MP Board Class 6th Sanskrit Solutions Chapter 7 संहतिः कार्यसाधिका

MP Board Class 6th Sanskrit Solutions Surbhi Chapter 7 संहतिः कार्यसाधिका

MP Board Class 6th Sanskrit Chapter 7 अभ्यासः

Mp Board Class 6 Sanskrit Chapter 7 प्रश्न 1.
एकपदेन उत्तरं लिखत (एक शब्द में उत्तर लिखो)
(क) वयं नेत्राभ्यां किं कर्मः? (हम दोनों नेत्रों से क्या करते हैं?)
उत्तर:
पश्यामः (देखते हैं)

(ख) तृणानां मेलनेन किं भवति? (तिनकों के मेल से क्या होता है?)
उत्तर:
रज्जुनिर्माणं (रस्सी का निर्माण)

(ग) केन बलशाली गजः बध्यते? (बलशाली हाथी किससे बाँधा जाता है?)
उत्तर:
रज्जुना (रस्सी से)

(घ) कैः वस्त्रनिर्माणं भवति? (वस्त्र निर्माण किससे होता है?)
उत्तर:
तन्तुभिः (धागों से)

(ङ) घटः केन पूर्णः भवति? (घड़ा किससे भर जाता है?)
उत्तर:
बिन्दुना (बूंद से)

(च) का कार्यसाधिका भवति? (कार्य में सफलता देने वाली क्या होती है?)
उत्तर:
संहति (एकता)।

कक्षा 6 संस्कृत पाठ 7 MP Board प्रश्न 2.
एकवाक्येन उत्तरं लिखत (एक वाक्य में उत्तर लिखो)
(क) वयं कया जिघ्राम:? (हम किससे सूंघते हैं?)
उत्तर:
वयं नासिकया जिघ्रामः। (हम नाक से सूंघते हैं।)

(ख) वयं कैः अन्नचर्वणं कुर्मः? (हम किसके द्वारा अन्न को चबाते हैं?)
उत्तर:
वयं दन्तैः अन्नचर्वणं कुर्मः। (हम दाँतों से अन्न को चबाते हैं।)

(ग) केन चक्रनिर्माणं भवति? (किसके द्वारा चक्र का निर्माण होता है?)
उत्तर:
बहुनाम् अराणां सहयोगेन चक्रनिर्माणं भवति। (बहुत-सी तीलियों के सहयोग से चक्र का निर्माण होता है।)

(घ) वृक्षः कैः शोभते? (वृक्ष किससे शोभा पाता है?)
उत्तर:
पर्णैः, पुष्पैः, फलैः, शाखाभिः च वृक्षः शोभते। (पत्तों, फूलों, फलों और शाखाओं से वृक्ष शोभा पाता है।)

संहतिः कार्यसाधिका Meaning MP Board Class 6th प्रश्न 3.
उचितं मेलयत (उचित का मिलान करो)
Mp Board Class 6 Sanskrit Chapter 7
उत्तर:
(क) → 3
(ख) → 7
(ग) → 6
(घ) → 5
(ङ) → 2
(च) → 1
(छ) → 4

Class 6 Sanskrit Chapter 7 MP Board प्रश्न 4.
निम्नलिखितशब्दानां तृतीयाविभक्तेः रूपाणि लिखत (निम्नलिखित शब्दों के तृतीया विभक्ति के रूपों को लिखो)
(1)(क)-पाद, (ख)-घट, (ग)-अर।
(2) (क)-जिह्वा, (ख)-इष्टिका, (ग)-शाखा।
(3) (क)-शरीर, (ख)-चक्र, (ग)-चित्र।
उत्तर:
कक्षा 6 संस्कृत पाठ 7 MP Board

Sanskrit Class 6 Mp Board  प्रश्न 5.
निम्नलिखितैः शब्दैः वाक्यानि रचयत (निम्नलिखित शब्दों से वाक्यों की रचना करो)
(क) हस्तेन
(ख) पादाभ्या
(ग) नासिकया
(घ) मालाभिः
(ङ) संहतिः।
उत्तर:
(क) अहम् हस्तेन कार्यम् करोमि। (मैं हाथ से कार्य करता हूँ।)
(ख) वयम् पादाभ्यां चलामः। (हम दो पैरों से चलते हैं।)
(ग) नासिकया वयं जिघ्रामः। (हम नाक से सूंघते हैं।)
(घ) मालाभिः देवताः पूज्यन्ते। (मालाओं से देवताओं की पूजा की जाती है।)
(ङ) संहतिः कार्यसाधिका भवति। (एकता से कार्य सफल होता है।)

Mp Board Solution Class 6 Sanskrit प्रश्न 6.
उचितशब्दैः रिक्तस्थानानि पूरयत (उचित शब्दों से रिक्त स्थानों की पूर्ति करो)
(क) कार्यसाधनाय ……….. श्रेष्ठा। (भिन्नता/संहतिः)
(ख) मालायाः निर्माणं …….. भवति। (पुष्पैः/पुष्पाय)
(ग) वयं नेत्राभ्यां ……….। (शृणुमः/पश्यामः)
(घ) ………. वस्त्रनिर्माणं भवति। (बिन्दुभिः/तन्तुभिः)
(ङ) कार्याणि ……….. पूर्णानि भवन्ति। (जनेन/जनैः)
(च) सीता ……….. सह वनं गच्छति।। (जनकेन/रामेण)
(छ) रमेशः मित्रैः ……….. क्रीडति। (सः/सह)
(ज) रमा …………. सह क्रीडति। (लतया/लतायाः)
उत्तर:
(क) संहतिः
(ख) पुष्पैः
(ग) पश्यामः
(घ) तन्तुभिः
(ङ) जनौः
(च) रामेण
(छ) सह
(ज) लतया।

संस्कृत सुरभि कक्षा 6 MP Board प्रश्न 7.
पाठे आगतान् तृतीयाविभक्तेः शब्दान् लिखत (पाठ में आये हुए तृतीया विभक्ति के शब्दों को लिखो)
उत्तर:
(1) शरीरेण, (2) मेलनेन, (3) सहयोगेन, (4) नेत्राभ्याम्, (5) कर्णाभ्याम्, (6) नासिकया, (7) जिह्वया, (8) पादाभ्याम्, (9) हस्ताभ्याम्, (10) दन्तैः, (11) मुखेन, (12) रज्जु ना, (13) तेन, (14) घटेन, (15) पुष्पैः, (16) मालाभिः, (17) जनैः, (18) एकेन, (19) जनेन, (20) बहुभिः, (21) क्रीडकैः, (22) विभिन्नैः, (23) मुद्रितपत्रैः, (24) पर्णैः, (25) पुष्पैः, (26) फलैः, (27) शाखाभिः, (28) तन्तुभिः, (29) पञ्चभिः, (30) अङ्गुलीभिः, (31) एकया, (32) इष्टिकया, (33) बिन्दुना, (34) निपातेन, (35) तृणैः, (36) आपन्नेः।

Class 6 Sanskrit Surbhi MP Board प्रश्न 8.
एकतया जनाः कानि-कानि कार्याणि कुर्वन्ति, चिन्तयित्वा पञ्च वाक्यानि लिखत। (एकता से मनुष्य कौन-कौन से कार्य करते हैं, विचार करके पाँच वाक्य लिखो।)
उत्तर:

  1. एकतया जनाः देशस्य रक्षां कुर्वन्ति।
    (एकता से मनुष्य देश की रक्षा करते हैं।)
  2. एकतया जनाः सबलाः भवन्ति।
    (एकता से लोग बलशाली बनते हैं।)
  3. एकतया विपत्तिकाले अपि सफलताम् आनुवन्ति।
    (एकता से विपत्तिकाल में भी सफलता प्राप्त करते हैं।)
  4. एकतया कठिन कार्याणि अपि तैः क्रियन्ते।
    (एकता से कठिन कार्य भी उनके द्वारा किये जाते हैं।)
  5. एकतया राष्ट्रस्य विघटनम् अपि न कर्तुम् शक्यते।
    (एकता से राष्ट्र का विघटन भी नहीं किया जा सकता।)

Class 6th Sanskrit Chapter 7 MP Board योग्यताविस्तारः
अधोलिखितान् श्लोकान् कण्ठस्थं कुरुत, तृतीयाविभक्तेः शब्दान् चिनुत।
(नीचे लिखे श्लोकों को कण्ठस्थ करो। तृतीया विभक्ति के शब्दों को चुनो।)
उत्तर:
(1) पाठ्य पुस्तक के इन श्लोकों को सावधानीपूर्वक बार-बार पढ़िये। शुद्ध वाचन करके कण्ठस्थ करने का प्रयास कीजिए।

(2) तृतीया विभक्ति के शब्द

  • दाने, कङ्कणेन, स्नानेन, चन्दनेन, मानेन, भोजनेन, ज्ञानेन, मुण्डनेन।
  • चतुर्भिः, ताडनैः, त्यागेन, शीलेन, गुणेन।
  • पञ्चभिः।

संहतिः कार्यसाधिका हिन्दी अनुवाद :

शरीरेण एकताबोधः भवति। शरीरे विभिन्नानि अङ्गानि भवन्ति। अङ्गानां मेलनेन शरीरनिर्माणं भवति। अङ्गानां सहयोगेन एव शरीरं सर्वाणि कार्याणि करोति।

वयं नेत्राभ्यां पश्यामः। कर्णाभ्यां शृणुमः। नासिकया जिघ्रामः। जिह्वया स्वादयामः। पादाभ्यां चलामः। हस्ताभ्यां कार्यं कुर्मः। दन्तैः अन्नचर्वणं कुर्मः। मुखेन खादामः, पिबामः वदामः च। एवम् अङ्गानां सहयोगेन एव शरीरेण सर्वाः क्रियाः भवन्ति।

अल्पानाम् अपि वस्तूनां सहयोगेन वयं दीर्घाणि कार्याणि कुर्मः। तृणानां मेलनेन रज्जुनिर्माणं भवति। रज्जुना शय्यानिर्माणं भवति। तेन एव कूपात् घटेन जलं प्राप्नुमः। रज्जुना बलशाली गजः अपि बध्यते। पुष्पैः मालायाः निर्माणं भवति। मालाभिश्च देवानां पूजनं वयं कुर्मः। महत् कार्याणि बहुभिः जनैः एव पूर्णानि भवन्ति, न तु एकेन जनेन।

अनुवाद :
शरीर से एकता का बोध होता है। शरीर में अनेक अङ्ग होते हैं। अङ्गों के मेल से शरीर का निर्माण होता है। अङ्गों के सहयोग से ही शरीर सभी कार्यों को करता है।

हम दो नेत्रों से देखते हैं। दो कानों से सुनते हैं। नाक से सूंघते हैं। जीभ से स्वाद लेते हैं (चखते हैं)। दो पैरों से चलते हैं। दो हाथों से कार्य करते हैं। दाँतों से अन्न को चबाते हैं। मुख से खाते हैं, पीते हैं और बोलते हैं। इस प्रकार अङ्गों के सहयोग से ही शरीर के द्वारा सभी क्रियाएँ होती हैं।

थोड़ी-सी भी वस्तुओं के सहयोग से हम बड़े कार्यों को कर लेते हैं। तिनकों के मेल से रस्सी का निर्माण होता है। रस्सी से शय्या (चारपाई) का निर्माण होता है। उसके द्वारा ही कुएँ से घड़े के द्वारा जल प्राप्त करते हैं। रस्सी से बलशाली हाथी भी बाँध लिया जाता है। फूलों से माला का निर्माण होता है और मालाओं से देवताओं की पूजा करते हैं। बड़े-बड़े कार्य बहुत-से लोगों के द्वारा ही पूरे किए जाते हैं, न कि एक आदमी के द्वारा।

बहुभिः क्रीडकैः एव क्रीडनं भवति। विभिन्नै: मुदितपत्रैः पुस्तकनिर्माणं भवति। पर्णैः, पुष्पैः, फलैः,शाखाभिः च वृक्षः शोभते। तन्तुभिः वस्त्रनिर्माणं भवति। पञ्चभिः अङ्गुलीभिः मुष्टिः भवति। बहूनाम् अराणां सहयोगेन चक्रनिर्माणं भवति। एकया एकया इष्टिकया गृहनिर्माणं भवति। एकेन एकेन बिन्दुना घटः पूर्णः भवति। तदा वयं जलं पिबामः। उक्तश्च-
“जलबिन्दुनिपातेन क्रमशः पूर्यते घटः”

अतः संहतिः एव कार्यसाधिका भवति। अनेकातायाम् एकता अस्माकं भारतदेशस्य गौरवसूत्रम् अपि अस्ति। उक्तम्

अल्पानामपि वस्तूनां संहतिः कार्यसाधिका।
तृणैर्गुणत्वमापन्नैर्बध्यन्ते मत्तदन्तिनः॥

अनुवाद :
बहुत से खिलौनों से खेल होता है। लिखे हुए विभिन्न पृष्ठों से पुस्तक का निर्माण होता है। पत्तों, फूलों, फलों, और शाखाओं से वृक्ष शोभा पाता है। धागों से वस्त्र (कपड़ा)
का निर्माण होता है। पाँच अँगुलियों से मुट्ठी बनती है। बहुत-सी तीलियों के सहयोग से चक्र का निर्माण होता है। एक-एक ईंट से घर का निर्माण होता है। एक-एक बूंद से घड़ा भर जाता है। तब हम जल पीते हैं।

कहा भी गया है-
“क्रमश: जल की बूंदों के गिरने से घड़ा भर जाता है।”
इसलिए एकता ही कार्य को सिद्ध कराने वाली होती है। अनेकता में एकता हमारे भारत देश का गौरवसूत्र (धागा) भी है।

कहा गया है-
“छोटी सी वस्तुओं की संहति (एकता) कार्य में सफलता प्राप्त कराती है। घास से रस्सी बना लेने पर (घास-फूस को कई गुना करके रस्सी बना लेने से) मतवाले हाथियों को भी बाँध लिया जाता है।”

संहतिः कार्यसाधिका शब्दार्थाः

कर्णाभ्यां = कानों से। क्रीडकैः = खिलाड़ियों से। संहति = एकता। कार्यसाधिका = कार्य को सिद्ध करने वाली। रज्जुना = रस्सी के द्वारा। घटः = घड़ा। इष्टिकया = ईंट से। जिह्वया = जीभ से। गजः = हाथी। मुदितपत्रैः = लिखित पन्नों द्वारा (पृष्ठों द्वारा)। अराणाम् = तीलियों के। मुष्टिः = मुट्ठी।

MP Board Class 6th Sanskrit Solutions

MP Board Class 7th Special English Solutions Chapter 17 The Pied Piper of Hamelin-II

Get Updated MP Board Solutions for Class 7 Special English Solutions Chapter 17 The Pied Piper of Hamelin-II Questions and Answers in PDF Format and download them free of cost. These are provided as per the latest exam pattern and syllabus. Access the topics of Chapter wise and communication skills, grammer part through the direct links available depending on the need. You can Download MP Board Class 7 English Solutions and can score highest grade in examination. Clear all your queries on the Mp Board Solutions for Class 7 English Chapter 17 The Pied Piper of Hamelin-II Questions and Answers Subject by using the Madhya Pradesh State Board Solutions for existing.

MP Board Class 7th Special English Solutions Chapter 17 The Pied Piper of Hamelin-II

If you are eager to know about the Madhya Pradesh State Board Solutions for Class 7 English you will find all of them here. You can identify the knowledge gap using these MP Board Solutions for English PDF and plan accordingly. Don’t worry about the accuracy as they are given after extensive research by people having subject knowledge along side from the latest English Syllabus.

The Pied Piper of Hamelin-II Text Book Exercise

Read and Learn

The Pied Piper Of Hamelin Questions And Answers Class 7 MP Board

Comprehension

A. Answer these questions:

The Pied Piper Of Hamelin Questions And Answers Class 7 MP Board Question 1.
What suggestions would Ravi and Ashok have offered the Mayor for getting rid of the rats?
Answer:
Ravi would have suggested to the’ Mayor to ‘poison the rats if he had been a councillor. Similarly Ashok would have suggested the Mayor to employ all the carpenters in the town to mend all old traps and make thousands of new ones. Besides, he would also have asked the Mayor to get all the holes plugged.

The Pied Piper Of Hamelin Class 7 MP Board Question 2.
Why did the Mayor not get the rats poisoned?
Answer:
The Mayor did not get the rats poisoned because by poisoning the rats he would be getting the people poisoned as well. No one in Hamelin could 1 eat food before rats had tasted it.

The Pied Piper Of Hamelin Questions And Answers MP Board Question 3.
What did the Mayor promise the Pied Piper?
Answer:
The Pied Piper promised the Mayor to rid the people of all the rats in the town. He would do so by drawing the rats after him through his secret charm.

The Pied Piper Was Dressed In MP Board Question 4.
Why did the Pied Piper look very strange?
Answer:
The Piper looked very strange on account of his red and yellow dress and odd appearance. He was dressed in red and yellow. He was as thin as a starved rat. He had a crooked nose and bright, blue eyes. He had no beard and a smile played on his lips.

Class 7 English Chapter 17 MP Board Question 5.
What did the Pied Piper do with the rats?
Answer:
The Pied Piper played a time on his Pipe. An army of rats followed him. He led the rats to river Weser. AH the rats except one rat ran into the water and were drowned.

Pied Piper Of Hamelin Question Answer MP Board Question 6.
Why was the Pied Piper disappointed?
Answer:
The Pied Piper was disappointed because the Mayor refused to pay him the promised amount of one thousand guilders. He rather offered him only fifty guilders.

Mp Board Class 7th English Chapter 17 Question 7.
How did the Piper punish the people of Hamelin?
Answer:
The Piper played a different tune. All the children were drawn to the charming tune. They followed the Piper merrily. In this way, the Piper punished the people of Hamelin very severely. He led their children to some unknown place in the side of mountain near the town.

Class 7th English Chapter 17 MP Board Question 8.
Was it right for the Mayor to deny the Piper his due? Why?
Answer:
The Mayor had promised the Pied Piper to pay him one thousand dollars in cash. The Pied Piper managed to rid the people of Hamelin of the nuisance caused by the rats. Therefore, it was wrong for the Mayor to deny the Piper his due.

B. Tick the correct option

The Pied Piper Of Hamelin Class 7 Solutions MP Board Question 1.
People wanted to get rid of
(i) the. Mayor
(ii) the rats
(iii) the councillors
Answer:
(ii) the rats

The Pied Piper Of Hamelin Question Answer MP Board Question 2.
All the carpenters worked to
(i) mend and make traps
(ii) plug holes
(iii) give poison to the rats.
Answer:
(i) mend and make traps

The Pied Piper Of Hamelin Solutions MP Board Question 3.
The Mayor made a
(i) rash promise
(ii) good promise
(iii) wrong promise
Answer:
(i) rash promise

Class 7 English Chapter 17 Question Answer MP Board Question 4.
The Pied Piper was dressed in
(i) red and yellow
(ii) blue and black
(iii) fine clothes
Answer:
(i) red and yellow

C. Say True or False.

  1. People liked the train of rats. T / F
  2. Dogs ate up all the rats T / F
  3. The Pied Piper sang a tune and led all the rats to the river. T / F
  4. The mayor was not honest. T / F
  5. The Pied Piper was disappointed. T / F

Answer:

  1. False
  2. False
  3. True
  4. True
  5. True.

Word Power

A. Fill in the blank spaces choosing the correct words from those given below:
(deny, army, cash, tune, deserve, suggest)

  1. Mahesh played a charming ………….. on a flute.
  2. First ………… then desire.
  3. Indian ……….. is one of the best armies of the world.
  4. I can accept money either in ………… or by cheque.
  5. You always ………. for my welfare.
  6. Always try to keep your promises. Never ……….. them.

Answer:

  1. tune
  2. deserve
  3. army
  4. cash
  5. suggest
  6. deny

B. Circle the odd word:

  1. guitar, pipe, sitar, radio
  2. rose, marigold, jasmine, road
  3. girl, lady, woman, man
  4. lecturer, professor, postman, teacher
  5. dollar, pound, rupee, cheque.
  6. milk, tea, bread, coffee.

Answer:

  1. radio
  2. road
  3. girl
  4. postman
  5. cheque
  6. bread.

Grammer in Use

A. Study these sentences

  1. He had all the old traps mended.
  2. He had all the rats aken away in a day.
  3. Mona had her hair cut in a parlour.

Now write ten meaningful sentences from the table given below.
The Pied Piper Of Hamelin Class 7 MP Board
Answer:

  1. He had a table made for his drawing.
  2. He had a chair mended.
  3. He had his clothes washed.
  4. He had his hair cut by a barber.
  5. He had his wound dressed by a doctor.
  6. Rahim had his bicycle repaired.
  7. Rahim had his house whitewashed.
  8. My friend had his house rebuilt in stone.
  9. Rahim had a photograph of his child taken by a friend of his.
  10. My friend had his house cleaned.

B. Rewrite the five sentences given below into passive voice as given in the first example:

Question 1.
The policeman asked.me many questions.
Answer:
I was asked many questions by the policeman.

Question 2.
Hie next day they found the owner of the ring.
Answer:
The owner of the ring was found (by them) the next day.

Question 3.
He asked me many more questions.
Answer:
Many more questions were asked of me by him.

Question 4.
He told me it was a very expensive ring.
Answer:
I was told by him that it was a very expensive ring.

Question 5.
The owner of the ring gave me the reward two days later.
Answer:
I was given the reward two days later by the owner of the ring.

Let’s Talk

Sit in pairs and talk to each other. One will speak the words of the Mayor and the other will speak the words of the piper – “Mayor would you like to get rid of the rats?”
“Who are you? Why do you ask this silly question?”
“I am the Pied Piper. By means of secret charm, I am able to draw after me all the living things on the earth or in the air.”
“A secret charm? What is it?”
“Don’t bother about it. You can pay me after I have saved you from the rats.”
“You won’t be denied anything you ask for, if you get rid of the rats for us.”
Answer:
Some more Sentences:
Pied Piper : I shall charge a thousand guilders in cash.
Mayor : Agreed.
Pied Piper : I shall start playing a tune and see its charm
Mayor : It is really a wonder that all sizes of rats have started running out of the houses.
Pied Piper : Now, I shall drown them in river Weser.
Mayor : I wish it were so!
Pied Piper : Now the work is finished. Give me my fee.
Mayor : Well, take this amount of fifty guilders. It is for your petty service.
Pied Piper : You will feel sorry for backing out of your promise.
Mayor : Do you know the result of challenging me?

Let’s Write

Question 1.
Describe in your own words the look and the dress of the Pied Piper.
Answer:
The Pied Piper was dressed in red and yellow. He had a pipe in his hand. He was very thin. His nose was crooked. His eyes were sharp and blue. He had no beard. He had smiling lips. He looked very strange.

Let’s Do it

This is only an imaginary story. Find out some more such stories from the story books and tell them to your friends.
Answer:
Class-room Activity

The Pied Piper of Hamelin-II Word Meaning 

The Pied Piper Of Hamelin Questions And Answers MP Board

We believe the information shared regarding MP Board Solutions for Class 7 English Chapter 17 The Pied Piper of Hamelin-II Questions and Answers as far as our knowledge is concerned is true and reliable. In case of any queries or suggestions do leave us your feedback and our team will guide you at soonest possibility. Bookmark our site to avail latest updates on several state board Solutions at your fingertips.

MP Board Class 8th Special English Solutions Chapter 17 Manav Sangrahalaya: One of Its Kind

Guys who are planning to learn the fundamentals of English can avail the handy study material using MP Board Solutions for Class 8 English Chapter 17 Manav Sangrahalaya: One of Its Kind Questions and Answers. You Can Download MP Board Class 8 English Solutions Questions and Answers, Notes, Summary, Guide, Pdf. Refer to the Madhya Pradesh State Board Solutions for English PDF available and score better grades. Simply click on the quick links available for MP Board Solutions for Class 8 English Chapter 17 Manav Sangrahalaya: One of Its Kind Questions and Answers and prepare all the concepts in it effectively. Take your preparation to the next level by availing the Madhya Pradesh State Board Solutions for Class 8 English prepared by subject experts.

MP Board Class 8th Special English Solutions Chapter 17 Manav Sangrahalaya: One of Its Kind

Do you feel the concept of English is difficult to understand? Not anymore with our MP Board Solutions for Class 8 English Chapter 17 Manav Sangrahalaya: One of Its Kind Questions and Answers. All the Solutions are given to you with detailed explanation and you can enhance your subject knowledge. Use the Madhya Pradesh State Board Solutions for Class 8 English PDF for free of cost and prepare whenever you want.

Manav Sangrahalaya: One of Its Kind Textual Exercise

Word Power

Class 8 English Chapter 15 Manav Sangrahalaya Question 1.
Give one word for the following:

(a) A building in which objects of artistic, cultural, historical or scientific interest are kept.
(b) The period of time in history before information was written down.
(c) The place where a particular type of animal or plant is normally found
(d) A picture that is made by using a camera that has a film sensitive to light inside it ……………
(e) A short journey made for pleasure, especially one that been organized for a group of people …………….

Answer:

(a) Museum
(b) Prehistoric
(c) Habitat
(d) Photograph
(e) Excursion.

Mp Board Class 8 English Chapter 17 Question 2.
Fill in the missing letters in the following words:

(a) d_p_cts
(b) m_gn_f_c_nt
(c) _xc_ _rs_ _n
(d) th_ m_
(e) w_nt_r
(f) t_m_rr_ w
(g) _r_g_n_l
(h) s_sp_ct
(i) sp_c_ _l
(j) c_mm_n_t_s

Answers:

(a) depicts
(b) magnificent
(c) excursion
(d) theme
(e) winter
(f) tomorrow
(g) original
(h) suspect
(i) special
(j) communities.

Comprehension

Class 8 English Chapter 17 Question 1.
Choose the right answer to complete these sentences

(a) Indira Gandhi Rashtriya Manav Sangrahalaya was initially set up in ………….
(i) 1979 in Bhopal
(ii) 1977 in New Delhi
(iii) 1976 in Mumbai
(iv) 1979 in New Delhi

(b) Indira Gandhi Rashtriya Manav Sangrahalaya is situated on of
(i) Shamla Hills.
(ii) Arera Hills.
(iii) Idgah Hills.
(iv) Museum Hills.

(c) The hill is one of a continuous chain hills.
(i) thirty-one.
(ii) thirty-six.
(iii) thirty-three.
(iv) thirty-four.

(d) The museum is spread on an area of ………….
(i) 197 acres.
(ii) 195 acres.
(iii) 190 acres.
(iv) 192 acres.

(e) The main entrance of Indira Gandhi Manav Sangrahalaya is of
(i) traditional desert village style.
(ii) traditional Himalayan village style.
(iii) traditional coastal village style.
(iv) traditional desert city style.

Class 8 English Chapter 17 Mp Board Question 2.
A. Answer the questions given below:

(a) Why Mere Rohit and Rani not very excited that day?
Answer:
They were not excited that day because the winter vacation was coming to an end yet there was still no plan in sight.

(b) What in Indira Gandhi Rashtriya Manav Sangrahalaya?
Answer:
It is a museum.

(c) Where is it situated?
Answer:
It is situated in Bhopal.

(d) What is parole?
Answer:
It is the wonderful gate constructed in a traditionial Himalayan village style.

(e) What do you know about Veethi Sankul?
Answer:
It is one of the main museum buildings based on the theme of human evolution.

(f) What makes this museum different from others?
Answer:
It preserves folkart, and tribal communities, their habitats, their cultural diversities and their relationship with nature. This fact makes this museum different from others.

(B) Pick out the words from the box that are related with ‘Parole’ and ‘Veethi Sankul’ and write them in the space given
Himalayan village style, building, wonderful, gate, photographs, exhibits, main entrance, models, human evolution.
Answer:
MP Board Class 8th Special English Chapter 17 Manav Sangrahalaya One of Its Kind 1

Let’s Learn

Look at these sentence:

1. I had already had my lunch.
2. The peon had rung the bell before ten o’clock.
3. The boys had gone to play prior to our arrival.

  • The verb in these sentences are in the past prefect tense. This tense is used to express an action completed in the past.
  • It is also used to express an action completed in the past before another action took place.

Example:

  1. I had finished my work before she came
  2. The train had steamed off before we reached the station

(A) Now rewrite the following passage using the past perfect tense of the verbs given in the brackets:

The train (arrive) at the station when I reached there. In fact, it was about to move again. The guard (show) the flag and the engine (give) the whistle. Pawan (get) down from the train. A porter (take) out the luggage. Pawan was standing with the luggage and wondering whether I (not receive) his telegram. He felt relived to see me. I told him that I leave) home well in time but a traffic jam on the way (made) me late. Pawan informed me that Pinki (stay) back at Agra. The doctor (advise) her to take rest far a few days.
Answer:
The train had arrived at the station when I reached there. In fact, it was about to move again. The gruard had showed the flag and the engine had given the whistle. Pawan had got down from the train. A porter had taken out the luggage. Pawan was standing with the luggage and wondering whether I had not received his telegram. He felt relieved to see me. I told him that I had left home well in time but a traffic jam on the way had made me late. Pawan informed me that Pinki had stayed back at Agra. The doctor had advised her to take rest for a few days.

(B) Complete the following sentences using the past perfect tense of suitable verbs:

Example: Mohit was limping
…………………………
Mohit was limping because he had sprained his leg.

(a) Rahul was sad because ……………………
(b) Asha was upset because ……………………
(c) The teacher was angry because ……………………
(d) Salma was happy because ……………………
(e) My mother was worried because ……………………

Answers:

(a) Rahul was sad because he had not got time to play.
(b) Asha was upset because she had received a bad news.
(c) The teacher was angry because the students had disobeyed him.
(d) Salma was happy because her father had brought a beautiful dress for her.
(e) My mother was worried because she had got bad new.

Let’s Talk

Rohit has come to visit Indira Gandhi Manav Sangrahalaya. He sees a potter at work. He is fascinated to see the potter’s wheel. The following is the conversation between Rohit and the potter. Talk to your partner and develop the conversation.

Rohit : Hello Sir, I’m Rohit. I want to ask you some questions on pottery.
Potter : Hello Rohit, you are welcome.
Rohit : First tell me about the material needed for pottery.
Potter : Clay, water.
Rohit : What type of clay do you use?
Potter : It is a special type of clay.
Rohit : How do you prepare the clay for the pot?
Potter : It takes a long time and labour in its preparation
Rohit : What do you do then?
Potter : Then we put the clay on the wheel and prepare the pot.
Rohit : Thank you, for giving me the information.

Let’s Write

Notice Writing

A notice is meant to give information to people without caring to circulate it individually. Notices are put up at a prominent place from where everybody can read. In school you may have a special place for a notice board. In residential colonies a notice board is generally placed at the entrance gate. Notices may be inserted in newspapers too.

All notices have a few features in common. They

  • have a heading
  • are clear, brief and complete.
  • are attractive.
  • are written in simple language giving all necessary information like the purpose, date, time and venue.
  • have the name and designation of the person circulating the notice.

Now read the following notice which the sports secretary of Govt. Model School had put up on his school notice board.

Notice
The Inter-school cricket Tournament will begin from 10th January 2007. Matches will be played after school between 3.00 p.m. to 5.00 p.m.

All boys aged between 12 and 14 who wish to play may give their names to the secretary, latest by 25th Dec.2007…..
Dec. 2007….
Sports Secretary,
10th Dec. 2007….

Your school has arranged an educational tour to Indira Gandhi Rashtriya Manav Sanghrahalaya on 1st Feb’2007. You are Arif Khan, the head boy of your school. Write a notice for your school notice board inviting the students to participate in the tour.
Answer:
Notice
The school has arranged an educational tour to Indira Gandhi Rashtriya Manav Sanghrahalaya on 1st Feb’ 2007. All the interested students are requested to contact the undersigered as soon as possible.
Arif Khan
The head boy
25th Jan. 2007

Let’s Read

Read the map carefully and answer the questions given below.
MP Board Class 8th Special English Chapter 17 Manav Sangrahalaya One of Its Kind 2
When you go from bhopal to pachmarhi:

Question 1.
Which highway will the bus take to go to Pachmarhi?
Answer:
The Bhopal Nagpur Highway.

Question 2.
Which direction does it go from the Nagpur Highway?
Answer:
Southwards.

Question 3.
What’s the distance between Hoshangabad and Pipariya?
Answer:
Pipariya is 70 kms from Hoshagabad.

Question 4.
How far is Pachmarhi from Pipariya?
Answer:
Pachmarhi is 54 kms from Pipariya.

Question 5.
Name the towns on the Hoshangabad Pachmarhi road.
Answer:
Babai, Sohagpur, Pipariya.

Question 6.
What does the signboard at Pachmarhi say?
Answer:
Welcome to Pachmarhi, a hill station.

Manav Sangrahalaya: One of Its Kind Word Meanings

MP Board Class 8th Special English Chapter 17 Manav Sangrahalaya One of Its Kind 3

We wish the knowledge shared regarding MP Board Solutions for Class 8 English Chapter 17 Manav Sangrahalaya: One of Its Kind Questions and Answers has been helpful to you. If you need any further help feel free to ask us and we will get back to you with the possible solution. Bookmark our site to avail the latest updates on different state boards solutions in split seconds.

