MP Board Class 12th Special Hindi Sahayak Vachan Solutions Chapter 9 तन हुए शहर के/तुम थक न बैठो

MP Board Class 12th Special Hindi सहायक वाचन Solutions Chapter 9 तन हुए शहर के/तुम थक न बैठो (नवगीत, सोम ठाकुर/जय कुमार जलज)

तन हुए शहर के/तुम थक न बैठो अभ्यास प्रश्न

प्रश्न 1.
“तन हुए शहर के, पर मन जंगल के हुए” इस पंक्ति में निहित कवि के आशय को समझाइए।
उत्तर:
तथाकथित आधुनिकता और पश्चिम का अंधानुकरण करने वाले इस वर्तमान समाज को चेताते हुए कवि सोम ठाकुर कहते हैं कि यह ठीक है कि आज के इंसान ने तमाम भौतिक सुख-सुविधाएँ एकत्रित कर ली हैं, किन्तु उस दौड़ में जो वह खो चुका है शायद उससे अनभिज्ञ है। अपनी बाह्य रूप-सज्जा को सँवारने-निखारने की जुगत में हम अपने अन्तस में कभी झाँक ही न सके। परिणाम यह हुआ कि हमारा बाहरी आवरण तो जगमगा गया, किन्तु अन्दर उपजे जंगल रूपी अन्धकार में हम घिरते चले गये।

प्रश्न 2.
कवि ने ‘आयातित अंधकार’ किसे कहा है? (2009)
उत्तर:
जैसा कि हम सभी जानते हैं कि ऊर्जा और प्रकाश का सनातन स्रोत,सूर्य,पूर्व में निकलता है और शाम होते-होते पश्चिम दिशा में जाकर अस्त हो जाता है। एक समय था जब हम भारतवासी (पूर्व वाले) विश्वगुरु कहलाते थे और अपने ज्ञान, कौशल और विद्या के दम पर समूचे विश्व में हमारा डंका बजता था, किन्तु बदलते परिवेश और पश्चिमी सभ्यता के अन्धानुकरण ने हमसे हमारा मानो विवेक छीन लिया हो। बिना भले-बुरे, लाभ-हानि का भेद किये हम पश्चिम रूपी आयातित विलासिता के गहन अंधकार में घिरते जा रहे हैं। स्पष्ट है कि ‘आयातित अंधकार’ से कवि का आशय तथाकथित आधुनिकता एवं विलासिता की वस्तुओं को प्राप्त करने के निहितार्थ,पश्चिमी सभ्यता के अन्धानुकरण करने से है।

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प्रश्न 3.
आज के विषाक्त शहर की विसंगतियाँ लिखिए।
उत्तर:
आज के इस भौतिकवादी और विलासिता भोगी युग में मनुष्य ने सफलता के नित नए सोपान चढ़े हैं। वह अपने पूर्वजों की तुलना में कहीं बेहतर सुख-सुविधाओं और आराम के साथ अपना जीवन व्यतीत कर रहा है। किन्तु इन सबको प्राप्त करने की जुगत में वह आदमीयत के मोर्चे पर लगातार पिछड़ता चला गया। उसने लोहे सीमेण्ट और कंक्रीट की गगनचुम्बी इमारतें तो खड़ी कर लीं किन्तु इस आपाधापी में हृदय की संवेदनाओं और मर्म को खोता गया। यह आज के विषाक्त शहर की विसंगति ही तो है कि आज शहरों-कॉलोनियों में लोगों को उनके नाम अथवा काम के आधार पर नहीं बल्कि उनके कोठियों, फ्लेटों के नम्बरों के आधार पर जाना अथवा पहचाना जाता है। तथाकथित विकास की इस अंधी दौड़ में आज प्रत्येक शहरवासी मुँह उठाए पश्चिमी सभ्यता का जिस प्रकार अन्धानुकरण कर रहा है, सच्चाई यह है कि वह अपनी जड़ों,अपनी परम्पराओं और अपने गौरवशाली अतीत से दूर होता जा रहा है।।

प्रश्न 4.
कवि ने अपनी श्रेष्ठ लोक-परम्पराओं को किन-किन रूपों में स्मरण किया है?
उत्तर:
प्रस्तुत कविता में कवि ने अपने गौरवशाली अतीत की उन श्रेष्ठ लोक-परम्पराओं का स्मरण करते हुए उल्लेख किया है, जिन्हें आज का मनुष्य पश्चिमी हवा के झोंकों में उड़कर भूलता जा रहा है। कवि के अनुसार ‘हाय हैल्लो’ के इस दौर में हमारे सुनहरे अतीत के वे अभिवादन और आदर के सम्बोधन भी लुप्त प्रायः हो चले हैं। साथ ही हमारी लोक-परम्पराओं में प्रचलित नाना प्रकार के शुभ-संकेत और दीवारों पर उकेरे जाने वाली आकृतियाँ भी अब अतीत का ही एक हिस्सा-सा बन गयी लगती हैं। किसी शुभ कार्य के लिए निकलते समय अथवा किसी दुष्कर कार्य को सफलतापूर्वक सम्पन्न करने पर घर को बड़ी बुआ द्वारा घर के प्रवेश द्वार पर किये जाने वाले आरते अब बस कहानी बनकर रह गये हैं।

इस प्रकार घर के द्वार पर चूने और गेरू से उकेरे जाने वाले सातिये एवं अन्य मंगलकारी संकेत एवं आकृतियाँ भी तथाकथित विकास की अंधी दौड़ में मीलों पीछे छूट गये लगते हैं। किसी शुभ कार्य अथवा गृह-प्रवेश के समय बहिनों द्वारा द्वार के दोनों ओर हल्दी और गेरू से लगाये जाने वाले हाथों के थापे भी अब नदारद हो गये हैं। घर के मुख्य द्वार पर सजने वाली अशोक के चिकने पत्तों से बनी बन्दनवार का स्थान अब प्लास्टिक और फाइबर की महँगी लताओं ने ले लिया। कवि के अनुसार आज का मनुष्य समय अभाव का रोना रोकर अपने परम्परागत तीज-त्यौहारों तक से दूर होता चला जा रहा है।

प्रश्न 5.
वर्तमान और पुरातन जीवन-शैली में कौन-कौन-सी भिन्नताएँ हैं?
उत्तर:
हम भारतीयों की वर्तमान जीवन-शैली में कई विसंगतियाँ घर कर गई हैं। पुरातन जीवन-शैली से यदि हम तुलना करें तो पाते हैं कि प्राचीनकाल में व्यक्ति तनावरहित जीवन जीता था। यद्यपि उसके पास आज के जैसे सुख-सुविधाओं के भौतिक साधन उपलब्ध न थे और न ही तब इतनी प्रचुर मात्रा में धन ही था किन्तु फिर भी वह निरोगी और दीर्घायु था। इसके विपरीत वर्तमान में सुख-सुविधाओं के वैज्ञानिक उपादानों की भरपूर फौज उपलब्ध होने और विकास के नित-नये कीर्तिमान गढ़ने के बावजूद आज का मानव निराश, हताश और तनावग्रस्त है। वह अक्सर समय की कमी का रोना रोता है। उसकी उम्र भी कम हुई है। वह हर तरफ से स्वयं को उपेक्षित एवं आतंकित-सा महसूस करता है। अपने भविष्य को लेकर भी वह तमाम प्रयासों के बावजूद आशान्वित नहीं है। एक अजीब-सी असुरक्षा की भावना से ग्रस्त वह दूसरे को भी सशंकित दृष्टि से देखने को मजबूर है।

पहले जहाँ व्यक्ति प्रकृति के नजदीक रहकर व उसके साथ सामंजस्य बैठाकर अपना जीवन सादगी के साथ व्यतीत करता था वहीं आज के दौर के आदमी ने अपने तथाकथित विकास के लिए प्रकृति को ही अपना निशाना बनाना प्रारम्भ कर दिया और प्रकृति के बनाये नियम-कानूनों से ही छेड़छाड़ करने लगा। परिणाम यह हुआ है कि उसे तरह-तरह की प्राकृतिक आपदाओं से लगातार दो-चार होना पड़ रहा है।

प्रश्न 6.
“ठण्डे सैलाब में बहीं बसन्त पीढ़ियाँ”-पंक्ति का भाव-विस्तार कीजिए। (2012)
उत्तर:
“ठण्डे सैलाब में बहीं बसन्त पीढ़ियाँ” इस पंक्ति के माध्यम से कवि यह कहना चाहता है कि आज की हमारी युवा पीढ़ी पश्चिमी सभ्यता की चकाचौंध से सम्मोहित हो बौरा-सी गई है। इस क्रम में वह अपने सुनहरे अतीत और गौरवशाली परम्पराओं तक को बिसरा चुकी है। वह पूरब की सुगन्धित बसन्ती हवाओं को त्याग कर पश्चिम की प्रदूषित पवन को अंगीकार करने हेतु लालायित दिखाई पड़ती है। कवि इस सबको भारतीय संस्कृति का बड़ा ह्रास मानता है और इस स्थिति से बहुत चिन्तित दिखाई देता है।

प्रश्न 7.
कवि सोम ठाकुर तथाकथित वर्तमान शहरी विकास से निराश क्यों हैं?
उत्तर:
कवि वर्तमान शहरी विकास का विरोधी नहीं है किन्तु यह तथाकथित विकास यदि अपनी गौरवशाली परम्पराओं की कीमत पर हो, यह बात कवि को सालती है और इस स्थिति पर वह गहरी निराशा प्रकट करता है। आज का समाज जिस प्रकार भौतिकवादी और उसकी संस्कृति जिस प्रकार उपभोक्तावादी होती जा रही है,कवि इस पर अपना अफसोस प्रकट करते हुए इसे पश्चिमी सभ्यता के अतिक्रमण की संज्ञा देता है। विकास की इस अन्धी दौड़ में जिस प्रकार आदमी अपनी आदमीयत भूलता जा रहा है वह चिन्तनीय विषय है। कवि इस बात से भी हताश है कि पहले व्यक्ति आदमी को प्यार करता था और वस्तुओं का उपयोग करता था किन्तु अब बदलते परिवेश में आदमी वस्तुओं से प्यार करने लगा है और आदमी का उपयोग करने लगा है।

कवि का स्पष्ट मत है कि इस तथाकथित वर्तमान शहरी विकास की दौड़ में मानवता,दया, करुणा, परोपकार, प्रेम इत्यादि जैसे उच्च मानवीय मूल्य विलुप्त हो गये हैं और आदमी की पहचान उसका काम न होकर धन, वैभव एवं चल-अचल सम्पत्ति बन गया है।

प्रश्न 8.
“तुम आँधी के पाँवों से चलकर तो देखो”-पंक्ति में निहित कवि का तात्पर्य समझाइए।
उत्तर:
“तुम आँधी के पाँवों से चलकर तो देखो” पंक्ति के माध्यम से कवि कर्तव्य पथ पर डटे उन लोगों को प्रेरित करने का प्रयास करता है जो किन्हीं कारणों से पथ से विचलित होना चाहते हैं। कवि ऐसे लोगों को सम्बोधित करते हुए कहता है कि तुम्हें ऐसी स्थिति में रुकने अथवा हटने का कोई अधिकार ही नहीं है जबकि मंजिल तुम्हारी प्रतीक्षा में पलक पाँवड़े बिछाए खड़ी है। तुम्हें तो दुगुने उत्साह के साथ अपने गन्तव्य की ओर कूच करना चाहिए। कवि उन्हें उनकी शक्तियों का स्मरण कराते हुए उन्हें और तीव्रता से बढ़ने की सलाह देता है। कवि के अनुसार संघर्ष के इन कुछ पलों के पार विजयश्री की भीनी-भीनी सुगन्ध तुम्हारी प्रतीक्षा कर रही है।

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प्रश्न 9.
कवि आसमान की तरह हृदय को फैलाने की बात क्यों कहता है?
उत्तर:
कवि प्रगति मार्ग पर डटे लोगों से आसमान की तरह हृदय को फैलाने की बात इसलिए कहता है ताकि वे मेरा-तेरा की संकीर्ण मानसिकता से ऊपर उठकर ‘हमारा’ के भाव को लेकर आगे बढ़ सकें। कवि चाहता है कि सभी को सम्मिलित प्रयास करके पूर्व निश्चित लक्ष्य को प्राप्त करना चाहिए। कवि व्यक्तिगत की बात त्यागकर व्यापकता अथवा विशालता के भाव को ग्रहण करने की बात कहता है। कवि लक्ष्य-प्रगति के मार्ग में आने वाली छोटी-मोटी बाधाओं और विघ्नों से बेपरवाह रहते हुए निरन्तर आगे बढ़ते रहने का आह्वान भी करता है।

प्रश्न 10.
कवि ने थककर बैठने की बात का निषेध क्यों किया है? (2017)
उत्तर:
कवि मंजिल के समीप पहुँचकर भी थकान के कारण थम गये पगों को आगे बढ़ने के लिए कहता है क्योंकि वह जानता है कि अब लक्ष्य की प्राप्ति दूर नहीं है। कवि के अनुसार यूं थकान के कारण अथवा छोटी-मोटी विघ्न-बाधाओं से घबराकर बैठ जाना अनुसरण करने वाले हजारों-लाखों दूसरे पथिकों के हौंसले और साहस को तोड़ देगा। वे राही जो अपने आगे चलने वाले पथिकों के पद-चिह्नों की सहायता से अपनी मंजिल को पाना चाहते हैं, बिना प्रयास करे ही हार मान लेंगे। इसीलिए कवि ने थककर बैठने की बात का निषेध किया है।

प्रश्न 11.
कवि के अनुसार बिना सोचे आगे बढ़ जाने से क्या परिवर्तन होगा?
उत्तर:
कवि के अनुसार कर्तव्य पथ पर ठहरे पथिकों को अपनी थकान भूलकर दुगुने उत्साह के साथ बिना सोचे-समझे आगे बढ़ना चाहिए। उनके ऐसा करने से जहाँ एक ओर मार्ग में आने वाली छोटी-बड़ी बाधाएँ स्वतः रास्ते से हट जायेंगी, वहीं दूसरी ओर इन पथिकों का अनुसरण करने वाले दूसरे राही भी उत्साह एवं आशा के साथ अपनी मंजिलें पाने के लिए अपनी यात्रा प्रारम्भ कर सकेंगे। साथ ही, आगे बढ़ते जाने से अपने लक्ष्य को शीघ्र पा लेने की ललक और उमंग उनके शरीरों में ऊर्जा का नवसंचार करेगी। कवि के अनुसार विपरीत एवं प्रतिकूल स्थिति में यदि धैर्य और साहस के साथ अपने कार्य को और अधिक परिश्रम से किया जाये तो उस कार्य में सफलता का मिलना निश्चित हो जाता है।

प्रश्न 12.
“तुम थक न बैठो” नवगीत का सारांश चार वाक्यों में लिखिए।
उत्तर:
इस नवगीत के सारांश के लिए विद्यार्थी पाठ के प्रारम्भ में दिये गये ‘तुम थक न बैठो’ कविता के सारांश का अवलोकन करें।

तन हुए शहर के/तुम थक न बैठो अति लघु उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 1.
‘तन हुए शहर के’ नामक कविता में कवि ने मूलत: क्या बात कही है?
उत्तर:
तन हुए शहर के’ नामक नवगीत में कवि ‘सोम ठाकुर’ ने वर्तमान समाज की विसंगतियों पर तीव्र प्रहार किये हैं।

प्रश्न 2.
‘तुम थक न बैठो’ के माध्यम से कवि ने किसको प्रेरित किया है?
उत्तर:
‘तुम थक न बैठो’ नामक नवगीत के माध्यम से कवि ने कर्तव्य पथ पर निराशा महसूस कर रहे उन पथिकों को प्रेरित किया है जो मन्जिल के बिल्कुल समीप हैं।

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तन हुए शहर के/तुम थक न बैठो पाठ का सारांश

तन हुए शहर के सारांश

सुविख्यात कवि व देश के शीर्षस्थ गीतकार ‘सोम ठाकुर’ द्वारा लिखित प्रस्तुत नवगीत, ‘तन हुए शहर के’ में कवि ने वर्तमान समाज की विसंगतियों पर तीव्र प्रहार किये हैं।

सोम ठाकुर तथाकथित आधुनिकता की अंधी दौड़ में भाग रहे समाज को शीशा दिखाते हुए कहते हैं कि आज का व्यक्ति चाहे कितनी ही भौतिक सुख-सुविधाएँ एकत्रित कर लें, किन्तु उसके मन को शान्ति प्राप्त नहीं हो सकती है। पश्चिम के फैशन का अनुसरण करते समय हम यह भूल गये कि हम पूर्व वालों का अतीत बेहद गौरवशाली रहा है। आज का व्यक्ति जिस प्रकार अपनी पुरानी परम्पराओं व रीति-रिवाजों से विमुख हो रहा है, उसे देखकर कवि का हृदय दुःख से भर जाता है।

तुम थक न बैठो सारांश

सुप्रसिद्ध गीतकार एवं ‘जय कुमार जलज’ की प्रबल लेखनी द्वारा लिखित प्रस्तुत नवगीत, ‘तुम थक न बैठो’ में कवि ने कर्त्तव्य पथ पर निराशा महसूस कर रहे उन पथिकों को प्रेरित किया है जो मन्जिल के बिल्कुल समीप हैं।

कवि उन पथिकों को,जो अपने गन्तव्य के ठीक समीप खड़े हैं,सम्बोधित करते हुए प्रेरित करता है कि उन्हें मन्जिल के इतने समीप आकर यूँ हार नहीं मान लेनी चाहिए। उन्हें दुगुने उत्साह व वेग से अपने लक्ष्य की ओर कदम उठाने चाहिए। कवि पुनः उनको कर्त्तव्य-बोध कराते हुए कहता है कि उनके इस प्रकार हार मान लेने से उनका अनुसरण कर रहे लोग भी निराशा के गर्त में डूब जायेंगे।

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MP Board Class 12th Special Hindi Sahayak Vachan Solutions Chapter 8 छोटे-छोटे सुख

MP Board Class 12th Special Hindi सहायक वाचन Solutions Chapter 8 छोटे-छोटे सुख (ललित निबंध, रामदरश मिश्र)

छोटे-छोटे सुख अभ्यास प्रश्न

प्रश्न 1.
रामदरश मिश्र उन सारे कार्यों के प्रति उदासीन क्यों रहे, जो तरक्की के लिए जरूरी हैं?
उत्तर:
वास्तव में,लेखक महोदय का मन सदैव से ही बड़ा अल्पाकांक्षी है। आवश्यकता के लिए दौड़-भाग करने के अतिरिक्त, तरक्की के चक्कर में पड़कर स्वयं को लहूलुहान कर लेना लेखक के लिए वश की बात नहीं। लेखक को यदि तेज रफ्तार जिन्दगी की भागमभाग में जब कभी शामिल होना पड़ा तो हुए-अर्थात् पढ़ाई के लिए, नौकरी के लिए या किसी संकट के समय, किन्तु उन्नति के लिए योजनाएँ बना-बनाकर यहाँ-वहाँ भागते फिरने उन्हें कभी रास नहीं आया। इसलिए वह उन सारे कार्यों के प्रति उदासीन रहे, जो तरक्की के लिए जरूरी समझे जाते हैं।

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प्रश्न 2.
“घर घुसरे मन के बावजूद लेखक को सब कुछ मिल गया।” विवेचना कीजिए।
उत्तर:
लेखक के लिए उसकी सबसे बड़ी दुनिया थी उसका घर। बाहर जितनी देर तक रहना जरूरी होता उतनी देर ही लेखक बाहर रहते थे,फिर घर की ओर भाग खड़े होते थे। वास्तव में,लेखक का मन बड़ा ही अल्पाकांक्षी है,उसे थोड़े से ही सन्तुष्टि मिल जाती है। उसे भागमभाग करने की उत्तेजना प्राप्त नहीं होती। लेखक को भागमभाग में शामिल होना ही पड़ा,तो हुआअर्थात् पढ़ाई के लिए, नौकरी के लिए या किसी के संकट के समय। उन्नति के लिए योजनाएँ बनाकर यहाँ-वहाँ भागते फिरना तथा कुछ अनचाहा पाने की दौड़ में स्वयं को लहूलुहान कर लेना लेखक को कभी भी रास नहीं आया। लेखक को उनके मन की इस घर-घुसरी प्रकृति के बावजूद काफी कुछ मिला, भले ही देर से सही, भले ही मात्रा में कम मिला, किन्तु मिला। लेखक को तो कभी-कभी इस बात पर आश्चर्य होता है कि उसे इतना सब कुछ कब और कैसे मिल गया, जिसके लिए उसने कभी भी विशेष प्रयास नहीं किये थे।

प्रश्न 3.
“मैं छोटा आदमी हूँ और छोटा बना रहना चाहता हूँ।” मिश्रजी के इस कथन का आशय स्पष्ट कीजिए।
उत्तर:
मिश्रजी स्वयं को एक साधारण और छोटा आदमी समझते हैं और चाहते हैं कि वे छोटे ही बने रहें। उन्हें ऐसे बड़प्पन की कल्पना मात्र से डर लगता है, जब उनका समस्त व्यक्तिगत सुख,खाँसना-खखारना,उठना-बैठना मीडिया के माध्यम से लोगों में समाचार बनकर फैलता रहे। मिश्रजी नहीं चाहते कि वे बड़े आदमी बनें और अपने आत्मीय लोगों तक से उन्हें एक विशेष दूरी बना कर रखनी पड़े अथवा उनके अपने लोग उनसे दूरी बनाकर रखें। वह छोटा आदमी ही बने रहना चाहते हैं जिससे उनके निजी सुख-दुःख उनके निजी ही रहें। वह अपने मन के अनुसार कहीं भी आ-जा सकें, किसी से भी घुल-मिल सकें और कुछ भी, कहीं भी खा-पी सकें। मिश्र जी स्वयं को सामान्य लोगों के मध्य पाकर प्रसन्नता का अनुभव करते हैं।

प्रश्न 4.
मिश्रजी ने जिन छोटे-छोटे सुखों की चर्चा की है, उनकी एक सूची बनाइए।
उत्तर:
मिश्रजी के अनुसार छोटा ही सही, किन्तु सबसे बड़ा सुख यह होता है कि जीवन अपने मन से जिया जाये-चाहे वह साहित्यिक जीवन हो, सामाजिक जीवन हो अथवा पारिवारिक जीवन। मिश्र जी के लिए छोटी-छोटी उपलब्धियाँ भी बहुत बड़ी हैं। मिश्र जी अपार सुख का अनुभव करते हैं जब रेलवे स्टेशन पर टिकट आरक्षित करा लेते हैं या फिर किसी अस्पताल में स्वयं को या अपने घर के किसी परिजन को दिखा लेते हैं अथवा यात्रा में अच्छे लोग मिल जाते हैं अथवा यात्रा शुरू होने से पूर्व तथा समाप्त होने के पश्चात् कोई भला टैक्सी वाला या ऑटो वाला मिल जाता है। मिश्रजी को तब भी असीम आनन्द और सुख प्राप्त होता है जब सीढ़ियों पर चढ़ते समय कोई युवती उनकी पत्नी की सहायता करने को तत्पर दिखाई पड़ती है। वास्तव में, मिश्रजी संतोषी प्रवृत्ति के,छोटे से सुख में ही बड़ेपन का अनुभव करने वाले सीधे सरल व्यक्तित्व के स्वामी हैं।

प्रश्न 5.
बड़प्पन प्राप्ति की कल्पना से मिश्रजी को भय क्यों लगता है?
उत्तर:
मिश्रजी स्वयं को एक सामान्य व्यक्ति समझते हैं और सामान्य व्यक्तियों के बीच खो जाना चाहते हैं। उन्हें बड़प्पन प्राप्ति की कल्पना मात्र से बहुत डर का अनुभव होता है। उनके अनुसार बड़ा आदमी बनने का मतलब है समस्त व्यक्तिगत सुख, खाँसना-खखारना, उठना-बैठना इत्यादि का,मीडिया के माध्यम से लोगों में समाचार बनकर फैलना। बड़े व्यक्ति होकर वे किसी भी ऐसे कार्यक्रम में नहीं जा सकेंगे जहाँ उन्हें आमन्त्रित न किया गया हो, किसी सार्वजनिक स्थान पर लोग उन्हें घेर कर खड़े होंगे,किन्तु उन्हें उनसे एक निश्चित दूरी बनाकर ही बात करनी पड़ेगी, आम व्यक्ति की तरह वह हँस-बोल नहीं सकेंगे,मनचाही जगह आ-जा नहीं सकेंगे और न ही मनचाहा खा-पी सकेंगे। बड़ा बनते ही उन्हें बड़प्पन का एक ऐसा ‘चोला’ धारण करना पड़ेगा कि जिसमें उनकी निजता ही दम तोड़ देगी। मिश्रजी को ऐसे बड़प्पन की कल्पना मात्र से ही भय लगता है। वह तो चाहते हैं कि उनके व्यक्तिगत सुख-दुःख की बात उनके आस-पास ही चक्कर काटती रहे। उनकी त्रुटियाँ और उपलब्धियाँ उनके और उनके सगे-सम्बन्धियों के बीच ही होती रहें।

प्रश्न 6.
“रामदरश मिश्र आजीवन मनुष्यता के प्रति संवेदनशील बने रहे।” इस कथन की व्याख्या कीजिए।
उत्तर:
रामदरश मिश्र ‘सादा जीवन-उच्च विचार के मूल मन्त्र पर अपना जीवन काटने वाले एक संतोषी प्रवृत्ति के व्यक्ति हैं। वे बड़े बनने की खोखली मनोवृत्ति और तरक्की के इरादे से किए जाने वाले गोरखधन्धों से दूर रहने वाले एक साधारण प्राणी है। मिश्रजी जीवन में प्राप्त होने वाली छोटी-मोटी उपलब्धियों में से ही सुख के असीम क्षणों को खोज निकालने की कला के कुशल चितेरे हैं। जीवन-भर वे सगे-सम्बन्धियों, परिजनों एवं व्यक्तियों के प्रति संवेदनशील बने रहना चाहते हैं। उनका मन बड़ा ही अल्पाकांक्षी रहा है और वे मनुष्यता एवं मानव मूल्यों के प्रति सदैव ही संवेदनशील रहे। छोटे-बड़े कई ऐसे प्रकरण वे अपनी स्मृतियों में संजोए हुए हैं जो यह सिद्ध करते हैं कि मनुष्यता अभी मरी नहीं है, छोटे-छोटे भाव और क्रिया दीप्तियों के रूप में वह आज तक जीवित है और सम्भवतया मनुष्य के रहने तक जीवित रहेगी।

उपर्युक्त चर्चा के आधार पर यह कहा जा सकता है कि रामदरश मिश्र ने एक साधारण व्यक्ति होते हुए भी अपनी संतोषी प्रवृत्ति के कारण एक अच्छा व सुखमय जीवन व्यतीत किया है। साथ ही, वे आजीवन मनुष्यता के प्रति संवेदनशील बने रहे हैं।

प्रश्न 7.
मूर्ति उठाने वाली युवती से आपको क्या प्रेरणा मिलती है और क्यों?
उत्तर:
स्टेशन पर सीढ़ियाँ चढ़ते समय मिश्रजी की पत्नी से भारी मूर्ति लेकर उठाने वाली युवती के कृत्य से हमें यह प्रेरणा मिलती है कि हमें सदैव दूसरों की सहायता के लिए तत्पर रहना चाहिए। इस प्रकार जरूरतमन्दों की आवश्यकता के समय की गई सहायता से हमारा तो कुछ नहीं जाता अपितु सहायता प्राप्त करने वाले व्यक्ति से प्राप्त आशीर्वाद और शुभ वचन हमें जीवन में और अधिक अच्छा करने के लिए प्रेरित करते हैं। कठिनाई के समय मूर्ति उठाने में मदद करने वाली उस युवती के निःस्वार्थ सेवा-भाव की स्मृति मिश्रजी जीवन भर संजोए रहे । हमें भी उस युवती के समान ही गरीब, असहाय,महिला, वृद्ध, रोगी इत्यादि की समय पड़ने पर भरपूर सहायता करनी चाहिए।

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छोटे-छोटे सुख अति लघु उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 1.
लेखक रामदरश मिश्र ने अपने मन के बारे में क्या लिखा है?
उत्तर:
लेखक रामदरश मिश्र के अनुसार उनका मन बड़ा ही अल्पाकांक्षी है। उसे आलसी या कायर भी कह सकते हैं। जो कहना हो,कह लीजिए उसे भागमभाग करने की उत्तेजना प्राप्त नहीं होती।

प्रश्न 2.
लेखक रामदरश मिश्र को सम्मान के रूप में आगरा में क्या मिला? उस समय उनके साथ और कौन था?
उत्तर:
लेखक रामदरश मिश्र को सम्मान के तहत आगरा में माँ सरस्वतीजी की एक भारी मूर्ति मिली थी। उस समय उनके साथ उनकी धर्मपत्नी मौजूद थीं।

छोटे-छोटे सुख पाठ का सारांश

सुप्रसिद्ध निबन्धकार ‘रामदरश मिश्र द्वारा लिखित प्रस्तुत ललित निबन्ध छोटे-छोटे सुख’ में लेखक ने तरक्की और उन्नति के लिए आपाधापी करने के स्थान पर संतोषी मनुष्य के जीवन में दिन-प्रतिदिन आने वाले छोटे,किन्तु महत्त्वपूर्ण सुखों के महत्त्व को प्रतिपादित किया है।

लेखक सदैव से ही संतोषी प्रवृत्ति के व अल्पाकांक्षी रहे हैं। पढ़ाई, नौकरी और अब सेवानिवृत्ति तक की लम्बी यात्रा में उन्हें जो प्राप्त हुआ,वे उसके लिए ईश्वर को धन्यवाद ज्ञापित करते हैं। इस दौरान उन्हें जो प्राप्त नहीं हो सका, वे उन सबके बारे में सोचना भी नहीं चाहते, क्योंकि वे उन्नति और तरक्की पाने की जुगत में स्वयं को असहाय ही पाते हैं। लेखक स्वयं को एक नितान्त साधारण व्यक्ति मानते हैं, एक ऐसा व्यक्ति जो बहुत बड़ा विद्वान अथवा साहित्यकार तो नहीं है,अपितु जो भी वह जानते हैं सदैव दूसरों के साथ वह अनुभव अथवा ज्ञान बाँटने को तत्पर रहते हैं। लेखक बड़े सुख की प्राप्ति की कामना में स्वयं को लहूलुहान करने की बजाय दिन-प्रतिदिन,जाने-अनजाने प्राप्त होने वाले छोटे-छोटे सुखों से सन्तुष्ट होने की बात कहते हैं। लेखक इतना बड़ा व्यक्ति भी नहीं बनना चाहते कि उन्हें लोगों से एक दूरी बनाकर रहना पड़े अथवा लोग स्वयं ही उनसे दूरी बनाने लगें। लेखक के अनुसार छोटा ही सही, किन्तु सबसे बड़ा सुख यह होता है कि जीवन अपने मन से जिया जाय–चाहे वह साहित्यिक हो, सामाजिक हो अथवा पारिवारिक जीवन हो। लेखक का मन बहुत अल्पतोषी है वह तो छोटी-छोटी बातों में ही सुख का अनुभव कर लेता है। लेखक अपने जीवन से जुड़ी हर उस छोटी-बड़ी घटना को याद रखना चाहता है, जिससे उसे लेशमात्र भी सुख की प्राप्ति हुई हो।

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MP Board Class 12th Special Hindi Sahayak Vachan Solutions Chapter 7 भारतीय गायिकाओं में बेजोड़ लता मंगेशकर

MP Board Class 12th Special Hindi सहायक वाचन Solutions Chapter 7 भारतीय गायिकाओं में बेजोड़ लता मंगेशकर (लेख, कुमार गंधर्व)

भारतीय गायिकाओं में बेजोड़ लता मंगेशकर अभ्यास प्रश्न

प्रश्न 1.
लता के गायन की विशेषताएँ लिखिए। (2016)
अथवा
भारतीय गायिकाओं में बेजोड़ लता मंगेशकर के गायन की विशेषताएँ लिखिए तथा बताइए कि लताजी की लोकप्रियता का मुख्य मर्म क्या है? (2009)
उत्तर:
लेखक का स्पष्ट मत है कि लता के जोड़ की गायिका हुई ही नहीं है। लता के कारण चित्रपट संगीत को और मनोरंजन की दुनिया को विलक्षण लोकप्रियता प्राप्त हुई है, यही नहीं लोगों का शास्त्रीय संगीत की ओर देखने का दृष्टिकोण भी बदला है। लता के गाने की मुख्य विशेषताएँ उसका ‘गानपन’ है। लता के गाने की एक और विशेषता है, उसके स्वरों की निर्मलता। लता के स्वरों में कोमलता और मुग्धता है। ऐसा अनुभव होता है कि लता का जीवन की ओर देखने का जो दृष्टिकोण है वही उसके गायन की निर्मलता में झलक रहा है। लता के गाने की एक और महत्त्वपूर्ण विशेषता है उसका ‘नादमय उच्चार’। उसके गीत के किन्हीं दो शब्दों का अन्तर स्वरों के आलाप द्वारा बड़ी सुन्दर रीति से भरा रहता है और ऐसा प्रतीत होता है कि वे दोनों शब्द विलीन होते-होते एक-दूसरे में मिल जाते हैं। यद्यपि गाने में यह बात पैदा करना बहुत कठिन है, परन्तु लता के साथ यह अत्यन्त सहज और स्वाभाविक ही बैठी है। वास्तव में,चित्रपट संगीत के क्षेत्र की लता साम्राज्ञी हैं।

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प्रश्न 2.
“लता ने करुण रस के साथ उतना न्याय नहीं किया है। बजाए इसके, मुग्ध श्रृंगार की अभिव्यक्ति करने वाले गाने लता ने बड़ी उत्कटता से गाए हैं।” इस कथन से आप कहाँ तक सहमत हैं?
उत्तर:
लता द्वारा चित्रपट :
संगीत के क्षेत्र में गाये गये गीतों पर यदि दृष्टि डाली जाये तो एक पल को यह कथन उचित ही प्रतीत होता है कि “लता ने करुण रस के साथ उतना न्याय नहीं किया है। बजाए इसके, मुग्ध श्रृंगार की अभिव्यक्ति करने वाले गाने लता ने बड़ी उत्कटता से गाए हैं”,किन्तु हमें यह नहीं भूलना चाहिए कि चित्रपट-संगीत की दुनिया में यह अधिकार गायक अथवा गायिका के पास नहीं होता कि उसे किस प्रकार के गाने गाने को मिलें, अपितु संगीत दिग्दर्शक अपनी पसन्द से गायक-गायिकाओं को गाने गाने के लिए चुनकर देते हैं। अतः, इसे लता की व्यावसायिक मजबूरी अथवा सीमा से उत्पन्न स्थिति ही कहा जाये तो बेहतर होगा कि स्वर कोकिला को करुण रस को व्यक्त करने वाले गाने उतनी संख्या में नहीं मिल सके कि वह इस रस में भी अपने कौशल का प्रभावशाली प्रदर्शन कर पातीं, तथापि उन्हें जब-जब भी अवसर मिला उन्होंने करुण रस के साथ भी पूरा न्याय किया है।

उपर्युक्त चर्चा से स्पष्ट है कि गायकी के क्षेत्र में लता की विविधताएँ असीमित हैं और उनके कौशल का लोहा संगीत प्रेमी भली प्रकार मानते हैं। यह मात्र संयोग ही है कि जिन भी संगीत दिग्दर्शकों के साथ उन्होंने कार्य किया है,वे लता को करुण रस की अभिव्यक्ति वाले गाने पर्याप्त मात्रा में गाने को नहीं दे सके।

प्रश्न 3.
शास्त्रीय संगीत और चित्रपट संगीत में अन्तर बतलाइए। (2012)
उत्तर:
लेखक के अनुसार शास्त्रीय संगीत और चित्रपट संगीत के मध्य किसी भी प्रकार की तुलना करना बेमानी है। उसका कारण यह है कि शास्त्रीय संगीत और चित्रपट संगीत में तुलना हो ही नहीं सकती। जहाँ गंभीरता शास्त्रीय संगीत का स्थायी भाव है वहीं द्रुत लय और चपलता चित्रपट संगीत का मुख्य गुणधर्म है। चित्रपट संगीत का ताल प्राथमिक अवस्था का ताल होता है, जबकि शास्त्रीय संगीत में ताल अपने परिष्कृत रूप में पाया जाता है। चित्रपट संगीत में आधे तालों का उपयोग किया जाता है। उसकी लयकारी बिल्कुल भिन्न होती है, आसान होती है। यहाँ गीत और आघात को अधिक महत्त्व दिया जाता है तथा सुलभता और लोच को अग्र स्थान पर रखा जाता है। चित्रपट संगीत द्वारा लोगों की अभिजात्य संगीत से जान-पहचान होती है। वास्तव में,चित्रपट संगीत का तंत्र ही अलग है। यहाँ नवनिर्मित की बहुत गुंजाइश है।

प्रश्न 4.
“चित्रपट संगीत ने लोगों के कान बिगाड़ दिए हैं।” आप इस कथन से कहाँ तक सहमत हैं?
उत्तर:
यदि यह बात कही जाये तो कोई अतिशयोक्ति न होगी कि 70-80वें दशक तक का चित्रपट संगीत, शास्त्रीय संगीत की दृष्टि से भी उच्च कोटि का था, किन्तु उसके बाद के चित्रपट संगीत में हास का दौर प्रारम्भ हुआ जो आज तक जारी है। बीच-बीच में कुछेक फिल्मों के संगीत में अवश्य ही पुराने दौर के गीत-संगीत की झलक दिखाई पड़ी,किन्तु कमोबेश स्थिति बद-से-बदतर होती चली गयी। नये दौर के चित्रपट संगीत में न तो पहले जैसी कर्णप्रिय धुनें थीं और न ही संगीत दिग्दर्शकों की व्यक्तिगत सोच ही परिलक्षित होती थी। नित्य नये विकसित वाद्ययंत्रों उच्चकोटि की लाजवाब प्रौद्योगिकी के बाद भी आज के दौर का चित्रपट संगीत अपनी गहरी और लम्बी छाप नहीं छोड़ सका है।

