MP Board Class 12th Chemistry Solutions Chapter 1 ठोस अवस्था

MP Board Class 12th Chemistry Solutions Chapter 1 ठोस अवस्था

ठोस अवस्था NCERT पाठ्यनिहित प्रश्नोत्तर

प्रश्न 1.
ठोस कठोर क्यों होते हैं ?
उत्तर
संगठनात्मक कणों के बीच प्रबल अन्तःआण्विक बल की उपस्थिति के कारण ठोस कठोर होते हैं।

प्रश्न 2.
ठोस का आयतन निश्चित क्यों होता है ?
उत्तर
संरचनात्मक कणों के स्थिर होने के कारण ठोस कठोर होते हैं। इस कारण इनका आयतन . निश्चित होता है।

प्रश्न 3.
निम्नलिखित को अक्रिस्टलीय तथा क्रिस्टलीय ठोसों में वर्गीकृत कीजिये –
पॉलियूरिथेन, नैफ्थेलीन, बेन्जोइक अम्ल, टेफ्लॉन, पोटैशियम नाइट्रेट, सेलोफेन, पॉलीविनाइल क्लोराइड, रेशकॉच, ताँबा।
उत्तर
अक्रिस्टलीय ठोस – पॉलियूरिथेन, टेफ्लॉन, सेलोफेन, पॉलिविनाइल क्लोराइड।
क्रिस्टलीय ठोस – बेन्जोइक अम्ल, पोटैशियम नाइट्रेट, कॉपर।

प्रश्न 4.
काँच को अतिशीतित द्रव क्यों माना जाता है ?
उत्तर
द्रव के समान काँच की प्रवृत्ति भी बहने की होती है, परन्तु बहुत धीमी, इसलिये इसे अतिशीतित द्रव कहते हैं।

प्रश्न 5.
एक ठोस के अपवर्तनांक का सभी दिशाओं में समान मान प्रेक्षित होता है। इस ठोस की प्रकृति पर टिप्पणी कीजिए। क्या यह विचलन गुण प्रदर्शित करेगा?
उत्तर
ठोस अक्रिस्टलीय होते हैं, क्योंकि अक्रिस्टलीय ठोस आइसोट्रोपिक प्रकृति के होते हैं। नहीं, ये विदलन गुण नहीं प्रदर्शित करते हैं।

प्रश्न 6.
उपस्थित अंतरा-आण्विक बलों की प्रकृति के आधार पर निम्नलिखित ठोसों को विभिन्न संवर्गों में वगीकृत कीजिए- पोटैशियम सल्फेट, टिन, बेन्जीन, यूरिया, अमोनिया, जल, जिंक सल्फाइड, ग्रेफाइट, रूबिडियम, ऑर्गन, सिलिकन कार्बाइड।
उत्तर
पोटैशियम सल्फेट- आयनिक, टिन-धात्विक, बेंजीन आण्विक (अध्रुवीय) यूरिया-आण्विक (ध्रुवीय), अमोनिया-आण्विक (H-बंधित), पानी-आण्विक (H-बंधित), जिंक सल्फेट-आयनिक, ग्रेफाइटसहसंयोजी या नेटवर्क, रूबिडियम-धात्विक, आर्गन-आण्विक (अध्रुवीय), सिलिकन कार्बाइड – सहसंयोजी या नेटवर्क।

प्रश्न 7.
ठोस A, अत्यधिक कठोर तथा ठोस एवं गलित दोनों अवस्थाओं में विद्युत्रोधी है और अत्यंत उच्च ताप पर पिघलता है। यह किस प्रकार का ठोस है ?
उत्तर –
सहसंयोजी ठोस।

प्रश्न 8.
आयनिक ठोस गलित अवस्था में विद्युत् चालक होते हैं परन्तु ठोस अवस्था में नहीं। व्याख्या कीजिये।
उत्तर –
ठोस अवस्था में आयन स्वतंत्र नहीं होते, अत: आयनिक ठोस अच्छे चालक नहीं होते हैं। जबकि गलित अवस्था में आयन मुक्त रहते हैं अत: विद्युत् धारा प्रवाहित होती है या विद्युत् के चालक होते हैं।

प्रश्न 9.
किस प्रकार के ठोस विद्युत् चालक, आघातवर्ध्य और तन्य होते हैं ?
उत्तर
धात्विक ठोस, विद्युत् के चालक उनमें उपस्थित मुक्त इलेक्ट्रॉनों के कारण होते हैं।

प्रश्न 10.
जालक बिन्दु के महत्व दीजिए।
उत्तर
प्रत्येक जालक बिन्दु ठोस का एक संघटनात्मक कण होता है। ये रचनात्मक कण एक परमाणु एक अणु (परमाणुओं का समूह) या एक आयन होता है।

प्रश्न 11.
एकक कोष्ठिका को अभिलक्षणित करने वाले पैरामीटरों के नाम बताइए।
उत्तर
एक एकक कोष्ठिका अभिलक्षणित होती है –
(i) तीन किनारे के आयामों के साथ, जिन्हें a, b तथा c द्वारा प्रदर्शित किया जाता है।
(ii) किनारे या कोने के बीच के कोण, जिन्हें α , β तथा γ द्वारा प्रदर्शित करते हैं । कोण α, b तथा c के बीच का कोण, β, a तथा c के बीच का और γ, a तथा b के बीच का कोण होता है।

प्रश्न 12.
निम्नलिखित में विभेद कीजिए –
(1) षट्कोणीय और एकनताक्ष एकक कोष्ठिका।
(ii) फलक केन्द्रित और अंत्य-केन्द्रित एकक कोष्ठिका।
उत्तर

  • षट्कोणीय एकक कोष्ठिका के लिये a = b ≠ c, α = β = 90°, γ = 120° एकनताक्ष एकक सेल के लिये a ≠b ≠c, α = γ = 90°, β= 90°
  • फलक केन्द्रित एकक सेल में किनारों पर बिन्दु के साथ-साथ प्रत्येक फलक के केन्द्र पर भी बिन्दु होता है। इसमें प्रत्येक एकक सेल में 4 परमाणु होते हैं।

अंत्य-केन्द्रित एकक कोष्ठिका में प्रत्येक किनारों पर तथा कोई दो विपरीत फलकों के केन्द्र पर भी बिन्दु होता है। इसमें प्रत्येक एकक सेल में 2 परमाणु होते हैं।

प्रश्न 13.
स्पष्ट कीजिए कि एक घनीय एकक कोष्ठिका के – (i) कोने और (ii) अंतःकेन्द्र पर उपस्थित परमाणु का कितना भाग सन्निकट कोष्ठिका से सहभाजित होता है।
उत्तर

  • कोने पर स्थित एक परमाणु का 1/8 भाग सन्निकट कोष्ठिका से सहभाजित होता है।
  • एक घनीय एक सेल का अंतः केन्द्र पर उपस्थित परमाणु किसी भी दूसरी एकक कोष्ठिका या सेल से सहभाजित नहीं होता है। अत: यह पूर्णतः एकक सेल के साथ होता है।

प्रश्न 14.
एक अणु की वर्ग-निविड संकुलित परत में द्विविमीय उपसहसंयोजन संख्या क्या है ?
उत्तर
4.

प्रश्न 15.
एक यौगिक षट्कोणीय निविड संकुलित संरचना बनाता है। इसके 0.5 मोल में कुल रिक्तियों की संख्या कितनी है ? उनमें से कितनी रिक्तियाँ चतुष्फलकीय हैं ?
उत्तर
एक परमाणु की षट्कोणीय निविड संकुलित संरचना में तीन रिक्तियाँ एक अष्टफलकीय तथा दो चतुष्फलकीय होती हैं।
0.5 मोल में परमाणु की संख्या = 0.5 × 6.022 × 1023
= 3.011 × 1023
कुल रिक्तियों की संख्या = 3 × 3.011 × 1023
= 9.033 × 1023
चतुष्फलकीय रिक्तियों की संख्या = 2 × 3.011 × 1023
= 6.022 × 1023

प्रश्न 16.
एक यौगिक दो तत्वों M और Nसे बना है। तत्व N, ccp संरचना बनाता है और M के परमाणु चतुष्फलकीय रिक्तियों के 1/3 भाग को अध्यासित करते हैं। यौगिक का सूत्र क्या है ?
उत्तर
चूँकि ccp संरचना के N रूप में प्रत्येक एकक सेल में 4 परमाणु होते हैं।
इकाई सेल में N परमाणुओं की संख्या = 4
प्रत्येक परमाणु के लिये यहाँ दो चतुष्फलकीय रिक्तिका है। अत: यहाँ प्रति एकक सेल 8 चतुष्फलकीय रिक्तिका होगी।
∴ M परमाणु की संख्या =\(\frac{1}{3} \times 8=\frac{8}{3}\)
सूत्र M8/3N4 या M2N3

प्रश्न 17.
निम्नलिखित में से किस जालक में उच्चतम संकुलन क्षमता है –
(1) सरल घनीय
(ii) अंतः केन्द्रित घन और
(iii) षट्कोणीय निविड संकुलित जालक।
उत्तर
संकुलन क्षमता होती है –
सरल घनीय = 52.4 %
अंतः केन्द्रित घन = 68 %
षट्कोणीय निविड संकुलित जालक = 74%
∴षट्कोणीय निविड संकुलित जालक में उच्चतम संकुलन क्षमता होती है।

प्रश्न 18.
एक तत्व का मोलर द्रव्यमान 2.7 x 102 kg मोल -1 है, यह 405 pm लम्बाई की भुजा वाली घनीय एकक कोष्ठिका बनाता है। यदि उसका घनत्व 2.7 x 103 kg M3 है तो घनीय एकक कोष्ठिका की प्रकृति क्या है ?
उत्तर
हम जानते हैं –
Z = \(\frac{a^{3} \times \mathrm{N}_{\mathrm{A}} \times d}{\mathrm{M}}\) जहाँ, a = 405 PM .
= 405 x 10-10 cm
d = 2.7 x 103 किलोग्राम m-3= 2.7 ग्राम सेमी -3
M = 2.7 x 10-2kg मोल -1 = 27 ग्राम मोल -1
NA = 6.023 x 1023
Z = \(\frac{\left(405 \times 10^{-10}\right)^{3} \times 2.7 \times 6023 \times 10^{23}}{27}\)
Z = 4
∴ तत्व fcc (ccp) एकक सेल होगा।

प्रश्न 19.
जब एक ठोस को गर्म किया जाता है, तो किस प्रकार का दोष उत्पन्न हो सकता है, इससे कौन-से भौतिक गुण प्रभावित होते हैं और किस प्रकार ?
उत्तर
जब ठोस को गर्म करते हैं, तो रिक्तिका दोष उत्पन्न होता है। क्योंकि गर्म करने पर कुछ परमाणु या आयन जालक सतह को पूर्णतः छोड़ देते हैं। इस कारण पदार्थ का घनत्व घटता है।

प्रश्न 20.
निम्नलिखित किस प्रकार का स्टॉइकियोमीट्री दोष दर्शाते हैं –
(i) ZnS,
(ii) AgBr.
उत्तर
(i) ZnS, फ्रेंकेल दोष आयनों के आकार में बड़ा अन्तर होने के कारण प्रदर्शित करते हैं।
(ii) AgBr, फ्रेंकेल तथा शॉट्की दोनों दोष दर्शाता है।

प्रश्न 21.
समझाइए कि एक उच्च संयोजी धनायन को अशुद्धि की तरह मिलाने पर आयनिक ठोस में रिक्तिकाएँ किस प्रकार प्रविष्ट होती हैं ?
उत्तर
जब आयनिक ठोस में एक उच्च संयोजकता वाला केटायन अशुद्धि के रूप में मिलाया जाता है, तब मूल केटायन की कुल सतह उच्च संयोजकता वाले केटायन द्वारा घिर जाती है। उदाहरण के लिये – NaCl में Sr+2, प्रत्येक Sr+2 दो Na+ आयनों को प्रतिस्थापित करता है। ये एक Na+ आयन के एक साइट को घेरता तथा दूसरा साइट हमेशा खाली रहता है। इस प्रकार बनी केटायन रिक्तिका Sr+2 आयन की संख्या के बराबर होती है।

प्रश्न 22.
जिन आयनिक ठोसों में धातु-आधिक्य दोष के कारण ऋणात्मक रिक्तिका होती है, वे रंगीन होते हैं। इसे उपयुक्त उदाहरण की सहायता से समझाइए।
उत्तर
आयनिक ठोसों में धातु आधिक्य दोष के कारण बनी ऋणायनिक रिक्तिका विद्युतीय उदासीनता बनाये रखने के लिये मुक्त इलेक्ट्रॉनों द्वारा भरी जाती है। क्रिस्टल पर पड़ने वाले दृश्य प्रकाश की ऊर्जा को इन इलेक्ट्रॉनों द्वारा ग्रहण करके उत्तेजित अवस्था में जाने के कारण से रंगीन हो जाते हैं। उदाहरण के लिये – जब NaCl को सोडियम वाष्प की उपस्थिति में गर्म करने पर, Na+ आयन अधिकता में होते हैं, Clआयन उनके सामान्य स्थान को छोड़कर सतह पर आ जाते हैं । ऐनायन का खाली स्थान इलेक्ट्रॉन द्वारा भर जाता है तथा F-केन्द्र का निर्माण होता है। ये दृश्य प्रकाश से ऊर्जा अवशोषित कर पूरक रंगों का विकिरण करते हैं।

प्रश्न 23.
वर्ग-14 के तत्व कोn-प्रकार के अर्धचालक में उपयुक्त अशुद्धि द्वारा अपमिश्रित करके रूपांतरित करना है। यह अशुद्धि किस वर्ग से संबंधित होनी चाहिये ?
उत्तर
n-प्रकार के अर्धचालक उच्चतम समूह की अशुद्धियों के डोपिंग करने से प्राप्त होते हैं । अतः वर्ग 14 के तत्वों को n-प्रकार अर्धचालक में बदलने के लिये उनमें समूह-15 के तत्वों की डोपिंग की जाती है।

प्रश्न 24.
किस प्रकार के पदार्थों से अच्छे स्थायी चुम्बक बनाये जा सकते हैं ? लौह चुम्बकीय अथवा फेरीचुम्बकीय। अपने उत्तर को सत्यापित या सही सिद्ध कीजिए।
उत्तर
फेरोमैग्नेटिक पदार्थ फेरीमैग्नेटिक पदार्थों की तुलना में ज्यादा स्थायी चुम्बक बनाते हैं क्योंकि फेरोमैग्नेटिक ठोस में अयुग्मित इलेक्ट्रॉनों का चुम्बकीय आघूर्ण उन्हें समान दिशा में सीधे स्वतः प्रवर्तिता द्वारा
आता है। जबकि फेरीमैग्नेटिक ठोस में डोमेन का चुम्बकीय आघूर्ण एक सीध में समानान्तर या असमानान्तर दिशा में असमान संख्या में होता है।
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ठोस अवस्था NCERT पाठ्य-पुस्तक प्रश्नोत्तर

प्रश्न 1.
‘अक्रिस्टलीय’ पद को परिभाषित कीजिए।अक्रिस्टलीय ठोसों के कुछ उदाहरण दीजिए।
उत्तर
एक ठोस अक्रिस्टलीय कहलाता है, यदि उसके संरचनात्मक कण अव्यवस्थित रूप से होते हैं या बेतरतीब रूप से व्यवस्थित होता है, बिना किसी व्यवस्था के।
उदाहरण के लिये – प्लास्टिक, काँच, रबर।

प्रश्न 2.
काँच, क्वार्ट्स जैसे ठोस से किस प्रकार भिन्न है ? किन परिस्थितियों में क्वार्ट्स को काँच में रूपांतरित किया जा सकता है ?
उत्तर
क्वार्ट्ज़ क्रिस्टलीय ठोस होता है, जबकि काँच एक अक्रिस्टलीय ठोस होता है। क्वार्ट्स को काँच में इसे गलाकर या तेजी से ठंडा करके बदला जा सकता है।

प्रश्न 3.
निम्नलिखित ठोसों का वर्गीकरण आयनिक, धात्विक, आण्विक, सहसंयोजक या अक्रिस्टलीय में कीजिए।
(i) टेट्राफॉस्फोरस डेकॉक्साइड (P4O10)
(ii) अमोनियम फॉस्फेट, (NH4)3 PO4
(iii) SiC
(iv) I2
(v) P4
(vi) प्लास्टिक
(vii) ग्रेफाइट
(viii) पीतल
(ix) Rb
(x) LiBr
(xi) Si.
उत्तर –
आयनिक – (NH4)3 PO4, LiBr
धात्विक – पीतल, Rb
आण्विक – P4O10, I2, P4, ठोस CO2
सहसंयोजक – ग्रेफाइट, SiC, Si
क्रिस्टलीय – प्लास्टिक।

प्रश्न 4.
(i) उपसहसंयोजन संख्या का क्या अर्थ है ?
(ii) निम्नलिखित परमाणुओं की उपसहसंयोजन संख्या क्या होती है –
(a) एक घनीय निविड संकुलित संरचना।
(b) एक अंत:केन्द्रित घनीय संरचना।
उत्तर
(i) एक कण में उसके घनीय पैकिंग (संकुलन) में निकटतम पड़ोसियों की संख्या को उसका उपसहसंयोजन संख्या कहते हैं।
(ii) (a) 12, (b) 8.

प्रश्न 5.
यदि आपको किसी अज्ञात धातु का घनत्व एवं एकक कोष्ठिका की विमाएँ ज्ञात हैं, तो क्या आप उसके परमाण्विक द्रव्यमान की गणना कर सकते हैं ? स्पष्ट कीजिए।
उत्तर
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या
\(\mathrm{M}=\frac{d \times \mathrm{N}_{\mathrm{A}} \times a^{3}}{Z}\)

प्रश्न 6.
‘किसी क्रिस्टल की स्थिरता उसके गलनांक के परिमाण द्वारा प्रकट होती है’, टिप्पणी कीजिए। किसी आँकड़ा पुस्तक से जल, एथिल ऐल्कोहॉल, डाइएथिल ईथर तथा मेथेन के गलनांक एकत्र करें। इन अणुओं के मध्य अंतर-आण्विक बलों के बारे में आप क्या कह सकते हैं ?
उत्तर –
क्रिस्टल का स्थायित्व आकर्षण बल पर निर्भर करता है। इसलिये क्रिस्टल का गलनांक जितना अधिक होगा, उतना ही अधिक अन्त:आण्विक आकर्षण बल तथा क्रिस्टल का स्थायित्व उतना ही अधिक होगा।
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H2O, C2H5OH डाइ ईथाइल ईथर तथा मेथेन का गलनांक नीचे दिया गया है।
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गलनांक के आधार पर इन अणुओं के बीच अंत:आण्विक बल की प्रबलता का क्रम निम्न होगा – पानी > डाइ-ईथाइल ईथर > ईथाइल एल्कोहॉल > मेथेन

प्रश्न 7.
निम्नलिखित युग्मों के पदों में कैसे विभेद करेंगे –
(i) षट्कोणीय निविड संकुलन एवं घनीय निविड संकुलन
(ii) क्रिस्टल जालक एवं एकक कोष्ठिका
(iii) चतुष्फलकीय रिक्ति एवं अष्टफलकीय रिक्ति।
उत्तर
(i) NCERT पाठ्य-पुस्तक देखिए। क्रिस्टल जालक
(ii)
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(iii)
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प्रश्न 8.
निम्नलिखित जालकों में से प्रत्येक की एकक कोष्ठिका में कितने जालक बिन्दु होते हैं – (i) फलक-केन्द्रित घनीय, (ii) अंत:केन्द्रित चतुष्कोणीय, (iii) अंत:केन्द्रित।
उत्तर
(a) फलक-केन्द्रित घनीय व्यवस्था में जालक बिन्दुओं की संख्या = 8 (कोने पर) + 6 (फलक केन्द्रों पर) प्रति एकक कोष्ठिका में जालक बिन्दु = \(8 \times \frac{1}{8}+6 \times \frac{1}{2}\) = 4
(b) फलक-केन्द्रित चतुष्कोणीय व्यवस्था में जालक बिन्दुओं की संख्या = 8 (कोने पर) +6 (फलक केन्द्रों पर)
प्रति एकक कोष्ठिका में जालक बिन्दु = \(8 \times \frac{1}{8}+6 \times \frac{1}{2}\) = 4
अंतः केन्द्रित व्यवस्था में जालक, बिन्दुओं की संख्या = 8 (कोनों पर) + 1 या केन्द्रों पर)
प्रति एकक कोष्ठिका में जालक बिन्दु
= \(8 \times \frac{1}{8}+1\)
= 2.

प्रश्न 9.
समझाइए –
(i) धात्विक एवं आयनिक क्रिस्टलों में समानता एवं विभेद का आधार।
(ii) आयनिक ठोस कठोर एवं भंगुर होते हैं।
उत्तर
(i) धात्विक तथा आयनिक क्रिस्टल –
(a) धात्विक तथा आयनिक ठोसों दोनों का गलनांक उच्च होता है।
(b) आयनिक ठोस कठोर तथा भंगुर होते हैं परन्तु धात्विक ठोस कठोर परन्तु भंगुर नहीं होते हैं। धातु आघातवर्धनीय व तन्य होते हैं।
(c) आयनिक ठोस कुचालक परन्तु गलित अवस्था तथा विलयन में अच्छे चालक (सुचालक) होते हैं। धात्विक ठोस, ठोस तथा द्रव व वाष्प अवस्था में भी सुचालक होते हैं।
(d) आयनिक ठोसों में संरचनात्मक (संघटक) इकाई केटायन तथा ऐनायन होते हैं। धात्विक ठोसों में संघटक इकाई करनैल (धनावेशित आयन) जो चारों ओर से विस्थानीकृत इलेक्ट्रॉनों के समृद्ध द्वारा घिरे होते हैं।

(ii) आयनिक ठोस विपरीत आवेशित आयनों के बीच प्रबल स्थिरवैद्युतीय आकर्षण बल होने के कारण कठोर होते हैं । ये भंगुर होते हैं क्योंकि आयनिक बंध अदिशात्मक होता है।

प्रश्न 10.
निम्नलिखित के लिए धातु के क्रिस्टल में संकुलन क्षमता की गणना कीजिए – (i) सरल घनीय, (ii) अंत:केन्द्रित घनीय, (iii) फलक-केन्द्रित घनीय। (यह मानते हुए कि परमाणु एक-दूसरे के सम्पर्क में हैं।)
एक परमाणु का आयतन
उत्तर –
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\(=\frac{\frac{4}{3} \pi r^{3}}{8 r^{3}} \times 100\)

\(=\frac{\pi}{6} \times 100=52 \cdot 4 \%\)

(ii) अंतः केन्द्रित घनीय में संकुलन क्षमता

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\(=\frac{2 \times \frac{4}{3} \pi r^{3}}{(4 / \sqrt{3}) r^{3}} \times 100\)
\(=\frac{(8 / 3) \pi r^{3}}{64 /(\sqrt{3}) r^{3}} \times 100=68 \%\)

(iii) फलक केन्द्रित घनीय में संकुलन क्षमता

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\(=\frac{4 \times \frac{4}{3} \pi r^{3}}{(2 / \sqrt{2}) r^{3}} \times 100\)

\(=\frac{(16 / 3) \pi r^{3}}{16 \sqrt{2} r^{3}} \times 100=70 \%\)

प्रश्न 11.
चाँदी का क्रिस्टलीकरण fcc जालक में होता है। यदि इसकी कोष्ठिका के कोरों की लम्बाई 4.07 10-8cm तथा घनत्व 10.5 g cm-3 हो, तो चाँदी का परमाण्विक द्रव्यमान ज्ञात कीजिए।
उत्तर
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प्रश्न 12.
एक घनीय ठोस दो तत्वों P एवं Q से बना है। घन के कोनों पर Q परमाणु एवं अंतः केन्द्र पर P परमाणु स्थित हैं। इस यौगिक का सूत्र क्या है ? P एवं Q की उपसहसंयोजन संख्या क्या है ?
उत्तर
परमाणु Q घन के 8 कोनों पर उपस्थित होता है, अतः इकाई सेल Q के परमाणुओं की संख्या = 8 × \(\frac{1}{8}\)=1
परमाणु P काया केन्द्र पर उपस्थित होता है, अतः प्रति इकाई सेल में P परमाणुओं की संख्या = 1
∴ यौगिक का सूत्र = PQ
प्रत्येक P तथा Q की समन्वयन संख्या = 8

प्रश्न 13.
नियोबियम का क्रिस्टलीकरण अंत:केन्द्रित घनीय संरचना में होता है। यदि इसका घनत्व 8:55 g cm-3 हो, तो इसके परमाण्विक द्रव्यमान 93 u का प्रयोग करके परमाणु त्रिज्या की गणना कीजिए।
हल –
घनत्व = 8.55 ग्राम सेमी -3
माना कि कोर की लम्बाई = a cm
प्रति इकाई सेल में परमाणुओं की संख्या = 2(bcc)
परमाण्वीय भार (M) = 93 ग्राम मोल -1
घनत्व \(d=\frac{\mathrm{Z} \times \mathrm{M}}{a^{3} \times \mathrm{N}_{\mathrm{A}}}\)
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अब काया-केन्द्रित घन की त्रिज्या r =\(\frac{\sqrt{3}}{4} a\)
= \(\frac{\sqrt{3} \times 3306 \times 10^{-10}}{4}\)
= 1.431 x 10-10 M
= 0.143 nm.

प्रश्न 14.
यदि अष्टफलकीय रिक्ति की त्रिज्या हो तथा निविड संकुलन में परमाणुओं की त्रिज्या R हो, तोr एवं R में संबंध स्थापित कीजिए।
हल – अष्टफलकीय रिक्ति को ढंकने वाले ऊपर और नीचे की ओर स्थित परमाणुओं को चित्र में नहीं दर्शाया गया है। अष्टफलकीय रिक्ति का केन्द्र C है तथा उसकी त्रिज्या r के बराबर है। रिक्ति को घेरे हुए जो परमाणु स्थित है, उनकी त्रिज्या R है।
चित्रानुसार,
रिक्ति को घेरने वाले परमाणु की त्रिज्या BA = R
BC = रिक्ति की त्रिज्या + बाह्य परमाणु की त्रिज्या
= R+r
∠ABC = 45°
समकोण त्रिभुज ABC से, \(\frac{\mathrm{AB}}{\mathrm{BC}}\) = cos45° =\(\frac{1}{\sqrt{2}}\) = 0.707
या \(\frac{\mathrm{R}}{\mathrm{R}+r}=0 \cdot 707\)
या 0.707R + 0.707r = R
या 0.293R = 0.707r
\(\frac{r}{\mathrm{R}}=\frac{0 \cdot 293}{0 \cdot 707}\) = 0.414
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प्रश्न 15.
कॉपर fcc जालक रूप में क्रिस्टलीकृत होता है, जिसके कोर की लम्बाई 3.61 x 10-6 cm है। यह दर्शाइए कि गणना किए गए घनत्व के मान तथा मापे गए घनत्व 8.92 g cm-3 में समानता है।
हल – हम जानते हैं कि
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ये मान अंकित मान के बहुत करीब है।

प्रश्न 16.
विश्लेषण द्वारा ज्ञात हुआ कि निकिल ऑक्साइड का सूत्र Ni0.98O1-100 है। निकिल आयनों का कितना अंश Ni2+ और Ni+ के रूप में विद्यमान है ?
हल – माना कि यहाँ Ni2+ के x आयन तथा (0.98 -X) आयन Ni3+ के हैं। यौगिक के विद्युतीय उदासीनता के लिये
Ni3+ तथा Ni3+ आयनों द्वारा कुल धनावेशित
आयनों का योगदान = O-2 आयनों द्वारा कुल ऋणावेश का योगदान
= (+2 × x) + (+3 × (0.98-x) = 2
2x + 2.94 – 3x = 2
x = 0.94
अत: Ni2+ का प्रभाज = \(\frac{0.94}{0.98}\) = 0.96 या 96%
0.98
Ni3+ का प्रभाज = (1 – 0.96) = 0.04 या 4%

प्रश्न 17.
अर्धचालक क्या होते हैं ? दो मुख्य अर्धचालकों की प्राप्ति कीजिए एवं उनकी चालकताक्रियाविधि में विभेद कीजिए।
उत्तर
अर्धचालक – अर्धचालक वे ठोस पदार्थ हैं, जिनकी विद्युत् चालकता चालकों व विद्युत्रोधी पदार्थों के बीच की होती है। इनकी चालकता 10-6 से 10 ohm-im-1 के बीच की होती है। इन पदार्थों में विद्युत् का संचालन अशुद्धियों के उपस्थिति के कारण होती है।

अर्धचालक निम्नलिखित दो प्रकार के होते हैं –

(i) n-प्रकार अर्धचालक-सिलिकॉन और जर्मेनियम में चार संयोजन इलेक्ट्रॉन होते हैं। क्रिस्टलों में इनका प्रत्येक परमाणु अपने निकटस्थ परमाणुओं के साथ चार सहसंयोजन बंध बनाता है। जब 15- वर्ग के तत्व जैसे P अथवा As जिसमें 5 सहसंयोजन इलेक्ट्रॉन होते हैं को अपमिश्रित किया जाता है तो यह सिलिकॉन अथवा जर्मेनियम के क्रिस्टल में कुछ जालक स्थलों में आ जाता है। P व As के पाँच में से चार इलेक्ट्रॉनों का उपयोग चार निकटस्थ Si अथवा Ge परमाणुओं के साथ चार सहसंयोजक बंध बनाने में होता है। पाँचवाँ अतिरिक्त इलेक्ट्रॉन विस्थापित हो जाता है। यह विस्थापित इलेक्ट्रॉन अपमिश्रित सिलिकॉन की चालकता में वृद्धि करता है। यह वृद्धि ऋणावेशित इलेक्ट्रॉन के कारण होती है। इसलिए इसे n-प्रकार का अर्धचालक कहा जाता है।

(ii) p-प्रकार अर्धचालक-सिलिकॉन अथवा जर्मेनियम को वर्ग-13 के तत्व B, AI, Ga के साथ भी अपमिश्रित किया जा सकता है। जिनमें केवल 3 संयोजक इलेक्ट्रॉन होते हैं। वर्ग-14 के तत्वों की तुलना में इनमें एक संयोजक इलेक्ट्रॉन की कमी होती है। वर्ग-13 के तत्व केवल तीन सहसंयोजक बंध बनाता है तथा चौथे इलेक्ट्रॉन के स्थान पर एक छिद्र उत्पन्न होता है जिसे इलेक्ट्रॉन छिद्र कहते हैं। यह छिद्र एक धनावेशित आवेश के समान गमन करके विद्युत् का संचालन करता है इसलिए इन्हें p-प्रकार का अर्धचालक कहा जाता है।

प्रश्न 18.
नॉनस्टॉइकियोमीट्री क्यूप्रस ऑक्साइड, Cu2O, प्रयोगशाला में बनाया जा सकता है। इसमें कॉपर तथा ऑक्सीजन का अनुपात 2 : 1 से कुछ कम है। क्या आप इस तथ्य की व्याख्या कर सकते हैं कि यह पदार्थ p-प्रकार का अर्धचालक है ?
उत्तर
Cu2O में 2 : 1 से कम का अनुपात होना, यह दर्शाता है कि कुछ क्यूप्रस आयन (Cu+) क्यूप्रिक आयन (Cu2+) द्वारा प्रतिस्थापित हो जाते हैं । विद्युतीय उदासीनता बनाये रखने के लिये प्रति दो Cu+ आयनों का एक Cu+2 आयन द्वारा प्रतिस्थापन होने पर एक छेद (होल) बन जाता है। क्योंकि चालकता इन्हीं धनावेशित होल की उपस्थिति के कारण होती है, इसलिये ये एक p-प्रकार का अर्धचालक है।

प्रश्न 19.
फेरिक ऑक्साइड, ऑक्साइड आयन के षट्कोणीय निविड संकुलन में क्रिस्टलीकृत होता है जिसकी तीन अष्टफलकीय रिक्तियों में से दो पर फेरिक आयन होते हैं। फेरिक ऑक्साइड का सूत्र ज्ञात कीजिए।
हल – ऑक्साइड आयनों की संख्या = n
अष्टफलकीय रिक्तियों की संख्या = n
Fe+3 आयनों की संख्या =\(\frac { 2 }{ 3 }\)n
Fe+3.O-2 = \(\frac { 2 }{ 3 }\) n:n
= 2 : 3
सूत्र
Fe3O3

प्रश्न 20.
निम्नलिखित को p-प्रकार या n-प्रकार के अर्धचालकों में वर्गीकृत कीजिए(i) In से डोपित Ge, (ii) B से डोपित Si..
उत्तर
(i) Ge समूह-14 का सदस्य है तथा In समूह-13 का। अतः एक इलेक्ट्रॉन-न्यून होल बनेगा। अत: यह n-प्रकार का अर्धचालक है।
(ii) B समूह 13 तथा Si समूह-14 का सदस्य है। अत: यहाँ एक इलेक्ट्रॉन मुक्त होगा। अत: यह nप्रकार का अर्धचालक होगा।

प्रश्न 21.
सोना ( परमाणु त्रिज्या = 0.144 nm) फलक-केन्द्रित एकक कोष्ठिका में क्रिस्टलीकृत होता है। इसकी कोष्ठिका के कोर की लम्बाई ज्ञात कीजिए।
हल – प्रश्नानुसार, r = 0.144 nm
fcc संरचना के लिये,
कोर लम्बाई (a) = 2√2 x परमाणु की त्रिज्या
=2 x 1.414 x 0.144
= 0.407 nm.

