MP Board Class 9th Sanskrit Solutions Durva Chapter 2 अलसस्य स्वप्नः (कथा)

MP Board Class 9th Sanskrit Chapter 2 पाठ्य पुस्तक के प्रश्न

संस्कृत कक्षा 9 पाठ 2 प्रश्न उत्तर MP Board प्रश्न 1.
एकपदेन उत्तरं लिखत (एक शब्द में उत्तर लिखो)।
(क) विप्रपुत्रस्य नाम किम् आसीत्? (विप्र पुत्र का नाम क्या था?)
उत्तर:
विप्रपुत्रस्य नाम सोम शर्मा आसीत्। (विप्र पुत्र का नाम सोम शर्मा था।)

(ख) सक्तुभिः कति रुप्यकाणि उत्पत्स्यन्ते? (सत्तू से कितने रुपये हुये?)
उत्तर:
सक्तुभिः शतम् रुप्यकाणि उत्पस्यन्ते (सत्तू से सौ रुपये हुए।)

(ग) विप्रः कं सततम् अवलोकयति? (विप्र किसे एकटक देख रहा था?)
उत्तर:
विप्रः सक्तुम सततम् अवलोकयति। (विप्र सत्तू को एकटक देख रहा था।)

(घ) अश्वानां विक्रयात् किं भविष्यति? (घोड़ों को बेचने से क्या होगा?)
उत्तर:
अश्वानां विक्रयात् सुवर्णम् भविष्यति। (घोड़ों को बेचने से स्वर्ण मुद्रा आयेगी।)

(ङ) विप्रस्य प्रहारेण कः भग्नः? (विप्र के प्रहार से क्या टूट गया?)
उत्तर:
विप्रस्य प्रहारेण घटः भग्नः। (विप्र के प्रहार से घड़ा टूट गया।)

संस्कृत कक्षा 9 पाठ 2 Question Answer MP Board प्रश्न 2.
एक वाक्येन उत्तर लिखत् (एक वाक्य में उत्तर लिखो)
(क) विप्रः स्वपत्नी किम् अभिधारयति? (ब्राह्मण अपनी पत्नी से क्या बोलेगा?)
उत्तर:
गृहाण तावद् बालकम्। (अपने बच्चे को पकड़ो।)

(ख) घट कैः सम्पूरितः? (घड़े में क्या भरा था?)
उत्तर:
सक्तुभिः। (सत्तू)।

(ग) सुवर्णेन किं सम्मत्स्यत्? (स्वर्ण मुद्रा से क्या बनेगा?)
उत्तर:
चतुः शालम् गृहम्। (चौकोर घर)।

(घ) सोम शर्मा कुतः विप्रसमीपम् आगच्छति? (सोम शर्मा ब्राह्मण के पास कहां आयेगा?)
उत्तर:
अश्वखुरासन्नवर्ती। (घुड़साल में मेरे समीप)।।

(ङ) विप्रः पुत्रम् कुतः अवधारयिष्यति? (ब्राह्मण पुत्र को कहां ग्रहण करेगा?)
उत्तर:
अश्वशालयः पृष्ठदेशे। (घुड़साल के पीछे)।

संस्कृत कक्षा 9 पाठ 2 सवाल जवाब MP Board प्रश्न 3.
अधोलिखित प्रश्नानाम् उत्तराणि लिखत् (नीचे लिखे प्रश्नों के उत्तर लिखो)
(क) सोम शर्मा पितरं दृष्ट्वा किं करिष्यति? (सोम शर्मा पिता को देखकर क्या करेगा?)
उत्तर:
ितु समीपम् आगमिष्यति। (पिता को देखकर उसके पास जायेगा।)

(ख) विप्रः रात्रो सुप्तः किं चिन्तयामास? (ब्राह्मण रात में सोते हुए क्या विचार किया?)
उत्तर:
अयं घटः सक्तुभि परिपूर्णः वर्तते। (इस घेड़े में सत्तू भरा हुआ है।)

(ग) विप्रः कं कदा कुतश्च अवधारिष्यति? (ब्राह्मण किसको कहा और कब धारण करेगा?)
उत्तर:
पुत्रम् अश्वशालायाः पृष्ठ देशे। (पुत्र को अश्वशाला के पीछे के भाग में ब्राह्मण ग्रहण करेगा।)