MP Board Class 10th Sanskrit Solutions Chapter 7 विश्वभारतीयम्

MP Board Class 10th Sanskrit Solutions Durva Chapter 7 विश्वभारतीयम् (संवादः) (सङ्कलितः)

MP Board Class 10th Sanskrit Chapter 7 पाठ्यपुस्तक के प्रश्न

कक्षा 10 संस्कृत पाठ 7 MP Board प्रश्न 1.
एकपदेन उत्तरं लिखत-(एक पद में उत्तर लिखिए-)।
(क) ‘संस्कृतभाषा भारतीयभाषाभ्यः गङ्गानदी अस्ति’ इति कः उक्तवान्?’ (संस्कृतभाषा भारतीय भाषाओं के लिए गंगा नदी है।’ यह किसने कहा?)
उत्तर:
महात्मागान्धिः (महात्मा गांधी ने)

(ख) भारतस्य प्रथमप्रधानमन्त्री कः आसीत्? (भारत का पहला प्रधानमन्त्री कौन था?)
उत्तर:
पं. जवाहरलाल नेहरूः (पं. जवाहरलाल नेहरू)

(ग) वैयाकरणेषु पूर्णः सर्वमान्यश्च कः? (वैयाकरणों में पूर्ण व सर्वमान्य कौन है?)
उत्तर:
पाणिनिः (पाणिनि)

(घ) भारतीयैकता साधकं किम्? (भारतीय एकता का साधक कौन है?)
उत्तर:
संस्कृतम् (संस्कृत)

(ङ) संस्कृतं कस्याः भाषायाः अपेक्षया अधिक समृद्धम्? (संस्कृत किस भाषा की अपेक्षा अधिक समृद्ध है?)
उत्तर:
लैटिन भाषायाः (लैटिन भाषा की)

Class 10 Sanskrit Chapter 7 MP Board प्रश्न 2.
एकवाक्येन उत्तरं लिखत- (एक वाक्य में उत्तर लिखिए-)
(क) संस्कृतभाषा कस्य पोषणं करोति? (संस्कृत भाषा किसका पोषण करती है?)
उत्तर:
संस्कृतभाषा विश्वबन्धुत्वस्व पोषणं करोति। (संस्कृत भाषा विश्वबन्धुत्व का पोषण करती है।)

(ख) सर्वप्राचीना भाषा का अस्ति? (सबसे पुरानी भाषा कौन-सी है?)
उत्तर:
सर्वप्राचीना भाषा संस्कृतभाषा अस्ति। (सबसे पुरानी भाषा संस्कृत है।)

(ग) श्रीमाता संस्कृतविषये किं कथयति? (श्रीमाता संस्कृत के विषय में क्या कहती हैं?)
उत्तर:
श्रीमाता संस्कृतविषये कथयति यत्-“संस्कृतमेवराष्ट्रभाषा भवितुम् अर्हति इति।”

(श्रीमाता ने संस्कृत के विषय पर कहा कि, “संस्कृत ही राष्ट्रभाषा बनने योग्य है।)

(घ) मैक्समूलरः संस्कतविषये किमुक्तवान्? (मैक्समूलर ने संस्कृत के विषय में क्या कहा?)
उत्तर:
मैक्समूलरः संस्कृतविषये उक्तवान् यत्-“संस्कृतं विश्वस्य महत्तमा भाषा अस्ति।” इति। (मैक्समूलर ने संस्कृत के विषय पर कहा कि, ‘संस्कृत विश्व की सबसे महत्वपूर्ण भाषा है।)

(ङ) अस्माकं सर्वेषां जननी का? (हम सब की जननी कौन है?)
उत्तर:
अस्माकं सर्वेषां जननी भारतमाता अस्ति। (हम सबकी जननी भारतमाता है।)

Mp Board Class 10 Sanskrit Chapter 7 प्रश्न 3.
अधोलिखितप्रश्नानाम् उत्तराणि लिखत-(नीचे लिखे प्रश्नों के उत्तर लिखिए)
(क) संस्कृतविषये विवेकानन्देन किं कथितम्? (संस्कृत विषय पर विवेकानन्द ने क्या कहा?)
उत्तर:
संस्कृतविषये विवेकानन्देन कथितम्- “संस्कृतम् अनिवार्यतया शिक्षणीयम्, तोहि तस्योच्चारणध्वनिरेव राष्ट्रियभावम् आत्मगौरवम् उदात्तभावञ्च जनयति। किन्तु अस्माभिः सर्वैरपि भारतीयैः संस्कृतस्य प्रसारे प्रचारे च प्रयत्नः न क्रियते इति खेदस्य विषयः।’

(संस्कृत के विषय पर विवेकानन्द ने कहा, “संस्कृत अनिवार्य रूप से पढ़नी चाहिए, क्योंकि उसकी उच्चारण ध्वनि से ही राष्ट्रीय भाव, आत्मगौरव और उदात्तभाव उत्पन्न होता है। किन्तु हम सभी भारतीयों के द्वारा संस्कृत के प्रसार और प्रचार में प्रयत्न नहीं किया जाता, यह दुख का विषय है।”)

(ख) वेबरमहोदयेन संस्कृतविषये किमुक्तम्? लिखत। (वेबर महोदय ने संस्कृत के विषय पर क्या कहा? लिखो।)
उत्तर:
वेबरमहोदयेन संस्कृतविषये उक्तम्- “सम्प्रति सम्पूर्ण विश्वे पाणिनिरेव वैयाकरणेषु पूर्णः सर्वमान्यश्चास्ति। दर्शने व्याकरणे च प्रामाणिकतायाम् उर्वरतायाञ्च भारतीयाः उच्चतमस्थले प्रतिष्ठिताः।

(वेबर महोदय ने संस्कृत के विषय में कहा, “अब पूरे विश्व में पाणिनी ही वैयाकरणों में पूर्ण व सर्वमान्य है। दर्शन में और व्याकरण में प्रामाणिकता और उर्वरता में भारतीयों का सबसे ऊँचा स्थान है।”)

(ग) एच.एच. विल्सनमहोदयः संस्कृतविषये किम् उक्तवान्?
(एच.एच. विल्सनमहोदय ने संस्कृत के विषय पर क्या कहा?)
उत्तर:
च.एच. विल्सन महोदयः संस्कृतविषये उक्तवान्-“न जाने अत्र संस्कृते किं तन्माधुर्यं विद्यते, येन वयम् वैदेशिकाः सर्वदैव समुन्मत्ता।”

(एच.एच. विल्सन महोदय ने संस्कृत के विषय पर कहा, “नहीं जानता कि इस संस्कृत में कौन-सा माधुर्य है, जिससे हम विदेशी हमेशा ही उन्मत्त होते हैं।”)

Mp Board Class 10th Sanskrit Chapter 7 प्रश्न 4.
उचितशब्देन रिक्तस्थानापूर्तिं कुरुत (दिए गए शब्दों से रिक्त स्थान भरिए-)
(क) भारतीयैकता………….संस्कृतम। (बाधक/साधक)
(ख) ………….वैदेशिकः विद्वान् अस्ति। (मैक्समूलरः/अरविन्दः)
(ग) ………….सम्पोषकं संस्कृतम्। (देशत्व/विश्वबन्धुत्व)
(घ) संस्कृतभाषा प्राचीनर्वाचीनयोर्मध्ये………….अस्ति। (सेतुः/केतुः)
(ङ) संस्कृतराहित्यं मानवजातेः कृते………….अस्ति। (अमूल्यधनम्/मूल्यधनम्)
उत्तर:
(क) साधकं
(ख) मैक्समूलरः
(ग) विश्वबन्धुत्व
(घ) सेतुः
(ङ) अमूल्यधनम्

Class 10th Sanskrit Chapter 7 MP Board प्रश्न 5.
यथायोग्यं योजयत-(कस्य कः कथनांशः अस्ति) (उचित क्रम से जोडिए-) (कौन-सा कथन किसका है?)
Class 10 Sanskrit Chapter 7 Solutions
उत्तर:
(क) 5
(ख) 3
(ग) 4
(घ) 2
(ङ) 1

Sanskrit Class 10 Chapter 7 Mp Board प्रश्न 6.
शुद्धवाक्यानां समक्षम् ‘आम्’ अशुद्धवाक्यानां समक्षं ‘न’ इति लिखत (शुद्ध वाक्यों के सामने ‘आम्’ और अशुद्ध वाक्यों के सामने ‘न’ लिखिए-)
(क) संस्कृतं विश्वस्य महत्तमा भाषा अस्ति।
(ख) संस्कृतस्य व्याकरणं सर्वमान्यं न अस्ति।
(ग) संस्कृतभाषायाः अपेक्षा ग्रीकभाषा अधिकपूर्णा वर्तते।
(घ) संस्कृतमाधुर्यं वैदेशिकैः अपि अनुभूतम्।
(ङ) भारतीयैकतार्थं संस्कृतम् आवश्यकम् अस्ति।
उत्तर:
(क) आम्
(ख) न
(ग) न
(घ) आम्
(ङ) आम्

Sanskrit Class 10th Chapter 7 MP Board प्रश्न 7.
निम्नलिखितशब्दानां मूलशब्दं विभक्तिं वचनं च लिखत (नीचे लिखे शब्दों के मूलशब्द, विभक्ति व वचन लिखिए-)
Chapter 7 Sanskrit Class 10 Mp Board
उत्तर:
कक्षा दसवीं संस्कृत पाठ 7 MP Board

Sanskrit Chapter 7 Class 10 Mp Board प्रश्न 8.
क्रियापदानां धातुं, लकारं, पुरुषं, वचनं च लिखत (क्रियापदों के धातु, लकार, पुरुष और वचन लिखिए।)
MP Board Class 10th Sanskrit Solutions Chapter 7 विश्वभारतीयम् img 6
उत्तर:
Chapter 7 Sanskrit Class 10 Mp Board

Sanskrit Class 10 Chapter 7 प्रश्न 9.
अधोलिखितपदानां सन्धिविच्छेदं कृत्वा सन्धिनाम लिखत। (नीचे लिखे पदों के सन्धि विच्छेद कर सन्धि का नाम लिखिए।)
Sanskrit Class 10 Chapter 7 Solutions
उत्तर:
Class 10th Sanskrit Chapter 7 Solution

Class 10 Sanskrit Chapter 7 Question Answer प्रश्न 10.
अव्ययैः वाक्यनिर्माणं कुरुत
(अव्ययों से वाक्य बनाइए।)
यथा- एव संस्कृतभाषा एवं देववाणी अस्ति।
उत्तर:
शब्द – वाक्य
(क) यदि-यदि सः न आगमिष्यति तर्हि किं?
(यदि वह न आया तो क्या होगा?

(ख) विना-अहं त्वाम् विना न गमिष्यामि।
(मैं तुम्हारे बिना नहीं जाऊँगी।)

(ग) यत्-सः कथयति यत्- ‘अहं कार्यं न करोमि।’
(वह कहता है कि-“मैं काम नहीं करता हूँ।”)

(घ) च-रामः श्यामः च आपणं गच्छतः।
(राम और श्याम बाजार जाते हैं)

(ङ) कृते-अहं तव कृते कार्यं करोमि।
(मैं तुम्हारे लिए काम कर रहा हूँ।)

योग्यताविस्तार –

संस्कृतभाषाविषये अन्ये के के विद्वांसः किं किमुक्तवन्तः अन्विष्य लिखत।
संस्कृतभाषा के विषय पर अन्य कौन-से विद्वान क्या कहते हैं, ढूँढ़ कर लिखो।

‘संस्कृतभाषा’ इति विषयमगधृत्य निबन्धं लिखत।
‘संस्कृत भाषा’ इस विषय के आधार पर निबन्ध लिखो।

विश्वभारतीयम्  पाठ का सार

प्रस्तुत पाठ में सरकत भाषा की महत्ता बताते हुए अनेक राजनेताओं, देशी व विदेशी साहित्यकारों के संस्कत के विषय में मतों का वर्णन किया गया है। सभी ने संस्कृत भाषा का स्थान सव भाषाओं में सर्वोच्च बताते हुए उसे सम्मानीय भाषा कहा है तथा संस्कृत भाषा को सब भाषाओं की जननी स्वीकार किया है।

विश्वभारतीयम् पाठ का अनुवाद

1. आचार्यः-भोः छात्राः! ध्यानेन श्रृण्वन्तु। वयं संस्कृतं पठामः, लिखामः, वदामः, किञ्चिन्महत्त्वमपि जानीमः। किन्तु संस्कृतस्य विषये भारतीयाः वैदेशिकाः विद्वान्सः किं कथयन्ति भवन्तः जानन्ति वा?
सर्वे छात्राः-आचार्य! न जानीमः।

आचार्य :
तर्हि अद्य संस्कृतविषये मूर्धन्यविदुषां प्रसिद्धराजनेतृणां वैदेशिकानां विचाराणां। चर्चा कुर्मः।

दिशा :
आचार्य! के के भारतीयाः विद्वान्सः संस्कृतविषये उक्तवन्तः?

आचार्य :
नैके विद्वान्सः, राजनेतारः, साहित्यकारश्च संस्कृतस्य महत्त्वं प्रतिपादितवन्तः। भारतीयेषु महात्मागान्धि, पं जवाहरलालनेहरू- महर्षिअरविन्दस्वामिविवेकानन्दप्रभृतयः, तथा च वैदेशिकेषु मैक्समूलर- मैक्डानल-वेबर, विलियम-बॉप-हीरेन प्रभृतयः उल्लेखनीयाः।

शब्दार्थ :
शृण्वन्तु-सुनो-listen; मूर्धन्य-महान-top ranking, विदुषाम्-विद्वानों के-learned people, नैके-अनेक-many, प्रभृतपः-इत्यादि-etcetera.

अनुवाद :
आचार्य-छात्रो! ध्यान से सुनो। हम संस्कृत पढ़ते हैं, लिखते हैं, बोलते हैं, थोड़ा महत्व भी जानते हैं। किन्तु संस्कृत के विषय पर भारतीय व विदेशी विद्वान, क्या कहते हैं, जानते हो या नहीं?

सभी छात्र-आचार्य! नहीं जानते।

आचार्य :
तो आज संस्कृत विषय पर महान विद्वानों के प्रसिद्ध राजनेताओं के और विदेशियों के विचारों की चर्चा करते हैं।

दिशा :
आचार्य! कौन-से भारतीय विद्वानों ने संस्कृत के विषय पर कहा है?

आचार्य :
अनेक विद्वान्, राजनेता और साहित्यकारों ने संस्कृत के महत्व को बताया है। भारतीयों में महात्मा गांधी, पं. जवाहरलात नेहरू, महर्षि अरविन्द, स्वामी विवेकानन्द इत्यादि और वैसे ही विदेशियों में मैक्समूलर, मैक्डानल, वेबर, विलियम, बॉप, हीरेन इत्यादि प्रमुख हैं।

English :
The teacher refers to top ranking scholars and lovers of Sanskrit.

Many Indian scholars, political leaders and literary persons loved Sanskrit. Many foreign scholars are also noteworthy.

2. मृदुलः-आचार्य! महात्मागांधिः संस्कृतविषये किमुक्तवान्?
आचार्य :
महात्मागान्धिः अवदत्-“यत् संस्कृतम् अस्माकं भारतीयभाषाभ्यः गङ्गा : नदी अस्ति। अहं चिन्तयामि यदि संस्कृतगङ्गा शुष्का भवेत् तर्हि सर्वाः अपि भाषाः सारहीनाः स्युः।”

प्रत्युष :
स्वामिविवेकानन्दः किमुक्तवान्?

आचार्य :
विवेकानन्दः उक्तवान् यत् “संस्कृतम् अनिवार्यतया शिक्षणीयम्, यतोहि तस्योच्चारणध्वनिरेव राष्ट्रियभावम् आत्मगौरवम् उदात्तभावञ्च जनयति। किन्तु अस्माभिः सर्वैरपि भारतीयैः संस्कृतस्य प्रसारे प्रचारे च प्रयत्नः न क्रियते इति खेदस्य विषयः।”

अनिकेत :
भारतस्य प्रथमप्रधानमन्त्री पं. जवाहरलालनेहरूः अपि संस्कृतभक्तः इति श्रूयते। असौ संस्कृतभाषाविषये किं चिन्तयति?

शब्दार्थाः :
शुष्का-सूखी-dry, सारहीनाः-साररहित- meaningless.

अनुवाद :
मृदुल-आचार्य! महात्मा गान्धी ने संस्कृत के विषय में क्या कहा?

आचार्य :
महात्मा गान्धी ने कहा- ‘संस्कृत हमारी भारतीय भाषाओं के लिए गङ्गा नदी है। मैं सोचता हूँ कि यदि संस्कृत रूपी गङ्गा सूख जाए तो सारी भाषाएँ भी ‘सारहीन हो जाएंगी।
प्रत्यूष-स्वामी विवेकानन्द ने क्या कहा?

आचार्य :
विवेकानन्द ने कहा कि-“संस्कृत अनिवार्य रूप से सीखनी चाहिए, क्योंकि उसकी उच्चारण ध्वनि से ही राष्ट्रीय भाव, आत्मगौरव और उदात्त (ऊँचा) भाव उत्पन्न होता है। किन्तु हम सब भारतीयों के द्वारा संस्कृत का प्रसार और प्रचार का प्रयत्न नहीं किया जा रहा, यह दुख का विषय है।

अनिकेत :
भारत के प्रथम प्रधानमंत्री पं. जवाहरलाल नेहरू भी संस्कृत के भक्त थे, ऐसा सुना है। वे संस्कृत भाषा के विषय पर क्या सोचते हैं?

English :
Gandhi calied Sanskrit as Ganga or the source of all the Indian languages. Swami Vivekananda pitied that Sanskrit is neglected which arouses national sentiments.

Pt. Nehru’s views about Sanskrit.

3. आचार्यः :
संस्कृतसन्दर्भे एकदा पं. नेहरूः उक्तवान् यत्-“यदि कश्चित् मां पृच्छेत् यत् भारतस्य उदात्ततमकोषः कः? अथवा भारतस्य सर्वश्रेष्ठा सम्पत्तिः का? तर्हि अहं तु कथयिष्यागि संस्कृतभाषा अथवा संस्कृतवाङमयम् एव। अहं विश्वसिमि यावत् संस्कृतभाषा जीवति, जीवने प्रभवति तावत भारतराष्ट्रस्य मूलभूता एकता स्थास्यत्येव।”

रजतः :
अन्येषां साहित्यकाराणां विषयेऽपि ज्ञातुम् इच्छामि।

आचार्यः :
आम्! अहं संक्षेपेण वदामि-साहित्यकारः राजनेता डॉ. सम्पूर्णानन्दः अवोचत् यत्-‘संस्कृतमेव अस्य देशस्य राष्ट्रभाषा भवितव्या ।संस्कृते अमूल्यरत्नानि सन्ति। संस्कृतं न केवलं जीवितानाम् अपितु दिवङ्गतानां कृतेऽपि सञ्जीवनी अस्ति।’ इति।

अपि च साहित्ये घुमक्कड़धर्मस्य प्रस्तावकः साहित्यकारः राहुलसांस्कृत्यायनोऽपि उक्तवान् यत्-“अस्मत्प्राचीनतमा वाणी संस्कृतरूपेण अधुनाऽपि विद्यमाना। तत्त्वतः यथा हिन्दीकथासाहित्यादिनाम् अध्ययनं भवति तथा संस्कृतग्रन्थानाम् अपि अध्ययनमध्यापनञ्च सर्वत्र भवेत्।”

शब्दार्थाः :
वाङमयम-वाणी, भाषा-language;विश्वसिमि-विश्वास करता हूँ-believe, दिवङ्गतानाम्-मरे हुए लोगों का-of the dead.

अनुवाद :
आचार्य-संस्कृत के सन्दर्भ में एक बार पं. नेहरू ने कहा कि, “यदि कोई मुझे पूछे कि भारत का सबसे ऊँचा/बड़ा खजाना क्या है? या भारत की सर्वश्रेष्ठ सम्पत्ति क्या है? तो मैं कहूँगा संस्कृत भाषा या संस्कृत वाणी। मैं विश्वास करता हूँ कि जब तक संस्कृत भाषा जीवित है, जीवन चल रहा है, तब तक भारत राष्ट्र की मूलभूत एकता स्थित है।

रजत :
अन्य साहित्यकारों के विषय में भी जानना चाहता हूँ।

आचार्य :
हाँ! मैं संक्षेप में बताता हूँ-साहित्यकार राजनेता डॉ. संपूर्णानन्द ने कहा कि, “संस्कृत ही इस देश की राष्ट्रभाषा होनी चाहिए। संस्कृत में बहुमूल्य रत्न हैं। संस्कृत न केवल जीवित लोगों को अपितु मरे हुए लोगों के लिए भी संजीवनी है।।

और साहित्य में घुमक्कड़ धर्म के प्रवर्तक साहित्यकार राहुल सांस्कृत्यायन ने भी कहा-“यह सबसे पुरानी भाषा। वाणी संस्कृत रूप में अब भी विद्यमान है। तत्व के जैसे हिन्दी कथा साहित्यादि का अध्ययन होता है वैसे ही संस्कृत ग्रन्थों का भी अध्ययन और अध्यापन सब जगह होना चाहिए।”

English :
Nehru-Sanskrit is the noblest treasure of India-It is the basis of national integrity. Dr. Sampooranananda-Sanskrit enshrines precious jewels-It gives life to all. Rahul SanskrityayanaSanskrit should be invariably taught everywhere like Hindi as it is our oldest language.

4. गिरिराजः :
महर्षेः अरविन्दस्य संस्कृतविषये कोऽभिप्रायः?
आचार्यः :
महर्षिः प्राह “सरलसंस्कृतमेव भारतराष्ट्रस्य राष्ट्रभाषा भवेत्।” अयमेव भावः श्रीमातु कथनेऽपि दृश्यते सा “संस्कृतमेवराष्ट्रभाषाभवितुम् अर्हति।” इत्युक्तवती। अन्येऽपि प्रसिद्धाः नायकाः संस्कृतस्य प्रशसां कृतवन्तः महनीयतां च स्वीकृतवन्तः। यथा-प्रथमः राष्ट्रपतिः डॉ. राजेन्द्रप्रसादः कथितवान् यत् ‘संस्कृतसाहित्यं न केवलं भारतस्य कृते अपितु मानवजातेः कृते अमूल्यधनम् अस्ति।’

पङ्कजः :
आचार्य! अन्यधर्मावलम्बिनः अपि संस्कृतस्य प्रशंसकाः खलु?

आचार्यः :
आम्! प्रसिद्धः मुस्लिमविचारकः बदरुद्दीनतय्यबमहोदयः उक्तवान् यत् ‘मम मते प्रत्येकम् अपि हिन्दुः, मुस्लिमः भारतीयो वा संस्कृतज्ञो भवेदिति।’

अन्यच्च प्रसिद्धः न्यायवेत्तां मु अली छागला उक्तवान् यत्” ममेच्छा यत् मातृभाषया सह संस्कृतशिक्षा अनिवार्या भवेत्।’ संस्कृतभाषा प्राचीनार्वाचीनयोर्मध्ये सेतुरस्तीति।

शब्दार्थाः :
महनीयताम्-महानता को-greatness, ममेच्छा-मेरी इच्छा-my wish, प्राचीनार्वाचीनयोर्मध्ये-पुराने और नए के बीच-between old and new, सेतुरस्ति-पुल हैं-bridge, धर्मावलम्बितः-धर्म को मानने वाले-religious persons.

अनुवाद :
गिरिराज-महर्षि अरविन्द का संस्कृत विषय पर क्या अभिप्राय है?

आचार्य :
महर्षि ने कहा-“सरल संस्कृत ही भारतराष्ट्र की राष्ट्रभाषा होनी चाहिए।” यही भाव श्री माता के कथन में भी दिखाई देता है, वह ‘संस्कृत ही राष्ट्रभाषा होने योग्य है” कहती थी। अन्य प्रसिद्ध नायक भी संस्कृत की प्रशंसा करते हुए उसकी महानता को मानते हैं। जैसे-प्रथम राष्ट्रपति डॉ. राजेन्द्र प्रसाद ने कहा, “संस्कृत साहित्य न केवल भारत के लिए बल्कि मानव जाति के लिए अमूल्य धन है।”

पङ्कज :
आचार्य! अन्य धर्मानुयायी भी संस्कृत के प्रशंसक होंगे?

आचार्य :
हाँ! प्रसिद्ध भुस्लिम विचारक बदरुद्दीनतय्यबमहोदय ने कहा- “मेरे विचार में प्रत्येक हिन्दू व मुस्लिग जो भारतीय हो संस्कृत को जानने वाला हो।”

और अन्य प्रसिद्ध न्यायमूर्ति मु. अली छागला ने कहा-“मेरी इच्छा है कि मातृभाषा के साथ संस्कृतशिक्षा अनिवार्य हो।” संस्कृत भाषा प्राचीन और नवीन के बीच पुल है।

English :
Maharishi Aurovindo and Shri Mata-Sanskrit should be the national language of India.

Dr. Rajendra Prasad-Sanskrit literature is a precious treasure not only for India but for the entire humanity.

Badruddin Tayyabji-Every Indian should learn Sanskrit. Mohd Ali Chhagla-Sanskrit is bridge between the old and the new.

5. सलीमः-आचार्य! संस्कृतविषये भारतीयानां मन्तव्यम् अवगतम्। अधुना वैदेशिकानां विषयेऽपि ज्ञातुम् इच्छामि।

आचार्यः :
साधूक्तं त्वया। इदानीमहं वैदेशिकविदुषां संस्कृतविषयकं मन्तव्यं बोधयामि। ‘विलड्यूरन्ट’ विख्यातः पाश्चात्यसमीक्षकः सः उक्तवान् यत् भारतम् अस्माकं जातेः जन्मभूमिः, तथा संस्कृतं यूरोपीयभाषाणां जननी अस्ति। संस्कृतमेव अस्माकं दर्शनस्य जननी, अरबदेशात् प्राप्तस्य गणितस्य जननी, ईसाईधर्मे समाहितानां बौद्धादर्शानां जननी, ग्रामीणसभुदायेन स्वायत्तशासनस्य तथा गणतन्त्रस्य जननी एवं प्रकारेण भारतमाता नानाविधरूपेषु अस्माकं सर्वेषां जननी अस्ति। जॉनः–वैदेशिकेषु मैक्समूलरमहोदयः विख्यातः। तेन किमुक्तम?

शब्दार्थाः :
मन्तव्यम्-विचार-view, अवगतम्-जान लिए-known, साधूक्तम्ठीक/बहुत अच्छा कहा-well spoken, पाश्चात्यसमीक्षकः-पश्चिमी देश के समीक्षकreviewers of western countries, विख्यातः-प्रसिद्ध-famous.

अनुवाद :
सलीम-आचार्य! संस्कृत विषय पर भारतीयों के विचार जान लिए। अब विदेशियों के विषय में भी जानना चाहता हूँ।

आचार्य :
तुम्हारे द्वारा सही कहा गया है। अब मैं विदेशी विद्वानों के संस्कृत विषयक विचारों को बताता हूँ। ‘विलड्यूरन्ट’ प्रसिद्ध पाश्चात्य समीक्षक, उसने कहा कि भारत हमारी जाति की जन्मभूमि है तथा संस्कृत यूरोपीय भाषाओं की जननी है। संस्कृत ही हमारे दर्शन की जननी है, अरब देश से प्राप्त गणित की जननी है। ईसाई धर्म में समाहित बौद्ध दर्शनों की जननी है, ग्रामीण समुदाय द्वारा स्वायत्तशासन की व गणतन्त्र की जननी है। इस प्रकार से भारतमाता अनेक प्रकार के रूपों में हम सबकी जननी है।

जॉन-विदेशियों में मैक्समूलर महोदय प्रसिद्ध हैं। उन्होंने क्या कहा?

English :
Wildurant-India is the birth place of our race and Sanskrit is the mother of all European languages and our philosophy. It is the mother of Arabic Mathematics–Mother of Buddhistic, philosophy-mother of autonomous and republic rule-Hence Mother India is ‘Mother of all’ in one way or the other.

6. आचार्यः-मैक्समूलरः उक्तवान् यत्-“संस्कृतं विश्वस्य महत्तमा भाषा अस्ति।” एवमपि प्राध्यापकः बॉप उक्तवान् यत्-‘संस्कृतमेव सम्पूर्णविश्वस्य एका भाषा आसीत् कदाचित् इति।” करतारसिंह-इतरेषामपि वैदेशिकविचारकाणाम् अभिप्रायः अपि ज्ञातव्यः खलु?

आचार्यः :
सत्यमेव! जानन्तु। विद्वान मैक्डानल उक्तवान् यत्-“वयं योरोपीयाः अद्यावधि स्ववर्णमालाम् अपि पूर्णीकर्तुं न समर्थाः परं भारतीयानां भाषा तथा भाषाविज्ञानं न केवल पूर्णम् अपितु वैज्ञानिकम् अस्ति।’ अन्यच्च विलियमजोन्समहोदयः उक्तवान् यत्-“संस्कृतस्य रचना आश्चर्यकारिणी अस्ति। इयं ग्रीकभाषायाः अपेक्षया अधिकपूर्णा, लैटिनभाषायाः अपेक्षया अधिका समृद्धा तथा च उभयोः तुलनायाम् अति परिष्कृता वर्तते।” मनीषः-केनापि अन्येन पाश्चात्यविद्वषाम् अपि संस्कृतविषये किमपि उक्तम्?

शब्दार्थाः :
ज्ञातव्यः-जानना चाहिए-should be known, अद्यावधि-आज के समय तक-up till the modern age, इतरेषामपि-दूसरों का भी-of others also, स्ववर्णमालाम्-अपनी वर्णमाला को-Own Letters (alphabet), पूर्णीकर्तुम-पूरा करने के लिए-to complete.

अनुवाद :
आचार्य-मैक्समूलर ने कहा कि-संस्कृत विश्व की महत्वपूर्ण भाषा है। ऐसे ही प्राध्यापक बॉप ने कहा कि, “संस्कृत ही कभी पूरे विश्व की एकमात्र भाषा थी।”
करतारसिंह-दूसरे विदेशियों के विचारों का अभिप्रायः भी जानना चाहिए?

आचार्य :
सत्य ही है। जानते हो। विद्वान् मैक्डानल ने कहा कि, “हम सब यूरोपीय आज तक अपनी वर्णमाला भी पूरा करने में समर्थ नहीं हो पाए, पर भारतीयों की भाषा तथा भाषाविज्ञान न केवल पूरा है, बल्कि वैज्ञानिक है।” और अन्य, विलियमजोन्स महोदय ने कहा कि, “संस्कृत की रचना आश्चर्यचकित करने वालो है। यह ग्रीकभाषा की अपेक्षा अधिक पूर्ण, लैटिन भाषा की अपेक्षा अधिक समृद्ध और दोनों की तुलना में अधिक परिष्कृत है।
मनीष-और किन पाश्चात्य विद्वानों ने भी संस्कृत के विषय पर कुछ कहा?

English :
Max Muller, “Sanskrit is important language of the world, Bopp, ‘Sanskrit was the only language of entire world sometimes.
Macdonell, Sanskrit and philology are both perfect and scientific.
William Jones-The structure of Sanskrit is wonder striking. It is perfect, prosperous and refined.

7. आचार्यः-आम्! वेबर महोदयेन कथितं यत्-‘सम्प्रति सम्पूर्ण विश्वे पाणिनिरेव वैयाकरणेषु पूर्णः सर्वमान्यश्चास्ति। दर्शने व्याकरणे च प्रामाणिकतायाम् उर्वरतायाञ्च भारतीयाः उच्चतमस्थले प्रतिष्ठिताः।’ तथा च एच.एच. विल्सन् महोदयेन कथितम् यत् –
न जाने विद्यते कं तन्माधुर्यमत्र संस्कृते।
सर्वदैव समुन्मत्ता येन वैदेशिका वयम्॥

सर्वे छात्राः-आचार्य! वयम् आनन्दिताः, संस्कृतं प्रति विश्वप्रसिद्धानां विदुषाम् अभिमतं श्रुत्वा, संस्कृतस्य वैश्विक महत्त्वं च ज्ञात्वा। उच्यते हि
भारतीयैकता साधकं संस्कृतम्।
विश्वबन्धुत्वसम्पोषकं संस्कृतम्॥
(सर्वे मिलित्वा श्लोकस्य सस्वरगायनं कुर्वन्ति)

शब्दार्थाः :
सम्प्रति-अब-now, समुन्मत्ता-उन्मत्ता को-Craziness, infatuation.

अनुवाद :
आचार्य-हाँ! वेबर महोदय ने कहा कि-अब पूरे संसार में पाणिनि ही वैयाकरणों में पूर्ण और सर्वमान्य है। दर्शन में और व्याकरण में प्रामाणिकता और उर्वरता में भारतीयता सबसे ऊँचे स्थान पर स्थित है। और एच.एच. विल्सन महोदय ने कहा कि –
नहीं जानते कि इस संस्कृत में कौन-सा माधुर्य है, जिससे हम विदेशी हमेशा ही उन्मत्त होते हैं।
सभी छात्र-आचार्य! हम सब प्रसन्न हुए, संस्कृत के प्रति विश्वप्रसिद्ध विद्वानों के विचार सुनकर और संस्कृत का वैश्विक महत्व जानकर।।

भारतीय एकता का साधक है संस्कृत।
विश्व बन्धुत्व की सम्पोषक है संस्कृत॥
(सब मिलकर श्लोक का ऊँचे स्वर में गायन करते हैं।)

English :
Weber : Panini alone is a perfect and well-known grammarian in the world. Indians are top ranking in philosophy and grammar.

H.H. Wilson : ‘Sanskrit enshrines charming sweetness even for foreigners’.

Sanskrit enjoys world-wide importance since it strengthens national integrity and worldly friendlness.

MP Board Class 10th Sanskrit Solutions

MP Board Class 12th Hindi Swati Solutions गद्य Chapter 3 नये मेहमान

MP Board Class 12th Hindi Swati Solutions गद्य Chapter 3 नये मेहमान (एकांकी, उदयशंकर भट्ट)

नये मेहमान अभ्यास

नये मेहमान अति लघु उत्तरीय प्रश्न

नए मेहमान एकांकी के प्रश्न उत्तर MP Board Class 12th Hindi प्रश्न 1.
रेवती अपने घर को जेलखाना क्यों कहती है? (2015)
उत्तर:
चूँकि उसका घर छोटा, घुटन वाला तथा जीवन की सुविधाओं से रहित,जेलखाने की किसी कोठरी जैसा है। अत: वह घर को जेलखाने की संज्ञा प्रदान करती है।

नए मेहमान MP Board Class 12th Hindi प्रश्न 2.
मकान छोटा होने के कारण विश्वनाथ किस बात से आशंकित हैं? (2014)
उत्तर:
छोटा मकान व भयंकर गर्मी के कारण विश्वनाथ इस बात से आशंकित हैं कि ऐसे में कहीं कोई मेहमान न आ जाये।

नए मेहमान एकांकी Pdf MP Board Class 12th Hindi प्रश्न 3.
“हे भगवान! कोई मुसीबत न आ जाए।” रेवती के इस कथन का आशय बताइए।
उत्तर:
रेवती गर्मी से परेशान है। साथ ही,घर में सोने के स्थान का भी अभाव है। किसी मेहमान के आने की सम्भावना की आशंका से ग्रसित हो वह कहती है कि ऐसे में कोई मेहमान न आ जाये।

Naye Mehman Story In Hindi MP Board Class 12th Hindi प्रश्न 4.
नये मेहमान किस शहर से आये थे?
उत्तर:
नए मेहमान बिजनौर शहर से आये थे।

प्रश्न 5.
नन्हेमल और बाबूलाल किसके घर जाना चाहते थे? (2016)
उत्तर:
नन्हेमल और बाबूलाल कविराज रामलाल वैद्य के घर जाना चाहते थे।

MP Board Solutions

नये मेहमान लघु उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 1.
गर्मी से बेहाल विश्वनाथ और रेवती के संवाद को अपने शब्दों में लिखिए।
उत्तर:
गर्मी से बेहाल विश्वनाथ कहते हैं कि बड़ी गर्मी है। बंद कमरों में रहना कठिन है, मकान भंट्टी बना हुआ है। रेवती कहती है कि पत्ता भी नहीं हिलता। घड़े का पानी ठण्डा नहीं होता। वह घर को जेलखाना कहती है। पति से बर्फ लाने के लिए कहती है। पति का कथन है कि नया मकान मिलता ही नहीं है। पड़ोसी छत को छूने तक नहीं देते। दोनों आँगन में सोने के लिए बहस के साथ आशंकित हैं कि ऐसे में कोई मेहमान न आ जाये। इस गर्मी ने उनके लिए अनेक चिन्ताएँ और मुसीबतें खड़ी कर दी हैं।

प्रश्न 2.
नन्हेमल और बाबूलाल स्टेशन से सीधे विश्वनाथ के घर क्यों पहुँचे?
उत्तर:
नन्हेमल और बाबूलाल अपना परिचय इधर-उधर की बातों से जोड़कर बताते हैं। इस घटना से झुंझलाकर विश्वनाथ पूछते हैं कि क्या आप कोई चिट्ठी-विट्ठी लाये हैं। तब नन्हेमल कहते हैं कि संपतराम ने कहा था कि स्टेशन से उतरकर सीधे रेलवे रोड चले जाना,वहाँ कृष्णगली में वह रहते हैं। अतः उन्होंने वैसा ही किया और बिना नाम पूछे दरवाजा खटखटा दिया। गृहस्वामी ने दरवाजा खोला तो वे लोग उनके पीछे-पीछे घर में घुस आये।

प्रश्न 3.
नन्हेमल ने बिजनौर के किन सन्दर्भो का उल्लेख विश्वनाथ से किया?
उत्तर:
अपना परिचय देते हुए नन्हेमल ने कहा कि बिजनौर निवासी लाला संपतराम, जो उनके चाचा हैं, वे विश्वनाथ के बड़े प्रशंसक हैं तथा विश्वनाथ से कई बार मिल चुके हैं। दूसरे, नन्हेमल नजीबाबाद में सेठ जगदीश प्रसाद के यहाँ मिले थे। जगदीश प्रसाद बिजनौर में एक चीनी की मिल खोलने जा रहे हैं। इस प्रकार मेहमान अपरिचय के सेतु के दोनों सिरों को परिचय के सन्दर्भ में जोड़ने का व्यर्थ प्रयास करते हैं।

प्रश्न 4.
नन्हेमल और बाबूलाल के सही स्थान पर न पहुँचने का भेद कब खुला?
उत्तर:
विश्वनाथ नन्हेमल और बाबूलाल से पूछते हैं कि जिसके यहाँ आपको जाना है, संपतराम ने उसका नाम तो बताया होगा। तब वे दोनों कविराज का नाम बताते हैं। इस पर विश्वनाथ कहते हैं कि मैं कविराज नहीं हूँ, कहीं आप कविराज रामलाल वैद्य के यहाँ तो नहीं आये हैं। दोनों एक साथ चिल्लाते हैं, हाँ वही तो। हम कविराज रामलाल वैद्य के यहाँ आये थे। इस प्रकार सही स्थान पर न पहुँचने का भेद खुल जाता है।

