MP Board Class 11th Maths Solutions Chapter 14 गणितीय विवेचन Ex 14.5

MP Board Class 11th Maths Solutions Chapter 14 गणितीय विवेचन Ex 14.5

प्रश्न 1.
सिद्ध कीजिए कि कथन यदि x एक ऐसी वास्तविक संख्या है कि x + 4x = 0, तो x = 0
(i) प्रत्यक्ष विधि द्वारा
(ii) विरोधोक्ति द्वारा
(iii) प्रतिधनात्मक कथन द्वारा
हल:
(i) प्रत्यक्ष विधि द्वारा
x3 + 4x = 0 या x(x2 + 4)= 0
∴ x = 0 या x2 + 4= 0
परन्तु x2 + 4 ≠ 0, x ϵ R
अतः x = 0.

(ii) विरोधोक्ति द्वारा : माना x ≠ 0 ∴ x = p
यदि समीकरण x3 + 4x = 0 का एक मूल p हो, तब
⇒ p3 + 4p = 0 या p(p2 + 4) = 0
p = 0 या p2 + 4 = 0
p2 + 4 ≠ 0,
p= 0 विरोधात्मक है x ≠ p के जो पूर्व निर्धारित है।
अर्थात् p = 0 या x = 0.

(iii) प्रतिधनात्मक कथन द्वारा :
माना x = 0 सत्य नहीं है।
x ϵ R, x2 + 4 ≠ 0, और x ≠ 0 (माना गया है)
∴ x(x2 + 4) ≠ 0
यह सिद्ध करता है कि x2 + 4x = 0 का x = 0 मूल है।

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प्रश्न 2.
प्रत्युदाहरण द्वारा सिद्ध कीजिए कि कथन “किसी भी ऐसी वास्तविक संख्याओं a और b के लिए, जहाँ a = का तात्पर्य है कि a=b” सत्य नहीं है।
हल:
माना जब a = 1, b = – 1 तो a2 = b2
परन्तु a ≠ b. अतः दिया गया कथन सत्य नहीं है।

प्रश्न 3.
प्रतिधनात्मक विधि द्वारा सिद्ध कीजिए कि निम्नलिखित कथन सत्य है।
p : यदि x एक पूर्णांक है और x2 सम है तो x भी सम है।
हल:
माना x एक सम संख्या नहीं हैं
x = 2n + 1
x2 = (2n + 1)2 = 4n2 + 4n + 1
= 2 (2n2 + 2n) + 1
यह एक विषम संख्या है।
इस प्रकार यदि q सत्य नहीं है तो p भी सत्य नहीं है।
अर्थात दिया हुआ कथन सत्य है।

प्रश्न 4.
प्रत्युदाहरण द्वारा सिद्ध कीजिए कि निम्नलिखित कथन सत्य नहीं हैं।
(i) p : यदि किसी त्रिभुज के कोण समान हैं, तो त्रिभुज एक अधिक कोण त्रिभुज है।
हल:
माना एक कोण = 90 + θ
तीनों कोण समान हों, तब
त्रिभुज के तीनों कोणों का योग = 3 (90 + θ) = 270 + 3θ
यह 180° के बराबर नहीं है।
∴ त्रिभुज का कोई भी कोण अधिक कोण नहीं हो सकता अर्थात वह त्रिभुज अधिक कोण त्रिभुज नहीं हो सकता है।

(ii) q : समीकरण x2 – 1 = 0 के मूल 0 और 2 के बीच स्थित नहीं है।
हल:
0 और 2 के बीच की संख्या 1 लीजिए
x2 – 1 = 0 में x = 1 रखने पर
1 – 1 = 0,
अतः x = 1, दिए हुए समीकरण को संतुष्ट करता है।
इसलिए x = 1, समीकरण x2 – 1 = 0 का मूल है और 0 और 2 के बीच स्थित हैं।
अतः दिया गया कथन सत्य नहीं है।

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प्रश्न 5.
निम्नलिखित कथनों मे से कौन से सत्य हैं और कौन से असत्य हैं। प्रत्येक दशा में अपने उत्तर के लिए वैध कारण बतलाइए:
(i) p : किसी वृत्त की प्रत्येक त्रिज्या वृत्त की जीवा होती है।
हल:
असत्य : त्रिज्या का एक सिरा केंद्र पर ओर दूसरा सिरा वृत्त पर होता हो तो वह जीवा नहीं होती है।
अतः यह वृत्त की जीवा नहीं है।

(ii) q : किसी वृत्त का केंद्र वृत्त की प्रत्येक जीवा को समद्विभाजित करता है। .
हल:
असत्य : वृत्त का केंद्र केवल व्यास को समद्विभाजित करता है। प्रत्येक जीवा केंद्र से होकर नहीं जाती है। अतः वृत्त का केंद्र प्रत्येक जीवा को समद्विभाजित नहीं करता है।

(iii) r : एक वृत्त किसी दीर्घवृत्त की एक विशेष स्थिति है।
हल:
सत्य : दीर्घवृत्त का समीकरण \(\frac{x^{2}}{a^{2}}+\frac{y^{2}}{b^{2}}\) = 1
जब a = b तब \(\frac{x^{2}}{a^{2}}+\frac{y^{2}}{b^{2}}\) = 1 या x2 + y2 = a2
अतः यह वृत्त का समीकरण है।

(iv) s : यदि x और y ऐसे पूर्णांक हैं कि x > y, तो – x < – y हैं।
हल: सत्य : यदि x और y पूर्णांक हैं और x > y तो – x < – y (असमिकाओं के नियम से)

(v) t : \(\sqrt{11}\) एक परिमेय संख्या है।
हल:
असत्य : \(\sqrt{11}\) एक अपरिमेय संख्या है।

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MP Board Class 12th Chemistry Solutions Chapter 15 बहुलक

MP Board Class 12th Chemistry Solutions Chapter 15 बहुलक

बहुलक NCERT पाठ्यनिहित प्रश्नोत्तर

प्रश्न 1.
बहुलक क्या होते हैं ?
उत्तर
सरल अणुओं अर्थात् एकलक के संयोजन से बने उच्चतर आण्विक द्रव्यमान वाले यौगिकों को बहुलक कहते हैं। पॉलिमर शब्द की उत्पत्ति ग्रीक भाषा के दो शब्द poly + mer के योग से हुई है। Poly = many (बहु), mer = parts (भाग) इन्हें वृहत् अणु भी कहते हैं।
उदाहरण-P.V.C..टेफ्लॉन, पॉलिथीन इत्यादि।

प्रश्न 2.
संरचना के आधार पर बहुलकों का वर्गीकरण कैसे किया जाता है ?
उत्तर
संरचना के आधार पर बहुलकों को निम्न प्रकार से वर्गीकृत किया जाता है

  1. रेखीय बहुलक– पॉलिएथिलीन, नायलॉन, पॉलिविनाइल क्लोराइड।
  2. शाखित श्रृंखला बहुलक-निम्न घनत्व पॉलिथीन, ग्लाइकोजन।
  3. तिर्यकबद्ध बहुलक-बेकेलाइट, मेलामिन इत्यादि।

प्रश्न 3.
निम्नलिखित बहुलकों को बनाने वाले एकलकों के नाम लिखिए[
MP Board Class 12th Chemistry Solutions Chapter 15 बहुलक - 4
उत्तर
(a) हेक्सामथेलीन, डाईएमीन तथा एडीपिक अम्ल
(b) केप्रोलेक्टम
(c) टेट्राफ्लुओरोएथिलीन।

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प्रश्न 4.
निम्न को योगात्मक एवं संघनन बहुलकों में वर्गीकृत कीजियेटेरिलीन, बैकेलाइट, पॉलिविनाइल क्लोराइड, पॉलिथीन।
उत्तर

  1. टेरिलीन- संघनन बहुलक
  2. बैकेलाइट- संघनन बहुलक
  3. पॉलिविनाइल क्लोराइड- योगात्मक बहुलक
  4. पॉलिथीन- योगात्मक बहुलक।

प्रश्न 5.
ब्यूना-N और ब्यूना-5 के मध्य अंतर समझाइए।
उत्तर
ब्यूना- N- 1, 3-ब्यूटाडाइईन एवं एक्रिलोनाइट्राइल का सहबहुलक है।
ब्यूना- S- 1, 3-ब्यूटाडाइईन एवं स्टाइरिन का सहबहुलक है।

प्रश्न 6.
निम्न बहुलकों को उनके अंतराआण्विक बलों के बढ़ते क्रम में व्यवस्थित कीजिए

  • नायलॉन-6, 6, ब्यूना-S, पॉलिथीन
  • नायलॉन-6, निओप्रिन, पॉलिविनाइल क्लोराइड।

उत्तर
अंतराआण्विक बलों के बढ़ते क्रम –

  • ब्यूना-S, पॉलिथीन, नायलॉन-6, 6
  • निओप्रिन, पॉलिविनाइल क्लोराइड, नायलॉन-6।

बहुलक NCERT पाठ्य-पुस्तक प्रश्नोत्तर

प्रश्न 1.
बहुलक और एकलक पदों की व्याख्या कीजिए।
उत्तर
बहुलक-बहुलक उच्च आण्विक द्रव्यमान वाले पदार्थ होते हैं जिनमें वृहत् संख्या में पुनरावृत्त संरचनात्मक इकाइयाँ पायी जाती हैं। इन्हें बृहत् अणु भी कहा जाता है । बहुलकों के कुछ उदाहरण- पॉलिथीन, बैकलाइट, रबर, नायलॉन 6, 6 आदि हैं।
एकलक- एकलक एक सरल अणु है जो बहुलीकृत होने में सक्षम है और इससे संगत बहुलक बनता
उदाहरण- पॉलिथीन एक बहुलक है। इसका सरल अणु एथिलीन एकलक है।
MP Board Class 12th Chemistry Solutions Chapter 15 बहुलक - 5

प्रश्न 2.
प्राकृतिक और संश्लेषित बहुलक क्या हैं ? प्रत्येक के दो उदाहरण दीजिए।
उत्तर
1. प्राकृतिक बहुलक-प्राकृतिक बहुलक उच्च आण्विक द्रव्यमान वाले वृहत्अणु हैं और यह पादपों और जंतुओं में पाए जाते हैं। प्रोटीन और न्यूक्लिक अम्ल इसके उदाहरण हैं।

2. संश्लेषित बहुलक-संश्लेषित बहुलक मानव निर्मित उच्च आण्विक द्रव्यमान वाले वृहत्अणु हैं। संश्लेषित प्लास्टिक, रेशे और रबर इसके अंतर्गत आते हैं। इनके दो विशिष्ट उदाहरण पॉलिथीन और डेक्रॉन हैं।

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प्रश्न 3.
समबहुलक और सहबहुलक पदों (शब्दों) में विभेद कर प्रत्येक का एक उदाहरण दीजिए।
उत्तर
समबहुलक- एक ही प्रकार की एकलक स्पीशीज के बहुलीकरण से बनने वाले योगात्मक बहुलकों को समबहुलक कहा जाता है।
उदाहरण –
MP Board Class 12th Chemistry Solutions Chapter 15 बहुलक - 6

सहबहुलक- दो भिन्न-भिन्न प्रकार के एकलकों के योगात्मक बहुलीकरण से बनने वाले बहलकों को सहबहुलक कहा जाता है।
उदाहरण –
MP Board Class 12th Chemistry Solutions Chapter 15 बहुलक - 7

प्रश्न 4.
एकलक की प्रकार्यात्मकता को आप किस प्रकार समझाएँगे?
उत्तर
प्रकार्यात्मकता एकलक में आबंधी स्थितियों की संख्या है।
उदाहरण- एथीन, प्रोपीन, स्टाइरीन, एक्रिलोनाइट्राइल की प्रकार्यात्मकृता एक है तथा एथिलीन ग्लाइकॉल, ऐडिपिक अम्ल हेक्सामेथिलीनडाइएमीन की दो है।

प्रश्न 5.
बहुलीकरण (Polymerization) पद (शब्द) को परिभाषित कीजिए।
उत्तर
एक अथवा अधिक एकलकों की सहसंयोजक बंधों द्वारा पुनरावृत्त संरचनात्मक इकाइयों के एक साथ श्रृंखलित होने से बनने वाले उच्च आण्विक द्रव्यमान वाले बहुलक बनने की प्रक्रिया बहुलीकरण है।

प्रश्न 6.
(NH-CHR-CO)n एक समबहुलक है या सह-बहुलक ?
उत्तर
चूँकि (NH-CHR -CO)n इकाई, एकल एकलक इकाई से प्राप्त होती हैं इसलिए यह एक समबहुलक है।

