MP Board Class 7th Sanskrit पत्र-लेखनम्

MP Board Class 7th Sanskrit पत्र-लेखनम्

पत्रलेखन रचना का महत्वपूर्ण अंग है। प्रायः प्रत्येक व्यक्ति को पत्र, प्रार्थना-पत्र इत्यादि लिखने पड़ते हैं। मार्गदर्शन के लिए महत्वपूर्ण पत्र यहाँ दिये जाते हैं

1. पितरम् प्रति पुत्रस्य पत्रम्
(पिता के लिए पुत्र का पत्र)

राजकीय विद्यालयः
इन्दौरनगरः (मध्य प्रदेश)
दिन. 21.07.20…

पूज्याः पितृचरणाः
सादरं कोटिशः प्रणामाः
अत्र कुशलं तत्रास्तु। मुद्राभिः सह पत्रं प्राप्तम्। राजकीय विद्यालये मम प्रवेशः अभवत्। मम त्रैमासिकी परीक्षा अक्टूबरमासे भविष्यति। अहं तथा परिश्रयम् प्रयत्नम् वा करिष्यामि यथा अहं सर्वासु परीक्षा विषयेतु प्रथमं स्थानम् प्राप्नुयम्। पूज्या जननी कामपि चिन्ताम् न करोत्। अत्र कापि कठिनता नास्ति। पूज्यायाः मातुः चरणकमलयोः कोटिशः साष्टाङ्ग प्रणामाः।

शुभशीर्वादाकांक्षी
विश्वनाथः
कक्षा सप्तमः

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2. पुत्रं प्रति पितुः पत्रम्
(पुत्र के लिए पिता का पत्र)

गोकुल निवासः
बडनगरम्
इन्दौर
दि. 07.08.20…

वत्स विश्वनाथ!
कोटिशः शुभाशीर्वादाः।
अत्रकुशलं तत्रास्तु।
तव पठनम् सम्यक्रूपेण चलति इति ज्ञात्वा वयं सर्वे प्रसन्नाः। सुपुत्रात् इयमेव आशास्ति यत् स स्वसन्तोषजनकेन उत्तम परिणामेन पितरौ सन्तोषयेत्। धनस्य कापि चिन्ता न कार्या। वयं समये समये धनं प्रेषयिष्यामः। त्वं सर्वोत्तमम् परिणामम् दर्शय, वयं यथेच्छं धनं दास्यामः। माता तुभ्यं सस्नेहं शुभाशीर्वादम् ददाति। पत्रम् प्रेषणीयम्।

तव हितैषी पिता
रामचन्द्रः।

3. प्रधानाचार्य प्रति शिष्यस्य प्रार्थनापत्रम्

माननीयाः प्रधानाचार्य महोदयाः
राजकीय विद्यालयः
इन्दौरनगरम्।
मान्याः।
सादरं सविनयम् निवेदनमिदं यत् मम पितुः वेतनम् अतिन्यूनम्। अन्ये च मे भ्रातरः अस्मिन्नेव विद्यालये षष्ट कक्षायाम् पठन्ति। अतः मम सविनयं निवेदनम् यत् मह्यम् निःशुल्का शिक्षा प्रदेया। पितुः वेतन-प्रमाणपत्रम् संलग्नम् अस्ति, अशास्ति यत् मम विषये भवताम् उदार: दृष्टिकोणः भविष्यति।

कृपाकांक्षी भवच्छिष्यः
विश्वनाथ
कक्षा सप्तमः।

4. प्रधानाचार्य प्रति शिष्यस्य प्रार्थनापत्रम्

श्रीमन्तः
प्रधानाचार्य महोदयाः
राजकीय विद्यालयः
इन्दौरनगरम्, मध्यप्रदेशः।
महोदयाः
सादरं सविनयं निवेदनं यह अहं तीव्रज्वरेण पीड़ितः अस्मि। अतः विद्यालये उपस्थातुम् सर्वथा असमर्थः। कृपया दशदिवसानाम् मह्यम् अवकाशप्रदानेन अनुग्रहः कार्यः। वैद्यराजस्य प्रमाणपत्रं संलग्नम्।

भवदाज्ञाकारी
विश्वनाथः
कक्षा सप्तमः।

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5. प्रधानाचार्यं प्रति प्रार्थनापत्रम्

श्रीमन्तः
प्रधानाचार्य महोदयाः
राजकीय विद्यालयः
इन्दौर नगरम् (मध्य प्रदेश)
मान्याः!
सविनयं निवेदनम् यत् मम ज्येष्ठभ्रातुः विवाहः अस्या मेव दशभ्याम् तिथौ अस्ति। वर-यात्रा भोपालनगरम् गमिष्यति। वरयात्रायां ममापि गमनम् अनिवार्यम्। अतः अहं पञ्च दिवसानाम् अवकाशस्य प्रार्थनां करोमि।

भवच्छिष्यः
विश्वनाथः
कक्षा सप्तमः।

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MP Board Class 7th Hindi Bhasha Bharti Solutions Chapter 12 नींव का पत्थर

MP Board Class 7th Hindi Bhasha Bharti Solutions Chapter 12 नींव का पत्थर

MP Board Class 7th Hindi Bhasha Bharti Chapter 12 पाठ का अभ्यास

बोध प्रश्न

प्रश्न 1.
निम्नांकित प्रश्नों के उत्तर दीजिए

(क) जूही के चरित्र की सबसे बड़ी विशेषता है’हँसना’। आपको जूही की हँसी से क्या प्रेरणा मिलती है?
उत्तर
हँसना बहुत जरूरी है। जूही के चरित्र की यह बहुत बड़ी विशेषता है। जूही की हँसी सभी को प्रेरणा देती है कि वे मृत्यु से भी भयभीत नहीं हो सकेंगे। उन्हें कठिन परिस्थितियों में भी हँसना चाहिए। इस प्रकार हम अपनी मंजिल की ओर बढ़ते जा सकते हैं।

(ख) “वीरता कलंकित न हो, सुशोभित हो” इसके लिए कौन-कौन से कार्य करना चाहिए?
उत्तर
वीरता तभी कलंकित होती है जब हम अपने कर्त्तव्य के पालन में पीछे रहते हैं। कर्त्तव्यपालन से मिलने वाली सफलता वीरता को सुशोभित करती है। इसलिए मातृभूमि की आजादी की रक्षा के काम में अडिग बना रहना चाहिए। मातृभूमि की सेवा हमारे बलिदान को चाहती है।

(ग) निम्नांकित के चरित्र की विशेषताएँ लिखिए
(क) लक्ष्मीबाई
(ख) मुन्दर
(ग) तात्या।
उत्तर
(क) लक्ष्मीबाई – महारानी लक्ष्मीबाई अपनी मातृभूमि से बहुत प्रेम करती हैं। वे उसकी आजादी की रक्षा में अपना सर्वस्व लुटा देती हैं। वे आजादी के लिए लगातार लड़ती रहती हैं। दृढ़ प्रतिज्ञ लक्ष्मीबाई हँसते-हँसते आजादी की बलि वेदी पर स्वयं को न्योछावर कर देती हैं। देशभक्ति, जनसेवा और राष्ट्र सेवा के लिए सब कुछ त्यागने के लिए तत्पर रहती हैं।

(ख) मुन्दर – मुन्दर महारानी लक्ष्मीबाई की सहेली है। वह फिरंगियों (अंग्रेजों) के आगमन की सूचना पर व्याकुल हो उठती और चाहती है कि उन्हें एकदम वहाँ से खदेड़ देना चाहिए। वह आज्ञापालक और वीरता के गुणों से युक्त है। वह स्वराज्य की पुजारिन है।

(ग) तात्या – तात्या लक्ष्मीबाई के एक सहयोगी हैं। वे प्रथम स्वतन्त्रता संग्राम (1857) के सेनानी हैं। वे मातृभूमि की सुरक्षा और स्वराज्य की नींव का आधार है। वे निर्भीक होकर शत्रु से लोहा लेते रहे।

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प्रश्न 2. निम्नांकित कथनों का आशय स्पष्ट कीजिए
(क) हम सब मिलकर या तो स्वराज्य प्राप्त करके रहेंगे या स्वराज्य की नींव का पत्थर बनेंगे।
(ख) सूर्य का तेज अनन्त सूर्य में विलीन हो गया।
उत्तर
(क) स्वराज्य प्राप्त करने में सफलता हम सब के सम्मिलित प्रयासों से सम्भव है। आजादी मिल भी सकती है। अन्यथा आजादी के लिए किये गये अपने प्रयासों के द्वारा स्वराज्य की नींव का पत्थर तो बन ही जायेंगे, जो आजादी के भवन को ऊँचा और मजबूत बनाने में सहायक होगा।

(ख) लक्ष्मीबाई की सेना का सेनापति रघुनाथ राव महारानी लक्ष्मीबाई के सर्वस्व त्याग पर कहता है कि लक्ष्मीबाई सूर्य जैसे तेज से युक्त ीं। उनका तेज सूर्य के कभी भी समाप्त न होने वाले तेज में विलीन हो गया। कहने का तात्पर्य यह है कि सूर्य के अन्तहीन तेज से स्वयं चूकने वाली वीरांगना अब उसी तेज में विलीन हो गयी और अमर हो गयी।

प्रश्न 3.
निम्नांकित कश्चन किसके द्वारा कहे गये
(क) स्वराज्य की लड़ाई स्वराज्य मिलने पर ही समाप्त हो सकती है, बाई साहब। (…… ने लक्ष्मीबाई से कहा।)
(ख) महारानी जी, विश्वास दिलाता हूँ कि आपकी पवित्र देह को छूने का साहस केवल पवित्र अग्नि ही कर सकेगी। (…… ने लक्ष्मीबाई से कहा।)
(ग) मैं किसी के लिए सरदार हो सकता हूँ, पर आपके लिए तो सेवक ही हूँ। (……… ने लक्ष्मीबाई से कहा।)
(घ) आज हमें स्वामिभक्त से ज्यादा देशभक्तों की आवश्यकता है। (ने जूही से कहा)
उत्तर
(क) (मुन्दर ने लक्ष्मीबाई से कहा।)
(ख) (रघुनाथ राव ने लक्ष्मीबाई से कहा।)
(ग) (तात्या ने लक्ष्मीबाई से कहा।)
(घ) (लक्ष्मीबाई ने जूही से कहा।)

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भाषा अध्ययन

प्रश्न 1.
निम्नलिखित शब्दों का शुद्ध उच्चारण कीजिए
अस्तबल, प्रतिज्ञा, रणभूमि, समर्पित, स्वराज्य।
उत्तर
शुद्ध उच्चारण के लिए विद्यार्थी लगातार इन शब्दों को पढ़ें और कोशिश करें कि ये शब्द सही रूप से उच्चारित हो रहे हैं या नहीं। अध्यापक महोदय की सहायता ले सकते हैं।

प्रश्न 2. निम्नलिखित शब्दों को वाक्यों में प्रयोग कीजिए
विलासप्रियता, जनसेवक, स्वामिभक्त, मरहमपट्टी।
उत्तर
विलासप्रियता = विलासप्रियता राष्ट्रीय सम्मान की रक्षा करने में एक सबसे बड़ी बाधा है।
जनसेवक = जनसेवक ही स्वराज्य के सच्चे पहरेदार हैं।
स्वामिभक्त = स्वामिभक्त की अपेक्षा देशभक्त बनिए।
मरहमपट्टी = अनेक घायलों की मरहमपट्टी करके उनका इलाज किया।

प्रश्न 3.
सही शब्द पर सही (✓) का निशान लगाइए
(क) दुर्भाग्य, दुरभाग्य, र्दुभाग्य, दुभार्य।
(ख) लक्ष्मिबाई, लछमीबाई, लक्ष्मीबाई, लक्षमीबाई।
(ग) सुरक्षीत, सुरक्षित, सूरछित, सुरशित।
(घ) समीत, समरपित, समर्पित, स्मर्पित।
(ङ) युधघोस, युधघोष, युधघोश, युद्धघोष।
उत्तर
(क) दुर्भाग्य
(ख) लक्ष्मीबाई
(ग) सुरक्षित
(घ) समर्पित
(ङ) युद्धघोष।

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प्रश्न 4.
नीचे दिये गये शब्द समूहों का प्रयोग करते हुए प्रत्येक से एक-एक वाक्य बनाइए
(क) क्या से क्या हो गया ?
(ख) कहाँ से कहाँ पहुँच गई?
(ग) नहीं, नहीं।
(घ) कौन कहता है?
उत्तर
(क) सोचते थे कि इस वर्ष वह परीक्षा में सफल हो सकेगा, परन्तु वह तो असफल ही रहा। क्या से क्या हो गया ? यह तो सोचा ही नहीं था।
(ख) उसकी पुत्री एक साधारण छात्रा थी, परन्तु वह तो आई.ए.एस. में सफल हो गयी। देखो तो वह कहाँ से कहाँ पहुंच गई ?
(ग) राधा ने उसे अपने घर ठहरने के लिए आग्रह किया परन्तु वह तो नहीं, नहीं ही कहती रही।
(घ) कौन कहता है कि मैंने उसकी सहायता नहीं की है।

प्रश्न 5.
निम्नलिखित प्रत्येक शब्द के दो-दो वाक्य छाँटकर लिखिए
कौन, कहाँ, कब, किसने, किसे।
उत्तर

  1. कौन कहता है, आप अकेली हैं, महारानी ?
    कौन सी बात की बाई साहब?
  2. कब हमने सोचा था, ऐसा भी होगा।
    कब क्या हो जाये, कह नहीं सकते।
  3. किसने ग्वालियर से झाँसी की ओर कूच किया ?
    किसने सम्मान पाया है ? देशभक्त ने या स्वामिभक्त ने।
  4.  मेरी सहायता की किसे है दरकार।
    उसने किसे सहायता के लिए वचन दिया।

प्रश्न 6.
दिए गए संवादों का हाव-भाव से वाचन कीजिए
रघुनाथ राव-महारानी, आपने सुना ?
लक्ष्मीबाई-क्या, रघुनाथ राव ?
जूही-क्या हुआ सरदार?
रघुनाथ राव-महारानी, जनरल यूरोज की सेना ने मुरार की सेना को हरा दिया।
जूही-(काँपकर) क्या पेशवा की सेना हार गई ?
उत्तर
इन संवादों को विशेष हाव-भाव से वाचन करने के लिए अपने आचार्य महोदय की सहायता ले सकते हैं।

प्रश्न 7.
निम्नलिखित शब्दों के विपरीतार्थी शब्द लिखिए
सफलता, दुर्भाग्य, आकाश, चेतन, दुर्बल, दुश्मन।
उत्तर
शब्द – विपरीतार्थी शब्द
सफलता – असफलता
दुर्भाग्य – सौभाग्य
आकाश – पाताल
चेतन – अचेतन
दुर्बल – सबल
दुश्मन – मित्र

प्रश्न 8.
निम्नलिखित मुहावरों का वाक्यों में प्रयोग कीजिए
हिमालय अड़ जाना, नींद खुलना, पीठ दिखाना, कलेजे पर पत्थर रखना।
उत्तर
हिमालय अड़ जाना – जीवन में सफलता के मार्ग में कभी-कभी हिमालय अड़ जाता है।
नींद खुलना – मुरार की सेना पर अंग्रेजों की फौज के आक्रमण ने उनकी नींद खोल दी।
पीठ दिखाना – भारतीय सैनिक युद्धक्षेत्र में कभी भी पीठ नहीं दिखाते।
कलेजे पर पत्थर रखना – कलेजे पर पत्थर रखकर, उसने अपने प्राणप्रिय से वियोग प्राप्त किया।

प्रश्न 9.
निम्नलिखित शब्दों के समास विग्रह करते हुए समास के नाम लिखिए
देशभक्त, रणभूमि, पेड़-पौधे, वीरबाला, फूल-पत्ती, शुभ-अशुभ, युद्धघोष।
उत्तर
MP Board Class 7th Hindi Bhasha Bharti Solutions Chapter 12 नींव का पत्थर 1

नींव का पत्थर परीक्षोपयोगी गद्यांशों की व्याख्या 

1. स्वराज्य को आते देखती हूँ, परन्तु दूसरे ही क्षण मार्ग में हिमालय अड़ जाता है। जूही, मैंने प्रतिज्ञा की थी कि अपनी झाँसी नहीं दूंगी। लेकिन झाँसी हाथ से निकल गई। (अत्यन्त धीमे स्वर में) झाँसी हाथ से निकल गई जूही। (सहसा तीव्रतर होकर) नहीं, नहीं, झाँसी हाथ से नहीं निकली। मैं अपनी झाँसी नहीं दूंगी।

सन्दर्भ-प्रस्तुत पंक्तियाँ हमारी पाठ्य-पुस्तक भाषा-भारती के ‘नींव का पत्थर’ नामक पाठ से ली गई हैं। इस पाठ के लेखक विष्णु प्रभाकर हैं।

