MP Board Class 6th Social Science Solutions Chapter 5 सौरमण्डल में हमारी पृथ्वी

MP Board Class 6th Social Science Solutions Chapter 5 सौरमण्डल में हमारी पृथ्वी

MP Board Class 6th Social Science Chapter 5 पाठान्तर्गत प्रश्नोत्तर

(अ) पाठ्य पुस्तक पृष्ठ संख्या 21 – 22 पर दी गई तालिका का अध्ययन कर लिखिए:
1. सौर परिवार का मुखिया …………… है।
2. ग्रह जिस पर पूर्ण जीवन है …………….. है।
3. सूर्य के सबसे निकट वाला ग्रह …………. है।
4. पीले रंग का सबसे बड़ा ग्रह ……………….. है।
5. पृथ्वी ग्रह का उपग्रह
उत्तर:
1. सूर्य
2. पृथ्वी
3. बुध
4. बृहस्पति
5. चन्द्रमा।

(ब) नीचे दी गई सारणी में उपयुक्त जानकारी भरें:
उत्तर:
MP Board Class 6th Social Science Solutions Chapter 5 सौरमण्डल में हमारी पृथ्वी

MP Board Class 6th Social Science Chapter 5 अभ्यास प्रश्न

प्रश्न 1.
निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर संक्षेप में लिखिए –
(अ) सूर्य में ऊर्जा कैसे पैदा होती है ?
उत्तर:
सूर्य कई ज्वलनशील गैसों का जलता हुआ पिण्ड है जिसमें हाइड्रोजन, हीलियम आदि प्रमुख हैं जो निरन्तर जलती रहती है। इनसे ही सूर्य में ऊर्जा उत्पन्न होती है।

(ब) पृथ्वी के तीन परिमण्डल कौन-कौन से हैं ?
उत्तर:
पृथ्वी के तीन परिमण्डल हैं-वायुमण्डल, जलमण्डल और स्थलमण्डल।

(स) सूर्य के महत्त्व को समझाइए।
उत्तर:
सूर्य ऊर्जा का एक प्रमुख स्रोत है। यह सभी ग्रहों और उपग्रहों का प्रमुख है। सभी इसकी परिक्रमा करते हैं और इसके ही प्रकाश से प्रकाशित होते हैं। यदि सूर्य न हो तो हम किसी भी प्रकार के जीवन की कल्पना नहीं कर सकते।

(द) सौरमण्डल के ग्रहों के नाम लिखिए।
उत्तर:
ग्रह संख्या में आठ हैं जिनके नाम निम्नलिखित हैं-बुध, शुक्र, पृथ्वी, मंगल, बृहस्पति, शनि, यूरेनस (अरुण), और नेपच्यून (वरुण)।

(य) ग्रह एवं तारे में क्या अन्तर है ? लिखिए।
उत्तर:
तारा और ग्रह में अन्तर:

  • तारों की अपनी ऊष्मा होती है और वे अपने ही प्रकाश से चमकते हैं, जबकि ग्रह सूर्य के प्रकाश से चमकते हैं।
  • तारों की चमक स्थिर नहीं होती, जबकि ग्रहों की चमक स्थिर रहती है।
  • आकाश में तारे स्थिर रहते हैं, जबकि ग्रह अपना स्थान बदलते रहते हैं।

(र) कौन-सी गैस हमारी जीवन रक्षक है ?
उत्तर:
ओजोन गैस हमारी जीवन रक्षक है। वायुमण्डल में स्थित ओजोन गैस की परत सूर्य की पराबैंगनी जैसी घातक किरणों से हमारी रक्षा करती है। यदि ओजोन परत नहीं होती तो सारे जीव और वनस्पति नष्ट हो जाते।

(ल) पृथ्वी पर पाई जाने वाली तीन महत्त्वपूर्ण गैसों के नाम लिखिए। इनमें जीवनदायिनी गैस कौन-कौन सी है ?
उत्तर:
पृथ्वी पर पाई जाने वाली तीन महत्त्वपूर्ण गैसें हैं-ऑक्सीजन, नाइट्रोजन और कार्बन डाइ-ऑक्साइड। इनमें से ऑक्सीजन गैस जीवनदायिनी है।

(व) ग्रह एवं उपग्रह में अन्तर बताइए।
उत्तर:
ग्रह और उपग्रह में अन्तर –

  • ग्रह सूर्य की परिक्रमा करते हैं, जबकि उपग्रह अपने ग्रहों की परिक्रमा करते हैं।
  • सौरमण्डल में ग्रहों की संख्या आठ है, जबकि उपग्रह संख्या में 44 हैं।
  • उपग्रहों की तुलना में ग्रह आकार में बड़े होते हैं।

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प्रश्न 2.
निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर विस्तार से लिखिए
(अ) सौरमण्डल किसे कहते हैं ? सौरमण्डल के ग्रहों को चित्र सहित नामांकित कीजिए।
उत्तर:
सूर्य, सभी ग्रहों और उपग्रहों से मिलकर सौरमण्डल बना होता है। इसी ‘सौरमण्डल’ को सौर परिवार भी कहते हैं।

सौरमण्डल के ग्रहों का चित्र सहित वर्णन –
(1) सूर्य-सूर्य का अपना ही प्रकाश और गर्मी होती है। यह एक तारा है। सभी ग्रह सूर्य की ही आकर्षण शक्ति से एक-दूसरे से बँधे रहते हैं और सूर्य की परिक्रमा करते हैं। सभी ग्रहों तथा उपग्रहों को ऊष्मा व प्रकाश सूर्य से ही मिलता है।

(2) ग्रह – ग्रह संख्या में आठ होते हैं, जो निम्नलिखित हैं –

  • बुध – बुध सूर्य के सबसे अधिक पास का ग्रह है। इसका कोई उपग्रह नहीं है। सूर्य की परिक्रमा करने में इसे 88 दिन का समय लगता है।
  • शुक्र – इसका कोई उपग्रह नहीं होता तथा आकार में पृथ्वी के बराबर होता है। यह 225 दिन में सूर्य की परिक्रमा करता है।
  • पृथ्वी – इसका उपग्रह चन्द्रमा होता है। सूर्य की परिक्रमा पूरी करने में इसे 365 7 दिन का समय लगता है। इस ग्रह पर जीवन पाए जाने के कारण इसे जीवित ग्रह भी कहते हैं।
  • मंगल – इसके दो उपग्रह हैं। यह 687 दिन में सूर्य की परिक्रमा पूरी कर लेता है।
  • बृहस्पति – यह सभी ग्रहों में बड़ा है। इसके 12 उपग्रह हैं। सूर्य की परिक्रमा यह 11 वर्ष 9 महीने में पूरी करता है।
  • शनि – इसके 20 उपग्रह हैं। सूर्य की परिक्रमा पूरी करने में इसे 29 वर्ष 5 माह का समय लगता है। यह सौरमण्डल का दूसरा सबसे बड़ा ग्रह है।
  • अरुण (यूरेनस) – यह सूर्य की परिक्रमा 84 वर्ष में पूरी करता है।
  • वरुण (नेपच्यून) – इसके 8 उपग्रह हैं। यह 165 वर्ष में सूर्य की परिक्रमा करता है।

MP Board Class 6th Social Science Solutions Chapter 5 सौरमण्डल में हमारी पृथ्वी img 2

(ब) पृथ्वी एक अनोखा व जीवित ग्रह कैसे है ? समझाइए।
उत्तर:
पृथ्वी सौरमण्डल का एक महत्त्वपूर्ण सदस्य है। सौर मण्डल ही नहीं बल्कि पूरे ब्रह्माण्ड में केवल पृथ्वी ही एकमात्र ऐसा ग्रह है जिस पर जीवन पाया जाता है। इसलिए इसे अनोखा और जीवित ग्रह कहते हैं।

निम्नलिखित कारणों से भी यह अनोखा व जीवित ग्रह है –

  • पृथ्वी पर जल ठोस, तरल और गैसीय अवस्था में मिलता है। यहाँ जल की उपलब्धता से जीवन का विकास हुआ है।
  • पृथ्वी पर जीवनदायिनी गैस ऑक्सीजन पर्याप्त मात्रा में पाई जाती है जो किसी भी प्रकार के जीवन के लिए आवश्यक है।
  • पृथ्वी पर वायुमण्डल, जलमण्डल और स्थलमण्डल का विस्तार है, तीनों का आपस में उचित सन्तुलन बना हुआ है। इसके अलावा पृथ्वी पर 12-12 घण्टे वाले दिन रात की आदर्श अवधि भी यहाँ जीवन के विकास में सहायक है।

(स) प्राकृतिक व कृत्रिम उपग्रह किसे कहते हैं ? पृथ्वी के प्राकृतिक उपग्रह का वर्णन कीजिए।
उत्तर:
वे आकाशीय पिण्ड जो अपने ग्रहों की परिक्रमा करने के साथ सूर्य की परिक्रमा भी करते हैं प्राकृतिक उपग्रह कहलाते हैं जबकि मानव द्वारा निर्मित छोटे और अस्थायी ग्रह कृत्रिम उपग्रह कहलाते हैं। पृथ्वी का प्राकृतिक उपग्रह चन्द्रमा है। यह आकार में पृथ्वी का 1 / 4 है। पृथ्वी से इसकी औसत दूरी 3 लाख 84 हजार किलोमीटर है। यह पृथ्वी की परिक्रमा 30 दिनों में पूरी करता है। यह सूर्य से प्रकाशित होता है।

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प्रश्न 3.
निम्नलिखित प्रत्येक वाक्य का एक-एक पारिभाषिक शब्द बताइए
(अ) सारे पदार्थों, सारी आकाशगंगाओं, सारी ऊर्जा तथा अन्तरिक्ष का अन्तहीन समूह।
उत्तर:
ब्रह्माण्ड

(ब) वह दूरी जिसे प्रकाश तीन लाख किमी प्रति सेकण्ड के वेग से एक वर्ष में तय करता है।
उत्तर:
प्रकाश वर्ष

(स) तारों भरे आकाश में बादलों जैसी दूधिया पट्टी।
उत्तर:
आकाश गंगा

(द) मंगल और बृहस्पति के बीच सौरमण्डल में छोटे-छोटे असंख्य पिण्डों की पट्टी।
उत्तर:
क्षुद्र ग्रह।

प्रश्न 4.
सही जोड़ी बनाइएअ –
MP Board Class 6th Social Science Solutions Chapter 5 सौरमण्डल में हमारी पृथ्वी img 3
उत्तर:
(अ) (iv) प्रोक्सिमा सेन्चुरी
(ब) (v) बृहस्पति
(स) (ii) चन्द्रमा
(द) (iii) वरुण
(य) (i) बुध

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MP Board Class 8th Maths Solutions Chapter 2 एक चर वाले रैखिक समीकरण Ex 2.3

MP Board Class 8th Maths Solutions Chapter 2 एक चर वाले रैखिक समीकरण Ex 2.3

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प्रश्न 1.
निम्न समीकरणों को हल कीजिए और अपने उत्तर की जाँच कीजिए –
1. 3x = 2x + 18
2. 5t – 3 = 3t – 5
3. 5x + 9 = 5 + 3x
4. 4z + 3 = 6 + 2z
5. 2x – 1 = 14 – x
6. 8x + 4 = 3(x – 1) + 7
7. x = \(\frac{4}{5}\) (x + 10)
8. \(\frac{2x}{3}\) + 1 = \(\frac{7x}{15}\) +3
9. 2y + \(\frac{5}{3}\) = – y
10. 3m = 5m – \(\frac{8}{5}\)
हल:
1. 3x = 2x + 18
⇒ 3x – 2x = 18
(2x को बायीं ओर पक्षान्तर करने पर)
⇒ x = 18
जाँच: समीकरण में x = 18 रखने पर,
बायाँ पक्ष = 3x = 3 x 18 = 54
दायाँ पक्ष = 2x + 18 = 2 x 18 + 18
= 36 + 18 = 24
अतः x = 18 के लिए, बायाँ पक्ष = दायाँ पक्ष।

2. 2t – 3 = 3t – 5 – 3 को दायीं ओर तथा
-3 को बायीं ओर पक्षान्तर करने पर,
∴ 5t – 3t = – 5 + 3
2t = – 2
दोनों ओर 2 से भाग करने पर,
\(\frac{2t}{2}\) = \(\frac{-2}{2}\)
या t = – 1
जाँच: समीकरण में t = – 1 रखने पर,
बायाँ पक्ष = 5t – 3 = 5(-1) – 3 = – 5 – 3 = – 8
दायाँ पक्ष = 3t – 5 = 3(-1) – 5 = – 3 – 5 = – 8
अतः t = – 1 के लिए, बायाँ पक्ष = दायाँ पक्ष