वर्तमान में,चित्रपट संगीत का आलम यह है कि कोई गाना आज बनता, कल सुना जाता है और परसों तक लोग उसे भूल जाते हैं। इस दौर का संगीत कानफाडू वाद्य यन्त्रों की सहायता से श्रोता के शरीर को तो हो सकता उत्तेजित कर सका हो,किन्तु किसी भी अर्थों में वह सुनने वालों के मन-मस्तिष्क में नहीं उतर सका है। इस स्थिति का एक बड़ा दुष्परिणाम यह भी हुआ है कि आजकल का श्रोता इस कानफाड़ चित्रपट संगीत को सुन-सुनकर अच्छे संगीत की समझ खो चुका है।

उपर्युक्त चर्चा से स्पष्ट है कि चित्रपट संगीत ने लोगों के कान बिगाड़ दिए हैं और उन्हें शास्त्रीय संगीत नीरस और उबाऊ प्रतीत होने लगा है।

प्रश्न 5.
संगीत के क्षेत्र को विस्तीर्ण क्यों कहा गया है?
उत्तर:
लेखक ने संगीत के क्षेत्र को विस्तीर्ण कहा है, क्योंकि उसके अनुसार संगीत के क्षेत्र में अब तक अलक्षित, असंशोधित और अदृष्टिपूर्ण ऐसा बहुत बड़ा प्रान्त है जिसकी खोज अथवा जिस पर कार्य होना अभी बाकी है। वास्तव में,संगीत एक ऐसी विधा है, जिसमें असीम सम्भावनाएँ हैं, करने के लिए काफी कुछ है। प्रयोगधर्मियों के लिए संगीत जैसा विस्तीर्ण क्षेत्र कोई दूसरा नहीं है। संगीत के क्षेत्र में होने वाले नित नए प्रयोग और कार्य इसे और भी सम्भावनाओं वाला क्षेत्र बनाते हैं।

प्रश्न 6.
स्वर साम्राज्ञी लता मंगेशकर’ पर एक लघु निबन्ध लिखिए।
उत्तर:
वैसे तो भारतीय भूमि पर एक से बढ़कर एक कलाकारों,साहित्यकारों, वैज्ञानिकों और राजनेताओं ने जन्म लिया है, परन्तु इनमें से कुछेक ऐसे भी होते हैं, जो अपने कौशल के कारण जीवित किवदन्ती बन जाते हैं। ऐसी ही एक जीवित किवदन्ती हैं-स्वर साम्राज्ञी, स्वर कोकिला-लता मंगेशकर।

सुप्रसिद्ध गायक दीनानाथ मंगेशकर की सुपुत्री लताजी को यदि भारतीय चित्रपट संगीत का पर्याय कहा जाये तो कोई अतिशयोक्ति न होगी। उन्होंने अपने कोकिल कण्ठ के मीठे व कोमल स्वरों से आम जनमानस को आनन्दित करने का जो भागीरथ कार्य किया है उसकी जितनी भी प्रशंसा की जाये कम ही होगी।

यूँ तो लताजी के चित्रपट संगीत की दुनिया में कदम रखने से पूर्व और पश्चात् सैकड़ों गायिकाओं ने अपनी-अपनी आवाजों का जादू बिखेरा, किन्तु लताजी के गाये गीतों का नशा हर भारतीय के सिर चढ़कर बोला। सच कहा जाये तो भारतीय गायिकाओं में लता जी के जोड़ की दूसरी कोई गायिका हुई ही नहीं। लताजी के कारण चित्रपट संगीत और मनोरंजन की दुनिया को विलक्षण लोकप्रियता प्राप्त हुई है, यही नहीं लोगों का शास्त्रीय संगीत की ओर देखने का दृष्टिकोण भी पूरी तरह बदला है। उनकी अभिप्रेरणा से देश के कोने-कोने यहाँ तक कि विदेशों में भी बच्चे-बड़े स्वर में गाने गुनगुनाते रहे हैं। सुरों से सजे गाने सुनकर लताजी के श्रोता उनका अनुकरण करने का प्रयास करते रहे हैं।

लता मंगेशकर की लोकप्रियता का मुख्य मर्म उनके गायन में मौजूद ‘गानपन’ है। लताजी के स्वरों में कोमलता और मुग्धता है। उनके गले की हरकतें’ सामान्य से गाने को भी असाधारण रूप में परिवर्तित करने में सक्षम हैं। शास्त्रीय संगीत का गहरा ज्ञान लताजी को अपना सर्वश्रेष्ठ देने के योग्य बनाता है। उनके गाने की एक और विशेषता है, उनके स्वरों की निर्मलता। उनके गायन में एक अजब-सी मिठास है, जो श्रोता को बाँधे रखती है। लताजी की एक बड़ी विशेषता और है और वह है उनका ‘नादमय उच्चार’।

चित्रपट संगीत के क्षेत्र की लताजी निर्विवाद साम्राज्ञी हैं। उनकी लोकप्रियता के शिखर का स्थान अचल है। नयी पीढ़ी के संगीत को संस्कारित करने और सामान्य मनुष्य में संगीत विषयक अभिरुचि पैदा करने में उनका उल्लेखनीय योगदान रहा है। संगीत की लोकप्रियता, उसके प्रसार और अभिरुचि के विकास का श्रेय लताजी को जाता है। हम सभी वास्तव में बहुत सौभाग्यशाली हैं कि हम इस कालजयी कलाकार को देख-सुन पा रहे हैं।

प्रश्न 7.
पाठ में विभिन्न प्रदेशों के विविध लोकगीतों की चर्चा की गई है। आप भी अपनी क्षेत्रीय बोली का कोई लोकगीत लिखिए तथा उसका मातृभाषा में अनुवाद कीजिए।
उत्तर:
विद्यार्थी स्वयं लिखें।

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भारतीय गायिकाओं में बेजोड़ लता मंगेशकर अति लघु उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 1.
लता मंगेशकर के पिताजी का नाम क्या था? वह क्या थे?
उत्तर:
लता मंगेशकर के पिताजी का नाम दीनानाथ मंगेशकर था। वह अपने जमाने के सुप्रसिद्ध गायक थे।

प्रश्न 2.
शास्त्रीय गायकी से आप क्या समझते हैं?
उत्तर:
शास्त्रीय गायकी गायन की एक ऐसी विधा है जिसमें गायन को कुछ निर्धारित नियमों के अन्दर ही गाया बजाया जाता है। ख्याल, ध्रुपद, धमार आदि शास्त्रीय गायकी के अन्तर्गत ही आते हैं।

भारतीय गायिकाओं में बेजोड़ लता मंगेशकर पाठ का सारांश

‘कुमार गंधर्व’ द्वारा लिखित प्रस्तुत लेख, भारतीय गायिकाओं में बेजोड़ लता मंगेशकर’ में स्वर साम्राज्ञी, लता मंगेशकर’ की प्रशंसा बहुत ही सुन्दर एवं विश्लेषणात्मक ढंग से की गई है।

लेखक के अनुसार भारत-भूमि पर अब तक सैकड़ों प्रतिभाशाली एवं सुरीले कण्ठ वाली गायिकाएँ पैदा हुई हैं, जिन्होंने अपने गायन से जन-जन को आनन्दित एवं प्रभावित किया है, किन्तु इन सब में से लता मंगेशकर का स्थान निर्विवादित रूप से सर्वोच्च है। लताजी का गायन व्यक्ति के तन से होता हुआ मन तक पहुँचता है और अन्तस को एक पारलौकिक अनुभूति प्रदान करता है। सुप्रसिद्ध गायक दीनानाथ मंगेशकर की सुपुत्री लता मंगेशकर की आवाज जितनी कोमल है, उतनी ही उसमें मिठास भी है। लताजी का गायन सुप्रसिद्ध चित्रपट-गायिका नूरजहाँ से भी कहीं बेहतर और मर्म को छू लेने वाला है।

लेखक के अनुसार लताजी के कारण चित्रपट संगीत और मनोरंजन की दुनिया को विलक्षण लोकप्रियता प्राप्त हुई है, साथ ही, लोगों का शास्त्रीय संगीत की ओर देखने का दृष्टिकोण भी एकदम बदला है। ये लताजी के कण्ठ का ही जादू है जो साधारण प्रकार के लोगों को भी संगीत के सुर-ताल और लय की सक्ष्मता समझ में आने लगी है। वास्तव में संगीत की लोकप्रियता, उसके प्रसार और अभिरुचि के विकास का श्रेय लताजी को ही देना पड़ेगा।

लताजी की लोकप्रियता का मुख्य मर्म उनका ‘गानपन’ है। उनके गाने की एक और विशेषता है, उसके स्वरों की निर्मलता। लताजी के स्वरों में कोमलता और मुग्धता है। साथ ही, लताजी के गाने में ‘नादमय उच्चार’ का भी अपना महत्त्व है।

लेखक के अनुसार शास्त्रीय संगीत और चित्रपट संगीत की तुलना बेमानी है। जहाँ गंभीरता शास्त्रीय संगीत का स्थायी भाव है वहीं द्रुतलय और चपलता चित्रपट संगीत का मुख्य गुणधर्म है। यह ठीक है कि चित्रपट संगीत से जुड़े व्यक्ति के लिए शास्त्रीय संगीत का ज्ञान होना परमावश्यक है और वह ज्ञान लताजी के पास नि:संशय भरपूर है। लताजी चित्रपट संगीत के क्षेत्र की सर्वमान्य साम्राज्ञी हैं। उनकी लोकप्रियता दुनिया के कोने-कोने में है। लताजी जैसा कलाकार शताब्दियों में एकाध ही पैदा होता है। यह हमारा सौभाग्य है कि हम शताब्दियों के इस कलाकार को यूँ जीता-जागता, घूमता-फिरता देख पा रहे हैं।

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MP Board Class 12th Economics Important Questions Unit 2 Consumer Behaviour and Demand

MP Board Class 12th Economics Important Questions Unit 2 Consumer Behavior and Demand

Micro Economics Consumer Behaviour and Demand Important Questions

Micro Economics Consumer Behavior and Demand Objective Type Questions

Question 1.
Choose the correct answers:

Question 1.
Consumer is in equilibrium when:
(a) MUx = PUx
(b) MUx> PUx
(c) MUx < Px
(d) MUx ÷ Px
Answer:
(a) MUx = PUx

Question 2.
Marshall has given the law of Equimarginal utility related:
(a) Related to goods
(b) Related to money
(c) In relation to both
(d) None of these.
Answer:
(a) Related to goods

Question 3.
How many tremendous curves can touch the budget line:
(a) One
(b) Two
(c) Several
(d) Depends on the basis of indifference maps.
Answer:
(a) One

Question 4.
Indifference curves were first introduced by the English economist in 1881 by:
(a) Edge worth
(b) Pareto
(c) Myers
(d) Hicks.
Answer:
(a) Edge worth

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Question 5.
Any statement about the demand of an object is considered complete when it is mentioned in the following:
(a) Price of good
(b) Demand of good
(c) Time period
(d) All of the above.
Answer:
(d) All of the above.

Question 6.
If price of goods ‘X’ falls leading to increase in demand of goods ‘ Y’ then both the goods are:
(a) Substitute goods
(b) Complementary goods
(c) Not related
(d) Competitor.
Answer:
(b) Complementary goods

Question 7
According to total outlay method, the demand of a good is sinelastic when:
(a) Price will fall with the increase in amount spent
(b) When price of good decreases and money spent decreases
(c) Expenditure remains the same, even if price falls
(d) Expenditure decreases with the increase in price.
Answer:
(b) When price of good decreases and money spent decreases

Question 2.
Fill in the blanks:

  1. Consumer is a …………. human being.
  2. If the price of substitute goods increases then the demand curve shifts to the ………….
  3. …………. propounded the law of Diminishing Returns.
  4. According to Marshall utility can be measured in terms of ………….
  5. An indifference curve gives …………. level of satisfaction to the consumers.
  6. Car and Petrol are goods ………….
  7. There is …………. relation between price and demand.

Answer:

  1. Rational
  2. Right
  3. Gossen
  4. Money
  5. Equal
  6. Substitute
  7. inverse.

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Question 3.
State true or false:

  1. Utility is an intensive assumption.
  2. The proportion of the cost of two goods measures the slope of budget line.
  3. Demand curve is generally negative sloped.
  4. Budget set is a collection of all bundles that a consumer purchases from their income at market prices.
  5. The elasticity of the demand of the object and the expenditure on the object is closely related.

Answer:

  1. True
  2. True
  3. False
  4. True
  5. True.

Question 4.
Match the following:
MP Board Class 12th Economics Important Questions Unit 2 Consumer Behaviour and Demand img-1
Answer:

  1. (b)
  2. (d)
  3. (a)
  4. (e)
  5. (c).

Question 5.
Answer the following in one word / sentence:

  1. Which curve is convex to the origin?
  2. After which stage marginal utility and Total utility starts decreasing?
  3. The point where a consumer derives maximum satisfaction is known as?
  4. The elasticity of demand of luxurious goods is.
  5. What is the demand for means of productions?

Answer:

  1. Indifference curve
  2. At zero point
  3. Consumer’s equilibrium
  4. Highly elastic
  5. Derived demand.

Consumer Behavior and Demand Very Short Answer Type Questions

Question 1.
What is the law of demand?
Answer:
The law of demand states that other things remaining the same, quantity demanded increases with the fall in price and quantity demanded decreases with rise in price.

Question 2.
What are complementary goods?
Answer:
Those goods which are jointly required to satisfy a particular want are known as complementary goods, e.g., bread and butter, car and petrol, pen and ink. These are also known as joint demand.

Question 3.
What is elasticity of demand?
Answer:
When we measure the proportionate change in the quantity demanded of a commodity due to change in its price, is known as elasticity of demand.

Question 4.
What do you mean by Relatively elastic demand?
Answer:
Demand is said to be relatively elastic when percentage change in demand is greater than percentage change in price.

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Question 5.
What is perfectly inelastic demand?
Answer:
The change of price does not affect the demand of certain commodities. The demand for these commodities remain almost constant. The demand of these commodities are known as perfectly inelastic demand (Ep = 0).

Question 6.
Write the differences between the demand and want
Answer:
Differences between the Demand and Want:
Demand:

  1. Demand is created by want.
  2. Demand goes on changing.

Want:

  1. Desire gives rise to want.
  2. Wants are more or less permanent.

Question 7.
What is cross elasticity of demand?
Answer:
Cross elasticity of Demand :
Cross elasticity of demand refers to a change in demand for a goods as a result of change in the price of another goods. Following formula for the cross elasticity of demand :
MP Board Class 12th Economics Important Questions Unit 2 Consumer Behaviour and Demand img-2
Cross elasticity of demand arises in case of interrelated goods such as substitutes and complementary goods.

Question 8.
What are substitute goods?
Answer:
Commodities which can be used in place of other goods are known as substitute goods. Fall in price of one commodity leads to rise in demand for other commodity.
Example : Tea and coffee, complain and bournvita.

Question 9.
What do you mean by consumer’s equilibrium?
Answer:
It refers to a situation under which a consumer spends his given income on purchase of a commodity in such a way which gives him maximum satisfaction and there is no tendency to change.

Question 10.
What is the effect of increase or decrease in the level of income on elasticity of demand?
Answer:
With the increase in income demand increases and with the decrease in income demand falls.

Question 11.
What do you mean by the budget set of a consumer?
Answer:
The budget set is the collection of all bundles of goods that a consumer can buy with his income at a prevailing market price.

Question 12.
What is budget line?
Answer:
The budget line represents all bundles which cost the consumers his entire income. The budget line is negatively sloping. If the consumer wants to consume an extra unit of goods 1, he will have to give up some amount of goods 2.

Question 13.
What do you mean by indifference curve?
Answer:
An indifference curve is the curve which represents all the combinations of two goods which gives the same level of satisfaction to a consumer.

Question 14.
What do you mean by market demand curve?
Answer:
Market demand curve represents the total of quantities of a commodity demanded by all the consumers in the market at different prices.

Question 15.
What do you mean by zero elasticity of demand or perfectly inelastic demand?
Answer:
A perfectly inelastic demand is one in which a change in a price causes no change in the quantity demanded.

Question 16.
What do you mean by market demand?
Answer:
Market demand means the total quantity of a good that all its buyers are willing to purchase at different prices over a given period of time.

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Question 17.
What do you mean by Giffen goods?
or
What do you mean by inferior goods?
Answer:
Giffen goods may be defined as those goods whose price effect is positive and income effect is negative. In it the demand falls with the fall in price and rises with an increase in price.

Question 18.
What do you mean by price effect?
Answer:
When the price of a commodity falls the real income of the consumer goes up and thus demand of the commodity increases. This effect is called the price effect.

Question 19.
Write the assumptions of the demand curve.
Answer:
Following are the assumptions of demand curve:

  1. There should not be any change in income and interest of consumer.
  2. It is assumed that there is small and continuous change in price and demand relationship.
  3. Goods can be divided into small units.
  4. Perfect completion is found in the market.

Question 20.
What do you mean by normal goods?
Answer:
Normal goods:
Normal goods are those goods for which the demand increases with the increases in income of the consumer and decreases with fall in income.
For example :
Demand for such goods like car, refrigerators, televisions, etc. increases with the increase in income and their demand decreases with the decrease in income.

Question 21.
Explain the meaning of complementary goods. Explain with example.
Answer:
Complementary goods are those goods which are complementary to one another. In other words, they are used jointly or consumed together. For example: Ink and Pen, Car and Petrol. An increase or decrease in price of petrol will affect the use of car. If the price for petrol decreases, the demand for car will increase along with demand for car. On the other hand, if the prices of petrol increase the demand for petrol will decreases along with the demand for car.

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Question 22.
Consider the demand curve Dp = 10 – 3x. What is the elasticity at price
\(\frac{5}{3}\)?
Solution:
Given ; q = a – bp
q = 10 – 3p
a = 10, b = 3, p =\(\frac{5}{3}\)
eD=-\(\frac{bp}{a-bp}\)
=(3 x \(\frac{5}{3}\)) ÷ (10 – 3 x \(\frac{5}{3}\))
= – (5) ÷ (10 – 5) = – 5 – 5 – 5 = -1
Price elasticity is (Ed) = -1
Price elasticity = -1.

Question 23.
Write the difference between Law of Demand and Elasticity of Demand.
Answer:
Differences between Law of Demand and Elasticity of Demand:
Law of Demand:

  1. The Law of demand is only a qualitative statement.
  2. It indicates direction of change in demand in response to the change in its price.
  3. It does not specify the quantity of change in demand in response to the change in price.

Elasticity of Demand:

  1. It is a quantitative statement.
  2. It indicates quantitative change in the demand for a commodity in response to a change in its price.
  3. Elasticity of demand is a measure of rate of change in demand in response price. to a change in the price of a commodity.

Question 24.
What do you mean by income demand?
Answer:
The income demand refers to various quantities of goods and services which would be purchased by the consumer at various levels of income. We assume that the price of the commodity or service as well as the price related goods the taste and desire of the consumer do not change. The income demand shows relationship between the income and quantities demanded. If the income increases the demand for a particular good will be increased and vice versa.

Question 25.
What do you mean by income elasticity of demand? Give one definition.
Answer:
The income and demand of goods has direct relation. The income elasticity of demand means the change .in demand which occurs as a result of change in income. Here, price remains constant.

Definition of Watson:
“Income elasticity of demand in the ratio between percentage of change in income and % of change in quantity demanded.”

Question 26.
Define price elasticity of demand.
Answer:
It is a measure of degree of responsiveness of demand for a commodity to change in its price or it is the ratio of percentage change in quantity demanded in response to a percentage change in price.

Consumer Behavior and Demand Short Answer Type Questions

Question 1.
What do you mean by utility? Give definition of it.
Answer:

  1. The power or capacity which satisfies human wants is called utility.
  2. According to Prof. Waugh, “Utility is the capacity to satisfy human wants”.

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Question 2.
Explain the characteristics of utility. Give definition of it.
Answer:
1. Utility is a psychological word :
Utility is a formless thing which is concerned with human sentiments. It can only be experienced because it has no form. Therefore, utility is supposed to be a psychological word and that the utility of one commodity may be different for different persons. It is an abstract noun. .

2. Utility is an individual characteristic:
The second characteristic of utility is that it is personal. The same utility is found to be different for different individuals. The utility of a commodity for one individual depends on his desire, taste, fashion, habit, environment and such other circumstances.

3. Utility depends on intensity of want:
The utility of a commodity depends on the intensity of its want. A person will obtain utility of a commodity depending upon the intensity of the utility of the commodity to the individual. This is the reason why a man gets maximum utility from food when he is very hungry. But the utility becomes zero when his hunger is satisfied.

Question 3.
Explain the types of utility.
Answer:
There are three types of utility:

  1. Total utility
  2. Marginal utility
  3. Average utility.

1. Total utility:
When a consumer uses more than one unit of a commodity, the sum total of the utility derived from all the units is called total utility. In other words, the utility derived from all the units of a commodity is called total utility.

2. Marginal utility:
The utility obtained from the last unit of a commodity is called marginal utility.“The marginal utility is the utility derived from the last unit of commodity consumed”.

3. Average utility:
When total utility of an article is divided with the total units of an article. The sum received is called average utility.

Question 4.
What are the factors which affect the marginal utility?
Answer:
Following are the factors which affect the marginal utility:

  1. Quantity of goods:
    When the supply of a commodity is in surplus its marginal
    utility declines on the other hand if there is scarcity of goods, the marginal utility will increase. .
  2. Substitute goods:
    If there are more substitutes available of a commodity, the marginal utility of that commodity declines and vice-versa.
  3. Income of a person:
    With the in the income of a person, the marginal utility of a commodity increases, while on the other hand it may decrease.

Question 5.
Write the assumptions of consumer’s equilibrium.
Answer:
Following are the assumptions of the consumer’s equilibrium:

  1. Maximum satisfaction :
    The first assumption on of the consumer equilibrium is that consumer is a rational human being and by purchasing two goods, he can achieve maxi-mum satisfaction.
  2. No change in taste and habit of the consumer during analysis:
    It is assumed that during the time of analysis of consumer equilibrium, there is no changes in taste, habit and liking of the consumer.
  3. Perfect competition:
    There is perfect competition in the market from where he purchases his goods.
  4. Consumer has an indifference map:
    Consumer has an indifference map showing his scale of preference for various combinations of the two goods (Apples and Mangoes). This scale of preference remains the same through out the analysis.
  5. No change in the price of the commodity:
    Prices of the goods in the market are given and they are constant during consumer’s equilibrium. Each goods is homogeneous and divisible
  6. 6. Constant amount of money:
    Consumer is given a constant amount of money to spend on the goods and if he does not spend on one good he must spend it on other.

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Question 6.
Write three importance of law of diminishing marginal utility.
Answer:
Following three importance of the law of diminishing marginal utility is of great use to man in almost every walk of life:

1. Basis of production:
The law of diminishing marginal utility helps the producers to produce their articles and goods they know that,the consumer gets the diminishing utility by consuming successive units of a commodity. So, various types of articles are produced by him instead of same articles.

2. Basis of consumer’s surplus:
The law helps us to study consumer’s behavior. We know that by each successive unit gives less and less utility to the consumer, though the price of the commodity is the same. The consumer thus stops consuming the commodity at the points of satisfaction.

3. Law of demand:
The law of diminishing marginal utility is the basis of the ‘Law of demand. It is this law which explains to us why the demand curve slopes downwards. The diminishing tendency is utility with increase in supply shows the points cut by the price and amount demanded in.

Question 7.
Write defects of law of diminishing marginal utility.
Answer:
The law of diminishing marginal utility is not free from the defects.

1. Utility cannot be measured cardinally:
According to Marshall, utility analysis is based on the hypothesis that utility is cardinally measured in utils or units and that utility can be added and subtracted.

2. Marginal utility of money is not constant:
The utility analysis assumes the marginal utility of money to be constant. Critics point out that marginal utility of money never remain constant. So it may affect consumer’s preferences.

3. The law depends on the supply of the substitutes and complements:
The law does not depend upon the supply of the commodity a consumer consumes but also on its substitutes and complements. If the green coconuts are available in plenty the utility of sarabat will decrease rapidly.

4. Rationality:
The theory assumes that the consumer is rational. However, various factors such as advertisement and ignorance can influence the consumer’s decision.

5. In-applicability in case of indivisible goods:
The application of this law to an indivisible bulky commodity seems to be absurd because no one would normally but at a time more than one unit of goods like TV set, Scooter, House etc.

Question 8.
Write the essential elements of demand.
Answer:
Following are the essential elements of demand:

  1. Desire for goods: For demand desire of any good is essential. If a person does not have desire for anything, then it cannot be turned into demand.
  2. Sufficient means or Wealth to purchase:
    A person should have sufficient wealth and means to get the goods, otherwise he/she cannot fulfill his wants.
  3. Eagerness to spend:
    A person should be willing to use means or wealth to fulfill his demand. Otherwise it will remain only desire not the demand.
  4. Fixed price:
    Demand is always expressed at a fixed price. If it is not expressed in terms of price, we cannot call it demand.
  5. Fixed Time:
    Demand is always expressed at a particular time. In a specific time only quantity of good is demanded.

Question 9.
Distinguish between Marginal Utility and Total Utility.
Answer:
Differences between Marginal Utility and Total Utility:
MP Board Class 12th Economics Important Questions Unit 2 Consumer Behaviour and Demand img-3

Question 10.
Explain, why the budget line is downward sloping?
Answer:
A budget line is the line showing different possible combinations of two goods i.e., goods x and goods y, which a consumer can buy, given his budget and the prices of two goods. Now, when the consumer can purchase two goods only with the given income and the prices, it is but obvious that the consumer can buy more of goods x only when he buys less of goods y. So, the budget line will be downward sloping indicating an inverse relationship between the consumption of two goods.

Question 11.
Write the exceptions of law of demand.
Answer:
Following are the exceptions of the law of demand:

1. Articles of Distinction:
This exception was first of all discussed by Veblen. According to him, articles of distinction have more demand only if their prices are sufficiently high. Diamond, jewelry, costly carpets etc. have more demand because their prices are abnormally high. It is so because distinction is bestowed on diamond, jewelry, etc. by the society because of their being costly. Accordingly, their demand is also high. If their prices falls, they will no longer be considered as articles of distinction and so their demand will decrease.

2. Giffen Goods:
In other words, Giffen goods are those inferior goods in the case of which income effect is negative and stronger than the substitution effect of a change in price. As a result, when price of such commodities falls, their demand also shrinks. Both in case of inferior good and Giffen goods income effect is negative. But in case of Giffen goods, negative income effect is always stronger than the substitution effect.

While in case of inferior goods, it may or may not be so. Law of demand fails only if negative income effect is stronger than the substitution effect. So, that while law of demand may or may not fail in case of inferior goods, it must always fail in case of Giffen goods. Therefore, at higher price the quantity demand of diamonds by rich consumers may increase.

3. Expectation regarding future prices:
If price of a commodity is rising today and it is likely tor rise more in the future, people will buy more even at the existing higher price and store it up. They will do this order to avoid the pinch of higher price in future. Similarly, when the consumers anticipate a large fall in the price of a commodity in future, they will postpone their purchase even when price falls today so as to purchase this commodity at a still lower price in future.

4. Emergencies:
Law of demand may not hold good emergencies like war, famines, etc. At such times consumers behave in an abnormal way. If they expect shortage of goods, they would buy and hoard goods even at high prices during such periods. On the other hand, during depression they will buy less even at low prices.

Question 12.
A consumer wants to consume two goods the prices of two goods are Rs. 4 and Rs. 5, respectively. The consumer incomes is Rs. 20. Find out the following:

  1. Write down the equation of the budget line.
  2. How much of goods 1 can the consumer consume if he/she spends entire income on that goods?
  3. How much of goods 2 Can a consumer consume if he/she spends her entire income on that goods?
  4. What is the sole of the budget line?

Answer:
Equation of budget line is:
1. Px Qx + Py Qy < Y, 4 Qy ≤ 20.

2. If he/she spends entire on goods 1 then his consumption on 1 will be,
= Total income of consumer =\(\frac{Rs.20}{Rs.4}\)
= Price of one goods.
= 5 units.

3. If the consumer consumes his full income on goods 2 then he will consume goods 2 in this quantity.
= Total incomes of consumer =\(\frac{Rs.20}{Rs.4}\)
=4 units.
MP Board Class 12th Economics Important Questions Unit 2 Consumer Behaviour and Demand img-18

Question 13.
How does the budget line change if the consumer’s income increases to ₹40 but the prices remain unchanged? (NCERT)
Answer:
An increase in consumer’s income implies that the consumer can purchase increased quantities of both the commodities at the prevailing market price. As a result the consumer will face a new budget line. The new budget line will shift-rightwards parallel to the original budget line. It can be explained with the following
MP Board Class 12th Economics Important Questions Unit 2 Consumer Behaviour and Demand img-4
In the above figure if the income of consumers is increased from ₹ 20 to ₹ 40 the budget line shift/upward) right side. Now the consumer can consume more quantity of goods than before because there is no change in price of goods. The new budget line is parallel to the original budget line.

Question 14.
How does the budget line change if the price of good 2 decreases by a rupee but the price of good 1 and the consumer’s income remain unchanged?
Answer:
If the price of goods 2 decreases by ₹1 and there is no change in income and price the budget line will change because the consumer can buy more of goods 2. It is clear form the following
MP Board Class 12th Economics Important Questions Unit 2 Consumer Behaviour and Demand img-5

Question 15.
Suppose a consumer can afford to buy 6 units of goods 1 and 8 units of goods 2 if he spends his entire income. The prices of two goods are ₹6 and ₹8 respectively. How much in the consumer’s income?
Answer:
Price of good 1= ₹6.
Quantity of good = ₹6.
Price of good 2 = ₹8.
Quantity of good 2 = ₹8.
Budget set;
or C1 X1 + C1 X2 = I
or 6 x 6 + 8 x 8 = I
or 36 + 64 = 1
100 = 1
So, income of consumer.

Question 16.
Consider the demand curve for a good. At price ₹ 4 the demand for the good is ₹ 25. Suppose the price of the good increases to₹ 5 and as a result the command for the falls to 20 unit Find out the price elasticity.
Solution:
MP Board Class 12th Economics Important Questions Unit 2 Consumer Behaviour and Demand img-6
=\(\frac { \frac { { q }_{ 1 }-{ q }_{ 0 } }{ { q }_{ 0 } } }{ \frac { p_{ 1 }-{ p }_{ 0 } }{ { p }_{ 0 } } }
\)
According to question, q0 = 25, p0 = 4, q0 = 20, p1 = 5
\({ e }_{ D }=\frac { \frac { 20-25 }{ 25 } }{ \frac { 5-4 }{ 4 } } =\frac { \frac { -5 }{ 25 } }{ \frac { 1 }{ 4 } } \)
\({ e }_{ D }=\frac { -5 }{ 25 } x\frac { 4 }{ 1 } =\frac { -20 }{ 25 } =-0.8\)

Question 17.
Write the assumptions of the law of marginal utility.
Answer:

  1. Units of the commodity must be similar:
    Each successive unit of the commodity must be similar in quantity and quality.
  2. Consumption should be continuous:
    The law will operate only when the consumption of unit is continuous without interval.
  3. Interest nature of the consumer should not change:
    If in the period of consumer interest and nature of the consumer changes then the law will not be applicable.
  4. Income should not change:
    The income of the consumer should not be changed. As soon as income changes man’s need changes.

Question 18.
Suppose the price elasticity of demand for a good is 0.2. If there is a 5% increase in the price of the good, by what percentage will the demand for the good go down?
Answer:
MP Board Class 12th Economics Important Questions Unit 2 Consumer Behaviour and Demand img-7
Substituting the value, we get
MP Board Class 12th Economics Important Questions Unit 2 Consumer Behaviour and Demand img-8
or, percentage change in quantity demanded
= 0.2 x 5 = 1
Demand of good will be reduced by 1 %.

Consumer Behavior and Demand Long Answer Type Questions

Question 1.
Write any six causes of the implication of the law of demand.
Or
Why demand curve slopes downwards to the right?
Answer:
It is a general law that the demand curve slopes downwards to the right. It shows the inverse relationship between the price and demand i.e., when price rises demand falls and vice – versa. This is why, it is also known as negative slope of the demand curve.

Following are the causes responsible for the downward sloping of the demand curve:

1. Law of diminishing marginal utility:
According to this law, consumption of a commodity increases, the utility from each successive unit goes on diminishing. Accordingly for every additional unit to be purchased, the consumer is willing to pay less price.

2. Income effect change:
Change in own price of a commodity causes a change in real income of the consumer, with a fall in price, real income increases. Accordingly, demand for the commodity expands.

3. Substitution effect:
It refers to substitution of one commodity for the other when it becomes relatively cheaper due in relative prices.

4. Size of consumer group:
When price of a commodity falls, it attracts new buyers who can afford to buy it, hence, quantity demanded rises.

5. Different uses:
Many goods have alternative uses e.g., Milk is used for making Curd, cheese and butter. If price of milk reduces, it will be put into different uses. Accordingly, demand for milk expands.

6. Tendency to satisfy the unsatisfied wants:
Each person has some unsatisfied wants. When the price of the goods falls, he wants to satisfy his unsatisfied wants which leads him to increase its demand. Because of this tendency of human beings, the demand curve slopes downwards to the right.

Question 2.
Write any five exceptions to the law of demand.
Answer:
The law of demand i.e., more demand of the commodity at lower price and lesser demand at higher price does not apply in every case and situation. The exceptions to the law of demand are as follows :
1. Necessaries of life:
Certain commodities represent necessaries of life and so the consumer is forced to buy them even at high price. As such, the demand curve may go upward or the law of demand may not operate.

2. Social status symbol:
There are certain goods which constitute social status symbol and the consumer has to buy them for maintaining his prestige in the society. He is, therefore, compelled to purchase such goods inspire of an increase in their prices. The law of demand will not operate as such.

3. Precious stores:
The law of demand does not operate in the case of precious stones like diamond etc. People do purchase them inspire of an increase in their price in order to distinguish their recognition.

4. Ignorance and psychology of consumer:
If the consumer is not aware of the competitive price of a commodity prevailing in the market, he may buy it in more quantity at higher price. It may be a psychological phenomenon that high price represents high quality. The law of demand may not operate as such.

5. Change in fashion, habits, interest and preference:
The law of demand does not operate when there is a change in consumer’s taste, habit, interest, fashion and preference. A commodity of new fashion will be purchased more even if the price is increased and so also is the case of change in habit, interest, taste and preference.

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Question 3.
Write any five factors affecting elasticity of demand.
Answer:
The elasticity of demand is affected by the following factors:
1. Nature of commodities:
Demand for necessity is inelastic whereas the demand for luxuries is elastic. Here too, we have to note the possibility that substitution plays an important role. Demand for necessities like bread and potatoes is inelastic because there are no close substitutes for them within the same price range and not merely because they are necessaries”. Hanson further sates that “The demand for some expensive luxury goods may be very inelastic not because they are luxuries but rather because they lack close substitutes.”

2. Consumer’s income:
Elasticity is closely related to person’s income. The demand of rich for all commodities may be quite unaffected by any changes of price. But this is not the case with the majority of the people as they have limited income and have to make a choice between this or that commodity. They cannot purchase all commodities.

3. Proportion of income spent on commodity:
The demand for a commodity is quite elastic over which consumer’s spend a large part of their income. It is so because even a small rise in price is likely to reduce substantially their ability to buy this item and so result in sharp percentage declines in the quantity demanded.

4. The possibility of substitution:
The most important influence on elasticity of demand is the degree of closeness of the substitute for the goods. The closer the substitute, the higher the elasticity of demand.

5. Possibility of postponement of the use of commodity:
If the consumption of a commodity can be postponed for further, the demand for such commodity will be elastic as the consumer does not feel its urgency. On the other hand if the consumption of a commodity cannot be postponed for future or which is very urgent, the demand for it will be inelastic.

Question 4.
Explain the factors affecting demand.
Answer:
Following are the factors affecting demand:

  1. Income:
    When consumer’s income increases, he or she usually buys more goods which increases the demand.
  2. Price of substitute goods:
    When the price of substitute goods increases, a consumer normally gives up at least some of its consumption and as a result the demand in-creases. (e.g., pineapple).
  3. Prices of complementary goods:
    When the price of complementary good in-creases, a consumer normally gives up some of its consumption as a result demand decreases (e.g. sugar).
  4. Number of consumer:
    When the number of consumers increases there are more people who buy the goods and as a result demand increases.
  5. Consumer’s taste:
    When a consumer likes the goods more he or she buys it more and the demand increases.

Question 5.
Explain the types of price elasticity of demand.
Or
Explain the degree of price elasticity of demand.
Answer:
Following are the types of price elasticity of demand:

1. Perfectly elastic demand:
Let us take one extreme case of elasticity of demand, when it is infinite or perfect elasticity of demand is infinity when even a negligible fall in the price of commodity leads to an infinite extension in the demand for it. Even when the price remains the same, the demand goes on changing.

2. Perfectly inelastic demand:
It means however great the rise or fall in the price of the commodity, its demand remains absolutely unchanged. In
other words, the elasticity of demand is zero. No amount of change in price induces a change in demand.  In other words, the change in price does not at all affect the quantity demanded. It is a case of perfectly inelastic demand.

3. Unitary elastic demand:
Demand for a commodity will be said to be unitary elastic, if the percentage change in the quantity demanded equals to the percentage change in the price. In other words, when the demand changes in the same proportion as in the price of the commodity, the elasticity of demand is equal to one.

4. Inelastic demand or Less than unit elastic demand:
When a considerable change in price does not lead to much change in the demand, the demand is said to be less elastic or inelastic. Here, the elasticity of demand is said to be less than unity. The slope of demand curve is more inclined towards Y axis.

5. Elastic demand or More than unit elastic demand :
When a small change in price leads to a greater change in demand, the demand is said to be elastic or more elastic. Here, the elasticity of demand is said to be greater than unity. In this case, proportionate change in demand will be more than proportionate change in price.

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Question 6.
Explain the law of demand with the help of table and graph.
Answer:
The law of demand explains the relationship between price of a commodity and its quantity demanded in the market. It says that there is inverse relationship between price and the quantity demanded. The law states that other things remaining same, the consumer will demand lesser quantity of goods at higher price and more quantity of goods at lower price. Thus, consumer’s equilibrium is the basis of law of demand.
Example:
MP Board Class 12th Economics Important Questions Unit 2 Consumer Behaviour and Demand img-9
The above table show that when the price of oranges is ₹ 1 per unit 80 units are demanded. If the price increases to ₹ 5 the quantity demand decreases it is 40 units.

