MP Board Class 7th Maths Solutions Chapter 8 राशियों की तुलना Ex 8.2

MP Board Class 7th Maths Solutions Chapter 8 राशियों की तुलना Ex 8.2

प्रश्न 1.
दी गई भिन्न संख्याओं को प्रतिशत में बदलो :
(a) \(\frac { 1 }{ 8 } \)
(b) \(\frac { 5 }{ 4 } \)
(c) \(\frac { 3 }{ 40 } \)
(d) \(\frac { 2 }{ 7 } \)
हल:
(a) \(\frac { 1 }{ 8 } \) = \(\frac { 1 }{ 8 } \) × \(\frac { 100 }{ 100 } \) = \(\frac { 100 }{ 8 } \) % = \(\frac { 25 }{ 2 } \) % = 12.5%

(b) \(\frac { 5 }{ 4 } \) = \(\frac { 5 }{ 4 } \) × \(\frac { 100 }{ 100 } \) = \(\frac{5 \times 100}{4}\)% = 125%

(c) \(\frac { 3 }{ 40 } \) = \(\frac { 3 }{ 40 } \) × \(\frac { 100 }{ 100 } \) = \(\frac{3 \times 100}{40}\)% = 7.5%

(d) \(\frac { 2 }{ 7 } \) = \(\frac { 2 }{ 7 } \) × \(\frac { 100 }{ 100 } \) = \(\frac { 200 }{ 7 } \)% = 28\(\frac { 4 }{ 7 } \)%

प्रश्न 2.
दी गई दशमलव भिन्नों को प्रतिशत में बदलो:
(a) 0.65
(b) 2.1
(c) 0.02
(d) 12.35
हल:
(a) 0.65 = \(\frac { 65 }{ 100 } \) = \(\frac { 65 }{ 100 } \) × 100% = 65%
(b) 2.1 = \(\frac { 21 }{ 10 } \) = \(\frac { 21 }{ 10 } \) × 100% = 210%
(c) 0.02 = \(\frac { 2 }{ 100 } \) = \(\frac { 2 }{ 100 } \) × 100% = 2%
(d) 12.35 = \(\frac { 1235 }{ 100 } \) = \(\frac { 1235 }{ 100 } \) × 100% = 1235%

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प्रश्न 3.
अनुमान लगाइए कि आकृति का कितना भाग रंग दिया गया है और इस प्रकार ज्ञात कीजिए कि कितने प्रतिशत रंगीन है।
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हल:
(i) ∵ रंगीन भाग = \(\frac { 1 }{ 4 } \)
∴ रंगे भाग का प्रतिशत = \(\frac { 1 }{ 4 } \) × 100% = 25%
अतः रंगीन भाग 25% है।

(ii) ∵ रंगीन भाग = \(\frac { 3 }{ 5 } \)
∴ रंगे भाग का प्रतिशत = \(\frac { 3 }{ 5 } \) × 100% = 60%
अतः रंगीन भाग 60% है।

(iii) यहाँ 8 में से 3 भाग रंगीन हैं।
∴ रंगीन भाग = \(\frac { 3 }{ 8 } \)
∴ रंगे भाग का प्रतिशत = \(\frac { 3 }{ 8 } \) × 100% = \(\frac { 75 }{ 2 } \) %
= 37.5%
अत: रंगीन भाग 37.5% है।

प्रश्न 4.
ज्ञात कीजिए:
(a) 250 का 15%
(b) 1 घण्टे का 1%
(c) 2500 का 20%
(d) 1 किग्रा का 75%
हल:
(a) 250 का 15% = \(\frac { 15 }{ 100 } \) × 250
= \(\frac { 75 }{ 2 } \) = 37.5%

(b) 1 घण्टे का 1% = \(\frac { 1 }{ 100 } \) × 1 घण्टे
= \(\frac { 1 }{ 100 } \) × 60 मिनट
= \(\frac { 3 }{ 5 } \) मिनट
= \(\frac { 3 }{ 5 } \) × 60 सेकण्ड
= 36 सेकण्ड

(c) 2500 का 20% = \(\frac { 20 }{ 100 } \) × 2500 = 500

(d) 1 किग्रा का 75% = \(\frac { 75 }{ 100 } \) × 1 किग्रा
= 0.75 किग्रा
= 0.75 × 1000 ग्राम = 750 ग्राम

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प्रश्न 5.
सम्पूर्ण राशि ज्ञात कीजिए, यदि
(a) इसका 5%, 600 है।
(b) इसका 12%, 1080 है।
(c) इसका 40%,500 km है।
(d) इसका 70%, 14 मिनट है।
(e) इसका 8%, 40 लीटर है।
हल:
(a) माना कि सम्पूर्ण राशि x है।
∴ x का 5% = 600
या \(\frac { 5 }{ 100 } \) × x = 600
या x = \(\frac{600 \times 100}{5}\) = 12000
अत: अभीष्ट राशि 12000 है।

(b) मानाकि सम्पूर्ण राशि x है।
∴ x का 12% = 1080
या \(\frac { 12 }{ 100 } \) × x = 1080
या x = \(\frac{1080 \times 100}{12}\) = 9000
अतः अभीष्ट राशि 9000 है।

(c) मानाकि सम्पूर्ण राशि x है।
∴ x का 40% = 500 km
या \(\frac { 40 }{ 100 } \) × x = 500 km
या x = \(\frac{500 \times 100}{40}\) km = 1250 km
अतः अभीष्ट राशि 1250 km है।

(d) मानाकि सम्पूर्ण राशि x है।
∴ x का 70% = 14 मिनट या \(\frac { 70 }{ 100 } \) × x = 14 मिनट
या x = \(\frac{14 \times 100}{70}\) मिनट = 20 मिनट
अतः अभीष्ट राशि 20 मिनट है।

(e) मानाकि सम्पूर्ण राशि x है।
∴ x का 8% = 40 लीटर
या \(\frac { 8 }{ 100 } \) × x = 40 लीटर
या x = \(\frac{40 \times 100}{8}\) लीटर = 500 लीटर
अतः अभीष्ट राशि 500 लीटर है।

प्रश्न 6.
दिए गए प्रतिशतों को साधारण व दशमलव भिन्नों में बदलो और अपने उत्तर को सरलतम रूप में लिखो :
(a) 25%
(b) 150%
(c) 20%
(d) 5%
हल:
(a) साधारण भिन्न – 25% = \(\frac { 25 }{ 100 } \) = \(\frac { 1 }{ 4 } \)
दशमलव भिन्न = \(\frac { 1 }{ 4 } \) = 0.25

(b) साधारण भिन्न – 150% = \(\frac { 150% }{ 100 } \) = \(\frac { 3 }{ 2 } \)
दशमलव भिन्न – \(\frac { 3 }{ 2 } \) = 1.5

(c) साधारण भिन्न – 20% = \(\frac { 20 }{ 100 } \) = \(\frac { 1 }{ 5 } \)
दशमलव भिन्न- \(\frac { 1 }{ 5 } \) = 0.20

(d) साधारण भिन्न – 5% = \(\frac { 5 }{ 100 } \) = \(\frac { 1 }{ 20 } \)
दशमलव भिन्न – \(\frac { 1 }{ 20 } \) = 0.05

प्रश्न 7.
एक नगर में 30% महिलाएं, 40% पुरुष तथा शेष बच्चे हैं। बच्चों का प्रतिशत कितना है ?
हल:
∴ महिलाएँ = 30% तथा पुरुष = 40%
∴ बच्चों का प्रतिशत = 100% – (30% + 40%)
= 100% – 70% = 30%

प्रश्न 8.
किसी क्षेत्र के 15,000 मतदाताओं में से 60% ने मतदान में भाग लिया। ज्ञात कीजिए कि कितने प्रतिशत ने मतदान में भाग नहीं लिया। क्या अब ज्ञात कर सकते हैं कि वास्तव में कितने मतदाताओं ने मतदान नहीं किया ?
हल:
कुल मतदाता = 15,000
मतदान करने वाले मतदाताओं का प्रतिशत = 60%
∴ मतदान न करने वाले मतदाताओं का प्रतिशत
= 100% – 60% = 40%
मतदान न करने वाले मतदाताओं की संख्या
= 15000 का 40%
= \(\frac { 40 }{ 100 } \) × 15000 = 6000
अत: 6000 मतदाताओं ने मतदान नहीं किया।

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प्रश्न 9.
मीता अपने वेतन में से ₹ 4000 बचाती है। यदि यह उसके वेतन का 10% है, तब उसका वेतन कितना है ?
हल:
माना कि उसका वेतन ₹ है।
उसकी बचत = वेतन का 10%
∴ x का 10% = ₹4000
या \(\frac { 10 }{ 100 } \) × x = ₹4000
या x = ₹ \(\frac{4000 \times 100}{10}\) = ₹40000
अत: उसका वेतन ₹40000 है।

प्रश्न 10.
एक स्थानीय क्रिकेट टीम ने, एक सत्र (Season) में 20 मैच खेले। इनमें से उस टीम ने 25% मैच जीते। जीते गए मैचों की संख्या कितनी थी ?
हल:
कुल खेले गये मैचों की संख्या = 20
टीम द्वारा जीते गए मैच = 25%
∴ जीते गए मैचों की संख्या = 20 का 25%
= \(\frac { 25 }{ 100 } \) × 20 = 5
अत: टीम ने 5 मैच जीते।

पाठ्य-पुस्तक पृष्ठ संख्या # 179

प्रयास कीजिए

प्रश्न 1.
15 मिठाइयों को मनु तथा सोनू में इस प्रकार बाँटिए कि उन्हें कुल का क्रमशः 20% तथा 80% मिले।
हल:
कुल मिठाइयों की संख्या = 15
मनु का हिस्सा = 15 का 20%
= \(\frac { 20 }{ 100 } \) × 15
= 3 मिठाइयाँ
सोनू का हिस्सा = 15 का 80%
= \(\frac { 80 }{ 100 } \) × 15
= 12 मिठाइयाँ

प्रश्न 2.
यदि किसी त्रिभुज के कोणों में अनुपात 2:3:4 है तब उसके प्रत्येक कोण की माप क्या होगी?
हल:
∵ त्रिभुज के तीनों अन्त:कोणों का योग = 180°
त्रिभुज के कोणों का अनुपात = 2:3:4
अनुपात का योग = 2 + 3 + 4 = 9
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अतः अभीष्ट कोण 40°, 60° और 80° हैं।

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पाठ्य-पुस्तक पृष्ठ संख्या # 180

प्रयास कीजिए

प्रश्न 1.
बढ़ने या घटने का प्रतिशत ज्ञात कीजिए :
(i) कमीज का मूल्य ₹ 80 से घटकर 60 हो गया।
(ii) किसी परीक्षा में प्राप्तांक बढ़कर 20 से 30 हो गए।
हल:
(i) कमीज का वास्तविक मूल्य = ₹ 80
कमीज का नया मूल्य = ₹60
कमीज के मूल्य में कमी = ₹80 – ₹60 = ₹20
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(ii) मूल प्राप्तांक = 20
नये प्राप्तांक = 30
प्राप्तांक में वृद्धि = 30 – 20 = 10
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प्रश्न 2.
मेरी माताजी कहती हैं कि उनके बचपन, के समय पैट्रोल की दर ₹ 1 प्रति लीटर थी और आजकल यह ₹52 प्रति लीटर है। पैट्रोल की दर में कितने प्रतिशत की वृद्धि हुई ?
हल:
पैट्रोल का पहले का मूल्य = ₹ 1 प्रति लीटर
पैट्रोल का नया मूल्य = ₹52 प्रति लीटर
पैट्रोल के मूल्य में वृद्धि =₹52 – ₹ 1 = ₹51
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पाठ्य-पुस्तक पृष्ठ संख्या # 183

प्रयास कीजिए

प्रश्न 1.
एक दुकानदार ने एक कुर्सी ₹ 375 में खरीदी तथा ₹ 400 में बेच दी। उसका लाभ प्रतिशत ज्ञात कीजिए।
हल:
कुर्सी का क्रय मूल्य = ₹ 375
कुर्सी का विक्रय मूल्य = ₹ 400
∴ विक्रय मूल्य > क्रय मूल्य
∴ लाभ = ₹400 – ₹375 = ₹25
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प्रश्न 2.
एक वस्तु ₹50 में क्रय की गई तथा 12 प्रतिशत लाभ पर बेच दी गई। उसका विक्रय मूल्य ज्ञात कीजिए।
हल:
वस्तु का क्रय मूल्य = ₹50, लाभ = 12%
∴ ₹50 पर लाभ = ₹50 का 12%
= \(\frac { 12 }{ 100 } \) × ₹50 = ₹6
अत: वस्तु का विक्रय मूल्य = ₹50 + ₹6 = ₹56

प्रश्न 3.
एक वस्तु ₹ 250 में बेचने पर 5 प्रतिशत लाभ प्राप्त हुआ। उसका क्रय मूल्य क्या था?
हल:
वस्तु का विक्रय मूल्य = ₹250, लाभ = 5%
माना कि क्रय मूल्य x रूपया है।
लाभ = x का 5%
= \(\frac { 5 }{ 100 } \) × x = ₹ \(\frac { x }{ 20 } \)
∴ विक्रय मूल्य = क्रय मूल्य + लाभ
∴ ₹ 250 = ₹x + ₹\(\frac { x }{ 20 } \)
या ₹250 = ₹ \(\frac { 21x }{ 20 } \)
या x = ₹ \(\frac{250 \times 20}{21}\) = ₹ 238 \(\frac { 2 }{ 21 } \)
अत: वस्तु का क्रय मूल्य = ₹ 238 \(\frac { 2 }{ 21 } \)

प्रश्न 4.
एक वस्तु 5 प्रतिशत हानि उठाकर ₹ 540 में बेची गई। उसका क्रय मूल्य क्या था ?
हल:
वस्तु का विक्रय मूल्य = ₹ 540, हानि = 5%
माना कि वस्तु का क्रय मूल्य = ₹ x
हानि = ₹ x का 5% = \(\frac { 5 }{ 100 } \) × x = ₹ \(\frac { x }{ 20 } \)
∴ विक्रय मूल्य = क्रय मूल्य – हानि
∴ ₹540 = ₹x – ₹\(\frac { x }{ 20 } \) = ₹ \(\frac { 19 }{ 20 } \)x
या x = ₹ \(\frac{540 \times 20}{19}\) = ₹ 568 \(\frac { 8 }{ 19 } \)
अत: वस्तु का क्रय मूल्य = 568 \(\frac { 8 }{ 19 } \)

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पाठ्य-पुस्तक पृष्ठ संख्या # 185

प्रयास कीजिए

प्रश्न 1.
₹ 10000, 5 प्रतिशत वार्षिक दर से जमा किए जाते हैं। एक वर्ष बाद कितना ब्याज प्राप्त होगा?
हल:
मूलधन (P) = ₹10000, दर R = 5%,
समय (T) = 1 वर्ष
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प्रश्न 2.
₹ 3500, 7 प्रतिशत वार्षिक दर से उधार दिए जाते हैं। दो वर्ष बाद कितना साधारण ब्याज देय होगा?
हल:
मूलधन (P) = ₹ 3500, दर (R) = 7%, समय (T) = 2 वर्ष
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प्रश्न 3.
₹ 6,050, 6.5 प्रतिशत वार्षिक दर से उधार लिए जाते हैं। 3 वर्ष बाद कितना ब्याज तथा कितना मिश्रधन देय होगा?
हल:
मूलधन (P) = ₹ 6050, दर (R) = 6.5%, समय (T) = 3 वर्ष
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∴ मिश्रधन = मूलधन + ब्याज
∴ मिश्रधन = ₹6050 + ₹ 1179.75
= ₹7229.75

प्रश्न 4.
₹ 7000, 3.5 प्रतिशत वार्षिक दर से दो वर्ष के लिए उधार लिए जाते हैं। दो वर्ष बाद कितना मिश्रधन देय होगा?
हल:
मूलधन (P) = ₹ 7000, दर (R) = 3.5%, समय (T) = 2 वर्ष
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∴ मिश्रधन = मूलधन + ब्याज
∴ मिश्रधन = ₹7,000 + ₹490
= ₹7,490

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पाठ्य-पुस्तक पृष्ठ संख्या # 186

प्रयास कीजिए

प्रश्न 1.
आपके बैंक खाते में ₹ 2,400 जमा हैं तथा ब्याज की दर 5 प्रतिशत वार्षिक है। कितने वर्षों बाद ब्याज की राशि ₹ 240 होगी?
हल:
यहाँ, मूलधन (P) = ₹ 2,400, दर (R) = 5%, ब्याज (S.I.) = ₹240, समय (T) = ?
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प्रश्न 2.
किसी धन का 5 प्रतिशत वार्षिक दर से 3 वर्ष का ब्याज ₹ 450 होता है। वह धन ज्ञात कीजिए।
हल:
यहाँ, दर (R) = 5%, समय (T) = 3 वर्ष, साधारण ब्याज (S.I.) = ₹ 450, मूलधन (P) = ?
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प्रश्न 1.
अनुपात ज्ञात कीजिए :
(a) ₹ 5 का 50 पैसे से
(b) 15 kg का 210g से
(c) 9 m का 27 cm से
(d) 30 दिनों का 36 घण्टों से
हल:
(a) ₹5 का 50 पैसे से,
= ₹ 5 : 50 पैसे
= 5 × 100 पैसे : 50 पैसे (∵ 1 रुपया = 100 पैसे)
= 500 : 50 = \(\frac { 500 }{ 50 } \) : \(\frac { 50 }{ 50 } \)
(∵500 और 50 का म. स. = 50)
= 10 : 1

(b) 15 kg का 210 g से
= 15 kg : 210g = 15 × 1000g : 210g (∵ 1 kg = 1000g)
= 15000 : 210 = \(\frac { 15000 }{ 30 } \) : \(\frac { 210 }{ 30 } \)
(∵ 15000 और 210 का म. स. = 30)
= 500 : 7

(c) 9 m का 27 cm से,
= 9 m : 27 cm = 9 × 100 cm : 27 cm (∵ 1 m = 100 cm)
= 900 : 27 = \(\frac { 900 }{ 90 } \) : \(\frac { 27 }{ 9 } \) (∵ 900 और 27 का म .स. = 9)
= 100 : 3

(d) 30 दिनों का 36 घण्टे से
= 30 दिन : 36 घण्टे = 30 × 24 घण्टे : 36 घण्टे (∵ 1 दिन = 24 घण्टे)
= 720 घण्टे : 36 घण्टे = \(\frac { 720 }{ 36 } \) : \(\frac { 36 }{ 36 } \)
(∵ 720 और 36 का म. स. = 36)
= 20 : 1

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प्रश्न 2.
एक कम्प्यूटर प्रयोगशाला में 6 विद्यार्थियों के लिए 3 कम्प्यूटर होने चाहिए। ज्ञात कीजिए कि 24 विद्यार्थियों के लिए कितने कम्प्यूटरों की आवश्यकता होगी?
हल:
माना कि आवश्यक कम्प्यूटर = x
∴ 3 : x = 6 : 24
या x × 6 = 3 × 24
या x = \(\frac{3 \times 24}{6}\) = 12
अतः अभीष्ट कम्प्यूटरों की संख्या = 12

प्रश्न 3.
राजस्थान की जनसंख्या = 570 लाख और उत्तर प्रदेश की जनसंख्या = 1660 लाख; राजस्थान का क्षेत्रफल = 3 लाख km2 और उत्तर प्रदेश का क्षेत्रफल = 2 लाख km2 ज्ञात कीजिए :
(i) इन दोनों राज्यों में प्रति km2 कितने व्यक्ति हैं ?
(ii) किस राज्य की जनसंख्या कम घनी है ?
हल:
(i) राजस्थान की जनसंख्या = 570 लाख, राजस्थान का क्षेत्रफल = 3 लाख km2
∴ प्रति km2 में व्यक्तियों की संख्या
= \(\frac { 570 }{ 3 } \) = 190 लाख प्रति km2
उत्तर प्रदेश की जनसंख्या = 1660 लाख, उत्तर प्रदेश का क्षेत्रफल = 2 लाख km2
∴ प्रति km2 में व्यक्तियों की संख्या
= \(\frac { 1660 }{ 2 } \) = 830 लाख प्रति km2

(ii) ∵ 190 लाख < 830 लाख
अत: राजस्थान की जनसंख्या कम घनी है।

पाठ्य-पुस्तक पृष्ठ संख्या # 170

रीना एक मेज के ऊपरी भाग (टॉप) को बनाने के लिए 100 भिन्न-भिन्न रंगों वाली टाइलें प्रयोग करती है। उसने पीले, हरे, लाल और नीले रंग वाली टाइलें अलग-अलग गिनीं और एक तालिका में निम्न प्रकार लिखा। क्या आप इस तालिका को पूरी करने में उसकी सहायता करेंगे ?
हल:
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पाठ्य-पुस्तक पृष्ठ संख्या # 171

प्रयास कीजिए

प्रश्न 1.
निम्न आँकड़ों के लिए विभिन्न ऊँचाई वाले बच्चों का प्रतिशत ज्ञात कीजिए।
हल:
MP Board Class 7th Maths Solutions Chapter 8 राशियों की तुलना Ex 8.1 image 2

प्रश्न 2.
एक दुकान में विभिन्न मापों वाले जूतों की जोडियों की संख्या निम्न प्रकार है-माप 2:20, माप 3:30, माप 4:28, माप 5:14, माप 6:8.
इस सूचना को ऊपर की भाँति एक तालिका के रूप में लिखिए और दुकान में उपलब्ध जूते की हर माप को प्रतिशतता में भी ज्ञात कीजिए।
हल:
MP Board Class 7th Maths Solutions Chapter 8 राशियों की तुलना Ex 8.1 image 3

पाठ्य-पुस्तक पृष्ठ संख्या # 172

प्रयास कीजिए

प्रश्न 1.
विभिन्न रंगों वाली 10 टुकड़ों (Chips) का संग्रह इस प्रकार से है:
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तालिका पूर्ण कीजिए तथा प्रत्येक रंग वाले टुकड़ों का प्रतिशत ज्ञात कीजिए।
हल:
यहाँ (G) = 4, (B) = 3, तथा (R) = 3, योग = 10
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प्रश्न 2.
माला के पास चूड़ियों का एक संग्रह है जिनमें 20 सोने तथा 10 चाँदी की चूड़ियाँ हैं। प्रत्येक प्रकार की चूड़ियों का प्रतिशत क्या है ? क्या आप इसके लिए भी ऊपर की तरह तालिका बना सकते हैं ?
हल:
हाँ, तालिका बना सकते हैं।
आँकड़ों को तालिका के रूप में रखने पर,
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पाठ्य-पुस्तक पृष्ठ संख्या #173

