कण्डीशनरों में ऐरोसोल का उपायेग, अग्निशमन यन्त्रों तथा फोम के उपयोग से क्लोरोफ्लोरोकार्बन का वातावरण में एकत्रित होना।
  4. अनेक जैविक प्रक्रियाओं, कृषि कार्यों एवं अपशिष्टों के सड़ने से ग्रीन हाउस गैसों का वातावरण में एकत्रित होना।

प्रश्न 11.
ग्लोबल वार्मिंग के विनाशकारी परिणामों पर प्रकाश डालिए।
उत्तर:
ग्लोबल वार्मिंग के विनाशकारी परिणाम:

  1. पृथ्वी का तापमान बढ़ने से पानी के वाष्पीकरण की दर बढ़ेगी जिससे उपलब्ध पानी में कमी आयेगी।
  2. पृथ्वी का तापमान बढ़ने से ध्रुवों की बरफ पिघलेगी जिससे समुद्र का जल स्तर बढ़ने से तटीय आबादी को जीवन का खतरा हो जायेगा।
  3. पेड़-पौधों एवं जन्तुओं की मृत्यु सम्भव है।
  4. जल एवं वायु प्रदूषण में तेजी से वृद्धि होगी।
  5. असामयिक वर्षा, अतिवृष्टि एवं अनावृष्टि एवं बाढ़ की सम्भावनाएँ बढ़ जायेंगी।

प्रश्न 12.
ग्लोबल वार्मिंग से बचाव के उपाय लिखिए।
उत्तर:
ग्लोबल वार्मिंग से बचाव के उपाय:

  1. वृक्षों के अत्यधिक कटान को प्रतिबन्धित करना चाहिए तथा अधिकाधिक वृक्षारोपण करना चाहिए।
  2. जीवाश्म ईंधन का मितव्ययिता से तथा पूर्ण दहन के साथ उपयोग करना चाहिए।
  3. क्लोरोफ्लोरोकार्बन (ऐरोसोल) को पूर्णतः प्रतिबन्धित कर देना चाहिए।
  4. रासायनिक खादों के प्रयोग को बन्द करके जैविक खादों के प्रयोग को बढ़ावा देना चाहिए।
  5. अधिकाधिक वैकल्पिक ऊर्जा स्रोतों का उपयोग करना चाहिए।

प्रश्न 13.
ओजोन स्तर (परत) के ह्रास (क्षरण) के कारणों पर प्रकाश डालिए।
उत्तर:
ओजोन स्तर (परत) के ह्रास (क्षरण) के कारण:

  1. क्लोरोफ्लोरोकार्बन गैस (ऐरोसोल) द्वारा ओजोन को नष्ट करना।
  2. मोटर वाहनों, ऊर्जा संयन्त्रों एवं विभिन्न प्रकार के उद्योगों से निकलने वाले धुएँ में पाई जाने वाली सल्फर डाइ-ऑक्साइड, कार्बन मोनो-ऑक्साइड,
  3. नाइट्रोजन के ऑक्साइड, हाइड्रोकार्बन आदि द्वारा ओजोन स्तर का क्षरण करना।
  4. अन्तरिक्ष यान, जेट वायुयान में ईंधन के जलने से नाइट्रोजन ऑक्साइड का उत्पन्न होना।
  5. ज्वालामुखी विस्फोट के कारण वायुमण्डल में सल्फर डाइ-ऑक्साइड की मात्रा में वृद्धि होना।
  6. हेलोन-1301, क्लोरोफॉर्म, कार्बन टेट्राक्लोराइड, मीथेन, ऐरोसोल, फोम आदि से ओजोन का क्षरण होना।