This can be further explained with the help of figure:
From the figure it is clear that DD demand curve is a downward slopping curve. Which indicates that when the price of a good increases demand falls and when price reduces there is increase in demand. This shows inverse relation between price and demand. Demand
MP Board Class 12th Economics Important Questions Unit 2 Consumer Behaviour and Demand img-10

Question 7.
Explain the law of diminishing marginal utility with example.
Answer:
Definition of Law of Diminishing Marginal Utility:

1. Prof. Alfred Marshall:
“The additional benefit which a person derives from a given increase in his stock of a thing diminishes with every increase in the stock that he already has.”

The law of diminishing marginal utility has great importance in the study of economics. This law was firstly introduced by the French economist Herman Henrick Gosen. So, it is known as ‘Gosen’s first-law, Afterwards Prof. Marshall presented it scientifically in a systematic manner. This law explains the relation between the units of a commodity and it marginal utility.

The law is the most logical exposition of a consumer behavior. As we go on consuming more of anything in succession, the satisfaction derived by its successive units goes on decreasing. It is a matter of common observation that the more we have the commodity, the less urgently we want its subsequent units.

Explanation: We may take an example to illustrate this law. We are very hungry and we want food. We start eating bread. The first bread, that we eat is of utmost importance to us. The utility of this bread is say 40. Then we eat the second bread, but the utility of this bread is not as great as that of the first. Its utility is say 30, because our hunger has been slightly satisfied. The next bread that we eat have lesser and lesser of utility. The utility of the third and fourth bread is say 20 and 10 respectively.

Suppose after eating 5 units of bread his hunger is satisfied. Now we won’t like to eat the sixth bread. There will be no intensity to eat the sixth bread, therefore no utility of the sixth bread will be there. Still if we eat the sixth bread, we may get displeasure or dissatisfaction. This is the negative utility.Here we get zero utility. The seventh bread will give him negative utility because he has spend money on it without getting any satisfaction. Because of the consumption of the additional unit he might feel uneasy.

We may summarize it in this manner :

  1. As long as we have intensity for a thing, there will be utility for that.
  2. With the consumption of each unit of any commodity, the intensity for that commodity will be lesser and lesser, hence its utility will also diminish.
  3.  If there is no intensity for a commodity, there will be no utility.
  4.  In spite of no intensity if we keep on consuming a thing, there will be negative
    utility.

MP Board Class 12th Economics Important Questions Unit 2 Consumer Behaviour and Demand img-11
In the above example, we see that after consuming number of 5 breads, our hunger is satisfied, therefore the utility of bread will be up to 5 breads only. This utility is in the decreasing order because with the consumption of every bread his hunger also decreases. At the consumption of the sixth bread, the utility received is zero because the hunger has been fully satisfied. There is no need of the seventh bread, but still if he eats, there will be negative utility.
MP Board Class 12th Economics Important Questions Unit 2 Consumer Behaviour and Demand img-12

Question 8.
What is Giffcn paradox?
Answer:
In economics Giffen goods is a good that is in greater demand as its price increases and falls when the price decreases. A Giffen goods is typically an inferior product that does not have easily available substitutes. There is a positive relationship between the price and the quantity demanded.

This situation is also known as Giffen paradox. The demand for inferior goods such as coarse grain, coarse cloth, inferior meat etc., will not increase even with the fall of their price, because consumers of there commodities will start consuming more of a superior commodity. As a result, the demand for Giffen commodity will fall.

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Question 9.
Explain the concept of consumer’s equilibrium with the help of suitable example.
Answer:
Consumers equilibrium refers to a situation, in which a consumer derives maximum satisfaction, with no intention to change it and subject to given prices and given income. The point of maximum satisfaction is achieved. The consumer equilibrium under indifference curve must meet the following conditions:

The three conditions must be satisfied for a consumer to attain equilibrium:

1. The price line should be tangent to an indifference curve or MRS of one commodity for another should be equal to their relative prices.
MP Board Class 12th Economics Important Questions Unit 2 Consumer Behaviour and Demand img-13
AB is the price line and IC1, IC2 and IC3 are the indifference curves. This curve shows the combination of goods X and Y. IC3 and IC2 indifference curve which lie above and below the price line. In other words a rational consumer with limited income cannot do the expenditure and curve IC1 shows less satisfaction, but IC2 curve touches the price line at ‘P’ which is a point at which consumer maximizes his satisfaction.

2. In the given figure, slope of price line and indifferent curve is same or equal at point ‘P.’

3. At the point of equilibrium an indifference curve must be convex to the origin. Thus, the point of consumer equilibrium or maximum satisfaction may be defined by the condition that the marginal rate of substitution between any pair of two commodity will be equal to the ratio of their prices, or the marginal rate of substitution of money for any commodity is equal to the price of the commodity.

Question 10.
What is indifference curve? Write its features.
Answer:
An indifference curve is the curve, which represents all those combinations of two commodity which give same level of satisfaction.
MP Board Class 12th Economics Important Questions Unit 2 Consumer Behaviour and Demand img-14
Main features are :

  1. The indifference curve must slopes downwards to the right.
  2. Higher indifference curve represents higher level of satisfaction.
  3. Indifference curves are convex to the origin.
  4. Indifference curve cannot intersect each other.
  5. Indifference curve do not touch the horizontal or vertical axis.
  6. The consumer acts rationally so as to maximize satisfaction.
  7. There are two goods X and Y.
  8. The consumer possesses complete information about the prices of the goods in the market.

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Question 11.
What is indifference map?
Answer:
A set of indifference curves is called indifference map. An indifference map depicts complete figure of consumer’s tastes and preference. The indifference map shows the preference of the consumer, he definitely prefer’s the combination lying on the higher indifference curve to the combination lying on a lower indifference curve because a higher indifference curve represents a higher level of satisfaction.

MP Board Class 12th Economics Important Questions Unit 2 Consumer Behaviour and Demand img-15

Question 12.
What do you mean by extension of demand and contraction of demand?
Answer:
1. Extension of demand :
When the quantity demanded of a commodity rises due to fall in its price, other things remaining the same, it is called ‘rise in quantity demanded or extension of demand. For example, as shown in when the price of apples falls ₹ 30 per Kg to ₹ 25 per Kg. A consumers purchase of apples rises from 1 Kg to 2 Kg per week. This is extension of demand.
MP Board Class 12th Economics Important Questions Unit 2 Consumer Behaviour and Demand img-16

2. Contraction of demand:
Contraction of demand or fall in quantity demanded refers to a fall in quantity demanded of a commodity as a result of rise in its price, other things remaining the same.” When the price of apples rises from ₹15 a Kg. to ₹ 20 a Kg. a consumer buys less apples, 4 Kg. instead of 6 Kg. In this case, there is contraction of demand or decrease in quantity demanded.
MP Board Class 12th Economics Important Questions Unit 2 Consumer Behaviour and Demand img-17
Any point on a demand curve represents a particular quantity being bought at a specified price. Different points on a demand curve represent quantities demanded at different prices. Therefore, a change in quantity demanded is indicated by a movement along a particular demand curve. A movement down a demand curve is called a “rise in quantity demanded” or “extension of demand.”

On the other hand, a movement up the demand curve is called a‘ fall in quantity demanded of ‘contraction of demand.’ Thus, a change in the quantity demanded as a result of change in price of a commodity alone does not involve the drawing of a new demand curve, but is represented by the movement up or down on a given demand curve. This is illustrated in.

It will be seen in fig. that when the price is OP1 quantity demanded is OQ1. Now, if the price of the commodity falls to OP2, the quantity demanded rises to QO2. This movement from A1 to A2 in the downward direction (as indicated by an arrow) on the given demand curve DD is the extension of demand.

On the other hand, if the price of the commodity rises from OP1 to OP3, the quantity demanded of the good falls to OQ3. This movement from A1 to A3 in the upward direction (as indicated by the arrow) on the given demand curve is the contraction of demand.

Extension in demand results from
a fall in the price, other things remaining the same.

Contraction in Demand results from
a rise in the price, other things remaining the same.

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MP Board Class 12th Special Hindi Sahayak Vachan Solutions Chapter 6 उनको पुकारता हूँ

MP Board Class 12th Special Hindi सहायक वाचन Solutions Chapter 6 उनको पुकारता हूँ (कविता, आनन्द मिश्र)

उनको पुकारता हूँ अभ्यास प्रश्न

प्रश्न 1.
‘लहू के पानी होने’ से कवि का क्या तात्पर्य है? (2015)
उत्तर:
प्रस्तुत कविता में ‘लहू के पानी होने से कवि का तात्पर्य ऐसे शौर्यवान और पराक्रमी लोगों से है, जिनके शरीर की धमनियों में बहता रक्त अपनी मातृभूमि को गुलामी की बेड़ियों से मुक्त कराने के लिए सदैव उबलता रहता है। उनके रक्त के ताप की अनुभूति युद्ध के मैदान में उनकी वीरता को देखकर सहज ही की जा सकती है। सच्चे अर्थों में ऐसे वीर युवाओं का रक्त-ही-रक्त है अन्यथा आपातकाल में भी जिस रक्त में उबाल न आये, उसे निरा पानी कहना ही न्यायसंगत होगा।

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प्रश्न 2.
‘मिटकर अजर-अमर जो’ कहकर कवि किन लोगों की ओर संकेत कर रहा है?
उत्तर:
प्रस्तुत कविता में वाक्यांश-‘मिटकर अजर-अमर जो’ से कवि देश के उन महान् शहीदों को अपने श्रद्धा सुमन अर्पित करना चाहता है, जिन्होंने अपनी मातृभूमि के आन-मान सम्मान के लिए अपना सर्वस्व न्यौछावर कर दिया। इस पंक्ति के माध्यम से कवि आज की युवा पीढ़ी को यह समझाना चाहता है कि संकट के समय संघर्ष करते हुए जिन लोगों ने देश-हित में अपने प्राण तक न्यौछावर कर दिये,वे मरकर भी अजर-अमर हैं। आने वाली संततियाँ उनके नाम से स्वयं को जोड़कर गौरव का अनुभव करेंगी।

प्रश्न 3.
विजय से भाँवर भरने की क्षमता किसमें होती है?
उत्तर:
कवि के अनुसार युद्ध के मैदान में जो रण-बाँकुरे अपने शौर्य और वीरता से शत्र के छक्के छुड़ा देते हैं तथा जो आवश्यकता पड़ने पर स्वतन्त्रता के यज्ञ में सफलता पाने हेतु अपने प्राणों तक की आहुति देने से भी नहीं हिचकते,वास्तव में, विजयश्री’ के साथ भाँवर भरने अथवा उसका ‘वरण’ करने का अधिकार भी उन्हीं को होता है। ऐसे वीर पुरुष अपने व्यक्तिगत हितों को त्यागकर निःस्वार्थ भावना से राष्ट्र की सेवा में स्वयं को पूरी तरह झोंक देते हैं और समूचा राष्ट्र अपने इन लाड़लों के कृत्यों से निहाल हो उठता है।

प्रश्न 4.
‘पावक’ से श्रृंगार कौन करता है?
उत्तर:
कवि के अनुसार देश-सेवा के लिए सिर्फ वही व्यक्ति उपयुक्त हैं जो महलों की ऐशो-आराम की जिन्दगी को त्यागकर कठिन एवं प्रतिकूल परिस्थितियों में भी संघर्ष करते हैं। ऐसे श्रम-साधकों को अपने श्रृंगार हेतु किसी भी प्रकार के सौन्दर्य प्रसाधनों अथवा पुष्पात्यादि की आवश्यकता नहीं होती, बल्कि तपती आग के सम्पर्क में आकर इनके चेहरे का ओज और भी चमक उठता है। ऐसे मतवालों का प्रथम प्यार होता है,देश की स्वतन्त्रता और उसे पाने के लिए वे सदैव अपना सर्वस्व न्यौछावर करने के लिए तत्पर रहते हैं।

प्रश्न 5.
कवि किन सपूतों को जागरण का संदेश देना चाह रहा है? (2014)
उत्तर:
प्रस्तुत कविता के माध्यम से कवि माँ भारती के उन सभी सपूतों का आह्वान करना चाहता है, जिनका रक्त का उबाल अभी तक ठण्डा नहीं हुआ है तथा जिनके पराक्रम एवं शौर्य का संसार में दूसरा कोई उदाहरण नहीं मिलता। देश-सेवा हेतु आह्वान करते हुए कवि ऐसे रण-बांकुरों को आवाज देता है,जो वीरता से लड़ते-लड़ते युद्ध-स्थल पर वीरगति को प्राप्त होकर भी अजर-अमर हैं, जिनकी गर्जना सुनकर समूची सृष्टि दहल जाये तथा जिनके प्रलयंकारी प्रहार से एकबारगी विशाल पर्वत तक चूर-चूर हो जायें। कवि ऐसे शेर-सपूतों को आन्दोलित करना चाहता है, जिनका प्रथम प्यार राष्ट्र है और जिनका श्रृंगार स्वयं अग्निदेव किया करते हैं। ऐसे वीर पुरुषों को पुकारते हुए कवि उन्हें मुक्ति-दूत की संज्ञा देता है और चाहता है कि संग्राम-संघर्ष के इस काल में वे सभी स्वाभिमानी राष्ट्रवासी देश-सेवा हेतु आगे आयें जिनका मान अभी तक मिटा नहीं है अर्थात् जो राष्ट्र के आन-मान-सम्मान की रक्षार्थ अपना सर्वस्व त्यागने को सदैव तत्पर रहते हैं।

प्रश्न 6.
‘मुक्ति-दूत’ से कवि का क्या तात्पर्य है? स्पष्ट कीजिए।
उत्तर:
प्रस्तुत कविता में ‘मुक्ति-दूत’ से कवि का तात्पर्य उन वीरों से है,जो अपने अदम्य साहस और अनूठे पराक्रम के बलबूते पर परतन्त्रता की बेड़ियाँ काटने की क्षमता रखते हैं। ऐसे निःस्वार्थी लोग अपने कार्यों से देश के लिए उन मुक्ति के दूतों के समान ही तो हैं,जो राष्ट्र को स्वतन्त्रता की मीठी सुगन्ध से परिचित कराने हेतु अपना सर्वस्य न्यौछावर करने को सदैव तत्पर रहते हैं। ऐसे वीर, संकटकाल में माँ भारती के सम्मानार्थ संघर्ष करते हैं और उसे हर संकट से मुक्ति प्रदान करवाने में प्राण-प्रण से प्रयास करते हैं।

प्रश्न 7.
‘सोया न मान जिनका, चेरा विहान जिनका’ इस पंक्ति का भावार्थ लिखिए।
उत्तर:
सोया न मान जिनका, चेरा विहान जिनका’ इस पंक्ति के माध्यम से कवि उन राष्ट्रभक्तों को राष्ट्र-रक्षा हेतु आवाज देना चाहता है, जिनका स्वाभिमान अभी तक जीवित है और जो देश के आन-मान-सम्मान और स्वाभिमान की रक्षा के लिए बड़े-से-बड़ा त्याग करने को भी सदैव आकुल रहते हैं। साथ ही, कवि माँ भारती के उन वीर सपूतों का भी आह्वान करता है जो प्राण-पण से संकट एवं संघर्ष के समय देश-रक्षा के अभियान में जुट जायें, जिनके पराक्रम और साहस को प्रकृति भी स्वीकार करती हो तथा आशाओं भरा प्रभातकाल चाकर (नौकर) बनकर जिनके सम्मुख खड़ा रहता हो।

प्रश्न 8.
‘उनको पुकारता हूँ’ कविता का केन्द्रीय भाव लिखिए।
उत्तर:
इस प्रश्न के उत्तर हेतु कृपया पाठ के प्रारम्भ में दिए गये ‘पाठ का सारांश’ का अवलोकन करें।

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उनको पुकारता हूँ अति लघु उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 1.
‘उनको पुकारता हूँ’ में कवि ने देश-हित हेतु किसका आह्वान किया है?
उत्तर:
उक्त कविता में कवि ने देश-हित हेतु अपना सर्वस्व न्यौछावर करने के लिए स्वाभिमानी युवाओं का आह्वान किया है।

प्रश्न 2.
कवि आनन्द मिश्र के अनुसार सच्चे देशभक्त को परतन्त्रता की बेडियाँ कैसी लगती हैं?
उत्तर:
कवि के अनुसार सच्चे राष्ट्रभक्तों को परतन्त्रता की बेडियाँ नरक की यातना के समान लगती हैं।

उनको पुकारता हूँ पाठ का सारांश

कुशल कवि ‘आनन्द मिश्र’ द्वारा लिखित प्रस्तुत कविता, ‘उनको पुकारता है’ में कवि ने देश-हित हेतु अपना सर्वस्व न्यौछावर करने के लिए स्वाभिमानी युवाओं का आह्वान किया है।

कवि आपातकाल में देश-सेवा हेतु माँ भारती के उन रण-बाँकुरों को आवाज देता है, जिनका स्वाभिमान जीवित है तथा संसार में जिनकी वीरता और त्याग का दूसरा कोई उदाहरण नहीं मिलता,जो आवश्यकता पड़ने पर अपने प्राणों की बाजी लगाने से भी नहीं हिचकते तथा जो वीरगति को प्राप्त होकर भी सदा के लिए. अमर हो गये हैं। जिनकी हंकार से विशाल पर्वत भी दहल जायें, जिनका आघात अत्यन्त प्रलयंकारी हो तथा जो अपने पराक्रम एवं शौर्य से युद्ध के मैदान में ‘विजयश्री’ का वरण’ करते हैं। कवि ऐसे वीरों का आह्वान करता है जिन्हें परतन्त्रता की बेड़ियाँ नरक की यातना के सदृश लगती हैं और जो अपने प्राणों की आहुति देकर भी स्वतन्त्रता का दीप-गान गाते हैं। युद्ध-काल के समय कवि ऐसे युवाओं को पुकारता है, जिनका मान सोया नहीं है तथा प्रभातकाल जिनके आदेश का पालन करने को सदैव तत्पर रहता है।

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MP Board Class 11th Physics Solutions Chapter 15 तरंगें

MP Board Class 11th Physics Solutions Chapter 15 तरंगें

तरंगें अभ्यास के प्रश्न एवं उनके उतर

प्रश्न 15.1.
2.50 kg द्रव्यमान की 20 cm लंबी तानित डोरी पर 200 N बल का तनाव है। यदि इस डोरी के एक सिरे को अनुप्रस्थ झटका दिया जाए तो उत्पन्न विक्षोभ कितने समय में दूसरे सिरे तक पहुँचेगा?
उत्तर:
दिया है: तनाव T = 200 N, डोरी की लम्बाई, l – 20 मी,
∴ डोरी का द्रव्यमान प्रति एकांक लम्बाई
m = \(\frac{M}{l}\) = \(\frac{2.50}{20.0}\) = 0.125 kg m-1
हम जानते हैं कि अनुप्रस्थ तरंगों का वेग,
v = \(\sqrt { \frac { T }{ m } } \) = \(\sqrt { \frac { 200 }{ 0.125 } } \)
= 40 ms-1
माना अनुप्रस्थ तरंगों द्वारा एक सिरे से दूसरे सिरे तक पहुँचने में लिया गया समय t है।
∴ सूत्र t = डोरी की ल०/डोरी का वेग,
∴ t = \(\frac{1}{v}\) = \(\frac{20}{40}\) = 0.5 s

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प्रश्न 15.2.
300 m ऊँची मीनार के शीर्ष से गिराया गया पत्थर मीनार के आधार पर बने तालाब के पानी से टकराता है। यदि वाय में ध्वनि की चाल 340 ms-1 है तो पत्थर के टकराने की ध्वनि मीनार के शीर्ष पर पत्थर गिराने के कितनी देर बाद सुनाई देगी? (g = 9.8 ms-2)
उत्तर:
दिया है: पत्थर का प्रारम्भिक वेग u = 0
त्वरण a = g = 9.8 मीटर/से०2
मीनार की ऊँचाई h = 300 m
वायु में ध्वनि की चाल v = 340 ms-1
माना t1 = पत्थर द्वारा गिरने में लिया गया समय
व t2 = ध्वनि द्वारा मीनार के आधार से शीर्ष तक पहुँचने में लिया गया समय
माना t = शीर्ष पर ध्वनि सुनाई देने का समय है।
अतः t = t1 + t2 ………. (i)
गति के समी० से
s = ut + \(\frac{1}{2}\) at2
दिया है: s = h, u = 0, a = g, t = t1
∴ h = 0 + \(\frac{1}{2}\) gt12
या t1 = \(\sqrt { \frac { 2h }{ g } } \)
या t1 = \(\sqrt { \frac { 2\times 300 }{ 9.8 } } \) = 7.82 s …….. (ii)
MP Board Class 11th Physics Solutions Chapter 15 तरंगें image 1
या t2 = \(\frac{300}{340}\) = \(\frac{15}{7}\) = 0.88s …….. (iii)
∴ समी० (i), (ii) व (iii) से,
t = 7.82 + 0.88 = 8.7s

प्रश्न 15.3.
12.0 m लंबे स्टील के तार का द्रव्यमान 2.10 kg है। तार में तनाव कितना होना चाहिए ताकि उस तार पर किसी अनुप्रस्थ तरंग की चाल 20°C पर शुष्क वायु में ध्वनि की चाल (343 ms-1) के बराबर हो।
उत्तर:
दिया है: t = 12 मीटर, M = 2.10 किग्रा
माना कि तार में तनाव = T
तथा तार की द्रव्यमान प्रति एकांक लम्बाई m है।
∴ m = \(\frac { M_{ s } }{ l } \) = \(\frac{2.10}{12}\)
= 0.175 किग्रा प्रति मीटर
तार में अनुप्रस्थ तरंग की चाल = 20°C 0
शुष्क वायु में ध्वनि की चाल = 343 मीटर/सेकण्ड
हम जानते हैं कि तार में अनुप्रस्थ तरंग की चाल
v = \(\sqrt { \frac { T }{ m } } \)
या v2 = \(\frac{T}{m}\)
∴ T = mv2 = 0.175 × (343)2
= 20588.6 किग्रा मीटर/सेकण्ड2
= 2.06 × 104 न्यूटन।

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प्रश्न 15.4.
सूत्र v = \(\sqrt { \frac { \gamma P }{ \rho } } \) का उपयोग करके स्पष्ट कीजिए कि वायु में ध्वनि की चाल क्यों
(a) दाब पर निर्भर नहीं करती।
(b) ताप के साथ बढ़ जाती है, तथा।
(c) आर्द्रता के साथ बढ़ जाती है?
उत्तर:
(a) वायु में ध्वनि की चाल पर दाब का प्रभाव:
वायु में ध्वनि की चाल सूत्र v = \(\sqrt { \frac { vP }{ d } } \), से प्रतीत होता है कि दाब P के बदलने पर ध्वनि की चाल (v) का मान भी बदल जाता है। लेकिन वास्तव में ऐसा नहीं होता है। माना कि परमताप T पर किसी गैस के 1 ग्राम – अणु द्रव्यमान का आयतन V व दाब P है। माना कि गैस का अणुभार तथा घनत्व क्रमश: M व d है।
∴ गैस का आयतन, V = MP Board Class 11th Physics Solutions Chapter 15 तरंगें image 2 = \(\frac{M}{d}\)
∴ गैस समीकरण PV = RT से,
\(\frac{Pm}{d}\) = RT
या \(\frac{P}{d}\) = \(\frac{RT}{m}\) = (ताप के नियत होने पर)
अतः ताप (T) के नियत रहने पर, यदि दाब P का मान बदलेगा तब उसके साथ घनत्व (d) का मान भी बदलेगा लेकिन P/d का मान नियत रहेगा। इससे ध्वनि की चाल का मान समान रहेगा। अतः वायु या गैस का ताप नियत रहे तो ध्वनि की चाल पर दाब परिवर्तन का कोई प्रभाव नहीं पड़ता है।

(b) वायु में ध्वनि की चाल पर ताप का प्रभाव:
किसी गैस के लिए P/d का मान गैस के ताप पर निर्भर करता है। किसी गैस को गर्म करने पर,
(i) ताप बढ़ने पर यदि गैस फैलने के लिए स्वतन्त्र है, तो उसका घनत्व कम हो जाता है। जिससे P/d का मान बढ़ेगा।
(ii) यदि गैस किसी.बर्तन में बंद है तो उसका घनत्व (d) वही रहेगा लेकिन दाब बढ़ जायेगा जिससे P/d का मान बढ़ेगा।
अर्थात् गैस का ताप बढ़ने पर उसमें ध्वनि की चाल बढ़ती है। जब किसी गैस के एक ग्राम अणु, घनत्व व आयतन क्रमश: M, d व v है तब V = \(\frac{M}{d}\)
यदि गैस का दाब P व परमताप T हो तो गैस समीकरण PV = RT से,
\(\frac{Pm}{d}\) = RT
या \(\frac{P}{m}\) = \(\frac{RT}{m}\)
∴ गैस में ध्वनि की चाल v = \(\sqrt { \frac { vP }{ d } } \)
= \(\sqrt { \frac { \gamma RT }{ M } } \)
अतः किसी गैस में ध्वनि की चाल उसके परमताप के वर्गमूल के समानुपाती होती है।
v ∝\(\sqrt { T } \)

(c) वायु में ध्वनि की चाल पर आवृत्ति का प्रभाव:
आर्द्र वायु का घनत्व शुष्क वायु के घनत्व की तुलना में कम होता है। अतः आर्द्र वायु में ध्वनि की चाल शुष्क वायु की तुलना में बढ़ जाती है।

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प्रश्न 15.5.
आपने यह सीखा है कि एक विमा में कोई प्रगामी तरंग फलन y = f (x,t) द्वारा निरूपित की जाती है जिसमें x तथा t को x – vt अथवा x + vt अर्थात् y = f (x ± vt) संयोजन में प्रकट होना चाहिए। क्या इसका प्रतिलोम भी सत्य है? नीचे दिए गए y के प्रत्येक फलन का परीक्षण करके यह बताइए कि वह किसी प्रगामी तरंग को निरूपित कर सकता है:

  1. (x – vt)2
  2. log (x + vt) x0
  3. 1/(x + vt)

उत्तर:
इसका विलोम असत्य है। चूंकि किसी प्रगामी तरंग के स्वीकार करने योग्य फलन के लिए एक प्रत्यक्ष आवश्यकता यह है कि यह हर समय व हर स्थान पर परिमित होनी चाहिए। दिए गए फलनों में से सिर्फ फलन (3) ही इस प्रतिबन्ध को सन्तुष्ट करता है। शेष फलन सम्भवतया किसी प्रगामी तरंग को व्यक्त नहीं कर सकते हैं।

प्रश्न 15.6.
कोई चमगादड़ वायु में 1000 kHz आवृत्ति की पराश्रव्य ध्वनि उत्सर्जित करता है। यदि यह ध्वनि जल के पृष्ठ से टकराती है, तो (a) परावर्तित ध्वनि तथा (b) पारगमित ध्वनि की तरंगदैर्ध्य ज्ञात कीजिए। वायु तथा जल में ध्वनि की चाल क्रमशः 340 ms-1 तथा 1486 ms-1 है।
उत्तर:
दिया है: v = 1000 kHz = 106 Hz
वायु में ध्वनि की चाल v1 = 340 ms-1
व जल में ध्वनि की चाल V2 = 1486 ms-1
सूत्र, λ = \(\frac{v}{v}\) से
(a) परावर्तित ध्वनि की तरंगदैर्ध्य
λ1 = \(\frac { v_{ 1 } }{ v } \) = \(\frac { 340 }{ 10^{ 6 } } \)
= 0.34 मिमी।

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प्रश्न 15.7.
किसी अस्पताल में ऊतकों में ट्यूमरों का पता लगाने के लिए पराश्रव्य स्कैनर का प्रयोग किया जाता है। उस ऊतक में ध्वनि की तरंगदैर्ध्य कितनी है जिसमें ध्वनि की चाल 1.7 kms-1 है? स्कैनर की प्रचालन आवृत्ति 4.2 MHz है।
उत्तर:
दिया है: आवृत्ति
v = 4.2 MHz = 4.2 × 106 Hz
चाल v = 1.7 kms-1 = 1700 मीटर/सेकण्ड
सूत्र तरंगदैर्ध्य λ = \(\frac{v}{v}\) से
ध्वनि की तरंगदैर्ध्य,
λ = \(\frac { 1700 }{ 4.2\times 10^{ 6 } } \)
= 0.405 मिमी।

प्रश्न 15.8.
किसी डोरी पर कोई अनुप्रस्थ गुणावृत्ति तरंग का वर्णन y (x,t)= 3.0 sin (36t + 0.018x + π/4)
द्वारा किया जाता है। यहाँ x तथा y सेंटीमीटर में तथा t सेकण्ड में है। x की धनात्मक दिशा बाएँ से दाएँ है।

  1. क्या यह प्रगामी तरंग है अथवा अप्रगामी? यदि यह प्रगामी तरंग है तो इसकी चाल तथा संचरण की दिशा क्या है?
  2. इसका आयाम तथा आवृत्ति क्या है?
  3. उद्गम के समय इसकी आरंभिक कला क्या है?
  4. इस तरंग में दो क्रमागत शिखरों के बीच की न्यूनतम दूरी क्या है?

उत्तर:
दी हुई अनुप्रस्थ गुणावृत्ति तरंग का समीकरण है –
y(x,t) = 3.0 (sin 36 + 0.018x + \(\frac { \pi }{ 4 } \)) …… (i)
संचरित तरंग का सामान्य समीकरण निम्न है –
y (x,t) = A sin [\(\frac { 2\pi }{ \lambda } \) (vt – x) + ϕ0]
A sin [\(\frac { 2\pi }{ T } \) t – \(\frac { 2\pi }{ \lambda } \) + ϕfie0] (∴ \(\frac{1}{T}\) = \(\frac{v}{λ}\)) ….. (ii)

1. समी० () व (ii) की तुलना करने पर स्पष्ट है कि समी० (i) संचरित तरंग को व्यक्त करती है। तथा
\(\frac { 2\pi }{ T } \) = 36, …….. (iii)
\(\frac { -2\pi }{ \lambda } \) = 0.018 ………. (iv)
या λ = – \(\frac { 2\pi }{ 0.018 } \)
समी० (iii) तथा (iv) की गुणा करने पर,
2πvλ = \(\frac { 2\pi \times 26 }{ 0.018 } \)
vλ = -2000
या v = -2000 cms-1 = -20ms-1
जहाँ v = vλ तरंग का वेग है। यहाँ ऋणात्मक चिह्न प्रदर्शित करता है कि तरंग बाएँ से दायीं ओर चलती है।
∴ वेग = 20 sm-1

2. A = 3.0 cm = 3.0 × 10-2 m
\(\frac { 2\pi }{ T } \) = 36
v = \(\frac { 36 }{ 2\pi } \) = \(\frac { 36 }{ 2\times 3.14 } \) = 5.73 Hz

3. प्रारम्भिक कला ϕ = \(\frac { \pi }{ 4 } \) rad

4. तरंग में दो गर्मों के बीच न्यूनतम दूरी = तरंगदैर्ध्य
= λ = \(\frac { 2\pi }{ 0.018 } \)
= \(\frac { 2\times 3.14 }{ 0.018 } \) = 348.9 cm
= 3.489 m

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प्रश्न 15.9.
प्रश्न 15.8 में वर्णित तरंग के लिए x = 0 cm, 2 cm तथा 4 cm के लिए विस्थापन (y) और समय (t) के बीच ग्राफ आलेखित कीजिए। इन ग्राफों की आकृति क्या है? आयाम, आवृत्ति अथवा कला में से किन पहलुओं में प्रगामी तरंग में दोलनी गति एक बिन्दु से दूसरे बिन्दु पर भिन्न है?
उत्तर:
दी हुई तरंग समीकरण है –
y (x,t) = 3.0 sin (36t + 0.018x + \(\frac { \pi }{ 4 } \)) …… (i)
माना x = 0, 2 व 4 सेमी के लिए तरंग के विस्थापन क्रमश: y1, y2 व y3 हैं।
∴ y1 = (0,t) = 3.0 sin (36t + \(\frac { \pi }{ 4 } \)) ……….. (ii)
y2(2,t) = 3.0 sin (36t + 0.036 + \(\frac { \pi }{ 4 } \)) ……….. (iii)
तथा y3(4,t) = 3.0 sin (36t + 0.072 + \(\frac { \pi }{ 4 } \)) ……… (iv)
image 3
समी० (ii), (iii) व (iv) से स्पष्ट है कि ये वक्र ज्यावक्रीय हैं। जैसा कि चित्र में दिखाया गया है। तरंग संचरण में दोलनी गति, एक बिन्दु से दूसरे बिन्दु तक केवल कला में भिन्न है, जैसा कि क्रमश: (i), (iii) व (iv) से दिखाया गया है।
इन तरंगों के आयाम व आवृत्ति क्रमश: 3 सेमी० व \(\frac { 36 }{ 2\pi } \) s-1समान हैं।

प्रश्न 15.10.
प्रगामी गुणावृत्ति तरंग y (x,t) = 2.0 cos 2π (10t – 0.0080x + 0.35)
जिसमें x तथा yको m में तथाt को s में लिया गया है,के लिए उन दो दोलनी बिन्दुओं के बीच कलांतर कितना है जिनके बीच की दूरी है –
(a) 4m
(b) 0.5 m
(c) λ/2
(d) \(\frac { 3\lambda }{ 4 } \)
उत्तर:
दी हुई प्रगामी गुणावृत्ति तरंग का समीकरण निम्न है –
y (x,t) = 2.0 cos 2π (10t – 0.0080x + 0.35) …… (i)
अतः संचरित गुणावृत्ति तरंग की सामान्य समीकरण निम्न है –
y(x,t) = A cos [\(\frac { 2\pi }{ T } \) t – \(\frac { 2\pi }{ \lambda } \) x + ϕ0] …. (ii)
(ii) समी० (i) व (ii) की तुलना से
\(\frac { 2\pi }{ \lambda } \) = 2π × 0.0080 cm-1 ….. (iii)
\(\frac { 2\pi }{ T } \) = 2π × 10
ϕ0 = 0.35
हम जानते हैं कि कलान्तर = \(\frac { 2\pi }{ \lambda } \) × पथान्तर ………… (iv)

(a) पथान्तर = 4m = 400m, (iv) से,
समी० (iv) से, कलान्तर = \(\frac { 2\pi }{ \lambda } \) × 400
= 2π × 0.0080 × 50
= 0.8π rad
(b) पथान्तर = 0.5 m = 50 cm पर
कलान्तर = 2π × 0.0080 × 50
= 0.8π rad

(c) पथान्तर = \(\frac { \pi }{ 2 } \) पर,
कलान्तर = \(\frac { 2\pi }{ \lambda } \) × \(\frac { 3\lambda }{ 4 } \)
= \(\frac { 3\pi }{ 2 } \) rad = (π + \(\frac { \pi }{ 2 } \))
∴ cos (π + θ) = -cos θ
प्रभावी कलान्तर = \(\frac { \pi }{ 2 } \)

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प्रश्न 15.11.
दोनों सिरों पर परिबद्ध किसी तानित डोरी पर अनुप्रस्थ विस्थापन को इस प्रकार व्यक्त किया गया है –
y(x,t) = 0.06 sin( \(\frac { 2\pi }{ 3 } \) x) cos (120 πt) जिसमें x तथा y को m तथा t को s में लिया गया है। इसमें – डोरी की लम्बाई 1.5 m है जिसकी संहति 3.0 × 10-2kg है। निम्नलिखित का उत्तर दीजिए:
(a) यह फलन प्रगामी तरंग अथवा अप्रगामी तरंग में से किसे निरूपित करता है?
(b) इसकी व्याख्या विपरीत दिशाओं में गमन करती दो तरंगों के अध्यारोपण के रूप में करते हुए प्रत्येक तरंग की तरंगदैर्ध्य, आवृत्ति तथा चाल ज्ञात कीजिए।
(c) डोरी में तनाव ज्ञात कीजिए।
उत्तर:
दिया हुआ फलन है –
y (x,t) = 0.06 sin (\(\frac { 2\pi x }{ 3 } \)) cos (120πt) ……… (i)
संचरित तरंग को निम्न रूप में व्यक्त कर सकते हैं –
y (x,t) = A sin \(\frac { 2\pi }{ \lambda } \) (vt – x) …………… (ii)

(a) चूँकि दिया गया फलन प्रगामी तरंग की भाँति है। अतः दिया गया फलन प्रगामी तरंग को व्यक्त करता है।

(b) हम जानते हैं कि यदि तरंग
y1 = A sin \(\frac { 2\pi }{ \lambda } \) (vt + x)
x – अक्ष की धनात्मक दिशा में संचरित होती है,
तो यह तरंग निम्न परावर्तित तरंग द्वारा अध्यारोपित होती है।
अतः y2 = -A sin \(\frac { 2\pi }{ \lambda } \) (vt + x)
अतः अध्यारोपण सिद्धांत से, y = y1 + Y2
= -2A sin (\(\frac { 2\pi }{ \lambda } \) x) cos (\(\frac { 2\pi }{ \lambda } \) vt) …… (iii)
समीकरण (i) तथा (ii) की तुलना करने पर,
\(\frac { 2\pi }{ \lambda } \) = \(\frac { 2\pi }{ 3 } \) or λ = 3m
\(\frac { 2\pi }{ \lambda } \) v = 120π
या v = 60λ = 60 × 3 = 180 ms-1
∴ आवृत्ति v = \(\frac { v }{ \lambda } \) = \(\frac{108}{3}\) = 60 Hz
अनुप्रस्थ तरंग का वेग
v = \(\sqrt { \frac { T }{ m } } \) or v2 = \(\frac{T}{m}\)
∴ T = v2 × m ……….. (iv)
दिया है: द्रव्यमान प्रति एकांक लम्बाई = image 3
= \(\frac { 3\times 10^{ -2 }kg }{ 1.5m } \) = 2 × 10-2 kg m-1 ……… (v)
v = 180 ms-1 प्रति तरंग

(c) माना डोरी में तनाव T है।
∴ समीकरण (iv) व (v) से,
T = (180)2 × (2 × 10-2)
= 32400 × 2 × 10-2 = 648 N

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प्रश्न 15.12.
(i) प्रश्न 15.11 में वर्णित डोरी पर तरंग के (b) कला, (c) आयाम से कंपन करते हैं? अपने उत्तरों को स्पष्ट कीजिए।
(ii) एक सिरे से 0.375 m दूर के बिन्दु का आयाम कितना हैं।
उत्तर:
(a) डोरी के समस्त बिन्दु समान आवृत्ति से कंपन करते हैं।

