MP Board Class 9th General Hindi व्याकरण विलोम या विपरीतार्थी शब्द
किसी शब्द का विपरीत या उल्टा अर्थ देने वाले शब्द विपरीतार्थी या विलोम शब्द कहलाते हैं।
यहाँ कुछ शब्दों के विलोम या विपरीतार्थी शब्द दिए जा रहे हैं-




किसी शब्द का विपरीत या उल्टा अर्थ देने वाले शब्द विपरीतार्थी या विलोम शब्द कहलाते हैं।
यहाँ कुछ शब्दों के विलोम या विपरीतार्थी शब्द दिए जा रहे हैं-




अनेकार्थक या अनेकार्थी शब्द वे शब्द कहलाते हैं, जिनके अर्थ एक से अधिक होते हैं। जैसे – ‘कल’। ‘कल’ शब्द का अर्थ ‘शोर’ भी है, ‘मशीन’ भी है, ‘शांति’ भी है और ‘आने वाला अथवा बीता हुआ दिवस’ भी है। इस प्रकार के कई शब्द एक भाषा में रहते हैं। इनसे परिचित होना अत्यंत आवश्यक है।
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नीचे कुछ शब्द दिए जा रहे हैं–
एक अर्थ प्रकट करने के लिए प्रत्येक भाषा में कई शब्द होते हैं। ऐसे शब्द समानार्थी या पर्यायवाची शब्द कहलाते हैं। वास्तव में तो एक–एक शब्द के सभी पर्यायवाची शब्दों का अर्थ एक समान नहीं होता, उनमें सूक्ष्म अंतर होता है। हवा, प्रभंजन, समीर, झंझा पर्यायवाची शब्द हैं।
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नीचे कुछ पर्यायवाची शब्द दिए जा रहे हैं–
प्रश्न 1.
शब्द की परिभाषा दें।
उत्तर-
शब्द की परिभाषा-निश्चित अर्थ को प्रकट करने वाले वर्ण-समूह को शब्द कहते हैं। जैसे-घर, रोटी, अर्थ, विचार, शब्द आदि।
प्रश्न 2.
शब्द के कितने रूप हैं? उदाहरण सहित समझाएँ।
उत्तरउत्पत्ति के आधार पर हिंदी में शब्द के चार भेद हैं
1. तत्सम-संस्कृत भाषा के ऐसे शब्द, जो हिंदी में भी अपने मूल रूप में प्रचलित हैं, तत्सम कहलाते हैं। जैसे-वायु, नारी, सत्य, छात्र, समुद्र आदि।
2. तद्भव-जो शब्द संस्कृत भाषा के शब्दों से बिगड़ कर हिंदी में प्रचलित हैं, तद्भव कहलाते हैं। जैसे-सपना (स्वप्न), दूध (दुग्ध)।
3. देशज-जो शब्द स्थानीय पदार्थ के रूप में, कार्य के रूप में अथवा ध्वनि के अनुसार प्रसिद्ध और प्रचलित हैं, देशज कहलाते हैं। ये शब्द देश की विभिन्न बोलियों से लिये गए हैं। जैसे–पेट, खिड़की, थूक, चीनी।
4. विदेशी-वे शब्द, जो अंग्रेज़ी, अरबी, फारसी, तुर्की, पुर्तगाली, फ्रांसीसी आदि विदेशी भाषाओं से हिंदी में आए हैं, विदेशी कहलाते हैं। जैसे-स्कूल, बटन, आलू, गरीब, किताब, लाश।
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प्रश्न 3.
तत्सम एवं तद्भव शब्द रूपों के अन्तर उदाहरण सहित समझाएँ।
उत्तर-
तत्सम और तद्भव शब्द-
तत्सम शब्द-
हिंदी में संस्कृत के कुछ शब्दों को ज्यों का त्यों (यथावत्) ले लिया है। ऐसे शब्द तत्सम कहलाते हैं।
तद्भव शब्द-
संस्कृत के कुछ शब्द ऐसे हैं, जिनका रूप परिवर्तन करके हिंदी में अपनाया गया है। ऐसे शब्दों को तद्भव शब्द कहते हैं। यहाँ कुछ तद्भव शब्द और उनके तत्सम रूप दिए जा रहे हैं
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प्रश्न 4.
हिन्दी में प्रयुक्त होने वाले कुछ विदेशी शब्दों के उदाहरण दें?
उत्तर-
अंग्रेजी-स्टेशन, राशन, सिनेमा, टेलीविजन, टिकट, फीस, रेडियो, डॉक्टर, बैंक आदि।
अरबी-मौलवी, अदालत, अमीर, मालिक, दुनिया, फकीर, तारीख, किताब, कसर आदि।