प्रश्न 7.
आण्विक बलों के आधार पर बहुलक किन संवर्गों में वर्गीकृत किए जाते हैं ?
उत्तर
विभिन्न बहुलकों की श्रृंखलाओं के मध्य उपस्थित आण्विक बलों के आधार पर बहुलकों का …वर्गीकरण निम्न प्रकार से दिया गया है।

  1. प्रत्यास्थ बहुलक,
  2. रेशे,
  3. तापसुघट्य बहुलक और
  4. तापदृढ़ बहुलक।

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प्रश्न 8.
संकलन और संघनन बहुलीकरण के मध्य आप किस प्रकार विभेद करेंगे?
उत्तर
संकलन बहुलीकरण-योगात्मक बहुलक द्वि या त्रि-आबंध युक्त एकलक अणुओं के पुनरावृत्त योग से बनते हैं। एक ही प्रकार के एकलक स्पीशीज के बहुलीकरण से बनने वाले योगात्मक बहुलक को समबहुलक कहते हैं तथा भिन्न-भिन्न प्रकार के एकलकों के योगात्मक बहुलीकरण से बनने वाले बहुलकों को सहबहुलक कहते हैं।
उदाहरण- एथीन से पॉलिएथिलीन का निर्माण।

संघनन बहुलीकरण- दो भिन्न द्वि-क्रियात्मक या त्रि-क्रियात्मक इकाइयों के बीच पुनरावृत्त संघनन अभिक्रिया द्वारा बनते हैं। इन बहुलीकरण अभिक्रिया के दौरान लघु अणु जैसे-H2O-NH3, HCl इत्यादि का विलोपन होता है।
उदाहरण- नायलॉन-6, 6, हेक्सामेथिलीनडाईएमीन तथा एडिपिक अम्ल का संघनन बहुलक है।

प्रश्न 9.
सहबहुलीकरण (Co-polymerization) पद(शब्द)की व्याख्या कीजिए और दो उदाहरण दीजिए।
उत्तर
सहबहुलीकरण वह प्रक्रिया है जिसमें एक से अधिक प्रकार की स्पीशीज का बहुलीकरण किया जाता है। सहबहुलक में प्रत्येक एकलक की अनेक इकाइयाँ होती हैं।
उदाहरण- ब्यूना-S- यह 1, 3-ब्यूटाडाइईन तथा स्टाइरीन का सहबहुलक है।
ब्यूना-N- यह 1, 3-ब्यूटाडाइईन तथा एक्रिलोनाइट्राइल का सहबहुलक है।

प्रश्न 10.
एथीन के बहुलीकरण के लिए मुक्त मूलक क्रियाविधि लिखिए।
उत्तर
बेंजॉयल परॉक्साइड की उपस्थिति में एथीन का बहुलीकरण मुक्त मूलक क्रियाविधि द्वारा समझा जा सकता है।
MP Board Class 12th Chemistry Solutions Chapter 15 बहुलक - 8

प्रश्न 11.
तापसुघट्य और तापदृढ़ बहुलकों को प्रत्येक के दो उदाहरण के साथ परिभाषित कीजिए।
उत्तर
तापसुघट्य बहुलक को बार-बार तापन द्वारा मृदुलित और शीतलन द्वारा कठोर बनाया जा सकता है। अतः इसे बार-बार उपयोग किया जा सकता है। पॉलिथीन और पॉलिप्रोपिलीन आदि इसके उदाहरण हैं। तापदृढ़ बहुलक स्थायी रूप से दृढ़ रहने वाला बहुलक है। यह साँचे में ढालने की प्रक्रिया में कठोर हो जाता है तथा जम जाता है और पुनः मृदुलित भी नहीं किया जा सकता। बैकेलाइट और मेलामिन-फॉर्मेल्डिहाइड बहुलक इसके उदाहरण हैं।

प्रश्न 12.
निम्न बहुलकों को प्राप्त करने के लिए प्रयुक्त एकलक लिखिए

  • पॉलिवाइनिल क्लोराइड,
  • टेफ्लॉन,
  • बैकेलाइट।

उत्तर

  • पॉलिवाइनिल क्लोराइड का एकलक, CH,=CHCI (वाइनिल क्लोराइड) है।
  • टेफ्लॉन का एकलक, CF2=CF2 (टेट्राफ्लुओरोएथिलीन) है।
  • बैकेलाइट के बनने में प्रयुक्त होने वाले एकलक, HCHO (फॉर्मेल्डिहाइड) और C6H5OH (फीनॉल) हैं।

प्रश्न 13.
मुक्त मूलक योगज बहुलकन में प्रयुक्त एक सामान्य प्रारंभक का नाम और संरचना लिखिए।
उत्तर
बेजॉइल परॉक्साइड
MP Board Class 12th Chemistry Solutions Chapter 15 बहुलक - 9

प्रश्न 14.
रबर अणुओं में द्विबंधों की उपस्थिति किस प्रकार उनकी संरचना और क्रियाशीलता को प्रभावित करती है ?
उत्तर
संरचना की दृष्टि से प्राकृतिक रबर एक रेखीय cis-1,4-पॉलिआइसोप्रिन है। इस बहुलक में द्विआबंध आइसोप्रिन इकाइयों के C, और C, के मध्य स्थित होते हैं। द्विआबंध का cis अभिविन्यास दुर्बल अंतर-आण्विक बलों द्वारा प्रभावी आकर्षण के लिए श्रृंखलाओं को समीप नहीं आने देता। अतः प्राकृतिक रबर की कुंडलित सरंचना होती है और यह प्रत्यास्थता प्रदर्शित करता है।
MP Board Class 12th Chemistry Solutions Chapter 15 बहुलक - 10

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प्रश्न 15.
रबर के वल्कनीकरण के मुख्य उद्देश्य की विवेचना कीजिए।
उत्तर
प्राकृतिक रबर के निम्नलिखित भौतिक गुणों के सुधार के लिये वल्कनीकरण किया जाता है

  • प्राकृतिक रबर उच्च ताप (>335K) ताप पर नर्म है।
  • प्राकृतिक रबर निम्न ताप (<283K) ताप पर भंगुर है।
  • यह अध्रुवीय विलायकों में घुलनशील है।
  • ऑक्सीकरण कर्मकों के आक्रमण के प्रति प्रतिरोधी नहीं है।

प्रश्न 16.
नायलॉन-6 और नायलॉन-6, 6 में पुनरावृत्त एकलक इकाइयाँ क्या हैं ?
उत्तर
नायलॉन-6 की पुनरावृत्त एकलक इकाई [NH(CH2)5-CO] है। नायलॉन-6, 6 बहुलक की पुनरावृत्तं एकलक इकाई दो एकलकों हेक्सामेथिलीनडाइऐमीन और ऐडिपिक अम्ल से व्युत्पित होती है।
[NH-(CH2)6-NH-CO(CH2)4-CO]

प्रश्न 17.
निम्नलिखित बहुलकों के एकलकों का नाम और संरचना लिखिए।
(i) ब्यूना-S,
(ii) ब्यूना-N,
(iii) डेक्रॉन,
(iv) निओप्रीन।
उत्तर
एकलकों के नाम और संरचनाएँक्र.
MP Board Class 12th Chemistry Solutions Chapter 15 बहुलक - 11

प्रश्न 18.
निम्नलिखित बहुलक संरचनाओं के एकलक की पहचान कीजिए
MP Board Class 12th Chemistry Solutions Chapter 15 बहुलक - 12
MP Board Class 12th Chemistry Solutions Chapter 15 बहुलक - 13
उत्तर
(i) डेकानॉइक अम्ल –
HOOC-(CH2)8-COOH और हेक्सामेथिलीनडाइएमीन-H2N-(CH2)6-NH2 है।
MP Board Class 12th Chemistry Solutions Chapter 15 बहुलक - 14

प्रश्न 19.
एथिलीन ग्लाइकॉल और टेरेफ्थैलिक अम्ल से डेक्रॉन किस प्रकार प्राप्त किया जाता है ?
उत्तर
डेक्रॉन बनाने के लिये निम्नलिखित समीकरण हैं-
MP Board Class 12th Chemistry Solutions Chapter 15 बहुलक - 15

प्रश्न 20.
जैवनिम्नीय बहुलक क्या हैं ? एक जैवनिम्नीय ऐलिफैटिक पॉलिएस्टर का उदाहरण दीजिए।
उत्तर
जैवनिम्नीय बहुलक वह बहुलक है जो एक लम्बे समयांतराल के बाद स्वयं के द्वारा अथवा सूक्ष्मजीवों की क्रिया द्वारा विघटित हो जाता है। जैवनिम्नीय बहुलक कहलाता है। इस प्रकार के बहुलक का उपयोग तथा उनका निस्तारण पर्यावरणीय समस्याएँ उत्पन्न नहीं करता है।
उदाहरण- पॉलिहाइड्रॉक्सीब्यूटीरेट को -हाइड्रॉक्सी वैलरेट PHBV.
MP Board Class 12th Chemistry Solutions Chapter 15 बहुलक - 16

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बहुलक अन्य महत्वपूर्ण प्रश्नोत्तर

बहुलक वस्तुनिष्ठ प्रश्न

1. सही विकल्प चुनकर लिखिए

प्रश्न 1.
निम्नलिखित में से कौन-सा कथन गलत है –
(a) सिल्क सेल्युलोज से बनाया जाता है
(b) नायलॉन-6, 6 इलास्टोमर्स का उदाहरण है
(c) प्राकृतिक रबर की पुनरावृत्त इकाई आइसोप्रिन है
(d) स्टार्च तथा सेल्युलोज दोनों ग्लूकोज के बहुलक हैं।
उत्तर
(b) नायलॉन-6, 6 इलास्टोमर्स का उदाहरण है

प्रश्न 2.
CaC2 से पॉलिएथिलीन का निर्माण निम्न प्रकार से होता है –
CaC2+2H2O →Ca(OH)2+C2H2
C2H2+H2 →C2H4
nC2H4 →(-CH2-CH2-)n
64.0 Kg CaC2 से पॉलिएथिलीन की मात्रा प्राप्त होगी-
(a) 7 kg
(b) 14 kg
(c) 21 kg
(d) 28 kg.
उत्तर
(d) 28 kg.

प्रश्न 3.
निम्न घनत्व पॉलिएथिलीन के लिये निम्न दिये गये कथनों में से कौन-सा कथन गलत है –
(a) इसके निर्माण हेतु उच्च दाब की आवश्यकता है
(b) यह विद्युत् का दुर्बल चालक है
(c) इसके निर्माण हेतु उत्प्रेरक के रूप में ऑक्सीजन या परॉक्साइड प्रयुक्त होता है
(d) इसका उपयोग बाल्टियाँ तथा डस्टबीन बनाने में होता है।
उत्तर
(d) इसका उपयोग बाल्टियाँ तथा डस्टबीन बनाने में होता है।

प्रश्न 4.
नायलॉन उदाहरण है –
(a) पॉलिऐमाइड
(b) पॉलिथीन
(c) पॉलिएस्टर
(d) पॉलिसैकेराइड।
उत्तर
(a) पॉलिऐमाइड

प्रश्न 5.
प्राकृतिक रबर में होता है –
(a) वैकल्पिक सिस एवं ट्रान्स अभिविन्यास
(b) अनियमित सिस एवं ट्रान्स अभिविन्यास
(c) सभी सिस अभिविन्यास
(d) सभी ट्रान्स अभिविन्यास।
उत्तर
(c) सभी सिस अभिविन्यास

प्रश्न 6.
निम्न में से कौन-सा संघनन बहुलक नहीं है –
(a) मेलामाइन
(b) ग्लिपटल
(c) डेक्रॉन
(d) नियोप्रिन।
उत्तर
(d) नियोप्रिन।

प्रश्न 7.
निम्न में से नियोप्रिन का एकलक है –
(a)
MP Board Class 12th Chemistry Solutions Chapter 15 बहुलक -1
(b)
MP Board Class 12th Chemistry Solutions Chapter 15 बहुलक -2
(c) CH2=CH-C=CH
(d) CH2= CH-CH= CH2.
उत्तर
(a)
MP Board Class 12th Chemistry Solutions Chapter 15 बहुलक -1

प्रश्न 8.
निम्न में से कौन-सा बहुलक जैवनिम्नीकरण बहुलक है –
(a) पॉलिएथिलीन
(b) बैकेलाइट
(c) PHBU
(d) PVC.
उत्तर
(c) PHBU

प्रश्न 9.
निम्न में से किसमें एस्टर बंध होता है –
(a) नायलॉन
(b) बैकलाइट
(c) टेरीलीन
(d) P.V.C.
(e) रबर।
उत्तर
(c) टेरीलीन

