MP Board Class 7th Hindi Bhasha Bharti Solutions Chapter 24 बुन्देलखण्ड केशरी-महाराजा छत्रसाल

MP Board Class 7th Hindi Bhasha Bharti Solutions Chapter 24 बुन्देलखण्ड केशरी-महाराजा छत्रसाल

MP Board Class 7th Hindi Bhasha Bharti Chapter 24 पाठ का अभ्यास

बोध प्रश्न

प्रश्न 1. निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर लिखिए

(क) महाराजा छत्रसाल किस नाम से विख्यात हैं?
उत्तर
महाराजा छत्रसाल बुन्देलखण्ड केसरी’ के नाम से विख्यात हैं।

(ख) महाराजा छत्रसाल का जन्म कब और कहाँ हुआ था?
उत्तर
महाराजा छत्रसाल का जन्म ज्येष्ठ शुक्ल तृतीया, संवत् सत्रह सौ छह (1706) अर्थात् 4 मई सन् 1649 ई. को टीकमगढ़ जिले के मोर पहाड़ी नामक स्थान पर हुआ था।

(ग) वीर चम्पतराय आजीवन किसका विरोध करते रहे?
उत्तर
महाराजा छत्रसाल के पिता वीर चम्पतराय आजीवन मुगल शासक शाहजहाँ और औरंगजेब के धर्मान्ध शासन और बहुसंख्यक प्रजा के प्रति पक्षपातपूर्ण नीतियों का विरोध करते

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(घ) बालक छत्रसाल में कौन-कौन से गुण विद्यमान थे?
उत्तर
बालक छत्रसाल में साहस, शौर्य, आत्मविश्वास, वीरता और निर्भयता के गुण कूट-कूट कर भरे थे।

(ङ) घोड़े को ‘भले भाई’ की संज्ञा क्यों दी गई ?
उत्तर
देवगढ़ युद्ध के दौरान छत्रसाल बुरी तरह घायल हो । गए थे। उनका प्यारा घोड़ा रात-भर उनकी रक्षा करता रहा। दूसरे दिन छत्रसाल के भाई अंगद राय की पहचान करने के बाद ही घोड़े ने उन्हें छत्रसाल के शिविर में जाने दिया। स्वस्थ होने पर छत्रसाल ने अपने घोड़े को भले भाई’ की उपाधि दी।

(च) छत्रपति शिवाजी ने वीर छत्रसाल को कैसे प्रेरित किया ?
उत्तर
छत्रपति शिवाजी ने वीर छत्रसाल को स्वाधीनता का मंत्र और अपनी तलवार देकर बुन्देलखण्ड को स्वतंत्र कराने के लिए प्रेरित किया।

(छ) वीर छत्रसाल ने अपनी सेना कैसे तैयार की?
उत्तर
वीर छत्रसाल के पास साधनों का घोर अभाव था। संगी-साथी भी कम ही थे। उन्होंने अपनी माता के आभूषणों को बेचकर पाँच घोड़ों और पच्चीस सैनिकों की एक छोटी-सी सेना तैयार की। उनकी इस सेना में सभी वर्गों के लोग थे।

(ज) स्वामी प्राणनाथ ने महाराजा छत्रसाल को आशीर्वाद देते हुए क्या कहा ?
उत्तर
स्वामी प्राणनाथ ने छत्रसाल को आशीर्वाद देते हुए कहा
“छत्ता तेरे राज में, धक-धक धरती होय। जित-जित घोड़ा मुख करे, तित-तित फतै होय॥”

(झ) महाराजा छत्रसाल की शासन व्यवस्था का वर्णन कीजिए।
उत्तर
महाराजा छत्रसाल ने प्रजा की सुख-शान्ति और समृद्धि के लिए अनेक प्रयास किए। उन्होंने न्याय व्यवस्था को सरल बनाने के लिए पंचायती व्यवस्था की स्थापना की। वे अपराधियों को कठोर दण्ड देते थे। जिससे उनके राज्य में अपराध होना कम हो गए। उनके राज्य में बच्चे, बूढ़े और महिलाएँ निर्भीकतापूर्वक कहीं भी आ-जा सकते थे।

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प्रश्न 2.
खाली स्थान भरिए

(क) महाराजा छत्रसाल ने ………… में ‘भले भाई’ का स्मारक बनवाया।
(ख) बुन्देलखण्ड की ………… भूमि भी इस संग्राम से अछूती नहीं थी।
(ग) स्वामी प्राणनाथ ………… के गुरु थे।
(घ) छत्रपति शिवाजी ने ……….. का मंत्र दिया।
(ङ) वीर छत्रसाल ने अपने दुश्मनों के …….दिए।
उत्तर
(क) धुबेला
(ख) वीर प्रसूता
(ग) महाराजा छत्रसाल
(घ) स्वाधीनता
(ङ) बके छुड़ा।

प्रश्न 3.
दिए गए उत्तरों में से सही उत्तर छाँटकर लिखिए
(क) महाराजा छत्रसाल ने पालकी में लगाकर सम्मान बढ़ाया:
(अ) भूषण का
(ब) जगनिक का
(स) सेनापति का।
उत्तर
(अ) भूषण का

(ख) महाराजा छत्रसाल की समाधि स्थित है:
(अ) पन्ना में
(ब) धुबेला में
(स) महेबा में।
उत्तर
(ब) धुबेला में

(ग) वीर छत्रसाल का जन्म हुआ था :
(अ) मोर पहाड़ी पर
(ब) गोर पहाड़ी पर
(स) मड़ोर पहाड़ी पर।
उत्तर
(अ) मोर पहाड़ी पर

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भाषा अध्ययन

प्रश्न 1.
निम्नलिखित शब्दों को वाक्य में प्रयोग कीजिए
स्वाधीन, सम्मान, समृद्धि, शौर्य, ओज, निर्भय, चुनौती, उत्तरदायी।
उत्तर
(क) स्वाधीन-छत्रसाल ने स्वाधीन पन्ना राज्य की स्थापना की।
(ख) सम्मान-छत्रसाल के दरबार में कवियों को पूरा सम्मान मिलता था।
(ग) समृद्धि-छत्रसाल ने प्रजा की सुख-शान्ति और समृद्धि के लिए अनेक प्रयत्न किए।
(घ) शौर्य-बुन्देलखण्ड में आज भी छत्रसाल की शौर्य और वीरता के गीत गाए जाते हैं।
(ङ) ओज-धुबेला में स्थित छत्रसाल का समाधिस्थल आज भी उनके शौर्य और ओज का स्मरण करा रहा है।
(च) निर्भय-छत्रसाल के राज्य में सभी लोग निर्भय होकर रहते थे।
(छ) चुनौती-छत्रसाल ने मुगलों को चुनौती देते हुए अपनी मातृभूमि की रक्षा के लिए युद्ध किया।
(ज) उत्तरदायी-छत्रसाल ने अपने माता-पिता की मृत्यु के उत्तरदायी विश्वासघातियों को दण्डित किया।

प्रश्न 2.
‘प्र’ उपसर्ग लगाकर बनने वाले तीन शब्द लिखिए।
उत्तर

  1. प्रसूता
  2. प्रहार
  3. प्रसाद।

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प्रश्न 3.
निम्नलिखित शब्दों में आए मूल शब्द और प्रत्यय शब्दांश को अलग-अलग लिखिए
वीरता, अछूती, जागीरदार, मार्मिक, उत्तरदायी।
उत्तर
(क) वीरता – वीर + ता
(ख) अछूती – अछूत + ई
(ग) जागीरदार – जागीर + दार
(घ) मार्मिक – मर्म + इक
(ङ) उत्तरदायी – उत्तर + दाई।

प्रश्न 4.
निम्नलिखित वाक्यों को उनके सामने दिए गए काल के अनुसार बदलिए
(क) महाराज छत्रसाल का समाधिस्थल उनके शौर्य का स्मरण दिला रहा है। (भविष्यकाल)
(ख) वे भारत के वीर सपूत थे। (वर्तमानकाल)
(ग) शत्रु सैनिक जान बचाकर भागे। (भूतकाल)
उत्तर
(क) महाराजा छत्रसाल का समाधिस्थल उनके शौर्य का स्मरण दिलाएगा।
(ख) वे भारत के वीर सपूत हैं।
(ग) शत्रु सैनिक जान बचाकर भाग गए ।

प्रश्न 5.
संधि विच्छेद कीजिएअत्याचार, स्वाधीन, इच्छानुसार, आत्मोत्सर्ग, सहायतार्थ।
उत्तर
(क) अत्याचार = अति + आचार।
(ख) स्वाधीन = स्व + आधीन।
(ग) इच्छानुसार = इच्छा + अनुसार।
(घ) आत्मोत्सर्ग = आत्मा + उत्सर्ग।
(ङ) सहायतार्थ = सहायता + अर्थ।

प्रश्न 6.
निम्नलिखित मुहावरों का अर्थ लिखिए और वाक्य में प्रयोग कीजिए
दो-दो हाथ करना, छक्के छुड़ाना, नाकों चने चबाना, लोहा लेना।
उत्तर
(क) दो-दो हाथ करना – मुकाबला करना। वाक्य प्रयोग-छत्रसाल मुगलों से दो-दो हाथ करने से पहले उनकी रणनीति समझना चाहते थे।
(ख) छक्के छुड़ाना – निरुत्साह करना। वाक्य प्रयोग-देवगढ़ के युद्ध में छत्रसाल ने दुश्मन के छक्के छुड़ा दिए।
(ग) नाकों चने चबाना – तंग करना। वाक्य प्रयोग-छत्रसाल ने मुगल सत्ता को नाकों चने चबाने के लिए विवश कर दिया था।
(घ) लोहा लेना – युद्ध करना, लड़ना। वाक्य प्रयोग-वीर दुर्गादास राठौर मुगल सत्ता को चुनौती देकर अपनी मातृभूमि की रक्षा के लिए लोहा ले रहे थे।

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प्रश्न 7.
निम्नलिखित शब्दों के अर्थ शब्दकोश से खोजकर लिखिए
प्रसूता, धरोहर, अस्त्र, शस्त्र, क्षति, ललकार, आत्मोत्सर्ग, पारावार, स्मारक, सिपहसालार, आधिपत्य, प्रजावत्सल, फत्तै (फतह), राजी, रैयत, ताजी, बार, बाँकौ।
उत्तर
‘शब्दकोश’ शीर्षक का अवलोकन करें।

बुन्देलखण्ड केशरी-महाराजा छत्रसाल परीक्षोपयोगी गद्यांशों की व्याख्या

1. देवगढ़ विजय में छत्रसाल के पुरुषार्थ को कोई महत्व नहीं दिए जाने पर छत्रसाल ने राजा जयसिंह का साथ छोड़ दिया। अब छत्रसाल का उद्देश्य भी पूरा हो गया था। उनका अगला ध्येय अपनी मातृभूमि से मुगलों के आधिपत्य को समाप्त करना था। इस कार्य में सफलता पाने के लिए छत्रसाल ने छत्रपति शिवाजी से भेंट की। छत्रपति ने उन्हें स्वाधीनता का मंत्र और अपनी तलवार देकर बुन्देलखण्ड में स्वतंत्रता का अलख जगाने भेज दिया।

सन्दर्भ-प्रस्तुत गद्यांश हमारी पाठ्य पुस्तक ‘भाषा भारती’ के ‘बुन्देलखण्ड केसरी-महाराजा छत्रसाल’ नामक पाठ से अवतरित है। यह एक संकलित रचना है।

प्रसंग-प्रस्तुत गद्यांश में महाराजा छत्रसाल द्वारा मुगलों के चंगुल से अपनी मातृभूमि को स्वतंत्र कराने के उद्देश्य से छत्रपति शिवाजी से भेंट करने का वर्णन किया गया है।

व्याख्या-जयपुर के राजा जयसिंह की सेना में छत्रसाल एक वीर योद्धा थे। उन्होंने राजा जयसिंह के साथ अनेक युद्धों में भाग लिया एवं अपनी वीरता का परिचय दिया। देवगढ़ की विजय में भी छत्रसाल ने बड़ी बहादुरी का परिचय देते हुए युद्ध किया और देवगढ़ पर विजय प्राप्त की। परन्तु राजा जयसिंह द्वारा छत्रसाल की वीरता एवं बहादुरी को कोई महत्व न दिए जाने के कारण छत्रसाल ने राजा जयसिंह का साथ छोड़ दिया। वैसे भी जिस उद्देश्य के लिए छत्रसाल राजा जयसिंह की सेना में सम्मिलित हुए थे, वह उद्देश्य अब पूरा हो गया था। अब उनका अगला उद्देश्य मुगलों के चंगुल से अपनी मातृभूमि को स्वतंत्र कराना था। परन्तु यह कार्य इतना आसान नहीं था। इस उद्देश्य में सफलता प्राप्त करने के लिए उनका छत्रपति शिवाजी से मिलना और उनका मार्गदर्शन प्राप्त करना आवश्यक था। अतः छत्रसाल ने शिवाजी महाराज से भेंट की। भेंट होने पर शिवाजी ने छत्रसाल को स्वतंत्रता प्राप्त करने हेतु मंत्र दिया और अपनी तलवार उन्हें उपहारस्वरूप देकर स्वतंत्रता की ज्योति जलाने के लिए भेज दिया।

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2. स्वतंत्र पन्ना की स्थापना और राज्य विस्तार के बाद उन्होंने प्रजा की सुख-शान्ति और समृद्धि के लिए प्रयत्न किए। स्वामी प्राणनाथ के निर्देश पर पन्ना राज्य में हीरों की खदानों की खोज करवाई। उन्होंने न्याय व्यवस्था को सरल बनाने के लिए पंचायती व्यवस्था स्थापित की। वे अपराधियों को कठोर दण्ड देते थे जिससे उनके राज्य में अपराध होना कम हो गए। उनके शान्ति पूर्ण राज्य में बच्चे-बूढ़े और स्त्रियाँ निर्भीकतापूर्वक कहीं भी आ-जा सकते थे। महाराज छत्रसाल जैसे तलवार के धनी थे वैसे ही कशल और प्रजावत्सल शासक भी

सन्दर्भ-पूर्व की तरह।

प्रसंग-प्रस्तुत गद्यांश में महाराजा छत्रसाल की शासन व्यवस्था का प्रभावपूर्ण वर्णन किया गया है।

व्याख्या-महाराजा छत्रसाल द्वारा स्वतंत्र राज्य की स्थापना करने और अपने राज्य का विस्तार करने के बाद अपनी प्रजा की सुख-शान्ति तथा समृद्धि के अनेक प्रयास किए गए। अपने गुरु राज्य में अपराध होना कम हो गए। उनके शान्ति पूर्ण राज्य में बच्चे-बूढ़े और स्त्रियाँ निर्भीकतापूर्वक कहीं भी आ-जा सकते थे। महाराज छत्रसाल जैसे तलवार के धनी थे वैसे ही कशल और प्रजावत्सल शासक भी

सन्दर्भ-पूर्व की तरह।

प्रसंग-प्रस्तुत गद्यांश में महाराजा छत्रसाल की शासन व्यवस्था का प्रभावपूर्ण वर्णन किया गया है।

व्याख्या-महाराजा छत्रसाल द्वारा स्वतंत्र राज्य की स्थापना करने और अपने राज्य का विस्तार करने के बाद अपनी प्रजा की सुख-शान्ति तथा समृद्धि के अनेक प्रयास किए गए। अपने गुरु स्वामी प्राणनाथ के आदेश पर छत्रसाल ने पन्ना राज्य में हीरों की खदानों की खोज का काम शुरू किया। महाराजा छत्रसाल ने अपने राज्य में न्याय व्यवस्था को आसान बनाने के लिए पंचायती व्यवस्था की स्थापना की। उनके राज्य में अपराधियों को कठोर दण्ड दिया जाता था जिसके फलस्वरूप राज्य में अपराधों की संख्या बहुत कम हो गई थी। उनके राज्य में प्रजा सुखी थी, बच्चे, बूढ़े और महिलाएं बिना किसी भय के स्वतंत्रतापूर्वक कहीं भी आ-जा सकते थे। महाराजा छत्रसाल जिस प्रकार एक कुशल योद्धा थे उसी प्रकार वह शासन व्यवस्था में भी निपुण एवं पारंगत थे। वे अपनी प्रजा के सुख का ध्यान रखने वाले शासक थे।

बुन्देलखण्ड केशरी-महाराजा छत्रसाल शब्दकोश

प्रसूता = जन्म देने वाली; धरोहर = अमानत, धाती, पूर्वजों से प्राप्त सांस्कृतिक विरासत; अस्त्र = हाथ से चलाने वाले हथियार; शस्त्र = फेंक कर चलाने वाले हथियार; क्षति = हानि; ललकार = चुनौती देना; आत्मोत्सर्ग = स्वयं का बलिदान; पारावार = असीम; स्मारक = स्मरण हेतु बनाई गई कोई रचना;
सिपहसालार = सेनापति; आधिपत्य = अधिकार; प्रजावत्सल = प्रजा से पुत्रवत प्रेम करने वाला; फत्तै (फतह) = जीत, विजय; राजी = प्रसन्न, सुखी;  रैयत = प्रजा; ताजी = सजग; चुस्त = दुरुस्त; बार = बाल; बाँकी = टेढ़ा।