फारसी-जिंदगी, बाग, चश्मा, खरगोश, चाकू, कारखाना, रूमाल, शिकायत, जल्दी, खरीद, तमाम, ज़मीन, फौज़, काग़ज़, हज़ार, दुकान, बादाम आदि।
पुर्तगाली-प्याला, आलू, साबुन, नीलाम, पिस्तौल, आदि।
ग्रीक-सुरंग, दाम आदि।
तुर्की-दारोगा, तमगा, काबू, लाश, कालीन, तोप आदि।
फ्रांसीसी-कूपन, अंगरेज़, कारतूस आदि।
प्रश्न 1.
वर्तनी की परिभाषा दें।
उत्तर-
‘वर्तनी’ का अर्थ है उच्चारण के अनुरूप वर्ण-विन्यास। इसे अंग्रेजी में (spelling) कहते हैं। सामान्यतया लिखने की रीति को वर्तनी कहते हैं। वर्तनी की शुद्धता के लिए उच्चारण की शुद्धता आवश्यक है। यदि उच्चारण गलत हुआ तो वर्तनी भी गलत होती है।
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प्रश्न 2.
वर्तनी संशोधन के नियमों पर प्रकाश डालें।
उत्तर-
वर्तनी संबंधी कुछ नियम हैं, जिनका पालन करने से शब्दों के शुद्ध रूप लिखे जा सकते हैं।
1. किसी भी स्वर के साथ किसी अन्य स्वर की मात्रा नहीं लगनी चाहिए।
जैसे-
‘अ’ अिस, ओक, अपर-ये अशुद्ध रूप हैं।
इस, एक, ऊपर-ये शुद्ध रूप हैं।
2. भाववाची-ति, नि, धि, टि से समाप्त होने वाली स्त्रीलिंग संज्ञाओं की अंतिम ‘इ’ ह्रस्व होती है।
जैसे-
भक्ति, शक्ति, नीति, प्रीति, रीति, जाति आदि।
3. संस्कृत के तत्सम पुल्लिंग शब्द के अंतिम इ, उ, प्रायः ह्रस्व होते हैं।
जैसे-
कवि, कपि, हरि, रवि, वाल्मीकि, उदधि आदि।
4. तद्भव तथा विदेशी भाषाओं में आए पुल्लिंग शब्दों के अंतिम इ, उ दीर्घ होते हैं।
जैसे-
अंग्रेजी, फ्रांसीसी, आलू, भालू, डाकू, लड़ाकू।
5. ‘ऋ’ स्वर है। कभी-कभी उसका उच्चारण, रि, रु इस प्रकार करके इसी से शब्द लिखते हैं, वह अशुद्ध रूप है। ‘ऋ’ प्रारंभ में लगने वाले शब्द को ‘र’ से नहीं ‘ऋ’ से लिखना चाहिए
जैसे-
ऋतु लिखना चाहिए, रितु नहीं।
शुद्ध रूप-ऋचा, ऋग्वेद, ऋण, वृष्टि, कृषक, कृष्ण, तृण, तृष्णा आदि।
6. ‘घ’ तथा ‘ध’ वाले शब्द-‘घ’-घर, घोड़ा, घनश्याम, घड़ा, घमण्ड आदि।
‘ध’-धैर्य, धर्म, धन, धमाका, धाम आदि।
7. ‘व’ और ‘ब’ में अंतर-‘व’ के उच्चारण में होठ’ (ओठ) खुले रहते हैं और ‘ब’ के उच्चारण में बंद हो जाते हैं।
‘व’ वाले शब्द-वह, वर्ण, विवाहर, विश्व इत्यादि।
‘ब’ वाले शब्द-बाहर, बंद, बंदर, बँटवारा, बाप, बतासा, बनावट, बारात इत्यादि।
8. श, ष, स का अन्तर-‘श’ वाले शब्द-शहर, शरबत, शेर इत्यादि।
‘ष’ वाले शब्द-षट्कोण, नष्ट, कष्ट, राष्ट्र, युधिष्ठिर, विशिष्ट इत्यादि।
‘स’ वाले शब्द-समाज, सपेरा, समय, सावन, स्वागत, सरौता, सबेरा, स्वर्ग इत्यादि।
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प्रश्न 3.
परसर्ग या कारक चिह्न का प्रयोग कहाँ किया जाता है?
उत्तर-
परसर्ग या कारक चिह्न का प्रयोग-संज्ञा शब्दों के साथ होना चाहिए। इस प्रकार जैसे-राम ने, मोहन को, घर में सर्वनाम के साथ प्रयोग-जैसे-मैंने, आपने, उन्होंने, उनको, जिसको इत्यादि।
प्रश्न 4.
योजक चिह्न का प्रयोग सोदाहरण समझाइये।
उत्तर-
योजक चिह्न का प्रयोग समानपद में करना चाहिए।
जैसे-
माता-पिता,
भाई-बहन,
पाप-पुण्य,
सरस्वती – वन्दना,
शोध-संस्था,
रात-दिन आदि।
प्रश्न 5.
शुद्ध एवं अशुद्ध वर्तनी को उदाहरण सहित समझाएँ।
उत्तर-
जैसे-

