MP Board Class 10th General Hindi व्याकरण विलोम या विपरीतार्थी शब्द
किसी शब्द का विपरीत या उल्टा अर्थ देने वाले शब्द विपरीतार्थी या विलोम शब्द कहलाते हैं।
यहाँ कुछ शब्दों के विलोम या विपरीतार्थी शब्द दिए जा रहे हैं-




किसी शब्द का विपरीत या उल्टा अर्थ देने वाले शब्द विपरीतार्थी या विलोम शब्द कहलाते हैं।
यहाँ कुछ शब्दों के विलोम या विपरीतार्थी शब्द दिए जा रहे हैं-




अनेकार्थक या अनेकार्थी शब्द वे शब्द कहलाते हैं, जिनके अर्थ एक से अधिक होते हैं। जैसे – ‘कल’। ‘कल’ शब्द का अर्थ ‘शोर’ भी है, ‘मशीन’ भी है, ‘शांति’ भी है और ‘आने वाला अथवा बीता हुआ दिवस’ भी है। इस प्रकार के कई शब्द एक भाषा में रहते हैं। इनसे परिचित होना अत्यंत आवश्यक है।
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नीचे कुछ शब्द दिए जा रहे हैं–
एक अर्थ प्रकट करने के लिए प्रत्येक भाषा में कई शब्द होते हैं। ऐसे शब्द समानार्थी या पर्यायवाची शब्द कहलाते हैं। वास्तव में तो एक–एक शब्द के सभी पर्यायवाची शब्दों का अर्थ एक समान नहीं होता, उनमें सूक्ष्म अंतर होता है। हवा, प्रभंजन, समीर, झंझा पर्यायवाची शब्द हैं।
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नीचे कुछ पर्यायवाची शब्द दिए जा रहे हैं–
प्रश्न 1.
शब्द की परिभाषा दें।
उत्तर-
शब्द की परिभाषा-निश्चित अर्थ को प्रकट करने वाले वर्ण-समूह को शब्द कहते हैं। जैसे-घर, रोटी, अर्थ, विचार, शब्द आदि।
प्रश्न 2.
शब्द के कितने रूप हैं? उदाहरण सहित समझाएँ।
उत्तरउत्पत्ति के आधार पर हिंदी में शब्द के चार भेद हैं
1. तत्सम-संस्कृत भाषा के ऐसे शब्द, जो हिंदी में भी अपने मूल रूप में प्रचलित हैं, तत्सम कहलाते हैं। जैसे-वायु, नारी, सत्य, छात्र, समुद्र आदि।
2. तद्भव-जो शब्द संस्कृत भाषा के शब्दों से बिगड़ कर हिंदी में प्रचलित हैं, तद्भव कहलाते हैं। जैसे-सपना (स्वप्न), दूध (दुग्ध)।
3. देशज-जो शब्द स्थानीय पदार्थ के रूप में, कार्य के रूप में अथवा ध्वनि के अनुसार प्रसिद्ध और प्रचलित हैं, देशज कहलाते हैं। ये शब्द देश की विभिन्न बोलियों से लिये गए हैं। जैसे–पेट, खिड़की, थूक, चीनी।
4. विदेशी-वे शब्द, जो अंग्रेज़ी, अरबी, फारसी, तुर्की, पुर्तगाली, फ्रांसीसी आदि विदेशी भाषाओं से हिंदी में आए हैं, विदेशी कहलाते हैं। जैसे-स्कूल, बटन, आलू, गरीब, किताब, लाश।
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प्रश्न 3.
तत्सम एवं तद्भव शब्द रूपों के अन्तर उदाहरण सहित समझाएँ।
उत्तर-
तत्सम और तद्भव शब्द-
तत्सम शब्द-
हिंदी में संस्कृत के कुछ शब्दों को ज्यों का त्यों (यथावत्) ले लिया है। ऐसे शब्द तत्सम कहलाते हैं।
तद्भव शब्द-
संस्कृत के कुछ शब्द ऐसे हैं, जिनका रूप परिवर्तन करके हिंदी में अपनाया गया है। ऐसे शब्दों को तद्भव शब्द कहते हैं। यहाँ कुछ तद्भव शब्द और उनके तत्सम रूप दिए जा रहे हैं
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प्रश्न 4.
हिन्दी में प्रयुक्त होने वाले कुछ विदेशी शब्दों के उदाहरण दें?
उत्तर-
अंग्रेजी-स्टेशन, राशन, सिनेमा, टेलीविजन, टिकट, फीस, रेडियो, डॉक्टर, बैंक आदि।
अरबी-मौलवी, अदालत, अमीर, मालिक, दुनिया, फकीर, तारीख, किताब, कसर आदि।