प्रश्न 22.
बैंड सिद्धान्त के आधार पर (i) चालक एवं रोधी, (ii) चालक एवं अर्धचालक में क्या अन्तर होता है ?
उत्तर
(i) एक कुचालक में संयोजी बैंड तथा चालन बैंड के बीच का ऊर्जा का अन्तर बहुत ज्यादा होता है, जबकि सुचालक में ऊर्जातर या तो बहुत कम या यहाँ संयोजी बैंड व चालन बैंड के बीच अतिव्यापन होता है।
(ii) सुचालक में संयोजी बैंड तथा चालन बैंड में ऊर्जातर बहुत कम या यहाँ संयोजी बैंड व चालन बैंड के बीच अतिव्यापन होता है। परन्तु अर्धचालक में इनके बीच हमेशा थोड़ा ऊर्जातर रहता ही है।

प्रश्न 23.
उचित उदाहरणों द्वारा निम्नलिखित पदों को परिभाषित कीजिए – (i) शॉट्की दोष, (ii) फ्रेंकेल दोष, (iii) अंतराकाशी, (iv) F-केन्द्र।
उत्तर
(i) शॉट्की त्रुटि (Schottky defect)—इस प्रकार की त्रुटि में क्रिस्टल जालक से कोई धनायन अपना स्थान छोड़कर लुप्त हो जाता है, अर्थात् वह क्रिस्टल 2 से बाहर हो जाता है । इसके परिणामस्वरूप दो घटनाएँ होती हैं – (i) उस आयन का स्थान रिक्त रह जाता है और (ii) सम्पूर्ण क्रिस्टल की विद्युत् उदासीनता को बनाये रखने के लिए एक अथवा अधिक (संयोजकतानुसार) ऋणायन भी क्रिस्टल से अपना स्थान छोड़कर बाहर निकल जाते हैं । अतः उनका स्थान भी रिक्त रह जाता है । इन दोनों घटनाओं से क्रिस्टल का घनत्व कम हो जाता है । यह त्रुटि मुख्यत: उच्च को-ऑर्डिनेशन संख्या वाले यौगिकों तथा ऐसे यौगिकों से में जिनके धनायन तथा ऋणायन के आकार लगभग बराबर होते हैं, पायी जाती है। उदाहरण-NaCl. CSCl आदि।
MP Board Class 12th Chemistry Solutions Chapter 1 ठोस अवस्था - 15

(ii) फ्रेन्केल त्रुटि (Frenkel defect)-आयनिक क्रिस्टलों में कोई (A धनायन अपना स्थान छोड़कर क्रिस्टल में ही कहीं रिक्त स्थान में चला जाये तो यह फ्रेन्केल दोष कहलाता है । इसमें किसी आयन के अनुपस्थित न होने (B से क्रिस्टल के घनत्व में कोई अन्तर नहीं आता । अवयवी धनायन और ऋणायन के आकार में अधिक अन्तर होने पर यह पाया जाता है; जैसे – ZnS, AgC] आदि।

MP Board Class 12th Chemistry Solutions Chapter 1 ठोस अवस्था - 16

(iii) अन्तराकाशी-अन्तराकाशी परमाणु अथवा आयन जो क्रिस्टल (B) (A)-(B)(A) के समान्यतः रिक्त अन्तराकाशी स्थान को ग्रहण करते हैं, अन्तराकाशी . चित्र-फ्रेन्केल त्रुटि कहलाते हैं।

(iv) F-केन्द्र-अयुग्मित इलेक्ट्रॉनों द्वारा भरी ऋणायनिक रिक्तिका को F-केन्द्र कहते हैं। F = Farthe जो जर्मन शब्द है, जिसका अर्थ रंग होता है। अतः यह F-केन्द्र क्रिस्टलों को रंग प्रदान करता है। यह रंग इलेक्ट्रॉनों द्वारा क्रिस्टल पर पड़ने वाले प्रकाश से ऊर्जा अवशोषित करके उत्तेजित होने के परिणामस्वरुप दिखता है। उदाहरण-यदि सोडियम की आधिक्य को क्लोरीन के वातावरण में गर्म किया जाये तो F-केन्द्र के कारण यह पीला रंग उत्पन्न करता है।

प्रश्न 24.
ऐल्युमिनियम घनीय निविड संकुलित संरचना में क्रिस्टलीकृत होता है। इसका धात्विक अर्ध-व्यास 125 pm है।
(i) एकक कोष्ठिका के कोर की लम्बाई ज्ञात कीजिए।
(ii) 1.0 cm3 ऐल्युमिनियम में कितनी एकक कोष्ठिकाएँ होंगी?
हल –
(i) घनीय निविड संकुलित संरचना के लिये एकक कोष्ठिका के कोर की लम्बाई त्रिज्या से संबंधित होगी –
r = \(\frac{a}{2 \sqrt{2}}\)
या
a =r × 2√2
= 125 ×2 × 1.414 pm
= 353.5 pm
(ii) इकाई सेल का आयतन = (353.5 × 10-10 सेमी)3
= 4.42 × 10-23 सेमी’
1 सेमी3 में एकक कोष्ठिका की संख्या = \(\frac{1}{4.42 \times 10^{-23}} \)
= 2.26 × 1022 इकाई सेल या एकक कोष्ठिका।

प्रश्न 25.
यदि NaCl को SrCl2 के 10-3 मोल % से डोपित किया जाए, तो धनायनों की रिक्तियों का सांद्रण क्या होगा?
हल – हम जानते हैं कि SrCI2 की NaCl में डोपिंग में 2Na+ आयन प्रत्येक Sr+2 आयन द्वारा प्रतिस्थापित होते हैं। परन्तु प्रत्येक Sr+2 केवल एक एकक कोष्ठिका घेरता है। जिससे एक धनावेश रिक्तिका बनती है।
अत: NaCl में 100 मोलों को SrCl2 के 10-3 मोल द्वारा डोपिंग की गई है। .
अत: NaCl धनावेश रिक्तिका बनायेगा = 10-3 मोल
∵ 100 मोल NaCl की डोपिंग के बाद केटायन रिक्तिका = 10-3मोल
∴ 1 मोल NaCl की डोपिंग पर केटायन रिक्तिका होगी
=\(\frac{10^{-3}}{100}\) = 10-5
डोंपिग के बाद कुल केटायनिक रिक्तिका = 10-5 × NA
= 10-5 × 6.023 × 1023
= 6.023 × 1018 रिक्तिका।

प्रश्न 26.
निम्नलिखित को उचित उदाहरणों से समझाइए –
(i) लौहचुम्बकत्व, (ii) अनुचुम्बकत्व, (ii) फेरीचुम्बकत्व, (iv) प्रतिलौहचुम्बकत्व, (v) 12-16 और 13-15 वर्गों के यौगिक।
उत्तर
पदार्थों को उनके चुम्बकीय क्षेत्र के प्रति व्यवहार के आधार पर निम्न श्रेणियों में बाँटा जा सकता है

(i) प्रति तुम्बकीय पदार्थ (Diamagnetic)-वे पदार्थ जो बाह्य चुम्बकीय क्षेत्र द्वारा प्रतिकर्षित होते हैं, प्रति चुम्बकीय पदार्थ कहलाते हैं। इन पदार्थों के परमाणु, अणुओं या आयनों में सभी इलेक्ट्रॉन युग्मित होते हैं । उदाहरण-TiO2, NaCl आदि।
MP Board Class 12th Chemistry Solutions Chapter 1 ठोस अवस्था - 17

(ii) अनुचुम्बकीय पदार्थ (Paramagnetic)-वे पदार्थ जो चुम्बकीय क्षेत्र के द्वारा आकर्षित होते हैं, अनुचुम्बकीय पदार्थ कहलाते हैं। इन पदार्थों के परमाणुओं, अणुओं या आयनों में कुछ अयुग्मित (unpaired) इलेक्ट्रॉन होते हैं । चुम्बकीय क्षेत्र से पृथक् करने पर अपना चुम्बकत्व खो देते हैं।
उदाहरण-Cu+2, Fe+3, TiO, CuO, O2 आदि।
MP Board Class 12th Chemistry Solutions Chapter 1 ठोस अवस्था - 18

(iii) लौह चुम्बकीय पदार्थ (Ferromagnetic)-वे पदार्थ जो चुम्बकीय क्षेत्र द्वारा तीव्रता से आकर्षित होते हैं, लौह चुम्बकीय पदार्थ कहलाते हैं, इन पदार्थों को चुम्बकीय क्षेत्र से हटा लेने पर भी स्थायी चुम्बकत्व बनाए रखते हैं। उदाहरण- Fe, Co, Ni आदि। इनमें अयुग्मित इलेक्ट्रॉनों की संख्या अधिक तथा संरेखण एक ही दिशा में होता है।
MP Board Class 12th Chemistry Solutions Chapter 1 ठोस अवस्था - 19

(iv) प्रति लौह चुम्बकीय पदार्थ (Anti ferromgnetic)-ऐसे पदार्थ जिनमें आधे इलेक्ट्रॉन चक्रण एक प्रकार से पंक्तिबद्ध तथा आधे इलेक्ट्रॉन चक्रण दूसरे प्रकार से (विपरीत) पंक्तिबद्ध होते हैं, प्रति लौह
चुम्बकीय पदार्थ कहलाते हैं। इन पदार्थों में चुम्बकीय आघूर्ण नहीं होता तथा चुम्बकीय क्षेत्र में अनुचुम्बकीय व्यवहार प्रदर्शित नहीं करते।
उदाहरण-Cr2O3, MnO2, MnO आदि।
MP Board Class 12th Chemistry Solutions Chapter 1 ठोस अवस्था - 20

(v) लघु लौह चुम्बकीय पदार्थ (Ferimagnetic)-ऐसे पदार्थ जो बहुत अधिक अनुचुम्बकीय गुण प्रदर्शित करते हैं, फेरीचुम्बकीय कहलाते हैं। जैसे-Fe3o4 तथा फेराइट। इनका एक नेट चुम्बकीय आघूर्ण होता है।

(vi) वर्ग-12, 16 और 13-15 वर्ग के यौगिक-वर्ग- 13 एवं 15 अथवा वर्ग- 12 तथा 16 के तत्वों के सम्मिश्रण से अनेक प्रकार के ठोस पदार्थ बनाए गए है। जिनकी औसत संयोजकता Ge या Si के समान 4 है। इनमें से वर्ग 13-15 के विशिष्ट यौगिक InSb, AIP तथा GaAs है। गैलियम आर्सेनाइड अर्धचालक त्वरित प्रतिसंवेदी होते हैं। इन्होंने अर्धचालक युक्तियों के निर्माण में क्रांतिकारी हलचल ला दी है। ZnS, Cds, SdSe तथा HgTe वर्ग-12-16 यौगिकों के उदाहरण हैं । इन यौगिकों में बंध पूर्णतः सहसंयोजक नहीं होते तथा इनके आयनिक गुण इनमे उपस्थित दोनो तत्वों के विद्युत् ऋणात्मकता पर निर्भर करते हैं।

ठोस अवस्था अन्य महत्वपूर्ण प्रश्नोत्तर

ठोस अवस्था वस्तुनिष्ठ प्रश्न

1. सही विकल्प चुनकर लिखिए

प्रश्न 1.
फ्रेन्केल दोष के कारण आयनिक ठोसों का घनत्व –
(a) घटता है
(b) बढ़ता है
(c) परिवर्तित नहीं होता है
(d) परिवर्तित होता है।
उत्तर
(c) परिवर्तित नहीं होता है

प्रश्न 2.
CsCl में प्रत्येक Cl कितने Cs से संकुलित है –
(a) 8
(b) 6
(c) 4
(d) 2
उत्तर
(a) 8

प्रश्न 3.
फ्रेन्केल दोष प्रदर्शित नहीं करता है
(a) AgBr
(b) AgCl
(c) KBr
(d) ZnS.
उत्तर
(c) KBr

प्रश्न 4.
NaCI क्रिस्टल में समान दूरी पर स्थित विरोधी आवेश वाले आयनों की संख्या होती है –
(a) 8
(b) 6
(c) 4
(d) 2.
उत्तर
(b) 6

प्रश्न 5.
विद्युत् का सबसे अच्छा सुचालक है –
(a) हीरा
(b) ग्रेफाइट
(c) सिलिकॉन
(d) कार्बन (अक्रिस्टलीय)।
उत्तर
(b) ग्रेफाइट

प्रश्न 6.
NaCl क्रिस्टल में किस प्रकार का बिन्दु दोष पाया जाता है
(a) फ्रेन्केल दोष
(b) शॉट्की दोष
(c) रैखिक दोष
(d) अशुद्धि दोष।
उत्तर
(b) शॉट्की दोष

प्रश्न 7.
विभिन्न क्रिस्टल तन्त्रों से कुल कितने त्रिविम जालक (ब्रेविस जालक ) प्राप्त होते हैं –
(a) 7
(b) 14
(c) 32
(d) 230.
उत्तर
(b) 14

प्रश्न 8.
हीरा है एक –
(a) H बन्ध युक्त ठोस
(b) आयनिक ठोस
(c) सहसंयोजक ठोस
(d) काँच।
उत्तर
(c) सहसंयोजक ठोस

प्रश्न 9.
फ्लुओराइड संरचना में Ca+2 आयनों की कोऑर्डीनेशन संख्या होती है –
(a) 4
(b) 6
(c) 8
(d) 3.
उत्तर
(c) 8

प्रश्न 10.
किस यौगिक से 8 : 8 समन्वय अंक पाया जाता है –
(a) MgO
(b) Al2O3
(c) CsCl
(d) इन सभी में।
उत्तर
(c) CsCl

प्रश्न 11.
काय केन्द्रित घनीय जालक की समन्वय संख्या होती है –
(a) 8
(b) 12
(c) 6
(d) 4
उत्तर
(a) 8

प्रश्न 12.
यूनिट सेल का घनत्व है
(a) \(\frac{\mathrm{ZM}}{a^{3} \mathrm{N}}\)
(b) \(\frac{\mathrm{ZN}}{a^{3} \mathrm{M}} \)
(c) \(\frac{\mathrm{Na}^{3}}{\mathrm{Z}}\)
(d) \(\frac{z}{M N}\)
उत्तर
(a) \(\frac{\mathrm{ZM}}{a^{3} \mathrm{N}}\)

प्रश्न 13.
एक बंद घनीय संकुलित इकाई कोशिका में उपस्थित चतुष्फलकीय रिक्तियों की संख्या होती है –
(a) 4
(b) 8
(c) 6
(d) 2
उत्तर
(b) 8

प्रश्न 14.
सीजियम क्लोराइड क्रिस्टल की अन्तरा आयनिक दूरी होगी –
(a) 1
(b) \(\frac { a }{ 2 }\)
(c) \(\frac{\sqrt{3} a}{2}\)
(d) \(\frac{2 a}{\sqrt{3}}\)
उत्तर
(c) \(\frac{\sqrt{3} a}{2}\)

प्रश्न 15.
अंत: केन्द्रित घनीय यूनिट सेल में परमाणुओं की संख्या होती है –
(a) 1
(b) 2
(c) 3
(d) 4.
उत्तर
(b) 2

प्रश्न 16.
निम्नलिखित में कौन-सा ब्रेग समीकरण है –
(a) nλ = 2θ sinθ
(b) nλ = 2d sinθ
(c) nλ = sinθ
(d) \(\frac{n}{2}=\frac{d}{2} \sin \theta\)
उत्तर
(b) nλ = 2d sinθ

प्रश्न 17.
सहसंयोजक क्रिस्टल का रचक घटक है –
(a) परमाणु
(b) अणु
(c) आयन
(d) उपर्युक्त सभी।
उत्तर
(a) परमाणु

प्रश्न 18.
NaCl क्रिस्टल की इकाई कोशिका में उपस्थित Na परमाणुओं की संख्या है –
(a) 1
(b) 2
(c) 3
(d) 4.
उत्तर
(d) 4.

प्रश्न 19.
Fe, CO, Ni किस प्रकार के चुम्बकीय पदार्थ है –
(a) अनुचुम्बकीय
(b) लौहचुम्बकीय
(c) प्रतिचुम्बकीय
(d) प्रतिलौहचुम्बकीय।
उत्तर
(b) लौहचुम्बकीय

प्रश्न 20.
“फ्रेंकेल दोष” का सही उदाहरण है –
(a) NaCl
(b) CsCI
(c) KC
(d) AgCl.
उत्तर
(d) AgCl.

प्रश्न 21.
शुष्क बर्फ (ठोस CO2) है –
(a) आयनिक क्रिस्टल
(b) सहसंयोजी क्रिस्टल
(c) आण्विक क्रिस्टल
(d) धात्विक क्रिस्टल।
उत्तर
(c) आण्विक क्रिस्टल

प्रश्न 22.
CsCl की संरचना में Cs की समन्वयन संख्या है –
(a) Cl के समान अर्थात् 6 है
(b) Cl के समान अर्थात् 8 है
(c) Cl के असमान अर्थात् 8 है
(d) Cl के असमान अर्थात् 6 है।
उत्तर
(b) Cl के समान अर्थात् 8 है

प्रश्न 23.
NaCl क्रिस्टल की संरचना है –
(a) द्विसमलम्बाक्ष
(b) घनीय
(c) विषमलम्बाक्ष
(d) एकनताक्ष ।
उत्तर
(b) घनीय

प्रश्न 24.
NaCl क्रिस्टल में प्रत्येक Na’ आयन घिरा हुआ है –
(a) तीन Cl आयनों से
(b) आठ Cl आयनों से
(c) चार Cl आयनों से
(d) छ: Cl आयनों से।
उत्तर
(d) छ: Cl आयनों से।

प्रश्न 25.
क्रिस्टल में विद्युत् चालकता उत्पन्न करने हेतु अशुद्धि मिलाने की क्रिया कहलाती है –
(a) शॉट्की त्रुटि
(b) फ्रेन्केल त्रुटि
(c) डोपिंग
(d) इलेक्ट्रॉनिक अपूर्णता ।
उत्तर
(c) डोपिंग

प्रश्न 26.
KCl क्रिस्टल में किस प्रकार का जालक पाया जाता है
(a) फलक केन्द्रित घनाकृति
(b) अन्त:केन्द्रित घनाकृति
(c) साधारण घनाकृति
(d) साधारण चतुष्कोण।
उत्तर
(a) फलक केन्द्रित घनाकृति

प्रश्न 27.
एकपरमाण्विक पदार्थ के अन्तः केन्द्रित घनीय यूनिट सेल में परमाणुओं की संख्या होगी –
(a) 1
(b) 2
(c) 3
(d) 4.
उत्तर
(b) 2

प्रश्न 28.
समचतुष्फलक सममिति के लिए त्रिज्या अनुपात की सीमा है –
(a) 0.155
(b) 0.414
(c) 0.732
(d) 0.225.
उत्तर
(d) 0.225.

प्रश्न 29.
क्रिस्टल जालक में से एक धनायन एवं एक ऋणायन अनुपस्थित होने पर उत्पन्न दोष को कहते –
(a) शॉट्की दोष
(b) फ्रेन्केल दोष
(c) क्रिस्टल दोष
(d) आयनिक दोष।
उत्तर
(a) शॉट्की दोष

प्रश्न 30.
CsCl में यदि Cs+की को-ऑर्डिनेशन संख्या 8 हो तो, Cl आयन की को-ऑर्डिनेशन संख्या होगी –
(a) 8
(b) 4
(c) 6
(d) 12.
उत्तर
(a) 8

2. एक शब्द/वाक्य में उत्तर दीजिए –

  1. धात्विक क्रिस्टल के दो उदाहरण दीजिए।
  2. सहसंयोजी क्रिस्टल के दो उदाहरण दीजिए।
  3. आयनिक क्रिस्टल के दो उदाहरण दीजिए।
  4. CaF2 में F आयन की समन्वय संख्या का मान होता है।
  5. SiC किस प्रकार का ठोस है ?
  6. षट्भुजीय संकुलित संरचना में समन्वय संख्या का क्या मान होता है ?
  7. त्रिज्या अनुपात का सूत्र लिखिए।
  8. NaCl क्रिस्टल की संरचना किस तरह की होती है ?
  9. अन्त:केन्द्रित घनीय सेल का एक उदाहरण लिखिए।
  10. ऐसे यौगिक का उदाहरण दीजिए जिसमें शॉट्की एवं फ्रेंकेल दोनों प्रकार के दोष होते हैं।
  11. आभासी ठोस या अक्रिस्टलीय ठोस के दो उदाहरण दीजिए।
  12. ड्रग समीकरण लिखिए।
  13. शॉट्की त्रुटि से पदार्थ या क्रिस्टल के घनत्व पर क्या प्रभाव होता है ?
  14. CsCl की संरचना का केवल चित्र बनाइए।
  15. CsCl व NaCl की समन्वय संख्या बताइए।
  16. दो अतिचालक पदार्थों के सूत्र लिखिए।
  17. फ्रेन्केल त्रुटि का एक उदाहरण दीजिए।
  18. अतिचालक का एक उदाहरण दीजिए।
  19. चतुष्फलकीय रिक्तिका का त्रिज्या अनुपात होता है।

उत्तर

  1. कॉपर, निकिल
  2. हीरा, ग्रेफाइट
  3. NaCl, NaNO3
  4. चार
  5. सहसंयोजी ठोस
  6. 12
  7. MP Board Class 12th Chemistry Solutions Chapter 1 ठोस अवस्था - 21
  8. घनीय
  9. CsCl,
  10. AgBr,
  11. काँच, प्लास्टिक,
  12. nλ = 2d sinθ
  13. शॉटकी त्रुटि के कारण पदार्थ का घनत्व कम हो जाता है,
  14. MP Board Class 12th Chemistry Solutions Chapter 1 ठोस अवस्था - 22
  15. CsCl की समन्वय संख्या 8 : 8, NaCl की समन्वय संख्या 6 : 6,
  16. (i) γBa2Cu3O7, (ii) Bi2Ca2Sr2Cu3O10
  17. AgCl
  18. Ba0.7K0.3BiO3
  19. 0.225.

3. रिक्त स्थानों की पूर्ति कीजिए –

  1. क्रिस्टल जालक में से एक धनायन व एक ऋणायन अनुपस्थित होने पर उत्पन्न त्रुटि को …………………. कहते हैं।
  2. यदि ठोस क्रिस्टल जालक में एक धनायन अपने स्थान से हटकर अन्तराकाशी स्थान पर उपस्थित हो तो उस त्रुटि को …………………. कहते हैं।
  3. पिघली अवस्था में NaCl के विद्युत् का सुचालक होने का कारण …………………. है।
  4. …………………. त्रुटि के कारण क्रिस्टल का घनत्व कम हो जाता है।
  5. कुल …………………. प्रकार के क्रिस्टल तंत्र होते हैं।
  6. सर्वप्रथम …………………. ने ‘परमाणु’ की अवधारणा प्रस्तुत की थी।
  7. किसी क्रिस्टल में उपस्थित धन आयन तथा ऋण आयन की त्रिज्याओं के अनुपात को …………………. कहते हैं।
  8. किसी तत्व या यौगिक में अशुद्धियों की अल्प मात्रा मिलाने की क्रिया को …………… कहते हैं।
  9. कुल 14 प्रकार की विभिन्न एकक सेलें होती हैं। जिन्हें ………………. कहते हैं।
  10. NaCl क्रिस्टल संरचना में Na+ तथा Cl दोनों आयनों की उप-सहसंयोजन संख्या …………………. होती है।
  11. ZnS एवं AgCl के क्रिस्टल में ………….. दोष पाया जाता है।
  12. शॉट्की त्रुटि के कारण पदार्थ का घनत्व ………… हो जाता है।
  13. धात्विक ठोसों में चालकता …………….की उपस्थिति के कारण होती है।
  14. बिन्दु दोष ……………… क्रिस्टलों में पाये जाते हैं।
  15. चुम्बकीय क्षेत्र द्वारा आकर्षित होने वाला पदार्थ ………………….. कहलाता है।
  16. किसी इकाई सेल के लिए r = a/√8 हो, तो वह ……………… प्रकार का इकाई सेल होगा।
  17. ताप बढ़ाने पर अर्द्धचालकों की चालकता में …………………. होती है।

उत्तर-

  1. शॉट्की त्रुटि
  2. फ्रेंकेल दोष
  3. स्वतंत्र आयन
  4. शॉट्की
  5. सात
  6. कणाद
  7. त्रिज्या अनुपात
  8. डोपिंग
  9. ब्रेविस जालक
  10. छ:
  11. फ्रेंकेल
  12. कम
  13. मुक्त इलेक्ट्रॉन
  14. आयनिक
  15. अनुचुम्बकीय पदार्थ
  16. fcc
  17. वृद्धि।

4. उचित संबंध जोडिए –

I.
MP Board Class 12th Chemistry Solutions Chapter 1 ठोस अवस्था - 23
उत्तर
1. (b), 2. (d), 3. (c), 4. (a).

II.
MP Board Class 12th Chemistry Solutions Chapter 1 ठोस अवस्था - 24
उत्तर
1. (c), 2. (d), 3. (a), 4. (b).

III.
MP Board Class 12th Chemistry Solutions Chapter 1 ठोस अवस्था - 25
उत्तर
1. (d), 2. (c), 3. (b), 4. (a).

IV.
MP Board Class 12th Chemistry Solutions Chapter 1 ठोस अवस्था - 26
उत्तर
1. (c), 2. (d), 3. (a), 4. (b).

ठोस अवस्था अति लघु उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 1.
क्रिस्टलीय ठोस किसे कहते हैं ? क्रिस्टलीय ठोस कितने प्रकार के होते हैं ? –
उत्तर
क्रिस्टलीय ठोस (Crystalline solids)-वे ठोस जिनमें अवयवी कणों (जैसे-परमाणु, अणु या आयन) का नियमित क्रम होता है, इनकी निश्चित ज्यामिति होती है। क्रिस्टलीय ठोस कहलाते हैं। क्रिस्टलीय ठोस चार प्रकार के होते है

  1. आयनिक क्रिस्टल
  2. सहसंयोजी क्रिस्टल
  3. आण्विक क्रिस्टल
  4. धात्विक क्रिस्टल।

प्रश्न 2.
यूनिट सेल के घनत्व का सूत्र लिखिए ।
उत्तर
MP Board Class 12th Chemistry Solutions Chapter 1 ठोस अवस्था - 27
\(=\frac{\mathrm{Z} \times \mathrm{M}}{a^{3} \times \mathrm{N}}\)

प्रश्न 3.
क्रिस्टल जालक किसे कहते हैं ?
उत्तर
किसी क्रिस्टल की वह ज्यामिती जिसमें इकाई कोशिका क्रमबद्ध रूप से व्यवस्थित है, तथा इकाई कोशिका की आकृति के सामान क्रिस्टल बनाती है, क्रिस्टल जालक कहलाती है।

प्रश्न 4.
इकाई कोशिका किसे कहते हैं ? .
उत्तर
इकाई कोशिका-किसी क्रिस्टल में उसके संघटक कणों परमाणु, अणु, आयनों के क्रमबद्ध रूप से व्यवस्थित रहने पर जो सूक्ष्मतम इकाई बनती है, उसे क्रिस्टल की इकाई कोशिका कहते हैं। .

प्रश्न 5.
निम्नलिखित के दो-दो उदाहरण लिखिए –
(i) प्रतिचुम्बकीय पदार्थ (Diamagnetic)
(ii) अनुचुम्बकीय पदार्थ (Paramagnetic)
(iii) लौह चुम्बकीय पदार्थ (Ferromagnetic)
(iv) लघु लौह चुम्बकीय पदार्थ (Ferromagnetic).
उत्तर
(i) TiO2, NaCl
(ii) Cu+2, Fe3+
(iii) Fe, Co
(iv) Fe3O4, फेराइट।

प्रश्न 6.
निम्नलिखित के संरचना व को-ऑर्डिनेशन संख्या लिखिए –
(a) CSCl
(b) NaCI
(c) Zn.
उत्तर
(a) CSCl सरंचना व्यवस्था-घनीय (Cubic)
को-ऑर्डिनेशन संख्या-8
(b) NaCl संरचना व्यवस्था – अष्टफलकीय
को-ऑर्डिनेशन संख्या-6
(c) Zn संरचना व्यवस्था — चतुष्फलकीय
को-ऑर्डिनेशन संख्या-4.