प्रश्न 6.
वर्ण तथा शब्द में क्या अंतर है?
उत्तर-
ध्वनि का लिखित रूप वर्ण कहलाता है। वर्ण भाषा की सबसे छोटी इकाई है। इन्हें विभाजित नहीं किया जा सकता, परन्तु वर्णों के सार्थक समूह से शब्दों का निर्माण होता है।
जैसे-
अ, आ, इ, ई वर्ण हैं जबकि र् + आ + म् + अ = ‘राम’ शब्द है।
प्रश्न 7.
हिन्दी की लिपि का नाम बताएँ।
उत्तर-
हिन्दी की लिपि का नाम देवनागरी लिपि है। प्रश्न 8. वर्तनी के नियमों में से कोई भी दो नियम लिखिए।
उत्तर-
1. किसी भी स्वर के साथ किसी अन्य स्वर की मात्रा नहीं लगती है।
जैसे-
अशुद्ध-ओक, शुद्ध-एक।
2. ‘ऋ’ स्वर का शुद्ध उच्चारण
जैसे-
रितु-अशुद्ध, ऋतु-शुद्ध शब्द है।
प्रश्न 9.
मानक वर्तनी क्या है? सोदाहरण समझाएँ।
उत्तर-
वर्तनी संबंधी कुछ महत्वपूर्ण नियम हैं। शुद्ध शब्द उच्चारण के लिए, उनका पालन करने से मानक शुद्ध वर्तनी प्रस्तुत होती है।
जैसे-
‘ष’ के स्थान पर ‘श’ संबंधी अशुद्धियाँ।
अशुद्ध शब्द – मानक (शुद्ध) वर्तनी
द्वेश – द्वेष
निर्दोष – निर्दोश
प्रश्न 10.
निम्नांकित शब्दों के (मानक) शुद्ध रूप लिखिए।
उत्तर-
अशुद्ध रूप – मानक (शुद्ध रूप)
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प्रश्न 11.
‘ऋ’ तथा ‘रि’ से बनने वाले कोई चार शब्द लिखिए।
उत्तर-
‘रि’ –
‘ऋ’ –
निम्नलिखित समीकरणों में से प्रत्येक को हल कीजिए :
प्रश्न 1.
x2 + 3 = 0.
हल:
x2 + 3 = 0 या x 2 = – 3 या x = ± [/latex]\sqrt{-3}[/latex] = ± \(\sqrt{3}\)i.
प्रश्न 2.
2x2 + x + 1 = 0.
हल:
दिया गया है : 2x2 + x + 1 = 0,
समीकरण ax2 + bx + c = 0 से तुलना करने पर,


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प्रश्न 3.
x + 3x + 9 = 0.
हल:
दिए गए समीकरण x2 + 3x + 9 = 0 की ax2 + bx + c = 0 से तुलना करने पर, a = 1, b = 3, c = 9 .

प्रश्न 4.
-x2 + x – 2 = 0.
हल:
दिया गया है :
– x2 + x – 2 = 0,
– 1 से दोनों पक्षों में गुणा करने पर
x2 x + 2 = 0
इसकी ax2 + bx + c = 0 से तुलना करने पर,
a = 1, b = – 1, c = 2

प्रश्न 5.
x2 + 3x + 5 = 0.
हल:
दिया गया है:
x2 + 3x + 5 = 0 इसकी ax2 + bx + c = 0 से तुलना करने पर, a = 1, b = 3, c = 5
x = \(\frac{-b \pm \sqrt{b^{2}-4 a c}}{2 a}\)

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प्रश्न 6.
x2 – x + 2 = 0
हल:
दिया है :
x2x + 2 = 0
इसकी ax2 + bx + c = 0 से तुलना करने पर,
∴ a = 1, b = – 1, c = 2

प्रश्न 7.
\(\sqrt{2}\) x2 + x + \(\sqrt{2}\) = 0.
हल:
दिया है:
\(\sqrt{2}\) x2 + x + \(\sqrt{2}\) = 0
इसकी ax2 + bx + c = 0 से तुलना करने पर