प्रसंग-महारानी लक्ष्मीबाई अंग्रेजी सेना के खिलाफ युद्ध कर रही हैं। वे झाँसी पर अंग्रेजों का अधिकार नहीं होने देंगी। वे अपनी आजादी के लिए लगातार संघर्ष कर रही हैं।

व्याख्या-महारानी लक्ष्मीबाई अपनी सखी जूही से कहती हैं कि वह एक क्षण तो आशावान हो उठती हैं कि वह स्वराज्य (आजादी) प्राप्त कर लेंगी। परन्तु दूसरे ही क्षण आजादी के मार्ग में बाधा आ खड़ी होती है। यह बाधा हिमालय पर्वत जैसी अति दुर्गम हो जाती है। लक्ष्मीबाई ने यह प्रतिज्ञा की हुई थी कि वह कभी भी अपनी झाँसी पर दुश्मनों का अधिकार नहीं होने देंगी। वह भावनाओं में खो जाती हैं और कहती हैं कि झाँसी उनके हाथों से निकल गई है, परन्तु एकदम ही वह अपनी प्रतिज्ञा को याद करके कह उठती हैं कि वह अपनी झाँसी को नहीं देंगी। झाँसी उनके हाथ से नहीं निकल सकती। वह कभी भी झाँसी पर शत्रुओं का अधिकार नहीं होने देंगी।

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2. मैं जानती हूँ कि मैं झाँसी लेकर रहूँगी, लेकिन क्या तुम नहीं जानती कि उस दिन बाबा गंगादास ने कहा था फिर मिट जाना, जब तक हम विलास-प्रियता को छोड़कर जन-सेवक नहीं बन जाते, तब तक स्वराज्य नहीं मिल सकता। वह मिल सकता है केवल सेवा, तपस्या और बलिदान से।

सन्दर्भ-पूर्व की तरह।

प्रसंग-महारानी लक्ष्मीबाई स्वराज्य को प्राप्त करने के लिए सेवा, तपस्या और बलिदान को महत्वपूर्ण मानती हैं।

व्याख्या-लक्ष्मीबाई को उनकी सखी जूही बताती है कि उनके साथ वे सभी (देशवासी) हैं। लक्ष्मीबाई इस बात को भली-भाँति जानती भी हैं कि पूरी जनता का सहयोग उनके साथ है। अत: वे झाँसी को फिर से अपने अधिकार में लेकर ही रहेंगी। लक्ष्मीबाई अपनी सखी से कहती हैं कि बाबा गंगादास का उपदेश तो वह जानती ही है। उन्होंने कहा था झाँसी (मातृभूमि) की आजादी के लिए हमें मर-मिट जाना चाहिए। उन्होंने कहा था कि हम जब तक विलासी बने रहेंगे, तब तक आम आदमी की सेवा करने वाले हम लोग नहीं हो सकते तथा आजादी को भी प्राप्त नहीं कर सकते। स्वराज्य को केवल सेवा के कार्यों से, तपस्या से और स्वयं को बलिदान करने की भावना से प्राप्त किया जा सकता है।

3. उन्होंने यह भी तो कहा था कि स्वराज्य प्राप्ति सेबढ़कर है, स्वराज्य की स्थापना के लिए भूमि तैयार करना; स्वराज्य की नींव का पत्थर बनना। सफलता
और असफलता देव के हाथ में है, लेकिन नींव का पत्थर बनने से हमें कौन रोक सकता है? वह हमारा अधिकार है।

सन्दर्भ-पूर्व की तरह।

प्रसंग-महारानी लक्ष्मीबाई की सहेली जूही अपने इस वार्तालाप में स्वराज्य स्थापना के लिए स्वराज्य की नींव का पत्थर बनने को अनिवार्य बतलाती है।

व्याख्या-महारानी लक्ष्मीबाई को जूही बाबा गंगादास के उपदेश के बारे में याद दिलाती हुई कहती है कि उन्होंने बतलाया था कि स्वराज्य को प्राप्त करने से भी बढ़कर यह जरूरी है कि स्वराज्य की स्थापना के लिए भूमि तैयार की जाये फिर स्वराज्य की नींव का ऐसा पत्थर जड़ा जाये कि उस पर आजादी के भवन का निर्माण होता चला जाये। उस आजादी को प्राप्त करने में जो भी सफलता और असफलता हाथ लगेगी, वह तो देवता के अधीन है, परन्तु आजादी की नींव का पत्थर बनने में हमारे लिए कोई भी बाधा नहीं डाल सकता। स्वराज्य को प्राप्त करना, हमारा जन्म सिद्ध अधिकार है।

नींव का पत्थर शब्दकोश

निराशा = हताश, जो हर आशा छोड़ चुका है; फिरंगी = अंग्रेज; कूच = प्रयाण, प्रस्थान; रणभूमि = युद्ध क्षेत्र, कलंक = दाग, धब्या; मुलाहिजा = लिहाज, सम्मान; अस्तबल = घोड़े बाँधने का स्थान; व्यूह = जमावड़ा, युद्धभूमि में सैनिकों को विशेषरूप में खड़ा करना; कृतज्ञ = उपकार मानने वाला।

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MP Board Class 7th Sanskrit Solutions विविधप्रश्नावलिः 3

MP Board Class 7th Sanskrit Solutions Surbhi विविधप्रश्नावलिः 3

प्रश्न 1.
एक शब्द में उत्तर लिखो
(क) अनागतविधाता कुत्र अगच्छत्? [अनागतविधाता कहाँ चली गई?]
उत्तर:
अन्यज्जलाशयं

(ख) धीवराः कदा जलाशयं अगच्छन्? [धीवर कब जलाशय पर चले गये?]
उत्तर:
प्रभाते

(ग) क: योगस्य प्रवर्तकः? [योग का प्रवर्तक कौन था?]
उत्तर:
पतञ्जलिः

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(घ) अगस्त्य किम् रचितवान्? [अगस्त्य ने किसकी रचना की?)
उत्तर:
विद्युत्कोशः

(ङ) कति जनाः नित्यदुःखिता? [कितने लोग प्रतिदिन दुखी होते हैं?]
उत्तर:
षट्

(च) शन्नोवरुणः’ इति ध्येयवाक्यं कस्याः सेनायाः अस्ति? [शन्नोवरुणः’ किस सेना का ध्येय वाक्य है?]
उत्तर:
जल सेनायाः

(छ) राज्ञी दुर्गावती कस्मिन् क्षेत्रे जाता? [रानी दुर्गावती किस क्षेत्र में जन्मी थी?
उत्तर:
मध्यप्रदेशस्यमण्डलाक्षेत्रे

(ज) विपरीतबुद्धिः कदा भवति? [बुद्धि किस समय विपरीत हो जाती है?]
उत्तर:
विनाशकाले।

प्रश्न 2.
एक वाक्य में उत्तर लिखो
(क) प्रभाते धीवराः किं अकुर्वन्? [प्रात:काल में धीवरों ने क्या किया?]
उत्तर:
प्रभाते धीवराः जलाशयं गत्वा जालं प्रसार्य मत्स्यान् अगृह्णन्। [प्रातःकाल धीवरों ने जलाशय पर जाकर जाल फैलाकर मछलियों को पकड़ लिया।]

(ख) मत्स्यानाम् नामानि कानि? [मछलियों के नाम क्या हैं?]
उत्तर:
मत्स्यानां नामानि-अनागतविधाता, प्रत्युत्पन्नमतिस्तथा, यद्भविष्यत्। [मछलियों के नाम-अनागतविधाता, प्रत्युत्पन्नमति और यद्भविष्यत् था।]

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(ग) स्वस्थ शरीरे किं सुकरं भवति? [स्वस्थ शरीर में क्या आसान होता है?]
उत्तर:
स्वस्थ शरीरे अध्ययनं सुकरम् भवति। [स्वस्थ शरीर से अध्ययन आसान है।]

(घ) बालचराणाम् का प्रथमा प्रतिज्ञा? [बालचरों की प्रथम प्रतिज्ञा कौन-सी है?]
उत्तर:
बालचरस्य प्रथमा प्रतिज्ञा अस्ति-‘ईश्वरं स्वदेशं प्रति च कर्त्तव्य पालनं’। [बालचर की पहली प्रतिज्ञा है-ईश्वर और अपने देश के प्रति कर्त्तव्य का पालन करना।]

(ङ) कस्य धनं दानाय भवति? [किसका धन दान के लिए होता है?]
उत्तर:
साधोः धनं दानाय भवति। [सज्जन का धन दान के लिए होता है।

(च) प्रकाशनिस्सारणेन के भोजनं कुर्वन्ति? [प्रकाश निस्सारण से भोजन कौन बनाते हैं?]
उत्तर:
प्रकाशनिस्सारणेन पादपाः भोजनां कुर्वन्ति। [प्रकाश निस्सारण से वृक्ष भोजन बनाते हैं।]

(छ) दलपतशाहः कस्य राज्यस्य शासकः आसीत [दलपतशाह किस राज्य का शासक था?]
उत्तर:
दलपतशाह: गोंडवाना राज्यस्य शासकः आसीत् [दलपतशाह गोंडवाना राज्य का शासक था।]

(ज) कीदृशं वचः दुर्लभं भवति? [कैसा वचन दुर्लभ होता है?]
उत्तर:
हितं मनोहरि च वचः दुर्लभं भवति। [हितकारी और मनोहारी वचन दुर्लभ होता है।

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प्रश्न 3.
अपेक्षित परिवर्तन करो
(क) बालचराः (एकवचनम्)
(ख) दलपतशाहस्य (तृतीया विभक्तिः)
(ग) प्राणायामस्य (सप्तमी विभक्तिः)
(घ) आगमनाय (प्रथमा विभक्तिः)
(ङ) साधोः (बहुवचनम्)
(च) रसायनम् (बहुवचनम्)
उत्तर:
(क) बालचरः
(ख) दलपतशाहेन
(ग) प्राणायामे
(घ) आगमनम्
(ङ) साधूनाम्
(च) रसायनानि।।

प्रश्न 4.
उचित विकल्प से वाक्यों को पूरा करो
(क) परोपकारः ……….. अस्ति। (पुण्याय/पापाय/धर्माय)
(ख) दुर्गावती यशः शरीरेण अद्यापि ………। (जीवन्ति/अजीवत्/जीवति)
(ग) पतञ्जलिः आयुर्वेदं ……… अरचयत्। (शरीराय/मनसे/वाण्यै)
(घ) महर्षिः कणादः ………. जनकः। (परमाणुवादस्य/योगस्य/शल्यक्रियायाः)
(ङ) स्थलसेना ……….. देशरक्षणं करोति। (आकाशमार्गात्/स्थलात्/जलमार्गात्)
(च) विनाशकाले ………..। ( अनुकूलबुद्धि/विपरीतबुद्धिः/सद्बुद्धिः)
उत्तर:
(क) पुण्याय
(ख) जीवति
(ग) शरीराय
(घ) परमाणुवादस्य
(ङ) स्थलात्
(च) विपरीतबुद्धिः।।

प्रश्न 5.
अधोलिखित वाक्यों में रेखांकित शब्दों के लिए प्रश्न बनाओ
(क) मृतं प्रत्युत्पन्नमतिं धीवराः जालात् बहिः अकुर्वन।
(ख) धीवराः मत्स्यान् जाले बध्वा नेष्यन्ति?
(ग) रेखागणितं शुल्बसूत्रे अस्ति।
(घ) पृथ्वी सूर्यं परिक्रमति।
(ङ) लोककल्याणं दुर्गावत्याः आदर्शः आसीत्।
(च) सेनाः त्रयः प्रकाराः।
(छ) उद्यमेन कार्याणि सिध्यन्ति।
उत्तर:
(क) मृतं प्रत्युत्पन्नमतिम् धीवरः कुतः बहिः अकरोत्?
(ख) धीवरा मत्स्यान् कस्मिन् बध्वा नेष्यन्ति?
(ग) रेखागणितं कस्मिन् सूत्रे अस्ति?
(घ) पृथ्वी कम् परिक्रमति?
(ङ) दुर्गावत्याः किम् आदर्शः आसीत्?
(च) सेनायाः कति प्रकाराः?
(छ) केन कार्याणि सिध्यन्ति?

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प्रश्न 6.
उचित का जोड़ मिलाओ
MP Board Class 7th Sanskrit Solutions विविधप्रश्नावलिः 3 img 1
उत्तर:
(क) → (6)
(ख) → (5)
(ग) → (4)
(घ) → (3)
(ङ) → (1)
(च) → (2)

प्रश्न 7.
शुद्ध वाक्यों के समक्ष ‘आम्’ और अशुद्ध वाक्यों के समक्ष ‘न’ लिखो
(क) संसर्गजाः दोषगुणाः न भवन्ति।
(ख) दुर्गावती मालवक्षेत्रे राज्यम् अकरोत्।
(ग) पतञ्जलि: धनुर्वेद अरचयत्।
(घ) बालचराः देशसेवां कुर्वन्ति।
(ङ) साधोः धनं दानाय भवति।
(च) बोधायन: पाइथागोरसतः पूर्वं अभवत् ।
उत्तर:
(क) न
(ख) न
(ग) न
(घ) आम्
(ङ) आम्
(च) आम्

प्रश्न 8.
समानार्थक शब्दों का मेल करो
MP Board Class 7th Sanskrit Solutions विविधप्रश्नावलिः 3 img 2
उत्तर:
(क) → (6)
(ख) → (5)
(ग) → (1)
(घ) → (2)
(ङ) → (3)
(च) → (4)

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प्रश्न 9.
विपरीतार्थक शब्दों का मेल करो
MP Board Class 7th Sanskrit Solutions विविधप्रश्नावलिः 3 img 3
उत्तर:
(क) → (6)
(ख) → (5)
(ग) → (4)
(घ) → (3)
(ङ) → (2)
(च) → (1)

प्रश्न 10.
कोष्ठक से चित शब्द चुनकर रिक्त स्थान की पूर्ति करो-
[क्रीत्वा, नीत्वा, केतुं, आगत्य, गतवान, दातुं, जलाशये, प्रविश्य]
(क) मत्स्याः ……….. निवसन्ति स्म।
(ख) मोहनः भोजनं ………. विद्यालयं ……….।
(ग) सः पुस्तकं ……….. गृहकार्यं कृतवान्।
(घ) सः लेखनी ………. आपणं गतवान्।
(ङ) ततः गृहं ……….. पत्रं लिखितवान्।
(च) सः आपणतः भगिन्यै ………… उपहारम् आनीतवान्।
(छ) रात्रौ शयनकक्षं ………… सुप्तवान्।
उत्तर:
(क) जलाशये
(ख) नीत्वा, गतवान्
(ग) क्रीत्वा
(घ) ऋतुम्
(ङ) आगत्य
(च) दातुं
(छ) प्रविश्य।

प्रश्न 11.
उचित विकल्प से वाक्यों को पूरा करो
(क) विद्या ………… भवति। (ज्ञानस्य/ज्ञानाय)
(ख) औषधिः ……….. उन्मूलयति। (रोगान/रोगाणाम्)
(ग) अहं सप्तम ………… पठामि। (कक्षायाः/कक्षायाम्)
(घ) आर्यभट्टः ………… गतिम् ज्ञातवान्। (प्रकाशाय/प्रकाशस्य)
(ङ) दुर्गावती …………. राज्यम् अकरोत्। (चातुर्येण/चातुर्यम्)
(च) वायुसेना ………….. राष्ट्र रक्षति। (वायुमार्गे/वायुमार्गात्)
उत्तर:
(क) ज्ञानाय
(ख) रोगान्
(ग) कक्षायाम्
(घ) प्रकाशस्य
(ङ) चातुर्येण
(च) वायुमार्गात्।

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प्रश्न 12.
उचित क्रियापद से बाक्य पूरा करो
(क) आगामिमासे अहं जबलपुरं ………….। (आगच्छम्/गमिष्यामि)
(ख) ह्यः भोजने मिष्टान्नं …………..। (अस्ति/आसीत्)
(ग) त्वं योग कक्षा …………. (प्रविशति/प्रविश्)
(घ) वयं सर्वे देशसेवां …………..। (कुर्मः/कुर्वन्ति)
(ङ) मयूराः वने ……………। (नृत्यति/नृत्यन्ति)
(च) शरीरे द्वे नेत्रे ……………..। (भवन्ति/भवतः)
उत्तर:
(क) गमिष्यामि
(ख) आसीत्
(ग) प्रविश
(घ) कुर्वन्ति
(ङ) नृत्यन्ति
(च) भवतः।

प्रश्न 13.
अन्वय की पूर्ति करो
(क) ……गुणी पुत्रः वरं ………… शतानि अपि ………… च। एकः ………. तमः ……….. तारागणाः ……….. च ……….. ।
(ख) यथायथा ……… , मनः कल्याणे …………। तथा ……….. अस्य सर्वार्थाः …………. अत्र ………… न।।
उत्तर:
(क) एकः, मूर्ख, न। चन्द्रः, हन्ति, अपि, न।
(ख) पुरुषः, कुरुते। तथा, सिध्द्यन्ते, संशयः।