प्रश्न 5.
आगन्तुक के आते ही रेवती के विचारों में क्या परिवर्तन हुआ और क्यों?
उत्तर:
आगन्तुक के आते ही रेवती के विचारों में परिवर्तन आया क्योंकि आगन्तुक अपरिचित नया मेहमान न होकर उसका अपना सगा भाई था। भाई के देखते ही रेवती के चेहरे पर खुशी आ जाती है। वह भाई से कपड़े उतारने के लिए कहती है। पंखा झलने लगती है और प्रमोद से ठण्डा पानी पिलाने के लिए कहती है। हलवाई के यहाँ से मिठाई लाने को कहती है। तेज गर्मी होने पर भी भाई के लिए खाना बनाना आरम्भ करती है।

नये मेहमान दीर्घ उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 1.
एकांकी के आधार पर महानगरीय आवास समस्या पर विचार व्यक्त कीजिए।
अथवा
‘नये मेहमान’ एकांकी के आधार पर महानगरों की आवास की समस्या पर प्रकाश डालिए। (2009, 13)
उत्तर:
‘नये मेहमान’ एकांकी में लेखक उदयशंकर भट्ट ने महानगरों के मध्यम वर्ग की ‘आवास समस्या’ को प्रस्तुत किया है। विश्वनाथ तथा रेवती जैसी स्थिति के लोगों की दशा बहुत ही दयनीय है। आवास छोटा होने के कारण स्वयं उनको सोने के लिए स्थान का अभाव है, उस पर किसी मेहमान का आना अच्छी-खासी चिन्ता व चर्चा का विषय बन जाता है। पानी की समस्या हारी-बीमारी इत्यादि समस्याओं से आज के निम्न-मध्यमवर्गीय समाज को जूझना पड़ रहा है। इन समस्याओं के साथ पड़ोसियों के साथ ताल-मेल बैठाना और भी चिन्ता का विषय है। एकांकीकार ने इस यथार्थ स्थिति का चित्र उभारने में व्यंग्य-विनोद का सहारा, सरल व बोलचाल की भाषा के माध्यम से लिया है।

प्रश्न 2.
क्या नन्हेमल और बाबूलाल ने अपने वाक्चातुर्य से विश्वनाथ को प्रभावित किया? उनके कछ महत्त्वपर्ण संवाद लिखिए।
उत्तर:
नये मेहमान एकांकी को विकास की चरम सीमा पर ले जाने वाले पात्र तो वास्तव में नन्हेमल और बाबूलाल ही हैं, जिनके प्रत्येक वाक्य में बोलने की चतुराई है। अपने इसी गुण के चलते वे प्रत्येक घटना को घुमा-फिरा कर विश्वनाथ के समक्ष खड़ा कर देते हैं, जैसे बिजनौर के संपतराम को चचेरा भाई बताकर विश्वनाथ से मिलने की बात कहते हैं-“नजीबाबाद में भानामल की लड़की की शादी में आपसे मिले थे।” तथा “मुरादाबाद में जगदीश प्रसाद के यहाँ विश्वनाथ को देखा था।” दोनों वाचालता के साथ-साथ बेशर्म बनकर लेमन की बोतल की चर्चा करते हैं। बीच-बीच में गृहस्वामी की प्रशंसा करते जाते हैं।

इस प्रकार दोनों अपनी वाक्पटुता से अपना उल्लू सीधा करने में लगे हैं। विश्वनाथ उनकी चातुर्यपूर्ण बातों से प्रारम्भ में तो प्रभावित हुए से जान पड़ते हैं किन्तु वस्तुस्थिति को समझते ही वह उनसे प्रभावित नहीं होते हैं। अन्त में विश्वनाथ पूछ बैठते हैं कि उनके पास कोई चिट्ठी-विट्ठी है अथवा नहीं? भेजने वाले ने उनका नाम तो बताया होगा ? दोनों कहते हैं कि शायद कविराज बताया था। विश्वनाथ कहते हैं, “मैं तो कविराज नहीं हूँ।” अतः यह कहा जा सकता है कि दोनों वाक्पटुता में निपुण होने के बाद भी विश्वनाथ को प्रभावित करने में पूर्ण असफल रहते हैं।

MP Board Solutions

प्रश्न 3.
रेवती का चरित्र-चित्रण कीजिए।
अथवा
रेघती के चरित्र की दो विशेषताएँ लिखिए। (2017)
उत्तर:
‘उदयशंकर भट्ट’ द्वारा रचित एकांकी ‘नये मेहमान’ की एक प्रमुख पात्र रिवती’ है जो इस एकांकी का एकल नारी पात्र है। साथ ही, वह मध्यमवर्गीय परिवार की गृहस्वामिनी का प्रतिनिधित्व भी करती है।
(1) पतिव्रता :
अनेक अभावों के मध्य तथा गर्मी के कारण झुंझलाते हुए भी वह पति की सुख-सुविधाओं का पूरा ध्यान रखती है। वह पति की आज्ञा का पालन करना भी जानती है। भीषण गर्मी में स्वयं आँगन में सोने के लिए कहती है तथा पति को ऊपर छत पर भेज देती है। सोचती है-रात में नींद न आयेगी,सबेरे काम पर जाना है। मेरा क्या है? पड़ी रहूँगी; इस प्रकार पति से बहुत प्रेम करती है।

(2) श्रेष्ठ गृहिणी :
रेवती में मध्यमवर्गीय परिवारों की गृहिणी के गुण स्पष्ट परिलक्षित होते हैं। वह मन से सबका आदर करना चाहती है परन्तु परिवार की परेशानियाँ, स्वभाव में शुष्कता पैदा कर देती है। पड़ोसी स्त्रियों, उनके अंधविश्वासों, पति और बच्चों की चिन्ता से परेशानी है। इस प्रकार रेवती भारतीय नारी का यथार्थ रूप प्रकट करती है।

(3) परिवार की समस्याओं से खिन्न :
एक ओर भीषण गर्मी है तो दूसरी ओर मकान का छोटा व घुटनवाला होना। बच्चों की बीमारी तथा बिजली के पंखे का न चलना,न नल में पानी का आना। ये सब परेशानियाँ रेवती को खिन्न स्वभाव वाला बना देती हैं। तब वह कह उठती है-“जाने कब तक इस जेलखाने में सड़ना होगा।”

(4) आतिथ्य-सेवा भाव से रहित :
अपरिचित मेहमान के आने पर अँझला जाती है तथा खाना बनाने की बात पर तुनक जाती है। खिसियाकर पति से कहती है कि “दर्द के मारे सिर फटा जा रहा है, फिर खाना बनाना इनके लिए और इस समय, आखिर वे आये कहाँ से हैं?” इस प्रकार रेवती आतिथ्य-सेवा भाव से रहित है। इसे मुसीबत समझकर तुनकमिजाज बन जाती है।

(5) पड़ोसियों के अशिष्ट व्यवहार से दुःखी :
रेवती के पड़ोस की स्त्रियों का व्यवहार अच्छा नहीं था। विशेष रूप से लाला की पत्नी बहुत लड़ाकू थी। वह पति से कहती है, क्या फायदा? अगर लाला मान भी लें तो वह दुष्टा नहीं मानेगी …… बड़ी डायन औरत है।”

(6) अपने पराये में भेद :
अपरिचित मेहमान के आने पर उसके सिर में दर्द होता है और वह खाना नहीं बना सकती। लेकिन जैसे ही उसका भाई आता है, उसमें उत्साह की लहर भर जाती है, सिर का दर्द ठीक हो जाता है, भाई को बिना खाये सोने नहीं देती है, बर्फ और मिठाई मँगवाती है। वह अपने तथा पराये के मध्य भेद रखती है।

(7) अंधविश्वासी :
रेवती संकुचित विचारधारा की स्त्री है। बच्चों को पड़ोसी की छत पर सोने देना नहीं चाहती है। उसके बजाए बच्चों को गर्मी में ही सुलाती है।

इस प्रकार रेवती में एक ओर कुछ अच्छाइयाँ हैं तो दूसरी ओर कुछ कमियाँ भी हैं। समग्र रूप में रेवती एक मध्यमवर्गीय नारी के गुणों से युक्त है।

प्रश्न 4.
एकांकी के तत्वों के नाम लिखते हए ‘नये मेहमान’ एकांकी के किसी एक तत्त्व पर अपने विचार लिखिए।
अथवा
एकाकी के तत्वों के आधार पर ‘नये मेहमान’ की समीक्षा कीजिए।
उत्तर:
नये मेहमान’ उदयशंकर भट्ट का एक यथार्थवादी एकांकी है, जिसमें आवास-समस्या को प्रधान रखा गया है। एकांकी के निम्नलिखित छ: तत्व होते हैं। उनके आधार पर इस एकांकी की समीक्षा निम्नलिखित है-
(1) कथावस्तु :
इस एकांकी की कथावस्तु पूर्णतः शृंखलाबद्ध है। प्रत्येक घटना क्रमबद्धता के धागे में पिरोई गई है। विश्वनाथ के संकोच,रेवती के नाक-भौं सिकोड़ने और नये मेहमानों की बेहयाई के त्रिकोण में हास्य-विनोद के साथ कथा आगे बढ़ती है। एकांकी में संकलनत्रय का पूर्ण निर्वाह हुआ है। पूरा एकांकी एक कमरे में घटित है। पूरे समय कौतूहल बना रहता है। कथानक सामाजिक है, जिसमें मध्यमवर्ग की आवास-समस्या को उठाया गया है।

(2) पात्र या चरित्र :
चित्रण-सफल एकांकी की दृष्टि से पात्रों की संख्या उचित है। मुख्य तीन पुरुष पात्र तथा एक नारी पात्र है। प्रथम, गृहस्वामी विश्वनाथ अपनी उदारता और दया के कारण कष्ट उठाता है। अन्य दो पुरुष पात्र नन्हेलाल तथा बाबूलाल हैं। दोनों बेशर्म तथा वाचाल हैं। दूसरों की परेशानी की उन्हें कोई चिन्ता नहीं। बिना उचित पते के अजनबी के मेहमान बन जाते हैं। उनका चरित्र एक विदूषक के समान है। रेवती अकेली नारी पात्र है जो पतिव्रता, तुनकमिजाज,श्रेष्ठ गृहिणी के साथ अनुदार व अंधविश्वासी विचारधारा की है। उसके साथ दो लड़के हैं-प्रमोद और किरण। अन्त में एक अन्य पुरुष पात्र आता है जो रेवती का भाई तथा वास्तविक मेहमान है। इसे आगन्तुक के नाम से सम्बोधित किया गया है।

(3) संवाद :
संवाद एकांकी के प्राण होते हैं जो कलेवर को सौन्दर्य प्रदान कर आकार देते हैं। संवाद छोटे-छोटे हैं परन्तु सारगर्भित हैं जो काव्य का-सा स्वाद व आनन्द देते हैं, देखिएबाबूलाल-उतना ही मैं भी। (दोनों गट-गट पानी पीते हैं किरण-(विश्वनाथ से धीरे से) फिर खाना। विश्वनाथ (इशारे से) ठहर जा जरा। नन्हेमल-कितने सीधे लड़के हैं। बाबूलाल-शहर के हैं न।

(4) भाषा-शैली :
भाषा साधारण खड़ी बोली है, जिसमें बोलचाल के शब्द हैं, जैसेकुर्सी इधर खिसका दो। उर्दू के शब्द भी हैं तारीफ, खूब,जरा। संस्कृत के तत्सम शब्द-क्षमा, साहित्यिक, मित्र। “चने की तरह भाड़ में भुनना” जैसे मुहावरों का प्रयोग है। भाषा में प्रवाह के साथ बोधगम्यता है। शैली सरल पर साधारण है। क्लिष्टता कहीं भी देखने को नहीं मिलती है।

(5) देश काल तथा वातावरण :
एकांकी में महानगरों के मध्यम वर्ग की आवास समस्या को प्रस्तुत किया गया है। उनके अपने बैठने-सोने को तो जगह होती नहीं, उस पर मेहमानों का सत्कार कैसे करें ? तंग गलियों में सटे मकान की छतों के पास-पास होने से पड़ोसियों के मध्य झगड़ने का दृश्य है। नलों में पानी का न आना। भीषण गर्मी का समय है।

(6) उद्देश्य बड़े :
बड़े नगरों की आवासीय समस्या को सहज ही उजागर करने की क्षमता इस एकांकी का उद्देश्य है। त्रस्त रेवती कह उठती है-“जाने कब तक इस जेल खाने में सड़ना पड़ेगा।” उधर विश्वनाथ भी परेशान हैं, क्योंकि नया मकान मिलता ही नहीं। लेखक ने इस समस्या का समाधान नहीं बताया है। एकांकी को रोचक बनाने के लिए व्यंग्य-विनोद का सहारा लिया गया है। मेहमानों का आना एक समस्या है। इसी उद्देश्य को चित्रित करने में नाटककार सफल हुआ है।

(7) अभिनेयता :
एकांकी के छ: तत्वों में इसकी गणना नहीं होती,क्योंकि अभिनेयता तो एकांकी की प्राण है। यह एकांकी प्रहसन की श्रेणी में सहज भाव से आ जाता है। मंचन की दृष्टि से यह एकांकी सफल है। पात्रों की गिनती का कम होना, भाषा सरल, वाक्य छोटे-छोटे होना, हास्य-व्यंग्य विनोद का होना इस एकांकी की अभिनेयता की नींव रखना है। इसका अभिनय और प्रसारण दोनों ही सफलतापूर्वक किये जा सकते हैं।

प्रश्न 5.
अपने मेहमान और पराये मेहमान के प्रति रेवती के व्यवहार में क्या अन्तर है? लिखिए।
अथवा
आगन्तुक के प्रति रेवती के आत्मीय व्यवहार से आप कहाँ तक सहमत हैं? स्पष्ट कीजिए। (2009)
उत्तर:
अपने मेहमान तथा पराये मेहमान के प्रति रेवती के व्यवहार में जमीन-आसमान का अन्तर है। रेवती को पराये मेहमान बोझ जैसे प्रतीत होते हैं जबकि अपने मेहमान,जो उसका भाई है,को देखकर वह एकदम खिल उठती है और भोजन बनाने में जुट जाती है। मिठाई व बर्फ मँगाती है। उसकी प्रत्येक सुख-सुविधा का पूरा-पूरा ध्यान रखती है। उसके सिर का दर्द भी गायब हो जाता है। इस प्रकार अपने मेहमान (आगन्तुक) के प्रति रेवती की आत्मीयता से हम सहमत हैं।

MP Board Solutions

नये मेहमान भाषा अध्ययन

प्रश्न 1.
निम्नलिखित मुहावरों का वाक्यों में प्रयोग कीजिए-
आग बरसना, चौपट हो जाना, पेट में चूहे कूदना, खून का घूट पीना।
उत्तर:
(i) शब्द – आग बरसना।
वाक्य प्रयोग :
ज्येष्ठ मास की दोपहरी में आसमान से आग बरसने लगती है।

(ii) शब्द – चौपट हो जाना।
वाक्य प्रयोग :
शहर में बाढ़ आने से लोगों के काम-धन्धे चौपट हो गये।

(iii) शब्द – पेट में चूहे कूदना।
वाक्य प्रयोग :
राजा ने सुबह से कुछ भी नहीं खाया। शाम होते-होते उसके पेट में चूहे कूदने लगे।

(iv) शब्द-खून का घूट पीना।।
वाक्य प्रयोग :
वह अपने पिताजी का अपमान होता देखकर भी खून के चूंट पीकर रह गया।

प्रश्न 2.
निम्नलिखित वाक्यों के लिए एक शब्द लिखिए-

  1. यात्रियों के ठहरने का स्थान।
  2. जिसके आने की तिथि न मालूम हो।
  3. आयुर्वेदिक औषधियों से इलाज करने वाला।
  4. कविताएँ रचने वाला।

उत्तर:

  1. धर्मशाला
  2. अतिथि
  3. वैद्य
  4. कवि।

प्रश्न 3.
निम्नलिखित वाक्यों में अशुद्ध वर्तनी वाले शब्दों की सही वर्तनी लिखिए

  1. जिवन में तुम्हें कोई सुख न दे सका।
  2. शायद वहाँ कोई साहितयिक मित्र हो।
  3. वह पड़ोसी की इसत्री चिल्ला रही है।
  4. मैं यह बरदाश नहीं कर सकता।

उत्तर:

  1. जीवन
  2. साहित्यिक
  3. स्त्री
  4. बर्दाश्त।

प्रश्न 4.
निम्नलिखित गद्यांश में उचित विराम चिह्नों का प्रयोग कीजिए-
खाना तो खिलाना ही होगा तुम भी खूब हो भला इस तरह कैसे काम चलेगा दर्द के मारे तो सिर फटा जा रहा है फिर खाना बनाना इनके लिए और इस समय आखिर ये आए कहाँ से हैं
उत्तर:
खाना तो खिलाना ही होगा-तुम भी खूब हो। भला इस तरह कैसे काम चलेगा? दर्द के मारे तो सिर फटा जा रहा है, फिर खाना बनाना इनके लिए; और इस समय ‘आखिर ये आए कहाँ से हैं?

प्रश्न 5.
पाठ में चिट्ठी-पत्री और तार शब्दों का प्रयोग हआ है। आप भी अपने आने की सूचना पत्र द्वारा अपने रिश्तेदार को दीजिए।
उत्तर:
74-B, शालीमार एन्कलेव,
भोपाल
दिनांक : 30 मार्च,……

आदरणीय चाचाजी,
सादर चरण स्पर्श।

मैं यहाँ कुशलतापूर्वक हूँ। आपके पत्र द्वारा आपकी कुशलक्षेम भी ज्ञात हुई। आपने अपने पत्र में पूछा था कि मेरा गर्मियों की छुट्टियों का क्या कार्यक्रम है? सो मैं आपको सचित करना चाहता हूँ कि मैं अपनी अन्तिम परीक्षा देने के उपरान्त 5 अप्रैल को मालवा एक्सप्रेस से ग्वालियर पहुँचूँगा। शेष बातें आपसे मिलने पर होंगी।

मेरी ओर से पूज्य चाचीजी को सादर चरण स्पर्श। छोटी बहन शुभा तथा अनुज शुभम को हार्दिक स्नेह।
शेष शुभ ….

आपका भतीजा
क ख ग

MP Board Solutions

नये मेहमान पाठ का सारांश

देश के शीर्षस्थ एकांकीकार ‘उदयशंकर भट्ट’ की प्रबल लेखनी से लिखित प्रस्तुत एकांकी ‘नये मेहमान’ में लेखक ने सामाजिक जीवन का यथार्थवादी व सशक्त चित्र प्रस्तुत किया है। प्रस्तुत एकांकी में आधुनिक महानगरों में रहने वाले निम्न मध्यमवर्गीय परिवारों की कठिनाइयों का एक सरल-सी घटना के माध्यम से प्रभावी वर्णन किया गया है।

गृहस्वामी विश्वनाथ किसी बड़े नगर में अपने बच्चों के साथ किराये के मकान में रहते हैं। गर्मी का मौसम है, छोटा बेटा बीमार है, उसे खुली हवा वाला सोने का स्थान भी नहीं मिलता। उसी समय पहर रात गये दो मेहमान-बाबूलाल और नन्हेमल घर पर आ जाते हैं। संकोची स्वभाव वाले विश्वनाथ जी मेहमानों से सही ठिकाना जाने बिना उनकी आवभगत में लग जाते हैं, परन्तु उनकी पत्नी मेहमानों के लिए खाना भी नहीं बनाना चाहती है, उसका कारण वह अपने सिर का दर्द बताती है। मेहमान स्वयं को बिजनौर का निवासी बताकर जबरदस्ती विश्वनाथ से रिश्ता जोड़कर अपनी खातिर करवाने में लगे हैं। “मान न मान, मैं तेरा मेहमान” वाला मुहावरा चरितार्थ करने में रत हैं। अन्त में रहस्य खुलता है कि वे इसी मौहल्ले में रहने वाले कविराज वैद्य के यहाँ आये हैं। अतः विश्वनाथ को उन्हें उनके असली गन्तव्य तक पहुँचाना पड़ता है। इस अप्रत्याशित कष्ट से छुटकारा मिला ही था कि अचानक विश्वनाथ जी का साला वहाँ आ टपकता है। उसका स्वागत अभावों में भी आत्मीयता के साथ होता है। गृहस्वामिनी सिर में दर्द होने पर भी भाई के लिए प्रेमपूर्वक भोजन बनाती है, ठण्डे पानी का प्रबन्ध करती है और नहाने के लिए बार-बार कहती है।

एकांकी की कथावस्तु परिचित व यथार्थवादी है। संकलनत्रय का पूरा निर्वाह हुआ है। पूरा एकांकी एक कमरे में आधे घण्टे में घटित हुआ है। एकांकी हास्य को प्रकट करता है, तो जीवन की सच्चाई को भी प्रदर्शित करता है। नाटक का शिल्प,रंगमंच और रेडियो-रूपक दोनों के अनुकूल है। भाषा सामान्य जीवन के निकट और सरल है। संवाद छोटे-छोटे व सरल वाक्यों वाले हैं, जिनमें देशज व तद्भव शब्दों का प्रयोग हुआ है। इस प्रकार सम्पूर्ण एकांकी सामाजिक और मनोवैज्ञानिक सत्य का प्रदर्शन यथार्थ रूप में करने में सफल हुआ है।

नये मेहमान कठिन शब्दार्थ

बेहद = बहुत। निर्दयी = जिसके हृदय में दया न हो। हर्ज = हानि। सम्पन्न = अमीर। आगंतुक = आने वाला। कारोबार = व्यवसाय। वजह = कारण। चौपट होना = बरबाद होना। तुनककर = रूठकर।

नये मेहमान संदर्भ-प्रसंग सहित व्याख्या

(1) वे तो हमें मसीबत में देखकर प्रसन्न होते हैं। उस दिन मैंने कहा तो लाला की औरत बोली: ‘क्या छत तुम्हारे लिए है? नकद पचास देते हैं, तब चार खाटों की जगह मिली है। न, बाबा, यह नहीं हो सकेगा। मैं खाट नहीं बिछाने दूंगी। सब हवा रुक जाएगी। उन्हें और किसी को सोता देखकर नींद नहीं आती।’

सन्दर्भ :
प्रस्तुत गद्य अवतरण हमारी पाठ्य-पुस्तक के ‘नये मेहमान’ नामक पाठ से लिया गया है। इसके लेखक देश के शीर्षस्थ एकांकीकार ‘उदयशंकर भट्ट’ हैं।

प्रसंग :
बड़े नगरों में किराये के मकान में रहने वालों के मध्यमवर्गीय समाज की परेशानियों का चित्रण अति सरल व सामान्य बोलचाल के माध्यम से किया गया है।

व्याख्या :
गर्मी का मौसम है। सोने के लिए खुली जगह की कमी है. परन्तु पडोसी की छत खाली होने पर भी कोई पड़ोसी उसे उपयोग में नहीं ला सकता है। रेवती पति से कहती है कि पड़ोसी-पड़ोसी को दुःखी देखकर प्रसन्न होते हैं। छत पर बच्चों को सुलाने की पूछने पर कहती है कि ऊँचा किराया देने पर ही ऐसा मकान मिला है, जिसमें खुली छत है। यह छत दूसरों के प्रयोग के लिए न होकर अपने प्रयोग के लिए है। दूसरों की खाट डालने से हवा रुक जायेगी तथा लाला को नींद भी नहीं आती है। मूल में भावना है कि यह छत किसी को नहीं दी जायेगी।

विशेष :

  1. पड़ोसी के स्वार्थी स्वभाव का चित्रण है।
  2. भाषा सामान्य बोलचाल की है, जिसमें देशज शब्द, जैसे-खाट तथा उर्दू शब्द, जैसे-मुसीबत का प्रयोग हुआ है।
  3. वाक्य अति संक्षिप्त किन्तु प्रभावशाली हैं।

MP Board Solutions

(2) अरे खाने की भली चलाई, पेट ही भरना है। शहर में आए हैं तो किसी को तकलीफ थोड़े ही देंगे। देखिए पंडित जी, जिसमें आपको आराम हो, हम तो रोटी भी खा लेंगे कल फिर देखी जाएगी।

सन्दर्भ :
पूर्ववत्।

प्रसंग :
विश्वनाथ बाबूलाल और नन्हेमल से खाने के लिए पूछते हैं, तो वे तुरन्त तैयार हो जाते हैं।

व्याख्या :
बाबूलाल विश्वनाथ से कहते हैं कि खाना तो खायेंगे ही चाहे रोटी ही क्यों न हो। खाने को तो बहुत कुछ खा लेंगे। इस समय तो पेट भरने से मतलब है। यहाँ आप लोगों को तकलीफ देने थोड़े ही आये हैं। खाना तो पेट भरने के लिए चाहिए। भले ही पूड़ी-सब्जी हो या दाल-रोटी। कल की कल देखी जायेगी। वे बातों की चालाकी से न सिर्फ अपनी पसन्द बता रहे हैं बल्कि दूसरे दिन के खाने का प्रबन्ध भी कर रहे हैं।

विशेष :

  1. बाबूलाल की वाक्पटुता का प्रदर्शन है।
  2. वाक्यांशों के द्वारा कविता का आनन्द व भावों की गहराई परिलक्षित होती है।
  3. बोलचाल की भाषा से युक्त खड़ी बोली है।
  4. भाषा में सम्प्रेषणीयता है।

MP Board Class 12th Hindi Solutions

MP Board Class 12th Economics Important Questions Unit 3 उत्पादक व्यवहार एवं पूर्ति

MP Board Class 12th Economics Important Questions Unit 3 उत्पादक व्यवहार एवं पूर्ति

उत्पादक व्यवहार एवं पूर्ति Important Questions

उत्पादक व्यवहार एवं पूर्ति वस्तुनिष्ठ प्रश्न

प्रश्न 1.
सही विकल्प चुनकर लिखिए –

प्रश्न (a)
उत्पादन के साधन होते हैं –
(a) दो
(b) तीन
(c) चार
(d) पाँच
उत्तर:
(d) पाँच

प्रश्न (b)
स्थिर लागत को कहते हैं –
(a) परिवर्तनशील लागत
(b) प्रमुख लागत
(c) पूरक लागत
(d) अल्पकालीन लागत।
उत्तर:
(c) पूरक लागत

प्रश्न (c)
पूर्ति में उसी कीमत पर गिरावट आ जाती है जब –
(a) पूर्ति में कमी हो जाय
(b) जब पूर्ति में संकुचन हो जाय
(c) पूर्ति में वृद्धि हो जाय
(d) पूर्ति में विस्तार हो जाय।
उत्तर:
(a) पूर्ति में कमी हो जाय

प्रश्न (d)
उत्पादन का सक्रिय साधन है –
(a) पूँजी
(b) श्रम
(c) भूमि
(d) इनमें से कोई नहीं।
उत्तर:
(b) श्रम

प्रश्न (e)
अल्पकाल में उत्पादन प्रक्रिया में निम्नलिखित में कौन से साधन होते हैं –
(a) स्थिर साधन
(b) परिवर्तनशील साधन
(c) (a) और (b) दोनों
(d) इनमें से कोई नहीं।
उत्तर:
(c) (a) और (b) दोनों

प्रश्न 2.
रिक्त स्थानों की पूर्ति कीजिए –

  1. अल्पकालीन उत्पादन फलन ……………………………… कहा जाता है।
  2. पैमाने के प्रतिफलों का संबंध …………………………… काल अवधि से है।
  3. उत्पादन की प्रति इकाई लागत को ……………………………. कहते हैं।
  4. उत्पादन की एक इकाई की बिक्री में वृद्धि होने से आय में होने वाली वृद्धि को ……………………… कहते हैं।
  5. एक उत्पादक तब संतुलन में होता है, जब उसका ………………………………. होता है।
  6. पूर्ति का नियम, कीमत एवं वस्तु की पूर्ति के बीच ………………………………. संबंध बताता है।
  7. दूध जैसी वस्तु के लिए पूर्ति लोच ……………………………….. होती है।

उत्तर:

  1. परिवर्तनशील अनुपात के नियम
  2. दीर्घ
  3. औसत लागत
  4. सीमांत लागत
  5. लाभ
  6. धनात्मक
  7. शून्य।

प्रश्न 3.
सत्य/असत्य बताइए –

  1. रिकार्डो का लगान सिद्धान्त उत्पत्ति ह्रास नियम पर आधारित है।
  2. अविभाज्यता के कारण पैमाने के घटते प्रतिफल की अवस्था लागू होती है।
  3. स्थिर लागत को पूरक लागत भी कहते हैं।
  4. पूर्ण प्रतियोगिता की स्थिति में एक फर्म का MC वक्र, MR वक्र को जब ऊपर से काटता है तो उस ‘ समय उसको अधिकतम लाभ की प्राप्ति होती है।
  5. पूर्ति तथा कीमत में विपरीत संबंध होता है।
  6. शीघ्र नष्ट होने वाली वस्तुओं की पूर्ति बेलोच होती है।
  7. उत्पत्ति के चार नियम प्रतिपादित किये गये हैं।

उत्तर:

  1. सत्य
  2. असत्य
  3. सत्य
  4. असत्य
  5. असत्य
  6. सत्य
  7. असत्य।

प्रश्न 4.
सही जोड़ी बनाइए –
MP Board Class 12th Economics Important Questions Unit 3 उत्पादक व्यवहार एवं पूर्ति img 1
उत्तर:

  1. (b)
  2. (c)
  3. (a)
  4. (e)
  5. (d).

प्रश्न 5.
एक शब्द/वाक्य में उत्तर दीजिए –

  1. हस्तांतरण आय किस लागत को कहा जाता है?
  2. स्थिर लागत और परिवर्तनशील लागत का योग किसके बराबर होता है?
  3. कीमत में थोड़ी – सी गिरावट होने पर वस्तु की पूर्ति शून्य हो जाती है तो इसे किसकी पूर्ति की लोच कहा जाता है?
  4. उत्पादन की एक अतिरिक्त इकाई बेचने से कुल आगम में जो वृद्धि होती है, उसे कहते हैं?
  5. एक फर्म साम्य की दशा में कौन-सा लाभ प्राप्त करती है?

उत्तर:

  1. अवसर लागत को
  2. कुल लागत के
  3. पूर्णत: लोचदार
  4. सीमांत आगम
  5. अधिकतम।

उत्पादक व्यवहार एवं पूर्ति लघु उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 1.
स्थिर लागत एवं परिवर्तनशील लागत में अन्तर स्पष्ट कीजिए?
उत्तर:
स्थिर लागत एवं परिवर्तनशील लागत में अन्तर –

स्थिर लागत –

  1. “परिवर्तनशील लागत स्थिर लागतों का सम्बन्ध उत्पादन के स्थिर।
  2. कुल स्थिर लागतों पर उत्पादन की मात्रा का। परिवर्तनशील लागतें उत्पादन की मात्रा से कोई प्रभाव नहीं पड़ता।
  3. स्थिर लागतें उत्पादन बन्द कर देने पर भी शून्य परिवर्तनशील लागतें उत्पादन बन्द कर देने पर नहीं होती हैं।
  4. स्थिर लागतों की हानि उठाकर भी अन्य काल| एक उत्पादक तभी उत्पादन जारी रखेगा, जब में एक उत्पादक, उत्पादन जारी रख सकता है।

परिवर्तनशील लागतों –

  1. परिवर्तनशील साधनों से होता है।
  2. परिवर्तनशील लागतें उत्पादन की मात्रा से कोई प्रभाव नहीं पड़ता।
  3. परिवर्तनशील लागतें उत्पादन बन्द कर देने पर नहीं होती हैं।
  4. एक उत्पादक तभी उत्पादन जारी रखेगा, जब में एक उत्पादक, उत्पादन जारी रख सकता है। उसे कम-से-कम परिवर्तनशील लागतों के बराबर कीमत अवश्य मिले।

प्रश्न 2.
लागत वक्रों की आकृति ‘U’ के समान होने के प्रमुख कारण लिखिए?
उत्तर:
लागत वक्रों की आकृति ‘U’ आकार की होने का सर्वाधिक महत्वपूर्ण कारण फर्म को प्राप्त होने वाली आंतरिक बचते हैं। आंतरिक बचतों को निम्नांकित चार भागों में बाँटा जा सकता है –

1. तकनीकी बचतें:
उत्पादन की तकनीक में सुधार पर बचतें प्राप्त होती हैं, उन्हें तकनीकी बचतें कहते हैं। आधुनिक मशीनों एवं बड़े आकार की मशीनों का प्रयोग करने के कारण उत्पादन अधिक मात्रा में होता है, तब प्रति इकाई लागत कम आती है।

2. श्रम संबंधी बचतें:
श्रम संबंधी बचतें श्रम विभाजन एवं विशिष्टीकरण का परिणाम होती हैं। जब उत्पादन बड़े पैमाने पर किया जाता है तो श्रम विभाजन एवं विशिष्टीकरण भी उतना ही अधिक संभव होता है। परिणामस्वरूप श्रमिकों की कार्य कुशलता में वृद्धि होती है जिससे प्रति इकाई उत्पादन लागत कम हो जाती है।

3. विपणन की बचतें:
कोई भी फर्म जब अपने उत्पादन की मात्रा को बढ़ाती है, तो विक्रय लागतें उस अनुपात में नहीं बढ़ती हैं, जिससे प्रति इकाई लागत में कमी आ जाती है।

4. प्रबंधकीय बचतें:
उत्पादन की मात्रा को बढ़ाने पर प्रबंध पर होने वाले व्ययों में कमी आती है, जिसे प्रबंधकीय बचतें कहते हैं। एक कुशल प्रबंधक अधिक मात्रा में उत्पादन का प्रबंध उसी कुशलता के साथ कर सकता है, जितना कि थोड़े उत्पादन का, तो फर्म की प्रति इकाई उत्पादन लागत कम हो जाती

प्रश्न 3.
औसत आय और सीमान्त आय में संबंध बताइए?
उत्तर:
औसत आय और सीमान्त आय वक्र में निम्न संबंध होते हैं –

  1. जब तक औसत आय वक्र ऊपर से नीचे की ओर गिरता है, तब तक सीमान्त आय वक्र भी अनिवार्य रूप से औसत आय से कम होगी।
  2. जब औसत आय वक्र तथा सीमान्त आय वक्र दोनों गिरते हुए होते हैं, तब यदि औसत आय वक्र के किसी बिन्दुं से OY अक्ष पर लम्ब डाला जाये तो सीमान्त आय वक्र सदैव उस लम्ब केन्द्र से गुजरेगा।
  3. जब औसत आय वक्र मूलबिन्दु की ओर नतोदर होता है तब औसत आय वक्र में किसी बिन्दु से AY अक्ष पर डाले गये लम्ब को सीमान्त आय वक्र आधे से कम दूरी पर काटता है।
  4. जब औसत आय वक्र मूलबिन्दु की ओर उन्नतोदर होता है तब औसत आय वक्र के किसी बिन्दु के OY अक्ष पर डाले गये लम्ब को सीमान्त आय वक्र आधे से अधिक दूरी पर काटता है।

प्रश्न 4.
एक उत्पादक संतुलन की स्थिति में कब होता है?
उत्तर:
एक उत्पादक संतुलन की स्थिति में तब होता है जब उत्पादक अधिकतम लाभ अर्जित कर रहा हो। एक उत्पादक अधिकतम लाभ वहाँ प्राप्त करता है जहाँ पर लाभ = TR – TC अधिकतम हो। जहाँ TR > TC होता है वहाँ पर फर्म (उत्पादक) को असामान्य लाभ प्राप्त होता है एवं जहाँ पर TR < TC होता है वहाँ पर हानि भी उत्पादक को ही होती है।

प्रश्न 5.
पूर्ति का क्या आशय है?
उत्तर:
किसी वस्तु की पूर्ति से आशय का सम्मानित एक वस्तु की विभिन्न कीमतों पर उत्पादक द्वारा बेची जाने वाली विविध मात्राओं से होता है। पूर्ति वास्तव में उस अनुसूची या तालिका को दर्शाती है जो वस्तु की उन मात्राओं को बताती है जिस पर एक उत्पादक विभिन्न कीमतों पर निश्चित समय पर विक्रय करने के लिए कार्य करता है।