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MP Board Class 7th Hindi Bhasha Bharti Solutions Chapter 23 कर्तव्य पालन

MP Board Class 7th Hindi Bhasha Bharti Solutions Chapter 23 कर्तव्य पालन

MP Board Class 7th Hindi Bhasha Bharti Chapter 23 पाठ का अभ्यास

बोध प्रश्न

प्रश्न 1.
निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर दीजिए

(क) कृष्ण ने अर्जुन को उपदेश कब दिया था ?
उत्तर
कुरुक्षेत्र के मैदान में जब अर्जुन युद्ध करने से पीछे हट रहा था तब श्रीकृष्ण ने उन्हें अपने कर्तव्यपथ पर डटे रहने के लिए उपदेश दिया था।

(ख) अर्जुन करुणा से क्यों भर उठते हैं?
उत्तर
कुरुक्षेत्र में युद्ध के मैदान में जब अर्जुन दोनों सेनाओं की ओर दृष्टि डालते हैं और वहाँ अपने ताऊ, दादा, मामा, भाई, पुत्र, मौसा, मित्र, गुरु तथा सुहृदयों आदि को देखते हैं तो उनका मन करुणा से भर उठता है।

(ग) अपने स्वजनों को युद्धभूमि में देखकर अर्जुन की क्या दशा हुई?
उत्तर
युद्ध के मैदान में अपने स्वजनों को सामने देखकर अर्जुन का बहुत बुरा हाल हुआ। उसका गला सूख गया। उसके पूरे शरीर में कम्पन्न होने लगा। उसके हाथ में थमा उसका प्रिय धनुष गाण्डीव गिर गया। उसके मन में भ्रम उत्पन्न हो गया। उसमें युद्ध के मैदान में खड़े रहने तक की शक्ति नहीं बची। उसके मन में अनायास अपनों के प्रति मोह उत्पन्न हो गया और उसने श्रीकृष्ण के सामने युद्ध न लड़ने की बात कही।

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(घ) अर्जुन युद्ध क्यों नहीं करना चाहता था ?
उत्तर
युद्ध के मैदान में दोनों सेनाओं की ओर दृष्टि डालने पर जब अर्जुन ने देखा कि दोनों ओर उसके परिजन एवं प्रियजन खड़े हैं तो उसका मन करुणा से भर गया और उसने श्रीकृष्ण के समक्ष युद्ध न करने की इच्छा व्यक्त की।

(छ) हम सुख-दुःख के बंधन से मुक्त कैसे हो सकते
उत्तर
हम सुख और दुःख दोनों स्थितियों में एकसमान रहकर सुख-दु:ख के बंधन से मुक्त हो सकते हैं।

(च) पाप-पुण्य के भ्रम से निकलने के लिए गुरुजी ने क्या उपाय बताया ? .
उत्तर
गुरुजी के अनुसार मनुष्य को कभी भी पाप-पुण्य के भ्रम में नहीं पड़ना चाहिए। पाप-पुण्य के भ्रम से निकलने के लिए उपाय बताते हुए गुरुजी ने कहा कि अतीत में किये गये पापों का अँधेरा पुण्य के एक ही कार्य से दूर हो जाता है।

प्रश्न 2.
निम्नलिखित पंक्तियों का अर्थ अपने शब्दों में लिखिए

(क) “कर्मण्येवाधिकारस्ते मा फलेषु कदाचन”।
उत्तर
श्रीकृष्ण कहते हैं कि हे मानव ! तुझे केवल कर्म करने का अधिकार है, उसका फल प्राप्त करने का कभी नहीं है। इसलिए मोह-माया को त्यागकर तू केवल अपने कर्म को कर, फल की इच्छा त्याग दे।

(ख) सुख और दुःख दोनों ही हमें बंधन में डालते हैं।
उत्तर
यह बिल्कुल ठीक है कि सुख और दुःख दोनों ही हमें बंधन में डालते हैं क्योंकि जब हमें सुख मिलता है तो हम इस चिन्ता में पड़ जाते हैं कि कहीं यह सुख हमसे छिन न जाये और जब हम दुःख में नहीं भी होते हैं तब भी इस चिन्ता में रहते हैं कि कहीं दु:ख न आ जाये। यही वह बंधन है जिससे हम मुक्त नहीं हो पाते हैं।

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प्रश्न 3.
रिक्त स्थानों की पूर्ति कीजिए

(क) युद्ध में तू प्राणों का उत्सर्ग कर ……….. को प्राप्त होगा।
(ख) तेरा यह आचरण किसी ………. पुरुष का आचरण नहीं है।
(ग) आपने मेरे मन से अज्ञानरूपी अंधकार का नाश
कर ज्ञान रूपी ……….” फैलाया है।
उत्तर
(क) स्वर्ग
(ख) श्रेष्ठ
(ग) प्रकाश

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प्रश्न 1.
शुद्ध वर्तनी छाँटिए

(क) कुरूक्षेत्र कुरुक्षेत्र कुरुछेत्र
(ख) पश्चात पशचात पश्चिात
(ग) निशचित निचित निश्चित
(घ) सामर्थ सामर्थ्य सामरथ्य
उत्तर
(क) कुरुक्षेत्र
(ख) पश्चात
(ग) निश्चित
(घ) सामर्थ्य।

प्रश्न 2.
दी गई वर्ग पहेली में से नीचे दिए गए शब्दों के विलोम शब्द छाँटिए
अंधकार, कर्म, अनिश्चय, लाभ, बंधन, ज्ञान, पुण्य।
उत्तर
अंधकार-प्रकाश, कर्म-अकर्म, अनिश्चयनिश्चय, लाभ-हानि, बंधन-मुक्त, ज्ञान-अज्ञान, पुण्य-पाप।

प्रश्न 3.
‘एकांकी’ में आए योजक चिह्न वाले शब्द छाँटकर लिखिए।
उत्तर
बात-चीत, माता-पिता, कृष्ण-अर्जुन, मेज-कुर्सी, धर्म-अधर्म, निश्चय-अनिश्चय, सुख-दुःख, कर्म-अकर्म, आमने-सामने, बंधु-बांधवों, पाप-पुण्य, जय-पराजय, लाभ-हानि, मोह-माया, क्या-क्या, अपने-अपने।

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प्रश्न 4.
दिए गए सामासिक पदों का विग्रह कीजिएपितृभक्त, सूत्रधार, सत्यवादी, युद्धारंभ, भगवद्गीता।।
उत्तर
पितभक्त =पिता का भक्त, सुत्रधार = सूत्र का धारक, सत्यवादी- सत्य का वादक (बोलने वाला), युद्धारंभ = युद्ध का आरम्भ, भगवद्गीता = भगवान की गीता।

प्रश्न 5.
दिए गए शब्दों में से तत्सम एवं तद्भव शब्द छाँटकर अलग कीजिए
वृक्ष, इच्छा, कर्त्तव्य, नमस्ते, सच, माता, अभिनय, मुंह।
उत्तर
तत्सम शब्द – वृक्ष, इच्छा, कर्तव्य, अभिनय।
तद्भव शब्द – नमस्ते, सच, माता, मुंह।

प्रश्न 6.
‘ही’ निपात के प्रयोग वाले वाक्य एकांकी से छाँटकर लिखिए।
उत्तर

  1. तेरा यह आचरण किसी श्रेष्ठ पुरुष का आचरण नहीं है और न ही तेरी कीर्ति को बढ़ाने वाला
  2. लेकिन केशव ! अपने ही बंधु-बांधवों से युद्ध कर न तो मैं विजय चाहता हूँ, न राज्य और न ही सुख।
  3. इसलिए इस विषय में तू व्यर्थ ही शोक कर रहा है।
  4. मैं रणभूमि में किस प्रकार भीष्म पितामह और द्रोणाचार्य के विरुद्ध लडूंगा? ये दोनों ही मेरे पूजनीय
  5. अपने ही गुरुजनों और बंधु-बांधवों का वधकर मेरा किसी भी प्रकार कल्याण नहीं होगा।
  6. बुद्ध में अपने ही स्वजनों का वध कर मुझे क्या फल मिलेगा?
  7. सुख और दुःख दोनों ही हमें बंधन में डालते हैं।
  8. उसी प्रकार अतीत में किये गये पापों का पुण्य अँधेरा पुण्य के एक ही कार्य से दूर हो जाता है।
  9. जब फल की इच्छा ही नहीं होगी तो हम कर्म क्यों करेंगे?
  10. तब तो कोई भी व्यक्ति न तो वृक्ष लगाता और न ही हमें उसके फल खाने को मिलते।

प्रश्न 7.
‘ईय’ प्रत्यय लगाकर शब्द बना है ‘पूजनीय’। इसी प्रकार के पाँच अन्य शब्द लिखिए।
उत्तर
शोभनीय, दर्शनीय, कल्पनीय, माननीय, । उल्लेखनीय।

कर्तव्य पालन परीक्षोपयोगी गद्यांशों की व्याख्या

1. मैं हूँसूत्रधार। आज मैं धर्म-अधर्म, निश्चय-अनिश्चय, सुख-दुख, कर्म-अकर्म आदि की ओर संकेत करने वाले एक ऐसे प्रसंग से आपका साक्षात्कार कराने जा रहा हूँ जिसने ‘श्रीमद्भगवद्गीता’ को जन्म दिया। कुरुक्षेत्र के मैदान में कौरव और पाण्डव की सेनाएँ युद्ध के लिए आमने-सामने खड़ी हैं। युद्धारम्भ के लिए शंखनाद हो चुका है।

सन्दर्भ-प्रस्तुत पंक्तियाँ ‘कर्त्तव्यपालन’ नामक पाठ से अवतरित हैं। इसकी रचयिता डॉ. छाया पाठक हैं।

प्रसंग-कुरुक्षेत्र के मैदान पर युद्ध के आरम्भ होने से पूर्व के दृश्य का वर्णन है।

व्याख्या-सूत्रधार के रूप में काल कुरुक्षेत्र के युद्धकाल का वर्णन करते हुए कहता है कि वह महाभारत युद्ध के एक ऐसे प्रसंग के बारे में बताना चाहता है जिसके कारण महान धर्म-ग्रन्थ ‘गीता’ की रचना हुई। महाभारतकाल का यह प्रसंग मानव के समक्ष अक्सर आने वाली विभिन्न विकट स्थितियों, जैसे-धर्म-अधर्म, निश्चय-अनिश्चय, सुख-दुख, कर्म-अकर्म आदि के समाधान हेतु एक मार्गदर्शक की-सी भूमिका निभाता है। कुरुक्षेत्र की रणभूमि में लड़ाई शुरू होने वाली है, बिगुल बज चुका है। एक ओर कौरवों की विशाल सेना खड़ी होती है तो दूसरी ओर पाण्डवों की सेना मोर्चा लिए हुए है।

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2. हे कृष्ण! अपने इन प्रियजनों को देखकर तो मेरा मुख सूखा जा रहा है। मेरे शरीर में कंप और रोमांच हो रहा है। हाथ से गाण्डीव धनुष गिर रहा है। मेरा मन
भी भ्रमितसा हो रहा है। मुझमें यहाँ खड़े रहने का भी सामर्थ्य नहीं है। इसलिए मैं युद्ध नहीं करना चाहता।

सन्दर्भ-पूर्व की तरह।

प्रसंग-कुरुक्षेत्र के मैदान में अर्जुन श्रीकृष्ण के समक्ष युद्ध लड़ने में अपनी असमर्थता व्यक्त कर रहा है।

व्याख्या-कुरुक्षेत्र के मैदान में श्रीकृष्ण अर्जुन के रथ को दोनों सेनाओं के बीचोबीच खड़ा कर देते हैं। दुश्मन सेना पर जैसे ही अर्जुन दृष्टि डालता है तो अपने नाते-रिश्तेदारों, परिजनों, शुभचिन्तकों इत्यादि को सामने देख उसके होश उड़ जाते हैं। वह श्रीकृष्ण के सम्मुख युद्ध न करने की बात कहता है। वह कहता है कि अपनों के विरुद्ध युद्ध लड़ने की सोचने मात्र से उसके शरीर में कँपकँपी छूट रही है। उसके हाथ से उसका प्रिय धनुष गाण्डीव भी छूटा जा रहा है। अपनों को सामने खड़ा देखकर उसका मन भ्रमित हो रहा है। उसमें तो मैदान में खड़ा रहने तक की शक्ति नहीं रह गई है। वह श्रीकृष्ण से कहता है कि वह इन परिस्थितियों में युद्ध नहीं करना चाहता।

कर्तव्य पालन शब्दकोश

आतुर = उतावला, अधीर, उत्सुक; तीर्थाटन = तीर्थयात्रा; सामर्थ्य = क्षमता, ताकत; जिज्ञासा = उत्सुकता; आचरण = व्यवहार; संशय = आशंका/संदेह;  उत्सर्ग = आत्म बलिदान दुविधा = अनिर्णय, अंतर्द्वन्द्व।

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MP Board Class 7th Hindi Bhasha Bharti Solutions Chapter 22 महाराजा श्री अग्रसेन

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MP Board Class 7th Hindi Bhasha Bharti Chapter 22 पाठ का अभ्यास

बोध प्रश्न

प्रश्न 1.
निम्नांकित प्रश्नों के उत्तर लिखिए

(क) महाराजा अग्रसेनजी का जन्म कब और कहाँ हुआ?
उत्तर
महाराजा अग्रसेनजी का जन्म आज से 5125 वर्ष पूर्व आश्विन शुक्ल प्रतिपदा को हरियाणा राज्य के हिसार जिले के प्रताप नगर में हुआ था। उनके पिता का नाम महाराजा वल्लभ था।

(ख) अग्रवाल समाज के प्रवर्तक कौन थे तथा इस समाज के कितने गोत्र प्रचलित हैं ?
उत्तर
महाराजा श्री अग्रसेनजी अग्रवाल समाज के प्रवर्तक थे। इस समाज के 18 गोत्र प्रचलित हैं।

(ग) महाराजा अग्रसेन ने राज्य में किस परिपाटी का चलन प्रारम्भ किया ?
उत्तर
महाराजा अग्रसेन ने एक परिपाटी बनाई थी कि यदि कोई व्यक्ति उनके अग्रोहा राज्य में आकर बसता है, तो प्रत्येक व्यक्ति परिवार उसे एक ईंट और एक रुपया देगा।

(घ) अग्रसेनजी के राज्य में लोकतान्त्रिक शासन व्यवस्था कैसे बनाई गई ?
उत्तर
महाराजा अग्रसेन ने अपने राज्य में सुव्यवस्था बनाए रखने हेतु 18 गणराज्य बनाए। प्रत्येक गणराज्य से एक-एक निर्वाचित प्रतिनिधि होता था। ये प्रतिनिधि शासन परिषद के सदस्य होते थे। इनके परामर्श से ही राज्य का शासन चलता था।

(ङ) महाराजा अग्रसेन ने पशुबलि प्रथा क्यों बन्द की ?
उत्तर
स्वभाव से धार्मिक महाराजा श्री अग्रसेन को यज्ञों से बहुत लगाव था। उस समय यज्ञों में पशुबलि की कुप्रथा प्रचलित थी। उन्होंने सोचा कि यज्ञ जैसे पवित्र कार्य में पशुबलि क्यों? वे हिंसा को दुष्कर्म और घोर पाप मानते थे। वे कहते थे कि यदि हम किसी को जीवनदान नहीं दे सकते तो हमें किसी के प्राण लेने का कोई अधिकार नहीं है। अतः उन्होंने पशुबलि प्रथा पर रोक लगा दी।

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प्रश्न 1.
पाठ में से संयोजक चिह्न वाले शब्द छाँटकर लिखिए। जैसे-देख-समझकर।
उत्तर
प्रस्तुत पाठ में प्रयुक्त संयोजक चिह्न वाले शब्द हैं-अपना अपना, अपनी-अपनी, ऊँच-नीच, जाति-पाँति, एक-एक, बड़े-बड़े, जन-जन, सोने-चाँदी इत्यादि।

प्रश्न 2. निम्नलिखित मुहावरों का वाक्यों में प्रयोग कीजिए
पाठ पढ़ाना, आमादा रहना, नींव रखना, पेट पालना, लकीर के फकीर, कूपमण्डूक।
उत्तर
(क) पाठ पढ़ाना-रानी लक्ष्मीबाई ने अपनी वीरता से अंग्रेजों को युद्ध-कौशल का अच्छा पाठ पढ़ाया।
(ख) आमादा रहना-वीरू की क्या कहें दरोगा जी ? वह तो सदैव लड़ने पर आमादा रहता है।
(ग) नींव रखना-1857 के गदर ने भारतीय स्वतन्त्रता संग्राम की नींव रखी।
(घ) पेट पालना-महँगाई के इस समय में गरीब के लिए अपना पेट पालना किसी चुनौती से कम नहीं है।
(ङ) लकीर के फकीर-लकीर के फकीर बने रहने से कुछ नहीं होगा। हमें समय के साथ बदलना सीखना होगा।
(च) कूपमण्डूक-हम अपनी उन्नति का खुद कितना ही विंदोरा क्यों न पीटें ? लेकिन दुनिया के परिदृश्य में हमारी स्थिति कूपमण्डूक जैसी ही है।

