MP Board Class 10th Sanskrit व्याकरण समास-प्रकरण

MP Board Class 10th Sanskrit व्याकरण समास-प्रकरण

‘समसनं समासः’ अर्थात् संक्षेपीकरण को समास कहते हैं। दो या दो से अधिक शब्दों की विभिक्ति हटाकर और उन्हें एक साथ जोड़कर एक शब्द बनाने की प्रक्रिया को समास कहते हैं। इस प्रकार मिला हुआ पद ‘समस्त पद’ अथवा ‘सामासिक पद’ कहलाता है। जब दो या दो से अधिक शब्दों को इस प्रकार रख दिया जाता है कि उनके आकार (स्वरूप) में कुछ कमी हो जाये और अर्थ पूरा – पूरा निकले तो उसे ‘समास’ कहते हैं।

Samas In Sanskrit MP Board Class 10th जैसे –
रामस्य मन्दिरम् = राममन्दिरम्।
(राम का मन्दिर) = (राममन्दिर)

समास के भेद – समास के छः भेद होते हैं –
Samas In Sanskrit MP Board Class 10th

संस्कृत के एक याचक की उक्ति में इन सभी समासों के नाम आ जाते हैं। यह उक्ति बहुत प्रसिद्ध है –

द्वन्द्वो द्विगुरपि चाहं मद्गेहे नित्यमव्ययीभावः।
तत्पुरुष कर्मधारय येनाहं स्यां बहुब्रीहिः॥

Sanskrit Samas Class 10 MP Board १. अव्ययीभाव समास
परिभाषा – पूर्वपदार्थाप्रधानोऽव्ययीभावः।

जहाँ प्रथम पद प्रधान तथा अव्यय होता है और द्वितीय पद संज्ञावाचक होता है, वहाँ अव्ययीभाव समास होता है।
Sanskrit Samas Class 10 MP Board

Samas In Sanskrit Class 10 MP Board  २. तत्पुरुष समास
परिभाषा – प्रायेण उत्तरपदप्रधानस्तत्पुरुषः।

जिस समास में पूर्वपद द्वितीया विभक्ति से सप्तमी विभक्ति का होता है और उत्तर पद प्रथमा विभक्ति का होता है, वह तत्पुरुष समास होता है।

द्वितीया तत्पुरुष – इसमें पहला पद द्वितीया विभक्ति का होता है और समासावस्था में उसका लोप हो जाता है।
Samas In Sanskrit Class 10 MP Board

तृतीया तत्पुरुष – इसमें पहला पद तृतीया विभक्ति का होता है और समासावस्था में उसका लोप हो जाता है।
Samas Sanskrit Class 10 MP Board

चतुर्थी तत्पुरुष – इसमें पहला पद चतुर्थी विभक्ति का होता है तथा समासावस्था में उसका लोप होता है।
Sanskrit Samas MP Board Class 10th

पञ्चमी तत्पुरुष – इसमें पहला पद पंचमी विभक्ति का होता है तथा समासावस्था में उसका लोप होता है।
समास संस्कृत में कक्षा 10 MP Board

षष्ठी तत्पुरुष – इसमें पहला पद षष्ठी विभक्ति का होता है तथा समासावस्था में उसका लोप होता है।
समास-विग्रह कीजिए Class 10 MP Board
सप्तमी तत्पुरुष – इसमें पहला पद सप्तमी विभक्ति का होता है तथा समासावस्था में उसका लोप होता है।
Samas Class 10 Sanskrit MP Board

नञ् तत्पुरुष – इस समास में निषेधवाचक शब्द (न) का अर्थ प्रकट करने के लिए प्रारम्भ में “अ” अथवा “अन्” जोड़ा जाता है।
Samas Vigrah In Sanskrit Class 10 MP Board

उपपद तत्पुरुष – तत्पुरुष समास में उत्तर पद (अन्तिम शब्द) किसी क्रिया द्वारा बना हुआ (कृदन्त पद) हो तो उसे उपपद तत्पुरुष समास कहते हैं।
Class 10th Sanskrit Samas MP Board

Samas Sanskrit Class 10 MP Board ३. कर्मधारय समास
परिभाषा – प्रायेण स चासौ कर्मधारयः।

जहाँ प्रथम पद विशेषण या उपमान होता है तथा दूसरा पद विशेष या उपमेय होता है, वहाँ कर्मधारय समास होता है।
समास विग्रह कीजिए Class 10 Sanskrit MP Board

Sanskrit Samas MP Board Class 10th ४. द्विगु समास
परिभाषा – संख्यापूर्वो द्विगुः।

जहाँ प्रथम पद संख्यावाची होता है तथा उत्तर पद की विशेषता को प्रकट करता है, वह द्विगु समास होता है।
Class 10 Samas Sanskrit MP Board

समास संस्कृत में कक्षा 10 MP Board ५. बहुव्रीहि समास
परिभाषा – अनन्यपदार्थप्रधानो बहुब्रीहिः।

जहाँ सामासिक पदों से किसी अन्य का बोध होता है, वहाँ बहुब्रीहि समास होता है।
Class 10 Sanskrit Samas MP Board

समास-विग्रह कीजिए Class 10 MP Board ६. द्वन्द्व समास
परिभाषा – उभयपदार्थप्रधानो द्वन्द्वः।

इस समास में सभी पद प्रधान होते हैं और दो या दो से अधिक संज्ञा शब्द विग्रह की दशा में ‘च’ शब्द से जुड़े रहते है।
Samas In Sanskrit Class 10 Pdf MP Board
Samas In Sanskrit Class 10 Examples MP Board

वस्तुनिष्ठ प्रश्न

बहु – विकल्पीय प्रश्न

Samas Class 10 Sanskrit MP Board १. ‘वाणहतः’ में समास है
(अ) अव्ययीभाव,
(ब) द्विगु,
(स) बहुब्रीहि,
(द) तत्पुरुष।

Samas Vigrah In Sanskrit Class 10 MP Board २. ‘पितरौ’ में समास है-
(अ) द्विगु,
(ब) द्वन्द्व,
(स) तत्पुरुष,
(द) कर्मधारय।

Class 10th Sanskrit Samas MP Board  ३. ‘राजपुरुषः’ का विग्रह होगा
(अ) राजा पुरुषः,
(ब) राज पुरुषः
(स) राज्ञः पुरुषः,
(द) राज्ञि पुरुषः।

समास विग्रह कीजिए Class 10 Sanskrit MP Board ४. ‘अनादरः’ का विग्रह होगा
(अ) न आदरः,
(ब) अन आदरः,
(स), अ नादरः,
(द) अना दरः

५. जिस समास में पूर्व पद संख्या वाचक हो, उसे कहते हैं
(अ) द्वन्द्व,
(ब) द्विगु,
(स) अव्ययीभाव,
(द) कर्मधारय।
उत्तर –
१. → (द),
२. → (ब),
३. → (स),
४. → (अ),
५. → (ब)

रिक्त स्थान पूर्ति
१. वृक्षपतितः = ………………………….।
२. विद्यालयः = ………………………….।
३. घनश्यामः = ………………………….।
४. रामलक्ष्मणौ = ………………………….।
५. पीताम्बरः = ………………………….।
उत्तर –
१. वृक्षात् पतितः,
२. विद्यायाः आलयः,
३. घन इव श्यामः,
४. रामश्च लक्ष्मणश्च,
५. पीतम् अम्बरं यस्य सः।

सत्य/असत्य
१. बाणहतः में अव्ययीभाव समास है।
२. पञ्चपात्रम् में द्विगु समास है।
३. महापुरुषः में कर्मधारय समास है।
४. असत्यम् में द्विगु समास है।
५. पितरौ में तत्पुरुष समास है।
उत्तर –
१. असत्य,
२. सत्य,
३. सत्य,
४. असत्य,
५. असत्य

♦ जोड़ी मिलाइए
MP Board Class 10th Sanskrit व्याकरण समास-प्रकरण img 15
उत्तर-
१. → (v)
२. → (i)
३. → (ii)
४. → (iii)
५. → (iv)

MP Board Class 10th Sanskrit Solutions

MP Board Class 12th Special Hindi काव्य-बोध प्रश्नोत्तर

MP Board Class 12th Special Hindi काव्य-बोध प्रश्नोत्तर

(क) वस्तुनिष्ठ प्रश्न
बहु-विकल्पीय

प्रश्न
1. समस्त भाव प्रधान साहित्य कहलाता है
(अ) काव्य,
(ब) गद्य,
(स) गद्य-काव्य,
(द) दोहा।
उत्तर-
(अ) काव्य,

2. ‘वाक्यं रसात्मकं काव्यम्’ परिभाषा है
(अ) आचार्य विश्वनाथ की,
(ब) पण्डितराज जगन्नाथ की,
(स) आचार्य रामचन्द्र शुक्ल की,
(द) भामह की।
उत्तर-
(अ) आचार्य विश्वनाथ की,

3. ‘रमणीयार्थ प्रतिपादकः शब्दः काव्यम्’ परिभाषा है
(अ) आचार्य विश्वनाथ की,
(ब) पण्डितराज जगन्नाथ की,
(स) आचार्य रामचन्द्र शुक्ल की,
(द) भामह की।
उत्तर-
(ब) पण्डितराज जगन्नाथ की,

4. ‘वक्रोक्ति काव्यस्य जीवितम्’ परिभाषा है
(अ) आचार्य विश्वनाथ की,
(ब) पण्डितराज जगन्नाथ की,
(स) कुन्तक की,
(द) भामह की।
उत्तर-
(स) कुन्तक की,

5. सामान्यतया काव्य के कुल इतने भेद बताये गये हैं?
(अ) एक,
(ब) दो,
(स) तीन,
(द) चार।
उत्तर-
(द) चार।

6. मुक्तक काव्य में होता है
(अ) छन्दों का पूर्वापर सम्बन्ध,
(ब) वृहत् कथा अंकन,
(स) छन्द का स्वतः पूर्ण,
(द) इनमें से कोई नहीं।
उत्तर-
(स) छन्द का स्वतः पूर्ण,

7. प्रबन्ध काव्य के भेद हैं
(अ) एक,
(ब) दो,
(स) तीन,
(द) चार।
उत्तर-
(ब) दो,

8. महाकाव्य में होता है
(अ) जीवन का खण्ड चित्रण,
(ब) जीवन का वृहत् चित्रण,
(स) जीवन का चित्रण नहीं,
(द) युद्ध का चित्रण।
उत्तर-
(ब) जीवन का वृहत् चित्रण,

9. दृश्य काव्य के अन्तर्गत आते हैं
(अ) नाटक और प्रहसन,
(ब) नाटक और कहानी,
(स) नाटक और व्यंग्य,
(द) प्रहसन और कहानी।
उत्तर-
(अ) नाटक और प्रहसन,

10. काव्य के मुख्य रूप से गुण हैं
(अ) एक,
(ब) दो,
(स) तीन,
(द) चार।
उत्तर-
(स) तीन,

11. चित्त की उत्तेजना वृत्ति से सम्बन्ध होता है ([2012]
(अ) ओज गुण का,
(ब) प्रसाद गुण का,
(स) माधुर्य गुण का,
(द) किसी का नहीं।
उत्तर-
(अ) ओज गुण का,

12. “राजा शिवराज के नगारन की धाक सुनि केते बादशाहन की छाती दरकति है।” में गुण
(अ) माधुर्य गुण,
(ब) ओज गुण,
(स) प्रसाद गुण,
(द) कोई नहीं।
उत्तर-
(ब) ओज गुण,

13. “हे प्रभो आनन्ददाता ! ज्ञान हमको दीजिए।” में गुण है
(अ) माधुर्य गुण,
(ब) प्रसाद गुण,
(स) ओज गुण,
(द) कोई नहीं।
उत्तर-
(ब) प्रसाद गुण,

14. भावों के उद्वेलन के लिए कितने अवयव बताये गये हैं?
(अ) एक,
(ब) दो,
(स) तीन,
(द) सात।
उत्तर-
(स) तीन,

15. उत्तेजना के मूल काव्य को कहते हैं
(अ) विभाव,
(ब) अनुभाव,
(स) उद्दीपन,
(द) संचारी भाव।
उत्तर-
(अ) विभाव,

16. करुण रस का स्थायी भाव है [2012]
(अ) उत्साह,
(ब) शोक,
(स) विस्मय,
(द) जुगुप्सा।
उत्तर-
(ब) शोक,

17. वीर रस का स्थायी भाव है [2014]
(अ) क्रोध,
(ब) रौद्र,।
(स) उत्साह,
(द) शोक।
उत्तर-
(स) उत्साह,

18. “खूब लड़ी मरदानी वह तो, झाँसी वाली रानी थी।” में रस है
(अ) रौद्र,
(ब) भयानक,
(स) वीर,
(द) करुण।
उत्तर-
(स) वीर,

19. काव्य की शोभा बढ़ाने वाले शब्द कहलाते हैं [2015]
(अ) शब्द-शक्ति
(ब) छन्द,
(स) गुण,
(द) अलंकार।
उत्तर-
(द) अलंकार।

20. जहाँ कारण के बिना भी कार्य होता है, वहाँ अलंकार है [2016]
(अ) विभावना,
(ब) विशेषोक्ति,
(स) व्यतिरे 5,
(द) विरोधाभास।
उत्तर-
(अ) विभावना,

21. ‘कवित्त’ के प्रत्येक चरण में वर्ण होते हैं [2010]
(अ) 31,
(ब) 33,
(स) 36,
(द) 28.
उत्तर-
(अ) 31,

22. दुर्मिल सवैया में वर्गों की संख्या होती है [2017]
(अ) छब्बीस,
(ब) अट्ठाईस,
(स) बत्तीस,
(द) चौबीस।
उत्तर-
(द) चौबीस।

रिक्त स्थानों की पूर्ति
1. ………………….. ने काव्य को ‘सगुणावलंकृतौ पुनः क्वापि’ कहा है।
2. …………………..” काव्य के दो भेद,महाकाव्य और खण्डकाव्य हैं।
3. आदिकवि वाल्मीकि कृत रामायण एक ………………….. है।
4. ………………….. महाकाव्य के एक देश या अंश का अनुसरण करने वाला है।
5. जिस काव्य में गद्य तथा पद्य मिश्रित रूप से प्रयुक्त होता है, उसे ………………….. काव्य कहते हैं।
6. ………………….. “काव्य के अन्तर्गत नाटक और प्रहसन आते हैं।
7. साहित्य में काव्य के ………………….. गुण प्रमुख हैं।
8. जिस काव्य-रचना को सुनने से मन में उत्तेजना पैदा होती है, उस कविता में ………………….. गुण होता है।
9. सहृदय के हृदय में स्थित अस्थायी भाव को ………………….. कहते हैं। [2011]
10. आश्रय की बाह्य शारीरिक चेष्टाएँ ………………….. कहलाती हैं। [2010]
11. ‘शान्त रस’ का स्थायी भाव ………………….. है।
12. ‘वीभत्स रस’ का स्थायी भाव ………………….. है। [2017]
13. आचार्यों के अनुसार दसवाँ रस ………………….. रस है।
14. काव्य में जहाँ एक शब्द के एक से अधिक अर्थ निकलते हैं,वहाँ ………………….. अलंकार होता है।
15. जहाँ कारण के बिना या कारण के विपरीत कार्य की उत्पत्ति का वर्णन किया जाये, वहाँ ………………….. अलंकार होता है।
16. ………………….. के दो प्रकार,मात्रिक और वर्णिक होते हैं।
17. जिन छन्दों में मात्राएँ गिनी जाती हैं, ………………….. छन्द कहलाते हैं।
18. कवित्त छन्द के प्रत्येक चरण में ………………….. होते हैं।’ [2014]
19. रोला और उल्लाला से मिलकर बनने वाला छन्दः ………………….. “है। [2016]
20. छप्पय छन्द …………………. से मिलकर बनता है। [2012]
21. ………………….. सवैया के प्रत्येक चरण में सात सगण और दो गुरु होते हैं।
उत्तर–
1. मम्मट, 2. प्रबन्ध, 3. महाकाव्य, 4. खण्डकाव्य, 5. चम्पू, 6. दृश्य, 7. तीन, 8. ओज,
9. संचारी भाव, 10. अनुभाव,11. निर्वेद, 12. जुगुप्सा, 13. वात्सल्य, 14. श्लेष, 15. विभावना,
16. छन्द, 17. मात्रिक, 18. 31 वर्ण, 19. छप्पय, 20. रोला व उल्लाला, 21. मत्तगयंद।

सत्य/असत्य
1. प्रबन्ध काव्य के दो भेद,महाकाव्य और खण्डकाव्य होते हैं।
2. महाकाव्य में सम्पूर्ण जीवन का चित्रण होता है। [2017]
3. महाकाव्य का कलेवर विस्तृत होता है। [2011]
4. श्याम नारायण पाण्डेय द्वारा रचित ‘हल्दी घाटी का युद्ध’ एक सुप्रसिद्ध महाकाव्य है।
5. चम्पू काव्य के अन्तर्गत नाटक और प्रहसन आते हैं।
6. जिसमें गद्य तथा पद्य मिश्रित रूप से प्रयुक्त होता है,उसे चम्पू काव्य कहते हैं।
7. ‘प्रेमभक्ति ‘ का मूल आधार ‘रति’ है। [2009]
8. ओज गुण शांत रस की कविताओं में पाया जाता है। [2010]
9. प्रसाद गुण की रचना में ‘ट’ वर्ग (ट, ठ, ड, ढ, ण) और सभी कठोर व्यंजनों का आधिक्य होता है।
10. माधुर्य गुण का सम्बंध चित्त की उत्तेजना वृत्ति से है। [2014]
11. हास्य रस का स्थायी भाव हास होता है।
12. भयानक रस का स्थायी भाव विस्मय होता है।
13. शान्त रस का स्थायी भाव निर्वेद है।
14. श्रृंगार रस का स्थायी भाव ह्रास होता है। [2009]
15. वीर रस का स्थायी भाव क्रोध होता है। [2009]
16. करुण रस का स्थायी भाव शोक होता है। [2016]
17. कविता का आभूषण अलंकार है। [2009]
18. जब एक ही शब्द की भिन्न अर्थ में आवृत्ति होती है,तो वहाँ यमक अलंकार होता है।
19. जहाँ किसी अन्य व्यक्ति या वस्तु को लक्ष्य में रखकर कोई बात किसी दूसरे के लिये कही जाती है,वहाँ व्याजनिन्दा अलंकार होता है।
20. समस्त प्रसिद्धकरण के उपस्थित रहने पर भी कार्य सम्पन्न न हो, वहाँ विभावना अलंकार होता है। [2009]
21. जहाँ कारण के न रहते हुए भी कार्य हो जाता है, वहाँ विभावना अलंकार होता है। [2009]
22. जहाँ कारण के बिना कार्य का होना कहा जाता है,वहाँ व्यतिरेक अलंकार होता है। [2012]
23. मात्रिक छन्द और वर्णिक छन्द,छन्द के दो प्रकार हैं।
24. बाईस से लेकर छब्बीस वर्षों तक के छन्द सवैया कहलाते हैं। [2012]
25. रोला और उल्लाला छन्दों के मिलने से छप्पय छन्द बनता है।
26. कविता पढ़ते समय विराम या रुकने को तुक कहते हैं। [2011]
उत्तर-
1. सत्य, 2. सत्य, 3. सत्य, 4. असत्य, 5. असत्य, 6. सत्य, 7. सत्य, 8. असत्य, 9. असत्य, 10. असत्य,
11. सत्य, 12. असत्य, 13. सत्य, 14. असत्य, 15. असत्य, 16. सत्य, 17. सत्य, 18. सत्य, 19. असत्य,
20. असत्य, 21. सत्य, 22. असत्य, 23. सत्य, 24. सत्य, 25. सत्य, 26. असत्य।