प्रश्न 10.
टेफ्लॉन किसका बहुलक है –
(a) टेट्राफ्लुओरो एथिलीन
(b) टेट्रा आयोडो एथिलीन
(c) टेट्राब्रोमो एथिलीन
(d) टेट्राफ्लुओरो एथिलीन।
उत्तर
(a) टेट्राफ्लुओरो एथिलीन

प्रश्न 11.
नायलॉन थ्रेड होते है –
(a) पॉलिएमाइड बहुलक
(b) पॉलिएथिलीन बहुलक
(c) पॉलिविनाइल बहुलक
(d) पॉलिएस्टर बहुलक।
उत्तर
(a) पॉलिएमाइड बहुलक

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प्रश्न 12.
बैकेलाइट बहुलक है –
(a) HCHO एवं एसीटीक अम्ल का
(b) HCHO एवं फिनॉल का
(c) C2H5-OH एवं फिनॉल का
(d) CH3-COOH एवं बेंजीन का।
उत्तर
(b) HCHO एवं फिनॉल का

प्रश्न 13.
निम्नलिखित में जैवनिम्नीकरण बहुलक (Biodegradable) है –
(a) सेल्युलोज
(b) पॉलिथीन
(c) पॉलिविनाइल फ्लोराइड
(d) नायलॉन-6.
उत्तर
(a) सेल्युलोज

प्रश्न 14.
नायलॉन-6, 6 नहीं है –
(a) संघनन बहुलक
(b) सह बहुलक
(c) पॉलि ऐमाइड .
(d) समबहुलक।
उत्तर
(d) समबहुलक।

प्रश्न 15.
निम्न में श्रृंखला वृद्धि बहुलक है –
(a) स्टार्च
(b) न्यूक्लिक अम्ल
(c) पॉलिस्टाइरिन
(d) प्रोटीन।
उत्तर
(c) पॉलिस्टाइरिन

2. रिक्त स्थानों की पूर्ति कीजिए

  1. क्लोरोप्रिन ………….. बनाने में उपयोग किया जाता है।
  2. बहुलकों पर आवेश ………… है।
  3. बहुलक प्रकाश का …………… करते हैं।
  4. बहुलकों का अणु द्रव्यमान …………… होता है।
  5. ग्लूकोज ……………. का मोनोमर है।
  6. सेल्युलोज एक ………….. बहुलक है।
  7. एथिलीन ग्लाइकॉल तथा थैलिक अम्ल का बहुलक …………… कहलाता है।
  8. रबर …………… बहुलक है।
  9. रबर का वल्कनीकरण ………….. का उदाहरण है।
  10. बैकेलाइट एक ………………. प्लास्टिक है।
  11. नाइलॉन -6 को …………… भी कहते हैं।
  12. टेफ्लॉन …………… का बहुलक है।

उत्तर

  1. संश्लेषित रबर
  2. नहीं होता
  3. प्रकीर्णन
  4. अधिक
  5. सेल्युलोज
  6. प्राकृतिक
  7. ग्लिप्टल
  8. प्राकृतिक
  9. इलेस्टोमर
  10. ताप दृढ़
  11. पेर्लीन-2
  12. टेट्रा फ्लोरो एथिलीन।

3. उचित संबंध जोडिए

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उत्तर

  1. (d)
  2. (a)
  3. (c)
  4. (1)
  5. (b)
  6. (g)
  7. (e)
  8. (h).

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4. एक शब्द/वाक्य में उत्तर दीजिए

  1. प्राकृतिक बहुलकों के दो उदाहरण दीजिए।
  2. योग बहुलक के दो उदाहरण दीजिए।
  3. संघनन बहुलक के दो उदाहरण दीजिए।
  4. ब्यूना रबर का रासायनिक नाम लिखिए।
  5. संश्लेषित रबर का एक उदाहरण दीजिए।
  6. पॉलीथीन का एकलक है।
  7. एथिलीन ग्लाइकॉल तथा डाइमेथैल थैलिक अम्ल के संघनन से प्राप्त बहुलक का नाम क्या है ?
  8. दो या दो से अधिक भिन्न एकलकों के बहुलीकरण को क्या कहते हैं ?
  9. टायर के धागे बनाने में प्रयुक्त बहुलक का नाम क्या है ?
  10. कैप्रोलैक्टम के बहुलीकरण से क्या प्राप्त होता है ?

उत्तर

  1. प्राकृतिक बहुलक-रबर, स्टार्च
  2. योग बहुलक-(i) पॉलिथीन (ii) पॉलिप्रापिलीन
  3. संघनन बहुलक- (i) नायलॉन-6 (ii) बैकलाइट
  4. स्टायरिन ब्यूटा डाइईन रबर (S.B.R)
  5. स्टाइरीन ब्यूटा-डाइ-ईन रबर (S.B.R.)
  6. एथीन (CH2 = CH2)
  7. टेरीलीन (डेक्रॉन)
  8. सह बहुलीकरण
  9. नायलॉन-6
  10. नायलॉन-6.

बहुलक लघु उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 1.
क्या योगात्मक व संघनन बहुलीकरण में सहबहुलक (Copolymer) बनता है ?
उत्तर
हाँ, यह दोनों प्रकार के बहुलीकरण में बन सकता है। जैसे ब्यूना-S एक सहबहुलक है जो कि स्टाइरिन व 1, 3-ब्यूटाडाइईन से योगात्मक बहुलीकरण में बनता है। नायलॉन-6, 6 एक सह बहुलक है जो कि एडिपिक अम्ल एवं हेक्सामेथिलीन डाई एमीन के संघनन बहुलीकरण से बनता है।

प्रश्न 2.
नायलॉन-6 एवं नायलॉन-6,6 में क्रमश: 6 एवं 6, 6 क्या व्यक्त करते हैं ?
उत्तर
नायलॉन-6 को कैप्रोलैक्टम से बनाया जाता है जो कि साइक्लोहेक्सेन से प्राप्त होता है। यह 6 कार्बन परमाणु युक्त यौगिक है अतः नायलॉन-6 में 6 अंक, इन्हीं 6 कार्बन परमाणुओं को व्यक्त करते हैं।

नायलॉन-6, 6 को 6 कार्बन परमाणु युक्त एडिपिक अम्ल तथा 6 कार्बन परमाणु युक्त डाइ एमीन से बनाया जाता है। अतः नाम नायलॉन-6, 6 में इसे 6, 6 से व्यक्त किया जाता है जो कि दोनों यौगिकों में 6-6 कार्बन श्रृंखला को व्यक्त करते हैं।

प्रश्न 3.
निम्न बहुलकों को उनके बढ़ते हुए अन्तर आण्विक बल के आधार पर व्यवस्थित कीजिए तथा इनको योगात्मक व संघनन बहुलक के रूप में भी वर्गीकृत कीजिए-नायलॉन-6, 6, ब्यूना-S, पॉलिथीन।
उत्तर
अन्तर आण्विक बल का बढ़ता हुआ क्रम है- पॉलिथीन < ब्यूना-S < नायलॉन-6,6
संघनन बहुलक- नायलॉन-6, 6
योगात्मक बहुलक- ब्यूना-S एवं पॉलिथीन।

प्रश्न 4.
थर्मोप्लास्टिक बहुलक, थर्मोसेटिंग बहुलक से किस प्रकार भिन्न है ?
उत्तर
थर्मोप्लास्टिक बहुलक एवं थर्मोसेटिंग बहुलक में भिन्नता –
MP Board Class 12th Chemistry Solutions Chapter 15 बहुलक - 17

प्रश्न 5.
क्या पॉलिएस्टर व पॉलिएक्रिलेट्स समान है ? उत्तर को स्पष्ट कीजिए।
उत्तर
पॉलिएस्टर व पॉलिएक्रिलेट्स दोनों अलग-अलग श्रेणियों के बहुलक हैं तथा दोनों में निम्न अन्तर स्पष्ट है

  • पॉलिएक्रिलेट्स एकलक (होमोपॉलिमर) है जबकि पॉलिएस्टर, सह बहुलक की प्रकृति के हैं।
  • पॉलिएक्रिलेट्स में बहुलकों का संश्लेषण योगात्मक बहुलीकरण द्वारा होता है जबकि पॉलिएस्टर का संश्लेषण संघनन बहुलीकरण द्वारा होता है।
  • पॉलिएक्रिलेट्स में बहुलीकरण C =C बन्ध के द्वारा होता है जबकि पॉलिएस्टर में यह एस्टर बन्ध के द्वारा होता है।

प्रश्न 6.
मुक्त मूलक बहुलीकरण अभिक्रिया में हमेशा एकलक का विशुद्ध रूप ही क्यों लिया जाता है ?
उत्तर
मुक्त मूलक बहुलीकरण में अशुद्धियाँ श्रृंखला स्थानान्तरण एजेण्ट के रूप में कार्य कर सकती है तथा मुक्त मूलक से क्रिया कर अभिक्रिया को धीमा कर सकती है या पूरी अभिक्रिया को ही रोक सकती है।

प्रश्न 7.
प्राकृतिक रबर तथा वल्कनित रबर के कुछ महत्वपूर्ण अन्तर लिखिए।
उत्तर
प्राकृतिक रबर एवं वल्कनित रबर में अन्तर –
MP Board Class 12th Chemistry Solutions Chapter 15 बहुलक - 18

प्रश्न 8.
पॉलिथीन क्या है ? इसके दो उपयोग लिखिये।
उत्तर
पॉलिथीन या पॉलिएथिलीन (Polyethylene)-अत्यधिक उच्च दाब 1000-3000 वायुमण्डल एवं 373 से 573K पर ऑक्सी अथवा अकार्बनिक परऑक्साइड की उपस्थिति में एथिलीन बहुलीकृत होकर पॉलिएथिलीन बनाता है।
MP Board Class 12th Chemistry Solutions Chapter 15 बहुलक - Q8
इस प्रकार पॉलिएथिलीन एक योगात्मक बहुलक है तथा व्यापार में पॉलिथीन के नाम से प्रसिद्ध है। यह ताप प्लास्टिक है तथा गर्म करने से नर्म हो जाता है, जिससे इसे विभिन्न आकृतियों में ढाला जा सकता है। यह जल, अम्ल, क्षार तथा कार्बनिक विलायकों द्वारा अप्रभावित रहती है।
उपयोग (Uses)-

  • न टूटने वाली बोतलें, पाइप, बाल्टी आदि घरेलू उपयोग की वस्तुओं के निर्माण में।
  • पैक करने वाली सामग्रियों के निर्माण में,
  • तारों के विद्युत्-रोधन में।

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प्रश्न 9.
निओप्रिन रबर क्या है ? इसके उपयोग लिखिए।
उत्तर
निओप्रिन रबर-यह संश्लेषित रबर है, जो पोटैशियम परसल्फेट की उपस्थिति में क्लोरोप्रिन (2- क्लोरो ब्यूटा-1, 3 डाईन) के बहुलीकरण से बनता है।
MP Board Class 12th Chemistry Solutions Chapter 15 बहुलक - 20
उपयोग-

  • पेट्रोल ले जाने वाली पाइप लाइन बनाने में।
  • कोयला खानों में काम करने वालों के लिए बेल्ट बनाने में।

प्रश्न 10.
पी.वी.सी. क्या है ? इसके क्या उपयोग हैं ?
उत्तर
पॉलि वाइनिल क्लोराइड (PVC)-इसे वाइनिल क्लोराइड के बहुलीकरण से बनाया जाता है। वाइनिल क्लोराइड को बेन्जॉइल परऑक्साइड की उपस्थिति में अक्रिय विलायक में लेकर गर्म करके इसे प्राप्त करते हैं।

प्रश्न 11.
टेफ्लॉन क्या है ? इसके उपयोग लिखिये।
उत्तर
टेफ्लॉन या पॉलिटेट्राफ्लु ओरोएथिलीन [Teflon, Polytetrafluoroethylene (PTFE).. टेफ्लॉन टेट्राफ्लुओरो एथिलीन का उच्च बहुलक है।
MP Board Class 12th Chemistry Solutions Chapter 15 बहुलक - 21
टेफ्लॉन रासायनिक रूप से निष्क्रिय एवं ऊष्मा प्रतिरोधी बहुलक है। इसका गलनांक 603K है।
उपयोग– यह गैस्केट, पम्प की पैकिंग, बल्ब की सील, अस्नेहित बेयरिंग, फिल्टर वस्त्र (जालीदार कपड़ा) आदि को बनाने के उपयोग में आता है।