3. 5x + 9 = 5 + 3x
या 5x – 3x = 5 – 9
(3x को बायीं ओर 9 को दायीं ओर पक्षान्तर करने पर)
या 2x = – 4
या \(\frac{2x}{2}\) = \(\frac{-4}{2}\)
(दोनों पक्षों को 2 से भाग करने पर)
या x = – 2
जाँच: समीकरण में x = – 2 रखने पर,
बायाँ पक्ष = 5x + 9= 5 (-2) +9 = – 10 + 9 = – 1
दायाँ पक्ष = 5 + 3x = 5 + 3 x (-2)= 5 – 6 = – 1
अतः x = – 2 के लिए, बायाँ पक्ष = दायाँ पक्ष।

4. 4z + 3 = 6 + 2z
या 4z – 2z = 6 – 3
(3 को दायीं ओर और 6 को बायीं ओर पक्षान्तर करने पर)
या 2z = 3
या \(\frac{2z}{2}\) = \(\frac{3}{2}\)
(दोनों पक्षों को 2 से भाग करने पर)
या x = \(\frac{3}{2}\)
जाँच: समीकरण में z = 3/2 रखने पर,
बायाँ पक्ष = 4z + 3 = 4 x \(\frac{3}{2}\) + 3 = 6 + 3 = 9
दायाँ पक्ष = 6 + 2x = 6 + 2 x \(\frac{3}{2}\) = 6 + 3 = 9.
अतः z = 3/2 के लिए, बायाँ पक्ष = दायाँ पक्ष।

5. 2x – 1 = 14 – x
2x + x = 14+1
(-1 को दायीं ओर तथा –x को बायीं ओर पक्षान्तर करने पर)
या 3x = 15
या \(\frac{3x}{3}\) = \(\frac{15}{3}\)
(दोनों पक्षों को 3 से भाग करने पर)
या x = 5
जाँच: समीकरण में x = 5 रखने पर,
बायाँ पक्ष = 2x – 1 = 2 x 5 – 1 = 10 – 1 = 9
दायाँ पक्ष = 14 – x = 14 – 5 = 9
अतः x = 5 के लिए, बायाँ पक्ष = दायाँ पक्ष।

6. 8x+ 4 = 3(x – 1) + 7
या 8x + 4 = 3x – 3 + 7
या 8x + 4 = 3x + 4
या 8x – 3x = 4 – 4
(3x को बायीं ओर और 4 को दायीं ओर पक्षान्तर करने पर)
या 5x = 0 ⇒ \(\frac{5x}{5}\) = \(\frac{0}{5}\)
(दोनों ओर 5 से भाग करने पर)
या x = 0
जाँच: समीकरण में x = 0 रखने पर,
बायाँ पक्ष = 8x + 4 = 0 = 8 x 0 + 4 = 0 + 4 =4
दायाँ पक्ष = 3(x – 1) + 7 = 3(0 – 1) + 7 = – 3 + 7 = 4
अतः x = 0 के लिए, बायाँ पक्ष = दायाँ पक्ष।

7. x = \(\frac{4}{5}\) (x + 10)
या 5x = 4(x + 10)
(दोनों ओर 5 से गुणा करने पर)
या 5x = 4x + 40
या 5x – 4x = 40
(4x का पक्षान्तर करने पर)
या x = 40
जाँच: समीकरण में x = 40 रखने पर,
बायाँ पक्ष = x = 40
दायाँ पक्ष = \(\frac{4}{5}\) (x + 10) = \(\frac{4}{5}\)(40 + 10) = \(\frac{4×5}{+5}\) = 40
अतः x = 40 के लिए, बायाँ पक्ष = दायाँ पक्ष।

8. \(\frac{2x}{3}\) + 1 = \(\frac{7x}{15}\) + 3
दोनों पक्षों को 15 से गुणा करने पर,
MP Board Class 8th Maths Solutions Chapter 2 एक चर वाले रैखिक समीकरण Ex 2.3 img-1
या 10x + 15 = 7x + 45
या 10x – 7x = 45 – 15
(7x तथा 15 को पक्षान्तर करने पर)
या 3x = 30
या \(\frac{3x}{3}\) = \(\frac{30}{3}\)
(दोनों ओर 3 से भाग करने पर)
या x = 10
जाँच: समीकरण में x = 10 रखने पर,
MP Board Class 8th Maths Solutions Chapter 2 एक चर वाले रैखिक समीकरण Ex 2.3 img-2
अत: x = 10 के लिए, बायाँ पक्ष = दायाँ पक्ष।

9. 2y + \(\frac{5}{3}\) = \(\frac{26}{3}\) – y
या 2y + y = \(\frac{26}{3}\) – \(\frac{5}{3}\)
(\(\frac{5}{3}\) तथा – y को पक्षान्तर करने पर)
MP Board Class 8th Maths Solutions Chapter 2 एक चर वाले रैखिक समीकरण Ex 2.3 img-3
(दोनों ओर 3 से भाग करने पर)
या y = \(\frac{7}{3}\)
जाँच: समीकरण में y = \(\frac{7}{3}\) रखने पर
MP Board Class 8th Maths Solutions Chapter 2 एक चर वाले रैखिक समीकरण Ex 2.3 img-4
अतः y = \(\frac{7}{3}\) के लिए, बायाँ पक्ष = दायाँ पक्ष।

10. 3m = 5 – \(\frac{8}{5}\)
या 3m – 5m = \(-\frac{8}{5}\)
(5m को पक्षान्तर करने पर) – 2m = – 3
या – 2m = \(-\frac{8}{5}\)
या \(\frac{-2m}{-2}\) = \(\frac{-8}{5(-2)}\)
(दोनों ओर – 2 भाग करने पर)
या m = \(\frac{4}{5}\)
जाँच: समीकरण में m = \(\frac{4}{5}\) रखने पर,
बायाँ पक्ष = 3m = 3 x \(\frac{4}{5}\) = \(\frac{12}{5}\)
MP Board Class 8th Maths Solutions Chapter 2 एक चर वाले रैखिक समीकरण Ex 2.3 img-5
अतः m = \(\frac{4}{5}\) के लिए, बायाँ पक्ष = दायाँ पक्ष।

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MP Board Class 6th Social Science Solutions Chapter 4 पारस्परिक निर्भरता

MP Board Class 6th Social Science Solutions Chapter 4 पारस्परिक निर्भरता

MP Board Class 6th Social Science Chapter 4 पाठान्तर्गत प्रश्नोत्तर

प्रश्न 1.
गाँव और शहरों द्वारा उत्पादित / तैयार वस्तुओं की सूची बनाइए।
उत्तर
MP Board Class 6th Social Science Solutions Chapter 4 पारस्परिक निर्भरता img 1

MP Board Class 6th Social Science Chapter 4 अभ्यास प्रश्न

प्रश्न 1.
निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर संक्षेप में लिखिए
(1) प्राचीन काल में मनुष्य की आवश्यकताएँ कैसी थीं?
उत्तर:
प्राचीन काल में मनुष्य की आवश्यकताएँ बहुत सीमित थीं। इनकी पूर्ति वह स्वयं कर लेता था।

(2) मनुष्य की मूलभूत आवश्यकताएँ क्या हैं ?
उत्तर:
भोजन, कपड़ा, आवास मनुष्य की मूलभूत आवश्यकताएँ हैं।

(3) अनाज, सब्जी व फल कहाँ उत्पादित होते हैं ?
उत्तर:
अनाज, सब्जी व फल अधिकतर गाँवों में उत्पादित होते हैं।

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प्रश्न 2.
निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर विस्तार से लिखिए
(अ) पारस्परिक निर्भरता किसे कहते हैं ? बताइए।
उत्तर:
किसी कार्य अथवा आवश्यकता के लिए एक-दूसरे पर निर्भर होना पारस्परिक निर्भरता कहलाता है। जैसे-शहर के लोग गाँव के लोगों द्वारा उत्पादित वस्तुएँ (अनाज, सब्जियाँ, फल आदि) के लिए गाँवों पर निर्भर रहते हैं, इसी प्रकार गाँव के लोग भी शहर में स्थापित कारखानों में बनी वस्तुओं के लिए उन पर निर्भर रहते हैं।

(ब) पारस्परिक निर्भरता की आवश्यकता क्यों पड़ती है ? दो देशों के मध्य पारस्परिक निर्भरता को उदाहरण देकर समझाइए।
उत्तर:
अपनी आवश्यकताओं एवं रुचियों की पूर्ति के लिए व्यक्ति को पारस्परिक निर्भरता की आवश्यकता होती है। इसी प्रकार किसी एक देश में सभी आवश्यकता की चीजें उपलब्ध नहीं होती या कम मात्रा में होती हैं, इसलिए उन्हें दूसरे देशों से मँगाना पड़ता है। हम भारत का ही उदाहरण लें तो यहाँ पेट्रोलियम पदार्थ (पेट्रोल, डीजल, मिट्टी का तेल), सेना के उपयोग के लिए आधुनिक उपकरण, हथियार आदि दूसरे देशों से मँगाये जाते हैं। भारत से मसाले, चाय, सीमेण्ट, तैयार कपड़े आदि दूसरे देशों को भेजे जाते हैं।

(स) नागरिक जीवन में परस्पर निर्भरता का क्या महत्त्व है?
उत्तर:
सामाजिक जीवन आपसी सहयोग पर निर्भर करता है। सभी नागरिक एक साथ मिलकर रहते हैं और एक-दूसरे की मदद करते हैं। इससे सामाजिक जीवन बेहतर और सुविधाजनक हो जाता है। यही नागरिक जीवन में परस्पर निर्भरता का महत्त्व है।

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प्रश्न 3.
रिक्त स्थानों की पूर्ति कीजिए
(अ) हमारा नागरिक जीवन परस्पर ………….. और …………. पर निर्भर करता है।
(ब) एक क्षेत्र में सभी तरह की ………… नहीं उगायी जातीं।
उत्तर:
(अ) सहयोग, कर्त्तव्य पालन
(ब) फसलें।

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MP Board Class 6th Social Science Solutions Chapter 2 आदिमानव

MP Board Class 6th Social Science Solutions Chapter 2 आदिमानव

MP Board Class 6th Social Science Chapter 2 पाठान्तर्गत प्रश्नोत्तर

प्रश्न 1.
पाठ्य पुस्तक पृष्ठ संख्या 6 पर दिये गये देखो और नीचे बनी तालिका को भरो।
उत्तर:
MP Board Class 6th Social Science Solutions Chapter 2 आदिमानव img 1

MP Board Class 6th Social Science Chapter 2 अभ्यास प्रश्न

1. निम्नलिखित प्रश्नों के संक्षेप में उत्तर लिखिए –
(अ) आदिमानव अपने औजार किससे बनाता था ?
उत्तर:
आदिमानव पत्थरों, लकड़ी तथा जानवरों की हड्डियों और सींगों से हथियार बनाता था। पत्थरों के हथियार अधिकतर चकमक पत्थरों से बनाए जाते थे। इन हथियारों में पत्थरों से बने हथौड़े, कुल्हाड़ियाँ तथा वसूले प्रमुख थे। आरम्भ में हथियार को बिना मूठ तथा हत्थे के ही काम में लाया जाता था। बाद में लकड़ी के हत्थों में बाँधकर इनका प्रयोग किया जाने लगा। आगे चलकर जब मनुष्य ने धातु की खोज कर ली तो वह धातु के हथियार बनाना भी सीख गया।

(ब) आदिमानव पत्थर के औजार किस-किस काम में लाते थे ?
उत्तर:
आदिमानव पत्थरों के औजारों का उपयोग जानवरों का शिकार करने, माँस काटने, लकड़ी काटने, कन्दमूल खोदने आदि के लिए करता था।

(स) मध्यप्रदेश के किन-किन जिलों में शैलचित्र मिलते हैं ?
उत्तर:
मध्यप्रदेश के रायसेन, होशंगाबाद, मन्दसौर आदि जिलों में शैलचित्र मिलते हैं।

(द) आदिमानव जानवरों से अपनी रक्षा किस तरह करता था ?
उत्तर:
सर्वप्रथम आदिमानव जानवरों से अपनी रक्षा करने के लिए पेड़ों पर रहता था। जब आदिमानव ने आग जलाना सीख लिया तब वह आग जलाकर जानवरों से रक्षा करने लगा। क्योंकि उसने जान लिया था कि जानवर आग से डरते हैं।

(य) आग की खोज कैसे हुई ? इससे आदिमानव को क्या लाभ हुए ?
उत्तर:
अनुमान है कि दो चकमक पत्थरों के आपस में टकराने से आग की चिंगारियाँ निकलीं जिससे पास ही पड़ी हुई पत्तियाँ जलने लगीं। इससे आदिमानव आग जलाना सीख गया। इस प्रकार आग की खोज संयोग से हुई। आदिमानव ने जब चकमक पत्थर की सहायता से आग जलाना सीख लिया तो वह रात के समय गुफा में आग जलाकर जंगली जानवरों से अपनी रक्षा करने लगा। उसने उजाला करना सीख लिया। आग में वह माँस भूनकर खाने लगा। इस प्रकार आग से उसे अनेक लाभ हुए।