फारसी-जिंदगी, बाग, चश्मा, खरगोश, चाकू, कारखाना, रूमाल, शिकायत, जल्दी, खरीद, तमाम, ज़मीन, फौज़, काग़ज़, हज़ार, दुकान, बादाम आदि।
पुर्तगाली-प्याला, आलू, साबुन, नीलाम, पिस्तौल, आदि।
ग्रीक-सुरंग, दाम आदि।
तुर्की-दारोगा, तमगा, काबू, लाश, कालीन, तोप आदि।
फ्रांसीसी-कूपन, अंगरेज़, कारतूस आदि।
प्रश्न 1.
वर्तनी की परिभाषा दें।
उत्तर-
‘वर्तनी’ का अर्थ है उच्चारण के अनुरूप वर्ण-विन्यास। इसे अंग्रेजी में (spelling) कहते हैं। सामान्यतया लिखने की रीति को वर्तनी कहते हैं। वर्तनी की शुद्धता के लिए उच्चारण की शुद्धता आवश्यक है। यदि उच्चारण गलत हुआ तो वर्तनी भी गलत होती है।
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प्रश्न 2.
वर्तनी संशोधन के नियमों पर प्रकाश डालें।
उत्तर-
वर्तनी संबंधी कुछ नियम हैं, जिनका पालन करने से शब्दों के शुद्ध रूप लिखे जा सकते हैं।
1. किसी भी स्वर के साथ किसी अन्य स्वर की मात्रा नहीं लगनी चाहिए।
जैसे-
‘अ’ अिस, ओक, अपर-ये अशुद्ध रूप हैं।
इस, एक, ऊपर-ये शुद्ध रूप हैं।
2. भाववाची-ति, नि, धि, टि से समाप्त होने वाली स्त्रीलिंग संज्ञाओं की अंतिम ‘इ’ ह्रस्व होती है।
जैसे-
भक्ति, शक्ति, नीति, प्रीति, रीति, जाति आदि।
3. संस्कृत के तत्सम पुल्लिंग शब्द के अंतिम इ, उ, प्रायः ह्रस्व होते हैं।
जैसे-
कवि, कपि, हरि, रवि, वाल्मीकि, उदधि आदि।
4. तद्भव तथा विदेशी भाषाओं में आए पुल्लिंग शब्दों के अंतिम इ, उ दीर्घ होते हैं।
जैसे-
अंग्रेजी, फ्रांसीसी, आलू, भालू, डाकू, लड़ाकू।
5. ‘ऋ’ स्वर है। कभी-कभी उसका उच्चारण, रि, रु इस प्रकार करके इसी से शब्द लिखते हैं, वह अशुद्ध रूप है। ‘ऋ’ प्रारंभ में लगने वाले शब्द को ‘र’ से नहीं ‘ऋ’ से लिखना चाहिए
जैसे-
ऋतु लिखना चाहिए, रितु नहीं।
शुद्ध रूप-ऋचा, ऋग्वेद, ऋण, वृष्टि, कृषक, कृष्ण, तृण, तृष्णा आदि।
6. ‘घ’ तथा ‘ध’ वाले शब्द-‘घ’-घर, घोड़ा, घनश्याम, घड़ा, घमण्ड आदि।
‘ध’-धैर्य, धर्म, धन, धमाका, धाम आदि।
7. ‘व’ और ‘ब’ में अंतर-‘व’ के उच्चारण में होठ’ (ओठ) खुले रहते हैं और ‘ब’ के उच्चारण में बंद हो जाते हैं।
‘व’ वाले शब्द-वह, वर्ण, विवाहर, विश्व इत्यादि।
‘ब’ वाले शब्द-बाहर, बंद, बंदर, बँटवारा, बाप, बतासा, बनावट, बारात इत्यादि।
8. श, ष, स का अन्तर-‘श’ वाले शब्द-शहर, शरबत, शेर इत्यादि।
‘ष’ वाले शब्द-षट्कोण, नष्ट, कष्ट, राष्ट्र, युधिष्ठिर, विशिष्ट इत्यादि।
‘स’ वाले शब्द-समाज, सपेरा, समय, सावन, स्वागत, सरौता, सबेरा, स्वर्ग इत्यादि।
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प्रश्न 3.
परसर्ग या कारक चिह्न का प्रयोग कहाँ किया जाता है?
उत्तर-
परसर्ग या कारक चिह्न का प्रयोग-संज्ञा शब्दों के साथ होना चाहिए। इस प्रकार जैसे-राम ने, मोहन को, घर में सर्वनाम के साथ प्रयोग-जैसे-मैंने, आपने, उन्होंने, उनको, जिसको इत्यादि।
प्रश्न 4.
योजक चिह्न का प्रयोग सोदाहरण समझाइये।
उत्तर-
योजक चिह्न का प्रयोग समानपद में करना चाहिए।
जैसे-
माता-पिता,
भाई-बहन,
पाप-पुण्य,
सरस्वती – वन्दना,
शोध-संस्था,
रात-दिन आदि।
प्रश्न 5.
शुद्ध एवं अशुद्ध वर्तनी को उदाहरण सहित समझाएँ।
उत्तर-
जैसे-