सोचिए, चर्चा कीजिए एवं लिखिए

प्रश्न 1.
निम्न उदाहरणों को ध्यान से देखिए और चर्चा कीजिए कि उनमें प्रत्येक के लिए कौन-सी विधि अधिक उपयुक्त है ?
1. वातावरण में, 1 gm वायु में उपस्थित हैं:
0-78 ग्राम नाइट्रोजन अथवा 78% नाइट्रोजन
0-21 ग्राम ऑक्सीजन अथवा 21% ऑक्सीजन
0-01 ग्राम अन्य गैस अथवा 1% अन्य गैस

2. एक कमीज के कपड़े में होते है :
\(\frac { 3 }{ 5 } \) सूती अथवा 60% सूती
\(\frac { 2 }{ 5 } \) अथवा 40% पॉलिस्टर
उत्तर:
दोनों उदाहरणों की तुलना करने पर दूसरी विधि अर्थात् प्रतिशत विधि अधिक उपयुक्त है।

पाठ्य-पुस्तक पृष्ठ संख्या # 174

सोचिए, चर्चा कीजिए एवं लिखिए

प्रश्न (i) क्या आप किसी ‘केक’ (Cake) का 50% खा सकते हैं ?
क्या आप किसी केक’ (Cake) का 100% खा सकते है ?
क्या आप किसी ‘केक’ (Cake) का 150% खा सकते है ?
(ii) क्या किसी वस्तु का मूल्य 50% बढ़ सकता है ?
क्या किसी वस्तु का मूल्य 100% बढ़ सकता है ?
क्या किसी वस्तु का मूल्य 150% बढ़ सकता है ?
उत्तर:
(i) जब हम भागों के बारे में सोचते हैं तो यह 100% या इससे कम होता है। अतः
हम किसी केक का 50% खा सकते हैं।
हम किसी केक का 100% खा सकते हैं।
हम किसी केक का 150% नहीं खा सकते हैं।
(ii) जब हम किसी वस्तु के मूल्य में बढ़ोत्तरी के बारे में सोचते हैं, तो बढोत्तरी में प्रतिशत 100% से ज्यादा हो सकता है। अतः
किसी वस्तु का मूल्य 50% बढ़ सकता है।
किसी वस्तु का मूल्य 100% बढ़ सकता है।
किसी वस्तु का मूल्य 150% बढ़ सकता है।

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प्रयास कीजिए

प्रश्न 1.
निम्नलिखित भिन्नों को प्रतिशत में बदलिए:
(a) \(\frac { 12 }{ 16 } \)
(b) 3.5
(c) \(\frac { 49 }{ 50 } \)
(d) \(\frac { 2 }{ 2 } \)
(e) 0.05
उत्तर:
(a) \(\frac { 12 }{ 16 } \) = \(\frac { 12 }{ 16 } \) × 100% = 75%
(b) 3.5 = 3.5 × 100% = 350%
(c) \(\frac { 49 }{ 50 } \) = \(\frac { 49 }{ 50 } \) × 100% = 98%
(d) \(\frac { 2 }{ 2 } \) = \(\frac { 2 }{ 2 } \) × 100% = 100%
(e) 0.05 = 0.05 × 100% = 100%

प्रश्न 2.
(i) 32 विद्यार्थियों में 8 अनुपस्थित हैं। विद्यार्थियों का क्या प्रतिशत अनुपस्थित है ?
(ii) 25 रेडियो सैट में 16 खराब हैं। खराब रेडियों सैटों का प्रतिशत क्या है ?
(ii) एक दुकान में 500 पुर्जे हैं जिनमें से 5 बेकार हैं। बेकार पुों का प्रतिशत क्या है ?
(iv) 120 मतदाताओं में से 90 ने ‘हाँ’ में मत दिया। कितने प्रतिशत ने ‘हाँ’ में मत दिया ?
हल:
(i) अनुपस्थित विद्यार्थियों का प्रतिशत
= \(\frac { 8 }{ 32 } \) × 100% = 25%

(ii) खराब रेडियों सैटों का प्रतिशत
= \(\frac { 16 }{ 25 } \) × 100% = 64%

(iii) खराब पुर्जी का प्रतिशत
= \(\frac { 5 }{ 500 } \) × 100% = 1%

(iv) ‘हाँ’ में मत देने वालों का प्रतिशत
= \(\frac { 90 }{ 120 } \) × 100% = 75%

पाठ्य-पुस्तक पृष्ठ संख्या # 175

प्रश्न 1.
निम्न तालिका को ध्यान से देखकर पूरा कीजिए :
हल:
MP Board Class 7th Maths Solutions Chapter 8 राशियों की तुलना Ex 8.1 image 7

प्रश्न 2.
ऐसे कुछ अन्य उदाहरण बनाइए और उन्हें हल भी कीजिए।
हलः
अन्य उदाहरण:
MP Board Class 7th Maths Solutions Chapter 8 राशियों की तुलना Ex 8.1 image 8

प्रयास कीजिए

प्रश्न 1.
35% + ….% = 100%
64% + 20% + ….% = 100%
45% = 100% – ….%
70% = ….. % – 30%
हल:
35% + 65% = 100%
64% + 20%+16% = 100%
45% = 100%-55%
70% = 100%-30%

प्रश्न 2.
किसी कक्षा के विद्यार्थियों में 65% के पास साइकिलें हैं। कितने प्रतिशत विद्यार्थियों के पास साइकिलें नहीं हैं ?
हल:
विद्यार्थी जिनके पास साइकिलें हैं = 65%
शेष विद्यार्थी = 100%-65%= 35%
अत: 35% विद्यार्थियों के पास साइकिलें नहीं हैं।

प्रश्न 3.
हमारे पास सेब, सन्तरों तथा आमों से भरी एक टोकरी है। यदि उसमें 50% सेब तथा 30% सन्तरे हैं, तब आमों का प्रतिशत कितना है?
हल:
सेबों का प्रतिशत = 50%, संतरों का प्रतिशत = 30%
सेबों तथा संतरों का कुल प्रतिशत = 50% + 30% = 80%
∴ आमों का प्रतिशत = 100%-80% = 20%
अत: टोकरी में आमों का प्रतिशत 20% है।

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सोचिए, चर्चा कीजिए एवं लिखिए

प्रश्न 1.
एक परिधान के बनाने पर हुए व्यय को देखिए। कढ़ाई पर 20%, कपड़े पर 50%, सिलाई पर 30%। क्या आप कुछ अन्य ऐसे ही उदाहरण दे सकते हैं।
उदाहरण – (i) पढ़ाई पर व्यय-फीस =50%, वाहन = 15%, किताबें व स्टेशनरी = 35%
(ii) भोजन पर व्यय-भोजन सामग्री = 60%, मजदूरी = 10%, गैस = 20%, मसाले = 10%

पाठ्य-पुस्तक पृष्ठ संख्या # 176

प्रयास कीजिए

प्रश्न 1.
निम्न आकृतियों का कितने प्रतिशत छायांकित है ?
MP Board Class 7th Maths Solutions Chapter 8 राशियों की तुलना Ex 8.1 image 9
चित्र 8.1
हल:
(i) छायांकित भाग = \(\frac { 1 }{ 4 } \) + \(\frac { 1 }{ 4 } \) + \(\frac { 1 }{ 4 } \) = \(\frac { 3 }{ 4 } \)
छायांकित भाग का प्रतिशत = \(\frac { 3 }{ 4 } \) × 100% = 75%
(ii) छायांकित भाग = \(\frac { 1 }{ 4 } \) + \(\frac { 1 }{ 8 } \) + \(\frac { 1 }{ 8 } \) = \(\frac { 2+1+1 }{ 8 } \) = \(\frac { 4 }{ 8 } \) = \(\frac { 1 }{ 2 } \)

छायांकित भाग का प्रतिशत = \(\frac { 1 }{ 2 } \) × 100% = 50%

पाठ्य-पुस्तक पृष्ठ संख्या # 177

प्रयास कीजिए

प्रश्न 1.
ज्ञात कीजिए :
(a) 164 का 50%
(b) 12 का 75%
(c) 64 का 125%
हल:
(a) 164 का 50% = \(\frac { 50 }{ 100 } \) × 164
= \(\frac { 1 }{ 2 } \) × 164 = 82

(b) 12 का 75% = \(\frac { 75 }{ 100 } \) × 12
= \(\frac { 3 }{ 4 } \) × 12 = 3 × 39

(c) 64 का 12 \(\frac { 1 }{ 2 } \)% = \(=\frac{12 \frac{1}{2}}{100} \times 64\)
= \(\frac { 25 }{ 2 } \) × \(\frac { 1 }{ 100 } \) 64 = 8

प्रश्न 2.
25 बच्चों की कक्षा में 8% बच्चे वर्षा में भीगना पसंद करते हैं। वर्षा में भीगने वाले बच्चों की संख्या ज्ञात कीजिए।
हल:
वर्षा में भीगने वाले बच्चे = 25 का 8%
= \(\frac { 8 }{ 100 } \) × 25 = \(\frac { 8 }{ 4 } \) × 1 = 2

पाठ्य-पुस्तक पृष्ठ संख्या # 178

प्रयास कीजिए

प्रश्न 1.
9 किस संख्या का 25% है ?
हल:
मानाकि अभीष्ट संख्या x है।
∴ x का 25% = 9
या \(\frac { 25 }{ 100 } \) × x = 9
या x = \(\frac{9 \times 100}{25}\) = 9 × 4 = 36
अतः अभीष्ट संख्या 36 है।

प्रश्न 2.
15 किस संख्या का 75% है ?
हल:
मानाकि अभीष्ट संख्या x है।
∴ x का 75% = 15
या \(\frac { 75 }{ 100 } \) × x = 15
या x = \(\frac{15 \times 100}{75}\) = \(\frac { 100 }{ 5 } \) = 20
अतः अभीष्ट संख्या 20 है।

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MP Board Class 7th General Hindi निबन्ध लेखन

MP Board Class 7th General Hindi निबन्ध लेखन

विज्ञान के चमत्कार

प्रस्तावना-अनेक वर्षों से विज्ञान निरंतर उन्नति कर रहा है। विज्ञान का इतिहास अत्यंत प्राचीन है। रामायण काल में भी पुष्पक विमान, अग्नि बाण, ब्रह्मास्त्र आदि ऐसे साधन थे; जिनके मुकाबले अभी भी विज्ञान पीछे है। वैसे 19वीं एवं 20वीं सदी में विज्ञान में नवीन आविष्कार हुए और आज हम विज्ञान से इतने संबद्ध हो चुके हैं कि इसके बिना हमारा जीवन ही अधूरा रह जाएगा।

आधुनिक युग का विज्ञान-आधुनिक युग के विज्ञान को देखा जाए, तो इसे हम आविष्कारों के युग की संज्ञा दे सकते हैं। सुई से हवाई जहाज़ तक के निर्माण में हमें विज्ञान की स्पष्ट झलक दिखाई देती है। विज्ञान ने मानव में क्रांतिकारी परिवर्तन लाया है। भाप, बिजली एवं अणु शक्ति को वश में करने वाला मानव आज वैभव की चरम सीमा पर आरूढ़ है। तेज़ गति से चलने वाले वाहन, समुद्री जहाज़ एवं आकाश में वायुवेग से चलने वाले हवाई जहाज़, चंद्रलोक की यात्रा करने वाला रॉकेट आदि कुछ ऐसे उदाहरण हैं, जिन्होंने प्रकृति पर मानव की विजय का उज्जवल दृष्टांत प्रस्तुत किया है।

संचार साधनों में वृद्धि-विज्ञान ने हमारे जीवन में तार, टेलीफोन, रेडियो, टेलीविज़न, सिनेमा और ग्रामोफोन आदि ने हमारे जीवन में अनेक सुविधाएँ प्रदान की हैं। इन सुविधाओं की कल्पना हमारे पूर्वजों के लिए कठिन थी।

विज्ञान वरदान के रूप में-हर सिक्के के दो पहलू होते हैं। इसी प्रकार विज्ञान के भी दो पहलू हैं। यदि हम विज्ञान के लाभकारी परिणामों पर दृष्टिपात करें, तो हम पायेंगे कि यह हमारे लिए ईश्वरीय वरदान है। प्रारंभ में मनुष्यों का अधिकांश समय उदर पूर्ति हेतु ही व्यतीत हो जाता था, परंतु आज के वैज्ञानिक युग में व्यक्ति के पास इतने अधिक काम और समय की कमी रहती है कि वह अपना काम बिना विज्ञान की सहायता के कर भी नहीं सकता। बड़ी-बड़ी मशीनों की सहायता से दिन भर का काम घंटों में निपटा लिया जाता है। मशीनीकरण से कीमती समय की बचत हो जाती है तथा कम समय में अधिक उत्पादन कर हम अपना एवं अपने देश का आर्थिक विकास संभव बनाते हैं। अतः हम कह सकते हैं कि विज्ञान मनुष्य को ईश्वरीय वरदान के रूप में प्राप्त है। इसमें किंचित् मात्रा भी संदेह भी नहीं कि विज्ञान हमारे जीवन का एक अमूल्य अंश है।

विज्ञान अभिशाप के रूप में-जिस प्रकार घोड़े की लगाम पकड़ कर हम घोड़े को सही मार्ग पर चलने को विवश करते हैं, उसी प्रकार विज्ञान भी हमारे हाथ की कठपुतली है। इसका उपयोग यदि निर्माण कार्यों में किया जाए, तो हमारे लिए वरदान है। वहीं यदि इसका प्रयोग अनुचित साधन के रूप में किया जाए, तो यह सर्वनाश का प्रबल प्रतीक बन सकती है, जैसे हिरोशिमा व नागासाकी का भयंकर विस्फोट विज्ञान के अभिशाप का एक सशक्त उदाहरण है।

प्रथम एवं द्वितीय विश्व-युद्ध के मध्य जन-धन का जितना विनाश विज्ञान के द्वारा हुआ, उतना विकास हम जीवनपर्यंत नहीं कर सकते। 40 साल बाद भी वहाँ इसका कुपरिणाम दिखाई दे जाता है। छोटा-सा उदाहरण बिजली को ही लें। वही बिजली बल्ब में जलकर घर के अंधकार को दूर करती है, तो असावधानीवश बिजली के करेंट द्वारा व्यक्ति मृत्यु के मुख में जाकर कुल के दीपक को बुझा कर विज्ञान के दुष्परिणामों को उजागर करता है।

उपसंहार-विज्ञान हमारे लिए वरदान भी है, और अभिशाप भी। हमें चाहिए कि विज्ञान का उपयोग विध्वंसात्मक रूप से न करके रचनात्मक रूप से करें। मानव विज्ञान का स्वामी है अतः उस पर अंकुश लगाए रहें, ताकि विज्ञान द्वारा होने वाले सर्वनाश से बचा जा सके। अंत में मैं यही कहना चाहूँगा कि मनुष्य विज्ञान का उपयोग विध्वंसात्मक रूप से न कर सृजनात्मक रूप से करे, जिससे आसानी से इक्कीसवीं शताब्दी में पदार्पण करें।

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धार्मिक त्योहार : दीपावली

प्रस्तावना-भारतीय त्योहारों में दशहरा, दीपावली, रक्षाबंधन, होली, विजयादशमी आदि का महत्त्वपूर्ण स्थान है। इसमें दीपावली अपने ढंग का एक अनोखा त्योहार है। इस दिन लोग अपनी प्रसन्नता व्यक्त करने के लिए दीपकों द्वारा सारे संसार को प्रकाशित करते हैं। इसीलिए इस त्योहार का नाम दीपावली पड़ा।

ऐतिहासिक महत्त्व-इस त्योहार के साथ अनेक ऐतिहासिक एवं धार्मिक गाथायें जुड़ी हुई हैं। ऐसी जनश्रुति है कि भगवान् श्रीराम, रावण पर विजय प्राप्त करने के पश्चात् इसी दिन अयोध्या वापस आए थे। अयोध्यावासियों ने उनका दीपों द्वारा स्वागत किया था। कुछ पौराणिक गाथाओं के अनुसार भगवान विष्णु ने इसी दिन नरकासुर का वध कर खुशियाँ मनाई थीं। दीपावली के मनाने का सामाजिक कारण भी है। वैदिककाल में जब फसल काटकर धान्य घर पर आ जाता था, तो किसान इसे बड़े प्रेम से अपने इष्ट देव को अर्पित करता था, यज्ञ होते थे तथा रात्रि में दीपों के प्रकाश से सारा वातावरण प्रकाशमय हो जाता था। वैज्ञानिक दृष्टि से भी इसका महत्त्व है। बरसात में गंदे पानी के कारण हानिकर कीड़े उत्पन्न हो जाते हैं। दीपों को जलाकर उन्हें भस्म कर दिया जाता है।

पूर्व तैयारी-दीपावली से कई दिन पूर्व तैयारी आरंभ हो जाती है। लोग अपने घरों की लिपाई-पुताई करवाते हैं एवं घरों को रंगीन चित्रों द्वारा सजाते हैं। पुताई से मच्छर, मक्खी एवं अन्य हानिकारक जीव नष्ट हो जाते हैं और कई तरह की बीमारियाँ होने से लोग बचे रहते हैं। कच्चे मकानों की मरम्मत भी इसी समय की जाती है तथा सफाई का विशेष ध्यान रखा जाता है।

पंच दिवसीय कार्यक्रम-यह त्योहार पाँच दिनों का होता है। इस त्योहार का आरंभ कार्तिक कृष्ण त्रयोदशी से होता है। यह दिन धन तेरस के नाम से मनाया जाता है। लोग नये बर्तन एवं वस्त्र आदि का क्रय करते हैं। दूसरे दिन नरक चतुर्दशी का आयोजन होता है। तीसरे दिन दीपावली का मुख्य आयोजन होता है। लोग शाम के समय लक्ष्मी, गणेश, सरस्वती आदि का पूजन कर दीपकों द्वारा घरों को प्रकाशित करते हैं। चौथे दिन गोवर्धन पूजा एवं पाँचवें दिन भाई दूज या यम द्वितीया के साथ इस त्योहार का समापन होता है।

दीपावली का पूजन-कार्तिक मास की अमावस्या को व्यापारी अपने बहीखातों का पूजन करते हैं तथा इष्ट मित्रों सहित लक्ष्मी जी का पूजन कर प्रसाद वितरण करते हैं। लक्ष्मी पूजन के उपरांत रात्रि में चारों ओर दीपकों का प्रकाश जगमगा उठता है। नगरों में दियों के स्थान पर मोमबत्तियों एवं बिजली की झालरों द्वारा प्रकाश किया जाता है। आतिशबाजी एवं पटाखों की ध्वनि से सारा आकाश गूंज उठता है। बालक-बालिकाएँ उमंग के साथ नया वस्त्र धारण कर प्रसाद वितरण एवं मिठाइयों का वितरण करते हैं। कुछ लोग रात में जुआ भी खेलते हैं, परंतु यह बुरी बात है। जुआ का दुष्परिणाम हम महाभारत में स्पष्ट रूप से देख चुके हैं, अतः इस आयोजन से हमें बचना चाहिए। बच्चों को खील, मिठाई, आतिशबाजी आदि की प्रसन्नता प्रदान करते हैं। इस दिन चारों ओर एक अनोखी छटा रहती है। चलह-पहल एवं प्रकाश से सारा वातावरण आनान्दित रहता है।

लाभ-हानि-इस त्योहार से जहाँ हमें लाभ होते हैं, वहीं नुकसान भी होते हैं। आतिशबाजी में जलकर लोग प्राण तक गंवा बैठते हैं, एवं जुए में कई घर बरबाद हो जाते हैं।

उपसंहार-यह हमारा धार्मिक त्योहार है। इसे उचित रूप से मनाया जाना चाहिए। इस दिन हमें शुभ मार्ग पर चलने की शपथ लेनी चाहिए। बुरे मार्ग पर चलने से अपने को बचाना चाहिए। आतिशबाजी आदि पर अधिक पैसा व्यय नहीं करना चाहिए।

महापुरुषों की जीवनी : महात्मा गांधी

प्रस्तावना-महात्मा गांधी हमारे देश के महान् नेताओं में अपना प्रमुख स्थान रखते हैं। सारा राष्ट्र उन्हें ‘राष्ट्रपिता’ और ‘बापू’ के नाम से जानता है। आपका पूरा नाम मोहनदास करमचंद गांधी था। आपने अहिंसा और सत्याग्रह के बल पर भारत को स्वतंत्र कराने का बीड़ा उठाया था। विश्व इतिहास में आपका नाम सदैव सम्मान के साथ लिया जाता रहेगा।

जन्म-महात्मा गाँधी का जन्म 2 अक्टूबर सन् 1869 में गुजरात के पोरबंदर नामक स्थान में हुआ था। आप के. पिता का नाम करमचंद था और वे राजकोट के राजा के दीवान थे। आपकी माता का नाम पुतलीबाई था। आपकी माता धार्मिक एवं सती साध्वी महिला थीं। उनकी शिक्षाओं का प्रभाव महात्मा गाँधी पर आजीवन रहा।

शिक्षा-दीक्षा-महात्मा गाँधी की प्रारंभिक शिक्षा पोरबंदर में हुई। मैट्रिक तक का अध्ययन आपने स्थानीय विद्यालयों में ही किया। तेरह वर्ष की अवस्था में आपका विवाह सुयोग्य कस्तूरबा के साथ हुआ। तदनंतर आप कानूनी शिक्षा प्राप्त करने के लिए विलायत गए। वहाँ से बैरिस्टरी की परीक्षा पास कर आप स्वदेश वापस आ गए। आपने अपना वकालत का पेशा बंबई नगर में आरंभ किया। कुछ विशेष मुकद्दमों के मामले में आपको पैरवी करने के लिए दक्षिण अफ्रीका जाना पड़ा। दक्षिण अफ्रीका में हो रहे भारतीयों पर अत्याचार को देखकर गाँधी जी का मन परिवर्तित हो गया और वे वकालत का धंधा छोड़कर राष्ट्रीय सेवा में संलग्न हो गए।