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MP Board Class 7th Hindi Bhasha Bharti Solutions Chapter 10 सुभाषचन्द्र बोस का पत्र

MP Board Class 7th Hindi Bhasha Bharti Solutions Chapter 10 सुभाषचन्द्र बोस का पत्र

MP Board Class 7th Hindi Bhasha Bharti Chapter 10 पाठ का अभ्यास

बोध प्रश्न

प्रश्न 1.
निम्नांकित प्रश्नों के उत्तर दीजिए

(अ) सुभाष चन्द्र बोस को किस जेल से किस जेल के लिए स्थानान्तरण आदेश मिला?
उत्त
सुभाषचन्द्र बोस को बहरामपुर जेल (बंगाल) से माण्डले सेन्ट्रल जेल के लिए स्थानान्तरण आदेश मिला था।

(ब) सुभाषचन्द्र बोस ने माण्डले जेल को तीर्थ स्थल क्यों कहा है?
उत्तर
सुभाषचन्द्र बोस ने माण्डले जेल को तीर्थ स्थल, इसलिए कहा है, क्योंकि वह जेल एक ऐसी जेल थी जहाँ भारत का एक महानतम् सपूत (लोकमान्य तिलक) लगातार छः वर्ष तक रहा था।

(स) माण्डले जेल में लोकमान्य तिलक के साथ कैसा व्यवहार किया जाता था ?
‘उत्तर
माण्डले जेल में लोकमान्य तिलक को छ: वर्ष तक शारीरिक और मानसिक यन्त्रणाओं से गुजरना पड़ा था। वे वहाँ अकेले रहे। उन्हें बौद्धिक स्तर का कोई साथी नहीं मिला। किसी अन्य बन्दी से उन्हें मिलने-जुलने नहीं दिया जाता था। जेल और पुलिस अधिकारियों की उपस्थिति में ही इतने वर्षों में दो या तीन भेंट से अधिक का मौका नहीं दिया था।

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(द) सुभाषचन्द्र बोस के अनुसार अपने आपको बन्दी जीवन के अनुकूल बनाने के लिए स्वयं में क्या-क्या परिवर्तन लाने पड़ते हैं?
उत्तर
सुभाषचन्द्र बोस के अनुसार अपने आपको बन्दी जीवन के अनुकूल बनाने के लिए हमें स्वयं ही पिछली आदतों का त्याग करना होता है। स्वयं को पूर्ण स्वस्थ और फुर्तीला बनाना पड़ता है। प्रत्येक नियम को सिर झुकाकर मानना पड़ता है। आन्तरिक प्रसन्नता बनाये रखनी होती है।
मानसिक सन्तुलन स्थिर रखना होता है।

(य) सुभाषचन्द्र बोस ने लोकमान्य तिलक को विश्व के महापुरुषों की प्रथम पंक्ति में स्थान मिलने की सिफारिश क्यों की है ?
उत्तर
सुभाषचन्द्र बोस ने सिफारिश की है कि लोकमान्य तिलक को विश्व के महापुरुषों की प्रथम पंक्ति में स्थान मिले क्योंकि लोकमान्य तिलक प्रतिकूल और शक्तिहारी वातावरण में भी ‘गीता-भाष्य’ जैसे महान दर्शन की रचना कर सके। उनमें प्रकाण्ड पाण्डित्य था, प्रबल इच्छाशक्ति थी। उनमें साधना की गहराई और सहनशीलता थी। वे बौद्धिक क्षमतावान एवं संघर्ष शक्ति से संयुक्त थे। उन्होंने बन्दीगृह के अन्धकारमय दिनों में अपनी मातृभूमि के लिए ‘गीता-भाष्य’ जैसे अतुलनीय ग्रन्थ की रचना भेंट स्वरूप प्रस्तुत की।

प्रश्न 2.
सही विकल्प चुनकर रिक्त स्थानों की पूर्ति कीजिए
(अ) लोकमान्य तिलक ने जेल में सुप्रसिद्ध ………. ग्रन्थ का प्रणयन किया था। (भारत की खोज/गीता भाष्य)
(ब) जेल में लोकमान्य तिलक अपना समय ………. बिताते थे। (किताबें पढ़कर/चित्र देखकर)
(स) सुभाषचन्द्र बोस ने अपने पत्र में माण्डले जेल को………..माना। (तीर्थस्थल/यातनास्थल)
उत्तर
(अ) गीताभाष्य
(ब) किताबें पढ़कर
(स) तीर्थस्थल।

भाषा अध्ययन

प्रश्न 1.
निम्नलिखित शब्दों को अपने वाक्यों में प्रयुक्त कीजिए___ अदम्य, प्रणयन, कृतित्व, सुदीर्घ, यन्त्रणा।
उत्तर
अदम्य-भारतीय स्वतन्त्रता के योद्धाओं में अदम्य साहस था।
प्रणयन-गीता भाष्य का प्रणयन लोकमान्य तिलक ने माण्डले सेन्ट्रल जेल में छ: वर्ष के बन्दी काल में किया।
कृतित्व-भारतीय मनीषियों को उनके कृतित्व के लिए आज भी स्मरण किया जाता है।
सुदीर्घ-भारतीय आजादी की लड़ाई सुदीर्घ काल तक चली।
यन्त्रणा-स्वतन्त्रता सैनिकों को बन्दीगृहों में विविध यन्त्रणाएँ दी गई।

प्रश्न 2. निम्नलिखित शब्दों में ‘दुर- उपसर्ग तथा तम’ प्रत्यय जोड़कर शब्द बनाइए.
(क) भाग्य, गम, गति, जन, गुण। (‘दुर’ उपसर्ग जोड़कर)
उत्तर
दुर्भाग्य, दुर्गम, दुर्गति, दुर्जन, दुर्गुण।

(ख) महान, अधिक, सरल, कठिन। (‘तम’ प्रत्यय जोड़कर)
उत्तर
महानतम, अधिकतम, सरलतम, कठिनतम।

प्रश्न 3.
इस पाठ में से इक प्रत्यय से बने शब्द छांटकर लिखिए।
उत्तर
शारीरिक, मानसिक, बौद्धिक, राजनैतिक, दार्शनिक।

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प्रश्न 4.
निम्नलिखित में से उपसर्ग और मूल शब्द छाँटकर लिखिए
सपूत, परिवेश, सशरीर, आदेश, अनुपस्थित, स्वदेश प्रकाण्ड, सुप्रसिद्ध।
उत्तर
MP Board Class 7th Hindi Bhasha Bharti Solutions Chapter 10 सुभाषचन्द्र बोस का पत्र 1
प्रश्न 5.
(क) निम्नलिखित शब्दों को पढ़िए और समझकर उनका विग्रह कीजिए
कर्मयोगी, चहारदीवारी, गीताभाष्य, शीतऋतु, धूलभरी, देशवासी. तीर्थस्थल, मन्दगति, युगनिर्माण, दशानन, दिन-रात।
उत्तर
कर्म का योगी, चहार से दीवार, गीता का भाष्य, शीत की ऋतु, धूल से भरी, देश के वासी, तीर्थ का स्थल, मन्द है जो गति, युग का निर्माण, दश हैं आनन जिसके, दिन और रात।

(ख) अपने प्रधानाध्यापक को शुल्क मुक्ति हेतु एक प्रार्थना-पत्र लिखिए।
उत्तर
‘प्रार्थना-पत्र’ अध्याय में देखिए।

सुभाषचन्द्र बोस का पत्र परीक्षोपयोगी गद्यांशों की व्याख्या 

1. यह विश्व भगवान की कृति है, लेकिन जेलें मानवb के कृतित्व की निशानी हैं। उनकी अपनी एक अलग ही दुनिया है और सभ्य समाज ने जिन विचारों और संस्कारों को प्रतिबद्ध होकर स्वीकार किया है, वो जेलों में लागू नहीं होते। अपनी आत्मा के ह्रास के बिना बन्दी जीवन के प्रति अपने आपको अनुकूल बना पाना आसान काम नहीं है। इसके लिए हमें पिछली आदतें छोड़नी होती हैं और फिर भी स्वास्थ्य और स्फूर्ति बनाए रखनी होती है, सभी तरह के नियमों के आगे नत होना होता है और फिर भी आन्तरिक प्रफुल्लता अक्षुण्ण रखनी होती है।

सन्दर्भ-प्रस्तुत गद्यांश ‘सुभाष चन्द्र बोस का पत्र’ शीर्षक से अवतरित है। इसके लेखक नेताजी सुभाषचन्द्र बोस है।

प्रसंग-सुभाषचन्द्र बोस ने इस पत्र को एन. सी. केलकर के नाम उस समय लिखा, जब वे माण्डले सेन्ट्रल जेल, बर्मा में थे। यह पत्र उन्होंने दिनांक 20-08-1925 को लिखा था।

व्याख्या-यह संसार ईश्वर ने बनाया है। अत: यह मनुष्यों के अनुकूल ही है, परन्तु इस संसार में जेलों की रचना मनुष्य ने की है जो आदमी के द्वारा किए गये कर्मों की निशानी है। इन जेलों की दुनिया अलग ही प्रकार की होती है। मनुष्य ने सभ्यता | का विकास किया। उसके विचारों और संस्कारों को मजबूती से समाज ने स्वीकार किया और अपनी एक सभ्यता कायम की। इस सभ्यता के पीछे मानव द्वारा विचारित नियम और संस्कार होते हैं जिससे मनुष्य समाज सभ्य कहलाया।

परन्तु मनुष्य के इन विचारों और संस्कारों को जेल-जीवन और जेल-जगत् पर लागू नहीं किया जा सकता। वहाँ अपनी आत्मा मर जाती है। इसलिए मनुष्य बन्दी जीवन के प्रति स्वयं को ढाल पाने में कठिनता अनुभव करता है। जेल का जीवन बहुत ही कठिन होता है। मनुष्य को जेल जीवन की आदतें ढालनी पड़ती हैं। पुरानी आदतों को त्यागना होता है। सब कुछ विपरीत होने पर भी जेल के बन्दियों को अपना स्वास्थ्य ठीक रखना पड़ता है तथा शरीर में तरो-ताजगी बनाये रखना अनिवार्य होता है। जेल के सभी नियमों का पालन करना पड़ता है। उन नियमों को सिर झुकाकर मानना होता है और कार्य करने के लिए विवश होना पड़ता है। हदय के अन्दर प्रसन्नता सदा बनाये रखनी पड़ती है।

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2. दासवृत्ति ठुकरानी होती है और फिर भी मानसिक सन्तुलन अडिग बनाये रखना होता है। केवल लोकमान्य जैसा दार्शनिक ही, जिसे अदम्य इच्छाशक्ति का वरदान मिला था, उस बन्दी जीवन के शक्ति हननकारी प्रभावों से बच सकता था, उस यन्त्रणा और दासता के बीच मानसिक सन्तुलन बना रख सकता था और ‘गीता-भाष्य’ जैसे विशाल एवं युगनिर्माणकारी ग्रन्थ का प्रणयन कर सकता था।

सन्दर्भ-पूर्व की तरह।

प्रसंग-सुभाषचन्द्र बोस ने बन्दी जीवन के प्रभावों का
वर्णन किया है जिसके कारण शारीरिक शक्ति एवं मानसिक सन्तुलन समाप्त सा होने लगता है।
व्याख्या-जेल के जीवन का प्रभाव ऐसा होता है, कि कारागार में रहने वाले व्यक्ति के मन मस्तिष्क से दासता की भावना तो विलीन होती ही है। उसके साथ ही मानसिक सन्तुलन स्थिर बनाये रखना होता है। बन्दी विचारशील बना रहता है। लोकमान्य तिलक भी इसी माण्डले सेन्ट्रल जेल में बन्दी रहे। उन्होंने यहाँ छः वर्ष का कठोर कारावास सहा। वे उच्चकोटि के दर्शनशास्त्री थे।

उनके अन्दर अदमनीय दृढ़ इच्छा शक्ति थी जिसे उन्होंने ईश्वर से वरदान के रूप में प्राप्त किया था। उनके ऊपर जेल जीवन का प्रभाव नहीं पड़ सकता था यद्यपि जेल का जीवन मनुष्य के अन्दर की शक्तियों को प्रभावित करता है। लोकमान्य तिलक जैसा पक्के इरादे वाला मनुष्य जेल के कष्टों और दासता के बीच रहकर भी अपने मानसिक सन्तुलन को बनाये रख सकता था और उन्होंने अपनी चिन्तन शक्ति को स्थिरता दी; तभी तो वे ‘गीता-भाष्य’ जैसे महान ग्रन्थ की रचना कर सके। यह ग्रन्थ नये युग का निर्माण करने वाला ग्रन्थ है।

3. अगर किसी को प्रत्यक्ष अनुभव पाना है कि इतने प्रतिकूल, शक्तिहारी और दुर्बल बना लेने वाले वातावरण में लोकमान्य के ‘गीता-भाष्य’ जैसे प्रकाण्ड पाण्डित्यपूर्ण एवं महान ग्रन्थ की रचना करने के लिए कितनी प्रबल इच्छाशक्ति, साधना की गहराई एवं सहनशीलता अपेक्षित है, तो जेल में आकर रहना चाहिए।

सन्दर्भ-पूर्व की तरह।

प्रसंग- नेताजी सुभाषचन्द्र बोस बताते हैं कि अपनी दृढ़ इच्छाशक्ति एवं विशिष्ट सहनशीलता के गुण के कारण ही लोकमान्य तिलक माण्डले की सेन्ट्रल जेल में गीता भाष्य की रचना कर सके।

व्याख्या-सुभाषचन्द्र बोस कहते हैं कि जेल का वातावरण अपने अनुकूल नहीं होता, परन्तु मनुष्य अपने अन्दर पक्की इच्छाशक्ति, साधना की गहराई तथा सहनशीलता पैदा कर लेता है। लोकमान्य ने अपने अन्दर इन्हीं गुणों को पैदा कर लिया था और गीता का भाष्य लिखा जो उनकी विद्वता पाण्डित्य को दर्शाता है। तिलक के ऊपर भी जेल के वातावरण का प्रभाव पड़ा। इससे मनुष्य में जीवन शक्ति कमजोर पड़ती है। शरीर दुर्बल हो जाता है। माण्डले की सेन्ट्रल जेल में रहते हुए तिलक ने अपनी आत्मिक शक्ति पैदा कर ली थी, जिससे वे गीता के भाष्य की रचना कर सके। यह रचना अद्वितीय है।

सुभाषचन्द्र बोस का पत्र शब्दकोश

दिलचस्पी = रुचि, शौक; निष्कासन हटाना, निकालना; यन्त्रणा = पीड़ा, यातना, अतिकष्ट; ह्रास = गिरावट; स्नेहभाजन = प्रेम पात्र। भाष्यकार = टीकाकार; प्रकाण्ड – उत्तम, सर्वश्रेष्ठ; बलात् = बलपूर्वक; कारावास = बन्दी होना, जेल की सजा; प्रफल्लता = प्रसन्नता; सुदीर्घ = बहुत लम्बा; दण्डसंहिता = सजा देने के नियमों की पुस्तक प्रणयन = रचना; प्रेरणा = उत्साह, किसी के प्रति उत्साहित करने की क्रिया; यातना = कष्ट, पीड़ा; अक्षुण्ण = अखण्डित हननकारीचोट पहुँचाने वाला, अडिग = न डिगने वाला, स्थिर, पक्का, दृढ़ शरीरान्त= मृत्यु: मन्दाग्नि = भूख कम लगने का रोग प्रतिबद्ध = बँधा हुआ, किसी कार्य के लिए संकल्पित; अदम्य – जिसका दमन न किया जा सके; अपेक्षित = जिसकी इच्छा की गई हो।

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MP Board Class 7th Sanskrit Solutions विविधप्रश्नावलिः 2

MP Board Class 7th Sanskrit Solutions Surbhi विविधप्रश्नावलिः 2

प्रश्न 1.
एक शब्द में उत्तर लिखो
(क) पक्षिराजः कः अस्ति? [पक्षियों का राजा कौन है?]
उत्तर:
गरुड़ः

(ख) स्वप्रकाश रहिताः के? [अपने प्रकाश से रहित कौन है?]
उत्तर:
ग्रहाः

(ग) कदा चन्द्रस्य दर्शनम् न भवति? [चन्द्रमा कब दिखाई नहीं देता है?]
उत्तर:
अमावस्यायां रात्रौ

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(घ) ग्रामः कस्मात् विरहितः? [गाँव किस से रहित था?]
उत्तर:
औद्योगिक प्रदूषणात्

(ङ) कदा संस्कृतदिवसः आयोज्यते? [संस्कृतदिवस का आयोजन कब होता है?]
उत्तर:
श्रावणी पूर्णिमायाम्

