MP Board Class 9th Hindi Vasanti Solutions Chapter 14 मेहमान की वापसी

MP Board Class 9th Hindi Vasanti Chapter 14 मेहमान की वापसी (मालती जोशी)

मेहमान की वापसी अभ्यास-प्रश्न

मेहमान की वापसी लघूत्तरीय प्रश्नोत्तर

प्रश्न 1.
अजय के घर कौन-कौन आये थे और क्यों?
उत्तर
अजय के घर राय अंकल और राय आँटी अपने कुत्ते जॉली के साथ आये थे। वे बॉली को महीने भर की छुट्टियों में अजय के घर पर छोड़ने के लिए आये थे।

प्रश्न 2.
राय अंकल ने अजय से जॉली की दोस्ती कैसे कराई?
उत्तर
राय अंकल ने जॉली से कहा, “जॉली! कम हियर… शेक हैंड्स विद अजय।” जॉली ने एक आज्ञाकारी बच्चे की तरह अपना दाहिना पंजा उठाया। अजय ने जॉली की तरफ अपना हाथ बढ़ा दिया। इस तरह राय अंकल ने अजय से जॉली की दोस्ती कराई।

प्रश्न 3.
जॉली के घर लौटने के पश्चात् अजय के मन पर क्या प्रभाव पड़ा?
उत्तर
जॉली के घर लौटने के पश्चात् अजय के मन पर बहुत अच्छा प्रभाव पड़ा। उसके मन से शिकायतों का बोझ उतर गया। वह प्रसन्नता से खिल उठा।

मेहमान की वापसी दीर्घ उत्तरीय प्रश्नोत्तर

प्रश्न 1.
‘मेहमान की वापसी’ कहानी का उद्देश्य क्या है? स्पष्ट कीजिए।
उत्तर
‘मेहमान की वापसी’ कहानी एक सोद्देश्यपरक कहानी है। इसमें मनुष्य और पशु के परस्पर प्रेम को दर्शाया गया है। इसके माध्यम से लेखिका ने मनुष्य के प्रति पशुओं की वफादारी, कृतज्ञता और निःस्वार्थता को प्रेरक रूप में प्रस्तुत किया

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प्रश्न 2.
अजय ने जॉली को अपनी दिनचर्या में कैसे सम्मिलित कर लिया?
उत्तर
अजय जॉली के साथ घुल-मिल गया था। वह सुबह उठते ही जॉली को गुड-मार्निंग बोलता था। वह जॉली के पास अपनी छोटी-सी मेज लगाकर.अपनी छुट्टियों का होमवर्क जॉली से बातें करते हुए करता था। वह घर से बाहर निकलने पर जॉली को ‘टा-टा’ करना नहीं भूलता था। शाम को वापस लौटने पर जब जॉली अपनी पूँछ हिलाकर अजय की अगवानी करता था तो वह उसके गले में हाथ डालकर उसे चूम लेता था। वह अपनी मम्मी-पापा के फर्स्ट शो देखने चले जाने पर घर में जॉली के साथ रह लेता। दोस्तों के कुट्टी कर लेने की उसे कोई परवाह नहीं थी, क्योंकि उसे खेलने के लिए जॉली एक अच्छा साथी मिल गया था। वह जॉली के साथ ही खाना खाता था। इस तरह अजय ने जॉली को अपनी दिनचर्या में सम्मिलित कर लिया था।

प्रश्न 3.
कहानी के मुख्य पात्र अजय का चरित्र-चित्रण कीजिए।
उत्तर
कहानी के मुख्य पात्र अजय की चरित्रगत विशेषताएँ निम्नलिखित हैं
1. बाल-सुलभ व्यवहार-अजय बालक है, इसलिए उसमें अनुभव की कमी है। उसे यह नहीं मालूम है कि कोई पालतू अपने स्वामी के साथ उसके पास आने पर उसे काट लेगा। इसलिए राय अँकल और राय आंटी के अल्सेशियन कुत्ते को देखकर डर जाता है। बहुत समझाने-बुझाने पर भी वह उससे डरा-डरा रहता है। अजय अपने बाल-सुलभ व्यवहार के कारण ही जॉली के प्रति धीरे-धीरे समझने का दृष्टिकोण अपनाने लगता है।

2. भावुक हदय-अजय के चरित्र की दूसरी विशेषता है-भावक हदय। अजय में भावुकता है। वह जॉली के रात-भर रोने-चिल्लाने पर भावुक हो उठता है। उसे आपबीती, अकेलेपन की दुखद बातें जब याद आती हैं, तो वह जॉली के प्रति सहानुभूति करने से स्वयं को रोक नहीं पाता है। उससे अपना प्यार जताने के लिए उसे थपथपाने लगता है। उसके प्यार को पाकर रूठा हुआ जॉली खुश होकर खाना खा लेता है।

3. सच्चा मित्र-अजय के चरित्र की तीसरी विशेषता है-सच्चा मित्र । अजय जॉली के प्रति दोस्ती का जब हाथ बढ़ाता है, तो उसका अन्त तक निर्वाह करता है। वह जॉली को अपना सबसे बड़ा और एक मात्र दोस्त मानता है। इसलिए वह अपने किसी भी पुराने दोस्त की परवाह नहीं करता है। वह जॉली को अपना सच्चा दोस्त मानकर उसे अपनी दिनचर्या में सम्मिलित कर लेता है। जॉली के चले जाने पर उसकी भूख गायब हो जाती है। उसे जॉली के लौट आने की आशा जोर मारने लगती है। जॉली के वापस आने पर उसकी आँखों से खुशी के आँसू बहने लगते हैं। उनसे उसकी जॉली के प्रति उसके न होने पर की गयी शिकायतें एक-एक कर बहकर समाप्त हो जाती हैं।

प्रश्न 4.
पाठ में आए उन महत्त्वपूर्ण अंशों को लिखिए, जिसने अजय के बाल-सुलभ व्यवहार और भावुक हृदय को प्रभावित किया हो।
उत्तर
1. ‘मम्मी…’ उसने दरवाजे के बाहर खड़े होकर जोर से आवाज दी।

2. ‘मर गए। अजय ने सोचाः यह इतना बड़ा कुत्ता घर में रहेगा, तो मेरा एक दोस्त भी यहाँ पाँव नहीं रखेगा। मैं भी जैसे जेल में बन्द हो जाऊँगा। अब मम्मी की आँख बचाकर जब-तब बाहर नहीं निकला जा सकेगा। यह राक्षस जो बैठा होगा – बरामदे में। सारी छुट्टियों का मजा किरकिरा हो जाएगा। इस माहौल में घर में बैठना अजय को जरा भी अच्छा नहीं लगा। वह चुपचाप पिछले दरवाजे से खिसक गया और रात के खाने पर ही लौटा। मन-ही-मन प्रार्थना करता रहा कि हे भगवान, राय अँकल के पिता जी को जल्दी से अच्छा कर दो ताकि वे जल्दी लौट आएँ और यह मुसीबत हमारे यहाँ से जल्दी से विदा हो जाए।

3. क्या पता जॉली को भी अँकल और आंटी की याद आ रही हो। इस बार , जब उसकी रुलाई कान में पड़ी, तब वह सहन नहीं कर सका और धीरे से दरवाजा खोलकर बाहर आ गया। जॉली कोने में सिमटकर बैठा हुआ था। दोपहर की तरह -अब वह बूंखार नहीं लग रहा था, बल्कि एक नन्हें बच्चे की तरह असहाय लग रहा था। अजय ने साहस बटोरा और उसके पास जा खड़ा हुआ और प्यार से बोला : ‘जॉली…!’

4. उनकी भी सावाज कुछ नम हो गई थी। और अजय? उसकी तो भख ही गायब हो गई थी। सामने रखी नाश्ते की प्लेट को वह यों ही घूरता रह गया था। उसे लग रहा था, अभी कहीं से जल्दी से जॉली आएगा और पास बैठकर बिस्कुट मांगेगा।

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5. नाश्ते की प्लेट वैसी की वैसी ही सरकाकर वह बाहर आया। बरामदे का वह कोना एकदम सूना लग रहा था। उसकी सारी गृहस्थी वहाँ से उठ गई थी। जगह पहले की तरह साफ हो गई थी-पर कितना उदास-उदास लग रही थी।

6. ‘खाक जानता है प्यार की कीमत!’ अजय ने सोचा : ‘कितना प्यार किया उसे। अपने दोस्त, अपनी पढ़ाई, अपना खाना-पीना सब कुछ भूल गया था मैं। पर उसे क्या, अंकल-आंटी को देखते ही सब कुछ भूल गया होगा।

7. खाना एकदम जहर लग रहा था उसे, फिर भी उसने खाया। क्यों भूखा रहे वह एक बेवफा कुत्ते के लिए। वह हजरत वहाँ मजे से अंकल और आंटी के हाथ से माल खा रहे होंगे।

मेहमान की वापसी भाषा-अध्ययन/काव्य-सौन्दर्य

प्रश्न 1.
आवाज, हिदायतें, कम हियर आदि शब्द विदेशी भाषा से लिए गए हैं ऐसे ही विदेशी भाषा के अन्य शब्द कहानी से छाँटकर मानक भाषा में परिवर्तित कर लिखिए।
उत्तर
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प्रश्न 2.
निम्नलिखित मुहावरों का वाक्यों में प्रयोग कीजिए
जान निछावर करना, साँस अटकना, मुसीबत गले पड़ना, मज़ा किरकिरा होना, ठण्डा करना, फूलकर कुप्पा हो जाना
उत्तर
MP Board Class 9th Hindi Vasanti Solutions Chapter 14 मेहमान की वापसी img 2

प्रश्न 3.
‘सूना-सूना’ जैसे पुनरुक्त शब्दों का प्रयोग कहानी में किया गया है। कहानी में आए ऐसे शब्दों को छाँटकर लिखिए।
उत्तर
पीछे-पीछे, टा-टा, दूर-दूर, सूना-सूना, उदास-उदास और भांय-भाय।

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प्रश्न 4.
दिए हुए अनेकार्थी शब्दों के दो-दो अर्थ स्पष्ट करते हुए वाक्य बनाइये।
उदाहरण-राम ने अपना कार्य जल्दी कर लिया।
मुख्य अतिथि ने अपने कर कमलों से पुरस्कार बाँटे।
अपेक्षा, कल, पद, उपचार, हल
उत्तर
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प्रश्न 5.
निम्नलिखित लोकोक्तियों के अर्थ स्पष्ट करते हुए वाक्यों में प्रयोग कीजिए
(i) ऊँची दुकान फीके पकवान
(ii) काला अक्षर भैंस बराबर
(iii) अँधा क्या जाने दो आँखें
(iv) चोर की दाढ़ी में तिनका
(v) जिसकी लाठी उसकी भेंस। उदाहरण देकर ऊपर लिखी लोकोक्तियों का अर्थ स्पष्ट करते हुए वाक्य बनाइयेजैसे :-‘एक अनार सौ बीमार’ अर्थ-वस्तु एक चाहने वाले अनेक।
वाक्य रचना-चालीस ‘पद’ रिक्त हैं। प्रार्थना पत्र दस हजार हैं। यह तो वही बात हुई कि एक अनार, सौ बीमार।
उत्तर
(i) ऊँची दुकान फीका पकवान . अर्थ-आडम्बर अधिक असलियत कम
वाक्य-रचना-उसने लिखा तो है स्वादिष्ट भोजनालय, लेकिन उसके एक भी भोजन में कोई स्वाद नहीं है। इसे कहते हैं, ‘ऊँची दुकान फीका पकवान।’
(ii) काला अक्षर भैंस बराबर अर्थ-निरक्षर, अनपढ़
वाक्य-रचना-उसे बार-बार समझाया जाता है। फिर भी वह नहीं समझता है; क्योंकि वह पूरी तरह से काला अक्षर भैंस बराबर है।
(iii) अंघा क्या जाने दो आँखें अर्थ-दुखी को सुख का अनुभव नहीं होता
वाक्य-रचना-चुनाव के समय मन्त्री गरीबों को लाभकारी योजना की घोषणा करते हैं, लेकिन गरीब उन पर यकीन नहीं करते हैं। यह तो वही बात हुई कि अँधा क्या जाने दो आँखें।
(iv) चोर की दाढ़ी में तिनका अर्थ-बुरे व्यक्ति का मन हमेशा शंकालु होता है।
वाक्य-रचना-भ्रष्टाचारी तो भ्रष्टाचार करते हैं, लेकिन पकड़ लिए जाने के भय से परेशान रहते हैं। इसे कहते हैं ‘चोर की दाढ़ी में तिनका।’
(v) जिसकी लाठी उसकी भैंस अर्थ-हमेशा शक्तिशाली की विजय होती है।
वाक्य-रचना-आखिरकार उसने अपने धन-बल से चनाव जीत ही लिया। यह सच ही कहा गया है-‘जिसकी लाठी, उसकी भैंस’।

मेहमान की वापसी योग्यता-विस्तार

प्रश्न 1.
यदि आपके घर कोई पालतू पशु है तो आप उसमें कितना ‘लगाव’ महसूस करते हैं। कोई एक घटना के आधार पर एक संस्मरण लिखिए।
प्रश्न 2.
आप अपनी दिनचर्या में कितने विदेशी शब्द प्रयोग करते हैं? उसकी सूची बनाइये।
उत्तर
उपर्युक्त प्रश्नों को छात्र/छात्रा अपने अध्यापक/अध्यापिका की सहायता से हल करें।

मेहमान की वापसी परीक्षोपयोगी अन्य महत्त्वपूर्ण प्रश्नोत्तर

लघूत्तरीय प्रश्नोत्तर

प्रश्न 1.
अजय की साँस दरवाजे पर क्यों अटककर रह गई?
उत्तर
अजय ने बरामदे में एक शेर की तरह एक बड़ा-सा अल्सेशियन कुत्ता । देखा। उसे देखकर दरवाजे पर ही उसकी साँस अटककर रह गई।

प्रश्न 2.
जॉली कौन था?
उत्तर
जॉली शेर की तरह एक बड़ा-सा अल्सेशियन कुत्ता था।

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प्रश्न 3.
जॉली को वपथपाने का साहस अजय को कैसे हुआ?
उत्तर
अजय ने जॉली की बेबसी को समझने का प्रयास किया। उसने देखा कि जॉली रात-भर रो-रोकर थक गया है। वह एक कोने में एक नन्हें बच्चे की तरह सिमटा हुआ बड़ा ही असहाय लग रहा है। इससे उसके प्रति उसकी सहानुभूति हो गई। उसी के सहारे उसे थपथपाने का उसे साहस हुआ।

प्रश्न 4.
कुत्ते की क्या विशेषता होती है?
उत्तर
कुत्ते की यही विशेषता होती है कि वह प्यार की कीमत को जानता-समझता है। इसलिए वह प्यार करने वालों पर अपना प्राण निछावर कर देता है।

मेहमान की वापसी दीर्घ उत्तरीय प्रश्नोत्तर

प्रश्न 1.
जॉली के आने पर अजय ने क्या अनुभव किया?
उत्तर
जॉली के आने पर अजय ने अनुभव किया कि वह तो नाराज है ही। उसके मम्मी-पापा भी नाराज हैं। उसकी मम्मी की नाराजगी इस बात से है कि वह महीने जॉली के लिए खाना कैसे बना पायेगी। उसके पापा को उस समय गुस्सा आया, जब जॉली ने उनके द्वारा कटोरे में रखे गए दूध-रोटी को खाने से मुंह फेर लिया। इस प्रकार अजय ने अनुभव किया कि जब इतना बड़ा कुत्ता घर में रहेगा तो उसके दोस्तों का आना-जाना बन्द हो जायेगा और वह जैसे जेल में बन्द हो जाएगा।

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प्रश्न 2.
जॉली का संक्षिप्त परिचय दीजिए।
उत्तर
जॉली एक बड़ा-सा अल्सेशियन कुत्ता था। वह शेर की तरह भयानक था। फिर वह बहुत ही समझदार और वफादार था। वह अपने स्वामी के द्वारा दूसरे को सौंप दिए जाने से अपनापन को नहीं भूल पाता है। वह अपने स्वामी के प्रति वफादारी दिखाने के लिए रात-भर चीखता-चिल्लाता है। उसके प्रति वह आँसू बहाता है। विवश होकर ही वह अपने दूसरे स्वामी के बच्चे के साथ दोस्ती कर लेता है। उसे बड़ी समझदारी से निभाता है। उस बच्चे से इतना घुल-मिल जाता है कि वह अपने पहले स्वामी को भूल जाता है। वह उसे इतना भूल जाता है कि वह उसे अपने दूसरे स्वामी के बच्चे के पास हमेशा के लिए छोड़ने को मजबूर कर देता है।

प्रश्न 3.
‘मेहमान की वापसी’ कहानी का प्रतिपाद्य स्पष्ट कीजिए।
उत्तर
‘मेहमान की वापसी’ कहानी सुप्रसिद्ध महिला कथाकार मालती जोशी की एक लोकचर्चित कहानी है। इसमें मूक पशुओं, और मनुष्यों के परस्पर प्रेम को बड़े ही भावपूर्ण शब्दों में चित्रित किया गया है। लेखिका की इस कहानी से यह सुस्पष्ट हो जाता है कि यदि मनुष्य पशुओं के प्रेम की अनुभूति करता है, उनके दुःख-दर्द
और भावनाओं को समझता है तो पशु भी उनके प्रति अपने प्रेम को किसी-न-किसी प्रकार से अवश्य ही प्रदर्शित करते हैं। इस प्रकार वे आत्मीयता का भाव प्रकट करते रहते हैं।

मेहमान की वापसी लेखिका-परिचय

प्रश्न
श्रीमती मालती जोशी का संक्षिप्त जीवन-परिचय देते हुए उनके साहित्य के महत्त्व पर प्रकाश डालिए।
उत्तर
जीवन-परिचय-श्रीमती जोशी का हिन्दी के आधुनिक महिला कथाकारों में महत्त्वपूर्ण स्थान है। अपनी शिक्षा समाप्त कर उन्होंने हिन्दी कथा-लेखन में सक्रिय रूप से भाग लिया। धीरे-धीरे उनके कथा-स्वरूप ने अपनी जड़ें जमाते हुए अत्यधिक सशक्त रूप ले लिया। उनके कथा-स्वरूप में पुरुष जगत-नारी जगत का विस्तार अधिक देखा जा सकता है। ‘ रचनाएँ-श्रीमती मालती जोशी के कथा-संग्रह इस प्रकार है-‘विश्वास गाथा’, ‘एक घर सपनों का’, ‘पटाक्षेप’, ‘रोग-विराग’, ‘समर्पण का सुख’, ‘सहचारिणी’, ‘मध्यान्तर’, ‘दादी की घड़ी’, आदि। महत्त्व-श्रीमती मालती जोशी का हिन्दी के उन आधुनिक महिला कथाकारों में बहुचर्चित स्थान है, जिन्होंने मध्यवर्गीय परिवारों का सूक्ष्म चित्रण मानवीय धरातल पर किया है। बाल-कथा-लेखन में भी उनका उन महिला बाल-कथाकारों में महत्त्वपूर्ण स्थान है, जिन्होंने बाल-मनोविज्ञान का सूक्ष्म-से-सूक्ष्म और गहन-से-गहन विश्लेषण प्रस्तुत किया है। इस प्रकार श्रीमती मालती जोशी एक प्रतिष्ठित महिला कथाकार के रूप में आने वाली पीढ़ी के लिए प्रेरणा स्रोत बनी रहेंगी।

मेहमान की वापसी कहानी का सारांश

प्रश्न
श्रीमती मालती जोशी-लिखित कहानी ‘मेहमान की वापसी’ का सारांश अपने शब्दों में लिखिए।
उत्तर
श्रीमती मालती जोशी-लिखित कहानी ‘मेहमान की वापसी’ पशु-मनुष्य के परस्पर प्रेम-चित्रण की कहानी है। इस कहानी का सारांश इस प्रकार है अजय रोज की तरह सीटी बजाते हुए अपने घर में आया तो उसने दरवाजे पर शेर की तरह एक अल्सेशियन कुत्ता देखकर डर गया। उसकी इस डर को देखकर उसके पापा के दोस्त राय अंकल ने उसे समझाया कि काटता नहीं है। उन्होंने अंकल से उसकी दोस्ती कराने के लिए उसे पुचकारते हुए कहा-“जॉली, कम हियर… शेक हैंड विद अजय।” जॉली ने अपना दाहिना पंजा उठाया तो अजय ने अपना हाथ उसकी तरफ बढ़ा दिया। राय अंकल ने अजय से कहा कि जॉली महीने भर की छुट्टियों में उसके पास ही रहेगा और वह उससे दोस्ती निभाता रहे। इसे सुनकर अजय दुखी हो गया कि इससे तो उसके दोस्तों का आना-जाना बन्द हो जायेगा और वह घर में ही बन्द पड़ा रहेगा। राय अंकल के चले जाने पर उसकी मम्मी को भी यह ठीक. नहीं लगा था। उसके नाराज होने पर उसके पापा ने उसे समझाया कि वे लोग जॉली के लिए एक बोरी आटा रख गए हैं।

रात होने पर अजय के पापा ने दूध में रोटियों को मीड़कर कटोरे में जॉली के सामने रख दिया। लेकिन उसने देखा तक नहीं। इससे अजय की मम्मी और पापा दोनों झल्ला गए। सबके सोने पर जॉली बिलखने लगा। उसका रोना अजय की मम्मी को असगुन लगा तो उसके पापा ने तसल्ली देते हुए कहा कि नई जगह है, थोड़ी. देर बाद ठीक हो जायेगा। अजय को अपनी पिछली छुट्टियों में बीते हुए अपने अकेलेपन के कारण अपने बहाए आँसुओं की जॉली के आँसुओं से समानता दिखाई दी। इससे उसके प्रति अचानक सहानुभूति हो आयी। उस समय उसे जॉली खूखार न लगकर एक नन्हें बच्चे की तरह असहाय लग रहा था। उसने उसे थपथपाते हुए कहा, “ऑटी की याद आ रही है न!

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उन्हें जल्दी आने के लिए हम लोग कल ही पत्र लिखेंगे, फिर उसने उसके गले में हाथ डालकर पुचकारते हुए कटोरे में पड़े हुए दूध-रोटी को उसे खिला दिया। सुबह गुडमार्निंग कहने पर जॉली ने दोनों पंजे उठाकर स्वागत किया तो उसकी खुशी का ठिकाना न रहा। उसने अपने आस-पास के सहमे हुए बच्चों को समझा दिया कि जॉली काटता नहीं, प्यार करता है। वह जब घर से बाहर निकलता तो जॉली उसे सड़क तक छोड़ने जाता और वापस लौटने पर वह पूँछ हिलाकर उसका स्वागत करता। उसके पापा ने राय अंकल को पत्र लिख दिया था। पत्र पाकर राय अंकल और राय आँटी जॉली को ले गए। इसे सुनकर अजय एकदम उदास हो गया। यों तो खाना उसे जहर लग रहा था। फिर भी उसने खाया। क्यों न खाये। एक बेवफा कुत्ते के लिए वह क्यों भूखा रहे। वह तो वहाँ पर राय

अंकल और राय आँटी के हाथ से माल खा रहा होगा। जॉली के जाने पर सारा घर मानो काटने को दौड़ रहा था। अजय की तरह उसके मम्मी-पापा भी खूब उदास थे। उसी मोटर की आवाज आयी। अजय के पापा ने दरवाजा खोला। राय अंकल ने कहा, “माफ करना भाई साहब, बड़े बेवक्त तकलीफ दे रहा हूँ, लेकिन… ‘इसी बीच जॉली तीर की तरह घर में आकर अजय के पैरों से ऐसे लिपट गया, जैसे बरसों बाद मिला हो। अजय की सारी शिकायतें आँसुओं में बह गई थीं।

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MP Board Class 9th Hindi Vasanti Solutions Chapter 13 बालिका का परिचय

MP Board Class 9th Hindi Vasanti Solutions Chapter 13 बालिका का परिचय (सुभद्रा कुमारी चौहान)

बालिका का परिचय अभ्यास-प्रश्न

बालिका का परिचय लघु उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 1.
इस कविता में जीवन-ज्योति का क्या आशय है? स्पष्ट करें।
उत्तर
इस कविता में जीवन-ज्योति का आशय है-जीवन का आधार । बिटिया के प्रति माँ का वात्सल्य प्रेम अनन्य होता है। वह उसके लिए अतुल्य होता है।

प्रश्न 2.
‘बेटी अंधकार में दीप-शिखा की तरह है’ यह भाव किस पंक्ति में है? चुनकर लिखिये।
उत्तर
‘बेटी अंधकार में दीप-शिखा की तरह है। यह भाव निम्नलिखित पंक्ति में हैं-‘दीपशिखा है अंधकार की।’

बालिका का परिचय सही उत्तर चुनिये

प्रश्न 1.
बेटी का परिचय कौन सबसे अच्छा दे सकता है?
(क) पिता
(ख) माता
(ग) दादा
उत्तर
(ख) माता।

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प्रश्न 2.
इस कविता में कौन-सा भाव है?
(क) श्रृंगार
(ख) वीरता
(ग) वात्सल्य
उत्तर
(ग) वात्सल्य।

बालिका का परिचय दीर्घ उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 1.
बालिका परिचय कविता का सारांश लिखिये।
उत्तर
देखें-‘कविता का सारांश’।

प्रश्न 2.
कवयित्री ने बालिका को गोदी की शोभा क्यों कहा है स्पष्ट कीजिये।
उत्तर
कवयित्री ने बालिका को गोदी की शोभा कहा है। यह इसलिए कि किसी भी माँ की गोद में उसकी बालिका का मचलना एक न केवल अपूर्व आनन्द देता है, अपितु मन को मोह भी लेता है। इससे माँ का हृदय बाग-बाग हो उठता है। उस समय की शोभा देखते ही बनती है।

प्रश्न 3.
बाल-सुलभ क्रियाओं को हँसती हुई नाटिका मानने का क्या आशय है?
उत्तर
बाल-सुलभ क्रियाओं को हँसती हुई नाटिका मानने का आशय है-बाल-सुलभ क्रियाएँ मन को भाने वाली और गुदगुदाने वाली होती है। अतएव उसे देखकर सभी आनन्द से झूम उठते हैं।