प्रश्न 12.
सेल्युलोज क्या है ? इसके उपयोग लिखिये।
उत्तर
सेल्युलोज प्रकृति द्वारा संश्लेषित बहुसैकेराइड (Polysaccharide) है। सेल्युलोज का अणुसूत्र (C6H10O5)n है। यह पेड़-पौधों की कोशिका भित्ति (Cell wall) का प्रमुख अंग है तथा कुछ जीव-जन्तुओं के ऊतक (Tissues) में भी पाया जाता है। लकड़ी में 60% तथा रुई (कॉटन) में 90% सेल्युलोज होती है। यह प्रकृति में सर्वाधिक मात्रा में मिलने वाला कार्बनिक यौगिक है।
उपयोग- सेल्युलोज से निर्मित अर्द्ध-संश्लेषित बहुलक कृत्रिम धागे व प्लॉस्टिक बनाने में बहुत उपयोगी

प्रश्न 13.
जिग्लर-नाटा उत्प्रेरक क्या है ? इसके उपयोग लिखिये ।
उत्तर
जिग्लर-नाटा उत्प्रेरक-टाइटेनियम क्लोराइड और ऐल्युमिनियम यौगिक का अक्रिय विलायक (हेक्सेन) में मिश्रण जिग्लर-नाटा उत्प्रेरक कहलाता है। उपयोग-1. कम दाब और ताप पर एथिलीन से पॉलिथीन बनता है।
MP Board Class 12th Chemistry Solutions Chapter 15 बहुलक - 22
पॉलिथीन पॉलिथीन का उपयोग खिलौने, रेडियो, टी.वी. के केबिनेट बनाने में होता है।
2. कम ताप और दाब पर प्रोपिलीन जिग्लर-नाटा उत्प्रेरक की उपस्थिति में पॉलिप्रोपिलीन बहुलक बनाता है।
MP Board Class 12th Chemistry Solutions Chapter 15 बहुलक - 23
पॉलिप्रोपिलीन पॉलिप्रोपिलीन का उपयोग बोतलें, पाइप, ग्रामोफोन, रिकॉर्ड बनाने में होता है।

प्रश्न 14.
नायलॉन-6 और नायलॉन-6,6 में अन्तर स्पष्ट कीजिएं।
उत्तर
नायलॉन-6 और नायलॉन-6,6 में अन्तर।
MP Board Class 12th Chemistry Solutions Chapter 15 बहुलक - 24
प्रश्न 15.
टेफ्लॉन की विधि, गुण तथा उपयोग का वर्णन कीजिए।
उत्तर
टेफ्लॉन-यह ट्रेटाफ्लोरोएथिलीन को अमोनियम परऑक्सी सल्फेट की उपस्थिति में गर्म करके बनाया जाता है।
MP Board Class 12th Chemistry Solutions Chapter 15 बहुलक - 25
गुण-

  • यह बहुत कठोर पदार्थ है,
  • ऊष्मा का प्रतिरोधी होता है,
  • इसका गलनांक 330°C है,
  • यह रासायनिक रूप से निष्क्रिय होता है।

उपयोग- टेफ्लॉन का उपयोग सान्द्र अम्लों और दाहक द्रवों के भरने की केन बनाने तथा ऊष्मा व रासायनिक पदार्थों के प्रतिस्थायी वस्तुएँ बनाने में होता है।

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प्रश्न 16.
बैकलाइट कैसे बनाते हैं ? इसके उपयोग लिखिए।
उत्तर
क्षार की उपस्थिति में फीनॉल और फॉर्मेल्डिहाइड के संघनन से बैकेलाइट बनता है। बैकेलाइट क्रॉस बन्ध (Cross linked) बहुलक है।
उपयोग़-बहुलीकरण की अल्प मात्रा में बने हुए मुक्त मृदु बैकलाइट स्तरित काष्ठ के तख्तों के लिए बन्धक गोंद के रूप में तथा वार्निशों एवं लैकरों में उपयोग किये जाते हैं। बहुलीकरण की मात्रा उच्च होने से कठोर बैकलाइट बनते हैं, जो कंघे, फाउण्टेन पेन की नलियों, ग्रामोफोन के रिकॉर्ड, बिजली के सामान, फार्माइका मेज तलों तथा अनेक उत्पादों के बनाने के लिए उपयोग किये जाते हैं।
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प्रश्न 17.
नायलॉन-6,6 बनाने की विधि, गुण एवं उपयोग लिखिए।
उत्तर
नायलॉन- 6,6 – यह पॉलिऐमाइड संवर्ग का अति सामान्य बहुलक है। इसमें अनुलग्न-66 का अर्थ है कि बहुलक श्रृंखला में एसिड और डाइऐमीन दोनों के छ:-छ: कार्बन परमाणु होते हैं।
नायलॉन- 6,6 बनाने की विधि-यह ऐडिपिक अम्ल या 1,6- हेक्सेन डाइ ओइक ऐसिड तथा हेक्सामेथिलीन डाइऐमीन या 1, 6-डाइऐमीनो हेक्सेन के बहुलीकरण से बनाया जाता है।
MP Board Class 12th Chemistry Solutions Chapter 15 बहुलक - 27
गुण-

  • नायलॉन धागे की उच्च तन्य शक्ति होती है।
  • ये कठोर होते हैं।
  • इनकी प्रवृत्ति इलेस्टिक होती है।
  • नायलॉन की संरचना प्रोटीन के समान होती है।

उपयोग-

  • इसका उपयोग ब्रिसल और ब्रश बनाने में होता है।
  • वस्त्र उद्योग में धागे, गलीचे, बनियान, जुरावे बनाने में होता है।

बहुलक दीर्घ उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 1.
प्राकृतिक बहुलक क्या है ? कुछ प्रमुख बहुलकों को उदाहरण द्वारा समझाइये।
उत्तर
प्राकृतिक बहुलक (Natural polymers)-अनेक बहुलक प्रकृति में पाये जाते हैं । प्रकृति में इनका निर्माण एकलक इकाइयों के संयोजन अथवा संघनन द्वारा न होकर एक जटिल उपापचय प्रक्रिया (metabolic process) द्वारा होता है। कुछ प्रमुख प्राकृतिक बहुलक निम्न हैं

1. पॉलिसैकेराइड (Polysaccharides)-ये मोनोसैकेराइडों के उच्च अणु द्रव्यमान वाले बहुलक है। इसका मुख्य उदाहरण स्टॉर्च तथा सेलूलोस है। स्टॉर्च पौधे का मुख्य संरक्षित खाद्य पदार्थ है जबकि सेलूलोस पौधों का मुख्य संरचनात्मक भाग है।

2. प्रोटीन (Proteins)-ये a ऐमीनो अम्लों के बहुलक हैं। प्रोटीन शरीर के अधिकांश भाग की रचना ही नहीं अपितु उसका संचालन भी करते हैं। प्रोटीन के जल-अपघटन से अन्तिम उत्पाद a ऐमीनो कार्बोक्सिलिक अम्ल प्राप्त होते हैं।

3. न्यूक्लिक अम्ल (Nucleic acids)-ये प्राकृतिक बहुलक पदार्थ हैं जो प्रत्येक जीवित कोशिका में “न्यूक्लिओ प्रोटीन” नामक यौगिक के रूप में प्रोटीनों के साथ संयुक्त पाये जाते हैं। प्रोटीनों के जैव संश्लेषण का नियंत्रण इन्हीं के द्वारा होता है। ये आनुवंशिक सूचना के वाहक हैं तथा इस विशिष्ट कार्य हेतु इनकी संरचना भी विशिष्ट होती है। राइबोन्यूक्लिक अम्ल (RNA) तथा डिऑक्सीराइबोन्यूक्लिक अम्ल (DNA) मुख्य न्यूक्लिक अम्ल है।

4. प्राकृतिक रबर (Natural rubber)-प्राकृतिक रबर पौधों के लैटेक्स से प्राप्त होती है जो आइसोप्रीन (2- मेथिल 1,3 ब्यूटाडाईन) का बहुलक है।

प्रश्न 2.
संरचना के आधार पर बहुलकों को कितने भागों में विभाजित किया गया है ? उदाहरण देते हुए समझाइये।
उत्तर
संरचना के आधार पर बहुलकों को निम्न भागों में विभाजित किया गया है

1. रैखिक बहुलक (Linear polymers)-इस प्रकार के बहुलकों में एकलक इकाइयाँ मिलकर लम्बी सीधी श्रृंखला बनाती है। ये बहुलक इकाइयाँ एक के ऊपर एक स्थित होती हैं जिसके कारण इसकी तन्यता एवं गलनांक उच्च होते हैं । उदाहरण-पॉलि एथिलीन, नाइलॉन, पॉलि एस्टर।

2. शाखित श्रृंखला बहुलक (Branched Chain Polymer)-शाखित बहुलक पार्श्व-शाखाओं वाली एक दीर्घ श्रृंखला है। इस प्रकार के बहुलकों में एकलक इकाइयाँ आपस में जुड़कर मुख्य श्रृंखला और इससे अनेक पार्श्व श्रृंखलाएँ निकलती हैं जो शाखित होती हैं। उदाहरण-ऐमिलोपेक्टिन, ग्लाइकोजेन।।

3. तिर्यकबद्ध बहुलक-इस प्रकार के बहुलक में एकलक इकाइयाँ आपस में जुड़कर जाली के समान संरचना बनाती हैं। ये बहुलक अत्यन्त कठोर एवं भंगुर होते हैं। उदाहरण-बेकेलाइट तथा यूरिया, फार्मेल्डिहाइड रेजीन।

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MP Board Class 12th Biology Solutions Chapter 12 जैव प्रौद्योगिकी एवं उसके उपयोग

MP Board Class 12th Biology Solutions Chapter 12 जैव प्रौद्योगिकी एवं उसके उपयोग

जैव प्रौद्योगिकी एवं उसके उपयोग NCERT प्रश्नोत्तर

प्रश्न 1.
बीटी (Bt) आविष के रवे कुछ जीवाणुओं द्वारा बनाये जाते हैं, लेकिन जीवाणु स्वयं को नहीं मारते क्योंकि
(क) जीवाणु आविष के प्रति प्रतिरोधी होते हैं
(ख) आविष अपरिपक्व हैं।
(ग) आविष (Toxin) निष्क्रिय होता है
(घ) आविष जीवाणु की विशेषथैली में मिलता है।
उत्तर
(ग) आविष (Toxin) निष्क्रिय होता है।

प्रश्न 2.
पारजीनी जीवाणु क्या है ? किसी ऐक उदाहरण द्वारा सचित्र वर्णन कीजिए।
उत्तर
पारजीनी जीवाणु (Transgenic Bacteria)-ऐसे बैक्टीरिया (जीवाणु) जिनके डी.एन.ए. में परिचालन द्वारा एक अतिरिक्त (बाहरी) जीन व्यवस्थित होता है जो अपना लक्षण व्यक्त करता है, इसे पारजीनी जीवाणु कहते हैं।

उदाहरण-ई. कोलाई (E.coli) बैक्टीरिया एक पारजीनी जीवाणु है जो मधुमेह (डायबिटीज) रोग के निदान के लिए इन्सुलिन (Insulin) को उत्पन्न करता है। इन्सुलिन अणु दो पॉलीपेप्टाइड श्रृंखलाओं का बना होता है-A श्रृंखला (A chain) तथा B श्रृंखला (B chain) जो आपस में डाइ-सल्फाइड बंधों द्वारा जुड़ी होती हैं। इन्सुलिन की दोनों शृंखलाओं का जैव संश्लेषण (Biosynthesis) एकल पॉलीपेप्टाइड श्रृंखलाओं प्राक्इन्सुलिन (Proinsulin) के रूप में होता है।

मानव सहित स्तनधारियों में इन्सुलिन प्राक् -हॉर्मोन (Pro-hormone) संश्लेषित होता है जिसमें एक अतिरिक्त फैलाव होता है जिसे पेप्टाइड C(Peptide-C) कहते हैं । यह ‘सी’ पेप्टाइड परिपक्व इन्सुलिन में नहीं होता है, जो परिपक्वता के दौरान इन्सुलिन से अलग हो जाता है। सन् 1983 में एली लिली नामक एक अमेरिकी कम्पनी ने दो DNAअनुक्रमों को तैयार किया जो मानव इन्सुलिन की श्रृंखला A और B के अनुरूप होते हैं, जिसे इश्चेरिचिया कोलाई (E.coli) के प्लास्मिड में प्रवेश कराकर इन्सुलिन का उत्पादन किया। इन अलग-अलग निर्मित श्रृंखलाओं में A और B को निकालकर डाइसल्फाइड बन्ध बनाकर आपस में संयोजित कर मानव इन्सुलिन का निर्माण किया जाता है।

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प्रश्न 3.
आनुवंशिक रूपान्तरित फसलों के उत्पादन के लाभ व हानि का तुलनात्मक विभेद कीजिये ?
उत्तर
आनुवंशिक रूपान्तरित फसलों के उत्पादन के लाभ (Advantages of Production of Genetically Modified (GM) crops)
जैव प्रौद्योगिकी का प्रयोग करके कई पादपों में लाभप्रद गुणों का निवेश किया जाता है। जैव प्रौद्योगिकी से विकसित आनुवंशिकता रूपान्तरित फसलों के लाभप्रद गुण अग्रलिखित हैं