प्रश्न 6.
पूर्ति अनुसूची से आपका क्या आशय है?
उत्तर:
पूर्ति अनुसूची एक तालिका है जो वस्तु की विभिन्न संचय कीमतों पर बिक्री के लिए प्रस्तुत की जाने वाली उस वस्तु की विभिन्न मात्राओं को दर्शाती है। पूर्ति अनुसूची भी दो प्रकार की हो सकती है व्यक्तिगत पूर्ति अनुसूची एवं बाजार की पूर्ति अनुसूची। व्यक्तिगत पूर्ति अनुसूची बाजार में किसी एक फर्म की पूर्ति अनुसूची होती है जबकि बाजार अनुसूची बाजार में किसी विशेष वस्तु का उत्पादन करने वाली सभी फर्मों की पूर्ति के योग को कहते हैं।

प्रश्न 7.
पूर्ति वक्र किसे कहते हैं?
उत्तर:
अनूसूची के रेखीय प्रस्तुतिकरण को पूर्ति वक्र कहा जाता है। किसी वस्तु की विभिन्न संभाव्य कीमतों पर बिक्री के लिए प्रस्तुत किए जाने वाले न लाभ न हानि की विभिन्न मात्राओं को दर्शाने वाला वक्र होता है। यह वक्र भी व्यक्तिगत पूर्ति वक्र एवं बाजार पूर्ति के रूप में विभाजित किया जा सकता है। व्यक्तिगत पूर्ति वक्र बाजार में एक फर्म की पूर्ति को रेखाचित्र में प्रस्तुत करता है जबकि बाजार पूर्ति वक्र किसी बाजार में सभी फर्मों की पूर्ति का योग होता है जिसे रेखाचित्र के रूप में प्रस्तुत किया जा सकता है।

प्रश्न 8.
पूर्ति के नियम की सचित्र व्याख्या कीजिए?
उत्तर:
यदि अन्य बातें समान रहें तो वस्तु की पूर्ति की मात्रा एवं उसकी कीमत में धनात्मक संबंध होता है। वस्तु की कीमत बढ़ने से पूर्ति की मात्रा बढ़ती है एवं वस्तु की कीमत घटने से पूर्ति की मात्रा कम होती है। एक उदाहरण द्वारा इसे निम्न प्रकार से स्पष्ट किया जा सकता है –
MP Board Class 12th Economics Important Questions Unit 3 उत्पादक व्यवहार एवं पूर्ति img 3
MP Board Class 12th Economics Important Questions Unit 3 उत्पादक व्यवहार एवं पूर्ति img 4

प्रश्न 9.
पूर्ति वक्र पर संचलन (Moments) एवं खिसकाव (Shifting) के कौन – से कारण हैं?
उत्तर:
जब वस्तु की कीमत में परिवर्तन होता है तो इस परिवर्तन के कारण पूर्ति वक्र पर संचलन दिखाई देता है। पूर्ति वक्र में खिसकाव तब होता है जब वस्तु की अपनी कीमत के अतिरिक्त अन्य कारकों में परिवर्तन दृष्टिगोचर होता है)। पूर्ति वक्र पर संचलन को जानने के लिए हमें पूर्ति के विस्तार एवं पूर्ति के संकुचन को जानना आवश्यक है पूर्ति वक्र में खिसकाव को वस्तु की पूर्ति में वृद्धि एवं वस्तु की पूर्ति में कमी के द्वारा जाना जाता है।

जब वस्तु की अपनी कीमत बढ़ने से पूर्ति की मात्रा बढ़ती है तो पूर्ति का विस्तार कहते हैं। इसके विपरीत होने पर संकुचन कहते हैं। हड्कि वस्तु की अपनी कीमत के अतिरिक्त अन्य कारण से पूर्ति की मात्रा में वृद्धि होती है तो इसे पूर्ति में वृद्धि कहते हैं। इसके विपरीत होने पर पूर्ति में कमी होती है।

प्रश्न 10.
पूर्ति की कीमत लोच से आप क्या समझते हैं?
उत्तर:
पूर्ति की कीमत लोच का तात्पर्य एक वस्तु की कीमत में परिवर्तनों के कारण वस्तु की पूर्ति की मात्रा की अनुक्रियाशीलता का मापन करती है। दूसरे शब्दों में, पूर्ति की कीमत लोच वस्तु की पूर्ति की मात्रा में प्रतिशत परिवर्तन तथा वस्तु की कीमत में प्रतिशत परिवर्तनों का अनुपात कहलाती है। इसे निम्न समीकरण की सहायता से स्पष्ट किया जा सकता है –
E s = \(\frac { \triangle Q }{ \triangle P } \times \frac { P }{ Q } \)

प्रश्न 11.
पूर्ति की कीमत लोच को मापने की प्रतिशत विधि एवं ज्यामितीय विधि को संक्षेप में समझाइये?
उत्तर:
पूर्ति की कीमत लोच को मापने में प्रतिशत विधि एवं ज्यामितीय विधि का उपयोग किया जा सकता है परन्तु इनमें प्रतिशत विधि अधिक लोकप्रिय है।
MP Board Class 12th Economics Important Questions Unit 3 उत्पादक व्यवहार एवं पूर्ति img b

ज्यामितीय विधि के अंतर्गत एक सीधी रेखा वाले पूर्ति वक्र पर कीमत लोच ज्ञात करने के लिए उसे बढ़ाते जाते हैं।

  1. जब वृद्धि पर पूर्ति मूल बिन्दु पर मिलता है तो Es < 1 होता है।
  2. जब वृद्धि पर पूर्ति वक्र X अक्ष के धनात्मक भाग को काटता है तो Es < 1 होता है।
  3. जब वृद्धि पर पूर्ति वक्र X अक्ष के ऋणात्मक भाग पर काटता है तो Es > 1 होता है।

प्रश्न 12.
पूर्ति की लोच को कौन – से घटक प्रभावित करते हैं?
उत्तर:
पूर्ति की लोच को निम्न घटक प्रभावित करते हैं –

  1. समयावधि
  2. वस्तु की प्रकृति
  3. प्राकृतिक अवरोध
  4. उत्पादन लागत
  5. उत्पादन की तकनीक
  6. उत्पादन की जोखिम सहन करने की शक्ति
  7. प्रयोग किए जाने वाले आगतों की प्रकृति
  8. उत्पादक की अभिरुचि एवं योग्यता।

प्रश्न 13.
औसत स्थिर लागत की विशेषताएँ बताइये।
उत्तर:
विशेषताएँ –

  1. औसत स्थिर लागत, कुल स्थिर लागत को फर्म के कुल उत्पादन मात्रा से भाग दिये जाने पर प्राप्त होती है –
  2. अल्पकाल में उत्पादन की मात्रा में परिवर्तन होने पर कुल स्थिर लागत अपरिवर्तित रहती है –
  3. उत्पादन के बढ़ने पर औसत स्थिर लागत घटती है –
  4. औसत स्थिर लागत को प्रति इकाई स्थिर लागत भी कहा जाता है।

प्रश्न 14.
उत्पादन लागत से आप क्या समझते हैं? स्पष्ट लागतों एवं अस्पष्ट लागतों में अंतर बताइए?
अथवा
उपयुक्त उदाहरण देते हुए स्पष्ट एवं अस्पष्ट लागतों में अंतर कीजिए?
उत्तर:
वे सभी व्यय जो किसी उत्पादक या फर्म द्वारा वस्तु के उत्पादन व्यय के रूप में किए जाते हैं, उत्पादन लागत कहलाते हैं।

  1. स्पष्ट लागतें: वे सभी लागतें जिनका उत्पादक भौतिक रूप से भुगतान करता है, जैसे – मजदूरी देना, विक्रय लागत आदि।
  2. अस्पष्ट लागतें: वे लागतें जिनका उत्पादक को किसी दूसरे व्यक्ति को भुगतान नहीं करना पड़ता जैसे – स्वयं की फैक्टरी या फर्म।

प्रश्न 15.
कॉब – डगलस के उत्पादन फलन को समझाइए?
उत्तर:
कॉब – डगलस का उत्पादन फलन:
यह फलन सामान्यतः निर्माण उद्योगों पर लागू होता है, इस फलन के अनुसार उत्पादन की मात्रा केवल दो साधनों श्रम और पूँजी की मात्रा पर निर्भर करती है।
सूत्र के रूप में – q = x1α, x2β

जहाँ α तथा β दो धनात्मक संख्याएँ हैं, फर्म निर्गत की q मात्रा का उत्पादन कारक एक का x1 मात्रा तथा कारक दो की x2 मात्रा को प्रयोग में लाकर करती है।

प्रश्न 16.
अल्पकाल एवं दीर्घकाल की संकल्पनाओं को समझाइये?
उत्तर:
अल्पकाल वह समयावधि है जिसमें उत्पादन के कुछ साधन स्थिर रहते हैं एवं कुछ परिवर्तनशील होते हैं। यही कारण है कि केवल परिवर्तनशील साधनों को बढ़ाकर उत्पादन को बढ़ाया जा सकता है। दीर्घकाल वह समयावधि है जिसमें उत्पादन के साधन चाहे वे स्थिर हों या परिवर्तनशील सभी परिवर्तनशील होते हैं। इसलिए उत्पादन के सभी साधनों की मात्राओं को बढ़ाया जा सकता है। दीर्घकाल में यहाँ तक कि उत्पादन के पैमाने को भी परिवर्तित किया जा सकता है। अल्पकाल में लागतें स्थिर एवं परिवर्तनशील होती हैं परन्तु दीर्घकाल में केवल परिवर्तनशील होती हैं।

प्रश्न 17.
अल्पकालीन सीमांत लागत वक्र ‘U’ आकार का क्यों होता है?
उत्तर:
जब किसी भी फर्म की उत्पादन प्रक्रिया शुरू की जाती है तब शुरुआत में सीमांत लागत घटती है, किन्तु यह साधन की निश्चित इकाइयों के अल्पकालीन सीमांत नियोजन तक ही घटती है। इसके बाद फर्म को साधन का समता प्रतिफल प्राप्त लागत वक्र होता है। अतः सीमांत लागत स्थिर होने लगती है अंत में साधन की इकाइयों का नियोजन बढ़ाने पर ह्रासमान प्रतिफल लागू हो जाता है इस स्थिति में सीमांत। लागत वक्र ऊपर उठने लगता है।
MP Board Class 12th Economics Important Questions Unit 3 उत्पादक व्यवहार एवं पूर्ति img 7
इस प्रकार उत्पादन प्रक्रिया के प्रारंभिक चरणों में सीमांत लागत घटती है इसके बाद स्थिर होती है तथा अंतिम चरणों में बढ़ने लगती है जिसकी वजह से सीमांत लागत वक्र अंग्रेजी के अक्षर ‘U’ जैसा होता है।

प्रश्न 18.
दीर्घकालीन सीमांत लागत तथा औसत लागत वक्र कैसे दिखते हैं?
उत्तर:
दीर्घकाल में एक फर्म उत्पादन प्रक्रिया में सभी साधनों को समायोजित कर सकती है। उत्पादन प्रक्रिया में उत्पादन का पैमाना बढ़ाने पर शुरू में पैमाने का वर्धमान प्रतिफल मिलता है। इस स्थिति में उत्पादन की समान मात्रा का उत्पादन करने पर अपेक्षाकृत कम लागत आती है। फर्म जब तक उत्पादन का वर्धमान प्रतिफल प्राप्त करती है तब तक सीमान्त औसत लागत दोनों घटती हैं। इसके बाद समता प्रतिफल प्राप्त होता है अतः समान उत्पादन के लिए समान लागत आती है जिससे औस उत्पादन व सीमान्त लागत दोनों स्थिर हो जाती हैं। अंतत: पैमाने का ह्रासमान प्रतिफल लागू होने पर सीमान्त व औसत लागत दोनों बढ़ती हैं। इसलिए सीमान्त व औसत लागत वक्रों का आकार अंग्रेजी के अक्षर U जैसा होता है।
MP Board Class 12th Economics Important Questions Unit 3 उत्पादक व्यवहार एवं पूर्ति img 8

प्रश्न 19.
निम्नलिखित तालिका, श्रम की कुल उत्पाद अनुसूची देती है। तद्नुरूप श्रम का औसत उत्पाद तथा सीमांत उत्पाद अनुसूची निकालिए –
MP Board Class 12th Economics Important Questions Unit 3 उत्पादक व्यवहार एवं पूर्ति img 9
उत्तर:
श्रम की औसत उत्पाद तथा सीमांत उत्पाद अनुसूची –
MP Board Class 12th Economics Important Questions Unit 3 उत्पादक व्यवहार एवं पूर्ति img 10

प्रश्न 20.
मान लीजिए, एक फर्म का उत्पादन फलन है –
q = 5 L\(\frac{1}{2}\) K \(\frac{1}{2}\) , K = 100, L = 100
समीकरण में मान रखने पर,
q = 5(100)1/2 x (100)1/2
q = 5\(\sqrt{100}\) x \(\sqrt{100 – 25}\)100
q = 5 x 10 x 10
q = 500
अतः अधिकतम सम्भावित निर्गत 500 इकाइयाँ होंगी।

प्रश्न 21.
लागत फलन की संकल्पनाओं को संक्षिप्त में समझाइए?
उत्तर:
लागत फलन:
लागत तथा निर्गत के बीच में तकनीकी संबंध को लागत फलन कहते हैं, लागत दो प्रकार की होती है –

(अ) अल्पकालीन लागत तथा
(ब) दीर्घकालीन लागत।

(अ) अल्पकालीन लागत:
अल्पकाल में केवल परिवर्ती साधनों को परिवर्तित किया जा सकता है, स्थिर साधनों को नहीं।

अल्पकाल में लागत की विभिन्न संकल्पनाएँ निम्नलिखित हैं –

  1. कुल स्थिर लागत – जिन लागतों में उत्पादन की मात्रा में परिवर्तन होने पर कोई प्रभाव नहीं पड़ता।
  2. कुल परिवर्ती लागत – जो लागतें उत्पादन की मात्रा में परिवर्तन के साथ – साथ परिवर्तित होती हैं।
  3. कुल लागत – किसी वस्तु के उत्पादन की कुल मात्रा पर किया जाने वाला कुल व्यय।
  4. औसत स्थिर लागत – कुल स्थिर लागत में कुल उत्पादित इकाइयों का भाग देकर औसत स्थिर लागत प्राप्त की जाती है।
  5. औसत परिवर्ती लागत –  कुल परिवर्ती लागत में उत्पादित मात्रा की कुल इकाइयों से भाग देकर प्राप्त होने वाली लागत।
  6. अल्पकालीन औसत लागत –  अल्पकालीन औसत लागत की गणना कुल लागत में उत्पादन मात्रा का भाग देकर अथवा औसत स्थिर लागत एवं औसत परिवर्तनशील लागत का योग करके की जा सकती है।
  7. अल्पकालीन सीमान्त लागत – उत्पादन की मात्रा में एक इकाई की वृद्धि होने से कुल लागत में जो परिवर्तन आता है, उसे अल्पकालीन सीमान्त लागत कहते हैं।

सूत्र –
MP Board Class 12th Economics Important Questions Unit 3 उत्पादक व्यवहार एवं पूर्ति img 11
(ब) दीर्घकालीन लागत:
दीर्घकालीन लागत में सभी लागत परिवर्तनशील होते हैं। दीर्घकालीन लागत की संकल्पनाएँ निम्नलिखित हैं

  1. दीर्घकालीन कुल लागत – कुल उत्पादन पर किये गये समस्त व्ययों के योग को दीर्घकालीन कुल लागत कहते हैं।
  2. दीर्घकालीन औसत लागत – दीर्घकालीन कुल लागत में उत्पादन की मात्रा का भाग देकर दीर्घकालीन औसत लागत ज्ञात की जाती है।

सूत्र के रूप में –
MP Board Class 12th Economics Important Questions Unit 3 उत्पादक व्यवहार एवं पूर्ति img 12

प्रश्न 22.
फर्म के संतुलन की मान्यताएँ लिखिए?
उत्तर:
फर्म के संतुलन की मान्यताएँ निम्नांकित हैं –

  1. फर्म के सिद्धांत में यह मान लिया जाता है कि उत्पादक का व्यवहार विवेकपूर्ण होता है। प्रत्येक उत्पादक अधिक से अधिक मौद्रिक लाभ अर्जित करने का प्रयत्न करते हैं।
  2. उद्यमकर्ता प्रत्येक उपज को उत्पादन की एक दी हुई तकनीकी दशाओं में कम से कम लागत पर पैदा करने का प्रयत्न करता है।
  3. एक फर्म द्वारा एक वस्तु का उत्पादन किया जाता है।
  4. प्रत्येक उत्पत्ति के साधन की कीमत दी हुई होती है तथा निश्चित होती है।

उत्पादक व्यवहार एवं पूर्ति दीर्घ उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 1.
औसत स्थिर लागत, औसत परिवर्तनशील लागत और औसत कुल लागत को भलीभाँति समझाइए?
उत्तर:
अल्पकालीन औसत लागते तीन प्रकार की होती हैं

(अ) औसत स्थिर लागत:
(ब) औसत परिवर्तनशील लागत एवं
(स) औसत कुल लागत।

(अ) औसत स्थिर लागत:
औसत स्थिर लागत, कुल स्थिर लागत को फर्म के कुल उत्पादन मात्रा से भाग दिये जाने पर प्राप्त होती है। इसे प्रति इकाई लागत भी कहा जाता है। अर्थात्,
MP Board Class 12th Economics Important Questions Unit 3 उत्पादक व्यवहार एवं पूर्ति img 13
अल्पकाल में उत्पादन की मात्रा घटे या बढ़े, कुल स्थिर लागत अपरिवर्तित रहती है। कुल स्थिर लागत में कोई परिवर्तन नहीं होता है, किन्तु उत्पादन के बढ़ने के साथ-साथ औसत स्थिर लागत घटती चली जाती है। इसका प्रमुख कारण यह है कि उत्पादन की मात्रा बढ़ने से कुल स्थिर लागत, उत्पादन की अधिकाधिक इकाइयों में बँटने लगती है। अत: औसत स्थिर लागत क्रमशः घटने लगती है।

(ब) औसत परिवर्तनशील लागत:
कुल परिवर्तनशील लागत को फर्म के कुल उत्पादन की इकाइयों से भाग दिये जाने पर जो भजनफल प्राप्त होता है, उसे ही औसत परिवर्तनशील लागत कहते हैं। इसे प्रति इकाई परिवर्तनशील लागत भी कहते हैं । अर्थात्,
MP Board Class 12th Economics Important Questions Unit 3 उत्पादक व्यवहार एवं पूर्ति img 14
कुल परिवर्तनशील लागत उत्पादन की मात्रा कुल परिवर्तनशील लागत, उत्पादन की मात्रा में वृद्धि किये जाने से हमेशा बढ़ती जाती है। चूंकि अल्पकाल में उत्पादन के क्षेत्र में परिवर्तनशील अनुपातों का नियम’ लागू होता हैं, इसलिए औसत परिवर्तनशील लागत वक्र प्रारम्भिक अवस्था में गिरता है, क्योंकि उत्पादन वृद्धि नियम या लागत ह्रास नियम लागू होता है, किन्तु एक बिन्दु के पश्चात् उत्पत्ति ह्रास नियम या लागत वृद्धि नियम लागू होने के कारण यह तीव्र गति से ऊपर की ओर बढ़ने लगता है।

(स) औसत कुल लागत:
औसत कुल लागत से अभिप्राय, उत्पादन की कुल प्रति इकाई लागत से है। जब उत्पादन की कुल लागत को उत्पादित इकाइयों की संख्या से भाग दिया जाता है, तो औसत कुल लागत प्राप्त होती है। अर्थात
MP Board Class 12th Economics Important Questions Unit 3 उत्पादक व्यवहार एवं पूर्ति img 15
चूँकि कुल लागत, परिवर्तनशील लागत एवं स्थिर लागत का योग होती है, अतः औसत कुल लागत, औसत परिवर्तनशील लागत और औसत स्थिर लागत के योग के बराबर होती है।

प्रश्न 2.
कुल, औसत एवं सीमान्त आय को एक काल्पनिक तालिका तथा रेखाचित्र की सहायता से समझाइए?
उत्तर:
कुल आय, औसत आय तथा सीमान्त आय को निम्नलिखित तालिका की सहायता से स्पष्ट किया जा सकता है
तालिका – कुल आय, औसत आय तथा सीमान्त आय कुल आय औसत आय –
MP Board Class 12th Economics Important Questions Unit 3 उत्पादक व्यवहार एवं पूर्ति img 16
उपर्युक्त तालिका से स्पष्ट है कि अतिरिक्त इकाई बेचने के लिए कीमत में कटौती की जा रही है। जब फर्म, वस्तु की इकाई बेचती है, तो औसत आय, कुल आय और सीमान्त आय सभी ₹ 10 हैं, किन्तु जब वह वस्तु की दो इकाइयाँ बेचती है, तो वस्तु की कीमत में कटौती कर ₹ 9 प्रति इकाई कर देती है, इससे उसकी कुल आय ₹ 18 हो गयी है, जबकि सीमान्त आय 18 – 10 = ₹ 8 है। जब वस्तु की 3 इकाइयाँ बेची जाती हैं, तो कीमत में पुनः कटौती की जाती है। प्रति इकाई कीमत ₹ 8 किये जाने पर कुल आय 8 x 3 = ₹ 24 हो गयी है, जबकि सीमान्त आय 24 – 18 = ₹ 6 हो गयी है।

उपर्युक्त तालिका को निम्न रेखाचित्र की सहायता से भी स्पष्ट किया जा सकता है प्रस्तुत रेखाचित्र में Ox – आधार रेखा पर बेची जाने वाली इकाइयाँ तथा OY – लम्ब रेखा पर आगम को दिखाया गया है।

1. चित्र में TR कुल आय वक्र, AR औसत आय वक्र एवं सीमांत आय वक्र एवं MR सीमान्त आय वक्र है।

2. जब कुल आय वक्र TR,A बिन्दु तक बढ़ता जाता है तो सीमान्त आय MR धनात्मक होती है। चित्र से स्पष्ट है 15 कि MR रेखा C बिन्दु तक धनात्मक है।

3. जब कुल आय वक्र TR, A में B बिन्दु तक घटने आय वक्र – लगती है, तो सीमान्त आय वक्र MR ऋणात्मक हो जाता है। MR वक्र C बिन्दु के पश्चात् ऋणात्मक हो गया है।

4. जब औसत आय वक्र AR गिरने लगता है, तो सीमान्त आय वक्र MR भी गिरने लगता है किन्तु MR वक्र में गिरावट की दर AR में गिरावट की दर से अधिक है। चित्र से स्पष्ट है कि MR वक्र AR वक्र से नीचे है।

5. जब उत्पादन की मात्रा OC हो जाती है, तो इसके उत्पादन बढ़ने पर सीमान्त आय वक्र ऋणात्मक हो जाता है।

6. औसत आय वक्र AR बायें से दायें नीचे की ओर गिरता हुआ वक्र है। इसका अभिप्राय यह है कि वस्तु की अतिरिक्त इकाइयाँ बेचने के लिए मूल्यों में कटौती करनी पड़ती है। मूल्यों में यह कटौती सभी इकाइयों में की जाती है इसलिए AR औसत आय वक्र नीचे की ओर गिरता हुआ है।

7. सीमान्त आय वक्र MR भी बायें से दायें की ओर गिरता हुआ वक्र है, किन्तु सीमान्त आय वक्र में गिरावट की दर अधिक है। इसका कारण यह है कि अतिरिक्त इकाई बेचने के लिए वस्तु के मूल्य में कटौती करनी पड़ती है।
MP Board Class 12th Economics Important Questions Unit 3 उत्पादक व्यवहार एवं पूर्ति img 17

प्रश्न 3.
पूर्ण प्रतियोगिता की दशा में अल्पकाल में किसी वस्तु का मूल्य कैसे निर्धारित होता है? उदाहरण तथा रेखाचित्र द्वारा समझाइए?
उत्तर:
पूर्ण प्रतियोगिता में फर्म का साम्य:
पूर्ण प्रतियोगिता की स्थिति में प्रत्येक फर्म का व्यवहार पूरी तरह विवेकपूर्ण होता है, ऐसा हम मान सकते हैं। ये फर्मे अपने हित में अधिकाधिक लाभ अर्जित करने का प्रयास करती हैं। आधुनिक अर्थशास्त्री किसी वस्तु के मूल्य तथा उत्पादन निर्धारण को फर्म के साम्य के शब्दों में व्यक्त करते हैं:

एक फर्म साम्य की स्थिति में तब होगी जबकि उसके कुल उत्पादन में कोई परिवर्तन नहीं होता। एक फर्म अपने उत्पादन में परिवर्तन तब नहीं करेगी जब उसे अधिकतम लाभ प्राप्त हो रहा हो। अत: “एक फर्म का साम्य तथा एक फर्म द्वारा उत्पादित वस्तु की मात्रा और कीमत निर्धारण दोनों एक ही बात है।”

अल्पकाल में फर्म का साम्य:
अल्पकाल में समय की कमी होती है जिससे पूर्ति की मात्रा को घटायाबढ़ाया नहीं जा सकता, परन्तु माँग में होने वाले परिवर्तनों को रोका भी नहीं जा सकता। अत: अल्पकाल में एक फर्म को लाभ, सामान्य लाभ व हानि हो सकती है।

1. लाभ की स्थिति:
जब वस्तु की माँग अधिक होती है और पूर्ति को अल्पकाल में उसके अनुसार नहीं बढ़ाया जा सकता तो उस समय विशेष पर फर्म को लाभ मिलता है जैसा कि चित्र से स्पष्ट है।

चित्र में E बिन्दु पर MR = MC के है इसलिए E PM बिन्दु अधिकतम लाभ का बिन्दु है। यह फर्म के साम्य की E स्थिति को बताता है अतः
कुल उत्पादन = 0Q
कीमत (AR) = EQ या OP
प्रति इकाई लागत (AC) = RQ
प्रति इकाई लाभ = EQ – RQ = ER
कुल लाभ = प्रति इकाई लाभ x उत्पादन.
= ER x OQ = ER X PE,
(: 0Q = PE) = MPER
MP Board Class 12th Economics Important Questions Unit 3 उत्पादक व्यवहार एवं पूर्ति img 18

2. सामान्य लाभ की स्थिति:
अर्थशास्त्र में सामान्य लाभ उस स्थिति में होता है जब वस्तु की माँग और MC AC पूर्ति आपस में बराबर होती है अर्थात् फर्म द्वारा प्राप्त की गयी कीमत AR से वस्तु की औसत लागत AC पूरी हो जाये (AR = AC) तो वह सामान्य लाभ की स्थिति होगी। जैसा AR = MR कि चित्र से स्पष्ट है। चित्र में E बिन्दु अधिकतम लाभ का बिन्दु है। इस बिन्दु पर OQ कुल उत्पादन है, वस्तु की प्रति इकाई कीमत EQया OP है तथा प्रति इकाई लागत भी EQ है, अतः स्पष्ट है कि फर्म को केवल सामान्य लाभ ही प्राप्त हो रहा है।
MP Board Class 12th Economics Important Questions Unit 3 उत्पादक व्यवहार एवं पूर्ति img 19

3. हानि की स्थिति:
उत्पादन में कभी – कभी अल्पकाल में ऐसी स्थिति भी उत्पन्न हो सकती है जबकि फर्म को हानि का सामना करना पड़े, अर्थात् उसकी औसत आय (AR) की तुलना में औसत लागत (AC) अधिक हो। इस स्थिति को चित्र की सहायता से समझा जा सकता है। चित्र में MC, MR को नीचे से काटती है। E बिन्दु साम्य PM बिन्दु है। इस बिन्दु पर OQ कुल उत्पादन है, वस्तु की प्रति ल इकाई कीमत EQ या OP है, प्रति इकाई लागत RQ तथा। प्रति इकाई हानि (RQ – EQ) = RE है। कुल = RE x MR.
MP Board Class 12th Economics Important Questions Unit 3 उत्पादक व्यवहार एवं पूर्ति img 20

प्रश्न 4.
औसत लागत और सीमान्त लागत में संबंध को एक काल्पनिक तालिका एवं रेखाचित्र की सहायता से स्पष्ट कीजिए?
अथवा
औसत लागत तथा सीमांत लागत में क्या संबंध है? रेखाचित्र की सहायता से समझाइये?
उत्तर:
औसत लागत और सीमान्त लागत के संबंध को निम्नलिखित तालिका एवं रेखाचित्र की सहायता से स्पष्ट किया जा सकता है –
तालिका – कुल, औसत व सीमान्त लागत –
MP Board Class 12th Economics Important Questions Unit 3 उत्पादक व्यवहार एवं पूर्ति img 21

प्रस्तुत रेखाचित्र में OX – आधार रेखा पर उत्पादन की मात्रा तथा OY – लम्ब रेखा पर लागत को दिखाया गया है। AC औसत लागत वक्र एवं MC सीमान्त लागत वक्र है। दोनों का स्वरूप अंग्रेजी अक्षर ‘U’ के समान है, क्योंकि उत्पादन के क्षेत्र में परिवर्तनशील अनुपातों। का नियम लागू होता है। Pबिन्दु औसत लागत वक्र का न्यूनतम बिन्दु। है। सीमान्त लागत वक्र MC, औसत लागत वक्र AC को इसी न्यूनतम बिन्दु P पर नीचे से काटता है एवं कटाव बिन्दु के ऊपर तेजी से बढ़ने। लगता है। P बिन्दु के पूर्व जब औसत लागत वक्र AC ऊपर से नीचे उत्पादन की मात्रा की ओर गिर रहा है। चित्र से स्पष्ट है कि सीमान्त लागत वक्र MC औसत लागत वक्र AC से नीचे है। P बिन्दु के पश्चात् जब औसत लागत वक्र AC की ओर बढ़ने लगता है, तो सीमान्त लागत वक्र MC भी बढ़ने लगता है, किन्तु सीमान्त लागत वक्र में वृद्धि की दर अधिक है।
MP Board Class 12th Economics Important Questions Unit 3 उत्पादक व्यवहार एवं पूर्ति img 22

प्रश्न 5.
उत्पादन लागत से आप क्या समझते हैं? कुल लागत, स्थिर लागत तथा परिवर्तनशील लागत का अर्थ समझाइए?
उत्तर:
“अर्थशास्त्र में उत्पादन लागत का अर्थ उन सभी भुगतानों से है जो उत्पादन दर व्यय किये गये हैं। भले ही इसके उत्पादक द्वारा प्रदान की गई पूँजी, भूमि, श्रम आदि सेवाओं का पुरस्कार भी शामिल हो। साहसी का सामान्य लाभ भी इसमें सम्मिलित होता है। उत्पादन लागत में न केवल वित्तीय व्यय, बल्कि समय, सेवा तथा शक्ति के रूप में किये गये व्यय को भी सम्मिलित किया जाता है।

कुल लागत:
किसी फर्म को उत्पादन की एक निश्चित मात्रा उत्पादित करने के लिए जो कुल व्यय करना पड़ता है, उसे फर्म की कुल लागत कहा जाता है। उत्पादन में वृद्धि के साथ – साथ कुल लागतों में वृद्धि होती जाती है। कुल लागतों में सामान्यतः दो प्रकार की लागतें सम्मिलित की जाती हैं –

  1. स्थिर या पूरक लागत तथा
  2. परिवर्तनशील या प्रमुख लागत

अर्थात्
कुल लागत = स्थिर लागत + परिवर्तनशील लागत।

1. स्थिर या पूरक लागत:
स्थिर लागत से तात्पर्य, उत्पत्ति के स्थिर साधनों पर किये जाने वाले व्यय से होता है। उत्पत्ति के स्थिर साधन ऐसे साधनों को कहा जाता है जिन्हें अल्पकाल में घटाया या बढ़ाया नहीं जा सकता, वे उत्पत्ति के स्थिर साधन कहलाते हैं। ऐसे साधनों पर किया जाने वाला व्यय उत्पादन के सभी स्तरों पर समान रहता है। यदि किसी समय पर उत्पादने शून्य हो जाये, तो भी स्थिर लागत बनी रहेगी। यही कारण है कि स्थिर लागतों को पूरक लागतें, ऊपरी लागते, सामान्य लागतें एवं अप्रत्यक्ष लागतें भी कहते हैं।

स्थिर लागतों के अन्तर्गत निम्नलिखित लागतों को सम्मिलित किया जाता है –

  1. फर्म की बिल्डिंग का किराया
  2. स्थिर पूँजी एवं दीर्घकालीन ऋण पर ब्याज
  3. बीमा शुल्क
  4. मशीनों का घिसावट व्यय
  5. प्रशासनिक ब्याज, जैसे – प्रबन्धकों एवं कार्यालयों के कर्मचारियों के वेतन
  6. विद्युत् व्यय
  7. व्यावसायिक कर, लाइसेंस फीस
  8. फर्म के स्वामी के अवसर लागतों एवं सामान्य लाभ को भी सम्मिलित किया जाता है।

2. परिवर्तनशील या प्रमुख लागत:
परिवर्तनशील लागतों से अभिप्राय, ऐसे व्ययों से है, जो उत्पत्ति के परिवर्तनशील साधनों पर किये जाते हैं। उत्पत्ति के परिवर्तनशील साधन ऐसे साधनों को कहा जाता है, जिन्हें उत्पादन में परिवर्तन होने पर परिवर्तन करना पड़ता है। इस प्रकार, परिवर्तनशील लागतों से तात्पर्य, ऐसी लागतों से है, जिनमें उत्पादन में परिवर्तन होने पर परिवर्तन हो जाता है। परिवर्तनशील लागत को प्रमुख लागत एवं प्रत्यक्ष लागत भी कहा जाता है।

अल्पकालीन परिवर्तनशील लागतों में निम्न लागतें सम्मिलित की जाती हैं –

  1. कच्चे माल का मूल्य
  2. श्रमिकों की मजदूरी
  3. ईंधन एवं विद्युत् शक्ति की लागते
  4. परिवहन लागत
  5. उत्पादन कर एवं बिक्री कर इत्यादि।

इस प्रकार स्पष्ट है कि कुल लागत, स्थिर लागत एवं कुल परिवर्तनशील लागत का योग होता है।

प्रश्न 6.
फर्म के संतुलन का क्या अर्थ है? फर्म के संतुलन की विशेषताओं को स्पष्ट कीजिये?
उत्तर:
फर्म के साम्य या संतुलन से आशय-फर्म के संतुलन से आशय उस अवस्था से है जिसमें परिवर्तन की अनुपस्थिति दृष्टिगोचर होती है। फर्म के साम्य के आधार पर किसी फर्म के द्वारा वस्तु के मूल्य निर्धारण एवं उत्पादन की मात्रा का निर्धारण किया जाता है साम्यावस्था में उत्पादन की मात्रा में कमी या वृद्धि से फर्म का कोई सारोकार नहीं होता है। यही कारण है कि फर्म को इस अवस्था में अधिकतम लाभ प्राप्त होता है। अतएव वह बिंदु जिस पर फर्म को अधिकतम मौद्रिक लाभ प्राप्त हो उसे फर्म का संतुलन कहते हैं। जहाँ TRTC अधिकतम हो।

फर्म के संतुलन की विशेषताएँ – फर्म के संतुलन की अवस्था की विशेषताएँ निम्नलिखित हैं –

1. वस्तु की कीमत या उत्पादन की मात्रा में कोई परिवर्तन नहीं:
संतुलन की स्थिति में फर्म अपनी कीमत या वस्तु के उत्पादन की मात्रा में किसी भी प्रकार की कोई परिवर्तन नहीं करती है अर्थात् परिवर्तन की अनुपस्थिति रहती है।

2. अधिकतम लाभ प्राप्त करना:
एक फर्म अपने संतुलन की स्थिति में अधिकतम लाभ प्राप्त करती है। अत: वह किसी भी प्रकार का जोखिम नहीं उठाना चाहती है।

3. फर्म की उत्पादन लागत न्यूनतम होना:
फर्म के संतुलन की स्थिति में फर्म न्यूनतम लागत पर उत्पादन को संभव बनाती है। उत्पादन लागत न्यूनतम हो जाने से लाभ बढ़ जाता है।

4. कुल लागत एवं कुल आगम तथा सीमांत विश्लेषण रीति का प्रयोग:
फर्म की साम्यावस्था कुल लागत एवं कुल आगम तथा सीमांत विश्लेषण रीति का प्रयोग करके प्राप्त की जा सकती है। एक फर्म के साम्य में उत्पादित वस्तु की मात्रा एवं कीमत निर्धारण में कोई अन्तर नहीं है।