प्रश्न 3.
निम्नांकित शब्दों की वर्तनी शुद्ध करके लिखिए
अव्यवस्थीत, आर्दश, नीवार्चित, लक्ष्मि, अननय, वेश्य, दुस्कर्म, सहनूभूति।
उत्तर
अव्यवस्थित, आदर्श, निर्वाचित, लक्ष्मी, अनुनय, वैश्य, दुष्कर्म, सहानुभूति।

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महाराजा श्री अग्रसेन परीक्षोपयोगी गद्यांशों की व्याख्या

1. देवभूमि भारत को अवतारों की क्रीड़ास्थली कहा जाता है। इस पवित्र भूमि में भगवान श्रीराम, योगीराज श्रीकृष्ण, महात्मा बुद्ध, महावीर स्वामी और गुरु नानक जैसे महापुरुषों ने जन्म लिया। इसी पावन धरती में एक ऐसे ही महामानव का जन्म हुआ, जिसने समूची मानवता को सर्वप्रथम समाजवाद का पाठ पढाया। वह महान विभूति थे अग्रोहा नरेश महाराजा श्री अग्रसेन।

सन्दर्भ-प्रस्तुत गद्यांश ‘महाराजा अग्रसेन’ नामक पाठ से अवतरित है। यह एक संकलित रचना है।

प्रसंग-इन पंक्तियों में समय-समय पर भारतभूमि पर पैदा होने वाले महापुरुषों का वर्णन किया गया है।

व्याख्या-विश्व में अपने धर्मों, रीति-रिवाजों, भाषाओं, बोलियों एवं पहनावों के लिए सुप्रसिद्ध भारतभूमि जिसे देवभूमि भी कहा जाता है, सदैव से ही अनेक महापुरुषों की जन्मस्थली रही है। किसी ने ठीक ही कहा है कि इस पवित्र भूमि पर जन्म लेने के लिए मानव तो क्या ईश्वर तक लालायित रहते हैं। यह वही गौरवशाली भूमि है जिसने भगवान श्रीराम. योगीराज श्रीकृष्ण, महात्मा बुद्ध, महावीर स्वामी और गुरु नानक जैसे अनेक महापुरुषों को अपनी कोख से जन्म दिया है। इसी पावन भूमि पर एक ऐसे महान व्यक्ति का जन्म हुआ जिसने सम्पूर्ण मानव जाति को सबसे पहले समाजवाद का पाठ पढ़ाया। वह महामानव थे अग्रोहा नामक नगर के राजा महाराजा श्री अग्रसेन।

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MP Board Class 7th Hindi Bhasha Bharti Solutions Chapter 20 महान् वैज्ञानिक : डॉक्टर चन्द्रशेखर वेंकटरमण

MP Board Class 7th Hindi Bhasha Bharti Solutions Chapter 20 महान् वैज्ञानिक : डॉक्टर चन्द्रशेखर वेंकटरमण

MP Board Class 7th Hindi Bhasha Bharti Chapter 20 पाठ का अभ्यास

बोध प्रश्न

प्रश्न 1.
निम्नांकित प्रश्नों के उत्तर दीजिए

(क) चन्द्रशेखर वेंकटरमण का जन्म कब और कहाँ हुआ था?
उत्तर
चन्द्रशेखर वेंकटरमण का जन्म 7 नवम्बर सन् 1888 ई. में दक्षिण भारत में तिरुचिरापल्ली नगर में हुआ था।

(ख) डॉक्टर रमण की विज्ञान के क्षेत्र में ख्याति फैलने की सबसे पहली घटना का उल्लेख कीजिए।
उत्तर
उच्च शिक्षा समाप्त करने के उपरान्त रमण ने लेखा विभाग की प्रतियोगी परीक्षा दी। परीक्षा में सफलता हेतु उन्होंने विज्ञान का विद्यार्थी होते हुए भी इतिहास, राजनीतिशास्त्र, संस्कृत आदि नए विषयों का अध्ययन किया। इस परीक्षा में भी उन्होंने प्रथम स्थान प्राप्त किया। उनकी नियुक्ति भारत सरकार के सहायक महालेखापाल के पद पर कलकत्ता में हो गई।

(ग) ‘लेनिन शान्ति पुरस्कार’ प्राप्त करते समय डॉ. रमण ने क्या कहा था ?
उत्तर
‘लेनिन शान्ति पुरस्कार’ प्राप्त करते समय डॉ. रमण ने कहा था-“मैंने अपने ज्ञान का उपयोग सैनिक कार्यों के लिए कभी नहीं किया। मैंने हमेशा यही कोशिश की है कि मेरी खोजों का इस्तेमाल रचनात्मक कार्यों में हो और इससे मानव जाति का कल्याण हो।”

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(घ) “राष्ट्रीय विज्ञान दिवस” कब और क्यों मनाया जाता है ?
उत्तर
‘रमण-प्रभाव’ की खोज 28 फरवरी, सन् 1928 ई. में हुई थी। इसलिए इस महान् घटना की याद में 28 फरवरी को ‘राष्ट्रीय विज्ञान-दिवस’ के रूप में मनाया जाता है।

(ङ) डॉ. रमण की क्या अभिलाषा थी?
उत्तर
डॉ. रमण की अभिलाषा थी कि हमारा देश वैज्ञानिक खोजों के मामले में अपने पैरों पर खड़ा हो जाये और हमें विदेशों का मुँह न ताकना पड़े।

प्रश्न 2.
सही विकल्प को चुनकर लिखिए

(क) डॉ. रमण को भौतिक विज्ञान का ‘नोबल पुरस्कार’ दिया गया
(अ) सन् 1914 ई. में
(ब) सन् 1930 ई. में
(स) सन् 1931 ई. में
(द) सन् 1920 ई. में।
उत्तर
(ब) सन् 1930 में

(ख) सन् 1954 ई. में भारत सरकार ने डॉ. रमण को उपाधि देकर सम्मानित किया
(अ) पद्म श्री
(ब) डॉक्टर ऑफ साइन्स
(स) भारत रत्न
(द) पद्म विभूषण।
उत्तर
(स) भारत रल

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(ग) डॉ. रमण प्रकाश सम्बन्धी खोज के विषय में गए थे-
(अ) न्यूयार्क
(ब) अमेरिका
(स) मास्को
(द) कनाडा।
उत्तर
(द) कनाडा

(घ) ‘रमण-प्रभाव’ की खोज हुई थी
(अ) 28 फरवरी, 1928 को
(ब) 28 फरवरी, 1931 को
(स) 28 फरवरी, 1911 को
(द) 28 फरवरी, 1930 को।
उत्तर
(अ) 28 फरवरी, 1928 को

(ङ) डॉ. रमण का पार्थिव शरीर पंच तत्व में विलीन हो गया
(अ) 24 नवम्बर, 1970 ई. को
(ब) 21 नवम्बर, 1970 ई. को
(स) 21 अक्टूबर, 1970 ई. को
(द) 21 दिसम्बर, 1970 ई. को।
उत्तर
(ब) 21 नवम्बर, 1970 ई. को।

भाषा अध्ययन

प्रश्न 1. सही शब्दों के सामने (✓) सही का चिन्ह लगाइए
(क) शिक्षा, सिछा, सीक्षा, शीछा।
(ख) आविश्कार, आविस्कार, आविष्कार, आवीष्कार
(ग) अनुशंधान, अनुसंधान, अनुसंधान, अनुसधांन
(घ) आसुतोष, आशुतोश, आशुतोष, आसूतोश।
(ङ) पुरुस्कार, पुरस्कार, पूरस्कार, पुरस्कार।
उत्तर
(क) शिक्षा
(ख) आविष्कार
(ग) अनुसंधान
(घ) आशुतोष
(ङ) पुरस्कार।

प्रश्न 2.
अपने परिवार के सदस्यों से बातचीत करके तालिका में जानकारी अंकित कीजिए
परिवार के सदस्य, जन्मतिथि, जन्म-स्थान, शिक्षा, रुचि, व्यवसाय, उपलब्धि।
(क) दादाजी
(ख) पिता जी
(ग) चाचा/ताऊ
(घ) माँ
(ङ) भाई/बहन।
उत्तर
इस तालिका को छात्र स्वयं तैयार करें, अपने घर के सदस्यों से पूछकर।

प्रश्न 3.
नीचे लिखी तालिका में कुछ शब्द दिए गए हैं। तालिका के अनुसार उनके सामने उपयुक्त खाने में उन्हें लिखिए।
शब्द-असाधारण, लकड़हारा, सफलता, अनुकृति, वैज्ञानिक, अभिमान, मिठाई वाला, भारतीय।
उत्तर
MP Board Class 7th Hindi Bhasha Bharti Solutions Chapter 20 महान् वैज्ञानिक डॉक्टर चन्द्रशेखर वेंकटरमण 2

प्रश्न 4.
नीचे के रेखाचित्र में एक उद्देश्य के साथ विभिन्न विधेय जोड़े जा सकते हैं।
उक्त तालिका से विभिन्न वाक्य बनाकर लिखिए।
MP Board Class 7th Hindi Bhasha Bharti Solutions Chapter 20 महान् वैज्ञानिक डॉक्टर चन्द्रशेखर वेंकटरमण 1
उत्तर

  1. रमण पहली बार विदेश गए।
  2. रमण प्रतिभाशाली थे।
  3. रमण नोबल पुरस्कार विजेता थे।
  4. रमण खोज में जुट गए।
  5. रमण भारत रत्न थे।

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महान् वैज्ञानिक : डॉक्टर चन्द्रशेखर वेंकटरमण परीक्षोपयोगी गद्यांशों की व्याख्या 

1. डॉ. रमण देश के महान वैज्ञानिक थे। उनका विश्वास था कि इस देश में प्रतिभाओं की कमी नहीं है। वे चाहते थे कि हमारा देश वैज्ञानिक खोजों के मामले में अपने पैरों पर खड़ा हो और हमें विदेशों का मुँह न ताकना पड़े। देशवासियों का यह पुनीत कर्तव्य है कि सभी उनके इस विश्वास को कायम रखें।

सन्दर्भ-प्रस्तुत गद्यांश “महान वैज्ञानिक : डॉक्टर चन्द्रशेखर वेंकटरमण” नामक पाठ से अवतरित है। यह एक निबन्ध विधा है।

प्रसंग-इन पंक्तियों में स्पष्ट किया गया है कि डॉ. रमण देश के एक महान वैज्ञानिक थे। साथ ही बताया है कि हमारे देश में विज्ञान सम्बन्धी खोज करने के लिए प्रतिभावान लोगों को प्रोत्साहित किया जाये।

व्याख्या-डॉक्टर चन्द्रशेखर वेंकटरमण उच्चकोटि के विज्ञानवेत्ता थे। वे इस बात को मानते थे कि हमारे देश भारतवर्ष में वान लोगों की कमी नहीं है। उनकी इच्छा थी कि हमारा देश ज्ञान के क्षेत्र में खोज करे और इन खोजों के आधार पर आत्र नर्भर हो जाये। विज्ञान के क्षेत्र में विशेष खोजों के लिए दूसरे देशों में की जाने वाली खोजों के लिए इन्तजार न करना पड़े। अब यह बात हमारे देशवासियों के लिए एक पवित्र कर्तव्य एवं दायित्व की बनती है कि हम उनके विश्वास को स्थायी रूप में मान्यता दें।

महान् वैज्ञानिक : डॉक्टर चन्द्रशेखर वेंकटरमण शब्दकोश

प्रतिनिधित्व – प्रतिनिधि का कार्य करना; व्याख्यान = भाषण; पार्थिव = मिट्टी का, पृथ्वी से सम्बन्धित; पंचतत्व = पाँच तत्व (पृथ्वी, जल, वायु, अग्नि, आकाश); विलीन = मिल जाना; पुनीत = पवित्र; कायम = स्थिर; अनुसंधान = खोज।

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MP Board Class 7th Sanskrit व्याकरण-खण्डः

MP Board Class 7th Sanskrit व्याकरण-खण्डः

1. शब्दरूपाणि

(क) संज्ञा शब्द रूप

अकारान्त (पुल्लिङ्ग) राम :
MP Board Class 7th Sanskrit व्याकरण-खण्डः img 1
अनुकरण :
राम के समान ही बालक, गज, वानर, सूर्य, चन्द्र, नृप आदि सभी अकारान्त पदों के रूप चलेंगे।

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इकारान्त (पुल्लिङ्ग) हरि :
MP Board Class 7th Sanskrit व्याकरण-खण्डः img 2
अनुकरण :
हरि के समान ही मुनि, गिरि, रवि, कपि, कवि, निधि, मणि, ऋषि आदि शब्दों के रूप चलेंगे।

अकारान्त (स्त्रीलिङ्ग) रमा (लक्ष्मी) :
MP Board Class 7th Sanskrit व्याकरण-खण्डः img 3
अनुकरण :
रमा के समान ही लता, माया, वाटिका, बालिका, पाठशाला, विद्या, वसुन्धरा आदि स्त्रीलिंग शब्दों के रूप चलेंगे।

उकारान्तः (पुल्लिङ्ग) “भानु” शब्द :
MP Board Class 7th Sanskrit व्याकरण-खण्डः img 4
अनुकरण :
गुरु, तरु, शिशु, साधु इत्यादयः।

इकारान्त स्त्रीलिङ्ग “मति” शब्द :
MP Board Class 7th Sanskrit व्याकरण-खण्डः img 5
अनुकरण :
बुद्धि, गति, रात्रि इत्यादयः।

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ईकारान्तः स्त्रीलिङ्गः “लेखनी” शब्दः
MP Board Class 7th Sanskrit व्याकरण-खण्डः img 6
अनुकरण :
जननी, नदी, द्रोणी, गौरी इत्यादयः।

उकारान्तः स्त्रीलिङ्ग “धेनु” शब्दः
MP Board Class 7th Sanskrit व्याकरण-खण्डः img 7
अनुकरण :
रेणु, रज्जु इत्यादयः।

इकारात नपुंसकलिङ्ग “वारि” शब्दः
MP Board Class 7th Sanskrit व्याकरण-खण्डः img 8

उकारान्तः नपुंसकलिङ्ग “मधु” शब्दः
MP Board Class 7th Sanskrit व्याकरण-खण्डः img 9

(ख) सर्वनाम शब्द रूप

दकारान्तः पुल्लिङ्ग “एतद्” (यह) शब्दः
MP Board Class 7th Sanskrit व्याकरण-खण्डः img 10

दकारान्तः स्त्रीलिङ्ग “एतद्” (यह) शब्दः
MP Board Class 7th Sanskrit व्याकरण-खण्डः img 38

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दकारान्तः नपुंसकलिङ्ग “एतद्” (यह) शब्दः
MP Board Class 7th Sanskrit व्याकरण-खण्डः img 11
तृतीया से सप्तमी तक पुल्लिङ्ग के समान रूप होते हैं।

दकारान्तः पुल्लिङ्ग “यद्” (जो) शब्दः
MP Board Class 7th Sanskrit व्याकरण-खण्डः img 38

दकारान्तः स्त्रीलिङ्ग “यद्” (जो) शब्द :
MP Board Class 7th Sanskrit व्याकरण-खण्डः img 12

दकारान्तः नपुंसकलिङ्ग “यत्” (जो) शब्दः
MP Board Class 7th Sanskrit व्याकरण-खण्डः img 13
तृतीया से सप्तमी तक पुल्लिङ्ग के समान रूप होते हैं।

पुल्लिङ्ग “सर्व’ (सब) शब्दः
MP Board Class 7th Sanskrit व्याकरण-खण्डः img 14

स्त्रीलिङ्ग “सर्व” (सब) शब्दः
MP Board Class 7th Sanskrit व्याकरण-खण्डः img 15

नपुंसकलिङ्ग “सर्व” (सब) शब्दः
MP Board Class 7th Sanskrit व्याकरण-खण्डः img 16
तृतीया से सप्तमी विभक्ति एक पुल्लिङ्ग के समान रूप होते हैं। यद्-तद आदि सर्वनाम शब्दों में सम्बोधन नहीं होता है।

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2. धातुरूपाणि

(क) परस्मैपदम्-

“पठ्’ (पढ़ना) धातुः लोट्लकारः (आज्ञार्थ)
MP Board Class 7th Sanskrit व्याकरण-खण्डः img 17

“पठ्’ (पढ़ना) धातुः विधिलिङ्गलकारः
(चाहिए अर्थ)
MP Board Class 7th Sanskrit व्याकरण-खण्डः img 18

“गम्” (जाना) धातुः लोट्लकारः (आज्ञार्थ):
MP Board Class 7th Sanskrit व्याकरण-खण्डः img 19

“गम्” (जाना) धातुः विधिलिङ्गलकारः
(चाहिए अर्थ)
MP Board Class 7th Sanskrit व्याकरण-खण्डः img 20

(ख) आत्मनेपदम्-

“लभ्” (पाना) धातुः लट्लकारः (वर्तमानकाले):
MP Board Class 7th Sanskrit व्याकरण-खण्डः img 21