प्रश्न 8.
\(\sqrt{3} x^{2}-\sqrt{2} x+3 \sqrt{3}\) = 0
हल:
दिया है :
\(\sqrt{3} x^{2}-\sqrt{2} x+3 \sqrt{3}\) = 0
इसकी ax2 + bx + c = 0 से तुलना करने पर
a= \(\sqrt{3}\), b = – \(\sqrt{2}\), c = 3\(\sqrt{3}\)

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प्रश्न 9.
x2 + x + \(\frac{1}{\sqrt{2}}\) = 0.
हल:
दिया है:
दोनों पक्षों में \(\sqrt{2}\) से गुणा करने पर,
\(\sqrt{2}\)x2 + \(\sqrt{2}\)x + 1 = 0.
इसकी ax2 + bx + c = 0 से तुलना करने पर
a = \(\sqrt{2}\) , b = \(\sqrt{2}\), c = 1

प्रश्न 10.
\(x^{2}+\frac{x}{\sqrt{2}}+1\) = 0.
हल:
दिया है: \(x^{2}+\frac{x}{\sqrt{2}}+1\) = 0.
दोनों पक्षों में \(\sqrt{2}\) से गुणा करने पर
\(\sqrt{2} x^{2}+x+\sqrt{2}\) = 0 .
इसकी ax2 + bx + c = 0 से तुलना करने पर

प्रश्न 1.
प्रत्यय किसे कहते हैं?
उत्तर-
मूल शब्दों के अंत में जो शब्दांश जुड़कर नये शब्द बनाए जाते हैं, उन्हें प्रत्यय कहते हैं। दूसरे शब्दों में जो शब्दांश शब्द के अंत में जुड़कर नये-नये शब्दों का निर्माण करते हैं, उन्हें प्रत्यय कहते हैं।
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प्रश्न 2.
प्रत्यय कितने प्रकार के होते हैं? उत्तर-प्रत्यय दो प्रकार के होते हैं-कृत और तद्धित।
प्रश्न 3.
कृत प्रत्यय को सोदाहरण समझाएँ:
उत्तर-
कृत प्रत्यय-क्रिया शब्दों के अंत में जो शब्दांश जोड़े जाते हैं, वे कृत प्रत्यय कहलाते हैं,
जैसे-
पढ़ना + ई = पढ़ाई ; लिखना + ई = लिखाई।
क्रिया में प्रत्यय जोड़कर संज्ञाएँ भी बनाई जाती हैं और विशेषण भी। संज्ञा बनाने वाले हिंदी के प्रमुख कृत् प्रत्यय निम्नलिखित हैं-
विशेषण बनाने वाले प्रत्यय


प्रश्न 4.
तद्धित प्रत्यय को सोदाहरण समझाएँ।
उत्तर-
तद्धित प्रत्यय-जो प्रत्यय संज्ञा, सर्वनाम, विशेषण के साथ जुड़कर नये शब्द बनाते हैं, उन्हें तद्धित प्रत्यय कहते हैं।
संज्ञा बनाने वाले तद्धित प्रत्यय-

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विशेषण बनाने वाले तद्धित प्रत्यय-

प्रश्न 1.
उपसर्ग किसे कहते हैं?
उत्तर-
उपसर्ग वे अविकारी (अव्यय) शब्दांश होते हैं, जो किसी शब्द के पूर्व में जुड़कर मूल शब्द के अर्थ में परिवर्तन कर देते हैं।
प्रश्न 2.
उपसर्ग की विशेषता बताइये।
उत्तर-
उपसर्ग किसी भी शब्द को परिवर्तित कर देता है। इससे
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प्रश्न 3.
उपसर्ग कितने तरह के होते हैं? उनके उदाहरण दें।
उत्तर-
संस्कृत उपसर्ग

हिंदी उपसर्ग
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Question 1.
Multiply the binomials.
(i) (2x + 5) and (4x – 3)
(ii) (y – 8) and (3y – 4)
(iii) (2.5l – 0.5 m) and (2.5l +0.5 m)
(iv) (a + 3b) and (x + 5)
(v) (2pq + 3q2) and (3pq – 2q2)
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Solution:
(i) (2x + 5) × (4x – 3) = 2x (4x – 3) + 5(4x – 3) = 8x2 – 6x + 20x – 15 = 8x2 + 14x – 15
(ii) (y – 8) × (3y – 4) = y(3y – 4) – 8(3y – 4)
= 3 y2 – 4y – 24y + 32 = 3y2 – 28y + 32
(iii) (2.5l – 0.5m) × (2.5l + 0.5m)
= 2.5l (2.5l + 0.5m) – 0.5 m (2.5l + 0.5m)
= 6.25l2 + 1.25lm – 1.25lm – 0.25m2 = 6.25l2 – 0.25m2
(iv) (a + 3b) × (x + 5) = a(x + 5) + 3b(x + 5)
= ax + 5a + 3 bx + 15 b
(v) (2pq + 3q2) × (3pq – 2q2)
= 2pq (3pq – 2q2) + 3q2 (3pq – 2q2)
= 6p2q2 – 4pq3 + 9pq3 – 6q4
= 6 p2q2 + 5pq3 – 6q4