सही जोड़ी मिलाइये

MP Board Class 12th Special Hindi काव्य-बोध प्रश्नोत्तर 1
उत्तर-

(1) → (स),
(2) → (इ),
(3) → (ब),
(4) → (अ),
(5) → (द)।

MP Board Class 12th Special Hindi काव्य-बोध प्रश्नोत्तर 2
उत्तर-

(1) → (अ),
(2) → (स),
(3) → (इ),
(4) → (ब),
(5) → (द)।

MP Board Class 12th Special Hindi काव्य-बोध प्रश्नोत्तर 3
उत्तर-

(1) → (द),
(2) → (अ),
(3) → (इ),
(4) → (स),
(5) → (ब)।

एक शब्द/वाक्य में उत्तर

प्रश्न 1.
काव्य के कितने भेद होते हैं? [2015]
उत्तर-
काव्य के दो भेद होते हैं।

प्रश्न 2.
विस्तृत कलेवर वाले काव्य को क्या कहते हैं? [2012]
उत्तर-
महाकाव्य।

प्रश्न 3.
जिस काव्य के छन्दों का पूर्वापर सम्बन्ध न हो, उसे क्या कहते हैं?
उत्तर-
मुक्तक काव्य।

प्रश्न 4.
गद्य-पद्य मिश्रित रचना को क्या नाम दिया गया है?
उत्तर-
चम्पू काव्य।

प्रश्न 5.
जिस रचना को सुनने से चित्त में उत्तेजना पैदा होती हो, उसमें कौन-सा गुण होता
उत्तर-
ओज गुण।

प्रश्न 6.
रस के अंगों के नाम लिखिए। [2016]
उत्तर-
(1) स्थायी भाव,
(2) विभाव,
(3) अनुभाव,
(4) संचारी या व्यभिचारी भाव।

प्रश्न 7.
वीभत्स रस का स्थायी भाव क्या है? [2009]
उत्तर-
जुगुप्सा (घृणा)।

प्रश्न 8.
उत्तेजना के मूल कारण को क्या कहते हैं?
उत्तर-
विभाव।

प्रश्न 9.
दसवाँ रस किसे माना गया है? [2012]
उत्तर-
वात्सल्य रस को।

प्रश्न 10.
वात्सल्य रस को दसवें रस के रूप में स्थापित करने वाले कवि का क्या नाम [2009]
उत्तर-
सूरदास।

प्रश्न 11.
जहाँ उपमेय को उपमान से भी श्रेष्ठ बताया जाये, वहाँ कौन-सा अलंकार होता है? [2014]
उत्तर-
व्यतिरेक।

प्रश्न 12.
जब कथन में देखने और सुनने पर निन्दा सी जान पड़े किन्तु वास्तव में प्रशंसा हो, वहाँ कौन-सा अलंकार होता है? [2010]
उत्तर-
व्याजस्तुति।

प्रश्न 13.
जहाँ किसी अन्य व्यक्ति या वस्तु को लक्ष्य में रखकर किसी अन्य से कोई बात कही जाये, वहाँ कौन-सा अलंकार होता है? 2017]
उत्तर-
अन्योक्ति अलंकार।

प्रश्न 14.
रोला और उल्लाला के संयोग से कौन-सा छन्द बनता है?
उत्तर-
छप्पय छन्द।

प्रश्न 15.
दुर्मिल सवैया का दूसरा नाम क्या है?
उत्तर-
चन्द्रकला।

प्रश्न 16.
आधुनिक काल के दो महाकाव्यों के नाम लिखिए। [2012]
उत्तर-
‘प्रिय प्रवास’ तथा ‘कामायनी’।

(ख) अति लघु उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 1.
हिन्दी के दो महाकाव्यों के नाम लिखिए।
उत्तर-
रामचरितमानस’ तथा ‘पद्मावत’ हिन्दी के श्रेष्ठ महाकाव्य हैं।

प्रश्न 2.
‘वाक्यं रसात्मकं काव्यम्’ किसकी परिभाषा है?
उत्तर-
रसात्मकं वाक्यं काव्यम्’ आचार्य विश्वनाथ द्वारा दी गई काव्य की परिभाषा है।

प्रश्न 3.
पण्डितराज जगन्नाथ ने काव्य की क्या परिभाषा दी है?
उत्तर-
पण्डितराज जगन्नाथ ने काव्य की परिभाषा देते हुए लिखा है-‘रमणीयार्थ प्रति पादकः शब्दः काव्यम्’ अर्थात् रमणीय अर्थ का प्रतिपादन करने वाले शब्द ही काव्य कहलाते हैं।

प्रश्न 4.
निम्नलिखित पंक्ति में गुण बताइये हे,प्रभो आनन्ददाता ! ज्ञान हमको दीजिए।’
उत्तर-
इस पंक्ति में प्रसाद गुण’ है।

प्रश्न 5.
ओज गुण से युक्त कोई दो पंक्तियाँ लिखिए।
उत्तर-
ओज गुण से युक्त दो पंक्तियाँ इस प्रकार हैं-
“बुन्देले हरबोलों के मुख हमने सुनी कहानी थी।
खूब लड़ी मरदानी वह तो झाँसी वाली रानी थी॥”

प्रश्न 6.
वीर रसपूर्ण काव्य में किस गुण की अधिकता रहती है?
उत्तर-
वीर रसपूर्ण काव्य में ओज गुण’ की अधिकता रहती है।

प्रश्न 7.
माधुर्य गुण युक्त काव्य में कैसे वर्णों का प्रयोग होता है?
उत्तर-
माधुर्य गुण युक्त काव्य में य,र,ल,ग,ज आदि कोमल वर्गों का प्रयोग होता है।

प्रश्न 8.
प्रसाद गुण युक्त काव्य में कैसे शब्दार्थ का प्रयोग किया जाता है?
उत्तर-
प्रसाद गुण युक्त काव्य में सरल शब्दार्थ का प्रयोग किया जाता है।

प्रश्न 9.
माधुर्य गुण किन रसों से युक्त काव्य में होता है?
उत्तर-
करुण, शृंगार या शान्त रसों से युक्त काव्य में माधुर्य गुण होता है।

(ग) लघु उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 1.
संस्कृत के किस आचार्य की काव्य की परिभाषा अधिक मान्य है?
उत्तर-
संस्कृत के कई आचार्यों ने काव्य की परिभाषा दी है। किसी ने शब्द और अर्थ को, किसी ने अलंकार को तो किसी ने ध्वनि को महत्त्व दिया है। किन्तु आचार्य विश्वनाथ द्वारा दी
गई ‘वाक्यं रसात्मकं काव्यम्’ परिभाषा अधिकांशतः मान्य है।

प्रश्न 2.
काव्य की परिभाषा देते हुए उसके भेद बताइए। [2012]
उत्तर-
काव्य की परिभाषा लघु प्रश्न 1 का उत्तर देखें।
अथवा
काव्य के प्रमुख भेद कौन-से माने गये हैं?
उत्तर-
भारतीय आचार्यों ने काव्य के दो प्रकार माने हैं—
(i) श्रव्य काव्य,
(ii) दृश्य काव्य।

(i) श्रव्य काव्य-जिस काव्य की आनन्दानुभूति पढ़ने या सुनने से होती है, उसे श्रव्य काव्य कहते हैं। जैसे-कविता, कहानी आदि।
(ii) दृश्य काव्य-जिस काव्य की अनुभूति अभिनय आदि देखकर होती है, उसे दृश्य काव्य कहते हैं, जैसे- नाटक, प्रहसन आदि।

प्रश्न 3.
प्रबन्ध काव्य के प्रमुख भेद कौन-से हैं?
उत्तर-
प्रबन्ध काव्य के दो भेद माने गये हैं-
(i) महाकाव्य,
(i) खण्डकाव्य।

प्रश्न 4.
महाकाव्य का परिचय दीजिए।
अथवा
महाकाव्य किसे कहते हैं? उसके दो लक्षण भी लिखिए।
अथवा
आचार्य विश्वनाथ के अनुसार काव्य की परिभाषा लिखते हुए महाकाव्य के प्रमुख लक्षण बताइए। [2009]
उत्तर-
काव्य की परिभाषा-लघु प्रश्न 1 का उत्तर देखें।

महाकाव्य एवं उसके लक्षण-यह एक प्रबन्ध काव्य है। इसके अन्तर्गत किसी नायक विशेष की चरित्र विषयक विशेषताओं का उल्लेख होता है। इसके कलेवर में अनेक अध्याय (सर्ग), विभिन्न रस एवं छन्दों का प्रयोग किया जाता है। तुलसीदास कृत ‘रामचरितमानस’ अयोध्या सिंह हरिऔध द्वारा रचित ‘प्रिय प्रवास’ महाकाव्य की कोटि में आते हैं।

प्रश्न 5.
महाकाव्य एवं खण्डकाव्य में तीन अन्तर बताइए। [2014]
अथवा
महाकाव्य एवं खण्डकाव्य में दो अन्तर बताइए तथा दोनों काव्यों का एक-एक नाम लिखते हुए उनके रचनाकारों के नाम लिखिए।
अथवा [2009]
हिन्दी के दो खण्डकाव्य एवं उनके रचनाकारों के नाम लिखिए। [2016]
उत्तर-
(1) महाकाव्य का कलेवर वृहद् (विशाल) होता है,जबकि खण्डकाव्य का आकार सीमित होता है।
(2) महाकाव्य में जीवन का समग्ररूपेण अंकन होता है, जबकि खण्डकाव्य में जीवन के किसी एक खण्ड (पक्ष) का विवरण होता है।
(3) महाकाव्य में श्रृंगार, वीर अथवा शान्त रस में से किसी एक रस की प्रधानता होती है, जबकि खण्डकाव्य में अनेक रस असमग्र रूप से प्रवाहमान रहते हैं या रस विशेष का चित्रण पूर्णरूपेण चित्रित होता है।
महाकाव्य- रामचरितमानस (तुलसीदास)व कामायनी (जयशंकर प्रसाद)।
खण्डकाव्य-मेघदूत (कालिदास) व पंचवटी (मैथिलीशरण गुप्त)।

प्रश्न 6.
प्रबन्ध काव्य तथा मुक्तक काव्य में अन्तर बताइए।
उत्तर-
प्रबन्ध काव्य में छन्दों का पूर्वापर सम्बन्ध होता है। इसमें छन्दों का क्रम बदलना सम्भव नहीं है जबकि मुक्तक काव्य में प्रत्येक छन्द का स्वतः पूर्ण अर्थ होता है। ये किसी क्रम से संचालित नहीं होते हैं। रामचरितमानस,प्रिय प्रवास प्रबन्ध काव्य हैं तथा बिहारी सतसई,सूर सागर मुक्तक रचनाओं के ग्रन्थ हैं।

प्रश्न 7.
मुक्तक काव्य की दो विशेषताएँ बताते हुए एक मुक्तक काव्य रचना का नाम लिखिए।
उत्तर-
मुक्तक काव्य की दो विशेषताएँ इस प्रकार हैं
(i) मुक्तक काव्य के प्रत्येक छन्द का अर्थ स्वयं में पूर्ण होता है। इसके छन्दों का पूर्वापर सम्बन्ध नहीं होता है।
(ii) मुक्तक काव्य के छन्द किसी क्रम से संचालित नहीं होते हैं। ‘बिहारी सतसई’ हिन्दी की श्रेष्ठ मुक्तक काव्य कृति है।।

प्रश्न 8.
गुण कितने प्रकार के होते हैं? इनके नाम बताइए।
अथवा
साहित्य में काव्य के प्रमुख गुण कितने माने गये हैं? ओज गुण की परिभाषा उदाहरण सहित लिखिए।
अथवा [2009]
माधुर्य गुण की परिभाषा लिखिए।
अथवा [2017]
ओज गुण तथा माधुर्य गुण का एक-एक उदाहरण लिखिए। [2012]
उत्तर-
गुण तीन प्रकार के माने गये हैं-
(i) माधुर्य,
(ii) ओज एवं
(iii) प्रसाद।

(i) माधुर्य-जिस काव्य के सुनने या पढ़ने से मन पुलकित हो उठे और कानों को मधुर प्रतीत हो, वहाँ माधुर्य गुण होता है।
उदाहरण-
“अनुराग भरे हरि बागन में, सखि रागत राग अचूकनि सों।”

(ii) ओज-जिस काव्य के सुनने या पढ़ने से चित्त की उत्तेजना वृत्ति जाग्रत हो,वह रचना ओज गुण सम्पन्न होती है।
उदाहरण-
“बुन्देले हरबोलों के मुख हमने सुनी कहानी थी।
खूब लड़ी मर्दानी वह तो झाँसी वाली रानी थी।”

(iii) प्रसाद-जिस रचना के सुनने या पढ़ने से हृदय प्रभावित हो, बुद्धि निर्मल बने,मन खिल उठे,उसमें प्रसाद गुण होता है।
उदाहरण-
“तन भी सुन्दर मन भी सुन्दर,प्रभु मेरा जीवन हो सुन्दर।’

प्रश्न 9.
रस की निष्पत्ति में सहायक तत्त्वों के नाम लिखिए। [2012]
उत्तर-
रस की निष्पत्ति में सहायक तत्त्व हैं-
(1) स्थायी भाव,
(2) विभाव,
(3) अनुभाव, तथा
(4) संचारी भाव।

प्रश्न 10.
स्थायी भाव व संचारी भाव (व्यभिचारी भाव) में क्या अन्तर है?
उत्तर-
मानव-हृदय (आश्रय) में सुषुप्त-रूप में रहने वाले मनोभावों को काव्य में ‘स्थायी भाव’ कहा जाता है। ये स्थायी रूप से हृदय में विद्यमान रहते हैं, इसलिए इनको स्थायी भाव कहते हैं। इन स्थायी भावों के साथ-साथ हृदय में अन्य अनन्त भाव जाग्रत तथा विलीन होते रहते हैं। इनको काव्य में संचारी या व्यभिचारी भाव कहते हैं। ये स्थायी भाव के सहायक के रूप में आते हैं।

प्रश्न 11.
अद्भुत रस को उदाहरण देकर समझाइए।
अथवा
अद्भुत रस की परिभाषा उदाहरण सहित लिखिए। [2009]
उत्तर-
अलौकिक प्रसंग की प्रतीति से उत्पन्न विस्मय अद्भुत-रस की व्यंजना कराता है।

उदाहरण-
“सारी बिच नारी है कि नारी बिच सारी है।
कि सारी ही की नारी है कि नारी ही की सारी है।”

प्रश्न 12.
करुण रस की परिभाषा उदाहरण देते हुए लिखिए। [2009]
उत्तर-
सहृदय के हृदय में शोक नामक स्थायी भाव का जब विभाव, अनुभाव, संचारी भाव के साथ संयोग होता है,तो वह करुण रस का रूप ग्रहण कर लेता है।
उदाहरण-
“प्रिय वह मेरा प्राण प्यारा कहाँ है?
दुःख जलनिधि में डूबी का सहारा कहाँ है?
लख मुख जिसका आज जी सकी हूँ,
वह हृदय हमारा नयन तारा कहाँ है?”

प्रश्न 13.
रौद्र रस को उदाहरण सहित समझाइए।
उत्तर-
अपना अनिष्ट या अनादर होने के फलस्वरूप उत्पन्न क्रोध से रौद्र रस की उत्पत्ति होती है।
उदाहरण-
“श्रीकृष्ण के सुन वचन, अर्जुन क्रोध से जलने लगे।
सब शोक अपना भूलकर, करतल युगल मलने लगे।”

प्रश्न 14.
हास्य रस की परिभाषा सोदाहरण लिखिए। [2013, 15]
उत्तर-
अनोखी वेशभूषा, आकार,वाणी तथा कार्य को निहारकर जो हास का भाव उत्पन्न होता है,वही हास्य रस की अभिव्यक्ति कराता है।

उदाहरण-
“फादर ने बनवा दिए तीन कोट छ: पेण्ट।
बेटा मेरा हो गया कॉलेज स्टूडेण्ट॥”

प्रश्न 15.
वात्सल्य रस की परिभाषा उदाहरण सहित दीजिए। [2017]
उत्तर-
पुत्र,शिष्य आदि के प्रति स्नेह व्यक्त करने की दशा में वात्सल्य रस माना जाता है।

उदाहरण-
‘जसोदा हरि पालने झुलावै।’

प्रश्न 16.
शान्त रस की परिभाषा उदाहरण सहित दीजिए। [2009]
अथवा
शान्त रस का उदाहरण लिखिए। [2014]
उत्तर-
संसार की निस्सारता तथा इसकी वस्तुओं की नश्वरता का अनुभव करते हृदय में वैराग्य या निर्वेद भाव उत्पन्न होता है। यही निर्वेद स्थायी भाव, विभाव, अनुभाव तथा संचारी भाव के संयोग से शान्त रस के रूप में परिणत होता है।

उदाहरण-
“मन रे ! परस हरि के चरण
सुभग सीतल कमल कोमल,
त्रिविधि ज्वाला हरण।”

प्रश्न 17.
भयानक रस की परिभाषा उदाहरण सहित दीजिए।
अथवा
भयानक रस का उदाहरण दीजिए। [2016]
उत्तर-
भय नामक स्थायी भाव का जब विभाव, अनुभाव,संचारी भाव से संयोग होता है, तब वह भयानक रस का रूप ग्रहण कर लेता है।

उदाहरण-
लपट कराल, ज्वाल, माल चहुँ दिशि।
धूम अकुलाने,पहिचाने कौन काहि रे।

प्रश्न 18.
छन्द की परिभाषा देते हुए उसके भेद बताइए।
उत्तर-
वर्ण, मात्रा, यति, गति, तुक आदि का ध्यान रखकर की गई शब्द रचना छन्द कहलाती है। इससे कविता में प्रवाह,संगीतात्मकता तथा प्रभावशीलता आ जाती है। वर्ण तथा मात्रा के आधार पर छन्द दो-वर्णिक एवं मात्रिक प्रकार के होते हैं। वर्णिक छन्दों में वर्गों की गणना की जाती है तथा मात्रिक छन्दों में मात्राओं की गणना की जाती है।

प्रश्न 19.
अलंकार की परिभाषा देते हुए उसके भेद बताइए।
उत्तर-
आचार्य दण्डी ने लिखा है-‘काव्य शोभाकरान्त धर्मान् अलंकारान् प्रचक्षते’ अर्थात् काव्य का सौन्दर्य बढ़ाने वाले धर्म अलंकार कहलाते हैं।
शब्द और अर्थ के आधार पर अलंकारों के तीन प्रकार माने गये हैं-
(i) शब्दालंकार,
(ii) अर्थालंकार व
(ii) उभयालंकार।