(घ) यदा दुर्भिक्षं भविष्यति तदा सक्तुभिः किंकिंभविष्यति? (जब अकाल होगा तब सत्तू के द्वारा क्या-क्या होगा?)
उत्तर:
स्वकणाम् सतम्। (अकाल के समय सैकड़ों रुपये सत्तू से प्राप्त होंगे)

(ङ) अस्याः कथायाः आशयः कः? (इस कथा का सार क्या है?)
उत्तर:
अविचार्यं न कर्तव्यम्। (बिना विचारे कोई कार्य नहीं करना चाहिए।) यही इस कथा का सार है।)

संस्कृत कक्षा 9 पाठ 2 MP Board प्रश्न 4.
उदाहरणानुसारं शब्दानां धातु प्रत्यय च पृथक कुरुत
कक्षा 9 संस्कृत पाठ 2 MP Board

स्वर्णकाकः प्रश्न उत्तर MP Board प्रश्न 5.
अव्ययः वाक्यनिर्माणं कुरुत
यथा- सः अत्र अस्ति।
(क) च – रमेश सुरेशश्च आपणं गच्छति।
(ख) अपि – अहं अपि भोपालम् गमिष्यामि।
(ग) तावत् – तावत् वर्षा वभूव।
(घ) न – अहं न गमिष्यामि।
(ङ) ततः – ततः पुत्रः आगतः।

संस्कृत कक्षा 9 पाठ 2 Answer MP Board प्रश्न 6.
उदाहरणानुसारं शब्दानां विभक्तिं, वचनं च लिखत्
Mp Board Class 9 Sanskrit Solution

Mp Board Class 9th Sanskrit Solution प्रश्न 7.
संधिविच्छेदं कृत्वा संधिः नाम लिखत्
(क) तद्यदि
उत्तर:
तत् + यदि = व्यंजन

(ख) कदाचिद्रात्रो
उत्तर:
कदाचित् + रात्रो = व्यंजन

(ग) तदनेन
उत्तर:
तत + अनेन = व्यंजन

(घ) कश्चित
उत्तर:
कः + चित = विसर्ग

(ङ) तथैव
उत्तर:
तथा + ऐव = वृद्धि स्वर

कक्षा 9 वीं संस्कृत अध्याय 2 MP Board प्रश्न 8.
क्रियापदानां धातु लकारम्, पुरुषं च लिखत्क्रियापदम्
Mp Board Solution Class 9th Sanskrit

संस्कृत कक्षा 9 पाठ 2 Solution MP Board प्रश्न 9.
शुद्धवाक्यानां समक्षम् “आम्” अशुद्ध वाक्यानां समक्षं “न” इति लिखत्
Mp Board Class 9 Sanskrit
उत्तर:
(क) न
(ख) आम्
(ग) आम्
(घ) आम्
(ङ) आम्

Class 9th Sanskrit Solution Mp Board प्रश्न 10.
रिक्तस्थानानि पूरयत् (खाली स्थान भरो)
(क) स एव पाण्डुरः शेते सोम शर्मा पिता यथा।
(ख) सुवर्णेन चतुः शालम् गृहं सम्पत्स्ये।
(ग) अजाभिः प्रभूता गा गृहीष्यामि।
(घ) तस्य अहम सोम शर्मा इति नाम करिष्यामि।
(ङ) वऽवा प्रसवतः प्रभूता अस्वाः भविष्यति

Mp Board Class 9 Sanskrit Chapter 2 प्रश्न 11.
यथायोग्यं योजयत् (सही जोड़ी बनाओ)
Mp Board 9th Class Sanskrit Solution

अलसस्य स्वप्नः पाठ-सन्दर्भ प्रतिपाद्य

यह कथा विष्णु शर्मा द्वारा रचित सुप्रसिद्ध कथा ग्रंथ ‘पंचतंत्र’ के ‘अपरीक्षित कारक’ नामक कृति से बालकों के ज्ञान-वृद्धि के उद्देश्य से ली गई है।