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Question 2.
Find the product
(i) (5 – 2x)(3 + x)
(ii) (x + 7y)(7x – y)
(iii) (a2 + b)(a + b2)
(iv) (p2 – q2)(2p + q)
Solution:
(i) (5 – 2x) × (3 + x) = 5(3 + x) – 2x(3 + x)
= 15 + 5x – 6x – 2x2 – 15 – x – 2x2
(ii) (x + 7y)(7x – y) = x(7x – y) + 7y(7x – y)
=7x2 – xy + 49xy – 7y2 = 7x2 + 48xy – 7y2
(iii) (a2 + b) (a + b2) = a2 (a + b2) + b (a + b2)
= a3 + a2b2) + ab + b3
(iv) (p2 – q2) (2p + q) = p2 (2p + q) – q2 (2p + q)
= 2p3 + p2q – 2q2p – q3
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Question 3.
Simplify.
(i) (x2 – 5)(x + 5) + 25
(ii) (a2 + 5)(b3 + 3) + 5
(iii) (t + s2)(t2 – s)
(iv) (a + b)(c – d) + (a – b)(c + d) + 2(ac + bd)
(v) (x + y)(2x + y) + (x + 2y)(x – y)
(vi) (x + y)(x2 – xy + y2)
(vii) (1 .5x – 4y)(1 .5x + 4y + 3) – 4.5x + 12y
(viii) (a + b + c)(a + b – c)
Solution:
(i) (x2 – 5) (x + 5) + 25
= x2(x +5) – 5(x + 5) +25
=x3+ 5x2 – 5x – 25 + 25 = r3+ 5r2 – 5x
(ii) (a2 + 5)(b3 + 3) + 5
= a2 (b3 + 3) + 5(b3 + 3) + 5
= a2b3 + 3a2 + 5b3 + 15 + 5
= a2b3 + 3a2 + 5b3 + 20
(iii) (t + s2) (t2 – s) = t(t2 – s) + s2(t2 – s)
= t3 – ts +s2t2 – s3
(iv) (a + b)(c – d) + (a – b)(c + d) + 2(ac + bd)
=a(c – d) + b(c – d) + a(c + d) – b(c + d) + 2a + 2bd
= ac – ad + bc – bd + ac + ad – bc – bd + 2ac + 2bd
= 4ac
(v) (x + y)(2x + y) + (x + 2y)(x – y)
= x(2x + y) + y(2x + y) + x(x – y) + 2y(x – y)
=2x2 + xy + 2xy + y2 + x2 – xy + 2xy – 2y2
= 3x2 + 4xy – y2
(vi) (x + y) (x2 – xy + y2)
= x (x2 – xy + y2) + y (x2 – xy + y2)
= x3 – x2y + xy2 + x2y – xy2 + y3 = x3 + y3
(vii) (1.5x – 4y) (1.5x + 4y + 3) – 4.5x + 12y
= 1.5x (1.5x + 4y + 3) – 4y (1.5x + 4y + 3) – 4.5x + 12y
= 2.25x2 + 6xy + 4.5x – 6xy – 16y2 – 12y – 4.5x + 12y
= 2.25x2 – 16y2
(viii) (a + b + c) (a + b – c)
= a (a+ b – c) + b (a+ b – c) + c (a + b – c)
= a2 + ab – ac + ab + b2 – bc + ac + bc – c2
= a2 + 2 ab + b2 – c2
मध्य प्रदेश की क्षेत्रीय बोलियाँ
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विशेष – घर – परिवार में प्रयुक्त की जाने वाली भाषा बोली कहलाती है। इसका सुनियोजित व्याकरण नहीं होता।
हिन्दी की चार बोलियों के नाम
1. पहेलियाँ
(क) छत्तीसगढ़ी पहेलियाँ
पहेलियाँ मनोरंजन का बहुत ही आकर्षक तथा सरस साधन हैं। इससे मानव की बुद्धि का भी परिचय मिलता है। जो जितना कुशाग्र बुद्धि होता है,पहेलियों का उत्तर उचित तथा कम समय में देने में सक्षम होता है। यहाँ पाठकों के ज्ञानवर्द्धन हेतु छत्तीसगढ़ की कुछ पहेलियाँ निम्नवत् अवलोकनीय हैं –
1. चघेल नाक ऊपर, धरेल कान ला
बतावा ओहर हवै, कौन शैतान जा।
अर्थात् वह कौन – सा शैतान है, जो नासिका (नाक) के ऊपर चढ़ता है तथा कर्ण (कान) को पकड़ता है।