प्रश्न 7.
क्रिस्टल ज्यामिति के आधार पर सात मूल प्रकार के क्रिस्टल कौन-कौन से हैं ? .
उत्तर

  1. घनीय (Cubic)
  2. द्विसमलम्बाक्ष (Teragonal)
  3. विषम लम्बाक्ष (Orthorhombic)
  4. एकनताक्ष (Mono clinic)
  5. षट्कोणीय (Hexagonal)
  6. त्रिसमनताक्ष (Rhombohedral)
  7. त्रिनताक्ष (Triclinic)।

प्रश्न 8.
समचतुर्भुजीय जालक के प्रकारों के नाम लिखिए ।
उत्तर
घनीय अथवा समचतुर्भुजीय क्रिस्टलों के प्रकार

  1. सरल घनीय (Simple cubic)
  2. काय केन्द्रित / अंतः केन्द्रित घनीय (Body centred cubic)
  3. फलक केन्द्रित घनीय (Face centred cubic) ।

प्रश्न 9.
NaCl की संरचना में Na+ और Clआयनों की को-ऑर्डिनेशन संख्या क्या है ?
उत्तर
NaCl की संरचना में Na+ आयन की को-ऑर्डिनेशन संख्या = 6 तथा Cl आयन की कोऑर्डिनेशन संख्या = 6 है ।
अर्थात् प्रत्येक Na+ आयन 6 Cl आयनों से व प्रत्येक CIआयन, 6 Na+आयनों से घिरा रहता है।

प्रश्न 10.
को-ऑर्डिनेशन संख्या क्या है ? को-ऑर्डिनेशन संख्या पर ताप व दाब का क्या प्रभाव पड़ता है ?
उत्तर
“किसी क्रिस्टल जालक में किसी संघटक कण के चारों तरफ पड़ोसी आयनों या परमाणुओं की संख्या उस कण की को-ऑर्डिनेशन संख्या कहलाती है।” उच्च दाब पर को-ऑर्डिनेशन संख्या में वृद्धि होती है एवं उच्च ताप पर को-ऑर्डिनेशन संख्या में कमी होती है ।

प्रश्न 11.
क्रिस्टलों के X- किरण विवर्तन अध्ययन से क्या जानकारी मिलती है ?
उत्तर
क्रिस्टल के X-किरण विवर्तन अध्ययन से ज्ञात होता है कि क्रिस्टल के संघटक कण समान दूरी पर एक सुक्रमित क्रम में पुनरावृत्त होकर पास-पास स्थित समतलों में स्थित रहते हैं ।

प्रश्न 12.
पुरानी बिल्डिंग के विंडो ग्लास दूधिया दिखाई पड़ते हैं, क्यों ?
उत्तर
दिन में काँच गर्म हो जाता है तथा रात में ठण्डा हो जाता है। इस प्रकार एनीलिंग की क्रिया होती है। एनीलिंग के कारण कई वर्षों में काँच में क्रिस्टलीय गुण उत्पन्न हो जाता है तथा विंडो ग्लास दूधिया रंग के दिखाई पड़ते हैं।

प्रश्न 13.
साधारण नमक कभी-कभी रंगहीन के स्थान पर पीला दिखता है, क्यों?
उत्तर
साधारण नमक में धातु अधिक्य त्रुटि के कारण ऋणायन Cl अपने नियत जालक बिंदु से गायब हो जाता है। किन्तु एक इलेक्ट्रॉन वहाँ छोड़ जाता है। जिससे क्रिस्टल विद्युत् उदासीन रहता है । ऋणायन के रिक्त स्थान पर एक छिद्र बनता है। इस छिद्र को F केन्द्र कहते हैं। इस कारण NaCl पीला दिखता है।

प्रश्न 14.
ताप बढ़ने के साथ अर्धचालकों की विद्युत् चालकता बढ़ जाती है क्यों?
उत्तर
अर्धचालको के संयोजक बैण्ड एवं चालक बैण्ड के मध्य अंतराल कम होता है। अतः कुछ इलेक्ट्रॉन ताप बढ़ने पर संयोजक बैण्ड को लाँघ कर चालक बैण्ड में चले जाते है। जिसके कारण ताप बढ़ने के साथ अर्धचालाकों की विद्युत् चालकता बढ़ जाती है।

ठोस अवस्था लघु उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 1.
आयनिक त्रिज्या अनुपात क्या है ?
उत्तर-
आयनिक त्रिज्या अनुपात-किसी क्रिस्टल में उपस्थित धन आयन तथा ऋण आयन की त्रिज्याओं का अनुपात होता है –
MP Board Class 12th Chemistry Solutions Chapter 1 ठोस अवस्था - 28
जैसे – Na+ आयन की त्रिज्या 95 pm और Cl आयन की त्रिज्या 181 pm है, तो NaCl क्रिस्टल में Na+और Cl का त्रिज्या अनुपात 95 / 181 = 0.52 होगा । क्रिस्टल में अन्य बलों के कारण वास्तविक त्रिज्या अनुपात का प्रेक्षित मान कुछ कम आता है I NaCl क्रिस्टल में यह मान 0.52 न होकर 0.414 आता है ।

प्रश्न 2.
सीजियम क्लोराइड क्रिस्टल की संरचना का संक्षेप में वर्णन कीजिए।
उत्तर
यह AB प्रकार का अन्त:केन्द्रित घनीय (bcc) आयनिक क्रिस्टल है। इसमें Cs+ आयन घन के केन्द्र पर तथा Cl आयन घन के कोनों पर (या इसके विपरीत) स्थित होते हैं । इसकी को-ऑर्डीनेशन संख्या 8 : 8 होती है तथा Cs+ तथा Cl की त्रिज्या का अनुपात 0.732 होता है। CsCl के यूनिट सेल में एक Cs+ आयन और एक Cl आयन होता है –
Cs+ = 1 (अन्तः केन्द्र पर) × 1 = 1
Cl= 8 (कोनों पर) × 1/8 = 1.
MP Board Class 12th Chemistry Solutions Chapter 1 ठोस अवस्था - 29

प्रश्न 3.
एकक सेल के घनत्व की गणना कीजिए।
उत्तर
MP Board Class 12th Chemistry Solutions Chapter 1 ठोस अवस्था - 30
यदि एकक सेल के कणों (परमाणु, अणु, आयनों) की संख्या 2 हो एवं प्रत्येक कण का द्रव्यमान हो तब
एकक सेल का द्रव्यमान = m x 2 ……..1
यदि पदार्थ का मोलर द्रव्यमान M हो तब प्रत्येक कण का द्रव्यमान
m =\(\frac{\mathrm{M}}{\mathrm{N}}\) (N0 ऐवोगैड्रो संख्या है)
समी. (1) में m का मान रखने पर
एकक सेल का द्रव्यमान = \(\frac{M}{N_{0}} \times 2\) ……………….2
यदि घनीय एकक सेल के किनारे की लम्बाई a हो तब
एकक सेल का आयतन = a 3 …….. 3
समी. (2) को समी. (3) से विभाजित करने पर एकक सेल का घनत्व (P) प्राप्त होता है।
MP Board Class 12th Chemistry Solutions Chapter 1 ठोस अवस्था - 31

प्रश्न 4.
दो तत्व A तथा B से बना यौगिक घनीय संरचना प्रदर्शित करता है, जिसमें सभी A परमाणु घन के शीर्षों पर तथा B परमाणु घन के फलक के केन्द्रों पर व्यवस्थित हैं। यौगिक का सूत्र क्या होगा?
उत्तर
घन के शीर्षों पर स्थित 8A परमाणु 8 घनों से भागीदारी करते हैं । अत: एकक सेल में,
A परमाणुओं की संख्या = 8 \(\times \frac{1}{8}\) = 1
इसी प्रकार B परमाणु घन के छ: फलकों के केन्द्र पर हैं तथा प्रत्येक फलक दो घनों से भागीदारी करता है । अतः एकक सेल में,
B परमाणुओं की संख्या = 6 \(\times \frac{1}{2}\) = 3.
अतः यौगिक का अणु सूत्र AB3 होगा ।

प्रश्न 5.
सिद्ध करो कि फलक केन्द्रित घनीय संरचना के एकक सेल में चार परमाणु होते हैं ।
उत्तर
फलक केन्द्रित घनीय सेल (Face Centred Cubic Cell) – इसमें घन के कोनों पर स्थित प्रत्येक फलक (छ:) पर एक-एक परमाणु होते हैं, जिनका समीपवर्ती दो फलकों द्वारा साझा होता है । इस
प्रकार –
fcc सेल के प्रति यूनिट सेल में परमाणुओं की संख्या
=\(8 \times \frac{1}{8}\) – (आठों कोनों पर )+ 6 \(\times \frac{1}{2}\) (छ: फलकों के केन्द्र पर होती है)
=1 + 3 = 4.

प्रश्न 6.
बॅग समीकरण लिखिए ।
उत्तर
बॅग समीकरण निम्न है –
2d sinθ= nλ
जहाँ d = क्रिस्टल में दो क्रमागत तलों के बीच की दूरी, θ =X-किरण पुंज का आपतन कोण, N = सरल पूर्णांक और λ = x-किरणों का तरंगदैर्घ्य होते हैं । इससे क्रिस्टल के तलों के बीच की दूरी d ज्ञात की जाती है।

ठोस अवस्था दीर्घ उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 1.
क्रिस्टलीय तथा अक्रिस्टलीय ठोस में क्या अन्तर है ?
उत्तर-
क्रिस्टलीय तथा अक्रिस्टलीय ठोस में अन्तर –
MP Board Class 12th Chemistry Solutions Chapter 1 ठोस अवस्था - 32

प्रश्न 2.
फ्रेन्केल त्रुटि और शॉट्की त्रुटि में अन्तर लिखिए ।
उत्तर
फ्रेन्केल त्रुटि और शॉट्की त्रुटि में प्रमुख अन्तर –

  1. क्रिस्टल जालक में किसी धनायन का अपने स्थान से हटकर जालक में ही किसी अन्य स्थान पर उपस्थित रहने पर फ्रेन्केल त्रुटि उत्पन्न होती है, जबकि शॉट्की त्रुटि में एक-एक धनायन और ऋणायन अनुपस्थित रहते हैं । क्रिस्टल जालक में ये स्थान रिक्त पड़े रहते हैं ।
  2. फ्रेन्केल त्रुटि के कारण पदार्थ के घनत्व पर कोई प्रभाव नहीं पड़ता, लेकिन शॉट्की त्रुटि के कारण पदार्थ का घनत्व कम हो जाता है ।
  3. फ्रेन्केल त्रुटि से पदार्थ में विद्युत् चालकता आ जाती है, किन्तु शॉट्की त्रुटि में ऐसा नहीं होता ।
  4. फ्रेन्केल त्रुटि ऐसे पदार्थों में पायी जाती है, जिनमें केटायन का आकार ऐनायन की तुलना में बहुत छोटा होता है, जबकि शॉट्की त्रुटि उन क्रिस्टलों में पाई जाती है जिनमें केटायनं तथा ऐनायन के आकार लगभग समान होते हैं ।

प्रश्न 3.
क्रिस्टलों में अपूर्णता से क्या समझते हो? इसके क्या कारण हैं ?
उत्तर
क्रिस्टलों की संरचना से ऐसा प्रतीत होता है कि उनमें उनके अवयवी कणों की व्यवस्था पूर्णतः नियमित होती है, किन्तु वास्तविक क्रिस्टलों में ऐसा नहीं होता (क्योंकि एक सम्पूर्ण क्रिस्टल प्राप्त करना लगभग असम्भव है) तथा उनकी संरचना में अपूर्णताएँ होती हैं। क्रिस्टलों में अपूर्णताएँ निम्नलिखित कारणों से होती हैं –

  • ताप–0 K पर क्रिस्टलों की ऊर्जा न्यूनतम होती है । ऐसे क्रिस्टल जिनमें अपूर्णताएँ नहीं होती हैं, आदर्श क्रिस्टल कहलाते हैं । 0 K से अधिक ताप पर क्रिस्टलों की नियमित व्यवस्था से विचलन आरम्भ हो जाता है, जिससे अपूर्णताएँ निर्मित होती हैं ।
  • अशुद्धियों की उपस्थिति—कभी-कभी अशुद्धियों की उपस्थिति के कारण क्रिस्टलों की क्रमबद्ध व्यवस्था अव्यवस्थित हो जाती है, जिससे अपूर्णता या दोष उत्पन्न हो जाते हैं ।

प्रश्न 4.
क्रिस्टल संरचना में त्रिज्या-अनुपात का महत्व बताइए ।
उत्तर
क्रिस्टल संरचना में आयनिक त्रिज्या का महत्व-क्रिस्टल की संरचना में त्रिज्या-अनुपात का संबंध को-ऑर्डिनेशन संख्या से है, जिसकी सहायता से क्रिस्टल की ज्यामिति का निर्धारण किया जा सकता है।
MP Board Class 12th Chemistry Solutions Chapter 1 ठोस अवस्था - 33

प्रश्न 5.
एक ठोस AB की संरचना NaCL जैसी है। यदि धनायन A की त्रिज्या 100 pm है तो ऋणायन की त्रिज्या ज्ञात कीजिए।
हल – NaCl के लिए त्रिज्या अनुपात \(\frac{r^{+}}{r^{-}}\) का मान 0.414 से 0.732 के बीच होना चाहिए। धनायन की त्रिज्या 100 pm है।
अतः ऋणायन की त्रिज्या r =\(\frac{r^{+}}{0 \cdot 414}\) से \(\frac{r^{+}}{0 \cdot 732}\) होगी।
= \(\frac{100}{0 \cdot 414}\) से \(\frac{100}{0.732}\)
= 241.6 से 236.6 pm के बीच होगी।

प्रश्न 6.
Na तथा CI की आयनिक त्रिज्या क्रमश: 95 pm तथा 181 pm है। Na की संयोजन संख्या क्या होगी?
अथवा
A तथा B का अर्द्धव्यास क्रमशः 0.95Ā एवं 1.81 Ā है। A+ की संयोजन संख्या ज्ञात कीजिए।
हल – Na+ की त्रिज्या = 95 pm
Cl की त्रिज्या = 181 pm
त्रिज्या अनुपात =\(\frac{r^{+}}{r^{-}}=\frac{95}{181}\) = 0.524
त्रिज्या अनुपात 0.414 और 0.732 के मध्य है। अत: Na+ अथवा A+ की संयोजन संख्या 6 होगी।

प्रश्न 7.
एक तत्व के फलक केन्द्रित घनीय क्रिस्टल की इकाई लम्बाई 400 pm है। तत्व के घनत्व की गणना कीजिए। तत्व का परमाणु द्रव्यमान 60 है।
हल – d =\(\frac{\mathrm{Z} \times \mathrm{M}}{\mathrm{N}_{0} \times a^{3}}\)
“ Noxa? यहाँ
d = तत्व का घनत्व = ?
Z= कणों की संख्या = 4
M = परमाणु द्रव्यमान = 60
No = ऐवोगेड्रो संख्या = 6-023 x 1023

a = इकाई कोशिका के किनारे की लम्बाई = 400 pm
d=\(\frac{4 \times 60}{\left(400 \times 10^{-10} \mathrm{cm}\right)^{3} \times 6 \cdot 023 \times 10^{23}}\)
= 6.2 gmcm-3

प्रश्न 8.
एक फलक केन्द्रित घन (fcc) वाले तत्व का परमाणु द्रव्यमान 60g mor-‘ है तथा उसके फलक की लम्बाई (Face edge) 400 pm है। उस तत्व का घनत्व ज्ञात कीजिए।
हल – सेल के फलक की लम्बाई = 400 pm = 400 × 10-12m ( ∴1pm = 10-12m)
∴ यूनिट सेल का आयतन (a)3 = (फलक की लम्बाई)3 .
= (400 × 10-12m)3= 64 × 10-30m3
= 64 × 10-30 (102 cm)3 = 64 × 10-24 cm3
fcc सेल में परमाणुओं की संख्या (Z) =4
सूत्र-यूनिट सेल का घनत्व = \(\frac{\mathrm{Z} \times \mathrm{M}}{a^{3} \times \mathrm{N}_{\mathrm{A}}}\)

MP Board Class 12th Chemistry Solutions Chapter 1 ठोस अवस्था - 34

प्रश्न 9.
यौगिक CuCI की Zns के समान घनीय संरचना होती है। यदि CuCI का घनत्व 3-4g cm हो, तो उसके यूनिट सेल के फलक की लम्बाई ज्ञात कीजिए।
हल- ZnS की fcc संरचना होती है, अत: यही संरचना CuCl की होगी। यदि यूनिट सेल के फलक की लम्बाई a, fcc में परमाणुओं की संख्या Z, आण्विक द्रव्यमान M तथा ऐवोगेड्रो संख्या NA हो, तो
MP Board Class 12th Chemistry Solutions Chapter 1 ठोस अवस्था - 35
a=\(\left[\frac{4 \times 99 \mathrm{g}}{6 \cdot 02 \times 10^{23} \times 3 \cdot 4}\right]^{1 / 3}\)
athah
= (193 . 47x 10-24 cm3)1/3
= 5.78 x 10-8cm = 578pm.

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MP Board Class 7th Hindi Bhasha Bharti Solutions Chapter 5 मध्यप्रदेश का वैभव

MP Board Class 7th Hindi Bhasha Bharti Solutions Chapter 5 मध्यप्रदेश का वैभव

MP Board Class 7th Hindi Bhasha Bharti Chapter 5 पाठ का अभ्यास

बोध प्रश्न

भाषा भारती कक्षा 7 पाठ 5 MP Board प्रश्न 1.
निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर लिखिए
(क) नर्मदा नदी को मध्यप्रदेश की जीवनरेखा क्यों कहा गया है ?
उत्तर-
नर्मदा नदी मध्यप्रदेश के एक बड़े भू-भाग से होकर गुजरती है। मध्य प्रदेश के कई छोटे-बड़े शहर इसके किनारे बसे हैं। अपने उद्गम स्रोत अमरकंटक से लेकर खम्भात की खाड़ी (गुजरात) तक के मार्ग में यह नदी मध्यप्रदेश की धरती को अपने जीवनदायक जल से अभिसिंचित करती है। फलस्वरूप इसे मध्यप्रदेश की जीवनरेखा कहा गया है।

(ख) पचमढ़ी में कौन-कौन से दर्शनीय स्थल हैं ?
उत्तर-
पचमढ़ी में अनेक दर्शनीय स्थल, जैसे धूपगढ़, चौरागढ़, महादेव मन्दिर एवं सूर्योदय-सूर्यास्त के अनुपम दृश्य इत्यादि हैं। यहाँ पर स्थित पाँच गुफाएँ पौराणिक महत्त्व रखती

(ग) चन्द्रगुप्त विक्रमादित्य इतिहास में क्यों अमर हैं ?
उत्तर-
विक्रम संवत् को प्रारम्भ करने वाले प्रख्यात सम्राट चन्द्रगुप्त विक्रमादित्य अवन्तिका (उज्जैन) के राजा थे। वे अपनी न्यायप्रियता, बुद्धिमत्ता, विवेकपूर्ण निर्णय और प्रजापालन आदि के लिए इतिहास में अमर हैं।

(घ) अवन्तिका का वर्तमान नाम क्या है ? तथा यह क्यों प्रसिद्ध है ?
उत्तर-
अवन्तिका का वर्तमान नाम उज्जैन है। उज्जैन में प्रसिद्ध ज्योतिर्लिङ्ग महाकाल का मन्दिर है जो भारत के बारह ज्योतिर्लिङ्गों में से एक है। श्रीकृष्ण की शिक्षा से जुड़ा पौराणिक महत्व का सांदीपनी आश्रम भी यहीं पर है। प्रत्येक बारह वर्ष के अन्तराल पर उज्जैन में कुम्भ मेला आयोजित होता है। इसे सिंहस्थ पर्व भी कहते हैं।

(ङ) मध्यप्रदेश के मुख्य लोकनृत्य, लोकनाट्य कौन-कौन से हैं?
उत्तर-
मध्यप्रदेश के मुख्य लोकनृत्य राई, सैरी, बधावा, ढिमरहाई इत्यादि हैं तथा ढोलामारू, माच और स्वांग इत्यादि यहाँ के प्रमुख लोक नाट्य हैं।

(च) मध्यप्रदेश की मुख्य बोलियाँ कौन-कौन सी हैं ?
उत्तर-
मध्यप्रदेश में प्रमुख रूप से हिन्दी बोली जाती है, – किन्तु अन्य बोलियों के रूप में बुन्देली, मालवी, भीली, बघेली, निमाड़ी इत्यादि बोलियों को बोलने वाले लोगों की संख्या भी काफी है।

(छ) मध्यप्रदेश को लघु भारत क्यों कहा गया है ?
उत्तर-
मध्यप्रदेश में विभिन्न धर्मों, रीति-रिवाजों व मान्यताओं के लोग परस्पर भाईचारे और सद्भाव से निवास करते हैं। प्रदेश में महाराष्ट्र का गणेश उत्सव, बंगाल की दुर्गा पूजा तथा उत्तर भारत की विजयादशमी और दीपावली के साथ-साथ होली, ईद, क्रिसमस जैसे त्यौहार भी उत्साहपूर्वक मनाये जाते हैं। वास्तव में, सांस्कृतिक एवं ऐतिहासिक दृष्टि से सम्पन्न मध्यप्रदेश, लघु भारत जैसा ही है।

Madhya Pradesh Ka Vaibhav MP Board प्रश्न 2.
खाली स्थान भरिए
(क) मैहर में ………………………………” का मन्दिर है।
(ख) कवि केशव की प्रसिद्ध कृति ……………………………… है।
(ग) झाबुआ का भाभरा ग्राम ……………………………… की जन्म स्थली है।
(घ) प्राचीनतम स्तूपों के लिए ……………………………… विख्यात है।

14 शिवलाल दिग्दर्शिका सम्पूर्ण विषय : कक्षा

(ङ) रीवा में स्थित ……………………………… जलप्रपात दर्शनीय है।
उत्तर-
(क) माँ शारदा,
(ख) रामचन्द्रिका,
(ग) चन्द्रशेखर आजाद,
(घ) साँची,
(ङ) चचाई।

Mp Board Class 5 Hindi Bhasha Bharti Solution प्रश्न 3.
निम्नलिखित विकल्प वाले प्रश्नों के सही उत्तर छाँटकर लिखिए
(क) इन्दौर शहर के राजवाड़ा में राजभवन है
(1) लोकमाता अहिल्याबाई का
(2) लक्ष्मीबाई का
(3) सुभद्रा कुमारी का
(4) दुर्गावती का।

(ख) बुंदेली के पितृपुरुष हैं
(1) डॉ. सर हरिसिंह गौर
(2) ईसुरी।
(3) भूषण
(4) पद्माकर।

(ग) भारत-भवन स्थित है
(1) इन्दौर में
(2) जबलपुर में :
(3) दिल्ली में
(4) भोपाल में।

(घ) दतिया प्रसिद्ध है
(1) शारदा देवी मन्दिर के लिए
(2) पीताम्बरा पीठ के लिए
(3) बाबनगज प्रतिमा के लिए
(4) शालभंजिका के लिए।
उत्तर-
(क) (1) लोकमाता अहिल्याबाई का,
(ख) (3) भूषण,
(ग) (4) भोपाल में,
(घ) (2) पीताम्बरा पीठ के लिए।

Mp Board Class 7th Hindi Chapter 5 प्रश्न 4.
निम्नलिखित दर्शनीय स्थलों और नगरों की सही जोड़ी बनाइए
(क) कामदगिरी। – (i) विदिशा
(ख) उदयगिरी – (ii) माँडवगढ़
(ग) माण्डू – (iii) साँची
(घ) हीरों की खान – (iv) चित्रकूट
(ङ) बौद्ध-स्तूप – (v) पन्ना
उत्तर-
(क) → (iv)
(ख) → (i)
(ग) → (ii)
(घ) → (v)
(ङ) → (iii)

भाषा अध्ययन

मध्य प्रदेश का वैभव MP Board प्रश्न 1.
निम्नलिखित शब्दों के दो अर्थ लिखिए-
उत्तर-
भाषा भारती कक्षा 7 पाठ 5 MP Board

Mp Board Class 7th Hindi Bhasha Bharti प्रश्न 2.
निम्नलिखित शब्दों का वाक्यों में प्रयोग कीजिए-
तोरण-द्वार, पाषाण-कालीन, हृदय-स्थली, जीवन-रेखा, | भरत-मिलाप, प्रस्तर-प्रतिमा
उत्तर-
(क) तोरण-द्वार-श्रीराम के वनवास से वापस लौटने पर कई तोरण-द्वार बनाये गये।
(ख) पाषाण-कालीन-हड़प्पा की खुदाई से कई पाषाण-कालीन तथ्य उजागर हुए हैं।
(ग) हृदय-स्थली-मध्यप्रदेश, भारत की हृदय-स्थली है।
(घ) जीवन-रेखा-गंगा नदी भारत की जीवन रेखा है।
(ङ) भरत-मिलाप-रामलीला के दौरान भरत-मिलाप की लीला देखकर दर्शकों की आँखें भर आईं।
(च) प्रस्तर-प्रतिमा-पास के मन्दिर में गणेश की एक भव्य प्रस्तर-प्रतिमा स्थापित की गई है।

Mp Board Class 7th Hindi प्रश्न 3.
शब्दों के अन्त में ‘ता’, ‘तम’ तथा ‘कार’ प्रत्यय जोड़कर नए शब्द बनाइए।
उत्तर-
‘ता’ प्रत्यय-सम + ता = समता; नीच + ता = नीचता; हीन + ता = हीनता।
“तम’ प्रत्यय-सरल + तम = सरलतम; कठिन + तम = कठिनतम; विशाल + तम = विशालतम!
‘कार’ प्रत्यय-उप + कार = उपकार; सर + कार = सरकार, कला + कार = कलाकार।

भाषा भारती कक्षा 5 Solutions MP Board प्रश्न 4.
निम्नलिखित वाक्यों में शब्दों को सही क्रम में लिखिए
(क) शान हैं अहिल्याबाई मालवा की।
उत्तर-
अहिल्याबाई मालवा की शान हैं।

(ख) भारत की हृदयस्थली है मध्यप्रदेश।
उत्तर-
मध्यप्रदेश भारत की हृदयस्थली है।

(ग) पवित्र नदियों क्षिप्रा में से मध्यप्रदेश की एक है।
उत्तर-
क्षिप्रा मध्यप्रदेश की पवित्र नदियों में से एक है।

(घ) उदाहरण हैं खजुराहो के मन्दिर स्थापत्य कला के।
उत्तर-
खजुराहो के मन्दिर स्थापत्य कला के उदाहरण हैं।

Bhasha Bharti Hindi Book Class 7 Solutions MP Board प्रश्न 5.
निम्नलिखित वाक्यों में से संयुक्त क्रियाएँ छाँटकर लिखिए
(क) कवि बिहारी का सम्बन्ध भी ओरछा से जुड़ा हुआ
(ख) भोपाल झीलों की नगरी के रूप में जाना जाता है।
(ग) भीमबेटका की गुफाएँ मध्य पाषाणकालीन मानव इतिहास का वैभव संजोए हैं।
(घ) किले अपनी भव्यता की कथा कहते रहते हैं।
(ङ) माण्डू के भग्नावशेष राजा बाजबहादुर और रानी रूपमती की कथा कहते प्रतीत होते हैं।
उत्तर-
(क) जुड़ा हुआ है,
(ख) जाना जाता है,
(ग) संजोए है,
(घ) कहते रहते हैं,
(ङ) कहते प्रतीत होते हैं।

मध्यप्रदेश का वैभव परीक्षोपयोगी गद्यांशों की व्याख्या

1. नर्मदा नदी मध्यप्रदेश की जीवनरेखा है। पुराणों में इसे मोक्षदायिनी कहा गया है। अमरकंटक से चलकर पश्चिम की ओर बहती हुई खम्भात की खाड़ी (गुजरात) में मिलती है। भेड़ाघाट पर नर्मदा का जल-प्रपात संगमरमर की चट्टानों के बीच ‘धुआँधार’ के रूप में विख्यात है। इसके तट पर बसे नगर महेश्वर और ओंकारेश्वर तीर्थ के रूप में प्रसिद्ध हैं।

सन्दर्भ-प्रस्तुत गद्यांश हमारी पाठ्य-पुस्तक ‘भाषा-भारती’ के ‘मध्यप्रदेश का वैभव’ नामक पाठ से अवतरित है। यह एक संकलित रचना है।

प्रसंग-प्रस्तुत गद्यांश में मध्यप्रदेश की जीवनरेखा कही जाने वाली नर्मदा नदी का वर्णन किया गया है।

व्याख्या-नर्मदा नदी को मध्यप्रदेश की जीवनरेखा कहा जाता है। हमारे पुराणों में तो इसके महत्त्व पर प्रकाश डालते “हुए इसे मोक्षदायिनी, अर्थात् मोक्ष प्रदान करने वाली कहा गया है। नर्मदा का उद्गम अमरकंटक नामक स्थान से हुआ है। वहाँ से अपनी यात्रा प्रारम्भ करके यह पश्चिम की ओर बहती हुई गुजरात में खम्भात की खाड़ी में पहुँचकर विश्राम करती है। इस। यात्रा के दौरान यह मध्यप्रदेश के कई नगरों व कस्बों को अपने जीवनदायक जल द्वारा अभिसिंचित करती है। नर्मदा नदी का अत्यन्त सुन्दर स्वरूप भेड़ाघाट में देखा जा सकता है, जहाँ यह जल-प्रपात के रूप में संगमरमर की ऊँची व विशालकाय चट्टानों के बीच से निकलती है। इस स्थान को ‘धुआँधार’ के नाम से जाना जाता है। अन्य अनेकों नगरों के अतिरिक्त इसके किनारे पर महेश्वर और ओंकारेश्वर नामक दो ऐतिहासिक नगर बसे हैं। जो तीर्थस्थान के रूप में विख्यात हैं।

2. “सांस्कृतिक, ऐतिहासिक दृष्टि से सम्पन्न हमारा मध्यप्रदेश, लघु भारत ही है। मध्यप्रदेश के वैभव की मिठास यहाँ के निवासियों के हृदय में रची-बसी है।”

सन्दर्भ-पूर्व की तरह।

प्रसंग-प्रस्तुत गद्यांश में मध्यप्रदेश को लघु भारत की संज्ञा दी गई है।

व्याख्या-मध्यप्रदेश में विभिन्न धर्मों, रीति-रिवाजों व मान्यताओं के लोग परस्पर भाईचारे और सद्भाव से निवास करते हैं। यहाँ भारत के अन्य सभी प्रदेशों में मनाये जाने वाले पारम्परिक तीज-त्यौहार मनाये जाते हैं। अतः सांस्कृतिक एवं ऐतिहासिक रूप से समृद्ध मध्य प्रदेश को लघु भारत कहना ठीक ही है। मध्यप्रदेश के गौरवशाली अतीत की मिठास इस प्रदेश के निवासियों के मन में आज भी विद्यमान है तथा जिसे उनके व्यवहार से महसूस किया जा सकता है।

मध्यप्रदेश का वैभव शब्दकाश

दर्शनीय = दर्शन के योग्य; मनोरम = सुन्दर, मन में रमने वाला; वैभव = सम्पत्ति, सम्पन्नता; पाषाण = पत्थर; मनोहारी = मन को अच्छा लगने वाला, मन को हरने वाला; सैलानी = पर्यटक, घूमने वाला; पुरा वैभव = प्राचीन-वैभव; नैसर्गिक = प्रकृति से सम्बन्धित; प्रतीक = चिह्न, संकेत; प्रस्तर = पत्थर; सृजन = रचना, किसी वस्तु का निर्माण करना; मोक्षदायिनी = मोक्ष देने वाली; अलंकृत = सजी हुई; भव्यता = सुन्दरता, विशालता; प्रतिस्पर्धा = टक्कर, मुकाबला; निसर्ग = प्रकृति; शैलाश्रय = पर्वतों में आदिम मनुष्यों के आवास स्थल, गुफाएँ; नक्काशी = बेलबूटे, चित्र बनाना; समाधि = मृत्यु के बाद बना हुआ स्मृति स्थल; उक्ति = कही गई बात, कहावत; जिजीविषा = जीने की इच्छा, जीवटता; शालभंजिका = विश्वप्रसिद्ध प्रतिमा।

MP Board Class 7th Hindi Solutions

MP Board Class 10th English The Rainbow Solutions Chapter 3 Of Expense

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MP Board Class 10th English The Rainbow Solutions Chapter 3 Of Expense (Francis Bacon)

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Of Expense Textbook Exercises

Of Expense Vocabulary

I. Find single words in the lesson which have roughly the meanings given below:

Mp Board Class 10 English Chapter 3 Question 1.
wonderfully fine
Answer:
magnificent

Of Expense Summary In Hindi MP Board Question 2.
to fall to a lower or worse state
Answer:
decay

Class 10 English Chapter 3 Mp Board Question 3.
the quality of being dishonest
Answer:
baseness

Class 10 English Chapter 3 Of Expense MP Board Question 4.
the great respect and admiration which people have for a person, country etc. often publically expressed
Answer:
estimation

Mp Board Class 10th English Chapter 3 Question 5.
the money used or needed for a purpose
Answer:
gettings

II. Use the following words in your own sentences.
hardly, scarcely, barely
Answer:
Hardly—We had hardly begun our walk, when it began to rain. Scarcely—There were scarcely fifty students present in the class. Barely-I barely had time to catch the train.

III. Say the following words and notice the difference in their pronunciation and meaning.
expense – expanse
estate – state
choose – chose
riches – reaches
beside – besides
diet – deity
Answer:
Mp Board Class 10 English Chapter 3

Comprehension

A. Answer the following questions in about 25 words.

Mp Board Class 10 English Workbook Solutions Chapter 3 Question 1.
How should prudent spending of riches be done?
Answer:
Riches are meant to be spent wisely. They are not meant to be wasted. They should be spent for honour and good actions. They should be spent keeping in view the worth of the occasion. Such spendings are known as prudent spendings.

Chapter 3 English Class 10 Mp Board Question 2.
What are the two motives for the sacrifice of all other possessions?
Answer:
Every man has a number of possessions. They include his estate, his regular income and his casual gettings. Honour and good actions are the two motives for the sacrifice of all other possessions.

Of Expense Questions And Answers MP Board Question 3.
What is Bacon’s advice on extraordinary expenses?
Answer:
In the essay ‘Of Expense’, Francis Bacon gives us an advice. He says that we should limit our extraordinary expenses, keeping in view the worth of the occasion. This means, the people should be discreet in spending money.

Of Expense Summary In English MP Board Question 4.
What are Bacon’s views on servants and employees?
Answer:
Bacon holds adverse views on servants and employees. He says that servants and employees are tricksters. They might deceive you if they spend your money on your behalf. They may also exploit you by keeping some money with them.