आंदोलनों का आरंभ-सन 1915 में जब महात्मा गाँधी आफ्रीका से भारत आए, तो यहाँ अंग्रेजों का दमन-चक्र अपनी चरम स्थिति पर था। रोलट एक्ट जैसा काला कानून भारत में संरक्षण पा रहा था। सन् 1919 में घटित जलियांवाला बांग हत्याकाण्ड से सारा देश क्षुब्ध था। इन सारी परिस्थितियों का अवलोकन कर महात्मा गाँधी के हृदय में शांत किंतु क्रांतिकारी परिवर्तन आया। उन्होंने राष्ट्रीय आंदोलन की बागडोर अपने हाथों में ले ली तथा इतिहास में एक नए युग का आरंभ हुआ।

गांधी युग का आरंभ-सन् 1920 में महात्मा गाँधी ने अंग्रेजों के विरुद्ध असहयोग आंदोलन आरंभ किया। भारतीय जनता ने इनका अपूर्व सहयोग दिया और लाखों लोग विदेशी वस्तुओं का बहिष्कार में कूद पड़े। अंग्रेज़ों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ा। लोगों ने सरकारी कार्यालयों की होली जलाई। शासकीय संस्थाओं में पढ़ने वाले छात्र इस आंदोलन में कूद पड़े। परिणामस्वरूप भारतीय स्वतंत्रता के प्रति एक नए वातावरण का निर्माण हुआ।

सन् 1928 में ‘साइमन कमीशन’ भारत आया। गाँधी जी ने इस कमीशन का भी बहिष्कार किया। इस आंदोलन में भी उन्हें जनता का पूर्ण सहयोग प्राप्त हुआ। उन्होंने इस बीच देश को उचित नेतृत्व प्रदान किया।

सन् 1930 में महात्मा गाँधी ने नमक-कर के विरोध में नामक आंदोलन का संचालन किया। उनके साथ असंख्य भारतीय दाण्डी पहुँचे और वहाँ नमक बनाकर कानून को तोड़ा।

भारत छोड़ो आंदोलन का श्री गणेश-द्वितीय विश्व युद्ध की समाप्ति के साथ ही 1942 में गाँधी जी ने भारत छोड़ो आंदोलन का श्री गणेश कर दिया। महात्मा गांधी के अनुसार यह उनकी अन्तिम लड़ाई थी। इस आन्दोलन में गाँधी जी तथा अनेक भारतीय गाँधी नेता और असंख्य आंदोलनकारी देश की विभिन्न जेलों में गिरफ्तार हुए। अंत में अंग्रेजों को इस आंदोलन के सम्मुख झुकना पड़ा एवं 15 अगस्त, 1947 को भारत पूर्ण रूप से आजाद हो गया।

अंतिम यात्रा-बापू के पूजा करने हेतु जाते समय नाथूराम गोडसे नामक एक युवक ने 30 जनवरी, 1948 को उन्हें गोली मार दी, जिसके कारण बापू ‘हे राम!’ कहकर चिर निद्रा में लीन हो गए। भारत में सर्वत्र शोक की लहर व्याप्त हो गयी। एक युग का सूर्य क्षण भर में अस्त हो गया। बापू मरकर भी अपने यशस्वी शरीर से अमर हो गए।

उपसंहार-बापू का नाम भारतीयों में तब तक आदर के साथ लिया जाता रहेगा, जब तक एक-एक भारतवासी के हृदय में देश-प्रेम है। उनका नाम भारतीय इतिहास में स्वर्णाक्षरों में अंकित है। हम बापू के कार्यों का स्मरण कर धन्य हो जाते है।

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विद्यार्थी जीवन और अनुशासन

प्रस्तावना-अनुशासन देश का आधार स्तंभ है और विद्यार्थी के लिए इसकी अत्यंत आवश्यकता होती है। अनुशासन शब्द अनु और शासन शब्दों से मिलकर बना है। अनु का अर्थ पीछे चलना एवं शासन से तात्पर्य आज्ञा पालन अर्थात् किसी आदेश के अनुसार चलना ही अनुशासन है। जब तक बालक घर की चारदीवारी में रहता है, तब तक वह माँ-बाप के अनुशासन में रहता है।

अनुशासन का महत्त्व-बालक जो कुछ अपनी छात्रावस्था में गुण ग्रहण करता है और क्षमता प्राप्त करता है, वह उसकी सम्पत्ति बन जाती है। इस सम्पत्ति का लाभ वह जीवन पर्यंत उठाता रहता है। विद्यार्थी का जीवन समाज एवं देश की अमूल्य निधि होता है। समाज एवं देश की उन्नति मात्र विद्यार्थियों पर ही निर्भर है। यही आगे चलकर देश के कर्णधार बनते हैं।

अनुशासन को हम सफलता के मार्ग का सोपान मान सकते हैं। अनुशासन जीवन को उन्नत बनाने का मूल मंत्र है। अनुशासन से बालकों को अपने माता-पिता, गुरु एवं बड़े, लोगों का स्नेह प्राप्त होता है। स्नेह बालक के जीवन के भावी विकास में सहायक सिद्ध होता है। यह स्नेह जिस बालक को जितना प्राप्त होता है, उसका उतना ही चारित्रिक विकास संभव होता है। अनुशासन से बालक के विकास के स्मस्त मार्ग खुल जाते हैं। विद्यार्थी जीवन में अनुशासन का तात्पर्य है-‘विद्यार्थी का अपने से बड़ों की आज्ञा का पालन’। बालक को बड़ों की आज्ञा के विपरीत कोई काम नहीं करता चाहिए। क्योंकि माता-पिता, गुरु एवं परिजन ही उसके वास्तविक शुभचिंतक होते हैं; ये उसे कभी बुरे मार्ग पर जाने की सलाह नहीं देंगे। विद्यार्थी के अनुशासन का तात्पर्य यह भी है कि उसे समय से उठना, समय से सोना, खेलना, पढ़ना, पाठशाला जाना, गृह-कार्य करना, घर के काम आना आदि समयबद्ध तरीके से करना चाहिए। अर्थात् जीवन में उसे समय की कीमत का ध्यान करना चाहिए।

जो विद्यार्थी अपने अध्यापकों की आज्ञा का पालन कर समय से पढ़ते-लिखते और खेलते हैं, वे परीक्षा में अच्छे अंक प्राप्त कर उत्तीर्ण होते हैं और उनका भविष्य सुखद एवं उज्जवल बनता है।

अनुशासन के प्रकार-अनुशासन को हम दो वर्गों में विभक्त कर सकते हैं। प्रथम आंतरिक अनुशासन एवं द्वितीय बाह्य अनुशासन। आन्तरिक अनुशासन में विद्यार्थी अपने शरीर, मन एवं बुद्धि पर पूर्ण नियन्त्रण रखता है, जबकि बाह्य अनुशासन भय या लोभ वश किया जाता है। आत्म-अनुशासित व्यक्ति ही अपने जीवन में महान् बन सकता है। दुनिया में जितने भी महान् व्यक्तित्व हुए हैं, आत्म-अनुशासित ही थे। जबकि बाह्य अनुशासन बालकों को डरपोक एवं रिश्वतखोर बनाता है। यह हमारे जीवन के लिए हानिकर हो सकता है।

अनुशासनहीनता के दुष्परिवास-आजकल के विद्यार्थियों में अनुशासन का अभाव है। वे अपने माता-पिता एवं गुरुओं की आज्ञा का कम ही पालन करते हैं। स्कूल, कॉलेजों में हड़ताल, आंदोलन, परीक्षा में नकल आदि की गंदी प्रवृत्तियाँ उनमें पनपने लगती हैं। ये उनके लिए घातक है। विद्यार्थियों को इन बुराइयों से बचना चाहिए, क्योंकि इनसे उनका भविष्य अंधकारमय हो जाता है। जिससे समाज में बेकारी एवं अव्यवस्था फैल जाती है।

उपसंहार-विद्यार्थी के जीवन के पूर्ण विकास के लिए अनुशासन का विशेष महत्त्व है। अनुशासित व्यक्ति कठिन से कठिन परिस्थितियों में भी अपना मानसिक संतुलन बनाए रखता है। सभी लोग अनुशासन प्रिय व्यक्ति पर विश्वास करते हैं। दायित्व का कार्य करने में ऐसे व्यक्ति पूर्ण सक्षम होते हैं। अनुशासन से हमारा जीवन सुंदर बनता है। सुंदर जीवन सभी सुखों का आधार होता है तथा सुखी जीवन स्वस्थ मानसिकता का निर्माण करता है। अतः विद्यार्थी जीवन में अनुशासन का विशेष महत्त्व है।

स्वतंत्रता दिवस : 15 अगस्त

प्रस्तावना-15 अगस्त, 1947 का दिन हम भारतवासियों के लिए एक अविस्मरणीय दिन रहेगा। इस दिन को इतिहास कभी भुला नहीं सकता। सदियों की गुलामी के बाद आज ही के दिन हम भारवासी आजाद हुए थे। सब ने शांति एवं सुख का अनुभव किया था। इस दिन का प्रभाव कुछ अद्भुत यादें संजोए हुए आया था। लोग जब सोए तो परतंत्र थे; परंतु जब प्रातः उनकी आँख खुली, तो वे पूर्ण स्वतंत्र नागरिक थे। यह हमारे लिए एक महत्त्वपूर्ण राष्ट्रीय त्योहार है।

अनेक बलिदान-भारत सदियों तक अंग्रेजों का गुलाम रहा। आजादी प्राप्ति के लिए अनेक लोगों को अपनी कुर्बानी देनी पडी। अनेक वीरों की गाथाएँ इस आजादी के साथ जड़ी हुई हैं। देश की आजादी के लिए लोकमान्य बाल गंगाधर तिलक ने हमें नारा दिया ‘स्वाधीनता हमारा जन्म सिद्ध अधिकार है और इसे लेकर ही रहेंगे, इस हेतु उन्होंने महाराष्ट्र में गणेशोत्सव एवं शिवाजी उत्सव का आयोजन किया, जिसकी आड़ में लोगों में स्वतंत्रता में चिनगारी फॅकी। लाला लाजपत राय ने लाठियों के वार सहकार भी अपना आंदोलन बंद न किया। उनका कहना था कि “मेरी पीठ पर पड़ा एक-एक लाठी का प्रहार अंग्रेजों के कफन में कील का काम करेगा।” वास्तव में हुआ भी ऐसा ही। नेताजी सुभाष चंद्र बोस ने क्रांतिकारी नारा दिया ‘तुम मुझे खून दो, मैं तुम्हें आजादी दूंगा।’ उनका कहना था कि बिना आत्म-बलिदान के आजादी प्राप्त करना असंभव है।

स्वतंत्रता आंदोलन में महात्मा गाँधी का योगदान-महात्मा गाँधी का राष्ट्रीय स्वतंत्रता आंदोलन में एक विशेष महत्त्व था। वे अहिंसा एवं सत्याग्रह पर विश्वास करते रहे। वे सन् 1928 से भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन में कूदे और अंत तक अपने उद्देश्य की प्राप्ति के लिए आंदोलन करते रहे। इन्होंने अहिंसा को अपना सबसे बड़ा अस्त्र बनाया। इन्होंने देश के लोगों को अहिंसा के बल पर आज़ादी प्राप्ति हेतु प्रेरित किया। महात्मा गाँधी के सत्य, अहिंसा एवं त्याग सम्मुख अंग्रेजों को नत मस्तक होना पड़ा। फलस्वरूप 15 अगस्त, 1947 को देश आजाद हुआ। नेहरू परिवार का योगदान भी आजादी के लिए अविस्मरणीय रहेगा। पं. मोतीलाल नेहरू, पं. जवाहरलाल नेहरू, इंदिरा गाँधी आदि ने आज़ादी पाने के लिए अनेक प्रयत्न किए। इन्हें कई बार जेल यात्राएं भी करनी पड़ीं एवं न जाने कितनी यातनाओं का सामना करना पड़ा। पं. जवाहरलाल नेहरू ने सन 1929 में लाहौर में रावी नदी के तट पर भारत को पूर्ण स्वतंत्र कराने की पहली ऐतिहासिक घोषणा की। इन्होंने निरंतर अठारह वर्ष तक अंग्रेजों के साथ संघर्ष किया। अंततः अंग्रेजों को भारत छोड़कर जाना पड़ा और हम आजाद हुए।

विविध आयोजन-यह उत्सव भारत के प्रत्येक ग्राम, नगर एवं शहर में बड़े धूम-धाम के साथ मनाया जाता है। शालाओं में आज के दिन विविध कार्यक्रमों का आयोजन किया जाता है। राष्ट्रीय ध्वज फहराकर राष्ट्रगीत गाया जाता है एवं सारा वातावरण उल्लासमय रहता है। विदेशों में रहने वाले भारतीय भी अपना राष्ट्रीय पर्व सोल्लास मानते हैं। दिल्ली के लाल किले एवं अन्य प्रमुख स्थलों पर तिरंगा झंडा लहराया जाता है एवं विभिन्न शालाओं में प्रभात फेरियों का आयोजन किया जाता है।

उपसंहार-15 अगस्त के दिन हम सभी को यह संकल्प लेना चाहिए कि देश की अखंडता, एकता और स्वतंत्रता की रक्षा के लिए हर भारतवासी समान रूप से समर्थ है। यह त्योहार हमें देश-भक्ति की प्रेरणा देता है। तथा अपने लक्ष्य की प्राप्ति हेतु सफलता की प्रेरणा प्रदान करता है। यह हमारे लिए एक महान् राष्ट्रीय पर्व है।

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किसी खेल का वर्णन
(मेरी शाला का हॉकी मैच)

खेल विद्यार्थियों के लिए स्फूर्तिदायक टॉनिक का कार्य करते हैं। अतः स्कूलों में विभिन्न प्रकार के खेलों का आयोजन होता रहता है। इनमें प्रमुख हैं-हॉकी, फुटबॉल वालीबॉल, कबड्डी, खो-खो, क्रिकेट आदि। मेरे विद्यालय में एक हॉकी टीम भी है। एक दिन मेरे स्कूल एवं आदर्श बुनियादी शाला में हॉकी मैच खेलने का निर्णय लिया गया। दोनों ही टीमें अपने-अपने क्षेत्र में एक से बढ़कर एक थीं। यह फाइनल मैच था अतः सभी खेल प्रेमियों की दृष्टि इसी खेल पर अड़ी थी। आखिर वह शुभ घड़ी आ ही गयी, जब दोनों टीमें आमने-सामने आकर अपने कौशल का प्रदर्शन करने के लिए तैयार थीं। .. मैच का आयोजन स्टेडियम ग्राउंड में किया गया। लोग पहले से ही आकर वहाँ काफी संख्या में बैठ चुके थे। हमारे स्कूल के छात्र भी जुलूस के रूप में स्टेडियम ग्राउंड पहुंचे। हम लोगों में उत्साह का अपार सागर हिलोरें ले रहा था।

दोनों टीमें आमने-सामने आयीं। निश्चित समय पर खेल आरंभ हुआ। सीटी बजते ही टीम के बालकों में उत्साह का संचार हो गया। शालेय छात्रों ने भी हाथ हिलाकर अपने-अपने दल वालों का हौसला बुलंद किया। खेल आरंभ हुआ। खिलाड़ी गेंद के पीछे-पीछे भागने लगे और दर्शकों की आँखें साथ-ही-साथ दौड़ने लगीं। खिलाड़ियों का प्रदर्शन काफी उत्तम था। इनकी कार्य कुशलता पर लोगों के मुँह से स्वतः ही ‘वाह-वाह’ की ध्वनि निकल जाती थी। तालियों की गड़गड़ाहट से सारा आकाश बीच-बीच में निनादित हो जाया करता था। खेल बड़े उत्तम तरीके से चल रहा था। दोनों टीमें अपने लिए अवसर खोज रही थीं। परंतु यह काम इतना आसान न था। खेल का लगभग आधा समय समाप्त हो गया परंतु किसी भी टीम को अभी तक कोई सफलता प्राप्त न हो सकी। निर्णायक महोदय ने सीटी बजाई और दोनों टीमों ने खेल बंद कर दिया। आराम करने के लिए अवकाश हो गया। प्राचार्य महोदय ने खिलाड़ियों को फल आदि खिलाकर आवश्यक नियमों से उन्हें अवगत कराया।

अवकाश का समय समाप्त हुआ। पुनः निर्णायक की सीटी सुनाई दी और खिलाड़ी दूने उत्साह में भर कर मैदान की ओर लपके। इस बार खिलाड़ियों ने आक्रामक रुख अपनाया। – ऐसा लगता था जैसे खिलाड़ी गेंद के साथ उड़े जा रहे हों। दर्शकों का उत्साह भी दुगुना हो रहा था। बच्चे बीच-बीच में शोरगल भी मचा रहे थे, परंतु इससे खेल में कोई व्यावधान नहीं पड़ रहा था।

खेल समाप्त होने में कुछ ही देर थी, परंतु अभी किसी भी टीम को कोई सफलता प्राप्त न हो सकी थी। हमारी शाला के विद्यार्थियों ने आक्रामक रुख अपनाया और उन्हें एक पेनाल्टी कॉर्नर मिला। बस क्या था, टीम के कप्तान ने रेखा पर गेंद रख कर इस प्रकार कुशल प्रहार किया कि गेंद गोल पोस्ट के भीतर हो गयी। सारा स्टेडियम तालियों की गड़गड़ाहट एवं बच्चों के शोरगुल से गूंज उठा। प्रतिद्वंद्वी टीम के हौसले पस्त हो गए। इसी बीच एक और पेनाल्टी कॉर्नर मिला और अगले ही हिट में गेंद पुनः गोल पोस्ट में प्रविष्ट हो गयी। पुनः तालियों की गड़गड़ाहट से सारा आकाश गूंज उठा। अगले ही क्षण सीटी बज उठी और निर्णायक ने हमारे विद्यालय को 2 गोल से विजयी घोषित किया। प्राचार्य जी ने पुरस्कार वितरण किया और अगले दिन की छुटी भी घोषित की। हम सभी प्रसन्नतापूर्वक अपने घर आ गए।

उपसंहार-खेलों का नियम ही एक पक्ष को जय तथा दूसरे को पराजय है। हमें जय या पराजय को उतना महत्त्वपूर्ण नहीं मानना चाहिए जितना महत्त्वपूर्ण कौशल को माना जाता
है। हमें पराजय के पश्चात् भी अपने मार्ग से विचलित नहीं __ होना चाहिए, सफलता अवश्य ही हमारे कदमों तले आ गिरेगी,
इसमें संदेह उन्हीं है।

बाल दिवस

हमारे विद्यालय में प्रतिवर्ष 14 नवंबर को बाल दिवस का आयोजन किया जाता है। बाल दिवस पूज्य चाचा नेहरू का जन्मदिवस है। चाचा नेहरू भारत के प्रथम प्रधानमंत्री थे। वे स्वतंत्रता संग्राम के महान् सेनानी थे। उन्होंने अपने देश की आजादी के लिए सर्वस्व न्योछावर कर दिया। अपने जीवन _ के अनेक अमूल्य वर्ष देश की सेवा में बिताए। अनेक वर्षों तक विदेशी शासकों ने उन्हें जेल में बंद रखा। उन्होंने साहस नहीं छोड़ा और देशवासियों को आगे बढ़ने की प्रेरणा देते रहे।

पं. नेहरू बच्चों के प्रिय नेता थे। बच्चे उन्हें प्यार से ‘चाचा’ कहकर संबोधित करते थे। उन्होंने देश में बच्चों के लिए शिक्षा सुविधाओं का विस्तार कराया। उनके अच्छे भविष्य के लिए अनेक योजनाएँ आरंभ की। वे कहा करते थे ‘कि आज के बच्चे ही कल के नागरिक बनेंगे। यदि आज उनकी अच्छी देखभाल की जाएगी तो आगे आने वाले समय में वे अच्छे डॉक्टर, इंजीनियर, सैनिक, विद्वान, लेखक और वैज्ञानिक बनेंगे।’ इसी कारण उन्होंने बाल कल्याण की अनेक योजनाएँ बनाईं। अनेक नगरों में बालघर और मनोरंजन केंद्र बनवाए। प्रतिवर्ष बाल दिवस पर डाक टिकटों का प्रचलन किया। बालकों के लिए अनेक प्रतियोगिताएँ आरंभ कराईं। वे देश-विदेश में जहाँ भी जाते बच्चे उन्हें घेर लेते थे। उनके जन्मदिवस को भारत में बाल-दिवस के रूप में मनाया जाता है।

हमारे विद्यालय में प्रतिवर्ष बाल-दिवस के अवसर पर बाल मेले का आयोजन किया जाता है। बच्चे अपनी छोटी-छोटी दुकानें लगाते हैं। विभिन्न प्रकार की विक्रय योग्य वस्तुएँ अपने हाथ से तैयार करते हैं। बच्चों के माता-पिता और मित्र उस अवसर पर खरीददारी करते हैं। सारे विद्यालय को अच्छी प्रकार सजाया जाता है। विद्यालय को झंडियों, चित्रों और रंगों की सहायता से आकर्षक रूप दिया जाता है। – बाल दिवस के अवसर पर खेल-कूद प्रतियोगिता और सांस्कृतिक कार्यक्रमों का भी आयोजन किया जाता है। बच्चे मंच पर आकर नाटक, गीत, कविता, नृत्य और फैंसी ड्रेस शो का प्रदर्शन करते हैं। सहगान, बाँसुरी वादन का कार्यक्रम दर्शकों का मन मोह लेता है। तत्पश्चात् सफल और अच्छा प्रदर्शन करने वाले छात्र-छात्राओं को पुरस्कार वितरण किए जाते हैं। बच्चों को मिठाई का भी वितरण किया जाता है। इस प्रकार दिवस विद्यालय का एक प्रमुख उत्सव बन जाता है।

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अगर मैं प्रधानमंत्री होता

किसी आजाद मुल्क का नागरिक अपनी योग्यताओं का विस्तार करके अपनी आकांक्षाओं को पूरा कर सकता है, वह कोई भी पद, स्थान या अवस्था को प्राप्त कर सकता है, उसको ऐसा होने का अधिकार उसका संविधान प्रदान करता है। भारत जैसे विशाल राष्ट्र में प्रधानमंत्री या राष्ट्रपति के पद को प्राप्त करना यों तो आकाश कुसुम तोड़ने के समान है फिर भी ‘जहाँ चाह वहाँ राह’ के अनुसार यहाँ का अत्यंत सामान्य नागरिक भी प्रधानमंत्री और राष्ट्रपति बन सकता है। लालबहादुर शास्त्री और ज्ञानी जैलसिंह इसके प्रमाण हैं।

