MP Board Class 9th Special Hindi सहायक वाचन Solutions Chapter 3 हल्दीघाटी (कविता, श्यामनारायण पाण्डेय)

हल्दीघाटी अभ्यास

बोध प्रश्न

प्रश्न 1.
चेतक को प्रलय मेघ-सा क्यों कहा गया है?
उत्तर:
चेतक को प्रलय मेघ-सा इसलिए कहा गया है क्योंकि वह रणभूमि में शत्रु सेना पर प्रलय काल के मेघ के समान भयंकरता से टूट पड़ता था।

प्रश्न 2.
राणा प्रताप की तलवार को किसके समान कहा गया है?
उत्तर:
राणा प्रताप की तलवार को विषयुक्त नागिन, विद्युत् एवं जिह्वा निकाले हुए चण्डी के समान कहा गया है।

प्रश्न 3.
अजब विषैली नागिन किसे कहा गया है?
उत्तर:
अजब विषैली नागिन राणा प्रताप की तलवार को कहा गया है।

प्रश्न 4.
मानसिंह के हाथी की कमर क्यों झुक गई?
उत्तर:
मानसिंह ने राणा प्रताप के ऊपर भाले से प्रहार करना चाहा तभी राणा प्रताप ने उस प्रहार को थाम कर इस तरह का झटका दिया कि हाथी की भी कमर झुक गई।

प्रश्न 5.
अम्बर कलंक किसे और क्यों कहा गया है?
उत्तर:
अम्बर कलंक का अर्थ होता है आकाश को कलंकित करने वाला। अम्बर कलंक मानसिंह को कहा गया है क्योंकि मानसिंह ने मेवाड़ पर आक्रमण करने का षड्यंत्र रचा था। अकबर तो राणा प्रताप के शौर्य एवं रणकौशल से भयभीत था। लेकिन मानसिंह के उकसाने पर और उसी के नेतृत्व में हल्दी घाटी पर आक्रमण किया गया। मेवाड़ की धरती के आकाश को कलंकित करने के कारण ही मानसिंह को अम्बर कलंक कहा गया है।

प्रश्न 6.
‘तो फिर लड़ ले भाला लेकर’ यह किसने, किससे कहा?
उत्तर:
‘तो फिर लड़ ले भाला लेकर’ यह कथन राणा प्रताप ने मानसिंह से कहा।

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प्रश्न 7.
प्रताप के भाले के वार से मानसिंह कैसे बचा? उसके बदले में कौन मारा गया?
उत्तर:
प्रताप के भाले के वार से मानसिंह हौंदे के तल में छिपकर बच सका पर भाले के वार से हाथी का चालक पीलवान मारा गया।

प्रश्न 8.
हल्दी घाटी कहाँ स्थित है और क्यों प्रसिद्ध है? वर्णन कीजिए।
उत्तर:
हल्दी घाटी अरावली पर्वत श्रेणियों के मध्य स्थित है। इस क्षेत्र में अकबर द्वारा भेजी गयी सेना ने मानसिंह के नेतृत्व में हमला किया। यह युद्ध एक भयनाक युद्ध था। अकबर, राणा प्रताप की शक्ति से डरता था पर मानसिंह के उकसाने पर उसने युद्ध किया। इस युद्ध में अकबर की सेना का बहुत नुकसान हुआ। महाराणा प्रताप सैनिकों की कमी के कारण युद्ध तो नहीं जीत पाये पर उन्होंने हार कभी भी स्वीकार नहीं की। भामाशाह से धन की मदद मिलने पर उन्होंने अपनी सेना को फिर इकट्ठा किया और वे देश की स्वतंत्रता के लिए जंगल-जंगल भटकते फिरे पर अपनी प्रतिज्ञा से पीछे नहीं हटे। भारत के स्वतंत्रता संग्राम में राणा प्रताप का नाम सुनहरे अक्षरों में लिखा हुआ है।

प्रश्न 9.
चेतक के शौर्य का वर्णन अपने शब्दों में कीजिए।
उत्तर:
महाराणा प्रताप का घोड़ा चेतक अत्यन्त तीव्र गति से दौड़ता था। वह दौड़ने में हवा को कभी को भी मात देता था। उसको चलाने के लिए चाबुक का प्रयोग नहीं किया जाता था। वह तो इशारे में ही उड़ जाता था। वह शत्रुओं को रौंदता हुआ युद्ध क्षेत्र से निकल जाता था। चौकड़ी भरते समय वह आकाश में उड़ने लगता था। तलवारों के युद्ध में भी वह बिना किसी डर के सरपट दौड़ जाता था।

वह शत्रु सेना पर प्रलय काल के बादलों के समान आक्रमण करता था। वह हाथी के मस्तक पर अपने आगे के दोनों पैर गड़ाकर उन्हें रोक देता था।

प्रश्न 10.
राणा प्रताप के युद्ध कौशल व वीरोचित व्यवहार का वर्णन अपने शब्दों में कीजिए।
उत्तर:
राणा प्रताप एक महान वीर योद्धा था। वह शत्रुओं से जरा भी नहीं डरता था। राणा प्रताप युद्धक्षेत्र में शत्रुओं के सिरों को एक झटके में काट डालता था। जब भी राणा का आक्रमण होता था शत्रुदल में आतंक मच जाता था और वे इधर-उधर बचने के लिए भागने लग जाते थे। उसकी तलवार शत्रुओं के सिर काट-काटकर लहराती रहती थी। उसकी तलवार को देखकर ऐसा लगता था मानो रणचण्डी अपनी जीभ पसार कर खून पीने के लिए व्याकुल हो रही है।

महान् योद्धा होते हुए भी वीरोचित व्यवहार शत्रु से भी करता था। जब प्रताप के प्रहार से मानसिंह का भाला टूट गया था। वह चाहता तो इस मौके का लाभ उठाकर मानसिंह का वध कर सकता था पर उसने ऐसा नहीं किया अपितु मानसिंह से पुनः भाला हाथ में लेने को कहा। जब मानसिंह ने दुबारा भाला ले लिया तो राणा प्रताप ने हँसकर कहा-हे मानसिंह अब तू बस कर युद्ध हो चुका। अब यदि तू अपनी खैर चाहता है तो अपनी जान बचाकर यहाँ से भाग जा। जब मानसिंह नहीं माना तो राणा ने ऐसा भीषण प्रहार किया कि हाथी का हौदा टूट गया और मानसिंह ने उसमें छिपकर अपनी जान बचाई लेकिन दूसरे ही क्षण राणा के प्रहार से पीलवान की मौत हो गई। इस प्रकार हम देखते हैं कि राणा जहाँ महान् योद्धा था वहीं वह शत्रु के निशस्त्र होने पर उस पर वार नहीं करता था।

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