10th Class English Chapter 3 Question Answer MP Board Question 5.
Why should one keep one’s expenses within the limits of one’s income?
Answer:
Some people are quite spendthrift. They spend lavishly. They don’t keep their expenses within the limits of their income. They become the object of decay, sooner or later. Hence one should keep one’s expenses within the limits of one’s income.

Question 6.
What will be the fate of a man who is plentiful in expenses of all kinds?
Answer:
Some people do not realise the importance of economy. They do not believe in the habit of saving. They are plentiful in incurring expenses of all kinds. As a result they spend whatever they earn. Thus their fockets are emptied continuously and they fall into the grip of decay.

Question 7.
Where does one tend to be plentiful in expense?
Answer:
One tends to be plentiful in matters of diet and in the hall. These are important matters. Besides he should be saving in costumes, in stable and the like. Otherwise the economic balance will be disturbed.

Question 8.
Why is hasty selling disadvantageous?
Answer:
Sometimes a man wants to dispose of his estate. He should be very careful in it. If we make undue haste in selling our estate, we would be duped by the middleman. It would pinch us lifelong because haste makes waste.

B. Answer the following questions in about 50 words.

Question 1.
Sum up the salutary rules for expenditure suggested by Bacon in the lesson.
Answer:
Bacon has suggested the following salutary rules for expenditure in the lesson ‘Of Expense’. Bacon instructs his readers to be discreet in spending money. According to him, one should spend only a fixed portion of his income. The servants and employees should not be relied on. People should keep a proper balance between their gettings and spendings. They should never be wasteful in their expenditure. They should always be thoughtful in spending. It would save them from many dangers.

Question 2.
What does Bacon want to convey, when he says “To turn all to certainties’?
Answer:
Bacon is in favour of turning all to certainties. He instructs his readers to curtail their ordinary expenses. An individual must not spend more than half of his earnings. He should keep the balance between his earnings and expenditure. He should not depend on his servants and employees because they would bring only sorrow and uncertainty. He should be aware of the fact that his indiscreet spending would definitely bring pain in his life.

Question 3.
Distinguish between ordinary and extraordinary expenses in the light of the views expressed by Bacon. (M.P. Board 2016)
Answer:
Francis Bacon refers to two types of expenses. He terms them as ordinary and extraordinary expenses. Ordinary expenses are normal, usual and unavoidable routine expenses. They can be calculated in advance. Expenses on food, milk, fees for the children and payment of bills are necessary expenses. Extraordinary expenses are those expenses which are casual. They cannot be foreseen. The expenses on medicine, entertainment of guests, purchase of fashion items etc. come under this category.

Question 4.
How should riches be spent and husbanded to the best advantage? Support your answer with textual references.
Answer:
Riches are meant to be spent and not to be wasted. We should not depend on servants, employees or others in managing our financial matters. The wearer alone knows where the shoe pinches. Nobody else will feel pain while wasting your money. A prudent person always saves half of his earnings to avoid himself from sorrow. Riches should be spent keeping in view one’s own estate. There should be a healthy balance between the ordinary and the extraordinary expenses. The financial matters should be in one’s own hands.

Question 5.
How far are the views of Bacon relevant to the present time?
Answer:
Bacon was of the view that his readers should be discreet in spending money. We should spend only a fixed portion of our income and save the rest for the rainy day. We should personally look after our financial matters. His views are partially relevant to the present time. The way of life has totally changed now. Ladies and children have an upper hand in spending the money. The salaried people with a fixed singie income live from hand to month. Therefore, the question of saving money is a silly thought in the present scenario. Still we should save some amount to avoid future uncertainties.

Grammar

Study the following sentences.

1. Extraordinary expenses must be limited by the worth of the occasion.
2. Ordinary expense ought to be limited by a man’s estate.
3. Bills may be less than’ the estimation abroad.
4. But wounds cannot be cured without searching.
5. In clearing of a man’s estate, he may as well hurt himself in being too sudden, as in letting it run on too long.

The underlined verbs are Modals Auxiliaries. They are also called defective verbs because they cannot be used in all tenses and moods.
Study the chart carefully

12
Primary AuxiliariesModal Auxiliaries
be: am, is, are, was, were do, does, did, have, has, hadcan, could, may, might, shall, should, will, would, must (am to, is to, are to, have to etc.) ought to, used to, need, dare.

List out Primary and Modal Auxiliary separately from the text ‘Of Expense’
Answer:

Primary AuxiliariesModal Auxiliaries
are, be, is, has, havemust (be, may be), ought to, may, will, shall, cannot, need, can, will, may

Speaking Skill

Deliver the following dialogues between two friends in the market in a proper manner:
Mrs. Ansari—Mrs. Gupta looks very busy nowadays.
Mrs. Sharma—Does she? Formerly she used to return home early in the evening from the office.
Mrs. Ansari—Yes, but now she has taken up a new project. Mrs. Sharm. This is indeed a good news. She is definitely doing a good job.
Mrs. Ansari—Now she is going to buy a car very shortly and is also planning to have a flat in a posh colony.
Answer:
Mrs. Ansari told Mrs. Sharma that Mrs. Gupta looked very busy these days.
Mrs. Sharma felt surprised and asked Mrs. Ansari if she (Mrs. Gupta) actually did (look very busy these days). She added that formerly Mrs. Gupta used to return home early in the evening from the office. .
Mrs. Ansari replied in the affirmative but intervened saying that she had taken a new project. Mrs. Sharma called that a good news. She (Mrs. Sharma) added that she (Mrs. Gupta) was definitely doing a good job.
Mrs. Ansari endorsed Mrs. Sharma’s words. She appreciated that she (Mrs. Gupta) was going to buy a car very shortly and was also planning to have a flat in a posh colony.

Now converse in pairs what you would do to make a progress. These hints will help you.

  • Then your activity intelligently
  • work hard and manage your time
  • choose a field of your choice
  • invest in shares

Hardik—I have become a property agent.
Shivam—Do you have previous experience in this line?
Hardik—Yes, I have been working with a property dealer for the last five years.
Shivam—What are the basic requirements of this task?
Hardik—Hard work and time management.
Shivam—Which area have you chosen?
Hardik—I have chosen the area around Bhopal. I have arranged the initial money.
Shivam—May God grant you progress in your ambition!

Writing Skill

Question 1.
Write a short note on ‘proper money management’. (50 words)
Answer:
Money is not meant to be wasted. It is rather to be spent usefully and meaningfully. Every penny has its own value. It should be spent judiciously. Assess the utility of the item you undertake to purchase. Money should be spent open heartedly on necessities. It should be spent half heartedly on comforts. The purchase of luxuries should be neglected. Spend on the maintenance of assets. Spend on the health and education. Spend the least on fashion items. Eat well and clothe yourself well. Money should add to your joy and curtail your sorrow.

Question 2.
Your friend Rajesh residing at 21/4 Adhartal, Jabalpur, is very extravagant. Write a letter suggesting him how extravagance is to be minimized. (150 ivords)
Ans.
V.&.P. O. Sadhrana
A 3/12, Shivaji Enclave
To
21/4 Adhartal, Jabalpur,
17th July, 20xx
Dear Rajesh.
I have come to know that you are very extravagant. You buy unnecessary items and pile them up in your room. They consume most of your earnings. Moreover, they get outdated quite soon and are disposed off at dire cheap rates.

I advise you to think twice about the utility of the items before purchasing them. Consider its price and durability. See that the item you have purchased is needed badly in your house. It should not be a source of dispute or unpleasantness in your family. These considerations will minimize your extravagance. Hope, you will act upon my advice. With love.

Yours,
Subhash Vasistha

Think It Over

Question 1.
If you think you are being trapped into a pit, stop digging it. Think how far it is applicable to our financial behaviour. Elaborate.
Answer:
We should be very prudent in our financial behaviour! We are living in kalyug. Every relation has gone to the dogs. The people do not hesitate to cheat you by sweet but tricky words. There are dupes who would ask you to dig a pit and then bury you into it. In other words, they would urge you to spend your savings in some so-called fruitful business and rob you on the pretext of providing you with a chance to earn more. If at any stage, you smell their mischief, you should wind up your dealings with them, and stop digging the pit if you think you are being trapped into it.

Question 2.
Bacon says that one should make a good choice of servants and change them as often as conditions permit. Think why he wants us to change them and write your opinion.
Answer:
Bacon was called by Pope as the wisest of mankind. He has guided us to manage our financial matters ourselves. He calls servants double-edged swords. They rob their masters with both hands. They save money while making purchases. They also make silly purchases of unwanted items. On staying together for years the servants of a house/locality form a clique. They cause all types of harm to their masters and their families. They cause murders, robberies and kidnappings. Therefore, one should make a good, choice of servants and change them as often as conditions permit lest it should be too late.

Things To Do

One should buy more assets and less liabilities. Assets bring profits whereas liabilities cause expenses. As a student, classify the following things according to your needs. house, car, fixed deposit, land, education, motorcycle Add some more assets and liabilities to the list.
Answer:
MP Board Class 10th English The Rainbow Solutions Chapter 3 Of Expense 2

Of Expense Additional Important Questions

A.Read the passage and answer questions that follow:

1. Besides, he that clears at once will replace; for finding himself out of straits, he will revert to his customs; but he that cleareth by degrees induceth a habit of frugality, and gaineth as well upon his mind as upon his estate. Certainly, who hath a state to repair, may not despise small things; and commonly it is less dishonourable to abridge petty charges, than to stop to petty gettings. A man ought warily to begin charges which once begun will continue: but in matters that return not he may be more magnificent. (Page 19)

Questions:
(a) The above passage is taken from:
(i) The Happy Prince
(ii) Of Expense
(iii) The Bet
(iv) Refund
(b) Find a word from the above passage that is similar in meaning to ‘tradition’.
(c) Find a word from the above passage that is opposite in meaning to ‘dull’.
(d) Why will the person return to his customs?
Answers:
(a) (ii) Of Expense
(b) custom
(c) magnificent
(d) He will return to his customs because he will find himself out of straits.

I. Match the following:

1. Riches are for – (a) expenses of all kinds
2. Spending is for – (b) without searching
3. Wounds cannot be cured – (c) timorous and less subtle
4. New servants are more – (d) spending
5. Don’t be plentiful in – (e) honour and good actions
Answer:
1. (d), 2. (e), 3. (b), 4. (c), 5. (a).

II. Pick up the correct choice:

(i) (a) Extraordinary expense must be limited by the (worth/necessity) of the occasion.
(b) Ordinary expense ought to be limited by a man’s (state/estate).
(c) Bills may be less than the (estimate/estimation) abroad.
(id) If he is(wasteful/plentiful) in diet, he must be saving in apparel.
Answer:
(a) worth
(b) estate
(c) estimation
(d) plentiful.

(ii) (a) Man’s ordinary expenses (ought/ought to) be but to the half of his receipts.
(b) Wounds cannot be cured without (search/ searching)
(c)If he be painful in the hall to be saving in the (stable, cowshed)
(d) (Hasty/Hurried) selling is commonly as disadvantageous as interest.
Answer:
(a) ought to
(b) searching
(c) stable
(d) Hasty.

III. Write ‘True’ or ‘False’.

1. ’Of Expense 1 is a guide to show us how we should manage our financial matters.
2. Alexander Pope called Francis Bacon the ’luckiest of mankind’.
3. Ordinary expenses must not be subject to deceit and abuse of servants.
4. The employees should be changed often.
5. He that cleareth by degrees induceth a habit of frugality.
Answer:
1. True, 2. False, 3. True, 4. True, 5. True.

IV. Fill in the following blanks:

1. Certainly who hath …………. may not despise small things.
2. Riches are for ……….. and spending for honour and good actions
3. It is no ………….. for the greatest to descend and look into their own estate.
4. New servants are more ………….. and less subtle.
5. He that is ……….. in expenses of all kinds will hardly be preserved from decay.
Answer:

  1. a state to repair
  2. spending
  3. baseness
  4. timorous
  5. plentiful.

B. Short Answer Type Questions (In about 25 words)

Question 1.
Give a brief life-sketch of Francis Bacon.
Answer:
Francis Bacon was born in 1561 at York House in London. He sought his education at Trinity College, Cambridge. He became a member of Parliament in 1584. He wrote several papers on public affairs. His essays are full of worldly wisdom. Alexander Pope has rightly said that he was ‘the wisest of mankind’.

Question 2.
What is Bacon’s opinion about old and new servants?
Answer:
A prudent person should manage his financial affairs himself. If he has no time to do so, he should choose well those whom he employs. The present-day servants are a nuisance. Most of them are criminals or run away from law. The rule ‘Old is gold/ does not hold good in their case. The new servants prove more timorous and less subtle.

Question 3.
What is the basic need of the present man?
Answer:
The basic need of the present man is to be frugal. If he happens to be plentiful in some kind of expense, then he should be economical in some other expense. If he is plentiful in matters of diet, he should be saving in clothes. If he spends more on watching films, he should save in some other items.

Question 4.
What happens to a person who is plentiful in expenses of all kinds?
Answer:
Every man gets a fixed income. One can hardly make both the ends. If we fail to spend the hard-earned money economically it would be spent in total. Then what will happen during rainy days? The person concerned will fall in the grip of decay and will become a borrower. Hence, it is wise to be wise in spending money.

C. Long Answer Type Questions (In about 50 words)

Question 1.
What are the modes of expenditure of the present day city-dwellers?
Answer:
The city-dwellers are the most extravagant fellows in the present day world. They hold nuclear families which have no place for the aged persons. They spend their monthly income in advance. They pay the heavy bills of the items purchased on installments. They spend less on food items and more on clothes and items of decoration. Medicines, and education of children and transportation consume the better part of their incomes. They spend unduly on celebrations.

Of Expense Introduction

This essay teaches us how we should manage our financial matters. The author instructs his readers to be discreet in spending money. He wants them to spend only a fixed portion of their income to avoid future uncertainties.

Of Expense Summary in English

Riches are for spending honourably and in noble actions. Extraordinary expenses must be limited by the worth of the occasion and by a man’s estate. We should spend the money thoughtfully so that the servants might not deceive us or abuse our money. A wise man’s expenses never exceed half of his irıcome. There is no harm for a great man to look into his own estate to avoid sorrow.

If we are plentiful in some kind of expense, we must be frugal in certain other kinds. He who is plentiful in expenses of all kinds will meet decay. Hasteful clearing of one’s estates hurts one a great deal. It proves disadvantageous. Clearing the estates by degrees induces a habit of frugality. It proves advantageous both financially and mentally. A man ought to begin charges carefully. It is not silly to curtail petty charges in comparison with stopping to petty earnings.

Of Expense Summary in Hindi

धनराशि, सम्मानपूर्वक ढंग से और नेक कामों में खर्च करने के लिए है। समय को तथा मनुष्य की हैसियत को देखकर असाधारण खर्चों को सीमित करना चाहिए। हमें धनराशि को सोच-समझकर खर्च करना चाहिए ताकि नौकर हमें धोखा नहीं दे सकें और हमारी धनराशि का दुरुपयोग नहीं कर सकें। किसी बुद्धिमान व्यक्ति का खर्च उसकी आधी आमदनी से अधिक नहीं बढ़ता है। दुख से बचने के लिए अपनी हैसियत (सम्पत्ति) को ध्यान में रखने में किसी महान् पुरुष को कोई हानि नहीं है।

यदि हम किसी खर्च में मुक्तहस्त हो जाते हैं तो हमें किन्हीं दूसरे खर्चों में किफायती (कृपण) होना चाहिए। जो सभी खर्चों में मुक्तहस्त होता है वह बर्बाद हो जाता है। यदि अपनी भूसम्पत्ति का जल्दबाजी में सौदा किया जाएगा तो वह काफी दुख का कारण बन जाएगा । वह हानिकारक सिद्ध होता है, क्रमिक रूप से भूसम्पत्ति का निपटारा करना किफायतसारी (कृपणता) की प्रवृति को प्रोत्साहित करता है। यह आर्थिक तथा मानसिक दोनों रूपों में लाभप्रद सिद्ध होता है। मनुष्यों को सावधानीपूर्वक आदेय प्रारम्भ करने चाहिएं। हलकी-फुलकी आमदनी को समाप्त करने की तुलना में छोटे आदेयों को घटाना मूर्खता नहीं है।

Of Expense Word-Meanings

MP Board Class 10th English The Rainbow Solutions Chapter 3 Of Expense 3
MP Board Class 10th English The Rainbow Solutions Chapter 3 Of Expense 4

Of Expense Some Important Pronunciations

MP Board Class 10th English The Rainbow Solutions Chapter 3 Of Expense 5

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MP Board Class 10th Hindi Vasanti Solutions Chapter 2 संस्कृति का स्वरूप

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MP Board Class 10th Hindi Vasanti Solutions Chapter 2 संस्कृति का स्वरूप (डॉ. वासुदेवशरण अग्रवाल)

संस्कृति का स्वरूप पाठ्य-पुस्तक के प्रश्नोत्तर

संस्कृति का स्वरूप लघु-उत्तरीय प्रश्नोत्तर

Class 10 Hindi Chapter 2 Mp Board प्रश्न 1.
‘संस्कृति से लेखक का क्या आशय है?
उत्तर-
‘संस्कृति’ से लेखक का आशय जीवन ढंग है।

Hindi Chapter 2 Class 10 Mp Board प्रश्न 2.
व्यक्ति का जीवन कब ढलने लगता है?
उत्तर-
व्यक्ति का जीवन तब ढलने लगता है, जब वह एक ही पड़ाव पर टिका रहता है।

Chapter 2 Hindi Class 10 Mp Board प्रश्न 3.
हमें दुराग्रह क्यों छोड़ देना चाहिए।
उत्तर-
हमें दुराग्रह इसलिए छोड़ देना चाहिए कि हमारे मत के समान दूसरों का भी मत हो सकता है।

प्रश्न 4.
भूतकालीन साहित्य से हमें क्या ग्रहण करना चाहिए?
उत्तर-
भूतकालीन साहित्य से हमें रूढ़ियों से ऊपर उठकर उसके नित्य अर्थ को ग्रहण करना चाहिए।

प्रश्न 5. धर्म का मथा हुआ सार क्या है?
उत्तर-
धर्म का मथा हुआ सार है-प्रयत्नपूर्वक अपने-आपको ऊँचा बनाना।

संस्कृति का स्वरूप दीर्घ उत्तरीय प्रश्नोत्तर

प्रश्न 1.
उन्नत देश कौन-से दो कार्य एक साथ सँभालते हैं?
उत्तर-
उन्नत देश आर्थिक कार्य और संस्कृति संबंधी कार्य-ये दोनों कार्य एक साथ सँभालते हैं।

प्रश्न 2.
संस्कृति जीवन के लिए आवश्यक क्यों है?
उत्तर-
संस्कृति जीवन के लिए आवश्यक है। यह इसलिए कि इससे हमारी निष्ठा पक्की होती है। हमारे मन की परिधि विस्तृत हो जाती है। हमारी उदारता का भंडार भर जाता है।

प्रश्न 3. कौन-से मनुष्य आत्म-हनन का मार्ग अपनाते हैं?
उत्तर-
जो यह सोचता कि पहले आचार्य और धर्म-गुरु जो कह गए, सब सच्चा है, उनकी सब बात सफल है और मेरी बुद्धि या विचारशक्ति टुटपुंजिया ऐसा ‘बाबा वाक्य प्रमाण’ के ढंग पर सोचने वाला मनुष्य केवल आत्म-हनन का मार्ग अपनाता है।

प्रश्न 4.
कैसे लोग नई संस्कृति को जन्म नहीं दे पाते?
उत्तर-
जब कर्म से भयभीत व्यक्ति केवल विचारों की उलझन में फँस जाते हैं, तब वे नई संस्कृति को जन्म नहीं दे पाते।

संस्कृति का स्वरूप भाषा अनुशीलन

प्रश्न 1.
निम्नलिखित शब्दों के विलोम शब्द लिखिए
उन्नति, उदारता, नूतन, सम्मान।
उत्तर-
‘शब्द – विलोम शब्द
उन्नति – अवनति
उदारता – अनुदारता
नूतन – पुरातन
सम्मान – अपमान।

प्रश्न 2.
निम्नलिखित मुहावरों/लोकोक्तियों का अर्थ स्पष्ट करते हुए वाक्यों में प्रयोग कीजिए
जीवन का ठाट, कसौटी पर कसना, घर खीर तो बाहर खीर।
उत्तर-
मुहावरे/लोकोक्तियाँ-अर्थ-वाक्य-प्रयोग जीवन का ठाट-संपन्नता-उसके जीवन का ठाट ढह गया है। कसौटी पर कसना-कड़ी परीक्षा लेना-सोना को कसौटी पर ही कसा जाता है।
घर खीर तो बाहर खीर-चारों ओर सुख-ही-सुख-भाग्यवानों का क्या कहना! उनके लिए तो घर खीर है तो बाहर भी खीर है।

प्रश्न 3.
तत्सम और तद्भव शब्दों को छाँटकर पृथक्-पृथक् लिखिएठाठ, चंद्र, संध्या, सहस्रों, पुराना, रास्ता।
उत्तर-
तत्सम शब्द-चंद्र, संध्या, सहस्रों। तद्भव शब्द-ठाठ, पुराना, रास्ता।

प्रश्न 4.
निम्नलिखित शब्द वर्तनी की दृष्टि से त्रुटिपूर्ण हैं। इन्हें शुद्ध रूप में लिखिए
एच्छिक, किरन, ज्योतसना, ध्वनी, प्रतीलिपि, उज्जैनी।
उत्तर-
MP Board Class 10th Hindi Vasanti Solutions Chapter 2 संस्कृति का स्वरूप img-1
संस्कृति का स्वरूप योग्यता-विस्तार

प्रश्न 1.
हमारे तीज-त्योहार भी संस्कृति के अंग हैं। वर्ष भर मनाए जाने वाले त्योहारों का चार्ट बनाकर कक्षा में लगाइए।
प्रश्न 2. ऐसे ऐतिहासिक/पौराणिक आदर्श चरित्रों को खोजिए जिन्होंने अपने पिता के अधूरे कार्यों को पूर्ण किया।
उत्तर-
उपर्युक्त प्रश्नों को छात्र/छात्रा अपने अध्यापक/अध्यापिका की सहायता से हल करें।

संस्कृति का स्वरूप परीक्षोपयोगी अतिरिक्त प्रश्नोत्तर

संस्कृति का स्वरूप अर्थग्रहण संबंधी प्रश्नोत्तर

प्रश्न 1.
सांस्कृतिक कार्य किस प्रकार फलदायी होता है?
उत्तर-
सांस्कृतिक कार्य कल्पवृक्ष की तरह फलदायी होता है।

प्रश्न 2.
संस्कृति क्या होती है?
उत्तर-
संस्कृति हमारे मन का मन, प्राणों का प्राण और शरीर का शरीर होती है।

प्रश्न 3.
संस्कृति कब विस्तृत मानव मन को जन्म देती है?
उत्तर-
संस्कृति राजनीति और अर्थशास्त्र दोनों को अपने में पचाकर इन दोनों से विस्तृत मानव मन को जन्म देती है।

प्रश्न 4.
हमारी गति में बाधा कब उत्पन्न होती है?
उत्तर-
हमारी गति में बाधा तब उत्पन्न होती है, जब हम संस्कृति के जड़ भाग के गुरुतर बोझ को ढोने लगते हैं।

प्रश्न 5. संस्कृति के कौन-कौन से अंग हैं?
उत्तर-
संस्कृति के अंग धर्म, दर्शन, साहित्य, कला आदि हैं।

2. निम्नलिखित कथनों के लिए दिए गए विकल्पों से सही विकल्प का चयन कीजिए

1. राजनीति की साधना का अंग है
(क) एक
(ख) दो
(ग) तीन
(घ) चार।
उत्तर-
(क) एक

2. कला और संस्कृति के लेखक हैं
(क) महावीर प्रसाद द्विवेदी
(ख) हजारी प्रसाद द्विवेदी
(ग) डॉ. वासुदेवशरण अग्रवाल
(घ) उपेन्द्रनाथ ‘अश्क’
उत्तर-
(ग) डॉ. वासुदेवशरण अग्रवाल

3. गुप्तकाल के दूसरे महान् विद्वान हैं.
(क) श्री सिद्धसेन
(ख) दिवाकर
(ग) श्री सिद्धसेन दिवाकर
(घ) कोई नहीं।
उत्तर-
(ग) श्री सिद्धसेन दिवाकर

4. अश्वघोष हैं
(क) आलोचक
(ख) निबंधकार
(ग) पत्रकार
(घ) महाकवि।
उत्तर-
(घ) महाकवि।

5. एक-दूसरे के पूरक हैं
(क) आर्थिक और सांस्कृतिक कार्यक्रम
(ख) आर्थिक कार्यक्रम
(ग) सांस्कृतिक कार्यक्रम
(घ) उपर्युक्त कोई नहीं।
उत्तर-
(क) आर्थिक और सांस्कृतिक कार्यक्रम

3. रिक्त स्थानों की पूर्ति दिए गए विकल्पों में से चुनकर कीजिए.

1. संस्कृति का स्वरूप के लेखक हैं ……………………….. (केदारनाथ अग्रवाल, डॉ. वासुदेवशरण अग्रवाल)
2. संस्कृति की प्रवृत्ति ……………………….. देने वाली होती है। (महाफल, कल्पवृक्ष)
3. जीवन के नानाविध स्वरूपों का समुदाय ही ……………………….. है (वृक्ष, संस्कृति)
4. ……………………….. संस्कृति का अंग है। (कर्म, धम)
5. ……………………….. ने गुप्तकाल की स्वर्णिम युगीन भावना को प्रकट किया है। (अश्वघोष, कालिदास)
उत्तर-
1. डॉ. वासुदेवशरण अग्रवाल,
2. महाफल,
3. संस्कृति,
4. धर्म,
5. कालिदास

4. सही जोड़े मिलाइए।
MP Board Class 10th Hindi Vasanti Solutions Chapter 2 संस्कृति का स्वरूप img-2
उत्तर-
MP Board Class 10th Hindi Vasanti Solutions Chapter 2 संस्कृति का स्वरूप img-3

5. निम्नलिखित वाक्य सत्य हैं या असत्य? वाक्य के आगे लिखिए

1. संस्कृति शब्द बड़ा व्यापक है।
2. हमारे जीवन का ढंग हमारी संस्कृति है।
3. संस्कृति जीवन में परमावश्यक नहीं है।
4. संस्कृति की उपजाऊ भूमि है-पूर्व और पश्चिम का मेल।
5. धर्म का अर्थ मत विशेष का आग्रह है।
उत्तर-
1 (सत्य),
2 (सत्य),
3 (असत्य),
4 (सत्य),
5 (असत्य)।

6. एक शब्द में उत्तर दीजिए

1. सांस्कृतिक कार्य किस तरह फलदायी होता है?
2. मनुष्य के भूत, वर्तमान और भावी जीवन का कौन प्रकार है?
3. संस्कृति का कौन रूप होता है?
4. जीवन के नानाविध रूपों का समुदाय क्या होती है?
5. किससे प्रकृति की संस्कृति भुवनों में व्याप्त हुई ?
उत्तर-
1. कल्पवृक्ष,
2. सर्वांगपूर्ण,
3. मूर्तिमान,
4. संस्कृति,
5. देवशिल्पों से।

संस्कृति का स्वरूप लघु-उत्तरीय प्रश्नोत्तर

प्रश्न 1. कौन-से वहुत फल देने वाला बड़ा वृक्ष बन जाता है?
उत्तर-
सांस्कृतिक कार्य के छोटे-से बीज से बहुत फल देने वाला बड़ा वृक्ष बन जाता है।

प्रश्न 2.
हमें अपने जीवन की उन्नति और आनंद के लिए क्या करना चाहिए?
उत्तर-
हमें अपने जीवन की उन्नति और आनंद के लिए अपनी संस्कृति की सुधि लेनी चाहिए।

प्रश्न 3.
सांस्कृतिक कार्य की उचित दिशा और सच्ची उपयोगिता क्या है?
उत्तर-
साहित्य, कला, दर्शन, और धर्म से जो मूल्यवान सामग्री हमें मिल सकती है, उसे नए जीवन के लिए ग्रहण करना, यहीं सांस्कृतिक कार्य की उचित दिशा और सच्ची उपयोगिता है।

संस्कृति का स्वरूप लेखक-परिचय

जीवन-परिचय-हिंदी के गद्य-लेखकों में डॉ. वासुदेवशरण अग्रवाल का महत्त्वपूर्ण स्थान है। आपका जन्म सन् 1904 ई. में हुआ था। आपने अपनी आरंभिक शिक्षा समाप्त करके उच्च शिक्षा के लिए लखनऊ विश्वविद्यालय में प्रवेश लिया। वहाँ से आपने एम.ए. की परीक्षा उत्तीर्ण की। इसके बाद वहीं से पी.-एच.डी. और डी.लिट. की भी उपाधियाँ हासिल की। इसके बाद आपने सरकारी नौकरी की। इसके लिए आपने सेण्ट्रल एशियन एक्टीक्विटीज म्यूजियम के अधीक्षक तथा भारतीय पुरातत्त्व विभाग के अध्यक्ष पद पर कई वर्षों तक सफलतापूर्वक कार्य किया। इसके बाद आपकी नियुक्ति काशी हिंदू विश्वविद्यालय के भारती महाविद्यालय में प्रोफेसर पद पर हुई।

रचनाएँ-डॉ. वासुदेवशरण अग्रवाल द्वारा लिखित और संपादित पुस्तकें हैं–उर-ज्योति, कला और संस्कृति, कल्पवृक्ष, कादम्बरी, मलिक मुहम्मद जायसी, पद्मावत, पाणिनीकालीन भारतवर्ष, पृथ्वीपुत्र, पोद्दार अभिनंदन ग्रंथ आदि।

भाषा-शैली-डॉ. वासुदेवशरण अग्रवाल की भाषा उच्चस्तरीय है। फलस्वरूप उसमें तत्सम शब्दों की प्रधानता है। इस प्रकार के आए हुए तत्सम शब्द असाधारण हैं। हालाँकि उनका यह प्रयास रहा है कि वे बहुप्रचलित अर्थपूरक शब्दों को ही प्रयुक्त करें, फिर उनके द्वारा प्रस्तुत शब्द सामान्यपाठक की समझ से परे हो गए हैं। इस आधार पर यह कहा जा सकता है कि इस प्रकार के शब्दों से बने हुए वाक्य-स्वरूप जटिल और गंभीर हो गए हैं।

डॉ. वासुदेवशरण की शैली में प्रवाह और गति है। उसमें क्रमबद्धता और स्वच्छंदता है। वह भावों को ढालने में तत्पर और सक्षम है। इस प्रकार उनका शैली-विधान अधिक प्रभावशाली. है, सराहनीय है और सटीक है। वह भाव और भाषा दोनों को बखूबी वहन करने में समर्थ है।

साहित्य में स्थान-डॉ. वासुदेवशरण अग्रवाल का साहित्यिक महत्त्व सर्वमान्य है। उनके लेखन में साहित्य की विविधता और अनेकरूपता है। कालिदास के मेघदूत और बाणभट्ट के हर्ष-चरित की नयी पीठिका को प्रस्तुत करने में आपका अनूठा योगदान है। इस दृष्टि से आप और अधिक सराहनीय हैं। यही नहीं आप भारतीय इतिहास, पुरातत्त्व और भारतीय संस्कृति के गंभीर और उच्चस्तरीय अध्येताओं में भी शीर्ष स्थान पर हैं।

निबंध का सार डॉ. वासुदेवशरण अग्रवाल लिखित निबंध ‘संस्कृति का स्वरूप’ एक ज्ञानबर्द्धक और भावबर्द्धक निबंध है। ‘संस्कृति’ शब्द के स्वरूप, अर्थ और महत्त्व को निबंधकार ने कई प्रकार समझाने और स्पष्ट करने का प्रयास किया है। निबंधकार का यह मानना है कि ‘जीवन के नानाविध रूपों का समुदाय ही संस्कृति है। संस्कृति के इन रूपों का उत्तराधिकार भी हमारे साथ चलता है। धर्म, दर्शन, साहित्य, कला उसी के अंग हैं। बुद्धि के संबल से ही राष्ट्र का संवर्धन संभव होता है। इसका सबसे प्रबल कार्य संस्कृति की साधना है।