(b) चूँकि λ = 3 मीटर व डोरी की लम्बाई, l = 1.5 मीटर = \(\frac{1}{2}\)
अर्थात् डोरी को दोनों सिरों पर निस्पंद व मध्य में एक प्रस्पंद बनेगा।
चूँकि अप्रगामी तरंगों में दो क्रमागत निस्पंदों के मध्य के सभी बिन्दु समान कला में कम्पन करते हैं। अतः डोरी के सभी बिन्दु समान कला में कम्पन करेंगे।

(c) दी गई समीकरण निम्न है –
y (x,t) = 0.06 sin (\(\frac { 2\pi }{ 3 } \) x) cos (12πt)
इस समीकरण का आयाम,
A = 0.06 sin (\(\frac { 2\pi }{ 3 } \) x)
x = 0.375 m पर,
A = 0.06 sin (\(\frac { 2\pi }{ 3 } \) × 0.375)
= 0.06 × sin (0.250π)
= 0.06 sin (\(\frac { \pi }{ 4 } \)) = 0.06 × \(\frac { 1 }{ \sqrt { 2 } } \)
= 0.06 \(\sqrt { \frac { 2 }{ 2 } } \) 102 = 0.3 \(\sqrt { 2 } \)
= 0.03 × 1.414
= 0.04242 m = 0.042 m

प्रश्न 15.13.
नीचे किसी प्रत्यास्थ तरंग (अनुप्रस्थ अथवा अनुदैर्ध्य ) के विस्थापन को निरूपित करने वाले x तथा t के फलन दिए गए हैं। यह बताइए कि इनमें से कौन (i) प्रगामी तरंग को, (ii) अप्रगामी तरंग को, (iii) इनमें से किसी भी तरंग को निरूपित नहीं करता है –

  1. y = 2cos (3x) sin 10t
  2. y = 2\(\sqrt { x-vt } \)
  3. y = 3 sin (5x – 0.5t) + 4 cos (5x – 0.5t)
  4. y = cos x sin t + cos 2x sin 2t

उत्तर:

  1. महत्व फलन अप्रगामी तरंग को व्यक्त करता है।
  2. किसी भी तरंग के लिए स्वीकार करने योग्य नहीं है।
  3. प्रगामी गुणावृत्ति तरंग को प्रदर्शित करता है।
  4. दो प्रगामी तरंगों के अध्यारोपण प्रदर्शित करता है।

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प्रश्न 15.14.
दो दृढ़ टेकों के बीच तानित तार अपनी मूल विधा में 45 Hz आवृत्ति से कंपन करता है। इस तार का द्रव्यमान 3.5 × 10-2 kg तथा रैखिक द्रव्यमान घनत्व 4.0 × 10-2 kg m-1 है। (a) तार पर अनुप्रस्थ तरंग की चाल क्या है, तथा (b) तार में तनाव कितना है?
उत्तर:
दिया है: m = 3.5 × 10-2 kg
रैखिक द्रव्यमान घनत्व µ = 4 × 10-2 kg m-1
सूत्र µ = \(\frac{m}{l}\) से,
तार की लम्बाई l = \(\frac{m}{µ}\)
= \(\frac { 3.5\times 10^{ -2 } }{ 4\times 10^{ -2 } } \) = \(\frac{7}{8}\) मीटर
माना तार में उत्पन्न तरंग की तरंगदैर्ध्य λ है। चूँकि तार मूल विधा में कम्पन कर रहा है। अतः \(\frac { \lambda }{ 2 } \) = l
∴ λ = 2l = \(\frac{7}{4}\) मीटर
सूत्र v = vλ से, तार में तरंग की चाल
v = 45 × 7 = 79 ms-1
माना कि तार का तनाव t है।
∴ v = \(\sqrt { \frac { T }{ \mu } } \)
∴ T = v2µ = (79)2 × 10-2
= 248 न्यूटन

प्रश्न 15.15.
एक सिरे पर खुली तथा दूसरे सिरे पर चलायमान पिस्टन लगी 1 m लंबी नलिका, किसी नियत आवृत्ति के स्त्रोत (340 Hz आवृत्ति का स्वरित्र द्विभुज) के साथ, जब नलिका में वायु कॉलम 25.5 cm अथवा 79.3 cm होता है तब अनुनाद दर्शाती है। प्रयोगशाला के ताप पर वायु में ध्वनि की चाल का आंकलन कीजिए। कोर-प्रभाव को नगण्य मान सकते हैं।
उत्तर:
नलिका में पिस्टन लगाने से यह बंद आर्गन नलिका की भाँति व्यवहार करेगा।
माना बंद नलिका में nवें तथा (n + 1) वें कम्पन के लिए अनुनादित वायु स्तम्भों की लम्बाइयाँ l1 व l2 हैं।
∴ l1 = 25.5 सेमी
l2 = 79.3 सेमी
माना ध्वनि तरंग का वेग v है। अतः इन कम्पनों के लिए आवृत्ति v1 व’ v2 निम्नवत् होगी।
v1 = (2n -1) \(\frac { v }{ 4l_{ 1 } } \) ………. (i)
तथा v2 = [2(n + 1) -1] \(\frac { v }{ 4l_{ 2 } } \) ………. (ii)
दोनों विधाओं में 340 Hz की आवृत्ति से अनुनाद होगा।
∴ V1 = V2 = 340 …………. (iii)
या (2n – l) – \(\frac { v }{ 4l_{ 1 } } \) = (2n +1) \(\frac { v }{ 4l_{ 2 } } \)
या \(\frac { (2n-1) }{ l_{ 1 } } \) – \(\frac { v }{ 4l_{ 1 } } \) = (2n + 1) \(\frac { v }{ 4l_{ 2 } } \)
या \(\frac { (2n-1) }{ l_{ 1 } } \) = \(\frac { (2n-1) }{ l_{ 2 } } \)
या \(\frac { 2n-1 }{ 2n+1 } \) = \(\frac { l_{ 2 } }{ l_{ 1 } } \) = \(\frac { 22.5 }{ 79.3 } \) ~ \(\frac{1}{3}\)
या 3(2n -1) = 2n +1
या 6n -3 = 2n + 1
या 6n – 2n = 3 + 1
4n = 4
∴ n = 1
समी० (2n -1) \(\frac { v }{ 4l_{ 2 } } \) = 340 में n = 1 रखने पर
(2 × 1 – 1) \(\frac { v }{ 4l_{ 2 } } \) = 340
या (2 – 1) × \(\frac { v }{ 4\times 25.5 } \) = 340
या \(\frac { v }{ 4\times 25.5 } \) = 340
या v = 340 × 4 × 25.5
या v = 340 × 102 = 34680 cms -1
= 346.8 ms -1 = 347 ms-1

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प्रश्न 15.16.
100 cm लंबी स्टील-छड़ अपने मध्य बिन्दु पर परिबद्ध है। इसके अनुदैर्ध्य कंपनों की मूल आवृत्ति 2.53 kHz है। स्टील में ध्वनि की चाल क्या है?
उत्तर:
चूँकि छड़ मध्य बिन्दु पर परिबद्ध है अतः यहाँ एक निस्पंद (A) तथा मूल विधा के लिए सिरों पर दो प्रस्पंद बनेंगे। अतः छड़ की मूल लम्बाई निम्नवत् होगी –
MP Board Class 11th Physics Solutions Chapter 15 तरंगें image 3
जहाँ l = छड़ की लम्बाई
तथा λ = तरंग की तरंगदैर्ध्य
दिया है =
l = 100 cm, v = 2.53 kHz = 2.53 × 103 Hz
∴ λ = 2 × 100 = 200 cm
माना स्टील में ध्वनि का वेग v है।
अत: v = vλ = 2.53 × 103 × 200
= 506 × 103 cms-1 = 5.06 × 103 ms-1
∴ v = 5.06 kms-1

प्रश्न 15.17.
20 cm लंबाई के पाइप का एक सिरा बंद है। 430 Hz आवृत्ति के स्त्रोत द्वारा इस पाइप की कौन-सी गुणावृत्ति विधा अनुनाद द्वारा उत्तेजित की जाती है? यदि इस पाइप के दोनों सिरे खुले हों, तो भी क्या यह स्त्रोत इस पाइप के साथ अनुनाद करेगा? वायु में ध्वनि की चाल 340 ms-1 है।
उत्तर:
दिया है:
l = 20 cm = 0.2 m, v = 340 ms-1
उत्तेजित स्त्रोत की आवृत्ति vn = 430 Hz
हम जानते हैं कि बंद नली के कम्पनों की आवृत्ति निम्न होती है –
vn = (2n – 1) \(\frac { v }{ 4l } \)
या 430 = (2n -1) \(\frac { 340 }{ 4\times 0.20 } \)
2n -1 = 430 × \(\frac { 0.80 }{ 340 } \) = 1.02
या n = 1.01
अत: आर्गन नली प्रथम सन्नादी या दोलन की मूल आवृत्ति में है।
खुली नली में, कम्पन की nवीं विधा की आवृत्ति v’n = n\(\frac { v }{ 2l } \)
जहाँ मूल विधा में लम्बाई l = \(\frac { \lambda }{ 2 } \) 0r λ = 2l
या 430 = \(\frac { n\times 340 }{ 2\times 0.2 } \)
या n = \(\frac { 430\times 0.4 }{ 340 } \) = \(\frac{172}{340}\) = 0.5
चूँकि n एक पूर्णांक है। अतः n = 0.5 सम्भव नहीं है। अतः समान स्त्रोत खुली नली में अनुनादित नहीं होगा।

प्रश्न 15.18.
सितार की दो डोरियाँ A तथा B एक साथ ‘गा’ स्वर बजा रही हैं तथा थोड़ी-सी बेसुरी होने के कारण 6 Hz आवृत्ति के विस्पंद उत्पन्न कर रही हैं। डोरी A का तनाव कुछ घटाने पर विस्पंद की आवृत्ति घटकर 3 Hz रह जाती है। यदि की मूल आवृत्ति 324 Hz है तो Bकी आवृत्ति क्या है?
उत्तर:
हम जानते हैं कि आवृत्ति ∝ image 4
अत: डोरी में तनाव कम होने से इसकी आवृत्ति भी घटती है। माना A की वास्तविक आवृत्ति VA व B की VB है।
∴ VA – VB = 6 Hz
परन्तु VA = 324 Hz
∴ VB = 324 – 6 =318 Hz
A में तनाव कम करने पर,
∆v = 3 Hz
A की आवृत्ति = 324 – 3 = 321 Hz
∴ B की आवृत्ति = 318 Hz

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प्रश्न 15.19.
स्पष्ट कीजिए क्यों (अथवा कैसे)?

  1. किसी ध्वनि तरंग में विस्थापन निस्पंद दाब प्रस्पंद होता है और विस्थापन प्रस्पंद दाब निस्पंद होता है।
  2. आँख न होने पर भी चमगादड़ अवरोधकों की दूरी, दिशा, प्रकृति तथा आकार सुनिश्चित कर लेते हैं।
  3. वायलिन तथा सितार के स्वरों की आवृत्तियाँ समान होने पर भी हम दोनों से उत्पन्न स्वरों में भेद कर लेते हैं।
  4. ठोस अनुदैर्ध्य तथा अनुप्रस्थ दोनों प्रकार की तरंगों का पोषण कर सकते हैं जबकि गैसों में केवल अनुदैर्ध्य तरंगें ही संचरित हो सकती हैं, तथा
  5. परिक्षेपी माध्यम में संचरण के समय स्पंद की आकृति विकृत हो जाती है।

उत्तर:
1. ध्वनि तरंगों में जहाँ माध्यम के कणों का विस्थापन न्यूनतम होता है वहाँ कण अत्यधिक पास-पास होते हैं। अतः वहाँ दाब अधिकतम होता है। (i.e., दाब प्रस्पंद बनता है) एवं जहाँ विस्थापन महत्तम होता है वहाँ कण दूर-दूर होते हैं, । अतः वहाँ दाब न्यूनतम होता है (i.e., दाब निस्पंद बनता है।)

2. चमगादड़ उच्च आवृत्ति की पराश्रव्य तरंगें उत्सर्जित करती है। ये तरंगें अवरोधकों से टकराकर वापस लौटती हैं तो चमगादड़ इन्हें अवशोषित कर लेते हैं। परावर्तित तरंगों की आवृत्ति व तीव्रता की प्रेषित तरंगों से तुलना करके चमगादड़ अवरोधकों की दूरी, प्रकृति, दिशा व आकार सुनिश्चित कर लेते हैं।

3. प्रत्येक स्वर में एक मूल स्वरक के साथ कुछ अधिस्वरक भी उत्पन्न होते हैं। परन्तु वायलिन व सितार से उत्पन्न स्वरों में मूल स्वरकों की आवृत्तियाँ समान रहती हैं लेकिन उनके साथ उत्पन्न होने वाले अधिस्वरकों की संख्या, आवृत्तियों व अपेक्षिक तीव्रताओं में भिन्नता होती है। इसी भिन्नता के आधार पर इन्हें विभेद किया जाता है।

4. ठोसों में आयतन प्रत्यास्थता के साथ-साथ अपरूपण प्रत्यास्थता भी पाई जाती है। अतः ठोसों में दोनों प्रकार की तरंगें संचरित होती हैं। जबकि गैसों में केवल आयतन प्रत्यास्थता ही पाई जाती है। अतः गैसों में केवल अनुदैर्ध्य तरंगें ही संचरित हो पाती हैं।

5. प्रत्येक ध्वनि स्पंद कई विभिन्न तरंगदैर्ध्य की तरंगों का मिश्रण होता है। जब यह स्पंद परिक्षेपी माध्यम में प्रवेश करता है तब ये तरंगें अलग-अलग वेगों से गतिमान रहती हैं। अतः स्पंद की आकृति विकृत हो जाती है।

प्रश्न 15.20.
रेलवे स्टेशन के बाह्य सिग्नल पर खड़ी कोई रेलगाड़ी शांत वायु में 400 Hz आवृत्ति की सीटी बजाती है। (i) प्लेटफॉर्म पर खड़े प्रेक्षक के लिए सीटी की आवृत्ति क्या होगी जबकि रेलगाड़ी (a) 10 ms-1 चाल से प्लेटफॉर्म की ओर गतिशील है, तथा (b) 10 ms-1 चाल से प्लेटफॉर्म से दूर जा रही है? (ii) दोनों ही प्रकरणों में ध्वनि की चाल क्या है? शांत वायु में ध्वनि की चाल 340 ms-1 लीजिए।
उत्तर:
दिया है: v = 400 Hz, Vt = 10 ms-1
शांत वायु में ध्वनि की चाल
v = 340 ms-1
(i) (a) जब रेलगाड़ी (ध्वनि स्त्रोत) स्थिर प्रेक्षक की ओर गतिमान है, तब प्रेक्षक द्वारा सुनी गई ध्वनि की आवृत्ति,
v’ = v(\(\frac { v }{ v-v_{ t } } \))
= 400(\(\frac { 340 }{ 340-10 } \))
= 412 Hz

(b) जब रेलगाड़ी स्थिर प्रेक्षक से दूर जा रही है तब प्रेक्षक द्वारा सुनी गई ध्वनि की आवृत्ति,
v’ = v (\(\frac { v }{ v+v_{ t } } \))
= 400 (\(\frac { 340 }{ 340+10 } \)) = 389 Hz
(ii) दोनों स्थितियों में ध्वनि की चाल (340 ms-1) समान है।

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प्रश्न 15.21.
स्टेशन यार्ड में खड़ी कोई रेलगाड़ी शांत वायु में 400 Hz आवृत्ति की सीटी बजा रही है। तभी 10 ms-1 की चाल से यार्ड से स्टेशन की ओर वायु बहने लगती है। । स्टेशन के प्लेटफॉर्म पर खड़े किसी प्रेक्षक के लिए ध्वनि की आवृत्ति, तरंगदैर्ध्य तथा चाल क्या है? क्या यह स्थिति तथ्यतः उस स्थिति के समरूप है जिसमें वायु शांत हो तथा प्रेक्षक 10 ms-1 चाल से यार्ड की ओर दौड़ रहा हो? शांत वायु में ध्वनि की चाल 340 ms-1 ले सकते हैं।
उत्तर:
दिया है: v = 400 Hz
वायु की प्रेक्षक की ओर चाल vw = 10 ms-1
शांत वायु में ध्वनि की चाल vs = 340 ms-1
चूँकि रेलगाड़ी व प्रेक्षक दोनों स्थिर हैं। अतः V0 = 0 व v’s = 0
अतः प्रेक्षक द्वारा सुनी गई ध्वनि की आवृत्ति
MP Board Class 11th Physics Solutions Chapter 15 तरंगें image 4
चूँकि वायु प्रेक्षक की ओर चलती है।
अतः प्रेक्षक के लिए वायु की चाल
= vs + vw = 350 ms-1
प्रेक्षक के लिए सीटी की आवृत्ति = 400 Hz
∴ ध्वनि की तरंगदैर्ध्य x = λ’ = \(\frac { v_{ t }+v_{ s } }{ v’ } \)
= \(\frac { 340+10 }{ 400 } \) = \(\frac{7}{8}\) Hz = 0.875 m

प्रश्न 15.22.
किसी डोरी पर कोई प्रगामी गुणावृत्ति तरंग इस प्रकार व्यक्त की गई है y(x,t) = 7.5 sin (0.0050x + 12t + π/4)
(a) x = 1cm तथा t = 1s पर किसी बिन्दु का विस्थापन तथा दोलन की चाल ज्ञात कीजिए। क्या यह चाल तरंग संचरण की चाल के बराबर है?
(b) डोरी के उन बिन्दुओं की अवस्थिति ज्ञात कीजिए जिनका अनुप्रस्थ विस्थापन तथा चाल उतनी ही है जितनी x=1cm पर स्थित बिन्दु की समय t = 25, 5 s तथा 11s पर
उत्तर:
दिया है:
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(a) समीकरण (i) की तुलना संचरित तरंग के सामान्य समीकरण से करने पर
y = a sin [\(\frac { 2\pi }{ \lambda } \) (vt +x ) + \(\frac { \pi }{ 4 } \)] we get,
v = velocity of wave
= \(\frac{12}{0.0050}\) = \(\frac { 12\times 10^{ 4 } }{ 50 } \)
= 12 × 200 cm s-1
= 24 ms-1
x = 1 सेमी० पर t = 1 सेकण्ड,
अतः विस्थापन,
MP Board Class 11th Physics Solutions Chapter 15 तरंगें image 6
बिन्दु के दोलन का वेग
MP Board Class 11th Physics Solutions Chapter 15 तरंगें image 7
x = 1 सेमी० पर t = 1 सेकण्ड
v = 90 c0s (0.05 × 1 + 12 × 1 + 0.785)
= 90 cos 732.83° = 90 cos 12.83°
= 90 × 0.9751 cms -1 = 87.76 cms-1
= 88 cms-1
परन्तु तरंग संचरण का वेग 24 मीटर/सेकण्ड है।
स्पष्ट है कि बिन्दु का दोलन वेग तरंग संचरण के वेग के समान नहीं है।
∴नहीं, यह वेग तरंग संचरण के वेग (24 मीटर/से०) के समान नहीं है।

(b) दी हुई समीकरण है,
y (x,t) = 7.5 sin 0.005x + 12 +\(\frac { \pi }{ 4 } \))
इस समीकरण की तुलना समीकरण,
y = A sin (ωt + kx + ϕ) से करने पर,
∴ k = 0.005 रेडियन 1 सेमी०
∴ λ = \(\frac { 2\pi }{ k } \)
= \(\frac { 2\times 3.14 }{ 0.005 } \) = 12.57 मीटर
तरंग में सभी बिन्दुओं का समान अनुप्रस्थ विस्थापन होता है। यह विस्थापन λ, 2λ, 3λ, … इत्यादि होता है। अतः 12.57 मीटर, 25.14 मीटर, 37.71 मीटर इत्यादि दूरी पर स्थित बिन्दु x = 1 सेमी से समान विस्थापन पर होंगे। अतः सभी बिन्दुओं जिनका विस्थापन nλ है। जहाँ n = ± 1, ± 2, ± 3, ± 4, … है, x = 1 सेमी से 12.57 मोटर, 25.14 मीटर … दूरी हैं।

प्रश्न 15.23.
ध्वनि का कोई सीमित स्पंद (उदाहरणार्थ सीटी की पिप) माध्यम में भेजा जाता है। (a) क्या इस स्पंद की कोई निश्चित (i) आवृत्ति, (ii) तरंगदैर्ध्य, (iii) संचरण की चाल है? (b) यदि स्पन्द दर 1 स्पंद प्रति 20 सेकण्ड है अर्थात् सीटी प्रत्येक 20 s के पश्चात् सेकंड के कुछ अंश के लिए बजती है, तो सीटी द्वारा उत्पन्न स्वर की आवृत्ति (1/20) Hz अथवा 0.05 Hz है?
उत्तर:
(a) नहीं, इस स्पंद की कोई निश्चित आवृत्ति या तरंगदैर्ध्य नहीं होती है। स्पन्द के संचरण की चाल निश्चित होती है, जो माध्यम में ध्वनि की चाल के समान है।
(b) नहीं, स्पंद की आवृत्ति (\(\frac{1}{20}\)) Hz
या 0.05 Hz नहीं है।

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प्रश्न 15.24.
8.0 × 10-3 kg m-1 रैखिक द्रव्यमान घनत्व की किसी लंबी डोरी का एक सिरा 256 Hz आवृत्ति के विद्युत चालित स्वरित्र द्विभुज से जुड़ा है। डोरी का दूसरा सिरा किसी स्थिर घिरनी के ऊपर गुजरता हुआ किसी तुला के पलड़े से बँधा है जिस पर 90 kg के बाट लटके हैं। घिरनी वाला सिरा सारी आवक ऊर्जा को अवशोषित कर लेता है जिसके कारण इस सिरे से परावर्तित तरंगों का आयाम नगण्य होता है। t = 0 पर डोरी के बाएँ सिरे (द्विभुज वाले सिरे) y = 0 पर अनुप्रस्थ विस्थापन शून्य है (y = 0) तथा वह y की धनात्मक दिशा के अनुदिश गतिशील है। तरंग का आयाम 5.0 cm है। डोरी पर इस तरंग का वर्णन करने वाले अनुप्रस्थ विस्थापन को तथा के फलन के रूप में लिखिए।
उत्तर:
हम जानते हैं कि तरंग वेग
V = \(\sqrt { \frac { T }{ m } } \) ……… (i)
पलड़े में द्रव्यमान = M = 90 kg
दिया है: T = Mg = 90 × 9.8 = 882.0 N
रेखीय द्रव्यमान घनत्व m = 8 × 10-3 kg m-1
∴ v = \(\sqrt { \frac { 882 }{ 8\times 10^{ -3 } } } \) = 3.32 × 102 ms-1
= 332 ms -1
धनात्मक x – दिशा में y विस्थापन वाली संचारित तरंग का समीकरण
y = A sin (ωt – kx) …………. (ii)
जहाँ ω = 2πv तथा
A = 5.0 cm = 0.05 m, v = 256 Hz
∴ ω = 2π × 256 s-1
= 16.1 × 102 = 1.61 × 103 s-1
=16.1 x 102 =1.61×103 5-1
पुनः
k = \(\frac { \omega }{ v } \) = \(\frac { 2\pi \times 256 }{ 3.32\times 10^{ 2 } } \)
= \(\frac { 1607.7 }{ 3.32\times 10^{ 2 } } \)
= \(\frac { 16.1\times 10^{ 2 }radm^{ -1 } }{ 3.32\times 10^{ 2 } } \)
= 4.84 m-1
समी० (ii) में ω1A तथा k के मान रखने पर,
y = 0.05 sin (1.6 × 103t – 4.84)

प्रश्न 15.25.
किसी पनडुब्बी से आबद्ध कोई ‘सोनार’ निकाय 40.0 KHz आवृत्ति पर प्रचालन करता है। कोई शत्रु-पनडुब्बी 360 kmh-1 चाल से इस सोनार की ओर गति करती है। पनडुब्बी से परावर्तित ध्वनि की आवृत्ति क्या है? जल में ध्वनि की चाल 1450 ms-1 लीजिए।
उत्तर:
दिया है: जल में ध्वनि की चाल v = 1450 ms-1
शत्रु पनडुब्बी की चाल v1 = 1360 kmh-1
= 360 × \(\frac{5}{18}\) = 100 ms-1
सोनार द्वारा प्रेषित तरंग की आवृत्ति
ω = 40 kHz
माना शत्रु पनडुब्बी द्वारा ग्रहण आवृत्ति v1 है।
स्पष्ट है: श्रोता का वेग v0 = v1 = 100 ms-1
∴ आवृत्ति v1 = v(\(\frac { v+v_{ 0 } }{ v } \))
= 40 (\(\frac { 140+100 }{ 1450 } \))
= 42.75 kHz = 43 kHz
शत्रु पगडुब्दी इस आवृत्ति की तरंगों को परावर्तित करती है। माना सोनार द्वारा ग्रहण आवृत्ति n2 है।
इस स्थिति में, स्त्रोत सोनार की ओर vs = 100 ms-1 के वेग से गति करता है।
∴ v2 = v1(\(\frac { v }{ v-v_{ s } } \))
= 42.75 (\(\frac { 1450 }{ 1450-100 } \)) = 46 kHz

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प्रश्न 15.26.
भूकम्प पृथ्वी के भीतर तरंगें उत्पन्न करते हैं। गैसों के विपरीत, पृथ्वी अनुप्रस्थ (S) तथा अनुदैर्ध्य (P) दोनों प्रकार की तरंगों की अनुभूति कर सकती है। S तरंगों की प्रतिरूपी चाल लगभग 4.0 kms-1तथा P तरंगों की प्रतिरूपी चाल लगभग 8.0 kms-1 है। कोई भूकंप-लेखी किसी भकंप की P तथा S तरंगों को रिकॉर्ड करता है। पहली P तरंग पहली S तरंग की तुलना में 4 मिनट पहले पहुँचती है। यह मानते हुए कि तरंगें सरल रेखा में गमन करती हैं यह ज्ञात कीजिए कि भूकंप घटित होने वाले स्थान की दूरी क्या है?
उत्तर:
दिया है: S तरंगों की चाल
v1 = 4 km s-1
= 4 × 60 = 240 km/min
P तरंगों की चाल V2 = 8 kms-1
= 480 km/min
अत: S तरंगों का भूकंप लेखी तक पहुँचने में लगा समय
t1 = \(\frac { x }{ u_{ 1 } } \) = \(\frac{n}{240}\) मिनट व P तरंगों का भूकंप लेखी तक पहुँचने में लगा समय
t2 = \(\frac { x }{ v_{ 2 } } \) = \(\frac{x}{480}\) मिनट
अतः t1 = 2t2
प्रश्नानुसार P तरंगें, Q तरंगों से भूकंप लेखी तक 4 मिनट पहले पहुँचती हैं।
t1 – t2 = 4 मिनट
या 2t2 – t2 = 4
∴ t2 = 4 मिनट
∴ दूरी x = 480 × 4
= 1920 km

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प्रश्न 15.27.
कोई चमगादड़ किसी गुफा में फड़फड़ाते हुए पराश्रव्य ध्वनि उत्पन्न करते हुए उड़ रहा है। मान लीजिए चमगादड़ द्वारा उत्सर्जित पराश्रव्य ध्वनि की आवृत्ति 40 kHz है। किसी दीवार की ओर सीधा तीव्र झपट्टा मारते समय चमगादड़ की चाल ध्वनि की चाल की 0.03 गुनी है। चमगादड़ द्वारा सुनी गई दीवार से परावर्तित ध्वनि की आवृत्ति क्या है?
उत्तर:
दिया है:
उत्सर्जित तरंग की आवृत्ति v = 40 kHz
माना ध्वनि की चाल = v
चमगादड़ की चाल v1 = 0.03v माना दीवार द्वारा ग्रहण की गई तरंग की आगामी आवृत्ति v1 है।
इस स्थिति में श्रोता की ओर गतिमान है तथा श्रोता स्थिर है।
∴ v1 = v (\(\frac { v }{ v-v_{ s } } \))
= 40 (\(\frac { v }{ v-0.03v } \)) kHz
= 41.24 kHz
v1 = 41.24 kHz आवृत्ति की तरंगें दीवारसे टकराकर चमगादड़ की ओर वापस लौटती हैं।
माना चमगादड़ द्वारा ग्रहण की गई तरंगो की आवृत्ति v2 इस स्थिति में, श्रोता, स्थिर स्त्रोत की ओर गतिमान है।
∴ v2 = v1 (\(\frac { v+v_{ 0 } }{ v } \))
= 41.24 (\(\frac { v+0.03v }{ v } \))
= 42.47 kHz
इस प्रकार चमगादड़ द्वारा ग्रहण की गई परावर्तित ध्वनि की आवृत्ति 42.47 kHz है।

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MP Board Class 11th Chemistry Solutions Chapter 12 कार्बनिक रसायन : कुछ आधारभूत सिद्धान्त तथा तकनीकें

MP Board Class 11th Chemistry Solutions Chapter 12 कार्बनिक रसायन : कुछ आधारभूत सिद्धान्त तथा तकनीकें

कार्बनिक रसायन : कुछ आधारभूत सिद्धान्त तथा तकनीकें NCERT अभ्यास प्रश्न

प्रश्न 1.
निम्नलिखित यौगिकों में प्रत्येक कार्बन पर संकरण अवस्था ज्ञात कीजिए –
(a) CH2 = C = O
(b) CH3 – CH = CH2
(c) (CH3)2CO
(d) CH2 = CH – CN2
(e) C6H6
उत्तर:
MP Board Class 11th Chemistry Solutions Chapter 12 कार्बनिक रसायनकुछ आधारभूत सिद्धान्त तथा तकनीकें - 6

प्रश्न 2.
MP Board Class 11th Chemistry Solutions Chapter 12 कार्बनिक रसायनकुछ आधारभूत सिद्धान्त तथा तकनीकें - 7
(d) CH2 = C = CH2
(e) CH3NO2
(f) HCONHCH3
उत्तर:
MP Board Class 11th Chemistry Solutions Chapter 12 कार्बनिक रसायनकुछ आधारभूत सिद्धान्त तथा तकनीकें - 8

प्रश्न 3.
निम्नलिखित यौगिकों के आबन्ध रेखा-सूत्र लिखिए –
(a) Isopropyl alcohol
(b) 2, 3-Dimethylbutanal
(c) Heptan – 4 – one.
OH
उत्तर:
MP Board Class 11th Chemistry Solutions Chapter 12 कार्बनिक रसायनकुछ आधारभूत सिद्धान्त तथा तकनीकें - 9

प्रश्न 4.
निम्नलिखित यौगिकों के IUPAC में नाम लिखिए –
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उत्तर:
(a) Propylbenzene
(b) 3 – Methylpentanenitrile
(c) 2, 5-Dimethylheptane
(d) 3 – Bromo – 3 – chloroheptane
(e) 3 – Chloropropanal
(f) 2, 2 – Dichloroethanol.

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प्रश्न 5.
निम्नलिखित यौगिकों में से कौन – सा नाम IUPAC के अनुसार सही है –
(a) 2, 2 – Diethylpentane अथवा 2 – Dimethylpentane
(b) 2, 4, 7 – Trimethyloctane अथवा 2, 5, 7 – Trimethy-loctane
(c) 2 – Chloro – 4 – methylpentane अथवा 4 – Chloro – 2,2 – methylpentane
(d) But – 3 – yn – 1 – ol अथवा But – 4 – 0l – 1 – yne.
उत्तर:
टीप-सर्वप्रथम दिये गए नाम से संरचना बना लें, फिर नियमों के अनुसार नाम दें, यदि वही नाम आता है तो सही है अन्यथा गलत है।
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3-Ethyl-3-methylhexane होना चाहिए, अतः दिया गया नाम गलत है। 2-Dimethylpentane यह गलत है। (यहाँ Dimethyl प्रतिस्थापियों की संख्या दो होनी चाहिए, जो नहीं है।)
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MP Board Class 11th Chemistry Solutions Chapter 12 कार्बनिक रसायनकुछ आधारभूत सिद्धान्त तथा तकनीकें - 14
∴ अंकन दायीं तरफ से होना चाहिए था। अत: But – 3 – yn – 1 – ol सही है।

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प्रश्न 6.
निम्नलिखित दो सजातीय श्रेणियों में से प्रत्येक के प्रथम पाँच सजातों के संरचना सूत्र लिखिए –
(a) कार्बोक्सिलिक अम्ल / एल्केनोइक अम्ल
(b) एस्टर
(c) एल्कीन।
उत्तर:
(a) कार्बोक्सिलिक अम्ल / एल्केनोइक अम्ल (Carboxylic acid/Alkanoic acid) –

  • HCOOH
  • CH3COOH
  • CH3 – CH2 – COOH
  • CH3 – CH2 – CH2 – COOH
  • CH3 – CH2 – CH2 – CH2 – COOH

(b) एस्टर (Esters)

  • CH3COOCH3
  • CH2CH2COOCH3
  • CH2CH2COOCH CH3
  • CH2CH2CH2COOCHCH3
  • CH3CH2CH2COOCH2CH2CH3

(c) एल्कीन (Alkenes)

  • CH2 = CH2
  • CH2CH = CH2
  • CH3CH2CH = CH2
  • CH3CH2CH2CH = CH2
  • CH2CH = CHCH2CH2CH3.