प्रश्न 4.
निम्न पंक्तियों का भावार्थ लिखो।
(क) मेरा मन्दिर …………………….. मेरी।
उत्तर
उपर्युक्त पंक्तियों का भावार्थ यह है कि किसी माँ के लिए उसकी बालिका सब कुछ होती है। माँ अपनी बालिका को किसी मन्दिर, मस्जिद, काबा, काशी, पूजा-पाठ, ध्यान, जप-तप से कम नहीं समझती है। इस प्रकार वह अपने हृदय में बसाए रहती है।

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(ख) प्रभु ईशा ………………………….. पास ॥
उत्तर
(ख) उपर्युक्त पंक्तियों का भावार्थ यह है कि बालिका में महान आत्माओं के गुण होते हैं। उसमें ईसामसीह की क्षमाशीलता, नबी-मुहम्मद का विश्वास और महावीर स्वामी और महात्मा गौतम बुद्ध के जीव-दया के भाव भरे होते हैं।

प्रश्न 5.
वही जान सकता है इसको
माता का दिल है जिसका ॥
इन पंक्तियों का भाव स्पष्ट कीजिये।
उत्तर
इन पंक्तियों का भाव यह है कि बालिका के महान और उच्च गुणों का वर्णन करना सम्भव नहीं है। दूसरे शब्दों में यह कि बालिका की महानता और श्रेष्ठता को कह-सुनकर नहीं, अपितु अनुभव करके ही जाना-समझा जा सकता है।

प्रश्न 6.
बेटी की तुलना किस-किस से की गई है?
उत्तर
बेटी की तुलना राम, कृष्ण, ईसामसीह, नबी, मुहम्मद, महावीर स्वामी और महात्मा गौतम बुद्ध से की गई है।

बालिका का परिचय भाषा-अध्ययन/काव्य-सौन्दर्य

क. कविता में अनुप्रास अलंकार की छटा दर्शनीय है। जैसे जीवन-ज्योति नष्ट नयनों की पंक्ति में ‘ज’ वर्ण की पुनरावृत्ति हुई है। कविता में से अनुप्रास अलंकार छाँटकर लिखिए।
ख. निम्नलिखित उदाहरण में ‘पतझड़ के साथ हरियाली का प्रयोग कर काव्य में विरोधाभास के सौन्दर्य को प्रस्तुत किया गया है। कविता में से इस प्रकार की अन्य पंक्तियाँ छाँटिए।
उदाहरण-
है पतझड़ की हरियाली
पतझड़ की हरियाली है।
उत्तर-(क) ‘सुख-सुहाग, शाही शान, मनोकामना मतवाली, घनी घटा. मस्ती मगन. मेरा मन्दिर, मेरी मस्जिद, काबा-काशी, पूजा-पाठ, जप-तप, अपने आँगन और मात्र मोदे।

1. शाहीशान भिखारिन की है।
भिखारिन की शाही शान है।

2. दीपशिखा है अंधकार की।
अंधकार की दीपशिखा है

3. सुधा-धार यह नीरस दिल की।
नीरस दिल की यह सुधा-धार।

बालिका का परिचय योग्यता-विस्तार

प्रश्न
1. भारतीय संस्कृति में ‘कन्या’ के महत्त्व को स्पष्ट करते हुए दो अनुच्छेद लिखिए।
2. धर्म अनेक परन्तु सन्देश एक है। हिन्दू, मुसलमान, और ईसाई, धर्मों के मूल आदर्श जानिए, उनकी और शिक्षाओं और मूल्यों के चार्ट तैयार कीजिए।
उत्तर
उपर्युक्त प्रश्नों को छात्र/छात्रा अपने अध्यापक/अध्यापिका की सहायता से हल करें।

बालिका का परिचय परीक्षोपयोग अन्य महत्त्वपूर्ण प्रश्नोत्तर

लघूत्तरीय प्रश्नोत्तर

प्रश्न 1.
‘सुधा-धार यह नीरस दिल की’ का क्या आशय है? स्पष्ट कीजिए।
उत्तर
‘सुधा-धार यह नीरस दिल की’ का आशय है-बालिका का अद्भुत प्रभाव। किसी माँ के लिए उसकी बालिका अमृत की धारा के समान होती है। अर्थात् बालिका अपनी माँ के सूनेपन को दूर कर उसमें चंचलता और सजीवता ला देती है।

प्रश्न 2.
इस कविता में किसके परस्पर संबंध को चित्रित किया गया है?
उत्तर
इस कविता में माँ और बेटी के परस्पर संबंध को चित्रित किया गया है।

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प्रश्न 3.
इस कविता में कवयित्री की कौन-सी भावना प्रकट हुई है?
उत्तर
इस कविता में कवयित्री की ‘बेटी माँ के भविष्य की निर्मात्री है’ यह भावना प्रकट हुई है।

बालिका का परिचय दीर्घ उत्तरीय प्रश्नोत्तर

प्रश्न 1.
इस कविता में रूपक अलंकार की छटा है। आप उन्हें छाँटकर लिखिए।
उत्तर
सुख-सुहाग की लाली, सुधा-धार और जीवन-ज्योति।

प्रश्न 2.
कवयित्री ने बालिका के लिए कौन-कौन से उदाहरण प्रस्तुत किए हैं?
उत्तर
कवयित्री ने बालिका के लिए.अँधेरे में दीपक, घटा का उजाला, आँखों की ज्योति. ईशामसीह की क्षमा, नबी मुहम्मद का विश्वास, महावीर स्वामी और महात्मा गौतम बुद्ध की दया को उदाहरण के रूप में प्रस्तुत किया है।

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प्रश्न 3.
श्रीमती सुभद्रा कुमारी चौहान विरचित कविता ‘बालिका का परिचय’ का मुख्य भाव स्पष्ट कीजिए।
उत्तर
प्रस्तुत कविता ‘बालिका का परिचय’ कवयित्री श्रीमती सुभद्राकुमारी चौहान की भाववर्द्धक कविता है। सुभद्राकुमारी चौहान ने इसमें वात्सल्य रस को उड़ेल दिया है। इसे लक्ष्य कर लिखी गई यह रचना ‘बालिका का परिचय’ आज भी मील का पत्थर कही जा सकती है। प्रस्तुत कविता में कवयित्री का मानो उनका मातृ हदय ही साकार हो उठा है। वे नन्हीं बालिका को अधिक प्रभावशाली रूप में अनुभव करती हैं। इसके लिए वे बालिका को अँधेरे में दीपक, घटा का उजाला, नयनों की ज्योति, ईशा की क्षमा, मुहम्मद का विश्वास तथा गौतम की दया जैसे अनेक यशस्वी प्रतीकों के रूप में देखती हैं। इस प्रकार हम यह देखते हैं कि उन्होंने माँ और शिशु के बीच के रागात्मक सम्बन्ध का नैसर्गिक चित्रण किया है। “बेटियाँ भविष्य की निर्माता हैं।” कवयित्री की यही भावना उनकी इस कविता में दिखाई देती है।

बालिका का परिचय कवयित्री-परिचय

प्रश्न
श्रीमती सुभद्रा कुमारी चौहान का संक्षिप्त जीवन-परिचय देते हुए उनके साहित्य के महत्त्व पर प्रकाश डालिए।
उत्तर
श्रीमती सुभद्रा कुमारी चौहान वीर रस की सर्वश्रेष्ठ कवयित्री हैं। जीवन परिचय-श्रीमती सुभद्रा कुमारी चौहान का जन्म सन् 1904 में उत्तर प्रदेश के प्रयाग के निहालपुर महसे में श्री रामनाथ सिक नामक एक सुशिक्षित परिवार में हुआ था। आपके पिता सम्पन्न, ईश्वरभक्त, उदार, विद्यानुरागी एवं राष्ट्रीय-विचारधारा वाले व्यक्ति थे। आपकी प्रतिभा बचपन से ही विलक्षण थी। इससे प्रभावित होकर आपकी शिक्षा की समुचित व्यवस्था हुई थी। आप प्रयाग के क्राइस्ट कालेज में अध्ययन करते समय काव्य-रचना किया करती थीं। उस समय भी आपकी कविताएँ राष्ट्रीय-भावों से ओत-प्रेत हुआ करती थीं। उसमें तत्कालीन राष्ट्रीय-आन्दोलनों की झलक, स्वदेश-प्रेम और राष्ट्रीयता की बलवती भावना मुखरित होती थी। ये ही भावनाएँ आपकी आगामी कविता की प्रेरणा-शक्ति बनकर आयीं। ‘कर्मवीर’ पत्र में प्रकाशित रचनाओं के माध्यम से आपकी ख्याति अमर हो गई। आपका विवाह सन् 1919 में खण्डवा निवासी ठाकुर लक्ष्मणसिंह चौहान से हुआ। पति की स्वीकृति लेकर आपने अपने अध्ययन का क्रम नहीं छोड़ा। बनारस के थियोसोफिकल स्कूल में प्रवेश लेकर अध्ययन जारी रखा। महात्मा गाँधी द्वारा चलाए जा रहे असहयोग आन्दोलन में आपने जमकर भाग लिया। फलतः आपको कई बार जेल जीवन बिताना पड़ा। इस स्थिति में भी आपने अपनी पारिवारिक व्यवस्था को अव्यवस्थित नहीं होने दिया। सन् 1934 ई. में आप विधान-परिषद् की सदस्या बनीं। सन् 1948 ई. में एक मोटर दुर्घटना में आपकी असामयिक मृत्यु हो गई।

कृतियाँ-आपकी रचनाएँ निम्नलिखित हैं

1. काव्य-संग्रह-

  • ‘मुकुल’
  • ‘नक्षत्र’
  • त्रिधारा’

2. कहानी-संग्रह

  • ‘सीधे-साधे चित्र’
  • ‘बिखरे मोती’
  • ‘उन्मादिनी’।

3. बाल-साहित्य-‘सभा के खेल’। भाषा-शैली-श्रीमती सुभद्रा कुमारी चौहान की भाषा सरल और प्रवाहमयी है। वह रोचक और हृदयस्पर्शी है। उसमें ओज और वेग है। वीर रस, करुण रस, वात्सल्य, शान्त रस आदि आपके प्रिय रस हैं। उपमा, अनुप्रास, मानवीकरण, उत्प्रेक्षा आदि आपके रुचिप्रद अलंकार हैं। बिम्बों और प्रतीकों के प्रयोग आपने यथावत् किए हैं। श्रीमती सुभ्रदा कुमारी चौहान की शैली चित्रात्मक, काव्यात्मक और भावात्मक गरसमें प्रवाहमयता और बोधगम्यता नामक शैलीगत विशेषताएँ अधिक रूप में दिखाई देती हैं। मूल रूप से आपकी शैली उपदेशात्मक और प्रेरणादायक है। वह सहज होकर भी कठिन दिखाई देती है।

साहित्यिक महत्त्व-श्रीमती सुभद्रा कुमारी चौहान का साहित्यिक महत्त्व वीर रस काव्य-क्षेत्र में सर्वोच्च है। आपने राजनीति और साहित्य दोनों ही क्षेत्रों में अपनी बहुत बड़ी पहचान बनाई है। यही नहीं आपने ग़द्य-पद्य दोनों ही साहित्यिक विधाओं का सफलतापूर्वक निर्वाह किया है। एक ओर जहाँ ‘झाँसी की रानी’ कविता हर युवक की जबान पर है, वहीं दूसरी ओर बचपन सम्बन्धी कविताएँ प्रत्येक को मधुर बचपन की याद दिलाती हैं। यही नहीं आप एक सफल कहानी लेखिका भी हैं। आपकी कहानियों में नारी-जीवन, शोषित-समाज और पारिवारिक-जीवन का मार्मिक चित्रण है। आपका साहित्यिक-महत्त्व रखने के लिए आपके काव्य-संग्रह ‘मुकुल’ पर सन् 1931 ई. में आपको सेक्सरिया पुरस्कार मिला था।

बालिका का परिचय कविता का सारांश

प्रश्न
श्रीमती सुभद्रा कुमारी चौहान-विरचित कविता ‘बालिका का परिचय’ का सारांश अपने शब्दों में लिखिए।
उत्तर
श्रीमती सुभद्रा कुमारी चौहान-विरचित कविता ‘बालिका का परिचय’ माता के हृदय के भावों को प्रकट करने वाली एक ज्ञानवर्द्धक कविता है। इस कविता का सारांश इस प्रकार है कवयित्री अपनी बेटी के प्रति अपने वात्सल्य भावों को उडेलती हई कह रही है कि वह उनकी गोदी की शोभा और सुख-सुहाग की लालिमा है। वह अंधकार की दीपशिखा, घनी घटाओं की चमक, उषा काल में कमल-भंगों (भौरी) की तरह सुखदायक है,तो पतझड़ की हरियाली है। नीरस और उदास हदय में अमत की धारा बहाने वाली है तो मस्त मगन तपस्वी के समान है। ज्योति खोई आँखों की जीवन-ज्योति और मनस्वी की सच्ची लगन है। बीते हुए बचपन की क्रीड़ामयी वाटिका है। यह तो मेरे लिए मन्दिर-मस्जिद, काबा-काशी के समान है। यह तो मेरी पूजा-पाठ, ध्यान, जप-तप है। उसने अपने आँगन में बालक कृष्ण की क्रीड़ाओं को देखा है। माता कौशल्या की प्रसन्नता को अपने मन के भीतर देखा। आओ सभी ईशामसीह की क्षमाशीलता, नबी मुहम्मद के विश्वास, और गौतम बुद्ध का जीवों के प्रति दया की भावना को बालिका के पास आकर देख लें। अगर कोई उससे परिचय पूछ रहा है, तो वह उसका किस प्रकार परिचय दे सकती है। उसे तो वही अच्छी तरह से जान सकता है, जिसमें माता का दिल है।

बालिका का परिचय संदर्भ-प्रसंग सहित व्याख्या

पद्यांश की सप्रसंग व्याख्या, काव्य-सौन्दर्य व विषय-वस्तु पर आधारित प्रश्नोत्तर

1. यह मेरी गोदी की शोभा,
सुख सुहाग की है लाली।
शाही शान भिखारिन की है,
मनोकामना मतवाली ॥1॥

दीपशिखा है अंधकार की,
घनी घटा की उजियाली।
उषा है यह कमल-भंग की,
है पतझड़ की हरियाली ॥2॥

शब्दार्थ-सुहाग-सौभाग्य। शाही-सम्पन्नता, वैभव। शान-स्वाभिमान। दीप शिखा-दीपक की लौ। भृग-मौंरा।

प्रसंग-यह पद्यांश हमारी पाठ्य-पुस्तक ‘वासंती-हिन्दी सामान्य’ में संकलित तथा श्रीमती सुभद्रा कुमारी विरचित कविता ‘बालिका का परिचय’ से है। इसमें कवयित्री ने अपनी बेटी को अपनी गोद की शोभा और सुख-सौभाग्य की लालिमा मानते हुए कहा है कि

व्याख्या-यह मेरी बिटिया मेरी गोद की शोभा और मेरे सुख-सौभाग्य की लालिमा है। यह मेरे लिए भिखारिन की शाही शान और मेरी स्वच्छन्द मनोकामना को पूरी करने के लिए मानो मतवाली बनी रहती है। यह मेरे दुख-अभाव रूपी अंधकार की दीपशिखा और कठिनाइयों की उमड़ती घटाओं के बीच उत्पन्न आशा रूपी उजियाली है। यही नहीं, यह तो मेरे लिए वैसे ही सुखकर और आनन्द है, जैसे उषा के होने पर कमलों-भौरों को आनन्द और सुख मिलता है। इसी प्रकार यह मेरे जीवन में आए पतझड़ के लिए हरियाली स्वरूप है। कहने का भाव यह कि मेरी बिटिया मेरे जीवन के लिए हर प्रकार से सुखद और आनन्ददायक है।

विशेष-

  1. कवयित्री का वात्सल्य भाव सच्चे रूप में है।
  2. वात्सल्य रस का संचार है।
  3. भाषा सरल और सुबोध है।
  4. रूपक अलंकार है।

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1. पद्यांश पर आधारित काव्य-सौन्दर्य सम्बन्धी प्रश्नोत्तर

प्रश्न
(i) प्रस्तुत पद्यांश का काव्य-सौन्दर्य स्पष्ट कीजिए।
(ii) प्रस्तुत पयांश का भाव-सौन्दर्य स्पष्ट कीजिए।
उत्तर-
(i) प्रस्तुत पद्यांश का काव्य-विधान वात्सल्य रस से लबालब है। उसे रूपक अलंकार से आकर्षक बनाकर सरल और सुबोध शब्दावली से रोचक बनाने का प्रयास सचमुच में सराहनीय है।
(ii) प्रस्तुत पद्यांश की भाव-योजना में सरलता और स्वाभाविकता है, तो रोचकता और प्रवाहमयता भी है। इस तरह यह पद्यांश भाववर्द्धक रूप में है। यह कहा जा सकता है।

2. पयांश पर आधारित विषय-वस्त से सम्बन्धित प्रश्नोत्तर

प्रश्न
(i) उपर्युक्त पद्यांश में कवयित्री ने क्या किया है?
(ii) बालिका का चरित्र कैसा है?
उत्तर
(i) उपर्युक्त पद्यांश में कवयित्री ने बालिका का परिचय दिया है।
(ii) बालिका का चरित्र अत्यधिक विशुद्ध और स्वाभाविक है।

2. सुपा-धार यह नीरस दिल की मस्ती मगन तपस्वी की।
जीवन ज्योति नष्ट नयनों की सच्ची लगन मनस्वी की॥3॥

बीते हुए बालपन की यह क्रीड़ा पूर्ण वाटिका है।
वही मचलना, वही किलकना हँसती हुई नाटिका है।।4।।

शब्दार्च
सुधा-धार-अमृत की धार। नयनों-आँखों। मनस्वी-बुद्धिमान। बालपन-बचपन। नाटिका-नाटक करने वाली।

प्रसंग-पूर्ववत । इसमें कवयित्री ने अपनी बिटिया को नीरस दिल में अमृत धारा प्रवाहित करने वाली मानते हुए कहा है।

व्याख्या-मेरी बिटिया मेरे नीरस हृदय के लिए अमृत की धारा है। इसकी मस्ती और प्रसन्नता किसी तपस्वी से कम नहीं है। आँखों की गयी हुई रोशनी को वापस लाने वाली यह जीवन की ज्योति के समान है। इसमें बुद्धिमानों की तरह सच्ची लगन है। यह मेरे बीते हुए बचपन को लौटाने वाली क्रीड़ामयी वाटिका की तरह है। इसका मचलना और किलकना किसी हँसती हुई नाटिका से किसी प्रकार कम नहीं है।

विशेष-

  1. भाषा की शब्दावली सरल और सुबोध है।
  2. शैली चित्रात्मक है।
  3. रूपक अलंकार है।
  4. वात्सल्य रस का संचार है।

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1. पद्यांश पर आधारित काव्य-सौन्दर्य सम्बन्धी प्रश्नोत्तर

प्रश्न(i) प्रस्तुत पद्यांश के काव्य-सौन्दर्य पर प्रकाश डालिए।
(ii) प्रस्तुत पयांश के भाव-सौन्दर्य को स्पष्ट कीजिए।
उत्तर
(i) प्रस्तुत पद्यांश का काव्य-स्वरूप सरल और सुबोध शब्दावली से होकर वात्सल्य रस में प्रवाहित हुआ है। इसमें चमत्कार लाने के लिए किया गया रूपक अलंकार का प्रयोग मन को और लुभा रहा है।
(ii) प्रस्तुत पयांश की भाव-योजना हृदय को बड़ी आसानी से छू रही है। बालिका के प्रति वात्सल्य भावना की सच्चाई की रोचकता निश्चर्य ही आकर्षक है।

2. पद्यांश पर आधारित विषय-वस्त से सम्बन्धी प्रश्नोत्तर

प्रश्न-
(i) बालिका को किन-किन रूपों में प्रस्तुत किया गया है?
(ii) बालिका के चरित्रोल्लेख से क्या अनुभूति होती है?
उत्तर
(i) बालिका को अमृत की धारा, मस्त मगन तपस्वी, जीवन-ज्योति, मनस्वी की सच्ची लगन, क्रीड़ामयी वाटिका और हँसती हुई नाटिका के रूप में प्रस्तुत किया गया है।
(ii) बालिका के चरित्रोल्लेख से बीते हुए बचपन की अनुभूति होती है।

3. मेरा मन्दिर, मेरी मस्जिद
काबा-काशी यह मेरी।
पूजा-पाठ, ध्यान-जप-तप है
घट-घट वासी यह मेरी ॥5॥

कृष्णचन्द्र की क्रीड़ाओं को
अपने आँगन में देखो।
कौशल्या के मात्र-मोदे को।
अपने ही मन में लेखो ॥6॥

शब्दार्थ-काबा-मुसलमानों का धार्मिक स्थान । घट-घट बासी-अन्दर निवास करने वाला परमात्मा। कृष्णचन्द्र-बालक श्रीकृष्ण। लेखो-देखो।

प्रसंग-पूर्ववत् । इसमें कवयित्री ने बालिका को धर्मस्वरूप मानते हुए कहा है कि

व्याख्या-मेरे लिए यह मेरी बेटी मन्दिर-मस्जिद, काबा, काशी के समान अत्यन्त पवित्र है। यह मेरे लिए पूजा-पाठ और ध्यान, जप-तप के समान है। यह मेरे घट-घट में निवास करती है। इस प्रकार मैंने अपनी बालिका को अपने आँगन में अनेक प्रकार के खेल-खेलते हुए देखा, तो मुझे ऐसा लगा मानो बालक श्रीकृष्ण ही मेरे ऑगन में बाल-क्रीड़ा कर रहे हैं। इसे आप लोग भी अपनी-अपनी बालिकाओं में देख सकते हैं। इस प्रकार माता कौशल्या के आनन्द को अपने मन में अनुभव कर सकते हैं।

विशेष-

  1.  भाषा में सजीवता है।
  2. शैली भावात्मक है।
  3. वात्सल्य रस का प्रवाह है।
  4. सामाजिक शब्दावली है।

1. पद्यांश पर आधारित काव्य-सौन्दर्य सम्बन्धी प्रश्नोत्तर

प्रश्न
(i) उपर्युक्त पद्यांश के काव्य-सौन्दर्य पर प्रकाश डालिए।
(ii) उपर्युक्त पयांश का भाव-सौन्दर्य लिखिए।
उत्तर
(i) उपर्युक्त पद्यांश वात्सल्य रस की सहज धारा से प्रवाहित है, जो सरल शब्दावली से पुष्ट हुआ है। अनुप्रास अलंकार (कृष्णचन्द्र की क्रीड़ाओं की, अपने आँगन, मात्र मोदे और मन में) के आकर्षक प्रयोग से यह पद्यांश प्रभावशाली बन गया है।
(ii) उपर्युक्त पद्यांश का भाव-सौन्दर्य सरल, स्वाभाविक और भाववर्द्धक है। यह पूरी तरह से बोधगम्य और हृदय को छू लेने वाला है। बालक के चरित्र की पवित्रता का उल्लेख सचमुच में बड़ा ही अनूठा है।

2. पद्यांश पर आधारित विषय-वस्त से सम्बन्धी प्रश्नोत्तर प्रश्न-10 बालिका की पवित्रता कैसी है?