प्रश्न 6.
वर्ण तथा शब्द में क्या अंतर है?
उत्तर-
ध्वनि का लिखित रूप वर्ण कहलाता है। वर्ण भाषा की सबसे छोटी इकाई है। इन्हें विभाजित नहीं किया जा सकता, परन्तु वर्णों के सार्थक समूह से शब्दों का निर्माण होता है।
जैसे-
अ, आ, इ, ई वर्ण हैं जबकि र् + आ + म् + अ = ‘राम’ शब्द है।
प्रश्न 7.
हिन्दी की लिपि का नाम बताएँ।
उत्तर-
हिन्दी की लिपि का नाम देवनागरी लिपि है। प्रश्न 8. वर्तनी के नियमों में से कोई भी दो नियम लिखिए।
उत्तर-
1. किसी भी स्वर के साथ किसी अन्य स्वर की मात्रा नहीं लगती है।
जैसे-
अशुद्ध-ओक, शुद्ध-एक।
2. ‘ऋ’ स्वर का शुद्ध उच्चारण
जैसे-
रितु-अशुद्ध, ऋतु-शुद्ध शब्द है।
प्रश्न 9.
मानक वर्तनी क्या है? सोदाहरण समझाएँ।
उत्तर-
वर्तनी संबंधी कुछ महत्वपूर्ण नियम हैं। शुद्ध शब्द उच्चारण के लिए, उनका पालन करने से मानक शुद्ध वर्तनी प्रस्तुत होती है।
जैसे-
‘ष’ के स्थान पर ‘श’ संबंधी अशुद्धियाँ।
अशुद्ध शब्द – मानक (शुद्ध) वर्तनी
द्वेश – द्वेष
निर्दोष – निर्दोश
प्रश्न 10.
निम्नांकित शब्दों के (मानक) शुद्ध रूप लिखिए।
उत्तर-
अशुद्ध रूप – मानक (शुद्ध रूप)
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प्रश्न 11.
‘ऋ’ तथा ‘रि’ से बनने वाले कोई चार शब्द लिखिए।
उत्तर-
‘रि’ –
‘ऋ’ –
प्रश्न 1.
प्रत्यय किसे कहते हैं?
उत्तर-
मूल शब्दों के अंत में जो शब्दांश जुड़कर नये शब्द बनाए जाते हैं, उन्हें प्रत्यय कहते हैं। दूसरे शब्दों में जो शब्दांश शब्द के अंत में जुड़कर नये-नये शब्दों का निर्माण करते हैं, उन्हें प्रत्यय कहते हैं।
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प्रश्न 2.
प्रत्यय कितने प्रकार के होते हैं? उत्तर-प्रत्यय दो प्रकार के होते हैं-कृत और तद्धित।
प्रश्न 3.
कृत प्रत्यय को सोदाहरण समझाएँ:
उत्तर-
कृत प्रत्यय-क्रिया शब्दों के अंत में जो शब्दांश जोड़े जाते हैं, वे कृत प्रत्यय कहलाते हैं,
जैसे-
पढ़ना + ई = पढ़ाई ; लिखना + ई = लिखाई।
क्रिया में प्रत्यय जोड़कर संज्ञाएँ भी बनाई जाती हैं और विशेषण भी। संज्ञा बनाने वाले हिंदी के प्रमुख कृत् प्रत्यय निम्नलिखित हैं-