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“सेव” (सेवा करना) धातुः लट्लकारः
(वर्तमानकाले)
MP Board Class 7th Sanskrit व्याकरण-खण्डः img 39

“वन्द्” (वन्दना करना) धातुः लट्लकारः
(वर्तमानकाले)
MP Board Class 7th Sanskrit व्याकरण-खण्डः img 22
इसी तरह भाष्, यत्, रम्, सह, शिक्ष, रुच् (रोच्) वृत् (वत्), वृध् (वर्ध), शुभ् (शोभ) इत्यादि धातुरूप होते हैं।

3. संस्कृतसंख्या (११ तः २० पर्यन्तम्)

एकादश – ११ (बहुवचनं)
द्वादश – १२ (बहुवचनं)
त्रयोदश – १३ (बहुवचनं)
चतुर्दश – १४ (बहुवचनं)
पञ्चदश – १५ (बहुवचन)
षोडश – १६ (बहुवचन)
सप्तदश – १७ (बहुवचनं)
अष्टादश – १८ (बहुवचन)
नवदश, एकोनविंशतिः – १९ (बहुवचन)
विंशतिः – २० (बहुवचन)
MP Board Class 7th Sanskrit व्याकरण-खण्डः img 23

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4. कारकपरिचयः

जिसका सम्बन्ध साक्षात् क्रिया के साथ होता है, उसे कारक कहते हैं। कारक छः होते हैं। सम्बन्ध को कारक नहीं माना गया है किन्तु विभक्तियाँ सात होती हैं।-
MP Board Class 7th Sanskrit व्याकरण-खण्डः img 24

कतृकारकम् (प्रथमा विभक्तिः)
यथा-
रामः पठति।
श्यामः गच्छति।

कर्मकारकम् (द्वितीया विभक्तिः)
यथा-
रामः विद्यालयं गच्छति।
मोहनः पुस्तकं पठति।

करणकारकम् (तृतीया विभक्तिः)
यथा-
रामः बाणेन रावणं हन्ति।
सीता रामेण सह वनं गच्छति।

सम्प्रदानकारकम् (चतुर्थी विभक्तिः)
यथा-
राजा ब्राह्मणाय धनं ददाति।
गुरवे नमः।

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अपादानकारकम् (पञ्चमी विभक्तिः)
यथा-
वृक्षात् पत्रं पतति।
हिमालयात् गङ्गा प्रभवति।

सम्बन्धः (षष्ठी विभक्तिः)
यथा-
रामः दशरथस्य पुत्रः अस्ति।
सीतायाः पतिः रामः अस्ति।

अधिकरणकारकम् (सप्तमी विभक्तिः)
यथा-
खगः वृक्षे निवसति।
मीन: नद्याम् अस्ति।

सम्बोधनम्-
यथा-
भो राम ! भवान् कुत्र गच्छति?
हे मोहन ! अत्र आगच्छ।

प्रस्तुत पद्य के आधार पर कारकों को स्मरण करना सरल है।-
कर्ता कर्म च करणं सम्प्रदानं तथैव च।
अपादानाधिकरणमित्याहुः कारकाणि षट्॥

5. सन्धिपरिचयः

(क) स्वरसन्धिः

स्वरसन्धि के भेद, प्रयोग और अभ्यास-
दीर्घसन्धिः
अ/आ + अ/आ = आ – हिम + आलयः = हिमालयः
इ/ई + इ/ई = ई – रवि + इन्द्रः = रवीन्द्रः
उ/ऊ + उ/ऊ = ऊ – भानु + उदयः = भानूदयः
ऋ/ऋ + ऋ/ऋ = ऋ – पितृ + ऋणम्: = पितृणम्

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गुणसन्धिः
अ/आ + इ/ई = ए – सुर + इन्द्रः = सुरेन्द्रः
अ/आ + उ/ऊ = ओ – महा + उत्सवः = महोत्सवः
अ/आ + ऋ/ऋ = अर् – देव + ऋषिः = देवर्षिः
अ/आ + लृ = अल् – तव + लृकारः = तवल्कारः

वृद्धिसन्धिः
अ/आ + ए/ऐ = ऐ – सदा + एव = सदैव
अ/आ + ए/ऐ = ऐ – अत्र + एव = अत्रैव
अ/आ + ओ/औ = औ – महा + ओषधिः= महौषधिः
अ/आ + ओ/औ = औ – महा + ओजस्वी= महौजस्वी

यण सन्धिः
यदि असमान स्वर आगे आता है, तो-
MP Board Class 7th Sanskrit व्याकरण-खण्डः img 25

अयादि सन्धिः
यदि असमान स्वर आगे आता है, तो निम्न प्रकार से परिवर्तन होकर नया शब्द बन जाता है-
ए + असमानस्वरः = अय् – ने + अनम् = नयनम्
ऐ + असमानस्वरः = अय् – गै + अकः =गायक:
ओ + असमानस्वरः = अव् – पो + अनः = पवनः
औ + असमानस्वरः = आव् – पौ + अकः = पावकः

पूर्वरूप सन्धिः
ए + अ = ऽ (अवग्रह चिह्न) – वने + अपि = ‘वनेऽपि
ओ + अ = ऽ (अवग्रह चिह्न) – को + अपि = कोऽपि

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(ख) व्यञ्जनसंधि-

श्चुत्व सन्धिः
त् + ज् – सत् + जनः = सज्जनः
त् + च् – सत् + चित् = सच्चित्
स् + श् – कस् + चित् = कश्चित्

अन्यानि उदाहरणानि :
क् + ग् – दिक् + गजः = दिग्गजः
च् + ज् – अच् + अन्तः = अजन्तः
त् + द् – जगत् + ईशः = जगदीशः
प् + ब् – सुप् + अन्तः = सुबन्तः
ध् + द् – बुध् + धिः = बुद्धिः
द् + .त् – सद् + कारः = सत्कारः

अनुस्वार सन्धि :
(1) ‘म्’ के बाद यदि कोई भी व्यंजन अक्षर होता है, तो ‘म्’ का अनुस्वार \(\left( \dot { – } \right) \) हो जाता है।
सत्यम् + वद् = सत्यं वद
पुस्तकम् + पठति = पुस्तकं पठति

(2) ‘म्’ के बाद स्वर अक्षर के आने पर ‘म्’ अनुस्वार नहीं होता-
पुस्तकम् + आनय = पुस्तकम् आनय/पुस्तकमानय
सत्यम् + अस्ति = सत्यम् अस्ति/सत्यमस्ति

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6. समासपरिचयः

शब्दानाम् अर्थानुसारं योजनं समासः। (शब्दों के अर्थ के अनुसार योजन करना ही समान होता है।) यथा-
रामस्य भक्तः = रामभक्तः – रामस्य भक्तः
कार्यस्य आलयः = कार्यालयः – कार्यस्य आलयः।

1. तत्पुरुष समासः
(क) राष्ट्रभक्तः – राष्ट्रस्य भक्तः।
(ख) चौरभयम् – चौराद् भयम् ।
(ग) दीनदानम् – दीनाय दानम्।
(घ) राजपुरुषः – राज्ञः पुरुषः।

2. कर्मधारय समासः
(क) नीलकमलम् – नीलं कमलम्
(ख) कृष्णसर्पः – कृष्णः सर्पः
(ग) घनश्यामः – घन इव श्यामः

3. द्विगु समासः
प्रथमपदं सङ्ख्यावाचकं भवति।
(क) पञ्चवटी – पञ्चानां वटानां समाहारः।
(ख) अष्टाध्यायी – अष्टानाम् अध्यायानां समाहारः।

4. द्वन्द्वः समासः
अत्र पदद्वयं प्रमुखं भवति।
(क) रामलक्ष्मणौ-रामः च लक्ष्मणः च/रामश्च लक्ष्मणश्च
(ख) कृष्णार्जुनौ-कृष्णः च अर्जुनः च/कृष्णश्च अर्जुनश्च

5. बहुब्रीहि समासः
अन्यपदस्य अर्थस्य प्रधानता भवति।
(क) पीताम्बरः – पीतम् अम्बरं यस्य सः। (विष्णुः)
(ख) चन्द्रशेखरः – चन्द्रः शेखरे यस्य सः। (शिव:)

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6. अव्ययीभाव समासः
प्रथमशब्दः अव्ययम् भवति।
(क) उपकृष्णम् – कृष्णस्य समीपम्।
(ख) प्रतिगृहम् – गृहं गृहं प्रति।
(ग) यथाशक्ति – शक्तिम् अनतिक्रम्य।

7. अव्ययपरिचयः

अव्यय शब्द पर लिङ्ग, वचन और विभक्ति का प्रभाव नहीं होता, अतः इसके अर्थ में भी कोई परिवर्तन नहीं होता है।
MP Board Class 7th Sanskrit व्याकरण-खण्डः img 26

अव्यय प्रयोग (वाक्य रचना)-

  1. पुरा एका राज्ञी राज्यम् अकरोत्।
    (प्राचीन काल में एक रानी राज्य करती थी।)
  2. बालकाः तत्र क्षेत्रे क्रीड़न्ति।
    (बालक वहाँ मैदान में खेलते हैं।)
  3. सत्वरम् इह आगच्छः।
    (यहाँ शीघ्र आओ।)
  4. सः पुनः आगच्छति।
    (वह फिर आता है।)
  5. पृष्ठात् अधः सः पतति।
    (छत से नीचे वह गिरता है।)
  6. ग्रामम् परितः वृक्षाः सन्ति।
    (गाँव के चारों ओर वृक्ष हैं।)
  7. सा उच्चैः प्रालपत्।
    (उसने ऊँचे स्वर में विलाप किया।)
  8.  सः यथा विचारयति तथा करोति।
    (वह जैसा सोचता है, वैसा करता है।)
  9. सः पठति अतः विद्यालयम् गच्छति।
    (वह पढ़ता है, इसलिए विद्यालय जाता है।)
  10. धिक् ! कापुरुषम्।
    (कायर पुरुष को धिक्कार है।)
  11. सः सर्वत्र भ्रमति।
    (वह सब जगह घूमता है।)
  12. कक्षात् बहिः गच्छ।
    (कक्षा से बाहर जाओ।)
  13. सः मम पुरतः वसति एव।
    (वह मेरे सामने ही रहता है।)
  14. यदा गरंजति तदा वर्षति।
    जब गरजता है तब वर्षा होती है।
  15. मा लिख।
    (मत लिखो।)

8. प्रत्ययपरिचयः

क्त्वा प्रत्ययः-“कर” अथवा “करके” इसका अर्थ होता है।
MP Board Class 7th Sanskrit व्याकरण-खण्डः img 27

ल्यपप्रत्ययः :
“कर” अथवा “करके” के अर्थ में ल्यप होता है। ल्यप् प्रत्यय में धातु से पूर्व उपसर्ग हुआ करता है।
MP Board Class 7th Sanskrit व्याकरण-खण्डः img 28

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क्त, क्तवतु प्रत्ययौ- (क्त्य, क्तवतु प्रत्ययों का प्रयोग भूतकाल में होता है।)
MP Board Class 7th Sanskrit व्याकरण-खण्डः img 29

9. उपसर्गः

(उपसर्ग धातु शब्द से पहले प्रयुक्त होकर धातु अथवा शब्द के अर्थ को बदल देता है।)
यथा-
MP Board Class 7th Sanskrit व्याकरण-खण्डः img 30

नये शब्द-प्र + गतिः= प्रगति, अनु + भवति = अनुभवति, अप + करोति = अपकरोति, उत् + खनति = उत्खनति, उत् + लिखितः = उल्लिखितः, प्र + हारः = प्रहारः, आ + हारः = आहारः इत्यादि।

10. अनुवाद के नियम

संस्कृत में अनुवाद करने के लिए मुख्य रूप से हमें विभक्ति (कारक) वचन, लिङ्ग, पुरुष, शब्द और धातु का ज्ञान होना आवश्यक है। उदाहरण के लिए-प्रथम पुरुष के एकवचन के कर्ता के साथ धातु का प्रथम पुरुष एकवचन का रूप प्रयोग होगा।
जैसे-वह जाता है-सः गच्छति।
प्रथम पुरुष :
वह दोनों जाते हैं-तौ गच्छतः।

के कर्ता :
वे सब जाते हैं-ते गच्छन्ति।

मध्यम पुरुष :
तुम जाते हो-त्वम् गच्छसि।

के कर्ता :
तुम दोनों जाते हो-युवाम् गच्छथः।
तुम सब जाते हो-यूयम् गच्छथ।

उत्तम पुरुष :
मैं जाता हूँ-अहम् गच्छामि।

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के कर्ता :
हम दोनों जाते हैं-आवाम् गच्छावः।
हम सब जाते हैं-वयम् गच्छामः।

इस प्रकार शब्द और धातु के वचन व पुरुष समान होंगे। तीनों लिंग के शब्द रूप भिन्न होने पर भी धातु रूप एक ही प्रयोग किये जाते हैं। जैसे-
(1) लड़की पढ़ती है-बालिका पठति।
(2) लड़का पढ़ता है-बालकः पठति।
(3) पत्रः गिरता है-पत्रम् पतति।
संस्कृत के व्याकरण के नियमों को हम इस प्रकार जानेंगे।

पुरुष या कर्ता :
कर्ता (पुरुष) तीन प्रकार के होते हैं-प्रथम या अन्य पुरुष, मध्यम पुरुष, उत्तम पुरुष।

प्रथम या अन्य पुरुष :
जिसके सम्बन्ध में कोई बात की जाये। जैसे-वे, सीता, लड़के, वह, दोनों, वे सब आदि।

मध्यम पुरुष :
जिससे बात की जाए। जैसे-तुम, तुम दोनों, तुम सब।

उत्तम पुरुष :
जो बात करता है। जैसे-मैं, हम दोनों, हम सब।

तीनों पुरुष तीन वचनों के साथ प्रयोग होते हैं। इनका प्रयोग धातु रूपों के साथ उसी क्रम से होता है। इनके रूप इस प्रकार से चलते हैं-
MP Board Class 7th Sanskrit व्याकरण-खण्डः img 31

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इसी प्रकार से धातु रूप भी चलते हैं। यथा पठ् धातु के रूप (वर्तमान काल) में क्रमशः तीनों पुरुष के साथ बनाने पर अनुवाद इस प्रकार बनेगा-
MP Board Class 7th Sanskrit व्याकरण-खण्डः img 32

कारक, चिह्न और विभक्ति-
MP Board Class 7th Sanskrit व्याकरण-खण्डः img 33

वर्ण परिचय :
वर्ण दो प्रकार के हैं-स्वर और व्यंजन।

स्वर :
इन्हें किसी अन्य वर्ण के सहयोग के बिना उच्चारित किया जा सकता है। ये 13 हैं-
अ, आ, इ, ई, उ, ऊ, ऋ, ए, ऐ, ओ, औ, अं और अः।

व्यंजन :
व्यंजनों का उच्चारण करने के लिए स्वरों की सहायता की आवश्यकता होती है। व्यंजन 33 हैं-
क् ख् ग् घ् ङ च् छ् ज् झ् ञ ट ठ् ड् ढ् ण् त् थ् द् ध् न् प् फ् ब् भ् म् य् र् ल् व् श् ष् स् ह्।

इनका उच्चारण करने के लिए प्रत्येक व्यंजन में ‘अ’ स्वर मिलाना पड़ता है; यथा-कमल लिखने के लिए-
क् + अ = क; म् + अ = म; ल् + अ = ल = कमल।
इसी प्रकार प्रत्येक व्यंजन में स्वर अ को मिलाकर पढ़ते हैं।

वर्ण समूह और उच्चारण स्थान :
वर्णों के उच्चारण स्थान के आधार पर उनका समूह हाता है जो निम्नलिखित है-
MP Board Class 7th Sanskrit व्याकरण-खण्डः img 34

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वचन :
संस्कृत में तीन वचन होते हैं-एकवचन, द्विवचन, बहुवचन।

एकवचन :
इससे किसी एक व्यक्ति अथवा वस्तु का बोध होता है। जैसे- राम, सीता, गीता आदि।

द्विवचन :
इससे दो वस्तुओं आदि का बोध होता है। जैसे-दो बालक, दो पुस्तकें, दो फल आदि।

बहुवचन :
इससे दो से अधिक वस्तुओं, स्थान या व्यक्तियों का बोध होता है। जैसे-लड़के, किताबें, स्त्रियाँ, बालिकाएँ आदि।

संस्कृत में अनुवाद बनाते समय प्रत्येक शब्द तथा धातु के साथ इन तीनों वचनों में से वाक्यानुसार किसी का भी प्रयोग होता है।

विभक्तियों का प्रयोग  :
चिह्न के आधार पर वाक्य में उसी विभक्ति का प्रयोग होगा। यथा-
MP Board Class 7th Sanskrit व्याकरण-खण्डः img 35

लिङ्ग :
संस्कृत में तीन लिङ्ग होते हैं-पुल्लिङ्ग, स्त्रीलिङ्ग और नपुंसकलिङ्ग।

पुल्लिङ्ग :
पुरुषवाचक शब्द पुल्लिङ्ग कहलाते हैं। जैसे-राम, मोहन, सोहन आदि।

स्त्रीलिङ्ग :
स्त्रीवाचक शब्द स्त्रीलिङ्ग कहलाते हैं। जैसे-सीता, गीता, लता, नदी, स्त्री आदि।