  • इस प्रकार के फसलों में पोषण गुणवत्ता में सुधार (Improvement in Nutritional Quality) हुआ है, जैसे-अधिक उत्पादन, अच्छे प्रोटीन : टक तथा अच्छे आवश्यक गुणों जैसे-गेहूँ की अच्छी बेकिंग गुणवत्ता तथा जौ की अच्छी माल्टिंग गुणवत्ता आदि का विकास इस प्रकार की फसलों में हुआ है।
  • लवण एवं सूखा सहिष्णुता-इस प्रकार की फसलें अजैव प्रतिबलों (Abiotic stresses) जैसे– ठण्डा, सूखा, लवण, ताप आदि के प्रति अधिक सहिष्णु (Tolerant) होते हैं।
  • इस प्रकार की फसलें रासायनिक पीड़क नाशकों पर कम निर्भर करती है।
  • इस प्रकार की फसलें कटाई के पश्चात् होने वाले नुकसान को कम करती है।
  • इस प्रकार की फसलें ऐसे पादपों के विकास में सहायक है जिनसे वैकल्पिक पदार्थों (Pharmaceuticals) की आपूर्ति भी की जाती है।

आनुवंशिक रूपान्तरित फसलों के उत्पादन से हानि (Disadvantages of Production of Genetically Modified Crops) आनुवंशिक रूपान्तरित फसलों से कुछ हानियाँ भी होती है जो निम्न हैं

  • इस प्रकार की कुछ फसलों में बीज उत्पन्न करने की शक्ति नहीं होती जिससे प्रत्येक वर्ष किसान को नये बीज खरीदने पड़ते हैं।
  • छोटे किसान प्रत्येक बार इन फसलों को नहीं उगा सकते क्योंकि ये फसलें बहुत महँगी पड़ती है।
  • इस प्रकार की फसलों से लोगों में एलर्जी उत्पन्न होने की सम्भावना रहती है।

प्रश्न 4.
क्राई प्रोटीन्स क्या है ? उस जीव का नाम बताइए जो इसे पैदा करता है ? मनुष्य अपने फायदे के लिये इस प्रोटीन को कैसे उपयोग में लाते हैं ?
उत्तर
जीव विष जिस जीन द्वारा कूटबद्ध होते हैं, उसे क्राई (Cry) कहते हैं। क्राई प्रोटीन क्रिस्टलीय प्रोटीन्स (Crystalline proteins) का एक वर्ग है। बैसीलस थूरीनजिएन्सिस जीवाणु की कुछ प्रजातियाँ क्राई प्रोटीन्स का निर्माण करती है। यह प्रोटीन फसल पादपों को कीट पीड़कों (Insect pests) के प्रति प्रतिरोधी बनाती है। ये कई प्रकार की होती है। उदाहरण के लिये, जो प्रोटीन्स जीन क्राई I ए सी (Cry I AC) व क्राई II ए बी (Cry II A B) द्वारा कूटबद्ध होते हैं वे कपास के मुकुल कृमि (Bud worm) को नियंत्रित करते हैं। जबकि क्राई I ए बी (Cry IA B) मक्का छेदक (Maize borer) को नियंत्रित करता है। ये प्रोटीन कई प्रकार के कीटों की प्रजातियों के लिये विष (Toxic) है लेकिन मनुष्य के लिये हानिकारक नहीं है।

प्रश्न 5.
जीन चिकित्सा क्या है ? एडीनोसिन डिएमिनेज (ए. डी. ए.) की कमी का उदाहरण देते हुए इसका सचित्र वर्णन कीजिए।
उत्तर
जीन चिकित्सा (Gene Therapy)-जीन चिकित्सा में उन विधियों का सहयोग लिया जाता है जिनके द्वारा किसी बच्चे या भ्रूण में चिन्हित किये गये जीन दोषों का सुधार किया जाता है। उसमें रोग के उपचार के लिये जीनों को व्यक्ति की कोशिकाओं या ऊतकों में प्रवेश कराया जाता है। आनुवंशिक दोष वाली कोशिकाओं के उपचार के लिये सामान्य जीन को व्यक्ति या भ्रूण में स्थानान्तरित करते हैं जो निष्क्रिय जीन की क्षतिपूर्ति कर उसके कार्यों को सम्पन्न करते हैं।

जीन चिकित्सा का सर्वप्रथम प्रयोग सन् 1990 में एक चार वर्षीय बालिका में एडीनोसिन डिएमिनेज (Adenosine deaminase) की कमी को दूर करने के लिये किया गया था। यह एन्जाइम प्रतिरक्षा तंत्र के कार्य के लिए अति आवश्यक होता है। एडीनोसिन डिएमिनेज (ADA) से संबंधित जीन में गड़बड़ी होने के कारण घातक सम्बद्ध प्रतिरक्षा न्यूनता (Severe combined Immuno Deficiency SCID) रोग उत्पन्न होता है ।। इस प्रकार के रोगी में अक्रियाशील T- लिम्फोसाइट्स होती है। इसके कारण प्रतिरक्षा तंत्र रोगजनकों से लड़ने की क्षमता नहीं होती है।

जीन चिकित्सा में सर्वप्रथम रोगी के शरीर के रक्त से लसीकाणु को निकालकर शरीर के बाहर संवर्धित किया जाता है। सक्रिय ADA का CDNA लसीकाणु में प्रवेश कराकर अन्त में रोगी के शरीर में समाकलित कर दिया जाता है। ये कोशिकाएं मृतप्राय होती है इसलिये आनुवंशिकत: निर्मित लसीकाणुओं को समय-समय पर रोगी के शरीर से अलग करने की आवश्यकता होती है। यदि मज्जा कोशिकाओं से विलगित
अच्छे जीनों को प्रारंभिक भ्रूणीय अवस्था की कोशिकाओं से उत्पादित ADA में प्रवेश करा दिया जाये तो यह एक स्थाई उपचार हो सकता है।

प्रश्न 6.
ई. कोलाई जैसे जीवाणु में मानव जीन की क्लोनिंग एवं अभिव्यक्ति के प्रायोगिक चरणों का आरेखीय निरूपण प्रस्तुत कीजिए
उत्तर
पुनर्योगज डीएनए तकनीक (Re combinant DNA Technology)-

पुनर्योगज DNA प्राप्त करने के लिए तीन विधियाँ प्रयुक्त की
(अ) DNA की दो श्रृंखलाओं के अंतिम छोर पर नई DNA श्रृंखलाएँ जोड़कर-यदि हम एक DNA के सिरे पर कुछ क्षारक (जैसे – TTTTT) जोड़ दें, तथा दूसरे DNA के सिरे पर इसके संयुग्मी क्षारक (AAAAAA) जोड़ दें और फिर इन दोनों प्रकार के DNA को मिलायें, तो नई लड़ियाँ आपस में H-bond बनाकर दो भिन्न DNA अणुओं को संयुक्त कर देंगी। इस कार्य के लिए विशेष एंजाइम का उपयोग किया जाता है जिसे डी.एन.ए. ‘ए’ DNA ‘A’ टर्मिनल ट्रांसफरेज (Terminal Transferase) कहते हैं। अनजुड़े स्थानों को डी.एन.ए. लाइगेज (DNA Ligase) नामक एंजाइम द्वारा भर देते हैं।

MP Board Class 12th Biology Solutions Chapter 12 जैव प्रौद्योगिकी एवं उसके उपयोग 1

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(ब) नियंत्रण एंजाइमों की सहायता से (With the help of Restriction Enzymes) –
इस विधि में संयुग्मी क्षारकों के बीच हाइड्रोजन बंध बनाकर संकरित DNA का निर्माण करते हैं। परन्तु इस विधि में एक विशेष एंजाइम, नियंत्रण एंजाइम (Restriction Enzymes) का उपयोग करते हैं। इस प्रकार के लगभग 100 एंजाइम अब उपलब्ध है। ये एंजाइम चाकू की तरह कार्य करते हैं तथा DNA श्रृंखला को विशिष्ट स्थानों पर इस प्रकार से काट देते हैं कि वांछित जीनों वाले खंड प्राप्त हो सकते हैं। उदाहरण के लिए, ई. कोलाई से ईको आर.आई. (Eco RI) नामक नियंत्रण एंजाइम पृथक् किया गया है। यह DNA अणु में क्षारकों के निम्न क्रम को पहचान कर उसे G तथा A के मध्य काट देता है|
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भिन्न-भिन्न स्रोतों से प्राप्त दो DNA के टुकड़ों को मिला दिया जाये तो संयुग्मी बेस आपस में हाइड्रोजन आबंध बनाकर द्विकुंडलित रचना बना लेते हैं। जो स्थान बिना जुड़े रहते हैं, उन्हें DNA लाइगेज की सहायता से जोड़ लिया जाता है, जैसा कि पहली विधि में किया गया था। स्पष्ट है कि Eco तथा DNA Ligase की सहायता से विभिन्न जीवों के जीनों को संयुक्त कराके संकरित जीन तैयार किये जा सकते हैं। संकरित जीन में दोनों ही जीवों के गुण उपस्थित होंगे। यहाँ तक कि ऐसे जीव, जिनमें कोई समानता नहीं है (हाथी और मनुष्य, चूहा और बंदर, टमाटर और आम) इत्यादि। यही नहीं पौधों और जंतुओं के बीच भी संकरण की संभावना बढ़ गई है।

(स) क्लोनिंग (Cloning)—
यह विधि सबसे अधिक सरल तथा उपयोगी सिद्ध हुई है। आप जानते हैं कि कोशिकाओं में DNA का प्रतिकृतिकरण होता रहता है। परन्तु यह भी तभी होता है, जब स्वयं जीन इसका आदेश देता है। कोशिका में इन ‘प्रतिकृतिकरण जीनों’ की संख्या बहुत कम होती है। जैसे, कुछ जीवाणुओं के गुणसूत्र में 300-500 तक जीन होते हैं, परन्तु ‘प्रतिकृतिकरण जीन’ केवल एक ही होता है। इस जीन की एक विशेषता यह भी है कि यदि इसे मूल DNA से अलग करके किसी दूसरे DNA के साथ जोड़ दिया जाये तो यह उसकी प्रतिकृति करने लगता है। जीवाणुओं के प्लाज्मिड (Plasmid) में भी यह जीन उपस्थित होता है। यही कारण है कि जिस जीवाणु कोशिकाओं में प्लाज्मिड होता है, वे तेजी से गुणन करती है।
MP Board Class 12th Biology Solutions Chapter 12 जैव प्रौद्योगिकी एवं उसके उपयोग 3
शरीर में प्रत्येक पदार्थ के संश्लेषण के लिए कोई निश्चित जीन उत्तरदायी होता है। यदि इस विशिष्ट जीन के साथ प्लाज्मिड के साथ पहले बताई विधियों द्वारा संकरित करा दिया जाये और इस संकरित DNA को पुनः जीवाणु की कोशिका में स्थापित करके उपयुक्त संवर्धन माध्यम में उगने दिया जाये, तो जीवाणु में वह जीन उसी पदार्थ का संश्लेषण करता है जो कि वह मूल शरीर में करता था। इस समस्त प्रक्रिया को क्लोनिंग (Cloning) कहते हैं। पोषी जीवाणु के लिए ई. कोलाई का उपयोग किया जाता है।

प्रश्न 7.
तेल के रसायनशास्त्र तथाr-DNA तकनीक जिसके बारे में आपको जितना भी ज्ञान प्राप्त है, उसके आधार पर बीजों से तेल हाइड्रोकार्बन हटाने की कोई एक विधि सुझाझा ?
उत्तर
बीजों से तेल हटाने के लिए जैव प्रौद्योगिकी की आण्विक जैव तकनीक का प्रयोग किया जाता है।

प्रश्न 8.
इन्टरनेट से पता लगाइए कि गोल्डन राइस (गोल्डन धान ) क्या है ?
उत्तर
“गोल्डन राइस” चावल (ओराइजा सटाइवा) की एक किस्म है जो जैव प्रौद्योगिकी द्वारा विकसित की गई है।