प्रश्न 14.
अम्ल वर्षा कैसे होती है?
उत्तर:
अम्ल वर्षा की प्रक्रिया:
वायु प्रदूषण के फलस्वरूप वायुमण्डल में कार्बन डाइ-ऑक्साइड, सल्फर डाइ-ऑक्साइड एवं नाइट्रोजन के ऑक्साइड जैसी अम्लीय गैसें एकत्रित हो जाती हैं। सूर्य की ऊष्मा के कारण नदियों, झीलों, तालाबों एवं समुद्रों का जल वाष्प बनकर वायुमण्डल में एकत्रित होता है। यह जलवाष्प उन अम्लीय गैसों से मिश्रित हो जाती है।

जब अनुकूल परिस्थितियाँ उत्पन्न होती हैं, तब जलवाष्प संघनित होकर जल की बूंदों में परिवर्तित होकर अम्लीय गैसों को अपने में घोलकर अम्ल बनाती है। इसमें कार्बनिक अम्ल, सल्फ्यूरस अम्ल, सल्फ्यूरिक अम्ल एवं नाइट्रिक अम्ल बनते हैं। जब जल की बूंदें वर्षा के रूप में पृथ्वी पर बरसती हैं तो उनके साथ अम्ल भी बरसता है। इस प्रकार अम्ल वर्षा होती है।

प्रश्न 15.
मानव के क्रियाकलापों ने जीवमण्डल के जीव रूपों को बुरी तरह प्रभावित किया है। मानव द्वारा प्रकृति के असीमित दोहन ने जीवमण्डल के जैव-अजैव अवयवों के संवेदनशील सन्तुलन को अस्त-व्यस्त कर दिया है। मानव द्वारा स्वयं सृजित प्रतिकूल परिस्थितियों ने न केवल उसकी अपनी उत्तरजीविता को ललकारा है, बल्कि पृथ्वी के समस्त जीवों को भी ललकारा है। आपका एक सहपाठी जो आपके स्कूल के ‘ईको क्लब’ का सक्रिय सदस्य है, स्कूल के छात्रों में पर्यावरण के प्रति जागरूकता उत्पन्न कर रहा है तथा इसे समाज में भी फैला रहा है। वह पास-पड़ोस के पर्यावरण के निम्नीकरण को रोकने के लिए भी कठोर कार्य कर रहा है।
(a) हमें अपने पर्यावरण का संरक्षण करना क्यों आवश्यक है?
(b) घरेलू अपशिष्टों के निरापद निपटारे के लिए हरी और नीली कड़ा-पेटियों का महत्व लिखिए।
(c) आपके उस सहपाठी द्वारा प्रदर्शित दो मूल्यों की सूची बनाइए जो आपके विद्यालय के ‘ईको क्लब’ का सक्रिय सदस्य है।
उत्तर:
(a) हमें अपने पर्यावरण का संरक्षण करना अति आवश्यक है क्योंकि हमारे द्वारा प्रकृति के असीमित दोहन ने जीवमण्डल के जैव एवं अजैव अवयवों के संवेदनशील सन्तुलन को अस्त-व्यस्त कर दिया है। हमारे द्वारा सृजित प्रतिकूल परिस्थितियों ने न केवल हमारी अपनी उत्तरजीविता खतरे पड़ गयी है अपितु पृथ्वी के समस्त जीवों की उत्तरजीविता को भी भारी खतरा हो गया है। सम्पूर्ण पर्यावरण असन्तुलित होता जा रहा है।

(b) घरेलू अपशिष्टों के निपटारे के लिए हरी और नीली कूड़ा-पेटियों का बहुत महत्व है। इससे जैव निम्नीकरणीय एवं अजैव निम्नीकरणीय कचरे को पृथक्-पृथक् रखा जा सकता है जिससे उनका उचित तरीके से निस्तारण किया जा सके। अलग-अलग रंग होने से कचरे के मिश्रित होने की सम्भावना नहीं रहती।

(c) ‘ईको क्लब’ के सक्रिय सदस्य द्वारा प्रदर्शित मूल्य:

  1. पर्यावरणीय-मित्रता।
  2. मानवीय मूल्य।

प्रश्न 16.
जैव निम्नीकरणीय एवं अजैव निम्नीकरणीय पदार्थों के बीच प्रत्येक का एक उदाहरण देकर विभेदन कीजिए। उन दो आदतों में परिवर्तन की सूची बनाइए जिन्हें पर्यावरण को बचाने के लिए, व्यक्ति अजैव निम्नीकरणीय अपशिष्टों के निपटारा करने में अपना सकते हैं।
उत्तर:
जैव निम्नीकरणीय पदार्थ वे पदार्थ होते हैं जो सूक्ष्मजीवियों द्वारा आसानी से अपघटित होकर सरल अकार्बनिक पदार्थों में बदल जाते हैं। जैसे जन्तु एवं वनस्पति अवशेष एवं अपशिष्ट, जबकि अजैव निम्नीकरणीय पदार्थ वे पदार्थ हैं जिनका सूक्ष्मजीवियों द्वारा या तो अपघटन नहीं होता या फिर बहुत अधिक धीमी गति से अपघटन होता है और वे लम्बे समय तक प्रकृति में बने रहकर पर्यावरण को हानि पहुँचाते हैं; जैसे-पॉलीथीन, प्लास्टिक एवं धातुएँ आदि।

पर्यावरण बचाने के लिए अजैव निम्नीकरणीय पदार्थों के निपटारे के लिए आदतों में बदलाव –

  1. अजैव निम्नीकरणीय पदार्थों पॉलीथीन एवं प्लास्टिक आदि के स्थान पर उनकी वैकल्पिक जैव निम्नीकरणीय पदार्थों का अधिकाधिक प्रयोग करना; जैसे-कागज की थैलियाँ, कपड़े के थैले, मिट्टी के कुल्लड़, सकोरे, वृक्ष के पत्तों से बने पत्तल एवं दोने आदि।
  2. अजैव निम्नीकरणीय पदार्थों का पुनर्चक्रण करके पुनः उपयोग करना।

प्रश्न 17.
पारितन्त्र में ऊर्जा प्रवाह को दर्शाइए। यह एकदैशिक क्यों होता है? पुष्टि कीजिए।
उत्तर:
पारितन्त्र में ऊर्जा का प्रवाह –
MP Board Class 10th Science Solutions Chapter 15 हमारा पर्यावरण 8
चूँकि ऊर्जा का प्रवाह एक पोषी स्तर से दूसरे पोषी स्तर की ओर आगे बढ़ता जाता है और वापस विपरीत दिशा में नहीं होता इसलिए यह एकदैशिक कहलाता है। इसके अतिरिक्त उपलब्ध ऊर्जा हर पोषी स्तर पर कम होती जाती है जिससे ऊर्जा का वापस लौटना असम्भव हो जाता है।

प्रश्न 18.
बाजार से खरीददारी करने के लिए कपड़े के थैलों का उपयोग करना प्लास्टिक की थैलियों से क्यों उत्तम है?
उत्तर:
कपड़े के थैलों का उपयोग प्लास्टिक की थैलियों के उपयोग से उत्तम है क्योंकि –

  1. कपड़े के थैलों में अधिक सामान आ जाता है।
  2. कपड़ा जैव निम्नीकरणीय पदार्थ है जबकि प्लास्टिक अजैव निम्नीकरणीय पदार्थ है।
  3. कपड़ा पर्यावरण को प्रदूषित नहीं करता जबकि प्लास्टिक पर्यावरण को प्रदूषित करता है।
  4. कपड़े के थैलों को बार-बार उपयोग में लाया जा सकता है जबकि प्लास्टिक (पॉलीथीन) की थैलियों को बार-बार प्रयोग में नहीं लाया जा सकता।

प्रश्न 19.
निम्न वाक्यों, कथनों एवं परिभाषाओं के लिए एक शब्द सुझाइए –
(a) भौतिक एवं जैवीय दुनिया जहाँ हम रहते हैं?
(b) आहार श्रृंखला (खाद्य शृंखला) का प्रत्येक स्तर जहाँ ऊर्जा का स्थानान्तरण होता है।
(c) पारितन्त्र के भौतिक कारक; जैसे-तापक्रम, वर्षा, पवन, मृदा आदि।
(d) वे जीव, जो प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से पेड़-पौधों पर भोजन के लिए निर्भर होते हैं।
उत्तर:
(a) पर्यावरण या जैवमण्डल।
(b) पोषीस्तर।
(c) पारितन्त्र के अजैव घटक।
(d) उपभोक्ता या परपोषी।