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नपुंसकलिङ्ग :
जिन शब्दों से किन्हीं भौतिक वस्तुओं अथवा निर्जीव वस्तुओं आदि का बोध होता है। जैसे-फल, पुस्तक, कलम आदि।

(1) संस्कृत में अनुवाद कीजिए-
MP Board Class 7th Sanskrit व्याकरण-खण्डः img 36

(2) संस्कृत में अनुवाद कीजिए-

  1. यह घोड़ा मेरा है।
    एषः मम अश्वः।
  2. चोर भ्रमित हो गया।
    चौरः भ्रमितम् अभवत्।
  3. किसान चतुर था।
    कृषकः चतुरः आसीत्।
  4. चोर ने घोड़ा चुराया था।
    चौरः अश्वम् अचोरयत्।
  5. हमारा भारत महान है।
    अस्माकं भारतं महान् अस्ति।
  6. हमारे देश का साहित्य बहुत समृद्ध है।
    अस्माकं देशस्य साहित्यम् अति समृद्धम् अस्ति।
  7. चण्डरव नाम का एक सियार था।
    चण्डरवः नाम्नः एकः शृगालः आसीत्।
  8. चण्डरव ने शोर सुना।
    चण्डरवः ध्वनिं श्रुतवान्।
  9. महान व्यक्तियों का धन सम्मान है।
    महताम् जनानां धनं सम्मानम् अस्ति।
  10. प्रवासकाल में विद्या माता के समान है।
    प्रवासकाले विद्या मातृसमा अस्ति।
  11. मेरी माता कार्य के लिए बाहर जाती हैं।
    मम माता कार्याय बहिः गच्छति।

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(3) संस्कृत में अनुवाद कीजिए-

  1. मानव जीवन के चार प्रयोजन हैं।
    मानव जीवनस्य चतुः प्रयोजनानि सन्ति।
  2. ‘निर्वाण’ मोक्ष का दूसरा नाम है।
    निर्वाणं मोक्षस्य अपरं नाम अस्ति।
  3. वीर व्यक्ति प्रयत्न से पर्वत पार करते हैं।
    वीराः प्रयासेन पर्वतान् पारयन्ति।
  4. प्रयत्न से वैभव प्राप्त करते हैं।
    प्रयत्नेन वैभवं प्राप्नुवन्ति।
  5. मयूर भारत देश का राष्ट्रीय पक्षी है।
    मयूरः भारतदेशस्य राष्ट्रीय पक्षी अस्ति।
  6. व्याघ्र पशुओं में तेजस्वी तथा पराक्रमी है।
    व्याघ्रः पशुषु तेजस्वी पराक्रमी च अस्ति।
  7. हमारी राष्ट्रभाषा हिन्दी है।
    अस्माकं राष्ट्रभाषा हिन्दी अस्ति।
  8. गाँव के लोगों का जीवन सरल होता है।
    ग्रामस्य जनानां जीवनं सरलम् भवति।
  9. गाँव के हाट में विविध दुकानें होती हैं।
    ग्रामस्य हाटे विविधाः आपणाः सन्ति।
  10.  यह वीर बालक दुष्यन्त और शकुन्तला का पुत्र है।
    अयं वीरः बालक : दुष्यंतस्य शकुंतलायाः च पुत्रः अस्ति।

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MP Board Class 7th Hindi Bhasha Bharti Solutions Chapter 19 ज्ञानदा की डायरी

MP Board Class 7th Hindi Bhasha Bharti Solutions Chapter 19 ज्ञानदा की डायरी

MP Board Class 7th Hindi Bhasha Bharti Chapter 19 पाठ का अभ्यास

बोध प्रश्न

प्रश्न 1.
निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर लिखिए

(क) ज्ञानदा का चयन किस प्रतियोगिता के लिए हुआ था?
उत्तर
ज्ञानदा का चयन राज्यस्तरीय शालेय हॉकी प्रतियोगिता के लिए हुआ था।

(ख) मौनिया नर्तक किस तरह नृत्य कर रहे थे ?
उत्तर
मौनिया नर्तक ढोलक और नगड़िया की थाप पर ! हाथ में पकड़े डण्डों को लय के साथ आपस में टकराते हुए अपने कदम बिना ताल चूके थिरका रहे थे।

(ग) ज्ञानदा को किस बात का दुःख था?
उत्तर
ज्ञानदा को इस बात का दुःख था कि वह हाफ बैक की जगह पर खेल रही थी। विपक्षी सेण्टर फारवर्ड खिलाड़ी गेंद लेकर उनके गोल की तरफ बढ़ी, तो उसने (ज्ञानदा ने) उसे रोकने के लिए गलत तरीके से ‘हाकी स्टिक’ अड़ा दी जिससे वह गिर पड़ी, उसका घुटना छिल गया।

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(घ) खेलों से हम कौन-कौन-से गुण सीखते हैं ?
उत्तर
खेलों से हमारे अन्दर अनुशासन, धैर्य, सहिष्णुता, उदारता और हार-जीत को समान रूप से लेने का गुण पैदा होता है।

(ङ) कोच ने ज्ञानदा की तारीफ क्यों की?
उत्तर
कोच ने ज्ञानदा की सूझबूझ और तत्काल निर्णय लेने के गुण के लिए तारीफ की।

प्रश्न 2.
खाली स्थान में उचित शब्द भरिए

(क) व्यक्तिगत उपलब्धि से अधिक टीम का हित ……… होता है। (सर्वोपरि, गौण)
(ख) मध्य प्रदेश में भोपाल को …….. कहते हैं। (क्रिकेट का गढ़, हॉकी का गढ़)
(ग) भोपाल में प्रतिवर्ष ……… हॉकी टूर्नामेण्ट आयोजित किया जाता है।
(सिंधिया स्वर्ण कप, औबेदुल्ला स्वर्ण कप)
(घ) हॉकी टीम में …………… खिलाड़ी होते हैं। (पाँच, ग्यारह)
(ङ) ज्ञानदा ने ………….. पर गोल किया। (पेनल्टी स्ट्रोक, पेनाल्टी कॉर्नर)
उत्तर
(क) सर्वोपरि
(ख) हॉकी का गढ़
(ग) औबेदुल्ला स्वर्णकप
(घ) ग्यारह
(ङ) पेनाल्टी कॉर्नर।

प्रश्न 3.
सही विकल्प चुनिए

1. ‘हॉकी के जादूगर’ के नाम से प्रसिद्ध हैं
(क) परगट सिंह
(ख) मेजर ध्यानचन्द
(ग) धनराज पिल्लई
(घ) अजीतपाल सिंह।
उत्तर
(ख) मेजर ध्यानचन्द

2. सांस्कृतिक कार्यक्रम में प्रस्तुत किया गया
(क) डांडिया नृत्य
(ख) गरबा नृत्य
(ग) मौनिया नृत्य
(घ) राई नृत्य।
उत्तर
(ग) मौनिया नृत्य

3. ज्ञानदा का चयन किस सम्भाग के लिए हुआ था ?
(क) सागर
(ख) रीवा
(ग) ग्वालियर
(घ) भोपाल
उत्तर
(घ) भोपाल

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4. ज्ञानदा किस पोजीशन (स्थान) पर खेल रही थी ?
(क) हाफ बैक
(ख) सेन्टर फारवर्ड
(ग) राइट आउट
(घ) लेफ्ट इन।
उत्तर
(क) हाफ बैक

5. ‘राष्ट्रीय खेल दिवस’ कब मनाया जाता है ?
(क) 29 अगस्त
(ख) 15 अगस्त
(ग) 26 फरवरी
(घ) 28 फरवरी।
उत्तर
(क) 29 अगस्त

प्रश्न 4.
तालिका से खेलों के नाम छाँटिए और नीचे लिखिए
MP Board Class 7th Hindi Bhasha Bharti Solutions Chapter 19 ज्ञानदा की डायरी 1
उत्तर

  1. टेबिल टेनिस
  2. क्रिकेट
  3. फुटबाल
  4. कैरम
  5. भारोत्तोलन
  6. कबड्डी
  7. गोल्फ
  8. खो-खो
  9. कुश्ती
  10. निशानेबाजी
  11. फुटबाल
  12. पोलो।

भाषा अध्ययन

प्रश्न 1. निम्नलिखित मुहावरों का अर्थ लिखिए
तथा इनके प्रयोग वाले वाक्य छाँटकर लिखिए
(क) नाम कमाना
(ख) झण्डे गाड़ना
(ग) समा बाँधना
(घ) खून पसीना बहाना
(ङ) कांटे की टक्कर
(च) ताकत झोंकना।
उत्तर
(क) प्रसिद्धि प्राप्त करना
(ख) सफलता दिखाना
(ग) सबको मोहित करना
(घ) कड़ी मेहनत करना
(ङ) बराबरी का मुकाबला
(च) पूरी तरह शक्ति लगा देना।
इन मुहावरों में प्रयोग होने वाले वाक्य

(ख) ग्वालियर के शिवाजी पवार, शंकर-लक्ष और क्रिस्टी ने भी हॉकी के क्षेत्र में अन्तर्राष्ट्रीय स्तर पर नाम के झण्डे गाड़े हैं।
(ग) यहाँ के लोक नृत्य ‘मौनिया’ ने तो जैसे समां बाँध दिया।
नोट-इसी तरह वाक्य छाँटकर छात्र स्वयं लिखें।

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प्रश्न 2.
निम्नलिखित शब्दों को वाक्यों में प्रयोग कीजिए
प्रतीक्षा, सम्भागीय, चयन, गौरव, चहल-पहल, स्वर्ण-पदक, जन्म-दिवस, कौशल, आक्रामक।
उत्तर

  1. मझे प्रतीक्षा करना बहुत कष्टदायी लगता है।
  2. सम्भागीय खेलों का आयोजन प्रतिवर्ष किया जाता
  3. मेरा चयन हॉकी की राष्ट्रीय टीम में कर लिया गया
  4. सम्भागीय हॉकी प्रजोगिता में खेलने के लिए सोनाली को गौरव प्राप्त है।
  5. स्टेशन पर जब रेलगाड़ी आती है तो वहाँ चहल-पहल बढ़ जाती है।
  6. मेजर ध्यानचन्द ने हॉकी के ओलम्पिक प्रतियोगिता में स्वर्ण पदक प्राप्त कराये।
  7. 29 अगस्त को ध्यानचन्द का जन्म-दिवस है। इस तिथि को राष्ट्रीय खेल दिवस के रूप में मनाया जाता
  8. ज्ञानदा ने बड़े कौशल से हॉकी का खेल खेलते हुए प्रतियोगिता में जीत हासिल की।
  9. सौरभ ने आक्रामक रुख अपनाते हुए एक गोल किया।

प्रश्न 3.
निम्नलिखित शब्दों के दो-दो अर्थ और उनके वाक्य प्रयोग कीजिए
पत्र, पृष्ठ, लक्ष्य, जीवन।
उत्तर
पत्र-पत्ता, चिट्ठी।
पृष्ठ-पीठ, पन्ना।
लक्ष्य-उद्देश्य, निशाना।
जीवन-ज़िन्दगी, जल।

प्रयोग
(क) पेड़ से पत्र गिरते हैं।
मुझे उसका पत्र मिला है।

(ख) उसकी पृष्ठ पर कील से घाव हो गया।
पुस्तक का पृष्ठ उलटिए।

(ग) हमें अपना लक्ष्य प्राप्त करना है।
उसने पक्षी पर लक्ष्य साधा।

(घ) वृक्षों में जीवन होता है।
वनों से जीवन प्राप्त होता है।

प्रश्न 4.
निम्नलिखित शब्दों से हिन्दी, उर्दू और अंग्रेजी के शब्द अलग-अलग छाँटकर तालिका में लिखिए
सीनियर, सम्भागीय, टीम, वर्ग, स्पर्धा, ओलम्पिक, टूनामेण्ट, राष्ट्रीय, मदद, जूनियर, रेलवे स्टेशन, मैनेजर, दल, मुताबिक, ट्रेन, कैप्टेन, जादूगर, खाना, तरीका, शहीद, खूबसूरत, स्टेडियम, मार्चपास्ट, शपथ, शबनम, दर्द, मुकाबला।
उत्तर
MP Board Class 7th Hindi Bhasha Bharti Solutions Chapter 19 ज्ञानदा की डायरी 2

प्रश्न 5.
‘सागर’ तथा ‘अनुसार’ शब्दों से पूर्व अन्य शब्द जोड़कर दो-दो नवीन शब्द बनाइए तथा उन्हें वाक्यों में प्रयोग कीजिए
उत्तर
शब्द

  1. (क) भव सागर , (ख) गंगा सागर।
  2. (क) नियमानुसार ,(ख) कथनानुसार।

प्रयोग

  1. (क) भवसागर कठिनाई से पार किया जाता है।
    (ख) मैं और मेरा मित्र स्नान करने गंगा सागर गये।
  2.  (क) हमे नियमानुसार काम करना अच्छा लगता है।
    (ख) उन्होंने आपके कथनानुसार ही अपना कार्यक्रम तैयार किया।

 ज्ञानदा की डायरी परीक्षोपयोगी गद्यांशों की व्याख्या

1. खेल हम सिर्फ जीतने या मनोरंजन के लिए नहीं खेलते। खेल हमें अनुशासन, धैर्य, सहिष्णुता, उदारता और हार-जीत को समान रूप से लेने का गुण सिखाते

सन्दर्भ-प्रस्तुत पंक्तियाँ ज्ञानदा की डायरी’ नामक पाठ से अवतरित हैं। इस पाठ को डायरी शैली में लिखा गया है।

प्रसंग-किसी भी खेल के खिलाड़ियों में खेल भावना का होना आवश्यक है।

व्याख्या-किसी भी खेल को जीत प्राप्त कर लेने अथवा एक विशेष मनोरंजन से मानसिक तनाव को न होने देने के लिए ही नहीं खेलते। खेल खेलने से हमारे अन्दर अनुशासन एवं धीरज रखने की भावना उत्पन्न होती है। इन्हीं दोनों गुणों से मनुष्य अपने जीवन को कुछ हद तक सफलता की सीढ़ी तक पहुँचा देता है। इन गुणों के अलावा हमारे अन्दर सहनशीलता, उदारता, (सभी को अपना ही मानने का गुण) हमारे अन्दर विकसित होने लगते हैं। खेल में हार हो अथवा जीत-इस हार-जीत को समान रूप से समझना चाहिए। इस प्रकार, ऊपर बताये गये अनेक गुण इन खेलों के खेलने से हम सीख जाते हैं।

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2. मैच के बाद, मेरी कोच ने मेरी सूझ-बूझ और तत्काल निर्णय लेने के लिए मेरी तारीफ की। तारीफ सुनकर मुझे बड़ा संकोच हुआ। खेल तो मिल-जुलकर ही खेला जाता है। व्यक्तिगत उपलब्धि से अधिक दल का हित सर्वोपरि होता है।

सन्दर्भ-पूर्व की तरह।

प्रसंग-प्रत्येक तरह के खेल में खिलाड़ियों के मेल-जोल से ही सफलता मिलती है।

व्याख्या-खेल में जीत पाकर खुशी हुई। खेल के बाद हम आगे चले, तो लेखिका की प्रशिक्षिका ने बताया कि खेल में उसी की सूझ-बूझ से सफलता मिली थी तथा जो निर्णय लेखिका ने उस क्षण लिया, वह बहुत ही अच्छा था, लाभकारी था। इस प्रकार प्रशिक्षिका ने लेखिका की प्रशंसा की। प्रशिक्षिका को अपनी तारीफ करते हुए सुन लेखिका को संकोच होने लगा। सही स्वभाव का व्यक्ति अपनी प्रशंसा सुनकर कभी भी घमण्डित नहीं होता, वह तो संकोच ही करता है। सभी खिलाड़ी अपने-अपने दायित्व को टीम में रहकर निभाते हैं। पूरा दल (टीम) सामूहिक जिम्मेदारी निभाता है, तो सफलता मिलती ही है। एक खिलाड़ी यदि व्यक्तिगत सफलता के लिए ही कार्य करता है तो सफलता प्राप्त होने में सन्देह रहता है।

ज्ञानदा की डायरी शब्दकोश

ख्याति = प्रसिद्धि स्पर्धा = होड़; नर्तक = नाचने वाला; उद्बोधन = बोलना, सम्बोधन; मुँह अंधेरे = सुबह के पहले का समय जब अँधेरा रहता है; चयन = चुना जाना, चुनाव में चुने जाने की प्रक्रिया; पंक्ति = कतार; मुताबिकअनुसार।

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MP Board Class 7th Hindi Bhasha Bharti Solutions Chapter 18 लोकमाता : अहिल्याबाई

MP Board Class 7th Hindi Bhasha Bharti Solutions Chapter 18 लोकमाता : अहिल्याबाई

MP Board Class 7th Hindi Bhasha Bharti Chapter 18 पाठ का अभ्यास

बोध प्रश्न

प्रश्न 1.
निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर लिखिए

(क) अहिल्याबाई को “लोकमाता” क्यों कहते हैं ?
उत्तर
अहिल्याबाई के शासनकाल में सम्पूर्ण प्रजा सुख और शान्ति से तथा समृद्धि से भरपूर थी, इसलिए लोग उन्हें लोकमाता कहते थे।