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प्रश्न 7.
निम्नलिखित के संघनित और आबन्ध रेखा-सूत्र लिखिए तथा उनमें यदि क्रियात्मक समूह हो, तो उसे पहचानिए –
(a) 2, 2, 4 – Trimethylpentane
(b) 2 – Hydroxy – 1, 2, 3 – propanetricarboxylic acid
(c) Hexanedial.
उत्तर:
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MP Board Class 11th Chemistry Solutions Chapter 12 कार्बनिक रसायनकुछ आधारभूत सिद्धान्त तथा तकनीकें - 16
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प्रश्न 8.
निम्नलिखित यौगिकों में क्रियात्मक समूह पहचानिए –
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उत्तर:
(a) क्रियात्मक समूह –

  • – CHO (Aldehyde)
  • – OMe (Ether)
  • – OH (Phenolic)

(b) क्रियात्मक समूह –

  • Amino
  • N, N-Diethylpropanoate,

(c) क्रियात्मक समूह –

1. COCl (Acid chloride)
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(d) क्रियात्मक समूह – एथिलीनिक द्विबन्ध, नाइट्रो।

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प्रश्न 9.
निम्न में कौन अधिक स्थायी है तथा क्यों –
O2NCH2CH2O, CH3CH2O
उत्तर:
– CH3 – CH2O की तुलना में O2N – CH2
CH2O अधिक स्थायी होता है क्योंकि – NO2 समूह – I प्रभाव प्रदर्शित करता है। जिसके कारण ऋणावेश विरल होता है। दूसरी ओर – CH3समूह +I प्रभाव प्रदर्शित करता है, जिसके कारण ऋणावेश सघन हो जाता है। आवेश के विरल हो जाने के कारण आयन का स्थायित्व बढ़ता है जबकि, ऋणावेश के सघन हो जाने के कारण आयन का स्थायित्व घटता है।
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प्रश्न 10.
निकाय से आबन्धित होने पर ऐल्किल समूह इलेक्ट्रॉन दाता की तरह व्यवहार प्रदर्शित क्यों करते हैं ? समझाइए।
उत्तर:
ऐल्किल समूह में कोई एकाकी इलेक्ट्रॉन युग्म नहीं होता है परन्तु 7 – इलेक्ट्रॉन तंत्र से जुड़ने पर अतिसंयुग्मन के कारण इलेक्ट्रॉन दाता के समान व्यवहार करता है। हम इसे टॉलुईन द्वारा दिखाते हैं, जिसमें मेथिल (CH3) समूह एकान्तर स्थितियों में तीन पाई (ooo) इलेक्ट्रॉन सहित बेंजीन वलय से जुड़ा होता है। विभिन्न अनुनादी संरचनाएँ निम्न हैं –
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प्रश्न 11.
निम्नलिखित यौगिकों की अनुनादी संरचना लिखिए तथा इलेक्ट्रॉनों का विस्थापन मुड़े तीरों की सहायता से दर्शाइए –
(a) C6H5 \(\stackrel{\ominus}{\mathbf{C}} \mathbf{H}_{2}\)
(b) C6H5OH
(c) C6H5NO2
(d) C6H5CH = O
(e) CH3 – CH = CH – CH = O
(f) CH3 – CH = CH – \(\stackrel{\ominus}{\mathbf{C}} \mathbf{H}_{2}\)
उत्तर:
(a) C6H5\(\stackrel{\ominus}{\mathbf{C}} \mathbf{H}_{2}\) में
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(b) C6H5OH में
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(c) C6H5NO2 में
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(d) C6H5CH = O में
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(e) CH3 – CH = CH – CH=0 में
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(1) CH3 – CH = CH – \(\stackrel{\ominus}{\mathbf{C}} \mathbf{H}_{2}\) में
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प्रश्न 12.
इलेक्ट्रॉन स्नेही तथा नाभिक स्नेही क्या है ? उदाहरण सहित समझाइए।
उत्तर:
इलेक्ट्रॉन स्नेही अभिकर्मक-वे अभिकर्मक जो इलेक्ट्रॉन के प्रति बंधुता रखते हैं, इलेक्ट्रॉन स्नेही अभिकर्मक कहलाते हैं। सभी धनावेशित आयन या ऐसे उदासीन अणु जो एक या एक से अधिक एकाकी इलेक्ट्रॉन युग्म ग्रहण कर सकते हैं। ये उस स्थान पर आक्रमण करते हैं, जहाँ इलेक्ट्रॉन घनत्व उच्च होता है।
धनावेशित इलेक्ट्रॉन स्नेही अभिकर्मक – NH4+H3O+, Br+, Ci+,NO2+
उदासीन इलेक्ट्रॉन स्नेही अभिकर्मक – BF3,AlCl3,FeCl3

नाभिक स्नेही अभिकर्मक:
वे अभिकर्मक जो नाभिक के द्वारा आकर्षित होते हैं या नाभिक के प्रति बंधुता रखते हैं नाभिक स्नेही अभिकर्मक कहलाते हैं। ये सामान्यतः ऋण आवेशित आयन या ऐसे उदासीन अणु होते हैं, जिनके पास एक या एक से अधिक एकाकी इलेक्ट्रॉन युग्म होते हैं। ये उस स्थान पर आक्रमण करते हैं, जहाँ इलेक्ट्रॉन घनत्व कम होता है।

ऋणावेशित नाभिक स्नेही अभिकर्मक –
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उदासीन नाभिक स्नेही अभिकर्मक –
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प्रश्न 13.
निम्नलिखित समीकरणों में रेखांकित अभिकर्मकों को नाभिक स्नेही तथा इलेक्ट्रॉन स्नेही में वर्गीकृत कीजिए –
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उत्तर:

  • HO → नाभिक स्नेही है।
  • CN → नाभिक स्नेही है।
  • CH3 \(^{\oplus} \mathrm{C} \mathrm{O}\) → इलेक्ट्रॉन स्नेही है।

प्रश्न 14.
निम्नलिखित अभिक्रियाओं को वर्गीकृत कीजिए –
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(c) CH3 – CH2 – Br + OH → CH2 = CH2 + H2O + Br
(d) (CH3 )3 C – CH2 OH + HBr → (CH3 )2 CBrCH2 CH3 + H2O.
उत्तर:
(a) नाभिक स्नेही प्रतिस्थापन अभिक्रिया।
(b) नाभिक स्नेही योगात्मक अभिक्रिया
(c) विलोपन अभिक्रिया
(d) पुनर्विन्यास के साथ नाभिक स्नेही प्रतिस्थापन अभिक्रिया।

प्रश्न 15.
निम्नलिखित युग्मों में सदस्य-संरचनाओं के मध्य कैसा संबंध है? क्या वे संरचनाएँ संरचनात्मक या ज्यामिति समावयव अथवा अनुनादी संरचनाएँ हैं –
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उत्तर:
(a) संरचनात्मक समावयव (क्रियात्मक समूह की स्थिति में भिन्न)
(b) ज्यामितीय समावयव
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(c) अनुनाद संरचनाएँ (इलेक्ट्रॉनों की स्थिति भिन्न है, परन्तु परमाणुओं की नहीं)।

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प्रश्न 16.
निम्नलिखित आबन्ध विदलनों के लिये इलेक्ट्रॉन विस्थापन को मुड़े तीरों द्वारा दर्शाइए तथा प्रत्येक विदलन को समांश अथवा विषमांश में वर्गीकृत कीजिये। साथ ही निर्मित सक्रिय मध्यवर्ती उत्पादों में मुक्त मूलक, कार्ब-धनायन तथा कार्ब – ऋणायन पहचानिए –
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उत्तर:
MP Board Class 11th Chemistry Solutions Chapter 12 कार्बनिक रसायनकुछ आधारभूत सिद्धान्त तथा तकनीकें - 33आबन्ध विदलन-समांश आबन्ध विदलन। प्राप्त सक्रिय मध्यवर्ती मुक्त मूलक है।
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आबन्ध विदलन-विषमांश आबन्ध विदलन। प्राप्त सक्रिय मध्यवर्ती कार्ब-ऋणायन है।
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आबन्ध विदलन-विषमांश आबन्ध विदलन। प्राप्त सक्रिय मध्यवर्ती कार्ब-धनायन है।
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आबन्ध विदलन-विषमांश आबन्ध विदलन। प्राप्त सक्रिय मध्यवर्ती कार्ब-ऋणायन है।

प्रश्न 17.
निम्नलिखित कार्बोक्सिलिक अम्लों की अम्लता का सही क्रम, कौन-सा इलेक्ट्रॉन विस्थापन वर्णित करता है ? प्रेरणिक तथा इलेक्ट्रोमेरिक प्रभावों की व्याख्या कीजिए –
(a) Cl3 CCOOH >CI2 CHCOO > CICH2COOH
(b) CH3 – CH2 – COOH>(CH3 )2 CHCOOH> (CH3)3 C – COOH.
उत्तर:
(a) प्रेरणिक प्रभाव:
संतृप्त कार्बन श्रृंखला के छोर पर इलेक्ट्रॉनग्राही या दाता परमाणु उपस्थित हो तब (σ) सिग्मा इलेक्ट्रॉन का बहाव होता है। संतृप्त कार्बन श्रृंखला में यह σ इलेक्ट्रॉन गति प्रेरणिक प्रभाव कहलाता है। प्रेरणिक प्रभाव शृंखला बढ़ने से पहले घटता है। तीन चार कार्बन परमाणु के बाद प्रेरणिक प्रभाव खत्म हो जाता है। प्रेरणिक प्रभाव दो प्रकार का होता है।

1. यदि श्रृंखला के अंत में इलेक्ट्रॉनग्राही परमाणु जुड़ा होता है तब -I प्रेरणिक प्रभाव उत्पन्न होता है।
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-I प्रेरणिक प्रभाव निम्न क्रम में घटता है –
NO,> – CN > – COOH >- F > – Cl>- Br >- I

2. यदि श्रृंखला के अन्त में इलेक्ट्रॉनदाता परमाणु जुड़ा होता है तथा + I प्रेरणिक प्रभाव उत्पन्न होता है।
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यह प्रभाव निम्न क्रम में घटता है –
(CH3)3C – >(CH3)2CH – >CH3 – CH2 – >CH3 – >D > H
यह प्रभाव स्थायी है इस प्रभाव के कारण अणुओं के उच्च क्वथनांक, गलनांक और द्विआघूर्ण ध्रुवण होता है।

(b) इलेक्ट्रोमेरिक प्रभाव-यह एक अस्थायी प्रभाव है। केवल आक्रमणकारी अभिकारकों की उपस्थिति में यह प्रभाव बहुआबंध वाले कार्बनिक यौगिकों में प्रदर्शित होता है, इसमें आक्रमण करने वाले अभिकारक की माँग के कारण बहु-आबंध से बंधित परमाणुओं में एक सहभाजित 7 – इलेक्ट्रॉन युग्म का पूर्ण विस्थापन होता है यह प्रभाव दो प्रकार का होता है।
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+E और -E प्रभाव – यदि बहुआबंध के -इलेक्ट्रॉनों का स्थानांतरण उस परमाणु पर होता है, जिससे आक्रमणकारी अभिकर्मक बंधित होता है + E प्रभाव कहलाता है, उदाहरणार्थ
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यदि बहुआबंध के π – इलेक्ट्रॉनों का स्थानांतरण उस परमाणु पर होता है, जिससे आक्रमणकारी अभिकर्मक बंधित नहीं होता है, – E प्रभाव कहलाता है।
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प्रश्न 18.
प्रत्येक का एक उदाहरण देते हुए निम्नलिखित प्रक्रमों के सिद्धान्तों का संक्षिप्त विवरण दीजिए –
(a) क्रिस्टलन
(b) आसवन
(c) क्रोमैटोग्राफी।
उत्तर:
(a) क्रिस्टलन:
इस विधि में अशुद्ध यौगिक का शुद्ध क्रिस्टलों में रूपांतरण होता है। यह किसी उचित विलायक में यौगिक तथा अशुद्धि की विलेयताओं में अंतर पर आधारित है। अशुद्ध यौगिक को किसी ऐसे विलायक में घोलते हैं जिससे यौगिक सामान्य ताप पर अल्प विलेय होता है, परन्तु उच्चतर ताप पर यथेस्ट मात्रा में घुल जाता है।

इसके पश्चात् विलयन को इतना सांद्रित करते हैं कि वह लगभग संतृप्त हो जाए। विलयन को ठंडा करने पर शुद्ध पदार्थ क्रिस्टलीय हो जाता है। उदाहरण – आयोडोफॉर्म, एल्कोहॉल के साथ क्रिस्टलित हो जाता है। नैफ्थ्लीन के साथ मिश्रित बेंजोइक अम्ल गर्म जल द्वारा शोधित हो जाता है।

(b) आसवन:
इस विधि में अशुद्ध द्रव को गर्म करके वाष्प में बदलते हैं तथा पुनः वाष्प को ठंडा करके द्रव में बदलते है। यह विधि केवल ऐसे द्रवों के शोधन के लिए उपयुक्त है, जो वायुमण्डलीय दाब पर बिना अपघटित हुए उबलते हैं तथा जिनमें अवाष्पशील अशुद्धियाँ मिली हुई हो। ऐसे दो द्रव, जिनके क्वथनांकों मे पर्याप्त अंतर हो, का पृथक्करण एवं शोधन भी इस विधि द्वारा कर सकते हैं।

उदाहरण के लिए, क्लोरोफॉर्म (क्वथनांक 334 K) तथा ऐनिलीन (क्वथनांक 457 K), आसवन विधि द्वारा सरलतापूर्वक पृथक् किए जाते हैं। उबालने पर, कम क्वथनांक वाले द्रव की वाष्प पहले बनती है, अतः इसे ठंडा करके पहले ग्राही में एकत्रित कर लिया जाता है।

(c) क्रोमैटोग्राफी (वर्णलेखन):
वर्णलेखन, यह मिश्रण के अवयवों के पृथक्करण, शुद्धिकरण तथा पहचान की विधि है। यह मिश्रण के अवयवों के दो प्रावस्था तथा गतिशील प्रावस्था पर विशिष्ट अधिशोषण के सिद्धांत पर आधारित है। स्थिर प्रावस्था ठोस या द्रव हो सकती है जबकि गतिशील प्रावस्था द्रव या गैस होती है।

अधिशोषण वर्णलेखन के प्रकार:

  • स्तंभ वर्णलेखन
  • पतली परत वर्णलेखन
  • वितरण वर्णलेखन।

स्तंभ वर्णलेखन में, स्थिर प्रावस्था ठोस तथा गतिशील प्रावस्था विभिन्न ध्रुवता के विलायकों का मिश्रण होती है। ठोस अधिशोषण को किसी उचित अध्रुवीय विलायक के साथ उपयुक्त लम्बाई की लंबी काँच की नली में लेते हैं। पृथक् तथा शुद्ध करने वाले कार्बनिक मिश्रण के सान्द्र विलयन की कुछ मात्रा को स्तम्भ के ऊपरी भाग में अधिशोषित कर देते हैं। विभिन्न यौगिकों के अधिशोषण की मात्रा के आधार पर उनका पृथक्करण हो जाता है। मिश्रण के अवयवों को अलग-अलग परतों, जिन्हें बैण्ड (क्रोमैटोग्राम) कहते हैं, के रूप में पृथक् कर लेते हैं।

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प्रश्न 19.
ऐसे दो यौगिक, जिनकी विलेयताएँ विलायक S से भिन्न है, को पृथक् करने की विधि की व्याख्या कीजिए।
उत्तर:
दो यौगिक जिनकी घुलनशीलता अलग:
अलग होती है, को प्रभाजी आसवन विधि द्वारा अलग किया जाता है। ऐसे द्रवों के वाष्प इसी तप्त परास में बन जाते हैं तथा साथ-साथ संघनित हो जाते हैं। ऐसी अवस्था में प्रभाजी आसवन का उपयोग किया जाता है। जब गर्म विलयन को ठंडा किया जाता है, तब कम घुलनशील पदार्थ क्रिस्टल के रूप में बाहर आ जाता है, तथा अधिक घुलनशील द्रव में (विलयन) रह जाता है। दोबारा गर्म कर दूसरे का क्रिस्टलन किया जाता है।

प्रश्न 20.
निम्न दाब पर आसवन तथा भाप आसवन में क्या अन्तर है ? विवेचना कीजिए।
उत्तर:
निम्न दाब पर आसवन:
यह विधि उन कार्बनिक द्रवों के लिए उपयुक्त है, जो अपने क्वथनांक से पूर्ण ताप पर ही अपघटित हो जाते हैं। किसी द्रव का वाष्पदाब वायुमण्डलीय दाब के बराबर होने पर यह उबलने लगता है। ऐसे द्रवों के पृष्ठ पर कम दाब करके उनके क्वथनांक से कम ताप पर उबाला जाता है। दाब कम करने के लिए जल पम्प अथवा निर्वात् पम्प का प्रयोग करते हैं। साबुन उद्योग में सह-उत्पाद, शेष लाई से ग्लिसरॉल को इस विधि द्वारा पृथक् करते हैं।

भाप आसवन:
यह जल के साथ सहसंघनन की विधि है। यह विधि उन पदार्थों के शोधन के लिए उपयुक्त है जो भाप वाष्पशील हो, परन्तु जल में अमिश्रणीय हो। ऐनिलीन को ऐनिलीन जल मिश्रण से इस विधि द्वारा पृथक करते हैं । इस विधि में कार्बनिक द्रव के वाष्प दाब (P1) तथा जल को वाष्प दाब (P2) का योग वायुमण्डलीय दाब (P) के बराबर होने पर द्रव उबलता है (अर्थात् P = P1 + P2) चूँकि P का मान P से कम है। अतः द्रव अपने क्वथनांक से कम ताप पर ही वाष्पित हो जाता है।

प्रश्न 21.
लैसेग्ने-परीक्षण का रसायन-सिद्धान्त समझाइए।
उत्तर:
लैसेग्ने निष्कर्ष का निर्माण:
सर्वप्रथम कार्बनिक यौगिक को संलयन नलिका में सोडियम धातु के साथ संगलित करते हैं। लाल तप्त नलिका को आसुत जल में तोड़कर गर्म करके, छान लेते हैं। छनित लैसेग्ने निष्कर्ष कहलाता है। यह दिए गए कार्बनिक यौगिक में N, S तथा हैलोजन की पहचान में प्रयुक्त होता है।

नाइट्रोजन का परीक्षण:
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लैसेग्ने निष्कर्ष को फेरस सल्फेट विलयन के साथ गर्म करके सान्द्र H2SO4 के साथ अम्लीकृत करने पर निम्न अभिक्रियाएँ होती हैं –
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गर्म करने पर कुछ Fe2+ आयन Fe3+ आयनों में ऑक्सीकृत हो जाते है।
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प्रशियन ब्लू रंग की उपस्थिति, यौगिक में नाइट्रोजन की उपस्थिति को दर्शाती है।
नाइट्रोजन तथा सल्फर संयुक्त परीक्षण:
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सोडियम थायोसायनेट सोडियम थायोसायनेट रक्त जैसा लाल रंग देता है तथा नाइट्रोजन के परीक्षण की भाँति प्रशियन ब्लू रंग उत्पन्न नहीं होता है, क्योंकि इस क्रिया में मुक्त सायनाइड आयन उपस्थित नहीं होते हैं।
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सल्फर का परीक्षण –
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1. लेड एसीटेड को लैसेग्ने निष्कर्ष में मिलाकर, ऐसीटिक अम्ल के साथ अम्लीकृत करने पर, PbS का काला अवक्षेप प्राप्त होता है।
Na2S + (CH3COO)2 Pb → PbS + 2CH3COONa
2. सोडियम नाइट्रोप्रुसाइड विलयन को जैसेग्ने निष्कर्ष में मिलाने पर, सोडियम थायोनाइट्रोप्रसाइड बनने के कारण बैंगनी रंग उत्पन्न होता है।
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हैलोजनों का परीक्षण:
यदि लैसेग्ने निष्कर्ष में N तथा S उपस्थित हो तो सर्वप्रथम इसे सान्द्र HNO3 के साथ गर्म करके यौगिक में उपस्थित सोडियम सायनाइट या सोडियम सल्फाइट को अपघटित करते हैं, अन्यथा ये आयन हैलोजन के सिल्वर नाइट्रेट परीक्षण में बाधा उत्पन्न करते हैं।
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विलयन को ठंडा करते हैं तथा इसमें AgNO3 विलयन का कुछ मात्रा डालते हैं तथा निम्न प्रेक्षण देखते हैं –
1. यदि सफेद अवक्षेप (AgCl) प्राप्त होता है जो NH3(aq) में विलेय परन्तु HNO3में अविलेय हो तो कार्बनिक यौगिक में क्लोरीन उपस्थित है।
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2. यदि हल्का पीला अवक्षेप (AgBr) प्राप्त होता है जो अमोनियम हाइड्रॉक्साइड विलयन में अल्पविलेय हो तो कार्बनिक यौगिक में ब्रोमीन की पुष्टि होती है।
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3. यदि पीला अवक्षेप (Agl) प्राप्त हो जो अमोनियम हाइड्रॉक्साइड में अविलेय हो तो कार्बनिक यौगिक में आयोडिन की पुष्टि होती है।
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प्रश्न 22.
किसी कार्बनिक यौगिक में नाइट्रोजन के आकलन की –
1. ड्यूमा विधि तथा
2. जेल्डॉल विधि के सिद्धान्त की रूप-रेखा प्रस्तुत कीजिए।
उत्तर:
1. ड्यूमा विधि से नाइट्रोजन के आकलन:
इस विधि का उपयोग उन सभी कार्बनिक यौगिकों के लिए होता है जो नाइट्रोजन तत्व रखते हैं। इस विधि में नाइट्रोजन युक्त कार्बनिक यौगिक को कार्बन डाइऑक्साइड के साथ गर्म करने पर नाइट्रोजन मुक्त होती है। कार्बन तथा हाइड्रोजन क्रमशः कार्बन डाइऑक्साइड एवं जल में परिवर्तित हो जाते हैं।
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माना कार्बनिक यौगिक का द्रव्यमान =M gm
नाइट्रोजन का आयतन = V2 ml
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2. जेल्डॉल विधि से नाइट्रोजन के आकलन:
इस विधि में नाइट्रोजन युक्त यौगिक को सान्द्र सल्फ्यूरिक अम्ल के साथ गर्म किया जाता है। फलस्वरूप यौगिक नाइट्रोजन अमोनियम सल्फेट में परिवर्तित हो जाती है। तब प्राप्त अम्लीय मिश्रण को सोडियम हाइड्रॉक्साइड के आधिक्य के साथ गर्म करने पर अमोनिया मुक्त होती है।

जिसे मानक सल्फ्यूरिक अम्ल विलयन के ज्ञात आयतन में अवशोषित कर लिया जाता है। इसके बाद अवशिष्ट सल्फ्यूरिक अम्ल को क्षार के मानक विलयन द्वारा अनुमापित कर लिया जाता है। अम्ल की प्रारंभिक मात्रा और अभिक्रिया के बाद शेष मात्रा के बीच अंतर से अमोनिया के साथ अभिकृत अम्ल की मात्रा प्राप्त होती है।
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प्रश्न 23.
किसी यौगिक में हैलोजन, सल्फर तथा फॉस्फोरस के आकलन के सिद्धान्त की विवेचना कीजिए।
उत्तर:
1. हैलोजन का आकलन:
कार्बनिक यौगिक की निश्चित मात्रा को केरियस नली में लेकर सिल्वर नाइट्रेट की उपस्थिति में सधूम नाइट्रिक अम्ल के साथ भट्ठी में गर्म किया जाता है। यौगिक में उपस्थित कार्बन तथा हाइड्रोजन इन परिस्थितियों में क्रमशः कार्बन डाइऑक्साइड तथा जल में ऑक्सीकृत हो जाते हैं, जबकि हैलोजन संगत सिल्वर हैलाइड AgX में परिवर्तित हो जाता है।
1 मोल AgX = 1 मोल X
mg AgX में हैलोजन का द्रव्यमान
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2. सल्फर का आकलन:
इस विधि में सल्फर को H2SO4 में बदलकर अवक्षेप के रूप में बदलते हैं, जो BaCl2 में संभव है।
C+ 2O → CO2
2H + O → H2O
S + H2O + 3O → H2SO4
H2SO4 + BaCl2 → BaSO4 + 2HCl
BaSO4 अवक्षेप को धोकर सुखाते हैं और S का % ज्ञात करते हैं।
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3. फॉस्फोरस का आकलन:
कार्बनिक यौगिक की एक ज्ञात मात्रा को सधुम नाइट्रिक अम्ल के साथ गर्म करने पर उसमें उपस्थित फॉस्फोरस, फॉस्फोरिक अम्ल में ऑक्सीकृत हो जाता है। इसे अमोनिया तथा अमोनियम मॉलिब्डेट मिलाकर अमोनियम फॉस्फोमॉलिब्डेट (NH4)3 PO12MoO3 के रूप में अवक्षेपित करते हैं। या फॉस्फोरिक अम्ल में मैग्नीशियम मिश्रण मिलाकर Mg2NH4PO4 के रूप में अवक्षेपित किया जा सकता है। जिसके ज्वलन से Mg2P2O7 प्राप्त होता है।
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प्रश्न 24.
पेपर क्रोमैटोग्राफी के सिद्धान्त को समझाइए।
उत्तर:
किसी भी पदार्थ का वितरण दो अलग-अलग प्रावस्थाओं में, जो एक-दूसरे के संपर्क में होती हैं, अलग-अलग होता है। यह वितरण, वितरण नियम का पालन करते हुए होता है। पेपर क्रोमैटोग्राफी इसका उदाहरण है। फिल्टर पेपर के समान अत्यंत महीन सरंध्र पेपर होता है जिसे क्रोमैटोग्राफी पेपर कहा जाता है। यह पेपर स्थिर प्रावस्था प्रदान करता है।

कार्ड बोर्ड यदि इस पेपर के एक सिरे को किसी उपयुक्त विलायक या विलायक के मिश्रण में डुबो दिया जाये तो केशिका क्रिया द्वारा विलायक ऊपर चढ़ने लगता है, यह चलित प्रावस्था होती है। अब कोई पदार्थ इस चलित द्रव प्रावस्था तथा क्रोमैटोग्राफी पेपर जिसमें 6 जल उपस्थित है तथा स्थिर द्रव प्रावस्था निर्मित करता है, इन दो प्रावस्थाओं में विलायक वितरण नियमानुसार वितरित होता है।

मिश्रण में अलग-अलग घटकों का वितरण अलग-अलग होने के कारण घटक अलग – अलग दूरी तय करते हुए ऊपर चढ़ते हैं, इस प्रकार निरंतरता से होने वाले वितरण के तहत हम घटकों का पृथक्करण कर पाते हैं। पेपर क्रोमैटोग्राफी के लिये क्रोमैटोग्राफी पेपर अलग-अलग आकार में लिया जा सकता है। एक फीते के रूप में तथा बेलनाकार आवरण के रूप में लिये जाने वाले पेपर को चित्र में प्रदर्शित किया गया है।

जिन घटकों का पृथक्करण करना है, उनके मिश्रण का एक धब्बा पेपर के एक सिरे में कुछ ऊपर लगाते हैं तथा उस सिरे को उपयुक्त विलायक में डुबाते हैं। कुछ समय पश्चात् हम देखते हैं कि घटक दो प्रावस्थाओं के बीच वितरण के आधार पर ऊपर चढ़कर अलग-अलग दूरी पर पृथक् हो जाते हैं।
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प्रश्न 25.
सोडियम संगलन निष्कर्ष में हैलोजन के परीक्षण के लिए AgNO3 मिलाने से पूर्व नाइट्रिक अम्ल क्यों मिलाया जाता है ?
उत्तर:
यदि कार्बनिक यौगिक में हैलोजन के अतिरिक्त S तथा N उपस्थित हैं तो सोडियम निष्कर्ष में उपस्थित NaCN तथा Na2S, सिल्वर नाइट्रेट के साथ अभिक्रिया करके अवक्षेप देते हैं और हैलोजन के परीक्षण में बाधा उत्पन्न नहीं करते हैं। लेकिन सोडियम निष्कर्ष में सांद्र HNO3 मिलाने से ये NaCN तथा Na2S अपघटित हो जाते हैं और परीक्षण में बाधा उत्पन्न नहीं करते हैं।
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प्रश्न 26.
N, S तथा P के परीक्षण के लिये Na के साथ कार्बनिक यौगिक का संगलन क्यों किया जाता है ?
उत्तर:
कार्बनिक यौगिक में उपस्थित नाइट्रोजन, सल्फर तथा हैलोजन सहसंयोजी अवस्था में होते हैं। अत: इनकी पहचान करना सरल नहीं है। धातु के साथ संगलन करने पर ये तत्व यूरिया या थायोयूरिया में बदल जाते हैं अर्थात् आयनिक रूप में बदल जाते हैं। आयनिक अवस्था में ये तत्व सरलता से आयनिक अभिक्रियाओं द्वारा पहचान लिये जाते हैं।

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प्रश्न 27.
CaSO4 तथा कपूर के मिश्रण के अवयवों को पृथक् करने के लिए एक उपयुक्त तकनीक बताइए।
उत्तर:
CaSO4 तथा कपूर के मिश्रण को ऊर्ध्वपातन तकनीक द्वारा पृथक् करते हैं क्योंकि कपूर ऊर्ध्वपातन है, जबकि CaSO4 नहीं। अतः मिश्रण को गर्म करने पर कपूर फनल की दीवारों पर एकत्रित होगा तथा CaSO4 क्रूसिबल में ही रह जायेगा।

प्रश्न 28.
भाप आसवन करने पर एक कार्बनिक द्रव अपने क्वथनांक से निम्न ताप पर वाष्पीकृत क्यों हो जाता है ?
उत्तर:
भाप आसवन विधि में, कार्बनिक द्रव तथा जल का मिश्रण कार्बनिक द्रव के वाष्प दाब (P1) तथा जल के वाष्प दाब (P2) के योग के वायुमंडलीय दाब (P) के बराबर हो जाने पर उबलता है, अर्थात् P = P1 + P2 चूँकि P की अपेक्षा P1 निम्न रहता है। अतः कार्बनिक द्रव अपने क्वथनांक से पूर्व ही निम्न ताप पर उबलने लगता है।

प्रश्न 29.
क्या CCl4 AgNO3 के साथ गर्म करने पर AgCl का सफेद अवक्षेप नहीं देता? कारण सहित समझाइए।
उत्तर:
CCl4, AgNO3 विलयन के साथ सफेद अवक्षेप नहीं देगा क्योंकि CCl4 एक सहसंयोजी यौगिक है। यह आयनित नही होता है, जिनके कारण AgCl का अवक्षेप बनने के लिए Cl आयन प्राप्त नहीं होता है।

प्रश्न 30.
किसी कार्बनिक यौगिक में C का आकलन करते समय उत्पन्न CO2 को अवशोषित करने के लिये KOH विलयन का उपयोग क्यों करते हैं ?
उत्तर:
KOH, CO2 गैस को अवशोषित कर K2CO3 (विलेय पदार्थ) में बदल जाता है।
2KOH + CO2 → K2CO3 + H2O(l)

प्रश्न 31.
लेड ऐसीटेट परीक्षण द्वारा S परीक्षण करते समय अम्ल के स्थान पर H2SO4 प्रयुक्त करना सलाह योग्य नहीं है। कारण बताइए।
उत्तर:
यदि H2SO4 का प्रयोग करते हैं तो लेड ऐसीटेट स्वयं H2SO4 के साथ क्रिया करके लेड सल्फेट का सफेद अवक्षेप देता है।
MP Board Class 11th Chemistry Solutions Chapter 12 कार्बनिक रसायनकुछ आधारभूत सिद्धान्त तथा तकनीकें - 139अत: PbSO4 का सफेद अवक्षेप सल्फर के निम्नलिखित परीक्षण को प्रभावित करेगा –
MP Board Class 11th Chemistry Solutions Chapter 12 कार्बनिक रसायनकुछ आधारभूत सिद्धान्त तथा तकनीकें - 140
परन्तु यदि ऐसिटिक अम्ल का प्रयोग किया जाये तो लेड ऐसीटेट के साथ क्रिया नहीं करता है, जिसके कारण यह परीक्षण में बाधा उत्पन्न नहीं करता है।

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प्रश्न 32.
एक कार्बनिक यौगिक में 69% कार्बन एवं 4.8% हाइड्रोजन पाया जाता है तथा शेष ऑक्सीजन होता है। CO2 तथा उत्पादित जल के भारों की गणना कीजिए जब इस यौगिक का 0.20 g पूर्ण दहन में आरोपित किया जाता है।
हल:
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MP Board Class 11th Chemistry Solutions Chapter 12 कार्बनिक रसायनकुछ आधारभूत सिद्धान्त तथा तकनीकें - 62

प्रश्न 33.
0. 50 g कार्बनिक यौगिक को जेल्डॉलीकृत किया गया है। उत्पन्न अमोनिया को 1 N H2SO4 के 50 cm3में प्रवाहित किया गया। अवशेषी अम्ल को N/2 NaOH विलयन के 60 cm3 की आवश्यकता होती है। यौगिक में नाइट्रोजन की प्रतिशत गणना कीजिए।
हल:
लिए गए अम्ल का आयतन = 50 mL – 0.5 M H2SO4
= 25 mL 1.0 M H2SO4
अम्ल की अधिकता को उदासीन करने में प्रयुक्त क्षार का आयतन
= 60 mL 0.5 M NaOH
= 30 mL 1.0 M NaOH
H2SO4 + 2NaOH + Na2SO4 + 2H2O
1 मोल H2SO 1 मोल NaOH
30 mL 1.0 M NaO H = 15 mL 1.OM H2SO4
अमोनिया द्वारा प्रयुक्त अम्ल का आयतन = 25 – 15 = 10mL
MP Board Class 11th Chemistry Solutions Chapter 12 कार्बनिक रसायनकुछ आधारभूत सिद्धान्त तथा तकनीकें - 63

प्रश्न 34.
केरियस आकलन में 0.3780g कार्बनिक क्लोरो यौगिक से 0-5740g सिल्वर क्लोराइड प्राप्त हुआ। यौगिक में Cl की % ज्ञात कीजिए।
हल:
MP Board Class 11th Chemistry Solutions Chapter 12 कार्बनिक रसायनकुछ आधारभूत सिद्धान्त तथा तकनीकें - 64

प्रश्न 35.
केरियस विधि द्वारा सल्फर के आकलन में 0.468 g सल्फर युक्त कार्बनिक यौगिक से 0.668g BaSO प्राप्त हुआ। दिये गये कार्बन यौगिक में सल्फर के % की गणना कीजिए।
हल:
प्रश्नानुसार, दिए गए कार्बनिक यौगिक का द्रव्यमान = 0.468g
उत्पन्न BasO4 का द्रव्यमान = 0.668g
MP Board Class 11th Chemistry Solutions Chapter 12 कार्बनिक रसायनकुछ आधारभूत सिद्धान्त तथा तकनीकें - 65

प्रश्न 36.
MP Board Class 11th Chemistry Solutions Chapter 12 कार्बनिक रसायनकुछ आधारभूत सिद्धान्त तथा तकनीकें - 66
कार्बनिक यौगिक में C2 – C3आबन्ध किन संकरित कक्षकों के युग्म से निर्मित होता है ?
उत्तर:
MP Board Class 11th Chemistry Solutions Chapter 12 कार्बनिक रसायनकुछ आधारभूत सिद्धान्त तथा तकनीकें - 67
C2 – C3 आबन्ध sp2 – sp3 संकरित कक्षकों के युग्म से निर्मित होता है।

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प्रश्न 37.
किसी कार्बनिक यौगिक में लैसेग्ने परीक्षण द्वारा नाइट्रोजन की जाँच में प्रशियन ब्लू रंग किसके कारण प्राप्त होता है ?
उत्तर;
Fe4 [Fe(CN)6]3यौगिक बनने के कारण।

प्रश्न 38.
निम्नलिखित कार्ब-धनायनों में से कौन-सा सबसे अधिक स्थायी है –
MP Board Class 11th Chemistry Solutions Chapter 12 कार्बनिक रसायनकुछ आधारभूत सिद्धान्त तथा तकनीकें - 138
उत्तर:
(b) (CH3)3 \($C$ \) (तृतीयक कार्ब-धनायन होने के कारण)।

प्रश्न 39.
कार्बनिक यौगिकों के पृथक्करण और शोधन की सर्वोत्तम तथा आधुनिकतम तकनीक कौन-सी है
(a) क्रिस्टलन
(b) आसवन
(c) ऊर्ध्वपातन
(d) क्रोमैटोग्राफी।
उत्तर:
(d) क्रोमैटोग्राफी।

प्रश्न 40.
CH3 – CH2I + KOH(aq) → CH3CH2OH + KI अभिक्रिया को नीचे दिये गये प्रकार में,वर्गीकृत कीजिए –
(a) इलेक्ट्रॉन स्नेही प्रतिस्थापन
(b) नाभिक स्नेही प्रतिस्थापन
(c) विलोपन
(d) संकलन।
उत्तर:
(b) नाभिक स्नेही प्रतिस्थापन अभिक्रिया।

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कार्बनिक रसायन : कुछ आधारभूत सिद्धान्त तथा तकनीकें अन्य महत्वपूर्ण प्रश्न

कार्बनिक रसायन : कुछ आधारभूत सिद्धान्त तथा तकनीकें वस्तुनिष्ठ प्रश्न

प्रश्न 1.
सही विकल्प चुनकर लिखिए –
1. एलिचक्रीय यौगिक है –
(a) ऐरोमैटिक यौगिक
(b) ऐलिफैटिक यौगिक
(c) विषमचक्रीय यौगिक
(d) ऐलिफैटिक चक्रीय यौगिक।
उत्तर:
(d) ऐलिफैटिक चक्रीय यौगिक।

2. एल्काइन का सामान्य सूत्र है –
(a) CnH2n+2
(b) CnH2n+1
(c)CnH2n
(d) CnH2n-2
उत्तर:
(d) CnH2n-2

3. IUPAC पद्धति से (CHF). CH – CH = CH – CH3 का नाम होगा –
(a) 2 – मेथिल पेन्टा – 3 – ईन
(b) 4 – मेथिल पेन्टा – 2 – ईन
(c) 2 – आइसो प्रोपिल प्रोप -1- ईन
(d) 3 – आइसो प्रोपिल प्रोप – 2 – ईन।
उत्तर:
(b) 4 – मेथिल पेन्टा – 2 – ईन

4. कार्बनिक यौगिकों का मुख्य स्रोत है –
(a) कोलतार
(b) पेट्रोलियम
(c) (a) और (b) दोनों
(d) इनमें से कोई नहीं।
उत्तर:
(c) (a) और (b) दोनों

5. ऐल्कोहॉल का सामान्य सूत्र है –
(a) CnH2n+2
(b) CnH2n+1.OH
(c) CnH2n-2
(d) CnH2n
उत्तर:
(b) CnH2n+1OH.