(i) बालिका की बाल-लीला कैसी होती है? उत्तर-0 बालिका की पवित्रता मन्दिर, मस्जिद, काबा और काशी जैसी है।
(ii) बालिका की बाललीला बालक राम-कृष्ण जैसी होती है।

4. प्रभु ईशा की क्षमाशीलता
नवी मुहम्मद का विश्वास।
जीव दया जिनवर गौतम की
आओ देखो इसके पास ॥7॥

परिचय पूछ रहे हो मुझसे
कैसे परिचय हूँ इसका।
वहीं जान सकता है इसको
माता का दिल है जिसका ॥8॥

शब्दार्थ-ईशा-ईशामसीह। नबी-इस्लाम धर्म के महापुरुष। जिनवर-तीर्थकर/ महावीर स्वीमी।

प्रसंग-पूर्ववत्। उसमें कवयित्री ने बालिका को संसार के महापुरुष के समान बतलाने का प्रयास किया है। इसके लिए कवयित्री का कहना है कि

व्याख्या-चूँकि बालिका का तन-मन स्वच्छंद और पवित्र भावों से भरा होता है।

इसलिए उसमें ईशामसीह की क्षमाशीलता और नबी-मुहम्मद के अटूट विश्वास को समझा जा सकता है। यही नहीं, उसमें महावीर स्वामी और महात्मा गौतम बुद्ध के जीवों के प्रति अपार दया की भावना जैसे अद्भुत और अनोखे उच्च गुणों को देखा-परखा जा सकता है। कवयित्री का पुनः कहना है कि अगर कोई उससे बालिका का परिचय पूछे तो वह क्या दे सकती है। उसका तो यही कहना है कि बालिका को एक माता का दिल ही सचमुच में जान सकता है।

विशेष-

  1. बालिका के उदार और विशाल हृदय को अत्यधिक श्रेष्ठ कहा गया है।
  2. ईशामसीह, नबी, मुहम्मद, महावीर स्वामी और महात्मा गौतम बुद्ध से बालिका की तुलना की गई है। इसलिए इसमें उपमा अलंकार है।
  3. उदाहरण शैली है।
  4. सम्पूर्ण कथन अत्यधिक रोचक है।

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1. पद्यांश पर आधारित काव्य-सौन्दर्य सम्बन्धी प्रश्नोत्तर

प्रश्न
(i) उपर्युक्त पद्यांश के काव्य-सौन्दर्य को स्पष्ट कीजिए।
(ii) उपर्युक्त पयांश का भाव-सौन्दर्य लिखिए।
उत्तर
(i) उपर्युक्त पद्यांश को उपमा अलंकार की झड़ी लगाकर अधिक आकर्षक बनाने का प्रयास सचमुच में प्रशंसनीय है। इसे और रोचक बनाने के लिए भाषा को धारदार बनाकर कथन की सच्चाई का सामने लाया गया है।
(ii) उपर्युक्त पद्यांश का भाव-विधान स्वाभाविक, यथार्थपूर्ण, विश्वसनीय और हदयस्पर्शी है। बालिका की अद्भुत विशेषता को महानतम रूप में लाने का कवयित्री का प्रयास न केवल अनूठा है, अपितु प्रेरक भी है।

2. पयांश पर आधारित विषय-वस्तु से सम्बन्धी प्रश्नोत्तर

प्रश्न
(i) बालिका के असाधारण गुण कौन-कौन से हैं?
(ii) बालिका की सच्चाई को कौन बता सकता है?
उत्तर
(i) बालिका के असाधारण गुण हैं-ईशामसीह की क्षमाशीलता, नवी-मुहम्मद का विश्वास, महावीर स्वामी और महात्मा गौतम बुद्ध के जीवों के प्रति दया-भावना।
(ii) बालिका की सच्चाई माता ही बता सकती है।

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MP Board Class 9th Hindi Vasanti Solutions Chapter 12 जब चाणक्य ने दूसरा दीपक जलाया

MP Board Class 9th Hindi Vasanti Solutions Chapter 12 जब चाणक्य ने दूसरा दीपक जलाया (संकलित)

जब चाणक्य ने दूसरा दीपक जलाया अभ्यास-प्रश्न

जब चाणक्य ने दूसरा दीपक जलाया लबूतरीय प्रश्नोत्तर

प्रश्न 1.
सैल्यूकस कहाँ का राजा वा? वह भारत क्यों आया था?
उत्तर
सैल्यूकस सीरिया का राजा था। वह भारत, भारत भ्रमण के लिए आया था।

प्रश्न 2.
मैगस्थनीज कौन था? उसने चाणक्य से मिलने का समय कब निश्चित किया?
उत्तर
मैगस्थनीज चन्द्रगुप्त के दरबार में नियुक्त राजदूत था। वह चाणक्य का प्रशंसक था। उसने चाणक्य से मिलने का समय सायंकाल निश्चित किया।

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प्रश्न 3.
जब चन्द्रगुप्त और सैल्यूकस कुटिया में पहुँचे, तब आचार्य चाणक्य किस कार्य में व्यस्त थे?
उत्तर
जब चन्द्रगुप्त और सैल्यूकस कुटिया में पहुँचे तब आचार्य चाणक्य राजकार्य से सम्बन्धित कुछ जरूरी दस्तावेजों की जाँच कर रहे थे।

प्रश्न 4.
सैल्यूकस के चकित होने का क्या कारण था?
उत्तर
सैल्यूकस के चकित होने का कारण यह था कि इतने बड़े साम्राज्य के प्रधानमन्त्री चाणक्य किसी भव्य और विशाल भवन में नहीं, अपितु एक कुटिया में रह रहे हैं।

जब चाणक्य ने दूसरा दीपक जलाया दीर्घ उत्तरीय प्रश्नोत्तर

प्रश्न 1.
आचार्य चाणक्य के व्यक्तित्व की प्रमुख विशेषताओं पर प्रकाश डालिए।
उत्तर
आचार्य चाणक्य का व्यक्तित्व विभिन्न प्रकार की अदभत विशेषताओं का भण्डार है। उनका व्यक्तित्व अनोखे गुणों से भरा हुआ था। वे एक साथ प्रतिभाशाली, चरित्रवान, सुस्पष्ट, दूरदर्शी, कुशल राजनीतिज्ञ, राष्ट्रभक्त, त्यागशील, ईमानदार, बुद्धिमान और उदार प्रकृति के थे। उनमें किसी प्रकार का न तो अभिमान था और न ही पद-लोलुपता थी। वे कर्तव्यपरायण और अतिथि सम्मानकर्ता थे। इस प्रकार आचार्य चाणक्य की अद्भुत विशेषताओं से दूसरे देश के शासक भी अधिक प्रभावित थे।

प्रश्न 2.
सैल्यूकस ने कुटिया में क्या-क्या देखा? ।
उत्तर
सैल्यूकस ने कुटिया में निम्नलिखित समानों को देखा कटिया के अन्दर एक ओर जल का घड़ा रखा था। दूसरे कोने में उपलों और समिधाओं का ढेर था। एक चटाई बिछी थी। नमक आदि पीसने के लिए सील-बट्टा भी रखा था। एक बाँस लटका हुआ था जिस पर कपड़े रखे हुए थे। एक चौकी, जिस पर पढ़ने-लिखने की सामग्री थी। पास ही दो दीपाधार भी रखे हुए थे। उस समय चाणक्य गम्भीर और एकाग्रचित्त विचार मग्न होकर लेखन के काम में व्यस्त थे।

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प्रश्न 3.
एक दीपक बुझाकर दूसरे दीपक को जलाने के पीछे चाणक्य का क्या तर्क था?
उत्तर
एक दीपक बुझाकर दूसरे दीपक को जलाने के पीछे चाणक्य का तर्क था-पहले दीपक में राजकोष के पैसों से तेल डाला गया था। इसलिए उससे राजकार्य से सम्बन्धित जरूरी दस्तावेजों की जाँच की जा रही थी। जाँच का काम समाप्त होने पर उसे बुझा दिया गया। दूसरा दीपक निजी पैसे से खरीदा हुआ जल रहा है। इससे होने वाली बात भी निजी है।

जब चाणक्य ने दूसरा दीपक जलाया भाषा-अध्ययन

(क) नीचे लिखे अपठित गद्यांश को ध्यानपूर्वक पढ़िए और पूछे गए प्रश्नों का उत्तर दीजिए:
स्वार्थ और परणाई मानव की दो प्रवृत्तियाँ हैं। हम अधिकतर सभी कार्य अपने लिए करते हैं ‘पर’ के लिए सर्वस्व बलिदान करना ही सच्ची मानक्ता है। यही धर्म है, यही पुण्य है। इसे ही परोपकार कहते हैं। प्रकृति हमें निरन्तर परोपकार का सन्देश देती है। नदी दूसरों के लिए बहती है। वृत मनुष्यों को छाया तथा फल देने के लिए ही घूप, आँधी, वर्षा और तूफानों के जल के रूप में अपना सब कुछ बलिदान कर देते हैं।

प्रश्न 1. सच्ची मानवता क्या है?
प्रश्न 2. वृक्ष हमें परोपकार का सन्देश कैसे देते हैं?
प्रश्न 3. मनुष्य की कौन-सी दो प्रमुख प्रवृत्तियाँ हैं?
प्रश्न 4. गद्यांश का उपयुक्त शीर्षक दीजिए।
(ख) वर्तनी सुधारियेचरीत्रवान, नियूक्त, आर्चाय, कुटीया, विशीष्ट, आशिर्वाद, सामराज्य, चटायी, चाडक्य।
उत्तर
1. परार्थ काम करना ही सच्ची मानवता है।
2. वृक्ष हमें छाया तथा फल देकर परोकार का सन्देश देते हैं।
3. स्वार्थ और परमार्थ मनुष्य की दो प्रमुख प्रवृत्तियों हैं।
4. शीर्षक-‘परोपकार’।
(ख) चरित्रवान्, नियुक्त, आचार्य, कुटिया, विशिष्ट, आशीर्वाद, साम्राज्य, चटाई, चाणक्य।

जब चाणक्य ने दूसरा दीपक जलाया योग्यता-विस्तार

(क) आचार्य चाणक्य की तरह प्रतिभाशाली और सूझबूझ रखने वाले राष्ट्र-भक्तों के बारे में साथियों से जानकारी प्राप्त कीजिए और उनके चित्रों को एकत्रित करिए। पुस्तकालय में जाकर जीवन-मूल्यों पर आधारित कहानियाँ पढ़िए और स्वयं इस प्रकार की कहानी लिखिए। चाणक्य से सम्बन्धित अन्य कहानियाँ जानिए और लिखिए।
‘सैल्यूकस की जन्म-भूमि अर्वात् ग्रीस के बारे में जानकारी एकत्रित कर लिखिए।
उत्तर
उपर्युक्त प्रश्नों को छात्र/छात्रा अपने अध्यापक/अध्यापिका की सहायता से हल करें।

जब चाणक्य ने दूसरा दीपक जलाया परीक्षोपयोगी अन्य महत्त्वपूर्ण प्रश्नोत्तर

लघूत्तरीय प्रश्नोत्तर

प्रश्न 1.
आचार्य चाणक्य कौन ?
उत्तर
आचार्य चाणक्य सम्राट चन्द्रगुप्त मौर्य के महामन्त्री थे। वे महान प्रतिभाशाली, दूरदर्शी और कुशल राजनीतिज्ञ थे।

प्रश्न 2.
सैल्यूकस कौन था? वह आचार्य चाणक्य से क्यों मिलने गया?
उत्तर
सैल्यूकस सिरिया का राजा था। उसने आचार्य चाणक्य की प्रशंसा सुन रखी थी। इसलिए वह उनसे मिलने गया।

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प्रश्न 3.
सम्राट चन्द्रगुप्त सैल्यूकस को लेकर कहाँ गये?
उत्तर
सम्राट चन्द्रगुप्त सैल्यूकस को लेकर एक पुरानी टूटी-फूटी कुटिया में रह रहे आचार्य चाणक्य के पास गये।

प्रश्न 4.
राजकोष के तेल से जलने वाले दीपक को बुझाकर निजी कोष के तेल से दूसरा दीपक जलाने से आचार्य चाणक्य के किस दृष्टिकोण का पता चलता है?
उत्तर
राजकोष के तेल से जलने वाले दीपक को बुझाकर निजी कोष के तेल से दूसरा दीपक जलाने से आचार्य चाणक्य की राष्ट्रभक्ति और ईमानदारी के दृष्टिकोण का पता चलता है।

जब चाणक्य ने दूसरा दीपक जलाया दीर्घ उत्तरीय प्रश्नोत्तर

प्रश्न 1.
आचार्य चाणक्य ने सैल्यूकस की शंका का समाधान करते हुए क्या कहा?
उत्तर
आचार्य चाणक्य ने सैल्यूकस की शंका का समाधान करते हुए कहा-“दूसरे दीपक को जलाने और पहले दीपक को बुझाने के पीछे कोई सनक या उन्माद की भावना काम नहीं कर रही थी। सच्चाई तो यह है कि जब आप यहाँ आये तो मैं राजकार्य से सम्बन्धित कुछ जरूरी दस्तावेजों की जाँच कर रहा था। उस समय जो दीपक जल रहा था उसमें राजकोष के पैसों से तेल डाला गया था, इस समय आपसे बातचीत करेंगे, वह हमारी निजी होगी। इस कारण मैंने राजकीय दीपक को बुझाकर अपने कमाये हुए धन से खरीदा हुआ दीपक जलाया है। ऐसा करके मैंने कोई विचित्र काम नहीं किया है।”

प्रश्न 2.
इस प्रेरक प्रसंग से क्या प्रेरणा मिलती है?
उत्तर
इस प्रेरक प्रसंग से हमें कई प्रकार की प्रेरणा मिलती है

  1. हमें अपने कर्तव्य का पालन सच्चाई से करना चाहिए।
  2. हमें अपने निजी स्वार्थ को देश और समाज के लिए न्यौछावर कर देना चाहिए।
  3. अपने राष्ट्र के प्रति प्रेम और भक्ति की भावना को प्रकट करते रहना चाहिए।
  4. हमें अपने पद और कार्यभार के दायित्व को सच्ची भावना से निभाना चाहिए।
  5. हमें पद-प्रतिष्ठा पाकर अहंकार नहीं करना चाहिए।

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प्रश्न 3.
‘जब चाणक्य ने दूसरा दीपक जलाया’ प्रेरक प्रसंग के मुख्य भाव को स्पष्ट कीजिए।
उत्तर
प्रस्तुत प्रेरक प्रसंग का आधार एक ऐतिहासिक घटना है। इस घटना को आधार बनाकर यह दिखलाने का प्रयास किया गया है कि जहाँ एक ओर ‘त्याग’ . व्यक्ति के जीवन को उदात्त बनाता है। वहीं दूसरी ओर सामाजिक जीवन के एक विशिष्ट मूल्य के रूप में व्यवस्थाओं को लोकहितकारी बनाने में महत्त्वपूर्ण भूमिका प्रस्तुत करता है। राजनीति और त्याग पर आधारित इस प्रेरक प्रसंग के माध्यम से महान सम्राट चन्द्रगुप्त के महामन्त्री चाणक्य की राष्ट्र-भक्ति को चित्रित किया गया है। राज्य के सभी प्रकार के सुख-वैभव को छोड़कर महामन्त्री चाणक्य का झोपड़ी। में रहना, के उल्लेख से जहाँ उनके अद्भुत त्याग का उदाहरण प्रस्तुत किया गया है। वहीं सैल्यूकस की निजी भेंट के समय राजकोष के तेल से जलने वाले दीपक को बुझाकर निजी कोष के तेल से दूसरा दीपक प्रज्ज्वलित करने के उल्लेख के द्वारा रनके राष्ट्रीय संचेतक एवं राजनीति के भोगवादी दृष्टिकोण के निषेध की भूमिका को भी बड़े अनूठे ढंग से सामने लाने का प्रयास किया गया है प्रस्तुत करता है।

जब चाणक्य ने दूसरा दीपक जलाया प्रेरक प्रसंग का सारांश

प्रश्न
‘जब चाणक्य ने दीपक जलाया’ प्रेरक प्रसंग का सारांश अपने शब्दों में लिखिए।
उत्तर
प्रस्तुत प्रसंग प्रेरक रूप में है। सम्राट चन्द्रगुप्त के महामन्त्री चाणक्य की ईमानदारी को इस प्रसंग में लाकर शिक्षाप्रद बनाने का प्रयास किया गया है। इस प्रेरक प्रसंग का सारांश इस प्रकार है सम्राट चन्द्रगुप्त के महामन्त्री आचार्य चाणक्य अत्यधिक प्रतिभाशाली, दूरदर्शी, कुशल राजनीतिक और महान चरित्रवान् थे। उनकी इस अद्भूत विशेषता को सुनकर सीरिया का राजा सिल्यूकस ने भारत आने पर उनसे मिलने की इच्छा सम्राट चन्द्रगुप्त के दरबार में नियुक्त राजदूत मैगस्थनीज से प्रकट की। चाणक्य से मिलने के लिए सूर्यास्त के बाद का समय निश्चित किया गया। एक विशाल साम्राज्य के महामन्त्री को एक पुरानी कुटिया में देखकर सिल्यूकस हैरान हो गये। चन्द्रगुप्त-सिल्यूकस ने उस कुटिया के भीतर जाकर देखा कि एक ओर पानी का घड़ा है तो दूसरी ओर उपले, सिल बट्टा, बाँस पर कपड़े और चौकी पर पढ़ने-लिखने की सामग्री थी।

पास में दो दीपाधार थे। उस समय चाणक्य गम्भीर मुद्रा में कुछ लिख रहे थे। लिखने का काम समाप्त करके उन्होंने चन्द्रगुप्त को आशीर्वाद और सिल्यूकस को सम्मान देते हुए दीपक बुझा दिया और दूसरा दीपक जला दिया। इसे देखकर सिल्यूकस हैरान हो गया। पूछने पर चाणक्य ने कहा कि जब वे वहाँ आये तो वे राजकार्य से सम्बन्धित जरूरी दस्तावेजों की जाँच कर रहे थे। उस समय जलते हुए उस दीपक में राजकोष के पैसों से तेल डाला गया था। इस समय उन दोनों की बात उनकी निजी होगी। इसलिए उन्होंने राजकीय दीपक को बुझाकर अपने कमाए हुए धन से खरीदा हुआ दीपक जलाया है। यह सुनकर सिल्यूकस और हैरान होकर सोचने लगे कि शायद ही ऐसे महान आदर्श महामन्त्री और किसी देश या राज्य में होगा।

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MP Board Class 9th Hindi Vasanti Solutions Chapter 11 जागरण गीत

MP Board Class 9th Hindi Vasanti Solutions Chapter 11 जागरण गीत (सोहनलाल द्विवेदी)

जागरण गीत अभ्यास-प्रश्न

जागरण गीत लघूत्तरीय प्रश्नोत्तर

प्रश्न 1.
कवि गीत गाकर ही लोगों को क्यों जगाना चाहता है?
उत्तर
कवि गीत गाकर ही लोगों को जगाना चाहता है। यह इसलिए कि साधारण रूप से कही गई बातों की अपेक्षा गीत के माध्यम से कही बातें अधिक प्रभावशाली होती हैं।

प्रश्न 2.
इस गीत में किस रास्ते को सर्वश्रेष्ठ बताया गया है?
उत्तर
इस गीत में उदयाचल को सर्वश्रेष्ठ रास्ता बताया गया है।

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प्रश्न 3.
कवि किस रास्ते पर आगे बढ़ाने के लिए आतुर है?
उत्तर
कवि प्रगति के रास्ते पर आगे बढ़ाने के लिए आतुर है।

प्रश्न 4.
संकीर्णताएँ तोड़ने के लिए कवि क्या करना चाहता है?
उत्तर
संकीर्णताएँ तोड़ने के लिए कवि सोए हुए दृढ़ भावों को जगाना चाहता है।

जागरण गीत दीर्घ उत्तरीय प्रश्नोत्तर

प्रश्न 1.
कवि आकाश में उड़ने के लिए क्यों रोक रहा है? कारण स्पष्ट कीजिए।
उत्तर
कवि आकाश में उड़ने के लिए रोक रहा है। यह इसलिए कि इससे जीवन की वास्तविकता का ज्ञान नहीं हो पाता है। फलस्वरूप जीवन दुखद और निरर्थक बना रहता है।

प्रश्न 2.
शूल को फूल बनाने से कवि का क्या आशय है?
उत्तर
शूल को फूल बनाने से कवि का आशय है-जीवन में आने वाली कठिनाइयों, रुकावटों और कष्टों को अपनी क्षमता, शक्ति आर बुद्धिबल से दूर करके जीवन को हर प्रकार से सुखद और सुन्दर बना लेना। इसके द्वारा कवि ने आलसी और निराश लोगों को प्रेरित और उत्साहित करना चाहा है।

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प्रश्न 3.
‘अतल अस्ताचल तुम्हें जाने न दूँगा। अरुण उदयाचल सजाने आ रहा हूँ।’ उपरोक्त पंक्तियों का भावार्य लिखिए।
उत्तर
अतल अस्ताचल तुम्हें जाने न दूंगा। अरुण उदयाचल सजाने आ रहा हूँ।’ उपरोक्त पंक्तियों के द्वारा कवि ने यह भाव दर्शाना चाहा है कि गहरी नींद में पड़े रहना, जीवन की सच्चाई को नकारना है। इस प्रकार का जीवन डूबते हुए सूरज के समान है, जिसमें न कोई आशा, विश्वास, आकर्षण, समुल्लास आदि जीवन-स्वरूप दिखाई देते हैं। इस प्रकार का जीवन न स्वयं के लिए अपितु दूसरे के लिए भी दुखद और कष्टकर होता है। इसलिए इस प्रकार के जीवन का परित्याग करके अरुण उदयाचल अर्थात् प्रगति के पथ पर बढ़ने के लिए हर प्रकार से कदम बढ़ाना चाहिए।

प्रश्न 4.
विपथ होकर मुड़ने का क्या आशय है? स्पष्ट कीजिए।
उत्तर
विपथ होकर मुड़ने का आशय है-सन्मार्ग से हटकर कुमार्ग पर चलना। दूसरे शब्दों में अच्छाई और सुन्दरता को छोड़कर बुराई और कुरूपता को अपनाना।

जागरण गीत भाषा-अध्ययन/काव्य-सौन्दर्य

प्रश्न 1.
निम्नलिखित शब्दों में वर्तनीगत अशुद्धियाँ हैं उन्हें दूर कर पुनः लिखिए।
अरूण, सीस, सूल, मंझदार, श्रृंखलाएँ, पातवार, पृगति, संकीणताएँ, विपथ, झनझनाये।
उत्तर
अशुद्धियाँ – शुद्धियाँ
अरूण – अरुण
शीस – शीश
सूल – शूल
मंझदार – मैंनधार
श्रृंखलाएँ – श्रृंखलाएँ
पातवार – पतवार
पृगति – प्रगति
संकीणताएँ – संकीर्णताएँ
विपथ – बिपथ
झनझनाये – झनझनाए।

प्रश्न 2.
निम्नलिखित वाक्यों में रेखांकित शब्दों के पर्यायवाची शब्द लिखकर पुनः वाक्य लिखिए
1. अब तुम्हें आकाश में उड़ने न दूंगा।
2. फूल मैं उसको बनाने आ रहा हूँ।
3. विपथ होकर मैं तुम्हें मुड़ने न दूंगा।
4. मैं किनारे पर तुम्हें बकने न दूंगा।
5. सिंधु बन तुमको उठाने आ रहा हूँ।
उत्तर

  1. अब तुम्हें आसमान में उड़ने न दूंगा।
  2. पुष्प मैं उसको बनाने आ रहा हूँ।
  3. कुपथ होकर मैं तुम्हें मुड़ने न दूंगा।
  4. मैं तट पर तुम्हें थकने न दूँगा।
  5. समुद्र बन तुमको उठाने आ रहा हूँ।

प्रश्न 3.
निम्नलिखित शब्दों को पढ़िए और पाठ में आए शब्दों में से स्वर मैत्री समझकर लिखिए
अस्ताचल – उदयाचल
साधना – ……………..
मैंनदार – ………………..
उठाए – ……………….
गति – ………………..
शूल – ……………
उत्तर
अस्ताचल – उदयाचल
साधना – कल्पना
मँझदार – पतवार
उठाए – झनझजाए
गति – गति
शूल – फूल

जागरण गीत योग्यता-विस्तार

प्रश्न 1.
जीवन में प्रगति तभी सम्भव है जब हम निराशा के क्षणों में तथा विरोधी परिस्थितियों में संघर्षरत रहकर आशावादी दृष्टिकोण रखकर आगे बढ़ें। इस सन्दर्भ की अन्य कविताएँ संकलित कीजिए तवा विभिन्न अवसरों पर अपने मित्रों/साथियों को सुलेख में लिखकर भेंट करें।

प्रश्न 2.
कक्षा में एक डिब्बा रखिए। अपने साथियों के किस गुण से किस परिस्थिति से आप प्रभावित हुए एक कागज पर लिखकर डिब्बे में डालिए। कुछ दिनों के उपरांत अपने शिक्षक एवं कक्षा के सम्मुख उन्हें खोलकर सबको सुनाएँ।
उत्तर
उपर्युक्त प्रश्नों को छात्र/छात्रा अपने अध्यापक/अध्यापिका की सहायता से हल करें।

जागरण गीत परीक्षोपयोगी अन्य महत्त्वपूर्ण प्रश्नोत्तर

लघूत्तरीय प्रश्नोत्तर

प्रश्न 1.
गहरी नींद में सोने वाले अब सो न सकेंगे। क्यों?
उत्तर
गहरी नींद में सोने वाले अब सो न सकेंगे। यह इसलिए कि कवि उन्हें गीत गाकर जगाने आ रहा है।

प्रश्न 2.
कवि अस्ताचल जाने के बजाय कहा जाने की बात कह रहा है? उत्तर-कवि अस्ताचल जाने के बजाय उदयाचल जाने की बात कह रहा है। प्रश्न 3. कवि के अनुसार क्या दुख-सुख है?
उत्तर
कवि के अनुसार नींद में सपने संजोना दुख है और इससे हटकर परिश्रम पूर्वक जीवन जीना सुख है।

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प्रश्न 4.
मैंनधार से किनारे पर आने के लिए कवि ने क्या कहा है?
उत्तर
मँझधार से किनारे पर आने के लिए कवि ने कहा है कि मैंझधार में पड़ने पर घबड़ाना नहीं चाहिए। हिम्मत करके विश्वासपूर्वक हाथ में पतवार लेकर किनारे की ओर आने का लगातार प्रयास करते रहना चाहिए।

जागरण गीत दीर्घ उत्तरीय प्रश्नोत्तर

प्रश्न 1.
कवि गीत किसके लिए गा रहा है?
उत्तर
कवि गहरी नींद में सोने वालों, अतल अस्ताचल की ओर जाने वालों, कल्पना के पंख लगाकर आकाश में उड़ने वालों, जीवन को काँटा समझने वालों, जीवन के मँझधार में पड़कर घबड़ाने और थकने वालों, मन में तुच्छ विचारों को रखने वालों और विपथ होकर जीवन की सच्चाई को नकारने वालों के लिए गीत गा रहा है।

प्रश्न 2.
‘आ रहा हूँ। ऐसा कवि ने बार-बार क्यों कहा है?
उत्तर
‘आ रहा हूँ।’ ऐसा कवि ने बार-बार कहा है। यह इसलिए कि इसके द्वारा वह अपना जागरण सन्देश देना चाहा है। उसने अपना यह जागरण सन्देश उन लोगों को ही देना चाहा है, जो जीवन की सच्चाई को नकारते रहे हैं और संकीर्ण मनोवृत्तियों जैसे-आलस्य, निराशा आदि को स्वीकारते रहे हैं। कवि इस प्रकार की संकीर्ण मनोवृत्तियों को त्यागकर कर्मरत होते हुए जीवन की वास्तविकता को स्वीकारने के लिए ही बार-बार ‘आ रहा हूँ। कहकर आत्मीयता प्रकट करना चाहता है।

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प्रश्न 3.
‘जागरण गीत’ का प्रतिपाद्य स्पष्ट कीजिए।
उत्तर
श्री सोहनलाल द्विवेदी-विरचित कविता ‘जागरण गीत’ एक प्रेरक कविता है। इस गीत के द्वारा द्विवेदी जी ने बड़े ही नपे-तुले शब्दों में जीवन की सार्थकता को बतलाने का प्रयास किया है। द्विवेदी जी इस जागरण गीत के माध्यम से जीवन की वास्तविकता का चित्रण किया है। उन्होंने यह बतलाना चाहा है कि जीवन में आलस्य, निराशा तथा संकीर्ण मनोवृत्ति को नकारते हुए मनोवृत्ति कर्मरत जीवन को ही प्रगति का मूलमंत्र बताया है। इस प्रकार उन्होंने पुराने मिथक तोड़ते हुए नव-जीवन के संचार का सन्देश इस गीत माध्यम से दिया है।

जागरण गीत कवि-परिचय

प्रश्न
श्री सोहनलाल द्विवेदी का संक्षिप्त जीवन-परिचय देते हुए उनके साहित्य के महत्त्व पर प्रकाश डालिए।
उत्तर
जीवन-परचिय-श्री सोहनलाल द्विवेदी का राष्ट्रीय विचारधारा के कवियों में प्रमुख स्थान है। उनकी कविताओं में राष्ट्रीयता का अधिक स्वर सुनाई पड़ता है। उनका जन्म सन् 1905 ई. में हुआ था। उन्होंने छोटी-सी आयु में ही काव्य-रचना आरम्भ किया, जो क्रमशः देश-प्रेम और भक्ति के स्वर से गुंजित होता गया। उनकी रचनाओं में राष्ट्रीय विचारधारा का प्रवाह है, तो गाँधीवादी चिन्तन और दृष्टिकोण भी है।