(ख) मल्हार राव ने अहिल्याबाई को किस राह पर आगे बढ़ाया ?
उत्तर
मल्हार राव ने अहिल्याबाई की आन्तरिक शक्तियों और क्षमताओं को पहचाना तथा अपने बेटे के समान ही राजनीति और यद्ध कला की शिक्षा दिलायी, घुडसवारी सिखलाई। इस तरह अहिल्याबाई को एक अच्छे शासक होने की राह पर आगे बढ़ाया।

(ग) अहिल्याबाई ने राज्य की बागडोर किन परिस्थितियों में संभाली?
उत्तर
भरतपुर के राजा सूरजमल ने मल्हार राव को वार्षिक कर नहीं दिया तो मल्हार राव ने भरतपुर पर आक्रमण कर दिया। तीन महीने तक चले इस भीषण युद्ध में अहिल्याबाई के पति खण्डेराव वीरगति को प्राप्त हुए। इस भीषण आघात से व्याकुल और आहत अहिल्याबाई ने जनकल्याण के लिए दृढ़तापूर्वक होल्कर राज्य की बागडोर अपने हाथों से संभाली।

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(घ) पेशवा राघोवा द्वारा आक्रमण किए जाने पर अहिल्याबाई ने क्या किया ?
उत्तर
पेशवा राघोवा द्वारा आक्रमण किए जाने पर अहिल्याबाई ने तुकोजी को पेशवा राघोवा से युद्ध करने के लिए भेजा और पेशवा राघोवा के लिए एक पत्र लिखा। इस पत्र में लिखा कि वह उनके पूर्वजों के राज्य को हड़पने का सपना न देखे। वह स्वयं नारी सेना लेकर युद्ध करेंगी। उसे (पेशवा को) नारी द्वारा हराये जाने का अपयश मिलेगा। यदि उसने विजय भी प्राप्त की तो उसके मुख पर एक विधवा के राज्य को हड़पने की कालिख लगेगी। पेशवा राघोवा पर इस बात का प्रभाव पड़ा और वह बिना युद्ध किये लौट गया। अहिल्याबाई ने होल्कर राज्य को अपनी बुद्धिमानी और दूरदर्शिता से भयमुक्त कर लिया।

(ङ) सौभागसिंह कौन था ? वह कैसे पकड़ा गया ?
उत्तर
सौभागसिंह रामपुरा का सरदार था। उदयपुर के राणा ने उसकी सहायता के लिए विशाल सेना भेजी। मन्दसौर के युद्ध क्षेत्र में भयानक युद्ध हुआ। तिरेसठ वर्षीय अहिल्याबाई ने युद्ध का संचालन किया। विरोधी सेना के छक्के छुड़ा दिये। सौभागसिंह को पकड़ लिया गया।

(च) भीलों द्वारा लूटपाट की समस्या अहिल्याबाई ने किस तरह निपटाई?
उत्तर
भीलों द्वारा लूटपाट की समस्या अहिल्याबाई ने अपने विवेक से निपटाई। अहिल्याबाई ने भीलों के सरदार को ही यात्रियों की सुरक्षा का दायित्व दे दिया। साथ ही, यह नियम भी बना दिया कि जिस इलाके में यात्रियों से लूटपाट होगी, तो वहाँ के भील उसकी भरपाई भी करेंगे। इस तरह इस समस्या से मुक्ति मिली।

(छ) “महारानी अहिल्याबाई का जीवन जनहित की मिसाल है”-स्पष्ट कीजिए।
उत्तर
महारानी अहिल्याबाई का व्यक्तित्व जुझारू था। – उनमें चतुराई, बुद्धिमानी, राज्य संचालन की क्षमता थी। सम्पूर्ण – प्रजा सुखी और सम्पन्न थी। वह समस्याओं को तुरन्त निपटाती थी। सैनिकों के परिवारों की देखरेख करती थीं। कृषकों को । सुविधाएँ देती थीं। किसानों से कर बहुत कम लिया जाता था। उन्होंने उद्योग-धन्धों को भी बढ़ावा दिया।

उन्होंने विद्वानों, लेखकों, साहित्यकारों, ज्योतिषियों तथा कलाकारों को प्रोत्साहित किया। उन्हें राज्य में बसाया और उन्हें पुरस्कृत भी किया। इस तरह अहिल्याबाई का जीवन जनहित की मिसाल है। उन्होंने पूरे भारत में मन्दिर बनवाये। जरूरतमन्दों को कभी निराश नहीं होने दिया।

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प्रश्न 2.
रिक्त स्थानों की पूर्ति कीजिए

(क) यात्री…………….होकर राज्य में विचरण करने लगे थे।
(ख) अहिल्याबाई ने 63 वर्ष की अवस्था में युद्ध का …………….. संचालन किया।
(ग) भारत के मन्दिर …………… कला के अनुपम उदाहरण
उत्तर
(क) निर्भय
(ख) कुशलता से
(ग) वास्तु।

भाषा अध्ययन

प्रश्न 1.
निम्नलिखित शब्दों में से उपसर्ग छाँटकर लिखिए
प्रशिक्षित, सशरीर, आघात, सुयोग्य, आहत, अपयश, वियोग, विजय, विचरण।
उत्तर
प्र, स, आ,सु, आ, अप, वि, वि, वि।

प्रश्न 2.
निम्नलिखित वाक्यों के समक्ष दिए गए
विकल्पों में से सही मुहावरे का प्रयोग करके रिक्त स्थानों की पूर्ति कीजिए

(क) अहिल्याबाई के सामने दिग्गजों के ………….
(कालिख लगाना, छक्के छूटना, हार नहीं मानना)

(ख) गृहकार्य में दक्ष वधू ने सबका ………….. है।
(मन मोह लेना, घुटने टेकना, रास न आना)

(ग) अनैतिक कार्यों की पोल खुलने से व्यक्ति के …………. है।
(मुँह पर रंग लगना, मुंह पर कालिख लगाना, मुँह पर छींटे मारना)

(घ) अहिल्याबाई की वीरता की सभी थे।
(भूरि-भूरि प्रशंसा करना, विचलित होना, निन्दा करना)

(ङ) अहिल्याबाई ने पेशवा के सामने …………… थे।
(पैर टेकना, सिर टेकना, घुटने न टेकना)

(च) विदेशी भी भारतीय नारियों की वीरता देखकर …………. थे।
(आँख मूंद लेते थे, दाँतों तले अंगुली दबा लेते, कानों पर हाथ रख लेते थे)
उत्तर
(क) छक्के छूट जाते
(ख) मन मोह लिया
(ग) मुँह पर कालिख लग जाती
(घ) भूरि-भूरि प्रशंसा करते
(ङ) घुटने नहीं टेके
(च) दाँतों तले अँगुली दबा लेते।

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प्रश्न 3.
निम्नलिखित शब्दों के स्त्रीलिंग रूप लिखिए
शीलवान, बुद्धिमान, सुत, घोड़ा, नाना, जेठ, सेठ, ठाकुर।
उत्तर
स्त्रीलिंग-शीलवती, बुद्धिमती, सुता, घोड़ी, नानी, जेठानी, सेठानी, ठकुराइन।

लोकमाता : अहिल्याबाई परीक्षोपयोगी गद्यांशों की व्याख्या 

1. “आप मेरे पूर्वजों द्वारा अपने कठिन परिश्रम से स्थापित किए हुए होल्कर राज्य को हड़प लेने का दिवा स्वप्न मत देखिए, मैं अपनी नारी सेना के साथ आपसे युद्ध करूंगी। आप हारे तो आपको एक नारी द्वारा पराजित होने का अपयश मिलेगा और जीत गए तो एक पुत्र के वियोग से व्यथित विधवा के राज्य को अकारण हड़प लेने की कालिख आपके मुंह पर लगेगी। इस बात पर विचार कर उत्तर दें। मैं अपनी नारी सेना के साथ आपसे युद्ध करने के लिए तैयार हूँ।”

सन्दर्भ-प्रस्तुत गद्यांश ‘लोकमाता : अहिल्याबाई’ नामक पाठ से अवतरित है। यह एक जीवनी है।

प्रसंग-होल्कर राज्य पर आक्रमण करने के लिए सेना सहित आये हुए पेशवा राघोवा के लिए अहिल्याबाई द्वारा लिखे पत्र का यह अंश है।

व्याख्या-अहिल्याबाई ने पत्र में लिखा कि होल्कर राज्य को उनके पूर्वजों ने बड़े ही परिश्रम से स्थापित किया है। तुम्हें इस राज्य को जबरन छीन लेने के लिए कल्पना नहीं करनी चाहिए यह विचार दिन में देखे सपने के समान होगा। मैंने तुमसे युद्ध करने का निश्चय कर लिया है। इस युद्ध में मेरी नारी सेना भाग लेगी जिसका संचालन में स्वयं (एक नारी) करूंगी। एक नारी के हाथ हार जाने पर तुम्हारा अपयश फैलेगा और यदि तुम जीत भी गए तो लोग कहेंगे कि तुमने एक विधवा के राज्य को छीन लिया जिसका पुत्र भी अभी-अभी मरा है। बिना किसी कारण तुमने राज्य छीन भी लिया, तो यह अपयश की कालिमा का टीका तुम्हारे माथे पर लगेगा। इन सभी बातों पर विचार करके मुझे उत्तर देने की कृपा करें। मैं युद्ध करने को तो तैयार हैं।

2. इस तरह जुझारू व्यक्तित्व की धनी रानी अहिल्याबाई ने अपने वाक् चातुर्य, बुद्धि कौशल से सत्ता का कुशलतापूर्वक संचालन कर जनता को सुखी किया। वह रोज दरबार लगातीं। प्रजा की समस्याओं का समाधान करतीं। वीरगति पाने वाले, सैनिकों एवं युद्ध में जाने वाले सैनिक परिवारों की सारी व्यवस्था स्वयं करतीं। वे कृषकों को सुविधाएँ देतीं। लगान के रूप में कृषि कर लिया जाता, जो बहुत कम होता, उसे भी वे जनहित के कार्यों में खर्च कर देतीं। अन्य उद्योगधन्धों को भी उन्होंने बढ़ावा दिया।

सन्दर्भ-पूर्व की तरह।

प्रसंग-अहिल्याबाई के व्यक्तित्व की विशेषताएँ बतायी गई हैं।

व्याख्या-अहिल्याबाई विपत्तियों से जूझने वाली महिला थीं। उनमें वाणी की चतुराई थी। वह बुद्धिमान थीं। इस तरह विशेष कौशल से चतुराईपूर्वक राज्य के ऊपर शासन कर रही थी। सभी प्रजा सुखी थी। वे प्रतिदिन ही अपने दरबार में उपस्थित होती थीं। अपनी प्रजा की सभी समस्याओं का हल वे अपने आप करती थीं। जितने भी सैनिक युद्ध में वीरगति प्राप्त कर चुके थे. उनके परिवारों तथा जो सैनिक युद्ध क्षेत्र में लड़ने के लिए गये हुए हैं, अथवा जाने वाले हैं, उनके परिवारों के सदस्यों की देख-रेख का काम अहिल्याबाई स्वयं ही किया करती थीं। इनके सुख-सुविधा के लिए वे स्वयं उत्तरदायित्व लेती थी। उन्होंने किसानों को अनेक तरह की सुविधाएँ दी थीं। किसानों से जो कृषि कर लिया जाता था। उसे अन्य उद्योगों के लगाने, उनके विकास में लगाया गया।

लोकमाता : अहिल्याबाई शब्दकोश

विद्रोह-विरोध करना, विरुद्ध होना; जनहित = जनता का हित, जन कल्याण; पारंगत = निपुण; विचलित = अस्थिर, हटना, डिगना; प्रत्युत्तर = उत्तर का उत्तर, उत्तर पाने पर दिया गया उत्तर; कूटनीति = छलकपट की नीति; दायित्व = जिम्मेदारी; दिग्गज = प्रकाण्ड, महान्; वज्राघात = विचलित: दिवास्वप्न = दिन में स्वप्न देखना संवेदना = समान दु:ख, समान वेदना; दाँतों तले अंगुली दबाना = अचम्भा करना; विचरण = घूमना; छक्के छूटना = भयभीत हो जाना; क्षीणकाय = कमजोर शरीर वाला, दुबले = पतले शरीर वाला; अपयश = बुराई: दूरदर्शिता = आगे की सोचना।

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MP Board Class 7th Hindi Bhasha Bharti Solutions Chapter 16 नरबदी

MP Board Class 7th Hindi Bhasha Bharti Solutions Chapter 16 नरबदी

MP Board Class 7th Hindi Bhasha Bharti Chapter 16 पाठ का अभ्यास

बोध प्रश्न

प्रश्न 1.
निम्नांकित प्रश्नों के उत्तर दीजिए

(क) नरबदी कौन थी ? वह किसके साथ रहती थी?
उत्तर
मैकल पर्वत के घने जंगलों के एक गाँव में दुग्गन रहता था। नरबदी उसकी बेटी थी। नरबदी अपने पिता के साथ रहती थी।

(ख) पिता के साथ नरबदी कहाँ रहती थी?
उत्तर
नरबदी अपने पिता के साथ जनजातियों के एक गाँव में रहती थी। यह गाँव आठ-दस झोपड़ियों का गाँव था।

(ग) दुग्गन सुबह-सुबह पहाड़ की दिशा में क्यों चल पड़ा?
उत्तर
बरसात आने वाली थी। दुग्गन को झोंपड़ी की मरम्मत के लिए बाँस की जरूरत थी। बाँस लेने के लिए दुग्गन सुबह-सुबह पहाड़ की दिशा में चल पड़ा।

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(घ) नरबदी झरना क्यों बन गई?
उत्तर
नरबदी अपनी प्यास के कष्ट को भूल गई। उसकी आँखों के सामने परेशान पिता का चेहरा आ गया। उसकी आँखों से आँसुओं की झड़ी लग गई। वह अपने देवता से मन ही मन प्रार्थना करने लगी कि वे उसके पिता की रक्षा करें, क्योंकि उनका प्यास से बुरा हाल है। तुम मेरे प्राण ले लो, लेकिन मेरे प्यारे बाबा को बचा लो। इसके साथ ही नरबदी वहाँ से अदृश्य हो गयी और झरने के रूप में वहाँ से प्रकट हो गई।

(ङ) लोक कथा के अनुसार नरबदी के कारण किस नदी का जन्म हुआ ?
उत्तर
लोक कथा के अनुसार नरबदी के कारण ‘नर्मदा’ नदी का जन्म अमरकण्टक से हुआ।

प्रश्न 2.
निम्नांकित कथनों का आशय स्पष्ट कीजिए

(क) उसकी आँखों के सामने पिता का परेशान चेहरा घूम गया।
आशय-नरबदी को उसके पिता दुग्गन का चेहरा स्पष्ट दिखाई पड़ रहा था। उसके चेहरे से दुग्गन की परेशानी भी झलक रही थी, क्योंकि वह लगातार ही अपनी प्यासी पुत्री के लिए पानी की तलाश कर रहा था। .