प्रश्न 7.
उत्पादन फलन को परिभाषित कीजिए।पैमाने के वर्धमान, स्थिर तथा ह्रासमान प्रतिफल को समझाइए?
उत्तर:
उत्पादन फलन – यह उत्पादन के आगतों तथा अंतिम उत्पाद के बीच तकनीकी संबंध को बताता है।
q= f(x1x2)
यहाँ = उत्पादन की मात्रा, x1 व x2, कारक 1 व 2
पैमाने के प्रतिफल:
दीर्घकाल में उत्पादन के साधनों के समानुपात में बदलने से उत्पादन पर जो प्रभाव पड़ता है, वह पैमाने के प्रतिफल कहलाते हैं। यह दीर्घकाल से संबंधित है तथा सभी आगत परिवर्तनीय होते हैं।
पैमाने के प्रतिफल के तीन निम्नलिखित प्रकार हैं –

पैमाने के बढ़ते प्रतिफल की अवस्था:
जब सभी आगतों को एक ही अनुपात में बढ़ाने के फलस्वरूप उत्पादन में, आगतों में वृद्धि की अपेक्षा, अधिक अनुपात में वृद्धि होती है, तो। इस स्थिति को पैमाने के बढ़ते प्रतिफल की अवस्था कहा जाता है, जैसेमाना कि आगतों में 10% की वृद्धि करने पर उत्पादन में 12% की वृद्धि हो, ” तो यह पैमाने के बढ़ते प्रतिफल कहलाएँगे।
MP Board Class 12th Economics Important Questions Unit 3 उत्पादक व्यवहार एवं पूर्ति img 23

पैमाने के स्थिर प्रतिफल की अवस्था:
जब सभी आगतों में एक निश्चित अनुपात में वृद्धि करने के फलस्वरूप उत्पादन में भी उसी अनुपात में वृद्धि होती है, जिस अनुपात में आगतों में वृद्धि की गई थी। तो इसे पैमाने के स्थिर प्रतिफल की अवस्था कहते, उपरोक्त चित्रानुसार OP पैमाने की रेखा है। साधन X व Y की पहली इकाइयों पर उत्पादन 100 इकाइयों का था, जबकि दोनों इकाइयों की मात्रा 300 बढ़ाकर 2 – 2 करने पर उत्पादन 200 तथा 3 – 3 करने पर उत्पादन 300 इकाइयाँ । X – 200 हो जाती हैं। अत: AB = BC, यहाँ यह स्पष्ट है कि उत्पादक को पैमाने के। स्थिर प्रतिफल प्राप्त हो रहे हैं।
MP Board Class 12th Economics Important Questions Unit 3 उत्पादक व्यवहार एवं पूर्ति img 24

पैमाने के घटते प्रतिफल की अवस्था:
जब सभी आगतों में एक निश्चित अनुपात में वृद्धि के परिणामस्वरूप उत्पादन में वृद्धि, आगतों में की गई आनुपातिक वृद्धि की। अपेक्षा कम होती है, तो इस स्थिति को पैमाने के घटते हुए प्रतिफल की अवस्था कहा जाता है, जैसे – माना कि आगतों में 10% की वृद्धि की जाती है। इसके परिणामस्वरूप उत्पादन में 8% की वृद्धि होती है, तो इसे पैमाने के घटते प्रतिफल की अवस्था कहा जायेगा। उपरोक्त चित्रानुसार, x + y उत्पादन के साधन मिलकर पहले 100 इकाइयाँ उत्पादित करते हैं। फिर 2x + 2y मिलकर 180 इकाइयाँ उत्पादित करते हैं तथा 3x + 3y मिलकर 240 इकाइयाँ।
MP Board Class 12th Economics Important Questions Unit 3 उत्पादक व्यवहार एवं पूर्ति img 25

अतः इस प्रकार उत्पत्ति के साधनों की मात्रा दुगुनी तथा तिगुनी होने पर भी उत्पादन दुगुना या तिगुना न होकर कम बढ़ता है। अत: E बिन्दु तक पैमाने के घटते हुए प्रतिफल की प्राप्ति हो रही है, क्योंकि DE > CD > BC > AB है।

प्रश्न 8.
निम्नलिखित तालिका, श्रम का सीमांत उत्पादन अनुसूची देती है। यह भी दिया गया है कि श्रम का कुल उत्पाद शून्य है। प्रयोग के शून्य स्तर पर श्रम के कुल उत्पाद तथा औसत उत्पाद अनुसूची की गणना कीजिए?
MP Board Class 12th Economics Important Questions Unit 3 उत्पादक व्यवहार एवं पूर्ति img 26
उत्तर:
श्रम की कुल उत्पाद तथा औसत उत्पाद अनुसूची –
MP Board Class 12th Economics Important Questions Unit 3 उत्पादक व्यवहार एवं पूर्ति img 27

प्रश्न 9.
एक फर्म की अल्पकालीन सीमांत लागत अनुसूची निम्नलिखित में दी गयी है। फर्म की स्थिर लागत ₹ 100 है। फर्म के कुल परिवर्ती लागत, कुल लागत, औसत परिवर्ती लागत तथा अल्पकालीन औसत लागत अनुसूची निकालिए?
MP Board Class 12th Economics Important Questions Unit 3 उत्पादक व्यवहार एवं पूर्ति img 28
उत्तर:
फर्म की अन्य अनुसूची निम्नलिखित हैं –
MP Board Class 12th Economics Important Questions Unit 3 उत्पादक व्यवहार एवं पूर्ति img 29

प्रश्न 10.
मान लीजिए, एक फर्म का उत्पादन फलन है?
q= 2L2 K
अधिकतम संभावित निर्गत ज्ञात कीजिए, जिसका फर्म उत्पादन कर सकती है, 5 इकाइयाँ L तथा 2 इकाइयाँ K द्वारा अधिकतम संभावित निर्गत क्या है, जिसका फर्म उत्पादन कर सकती है। शून्य इकाई L तथा 10 इकाई K द्वारा?
हल:
दिया है –
q = 22 K2
जहाँ L = 5,
K = 2
समीकरण में मान रखने पर,
q = 2(5)2 x (2)2
q = 2(25)(4)
q = 200 इकाइयाँ
अत: अधिकतम सम्भावित निर्गत (उत्पादन) 200 इकाइयाँ होंगी। दूसरी स्थिति में, दिया है
L = 0, K = 10 समीकरण में मान रखने पर,
q = 2(0) x (10) या
q = 2 x 0 x 100
q = 0
अतः अधिकतम संभावित निर्गत (उत्पादन) शून्य होगा।

प्रश्न 11.
एक फर्म के लिए शून्य इकाई L तथा 10 इकाइयाँ K द्वारा अधिकतम संभावित निर्गत निकालिए, जब इसका उत्पादन फलन है?
q= 5L + 2K.
हल:
दिया है
q = 5L + 2K
L = 0, K = 10
समीकरण में मान रखने पर,
q = 5(0) + 2(10) या
q = 0 + 20 या
q = 20
अतः अधिकतम संभावित उत्पादन 20 इकाइयाँ होंगी।

MP Board Class 12th Economics Important Questions

MP Board Class 8th Special English Solutions Chapter 13 How I Thought my Grandmother to Read

Guys who are planning to learn the fundamentals of English can avail the handy study material using MP Board Solutions for Class 8 English Chapter 13 How I Thought my Grandmother to Read Questions and Answers. You Can Download MP Board Class 8 English Solutions Questions and Answers, Notes, Summary, Guide, Pdf. Refer to the Madhya Pradesh State Board Solutions for English PDF available and score better grades. Simply click on the quick links available for MP Board Solutions for Class 8 English Chapter 13 How I Thought my Grandmother to Read Questions and Answers and prepare all the concepts in it effectively. Take your preparation to the next level by availing the Madhya Pradesh State Board Solutions for Class 8 English prepared by subject experts.

MP Board Class 8th Special English Solutions Chapter 13 How I Thought my Grandmother to Read

Do you feel the concept of English is difficult to understand? Not anymore with our MP Board Solutions for Class 8 English Chapter 13 How I Thought my Grandmother to Read Questions and Answers. All the Solutions are given to you with detailed explanation and you can enhance your subject knowledge. Use the Madhya Pradesh State Board Solutions for Class 8 English PDF for free of cost and prepare whenever you want.

How I Thought my Grandmother to Read Textual Exercise

Word Power

(A) Guess the words with the help of the given clues :

  1. A Child who has nobody to look after
  2. A gesture to say yes.
  3. Loving
  4. Something which surprises
  5. A quality that is needed to succeed.

Answer:

  1. Orphan
  2. nod
  3. affectionate
  4. amazing
  5. determination.

(B) Fill in the blanks with the appropriate words given in the box :
popular, obstacles, confidently, novels, worship

  1. There are different ways to ……………. God.
  2. We should reply in the class …………….
  3. Mahatma Gandhi was very ……………. among the people.
  4. Munshi Premchand wrote many ……………. on social problems.
  5. When somebody works ……………. come in his ways, but they teach him how to face problems.

Answer:

  1. worship
  2. confidently
  3. popular
  4. novels
  5. obstacles.

Comprehension

(A) Answer the following questions :

A Child Who Has Nobody To Look After MP Board Class 8th Question 1.
Why did the weekly magazine come late in the village?
Answer:
The weekly magazine came late in the village because the transport system was not very good.

Class 8 English Chapter 12 How I Taught My Grandmother To Read MP Board Question 2.
What is the story of the novel “Kashi Yatra”?
Answer:
There is a old lady who has an ordent desire to go to Kashi or Varanasi. There is also a orphan girl who falls in love but there is no money for the wedding. Finally, the old lady gives away all her savings to the orphan girl without going to Kashi.

Mp Board Class 8 English Chapter 13  Question 3.
Why did the little girl read the several out for her grandmother?
Answer:
The little girl read the serial out for her grandmother because. She (grandmother) was illiterate.

Class 8 English Chapter 13 Mp Board Question 4.
What happened when the girl went to attend a wedding in the neighbouring village?
Answer:
Grandmother could not understand the heat episode of Kashi Yatra when the girl went to attend a wedding in the neighbouring village.

How I Taught My Grandmother To Read Class 8 MP Board Question 5.
Why was grandmother unhappy?
Answer:
Grandmother was unhappy because she found herself helpless and dependent Her favorite story (Kashi Yatra) was in front of her but she was unable to read the lines.

Class 8 English Chapter 13 MP Board Question 6.
What help did grandmother need from his granddaughter?
Answer:
Grandmother told her granddaughter to teach her the Kannada alphabets.

Class 8 English Chapter 13 Question Answer MP Board Question 7.
How was grandmother a wonderful student?
Answer:
The amount of homework she did was amazing. She would read, repeat and recite. Very soon she learnt to read the Kannada alphabet.

Question 8.
What did grandmother do on Dashera festival?
Answer:
Grandmother called her granddaughter to the puja place and made her sit down on a stool. She gave her a gift of a frock material and then she touched her feet.

(B) Choose the correct alternative :

(a) In those days girl’s education was considered …………
– essential
– not essential.

(b) Grandmother could not go to school because …………
– there was no school in the village.
– she got married very young and had children.

(c) The old lady in the novel Kashi Yatra believed that …………
– going to Kashi and worshipping Lord Vishweshvara has very importance.
– the happiness of the orphan girl was more important.

(d) Grandmother was determined to learn. She said. …………
– “I shall try to learn the Kannada alphabet.”
– “I am too old to learn”
Answer:
(a) not essential.
(b) she got married very young and had children.
(c) going to Kashi and worshipping Lord Vishweshvara has very importance.
(d) “I shall try to learn the Kannada alphabet.”

Let’s Learn

Read the following sentences carefully :

  1. When I was only twelve I used to stay in a village with my grandmother.
  2. At the transport system was not good we used to get newspapers very late.
  3. Grandmother used to tell the story to the other woman in the temple.

A Child Who Has Nobody To Look After MP Board Class 8th

Now complete the sentences by using ‘used to + verbs’ given below. One example has been done to help you.
(travel, drink, play, be, have, teach, live, work)

  1. I used to play …………… but now I don’t
  2. My friend’s father …………… a lot but now he doesn’t go away very often.
  3. There …………… a castle on that hill some years ago.
  4. Rita …………… long hair but she got it cut something ago.
  5. We …………… in Indore but now we live in Bhopal
  6. My brother …………… milk when he was young
  7. Rohit …………… hard but nowdays he has become a bit careless.
  8. Mrs. Mehta. …………… us English when I was in class VII.

Answers:

  1. tennis
  2. used to travel
  3. used to be
  4. used to have
  5. used to live
  6. used to drink
  7. used to work
  8. used to teach.

Let’s Talk

Describing past habits.
Class 8 English Chapter 12 How I Taught My Grandmother To Read MP Board
Now talk to your friend describiing past habits.
Answer:
Mp Board Class 8 English Chapter 13
Class 8 English Chapter 13 Mp Board

Let’s Read

Read the following carefully:

This story is an account of successes and setbacks of the science ‘establishment in modern India, struggling to establish itself in the technological forefront. It is the story of national aspiration and of cooperative endeavour. And, as I see it, the saga of India’s search for self-sufficiency and technological competence is a parable for our times.

Each individual creature on this beautiful planet is created by God to fulfill a particular role. Whatever I have achieved in life is through His help and an expression of His will. He showered His grace on me through some outstanding teachers and colleagues and when I pay my tribute to these persons, I’m merely praising His glory. All these rockets and missiles are his work through a small person called Kalam in order to tell several million mass of India, to never feel small or helpless. We are born with a divine fire in us. Our efforts should be to give wings to this fire and fill the world with the glow of its goodness.

Now answer the following questions:

Question 1.
Find of the words in the passage which mean :
(a) effort …………..
(b) blessed ………….
Answer:
(a) endeavour
(b) cursed

Question 2.
Find the words in the passage which mean opposite of:
(a) failure ……..
(b) always …………
Answer:
(a) success
(b) never

Question 3.
Who has written this paragraph? Guess.
Answer:
This paragraph has been written by A.P.J. Abdul Kalam.

Question 4.
With what the narrator, ‘Kalam’ is associated?
Answer:
The narrator ‘Kalam’ is associated with rockets and missiles.

Question 5.
The narrator uses the phrases ‘His help’ His will, “His glory’. What does ‘His! stand for?
Answer:
“His stands for Almighty god.

Question 6.
What message does the narrator give to the people of India?
Answer:
We are born with a divine fire in us. Our efforts should be to give wings to thus fire and fill the world with the glow of its goodness.

Let’s Write

(A) Form groups of two each in your class. Write dialogues of the little girl and her grandmother. Take the help of the clues given below. Present it in a dramatic form before the class.

The little girl : ready to teach her grand mother, has sympathy for her grandmother loves her very much, teaches her the Kannada alpha bet.
Grandmother : unhappy at being illiterate, determined to learn, asks the help of her granddaughter to teach her, gives her granddaughter a gift when she learns to read.

Write the dialogue here :
Answer:
Little girl : Why do you feel so unhappy?
Grandmother : Because I am illiterate. But now I have decided to learn. Will you help me?
Little girl : Yes, I’ll do so. I can’t see you so unhappy.
Grandmother: How will you teach me?
Little girl : I’ll teach you a planned way. You’ll learn everything through Kannad al phabet.
Grandmother : O.K. It will be easiser for me. (After a few months)
Little girl : Grandma, now you have learnt a lot.
Grandmother : Yes, you are right. Thank you very much.

Let’s do it

Make a short survey around you. Find out how many people around you are literate illiterate. Fill in the following table the information you collect :
How I Taught My Grandmother To Read Class 8 MP Board

How I Thought my Grandmother to Read Word Meanings

Class 8 English Chapter 13 MP Board

We wish the knowledge shared regarding MP Board Solutions for Class 8 English Chapter 13 How I Thought my Grandmother to Read Questions and Answers has been helpful to you. If you need any further help feel free to ask us and we will get back to you with the possible solution. Bookmark our site to avail the latest updates on different state boards solutions in split seconds.

MP Board Class 11th Chemistry Solutions Chapter 3 तत्त्वों का वर्गीकरण एवं गुणधर्मों में आवर्तिता

MP Board Class 11th Chemistry Solutions Chapter 3 तत्त्वों का वर्गीकरण एवं गुणधर्मों में आवर्तिता

तत्त्वों का वर्गीकरण एवं गुणधर्मों में आवर्तिता NCERT अभ्यास प्रश्न

प्रश्न 1.
आवर्त तालिका में व्यवस्था का भौतिक आधार क्या है?
उत्तर:
आवर्त तालिका में तत्वों को इस तरह वर्गीकृत किया गया है कि समान गुणधर्म वाले तत्व समान समूह में स्थित रहे। चूँकि तत्वों के गुण उनके इलेक्ट्रॉनिक विन्यास पर निर्भर करते हैं अतः एक समूह के तत्वों का इलेक्ट्रॉनिक विन्यास समान होता है।

प्रश्न 2.
मेण्डलीव ने किस महत्वपूर्ण गुणधर्म को अपनी आवर्त तालिका में तत्वों के वर्गीकरण का आधार बनाया। क्या वे उस पर दृढ़ रह पाए?
उत्तर:
मेण्डलीव के अनुसार, तत्वों के भौतिक एवं रासायनिक गुण उनके परमाणु भारों के आवर्ती फलन होते हैं। मेण्डलीफ ने समान गुणधर्मों के आधार पर रखते हुए कुछ रिक्त स्थान छोड़ दिये थे, जिनकी खोज की भविष्यवाणी की थी जो बाद में खोजे भी गये। मेण्डलीव ने कई तत्वों को उनके भौतिक एवं रासायनिक गुणों के आधार पर आवर्त तालिका में उचित स्थान दिया किन्तु वे परमाणु भारों के आधार पर वर्गीकरण का पूर्णतया पालन नहीं कर सके।

प्रश्न 3.
मेण्डलीव के आवर्त नियम और आधुनिक आवर्त नियम में मौलिक अंतर क्या है?
उत्तर:
मेण्डलीव के आवर्त नियम के अनुसार तत्वों के गुणधर्म उनके परमाणु भारों के आवर्ती फलन होते हैं। जबकि आधुनिक आवर्त नियम के अनुसार तत्वों के गुणधर्म उनके परमाणु क्रमांकों के आवर्ती फलन होते हैं।

प्रश्न 4.
क्वाण्टम संख्याओं के आधार पर यह सिद्ध कीजिए कि आवर्त तालिका के छठवें आवर्त में 32 तत्व होने चाहिए।
उत्तर:
दीर्घ आवर्त सारणी में प्रत्येक आवर्त एक नये मुख्य ऊर्जा (n) के भरने से प्रारंभ होता है। छठवें आवर्त हेतु n = 6 इस आवर्त में इलेक्ट्रॉन 6s, 4f, 5d तथा 6p में प्रवेश करते हैं। इन उपकोशों में कुल 16 (1 + 7 + 5 + 3) कक्षक होते हैं। पाउली के अपवर्जन सिद्धान्त के अनुसार प्रत्येक कक्षक में अधिकतम दो इलेक्ट्रॉन हो सकते हैं। अतः 16 कक्षकों में केवल 32 इलेक्ट्रॉन आ सकते हैं। इसलिए, छठे आवर्त में 32 तत्व होने चाहिए।

प्रश्न 5.
आवर्त और वर्ग के पदों में यह बताइए कि Z = 114 कहाँ स्थित होगा?
उत्तर:
परमाणु क्रमांक 114 वाले तत्व का इलेक्ट्रॉनिक विन्यास 86[Rn] 5f146d19, 7s26p2 है। अतः 7वें आवर्त (n = 7) एवं 14वें समूह (10 + 2 + 2) का सदस्य होगा।

प्रश्न 6.
उस तत्व का परमाणु क्रमांक लिखिए, जो आवर्त तालिका में तीसरे आवर्त और 17वें वर्ग में स्थित होता है।
उत्तर:
17वें वर्ग के सदस्य के लिए ns2np2 विन्यास होगा। तीसरे आवर्त के लिए यही विन्यास 3s23p5 होगा। अतः तत्व का परमाणु क्रमांक = 10 + 2 + 5 = 17 होगा।

प्रश्न 7.
कौन-से तत्व का नाम निम्नलिखित द्वारा दिया गया है –

  1. लॉरेन्स बर्कले प्रयोगशाला द्वारा
  2. सी-बोर्ग समूह द्वारा।

उत्तर:

  1. लॉरेन्स बर्कले प्रयोगशाला द्वारा दिया गया नाम लॉरेन्सियम (Z = 103) एवं बर्केलियम (Z = 97) है।
  2. सी-बोर्ग समूह द्वारा दिया गया नाम, सीबोर्गियम (Z = 106) है।

प्रश्न 8.
एक ही वर्ग में उपस्थित तत्वों के भौतिक और रासायनिक गुणधर्म समान क्यों होते हैं?
उत्तर:
एक ही वर्ग के तत्वों के भौतिक और रासायनिक गुणधर्म समान होते हैं क्योंकि इनके इलेक्ट्रॉनिक विन्यास (अन्तिम कक्ष) के एक जैसे होते हैं।

प्रश्न 9.
‘परमाणु त्रिज्या’ और ‘आयनिक त्रिज्या’ से आप क्या समझते हैं?
उत्तर:
परमाणु त्रिज्या:
परमाणु त्रिज्या से तात्पर्य परमाणु के आकार से होता है। इसको X- किरणों या अन्य स्पैक्ट्रोस्कोपिक विधियों से नापा जा सकता है। अधातुओं के लिए इसे सहसंयोजक त्रिज्या भी कहते हैं तथा धातु तत्वों के लिए इसे धात्विक त्रिज्या कहते हैं। सहसंयोजक त्रिज्या किसी तत्व के एक अणु में सहसंयोजक बंध द्वारा जुड़े दो परमाणुओं के नाभिकों के बीच की दूरी के आधे भाग को सहसंयोजक त्रिज्या कहते हैं। उदाहरण के लिए क्लोरीन अणु के लिए बंध दूरी का मान 198 pm है। अतः इस मान का आधा, 99 pm क्लोरीन परमाणु त्रिज्या या सहसंयोजक त्रिज्या होगी।

आयनिक त्रिज्या:
आयनिक त्रिज्या से तात्पर्य आयन (धनायन या ऋणायन) के आकार से है इसको आयनिक क्रिस्टल में धनायन तथा ऋणायन के बीच की दूरी मापकर नाप सकते हैं। एक धनायन सदैव अपने जनक परमाणु से आकार में छोटा होता है क्योंकि एक या अधिक इलेक्ट्रॉन निकल जाने पर प्रभावी नाभिकीय आवेश का मान बढ़ जाता है। ऋणायन सदैव अपने जनक परमाणु से बड़ा होता है क्योंकि इलेक्ट्रॉन ग्रहण करने के फलस्वरूप प्रभावी नाभिकीय आवेश का मान घट जाता है। उदाहरण के लिए, Na+ आयन (95 pm) की आयनिक त्रिज्या, Na परमाणु (186 pm) की परमाणु त्रिज्या से कम होती है जबकि F आयन (136 pm) की आयनिक त्रिज्या परमाणु (72 pm) की परमाणु त्रिज्या से अधिक होती है।

प्रश्न 10.
किसी वर्ग या आवर्त में परमाणु त्रिज्या किस प्रकार परिवर्तित होती है? इस परिवर्तन की व्याख्या आप किस प्रकार करेंगे?
उत्तर:
किसी आवर्त में बायें से दायें जाने पर परमाणु त्रिज्या का मान घटता है क्योंकि एक ही आवर्त में संयोजी कोश समान होते हैं किन्तु दायीं ओर जाने से परमाणु क्रमांक बढ़ने से प्रभावी नाभिकीय आवेश बढ़ते जाता है जिससे बाह्यतम इलेक्ट्रॉनों का नाभिक से आकर्षण बढ़ता है एवं परमाणु त्रिज्या कम होती जाती है। किसी वर्ग में ऊपर से नीचे जाने पर परमाणु त्रिज्या बढ़ती है क्योंकि नीचे जाने पर वर्ग में कोशों की संख्या बढ़ती जाती है। जिससे परमाणु के आकार या त्रिज्या में वृद्धि होती जाती है।

प्रश्न 11.
समइलेक्ट्रॉनिक स्पीशीज़ से आप क्या समझते हैं? एक ऐसी स्पीशीज़ का नाम लिखिए, जो निम्नलिखित परमाणुओं या आयनों के साथ समइलेक्ट्रॉनिक होगी –

  1. F
  2. Ar
  3. Mg2+
  4. Rb+

उत्तर:
समइलेक्ट्रॉनिक स्पीशीज़ में इलेक्ट्रॉनों की संख्या समान होती है किन्तु नाभिक में प्रोटॉनों की संख्या (आवेश) भिन्न-भिन्न होती है।

  1. F में इलेक्ट्रॉनों की संख्या 9 + 1 = 10 होती है। अत:F के समइलेक्ट्रॉनिक धनायन, Na+, Mg2+, Al3+ तथा ऋणायन N3-, O2- होते हैं।
  2. Ar में इलेक्ट्रॉनों की संख्या 18 है। अतः इसके समइलेक्ट्रॉनिक आयन S2-, Cl, K+ एवं Ca2+ होंगे।
  3. Mg2+ में 10 इलेक्ट्रॉन हैं इसके समइलेक्ट्रॉनिक आयन उत्तर (i) में दिये गये हैं।
  4. Rb+ में इलेक्ट्रॉनों की संख्या 37 – 1 = 36 है अतः इसके समइलेक्ट्रॉनिक आयन Br, Kr एवं Sr2+ होंगे।

प्रश्न 12.
निम्नलिखित स्पीशीज़ पर विचार कीजिए – N3-, O2-, F, Na+, Mg2+ और Al3+.

  1. इनमें क्या समानता है?
  2. इन्हें आयनी त्रिज्या के बढ़ते क्रम में व्यवस्थित कीजिए।

उत्तर:

  1. सभी आयन समइलेक्ट्रॉनिक हैं।
  2. समइलेक्ट्रॉनिक आयनों में परमाणु संख्या वृद्धि के साथ-साथ नाभिकीय आवेश बढ़ता जाता है एवं आयनिक त्रिज्या में कमी होती जाती है। अतः समइलेक्ट्रॉनिक आयनों की त्रिज्या का बढ़ता हुआ क्रम निम्न होगा

Al3+ < Mg2+ < Na+ < F < O2- < N3-

प्रश्न 13.
धनायन अपने जनक परमाणुओं से छोटे क्यों होते हैं और ऋणायनों की त्रिज्या उनके जनक परमाणुओं की त्रिज्या से अधिक क्यों होती है? व्याख्या कीजिए।
उत्तर:
उदासीन परमाणु से इलेक्ट्रॉन त्यागने पर धनायन बनते हैं। धनायन बनते ही प्रभावी नाभिकीय आवेश में वृद्धि हो जाती है जिससे संयोजी कोश के इलेक्ट्रॉनों पर नाभिक से लगने वाले बल में वृद्धि हो जाती है और धनायन का आकार अपने जनक परमाणु से छोटा हो जाता है। किन्तु ऋणायनों के बनने में परमाणु अतिरिक्त इलेक्ट्रॉन ग्रहण करता है जिससे प्रभावी नाभिकीय आवेश में कमी आती है और ऋणायन की त्रिज्या जनक परमाणुओं से बढ़ जाती है।

प्रश्न 14.
आयनन एन्थैल्पी और इलेक्ट्रॉन लब्धि एन्थैल्पी को परिभाषित करने में विलगित गैसीय परमाणु तथा ‘आद्य अवस्था’ पदों की सार्थकता क्या है?
उत्तर:
आयनन एन्थैल्पी, यह विलगित गैसीय परमाणु (X) से बाह्यतम इलेक्ट्रॉन को बाहर निकालने के लिए आवश्यक न्यूनतम ऊर्जा होती है।

X(g) → X(g)+ + e

वह बल जिससे इलेक्ट्रॉन नाभिक के प्रति आकर्षित होता है, अणु में उपस्थित अन्य परमाणुओं अथवा पड़ोस में स्थित अन्य परमाणुओं से भी प्रभावित होता है। अतः आयनन एन्थैल्पी सदैव गैसीय अवस्था में ज्ञात की जाती है क्योंकि गैसीय अवस्था में अन्तराण्विक स्थान अधिकतम होता है तथा अन्तराण्विक आकर्षण बल न्यूनतम होता है। पुनः आयनन एन्थैल्पी कम दाब पर मापी जाती है, क्योंकि मात्र एक परमाणु को विलगित करना संभव नहीं है परन्तु दाब कम करके अन्तराण्विक आकर्षण बल को कम किया जा सकता है। इनके कारण ही आयनन एन्थैल्पी की परिभाषा में, आद्य अवस्था में विलगित गैसीय परमाणु पद जोड़ा गया है।

इलेक्ट्रॉन लब्धि एन्थैल्पी यह आद्य अवस्था में किसी विलगित गैसीय परमाणु (X) द्वारा एक इलेक्ट्रॉन ग्रहण कर एनायन (X) बनाने में निर्मुक्त ऊर्जा की मात्रा है।

X(g) + e → X(g)

परमाणु की सबसे स्थायी अवस्था आद्य अवस्था होती है। यदि विलगित गैसीय परमाणु उत्तेजित अवस्था में हो तो एक इलेक्ट्रॉन ग्रहण करने पर तुलनात्मक रूप से कम ऊर्जा निर्मुक्त होगी। अतः गैसीय परमाणुओं की इलेक्ट्रॉन लब्धि एन्थैल्पी सदैव आद्य अवस्था में मापी जाती है। अतः ‘आद्य अवस्था’ तथा ‘विलगित गैसीय अणु’ इलेक्ट्रॉन लब्धि एंन्थैल्पी की परिभाषा में अवश्य सम्मिलित किए जाने चाहिए।

प्रश्न 15.
हाइड्रोजन परमाणु में आद्य अवस्था में इलेक्ट्रॉन की ऊर्जा – 2.18 x 10-18 J है। परमाणविक हाइड्रोजन की आयनन एन्थैल्पी J mol-1 के पदों में परिकलित कीजिए।
हल:
आयनन एन्थैल्पी = – (आद्य अवस्था में ऊर्जा)
= – (-2.18 x 10-18) J प्रति परमाणु
= 2.18 x 10-18 x 6.023 x 1023
= 1.312 x 106 J mol-1

प्रश्न 16.
द्वितीय आवर्त के तत्वों में वास्तविक आयनन एन्थैल्पी का क्रम इस प्रकार है – Li < B < Be < C < O < N < F < Ne. व्याख्या कीजिए कि –

  1. Be की ∆iH, B से अधिक क्यों है?
  2. O की ∆iH, N और F से कम क्यों है?

उत्तर:
1. दिये गये क्रम में Be की ∆iH, B से ज्यादा है क्योंकि 4Be = 1s2, 2s2 में से इलेक्ट्रॉन निकालने के लिए ,B = 15-2522p’ की तुलना में ज्यादा ऊर्जा लगेगी, क्योंकि Be का 252 कक्षक पूर्ण भरा होने एवं नाभिक से ज्यादा निकट होने के कारण, नाभिक से अतिरिक्त आकर्षण रखता है।

2. O की आयनन एन्थैल्पी (∆iH) का मान N और F से कम होगा चूँकि किसी आवर्त में बायें से दायें जाने पर परमाणु आकार में कमी होने के साथ-साथ आयनन एन्थैल्पी का मान बढ़ता है। O की ∆iH, F से कम होगी किन्तु 7N = 1s22s22p3 में p – कक्षक पूर्णतया अर्धपूरित रहता है और अतिरिक्त स्थायित्व दर्शाता है। अतः O की ∆iH, N से भी कम होती है।

प्रश्न 17.
आप इस तथ्य की व्याख्या किस प्रकार करेंगे कि सोडियम की प्रथम आयनन एन्थैल्पी मैग्नीशियम की प्रथम आयनन एन्थैल्पी से कम है, किन्तु इसकी द्वितीय आयनन एन्थैल्पी मैग्नीशियम की द्वितीय आयनन एन्थैल्पी से अधिक है?
उत्तर:
Na का प्रभावी नाभिकीय आवेश Mg से कम होता है। अत: Na की प्रथम आयनन एन्थैल्पी का मान Mg से कम होता है किन्तु एक इलेक्ट्रॉन निकलने के पश्चात् Na+ का इलेक्ट्रॉनिक विन्यास अक्रिय गैस का विन्यास हो जाता है। अत: Na की द्वितीय आयनन एन्थैल्पी का मान Mg की द्वितीय आयनन एन्थैल्पी से ज्यादा होता है।

प्रश्न 18.
मुख्य समूह तत्वों में आयनन एन्थैल्पी के किसी समूह में नीचे की ओर कम होने के कौनसे कारक हैं?
उत्तर:
आयनन एन्थैल्पी का मान किसी समूह में ऊपर से नीचे जाने पर कम होता है, जिसके निम्न दो कारण हैं –

1. समूह में ऊपर से नीचे जाने पर मुख्य क्वाण्टम संख्या n का मान (कक्षों की संख्या) बढ़ने के कारण परमाणु का आकार बढ़ता है। अतः संयोजी इलेक्ट्रॉनों पर नाभिक का आकर्षण कम होता है, जिससे इलेक्ट्रॉन मुक्त करने के लिए क्रमशः कम ऊर्जा की आवश्यकता होगी और आयनन एन्थैल्पी का मान कम होता जाता है।

2. समूह में नीचे जाने पर संयोजी इलेक्ट्रॉनों पर परिरक्षण प्रभाव बढ़ता है, जिससे भी आयनन एन्थैल्पी में कमी आती है।

प्रश्न 19.
वर्ग 13 के तत्वों की प्रथम आयनन एन्थैल्पी के मान (kJ mol-1) में इस प्रकार हैं –
MP Board Class 11th Chemistry Solutions Chapter 3 तत्त्वों का वर्गीकरण एवं गुणधर्मों में आवर्तिता - 1
सामान्य से इस विचलन की प्रवृत्ति की व्याख्या आप किस प्रकार करेंगे?
उत्तर:
Ga एवं TI की प्रथम आयनन एन्थैल्पी (∆iH) का मान असामान्य रूप से क्रमशः Al एवं In से ज्यादा होता है, क्योंकि Ga के 3d – कक्षक के संयोजी इलेक्ट्रॉन एवं T के 4f – कक्षक के इलेक्ट्रॉनों पर 5 एवं pकक्षकों के इलेक्ट्रॉनों की तुलना में कम परिरक्षण प्रभाव होता है। अतः इनकी ∆iH कुछ ज्यादा होती है।

प्रश्न 20.
तत्वों के निम्नलिखित युग्मों में किस तत्व की इलेक्ट्रॉन लब्धि एन्थैल्पी अधिक ऋणात्मक होगी –

  1. O या F
  2. F या Cl.

उत्तर:

1. ऑक्सीजन तथा फ्लुओरीन दोनों द्वितीय आवर्त में स्थित है। किसी आवर्त में बाएँ से दाएँ जाने पर, इलेक्ट्रॉन लब्धि एन्थैल्पी का मान सामान्यतः अधिक ऋणात्मक होता जाता है। ऑक्सीजन से फ्लुओरीन की ओर जाने पर, परमाणु संख्या में वृद्धि के साथ-साथ प्रभावी नाभिकीय आवेश का मान बढ़ता है तथा परमाणु का आकार घटता है, इसके कारण आने वाले इलेक्ट्रॉन के लिए, नाभिक के प्रति आकर्षण बल बढ़ता है। यही कारण है कि फ्लुओरीन की इलेक्ट्रॉन लब्धि एन्थैल्पी, ऑक्सीजन की इलेक्ट्रॉन लब्धि एन्थैल्पी की अपेक्षा अधिक होती है। पुनः एक फ्लुओरीन इलेक्ट्रॉन ग्रहण करके स्थायी विन्यास प्राप्त कर लेता है।
MP Board Class 11th Chemistry Solutions Chapter 3 तत्त्वों का वर्गीकरण एवं गुणधर्मों में आवर्तिता - 2
अतः फ्लुओरीन की इलेक्ट्रॉन लब्धि एन्थैल्पी (-328 kJ mol-1), ऑक्सीजन (-141 kJ mol-1) से बहुत अधिक ऋणात्मक होती है।