संस्कृति की उर्वर भूमि के लिए आवश्यक है-पुरानी और नयी मान्यताओं का मेल-मिलाप। इसके लिए किसी प्रकार के दुराग्रह से मुक्ति नितांत आवश्यक है। यही कारण है कि जब कर्म से भयभीत व्यक्ति केवल विचारों की उलझन में फँस जाता है, तब वह जीवन की किसी नई पद्धति या संस्कृति को जन्म नहीं दे पाता। इसलिए यह बहुत आवश्यक है कि पूर्वकालीन संस्कृति के जो निर्माणकालीन तत्त्व हैं, उन्हें लेकर हम कर्म में लगें और नई वस्तु का निर्माण करें। निबंधकार का अंततः यह मानना है कि “जीवन को उठाने वाले जो नियम हैं, वे जब आत्मा में बसने लगते हैं, तभी धर्म का सच्चा आरंभ मानना चाहिए। साहित्य, कला, दर्शन और धर्म से जो मूल्यवान सामग्री हमें मिल सकती है, उसे नए जीवन के लिए ग्रहण करना, यही सांस्कृतिक कार्य की उचित दिशा और सच्ची उपयोगिता है।”

संस्कृति का स्वरूप संदर्भ और प्रसंग सहित व्याख्या

1. संस्कृति की प्रवृत्ति महाफल देने वाली होती है। सांस्कृतिक कार्य के छोटे-से बीज से बहुत फल देने वाला बड़ा वृक्ष बन जाता है। सांस्कृतिक कार्य कल्पवृक्ष की तरह फलदायी होते हैं। अपने ही जीवन की उन्नति, विकास और आनंद के लिए हमें अपनी संस्कृति की सुधि लेनी चाहिए। आर्थिक कार्यक्रम जितने आवश्यक हैं, उनसे कम महत्त्व संस्कृति-संबंधी कार्यों का नहीं है। दोनों एक ही रथ के दो पहिए हैं, एक-दूसरे के पूरक हैं, एक के बिना दूसरे की कुशल नहीं रहती। जो उन्नत देश हैं, वे दोनों कार्यों को एक साथ संभालते हैं। वस्तुतः उन्नति करने का यही मार्ग है। मन को भुलाकर केवल शरीर की रक्षा पर्याप्त नहीं है।

शब्दार्थ-प्रवृत्ति-मन का किसी विषय की ओर झुकाव। कल्पवृक्ष इच्छा पूरी करने वाला वृक्ष। सुधि खबर। उन्नत-श्रेष्ठ, संपन्न। वस्तुतः वास्तव में। पर्याप्त काफी।

संदर्भ-प्रस्तुत गद्यांश हमारी पाठ्य-पुस्तक ‘हिंदी सामान्य’ में संकलित निबंधकार डॉ. वासुदेवशरण अग्रवाल लिखित निबंध ‘संस्कृति का स्वरूप’ से है।

प्रसंग-प्रस्तुत गद्यांश में निबंधकार ने संस्कृति की प्रवृत्ति क्या होती है, इस पर प्रकाश डालते हुए कहा है कि

व्याख्या-संस्कृति का किसी खास विषय की ओर झुकाव निश्चय ही सुखद और पुष्यदायक फल को प्रदान करने वाली होती है। इस आधार पर हम यह कह सकते हैं कि संस्कृति के द्वारा जो भी काम, चाहे वे कितने भी छोटे-छोटे क्यों न हों, वे सभी-के-सभी उस बीज की तरह होते हैं, जिससे कुछ समय बाद कोई बड़ा और शक्तिशाली पेड़ देखते-देखते तैयार हो जाता है। वह वास्तव में कल्पवृक्ष के समान सर्वाधिक आनंददायक और इच्छाओं को पूरा करने वाला होता है। इसलिए हमें अपने जीवन के विकास-सुख आनंद आदि की प्राप्ति के लिए अपनी-अपनी संस्कृति को याद करके उसे अपनाना चाहिए। यहाँ यह ध्यान देना आवश्यक है कि जिस प्रकार आर्थिक कार्यक्रम हमारे जीवन के विकास, सुख और आनंद की प्राप्ति के लिए बहुत जरूरी है, उतने ही संस्कृति से संबंधित कार्यक्रम भी। दूसरे शब्दों में, यह कहा जा सकता है कि आर्थिक और सांस्कृतिक कार्यक्रम एक रथ के दो पहिए होने के कारण समान रूप से उपयोगी हैं। दोनों एक-दूसरे के पूरक हैं; अर्थात एक का दूसरे के बिना कोई महत्त्व और प्रभाव नहीं है। सचमुच में जीवन में सुख-शांति, चैन, आनंद और विकास करने का यही तरीका है। यही एक रास्ता है। यह ध्यान रहे कि अगर हम मन को भुलाकर केवल शारीरिक रक्षा करते हैं, तो इससे हमें जीवन के सुख-आनंद आदि की प्राप्ति नहीं हो सकती है।

विशेष-
1. संस्कृति की प्रवृत्ति का महत्त्व बतलाया गया है।
2. आर्थिक और सांस्कृतिक कार्यक्रम को जीवन विकास के आधार कहे गए हैं।
3. एक ही रथ के दो पहिए हैं’ उपमा आकर्षक है।

अर्थ-ग्रहण संबंधी प्रश्नोत्तर

प्रश्न 1.
संस्कृति की क्या विशेषता है? उत्तर-संस्कृति महाफल देने वाला कल्पवृक्ष है। प्रश्न 2. कौन दो एक ही रथ के पहिए हैं और क्यों?
उत्तर-
आर्थिक कार्यक्रम और संस्कृति संबंधी कार्यक्रम ये दोनों एक ही रथ के पहिए हैं। यह इसलिए ये दोनों एक-दूसरे के पूरक हैं, अर्थात् एक के बिना दूसरे का काम नहीं चल पाता है।

विषय-वस्तु पर आधारित बोध प्रश्नोत्तर

प्रश्न 1.
उपर्युक्त गद्यांश का आशय स्पष्ट कीजिए।
उत्तर-
उपर्युक्त गद्यांश में निबंधकार ने संस्कृति के स्वरूप को बतलाना चाहिए। निबंधकार के अनुसार संस्कृति महाफल प्रदान करने वाला कल्पवृक्ष के समान है। इसलिए अगर हमें अपना जीवन-विकास करना है और आनंद की प्राप्ति करनी है तो हमें अपनी संस्कृति को अपनाना होगा। इसके लिए हमें आर्थिक और सांस्कृतिक दोनों कार्यक्रम साथ ही चलाने होंगे।

2. यों तो संसार में अनेक स्त्रियाँ और पुरुष हैं, पर एक जन्म में जो हमारे माता-पिता बनते हैं उनके गुण हममें आते हैं और उन्हीं को हम अपनाते हैं। ऐसे ही संस्कृति का संबंध है, वह सच्चे अर्थों में हमारी धात्री होती है। इस दृष्टि से वह संस्कृति हमारे मन का मन, प्राणों का प्राण और शरीर का शरीर होती है। इसका यह अर्थ नहीं कि हम अपने विचारों को किसी प्रकार संकुचित कर लेते हैं। सच तो यह है कि जितना अधिक हम एक संस्कृति के मर्म को अपनाते हैं उतने ही ऊँचे उठकर हमारा व्यक्तित्व संसार के दूसरे मनुष्यों, धर्मों, विचारधाराओं और संस्कृतियों से मिलने और उन्हें जानने के लिए समर्थ और अभिलाषी बनता है।

शब्दार्थ-धात्री=धारण करने वाली। संकुचित छोटा। समर्थ=योग्य। अभिलाषी इच्छुक।

संदर्भ-पूर्ववत्।

प्रसंग-प्रस्तुत गद्यांश में निबंधकार ने संस्कृति के स्वरूप पर प्रकाश डालते हुए कहा है कि

व्याख्या-हम यह अच्छी तरह जानते हैं कि संसार में अनेक प्रकार के नर-नारी हैं। उनके गुण-धर्म भी अलग-अलग हैं। उन सभी से हमारा संबंध न होकर अपने माता-पिता से बनते हैं। हमारे ये संबंध बड़ी गहराई में होते हैं। इसलिए उनके गुण-धर्म हमें प्रभावित करते हैं और हम उन्हें अपनाते हैं। यही संबंध संस्कृति का भी होता है। वह वास्तव में हमें धारण करती है। इससे हमारा मन, हमारे प्राण और हमारा शरीर संस्कृति के ही अनुरूप बन कर रह जाता है। उसका यह अर्थ नहीं लेना चाहिए कि हमारी सोच-समझ को संस्कृति बदल देती है और अपने अनुरूप ढाल लेती है। इससे हटकर सच्चाई तो यह है कि जब हम एक संस्कृति को अच्छी तरह से अपना लेते हैं और उससे प्रभावित हो जाते हैं, तब हम दूसरी संस्कृतियों के स्वरूप, गुण, धर्म, प्रभाव आदि को जानने और समझने को लालायित होने लगते हैं। फिर इसकी पूर्ति के लिए प्रयत्नशील हो उठते हैं। कहने का भाव यह है कि हम एक संस्कृति को विधिवत जानकर-समझकर और उसके गुण-धर्म को अपनाकर ही दूसरे मनुष्यों, धर्मों, विचारधाराओं आदि को जानने-समझने के योग्य हो सकते हैं।

विशेष-
1. एक संस्कृति को अपनाकर ही दूसरी संस्कृति को समझने की आवश्यकता पर बल दिया गया है।
2. भाषा में प्रभाव और प्रवाह है।
3. शब्द-विधान ऊँचे हैं।

अर्थग्रहण संबंधी प्रश्नोत्तर

प्रश्न 1.
संस्कृति का संबंध कैसा होता है?
उत्तर-
संस्कृति का सबंध माता-पिता के समान होता है।

प्रश्न 2.
संस्कृति क्या है?
उत्तर-
संस्कृति हमारी धात्री है।

प्रश्न 3.
हमारा व्यक्तित्व कब और ऊँचा उठ जाता है?
उत्तर-
जब हम एक संस्कृति को अधिक-से-अधिक अपनाने लगते हैं, तब हमारा व्यक्तित्व और ऊँचा उठ जाता है।

विषय-वस्तु पर आधारित बोध प्रश्नोत्तर

प्रश्न 1.
उपर्युक्त गद्यांश का प्रतिपाद्य स्पष्ट कीजिए।
उत्तर-
उपर्युक्त गद्यांश के द्वारा निबंधकार ने संस्कृति के अर्थ और उसके प्रभाव को स्पष्ट करना चाहा है। इस दृष्टि से उसने संस्कृति के संबंध को माता-पिता के समान बतलाते हुए धात्री कहा है। उसका यह मानना है कि एक संस्कृति को अधिक-सेअधिक अपनाकर ही अपने व्यक्तित्व को और अधिक ऊँचा उठा सकते हैं।

3. संस्कृति जीवन के लिए परम आवश्यक है। राजनीति की साधना उसका केवल एक अंग है। संस्कृति राजनीति और अर्थशास्त्र दोनों को अपने में पचाकर इन दोनों से विस्तृत मानव मन को जन्म देती है। राजनीति में स्थायी रक्त-संचार केवल संस्कृति के प्रचार, ज्ञान और साधना से संभव है। संस्कृति जीवन के वृक्ष का संवर्धन करने वाला रस है। राजनीति के क्षेत्र में तो उसके इने-गिने पत्ते ही देखने में आते हैं अथवा यों कहें कि राजनीति केवल पथ की साधना है, संस्कृति उस पथ का साध्य

शब्दार्थ-परम=बहुत। पचाकर रखकर। विस्तृत फैले हुए। संवर्धन बढ़ाने। इने-गिने=कुछ ही। साध्य=जिसे प्राप्त किया जाए।

संदर्भ-पूर्ववत्

प्रसंग-प्रस्तुत गद्यांश में निबंधकार ने संस्कृति और राजनीति के अलग स्वरूपों। का उल्लेख करते हुए कहा है कि

व्याख्या-संस्कृति और राजनीति में अंतर है। संस्कृति जीवन की बहुत बड़ी आवश्यकता है। लेकिन राजनीति नहीं। राजनीति की साधना उसका मात्र एक अंग है। संस्कृति की शक्ति राजनीतिशास्त्र और अर्थशास्त्र दोनों से बड़ी है। फलस्वरूप राजनीतिशास्त्र और अर्थशास्त्र दोनों को ही अपने अधीन कर रखने की क्षमता संस्कृति में होती है। इससे संस्कृति इन दोनों से मनुष्य के मन का विस्तार करती है। स्पष्ट रूप से यह कहा जा सकता है कि संस्कृति के प्रचार, ज्ञान और साधना से राजनीति में स्थायी रक्त-संचार संभव है। इस प्रकार संस्कृति का महत्त्व जीवन को विस्तृत और विकसित करने वाले वृक्ष का संवर्धन वाला रस है। राजनीतिक धरातल पर उसके प्रभाव बहुत कम दिखाई देते हैं। यह भी हम कह सकते हैं कि राजनीति ही साधना पथ और संस्कृति उसका साध्य है।

विशेष-
1. राजनीतिशास्त्र और अर्थशास्त्र से अधिक प्रभावशाली और शक्तिशाली संस्कृति को सिद्ध किया गया है।
2. यह अंश ज्ञानवर्द्धक है।
3. भाषा-शैली सरल और सुबोध है।

अर्थग्रहण संबंधी प्रश्नोत्तर

प्रश्न 1.
संस्कृति जीवन के लिए क्यों परमावश्यक है?
उत्तर-
संस्कृति जीवन के लिए परमावश्यक है। यह इसलिए कि यह जीवन के वृक्ष का संवर्धन करनेवाला रस है।

प्रश्न 2.
जीवन के पथ की साधना और साध्य किसे कहा गया है?
उत्तर-
राजनीति को जीवन के पथ की साधना और संस्कृति को साध्य कहा गया है।

विषय-वस्तु पर आधारित बोध प्रश्नोत्तर

प्रश्न 1.
उपर्युक्त गद्यांश का आशय लिखिए।
उत्तर-
उपर्युक्त गद्यांश के द्वारा निबंधकार ने संस्कृति की अत्यधिक आवश्यकता पर बल देते हुए कहा है कि यह जीवन की बहुत बड़ी आवश्यकता है। हालाँकि राजनीति और अर्थशास्त्र दोनों ही जीवन के लिए आवश्यक हैं, लेकिन संस्कृति इन दोनों से कहीं अधिक। इसलिए संस्कृति को जीवन के वृक्ष का संवर्धन करने वाला रस कहा गया है। इसलिए राजनीति जीवन-पथ की साधना है तो संस्कृति साध्य है।

4. इस देश की संस्कृति की धारा अति प्राचीन काल से बहती आई है। हम उसका सम्मान करते हैं, किंतु उसके प्राणवत तत्त्व को अपनाकर ही हम आगे बढ़ सकते हैं। उसका जो जड़ भाग है, उस गुरूतर बोझ को यदि हम ढोना चाहें तो हमारी गति में अड़चन उत्पन्न हो सकती है। निरंतर गति मानव-जीवन का वरदान है। व्यक्ति हो या राष्ट्र, जो एक पड़ाव पर टिका रहता है, उसका जीवन भी ढलने लगता है। इसलिए ‘चरैवेति चरैवेति’ की धुन जब तक राष्ट्र के रथ-चक्रों में गूंजती रहती है तभी तक प्रगति और उन्नति होती है, अन्यथा प्रकाश और प्राणवायु के कपाट बंद हो जाते हैं और जीवन सँध जाता है। हमें जागरूक रहना चाहिए, ऐसा न हो कि हमारा मन परकोटा खींचकर आत्म-रक्षा की साध करने लगे।

शब्दार्थ-अति अत्यंत।प्राणवत प्राण के समान। गुरुतर=भारी।अड़चन रुकावट। चरैवेति-चरैवेति-चलते रहो, चलते रहो। कपाट-दरवाजे। सँध रुक। जागरूक-सावधान। परकोटा किले की रक्षा के लिए उसके चारों ओर बनाई हुई दीवार।

संदर्भ-पूर्ववत्।

प्रसंग-प्रस्तुत गद्यांश में निबंधकार ने भारत देश की संस्कृति की मजबूती का उल्लेख करते हुए कहा है कि

व्याख्या-भारत देश की संस्कृति और देशों की संस्कृति से अलग है और महान/ है। यह इसलिए कि इस देश की संस्कृति बहुत पुरानी है। सभी देशवासी इसमें डुबकी लगाते हुए नहीं अघाते हैं। यहाँ यह ध्यान देना आवश्यक है कि इसे अपनाते समय इसके मूल रूप की ही ओर हमारा प्रयास हो! इससे हमारा जीवन-विकास हो सकता है। हम सुखमय जीवन बिता सकते हैं। अगर हम यह ध्यान नहीं देंगे और संस्कृति के जड़तत्त्व को अपनाने लगेंगे तो हमारे जीवन-विकास में कठिनाइयाँ आने लगेंगी। इसलिए हम इसके जड़तत्त्व को भूलकर इसके चेतन तल को अपनाना चाहिए, जिससे गतिशील जीवन-पथ पर बढ़ सकें। ऐसा इसलिए कि गतिशील जीवन ही वरदानस्वरूप होता है। एक ही जगह पर टिके रहने वाले देश-व्यक्ति जीवन-विकास से कोसों दूर चला जाता है। इसलिए जब तक ‘चलते रहो, चलते रहो’ की गूंज हृदय में नहीं गूंजती रहेगी, जब तक जीवन-विकास का रथ-चक्र नहीं रुक सकता है। अगर इस प्रकार की गूंज हृदय में नहीं गूंजती तो आनंद-प्रकाश टिमटिमाने लगेगा और जीवनी-शक्ति के द्वार बंद होने लगेंगे। फलस्वरूप जीवन-क्रम ठप्प पड़ जाता है। इन बातों को ध्यान में रखना चाहिए कि हम हर समय सावधान रहें, ताकि हमारा मन पर कोटा न खींचकर आत्म-रक्षा की साध लेने लगे।

विशेष-
1. भारत देश की संस्कृति की विशेषता बतलायी गयी है।
2. ‘चरैवेति, चरैवेति’ सूक्ति का सटीक प्रयोग है।
3. यह अंश उपदेशात्मक है।

अर्थग्रहण संबंधी प्रश्नोत्तर

प्रश्न 1.
हमारे देश की संस्कृति क्या है? उत्तर-हमारे देश की संस्कृति बहुत ही पुरानी है। प्रश्न 2. मानव जीवन का वरदान-अभिशाप क्या है?
उत्तर-
निरंतर गति मानव जीवन का वरदान है और एक पड़ाव पर टिका रहना अभिशाप है।

विषय-वस्तु पर आधारित बोध प्रश्नोत्तर

प्रश्न 1.
उपर्युक्त गद्यांश का भाव स्पष्ट कीजिए।
उत्तर-
उपर्युक्त गद्यांश के माध्यम से निबंधकार ने भारतीय संस्कृति की विशेषताओं को कई प्रकार से रेखांकित करने का प्रयास किया है। इस संदर्भ में उसने यह स्पष्ट करना चाहा है कि संस्कृति के प्राणतत्त्व को अपनाकर हम आगे बढ़ सकते हैं न कि उसके जड़ भाग के गुरुतर बोझ को। दूसरी बात यह कि चलते रहो, चलते रहो, की गूंज से प्रगति की रफ्तार बढ़ती है।

5. “मनुष्यों के चरित्र मनुष्यों के कारण स्वयं मनुष्यों द्वारा ही निश्चित किए गए थे। यदि कोई बुद्धि का आलसी या विचारों का दरिद्री बनकर हाथ में पतवार लेता है तो वह कभी उन चरित्र का पार नहीं पा सकता, जो अथाह है और जिनका अंत नहीं। जिस प्रकार हम अपने मत को पक्का समझते हैं वैसे ही दूसरों का मत भी तो हो सकता है। दोनों में से किसकी बात कही जाए? इसलिए दुराग्रह को छोड़कर परीक्षा की कसौटी पर प्रत्येक वस्तु को कसकर देखना चाहिए।”

शब्दार्थ-पतवार=सहारा। अथाह जिसका थाह न हो। मत विचार। दुराग्रह-हठ।

संदर्भ-पूर्ववत्।

प्रसंग-प्रस्तुत गद्यांश में निबंधकार ने मनुष्य के चरित्र-कर्म के बारे में बतलाते हुए कहा है कि

व्याख्या-मनुष्यों के चरित्र मनुष्यों के ही द्वारा निश्चित और बनाए गए थे। इस प्रकार के चरित्र मनुष्य की शक्ति, इच्छा और साधन पर निर्भर रहे हैं। उस विषय में यहाँ यह कहना है कि कमजोर चरित्र कमजोर ही फल देता है। इसके लिए बहुत हद तक कमजोर साधन भी दोषी कहा जा सकता है। उदाहरण के लिए यदि कोई बुद्धि का सहारा न लेकर या दृढ़ विचार न करके काम आरंभ करता है। उसमें उसे कोई सफलता नहीं मिल सकती है। दूसरी बात यह है कि अपनी विचारधाओं के सामने हमें किसी की विचारधारा को हीन या कम नहीं समझना चाहिए। यह इसलिए कि शायद हमारी यह सोच-समझ सही न हो। दूसरे शब्दों में, यह कि हमारी विचारधारा दूसरे की विचारधारा से कम है या वह भी वैसी ही है। इसलिए हमें अपनी ही सोच-समझ पर नहीं अड़े रहना चाहिए। दूसरों की भी सोच-समझ की परख करनी चाहिए।

विशेष-
1. समान विचारधारा की ओर बल दिया गया है।
2. भाषा-शैली सरल है।
3. यह अंश उपदेशात्मक है।

अर्थग्रहण संबंधी प्रश्नोत्तर

प्रश्न 1.
किसके चरित्र किसके द्वारा निश्चित किए गए हैं? उत्तर-मनुष्यों के चरित्र मनुष्यों द्वारा ही निश्चित किए गए हैं। प्रश्न 2. अथाह और अंतहीन चरित्रों का पार कौन पा सकता है?
उत्तर-
बुद्धि सम्पन्न तत्पर और विचारपूर्ण कर्मठ व्यक्ति ही अथाह और अंतहीन चरित्रों का पार पा सकता है।

विषय-वस्तु पर आधारित बोध प्रश्नोत्तर

प्रश्न 1.
उपर्युक्त गद्यांश का आशय स्पष्ट कीजिए।
उत्तर-
उपर्युक्त गद्यांश के द्वारा निबंधकार ने यह आशय स्पष्ट करना चाहा है कि मनुष्य ही मनुष्य का चरित्र-निर्माता है। दूसरी बात यह कि मनुष्य के चरित्र को मनुष्य अपनी बुद्धि की क्षमता-संपन्न को कार्यरूप में ढालकर ही पूरी तरह से समझ सकता है। तीसरी बात यह कि स्वयं की तरह हमें औरों के भी मत को महत्त्व देना चाहिए। इसके लिए आवश्यक है कि बिना किसी दुराग्रह के विचारों को परीक्षा की कसौटी पर कसना चाहिए।

MP Board Class 8th Hindi Sugam Bharti Solutions Chapter 8 मध्य प्रदेश के गौरव

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MP Board Class 8th Hindi Sugam Bharti Solutions Chapter 8 मध्य प्रदेश के गौरव

प्रश्न अभ्यास

अनुभव विस्तार

Mp Board Class 8 Hindi Chapter 8 प्रश्न 1.
वस्तुनिष्ठ प्रश्न
(क) सही जोड़ी बनाइए
(अ) मध्यप्रदेश की दो – 1. भोपाल की गुलियादाई गली विभूतियाँ। में जन्में।
(ब) डॉ. शंकर दयाल शर्मा – 2. डॉ. शंकर दयाल शर्मा, अटल का जन्म बिहारी वाजपेयी।
(स) अटल बिहारी वाजपेयी – 3. कैम्ब्रिज विश्वविद्यालय से विधि में पी-एच. डी. की।
(द) डॉ. शंकर दयाल – 4. ग्वालियर जिले में हुआ। शर्मा ने
उत्तर-
(अ) – 1
(ब) – 2
(स) – 3
(द) – 4

Class 8 Hindi Chapter 8 Mp Board प्रश्न 2.
दिए गए विकल्पों से रिक्त स्थान की पूर्ति कीजिए
(अ) डॉ. शंकर दयाल शर्मा का जन्म …………………………………. ई. को हुआ था। (19 अगस्त 1918, 29 अगस्त 1928)
(ब) डॉ. शर्मा तैराकी में …………………………………. के चैम्पियन रहे थे। (विक्रम विश्वविद्यालय, लखनऊ विश्वविद्यालय)
(स) अटल बिहारी वाजपेयी की माताजी का नाम …………………………………. था। (कृष्णा देवी, राधा देवी)
(द) अटल जी के विशेष कार्यों को देखते हुए भारत सरकार ने उन्हें …………………………………. से अलंकृत किया। (पद्मश्री, पद्मभूषण)
उत्तर-
(अ) 19 अगस्त, 1918,
(ब) लखनऊ विश्वविद्यालय,
(स) कृष्ण देवी,
(द) पद्मभूषण।

Mp Board Class 8th Hindi Solution Chapter 8 प्रश्न 2.
अति लघु उत्तरीय प्रश्न
(अ) डॉ. शर्मा लोगों से किस प्रकार मिलते थे?
(ब) डॉ. शंकर दयाल शर्मा ने भारत के किस गरिमामय सर्वोच्च पद को सुशोभित किया था?
(स) अटल जी ने किन-किन पत्रों का संपादन किया?
(द) अटल बिहारी वाजपेयी प्रथम बार प्रधानमंत्री कब बने?
उत्तर-
(अ) डॉ. शर्मा लोगों से अपने परिवार के सदस्य की तरह मिलते थे?
(ब) डॉ. शंकर दयाल शर्मा ने भारत के राष्ट्रपति गरिमामय सर्वोच्च पद को सुशोभित किया था।
(स) अटल जी ने ‘राष्ट्रधर्म’, ‘स्वदेश’, ‘पाञ्चजन्य’ और ‘वीर अर्जुन’ का संपादन किया।
(द) अटल बिहारी वाजपेयी प्रथम बार 1996 में प्रधान मंत्री बने।

Mp Board Class 8th Hindi Solution प्रश्न 3.
लघु उत्तरीय प्रश्न(अ)डॉ. शंकर दयाल शर्मा की शिक्षा के बारे में लिखिए।
उत्तर-
डॉ. शंकर दयाल शर्मा ने अपने यशस्वी जीवन की शैक्षिक यात्रा में स्वयं को मेधावी छात्र के रूप में निरंतर प्रमाणित किया। आपने हिन्दी, अंग्रेजी और संस्कृत साहित्य में स्नातकोत्तर उपाधियाँ प्रथम श्रेणी में प्राप्त की। लखनऊ विश्वविद्यालय से एल.एल.एम. तथा कैंब्रिज विश्वविद्यालय से कानून में पी-एच. डी. की उपाधि प्राप्त की।

(ब) डॉ. शर्मा ने किन-किन पुस्तकों की रचना की?
उत्तर-
डॉ. शर्मा ने ‘प्रतिष्ठित भारतीय’, ‘हमारे चिंतन की मूलधारा’ और ‘देश-मणि’ पुस्तकों की रचना की।

(स) डॉ. शंकर दयाल शर्मा जन समान्य से कब मिलते थे?
उत्तर-
डॉ. शंकर दयाल शर्मा जन समान्य से प्रातः 9 बजे से अपराह्न 1:30 तक प्रतिदिन मिलते थे।

(द) अटल जी की काव्य-सृजन में रुचि कैसे जागृत हुई?
उत्तर-
अटल जी के पिता श्री कृष्ण बिहारी वाजपेयी अध्यापक एवं कवि थे। अपने पिता की रचनाएँ पढ़ते-पढ़ते अटल जी तुकबन्दी करने लगे। उनकी रचनाओं की प्रशंसा होने लगी तो हिन्दी साहित्य सभा की गोष्ठियों में जाने लगे। उन दिनों घनाक्षरी और सवैया छंद विशेष पसंद किए जाते थे। अटल ने ब्रजभाषा में रचनाएँ कीं।।

(ई) अटल जी की प्रमुख रचनाओं के नाम लिखिए।
उत्तर-
‘मेरी इक्यावन कविताएँ’, ‘कैदी कविराय की कुंडलियाँ’, ‘न दैन्यं न पलायनम्’, ‘मेरी संसद यात्रा’ आदि अटल जी की प्रमुख रचनाएँ हैं।

भाषा की बात

Mp Board Class 8 Hindi Book Solution प्रश्न 1.
बोलिए और लिखिएप्रतिनिधि, विश्वविद्यालय, स्वतंत्रता-संग्राम, सर्वोच्च।
उत्तर-
प्रतिनिधि, विश्वविद्यालय, स्वतंत्रता-संग्राम, सर्वोच्च।

Class 8 Hindi Mp Board प्रश्न 2.
सही वर्तनी वाले शब्दों पर गोला लगाइए
Mp Board Solution Class 8 Hindi
उत्तर-
साहित्य, उत्तीर्ण, राष्ट्रपति, ग्वालियर।

Mp Board Class 8 Hindi प्रश्न 3.
नीचे दिए वाक्यों में क्रिया विशेषण के शब्द छाँटकर लिखिए
1. वे धूप में बाहर बैठे थे। ………………………….
2. वह थोड़ा लुढ़क गया। ………………………….
3. लड़की जोर-जोर से चीख रही थी। ………………………….
4. राम अपनी बहन को बहुत सता रहा था। ………………………….
उत्तर-
1. बाहर,
2. थोड़ा,
3. जोर-जोर से,
4. बहुत।

Class 8 Mp Board Hindi प्रश्न 4.
उदाहरण के अनुसार नीचे लिखे शब्दों में से मूल शब्द और प्रत्यय अलग कीजिए।
उत्तर-
Mp Board Class 8 Hindi Book Solution Sugam Bharti

♦प्रमुख गद्यांशों की संदर्भ-प्रसंग सहित व्याख्याएँ

1. डॉ. शर्मा देश के स्वाधीनता संग्राम के अग्रणी योद्धा और साक्षी रहे हैं। आपने अपने राजनीतिक जीवन से भारत के महान व्यक्तियों की गौरवशाली परंपरा को सार्थक बनाया। आप जिन सार्वजनिक पदों पर आसीन हुए, आपने उनमें आध्यात्मिक और लौकिक मूल्यों का साहसिक संतुलन बनाए रखा। डॉ. शर्मा ने जब भी जहाँ भी राजनीति में नैतिक मूल्यों का क्षरण होते देखा, वहाँ अपना विवेकपूर्ण हस्तक्षेप अवश्य किया। आपने अवमूल्यित राजनीति के संदर्भ में सदैव वैचारिक जिज्ञासा, सांस्कृतिक आत्मविश्वास तथा सृजनात्मक विमर्श के प्रतिमानों को अनेक मंचों से अभिव्यक्ति प्रदान की।

शब्दार्थ-सर्वोच्च-सबसे ऊँचा। अग्रणी-आगे चलने वाले। साक्षी-गवाह। गौरवशाली-महत्त्वपूर्ण। आसीन-पद पर नियुक्त। संतुलन-मेल। नैतिक-नीति संबंधी। क्षरण-कमजोर। अवमूलित-मूल्य में कमी हुई। जिज्ञासा-जानने की इच्छा। सृजनात्मक-रचनात्मक। विमर्श-विवेचन, तर्क, ज्ञान। अभिव्यक्ति-प्रकाशन।

संदर्भ-प्रस्तुत पंक्तियाँ हमारी पाठ्य-पुस्तक ‘सुगम भारती’ (हिन्दी सामान्य) भाग-8 के पाठ-8 ‘मध्य-प्रदेश के गौरव’ से ली गई हैं।

प्रसंग-प्रस्तुत पंक्तियों में लेखक ने भूतपूर्व राष्ट्रपति डॉ. शंकर दयाल शर्मा की महान् विशेषताओं के बारे में कहा है कि-