प्रश्न 9.
क्या हमारे रुधिर में प्रोटिओजेज तथा न्यूक्लिएजेज है ?
उत्तर
नहीं।

प्रश्न 10.
इन्टरनेट से पता लगाइए कि मुखीय सक्रिय औषध प्रोटीन को किस प्रकार बनायेंगे ? इस कार्य में आने वाली प्रमख समस्याओं का वर्णन कीजिये।
उत्तर
प्रोटीन की संरचना तथा कार्यों के अध्ययन के लिए मास-स्पेक्ट्रोस्कोपी तकनीक पर आधारित पेप्टाइड-एमाइड-ड्यूटीरियम परिवर्तन तकनीक का अध्ययन किया जाता है तथा प्रोब उप-अणुक प्रोटीन संचालक की क्षमता का अध्ययन किया जाता है। यह विधि अत्यधिक श्रम व समय लेने वाली है। इस विधि में एमाइड के पृथक्करण का अध्ययन किया जाता है। ड्यूटीरियम एक्सचेंज मास स्पेक्ट्रोस्कोपी (DXMS) के द्वारा बन्ध का पूर्ण होना एवं एकल एमाइड (अमीनो अम्ल) पृथक्करण तीव्रता से सिद्ध होता है।

उपर्युक्त तकनीक से अत्यन्त कम मात्रा में उपस्थित पदार्थ में तथा लम्बे प्रोटीन पर सरलतापूर्वक कार्य किया जाता है। रिसेप्टर-लिगेन्ड युग्म पर जो जीवित कोशिका के अन्दर या कोशिका पर उपस्थित होते हैं, को शुद्धता के बिना अध्ययन किया जा सकता है। प्रोटीन रिसेप्टर की झिल्लियों का इन विट्रो विश्लेषण किया जाता है। इसकी मुख्य कठिनाई यह है कि इसके द्वारा कैंसर रोग हो जाता है।

जैव प्रौद्योगिकी एवं उसके उपयोग अन्य महत्वपूर्ण प्रश्नोत्तर

जैव प्रौद्योगिकी एवं उसके उपयोग वस्तुनिष्ठ प्रश्न

1. सही विकल्प चुनकर लिखिए

प्रश्न 1.
गेहूँ है एक
(a) फल
(b) बीज
(c) भ्रूण
(d) ग्लूम।
उत्तर
(b) बीज

प्रश्न 2.
कॉल्चीसीन निम्न में से कौन-सा प्रभाव डालता है
(a) D.N.A. द्विगुणन
(b) गुणसूत्रों का द्विगुणन
(c) स्पिण्डिल तन्तुओं का बनना
(d) मध्य पटलिका के बनने में अवरोधन
उत्तर
(b) गुणसूत्रों का द्विगुणन

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प्रश्न 3.
वह पौधा जिसमें बीज बनता है फिर भी वर्धी प्रजनन द्वारा उगाया जाता है
(a) आलू
(b) नीम
(c) आम
(d) सेवन्ती।
उत्तर
(a) आलू

प्रश्न 4.
मानव निर्मित अन्न है
(a) ट्रिटिकम
(b) ट्रिटिकेल
(c) पाइसम
(d) गन्ना।
उत्तर
(b) ट्रिटिकेल

प्रश्न 5.
सोनेरा 64 और लारोजा 64A किस पादप की प्रजातियाँ हैं
(a) गेहूँ
(b) धान
(c) मटर
(d) मक्का
उत्तर
(a) गेहूँ

प्रश्न 6.
अगुणित नर पौधे किसके संवर्धन से तैयार किये जा सकते हैं
(a) पुतन्तु
(b) परागकण
(c) पुंकेसर
(d) पुमंग।
उत्तर
(b) परागकण

प्रश्न 7.
संकरण के समय फूल की कली से पुंकेसरों को हटाने की क्रिया कहलाती है
(a) कृप्स करवाना
(b) स्वनिषेचन
(c) विपुंसन
(d) टोपपिन
उत्तर
(c) विपुंसन

प्रश्न 8.
बीज बुआई निर्भर करती है
(a) तापमान पर
(b) प्रकाश अवधि पर
(c) भूमि की नमी पर
(d) उपर्युक्त सभी पर।
उत्तर
(d) उपर्युक्त सभी पर।

प्रश्न 9.
संकर ज्यादातर जनक से ओजस्वी होते हैं क्योंकि
(a) समयुग्मजता
(b) संकर ओज
(c) जनक ज्यादातर कमजोर होते हैं
(d) इनमें से कोई नहीं।
उत्तर
(b) संकर ओज

प्रश्न 10.
Ti प्लाज्मिड जो आनुवंशिक इंजीनियरिंग में प्रयुक्त होता है, प्राप्त होता है
(a) इश्चेरिचिया कोलाई से
(b) बैसीलस थूरिनजिएन्सिस से
(c) एग्रोबैक्टीरियम राइजोजीन्स से
(d) एग्रोबैक्टीरियम ट्यूमीफेसिएन्स से।
उत्तर
(d) एग्रोबैक्टीरियम ट्यूमीफेसिएन्स से।

प्रश्न 11.
Bt टॉक्सिन है
(a) अंत: कोशिकीय लिपिड
(b) अंत: कोशिकीय क्रिस्टलित प्रोटीन
(c) बाह्य कोशिकीय क्रिस्टलित प्रोटीन
(d) लिपिड।
उत्तर
(c) बाह्य कोशिकीय क्रिस्टलित प्रोटीन

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प्रश्न 12.
बैसीलस थूरिनजिएन्सिस (Bt) विभेद अपूर्व कार्य के लिए प्रयोग किया जाता है
(a) बायोमेटलर्जिक तकनीक
(b) बायोइन्सेक्टिसाइड्स पौधे
(c) जैव उर्वरक
(d) बायोमिनरेलाइजेशन प्रक्रम।
उत्तर
(b) बायोइन्सेक्टिसाइड्स पौधे

प्रश्न 13.
भारतीय पौधों में विदेशी DNA स्थानान्तरण में सामान्यतः प्रयोग की जाती है
(a) ट्राइकोडर्मा हार्जीएनम
(b) मेलोइडोगॉन इन्काग्नीटा
(c) एग्रोबैक्टीरियम ट्यूमीफेसिएन्स
(d) पेनीसिलीयम एक्सपेन्सम
उत्तर
(c) एग्रोबैक्टीरियम ट्यूमीफेसिएन्स

प्रश्न 14.
बायोपाइरेसी सम्बन्धित है
(a) जैव अणु तथा जीन्स की खोज से
(b) परम्परागत ज्ञान से
(c) जैव अनुसंधान से
(d) उपरोक्त सभी से।
उत्तर
(c) एग्रोबैक्टीरियम ट्यूमीफेसिएन्स

प्रश्न 15.
सुनहरे चावल में कौन-सा विटामिन प्रचुर होता है
(a) विटामिन A
(b) विटामिन B
(c) विटामिन C
(d) विटामिन
उत्तर
(a) विटामिन A

2.  रिक्त स्थानों की पूर्ति कीजिए

1. देश के जैव संसाधनों की चोरी, डकैती तथा गैर कानूनी दोहन को ………….. कहते हैं।
2. जैविक पदार्थों के प्रयोग के लिए……………. एक प्रशासकीय आज्ञापत्र (Official licence) है।
3. जीवित जीवधारियों द्वारा उत्पन्न यौगिक ………….. है।
4. ……………. मानकों का एक समूह है जिसका प्रयोग हमारे कार्यों तथा जैविक संसार के बीच संबंधों को नियंत्रित करने में होता है।
5. उत्पाद की पुनर्घाप्ति, इसका शोधन तथा क्रियाविधि ………….. क्रिया कहलाती है।
उत्तर

  1. बायोपाइरेसी
  2. जैव एकाधिकार (बायोपेटेंट)
  3. जैव अणु
  4. जैव आचार संहिता
  5. डाउन स्ट्रीम।

3. सही जोड़ी बनाइए

‘A’ – ‘B’

1. एण्टीबायोटिक्स – (a) प्रति विषाणु प्रोटीन
2 ह्यूमूलिन – (b) जैव अणु तथा जीन की खोज
3. बायोपाइरेसी – (c) एस. वाक्समेन
4. इन्टरफेरॉन – (d) मानव इंसुलिन।
उत्तर
1. (c), 2. (d), 3. (b), 4. (a)

4. एक शब्द में उत्तर दीजिए

1. प्रथम ट्रांसजेनिक फसल का नाम लिखिए।
2. Bt-कपास में स्थानान्तरित कीटरोधी प्रोटीन का नाम क्या है ?
3. मानवनिर्मित इन्सुलिन का नाम क्या है ?
4. Nif जीन किस सूक्ष्मजीव में पाए जाते हैं ?
उत्तर

  1. तम्बाकू
  2. Cry प्रोटीन
  3. ह्यूम्यूलिन
  4. राइजोबियम।

जैव प्रौद्योगिकी एवं उसके उपयोग अति लघु उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 1.
वे जीन जिनके जीन्स हस्तकौशल द्वारा परिवर्तित किये जा चुके हैं, उन्हें क्या कहते हैं ?
उत्तर
आनुवंशिकतः रूपान्तरित जीव (Genetically modified organisms = GMO)

प्रश्न 2.
जैव प्रौद्योगिकी के सहयोग से तैयार की गई पीड़क फसलों के नाम लिखिए। उत्तर-बी.टी. कपास, बी.टी मक्का, धान, टमाटर, आलू व सोयाबीन। प्रश्न 3. बी.टी. विष (Bt toxin) प्रोटीन किसके द्वारा उत्पन्न
होता है ?
उत्तर
बैसीलस थूरीनजिएंसिस (Bacillus thuringiensis) द्वारा।

प्रश्न 4.
बी.टी. विष किस जीन द्वारा कूटबद्ध होता है ?
उत्तर
बी.टी. विष क्राई (Cry) जीन्स द्वारा कूटबद्ध होता है।

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प्रश्न 5.
RNi का पूर्ण नाम लिखिए।
उत्तर
आर एन ए अंतरक्षेप (RNA interference)!

प्रश्न 6.
आनुवंशिक रोग से ग्रसित शिशु के रोगोपचार के लिये उपयुक्त चिकित्सा व्यवस्था का नाम लिखिए।
उत्तर
जीन चिकित्सा।

प्रश्न 7.
उस जीवाणु का वैज्ञानिक नाम लिखिये, जिसमें Bt जीव विष निर्मित होता है।
उत्तर
बैसीलस थूरीनजिएंसिस।

जैव प्रौद्योगिकी एवं उसके उपयोग लघु उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 1.
GM खाद्य क्या है ?
अथवा
जी.एम. फसल को संक्षेप में समझाइए।
उत्तर
आनुवंशिक रूप से रूपान्तरित फसलों से उत्पादित खाद्य पदार्थों को GM खाद्य कहते हैं। यह GM

  • GM खाद्य पदार्थों में प्रति जैविक प्रतिरोधी जीन पाये जाते हैं।
  • इनमें ट्रांसजीवों (Transgenes) द्वारा उत्पादित प्रोटीन पाई जाती है। उदा. Cry-प्रोटीन । यह प्रोटीन कीट प्रतिरोधी किस्मों में पाई जाती है।
  • इन खाद्य पदार्थों में प्रतिजैविक प्रतिरोधी जीनों के द्वारा उत्पादित एन्जाइम पाये जाते हैं जो कि पुनर्योजन DNA तकनीक में जीन ट्रांसफर के समय काम आते हैं।

प्रमुख GM फसल, खाद्य एवं फल

  • मक्का (Maize)-आनुवंशिक रूप से रूपांतरित जीनों का समावेश किया गया है जिनमें पीड़कों (Pests) एवं रोगों के लिए प्रतिरोधकता पायी जाती है।
  • फ्लौर-सौर टमाटर (Flaur Saur Tomato)-यह प्रथम GM खाद्य है । इन टमाटरों में कैनामाइसिन (Kanamycin) जैसे प्रतिजैविक के लिए प्रतिरोधकता पाई जाती है।
  • रेप ऑयल सीड (Rape Oil Seed)–यह एक नया पादप है जिनमें बास्टा (Basta) नाम खरपतवारनाशी के प्रति प्रतिरोधकता पाई जाती है।

प्रश्न 2.
GM फसलों के लाभ लिखिए।
उत्तर
GM फसलों के लाभ

  • GM फसलें, फसली पौधों में वांछित फिनोटाइपिक लक्षण उत्पन्न करती हैं।
  • Transgenesis द्वारा GM पौधों में विशिष्ट प्रकार की प्रोटीन उत्पन्न करने वाले जीवों को प्रविष्ट कराया जाता है। ये फसलें बाद में उस प्रोटीन का उत्पादन करती हैं।
  • इनमें विशिष्ट जैव-रासायनिक पथ वाले पौधों का संश्लेषण होता है।
  • इन फसलों में पूर्व से उपस्थित जीन की अभिव्यक्ति को रोकने में सहायता मिलती है।