यहाँ प्रतिपाद्य विषय का उल्लेख प्रस्तुत है कि ‘अगर मैं प्रधानमंत्री होता’ तो क्या करता? में यह भली-भाँति जानता हूँ कि प्रधानमंत्री का पद अत्यंत विशिष्ट और महान् उत्तरदायित्वपूर्ण पद है। इसकी गरिमा और महानता को बनाए रखने में किसी एक सामान्य और भावुक व्यक्ति के लिए संभव नहीं है फिर मैं महत्त्वाकांक्षी हूँ और अगर मैं प्रधानमंत्री बन गया तो निश्चय समूचे राष्ट्र की काया पलट कर दूंगा। मैं क्या-क्या राष्ट्रोत्थान के लिए कदम उठाऊँगा, उसे मैं प्रस्तुत करना पहला कर्तव्य मानता हूँ जिससे मैं लगातार इस पद पर बना रहूँ।

सबसे पहले शिक्षा-नीति में आमूल चूल परिवर्तन लाऊँगा। मुझे सुविज्ञात है कि हमारी कोई स्थायी शिक्षा-नीति नहीं है जिससे शिक्षा का स्तर दिनोंदिन गिरता जा रहा है, यही कारण है कि अंतर्राष्ट्रीय दृष्टिकोण से हम शिक्षा के क्षेत्र में बहुत. पीछे हैं, बेरोजगारी की जो आज विभीषिका आज के शिक्षित युवकों को त्रस्त कर रही है, उनका मुख्य कारण हमारी बुनियादी शिक्षा की कमजोरी, प्राचीन काल की गुरु-शिष्य परंपरा की गुरुकुल परिपाटी की शुरुआत नये सिरे से करके धर्म और राजनीति के समन्वय से आधुनिक शिक्षा का सूत्रपात कराना चाहूँगा। राष्ट्र को बाह्य शक्तियों के आक्रमण का खतरा आज भी बना हुआ है। हमारी राष्ट्रीय सुरक्षा अभी अपेक्षित रूप में नहीं है। इसके लिए अत्याधुनिक युद्ध के उपकरणों का आयात बढ़ाना होगा। मैं खुले आम न्यूक्लीयर विस्फोट का उपयोग सृजनात्मक कार्यों के लिए ही करना चाहूँगा। मैं किसी प्रकार ढुलमुल राजनीति का शिकार नहीं बनूँगा अगर कोई राष्ट्र हमारे राष्ट्र की ओर आँख उठाकर देखें तो मैं उसका मुँहतोड़ जवाब देने में संकोच नहीं करूंगा। मैं अपने वीर सैनिकों का उत्साहवर्द्धन करते हुए उनके जीवन को अत्यधिक संपन्न और खुशहाल बनाने के लिए उन्हें पूरी समुचित सुविधाएँ प्रदान कराऊँगा जिससे वे राष्ट्र की आन-मान पर न्योछावर होने में पीछे नहीं हटेंगे।

हमारे देश की खाद्य समस्या सर्वाधिक जटिल और दुखद समस्या है। कृषि प्रधान राष्ट्र होने के बावजूद यहाँ खाद्य संकट हमेशा मँडराया करता है। इसको ध्यान में रखते हुए मैं नवीनतम कृषि यंत्रों, उपकरणों और रासायनिक खादों और सिंचाई के विभिन्न साधनों के द्वारा कृषि-दशा की दयनीय स्थिति को सबल बनाऊँगा। देश की जो बंजर और बेकार भूमि है उसका पूर्ण उपयोग कृषि के लिए करवाते हुए कृषकों को एक-से-एक बढ़कर उन्नतिशील बीज उपलब्ध कराके उनकी अपेक्षित सहायता सुलभ कराऊँगा।

यदि मैं प्रधानमंत्री हँगा तो देश में फैलती हई राजनीतिक अस्थिरता पर कड़ा अंकुश लगाकर दलों के दलदल को रोक दूंगा। राष्ट्र को पतन की ओर ले जाने वाली राजनीतिक अस्थिरता के फलस्वरूप प्रतिदिन होने वाले आंदोलनों, काम-रोको और विरोध दिवस बंद को समाप्त करने के लिए पूरा प्रयास करूँगा। देश में गिरती हुई अर्थव्यवस्था के कारण मुद्रा प्रसार पर रोक लगाना अपना मैं प्रमुख कर्त्तव्य समझूगा। उत्पादन, उपभोग और विनियम की व्यवस्था को पूरी तरह से बदलकर देश को आर्थिक दृष्टि से अंतर्राष्ट्रीय महत्त्व प्रदान कराऊँगा।

देश को विकलांग करने वाले तत्त्वों, जैसे-मुनाफाखोरी और भ्रष्टाचार ही नव अवगुणों की जड़ है। इसको जड़मूल से समाप्त करने के लिए अपराधी तत्त्वों को कड़ी-से-कड़ी सजा दिलाकर समस्त वातावरण को शिष्ट और स्वच्छ व्यवहारों से भरने की मेरी सबल कोशिश होगी। यहीं आज धर्म और जाति को लेकर तो साम्प्रदायिकता फैलाई जा रही है वह राष्ट्र को पराधीनता की ओर ढकेलने के ही अर्थ में हैं, इसलिए ऐसी राष्ट्र विरोधी शक्तियों को आज दंड की सजा देने के लिए मैं सबसे संसद के दोनों सदनों से अधिक-से-अधिक मतों से इस प्रस्ताव को पारित करा करके राष्ट्रपति से सिफारिश करके संविधान में परिवर्तन के बाद एक विशेष अधिनियम जारी कराऊंगा जिससे विदेशी हाथ अपना बटोर सकें।

संक्षेप में यही कहना चाहता हूँ कि यदि मैं प्रधानमंत्री हूँगा तो राष्ट्र और समाज के कल्याण और पूरे उत्थान के लिए मैं एड़ी-चोटी का प्रयास करके प्रधानमंत्रियों की परम्परा और इतिहास में अपना सबसे अधिक लोकापेक्षित नाम स्थापित करूँगा। भारत को सोने की चिड़िया बनाने वाला यदि मैं प्रधानमंत्री होता तो कथनी और करनी को साकार कर देता।

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MP Board Class 7th General Hindi पत्र-लेखन

MP Board Class 7th General Hindi पत्र-लेखन

पिता जी को पत्र

भोपाल
दिनांक ………………………………

आदरणीय पिता जी,
सादर चरण स्पर्श!

आपका पत्र प्राप्त हुआ। समाचार ज्ञात हुआ। माता जी की तबीयत में सुधार का समाचार सुनकर प्रसन्नता हुई। मेरी शाला प्रारंभ हो चुकी है। आप पुस्तकों के लिए 100 रु. भेजने की व्यवस्था करें। छोटे भाई-बहिनों को प्यार एवं दादा-दादी, काका-काकी को चरण स्पर्श। माता जी के लिए ध्यान लगा रहता है।

आपका आज्ञाकारी पुत्र
दिनेश गोस्वामी

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मित्र को पत्र

सागर
दिनांक ………………………………

प्रिय मित्र दिलीप,
सादर अभिवादन्

पत्र प्राप्त कर समाचार ज्ञात किया। आवश्यक कार्य में व्यस्त होने के कारण प्रश्नोत्तर में विलंब हुआ। तिमाही परीक्षा की तैयारी चल रही है। आशा है तुम भी मन लगाकर विद्याध्ययन कर रहे होगे। इस बार भी से इतना परिश्रम करो कि अपनी कक्षा में प्रथम स्थान प्राप्त करो। इसी आशा से साथ शेष अगले पत्र में।

तुम्हारा मित्र
देवाशीश मिश्र

अस्वस्थता के कारण छुट्टी के लिए आवेदन-पत्र

सेवा में,
माननीय प्रधानाध्यापक महोदय,
शासकीय माध्यमिक शाला, बालाघाट।

विषय : अस्वस्थता के कारण छुट्टी हेतु आवेदन।

महोदय,
नम्र निवेदन है कि मुझे अचानक बुखार आ जाने के कारण मैं शाला आने में असमर्थ हूँ। साथ ही डाक्टर ने पूर्ण आराम करने की सलाह दी है। अतः आप मुझे तीन दिन के लिए. अवकाश देने की कृपा करें। गृहकार्य मैं स्वस्थ होने पर पूरा कर लूँगा। धन्यवाद।

आपका प्रिय शिष्य
प्रदीप बक्शी
7वीं ‘अ’

दिनांक ………………………………

बहिन की शादी के लिए अवकाश हेतु

सेवा में,
माननीय प्राचार्य महोदय,
शासकीय बालक उ.मा. शाला, सिवनी।

महोदय,
निवेदन है कि मेरी बड़ी बहिन उषा का शुभ-विवाह 3-3-20.. को संपन्न होना निश्चित हुआ है। मेरा इस विवाह में सम्मिलित होना अत्यंत आवश्यक है, अतः आप मुझे एक मार्च 20.. से एक सप्ताह का अवकाश देने की कृपा करें। कष्ट के लिए क्षमा!

आपका आज्ञाकारी शिष्य
सुरेश वाधवा
7वीं ‘स’

दिनांक ………………………………

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शिक्षा शुल्क माफी हेतु आवेदन-पत्र

प्रति,
माननीय प्रधानाध्यापक महोदय, शासकीय मिडिल स्कूल, रायसेन।
विषय : शिक्षण शुल्क माफ करने हेतु निवेदन।

महोदय,
मैं अति निर्धन छात्र हूँ। मेरे पिता जी की आर्थिक स्थिति काफी गिरी हुई है तथा वे मुझे पढ़ाने में असमर्थ हैं। यदि आप मेरा शिक्षण शुल्क माफ कर दें, तो मेरा अंधकारमय भविष्य उज्जवल बन सकता है।

कृपया शिक्षण शुल्क माफ करके मुझ पर महती कृपा करें।

निवेदक
राकेश रस्तौगी
सातवीं ‘स’

दिनांक ………………………………

स्थानान्तरण प्रमाण-पत्र हेतु आवेदन

प्रति,
माननीय प्राचार्य महोदय,
शासकीय मॉडल स्कूल, जबलपुर
विषय : ट्रांस्फर सर्टिफिकेट हेतु आवेदन-पत्र।

महोदय,
मैं आपकी शाला की कक्षा सातवीं ‘अ’ का छात्र हूँ। मेरे पिता जी का ट्रांस्फर इंदौर हो गया है। मुझे इस कारण यहाँ पढ़ने में असुविधा हो रही है। अतः आप मुझे ट्रांस्फर सर्टिफिकेट प्रदान करने की व्यवस्था करें। धन्यवाद!

आपका शिष्य,
मनोहर कश्यप
कक्षा सातवीं ‘अ’

दिनांक ………………………………

पुस्तकें मंगवाने हेतु पत्र

प्रति,

दिनांक ………………………………, रीवा
व्यवस्थापक महोदय
कमल प्रकाशन ………………………………

महोदय,
नीचे लिखी पुस्तकें आप पत्र मिलते ही V.P.P. द्वारा भेजने की व्यवस्था करें। पैकेट पाते ही मैं उन्हें छुड़ा लूँगा। पुस्तकें इस प्रकार हैं-
1. बाल भारती भाग 7 2 प्रति
2. कमल विज्ञान (कक्षा सातवीं के लिए) 2 प्रति
3. कमल गणित VII 3 प्रति
4. कमल गाइड VII 3 प्रति

कृपया पुस्तकें नीचे लिखे पते पर भेजें। मेरा पता-

राम स्वरूप भारती
C/o सीता राम भारती,
बस स्टैण्ड रोड, रीवा (म. प्र.)

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अग्नि-पीड़ितों की सहायता हेतु पत्र

प्रति,
आदरणीय जिलाध्यक्ष महोदय,
भोपाल।

विषय : अग्नि-पीड़ितों की तुरंत सहायता।
मान्यवर,
हमारे ग्राम में गत दिवस गेहूँ के एक खलिहान में आग लगने से आस-पास के अनेक किसानों की गेहूँ की गंजियाँ आग में स्वाहा हो गयीं। हम गरीब किसान दाने-दाने के लिए तरस रहे हैं। अतः श्रीमान् जी से प्रार्थना है कि हम अग्नि-पीड़ितों की तुरंत सहायता की जाए, ताकि हम अपने बाल-बच्चों का पालन-पोषण कर सकें। साथ ही यहाँ पर कोई राहत कार्य खोल दिया जाए, ताकि हम अपनी आजीविका कमा सकें। आशा एवं धन्यवाद सहित,

हम हैं पीड़ित किसान
(ग्राम के बीस किसानों के हस्ताक्षर)

दिनांक ………………………………

ग्राम ………………………………
जिला-भोपाल।

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MP Board Class 7th General Hindi व्याकरण

MP Board Class 7th General Hindi व्याकरण

संधि एवं संधि-विच्छेद

संधि एवं संधि-विच्छेद
(1) स्वर संधि

  • विद्यार्थी = विद्या + अर्थी
  • हिमालय = हिम + आलय
  • महात्मा = महा + आत्मा
  • परमात्मा = परम + आत्मा
  • विद्यालय = विद्या + आलय
  • यद्यपि = यदि + अपि
  • सूर्योदय = सूर्य + उदय
  • देवेन्द्र = देव + इन्द्र
  • रमेश = रमा + ईश
  • सुरेश = सुर + ईश
  • गिरिश = गिरि + ईश
  • विद्याध्ययन = विद्या + अध्ययन
  • स्वागत = सु + आगत
  • परोपकार = पर + उपकार
  • नयन = ने + अन
  • गायक = गै + अक

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(2) व्यंजन संधि

  • सज्जन = सत् + जन
  • सन्तोष = सम् + तोष
  • उन्नति = उत् + नति
  • उद्वेग = उत् + वेग
  • संसार = सम् + सार
  • उद्घाटन = उत् + घाटन
  • जगन्नाथ = जगत् + नाथ
  • जगदीश = जगत् + ईश
  • संहार = सम् + हार
  • संकल्प = सम् + कल्प
  • संयोग = सम् + योग
  • सद्भावना = सत् + भावना

(3) विसर्ग संधि

  • दुर्जन = दुः + जन
  • दुर्लभ = दुः + लभ
  • दुराचार = दुः + आचार
  • मनस्ताप = मनः + ताप
  • मनोबल = मनः + बल
  • मनोनुकूल = मनः + अनुकूल
  • वयोवृद्ध = वयः + वृद्ध
  • निष्फल = निः + फल
  • निष्कपट = निः + कपट
  • दुराशा = दु: + आशा

समास एवं समास विग्रह
(1) अव्ययीभाव समास

  • यथाशक्ति – शक्ति के अनुसार
  • प्रतिदिन – दिनों दिन
  • आजीवन – जीवन पर्यन्त
  • आजन्म – जन्म पर्यन्त
  • प्रत्येक – प्रति एक
  • प्रतिक्षण – क्षण-क्षण

(2) तत्पुरुष समास

  • पथभ्रष्ट – पथ से भ्रष्ट
  • सत्याग्रह – सत्य के लिए आग्रह
  • नीतियुक्त – नीति से युक्त
  • बुद्धिहीन – बुद्धि से हीन
  • कर्महीन – कर्म से रहित
  • शरणागत – शरण के लिए आया
  • पदमुक्त – पद से मुक्त
  • राष्ट्रचिन्ह – राष्ट्र का चिन्ह
  • ध्यानमग्न – ध्यान में मग्न
  • पुरुषोत्तम – पुरुषों में उत्तम
  • नरश्रेष्ठ – नर में श्रेष्ठ
  • राजपुत्र – राजा का पुत्र
  • राजद्रोह – राज से द्रोह
  • धर्मशाला – धर्म की शाला
  • राजप्रासाद – राज का प्रासाद
  • जन्मभूमि – जन्म की भूमि
  • सूर्यप्रकाश – सूर्य का प्रकाश

(3) कर्मधारय समास

  • नीलकमल – नील जैसा कमल
  • नीलकण्ठ – नील जैसा कण्ठ
  • घनश्याम – घन जैसा श्याम
  • चरण कमल – कमल जैसा चरण
  • चन्द्रमुख – चन्द्र जैसा मुख
  • सर्वजन – सभी लोग
  • अल्पसंचय – अल्प संचय जैसा
  • योगिजन – योगबी जैसे जन

(4) द्विगु समास

  • पंचवटी – पाँच वटों का समूह
  • नवग्रह – नौ ग्रहों का समूह
  • त्रिमूर्ति – तीन मूर्तियों का समूह
  • पंचनद – पाँच नदों का समूह
  • पंचरत्न – पाँच रत्नों का समूह
  • पंचगव्य – पाँच गव्यों का समूह
  • नवरत्न – नौ रत्नों का समूह
  • नवग्रह – नौ ग्रहों का समूह

(5) बन्द समास

  • न्याय – धर्म – न्याय और धर्म
  • माता – पिता – माता और पिता
  • भाई – बहिन – भाई और बहिन
  • पाप – पुण्य – पाप और पुण्य
  • धर्म – अधर्म – धर्म और अधर्म
  • अमीर – गरीब – अमीर और गरीब
  • दाल – रोटी – दाल और रोटी
  • लोटा – डोरी – लोटा और डोरी
  • राम – लक्ष्मण – राम और लक्ष्मण
  • चाचा – चाची – चाचा और चाची

(6) बहुब्रीहि समास

  • सत्यवादी – जो सत्य बोला है (वह व्यक्ति)
  • पीताम्बर – पीले अम्बर वाले (विष्णु)
  • गजानन – गज के समान आनन (गणेश)
  • दशानन – दश हैं आनन जिनके (रावण)
  • वीणापाणि – वीणा है जिनके हाथ में (सरस्वती)
  • चन्द्रशेखर – चन्द्र है शेखर पर जिसके (शिव)
  • मुरलीधर – मुरली धारण करने वाले (श्रीकृष्ण)

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संज्ञा

प्रश्न-
संज्ञा की परिभाषा लिखकर उसके भेद बताइये
उत्तर-
परिभाषा-किसी व्यक्ति, वस्तु, जाति, स्थान आदि के नाम को संज्ञा कहते हैं।

जैसे-
अमीना, वाराणसी, गाय, चांदी, भीड़ आदि। प्रकार-संज्ञा के प्रमुख पाँच प्रकार हैं

  1. व्यक्तिवाचक संज्ञा-जिस संज्ञा से किसी व्यक्ति, वस्तु या स्थान के नाम का ज्ञान हो, उसे व्यक्तिवाचक संज्ञा कहते हैं। जैसे-जबलपुर, कृष्ण, इलाहाबाद, गीता।
  2. जातिवाचक संज्ञा-जिस संज्ञा से एक ही जाति का ज्ञान हो, उसे जातिवाचक संज्ञा कहते हैं। जैसे-बंदर, सुअर, घर आदि।
  3. भाववाचक संज्ञा-जिन शब्दों से किसी भाव या काम का ज्ञान हो, उसे भाववाचक संज्ञा कहते हैं। जैसे-शत्रुता, सौंदर्य, प्रेम, मूर्खता आदि।
  4. समुदायवाचक संज्ञा-जिन शब्दों से समूह का ज्ञान हो, उन्हें समूहवाचक संज्ञा कहते हैं। जैसे-मेला, भीड़, जुलूस, रथ-यात्रा आदि।
  5. पदार्थवाचक संज्ञा-जिन शब्दों से किसी पदार्थ का ज्ञान हो, उसे पदार्थवाचक संज्ञा कहते हैं। जैसे-सोना, चांदी, सीसा आदि।

सर्वनाम

प्रश्न-
सर्वनाम की परिभाषा एवं प्रकार उदाहरण सहित बताइये।
उत्तर-
परिभाषा-वाक्य में संज्ञा के स्थान पर प्रयुक्त होने वाले शब्दों को सर्वनाम कहते हैं। या जो संज्ञा शब्दों के बदले में आते हैं उन्हें सर्वनाम कहते हैं। जैसे-राम सुरेंद्र के साथ उसके विद्यालय तक आया।

उपर्युक्त वाक्य में उसके’ सर्वनाम सुरेंद्र के लिए प्रयुक्त है। सर्वनाम के प्रकार-सर्वनाम के प्रमुख पाँच प्रकार हैं-

  1. पुरुषवाचक सर्वनाम-जो सर्वनाम वक्ता, श्रोता या अन्य व्यक्ति के बदले प्रयुक्त होता है उसे पुरुषवाचक सर्वनाम कहते हैं। इसके तीन उपभेद हैं।
    • अन्य पुरुष-वह, वे
    • मध्यम पुरुष-तुम, आप, तू
    • उत्तम पुरुष-मैं, हम।
  2. निश्चयवाचक सर्वनाम-जिस सर्वनाम से वक्ता के समीप एवं दूर की वस्तु का निश्चय हो, वह निश्चयवाचक सर्वनाम कहलाता है। जैसे-यह, वह, ये, वे आदि।
  3. अनिश्चयवाचक सर्वनाम-जिस सर्वनाम से पुरुष या वस्तु का निश्चित ज्ञान न प्राप्त हो, वह अनिश्चयवाचक सर्वनाम होता है। जैसे-कुछ, कौन, कोई आदि।
  4. संबंधवाचक सर्वनाम-जिन शब्दों से संज्ञाओं के बीच परस्पर संबंध का ज्ञान हो उन्हें संबंधवाचक सर्वनाम कहते हैं। जैसे-जैसा-तैसा, जिस-तिस।
  5. प्रश्नवाचक सर्वनाम-जिस सर्वनाक से प्रश्न के विषय में जानकारी मिले वह प्रश्नवाचक सर्वनाम है। जैसे-क्या, कौन, क्यों आदि।

विशेष एवं विशेष्य

प्रश्न-
विशेषण की परिभाषा एवं प्रकार बताइए।
उत्तर-
परिभाषा-जो शब्द संज्ञा या सर्वनाम शब्दों की विशेषता प्रदर्शित करते हैं, उन्हें विशेषण कहते हैं। जैसे राम अच्छा विद्यार्थी है। उपर्युक्त वाक्य में ‘अच्छा’ शब्द राम की विशेषता प्रकट कर रहा है। अतः यह विशेषण है।

विशेषण के प्रकार-विशेषण के मुख्य चार प्रकार हैं-

  1. गुणवाचक विशेषक-संज्ञा या सर्वनाम शब्दों के गुण, दोष अवस्था, रंग आदि की विशेषता बताने वाले शब्द गुणवाचक विशेषण हैं। जैसे-काली गाय, लाल बस।
  2. संख्यावाचक विशेषण-जिससे संज्ञा या सर्वनाम की संख्या का पता चले वह संख्यावाचक विशेषण कहलाता है। जैसे-बीस शालाएँ, पाँच अंगुलियाँ।
  3. परिमाणवाचक विशेषण-जिससे संज्ञा या सर्वनाम के परिमाण (नाप-तौला) का ज्ञान हो उसे परिमाणवाचक विशेषण कहते है। जैसे-दस किलोमीटर, पाँच सेर।।
  4. सार्वनामिक विशेषण-यदि सर्वनाम का प्रयोग संज्ञा के साथ उसके संकेत के रूप में किया जाए, तो वह सार्वनामिक विशेषण कहलाता है। जैसे-यह तुम्हारी कलम है।