व्याख्या-डॉ. शंकर दयाल शर्मा ने देश की आजादी के लिए किए गए संघर्षों में बहुत बड़ी भूमिका निभायी। इसके वे आगे चलने वाले एक महान योद्धा और गवाह थे। यही नहीं उन्होंने अपने राजनीतिक जीवन से भी अपनी एक अलग ही पहचान कायम की। इसके द्वारा उन्होंने स्वयं को भारत के महान् राजनेताओं की चली आ रही परंपरा को आगे बढ़ाने में अपना महान् योगदान दिया। इसी प्रकार वे सार्वजनिक रूप में भी लोकप्रिय हुए। इसके लिए वे जिन-जिन सार्वजनिक पदों के अधिकारी बने, उनमें आपने आध्यात्मिक और साहसिक संतुलन बनाने में अपनी कोई कसर नहीं छोड़ी। जहाँ-जहाँ उन्होंने राजनीतिक मूल्यों में नैतिक मूल्यों को कमजोर पड़ते हुए देखा, वहाँ-वहाँ उन्होंने अपने बुद्धि-बल से उसे संमुलित बनाने की पूरी-पूरी कोशिश की। इस प्रकार उन्होंने राजनीतिक मूल्यों के घटते स्तर को बड़ी गंभीरता से देखा और समझा। फिर उसे दूर करने के लिए अपने विचारों, सांस्कृतिक आत्मविश्वासों और रचनात्मक ज्ञान-तर्क के द्वारा बार-बार प्रयास किया।

विशेष-

  • डॉ. शंकर दयाल शर्मा को प्रेरक रूप में प्रस्तुत किया गया है।
  • शब्द-प्रयोग कठिन हैं।

MP Board Class 8th Hindi Sugam Bharti Solutions Chapter 7 हम भी सीखें

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MP Board Class 8th Hindi Sugam Bharti Solutions Chapter 7 हम भी सीखें

प्रश्न-अभ्यास

अनुभव विस्तार

Mp Board Class 8 Hindi Chapter 7 प्रश्न 1.
वस्तुनिष्ठ प्रश्न
(क) सही जोड़ी बनाइए
(अ) सूरज हमें रोशनी देता – 1. निर्मल जल दिन-रात बहाते
(ब) बिन अभिमान पेड़ देते हैं – 2.अन्न उगाती धरती प्यारी
(स) गहरी नदियाँ, निर्झर नाले – 3. बीज, फल, फूल, ठण्डी छाया
(द) सबका पालन करने वाली – 4. तारे शीतलता बरसाते
उत्तर-
(अ) – 1
(ब) – 2
(स) – 3
(द) – 4

(ख) दिए गए विकल्पों से रिक्त स्थान की पूर्ति कीजिए-
(अ) अपने लिए सभी जीते हैं …………………………………. मरना सीखें। (औरों के हित, दूसरों के हित)
(ब) चाँद बाँटता …………………………………. सबको, बादल वर्षा जल दे जाते। (अमृत, चाँदनी)
(स) ऊँचे-नीचे …………………………………. ही तो, इन सोतों के जनक कहाते। (पहाड़, पर्वत)
(द) ऐसे ही त्यागी बनकर हम, बूंद-बूंद कर …………………………………. सीखें। (घटना, झरना।)
उत्तर-
(अ) औरों के हित,
(ब) अमृत,
(स) पर्वत,
(द) झरना।

Mp Board Class 8th Hindi Solution Chapter 7 प्रश्न 2.
अति लघु उत्तरीय प्रश्न
(अ) कुदरत हमें क्या सिखाती है?
(ब) तारे हमें क्या देते हैं?
(स) धरती क्या कार्य करती है?
उत्तर-
(अ) कुदरत हमें परोपकार करना सिखाती है।
(ब) तारे हमें शीतलता देते हैं।
(स) धरती सबका पालन-पोषण करती है।

Class 8 Hindi Sugam Bharti MP Board प्रश्न 3.
लघु उत्तरीय प्रश्न

(अ) पर्वतों को सोतों का जनक क्यों कहा गया है?
उत्तर-
पर्वतों से बड़ी-बड़ी गहरी नदियाँ निकलती हैं। पर्वतों से कई प्रकार के छोटे-बड़े झरने निकलते हैं। यही नहीं पर्वतों से ही कई प्रकार के छोटे-बड़े नाले निकलते हैं। इन नदियों, झरनों और नालों में रात-दिन स्वच्छ जल बहता रहता है। इस प्रकार पर्वतों से नदियों, झरनों और नालों के निकलने के कारण पर्वतों को इनका जनक कहा गया है।

(ब) पेड़ों को दधीचि क्यों माना गया है?
उत्तर-
पेड़ हर युग में अपना सब कुछ न्यौछावर परोपकार के लिए करते रहते हैं। चाहे कोई मौसम अर्थात् कठिन समय क्यों न हो, वे परोपकार करने से पीछे नहीं हटते हैं। चूँकि इनका त्याग – बलिदान महर्षि दधीचि के ही समान होता है। इसलिए उन्हें महर्षि दधीचि माना गया है।

(स) जुगनू से हमें क्या सीख मिलती है?
उत्तर-
यद्यपि जुगनू आकर-प्रकार में बहुत ही छोटा होता है। फिर भी हमें रोशनी थोड़ा-थोड़ा करके ही सही, देने से कभी पीछे नहीं हटता है। इस प्रकार वह अंधकार को दूर करके हमें प्रकाश देने में लगा रहता है। फलस्वरूप हमें उससे यह सीख मिलती है कि परोपकार करने के लिए बड़े-छोटे का महत्त्व नहीं होता है। दूसरी बात यह कि हमें जितना भी हो सके, परोपकार करते ही रहना चाहिए।

भाषा की बात

Hindi Class 8 Sugam Bharti MP Board प्रश्न 1.
बोलिए और लिखिएकुदरत, अमृत, दधीचि, निर्मल, पर्वत, त्यागी।
उत्तर-
कुदरत, अमृत, दधीचि, निर्मल, त्यागी।

Class 8th Hindi Solution Mp Board प्रश्न 2.
सही वर्तनी वाले शब्दों पर गोला लगाइए
1. सिखती, सखाती, सिखाती, सीखाति
2. वरषा, वरीषा, वर्षा, वार्ष
3. जुगनू, जुगन, जुगुन, जूगनू,
4. अंधकर, अंधाकार, अंधकार, अधंकारा।
उत्तर-
सही वर्तनी
1. सिखाती,
2. वर्षा,
3. जुगनू,
4. अंधकार।

Hum Bhi Sikhe Kavita MP Board प्रश्न 3.
निम्नलिखित शब्दों में उचित स्थान पर अनुनासिक के चिह्न () का प्रयोग कीजिए

माग, टाग, जाच, तागा, ऊट, नदिया, बाटना।

उत्तर-

माँग, टाँग, जाँच, ताँगा, ऊँट, नदियाँ, बाँटना।

Mp Board Class 8th Hindi Solution प्रश्न 4.
कोष्ठक में दिए गए शब्द की आवृत्ति से शब्द बनाकर रिक्त स्थान की पूर्ति कीजिए
…………………………… चलता भैया। (आगे)
…………………………… आई गया। (पीछे)
…………………………… लो घास खिलाई। (हरी)
…………………………… उसने वह खाई। (खुशी)
उत्तर-
आगे-आगे – चलता भैया।
पीछे-पीछे – आई गैया।
हरी-हरी – लो घास खिलाई।
खुशी-खुशी – उसने वह खाई।

Sugam Bharti Class 8 Hindi MP Board प्रश्न 5.
निम्नलिखित शब्दों के विपरीतार्थी शब्द लिखिएअग्रज, सुगंध, आदि, आदान।
उत्तर-
शब्द – विपरीतार्थी शब्द
अग्रज – अनुज
सुगंध – दुर्गंध
आदि – अंत
आदान – प्रदान

सुगम भारती कक्षा 8 Solutions MP Board प्रश्न 6.
निम्नलिखित शब्दों में ‘अभि’ उपसर्ग का प्रयोग करते हुए नए शब्द बनाइए-
ज्ञान, नंदन, यान, रूचि, नेता, मत
उत्तर-
Mp Board Class 8 Hindi Chapter 7

♦ प्रमुख पद्यांशों की संदर्भ-प्रसंग सहित व्याख्याएँ

1.

कुदरत हमको रोज सिखाती, जग-हित में कुछ करना सीखें।
अपने लिए सभी जीते हैं, औरों के हित मरना सीखें।

शब्दार्थ-कुदरत-प्रकृति। जगह-हित-संसार की भलाई। औरों-दूसरों। हित के लिए।

संदर्भ-प्रस्तुत पंक्तियाँ हमारी पाठ्य-पुस्तक ‘सुगम भारती’ (हिंदी सामान्य) के भाग-8 के पाठ-7 ‘हम भी सीखें से ली गई हैं। इन पंक्तियों के कवि श्री गोपाल कृष्ण कौल हैं।

प्रसंग-प्रस्तुत पंक्तियों में कवि ने प्रकृति से प्रेरणा लेने का उपदेश देते हुए कहा है कि

व्याख्या-प्रकृति हमें यह रोज-ही-रोज पाठ पढ़ाती रहती है कि हम संसार में एक खास उद्देश्य से आए हैं। वह यह कि हम इस संसार के लिए कुछ करना सीखें। यह तो हम जानते हैं कि अपनी भलाई के लिए तो सभी कछ-न-कछ करते रहते हैं। लेकिन दूसरों की भलाई के लिए शायद ही कोई कुछ करता है। इसलिए हमें प्रकृति की तरह दूसरों की भलाई के लिए अपने जीवन को लगाना चाहिए।

विशेष-

  • परोपकार करने की सीख दी गई है।
  • तुकांत शब्दावली है।

2.

सूरज हमें रोशनी देता, तारे शीतलता बरसाते,
चाँद बाँटता अमृत सबको, बादल वर्षा-जल दे जाते।
जुगनू ज्यों थोड़ा-थोड़ा ही, अंधकार हम हरना सीखें।

शब्दार्थ-रोशनी-प्रकाश। शीतलता-ठंढ़क, आनंद। संदर्भ-पूर्ववत्।

प्रसंग-प्रस्तुत पंक्तियों में कवि ने सूरज, तारे, चाँद, बादल और जुगनू से परोपकार करने की प्रेरणा लेने की सीख देते हुए कहा है कि-

व्याख्या-सूरज हमें रोशनी (प्रकाश) देकर जीवन प्रदान करता है, तो तारे हमें शीतलता प्रदान करते हैं। इसी प्रकार चाँद अपनी किरणों से हमें अमृत प्रदान करता है, तो बादल जल की बरसा कर हमारी आवश्यकताओं को पूरा करते हैं। जुगनू भले ही थोड़ी-थोड़ी और कहीं-कहीं रोशनी करता है, फिर भी वह अंधकार को दूर करने में लगा ही रहता है। इस प्रकार प्रकृति के इन स्वरूपों से प्रेरणा लेकर हमें भी परोपकार करना चाहिए।

विशेष-

  • परोपकार करने की सीख आकर्षक रूप में है।
  • उदाहरण शैली है।

3.

बिन अभिमान पेड़ देते हैं, बीज, फूल, फल ठण्डी छाया।
ये दधीचि बनकर हर युग में, न्यौछावर कर देते काया।।
मौसम चाहे कैसा भी हो, तरु की तरह निखरना सीखें।

शब्दार्थ-अभिमान-घमंड। बिन-बिना, अकारण। न्यौछावर -त्याग। काया-शरीर। एक पौराणिक कथा के अनुसार दधीचि ऋषि ने अस्त्र बनाने के लिए अपनी हड्डियाँ तक देवताओं को दान कर दी थीं। इन हड्डियों से वज्र बनाया गया जिससे इंद्र ने राक्षसों को परास्त किया।

संदर्भ-पूर्ववत्।

प्रसंग-प्रस्तुत पंक्तियों में कवि ने प्रकृति की ही बिना किसी घमंड करके परोपकार करने की सीख देते हुए कहा है कि

व्याख्या-हम यह रोज ही देखते हैं कि पेड़-पौधे बिना किसी घमंड के ही हमें बीज, फूल और फल देते रहते हैं। यही नहीं वे बड़ी सुखद ठंडी छाया भी हमें देते रहते हैं। इसी प्रकार वे महर्षि दधीचि की तरह हरेक समय में अपना सब कुछ परोपकार में लगाते रहते हैं। मौसम चाहे जो कुछ भी बुरा और खराब क्यों न हो हमें तो पेड़ की तरह ही परोपकार करना नहीं भूलना चाहिए।

विशेष-

  • पेड़-पौधों की तुलना महर्षि दधीचि से की गई है।
  • लय और संगीत का सुंदर मेल है।

4.

गहरी नदियाँ, निर्झर, नाले, निर्मल जल दिन-रात बहाते।
ऊँचे-नीचे पर्वत ही तो, इन सातों के जनक कहाते।
ऐसे ही त्यागी बनकर हम, बूंद-बूंद कर झरना सीखें।

शब्दार्थ-निर्झर-झरने। निर्मल-स्वच्छ। स्रोतों-झरनों। जनक-पिता, जन्म देने वाला।

संदर्भ-पूर्ववत्।

प्रसंग-प्रस्तुत पंक्तियों में कवि ने गहरी नदियों, नालों और झरनों के त्याग को बतलाते हुए कहा है कि

व्याख्या-बड़ी-बड़ी नदियाँ, नाले और झरने रात-दिन दूसरों के लिए ही साफ और सुंदर जल बहाते रहते हैं। इनको जन्म देने वाले बड़े-बड़े ऊँचे-ऊँचे पर्वत ही तो हैं। इनकी तरह त्यागी-बलिदानी बनकर हम दूसरों को सुख और जीवन देने के लिए अपने जीवन-रस की एक-एक बूँद को टपकाते रहना चाहिए।

विशेष-

  • हमेशा ही परोपकार करते रहने की सीख दी गयी है।
  • भाषा सरल है।

5.

सबका पालन करने वाली, अन्न उगाती धरती प्यारी।
उथल-पुथल खुद ही सह लेती, महकाती जीवन फुलवारी।
जीवन देती प्राणवायु बन, चारों ओर विचरना सीखें।।

शब्दार्थ-उगाती-पैदा करती। उथल-पुथल-उलट-पुलट,. हेर-फेर। महकाती-सुगंध देती। प्राणवायु-संजीवनी। विचरना-घूमना, फिरना।

संदर्भ-पूर्ववत्।

प्रसंग-प्रस्तुत पंक्तियों में कवि ने धरती को माँ के रूप में प्रस्तुत करते हुए कहा है कि-

व्याख्या-धरती सचमुच में प्यारी माँ की तरह है। यह सबका पालन-पोषण करने के लिए ही तरह-तरह के अनाज को पैदा करती है। जब कभी कोई उलट-फेर अर्थात् कठिन और दुखद घटना होती है, उसे यह स्वयं ही सह लेती है। लेकिन सबके जीवन की फुलवारी को सुगंधित करने से नहीं रुकती है। इस प्रकार यह सबको हमेशा ही संजीवनी देती रहती है। हमें चारों ओर स्वतंत्र रूप से विचरने-घूमने की शिक्षा इससे अवश्य लेनी चाहिए।

विशेष-

  • धरती को प्यारी माँ की तरह महत्त्व दिया गया है।
  • यह अंश उपदेशात्मक है।

MP Board Class 8th Hindi Sugam Bharti Solutions Chapter 2 विनम्रता

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MP Board Class 8th Hindi Sugam Bharti Solutions Chapter 2 विनम्रता

प्रश्न-अभ्यास

अनुभव विस्तार

Class 8 Hindi Chapter 2 Vinamrata MP Board प्रश्न 1.
वस्तुनिष्ठ प्रश्न
(क) सही जोड़ी बनाइए
(अ) सुसंस्कृत – 1. अभिमान
(ब) सामंजस्य – 2. व्यवहार
(स) दंभ – 3. औचित्य
(द) आचरण – 4. अच्छे संस्कार वाला
उत्तर-
(अ) 4
(ब) 3
(स) 1
(द) 2

(ख) दिए गए विकल्पों से रिक्त स्थान की पूर्ति कीजिए
(अ) दीन याचक होता है जबकि विनम्र …………….। (पाने वाला, दाता)
(ब) ………….. चरित्र का सद्गुण है। (विनम्रता, सुन्दरता)
(स) यदि हमारे लिए कोई कष्ट उठाकर काम करता है तो हमें उसके प्रति …………… प्रकट करना चाहिए। (कृतघ्नता, कृतज्ञता)
(द) विनम्रता ……………. की पोषक है। (निजता, जीवंतता)
उत्तर-
(अ) दाता,
(ब) विनम्रता,
(स) कृतज्ञता,
(द) जीवंतता।

Mp Board Class 8th Hindi Solution प्रश्न 2.
अति लघु उत्तरीय प्रश्न
(अ) ‘विनम्रता’ शब्द का अर्थ बताइए।
(ब) ‘विधु’ के व्यवहार से वीरेन्द्र क्यों प्रभावित हुए?
(स) बड़ों के बुलाने पर किस तरह उत्तर देना चाहिए?
(द) सफलता की गारंटी किसे कहा है?
उत्तर-
(अ) ‘विनम्रता’ शब्द का अर्थ है-अच्छा व्यवहार।
(ब) ‘विधु’ के व्यवहार से वीरेन्द्र उसकी विनम्रता से प्रभावित हुए।
(स) बड़ों के बुलाने पर ‘जी हाँ’ ‘जी आया’ इस तरह का उत्तर देना चाहिए।
(द) सफलता की गारंटी विनम्रता को कहा है।

Mp Board Class 8 Hindi Book Solution प्रश्न 3.
लघु उत्तरीय प्रश्न
(अ) विराट और विधु के व्यवहार की तुलना कीजिए।
उत्तर-
(अ) विराट और विधु के व्यवहार एक-दूसरे के विपरीत हैं। विराट के व्यवहार में शिष्टता और विनम्रता नहीं है। वह दंभी है। इसलिए वह प्रशंसा का पात्र नहीं है। इसके विपरीत विधु के व्यवहार में शिष्टता और विनम्रता है। वह दंभी नहीं है। अपने इस सद्गुण के कारण वह प्रशंसनीय है।

(ब) विनम्र व्यक्ति की पहचान कैसे होती है?
उत्तर-
(ब) विनम्र व्यक्ति की पहचान उसके सद्व्यवहार से होती है। वह अपने से बड़ों-छोटों के प्रति यथोचित आदर-सत्कार और प्यार के भावों को प्रकट करता है। इस प्रकार वह बिना किसी भेदभाव के सबकी गरिमा और भावनाओं का समुचित सम्मान करता है।

(स) समुद्र में बाढ़ क्यों नहीं आती? स्पष्ट कीजिए।
उत्तर-
(स) समुद्र में बाढ़ नहीं आती है। यह इसलिए कि समुद्र अपनी सीमा में ही रहता है। वह अपनी सीमा से कभी भी बाहर नहीं आता है। इस प्रकार अपनी सीमा में ही वह रहकर नदियों के पानी को समा लेता है। यह वह अपनी विनम्र अनुशासन की विशेषता के कारण ही कर लेता है।

(द) ‘दीन याचक होता है, जबकि विनम्र दाता’ इसका आशय स्पष्ट कीजिए।
उत्तर-
(द) ‘दीन याचक होता है, जबकि विनम्र दाता’ इसका आशय यह है कि दीन व्यक्ति में अपनापन की भावना नहीं होती है। वह स्वार्थी होता है। इसके विपरीत विनम्र व्यक्ति में अपनापन होता है। वह प्यार बाँटता है। परस्पर मेल-मिलाप का वातावरण तैयार करता है। वह किसी से कुछ माँगता-चाहता नहीं है। वह तो अपने सद्व्यवहार से अपने संपर्क में आने वालों को अपने सद्गुणों को बाँटता ही रहता है।

(इ) विनम्रता कब प्रभाव पैदा करती है?
उत्तर-
(इ) विनम्रता तब प्रभाव पैदा करती है, जब जिस समस्या का समाधान आवेश भरा व्यक्ति नहीं ढूँढ़ पाता, उसे विनम्रता सहज में खोज लेती है।।

भाषा की बात

Sugam Bharti Class 8 MP Board प्रश्न 1.
बोलिए और लिखिएप्रतीक्षा, प्रशंसा, सुसंस्कृत, पृष्ठभूमि, सामंजस्य, जीवंतता।
उत्तर-
1. प्रतीक्षा, प्रशंसा, सुसंस्कृत, पृष्ठभूमि, सामंजस्य, जीवंतता।

Mp Board Class 8 Hindi  प्रश्न 2.
शुद्ध वर्तनी लिखिएसंक्षीप्त, मर्दुल, विनमरता, व्यतित्व, ओपचारिकता।
उत्तर-
शुद्ध वर्तनी-संक्षिप्त, मृदुल, विनम्रता, व्यक्तित्व, औपचारिकता।

Mp Board Class 8 Hindi Chapter 2 प्रश्न 3.
निम्नलिखित वाक्यों में से विशेषण और विशेष्य शब्द छाँटिए
(अ) आया शरारती लड़की है।
(ब) बाजार में मीठे आम बिक रहे हैं।
(स) परिश्रमी व्यक्ति सफल होते हैं।
(द) लाल टोपी लेकर आओ।
उत्तर-
विशेषण – विशेष्य
शरारती – लड़की
मीठे – आम
परिश्रमी – व्यक्ति
लाल – टोपी

भाषा भारती कक्षा 8 Solutions MP Board प्रश्न 4.
उदाहरण के अनुसार ‘ता’ प्रत्यय लगाकर नए शब्द बनाइए-
Class 8 Hindi Chapter 2 Vinamrata MP Board
Mp Board Class 8th Hindi Solution
उत्तर-
Mp Board Class 8 Hindi Book Solution

Mp Board Solution Class 8 Hindi प्रश्न 5.
पाठ में सु उपसर्ग वाले सुमधुर, सुसंस्कृत आदि शब्द आए हैं। निम्नलिखित शब्दों में ‘सु’ उपसर्ग लगाकर नए शब्द बनाइए-
गंध, पुत्र, फल, मुखी, संस्कार, योग।
उत्तर-
Sugam Bharti Class 8 MP Board

एमपी बोर्ड क्लास 8 हिंदी MP Board प्रश्न 6.
निम्नलिखित शब्दों को उनके उचित विलोम से रेखा खींचकर मिलाइए-
उचित- उपेक्षा
औपचारिक – दुर्गुण
अपेक्षा – अनादर
सद्गुण – अनुचित
आदर – अनौपचारिक
उत्तर-
शब्द – विलोम शब्द
उचित – अनुचित
औपचारिक – अनौपचारिक
अपेक्षा – उपेक्षा
सद्गुण – दुर्गुण
आदर – अनादर

प्रमुख गद्यांशों की संदर्भ-प्रसंग सहित व्याख्याएँ

1. विनम्रता चरित्र का सद्गुण है। सुसंस्कृत होने का परिचय है। यह एक ऐसा चुंबक है जो सम्पर्क में आने वाले को स्वयं अपनी ओर खींच लेता है। विनम्र व्यक्ति की बोली मृदुल, आचरण शिष्ट, तथा भावना निजता से ओतप्रोत होती

शब्दार्थ-विनम्रता-शिष्टता, अच्छा व्यवहार। सद्गुण-अच्छा गुण। सुसंस्कृत-अच्छा संस्कार। मृदुल-कोमल। शिष्ट-विनम्र। आचरण-व्यवहार। निजता-अपनापन।

संदर्भ-प्रस्तुत पंक्तियां हमारी पाठ्य-पुस्तक ‘सुगम भारती’ (हिंदी सामान्य) भाग-8 के पाठ-2 ‘विनम्रता’ से ली गई है।

प्रसंग-प्रस्तुत पंक्तियों में लेखक ने विनम्रता की विशेषता बतलाने का प्रयास किया है।

व्याख्या-लेखक का कहना है कि विनम्रता चरित्र का अधिक श्रेष्ठ गुण है। दूसरे शब्दों में विनम्रता से चरित्र अधिक महान बनता है। विनम्रता से अच्छा संस्कार के होने का परिचय मिलता है। विनम्रता की एक यह भी विशेषता होती है कि वह चुंबक की तरह होती है। अपनी इस विशेषता से वह अपने पास आने वालों को तुरंत ही अपनी ओर खींच लेती है। इस प्रकार जिसमें विनम्रता होती है, वह मधुर बोलता है, उसका व्यवहार सभ्य होता है, और उसके भाव-विचार में अपनापन भरा होता है।

विशेष-

  1. विनम्र व्यक्ति पर प्रकाश डाला गया है।
  2. भाषा सरल है।

2. विनम्रता केवल बड़ों के प्रति ही नहीं होती है बराबर वालों के प्रति भी समादर और अपने से छोटों के प्रति स्नेह के रूप में भी प्रकट होती है। व्यक्तित्व को आकर्षक बनाने में इसकी महत्त्वपूर्ण भूमिका रही है। यदि हमारे लिए कोई कष्ट उठाकर कुछ काम करता है तो हमें उसके प्रति अपनी कृतज्ञता अवश्य प्रकट करनी चाहिए। यदि बस या रेल में कोई व्यक्ति अपनी जगह हमें बैठने के लिए देता है तो उसे धन्यवाद देना कभी न भूलें। ऐसा करते समय लगना भी चाहिए कि हम उसे हृदय से धन्यवाद दे रहे हैं, केवल औपचारिकता का निर्वाह नहीं।

शब्दार्थ-स्नेह-प्रेम। आकर्षक-मोहक। कृतज्ञता-अहसान। औपचारिकता-दिखावा।

संदर्भ-पूर्ववत्।

प्रसंग-प्रस्तुत पंक्तियों में लेखक ने यह बतलाने का प्रयास किया है कि विनम्रता सबके प्रति होती है।

व्याख्या-विनम्र व्यक्ति अपने से बड़ों-छोटों के प्रति उचित रूप से विनम्र होना नहीं भूलता है। वह अपने से बड़ों के प्रति आदर-सत्कार को प्रकट करता है। इसी प्रकार वह अपने बराबर वालों का भी सत्कार करता है। अपने से छोटों के प्रति प्यार प्रकट करता है। इस प्रकार की विनम्रता से उसका व्यक्तित्व आकर्षक और महान् बनता है। इस आधार पर यह कहना ठीक होगा कि विनम्र व्यक्ति को सहयोग करने वाले के प्रति अपनी कृतज्ञता अवश्य करने चाहिए। उदाहरण के लिए यदि कोई बस, रेल आदि में बैठ आराम करने या कोई सुविधा दे तो विनम्र व्यक्ति को चाहिए कि वह उसे हृदय से धन्यवाद दे। अगर वह दिखावा कर रहा है, तो उससे उसकी विनम्रता नहीं प्रकट होगी।

विशेष-

  1. विनम्रता से व्यक्तित्व महान् बनता है, इसे समझाया गया है।
  2. विनम्रता में किसी प्रकार का दिखावा नहीं होना चाहिए, इसे स्पष्ट किया गया है।

MP Board Class 8th Hindi Bhasha Bharti Solutions Chapter 6 भक्ति के पद

MP Board Class 8th Hindi Bhasha Bharti Solutions Chapter 6 भक्ति के पद

MP Board Class 8th Hindi Bhasha Bharti Chapter 6 पाठ का अभ्यास

बोध प्रश्न

भक्ति के पद कक्षा 8 MP Board Chapter 6 प्रश्न 1.
निम्नलिखित शब्दों के अर्थ शब्दकोश से खोजकर लिखिए
उत्तर
पंछी = पक्षी; कूप = कुआँ; मधुकर = भौंरा; तजि = छोड़कर; अधम = नीच; दनुज = राक्षस, दानव; घन = बादल; चकोरा = चकोर, चकवा-चकवी; पूँजी = धन; छाँड़ि= छोड़कर; छेरी = बकरी; अम्बुज= कमल; उधारे = उद्धार किया; बास = सुगन्ध।

Bhakti Ke Pad Class 8 MP Board Chapter 6 प्रश्न 2.
निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर संक्षेप में लिखिए

(क) सूर के मन को सुख कहाँ प्राप्त होता है ?
उत्तर
सूरदास के मन को सुख भगवान श्रीकृष्ण के चरणों की भक्ति में प्राप्त होता है।

(ख) अधम का उद्धारक कौन है ?
उत्तर
अधम के उद्धारक भगवान राम हैं।

(ग) रैदास किसके आराधक थे ?
उत्तर
रैदास ईश्वर के नाम के आराधक थे।

(घ) मीराबाई को कौन-सा रत्न प्राप्त हो गया ?
उत्तर
मीराबाई को राम रत्न प्राप्त हो गया।

पाठ 6 भक्ति के पद MP Board Class 8th प्रश्न 3.
निम्नलिखित विकल्पों में से सही उत्तर चुनिए

(क) “प्रभुजी तुम चन्दन हम पानी …………… पंक्ति किस कवि की है ?
(अ) सूर
(आ) तुलसी
(इ) रैदास
(ई) मीराबाई
उत्तर
(इ) रैदास

(ख) तुलसीदास की भक्ति निम्नलिखित में से किस भाव की है ?
(अ) सखाभाव
(आ) दासभाव
(इ) मित्रभाव
(ई) गुरु भाव।
उत्तर
(आ) दासभाव

(ग) ब्रज भूमि में किसकी झाड़ियाँ (कुंज) अधिक मिलती हैं?
(अ) आम
(आ) जामुन,
(इ) नीम
(ई) करील।
उत्तर
(ई) करील

(घ) निम्नलिखित रचनाकारों में से किसका सम्बन्ध राजस्थान से था?
(अ) सूर
(आ) तुलसी
(इ) मीरा
(ई) बिहारी।
उत्तर
(इ) मीरा।

Mp Board Class 8 Hindi Chapter 6 प्रश्न 4.
निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर विस्तार से लिखिए

(क) ‘जहाज का पक्षी’ किस बात का प्रतीक है? आशय स्पष्ट कीजिए
उत्तर
‘जहाज का पक्षी’ भगवान कृष्ण रूपी जहाज पर स्थल के दूर या समीप होने की जानकारी देने वाला पक्षी रूप भक्त है। जिस तरह समुद्र से यात्रा करने वाले जहाज से जमीन किधर है और कितनी दूर है, इसकी जानकारी लेने के लिए पक्षियों को छोड़ा जाता था। जब जमीन कहीं नहीं दीखती और जमीन पक्षियों की पहुँच से बाहर होती थी, तो पक्षी लौटकर जहाज पर ही आ जाते थे। यदि जमीन दूर या समीप होती, तो पक्षी उसी दिशा में उड़ते हुए चले जाते थे और वह जमीन ही उनकी शरण स्थल बन जाती थी। नाविक भी जहाज को उसी दिशा में खेने लग जाते थे। उस जमीन पर जाकर जहाज अपना लंगर डाल देता था। यह उस समय होता था जब कुतुबनुमा आदि दिशासूचक यन्त्रों का आविष्कार नहीं हुआ था। इस पद में कवि ने अपने आपको जहाज के पक्षी के (भक्त) रूप में चित्रित किया है जो बार-बार सभी ओर से निराश होकर श्रीकृष्ण के चरणों रूपी जहाज पर शरण प्राप्त करता है।

(ख) तुलसी ने किस-किसके उद्धार का उल्लेख किया है ?
उत्तर
तुलसी ने वर्णन किया है कि खग (जटायु), मृग (मारीच), व्याघ (वाल्मीकि), पषान (शाप से पत्थर बनकर पड़ी हुई गौतम पत्नी अहिल्या); बिटप (यमलार्जुन नामक वृक्ष); जड़ (भरत मुनि); आदि का उद्धार भगवान श्रीराम ने त्रेतायुग में और भगवान श्रीकृष्ण ने द्वापर युग में किया था। जटायु पक्षी सीता हरण के समय, सीता को बचाने के लिए रावण से संघर्ष करते हुए घायल हो गया था। श्रीराम ने उसका उद्धार किया था। मृग (मारीच) रावण का सम्बन्धी था जो रावण की सहायता के ‘लिए कपट-मृग (स्वर्ण मृग) बना था; जिसका राम ने उद्धार किया था। व्याध (वाल्मीकि) पहले डाकू थे। राम शब्द का उल्टा जाप करने से उनका कल्याण हो गया। पषान (अहिल्या) गौतम ऋषि की पत्नी थीं। वे अपने ऋषि पति के द्वारा दिये गये शाप के कारण पत्थर (पाषाण) बन गई थीं। भगवान राम ने अपने चरणों की धूल के प्रताप से उनका उद्धार किया था। यमलार्जुन को श्राप लगा और वे वृक्ष बन गये थे। द्वापर युग में श्रीकृष्ण ने उनका उद्धार किया। इस तरह विभिन्न रूप में पतित हुए प्राणियों का भगवान ने उचित समय पर उद्धार किया था।

(ग) रैदास ने भगवान से अपना सम्बन्ध स्थापित करते हुए किस-किससे अपने को जोड़ा है?
उत्तर
रैदास ने भगवान से अपने आपको कई तरह से जोड़ा है। उन्होंने भगवान को चन्दन, धन (बादल), चन्द्रमा, दीपक, मोती के रूप में है और अपने आपको क्रमशः पानी, मोर, चकोर, बत्ती, धागे के रूप में चित्रित किया है। चन्दन पानी के संयोग से घिस जाता है और उसकी गंध फैलने लगती है। बादल की गरजना के साथ ही मोर कूकता है। चन्द्रमा को चकोर एकटक ही देखता है। दीपक में बत्ती होती है, वह दीपक की ज्योति बिखेरती है। मोतियों में धागा पिरोया जाता है, फिर हार (माला) बन जाता है। सोने को सुहागे से चमक प्राप्त होती है। इस तरह ईश्वर से इन जीवों का विभिन्न प्रकार का सम्बन्ध है।

(घ) मीरा की भक्ति भावना पर अपने विचार प्रकट कीजिए।
उत्तर
मीरा की भक्ति दास भावना से ओत-प्रोत है। वे भगवान कृष्ण की भक्त दासी हैं। ईश्वर की भक्ति उनके लिए वह रत्न है जिसे कोई चोर चुरा नहीं सकता, खर्च करने पर भी खर्च नहीं होता। भगवान की भक्ति का रत्न तो प्रतिदिन सवाया ही होता जाता है। इस प्रकार ईश-भक्ति से मनुष्य सतगुरु की कृपा प्राप्त कर लेता है और सत पर आधारित मनुष्य की जीवन नौका बड़ी सरलता से संसार सागर को पार कर जाती है। ईश्वर की भक्ति ही मनुष्य को उद्धार प्राप्त कराने का एकमात्र साधन है। ईश्वर की भक्ति तो संसार की विविध वस्तुओं के प्रति मोह त्यागने पर ही प्राप्त होती है।

भाषा भारती कक्षा 8 Solutions Chapter 6 MP Board  प्रश्न 5.
निम्नलिखित पंक्तियों का आशय स्पष्ट कीजिए
(क) कौन देव बराय बिरद-हित, हठि-हठिअधम उचारे ?
उत्तर
तुलसीदास जी कहते हैं कि भगवान राम ! मैं आपके चरणों की भक्ति को छोड़कर कहाँ जाऊँ ? आपके अतिरिक्त किसका नाम पतितपावन है ? दीनों के प्रति किसे अति प्रेम है ? अन्य कौन-सा देवता है जिसने हठपूर्वक अपने यश के लिए पापियों का उद्धार किया हो ? पक्षी (जटायु), मृग (मारीच), व्याध वाल्मीकि), पाषान (अहिल्या), वृक्ष (यमलार्जुन),जड़ (भरत मुनि) आदि का किस देवता ने संसार-सागर से उद्धार किया है ? देव, राक्षस, मुनि, नाग और मनुष्य आदि सभी माया के वशीभूत होकर दयनीय बने हुए हैं। इसलिए, तुलसीदास अपने आपको समझाते हुए कहते हैं कि इनके समक्ष तू (तुलसी) अपनी दीनता का बखान क्यों करता है ?