विशेषण बनाने वाले प्रत्यय


प्रश्न 4.
तद्धित प्रत्यय को सोदाहरण समझाएँ।
उत्तर-
तद्धित प्रत्यय-जो प्रत्यय संज्ञा, सर्वनाम, विशेषण के साथ जुड़कर नये शब्द बनाते हैं, उन्हें तद्धित प्रत्यय कहते हैं।
संज्ञा बनाने वाले तद्धित प्रत्यय-

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विशेषण बनाने वाले तद्धित प्रत्यय-

प्रश्न 1.
उपसर्ग किसे कहते हैं?
उत्तर-
उपसर्ग वे अविकारी (अव्यय) शब्दांश होते हैं, जो किसी शब्द के पूर्व में जुड़कर मूल शब्द के अर्थ में परिवर्तन कर देते हैं।
प्रश्न 2.
उपसर्ग की विशेषता बताइये।
उत्तर-
उपसर्ग किसी भी शब्द को परिवर्तित कर देता है। इससे
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प्रश्न 3.
उपसर्ग कितने तरह के होते हैं? उनके उदाहरण दें।
उत्तर-
संस्कृत उपसर्ग

हिंदी उपसर्ग
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क्रिया-जिसके द्वारा किसी कार्य का करना अथवा होना पाया जाता है, उसे क्रिया कहते हैं। प्रयोग के अनुसार क्रियाओं में परिवर्तन होने से पहले क्रिया का जो मूल रूप होता है, उसे संस्कृत में ‘धातु’ कहते हैं।
जैसे-
‘रामः मन्दिरं गच्छति’
(राम मन्दिर जाता है।)
इस वाक्य में ‘गच्छति’ (जाता है) क्रिया के द्वारा जाने का कार्य हो रहा है, अतः ‘गच्छति’ क्रिया है। यह गम्’ मूल धातु से बनी है। अतः इसमें ‘गम्’ धातु है।
पद-क्रियाओं के रूप चलने के क्रम को पद कहते हैं। पद दो होते हैं-
१. परस्मैपद,
२. आत्मनेपद,
पद के अनुसार धातु भेद-पद के अनुसार धातुएँ तीन प्रकार की होती हैं-
१. परस्मैपदी,
२. आत्मनेपदी,
३. उभयपदी।
प्रत्येक क्रिया किसी न किसी समय में सम्पन्न होती है। अतः इस समय को सूचित करने के लिए संस्कृत में दस लकार होते हैं। यहाँ पाठयक्रम में पाँच लकारों के रूप दिये जा रहे हैं-
१. लट्लकार – वर्तमान काल।
२. लुट्लकार – भविष्यकाल।
३. लङ्लकार – भूतकाल।
४. लोट्लकार – आज्ञा-सूचक।
५. विधिलिङ्लकार – इच्छार्थक – चाहिए अर्थ में।
♦ I. परस्मैपदी
१. “भू” (भव्) होना