रचनाएँ-द्विवेजी जी की निम्नलिखत-रचनाएँ हैं-भैरवी-पूजा, ‘गीत’, ‘सेवाग्राम’, ‘दूध बतासा’, ‘चेतना’,’बाल भारती’ आदि।

भाषा-शैली-द्विवेदी जी की भाषा सहज और ऐसे प्रचलित शब्दों की है, जिसमें विविधता और अनेकरूपता है। तत्सम शब्दों की अधिकता है। जिसकी सहजता के लिए तभव और देशज शब्द बड़े ही उपयुक्त और सटीक रूप में प्रस्तुत हुए हैं। कहीं-कहीं मुहावरों-कहावतों को प्रयुक्त किया गया है। उनसे भाषा में और सजीवता आ गई है। बोधगम्यता और प्रवाहमयता उनकी शैली की पहली विशेषता है।

महत्त्व-द्विवेदी जी भारतीय संस्कृति को गौरवपूर्ण स्थान दिलाने के प्रबल समर्थक थे चूँकि गाँधी की विचारधारा से वे पूरी तरह प्रभावित थे। इसलिए उन्होंने उसका न केवल समर्थन किया, अपितु उसे अपनी रचनाओं के माध्यम से जन-जन तक प्रेरित भी किया। गाँधीवादी विचारधारा में आस्था रखने के कारण उनकी रचनाओं में प्रेम, अहिंसा और समता के भाव दिखाई देते हैं। इस प्रकार वे अपने विशिष्ट योगदानों के लिए सदैव याद किए जाते रहेंगे।

जागरण गीत कविता का सारांश

प्रश्न
सोहन लात द्विवेदी विरचित कविता ‘जागरण गीत’ का सारांश अपने शब्दों में लिखिए।
उत्तर
श्री सोहनलाल द्विवेदी-विरचित कविता ‘जागरण गीत’ एक भाववर्द्धक और सन्देशवाहक कविता है। इसमें कवि ने यथार्थ जीवन जीने का सन्देश दिया है। इस कविता का सारांश इस प्रकार है कवि गहरी नींद में सोने वालों से कह रहा है कि वह गीत गाकर उसे जगाने के लिए आ रहा है। वह अब नींद की गहराई से ऊपर निकालकर उसे आकर्षक उदयाचल की तरह उत्साह प्रदान करने का जागरण गीत गा रहा है। कवि गहरी नींद में सोने वाले को फटकारते हुए कह रहा है कि वह आज तक नींद में पड़े-पड़े मीठी-मीठी कल्पना का उड़ान भरता रहा है। परिश्रम करने से कतराता रहा है।

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लेकिन वह ऐसा नहीं कर पायेगा। ऐसा इसलिए कि वह अपने जागरण गीत से उसे यथार्थ जमीन पर ला देगा। उसमें यह चेतना ला देगा कि नींद में सपने देखना सुखदायक नहीं है। उसके दुःखों को सुखों में वह अपने जागरण गीत से फूल में बदल देगा। गहरी नींद में सोने वाले को कवि की सीख है कि उसे जीवन के दुखों के मझधार में पड़ने पर घबड़ाना नहीं चाहिए। ऐसा इसलिए कि वह अपने जागरण गीत से उसे पार लगा देगा। इसलिए उसे अपने मन में उठने वाली छोटी-छोटी बातों को भूल जाना चाहिए। उसे यह विश्वास होना चाहिए कि वह अपने जागरण गीत से उसकी हीनता को समाप्त कर देगा। यह सोच-समझकर अपने जीवन-पथ पर निरन्तर आगे बढ़ते जाओ। वह अपने जागरण गीत से उसे उसके प्रगति के पथ से पीछे नहीं मुड़ने देगा।

जागरण गीत संदर्भ-प्रसंग सहित व्याख्या

पद की सप्रसंग व्याख्या, काव्य-सौन्दर्य व विषय-वस्तु पर आधारित प्रश्नोत्तर

1. अब न गहरी नींद में तुम सो सकोगे,
गीत गाकर मैं जगाने आ रहा हूँ।
अतल अस्ताचल तुम्हें जाने न दूंगा,
अरुण उदयाचल सजाने आ रहा हूँ॥

कल्पना में आज तक उड़ते रहे तुम,
साधना से सिहरकर मुड़ते रहे तुम।
अब तुम्हें आकाश में उड़ने न दूँगा,
आज धरती पर बसाने आ रहा हूँ॥

शब्दार्च-अतल-गहराई। अस्ताचल-पश्चिम का वह कल्पित पर्वत जिसके पीछे सूर्य का अस्त होना माना जाता है। उदयाचल-पूर्व का वह कल्पित पर्वत जहाँ से सूर्य उदित होता है।

प्रसंग-प्रस्तुत पद हमारी पाठ्य-पुस्तक ‘वासन्ती’ हिन्दी सामान्य में संकलित तथा श्री सोहनलाल द्विवेदी विरचित कविता ‘जागरण गीत’ से है। इसमें कवि ने आलसी मनुष्यों को सावधान करते हुए कहा है कि

व्याख्या-अब मैं तुम्हें गहरी नींद में नहीं सोने दूंगा। मैं तुम्हें जगाने के लिए जागरण गीत तुम्हें सुनाने के लिए तुम्हारे पास आ रहा हूँ। अस्ताचल की गहराई अर्थात् जीवन की बर्बादी की ओर तुम्हें जाने से रोकने के लिए मैं आकर्षक उदयाचल को सजाने के लिए अर्थात् तुम्हारे जीवन को आनन्दित बनाने के लिए तुम्हारे पास आ रहा हूँ। तुम्हें अपने-आपके विषय में यह अच्छी तरह से जानकारी होनी चाहिए कि तुम आज तक कल्पना की ऊँची उड़ान उड़ते रहे हो। परिश्रम से मुँह मोड़ते रहे हो। लेकिन अब मैं तुम्हें ऐसा नहीं करने दूंगा। अब तो मैं आकाश की उड़ान से नीचे धरती पर लाने के लिए तुम्हारे पास आ रहा हैं। दूसरे शब्दों में तम्हें जीवन की वास्तविकता बतलाने-समझाने के लिए तुम्हारे पास आ रहा हूँ।

विशेष-

  1. कवि का जागरण-सन्देश भाववर्द्धक है।
  2. शब्द-चयन लाक्षणिक है।
  3. तत्सम शब्दों एवं तदभव शब्दों के प्रयोग सटीक हैं।
  4. शैली उपदेशात्मक-भावात्मक है।
  5. वीर रस का संचार है।

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1. पद्यांश पर आधारित काव्य-सौन्दर्य सम्बन्धी प्रश्नोत्तर

प्रश्न
(i) प्रस्तुत पद्यांश का काव्य-सौन्दर्य स्पष्ट कीजिए।
(ii) प्रस्तुत पयांश का भाव-सौन्दर्य लिखिए।
उत्तर
(i) प्रस्तुत पद्यांश का काव्य-सौन्दर्य काव्यांग के स्वरूपों से पष्ट है। अनप्रास अलंकार की छटा (गीत गाकार व अतल अस्ताचल) इस पद्यांश में जहाँ है, वहीं मुहावरेदार शैली (गहरी नींद में सोना, आकाश में उड़ना और धरती पर बसाना) का प्रयोग आकर्षक है। वीर रस से यह अंश अधिक गतिशील होकर ओजपूर्ण बन गया है।
(ii) प्रस्तुत पद्यांश का भाव-सौन्दर्य सरस और सहज शब्दों का है गहरी नींद में गीत गाकर जगाने का भाव न केवल अनूठा है अपित आत्मीयता से परिपूर्ण है।
गहरी नींद की सच्चाई को विश्वसनीयता के साथ बतलाने का ढंग रोचक होने के । साथ प्रेरक भी है। इससे कथन की सफलता को नकारा नहीं जा सकता है।

2. पद्यांश पर आधारित विषय-वस्त से सम्बन्धी प्रश्नोत्तर

प्रश्न
(i) कवि गीत गाकर किसे जगाना चाहता है?
(ii) आकाश में उड़ने के लिए कवि क्यों मना करता है?
उत्तर
(i) कवि गीत गाकर गहरी नींद में सोने वाले को जगाना चाहता है।
(ii) आकाश में उड़ने के लिए कवि मना करता है। यह इसलिए कि इससे जीवन की निरर्थकता सिद्ध होती है।

2. सुख नहीं यह, नींद में सपने संजोना,
दुख नहीं यह, शीश पर गुरू भार ढोना।
शूल तुम जिसको समझते वे अभी तक,
फूल में उसको बनाने आ रहा हूँ।
देखकर मँझधार को घबरा न जाना,
हाथ ले पतवार को घबरा न जाना।
मैं किनारे पर तुम्हें चकने न दूंगा,
पार में तुमको लगाने आ रहा हूँ।

शब्दार्थ-गुरूभार-भारीभार। शूल-काँटा (कठिनाई)। मझधार-बीच धारा।

प्रसंग-पूर्ववत् । इस पद्यांश में कवि ने कायर और आलसी मनुष्यों को प्रोत्साहित करते हुए कहा है कि

व्याख्या-हे आलसी, कायर मनुष्य! तुम्हें यह बात गाँठ बाँध लेनी चाहिए कि गहरी नींद में पड़े रहना किसी प्रकार से सुखद नहीं हो सकता है। दूसरे शब्दों में यह हर प्रकार से दुखद और हानिकर ही होगा। इस प्रकार दुःखद होगा कि यह सिर का एक बहुत बड़ा बोझ बन जायेगा। उसे ढो पाना निश्चय ही असम्भव होगा। अब तक तुमने जिसे फूल अर्थात् जीवन की कठिनता समझते आ रहे हो। उसे ही मैं फूल बनाने के लिए तुम्हारे पास आ रहा हूँ।

कवि का पुनः गहरी नींद में सोने वाले अर्थात् जीवन-संघर्ष से भागने वाले मनुष्य को समुत्साहित करते हुए कहना है कि तुम स्वयं को जीवन-सागर के मँझधार में पाकर घबड़ाओ नहीं, अपितु धैर्य और हिम्मत से काम लो। जीवन-सागर के मँझधार से निकलकर किनारे पर आने के लिए तुम धैर्य रूपी पतवार को अपने हाथ में संभाल लो। इस प्रकार जब तुम साहस करोगे तो मैं तुम्हें किनारे पर आने तक उत्साहित करते हुए किसी प्रकार से निराश नहीं होने दूंगा। इस प्रकार मैं तुम्हें तुम्हारे जीवन-सागर से पार लगाने के लिए ही तुम्हारे पास आ रहा हूँ।

विशेष-

  1. वीर रस का प्रवाह है।
  2. तुकान्त शब्दावली है।
  3. शैली उपदेशात्मक है।
  4. ‘नींद में सपने संजोना’, ‘फूल बनाना’, हाथ में पतवार लेना और पार लगाना मुहावरों के सटीक और सार्थक प्रयोग हैं।

1. पद्यांश पर आधारित काव्य-सौन्दर्य सम्बन्धी प्रश्नोत्तर

प्रश्न
(i) प्रस्तुत पयांश का काव्य-सौन्दर्य स्पष्ट कीजिए।
(ii) प्रस्तुत पयांश का भाक्-सौन्दर्य स्पष्ट कीजिए।
उत्तर
(i) प्रस्तुत पद्यांश को काव्य:विधान-स्वरूप शब्द-भाव-योजना से निखारने का प्रयास प्रशंसनीय कहा जा सकता है। ‘घबरा न जाना’ पुनरुक्ति प्रकाश अलंकार से अलंकृत यह पद्यांश कई मुहावरों के एकजुट आने से अधिक भावपूर्ण होकर सार्थकता में बदल गया है।
(ii) प्रस्तुत पद्यांश की भाव-योजना अपनी प्रभावमयता के फलस्वरूप रोचक और आकर्षक है। निराश और जीवन-संघर्ष के सामने घुटना टेकने वालों को सत्प्रेरित करने के विविध प्रयास प्रभावशाली रूप में हैं।

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2. पद्यांश पर आधारित विषय-वस्त से सम्बन्धी प्रश्नोत्तर

प्रश्न
(i) नींद में सपने संजोना क्यों नहीं सुखद है?
(ii) मँझधार में पड़ने पर क्या नहीं करना चाहिए और क्या करना चाहिए?
उत्तर-
(i) नींद में सपने संजोना सुखद नहीं है। यह इसलिए कि इससे दुखों का बोझ कम न होकर बहुत भारी हो जाता है। फिर उसे ढोना असम्भव-सा हो जाता है।
(ii) मँझधार में पड़ने पर घबड़ाना नहीं चाहिए। हाथ में पतवार लेकर किनारे पर आने के लिए पूरी शक्ति लगा देनी चाहिए।

3. तोड़ दो मन में कसी सब शृंखलाएँ
तोड़ दो मन में बसी संकीर्णताएँ।
बिन्दु बनकर मैं तुम्हें ढलने न दूंगा
सिन्धु बन तुमको उठाने आ रहा हूँ॥
तुम उठो, धरती उठे, नभ शिर उठाए,
तुम चलो गति में नई गति झनझनाए।
विपथ होकर मैं तुम्हें मुड़ने न दूंगा,
प्रगति के पथ पर बढ़ाने आ रहा हूँ॥

शब्दार्व-संकीर्णताएँ-तुच्छ विचार । श्रृंखलाएँ-कड़ियाँ। नभ-आकाश । शिर-मस्तक, सिर। विपथ-बुरा रास्ता। प्रगति-उन्नति।

प्रसंग-पूर्ववत् । इसमें कवि ने आलसी और निराश व्यक्ति को समुत्साहित करते हुए कहा है कि

व्याख्या-तुम अपने मन को हीन करने वाली विचारों की कड़ियों को खण्ड-खण्ड कर डालो। इसी प्रकार तुम अपने अन्दर के तुच्छ विचारों और हीन भावों का परित्याग कर दो। तुम्हें स्वयं को कम न समझते हुए समुद्र की तरह विशाल और असीमित शक्ति से भरपूर समझना चाहिए। अगर तुम ऐसा नहीं समझते हो तो मैं तुम्हें ऐसा समझने के भावों को तुम्हारे अन्दर से जगाऊँगा।

इस प्रकार तुम्हें एक बिन्दु के समान जीवन जीने की स्थिति में नहीं रहने देगा। मैं तो तुम्हें समुद्र की तरह जीने देने के लिए तुम्हारे अन्दर सोई हुई भावनाओं को जगाने के लिए तुम्हारे ही पास आ रहा हूँ। कवि का पुनः जीवन में हारे हुए और निराश व्यक्ति को समुत्साहित करते हुए कहना है कि तुम अब अपनी गहरी नींद से जग जाओ। तुम्हारी जागृति और चेतना से इस संसार में जागृति और चेतना आ जाएगी। सारा आसमान अपना मस्तक ऊंचा कर लेगा। तुम्हारे गतिशील होने से सब ओर गतिशीलता आ जाएगी। तुम्हें विकास के पथ पर आगे बढ़ाने के उद्देश्य से मैं तुम्हारे जीवन में हारने नहीं दूंगा। इस प्रकार मैं तुम्हें विकास के रास्ते पर निरंतर बढ़ाने के उद्देश्य से तुम्हारे पास ही आ रहा हूँ।

विशेष-

  1. भाषा में ओज और गति है।
  2. मुहावरों के प्रयोग सटीक हैं।
  3. शब्द-चयन प्रचलित रूप में है।
  4. वीर रस का प्रवाह है।

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1. पद्यांश पर आधारित काव्य-सौन्दर्य सम्बन्धी प्रश्नोत्तर

प्रश्न
(i) उपर्युक्त पयांश के काव्य-सौन्दर्य को स्पष्ट कीजिए।
(ii) उपर्युक्त पद्यांश के भाव-सौन्दर्य को स्पष्ट कीजिए।
उत्तर
(i) उपर्युक्त पद्यांश का काव्य-स्वरूप प्रचलित तत्सम शब्दावली से परिपुष्ट है। उसे रोचक और आकर्षक बनाने के लिए तुकान्त शब्दावली की योजना ने लय
और संगीत को प्रस्तुत करके भाववर्द्धक बना दिया है। वीर रस के प्रवाह-संचार से यह पद्यांश प्रेरक रूप में है।
(ii) उपर्युक्त पद्यांश का भाव-सौन्दर्य वीरता के भावों से प्रेरक रूप में है। निराश मनों को वीर रस से संचारित करने का प्रयास प्रशंसनीय है। भाव और अर्थ का सुन्दर मेल है।

2. पद्यांश पर आधारित विषय-वस्त से सम्बन्धी प्रश्नोत्तर

प्रश्न
(i) ‘शृंखलाओं’ से कवि का क्या आशय है?
(ii) ‘विपव’ से कवि का क्या तात्पर्य है?
उत्तर
(i) शृंखलाओं से कवि का आशय है हीन भावनाएँ।
(ii) ‘विपथ’ से कवि का तात्पर्य है-कुपथ। सन्मार्ग को छोड़कर दुखद रास्ते पर चलना।

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MP Board Class 9th Hindi Vasanti Solutions Chapter 10 न्यायमंत्री

MP Board Class 9th Hindi Vasanti Solutions Chapter 10 न्यायमंत्री (सुदर्शन)

न्यायमंत्री अभ्यास प्रश्न

न्यायमंत्री लघुत्तरीय प्रश्नोत्तर

प्रश्न 1.
शिशुपाल के घर आने वाला अतिथि कौन था? उसकी बातों से शिशुपाल क्यों नाराज हो गये?
उत्तर
शिशुपाल के घर आने वाला अतिथि एक परदेशी था। उसकी बातों से शिशुपाल नाराज हो गए, क्योंकि उसने उनके पुत्र को सेवक कहा था।

प्रश्न 2.
‘गोबर में फूल खिला हुआ है।’ यह वाक्य किसके लिए कहा गया है और क्यों ?
उत्तर
‘गोबर में फूल खिला हुआ है।’ यह वाक्य उस परदेशी अतिथि द्वारा शिशुपाल के लिए कहा गया है। यह इसलिए कि उसके युक्तियुक्त और शासन पद्धति का इतना विशाल ज्ञान उस छोटे-से गाँव के ऐसे व्यक्ति में होने की उसने कल्पना भी नहीं की थी।

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प्रश्न 3.
शिशुपाल महाराज अशोक के दरबार में जाने से क्यों घबरा रहे थे?
उत्तर
शिशुपाल महाराज अशोक के दरबार में जाने से घबरा रहे थे। यह इसलिए कि उनके मन में यह आशंका हो रही थी कि उनके शत्रओं ने महाराज से कोई शिकायत कर दी है। उन्हें हो सकता है कि प्राणदंड मिल जाए।

प्रश्न 4.
न्यायमंत्री को प्रहरी के हत्यारे का पता कैसे चला?
उत्तर
न्यायमंत्री को प्रहरी के हत्यारे का पता एक स्त्री के द्वारा गुप्त रूप से चला।

प्रश्न 5.
न्यायमंत्री ने महाराज को दंड किस तरह दिया?
उत्तर
न्यायमंत्री ने महाराज की सोने की मुर्ति को फाँसी पर लटकवाया और उनको चेतावनी देकर छोड़ दिया। इस प्रकार न्यायमंत्री ने महाराज को दंड दिया।

न्यायमंत्री दीर्घ उत्तरीय प्रश्नोत्तर

प्रश्न 1.
“शिशुपाल का न्याय अंपा और बहरा है।’ यह उक्ति किन संदर्भो में कही गई है? स्पष्ट कीजिए।
उत्तर
‘शिशुपाल का न्याय अंधा और बहरा है। यह उक्ति उन संदर्भो में कही गई है कि शिशुपाल ने न्यायमंत्री के अधिकार से पूरे पाटलीपुत्र नगर में न्याय और सप्रबंध की धूम मचा दी। उन्होंने चोर-डाकुओं को इस प्रकार वश में कर लिया था, जिस प्रकार बीन बजाकर सपेरा साँप को वश में कर लेता है। उन दिनों लोगबाग दरवाजे खुले छोड़ देते थे, फिर भी किसी की हानि नहीं होती थी। इस प्रकार शिशपाल का न्याय अंधा और बहरा था। जो न सूरत देखता था, न कोई सिफारिश सुनता था। वह तो केवल शिक्षाप्रद दंड ही देना जानता था।

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प्रश्न 2.
पाठ के आधार पर शिशुपाल के चरित्र की विशेषताएँ बताइए।
उत्तर
शिशुपाल के चरित्र में हमें निम्नलिखित विशेषताएँ दिखाई देती हैं
1. आतिथ्य सत्कार की भावना-शिशुपाल अपने गाँव का घोर दरिद्र ब्राह्मण था। उसकी जीविका थोड़ी-सी भूमि पर चलती थी। फिर भी एक परदेशी को द्वार पर खड़ा देखकर उसका मुख खिल गया। वह मुस्कुर.कर कहता है कि यह मेरा सौभाग्य है। आइए, पधारिए अतिथि के चरणों से मेरा चौका पवित्र हो जाएगा। इस प्रकार उसमें अतिथि-सत्कार की भावना दिखाई देती है।

2. सच्चा न्यायप्रिय-शिशुपाल ब्राह्मण को शासन-पद्धति का पूरा-पूरा ज्ञान था। सम्राट अशोक ने उसे न्यायमंत्री बना दिया। शिशुपाल का न्याय अंधा और बहरा था जो न सूरत देखता था और न सिफारिश मानता था। वह तो केवल दंड देना जानता था। उसने प्रहरी की हत्या के अपराध में सम्राट अशोक को भी दंडित किया। वह एक सच्चा न्यायी था।

3. निर्भीक और साहसी-शिशुपाल पाटलिपुत्र का न्यायमंत्री था। वह सम्राट अशोक से भी भयभीत नहीं होता था। जब सम्राट अशोक प्रहरी की हत्या के अपराध में पकड़े जाते हैं तो शिशुपाल उनके हाथ में बड़े साहस के साथ हथकड़ी डलवा देता है और निर्भीकता से सम्राट को दंडित करता है।

4. कर्तब्ध-परायण-शिशुपाल ने एक बार कहा था कि अवसर मिले तो दिखा हूँ कि न्याय किसे कहते हैं। मुझसे कोई अपराधी दंड से नहीं बचेगा। मैं न्याय का डंका बजाकर बता दूंगा। और शिशुपाल ने ऐसा ही करके दिखा दिया। प्रहरी की हत्या का पता उसने तीन दिन में निकाल लिया ! उसके न्याय के आगे न राजा बड़ा है और न रंक। वह राजा अशोक को प्रहरी की हत्या के अपराध में बंदी बनाता है और उसे दंडित भी करता है।

प्रश्न 3.
आपकी दृष्टि में न्यायमंत्री कैसा होना चाहिए? स्पष्ट कीजिए।
उत्तर
हमारी दृष्टि में न्यायमंत्री सच्चा और निष्पक्ष होना चाहिए। उसमें अपने कर्तव्य का बोध होना चाहिए और उसका पालन करने की दृढ़ता होनी चाहिए। उसका न्याय दोषी और अपराधी के प्रति कठोर और सीधा होना चाहिए। उसे दंड-विधान का ज्ञान होना चाहिए। उसका दंड शिक्षाप्रद और सुधारप्रद होना चाहिए।

प्रश्न 4.
अपराधी घोषित होने पर भी महाराज अशोक का हृदय क्यों प्रफुल्लित वा?
उत्तर
अपराधी घोषित होने पर भी महाराज अशोक का हदय प्रफुल्लित था। यह इसलिए कि उन्होंने अपने गुप्त वेश में शिशुपाल की जो दृढ़ता सुनी थी, उसने उसे कर दिखाया। इस प्रकार शिशुपाल के न्याय को सुनकर उन्होंने प्रफुल्लित हदय से यह विचार किया कि यह मनुष्य सोना है, जो अग्नि में पड़कर कुंदन हो गया। ऐसे मनुष्यों पर जातियाँ अभिमान करती हुई अपने तन-मन को निछावर करने के लिए तैयार हो जाती हैं।

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प्रश्न 5.
न्यायमंत्री की जगह यदि आप होते, तो किसी प्रकार का न्याय करते? लिखिए।
उत्तर
न्यायमंत्री की जगह यदि हम होते तो उचित-अनुचित का ध्यान रखकर न्याय करते। ‘राजा को ईश्वर माना गया है। ईश्वर ही दंड दे सकता है।’ इसे हम ध्यान में रखकर महाराज अशोक की मूर्ति को फाँसी पर लटकाए जाने का आदेश तो अवश्य देते, लेकिन उन्हें सम्मान देते, उन्हें सार्वजनिक रूप से चेतावनी नहीं देते।

प्रश्न 6.
आशय स्पष्ट कीजिए

(क) जिसका अंतःकरण कुढ़ रहा हो जिसके नेत्र आँसू बहा रहे हों, जिसका मस्तिष्क अपने आपे में नहीं, उसके होंठों पर हँसी ऐसी भयानक प्रतीत होती है, जैसे श्मशान में चाँदनी वरन् उससे भी अधिक।
(ख) उन्होंने चोर-डाकुओं को इस प्रकार वश में कर लिया था जिस प्रकार बीन बजाकर सपेरा सर्प को वश में कर लेता है।
उत्तर
उपर्युक्त कथन का आशय है कि शुष्क हृदय, शुष्क आँखों और अव्यवस्थित मन और मस्तिष्क में अचानक आशाओं को जगा देने से क्षणिक सुख का अनुभव अवश्य होता है। वह सुखद होकर भी भयानकता से बाहर नहीं दिखाई देता है। भाव यह है कि दुखमय जीवन में आने वाले सुखद क्षणों से पूरा जीवन हरा-भरा नहीं दिखाई देता है।

(ख) उपर्युक्त वाक्य का आशय यह है कि सुशासन और सुप्रबंध से अपराधियों के हौसले पस्त हो जाते हैं। जनता में प्रशासन के प्रति विश्वास बढ़ जाता है। भय और आतंक के पादल छंटने लगते हैं। चारों ओर अमन-चैन का माहौल बनने लगता है।

न्यायमंत्री भाषा-अध्ययन

1. वाक्य शुद्ध कीजिए
(क) मेरे को आपकी परीक्षा करना है।
(ख) मैं तुमही को जानमा हूँ।
(ग) हम लोग आपस में परस्पर हमेशा विचार विमर्श करने हैं।
(घ) मैं सोती नींद से उठ बैठा।
(ङ) कृपया उनका कार्य करने की कृपा करें।

2. दिए हुए शब्दों में से तत्सम, तद्भव शब्दों को छाँटकर लिखिए
सर्प, चरण, आँखें, रक्त, कठिन, अश्रु, अंधा, मृत्यु, आग, कदाचित, बातचीत, सफल, नींद, ग्राम।

3. निम्नलिखित शब्दों को पढ़कर उनका सही उच्चारण कीजिए
दृढ़-संकल्प, निर्विवाद, हतोत्साह, निस्तब्धता, आत्मोत्सर्ग।
उत्तर
1. शुद्ध वाक्य
(क) मुझे आपकी परीक्षा करनी है।
(ख) मैं तुम्हें जानता हूँ।
(ग) हम लोग आपस में हमेशा विचार-विमर्श करते हैं।
(घ) मैं नींद से उठ बैठा।
(ङ) उनका कार्य करने की कृपा करें।

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2. तत्सम शब्द तद्भव शब्द
सर्प – आँखें
चरण – कठिन
रक्त – अंधा
अश्रु – आग
मृत्यु – बातचीत
कदाचित – नींद
ग्राम – सफल।

3. निम्नलिखित शब्दों को पढ़कर उनका सही उच्चारण छात्र/छात्रा अपने अध्यापक/अध्यापिका की सहायता से करें
दृढ़-संकल्प, निर्विवाद, हतोत्साह, निस्तब्धता, आत्मोत्सर्ग।

न्यायमंत्री योग्यता-विस्तार

प्रश्न 1.
बदलते परिवेश में शिशुपाल का चरित्र कितना प्रासंगिक है? इस संबंध में अपने आस-पास के अन्य व्यक्तियों के बारे में जानकारी एकत्रित करें जिससे आप प्रभावित हैं।
उत्तर
उपर्युक्त प्रश्नों को छात्र/छात्रा अपने अध्यापक/अध्यापिका की सहायता से हल करें।

2. पाठ में आए शिशुपाल के संवार्दो को अभिनय के साथ कक्षा में प्रस्तुत कीजिए।
उत्तर
उपर्युक्त प्रश्नों को छात्र/छात्रा अपने अध्यापक/अध्यापिका की सहायता से हल करें।

3. सम्राट अशोक से संबंधित कुछ महत्त्वपूर्ण घटनाओं को एकत्र करें तश नाटिका या कहानी लिखें।
उत्तर
उपर्युक्त प्रश्नों को छात्र/छात्रा अपने अध्यापक/अध्यापिका की सहायता से हल करें।

न्यायमंत्री परीक्षापयोगी अन्य महत्त्वपूर्ण प्रश्नोत्तर

लघूत्तरीय प्रश्नोत्तर

प्रश्न 1.
शिशुपाल कौन था?
उत्तर
शिशुपाल बुद्ध गया नामक गाँव का सबसे अधिक निर्धन ब्राह्मण था। बाद में महाराज अशोक के दरबार में न्यायमंत्री बना।

प्रश्न 2.
अशोक कैसा था?
उत्तर
अशोक बहुत ही निष्ठुर और निर्दयी था। वह ब्राह्मणों और स्त्रियों को भी फाँसी पर चढ़ा दिया करता था।

प्रश्न 3.
अशोक ने शिशुपाल के न्याय की परीक्षा लेने के लिए क्या कहा?
उत्तर
अशोक ने शिशुपाल के न्याय की परीक्षा लेने के लिए कहा, “यह राजमुद्रा है, तुम कल प्रातःकाल से सूर्य की पहली किरण के साथ न्यायमंत्री समझे जाओगे। मैं देखूगा, तुम अपने-आपको किस प्रकार सफल शासक सिद्ध कर सकते हो?