प्रश्न 20.
अलंकारों के प्रकारों पर प्रकाश डालिए। उत्तर-अलंकारों के तीन प्रकारों का परिचय इस प्रकार है
(1) शब्दालंकार जहाँ शब्द से काव्य की शोभा बढ़ती है, वहाँ शब्दालंकार होता है, जैसे-अनुप्रास, यमक,श्लेष आदि।
(2) अर्थालंकार-जिनमें अर्थ के कारण सौन्दर्य वृद्धि होती है,वे अर्थालंकार कहलाते हैं, जैसे-उपमा, रूपक, उत्प्रेक्षा आदि।
(3) उभयालंकार-कुछ अलंकारों में शब्द और अर्थ दोनों का चमत्कार विद्यमान रहता है,वे उभयालंकार कहलाते हैं।

प्रश्न 21.
अनुप्रास अलंकार की परिभाषा सोदाहरण लिखिए। [2015]
उत्तर-
परिभाषा-जिस रचना में व्यंजन वर्णों की आवृत्ति (आगमन) एक या दो बार से अधिक होती है, वहाँ अनुप्रास अलंकार होता है।

उदाहरण-
चारु चन्द्र की चंचल किरणें।
खेल रही हैं जल-थल में।

यहाँ ‘च’ वर्ण की आवृत्ति कई बार होने के कारण अनुप्रास अलंकार है।

प्रश्न 22.
विभावना और विशेषोक्ति अलंकार में अन्तर उदाहरण सहित लिखिए।
अथवा [2010, 12]
विभावना अलंकार की परिभाषा एवं उदाहरण लिखिए। [2017]
उत्तर-
जहाँ कारण के बिना या कारण के विपरीत कार्य की उत्पत्ति का वर्णन किया जाये वहाँ विभावना अलंकार होता है,जबकि जहाँ कारण के उपस्थित होने पर भी कार्य नहीं होता, वहाँ विशेषोक्ति अलंकार होता है।

उदाहरण :
विभावना-बिनु पद चलै, सुने बिनु काना,
कर बिनु करम करें विधि नाना।
विशेषोक्ति-जल बिच मीन पियासी।

प्रश्न 23.
निम्नलिखित पंक्तियों में प्रयुक्त अलंकार लिखिए
(i) देह धरे का गुन यही, देह देह कछु देह।
बहुरि न देही पाइये, अबकी देह सुदेह॥

(ii) ‘जे रहीम गति दीप की,कुल कपूत गति सोय।
बारे उजियारो करै, बढ़े अँधेरो होय॥

(iii) गंगा क्यों टेढ़ी चलती हो,
दुष्टों को शिव कर देती हो।

(iv) राम साधु, तुम साधु सुजाना।
राम मातु भलि में पहिचाना॥

(v) मूरख हृदय न चेत,
जो गुरु मिलहिं बिरंचि सम।

(vi) बिनु पद चलै सुनै बिनु काना।
कर बिनु करम करै बिधि नाना॥
उत्तर-
(i) यमक अलंकार,
(ii) श्लेष अलंकार,
(ii) व्याजस्तुति अलंकार,
(iv) व्याजनिन्दा अलंकार,
(v) विशेषोक्ति अलंकार,
(vi) विभावना अलंकार।

प्रश्न 24.
रोला छन्द की परिभाषा उदाहरण सहित लिखिए। [2015]
उत्तर-
परिभाषा-इसके चार चरण होते हैं। प्रत्येक चरण में 24 मात्राएँ होती हैं तथा 11 और 13 मात्राओं पर यति होती है। इसके अन्त में प्रायः दो गुरु होते हैं।

उदाहरण-
निज उज्जवल जलधार, हार हीरक सी सोहति।
बिच-बिच छहरति बूंद,मध्य मुक्तामनि पोहति॥
लोल लहर लहि पवन, एक पै इक इमि आवत।
जिमि नरगन मन विविध,मनोरथ करत मिटावत॥

प्रश्न 25.
छप्पय छन्द को सोदाहरण परिभाषित कीजिए। [2009, 1])
उत्तर-
परिभाषा-इस विषम मात्रिक छन्द में छह चरण होते हैं। इसके प्रथम चार चरण रोला और दो चरण उल्लाला के होते हैं। रोला के प्रत्येक चरण में 11-13 की यति पर 24 मात्राएँ और उल्लाला के हर चरण में 15-13 की यति पर 28 मात्राएँ होती हैं।

उदाहरण
जहाँ स्वतन्त्र विचार न बदलें मन में मुख में,
जहाँ न बाधक बनें सबल निबलों के सुख में।
सबको जहाँ समान निजोन्नति का अवसर हो।
शान्तिदायिनी निशा, हर्षसूचक वासर हो।
सब भाँति सुशासित हों जहाँ, समता के सुखकर नियम।
बस उसी स्वशासित देश में जागे हे जगदीश हम॥

प्रश्न 26.
सवैया और कवित्त में कितने वर्ण होते हैं?
अथवा
सवैया छंद की परिभाषा उदाहरण सहित लिखिए। [2009, 14]
अथवा
कवित्त छन्द की परिभाषा व उदाहरण लिखिए। [2009, 16]
उत्तर-
सवैया-इसके अन्तर्गत 22 से लेकर 26 वर्ण प्रयक्त होते हैं। इसके कई प्रकार हैं। यहाँ दुर्मिल सवैया का उदाहरण दिया जा रहा है

उदाहरण-
पुर तें निकसीं रघुवीर बधू धरि धीर दये मग में डग द्वै।
झलकी भरि भालकनी जल की पुट सूखि गये मधुराधर वै।
फिर बूझति हैं चलनौ अब केतिक पर्णकुटी करिहौ कित है।
तिय की लखि आतुरता पिय की अँखियाँ अति चारु चली जलच्च।

कवित्त-इसके प्रत्येक चरण में 16 एवं 15 के विराम से 31 वर्ण प्रयुक्त किये जाते हैं। हर चरण का आखिरी वर्ण गुरु होता है।

उदाहरण-
झहरि-झहरि झीनी बूंद हैं परति मानो,
घहरि-घहरि घटा घेरी है गगन में।
आनि कयौ स्याम मोसों चलौ झूलिबे को आज,
फूलि न समानी भई, ऐसी हौं मगन में।
चाहति उद्योई उठि गयी सो निगोड़ी नींद,
सोय गए भाग मेरे जागि वा जगन में।
आँखि खोल देखौ तौ न घन हैं न घनस्याम,
वेई छाई बूंदें मेरे आँसू है दृगन में।

प्रश्न 27.
दुर्मिल सवैया की परिभाषा उदाहरण देते हुए लिखिए। [2009, 11]
अथवा
दुर्मिल सवैया के लक्षण लिखिए।
उत्तर-
दुर्मिल सवैया के हर चरण में आठ सगण पाये जाते हैं। वर्ण संख्या 24 मानी गयी है। इसका दूसरा नाम चन्द्रकला भी है।

उदाहरण-
इसके अनुरूप कहैं किसको, वह कौन सुदेश समुन्नत है।
समझे सुरलोक समान इसे,उनका अनुमान असंगत है।
कवि कोविद वृन्द बखान रहे,सबका अनुभूत यही मत है।
उपमान विहीन रचा विधि ने,बस भारत के सम भारत है।

प्रश्न 28.
मत्तगयंद सवैया की परिभाषा उदाहरण सहित लिखिए। [2010, 17]
उत्तर-
इसके प्रत्येक चरण में सात सगण और दो गुरु होते हैं।

उदाहरण-
या लकुटी अरु कमरिया पर राज तिहुपुर को तज डारौं।
आठहुँ सिद्धि नवौं निधि को सुख नन्द की गाय चराइ विसारों।
रसखान कबौं इन आँखिन सौं ब्रज के वन बाग तड़ाग निहारौं।
कौटिक हूँ कलधौत के धाम, करील के कुंजन ऊपर बारौं।

MP Board Class 12th Hindi Solutions

MP Board Class 10th Sanskrit व्याकरण प्रत्यय-प्रकरण

MP Board Class 10th Sanskrit व्याकरण प्रत्यय-प्रकरण

प्रत्यय की परिभाषा-यः शब्दः धातोः प्रातिपदिकस्य वा अन्ते संयुज्य विशेषार्थस्य बोधं कारयति सः प्रत्ययः।

Pratyay In Sanskrit Class 10 MP Board अथवा

धातूनां प्रातिपदिकानां च अन्ते ये प्रयुज्यन्ते ते प्रत्ययाः।

अर्थात् किसी धातु अथवा शब्द के बाद में किसी विशेष अर्थ को प्रकट करने के लिए जो शब्दांश जोड़ा जाता है, उसे प्रत्यय कहते हैं।

जैसे-
बालकः गच्छति।
बालकः पठति।

उपरोक्त दो वाक्यों को प्रत्यय के प्रयोग से एक वाक्य बना सकते हैं।

बालकः गत्वा पठति।

प्रत्यय के भेद-प्रत्ययों से बनने वाले शब्दों को निम्नलिखित छ: वर्गों में विभक्त किया जाता है

Pratyay Class 10 MP Board
१. सुबन्त
सुप् आदि २१ प्रत्ययों के योग से संज्ञा, सर्वनाम, विशेषण आदि के शब्द रूप बनते हैं। जैसे-रामः, सीता आदि।

Pratyay Sanskrit Class 10 MP Board २. तिङन्त
तिङ आदि १८ प्रत्ययों के योग से क्रिया पदों (धातु रूपों) का निर्माण होता है। जैसे-पठति, गच्छति आदि।

प्रकृति-प्रत्यय संस्कृत Class 10 MP Board ३. समासान्त –
समास करने के बाद समस्त पद के अन्त में कप, टच आदि प्रत्यय जुड़ते हैं। समास के अन्त में जुड़ने के कारण इन प्रत्ययों को समासान्त कहते हैं।

जैसे-
महाराजः,,सपत्नीकः आदि।

Sanskrit Pratyay Class 10 MP Board ४. कृदन्त
जो प्रत्यय संज्ञा, सर्वनाम, विशेषण आदि बनाने के लिए धातुओं के साथ जोड़े जाते हैं, वे कृत् प्रत्यय कहे जाते हैं और कृत् प्रत्यय से बने हुए शब्दों को कृदन्त कहते हैं।
जैसे-
क्त, क्तवतु, तव्यत्, अनीयर्, क्त्वा, ल्यप्, तुमुन्, शतृ, शानच्, क्तिन् इत्यादि।

❖ क्त

  • पठ् + क्तः = पठितः – (पढ़ा हुआ)
  • गम् + क्तः = गतः – (गया हुआ)
  • हस् + क्तः = हसितः – (हँसा हुआ)
  • दृश + क्तः = दृष्टः – (देखा हुआ)

❖ क्तवतु

  • पठ् + क्तवतु = पठितवान् – (पढ़ा)
  • गम् + क्तवतु = गतवान् – (गया)
  • कृ + क्तवतु = कृतवान् – (करा)
  • क्रीड् + क्तवतु = क्रीडितवान् – (खेला)

❖ तव्यत्

  • पठ् + तव्यत् = पठितव्यम् – (पढ़ने योग्य)
  • खाद् + तव्यत् = खादितव्यम् – (खाने योग्य)
  • गम् + तव्यत् = गन्तव्यम् – (जाने योग्य)
  • लिख् + तव्यत् = लेखितव्यम् – (लिखने योग्य)
  • अनीयर । पठ् + अनीयर् = पठनीयम् – (पढ़ने योग्य)
  • चल् + अनीयर् = चलनीयम् – (चलने योग्य)
  • कृ + अनीयर् = करणीयम् – (करने योग्य)
  • क्रीड् + अनीयर् = क्रीडनीयम् – (खेलने योग्य)
  • क्त्वा पठ् + क्त्वा = पठित्वा – (पढ़कर)
  • क्रीड् + क्त्वा = क्रीडित्वा

❖ (खेलकर)

  • गम् + क्त्वा = गत्वा – (जाकर)
  • पा + क्त्वा = पीत्वा – (पीकर)
  • ल्यप् प्र + दा + ल्यप् = प्रदाय – (देकर)
  • आ + गम् + ल्यप् = आगम्य/आगत्य – (आकर)
  • प्र + नम् + ल्यप् = प्रणम्य – (प्रणाम करके)
  • वि + हस् + ल्यप् = विहस्य – (हँसकर)

❖ तुमुन्

  • पठ् + तुमुन् = पठितुम् – (पढ़ने के लिए)
  • गम् + तुमुन् = गन्तुम् – (जाने के लिए)
  • श्रु + तुमुन् = श्रोतुम् – (सुनेन के लिए)
  • हस् + तुमुन् = हसितुम् – (हँसने के लिए)

❖ शतृ

  • पठ् + शतृ = पठन् – (पढ़ते हुए)
  • गम् + शतृ = गच्छन् – (जाते हुए)
  • कृ + शतृ = कुर्वन् – (करते हुए)
  • क्रीड् + शतृ = क्रीडन् – (खेलते हुए)

❖ शानच

  • सेव् + शानच् = सेवमानः – (सेवा करता हुआ)
  • लभ् + शानच् = लभमानः – (प्राप्त करता हुआ)
  • वृध् + शानच् = वर्धमानः – (बढ़ता हुआ)
  • कम्प, + शानच् = कम्पमानः – (काँपता हुआ)

❖ क्तिन्

  • भू + क्तिन् = भूतिः – (ऐश्वर्य)
  • गम् + क्तिन् = गतिः – (गति)
  • स्तु + क्तिन् = स्तुतिः – (स्तुति)

प्रत्यय संस्कृत व्याकरण 10 MP Board  ५. तद्धितान्त
जो प्रत्यय संज्ञा, सर्वनाम और विशेषण शब्दों में जोड़े जाते हैं, उन्हें तद्धित प्रत्यय कहते हैं और तद्धित प्रत्ययों के बने हुए शब्दों को तद्धितान्त कहते हैं। जैसे-मतुप्, इनि इत्यादि।

❖ मतुप

  • विद्या + मतुप् = विद्यावान् – (विद्या वाला)
  • शक्ति + मतुप् = शक्तिवान् – (शक्ति वाला)
  • गुण + मतुप् = गुणवान् – (गुण वाला)
  • धन + मतुप् = धनवान् – (धन वाला)

❖ इनि (इन्)

  • मान + इनि = मानी (मानिन्) – (मान वाला)
  • धन + ‘इनि = धनी (धनिन्) – (धन वाला)
  • ज्ञान + इनि = ज्ञानी (ज्ञानिन्) – (ज्ञान वाला)
  • गुण + इनि = गुणी (गुणिन्) – (गुण वाला)

❖ ठक (इक)

  • समाज + ठक् = सामाजिकः – (समाज से सम्बन्धित)
  • इतिहास + ठक् = ऐतिहासिक: – (इतिहास से सम्बन्धित)
  • धर्म + ठक् = धार्मिकः – (धर्म से सम्बन्धित)

❖ त्व

  • मनुष्य + त्व = मनुष्यत्वम् – (मुनष्यपन या मनुष्य का कर्म)
  • विद्वस् + त्व = विद्वत्त्वम् – (विद्वान का भाव या कर्म)
  • लघु + त्व = लघुत्वम् – (छोटापन)
  • गुरु + त्व = गुरुत्वम् – (बड़प्पन)

❖ त्रल

  • बहु + ल् = बहुत्र – (बहुत जगह)
  • सर्व + त्रल् = सर्वत्र – (बहुत जगह)
  • यद् + त्रल् = यत्र – (जहाँ)
  • तद् + त्रल् = तत्र – (वहाँ)

Pratyay Class 10 Sanskrit MP Board ६. स्त्री-प्रत्ययान्त
शब्दों को स्त्रीलिंग वाची बनाने के लिए टाप, ङीष्, ङीप्, आदि प्रत्ययों का प्रयोग होता है। इन प्रत्ययों से बनने वाले शब्दों E को स्त्री-प्रत्ययान्त कहते हैं। जैसे-रमा, उमा, अजा आदि।

❖ टाप

  • बालक + टाप् = बालिका – (लड़की)
  • अज + टाप् = अजा – (बकरी)
  • कोकिल+ टाप् = कोकिला – (कोयल)
  • अश्व + टाप् = अश्वा – (घोड़ी)

❖ ङीप्

  • स्वामिन्+ ङीप् = स्वामिनी – (मालकिन)
  • देव + ङीप् = देवी – (देवी)
  • कुमार + ङीप् = कुमारी – (कुमारी)
  • किशोर + ङीप् = किशोरी – (किशोरी)
  • ङीष गौर + ङीष् = गौरी – (गौरी)
  • सुन्दर + ङीष् = सुन्दरी – (सुन्दरी)
  • नर्तक + ङीष् = नर्तकी – (नर्तकी)

❖ डीन्

  • नर + ङीन् = नारी – (नारी)
  • ब्राह्मण + ङीन् = ब्राह्मणी – (ब्राह्मणी)

वस्तुनिष्ठ प्रश्न

बहु-विकल्पीय

Prakriti Pratyay In Sanskrit Class 10 MP Board प्रश्न १.
पठ् + तव्यत्: ” ……………………… ” होता है।
(अ) पठनीयम्,
(ब) पठिव्य,
(स) पठित्वा,
(द) पठितव्यम्।
उत्तर-
(द) पठितव्यम्।

२. हस + शत = ………………………” होगा।
(अ) हसन्,
(ब) हसमान्,
(स) हसथ,
(द) हसामि।
उत्तर-
(अ) हसन्,

३. ‘कथितः’ को पृथक करने पर होगा
(अ) कथ् + तव्यत्,
(ब) कथ् + क्त,
(स) कथ् + क्त्वा,
(द) कथ् + शतृ।
उत्तर-
(ब) कथ् + क्त,

४. ‘कृ + तुमुन्’ को मिलाने पर होगा
(अ) कर्तुम्,
(ब) कर्तम्,
(स) कुर्तुम्,
(द) कतुम्।
उत्तर-
(अ) कर्तुम्,

५. ‘आगम्य’ में प्रकृति-प्रत्यय हैं
(अ) आ + गम्य + ल्यपु,
(ब) आ + गम् + ल्यप्,
(स) आ + गय + ल्यप्,
(द) आ + ल्यप् + गम्।
उत्तर-
(ब) आ + गम् + ल्यप्,

रिक्त स्थान पूर्ति-

१. बाल + टाप् = ………………………………
२. जि + तुमुन् = ………………………………।
३. वध् + शानच् = ………………………………।
४. गम् + क्त = ………………………………।
५. दृश् + अनीयर् = ………………………………
उत्तर-
१. बालिका,
२. जेतुम्,
३. वर्धमानः,
४. गतः,
५. दर्शनीयम्।

Prakriti Pratyay Class 10 MP Board सत्य/असत्य-

१. पठितव्यम्’ में शानच् प्रत्यय है।
२. ‘गत्वा’ में क्त्वा प्रत्यय है।
३. विद्यवान्’ में शानच् प्रत्यय है।
४. ‘श्रीमान्’ में मतुप् प्रत्यय है।
५. ‘सर्वत्र’ में त्रल् प्रत्यय है।
उत्तर-
१. असत्य,
२. सत्य,
३. असत्य,
४. सत्य,
५. सत्य।