(ख) मैं तुम्हारी प्यास बुझाने के लिए झरना बन गई हूँ।
आशय- नरबदी ने अपने परेशान और प्यासे पिता दुग्णन के लिए जल प्राप्त कराने वाले झरने का रूप धारण कर लिया।

प्रश्न 3. रिक्त स्थानों की पूर्ति कीजिए
(क) …………. तब घने जंगलों से घिरा था।
(ख) दुग्गन ने उसे ………….की तरह पाला पोसा था।
(ग) दुग्गन के हाथ अपने आप ………….. में उठकर जुड़ गए।
(घ) मैं तुम्हारी प्यास बुझाने के लिए ……… बन गई हूँ।
(ङ) इस जंगल में अब कभी कोई आदमी … से अपनी जान नहीं देगा।
उत्तर
(क) मैकल पर्वत
(ख) माँ
(ग) प्रार्थना
(घ) झरना
(ङ) प्यास।

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भाषा अध्ययन

प्रश्न 1.
निम्नलिखित शब्दों के सामने कुछ शब्द लिखे हुए हैं। इनमें प्रत्येक के साथ दो-दो पर्यायवाची शब्द हैं, आप उन्हें छाँटकर लिखिए
MP Board Class 7th Hindi Bhasha Bharti Solutions Chapter 16 नरबदी 1

प्रश्न 2.
निम्नलिखित गद्यांश में यथास्थान विराम चिह्नों का प्रयोग कीजिए
वह मन ही मन बड़े देव को मनाने लगी है बड़े देव मेरे बाबा को बचा लेना उनका प्यास के मारे बुरा हाल है पानी नहीं मिला तो वे मर जाएंगे
उत्तर
वह, मन ही मन, बड़े देव को मनाने लगी है। बड़े देव ! मेरे बाबा को बचा लेना। उनका प्यास के मारे बुरा हाल है। पानी नहीं मिला, तो वे मर जाएँगे।

प्रश्न 3.
निम्नलिखित शब्दों का सही क्रम करके सार्थक वाक्य बनाइए
(क) मुस्कुराने की कोशिश नरबदी की ने।
(ख) चुकी थी थक वह तरह बुरी।
(ग) थी वाली बरसात आने।
(घ) वह हो चिन्तित उठा न नरबदी को वहाँ पाकर।
(ङ) रही थी बह नरबदी।
उत्तर
(क) नरबदी ने मुस्कुराने की कोशिश की।
(ख) वह बुरी तरह थक चुकी थी।
(ग) बरसात आने वाली थी।
(घ) नरबदी को वहाँ न पाकर वह चिन्तित हो उठा।
(ङ) नरबदी बह रही थी।

प्रश्न – दिए गए संज्ञा, सर्वनाम, क्रिया, अव्यय शब्दों से उदाहरण के अनुसार विशेषण बनाइए
(क) संज्ञा-(1) धन, (2) सुख, (3) ज्ञान, (4) दान, (5) बल, (6) गुण।
उत्तर
विशेषण-(1) धनी, (2) सुखी, (3) ज्ञानी, (4) दानी, (5) बली, (6) गुणी।

(ख) सर्वनाम-(1) यह, (2) वह, (3) कौन, (4) जो।
उत्तर
विशेषण-(1) ऐसा, (2) वैसा, (3) कैसा, (4) जैसा।

(ग) क्रिया-(1) पढ़ना, (2) लड़ना, (3) झगड़ना, (4) बेचना।
उत्तर
विशेषण-(1) पढ़ाकू, (2) लड़ाकू, (3) झगड़ालू, (4) विकबाल।

(घ) अव्यय-(1) आगे, (2) पीछे, (3) बाहर, (4) ऊपर।
उत्तर
विशेषण-(1) अगला, (2) पिछला, (3) बाहरी, (4) ऊपरी।

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प्रश्न 5.
नीचे बनी तालिकाओं में दिए गए उदाहरणों के अनुसार रिक्त स्थानों की पूर्ति कीजिए
उत्तर
MP Board Class 7th Hindi Bhasha Bharti Solutions Chapter 16 नरबदी 2

नरबदी परीक्षोपयोगी गद्यांशों की व्याख्या 

1. मैकल के शिखर पर घने-ऊँचे पेड़ तो थे, लेकिन झरने की कोई आवाज सुनाई नहीं दे रही थी, दुग्गन भटकता रहा। उसका भी प्यास के मारे बुरा हाल था। वह सोच रहा था-जब प्यास के कारण मेरी यह दशा हैतो नहीं जान नरबदी का क्या हाल होगा? उसने सिर उठाकर आसमान की तरफ देखा। सूरज तमतमाया हुआ था। दुग्गन के हाथ अपने आप प्रार्थना में उठकर जुड़ गए। वह लगभग रुआंसा होकर गिड़गिड़ाया, “हे प्रभु ! मेरी लाडली की रक्षा कर। वह बिना माँ की बच्ची है। उसे कुछ हो गया तो मैं जीवित नहीं रह पाऊँगा।”

सन्दर्भ-प्रस्तुत पंक्तियाँ ‘नरबदी’ नामक पाठ से ली गई हैं। इस लोककथा के लेखक लक्ष्मीनारायण ‘पयोधि हैं।

प्रसंग-प्रस्तुत गोंडी लोक कथा में लेखक ने नर्मदा नदी के उद्गम की कल्पना प्रस्तुत की है।

व्याख्या-मैकल पर्वत (अमरकण्टक पहाड़) की सबसे ऊँची चोटी पर बहुत ऊँचे-ऊँचे पेड़ थे। वहाँ कोई झरना नहीं था, क्योंकि झरने के बहने की आवाज सुनाई नहीं पड़ रही थी। दुग्गन अपनी प्यासी बेटी नरबदी के लिए पानी लाने के लिए चारों और भटकता रहा। वह भी प्यास से पीड़ित था। उसने विचार किया कि जब प्यास से मेरी यह दशा है तो अति छोटी-सी मेरी पुत्री नरबदी का हाल तो प्यास से बहुत बुरा हो रहा होगा। उसने आसमान की ओर देखा। सूरज अपनी रोशनी से तप रहा था। उसने हाथ जोड़कर ईश्वर से प्रार्थना की। वह प्रार्थना करते समय रो रहा था। दयनीय अवस्था में कहने लगा “हे ईश्वर ! तू, मेरी प्यारी पुत्री नरबदी की रक्षा करना। वह बिना माँ की बेटी है। उसको कुछ भी नहीं होना चाहिए, नहीं तो मैं अपना जीवन समाप्त कर दूंगा।”

नरबदी शब्दकोश

शिखर = चोटी; तूम्बा = विशेष प्रकार की लौकी से बना पात्र, बर्तन; लस्त-पस्त = थका हारा ; प्रतिध्वनि = गूंज;झुरमुट = झाड़ियों का समूह।

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MP Board Class 7th Hindi Bhasha Bharti Solutions Chapter 14 मत ठहरो तुमको चलना ही चलना है

MP Board Class 7th Hindi Bhasha Bharti Solutions Chapter 14 मत ठहरो तुमको चलना ही चलना है

MP Board Class 7th Hindi Bhasha Bharti Chapter 14 पाठ का अभ्यास

बोध प्रश्न

प्रश्न 1.
निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर लिखिए

(क) कवि का ठहरने से क्या तात्पर्य है ?
उत्तर
ठहरने से कवि का तात्पर्य है, गतिहीन हो जाना, किसी भी प्रकार की उन्नति से रहित। दूसरा अर्थ जीवन का रुक जाना भी होता है।

(ख) हमें अपने साथ किन्हें लेकर चलना है?
उत्तर
हमें अपने साथ जमाने को लेकर चलना है। साथ ही, पिछड़े हुए लोगों को भी आगे बढ़ाना है।

(ग) जीवन की बाधाओं को कैसे दूर किया जा सकता
उत्तर
पक्के निश्चय से (पक्के इरादों से) जीवन की बाधाओं को दूर किया जा सकता है।

(घ) कवि के अनुसार मनुष्य को कब पछताना पड़ता है?
उत्तर
काम करने के उचित अवसर के हाथ से निकाल दिये जाने पर मनुष्य को पछताना पड़ता है।

(ङ) कवि निरन्तर चलते रहने को महत्त्व क्यों दे रहा
उत्तर
कवि निरन्तर चलते रहने को महत्त्व इसलिए दे रहा है, क्योंकि ठहरना पतन का और मृत्यु का प्रतीक है। जीवन में ठहराव अवनति लाने वाला होता है।

(च) समय व्यर्थ क्यों नहीं गवाना चाहिए?
उत्तर
हमें अपना समय व्यर्थ नहीं गँवाना चाहिए। अपनी जिम्मेदारी का निभाना ही ईश्वर की पूजा है। अतः प्रत्येक क्षण का सही उपयोग करते हुए काम को पूरा करें, नहीं तो काम करने के उचित अवसर के बीत जाने पर हमें पछताना पड़ेगा।

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प्रश्न 2.
निम्नांकित पंक्तियों के भाव स्पष्ट कीजिए

(क) तुमको प्रतीक बनना है, विश्व प्रगति का।
तुमको जनहित के साँचे में ढलना है।
उत्तर
हे मनुष्य, तुम्हें संसार की प्रगति के प्रतीक (पहचान) बनकर प्रत्येक मनुष्य की भलाई के लिए एक साँचा . (आदर्श) बन जाना चाहिए।

(ख) जितने भी रोड़े मिलें, उन्हें ठुकराओ।
पच के कांटों को पैरों से दलना है।
उत्तर
हे मनुष्य, तुम्हारे मार्ग में कितनी ही बाधाएँ और रुकावटें भले ही आ जाएँ, परन्तु उन्हें अपने पैर की ठोकर से हटा दो। मार्ग में कितने भी काँटे हो सकते हैं, परन्तु हिम्मत के साथ उनके ऊपर से चलते हुए, उन्हें कुचलते हुए आगे ही आगे बढ़ते जाना चाहिए। मार्ग की बाधाओं और रुकावटों को हिम्मत से दूर करते हुए, अपने निश्चित मार्ग पर आगे ही आगे गतिमान बने रहना हमारा कर्तव्य है।

प्रश्न 3.
रिक्त स्थानों की पूर्ति कीजिए

(क) सुख की खोज बड़ी ………….. है।
(ख) जनहित के साँचे में ……….. है।
(ग) काँटों को पैरों से ……….. है।
(घ) अवसर खोकर हाथ ………… है।
(ङ) प्रण से तुम्हें नहीं ………. है।
उत्तर
(क) छलना
(ख) ढलना
(ग) दलना
(घ) मलना
(ङ) टलना

भाषा अध्ययन

प्रश्न 1.
निम्नलिखित मुहावरों का अर्थ लिखिए। साथ ही कविता में उन पंक्तियों को छाँटकर लिखिए, जिनमें इन मुहावरों का प्रयोग हुआ है
(क) साँचे में ढलना
(ख) हाथ मलना
(ग) व्रत लेना
(घ) जुट जाना
(ङ) अवसर खोना।
उत्तर
(1) अर्थ-(क) अनुसार बन जाना
(ख) पछताना
(ग) प्रतिज्ञा कर लेना
(घ) लग जाना
(ङ) समय को निकाल देना।

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(2) पंक्तियाँ जिनमें मुहावरों का प्रयोग हुआ है
(क) तुमको जनहित के साँचे में ढलना है।
(ख) अवसर खोकर तो सदा हाथ मलना है।
(ग) जब चलने का व्रत लिया, ठहरना कैसा?
(घ) जो कुछ करना है, उठो ! करो, जुट जाओ।
(ङ) अवसर खोकर तो सदा हाथ मलना है।

प्रश्न 2.
इस कविता के तुकान्त शब्द छाँटकर लिखिए।
उत्तर
(क) चलना, टलना, छलना, ढलना, दलना मलना।
(ख) पतन, जीवन।
(ग) चलाओ, बढ़ाओ, ठुकराओ, जुट जाओ, गँवाओ।
(घ) आती, जाती।

प्रश्न 3.
निम्नलिखित वाक्यों में रेखांकित शब्दों के । विलोम शब्द भरिए
(क) जीवन में उत्थान और ………… आते ही रहते हैं।
(ख) कहीं भी अधिक ठहरना अच्छा नहीं, हमेशा प्रगति के – पथ पर ……..अच्छा है।
(ग) पशु-पक्षी भी अपना हित ……….. जानते हैं।
(घ) असफलता के बाद ……….का मिलना एक प्रक्रिया
(ङ) सुख सभी चाहते हैं ………कोई नहीं।
उत्तर
(क) पतन
(ख) चलना
(ग) अनहित
(घ) सफलता
(ङ) दुःख।

प्रश्न 4.
दिये गये प्रयोगों की तरह नीचे दिए गए वाक्यों 1 में ‘मत’ का प्रयोग कीजिए।
(क) रुको मत, आगे बढ़ो।
(ख) पढ़ो मत, बात करो।
(ग) हँसो मत, भोजन करो।
(घ) भागो मत, धीरे चलो।
उत्तर
(क) मत रुको, आगे बढ़ो।
(ख) पढ़ो, मत बात करो।
(ग) मत हँसो, भोजन करो।
(घ) मत भागो, धीरे चलो।

मत ठहरो तुमको चलना ही चलना है सम्पूर्ण पद्यांशों की व्याख्या

1. मत ठहरो, तुमको चलना ही चलना है।
चलने के प्रण से, तुम्हें नहीं टलना है।
केवल गति ही जीवन, विश्रान्ति पतन है।
तुम ठहरे, तो समझो ठहरा जीवन है।
जब चलने का व्रत लिया, ठहरना कैसा?
अपने हित सुख की खोज बड़ी छलना है।
मत ठहरो, तुमको चलना ही चलना है।

शब्दार्थ-प्रण = प्रतिज्ञा; टलना = हटना; गति = चलना; विश्रान्ति = थकान, या रुकावट; पतन = गिरावट, अधोगति; ठहरे = स्थिर होना, रुकना; व्रत = प्रण, प्रतिज्ञा; हित = भलाई के लिए, कल्याण के लिए;
छलना = धोखा; ठहरो-रुको।

सन्दर्भ-प्रस्तुत पद्यांश हमारी पाठ्य पुस्तक की कविता ‘मत ठहरो तुमको चलना ही चलना है’ से लिया गया है। इस कविता के रचयिता श्रीकृष्ण ‘सरल’ हैं।

प्रसंग-जीवन गतिमान होता है। ठहराव आने पर अवनति हो जाती है।

व्याख्या-हे मनुष्य ! तुम्हें ठहरना नहीं है। तुम्हें तो लगातार चलते रहना है। तुमने चलने का जो प्रण (व्रत, प्रतिज्ञा) किया है, उसी पर तुम्हें मजबूती से बने रहना है। उससे बिल्कुल भी हटना नहीं है। जीवन में गति हुआ करती है। थकान या रुकावट आने पर आदमी को समझ लेना चाहिए कि उसके जीवन में गिरावट आ गई। इसलिए तुम्हारे ठहराव से जीवन भी ठहर जाता है। शायद उसे फिर जीवन नहीं कहते हैं, परन्तु जब हमने चलते रहने का प्रण किया हुआ है, प्रतिज्ञा की हुई है तो ठहराव किस बात का, कैसा ? अपने कल्याण के लिए यदि हम सुख की खोज करते हैं, तो यही एक धोखा है। तुम्हें बिना ठहरे ही चलते रहना है।

2. तुम चलो, जमाना अपने साथ चलाओ,
जो पिछड़ गये हैं, आगे उन्हें बढ़ाओ।
तुमको प्रतीक बनना है, विश्व प्रगति का,
तुमको जनहित के साँचे में ढलना है।
मत व्हरो तुमको चलना ही चलना है।

शब्दार्थ-जमाना = युग; प्रतीक = चिह्न, पहचान; विश्व प्रगति-संसार की उन्नति जनहित सभी लोगों की भलाई के।

सन्दर्भ-पूर्व की तरह। प्रसंग-कवि सन्देश दे रहा है कि हमें आगे बढ़ना चाहिए और दुनिया के अन्य लोगों को भी आगे बढ़ाना चाहिए।

व्याख्या-कवि कहता है कि तुम्हें लगातार चलते रहना है, साथ ही युग को भी अपने साथ चलाना है। इस उन्नति की दौड़ में जो पीछे रह गये हैं, उन्हें भी आगे बढ़ाने का हमारा कर्तव्य है। इस तरह संसार की उन्नति का, उसमें परिवर्तन लाने का आदर्श बनकर तुम्हें प्रतीक (पहचान) बनना है। इस संसार के लोगों की भलाई के लिए कार्य करने के साँचे में तुम्हें ढल जाना चाहिए। इसलिए तुम ठहरो मत, तुम्हें तो आगे ही आगे बढ़ते जाना है।

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3. बाधाएँ, असफलताएँ तो आती हैं।
दृढ़ निश्चय लख, वे स्वयं चली जाती हैं।
जितने भी रोड़े मिलें, उन्हें ठुकराओ,
पथ के काँटों को पैरों से दलना है।
मत ठहरो तुमको चलना ही चलना है।

शब्दार्थ-बाधाएँ = रुकावटें; असफलताएँ = विफलताएँ; दृढ़ निश्चय- पक्का इरादा; लख – देखकर रोड़े-रुकावट, मार्ग की बाधाएँ ठुकराओ = ठोकर मारकर हटा दो; पथ – मार्ग; दलना = कुचलना है।

सन्दर्भ-पूर्व की तरह।

प्रसंग-कवि सन्देश देता है कि हमें असफलताओं, बाधाओं से नहीं घबराना चाहिए।

व्याख्या-मनुष्य के जीवन में आने वाली बाधाएँ (रुकावटें) और विफलताएँ मनुष्य के पक्के इरादों को देखकर अपने आप ही चली जाती हैं। वे उसके मार्ग में रुकावट बनने से हट जाती हैं। इसलिए मार्ग के रोड़ों को अपने पैर की ठोकर से एक तरफ हटा दो। अपने मार्ग के काँटों को अपने पैरों से कुचल डालो और अपने मार्ग पर चलते रहो, तुम्हें रुकना नहीं है।

4. जो कुछ करना है, उठो ! करो, जुट जाओ,
जीवन का कोई क्षण, मत व्यर्थ गवाओ।
कर लिया काम, भज लिया राम यह सच है,
अवसर खोकर तो सदा हाथ मलना है।
मत ठहरो तुमको चलना ही चलना है।

शब्दार्थ-जुट जाओ – (काम में) लग जाओ; व्यर्थ = बेकार, निष्फल; गँवाओ= नष्ट करो, बिताओ; अवसर खोकर – मौका नष्ट करके; सदा = हमेशा; हाथ मलना है पश्चाताप करना है, पछताना है।