२. गम् (गच्छ) जाना


३. दृश् (पश्य) देखना


४. पच् (पकाना)


५. पा (पिब्) पीना


♦ II. आत्मनेपदी
६. लभ् (पाना)

७. सेव (सेवा करना)


८. वृध् (बढ़ना)


९. वृत् (होना)


♦ III. अभयपदी

लङ्लकार

लुट्लकार

लोट्लकार

विधिलिङ्लकार

११. ह् (हरना)
लट्लकार

लङ्लकार

लङ्लकार

लोट्लकार

विधिलिङ्लकार

१२. याच् (माँगना)
लट्लकार

ललकार

लुट्लकार

लोट्लकार

विधिलिङ्लकार

वस्तुनिष्ठ प्रश्न
बहु-विकल्पीय
प्रश्न १. ‘भवति’ रूप बनता है
(अ) प्रथम पुरुष – द्विवचन,
(ब) प्रथम पुरुष – एकवचन,
(स) प्रथम पुरुष – बहुवचन,
(द) मध्यम पुरुष – एकवचन।
उत्तर-
(ब) प्रथम पुरुष – एकवचन,
२. ‘भू’ धातु, लृट् लकार, प्रथम पुरुष, बहुवचन का रूप
(अ) भवन्ति,
(ब) भविष्यामि,
(स) भविष्यामः,
(द) भविष्यन्ति।
उत्तर-
(द) भविष्यन्ति।
३. ‘गम्’ धातु, लङ्लकार, प्रथम पुरुष, एकवचन का रूप
(अ) अगच्छत्,
(स) अगच्छः
(ब) अगच्छम्,
(द) अगच्छत।
उत्तर-
(अ) अगच्छत्,
४. ‘दृश्’ धातु का ‘द्रक्ष्यति’ रूप किस प्रकार का है?
(अ) लट्,
(ब) लङ्,
(स) लृट,
(द) लोट।
उत्तर-
(स) लृट,
५. ‘पिबन्ति’ रूप ‘पा’ धातु के किस पुरुष, से बनता है?
(अ) प्रथम,
(ब) मध्यम,
(स) उत्तम,
(द) अधम।
उत्तर-
(अ) प्रथम,
रिक्त स्थान पूर्ति
१. ‘भू’ धातु, लङ् लकार, उत्तम पुरुष, एकवचन का रूप ………………………………… है।
२. ‘गम्’ धातु, लृट् लकार, मध्यम पुरुष, बहुवचन का रूप ………………………………… है।
३. ‘दृश्’ धातु, लट् लकार, उत्तम पुरुष, द्विवचन का रूप ………………………………… है।
४. ‘पचेत्’ रूप ………………………………… लकार, प्रथम पुरुष, एकवचन का रूप ………………………………… है।
५. ‘द्रक्ष्यति’ रूप लट् लकार, प्रथम पुरुष, ………………………………… वचन का रूप है।
उत्तर-
१. अभवम्,
२. गमिष्यथ,
३. पश्यावः,
४. विधिलिङ्,
५. एक।
सत्य/असत्य
१. ‘भवामि’ रूप लृट् लकार का है।
२. ‘गमिष्यामि’ रूप मध्यम पुरुष में बनता है।
३. ‘द्रक्ष्यति’ रूप लृट् लकार में बनता है।
४. ‘पचेत्’ रूप विधिलिङ् लकार प्रथम पुरुष का है।
५. ‘पा’ धातु, लट्लकार, उत्तम पुरुष, बहुवचन का रूप पचामः
उत्तर-
१. असत्य,
२. असत्य,
३. सत्य,
४. सत्य,
५. सत्य।
जोड़ी मिलाइए