जोड़ी मिलाइए-
Class 10 Sanskrit Pratyay MP Board
उत्तर-
१. → (iv)
२. → (i)
३. → (v)
४. → (ii)
५. → (iii)

MP Board Class 10th Sanskrit Solutions

MP Board Class 8th Hindi Sugam Bharti Solutions Chapter 9 हमें न बाँघें प्राचीरों में

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MP Board Class 8th Hindi Sugam Bharti Solutions Chapter 9 हमें न बाँघें प्राचीरों में

प्रश्न अभ्यास
अनुभव विस्तार

Mp Board Class 8 Hindi Chapter 9 प्रश्न 1.
(क) सही जोड़ी बनाइए
Mp Board Class 8 Hindi Chapter 9
उत्तर
(अ) 2, (ब) 1, (स) 4, (द) 3

(ख) सही विकल्प चुनकर रिक्त स्थानों की पूर्ति कीजिए

1. हम पंछी उन्मुक्त …………………. (गगन, चमन)
2. नीड़ ने दो चाहे …………………. का (डाली, टहनी)
3. आश्रय …………………. कर डालो (छिन्न-भिन्न, तहस-नहस)
4. या तो ……………… मिलन बन जाता। (आकाश, क्षितिज)
उत्तर
1. गगन,
2. टहनी,
3. छिन्न-भिन्न,
4. क्षितिज

Class 8 Hindi Chapter 9 Mp Board प्रश्न 2.
अति लघु उत्तरीय प्रश्न
(अ)पिंजरे में बंद होकर पक्षी क्यों नहीं गा पाएँगे?
(ब) पंछी क्या चाहता है?
(स) पंछी का क्या अरमान है?
(द) पंछी स्वप्न में क्या देखता है?
उत्तर
(अ) पिंजरे में बंद होकर पंक्षी नहीं गा पाएँगे; क्योंकि वे स्वतंत्र आसमान में उड़ने वाले जीव हैं।
(ब) पंछी चाहता है कि उसकी उड़ान में कोई बाधा न डाले।
(स) पंछी का अरमान है कि वह नीले आसमान की सीमा पा ले।
(द) पंछी स्वप्न में तरु (पेड़) की फुनगी पर के झूले को देखता है।

भाषा भारती कक्षा 8 Solutions Mp Board प्रश्न 3.
लघु उत्तरीय प्रश्न

(अ)
पक्षी को सोने की सलाखों के पिंजरे में किस बात का भय बना रहता है और क्यों?
उत्तर
पक्षी को सोने की सलाखों के पिंजरे में इस बात का भय बना रहता है कि वह अपनी गति उड़ान आदि न भूल जाए। चूंकि पिंजरे का जीवन स्वतंत्र नहीं है। पक्षी को स्वतंत्रता चाहिए, जो उन्हें उन्मुक्त गगन में ही मिल सकता है, पिंजरे में नहीं। पक्षी उन्मुक्त गगन में उड़ान भरकर काफी खुश होंगे। पिंजरे की सुख-सुविधा उन्हें नहीं चाहिए।

(ब)
स्वतंत्र जीवन जीने वाले कैसे होते हैं?
उत्तर
स्वतंत्र जीवन जीने वाले स्वाभिमानी होते हैं। उनके बड़े-बड़े अरमान होते हैं। वे इसके लिए कुछ भी कर गुजरने से नहीं रुकते हैं। वे स्वतंत्र जीवन को ही एकमात्र अपना जीवन-लक्ष्य मानकर इसको दृढ़तापूर्वक सिद्ध करने में कोई कोई कसर नहीं छोड़ते हैं।

(स)
‘कनक-कटोरी की मैदा’ और ‘कटुक-निबौरी’ में से पक्षी को कौन-सी वस्तु भली लगती है और क्यों? लिखिए।
उत्तर
‘कनक-कटोरी की मैदा’ और ‘कटक-निबौरी’ में से पक्षी को ‘कटुक-निबौरी’ ही वस्तु भली लगती है। यह इसलिए कि इसमें उसकी स्वतंत्रता है, परतंत्रता नहीं।

(द)
पिंजरे की सुविधाएँ पंछी को क्यों पसंद नहीं हैं?
उत्तर
पिंजरे की सविधाएं पंछी को पसंद नहीं हैं। यह इसलिए कि इसमें उसकी स्वतंत्रता नहीं परतंत्रता है। चूंकि वह बहता जल पीने वाला है। खुले आकाश में अपनी उड़ान भरने वाला है। मनपसंद फल खाने वाला है। ये स्वतंत्रता (सुख-सुविधाएँ) उसे पिंजरे में नहीं मिल सकती हैं।

भाषा की बात

Sugam Bharti Class 8 Mp Board प्रश्न 1.
निम्नलिखित शब्दों को बोलिए और लिखिए
उन्मुक्त, पिंजरबद्ध, कटुक-निवौरी, श्रृंखला, फुनगी, नीड़, आश्रय, नील-गगन, क्षितिज।
उत्तर
उन्मुक्त, पिंजरबद्ध, कटुक-निबौरी, शृंखला, फुनगी; नीड़ आश्रय, नील-गगन, क्षितिज।

Mp Board Class 8th Hindi Solution प्रश्न 2.
निम्नलिखित पंक्तियों के भाव स्पष्ट कीजिए
(क) पुलकित पंख टूट जाएँगे।
(ख) स्वर्ण-शृंखला के बंधन में, अपनी गति, उड़ान सब भूले।
(ग) नील-गगन से होड़ा-होड़ी।
उत्तर
(क) पुलकित पंख टूट जाएँगे।
इन पंक्तियों में कवि ने यह कहना चाहा है कि परतंत्रता बड़ी कठोर होती है। वह स्वतंत्रता की सरसता के पर को कतर-कतर उसका जीना कठिन कर देती है।

(ख) स्वर्ण-शृंखला के बंधन में अपनी गति उड़ान सब भूले।
इन पंक्तियों में कवि ने यह कहना चाहा है कि परतंत्रता स्वतंत्रता की सभी अच्छाइयों और रूपों को भूल जाने के लिए मजबूर कर देती है। इस तरह परतंत्रता की सुख-सुविधाएँ स्वतंत्रता के महत्त्व को समाप्त नहीं कर सकती हैं।

(ग) इन पंक्तियों में कवि ने यह कहना चाहा है कि स्वतंत्रता बेरोक-टोक होती है। वह बड़े-बड़े अरमानों को पूरा करने के लिए हमेशा कोशिश करती रहती है। इस दिशा में वह किसी से सामना करने से पीछे नहीं हटती है।

Mp Board Class 8 Hindi Book Solution प्रश्न 3.
कविता में ‘नील-गगन’ शब्द आया है। इसमें योजक चिह्न (-) का प्रयोग हुआ है।
निम्नलिखित शब्दों को योजक चिह लगाकार लिखिए कनक तीलियों, भूखे प्यासे, कटुक निबौरी, कनक कटोरी, होड़ा होड़ी, भिन्न भिन्न।
उत्तर
कनक-तीलियों, भूखे-प्यासे, कटुक-निबोरी, कनक-कटोरी, होड़ा-होड़ी, भिन्न-भिन्न। विलोम शब्द देश

Mp Board 8th Class Hindi Book Solutions प्रश्न 4.
निम्नलिखित शब्दों के विलोम शब्द लिखिए
उत्तर
शब्द  विलोम शब्द
आकाश –  धरती
स्वाधीन –
पराधीन
सुबह –
शाम
अमृत – विष

Bhasha Bharti Class 8 Hindi MP Board प्रश्न 5.
नीचे दिए गए शब्दों के लिंग परिवर्तन कीजिए
उत्तर
शब्द लिंग – परिवर्तन
चूहा – चूहिया
बालक –
बालिका
सेवक – सेविका
पापी –
पाप
बंदर –
बंदरिया
घोड़ा –
घोड़ी
लेखक –
लेखिका।

प्रमुख पद्यांशों की संदर्भ-प्रसंग सहित व्याख्याएँ

1. हम पंक्षी उन्मुक्त गगन के
पिंजरबद्ध न गा पाएंगे
कनक-तीलियों से टकराकर
पुलकित पंख टूट जाएंगे।
हम बहता जल पीने वाले
मर जाएंगे भूखे-प्यासे’
कहीं भली है कटुक निबोरी
कनक-कटोरी की मैदा से।

Hum Panchhi Unmukt Gagan Ke Question Answer Class 8 शब्दार्थ:
उन्मुक्त-स्वतंत्र। गगन-आसमान । पिंजरबद्ध-पिंजरे में बंद। कनक- तीलियों-सोने की तीलियों। पुलकित-आनंदित। कटुक-तीखा। निबौरी-नीम के फल : कनक-कटोरी-सोने की कटोरी।

संदर्भ – प्रस्तुत पंक्तियां हमारी पाठ्य पुस्तक ‘सुगम भारती’ (हिन्दी सामान्य) भाग-8 के पाठ-9 ‘हमें न बाँधों प्राचीरों में’ से ली गई हैं। इसके रचयिता हैं शिवमंगल सिंह ‘सुमन’ ।

प्रसंग- इसमें कवि पंछी के मनोभावों को व्यक्त कर रहा है।

Hum Behta Jal Peene Wale MP Board Class 8th व्याख्या:
स्वतंत्रता सबको प्यारी लगती है। मानव ही नहीं, पशु-पक्षी भी स्वतंत्र वातावरण में रहना चाहते हैं। इन पंक्तियों में पंछियों के मनोभावों को व्यक्त करते हुए कवि कहता है

कि ये स्वतंत्र आसमान में उड़ने वाले जीव हैं। इन्हें पिंजरे में बंद होना कतई अच्छा नहीं लगता। पंछी कहते हैं कि सोने की तीलियों (जिससे पिंजड़ा बना है) से टकराकर उसके पंख टूट जाएंगे। वे उड़ नहीं पाएंगे, क्योंकि पेंजड़े का दायरा काफी छोटा है। उडान भरते हए जब कभी उन्हें प्यास लगती है. वे नदी-तालाबों में से पानी पी लेते हैं। यहां पिंजड़े में वे भखे-प्यासे मः जाएंगे। स्वतंत्र रहते हुए अगर उन्हें नीम के तीखे फल (निया भी मिले तो उन्हें अच्छा लगेगा, किंतु पिंजरे में बंद कर जर कोई उन्हें सोने की कटोरी में स्वादिष्ट भोजन भी ला है । उन्हें वह बिल्कुल रास नहीं आएगा।

विशेष:
स्वतंत्रता मनुष्यों और पशु-पक्षियों का समान रूप स प्रिय है। कनक-तीलियों में रूपक अलंकार और पुलकित पंख एवं . कनक-कटोरी में अनुप्रास अलंकार है।

2. स्वर्ण-शृंखला के बंधन में
अपनी गति, उड़ान सब भूले,
बस सपनों में देख रहे हैं,
तरु की फुनगी पर के झूले।
ऐसे थे अरमान कि उड़ते
नीले नम की सीमा पाने,
लाल-किरण-सी चोंच खोल
चुगते तारक अनार के दाने।

शब्दार्थ :
स्वर्ण-शृंखला-सोने की कड़ी। तरु-पेड़। फुनगी-पेड़ की चोटी। अरमान-इच्छा, आकांक्षा । नभ-आकाश, आसमान। चुगते-चुगना।

संदर्भ – पूर्ववत्।

प्रसंग – इसमें कवि पिंजड़े में बंद पंछियों की व्यथा को व्यक्त कर रहा है।

व्याख्या
पिंजड़े में बंद पंछी काफी दुःखी हैं। उन्हें डर है कि वे अपनी उड़ान न भूल जाएं। उन्हें लगता है कि पेड़ों के ऊपरी सिरे पर झुलने का उनका सपना यूं ही बेकार हो जाएगा। पंछी नीले आसमान की सीमा पाने का अरमान रखते हैं, जहां वे ताड़ों जैसे अनार के दाने चुग सकें। लेकिन पिंजड़े की स्वर्ण शृंखला ने उनकी सारी इच्छाओं पर पानी फेर दिया है। वे परतंत्र हैं। उन्मुक्त होकर उड़ नहीं सकते। शायद इसीलिए वे दुःखी हैं, व्यथित हैं।

विशेष
लाल किरण-सी चोंच में उपमा अलंकार और तारक-अनार में रूपक अलंकार है।

3. होती सीमाहीन क्षितिज से
इन पंखों की होड़ा-होड़ी
या तो क्षितिज मिलन बन जाता
या तनती सांसों की डोरी।
नीड़ न दो, चाहे टहनी का
आश्रय छिन्न-भिन्न कर डालो,
लेकिन पंक्ष दिए हैं तो
आकुल उड़ान में विघ्न न डालो।

शब्दार्थ: सीमाहीन
जिसकी कोई सीमा न हो। क्षितिज-वह स्थान जहां पृथ्वी एवं आकाश मिलते दिखाई देते हैं। होड़ा-होड़ी-प्रतियोगिता, होड़ । तनती सांसों की डोरी-सांसें टूट जातीं। नीड़-घोंसला। टहनी-पेड़ का तना। आश्रय-रहने का स्थान। छिन्न-भिन्न-नष्ट। आकुल-बेचैन। विघ्न-बाधा।

संदर्भ – पूर्ववत्।

प्रसंग – प्रथम चार पंक्तियों में कवि पंछियों की सुखद कल्पना को व्यक्त कर रहा है अर्थात अगर वे पिंजरे में बंद नहीं होते तो क्या करते। बाद की चार पंक्तियों में कवि उनके द्वारा मानव के किए गए अनुरोध का जिक्र कर रहा है।

व्याख्या:
उड़ान भरने को व्याकुल पंछी पिंजड़े में पड़े हुए सोचते हैं कि अगर वे स्वतंत्र होते, तो सीमाहीन आसमान में उड़ते रहते। अनंत क्षितिज को छूने के लिए इनमें होड़ लगती जहां या तो क्षितिज से मिलन हो जाता या इनकी सांसें टूट जातीं।
अंत में पंछी हम मानव से अनुरोध करते हैं कि भले ही हम वृक्षों को काटकर उनके आश्रय (घोंसला) को नष्ट कर दें, लेकिन उनकी उड़ान में कोई बाधा न डालें। उनके लिए दो पंख काफी हैं। इन पंखों के सहारे वे खुशी-खुशी अपना जीवन बिता सकते हैं।

विशेष:
होड़ा-होड़ी, तनती सांसों की डोरी, छिन्न-भिन्न कर डालो, जैसे मुहावरों के प्रयोग से कविता की सुंदरता बढ़ गई

 

MP Board Class 8th Hindi Sugam Bharti Solutions Chapter 21 मेरा गाँव मिल क्यों नहीं रहा?

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MP Board Class 8th Hindi Sugam Bharti Solutions Chapter 21 मेरा गाँव मिल क्यों नहीं रहा?

प्रश्न अभ्यास
अनुभव विस्तार

Class 8 Hindi Chapter 21 MP Board Chapter 21 प्रश्न 1.
(क) सही जोड़ी बनाइए
वस्तुनिष्ठ प्रश्न
Class 8 Hindi Sugam Bharti MP Board Chapter 21
उत्तर
(अ) 2, (ब) 1, (स) 4, (द) 3

(ख) दिए गए विकल्पों से सही शब्द चुनकर रिक्त स्थान की पूर्ति कीजिए
(ऋण, चेहरा, दर्द, भूख, गोरस, आम, पानी, स्वप्न)
(अ) ये कौन लोग हैं जो बाँटे गए…………………से खेतों के लहलहाने का……………….देख रहे हैं?
(ब) अब तो नदी का ………………. उभरे हुए ………की तरह रेत बन चुका है।
(स) गाँव का …………. बजाय चीखते बच्चों के, होटल वालों की ……………बुझाने में लगा है।
(द) आम को देखकर…………आदमी के मुँह में……..तो नहीं आ रहा है।
उत्तर
(अ) ऋण, स्वप्न,
(ब) पानी, दर्द
(स) गोरस, भूख
(द) ‘आम’, पानी।

अति लघु उत्तरीय प्रश्नोत्तर

Mp Board Class 8 Hindi Chapter 21 प्रश्न 1.
(अ) गाँव की गली के मोड़ पर कौन बाट जोह रहा है? (ब) पीली पत्तियों की तुलना किससे की गई है?
(स) “गाँव में जहाँ रथ-सी सजी गाड़ियाँ खड़ी रहती थीं’-वहाँ अब क्या खड़े नजर आते हैं?
(द) तेलघानी में तिल्ली या मूंगफली के स्थान पर अब क्या डाला जा रहा है?
(ई) लेखक क्या ढूँढ रहा है?
उत्तर
(अ) गाँव की गली के मोड़ पर खड़ा बूढ़ा नीम बाट जोह रहा है।
(ब) पीली पत्तियों की तुलना पगड़ी से की गई है।
(स) ‘गाँव में जहाँ रथ-सी सजी गाड़ियाँ खड़ी रहती थीं’ वहाँ अब ठलुओं के साथ ठेले खड़े नज़र आते हैं।
(द) तेलघानी में तिल्ली या मूंगफली के स्थान पर अब नोट डाला जा रहा है।
(ई) लेखक अपना गाँव ढूँढ़ रहा है।

लघु उत्तरीय प्रश्नोत्तर

Class 8 Hindi Chapter 21 Mp Board Chapter 21 प्रश्न 1.