(च) लोकमान्यतिलकः कः आसीत्? [लोकमान्य तिलक कौन थे?]
उत्तर:
महान् देशभक्तः

(छ) कस्य सहायतां प्रभुः करोति? [प्रभु किसकी सहायता करते हैं?]
उत्तर:
श्रमशीलस्य

(ज) संस्कृतसप्ताहः कदा भवति? [संस्कृत सप्ताह कब होता है?]
उत्तर:
श्रावणमासस्य द्वादशीतः भाद्रपदमासस्य तृतीयापर्यन्तं

(झ) कति वेदाः सन्ति? [वेद कितने हैं?]
उत्तर:
चत्वारः

(ञ) सिक्खानाम् दशमः गुरुः कः आसीत्? [सिक्खों के दसवें गुरु कौन थे?]
उत्तर:
गुरुगोविन्दसिंहः

(ट) गुरुगोविन्दसिंहस्य मातुः नाम किम्? [गुरुगोविन्दसिंह की माता का नाम क्या था?]
उत्तर:
‘गुजरी’

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(ठ) पाणिनेः पितुः नाम किम्? [पाणिनि के पिता का नाम क्या है?]
उत्तर:
पाणी।

प्रश्न 2.
एक वाक्य में उत्तर लिखो
(क) आकाशपिण्डेषु के-के दृश्यन्ते? [आकाशपिण्डों में क्या-क्या दीखते हैं?]
उत्तर:
आकाशपिण्डेषु तारागणा: महाः उपग्रहाः च दृश्यन्ते। [आकाशपिण्डों में तारागण, ग्रह और उपग्रह दिखाई देते हैं।]

(ख) सूर्यं परितः के ग्रहाः परिभ्रमन्ति? [सूर्य के चारों ओर कौन-से ग्रह घूमते हैं?]
उत्तर:
सूर्यम् परितः क्रमेण बुधः, शुक्रः, पृथिवी, मङ्गल, गुरुः, शनिः, अरुणः, वरुणः, यम इति ग्रहाः परिभ्रमन्ति। [सूर्य के चारों ओर क्रमशः बुध, शुक्र, पृथ्वी, मंगल, गुरु, शनि, अरुण, वरुण, यम इत्यादि ग्रह घूमते हैं।]

(ग) संस्कृतभाषायाः पञ्चकवीनां नामानि लिखत? [संस्कृतभाषा के पाँच कवियों के नाम लिखो।]
उत्तर:
संस्कृतभाषायाः पञ्चकवीनां नामानि-कालिदास भारविमाघदण्डि भर्तृहरिः सन्ति। [संस्कृत भाषा के पाँच कवियों के नाम हैं-कालिदास, भारवि, माघ, दण्डि तथा भर्तृहरि।]

(घ) तिलकः किम् अघोषयत्? [तिलक ने क्या घोषणा की?]
उत्तर:
तिलकः अघोषयत् “स्वराज्य मम जन्मसिद्धः अधिकारः अस्ति।” [तिलक ने घोषणा की “स्वराज्य मेरा जन्मसिद्ध अधिकार है।”]

(ङ) तिलकेन कः ग्रन्थः रचितः? [तिलक ने कौन से ग्रंथ की रचना की?]
उत्तर:
तिलकेन ‘गीतारहस्य’ नामक ग्रन्थम् अरचयत्। [तिलक ने ‘गीता रहस्य’ नामक ग्रन्थ की रचना की।]

(च) सिक्खानाम् पञ्च बाह्यचिह्नानि कानि? [सिक्खों के पाँच बाहरी चिह्न कौन से हैं?]
उत्तर:
सिक्खानां पञ्च बाह्य चिह्नानि-केशबन्धनं, कङ्कतिका अस्थापनं, कङ्कणधारणं, कट्यां वस्त्रधारणं, सर्वदा खड्गंधारणम् इति।
[सिक्खों के पाँच बाहरी चिह्न हैं-केशबन्धन (पगड़ी), कंघी रखना, कड़ा धारण करना, कमर में फेंटा बांधना, सदा तलवार धारण करते रहना।]

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(छ) गुरुगोविन्दसिंहस्य जननं कदा अभवत्? [गुरुगोविन्दसिंह का जन्म कब हुआ था?]
उत्तर:
गुरुगोविन्दस्य जननं १६६६ तमे वर्षे कार्तिक शुक्ल सप्तम्यां पटना नगरे अभवत्। [गुरुगोविन्द का जन्म सन् १६६६ ई. में कार्तिक महीने की शुक्लपक्ष की सप्तमी को पटना नगर में हुआ था।

(ज) त्रय मुनयः के? [तीन मुनि कौन से हैं?]
उत्तर:
त्रयः मुनयः सन्ति-प्रथमः सूत्रकारः पाणिनिः, द्वितीयः वाक्यकार: वररुचिः, तृतीयः च भाष्यकार: पतञ्जलि। [तीन मुनि हैं- पहले सूत्रकार पाणिनि, दूसरे वाक्यकार वररुचि और तीसरे भाष्यकार पतञ्जलि।]

प्रश्न 3.
प्रश्न निर्माण करो
(क) उपग्रहाः ग्रहं परितः परिभ्रमन्ति।
उत्तर:
उपग्रहाः कम् परितः परिभ्रमन्ति?

(ख) पौर्णिमायां रात्रौ पूर्णचन्द्रस्य दर्शनं भवति।
उत्तर:
कस्याम् रात्रौ चन्द्रस्य दर्शनं भवति?

(ग) कर्मशीलस्य सहायतां प्रभुः करोति।
उत्तर:
कस्य सहायतां प्रभुः करोति?

(घ) आकाशगङ्गायां तारागणानां अनेके समूहाः वर्तन्ते।
उत्तर:
आकाशगङ्गायां केषाम् अनेके समूहाः वर्तन्ते?

(ङ) लोकमान्यतिलकः महान् देशभक्तः आसीत्।
उत्तर:
कः महान् देशभक्तः अस्ति?

(च) भारते पञ्चदश संस्कृत विश्वविद्यालयाः सन्ति।
उत्तर:
भारते कति संस्कृत विश्वविद्यालयाः सन्ति?

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प्रश्न 4.
रिक्त स्थानों को भरो
(क) वाहे …………. की फतह।
(ख) तिलकः ………….. तिलकम् इव भाति।
(ग) मीनः सुप्तेऽपि ………….. न निमीलयति।
(घ) चन्द्रः …………. परिक्रमति।
(ङ) गणेशोत्सवः …………. प्रारब्धः।
(च) व्याकरणनियमांना रचयिता …………..
उत्तर:
(क) गुरुजी
(ख) भारतभालस्य
(ग) नेत्रे
(घ) पृथिवीं
(ङ) शिवराजोत्सवः च
(च) पाणिनिः।

प्रश्न 5.
अधोनिर्दिष्ट अव्ययों से वाक्य बनाओ-
नूनम्, एव, अपि, इति, श्वः, शनैः-शनैः।
उत्तर:

  1. श्वः अहम् विद्यालयम् गमिष्यामि।
  2. सः अस्मिन् एव ग्रामे वसति।
  3. मोहनः इति नामकः छात्रः क्रीडाम् खेलति।
  4. अत्र आगत्य कार्यम् कुरु।
  5. ग्रामात् बहिः नदी बहति।
  6. यदि सः आगमिष्यति तर्हि अहम् तस्य सहायताम् करिष्यामि।
  7. सः नूनं नगरम् गमिष्यति।
  8. प्रातः भ्रमणार्थम् अहम् गच्छामि।
  9. अहम् तस्य अपि सहायताम् करिष्यामि।

शनैः-शनैः = वृद्धः सिंहःशनैः-शनैः मंचम् प्रति अगच्छत्।

प्रश्न 6.
सन्धि विच्छेद करो-
(क) तस्यादिः
(ख) निश्चयः
(ग) शिवराजोत्सवः
(घ) परमेश्वरः
(ङ) ममाप्यस्ति।
उत्तर:
(क) तस्य + आदिः
(ख) निः + चयः
(ग) शिवराज + उत्सवः
(घ) परम + ईश्वरः
(ङ) मम + अपि + अस्ति।

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प्रश्न 7.
लकार परिवर्तन करोलङ्लकार लट् लकार
MP Board Class 7th Sanskrit Solutions विविधप्रश्नावलिः 2 img 1
उत्तर:
लङ् लकार :
(ग) अखादत्
(ङ) अपिबत्
(ज) अकरोत्।

लट् लकार :
(क) कुर्वन्ति
(ख) पठन्ति
(घ) गच्छति
(च) कथयति
(छ) वसति
(झ) प्रविशति

प्रश्न 8.
उचित का मिलान करो
MP Board Class 7th Sanskrit Solutions विविधप्रश्नावलिः 2 img 2
उत्तर:
(क) → (6)
(ख) → (3)
(ग) → (2)
(घ) → (5)
(ङ) → (4)
(च) → (1)

प्रश्न 9.
विलोम शब्दों का मेल करो
MP Board Class 7th Sanskrit Solutions विविधप्रश्नावलिः 2 img 3
उत्तर:
(क) → (5)
(ख) → (1)
(ग) → (2)
(घ) → (3)
(ङ) → (4)

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प्रश्न 10.
पूर्ति करो
(क) …….. तिष्ठामि बक: न ……….. , दाता ………. न कृतिः ……….. यत्नः, मौनेन ………… मुनिः ………….. मूकः, सेव्यः ……….. कः………. नृपतिः ………… देवः।
(ख) सुप्तः ………. नेत्रे न निमीलयामि, जलस्य ………. नित्यं …….. , मम …….. स्वजातिजीवाः मान्याः! नामधेयं ……… ।
उत्तर:
(क) अहं पादेन, पङ्गु, अहं फलानां न, जीवामि न, न अस्मि, न।
(ख) अपि, मध्ये निवसामि, भोजनानि, मम, वदन्तु।

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MP Board Class 7th Hindi Bhasha Bharti Solutions Chapter 9 गौरैया

MP Board Class 7th Hindi Bhasha Bharti Solutions Chapter 9 गौरैया

MP Board Class 7th Hindi Bhasha Bharti Chapter 9 पाठ का अभ्यास

बोध प्रश्न

प्रश्न 1.
निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर लिखिए

(क) गौरैया की आँखों और परों की तुलना किससे की गई है ?
उत्तर
गौरैया की आँखों और परों की तुलना क्रमशः नीलम और सोने से की गई है।

(ख) गौरैया अपना घोंसला कैसे बनाती है ?
उत्तर
गौरैया अपना घोंसला तिनकों को चुन-चुनकर बनाती है।

(ग) गौरैया को हरियाली की रानी क्यों कहा गया है ?
उत्तर
गौरैया हरियाली की रानी है, क्योंकि वह हरे-भरे पौधों और हरी-भरी घास के तिनके एकत्र करती है और अपने लिए घोंसला बनाती है।

(घ) कवि अपनी बहन किसे बनाना चाहता है ?
उत्तर
कवि गौरैया को अपनी बहन बनाना चाहता है, क्योंकि वह उसके मिट्टी के रंग के आँगन में फुर्र-फुर्र उड़ती है,फुदकती है। उसका प्रत्येक अंग बिजली की भाँति चमकीला लगता है।

प्रश्न 2.
गौरैया कैसे आँगन में फुदक रही है ? (सही विकल्प चुनिए)

(क) साफ आँगन में
(ख) बड़े आँगन में
(ग) मटमैले आँगन में
(घ) हरे-भरे आँगन में।
उत्तर
(ग) मटमैले आँगन में।

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प्रश्न 3.
निम्नलिखित पंक्तियों का भावार्थ लिखिए

(क) मैंने अपना नीड़ बनाया, तिनके-तिनके चुन-चुन।
(ख) तू प्रति अंग-उमंग भरी-सी, पीती फिरती पानी।
(ग) सूक्ष्म वायवी लहरों पर, सन्तरण कर रही सर-सर।
उत्तर
(क) एक-एक तिनका चुन-चुनकर (बड़ी मेहनत करके) मैंने अपना घोंसला बनाया है।
(ख) हे गौरैया ! तेरा प्रत्येक अंग उत्साह से भरा हुआ | लगता है और फिर भी त पानी पीती फिरती है।
(ग) हवा के द्वारा ऊपर की ओर उठी हुई छोटी-छोटी लहरों | पर सरसराती गौरैया गतिशील है।

भाषा अध्ययन

प्रश्न 1.
इस कविता में आये ध्वन्यात्मक एवं पुनरुक्ति वाले शब्दों की सूची बनाइए।
उत्तर
चुन-चुन, तिनके-तिनके, अंग-अंग, फर-फर, चिऊँ-चिऊँ, फुला-फुला, सर-सर, मर-मर, हिला-हिला।

प्रश्न 2.
इस कविता में प्रयुक्त निम्नांकित विशेषण किस शब्द की विशेषता बता रहे हैं
मधुर, मटमैला, सुन्दर, वायवी, निर्दय।
उत्तर
MP Board Class 7th Hindi Bhasha Bharti Solutions Chapter 9 गौरैया 1

प्रश्न 3.
निम्नलिखित तालिका से समानता दर्शाने वाले शब्दों को कम से लिखिए
उत्तर
MP Board Class 7th Hindi Bhasha Bharti Solutions Chapter 9 गौरैया 2

  1. नीलम-सी नीली आँखें।
  2. सोने-सा सुनहरा रंग।
  3. सोने-से सुन्दर पर।
  4. चन्द्रमा-सा सुन्दर मुख।
  5. कमलकली-सी सुन्दर आँखें।
  6. चाँदी-से सफेद बाल।

प्रश्न 4.
निम्नलिखित शब्दों के दो-दो पर्यायवाची शब्द लिखिए।
बिजली, आँख, वायु, सोना।
उत्तर
बिजली = विद्युत, तड़ित।
आँख = नयन, नेत्र।
वायु = हवा, समीर।
सोना = स्वर्ण, कनक।

प्रश्न 5.
निम्नलिखित शब्दों के विलोम शब्द लिखिए
मधुर, सुन्दर, चंचल, सूक्ष्म।
उत्तर
मधुर = कदु
सुन्दर = कुरूप
चंचल = स्थिर
सूक्ष्म = विशाल।

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गौरैया सम्पूर्ण पद्यांशों की व्याख्या

1. मेरे मटमैले अंगना में,
फुदक रही गौरैया।
कच्ची मिट्टी की दीवारें,
घासपात का छाजन।
मैंने अपना नीड़ बनाया,
तिनके-तिनके चुन-चुन।
यहाँ कहाँ से तू आ बैठी,
हरियाली की रानी।
जी करता है तुझे घूम लूँ,
ले लूँ मधुर बलैया।
मेरे मटमैले अंगना में,
फुदक रही गौरैया।

शब्दार्थ-मटमैले = मिट्टी के रंग के गौरैया = एक छोटी चिड़िया जो प्रायः घरों के आस-पास रहती है; घासपात = घास और पत्तों का; छाजन = छप्पर;
नीड़ = घोंसला।

सन्दर्भ-प्रस्तुत पद्य पंक्तियाँ ‘गौरैया’ शीर्षक कविता से अवतरित हैं। इसके रचियता डॉ. शिवमंगल सिंह ‘सुमन’ हैं।

प्रसंग-कवि ने ‘गौरैया’ नामक छोटी-सी चिड़िया की मधुर क्रीड़ाओं का वर्णन किया है।

व्याख्या-मिट्टी के बने हुए मेरे आँगन में गौरैया फुदक रही है। कच्ची मिट्टी की दीवारों पर घास और पत्तों का छप्पर पड़ा हुआ है। उसमें मैंने अपना घोंसला एक-एक तिनका एकत्र कर-करके बनाया है। तू, हे हरियाली की रानी, यहाँ कहाँ से आकर बैठ गयी है। कवि कहता है कि मेरे मन में आता है कि मैं तुझे प्यार से चूम लूँ तथा तेरे ऊपर मधुर-मधुर बलैया ले लूँ। हे गौरैया, तू मेरे मटमैले आँगन में फुदक रही है।

2. नीलम की-सी नीली आँखें,
सोने से सुन्दर पर।
अंग-अंग में बिजली-सी भर,
फुदक रही तू फर-फर।
फूली नहीं समाती तू तो,
मुझे देख हैरानी।
आ जा तुझको बहन बना लूँ,
और बनूं मैं भैया।
मेरे मटमैले अंगना में,
फुदक रही गौरैया।

शब्दार्थ- पर – पंख फूली नहीं समाती = बहुत अधिक प्रसन्न हैरानी = अचम्भाः

सन्दर्भ – पूर्व की तरह।

प्रसंग-कवि गौरैया की सुन्दरता और उसकी चंचलता का वर्णन करता है।

व्याख्या-कवि कहता है कि इस गौरैया की आँखें नीलम मणि के समान नीली हैं। इसके पंख स्वर्ण के जैसे हैं। अपने अंग-अंग में यह बिजली के समान चपलता लिए हुए-फुर-फुरी करती हुई इधर से उधर फुदक रही है। इसकी चंचलता को देखकर मुझे अचम्भा हो रहा है, कि यह खुशी के मारे फूली नहीं समा रही है। हे गौरैया ! तू मेरे पास आ जा, मैं तुझे अपनी बहन बना लेना चाहता हूँ, साथ ही मैं तेरा भैया (भाई) बन जाने की कामना करता हूँ। यह गौरैया, मटमैले रंग के मेरे आँगन में इधर से उधर लगातार फुदक रही है।