2. किसी वर्ग में नीचे की ओर जाने पर, इलेक्ट्रॉन लब्धि एन्थैल्पी की ऋणात्मकता क्रमशः घटती जाती है। परन्तु क्लोरीन की इलेक्ट्रॉन लब्धि एन्थैल्पी (-349 kJ mol-1), फ्लुओरीन की इलेक्ट्रॉन लब्धि एन्थैल्पी (-328 kJ mol-1) की अपेक्षा अधिक ऋणात्मक होती है। यह फ्लुओरीन के छोटे आकार के कारण होता है। 3p कक्षक (Cl) की अपेक्षा 2p कक्षक (F) में इलेक्ट्रॉन-इलेक्ट्रॉन प्रतिकर्षण अधिक होता है। अतः बाहर से आने वाला इलेक्ट्रॉन क्लोरीन की अपेक्षा फ्लुओरीन में अधिक प्रतिकर्षण अनुभव करता है। इसी कारण फ्लुओरीन की तुलना में क्लोरीन की इलेक्ट्रॉन लब्धि एन्थैल्पी अधिक ऋणात्मक होती है।

प्रश्न 21.
आप क्या सोचते हैं कि O की द्वितीय इलेक्ट्रॉन लब्धि एन्थैल्पी प्रथम इलेक्ट्रॉन लब्धि एन्थैल्पी के समान धनात्मक, अधिक ऋणात्मक या कम ऋणात्मक होगी? अपने उत्तर की पुष्टि कीजिए।
उत्तर:
ऑक्सीजन परमाणु से एक इलेक्ट्रॉन जुड़ने पर O आयन बनता है, जिससे ऊर्जा मुक्त होती है अर्थात् इलेक्ट्रॉन लब्धि एन्थैल्पी ऋणात्मक होती है, किन्तु जब O आयन पर कोई इलेक्ट्रॉन जुड़कर O2-आयन बनाता है तो आने वाला इलेक्ट्रॉन 0 आयन से प्रतिकर्षण अनुभव करता है एवं द्वितीय इलेक्ट्रॉन लब्धि एन्थैल्पी धनात्मक होती है

O(g) + e (g) → O(g)egH1 = -141 kJ mol-1

Or(g) + e(g)2- → O(g)2-, ∆egH2 = +780 kJ mol-1

प्रश्न 22.
इलेक्ट्रॉन लब्धि एन्थैल्पी और इलेक्ट्रॉन ऋणात्मक में क्या मल अंतर है?
उत्तर:
इलेक्ट्रॉन लब्धि एन्थैल्पी किसी विलगित गैसीय परमाणु द्वारा एक इलेक्ट्रॉन ग्रहण करके गैसीय ऋणायन बनाने की प्रवृत्ति है, जबकि किसी तत्व की इलेक्ट्रॉन ऋणात्मकता उस तत्व के परमाणु द्वारा सहसंयोजक बंध के साझे के इलेक्ट्रॉनों को अपनी ओर आकर्षित करने की प्रवृत्ति होती है।

प्रश्न 23.
सभी नाइट्रोजन यौगिकों में N की विद्युत् ऋणात्मकता पाऊलिंग पैमाने पर 3.0 है। आप इस कथन पर अपनी क्या प्रतिक्रिया देंगे?
उत्तर:
किसी भी तत्व की विद्युत् ऋणात्मकता स्थिर नहीं होती है। यह उस तत्व के साथ जुड़े अन्य तत्व से प्रभावित होती है अर्थात् सभी नाइट्रोजन यौगिकों में N की विद्युत् ऋणात्मकता पाऊलिंग पैमाने पर 3.0 होती है। अत: यह कथन सत्य नहीं है।

प्रश्न 24.
उस सिद्धांत का वर्णन कीजिए, जो परमाणु की त्रिज्या से संबंधित होता है –

  1. जब वह इलेक्ट्रॉन प्राप्त करता है।
  2. जब वह इलेक्ट्रॉन का त्याग करता है।

उत्तर:
परमाणु त्रिज्या का मान प्रभावी नाभिकीय आवेश पर निर्भर करता है।

  1. इलेक्ट्रॉन ग्रहण करने से प्रभावी नाभिकीय आवेश कम होता जाता है। अतः परमाणु त्रिज्या में वृद्धि होती है।
  2. इलेक्ट्रॉन त्यागने पर प्रभावी नाभिकीय आवेश बढ़ता जाता है, जिससे परमाणु त्रिज्या कम होती जाती है।

प्रश्न 25.
किसी तत्व के दो समस्थानिकों की प्रथम आयनन एन्थैल्पी समान होगी या भिन्न? आप क्या मानते हैं? अपने उत्तर की पुष्टि कीजिए।
उत्तर:
किसी तत्व के दो समस्थानिकों की प्रथम आयनन एन्थैल्पी समान होगी क्योंकि इनके इलेक्ट्रॉनिक विन्यास और प्रभावी नाभिकीय आवेश में कोई अन्तर नहीं होता है। इनमें केवल न्यूट्रॉनों की संख्या में अन्तर होता है जिसका आयनन एन्थैल्पी पर कोई प्रभाव नहीं पड़ता है।

प्रश्न 26.
धातुओं और अधातुओं में मुख्य अंतर क्या है?
उत्तर:
धातुएँ कमरे के ताप पर सामान्यतया ठोस होती हैं (मर्करी इसका अपवाद है, गैलियम और सीज़ियम के गलनांक भी बहुत कम क्रमश: 303 K और 302 K हैं)। धातुओं के गलनांक व क्वथनांक उच्च होते हैं तथा ये ताप तथा विद्युत् के सुचालक, आघातवर्ध्य तथा तन्य होते हैं। जबकि अधातु आवर्त सारणी में दायीं ओर स्थित होते हैं। दीर्घ आवर्त सारणी में धात्विक गुण (उसकी इलेक्ट्रॉन ग्रहण करने की क्षमता) किसी वर्ग में ऊपर से नीचे जाने पर बढ़ती है तथा आवर्त में बायें से दायें जाने पर कम होती है। अधातु कमरे के ताप पर ठोस व गैस होती है। इनके गलनांक व क्वथनांक कम, ताप तथा विद्युत् के अल्प चालक तथा आघातवर्ध्य व तन्य नहीं होते हैं।

प्रश्न 27.
आवर्त तालिका का उपयोग करते हुए निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर दीजिए –

  1. उस तत्व का नाम बताइए, जिसके बाह्य उपकोश में पाँच इलेक्ट्रॉन उपस्थित हों।
  2. उस तत्व का नाम बताइए, जिसकी प्रवृत्ति दो इलेक्ट्रॉनों को त्यागने की हो।
  3. उस तत्व का नाम बताइए, जिसकी प्रवृत्ति दो इलेक्ट्रॉनों को प्राप्त करने की हो।
  4. उस वर्ग का नाम बताइए, जिसमें सामान्य ताप पर धातु, अधातु, द्रव और गैस उपस्थित हों।

उत्तर:

  1. समूह 17 (हैलोजन परिवार, F, Cl, Br, I एवं At) के सभी तत्वों का ns.np इलेक्ट्रॉनिक विन्यास होता है। अत: इनके बाह्यतम उपकोश np में पाँच इलेक्ट्रॉन होते हैं।
  2. द्वितीय समूह के तत्व Mg, Ca, Sr, Ba एवं Ra में दो इलेक्ट्रॉन त्यागने की प्रवृत्ति होती है।
  3. 16 वें समूह के तत्व O, S, Se आदि में दो इलेक्ट्रॉन ग्रहण करने की प्रवृत्ति होती है।
  4. प्रथम समूह में H अधातु एवं गैस हैं जबकि Li, Na, K, Rb ठोस धातुएँ हैं एवं Cs एक द्रव धातु (m.p. 28°C) है।

प्रश्न 28.
प्रथम वर्ग के तत्वों के लिए अभिक्रियाशीलता का बढ़ता हुआ क्रम इस प्रकार है –
Li < Na < K < Rb < Cs; जबकि वर्ग 17 के तत्वों में क्रम F > Cl > Br > I है। इसकी व्याख्या कीजिए।
उत्तर:
प्रथम समूह के तत्वों की क्रियाशीलता उनके इलेक्ट्रॉन त्यागने की प्रवृत्ति पर निर्भर करती है चूँकि इस समूह में ऊपर से नीचे जाने पर आयनन ऊर्जा का मान कम होता है। अतः तत्वों की क्रियाशीलता का क्रम Li < Na < K < Rb < Cs होगा। जबकि 17वें समूह के हैलोजनों के लिए क्रियाशीलता उनके इलेक्ट्रॉन ग्रहण कर ऋणायन बनाने की क्षमता पर निर्भर करता है। अत: 17वें समूह के तत्वों की क्रियाशीलता का क्रम F > Cl > Br > I होगा। F की इलेक्ट्रॉन लब्धि एन्थैल्पी Cl से कम है किन्तु इसके बन्ध की वियोजन ऊर्जा कम होने के कारण यह Cl से ज्यादा क्रियाशील है।

प्रश्न 29.
s, p, d और f-ब्लॉक के तत्वों का सामान्य बाह्य इलेक्ट्रॉनिक विन्यास लिखिए।
उत्तर:

  • s – ब्लॉक के तत्व – ns1-2 (n = 2 से 7)
  • p – ब्लॉक के तत्व – ns2np1-6 (n = 2 से 7)
  • d – ब्लॉक के तत्व – (n – 1)d1-10 ns0-2 (n = 3 से 7)
  • f – ब्लॉक के तत्व – (n – 2)f1-14 (n – 1) d0-1 ns2 (n = 6 से 7)

प्रश्न 30.
तत्व, जिसका बाह्य इलेक्ट्रॉनिक विन्यास निम्न है, का स्थान आवर्त तालिका में बताइए –

(i) ns2np4 जिसके लिए n = 3 है।
(ii) (n – 1) d2ns2, जब n = 4 है तथा
(iii) (n – 2)f7 (n – 1) d1ns2, जब n = 6 है।

उत्तर:
MP Board Class 11th Chemistry Solutions Chapter 3 तत्त्वों का वर्गीकरण एवं गुणधर्मों में आवर्तिता - 3

प्रश्न 31.
कुछ तत्वों की प्रथम ∆iH1 और द्वितीय ∆iH1 आयनन एन्थैल्पी (kJ mol-1 में) और इलेक्ट्रॉन लब्धि एन्थैल्पी (∆egH) (kJ mol-1 में) निम्नलिखित हैं –
MP Board Class 11th Chemistry Solutions Chapter 3 तत्त्वों का वर्गीकरण एवं गुणधर्मों में आवर्तिता - 4
ऊपर दिए गए तत्वों में से कौन-सी –

  1. सबसे कम अभिक्रियाशील धातु है?
  2. सबसे अधिक अभिक्रियाशील धातु है?
  3. सबसे अधिक अभिक्रियाशील अधातु है?
  4. सबसे कम अभिक्रियाशील अधातु है?
  5. ऐसी धातु है, जो स्थायी द्विअंगी हैलाइड (binary halide), जिनका सूत्र MX2 (X = हैलोजन) है, बनाता है।
  6. ऐसी धातु, जो मुख्यतः MX (X = हैलोजन) वाले स्थायी सहसंयोजी हैलाइड बनाती है।

उत्तर:
1. सबसे कम अभिक्रियाशील धातु तत्व V है क्योंकि इसकी प्रथम आयनन एन्थैल्पी अधिकतम एवं इलेक्ट्रॉन लब्धि एन्थैल्पी धनात्मक है।

2. सबसे अधिक अभिक्रियाशील धातु तत्व II है क्योंकि इसकी प्रथम आयनन एन्थैल्पी न्यूनतम तथा इलेक्ट्रॉन लब्धि एन्थैल्पी कम ऋणात्मक है।

3. सबसे अधिक अभिक्रियाशील अधातु तत्व III है क्योंकि इसकी प्रथम आयनन एन्थैल्पी उच्च है तथा इलेक्ट्रॉन लब्धि अधिक ऋणात्मक है।

4. सबसे कम अभिक्रियाशील अधातु तत्व IV है क्योंकि इसकी प्रथम आयनन एन्थैल्पी कम है किन्तु इलेक्ट्रॉन लब्धि अधिक ऋणात्मक है।

5. ऐसी धातु जो स्थायी द्विअंगी हैलाइड (सूत्र MX,) बनाने वाली धातु तत्व VI होगी जो कि एक क्षारीय मृदा धातु होगी जिसकी प्रथम एवं द्वितीय आयनन एन्थैल्पी के मान में ज्यादा अंतर नहीं है।

6. ऐसी धातु जो MX सूत्र वाले स्थायी सहसंयोजी हैलाइड बनाती है तत्व I होगी जो कि एक क्षारीय धातु होगी, जिसकी प्रथम आयनन एन्थैल्पी कम तथा द्वितीय आयनन एन्थैल्पी उच्च होती है। साथ ही इसकी इलेक्ट्रॉन लब्धि एन्थैल्पी कम ऋणात्मक होती है। यह तत्व Li जैसा होगा।

प्रश्न 32.
तत्वों के निम्नलिखित युग्मों के संयोजन से बने स्थायी द्विअंगी यौगिकों के सूत्रों की प्रगुक्ति कीजिए –

  1. लीथियम और ऑक्सीजन
  2. मैग्नीशियम और नाइट्रोजन
  3. ऐल्युमिनियम और आयोडीन
  4. सिलिकॉन और ऑक्सीजन
  5. फॉस्फोरस और फ्लुओरीन
  6. ल्यूटेसियम (71वाँ तत्व) और फ्लु ओरीन।

उत्तर:

  1. Li2O
  2. Mg3N2
  3. AlI5
  4. SiO2
  5. PF3 या PF5
  6. LuF3.

प्रश्न 33.
आधुनिक आवर्त सारणी में आवर्त निम्नलिखित में से किसे व्यक्त करता है –
(a) परमाणु संख्या
(b) परमाणु द्रव्यमान
(c) मुख्य क्वांटम संख्या
(d) दिगंशी क्वांटम संख्या।
उत्तर:
(c) मुख्य क्वांटम संख्या

प्रश्न 34.
आधुनिक आवर्त तालिका के लिए निम्नलिखित के संदर्भ में कौन-सा कथन सही नहीं है –
(a) p-ब्लॉक में 6 स्तंभ है, क्योंकिp-कोश के सभी कक्षक भरने के लिए अधिकतम 6 इलेक्ट्रॉनों की आवश्यकता होती है।
(b) d-ब्लॉक में 8 स्तंभ है, क्योंकि d-उपकोश के कक्षक भरने के लिए अधिकतम 8 इलेक्ट्रॉनों की आवश्यकता होती है।
(c) प्रत्येक ब्लॉक में स्तंभों की संख्या उस उपकोश में भरे जा सकने वाले इलेक्ट्रॉनों की संख्या के बराबर होती है।
(d) तत्व के इलेक्ट्रॉन विन्यास को भरते समय अंतिम भरे जाने वाले इलेक्ट्रॉन का उपकोश उसके दिगंशी क्वाण्टम संख्या को प्रदर्शित करता है।
उत्तर:
(b) d-ब्लॉक में 8 स्तंभ है, क्योंकि d-उपकोश के कक्षक भरने के लिए अधिकतम 8 इलेक्ट्रॉनों की आवश्यकता होती है।

प्रश्न 35.
ऐसा कारक, जो संयोजकता इलेक्ट्रॉन को प्रभावित करता है, उस तत्व की रासायनिक प्रवृत्ति को भी प्रभावित करता है। निम्नलिखित में से कौन-सा कारक संयोजकता कोश को प्रभावित नहीं करता- .
(a) संयोजक मुख्य क्वाण्टम संख्या (n)
(b) नाभिकीय आवेश (Z)
(c) नाभिकीय द्रव्यमान
(d) क्रोड इलेक्ट्रॉनों की संख्या।
उत्तर:
(c) नाभिकीय द्रव्यमान

प्रश्न 36.
समइलेक्ट्रॉनिक स्पीशीज़ F, Ne और Na+ का आकार इनमें से किससे प्रभावित होता –
(a) नाभिकीय आवेश (Z)
(b) मुख्य क्वाण्टम संख्या (n)
(c) बाह्य कक्षकों में इलेक्ट्रॉन-इलेक्ट्रॉन अन्योन्य क्रिया
(d) ऊपर दिए गए कारणों में से कोई भी नहीं, क्योंकि उनका आकार समान है।
उत्तर:
(a) नाभिकीय आवेश (Z)

प्रश्न 37.
आयनन एन्थैल्पी के संदर्भ में निम्नलिखित में से कौन-सा कथन गलत है –
(a) प्रत्येक उत्तरोत्तर इलेक्ट्रॉन से आयनन एन्थैल्पी बढ़ती है।
(b) क्रोड उत्कृष्ट गैस के विन्यास से जब इलेक्ट्रॉन को निकाला जाता है, तब आयनन एन्थैल्पी का मान अत्यधिक होता है।
(c) आयनन एन्थैल्पी के मान में अत्यधिक तीव्र वृद्धि संयोजकता इलेक्ट्रॉनों के विलोपन को व्यक्त करता है।
(d) कमn मान वाले कक्षकों से अधिक n मान वाले कक्षकों की तुलना में इलेक्ट्रॉनों को आसानी से निकाला जा सकता है।
उत्तर:
(d) कमn मान वाले कक्षकों से अधिक n मान वाले कक्षकों की तुलना में इलेक्ट्रॉनों को आसानी से निकाला जा सकता है।

प्रश्न 38.
B, AI, Mg, K तत्वों के लिए धात्विक अभिलक्षण का सही क्रम इनमें से कौन-सा है –
(a) B > Al > Mg > K
(b) Al > Mg > B > K
(c) Mg > Al > K > B
(d) K > Mg > Al > B
उत्तर:
(d) K > Mg > Al > B

प्रश्न 39.
तत्वों B, C, N, F और Si के लिए अधातु अभिलक्षण का सही क्रम इनमें से कौन-सा
(a) B > C > Si > N > F
(b) Si > C > B > N > F
(c) F > N > C > B > Si
(d) F > N > C > Si > B
उत्तर:
(c) F > N > C > B > Si

प्रश्न 40.
तत्वों F, CI, O और N तथा ऑक्सीकरण गुणधर्मों के आधार पर उनकी रासायनिक अभिक्रियाशीलता का निम्नलिखित में से कौन-से तत्वों में है –
(a) F > Cl > O > N
(b) F > O > Cl > N
(c) Cl > F > O > N
(d) O > F > N > Cl
उत्तर:
(b) F > O > Cl > N

तत्त्वों का वर्गीकरण एवं गुणधर्मों में आवर्तिता अन्य महत्वपूर्ण प्रश्न

तत्त्वों का वर्गीकरण एवं गुणधर्मों में आवर्तिता वस्तुनिष्ठ प्रश्न

प्रश्न 1.
सही विकल्प चुनकर लिखिए –

प्रश्न 1.
इन तत्वों में से किसका आयनन विभव सर्वाधिक होगा –
(a) Na
(b) Mg
(c) C
(d) F
उत्तर:
(d) F

प्रश्न 2.
इन तत्वों में से कौन-सा तत्व सबसे अधिक ऋण-विद्युती है –
(a) ऑक्सीजन
(b) क्लोरीन
(c) नाइट्रोजन
(d) फ्लुओरीन
उत्तर:
(d) फ्लुओरीन

प्रश्न 3.
आवर्त-सारणी के किसी आवर्त में परमाणु द्रव्यमान बढ़ने के साथ-साथ –
(a) धन-विद्युती गुण में वृद्धि होती है
(b) ऋण-विद्युती गुण में वृद्धि होती है
(c) रासायनिक सक्रियता में वृद्धि होती है
(d) रासायनिक सक्रियता में कमी होती है।
उत्तर:
(b) ऋण-विद्युती गुण में वृद्धि होती है

प्रश्न 4.
निम्नलिखित में से किसकी आयनिक त्रिज्या सबसे अधिक है –
(a) K+
(b) O-2
(c) B2+
(d) C
उत्तर:
(b) O-2

प्रश्न 5.
निम्नलिखित इलेक्ट्रॉनिक संरचनाओं में किसी निष्क्रिय गैस के अन्तिम कक्ष की इलेक्ट्रॉनिक संरचना कौन-सी है –
(a) s2p3
(b) s2p4
(c) s2p5
(d) s2p6
उत्तर:
(d) s2p6

प्रश्न 6.
निम्न में किसका आकार सबसे छोटा होगा –
(a) Al
(b) Al+1
(c)Al+2
(d) Al+3
उत्तर:
(d) Al+3

प्रश्न 7.
निम्नलिखित में से कौन-सा प्रबल अपचायक है –
(a) F
(b) Cl
(c) Br
(d) I
उत्तर:
(d) I

प्रश्न 8.
निम्न में से किसका आयनन विभव सर्वोच्च है –
(a) Ca
(b) Ba
(c) Sr
(d) Mg
उत्तर:
(d) Mg

प्रश्न 9.
एक तत्व जिसका परमाणु-क्रमांक 20 है, आवर्त-सारणी के किस समूह में रखा जायेगा –
(a) 4
(b)3
(c) 2
(d) 1
उत्तर:
(c) 2

प्रश्न 10.
तत्वों का आयनन विभव आवर्त-सारणी के वर्ग में –
(a) परमाणु आमाप के साथ बढ़ता है
(b) परमाणु आमाप के साथ घटता है
(c) स्थिर रहता है
(d) अनियमित रूप से बदलता है
उत्तर:
(b) परमाणु आमाप के साथ घटता है

प्रश्न 2.
रिक्त स्थानों की पूर्ति कीजिए –

  1. उत्कृष्ट गैसों की इलेक्ट्रॉन बन्धुता …………… होती है।
  2. द्वितीय समूह में Be तथा Mg की इलेक्ट्रॉन बन्धुता ……….. है।
  3. आवर्त में बायें से दायें जाने पर सामान्यतः आयनन ऊर्जा में ………………. होता है।
  4. किसी भी तत्व के द्वितीय आयनन विभव का मान सदैव इसके प्रथम आयनन विभव से ……… होता है।
  5. सर्वाधिक विद्युतऋणीय तत्व आवर्त सारणी के ………………. समूह में स्थित हैं।
  6. Li एवं Mg तथा Be और Al के गुणों में समानता का पाया जाना ……….. सम्बन्ध के कारण होता है।
  7. आधुनिक आवर्त सारिणी में कुल ……………. खाने (कॉलम) हैं तथा कुल ………… आवर्त हैं।
  8. नाभिकीय आवेश में वृद्धि होने पर आवर्त में परमाणविक त्रिज्या ……………….. है।
  9. क्लोरीन की इलेक्ट्रॉन बन्धुता फ्लुओरीन से ………. होती है।
  10. डोबेराइनर ने बताया कि अगर तत्वों को उनके परमाणु भार के बढ़ते क्रम में रखा जाये तो प्रत्येक ……………. तत्व पहले तत्वों के समान गुण प्रदर्शित करता है।

उत्तर:

  1. शून्य
  2. शून्य
  3. वृद्धि
  4. अधिक
  5. VII A
  6. विकर्ण
  7. 18, 7
  8. घटती
  9. अधिक
  10. आठवाँ।

प्रश्न 3.
उचित संबंध जोडिए –
MP Board Class 11th Chemistry Solutions Chapter 3 तत्त्वों का वर्गीकरण एवं गुणधर्मों में आवर्तिता - 5
उत्तर:

  1. (d)
  2. (c)
  3. (b)
  4. (a).

प्रश्न 4.
एक शब्द/वाक्य में उत्तर दीजिए –

  1. एका सिलिकॉन का दूसरा नाम है।
  2. N-3 एवं O-2 दोनों में इलेक्ट्रॉनों की संख्या समान है। अतः इन्हें क्या कहा जायेगा?
  3. Al की कौन-सी ऑक्सीकारक अवस्था सबसे अधिक स्थायी होगी?
  4. एक तत्व का परमाणु क्रमांक 16 है, बताइये वह आवर्त सारणी के किस वर्ग में उपस्थित है?
  5. आधुनिक आवर्त सारणी के प्रथम आवर्त में कितने तत्व हैं?

उत्तर:

  1. जर्मेनियम
  2. समइलेक्ट्रॉनिक
  3. + 3
  4. 6 वें
  5. दो।

तत्त्वों का वर्गीकरण एवं गुणधर्मों में आवर्तिता अति लघु उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 1.
मेण्डलीफ का आवर्त नियम क्या है?
उत्तर:
मेण्डलीफ का आवर्त नियम-“तत्वों के भौतिक और रासायनिक गुण उनके परमाणु द्रव्यमान के आवर्ती फलन होते हैं।” अर्थात् तत्वों को उनके परमाणु द्रव्यमानों के बढ़ते क्रम में व्यवस्थित करने पर एक निश्चित अंतराल के बाद उनके गुणों में पुनरावृत्ति होती है।

प्रश्न 2.
आधुनिक आवर्त नियम क्या है?
उत्तर:
आधुनिक आवर्त नियम-“तत्वों के भौतिक और रासायनिक गुण उनके परमाणु क्रमांक के आवर्ती फलन होते हैं।” इस नियम के आधार पर जब तत्वों को उनके बढ़ते हुये परमाणु क्रमांक के क्रम में रखने पर इनके गुणों में क्रमिक परिवर्तन होता है और एक निश्चित अंतराल के बाद समान गुणों वाले तत्वों की पुनरावृत्ति होती है।

प्रश्न 3.
उस नियम का उल्लेख कीजिये जिसके आधार पर मेण्डलीफ ने तत्वों का वर्गीकरण किया। इस नियम में अब क्या संशोधन हुए हैं?
उत्तर:
वह नियम जिसके आधार पर मेण्डलीफ ने तत्वों का वर्गीकरण किया, मेण्डलीफ का आवर्त नियम कहलाता है। इस नियम के अनुसार-“तत्वों के भौतिक एवं रासायनिक गुण उनके परमाणु द्रव्यमानों के आवर्ती फलन होते हैं।” इस नियम को अब संशोधित किया गया है तथा इसे आधुनिक आवर्त नियम कहते हैं। इस नियम के अनुसार-“तत्वों के भौतिक एवं रासायनिक गुण उनके परमाणु क्रमांक के आवर्ती फलन होते हैं।”

प्रश्न 4.
डोबेराइनर का त्रिक नियम क्या है?
उत्तर:
यह नियम सर्वप्रथम डोबेराइनर ने दिया था। इस नियमानुसार तत्वों में समान गुणों वाले तत्वों के केन्द्रीय तत्व का परमाणु भार अन्य दो तत्वों के परमाणु भार का औसत भार होता है।
Li7 Na23 K39 अर्थात् \(\frac{39+7}{2}\) = 23

प्रश्न 5.
न्यूलैण्ड का अष्टक नियम समझाइये।
उत्तर:
न्यूलैण्ड का अष्टक नियम-यह नियम न्यूलैण्ड ने दिया था। इस नियमानुसार तत्वों को उनके परमाणु भार के बढ़ते क्रम में व्यवस्थित करने पर आने वाले आठवें तत्व का गुण प्रथम तत्व के गुण के समान होता है। यह संगीत के सात सुरों पर आधारित था जिसमें आठवें से पुनरावृत्ति होती है।
MP Board Class 11th Chemistry Solutions Chapter 3 तत्त्वों का वर्गीकरण एवं गुणधर्मों में आवर्तिता - 6

प्रश्न 6.
धनायन अपने जनक परमाणुओं से छोटे क्यों होते हैं और ऋणायनों की त्रिज्या जनक परमाणुओं की त्रिज्या से अधिक क्यों होती है? व्याख्या कीजिए।
उत्तर:
धनायन सदैव अपने जनक परमाणुओं से छोटे होते हैं क्योंकि एक या दो इलेक्ट्रॉनों को त्यागने के कारण, प्रभावी नाभिकीय आवेश का मान बढ़ जाता है। इसके कारण संयोजी इलेक्ट्रॉनों पर नाभिक का आकर्षण बल बढ़ जाता है जिससे आयनिक त्रिज्या घट जाती है। दूसरी ओर ऋणायन सदैव अपने जनक परमाणुओं से बड़े होते हैं क्योंकि एक या दो इलेक्ट्रॉनों को ग्रहण करने के कारण प्रभावी नाभिकीय आवेश का मान घट जाता है जिससे संयोजी इलेक्ट्रॉनों का नाभिक से आकर्षण बल घट जाता है। इसी कारण आयनिक त्रिज्या घट जाती है।

प्रश्न 7.
मेण्डलीफ की आवर्त सारणी में कितने आवर्त तथा कितने वर्ग हैं? प्रत्येक आवर्त में तत्वों की संख्या कितनी है?
उत्तर:
मेण्डलीफ की आवर्त सारणी में 7 आवर्त तथा 9 वर्ग हैं। प्रथम आवर्त में 2 तत्व, द्वितीय तथा तृतीय आवर्त में 8-8 तत्व, चौथे और पाँचवें आवर्त में 18-18 तत्व हैं, छठवें आवर्त में 32 तत्व हैं । सातवाँ आवर्त अपूर्ण है। इनमें परमाणु क्रमांक 90 से 103 तक के तत्व जिन्हें एक्टिनाइड कहते हैं भी सम्मिलित हैं।

प्रश्न 8.
प्रत्येक आवर्त में बाँये से दाँये जाने पर क्या परिवर्तन होता है?
उत्तर:
प्रत्येक आवर्त में बाँये से दाँये चलने पर आयनन विभव, इलेक्ट्रॉन बंधुता बढ़ती है। लेकिन धात्विक प्रकृति, ऑक्साइडों की क्षारीयता, परमाणु त्रिज्या घटती है।

प्रश्न 9.
किसी समूह में ऊपर से नीचे आने पर क्या परिवर्तन होता है?
उत्तर:
किसी समूह में ऊपर से नीचे आने पर परमाणु त्रिज्या, आयनिक त्रिज्या बढ़ती है लेकिन आयनन ऊर्जा, ऋणविद्युतता, इलेक्ट्रॉन बंधुता, गलनांक में कमी आती है।

प्रश्न 10.
आधुनिक आवर्त सारणी तथा मेण्डलीफ की आवर्त सारणी की तुलना कीजिए।
उत्तर:
आधुनिक आवर्त सारणी और मेण्डलीफ आवर्त सारणी की तुलना:

आधुनिक आवर्त सारणी:

  1. आधुनिक आवर्त सारणी में तत्वों को परमाणु क्रमांक के बढ़ते क्रम में रखा गया है।
  2. इसमें तत्वों को 18 वर्गों में रखा गया है।
  3. इसमें धातु और अधातु तत्वों को पृथक् रखा गया है।

मेण्डलीफ आवर्त सारणी:

  1. मेण्डलीफ आवर्त सारणी में तत्वों को परमाणु भार के बढ़ते क्रम में रखा गया है।
  2. इसमें तत्वों को 9 वर्ग और 7 उप-वर्गों में रखा गया है।
  3. इसमें धातु और अधातु को पृथक् नहीं रखा गया है।

प्रश्न 11.
विकर्ण संबंध किसे कहते हैं? उदाहरण देकर स्पष्ट कीजिए।
उत्तर:
द्वितीय आवर्त के तत्व तृतीय आवर्त के अगले वर्ग के तत्वों से गुणों में समानता दर्शाते हैं। अर्थात् द्वितीय एवं तृतीय आवर्त में एक-दूसरे के विकर्णतः उपस्थित तत्वों के गुणों में समानता होती है। इसे विकर्ण संबंध कहते हैं।
उदाहरण:
वर्ग                      I           II            III            IV
द्वितीय आवर्त        Li         Be           B             C
तृतीय आवर्त         Na        Mg        Al             Si

प्रश्न 12.
सभी नाइट्रोजन यौगिकों में N की विद्युत् ऋणात्मकता पाउलिंग पैमाने पर 3.0 है। आप इस कथन पर अपनी क्या प्रतिक्रिया देंगे?
उत्तर:
सभी नाइट्रोजन यौगिकों में N की विद्युत् ऋणात्मकता पाउलिंग पैमाने पर 3.0 है। यह कथन असत्य है क्योंकि, किसी भी तत्व की विद्युत् ऋणात्मकता नियत नहीं होती है। जिन अन्य तत्वों पर यह बंधित होता है, उनका प्रभाव भी इसके मान पर पड़ता है। तत्व की ऑक्सीकरण अवस्था तथा संकर कक्षक के s- व्यवहार का प्रतिशत बढ़ने पर भी इसका मान बढ़ता है।

प्रश्न 13.
सहसंयोजक त्रिज्या किसे कहते हैं?
उत्तर:
किसी तत्व के अणु में एकल सहसंयोजक बंध द्वारा आबंधित दो. परमाणुओं के नाभिकों के केन्द्र के बीच की दूरी का आधा उस तत्व के परमाणु की सहसंयोजक त्रिज्या सहसंयोजक त्रिज्या कहलाती है।
MP Board Class 11th Chemistry Solutions Chapter 3 तत्त्वों का वर्गीकरण एवं गुणधर्मों में आवर्तिता - 7

प्रश्न 14.
वाण्डर वाल्स त्रिज्या किसे कहते हैं?
उत्तर:
ठोस अवस्था में किसी तत्व के दो निकटतम अणुओं के परमाणुओं के केन्द्रों के बीच की दूरी का आधा उस तत्व के परमाणु की वाण्डर वाल्स त्रिज्या कहलाती है। वाण्डर वाल्स त्रिज्या का मान सह-संयोजक त्रिज्या से अधिक होता है।
MP Board Class 11th Chemistry Solutions Chapter 3 तत्त्वों का वर्गीकरण एवं गुणधर्मों में आवर्तिता - 8

प्रश्न 15.
प्रारूपी तत्व से क्या समझते हो?
उत्तर:
ऐसे तत्व जो अपने वर्ग का प्रतिनिधित्व करते हैं, प्रारूपी तत्व कहलाते हैं। इनमें केवल एक बाह्य कोश अपूर्ण होता है तथा अंदर का कोश नियमानुसार पूर्ण रूप से भरा होता है। द्वितीय तथा तृतीय आवर्त के तत्व प्रारूपी तत्व कहलाते हैं।
उदाहरण: C, N, O इत्यादि।

प्रश्न 16.
किसी तत्व के दो समस्थानिकों की प्रथम आयनन एन्थैल्पी समान होगी या भिन्न? आप क्या मानते हैं? अपने उत्तर से पुष्टि कीजिए।
उत्तर:
किसी तत्व के दो समस्थानिकों की प्रथम आयनन एन्थैल्पी समान होनी चाहिए क्योंकि इसका मान इलेक्ट्रॉनिक विन्यास तथा प्रभावी नाभिकीय आवेश पर निर्भर करता है। किसी तत्व के समस्थानिकों का इलेक्ट्रॉनिक विन्यास समान होता है जिसके कारण नाभिकीय आवेश भी समान होता है।

प्रश्न 17.
नाइट्रोजन का आयनन विभव ऑक्सीजन से अधिक है, क्यों?
उत्तर:
नाइट्रोजन तथा ऑक्सीजन का इलेक्ट्रॉनिक विन्यास निम्न हैं –
N7 = 1s2 2s2 2p3
O8 = 1s2 2s2 2p3
कोई भी उपकोश यदि पूर्ण उपकोश या अर्धपूर्ण उपकोश हो तो स्थायी होता है। नाइट्रोजन का p उपकोश अर्धपूर्ण उपकोश है जबकि ऑक्सीजन का p उपकोश अपूर्ण उपकोश है। अर्थात् नाइट्रोजन का p उपकोश ऑक्सीजन के p उपकोश से अधिक स्थायी है। इसलिये N परमाणु में से एक इलेक्ट्रॉन को निकालने के लिये अधिक ऊर्जा की आवश्यकता होती है। इसलिये नाइट्रोजन का आयनन विभव उच्च होता है।

प्रश्न 18.
अक्रिय गैसों के आयनन विभव उच्च होते हैं, क्यों?
उत्तर:
पूर्ण उपकोश तथा अष्टक पूर्ण होने की वजह से अक्रिय गैसों का इलेक्ट्रॉनिक विन्यास सबसे अधिक स्थायी होता है। इसलिये बाहरी कोश से इलेक्ट्रॉन हेतु अधिक ऊर्जा की आवश्यकता होती हैं।