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प्रश्न 4.
न्यायमंत्री निरुत्तर क्यों हो गए?
उत्तर
न्यायमंत्री ने जब अशोक को उसकी मुद्रा लौटाते हुए कहा कि वे यह अपनी वस्तु सँभाले। वह अपने गाँव वापिस जाएगा, तब अशोक ने कहा, “आपका साहस मैं कभी नहीं भूलूँगा। यह बोझ आप ही उठा सकते हैं। मुझे कोई दूसरा इस पद के योग्य दिखाई नहीं देता।” अशोक की इन बातों को सुनकर न्यायमंत्री निरुत्तर हो गए।

न्यायमंत्री दीर्घ उत्तरीय प्रश्नोत्तर

प्रश्न 1.
न्यायमंत्री के रूप में शिशुपाल ने राज्य में क्या व्यवस्था की थी?
उत्तर
न्यायमंत्री के रूप में शिशुपाल ने राज्य में व्यवस्था के लिए पुलिस और पहरेदारों को संगठित किया। पहरेदारों के कारण पहले तो अपराध होते ही नहीं थे। यदि अपराध हो जाए तो अपराधी को कठोर सजा मिलती थी। कुछ दिनों में सारे राज्य में शिशुपाल के न्याय की पताका फहरा उठी थी।

प्रश्न 2.
न्यायमंत्री ने अपनी कार्यकुशलता का परिचय किस प्रकार दिया?
उत्तर
सम्राट अशोक के बुलाने पर शिशुपाल सामने आए। महाराज ने पूछा-“घातक का पता लगा?” न्यायमंत्री ने कहा, “हाँ, लग गया।” न्यायमंत्री ने थोड़ी देर कुछ सोचा फिर दृढ़ संकल्प के साथ कहा, “मेरी आज्ञा है, सम्राट अशोक को गिरफ्तार कर लो।” इस पर अशोक क्रोध से लाल हो गए। उन्होंने ब्राह्मण से कहा-“ब्राह्मण! तुममें इतनी शक्ति है कि जो तुम मुझ तक बढ़ आए” किंतु शिशुपाल ने सम्राट अशोक की बात पर कोई ध्यान नहीं दिया। शिशुपाल ने फिर दोहराया, “मैं आज्ञा देता हूँ गिरफ्तार कर लो। यह घातक है। इसे मेरी अदालत में पेश करो।”

धनवीर ने अशोक को हथकड़ी लगा दी और शिशुपाल की अदालत में सम्राट अशोक को बंदी के रूप में पेश किया। शिशपाल ने धीरे से कहा, “सम्राट तुम पर एक पहरेदार की हत्या का अपराध है। तुम इसका क्या उत्तर देते हो?” सम्राट अशोक ने अपना अपराध स्वीकार कर लिया। परंतु उन्होंने उसे उद्दण्डता के कारण मारा था। शिशुपाल ने कहा, “अशोक! तुमने एक राजकर्मचारी की हत्या की है। मैं तुम्हारे वध की आज्ञा देता हूँ।”

प्रश्न 3.
लोग शिशुपाल के किस न्याय पर मुग्ध हो गए?
उत्तर
जब न्यायमंत्री ने खड़े होकर कहा, “महाशय! यह सच है कि एक राजकर्मचारी की हत्या की गई है। उसका दंड अवश्यंभावी है। परंतु शास्त्रों में राजा को ईश्वर माना गया है। उसे ईश्वर ही दंड दे सकता है। यह काम न्यायमंत्री की शक्ति के बाहर है, अतएव मैं आज्ञा देता हूँ कि महाराज को चेतावनी देकर छोड़ दिया जाए और उनकी मूर्ति फाँसी पर लटकाई जाए जिससे लोगों को शिक्षा मिले।”न्यायमंत्री का जय-जयकार हुआ। लोग इस न्याय पर मुग्ध हो गए।

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प्रश्न 4.
शिशुपाल और महाराज अशोक में तुम किसे श्रेष्ठ समझते हो और क्यों?
उत्तर
शिशुपाल और महाराज अशोक में हम शिशुपाल को श्रेष्ठ समझते हैं। यह इसलिए कि उसमें निष्पक्ष न्याय करने की योग्यता थी। वह अपराधी सिद्ध होने पर सम्राट अशोक को भी फाँसी की सजा देने से नहीं हिचकता है। वह परम न्यायी है। उसे न्याय के सिवाय और कुछ नहीं दिखाई देता है जबकि सम्राट अशोक न्याय के नाम पर क्रोधित हो जाते हैं। लेकिन वह निडर होकर अपने न्याय पर ही डटा रहता है।

प्रश्न 5.
सुदर्शन-लिखित कहानी ‘न्यायमंत्री’ का प्रतिपाय स्पष्ट कीजिए।
उत्तर
न्यायमंत्री’ शीर्षक कहानी महान कथाकार सुदर्शन की एक श्रेष्ठ और चर्चित कहानी है। इस कहानी में यह बतलाने का प्रयास किया गया है कि सम्राट अशोक के शासनकाल में शिशुपाल एक निर्धन ब्राह्मण था। इसके साथ ही वह एक न्यायप्रिय, निर्भीक तथा लोकप्रिय व्यक्ति भी था। शिशुपाल के यहाँ अतिथि के रूप में रहकर सम्राट अशोक ने उसकी उस अद्भुत योग्यता को परखा। उससे प्रभावित होकर उसे न्यायमंत्री के पद पर नियुक्त किया। उसने न्यायमंत्री बनते ही राज्य में सुख-शांति का वातावरण फैला दिया। अपने न्याय के बल पर उसने एक परिवार की रक्षा करते पहरेदार की हत्या के आरोप में सम्राट अशोक को ही दोषी सिद्ध कर दिया। फिर उन्हें मृत्युदंड के रूप में सजा सुना दिया। उसकी न्यायप्रियता और राज्यभक्ति वर्तमान समय में भी अनुकरणीय है।

न्यायमंत्री लेखक-परिचय

प्रश्न
श्री तुदर्शन का संक्षिप्त जीवन-परिचय देते हुए उनके साहित्य के महत्त्व पर प्रकाश झलिए।
उत्तर
श्री सुदर्शन प्रेमचंदकालीन कहानीकारों में एक प्रमुख कहानीकार हैं।

जीवन-परिचय-श्री सुदर्शन जी का असली नाम पंडित बदरीनाथ था। आपका जन्म सन् 1896 ई. में स्यालकोट में हुआ था। आपने हिंदी, अंग्रेजी, उर्दू जादि भाषाओं का सम्यक अध्ययन किया। आपकी प्रवृत्ति लेखन की ओर आरंभ से ही थी। प्रेमचंद की तरह आपने उर्दू के बाद हिंदी में कच्ची उम्र में ही लिखना शुरू किया था।

रचनाएँ-‘तीर्थ-यात्रा’, ‘पनघट’, ‘फूलवती’, ‘भाग्यचक्र’, ‘सिकंदर’ आदि आपकी लोकचर्चित रचनाएँ हैं। इसके अतिरिक्त आपने नाटक और बाल-साहित्य भी रचा है।

भाषा-शैली-श्री सुदर्शन जी की भाषा-शैली सरस और प्रवाहमयी है, आपकी भाषा शैली संबंधित निम्नलिखित विशेषताएँ हैं

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1. भाषा-श्री सुदर्शनजी की भाषा में उर्दू-फारसी और अरबी के प्रचलित शब्द स्थान-स्थान पर दिखाई देते हैं। उसमें जगह-जगह कहावतों और मुहावरों के भी प्रयोग हुए हैं। इससे आपकी भाषा सुबोध भाषा कही जा सकती है।

2. शैली-श्री सुदर्शन जी की शैली में बोधगम्यता नामक विशिष्ट गुण है। वह सर्वत्र रोचक और हदयस्पर्शी है। मार्मिकता उसकी प्रमुख पहचान है। स्थान-स्थान पर उद्धरणों और कथा-सूत्रों को प्रयुक्त करके विषय को स्पष्ट करने के प्रयास अधिक आकर्षक लगते हैं। महत्त्व-श्री सुदर्शनजी का स्थान मुंशी प्रेमचंद के बाद है ये उनके अनुवर्ती हैं, उर्दू से हिंदी में लिखने वाले आप मुंशी प्रेमचंद के बाद सर्वप्रमुख हैं। कथा-साहित्य में आपने प्रेमचंद के बाद अत्यधिक भूमिका निभाई है।

न्यायमंत्री कहानी का सारांश

प्रश्न
श्री सुदर्शन लिखित कहानी ‘न्यायमंत्री’ का तारांश अपने शब्दों में लिखिए।
उत्तर
श्री सुदर्शन लिखित कहानी न्यायमंत्री एक शिक्षाप्रद और प्रेरणादायक कहानी है। इस कहानी का सारांश इस प्रकार है आज से 2500 साल पहले बुद्ध गया नामक गाँव में एक बहुत गरीब शिशुपाल नामक ब्राह्मण रहता था। उसके यहाँ एक परदेशी रहा। उस परदेशी की शिशुपाल ने यथाशक्ति आदर-सत्कार किया। उससे वह परदेशी बहुत खुश था। उसने उसकी खूब प्रशंसा की। उससे उसने यह भी कहा-“मुझे ख्याल भी न था कि गोबर में फूल खिलाहुआ है। महाराज अशोक को पता लग जाए तो कोई बड़ी-सी ऊँची पदवी पर नियुक्त कर दें।”

शिशुपाल ने उस परदेशी की बातें सुनकर मुस्कुरा दिया। कुछ देर बाद उसने उस परदेशी से कहा, “आजकल के बढ़ रहे अन्याय को देखकर मेरा रक्त उबलने लगता है। अगर मुझे अवसर मिले तो कोई अन्याय नहीं होने दूंगा और कोई अपराधी दंड से नहीं बचेगा।” परदेशी ने हँसते हुए कहा, “यदि मैं अशोक होता तो आपकी इच्छा पूरी कर देता।” . दूसरे दिन महाराज अशोक ने जब शिशुपाल को दरबार में बुलाया तो लोगों ने अशोक की कठोरता-निर्दयता को याद कर यह समझ लिया कि अब शिशुपाल जीवित नहीं लौटेगा।

शिशुपाल अपने पुत्र-स्त्री को समझाकर पाटलीपुत्र पहुँचा तो उसके मन में तरह-तरह की आशका होने लगी। उसे यह भी आशंका हुई कि कहीं वह परदेशी ही हो, यह उसी की लगाई हुई हो। इस प्रकार की आशंकाओं से उसका कलेजा धड़कने लगा। उसी समय महाराज अशोक ने राजकीय ठाठ से कमरे में आकर उससे पूछा कि क्या उसने उसे पहचान लिया? उसने कहा कि उसे पता होता कि वही महाराज हैं, तो वह उतनी स्वतंत्रता से बात नहीं करता। महाराज ने उससे कहा कि उसने कहा था कि उसे अवसर दिया जाए तो वह न्याय का डंका बजा देगा। महाराज ने उससे आगे कहा कि इसके लिए अब उसे एक परीक्षा देनी होगी। कल प्रातः से वह न्यायमंत्री के रूप में कार्य करेगा। उसके अधीन पुलिस अधिकारी होंगे। उसका उत्तरदायित्व पाटलीपुत्र में शांति रखने का होगा। यह देखा जाएगा कि वह स्वयं को किस प्रकार सफल शासक सिद्ध करता है। एक माह बीतते ही न्यायमंत्री के रूप में शिशुपाल ने अपने कड़े शासन की चारों ओर धूम मचा दी। इससे नगर की दशा में आकाश-पाताल का अंतर पड़ गया।

एक रात को एक अमीर ने एक विशाल भवन के द्वार को खटखटाकर खुलवाना चाहा, लेकिन उसके अंदर से किसी स्त्री ने खोलने से मना कर दिया। उसने उस स्त्री को धमकाया तो उसने उससे कहा कि शिशुपाल का राज्य है। कोई किसी को तंग नहीं कर सकता। लेकिन उस अमीर ने उसकी एक न सुनी और तलवार निकालकर दरवाजे पर आक्रमण कर दिया। अचानक आकर एक पहरेदार ने उसका हाथ थामकर उसे फटकारा। पूछने पर उस पहरेदार ने उसे बताया कि उसे न्यायमंत्री ने नियुक्त किया है। उसने यह प्रण किया है कि उसके तन में जब तक प्राण और खून की अंतिम बूँद है, वह अपने कर्त्तव्य से पीछे नहीं हटेगा। इसलिए अगर इस समय महाराज अशोक भी आ जाएँ तो भी वह नहीं टलेगा। उस अमीर ने उसकी बातों को अनसुना कर उस पर तलवार लेकर झपटा। उसका सामना करते हुए वह पहरेदार मारा गया। उसकी लाश को एक ओर करके वह अमीर वहाँ से भाग निकला।

इस घटना को सुनकर सब हैरान थे कि शिशुपाल के शासन में ऐसी घटना! शिशु की नींद हराम हो गई। वे खाना-पीना सब भूलकर उस घातक का पता न लगा सके। महाराज उनसे बार-बार पूछते-“घातक पकड़ा गया…कब तक पकड़ा जाएगा।” न्यायमंत्री उन्हें तसल्ली देते-“जल्दी ही पकड़ लिया जाएगा।” एक दिन महाराज ने क्रोध में आकर यह चेतावनी दे दी, “तुम्हें तीन दिन की अवधि दी जाती है। यदि इस बीच घातक न पकड़ा गया तो तुम्हें फाँसी दे दी जाएगी।” इस समचार से पूरे नगर में

हलचल मच गई। तीसरे दिन आने पर शिशुपाल नगर के घने बाजार में घूम रहे थे। एक स्त्री ने उन्हें खिड़की से देख लिया। उसने उन्हें अंदर बलाकर उस बीती घटना के बारे में सब कुछ बता दिया। दूसरे दिन दरबार में आते ही महाराज अशोक के पछने पर शिशुपाल ने कहा कि घातक का पता लग गया है और वह घातक तुम हो। तुम पर पहरेदार की हत्या का अपराध है। तुम इसका क्या उत्तर देते हो? महाराज अशोक ने कहा कि वह उइंड था। इसलिए उन्होंने उसको मार डाला। न्यायमंत्री शिशुपाल ने उन्हें एक राजकर्मचारी का वध करने के अपराध में उनके वध की आज्ञा दी।

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उसे सुनकर लोगों ने शिशुपाल को गाली दी। लेकिन अशोक ने उन्हें शांत रहने का संकेत किया। अशोक ने उपेक्षापूर्वक कहा कि वे इस आज्ञा के विरुद्ध कछ नहीं बोल सकते। न्यायमंत्री के आदेश पर एक मनुष्य अशोक की सोने की मूर्ति लेकर उपस्थित हुआ। न्यायमंत्री ने खड़े होकर कहा, “महाशय! यह सच है कि राजकर्मचारी की हत्या की गई है। उसका दंड अवश्यंभावी है। परंतु शास्त्रों में राजा को ईश्वर माना गया है। ईश्वर ही दंड दे सकता है। यह काम न्यायमंत्री की शक्ति से बाहर है। अतएव मैं आज्ञा देता हूँ कि महाराज को चेतावनी देकर छोड़ दिया जाए और उनकी मूर्ति को फाँसी दे दी जाए, जिससे लोगों को शिक्षा मिले।” इसे सुनकर सभी ने न्यायमंत्री की जय-जयकार की।

रात को न्यायमंत्री ने राजमहल में जाकर अशोक को उसकी अंगठी और मद्रा देते हुए अपने गाँव वापिस जाने की बात कही। अशोक ने उसे सम्मानभरी आँखों से देखते हुए कहा कि अब यह संभव नहीं है। वह उसके साहस को नहीं भूल सकता है। दूसरा. इस पद के योग्य उसे कोई नहीं दिखाई देता।

न्यायमंत्री संदर्भ-प्रसंग सहित व्याख्या

गद्यांश की सप्रसंग व्याख्या, अर्थ-ग्रहण संबंधी व विषय-वस्तु पर आधारित प्रश्नोत्तर

1. महाराज ने सिर झुका दिया। इस समय उनके हृदय में ब्रह्मानंद का समुद्र लहरें मार रहा था। सोचते थे, यह मनुष्य स्वर्ण है, जो अग्नि में पड़कर कुंदन हो गया। कहता था मेरा न्याय अपनी पूम मचा देगा, यह वचन झूठा न था। इसने अपने कहने की लाज रख ली है। ऐसे ही मनुष्य होते हैं जिन पर जातियाँ अभिमान करती हैं और जिन पर अपना तन-मन निष्ठावर करने को उद्धृत हो जाती हैं।

शब्दार्थ-ब्रह्मानंद-ब्रह्म का आनंद । लाज-इज्जत। निछावर-बलिदान।

संदर्भ-प्रस्तुत गद्यांश महाकथाकार श्री सुदर्शन द्वारा लिखित कहानी ‘न्यायमंत्री’

प्रसंग-इस गद्यांश में कहानीकार ने इस तथ्य पर प्रकाश डालना चाहा है कि जब शिशुपाल ने अपराधी का पता लगा लिया और यह पाया कि अपराधी स्वयं सम्राट अशोक ही हैं तो शिशुपाल ने अपराधी होने के कारण उन्हें फाँसी की सजा दे दी। इस पर सम्राट अशोक की क्या प्रतिक्रिया हुई।

व्याख्या-जब फाँसी की सजा को न्यायमंत्री शिशुपाल ने सुनाया तब सम्राट अशोक का सिर झुक गया। उस समय उनके हृदय में स्वर्ग के आनंद की लहर उठ रही थी। ऐसा इसलिए कि उन्हें अपने एक सच्चे और निर्भीक न्यायमंत्री का न्याय देखकर आनंद आ रहा था। वे मन-ही-मन सोच रहे थे कि शिशुपाल वास्तव में सच्चा स्वर्ण-मानव था जो कत्र्तव्यरूपी अग्नि में पड़कर शुद्ध हो गया था। वह कहा करता था कि उसके न्याय की धूम मचेगी यह बात निःसंदेह सच ही निकली। उसने जो कुछ कहा था उसको पूरा कर दिया। शिशुपाल जैसे मनुष्य जो सच्चे और साहसी होते हैं उन पर आने वाली पीढ़ियाँ गर्व करती हैं और ऐसे ही लोगों पर अपना तन-मन-धन न्यौछावर करने के लिए वे तत्पर भी हो उठती हैं।

विशेष-

  1. सत्य और निष्पक्ष न्याय के महत्त्व को प्रदर्शित किया गया है।
  2. भाषा सरल और स्पष्ट है।
  3. ‘धूम मचाना’ मुहावरे का सार्थक प्रयोग है।
  4.  शैली सुबोध है।
  5. संपूर्ण अंश प्रेरणादायक है।

1. गद्यांश पर आधारित अर्थग्रहण संबंधी प्रश्नोत्तर

प्रश्न
(i) महाराज ने सिर क्यों झुका लिया?
(ii) महाराज के हृदय में ब्रह्मानंद का समुद्र लहरें क्यों मार रहा था? .
उत्तर
(i) महाराज ने सिर झुका लिया। यह इसलिए कि उन्हें न्यायमंत्री शिशुपाल ने अपराधी सिद्ध कर दिया था। उसे सिर झुकाकर स्वीकार कर लेना उन्होंने अपना कर्तव्य समझ लिया था।
(ii) महाराज के हृदय में ब्रह्मानंद का समुद्र लहरें मार रहा था। यह इसलिए कि उनसे शिशुपाल ने कहा था कि उसका न्याय धूम मचा देगा तो उसने आज सचमुच यह कर दिखाया है। इस प्रकार उसने उनको झूठे वचन न देकर उनके विश्वास को कायम रखा था।

2. गद्यांश पर आधारित विषय-वस्त से संबंधित प्रश्नोत्तर

प्रश्न
(i) जातियाँ किन पर अभिमान कर अपना तन-मन निछावर करने को उद्यत हो जाती हैं?
(ii) उपर्युक्त गयांश का मुख्य भाव क्या है?
उत्तर
(i) जातियाँ कथनी-करनी में अंतर न रखने वालों पर अपना तन-मन निछावर करने को उद्यत हो जाती हैं।
(ii) उपर्युक्त गद्यांश का मुख्य भाव है-किसी को दिए गए वचन को झूठा न होने देना। किसी भी परिस्थिति में अपने कहने की लाज रखना।

MP Board Class 9th Hindi Solutions

MP Board Class 9th Maths Solutions Chapter 2 Polynomials Ex 2.1

MP Board Class 9th Maths Solutions Chapter 2 Polynomials Ex 2.1

Question 1.
Which of the following expressions are polynomials in one variable and which are not? State reasons for your answer.

  1. 4x2 – 3x + 7
  2. y2 + √2
  3. 3√t + t√2
  4. y + \(\frac{2}{y}\)
  5. x10 + y3 + t50.

Solution:
1. 4x2 – 3x + 7
This expression is a polynomial in one variable .r because in the expression there is only one variable (x) and all the indices of x are whole numbers.

2. y2 + √2
This expression is a polynomial in one variable y because in the expression there is only one variable (y) and all the indices of y are whole numbers.

3. 3√t + t√2
This expression is not a polynomial because in the term 3√t, the exponent of t is \(\frac{1}{2}\), which is not a whole number.

4. y + \(\frac{2}{y}\)
This expression is not a polynomial because in the term \(\frac{2}{y}\) the exponent of y is (-1) which is not a whole number.

5. x10 + y3 + t50
This expression is not a polynomial in one variable because in the expression, three variables (x, y and t) occur.

Question 2.
Write the coefficients of x2 in each of the following:

  1. 2 + x2 + x
  2. 2 – x2 + x3
  3. \(\frac{π}{2}\)x2 + x
  4. \(\sqrt{2x}\) – 1

Solution:
1. 2 + x2 + x
Coefficient of x2 = 1

2. 2 – x2 + x3
Coefficient of x2 = – 1

3. \(\frac{π}{2}\)x2 + x
Coefficient of x2 = \(\frac{π}{2}\)

4. \(\sqrt{2x}\) – 1
Coefficient of x2 = 0.

Question 3.
Give one example each of a binomial of degree 35, and of a monomial of degree 100.
Solution:
One example of a binomial of degree 35 is 3x35 – 4.
One example of a monomial of degree 100 is √2y100

Question 4.
Write the degree of each of the following polynomials:

  1. 5x3 + 4x2 + 7x
  2. 4 – y2
  3. 5x3 – √7
  4. 3

Solution:
1. 5x3 + 4x2 + 7x
Term with the highest power of x = 5x3
Exponent of x in this term = 3
∴ Degree of this polynomial = 3.

2. 4 – y2
Term with the highest power of y = – y2
Exponent of y in this term = 2
∴ Degree of this polynomial = 2.

3. 5t – √7
Term with the highest power of t = 5t
Exponent of t in this term = 1
∴ Degree of this polynomial = 1.

4. 3
It is a non-zero constant. So the degree of this polynomial is zero.