प्रश्न 3.
आनुवंशिक रूप से रूपांतरित खाद्य क्या है ? कोई दो उदाहरण दीजिए।
उत्तर
ऐसी फसलें जिनमें अन्य प्रजातियों के उपयोगी जीन पाये जाते हैं तथा जिन्हें आनुवंशिक अभियांत्रिकी की सहायता से दूसरे में प्रविष्ट कराया जाता है उसे आनुवंशिक रूप से रूपांतरित (Genetically modified) या ट्रांसजेनिक फसलें कहते हैं । इन फसलों को ट्रांसजिनेसिस विधि द्वारा पुनर्योगज DNA तकनीक की सहायता से तैयार किया जाता है।
उदाहरण-

  • फ्लौर सौर टमाटर-यह प्रथम GM खाद्य है। इनमें कैनामाइसिन जैसे प्रतिजैविक के लिए प्रतिरोधकता पायी जाती है।
  • रेप ऑयल सीड-यह नया GM पादप है जिनमें बास्टा नामक खरपतवारनाशी के प्रति प्रतिरोधकता होती है।

प्रश्न 4.
दोषमुक्त कृषि किसे कहते हैं ?
उत्तर
कृषि की वह विधि जो कि दीर्घकालीन, टिकाऊ एवं हानि रहित होती है उसे दोषमुक्त कृषि कहते हैं । हरित क्रांति एवं उसके बाद के दौर में अधिक उत्पादन हेतु नई किस्मों के उपयोग, सिंचित क्षेत्र में वृद्धि, उर्वरकों के अति उपयोग, कीटनाशकों तथा शाकनाशी रसायनों के अंधाधुंध उपयोग से फसल उत्पादन में तो अत्यधिक वृद्धि हुई, परन्तु भूमि की गिरती उर्वरता, खाद्य व जल में प्रदूषण, विभिन्न रोगों व विकृतियों के रूप में सामने आ रही है।

पौधों व मनुष्य में रोगों से लड़ने की प्रतिरोधी क्षमता धीरे-धीरे कम होती जा रही है। खाद्य व जल जनित बीमारियाँ मानव एवं पशु स्वास्थ्य को प्रभावित कर रही हैं । यह सब आधुनिक व्यावसायिक खेती के कारण हो रहा है, अतः एक ऐसी कृषि प्रणाली को विकसित करने की आवश्यकता हो गई है जो उपर्युक्त दोषों से मुक्त हों। ऐसी कृषि को दोषमुक्त या दीर्घकालीन कृषि कहा जाता है । दोषमुक्त कृषि का सबसे अच्छा उदाहरण कार्बनिक खेती (Organic agriculture) है।

प्रश्न 5.
कार्बनिक खेती क्या है ? इसका क्या आधार होता है ?
उत्तर
कार्बनिक खेती (Organic agriculture)-खेती कृषि उत्पादन की वह पद्धति है जिसमें संश्लेषित उर्वरक, कीटनाशक, निंदानाशक, पौध वृद्धि नियामक, पशुजनित पदार्थ, आनुवंशिक रूप से रूपान्तरित जीवाणु का उपयोग नहीं किया जाता है। इस विधि में भूमि की उर्वरता तथा उत्पादकता बढ़ाने के लिए जैविक खाद, फसल चक्र तथा कीटों तथा खरपतवारों को नष्ट करने के लिए जैव पीड़क नाशकों का उपयोग किया जाता
है। इसके अन्तर्गत पर्यावरण को क्षति पहुँचाये बिना उर्वरकों एवं कृषि रसायनों का कम-से-कम प्रयोग करते हुए जैविक आधारित उर्वरकों, खादों एवं जैव पीड़कनाशकों का अधिकाधिक उपयोग करके उत्पादन में वृद्धि की जाती है।

खेती के आधार (Basic of organic agriculture)-

  • कार्बनिक खेती भूमि, पौधे, पशु व मानव तथा वैश्विक परिस्थितियों को सुधारने व उसे टिकाऊ बनाने पर आधारित है।
  • कार्बनिक उन खेती उन जैव पारिस्थितिक तंत्रों एवं जैव चक्रों पर आधारित है जिसमें उन्हीं जैव तंत्रों व जैव पारिस्थितिक तंत्रों का उपयोग किया जाता है तथा उन्हें बढ़ाया जाता है।
  • कार्बनिक खेती वातावरण एवं जीवन की संभावनाओं को प्रदूषण मुक्त बनाने पर आधारित है।
  • कार्बनिक खेती वर्तमान एवं भविष्य की पीढ़ियों के स्वास्थ्य एवं वातावरण को बचाने के लिए वांछित सावधानियों एवं आवश्यक उपायों पर आधारित है।

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प्रश्न 6.
जीन मैनीपुलेशन या जेनेटिक इन्जीनियरिंग को समझाइए।
अथवा
आनुवंशिक अभियांत्रिकी किसे कहते हैं ? उसका मानव जीवन में महत्व लिखिए।
उत्तर
वैज्ञानिकों द्वारा DNA या आनुवंशिक पदार्थ की संरचना में आवश्यकतानुसार हेर-फेर करने को जीन मैनीपुलेशन या जेनेटिक इन्जीनियरिंग कहते हैं । आनुवंशिक पदार्थ का कृत्रिम संश्लेषण दो अलग-अलग जीनों के DNA खण्डों को जोड़कर नया DNA बनाना, DNA की मरम्मत, DNA से कुछ न्यूक्लियोटाइड को हटाकर या जोड़कर या विस्थापित करके इच्छित संरचना वाले नये DNA अणुओं का संश्लेषण करके जीन क्रिया का नियन्त्रण करना तथा जीवधारियों में इच्छित गुणों का समावेश करना जेनेटिक इन्जीनियरिंग का मुख्य उद्देश्य है। आनुवंशिकी की यह शाखा अभी अपने शैशव काल में है।

उम्मीद की जाती है कि इस विधि के द्वारा आनुवंशिक वैज्ञानिक जीन की संरचना में सुधार करके अथवा विकृत जीन को सामान्य जीन द्वारा विस्थापित करके आनुवंशिक रोगों से मानव जाति को मुक्ति दिला सकेंगे अथवा मानव द्वारा उपयोग में आने वाले पादपों व जन्तुओं की नस्लों का सुधार कर सकेंगे। आनुवंशिक पदार्थ के संगठन में हेर-फेर, DNA की संरचना का ज्ञान एक अत्याधुनिक तकनीक के विकास के कारण सम्भव हो सकता है। इनको रिकॉम्बिनेन्ट DNA तकनीकी कहते हैं।

आनुवंशिक अभियांत्रिकी का मानव जीवन में महत्व

1. औद्योगिक उपयोग-उच्च वर्गों के जीवों के विटामिन प्रतिजैविक या हॉर्मोन के जीन को कोड करके तथा इनके संश्लेषित DNA को जीवाणुओं में पुनः स्थापित करके विटामिन्स, हॉर्मोन्स आदि यौगिकों का औद्योगिक स्तर पर संश्लेषण किया जाना सम्भव हुआ है। इस विधि से मानव इन्सुलिन का Humulin नाम से जैव-संश्लेषण किया गया है।

2.चिकित्सीय उपयोग-नयी दवाइयों का जैवस्तर पर संश्लेषण तथा जीन चिकित्सा द्वारा हीमोफीलिया, फिनाइल कीटोन्यूरिया आदि वंशागत रोगों का उपचार किया जाना सम्भव हुआ है।

3. कृषि क्षेत्र में उपयोग-

  • जीवाणु अथवा नीले-हरे शैवाल से नाइट्रोजन यौगिकीकरण करने वाले जीनों का अनाज वाली फसलों में स्थानान्तरण करने हेतु प्रयोग जारी है, जिससे हमारी फसलें पर्यावरण से नाइट्रोजन का सीधा प्रयोग कर सकेंगी और हमें कृषि में कृत्रिम उर्वरक के उपयोग की आवश्यकता नहीं रहेगी।
  • आनुवंशिक अभियांत्रिकी के द्वारा पौधों की नई एवं उच्च उत्पादन वाली प्रजातियों का विकास किया जाता है।
  • इसकी सहायता से उच्च गुणवत्ता एवं प्रोटीन युक्त पौधे विकसित किये जा सकते हैं।

4. जीन संरचना अभिव्यक्ति में परिवर्तन-इस तकनीक द्वारा इच्छानुसार नये-नये प्रकार के जीवों तथा वनस्पतियों का निर्माण सम्भव हो सकेगा।

प्रश्न 7.
जीन लाइब्रेरी या जीन बैंक क्या हैं ? इसे तैयार करने की विधि लिखिये ।
उत्तर
जीनोमिक लाइब्रेरी या जीन बैंक के अन्दर जीनोम खण्डों अथवा पूर्ण जीनोम को संरक्षित किया जाता है। जीनोमिक लाइब्रेरी तैयार करने के लिए कई क्रियाएँ चरण के रूप में सम्पन्न कराई जाती हैं

Isolation of m-RNA from tissue

Reverse transcriptase

c-DNA copies

Removal of m-RNA by alkali treatment

Single-stranded c-DNA

Double-stranded c-DNA with DNA polymerase forming hairpin loops

Removal of hairpin loops with Si nuclease

Double-stranded c-DNA

Insertion in vector to make library
चित्र-जीनोमिक लाइब्रेरी का निर्माण

(1) DNA खण्डों का उत्पादन।
(2) DNA खण्डों का वाहक क्लोन (प्लाज्मिड, कास्मिड या विषाणु) में प्रवेश।
(3) क्लोन्ड DNA का पोषक जीवाणु में प्रवेश। इस प्रकार प्राप्त पोषक जीवाणु जिसमें इच्छित DNA संरक्षित रहता है, को संवर्धन माध्यम में विकसित करते हैं। ऐसा करने पर जीवाणुओं की कॉलोनियाँ प्राप्त होती हैं। इन जीवाणुओं से एन्जाइम की सहायता से DNA को प्राप्त कर इन खण्डों को जीनोमिक लाइब्रेरी में संरक्षित किया जाता है।

जैव प्रौद्योगिकी एवं उसके उपयोग दीर्घ उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 1.
आनुवंशिक इन्जीनियरिंग की अनुप्रयोज्यता का वर्णन कीजिए।
उत्तर
अनुप्रयोज्यता की दृष्टि से आनुवंशिक इन्जीनियरिंग हमें निम्नलिखित लाभदायक तथा हानिकारक परिणाम देती है
(A) लाभदायक प्रभाव

  • औद्योगिक उपयोग-उच्च वर्गों के जीवों के विटामिन प्रतिजैविक या हॉर्मोन के जीन का कोड करके तथा संश्लेषित DNA को जीवाणुओं में पुन:स्थापित करके विटामिन्स, हॉर्मोन्स आदि यौगिकों को औद्योगिक स्तर पर संश्लेषण किया जाना सम्भव हुआ है। इस विधि से मानव इन्सुलिन का Humulin नाम से जैव-संश्लेषण किया गया है।
  • चिकित्सीय उपयोग-नयी दवाइयों का जैव स्तर पर संश्लेषण तथा जीन चिकित्सा द्वारा हीमोफीलिया, फीनाइलकीटोन्यूरिया आदि वंशागत रोगों का उपचार किया जाना सम्भव हुआ है।
  • कृषि क्षेत्र में उपयोग-जीवाणु अथवा नीले-हरे शैवाल से नाइट्रोजन यौगिकीकरण करने वाले जीनों का अनाज वाली फसलों में स्थानान्तरण करने हेतु प्रयोग जारी है, जिससे हमारी फसलें पर्यावरण से नाइट्रोजन का सीधा प्रयोग कर सकेंगी और हमें कृषि में कृत्रिम उर्वरक के उपयोग की आवश्यकता नहीं रहेगी।
  • जीन संरचना अभिव्यक्ति में परिवर्तन-इस तकनीक द्वारा इच्छानुसार नये-नये प्रकार के जीवों तथा वनस्पतियों का निर्माण सम्भव हो सकेगा।

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(B) हानिकारक प्रभाव

  • रोगाणु ऐन्टीबायोटिक्स के प्रति प्रतिरोधी हो सकते हैं।
  • आन्त्र में पाये जाने वाले जीवाणु कैन्सर कारक हो सकते हैं।
  • सामान्य वाइरस से अत्यधिक खतरनाक वाइरस का निर्माण हो सकता है।

प्रश्न 2.
फोरेंसिक विज्ञान क्या है ? फोरेंसिक विज्ञान में DNA फिंगर प्रिंटिंग की विधि समझाइए।
उत्तर
फोरेंसिक विज्ञान-फोरेंसिक विज्ञान के अन्तर्गत अपराधों की विवेचना की जाती है। आज जैव तकनीकी ने अपराधिक प्रकरणों के निपटारे में नये आयाम खोल दिये हैं। इनमें से DNA फिंगर प्रिंटिंग

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MP Board Class 11th Maths Solutions Chapter 14 गणितीय विवेचन Ex 14.4