प्रश्न 19.
हैलोजन तत्वों की इलेक्ट्रॉन बंधुता उच्च होती है, क्यों?
उत्तर:
हैलोजन तत्वों का सामान्य इलेक्ट्रॉनिक विन्यास ns2np5 होता है तथा इन्हें स्थायी इलेक्ट्रॉनिक विन्यास प्राप्त करने हेतु एक अतिरिक्त इलेक्ट्रॉन की आवश्यकता होती है। अत: ये आसानी से एक इलेक्ट्रॉन ग्रहण करके स्थायी हैलाइड आयन बनाते हैं। इसलिये हैलोजनों की इलेक्ट्रॉन बंधुता उच्च होती है।

प्रश्न 20.
F और Cl में किसकी इलेक्ट्रॉन बंधुता उच्च होती है, और क्यों?
उत्तर:
F की इलेक्ट्रॉन बंधुता Cl से कम होती है क्योंकि F के छोटे आकार के कारण इसके 2p कक्षकों के इलेक्ट्रॉनों में प्रतिकर्षण अधिक होता है। इसलिये योगशील इलेक्ट्रॉन परमाणु को अतिरिक्त स्थायित्व प्रदान नहीं कर पाता।

प्रश्न 21.
उत्कृष्ट गैसों की इलेक्ट्रॉन बंधुता शून्य होती है, क्यों?
उत्तर:
उत्कृष्ट गैसों का इलेक्ट्रॉनिक विन्यास स्थायी होता है, क्योंकि इनके संयोजी कोश पूर्णतः भरे होते हैं तथा सभी इलेक्ट्रॉन युग्मित होते हैं, जिसके कारण आने वाले इलेक्ट्रॉन के प्रति कोई बंधुता नहीं होती है। इसलिये अक्रिय गैसों की इलेक्ट्रॉन बंधुता शून्य होती है।

प्रश्न 22.
परमाणु त्रिज्या तथा आयनिक त्रिज्या में अंतर स्पष्ट कीजिए।
उत्तर:
परमाणु त्रिज्या तथा आयनिक त्रिज्या में अंतर –
परमाणु त्रिज्या

  1. उदासीन परमाणु के नाभिक से बाहरी कोश तक की दूरी परमाणु त्रिज्या कहलाती है।
  2. परमाणु त्रिज्या धनायन की आयनिक त्रिज्या से अधिक होती है।

आयनिक त्रिज्या

  1. उदासीन परमाणु से बने आयन के नाभिक से बाहरी कोश तक की दूरी आयनिक त्रिज्या कहलाती है।
  2. धनायन की त्रिज्या परमाणु त्रिज्या से कम लेकिन ऋणायन की आयनिक त्रिज्या परमाणु त्रिज्या से अधिक होती है।

प्रश्न 23.
किसी तत्व के द्वितीय आयनन विभव का मान प्रथम आयनन विभव से अधिक होता है। क्यों?
उत्तर:
किसी परमाणु से एक इलेक्ट्रॉन निकल जाने से शेष परमाणु धन आवेशित होते हैं तथा धनायन का आयनिक त्रिज्या परमाणु त्रिज्या से कम होती है जिसके फलस्वरूप संयोजी कोश के इलेक्ट्रॉन तथा नाभिक के बीच आकर्षण बल बढ़ जाता है, जिसके कारण बाहरी कोश से द्वितीय इलेक्ट्रॉन को निकालने के लिये ज्यादा ऊर्जा की आवश्यकता होती है। इसलिये द्वितीय आयनन विभव का मान प्रथम आयनन विभव से उच्च होता है।

प्रश्न 24.
धन आयन की आयनिक त्रिज्या परमाणु त्रिज्या से कम होती है। क्यों? अथवा, धनायन का आकार संगत परमाणु से कम होता है। क्यों?
उत्तर::
जब कोई परमाणु एक या एक से अधिक इलेक्ट्रॉन त्यागता है तो धनायन बनता है। इस प्रक्रिया में नाभिक में उपस्थित प्रोट्रॉनों की संख्या व नाभिक पर उपस्थित नाभिकीय आवेश तो वही रहता है परन्तु बाहरी कोश में उपस्थित इलेक्ट्रॉनों की संख्या में कमी आती है। जिसके फलस्वरूप प्रति इलेक्ट्रॉन कार्य कर रहे नाभिकीय आकर्षण बल में वृद्धि होती है और बाहरी कोश नाभिक की ओर दृढ़ता से आकर्षित होता है। इसलिये धन आयन का आकार संगत परमाण से कम होता है।

प्रश्न 25.
ऋण आयन की आयनिक त्रिज्या परमाण त्रिज्या से अधिक होती है। क्यों ? अथवा, ऋण आयन का आकार संगत परमाणु से बड़ा होता है। क्यों?
उत्तर:
जब कोई परमाणु एक या एक से अधिक इलेक्ट्रॉन ग्रहण करता है तो ऋणायन बनता है। इस प्रक्रिया में नाभिक में उपस्थित प्रोटॉनों की संख्या व नाभिक पर उपस्थित नाभिकीय आवेश तो वही रहता है परन्तु बाहरी कोश में उपस्थित इलेक्ट्रॉनों की संख्या में वृद्धि होती है। जिसके फलस्वरूप प्रति इलेक्ट्रॉन कार्य कर रहे नाभिकीय आकर्षण बल में कमी आती है। जिसके कारण ऋण आयन का आकार संगत परमाणु से बढ़ जाता है।

प्रश्न 26.
Be और N की इलेक्ट्रॉन बंधुता का मान शून्य के निकट होता है। क्यों ?
उत्तर:
Be का 2s उपकोश पूर्ण उपकोश होने के कारण अधिक स्थायी होता है, और वह किसी अतिरिक्त इलेक्ट्रॉन को 5 उपकोश में प्रवेश करने नहीं देता, इसी प्रकार N के p उपकोश अर्धपूर्ण होने के कारण अधिक स्थायी होता है और अतिरिक्त इलेक्ट्रॉन को ग्रहण नहीं करता। इसलिये Be तथा N की इलेक्ट्रॉन बंधुता का मान शून्य के करीब होता है।

प्रश्न 27. Mg+2 आयन का आकार O-2 से छोटा होता है, जबकि दोनों का इलेक्ट्रॉनिक विन्यास समान होता है। समझाइये।
उत्तर:
Mg+2 आयन तथा O-2 आयन का इलेक्ट्रॉनिक विन्यास समान है। दोनों के संयोजी कोश में आठ इलेक्ट्रॉन होते हैं। परन्तु Mg+2 आयन में नाभिकीय आवेश + 12 होता है जबकि O-2 आयन में नाभिकीय आवेश +8 है। इसलिये Mg+2 में बाहरी कोश के इलेक्ट्रॉनों पर नाभिकीय आवेश O-2 की तुलना में अधिक होता है इसलिये Mg+2 आयन का आकार O-2 से छोटा होता है।

प्रश्न 28.
Al का प्रथम आयनन विभव Mg से कम होता है। क्यों?
उत्तर:
A तथा Mg का इलेक्ट्रॉनिक विन्यास निम्न हैं –
Al13 – 1s22 2s2 2p6 3s2 3p1
Mg12 – 1s2 2s2 2p6 3s2
कोई भी उपकोश यदि पूर्ण तथा अर्धपूर्ण उपकोश है, तो परमाणु अधिक स्थायी होता है। AI में p उपकोश अपूर्ण उपकोश है जबकि Mg का s उपकोश पूर्ण उपकोश है। अर्थात् AI का उपकोश Mg के उपकोश से कम स्थायी है। इसलिये Al परमाणु में से एक इलेक्ट्रॉन निकालने के लिये Mg की तुलना में कम ऊर्जा की आवश्यकता होती है इसलिये AI की आयनन ऊर्जा Mg से कम है।

प्रश्न 29.
परिरक्षण प्रभाव से आप क्या समझते हैं?
उत्तर:
इलेक्ट्रॉनों पर समान ऋण आवेश होता है तथा ये एक-दूसरे को प्रतिकर्षित करते हैं और यह प्रतिकर्षण बल नाभिक द्वारा बाहरी कोश पर लग रहे आकर्षण बल को कम कर देता है, जिसके कारण संयोजी कोश में उपस्थित इलेक्ट्रॉन नाभिक द्वारा दृढ़ता से बँधे नहीं रहते हैं। इस प्रकार बाह्यतम कोश तथा नाभिक के बीच उपस्थित इलेक्ट्रॉन द्वारा नाभिकीय आकर्षण में डाले गये बाधा को परिरक्षण प्रभाव कहते हैं, जिसके कारण बाहरी कोश का इलेक्ट्रॉन ढीला बँधा रहता है।

तत्त्वों का वर्गीकरण एवं गुणधर्मों में आवर्तिता लघु उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 1.
फ्लुओरीन की इलेक्ट्रॉन लब्धि एन्थैल्पी, क्लोरीन की अपेक्षा कम ऋणात्मक होती है। कारण स्पष्ट कीजिए।
उत्तर:
फ्लुओरीन की इलेक्ट्रॉन लब्धि एन्थैल्पी (इलेक्ट्रॉन बंधुता) क्लोरीन की अपेक्षा कम ऋणात्मक होती है क्योंकि जब एक इलेक्ट्रॉन F (फ्लुओरीन) में प्रवेश करता है तो वह छोटे (n = 2) ऊर्जा स्तर में प्रवेश करता है जहाँ उस पर इस ऊर्जा स्तर में उपस्थित अन्य इलेक्ट्रॉनों का प्रतिकर्षण बल लगता है। CL में प्रवेश करने वाला इलेक्ट्रॉन बड़े (n = 3) ऊर्जा स्तर में प्रवेश करता है जहाँ उस पर उपस्थित अन्य इलेक्ट्रॉनों का बहुत कम प्रतिकर्षण लगता है।

प्रश्न 2.
मेण्डलीफ की आवर्त सारणी से दीर्घ आवर्त सारणी श्रेष्ठ है, क्यों?
उत्तर:

  1. आवर्त सारणी का दीर्घ रूप परमाणु क्रमांक पर आधारित है जो परमाणु का अधिक मूलभूत गुण है।
  2. प्रत्येक तत्व की स्थिति उसके इलेक्ट्रॉनिक विन्यास के आधार पर सुनिश्चित की गयी है।
  3. यह विभिन्न तत्वों के रासायनिक गुणों की समानताओं, असमानताओं तथा उन गुणों में क्रमिक परिवर्तन को अधिक स्पष्ट रूप से दर्शाता है।
  4. इसमें तत्वों का वर्गीकरण अधिक वैज्ञानिक एवं तर्कसंगत आधार पर किया गया है।

प्रश्न 3.
आधुनिक आवर्त सारणी की प्रमुख विशेषताएँ लिखिए।
उत्तर:

  1. यह आवर्त सारणी तत्वों के इलेक्ट्रॉनिक विन्यास पर आधारित है।
  2. इसमें धातु और अधातु को पृथक् रखा गया है।
  3. संक्रमण तत्वों को सामान्य तत्वों से पृथक् कर दिया गया है।
  4. तत्वों को इलेक्ट्रॉन भरने के आधार पर समस्त तत्वों को s, p, d एवं ब्लॉक में विभाजित किया गया है।
  5. दुर्लभ मृदा तत्वों को उपयुक्त स्थान पर मुख्य आवर्त सारणी के बाहर नीचे रखा गया है।

प्रश्न 4.
किसी तत्व का परमाणु क्रमांक 17 है। इलेक्ट्रॉनिक विन्यास देते हुये आवर्त सारणी में इसका स्थान निश्चित कीजिये।
उत्तर:
परमाणु क्रमांक 17 वाले तत्व का इलेक्ट्रॉनिक विन्यास = 1s2 2s2 2p6 3s2 3p5 = 2, 8,7

1. इसके बाह्यतम कोश की इलेक्ट्रॉनिक संरचना 3523p है अतः यह p ब्लॉक का तत्व है।

2. समूह:
यदि एक कोश अपूर्ण है तो बाहरी कोश में उपस्थित इलेक्ट्रॉन उस तत्व के समूह को दर्शाते हैं इसलिये 7 वें समूह का तत्व है।

3. उपसमूह:
यदि अंतिम इलेक्ट्रॉन s या p उपकोश में प्रवेश करता है तो वह तत्व A उपसमूह का होता है।

4. आवर्त:
कोशों की संख्या आवर्त को दर्शाती है। यह तत्व तीसरे आवर्त का सदस्य है।
समूह = 7
उपसमूह = A
आवर्त = 3

प्रश्न 5.
एक तत्व का इलेक्ट्रॉनिक विन्यास 1s2 2s2 2p6 3s2 3p6 है, इसे आवर्त सारणी के किस समूह और आवर्त में रखा जायेगा और क्यों?
उत्तर:
समूह:
यदि किसी तत्व के बाहरी कोश में आठ इलेक्ट्रॉन हैं अर्थात् अष्टक पूर्ण है तो वह तत्व शून्य समूह अर्थात् 18 वर्ग का सदस्य होगा।

आवर्त:
कुल कोशों की संख्या आवर्त को दर्शाती है। दिये गये तत्व का इलेक्ट्रॉनिक विन्यास 1s2 2s2 2p6 3s2 3p6 अर्थात् 2, 8, 8 है। इसलिये तत्व शून्य समूह का सदस्य है तथा तीसरे आवर्त में व्यवस्थित है।

प्रश्न 6.
‘सभी संक्रमण तत्वd-ब्लॉक के तत्व हैं परन्तु सभी d – ब्लॉक के तत्व संक्रमण तत्व नहीं है।’ व्याख्या कीजिए।
उत्तर:
जिन तत्वों के अन्तिम इलेक्ट्रॉन d – कक्षक में प्रवेश करते हैं, d – ब्लॉक के तत्व अथवा संक्रमण तत्व कहलाते हैं। इन तत्वों का सामान्य बाह्यतम इलेक्ट्रॉनिक विन्यास (n – 1) d-10 ns0-2 होता है। Zn, Cd तथा Hg का इलेक्ट्रॉनिक विन्यास (n – 1)dions होता है परन्तु ये संक्रमण तत्वों की विशेषताएँ नहीं दर्शाते हैं। इन तत्वों की आद्य अवस्था तथा सामान्य ऑक्सीकरण अवस्था में, d- कक्षक पूर्णतया भरे हुए होते हैं। अतः इन्हें संक्रमण तत्व नहीं माना जा सकता है। अत: गुणों के आधार पर सभी संक्रमण तत्व, d – ब्लॉक के तत्व हैं तथा इलेक्ट्रॉनिक विन्यास के आधार पर सभी d – ब्लॉक के तत्व संक्रमण तत्व नहीं हैं।

प्रश्न 7.
निम्नलिखित जोड़ों में से किसकी आयनन ऊर्जा का मान कम है और क्यों –

  1. Cl या F
  2. Cl या S
  3. K या Ar
  4. Kr या Xe.

उत्तर:

1. Cl और F में क्लोरीन की आयनन ऊर्जा कम है क्योंकि Cl का आकार F से बड़ा है।

2. Cl और S में S की आयनन ऊर्जा कम है क्योंकि दोनों में कोशों की संख्या समान है लेकिन S में क्लोरीन की तुलना में नाभिकीय आवेश कम है इसलिये S का आकार CI से बड़ा है।

3. K तथा Ar में K की आयनन ऊर्जा कम है। पोटैशियम के संयोजी कोश में 1 इलेक्ट्रॉन है जिसे वह सरलता से दान कर K+ आयन बना सकता है जबकि Ar में अष्टक पूर्ण होने की वजह से स्थायी है तथा इलेक्ट्रॉन निकालने के लिये ज्यादा ऊर्जा की आवश्यकता होती है।

4. Kr तथा Xe में Xe की आयनन ऊर्जा कम है क्योंकि Xe का आकार Kr से बड़ा है।

प्रश्न 8.
इलेक्ट्रॉनिक विन्यास के आधार पर तत्व कितने प्रकार के होते हैं ? प्रत्येक के उदाहरण दीजिये।
अथवा
इलेक्ट्रॉनिक व्यवस्था के आधार पर तत्वों के विभिन्न प्रकारों का वर्णन कीजिये।
उत्तर:
इलेक्ट्रॉनिक व्यवस्था के आधार पर तत्व –

1. सक्रिय गैस:
इन्हें आवर्त सारणी में 18 वें वर्ग में रखा गया है। इनके बाहरी कोश में 8 इलेक्ट्रॉन होते हैं। इलेक्ट्रॉनिक विन्यास स्थायी होता है। इनका सामान्य इलेक्ट्रॉनिक विन्यास ns2np6 है (हीलियम को छोड़कर, ns2)।
उदाहरण: Ne, Ar.

2. प्रतिनिधि तत्व:
इनके बाहरी कोश अपूर्ण होते हैं। इलेक्ट्रॉनिक विन्यास करने पर अंतिम इलेक्ट्रॉन s या p उपकोश में प्रवेश करता है। इसलिये इसके अंतर्गत 5 ब्लॉक तत्व तथा p ब्लॉक तत्व आते हैं। इनका सामान्य इलेक्ट्रॉनिक विन्यास ns1 से ns22p5 तक होता है।

  • s ब्लॉक तत्व – Na, Mg
  • p ब्लॉक तत्व – Cl, S.

3. संक्रमण तत्व:
इनके बाहरी दो कक्ष अपूर्ण होते हैं। समूह क्रमांक 3 से 12 तक के तत्व जो आवर्त सारणी के मध्य में स्थित हैं, संक्रमण तत्व कहलाते हैं। इलेक्ट्रॉनिक विन्यास करने पर अंतिम इलेक्ट्रॉन d उपकोश में प्रवेश करता है। इनके बाहरी कोश का सामान्य इलेक्ट्रॉनिक विन्यास ns2(n – 1)d1-10 होता है। उदाहरण: Cr, Mn.

4. अंतर संक्रमण तत्व:
इनके बाहरी तीन कोश अपूर्ण होते हैं। इसके अंतर्गत लैन्थेनाइड तथा एक्टिनाइड आते हैं। ये आवर्त सारणी के नीचे स्थित हैं। अंतिम इलेक्ट्रॉन F उपकोश में प्रवेश करता है। इनका सामान्य इलेक्ट्रॉनिक विन्यास ns2(n – 2)f1-14 होता है।
उदाहरण: Ce, Th.

प्रश्न 9.
s – ब्लॉक तत्व किसे कहते हैं? इनके मुख्य गुण लिखिये।
उत्तर:
इनमें इलेक्ट्रॉनिक विन्यास करने पर अंतिम इलेक्ट्रॉन 5 उपकोश में प्रवेश करता है तथा केवल बाहरी कोश अपूर्ण होता है। बाहरी कोश के 5 उपकोश में 1 या 2 इलेक्ट्रॉन होते हैं तथा इनका सामान्य इलेक्ट्रॉनिक विन्यास ns1-2 होता है।
s – ब्लॉक तत्वों के सामान्य गुण:

  1. इन तत्वों के बाह्य कोश में 1 या 2 इलेक्ट्रॉन होते हैं।
  2. इनके बाहरी कोश का इलेक्ट्रॉनिक विन्यास ns1-2 है।
  3. हाइड्रोजन को छोड़कर अन्य सभी तत्व धातु हैं। प्रथम समूह के तत्व क्षारीय तत्व तथा द्वितीय समूह के तत्व क्षारीय मृदा तत्व कहलाते हैं।
  4. इनकी ऑक्सीकरण संख्या +1 या +2 होती है।
  5. ये प्रबल आयनिक यौगिक बनाते हैं।
  6. इनके ऑक्साइड क्षारीय होते हैं।
  7. ये प्रबल अपचायक हैं।
  8. ये जटिल आयन नहीं बनाते हैं।
  9. जल तथा अम्ल से क्रिया कराने पर हाइड्रोजनं विस्थापित करते हैं।

प्रश्न 10.
p ब्लॉक तत्व किसे कहते हैं? इनके मुख्य लक्षण लिखिये।
उत्तर:
यदि इलेक्ट्रॉनिक विन्यास करने पर अंतिम इलेक्ट्रॉन p उपकोश में प्रवेश करता है तो उसे p ब्लॉक तत्व कहते हैं। बाह्यतम कोश के 5 उपकोश में 2 तथा p उपकोश में 1 से 6 इलेक्ट्रॉन होते हैं। इनके संयोजी कोश का विन्यास      ns2np1-6 होता है।

p ब्लॉक तत्वों के सामान्य गुण:

  1. अंतिम इलेक्ट्रॉन p उपकोश में प्रवेश करता है।
  2. इनके संयोजी कोश का इलेक्ट्रॉनिक विन्यास ns2np1-6 होता है।
  3. ये प्रायः अधातु तथा उपधातु हैं। कुछ भारी तत्व धातु भी होते हैं।
  4. प्रायः इनकी निश्चित संयोजकता होती है किन्तु कुछ तत्व परिवर्ती संयोजकता भी दर्शाते हैं।
  5. ये आपस में सहसंयोजी यौगिक बनाते हैं परन्तु 5 ब्लॉक तत्वों के साथ आयनिक यौगिक बनाते हैं।
  6. ये प्रायः जटिल ऋण आयन बनाते हैं। जैसे – CO3-2, SO4-2, Na3-1-1.
  7. इनके ऑक्साइड प्रायः अम्लीय होते हैं। कुछ ऑक्साइड जैसे – PbO, Al2O3, इत्यादि उभयधर्मी भी होते हैं।

प्रश्न 11.
एक तत्व का इलेक्ट्रॉनिक विन्यास 1s2 2s2 2p6 3s2 3p6 4s2 है इसका परमाणु भार 40 है। इसके नाभिक में न्यूट्रॉनों की संख्या बताइये। तत्व का नाम व आवर्त सारणी में स्थिति बताइये।
उत्तर:

  • तत्व का परमाणु भार – 40
  • तत्व का परमाणु क्रमांक – 20
  • इलेक्ट्रॉनों की संख्या – 20
  • प्रोटॉनों की संख्या – 20
  • न्यूट्रॉनों की संख्या – परमाणु भार – प्रोटॉनों की संख्या
    40 – 20 = 20
  • इलेक्ट्रॉनिक विन्यास – 2, 8, 8, 2
  • समूह – 2
  • उपसमूह – A
  • आवर्त – 4

अतः यह तत्व 2A समूह में चौथे आवर्त में स्थित है।

प्रश्न 12.
किसी तत्व की विद्युत् ऋणात्मक से क्या समझते हो ? इलेक्ट्रॉन बंधुता से यह किस प्रकार भिन्न है ? आवर्त सारणी में विद्युत् ऋणात्मकता किस प्रकार बदलती है?
उत्तर:
विद्युत् ऋणात्मकता:
किसी यौगिक में दो परमाणुओं के मध्य स्थित साझे के इलेक्ट्रॉन जोड़े को अपनी ओर आकर्षित करने की क्षमता को परमाणु की विद्युत् ऋणात्मकता या ऋणविद्युता कहते हैं।

इलेक्ट्रॉन बंधुता:
किसी परमाणु की गैसीय अवस्था में बाहरी कोश में एक इलेक्ट्रॉन के प्रवेश करने पर मुक्त होने वाली ऊर्जा को इलेक्ट्रॉन बंधुता कहते हैं। दूसरे शब्दों में, किसी परमाणु द्वारा बाह्यतम कोश में इलेक्ट्रॉन को बाँधकर रखने की क्षमता को इलेक्ट्रॉन बंधुता कहते हैं। किसी भी तत्व की प्रथम इलेक्ट्रॉन बंधुता का मान ऋणात्मक होता है क्योंकि यह प्रक्रिया ऊष्माक्षेपी है। जबकि द्वितीय इलेक्ट्रॉन बंधुता में ऊर्जा का अवशोषण होता है। क्योंकि ऋणआवेशित आयन आने वाले अतिरिक्त इलेक्ट्रॉन को प्रतिकर्षित करता है।

अंतर:
इलेक्ट्रॉन बंधुता अतिरिक्त इलेक्ट्रॉन को बाँधने का गुण है। जबकि ऋणविद्युतता अणु में किसी परमाणु द्वारा इलेक्ट्रॉन को आकर्षित करने की क्षमता है।

आवर्तिता:
किसी आवर्त में बाँये से दाँये जाने पर परमाणु आकार में कमी तथा नाभिकीय आवेश में वृद्धि के कारण ऋणविद्युतता बढ़ती है। समूह में ऊपर से नीचे आने पर परमाणु आकार में वृद्धि के साथ ऋणविद्युतता घटती है।

प्रश्न 13.
मेण्डलीफ की आवर्त सारणी के उपयोग लिखिए।
उत्तर:
मेण्डलीफ की आवर्त सारणी की उपयोगिता

1. तत्वों के अध्ययन में सहायक:
आवर्त सारणी में वर्गों के समान गुण वाले तत्व तथा आवर्त में तत्वों के गुणों में क्रमिक परिवर्तन होता है। एक वर्ग के सामान्य गुणों की जानकारी होने पर उस वर्ग के सभी तत्वों के सामान्य गुणों को बताया जा सकता है।

2. नये तत्वों की खोज में सहायक:
मेण्डलीफ ने मूल आवर्त सारणी में अज्ञात तत्वों के लिये खाली स्थान छोड़ दिये थे किन्तु इन स्थान पर होने वाले तत्वों की उसने पहले ही भविष्यवाणी कर दी थी। बाद में जब इन तत्वों की खोज हुई थी तो इन तत्वों के गुण लगभग वही पाये गये जिनके मेण्डलीफ ने पहले ही भविष्यवाणी की थी। स्कैण्डियम, गैलियम, जर्मेनियम तत्वों की खोज मेण्डलीफ की भविष्यवाणी के आधार पर हुई।

3. अनेक तत्वों के परमाणु द्रव्यमान ज्ञात करने में:
किसी तत्व की आवर्त सारणी में स्थिति के आधार पर उसकी संयोजकता ज्ञात की जा सकती है। संयोजकता को उस तत्व के सही तुल्यांकी द्रव्यमान से गुणा करने से तत्व का सही परमाणु द्रव्यमान ज्ञात कर सकते हैं।

परमाणु द्रव्यमान = तुल्यांकी द्रव्यमान x संयोजकता

4. अनुसंधान में सहायक:
मेण्डलीफ की आवर्त सारणी के अवलोकन मात्र से किसी तत्व का दूसरे तत्व के प्रति व्यवहार का अनुमान लगाया जा सकता है। यह ज्ञान तथा जानकारी अनेक अनुसंधान में सहायक है।

प्रश्न 14.
संक्रमण तत्व किन तत्वों को कहते हैं? संक्रमण तत्वों के सामान्य लक्षणों पर प्रकाश डालिए।
उत्तर:
संक्रमण तत्व:
आधुनिक आवर्त सारणी में 5 ब्लॉक तथा p ब्लॉक तत्वों के मध्य स्थित तत्वों को संक्रमण तत्व कहते हैं या जिन तत्वों अथवा उनके आयनों में आंशिक भरे d कक्षक होते हैं, संक्रमण तत्व कहलाते हैं। इनमें अंतिम इलेक्ट्रॉन उपान्तय कक्ष के d कक्षक में प्रवेश करता है। इसलिये इन्हें d ब्लॉक तत्व कहते हैं। इनका सामान्य इलेक्ट्रॉनिक विन्यास ns2(n – 1)d1-10 होता है। इसके अंतर्गत III B से II B तक के वर्ग आते हैं।

संक्रमण तत्वों के सामान्य गुण:

  1. इनके बाह्यकोश के 2 कोश अपूर्ण होते हैं।
  2. इनकी प्रकृति धात्विक होती है।
  3. ये परिवर्ती ऑक्सीकरण संख्या दर्शाते हैं।
  4. ये रंगीन आयन बनाते हैं।
  5. ये संकुल लवण बनाते हैं।
  6. ये अच्छे उत्प्रेरक होते हैं।
  7. ये सरलता से मिश्रधातु बनाते हैं।
  8. ये सामान्यतः अनुचुम्बकीय होते हैं।
  9. सरलता से अन्तराली यौगिकों का निर्माण करते हैं।
  10. ये रासायनिक रूप से कम क्रियाशील होते हैं।

प्रश्न 15.
अंतर संक्रमण तत्व किसे कहते हैं? अंतर संक्रमण तत्वों के सामान्य गुण लिखिए।
उत्तर:
इन तत्वों के तीन बाहरी कक्ष अपूर्ण होते हैं। इन तत्वों का इलेक्ट्रॉनिक विन्यास करने पर अंतिम इलेक्ट्रॉन भीतर की ओर तीसरी कक्ष के उपकोश में प्रवेश करता है। इसलिये इन्हें fब्लॉक तत्व भी कहते हैं। लैन्थेनाइड्स तथा एक्टीनाइड्स तत्वों की दोनों श्रेणियाँ वर्ग 3 तथा वर्ग 4 को जोड़ने वाले तत्व हैं इसलिये इन्हें अंतर संक्रमण तत्व कहते हैं तथा इनका सामान्य इलेक्ट्रॉनिक विन्यास ns2(n – 2) f1-14 होता है।

लैन्थेनाइड्स:
इलेक्ट्रॉनिक विन्यास करने पर अंतिम इलेक्ट्रॉन 4f उपकोश में प्रवेश करता है।

एक्टिनाइड्स:
इलेक्ट्रॉनिक विन्यास करने पर अंतिम इलेक्ट्रॉन 5f उपकोश में प्रवेश करता है।

अंतर संक्रमण तत्वों के सामान्य गुण:

  1. इनके (n – 2) कोश के उपकोश में इलेक्ट्रॉन प्रवेश करता है।
  2. परिवर्ती संयोजकता दर्शाते हैं।
  3. ये सभी धात्विक प्रकृति दर्शाते हैं।
  4. इनके आयन प्रायः रंगीन होते हैं।
  5. संकुल आयन बनाने की प्रवृत्ति होती है।
  6. विद्युत् संयोजी यौगिक बनाते हैं।

प्रश्न 16.
आधुनिक आवर्त नियम क्या है? इस नियम के आधार पर बनी आवर्त सारणी का संक्षिप्त वर्णन कीजिए।
उत्तर:
आधुनिक आवर्त नियम- यह नियम मोसले ने प्रस्तुत किया था। इस नियम के अनुसार, “तत्वों के भौतिक एवं रासायनिक गुण परमाणु संख्या के आवर्ती फलन होते हैं।”
इस सारणी में सात क्षैतिज और 18 ऊर्ध्वाधर खाने हैं। 7 क्षैतिज खाने आवर्त तथा 18 ऊर्ध्वाधर खाने उपवर्ग को दर्शाते हैं।

आवर्त:

  1. प्रत्येक आवर्त में तत्व परमाणु क्रमांक के बढ़ते क्रम के आधार पर व्यवस्थित हैं।
  2. प्रत्येक आवर्त का क्रमांक उस तत्व के बाहरी कोश की मुख्य क्वाण्टम संख्या को दर्शाता है।
  3. प्रथम आवर्त को छोड़कर अन्य सभी आवर्त क्षार धातु से प्रारम्भ होकर अक्रिय गैस पर समाप्त होते हैं।
  4. प्रथम आवर्त में 2 तत्व हैं इसे अति लघु आवर्त कहते हैं।

दूसरे तथा तीसरा आवर्त लघु आवर्त हैं इनमें क्रमशः 8-8 तत्व हैं। चौथा, पाँचवाँ आवर्त दीर्घ आवर्त हैं। इनमें क्रमशः 18-18 तत्व हैं । छठवाँ आवर्त अति दीर्घ आवर्त है इसमें 32 तत्व हैं। सातवाँ आवर्त अपूर्ण है।

वर्ग:

  1. आवर्त सारणी में 18 ऊर्ध्वाधर खाने होते हैं, जो 1 से 18 वर्गों को प्रदर्शित करते हैं।
  2. प्रत्येक वर्ग में सभी तत्वों के बाह्यतम कोश का इलेक्ट्रॉनिक विन्यास समान होता है।
  3. इलेक्ट्रॉनिक विन्यास के आधार पर तत्वों को चार समुदाय में वर्गीकृत किया गया है –
    • 5 ब्लॉक
    • p ब्लॉक तत्व
    • d ब्लॉक तत्व,
    • f ब्लॉक तत्व।

प्रश्न 17.
मेण्डलीफ की आवर्त सारणी तथा आधुनिक आवर्त सारणी की तुलना कीजिए।
उत्तर:
मेण्डलीफ की आवर्त सारणी और आधुनिक आवर्त सारणी की तुलना –

मेण्डलीफ की आवर्त सारणी:

  1. इस आवर्त सारणी में तत्वों को बढ़ते हुये परमाणु द्रव्यमान के आधार पर व्यवस्थित किया गया है।
  2. मेण्डलीफ की आवर्त सारणी में कुल 9 ऊर्ध्वाधर खाने हैं जिन्हें वर्ग कहते हैं।
  3. मेण्डलीफ की आवर्त सारणी में शून्य समूह में अक्रिय गैसें हैं।
  4. मेण्डलीफ की आवर्त सारणी में भिन्न गुणों वाले तत्वों को एक ही वर्ग में रखा गया है।
  5. मेण्डलीफ की आवर्त सारणी में प्रत्येक समस्थानिक को अलग-अलग स्थान मिलना चाहिये। लेकिन समस्थानिकों के लिये कोई स्थान नहीं है।

आधुनिक आवर्त सारणी:

  1. इस आवर्त सारणी में तत्वों को बढ़ते हुये परमाणु क्रमांक के आधार पर व्यवस्थित किया गया है।
  2. आधुनिक आवर्त सारणी में कुल 18 ऊर्ध्वाधर खाने हैं जिन्हें वर्ग कहते हैं।
  3. आधुनिक आवर्त सारणी में प्रत्येक आवर्त के अंत को बाद में जोड़ा गया है।
  4. आधुनिक आवर्त सारणी में असमान गुण वाले तत्वों को अलग-अलग रखा गया है।
  5. सभी तत्वों के समस्थानिकों का परमाणु क्रमांक क्रमांक एक ही होता है। इसलिये समस्थानिकों को अलग-अलग स्थान देने की आवश्यकता नहीं है।

प्रश्न 18.
आवर्त सारणी में परमाणु के आकार में किस प्रकार परिवर्तन होता है? समझाइये।
उत्तर:
किसी परमाणु में परमाणु के नाभिक से उसके बाह्यतम कोश तक की दूरी परमाणु त्रिज्या कहलाती है।

आवर्त:
किसी आवर्त में बाँये से दाँये जाने पर कोशों की संख्या तो समान रहती है लेकिन परमाणु क्रमांक में वृद्धि के साथ बाहरी कोश में उपस्थित इलेक्ट्रॉन की संख्या में वृद्धि होती है तथा प्रभावी नाभिकीय आवेश भी बढ़ जाता है। इस प्रकार नाभिकीय आवेश के बढ़ने से नाभिक तथा बाहरी कोश के बीच आकर्षण बल बढ़ने के कारण त्रिज्या में कमी आती है अतः आवर्त में बाँये से दाँये जाने पर परमाणु त्रिज्या में कमी आती है।

वर्ग में:
किसी वर्ग में ऊपर से नीचे जाने पर परमाणु के आकार में वृद्धि होती है, क्योंकि इलेक्ट्रॉन नये कोश में प्रवेश करता है तथा कोशों की संख्या में भी वृद्धि होती है तथा नाभिकीय आवेश भी बढ़ता है। लेकिन नये कोश का प्रभाव नाभिक की आकर्षण से अधिक होता है।

तत्त्वों का वर्गीकरण एवं गुणधर्मों में आवर्तिता दीर्घ उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 1.
मेण्डलीफ की आवर्त सारणी के प्रमुख दोष क्या हैं ? इन्हें आधुनिक आवर्त सारणी में किस प्रकार दूर किया जा सकता है?
उत्तर:
मेण्डलीफ की आवर्त सारणी के मुख्य दोष निम्नलिखित हैं –

  1. हाइड्रोजन का स्थान निश्चित नहीं है।
  2. अनेक तत्व परमाणु भार के बढ़ते क्रम में नहीं हैं, कुछ भारी तत्वों को हल्के तत्वों से पहले रखा गया है।
  3. समस्थानिकों को एक ही स्थान पर रखा गया है।
  4. असमान गुण वाले तत्वों को एक ही वर्ग में एक साथ रखा गया है।
  5. समान गुण वाले तत्वों को अलग-अलग स्थान पर रखा गया है।
  6. आठवें वर्ग में तत्वों की स्थिति अनुपयुक्त है।
  7. अक्रिय गैसों को स्थान नहीं दिया गया था।

आधुनिक आवर्त सारणी में तत्वों को बढ़ते हुये परमाणु क्रमांक के क्रम में रखा गया है जिसके कारण मेण्डलीफ आवर्त सारणी के अधिकांश दोष दूर हो गये हैं।