Question 5.
Classify the following as linear, quadratic and cubic polynomials:

  1. x2 + x
  2. x – x3
  3. y + y2 + 4
  4. 1 + x
  5. 3t
  6. r2
  7. 7x3

Solution:

  1. Quadratic
  2. Cubic
  3. Quadratic
  4. Linear
  5. Linear
  6. Quadratic
  7. Cubic.

Zero’s of a Polynomial:
1. A zero of a polynomial p(x) is a number c such that p(c) = 0. Here p(x) = 0 is a polynomial equation and c is the root of the polynomial equation.

2. A non-zero constant polynomial has no zero. Every real number is a zero of the zero polynomial.

Some Observations:

  1. A zero of a polynomial need not be 0.
  2. 0 may be a zero of a polynomial.
  3. Every linear polynomial has one and only one zero.
  4. A polynomial can have more than one zero.

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MP Board Class 9th Maths Solutions Chapter 1 Number Systems Ex 1.6

MP Board Class 9th Maths Solutions Chapter 1 Number Systems Ex 1.6

Question 1.
find:

  1. 64\(\frac{1}{2}\)
  2. 32\(\frac{1}{5}\)
  3. 125\(\frac{1}{3}\)

Solution:

  1. 64\(\frac{1}{2}\) = (82)\(\frac{1}{2}\)
  2. 32\(\frac{1}{5}\) = (25)\(\frac{1}{5}\)
  3. 125\(\frac{1}{3}\) =(5)3x\(\frac{1}{2}\) = 5

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Question 2.
Find:

  1. 9\(\frac{3}{2}\)
  2. 32\(\frac{1}{5}\)
  3. 16\(\frac{3}{4}\)
  4. 125\(\frac{-1}{3}\)

Solution:

  1. 9\(\frac{3}{2}\) = (32)\(\frac{3}{2}\)
  2. 32\(\frac{2}{2}\) = (25)\(\frac{2}{5}\)
  3. 16\(\frac{3}{4}\) = (24)\(\frac{3}{4}\) = (2)4x\(\frac{3}{4}\) = (2)3 = 8
  4. 125\(\frac{1}{3}\) = (53)\(\frac{-1}{3}\) = (5) 3x\(\frac{-1}{3}\) = (5)-1 = \(\frac{3}{2}\)

Question 3.
Simplify:
MP Board Class 9th Maths Solutions Chapter 1 Number Systems Ex 1.6 img-1
Solution:
MP Board Class 9th Maths Solutions Chapter 1 Number Systems Ex 1.6 img-2

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MP Board Class 9th Hindi Vasanti Solutions Chapter 9 मैं अमर शहीदों का चारण

MP Board Class 9th Hindi Vasanti Solutions Chapter 9 मैं अमर शहीदों का चारण (श्री कृष्ण सरल)

मैं अमर शहीदों का चारण अभ्यास-प्रश्न

मैं अमर शहीदों का चारण लघूत्तरीय प्रश्नोत्तर

प्रश्न 1.
कवि चारण बनने की कामना क्यों करता है।
उत्तर
कवि चारण बनने की कामना करता है, क्योंकि वह अमर शहीदों के अद्भुत त्याग-बलिदान से बहुत अधिक प्रभावित है।

प्रश्न 2.
इस कविता में कवि किसका कर्ज चुकाना चाहता है?
उत्तर
इस कविता में कवि अपने राष्ट्र का कर्ज चुकाना चाहता है?

प्रश्न 3.
आजादी प्राप्त करने में शहीदों का क्या योगदान रहा? स्पष्ट कीजिए।
उत्तर
आजादी प्राप्त करने में शहीदों का विशेष ही नहीं, अपितु सर्वाधिक योगदान रहा। उन्होंने आजादी के लिए अपना सब कुछ निछावर कर दिया।

मैं अमर शहीदों का चारण दीर्घ उत्तरीय प्रश्नोत्तर

प्रश्न 1.
शहीदों का नाम गौरव के साथ क्यों लिया जाता है?
उत्तर
शहीदों का नाम गौरव के साथ लिया जाता है। यह इसलिए कि उन्होंने स्वतंत्रता-संग्राम में बढ़-चढ़कर भाग लिया था। उन्होंने अपने जीवन में आने वाली अनेक प्रकार की सुख-सुविधाओं को त्याग कर अपनी मातृभूमि के आँसुओं को पोंछने के लिए अनेक तरह के कष्टों को सहा। अंत में उन्होंने अपने प्राणों की बाजी लगा दी।

प्रश्न 2.
धरती में मस्तक बोने का क्या तात्पर्य है?
उत्तर
धरती में मस्तक बोने का तात्पर्य है-अपने-आपको निछावर कर देना। हमारे देश के अमर शहीदों ने अपनी मातृभूमि की आजादी के लिए अपने तन-मन-धन आदि सब कुछ को न्यौछावर कर दिया।

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प्रश्न 3.
माँ के आँसू देखकर शहीदों ने किस पब को अपनाया?
उत्तर
माँ के आँसू देखकर शहीदों ने अपने जीवन में आई हुई सरस फुहारों को लौटा दिया। उन्होंने काँटों को चुन लिया। इस प्रकार उन्होंने अपने जीवन की रंगीन बहारों को लौटाकर स्वतंत्रता-संग्राम में बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया।

प्रश्न 4.
‘जो कर्ज राष्ट्र ने……………है’ इस पंक्ति का आशय स्पष्ट कीजिए।
उत्तर
जो ‘कर्ज राष्ट्र ने….है’ इस पक्ति का आशय है-कवि अपने राष्ट्र के प्रति वफादार है। इसलिए वह राष्ट्र की आजादी के लिए अपना सब कुछ न्यौछावर कर देने वालों अमर शहीदों का चारण बनकर उनकी यशस्वी गौरव-गाथा का गान करते हुए नहीं थकता है। इसे वह अपनी मातृभूमि के प्रति पवित्र कर्त्तव्य समझता-मानता है।

प्रश्न 5.
कवि ने किस जीवन को श्रेष्ठ माना है और क्यों?
उत्तर
कवि ने देश के लिए समर्पित जीवन को श्रेष्ठ माना है। यह इसलिए कि किसी भी देश के निवासियों का यह पवित्र कर्त्तव्य है। इसका निर्वाह करके ही कोई देशवासी अपने देश के इस ऋण-भार से मुक्त हो सकता है।

मैं अमर शहीदों का चारण भाषा-अध्ययन/काव्य-सौंदर्य

प्रश्न 1.
‘उनने धरती में मस्तक बोए हैं’ इस पंक्ति में प्रतीकात्मकता है। प्रतीक के माध्यम से शहीदों की वीरता का यशोगान किया गया है। इसी तरह की अन्य प्रतीकात्मक पंक्तियाँ लिखिए।
2. यह कविता वीर रस से ओत-प्रोत है। इसी तरह वीर रस की कोई अन्य पंक्तियाँ लिखिए।
उत्तर

  1. उनकी लाशों पर चलकर आजादी आई है।
  2. हिंदुस्तान आज जिंदा उनकी कुर्बानी से।
  3. वे अगर न होते, तो भारत मुर्दो का देश कहा जाता।
  4. दाग गुलामी के उनके लोहू से धोए हैं।
  5. माँ के अर्जन हित फूल नहीं, वे निज मस्तक लेकर दौड़े।
  6. भारत का खून नहीं पतला, वे खून बहाकर दिखा गए।
  7. इस प्रश्न को छात्र/छात्रा स्वयं हल करें।

मैं अमर शहीदों का चारण योग्यता-विस्तार

प्रश्न 1.
चंद्रशेखर आजाद की जन्म शताब्दी कब मनाई गई? अपने शिक्षक से जानकारी प्राप्त करें तवा आजादी पर केंद्रित कविता याद करें।
उत्तर
उपर्युक्त प्रश्नों को छात्र/छात्रा अपने अध्यापक/अध्यापिका की सहायता से हल करें।

2. श्रीकृष्ण ‘सरल’ के जीवन की घटनाओं को एकत्र कर एक संक्षिप्त जीवनी लिखिए।
उत्तर
उपर्युक्त प्रश्नों को छात्र/छात्रा अपने अध्यापक अध्यापिका की सहायता से हल करें।

मैं अमर शहीदों का चारण परीक्षोपयोगी अन्य महत्त्वपूर्ण प्रश्नोत्तर

लघूत्तरीय प्रश्नोत्तर

प्रश्न 1.
कवि’चारण बनकर क्या करता है?
उत्तर
कवि चारण बनकर अमर शहीदों का यशगान करता है।

प्रश्न 2.
अगर अमर शहीद न होते तो क्या होता?
उत्तर
अगर अमीर शहीद न होते तो हमारा देश मुर्दो का देश कहा जाता। इससे हमारा जीवन न सहने योग्य एक बोझ बनकर रह जाता।

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प्रश्न 3.
अपनी मातृभूमि की अर्चना अमर शहीदों ने किससे की?
उत्तर
अपनी मातृभूमि की अर्चना अमर शहीदों ने फूल से नहीं की, अपितु अपने मस्तक को देकर की, अर्थात् अपने प्राणों की आहुति देकर की।

मैं अमर शहीदों का चारण दीर्घ उत्तरीय प्रश्नोत्तर

प्रश्न 1.
कवि के अनुसार क्या सच है?
उत्तर
कवि के अनुसार सच है

  1. हम लोगों ने शहीदों की यादों को दफना दिया है, अर्थात् शहीदों को भुला दिया है।
  2. उनके ही त्याग-बलिदानों से हमने आजादी हासिल की है।
  3. आज हिंदुस्तान उन्हीं की कुर्बानी से जिंदा है।
  4. आज हम उनके ही बलिदान से अपना मस्तक ऊँचा किए हुए हैं।
  5. हम गुलामी के दाग उनके ही प्राण निछावर से मिटा सके हैं।

प्रश्न 2.
अमर शहीदों के जीवन में क्या-क्या सुख-आनंद आए थे? उनको उन्होंने क्या किया?
उत्तर
अमर शहीदों के जीवन में रंगीन-बहारें, सपने के समान निधियाँ, सरस फुहारें आदि सुख-आनंद आए थे। उनको उन्होंने अपनी मातृभूमि के आँसुओं को देखकर वापस कर दिया। इस प्रकार उन्होंने अपने सभी प्रकार के सुखों को अपनी मातृभूमि की आजादी के लिए न्यौछावर कर दिए।

प्रश्न 3.
‘मैं अमर शहीदों का चारण’ कविता का प्रतिपाय स्पष्ट कीजिए।
उत्तर
श्री श्रीकृष्ण ‘सरल’ विरचित कविता ‘मैं अमर शहीदों का चारण’ एक प्रेरणादायक कविता है। इसमें श्री ‘सरल’ ने अपनी ओजपूर्ण भावधारा को भक्तिरस से भर दिया है। इस कविता में उन्होंने स्वयं को ‘अमर शहीदों का चारण’ कहा है। फिर देश के लिए अपने प्राणों की आहुति देने वाले वीर शहीदों के गौरवपूर्ण अतीत का चित्रण कर उनका यशोगान किया है। उन्होंने यह सुस्पष्ट किया है कि स्वतंत्रता संग्राम में इन वीरों ने फूलों के मार्ग को त्यागकर काँटों से भरे रास्ते का वरण किया, यही नहीं उन्होंने भारत माँ की अर्चना में सहर्ष अपना मस्तक समर्पित कर दिया। फलस्वरूप ऐसे वीर शहीद इतिहास में अमर होकर जन-जन के लिए प्रेरणादायी हो गए।

मैं अमर शहीदों का चारण कवि-परिचय

प्रश्न
श्री श्रीकृष्ण ‘सरल’ का संक्षिप्त जीवन-परिचय देते हुए उनके साहित्य के महत्त्व पर प्रकाश डालिए।
उत्तर
भारतीय स्वाधीनता सेनानियों और क्रांतिकारियों का यशगान करने वाले कवियों में श्रीकृष्ण ‘सरल’ का नाम अत्यंत लोकप्रिय है। शहीदों के प्रति श्रद्धा-भाव रखने और प्राचीन भारतीय सभ्यता के अमर-गायक श्रीकृष्ण ‘सरल’ अत्यधिक प्रसिद्ध कवि के रूप में प्रतिष्ठित हैं।

जीवन-परिचय-कविवर श्रीकृष्ण ‘सरल’ का जन्म मध्य प्रदेश के गुना जिलान्तर्गत अशोक नगर में 1 जनवरी 1919 को हुआ था। आपकी प्रारंभिक शिक्षा ग्रामीण वातावरण में ही हुई। आपका बालस्वरूप अत्यंत स्वाभिमानी और स्वाध्यायी था। आपने अपने स्वाध्याय के द्वारा कई परीक्षाओं को अच्छे अंकों से उत्तीर्ण कर लिया। शिक्षा ग्रहण करने के उपरांत आपने अध्यापन क्षेत्र में प्रवेश लिया। इस अध्यापन-वृत्ति से आप आजीवन संबद्ध रहे। इसे आपने अत्यंत सफलतापूर्वक निभाया। सन् 1976 में आप शिक्षा महाविद्यालय उज्जैन से सेवा-निवृत्त हुए। तब से लेकर आज तक आप स्वतंत्र रूप से लेखन-कार्य में व्यस्त हैं
रचनाएँ-श्रीकृष्ण ‘सरल’ ने काव्य और गद्य दोनों पर ही अपना समानाधिकार दिखाया है। आपकी रचनाएँ निम्नलिखित हैं

1. महाकाव्य-

  • भगत सिंह
  • चन्द्रशेखर आजाद
  • सुभाष चन्द्र बोस

2. काव्य-संकलन-

  • मुक्तिगान
  • स्मृति-पूजा।

3. बाल-साहित्य-बच्चों की फुलवारी।
4. गय-ग्रंथ-संसार की प्राचीन समस्याएँ, सभाष-दर्शन आदि।

भाषा-शैली-श्रीकृष्ण ‘सरल’ की भाषा उसके नाम के अनुरूप ही है। दूसरे शब्दों में उनकी भाषा सरल, सुबोध और सुस्पष्ट भाषा है। उसमें तद्भव और देशज शब्दावली की प्रधानता है। इस प्रकार की भाषा से भावाभिव्यक्ति को स्पष्ट होने में कोई कठिनाई नहीं दिखाई देती। श्रीकृष्ण ‘सरल’ की शैली ओजमयी और प्रौढ़मयी है। वह अधिक सशक्त, पुष्ट और सबल है। गंभीर-से गंभीर विषयों को अलंकृत शैली में प्रस्तुत करने की विशेषता प्रकट करने वाले श्रीकृष्ण ‘सरल’ में भाषा-शैली की प्रचुर क्षमता और योग्यता है।

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व्यक्तित्व-श्रीकृष्ण ‘सरल’ का व्यक्तित्व देशभक्त और क्रांतिकारी व्यक्तित्व है। उनके व्यक्तित्व का दूसरा पक्ष है भारतीय अतीत के प्रति आस्थावान और श्रद्धावान व्यक्तित्व । इन दोनों प्रकार के व्यक्तित्त्व को जोड़कर एक पूरा और सफल व्यक्तित्व बना है-सफल और परिपक्व रचनाशील व्यक्तित्व । इस तरह से श्रीकृष्ण ‘सरल’ का व्यक्तित्व एक युगीन व्यक्तित्व सिद्ध होता है।

महत्त्व-श्रीकृष्ण ‘सरल’ का राष्ट्रीय विचार प्रधान रचनाकारों में विशिष्ट स्थान है। अतीत को सरेरक रूप में प्रस्तुत करने वाले साहित्यकारों में भी उनका स्थान सर्वोच्च है। भारतीय संस्कृति का महत्त्वांकन करने में जितनी बड़ी सफलता आपको मिली है। यह अन्यत्र कम ही दिखाई देती है।

मैं अमर शहीदों का चारण कविता का सारांश

प्रश्न
श्री श्रीकृष्ण ‘सरल’-विरचित कविता ‘मैं अमर शहीदों का चारण’ का सारांश अपने शब्दों में लिखिए।
उत्तर
श्री श्रीकृष्ण ‘सरल’ विरचित कविता ‘मैं अमर शहीदों का चारण’ एक प्रेरक और भावों को जगाने वाली कविता है। इस कविता का सारांश इस प्रकार है कवि अमर शहीदों के प्रति अपना श्रद्धा-सुमन अर्पित करते हुए कहता है कि वह अमर शहीदों के यश का गायन करता है। इससे वह अपने राष्ट्र के कर्ज-पार से मुक्त’ हुआ करता है। इस सच्चाई को कोई अस्वीकार नहीं कर सकता है कि हमने देश की आजादी के लिए अपना सब कुछ कुर्बान कर देने वाले वीर बलिदानों को मुला दिया है। लेकिन आज देश उन्हीं के प्राण न्यौछावर से स्वतंत्र है। अगर वे नहीं होते तो हम आजाद नहीं होते और गुलामी के बंधनों में पड़े-पड़े छटपटाते रहते। इसलिए वह (कवि) आज की पीढ़ी के अंदर उन अमर शहीदों के प्रति सच्चे श्रद्धाभावों को जगाने का प्रयत्न किया करता है। उन्हें याद करते हुए हमें यह अच्छी तरह से जानना चाहिए कि उन अमर शहीदों ने अपनी मातृभूमि के आँसुओं को देख करके अपने सुखों का परित्याग कर दिया और उसके लिए अपने प्राणों की बाजी लगा दी। ऐसा करते हुए उन्होंने कोई लम्बे-चौड़े वादे नहीं किए। वे अपनी मातृभूमि की पूजा-अर्चना के लिए फूलों के स्थान पर अपने मस्तक ही लेकर आगे बढ़े थे।

मैं अमर शहीदों का चारण संदर्भ-प्रसंग सहित व्याख्या

पदों की सप्रसंग व्याख्या, काव्य-सौंदर्य व विषय-वस्त पर आधारित प्रश्नोत्तर

1. मैं अमर शहीदों का चारण, उनके यश गाया करता है
जो कर्ज राष्ट्र से खाया है, मैं उसे चुकाया करता हूँ।
यह सच है, बाद शहीदों की, हम लोगों ने दफनाई है,
यह सच है, उनकी लाशों पर चलकर आजादी आई है।
यह सच है, हिंदुस्तान आज जिंदा उनकी कुर्बानी से,
यह सच, अपना मस्तक ऊँचा उनकी बलिदान कहानी से

शब्दार्च-चारण-भाट, यश गान करने वाला। दफनाई-भुला दी। लाश-पलिदानों। कुर्बानी-बलिदान।

प्रसंग-यह पद हमारी पाठ्य-पुस्तक ‘वासंती-हिंदी सामान्य’ में संकलित तथा श्री श्रीकृष्ण ‘सरल’-विरिचत कविता ‘मैं अमर शहीदों का चारण से है। इसमें कवि ने देश की आजादी के लिए अपने प्राणों का बलिदान करने वालों के प्रति अपने श्रद्धा-भावों को प्रकट करते हुए कहा है कि

व्याख्या-वह अपने देश की आजादी के लिए मर-मिटने वाले अमर शहीदों का चारण है। वह उनके यश का गीत हमेशा गाया करता है। इससे वह अपने सष्ट्र के ऋण-भार से मुक्त हुआ करता है।

कवि का पुनः कहना है कि इस सच्चाई को कोई भी अस्वीकार नहीं कर सकता है कि जिन अमर शहीद के बदौलत हमारे देश को एक लंबी गुलामी के बाद आजादी मिली है, उन्हें आज हम देशवासी लगभग भुला दिए हैं। यह भी एक सच्चाई है कि उन शहीदों के सब कुछ न्यौछावर कर देने और उनके बलिदानों से ही हम आजादी को हासिल किए हैं। यह भी एक बड़ी सच्चाई है कि उन अमर शहीदों के बलिदानों के बदौलत ही आज हमारा देश अपनी पहचान बढ़ा रहा है और अपनी शक्ति-संपन्नता का परिचय दे रहा है। यह भी अपने आप में बहुत बड़ी सच्चाई है कि उन अमर शहीदों के त्याग और बलिदान के कारण ही हमारा यह भारत देशबड़े गर्व से अपना सिर उठाए हुआ अपना महत्त्व क्तला रहा है।

विशेष-

  1. भाषा हिन्दी-उर्दू के सरल शब्दों की है।
  2. शैली वर्णनात्मक है।
  3. वीर रस का प्रवाह है।
  4. यह पद्यांश प्रेरक रूप में है।

1. पद पर आधारित काव्य-सौंदर्य संबंधी प्रश्नोत्तर

प्रश्न
(i) उपर्युक्त पद्यांश के काव्य-सौंदर्य पर प्रकाश डालिए।
(ii) उपर्युक्त पयांश के भाव-सौंदर्य पर प्रकाश डालिए।
उत्तर
(i) उपर्युक्त पद्यांश में यह सच है कि पुनरावृत्ति से पुनरुक्ति प्रकाश अलंकार का चमत्कार भक्ति रस के प्रवाह से गतिशील बनाकर भाववर्द्धक है। तुकांत शब्दावली की योजना से प्रस्तुत पद्यांश का सौंदर्य बढ़ गया है।
(ii) उपर्युक्त पद्यांश का भाव-सौंदर्य मिश्रित भाव और भाषा के प्रयोग से और कथन की स्वाभाविकता-सरलता रोचक रूप में प्रस्तुत हुआ है। इस प्रकार यह प्रेरक और मर्मस्पर्शी होने के साथ-साथ अनूठा भी कहा जा सकता है।

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2. पद पर आधारित विषय-वस्त से संबंधित प्रश्नोत्तर

प्रश्न
(i) आज देशवासियों ने शहीदों के प्रति क्या अपराध किया है?
(ii) शहीदों की कुर्बानी का क्या फल मिला?
उत्तर
(i) आज देशवासियों ने शहीदों के प्रति यह अपराध किया है कि उन्होंने शहीदों की यादों को भुला दिया है।
(ii) शहीदों की कुर्बानी का फल यह मिला कि उससे ही हमने आजादी पाई है। उनकी ही कुर्बानी से आज यह हमारा देश
आत्मनिर्भरता का मस्तक ऊँचा किया है।

2. ये अगर न होते, तो भारत मुदों का देश कहा जाता,
जीवन ऐसा बोझा होता, जो हमसे नहीं सहा जाता।
यह सच है दाग गुलामी के उनके लोहू से धोए हैं,
हम लोग बीज बोते, उनने घरती में मस्तक बोए हैं।

शब्दार्थ-मुर्दो-बेजानों। बोझा-वजन, भार। दाग-दोष, कलंक। लोहू-खून।

प्रसंग-पूर्ववत् । इसमें कवि ने देश के अमर शहीदों का महत्त्वांकन करते हुए कहा है कि

व्याख्या-अगर हमारे देश की आजादी के लिए अपना सब कुछ त्याग-बलिदान करने वाले हमारे अमर शहीद न होते, तो देश गुलामी के बंधन में बँधा रहता। उसे मुर्दा समझकर उस पर बाहरी शासक अर्थात् अंग्रेजी सत्ता अपना शासन करती। फलस्वरूप प्रत्येक देशवासी की जिंदगी एक ऐसा बोझ बनकर रह जाती, जिसे सहना बड़ा ही असंभव-सा हो जाता। अगर हम अपने देश के अमर शहीदों को गहराई से समझने की कोशिश करेंगे, तो हम यह अवश्य पाएँगे कि हमारे देश के ऊपर गुलामी का जो दाग लगा था, उसे उन्होंने अपना सब कुछ परित्याग-न्यौछावर करके बिल्कुल धो दिया है। इस प्रकार हम यह कह सकते हैं कि हम लोग तो साधारण बीज बोते हैं, लेकिन उन्होंने तो इस देश की धरती पर अपने मस्तक रूपी बीज को बोकर हमें अमन-चैन की जिंदगी दी है।

विशेष-

  1. अमर शहीदों की असाधारण देन का उल्लेख किया गया है।
  2. इस पयांश से देश-भक्ति की भावना जग रही है।
  3. मुहावरेदार शैली है।
  4. तुकांत शब्दावली है।

1. पद पर आधारित काव्य-सौंदर्य संबंधी प्रश्नोत्तर

प्रश्न
(i) उपर्युक्त पद्यांश के काव्य-सौंदर्य पर प्रकाश डालिए।
(ii) उपर्युक्त पद्यांश के भाव-सौंदर्य पर प्रकाश डालिए।
उत्तर
(i) उपर्युक्त पद्यांश की भाषा सरल शब्दों से प्रस्तत होकर महावरेदार शैली से प्रभावशाली बन गई है। बिंब-प्रतीक यथास्थान है। काव्य-स्वरूप की योजना आकर्षक रूप में है।
(ii) उपर्युक्त पद्यांश का भाव-सौंदर्य शहीदों के त्याग-बलिदान की वीरता को सरलता से बतलाकर भावों को बढ़ाने वाला है। अमर शहीदों की एक-एक विशेषताओं को रोचक रूप में प्रस्तुत करने का भाव सचमुच में अनूठा है।

2. पद पर आधारित विषय-वस्तु से संबंधित प्रश्नोत्तर

प्रश्न
(i) अमर शहीद न होते क्या होता और क्यों?
(ii) ‘दाग गुलामी के लोहू से घोए हैं’ से क्या तात्पर्य है?
उत्तर
(i) अमर शहीद न होते तो देश आजाद नहीं होता। यह इसलिए गुलामी की बेड़ी नहीं टूटती और यह देश न जाने कब तक गुलाम बना रहता।
(ii) ‘दाग गुलामी के लोहू से धोए हैं, से तात्पर्य है, अमर शहीदों ने अपने प्राणों का बलिदान करके, इस गुलाम देश को आजाद करवाया है।

3. इस पीढ़ी में, उस पीढ़ी के, में भाव जगाया करता हूँ,
मैं अमर शहीदों का चारण, उनके यश गाया करता हूँ।
यह सच, उनके जीवन में भी रंगीन बहारें आई थीं,
जीवन की स्वप्निल निधियाँ भी उनने जीवन में पाई थीं।

शब्दार्थ-भाव-उत्साह। रंगीन-आकर्षक, सुखद। स्वप्निल-स्वप्न के समान। निधियाँ-खजाने।

प्रसंग-पूर्ववत। इसमें कवि ने देश के अमर शहीदों के प्रति अपनी श्रद्धा और कर्तव्य-भाव को प्रकट करते हुए कहा है कि