उत्तर-
१. → (iv)
२. → (i)
३. → (v)
४. → (ii)
५. → (iii)
निम्नलिखित वाक्यों के घटना के अनुसार क्रम से लगाओ
(क)
(१) तेषां मध्ये सर्पः फटाटोपं कुर्वन् न्यगदत्।
(२) पक्षिणः तस्य शाखासु नीडानि विरच्य वसन्ति स्म।
(३) कस्मिंश्चित् ग्रामे एकः प्राचीनः विशाल: न्यग्रोधवृक्षः आसीत्।
(४) अनन्तरं शुकः उच्चैः अभणत्।
(५) अस्माभिः मानवैः अपि वृक्षसम्पत् वर्धनीया ननु।
(६) अहम् अस्मिन् वृक्षे चिरात् वसामि’ इति काकः अवदत्।
(७) ततःशाखातःशाखान्तरं चंक्रम्य एकः कीट: प्रत्यवदत्।
(८) वृक्षच्छेदकम् आह्वयामि इमं वृक्षं खण्डशः कर्तुम्।
(९) काकस्य रहनं श्रुत्वा सर्वे प्राणिनः पशवः पक्षिणः साश्च समायाताः।
(१०) ततश्च कृमयः कीटाश्च स्वं-स्वम् अधिकारं घोषयन् कोलाहलम् अकुर्वन्।
उत्तर-
(३) → (२) → (६) → (९) → (१) → (७) → (४) → (१०) → (८) → (५)।
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(ख)
(१) पीवरतनुरुष्ट्री सज्जाता।
(२) अहो! धिगियं दरिद्रताऽस्मद्गेहे।
(३) ततश्च गुर्जरदेशं गत्वोष्ी गृहीत्वा स्वगृहमागतः।
(४) सोऽपि दासेरको महानुष्ट्रः सज्जातः।
(५) सः प्रसववेदनया पीड्यमानाम् उष्ट्रीम् अपश्यत्।
(६) इति चिन्तयित्वा देशान्निष्क्रान्तः।
(७) कस्मिश्चिदधिष्ठाने उज्जवलको नाम रथकारः प्रतिवसति स्म।
(८) स च पूर्वदासेरको मदातिरेकात्पृष्ठे आगत्य मिलति।
(९) ततस्तेन महदुष्ट्रयूथं कृत्वा रक्षापुरुषो धृतः।
(१०) ततः सः नित्यमेव दुग्धं गृहीत्वा स्वकुटुम्बं परिपालयति।
उत्तर-
(७) → (२) → (६) → (५) → (१) → (४) → (१०) → (३) → (९) → (८)।
(ग)
(१). तत्र मुनेः पुरतः ते अश्वं दृष्टवन्तः।
(२) सूर्यवंशस्य राजा सगरः आसीत्।
(३) सः गङ्गां भूमौ आनीतवान्।
(४) सः एकदा अश्वमेधयागं कृतवान्।
(५) भगीरथः तपः कृतवान्।
(६) तस्मात् सः मागस्य विघ्नं कर्तुम् मार्ग चिन्तितवान्।
(७) सगरस्य वंशे भगीरथस्य जन्म अभवत्।
(८) अश्वमेधं कृत्वा सगरः स्वयम् इन्द्रः भविष्यति इति देवेन्द्रस्य असूया आसीत्।
(९) कुपितः मुनि सगरपुत्रान् क्रोधाग्निना दग्धवान्।
(१०) सगरस्य षष्टिसहस्रपुत्राः अश्वम् अन्वेष्टुं सर्वत्र गतवन्तः।
उत्तर-
(२) → (४) → (८) → (६) → (१०) → (१) → (९) → (७) → (५) → (३)।
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संज्ञा, सर्वनाम और विशेषणों में लिंग के अनुसार एवं शब्दों के अन्तिम स्वर अथवा अन्तिम व्यञ्जन के अनुसार परिवर्तन होता है। जिस प्रकार हिन्दी भाषा में कंर्ता, कर्म, करण आदि कारकों का सम्बन्ध प्रकट करने के लिए “ने, को, से/के द्वारा” इत्यादि चिन्ह संज्ञा, सर्वनाम, विशेषण आदि में जोड़े जाते हैं। उसी प्रकार संस्कृत भाषा में इन सम्बन्धों को प्रकट करने के लिए विभक्तियों के रूप रखे जाते हैं। इनमें हिन्दी के समान अलग से कोई चिह्न नहीं लगता है।
जैसे-
हिन्दी भाषा – संस्कृत भाषा
बालक ने → बालकः
बालक को → बालकम्
बालक से → बालकेन
दो बालकों को → बालकौ इत्यादि।
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(I) संज्ञा शब्दों के रूप
अकारान्त पुल्लिङ्ग “राम” शब्द