अलसस्य स्वप्नः पाठ का हिन्दी अर्थ

1. कस्मिंश्चिन्नगरे कश्चित् स्वभाव कृपणः विप्रः प्रतिवसति स्म। तेन भिक्षार्जितैः
भुक्तशेषैः सक्तुभिः कलशः सम्पूरितः। तं च घटं नागदन्ते अवलम्ब्य तस्याधस्तात् खट्वां निधाय सततम् एकदृष्ट्या तम् अवलोकयति।

शब्दार्थ :
कस्मिं-किसी-any; स्वभावकृपणा-स्वभाव से कँजूस-miser by nature; विप्रः-ब्राह्मण-Pandit, Wiseman; प्रतिवाति-रहता-Lives; भिक्षार्जितः-भिाक्षा के द्वारा अर्जित-Collection begging: भुक्तशेषैः-खाने से बचे हुए-Remaining food; सक्तुभिः-सत्तू-Power of Gram; तं-उसे-Complet, full, finish; च-और-him/ her/its; अवलम्ब्य-अवलंबित-Support; खटवां-खूटी-Nails; अवलोकयति-देखता था-Looks.

हिन्दी अर्थ :
किसी नगर में स्वभाव से कंजूस (कृपण) एक ब्राह्मण रहता था। वह भिक्षा से प्राप्त भोजन के बाद बचे हुए सत्तू को एक घड़े में भरता जाता। तब उस घड़े को एक खूटी से लटका कर उसके नीचे चारपाई पर बैठ घड़े को निरंतर देखता जाता।

2. अथ कदाचिद्रात्रौ सुप्तश्चिन्तयामास-यत् अयं घटः सक्तुभि परिपूर्णः वर्तते। तद्यदि दुर्भिक्षं भवति, तदनेन रुप्यकाणां शतमुत्पत्स्यते। ततस्तेन मया अजाद्वयं ग्रहीतव्यम्। ततः षाण्मासिकात् आप्रसववशात् ताभ्यां यूथंभविष्यति। ततोऽजाभिः प्रभूता गा गृहीष्यामि। गोभिर्महिषीः। महिषीभिर्वडवा। वडवाप्रसवतः प्रभूता अश्वा भविष्यन्ति। तेषां विक्रयात् प्रभूतां सुवर्णं भविष्यति। सुवर्णेन चतुः शालं गृहे सम्पत्स्यते।

शब्दार्थ :
अथ-इस प्रकार-This type; कदाचित-किसी-Anybody; सुप्त-सोते हुए-With sleeping; अयं-इस-This; सक्तुभि-सत्तू-Powder of gram; परिपूर्णः-परिपूर्ण-fulfill, over; शतमुत्पत्स्यते-सौहो जायेंगे-Hundred will be; तेन-उससे-Its; अजदूयं-दो बकरी-Two she goat; गृहीत्यम्-खरीदी जायेगी-Will have purchased; दुर्भिक्षम-अकाल-Starving; षाण्मासिकात्-छः महीने में होने वाली-Six monthly/Half yearly; ताभ्याम्-उससे-His; यूथम्-झुण्ड (समूह)-Group; गृहीष्यामि-ग्रहण करना-Will recieve; तेषां-उनके-Them; विक्रयात्-विक्रय से-From sell; प्रभूतं-बहुत अधिक-Very much; सुवर्ण-सोना-Gold; चतुःशालं-चौकोर-Square; गृहम्-घर-Home, House, Residence; सम्पत्स्यते-निर्मित करूँगा-Will build;

हिन्दी अर्थ :
तत्पश्चात् रात्रि में शयन करते समय मन में यह विचार करता कि सत्तू से यह कलश पूरी तरह भरा हुआ है। यदि अकाल पड़ जाता तो इसके द्वारा सैकड़ों रुपये प्राप्त हो जाएँगे। फिर उन रुपयों से वह दो बकरियाँ खरीदेगा। पुनः उन बकरियों से छः माह बाद पैदा होने वाले बच्चों का एक बहुत बड़ा समूह ही जाएगा। फिर वह इन बकरियों के बेचने से होने वाली आय से गायें, भैसें, भैसों से होने वाली आय से थोड़ी, उस घोड़ी से (अच्छे) किस्म के घोड़े होंगे। उन घोड़ों के बेचने से बहुत अधिक स्वर्ण प्राप्त होगा। उन स्वर्ण मुद्राओं से एक अच्छा घर निर्मित करूँगा।