व्याख्या-वह अपने देश के वर्तमान युवा पीढ़ी के अंदर बार-बार अपने देश के अमर शहीदों के त्याग-बलिदान को उत्साहवर्द्धक और प्रेरक रूप में रखने का प्रयास किया करता है। इस प्रकार वह उन अमर शहीदों का चारण है। उनके अमर यशगान को गाया करता है। यह एक बहुत बड़ी सच्चाई है कि उन अमर शहीदों के भी जीवन में सबकी तरह आकर्षक और सुखद अवसर प्राप्त हुए थे। इस प्रकार स्वप्न के समान उन्होंने अपने जीवन में अनेक प्रकार के सुख-सुविधाओं के खजाने (अवसर) प्राप्त किए थे।

विशेष-

  1. कवि का आत्मकर्तव्य-बोध सराहनीय है।
  2. तुकांत शब्दावली आकर्षक है।
  3. लय और संगीत की सुंदर योजना है।
  4. यह अंश ज्ञानवर्द्धक और भाववर्द्धक है।
  5. भक्ति रस का प्रवाह है।

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1. पद पर आधारित काव्य-सौंदर्य संबंधी प्रश्नोत्तर

प्रश्न
(i) प्रस्तुत पद्यांश का काव्य-सौंदर्य स्पष्ट कीजिए।
(ii) प्रस्तुत पयांश का भाव-सौंदर्य स्पष्ट कीजिए।
उत्तर
(i) प्रस्तुत पद्यांश का काव्य-सौंदर्य सरल शब्दों और सरल काव्य-स्वरूपों से निखरकर आया है। भक्ति रस का प्रवाह और तुकांत शब्दावली से प्रस्तुत लयात्मकता से काव्याकर्षण बढ़ गया है।
(ii) प्रस्तुत पद्यांश की भाव-योजना सहज रूप में है। कवि-धर्म देश-भक्तों का गुणगान करना भी होता है, इसे कवि ने अपने भावों के द्वारा व्यक्त कर दिया है। शहीदों के त्याग-बलिदान के संकेत से भाव-योजना में और स्वाभाविकता आ गई है।

2. पद पर आधारित विषय-वस्तु से संबंधित प्रश्नोत्तर

प्रश्न
(i) ‘इस पीढ़ी में, उस पीढ़ी के’ कवन का तात्पर्य क्या है?
(ii) ‘अमर शहीदों के जीवन में भी रंगीन बहारें आई थीं’ और ‘उन्होंने अपने जीवन में स्वप्निल निधियाँ पाई वी’ कहकर कवि ने क्या प्रकट करना चाहता है?
उत्तर
(i) इस पीढ़ी में, उस पीढ़ी के कथन का तात्पर्य है. वर्तमान युवा पीढ़ी को अमर शहीदों के युग-प्रभाव’ को बतलाना।
(ii) अमर शहीदों के जीवन में भी रंगीन बहारें आई थीं और उन्होंने अपने जीवन में स्वप्निल निधियाँ पाई थीं’ कहकर कवि यह प्रकट करना चाहता है कि अमर शहीदों ने अपनी सुख-सुविधाओं की परवाह न करके देश की आजादी को प्राप्त करने को ही महत्त्व दिया।

4. पर, माँ के आँसू लख उनने सब सरस फुहारें लौटा दी,
काँटों के पथ का वरण किया, रंगीन बहारें लौटा दी।
उनने धरती की सेक के वादे न किए लंबे-चौड़े
माँ के अर्चन हित फूल नहीं, वे निज मस्तक लेकर दौड़े।

शब्दार्थ-लख-देखकर। फुहारें-बहारें। बरण-स्वागत। अर्चन-पूजा। हित-के लिए। निज-अपने।

प्रसंग-पूर्ववत् । इसमें कवि ने अमर शहीदों के अद्भुत देश-भक्ति पर प्रकाश डालते हुए कहा है कि

व्याख्या-देश के अमर शहीदों ने अपने जीवन में आई हई सरसता भरी फहारों की ओर तनिक भी ध्यान नहीं दिया और न उन्होंने उसे और को महत्त्व ही दिया। उन्होंने तो अपनी मातृभूमि को गुलामी की बेड़ियों में कसे हुए देखा। उसे आँसू बहाते हुए देखा तो अपने जीवन की ‘सरस फुहारों’ को अनदेखा कर दिया। इस तरह उन्होंने अपने सुखमय जीवन को छोड़कर दुखमय जीवन को चुना। फूलों को छोड़कर काँटों को अपनाया। ऐसा करके उन्होंने अपने जीवन में आई रंगीन बहारें लौटा दीं। इस प्रकार उन्होंने अपनी मातृभूमि की रक्षा, उसकी आजादी और सेवा के लिए किसी भी प्रकार की बड़ी-बड़ी खोखली बातें नहीं की। आवश्यकता पड़ने पर उन्होंने अपनी मातृभूमि की अर्चना-पूजा के लिए फूल नहीं, अपने शीश (मस्तक) को ही अर्पित-समर्पित कर दिया।

विशेष-

  1. अमर शहीदों की देशभक्ति के प्रति किए गए त्याग-बलिदान का उल्लेख है।
  2. प्रतीकात्मक शब्दों के प्रयोग हैं-सरस फुहारें, रंगीन बहार, काँटों का पथ, लंबे-चौड़े वादे आदि।
  3. मुहावरेदार शैली है।
  4. यह अंश उत्साहवर्द्धक है।

1. पद पर आधारित काव्य-सौंदर्य संबंधी प्रश्नोत्तर

प्रश्न
(i) प्रस्तुत पद्यांश का काव्य-सौंदर्य स्पष्ट कीजिए।
(ii) प्रस्तुत पद्यांश का भाव-सौंदर्य स्पष्ट कीजिए।
उत्तर
(i) प्रस्तुत पद्यांश में मुहावरेदार शैली के द्वारा कथ्य को आकर्षक बनाने का प्रयास किया गया है। फुहारें लौटाना, काँटों के पथ का वरण करना, रंगीन बहारें लौटाना, लंबे-चौड़े वादे करना और मस्तक लेकर दौड़ना मुहावरे प्रचलित रूप में हैं। इनसे काव्य-सौंदर्य में अच्छा निखार आ गया है।
(ii) प्रस्तुत पद्यांश की भाव-योजना सरस और सरल शब्दों से पुष्ट हुई है। अमर शहीदों के असाधारण और बेजोड़ त्यागपूर्ण देश-भक्ति की भावना को अनूठे रूप में रखने का प्रयास काबिलेतारीफ है।

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2. पद पर आधारित विषय-वस्त से संबंधित प्रश्नोत्तर

प्रश्न
(i) अमर शहीदों ने अपनी मातृभूमि की सेवा के लिए क्या-क्या किया?
(ii) उपर्युक्त पद्यांश का मुख्य भाव क्या है?
उत्तर
(i) अमर शहीदों ने अपनी मातृभूमि की सेवा के लिए अपने जीवन में आई हुई सरस फुहारें और रंगीन बहारें लौटा दीं। उन्होंने काँटों के पथ का वरण किया। कोई लंबे-चौड़े वादे नहीं किए। इस प्रकार उन्होंने अपनी मातृभूमि की अर्चना के लिए फूल नहीं, अपितु अपने शीश ही चढ़ाए।
(ii) उपर्युक्त पद्यांश का मुख्य भाव है-अमर शहीदों की बेजोड देशभक्ति को प्रेरक रूप में प्रस्तुत करना।

5. भारत का खून नहीं पतला, वे खून बहाकर दिखा गए,
जग के इतिहासों में अपनी, वे गौरव-गाथा लिखा गए।
उन गाथाओं से सर्द खून को मैं गरमाया करता हूँ।
में अमर शहीदों का चारण, उनके यश गाया करता हूँ।

शब्दार्थ-जग-संसार । गौरव-प्रतिष्ठा, महत्त्व, बड़प्पन । गाथा-गीत-कथा, कथा।

प्रसंग-पूर्ववत् । इसमें कवि ने अमर शहीदों के अमर त्याग-बलिदान का यशगान करते हुए कहा है कि

व्याख्या-हमारा देश अमर शहीदों का देश है। इसलिए यहाँ के प्रत्येक देशवासी को इसे अच्छी तरह से समझ लेना चाहिए कि हमारे अमर शहीदों ने अपने त्याग-बलिदान से यह सिद्ध कर दिया है कि हमारे देश भारत का खून पतला नहीं है, अर्थात् बेअसर और निरर्थक नहीं है। इससे वे पूरे संसार के इतिहास में अपनी यशस्वी गौरव-गाथा को अंकित कर गए। अर्थात् संसार में एक नया इतिहास बना गए। कवि अपने देश के इस प्रकार की अद्भुत वीरता और त्याग-बलिदान का गुणगान करते हुए पुनः कह रहा है कि वह उन अमर शहीदों की अमर जीवन गाथा की चर्चा के फीकी पड़ने को सहन नहीं कर सकता है। उन्हें फिर से अधिक चर्चित करने के लिए वह उनका चारण है। इस प्रकार वह उनके यश का हमेशा गुणगान करता है।

विशेष-

  1. भारतीय अमर शहीदों के बेजोड़ त्याग-बलिदान का उल्लेख है।
  2. कवि की सच्ची देशभक्ति प्रकट हुई है।
  3. ‘पतला खून’ और ‘सर्द खून’ प्रतीकात्मक शब्द से भाषा सजीव हो उठी है।
  4. ‘खून बहाना’ मुहावरे का सार्थक प्रयोग है।

1. पद पर आधारित काव्य-सौंदर्य संबंधी प्रश्नोत्तर

प्रश्न-
(i) उपर्युक्त पयांश के काव्य-सौंदर्य को स्पष्ट कीजिए।
(ii) उपर्युक्त पयांश के भाव-सौंदर्य को लिखिए।
उत्तर-
(i) उपर्युक्त पद्यांश में अमर शहीदों के अद्भुत त्याग-बलिदान को प्रतीकात्मक शब्दावली में पिरोकर भक्ति रस से हृदयस्पर्शी बनाने का प्रयास किया गया है। लय और संगीत के मिश्रित प्रयास से प्रस्तुत पद्यांश का सौंदर्य बढ़ गया है।
(ii) उपर्युक्त पद्यांश का भाव-सौंदर्य सुस्पष्ट है। अमर शहीदों के त्याग-बलिदान को ओजस्वी और सजीव भावों के द्वारा प्रस्तुत कर कवि ने इस पद्यांश के भाव-सौंदर्य में अधिक चमत्कार ला दिया है।

2. पद पर आधारित विषय-वस्तु से संबंधित प्रश्नोत्तर

प्रश्न
(i) उपर्युक्त पद्यांश में अमर शहीदों की किन विशेषताओं को बतलाया गया है?
(ii) कवि ने शहीदों के प्रति अपनी कौन-सी भावना व्यक्त की है?
उत्तर
(i) उपर्युक्त पद्यांश में अमर शहीदों की त्याग-बलिदान और गौरवमयी ऐतिहासिक गाथा प्रस्तुत करने वाली विशेषताओं को बतलाया गया है।
(ii) कवि ने शहीदों के प्रति अपनी श्रद्धाभावना व्यक्त किया है।

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MP Board Class 9th Maths Solutions Chapter 1 Number Systems Ex 1.5

MP Board Class 9th Maths Solutions Chapter 1 Number Systems Ex 1.5

Question 1.
Classify the following numbers as rational or irrational –

  1. 2 – √5
  2. (3 + \(\sqrt{23}\) ) – \(\sqrt{23}\)
  3. \(\frac { 2\sqrt { 7 } }{ 7\sqrt { 7 } } \)
  4. \(\frac{1}{sqrt { 2 }}\)

Solution:

  1. 2 – \(\sqrt{5}\) is an irrational number
  2. (3 + \(\sqrt{23}\) ) – \(\sqrt{23}\) = 3 is a rational number
  3. \(\frac { 2\sqrt { 7 } }{ 7\sqrt { 7 } } \) = \(\frac{2}{7}\) is a rational number
  4. \(\frac{1}{\sqrt { 2 }}\) = is an irrational number
  5. 2π is an irrational number.

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Question 2.
Simplify each of the following expressions –

  1. (3 + \(\sqrt{3}\) ) (2 +\(\sqrt{2}\))
  2. (3 + \(\sqrt{3}\) ) (3 – \(\sqrt{3}\))
  3. (\(\sqrt{5}\) + \(\sqrt{2}\))2
  4. (\(\sqrt{5}\) – \(\sqrt{2}\)) (\(\sqrt{5}\) + \(\sqrt{2}\))

Solution:
1. (3 + \(\sqrt{3}\) ) (2 +\(\sqrt{2}\))
= 6 + 3\(\sqrt{2}\) + 2\(\sqrt{3}\) + \(\sqrt{6}\)

2. (3 + \(\sqrt{3}\)) (3 – \(\sqrt{3}\))
= (3)2 – (\(\sqrt{3}\) )2 = 9 – 3 = 6

3. (\(\sqrt{5}\) + \(\sqrt{2}\) )2
= (\(\sqrt{5}\))2 + 2\(\sqrt{5}\) x \(\sqrt{2}\) + (\(\sqrt{2}\))2
= 5 + 2\(\sqrt{10}\) + 2 = 7 + 2\(\sqrt{10}\)

4. (\(\sqrt{5}\) – \(\sqrt{2}\)) (\(\sqrt{5}\) + \(\sqrt{2}\))
= (\(\sqrt{5}\))2 – (\(\sqrt{2}\))2 = 5 – 2 = 3

Question 3.
Recall, 7t is defined as the ratio of the circumference (say c) of a circle to its diameter (say d). That is, π = \(\frac{c}{d}\). This seems to contradiet the fact n is irrational. How will you resolve this contradiction?
Solution:
No contradiction will be there. Whenever we measure any length with any device, we only get an approx, rational value and so cannot realise that either c or d is irrational.

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Question 4.
Represent \(\sqrt{9.3}\) on the number line.
Solution:
Steps:

  1. Draw a line segment AC = 9.3 cm and extend it to B such that CB – 1 cm.
  2. Draw the perpendicular bisector of AS and mark the mid point O of AB.
  3. With O as centre and OB as radius, draw a semicircle.
  4. At point C, draw perpendicular CD which intersect the semicircle at D such that CD = \(\sqrt{9.3}\).
  5. With C as centre and CD as radius, draw an arc which intersect AB produced at E.

MP Board Class 9th Maths Solutions Chapter 1 Number Systems Ex 1.5 img-1
Proof:
OA = OB = \(\frac{10.3}{2}\) = 5.15cm
OD = 5.15 cm
OC = OB – BC = 5.15 – 1 = 4.15 cm
CD = \(\sqrt { OD^{ 2 }-OC^{ 2 } } \)
= \(\sqrt{9.3}\) cm

Question 5.
Rationalise the denominators of the following:

  1. \(\frac{1}{\sqrt { 7 }}\)
  2. \(\frac{1}{\sqrt{7}-\sqrt{6}}\)
  3. \(\frac{1}{\sqrt{5}+\sqrt{2}}\)
  4. \(\frac{1}{\sqrt{7}-2}\)

Solution:
1. \(\frac{1}{\sqrt { 7 }}\)
MP Board Class 9th Maths Solutions Chapter 1 Number Systems Ex 1.5 img-2

2. \(\frac{1}{\sqrt{7}-\sqrt{6}}\)
MP Board Class 9th Maths Solutions Chapter 1 Number Systems Ex 1.5 img-3

3. \(\frac{1}{\sqrt{5}+\sqrt{2}}\)
MP Board Class 9th Maths Solutions Chapter 1 Number Systems Ex 1.5 img-4

4. \(\frac{1}{\sqrt{7}-2}\)
MP Board Class 9th Maths Solutions Chapter 1 Number Systems Ex 1.5 img-5

Laws of Exponents for real numbers:
If a, n and m are natural numbers, then

  1. am x an = am+n
  2. (am)n = amn
  3. \(\frac { a^{ m } }{ b^{ n } } \) where m > n
  4. am x bm – (ab)m

Example 1.

  1. 23 x 24 = 23+4 = 27
  2. (32)3 = 32×3 = 36
  3. \(\frac { 5^{ 5 } }{ 5^{ 2 } } \) = 55-2 = 53
  4. 23 x 33 = (2 x 3)3 = 63

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Example 2.
1. 6\(\frac{2}{5}\) x 6\(\frac{3}{5}\)
Solution:
6\(\frac{2}{5}\) x 6\(\frac{3}{5}\) = 6\(\frac{5}{5}\) = 6

2. 6\(\frac{1}{2}\) x 7\(\frac{1}{2}\)
Solution:
6\(\frac{1}{2}\) x 7\(\frac{1}{2}\) = (6 x 7)\(\frac{1}{2}\) = 42\(\frac{1}{2}\)

3. \(\frac{5^{6 / 7}}{5^{2 / 3}}\)
Solution:
MP Board Class 9th Maths Solutions Chapter 1 Number Systems Ex 1.5 img-6

Example 3.
Simplify
MP Board Class 9th Maths Solutions Chapter 1 Number Systems Ex 1.5 img-7
Solution:
MP Board Class 9th Maths Solutions Chapter 1 Number Systems Ex 1.5 img-8
MP Board Class 9th Maths Solutions Chapter 1 Number Systems Ex 1.5 img-9

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MP Board Class 9th Hindi Vasanti Solutions Chapter 8 देवताओं के अंचल में

MP Board Class 9th Hindi Vasanti Solutions Chapter 8 देवताओं के अंचल में (अज्ञेय)

देवताओं के अंचल में अभ्यास-प्रश्न

देवताओं के अंचल में लघूत्तरीय प्रश्नोत्तर

प्रश्न 1.
कुलू में भारी मेला कब लगता है? वहाँ कौन-कौन-सी चीजें विकने आती
उत्तर
कुलू में दशहरे के अवसर पर बड़ा भारी मेला लगता है। रंग-बिरंगे कम्बल, पटू-पट्टियाँ, पश्मीना, ‘चरू’ और अन्य प्रकार की खालें-रीछ की, मग की, बाघ की, कभी-कभी बर्फ के बाघ (स्नो-लेपड) की तरह-तरह के जूते, मोजे, सिली-सिलाई पोशाकें, टोपियाँ, बाँसुरी, बर्तन, पीतल और चाँदी के आभूषण, लकड़ी, हड़ी और सींग की कंधियाँ, देशी और विदेशी काँच, बिल्लौर और पत्थर के मनकों के हार-न जाने क्या-क्या चीजें वहाँ बिकने आती हैं।

प्रश्न 2.
‘हिमालयन रिसर्च इंस्टीट्यूट’ किसके द्वारा स्थापित किया गया और यह संस्था किस संबंध में कार्य करती है?
उत्तर
रूसी कलाकार रोयरिक द्वारा स्थापित हिमालयन रिसर्च इंस्टीट्यूट है। यह संस्था रोयरिक के भाई डॉक्टर जॉर्ज रोयरिक की देखरेख में हिमालय की भाषाओं, जातियों, लोक-साहित्य और वनस्पतियों के संबंध में अनुसंधान करती है। स्वयं रोयरिक भी अक्सर यहीं रहते हैं।

प्रश्न 3.
लेखक ने ऊनी कपड़ों के लिए बढ़िया लांड्री किसे कहा है?
उत्तर
कट्राई से आगे कलाथ है। उसमें गर्म पानी का कुंड है। उसमें गंधक और अन्य रसायन काफी मात्रा में होते हैं। इसे ही लेखक ने ऊनी कपड़ों के लिए बढ़िया लाँड्री कहा है।

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प्रश्न 4.
कुलू प्रदेश को ‘देवताओं का अंचल’ कहा है, क्यों? अपने शब्दों में लिखिए।
उत्तर
कुलू प्रदेश को ‘देवताओं का अंचल’ कहा है। यह इसलिए कि यहाँ सैकड़ों देवी-देवताओं और उनके मंदिर हैं। और साल में एक बार वे अपने-अपने रथों में बैठकर कुलू के रघुनाथ मंदिर में प्रतिष्ठित राम की उपासना के लिए जाते हैं। इस विराट देव सम्मेलन के कारण भी लेखक ने कुल प्रदेश को देवताओं का अंचल कहा

प्रश्न 5.
लेखक ने ‘मनाली’ के नामकरण के पीछे क्या कारण बताया है?
उत्तर
लेखक ने ‘मनाली’ का नाम यहाँ अधिक संख्या में पाया जाने वाला मुनाल नामक पक्षी से सम्बन्धित बताया है। लेखक ने यह भी कहा है कि कुछ लोग मनाली को वहाँ के सेबों और नाशपाती के कारण ही जानते हैं।

देवताओं के अंचल में दीर्घ उत्तरीय प्रश्नोत्तर

प्रश्न 1.
पाठ के आधार पर ‘कुलू’ व ‘मनाली’ के प्राकृतिक सौंदर्य का वर्णन कीजिए।
उत्तर
कुलू को प्राचीन हिंदू-सभ्यता का हिण्डोला (झूला) कहा जा सकता है। यहाँ के हरेक कस्बे और गाँव के अपने-अपने देवता हैं। उनके अपने-अपने मंदिर और भक्त हैं। साल में एक बार वे सभी अपने-अपने रथों में बैठकर कुलू के रखनाथ मंदिर में प्रतिष्ठित राम की उपासना के लिए जाते हैं। इसलिए कल प्रदेश को ‘देवताओं का अंचल’ (बली ऑफ दि गॉङ्स) कहते हैं। दशहरे के अवसर पर यहाँ बहुत बड़ा मेला लगता है। उसमें अनेक प्रकार की जीवनोपयोगी वस्तुएँ बेची जाती हैं। कुलू-प्रांत में व्यास कुंड तथा व्यास मुनि, बशिष्ठ आदि ऋषि-मुनियों के स्थान हैं, पांडवों के मंदिर हैं. भीम की पत्नी हिडिंबा देवी भी पूजा पाती है, और सबसे बढ़कर महत्त्वपूर्ण बात यह है कि वहाँ पर ‘मनु रिखि’ या मन भगवान का भी एक मंदिर है। शायद भारत में एकमात्र स्थान है, जहाँ मानवता का यह स्वयंभू आदिम प्रवर्तक मंदिर में प्रतिष्ठित हो और पूजा पाता हो।

मनाली का नामकरण यहाँ अधिक संख्या में पाया जानेवाला मुनाल नामक पक्षी के नाम पर हुआ है। कुछ लोग यहाँ के सेब और नाशपाती की श्रेष्ठता के कारण इसे जानते हैं। मनाली की दो बस्तियाँ हैं-एक तो बाहर से आकर बसे हुए लोगों द्वारा बनाए हए बंगलों और बाजार वाली चस्ती, जो दाना कहलाती है, और दूसरी उससे करीब मील भर ऊपर चलकर खास मनाली गाँव की। मोटर दाना तक जाती है। दाना से सड़क फिर व्यास नदी पार करके रोहतंग की जोत से होकर लाहौर को चली जाती है। इसी मार्ग पर मनाली से दो मील की दूरी पर वशिष्ठ नाम का गाँव है, जहाँ गरम पानी के कंड है। और वशिष्ठ मंदिर भी हैं। कहते हैं कि वशिष्ठ ऋषि यहीं तपस्या करते-करते पाषाण हो गए थे, पाषाण-मूर्ति वहाँ पूजी भी जाती हैं। यहाँ पानी में गंधक की मात्रा काफी है, और यह स्वास्थ्य के लिए बहुत अच्छा है।

प्रश्न 2.
‘कुलू’ प्राचीन हिंदू सभ्यता का गहबारा है।’ लेखक के इस कवन का आशय स्पष्ट कीजिए।
उत्तर
‘कुलू’ प्राचीन हिंदू सभ्यता का गहवारा है। लेखक के इस कथन का आशय यह है कि यहाँ के हरेक कस्बे और गाँव के अपने-अपने देवताओं के मंदिर हैं। वे साल में एक बार अपने रथ में बैठकर कुलू के रघुनाथ मंदिर में प्रतिष्ठित राम की उपासना के लिए जाते हैं। इससे हिन्दू सभ्यता की अच्छी झलक मिलती है।

प्रश्न 3.
कोकसर के मार्ग में बर्फानी सौंदर्य का वर्णन अपने शब्दों में कीजिए।
उत्तर
कोकसर के मार्ग में पड़ने वाले बर्फीले सौंदर्य अद्भुत और बेजोड़ हैं। कुछ मीलों के क्षेत्रफल एक प्याला के समान बना हुआ दृश्य है। उसके चारों ओर बर्फ की ऊँची-ऊँची चोटियाँ हैं। उनके नीचे पहाड़ के खुले रूप हैं, जो काले दिखाई देते हैं। उस प्याले के बीच में बर्फ से ढका हुआ बहुत बड़ा मैदान है। उसे देखकर ऐसा लगता है, मानो अभिमान में आकर पहाड़ की इन ऊँची-ऊँची चोटियों ने अपने सिर और कटि-प्रदेश को ढक लिया है।

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प्रश्न 4.
कुलू और मनाली में कौन-कौन से दर्शनीय स्थल हैं तथा उनका क्या महत्त्व है?
उत्तर
कुलू में प्राकृतिक सौंदर्य अद्भुत रूप में दिखाई देता है। यहाँ अनेक देवी-देवताओं के मंदिर हैं। वे बड़े ही मनोरम हैं। यहाँ कट्राई सबसे सुंदर स्थान है। फैले हए धान के खेतों के बीच-बीच में सेब, नाशपाती, खुबानी, आड़ और आलचे के पेड़ मन को मोह लेते हैं। यहाँ के पुराने राजाओं के महल आदि अनेक दर्शनीय इमारतें और कुछ प्राचीन मंदिर हैं। मनाली का मुनाली पक्षी बहुत ही सुंदर होता है। मनाली से दो मील की दूरी पर वशिष्ठ गाँव में गरम पानी के कुंड हैं और वशिष्ठ मंदिर भी है। यहाँ के पानी में गंधक की मात्रा अधिक है, जो स्वास्थ्य के लिए बहुत ही लाभदायक है।

प्रश्न 5.
कट्राई के सौंदर्य को अपने शब्दों में लिखिए।
उत्तर
कट्राई के सौंदर्य उसकी सड़क के हर मोड़ पर दिखाई देते हैं। एक ओर ऊँचे-ऊँचे चीड़ के जंगल हैं, तो दूसरी ओर फैली तराई में धान के खेत लहराते हुए दिखाई देते हैं। वे मानों मखमली आँगन हैं। इसी सड़क पर जगत सुख एक ऐसा गाँव है, जहाँ अनेक दर्शनीय पुराने मंदिर हैं।