1. अधिक परमाणु द्रव्यमान वाले तत्व का कम परमाणु द्रव्यमान वाले तत्व के पहले रखा जाना:
आधुनिक आवर्त सारणी में इन्हें परमाणु संख्या के क्रम में रखा गया है जिससे परमाणु द्रव्यमान के आधार पर रखने से जो दोष उत्पन्न हो गये थे वह दूर हो गये। जैसे-Ar परमाणु संख्या 18 को पोटैशियम परमाणु संख्या 19 होने से कोई विसंगति नहीं है।

2. समस्थानिकों का स्थान:
किसी तत्व के सभी समस्थानिकों का परमाणु क्रमांक एक ही होता है। इसलिये समस्थानिकों के लिये अलग-अलग स्थान देने की आवश्यकता नहीं है।

3. असमान गुण वाले तत्वों को एक ही स्थान पर रखा गया है:
आधुनिक आवर्त सारणी में असमान गुण वाले तत्वों को अलग-अलग रखा गया है। जैसे-उपवर्ग IA के Li, Na, K को वर्ग A में तथा उपवर्ग IB के Cu, Ag, Au को वर्ग II में रखा गया है।

4. अक्रिय गैसों का स्थान:
आधुनिक आवर्त सारणी में अक्रिय गैसों को प्रबल वैद्युत् ऋणात्मक तत्वों (वर्ग 17) और प्रबल वैद्युत् धनात्मक तत्वों (वर्ग 1) के बीच में रखा गया है जो सेतु जैसा कार्य करते हैं।

प्रश्न 2.
आयनन ऊर्जा से क्या समझते हो? आयनन ऊर्जा को प्रभावित करने वाले कारकों को समझाइए।
उत्तर:
आयनन ऊर्जा-किसी तत्व के गैसीय अवस्था में एक विलगित परमाणु से बाह्यतम इलेक्ट्रॉन को बाहर निकालने के लिये आवश्यक ऊर्जा को आयनन ऊर्जा कहते हैं।

Me(g) + ऊर्जा → M(g)+ + इलेक्ट्रॉन
Me(g) – इलेक्ट्रॉन → Me(g)+ + आयनन ऊर्जा

मात्रक:
आयनन ऊर्जा का मात्रक kJ/mol है।

आयनन ऊर्जा को प्रभावित करने वाले कारक:

1. परमाणु या आयन का आकार:
परमाणु या आयन का आकार जितना अधिक होगा नाभिक और बाह्य कोश के इलेक्ट्रॉनों के बीच उतना ही कम प्रभावी आकर्षण बल कार्य करता है जिसके कारण इलेक्ट्रॉन को निकालने के लिये कम ऊर्जा की आवश्यकता होती है। अतः आयनन ऊर्जा के मान में कमी आती है।

2. नाभिकीय आवेश:
नाभिकीय आवेश में वृद्धि होने से आयनन ऊर्जा के मान में वृद्धि होती है क्योंकि इलेक्ट्रॉन और इलेक्ट्रॉन के बीच उच्च स्थिर वैद्युत आकर्षण बल होने के कारण इलेक्ट्रॉन को निकालने के लिये ऊर्जा की आवश्यकता होती है।

3. परिरक्षण प्रभाव:
परिरक्षण प्रभाव जितना अधिक होता है आयनन विभव का मान उतना कम होता है।

4. पूर्ण एवं अर्धपूर्ण कक्षक:
पूर्ण तथा अर्धपूर्ण उपकक्ष अपेक्षाकृत अधिक स्थायी होते हैं। इस स्थिति में इलेक्ट्रॉन को निकालने के लिये अधिक ऊर्जा की आवश्यकता होती है। अतः इस प्रकार के परमाणुओं की आयनन ऊर्जा अधिक होती है।

5. बाह्य इलेक्ट्रॉनिक विन्यास:
जिन तत्वों का अष्टक पूर्ण होता है अर्थात् संयोजी कोश में 8 इलेक्ट्रॉन होते हैं वे तत्व अत्यधिक स्थायी होते हैं । अतः इनके संयोजी कोश से इलेक्ट्रॉन को निकालने के लिये अधिक ऊर्जा की आवश्यकता होती है।

6. आवर्तिता:
(i) वर्ग में आवर्तिता:
किसी भी वर्ग में ऊपर से नीचे आने पर परमाणु त्रिज्या में वृद्धि होती है जिसके कारण संयोजी कोश से इलेक्ट्रॉन को निकालने के लिये कम ऊर्जा की आवश्यकता होती है। अत: वर्ग में ऊपर से नीचे आने पर आयनन ऊर्जा में कमी आती है।

(ii) आवर्त में आवर्तिता:
किसी आवर्त में बाँये से दाँये जाने पर नाभिकीय आवेश में वृद्धि एवं परमाणु त्रिज्या में कमी के कारण संयोजी कोश से किसी इलेक्ट्रॉन को निष्कासित करने हेतु अधिक ऊर्जा की आवश्यकता होती है। अर्थात् आवर्त में बाँये से दाँये जाने पर आयनन ऊर्जा का मान बढ़ता है।

प्रश्न 3.
इलेक्ट्रॉन बन्धुता से क्या समझते हो? इसके प्रभावकारी कारकों का उल्लेख कीजिए।
उत्तर:
उत्तेजित अवस्था में किसी परमाणु या अणु या आयन के इलेक्ट्रॉन ग्रहण करने की प्रवृत्ति को इलेक्ट्रॉन बंधुता कहते हैं । अर्थात् किसी विलगित एवं उदासीन परमाणु को ऋण आयन में बदलने पर प्राप्त ऊर्जा को इलेक्ट्रॉन बंधुता कहते हैं।

इस प्रकार किसी उदासीन विलगित परमाणु में एक अतिरिक्त इलेक्ट्रॉन के प्रवेश करने से ऊर्जा मुक्त होती है अतः इलेक्ट्रॉन बंधुता का मान धनात्मक होता है। परन्तु इस ऋण आयन में और अतिरिक्त इलेक्ट्रॉन का समावेश करने के लिये अतिरिक्त ऊर्जा की आवश्यकता होती है। अतः इलेक्ट्रॉन बंधुता का मान ऋणात्मक होता है।
Ag(g) + इलेक्ट्रॉन → A(g) + ऊर्जा
A(g) + इलेक्ट्रॉन → A(g)-2-2 ऊर्जा

मात्रक:
इलेक्ट्रॉन बंधुता का मात्रक kJ/mol है।

इलेक्ट्रॉन बंधुता को प्रभावित करने वाले कारक:

1. परमाणु या आयन का आकार:
परमाणु या आयन का आकार बढ़ने से बाह्यकोश तथा नाभिक के बीच दूरी बढ़ती है। जिसके कारण नाभिक तथा ग्रहण होने वाले इलेक्ट्रॉन के बीच आकर्षण बल में कमी आती है, जिसके कारण इलेक्ट्रॉन बंधुता का मान घटता है।

2. प्रभावी नाभिकीय आवेश:
प्रभावी नाभिकीय आवेश में वृद्धि करने से नाभिक तथा ग्रहण होने वाले इलेक्ट्रॉन के बीच आकर्षण बढ़ता है, जिसके कारण इलेक्ट्रॉन बंधुता का मान बढ़ता है।

3. बाह्य कोश का इलेक्ट्रॉनिक विन्यास:
जिन तत्वों का अष्टक पूर्ण होता है। अर्थात् संयोजी कोश में आठ इलेक्ट्रॉन हैं तो तत्वों के अतिरिक्त इलेक्ट्रॉन ग्रहण करने की प्रवृत्ति शून्य होती है इसलिये ऐसे तत्वों की इलेक्ट्रॉन बंधुता का मान शून्य होता है।

4. अर्धपूर्ण तथा पूर्ण कक्षक:
पूर्ण तथा अर्धपूर्ण कक्षक अधिक स्थायी होते हैं तथा इस अवस्था में यह अतिरिक्त इलेक्ट्रॉन को सरलता से ग्रहण नहीं करते हैं इसलिये ऐसे तत्वों की इलेक्ट्रॉन बंधुता का मान शून्य होता है।

5. आवर्तिता:
(i) आवर्त में आवर्तिता:
किसी आवर्त में बाँये से दाँये जाने पर इलेक्ट्रॉन बंधुता का मान सामान्यतः बढ़ता है क्योंकि नाभिकीय आवेश बढ़ता है तथा परमाणु का आकार घटता है । इसके फलस्वरूप ग्रहण करने वाले इलेक्ट्रॉन पर नाभिक का आकर्षण बढ़ता है।

(ii) वर्ग में आवर्तिता:
किसी भी वर्ग में ऊपर से नीचे आने पर परमाणु त्रिज्या में वृद्धि के कारण आने वाले इलेक्ट्रॉन तथा नाभिक के बीच आकर्षण बल में कमी आती है, जिसके कारण इलेक्ट्रॉन बंधुता में कमी आती है।

प्रश्न 4.
आवर्त सारणी के किसी आवर्त में बाँये से दाँये जाने पर तत्वों के निम्न गुणों में होने वाले परिवर्तन को समझाइये –

  1. परमाणु त्रिज्या
  2. ऋणविद्युतता
  3. आयनन ऊर्जा
  4. धात्विक लक्षण
  5. संयोजकता।

उत्तर:
1. परमाणु त्रिज्या:
किसी भी आवर्त में बाँये से दाँये जाने पर परमाणु क्रमांक में वृद्धि के साथ नाभिक में उपस्थित प्रोटॉनों की संख्या में वृद्धि के कारण नाभिक आवेश में वृद्धि होती है। लेकिन आने वाले इलेक्ट्रॉन समान कोश में प्रवेश करते हैं जिसके कारण बाहरी कोश नाभिक की ओर दृढ़ता से आकर्षित रहता है, जिसके कारण परमाणु त्रिज्या में कमी आती है।

2. ऋणविद्युतता:
किसी भी आवर्त में बाँये से दाँये जाने पर नाभिकीय आवेश में वृद्धि तथा परमाणु त्रिज्या में कमी आती है जिसके कारण ऋणविद्युतता में वृद्धि होती है।

3. आयनन ऊर्जा:
किसी आवर्त में बाँये से दाँये जाने पर इलेक्ट्रॉन बंधुता का मान सामान्यतः बढ़ता है। क्योंकि नाभिकीय आवेश बढ़ता है तथा परमाणु का आकार घटता है जिसके कारण ग्रहण करने वाले इलेक्ट्रॉन पर नाभिक का आकर्षण बढ़ता है। .

4. धात्विक लक्षण:
किसी भी आवर्त में बाँये से दाँये जाने पर परमाणु त्रिज्या में कमी तथा नाभिकीय आवेश में वृद्धि के कारण आयनन ऊर्जा में वृद्धि होती है जिसके कारण संयोजी कोश के इलेक्ट्रॉन नाभिक के साथ दृढ़ता से जुड़े रहते हैं जिसके फलस्वरूप उसके इलेक्ट्रॉन दान करने की प्रवृत्ति में कमी आती है। इसलिये किसी भी आवर्त में बाँये से दाँये जाने पर धात्विक लक्षण में कमी आती है।

5. संयोजकता:
किसी भी आवर्त में बाँये से दाँये जाने पर ऑक्सीजन के सापेक्ष संयोजकता 1 से 7 तक बढ़ती है लेकिन हाइड्रोजन के प्रति संयोजकता 1 से 4 तक बढ़ती है फिर घटती है।

MP Board Class 11th Chemistry Solutions

MP Board Class 10th Social Science Solutions Chapter 12 Indian Constitution

In this article, we will share MP Board Class 10th Social Science Book Solutions Chapter 12 Indian Constitution Pdf, These solutions are solved subject experts from the latest edition books.

MP Board Class 10th Social Science Solutions Chapter 12 Indian Constitution

MP Board Class 10th Social Science Chapter 12 Text book Exercises

Objective Type Questions

Mp Board Class 10th Social Science Chapter 12 Question 1.
Multiple Choice Questions
(Choose the correct answer from the following)

Chapter 12 Social Science Class 10 Question (i)
The constitution is –
(a) Form of government
(b) Government of country
(c) Documents of rules
(d) Fundamental Rights and laws
Answer:
(c) Documents of rules

Indian Constitution Class 10 Mp Board Question (ii)
Which of the following is not a speciality of the Indian constitution –
(a) Parliamentary form of government
(b) Federal Government
(c) Free and impartial Judiciary
(d) Unwritten Constitution
Answer:
(d) Unwritten Constitution

Indian Constitution Class 10 Question (iii)
How many Fundamental duties have been indicated in the Constitution –
(a) 5
(b) 14
(c) 18
(d) 10
Answer:
(a) 5

MP Board Solutions

Class 10 Social Science Chapter 12 Question 2.
Fill in the blanks: (MP Board 2011, 2013)

  1. Chairman of the Constituent Assembly was …………
  2. Dr.B.R. Ambedkar was chairman of constitutional ………..
  3. The newly drafted Constitution was adopted by the constituent assembly on …………
  4. The right of equality is one of the ……………. describe in the Constitution.

Answer:

  1. Rajendra Prasad
  2. Drafting Committee
  3. 26 Nov 1949
  4. Rights

Social Science Class 10 Chapter 12 Question 3.
Match the coloumn:
Mp Board Class 10th Social Science Chapter 12
Answer:

(a) (iv)
(b) (ii)
(c) (v)
(d) (i)
(e) (iii).

MP Board Class 10th Social Science Chapter 12 Very Short Answer Type Questions

Indian Constitution 10th Class Chapter 12 Question 1.
What is a constitution?
Answer:
Constitution may be said to be a document which contains laws, rules and regulations for proper governemnt of a country.

The Constitution Of India Class 10 Chapter 12 Question 2.
Who is the protector of Fundamental Rights in India?
Answer:
Supreme Court (Judiciary).

Define Constitution Class 10 Chapter 12 Question 3.
When fundamental duties were added in the Constitution?
Answer:
According to the 42th Amendment in 1976 the fundamental duties were added in the Constitution of India.

Mp Board Class 8 Social Science Chapter 12 Question 4.
In whose guidance the Independence Bill was drafted?
Answer:
Lok Manya Bal Gangadhar Tilak.

MP Board Class 10th Social Science Chapter 12 Short Answer Type Questions

10th Social Science Match The Following Chapter 12 Question 1.
What is the importance of Constitution? (MP Board 2010)
Answer:
Constitution is needed for properly running the government and clearly defining the roles and functions of the legislature, judiciary and administration so also for ensuring a balance and coordination amongst them. In the absence of Constitution there is a strong possibility of conflicts between different organs of the Government and at times even a situation of anarchy may arise Fundamental rights and duties of citizens are also specified in the Constitution. It can be said that Constitution is the very base of Government.

MP Board Solutions

Mp Board Class 8 Social Science Solution Chapter 12 Question 2.
Write an introductory note on Constituent Assembly?
Or
Give the introduction of Constitution Assembly? (MP Board 2009)
Answer:
The formation of Constituent Assembly was the result of the ‘Swaraj Bill’ prepared under the directions of Lokmanya Bal Gangadhar Tilak in 1895, the statement of Mahatma Gandhi on 5 January, 1922 that, “Indian Constitution shall be as per the wishes of the people of India”, the National Convention of February 1924 under the Chairmanship of Tej Bahadur Sapru and the demand in the Patna Convention of Swaraj Dal in May 1934.

The members of the Constituent Assembly could not be elected directly by adult franchise therefore as a practical solution provincial Assemblies were utilised as election bodies.

Question 3.
Who were the prominent members of the Constituent Assembly from Madhya Pradesh?
Answer:
Important members of the Constituent Assembly from the existing provinces viz. Central Province a Berar, Central India region (Bhopal, Gwalior, Indore and Rewa) were Pandit Ravishankar Shukla, Seth Govind Das, Hari Vishnu Kamat, Ghanshyam Singh Gucch, Gopikrishan Vijayvargiya, Radhavallabh Vijayvargiya and Thakur Lai Singh.

Question 4.
What do you understand by Directive Principales of the State Policy?
Or
What do you mean by Directive Principles of State Policy? Write. (MP Board 2009)
Answer:
Directive Principles of the State Policy:
In the fourth part of the Constitution, fundamental principles of Governance have been described, these are known as directive principles. The principles are guidelines for political, social and economic programmes for modem democracy. Although these principles cannot be directed by any court to be enforced but they are fundamental in the good Governance of the country. Through these directive principles an attempt has been made to set up a welfare state in India.

Question 5.
What is importance of Preamble in the Constitution?
Answer:
In the Preamble of the Constitution the framers of the Constitution have incorporated the objectives of the Constitution, so also values and ideals. This is called the essence or spirit of the Constitutions, it is the resolve and feelings of the framers of the Constitution.

In the very beginning of the Preamble it has been indicated that the Constitution has been framed as per the wishes of the people and ultimate powers vest in the people. It has been stated that India shall be sovereign, democratic republic. As per the 42nd Constitutional amendment; India was declared as a socialist and secular state.

Question 6.
Explain the meaning of Socialist and Secular. (MP Board 2009, 2013)
Answer:
Socialism and Secular:
By a socialist state is meant that the Indian economy shall be based on socialistic pattern of society. Minimum basic needs of every Indian shall be fulfilled. Socialism as per the Indian conditions shall be adopted. The ideal of secularism has been cherished in the Constitution. It means that the state shall protect the interests of all religious beliefs but will not have any particular religion as state religion. The state shall not discriminate citizens on the basis of religion. Every citizen is free to follow its religion and beliefs.

MP Board Class 10th Social Science Chapter 12 Additional Important Questions

Objective Type Questions

Question 1.
Multiple Choice Questions:
Choose the correct answer from the following

Question (i)
Cabinet Mission Plan came to India in –
(a) 1942
(b) 1944
(c) 1946
(d) 1948.
Answer:
(b) 1944

Question (ii)
Indian Constitution is divided into –
(a) 20 Parts
(b) 21 Parts
(c) 22 Parts
(d) 23 Parts.
Answer:
(c) 22 Parts

Question (iii)
How many articles are there in Indian constitution –
(a) 320
(b) 345
(c) 370
(d) 395
Answer:
(d) 395

Question 1.
Fill in the blanks:

  1. The first draft on Constitution was submitted to the President of the Constituent Assembly on …………..
  2. The first meeting of Constituent Assembly was held on 9 December………….

Answer:

  1. 21 February, 1948
  2. 1946

Question 3.
True and False type questions:

  1. The demand for Constituent Assembly was related with National Movement.
  2. Indian Constitution had 395 Articles at the time of final submission.
  3. Supreme Court is the protector of fundamental rights? (MP Board 2009)
  4. Dr. Rajendra Prasad was the Chairman of the Drafting Committee of Constitution? (MP Board 2009)

Answer:

  1. True
  2. True
  3. True
  4. False

Answer in One – Two Words or One Sentence:

Question 1.
What did the citizens obtain by enjoying fundamental rights?
Answer:
The citizens can live independent and progressive life by enjoying fundamental rights.

Question 2.
How has Abraham Lincoln defined democracy?
Answer:
Abraham Lincoln defined democracy, as that it is government of the people, by the people and for the people.

Question 3.
When was the first meeting of the Constituent Assembly held?
Answer:
First meeting of the Constituent Assembly was held on 9 December, 1946.

Question 4.
Who was elected the Chairman for first meeting of the Constituent Assembly?
Answer:
Dr. Sacchidanand Sinha.

MP Board Solutions

Question 5.
When was new constitation passed and adopted?
Answer:
The new constitution was passed and adopted on 26 November, 1949.

Question 6.
Which plan is the basis of Indian constitution.
Answer:
By 42nd Amendment (1976).

MP Board Class 10th Social Science Chapter 12 Very Short Answer Type Questions

Question 1.
What is Universal adult franchise?
Answer:
The Constitution has given the right to vote to all its adult citizens. By adult franchise is meant that every adult citizen has a right to vote on attainment of a definite age. In the Constitution this right is given to all citizens who attain the age of 18 years, irrespective of their religion, race, caste, sex or place of the person.

Question 2.
What do you mean by a soverign state?
Answer:
The country will decide its own foreign and domestic policies. It is not under any foreign rule and it can have its own policies of behaviour at the international level.

Question 3.
When did the new constitution was adopted?
Answer:
The new Constitution was passed and adopted on 26 November, 1949. Certain provisions of the Constitution in respect of citizenship, election and interim Parliament were adopted with immediate effect and remaining provisions became effective from 26 January, 1950, which was called as the date of promulgation of the Constitution.

Question 4.
What did Dr. B.R Ambedkar say about the Constitution of India?
Answer:
Dr. B.R. Ambedkar said about the Indian Constitution:
It is the bulkiest in the world. Here people of different religions and classes live. Detailed description of all this is given in the constitution of the country.

Question 5.
Explain the right of speech and freedom of expression?
Answer:
The right to freed on grants certain freedoms to the Indians. One such freedom is right to state one’s views and express them. But this freedom is to be exercised within the framework of public order, decency, sovereignty etc.

Question 6.
Explain the right to constitutional remedies?
Answer:
Right to constitutional remedies is one of the important fundamental rights. According to this right, the courts are required to protect the fundamental rights from any encroachment. For this, the courts have the power to issue writs. Habeas Corpus, Prohibition, Quo Warranto, Mandamus, Certiorari.

Question 7.
Why Fundamental Rights are incorporated in the Indian Constitution?
Answer:
The incorporation of fundamental rights in the Constitution is a matter of great significance. This shows that how important and sacred fundamental rights have been considered and how they are thought to be so Fundamental that they have been incorporated in the Constitution.

Question 8.
Why the Indian citizen should follow the Fundamental Duties?
Answer:
The Indian citizen follows and should follow fundamental duties because –

  1. Duties constitute part of the constitution and as such possess legal states.
  2. They have to enjoy rights and hence should follow duties.

MP Board Class 10th Social Science Chapter 12 Short Answer Type Questions

Question 1.
Explain the right to equality?
Answer:
Right to equality has been explained in Articles 14, 15, 16, 17 and 18. The kind of equality in the constitution is given as under –

  1. Equality before law and equal protection of law.
  2. Prohibition of discrimination on grounds of caste, creed, colour, sex, region or any one of them.
  3. Equal opportunities to all, based only on qualifications.
  4. Abolition of untouchability.
  5. Abolition of all title except academic and military.

Question 2.
What rights are received from the right against exploitation?
Answer:
The following rights are received from the right against exploitation –

  1. Prohibition of bonded labour.
  2. Prohibition of Adivasis system.
  3. Prohibition of employment of children below the age of 14 in any hazardous beings.
  4. Prohibition of trafficing in human beings.

Question 3.
Distinguish between Fundamental Rights and Directive Principles?
Answer:

  1. The Fundamental Rights are enforceable while the Directive Principles are not enforceable.
  2. The Fundamental Rights are in the form of injustiction on the state while the Directive Principles are in the form of directives to the state.
  3. The Fundamental Rights are rights of the citizens the Directive Principles are the duties of the state.
  4. The Fundamental Rights lay the foundations of political democracy while the Directive Principles, of economic democracy.
  5. The Fundamental Rights are, by and large, negative whereas the Directive Principles are positive in character.

Question 4.
What do you mean by the Federal Form of Government?
Answer:
Federal Form of Government As per the First Schedule of the Constitution, India is a federation of States. Thus federal form of Government has been set up in India. The powers of Government are not Centralized at one place and are divided between the Center and the States and both have independence in their respective jurisdictions.

The Constitution is written and rigid to a considerable extent and it is supreme. The Supreme Court is the protector of the Constitution. Supreme Court has also the powers to interpret the Constitutional provisions and decide Constitutional disputes arising between the Center and the States.

Question 5.
Discribe the salient features of Indian Constitution?
Answer:
Salient Features of Indian Constitution are:

  1. Written and the largest Constitution.
  2. Mix of rigidity flexibility.
  3. Sovereign Republic.
  4. Socialist and secular republic.
  5. Parliamentary system.
  6. Federal system.
  7. Free and impartial judiciary.
  8. Fundamental rights and basic duties.
  9. Directive principles of state policy.
  10. Universal adult franchise.

Question 6.
Indian Constitution is the matrix of flexibility and rigidity. Explain?
Answer:
A Constitution is termed as rigid or flexible on the basis of the procedure adopted for its amendment. If the constitution can be adopted by a simple procedure followed for framing simple laws it is termed as flexible but if a special procedure is needed for amendment then it is termed as rigid or inflexible.

There are three procedures of amendments in the Indian Constitution. Certain provisions can be amended by a simple majority, some provisions can be amended by specific majority and certain important ones can only be amended by specific majority and consent of atleast 50 per cent number of states. Thus it is a mix of flexibility and rigidity.

Question 7.
How many types of Constitution can be there?
Answer:
The fathers of Indian Constitution consulted and took useful provisions from Constitutions of several countries. The directive principles have been taken from the Constitution of Ireland. The idea of Fundamental Rights has been taken from the Constitution of United States of America. The concept of Federation of states (Federal form of Government) is taken from Canadian Constitution.

MP Board Class 10th Social Science Chapter 12 Long Answer Type Questions

Question 1.
Describe the characteristics of the Fundamental Rights and Duties in Indian Constitution? (MP Board 2011, 2013)
Or
Describe the fundamental duties of citizen of India? (MP Board 2009)
Or
Describe the fundamental rights and citizen? (MP Board 2009)
Answer:
The Fundamental Rights are as follows:

  1. Right to equality.
  2. Right to freedom.
  3. Right against exploitation.
  4. Right to freedom of religion.
  5. Cultural and educational rights.

Fundamental Rights and Duties:
For alround development of the citizens, fundamental rights are essential. There is a provision for fundamental righjts for the citizens. In case they are violated, a citizen has the right to approach the High Court or Supreme Court. During the period of Emergency these Fundamental Rights can be suspended.

The provision of Fundamental Duties of the citizens have been added in the Constitution by an amendment (42nd Amendment of the Constitution, 1976). Ten fundamental duties have been specified in the Constitution.

Fundamental Duties:
It shall be the duty of every citizen of India.

1. To abide by the Constitution and respect its ideals and institutions, the National Flag and the National Anthem.

2. To cherish and follow the noble ideals which inspired our national struggle for freedom.

3. To uphold and protect the sovereignty, unity and integrity of India.

4. To defend the country and render national service when called upon to do so.

5. To promote harmony and spirit of common brotherhood amongst all the people of India transcending religious, linguistic and regional or sectional diversities, to renounce practices derogatory to the dignity of women.

6. To value and preserve the rich heritage of our composite culture.

7. To protect and improve the natural environment including forest, lakes, rivers and wildlife and to have compassion for living creatures.

8. To develop the scientific temper, humanism and the spirit of inquiry and reform.

9. To safeguard public property and to abjure violence.

10. To strive towards excellence in all spheres of individual and collective activity so that the nation constantly rises to higher levels of endeavor and achievement.

Question 2.
Discuss any four features of the Indian Constitution?
Or
Describe the main features of Indian constitution? (MP Board 2009)
Or
Describe the Parliamentary and Federal System of the Government?(MP Board 2009)
Or
Write any five features of Indian constitution? (MP Board 2009)

Answer:
The constitution of India is the lengthiest constitution. Accordingly it possesses certain important features. Some of these can be discussed as under:

1. Federal Form of Government:
The Constitution does possess all the formal requisites of a federation written constitution, rigidity of the constitution, decentralisation, powerful judiciary. But it can change into a unitary system during emergency.

2. Parliamentary System:
The Present of India is constitutional head whereas the council of Ministers is the real. All the ministers are collectively responsible in the Lok Sabha. The ministers work as a team they swim, and sink together.

3. Abolition of Untouchability:
The constitution abolishes untouchability. Untouchability is declared against law and against the constitution.

4. Universal Adult Franchise:
The universal adult franchise has been guaranteed by the constitution. Every citizen, irrespective of any caste, creed, colour or sex, has the right to vote and participate in administration.

Question 3.
Mention some of the Directive Principles of State Policy?
Answer:

  1. The state would prohibit concentration of material and natural resources in the hands of the few.
  2. Public assistance to the poor, the aged and the helpless.
  3. Right to work and to education.
  4. Equal wages for equal work, for both men and women.
  5. Organising and empowering the Village Panchayats to make them units of self – government.
  6. Promoting cottage and small scale industries in the rural, areas.
  7. Enacting prohibition.
  8. Prohibiting the slaughter of the cows and those animals which give milk.
  9. Organising agriculture on scientific lines and promoting animal husbandry.
  10. Providing free and compulsory education to the children below 14 years within a period of ten years.
  11. Uniform civil code for the whole country.
  12. Separation of executive from judiciary.
  13. Protection of monuments of national importance.
  14. Promoting world peace and security, cooperation and arbitration.
  15. Giving economic and educational assistance to Scheduled Castes and Scheduled Tribes and other weaker sections of the society.

Question 4.
Explain briefly to the Drafting Committee for the preparation of Indian Constitution?
Answer:
Drafting Committee:
Drafting of the Constitution was not an easy task, therefore different sub committees were formed to facilitate drafting of the Constitution. 10 sub – committees were relating to matters of procedure and 8 sub – committees related to matters of facts. Important sub – committees were Rules, Business and Drafting Committee, Steering Committee, Committee on Fundamental Rights Union Powers Committee, Minority Rights Sub-committee, etc.

To give final shape to the reports and suggestions of the above sub – committees a drafting Committee under the chairmanship of Dr. Bhimrao Ambedkar was formed. Other members of this Committee were N. Gopalswami Ayangar, Aladi Krishna Swami Aiyyar, Sayyad Mohammad Sadullah, K.M. Munshi. B.L. Mittra and D.P. Khaitan subsequently B.L. Mittra and D.P. Khaitan were replaced by N. Madhavan Rao and T.T. Krishnamachari. The Draft Constitution was submitted to the President of the Constituent Assembly on 21 February, 1948. Thereafter detailed discussions were held in the Constituent Assembly.

Question 2.
Discuss the cultural base of Indian Constitution.
Answer:
The framers of the Constitution were aware of the fact that the life of the people of a country is closely associated with the culture and rich heritage of the country the identity of a country is not on the basis of political organisation or beliefs but on the basis of the culture, traditions, beliefs and feelings of nationality.

Indian Constitution is not merely a political document but much more than that. It contains the culture and National Values in it. In the manuscript of the Constitution, the rice cultural and national heritage of the country has been depicted through representative pictures. These pictures depict the traditions from Mohan – jodaro and Vedic period to the period of Freedom Movement.

These pictures are of the bull seal of Mohan – jodaro period, Lord Ram returning with Sita in the ‘Pushpak Viman’ after victory of Lanka, preaching of Gita by Sri Krishan to Arjuna, Lord Buddha, Mahavir Swami, Akbar and in the background Mughal architecture, Shivaji, Guru Govind Singh, Tipu Sultan, the historical Dandi March of Mahatma Gandhi, the Himalayas the Indian ocean etc.

MP Board Class 8th Social Science Solutions Chapter 3 Struggle Against the British Rule

MP Board Class 8th Social Science Solutions Chapter 3 Struggle Against the British Rule

MP Board Class 8th Social Science Chapter 3 Text Book Exercise

chose the correct option of the following

Mp Board Class 8 Social Science Solution Chapter 3 Question 1.
Which uas nottriba1 uprising
(a) Vellore uprising
(h) Bull uprising
(c) Santhal upring
(d) Mundda uprising
Answer:
(a) Vellore uprising

Mp Board Class 8 Social Science Chapter 3 Question 2.
Who did not join 1857 struggle
(a) Rani Laxmi BaI
(b) Tatya Tope
(c) Bahadur Sháh Zafar
(d) Dileep Singh
Answer:
(d) Dileep Singh

Struggle Against The British Rule MP Board Class 8 Question 3.
Which of the British policy Thred Bhil? to revolt?
(a) industrial policy
(b) Agriculture policy
(c) religious policy
(d) State’s inter ference
Answer:
(b) Agriculture policy

MP Board Class 8th Social Science Chapter 3 Very Short Answer Type Questions

Struggle Against The British Rule Class 8 MP Board Question 1.
Which book mentions about San yasi struggle?
Answer:
Bankim Chandra Çhatarjee mentioned about Sanyasi uprising in his book. “Anand Math”

Class 8 Social Science Chapter 3 Mp Board  Question 2
Who Iedthe SanUil uprising”
Answer:
The Sauthal uprising was led by leaders Sido and Kanhu.

Question 3.
Who was the leader of Wahabi upring?
Answer:
Sayyed Ahmed of Raibareily led the Wahabi streiggie.

MP Board Class 8th Social Science Chapter 3 Short Answer Type Questions

Question 1.
When and where Khol uprising took place?
Answer:
The kohl led Budho Bhagat Bharat lanched revolit in 1831 in singhbham ranchi palamu hajari bagh manbhumi and other pleces the kohls protested against their landas given to muslim and sikh peasants.

Questions 2.
Name the places of India where 1857 struggle was ‘widespread?
Answer:
The places where the 1857 struggle was wide spread were Delhi. Awadh. Rohilkhand. Bundelkhand Allbhahad, Agra Meerut. Kanpur and jhansi.

MP Board Class 8th Social Science Chapter 3 Long Answer Type Questions

Question 1.
Describe the Santh:il uprising?’
Answer:
The Snthal revolt was led by Santhal leaders and sido and Kanhu in 1856. It was one of the most power ful uprisings. ‘The opposed the maltreatment up-rings they opposed the maltrrement of lands revenu offioal in daman -e- koh area this area lies between Bhagalpur and Rajmahahal the santhals declared end of the company rule in their region and revolt and were later suppressed by Britisher’s.

Question 2.
What were the causes of resentment among sepoys
Answer:
The causes of discontent among the Indian soldiers of the British army were as under:

  • the salaries of Indian soldiers were very low and were practically for hem the higher posts in the army were reserved for European officers only .
  • there was great disparity between the salaries of Indian and European soldiers.
  • the Indian splicer felt the injustices which the old Royal families in Indian had been suffering the increased misery which the conman people had to suffer affected the soldiers directly as they were part and parce of the Indian society
  • the cartridges of the newly introduced rifle were greased with cows and pigs fat their covers had to be cut with teeth before loading the rifle. the use of these greased cartage offended the religions sentiments of both the Hindu and the Muslim soldiers it became the immediate cause of the Revolt.

Question 3.
What were the major cuses of the failure of 1857 struggle
Answer:
There were many causes that led to the failure of the revolt of 1857:

  • Not Planned –  The revolt of 1857 was not well planned. it sparked off abruptly
  •  No Single or Common Object – The leaders of revolt in varies part of the country had different and limited Sanous parts of the objectives before them
  • No Common Leadership – There was no common leader for the whole upping each region had its own leader.
  • No Coordination – The uprising suffered from lack of coordination. There was no coordination among the rebel in various religions of the country
  • Localized – It was Wotan all-India revolt It was localized in certain areas. it dd not start in South and Punjab
  • Led by some experiences and Landlords – it was led by some experiences and landlord who were deprived of territories.
  • Not People’ Revolt – it was not people revolt it was only at one two pleases where conman people participated
  • New Emerging middle class did not participated
  • some Indian rulers are sided with the British: some Indian rulers kept away while some rulers sided with the English
  • lack of resource – the rebel did not have enough financial resources and weapons of war.

Question 4.
Write notes on:
1. sanyasis upring
2. Whabi upring
Answer:
1. sanyasis upring:
this upring was important among other civil up-rings. the apathy of British government after 1770 famine in Bengal economic loot and ban on religious they attacked fractious colonies and forts of the company governor General Warren Hastings could brought the revolt under control.

2. Whabi upspring :
sayyed Ahmed of Railbareilly led the Wahhabi And changes in Islam sayyed Ahwed launned revolt against sikh rule in Punjab and when company took control over Punjab in 1849 Wahhabi raised rebellion against British rule got most powerful challenge from Wahhabi struggle.

Question 5.
make an album with the help of leaders who participated in 1857 struggle.
Answer:

MP Board Class 8th Social Science Solutions Chapter 3 Struggle Against the British Rule img 1
MP Board Class 8th Social Science Solutions Chapter 3 Struggle Against the British Rule img 2
Question 6.
South major regions of 1857 struggle in the out line map of India.
Answer:
MP Board Class 8th Social Science Solutions Chapter 3 Struggle Against the British Rule img 2

MP Board Class 8th Social Science Solutions