(अ)
लेखक की बूढ़े बाबा से क्या बात होती थी?
उत्तर
लेखक की बूढ़े बाबा से यह बात होती है कि उसने उसे कैसे पहचाना।

(ब)
लेखक कुबेर-सा समृद्ध कब हो उठता था?
उत्तर
लेखक उस समय कुबेर-सा समृद्ध हो उठता था, जब बकरी के दूध से बनी चाय के साथ अपनी तार-तार पगड़ी के पेंच से बँधे दस पैसे निकाल दक्षिणा में देता था।

(स)
गाँव में अब नदी की क्या स्थिति हो गई है?
उत्तर
गाँव में अब नदी की स्थिति दर्द की तरह बन चुकी है।

(द)
गाँव की अमराई के स्वरूप में क्या परिवर्तन हुआ है? स्पष्ट करें।
उत्तर
गाँव की अमराई के स्वरूप में वड़ा दुखद परिवर्तन हो गया है। अब उन पर कायलें कूकती नहीं, कौए बैठकर इस बात की चौकसी करते हैं कि कहीं ‘आम को देखकर’ आम आदमी के मुँह में पानी तो नहीं आ रहा है।

(ई)
वर्तमान में गाँव का ठाठ उठ चुका है’ कैसे? पाइ के आधार पर स्पष्ट कीजिए।
उत्तर
‘वर्तमान में गाँव का ठाठ उठ चुका है बाजार की तरह। यह ठीक उसी प्रकार जैसे हुए बाजार का सन्नाटा छा जाता है। जहाँ नमकीन, सेव और गुड़ी पट्टी से चिपचिपाते कागज के जूठे पन्ने हवा में उड़ते-फिरते हैं। जहाँ पान की पीक और मूंगफली के छिलकों से वहाँ कभी आदमियों के होने का आभास होता है।

भाषा की बात

Mp Board Solution Class 8 Hindi Chapter 21 प्रश्न 1.
बोलिए और लिखिए
चौपाल, चौसर, जन्मान्ध, पगथैलियों, खलिहान, अमराई, तेलघानी, समृद्ध, सर्वांगीण, अनुदान, क्वार्टर।।
उत्तर
चौपाल, चौसर, जन्मान्ध, पगथैलियों, खलिहान, अमराई, तेलघानी, समृद्ध, सर्वांगीण, अनुदान, क्वार्टर।।

Class 8th Hindi Solution Mp Board Chapter 21 प्रश्न 2.
निम्नलिखित शब्दों की शुद्ध वर्तनी लिखिए
पड़ोसिन, कूम्हार, दक्षीणा, चौरहा, अवाज, तिली, मूंगफलि, दफतर, चिपचपाते।
उत्तर
पड़ोसिन, कुम्हार, दक्षिणा, चौराहा, आवाज, तिल्ली. मूंगफली, दफ्तर, चिपचिपाते।

Mp Board Solution Class 8 Chapter 21 प्रश्न 3.
नीचे लिखे शब्दों से विशेषण शब्द अलग करके, लिखिए
(अ) बूटा नीम
(ब) फटे जूते
(स) शरारती हवा
(द) पीली पत्तियाँ
(ई) ‘नालदार जूते
उत्तर
शब्द – विशेषण शब्द
(अ) बूढ़ा नीम – बूढ़ा
(ब) फटे जूते – फटे
(स) शरारती हवा – शरारती
(द) पीली पत्तियाँ – पीली
(ई) नालदार जूते – नालदार

Mp Board Class 8th Hindi Solution Chapter 21 प्रश्न 4.
नीचे लिखे शब्दों के दो-दो पर्यायवाची शब्द लिखिए
उत्तर
(अ) घर – सदन, आवास।
(ब) धरती – धरा, अवनि।
(स) धन – सम्पदा, अर्थ।
(द) नदी – सरिता, निर्झरणी।

Class 8 Hindi Mp Board Solution Chapter 21 प्रश्न 5.
उदाहरण के अनुसार नीचे दिए गए क्रिया शब्दों को प्रेरणार्थक क्रिया में बदलिए
उत्तर
Mp Board Class 8 Hindi Solutions Chapter 21

गद्यांश की संदर्भ-प्रसंग सहित व्याख्या

1. लगता है, उठे हुए बाजार की तरह मेरे गाँव का ठाठ उठ चुका है। कभी देखा है उठे हुए बाजार का सन्नाटा, जहाँ नमकीन, सेंव और गुड़ी पट्टी से चिपचिपाते कागज के जूठे पन्ने हवा में उड़ते फिरते हैं। जहाँ पान की पीक तथा मूंगफली के छिलकों से, वहाँ कभी आदमियों के होने का आभास होता है।

शब्दार्थ
ठाठ-सौन्दर्य । सन्नाटा-चुप्पी, शान्ति।पीक-थूक। आभास-भ्रम, अनुमान।

संदर्भ – प्रस्तुत पंक्तियाँ हमारी पाठ्य-पुस्तक ‘सुगम भारती’ (हिंदी सामान्य) भाग-8 के पाठ 21 ‘मेरा गाँव मिल क्यों नहीं रहा?’ से ली गई हैं। इनके लेखक श्री रामनारायण उपाध्याय है।

प्रसंग- प्रस्तुत पंक्तियों में लेखक ने बदलते यांत्रिक परिवेश में गाँव की दुर्दशा का उल्लेख करते हुए कहा कि

Class 8 Hindi Mp Board Chapter 21 व्याख्या
आज गाँव की दशा को देखकर ऐसा लगता है कि आज गाँव का सब कुछ उजड़ चुका है। लुट चुका है। इस तरह गाँव की दशा आज ठीक वैसी ही दिखाई दे रही है, जैसे उठे हुए बाजार की रूप-दशा। इसी तरह आज गाँव की शान, और सुन्दरता उतर चुका है। जिस प्रकार उठे हुए बाजार में सन्नाटा छा जाता है। वहाँ केवल नमकीन, सेव, गुड़ी पट्टी से चिपचिपाते कागज के जूठे पन्ने-पत्ते हवा के झोंके से कभी इधर कभी उधर मँडराते रहते हैं। पान की पीक और मूंगफली के छिलकों से वहाँ पर किसी-न-किसी आदमी के होने का भ्रम होता है। ठीक इसी प्रकार आज के इस यंत्र युग के अभाव से गाँवों की दशा हो गई।

विशेष

  • भाषा सरल है।
  • गाँव की दुखद दशा का उल्लेख है।

MP Board Class 7th Science Solutions Chapter 6 भौतिक एवं रासायनिक परिवर्तन

MP Board Class 7th Science Solutions Chapter 6 भौतिक एवं रासायनिक परिवर्तन

MP Board Class 7th Science Chapter 6 पाठान्त अभ्यास के प्रश्नोत्तर

भौतिक एवं रासायनिक परिवर्तन कक्षा 7 MP Board Chapter 6 प्रश्न 1.
निम्नलिखित प्रक्रमों के अन्तर्गत होने वाले परिवर्तनों को भौतिक अथवा रासायनिक परिवर्तन के रूप में वर्गीकृत कीजिए:

  1. प्रकाश संश्लेषण।
  2. जल में शक्कर को घोलना।
  3. कोयले को जलाना।
  4. मोम को पिघलाना।
  5. ऐलुमिनियम के टुकड़े को पीटकर उसका पतला पत्र (फॉइल) बनाना।
  6. भोजन का पाचन।

उत्तर:

  1. रासायनिक परिवर्तन।
  2. भौतिक परिवर्तन।
  3. रासायनिक परिवर्तन।
  4. भौतिक परिवर्तन।
  5. भौतिक परिवर्तन।
  6. रासायनिक परिवर्तन।

भौतिक एवं रासायनिक परिवर्तन प्रश्न उत्तर MP Board Chapter 6 प्रश्न 2.
बताइए कि निम्नलिखित कथन सत्य हैं अथवा असत्य। यदि कथन असत्य हो, तो अपनी अभ्यास पुस्तिका में उसे सही करके लिखिए।

  1. लकड़ी के लट्ठे को टुकड़ों में काटना एक रासायनिक परिवर्तन है। (सत्य/असत्य)
  2. पत्तियों से खाद बनना एक भौतिक परिवर्तन है। (सत्य/असत्य)
  3. जस्ते (जिंक) लेपित लोहे के पाइपों में आसानी से जंग नहीं लगती है। (सत्य/असत्य)
  4. लोहा और जंग एक ही पदार्थ हैं। (सत्य/असत्य)
  5. भाप का संघनन रासायनिक परिवर्तन नहीं है। (सत्य/ असत्य)

उत्तर:

  1. लकड़ी के लढे को टुकड़ों में काटना एक भौतिक परिवर्तन है। (असत्य)
  2. पत्तियों से खाद बनना एक रासायनिक परिवर्तन है। (असत्य)
  3. जस्ते (जिंक) लेपित लोहे के पाइपों में आसानी से जंग नहीं लगती है। (सत्य)
  4. लोहा और जंग एक ही पदार्थ नहीं हैं। जंग लोहे का ऑक्साइड (आयरन ऑक्साइड) है। (असत्य)
  5. भाप का संघनन रासायनिक परिवर्तन नहीं है। यह एक भौतिक परिवर्तन है। (सत्य)

कक्षा 7 विज्ञान पाठ 6 के प्रश्न उत्तर MP Board प्रश्न 3.
निम्नलिखित कथनों में रिक्त स्थानों को भरिए:

  1. जब कार्बन डाइऑक्साइड को चूने के पानी में प्रवाहित किया जाता है, तो वह …….. के बनने के कारण दूधिया हो जाता है।
  2. खाने के सोडे का रासायनिक नाम है।
  3. ऐसी दो विधियाँ, जिनके द्वारा लोहे को जंग लगने से बचाया जा सकता है …….. और ……… है।
  4. ऐसे परिवर्तन भौतिक परिवर्तन कहलाते हैं, जिनमें किसी पदार्थ के केवल …… गुणों में परिवर्तन होता है।
  5. ऐसे परिवर्तन जिनमें नये पदार्थ बनते हैं, ……….. परिवर्तन कहलाते हैं।

उत्तर:

  1. कैल्सियम कार्बोनेट।
  2. सोडियम हाइड्रोजन कार्बोनेट।
  3. गैल्वेनाइजेशन, ग्रीजिंग।
  4. भौतिक।
  5. रासायनिक।

कक्षा 7 विज्ञान भौतिक एवं रासायनिक परिवर्तन MP Board Chapter 6 प्रश्न 4.
जब नीबू के रस में खाने का सोडा मिलाया जाता है, तो बुलबुले बनते हैं और गैस निकलती है। यह किस प्रकार का परिवर्तन है? समझाइए।
उत्तर:
यह रासायनिक परिवर्तन है। जब नीबू के रस में खाने का सोडा मिलाया जाता है, तो कार्बन डाइऑक्साइड गैस निकलती है तथा अन्य पदार्थ बनते हैं। इस परिवर्तन में नये पदार्थ बनते हैं। अत: यह एक रासायनिक परिवर्तन है।

प्रश्न 5.
जब कोई मोमबत्ती जलती है, तो भौतिक और रासायनिक परिवर्तन दोनों ही होते हैं। इन परिवर्तनों की पहचान कीजिए। ऐसे ही किसी ज्ञात प्रक्रम का एक और उदाहरण दीजिए, जिसमें भौतिक और रासायिनक परिवर्तन दोनों होते हैं।
उत्तर:
मोमबत्ती के जलने पर मोम का पिघलना भौतिक परिवर्तन है तथा मोमबत्ती का जलना रासायनिक परिवर्तन है। मोम के पिघलने पर उसके केवल भौतिक गुणों में परिवर्तन होता है। अत: यह भौतिक परिवर्तन है। मोमबत्ती के जलने से इसके रासायनिक गुण व संगठन बदल जाता है, पिघला हुआ मोम कार्बन डाइऑक्साइड तथा अन्य पदार्थों में बदल जाता है तथा इसे मूल के रूप में प्राप्त नहीं किया जा सकता। यह रासायनिक परिवर्तन है। अत: मोमबत्ती के जलने पर भौतिक एवं रासायनिक में परिवर्तन दोनों की होते हैं।

उदाहरण:
कोयला को टुकड़ों में तोड़कर जलाने पर भौतिक और रासायनिक परिवर्तन दोनों ही होते हैं। कोयले का टुकड़ों में टूटना भौतिक परिवर्तन है। इसमें कोयले के गुण नहीं बदलते। कोयले का जलना रासायनिक परिवर्तन है। जलने से कोयले के रासायनिक गुण बदल जाते हैं और नये पदार्थ बन जाते हैं।

प्रश्न 6.
आप यह कैसे दिखाएँगे कि दही का जमना रासायनिक परिवर्तन है?
उत्तर:

  1. दही के जमने पर रासायनिक संगठन बदल जाता है।
  2. दही नये पदार्थ के रूप में प्राप्त होता है।
  3. दही को पुन: इसकी मूल अवस्था (दूध) में प्राप्त नहीं किया जा सकता है।
  4. रासायनिक गुणों में परिवर्तन हो जाता है। इसका स्वाद खट्टा होता है।

अत: दही का जमना रासायनिक परिवर्तन है।

प्रश्न 7.
समझाइए कि लकड़ी के जलने और उसे छोटे टुकड़ों में काटने को दो भिन्न प्रकार के परिवर्तन क्यों माना जाता है?
उत्तर:
लकड़ी के टुकड़ों को पुन: जोड़कर मूल टुकड़ा नहीं बना सकते, लेकिन लकड़ी के गुण में कोई परिवर्तन नहीं हुआ। यह भौतिक परिवर्तन है। लकड़ी के जलने के बाद उसे मूल रूप में वापस नहीं लाया जा सकता है। इसके गुणों में भी परिवर्तन हो जाता है तथा ऊष्मा का उत्पादन होता है। यह रासायनिक परिवर्तन है। यहाँ लकड़ी के जलने और उसे छोटे टुकड़ों में काटने की दो भिन्न अवस्थाएँ हैं। इस स्थिति में दो भिन्न प्रकार के परिवर्तन माने जाते हैं।

प्रश्न 8.
कॉपर सल्फेट के क्रिस्टल कैसे बनाते हैं, इसका वर्णन कीजिए।
उत्तर:
कॉपर सल्फेट के क्रिस्टल बनाना:
विधि:
एक बीकर को अच्छी तरह साफ करके इसमें एक कप जल लेते हैं। इस जल में तनु सल्फ्यू रिक अम्ल की कुछ बूंदें मिलाकर गर्म करते हैं। जब जल उबलने लगे तब उसमें कॉपर सल्फेट का चूर्ण डालते जाते हैं तथा इसे चलाते जाते हैं। कॉपर सल्फेट का चूर्ण तब तक डालते हैं जब तक कि उसका घुलना बन्द न हो जाए। अब इस विलयन को फिल्टर पेपर की सहायता से छानकर विलयन को ठण्डा होने देते हैं। कुछ समय के बाद कॉपर सल्फेट के क्रिस्टल बनने लगते हैं।

प्रश्न 9.
समझाइए कि लोहे के गेट को पेंट करने से उसका जंग लगने से बचाव किस कारण से होता है?
उत्तर:
जंग लगने के लिए ऑक्सीजन और जलवाष्प की उपस्थिति आवश्यक है। लोहे के गेट को इनके सम्पर्क में आने से बचाने के लिए इस पर पेंट कर देते हैं। पेंट की तह लोहे को इनके सम्पर्क में नहीं आने देती और लोहे का गेट जंग लगने से बच जाता है।

प्रश्न 10.
समझाइए कि रेगिस्तानी क्षेत्रों की अपेक्षा समुद्र तटीय क्षेत्रों में लोहे की वस्तुओं में जंग अधिक क्यों लगती है?
उत्तर:
रेगिस्तानी क्षेत्रों में वायु में आर्द्रता (नमी) की मात्रा बहुत कम होती है जबकि समुद्र तटीय क्षेत्रों में वायु में आर्द्रता की मात्रा अधिक होती है, जो जंग लगने के लिए आवश्यक है। अतः रेगिस्तानी क्षेत्रों की अपेक्षा समुद्र तटीय क्षेत्रों में लोहे की वस्तुओं में अधिक जंग लगती है।

प्रश्न 11.
हम रसोई गैस का उपयोग करते हैं। वह दवित पेट्रोलियम गैस (LPG) कहलाती है। सिलिण्डर में LPG द्रव के रूप में होती है। सिलिण्डर से बाहर आते ही यह गैस में परिवर्तित हो जाती है (परिवर्तन A); फिर यही गैस जलती है(परिवर्तन B)। निम्नलिखित कथन इन परिवर्तनों से सम्बन्धित हैं। सही कथन का चयन कीजिए।

  1. प्रक्रम-A एक रासायनिक परिवर्तन है।
  2. प्रक्रम-B एक रासायनिक परिवर्तन है।
  3. प्रक्रम-A और प्रक्रम-B दोनों ही रासायनिक परिवर्तन हैं।
  4. इनमें से कोई भी प्रक्रम रासायनिक परिवर्तन नहीं है।

उत्तर:
प्रक्रम-B रासायनिक परिवर्तन है।

प्रश्न 12.
अवायवीय जीवाणु जैविक अपशिष्ट पदार्थों को अपघटित कर जैव गैस (बायोगैस) बनाते हैं (परिवर्तन-A)। फिर जैव गैस ईधन के रूप में जलाई जाती है। (परिवर्तन-B)। निम्नलिखित कथन इन परिवर्तन से सम्बन्धित हैं। सही कथन चुनिए:

  1. प्रक्रम-A एक रासायनिक परिवर्तन है।
  2. प्रक्रम-B एक रासायनिक परिवर्तन है।
  3. प्रक्रम-A और प्रक्रम-B दोनों ही रासायनिक परिवर्तन हैं।
  4. इनमें से कोई भी प्रक्रम रासायनिक परिवर्तन नहीं है।

उत्तर:
प्रक्रम-A और प्रक्रम-B दोनों ही रासायनिक परिवर्तन हैं।

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MP Board Class 11th Special Hindi शुद्ध वाक्य रचना सम्बन्धी नियम

MP Board Class 11th Special Hindi शुद्ध वाक्य रचना सम्बन्धी नियम

वाक्य रचना की सामान्य अशुद्धियाँ

वाक्य रचना में होने वाली सामान्य अशुद्धियाँ प्रायः इस प्रकार हैं

1. वचन सम्बन्धी अशुद्धियाँ-आदि, अनेक अथवा बहुवचन संज्ञा की क्रियाओं में प्रायः वचन सम्बन्धी त्रुटियाँ हो हैं। जैसे-
अशुद्ध वाक्य – शुद्ध वाक्य
(1) मैंने आज फूल आदि खरीदा। – (1) मैंने आज फूल आदि खरीदे।
(2)मैंने अनेकों स्थान देखे। – (2) मैंने अनेक स्थान देखे।
(3) बार-बार एक ही बात सुनते-सुनते मेरा कान पक गया। – (3) बार-बार एक ही बात सुनते-सुनते मेरे कान पक गये।

2. लिंग सम्बन्धी अशुद्धियाँ-विशेषण और विशेष्य का लिंग एक जैसा हो, समस्त पदों के सर्वनाम का लिंग एवं क्रिया का लिंग अन्तिम पद के अनुसार होना चाहिए। उदाहरण
अशुद्ध वाक्य – शुद्ध वाक्य
(1) सीता एक विद्वान् छात्रा है। – (1) सीता एक विदुषी छात्रा है।
(2) मैं अपनी देवी-देवताओं को मानता हूँ। – (2) मैं अपने देवी-देवताओं को मानता हैं।
(3) रीता ने आज मिष्ठान्न और नमकीन खरीदी। – (3) रीता ने आज मिष्ठान्न और नमकीन खरीदे।

3. अर्थ सम्बन्धी अशुद्धियाँ
अशुद्ध वाक्य – शुद्ध वाक्य
(1) आपकी सौजन्यता से मुझे कार्य मिला। – (1) आपके सौजन्य से मुझे कार्य मिला। [2009]
(2) निरपराधी को दण्ड देना अनुचित है। – (2) निरपराध को दण्ड देना अनुचित है। [2009]
(3) तुम अपने लड़के को मेरे यहाँ भेजो। – (3) तुम अपने पुत्र को मेरे यहाँ भेजो।
(4) शोक है कि तुम अनुत्तीर्ण हो गए। – (4) खेद है कि तुम अनुत्तीर्ण हो गए।

4. काल सम्बन्धी अशुद्धियाँ
अशुद्ध वाक्य – शुद्ध वाक्य
(1) मैंने कल पुस्तकें खरीदूंगा। – (1) मैं कल पुस्तकें खरीदूंगा।
(2) वह अगले साल दिल्ली गया था। – (2) वह पिछले साल दिल्ली गया था।
(3) मैं अगले सप्ताह विदेश जाता हूँ। – (3) मैं अगले सप्ताह विदेश जाऊँगा।