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3. मटके की गरदन पर बैठी,
कभी अरगनी पर चल।
चहक रही तू चिऊँ-चिऊँ,
चिऊँ-चिऊं, फुला-फुला पर चंचल।
कहीं एक क्षण तो थिर होकर,
तू जा बैठ सलोनी।
कैसे तुझे पाल पाई होगी,
री तेरी मैया।
मेरे मटमैले अंगना में,
फुदक रही गौरैया।

शब्दार्थ-मटका = घड़ा; अरगनी = कपड़े आदि टाँगने के लिए रस्सी या लकड़ी; खूटी; पर = पंख; थिर = स्थिर होकर; सलोनी = सुन्दर, अच्छी;  पाल पाई होगी = पालन-पोषण किया होगा।

सन्दर्भ-पूर्व की तरह।

प्रसंग-कवि फुर्तीली गौरैया नामक चिड़िया की क्रियाओं का वर्णन करता है।

व्याख्या-कवि कहता है कि गौरैया कभी तो घड़े की गरदन पर उछलकर आकर बैठ जाती है तो दूसरे ही क्षण वह अरगनी (कपड़े आदि टाँगने की रस्सी) पर चली जाती है। वह चिऊँ-चिऊँ करती हुई लगातार चहकती फिरती है। वह चंचल बनकर अपने पंखों को फुलाकर इधर-उधर फुदकती फिरती है। हे सुन्दर सी गौरैया ! तू एक क्षण भरके लिए तो किसी एक स्थान पर स्थिर होकर बैठ जा। तेरी इस चंचलता को देखकर तो मुझे लगता है कि तेरी माँ ने तेरा पालन-पोषण किस तरह किया होगा। हे गौरैया ! तू मेरे मिट्टी के रंग वाले आँगन में फुदक रही है।

4. सूक्ष्म वायवी लहरों पर,
सन्तरण कर रही सर-सर।
हिला-हिला सिर मुझे बुलाते,
पत्ते कर-कर मर-मर।
तू प्रति अंग-उमंग भरी सी,
पीती फिरती पानी।
निर्दय हलकोरों से डगमग,
बहती मेरी नैया।
मेरे मटमैले अंगना में,
फुदक रही गौरैया।

शब्दार्थ-सूक्ष्म = छोटी-छोटी-सी; वायवी = हवा की; पर = ऊपर; सन्तरण = गति, गतिशीलता, नैरना; मर-मर = मर-मर की आवाज करते हुए; प्रति = प्रत्येक उमंग= उत्साह; हलकोरों = हिलोरें;
डगमग = डगमगाती हुई; नैया = नौका; निर्दय = कठोर हृदय।

सन्दर्भ-पूर्व की तरह।

प्रसंग-गौरैया के फुर्तीले क्रियाकलापों का वर्णन किया गया है।

व्याख्या-कवि कहता है कि हवा के द्वारा ऊपर को उठी हुई छोटी-छोटी लहरों पर सरसराती गौरैया गतिशील बनी हुई है। (हवा से) हिलते हुए उसके सिरों से मर-मर की ध्वनि करते पत्ते कवि को बुला रहे हैं। गौरैया के शरीर का प्रत्येक अंग, उमंग से (उत्साह) से भरा हुआ है और वह उठी हुई छोटी-छोटी लहरों के पानी को पीती फिरती है। कवि कहता है कि मेरे जीवन की नौका कठोर हृदय (संकटों-दुःखों) रूपी हिलोरों से इधर-उधर डगमगाती फिरती है। (इस तरह के मुझ जैसे व्यक्ति के) मटमैले (मिट्टी के रंग वाले) आँगन में गौरैया फुदकती फिरती है।

गौरैया शब्दकोश

गौरैया – ‘गौरैया’=एक चिड़िया जो घरों, छप्परों में अपने घोंसले बनाकर रहती है; नीड़ = घोंसला; सलोनी = सुन्दर, अच्छी; । फुदकती है। उसका प्रत्येक अंग बिजली की भाँति चमकीला लगता है।

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MP Board Class 7th Sanskrit Solutions विविधप्रश्नावलिः 1

MP Board Class 7th Sanskrit Solutions Surbhi विविधप्रश्नावलिः 1

प्रश्न 1.
प्रश्नों के उत्तर एक शब्द में लिखो
(क) महतां किम् धनम्? [महापुरुषों का धन क्या होता है?]
उत्तर:
मानः

(ख) अपाठितः बाल: कुत्र न शोभते? [अशिक्षित बालक कहाँ शोभा नहीं पाता है?]
उत्तर:
सभामध्ये

(ग) शारदामठं कस्यां दिशि अस्ति? [शारदामठ किस दिशा में है?
उत्तर:
पश्चिमदिशि

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(घ) द्वावपि अग्रजौ कुतः गृहं प्रत्यागच्छताम्? [दोनों बड़े भाई कहाँ से घर को लौट आये?]
उत्तर:
इन्दौरनगरात्

(ङ) जगद्गुरुः कः आसीत्? [जगद्गुरु कौन थे?
उत्तर:
शङ्कराचार्य

(च) सप्ताहे कति दिनानि भवन्ति? [सप्ताह में कितने दिन होते हैं?]
उत्तर:
सप्तदिनानि

(छ) सिंहः कूपस्य जले किम् अपश्यत्? [सिंह ने कुएँ के जल में क्या देखा?]
उत्तर:
स्वप्रतिबिम्बम्

(ज) प्रयत्नादयोग्याः कीदृशाः भवन्ति? [प्रयत्न से अयोग्य कैसे हो जाते हैं?]
उत्तर:
योग्याः।

प्रश्न 2.
एक वाक्य में उत्तर लिखो
(क) के मानम् इच्छन्ति? [कौन सम्मान चाहते हैं?]
उत्तर:
उत्तमजना: मानम् इच्छन्ति। [उत्तम श्रेणी के व्यक्ति सम्मान चाहते हैं।।]

(ख) विद्यार्थी किं न प्राप्नोति? [विद्यार्थी क्या नहीं प्राप्त करते हैं?]
उत्तर:
विद्यार्थी सुखम् न प्राप्नोति। [विद्यार्थी को सुख प्राप्त नहीं होता।]

(ग) कः कस्य एकतायाः मूलाधारः? [कौन किसकी एकता का मूल आधार है?]
उत्तर:
धर्मः भारतस्य एकतायाः मूलाधारः। [धर्म भारत की एकता का मूल आधार है।]

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(घ) आञ्चलिकविज्ञानकेन्द्रं कुत्र अस्ति? [आञ्चलिक विज्ञान केन्द्र कहाँ है?]
उत्तर:
आञ्चलिक विज्ञान केन्द्रं भोपालनगरे अस्ति।

(ङ) कर्मवती के रक्षासूत्रं प्रेषितवती? [कर्मवती ने किसके लिए रक्षासूत्र भेजा?]
उत्तर:
कर्मवती हुमायूँ नामाख्यं मुगलशासकं रक्षासूत्रं प्रेषितवती। [कर्मवती ने हुमायूँ नामक मुगलशासक के लिए राखी भेजी थी।]

(च) शङ्कराचार्यस्य चत्वारः शिष्याः के? [शंकराचार्य के चार शिष्य कौन थे?]
उत्तर:
शङ्कराचार्यस्य प्रथम शिष्यः सुरेश्वराचार्यः, द्वितीयः शिष्य हस्तामलकः, तृतीय शिष्यः त्रोटकाचार्यः, चतुर्थः शिष्यः पद्मपादः इति।
[शंकराचार्य के प्रथम शिष्य सुरेश्वराचार्य, द्वितीय शिष्य हस्तामलक, तीसरे शिष्य त्रोटकाचार्य और चौथे शिष्य पद्मपाद थे।]

(छ) चन्द्रः कदा पूर्णतां प्राप्नोति? [चन्द्रमा पूर्णता को कब प्राप्त करता है?]
उत्तर:
चन्द्रः पूर्णिमायां पूर्णतां प्राप्नोति।

(ज) अस्माभिः कः विधेयः? [हमें क्या करना चाहिए?]
उत्तर:
अस्माभिः पुनः पुनः प्रयत्नः विधेयः।

प्रश्न 3.
कोष्ठक से उचित शब्दों को चुनकर रिक्त स्थानों को पूरा करो
(क) विद्यार्थिनः कुतः ………….। (दुःखम्/सुखम्)
(ख) वृश्चिकस्य विषं ………….। (दन्ते/पुच्छे)
(ग) ज्योतिर्मठं ……….. दिशायाम् अस्ति।(उत्तर दक्षिण)
(घ) भोपालस्य सरोवरे जनाः ………….. कुर्वन्ति। (नौकाविहारं/भ्रमणं)
(ङ) सर्वे तूष्णी …………। (भवतु/भवन्तु)
(च) वर्षागीतानि गायन्ति …………..। (गायकः/ गायकाः)
(छ) शुक्लपक्षे ………… तिथिः भवति। (अमावस्या/पूर्णिमा)
उत्तर:
(क) सुखम्
(ख) पुच्छे
(ग) उत्तर
(घ) नौकाविहारम्
(ङ) भवन्तु
(च) गायकाः
(छ) पूर्णिमा।

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प्रश्न 4.
अधोलिखित शब्दों के विलोम लिखो
(क) गुणः
(ख) धैर्यम्
(ग) सत्यम्
(घ) केतुम्
(ङ) कठोरः
(च) विज्ञः।
उत्तर:
(क) दुर्गुणः
(ख) अधैर्यम्
(ग) अनृतम्
(घ) विक्रेतुम्
(ङ) मृदुः
(च) अविज्ञः।

प्रश्न 5.
शब्दों के समानार्थक शब्द लिखो-
(क) माता
(ख) वनम्
(ग) मनोहरम्
(घ) परिश्रमः।
उत्तर:
(क) जननी
(ख) अरण्यम्
(ग) आकर्षकम्
(घ) प्रयत्नः।

प्रश्न 6.
सन्धि विच्छेद करो-
(क) विद्यैव
(ख) परोपकारः
(ग) महौषधिः
(घ) महेशः
(ङ) ज्येष्ठाषाढयोः।
उत्तर:
(क) विद्या + एव
(ख) पर + उपकारः
(ग) महा + औषधिः
(घ) महा + ईशः
(ङ) ज्येष्ठ + आषाढयोः।

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प्रश्न 7.
सन्धि करो-
(क) द्वौ + अपि
(ख) विद्या + आलयः
(ग) नृत्यन्ति + अपि
(घ) सत् + चित्।
उत्तर:
(क) द्वावपि
(ख) विद्यालयः
(ग) नृत्यन्त्यपि
(घ) सच्चित्।

प्रश्न 8.
अर्थ के अनुसार जोड़ो
MP Board Class 7th Sanskrit Solutions विविधप्रश्नावलिः 1 img 1
उत्तर:
(क) → (2)
(ख) → (1)
(ग) → (4)
(घ) → (3)

प्रश्न 9.
धातु रूपों के सामने धातु, लकार, पुरुष और वचन लिखो
(क) आसीत्
(ख) करिष्यामः
(ग) अकुर्वन्
(घ) भवति
(ङ) लभन्ते
(च) नृत्यतः।
उत्तर:
(क) अस्-अन्य पुरुष-लङ्-एकवचन।
(ख) कृ-उत्तम पुरुष-लुट्-बहुवचन।
(ग) कृ-अन्य पुरुष-लङ्-बहुवचन।
(घ) भू-अन्य पुरुष-लट्-एकवचन।
(ङ) लभ्-अन्य पुरुष-लट्-बहुवचन।
(च) नृत्-अन्य पुरुष-लट्-द्विवचन।

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प्रश्न 10.
शुद्ध शब्द लिखो
(क) विशेषः-विषेशः
(ख) अत्याधिकम्-अत्यधिकम्
(ग) रवीन्द्रः-रविन्द्रः
(घ) उपर्युक्तः-उपरोक्तः
(ङ) कालिदासः-कालीदासः।
उत्तर:
(क) विशेषः
(ख) अत्यधिकम्
(ग) रवीन्द्रः
(घ) उपर्युक्तः
(ङ) कालिदासः।

प्रश्न 11.
श्लोक की पूर्ति करो
(1) प्रयत्नेन ………. समुद्रं ………. , प्रयत्नेन वीराः ………… लङ्घयन्ति, …………. विज्ञाः वियति ………… , प्रयत्नः ………. , ……….. विधेयः।
(2) सुखार्थी चेत् ……….. त्यजेत्, विद्यार्थी ……….. सुखं ………. , सुखार्थिनः विद्या ………… , विद्यार्थिनः ……….. कुतः।
उत्तर:
(1) धीरा, तरन्ति, गिरीन्, प्रयत्नेन, उत्पतन्ति, विधेयः, प्रयत्नः।
(2) विद्या, चेत्, त्यजेत्, त्यजेत्, सुखम्।

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MP Board Class 7th Sanskrit Solutions Chapter 19 देशहिताय

MP Board Class 7th Sanskrit Solutions Surbhi Chapter 19 देशहिताय

MP Board Class 7th Sanskrit Chapter 19 अभ्यासः

प्रश्न 1.
एक शब्द में उत्तर लिखो
(क) सिद्धार्थः कस्यां कक्षायां पठति? [सिद्धार्थ किस कक्षा में पढ़ता है?]
उत्तर:
‘सप्तम कक्षायां’

(ख) देशः कस्य तुल्यः अस्ति? [देश किसके समान है?]
उत्तर:
मातृतुल्यः

(ग) “शन्नोवरुणः’ इति कस्याः ध्येयवाक्यम् अस्ति? [‘शन्नो वरुण’ किसका ध्येय वाक्य है?]
उत्तर:
जलसेनायाः

(घ) देशसेवायाः सर्वेषां मार्गाणाम् उद्देश्यं किम्? [देशसेवा के सभी मार्गों का क्या उद्देश्य है?]
उत्तर:
‘देशहितम्’

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(ङ) सिद्धार्थस्य मित्रं कः? [सिद्धार्थ का मित्र कौन है?]
उत्तर:
सुधीशः।

प्रश्न 2.
एक वाक्य में उत्तर लिखो
(क) बालचरः इत्युक्ते किं ज्ञायते? [बालचर कहे जाने से क्या प्रतीत होता है?]
उत्तर:
‘बालचरः’ इति बालानां एका सेवासंस्था अस्ति। [‘बालचर’ नामक बालकों की एक सेवा संस्था है।]

(ख) राष्ट्रियछात्रसेनायाः’ (एन.सी.सी.) ध्येयवाक्यं किम्? [राष्ट्रीय छात्र सेना का ध्येय वाक्य क्या है?]
उत्तर:
राष्ट्रियछात्रसेनायाः (एन.सी.सी.) ध्येयवाक्यं ‘अहं न भवान्’ इति। [राष्ट्रीय छात्र सेना का ध्येय वाक्य “मैं नहीं, आप” है।]

(ग) सेनायाः त्रिविधप्रकाराः के सन्ति? [सेना के तीन भेद कौन से हैं?]
उत्तर:
सेनायाः त्रिविधप्रकाराः सन्ति-जल सेना, वायु सेना, स्थल सेना च। [सेना के तीन भेद हैं-जल सेना, वायु सेना और स्थल सेना।]

(घ) बालचरस्य प्रथमा प्रतिज्ञा का अस्ति? [बालचर की पहली प्रतिज्ञा क्या है?]
उत्तर:
बालचरस्य प्रथमा प्रतिज्ञा अस्ति-‘ईश्वरं स्वदेशं प्रति च कर्त्तव्य पालनं’। [बालचर की पहली प्रतिज्ञा है-ईश्वर और अपने देश के प्रति कर्त्तव्य का पालन करना।]

(ङ) छात्रजीवने देशसेवायाः मार्गों को? [छात्र जीवन में देश सेवा के कौन से दो मार्ग हैं?]
उत्तर:
छात्रजीवने देश सेवायाः मार्गौ–’राष्ट्रीय छात्र सेना’, ‘राष्ट्रीय सेवायोजना’ च। [छात्र जीवन में देशसेवा के दो मार्ग (उपाय) हैं- ‘राष्ट्रीय छात्र सेना’ तथा ‘राष्ट्रीय सेवा योजना’।]

प्रश्न 3.
रेखांकित शब्द के आधार पर प्रश्न बनाओ
(क) ‘सिद्धार्थ:’ सप्तम्यां कक्षायां पठति।
(ख) गणवेशधारिणः वयं बालचराः स्मः।
(ग) “सर्वेषां सहायता” इति द्वितीया प्रतिज्ञा।
(घ) जलसेना जलमार्गात् देशसुरक्षां करोति।
(ङ) बालचरः एकं ग्रामं जनसेवायै गच्छति।
उत्तर:
(क) कः सप्तम्यां कक्षायां पठति?
(ख) गणवेशधारिणः वयं के स्मः?
(ग) ‘सर्वेषां का’ इति द्वितीया प्रतिज्ञा?
(घ) जलसेना कस्मात् देश सुरक्षां करोति?
(ङ) बालचरः एक ग्रामं कस्याथै गच्छति?