सन्दर्भ-पूर्व की तरह।

प्रसंग-कवि कहता है कि समय व्यर्थ बिताकर मनुष्य को जीवनभर पश्चाताप करना पड़ता है।

व्याख्या-हे मनुष्यो ! तुम्हें जो भी कार्य करना है, उसे पूरा करने के लिए तुम्हें उठना चाहिए। कार्य पूरा करो। कार्य में तल्लीन होकर लग जाओ। अपने जीवन के समय का एक भी क्षण व्यर्थ (बेकार के कामों में) नहीं बिताना चाहिए। यदि तुमने अपने कर्तव्य का पालन किया हुआ है, तो समझो तुमने राम का भजन कर लिया। अर्थात् अपनी जिम्मेदारी का निर्वाह करना ही ईश्वर की भक्ति है। काम को पूरा करने का समय गंवा दिया, तो फिर सदा ही पछताना पड़ेगा। इसलिए तुम्हें ठहरना नहीं, सदैव गतिमान बने रहो।

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MP Board Class 7th Hindi Bhasha Bharti Solutions Chapter 13 अगर नाक न होती

MP Board Class 7th Hindi Bhasha Bharti Solutions Chapter 13 अगर नाक न होती

MP Board Class 7th Hindi Bhasha Bharti Chapter 13 पाठ का अभ्यास

बोध प्रश्न

प्रश्न 1.
निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर लिखिए

(क) नाक को किस बात का प्रतीक माना जाता है?
उत्तर
नाक को इज्जत व प्रतिष्ठा का प्रतीक माना जाता

(ख) आदमी सामान्यतः नाक रगड़ने को कब मजबूर हो जाता है?
उत्तर
जब आदमी का बुरा वक्त आता है या उसे किसी से कोई काम करवाना होता है, तब वह सारा अक्खड़पन भूल जाता है और वह हजार बार नाक रगड़ने को मजबूर हो जाता है।

(ग) असली हींग और देशी घी की पहचान में नाक का क्या उपयोग है?
उत्तर
नाक से ही असली हींग और देशी घी की पहचान कर सकते हैं। नाक की सहायता से सँघकर असली और नकली की पहचान करते हैं। इसलिए नाक का सूंघने की अपनी इसी विशेषता के कारण बड़ा महत्व है, उपयोग है।

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(घ) नाक हीटर का काम कैसे करती है ?
उत्तर
बाहर की ठण्डी हवा को नाक गरम करती है और तब उसे अन्दर जाने देती है। हवाओं को गरम करने के कारण ही नाक हीटर का काम करती है।

(ङ) नाक में कौन-से आभूषण पहने जाते हैं ?
उत्तर
नाक में सोने की हीरे-मोती जड़ी नथ, नथुनी, लौंग, बुलाक, आदि आभूषण पहने जाते हैं।

(च) नाक के लिए कोई चार उपमाएँ लिखिए
उत्तर
नाक को प्रायः निम्नलिखित चार उपमाएँ देकर वर्णित किया गया है

  1. सारस जैसी लम्बी
  2. चिलगोजे जैसी छोटी
  3. चोथ जैसी चपटी
  4. पकौड़ा जैसी मोटी।

प्रश्न 2.
इन कर्मेन्द्रियों को उनके कामों (कार्यों से मिलाओ और सामने लिखो

(1) सूंघना – (क) आँख
(2) छूना – (ख) कान
(3) देखना – (ग) नाक
(4) सुनना – घ) मुँह
(5) चखना – (ङ) त्वचा
उत्तर
(क)→ (3),(ख)→(4),(ग)→(1),(घ)→ (5),(ङ) → (2)

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भाषा अध्ययन

ग्रान 1.
इस पाठ में आये हुए-तत्सम, तद्भव, देशज और विदेशी शब्द छाँटकर लिखिए
उत्तर
तत्सम् = मनोवैज्ञानिक, मृत्यु, उच्छ्वास, प्रदूषण, पर्यावरण।
तद्भव = ब्याह, रूठ, सहेली, हेकड़ी, शिख, नख, पाँव।
देशज = छोछक, नकटा, नथुनी, बुलाक, असली, नकसुरा, छन्ना।
विदेशी = कूलर, टी.वी., फ्रिज, प्लास्टिक सर्जरी, कटलेट।

प्रश्न 2.
निम्नलिखित सम्बन्ध बोधक अव्ययों का प्रयोग करते हुए वाक्य बनाइए
के सामने, के बिना, के नीचे, के ऊपर, की ओर, के बदले की अपेक्षा, के साथ।
उत्तर
मेरे घर के सामने स्थित पेड़ के नीचे वे बैठते हैं। उस पेड़ के ऊपर पक्षी रहते हैं।
बालक माता-पिता के बिना सुस्त दिखते हैं।
रवीन्द्र के बदले उसके साथ मोहन खेत की ओर गया,
क्योंकि उसकी अपेक्षा मोहन ताकतवर है।

प्रश्न 3.
‘नाक’ शब्द से अनेक मुहावरे बनते हैं। निम्नलिखित तालिका में ‘नाक’ शब्द जोड़कर मुहावरे बनाइए
रखना, कटना, ऊंची रखना, फुलाना, रहना, के नीचे, चने चबाना।
उत्तर
नाक रखना। नाक कटना। नाक ऊँची रखना। नाक फुलाना। नाक रहना। नाक के नीचे। नाकों चने चबाना।
मुहावरों का अर्थ-इज्जत का बचाव करना। इज्जत चली जाना। सम्मान बनाये रखना। गुस्सा हो जाना। इज्जत या सम्मान का बना रहना। उपस्थिति में परेशान करना।

प्रश्न 4.
निम्नलिखित शब्दों के पीछे ‘दिखाना’ शब्द जोड़ने से बने मुहावरों को वाक्यों में प्रयोग कीजिए
आँख, अँगूठा, दाँत, पीठ, जीभ, आईना।
उत्तर
MP Board Class 7th Hindi Bhasha Bharti Solutions Chapter 13 अगर नाक न होती 1

प्रश्न 5.
‘कितना’ और ‘अगर’ शब्द लगाकर पाँच वाक्य बनाओ।
उत्तर

  1. ‘कितना’ अच्छा होता ‘अगर’ वह परीक्षा में पास हो जाता।
  2. ‘कितना अच्छा होता ‘अगर’ मेरा मित्र आज यहाँ आ जाता।
  3. ‘कितना’ अच्छा होता ‘अगर’ वह मेरी सहायता कर देता।
  4. ‘कितना अच्छा होता ‘अगर’ वह मेरे साथ यात्रा में होता।
  5. ‘कितना’ अच्छा होता ‘अगर’ वह मेरे विद्यालय में प्रवेश लेता।

प्रश्न 6.
निम्नलिखित वाक्यों को दिए गये उदाहरण के अनुसार बदलिए
(क) वे मौके की तलाश में रहते हैं कि कब, कैसे, किसी की नाक रगड़ दें।
(ख) यह कोशिश रहती है कि उसकी नाक न कटे।
(ग) आज तुम्हें अच्छा गाना सुनाती हूँ।
(घ) सेठ जी अपने बच्चे के जन्म दिन पर सभी को दावत खिलाते हैं।
उत्तर
(क) वे मौके की तलाश में रहते हैं कि कब, कैसे, किसी की नाक रगड़वा दें।
(ख) यह कोशिश रहती है कि उसकी नाक न कटवा दें। (ग) आज तुम्हें अच्छा गाना सुनवाती हूँ।
(घ) सेठ जी अपने बच्चे के जन्मदिन पर सभी को दावत खिलवाते हैं।

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प्रश्न 7.
उदाहरण के अनुसार क्रियारूप परिवर्तन करके लिखिए
खाना, जाना, गाना, पढ़ना, हँसना, रोना, सोना, धोना।
उत्तर

  1. खाकर, खाया
  2. जाकर, गया
  3. गाकर, गाया
  4. पढकर, पढ़ा
  5. हँसकर, हंसा
  6. रोकर, रोया
  7. सोकर, सोया
  8. धोकर, धोया।

प्रश्न 8.
नीचे उर्दू के शब्द दिए गये हैं, उनके हिन्दी शब्द लिखिए
औकात, आदमी, खानदान, इल्जाम, वक्त, तलाश, जिन्दगी, मर्द।
उत्तर

  1. क्षमता
  2. मनुष्य
  3. कुटुम्ब
  4. दोष
  5. समय
  6. अन्वेषण
  7. जीवन
  8. पुरुष।

अगर नाक न होती परीक्षोपयोगी गद्यांशों की व्याख्या

1. नाक की चिन्ता में आदमी का जीना मुहाल हो गया है। नाक रखने की खातिर लोग मुकदमेबाजी में बरबाद हो जाते हैं, कर्ज लेकर भी व्याह-शादी, भात-छोछक आदि में अन्धाधुन्ध खर्च करते हैं। जन्म पर ही नहीं, मृत्यु पर भी दावत खिलाते हैं। खरीदने की औकात न होने पर भी महंगी किश्त देकर टी.वी., फ्रिज या कूलर आदि ले आते हैं, क्योंकि नाक नीची होने से डरते हैं। लोग अपनी धाक जमाने के लिए नाक ऊँची रखते हैं।

सन्दर्भ-प्रस्तुत पंक्तियाँ ‘अगर नाक न होती’ नामक पाठ से अवतरित हैं। इसके लेखक ‘गोपाल बाबू शर्मा हैं।

प्रसंग-इस पाठ में लेखक ने अपनी व्यंग्य शैली में नाक के रखने या नाक के कट जाने जैसे मुहावरों का प्रयोग करके बताया है, कि आदमी इस खातिर न जाने कितने आडम्बर युक्त कार्य करता है।

व्याख्या-लेखक कहता है कि आज आदमी अपनी इज्जत रखने की चिन्ता में बड़ी कठिनाई से जीवन जी रहा है। अपनी नाक रखने की (इज्जत रखने की) चिन्ता लगी रहती है, अतः वह मुकदमेबाजी में धन खर्च कर देता है और नष्ट हो जाता है। चाहे उसे ऋण (कर्ज) लेना पड़े. फिर भी विवाह, भात-छोछक जैसे कामों के ऊपर आँख बन्द करके व्यय करता है। लोग बच्चे के जन्म की खुशी पर दावत देते हैं, साथ ही वे मृत्युभोज देकर भी अपना नाम कमा लेने की बात करते हैं। उनकी उतनी हैसियत न हो, पर कितना भी महँगा टी. वी. हो, फ्रिज हो या कूलर हो, इन सबको वे खरीदते हैं। किश्त का ऋण चुकाने के लिए वे परेशान हो सकते हैं, परन्तु उन्हें अपनी नाक नीची होने का भय सताता रहता है। अपनी नाक रखने के लिए (इज्जत बचाने के लिए) वे गलत और अनुचित काम करने से भी पीछे नहीं हटते हैं।

2. नाक के कारण आदमी को नाकों चने चबाने पड़ते हैं। नाक बड़ी जल्दी कटती है और प्रायः बिना किसी हथियार के ही कट जाती है। आदमी की अपनी नाक के साथ खानदान की नाक भी जुड़ी रहती है। कभी कोई ऐसी-वैसी बात हो जाए, लड़का घर से रूठकर भाग जाए, कोई झूठ-मूठा इलजाम जान को लग जाए, तो अपनी ही नहीं, पूरे खानदान की नाक कट जाती है।

सन्दर्भ-पूर्व की तरह।

प्रसंग-अपनी इज्जत रखने के लिए (नाक रखने के लिए) आदमी अनेक तरह की कोशिश करता है।

व्याख्या-आदमी यदि अपनी इज्जत बचाना चाहता है, तो उसे अच्छा खासा परिश्रम करना पड़ता है। आज आदमी की नाक (इज्जत) बड़ी जल्दी ही चली जाती है (कट जाती है), इस काम के लिए उसे किसी हथियार आदि का प्रयोग भी नहीं करना पड़ता। अकेले उस आदमी की ही नहीं, उसके परिवार के, उसके सम्बन्धी लोगों की भी नाक चट से कट जाती है। उनकी इज्जत चली जाती है। छोटी-मोटी घटना के घट जाने से उस आदमी के सम्बन्धियों आदि की भी इज्जत समाप्त हो जाती है। चाहे उनके घर-परिवार में छोटी-से-छोटी घटना ही क्यों न घट जाए-वह भी बहुत महत्वपूर्ण बात मानी जाती है।

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3. जब आदमी का बुरा वक्त आता है, या उसे किसी सेकोई काम करवाना होता है, तब वह सारी हेकड़ी भूल जाता है। एक बार क्या हजार बार नाक रगड़ता है। जब कोई गलती हो जाती है, तब भी आदमी को अपनी नाक रगड़नी पड़ती है। जिन लोगों में बदले या ईर्ष्या की भावना होती है, वे भी मौके की तलाश में रहते हैं कि कब, कैसे किसी की नाक रगड़वा दें।

सन्दर्भ-पूर्व की तरह।

प्रसंग-आदमी के ऊपर बुरे समय के आने पर भी उसे अपनी इज्जत बचाने के लाले पड़ सकते हैं।

व्याख्या-आदमी के जब खराब दिन आते हैं, तो वह अपना सारा अक्खड़पन भूल जाता है। उसे अपने काम करवाने के लिए अनेक बार अपनी इज्जत की परवाह न करते हुए भी नीचे दर्जे का व्यवहार करने पर उतारू रहना पड़ता है। अपनी गलती के लिए भी आदमी को अपनी आत्मा के विरुद्ध आचरण अपनाना पड़ता है। ऐसी विपरीत दशा में, कुछ लोग जो जलनशील स्वभाव के होते हैं अथवा जो बदला लेना चाहते हैं, वे भी अपने ऐसे मौके की तलाश जारी रखते हैं, जिसमें वे अपने विरोधी की नाक काटना चाहते हैं। वे उसे नीचा दिखाना चाहते हैं।

4. गुस्सा भी बहुत से लोगों की नाक पर रखा रहता है। उनसे जरा कुछ कहा नहीं कि बिना बात नाक फुला लेते हैं। नाक में जितनी कमियाँ या बुराइयाँ हैं, उससे ज्यादा अच्छाइयाँ हैं इसलिए जिनकी नाक नहीं होती है, वे भी नाक लगाते हैं, भले ही इस बात पर कोई दूसरा नाक भौंह सिकोड़े तो सिकोड़ता रहे।

सन्दर्भ-पूर्व की तरह।

प्रसंग-बहुत जल्दी ही नाराज हो जाने वाले आदमियों पर – व्यंग्य कसा जा रहा है।

व्याख्या-लेखक कहता है कि कुछ लोग इस तरह के होते हैं कि वे छोटी-छोटी बातों पर नाराज हो जाते हैं। उनसे चाहे, उनके फायदे की ही बात क्यों न कही जायें, परन्तु फिर भी वे अपनी नाक फुला लेते हैं अर्थात् अपना क्रोध प्रकट कर बैठते हैं। इस तरह नाक से सम्बन्धी अनेक बुराइयाँ हो सकती हैं, अनेक कमियाँ हो सकती हैं, परन्तु हमें यह भी ध्यान रखना चाहिए कि नाक से अनेक लाभ भी हैं, क्योंकि शरीर के एक अंग होने की दशा में नाक अपना अलग ही महत्व रखती है जिसे कटने से – बचाये रखने के लिए अति खर्चीले काम भी करने पड़ते हैं।

अगर नाक न होती शब्दकोश

मुहाल = कठिन औकात = हैसियत; हेकड़ी = अकड़, अड़ना; फ्रन्ट = मुकाबला या सामना; नक्कूशाह- अपने आपको बड़ा समझने वाला; निःश्वास = श्वास निकाल देना, बिना सांस लिए; नाक नीची होना – अपमानित होना; नाक बचाना = सम्मान की रक्षा करना; भात-छोछक = विवाह अथवा बच्चे के जन्म के समय पर मामा के द्वारा दिया जाने वाला । भेंट; फुरेरी = सींक व तिनके के सिरे पर लिपटी हुई रुई जिस पर इत्र, तेल आदि चुपड़ा जाता है; चोथ = गाय, भैंस का गोबर,सुतवाँ = लम्बी, पतली; उच्छ्वास = लम्बी साँसें, गहरी साँसे; नाक रखना = सम्मान रखना; नाक जमाना = प्रभाव छोड़ना; नाकों चने चबाना = बहुत कष्ट सहना; असम्मानित होना = अनादरित होना; मान न मान मैं तेरा मेहमान = जबरदस्ती करना; नाक फुलाना = रूठ जाना; हाथ के तोते उड़ जाना = घबरा जाना; नानी याद आना = बड़े संकट में पड़ जाना; न बैठने देना = चैन न लेने देना; नाक नचाना = परेशान करना; सिर खाना = परेशान करना; नाक का बाल बनना बहुत प्रिय होना; आँख दिखाना = हीनता प्रकट करना; पीठ दिखाना =घर के लिए भाग जाना; नाक रगड़ना-मिन्नतें करना; गुस्सा नाक पर रखा होना – जल्दी नाराज हो जाना; सोने में सुहागा – अच्छी वस्तु में और अधिक अच्छाई; चार चाँद लगाना – सुन्दरता बढ़ जाना नाक पर मक्खी तक न बैठने देना- अपने विरुद्ध कुछ भी न सुनना; नाक के नीचे होना = उपस्थिति में, मौजूदगी में, नाक रहना = सम्मान बचे रहना; मुँह की खाना = घर जाना, अपमानित होना; सिंगट्टा दिखाना = बेवकूफ बना देना, प्रार्थना न सुनना; दाँत दिखाना = हीनता प्रकट करना।

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