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प्रश्न 2.
निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर विस्तार से दीजिए –
(अ) मानव का क्रमिक विकास बताइए।
उत्तर:
लाखों साल पहले इस पृथ्वी पर मानव का जन्म हुआ था। पहले मानव दोनों हाथों और दोनों पैरों पर चलता था और जंगलों में रहता था। वह पेड़ों की जड़ और फूल-पत्तियाँ खाता था। कुछ छोटे जानवरों को मारकर भी वह खा जाता था। धीरे-धीरे यह वानर जैसा मानव विकास करता गया और वह अपने शरीर को सन्तुलित कर दो पैरों पर चलने लगा।

अपने दोनों हाथों से उसने खोदने, पकड़ने और उठाने का काम सीख लिया। शारीरिक परिवर्तनों के साथ उसके सोचने-समझने की शक्ति भी विकसित होने लगी। वह अपनी मूलभूत जरूरतों जैसे भोजन, आवास और सुरक्षा के बारे में सोचने लगा। वह भोजन इकट्ठा करने लगा और उसने पत्थर के औजार भी बना लिए। इस प्रकार मानव का विकास होता गया। यहाँ तक का उसके विकास का युग पुरा पाषाण युग कहलाता है।

आगे चलकर उसने आग जलाना सीख लिया। वह माँस को भूनकर खाने लगा और आग से ही प्रकाश प्राप्त करने लगा। आदिमानव के विकास का यह युग मध्य पाषाण युग कहलाता है। धीरे-धीरे आदि मानव ने पशुपालन और कृषि करना सीख लिया। इससे उसका भोजन के लिए भटकना बन्द हो गया। उसने पहिये की खोज की और वह निरन्तर प्रगति करता गया। उसका यह विकास का युग नव पाषाण युग कहलाता है। यही मानव का क्रमिक विकास है।

(ब) मानव खेती करना और पशुपालन करना कैसे सीखा ? विस्तार से लिखिए।
उत्तर:
नव पाषाण युग से पहले आदिमानव भोजन की तलाश में यहाँ-वहाँ घूमता रहता था। नव पाषाण काल में उसने पशुपालन और खेती करने के प्रारम्भिक तरीकों की खोज कर ली थी। इसी कारण आदिमानव का भोजन की तलाश में यहाँ-वहाँ घूमना कम हो गया था। आदिमानव को यह समझ में आ गया था कि मानव और पशु – पक्षियों द्वारा फेंके हुए फलों के बीजों से नए पौधे उग आते हैं, यही खेती करने की कला उसकी एक महत्वपूर्ण खोज थी।

वह यह भी जान गया था कि शिकार के साथ – साथ पशुपालन उसके लिए महत्वपूर्ण है। वह अनेक पशुओं को पालने लगा था और उनसे काम भी लेने लगा था। शिकार करने में कुत्ते, खेती करने में बैल, दूध प्राप्त करने के लिए गाय, भैंस, बकरी, माँस प्राप्त करने के लिए बकरा, सवारी के लिए बैल, भैंसा, ऊँट, घोड़े का वह उपयोग करना सीख गया था।

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टिप्पणी लिखिए
प्रश्न 3.
(अ) आग की खोज।
उत्तर:
आग के बारे में मनुष्य को पहले कोई जानकारी नहीं थी। यद्यपि यह कहना कठिन है कि आग की खोज किस प्रकार हुई किन्तु यह अनुमान लगाया जाता है कि जब उसने पहली बार जंगल में सूखी लकड़ियों को आपस में तेज रगड़ खाकर आग लगते हुए एवं पत्थरों के औजारों के निर्माण के दौरान दो पत्थरों के आपस में टकराने से चिंगारियों को निकलते देखा होगा तो उसे आग का ज्ञान हुआ होगा। तब पहली बार मानव ने पत्थरों को आपस में टकराकर आग उत्पन्न की होगी। आग की खोज मनुष्य की सबसे बड़ी उपलब्धि है।

(ब) पहिए की खोज एवं उपयोग
उत्तर:
मानव की उन्नति में पहिए की खोज का महत्वपूर्ण स्थान है। ऐसा अनुमान है कि पेड़ के तने को लुढ़कते हुए देखकर आदिमानव के मन में पहिए के निर्माण का विचार आया होगा। यह खोज उसके जीवनयापन के लिए वरदान साबित हुई। पहिए का उपयोग उसने निम्नलिखित कार्यों के लिए किया –

  • चाक से मिट्टी के बर्तन बनाने में।
  • भारी चीज को एक जगह से दूसरी जगह लाने ले जाने में।
  • गहराई से पानी खींचने में।
  • पशुओं द्वारा खींची जाने वाली गाड़ी के निर्माण में।

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MP Board Class 6th Social Science Solutions Chapter 3 परिवार एवं समाज

MP Board Class 6th Social Science Solutions Chapter 3 परिवार एवं समाज

MP Board Class 6th Social Science Chapter 3 अभ्यास प्रश्न

प्रश्न 1.
निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर संक्षेप में लिखिए –
(अ) परिवार की इकाई क्या है?
उत्तर:
व्यक्ति परिवार की इकाई है।

(ब) समाज में व्यक्ति अपनी पहचान कैसे बनाता है?
उत्तर:
समाज में रहकर व्यक्ति राजनेता, धर्म प्रचारक, शिक्षक, डॉक्टर, जज, कृषक, श्रमिक आदि पदों पर रहकर विभिन्न कार्य करता है और समाज में अपनी पहचान बनाता है।

(स) बच्चे का प्रथम गुरु किसे माना गया है?
उत्तर:
बच्चे को प्रथम शिक्षा परिवार में माता से ही प्राप्त होती है इसलिए माता को प्रथम गुरु माना गया है।

(द) आपके परिवार में कितने सदस्य हैं ?
उत्तर:
इस प्रश्न का उत्तर विद्यार्थी स्वयं लिखें।

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प्रश्न 2.
निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर विस्तार से लिखिए
(अ) एकल परिवार और संयुक्त परिवार से आप क्या समझते हैं? आपका परिवार आपकी कौन-कौन सी आवश्यकताएँ पूरी करता है? सूची बनाइए।
उत्तर:
जिस परिवार में पति-पत्नी उनके पुत्र-पुत्रियाँ होते हैं वे एकल परिवार कहलाते हैं जबकि संयुक्त परिवार में पति-पत्नी, पुत्र-पुत्रियों के अलावा दादा-दादी, चाचा-चाची, ताऊ-ताई आदि भी शामिल होते हैं। परिवार में रहकर व्यक्ति अपनी समस्त मूलभूत आवश्यकताओं को पूरा करता है जिनमें प्रमुख हैं भोजन, वस्त्र, आवास, स्वास्थ्य, शिक्षा और सुरक्षा।

(ब) समाज कैसे बनता है ? आप समाज की किन-किन बुराइयों पर नियन्त्रण लगाना चाहते हैं ? लिखिए।
उत्तर:
समाजशास्त्रियों ने समाज को सामाजिक सम्बन्धों का जाल माना है। कई परिवारों से मिलकर समाज का निर्माण होता है। मनुष्य एक सामाजिक प्राणी है। इसलिए वह परिवार और समाज दोनों से जुड़कर रहता है। हम समाज की कम आयु में विवाह, अधिक बच्चों का जन्म, बच्चों को प्रारम्भिक एवं अनिवार्य  शिक्षा न दिलाना जैसी बुराइयों पर नियन्त्रण लगाना चाहते हैं।

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प्रश्न 3.
रिक्त स्थानों की पूर्ति कीजिए
(अ) अपने शिशुओं की जिम्मेदारी …………… सहज रूप से स्वीकारते हैं।
(ब) छोटे परिवारों को ………… माना गया है।
(स) परिवार की इकाई ………… होती है।
(द) समाज की इकाई ……….. होती है।
उत्तर:
(अ) माता – पिता
(ब) आदर्श परिवार
(स) व्यक्ति
(द) परिवार

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MP Board Class 8th Maths Solutions Chapter 2 एक चर वाले रैखिक समीकरण Ex 2.2

MP Board Class 8th Maths Solutions Chapter 2 एक चर वाले रैखिक समीकरण Ex 2.2

प्रश्न 1.
अगर आपको किसी संख्या से \(\frac{1}{2}\) घटाने और परिणम को \(\frac{1}{2}\) से गुणा करने पर \(\frac{1}{8}\) प्राप्त होता है तो वह संख्या क्या है?
हल:
मानाकि अभीष्ट संख्या x है।
अब, प्रश्नानुसार,
MP Board Class 8th Maths Solutions Chapter 2 एक चर वाले रैखिक समीकरण Ex 2.2 img-1
∴ अभीष्ट संख्या: \(\frac{3}{4}\)

प्रश्न 2.
एक आयताकार तरण ताल (swimming pool) की लम्बाई उसकी चौड़ाई के दुगुने से 2 मीटर अधिक है। यदि इसका परिमाप 154 मीटर है तो इसकी लम्बाई व चौड़ाई ज्ञात कीजिए।
हल:
मानाकि तरण ताल की चौड़ाई x मीटर है,
तब इसकी लम्बाई = (2x + 2) मीटर
परिमाप = 2 x (लम्बाई + चौड़ाई)
=2 x (2x + 2 + x)
= 2 x (3x + 2)
= 6x + 4
अब, प्रश्नानुसार
6x + 4 = 154
या 6x = 154 – 4 = 150
या x = \(\frac{150}{6}\) = 25
लम्बाई = (2 x 25 + 2) मीटर
= 52 मीटर
और चौड़ाई = 25 मीटर

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प्रश्न 3.
एक समद्विबाहु त्रिभुज का आधार \(\frac{4}{3}\) cm तथा उसका परिमाप 4 \(\frac{2}{15}\) cm है। उसकी दो बराबर भुजाओं की माप ज्ञात कीजिए।
हल:
माना कि समद्विबाहु त्रिभुज की प्रत्येक बराबर भुजा की माप x सेमी है। अतः इसका परिमाप = (x + x + \(\frac{4}{3}\)) सेमी
= (2x + \(\frac{4}{3}\))
सेमी
परन्तु, प्रश्नानुसार,
2x + \(\frac{4}{3}\) = 4 \(\frac{4}{3}\) = 4\(\frac{2}{15}\) = \(\frac{62}{15}\)
या 30x + 20 = 62
या 30x = 62 – 20 = 42
या x = \(\frac{42}{30}\) = \(\frac{7}{5}\)
या x = 1\(\frac{2}{5}\) सेमी
∴ समद्विबाहु त्रिभुज की बराबर भुजाओं में प्रत्येक भुजा की माप = 1\(\frac{2}{5}\) सेमी

प्रश्न 4.
दो संख्याओं का योग 95 है। यदि एक संख्या दूसरी से 15 अधिक है तो दोनों संख्याएँ ज्ञात कीजिए।
हल:
माना कि दो संख्याएँ x तथा x + 15 हैं।
तब x + (x + 15) = 95
या 2x + 15 = 95
दोनों ओर से 15 घटाने पर,
∴ 2x + 15 – 15 = 95 – 15
या 2x = 80
या x = 40
अतः एक संख्या 40 और दूसरी संख्या 40 + 15 = 55

प्रश्न 5.
दो संख्याओं में अनुपात 5 : 3 है। यदि उनमें अन्तर 18 है तो संख्याएँ ज्ञात कीजिए।
हल:
माना कि संख्याएँ 5x व 3x हैं।
अब, प्रश्नानुसार,
5x – 3x = 18
या 2x = 18
या x = \(\frac{18}{2}\) = 9
∴ संख्याएँ 5x = 5 x 9 = 45 तथा 3x = 3 x 9 = 27
अतः अभीष्ट संख्याएँ = 45 तथा 27

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प्रश्न 6.
तीन लगातार पूर्णांकों का योग 51 है। पूर्णांक ज्ञात कीजिए।
हल:
माना कि तीन लगातार पूर्णांक x, (x + 1) और (x + 2) हैं।
अब, प्रश्नानुसार,
x + (x + 1) + (x + 2) =51
या 3x + 3 = 51
या 3x = 51 – 3 = 48
या x = \(\frac{48}{3}\) = 16
अतः अभीष्ट पूर्णांक 16, 17 व 18 हैं।

प्रश्न 7.
8 के तीन लगातार गुणजों का योग 888 है। गुणजों को ज्ञात कीजिए?
हल:
माना कि तीन लगातार गुणज 8x, 8 (x + 1) व 8 (x + 2) हैं।
अब, प्रश्नानुसार,
8x + 8 (x + 1) + 8 (x + 2) = 888
या 24x + 24 = 888
या 24x = 888 – 24 = 864
या x = \(\frac{864}{24}\) = 36
अतः तीन लगातार गुणज 8 x 36, 8 (36 + 1) व 8 (36 + 2)
अर्थात् अभीष्ट तीन लगातार गुणज = 288, 296 व 304 हैं।