उत्तर –
चश्मा।
2. मोर घर कर पहरेदार, नई खाय नई पीये।
जुग – जुग तलक जिये।
मेरे गृह का चौकीदार न कभी खाना खाता है एवं न जल पीता है, लेकिन अत्यधिक समय तक जिन्दा रहता है।
उत्तर –
कपाट (किवाड़)।
3. पायंच भाई का एगोट आंगना।
पाँच बंधुओं के मध्य एक आंगन है।
उत्तर –
पाँच अंगुली तथा हथेली।
4. छोटा सा काला घर
घूमत रहेल इधर – उधर।
मेरे पास छोटा – सा काले वर्ण (रंग) का गृह है जो इधर – उधर घूमता है।
उत्तर –
छाता।
5. एक ठन पेड़ के एकेच ठन पतई
एक वृक्ष में एक ही पत्ता।
उत्तर –
झण्डा।
6. ना राजा के राज मा, न माली के बाग मा।
फोड़े मा गुठली नहीं, खाये मा स्वाद नहीं।
नृप के राज्य में नहीं है एवं न माली के बगीचे में है। फोड़ने पर इसमें गुठली नहीं निकलती एवं खाने में स्वादिष्ट नहीं।
उत्तर –
ओला (करा)।
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7. आयल लुलु जाय ल लु, पानी लां उर्सयलुलु।
वह आता जाता है, परन्तु जल से भयभीत रहता है।
उत्तर –
जूता।
(ख) निमाड़ी पहेलियाँ
1. गाय चलती जाय, दूध पड़ती जाय।
गाय गमन करती है, दुग्ध (दूध) गिरता जाता है।
उत्तर –
चक्की।
2. ‘तू चल हऊँ आयो’।
तुम चलो मैं आया।
उत्तर –
दरवाजा।
3. “बाकी तेकी पावलई, वजावण वालो कण।
सुन्दर नाय सारसऽ मनावण बालो कूण॥”
टेढ़ी एवं तिरछी बांसुरी कौन बजा सकता है एवं ससुराल गमन करने वाली लड़की को कौन मनाने में सक्षम हो सकता है।
उत्तर –
नदी।
4. “आरकस बारकस नौ सौ खूटा, गाय है
भारकराई दूध छे मीठा।”
सैकड़ों चौखटों एवं दरवाजों से सुसज्जित पायगा में बहुत से खूटे गढ़े हैं, वहाँ की गायें मरखनी हैं परन्तु उनका दूध मधुर है।
उत्तर –
मधुमक्खी का छत्ता।
5. एक वाई असी कि सरकजऽनी
एक नारी ऐसी है, जो हटती ही नहीं।
उत्तर –
दीवार।
6. “काला खेत मंड दही को छीटों”
काले खेत में दही फैला हो।
उत्तर –
कपास।
7. “नीलई बेटी झूलड बठी, लड़रे सगा थारी बेटी।”
नीली लड़की झूले पर बैठी है। इसी कारण कहा है कि समधी लड़की को भली प्रकार रखा करो।
उत्तर –
केरी।
8. “असो कसो पावणों पाय
घर मंड सूतो आंगरणऽपांव” हे माता ! वह कैसा अतिथि (मेहमान) है जो सोता गृह में है, परन्तु इसके पैर आँगन तक आते हैं।
उत्तर –
दीपक (दिया)।
9. “छोटी सी छड़ी जमीन मंऽ गड़ी
रुम – झुम करती महले मंऽ चढ़ी” जब छोटी – सी थी तब धरती में गढ़ी थी, परन्तु अब बढ़ने पर रुम – झुम करती हुई प्रासादों महलों में चढ़ी जा रही है।
उत्तर –
ज्वार।
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10. “काला खेत मंड शेर को पंजो”
काले खेत में शेर का पंजा हो।
उत्तर –
अदरक।
2. चुटकुले
(1) रात को पत्नी जोर से खाँस रही थी। पति ने सहानुभूति प्रकट करते हुए कहा –
“कल मैं तुम्हारे गले के लिए कुछ लाऊँगा।”
“हाँ, मेहरा ज्वैलर्स पर मैंने एक लॉकेट देखा था। वह ले आना प्लीज।”
(2) एक जानी मानी महिला वक्ता महिला उत्थान के सम्बन्ध में भाषण दे रही थी।