निर्देश-‘राम’ शब्द के समान ही बालक, छात्र, नर, पुत्र, वानर इत्यादि शब्दों के रूप होते हैं।
इकारान्त पुल्लिङ्ग “कवि” शब्द

निर्देश-‘कवि’ शब्द के समान ही हरि, रवि, कपि, गिरि, अग्नि इत्यादि शब्दों के रूप बनेंगे।
उकारान्त पुल्लिङ्ग “साधु” शब्द

निर्देश- साधु’ शब्द के समान ही गुरु, भानु, तरु, पशु, रिपु इत्यादि शब्दों के रूप होते हैं।
ऋकारान्त पुल्लिङ्ग “पितृ” शब्द

निर्देश-‘पितृ’ शब्द के समान ही दातृ, भ्रातृ इत्यादि के रूप होते हैं।
हलन्त पुल्लिङ्ग “राजन्” शब्द


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हलन्त पुल्लिङ्ग “भवत्” (आप) शब्द

निर्देश- भवत्’ शब्द के समान ही गच्छत्, धीमत्, श्रीमत्, बुद्धिमत् इत्यादि शब्दों के रूप होते हैं।
हलन्त पुल्लिङ्ग “आत्मन्” शब्द

निर्देश-‘आत्मन्’ शब्द के समान ही ब्रह्मन्, अध्वन् आदि के रूप होते हैं।
आकारान्त स्त्रीलिङ्ग “रमा” शब्द


निर्देश-‘रमा’ शब्द के समान ही बाला, बालिका, लता, छात्रा, माला, सीता इत्यादि शब्दों के रूप होते हैं।
इकारान्त स्त्रीलिङ्ग “मति” शब्द

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निर्देश-‘मति’ शब्द के समान ही गति, औषधि, भूमि, जाति इत्यादि शब्दों के रूप होते हैं।
ईकारान्त स्त्रीलिङ्ग “नदी” शब्द

निर्देश-‘नदी’ शब्द के समान ही जननी, पार्वती, पत्नी, नारी इत्यादि शब्दों के रूप होते हैं।
ऋकारान्त स्त्रीलिङ्ग “मातृ” शब्द


निर्देश-‘मातृ’ शब्द के समान ही ‘दुहितृ’ इत्यादि शब्दों के रूप होते हैं।
अकारान्त नपुंसकलिङ्ग “फल” शब्द

निर्देश-‘फल’ शब्द के समान ही पुस्तक, गृह, पुष्प, वन | इत्यादि शब्दों के रूप होते हैं।
इकारान्त नपुंसकलिङ्ग “वारि” शब्द

निर्देश-‘मधु’ शब्द के समान ही वसु, अश्रु, अम्बु इत्यादि शब्दों के रूप होते हैं।
नकारान्त नपुंसकलिङ्ग “नामन्” शब्द