5. पुनरुक्ति सम्बन्धी अशुद्धियाँ
अशुद्ध वाक्य – शुद्ध वाक्य
(1) वह सदैव हमेशा सच बोलता है। – (1) वह सदैव सच बोलता है।
(2) वे सज्जन पुरुष आए हैं। – (2) वे सज्जन आए हैं।
(3) पूरे संसार जगत् में ईश्वर व्याप्त है। – (3) पूरे संसार में ईश्वर व्याप्त है।

6. मात्रा सम्बन्धी अशुद्धियाँ
अशुद्ध वाक्य – शुद्ध वाक्य
(1) राना सांगा एक ऐतिहासिक पुरुष थे। – (1) राणा सांगा एक ऐतिहासिक पुरुष थे।
(2) सौन्दर्यता सबको मोह लेती है। [2009] – (2) सुन्दरता सबको मोह लेती है।
(3) उसे रास्ते में सात पुरुष मिलें। – (3) उसे रास्ते में सात पुरुष मिले।

7. अन्य अशुद्धियाँ
अशुद्ध वाक्य – शुद्ध वाक्य
(1) घर में चीनी केवल नाममात्र को है। – (1) घर में चीनी नाममात्र को है।
(2) राम अथवा श्याम गए हैं। – (2) राम अथवा श्याम गया है।
(3) वह एक फूलों की माला लाया। – (3) वह फूलों की एक माला लाया।
(4) राम ने कहा कि राम का भाई आया हैं। – (4) राम ने कहा कि उसका भाई आया है।
(5) आज मोहन मीरा के साथ आया है। – (5) मोहन आज मीरा के साथ आया है।

शब्द-बोध
1. वर्तनी की दृष्टि से शुद्ध शब्दों का प्रयोग

वर्तनी (Spelling) का तात्पर्य अक्षर-विन्यास से है। पहले इसके लिए ‘हिज्जे’ या ‘अक्षरी’ नाम प्रचलित थे। उच्चारण की शुद्धता के अनुसार एवं व्याकरण की दृष्टि के अनुरूप शब्दों को लिखना ही, वर्तनी की दृष्टि से शुद्ध शब्दों का प्रयोग कहलाता है। – इन अशुद्धियों के कारण होते हैं-अज्ञान, भ्रान्ति, असावधानी, बनकर बोलने की दुष्प्रवृत्ति और विदेशी प्रभाव।

शुद्ध लेखन के लिए शुद्ध वर्तनी अपेक्षित होती है। वर्तनी ही भाषा की प्रभाव-क्षमता बढ़ाती है। अत: वर्तनी के सुधार या शब्द-शुद्धिकरण के लिए नीचे कुछ अशुद्ध शब्दों के शुद्ध रूप दिये हैं-
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2. अर्थ की दृष्टि से सही शब्दों का चयन

हिन्दी में कतिपय ऐसे शब्द हैं जिन्हें ऊपर से देखने पर कोई अर्थ-भेद नहीं दिखाई देता है, पर सूक्ष्मतः उनमें अन्तर होता है। ऐसे शब्दों का ज्ञान आवश्यक है।

कुछ शब्दों का अर्थ तो एक ही रहता है, पर प्रयोग में उनमें कुछ अन्तर रहता है। कभी-कभी सम्बद्ध शब्दों के प्रयोग से भी वाक्य अशुद्ध हो जाता है। जैसे
अशुद्ध वाक्य – शुद्ध वाक्य
(1) उसे व्यापार में हानि होने की आशा है। – (1) उसे व्यापार में हानि होने की आशंका है।
(2) विनय को परीक्षा में उत्तीर्ण होने की आशा है। – (2) विनय को परीक्षा में उत्तीर्ण होने की आशंका है।
(3) राम बुरी तरह प्रसिद्ध है। – (3) राम बुरी तरह बदनाम है।
(4) शोक है कि आपने मेरे पत्रों का उत्तर नहीं दिया है। – (4) खेद है कि आपने मेरे पत्रों का उत्तर नहीं दिया।
(5) मैंने एक वर्ष तक उसकी प्रतीक्षा देखी। – (5) मैंने एक वर्ष तक उसकी प्रतीक्षा की।
(6) रमा एक मोतियों का हार गले में पहने है। – (6) रमा मोतियों का एक हार गले में [2009] पहने है।
(7) मीना चाचाजी के ऊपर विश्वास करती है। – (7) मीना चाचाजी पर विश्वास करती है।
(8) शब्द केवल संकेत मात्र होते हैं। – (8) शब्द संकेत मात्र होते हैं।
(9) आपके एक-एक शब्द तुले हुए होते हैं। – (9) आपका एक-एक शब्द तुला हुआ होता है।
(10) उसे अनेकों व्यक्तियों ने आशीवाद दिया। – (10) उसे अनेक व्यक्तियों ने आशीर्वाद दिया।

(11) विंध्याचल पर्वत के दक्खिन में नर्मदा स्थित है। – (11) विंध्याचल के दक्षिण में नर्मदा स्थित है।
(12) मैं अपनी बात का स्पष्टीकरण करने के लिए तैयार हूँ। [2009]- (12) मैं अपनी बात का स्पष्टीकरण देने के लिए तैयार हूँ।
(13) मैं अपने गुरु के ऊपर बहुत श्रद्धा करता है। – (13) मैं अपने गुरु पर बहुत श्रद्धा रखता हूँ।
(14) सौन्दर्यता सबको मोह लेती है। [2009] – (14) सुन्दरता सबको मोह लेती है।
(15) हवा, चल रही है। – (15) हवा बह रही है।
(16) महादेवी वर्मा विद्वान महिला थी। – (16) महादेवी वर्मा एक विदुषी महिला थी।
(17) श्रीकृष्ण के अनेकों नाम हैं। [2009] – (17) श्रीकृष्ण के अनेक नाम हैं।
(18) यह घी की शुद्ध दुकान है। – (18) यह शुद्ध घी की दुकान है।
(19) मोहन आटा पिसाकर लाया। – (19) मोहन अनाज पिसाकर लाया।
(20) वे सज्जन पुरुष कौन हैं? – (20) वे सज्जन कौन हैं?
(21) प्रत्येक वृक्ष फल देते हैं।। – (21) प्रत्येक वृक्ष फल देता है।

अर्थ की दृष्टि से सही शब्दों का चयन करने के लिए सूक्ष्म अन्तर वाले शब्दों को कान लेना चाहिए जिससे सही अर्थ का ज्ञान हो तो हम सभी जगह उसका उपयोग कर सकें। जैसे
(1) अनुराग = स्त्री-पुरुष के बीच होने वाला स्नेह। प्रेम = स्नेह सम्बन्ध मात्र। वात्सल्य = छोटों के प्रति बड़ों का स्नेह। भक्ति = बड़ों के प्रति छोटों का श्रद्धायुक्त स्नेह।
(2) अस्त्र = जो फेंक कर मारा जाय, जैसे-तीर, भाला, बम। शस्त्र = जिससे काटा जाय; जैसे-तलवार, छुरा। आयुध = लड़ाई के सभी साधन, आयुध कहलाते हैं। इसमें अस्त्र-शस्त्र के अतिरिक्त लाठी, गदा, छड़ आदि को भी ले सकते हैं। हथियार = हाथ से चलाये जाने वाले आयुध।
(3) अशुद्धि = अपवित्रता, मिलावट, लिखने अथवा बोलने में कमी, इन सभी को अशुद्धि कहते हैं। भूल = विस्मृति, जिसमें कर्ता की असावधानी प्रकट होती है। त्रुटि = वस्तु में किसी कमी का होना।
(4) अमूल्य = वस्तु जो मूल्य देकर प्राप्त न की जा सके, जैसे-विद्या, ज्ञान, प्रेम, सफलता, सुख, विश्वास। बहुमूल्य = जिसका अधिक मूल्य देना पड़े, जो वस्तु साधारण मूल्य की न हो। जैसे-सोना, प्लेटिनम, हीरा। महँगा = जिस वस्तु को बदलते बाजार भाव के कारण अधिक मूल्य देकर पाया जाये।
(5) अलभ्य = जिसे किसी उपाय से न पाया जाय। दुर्लभ = जिसे अधिक कष्ट उठाकर पाया जाय।
(6) अलौकिक = जो संसार में इन्द्रियों के द्वारा सुलभ न हो। असाधारण = जो सांसारिक होकर भी अधिकता से न मिलता हो। अस्वाभाविक = अप्राकृतिक, जो प्रकृति के नियमों से बाहर का प्रतीत हो।
(7) अर्पण = शरणगति का भाव लिए अर्पण। प्रदान = धार्मिक भावना के साथ दूसरे का स्वत्व स्थापित करना, जैसे-जलदान, दीपदान, विद्यादान, गोदान, अन्नदान। प्रदान = सामान्य रूप से बड़ों के द्वारा छोटों को देना। वितरण = समाज में उत्पादित वस्तुओं के विभाजन की प्रणाली।
(8) अनुग्रह बड़े की ओर से छोटों के अभीष्ट सम्पादन की स्नेहपूर्ण क्रिया अनुग्रह है। अनुकम्पा = दुःख दूर करने की चेष्टा से युक्त कृपा। दया = दुःख देखकर द्रवित होना। कृपा = दुःख-निवारण के सामर्थ्य से युक्त दया। सहानुभूति = दूसरे के दुःख में समभागी होने का भाव। करुणा = दुःख निवारण की व्याकुलता लिए हुए द्रवित होना। ममता = माता के समान किसी पर वत्सल भाव।
(9) अंग = (अवयव) भौतिक समष्टि का भाग, जैसे-शरीर का अंग, वृक्ष का अंग, शाखा आदि। देह = शरीर। आकृति = रेखाओं से बनी कोई समष्टि, चाहे वह सजीव हो या निर्जीव।
(10) अमर्ष = द्वेष या दु:ख जो तिरस्कार करने वाले के कारण होता है। क्रोध = प्रतिकूल आचरण के बदले में प्रतिकूल आचरण की प्रवृत्ति। कलह = क्रोध को जब सक्रिय रूप दिया जाता है तो उससे होने वाला वाचिक या शारीरिक आचरण।

(11) असुर = दैत्य या दानव-एक जाति विशेष, जो देवों के समकक्ष थी। राक्षस = यह अनुचित आचरण के कारण मनुष्य जाति के लिए आता है।
(12) अनुपम = बेजोड़-जिसकी तुलना न हो सके। अपूर्व = जिसे पहले भनुभव न किया गया हो। अद्भुत = जो विस्मयजनक हो।
(13) आयु = जीवन के सम्पूर्ण समय को आयु कहते हैं। वयस् = जीवन के शरीर विकास सूचक भाग को वयस् कहा जाता है, जैसे-शैशव। अवस्था = दशा-जीवन के प्रसंग में बीते हुए जीवन का भाग। वयस् के अर्थ में भी चलता है, जैसे-युवावस्था, वृद्धावस्था।
(14) अबला = स्त्री की संज्ञा है जिससे उसकी कोमलता एवं निर्बलता का संकेत मिलता है। नारी = केवल नर जाति की स्त्री या मानवी। कान्ता = प्रिया, किसी पुरुष के स्नेह-सम्बन्ध से दिया हुआ स्त्री का नाम-जो चमक को भी प्रकट करता है। भार्या = वह स्त्री जो किसी पुरुष से अपने भरण-पोषण की प्राप्ति का अधिकार रखती हो। पत्नी = पति से सम्बद्ध धार्मिक कार्यों में पति का साथ देने वाली, जिसका धार्मिक रीति से विवाह सम्पन्न हुआ हो। वधू = विवाह के बाद नारी की संज्ञा। अंगना = अंगों की कोमलता तथा सुन्दरता की सूचक स्त्री की संज्ञा।
(15) आनन्द = समस्त मन, प्राण, शरीर, आत्मा के सम्मिलित सुखानुभूति को आनन्द कहते हैं, हर्षित, प्रसन्न। सुख = मन के अनुकूल किसी भी प्रतीति को सुख कहते हैं। हर्ष = सुख या आनन्द के कारण शरीर की रोमांचमयी अवस्था हर्ष है। उल्लास-उमंग = मन में सुख की वेगयुक्त अल्पकालिक क्रिया।
(16) भिज्ञ = विषय के ज्ञान से सम्पन्न। विज्ञ = विषय का विशेष ज्ञान रखने वाला। बहुज्ञ = अनेक विषयों का ज्ञाता।।
(17) अंश = मूर्त, अमूर्त तत्त्व का भाग। खण्ड = मूर्त पदार्थ का विभाजन।
(18) अन्न = मुख्य भोजन का धान्य विशेष। दाना = किसी भी वस्तु का गोलाई लिए छोटी इकाई का नाम, जैसे-माला का दाना, मोती का दाना, अनाज का दाना। शस्य = फसल; जो खेत में काटने हेतु लगी हो। खाद्य = सभी प्रकार का भोजन योग्य पदार्थ। पकवान = पका हुआ भोजन।

(19) आज्ञा = बड़ों द्वारा छोटों के प्रति काम की प्रेरणा। अनुज्ञा = श्रोता की इच्छा के समर्थन में स्वीकृतिसूचक कथन। अनुमति = बड़ों द्वारा सहमति अथवा किसी काम करने की इच्छा का समर्थन। आदेश = प्रायः कार्याधिकारी द्वारा दी गई आज्ञा।
(20) अनुनय = किसी बात पर सहमत होने की प्रार्थना। विनय = निवेदन, शिष्टता, अनुशासन। प्रार्थना = किसी कार्यसिद्धि या वस्तु प्राप्ति के लिए विनययुक्त कथन। निवेदन = अपनी बात विनयपूर्वक रखना। आवेदन = अपनी योग्यता आदि के कथन द्वारा किसी पद या कार्य हेतु प्रस्तुत होना।
(21) आमन्त्रण = किसी अवसर पर सम्मिलित होने का बुलावा। निमन्त्रण = उत्सव के अवसर पर बुलाना। आह्वान = ललकारना, संघर्ष के लिए बुलाना।
(22) इच्छा = किसी वस्तु के प्रति मन का राग। आशा = इच्छा के साथ प्राप्ति की सम्भावना का सुख। उत्कण्ठा = जिज्ञासा। स्पृहा = उत्कृष्ट इच्छा। मनोरथ = अभिलाषा।
(23) उत्साह = बड़े कार्यों के प्रति प्रेरित करने वाला आनन्ददायक भाव। साहस = सहने की शक्ति को साहस कहते हैं।
(24) तेज = बाहरी प्रकाश। कान्ति = चमक। प्रकाश = किरण समूह।
(25) ईर्ष्या = दूसरे की उन्नति न सह पाना। स्पर्धा = दूसरे को उन्नत देखकर स्वयं उन्नति की होड़। असूया = दूसरे के गुणों में दोष ढूँढ़ना। द्वे ष- दूसरे की बुराई की कामना। बैर = बहुत दिनों का संचित क्रोध का रूप।
(26) खेद = अनिष्ट सूचना। अवसाद= मन-शरीर की निश्चेष्टता। क्लेश = मन-शरीर दोनों का पीड़ित होना। कष्ट = दुःखजनक स्थिति। व्यथा = पीड़ा। वेदना = पीड़ा का मानसिक अनुभव। यातना = दुःख भोगने की मनोदशा। यन्त्रणा = दुःख की दीर्घकालिक जकड़न।
(27) ऋतु = छः ऋतुएँ होती हैं। मौसम = पारिस्थितिक भेद।

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MP Board Class 6th Hindi Sugam Bharti Solutions Chapter 17 तीर्थ-यात्रा

MP Board Class 6th Hindi Sugam Bharti Solutions Chapter 17 तीर्थ-यात्रा

MP Board Class 6th Hindi Sugam Bharti Chapter 17 प्रश्न-अभ्यास

वस्तुनिष्ठ प्रश्न

प्रश्न 1. (क) सही जोड़ी बनाइए
1. समाचार – (क) चहकना
2. मुख – (ख) तीर्थ स्थल
3. बुलबुल – (ग) मंडल
4. हरिद्वार – (घ) पत्र
उत्तर
1. (घ), 2. (ग), 3. (क), 4. (ख)

तीर्थ यात्रा कहानी का सारांश MP Board Class 6th Hindi प्रश्न (ख)
दिए गए शब्दों में से उपयुक्त शब्द चुन कर रिक्त स्थानों की पूर्ति कीजिए
1. लाजवंती का……हृदय कांप गया। (नारी/कोमल)
2. वैवजी बैठे एक पुराना……सामाचार पत्र पढ़ रहे थे। (मासिक/सप्ताहिक)
3. मंदिरों को देखकर हृदय……..की तरह खिल जाएगा। (कमल/कली)
4. जो सुख त्याग में है वह……..में कहाँ ? (ग्रहण/वरण)
उत्तर
1. नारी
2. साप्ताहिक
3. कमल
4. ग्रहण।

MP Board Class 6th Hindi Sugam Bharti Chapter 17 अतिलघु उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 2.
निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर एक-एक वाक्य में दीजिए

(क) मियादी बुखार किसे कहते हैं?
उत्तर
जो बुखार अपनी मियाद पूरी करके उतरता है, उसे मियादी बुखार कहते हैं।

(ख) ‘लुकमान’ शब्द का प्रयोग लेखक ने किसके लिए किया है?
उत्तर
‘लुकमान’ शब्द का प्रयोग लेखक ने वैद्य दुर्गादास के लिए किया है।

(ग) लाजवंती तीर्थयात्रा के लिए कहाँ-कहाँ जा रही थी?
उत्तर
लाजवंती तीर्थयात्रा के लिए हरिद्वार, मथुरा और वृंदावन जा रही थी।

(घ) लाजवंती क्यों अधीर हो रही थी?
उत्तर
लाजवंती तीर्थयात्रा के लिए अधीर हो रही थी।

(ङ) रामलाल ने अपनी दौलत किसे कहा है?
उत्तर
रामलाम ने अपने पुत्र हेमराज को अपनी दौलत कहा है।

MP Board Class 6th Hindi Sugam Bharti Chapter 17 लघु उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 3.
निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर तीन से पाँच वाक्यों में दें

(क) लाजवंती के पैरों के नीचे से धरती खिसकती सी क्यों लगी?
उत्तर
लाजवंती हेमराज के सिर के दर्द की बात सुनकर पवरा गयी थी। उसे याद आया कि इसी मौसम । में उसका पहला पत्र मदन भी ऐसे ही बीमार होकर चल | बसा था। यही कारण था कि उसे पैरों के नीचे से धरती खिसकती सी लगी।

(ख) लाजवंती मंदिर क्यों गई?
उत्तर
लाजवंती का बेटा हेमराज बहुत बीमार था। उसके ठीक होने की आशा न थी। लाजवंती उसके अच्छे स्वास्थ्य के लिए प्रार्थना करने देवी माँ के मंदिर गई।

(ग) ‘त्याग करने में ही सुख है’। इस पंक्ति का क्या आशय है?
उत्तर
इसका आशय यह है कि त्याग में किसी की सहायता करने या किसी को कुछ देने का आनंद छिपा होता है। यह खुशी किसी से कुछ लेने पर नहीं मिलती। वास्तव में त्याग मनुष्य को आत्मिक संतुष्टि प्रदान करता है।