क्रिया

परिभाषा एवं प्रकार

परिभाषा-जिस शब्द से किसी काम का करना, रहना या होने का बोध हो उसे क्रिया कहते हैं। जैसे-श्याम जाता है। सीला बैठी है। आदि। क्रियाओं के अन्य प्रकार

  1. प्रेरणार्थक क्रिया-जिस क्रिया के माध्यम से कर्ता स्वयं काम न करके दूसरे को कार्य करने की प्रेरणा दे, उसे प्रेरणार्थक क्रिया कहते हैं। जैसे-जगना से जगाना, रोना से रुलाना।
  2. पूर्वकालिक क्रिया-पूर्वकालिक क्रिया मूल क्रिया की समाप्ति के पहले प्रयुक्त की जाती है। जैसे-सोकर, जागकर, खाकर आदि।
  3. संयुक्त क्रिया-जब दो या दो से अधिक क्रियाएँ एक साथ आती है, तो उसे संयुक्त क्रिया कहते हैं। जैसे-जाना चाहता है, गा सकना आदि।

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क्रिया-विशेषण
परिभाषा-जो शब्द क्रिया की विशेषता बताते हैं, वे क्रिया-विशेषण कहलाते हैं। क्रिया-विशेषण के प्रकार-क्रिया-विशेषण के चार प्रकार हैं-

  1. स्थानवाचक-ये शब्द क्रिया की विशेषता बताते हैं। जैसे-यहाँ, वहाँ, उस आदि।
  2. कालवाचक-ये विशेषण क्रिया के समय की विशेषता बताते हैं, अतः इन्हें कालवाचक क्रिया-विशेषण कहते हैं। जैसे-आज, कल।
  3. परिमाणवाचक-ये विशेषण क्रिया का परिमाण बतलाते हैं अतः इन्हें परिमाणवाचक क्रिया-विशेषण कहते हैं। जैसे-न्यून, अधिक, कम आदि।
  4. रीतिवाचक-ये विशेष क्रिया होने का ढंग बताते हैं। अतः इन्हें रीतिवाचक क्रिया-विशेषण कहते हैं। जैसे-धीरे, तेज़, मंद, आदि।

संबंधबोधक अव्यय

जो शब्द संज्ञा या सर्वनाम शब्दों के साथ प्रयुक्त होकर वाक्य के दूसरे शब्दों से उसका संबंध बताते हैं, संबंधबोधक अव्यय कहलाते हैं। जैसे-भीतर, सहित और आदि।

समुच्चयबोधक अव्वय- जो शब्द दो शब्दों या वाक्यों को मिलाते हैं, उन्हें समुच्चयबोधक अव्यय कहते हैं। जैसे-भी, तथा, मानो, इसलिए आदि।
विस्मयादिबोधक अव्यय- जो शब्द वक्ता के शोक, हर्ष, विषाद या लज्जा के भावों को प्रकट करें, वे विस्मयादिबोधक अव्यय कहलाते हैं। जैसे-अरे, अहो, हाय, धन्य आदि।

कारक

प्रश्न-
कारक की परिभाषा एवं भेद बताइये।
परिभाषा-संज्ञा या सर्वनाम के जिस रूप से उसका वाक्य के दूसरे शब्दों से संबंध जाना जाए, उसे कारक कहते हैं। जैसे-राम ने गीता की पुस्तक को पढ़ा।

विभक्ति- कारक प्रकट करने के लिए संज्ञा या सर्वनाम के साथ जिन चिन्हों का प्रयोग किया जाता है, उन्हें विभक्ति कहते हैं।

हिंदी में आठ कारक हैं तथा उनके विभक्ति चिन्ह निम्नलिखित हैं-
MP Board Class 7th General Hindi व्याकरण 1

काल

परिभाषा-क्रिया के जिस रूप से उसके करने या होने के समय का बोध हो उसे काल कहते हैं।

प्रकार-काल के तीन प्रकार हैं-
(1) भूल काल,
(2) वर्तमान काल
(3) भविष्यत् काल।।

  1. भूत काल-क्रिया के जिस रूप से उसके बीते समय का ज्ञान हो, उसे भूत काल कहते हैं। राम ने यज्ञ किया।
  2. वर्तमान काल-क्रिया के जिस रूप से उसके वर्तमान में होने का बोध हो उसे वर्तमान काल कहते हैं। जैसे-राम जा रहा है।
  3. भविष्यत् काल-क्रिया के जिस रूप से कार्य के होने का आने वाले समय में ज्ञान हो, वह भविष्यत् काल कहलाता है। जैसे-हम रात्रि जागरण करेंगे।

उपसर्ग

परिभाषा-वे शब्दांश जो किसी शब्द के पूर्व लगकर उसके अर्थ को परिवर्तित कर देते हैं, उपसर्ग कहलाते हैं।
जैसे-प्र + हार = प्रहार, (हार = पराजय) प्रहार = आक्रमण-

प्रमुख उपसर्ग इस प्रकार हैं

  • प्र – प्रक्रिया, प्रकाण्ड, प्रदूषण, प्रस्थान, प्रवेश, प्रगति।
  • परा – पराजय, पराभव, परागबैनी।
  • अनु – अनुशासन, अनुकरण, अनुचर, अनुग्रह, अनुरोध।
  • अव – अवगुण, अवतरण, अवसर, अवतार, अवस्था।
  • निर् – निर्मल, निर्बल, निर्जल, निर्दय, निर्विकार।
  • दुस् – दुःशासन, दुस्साहस।
  • अति – अतिवीर, अत्यधिक अतिरिक्त, अत्याचार, अतिशय।
  • अप – अपमान, अपयश, अपवाद।
  • उत् – उत्कीर्ण, उद्गार, उद्दण्ड, उद्घाटन, उत्सुक, उत्थान, उद्योग, उद्यान, उन्नति, उदाहरण।
  • उप – उपकरण, उपहारस, उपकार, उपकृत, उपद्रव।
  • नि – निवेदन, निवास, नियुक्त, निमंत्रण।
  • परि – परिस्थिति, पर्यावरण, परिवर्तन, परिचय, परिमिति, परिश्रम।
  • वि – विकट, विध्वंस, विपक्ष, विसर्जित, विकल्प, विलक्षण, विकल, विपत्ति।

प्रत्यय

परिभाषा-वे शब्दांश जो शब्द के अंत में जुड़कर शब्द के अर्थ में परिवर्तन कर देते हैं, प्रत्यय कहलाते हैं।
प्रमुख प्रत्यय एवं उनसे बने शब्द नीचे अनुसार हैं-

  • डक – तांत्रिक, साहित्यिक, लौकिक, धार्मिक, दैनिक, वार्षिक, बौद्धिक, तार्किक, नैयायिक।
  • इन – मलिन।
  • ई – योगी, माली।
  • इत – पतित, लज्जित, लिखित, निर्मित, चलित।
  • गत – मनोगत, दृष्टिगत, व्यक्तिगत, कण्ठगत, स्वर्गगत, दलगत।
  • गम – दुर्गम, हृदयंगम, अगम, संगम, विहंगम।
  • दायक – गुणदायक, मंगलदायक, कष्टदायक, लाभदायक, सुखदायक।
  • धर – गिरिधर, गंगाधर, हलधर, जलधर, पयोधर, विषधर, मुरलीधर।
  • भेद – बुद्धिभेद, मतभेद, अर्थभेद, धर्मभेद, शब्दभेद।
  • रहित – भावरहित, धर्मरहित, ज्ञानरहित, प्रेमरहित, दयारहित, शंकारहित, कल्पनारहित।
  • शील – विचारशील, दानशील, धर्मशील, सहनशील, प्रगतिशील।
  • हीन – गुणहीन, मतिहीन, विद्याहीन, शक्तिहीन, कुलहीन, धनहीन।
  • रत – कार्यरत, अध्ययनरत।

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मुहावरे : अर्थ एवं वाक्यों में प्रयोग

  1. काफूर हो जाना (दूर हो जाना)-हामिद की बातें सुनकर अमीना का गुस्सा काफूर हो गया।
  2. कसमें खाना (प्रतिज्ञा करना)-तुम्हें झूठी कसमें कभी नहीं खानी चाहिए।
  3. छक्के छूट जाना (हिम्मत हार जाना)-हमारे सैनिकों की वीरता के आगे शत्रुओं के छक्के छूट जाते हैं।
  4. रंग जमाना (रौब जमाना)-हामिद के चिमटे की तारीफ कर सभी साथियों पर रंग जमा दिया।
  5. गद्गद होना (गला भर जाना)-हामिद के चिमटा लेने के कारण का उत्तर सुनकर दादी गद्दगद् होकर रो पड़ी।
  6. माटी में मिल जाना (नष्ट हो जाना)-नूरे के वकील साहब लुढ़क पड़े और उनका माटी का चोला माटी में मिल गया।
  7. मुँह छिपाना (लज्जित होना)-रमेश को ऐसा कोई काम नहीं करना चाहिए जिससे उसे लोगों के सामने मुँह छिपाना पड़े।
  8. नींद खुलना (होश आना)-तुम ताला बंद करके नहीं जाते। यादे चोरी हो गयी, तो तुम्हारी नींद खुलेगी।
  9. पीठ दिखाना (मैदान छोड़कर भाग जाना)-हमारे सैनिक युद्ध के मैदान से कभी पीठ दिखाकर नहीं भागते।
  10. आँख चौंधिया जाना (आश्चर्यचकित हो जाना) -दीपावली की चकाचौंध देखकर सहज ही आँखे चौंधिया जाती हैं।
  11. लोहा लेना (टक्कर लेना)-शत्रुओं का हमारे सैनिकों से लोहा लेना बड़ा महंगा पड़ेगा।
  12. हाथ पर हाथ धरे बैठे रहना (निठल्ला रहना)-हमें कभी भी हाथ पर हाथ धरे बैठे नहीं रहना चाहिए।
  13. पाँचों अंगुलियाँ घी में होना (लाभ ही लाभ)-आजकल रहमान की पाँचों अंगुलियाँ घी में हैं।
  14. प्राण फूंकना (जान डाल देना)-उपवास आत्मा की शांति के लिए किया हुआ शरीर में प्राण फूंकने जैसा कार्य है।
  15. मिट्टी में मिलना (नष्ट करना)-मेला न देख पाने का कारण टिंकू के सारे के सारे अरमान मिट्टी में मिल गए।
  16. फूले न समाना (खुशी की सीमा न रहना)-परीक्षा फल में प्रथम श्रेणी में पास होने पर मैं फूला नहीं समाया।
  17. तीर मारना (बहादुरी दिखाना)-दो वर्ष में एक कक्षा उत्तीर्ण करने के बाद इतनी खुशी हो रही है जैसे कोई तीर मारकर लौटे हो।
  18. सतर्क रहना (सावधान रहना)-हमें शहर में जेब-कतरों से हमेशा सतर्क रहना चाहिए।
  19. हाथ-पाँव फूलना (हताश हो जाना)-बालकों की निर्भीकता एवं साहस देखकर डाकू रामसिंह के हाथ-पाँव फूल गए।
  20. आँख का तारा (परम प्रिय)-अक्षय और निर्भय अपने दादा की आँख के तारे थे।
  21. बाल बाँका न होना (कुछ भी न बिगाड़ पाना)-डाकू रामसिंह वीर बालकों का बाल बाँका न कर सका।
  22. मुँह में पानी आना (मन ललचाना)-खेत में लगे हरे-हरे चनों को देखकर सबके मुँह में पानी आ गया।
  23. अंधे की लकड़ी (एक मात्र सहारा)-हामिद अमीना के लिए अंधे की लकड़ी के समान था।
  24. अपना उल्लू सीधा करना (मतलब निकालना)-कुछ लोग अपना उल्लू सीधा करने में ही लगे रहते हैं।
  25. अपने पैरों पर खड़े होना (आत्म-निर्भर बनना)-हमें उद्यम करके अपने पैरों पर खड़े हो जाना चाहिए।
  26. आँख में धूल झोंकना (धोख देना)-कभी-कभी चोर पुलिस की आँखों में धूल झोंककर भाग जाते हैं।
  27. कमर कसना (तैयार होना)-देश से निरक्षरता दूर करने के लिए हम सभी को कमर कस लेनी चाहिए।
  28. जहर का यूंट पीना (क्रोध को दबाना)-प्रताड़ित होने पर नववधूओं को क्रोध तो आता है, परंतु परवशता में वे जहर का चूंट पीकर रह जाती हैं।
  29. नाक में दम करना (तंग करना)-तुमने तो हमारी नाक में दम कर रखा है, क्या मैं ठीक से सो भी नहीं सकता?
  30. नौ-दो ग्यारह होना (भाग जाना)-पुलिस को देखते ही चोर नौ-दो ग्यारह हो गया।
  31. मुँह की खाना (पराजित होना)-सन् 1965 के युद्ध में भारतीय वीरों के सम्मुख पाकिस्तानी सैनिकों को मुँह की खानी पड़ी थी।
  32. श्री गणेश होना (काम का शुभारंभ होना)-स्टेडियम की आधारशिला रखकर मुख्यमंत्री ने कार्य का श्री गणेश किया।
  33. लेने के देने पड़ना (हानि होना)-भारतीय सैनिकों के सम्मुख पाकिस्तानी सैनिकों को लेने के देने पड़ गए।
  34. हाथ बटाना (हिस्सा लेना)-हमें हमेशा अपने बड़ों के कामों में हाथ बटाना चाहिए।

विराम-चिन्ह

परिभाषा-शब्दों व वाक्यों का परस्पर संबंध बताने तथा किसी विषय को भिन्न-भिन्न भागों में बाँटने व पढ़ने में ठहरने के लिए जिन चिन्हों का उपयोग किया जाता है, उन्हें विराम-चिन्ह कहते हैं।

विराह-चिन्ह निम्न प्रकार के होते हैं-

  • अल्पविराम (,)
  • अर्धविराम (;)
  • पूर्णविराम (।)
  • प्रश्नबोधक (?)
  • विस्मयादिवोधक (!)
  • उद्धरण चिन्ह (“)
  • निदेशक (:-)
  • कोष्ठक ()
  • योजक चिन्ह (-)
  • लाघव चिन्ह (0)
  • त्रुटिपूरक (^)

पर्यायवाची शब्द

  • चंद्रमा – चंद्रमा, शशि, द्विजराज, विधु, सुधाकर, राकापति, निशापति, रजनीश, हिमांशु, शशांक, मयंक, राकेश।
  • तालाब – सर, सरोवर, तडाग, हृद, ताल। देवता-अमर, विबुध, देव, सुर।
  • असुर – राक्षस, दैत्य, दानव, दनुज, निशाचर, रजनीचर, तमीचर।
  • पर्वत – नग, गिरि, अचल, भूधर, महीधर, शैल, पहाड़।
  • जल – वारि, अंबु, तोय, नीर, पानी, पय, अंभ, उदक, अमृत, जीवन, अप।
  • कमल – पदम्, अंबुज, जलज, नीरज, सरोज, वारिज, पंकज, सरसिज, राजीव, अरविंद, नलिनी, उत्पल, पुण्डरीक।
  • स्त्री – अबला, नारी, महिला, ललना। राजा-नृप, नृपति, भूप, भूपति, नरपति, नरनाथ, भूपाल, नरेश।
  • अमृत – पीयूष, सुधा, सोपान, अमिय। पुत्र-आत्मज, सुत, सूनु, तनय, तनुज।
  • पृथ्वी – भूमि, भू, धरा, अचला, मही, क्षिति, धरती, वसुधा, वसुंधरा।
  • समुद्र – सागर, सिंधु, जलधि, जलनिधि, पयोधि, नीरधि, वारीश।
  • बादल – मेघ, घन, वारिद, अंबुद, तोयद, जलद, जलधर।
  • फल – पुष्प, कुसुम, सुमन, प्रसून।
  • ब्राह्मण – द्विज, भूदेव, भूसूर, विप्र, अग्र, जन्मा।
  • भोरा – अलि, भ्रमर, षट्पद, षडनि, मिलिंद।

विरुद्धार्थी शब्द

MP Board Class 7th General Hindi व्याकरण 2

अनेकर्थी शब्द

कनक-सोना, धतूरा। आवागमन यातायात, संसार, भ्रमण। हलधर के वीर-बैल, कृष्ण। वृषभानुज गाय, राधा। पानी इज्जत, जल। राम-श्रीराम, ईश्वर। अंबर-कपड़ा, आकाश। पेय-दूध, पानी। पत्र-पत्ता, चिट्ठी। कंचन-सोना, स्वच्छ। अंबु-जल, एक छंद, चार, आम। अंकन-लिखना, चित्र बनाना। अंकुर पौधे का छोटा रूप, जल, संतति। अकंटक बिना काँटे के, शत्रु रहित। अक्सीर शर्तिया, अचूक। कृष्ण काला, श्याम, (श्रीकृष्ण जी)। अरण्य जंगल, सन्ख्यासियों का एक प्रकार, एक फल का नाम। आँख नेत्र, ईख की गाँठ, संतान। उदरपेट, वस्तु का भीतरी भाग। शुष्क-सूखा, उदास।

तद्भव एवं तत्सम शब्द

MP Board Class 7th General Hindi व्याकरण 3
MP Board Class 7th General Hindi व्याकरण 4

अनेक शब्दों के लिए एक शब्द

  • वह व्यक्ति जो ईश्वर को नहीं मानता – नास्तिक
  • वह व्यक्ति जो ईश्वर को मानता है – आस्तिक
  • जिसकी उपमा न दी जा सके – अनुपम
  • जिसे जीता न जा सके – अजेय
  • जहाँ लोग स्वास्थ्य लाभ के लिए जाते हों – स्वास्थ्य-गृह
  • जिसका कोई मूल्य न आँका जा सके – अनमोल
  • अधिक उम्र वाली – सयानी
  • जिससे जान पहचान न हो – अजनबी
  • जो पाप से रहित है – निष्पाप
  • जिसके दस सिर हैं – दशानन
  • वह स्थान जहाँ मनुष्य का जाना कठिन है – दुर्गम
  • वह रोग जो अच्छा नहीं हो सकता – असाध्य
  • एक ही माता से जन्म लेने वाली संतान – सहोदर
  • बिना पढ़ा-लिखा व्यक्ति – निरक्षर
  • वह व्यक्ति जिसका कोई शत्रु न हो – आजातशत्रु
  • जिसके आर-पार देखा जा सके – पारदर्शक
  • जिसके आर-पार न देखा जा सके – अपारदर्शक
  • जो बिना किसी वेतन के कार्य करता है – अवैतनिक
  • वह जो सब-कुछ जानता है – सर्वज्ञ
  • जिसे रोगद्वेष नहीं है – वीतराग
  • जो सबका हित करने वाला है – हितैषी
  • जो कम से कम बोलता है – मितभाषी
  • जो मीठा बोलता है – मिष्ट भाषी, मृदुभाषी
  • जो किसी के पीछे चलता है – अनुगामी
  • जिस पर कोई बंधन नहीं – स्वतंत्र
  • जो बंधन युक्त है – परतंत्र
  • तपस्या करने वाला व्यक्ति – तपस्वी
  • जिसकी गणना न की जा सके – अगणित
  • जिसका कोई महत्त्व न हो – नगण्य
  • प्राचीन काल से चली आने वाली रीति – परंपरागत
  • किसी स्थान को चारों ओर से – चहारदीवारी
  • घेरे हुए दीवार
  • जिसकी कोई सीमा न हो – असीम
  • जो समान आयु का हो – समवयस्क
  • जो किसी विशेष स्थान से संबद्ध हो – स्थानीय
  • दूसरे देश का व्यक्ति – विदेशी
  • किसी देश में रहने वाला व्यक्ति – नागरिक
  • पास में रहने वाला व्यक्ति – पड़ोसी
  • जिसे प्रेम किया गया है – प्रेमिका/प्रेमी
  • गाना गाने वाला – गवैया
  • तबला बजाने वाला – तबलची
  • गान-नृत्य का स्थान – महफिल
  • किसी देवता की स्थापना का स्थान – मंदिर
  • जिसने इंद्रियों को जीत लिया है – जितेंद्रिय
  • जो बिना विचारे किसी को मानता है – अंधभक्त

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अलंकार एवं अलंकार के प्रकार

परिभाषा-वाक्य में सुंदरता या चमत्कार लाने के लिए जिस शाब्दिक या अर्थ संबंधी चमत्कार की उत्पत्ति होती है, उसे अलंकार कहते हैं।

अलंकार के तीन प्रकार हैं-

  • शब्दालंकार
  • अर्थालंकार
  • उभयालंकार।

प्रमुख अलंकार

1. अनुप्रयास-जहाँ वर्णों की आवृत्ति (बार-बार आने से) कारण चमत्कार उत्पन्न हो, वहाँ अनुप्रास अलंकार होता है।

जैसे-
‘मुदित महीपति मदिर आये, सेवक सचित्र सुमंत्र बुलाये।’ इसमें ‘म’ एवं ‘स’ की बार-बार आवृति हुई है।

2. यमक-जब एक या अधिक शब्द एक से अधिक बार प्रयुक्त हों, पर हर बार उसका अर्थ भिन्न हो, वहाँ यमक अलंकार होता है।

जैसे-

कनक-कनक ते सौ गुनी मादकता अधिकाय।
वा खाये बौराय जग या पाये बौराय॥
यहाँ एक कनक का अर्थ धतूरा व दूसरे का होना है।

3. इलेष-जहाँ एक ही शब्द के कई अर्थ निकलें।

जैसे-

रहिमन पानी राखिये बिन पानी सब सून।
पानी गये न ऊबरे मोती मानुस चून।
यहाँ पानी का अर्थ-क्रमशः चमक, इज्जत व जल है।

4. उपमा-जहाँ किसी वस्तु की उसके किसी विशेष गुण के कारण तुलना की जाए, वहाँ उपमा अलंकार होता है।
जैसे- ‘बन्दौं कोमल कमल से, जग जननी के पाँय।’

5. रूपक-जहाँ उपमेय में उपमान का आरोप हो वहाँ रूपक होता है।

जैसे-

‘चरण कमल बन्दौं हरि राई।’
यहाँ चरण उपमेय पर कमल उपमान का आरोप

6. उत्प्रेक्षा-जब उपमेय में उपमान की कल्पना कर ली जाए, तो वहाँ उत्प्रेक्षा अलंकार होता है।