जोश में कहने लगी – “बताइए, यदि स्त्री न होती तो ये पुरुष कहाँ होते ?”
पीछे से आवाज आई-‘स्वर्ग में।’
(3) एक नवयुवती ने टैक्सी रोकी और ड्राइवर से कहा –
“जल्दी जच्चा – बच्चा अस्पताल ले चलो।”
टैक्सी ड्राइवर बहुत तेज टैक्सी चलाने लगा, तब वह नवयुवती बोली –
“इतनी तेज भी न चलाओ। मैं वहाँ नर्स हूँ।”
(4) एक मित्र ने देरी से आने का कारण बताते हुए कहा –
“यार, मेरी आदत है कि मैं जो भी काम करता हूँ, उसी में डूब जाता हूँ।”
‘तो फिर तुम एक कुआँ क्यों नहीं खोदते ?’ दूसरा मित्र क्रोध में बोला।
3. लोकगीत
(क) बुन्देली लोकगीत
तोरे गुन जान गई अरे बलमा रे।
जब तो कहत ते रंगामहल में, हो रंगामहल में
टूटी टपरिया में ल्याये बलमारे॥ तोरे गुन॥
जब तो कहत ते सेजा सुपैती, हो सेजा सुपैती।
टूटी खटुलिया पै ल्याये बलमा रे। तोरे गुन॥
(ख) ब्रज का लोकगीत
देखो री मुकुट झोंका ले रहयो
एजी लै रहयो यमुना के तीर॥
कुंजन झूले रानी राधिका,
एजी बागन झूलें घनश्याम। देखो री ………….॥
कौन झुला मैं रानी राधिका
एजी कौन झुलामैं घनश्याम॥ देखो री ………….॥
सखी झुलामैं राधिका
एजी सखा झुलामैं घनश्याम॥ देखो री ………….॥
कौन बरन हैं रानी राधिका
एजी कौन बरन घनश्याम॥ देखो री ………….॥
गौर बरन हैं रानी राधिका
एजी स्याम बरन घनश्याम॥ देखो री ………….॥
बिजुरी सी चमकें रानी राधिका
एजी वारिस से घनश्याम॥ देखो री ………….॥
सावन रस सरसावनों
जामें झूलत हैं घनश्याम॥ देखो री ………….॥
4. दूरदर्शन और आकाशवाणी के कार्यक्रम
दूरदर्शन पर प्रातः से लेकर रात्रि वेला तक निरन्तर कोई – न – कोई कार्यक्रम प्रसारित होता रहता है।
प्रात:काल समाचार, मौसम की भविष्यवाणी, चित्रहार, डिस्कवरी तथा धारावाहिक नाटकों का प्रसारण होता रहता है।
धारावाहिक नाटकों में तारक मेहता का उल्टा चश्मा,बालिका वधू, ये रिश्ता क्या कहलाता है,रामायण, महाभारत, भाभीजी घर पर हैं आदि बहुत लोकप्रिय हैं।
दूरदर्शन पर कृषि दर्शन, जनमंच तथा अन्य महत्त्वपूर्ण कार्यक्रम प्रसारित होते हैं। इन कार्यक्रमों के अतिरिक्त बच्चों के लिए व बड़ों के लिए अंताक्षरी प्रतियोगिता व धार्मिक धारावाहिक भी प्रसारित होते रहते हैं।
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प्रत्येक कार्य को इस प्रकार प्रस्तुत किया जाता है कि बच्चे, बड़े,बूढ़े व युवा वर्ग उसका भरपूर लाभ उठा सकें। इसके अतिरिक्त महत्त्वपूर्ण स्थानों की जानकारी भी दूरदर्शन पर दी जाती हैं। विभिन्न प्रकार की औषधियाँ तथा योगासन व अन्य स्वास्थ्य सम्बन्धी जानकारियाँ भी मिलती हैं।
5. हिन्दी साहित्य का स्वतन्त्र पठन
मानव के सभ्य एवं सुसंस्कृत होने का श्रेय वाणी के माध्यम से होता है।
भावों तथा मनोगत विचारों को व्यक्त करने के दो साधन हैं –
1. मौखिक एवं लिखित। दोनों रूपों को व्यक्त करने का साधन भाषा है। प्रस्तुत विवेचन में मौखिक अभिव्यक्ति विषयक कतिपय उपादेय प्रकारों का विवेचन निम्नवत् है
(क) टिप्पणियाँ