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प्रश्न 4.
मिलान करो-
MP Board Class 7th Sanskrit Solutions Chapter 19 देशहिताय img 1
उत्तर:
(क) → (2)
(ख) → (3)
(ग) → (1)
(घ) → (4)

प्रश्न 5.
कोष्ठक से चुनकर वाक्य बनाओ-
MP Board Class 7th Sanskrit Solutions Chapter 19 देशहिताय img 2
उत्तर:
(क) अहम् लिखामि।
(ख) अहम् गच्छामि।
(ग) अहम् करोमि।
(घ) अहम् प्रेरयामि।
(ङ) भवान् पठति।
(च) भवान् गच्छति।
(छ) भवान् प्रेरयति।
(ज) भवान् रक्षति।
(झ) वयम् अनुपालयामः।
(ब) वयम् कुर्मः।
(ट) वयम् विचरामः।
(ठ) वयम् गच्छामः।
(ड) वयम् भवामः।
(ढ) अहम् शृणोमि।

प्रश्न 6.
उदाहरण के अनुसार रूप लिखो
धातुएँ :
लिख्, दृश् (पश्य), वद्, क्रीड, उपविश।
लकार :
लट्, लोट् (सभी पुरुष व सभी वचनों में)
उत्तर:
लट् लकार (वर्तमान में)
MP Board Class 7th Sanskrit Solutions Chapter 19 देशहिताय img 3

लोट् लकार (आज्ञायां)
MP Board Class 7th Sanskrit Solutions Chapter 19 देशहिताय img 4

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प्रश्न 7.
कोष्ठक में दिये गये शब्दों से रिक्त स्थानों को पूरा करो
(कक्षायां, ग्रामम्, सेवासंस्था, मातृतुल्यः, सेना, बालचराः, के मार्गाः, ताः प्रतिज्ञाः, मार्गाभ्याम्)
(क) कस्यां ………।
(ख) एकं ……….।
(ग) एका ……….।
(घ) गणवेशधारिणः ………।
(ङ) काः प्रतिज्ञाः ……….।
(च) देशः ……….।
(छ) एताभ्यां ………।
(ज) एषा ……..।
उत्तर:
(क) कक्षायां
(ख) ग्रामम्
(ग) सेवासंस्था
(घ) बालचरा
(ङ) ताः प्रतिज्ञाः
(च) मातृतुल्यः
(छ) मार्गाभ्याम्
(ज) सेना।

देशहिताय हिन्दी अनुवाद

सुधीश: :
मित्र सिद्धार्थ! भवान् कस्यां कक्षायां पठति?

सिद्धार्थः :
अहं सप्तमकक्षायां पठामि। सुधीशः-एतद् वेशं धृत्वा भवान् कुत्र गच्छति?

सिद्धार्थ :
मित्र! पश्यतु मम गणवेशम्। अहं बालचरः। अतः जनसेवायै एक ग्रामं गच्छामि।

सुधीश: :
‘बालचरः’ इत्युक्ते किं ज्ञायते?

सिद्धार्थः :
बालचरः इति बालानां एका सेवासंस्था अस्ति। तस्याः सदस्यः भूत्वा वयं देशसेवां कर्तुं समर्थाः भवामः।

अनुवाद :
सुधीश :
हे मित्र सिद्धार्थ! आप किस कक्षा में पढ़ते हो?

सिद्धार्थ :
मैं सातवीं कक्षा में पढ़ता हूँ। सुधीश-यह वेश धारण करके आप कहाँ जा रहे हो?

सिद्धार्थ :
मित्र! मेरे गणवेश को देखो। मैं बालचर हैं। इसलिए मनुष्यों की सेवा के लिए एक गाँव को जा रहा हूँ।

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सुधीश :
‘बालचर’ इसके कहने से क्या ज्ञात होता है?

सिद्धार्थ :
‘बालचर’ नामक बालकों की एक सेवा संस्था है। उसके सदस्य बनकर हम देश सेवा करने में समर्थ होते हैं।

सुधीश: :
बालचरो भूत्वा भवान् किं किं करोति?

सिद्धार्थः :
गणवेशधारिणः वयं बालचराः सर्वत्र विचरामः। वयं देवालयेषु मेलापकेषु हट्टेषु जनसमूहेषु सामाजिकार्यक्रमेषु भूकम्पादि आपात्कालेषु च उत्साहेन जनानां साहाय्यं कुर्मः। प्रतिज्ञाः अपि अनुपालयामः।

सुधीश: :
काः ताः प्रतिज्ञाः?

सिद्धार्थः :
प्रथमा तु ‘ईश्वरं स्वदेशं प्रति च कर्त्तव्यपालनं’, द्वितीया तावत् ‘सर्वेषां सहायता’ तृतीया प्रतिज्ञा ‘संस्थायाः अनुशासनस्य पालनम्’ इति।

अनुवाद :
सुधीश :
बालचर होकर आप क्या-क्या करते हो?

सिद्धार्थ :
गणवेश धारण किये हुए हम सभी बालचर सर्वत्र घूमते हैं। हम सब मन्दिरों में, मेलों में, हाटों में (पैठ में), मनुष्यों की भीड़ में, सामाजिक कार्यक्रमों में और भूकम्प आदि आपातकाल में उत्साहपूर्वक मनुष्यों की सहायता करते हैं। प्रतिज्ञा का भी पालन करते हैं।

सुधीश :
वह कौन सी प्रतिज्ञा है?

सिद्धार्थ :
पहली (प्रतिज्ञा है) ‘ईश्वर और अपने देश के प्रति कर्त्तव्य का पालन’, दूसरी (प्रतिज्ञा है) ‘सबकी सहायता करना’, तीसरी (प्रतिज्ञा है) ‘संस्था के अनुशासन का पालन करना।’

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सुधीशः :
भवन्तं सेवायै कः प्रेरयति? सिद्धार्थः-देशस्तु मातृतुल्यः। मातृसेवायै सर्वे समानयोग्याः। आत्मप्रेरणया एव देशसेवां कुर्मः।

सुधीशः :
कथमहं देशसेवां कर्तुं शक्नोमि? के ते मार्गाः?

सिद्धार्थ: :
देशसेवायाः बहवः मार्गाः सन्ति। छात्रजीवने ‘राष्ट्रियछात्रसेना (एन.सी.सी.)’ इति। ‘राष्ट्रियसेवायोजना (एन.एस.एस.)’ इति देशसेवामार्गौ। ‘एकता अनुशासनञ्च’ राष्ट्रियछात्रसेनायाः ध्येयवाक्यम् एवञ्च ‘अहं न भवान्’ इति राष्ट्रियसेवायोजनायाः ध्येयवाक्यमस्ति। एताभ्यां मार्गाभ्यां वयं व्यक्तित्वविकासेन सह समाजसेवां देशसेवां च कर्तुं शक्नुमः।

अनुवाद :
सुधीश-आपको सेवा करने के लिए कौन प्रेरणा देता है?

सिद्धार्थ :
देश तो माता के समान है। माता की सेवा के लिए सभी समान रूप से योग्य हैं (सक्षम हैं)। आत्मा से प्राप्त प्रेरणा से ही देश की सेवा करते हैं।

सुधीश :
मैं किस तरह देश सेवा कर सकता हूँ? वे कौन से उपाय हैं?

सिद्धार्थ :
देश सेवा के बहुत से योग्य उपाय हैं। विद्यार्थी जीवन में “राष्ट्रीय छात्र सेना (एन. सी. सी.)” होती हैं। ‘राष्ट्रीय सेवायोजना’ (एन. एस. एस.) देश सेवा के उपाय हैं। ‘एकता और अनुशासन’ राष्ट्रीय छात्र सेना का ध्येय वाक्य ही है और ‘मैं नहीं आप’ भी राष्ट्रीय सेवायोजना का ध्येय वाक्य हैं। इन दोनों उपायों से (मार्गों से) हम सभी व्यक्तित्व विकास के साथ ही समाजसेवा और देश सेवा करने में समर्थ हैं।

सुधीशः :
छात्रजीवनस्य अनन्तरं देशसेवायाः के मार्गाः?

सिद्धार्थ: :
जल-वायु-स्थलसेना इति त्रिविधसेनाप्रकाराः देशसेवायाः एव मार्गाः सन्ति।

सुधीश: :
मित्र! एतासां सेनानां विषये किञ्चित् विवरणं ददातु।

सिद्धार्थ: :
जलसेनायाः ध्येयवाक्यं ‘शन्नोवरुणः’ इति अस्ति। एषा जलमार्गात् देशरक्षां करोति। वायुसेना ‘नभः स्पृशं दीप्तम्’ इति ध्येयवाक्यं स्वीकृत्य आकाशमार्गात् देशं रक्षति। स्थलसेनायाः ध्येयवाक्यं-‘सेवा अस्माकं धर्मः’ इति। एषा स्थलात् देशरक्षणं करोति।

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सुधीश: :
भवतु, ज्ञातं देशहितमार्गाणां विषयेः, किन्तु एतेषु कः भेदः।

सिद्धार्थ: :
न कोऽपि भेदः। एते सर्वे जाति-धर्म-भाषाभेदरहिताः देशसेवायाः विभिन्नाः मार्गाः वर्तन्ते। सर्वेषामुद्देश्यं तु एकम् एव ‘देशहितम्’ इति।

अनुवाद :
सुधीश :
छात्र जीवन के बाद देशसेवा के कौन से उपाय हैं?

सिद्धार्थ :
जल सेना, वायु सेना तथा थल सेना, जो तीन प्रकार की सेना है, (वह भी) देशसेवा के उपाय हैं।

सुधीश :
हे मित्र! इन सभी सेनाओं के विषय में कुछ विवरण दीजिए।

सिद्धार्थ :
‘जल सेना’ का ध्येय वाक्य ‘शन्नोवरुण:’ (वरुण देवता हमारा कल्याण करे) है। यह जलमार्ग से देश की रक्षा करती है। वायुसेना ‘नभः स्पृशं दीप्तम्’ (आकाश प्रकाश से युक्त हो) इस ध्येय वाक्य को स्वीकार करके आकाशमार्ग से देश की रक्षा करती है। स्थल सेना (थल सेना) का ध्येय वाक्य है-‘सेवा (ही) हमारा धर्म है।’ यह स्थल से देश की रक्षा करती है।

सुधीश :
ठीक है, देश की भलाई के मार्गों (उपायों) के विषय में जानकारी मिली। किन्तु इनमें कौन सा भेद है?

सिद्धार्थ :
कोई भी भेद नहीं है। ये सभी जाति-धर्म और भाषा के भेद से रहित देश सेवा के विभिन्न मार्ग (उपाय) हैं। सभी का एक ही उद्देश्य ‘देश की भलाई (कल्याण)’ है।

देशहिताय शब्दार्थाः

धृत्वा = पहनकर। जनसेवायै = लोगों की सेवा के लिए। मेलापकेषु = मेलों में। हट्टेषु = बाजारों में। मातृतुल्यः = माता के समान।

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MP Board Class 7th Sanskrit Solutions Chapter 15 मत्स्यत्रयकथा

MP Board Class 7th Sanskrit Solutions Surbhi Chapter 15 मत्स्यत्रयकथा

MP Board Class 7th Sanskrit Chapter 15 अभ्यासः

प्रश्न 1.
एक शब्द में उत्तर लिखो
(क) मत्स्याः कुत्र अवसन्? [मछलियाँ कहाँ रहती थीं?]
उत्तर:
जलाशये

(ख) धीवराः कदा जलाशयम् अगच्छन्? [धीवर कब जलाशय पर चले गये?]
उत्तर:
कदाचित्

(ग) प्रत्युत्पन्नमतिः कः इव अतिष्ठत्? [प्रत्युत्पन्नमति किसकी तरह हो गयी?]
उत्तर:
मृतः इव

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(घ) तृतीयः मत्स्यः कुत्र पतितः? [तीसरी मछली कहाँ गिर पड़ी?]
उत्तर:
जाले

(ङ) अनागतविधाता कुत्र अगच्छत्? [अनागत विधाता कहाँ चली गई?]
उत्तर:
अन्यज्जलाशयम्।

प्रश्न 2.
एक वाक्य में उत्तर लिखो
(क) मत्स्यानां नामानि कानि? [मछलियों के नाम कौन-कौन से हैं?]
उत्तर:
मत्स्यानां नामानि-अनागतविधाता, प्रत्युत्पन्नमतिस्तथा, यद्भविष्यत्। [मछलियों के नाम-अनागतविधाता, प्रत्युत्पन्नमति और यद्भविष्यत् था।]

(ख) प्रत्युत्पन्नमतिः किमुक्त्वा निश्चिन्तः अभवत्? [प्रत्युत्पन्नमति क्या कहकर निश्चित हो गयी?]
उत्तर:
प्रत्युत्पन्नमतिः नाम मत्स्यः “समयानुगुणं कार्यं करोमि” इति उक्त्वा निश्चिन्तः अभवत्। [प्रत्युत्पन्नमति नामक मछली “समय के अनुसार कार्य करती हूँ” ऐसा कहकर निश्चिन्त हो गई।]

(ग) प्रभाते धीवराः किम् अकुर्वन्? [प्रात:काल में धीवरों ने क्या किया?]
उत्तर:
प्रभाते धीवराः जलाशयं गत्वा जालं प्रसार्य मत्स्यान् अगृह्णन्। [प्रातःकाल धीवरों ने जलाशय पर जाकर जाल फैलाकर मछलियों को पकड़ लिया।]

(घ) अनागतविधाता किम् अवदत्? [अनागतविधाता ने क्या कहा?]
उत्तर:
अनागतविधाता अवदत् ‘श्वः प्रभाते ते धीवराः नूनमेव अत्र आगमिष्यन्ति, सर्वान् च मत्स्यान् जाले बद्धवा नेष्यन्ति’, एतच्चिन्तयित्वा अनागतविधाता अन्यज्जलाशयं अगच्छत्।
[अनागत विधाता ने कहा, “प्रातः काल धीवर अवश्य ही यहाँ आयेंगे और सभी मछलियों को जाल में बाँधकर ले जायेंगे।” ऐसा चिन्तन करके अनागत विधाता दूसरे जलाशय में चली गई।]

(ङ) प्रत्युत्पन्नमतिः स्वनामानुगुणं किम् अकरोत्? [प्रत्युत्पन्नमति ने अपने नाम के अनुसार क्या किया?]
उत्तर:
प्रत्युत्पन्नमतिः स्वनामानुगुणं मृतः इव अतिष्ठत्। [प्रत्युत्पन्नमति अपने नाम के अनुसार मरी हुई-सी हो गई।]

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प्रश्न 3.
रेखांकित शब्द के आधार पर प्रश्न निर्माण करो
(क) मत्स्याः जलाशये अवसन्।
(ख) धीवराः जलाशयम् अवलोकितवन्तः।
(ग) मृतं प्रत्युत्पन्नमति धीवरः जालात् बहिः अकरोत्।
(घ) कस्मिंश्चित् जलाशये त्रयः मत्स्याः अवसन्।
(ङ) धीवराः मत्स्यान् जाले बध्वा नेष्यन्ति।
उत्तर:
(क) मत्स्याः कुत्र अवसन्
(ख) धीवराः किम अवलोकितवन्तः?
(ग) मृतं प्रत्युत्पन्नमतिम् धीवरः कुतः बहिः अकरोत्?
(घ) कस्मिंश्चित् जलाशये कतिः मत्स्याः अवसन्?
(ङ) धीवराः मत्स्यान् कस्मिन् बध्वा नेष्यन्ति?