(ख) सूरदास प्रभु काम धेनु तजि, छेरी कौन दुहावै ?
उत्तर
मेरा मन दूसरे स्थान पर किस तरह सुख प्राप्त कर सकता है। जिस तरह समुद्री जहाज से जमीन के होने की जानकारी के लिए छोड़ा गया पक्षी लौटकर फिर से जहाज पर ही आ जाता है, क्योंकि स्थल पास में नहीं होता है। उसे उसी जहाज पर शरण प्राप्त होती है। उसी पक्षी की तरह यह मेरा मूर्ख बना मन श्रीकृष्ण को झेड़कर किसी दूसरे देव का ध्यान क्यों धरता है। महान् पुण्यशाली पवित्र गंगा को छोड़कर मूर्ख और कुबुद्धि मनुष्य ही कुआँ खोदने की बात सोचता है। जिस भौरे ने कमल के पराग का ही पान किया हो, वह भौरा करील के फल (टेंटी) क्यों खायेगा ? सूरदास वर्णन करते हैं कि कामधेनु को छोड़कर बकरी दुहने का विचार कौन करता है ? तात्पर्य यह है कि भगवान श्रीकृष्ण को छोड़कर, हे मेरे मन ! तू किस दूसरे देव की आराधना करने का विचार करता है ? यदि तू ऐसा करता है तो निश्चय ही तू बड़ा मूर्ख है, उचित और अनुचित के भेद को तू नहीं जानता है।

Bhakti Ke Pad Class 8 Medha MP Board प्रश्न 6.
निम्नलिखित पंक्तियों का सन्दर्भ सहित भाव स्पष्ट कीजिए
(क) प्रभु जी तुम चन्दन हम पानी, जाकी अंग-अंग बास समानी।
उत्तर
इस पंक्ति के सन्दर्भ सहित भाव के लिए ‘सम्पूर्ण पद्यांशों की व्याख्या’ शीर्षक के पद्यांश-03 की व्याख्या सन्दर्भ-प्रसंग सहित देखिए।

(ख) पायो जी मैंने राम रतन धन पायो।
वस्तु अमोलक दी मेरे सतगुरु, किरपा कर अपनायो।।
जनम-जनम की पूँजी पाई, जग में सभी खोवायो।
खरचै नहिकोई चोर नलेवे, दिन-दिन बढ़त सवायो।।
उत्तर
इन पंक्तियों के सन्दर्भ सहित भाव के लिए ‘सम्पूर्ण पद्यांशों की व्याख्या’ शीर्षक के पद्यांश-04 की व्याख्या सन्दर्भ-सहित देखिए।

भाषा-अध्ययन

प्रश्न 1.
दिये गये विकल्पों में से सही विकल्प छाँटकर रिक्त स्थानों की पूर्ति कीजिए
(क) पंछी तद्भव शब्द है। इसका तत्सम रूप …… है। (पक्षी, पक्षि, पंच्छी)
(ख) चरन तद्भव शब्द है। इसका तत्सम रूप ……………… है। (पैर, चारन, चरण)
(ग) कमल का पर्यायवाची ……. शब्द है। (नीरद, जलद, नीरज)
(घ) रात का पर्यायवाची ……… है। (दिननाथ, रजनीपति, रजनी)
उत्तर
(क) पक्षी
(ख) चरण
(ग) नीरज
(घ) रजनी।

प्रश्न 2.
निम्नलिखित वर्ग पहेली में रात, पानी, कमल के दो-दो पर्यायवाची शब्द दिए हैं। उन्हें ढूँदिए तथा लिखिए।
उत्तर
शब्द – पर्यायवाची
रात = रात्रि, रजनी।
पानी = तोय, जल।
कमल = नीरज, तोयज।

प्रश्न 3.
तालिका में दिए गए शब्दों की सही जोड़ी बनाइए
उत्तर
तद्भव शब्द – तत्सम शब्द
(क) महातम – (1) दुर्मति
(ख) दुरमति – (2) स्वर्ण
(ग) मानुस – (3) माहात्म्य
(घ) सोना – (4) मनुष्य
उत्तर
(क)-(3),(ख)→(1),(ग)→(4),(घ)→2

प्रश्न 4.
निम्नलिखित छंदों में प्रयुक्त मात्राएँ गिनकर लक्षण के अनुसार छंद का नाम लिखिए
(क) वृक्ष कबहु नहिं फल भखै, नदी न संचै नीर।
परमारथ के कारने, साधुन धरा शरीर।।
उत्तर
यह छंद दोहा है। यह मात्रिक छन्द है। इसमें चार चरण होते हैं। इसके विषम चरणों (पहले और तीसरे) में 13-13 मात्राएँ तथा सम चरणों (दूसरे और चौथे) में 11-11 मात्राएँ हैं।
MP Board Class 8th Hindi Bhasha Bharti Solutions Chapter 6 भक्ति के पद 2
वृक्ष कबहु नहिं फल भखै, नदी न संचै नीर।
MP Board Class 8th Hindi Bhasha Bharti Solutions Chapter 6 भक्ति के पद 1
परमारथ के कारने, साधुन धरा शरीर।।
अत: यह दोहा छन्द है।

(ख) कुन्द इन्दु सम देह, उमा रमन करुना अयन।
जाहि दीन पर नेह, करहु कृपा मर्दन मयन।।
उत्तर
MP Board Class 8th Hindi Bhasha Bharti Solutions Chapter 6 भक्ति के पद 3
कुन्द इन्दु सम देह, उमा रमन करुना अयन।
MP Board Class 8th Hindi Bhasha Bharti Solutions Chapter 6 भक्ति के पद 4
जाहि दीन पर नेह, करहु कृपा मर्दन मयन।
(11-13 मात्राएँ) अत: यह सोरठा छन्द है।

(ग) जेहि सुमिरत सिधि होय, गन नायक करिवर वदन।
करहु अनुग्रह सोय, बुद्धि रासि सुभ गुन सदन।।
उत्तर
MP Board Class 8th Hindi Bhasha Bharti Solutions Chapter 6 भक्ति के पद 5
जेहि सुमिरत सिधि होय, गन नायक करिवर वदन।
MP Board Class 8th Hindi Bhasha Bharti Solutions Chapter 6 भक्ति के पद 6 (11-13 मात्राएँ)
करहु अनुग्रह सोय, बुद्धि रासि सुम गुन सदन।।
(11-13 मात्राएँ) अतः यह सोरठा कद है।
खण्ड-ख और ग सोरठा मद के उदाहरण हैं। सोरठा छन्द मात्रिक छन्द होता है। यह दोहे का उल्टा होता है। इसके विषम चरणों में (पहले और तीसरे में) 11-11 मात्राएँ तथा सम चरणों में (दूसरे और चौथे में)
13-13 मात्राएँ होती है।

भक्ति के पद सम्पूर्ण पद्यांशों की व्याख्या

(1) मेरौ मन अनत कहाँ सुख पावै।
जैसे उड़ि जहाज को पंछी, फिरि जहाज पर आवै।
कमल-नैन को छाँड़ि महातम और देव को ध्यावे?
परम गंग को छोड़ि पियासौ, दुरमति कूप खनावै।
जिहिं मधुकर अंबुज-रस चाख्यौ, क्यों करील फल भावै।
सूरदास, प्रभु, कामधेनु तजि, छरी कौन दुहावै ?

शब्दार्थ-मेरौ= मेरा; अनत-अन्यत्र,दूसरी जगह; पावै प्राप्त कर सकता है; पंछी = पक्षी; फिरि = लौटकर आवै = आ-जाता है; कमल-नैन = कमल के समान नेत्र वाले भगवान कृष्ण; छाँड़ि = छोड़कर या अतिरिक्त; महातम = महान् मूर्ख और देव = अन्य देवता को; ध्यावै = ध्यान करता है; परम = महान्; पियासौ = प्यासा व्यक्ति; दुरमति = दुर्बुद्धि; कूप – कुऔं; खनावै = खुदवाता है; जिहि = जिस; मधुकर = भौरे ने; अंबुज-रस = कमल के पराग का; चाख्यौ = आस्वादन किया है; करील फल = टेंटी; भावै = अच्छी लगें; छेरी = बकरी; दुहावै दुहेगा।

सन्दर्भ-प्रस्तुत पद हमारी पाठ्य-पुस्तक ‘भाषा-भारती के पाठ’ भक्ति के पद’ से अवतरित है। इसके रचयिता ‘सूरदास हैं।

प्रसंग-प्रस्तुत पद में सूरदास ने अपनी दीनता भरी विनती को स्पष्ट किया है। वे आशा करते हैं कि हे भगवान श्री कृष्ण जी ! आपके ही चरणों में मुझे शरण प्राप्त होगी।

व्याख्या-मेरा मन दूसरे स्थान पर किस तरह सुख प्राप्त कर सकता है। जिस तरह समुद्री जहाज से जमीन के होने की जानकारी के लिए छोड़ा गया पक्षी लौटकर फिर से जहाज पर ही आ जाता है, क्योंकि स्थल पास में नहीं होता है। उसे उसी जहाज पर शरण प्राप्त होती है। उसी पक्षी की तरह यह मेरा मूर्ख बना मन श्रीकृष्ण को झेड़कर किसी दूसरे देव का ध्यान क्यों धरता है। महान् पुण्यशाली पवित्र गंगा को छोड़कर मूर्ख और कुबुद्धि मनुष्य ही कुआँ खोदने की बात सोचता है। जिस भौरे ने कमल के पराग का ही पान किया हो, वह भौरा करील के फल (टेंटी) क्यों खायेगा ? सूरदास वर्णन करते हैं कि कामधेनु को छोड़कर बकरी दुहने का विचार कौन करता है ? तात्पर्य यह है कि भगवान श्रीकृष्ण को छोड़कर, हे मेरे मन ! तू किस दूसरे देव की आराधना करने का विचार करता है ? यदि तू ऐसा करता है तो निश्चय ही तू बड़ा मूर्ख है, उचित और अनुचित के भेद को तू नहीं जानता है।

(2) जाऊँ कहाँ तजि चरन तिहारे ?
काको नाम पतित पावन ? जग केहि अति दीन पियारे ?
कौन देव बराय बिरद-हित, हठि हठि अधम उधारे ?
खग, मृग, व्याघ, पषान, बिटप, जड़, जवन कवन सुर तारे ?
देव, दनुज, मुनि, नाग, मनुज सब, माया-बिबस बिचारे।
तिनके हाथ दास तुलसी प्रभु कहा ‘अपनपी हारे’।।

शब्दार्थ-तजि = छोड़कर; तिहारे = तुम्हारे; काको = किसका; पतित-पावन = नीच व्यक्ति का उद्धार करने वाला; जग = संसार में; केहि = किसको, अति = बहुत अधिक; दीन = गरीब पियारे= प्रिय हैं; बराय = दूसरा; बिरद-हित = यश के लिए: हठि-हठि= हठपूर्वक; अधम = पापियों का; उधारे = उद्धार किया है; खग = जटायु; मृग = मारीच; व्याघ – वाल्मीकि जो पहले डाकू थे; पषान = अहिल्या; बिटप = यमलार्जुन; जड़भरतमुनि; मनुज = मनुष्य; माया-बिबस = माया से भ्रमित होकर; बिचारे = दीन बने हुए हैं। अपनपौ = अपनेपन अर्थात् अपनी दीनता; हारे = हार मान जाये।

सन्दर्भ-प्रस्तुत पद हमारी पाठ्य-पुस्तक ‘भाषा-भारती’ के पाठ’ भक्ति के पद’ से अवतरित है। इसके रचयिता गोस्वामी तुलसीदास हैं।

प्रसंग-तुलसीदास भगवान राम के प्रति अपनी अटूट भक्ति और विश्वास को प्रकट करते हैं। वे अपने इष्ट राम के चरणों में ही शरण प्राप्त करते हैं।

व्याख्या-तुलसीदास जी कहते हैं कि भगवान राम ! मैं आपके चरणों की भक्ति को छोड़कर कहाँ जाऊँ ? आपके अतिरिक्त किसका नाम पतितपावन है ? दीनों के प्रति किसे अति प्रेम है ? अन्य कौन-सा देवता है जिसने हठपूर्वक अपने यश के लिए पापियों का उद्धार किया हो ? पक्षी (जटायु), मृग (मारीच), व्याध वाल्मीकि), पाषान (अहिल्या), वृक्ष (यमलार्जुन),जड़ (भरत मुनि) आदि का किस देवता ने संसार-सागर से उद्धार किया है ? देव, राक्षस, मुनि, नाग और मनुष्य आदि सभी माया के वशीभूत होकर दयनीय बने हुए हैं। इसलिए, तुलसीदास अपने आपको समझाते हुए कहते हैं कि इनके समक्ष तू (तुलसी) अपनी दीनता का बखान क्यों करता है ?

(3) अब कैसे छूटै नाम रट लागी ? प्रभुजी तुम चन्दन हम पानी, जा की अंग-अंग बास समानी ।।
प्रभुजी तुम घनवन हम मोरा, जैसे चितवत चंद चकोरा ।
प्रभुजी तुम दीपक हम बाती,जाकी ज्योति बरे दिन राती ।।
प्रभुजी तुम मोती हम धागा, जैसे सोनहिं मिलत सुहागा ।
प्रभुजी तुम स्वामी हम दासा, ऐसी भक्ति करे रैदासा ।।

शब्दार्थ-छूटै = समाप्त हो; नाम रट = भगवान के नाम की रट: अंग-अंग = शरीर के प्रत्येक अंग में बास = सगन्धः समानी = व्याप्त हो गयी है; घन बादल; वन जंगल (संसार); हम = प्राणी; मोरा = मोर हैं; जैसे = जिस तरह; चितवत = एक टक होकर देखता रहता है; चंद = चन्द्रमा को; चकोरा = चकोर पक्षी; बाती = बत्ती; ज्योति = प्रकाश, उजाला; बरे = जलती है; दिन राती रात और दिन; सोनहि-सोने में।

सन्दर्भ-प्रस्तुत पद हमारी पाठ्य-पुस्तक ‘भाषा-भारती के पाठ ‘भक्ति के पद से अवतरित है। इसके रचयिता भक्त कवि रैदास हैं।

प्रसंग-भक्त कवि रैदास ने इस पद में बताया है कि वे ‘दास’ भाव की भक्ति करते हैं।

व्याख्या-हे प्रभो ! तुम्हारे नाम की लगी हुई रट किसी भी तरह नहीं छट सकती। तुम सुगन्धित चन्दन हो, हम (मैं) पानी के समान हैं। चन्दन की सुगन्ध जल के साथ मिलकर उसमें समा जाती है। उसी तरह, हे प्रभो ! तुम्हारी भक्ति में मेरा अंग-अंग डूबा हुआ है। हे प्रभो ! तुम बादल के समान हो, और हम (भक्तगण) मोर के समान है। हम आपकी तरफ ठीक उसी तरह एकटक होकर देखते रहते हैं, जिस तरह चकोर पक्षी चन्द्रमा की ओर देखता रहता है। आगे फिर कवि कहता है कि हे ईश्वर ! तुम दीपक हो और हम उस दीपक की बत्ती के समान हैं, जिसकी लौ की ज्योति रात-दिन जलती रहती है अर्थात् तुम्हारा ही तेज सर्वत्र बिखरा हुआ है। कवि फिर कहता है कि हे ईश्वर ! तुम मोती के समान हो और मोती पिरोये गये धागे के समान हम (भक्त) लोग हैं अर्थात् भक्त ईश्वर से मिलकर अपनी बात बना ले जाता है। रैदास कवि कहते हैं कि हे प्रभो ! मैं आपका दास हूँ और तुम मेरे स्वामी हो। इस तरह मैं दास भाव की भक्ति करता हूँ।

(4) पायो जी मैंने, राम रतन धन पायो।
वस्तु अमोलक दी मेरे सतगुरु, किरपा कर अपनायो।।
जनम-जनम की पूँजी पाई, जग में सभी खोवायो।
खरचै नहिं कोई चोर न लेवै, दिन-दिन बढ़त सबायो।।
सत की नाव खेवटिया सतगुरु, भवसागर तर आयो।
मीरा,के प्रभु गिरधर नागर, हरख-हरख जस गायो।।

शब्दार्थ-पायो = प्राप्त कर लिया है; अमोलक अमूल्य, बेशकीमती किरपा= कृपा, दया; अपनायो- अपना लिया है, स्वीकार कर लिया है। पूँजी = सम्पत्ति खोवायो – खो दिया है; दिन-दिन-प्रतिदिन, रोजाना; बढ़त = वृद्धि हो रही है; सबायो = सवा गुना; सत = सत्य, खेवटिया = खेने वाला; तर आयो = उद्धार प्राप्त कर लिया; नागर = चतुर: हरख-हरख = हर्षित होकर, प्रसन्न होकर; जस = यश, कीर्ति; गायो = गाया है।

सन्दर्भ-प्रस्तुत पद हमारी पाठ्य-पुस्तक ‘भाषा-भारती के पाठ’ भक्ति के पद’ से अवतरित है। इस पद की रचयिता भक्त कवयित्री ‘मीराबाई हैं।

प्रसंग-मीरा भगवान कृष्ण की भक्ति करती हैं। वह उनके यश का गान बहुत ही हर्षपूर्वक करती हैं।

व्याख्या-मीराबाई कहती है कि मैंने राम रूपी रत्न को धन के रूप में प्राप्त कर लिया है। मेरे श्रेष्ठ गुरु ने मुझे एक बेशकीमती वस्तु प्रदान की है। मेरे गुरु ने बड़ी ही कृपा करते हुए मुझे अपना लिया है। इस तरह मैंने प्रत्येक जन्म की पूँजी प्राप्त कर ली है। संसार सम्बन्धी सब कुछ (धन इत्यादि) खो दिया। यह भक्ति रूपी सम्पत्ति बहुत ही अजब है जिसे किसी भी तरह खर्च नहीं किया जा सकता। कोई चोर भी इसे चुरा नहीं सकता। यह भक्ति रूपी धन प्रतिदिन ही सवाया होकर बढ़ता जा रहा है। सत्य की नाव को खेने वाला यदि सतगुरु है तो आसानी से ही संसार रूपी सागर को सहज ही पार किया जा सकता है। मीरा वर्णन करती हैं कि मेरे प्रभु तो गोवर्धन पर्वत को धारण करने वाले हैं; वे अति चतुर हैं। मैंने तो उनके यश का गान हर्षित होकर किया है।

MP Board Class 8th Hindi Solutions

MP Board Class 10th English The Rainbow Solutions Chapter 5 Refund

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MP Board Class 10th English The Rainbow Solutions Chapter 5 Refund (Fritz Karinthy)

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Refund Textbook Exercises

Refund Vocabulary

Mp Board Class 10 English Chapter 5 Question 1.
Use the following expressions in your own sentences.
by hook or by crook, what the hell, is that plain enough, will go straight, good for nothing, God forbid! Bravo! Have my ears open, as a matter of fact, with flying colours.
Answer:

  1. By hook or by crook—She will try to pass the test by hook or by crook.
  2. What the hell—What the hell were you doing with that girl?
  3. Is that plain enough—Don’t waste your precious time. Is that plain enough to you?
  4. Will go straight—The arrow will go straight to its target.
  5. Good for nothing—Your neighbour is a good for nothing fellow.
  6. God forbid—God forbid! how will the old man survive if he is not given medicines in time.
  7. Bravo—Bravo! our team has won the final match.
  8. Have my ears open—Don’t speak so loudly, I have my ears open.
  9. As a matter of fact—She won’t listen to your advice. As a matter of fact, she is stupid.
  10. With flying colours—Our soldiers returned with flying colours after defeating their enemy.

II. Select the correct spelling of the following and write it in your notebook.

Class 10 English Chapter 5 Refund Question Answer MP Board Question 1.
A. Tution
B. Twishan
C. Tuition
D.Tooshan
Answer:
(C) Tuition

Class 10 English Chapter 5 Refund MP Board Question 2.
A. Kursy
B. Courtesy
C. Gourtsy
D. Courtsye
Answer:
(B) Courtesy

Refund Questions And Answers MP Board Question 3.
A. Mathematic
B. Mathematics
C. Mathamatics
D. Mathamatiks
Answer:
(B) Mathematics

Mp Board Class 10th English Chapter 5 Question 4.
A. Ainsteen
B. Einstean
C. Instein
D. Einstein
Answer:
(D) Einstein

Class 10 English Chapter 5 Mp Board Question 5.
A. Unparalleled
B. Unparralleled
C. Unparaleled
D. Unparelleled
Answer:
(A) Unparalleled

III. Write in your own words what the following expressions mean in the lesson.
approved of, examined in, agree with, entitled to.
Answer:
Approved of—agreed with Examined in—tested in Agree with—to have similar opinion
Entitled to—having the right to get/do something; deserved/ fit for.

Comprehension

A. Answer the following questions in about 25 words.

Chapter 5 English Class 10 Mp Board Question 1.
Why did Wasserkopf come to the school after eighteen years?
Answer:
Wasserkopf had studied at the school nearly eighteen years ago. The education he received in the school failed to provide him with any capability. It had also rendered him worthless. He came to the school for the refund of his tuition fees.

Refund Questions And Answers Mp Board Question 2.
What were Wasserkopf’s arguments to get his fee back?
Answer:
Wasserkopf argued with the Principal of the school. He said that he had received education in that school eighteen years ago. It had not provided him with any capability at all. On the contrary, it had made him worthless. He hadn’t got his money’s worth.

Refund Chapter Question Answer MP Board Question 3.
The Principal summoned the Masters for a most extra-ordinary conference. What did he tell them?
Answer:
The Principal summoned the Masters for the most extraordinary conference. He told them about an old pupil, Wasserkopf who had come there to get his fee back. It was a unique case during his career as a school-master.

Mp Board Class 10 English Workbook Solutions Chapter 5 Question 4.
Why did the Principal consider Wasserkopf’s case “a most unusual state of affairs”?
Answer:
Wasserkopf had brought the certificate of the school. He said that he was no good for anything. The education he got there made nothing but an incompetent ass of him. He would complain about the Principal if his fee was not refunded to him. The Principal considered it a most unusual case.

Question 5.
What did the Mathematics teacher suggest to checkmate Wasserkopf?
Answer:
The Mathematics teacher said that they were dealing with a sly, crafty individual. He would try to get the better of them and would take his money back anyhow. In this context he suggested that he should be asked simple questions so that he must not fail. In this way, they could checkmate him.

Question 6.
Why did the Mathematics teacher want to prevent Wasserkopf from failing?
Answer:
The Mathematics teacher ’knew that Wasserkopf would try his level best to fail in the re-examination. If he failed, he would succeed in his mission. In other words, the school would have to refund his fees. That would place them in an awkward position. Therefore, he wanted to prevent Wasserkopf from failing.

Question 7.
What were the qualities of Wasserkopf that the Principal and the Masters evaluated?
Answer:
The Principal and the Master evaluated the following qualities of Wasserkopf. Patriarchal manners, gentlemanliness, courtesy, physical culture, alertness, perseverance, logic and ambition.

Question 8.
On what ground was Wasserkopf awarded ‘Excellent’ in Physical Culture?
Answer:
The History Master asked Wasserkopf to sit on the chair. Wasserkopf said. “To hell with a seat! I shall stand.” The Mathematics Master interprets that Wasserkopf intended to face the oral examination and will remain standing. He awarded Wasserkopf ‘excellent’ in physical culture due to his splendid physical condition.

Question 9.
What was the question that the Physics Master put to Wasserkopf?
Answer:
The Physics Master also put a question to Wasseskopf. The question was whether clocks in church steeples really become smaller as you walk away from them or do they merely appear to become smaller because of an optical illusion (mirage)

Question 10.
How much money, according to Wasserkopf, did the school owe to him?
Answer:
According to Wasserkopf, the school owed to him the following money.
Wasserkopf had attended the school for six years. The total of his fees, examination fees and fees on incidentals was 2400 + 1800 + 1482 + 768 crowns 50 heller. He was ready to knock off the hellers.

Question 11.
What was the final result that Principal presented to Wasserkopf?
Answer.
The Principal presented the result to Wasserkopf. He had passed with distinction in every subject. Therefore, he had again shown that he was entitled to the certificate they had awarded him on his graduation. He congratulated both Wasserkopf and his team.

Question 2.
Anita: What do want to do this morning?

Prakash: I feel like taking a walk. It’s so nice outside.
Anita: Great, let’s walk around the lake in the park.
Prakash: It’s really rocky here.
Anita: Yes, watch your steps so you don‘t trip.
Anita asked Prakash
(a) Prakash …………… answered that he (b) It was so nice outside.Anita agreed to this and suggested (c) ………….. Then Prakash observed that (d) …………. Anita cautioned him to watch his steps.

Question 3.
Read the comic strip and complete the passage given below.
Mp Board Class 10 English Chapter 5
Neha asked Naina (a) …………… London. Naina replied that she had enjoyed herself only in parts as
(b) …………….. there. Then Neha wanted to know (c) ……………… To this Naina replied that she saw a number of places although (d) ……………. it had rained a little less there.

Question 4.
Interviewer: So, Why do you want to be a computer programmer?
Ravi: Well, I don’t like working in a fast food restaurant and I want to make more money.
Interviewer: I see. Do you have any experience?
Ravi: No, but I am a fast learner.
Interviewer: What kind of a computer do you use?
Ravi: Computer? Uhm… let me see. I can use a Mac. I also used Windows 95 once.
Interviewer: We will get back to you. called his claim for refund genuine. The second answer made him call Wasserkopf as a mathematical genius. By his tact,-the Mathematics teacher proved that he was more ‘shrewd’ than the former pupil.

Question 5.
How did the three Masters shatter Wasserkopf’s plan to get the refund?
Answer:
Wasserkopf wanted to fail in the examination to get the refund of his fees. Wasserkopf’s answer was absurd. He spoke that the Thirty- year war lasted seven metres. The History teacher and the Maths teacher proved it correct according to Einstein’s theory of relativity.

The Physics teacher asked, ’Do clocks in church steeples really become smaller as you walk away from them or merely appear so?’ His reply was you’re an ass. The teacher proved it correct due to optical illusion. The Mathematics teacher asked Wasserkopf to calculate the amount of refund. His correct answer made him successful. He was declared pass in every subject. His request for refund was rejected. He was sent away disappointed.

Question 6.
How far is a school or educational institution accountable for the future of its students? Support your answer with arguments given in the play.
Answer:
Education aims at securing one’s livelihood as well as life. Stress should be laid on technical and vocational education. Character formation should be the major motive of education. There should be a personal contact between the teacher and the taught. Good manners should be inculcated among the students from the very beginning. According to Wasserkopf he didn’t learn anything. He had become an incompetent ass. He failed at every job. He used abusive and taunting language before teachers and the Principal of the school. He was rude and challenging in his behaviour. He lacked respectful behaviour. He was nill at gentlemanliness, courtesy, physical culture, alertness, perseverance, logic and ambition. The school was not accountable for his fate.

Refund Grammar

Non-Finite s
Study the following sentences:

  1. I want you to refund the tuition fee.
  2. I have got to hurry to the broker’s to collect the money.
  3. I haven’t got to tell you now.

The root form of the verb preceded by ‘to’ is called the to-infinitive. Study the following sentences:

  1. I don’t think.
  2. I should just say.
  3. I suppose I can get along.

The root form of the verb without ‘to’ is called the bare-infinitive. Name and underline the Infinitives in the following sentences:
1. You really want to take another examination?
2. Why do you want it?
3. I might be able to do something.
4. I have the right to take one.
5. I shall have to consult the staff.
6. I have asked you to come here on account of a most unusual state of affairs.
7. How do you do?
Answer:

  1. You really want to take another examination? (To-Infinitive)
  2. Why do you want it? (Bare-Infinitive)
  3. I might be able to do something. (To-Infinitive)
  4. I’ve the right to take one. (To-Infinitive)
  5. I shall have to consult the staff. (To-Infinitive)
  6. I have asked you to come here on account of a mostunusual state of affairs. (To-Infinitive)
  7.  How do you do? (Bare-Infinitive)

Study the following sentences.

  1. I am bringing back the leaving certificate.
  2. Will you wait in the waiting room?
  3. Thus the candidate has come through with flying colours.

The form of verb which has the characteristic of a verb as well as an adjective is called the Participle. Study the following sentences.

  1. I made speculation in foreign exchange.
  2. They surround the Physics Master, slapping him on the back and shaking his hands.
  3. I’ll start off by telling you a few things.

The -ing form of verb when used as a Noun is called Gerund.
Distinguish the following underlined words:
1. He remains standing.
2. He hurried away and left me standing there.
3. What a distressing bussiness
4. The following speeches are nearly spoken simultaneously.
5. The Principal, leaning back and stretching, received parents only during office hours.
Answer:

  1. standing – Gerund.
  2. standing – Gerund.
  3. distressing – Participle.
  4. following – Participle.
  5. leaning – Participle
  6. stretching – Gerund.