प्रश्न 20.
अपघटक (अपमार्जक) क्या होते हैं? इनकी अनुपस्थिति पारितन्त्र पर क्या कुप्रभाव डालेगी?
उत्तर:
अपघटक (अपमार्जक):
“वे सूक्ष्मजीवी जो जन्तुओं एवं वनस्पतियों के अवशेषों, मृत शरीरों एवं जैव अपशिष्टों का साधारण अकार्बनिक यौगिकों में अपघटन करके पौधों के लिए उपयोगी बनाते हैं, अपघटक (अपमार्जक) कहलाते हैं।”

अपमार्जकों (अपघटकों) की अनुपस्थिति का पारितन्त्र पर प्रभाव:
अगर पारितन्त्र से अपघटक अनुपस्थित हो जाएँ तो जैव निम्नीकरणीय पदार्थों और अपशिष्टों का अपघटन नहीं होगा और पारितन्त्र में उनकी मात्रा इतनी बढ़ जायेगी कि उनका निस्तारण करना असम्भव हो जायेगा। इससे पर्यावरण प्रदूषित होगा अर्थात् अपशिष्टों का पुनर्चक्रण रुक जायेगा।

प्रश्न 21.
अपने दैनिक जीवन के चार ऐसे क्रियाकलापों का वर्णन कीजिए जो पारितन्त्र मैत्रीय हों।
उत्तर:

  1. जैव निम्नीकरणीय एवं अजैव निम्नीकरणीय अपशिष्टों को पृथक्-पृथक् रखना जिससे उनका आसानी से निपटारन हो सके।
  2. घरों में पेड़-पौधे लगाना, किचन गार्डन में फल-सब्जी उगाना तथा सड़कों के सहारे वृक्षारोपण करना।
  3. प्लास्टिक एवं पॉलीथीन की थैलियों एवं अन्य वस्तुओं के स्थान पर कपड़े एवं कागज के बने थैले तथा पत्तों से बने पत्तल, दोनों एवं मिट्टी के बने कुल्लड़-सकोरों को उपयोग में लाना।
  4. उर्वरकों के स्थान पर कम्पोस्ट एवं वर्मी कम्पोस्ट खाद का उपयोग करना। (5) वर्षा जल संग्रहण करना।

प्रश्न 22.
आहार जाल (खाद्य जाल) एवं आहार श्रृंखला (खाद्य शृंखला) के दो अन्तर लिखिए।
उत्तर:

आहार जाल (खाद्य जाल)आहार श्रृंखला (खाद्य श्रृंखला)
आहार जाल अनेक आहार श्रृंखलाओंCका कम संकलन है जो आपस में गुथी होती है।आहार श्रृंखला एक जीवों की श्रृंखला है जो अपने पोषण के लिए एक-दूसरे पर निर्भर होते हैं।
उच्चतर पोषी स्तर के सदस्य अपने नीचे के पोषी स्तर की किसी अन्य श्रृंखला के सदस्य जीव द्वारा पोषण प्राप्त कर सकते हैं।उच्चतर पोषी स्तर के जीव अपने से निम्न पोषी स्तर के किसी विशेष सदस्य जीव से पोषण प्राप्तकर सकते हैं।

प्रश्न 23.
कृषिकर्म के क्रियाकलापों से पर्यावरण पर पड़ने वाले हानिकारक प्रभावों का वर्णन कीजिए।
उत्तर:
कृषिकर्म के क्रियाकलापों का पर्यावरण पर हानिकारक प्रभाव –