प्रश्न 8.
तीन लगातार पूर्णांक बढ़ते क्रम में लेकर उन्हें क्रमश: 2, 3 तथा 4 से गुणा कर योग करने पर योगफल 74 प्राप्त होता है। तीनों पूर्णांक ज्ञात कीजिए।
हल:
माना कि तीन लगातार पूर्णांक x, (x + 1) और (x + 2) हैं।
अब, प्रश्नानुसार,
2 × x + 3 (x + 1)+4 x (x + 2) = 74
या 2x + 3x + 3 + 4x + 8 = 74
या 9x + 11 = 74
या 9x = 74 – 11
या 9x = 63
या x = \(\frac{63}{9}\) = 7
अतः तीन अभीष्ट लगातार पूर्णांक = 7,8 व 9 हैं।

प्रश्न 9.
राहुल और हारून की वर्तमान आयु में अनुपात 5 : 7 है। 4 वर्ष बाद उनकी आयु का योग 56 वर्ष हो जाएगा। उनकी वर्तमान आयु क्या है?
हल:
माना कि राहुल की वर्तमान आयु = 5x वर्ष है
हारून की वर्तमान आयु = 7x वर्ष
चार वर्ष बाद राहुल की आयु (5x + 4) वर्ष
चार वर्ष बाद हारून की आयु = (7x + 4) वर्ष
अब, प्रश्नानुसार,
5x + 4 + 7x + 4 = 56
12x + 8= 56
8 को दायें पक्ष में पक्षान्तर करने पर,
12x = 56 – 8
या 12x = 48
या x = \(\frac{48}{12}\) = 4
∴ राहुल की आयु = 5 x 4 = 20 वर्ष
तथा हारून की आयु = 7 x 4 = 28 वर्ष

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प्रश्न 10.
किसी कक्षा में बालक और बालिकाओं की संख्याओं में अनुपात 7 : 5 है। यदि बालकों की संख्या बालिकाओं की संख्या से 8 अधिक है तो कक्षा में कुल कितने विद्यार्थी हैं?
हल:
मानाकि कक्षा में बालकों की संख्या = 7x
तथा बालिकाओं की संख्या = 5x
अब, प्रश्नानुसार,
या 7x = 5x + 8
या 7x – 5x = 8
या 2x = 8
x = \(\frac{8}{2}\) = 4
∴ बालकों की संख्या = 7 x 4 = 28
और बालिकाओं की संख्या = 5 x 4 = 20
अतः विद्यार्थियों की कुल संख्या = 28 + 20 = 48

प्रश्न 11.
बाइचुंग के पिताजी उसके दादा जी से 26 वर्ष छोटे हैं और उससे 29 वर्ष बड़े हैं। यदि उन तीनों की आयु का योग 135 वर्ष है तो उनकी आयु अलग-अलग ज्ञात कीजिए।
हल:
माना कि बाइचुंग की आयु = x वर्ष है
बायुचुंग के पिताजी की आयु = (x + 29) वर्ष
बाइचुंग के दादा जी की आयु = [(x + 29) + 26] वर्ष
= (x + 55) वर्ष
अब, प्रश्नानुसार,
x + (x + 29) + (x + 55) = 135
या 3x + 84 = 135
या 3x = 135 – 84
या 3x = 51
या x = \(\frac{51}{3}\) = 17
∴ बाइचुंग की आयु = 17 वर्ष,
उसके पिता की आयु = 17 + 29 = 46 वर्ष, तथा
उसके दादा जी की आयु = 17 + 55 = 72 वर्ष।

प्रश्न 12.
15 वर्ष बाद रवि की आयु उसकी वर्तमान आयु से चार गुनी हो जाएगी। रवि की वर्तमान आयु क्या है?
हल:
माना कि रवि की वर्तमान आयु = x वर्ष है।
∴ 15 वर्ष बाद रवि की आयु = x + 15 वर्ष
अब, प्रश्नानुसार,
x + 15 = 4x
या 4x = x + 15
या 4x – x = 15
या 3x = 15
या x = \(\frac{15}{3}\) = 5
अतः रवि की वर्तमान आयु = 5 वर्ष।

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प्रश्न 13.
एक परिमेय संख्या को \(\frac{5}{2}\) से गुणा कर \(\frac{2}{3}\) जोड़ने पर – \(\frac{7}{12}\) प्राप्त होता है। वह संख्या क्या है?
हल:
माना कि संख्या = x
अब, प्रश्नानुसार,
MP Board Class 8th Maths Solutions Chapter 2 एक चर वाले रैखिक समीकरण Ex 2.2 img-2
अत: अभीष्ट परिमेय संख्या = \(-\frac{1}{2}\)

प्रश्न 14.
लक्ष्मी एक बैंक में खजांची है। उसके पास नगदी के रूप में ₹ 100, ₹ 50, ₹ 10 वाले नोट हैं। उनकी संख्या में क्रमशः 2 : 3 : 5 का अनुपात है और उनका कुल मूल्य ₹4,00,000 है। उसके पास प्रत्येक प्रकार के कितने-कितने नोट हैं ?
हल:
माना कि ₹ 100, ₹ 50 तथा ₹ 10 वाले नोटों की संख्या क्रमश: 2x, 3x व 5x है।
₹ 100 वाले नोटों से कुल नगदी = 2x × 100 = ₹ 200x
₹ 50 वाले नोटों से कुल नगदी = 3x × 50 = ₹ 150x
₹ 10 वाले नोटों से कुल नगदी = 5x × 10 = ₹ 50x
अब, प्रश्नानुसार,
कुलधन = 200x + 150x + 50x = ₹ 4,00,000
∴ 200x + 150x + 50x = 4,00,000
या 400x = 400000
या x =\(\frac{4,00,000}{1000}\)
या x = 1000
अतः ₹ 100 के नोटों की संख्या = 2 x 1000 = 2000
₹ 50 के नोटों की संख्या = 3 x 1000 = 3000
₹ 10 के नोटों की संख्या = 5 x 1000 = 5000

प्रश्न 15.
मेरे पास ₹ 300 मूल्य के ₹ 1,₹ 2 और ₹ 5 वाले सिक्के हैं। ₹ 2 वाले सिक्कों की संख्या ₹ 5 वाले सिक्कों की संख्या की तिगुनी है और सिक्कों की कुल संख्या 160 है। मेरे पास प्रत्येक प्रकार के कितने-कितने सिक्के हैं
हल:
माना कि ₹ 5 वाले सिक्कों की संख्या =x
₹ 2 वाले सिक्कों की संख्या = 3x
और ₹ 1 वाले सिक्कों की संख्या = 160 – (x + 3x)
= 160 – 4x
अब, ₹ 5 वाले सिक्कों का मूल्य = 5 × x = ₹ 5x
₹ 2 वाले सिक्कों का मूल्य = 2 × 3x = ₹ 6x
₹ 1 वाले सिक्कों का मूल्य = 1 × (160 – 4x)
= ₹ (160 – 4x)
अब, प्रश्नानुसार
कुल धन = 5x + 6x + (160 – 4x) = ₹ 300
∴ 5x + 6x + 160 – 4x = 300
या 7x = 300 – 160 = 140
या x = \(\frac{140}{7}\) = 20
∴ ₹ 5 के सिक्कों की संख्या = 20
₹ 2 के सिक्कों की संख्या = 3 x 20 = 60
और ₹ 1 के सिक्कों की संख्या = 160 – (20 + 60) = 80

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प्रश्न 16.
एक निबन्ध प्रतियोगिता में आयोजकों ने तय किया कि प्रत्येक विजेता को ₹ 100 और विजेता को छोड़कर प्रत्येक प्रतिभागी को ₹ 25 पुरस्कार के रूप में दिए जाएँगे। यदि पुरस्कारों में बाँटी गई राशि ₹ 3,000 थी तो । कुल विजेताओं की संख्या ज्ञात कीजिए जबकि कुल 63 प्रतिभागी थे।
हल:
माना कि विजेताओं की संख्या = x है।
∴ शेष प्रतिभागियों की संख्या = (63 – x)
विजेताओं की दी गई धनराशि = 100 x x = ₹ 100x
प्रतिभागियों को बाँटी गई धनराशि = ₹ (63 – x) x 25
∴ कुल बाँटी गई धनराशि = 100x + 25 (63 – x)
= ₹ 3,000
∴ 100x + 25 (63 –x) = 3,000
या 4x + (63 –x) = 120
या 3x + 63 = 120
या 3x = 120 – 63 = 57
या x = \(\frac{57}{3}\) = 19
विजेताओं की संख्या = 19

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MP Board Class 6th Social Science Solutions Chapter 1 इतिहास जानने के स्रोत

MP Board Class 6th Social Science Solutions Chapter 1 इतिहास जानने के स्रोत

MP Board Class 6th Social Science Chapter 11 अभ्यास प्रश्न

प्रश्न 1.
नीचे लिखे प्रश्नों के उत्तर दीजिए –
(अ) इतिहास जानने के मुख्य स्रोत कौन-कौन से हैं ?
उत्तर:
इतिहास जानने के मुख्य स्रोत हैं – पाषाण उपकरण, जीवाश्म, मिट्टी के बर्तन, शिलालेख, सिक्के, हथियार, मन्दिर, महल, मस्जिद, भोजपत्र, ताम्रपत्र, ताड़पत्र, पुरातत्त्व तथा इतिहास की पुस्तकें आदि।

(ब) शैलचित्र क्या होते हैं व मध्यप्रदेश में वे कहाँ मिलते हैं?
उत्तर:
बहुत पहले लोग जब लिखना-पढ़ना नहीं जानते थे तब वे अपनी बात चित्र बनाकर कहते थे। खोज करने पर पता चला है कि ऐसे चित्र आदिमानव बनाया करते थे। आदि मानव काल में चित्र पहाड़ों की गुफाओं में बनाए जाते थे। इसलिए इस काल के चित्रों को शैलचित्र कहते हैं। मध्यप्रदेश में भोपाल के पास भीमबेटका के शैलचित्र आदिमानव काल के ही हैं। भीमबेटका विश्व का सबसे बड़ा शैलचित्र स्थल है।

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(स) भोजपत्र किसे कहते हैं ?
उत्तर:
भोजपत्र एक विशेष प्रकार के वृक्ष की छाल होती है जिस पर प्राचीन काल में लिखा जाता था।

(द) इतिहास का अध्ययन क्यों आवश्यक है ?
उत्तर:
इतिहास से हमें पुरानी बातों की जानकारी मिलती है। पहले लोगों का जीवन कैसा था तथा वे किस प्रकार रहते थे, उन्होंने आग जलाना कैसे सीखा, पहिए की खोज कब हुई ? ये सब बातें हम इतिहास से ही सीख सकते हैं। इतिहास को पढ़ने से हमें अपनी सभ्यता व संस्कृति की जानकारी मिलती है। इतिहास हमें राजा-महाराजा से लेकर जन-साधारण तक की जानकारी देता है। इतिहास से अनेक बातें सीखकर ही हम लगातार उन्नति कर सकते हैं।

(य) ऐतिहासिक धरोहरों की सुरक्षा हमें क्यों करनी चाहिए?
उत्तर:
ऐतिहासिक धरोहर हमें अपने अतीत, अपनी सभ्यता तथा संस्कृति की जानकारी देती है, इसलिए हमें इसकी सुरक्षा करनी चाहिए।

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प्रश्न 2.
रिक्त स्थानों की पूर्ति कीजिए –
(अ) ह्वेनसांग और फाह्यान …………….. यात्री थे।
(ब) भीमबेटका की खोज ……………… ने की थी।
(स) पुरानी वस्तुओं / स्थलों की खोज करने व उनके बारे में सही तथ्यों का पता लगाने वाले को ………….. कहते हैं।
उत्तर:
(अ) चीनी,
(ब) पद्मश्री डॉ. वि. श्री. वाकणकर
(स) पुरातत्त्ववेत्ता।

प्रश्न 3.
सही विकल्प चुनकर लिखिए।
(अ) ताम्रपत्र लिखे जाते हैं –
(i) पत्थरों पर,
(ii) ताँबे के पत्तरों पर
(iii) वृक्ष की छाल पर।
उत्तर:
(ii) ताँबे के पत्तरों पर

(ब) शिलालेख कहा जाता है –
(i) पत्थरों पर खोद कर लिखी जानकारी
(ii) किताबों में लिखी जानकारी
(iii) भोजपत्र पर लिखी जानकारी
उत्तर:
(i) पत्थरों पर खोद कर लिखी जानकारी

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(स) स्थापत्य कला से हमें ज्ञान होता है –
(i) भवनों का
(ii) चित्रों का
(iii) औजारों का।
उत्तर:
(i) भवनों का

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MP Board Class 10th Sanskrit Solutions Chapter 13 महाभारते विज्ञानम्

MP Board Class 10th Sanskrit Solutions Durva Chapter 13 महाभारते विज्ञानम् (गद्यम्) (सङ्कलितम्)