(घ) लेखक ने रुपये को हाथ का मैल क्यों कहा है?
उत्तर
रुपया कभी एक जगह नहीं टिकता । वह इधर से आता है उधर चला जाता है। इसलिए लेखक ने रुपए को हाथ का मैल कहा है।

(ङ) लाजवंती तीर्थ यात्रा पर क्यों नहीं जा सकी?
उत्तर
तीर्थयात्रा पर जाने से पूर्व लाजवंती को पता चला कि उसकी पड़ोसन हरो के पास बेटी के ब्याह के लिए पैसे नहीं हैं। उसने तीर्थयात्रा के लिए जमा पैसे हरो को दे दिए। यही कारण था कि वह तीर्थयात्रा पर नहीं जा सकी।

भाषा की बात

प्रश्न 4.
निम्नलिखित शब्दों का शुद्ध उच्चारण कीजिए
परीक्षा, सहानुभूति, दिव्य-शक्ति, परिश्रम
उत्तर
छात्र स्वयं करें।

प्रश्न 5.
निम्नलिखित शब्दों की वर्तनी शुद्ध कीजिए
सप्हीक, परिकमा, समुद, प्रसननता
उत्तर
साप्ताहिक, परिक्रमा, समुद्र, प्रसन्नता

प्रश्न 6.
निम्नलिखित वाक्यांशों के लिए एक-एक शब्द लिखिए
सप्ताह में एक दिन प्रकाशित विद्या अध्ययन करने वाला आयुर्वेद पद्धति से चिकित्सा करने वाला पड़ोस में रहने वाली
उत्तर
साप्ताहिक, विद्यार्थी, वैद्य, पड़ोसन

प्रश्न 7.
निम्नलिखित गयांश को पढ़कर रेखांकित शब्दों के विलोम शब्द लिखिए
वह दौड़ती हुई अपने घर के अंदर गई और संदूक में से दो सौ रुपए लाकर हरो के सामने ढेर कर दिए। यह रुपए जमा करते समय वह प्रसन्न हुई थी, पर उसे देते समय उससे भी अधिक प्रसन्नता हुई। जो सुख त्याग में है वह ग्रहण में कहाँ?
उत्तर
शब्द – विलोम
अपने – पराए
अन्दर – बाहर
प्रसन्न – उदास
अधिक – कम
सुख – दुख
त्याग – ग्रहण

प्रश्न 8.
निम्नलिखित वाक्यों को पढ़कर रेखांकित शब्दों से मूल शब्द और प्रत्यय अलग कर लिखिए
उस गाड़ीवान का बचपन बहुत ही अभाव से बीता। वह बहुत अच्छा कलाकार था। उसकी यह अच्छाई थी कि वह स्वभाव से बहुत नर्म था। उसने पढ़ाई, लिखाई नहीं की थी; किंतु वह बहुत अच्छे फूलदान बनाता था।
उत्तर
MP Board Class 6th Hindi Sugam Bharti Solutions Chapter 17 तीर्थ-यात्रा 1

प्रश्न 9.
निम्नलिखित गद्यांश में विराम चिन्ह लगे हैं, उन चिहनों को पहचान उनका नाम लिखिए
रामलाल ने तीर्थ यात्रा के खर्च का अनुमान किया, तो हदय बैठ गया। परंतु पुत्र-स्नेह ने इस चिंता को देर तक ठहरने न दिया-“अच्छा किया! रुपए का क्या है, हाथ का मैल है, आता है, चला जाता है। परमेश्वर ने एक लाल दिया है, वह जीता रहे। यही हमारी दौलत है।” लाजवंती ने स्वामी को सुला दिया और आप रात भर जागती रही। लाजवंती ने पुत्र हेम के सिर पर हाथ फेरते हुए कहा-“क्या से क्या हो गया है?”
उत्तर
MP Board Class 6th Hindi Sugam Bharti Solutions Chapter 17 तीर्थ-यात्रा 2

प्रश्न 10.
निम्नलिखित शब्दों के तत्सम रूप लिखिए
आँसू, पैर, हाथ, धीरज, आग, मुँह, नाव, जेठ।
उत्तर
सत्सम-अश्रु, पाद, हस्त, धैर्य, अग्नि, मुख, नौका, ज्येष्ठ

प्रश्न 11.
निम्नलिखित शब्ज़े में प्रयुक्त उपसर्ग और मूलशब्द लिखिए
परिश्रम, अनुभव, अनुमान, अभिमान, सफल, प्रभाव, सुगंध, अपमान।
उत्तर
MP Board Class 6th Hindi Sugam Bharti Solutions Chapter 17 तीर्थ-यात्रा 3

तीर्थ-यात्रा प्रसंग सहित व्याख्या

1. लाजवंती मंदिर पहुँची और देवी के सामने गिर कर देर तक रोती रही। जब थककर उसने सिर उटाया तो उसका मुख-मंडल शांत था, जैसे तुफान शांत हो आता है। उसको ऐसा मालूम हुआ, जैसे कोई दिव्य-शक्ति उसके कान में कह रही है तूने आँसू बहा कर देवी के पाषाण हृदय को मोम कर दिया है। लाजवंती ने देवी की आरती उतारी, फूल चढ़ाए, मंदिर की परिक्रमा की और प्रेम के बोझ से काँपते हुए स्वर से मानता मानी-“देवी माता! मेरा हम बच जाए तो मैं तीर्थ यात्रा करूंगी।”

शब्दार्थ-पाषाण = पत्थर।

प्रसंग-प्रस्तुत पंक्तियाँ हमारी पाठ्य-पुस्तक सुगम भारती-6 में संकलित कथा ‘यात्रा’ से ली गई हैं। इसके लेखक ‘सुदर्शन’ हैं। इन पंक्तियों में पत्र की चिंता में व्याकुल एक माँ की मनोदशा का वर्णन है।

व्याख्या-लाजवंती अपने पुत्र का बुखार उतरता न देख कर घबरा जाती है और देवी माँ के मंदिर में सिर झुकाकर देर तक रोती है। हृदय का सारा बुखार निकल जाने पर उसका मन शांत होता है और उसे ऐसा लगता है जैसे देवी माँ उसके आँसुओं से पिघल गई हैं। वह देवी माँ की अर्चना करती है और हृदय से यह प्रार्थना करती है कि अगर उसका पुत्र ठीक हो गया, तो वह तीर्थयात्रा करेगी।

विशेष

  • ईश्वर में आस्था को दर्शाया गया है।
  • माँ का पुत्र के प्रति प्रेम भी प्रदर्शित हुआ है।

2. मैं तुम्हें दूसरी सावित्री समझता हूँ उसने मरे हुए पति को जिलाया था तुमने पुत्र को मृत्यु के मुंह से निकाला है। तुम यदि दिन-रात एक न करती तो हेम का बचना असंभव था। यह सब तुम्हारी मेहनत का फल है। बच्चा बचा नहीं है, दूसरी वार पैदा हुआ है।

शब्दार्य-असंभव = जो संभव न हो। दिन रात एक करना = बहुत मेहनत करना। फल=परिणाम।

प्रसंग-पूर्ववत्

व्याख्या-वैद्य जी कहते हैं कि हेमराज लाजवंती की मेहनत के कारण ही बच गया है। वह उसकी तुलना सावित्री से करते हैं, जिसने अपने मृत पति को जिला लिया था। वे रहते हैं कि लाजवंती ने ही अपने पुत्र को नया जीवन दिया है।

विशेष

  • माँ की महिमा का पता चलता है।
  • स्त्री के दो महत्त्वपूर्ण रूपों की शक्ति पर प्रकाश डाला गया है।

MP Board Class 6th Hindi Solutions

MP Board Class 7th Hindi Sugam Bharti Solutions Chapter 14 गोपी

MP Board Class 7th Hindi Sugam Bharti Solutions Chapter 14 गोपी

MP Board Class 7th Hindi Sugam Bharti Chapter 14 प्रश्न-अभ्यास

वस्तुनिष्ठ प्रश्न
Mp Board Class 7th Hindi Chapter 14 प्रश्न 1.
(क) सही जोड़ी बनाइए
1. निमंत्रण = (क) संस्था
2. गुलाबी = (ख) पलकें
3. शिक्षण = (ग) पत्र
4. भीगी = (घ) लिफाफा
उत्तर
1. (ग), 2. (घ), 3. (क), 4. (घ)

Mp Board Solution Class 7 प्रश्न (ख)
दिए गए शब्दों से उपयुक्त विकल्प चुनकर रिक्त स्थानों की पूर्ति कीजिए
1. बीस वर्ष से वह ………………….. कक्षाएँ पढ़ा रही थी। (ग्यारहवीं/बारहवीं)
2. पिता, गाँवों में ………………….. का काम करते थे। (चिनोई पुताई)
3. गोपी तो जैसे प्यार का ….. खजाना पा गया था। (अनमोल/विशाल)
4. पिछले पाँच वर्षों से वे …. से पीड़ित थे। …….. (कैंसर/क्षय)
उत्तर
1. बारहवीं
2. चिनाई
3. विशाल
4. क्षय

MP Board Class 7th Hindi Sugam Bharti Chapter 14 अति लघु उत्तरीय प्रश्न

Mp Board Class 7th Hindi प्रश्न 2.
निम्नलिखित प्रश्नों के एक-एक वाक्य में उत्तर दीजिए

(क)
गोपी कक्षा में कहाँ बैठता था?
उत्तर
गोपी कक्षा में सबसे पीछे कोने वाली सीट पर बैठता था।

(ख)
शिल्पा से गोपी का कौन-सा रिश्ता था?
उत्तर
गोपी शिल्पा को अपनी बड़ी बहन की तरह मानता था।

(ग)
कक्षा के अन्य छात्रों ने गोपी की मदद किस प्रकार की?
उत्तर
कक्षा के छात्रों ने गोपी की आर्थिक मदद के साथ उसे प्यार और सांत्वना प्रदान की।

(घ)
गोपी की माँ क्या काम करती थी?
उत्तर
गोपी की मां सड़क पर पत्थर तोड़ती थी।

MP Board Class 7th Hindi Sugam Bharti Chapter 14 लघु उत्तरीय प्रश्न

Gopi Chaprasi Question Answer MP Board प्रश्न 3.
निम्नलिखित प्रश्नों के तीन से पाँच वाक्यों में उत्तर लिखिए

(क)
गोपी स्कूल देर से क्यों आता था?
उत्तर
गोपी सुबह देर से इसलिए आता था क्योंकि सुबह सात बजे से लेकर एक बजे तक वह मजदूरी करता रहता। एक साहब के बगीचे में पानी देता और दस घरों में दूध की थैलियों औरा बाजार का सामान लाकर देता।

(ख)
शिल्पा गोपी को देखकर क्यों चिढ़ जाती थी?
उत्तर
गोपी रबर के टायर वाली चप्पले पहनता। स्कूल पोशाक की सफेद कमीज बिना ठीक धुले, बिना प्रेस लगे एकदम पीली और चमड़े जैसी गुडीमुड़ी रहती थी। नाखून गंदे होते थे। उसके नहाने पर भी संदेह होता था। इसलिए शिल्पा उससे चिढ़ जाती थी।

(ग)
‘जिंदगी कितनी कठोर और निर्मम होती है।’ इस पंक्ति का आशय स्पष्ट कीजिए। .
उत्तर
जब गोपी ने अपनी समस्त समस्याएँ जैसे पिता का गुजरना, मेहनत-मजदूरी करना, सुबह से एक बजे तक छोटा-मोटा काम करना आदि शिल्पा को बताई, यह सब सुनकर शिल्पा का मन हाहाकार से भर उठा था। वाकई जिंदगी कितनी कठोर और निर्मम होती है।

(घ)
गोपी ने अपनी मंजिल किस प्रकार पाई?
उत्तर
भाग्य की बात है कि गोपी के पिता की तेरहवीं ‘ वाले दिन स्कूल में कुछ समारोह था। आधे दिन का
अवकाश था। पता लगा कि पूरी कक्षा गोपी के घर पहुँच गई। हाथों हाथ सारा सामान दिला दिया। खाना-पिना, पूजा हवन सभी कराकर और शेष रुपए गोपी की माँ को देकर बालक लौटे।

(ङ)
शिल्पा को कठोर और ममतामयी क्यों कहा गयाहै?
उत्तर
शिल्पा कठोर इसलिए थी क्योंकि कक्षा में प्रत्येक क्षेत्र जैसे-शिक्षा, कपड़े आदि में अनुशासनप्रिय थी परंतु जब उसने गोपी की निर्धनता और व्यथा सुनी तो दयाभाव तथा ममताभयी होकर गोपी का पूरा साथ दिया।

Mp Board Class 7th Subject Hindi प्रश्न 4.
निम्नलिखित शब्दों के शुद्ध उच्चारण कीजिएहृदय, शिक्षण, ट्रेनिंग, स्वच्छ, अनुशासित, विश्वास ।
उत्तर
छात्र स्वयं करें।

Gopi Ne Apni Manzil Kaise Prapt Ki MP Board प्रश्न 5.
निम्नलिखित शब्दों की वर्तनी शुद्ध कीजिए।
सेष, निरमम, कालाश, निभंतरण, संघर्शों
उत्तर
शब्द = शुद्ध वर्तनी
सेप = शेष
निर्मम = निरमम
कांलाश = कालांश
निमंतरण = निमंत्रण
संघर्टी = संघर्षों

Mp Board Class 7th Hindi Chapter 2 प्रश्न 6.
‘बंदर’ शब्द पुल्लिंग है। इसमें ‘इया’ प्रत्य जोड़ने से स्त्रीलिंग शब्द ‘बंदरिया’ बनता है। इसी प्रकार निम्नलिखित शब्दों में ‘इया’ प्रत्यय जोड़कर स्त्रीलिंग शब्द बनाइए।
गुड्डा, बूढ़ा, बेटा, लोटा, बछड़ा
उत्तर
(क) गुड्डा = गुड़िया
(ख) बूढ़ा = बुढ़िया
(ग) बेटा = बेटियां
(घ) लोटा = लुटियां
(ङ) बछड़ा = बछड़ियां

Mp Board Solution Class 7 Hindi प्रश्न 7.
निम्नलिखित शब्दों के तत्सम रूप लिखिए
बात, आठ, आधा, काम, घर, पिता, गाँव, पाँच, चमड़ा
उत्तर
तद्भव = तत्सम
बात = वार्ता
आठ = अष्ट
आधा = अर्ध
काम = कार्य
घर = गुह
पिता= पितृ
गगाँ = व्राम
पाँच = पंचम
चमड़ा = चर्म

Sugam Bharti Class 7 MP Board प्रश्न 8.
निम्नलिखित विलोम युग्म शब्दों का उदाहरणनुसार वाक्यों में प्रयोग कीजिए।
उदाहरण : राम की सुग्रीव से मित्रता थी तो रावण से शत्रुता
कठोर-कोमल, गरीब-अमीर, सुबह-शाम, उपस्थित-अनुपस्थित, उत्तीर्ण-अनुत्तीर्ण पूर्व के अध्याय में आप वचन पढ़ चुके हैं। इसके साथ ही इन्हें भी समझिए
उत्तर

  • कठोर-कोमल-नारियल जितना ऊपर से कठोर है उतना ही अंदर से कोमल होता है।
  • गरीब-अमीर-समाज में बड़ा वर्ग गरीब का तथा छोटा वर्ग अमीर का होता है।
  • सुबह-शाम-हर शाम पश्चात सुबह जरुर आती
  • उपस्थित-अनुपस्थित-सारे बच्चे समय पर उपस्थित थे परंतु गोपी अनुपस्थित था।
  • उत्तीर्ण-उनुत्तीर्ण-एक बच्चा अनुत्तीर्ण है बाकि – सारे उत्तीर्ण हैं।

Mp Board Class 7 Hindi प्रश्न 9.
नीचे लिखे वाक्यों में वचन की अशुद्धियां हैं, उन्हें दूर करके वाक्य पुनः लिखिए।

(क) साइकिल के पहिए पंक्चर हो गया।
(ख) शिवा ने पाँच केले खरीदा।
(ग) पंडित जी पूजाएँ करवाई।
(घ) आज बहुत तेज वर्षाएँ हो रही हैं।
(ङ) मानसी की माताजी बाजार से आई है।
उत्तर
(क) साइकिल के पहिए पंक्चर हो गए।
(ख) शिवा ने पाँच केले खरीदे।
(ग) पंडित जी ने पूजा करवाईं।
(घ) आज बहुत तेज वर्षा हो रही है।
(ङ) मानसी की माताजी बाजार से आई है।

गोपी पाठ का परिचय

प्रस्तुत पाठ एक भावनाप्रद एवं शिक्षाप्रद रचना है जिसमें शिल्पा एक आध्यापिका है जो लंबी यात्रा से लौटी है, वह एक गुलाबी पत्र पढ़ती है जिसे उसके पूर्व छात्र गोपी ने लिखा था। गोपी बताता है कि अपार संघर्ष के बाद उसने छोटे भाई को पढ़ाया तथा नौकरी लगवाई। स्वयं भी कार्यरत है। पिता की मृत्यु तो पहले ही हो चुकी थी। माँ भी चल बसी थी। गोपी अपने विवाह में आने के लिए शिल्पा दीदी से आग्रह कर रहा था। पत्र पढ़कर शिल्पा भूतकाल में खो गई। उसे याद है गोपी एक गंदा और मैले-कुचैले कपड़े पहनकर आता था। वह मना करने के बावजूद टायर से बनी चप्पले पहनता था। वह रोज देर से आता था। प्रार्थना सभा में तो कभी जा ही नहीं पाता था। ऐसा शायद ही कोई दिन होता था जब गोपी को डांट नहीं पड़ती थी। ऐसे में शिल्पा दीदी गोपी से चिढ़ी-चिढ़ी-सी रहने लगी। थी। एक बार तो गोपी ने आठ-दस दिन की छुट्टी ही कर ली। जब – वापस आया तो टोपी पहन कर कक्षा में आया। सारे बच्चे हैंसने लगे। उसके कपड़े अभी भी गंदे थे। शिल्पा

दीदी ने आव देखा न ताव और गुस्से में उसके चाँटा जड़ दिया। वह उसे कुछ-कुछ कहने लगी। और पूछा कि यह टोपी का क्या चक्कर है? गोपी ने रोते हुए बताया कि उसके पिता गुजर गए है। और उसे अपने छोटे भाई-बहन के लिए सुबह काम करना पड़ता है, इसीलिए उसे देर हो जाती है। उसकी कहानी सुनकर दीदी उससे माफी माँगने लगती है। शिल्पा दीदी और कक्षा के बच्चों ने गोपली के लिए बहुत धन एकत्रित किया। इस तरह से गोपी का भविष्य सुधरा इसके बाद शिल्पा ने गोपी लिखते हुए कहा कि वह अवश्य उसकी शादी में आएगी।

गोपी संदर्भ-प्रसंग सहित व्याख्या

1. उनकी कक्षा ……..पूरा-पूरा अधिकार था।

शब्दार्थ- खीज = नफरत; ऊब = निरूत्साह ।

संदर्भ-पूर्ववत्।
प्रसंग-इसमें दीदी की गोपी के लिए खीज दिखाई गई है।

व्याख्या
गोपी प्रायः सबसे पीछे की कोने वाली सीट पर बैठता था। कई बार मना करने के बावजूद वह टायर से बनी चप्पलें पहनता था। विद्यालय की ड्रेस सिकुड़ी और गंदी होती थी। बालों में तेल नहीं, नखून बिना कटे रहते थे। दीदी को संदेह रहता था कि चूकि वह द्वितीय श्रेणी में दसवीं पास करके आया है, इसलिए उसे पढ़ने का अधिकार था।