निर्देश-‘नामन्’ शब्द के समान हेमन्, प्रेमन्, व्योमन्, धामन्, दामन्, सामन्, लोमन् इत्यादि शब्दों के रूप होते हैं।

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(II) सर्वनाम शब्दों के रूप
नोट-सर्वनाम शब्दों में सम्बोधन नहीं होता। इसलिए इनके रूप प्रथमा से सप्तमी विभक्ति तक ही चलते हैं, सम्बोधन में नहीं।
“अस्मद्” (मैं, हम) शब्द


“युष्मद्” (तू, तुम, तुझे) शब्द

पुल्लिङ्ग “तत्” (वह, उस) शब्द

स्त्रीलिङ्ग “तत्” शब्द

नपुंसकलिङ्ग “तत्” शब्द

पुल्लिङ्ग “एतत्” शब्द (यह)

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स्त्रीलिङ्ग “एतत्” शब्द (यह)

नपुंसकलिङ्ग “एतत्” शब्द (यह)

पुल्लिङ्ग “किम्” (कौन, किस) शब्द

स्त्रीलिङ्ग “किम्” शब्द

नपुंसकलिङ्ग “किम्” शब्द

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पुल्लिङ्ग “यत्” (जो) शब्द

स्त्रीलिङ्ग “यत्” शब्द

नपुंसकलिङ्ग “यत्” शब्द

पुल्लिङ्ग “इदम्” (यह, दस, ये, इन) शब्द

स्त्रीलिङ्ग “यत्” शब्द

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नपुंसकलिङ्ग “इदम्” शब्द

वस्तुनिष्ठ प्रश्न
बहु-विकल्पीय
प्रश्न १.
‘राम’ शब्द का षष्ठी विभक्ति का रूप है
(अ) रामः,
(ब) रामम्,
(स) रामेण,
(द) रामस्य।
२. ‘कवि’ शब्द का द्वितीया विभक्ति का रूप है
(अ) कविम्,
(ब) कविः
(स) कविना,
(द) कवेः।
३. ‘साधोः’ शब्द में विभक्ति है
(अ) प्रथमा,
(ब) द्वितीया,
(स) चतुर्थी,
(द) पंचमी।
४. ‘पित्रा’ शब्द में विभक्ति है
(अ) चतुर्थी,
(ब) तृतीया,
(स) प्रथमा,
(द) पंचमी।
५. ‘राज्ञः’ शब्द में विभक्ति है
(अ) प्रथमा,
(ब) षष्ठी
(स) सप्तमी,
(द) सम्बोधन।
उत्तर-
१. (द),
२. (अ),
३. (द),
४. (ब),
५. (ब)
रिक्त स्थान पूर्ति
१. ‘रामेण’ शब्द में ………………………………. विभक्ति है।
२. ‘रमायै’ शब्द ………………………………. विभक्ति का है।
३. ‘कवि’ शब्द द्वितीया विभक्ति बहुवचन का रूप ………………………………. है।
४. ‘साधुना’ शब्द में ………………………………. विभक्ति है।
५. ‘पितुः’ शब्द ………………………………. विभक्ति का है।
उत्तर-
१. तृतीया,
२. चतुर्थी,
३. कवीन्,
४. तृतीया,
५. षष्ठी।
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सत्य/असत्य
१. ‘माम्’ रूप प्रथमा विभक्ति का है।
२. ‘राज्ञा’ रूप तृतीया विभक्ति में बनता है।
३. ‘तेन’ रूप में तृतीया विभक्ति है।
४. ‘रामे’ रूप प्रथमा विभक्ति से बनता है।
५. ‘रमायाः’ रूप पंचमी और षष्ठी विभक्ति में बनता है।
उत्तर-
१. असत्य,
२. सत्य,
३. सत्य,
४. असत्य,
५. सत्य।
जोड़ी मिलाइए

उत्तर-
१. → (iii)
२. → (i)
३. → (iv)
४. → (ii)
५. → (vi)
६. →(v)