जैसे-

सोहत ओढ़े पीत पट, श्याम सलोने गात।
मनौ नील मनि शैल पर, आतप पर्योप्रभात॥
यहाँ श्याम में सूर्य के प्रकाश का उपमान है।

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MP Board Class 7th Science Solutions Chapter 18 अपशिष्ट जल की कहानी

MP Board Class 7th Science Solutions Chapter 18 अपशिष्ट जल की कहानी

MP Board Class 7th Science Chapter 18 पाठान्त अभ्यास के प्रश्नोत्तर

प्रश्न 1.
रिक्त स्थानों की पूर्ति कीजिए –

  1. जल को स्वच्छ करना ……. को दूर करने का प्रक्रम है।
  2. घरों द्वारा निर्मुक्त किए जाने वाला अपशिष्ट जल ……. कहलाता है।
  3. शुष्क ……. का उपयोग खाद के रूप में किया जाता
  4. नालियाँ ….. और ……. के द्वारा अवरुद्ध हो जाती हैं।

उत्तर:

  1. प्रदूषकों।
  2. वाहित मल।
  3. आपंक।
  4. चाय की पत्ती, ठोस खाद्य पदार्थ।

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प्रश्न 2.
वाहित मल क्या है? अनुपचारित वाहित मल को नदियों अथवा समुद्र में विसर्जित करना हानिकारक क्यों है, समझाइए।
उत्तर:
घरों, उद्योगों, कृषि कार्य, खेतों और अन्य मानव क्रिया कलापों में उपयोग किया हुआ अपशिष्ट जल वाहित मल कहलाता है। अनुपचारित वाहित मल को नदियों अथवा समुद्र में विसर्जित करने से जल प्रदूषित हो जाता है जिससे नहाने से त्वचा सम्बन्धी रोग तथा पीने से पेट से सम्बन्धित बीमरियाँ उत्पन्न होती हैं। कभी-कभी जल सम्बन्धित रोगों से पीड़ित व्यक्ति की मृत्यु भी हो जाती है।

प्रश्न 3.
तेल और वसाओं को नाली में क्यों नहीं बहाना चाहिए? समझाइए।
उत्तर:
तेल और वसा पाइपों में कठोर पदार्थों की परत जमाकर उन्हें अवरुद्ध कर सकते हैं। खली नालियों में वसा, मदा के रन्ध्रों को बन्द कर देती है जिससे उसकी जल को फिल्टर करने की प्रभाविता कम हो जाती है। अतः तेल और वसाओं को नाली में नहीं बहाना चाहिए।

प्रश्न 4.
अपशिष्ट जल से स्वच्छ जल प्राप्त करने के प्रक्रम में सम्मिलित चरणों का वर्णन कीजिए।
उत्तर:
प्रथम चरण:
सर्वप्रथम अपशिष्ट जल को ऊर्ध्वाधर छड़ों से बने शलाका से गुजारा जाता है। यहाँ अपशिष्ट जल में उपस्थित बड़े साइज के संदूषक, जैसे- कपड़ों के टुकड़े, प्लास्टिक के पैकेट, नैपकिन, इंडियाँ आदि अलग हो जाते हैं।

द्वितीय चरण:
अब वाहित जल को ग्रिट और बालू को अलग करने की टंकी में ले जाया जाता है। इस टंकी में अपशिष्ट जल को कम प्रवाह से छोड़ा जाता है जिससे उसमें उपस्थित बालू, ग्रिट और कंकड़-पत्थर उसकी पेंदी में बैठ जाते हैं।

तृतीय चरण:
द्वितीय चरण से प्राप्त जल को एक ऐसी टंकी में ले जाया जाता है जिसका पेंदा मध्य भाग की ओर ढलानदार होता है। जल को इस टंकी में कई घण्टों तक रखा जाता है जिससे मल जैसे ठोस मध्य भाग की तली में बैठ जाते हैं। इन अशुद्धियों को खुरचकर बाहर निकाल दिया जाता है। यह आपंक (स्लज) होता है।

जल में तैरने वाले तेल और ग्रीज जैसी अशद्धियों को अपमथित्र (स्किमर) द्वारा अलग कर लिया जाता है। इस प्रकार प्राप्त जल निर्मलीकृत जल कहलाता है। आपंक को पृथक टंकी में स्थानान्तरित कर दिया जाता है, जहाँ यह अवायवीय जीवाणुओं द्वारा अपघटित हो जाता है तथा इस प्रक्रम में उत्पन्न बायोगैस को ईंधन अथवा विद्युत् उत्पादन के लिए किया जाता है।

चतुर्थ चरण:
निर्मलीकृत जल में पम्प द्वारा वायु प्रवाहित की जाती है जिससे वायवीय जीवाणुओं की वृद्धि होती है। ये जीवाणु निर्मलीकृत जल में बचे हुए मानव एवं खाद्य अपशिष्ट पदार्थों, साबुन व अन्य अवांछित पदार्थों का उपयोग कर लेते हैं। अब शीर्ष भाग से जल को निकाल कर उसे रोगाणुमुक्त करने के लिए क्लोरीन अथवा ओजोन से गुजार कर शुद्ध कर लिया जाता है।

प्रश्न 5.
आपंक क्या है? समझाइए इसे कैसे उपचारित किया जाता है?
उत्तर:
आपंक अपशिष्ट जल का सह-उत्पाद है। यह मल जैसा ठोस अपशिष्ट है। टंकी की पेंदी में एकत्रित सक्रियित आपंक में लगभग 97% जल होता है। जल को बालू द्वारा बनाए गए शुष्कन तलों द्वारा अथवा मशीनों द्वारा हटा दिया जाता है। इससे आपंक शुष्क हो जाता है। इसका उपयोग खाद से रूप में करते हैं जिससे कार्बनिक पदार्थ और पोषक तत्त्व पुनः मृदा में चले जाते है।

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प्रश्न 6.
अनुपचारित मानव मल एक स्वास्थ्य संकट है। समझाइए।
उत्तर:
अनुपचारित मानव मल के वातावरण में बने रहने से विषैले पदार्थ उत्पन्न हो जाते हैं। इससे दुर्गन्ध आने लगती है जिससे श्वास सम्बन्धी एवं अन्य रोग होने की सम्भावना रहती है। मल के ढेर पर मक्खियाँ, मच्छर एवं विभिन्न रोगाणु पनपने लगते हैं जो हैजा, तपेदिक, हेपैटाइटिस, पोलियो, पेचिश, मेनिन्जाइटिस आदि बीमारियाँ फैलाते हैं। इससे जल और मृदा भी प्रदूषित होते हैं। अतः अनुपचारित मानव मल स्वास्थ्य संकट का एक कारक है।

प्रश्न 7.
जल को रोगाणुनाशित (रोगाणुमुक्त) करने के लिए उपयोग किए जाने वाले दो रसायनों के नाम बताइए।
उत्तर:
रोगाणुनाशित रसायन-ओजोन और क्लोरीन।

प्रश्न 8.
अपशिष्ट जल उपचार संयन्त्र में शलाका छन्नों के कार्यों को समझाइए।
उत्तर:
शलाका छन्नों (बार स्क्रीन) द्वारा अपशिष्ट जल में उपस्थित कपड़ों के टुकड़े, डंडियाँ, डिब्बे, प्लास्टिक पैकेट, नैपकिन आदि बड़े साइज के सन्दूषक अलग कर दिए जाते हैं।

प्रश्न 9.
स्वच्छता और रोग के बीच सम्बन्ध को समझाइए।
उत्तर:
स्वच्छता की कमी और सन्दूषित पेयजल अनेक रोगों को जन्म देते हैं। हमारी जनसंख्या का बहुत बड़ा भाग खुले स्थानों, नदी के किनारों, रेल की पटरियों, खेतों, जल स्रोतों आदि में ही मल त्याग करते हैं। इससे जल और मृदा दोनों ही प्रदूषित हो जाते हैं। इससे दुर्गन्ध फैलती है तथा अनुपचारित मल पर विभिन्न रोगाणु पनपते हैं जिससे अनेक रोग उत्पन्न होते हैं।

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प्रश्न 10.
स्वच्छता के सन्दर्भ में एक सक्रिय नागरिक के रूप में अपनी भूमिका को समझाइए।
उत्तर:
स्वच्छता के सन्दर्भ में सक्रिय नागरिक की भूमिका:

  1. अपशिष्ट पदार्थों की मात्रा और उनकी विविधता को कम करने का प्रयास करना चाहिए।
  2. अपने पास-पड़ोस, सार्वजनिक स्थानों और सड़कों पर फैले हुए कूड़े-कचरे के ढेरों की जानकारी नगरपालिका अथवा ग्राम पंचायत को देनी चाहिए तथा उनसे यथोचित कदम उठाने के लिए आग्रह करना चाहिए।
  3. यदि किसी के घर से निकलने वाला वाहित जल पास-पड़ोस में गन्दगी फैला रहा हो, तो उन्हें अन्य नागरिकों के स्वास्थ्य के प्रति समझाना चाहिए।

प्रश्न 11.
प्रस्तुत वर्ग पहेली को दिए गए संकेतों की सहायता से हल कीजिए।
संकेत:
बाएं से दाएँ:
2. वाहित मल उपचार संयन्त्र से प्राप्त गैसीय उत्पाद।
4. इस प्रक्रम में प्रदूषित जल से वायु को गुजारा जाता है।
7. वाहित मल ले जाने वाले पादपों की व्यवस्था।
8. उपयोग के बाद नालियों में बहता जल।

ऊपर से नीचे:
1. जल उपचार में रोगाणुनाशन के लिए प्रयुक्त एक रसायन।
3. वह सूक्ष्मजीव, जो ऑक्सीजन की अनुपस्थिति में जैव पदार्थों का विघटन करते हैं।
5. सन्दूषित जल।
6. वह स्थान, जहाँ वाहित मल से प्रदूषण पृथक् किये जाते हैं।
9. अनेक व्यक्ति इसका विसर्जन खुले स्थानों में करते हैं।
MP Board Class 7th Science Solutions Chapter 18 अपशिष्ट जल की कहानी 1

प्रश्न 12.
ओजोन के बारे में निम्नलिखित वक्तव्यों को ध्यानपूर्वक पढ़िए:
(क) यह सजीव जीवों के श्वसन के लिए अनिवार्य है।
(ख) इसका उपयोग जल के रोगाणुरहित करने के लिए किया जाता है।
(ग) यह पराबैंगनी किरणों को अवशोषित कर लेती है।
(घ) वायु में इसका अनुपात 3% है।

इनमें से कौन-से वक्तव्य सही हैं?

  1. (क), (ख) और (ग)।
  2. (ख) और (ग)।
  3. (क) और (ग)।
  4. सभी चार।

उत्तर:
(ख) और (ग)।

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MP Board Class 7th Science Solutions Chapter 17 वन: हमारी जीवन रेखा

MP Board Class 7th Science Solutions Chapter 17 वन: हमारी जीवन रेखा

MP Board Class 7th Science Chapter 17 पाठान्त अभ्यास के प्रश्नोत्तर

प्रश्न 1.
समझाइए कि वन में रहने वाले जन्तु किस प्रकार वनों की वृद्धि करने और पुनर्जनन में सहायक होते हैं?
उत्तर:
वन में रहने वाले जन्तुओं द्वारा किए गए गोबर के ढेर पर शाकों और झाड़ियों के नवोद्भिद अंकुरित हो जाते हैं।इनको उगने के लिए पोषक तत्त्व भी गोबर से प्राप्त हो जाते हैं। ये जन्तु कुछ पादपों के बीजों को प्रकीर्णित कर देते हैं। ये बीज नये पादपों को जन्म देते हैं। पादपों की अधिक किस्में शाकाहारी जन्तुओं को भोजन और आवास के लिए अधिक अवसर प्रदान करते हैं। शाकाहारियों की अधिक संख्या माँसभक्षियों के लिए भोजन बनते हैं। इस प्रकार जन्तु वनों की वृद्धि करने और पुनर्जनन में सहायक हैं।

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प्रश्न 2.
समझाइए कि वन, बाढ़ की रोकथाम कैसे करते हैं?
उत्तर:
वन वर्षा जल के प्राकृतिक अवशोषक का काम करते हैं और उसे अवस्रावित होने देते हैं। वृक्षों तथा पौधों के मूल मृदा को एक साथ बाँधे रखते हैं। मृदा भू-तल पर गिरने वाले वर्षा जल को अवशोषित करके पृथ्वी के अन्दर भेज देती है। इस प्रकार वन बाढ़ों की रोकथाम करने में सहायक होते हैं।

प्रश्न 3.
अपघटक किन्हें कहते हैं? इनमें से किन्हीं दो के नाम बताइए। ये वन में क्या करते हैं?
उत्तर:
पादपों और जन्तुओं के मृत शरीर को ह्यूमस में परिवर्तित करने वाले सूक्ष्म जीव, अपघटक कहलाते हैं।
अपघटक: मशरूम, मिलीपीड़ों।
सूक्ष्मजीव मृत पादपों और जन्तु ऊतकों को खाते हैं और उन्हें एक गहरे रंग के पदार्थ ह्यूमस में बदल देते हैं। ह्यूमस मृदा को उर्वर बनाता है और पादपों को पोषण प्रदान करता है।

प्रश्न 4.
वायुमण्डल में ऑक्सीजन और कार्बन डाइऑक्साइड के बीच सन्तुलन को बनाए रखने में वनों की भूमिका को समझाइए।
उत्तर:
सभी हरे पेड़-पौधे दिन में सूर्य के प्रकाश की उपस्थिति में प्रकाश संश्लेषण की क्रिया करते हैं, जिसमें ये कार्बन डाइऑक्साइड लेते हैं तथा आक्सीजन छोड़ते हैं जिससे वायुमण्डल में ऑक्सीजन तथा कार्बन डाइऑक्साइड का सन्तुलन बना रहता है।

प्रश्न 5.
समझाइए कि वनों में कुछ भी व्यर्थ क्यों नहीं होता है?
उत्तर:
वनों के कारण खनिज पदार्थ एवं अन्य उपयोगी पदार्थों की मात्रा का सन्तुलन बना रहता है तथा विभिन्न पदार्थों का चक्रीकरण होता रहता है। मृदा में ह्यूमस की उपस्थिति से मृत पादपों और जन्तुओं के पोषक तत्त्व मृदा में निर्मुक्त होते रहते हैं। वहाँ से इन पोषक तत्त्वों को सजीव पादपों की मूलों द्वारा अवशोषित कर लिया जाता है। इन पोषक तत्त्वों का चक्र चलता रहता है जिससे वन में कुछ भी व्यर्थ नहीं जाता है।

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प्रश्न 6.
ऐसे पाँच उत्पादों के नाम बताइए, जिन्हें हम वनों से प्राप्त करते हैं।
उत्तर:
वनों से प्राप्त होने वाले उत्पाद-लाख, गोंद, चन्दन, कपूर, जैव ईधन आदि।

प्रश्न 7.
रिक्त स्थानों की पूर्ति कीजिए –

  1. कीट, तितलियाँ, मधुमक्खियाँ और पक्षी, पुष्पीय पादपों की ………. में सहायता करते हैं।
  2. वन परिशुद्ध करते हैं ……… और ……… को।
  3. शाक वन में …………. परत बनाते हैं।
  4. वन में क्षयमान पत्तियाँ और जन्तुओं की लीद ……….को समृद्ध करते हैं।

उत्तर:

  1. वृद्धि।
  2. जलवायु, वायु।
  3. सबसे नीचे की।
  4. मृदा।

प्रश्न 8.
हमें अपने से दूर स्थित वनों से सम्बन्धित परिस्थितियों और मुद्दों के विषय में चिंतित होने की क्यों आवश्यकता है?
उत्तर:
हमें वनों से सम्बन्धित परिस्थितियों और मुद्दों के विषय में चिंतित होने की आवश्यकता इसलिए है कि यदि वन नष्ट हो जाएँगे तो मनुष्य के जीवन की कल्पना नहीं की जो सकती क्योंकि –

  1. वनों के न होने से वन्य जीवों को आवास एवं भोजन उपलब्ध नहीं होगा जिससे वे नष्ट हो जायेंगे। इसके परिणामस्वरूप मनुष्य को वनों से उपलब्ध होने वाले उपयोगी औषधीय पादप, काष्ठ और अनेक उपयोगी पदार्थ प्राप्त नहीं हो सकेंगे।
  2. वन हमें ऑक्सीजन प्रदान करते हैं और मृदा को सुरक्षित रखते हैं। वातावरण में ऑक्सीजन की कमी से कार्बन डाइऑक्साइड की मात्रा बढ़ जाएगी। वन वायुमण्डल में ऑक्सीजन तथा कार्बन डाइऑक्साइड का सन्तुलन बनाए रखते हैं।
    वर्षा नहीं होगी। इससे भू-जल स्तर गिरता चला जाएगा और वर्षा के अभाव में अकाल पड़ जाएगा।
  3. पौधे प्रकाश संश्लेषण की क्रिया में भोजन का निर्माण करते हैं, इस भोजन पर सभी जीव प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से निर्भर रहते हैं। अतः मनुष्य को भोजन नहीं मिल पाएगा।
  4. वातावरण का तापमान बढ़ता जाएगा, क्योंकि पौधे वातावरणीय तापमान को बढ़ने से रोकते हैं। एक निश्चित तापमान के बाद जीवन असम्भव है।

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प्रश्न 9.
समझाइए कि वनों में विभिन्न प्रकार के जन्तुओं और पादपों के होने की आवश्यकता क्यों है?
उत्तर:
वनों में विभिन्न प्रकार के जन्तुओं और पादपों का होना इसलिए आवश्यक है, क्योंकि –

  1. जन्तुओं और पादपों से हमें अनेक महत्त्वपूर्ण वस्तुएँ प्राप्त होती हैं, जैसे- लाख, गोंद, सुगन्धित पदार्थ, शहद, औषधियाँ, पशु-चारा, जैव ईधन, ऊन, फर तथा भोज्य पदार्थ इत्यादि।
  2. पादप भोजन का निर्माण करते हैं। सभी जन्तु चाहे वे शाकाहारी हों अथवा माँसाहारी अन्ततः भोजन के लिए पादपों पर ही निर्भर होते हैं। जो जीव पादपों से भोजन लेते हैं, उन्हें अन्य जन्तुओं द्वारा भोजन के रूप में लिया जाता है। इस प्रकार यह क्रम चलता रहता है।
    पादप → कीट → मेंढक → सर्प → उकाब (गरुड़)
  3. जन्तुओं और पादपों से प्राकृतिक सन्तुलन बना रहता है।

प्रश्न 10.
संलग्न चित्र में चित्रकार, चित्र को नामांकित करना और तीरों द्वारा दिशा दिखाना भूल गया है। तीरों पर दिशा को दिखाइए और चित्र को निम्नलिखित नामों द्वारा नामांकित करिए –
बादल, वर्णा, वायुमंडल, कार्बन डाइऑक्साइड, ऑक्सीजन, पादप, जन्तु, मृदा, अपघटक, मूल, भौमजल स्तर।
उत्तर:
MP Board Class 7th Science Solutions Chapter 17 वन हमारी जीवन रेखा 1

प्रश्न 11.
निम्नलिखित में से कौन-सा वन उत्पाद नहीं है?

  1. गोंद।
  2. प्लाईवुड।
  3. सील करने का लाख।
  4. कैरोसीन।

उत्तर:
कैरोसीन।

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प्रश्न 12.
निम्नलिखित में से कौन-सा वक्तव्य सही नहीं है?