विशेष-गोपी की दयनीय स्थिति को प्रकट किया गया है।

2. ‘माँ कहाँ से………खजाना पा गया था। (प्र. 82)
शब्दार्थ-पोशाकें = कपड़े; निर्मम = जिसमें दया न हो।

संदर्भ-पूर्ववत्
प्रसंग-इसमें गोपी अपनी परेशानी बताता है।

व्याख्या
गोपी बताता है कि चमड़े के जूते और दो जोड़ी स्कूल के कपड़े लाना माँ के बस की बात नहीं थी। एक सस्ती टिक्की महीने भर चलानी होती है। एक वक्त की रोटी मिलती है। तेल का क्या पता, नाखून कब काटना और नहाना कब, कुछ पता नहीं होता। हव सात बजे से स्कूल आने तक मजदूरी करता है। दस घरों में दूध की थैलियाँ और बाजार का सामान लाकर देता। विता भी बिमारी के चलते चल बसे। दीदी, नाम मत काटिए। आपके घर का काम कर दिया करूँगा। यह वर्ष निकल जाए तो कुछ बन जाऊँगा। परसों पिता की तेरहवीं है। घर में कुछ नहीं है। एक टूटी हुई घड़ी बेचकर कुछ सामान लाया हूँ। मुझे क्षमा कर दे। गोपी की व्यथा सुनकर शिल्पा का मन आसुँओं में डूब गया। उसने स्वयं गोपी से क्षमा मांगी। अगले दिन शिल्पा ने तथ समस्त कक्षा के साथियों ने गोपी की आर्थिक सहायता तो की ही तथा उसे प्यार, सांत्वना और तसल्ली दी।

MP Board Class 7th Hindi Solutions

MP Board Class 7th Hindi Sugam Bharti Solutions Chapter 16 नीति दशक

MP Board Class 7th Hindi Sugam Bharti Solutions Chapter 16 नीति दशक

MP Board Class 7th Hindi Sugam Bharti प्रश्न-अभ्यास

वस्तुनिष्ठ प्रश्न
Mp Board Class 7th Hindi Chapter 16 प्रश्न 1.
(क) सही जोड़ियाँ बनाइए
1. डार-पात = (क) लाख विकाय
2. जहाँ पुष्प. = (ख) सम लाभ
3. जहाँ सजन = (ग) फल, फूल
4. गुण कूँ गाहक = (घ) तहँ प्रीति
5. समय लाभ = (ङ) तहँ वास
उत्तर
1. (ग), 2. (ङ), 3. (घ), 4. (क), 5. (ख)

Mp Board Solution Class 7 प्रश्न (ख)
दिए गए शब्दों में से उचित शब्द का चयन कर रिक्त स्थानों की पूर्ति कीजिए
1. कबीर ने ……………… को दूर न करने की सलाह दी है। (प्रशंसक निंदक)
2. जब तक ………………. नहीं होता तब तक मित्र नहीं बनते। (वित्त/चित्त)
3. रहिमन ……………….. अंबु बिन, रवि ताकर रिप होय। (अंबुद/अंबुज)
4. विचार पूर्वक कार्य करने से ………….. राजी रहते हैं। (निजलोक सर्वलोक)
उत्तर
1. निंदक
2. वित्त
3. अंबुज
4. सर्वलोक।

MP Board Class 7th Hindi Sugam Bharti अति लघु उत्तरीय प्रश्न

Mp Board Class 7th Hindi प्रश्न 2.
निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर एक-एक वाक्य में लिखिए

(क)
कवि ने अमोल किसे कहा है?
उत्तर
कवि ने बोली को अमोल कहा है।

(ख)
कबीर के अनुसार तन-मन को निर्मल कौन करता है?
उत्तर
सबका मान करने से तन-मन निर्मल हो जाता है।

(ग)
वृंद कवि के अनुसार प्रेम का वास कहाँ होता है?
उत्तर
कवि द्वंद के अनुसार प्रेम का वास प्रेमी के हृदय में होता है।

(घ)
रहीम कवि ने अनुसार ऊख और प्रेम में गाँठ पड़ जाने से क्या होता है?
उत्तर
कवि ने अनुसार ऊख में गाँठ पड़ने से रस में कमी आती है जबकि प्रेम में गाँठ पड़ने से रस में कमी आती है जबकि प्रेम में गाँठ पड़ने पर प्रीत में कमी आती है।

(ङ)
बंद कवि ने सब लोगों के प्रसन्न रखने के लिए कौन-सा उपचार करने के लिए कहा है?
उत्तर
कवि के अनुसार कुछ भी निर्णय लेने से पहले सबकी सुननी चाहिए तथा स्वयं के और सबके विचारों से निष्कर्ष निकालना चाहिए।

MP Board Class 7th Hindi Sugam Bharti लघु उत्तरीय प्रश्न

Mp Board Solution Class 7 Hindi प्रश्न 3.
निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर तीन से पाँच वाक्यों में लिखिए

(क)
कबीर ने तराजू में तौलने के लिए किसे और क्यों कहा है?
उत्तर
कबीर ने बोली को तौलने के लिए कहा है क्योंकि बोली से बने बनाए घर उजड़ भी सकते हैं और संवर भी सकते हैं इसलिए सोच समझ कर बोलना चाहिए।

(ख)
कवि ने किस गुण की कीमत कौड़ी के समान बताई है?
उत्तर
कवि ने उस गुण की कीमत कौड़ी के समान बताई जिसे कोई स्वीकार नहीं करता अर्थात जिस गुण से समाज व लोगों को कोई लाभ नहीं होता वह ना के बराबर होता है।

(ग)
रहीम ने बबूल के पेड़ को क्यों खराब कहा है?
उत्तर
रहीम ने बबूल के पेड़ को इसलिए खराब कहा है क्योंकि उसमें कोई फल-फूल नहीं होते अर्थात जो व्यक्ति स्वयं स्वार्थी हो, यदि वह किसी को सीख दे तो वह अनर्थक लगता है।

(घ)
‘ससि सुकेस’ दोहे में किन-किन को एक समान बताया है?
उत्तर
‘ससि सुकेस’ दोहे में ससि, सुकेस, साहस, सलिल, मान तथा सनेह को एक समान कहा गया है क्योंकि ये सारे बढ़ने पर बढ़ते चले जाते है और घटने पर घटते चले जाते हैं।

(ङ)
वृंद कवि ने सज्जन और पुष्प की क्या विशेषाएँ बताई है?
उत्तर
जिस प्रकार पुष्प अपनी खुशबू और मनमोहकता से सबको सम्मोहित कर देता है उसी प्रकार एक सज्जन व्यक्ति समाज में अपने अच्छे और निस्वार्थ कार्यों से सबको आकर्षित करता है।

भाषा की बात

Mp Board Class 7 Hindi प्रश्न 4.
निम्नलिखित शब्दों के शुद्ध उच्चारण कीजिए
निर्मल, वित्त, अम्बुज, ऊख, प्रीति, स्नेह, सर्व
उत्तर
निर्मल, वित्त, अंबुज, ऊख, प्रीति, स्नेह, सर्व।

Sugam Bharti Class 7 प्रश्न 5.
निम्नलिखित शब्दों की वर्तनी शुद्ध कीजिएआमोल, मित्तर, शसि, सजजन, गांठ, जहाँ, चतूर
उत्तर
शब्द = शुद्ध वर्तनी
आमोल = अमोल
मित्तर = मित्र
सजजन = सज्जन
गांठ = गाँठ
जहाँ = जहाँ
चतूर = चतुर

Hindi Mp Board Class 7 MP Board प्रश्न 6.
निम्नलिखित शब्दों के दो-दो पर्यायवाची शब्द लिखिए
निर्मल, पुष्प, समय, पेड़
उत्तर
शब्द = पर्यायवाची शब्द
निर्मल = शुद्ध, स्वच्छ
पुष्प = फूल, कुसुम
समय = वक्त
पेड़ = तरु, वृक्ष

सुगम भारती हिंदी सामान्य कक्षा 7 MP Board प्रश्न 7.
नीचे दिए गए शब्दों में से उपसर्ग छाँटिएअमोल, निर्मल, सुकेस, सजन, सुवास, अनादर, दुर्भावना
उत्तर
Mp Board Class 7th Hindi Chapter 16

Sugam Math Class 7 Solutions MP Board प्रश्न 8.
निम्नलिखित शब्दों को पृथक-पृथक वाक्यों में प्रयोग कीजिए
तराजू, निंदक, मान, विचार, उपचार, वित्त
उत्तर
शब्द = वाक्य
तराजू = मनुष्य को स्वयं सद्भाव के तराजू में तोलना चाहिए।
निंदक = निंदक व्यक्ति की भी बुराई नहीं करनी चाहिए।
मान = बड़ों का मान करना चाहिए।
विचार = मनुष्य अपना विकास अच्छे विचारों के साथ करता है।
वित्त = आजकल जिसके पास वित्त होता है, सब उसके पीछे भागते हैं।

नीति दशक पाठ का परिचय

Mp Board Class 7th English Chapter 16 (कबीर)

प्रस्तुत पंक्तियों में कबीर के कुछ दोहों का वर्णन किया गया है जिनमें उन्होंने जीवन की कुछ सच्चाइयों से अवगत कराया है। उन्होंने कहा है कि व्यक्ति को बोलने से पहले सोचना चाहिए क्योंकि मुख से निकला प्रत्येक शब्द अमूल्य है। इसी प्रकार जब किसी गुण को सार्थकता मिलती है तब वह खूब फलता-फूलता है किंतु जब गुण का महत्त्व समाप्त हो जाता है तो वह कौड़ी के समान हो जाता है। निंदा करने वाले से निंदा नहीं करनी चाहिए बल्कि उसकी तरफ से मन निर्मल रखना चाहिए।

नीति दशक संदर्भ-प्रसंग सहित व्याख्या

1. बोली एक अमोल है, जो कोई बोले जानि।
हिये तराजू तौलि के, तब मुख बाहर आनि।।

शब्दार्थ – अमोल = अमूल्य; अमूल्य = अमूल्य, तौलि = तौलना; आनि = आना।

संदर्भ-प्रस्तुत दोहे की पंक्तियाँ हमारी पाठ्य-पुस्तक ‘सुगम भारती’ (हिंदी सामान्य) भाग-7 के पाठ-16 ‘नीति दशक’ से ली गई है। इसके रचचिता कबीर है।

प्रसंग-इसमें व्यक्ति की बोली के महत्त्व के बारे में बताया गया है।

Mp Board 7th Class Hindi Solution व्याख्या
प्रस्तुत दोहे में कबीर ने कहा है कि बोली अमूल्य होती है। मुँह से निकला प्रत्येक बोल वही जानता है जो वह बोलता है। हमें सोच-समझकर और तौल कर कुछ बोलना चाहिए।

विशेष

  • दोहे की भाषा प्रवाहमय है।
  • बोली को महत्त्व दिया गया है।

2. जब गुण कूँ गाहक मिले, तब गुण लाख बिकाइ।
जब गुण गाहक नहीं, तब कौड़ी बदले जाइ।

शब्दार्थ-गाहक = ग्राहक, ग्रहण करने वाला; कौड़ी = महत्त्वहीन।

संदर्भ-पूर्ववत्।

प्रसंग-इसमें गुण के महत्त्व को दर्शाया गया।

नीति दशक रहीम का परिचय

रहीम का जन्म सन् 1556 ई. में लाहौर में हुआ था। वे अकबर के संरक्षक बैराम खां के पत्र थे। उनका पूरा नाम अब्दुर्रहीम खानखाना था। अकबर के नौ रत्नों में वे भी एक थे। वे अकबर के प्रधान सेनापति, मंत्री और वीर योद्धा थे।

1. आप न काहू काम के, डार पात फल फूल ।
औरत को रोकत फिरे, रहिमन पेड़ बबूल।।

शब्दार्थ-रोकत-रोकना।

संदर्भ-प्रस्तुत दोहे की पंक्तियाँ हमारी पाठ्य-पुस्तक ‘सुगम-भारती’ (हिंदी सामान्य’) भाग-7 के पाठ-16 ‘नीति दशक’ से ली गई है। इसके रचयिता ‘रहीम’ हैं।

प्रसंग-इसमें उन लोगों के विषय में कहा गया है जो कपटी है।

व्याख्या-प्रस्तुत दोहे में रहीम ने उन लोगों के विषय में कहा है जो स्वयं कपटी और स्वार्थी हैं तथा सारे दिन पाप के कार्य करते हैं फिर भी दूसरों को गलत काम करने से रोकते हैं।

विशेष

  • भाषा सरल और प्रवाहमय है।
  • स्वार्थी लोगों द्वारा दी गई सीख को दर्शाया गया है।

2. समय लाभ समय लाभ सम लाभ नहिं,
समय चूंकि सम चूक।
चतुरन चित रहिमन लगी,
समय चूंकि की हूक ॥

शब्दार्थ-वित्तत = धन, पूंजी।

संदर्भ-पूर्ववत्।

प्रसंग-इसमें चतुर व्यक्तित्व के बारे में कहा गया है।

व्याख्या-प्रस्तुत दोहे में रहीम ने कहा है कि जब व्यक्तिको लाभ का समय मिले या ईश्वर अवसर प्रदान करे तो उसे ग्रहण कर लेना चाहिए। एक बार समय निकलने पर अवसर भी हाथ से चला जाता है। एक चतुर और समझदार व्यक्ति अवसर को अपने हाथ में नहीं जाने देता।

विशेष

  • भाषा सरल और प्रवाहमय है।
  • समय की सार्थकता को प्रकट किया गया है।

3. जब लगि वित्त न आपुने, तब लगि मित्त न कोय।
रहिमन अंबुज अंबु बिन, रवि ताकर रिपु होय।।

शब्दार्थ-मित्त = मित्र; अंबुज = कमल; अंबु = पानी; रवि = सर्य; रिपु = शत्रु, दुश्मन।

संदर्भ-पूर्ववत् ।
प्रसंग-इसमें स्वार्थ के बारे में कहा गया है।

व्याख्या- प्रस्तुत दोहे में बताया गया है कि जब तक हमारे पास पैसा होता है तब तक हमारे पास मित्र होते हैं और उसके नहीं रहने पर मित्र भी चले जाते हैं। इसी | तरह बिना पानी के सूर्य भी कमल का दुश्मन बन जाता है।

विशेष

  • भाषा सरल और प्रवाहमय है
  • इसमें लालच के संदर्भ में कहा गया है।

4. रहिमन खोजे ऊख में, जहाँ रसनि की खानि
जहाँ गाँठ तहं रस नहीं, यही प्रीति में हानि॥

शब्दार्थ-ऊख = गन्ना; रसनि = रस; खानिखान।

संदर्भ-पूर्ववत्
प्रसंग-इसमें प्रेम के मध्य ठीस को उजागर किया गया है।

व्याख्या-प्रस्तुत दोहे में रहीम ने गन्ने का उदाहरण लिया है कि जिस प्रकार गन्ने में रस भरा होता है और इससे आनंद भी मिलता है परंतु हमें उसकी गाँठों को नहीं भूलना चाहिए जिनमें रस नहीं होता उसी प्रकार अधिक प्रेम में भी गाँठ आ सकती है। .

विशेष

  • भाषा सरल और प्रवाहमय है।
  • इसमें सुख-दुख को दर्शाया गया है।

5. ससि सुकेस साहस सलिल मान सनेह रहीम।
बढ़त बढ़त बढ़ि जात है, घटत घटत घटि सीम।।

शब्दार्थ-ससि = चंद्रमा; सुकेस = बाल, सलिल = पानी, जल।

संदर्भ-पूर्ववत्।
प्रसंग-इसमें चंद्रमा, केस आदि के बढ़ने और घटने पर विचार किया गया है।

व्याख्या-प्रस्तुत दोहे में रहीम ने कहा है कि चंद्रमा, बाल, साहस, पानी, माम और प्रेम आदि जितनी तेजी से बढ़ते है उतनी तेजी से ही कम होते चले जाते हैं अर्थात जीवन में कुछ भी स्थिर नहीं है, सबकी नियती और चाल में अंतर आना स्वाभाविक है।

विशेष

  • निरतंरशीलता को दर्शाया गया है।
  • भाषा सरल एवं प्रवाहमय है।

नीति दशक वृंद का परिचय

वृंद का पूरा नाम वृंदावन दास था। वे रीतिकाल के सुप्रसिद्ध कवि थे। उनका जन्म सन् 1643 ई. में मेड़ना नामक गाँव में हुआ था, जो जोधपुर, राजस्थान में है। उनका कार्यक्षेत्र बहुत विस्तृत था। वे अपने आश्रदयाताओं के साथ सदा यात्रा करते रहे। वे कृष्णगढ़ नरेश महाराज राजसिंह के गुरु थे। वे उनके साथ औरगजेब की फौज में ढाका तक गए थे।

1. जहाँ सहन तहं प्रीति है, प्रीति तहाँ सुख ठौर।
जहाँ पुष्प तहं वास है, जहाँ बास तहं मौर।।

शब्दार्थ-ठौर = स्थान; प्रीति = प्रेम; पुष्प = फूल।

संदर्भ-इस दोहे के रचयिता महाकवि वृंद हैं।
प्रसंग-इसमें प्रेम की सार्थकता के बारे में बताया गया है।

व्याख्या-प्रस्तुत दोहे में महाकवि वृंद प्रेम की सार्थकता को प्रकट करते हुए कहते हैं कि सच्चे प्रेम का सुख तभी प्राप्त होता है जब प्रेमी भी प्रेम में डूबा हो। जहाँ फूलों का वास होगा, वहीं मोर भी घूमेगा। अतः प्रेम अतुल्नीय है।

विशेष

  • भाषा सरल एवं प्रवाहमय है।
  • प्रेम को अतुल्नीय बताया गया है।

2. सुनिए सबही की कही, करिए सहित विचार।
सर्व लोक राजी रहै, सो कीजे उपचार।।

शब्दार्थ-सर्वलोक = सभी लोग, सारा संसार; हिये = हृदय।

संदर्भ-पूर्ववत्।
प्रसंग-सब लोगों के सुनने पर बल दिया गया है।

व्याख्या-प्रस्तुत दोहे में कवि वृंद ने व्यक्ति विशेष से कहा है कि हमें कुछ भी निर्णय लेने से पहले सबकी राय सुननी चाहिए, तत्पश्चात विचार करना चाहिए। अंतत, ऐसा निर्णय लेना चाहिए, तत्पश्चात, विचार करना चाहिए। अंतत ऐसी निर्णय लेना चाहिए। जिसमें जिससे सभी संबंधित लोग एकमत हो। अर्थात हमें कोई भी कार्य जल्दबाजी में नहीं करना चाहिए।

विशेष

  • भाषा सरल एवं प्रवाहमय है।
  • इसमें कार्य की सार्थकता पर बल दिया गया है।

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