  1. उर्वरकों का अत्यधिक प्रयोग मृदा की गुणवत्ता को समाप्त कर देता है तथा कृषि के लिए उपयोगी सूक्ष्मजीवियों का वध कर देती है।
  2. पीड़कनाशक आदि अजैव निम्नीकरणीय रसायनों का अत्यधिक उपयोग जैव संवर्धन को बढ़ावा देता है।
  3. अत्यधिक फसल उत्पादन मृदा की उर्वरक क्षमता का ह्रास करता है।
  4. कृषि के लिए अत्यधिक जमीनी जल का उपयोग जल स्तर को गिराता है।
  5. प्राकृतिक पारितन्त्र एवं आवास को हानि पहुँचाता है।

MP Board Class 10th Science Chapter 15 दीर्घ उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 1.
आपके घर में प्रतिदिन उत्पन्न होने वाले अपशिष्टों के नाम लिखिए। आप उनके निस्तारण के लिए क्या उपाय अपनाएँगे?
उत्तर:
घरों में प्रतिदिन उत्पन्न (पैदा होने वाले) अपशिष्ट निम्न प्रकार के हैं –

  1. रसोईघर के अपशिष्ट।
  2. कागज के अपशिष्ट; जैसे-अखबार, कॉपी-किताब, लिफाफे, थैलियाँ आदि।
  3. पॉलीथीन या प्लास्टिक की थैलियाँ, गिलास, प्लेट, कटोरियाँ एवं चम्मच आदि।
  4. फल एवं तरकारियों की छीलन तथा उनके अन्य अपशिष्ट।

उनके निस्तारण के उपाय एवं सावधानियाँ:

  1. जैव निम्नीकरणीय एवं अजैव निम्नीकरणीय अपशिष्टों का पृथक्-पृथक् संचय करना जिससे उनके निस्तारण में आसानी हो।
  2. पॉलीथीन एवं प्लास्टिक की थैलियाँ एवं अन्य वस्तुओं का सुरक्षापूर्वक निस्तारण के लिए उन्हें पुनर्चक्रण के लिए दे देंगे।
  3. फल एवं तरकारियों के छिलके, छीलन एवं अन्य अवशेषों को पौधों में डालना ताकि उनका उपयोग खाद के रूप में हो सके जो पौधों को पोषक तत्व उपलब्ध करा सके।
  4. कागज के अखबार, कापियाँ एवं पुस्तकों तथा अन्य अप्रयुक्त कागज उत्पादों को पुनर्चक्रण के लिए दे देंगे।
  5. रसोईघर के अपशिष्टों के निपटान (निस्तारण) के लिए कम्पोस्ट गड्डे का निर्माण करेंगे।

प्रश्न 2.
पर्यावरणीय समस्याएँ क्या-क्या हैं? लिखिए।
उत्तर:
प्रमुख पर्यावरणीय समस्याएँ-प्रमुख पर्यावरणीय समस्याएँ निम्न हैं –

  1. वायु, जल, मृदा एवं ध्वनि के प्रदूषण की समस्याएँ।
  2. मरुस्थल, भूस्खलन, बाढ़, नदियों के मार्ग में परिवर्तन, मृदा अपरदन की समस्याएँ।
  3. प्राणी एवं पादप जातियों के विलोपन के कारण जंगलों के विनाश की समस्या।
  4. लवणों के कारण मरुस्थल बनने अर्थात् लवणीकरण की समस्या।
  5. कचरे के जमाव एवं उसके निस्तारण की समस्या।
  6. प्राकृतिक संसाधनों के ह्रास की समस्या।
  7. ग्लोबल वार्मिंग एवं ग्रीन हाउस के प्रभाव की समस्या।
  8. ओजोन परत के पतले होने तथा उसमें छेद होने की समस्या।

प्रश्न 3.
अम्ल वर्षा का पर्यावरण पर क्या प्रभाव पड़ता है?
उत्तर:
अम्ल वर्षा का पर्यावरण पर प्रभाव:

  1. धरती का हरा-भरा आवरण नष्ट हो जाता है।
  2. पेड़-पौधों की जड़ें सिकुड़ने लगती हैं।
  3. पेड़-पौधों की रोग प्रतिरोधक क्षमता नष्ट हो जाती है।
  4. पेड़-पौधों की पत्तियाँ झड़ जाती हैं।
  5. मृदा की अम्लीयता बढ़ जाती है तथा उसकी उर्वरा शक्ति नष्ट हो जाती है।
  6. सभी जैविक क्रियाएँ मन्द पड़ जाती हैं।
  7. खड़ी फसलें नष्ट हो जाती हैं।
  8. पेयजल प्रदूषित हो जाता है।
  9. मनुष्य की त्वचा एवं आँखों में जलन होने लगती है तथा श्वसन रोग हो जाते हैं।
  10. ऐतिहासिक महत्व के भवनों (जैसे ताजमहल) पर दुष्प्रभाव पड़ता है।

प्रश्न 4.
पर्यावरण हेतु जागरूकता पर एक निबन्ध लिखिए।
उत्तर:
पर्यावरण हेतु जागरूकता:
दिन-प्रतिदिन पर्यावरण असन्तुलित होता जा रहा है जिससे मानव जीवन एवं जन्तुओं तथा पेड़-पौधों का जीवन संकट में पड़ सकता है। अतः इसके संरक्षण की महती आवश्यकता है। लेकिन यह कार्य एक अकेले के बूते का नहीं है। शासन-प्रशासन भी इस कार्य को पूर्ण रूप से करने में सक्षम नहीं, जब तक कि जन-जन इसके लिए जागरूक नहीं होगा। जन-जागृति के लिए तथा मनुष्यों में जागरूकता पैदा करने के लिए उन क्षेत्रों की जानकारी होना आवश्यक है जिनमें उन्हें जागरूक करना है और वे निम्न हैं –

  1. जनसंख्या वृद्धि: जनसंख्या वृद्धि से प्रदूषण की समस्या बढ़ती है, संसाधनों का अधिकाधिक दोहन होता है। इसलिए इस पर नियन्त्रण आवश्यक है।
    संसाधनों का समुचित प्रयोग: संसाधन सीमित हैं अतः उनका विवेकपूर्ण एवं मितव्ययिता के साथ उपयोग करना आवश्यक है तथा उन्हें लम्बे समय तक बनाये रखना है।
  2. प्रदूषण के प्रति सचेत करना: प्रदूषण से नाना प्रकार की असाध्य बीमारियाँ पैदा होती हैं। सबसे ज्यादा प्रदूषण मनुष्य के क्रियाकलापों से होता है।
  3. अतः इसके प्रति सचेत करना आवश्यक है। उन्हें प्रदूषणों के कारणों, उनके दुष्परिणामों एवं उनसे निदान के सम्बन्ध में बताना है।
  4. संरक्षण के प्रति जागरूकता: प्राकृतिक संसाधनों के प्रति उन्हें जागरूक बनाना है कि वे उन संसाधनों का अति दोहन न करें बल्कि उन्हें संरक्षित करें।
  5. आदतों में सुधार: मनुष्य के अन्दर मितव्ययिता की प्रवृत्ति को बढ़ाना है जिससे वे संसाधनों के अपव्यय को रोक सकें क्योंकि ऊर्जा बचाना, ऊर्जा पैदा करने के समान होता है।
  6. उपर्युक्त सभी क्षेत्रों में जागरूकता लाकर पर्यावरण को संरक्षित किया जा सकता है। इसके लिए पर्यावरण शिक्षा महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।
  7. प्रारम्भ से ही बच्चों के पाठ्यक्रम में पर्यावरण पर पाठ्य सामग्री होना आवश्यक है।
  8. पर्यावरण के प्रति जागरूकता के लिए प्रतियोगिताएँ (निबन्ध, वाद-विवाद, पोस्टर), सेमीनार, कार्यशालाएँ एवं प्रदर्शन रैली आयोजित करना अधिक कारगर होगा।

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