3. ततः कश्चिद विप्रः मम गृहम् आगत्य रूपाढ्यां कन्यां मह्यं दास्यति। तत्सकाशात् पुत्रो मे भविष्यति। तस्य अहं “सोमशा” इति नाम करिष्यामि। ततः तस्मिञ्जानुचलन-योग्ये सजाते अहं पुस्तकंगृहीत्वा अश्वशालायाः पृष्ठदेशे उपविष्टस्तदवधारयिष्यामि। अत्रान्तरे सोमशर्मा मां दृष्ट्वा जनन्युत्सङ्गात् जानुचलनपरः अश्वखुरासन्नवर्ती मत्समीपमा गमिष्यति। ततोऽहं स्वपत्नी कोपाविष्टोऽभिधास्यामि ‘गृहाण तावद बालकम्। सा अपि गृहकर्म व्यग्रतयाऽस्मद्वचनं न श्रोष्यति। ततोऽहं समुत्थाय तं ताडयिष्यामि।

शब्दार्थ :
कश्चिद-कोई-Anybody; आगत्य-आकर-After coming; रूपाढ्यां रूपमति-Beautiful; दास्यति-देगा-Will give; तस्य-उससे-Her/Him; भविष्यति-होगा-Will/Shall; करिष्यामि-करूंगा-Will do/shall do; गृहीत्वा-ग्रहण करके-Except; जानुचलनयोग्ये-घुटने से चलने योग्य होने पर-Walking with knee, With fulfill of qualification; उत्सङ्गात्-गोद से-by lap; भग्नः-टूट गया-broke; षाण्डुरताम्-पीले रंग का-The colour of yellow; असम्भव्याम-असम्भव-Impossible; पृष्ठदेशे-पृष्ठ देश में-Behind of the stable; धारयिष्यामि-धारण करूँगा-Keep,except; तावद् बालकम-तुम्हारे बालक का-To your son; श्रोष्यति-सुना जाता है-Is listen; ताडयिस्यामि-पिटाई करूँगा-Will beating;

हिन्दी अर्थ :
तत्पश्चात् कोई ब्राह्मण मेरे घर आकर अपनी रूपवती कन्या मुझे देगा। उससे मेरा पुत्र होगा। उसका नाम मैं सोम शर्मा रलूँगा। तत्पश्चात् बालक के चलने योग्य हो जाने पर मैं पुस्तक लेकर घुड़साल के पीछे बैठकर अध्ययन करूँगा और बालक सोम शर्मा मुझे देखकर घुटने के बल घोड़े के खुरों के पास से होता हुआ घुड़साल में मेरे पास आ जाएगा। तब मैं अपनी पत्नी को गुस्से में डाँटते हुए पकड़ने को कहूँगा। वह भी गृहकार्य में व्यस्त होने के कारण मेरे वचन नहीं सुनेगी तो मैं उसकी पिटाई करूँगा।

4. एवं तेन ध्यानस्थितेन प्रहारो दत्तो यथा स घटो भग्नः स्वयं च पाण्डुरतां गतः अतोऽहं ब्रवीमि –
अनागतवती चिंताम असम्भाव्यां करोति यः।
स एव पाण्डुरः शेते सोमशर्मपिता यथा ॥

शब्दार्थ :
अनागतवतीम्-न आयी हुई को-Unreachable/miss call; ध्यानस्थितेन-ध्यान करते हुए-With meditate; ततैव-इसी प्रकार-This type; प्रहारो-प्रहार किया-Stroke.
हिन्दी अर्थ-इस प्रकार वह ब्राह्मण मन में ध्यान करते हुए उसी प्रकार प्रहार किया जिससे वह घड़ा फूट गया और ब्राह्मण (सत्तू के गिरने से) पीला पड़ गया। अतः मैं कहता हूँ –

“न आई हुई की चिंता करते हुए असंभावित कार्य की जो कल्पना करता है वह सोम शर्मा के पिता की तरह पीले रंग का हो जाता है।

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