  1. वन, मृदा को अपरदन से बचाते हैं।
  2. वन में पादप और जन्तु एक दूसरे पर निर्भर नहीं होते हैं।
  3. वन जलावायु और चल चक्र को प्रभावित करते हैं।
  4. मृदा, वनों की वृद्धि और पुनर्जनन में सहायक होती है।

उत्तर:
वन में पादप और जन्तु एक-दूसरे पर निर्भर नहीं होते हैं।

प्रश्न 13.
सूक्ष्मजीवों द्वारा मृत पादपों पर क्रिया करने से बनने वाले एक उत्पाद का नाम है –

  1. बालू।
  2. मशरूम।
  3. ह्यूमस।
  4. काष्ठ।

उत्तर:
ह्यूमस।

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MP Board Class 7th Science Solutions Chapter 16 जल: एक बहुमूल्य संसाधन

MP Board Class 7th Science Solutions Chapter 16 जल: एक बहुमूल्य संसाधन

MP Board Class 7th Science Chapter 16 पाठान्त अभ्यास के प्रश्नोत्तर

प्रश्न 1.
निम्नलिखित वक्तव्य ‘सत्य’ हैं अथवा ‘असत्य’

  1. भौमजल विश्वभर की नदियों और झीलों में पाये जाने वाले जल से कहीं अधिक है।
  2. जल की कमी की समस्या का सामना केवल ग्रामीण क्षेत्रों के निवासी करते हैं।
  3. नदियों का जल खेतों में सिंचाई का एकमात्र स्रोत है।
  4. वर्षा जल का चरम स्रोत है।

उत्तर:

  1. सत्य।
  2. असत्य।
  3. असत्य।
  4. सत्य।

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प्रश्न 2.
समझाइए कि भौमजल की पुनःपूर्ति किस प्रकार होती है?
उत्तर:
भौमजल स्तर की पुन:पूर्ति वर्षा जल के द्वारा की जाती है। वर्षा के रूप में गिरने वाला अधिकांश जल नदियों तथा झरनों के द्वारा समुद्र में पहुँच जाता है। वर्षा का कुछ जल वाष्प बनकर उड़ जाता है तथा कुछ जल भूमि द्वारा सोख लिया जाता है। इस प्रकार भूमि द्वारा सोखा हुआ वर्षा जल भौमजल स्तर की पुनः पूर्ति करता है।

प्रश्न 3.
किसी गली में पचास घर हैं जिनके लिए दस नलकूप (ट्यूब वैल) लगाए गए हैं। भौमजल स्तर पर इसका दीर्घावधि प्रभाव क्या होगा?
उत्तर:
पचास घरों के लिए दस नलकूपों की संख्या अपेक्षाकृत अधिक है। इससे पानी अपव्यय अधिक होगा और दीर्घावधि में प्राकृतिक प्रक्रमों द्वारा पुन:पूर्ति न होने पर भौमजल स्तर नीचे गिर जाएगा।

प्रश्न 4.
मान लीजिए आपको किसी बगीचे का रखरखाव करने की जिम्मेदारी दी जाती है। आप जल का सदुपयोग करने के लिए क्या कदम उठाएँगे?
उत्तर:
जल का सदुपयोग निम्न प्रकार किया जा सकता है –

  1. अगर बगीचे में कहीं पानी का दुरुपयोग हो रहा है तो इसे रोककर अपव्यय कम करेंगे।
  2. पेड़-पौधों को कम व्यास के पाइपों द्वारा पानी देंगे, जिससे कि उनकी जड़ों तक जल पहुँच सके। इससे आवश्यकतानुसार ही पानी का उपयोग होगा।
  3. पेड़-पौधों के लिए आवश्यक जल की आपूर्ति सुनियोजित ढंग से करेंगे।
  4. वर्षा के पानी का अधिकतम उपयोग करेंगे।

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प्रश्न 5.
भौमजल स्तर के नीचे गिरने के लिए उत्तरदायी कारकों को समझाइए।
उत्तर:
भौमजल स्तर के नीचे गिरने के लिए उत्तरदायी कारक:
(1) जनसंख्या वृद्धि:
जनसंख्या बढ़ने से भवनों, दुकानों, कार्यालयों और सड़कों के निर्माण में वृद्धि हो जाती है। इससे खुले क्षेत्रों में कमी आ जाती है। इसके कारण वर्षा जल के अवस्रवण की दर कम हो जाती है। निर्माण कार्य के लिए भी अधिक मात्रा में जल की आवश्यकता होती है। जनसंख्या वृद्धि से पानी का उपयोग भी बढ़ जाता है।

(2) बढ़ते हुए उद्योग:
उद्योगों की संख्या निरन्तर बढ़ती जा रही है। अधिकांश उद्योगों द्वारा उपयोग किये जाने वाला जल भूमि से निकाला जा रहा है। इससे जल स्तर नीचे गिर रहा है।

(3) कृषि गतिविधियाँ:
कृषि में जल अत्यन्त आवश्यक है। खेतों की सिंचाई के लिए वर्षा जल के अतिरिक्त अन्य स्रोतों से जल का उपयोग किया जाता है। अनियमित वर्षा के कारण भी जल की उपलब्धता में कमी आयी है। जनसंख्या के बढ़ते दबाव के कारण कृषि के लिए भौमजल का उपयोग दिन-प्रतिदिन बढ़ता जा रहा है। इसके परिणामस्वरूप भौमजल स्तर निरन्तर गिर रहा है।

प्रश्न 6.
रिक्त स्थानों की उचित शब्द भरकर पूर्ति कीजिए।

  1. भौमजल प्राप्त करने के लिए … तथा ….. का उपयोग होता है।
  2. जल की तीन अवस्थाएँ ….., ……, और ….. हैं।
  3. भूमि की जल धारण करने वाली परत ………. कहलाती है।
  4. भूमि में जल के अवस्रवण के प्रक्रम को ……… कहते हैं।

उत्तर:

  1. नलकूप, हैण्डपम्प।
  2. ठोस, द्रव, गैस।
  3. भौमजल स्तर।
  4. जल चक्र।

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प्रश्न 7.
निम्नलिखित में से कौन-सा कारक जल की कमी के लिए उत्तरदायी नहीं है?

  1. औद्योगीकरण में वृद्धि।
  2. बढ़ती जनसंख्या।
  3. अत्यधिक वर्षा।
  4. जल संसाधनों का कुप्रबन्धन।

उत्तर:
अत्यधिक वर्षा।

प्रश्न 8.
सही विकल्प का चयन कीजिए –

  1. विश्व की सभी झीलों और नदियों में कुल मात्रा नियत (स्थिर) रहती है।
  2. भूमिगत जल की कुल मात्रा नियत रहती है।
  3. विश्व के समुद्रों और महासागरों में जल की कुल मात्रा नियत है।
  4. विश्व में जल की कुल मात्रा नियत है।

उत्तर:
विश्व में जल की कुल मात्रा नियत है।

प्रश्न 9.
भौमजल और भौमजल स्तर को दिखाते हुए एक चित्र बनाइए। उसे चिह्नित कीजिए।
उत्तर:
भौमजल एवं भौमजल स्तर।
MP Board Class 7th Science Solutions Chapter 16 जल एक बहुमूल्य संसाधन 1

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MP Board Class 7th Maths Solutions Chapter 7 त्रिभुजों की सर्वांगसमता Ex 7.2

MP Board Class 7th Maths Solutions Chapter 7 त्रिभुजों की सर्वांगसमता Ex 7.2

प्रश्न 1.
निम्न में आप कौन-से सर्वांगसम प्रतिबन्धों का प्रयोग करेंगे ?
(a) दिया है : AC = DF AB = DE, BC = EF
MP Board Class 7th Maths Solutions Chapter 7 त्रिभुजों की सर्वांगसमता Ex 7.2 image 1

इसलिए, ∆ABC ≅ ∆DEF
(b) दिया है : ZX = RP RQ = ZY
∠PRQ = ∠XZY
इसलिए, ∆PQR = ∆XYZ
(c) दिया है: ∠MLN = ∠FGH
∠NML = ∠GFH
ML = FG
इसलिए, ∆LMN ≅ ∆GFH
(d) दिया है: EB = DB
AE = BC
∠A = ∠C
इसलिए, ∆ABE ≅ ∆CDB
उत्तर:
(a) S.S.S. सर्वांगसमता प्रतिबन्ध द्वारा,
∆ABC ≅ ∆DEE
(b) S.A.S. सर्वांगसमता प्रतिबन्ध द्वारा,
∆PQR ≅ ∆XYZ.
(c) A.S.A. सर्वांगसमता प्रतिबन्ध द्वारा,
∆LMN ≅ ∆GFH.
(d) R.H.S. सर्वांगसमता प्रतिबन्ध द्वारा,
∆ABE ≅ ∆CDB.

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प्रश्न 2.
आप ∆ART ≅ ∆PEN दर्शाना चाहते हैं।
(a) यदि आप S.S.S. सर्वांगसमता प्रतिबन्ध का प्रयोग करें तो आपको दर्शाने की आवश्यकता है:
(i) AR =
(ii) RT =
(iii) AT =
(b) यदि यह दिया गया है कि ∠T = ∠N और आपको S.A.S. प्रतिबन्ध का प्रयोग करना है, तो आपको आवश्यकता होगी:
(i) RT = और (ii) PN =
MP Board Class 7th Maths Solutions Chapter 7 त्रिभुजों की सर्वांगसमता Ex 7.2 image 2

(c) यदि यह दिया गया है कि AT = PN और आपको A.S.A. प्रतिबन्ध का प्रयोग करना है, तो आपको आवश्यकता होगी:
(i) ? =
(ii) ? =
हल:
(a) ∆ART ≅ ∆PEN को S.S.S. सर्वांगसमता प्रतिबन्ध द्वारा दर्शाने के लिए दर्शाना होगा –
(i) AR = PE
(ii) RT = EN
(iii) AT = PN
(b) ∴ ∠T = ∠N
∴ (i) RT = EN
(ii) PN = AT
(c) यदि AT = PN और A.S.A. सर्वांगसमता के लिए आवश्यकता होगी –
(i) ∠RAT = ∠EPN
(ii) ∠ATR = ∠PNE

प्रश्न 3.
आपको ∆AMP ≅ ∆AMQ दर्शाना है। निम्न चरणों में, रिक्त कारणों को भरिए:
MP Board Class 7th Maths Solutions Chapter 7 त्रिभुजों की सर्वांगसमता Ex 7.2 image 3
उत्तर:
(i) दिया है
(ii) दिया है
(iii) उभयनिष्ठ
(iv) S.A.S. सर्वांगसमता प्रतिबन्ध।

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प्रश्न 4.
∆ABC में ∠L = 30°, ∠B = 40° और ∠C = 110°, ∆PQR में, ∠P = 30° ∠Q = 40° और ∠R = 110°. एक विद्यार्थी कहता है कि A.A.A. सर्वांगसमता प्रतिबन्ध से ∆ABC ≅ ∆PQR है।
क्या यह कथन सत्य है ? क्यों या क्यों नहीं ?
हल:
यहाँ ∆MBC के तीनों कोण ∆PQR के तीनों कोणों के बराबर हैं। तो यह आवश्यक नहीं कि त्रिभुज सर्वांगसम हों क्योंकि यदि ∆ABC में, भुजा BC = 3.0-सेमी तथा ∆POR में, भुजा QR = 4.0 सेमी हो, तो इस दशा में त्रिभुज के संगत कोण तो बराबर हैं परन्तु यह सर्वांगसम नहीं हैं। क्योंकि BC ≠ QR अतः विद्यार्थी की A.A.A. सर्वांगसमता का प्रतिबन्ध तर्कसंगत नहीं है।

प्रश्न 5.
संलग्न आकृति में दो त्रिभुज ART तथा OWN सर्वांगसम हैं जिनके संगत भागों को अंकित किया गया है। हम लिख सकते हैं ∆RAT = ?
MP Board Class 7th Maths Solutions Chapter 7 त्रिभुजों की सर्वांगसमता Ex 7.2 image 4

हल:
हम लिख सकते हैं ∆RAT ≅ ∆WON
(∴ O ↔ A, N ↔ T, W ↔ R)

प्रश्न 6.
कथनों को पूरा कीजिए –
MP Board Class 7th Maths Solutions Chapter 7 त्रिभुजों की सर्वांगसमता Ex 7.2 image 5

∆BCA ≅ ? ∆QRS ≅ ?
उत्तर:
∆BCA ≅ ∆ABTA, ∆QRS = ∆TPQ

प्रश्न 7.
एक वर्गांकित शीट पर, बराबर क्षेत्रफलों वाले दो त्रिभुजों को इस प्रकार बनाइए कि
(i) त्रिभुज सर्वांगसम हों
(ii) त्रिभुज सर्वांगसम न हों। आप उनके परिमाप के बारे में क्या कह सकते हैं?
हल:
MP Board Class 7th Maths Solutions Chapter 7 त्रिभुजों की सर्वांगसमता Ex 7.2 image 6

(i) चित्र 7.19 (1) में,
∆ ABC का क्षेत्रफल = ∆EDC का क्षेत्रफल = \(\frac { 1 }{ 2 } \) × 3 × 4 = 6 cm2
∆ ABC का परिमाप = 3 + 4 + 5 = 12 cm
∆ EDE का परिमाप = 3 + 4 + 5 = 12 cm
∆ ABC का परिमाप = ∆EDC का परिमाप,
अतः चित्र 7.19 में, ∆ABC ≅ ∆EDC है।
(ii) चित्र 7.19 (ii) में,
∆ PQR का क्षेत्रफल = \(\frac { 1 }{ 2 } \) × PQ × PR
= \(\frac { 1 }{ 2 } \) × 3 × 4 = 6 cm2
तथा ∆ PSR का क्षेत्रफल = \(\frac { 1 }{ 2 } \) × ST × PR
\(\frac { 1 }{ 2 } \) × 3 × 4 = 6 cm2

∴ ∆ POR का क्षेत्रफल = ∆ PSR का क्षेत्रफल
अब, ∆ PQR का परिमाप = 3 + 4 + 5 = 12 cm
तथा ∆ PRS का परिमाप = 4 + 35 + 4 = 11’5 cm
∆ POR का परिमाप ≠ ∆PRS का परिमाप
अत: चित्र 7.19 (ii) में ∆POR व ∆PRS सर्वांगसम नहीं हैं क्योंकि इनके क्षेत्रफल तो समान हैं परन्तु परिमाप समान नहीं

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प्रश्न 8.
संलग्न आकृति में एक सर्वांगसम भागों का एक अतिरिक्त युग्म बताइए जिससे ∆ABC और ∆PQR सर्वांगसम हो जाएँ। आपने किस प्रतिबन्ध का प्रयोग किया ?
MP Board Class 7th Maths Solutions Chapter 7 त्रिभुजों की सर्वांगसमता Ex 7.2 image 7

हल:
यहाँ, ∆ABC ≅ ∆PQR
∴ ∠B = ∠Q IR ∠C = ∠R
∴ सर्वांगसम भागों का अतिरिक्त युग्म –
BC = QR
उत्तर हमने यहाँ A.S.A. सर्वांगसम प्रतिबन्ध का प्रयोग किया है।

प्रश्न 9.
चर्चा कीजिए, क्यों?
∆ABC ≅ ∆FED.
MP Board Class 7th Maths Solutions Chapter 7 त्रिभुजों की सर्वांगसमता Ex 7.2 image 8

हल:
∠B = ∠E = 90°,
∠A = ∠F (दिया हुआ है)
∴ ∠C = ∠D (तीसरा कोण)
BC = DE (दिया हुआ है)
अत: ASA सर्वांगसम प्रतिबन्ध से ∆ ABC ≅ ∆ FED परिणाम प्राप्त होगा।

पाठ्य-पुस्तक पृष्ठ संख्या # 163

ज्ञानवर्धक क्रियाकलाप

प्रश्न 1.
अलग-अलग माप के वर्गों के कट-आउट सोचिए। अध्यारोपण विधि का प्रयोग वर्गों की सर्वांगसमता के लिए प्रतिबन्ध ज्ञात करने के लिए कीजिए। कैसे “सर्वांगसम भागों” की संकल्पना सर्वांगसम के अंतर्गत उपयोग होती है ? क्या यहाँ संगत भुजाएँ हैं ? क्या यहाँ संगत विकर्ण हैं ?
हल:
हम जानते हैं कि समतल आकृतियाँ सर्वांगसम होती हैं। जब आकृतियों के आकार समान होते हैं तो वे एक-दूसरे की ठीक-ठीक पूरा ढक लेती हैं। सभी वर्ग समान आकृति के होते हैं लेकिन वर्ग का आकार उनकी भुजाओं की लम्बाई पर निर्भर करता है।
MP Board Class 7th Maths Solutions Chapter 7 त्रिभुजों की सर्वांगसमता Ex 7.2 image 9

ABCD व PQRS दो वर्ग हैं। वर्ग ABCD के कट-आउट को वर्ग PQRS के ऊपर इस प्रकार रखते हैं कि शीर्ष A, वर्ग PQRS के शीर्ष P पर और भुजा AB भुजा PQ पर आए।

स्पष्ट है कि ABCD वर्ग PQRS को पूर्णतया ढक लेता है।

यदि AB = PQ तो दो वर्ग सर्वागसम होंगे यदि उनकी भुजाओं की लम्बाइयाँ समान हों।

अत: वर्ग ABCD ≅ वर्ग PORS यदि AB = PQ

हम एक वर्ग की किसी भी भुजा को दूसरे वर्ग की किसी भुजा के संगत ले सकते हैं। दूसरी संगत भुजाओं के युग्म इसी प्रकार बदल जाएँगे। यह बात विकर्णों के लिए भी सत्य है।

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प्रश्न 2.
यदि आप वृत्त लेते हैं तो क्या होता है ? दो वृत्तों की सर्वांगसमता के लिए प्रतिबन्ध क्या है ? क्या, आप फिर अध्यारोपण विधि का प्रयोग कर सकते हैं ? पता लगाइए।
हल:
सभी वृत्तों की समान आकृति होती है और वृत्त का आकार वृत्त की त्रिज्या पर निर्भर करता है। यहाँ दो वृत्त C1 व C2 हैं। इनमें से किसी एक वृत्त का कट-आउट (माना वृत्त C2 का) वृत्त C1 पर रखते हैं। वृत्त C2 वृत्त C1 को पूरी तरह ठीक-ठीक ढल लेता है। यदि दोनों वृत्तों की त्रिज्याएँ समान होंगी तो दोनों वृत्त सर्वांगसम होंगे।

वृत्त C1 वृत्त C2 जबकि C1 वृत्त की त्रिज्या = C2 वृत्त की त्रिज्या।
MP Board Class 7th Maths Solutions Chapter 7 त्रिभुजों की सर्वांगसमता Ex 7.2 image 10

प्रश्न 3.
इस संकल्पना को बढ़ाकर तल की दूसरी आकृतियाँ जैसे समषद्भुज इत्यादि के लिए प्रयत्न कीजिए।
हल:
हम जानते हैं कि समतल आकृतियाँ सर्वांगसम होती हैं यदि वे एक-दूसरे को पूर्णतया ढक लेती हैं। सभी समषट्भुज समान आकृति के होते हैं और इनका आकार समषट्भुज की भुजा की लम्बाई पर निर्भर करता है। दो समषट्भुज ABCDEF व PQRSTU लेते हैं। इनके कट-आउट लेते हैं जिनमें से प्रत्येक की सभी भुजाएँ समान हों।
MP Board Class 7th Maths Solutions Chapter 7 त्रिभुजों की सर्वांगसमता Ex 7.2 image 11

अब PQRSTU के कट-आउट को ABCDEF पर इस प्रकार रखते हैं कि PQRSTU का बिन्दु P बिन्दु A पर आए तथा भुजा PQ भुजा AB पर आए। यदि PQ = AB तो समषट्भुज PQRSTU, समषट्भुज ABCDEF को पूर्णतया ठीक-ठीक ढक लेता है। अत: दो समषट्भुज सर्वांगसम होते हैं यदि इनकी भुजाओं की लम्बाई समान हो।

अत: समषट्भुज ABCDEF = समषट्भुज PQRSTU.

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प्रश्न 4.
एक त्रिभुज की दो सर्वांगसम प्रतिलिपियाँ लीजिए। कागज को मोड़कर पता लगाइए कि क्या उनके शीर्ष लम्ब बराबर हैं ? क्या उनकी माध्यिकाएँ समान हैं ? आप उनके परिमाप तथा क्षेत्रफल के बारे में क्या कह सकते हैं ?
हल:
माना ∆ABC ≅ ∆DEF
कागज को मोड़कर प्रत्येक त्रिभुज के शीर्ष बनाए। हम देखते हैं कि
AL = DP BM = EQ और CN = FR
अर्थात् संगत शीर्ष लम्ब समान हैं।

इसी प्रकार हम देख सकते हैं कि सर्वांगसम त्रिभुजों में संगत माध्यिकाएँ समान होती हैं और इनके परिमाप व क्षेत्रफल समान होते हैं।
MP Board Class 7th Maths Solutions Chapter 7 त्रिभुजों की सर्वांगसमता Ex 7.2 image 12

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MP Board Class 7th Maths Solutions Chapter 7 त्रिभुजों की सर्वांगसमता Ex 7.1

MP Board Class 7th Maths Solutions Chapter 7 त्रिभुजों की सर्वांगसमता Ex 7.1

प्रश्न 1.
निम्न कथनों को पूरा कीजिए :
(a) दो रेखाखण्ड सर्वांगसम होते हैं यदि …….. ।
(b) दो सर्वांगसम कोणों में से एक की माप 70° है, दूसरे कोण की माप …….. है।
(c) जब हम ∠A = ∠B लिखते हैं, हमारा वास्तव में अर्थ होता है ……… ।
उत्तर:
(a) इनकी लम्बाइयाँ समान हों।
(b)70°
(c) m ∠A = m∠B

प्रश्न 2.
वास्तविक जीवन से सम्बन्धित सर्वांगसम आकारों के कोई दो उदाहरण दीजिए।
उत्तर:
उदाहरण – समान मान के दो नोट, एक ही ताले की दो चाबियाँ।

प्रश्न 3.
यदि सुमेलन ABC ↔ FED के अंतर्गत ∆ARC ≅ ∆FED तो त्रिभुजों के सभी संगत सर्वांगसम भागों को लिखिए।
उत्तर:
∆ABC तथा ∆FED के संगत सर्वांगसम भाग
MP Board Class 7th Maths Solutions Chapter 7 त्रिभुजों की सर्वांगसमता Ex 7.1 image 1 a

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प्रश्न 4.
यदि ∆DEF ≅ ∆BCA हो, तो ∆BCA के उन भागों को लिखिए जो निम्न के संगत हों :
(i) ∠E
(ii) \(\overline{E F}\)
(iii) ∠F
(iv) \(\overline{D F}\)
उत्तर:
∵ ∆DEF ≅ ∆BCA
∴ (i) ∠E ↔∠C
(ii) \(\overline{E F}\) ↔ \(\overline{C A}\)
(iii) ∠F ↔ ∠A
(iv) \(\overline{D F}\) ↔ \(\overline{B A}\)

पाठ्य-पुस्तक पृष्ठ संख्या # 152-153

प्रयास कीजिए

प्रश्न 1.
संलग्न आकृति में त्रिभुजों की भुजाओं की लम्बाइयाँ दर्शाई गई हैं। S.S.S. सर्वांगसमता के प्रतिबन्ध का प्रयोग करके बताइए कि कौन-कौन से त्रिभुज-युग्म सर्वांगसम हैं। सर्वांगसमता की स्थिति में उत्तर को सांकेतिक रूप में लिखिए।
MP Board Class 7th Maths Solutions Chapter 7 त्रिभुजों की सर्वांगसमता Ex 7.1 image 1 b
हल:
(i) ∆ABC और ∆POR में,
AB = 1.5 cm, PQ = 1.5 cm, ∴ AB = PQ
BC = 2.5 cm, QR = 2.5 cm, ∴ BC = QR
AC = 2-2 cm, PR = 2-2 cm, ∴ AC = PR
चूँकि ∆ABC की तीन भुजाएँ ∆PQR की तीन भुजाओं के बराबर हैं। अत: दोनों त्रिभुज सर्वांगसम हैं। (S.S.S. सर्वांगसमता)
साथ ही, A ↔ P, B ↔ Q और C ↔ R
∴ ∆ABC ≅ ∆PQR

(ii) ∆DEF और ∆LMN में,
DE = 3.2 cm, MN = 3-2 cm, ∴ DE = MN
DF = 3.5 cm, LN = 3.5cm, ∴ DF = LN
EF = 3 cm, LM = 3 cm, ∴ EF = LM
चूँकि ∆DEF की तीन भुजाएँ ∆LMN की तीन भुजाओं के बराबर हैं। अत: दोनों त्रिभुज सर्वांगसम हैं। (S.S.S. सर्वांगसमता)
साथ ही, D ↔ N, E ↔ M, और F ↔ L
∴ ∆DEF ≅ ∆NML

(iii) ∆ABC और ∆POR में,
AC = 5 cm, PR = 5 cm, ∴ AC = PR
BC = 4 cm, PQ = 4 cm, ∴ BC = PQ
AB = 2 cm, QR = 2.5 cm, ∴ BC ≠ PQ
चूँकि, AB ≠ QR, अत: ∆ABC और ∆PQR सर्वांगसम नहीं हैं।

(iv) ∆ABD और ∆ADC में,
AB = 3.5 cm, AC = 3.5 cm, ∴ AB = AC
BD = 2.5 cm, CD = 2.5 cm, ∴ BD = CD
AD = AD (उभयनिष्ठ है)
चूँकि ∆ABD की तीन भुजाएँ ∆ADC की तीन भुजाओं के बराबर हैं। अत: दोनों त्रिभुज सर्वांगसम हैं (S.S.S सर्वांगसमता)।
साथ ही, A ↔ A, B ↔ C और D ↔ D
∆ABD ≅ ∆ACD

प्रश्न 2.
संलग्न आकृति में AB = AC और D, \(\overline{B C}\) का मध्य-बिन्दु है।
(i) ∆ADB और ∆ADC में बराबर भागों के तीन युग्म बताइए।
(ii) क्या ∆ADB ≅ ∆ADC है ? कारण दीजिए।
(iii) क्या ∠B = ∠C है? क्यों?
MP Board Class 7th Maths Solutions Chapter 7 त्रिभुजों की सर्वांगसमता Ex 7.1 image 2
हल:
यहाँ, AB = AC और D, \(\overline{B C}\) का मध्य बिन्दु है
अर्थात् BD = DC
(i) ∆ABD तथा ∆ADC से, बराबर भागों के तीन युग्म
AB = AC (दिया हुआ है)
AD = AD (उमयनिष्ठ है)
BD = DC (∵ D,CB का मध्य बिन्दु है)

(ii) ∆ABD की तीन भुजाएँ ∆ADC की तीन भुजाओं के बराबर हैं।
अतः सर्वांगसमता के S.S.S प्रतिबन्ध से,
∆ABD और ∆ADC सर्वांगसम हैं
और A ↔ A, B ↔ C, D ↔ D
∴ ∆ADB ≅ ∆ADC.