MP Board Class 10th Sanskrit Chapter 13 पाठ्यपुस्तक के प्रश्न

प्रश्न 1.
एकपदेन उत्तरं लिखत-(एक पद में उत्तर लिखिए)।
(क) महाभारतस्य प्रणयनं केन कृतम्? (महाभारत की रचना किसने की?)
उत्तर:
वेदव्यासेन (वेदव्यास के द्वारा)

(ख) जलं बिना किं न सम्भवम्? (जल के बिना क्या सम्भव नहीं?)
उत्तर:
जीवनम् (जीवन)

(ग) खगोलशास्त्रं कस्मिन् क्षेत्र प्रसिद्धम्? (खगोलशास्त्र किस क्षेत्र में प्रसिद्ध है?)
उत्तर:
कालगणनाक्षेत्रे (कालगणना के क्षेत्र में)

(घ) राजप्रासादादीनां निर्माणे कस्य उपयोगः भवति स्म? (राजमहल आदि के निर्माण में किसका उपयोग होता था?)
उत्तर:
अयसः (लोहे का)

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(ङ) केन दर्शनेन सूक्ष्मवस्तु बृहद् इव भासते? (किसके द्वारा देखने से छोटी वस्तु बड़ी लगती थी?)
उत्तर:
काचकेन (शीशे से)

प्रश्न 2.
एकवाक्येन उत्तरं लिखत-(एक वाक्य में उत्तर लिखिए-)
(क) शिष्यान् कथं परीक्षेत? (शियों की कैसे परीक्षा ली जानी चाहिए?)
उत्तर:
यथा शुद्धं कनकं तापच्छेदनिघर्षणैः परीक्ष्येत तथा शिष्यान् परीक्षेत।

(जैसे शुद्ध सोने को तपाकर, काटकर और घिसकर परखा जाता है वैसे ही शिष्यों की परीक्षा ली जानी चाहिए।)

(ख) आभरणस्वरूपेण कयोः उपयोगिता महाभारते वर्णितम्? (आभूषण रूप में किन की उपयोगिता महाभारत में वर्णित है?)
उत्तर:
आभरणस्वरूपेण सुवर्णरजतयोः उपयोगिता महाभारते वर्णितम्। (आभूषण के रूप में सोने और चाँदी का उपयोग महाभारत में वर्णित है।)

(ग) जनाः सुगन्धद्रव्याणां निर्माणार्थं कस्य उपयोगः कुर्वन्ति स्म? (लोग सुगन्ध द्रव्यों को बनाने के लिए किसका उपयोग करते थे?)
उत्तर:
जनाः सुगन्ध द्रव्याणां निर्माणार्थं पुष्पाणां तैलस्य उपयोगः कुर्वन्ति स्म। (लोग सुगन्धित द्रव्यों को बनाने के लिए फूलों के तेल का उपयोग करते थे।)

(घ) वेदव्यासेन महाभारतस्य प्रणयनं किमर्थं कृतम्? (वेदव्यास के द्वारा महाभारत को रचना किस लिए की गई?)
उत्तर:
वेदव्यासेन महाभारतस्य प्रणयनं लोकोपकाराय कृतम्। (वेदव्यास ने महाभारत की रचना लोकोपकार के लिए की।)

(ङ) महाभारतं कस्याः परिचायकग्रन्थः? (महाभारत किसका परिचायक ग्रन्थ है?)
उत्तर:
महाभारतं भारतीयसनातन वैदिक संस्कृतेः परिचायक ग्रन्थः। (महाभारत भारतीय सनातन वैदिक संस्कृति का परिचायक ग्रन्थ है।)

प्रश्न 3.
अधोलिखितप्रश्नानाम् उत्तराणि लिखत-(नीचे लिखे प्रश्नों के उत्तर लिखिए-)
(क) मानवस्य स्वभावः कः? (मानव का स्वभाव क्या है?)
उत्तर:
मानवस्य स्वभावः अयम् अस्ति यत् सः लज्जया स्वकीयं नश्वरम् अपि शरीरम् वस्त्रेण आच्छादितुम् इच्छति। (मानव का स्वभाव है कि वह लज्जा ने अपने नश्वर शरीर को भी वस्त्र से ढंकना चाहता है।)

(ख) रसायनशास्त्रविषये व्यासदेवः किं कथयति? (रसायनशास्त्र के विषय में व्यासदेव क्या कहते हैं?)
उत्तर:
रसायन शास्त्र विषये व्यासदेवः कथयति यत्-रसायन विदः सुप्रयुक्त रसायनाः च एव जरया भग्नाः दृश्यन्ते, उतमैः नागैः नगा इव।

(रसायन शास्त्र के विषय में व्यासदेव कहते हैं कि रसायन शास्त्र के जानकारों को उत्तम सापों द्वारा पर्वत के सभान ठीक प्रकार से प्रयुक्त रसायन पुराने होने के कारण व्यर्थ दिखाई देते हैं।)

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(ग) भौतिकशास्त्रे अतीव प्रसिद्धः कः विचारः? (भौतिकशास्त्र में बहुत प्रसिद्ध विचार क्या है?)
उत्तर:
भौतिकशास्त्रे अतीव प्रसिद्धः विचारः यत् “वस्तूनाम् अन्यसापेक्षं चलनम्” इति। (भौतिकशास्त्र का अधिक प्रसिद्ध विचार है कि ‘वस्तुएँ अन्यों के साथ चलती हैं।”)

प्रश्न 4.
यथायोग्यं योजयत-(उचित क्रम से जोडिए-)
MP Board Class 10th Sanskrit Solutions Chapter 13 महाभारते विज्ञानम् img 1
उत्तर:
(क) 2
(ख) 3
(ग) 1
(घ) 5
(ङ) 4

प्रश्न 5.
शुद्धवाक्यानां समक्षम् “आम्” अशुद्धवाक्यानां समक्षं “न” इति लिखत
(शुद्ध वाक्यों के सामने ‘आम्’ और अशुद्ध वाक्यों के सामने ‘न’ लिखिए-)
(क) महाभारते सर्षपतैलस्य बहुशः उल्लेखो वर्तते।
(ख) राजरोगाणां शमनाय पञ्चसप्तविविधा चिकित्सा करणीया।
(ग) महाभारतं लक्षैकपद्यात्मकं महाकाव्यम् अस्ति।
(घ) यत् महाभारते अस्ति तदन्यत्र नास्ति।
(ङ) वस्तूनाम् अन्यसापेक्षं चलनम् भौतिकशास्त्रस्य सिद्धान्तः।।
उत्तर:
(क) आम्
(ख) न
(ग) आम्
(घ) न
(ङ) आम्।

प्रश्न 6.
अधोलिखितशब्दानां विभक्तिं वचनञ्च लिखत
(नीचे लिखे शब्दों की विभक्ति और वचन लिखिए-)
MP Board Class 10th Sanskrit Solutions Chapter 13 महाभारते विज्ञानम् img 2
उत्तर:
MP Board Class 10th Sanskrit Solutions Chapter 13 महाभारते विज्ञानम् img 3

प्रश्न 7.
अधोलिखतपदानां धातुं लकारं वचनं च लिखत
(नीचे लिखे पदों के धातु, लकार और वचन लिखिए-)
MP Board Class 10th Sanskrit Solutions Chapter 13 महाभारते विज्ञानम् img 4
उत्तर:
MP Board Class 10th Sanskrit Solutions Chapter 13 महाभारते विज्ञानम् img 5

प्रश्न 8.
अधोलिखितशब्दानां सन्धिविच्छेदं कृत्वा सन्धिनाम लिखत
(नीचे लिखे पदों के सन्धि-विच्छेद करके सन्धि का नाम लिखिए-)
MP Board Class 10th Sanskrit Solutions Chapter 13 महाभारते विज्ञानम् img 6
उत्तर:
MP Board Class 10th Sanskrit Solutions Chapter 13 महाभारते विज्ञानम् img 7

प्रश्न 9.
अधोलिखितपदानां पर्यायवाचिशब्दान् लिखत
(नीचे लिखे शब्दों के पर्यायवाची शब्द लिखिए-)
यथा- जलम् – वारि
(क) वेदव्यासः
(ख) कालः
(ग) सुवर्णम्
(घ) मनुष्यः
उत्तर:
(क) वेदव्यासः – कृष्णद्वैपायनः
(ख) कालः – समयः
(ग) सुवर्णम् – कनकम्
(घ) मनुष्यः – मानवः

प्रश्न 10.
अधोलिखितव्ययानां वाक्यप्रयोगं कुरुत
(नीचे लिखे अव्ययों के वाक्य बनाइए)
यथा- अत्र – अहम् अत्र अस्मि
(क) अपि
(ख) इदानीम्
(ग) बिना
(घ) यथा
(ङ) एव
उत्तर:
(क) अपि – अहम् अपि गच्छामि ।(मैं भी जाती हूँ।)
(ख) इदानीम् – इदानीम् शयनं कुरु। (अब सो जाओ।)
(ग) बिना – त्वाम् विना अहम् न गमिष्यामि। (तुम्हारे बिना मैं नहीं जाऊँगी।)
(घ) यथा – यथा करिष्यति तथा प्राप्तं करिष्यति। (जैसा करोगे वैसा पाओगे।)
(ङ) एव – रामः एव प्रथमम् आगमिष्यति। (राम ही प्रथम आएगा।)

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योग्यताविस्तार –

कृष्णद्वैपायनवेदव्यासविषये निबन्धो लिखत।
कृष्णद्वैपायनवेदव्यास जी के विषय पर निबन्ध लिखो।

महाभारते कति पर्वाणि सन्ति तेषां नामानि लिखत।
महाभारत में कितने पर्व है, नाम लिखो।

महाभारते विज्ञानम् पाठ का सार

प्रस्तुत पाठ में श्री वेदव्यास जी द्वारा रचित ‘महाभारत’ के विषय पर चर्चा की गई है तथा इस ग्रन्थ की वैज्ञानिक दृष्टि से व्याख्या की गई है, जिससे यह पता चलता है कि महाभारत में विज्ञान के सभी विषय-भौतिक शास्त्र, रसायन शास्त्र, खगोलशास्त्र, कृषि सम्बन्धी व्यवस्था, वैद्यशास्त्र, लौहशास्त्र आदि अनेक विषय सम्मिलित हैं।

महाभारते विज्ञानम् पाठ का अनुवाद

1. भारतीयसनातनवैदिकसंस्कृतेः परिचायकः, आकरग्रन्थः ‘श्रीमन्महाभारतम्। यस्य प्रणयनं भगवता वेदव्यासेन लोकोपकाराय कृतम् अस्ति। एतस्य महत्ताविषये स्वयमेव कृष्णद्वैपायनोमुनिः प्रकाशयति –
“धर्मे चार्थे च कामे च मोक्षे च भरतर्षभ।
यदिहास्ति तदन्यत्र यन्नेहास्ति न तत् क्वचित्।।”

‘महाभारतम्’ न केवलं विश्वकोशत्वेन विद्यते पुराणेतिहासादीनाम् अपित्वत्र वैज्ञानिकदृष्टया भौतिकशास्त्र-खगोलशास्त्र-कृषि-जलबन्ध-जलसेचनादिव्यवस्था-रसायनशास्त्र वैद्यकशास्त्र-लौहशास्त्र-वस्त्रनिर्माण-शस्त्रास्त्रनिर्माणञ्चालन-विधिरित्यादयः बहवः विषयाः ज्ञान-विज्ञानोपेताः वर्णिताः सन्ति। तेषु केचनविषयाः अत्र उदाह्रियन्ते

अन्वयः :
(धर्मे चार्थे …………… तत् वचित्) हे भरतर्षभ! धर्मे च, अर्थे च, कामे च, मोक्षे च यद् इह अस्ति, तद् अन्यत्र (अस्ति), यद् इह न अस्ति, तत् क्वचित् न (अस्ति)

शब्दार्थाः :
परिचायकः-परिचय कराने वाला-Introducer; आकरग्रन्थः-खान रूपी ग्रन्ध-Storehouse; प्रणयनम्-लिखना-writing, composition; इह-यहाँ (इस संसार में)-here (in this world); क्वचित्-कहीं-somewhere; न क्वचित्-कहीं नहीं-nowhere

अनुवाद :
भारतीय सनातन वैदिक संस्कृति का परिचय कराने वाला खान रूपी ग्रन्थ ‘श्रीमन्महाभारत’ है। जिसकी रचना भगवान वेदव्यास के द्वारा लोकोपकार के लिए की गई है। इसकी महानता के विषय में स्वयं ही कृष्णद्वैपायन मुनि प्रकाशित करते हैं। हे भरतर्षभ! धर्म, अर्थ, काम और मोक्ष में जो यहाँ है, वह सब जगह है, जो यहाँ नहीं है, वह कहीं नहीं है।

‘महाभारत’ न केवल विश्वकोश के रूप में पुराण-इतिहास आदि है, बल्कि यहाँ वैज्ञानिक दृष्टि से भौतिकशास्त्र, खगोलशास्त्र, कृषि, जलबन्ध, जलसेचन आदि व्यवस्थाएँ, रसायनशास्त्र, वैद्यकशास्त्र, लौहशास्त्र, वस्त्रनिर्माण, अस्त्र-शस्त्र निर्माण तथा सञ्चालन की विधि आदि बहुत से विषय ज्ञान और विज्ञान से युक्त वर्णित हैं। उनमें से कुछ पियों के यहाँ उदाहरण दिए जा रहे हैं –

English :
Mahabharat-introducer of vedic culture-Enshrines knowledge of religion, wealth, love and redemption-encyclopediafull of scientific knowledge-full of knowledge and wisdom.