प्रश्न 4.
पदच्छेद करो (शब्दों को अलग करो)
सन्धियुक्त पद :
(क) अन्यज्जलाशयं
(ख) एतज्ज्ञात्वा
(ग) निश्चिन्तः
(घ) भगवच्छक्त्या
(ङ) तच्चोक्तम्
(च) निश्चयः
(छ) सच्चरित्रः
(ज) सज्जनः
(झ) दुष्चरित्रः
(ज) तपश्चर्या।
उत्तर:
(क) अन्यत् + जलाशयं
(ख) एतत् + ज्ञात्वा
(ग) निः + चिन्तः
(घ) भगवत् + शक्त्या
(ङ) तत् + च + उक्तम
(च) निः + चयः
(छ) सत् + चरित्रः
(ज) सत् + जनः
(झ) दुः + चरित्रः
(ब) तपः + चर्या

प्रश्न 5.
लकार परिवर्तन करो-
MP Board Class 7th Sanskrit Solutions Chapter 15 मत्स्यत्रयकथा img 1
उत्तर:
(क) वदति
(ख) गच्छति
(ग) अकथयत्
(घ) अगच्छत्
(ङ) भवति
(च) गृह्णाति
(छ) तिष्ठति
(ज) प्राविशत्
(झ) अपठत्
(ब) अपिबन्।

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काल 6.
क्रम से वाक्यों को लिखकर कथा लिखो
(क) द्वितीयमत्स्यः प्रत्युत्पन्नमतिः “समयानुगुणं कार्य करोमि” इति निश्चिन्तः अभवत्।
(ख) तृतीयः मत्स्यः जाले पतितः धीवरैः कर्तितः मृतश्च।
(ग) प्रभाते धीवराः जलाशयं गत्वा जालं प्रसार्य मत्स्यान् अगृह्णन्।
(घ) प्रत्युत्पन्नमतिः मृतः इव अतिष्ठत्।
(ङ) वेलाग्रामस्य जलाशये त्रयः मत्स्याः अवसन्।
(च) एकदा धीवराणां वार्तालापं श्रुत्वा जीवनरक्षणाय अनागतविधाता अन्यज्जलाशयम् अगच्छत्।
(छ) तृतीयमत्स्यः यद्भविष्यः अचिन्तयत् “जलशयान्तरेण किं प्रयोजनम्।”
(ज) प्रत्युत्पन्नमति: जले अकूर्दत् जलाशयान्तरे प्राविशच्च।
उत्तर:
(ङ) वेलाग्रामस्य जलाशये त्रयः मत्स्याः अवसन्।
(च) एकदा धीवराणां वार्तालापं श्रुत्वा जीवनरक्षणाय अनागतविधाता अन्यज्जलाशयम् अगच्छत्।
(क) द्वितीयमत्स्यः प्रत्युत्पन्नमतिः “समयानुगुणं कार्यं करोमि” इति निश्चिन्तः अभवत्।
(छ) तृतीयमत्स्यः यद्भविष्यः अचिन्तयत् “जलशयान्तरेण किं प्रयोजनम्।”
(ग) प्रभाते धीवराः जलाशयं गत्वा जालं प्रसार्य मत्स्यान् अगृह्णन्।
(घ) प्रत्युत्पन्नमतिः मृतः इव अतिष्ठत्।
(ज) प्रत्युत्पन्नमतिः जले अकूर्दत् जलाशयान्तरे प्राविशच्च।
(ख) तृतीयः मत्स्यः जाले पतितः धीवरैः कर्तितः मृतश्च।

प्रश्न 7.
दिये गये अव्ययों से वाक्य का निर्माण करोश्वः, एव, इति, अत्र, बहिः, यदि-तर्हिः, नूनं, प्रातः, अपि।
उत्तर:

  1. श्वः अहम् विद्यालयम् गमिष्यामि।
  2. सः अस्मिन् एव ग्रामे वसति।
  3. मोहनः इति नामकः छात्रः क्रीडाम् खेलति।
  4. अत्र आगत्य कार्यम् कुरु।
  5. ग्रामात् बहिः नदी बहति।
  6. यदि सः आगमिष्यति तर्हि अहम् तस्य सहायताम् करिष्यामि।
  7. सः नूनं नगरम् गमिष्यति।
  8. प्रातः भ्रमणार्थम् अहम् गच्छामि।
  9. अहम् तस्य अपि सहायताम् करिष्यामि।

मत्स्यत्रयकथा हिन्दी अनुवाद

वेलाग्रामस्य कस्मिञ्चित् जलाशये अनागतविधाता प्रत्युत्पन्नमतिः यद्यविष्यश्चेति नामकाः त्रयः मत्स्याः अवसन्। कदाचित् तं जलाशयम् अवलोक्य धीवराः परस्परमवदन्, “अस्मिन् जलाशये बहवः मत्स्याः सन्ति, प्रभाते अस्माभिः अत्र अवश्यमेव आगन्तव्यम् इति।” एतादृशं निश्चयं कृत्वा ते अगच्छन्। एतत् श्रुत्वा तेषु मत्स्येषु अनागतविधाता नाम मत्स्यः अकथयत्, “श्वः प्रभाते ते धीवरा: नूनमेव अत्र आगमिष्यन्ति, सर्वान् च मत्स्यान् जाले बध्दता नेष्यन्ति।” एतच्चिन्तयित्वा अनागतविधाता अन्यज्जलाशयं अगच्छत्। एतज्ज्ञात्वा प्रत्युत्पन्नमतिः नाम मत्स्यः “समयानुगणं कार्य करोमि” इति उक्त्वा निश्चिन्तः अभवत्। तृतीयः मत्स्यः यद्मविष्यः अवदत्, “भगवच्छक्त्या अहं जीवामि। यदि मरणमेव निश्चितं तर्हि जलाशयान्तरेण किं प्रयोजनम्? भाग्यानुसारं यद् भविष्यति तद् भवतु” इति।

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अनुवाद :
‘वेला’ ग्राम के किसी जलाशय में अनागतविधाता, प्रत्युत्पन्नमति और यद्भविष्यत् नामक तीन मछलियाँ रहती थीं। किसी समय उस तालाब को देखकर धीवर’ आपस में बोले-‘इस जलाशय में बहुत सी मछलियाँ हैं, प्रात:काल हमें यहाँ अवश्य ही आना चाहिए।’ इस तरह का निश्चय करके वे चले गये। इसे सुनकर, उन मछलियों में से ‘अनागतविधाता’ नाम की मछली ने कहा, “कल प्रात:काल ही वे धीवर (मछुआरे) अवश्य ही यहाँ आयेंगे और सभी मछलियों को जाल में बाँधकर ले जायेंगे।” ऐसा सोचकर ‘अनागतविधाता’ तो दूसरे तालाब को चली गई। इसे जानकर ‘प्रत्युत्पन्नमति’ नामक मछली “समय के अनुसार कार्य करती हूँ” ऐसा कहकर चिन्तामुक्त हो गई। तीसरी मछली ‘यद्भविष्यत’ बोली-“भगवान की शक्ति से मैं जीवित हूँ।” यदि मरना ही निश्चय है तो दूसरे जलाशय से क्या लाभ ? भाग्य के अनुसार जो हो, वह हो जाए।”

प्रभाते धीवराः जलाशयं गत्वा जालं प्रसार्य मत्स्यान् अगृणन्। प्रत्युत्पन्नमतिः मृतः इव अतिष्ठत्। मृतमिव प्रत्युत्पन्नमतिं दृष्ट्वा धीवरः तं जालात् बहिः अकरोत्। प्रत्युत्पन्नमतिः स्वानामानुगुणं मतिप्रयोगेण ततः जले अकूर्दत् जलाशयान्तरे प्राविशच्च। तृतीयः मत्स्यः जाले पतितः धीवरैः कर्तितः मृतश्च अभवत्। तच्चोक्तम्-

“अनागतविधाता च प्रत्युत्पन्नमतिस्तथा।
द्वावेतौ सुखमेधेते यद्भविष्यो विनश्यति॥”

अनुवाद :
प्रात:काल धीवरों (मछुआरों) ने तालाब पर जाकर जाल फैलाकर मछलियों को पकड़ा। ‘प्रत्युत्पन्नमति’ मरे हुए जैसी हो गई। मरी हुई सी प्रत्युत्पन्न मति को देखकर धीवर (मछुआरे) ने उसे जाल से बाहर कर दिया। ‘प्रत्युत्पन्नमति’ अपने नाम के अनुसार मति (बुद्धि) का प्रयोग करके इसके बाद जल में कूद गयी और दूसरे जलाशय में प्रवेश कर गयी। तीसरी मछली जाल में गिर जाने से (फंस जाने से) धीवरों के द्वारा काट डाली गई और मर गई। उसने कहा-

“अनागतविधाता और प्रत्युत्पन्नमति ये दोनों सुख से वृद्धि। को प्राप्त हुईं परन्तु ‘यद्भविष्यत्’ नष्ट हो गई है।”

मत्स्यत्रयकथा शब्दार्थाः

मत्स्याः = मछलियाँ। जलाशयः = तालाब। धीवरः = मछुआरा। अवलोक्य = देखकर। नूनम् = अवश्य। बध्वा = बाँधकर। जलाशयान्तरम् = दूसरे जलाशय में। अगृहणन् = पकड़ लिए। सुखमेधेते = (दोनों) सुख से बढ़ रहे हैं। विनश्यति = नष्ट होता है।

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MP Board Class 7th Special Hindi व्याकरण

MP Board Class 7th Special Hindi व्याकरण

संज्ञा

परिभाषा–किसी प्राणी, वस्तु, स्थान, भाव, गुण, दशा आदि के नाम को संज्ञा कहते हैं। संज्ञा के तीन भेद होते हैं

  1. जातिवाचक संज्ञा–एक ही जाति का बोध कराने वाले शब्द जातिवाचक संज्ञा कहलाते हैं; जैसे–पुस्तक, विद्यालय, घोड़ा, मनुष्य, लड़का आदि।
  2. व्यक्तिवाचक संज्ञा–जिस शब्द से किसी एक ही विशेष व्यक्ति का बोध हो, उसे व्यक्तिवाचक संज्ञा कहते हैं; जैसे–राम, सीता, भोपाल, नर्मदा, गंगा आदि।
  3. भाववाचक संज्ञा–जिस संज्ञा से किसी पदार्थ के गुण–दोष, स्वभाव, अवस्था आदि का ज्ञान हो उसे भाववाचक संज्ञा कहते हैं; जैसे–सुन्दरता, बचपन, बुढ़ापा आदि।

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लिङ्ग

परिभाषा–संज्ञा शब्द के जिस रूप से स्त्री अथवा पुरुष जाति का बोध होता है, उसे लिङ्ग कहते हैं। लिङ्ग दो प्रकार के होते हैं
(क) पुल्लिङ्ग,
(ख) स्त्रीलिङ्ग।

(क) पुल्लिङ्ग से किसी पुरुष जाति का बोध होता है; जैसे–राम, घोड़ा, बालक आदमी आदि।
(ख) स्त्रीलिङ्ग से किसी स्त्री जाति का बोध होता है; जैसे–लड़की, नारी, सीता आदि।।

वचन वचन दो प्रकार के होते हैं–
(क) एकवचन,
(ख) बहुवचन।

(क) जिन शब्दों से एक संख्या का बोध हो, एकवचन कहलाते हैं; जैसे–घर, दिन, पुस्तक आदि।
(ख) जिन शब्दों से एक से अधिक संख्या का बोध होता है, उन्हें बहुवचन कहते हैं; जैसे–पुस्तकें, लड़कियाँ आदि।

सर्वनाम

परिभाषा–जो शब्द संज्ञा के स्थान पर प्रयोग किए जाते हैं, उन्हें सर्वनाम कहते हैं; जैसे–वह, हम, तुम, वे, मैं, यहाँ, वहाँ आदि।

सर्वनाम के भेद–सर्वनाम निम्नलिखित छः प्रकार के होते हैं–

  • पुरुषवाचक सर्वनाम,
  • निश्चयवाचक सर्वनाम,
  • अनिश्चयवाचक सर्वनाम,
  • सम्बन्धवाचक सर्वनाम,
  • प्रश्नवाचक सर्वनाम,
  • निजवाचक सर्वनाम।

विशेषण

परिभाषा–संज्ञा तथा सर्वनाम की विशेषता प्रकट करने वाले शब्दों को विशेषण कहते हैं; जैसे–सुन्दर बालक, मीठा फल, काला घोड़ा आदि। इनमें सुन्दर, मीठा, काला शब्द विशेषण हैं। वे क्रमशः बालक, फल, घोड़ा शब्दों (संज्ञा) की विशेषता बताते हैं।

विशेषण के प्रकार–विशेषण छः प्रकार के होते हैं-

  • गुणवाचक विशेषण,
  • संख्यावाचक विशेषण,
  • परिमाणवाचक विशेषण,
  • संकेतवाचक विशेषण,
  • व्यक्तिवाचक विशेषण,
  • प्रश्नवाचक विशेषण।

क्रिया

परिभाषा–जिन शब्दों से किसी वाक्य में कार्य का करना या होना पाया जाता है, उन्हें क्रिया कहते हैं; जैसे–जाना, खाना, पीना, उठना, बैठना. पढना आदि।

क्रिया के भेद–क्रिया दो प्रकार की होती है–

  1. अभिकर्मक (अकर्मक) क्रिया–जिस क्रिया में कर्म न होकर केवल कर्ता ही होता है, वह अकर्मक (अभिकर्मक)। क्रिया कहलाती है; जैसे–मोहन गया। वे हँसते हैं।
  2. सकर्मक क्रिया–जिस क्रिया में कर्म होता है, उसे सकर्मक क्रिया कहते हैं। जैसे–मोहन किताब लिखता है। इस वाक्य में लिखता है’ क्रिया का कर्म, ‘किताब’ है।

काल

परिभाषा–किसी भी क्रिया के होने या करने के समय को काल कहते हैं। काल तीन प्रकार के होते हैं

  • भूतकाल–जैसे–मोहन शहर गया।
  • वर्तमानकाल–जैसे–सीता गाना गा रही है।
  • भविष्यत्काल–जैसे–मैं पत्र लिखूगा।

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क्रिया–विशेषण

परिभाषा–किसी भी क्रिया की विशेषता बताने वाले शब्दों को क्रिया–विशेषण कहते हैं; जैसे–घोड़ा तेज दौड़ता। है। इस वाक्य में ‘तेज’ शब्द क्रिया विशेषण है। इसमें ‘दौड़ता। है’ क्रिया की विशेषता बतायी जा रही है। अतः ‘तेज’ शब्द क्रिया–विशेषण हुआ।

सम्बन्ध बोधक परिभाषा–दो शब्दों में सम्बन्ध स्थापित करने वाले अव्ययों को सम्बन्धबोधक अव्यय कहते हैं; जैसे–छत के ऊपर चोर है। इस वाक्य में छत और चोर का सम्बन्ध ‘ऊपर’ के द्वारा बताया गया है अतः ऊपर’ शब्द सम्बन्धबोधक अव्यय है।

समुच्चय बोधक

परिभाषा–दो शब्दों, वाक्यों या वाक्यांशों को मिलाने वाले शब्द समुच्चयबोधक अव्यय कहलाते हैं; जैसे– राम और श्याम भाई–भाई हैं। राम श्याम को मिलाने वाला ‘और’ शब्द समुच्चयबोधक अव्यय है।

विस्मयादिबोधक

परिभाषा–विस्मय, हर्ष, विषाद, तिरस्कार, लज्जा, उत्साह, चिन्ता, घृणा आदि मनोभावों को प्रकट करने वाले अव्यय विस्मयबोधक कहलाते हैं;
जैसे–
हे ! हो ! हरे ! आदि।
मुहावरे तथा लोकोक्तियाँ

और उनके वाक्य प्रयोग
1. अक्ल का दुश्मन–मुर्ख।
प्रयोग–वह तो अक्ल का दुश्मन है, किसी की भी राय नहीं मानेगा।

2. अपना उल्लू सीधा करना–स्वार्थ सिद्ध करना।
प्रयोग–तुम्हें भले–बुरे से क्या मतलब ? तुम तो अपना उल्लू सीधा करो।

3. अंगूठा दिखाना–निराश कर देना।
प्रयोग–उसने रुपये लौटाने का वायदा किया था, फिर भी अँगूठा दिखा दिया।

4. आँखों का तारा–बहुत प्यारा।
प्रयोग–मोहन अपने माता–पिता की आँखों का तारा है।

5. आँख का अन्धा–मूर्ख।
प्रयोग–प्रत्येक व्यापारी चाहता है कि कोई आँख का अन्धा व्यक्ति ही उसके हाथ लगे।

6. अपमान के चूंट पीना–अपमान सहन करना।
प्रयोग–चुनाव में हार होने पर मुखिया अपमान का घूट पिये बैठा है। .