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6. निम्नलिखित यौगिक परस्पर किस प्रकार की समावयवता प्रदर्शित करते हैं –
MP Board Class 11th Chemistry Solutions Chapter 12 कार्बनिक रसायनकुछ आधारभूत सिद्धान्त तथा तकनीकें - 1
(a) केवल क्रियात्मक समूह
(b) केवल श्रृंखला
(c) स्थिति तथा श्रृंखला
(d) केवल स्थिति।
उत्तर:
(b) केवल श्रृंखला

7. निम्नलिखित में से कौन एक कार्बएनायन का उदाहरण है –
(a) CH3
(b) \($$: \mathrm{CH}_{3}$$\)
(c) \($\stackrel{\oplus}{\mathrm{C}} \mathrm{H}_{3}$\)
(d) CH3
उत्तर:
(b) \($$: \mathrm{CH}_{3}$$\)

8. किरेल अणु उनको कहते हैं –
(a) जो अपने दर्पण प्रतिबिम्ब पर अध्यारोपित नहीं होते हैं
(b) जो अपने दर्पण प्रतिबिम्ब पर अध्यारोपित होते हैं
(c) जो ज्यामिति समावयवता दर्शाते हैं
(d) जो स्थायी अणु होते हैं।
उत्तर:
(a) जो अपने दर्पण प्रतिबिम्ब पर अध्यारोपित नहीं होते हैं

9. निम्न में से किसमें तीनों समूह -I प्रभाव प्रदर्शित करते हैं –
(a) -NO2 , -Br, -CH3
(b) -I, -NO2, -C2H5
(c) – Cl, – C2H5, – CH3
(d) -F, -NO2, -C6H5.
उत्तर:
(d) -F, -NO2, -C6H5

10. नाभिकस्नेही का उदाहरण निम्न में से है –
(a) F आयन
(b) H2O+ आयन
(c) Cl परमाणु .
(d) एनीलीन हाइड्रोक्लोराइड।
उत्तर:
(a) F आयन

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11. निम्नलिखित में से कौन-सा यौगिक ज्यामितीय समावयवी रूपों में पाया जा सकता है –
MP Board Class 11th Chemistry Solutions Chapter 12 कार्बनिक रसायनकुछ आधारभूत सिद्धान्त तथा तकनीकें - 2
उत्तर:
MP Board Class 11th Chemistry Solutions Chapter 12 कार्बनिक रसायनकुछ आधारभूत सिद्धान्त तथा तकनीकें - 129

12. एक पदार्थ का एक से अधिक ठोस रूपान्तरों में अस्तित्व रखना ……………. जाना जाता है –
(a) बहुरूपता
(b) समाकृतिकता
(c) अपरूपता
(d) प्रतिबिम्बरूपता।
उत्तर:
(a) बहुरूपता

13. Cl.CH2CH2COOH की संरचना वाले यौगिक का नाम है –
(a) 3 – क्लोरोप्रोपेनोइक अम्ल
(b) 2 – क्लोरोप्रोपेनोइक अम्ल
(c) 2 – क्लोरोएथेनोइक अम्ल
(d) क्लोरोसक्सिनिक अम्ल।
उत्तर:
(a) 3 – क्लोरोप्रोपेनोइक अम्ल

14. आइसोब्यूटिल क्लोराइड का संरचना सूत्र है –
(a) CH3CH2CH2CH2Cl
(b) (CH3)2CH.CH2Cl
(c) CH3CH2CHCl.CH3
(d) (CH3)3C – Cl.
उत्तर:
(c) CH3CH2CHCl.CH3

15. CnH2n सामान्य सूत्र है –
(a) ऐल्केन्स का
(b) ऐल्कीन्स का
(c) ऐल्काइन्स का
(d) ऐरीन्स का।
उत्तर:
(b) ऐल्कीन्स का

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16. कार्बन टेट्राक्लोराइड में बन्ध कोण है लगभग –
(a) 90°
(b) 109°
(c) 120°
(d) 180°
उत्तर:
(b) 109°

17. (CH3)2CH – O – CH2 – CH2 – CH3 का नाम है –
(a) आइसोप्रोपिल प्रोपिल ईथर
(b) डाइप्रोपिल ईथर
(c) डाइआइसो प्रोपिल ईथर
(d) आइसोप्रोपिल प्रोपिलकीटोन।
उत्तर:
(a) आइसोप्रोपिल प्रोपिल ईथर

18. कैल्सियम कार्बाइड पर जल की क्रिया द्वारा यह गैस उत्पन्न होती है –
(a) मेथेन
(b) एथेन
(c) एथिलीन
(d) ऐसीटिलीन।
उत्तर:
(d) ऐसीटिलीन।

19. बेयर अभिकर्मक है –
(a) क्षारीय KMnO4
(b) अमोनियामय AgNO3
(c) अमोनियामय CuSO4
(d) अप्लीय CaSO4
उत्तर:
(a) क्षारीय KMnO4

20. Cl3C.CH2CHO सूत्र वाले यौगिक का IUPAC नाम है –
(a) 3, 3, 3-ट्राइक्लोरोप्रोपेनल
(b) 1,1, 1-ट्राइक्लोरोप्रोपेनल
(c) 2, 2, 2-ट्राइक्लोरोप्रोपेनल
(d) क्लोरल।
उत्तर:
(a) 3, 3, 3-ट्राइक्लोरोप्रोपेनल

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21. त्रिविम समावयवी भिन्न होते हैं –
(a) विन्यास में
(b) संरूपण में
(c) ये भिन्न नहीं होते
(d) इनमें से कोई नहीं।
उत्तर:
(a) विन्यास में

22. CH3– CH – (OH) – COOH प्रदर्शित करता है –
(a) ज्यामितीय समावयवता
(b) प्रकाशीय समावयवता
(c) (a) और (b) दोनों
(d) इनमें से कोई नहीं।
उत्तर:
(b) प्रकाशीय समावयवता

23. नाइट्रो एथेन निम्न में से एक प्रकार की समावयवता है –
(a) मध्यावयवता
(b) प्रकाश सक्रियता
(c) चलावयवता
(d) स्थान समावयवता।
उत्तर:
(c) चलावयवता

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प्रश्न 2.
रिक्त स्थानों की पूर्ति कीजिए –

  1. फ्रिऑन कार्बनिक पदार्थ जिसका उपयोग वायु प्रशीतकों तथा रेफ्रीजरेटर्स में होता है का रासायनिक नाम ……………. एवं संरचना सूत्र ……………… होगा।
  2. दो पदार्थों को पृथक् करने की प्रभाजी क्रिस्टलन विधि ……………. के अन्तर पर निर्भर करती है।
  3. कार्बनिक यौगिक में उपस्थित हैलोजन की मात्रा ज्ञात करते हैं उसे ……………… में बदलकर।
  4. एक पदार्थ में 80% कार्बन तथा 20% हाइड्रोजन है तो उसका सूत्र ………………. होगा।
  5. मार्श गैस में मुख्यतः ……………. गैस होती है।
  6. ‘भिन्न-भिन्न अवशोषण दर से अलग किए गये पदार्थ का प्रक्रम ……………. कहलाता है।
  7. जेल्डॉल विधि का प्रयोग ……………. तल के आकलन में होता है।
  8. दो पदार्थों के मिश्रण का पृथक्करण ……………. पर निर्भर करता है।
  9. o-नाइट्रोफिनॉल और p-नाइट्रोफिनॉल के मिश्रण का पृथक्करण ……………. से होता है।
  10. ग्लिसरीन के क्वथनांक पर वियोजन होता है, यह शुद्धिकरण ……………. से होता है।

उत्तर:

  1. डाइफ्लुओरो – डाइक्लोरो मेथेन, CF2Cl2
  2. विलायक
  3. सिल्वर हैलाइड
  4. C2H6.
  5. मेथेन
  6. इल्युशन
  7. नाइट्रोजन
  8.  विलेयता
  9. भाप आसवन
  10. निम्न दाब आसवन

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प्रश्न 3.
उचित संबंध जोडिए –
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उत्तर:

    1. (h) CH4
    2. (g) CH3 – COOH
    3. (b) CH3 – CH2 – OH
    4. (c) HCHO
    5. (i) CHI3
    6. (j) CH3 – CN
    7. (d) CH3NC
    8. MP Board Class 11th Chemistry Solutions Chapter 12 कार्बनिक रसायनकुछ आधारभूत सिद्धान्त तथा तकनीकें - 3

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  1. (a) (CH3)3 – C – OH

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प्रश्न 4.
एक शब्द / वाक्य में उत्तर दीजिए –

  1. CH3 – CH2 CHCl – CH3 का रासायनिक नाम है …………..।
  2. KMnO4 और KOH का मिश्रण कहलाता है।
  3. सिरका का IUPAC नाम है।
  4. अन्न एल्कोहॉल का IUPAC नाम है।
  5. CaSO4 युक्त मिश्रण में कपूर को अलग किया जाता है।
  6. नैफ्थेलीन का शुद्धिकरण होता है।
  7. कॉलम क्रोमैटोग्राफी द्वारा शुद्धिकरण होता है क्योंकि –
  8. पेट्रोलियम का शुद्धिकरण होता है।
  9. बेलस्टाइन परीक्षण का प्रयोग होता है।
  10. मुक्त मूलक आबंधन के किस प्रकार के विदलन से बनते हैं।

उत्तर:

  1. आइसो ब्यूटिल क्लोराइड
  2. बेयर अभिकर्मक
  3. एथेनोइक अम्ल
  4. एथेनॉल
  5. ऊर्ध्वपातन
  6. ऊर्ध्वपातन
  7. अलग-अलग अवशोषण
  8. प्रभाजी आसवन
  9. हैलोजन परीक्षण में
  10. समांश विदलन से।

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कार्बनिक रसायन : कुछ आधारभूत सिद्धान्त तथा तकनीकें अति लघु उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 1.
समावयवता किसे कहते हैं ? उदाहरण सहित समझाइये।
उत्तर:
वे यौगिक जिनके अणुसूत्र समान होते हैं लेकिन संरचना सूत्र भिन्न-भिन्न होते हैं ये एक-दूसरे के समावयवी कहलाते हैं तथा इस गुण को समावयवता कहते हैं। उदाहरण – एथिल ऐल्कोहॉल C2H5OH और डाइमेथिल ईथर के अणुसूत्र C2H6O समान हैं, लेकिन इनके संरचना सूत्र में भिन्नता है इसलिये ये एक-दूसरे के समावयवी हैं।

प्रश्न 2.
स्थान समावयवता को उदाहरण सहित समझाइये।
उत्तर:
इस प्रकार की समावयवता तब होती है जब प्रतिस्थापी मूलक या क्रियात्मक समूह या द्विबंध या त्रिबंध की भिन्न-भिन्न स्थितियाँ हों अर्थात् भिन्न-भिन्न C पर जुड़े हों।
उदाहरण:
C3H8O
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प्रश्न 3.
C3H6O अणुसूत्र वाले दो क्रियात्मक समावयवी यौगिकों के संरचना सूत्र और प्रचलित नाम लिखिये।
उत्तर:
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प्रश्न 4.
पेण्टेन के समावयवी लिखिये तथा उपस्थित समावयवता का नाम लिखिये।
अथवा
एल्केन में किस प्रकार की समावयवता होती है ? उदाहरण सहित स्पष्ट कीजिये।
उत्तर:
एल्केन सामान्यतः शृंखला समावयवता दर्शाते हैं, उदाहरण के रूप में – C5H12 में शृंखला समावयवता होती है, इसके तीन समावयवी बनते हैं-
MP Board Class 11th Chemistry Solutions Chapter 12 कार्बनिक रसायनकुछ आधारभूत सिद्धान्त तथा तकनीकें - 70

प्रश्न 5.
एल्काइन में श्रृंखला एवं स्थिति समावयवता को उदाहरण सहित समझाइये।
उत्तर:
एल्काइन शृंखला एवं स्थिति समावयवंता दर्शाते हैं।
1. श्रृंखला समावयवता –
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2. स्थिति समावयवता –
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प्रश्न 6.
एरीन में कौन-सी समावयवता पायी जाती है ? उदाहरण दीजिये।
उत्तर:
एरीन में स्थान समावयवता होती है।
उदाहरण –
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प्रश्न 7.
निम्नलिखित यौगिकों के संरचना सूत्र दिये गये हैं। इनमें पायी जाने वाली समावयवता के नाम लिखिये
MP Board Class 11th Chemistry Solutions Chapter 12 कार्बनिक रसायनकुछ आधारभूत सिद्धान्त तथा तकनीकें - 74
उत्तर:

  1. क्रियात्मक समावयवता
  2. मध्यावयवता
  3. चलावयवता।

प्रश्न 8.
कार्बनिक यौगिकों में C व H के आकलन की विधि का नाम लिखिये।
उत्तर:
कार्बनिक यौगिकों में C व H के आकलन के लिये लीबिग विधि का प्रयोग करते हैं।

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प्रश्न 9.
निम्नलिखित मिश्रणों को शुद्ध करने की विधि का नाम लिखिये –

  1. अशुद्ध नैफ्थेलीन
  2. दो वाष्पशील द्रव
  3. आयोडीन व NaCl
  4. बेंजीन एवं टॉलुईन।

उत्तर:

  1. अशुद्ध नैफ्थेलीन – ऊर्ध्वपातन
  2. दो वाष्पशील द्रव – प्रभाजी आसवन
  3. आयोडीन व NaCl – ऊर्ध्वपातन
  4. बेंजीन एवं टॉलुईन – प्रभाजी आसवन।

प्रश्न 10.
कार्बनिक यौगिकों के शोधन में प्रयुक्त होने वाली विधियों के नाम लिखिये।
उत्तर:

  • ठोस पदार्थ के लिये प्रयुक्त होने वाली विधि – साधारण क्रिस्टलन, प्रभाजी क्रिस्टलन, ऊर्ध्वपातन तथा विलायकों द्वारा निष्कर्षण।
  • द्रव पदार्थ के लिये प्रयुक्त होने वाली विधि – साधारण आसवन, प्रभाजी आसवन, निर्वात आसवन, भाप आसवन इत्यादि।

प्रश्न 11.
क्रोमैटोग्राफी किसे कहते हैं ?
उत्तर:
किसी मिश्रण के विभिन्न अवयवों को किसी अधिशोषक पर अधिशोषित होने की शक्ति में भिन्नता के आधार पर स्थिर व चलायमान प्रावस्थाओं में वितरित कर पृथक करने की प्रक्रिया क्रोमैटोग्राफी कहलाती है।

प्रश्न 12.
यदि कोई कार्बनिक पदार्थ बहुत थोड़ी मात्रा में दिया गया है तो उसकी शुद्धता की जाँच किस प्रकार की जाती है ?
उत्तर:
यदि कोई पदार्थ बहुत कम मात्रा में दिया गया है तो उसकी शुद्धता उसके गलनांक या क्वथनांक को ज्ञात करके की जा सकती है या फिर शुद्धता का परीक्षण स्तम्भ क्रोमैटोग्राफी से करते हैं यदि एक बैण्ड प्राप्त होता है तो यौगिक शुद्ध होगा और यदि एक से अधिक बैण्ड प्राप्त होते हैं तो यौगिक अशुद्ध होगा।

प्रश्न 13.
अधिशोषण वर्णलेखी प्रक्रम का कार्बनिक यौगिकों के शोधन में क्या उपयोग है ? लिखिये।
उत्तर:
अधिशोषण वर्णलेखी प्रक्रम का उपयोग विशेषतः विटामिन और हॉर्मोन्स जैसे – जटिल यौगिकों के पृथक्करण में होता है तथा इसका उपयोग पदार्थों की शुद्धता का परीक्षण करने में होता है।

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प्रश्न 14.
कार्बनिक यौगिक में हैलोजन का सिल्वर नाइट्रेट परीक्षण करते समय HNO3 मिलाते हैं, क्यों?
उत्तर:
यदि कार्बनिक यौगिक में हैलोजन के अतिरिक्त S तथा N उपस्थित हैं तो सोडियम निष्कर्ष में उपस्थित NaCN तथा Na2S, सिल्वर नाइट्रेट के साथ अभिक्रिया करके अवक्षेप देते हैं और हैलोजन के परीक्षण में बाधा उत्पन्न नहीं करते हैं। लेकिन सोडियम निष्कर्ष में सान्द्र HNO3 मिलाने से ये NaCN तथा Nags अपघटित हो जाते हैं और परीक्षण में बाधा उत्पन्न नहीं करते हैं।
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प्रश्न 15.
नाइट्रोजन का परीक्षण करते समय FeCl3 का विलयन मिलाने पर रक्त लाल रंग का श्वेत अवक्षेप आता है। क्यों?
उत्तर:
नाइट्रोजन का परीक्षण करते समय FeCl3 मिलाने पर लाल रंग का उत्पन्न होना कार्बनिक यौगिक मैं N तथा S दोनों की उपस्थिति को दर्शाता है। क्योंकि सोडियम निष्कर्ष बनाते समय कार्बनिक यौगिक में उपस्थित N एवं S सोडियम के साथ अभिक्रिया करके सोडियम सल्फोसायनाइड बनाते हैं जो FeCl3 के साथ अभिक्रिया करके फैरिक सल्फोसायनाइड का रक्त लाल रंग का विलयन देते हैं।
Na + C + N + S →NaSCN
NaSCN + FeCl3 → Fe(CNS)3 + 3NaCl

प्रश्न 16.
आयतनात्मक विधि द्वारा किस प्रकार के यौगिकों के आण्विक द्रव्यमान को ज्ञात किया जा सकता है ?
उत्तर:
आयतनात्मक विधि द्वारा अम्लीय या क्षारीय गुण दर्शाने वाले यौगिक सूचक की उपस्थिति में मानक क्षार या मानक अम्ल द्वारा अनुमापन किया जाता है तथा अनुमापन द्वारा उनके तुल्यांकी भार को ज्ञात कर लेते हैं। मानक अम्ल या क्षार उनके तुल्यांकी भार को एक लीटर में विलेय करके बनाये जाते हैं। अम्ल या क्षार का आण्विक द्रव्यमान = तुल्यांकी द्रव्यमान × अम्लता या क्षारकता।

प्रश्न 17.
कार्बनिक यौगिकों के तत्वों के परीक्षण हेतु सोडियम निष्कर्ष क्यों बनाया जाता है ?
उत्तर:
कार्बनिक यौगिक सहसंयोजी प्रकृति के होने के कारण सरलता से आयनित नहीं होते हैं। जिसके कारण इनमें उपस्थित तत्वों का परीक्षण सरलता से नहीं किया जा सकता है। सोडियम एक अत्यन्त क्रियाशील धातु है जो कार्बनिक यौगिक में उपस्थित तत्वों के साथ संयोग करके सोडियम यौगिक बनाता है जो प्रबल आयनिक होते हैं और सरलता से आयनित हो जाते हैं इसलिये तत्वों का परीक्षण सरलता से किया जा सकता है।

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प्रश्न 18.
सोडियम निष्कर्ष में ब्रोमीन या आयोडीन का परीक्षण करने के लिये क्लोरोफॉर्म या CCI, क्यों मिलाया जाता है ?
उत्तर:
सोडियम निष्कर्ष को तनु HNO3 से उदासीन करके CHCl3 या CCl4 तथा क्लोरीन जल डालते हैं। क्लोरीन सोडियम निष्कर्ष में उपस्थित ब्रोमीन या आयोडीन को विस्थापित कर देता है, जो CHCl3 या CCl4 में विलेय होकर भूरा या बैंगनी रंग प्रदान करता है।

प्रश्न 19.
कार्बनिक यौगिक में कार्बन तथा हाइड्रोजन का परीक्षण किस प्रकार करते हैं ?
उत्तर:
परखनली में शुष्क CuO के साथ कार्बनिक यौगिक को लेकर गर्म करते हैं निकलने वाली CO2 गैस चूने के पानी को दूधिया कर देती है जबकि जल वाष्प बूंदों के रूप में संघनित हो जाती है। इस निर्जल CuSO4 द्वारा अवशोषित होने के कारण उसे नीला कर देती है।
C + 2 Cuo → CO2 + 2Cu
2H + CuO → H2O + Cu
MP Board Class 11th Chemistry Solutions Chapter 12 कार्बनिक रसायनकुछ आधारभूत सिद्धान्त तथा तकनीकें - 76

प्रश्न 20.
किसी कार्बनिक यौगिकों के शुद्धता परीक्षण की मिश्रित गलनांक विधि से क्या समझते हो?
उत्तर:
पूर्णरूप से मिले हुये दो पदार्थों के मिश्रण को मिश्रित गलनांक कहते हैं। इस विधि में पदार्थ की शुद्धता की जाँच करने के लिये दिये गये पदार्थ को विशुद्ध पदार्थ की समान मात्रा के साथ मिश्रित करके मिश्रण का गलनांक ज्ञात करते हैं। यदि मिश्रण का गलनांक शुद्ध पदार्थ के गलनांक के समान है तो दिया गया पदार्थ शुद्ध है।

प्रश्न 21.
दो भिन्न क्वथनांक वाले द्रवों का पृथक्करण किस प्रकार किया जा सकता है ?
उत्तर:
दो द्रव जिनके क्वथनांक में अंतर हो का पृथक्करण प्रभाजी आसवन विधि द्वारा करते हैं। अधिक वाष्पशील यौगिक पहले वाष्पित होता है तथा इसकी वाष्प प्रभाजी स्तम्भ से आगे बढ़कर संघनित्र में से प्रवाहित होने पर द्रवित होकर ग्राही में एकत्रित हो जाती है जबकि कम वाष्पशील पदार्थ की वाष्प प्रभाजी स्तम्भ में संघनित होकर वापस फ्लास्क में आ जाती है।

प्रश्न 22.
मूलानुपाती सूत्र क्या है ?
उत्तर:
वह रासायनिक सूत्र जो यौगिक में उपस्थित विभिन्न तत्वों के परमाणुओं का सरलतम अनुपात दर्शाता है, मूलानुपाती सूत्र कहलाता है। उदाहरण- ग्लूकोस का मूलानुपाती सूत्र CH2O है।

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प्रश्न 23.
अणुसूत्र क्या है ? उदाहरण सहित समझाइये।
उत्तर:
वह रासायनिक सूत्र जो यौगिक में उपस्थित विभिन्न तत्वों के परमाणुओं की वास्तविक संख्या को दर्शाता है, अणुसूत्र कहलाता है। उदाहरण- ग्लूकोस का अणुसूत्र C6 o H12O6 है।
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प्रश्न 24.
विषम चक्रीय यौगिक किसे कहते हैं ? उदाहरण सहित समझाइये।
उत्तर:
इस श्रेणी में वे चक्रीय यौगिक होते हैं जिनके चक्र में कार्बन परमाणु के अतिरिक्त एक या एक से अधिक बहु संयोजक परमाणु जैसे-नाइट्रोजन, सल्फर, ऑक्सीजन इत्यादि होते हैं।

  • पिरीडीन C5 H5 N,
  • C4 H4 O प्यूरेन
  • थायोफिन C4 H4 S.

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प्रश्न 25.
समचक्रीय यौगिक किसे कहते हैं ? उदाहरण सहित समझाइये।
उत्तर:
इस श्रेणी में कार्बनिक यौगिक होते हैं जिनके चक्र में केवल कार्बन परमाणु होते हैं। समचक्रीय यौगिक दो प्रकार के होते हैं

  • एरोमैटिक यौगिक
  • एलीसाइक्लिक यौगिक।

उदाहरण:
एरोमैटिक यौगिक –
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एलीसाइक्लिक यौगिक –
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प्रश्न 26.
क्रियात्मक समूह किसे कहते हैं?
उत्तर:
सामान्यतः कार्बनिक यौगिक दो भागों से मिलकर बना होता है –

  • मूलक
  • क्रियात्मक समूह।

क्रियात्मक समूह – किसी कार्बनिक यौगिक का वह भाग जो उसके रासायनिक गुणों का निर्धारण करता है, क्रियात्मक समूह कहलाता है।
उदाहरण – C2H2 – OH में OH क्रियात्मक समूह है।

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प्रश्न 27.
एल्डिहाइड श्रेणी का सामान्य सूत्र, अणुसूत्र लिखिये तथा प्रथम सजातों का साधारण नाम व IUPAC नाम लिखिये।
उत्तर:
1. सामान्य सूत्र – R – CHO
2. अणुसूत्र – Cn H2nO
3. H – CHO – फॉर्मेल्डिहाइड – Methanal
CH3 – CHO – एसीटैल्डिहाइड – Ethanal

कार्बनिक रसायन : कुछ आधारभूत सिद्धान्त तथा तकनीकें लघु उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 1.
सल्फर के लेड ऐसीटेट द्वारा परीक्षण में सोडियम संगलन निष्कर्ष को ऐसीटिक अम्ल द्वारा उदासीन किया जाता है, न कि सल्फ्यूरिक अम्ल द्वारा, क्यों?
उत्तर;
यदि H2SO4 का प्रयोग करते हैं तो लेड ऐसीटेट स्वयं H2SO4 के साथ क्रिया करके लेंड सल्फेट का सफेद अवक्षेप देता है।
MP Board Class 11th Chemistry Solutions Chapter 12 कार्बनिक रसायनकुछ आधारभूत सिद्धान्त तथा तकनीकें - 81
अत: PbSO4 का सफेद अवक्षेप सल्फर के निम्नलिखित परीक्षण को प्रभावित करेगा।
MP Board Class 11th Chemistry Solutions Chapter 12 कार्बनिक रसायनकुछ आधारभूत सिद्धान्त तथा तकनीकें - 82
परन्तु यदि ऐसीटिक अम्ल का प्रयोग किया जाये तो लेड ऐसीटेट के साथ क्रिया नहीं करता है, जिसके कारण यह परीक्षण में बाधा उत्पन्न नहीं करता है।

प्रश्न 2.
किसी कार्बनिक यौगिक में कार्बन का आकलन करते समय उत्पन्न कार्बन डाइऑक्साइड को अवशोषित करने के लिए पोटैशियम हाइड्रॉक्साइड विलयन का उपयोग क्यों किया जाता है ?
उत्तर:
CO2 की प्रकृति थोड़ी अम्लीय होती है। अत: यह प्रबल क्षार KOH के साथ क्रिया करके K2CO3 बनाती है। जिसकी सहायता से प्राप्त CO2 कार्बनिक यौगिक में कार्बन की प्रतिशत मात्रा ज्ञात कर ली जाती है।
2KOH + CO2 →K2CO3 + H2O
KOH वाली U – ट्यूब के भार में वृद्धि के फलस्वरूप उत्पन्न CO2 का भार ज्ञात करते हैं। प्राप्त CO2 के भार से कार्बनिक यौगिक में उपस्थित कार्बन की प्रतिशत मात्रा निम्न प्रकार से ज्ञात करते हैं।
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प्रश्न 3.
इलेक्ट्रॉनस्नेही तथा नाभिकस्नेही अभिकर्मक में अंतर लिखिये।
उत्तर:
इलेक्ट्रॉनस्नेही तथा नाभिकस्नेही अभिकर्मक में अंतर –

इलेक्ट्रॉनस्नेही अभिकर्मक:

  • इलेक्ट्रॉन न्यून होता है।
  • सामान्यतः संयोजी कोश में इलेक्ट्रॉन होते हैं।
  • ये धन विद्युती आयन होते हैं।
  • उदासीन अणु जिनके अष्टक अपूर्ण होते हैं ये इलेक्ट्रॉन युग्म ग्राही होते हैं।
  • लुईस अम्ल होते हैं।
  • ये अणु के उस स्थान पर आक्रमण करते इलेक्ट्रॉन घनत्व न्यूनतम होता है।

नाभिकस्नेही अभिकर्मक:

  • अधिक इलेक्ट्रॉन रखते हैं।
  • सामान्यतः संयोजी कोश में 8 इलेक्ट्रॉन होते हैं। 109°28
  • ये ऋण विद्युती आयन होते हैं।
  • ये इलेक्ट्रॉन युग्म दाता होते हैं।
  • लुईस क्षार होते हैं।
  • ये उस स्थान पर आक्रमण करते हैं जहाँ हैं जहाँ इलेक्ट्रॉन घनत्व अधिकतम होता है।

प्रश्न 4.
कार्बन परमाणु की संयोजकता संबंधी वाण्ट हॉफ तथा लेवेल का नियम समझाइये।
उत्तर:
कार्बन का परमाणु क्रमांक 6 है। इसका सामान्य इलेक्ट्रॉनिक विन्यास 2, 4 है। इस प्रकार इसके संयोजी कोश में 4 इलेक्ट्रॉन हैं इसलिये इसकी संयोजकता 4 है। वाण्ट हॉफ तथा लेवेल के अनुसार, कार्बन सामान्यत: sp3 संकरित होता है इसलिये इसकी संरचना समचतुष्फलकीय होती है। जिसमें कार्बन केन्द्र में स्थित रहता है तथा इसकी चारों संयोजकता चतुष्फलकीय संरचना के चारों कोनों में स्थित है और दो संयोजकताओं के बीच बंध कोण 109° 28′ होता है।

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प्रश्न 5.
कार्बन केवल सहसंयोजी यौगिक बनाता है, क्यों?
उत्तर:
कार्बन का परमाणु क्रमांक 6 है इसके संयोजी कोश में 4 इलेक्ट्रॉन हैं। इसे अष्टक पूर्ण करने के लिये4अतिरिक्त इलेक्ट्रॉन की आवश्यकता है।अतःकार्बन 4 इलेक्ट्रॉन या तो दान कर सकता है या ग्रहण कर सकता है या 4 इलेक्ट्रॉन का साझा कर सकता है लेकिन कार्बन के छोटे आकार के कारण इसकी आयनन ऊर्जा व इलेक्ट्रॉन बंधुता अत्यधिक उच्च होती है। अतः कार्बन का 4 इलेक्ट्रॉन का दान करना या ग्रहण करना संभव नहीं है, अतः कार्बन अपना अष्टक पूर्ण करने के लिये केवल अन्य परमाणुओं के साथ इलेक्ट्रॉन का साझा कर सकता है इसलिये वह केवल सहसंयोजी यौगिक बनाता है।
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प्रश्न 6.
क्या कारण है कि कार्बन बहुत अधिक संख्या में यौगिक बनाता है ?
अथवा
कार्बन की अद्वितीय प्रकृति को समझाइये।
उत्तर:
कार्बनिक यौगिकों के अधिकता में पाये जाने के निम्नलिखित कारण हैं –
1. श्रृंखलन – किसी तत्व के दो या दो से अधिक परमाणुओं का सहसंयोजक बंध द्वारा श्रृंखला बनाने की प्रवृति को श्रृंखलन कहते हैं। कार्बन परमाणु में श्रृंखलन की प्रवृत्ति सबसे अधिक होती है।

2. कार्बन – कार्बन परमाणु के मध्य प्रबल बंध – कार्बन परमाणु का आकार अत्यन्त छोटा है। इससे कार्बन परमाणु के अर्धपूर्ण कक्षकों का अतिव्यापन अत्यधिक सरलता से अधिक सीमा में हो सकता है जिसके फलस्वरूप कार्बन-कार्बन के बीच बना बंध अत्यधिक दृढ़ तथा प्रबल होता है।

3. बहु आबंध बनाने की प्रवृत्ति – कार्बन परमाणु अपने छोटे आकार के कारण अन्य परमाणु जैसे C, H, O, N के साथ सरलता से संयोग कर द्विबंध या त्रिबंध बना सकता है।

4. समावयवता – जब दो या दो से अधिक यौगिकों के अणुसूत्र समान हो लेकिन उनके संरचना सूत्र में भिन्नता हो तो ऐसे यौगिकों को समावयवी कहते हैं तथा इस गुण को समावयवता कहते हैं। यह गुण कार्बन में अधिकतम है। इन्हीं उपर्युक्त गुणों के कारण कार्बन बहुत अधिक संख्या में यौगिकों का निर्माण करती है।

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प्रश्न 7.
कार्बनिक तथा अकार्बनिक यौगिक में अंतर लिखिये।
उत्तर:
कार्बनिक तथा अकार्बनिक यौगिक में अंतर –

कार्बनिक यौगिक:

  • कार्बन तथा कुछ अन्य तत्व जैसे – H, O, N, S, P इत्यादि के संयोग से बनते हैं।
  • ये सहसंयोजी यौगिक होते हैं।
  • ये वैद्युत अपघट्य नहीं हैं।
  • इनके गलनांक और क्वथनांक कम होते हैं
  • ये जल में अविलेय परन्तु कार्बनिक विलायकों में विलेय हैं।
  • ये समावयवता दर्शाते हैं।
  • इनकी अभिक्रियायें आण्विक तथा जटिल होती हैं तथा धीमी गति से होती हैं।

अकार्बनिक यौगिक:.

  • ये यौगिक सभी तत्वों द्वारा बनाये जाते हैं।
  • अधिकांश अकार्बनिक यौगिक वैद्युत संयोजी होते हैं। लेकिन कुछ यौगिक सहसंयोजी तथा उपसहसंयोजी भी होते हैं।
  • ये वैद्युत अपघट्य हैं।
  • इनके गलनांक और क्वथनांक उच्च होते हैं।
  • ये जल में विलेय परन्तु कार्बनिक विलायकों में अविलेय है।
  • ये समावयवता नहीं दर्शाते हैं।
  • इनकी अभिक्रियायें आयनिक होती हैं तथा तीव्र गति से होती हैं।

प्रश्न 8.
सजातीय श्रेणी किसे कहते हैं ? इसकी विशेषतायें लिखिये।
उत्तर:
कार्बनिक यौगिकों की वह श्रेणी जिसमें सदस्यों में समान क्रियात्मक समूह उपस्थित हो तथा जिसके दो क्रमागत सदस्यों के अणुओं में CH2 का अंतर हो, सजातीय श्रेणी कहलाती है।
विशेषतायें –

  • सजातीय श्रेणी के सदस्यों को एक सामान्य सूत्र द्वारा प्रदर्शित किया जा सकता है।
  • श्रेणी के दो क्रमागत सदस्यों के अणुसूत्र में CH2 का अंतर होता है।
  • श्रेणी के दो क्रमागत सदस्यों के अणुभार में 14 का अंतर होता है।
  • श्रेणी के सभी सदस्यों को समान रासायनिक अभिक्रियाओं द्वारा बनाया जा सकता है।
  • श्रेणी के सभी सदस्यों के रासायनिक गुणों में समानता होती है।

प्रश्न 9.
कार्बनिक यौगिकों में प्राथमिक, द्वितीयक, तृतीयक और चतुर्थक कार्बन क्या होते हैं ?
उत्तर:
प्राथमिक कार्बन – किसी कार्बनिक यौगिक में उपस्थित वह कार्बन परमाणु जो अधिकतम एक कार्बन परमाणु से जुड़ा है, प्राथमिक कार्बन या 1°C कार्बन कहलाता है। द्वितीयक कार्बन – किसी कार्बनिक यौगिक में उपस्थित वह कार्बन जो दो कार्बन परमाणु से जुड़ा है। द्वितीयक या 2°C कार्बन कहलाता है। बृतीयक कार्बन – किसी कार्बनिक यौगिक में उपस्थित वह कार्बन जो तीन अन्य कार्बन परमाणु से जुड़ा हो तृतीयक कार्बन या 3°C कहलाता है। चतुर्थक कार्बन – किसी कार्बनिक यौगिक में उपस्थित वह कार्बन जो अन्य 4 कार्बन परमाणु से जुड़ा हो चतुर्थक कार्बन कहलाता है।
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जहाँ p = प्राथमिक, s = द्वितीयक, t = तृतीयक, q= चतुर्थक।

प्रश्न 10.
अमोनियम क्लोराइड तथा सोडियम क्लोराइड के मिश्रण को पृथक् करने की विधि समझाइये।
अथवा
नैफ्थेलीन तथा नमक के मिश्रण को पृथक् करने की विधि को समझाइये।
उत्तर:
नौसादर (अमोनियम क्लोराइड) या नैफ्थेलीन तथा NaCl के मिश्रण को ऊर्ध्वपातन विधि द्वारा पृथक् करते हैं। इस मिश्रण को एक चीनी की प्याली में लेकर छिद्र युक्त फिल्टर पेपर से ढंक देते हैं तथा फनल की नली में रूई या ऊन भरकर फिल्टर पेपर के ऊपर उल्टा करके रख देते हैं तथा इसे बालू ऊष्मक पर रखकर धीरे-धीरे गर्म करते हैं। NH4Cl या नैफ्थेलीन ऊर्ध्वपातित होकर फिल्टर पेपर के छिद्रों से गुजरकर फनल की दीवारों के ठण्डे भाग में जमा हो जाते हैं जहाँ से इन्हें पृथक कर लेते हैं तथा नमक (NaCl) प्याली में शेष रह जाता है।

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प्रश्न 11.
किसी कार्बनिक यौगिक में नाइट्रोजन का परीक्षण लैसग्ने विधि द्वारा कैसे किया जाता है ?
उत्तर:
नाइट्रोजन के परीक्षण की लैसग्ने विधि-कार्बनिक पदार्थ के सोडियम निष्कर्ष में थोड़ा-सा NaOH मिलाकर FeSO4 का ताजा बना विलयन मिलाकर गर्म करने पर Fe (OH)2 का हरा अवक्षेप बनता है। इसे ठण्डा कर सान्द्र HCl मिलाया जाता है। जिसमें हरा अवक्षेप विलेय हो जाता है फिर FeCl3 विलयन मिलाते हैं। नीला या हरा अवक्षेप प्राप्त हो तो यौगिक में नाइट्रोजन उपस्थित है।
Na + C + N → NaCN
Fe (OH)2 + 6 NaCN → Na4 [Fe(CN)6] + 2NaOH
3Na4 [Fe (CN)6] + 4 FeCl3 → Fe4 [ Fe (CN)6 ]3(नीला अवक्षेप) + 12NaCl

प्रश्न 12.
किसी कार्बनिक यौगिक में सल्फर का परीक्षण किस प्रकार किया जाता है ?.
उत्तर:
1. सोडियम नाइट्रोप्रुसाइड:
सोडियम निष्कर्ष में सोडियम नाइट्रो साइड की कुछ बूंदें मिलाने पर यदि बैंगनी रंग प्राप्त हो तो सल्फर उपस्थित होगा।
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2. लेड एसीटेट परीक्षण सोडियम निष्कर्ष में एसीटिक अम्ल मिलाकर लेड एसीटेट मिलाने पर यदि काला अवक्षेप प्राप्त होता है तो कार्बनिक यौगिक में सल्फर उपस्थित है।
MP Board Class 11th Chemistry Solutions Chapter 12 कार्बनिक रसायनकुछ आधारभूत सिद्धान्त तथा तकनीकें - 86

प्रश्न 13.
भाप आसवन किन यौगिकों के लिये उपयोगी है, सचित्र समझाइये।
उत्तर:
वे कार्बनिक यौगिक जो जल में अविलेय लेकिन भाप में वाष्पशील रूप में विलेय होते हैं, उनका शोधन भाप आसवन विधि द्वारा किया जाता है। अशुद्ध पदार्थ को एक गोल पेंदी वाले फ्लास्क में लेकर थोड़ासा जल मिलाते हैं। और इसे बालू ऊष्मक पर रखकर 90°C ताप पर गर्म करते हैं, तथा इसे वाष्प उत्पादक प्लास्क से जोड़कर इसमें वाष्प प्रवाहित करते है।

जो मिश्रण से वाष्पशील पदार्थ को अपने में विलेय करके वाष्प रूप में रहती है। इस वाष्प और वाष्पशील द्रव को संघनित से गुजार कर संघनित्र कर ग्राही में एकत्रित कर लेते हैं। यदि यौगिक अविलेय ठोस है तो उसे छानकर पृथक् कर लेते हैं और अविलेय द्रव है तो पृथक्कारी कीप की सहायता से छानकर पृथक् कर लेते हैं। एनिलीन तथा सुगन्धित तेलों का आसवन इस विधि द्वारा किया जाता है।
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प्रश्न 14.
निर्वात् आसवन या कम दाब पर आसवन का सिद्धांत क्या है ? चित्र सहित समझाइये।
उत्तर:
ऐसे कार्बनिक यौगिक जो अपने क्वथनांक या उसके पूर्व ही गर्म करने पर अपघटित हो जाते हैं उनका शोधन निर्वात् आसवन द्वारा किया जाता है। ग्राही में निर्वात् पम्प द्वारा आंशिक निर्वात उत्पन्न करते हैं जिससे आसवन फ्लास्क में दाब कम हो जाता है। और द्रव अपने क्वथनांक से पूर्व ही उबलने लगता है। ग्लिसरॉल का शोधन इस विधि द्वारा करते हैं।
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प्रश्न 15.
कार्बनिक यौगिक में उपस्थित हैलोजन का परीक्षण किस प्रकार किया जाता है ?
उत्तर:
AgNO3 परीक्षण-सोडियम निष्कर्ष में तनु HNO3 तथा AgNO3 मिलाने पर श्वेत अवक्षेप आये जो AgCl का होता है यदि श्वेत अवक्षेप NH4Cl के आधिक्य में विलेय हो तो कार्बनिक यौगिक में Cl उपस्थित होगा। सोडियम निष्कर्ष में तनु HNO3 तथा AgNO3 मिलाने पर हल्का पीला या गाढ़ा पीला अवक्षेप आये तो ब्रोमीन तथा आयोडीन उपस्थित होगा AgBr का हल्का पीला अवक्षेप NH4OH के आधिक्य में अल्प विलेय तथा AgI का गाढ़ा पीला अवक्षेप NH4OH के आधिक्य में अविलेय होगा।
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प्रश्न 16.
कार्बनिक पदार्थ में उपस्थित सल्फर के आकलन की केरियस विधि का चित्र सहित वर्णन कीजिये।
उत्तर:
केरियस विधि:
सल्फर युक्त कार्बनिक यौगिक की निश्चित मात्रा को सधूम HNO3 के साथ गर्म करने पर सल्फर केरियस H3SO4 में ऑक्सीकृत हो जाता है। अभिक्रिया पूर्ण होने पर नली नली को ठण्डा करके H2SO4 को बीकर में लेकर आसुत जल से धोकर लोहे की इसमें BaCl2 विलयन की उचित मात्रा मिलाने पर BaSO4काश्वेत अवक्षेप आता है जिसे छानकर सुखा लेते हैं तथा इसका भार ज्ञात कर लेते हैं।
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प्रश्न 17.
किसी कार्बनिक यौगिक हैलोजन का आकलन किस प्रकार किया जाता है ?
उत्तर:
केरियस विधि;
कार्बनिक यौगिक की – निश्चित मात्रा को सधूम HNO3 तथा AgNO4 के साथ एक। बंद नली में उच्च ताप पर गर्म करते हैं। केरियस नली इस प्रकार हैलोजन सिल्वर हैलाइड में परिवर्तित हो  लोहे की नली जाता है। इस प्रकार प्राप्त Agx अवक्षेप को धोकर सुखाकर तौल लेते हैं। इसद्रव्यमान की सहायता से हैलोजन की प्रतिशत कार्बनिक पदार्थ मात्रा ज्ञात कर लेते हैं।
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प्रश्न 18.
जेल्डॉल विधि द्वारा नाइट्रोजन का आकलन करने का सिद्धांत समझाइये।
उत्तर:
जेल्डॉल विधि का सिद्धांत:
जब नाइट्रोजन युक्त कार्बनिक पदार्थ की ज्ञात मात्रा लेकर उसे सान्द्र H2SO4 के साथ गर्म करते हैं तो कार्बनिक यौगिक में उपस्थित नाइट्रोजन, अमोनियम सल्फेट में परिवर्तित हो जाती है। इसे NaOH के साथ गर्म करने पर NH3 गैस बनती है। इस NH3 गैस को मानक अम्ल जैसे H2SO4 के ज्ञात आयतन में अवशोषित कर लेते हैं । प्रयोग के पश्चात् H2SO4 का मानक क्षार के साथ अनुमापन कर अमोनिया की बची मात्रा का परिकलन कर लेते हैं। इस मात्रा से कार्बनिक पदार्थ में नाइट्रोजन की % मात्रा को ज्ञात किया जा सकता है।
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प्रश्न 19.
यौगिकों के शोधन की आसवन विधि को चित्र सहित समझाइये।
उत्तर:
किसी द्रव या ठोस पदार्थ को वाष्प में बदलकर दूसरे स्थान पर भेजकर उसे फिर से ठण्डा कर ठोस या द्रव अवस्था में प्राप्त करने की क्रिया को आसवन कहते हैं। आसवन अनेक प्रकार के होते हैं