2. भौतिकशास्त्रम्-‘वस्तूनाम् अन्यसापेक्षं चलनम्’ इत्येषः विचारः भौतिकशास्त्रे अतीव प्रसिद्धः। महतः आश्चर्यस्य विषयोऽयम् अस्ति यत् इमं मतं भगवान बादरायणः संस्थापयति महाभारते –
“चलं यथा दृष्टिपथं परैति सूक्ष्म महद्पमिवाभिभाति।
स्वपमालोचयते च रूपं परं तथा बुद्धिपथं परैति॥”

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अस्य पद्यस्य प्रथमे पादे तेन स एव विचारः प्रकटितः अस्ति। अत्रैव अन्यौ अपि द्वौ भौतिकशास्त्रसम्बद्धौ विचारौ कथितौ स्तः। तौ च-‘काचकेन दर्शनेन सूक्ष्मम् अपि वस्तु बृहद् इव भासते’ इति स्वच्छे दर्पणे वस्तुनः रूपस्य तादृशमेव प्रतिबिम्बं दृश्यते’ इति च।

अन्वयः :
(चलं यथा दृष्टि …………. बुद्धिपथं परैति॥’)
यथा चलं दृष्टिपथं परैति, सूक्ष्म महद् रूपम् इव अभिभाति, रूपं स्वरूपं च आलोचयते, तथा परं बुद्धिपथं परैति॥

शब्दार्थाः :
संस्थापयति-स्थापित करता है-establishes-sets up; अभिभाति-दिखाई देता है-Appears;आलोचयते-दिखलाता है-shows, displays; परैति-आती है-comes.
अनुवाद-भौतिकशास्त्रम्-‘वस्तुएं दूसरों पर निर्भर होकर चलती हैं’ यह विचार भौतिक शास्त्र में बहुत प्रसिद्ध है। अधिक आश्चर्य की बात यह है कि यही मत भगवान बादरायण ने महाभारत में स्थापित किया है-

जिस प्रकार चलते हुए दृष्टिपथ पर आती हुई, छोटी वस्तु बड़े के समान दिखाई देती है, वैसे ही दूसरे की बुद्धिपथ पर आई हुई वस्तु का रूप और स्वरूप दिखाई पड़ता है। इस पद्य के प्रथम पाद में उसके द्वारा वही विचार प्रकट किया गया है। यहीं और भी दो भौतिक शास्त्र संबंधी विचारों को कहा गया है। वे हैं-“शीशे में देखने से छोटी सी वस्तु भी बहुत बड़ी लगती है” और “साफ शीशे में वस्तु के रूप की वैसी ही परछाई दिखाई देती है’।

English :
Physics: Material depends on other items for motionsame principle found in Mahabharata-Lens enlarge the size of an object-Clear glass reflects the original shape of the objects.

3. खगोलशास्त्रम्-कालगणनाक्षेत्रे भारतीयं खगोलशास्त्रं विश्वस्मिन् प्रसिद्धम् अस्ति। खगोलस्य भावार्थः भवति यद् आकाशः अपि पृथिवीव गोलः अस्ति। महाभारते तु, विपलं ‘सेकेण्ड’ इति आङ्ग्लीयनाम्ना प्रसिद्धम्, इत्यस्यापि विभागः कृतः दृश्यते।
यथा –
“काष्ठा निमेषा दश पञ्च चैव त्रिशत्तु काष्ठा गणयेत् कलां ताम्।
त्रिंशत्कलाश्चापि भवेन्मुहूर्तो भागः कतायाः दशमश्च यः स्यात्॥

एवमेव सूर्यचन्द्रग्रहणविषयिण्याः खगोलीयघटनायाः वर्णनम् अपि महाभारतकारः करोति।

अन्वयः :
(काष्ठा निमेषा ……………….. यः स्यात्।)

दशः काष्ठाः निमेषाः पञ्च च एव त्रिंशत् तु काष्ठा तां कलां गणयेत् मूहूर्तो भागः त्रिंशत् कलाः च अपि भवेत् यः कलायाः दशमः च स्यात्।

शब्दार्थाः :
विपलम्-क्षण-Moment; आङ्ग्लीयनाम्ना-अंग्रेजी नाम से-by English name; काष्ठा-18 निमेष की संख्या-number of 18 moments; निमेषा-नेत्रों की पलक गिरने का समय-blinking (winking) time of eyes.

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अनुवाद :
खगोलशास्त्रम्-कालगणना के क्षेत्र में भारतीय खगोल शास्त्र इस विश्व में प्रसिद्ध है। खगोल का भावार्थ होता है कि आकाश भी पृथिवी की तरह गोल है। महाभारत में तो, क्षण ‘सैकेण्ड’ इस अंग्रेजी नाम से प्रसिद्ध है, इसके भी छोटे-छोटे भाग किए हुए दिखते हैं। जैसे

दस काष्ठा (18 निमेष का एक काष्ठा), निमेष पाँच ही है, तो 30 काष्ठा, उसको एक कला (खण्ड) गिनते हैं। और एक क्षण का भाग भी 30 कलाएँ होती हैं, जो कला का दसवां भाग होती हैं।

इस प्रकार ही सूर्य और चन्द्र ग्रहण के विषयों का, तथा खगोलीय घटनाओं का वर्णन भी महाभारत लिखने वाला करता है।

English :
Geography-Measurement of time-sky also round like earth-parts of seconds mentioned in Mahabharata. Kashtha, Kala and Muharta are mentioned in Mahabharata. Divisions of Kala.

Solar and lunar eclipses also mentioned in Mahabharata.

4. कृषि-जलबन्ध-जलसेचनादिव्यवस्था-‘जलमेव जीवनम्’ इत्युक्त्या सिद्धयति यत् जलं बिना जीवनं कथमपि न सम्भवम्। जलं न भविष्यति चेत्तदा धान्योत्पत्तिः कथं भविष्यति? अतः जलबन्धपूर्वकं विशालजलराशिं सकलय्य तस्य सम्यक् रूपेण सेचनादि व्यवस्था करणीया। एतदर्थं सत्यवतीसुतः महाभारते उल्लिखति –
“क्षेत्रं हि रसवत् शुद्धं कर्षकेणोपपादितम्।
ऋते वर्ष न कौन्तेय!, जातु निर्वतयेत् फलम्।

तत्र वै पौरुषं ब्रूयुः आसेकं यत्नकारितम्। सस्यानां जलसेचनाय नदीषु जलबन्धाः स्थापयितुम अपि निर्दिशति।।

श्लोक का अन्वयः :
(क्षेत्रं हि रसवत् …………. निर्वर्तयेत् फलम्।।)
हि कर्षकेण उपपादितं क्षेत्रं रसवत् शुद्धम् कौन्तेय। वर्षम् ऋते न जातु फलं निवर्तयेत्।

शब्दार्थाः :
सङ्कलय्य-एकत्रित करके-storing; कर्षकेण-किसान के द्वारा-by the farmer; उपपादितम्-उत्पादित-produce; ऋते-बिना-without; आसेकम्-गीला करना-to nmoisten; सस्यानाम्-फसलों की-of crops/foodgrains;

अनुवाद :
कृषि-जलबन्ध (बाँध)-जल सेचन सिंचाई आदि की व्यवस्था-‘जल ही जीवन है’ यह कहकर सिद्ध होता है कि जल के बिना जीवन किसी भी प्रकार से सम्भव नहीं है। यदि जल नहीं होगा तो धान आदि की उत्पत्ति कैसे होगी? इसलिए बाँध बनाने से पहले बहुत सारा जल एकत्रित कर उसकी ठीक प्रकार से सिंचाई की व्यवस्था करनी चाहिए। इसलिए सत्यवती पुत्र ने महाभारत में उल्लेख किया है कि हे कौन्तेय किसानों के द्वारा उत्पादित क्षेत्र रसवान् और शुद्ध है। पर वर्षा के बिना उनके फल नहीं हो पाएँगे।

तब उनके द्वारा मेहनत के साथ जल देने का (गीला रखने का प्रयत्न करने को भी कहना चाहिए। फसलों की जल से सिंचाई के लिए नदियों पर बाँध बनाने का भी निर्देश दिया है।

English :
Agriculture, dams and irrigation-water is life-source of agricultural produce-dams or rivers for irrigation-rain water a must for irrigation.

5. रसायनशास्त्रम्-महाभारतकाले रसायनशास्त्रस्य पर्याप्तः विकासः अभवत्। तस्माद् एव औषधिविज्ञानं, धातुशास्त्रं च विकसितम्। व्यासदेवः कथयति –
‘रसायनविदश्चैव सुप्रयुक्तरसायनाः।
दृश्यन्ते जरया भग्ना नगा नागैरिवोत्तमैः॥’

नानाविधानां सुगन्धद्रव्याणां निर्माणार्थं पुष्पाणां तैलस्य च उपयोगः तदानीन्तनाः जनाः कुर्वन्ति स्म। तिल-सर्षपतैलस्य बहुशः उल्लेखो वर्तते।

अन्वयः :
(रसायनविदश्चैव ………… इवोत्तमैः) रसानविदः, सप्रयक्तरसायनाः च एव जरया भग्ना दृश्यन्ते, उतमैः नागैः नगा इव।

शब्दार्थाः :
पर्याप्तः-काफी-enough, sufficient; सुप्रयुक्त-ठीक प्रकार प्रयोग किए गए-well utilised ; भग्ना-टूटा हुआ, व्यर्थ-broken, useless; दृश्यन्ते-दिखाई देते हैं-appear; तदानीन्तनाः-उस समय के-of those times; सर्षप-सरसों-mustard.

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अनुवाद :
रसायनशास्त्र-महाभारत के समय में रसायनशास्त्र का काफी विकास हुआ। वहीं से औषध विज्ञान और धातु शास्त्र का विकास हुआ। व्यासदेव कहते हैं

‘रसायनशास्त्र के जानकार को उत्तम साँपों के द्वारा पर्वत के समान अच्छे प्रकार से प्रयोग किए गए रसायन पुराने होने के कारण व्यर्थ दिखाई देते हैं।

अनेक प्रकार के सुगन्धित द्रव्यों को बनाने के लिए फूलों के तेल का उपयोग उस समय के लोग करते थे। तिल और सरसों के तेल का बहुत उल्लेख है।

English :
Chemistry, medical service and metallurgy are offshoot of Chemistry.

Sap of plants was used to produce scent. Sesamum and mustard oil is widely mentioned.

6. वैद्यकशास्त्रम्-मनुष्य सदा नीरोगः भवेत्। अत एव स्वस्थशरीरार्थं बहवः उपायाः वर्णिताः सन्ति। वैद्यकशास्त्रम् आरोग्यशास्त्रम् अपि कथ्यते। स्वास्थ्यघातकाः ये राजरोगादयः सन्ति। तेषां सर्वथा शमनाय द्विसप्ततिविधाः चिकित्साः करणीयाः। उल्लेख एवं विधः विद्यते –
‘द्वासप्ततिविधा चैव शरीरस्य प्रतिक्रिया।
देशजातिकुलानां च धर्माः समनुवर्णिताः ॥7॥

शान्तिपर्वणि59’ श्लोक का अन्वयः-(द्वासप्तति ………… समानुवर्णिताः॥)

शरीरस्य प्रतिक्रिया द्वासप्ततिविधा च एव। देश, जाति, कुलानां च धर्माः समनुवर्णिताः (सन्ति)

शब्दार्थाः :
घातका-नष्ट करने वाले-destroyers;शमनाय-शान्ति/रोकने के लिए-to pacify; द्विसप्ततिविधाः-72 प्रकार की-of 72 types.

अनुवाद :
वैद्यशास्त्र-मनुष्य सदा नीरोगी रहे। इसलिए स्वस्थ शरीर के लिए बहुत से उपायों का वर्णन है। वैद्यशास्त्र को आरोग्यशास्त्र भी कहते हैं। जो स्वास्थ्य को नष्ट करने वाले राजरोग आदि है। उनकी हमेशा की शान्ति के लिए 72 इलाज करने चाहिएं। उनका उल्लेख इस प्रकार है-

‘शरीर की प्रतिक्रिया बहत्तर (72) प्रकार की ही है। देश, जाति और कुलों के धर्म का इसमें वर्णन हैं।’

English :
Medical science-Science of healthy living-72 treatments are known to cure diseases. Physical process-of 72 types-according to location (climate) race, and nature of families.