देवताओं के अंचल में भाषा-अध्ययन

1. पाठ में कई ऐसे शब्द भी आए हैं जिनके एक से अधिक अर्थ मिल जाते हैं। जैसे-सोते (स्रोत, झरना) सोना (क्रिया) हार (पराजय, माला)।
निम्नलिखित शब्दों के एक से अधिक अर्थ बताइए
सोना, तीर, मत, अंबर, श्री, हरि।
उत्तर
शब्द – एक से अधिक अर्व
सोना – नींद में होना, स्वर्ण (एक बहुमूल्य धातु)
तीर – बाण, किनारा
मत – विचार, नहीं
अंबर – वस्त्र, आकाश
श्री. – शोभा, यश
हरि – विष्णु, सिंह।

2. वर्तनी शुद्ध कीजिए
स्रष्टि – सृष्टि
अनूमति – ………….
प्रवतर्क – …………..
प्रतीष्ठीत – ………….
दरशनीय – …………….
अभीमानी – …………..
पोषाक – ………….
सैलानि – …………….
उत्तर
अशुद्ध शब्द – शुद्ध शब्द
स्रष्टि – सृष्टि
अनुमति – अनुमति
प्रर्वतक – प्रवर्तक
प्रतीष्ठीत – प्रतिष्ठित
दरशनीय – दर्शनीय
अभीमानी – अभिमानी
पोषाक – पोशाक
सैलानि – सैलानी।

3. नीचे लिखे शब्दों में से मूल शब्द और प्रत्यय छाँटकर अलग-अलग कीजिए।
साहसिक, दर्शनीय, लड़कपन, सुंदरता, अभिमानी, दुकानदार, प्रतिष्ठित ।
उत्तर
मूल शब्द – प्रत्यय
साहस – ईक
दर्शन – ईय
लड़का – पन
सुन्दर – ता
अभिमान – ई
दुकान – दार
प्रतिष्ठा – इत

4. दिए हुए वाक्यांशों के लिए एक शब्द लिखिए :
1. जिसके बराबर कोई दूसरा न हो-अद्वितीय ……………….
2. जिसका वर्णन न किया जा सके………..
3. आकाश को छूने वाला………….
4. जिसका कोई आकार न हो….
5. दूसरों पर आश्रित रहने वाला…………
उत्तर

  1. जिसके बराबर कोई दूसरा न हो – अद्वितीय
  2. जिसका वर्णन न किया जा सके – अवर्णनीय
  3. आकाश को छूने वाला – गगनचुम्बी
  4. जिसका कोई आकार न हो – निराकार
  5. दूसरों पर आश्रित रहने वाला – पराश्रित

देवताओं के अंचल में योग्यता-विस्तार

1. इस लेखक के अतिरिक्त किसी अन्य हिन्दी के साहित्यकार द्वारा लिखे गए यात्रा-वृत्तांतों की सूची बनाइए।
2. आप भी किसी स्थान को देखने गए होंगे, उसका यात्रा-वृत्तांत अपने शब्दों में लिखिए।
उत्तर
उपर्युक्त प्रश्नों को छात्र/छात्रा अपने अध्यापक/अध्यापिका की सहायता से हल करें।

देवताओं के अंचल में परीक्षोपयोगी अन्य महत्त्वपूर्ण प्रश्नोत्तर

लघूत्तरीय प्रश्नोत्तर

प्रश्न 1.
कहाँ से देवताओं का अंचल आरंभ होता है?
उत्तर
मंडी से कुलू-प्रदेश तक देवताओं का अँचल आरंभ होता है।

प्रश्न 2.
मणिकर्ण क्या है?
उत्तर
मणिकर्ण तीर्थ-स्थान है। यहाँ गरम पानी के कई सोते हैं। उसकी उष्णता अलग-अलग है। कोई नहाने के लिए ठीक है, तो किसी में चावल उबाले जा सकते हैं।

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प्रश्न 3.
कुलू-प्रांत की सबसे बढ़कर महत्त्वपूर्ण बात क्या है?
उत्तर
कुलू-प्रांत की सबसे बढ़कर महत्त्वपूर्ण बात यह है कि वहाँ पर ‘मनु रिखि’ या मनु भगवान का भी एक मंदिर है। यह शायद भारत में एकमात्र ऐसा स्थान है, जहाँ मानवता यह स्वयंभू आदिम प्रवर्तक मंदिर में प्रतिष्ठित होकर पूजा पाता है।

देवताओं के अंचल में दीर्घ उत्तरीय प्रश्नोत्तर

प्रश्न 1.
मंडी से कुलू-प्रदेश में कैसे जाना पड़ता है?
उत्तर
मंडी से कुलू-प्रदेश में जाने के लिए व्यास नदी को पार करना पड़ता है। व्यास नदी पर रस्सी के झूलना पुल है। उस पर लारी से जाना पड़ता है जो बहुत खतरनाक है। कोई अप्रिय घटना न घटे, इसके लिए यह प्रबंध किया गया है कि पुल का चौकीदार अपनी पीठ पर बड़े-बड़े अक्षरों में यह लिखी हई एक तख्ती टाँगे रहता है-‘चार मील रफ्तार। उसके पीछे-पीछे लारी चलती है। पुल के दोनों ओर चौकीदार पहरा देता रहता है। उसकी अनुमति के बिना कोई आर-पार नहीं जा सकता है।

प्रश्न 2.
रोहतंग मार्ग की क्या विशेषता है?
उत्तर
रोहतंग की जोत पर ही व्यास-कंड है। यहाँ से कुछ मील हटकर व्यास मुनि का स्थान है, जहाँ से व्यास नदी का उद्गम है। रोहतंग का मार्ग बहुत रमणीक है। व्यास नदी के वेग से किस तरह पहाड़ के पहाड़ कट गए हैं, वे भी देखने की चीज है। कहीं-कहीं तो नदी आठ-दस फुट चौड़ी दरार में चार-पाँच सौ फुट नीचे जाकर अदृश्य हो गई है, केवल स्वर सुनाई पड़ता है। इसका कारण यह है कि व्यास नदी तीव्र गति से नीचे उतरती है-अपने मार्ग के पहले पाँच मील में जितना नीचे उतर आती है, वह उतना अगले पचास मील में नहीं, और उसके बाद में पाँच सौ मील में नहीं।

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प्रश्न 3.
मनाली लौटकर आने पर लेखक ने क्या सोचा?
उत्तर
मनाली लौटकर आने पर लेखक ने एकांत में रहकर एक बड़ा-सा उपन्यास लिखने को सोचा। इससे पहले उसने अंग्रेजी में एक पूरा उपन्यास लिख भी डाला था, लेकिन जेल के चार वर्षों के अनुभवों ने उसे यह बता दिया था कि उसमें अभी लड़कपन है। अब उसने अपने नए अनुभवों के आधार पर परिवर्तन और परिष्कार कर उसे हिन्दी में लिखने को सोचा।

प्रश्न 4.
देवताओं के अंचल में’ यात्रा-वृत्तांत के मुख्य भाव को स्पष्ट कीजिए।
उत्तर
श्री सच्चिदानंद हीरानंद वात्स्यायन ‘अज्ञेय’ द्वारा लिखित यात्रा-वृत्तांत प्रेरक और ज्ञानवर्द्धक है। यह भारत के प्रमुख पर्यटन क्षेत्र ‘कुलू’ व मनाली की रचना ‘अरे यायावर रहेगा याद’ से उधत है। इसमें लेखक ने शहरी कोलाहल से दूर प्रकृति की गोद में बैठकर स्वास्थ्य लाभ लिया है। इसके साथ-साथ उपन्यास लेखन की इच्छा से वह देवभूमि ‘कुलू’ आता है। इस लेख में कुलू-मनाली के निवासियों की सहज धार्मिक आस्थाओं, रीति-रिवाजों और विभिन्न मनमोहक स्थलों के सौंदर्य एवं महत्त्व को लेखक ने चित्रित किया है। प्राकृतिक संपदा तथा स्थानीय उत्पादों का सजीव चित्रण इस यात्रा-वृत्तांत में अलौकिक अनुभूति कराता है। फलस्वरूप यह यात्रा-वृत्तांत न केवल हृदयस्पर्शी बन गया है, अपितु भाववर्द्धक भी। .

देवताओं के अंचल में लेखक-परिचय

प्रश्न
श्री सच्चिदानंद हीरानंद वात्स्यायन ‘अज्ञेय’ का संक्षिप्त जीवन-परिचय देते हुए उनके साहित्य के महत्त्व पर प्रकाश डालिए।
उत्तर
जीवन-परिचय-श्री सच्चिदानंद हीरानंद वात्स्यायन ‘अज्ञेय’ का जन्म 7 मार्च 1911 को उत्तर-प्रदेश के देवरिया जिले के कसिया नामक गाँव में हुआ था। उनके पिता पंडित हीरानंद शास्त्री पुरातत्त्व विभाग में थे। उनका तबादला एक स्थान से दूसरे स्थान पर होता रहा। उससे अज्ञेय की शिक्षा भी एक स्थान से दूसरे पर होती रही। आरंभिक शिक्षा समाप्त करके उन्होंने लाहौर के फॉरसन कॉलेज से बी-एस.सी की उपाधि प्राप्त की। उसके बाद अंग्रेजी विषय लेकर एम.ए. में प्रवेश लिया, लेकिन उसी समय क्रांतिकारियों के संपर्क में आने के कारण उनकी पढ़ाई बीच में ही लटककर रह गई। क्रांतिकारियों के संपर्क में आने के कारण वे कई बार गिरफ्तार होकर जेल गए और रिहा हुए। वे 1936 में ‘सैनिक’ के संपादक मंडल में काम करने लगे। इसके बाद ‘विशाल भारत’ के संपादक मंडल में कलकत्ता रहे। 1943 से 1946 तक वे सेना में रहे। 1947 में ‘प्रतीक’ नामक पत्र निकाला। 1950 में आकाशवाणी दिल्ली में नौकरी की। 1955 से 1960 तक अनेक देशों की यात्रा की। 1987 में उनका निधन हो गया।

रचनाएँ-‘अज्ञेय’ की निम्नलिखित रचनाएँ हैंकाव्य-संग्रह-‘आँगन के पार द्वार’,’कितनी नावों में कितनी बार’, ‘सागर-मुद्रा’ आदि।

उपन्यास-‘शेखर एक जीवनी’, ‘नदी के द्वीप’ और ‘अपने-अपने अजनबी।’ कहानी-संग्रह-‘शरणार्थी’, ‘कोठरी की बात’ आदि।

निबंध-डायरी और यात्रा-‘एक बूँद सहसा उछली’, ‘अरे यायावर रहेगा याद’, ‘लिखी कागज कोरे’, ‘भवन्ती’ आदि।

महत्त्व-चूँकि ‘अज्ञेय’ बहुमुखी प्रतिभासंपन्न रचनाकार रहे। इसलिए उनका रचना-संसार भी विविध है। वे गद्य और काव्य दोनों ही क्षेत्र में युग-प्रवर्तक के रूप में याद किए जाते रहेंगे। ‘तार-सप्तक’ कविता संकलनों के संपादक के रूप में वे युग-युग तक अविस्मरणीय रहेंगे।

देवताओं के अंचल में यात्रा-वृत्तांत का सारांश

प्रश्न
‘अज्ञेय’ द्वारा लिखित यात्रा-वृत्तांत ‘देवताओं के आँचल में’ का सारांश अपने शब्दों में लिखिए।
उत्तर
‘अज्ञेय’ द्वारा लिखित यात्रा-वृत्तांत ‘देवताओं के आँचल में एक रोचक यात्रा-वृत्तांत है। इसमें कुलू से मनाली तक की यात्रा का उल्लेख किया गया है। इस यात्रा-वृत्तांत का सारांश इस प्रकार है मंडी से कुलू में प्रवेश को देवताओं का आँचल कहा जाता है। इसमें जाने के लिए व्यास नदी को रस्सी के झूलन पुल से पार करने के लिए लारी से जाना वास्तव में बहत खतरनाक होता है। इसलिए चार मील की ही रफ्तार से लारी को चलाने के लिए, का संकेत लिखा हुआ एक आदमी लारी से आगे-आगे चलता है। पुल के चौकीदार की अनुमति से कोई आर-पार आ-जा सकता है।

अपने लोगों के साथ लेखक दस बजे के आस-पास लोट पहुँचकर मोटर में बैठकर शिमला के लिए रवाना हो जाता है। वह व्यास नदी के किनारे-किनारे होते हुए कुलू बारह बजे पहुँच गया। कुलू में अनेक प्राचीन हिन्द-सभ्यता का झला है। यहाँ के हरेक कस्बे और गाँव के अपने-अपने देवता हैं। इस प्रकार के सैकड़ों देवी-देवताओं के मंदिरों और इस विराट देव-सम्मेलन के कारण ही कुलू प्रदेश का नाम ‘देवताओं का अंचल’ (वैली ऑफ दि गाइस) पड़ा है। दशहरे के दिन आस-पास के लगभग हजारों देवी-देवताओं को रथ में बैठाकर यहाँ लाया जाता है। उस दिन विजयी राम का उत्सव होता है। कुलू प्रदेश में व्यास-कुंड, व्यास मुनि, वशिष्ठ आदि ऋषि-मुनियों के स्थान और पाण्डवों के मंदिर हैं। यहाँ भीम की पत्नी हिडिंबा देवी की भी पूजा होती है। सबसे रोचक बात यह है कि यहाँ मानवता का आदिम प्रवर्तक स्वयंभ (मन) की भी पूजा की जाती है।

दशहरे के अवसर पर यहाँ बहुत बड़ा मेले का आयोजन किया जाता है। फलस्वरूप तरह-तरह की दुकानें और खरीददार यहाँ आते हैं। इस तरह यहाँ एक से एक महँगी वस्तुओं की खरीद-बिक्री होती है। इसके साथ ही यहाँ अनेक प्रकार के खेल-तमाशे, गाने-बजाने और सजावट होती है। लेखक यहाँ अपने साथियों के साथ दो घंटे ठहरकर और भोजन करके लारी में बैठकर आगे चला गया। व्यास नदी के कटाव से कट्राई सबसे सुन्दर स्थान है। यहाँ की घाटी अधिक चौड़ी है। ऊपर चढ़कर देखने से धान के खेतों के बीच-बीच में सेब, नाशपाती, खूबानी, आड़ और आलूचे के पेड़ मन को मोह लेते हैं। यहाँ मछली का शिकार बहुत अच्छा होता है। कट्राई से दो मील की ऊँचाई पर कुलू राज्य की पुरानी राजधानी है।

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यहाँ अनेक दर्शनीय इमारतें-मंदिर हैं। यहाँ रूसी कलाकार रोपरिक द्वारा स्थापित ‘हिमालयन रिसर्च इंस्टीट्यूट’ है, जहाँ पर हिमालय की भाषाओं. जातियों. लोक-साहित्य और वनस्पतियों से संबंधित रिसर्च होते हैं। कट्राई से मनाली तक का पुराना रास्ता नगर और जगत सुख होकर जाता था लेकिन अब नगर उससे अलग हो गया है। मनाली से नगर वाली सड़क कच्ची है, लेकिन लम्बी है। इस पर फैला प्राकृतिक दृश्य मन को मोह लेता है। इसी सड़क पर जगत सुख गाँव में अनेक दर्शनीय हिन्दू युग के कलाकारों से निर्मित प्राचीन मंदिर हैं। कटाई से आगे कलाथ में गर्म पानी का एक ऐसा कुंड है, जिसमें गंधक और अन्य रसायन की अधिक मात्रा होती है। यहाँ पर पहाड़ी औरतें खासतौर पर अपने कपड़े धोती हैं।

ऊनी कपड़ों के लिए यहाँ बहुत अच्छी लांडी है। मनाली या मुनाली का नाम यहाँ पर अधिक संख्या में पाया जाने वाला ‘मुनाल’ नामक अधिक सुन्दर पक्षी के नाम पर रखा गया है। यहाँ के कुछ सेबों और नाशपाती के अधिकता के कारण मनाली को जानते हैं। मनाली की दो बस्तियाँ हैं-एक बाहर से आकर बसे हुए लोगों के बंगलों और बाजारवाली बस्ती और दूसरी-उससे मील भर ऊपर बसी खास मनाली गौण की बस्ती जो मोटर दाना तक जाती है। फिर वहाँ से व्यास नदी को पार करके रोहतंग की जोत से लाहौर को चली जाती है। इसी मार्ग पर मनाली से दो मील दूर वसिष्ठ नामक गाँव और मंदिर है। रोहतंग की जोत पर व्यास कुंड है। यहीं से व्यास नदी निकलती है। रोहतंग की जोत के दूसरी पार कोकसर नामक बर्फ की सुन्दरता में बेजोड़ है। मनाली से आकर लेखक की स्वास्थ्य-लाभ करने के बाद सबसे बड़ी आकांक्षा एक बड़ा-सा उपन्यास लिखने की थी। दूसरे दिन सुबह उसने स्वयं को पाया कि वह भी देवताओं का समकक्षी होकर स्रष्टा हो गया है। वह लिखने लगा।

देवताओं के अंचल में संदर्भ-प्रसंग सहित व्याख्या

गद्यांशों की सप्रसंग व्याख्या, अर्थग्रहण व विषय-वस्त से संबंधी प्रश्नोत्तर

1. सुभीते के लिहाज से चाहे जैसा हो, सौंदर्य-रक्षा के लिए एक बहुत अच्छा हुआ है। मनाली से नगरवाली कच्ची सड़क उस तरफ की सबसे लंबी सैर है। ऊँच-नीच भी बहुत अधिक नहीं है और दृश्य तो हर एक मोड़ पर ऐसा सुंदर दिखता है कि कहा नहीं जा सकता। एक ओर उठते हुए चीड़ के जंगल की गजियाँ, दूसरी ओर खुली हुई तराई में लहराते हुए धन-खेतों के मखमली आँगन-न जाने किस रहस्यमय की नीरव पद-चाप हर समय उसमें एक हिलोस्-सी उठाती रहती हैं।

शब्दार्थ-सुभीते-सुविधा। लिहाज-दृष्टिकोण। सैर-दूरी, भ्रमण। नीरव-शान्त। पद-चाप-पैर की ध्वनि। हिलोर-उमंग।

प्रसंग-प्रस्तुत गद्यांश हमारी पाठ्य-पुस्तक ‘वासंती-हिंदी सामान्य’ में संकलित तथा सच्चिदानंद हीरानंद वात्स्यावन’ ‘अज्ञेय’ लिखित यात्रा-वृत्तांत ‘देवताओं के आँचल में से है। इसमें लेखक ने कट्राई से मनाली तक की सुंदरता का उल्लेख करते हुए कहा है कि

व्याख्या-कट्राई से मनाली तक का प्राकृतिक सौंदर्य मन को मोह लेता है। यहाँ तक आने के लिए पूर्वापेक्षा यातायात की बहुत बड़ी सुविधा हो गई है। जो कुछ सुविधा इस समय है, और जैसे भी हो, कोई यहाँ पहुँचता है, तो वह यही पाता है कि इस सुविधा से प्राकृतिक सुंदरता की बहुत बड़ी रक्षा हुई है। इस दृष्टि से यह प्रशंसनीय कदम कहा जा सकता है। यहाँ तक आने का यह पता लग जाता है। कट्राई से मनाली और फिर मनाली से नगर जानेवाली सड़क पक्की नहीं है, अपितु वह कच्ची है। उस ओर जानेवाली वही सबसे लंबी सड़क है। अधिकतर वह समतल है। कहीं-कहीं वह ऊँची-नीची अवश्य है। उसका हरेक मोड़ अपनी सुंदरता से आने-जानेवालों को अपनी ओर आकर्षित कर लेता है। सचमुच उसका वर्णन करना असंभव-सा लगता है। उस पर एक ओर ऊँचे-ऊँचे चीड़ के जंगल हैं तो दूसरी ओर तराई है। उसमें धान के खेत ऐसे दिखाई देते हैं, मानो वे मखमल के आँगन की तरह फैले हुए हैं। उन पर फैली हुई शांति एक रहस्यमयी-लगती है। उस पर पैरों की ध्वनि मानों रह-रहकर लहरों से उठ रहो है और गिर रही है।

विशेष-

  1. प्राकृतिक सौंदर्य का आकर्षक चित्र है।
  2. शैली चित्रमयी है।
  3. भाषा काव्यात्मक है।

1. गद्यांश पर आधारित अर्थग्रहण संबंधी प्रश्नोत्तर

प्रश्न
(i) सौंदर्य-रक्षा के लिए क्या बहुत अच्छा हुआ है?
(ii) मनाली से नगरवाली सड़क कैसी है?
उत्तर
(i) सौंदर्य-रक्षा के लिए कटाई से मनाली तक का पुराना रास्ता नया हो गया है। अब इस पर मोटर चलने लगी है।
(ii) मनाली से नगरवाली सड़क कच्ची है। उस ओर की वह सबसे लंबी सड़क है। वह बहुत ऊँची नहीं है और बहुत नीची भी नहीं है।

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2. गद्यांश पर आधारित विषय-वस्तु से संबंधित प्रश्नोत्तर

प्रश्न
(i) किसके मोड़ पर सुंदर-सुंदर द्रश्य दिखाई देते हैं?
(ii) धान के खेत कैसे लगते हैं?
उत्तर
(i) मनाली से नगरवाली सड़क के हर मोड़ पर सुंदर-सुंदर दृश्य दिखाई देते हैं।
(ii) धान के खेत मखमली आँगन की तरह एक रहस्यमयी ऐसी शांति जैसे दिखाई देते हैं। उनसे होने वाली धीमी ध्वनि लहरों के उठने-गिरने की तरह सुनाई देती

2. रोहतंग की जोत के दूसरी पार कोकसर पड़ाव है। यहाँ जाते हुए बर्फ के सौंदर्य का जो दृश्य दिखता है, मैंने दूसरा नहीं देखा। उसका न वर्णन हो सकता है, न चित्र खिंच सकता है। कुछ मीलों के दायरे का एक प्याला-सा बना हुआ है, जिसके सब ओर ऊँची-ऊँची हिमावृत्त चोटियाँ, उससे कुछ नीचे पहाड़ों के नंगे काले अंग, और प्याले के बीच में फिर बर्फ से छाया हुआ मैदान मानो अभिमानी पर्वत सरदारों ने. अपना शीश और कटि प्रदेश को ढक लिया है, लेकिन छाती दर्प से खोल रखी है… इस स्थान से तीन नदियों का उद्गम है, ऊपर से व्यास, मध्य से चन्द्रा और भागा, जो आगे चलकर मिल जाती हैं। लेकिन रोहतंग की यात्रा का और कुलू प्रदेश के अपने दूसरे विचित्र अनुभवों का वर्णन अलग लेख माँगता है।

शब्दार्च-हिमावृत्त-बर्फ से ढकी हुई। कटि-प्रदेश-नीचे का भाग। दर्प-गर्व, अहंकार । उद्गम-उत्पत्ति स्थान ।

प्रसंग-पूर्ववत् । इसमें लेखक ने कोकसर पड़ाव से आगे बर्फीले सौंदर्य का चित्रण करते हुए कहा है कि

व्याख्या-रोहतंग की जोत के दूसरी तरफ कोकसर का पड़ाव पड़ता है, जो अपनी खास विशेषता रखता है। यहाँ से आगे बढ़ने पर बर्फ का फैला हुआ रूप अपनी सुंदरता से आने-जाने वालों के मन को मोह लेता है। लेखक का यह मानना उसने ऐसा कोई और मोहक दृश्य और कहीं नहीं देखा है। यही नहीं वह उसका वर्णन भी नहीं कर सकता है। शायद वह उसका पूरा-पूरा चित्र भी नहीं खींच सकता है। उसने बड़े ध्यान से देखा कि एक प्याले की कोई आकृति लगभग कुछ मीलों का विस्तार लिए हुए है। उसके चारों ओर केवल बर्फ से ढकी हुई चोटियाँ हैं। उन चोटियों के नीचे काले रंग का फैले हुए पहाड़ के छोटे-बड़े रूप हैं। मीलों तक फैले हुएय उस प्याले-सी आकृति के बीच में और कुछ नहीं है। केवल बर्फ-ही-बर्फ है। वह बहुत बड़ा विस्तार लिए हुए है। उसे देखने से ऐसा लगता है मानो अपने बड़प्पन और उच्चता के अभिमान को लिए हुए पर्वतों का एक एक ऊँचे-ऊँचे भाग स्वयं को छिपा लिये हैं। फिर भी वे अपने विस्तार रूपी छाती को दर्पपूर्वक फैला रखने में अपने-आपको बडा दिखाने का प्रदर्शन कर रहे हैं। इस स्थान के बारे में यह कहा जाता है कि इससे व्यास, चन्द्रा और भागा ये तीन नदियाँ निकलती हैं। वे इसके क्रमशः ऊपर और मध्य भाग से निकलती तो हैं, लेकिन आगे चलकर परस्पर मिल भी जाती हैं। लेखक के अनुसार यहाँ यह ध्यान देने की बात है कि अगर रोहतंग और कुलू प्रदेश की यात्रा के अनुभवों का उल्लेख अपेक्षित और समुचित रूप में करना है, तो उसके लिए अलग से लेख लिखना पड़ेगा।

विशेष

  1. लेखक की कोकसर पड़ाव से आगे के प्राकृतिक सुन्दरता के प्रति दृष्टि आकर्षक है।
  2. संपूर्ण उल्लेख रोचक और ज्ञानवर्द्धक है।
  3. तत्सम शब्दों की प्रधानता है।
  4. शैली चित्रमयी है।

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1. गद्यांश पर आधारित अर्यग्रहण संबंधी प्रश्नोत्तर

प्रश्न
(i) कोकसर पड़ाव से आगे कौन-सा अद्भुत दृश्य दिखाई देता है?
(ii) प्याला-सा बने दृश्य की क्या विशेषता है?
उत्तर
(i) कोकसर पड़ाव से आगे बर्फ का अत्यधिक आकर्षक दृश्य दिखाई देता
(ii) प्याला-सा बने दृश्य की विशेषता है कि वह कुछ मीलों के दायरे में फैला हुआ है। उसके चारों ओर ऊँची-ऊँची बर्फीली चोटियाँ हैं।

2. गद्यांश पर आधारित विषय-वस्त से संबंधित प्रश्नोत्तर

प्रश्न
(i) बर्फ के मैदान से कौन-कौन नदियाँ निकलती हैं?
(ii) लेखक ने किसके लिए अलग लेख लिखने का सुझाव दिया है?
उत्तर
(i) बर्फ के मैदान से व्यास, चन्द्रा, और भागा नदियाँ निकलती हैं।
(ii) लेखक ने रोहतंग और कुलू प्रदेश की यात्रा के विचित्र अनुभवों के लिए अलग लेख लिखने का सुझाव दिया है।

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