(iii) ∵ ∆ABC ≅ ∆ADC
∴ उनके संगत भाग बराबर हैं।
अर्थात् B ↔ C या ∠B = ∠C.

प्रश्न 3.
संलग्न आकृति में AC = BD और AD = BC हैं। निम्नलिखित कथनों में कौन-सा कथन सत्य है ?
(i) ∆ABC ≅ ∆ABD
(ii) ∆ABC ≅ ∆BAD
MP Board Class 7th Maths Solutions Chapter 7 त्रिभुजों की सर्वांगसमता Ex 7.1 image 3

हल:
यहाँ AC = BD और AD = BC
(i) ∆ABC तथा ∆ABD में,
AB = AB (सही है)
BC = BD (सही नहीं है)
CA = DA (सही नहीं हैं)
अत: हम ∆ABC = ∆ABD नहीं लिख सकते।

(ii) ∆ABC तथा ∆BAD में,
AB = AB (उभयनिष्ठ)
BC = AD (दिया है)
CA = BD (दिया हैं)
यहाँ S.S.S. सर्वांगसमता है।
अत: ≅ABC ≅ ∆BAD लिख सकते हैं।
अतः
(i) ∴ ∆ABC ≅ ∆ABD असत्य है।
(ii) ∆ABC ≅ ∆BAD सत्य है।

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सोचिए, चर्चा कीजिए एवं लिखिए

प्रश्न 1.
ABC एक समद्विबाहु त्रिभुज है जिसमें AB = AC है।
∆ABC की एक अक्स प्रतिलिपि लीजिए और इसे भी ∆ABC का नाम दीजिए।
(i) ABC और ∆ACB में बराबर भागों के तीन युग्म बताइए।
(ii) क्या ∆ABC ≅ ∆ACB है ? क्यों अथवा क्यों नहीं ?
(iii) क्या ∠B = ∠C है? क्यों अथवा क्यों नहीं ?
MP Board Class 7th Maths Solutions Chapter 7 त्रिभुजों की सर्वांगसमता Ex 7.1 image 4

हल:
∆ABC एक समद्विबाहु त्रिभुज है
जिसमें AB = AC, BC = CB तथा AC = AB.

(i) अब ∆ABC और ∆ACB में, बराबर भागों के तीन
युग्म – BC = BC (उभयनिष्ठ है)
AB = AC (दिया हुआ है)
AC = AB (रचना से)
MP Board Class 7th Maths Solutions Chapter 7 त्रिभुजों की सर्वांगसमता Ex 7.1 image 5

(ii) हाँ, ∆ABC = ∆ACB.
क्योंकि ∆ABC की तीनों भुजाएँ ∆ACB की तीनों भुजाओं के बराबर हैं और A ↔ A, B ↔ C,C ↔ B.

(iii) हाँ, ∠B = ∠C ∴ B ↔ C

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पाठ्य-पुस्तक पृष्ठ संख्या # 156 – 157

इन्हें कीजिए

प्रश्न 1.
∆DEF की भुजाओं \(\overline{D E}\) और \(\overline{E F}\) का अंतर्गत कोण कौन-सा है?
उत्तर:
∆DEF में, भुजाओं \(\overline{D E}\) और \(\overline{E F}\) के अंतर्गत कोण, ∠DEF है।

प्रश्न 2.
S.A.S. सर्वांगसमता प्रतिबन्ध का उपयोग करके आप ∆POR ≅ ∆FED स्थापित करना चाहते हैं। यह दिया गया है कि PQ = FE और RP = DF है। सर्वांगसमता को स्थापित करने के लिए अन्य किस तथ्य या सूचना की आवश्यकता होगी?
हल:
∆PQR ≅ ∆FED (सर्वांगसमता के प्रतिबन्ध S.A.S. के अनुसार)
PQ = FE और RP = DF (दिया है)
अन्य तथ्य और सूचना :
चूँकि S.A.S. प्रतिबन्ध के अन्तर्गत भुजाओं PQ और RP तथा FE और DF के बीच बने कोण भी बराबर होना चाहिए।
∴ ∠P = ∠F

प्रश्न 3.
संलग्न आकृति में त्रिभुजों के युग्मों में कुछ भागों की माप अंकित की गई है। S.A.S. सर्वांगसमता प्रतिबन्ध का उपयोग करके, इनमें वे युग्म छाँटिए जो सर्वांगसम हैं। सर्वांगसम त्रिभुजों की स्थिति में उन्हें सांकेतिक रूप में भी लिखिए।
MP Board Class 7th Maths Solutions Chapter 7 त्रिभुजों की सर्वांगसमता Ex 7.1 image 6
हल:
(i) ∆ABC और ∆DEF में,
यहाँ, AB = DE = 2.5 cm
AC = DF = 2.8 cm
∠A = 80°,∠D = 70°
∴ ∠A ≠ ∠D
∴ ∆ABC और ∆DEF सर्वांगसम नहीं है।

(ii) ∆ABC और ∆POR में,
यहाँ AC = PR = 2.5 cm
BC = PQ = 3 cm
∠C = ∠P = 35°
∴ ∆ABC की दो भुजाएँ और उनके अंतर्गत कोण ∆POR की दो संगत भुजाओं और उनके अंतर्गत कोण के बराबर हैं।
अतः दोनों त्रिभुज सर्वांगसमता के S.A.S प्रतिबन्ध के आधार पर सर्वांगसम हैं।
साथ ही C ↔ P A ↔ R और B ↔ Q
∴ ∆ABC ≅ ∆RQP

(iii) ∆DEF तथा ∆PQR में,
यहाँ, EF = QR = 3 cm
DF = PQ = 3.5 cm
भुजाओं के अंतर्गत कोण ∠F = ∠Q = 40°
∴ ∆DEF की दो भुजाएँ और उनके अन्तर्गत कोण ∆PQR की दो संगत भुजाओं और उनके अन्तर्गत कोण के बराबर हैं।

अतः दोनों त्रिभुज सर्वांगसमता के S.A.S. प्रतिबन्ध के आधार पर सवांगसम हैं।
साथ ही, F ↔ Q.D ↔ P और E ↔ R
∴ ∆DEF ≅ ∆PRQ

(iv) ∆PQR और ∆RSP में,
PQ = R = 3.5 cm
PR = PR (उभयनिष्ठ है)
अंतर्गत कोण ∠QPR = ∠PRS = 30°
अत: ∆PQR की दो भुजाएँ और उनके अन्तर्गत कोण ∆RSP की दो संगत भुजाओं और उनके अन्तर्गत बीच के कोण के बराबर हैं।
अतः दोनों त्रिभुज सर्वांगसमता के प्रतिबन्ध S.A.S. के आधार पर सर्वांगसम हैं
साथ ही, P ↔ R, Q ↔ S
∴ ∆PQR ≅ ∆RSP

प्रश्न 4.
संलग्न आकृति में \(\overline{A B}\) और \(\overline{C D}\) एक दूसरे को O पर समद्विभाजित करते हैं।
(i) दोनों त्रिभुज AOC और BOD में बराबर भागों के तीन युग्मों को बताइए।
(ii) निम्न कथनों में से कौन-सा कथन सत्य है?
(a) ∆AOC ≅ ∆DOB
(b) ∆AOC ≅ ∆BOD
MP Board Class 7th Maths Solutions Chapter 7 त्रिभुजों की सर्वांगसमता Ex 7.1 image 7

हल:
∵ \(\overline{A B}\) और \(\overline{C D}\) एक दूसरे को O पर समद्विभाजित करते हैं।
∴ AO = BO और CO = DO
साथ ही ऊर्ध्वाधर सम्मुख ∠AOC = ∠BOD
(i) ∆MOC तथा ∆BOD में, बराबर भागों के तीन युग्म –
AO = BO और CO = DO
∠AOC = ∠BOD

(ii) उपर्युक्त सम्बन्धों के आधार पर ∆AOC की दो भुजाएँ और उनके अन्तर्गत कोण ∆BOD की दो संगत भुजाओं और उनके अन्तर्गत कोण के बराबर हैं।
अत: सर्वांगसमता के गुण S.A.S. के आधार पर दोनों त्रिभुज सर्वांगसम हैं।
साथ ही,O ↔ O,A ↔ B, और C ↔ D
∴ ∆AOC ≅ ∆BOD
(a) कथन ∆AOC ≅ ∆DOB असत्य है।
(b) कथन ∆AOC ≅ ∆BOD सत्य है।

पाठ्य-पुस्तक पृष्ठ संख्या # 158

इन्हें कीजिए

प्रश्न 1.
∆MNP में कोणों M तथा N के अंतर्गत भुजा क्या है ?
उत्तर:
∆MNP में कोणों M तथा N के अंतर्गत भुजा MN है।

प्रश्न 2.
A.S.A. सर्वांगसमता प्रतिबन्ध का उपयोग करके आप ∆DEF ≅ ∆MNP स्थापित करना चाहते हैं। आपको दिया गया है कि ∠D = ∠M और ∠F = ∠P। इस सर्वांगसमता को स्थापित करने के लिए और कौन-कौन से तथ्य की आवश्यकता है ? (खाका आकृति बनाकर कोशिश कीजिए।)
हल:
∆DEF ≅ ∆MNP स्थापित करने के लिए A.S.A. सर्वांगसमता के प्रतिबन्ध के लिए हमें आवश्यकता होगी-भुजाएँ जिनसे ∠D और ∠F बनते हैं तथा समान भुजाएँ जिनसे ∠M और ∠P बनते हैं।
अर्थात् हमें आवश्यकता होगी \(\overline{D F}\) = \(\overline{M P}\)
MP Board Class 7th Maths Solutions Chapter 7 त्रिभुजों की सर्वांगसमता Ex 7.1 image 8

प्रश्न 3.
संलग्न आकृति में, त्रिभुज के कुछ भागों की माप अंकित की गई है। A.S.A. सर्वांगसमता प्रतिबन्ध का उपयोग करके बताइए कौन-से त्रिभुजों के युग्म सर्वांगसम हैं। सर्वांगसमता की स्थिति में, उत्तर को सांकेतिक रूप में लिखिए।
MP Board Class 7th Maths Solutions Chapter 7 त्रिभुजों की सर्वांगसमता Ex 7.1 image 9

हल:
(i) ∆ABC और ∆DEF में,
AB = EF = 3.5 cm,
∠A = ∠F = 40°
और ∠B = ∠E = 60°.
∴ A.S.A. सर्वांगसमता प्रतिबन्ध से ये दो त्रिभुज सर्वांगसम हैं। साथ ही, A ↔ F,B ↔ E और C ↔ D
∴ ∆ABC ≅ ∆FED

(ii) ∆POR और ∆DEF में,
∆POR में, ∠P = 180° – (90° + 50°) = 40°
इसी प्रकार ∆DEF में, ∠F = 180° – (90° + 50°) = 40°
अब, PR = 3.3 cm, EF = 3.5 cm ∴ PR ≠ EF
∠R = ∠E = 50° और ∠P = ∠F = 40° ∴ ∠P = ∠F
∴ A.S.A. सर्वांगसमता प्रतिबन्ध से त्रिभुज सर्वांगसम नहीं है।

(iii) ∆PQR और ∆LMN में,
RQ = LN = 6 cm, ∠R = ∠L = 60° और ∠Q = ∠N = 30° ∴ A.S.A. सर्वांगसमता प्रतिबन्ध से ये दो त्रिभुज सर्वांगसम हैं
साथ ही, R ↔ L, Q ↔ N और P ↔ M
∴ ∆PQR ≅ ∆MNL

(iv) ∆ABC और ∆ABD में,
AB = AB (उभयनिष्ठ हैं),
∠BAC = ∠DBA = 30°
∠BAD = 45° + 30° = 75°
∠ABC = ∠45° + 30° = 75°
∴ A.S.A. सर्वांगसमता प्रतिबन्ध से ये दो त्रिभुज सर्वांगसम हैं।
साथ ही, A ↔ B, D ↔ C
∴ ∆ABC ≅ ∆BAD.

प्रश्न 4.
दो त्रिभुजों के कुछ भागों की निम्न माप दी गई है। A.S.A. सर्वांगसमता प्रतिबन्ध का उपयोग करके जाँचिए कि क्या ये दो त्रिभुज सर्वांगसम हैं या नहीं। सर्वांगसमता की स्थिति में उत्तर को सांकेतिक रूप में भी लिखिए।
∆DEF ∆PQR
(i) ∠D = 60°, ∠F = 80°, ∠Q = 60°, ∠R = 80°,
DF = 5 cm QR = 5 cm
(ii) ∠D = 60°, ∠F = 80°, ∠Q = 60°, ∠R = 80°,
DF = 6 cm, P = 6 cm
(iii) ∠E = 80°, ∠F = 30°, ∠P = 80°, PQ = 5 cm
EF = 5 cm, ∠R = 30°
हल:
(i) ∆DEF और ∆PQR में,
∠D = ∠Q = 60°, ∠F = ∠R = 80°
अन्तर्गत भुजा DF = अन्तर्गत भुजा QR = 5 cm
A.S.A. सर्वांगसमता प्रतिबन्ध से ये दो त्रिभुज सर्वांगसम हैं।
साथ ही, D ↔ Q. F ↔ R. और E ↔ P
∴ ∆DEF = ∆QPR

(ii) यहाँ ∆DEF तक ∆PQR में समान कोणों के बीच की भुजाएँ DF व QR समान नहीं हैं।
∴ दिए गये त्रिभुज सर्वांगसम नहीं हैं।

(iii) यहाँ ∆DEF तक ∆PQR में समान कोणों के बीच की भुजाएँ EF व PR समान नहीं हैं।
∴ दिए गये त्रिभुज सर्वांगसम नहीं हैं।

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प्रश्न 5.
संलग्न आकृति में किरण AZ, ∠DAB तथा ∠DCB को समद्विभाजित करती है।
MP Board Class 7th Maths Solutions Chapter 7 त्रिभुजों की सर्वांगसमता Ex 7.1 image 10

(i) त्रिभुज BAC और DAC में बराबर भागों के तीन युग्म बताइए।
(ii) क्या ∆BACE ≅ ∆DAC है ? कारण दीजिए।
(iii) क्या AB = AD है ? अपने उत्तर का उचित कारण दीजिए।
(iv) क्या CD = CB है? कारण दीजिए।
हल:
(i) ∵ AC, ∠DAB और ∠DCB का समद्विभाजक है।
∠DAC = ∠BAC
और ∠DCA = ∠BCA
अब, ∆BAC और ∆DAC में, बराबर भागों के युग्म हैं –
AC = AC (उभयनिष्ठ)
∠DAC = ∠BAC (AC समद्विभाजक है)
∠DCA = ∠BCA (AC समद्विभाजक है)

(ii) उपर्युक्त सम्बन्धों से, ये दो त्रिभुज सर्वांगसम हैं (A.S.A. सर्वांगसमता)
साथ ही, A ↔ A, C ↔ C और D ↔ B
∴ ∆BAC ≅ ∆DAC

(iii) ∴ ∆BAC ≅ ∆DAC
∴ संगत भाग बराबर हैं।
अर्थात् AB = AD

(iv) ∴ C ↔ C और A ↔ A तथा AC = AC
अर्थात् ∆BAC ≅ ∆DAC
∴ संगत भाग बराबर हैं,
अर्थात् CD = CB

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पाठ्य-पुस्तक पृष्ठ संख्या # 160-161

इन्हें कीजिए

प्रश्न 1.
संलग्न आकृति में त्रिभुजों के कुछ भागों की माप दी गई है। R.H.S. सर्वांगसमता प्रतिबन्ध का उपयोग करके बताइए कि कौन-कौन से त्रिभुज युग्म सर्वांगसम हैं। सर्वांगसम त्रिभुजों की स्थिति में उन्हें सांकेतिक रूप में लिखिए।
MP Board Class 7th Maths Solutions Chapter 7 त्रिभुजों की सर्वांगसमता Ex 7.1 image 11
हल:
(i) समकोण ∆PQR तथा समकोण ∆DEF में,
कर्ण PR = कर्ण DF = 6 cm
भुजा PQ = 3 cm ≠ भुजा DE = 2.5 cm
∴ ∆POR और ∆DEF सर्वांगसम नहीं हैं।

(ii) समकोण ∆ABC और समकोण ∆ABD में, कर्ण AB = कर्ण BA = 3.5 cm (उभयनिष्ठ) भुजा AC = भुजा BD = 2 cm तथा ∠C = ∠D = 90°
∴ समकोण त्रिभुजों की R.H.S. सर्वांगसमता के गुण के अनुसार त्रिभुज सर्वांगसम हैं।
साथ ही, A ↔ B, B ↔ A, C ↔ D
∴ ∆ABD ≅ ∆BAC

(iii) समकोण ∆ABC और समकोण ∆ADC में,
कर्ण AC = कर्ण AC (उभयनिष्ठ)
भुजा AD = भुजा AB = 3.6 cm
तथा ∠B = ∠D = 90°
∴ समकोण त्रिभुजों की R.H.S. सर्वांगसमता के गुण के अनुसार त्रिभुज सर्वांगसम हैं।
साथ ही, A ↔ A,C ↔ C,B ↔ D
∆ABC ≅ ∆ADC

(iv) समकोण ∆PQS और समकोण ∆PRS में,
कर्ण PQ = कर्ण PR = 3 cm
भुजा PS = भुजा PS (उभयनिष्ठ)
तथा ∠PSQ तथा ∠PSR = 90°
∴ समकोण त्रिभुजों की R.H.S. सर्वांगसमता के गुण के अनुसार त्रिभुज सर्वांगसम हैं।
साथ ही P ↔ P, S ↔ S, Q ↔ R
∆PQS ≅ ∆PRS.

प्रश्न 2.
R.H.S. सर्वांगसमता प्रतिबन्ध से ∆ABC ≅ ∆RPO स्थापित करना है। यदि यह दिया गया हो कि ∠B = ∠P = 90° और AB = RP है, तो अन्य किस और सूचना की आवश्यकता है ?
हल:
R.H.S. सर्वांगसमता प्रतिबन्ध द्वारा ∠ABC ≅ ∠RPO स्थापित करने के लिए हमें कर्ण AC = कर्ण RQ को समान करने की आवश्यकता होगी।

प्रश्न 3.
संलग्न आकृति में, BD और CE, ∆ABC के शीर्षलम्ब हैं और BD = CE.
MP Board Class 7th Maths Solutions Chapter 7 त्रिभुजों की सर्वांगसमता Ex 7.1 image 12
(i) ∆CBD और ∆BCE में, बराबर भागों के तीन युग्म बताइए।
(ii) क्या ∠CBD ≅ ∠BCE है ? क्यों अथवा क्यों नहीं ?
(iii) क्या ∆DCB = ∆EBC है ? क्यों या क्यों नहीं?
हल:
(i) ∆CBD और ∆BCE में बराबर भागों के तीन युग्म –
कर्ण BC = कर्ण BC (उभयनिष्ठ)
भुजा BD = भुजा CE
∠BEC = ∠BDC = प्रत्येक 90°

(ii)∴∠D = ∠E, CB = BC तथा BD = CE
अत: RHS सर्वांगसमता से
हाँ, ∆CBD ≅ ∆BCE,

(iii)∴ ∆CBD ≅ ∆BCE
∴ उनके संगत भाग बराबर हैं।
अब, हाँ, ∠DCB = ∠EBC

प्रश्न 4.
∆ABC एक समद्विबाहु त्रिभुज है जिसमें AB = AC और AD इसका शीर्ष लम्ब है।
(i) ∆ADB और ∆ADC में, बराबर भागों के-तीन युग्म बताइए।
(ii) क्या ∆ADB ≅ ∆ADC है ? क्यों अथवा क्यों नहीं ?
(iii) क्या ∠B = ∠C है ? क्यों या क्यों नहीं ?
(iv) क्या BD = CD है? क्यों या क्यों नहीं?
MP Board Class 7th Maths Solutions Chapter 7 त्रिभुजों की सर्वांगसमता Ex 7.1 image 13

हल:
(i) ∆ADB और ∆ADC में, बराबर भागों के तीन युग्म हैं –
AD = AD (उभयनिष्ठ)
कर्ण AB = कर्ण AC
∠ADB = ∠ADC (प्रत्येक 90°)

(ii) ∴ AB = AC, AD = AD, D ↔ D
अब, हाँ, ∆ADB ≅ ∆ADC

(iii) हाँ, ∠B = ∠C
∴ ∆ADB ≅ ∆ADC
∴ संगत भाग समान हैं, ∴ ∠B = ∠C

(iv) साथ ही, हाँ, \(\overline{B D}\) = \(\overline{C D}\)
∆ADB ≅ ∆ADC, ∴ संगत भाग समान हैं
∴ \(\overline{B D}\) = \(\overline{C D}\)

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