  • साधारण आसवन
  • प्रभाजी आसवन
  • निर्वात आसवन
  • भाप आसवन।

साधारण आसवन:
यदि किसी द्रव में अवाष्पशील पदार्थों की अशुद्धि हो तो इस विधि का उपयोग किया जाता है। इस विधि द्वारा ऐसे द्रवों को पृथक् किया जाता है जिनके क्वथनांक में 30-40°C का अंतर है। मिश्रण को गर्म करने पर शुद्ध द्रव की वाष्प प्राप्त होती है जो संघनित्र द्वारा ठण्डी होकर ग्राही में एकत्रित हो जाती है तथा अशुद्धियाँ आसवन फ्लास्क में रह जाती हैं।
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प्रश्न 20.
अधिशोषण क्रोमैटोग्राफी का सिद्धांत क्या है ? समझाइये।
उत्तर:
किसी मिश्रण के विभिन्न अवयवों की विलायक पथक्करण निरंतर इल्यूजन किसी अधिशोषक पर अधिशोषित होने की शक्ति में भिन्नता। होने के सिद्धांत पर यह विधि आधारित है। इसलिये जब एक काँच की नली में भरे हुये अधिशोषक पर किसी मिश्रण के विलयन कोडालकर नीचे बहने दियाजायेतोअधिशोषक शक्ति में भिन्नता होने के कारण मिश्रण के विभिन्न अवयव अधिशोषक में अलग-अलग स्थान पर अधिशोषित हो जाते हैं । जिनकी अधिशोषित होने की प्रवृत्ति अधिक होती है वे पहले अधिशोषित होते हैं तथा जिनकी अधिशोषित होने – की प्रवृत्ति कम होती है वे बाद में अधिशोषित होते हैं। इसे क्रोमैटोग्राफ कहा जाता है।
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प्रश्न 21.
श्रृंखला समावयवता तथा क्रियात्मक समावयवता को उदाहरण सहित समझाइये। प्रथम घटक
उत्तर:
श्रृंखला समावयवता:
जब दो या दो से अधिक यौगिकों के अणुसूत्र समान हों लेकिन श्रृंखला में कार्बन परमाणुओं के व्यवस्थित होने के क्रम में भिन्नता हो तो इन यौगिकों को श्रृंखला समावयवी तथा इस गुण को श्रृंखला समावयवता कहते हैं।
उदाहरण –
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क्रियात्मक समावयवता:
जब दो या दो से अधिक यौगिकों के अणुसूत्र समान हों लेकिन उनमें उपस्थित क्रियात्मक समूह भिन्न-भिन्न हों तो ऐसे यौगिक क्रियात्मक समावयवी तथा इस समावयवता को क्रियात्मक समावयवता कहते हैं।
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प्रश्न 22.
निम्नलिखित के संघनित और आबंध-रेखा-सूत्र लिखिए तथा उनमें यदि कोई क्रियात्मक समूह हो, तो उसे पहचानिए
(a) 2,2,4-ट्राइमेथिलपेन्टेन
(b) 2,- हाइड्रॉक्सी-1, 2, 3- प्रोपेनट्राइकार्बोक्सिलिक अम्ल
(c) हेक्सेनडाऐल।
उत्तर:
संघनित और आबंध रेखा-सूत्र लिखने के लिए सर्वप्रथम दिए गए यौगिकों का संरचनात्मक सूत्र लिखते हैं –
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प्रश्न 23.
कार्बऋणायन या कार्बेनियन पर संक्षिप्त टिप्पणी लिखिये।
उत्तर:
कार्बेनियन:
वह ऋणावेशित आयन जिसमें ऋण आवेश C पर होता है, कार्बेनियन आयन कहलाता है। इनमें C के संयोजी कोश में 8 इलेक्ट्रॉन होते हैं। जिसमें तीन बंधी इलेक्ट्रॉन युग्म के रूप में तथा एक एकांकी इलेक्ट्रॉन युग्म के रूप में होता है।

वर्गीकरण:
प्राथमिक कार्बेनियन आयन – यदि ऋण आवेश प्राथमिक C पर होता है।
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द्वितीयक कार्बेनियन आयन-ऋण आवेश द्वितीयक C पर होता है।
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तृतीयक कार्बेनियन आयन-ऋण आवेश तृतीयक C पर होता है।
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स्थायित्व:
कार्बेनियन आयन में C पर उपस्थित ऋण आवेश में वृद्धि होने पर स्थायित्व में कमी आती है। एल्किल मूलकों की संख्या में वृद्धि करने पर स्थायित्व में कमी आती है।
CH5 > 1° > 2° > 3°
संरचना:
इसमें कार्बन sp3 संकरित अवस्था में होता है, तीन आबंधी इलेक्ट्रॉन युग्म तथा एक एकांकी इलेक्ट्रॉन युग्म होता है।
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प्रश्न 24.
मध्यावयवता तथा चलावयवता समावयवता को उदाहरण सहित समझाइये।
उत्तर:
मध्यावयवता:
जब दो या दो से अधिक यौगिकों के अणुसूत्र समान हों उनमें उपस्थित क्रियात्मक समूह भी समान हो लेकिन उनसे जुड़े एल्किल मूलक में भिन्नता हो तो इस प्रकार उत्पन्न समावयवता को मध्यावयवता कहते हैं।
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चलावयवता:
यह एक विशेष प्रकार की क्रियात्मक समावयवता है जिसमें दोनों समावयवी साम्य अवस्था में होते हैं तथा सरलता से एक-दूसरे में परिवर्तित हो जाते हैं। इस प्रकार की समावयवता तब उत्पन्न होती है। जब हाइड्रोजन या एल्किल समूह द्विबंध या त्रिबंध के दोनों तरफ दोलन करता है।
द्विक प्रणाली:
हाइड्रोजन का दोलन दो बहुसंयोजी परमाणु के मध्य होता है।
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त्रिक प्रणाली – हाइड्रोजन का दोलन तीन बहुसंयोजी परमाणुओं के मध्य होता है।
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प्रश्न 25.
निम्नलिखित यौगिकों के आबंध-रेखा-सूत्र लिखिएआइसोप्रोपिल ऐल्कोहॉल, 2, 3 – डाइमेथिल ब्यूटेनल, हेप्टेन – 4 – ओन।
उत्तर:
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प्रश्न 26.
प्रेरणिक प्रभाव किसे कहते हैं ? इसके क्या उपयोग हैं ?
उत्तर:
जब सहसंयोजी बंध दो भिन्न तत्वों के परमाणुओं के मध्य बनता है तो साझे के इलेक्ट्रॉन दोनों परमाणुओं या नाभिकों के मध्य में न रहकर अत्यधिक ऋण विद्युती तत्व की ओर विस्थापित हो जाता है जिससे अधिक ऋण विद्युती समूह पर आंशिक ऋण आवेश तथा कम ऋण विद्युती समूह पर आंशिक धन आवेश आ जाता है। इस पर σ बंध के इलेक्ट्रॉनों का अधिक ऋण विद्युती समूह की तरफ विस्थापन प्रेरणिक प्रभाव कहलाता है। परमाणुओं की श्रृंखला में ध्रुवीय सहसंयोजक बंध की उपस्थिति के कारण इलेक्ट्रॉन विस्थापन प्रक्रिया प्रेरणिक प्रभाव कहलाता है। प्रेरणिक प्रभाव को बीच में बाणान युक्त डैश से दर्शाते हैं।
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प्रेरणिक प्रभाव के प्रकार –
1.ऋणात्मक प्रेरणिक प्रभाव – वे परमाणु या समूह जो हाइड्रोजन की तुलना में अधिक ऋण विद्युती होते हैं इलेक्ट्रॉन आकर्षी या इलेक्ट्रॉन ग्राही समूह होते हैं। इनका प्रेरणिक प्रभाव ऋणात्मक प्रेरणिक प्रभाव कहलाता है।
+NR3 > \(\stackrel{+}{\mathrm{N}} \mathrm{R}_{2}\) > – \(\stackrel{+}{\mathrm{N}} \mathrm{H}_{3}\), > – NO3 > – SO2R> – CN > – COOH > – F> – Cl> – Br> – I> – OH> – C6H5.

धनात्मक प्रेरणिक प्रभाव:
ऐसे परमाणु जिनकी इलेक्ट्रॉन बंधुता हाइड्रोजन की तुलना में कम होती है इलेक्ट्रॉन निर्मोची कहलाता है। ये धनात्मक प्रेरणिक प्रभाव दर्शाते हैं।
O>COO>(CH3)2C > (CH3)2 CH > CH3 CH2 > CH3H .
अनुप्रयोग:

  • वसीय अम्लों की प्रबलता की तुलना
  • एमीनों के क्षारकीय गुण
  • द्विध्रुव आघूर्ण की उपस्थिति।

प्रश्न 27.
निम्नलिखित यौगिकों के IUPAC नाम लिखिए –
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उत्तर:
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प्रश्न 28.
इलेक्ट्रोमेरिक प्रभाव क्या है ? इस पर संक्षिप्त टिप्पणी लिखिये।
उत्तर:
यह एक अस्थायी प्रभाव है जो अभिक्रिया के समय केवल किसी अभिकर्मक की उपस्थिति में कार्य करता है। किसी आक्रमणकारी समूह की उपस्थिति में 1 बंध के इलेक्ट्रॉनों का पूर्ण रूप से अधिक ऋण विद्युती समूह की ओर होने वाला विस्थापन इलेक्ट्रोमेरिक प्रभाव कहलाता है। लेकिन जैसे ही आक्रमणकारी समूह को हटाया जाता है। अणु वापिस अपनी मूल स्थिति में आ जाता है। इलेक्ट्रोमेरिक प्रभाव को
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एक मुड़े हुये तीर द्वारा व्यक्त करते हैं। जो उस स्थान से शुरू होता है जहाँ से इलेक्ट्रॉन जाते हैं और उस स्थान पर समाप्त होता है जहाँ पर इलेक्ट्रॉन आते हैं।

धनात्मक इलेक्ट्रोमेरिक प्रभाव:
इसमें 7 इलेक्ट्रॉन युग्म का स्थानान्तरण अणु की मुख्य संरचना के किसी एक छोर पर स्थित परमाणु से अणु के मुख्य भाग की ओर होता है।
उदाहरण – F, CI, Br, I,- 0 -, NR2,NR

ऋणात्मक इलेक्ट्रोमेरिक प्रभाव:
इलेक्ट्रॉन युग्म का स्थानान्तरण अणु की मुख्य संरचना से बाहर की ओर होता है।
उदाहरण – = N, = O = CR2 = S इत्यादि।
अनुप्रयोग –

  • एल्कीन या एल्काइन पर हैलोजन की योगात्मक अभिक्रिया।
  • कार्बोनिक यौगिकों की नाभिकस्नेही योगात्मक अभिक्रिया।

प्रश्न 29.
प्रेरणिक प्रभाव तथा इलेक्ट्रोमेरिक प्रभाव में अंतर लिखिए।
उत्तर:
प्रेरणिक प्रभाव तथा इलेक्ट्रोमेरिक प्रभाव में अंतर –
प्रेरणिक प्रभाव:

  • यह एक स्थायी प्रभाव है।
  • यह प्रभाव σ बंध के इलेक्ट्रॉनों के विस्थापन के कारण उत्पन्न होता है।
  • आंशिक धन आवेश तथा आंशिक ऋण आवेश उत्पन्न होता है।
  • इसके कारण प्रतिस्थापन अभिक्रिया होती है।
  • अणु में सदैव उपस्थित रहता है।

इलेक्ट्रोमेरिक प्रभाव:

  • यह एक अस्थायी प्रभाव है।
  • यह प्रभाव π बंध के इलेक्ट्रॉनों के विस्थापन के कारण उत्पन्न होता है।
  • पूर्ण धन आवेश तथा पूर्ण ऋण आवेश होता है।
  • इसके कारण योगात्मक अभिक्रियायें होती हैं।
  • यह प्रभाव अभिक्रिया के दौरान आक्रमणकारी समूह की उपस्थिति में उत्पन्न होता है।

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प्रश्न 30.
क्रियात्मक समूह उपस्थित होने पर यौगिकों के नामकरण करने के नियम को उदाहरण सहित समझाइये।
उत्तर:
नामकरण के नियम –

  • उस कार्बन श्रृंखला का चयन मुख्य श्रृंखला के रूप में करते हैं जिसमें क्रियात्मक समूह उपस्थित हों।
  • यदि क्रियात्मक समूह में कार्बन उपस्थित हो तो उसे मुख्य श्रृंखला में गिना जाता है।
  • श्रृंखला का क्रमांकन उस सिरे से प्रारम्भ करते हैं जहाँ से क्रियात्मक समूह सिरे के ज्यादा पास है।
  • नामकरण करते समय पहले प्रतिस्थापी समूह का नाम लिखा जाता है बाद में मुख्य क्रियात्मक समूह का।
  • यदि शृंखला में एक से अधिक क्रियात्मक समूह उपस्थित हो तो वरीयता के आधार पर क्रियात्मक समूह का चयन किया जाता है। फिर प्रतिस्थापी समूह के नाम से पहले मुख्य क्रियात्मक समूह को छोड़कर अन्य क्रियात्मक समूह की स्थिति दर्शाकर उनके नाम लिखते हैं।

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प्रश्न 31.
निम्नलिखित यौगिकों के IUPAC नाम व सूत्र दीजिये

  1. आयोडोफॉर्म
  2. सिरका
  3. फॉर्मिक अम्ल
  4. मार्शगैस
  5. एसीटोन
  6. ग्लाइकॉल
  7. डाईमेथिल ईथर
  8. फॉर्मेल्डिहाइड
  9. मेथिल सायनाइड।

उत्तर:
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प्रश्न 32.
निम्नलिखित यौगिकों के संरचना सूत्र लिखिए –

  1. 3,3,-डाइमिथाइलपेण्टीन
  2. 4-मेथिलहेक्सेन-2ऑल
  3. 1,2डाइब्रोमोएथेन
  4. नाइट्रोमेथेन
  5. 4-मेथिल-3 हाइड्रॉक्सी पेन्टेन।

उत्तर:
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प्रश्न 33.
एलीफैटिक तथा एरोमैटिक यौगिक में अंतर लिखिये।
उत्तर:
एलीफैटिक तथा एरोमैटिक यौगिक में अंतर –

एलीफैटिक यौगिक:

  • ये खुली श्रृंखला वाले यौगिक होते हैं।
  • इनमें प्रायः C – C बंध पाया जाता है।
  • ये अधिक क्रियाशील होते हैं।
  • हैलोजनीकरण, नाइट्रीकरण, सल्फोनीकरण सरलता से नहीं होता।
  • इनकी दहन ऊष्मा अधिक होती है।
  • इनके – OH मूलक उदासीन होते हैं।
  • इनके मूलक क्षारीय होते हैं।

एरोमैटिक यौगिक:

  • ये बंद श्रृंखला वाले यौगिक होते हैं।
  • इनके चक्र में एकान्तर क्रम में एकल व द्विबंध होते हैं।
  • ये कम क्रियाशील होते हैं।
  • हैलोजनीकरण, नाइट्रीकरण, सल्फोनीकरण सरलता से होता है।
  • इनकी दहन ऊष्मा कम होती है।
  • इनके हाइड्रॉक्सी यौगिक अम्लीय गुण दर्शाते हैं।
  • इनके मूलक अम्लीय होते हैं।

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प्रश्न 34.
अनुनाद प्रभाव क्या है ? इसके अनुप्रयोग लिखिये।
उत्तर:
यह प्रभाव संयुग्मी निकाय जिनमें एकल बंध व द्विबंध एकान्तर क्रम में उपस्थित हो उनमें होता है। अनुनाद के कारण निकाय के किसी एक भाग से इलेक्ट्रॉनों का प्रवाह दूसरे भाग की ओर होता है जिससे अलगअलग इलेक्ट्रॉन घनत्व के केन्द्र बन जाते हैं, इस घटना को अनुनाद प्रभाव या मेसोमेरिक प्रभाव कहते हैं। यह एक स्थायी प्रभाव है।

ऋणात्मक मेसोमेरिक प्रभाव:
इलेक्ट्रॉन युग्म का स्थानान्तरण जब परमाणु या समूह की ओर होता है तो इसे – M प्रभाव कहते हैं।
उदाहरण – – NO2, – CHO, – SO3H, > C = O.
धनात्मक मेसोमेरिक प्रभाव-इलेक्ट्रॉन युग्म का स्थानान्तरण जब परमाणु या समूह से दूर की ओर होता है तो उसे +M प्रभाव कहते हैं।
उदाहरण – – OH – OR, – SH, – SR, – NH2, – Cl, – Br
अनुप्रयोग –

  • बेंजीन की संरचना निर्धारण में।
  • द्विध्रुव आघूर्ण की व्याख्या में।
  • अम्ल व क्षार की सामर्थ्य का स्पष्टीकरण।
  • संयुग्मी योगात्मक अभिक्रिया।

प्रश्न 35.
प्रतिस्थापन अभिक्रिया किसे कहते हैं ? उदाहरण सहित समझाइये।
उत्तर:
वे अभिक्रियाएँ जिनमें अभिकारक अणु के किसी परमाणु या समूह का अभिकर्मक के किसी परमाणु या समूह द्वारा प्रतिस्थापन होता है, उसे प्रतिस्थापन अभिक्रिया (Substitution reaction) कहते हैं।
उदाहरण –
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इसमें मीथेन के H परमाणु का CI परमाणु द्वारा प्रतिस्थापन हुआ है।
(ii) CH3CH2 – OH + PCl5 → CH3CH2Cl + POCl3 + HCl
इस अभिक्रिया में एल्कोहॉल का – OH समूह – Cl के द्वारा प्रतिस्थापित हुआ है।

कार्बनिक रसायन : कुछ आधारभूत सिद्धान्त तथा तकनीकें दीर्घ उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 1.
(a) IUPAC नामकरण संबंधी नियम क्या है ?
(b) IUPAC नाम दिया हो तो संरचना सूत्र किस प्रकार लिखा जाता है ?
उत्तर:
(a) IUPAC नामकरण के नियम – किसी यौगिक का IUPAC नामकरण निम्नलिखित नियमों के अनुसार करते हैं –

  • सर्वाधिक लम्बी कार्बन श्रृंखला का चयन
  • वरीय कार्बन श्रृंखला का चयन
  • श्रृंखला में कार्बन परमाणुओं का क्रमांकन
  • प्रतिस्थापियों की स्थितियों का न्यूनतम योग नियम
  • प्रतिस्थापियों का अंग्रेजी वर्णमाला क्रम में नामोल्लेख
  • प्रतिस्थापियों के नामों की संख्या सूचक पूर्वलग्न
  • सम-स्थित प्रतिस्थापियों का स्थान क्रमांकन
  • यौगिक में क्रियात्मक समूह, द्विबंध या त्रिबंध उपस्थित है तो प्रतिस्थापियों की तुलना में वरीयता।

(b) संरचना सूत्र लिखना – कार्बनिक यौगिक के IUPAC नाम ज्ञात होने पर संरचना सूत्र लिखते समय निम्न बिन्दुओं का ध्यान में रखा जाना आवश्यक है –

  • सर्वप्रथम कार्बनिक यौगिक के IUPAC नाम से मुख्य श्रृंखला लिखते हैं।
  • श्रृंखला के किसी भी सिरे से कार्बन श्रृंखला का क्रमांकन करते हैं।
  • अनुलग्न के आधार पर मुख्य क्रियात्मक समूह को उसकी स्थिति के अनुसार दर्शाते हैं।
  • यदि ene तथा yne शब्द का प्रयोग हुआ है तो स्थिति के अनुसार द्विबंध और त्रिबंध को दर्शाते हैं।
  • पूर्वलग्न के आधार पर अन्य क्रियात्मक समूह को उनकी स्थिति के आधार पर दर्शाते हैं।
  • कार्बन की संयोजकता को पूर्ण करने के लिये हाइड्रोजन जोड़ते हैं।

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प्रश्न 2.
कार्बनिक यौगिक में उपस्थित नाइट्रोज न के आकलन की जेल्डॉल विधि का वर्णन निम्न शीर्षक में कीजिए –
1. सिद्धांत
2. चित्र
3. रासायनिक समीकरण
4. अवलोकन तथा गणना।
उत्तर:
जेल्डॉल विधि का सिद्धांत:
जब नाइट्रोजन युक्त कार्बनिक पदार्थ की ज्ञात मात्रा लेकर उसे सान्द्र H2SO4 के साथ गर्म करते हैं तो कार्बनिक यौगिक में उपस्थित नाइट्रोजन, अमोनियम सल्फेट में परिवर्तित हो जाती है। इसे NaOH के साथ गर्म करने पर NH3 गैस बनती है। इस NH3 गैस को मानक अम्ल जैसे H2SO4 के ज्ञात आयतन में अवशोषित कर लेते हैं । प्रयोग के पश्चात् H2SO4 का मानक क्षार के साथ अनुमापन कर अमोनिया की बची मात्रा का परिकलन कर लेते हैं। इस मात्रा से कार्बनिक पदार्थ में नाइट्रोजन की % मात्रा को ज्ञात किया जा सकता है।
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अवलोकन एवं गणना – माना कि:

  • कार्बनिक यौगिक का द्रव्यमान = W gm
  • अमोनिया द्वारा उदासीन किये गये अम्ल का आयतन = Vml
  • अमोनिया द्वारा उदासीन किये गये अम्ल की नार्मलता = N

N नार्मल अम्ल के Vml = N नार्मल अमोनिया में Vml
∴ IN अमोनिया विलयन के 1000 ml में = 17 gm NH3 है या 14 gm N2 है।
1 ….. “….. Vml में नाइट्रोजन = \(\frac { 14 }{ 1000 }\) × Vgm
∴ N नार्मल अमोनिया विलयन के Vml में नाइट्रोजन = \(\frac { 14 }{ 1000 }\) × V × Ngm
Wgm पदार्थ में =\(\frac { 14 × V × N }{ 1000 }\) gm नाइट्रोजन है।
∴ ….. “….. 100 gm = \(\frac { 14 × V × N }{ 1000 }\) × \(\frac { 100 }{ W }\)
नाइट्रोजन का % = \(\frac { 14 × V × N }{ W }\)

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प्रश्न 3.
यौगिकों के आणविक द्रव्यमान ज्ञात करने की विक्टर मेयर विधि को चित्र सहित समझाइये।
उत्तर:
सिद्धांत:
इस विधि द्वारा वाष्पशील पदार्थों के आणविक द्रव्यमान ज्ञात किये जा सकते हैं। किसी वाष्पशील यौगिक की ज्ञात मात्रा को विक्टर नली में वाष्पित करने पर यौगिक की वाष्प अपने आयतन के बराबर वायु को विस्थापित करती है। वाष्पित वायु का आयतन तथा कमरे के ताप को नोट कर लेते हैं तथा गैस समीकरण की सहायता से इस आयतन को S.T.P. पर शुष्क वायु के आयतन में बदल लेते हैं। इस आयतन तथा यौगिक के द्रव्यमान से यौगिक की वाष्प घनत्व तथा आणविक द्रव्यमान की गणना की जा सकती है।

उपकरण:

  • ताँबे का बना हुआ बाहरी जैकेट
  • विक्टर मेयर नली जिसमें काँच की पार्श्व नली लगी होती है
  • अंशाकित सिलेण्डर
  • हॉफमैन बॉटल।

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गणना:
माना कि कार्बनिक यौगिक का द्रव्यमान = Wgm, विस्थापित वायु का आयतन = Vml, वायुमण्डलीय दाब = P mm, कमरे का ताप = t°C या t + 273 K, t°C पर जलीय तनाव = t, शुष्क वायु का दाब = p – f, S. T. P. पर वाष्प का आयतन

प्रायोगिक अवस्था में:
P1 = p – f, V1 = Vml, T1 = t + 273
S. T. P. पर – P2 = 760, V2 = ? T2 = 273 K
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S.T.P. पर V2 ml वाष्प W gm पदार्थ से प्राप्त होती है।
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प्रश्न 4.
कार्बनिक यौगिक के शोधन की स्तम्भ क्रोमैटोग्राफी विधि को समझाइये।
उत्तर:
सिद्धांत:
किसी मिश्रण के विभिन्न अवयवों को किसी अधिशोषक पर अधिशोषित होने की क्षमता या शक्ति में भिन्नता होती है। अधिशोषण के आधार पर किसी मिश्रण में उपस्थित अवयवों को पृथक् करने –

(1) अधिशोषक स्तम्भ बनाना:
ब्यूरेट के समान एक लंबी नली में अधिशोषक पदार्थ जैसे – एलूमिना, जिप्सम, सिलिका जैल में से किसी एक का उचित विलायक में पेस्ट बनाकर नली में भर देते हैं। जब अधिशोषक जम जाता है तब विलायक को थोड़ी देर के लिये बहने दिया जाता है। पेस्ट बनाते समय उसी विलायक का प्रयोग करते हैं जिसमें पृथक्करण किये जाने वाले मिश्रण को विलेय किया जाता है।

(2) अधिशोषण प्रक्रम:
जिस पदार्थ या मिश्रण को अधिशोषित करना होता है उसे विलायक की अल्प मात्रा में विलेय करते हैं। इसके लिये अध्रुवीय विलायक जैसे बेंजीन, ईथर इत्यादि का उपयोग करते हैं। इस विलयन को अधिशोषक स्तम्भ से गुजरने दिया जाता है। मिश्रण का वह अवयव जो अधिक प्रबलता से अधिशोषित होता है वह इस स्तम्भ में सबसे ऊपर एक बैंड बनाता है तथा जो घटक सबसे कम अधिशोषित होता है वह सबसे बाद में बैंड बनाता है। इस प्रकार विभिन्न घटक इस अधिशोषक स्तम्भ में विभिन्न स्थानों पर अधिशोषित होकर भिन्नभिन्न रंगों की पट्टियाँ बनाते हैं।

निक्षालन:
इस पद में पदार्थ का अधिशोषण हो चुकने के बाद निक्षालक विलायक स्तम्भ में डालकर धीरे-धीरे नीचे की ओर बहने देते हैं तथा बहकर निकले हुए द्रव विलयनों को इकट्ठा करते जाते हैं । विलायकों को बढ़ती हुई ध्रुवता के क्रम में प्रयुक्त करते हैं। ये विलायक एक के बाद एक क्रम में डाले जाते हैं।

वह अवयव जो सबसे कम अधिशोषित होता है वह सबसे कम ध्रुवता वाले विलायक द्वारा निक्षालित होता है तथा जो सबसे अधिक अधिशोषित होता है वह अधिक ध्रुवता वाले विलायक द्वारा निक्षालित होता है। फिर इन विलायकों से इन अवयवों को आसवन विधि द्वारा पृथक् कर लिया जाता है।

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प्रश्न 5.
कार्बनिक क्षार के अणुभार ज्ञात करने की क्लोरोप्लेटिनेट विधि का वर्णन कीजिए।
उत्तर:
सिद्धांत:
क्लोरोप्लेटिनिक अम्ल से कार्बनिक क्षार संयोग करके सामान्य सूत्र B2H2PtCl6 के अघुलनशील पदार्थ बनाते हैं। B क्षार के तुल्यांक को दर्शाता है। इस प्लेटिनम लवण में ज्वलन के पश्चात् धात्विक प्लेटीनम प्राप्त होता है।
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प्लेटीनम लवण एवं धात्विक प्लेटीनम दोनों के अलग-अलग भार होने पर क्षार का अणुभार ज्ञात कर लेते हैं।

विधि:
कार्बनिक क्षार को पहले तनु HCl से अभिकृत करके विलेय हाइड्रोक्लोराइड प्राप्त कर लिया जाता है। इसमें प्लेटीनिक क्लोराइड को मिलाकर क्षार के लवण को क्लोरोप्लेटीनेट के रूप में प्राप्त कर लेते हैं। इसे धोकर सुखा लेते हैं। ज्ञात मात्रा को प्लेटीनम क्रूसीबल में लेकर गर्म करने के पश्चात् प्लेटीनम को क्रूसीबल में शेष पदार्थ के रूप में प्राप्त कर लेते हैं। इससे क्षार का तुल्यांक भार ज्ञात कर लेते हैं।

गणना:
क्षार का तुल्यांक भार =E
प्लेटीनम लवण का भार = Wgm
प्लेटीनम का भार = xgm
B2H2PtCl6 का अणुभार = 2E + 2 + 195 + 213 = 2 E + 410
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प्रश्न 6.
कार्बनिक यौगिक में नाइट्रोजन निर्धारण की ड्यूमा की विधि का सिद्धांत बताकर विवरण दीजिये।
उत्तर:
ड्यूमा विधि:
किसी नाइट्रोजन युक्त कार्बनिक पदार्थ की निश्चित मात्रा को क्यूप्रिक ऑक्साइड के साथ CO2 के वायुमण्डल में दहन कराने पर C, H, S क्रमश: CO2H2O व SO2 में ऑक्सीकृत हो जाते हैं। नाइट्रोजन मुक्त अवस्था में प्राप्त होती है तथा साथ में नाइट्रोजन के ऑक्साइड कुछ मात्रा में बनते हैं।
C + 2CuO → CO2 + 2Cu
2H + CuO → H2O + Cu
नाइट्रोजन + CuO → N + नाइट्रोजन के ऑक्साइड

गैसीय मिश्रण को Cu की जाली पर प्रवाहित करने पर नाइट्रोजन के ऑक्साइड नाइट्रोजन में अपचयित हो जाते हैं। मुक्त नाइट्रोजन को HOH से भरे नाइट्रोमीटर में एकत्रित कर लेते हैं। HOH विलयन CO2, SO2, व H2O को अवशोषित कर लेती है। नाइट्रोमीटर में वायुमण्डलीय दाब व ताप पर N2 का आयतन ज्ञात कर इसे S.T.P. में परिवर्तित करके उससे नाइट्रोजन की प्रतिशत मात्रा ज्ञात कर लेते हैं।

अवलोकन व गणना:
कार्बनिक यौगिक का द्रव्यमान = Wgm, नाइट्रोजन का आयतन = Vml, कमरे का ताप = t°C, वायुमण्डल का दाब = p mm, t°C ताप पर जलीय तनाव = f.

सामान्य ताप पर:
P1 = (p – f), V1 = Vml, T1 = t + 273
S. T. P. पर – P2 = 760 mm, V2 = ? T2 = 0 + 273,
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22, 400 ml S.T.P. पर N2 का द्रव्यमान 28gm है।
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MP Board Class 12th Special Hindi Sahayak Vachan Solutions Chapter 5 नैनो टेक्नोलॉजी

MP Board Class 12th Special Hindi सहायक वाचन Solutions Chapter 5 नैनो टेक्नोलॉजी (वैज्ञानिक निबंध, संकलित)

नैनो टेक्नोलॉजी अभ्यास प्रश्न

प्रश्न 1.
नैनो टेक्नोलॉजी क्या है? इसके क्षेत्र-विस्तार के बारे में सम्भावनाएँ बतलाइए। (2011, 14)
उत्तर:
नैनो टेक्नोलॉजी एक अतिसूक्ष्म दुनिया है, जिसका दायरा एक मीटर के अरबवें हिस्से अथवा उससे भी छोटा है। वास्तव में नैनो’ शब्द की उत्पत्ति ग्रीक भाषा के शब्द नैनों से हुई है, जिसका शाब्दिक अर्थ है-बौना अथवा सूक्ष्म। यह नाम जापान के वैज्ञानिक नौरिया तानीगूगूची ने 1976 में दिया। नैनो टेक्नोलॉजी एक इकाई है जो एक मीटर के अरबवें हिस्से के बराबर होती है। आश्चर्यजनक बात यह है कि यह टेक्नोलॉजी जितनी अधिक सूक्ष्म है,उतनी ही विशाल सम्भावनाएँ यह अपने आप में समेटे हुए है। वर्तमान में नैनो टेक्नोलॉजी चिकित्सा के क्षेत्र से लेकर उद्योगों तक में अपनी उपयोगिता सिद्ध कर रही है। यद्यपि भारतीय बाजारों में नैनो उत्पादों की संख्या अत्यन्त कम है,मगर वह दिन दूर नहीं जब भारत में भी नैनो टेक्नोलॉजी जनित उत्पादों का बोलबाला होगा। वर्तमान में भारतीय विशेषज्ञ भी इस क्षेत्र में शोध करने में रत हैं। स्पष्ट है कि भविष्य में नैनो टेक्नोलॉजी के क्षेत्र विस्तार की सम्भावनाएँ असीम हैं।

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प्रश्न 2.
‘नैनोडोमेन’ की निर्माण प्रक्रिया समझाते हुए उसके आश्चर्यजनक परिणाम लिखिए। (2009)
उत्तर:
नैनो टेक्नोलॉजी एक इकाई है जिसका मान 1 मीटर के अरबवें हिस्से के बराबर होता है। एक से लेकर सौ नैनोमीटर को ‘नैनोडोमेन’ कहा जाता है। नैनो टेक्नोलॉजी के तहत मेटेरियल का आकार छोटा करके उसे नैनोडोमेन’ बना लिया जाता है। ऐसा करने पर उस पदार्थ के विभिन्न गुण; जैसे-इलेक्ट्रिकल, मैकेनिकल,थर्मल व ऑप्टीकल इत्यादि हर स्तर पर बदलना शुरू हो जाते हैं। यह एक नवीन विज्ञान है जो बेहद आश्चर्यचकित परिणाम प्रदान करता है। जब अणु और परमाणु नैनो क्षेत्र को प्रभावित करते हैं तो इनमें नवीन परिवर्तन होना प्रारम्भ हो जाते हैं। ये परिवर्तन अद्भुत होते हैं, जिसमें वस्तु के मूल गुण तक बदल जाते हैं।

प्रश्न 3.
नैनो मेटेरियल किसे कहते हैं? नैनो मेटेरियल तैयार करने की दो पद्धतियाँ कौन-कौन सी हैं? (2015)
उत्तर:
नैनो टेक्नोलॉजी के तहत मेटेरियल के आकार को छोटा करके उसे नैनोडोमेन में बदल लिया जाता है। इस प्रक्रिया में मेटेरियल के विभिन्न गुण; जैसे-इलेक्ट्रिकल,मैकेनिकल, थर्मल व ऑप्टीकल इत्यादि हर स्तर पर बदलने लगते हैं। इन परिवर्तनों से अत्यन्त आश्चर्यजनक परिणाम प्राप्त होते हैं। जैसे-जैसे परमाणु का आकार छोटा होता जाता है, उसके अन्दर दूसरी धातुओं व पदार्थों से आपसी प्रतिक्रिया की क्षमता बढ़ती जाती है। इस विशेषता का उपयोग करके नैनो मेटेरियल से एकदम नया उत्पाद सरलता से तैयार किया जा सकता है।

नैनो मेटेरियल को तैयार करने के लिए सदैव दो पद्धतियों को उपयोग में लाया जाता है-प्रथम, बड़े से छोटा करने की पद्धति और द्वितीय, छोटे से बड़ा करने की पद्धति। इन पद्धतियों से एक आश्चर्यचकित कर देने वाला नैनो मेटेरियल तैयार किया जा सकता है।

प्रश्न 4.
चिकित्सा क्षेत्र में नैनो टेक्नोलॉजी की उपयोगिता बताइए। (2009)
उत्तर:
वर्तमान में नैनो टेक्नोलॉजी दुनिया भर में अपनी विशेषताओं और उपयोगिताओं के कारण अत्यन्त तेजी से लोकप्रिय हो रही है। वैसे तो नैनो टेक्नोलॉजी की उपयोगिताओं का क्षेत्र प्रसार अनन्त एवं असीम है, किन्तु वर्तमान में इसका सर्वाधिक प्रभाव चिकित्सा के क्षेत्र में ही देखने को मिल रहा है। वैज्ञानिक इस प्रौद्योगिकी का उपयोग कर ‘गोल्ड पार्टिकल बैक्टीरिया ट्यूमर सेल्स’ का निर्माण कर रहे हैं,जो कैंसर की संमूची प्रक्रिया को ही परिवर्तित करने में सक्षम होंगे। इससे ट्यूमर के खतरनाक तत्व को समाप्त कर दिया जाता है। इसके अतिरिक्त विशेषज्ञ कलाई में पहन सकने योग्य एक ऐसी कलाई घड़ी के रूप में नैनो टेक्नोलॉजी आधारित युक्ति का विकास करने में प्रयत्नशील हैं, जिसके माध्यम से व्यक्ति अपने शरीर की कई बीमारियों का समय रहते पता लगा पायेंगे।