7. अन्धे की लकड़ी–एकमात्र सहारा।
प्रयोग–श्रवण कुमार अपने माता–पिता के लिए अन्धे की लकड़ी था।

8. आँखों में धूल झोंकना–धोखा देना।
प्रयोग–बाजार में ठग दुकानदार की आँखों में धूल झोंककर माल ले गये।

9. आँख दिखाना–डराना, धमकाना।
प्रयोग–छोटे बच्चों को कभी भी आँखें नहीं दिखानी चाहिए।

10. आँखें चुराना–छिपना।
प्रयोग–पहले तो सोचा नहीं, अब आँखें चुराते फिरते हो।

11. आँखों में खून उतरना–बहुत क्रोधित होना।
प्रयोग–अपराधी को देखते ही, मेरी आँखों में खून उतर आया।

12. आँखें बिछाना–स्वागत करना।
प्रयोग–राष्ट्रपति के आने पर जनता ने उनके सामने अपनी आँखे बिछा दीं।

13. ईंट से ईंट बजाना–सर्वनाश करना।
प्रयोग–भारत के वीरों ने अंग्रेजी राज्य की ईंट से ईंट बजा दी।

14.ईद का चाँद होना–बहुत कम दर्शन होना।
प्रयोग–दशहरे के दिन नीलकंठ पक्षी लोगों के लिए ईद का चाँद हो जाता है।

15. काम तमाम करना–मार डालना।
प्रयोग–शिकारी ने अपनी एक ही गोली से शेर का काम तमाम कर दिया।

16. काफूर होना–नष्ट होना।
प्रयोग–हामिद की बात सुनकर उसकी दादी का क्रोध काफूर हो गया।

17. गले न उतरना–समझ में न आना।
प्रयोग–आपकी कोई भी बात मेरे गले नहीं उतर रही है।

18. गंध भी न मिलना–कोई पता न चलना।
प्रयोग–मेरा मित्र जब से गया है, तब से अभी तक उसकी गंध भी नहीं मिल रही है।

19. टेढ़ी खीर–कठिन कार्य।
प्रयोग–भारत का प्रधानमंत्री बनना टेढ़ी खीर है।

20. छक्के छुड़ाना–घबरा देना।
प्रयोग–सन् 1857 के प्रथम स्वतन्त्रता संग्राम में रानी लक्ष्मीबाई ने अंग्रेजों के छक्के छुड़ा दिये।

21. ठण्डा होना–मर जाना।
प्रयोग–शिकारी की गोली लगते ही शेर ठण्डा पड़ गया।

22. नौ दो ग्यारह होना–भाग जाना।
प्रयोग–पुलिस को देखते ही चोर नौ दो ग्यारहे हो गये।

23. दंग रह जाना–आश्चर्यचकित होना।
प्रयोग–ताजमहल की कारीगरी देखकर विदेशी दंग रह जाते हैं।

24. पीठ दिखाना–भाग जाना।
प्रयोग–वीर पुरुष कभी भी युद्ध के मैदान से पीठ दिखाकर नहीं भागते।

25. धोबी का कुत्ता घर का न घाट का–कहीं का न रहना।
प्रयोग–मोहन ने चपरासी की नौकरी छोड़ दी, यह सोचकर कि अब अच्छी नौकरी करेगा। नौकरी तो उसे मिलती नहीं अतः उसकी दशा धोबी के कुत्ते जैसी है, जो न तो घर का है और न घाट का।

26. काला अक्षर भैंस बराबर–अनपढ़।
प्रयोग–मोहन के लिए काला अक्षर भैंस बराबर है।

27. एक पंथ दो काज–एक ही रास्ते से दो काम।
प्रयोग–वह 26 जनवरी का उत्सव देखने दिल्ली गया। लौटते हुए वह अपने भाई से भी मिल लिया। इस तरह उसने एक पंथ दो काज कर लिए।

28. आम के आम गुठलियों के दाम–एक वस्तु से दो लाभ लेना।
प्रयोग–अखबार पढ़ लेते हैं तथा उसे बेचकर पैसे भी प्राप्त कर लेते हैं, इस प्रकार आम के आम गुठलियों के दाम हो जाते हैं।

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तत्सम तथा तद्भव शब्द

MP Board Class 7th Special Hindi व्याकरण 1
MP Board Class 7th Special Hindi व्याकरण 2

विलोम शब्द

MP Board Class 7th Special Hindi व्याकरण 3
MP Board Class 7th Special Hindi व्याकरण 4
MP Board Class 7th Special Hindi व्याकरण 5

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पर्यायवाची शब्द।

  • अग्नि–पावक, अनल, आग, ज्वाला, दहन, कृशानु, वैशांदुर।
  • अमृत–सोम, अमीय, सुधा, पीयूष, सुरभोग।
  • आँख–लोचन, नयन, नेत्र, चक्षु, द्रग।
  • असुर–दानव, दैत्य, राक्षस, निशाचर, दनुज, तमोचर।
  • आकाश–व्योम, गगन, अम्बर, शून्य, अनन्त, अन्तरिक्ष।
  • घोड़ा–अश्व, तुरंग, वाजि, हय, घोटक, रवि–सुत।
  • इन्द्र–पुरन्दर, मघवा, सुरेन्द्र, सुरेश, सुरपति, देवराज।
  • पानी–जल, वारि, अम्बु, तोय, नीर, पय, सलिल।
  • कमल–जलज, वारिज, अम्बुज, तोयज, नीरज, पंकज, सरोज।
  • बादल–जलद, वारिद, अम्बुद, नीरद, तोयद, जलधर, मेघ।
  • समुद्र–जलधि, वारिधि, अम्बुधि, नीरधि, तोयधि, पयोधि, नदीश।
  • सूर्य–दिवाकर, दिनेश, भानु, भाष्कर, रवि, दिवाकर, प्रभातकर, पतंग।
  • चन्द्रमा–मयंक, शशि, राकेश, राकापति, सोम, हिमकर, रजनीश, निशाकर।
  • पृथ्वी–भू, भूमि, धरती, धरा, वसुधा, अवनि, मही, वसुन्धरा।
  • कोयल–कोकिला, पिक, वनप्रिय, परमृत, वसन्तदूत।
  • कामदेव–मदन, अनंग, मन्मथ, मनोज, मार।
  • गंगा–सुरनदि, देवसरि, देवपगा, त्रिपथगा, भागीरथी, देवनदी, जाह्नवी।
  • घर–धाम, गृह, सदन, भवन, मन्दिर, निकेतन।
  • तालाब–सर, तड़ाग, सरोवर, ताल, जलाशय, पुष्कर।
  • दिन–दिवस, वासर, दिवा, अह्न, द्यौस, दिवा।
  • नदी–सरिता, आपगा, तरंगिणी, नद, तटनी, सरि।
  • फूल–पुष्प, सुमन, कुसुम, प्रसून, पुहुप।
  • पक्षी–खग, पतंग, पखेरू, परिंदा, द्विज।
  • हवा–वायु, पवन, समीर, अनिल, मारूति, ब्यार।
  • पेड़–तरु, विटप, वृक्ष, पादप, द्रुम।
  • धनुष–चाप, कोदण्ड, धनु, सरासन, कमान।
  • नाव–नौका, नैया, तरिणी, तरी।
  • पत्थर–पाहन, पाषाण, प्रस्तर, उपल, अश्म।
  • पर्वत–अचल, नग, गिरि, भूधर, शैल।
  • पुत्र–तनय, सुत, आत्मज, नन्दन, तात।
  • बिजली–विद्युत, दामिनी, चपला, तड़ित, चंचला।
  • भौंरा–अलि, मधुकर, भ्रमर, मधुप, भुंग।
  • मोर–केकी, शिखी, मयूर, नीलकंठ, शिखण्डी।
  • यमुना–कालिन्दी, अर्कजा, रवितनया, कृष्णा, तरणि तनूजा।
  • राजा–नृप, भूप, महीप, नृपति, नरेश।
  • रात्रि–रजनी, निशा, यामिनी, विभावरी, रैन।
  • लक्ष्मी–रमा, श्री, चंचला, पद्मा, हरिप्रिया, कमला।
  • विष्णु–नारायण, हरि, श्रीपति, चतुर्भुज, उपेन्द्र।
  • सिंह–मृगराज, केहरि, केसरी, पंचानन।
  • सोना–स्वर्ण, कनक, हेम, कंचन, कुन्दन।
  • स्वर्ग–देवलोक, विष्णुलोक, सुरपुर, ब्रह्मलोक, बैकुण्ठ।
  • साँप–सर्प, नाग, भुजंग, विषधर, व्याल।
  • स्त्री–नारी, तिय, अबला, कामिनी, रमणी।
  • सरस्वती–शारदा, भारती, वीणावादिनि, हंस वाहिनी वागेश्वरी।
  • हाथी–गज, हस्ती, कुंजर, नयन्द, दन्ती।
  • मृग–सारंग, कुरंग, मृणीक, हिरण।

समास

परिभाषा–किन्हीं दो पदों (शब्दों) के योग को समास कहते हैं। समास का अर्थ संक्षिप्त होता है।
जैसे–

  • दिन–रात, माता–पिता आदि।

समास के भेद–समास छः प्रकार के होते हैं-
1. द्वन्द्व समास–इस समास में दोनों पद प्रधान होते हैं। बीच में ‘और’ शब्द का लोप होता है।
जैसे–

  • माता–पिता = माता और पिता।
  • भाई–बहन = भाई और बहन।
  • दिन–रात = दिन और रात।

2. द्विगु समास–जिस समास में पहला पद संख्यावाची विशेषण हो, वह द्विगु समास होता है।
जैसे–

  • त्रिभुवन = तीन भुवनों का समूह,
  • नवरत्न = नौ रत्नों का समूह।

3. कर्मधारय समास–जिसमें पहला पद विशेषण तथा दूसरा पद विशेष्य हो, तो वहाँ कर्मधारय समास होता है।
जैसे–

  • नीलकमल = नीला है जो कमल।
  • महादेव = महान है जो देव।
  • घनश्याम = घन के समान श्याम।

4. तत्पुरुष समास–जिस समास में उत्तर पद प्रधान होता है तथा बीच में विभक्तियों का लोप होता है, वह तत्पुष समास कहलाता है,
जैसे–

  • राम–भजन = राम का भजन।
  • राजपुत्र = राजा का पुत्र।
  • विद्याहीन = विद्या से हीन।

5. अव्ययीभाव समास–जिस समास में पहला पद अव्यय तथा दूसरा पद प्रधान होता है, वहाँ अव्ययीभाव समास होता है।
जैसे–
यथाशक्ति = शक्ति के अनुसार, (यथा + शक्ति)।

  • यथोचित = यथा + उचित।
  • प्रतिदिन = प्रति + दिन।
  • अनुदिन = अनु + दिन।

6. बहुब्रीहि समास–जिस समास में किसी भी पद की प्रधानता न होते हुए अन्य तीसरे पद की प्रधानता होती है वहाँ बहुब्रीहि समास होता है।
जैसे–

  • दशानन = दस हैं आनन जिसके अर्थात् रावण।
  • नीलकंठ = नीला है कंठ जिसका अर्थात् महादेव।
  • लम्बोदर = लम्बा है उदर जिसका अर्थात् गणेशजी।

उदाहरण–
निम्नलिखित शब्दों के पद–विग्रह सहित समास लिखो-
MP Board Class 7th Special Hindi व्याकरण 6

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अलंकार

परिभाषा–जिस प्रकार किसी सुन्दरी की शोभा बढ़ाने के लिए कुछ आभूषणों का प्रयोग किया जाता है। उसी प्रकार भाषा रूपी सुन्दरी को सजाने के लिए कुछ शब्दों का प्रयोग करते हैं। उन्हें अलंकार कहते हैं।

अलंकार के भेद–अलंकार दो प्रकार के होते हैं
(1) शब्दालंकार,
(2) अर्थालंकार।
शब्दालंकार से शब्द में चमत्कार पैदा होता है। अर्थालंकार से अर्थ में चमत्कार पैदा होता है।

(क) शब्दालंकारों में अनुप्रास, यमक और श्लेष मुख्य
1. अनुप्रास अलंकार–जब एक ही अक्षर दो या दो से अधिक बार प्रयोग हो रहा हो, तो वहाँ अनुप्रास अलंकार होता है।
जैसे-
तरनि तनूजा तट तमाल तरुवर बहु छाये।
इस वाक्य में ‘त’ वर्ण कई बार आया है।
अत: यहाँ अनुप्रास अलंकार है।

2. यमक अलंकार–जिस वाक्य में एक ही शब्द दो या दो से अधिक बार आये तथा उनके अर्थ अलग–अलग हों, तो वहाँ यमक अलंकार होता है।
जैसे–
‘कनक–कनक ते सौ गुनी मादकता अधिकाय’ में कनक शब्द दो बार प्रयुक्त हुआ है। पहले ‘कनक’ का अर्थ स्वर्ण (सोना) है तथा दूसरे ‘कनक’ का अर्थ है ‘धतूरा’। इसलिए यहाँ यमक अंलकार है।

3. श्लेष अलंकार–श्लेष शब्द का अर्थ है चिपका हुआ। जहाँ किसी एक शब्द का एक ही बार प्रयोग हो तथा उसके अर्थ अनेक हों, वहाँ श्लेष अलंकार होता है।
जैसे–
रहिमन पानी राखिये बिनु पानी सब सून।
पानी गये न ऊबरे, मोती मानुस चून॥
इस पद्यांश में प्रयुक्त ‘पानी’ शब्द का अर्थ–चमक, प्रतिष्ठा, तथा जल है अतः यहाँ श्लेष अलंकार है।

(ख) अर्थालंकारों में उपमा, रूपक तथा उत्प्रेक्षा विशेष रूप से उल्लेखनीय हैं-
1. उपमा–जहाँ एक वस्तु की समानता किसी दूसरी वस्तु से दिखायी जाती है, वहाँ उपमा अलंकार होता है। उपमां के चार भेद होते हैं– उपमेय, उपमान, धर्म, वाचक।
उदाहरण–
‘हरि पद कोमल कमल से।’ इस वाक्य में हरिपद उपमेय है, ‘कमल’ उपमान है ‘से’ वाचक है तथा ‘कोमल’ साधारण धर्म है।

2. रूपक–जहाँ उपमेय और उपमान को एक ही रूप दे दिया जाता है, तो वहाँ रूपक अलंकार होता है।
जैसे–
“चरण कमल बन्दी हरि राई।” – यहाँ पर ‘चरण’ उपमेय है, और ‘कमल’ उपमान है। दोनों को ही एक रूप दे दिया गया है, अतः यहाँ रूपक अलंकार है।

3. उत्प्रेक्षा–जहाँ उपमेय में उपमान की कल्पना की जाये, तो वहाँ उत्प्रेक्षा अलंकार होता है। इसमें जनु, मनु, जानहु, मानहु, आदि शब्द ‘वाचक’ होते हैं।
उदाहरण–
सोहत ओढ़े पीत पट श्याम सलोने गात।
मनहु नीलमणि शैल पर आतप पर्यो प्रभात ॥
यहाँ श्रीकृष्ण के श्याम सलोने शरीर की समानता नीलमणि के पर्वत से की है, शरीर पर पीलावस्त्र नीलमणि के पर्वतरूपी श्यामवर्ण शरीर पर पड़ी हुई प्रातःकालीन धूप है।

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शब्दसमूह के लिए एक शब्द
शब्दसमूह   –         एक शब्द
1. कभी निष्फल न होने वाला – अमोघ
2. सम्पूर्ण संसार का स्वामी – अखिलेश
3. जो ईश्वर को नहीं मानता हो – नास्तिक
4. जो कभी न मरे – अमर
5. दूसरों का एहसान न मानता हो कृतघ्न या – अकृतज्ञ
6. जिसके माता–पिता हैं – सनाथ
7. जिसके माता–पिता न हों – अनाथ
8. बहुत अधिक बोलने वाला – वाचाल
9. बुराई करने वाला – निन्दक
10. दूसरों की भलाई करने वाला – परोपकारी
11. भ्रमण करने वाला – पर्यटक
12. दूसरे देश का रहने वाला – विदेशी
13. घोड़े बाँधने का स्थान – अस्तबल
14. गोद लिया पुत्र – दत्तक पुत्र
15. भाषण देने वाला – वक्ता
16. जो लिखना पढ़ना जानता हो – साक्षर
17. क्षणभर में नष्ट होने वाला – क्षणभंगुर
18. वह स्त्री जिसका पति मर चुका हो – विधवा
19. वह आदमी जिसकी स्त्री मर विधुर – चुकी हो
20. जो बिना बुद्धि का हो – निर्बुद्धि
21. जो बिना चरित्र का हो – चरित्रहीन
22. मांस खाने वाला – मांसाहारी
23. दूर तक की सोचने वाला। – दूरदर्शी
24. नीति का ज्ञाता – नीतिज्ञ
25. जिसे जीता न जा सके – अजेय
26. घृणा के योग्य – घृणित
27. जिसे सभी कामों में सफलता। सफल – मिली हो
28. ईश्वर में विश्वास करने वाला – आस्तिक
29. जो बूढ़ा न हो – अजर
30. सौ वर्ष का समय – शताब्दी
31. शरण में आया हुआ – शरणागत
32. आज्ञा मानने वाला – आज्ञाकारी
33. बहुत कम जानने वाला – अल्पज्ञ
34. दोपहर का समय – मध्याह्न
35. आकाश को छूने वाला – गगनचुम्बी
36. कम बोलने वाला – मितभाषी
37. दोपहर के बाद का समय – अपराह्न
38. पूजा के योग्य – पूज्य
39. सम्पूर्ण दिन का कार्यक्रम – दिनचर्या
40. जिसका जन्म पहले हुआ हो। – अग्रज
41. मांस न खाने वाला – शाकाहारी
42. जिसका कोई शत्रु न हो – अजातशत्रु
43. पति तथा पत्नी – दम्पत्ति
44. निष्फल न होने वाली – अचूक
45. जिसका आकार न हो – निराकार

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