सुने अथवा पढ़े गये संवाद,भाषण,कविता, लेख,आलोचना,धार्मिक एवं साहित्यिक ग्रन्थ घटना दृश्य के संदर्भ में लिखित एवं मौखिक रूप से संयत वाणी में व्यक्त कर देना ही टिप्पणी कही जाती है।
टिप्पणी को शब्द सीमा में आबद्ध नहीं किया जा सकता है, लेकिन संक्षिप्त एवं सारगर्भित टिप्पणी ही प्रशंसनीय होती है। टिप्पणियाँ निम्नवत् तीन श्रेणियों में विभक्त की जा सकती हैं
(क) कार्यालय टिप्पणी,
(ख) सम्पादकीय टिप्पणी,
(ग) सामान्य टिप्पणी।
(ख) प्रेरणाएँ
साहित्य के अन्तर्गत प्रेरणा का आशय उन कृतियों एवं रचनाओं से है,जो पाठक के मनमानस का जीवन पथ पर आगे कदम बढ़ाने की प्रेरणा देते हैं। उसके अन्तर्गत प्रमुख रूप से उन कहानियों को सम्मिलित किया जाता है जो इस उद्देश्य को लेकर लिपिबद्ध की जाती हैं। इस संदर्भ में कहानी इतनी बड़ी न हो, जिसे पढ़ने से पाठक ऊबकर निश्चित लक्ष्य से भटक जाये।
आज के संघर्षमय जीवन में पाठक कम – से – कम समय में मनोरंजन करना चाहता है। अतः कहानी का कलेवर भी सीमित होना भी नितान्त आवश्यक है। जो कहानी एक ही बैठक में समाप्त हो जाती है; पाठक का मन भी इससे पूरी तरह इसी प्रकार की कहानियों में रमता है तथा ये कहानियाँ ही साहित्य जगत में उपयुक्त ठहराई जाती हैं।
6. हस्तलिखित पत्रिका तैयार करना
छात्र परस्पर मिलकर हस्तलिखित पत्रिका का प्रारूप तैयार कर सकते हैं जिसके अन्तर्गत सबसे पहले स्वयं के निबन्ध, कहानियाँ, कविताओं तथा चुटकले आदि हो सकते हैं।
इनको सूचीबद्ध करना आवश्यक है। सूची में उसके संकलनकर्ता अथवा लेखक का नाम देना भी अनिवार्य है।
इसके पश्चात् सम्पादक की ओर से अपने सहयोगियों को धन्यवाद देना चाहिए।
पत्रिका का परिचय प्रस्तुत करते हुए उसमें संकलित अथवा लिखित लेखों पर मन्तव्य व्यक्त करना अथवा प्रकाश डालना भी अपेक्षित है। इसके बाद लेखों को रोचक तथा आकर्षक रूप में पूर्ण रूप से प्रस्तुत करना श्रेयस्कर होगा।
यह बात स्मरण रखने योग्य है कि पत्रिका के लेखों का कलेवर इतना विस्तृत न हो जो पत्रिका की रोचकता तथा उपादेयता में व्यवधान बने।
7. क्षेत्रीय पत्र – पत्रिकाएँ
बुन्देलखण्ड अंचल
छत्तीसगढ़ अंचल
मालवा अंचल
निमाड़ अंचल
प्रश्नोत्तर
प्रश्न 1.
हिन्दी के चार समाचार – पत्रों के नाम लिखिए।
उत्तर-
प्रश्न 2.
दूरदर्शन पर प्रसारित दो धार्मिक धारावाहिकों के नाम लिखिए।
उत्तर-
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प्रश्न 3.
हिन्दी की चार बाल पत्रिकाओं के नाम लिखिए। [2009]
उत्तर-
प्रश्न 4.
लोकगीत की चार पंक्तियाँ लिखिए।
उत्तर-
प्रश्न 5.
लोककथा की कोई दो विशेषताएँ लिखिए।
उत्तर-
प्रश्न 6.
मध्य प्रदेश की चार क्षेत्रीय बोलियों के नाम लिखिए।
उत्तर-
प्रश्न 7.
कोई एक छत्तीसगढ़ी पहेली लिखिए।
उत्तर-
प्रश्न 8.
दूरदर्शन पर प्रसारित दो सामाजिक धारावाहिकों के नाम लिखिए।
उत्तर-
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प्रश्न 9.
इन्दौर से प्रकाशित दो समाचार – पत्रों के नाम लिखिए।
उत्तर-
प्रश्न 10.
ब्रजभाषा मध्य प्रदेश के किन क्षेत्रों में बोली जाती है ?
उत्तर-