7. लौहशास्त्रम्-वयं जानीमः यत् सुवर्ण, रजतं, ताळं, सीसं, नपुः, अयः इति नाम्ना धातवः प्रसिद्धाः सन्ति। आभग्णस्वरूपेण, क्रयविक्रयव्यवहारसाधनत्वेन च सुवर्णरजतयोः उपयोगिता महाभारते वर्णिता अस्ति। राजप्रासादादीनां निर्माणे अयसः उपयोगः भवति स्म। सुवर्णस्य अग्नौ तापनेन शुद्धीकरणक्रमः तदानीन्तनस्य व्यवहारस्य प्रमाणम् उपस्थापयति –
‘यथा हि कनकं शुद्धं तापच्छेदनिघर्षणैः।
परीक्ष्येत तथा शिष्यान ईक्षेत्शीलगुणदिभिः॥४६॥शान्तिपर्वणि329

श्लोक का अन्वयः :
(यथा हि कनकं ………… शीतगुणादिभिः।।)
यथा हि शुद्धं कनकं तापच्छेद निघर्षणैः परीक्ष्येत तथा शिष्यान् शीलगुणादिभिः ईक्षेत्॥

शब्दार्थाः :
त्रपुः-रांगा-tin pewter; आभरण-आभूषण-ornament; अयः-लोहा -iron; राजप्रासादादिनाम्-राजमहल आदि के-of royal palaces etc; तापनेन-तपाने से-heating; तापच्छेदनिघर्षणैः-तपाकर, काटकर; घिसकर-heating, cutting and rubbing; परीक्ष्येत-परीक्षा करनी चाहिए-to be tested; ईक्षेत्-देखना चाहिए-to be seen.

अनुवाद :
लोहशास्त्र-हम जानते हैं कि सोना, चाँदी, ताँबा, सीसा, राँगा, लोहा आदि धातुएं संसार में प्रसिद्ध हैं। आभूषण बनाने में तथा खरीदने-बेचने के व्यवहार के साधन में सोना और चाँदी का उपयंग महाभारत में वर्णित है। राजमहल आदि के निर्माण में लोहे का प्रयोग होता था। सोने को अग्नि में तपा कर शुद्धीकरण का क्रम उस समय के व्यवहार का प्रमाण स्थापित करता है

‘जैसे शुद्ध सोना तपा कर, काट कर और घिसकर परखा जाता है, वैसे ही शिष्यों के शीलगुण आदि भी देखने चाहिएं।’

English :
Various metals-Silver and Gold were used in making ornaments and as means of exchange-Iron was very useful as building material. Gold was purified by heating in fire-It was tested in fire, by cutting and rubbing

8. वस्त्रनिर्माणम्-मानवस्य स्वभावोऽयम् अस्ति, यत् सा लज्जया चकीयं नश्वरम् अपि शरीरं वस्त्रेण आच्छादितुम् इच्छति। वैदिककालाद् एव वस्त्रनिर्माण-परम्परा वर्तते। महाभारते ऊर्ण-कापसि-कौशेयादिवस्त्राणां निर्माणस्य, तत्र तु स्वापेक्षितस्य वर्णस्य संयोजनस्प च वर्णनं मिलति।
यथा –
“यादृशेन हि वर्णेन भाव्यते शुक्लमम्बरम्।
तादृशं कुरुते रुपम् एतदेवमवेहि में॥५॥ शान्तिपर्वणणि २६३”

अनेन ज्ञायते यद् इदं लक्षैकपद्यात्मकं महाकाव्यं महाभारतं एकतः पुरुषार्थचतुष्टयप्रकाशकं वर्तते, ततो अपि अधिकं ज्ञानविज्ञानयोः वैशा च समुपदिशति।

श्लोक का अन्वयः :
(यादृशेन हि ………… एतदेवमवेहि मे॥) हि यादृशेन वर्णेन शुक्लम् अम्बरं भाव्यते तादृशं रूपं कुरुते, एतद् एवम् एव मे (मतम्) अवेहि।

शब्दार्थाः :
आच्छादितुम्-ढंकने के लिए-to cover, to hide;कौशेयम्-रेशमी-silken; संयोजनस्य-मिलाने का-mixing; स्वापेक्षितस्य-अपनी अपेक्षा, इच्छा के-at sweet will; अम्बरम्-वस्त्र-clothes; वैशधम्-विस्तार पूर्वक-in detail; समुपदिशति-ठीक प्रकार सेinstruct; अवेहि-उपदेश करता है- advises.

अनुवाद :
वस्त्रनिर्माण-मानव का यह स्वभाव है कि वह लज्जा से अपने नश्वर शरीर को वस्त्र से ढंकने की इच्छा करता है। वैदिक काल से ही वस्त्र बनाने की परम्परा है। महाभारत में ऊन, कपास, रेशम आदि के वस्त्रों के निर्माण का और उनमें अपनी इच्छा के रंग मिलाने का वर्णन मिलता है। जैसे –

‘जैसे रंग से सफेद वस्त्र सुन्दर लगता है, वैसे ही रूप हो जाता है। यह ऐसे ही मेरा ‘विचार’ है।

इससे ज्ञात होता है कि यह एक लाख पद्यों वाला महाकाव्य ‘महाभारत’ एक ओर चार प्रकार के पुरुषार्थों का प्रकाशक है, इससे भी अधिक ज्ञान और विज्ञान, के विषयों का ठीक प्रकार से उपदेश करता है।

English :
Cloth manufacturing (texturing cloth manufacturing prevalent through the ages-coloured woollen, cotton and silken clothes were manufactured in the period of Mahabharata.

Mahabharata deals with four types of manliness. It also deals with topics of knowledge and science.

MP Board Class 10th Sanskrit Solutions

MP Board Class 8th Maths Solutions Chapter 2 एक चर वाले रैखिक समीकरण Ex 2.1

MP Board Class 8th Maths Solutions Chapter 2 एक चर वाले रैखिक समीकरण Ex 2.1

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प्रश्न 1.
निम्न समीकरणों को हल कीजिए –
1. x – 2 = 7
2. y + 3 = 0
3. 6 = z + 2
4. 1 + x = 17
5. 6x = 12
6. \(\frac{t}{5}\) = 10
7. \(\frac{2x}{3}\) = 18
8. 1.6 = \(\frac{y}{1.5}\)
9. 7x – 9 = 16
10. 14y – 8 = 13
11. 17 + 6p = 9
12. \(\frac{x}{3}\) +1 = 1
हल:
1. x – 2 = 7
दोनों पक्षों में 2 जोड़ने पर हम प्राप्त करते हैं,
x – 2 + 2 = 7 + 2
या x = 9
∴ समीकरण का अभीष्ट हल: x = 9 होगा

2. y + 3 = 10
दोनों पक्षों में से 3 घटाने पर,
y + 3 – 3 = 10 – 3
या y = 7
∴ समीकरण का अभीष्ट हल: y=7

3. 6 = z + 2
दोनों पक्षों का पक्षान्तर करने पर,
z + 2 = 6
दोनों पक्षों में से 2 घटाने पर,
z + 2 – 2 = 6 – 2
या z = 4
∴ समीकरण का अभीष्ट हल: z = 4

4. \(\frac{3}{7}\) + x = \(\frac{17}{7}\)
x = \(\frac{17}{7}\) – \(\frac{3}{7}\)
(\(\frac{3}{7}\) को दाएँ पक्ष में पक्षान्तर करने पर)
x = \(\frac{17-3}{7}\) = \(\frac{14}{7}\)
या x = 2
∴ समीकरण का अभीष्ट हल: x = 2

5. 6x = 12
दोनों पक्षों को 6 से भाग देने पर,
\(\frac{6x}{6}\) = \(\frac{12}{6}\)
या x=2
∴ समीकरण का अभीष्ट हल: x = 2

6. \(\frac{t}{5}\) = 10
दोनों पक्षों को 5 से गुणा करने पर,
\(\frac{t}{5}\) x 5 = 10 x 5
या t=50
∴ समीकरण का अभीष्ट हल: t = 50

7. \(\frac{2x}{3}\) = 18
दोनों पक्षों को 3 से गुणा करने पर,
∴ \(\frac{2x}{3}\) x 3 = 18 x 3
या 2x = 54
दोनों पक्षों को 2 से भाग करने पर,
\(\frac{2x}{2}\) = \(\frac{54}{2}\)
या x = 27
∴ समीकरण का अभीष्ट हल: x = 27

8. 1.6 = \(\frac{y}{1.5}\)
दोनों पक्षों का पंक्षातर करने पर
\(\frac{y}{1.5}\) x 1.5 = 1.6 x 1.5
दोनों पक्षों को 1.5 से गुणा करने पर
या y = 2.4
∴ समीकरण का अभीष्ट हल: y = 2.4

9. 7x – 9 = 16.
दोनों पक्षों में 9 जोड़ने पर,
7x – 9 + 9 = 16 + 9
या 7x = 25
दोनों पक्षों को 7 से भाग करने पर,
\(\frac{7x}{7}\) = \(\frac{25}{7}\)
या x = \(\frac{25}{7}\)
∴ समीकरण का अभीष्ट हल: x = \(\frac{25}{7}\)

10. 14y – 8 = 13
दोनों पक्षों में 8 जोड़ने पर,
∴ 14y – 8 + 8 = 13 + 8
या 14y = 21
\(\frac{14y}{14}\) = \(\frac{21}{14}\)
दोनों पक्षों में 14 से भाग करने पर,
y = \(\frac{3}{2}\)
∴ समीकरण का अभीष्ट हल: y = \(\frac{3}{2}\)

11. 17 + 6p = 9
दोनों पक्षों से 17 घटाने पर,
∴ 17 – 17 + 6p = 9 – 17
या 6p = – 8
दोनों पक्षों को 6 से भाग करने पर,
∴ \(\frac{6p}{6}\) = \(\frac{-8}{6}\)
या p = \(\frac{-4}{3}\)
∴ समीकरण का अभीष्ट हल: p = \(\frac{-4}{3}\)

12. \(\frac{x}{3}\) + 1 = 13
दोनों पक्षों से 1 घटाने पर,
∴ \(\frac{x}{3}\) + 1 – 1 = 13 – 1
या  \(\frac{x}{3}\) = \(\frac{7-15}{15}\) = \(\frac{-8}{15}\)
दोनों पक्षों को 3 से गुणा करने पर,
\(\frac{x}{3}\) x 3 = \(\frac{-8}{15}\) x 3
या  x = \(\frac{-8}{5}\)
∴ समीकरण का अभीष्ट हल: x = \(\frac{-8}{5}\)

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MP Board Class 7th Social Science Solutions विविध प्रश्नावली 2

MP Board Class 7th Social Science Solutions विविध प्रश्नावली 2

प्रश्न 1.
निम्नलिखित प्रश्नों के सही विकल्प चुनकर लिखिए –
(1) गुलाम वंश का संस्थापक था
(अ) मोहम्मद गौरी
(ब) इल्तुतमिश
(स) कुतुबुद्दीन ऐबक
(द) अलाउद्दीन खिलजी।
उत्तर:
(स) कुतुबुद्दीन ऐबक

(2) राष्ट्रीय मानव अधिकार आयोग के अध्यक्ष की नियुक्ति किसके द्वारा की जाती है ?
(अ) प्रधानमन्त्री
(ब) राष्ट्रपति
(स) राज्यपाल
(द) मुख्यमन्त्री।
उत्तर:
(ब) राष्ट्रपति

(3) पानीपत का प्रथम युद्ध हुआ था –
(अ) 1526 ई. में
(ब) 1556 ई. में
(स) 1529 ई. में
(द) 1527 ई. में।
उत्तर:
(अ) 1526 ई. में

(4) हमारी पृथ्वी के कितने प्रतिशत भाग पर थलमण्डल –
(अ) 71%
(ब) 72%
(स) 28%
(द) 29%
उत्तर:
(द) 29%

(5) दीर्घ ज्वार आता है –
(अ) पंचमी को
(ब) पूर्णिमा को
(स) अष्टमी को
(द) चतुर्थी को।
उत्तर:
(ब) पूर्णिमा को।

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प्रश्न 2.
रिक्त स्थानों की पूर्ति कीजिए –
(1) खिलजी वंश का संस्थापक …………. था।
(2) गुरुनानक देव का जन्म …………… गाँव में हुआ था।
(3) भारत के उपराष्ट्रपति का कार्यकाल ………….. वर्ष का होता है।
(4) वर्षा मापने वाले यन्त्र को ………… कहते हैं।
(5) भारत में ऋतुओं की संख्या …………..’ हैं।
उत्तर:
(1) जलालुद्दीन खिलजी
(2) तलवण्डी
(3) 5
(4) वर्षा मापक
(5) तीन।

प्रश्न 3.
निम्नलिखित की सही जोड़ियाँ बनाइए
MP Board Class 7th Social Science Solutions विविध प्रश्नावली 2
उत्तर:
(1) (b) ताँबे की मुद्रा का प्रचलन
(2) (c) पहेलियाँ-मुकरियाँ
(3) (a) इक्ता प्रणाली तुगलक
(4) (e) चतुर, वाकपटु, सलाहकार
(5) (d) लहरें