Speaking Skill

A. Survey of students opinion regarding the school timetable.

Question 1.
Prepare a questionnaire consisting of seven questions on the school timetable. Question atleast ten students, get their views and note down the questions.
You may use the following questions.
1. What should be the length of total reading time in schools?
2. What should be the length of a period?
3. Which subjects should be taught before the recess (interval)?
4. Which period should be allotted to practical classes?
5. How many periods should be alloted to library-activity in a week?
6. What should be the length of recess (interval)?
7. How many periods should be allotted to games in a week?
Answer:
Sample Answer of one student.

  1. The length of total reading time in school should be six hours.
  2. The length of a period should be 45 minutes before recess and 40 minutes after recess.
  3. English, Maths and Science subjects should be taught before
    the recess (interval).
  4. The last period should be allotted to practical classes.
  5. Three periods should be allotted to library activity in a week.
  6. The length of recess (interval) should be 20 minutes.
  7. Four periods should be allotted to games in a week. (However, there can be as many different answers depending on the number of students.)

Question 2.
Imagine you have just shifted to Bhopal from Harda and H have to join a new school there. Your residence is in a multistoreyed complex where there are many students of your age. Talk to them and find out all about the schools in which they study.
Draw a table in your notebook in the manner as given below and fill in the details. In some cases, the friends may not provide information under all the headings in the table. In- such cases, put a -in that box.
Class 10 English Chapter 5 Refund Question Answer MP Board
Ask the same question in different ways as given below:

  1. Where do you study? or
  2. In which school do you study? or
  3. What is the name of your school?

Answer:
Class 10 English Chapter 5 Refund MP Board

Writing Skill

Question 1.
‘Education is for life, not for livelihood’. Expand the idea. (50 words)
Answer:
Education aims at creating ideal personality in a student. It is expected that the student after completing his education becomes the picture of all that is noble. He knows the value of time. He is helpful and sympathetic towards those who are weak and needy. He never nourishes ill will against others. He is honest and respectful to his seniors. He remains in discipline. He takes care of his health and honour. He does not degrade himself in the estimation of others. He is never a slave to his senses. He is a good debator and organizer. He becomes a moving spirit in society. He accomplishes everything with a humanitarian concern. Being a social animal he shares others’ happiness and woes. In this way education prepares him for life, not only for livelihood.

Question 2.
Suppose you are going to deliver a speech on ’Teacher’s Day’. Prepare a draft of your speech. (150 words)
Answer:
Teacher’s Day Teacher’s day is a national function. It is celebrated on 5th September every year, the day of Dr. Radha- krishnan’s birthday. Dr. Radhakrishnan was an ideal teacher and therefore his birthday is celebrated as Teacher’s Day throughout the country. The main idea is to draw the attention of the society towards this noble profession. Nearly a hundred teachers are honoured with National Award on this day. The awardees are selected on the basis of the personal character, conduct, professional competence and their contribution to society. Only ideal and worthy teachers get it.

Giving award to teachers is a good incentive for them. It is a pity that a teacher is not accorded due respect these days. He is held low7 down in the social scale. One of the most serious causes for the loss of respect for the teacher is his poor salary. Also most of the teachers today fail to involve themselves with students. They do not bother for the future of their students. It is therefore, whenever they (students) obtain poor marks or show poor results, teachers are held responsible. They sometimes suffer from lack of confidence. The selfless teachers who possess character and unbiased love and affection for students enjoy social respect which is its own award.

Think It Over

1. He who does not know that he doesn’t know is an ignorant person. Keep him away.
He who knows that he doesn’t know is ready to learn, teach him. He who knows that he knows is wise, make him your teacher. Ponder over it and if you find such persons around you, write their names and traits.
2. Be wise than other people, if you can; but do not tell them so because men must be taught as if you taught them not. And things unknown must be proposed as things forgot. Ponder.
3. A man convinced against his will is of the same opinion still. Think and pen your experience.
Answer:
For pondering at individual level.

Things To Do

1. Take as many chart sheets as many subjects you read. Write names of the subjects on different sheets. Now write difficult portions of your syllabus according to your opinion on every sheet.
2. Show these sheets to your parents and teachers. Stick them on the wall in your study.
3. Try to learn those items and cross them when they are no more difficult for you.
4. Try to eliminate them all.
Answer:
For self-attempt.

Refund Additional Important Questions

A. Read the passages and answer the questions that follow.

1. Because actual warfare took place only during half of each day- that is to say, twelve hours out of the twenty-four-and the thirty years at once become fifteen. But not even fifteen years were given up to incessant fighting, for the combatants had to eat-three hours a day, reducing our fifteen years to twelve. And if from this we deduct the hours given up to noonday siestas, to peaceful diversions, to nonwar like activities. (Page 38)

Question 1.
Who spoke the above lines?
Answer:
The History Master spoke the above lines.

Question 2.
How many hours did the actual warfare take place each day?
Answer:
The actual warfare took place twelve hours out of twenty- four each day.

Question 3.
How many hours a day did the combatants have to eat?
Answer:
The combatants had to eat for three hours a day.

Question 4.
How long had the war lasted according to Wasserkopf?
Answer:
According to Wasserkopf, the war had lasted seven metres.

Question 5.
Give a synonym from the passage for the word ‘afternoon short sleep’.
Answer:
‘Siesta.’

2. (rising): I present the result of the examination. Herr Wasserkopf has passed with distinction in every subject, and has again shown that he is entitled to the certificate we awarded him on his graduation. Herr Wasserkopf, we offer our congratulations accepting a large share of them for ourselves for having taught you so excellently. And noisy that we have verified your knowledge and your abilities (he makes an eloquent gesture) get out before I have you thrown out! (Page 41)

Question 1.
Who spoke the above lines?
Answer:
The Principal spoke the above lines.

Question 2.
What would he present ?
Answer:
He would present the result of the examination.

Question 3.
How had Herr Wasserkopf passed?
Answer:
Herr Wasserkopf had passed with distinction in every subject.

Question 4.
What was his final word to Wasserkopf?
Answer:
His final word to Wasserkopf was Get out before he had him thrown out.

Question 5.
Give a word from the passage for the expression. ‘Expression with motion of limbs’.
Answer:
‘Gesture’.

I. Match the following:

1. Principal received parents – (a) i don’t think so
2. Wasserkopf – (b) Gentlemen, the case is natural
3. The Mathematics teacher – (c) Only during office hours
4. The Physics Master – (d) I’m bringing back the leaving certificate you gave me.
5. A pupil – Tell us about it.
Answer:
1. (c), 2. (d), 3. (e), 4. (b), 5. (a).

II. Pick up the correct choice.

(i) The story Refund
A. Wasserkopf
B. Fritz Karinthy
C. Rudyard Kipling
D. Oscar Wilde
Answer:
B. Fritz Karinthy

(ii) A. Yes; but be quick. I’’e got no time to (waste! wait).
B. Because hes (a donkey/an ass).
C. There is nothing like it in the history of (India! civilization).
D. The Geography Master. Where is the (fellow! person), any how?
Answer:
A. waste
B. an ass
C. civilization.
D. fellow

III. Write ‘True’ or ‘False’.

1. The History Master, leave it to us.
2. The Principal (to the servant): Show in Herr Wasserkopf.
3. Wasserkopf. Agreed! Agrèed!
4. The Mathematics Master: ‘Logic; Excellent’.
5. The Physics Master: You were always a numskull.
Answer:

  1. False.
  2. True
  3. False
  4. True
  5. False.

IV. Fill in the following blanks.

1. Oh, you can’t think of a ………….. that’s easy enough?
2. How long did the …………….. year war last?
3. This is no way to ……………. an examination.
4. The Principal; I shall …………….with this decisively.
5. The ……….. takes the’ place of the History Master.
Answer:

  1. question
  2.  thirty
  3. run
  4. deal
  5. Physics Master.

B. Short Answer Type Questions (In about 25 words)

Question 1.
What did the servant (peon) tell the Principal?
Answer:
The servant (peon) told the Principal that there was a man outside. He wanted to see the Principal. He was neither a parent nor a pupil. He had a beard. His name was Wasserkopf. He looked intelligent.

Question 2.
Whom did the peon show in?
Answer:
The peon showed in a middle-aged person. His name was Wasserkopf. He was bearded. He was carelessly dressed. He was somewhat under forty. He was energetic and decidedly a man of confidence.

Question 3.
How did Wasserkopf introduce himself?
Answer:
Wasserkopf remained standing. The Principal asked him what he should do for him. Wasserkopf asked if the Principal remembered him. Then he realised that he was not worth remembering. In the end he told the Principal that he was a student in that school eighteen years ago.

Question 4.
Why could Wasserkopf say that he could get along without another certificate?
Answer:
Wasserkopf was awarded a certificate on his graduation from the school. The certificate showed that he had got an education. The reality was that he hadn’t learnt anything. He couldn’t keep a job even if he managed to get it. Therefore, he could get along without any (another) certificate.

Question 5.
Who was Lederer? What was his suggestion to Wasserkopf?
Answer:
Lederer was a man who made speculations in foreign exchange. He was awfully busy. He told Wasserkopf that he earned whenever money Was down. Wasserkopf failed to understand it. Lederer pitied his poor knowledge. He suggested him to get his tuition fee refunded if he did not know any damn thing.

Question 6.
Why was Wasserkopf hell bent on getting the refund of his tuition fee?
Answer:
Wasserkopf was a poor man. His tuition fee amounted to a lot of money. Therefore, he could not afford to forgo the heavy amount. Moreover, he didn’t get anything for them. He was no good for anything. He couldn’t retain even his acquired jobs.

Question 7.
Why did the Principal scratch his head?
Answer:
A former student, named Wasserkopf came to the Principal ,j to get his tuition fee refunded. It was a unique case. He had never heard of anything like it before. He couldn’t make any decision single handed. Therefore, he scratched his head.

Question 8.
What were the views’ of the Mathematics Master about re-examination?
Answer:
Wasserkopf was in favour of a re-examination. It would prove that he had really learned nothing. The Mathematics Master suggested that they should not make their questions too difficult. In this way, they would get the better of the sly and crafty fellow.

Question 9.
What is the pedagogical scandal referred to in the lesson ’Refund’?
Answer:
The Mathematics Master was of the view that all the teachers would prevent Wasserkopf from failing. If he fails, he would claim for the refund of his fees. It would become a pedagogic scandal. The number of claimants would go on swelling day after day

C. Long Answer Type Questions (In about 50 words)

Question 1.
Give a brief character sketch of Wasserkopf.
Answer:
Wasserkopf was a poor and greedy person. He was fired from his jobs due to his ill manners and rude behaviour. He had no knowledge of any field. He neither had sense of shame nor sense of respect. He threatens the Principal that he would complain against him to the Ministry of Education. He is like a ruffian. He stares insolently at the Principal. He calls the teachers ’loafers’. He doesn’t give a damn for the teachers. He calls the History Master a ‘numskull’. He calls the Physics Master ‘a cannibal’ and ‘a whiskered balloon’. He calls the Maths teacher as ‘old stick in the mud’.

Question 2.
Give the role of the Principal of the school in the lesson ’Refund’.
Answer:
The entire scene of the one act play takes place in the office of the Principal of the school. A former student, named Wasserfopf enters his office. He addresses him as Mr. Principal. He asks him to refund his tuition fee because the school had taught him nothing. The Principal hears his complaint patiently He makes him wait and called a conference of his teachers. He apprises the teachers of the silly demand of a sly and crafty old student. He is a silent spectator when Wasserkopf is re-examined. He is a competent and considerate administrator. He controls the situation and turns Wasserkopf out empty handed.

Refund Introduction

This one act play is about a former pupil who unexpectedly arrives at the school in which he studied earlier. The education that he received at school has left no good impact on him. He has become worthless. He argues with the Principal of the school. Previously the Principal is not ready to accept his demand. But finally he tells his teachers to conduct a re-examination to a certain his worth.

Refund Summary in English

A former pupil unexpectedly arrived at the school. He had studied there nearly eighteen years ago. He entered the Principal’s office arrogantly. He told the Principal that his name was Wasserkopf. The Principal asked him whether he wanted a certificate. Wasserkopf replied in the negative. He wanted the Principal to refund the tuition fees which he had paid for his education. He was a poor man. Therefore, he needed the money.

The Principal asked Wasserkopf why he wanted the fee back. He told the Principal that he didn’t get his money’s worth. He didn’t learn anything. Rather, the education had made nothing but an incompetent ass of him. His old classmate Lederer gave him the idea because he did not know any damn thing. He said, he would complain against the Principal if his request for refund was not granted

The Principal asked Wasserkopf why he thought he couldn’t do anything. Wasserkopf told that he couldn’t keep any job even if he got it. He asked the Principal to give him an examination and tell him what he ought to do. The Principal asked him to wait and called a conference of the teachers. The matter was discussed seriously. The teachers decided to hold the examination and ask him simple questions. They would declare him successful regardless of his answers.

Wasserkopf faced all the teachers one-by-one. He called them by names and gave silly answers. The teachers interpreted his answers positively. He was given excellent in patriarchal manners, gentle manliness, courtesy, physical culture, alertness, perseverance, logic and ambition. Now it was the turn of the Maths teacher. His first question was answered wrongly. Everybody was stunned when the teacher justified his rightful claim for the refund. The Principal got furious with the Maths teacher. Then the teacher asked Wasserkopf to calculate the amount of the fees to be refunded. He did the same correctly. It amounted to 6450 crowns. He had answered the difficult question correctly to the smallest detail. The Maths teacher certified that the candidate passed in Maths. He was really a Mathematical genius. Wasserkopf called it a tricky plan.

The Principal declared him pass with distinction in every subject and was fully entitled to the certificate he was already awarded. The Principal congratulated him. He asked Wasserkopf to be off lest he should be thrown out.

Refund Summary in Hindi

एक पूर्वकालिक अनपेक्षित छात्र एक स्कूल में आया। वह लगभग अठारह वर्ष पहले वहाँ पढ़ा था। वह अभद्रता से मुख्याध्यापक के दफ्तर में घुस गया। उसने प्रधानाचार्य को अपना नाम वॉसरकॉफ बताया। प्रधानाचार्य ने उससे पूछा कि क्या उसे प्रमाणपत्र चाहिए, वॉसरकॉफ ने नकारात्मक उत्तर दिया। वह चाहता था कि प्रधानाचार्य उसकी वह फीस लौटा दे जो उसने अपनी शिक्षा-प्राप्ति के बदले दी थी। वह निर्धन व्यक्ति था। इसलिए, उसे धन-राशि की आवश्यकता थी।

प्रधानाचार्य ने वॉसरकॉफ से पूछा कि उसे फीस वापिस क्यों चाहिए? उसने प्रधानाचार्य को बताया कि उसे अपनी धन-राशि का उचित लाभ नहीं मिला। उसने कुछ भी नहीं सीखा। बल्कि, शिक्षा ने उसे एक अयोग्य गधा बना दिया। उसके पुराने सहपाठी लैडरर ने उसे यह विचार दिया क्योंकि उसे (वॉसरकॉफ को) कुछ भी नहीं आता था। वह बोला कि शुल्क वापसी की उसकी प्रार्थना अस्वीकार किए जाने पर वह प्रधानाचार्य की शिकायत कर देगा।

प्रधानाचार्य ने वॉसरकॉफ से पूछा कि उसे यह विचार कैसे आया कि वह कुछ नहीं कर सकता था। वॉसरकॉफ ने बताया कि कोई धंधा मिल जाने पर भी वह उसे निभा नहीं पाता था। उसने प्रधानाचार्य से कहा कि उसकी परीक्षा ली जाए और उसे बताया जाए कि उसे क्या करना चाहिए। प्रधानाचार्य ने उसे इंतजार करने के लिए कहा और अध्यापकों की मीटिंग बुलाई। इस मामले पर गम्भीर रूप से विचार किया गया। अध्यापकों ने परीक्षा लेने और आसान प्रश्न पूछने का निर्णय लिया। उसके उत्तरों पर विचार नहीं करते हुए वे उसे सफल घोषित कर देंगे।

वॉसरकॉफ ने क्रम से एक-एक अध्यापक का मुकाबला किया। उसने उन्हें उनके उपनाम (चिढ़ाने वाले नाम) से पुकारा और उन्हें बेतुके उत्तर दिए। अध्यापकों ने उसके उत्तरों पर सकारात्मक टिप्पणी की। उसे पैतृक व्यवहार, भलमनसाहत, शिष्टाचार, शारीरिक फुर्ती, संस्कृति, अध्यवसाय, तर्क, तथा अभिलाषा में उत्कृष्ट दर्शाया गया। फिर, गणित अध्यापक की बारी थी। उनके पहले प्रश्न का उत्तर गलत पाया गया। उन्होंने फीस वापसी के वॉसरकॉफ के दावे को न्यायोचित ठहराया। प्रधानाचार्य, गणित के अध्यापक से रुष्ट हो गए। फिर अध्यापक ने वॉसरकॉफ से कहा कि वापिस ली जाने वाली फीस का हिसाब लगाओ। उसने ठीक (सही) हिसाब लगा दिया। वह 6450 क्राऊन बनी। उसने कठिन प्रश्न का सूक्ष्मतम विस्तार के साथ सही उत्तर दिया था। गणित के अध्यापक ने प्रमाणित किया कि प्रत्याशी (परीक्षार्थी) को गणित में पास किया जाता है। वह वास्तव में गणित में प्रतिभाशाली पाया गया। वॉसरकॉफ ने उसे एक षड्यन्त्रपूर्ण चाल बताया।प्रधानाचार्य ने घोषित किया कि वह प्रत्येक विषय में श्रेष्ठता प्राप्त रूप में पास है और पहले दिए गए प्रमाणपत्र का वह पूर्ण रूप से अधिकारी है। प्रधानाचार्य ने उसे बधाई दी। उसने वॉसरकॉफ को दफा होने के लिए कहा ताकि उसे बाहर नहीं फेंका जाए।

Refund Word-Meanings
Refund Questions And Answers MP Board
Mp Board Class 10th English Chapter 5
Class 10 English Chapter 5 Mp Board
Chapter 5 English Class 10 Mp Board
Refund Questions And Answers Mp Board

Refund Some Important Pronunciations
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MP Board Class 8th Hindi Sugam Bharti Solutions Chapter 17 रहीमन-विलास

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MP Board Class 8th Hindi Sugam Bharti Solution Chapter 17 रहीमन-विलास

प्रश्न अभ्यास
अनुभव विस्तार

Mp Board Class 8 Hindi Chapter 17 प्रश्न 1.
वस्तुनिष्ठ प्रश्न
Mp Board Class 8 Hindi Chapter 17
Class 8 Hindi Chapter 17 Mp Board
उत्तर
(अ) 4, (ब) 1, (स) 2, (द) 3

अति लघु उत्तरीय प्रश्नोत्तर
Class 8 Hindi Chapter 17 Mp Board प्रश्न 2.
(अ) कपूत की गति किसके समान होती है?
(ब) रहीम के अनुसर अब कौन से वृक्ष दिखाई नहीं देते?
(स) रहीम ने सबसे बड़ा लाभ किसे माना है?
(द) दीनबंधु के समान कौन हो जाता है?
(ई) पावस आने पर कौन मौन साध लेता है?
उत्तर
(अ) कपूत की गति दीपक के समान होती है।
(ब) रहीम के अनुसार अब घनी छाया देने वाले वृक्ष नहीं दिखाई देते।
(स) रहीम ने सबसे बड़ा लाभ समय के सदुपयोग को माना है।
(द) दीनबंधु के समान दीनों (गरीबों) को देखने वाले हो जाते हैं।
(इ) पावस आने पर कोयल मौन साध लेता है। लघु उत्तरीय प्रश्नोत्तर

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Rahiman Vilas Class 8 MP Board Chapter 17 प्रश्न 3.
(अ)
रहीम ‘रिस की गाँस’ के विषय में क्या कहते हैं?
उत्तर
रहीम ‘रिस की गाँस’ के विषय में यह कहते हैं कि अमृत ऐसे वचन हैं, जो रिस की गाँस अर्थात् क्रोध की चुभन को कम कर देते हैं।

(ब)
‘जीभ के बावलेपन’ का क्या दुष्परिणाम होता है?
उत्तर
‘जीभ के बावलेपन” का दष्परिणाम यह होता है कि वह तो भीतर चली जाती है और सिर को जूती खानी पड़ती है।

(स)
रहीम ने तन की तुलना नाव से क्यों की है?
उत्तर
रहीम ने तन की तुलना नाव से की है। यह इसलिए कि दोनों की गति एक ही तरह की होती है।

(द)
कवि के अनुसार ‘सच्चा मीत’ कौन है?
उत्तर
कवि के अनुसार ‘सच्चा मित्र’ वही होता है, जो विपत्ति में साथ देता है।

MP Board Solutions

Mp Board Class 8 Hindi Book Solution Chapter 17 प्रश्न 4.
निम्नलिखित दोहे के माध्यम से कवि क्या कहना चाहते हैं, स्पष्ट कीजिए
विपति भए धन ना रहे, रहे जो लाख करोर।
नभ तारे छिपि जात हैं, ज्यों रहीम भए भोर।।
उत्तर
उपर्युक्त दोहे के माध्यम कवि यह कहना चाहता है कि धन-सुख अस्थिर होते हैं। वे कब रहेंगे और कब नष्ट हो जाएंगे, कहा नहीं जा सकता है। इसलिए हमें धन को पाकर इतराना और घमंड करना नहीं चाहिए।

भाषा की बात

Mp Board Solution Class 8 Hindi Chapter 17 प्रश्न 1.
बोलिए और लिखिएमिसिरिहु, विरछ, दीनबंधु, सेंहुड, बक्ता।
उत्तर
मिसिरिङ, विरछ, दीनबंधु, सेंहुड़, वक्ता।

Mp Board Class 8 Hindi Chapter 17 प्रश्न 2.
निम्नलिखित शब्दों की शुद्ध वर्तनी खाली स्थान में लिखिए
बिरछ वृक्ष बिरक्छ निरस निरीस नीरस संपत्ति संपनी संपति बाँसवाँस वासँ
Rahiman Vilas Class 8 MP Board Chapter 17
उत्तर
वृक्ष, नीरस, संपत्ति, बाँस।

Mp Board Class 8th Hindi Solution Chapter 17 प्रश्न 3.
निम्नलिखित शब्दों के विलोम शब्द लिखिए
उत्तर
शब्द – विलोम शब्द
उपकार – अपकार
अमृत –  विष
लाभ – हानि
सबल – निर्बल
अनुरक्ति – विरक्ति
कपूत – सपूत

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हिंदी सुगम भारती आठवीं कक्षा Pdf MP Board Chapter 17 प्रश्न 4.
निम्नलिखित तत्सम एवं तद्भव शब्दों को पहचानकर जोड़ी बनाइए
अँधरो, दीप, स्वर्ग, जीभ, कुपुत्र, दुग्ध, दीया, अंधकार, कपूत, दूध, जिह्वा, सरग।
उत्तर
अधरो – अंधकार
दीप – दीया
स्वर्ग – सरग
जीभ – जिह् वा
कुपुत्र – कपूत
दुग्ध – दुध

दोहों की संदर्भ-प्रसंग सहित व्याख्याएँ

1. जो रहीम गति दीप की, कुल कपूत गति सोय
बारे अजियारो कर, बड़े अँधेरो होय ॥1॥

शब्दार्थ
कुल-वंश। दीप-दीपक। गति-दशा। उजियारो-अजेला।

संदर्भ – प्रस्तुत पंक्तियाँ हमारी पाठ्य-पुस्तक ‘सुगम भारती’
(हिंदी सामान्य) भाग-8 के ‘पाठ-17’ के ‘रहिमन-विलास’ से ली गई हैं। इसके रचयिता कविवर रहीम हैं।

प्रसंग – प्रस्तुत पक्तियों में रहीम ने कुपुत्र की दशा दीपक के समान बतलाते हुए कहा है कि

Sugam Bharti Class 8 MP Board Chapter 17 व्याख्या
कुपुत्र और दीपक की दशा एक ही होती है। दीपक के जलने पर प्रकाश होता है और बुझने पर अंधेरा हो जाता है। उसी प्रकार कुपुत्र का बचपन अच्छा लगता है लेकिन जब वह बड़ा हो जाता है, तब वह परिवार के लिए दुखदायक हो जाता है।

विशेष

  • भाषा में प्रवाह है।
  • यह अंश ज्ञानवर्धक है।

2. अमृत ऐसे वचन में, रहिमन रिस की गाँस ।
जैसे मिसिरिहु में मिली, निरस बाँस की फाँस।।2।।

शब्दार्थ
रिस की गाँस-क्रोध की चुभन !

संदर्भ – पूर्ववत् ।

प्रसंग – प्रस्तुत पंक्तियों में कविवरम ने मीठी बोली के महत्त्व बतलाते हुए कहा है कि

व्याख्या- अमृत के समान मीठी बोली का बहुत ही अधिक महत्त्व और प्रभाव है। इससे क्रोध की चुभन समाप्त हो जाती है। यह ठीक उसी प्रकार से है, जैसे मिश्री में नीरस बाँस की फाँस का अभाव नहीं रहता है।
विशेष

  • मीठी बोली बोलने की सीख दी गई है।
  • दोहा छंद है।

3. रहीमन अब वे विरठ कहैं जिनकी छाँह गंभीर।
यागन बिच-बिच देखियत, सेंहुड़ कुंज करीर ॥3॥

शब्दार्थ
बिरछ-पेड़ । कुंज-लता। करीर-काँटेदार झाड़ी।

संदर्भ – पूर्ववत्।

प्रसंग – प्रस्तुत पंक्तियों में कविवर रहीम ने उपकारी व्यक्तियों की हो रही कमी के बारे में कहा है कि

व्याख्या
आजकल वे बड़े-बड़े और घनी छाया देने वाले पेड़ नहीं दिखाई दे रहे हैं। आजकल तो बागों के बीच-बीच में सेंहुड़, लता और काँटेदार झाड़ियाँ ही दिखाई दे रही हैं।

विशेष

  • दोहा छंद है।
  • यह अंश आर्कषक है।।

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4. रहिमन जिह्वा बाबरी, कहि गई सरग पताल ।
आपु तो कहि भीतर गई, जूती खात कपाल  ||4||

शब्दार्थ
बावरी-बावली। सरग = स्वर्ग। आपु-स्वयं । कपाल-सिर।

संदर्भ – पूर्ववत्।

प्रसंग – प्रस्तुत पंक्तियों में कविवर रहीम ने दुष्ट की संगति के कुपरिणाम को बदलते हुए कहा है कि

व्याखा
बावली जीभ ने बिना किसी सोच-विचार के स्वर्ग-पताल आदि अनाप-शनाप कह दिया। फिर वह अंदर चली गई। उसके इस प्रकार अनाप-शनाप कहने के कारण ही सिर को जूतों की मार खानी पड़ी।

विशेष

  • दोहा छंद है।
  • दुष्टों की निंदा की गई है।

5. तन रहीम है कर्म बस, मन राखो ओहि ओर।
जल में उलटी नाव ज्यों, बँचत गुन के जोर । ॥5॥

शब्दार्थ
बस-वश । राखो-रखो। ओहि-उस ।

संदर्भ – पूर्ववत्।

प्रसंग – प्रस्तुत पंक्तियों में कविवर रहीम ने मन को केन्द्रित करके कर्म की करने सीख देते हुए कहा है कि

व्याख्या
यह शरीर कर्म के अधीन है। इसलिए इसे मन से उस ओर ही लगाना चाहिए। जिस प्रकार पानी में उलटी नाव अर्थात् धारा के विपरीत नाव को चलाने के लिए नाव को खींच करके उस ओर लाया जाता है।

विशेष

  • मन को लगाकर कर्म करने की सीख दी
  • दोहा इंद है।

6. समय लाभ सम लाभ नहि, समय चूक सम चूक।
चतुरन चित रहिमन लगी, समय चूक की हूक ॥6॥

शब्दार्थ
सम-समान। चूक-भूल। चतुरन-चतुराई। = चित-हदय । हूक-चोट।

संदर्भ- पूर्ववत् ।

प्रसंग – प्रस्तुत पंक्तियों में कविवर रहीम ने समय के सदुपयोग को बतलाते हुए कहा है कि

व्याख्या
समय के सदुपयोग के समान और कोई बड़ा लाभ नहीं है। इसी प्रकार समय के दुरुपयोग के समान और
कोई भूल अर्थात् हानि नहीं है। इसलिए इसे बड़ी चतुराई से । चतुर लोग हृदय से जानते हैं कि समय के चूक जाने से हृदय को बड़ी चोट पहुँचती है।।

विशेष

  • दोहा छंद है।
  • भाषा सरल है।

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7. कहि रहीम संपति सगे, बनत बहुत बहु रीति।
विपति कसौटी जे कसे, ते ही साँचे मीत ॥7॥

शब्दार्थ
संपत्ति-धन। सगे-संबंधी। रीति-प्रकार। कसौटी-परीक्षा । साँचे-सच्चा। मीत-मित्र।

संदर्भ- पूर्ववत्।

प्रसंग – प्रस्तुत पंक्तियों में कविवर रहीम ने सच्चे मित्र की पहचान बलताते हुए कहा है कि

व्याख्या
जब व्यक्ति धनवान होता है उसके अनेक मित्र होते हैं। अनेक संबंधी बन जाते हैं। लेकिन सच्चे मित्र तो वे ही होते हैं, जो विपत्ति में साथ देते हैं।

विशेष

  • दोहा छंद है।
  • सच्चे मित्र की पहचान बताई गई है।

8. दीन सबन को लखत है, दीनहि लबै न कोय।
जो रहीम दीनहि लखे, दीनबंधु सम होय ॥8॥

शब्दार्थ
दीन-गरीब । सबन-सभी को। लखे-देखता।

संदर्भ – पूर्ववत्।

प्रसंग – प्रस्तुत पंक्तियों में कविवर रहीम ने गरीब लोगों के महत्त्व को बतलाते हुए कहा है कि

व्याख्या
गरीब लोग सभी को महत्त्व देते हैं। सबके दुख में अपना हाथ बँटाते हैं। लेकिन गरीबों को कोई महत्त्व नहीं देता है। उनके दुख में कोई हाथ नहीं बँटाता है। जो कोई गरीबों के दुख में साथ देता है, वह ईश्वर के समान होता है।

विशेष

  • दोहा छंद है।
  • भाषा-शैली में प्रवाह है।

9. पावस देखि रहीम मन, कोइल साये मौन।
अब दादुर बक्ता भए, हमको पूछत कौन ॥9॥

शब्दार्थ
पावस-वर्षा ऋतु । कोइल-कोयल । साधे मौन-चुप हो जाती है। दादुर-मेंढक।

संदर्भ- पूर्ववत्।

प्रसंग – प्रस्तुत पंक्तियों में कविवर रहीम ने समयानुसार रहने की सीख देते हुए कहा है कि

व्याख्या
वर्षा ऋतु में कोयल मौन धारण कर लेती। वर्षा ऋतु में मेंढक टरटर्राने लगते हैं। ऐसे समय में वह यह सोच लेती है कि उसके मधुर स्वर की कोई नहीं प्रशंसा करेगा। इसलिए चुप रहना ही ठीक है।

विशेष

  • भाषा में प्रवाह है।
  • दोहा छंद है।

10. विपति भए धन ना रहे, रहे जो लाख करोर।
नभ तारे छिपि जात हैं, ज्यों रहीम भए भोर ॥10॥

शब्दाव
विपत्ति-संकट । करोर-करोड़। छिपि-छिप । जात हैं-जाते हैं। भोर-प्रातःकाल ।

संदर्भ – पूर्ववत् ।

प्रसंग – प्रस्तुत पंक्तियों में कविवर रहीम ने धन की अस्थिरता और नश्वरता को बतलाते हुए कहा है कि

व्याख्या
जब विपत्ति आती है, तो सारे धन-सुख नष्ट हो जाते हैं। धन चाहे लाख करोड़ क्यों न हो। वह ठीक वैसे ही समाप्त हो जाता है, जैसे प्रातःकाल होने पर आकाश के तारे नहीं दिखाई देते हैं।

विशेष

  • भाषा-शैली आकर्षक है।
  • दोहा छंद है।