प्रश्न 5.
“सुपर कम्प्यूटर नैनो टेक्नोलॉजी का ही परिणाम है।” समझाइए।
उत्तर:
वर्तमान युग प्रौद्योगिकी एवं कम्प्यूटर का युग है। आज कम्प्यूटर हमारे दिन-प्रतिदिन के जीवन के मध्य इतना घुल-मिल गये हैं कि इनके बिना अब जीवन की कल्पना करना भी आसान नहीं है। कम्प्यूटर की चर्चा चलते ही एक बड़े से घनाभाकार डिब्बे की आकृति मानस-पटल पर अंकित हो उठती है। एक समय था जब कम्प्यूटर अपनी शैशवावस्था में था। उसका आकार काफी बड़ा और उसकी क्षमता सीमित थी। किन्तु नैनो टेक्नोलॉजी के आगमन ने कम्प्यूटर की तो मानो काया ही पलट कर रख दी है। नैनो टेक्नोलॉजी के उपयोग से जहाँ कम्प्यूटर के आकार को छोटा किया जाना सम्भव हो सका है, वहीं उसकी तमाम क्षमताओं में आश्चर्यजनक बढ़ोत्तरी की जा सकती है। कम्प्यूटर के क्षेत्र में नैनो टेक्नोलॉजी के प्रभावी दखल का सबसे ज्वलंत उदाहरण है-‘सुपर कम्प्यूटर’ वास्तव में,सुपर कम्प्यूटर इस नैनो टेक्नोलॉजी का ही परिणाम है। पलभर में अरबों गणनाएँ त्रुटिरहित सम्पन्न कर देना, मैमोरी इतनी विशाल कि असंख्य आँकड़े समा जायें इत्यादि विशेषताएँ सुपर कम्प्यूटर में नैनो टेक्नोलॉजी के उपयोग से ही सम्भव हो सकी हैं।

प्रश्न 6.
निम्नलिखित क्षेत्रों में नैनो टेक्नोलॉजी की उपयोगिता बतलाइए
(1) पेंट
(2) कपड़ा
(3) जल-शोधन,
(4) टी. वी डिस्प्ले।
उत्तर:
जीवन से जुड़े विभिन्न क्षेत्रों में नैनो टेक्नोलॉजी की उपयोगिता अब सर्वविदित है। कुछ विशिष्ट क्षेत्रों में इस नवीन क्रान्तिकारी प्रौद्योगिकी के उपयोग की चर्चा निम्नवत् की जा सकती है-
(1) पेंट उद्योग में :
पेंट उद्योग के क्षेत्र में नैनो टेक्नोलॉजी अपनी पैठ बनाती जा रही है, जैसे-टिटेनियम डाइ-ऑक्साइड पेंट। यदि इस पेंट को नैनो मेटेरियल बनाकर अन्य पेंट में मिला दिया जाये तो उसकी चमक और अन्य गुण बढ़ जाते हैं। इस प्रकार निर्मित पेंट का जीवन अन्य सामान्य पेंट की तुलना में काफी अधिक होता है।

(2) कपड़ा उद्योग में :
कपड़ा उद्योग में भी नैनो टेक्नोलॉजी अपना प्रभाव एवं उपयोगिता सिद्ध कर रही है। इस चमत्कारी प्रौद्योगिकी का उपयोग करके ‘नैनोबेस्ड क्लॉथ’ बनाए जा रहे हैं,जो व्यक्ति के पसीने को सरलता से सोख लेते हैं। साथ ही, इस तकनीक से बना कपड़ा उपलब्ध अन्य कपड़ों की तुलना में अधिक टिकाऊ होता है।

(3) जल-शोधन में :
नैनो टेक्नोलॉजी रूपी वरदान का उपयोग जल-शोधन के क्षेत्र में भी किया जा सकता है। भारत जैसे विकासशील देश में जहाँ तीन-चौथाई जनसंख्या को शुद्ध पेयजल तक उपलब्ध नहीं है, इस प्रौद्योगिकी का उपयोग किसी ‘देव-वरदान’ से कम सिद्ध नहीं होगा। इस नवीन प्रौद्योगिकी के माध्यम से जल में मौजूद एवं स्वास्थ्य के लिए अत्यन्त हानिकारक ऑर्सेनिक तत्त्व को समाप्त कर दिया जाता है अथवा एकत्र कर जल से पृथक् कर दिया जाता है। इस प्रक्रिया में नैनो मिनरल, नैनो गोल्ड, नैनो सिल्वर व नाइट्रेट इत्यादि नैनो उत्पादों का प्रयोग किया जाता है।

(4) टी. वी. डिस्ले में :
नैनो टेक्नोलॉजी के आम जनजीवन में उपयोग का सबसे सुन्दर उदाहरण है टी.वी. डिस्प्ले का क्षेत्र। टेलीविजन पर दिखाई देने वाली तस्वीर की ‘ब्राइटनेस’ व ‘कंट्रास्ट’ को बेहतर बनाने के लिए इस प्रौद्योगिकी का उपयोग किया जाता है। इस प्रक्रिया में नैनो फास्टर मेटेरियल का उपयोग किया जाता है, जिससे टी.वी. की ‘पिक्चर क्वालिटी काफी उन्नत हो जाती है। वास्तव में, नैनो टेक्नोलॉजी एक ऐसी प्रौद्योगिकी है जिसे एक नये युग का सूत्रपात माना जा सकता है।

प्रश्न 7.
भारत में नैनो टेक्नोलॉजी के शिक्षण-प्रशिक्षण की उपलब्धता पर प्रकाश डालिए।
उत्तर:
यदि वर्तमान में भारत में नैनो टेक्नोलॉजी के प्रचार-प्रसार और उपयोग की बात की जाये तो नैनो टेक्नोलॉजी के शिक्षण-प्रशिक्षण में अभी बहुत कम निजी व सरकारी संस्थान आगे आए हैं। वर्तमान में, इस प्रौद्योगिकी से सम्बन्धित मात्र एम. टेक. नैनो टेक्नोलॉजी पाठ्यक्रम ही देश में उपलब्ध है, जिसके लिए निर्धारित योग्यता इंजीनियरिंग की डिग्री अथवा भौतिक विज्ञान, रसायन विज्ञान या जैव प्रौद्योगिकी के साथ स्नातकोत्तर डिग्री अनिवार्य है। एम. टेक.के इस कोर्स की कुल अवधि दो वर्ष है, जिसमें प्रशिक्षुओं को छ: माह का प्रशिक्षण उपलब्ध कराया जाता है।

आशा है कि जिस प्रकार यह प्रौद्योगिकी दनिया-भर में तेजी से अपने पैर पसार रही है. भारत में भी जल्दी ही विश्वविद्यालयों एवं संस्थानों में इससे सम्बन्धित अनेक पाठ्यक्रम पढ़ाए जाने लगेंगे।

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नैनो टेक्नोलॉजी अति लघु उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 1.
किस वैज्ञानिक युक्ति की सहायता से वैज्ञानिक पहली बार अणु व परमाणु को देख पाए?
उत्तर:
जर्मन वैज्ञानिक गार्ड विनिग व स्विट्जरलैंड के हैनरिच रारेर के संयुक्त प्रयास से तैयार ‘स्कैनिंग टानलिंग माइक्रोस्कोप’ की सहायता से वैज्ञानिक पहली बार अणु व परमाणु को देख पाए।

प्रश्न 2.
एक नैनो मीटर मानव बाल के कौन-से हिस्से के बराबर होता है?
उत्तर:
एक नैनो मीटर का आकार ‘मानव बाल के 50 हजारवें’ हिस्से के बराबर होता है।

नैनो टेक्नोलॉजी पाठ का सारांश

संकलित वैज्ञानिक निबन्ध, ‘नैनो टेक्नोलॉजी’ में वर्तमान में चल रहे वैज्ञानिक युग में एक नये एवं क्रान्तिकारी युग के सूत्रपात की अवधारणा और सम्भावना की बात कही गई है।

‘नैनो’ शब्द की उत्पत्ति ग्रीक भाषा के शब्द ‘नैनों’ से हुई है, जिसका अर्थ है-‘बौना’ या ‘सूक्ष्म’। यह नाम जापान के वैज्ञानिक नौरिया तानीगूगूची ने वर्ष 1976 में दिया था । वास्तव में, नैनो टेक्नोलॉजी एक इकाई है जो एक मीटर के अरब हिस्से के बराबर होती है। एक से लेकर सौ नैनोमीटर को ‘नैनोडोमेन’ कहा जाता है।

प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में नैनो टेक्नोलॉजी को एक नए युग के सूत्रपात के रूप में देखा जा रहा है। नैनो टेक्नोलॉजी की दुनिया अति सूक्ष्म है। अद्भुत बात यह है कि जितनी अधिक यह सूक्ष्म है उतनी ही अधिक सम्भावनाएँ इसमें निहित हैं। नैनो टेक्नोलॉजी के तहत मेटेरियल का आकार छोटा करके उसे ‘नैनोडोमेन’ बना लिया जाता है। ऐसा करने पर उस पदार्थ के विभिन्न गुण; जैसे-इलेक्ट्रिकल, मैकेनिकल, थर्मल व ऑप्टीकल, हर स्तर पर बदल जाते हैं। नैनो उत्पाद बेहद हल्के,छोटे,मजबूत,पारदर्शी एवं अपने मूल मेटेरियल से पूरी तरह से भिन्न होते हैं।

वर्तमान प्रौद्योगिकी के इस युग में नैनो टेक्नोलॉजी का क्षेत्र असीम है और इसके विस्तार की सम्भावनाएँ भी अनन्त हैं। आज नैनो टेक्नोलॉजी चिकित्सा क्षेत्र से लेकर उद्योगों तक कहीं-न-कहीं अपनी महत्वपूर्ण भूमिका अदा कर रही है। भारत में भी इसका उपयोग और विस्तार अत्यन्त तेजी से हो रहा है।

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MP Board Class 12th Special Hindi Sahayak Vachan Solutions Chapter 4 मेरे जीवन के कुछ चित्र

MP Board Class 12th Special Hindi सहायक वाचन Solutions Chapter 4 मेरे जीवन के कुछ चित्र (आत्मकथा, डॉ. रामकुमार वर्मा)

मेरे जीवन के कुछ चित्र अभ्यास प्रश्न

प्रश्न 1.
डॉ. रामकुमार वर्मा सबसे पहले अपनी माता का स्मरण क्यों करते हैं? उनकी माता की दिनचर्या लिखिए।
उत्तर:
अपने अतीत के झरोखों में झाँकते समय डॉ.रामकुमार वर्मा के मन-मस्तिष्क में जो सबसे पहली तस्वीर उभरती है वह है उनकी पूज्यनीय एवं प्रातः स्मरणीय माताजी राजरानी देवी की डॉ. वर्मा अपनी माताजी का बहुत आदर और सम्मान करते थे। उनकी माँ एक उच्च कोटि की संगीतज्ञ एवं काव्य-ज्ञान से परिपूर्ण थीं। उन्हीं की प्रेरणा,स्नेह,मार्गदर्शन और आशीर्वाद से वे कविता-लेखन के क्षेत्र में कदम रख सके थे, अत: डॉ.वर्मा अपनी माँ में न सिर्फ करुणामयी माँ का रूप देखते थे, अपितु एक गुरु का बिम्ब भी उन्हें अपनी माँ में दिखाई देता था। अत: डॉ. रामकुमार वर्मा सवसे पहले अपनी माता का स्मरण किया करते थे।

डॉ.रामकुमार वर्मा की माँ एक कुशल संगीतज्ञ एवं कला प्रेमी महिला थीं। उनके कण्ठ में अद्भुत मिठास थी। वे सुबह-सवेरे जल्दी उठकर शौच इत्यादि से निवृत्त हो राग विभास के स्वरों ‘भोर भयो जागह रघुनन्दन’ का तन्मयता से गान करती थीं। परिवार के अन्य सभी लोग उनके कोकिल कण्ठ को सुनने के लिए उनके पास एकत्रित हो जाते थे। ये नियम उनका प्रतिदिन का था। प्रातःकाल गान के पश्चात् ही वे अन्य आवश्यक कार्यों को सम्पादित किया करती थीं।”

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प्रश्न 2.
बचपन में लेखक किस पात्र के अभिनय के विशेषज्ञ थे? इस अभिनय का प्रभाव उन पर कितने समय तक बना रहा?
उत्तर:
बचपन से ही लेखक को कुश्ती लड़ने,नाटक करने, अभिनय करने और पढ़ने का बहुत शौक था। वैसे तो लेखक ने नाटकों में कई पात्रों का अभिनय किया था, किन्तु ‘श्रीकृष्ण’ का अभिनय करने में उन्हें दक्षता प्राप्त थी और वे उसके विशेषज्ञ माने जाते थे। ‘श्रीकृष्ण’ का अभिनय करने के लिए उनके गुरुजन उन्हें शहर के बाहर भी लेकर जाते थे। कई लोग तो उन्हें ‘श्रीकृष्ण’ कहकर ही पुकारने लगे थे।

श्रीकृष्ण’ के अभिनय का लेखक पर प्रभाव पूरे बचपन भर बना रहा। इस पात्र के अतिरिक्त उन्हें किसी अन्य चरित्र का अभिनय करने में आनन्द प्राप्त नहीं होता था। जैसे-जैसे लेखक ने बाल्यावस्था से किशोरावस्था में प्रवेश किया ‘श्रीकृष्ण’ का अभिनय छूटता गया, क्योंकि अब वे बड़े हो गये थे।

प्रश्न 3.
नागपंचमी के दिन घटित अखाड़े की घटना का वर्णन अपने शब्दों में लिखिए।
उत्तर:
बचपन से ही लेखक को कुश्ती लड़ने, नाटक करने, अभिनय करने और पढ़ने इत्यादि का बहुत शौक था। साथ ही,लेखक इनकी प्रतियोगिताओं में भी भाग लेने के लिए सदैव ही उत्सुक रहते थे। एक बार बचपन में लेखक अपने पिताजी के साथ तमाशा देखने के लिए गये। वह नागपंचमी का दिन था। अखाड़े में कुश्ती की प्रतियोगिता चल रही थी। दूर-दूर से कई पहलवान कुश्ती के मैदान में अपना-अपना भाग्य परखने के लिए डटे थे। प्रतियोगिता के दौरान एक पहलवान सबको ‘चित्त’ करता गया और ‘फुल्लम’ (सर्व विजयी) घोषित हुआ। दम्भ के मारे वह पहलवान अखाड़े की मिट्टी को शरीर पर मलते हुए ताल ठोंककर किसी को भी उसका मुकाबला करने के लिए खुली चुनौती देने लगा। लेखक अपने पिताजी के साथ ये सब देख रहे थे।

उनसे यूँ चुनौती से दूर भाग जाना गवारा न हुआ। उन्होंने आव देखा न ताव और उस ‘फुल्लम’ की चुनौती को स्वीकार करते हुए कुश्ती के लिए ललकार दिया। दोनों पहलवानों ने अखाड़े की मिट्टी में अपने-अपने हाथ मले और बोल बजरंग’ के उद्घोष के साथ भिड़ गये। मात्र 5 मिनट से भी कम समय में वह ‘फुल्लम’ पहलवान ‘फुस्स’ हो धरती की धूल चाट रहा था और लेखक के चेहरे पर विजयी आभा तैर रही थी। तालियों की करतल ध्वनि के मध्य लेखक को शेरवानी और नकद पुरस्कार उपहारस्वरूप दिये गये जो लेखक ने प्राप्त करके उदारता के साथ उसी ‘फुल्लम’ पहलवान को प्रदान कर दिये।

प्रश्न 4.
माँ ने रामकुमार वर्मा को पढ़ाई के सम्बन्ध में क्या निर्देश दिए थे? (2010)
उत्तर:
डॉ. रामकुमार वर्मा की माँ एक सुशिक्षित एवं सुसंस्कृत महिला थीं। वे अपने बच्चों में भी शिक्षा के उच्च संस्कार प्रदान करना चाहती थीं। यह उन्हीं के मार्गदर्शन और सीख का फल था कि डॉ.रामकुमार वर्मा कभी अनुत्तीर्ण नहीं हुए, बल्कि वे सदैव ‘डिवीजन’ से उत्तीर्ण होते रहे। पढ़ाई के सम्बन्ध में निर्देशित करते हुए उनकी माँ ने उनसे कहा था कि पढ़ाई में उन्हें पहले दर्जे का ध्यान रखना चाहिए। अपने लक्ष्य के प्रति उसी एकाग्रता एवं समर्पण के साथ प्रयत्नशील रहना चाहिए जिस प्रकार महाभारत काल में अर्जुन ने चिड़िया की केवल आँख पर अपना ध्यान रखा था।

प्रश्न 5.
लेखक ने स्कूल जाना क्यों छोड़ा?
उत्तर:
लेखक जब अपनी किशोरावस्था से युवावस्था में प्रवेश कर रहे थे तब देश में स्वतन्त्रता के लिए संघर्ष अपने चरम पर था। महात्मा गाँधीजी के आह्वान पर देशभर में असहयोग आन्दोलन चलाया जा रहा था। लेखक ने भी इस असहयोग आन्दोलन में भाग लिया। सन् 1921 में जब नागपुर में आयोजित कांग्रेस के सम्मेलन में असहयोग-आन्दोलन का प्रस्ताव पारित हुआ तो लेखक ने मन-ही-मन स्कूल छोड़ने का प्रण कर लिया। लेखक नरसिंहपुर में रहते थे और उनके पिताजी मंडला (सी.पी) में ‘ऐक्स्ट्रा असिस्टेंट कमिश्नर’ थे। उस समय लेखक कक्षा 10 में पढ़ते थे और उन्हें 6 रुपये का वजीफा भी मिलता था। अपने प्रण को पूरा करते हुए लेखक ने स्कूल छोड़ दिया। यह समाचार सुनकर उनके पिताजी ने उन्हें भविष्य के स्वप्न दिखाते हुए पुनः स्कूल जाने के लिए कहा,किन्तु लेखक नहीं माने। पिताजी उनसे रुष्ट हो गये और बेंत से उन्हें दण्ड भी दिया। लेखक ने 72 घण्टे तक उपवास रखा और अपने स्कूल न जाने के निर्णय पर अडिग रहे।

प्रश्न 6.
लेखक ने ‘देश-सेवा’ कविता किन परिस्थितियों में लिखी और उसका क्या परिणाम हुआ? (2016)
उत्तर:
उन दिनों देश-भर में असहयोग आन्दोलन की गूंज थी। बच्चे, बड़े, स्त्री-पुरुष सभी बढ़-चढ़कर उस आन्दोलन में भाग ले रहे थे। गाँधीजी के नेतृत्व में समूचा राष्ट्र मानो एक साथ उठ खड़ा हुआ था। उन दिनों जुलूस राष्ट्रीय झण्डे को लेकर निकलते थे और गाने के लिए नए-नए गीतों की आवश्यकता पड़ती थी। उसी समय देश-सेवा’ कविता के लिए कानपुर के श्री बेनीमाधव खन्ना की 51 रुपये के नकद पुरस्कार वाली घोषणा निकली। लेखक के पिताजी ने लेखक से कहलवाया; “छोटे गाँधीजी से कहो देश-सेवा पर कविता लिखें।” लेखक ने पिताजी की आज्ञा को चुनौती के रूप में स्वीकार करते हुए कविता लिखने की ठान ली। उन्होंने बिना किसी को बतलाए कविता लिखकर भेज दी। तीन माह बाद सूचना मिली कि लेखक की भेजी गई कविता को सर्वोत्तम आँका गया है और उन्हें 51 रुपये का पुरस्कार प्रेषित किया जा रहा है। यूँ कविता चयन की बात सुनकर प्रसन्न माताजी ने लेखक पर अभिमान जताते हुए कहा था, “मुझे गर्व है कि मेरा एक बेटा देश-सेवा में तन-मन से काम कर रहा है” और लेखक के पिताजी ने प्रसन्न होकर लेखक के लिए एक कोट बनवाया था।

मेरे जीवन के कुछ चित्र अति लघु उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 1.
लेखक डॉ. रामकुमार वर्मा के लिए ‘देव पुरस्कार’ से भी अधिक मूल्यवान क्या था?
उत्तर:
लेखक की माताजी संगीतज्ञ एवं काव्य-ज्ञान से पूर्ण थीं। वे उषा-काल में उठकर ‘भोर भयो जागहु रघुनन्दन’ गातीं और लेखक से भी गाने के लिए कहतीं। ठीक गाने पर लेखक को एक जलेबी अधिक का पुरस्कार मिलता था जो लेखक के लिए किसी ‘देव पुरस्कार’ से भी अधिक मूल्यवान था।

प्रश्न 2.
बचपन में लेखक डॉ. रामकुमार वर्मा की विशेष रुचि क्या थीं?
उत्तर:
लेखक को बचपन से ही ‘प्रतियोगिता’ विशेष प्रिय रही। कुश्ती लड़ने, नाटक करने, अभिनय करने और पढ़ने में लेखक की विशेष रुचि रही।

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मेरे जीवन के कुछ चित्र पाठ का सारांश

सुप्रसिद्ध कहानीकार ‘डॉ. रामकुमार वर्मा द्वारा लिखित प्रस्तुत आत्मकथा ‘मेरे जीवन के कुछ चित्र’ में लेखक ने अपने बचपन एवं प्रियजनों से सम्बन्धित अतीत की कुछ घटनाओं का सुन्दर एवं सजीव वर्णन किया है।

लेखक के अनुसार उनके जीवन में उनकी माँ का स्थान सर्वोपरि है। उनकी माता का नाम राजरानी देवी था। वे एक उच्च कोटि की संगीतज्ञ थीं और उन्हें काव्य-ज्ञान भी खूब था। वे प्रात:काल जल्दी उठकर राग विभास में गान करतीं और परिवार के सभी लोग सुध-बुध खोकर तन्मयता से उनके गान को सुना करते थे। उन्हीं की प्रेरणा एवं प्रभाव से लेखक कविता-लेखन के क्षेत्र में प्रविष्ट हुए। बचपन से ही लेखक को कुश्ती लड़ने, नाटक खेलने, अभिनय करने और पढ़ने इत्यादि में गहन रुचि थी। किशोरावस्था में एक बार लेखक ने अपने से कहीं अधिक बलशाली प्रतिद्वन्द्वी को कुश्ती में हराकर पुरस्कार जीता था। अभिनय की यदि बात की जाये तो लेखक श्रीकृष्ण’ के अभिनय के विशेषज्ञ थे। श्रीकृष्ण के अभिनय में उन्होंने बहुत-से पुरस्कार अर्जित किये थे।

लेखक पढ़ने में भी काफी होशियार थे। वे सदैव ‘डिवीजन’ में ही उत्तीर्ण हुआ करते थे। माँ की प्रेरणा पर वे सदैव लक्ष्य पर ही अपना ध्यान केन्द्रित करते और उसे पाकर ही साँस लेते थे। लेखक ने अपने जीवन की प्रथम कविता स्वयं-प्रेरणा से एक छोटी-सी तुकबन्दी के रूप में लिखी थी। युवावस्था में लेखक ने असहयोग आन्दोलन में भाग लिया और विरोधस्वरूप स्कूल छोड़ दिया। एक बार पिताजी के कहने पर लेखक ने देश-सेवा पर एक कविता लिखी और 51 रुपये का नकद पुरस्कार अर्जित कर अपने माता-पिता को गौरवान्वित किया। समाचार के साथ-साथ अपने बचपन की यादों से जुड़ी ये कहानियाँ अब लेखक के मस्तिष्क से निकलती जा रही हैं।

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MP Board Class 12th Biology Important Questions Chapter 4 Reproductive Health

MP Board Class 12th Biology Important Questions Chapter 4 Reproductive Health

Reproductive Health Important Questions

Reproductive Health Objective Type Questions

Question 1.
Choose the correct answers:

Question 1.
The gestation period in human female is :
(a) 30 days
(b) 200 days
(c) 250 days
(d) 270-280 days.
Answer:
(d) 270-280 days.

Question 2.
In population growth curve the early phase is also called as :
(a) Exponential phase
(b) Stationary phase
(c) Lag period
(d) None of these.
Answer:
(c) Lag period

Question 3.
Removal of fallopian tube in human female is called :
(a) Vesectomy
(b) Tubectomy
(c) Ovaritectomy
(d) Castration.
Answer:
(b) Tubectomy

Question 4.
The cause of population explosion in large cities is : (MP 2009 Set A)
(a) Chances of education
(b) Available facilities
(c) Sources of income
(d) All of these.
Answer:
(d) All of these.

Question 5.
Population density is more in : (MP 2009 Set B)
(a) USA
(b) India
(c) China
(d) Japan.
Answer:
(b) India

Question 6.
Ratio of death rate and birth rate percentage is called : (MP 2016)
(a) Organic index
(b) Demography
(c) Population density
(d) Total population.
Answer:
(a) Organic index

Question 7.
Which of the following is the best solution of population problem in India :
(a) Conservation of natural resources
(b) Growth of medicinal fascility
(c) Decreasing in birth rate
(d) Increasing in food product.
Answer:
(c) Decreasing in birth rate

Question 8.
In which state has less population density :
(a) Manipur
(b) Rajasthan
(c) Meghalaya
(d) Arunachal pradesh.
Answer:
(d) Arunachal pradesh.

Question 9.
Meaning of test tube-baby, when child :
(a) Produce from unfertilized egg
(b) Developed in test-tube
(c) Developed by tissue culture
(d) Fertilization of ovum to out side the body then transplant in uterus.
Answer:
(d) Fertilization of ovum to out side the body then transplant in uterus.

Question 10.
Study of human population growth is :
(a) Anthropology
(b) Sociology
(c) Demography
(d) Geography.
Answer:
(c) Demography

Question 11.
Amniocentesis is used for determining :
(a) Heart disease
(b) Brain disease
(c) Hereditary disease of embryo
(d) All of these.
Answer:
(c) Hereditary disease of embryo

Question 12.
Amniocentesis is the withdrawal of amniotic fluid in :
(a) Menopause
(b) Lactation
(c) Gastation
(d) Pregnancy.
Answer:
(d) Pregnancy.

Question 2.
Fill in the blanks :

  1. Statisitical study of population is called ………………
  2. According to Malthus population grows ……………… whereas the means of its subsistinance grows ………………
  3. According to census 2001, the population of India was ………………
  4. The entry and exit of member in any population is called ………………
  5. Cutting and ligating ends of segments of vas deferense is called ………………
  6. The testing of sex of embryo is done by ………………
  7. Immigration ……………… the population.
  8. Study of differences in foetus is called ………………
  9. Theory of population growth was given by ………………

Answer:

  1. Demography
  2. Geometrically Arithmatically
  3. 1,02,70,15,247
  4. Migration
  5. Vasectomy
  6. Amniocentesis
  7. Increases
  8. Teratology
  9. Malthus.

Question 3.
Match the followings :
I.
MP Board Class 12th Biology Important Questions Chapter 4 Reproductive Health Important Questions 1
Answer:

  1. (b)
  2. (d)
  3. (a)
  4. (c)
  5. (e).

II.
MP Board Class 12th Biology Important Questions Chapter 4 Reproductive Health Important Questions 2
Answer:

  1. (d)
  2. (e)
  3. (c)
  4. (b)
  5. (a).

Question 4.
Write the answer in one word/senteces :

  1. Give the full name of IUCD.
  2. Write a disease which is transmitted by sexual contact.
  3. Write the full name of ZIFT.
  4. Name the method in which cutting and binding of spermatic duct in male.
  5. What is the name of the study of population?
  6. World population day celebrated on.
  7. Name the process in which implantation of embryo in fallopian tube.
  8. Name the stage of life which is called puberty.
  9. Name the disease caused by HIV.
  10. Who gave the human population growth theory?
  11. Write the name of technique in which testing of amniotic fluid to find out the sex and disorders of the foetus.
  12. Name the technique by which found the AIDS.
  13. Write the lull name of GIFT.
  14. Name the technique in which removal of a segment of oviduct.

Answer:

  1. Intrauterine Contraceptive Device
  2. Gonorrhoea
  3. Zygote Intrafallopian Transfer
  4. Vasectomy
  5. Demography
  6. 11 July
  7. Actopic pregnancy
  8. 13 to 18 years
  9. AIDS
  10. T.R.Malthus
  11. Amniocentesis
  12. ELISA test
  13. Gamete Intrafaillopian Transfer
  14. Tubectomy.

Reproductive Health Important Questions Very Short Answer Type Questions

Question 1.
Write one benefit of condom.
Answer:
Condom provides protection from Sexually Transmitted Diseases (STDs).

Question 2.
What is the name of contraceptive pill which is taken only in once in a week?
Answer:
“Saheli.”

Question 3.
Write the full form of IUCD.
Answer:
Intra Uterine Contraceptive Device.

Question 4.
Write the full form of STDs.
Answer:
Sexually Transmitted Diseases.

Question 5.
What is the legal age for marriage of male and female in India?
Answer:
For male 21 Years and for female 18 years.

Question 6.
Write the name of two STDs which are spread through infected blood.
Answer:
AIDS, Hepatitis – B.

Question 7.
Write the name of two diseases which are caused by sexual contact.
Answer:
Gonorrhoea, Syphilis.

Question 8.
Write the full form of HIV and AIDS.
Answer:
HIV : Human Immunodeficiency Virus.
AIDS : Acquired Immune Deficiency Syndrome.

Question 9.
Write the full form of ZIFT.
Answer:
Zygote Intrafallopian Transfer.

Question 10.
What is the process for surgical sterilization in males called?
Answer:
Vasectomy.

Reproductive Health Short Answer Type Questions

Question 1.
Explain the following :

  1. Tubectomy
  2. Vasectomy.

Answer:
1. Tubectomy:
The surgical removal of a segment of oviduct and then ligating the cut end is called tubectomy. It is applied in females to check the pregnancy.

2. Vasectomy:
Surgical cutting and ligating ends of segments of vas deferens is called vasectomy.

Question 2.
What is amniocentesis? Write its effects and two advantages.
Answer:
Amniocentesis:
It is prenatal diagnostic technique in which amniotic fluid of uterus is isolated by a surgical needle and foetus cells are cultured on a culture medium and chromosomes are examined.

This technique is used to understand the following things or Advantages:

  1. Chromosomal abnormalities like that of Down’s syndrome, Philadelphia syndrome and Edward’s syndrome.
  2. Metabolic disorders like that of PKV, Cretinism, Alkaptonuria, etc.
  3. Sex of the embryo can be examined by this technique.

Effects of amniocentesis:
Due to this type of test, the female embryos are being eradicated. This leads into the decrease in number of females which may cause a serious problem.

Question 3.
Explain the social causes of human population growth.
Answer:
Social causes of human population growth rate are:

  1. Illiteracy in society.
  2. Low level of society.
  3. Various orthodox tradition like son leads to progeny.
  4. Social barriers.
  5. Early child marriage presuming that after mid-age marriage reproductive capacity degenerates.
  6. Social backwardness.
  7. Social set – up that “Putra Ratan se Moksh milta hai”.

Question 4.
What do you think about the significance of reproductive health in a society?
Answer:
Significance of reproductive health in a society are:

  1. Control over the transmission of STDs.
  2. Less death due to reproduction related diseases, like AIDS, cancer of reproductive tract.
  3. Control in population explosion.
  4. Not only this reproductive health of men and women affectsthe health of the next generation.

Question 5.
Suggest the aspects of reproductive health which need to be given special attention in the present scenario.
Answer:
Special attention need to be given to the following aspects:

  1. Introduction of sex education in school that to helps in eradicating myths and misconceptions regarding sex – related aspects.
  2. Proper information about reproductive organs, safe and hygienic sexual practices and Sexually Transmitted Diseases.
  3. Awareness of problems due to uncontrolled population growth, social evils like sex abuse and sex – related crimes etc.
  4. Strong infrastructural facilities, professional expertise and material support to provide medical assistance and care to people in reproduction related problems.
  5. Educating people about available birth control options, care of pregnant mothers, postnatal care of mother and child, importance of breast feeding, equal opportunities for the male and female child.

Question 6.
Is sex education necessary in schools. Why?
Answer:
Yes, sex education is necessary in schools because:

  1. It will provide proper information about reproductive organs, adolescence, safe, hygienic sexual practices and Sexually Transmitted Diseases (STDs).
  2. It will provide right information to avoid myths and misconceptions about sex related queries.

Question 7.
Do you think that reproductive health in our country has improved in the past 50 years? If yes, mention some such areas of improvement.
Answer:
Yes, reproductive health in our country has improved in the last 50 years.

Some areas of improvement are:

  1. Better awareness about sex-related matters.
  2. Increased number of medically assisted deliveries and better post-natal care of child and mother leading to decreased maternal and infant mortality rates.
  3. Increased number of couples with small families.
  4. Better direction and cure of STDs and overall increased medical facilities for all sex – related problems.

Question 8.
What are the suggested reasons of population explosion?
Answer:
The situation where population exceeds productive capacity is known as popu-lation explosion. In nature, the amount of resources are limited hence, if the population increases in the present rate and increasing beyond the limit, they (Resources) would get exhausted.

Reasons of population explosion : Following are the reasons of population explosion:

  1. Increasing birth rate.
  2. Decreasing death rate.
  3. Higher rate of reproduction.
  4. Medical services have brought down mortality due to fatal diseases and epidemics.
  5. Lack of predator in the civilized world today, the only predator of man is man himself.

Question 9.
Is the use of contraceptives justified? Give reasons.
Answer:
Yes, use of contraceptive is justified because it helps to control the rapid growth of human population. It will also help in preventing unwanted pregnancies and STDs. Contraceptive also help in controlling the population growth rate.

Question 10.
Removal of gonads can not be considered as a contraceptive option, why?
Answer:
Removal of gonads not only stops the production of gametes but will also stop the secretions of various important hormones, which are important for bodily func¬tions. This method is irreversible and thus, can not be considered as a contraceptive method.

Question 11.
Amniocentesis for sex determination is banned in our country. Is this ban necessary? Comment.
Answer:
Yes, the ban is necessary because amniocentesis is misused for determining the sex of the foetus and then aborting the child if it is a female. This process is illegal as it causes harm to the foetus as well as mother it can also disturb the sex ratio.

Question 12.
What is test – tube baby?
Answer:
In some cases, a woman is unable to have a normal fertilization to bear the child. In such cases, test – tube technique may be successful. In this technique, the unfertilized eggs of such woman is isolated in aseptic condition and fertilized it in test – tube by the sperms of her husband. The fertilized egg or blastocyst can be maintained in vitro till it gets 32 celled stage. It can be implanted in the uterus of the female. The female remains under the supervision of doctor till completion of gestation period of 280 days. The baby produced in such a way is called a test – tube baby.

Question 13.
What is GIFT? Explain in brief.
Answer:
GIFT (Gametes Intrafallopian Transfer): It is a latest technique to produce a child. In this technique, the gametes are kept separately in a catheter and injected directly into the fallopian tube of the woman using laproscopy. Thus, in this case, fertilization occurs inside the body of woman. Prior to injection of gametes, the mother would be given hormones for about a week to stimulate follicle formation. This causes development of several eggs i.e., super ovulation. The first GIFT in India was done in Mumbai and twins were born in August, 1990.

Reproductive Health Long Answer Type Questions

Question 1.
Suggest some methods to assist infertile couples to have children.
Answer:
If the couples are enable birth the children and corrections are not possible, the couples could be assisted to have children through certain special techniques, com¬monly known as Assisted Reproductive Technologies (ART). Some methods are given as:

(1) In Vitro Fertilization (IVF):
In this method, ova from the female and the sperm from the male are collected and induced to form zygote under stimulated conditions in the laboratory. This process is called In Vitro Fertilization (IVF). Some method given as follows:

1. Zygote Intrafallopian Transfer (ZIFT):
The zygote or early embryo with up to 8 blastomeres is transferred into the fallopian tube.

2. Intra Uterine Transfer (IUT):
Embryo with more than 8 blastomeres is trans – ferred into the uterus in females who cannot conceive embryos formed by fusion of gametes in another female are transfered.

3. Test – tube baby:
In this method, ova from the donor (female) and sperm from the donor (male) are collected and are induced to form zygote under stimulated conditions in the laboratory. The zygote could then be transferred into the fallopian tube and embryos transferred intc the uterus, to complete its further development. The child bom from this method is called test-tube baby.

(2) Gamete Intrafallopian Transfer (GIFT):
It is the transfer of an ovum collected from a donor into the fallopian tube of another female who cannot produce one, but can provide suitable environment for fertilization and further development of the embryo.

(3) Intra Cytoplasmic Sperm Injection (ICSI):
It is a procedure to form an embryo in the laboratory by directly injecting the sperm into an ovum.

(4) Artificial Insemination (AI):
In this method, the semen collected either from the husband or a healthy donor is artificially introduced into the vegina or into the uterus (Intra Uterine Insemination, IUI). This technique is used in cases where the male is unable to inseminate sperms in the female reproductive tract or due to very low sperm counts in the ejaculation.

(5) Host Mothering:
In this process, the embryo is transferred from the biological mother to a surrogate mother. The embryo then develops till it is fully developed or partially developed. It is then transferred to the biological mother or into any other. This technique is useful for females in which embryo forms but is not able to develop.

Question 2.
What are the measures one has to take to prevent from contracting STDs?
Answer:
STDs can be prevented by the following methods:

  1. Avoid sex with unknown partners/multiple partners.
  2. Always use condoms during coitus.
  3. Always contact a qualified doctor for any doubt in early stage of infection and get complete treatment if diagnosed with disease.

Question 3.
State True/False with explanation.

Question (a)
Abortion could happen spontaneously too. (True/False)
Answer:
False, Abortion does not happen under normal conditions. It happens accidently or under the will of Parents.

Question (b)
Infertility is defined as the inability to produce a viable offspring and is always due to abnormalities/defects in the female partner. (True/False)
Answer:
False, Sterility always does not occur due to female. Sometimes males are also responsible for this.

Question (c)
Complete lactation could help as a natural method of contraception. (True/False)
Answer:
True, Menstrual cycle does not occur after parturition which can act as natural contraception but this method is functional for a period of six months from parturition.

Question (d)
Creating awareness about sex related aspects is an effective method to im-prove reproductive health of the people. (True/False)
Answer:
True, this creates better reproductive health among people.

Question 4.
Correct the following statements:

Question (a)
Surgical methods of contraception prevent gamete formation.
Answer:
It prevents the transportation of gametes not their formation.

Question (b)
All sexually transmitted diseases are completely curable.
Answer:
Hepatitis – B and AIDS are not curable.

Question (c)
Oral pills are very popular contraceptives among the rural women.
Answer:
Oral pills are not popular among rural women. They require sex education.

Question (d)
In E.T. techniques, embryos are always transferred into the uterus.
Answer:
In E.T. techniques, 8 – celled blastomere is transferred into the fallopian tube. While more than 8 – celled blastomere is transferred into the uterus.

MP Board Class 12th Biology Important Questions