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प्रश्न 4.
निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर संक्षेप में लिखिए –
(1) अलाउद्दीन खिलजी की बाजार नियन्त्रण व्यवस्था को समझाइए।
उत्तर:
धन की पूर्ति हेतु उसने बाजार नियन्त्रण नीति को लागू किया था। उसने वस्तुओं की कीमतें निश्चित कर दी। व्यापारियों पर नियन्त्रण रखने के लिए उसने कुशल तथा ईमानदार कर्मचारियों की नियुक्ति की। दुकानदारों द्वारा बाजार के नियमों का पालन न करने पर उन्हें कठोर दण्ड दिया जाता था। बाजार भावों पर गुप्तचरों द्वारा निगरानी रखी जाती थी। अकाल पड़ने पर सरकारी गोदामों से खाद्यान्नों की पूर्ति की जाती थी।

(2) ज्वार – भाटे से कौन-कौन से लाभ हैं, लिखिए।
उत्तर:
ज्वार-भाटे से निम्नलिखित लाभ हैं –

  •  ज्वारीय शक्ति से जल विद्युत उत्पन्न की जा सकती है।
  • अनेक प्रकार की सीमें, शंख, मोती आदि वस्तुएँ किनारों पर आ जाती हैं।
  • नदियों के मुहानों की गंदगी साफ हो जाती है तथा नौकायन में सहायता मिलती है।
  • ज्वार के समय उथले बन्दरगाहों की गहराई बढ़ जाती है, जिससे बड़े-बड़े जलयान बन्दरगाह तक पहुँच जाते हैं और भाटे के साथ लौट आते हैं। इससे व्यापारिक माल ढोने में सहायता मिलती है।

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(3) अध्यादेश से क्या आशय है ?
उत्तर:
जब विधानसभा की बैठकें नहीं चल रही हों और किसी कानून की तुरन्त आवश्यकता हो तो राज्यपाल द्वारा जारी आदेश अध्यादेश कहलाता है। अध्यादेश कानून के ही समान होते हैं।

(4) शाहजहाँ के शासनकाल में स्थापत्य कला की प्रगति को लिखिए।
उत्तर:
शाहजहाँ ने अपने शासन काल में दिल्ली का लाल किला, दीवान-ए-आम, दीवान-ए-खास, जामा मस्जिद, ताजमहल आदि का निर्माण कराया। उसकी शान-शौकत और ऐश्वर्य का प्रतीक मयूर सिंहासन भी है जिसमें विख्यात कोहिनूर हीरा भी जड़ा हुआ था।

(5) चक्रवातीय वर्षा पर टिप्पणी लिखिए।
उत्तर:
चक्रवातीय वर्षा – गर्म और ठण्डी हवाओं के मिलने पर गर्म हवाएँ ऊपर की ओर उठती हैं और ठण्डी हवाएँ तेजी से कम दबाव की ओर आती हैं। पृथ्वी की गति के कारण ये हवाएँ चक्र की भाँति घूमने लगती हैं जिन्हें चक्रवात कहते हैं। चक्रवात के मध्य की हवाएँ ठण्डी होने पर वर्षा करती हैं। इसे चक्रवाती वर्षा कहते हैं।

MP Board Class 7th Social Science Solutions Chapter 18 आर्द्रता एवं वर्षा-3

(6) अकबर की मनसबदारी व्यवस्था की प्रमुख विशेषताएँ लिखिए।
उत्तर:
अकबर की मनसबदारी व्यवस्था की प्रमुख विशेषताएँ निम्नलिखित हैं –

  • गुप्तचर व डाक व्यवस्था में सुधार करना।
  • प्रशासनिक तन्त्र को सैन्य स्तर पर संगठित करना।
  • सरकारी सेवारत अधिकारियों को सैन्य पद (मनसबदार) पर नियुक्त करना।
  • मनसबदारों को नकद वेतन देना तथा सेना के रख-रखाव के लिए भूमि (जागीर) देना।

(7) भक्ति आन्दोलन का जनजीवन पर क्या प्रभाव पड़ा?
उत्तर:

  • भक्ति आन्दोलन ने धर्म व समाज में व्याप्त आडम्बर और कुरीतियों को दूर करने का प्रयास किया।
  • समाज में हिन्दू व मुसलमानों के भेद व अलगाव को दूर कर दोनों को निकट लाने का प्रयास किया।

प्रश्न 5.
निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर विस्तार से लिखिए
(1) समुद्री धाराओं का मानव जीवन पर क्या प्रभाव पड़ता है ? लिखिए।
उत्तर:
जल धाराओं के उत्पन्न होने के प्रमुख कारण निम्नलिखित हैं –

  1. स्थायी पवनों का प्रभाव-स्थायी पवनों के प्रभाव से जलधाराएँ उत्पन्न होकर इन हवाओं की दिशा की ओर बहने लगती हैं।
  2. तापमान में भिन्नता का प्रभाव-विषुवत रेखा के आस-पास तापमान अधिक रहने के कारण समुद्री जल गर्मी पाकर फैलता है और जलधाराएँ ध्रुवों की ओर बढ़ने लगती हैं।विषुवत रेखा के समीप खाली स्थान को भरने के लिए ध्रुवों की ओर से ठण्डी जलधाराएँ विषुवत रेखा की ओर बहने लगती हैं। इस प्रकार तापमान की भिन्नता जलधाराओं को उत्पन्न करती हैं।
  3. पृथ्वी की दैनिक परिभ्रमण गति का प्रभाव-पृथ्वी। अपने अक्ष पर पश्चिम से पूर्व की ओर 24 घण्टे में घूर्णन गति द्वारा एक चक्कर पूरा करती है जिससे जलधाराएँ उत्तरी गोलार्द्ध में। अपने दायीं ओर तथा दक्षिणी गोलार्द्ध में बायीं ओर मुड़ जाती हैं।
  4. स्थल भू-भाग का प्रभाव-बहती हुई धारा के सामने जब कोई विशाल स्थल भाग आ जाता है, तो वह अपनी दिशा। स्थल के अनुरूप बदल लेती हैं।
  5. समुद्र की लवणता का प्रभाव-कुछ धाराएँ जल के घनत्व में अन्तर होने से भी उत्पन्न होती हैं। जलधाराओं का मानव जीवन पर प्रभाव – इन धाराओं का जलवायु, आवागमन, वर्षा और मत्स्य उद्योग पर प्रभाव पड़ता है –
    • गर्म जलधाराएँ अपने तटवर्ती स्थानों का तापमान बढ़ा देती हैं तथा ठण्डी धाराएँ निकटवर्ती क्षेत्रों का सामान्य तापमान कम कर देती हैं।
    • समुद्रों में जहाँ गर्म और ठण्डी धाराएँ मिलती हैं, तो वहाँ घना कोहरा उत्पन्न हो जाता है।
    • गर्म जलधारा के कारण ऊँचे अक्षांशों में स्थित बन्दरगाह वर्षभर खुले रहते हैं। गर्म धाराओं के ऊपर बहने वाली हवाएँ गर्म होकर
      आर्द्रता ग्रहण कर लेती हैं और निकटवर्ती क्षेत्रों में पर्याप्त वर्षा । कर देती हैं।

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(2) शेरशाह के शासन प्रबन्ध का वर्णन कीजिए।
उत्तर:
शेरशाह की शासन व्यवस्था –

  • केन्द्रीय शासन-केन्द्रीय शासन का सबसे बड़ा अधिकारी स्वयं सम्राट था। उसकी सहायता के लिए अनेक अधिकारी व कर्मचारी होते थे। वह एक उदार शासक था। उसकी दण्ड व्यवस्था कठोर थी। हिन्दुओं के साथ उसका व्यवहार अच्छा था।
  • जिले का शासन – शासन की सुविधा के लिए शेरशाह ने अपने समस्त साम्राज्य को अनेक सरकारों (जिलों) में विभाजित किया, जिन्हें पुनः परगनों में विभाजित किया गया। सरकारों और परगनों के अधिकारियों को समय-समय पर स्थानान्तरित किया जाता था।
  •  सैनिक प्रशासन – शेरशाह ने एक विशाल एवं शक्तिशाली सेना का संगठन किया जिसमें पैदल सिपाही, घुड़सवार, तोपखाना व हाथी चार विभाग थे। सैनिकों को नकद वेतन दिया जाता था तथा उनका हुलिया एक रजिस्टर में दर्ज किया जाता था। घोड़ों को दागने की प्रथा प्रचलित थी।
  • भूमि प्रबन्ध – शेरशाह ने भूमि की नाप कराकर उसे उपज के अनुसार बाँट दिया गया था। किसानों से उपज का चौथाई भाग लगान के रूप में वसूल किया जाता था।
  • न्यायव्यवस्था – सम्राट न्याय विभाग का सर्वोच्च अधिकारी था। वह न्याय में किसी भी प्रकार का भेदभाव नहीं करता था। साम्राज्य के विभिन्न भागों में काजियों की नियुक्ति की गई।
  • जनता की भलाई के कार्य-शिक्षा के क्षेत्र में उसने मदरसों का निर्माण कराया। उसने यात्रियों की सुविधा के लिए कुँओं और सरायों की व्यवस्था की। अनेक सड़कें बनवाईं तथा उनके किनारे छायादार वृक्ष लगवाए। आज की ग्राण्ड ट्रंक रोड (शेरशाह सूरी मार्ग) उसी की देन है।

(3) विधानसभा के गठन की प्रक्रिया को समझाइए।
उत्तर:
वित्तीय कार्य:
विधानसभा राज्य की वित्तीय व्यवस्था पर नियंत्रण रखती है। प्रतिवर्ष विधान सभा में वित्तमन्त्री द्वारा राज्य का आय-व्यय विधेयक (बजट) प्रस्तुत होता है। विधानसभा द्वारा बजट पारित होने पर इसे राज्यपाल के हस्ताक्षर हेतु भेजा जाता है। राज्यपाल के हस्ताक्षर होने के बाद सभी वित्तीय कार्य संचालित होते हैं। इसके अतिरिक्त विधान सभा कार्य विभिन्न माध्यमों से जनहित के कार्यों, सरकारी योजनाओं, विभागीय कार्यवाहियों आदि के सम्बन्ध में जानकारियाँ प्राप्त करना है।

विधानसभा की शक्तियाँ:
विधान सभा सरकारी विभागों द्वारा किए गए कार्यों पर नियन्त्रण रखती है। यह कार्य विधानसभा सदस्य विभिन्न प्रस्तावों के माध्यमों से करते हैं। ऐसे प्रस्ताव काम रोको प्रस्ताव, ध्यानाकर्षण, प्रश्न पूछना, बजट में कटौती प्रस्ताव आदि हैं। गम्भीर स्थिति उत्पन्न होने पर सरकार के विरुद्ध अविश्वास प्रस्ताव भी पेश किया जा सकता है।

(4) महासागरों से कौन-कौन से लाभ हैं ? लिखिए।
उत्तर:
महासागरों से निम्नलिखित लाभ हैं –

  • भूमि पर वर्षा – भूमि पर समस्त वर्षा समुद्र के पानी के वाष्पन से उत्पन्न भाप से होती है, जो वनस्पति, जीव-जन्तु एवं मानव जीवन के लिए उपयोगी है।
  • तापमान का सन्तुलन – महासागर धरातल पर तापमान का सन्तुलन बनाने में उपयोगी हैं।
  • आवागमन के साधन – महासागर विभिन्न महाद्वीपों को जोड़ते हैं जो अन्तर्राष्ट्रीय व्यापार में सहायक हैं।
  • अन्य – इसके अतिरिक्त महासागर खनिजों के भण्डार, सुरक्षा के उत्तम साधन, मछलियों के भण्डार एवं प्राकृतिक सौन्दर्य से भी परिपूर्ण हैं।

(5) सल्तनतकालीन वास्तुकला की प्रमुख विशेषताओं को लिखिए।
उत्तर:
सल्तनतकालीन वास्तुकला की प्रमुख विशेषताएँ निम्न हैं –

  • नुकीले मेहराब और गुम्बद तथा ऊँची सँकरी मीनारें इस काल की वास्तुकला की महत्वपूर्ण विशेषता थी।
  • इस काल के अनेक शासकों ने उल्लेखनीय निर्माण कार्य करवाए। दिल्ली की कुतुबमीनार, फिरोजशाह का दुर्ग, अलाई दरवाजा, लाल महल, तुगलकाबाद का किला, लोदी सुल्तानों के रंग-बिरंगे खपरैलों की डिजाइनों से सजे मकबरे आदि का निर्माण कराया।
  • दक्षिण के शासकों ने किले के अन्दर शानदार – इमारतें बनवायीं। दौलताबाद एवं गोलकुण्डा के किले इनमें प्रमु ख हैं।
  • सुदूर दक्षिण में विजयनगर के शासकों द्वारा मन्दिरों का निर्माण व जीर्णोद्धार कराया गया। इनके द्वारा

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