MP Board Class 11th Maths Solutions Chapter 14 गणितीय विवेचन Ex 14.4

प्रश्न 1.
निम्नलिखित कथन को वाक्यांश “यदि- तो” का प्रयोग करते हुए पाँच विभिन्न रूप में इस प्रकार लिखिए कि उनके अर्थ समान हों।
“यदि एक प्राकृत संख्या विषम है तो उसका वर्ग भी विषम है।
हल:
(i) यदि एक प्राकृत संख्या विषम है तो अंर्तभाव है उसका वर्ग भी विषम है।
(ii) कोई प्राकृत संख्या विषम संख्या है केवल यदि उसका वर्ग विषम है।
(iii) यदि प्राकृत संख्या का वर्ग विषम नहीं है तो वह प्राकृत संख्या भी विषम नहीं होगी।
(iv) एक प्राकृत संख्या विषम है, इसके लिए यह अनिवार्य है कि उनका वर्ग भी विषम होगा।
(v) एक प्राकृत संख्या का वर्ग विषम है, इसके लिए यह पर्याप्त होगा कि वह संख्या विषम है।

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प्रश्न 2.
निम्नलिखित कथनों के प्रतिधनात्मक और विलोम कथन लिखिए :
(i) यदि x एक अभाज्य संख्या है, तो x एक विषम है।
हल:
प्रतिधनात्मक कथन : यदि एक संख्या x विषम नहीं है तो x एक अभाज्य संख्या नहीं है। विलोम कथन : यदि एक संख्या x विषम है तो x एक अभाज्य संख्या है।

(ii) यदि दो रेखाएँ समांतर हैं तो वे एक दूसरे को एक समतल में नहीं काटती हैं।
हल:
तिधनात्मक कथन : यदि दो रेखाएँ एक दूसरे को समतल में काटती हैं तो रेखाएँ समांतर नहीं हैं। विलोम कथन : यदि दो रेखाएँ एक दूसरे को एक ही समतल में नही काटती हैं तो रेखाएँ समांतर हैं।

(iii) किसी वस्तु के ठंडे होने का तात्पर्य (अंतर्भाव) है कि उसका तापक्रम कम है।
हल:
प्रतिधनात्मक कथन : यदि किसी वस्तु का तापमान कम नहीं है तो वह वस्तु ठंडी नहीं है।
विलोम कथन : यदि किसी वस्तु का तापमान कम है तो वह वस्तु ठंडी है।

(iv) आप ज्यामिति विषय को आत्मसात नहीं कर सकते यदि आपको यह ज्ञान नहीं है कि निगमनात्मक विवेचन किस प्रकार किया जाता है।
हल:
प्रतिधनात्मक कथन : यदि आपको यह ज्ञात है कि निगमनात्मक विवेचन किस प्रकार किया है तो आप ज्यामिति विषय को आत्मसात कर सकते हैं।
विलोम कथन : यदि आपको यह ज्ञात नहीं है कि निगमनात्मक विवेचन किस प्रकार किया जाता है तो आप ज्यामिति विषय को आत्मसात नहीं कर सकते हैं।

(v) “x एक सम संख्या है” से तात्पर्य (अंतर्भाव) है कि संख्या 4 से भाज्य है।
हल:
प्रतिधनात्मक कथन : यदि x संख्या 4 से भाज्य नहीं है तो x एक सम संख्या नहीं है।
विलोम कथन : यदि संख्या x, 4 से भाज्य है तो यह एक सम संख्या है।

प्रश्न 3.
निम्नलिखित कथनों में से प्रत्येक को ‘यदि-तो’ रूप में लिखिए :
(i) आपको नौकरी (काम) मिलने का तात्पर्य (अंतर्भाव) है कि आपकी विश्वसनियता अच्छी है।
हल:
यदि आपको नौकरी मिल गई है तो आपकी विश्वसनियता अच्छी है।

(ii) केले का पेड़ फूलेगा यदि वह एक माह तक गरम बना रहे।
हल:
यदि केले का पेड़ एक माह तक गरम बना रहे तो केले का पेड़ फूलेगा।

(iii) एक चतुर्भुज समांतर चतुर्भुज है यदि उसके विकर्ण एक-दूसरे को समद्विभाजित करे।
हल:
यदि किसी चतुर्भुज के विकर्ण एक दूसरे को समद्विभाजित करते हैं तो वह एक समांतर चतुर्भुज है।

(iv) कक्षा में ग्रेड A पाने के लिए यह अनिवार्य है कि आप पुस्तक के सभी प्रश्नों को सरल कर लेते है।
हल:
यदि आप कक्षा में A ग्रेड पाते हैं, तो आप पुस्तक के सभी प्रश्न हल कर लेते हैं।

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प्रश्न 4.
नीचे (a) और (b) में प्रदत्त कथनों में से प्रत्येक के (i) में दिए कथन का प्रतिधनात्मक और विलोम कथन पहचानिए।
(a) यदि आप दिल्ली में रहते हैं तो आपके पास जाड़े के कपड़े हैं।
(i) यदि आपके पास जाड़े के कपड़े नहीं हैं, तो आप दिल्ली में नहीं रहते हैं।
हल:
प्रतिधनात्मक।

(ii) यदि आपके पास जाड़े के कपड़े हैं, तो आप दिल्ली में रहते हैं।
हल:
विलोम

(b) यदि एक चतुर्भुज समांतर चतुर्भुज है, तो उसके विकर्ण एक दूसरे को समद्विभाजित करते हैं।
(i) यदि किसी चतुर्भुज के विकर्ण एक दूसरे को समद्विभाजित नहीं करते हैं तो चतुर्भुज एक समांतर चतुर्भुज नहीं है।
हल:
प्रतिधनात्मक।

(ii) यदि चतुर्भुज के विकर्ण एक दूसरे को समद्विभाजित करते हैं तो वह समांतर चतुर्भुज है।
हल:
विलोम।

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MP Board Class 11th Maths Solutions Chapter 14 गणितीय विवेचन Ex 14.3

MP Board Class 11th Maths Solutions Chapter 14 गणितीय विवेचन Ex 14.3

प्रश्न 1.
निम्नलिखित मिश्र कथनों में पहले संयोजक शब्दों को पहचानिए और फिर उनको घटक कथनों में विघटित कीजिए :
(i) सभी परिमेय संख्याएँ वास्तविक संख्याएँ होती हैं और सभी वास्तविक संख्याएँ सम्मिश्र संख्याएँ नहीं होती हैं।
हल:
संयोजक शब्द ‘और’
घटक p : सभी परिमेय संख्याएँ वास्तविक संख्याएँ होती हैं।
q: सभी वास्तविक संख्याएँ सम्मिश्र संख्याएँ नहीं होती हैं।

(ii) किसी पूर्णांक का वर्ग धन या ऋण होता है।
हल:
संयोजक शब्द ‘या’
घटक p : किसी पूर्णांक का वर्ग धन होता है।
q : किसी पूर्णाक का वर्ग ऋण होता है।

(iii) रेत (बालू) घूप में शीघ्र गर्म हो जाती है और रात्रि में शीघ्र ठंडी नहीं होती है।
हल:
संयोजक शब्द ‘और’
घटक p : रेत (बालू) धूप में शीघ्र गर्म हो जाती है।
q : रेत (बालू) रात्रि में शीघ्र ठंडी नहीं होती।

(iv) x = 2 और x = 3, समीकरण 3x2 – x – 10 = 0 के मूल हैं।
हल:
संयोजक शब्द ‘और’
घटक p: x = 2, समीकरण 3x2 – x – 10 = 0 का मूल है।
q: x = 3 समीकरण 3x2 – x – 10 = 0 का मूल है।

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प्रश्न 2.
निम्नलिखित कथनों में परिमाण वाचक वाक्यांश पहचानिए और कथनों के निषेधन लिखिए :
(i) एक ऐसी संख्या का अस्तित्व है, जो अपने वर्ग के बराबर है।
हल:
परिमाणवाचक वाक्यांश : एक ऐसी संख्या का अस्तित्व है।
कथन का निषेधन : ऐसी संख्या का अस्तित्व नहीं है जो अपने वर्ग के बराबर हो।

(ii) प्रत्येक वास्तविक संख्या x के लिए x, (x + 1) से कम होता है।
हल:
परिमाणवाचक वाक्यांश : “प्रत्येक के लिए”
p : प्रत्येक वास्तविक संख्या x के लिए x, x + 1 से कम होता है।
p का निषेधन = ~ p = कम से कम एक वास्तविक संख्या x ऐसी है जो x + 1 से कम नहीं है।

(iii) भारत के हर एक राज्य/प्रदेश के लिए एक राजधानी का अस्तित्व है।
हल:
परिमाणवाचक वाक्यांश : एक ऐसे का अस्तित्व है।
कथन p : भारत के हर एक राज्य/प्रदेश के लिए एक राजधानी का अस्तित्व है।
p का निषेधन : ~p = भारत के हर एक राज्य/ प्रदेश के लिए एक राजधानी का अस्तित्व नहीं है।

प्रश्न 3.
जाँचिए कि क्या नीचे लिखे कथनों के जोड़े (युग्म) एक दूसरे के निषेधन हैं। अपने उत्तर के लिए कारण भी बतलाइए।
(i) प्रत्येक वास्तविक संख्याओं x और y के लिए x + y = y + x सत्य है।
(ii) ऐसी वास्तविक संख्याओं x और y का अस्तित्व है जिनके लिए x + y = y + x सत्य है।
हल:
कथन (i) और (ii) एक दूसरे के निषेधन नहीं है।

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प्रश्न 4.
बतलाइए कि निम्नलिखित कथनों में प्रयुक्त ‘या’ ‘अपवर्जित है’ अथवा ‘अंतर्विष्ट’ है। अपने उत्तर के लिए कारण भी बतलाइए।
(i) सूर्य उदय होता है या चन्द्रमा अस्त होता है।
हल:
(i) अपवर्जित : सूर्य उदय होता है और चन्द्रमा अस्त होता है। एक समय पर सूर्य उदय होगा या चन्द्रमा।

(ii) ड्राइविंग लाइसेंस के आवेदन हेतु आपके पास राशन कार्ड या पासपोर्ट होना चाहिए।
हल:
अंतर्विष्ट : ड्राइविंग लाइसेंस के आवेदन हेतु राशन कार्ड या पास पोर्ट या दोनों मान्य है।

(iii) सभी पूर्णांक धन या ऋण होते है।
हल:
अपवर्जित : सभी पूर्णांक धन या ऋण होते हैं। परन्तु धन या ऋण दोनों नहीं हो सकते ।

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MP Board Class 11th Maths Solutions Chapter 14 गणितीय विवेचन Ex 14.2

MP Board Class 11th Maths Solutions Chapter 14 गणितीय विवेचन Ex 14.2

प्रश्न 1.
निम्नलिखित कथन का निषेधन लिखिए :
(i) चैन्नई, तमिलनाडु की राजधानी है।
(ii) \(\sqrt{2}\) एक सम्मिश्र संख्या नहीं है।
(iii) सभी त्रिभुज समबाहु त्रिभुज नहीं होते हैं।
(iv) संख्या 2 संख्या 7 से अधिक है।
(v) प्रत्येक प्राकृत संख्या एक पूर्णांक होती है।
हल:
(i) चैन्नई, तमिलनाडु की राजधानी नहीं है।
(ii) \(\sqrt{2}\) एक सम्मिश्र संख्या है।
(iii) सभी त्रिभुज समबाहु त्रिभुज हैं।
(iv) संख्या 2 संख्या 7 से बड़ी नहीं है।
(v) प्रत्येक प्राकृत संख्या एक पूर्णांक नहीं है।

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प्रश्न 2.
क्या निम्नलिखित कथन युग्म (कथन के जोड़े) एक दूसरे के निषेधन हैं?
(i) संख्या x एक परिमेय संख्या नहीं है।
संख्या x एक अपरिमेय संख्या नहीं है।
हल:
कथन ” संख्या : एक परिमेय संख्या नहीं है।” का निषेधन संख्या x एक परिमेय संख्या है। या x एक अपरिमेय संख्या नहीं है। यही दूसरा कथन है। अतः दिए गए कथन एक दूसरे के निषेधन हैं।

(ii) संख्या x एक परिमेय संख्या है।
संख्या x एक अपरिमेय संख्या है।
हल:
कथन “संख्या x एक परिमेय संख्या है।” का निषेधन संख्या x एक अपरिमेय संख्या है। जो कि दूसरे कथन के समान है।
अतः यह कथन एक दूसरे के निषेधन हैं।

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प्रश्न 3.
निम्नलिखित मिश्र कथन के घटक कथन ज्ञात कीजिए और जाँचिए कि वे सत्य हैं या असत्य हैं।
(i) संख्या 3 अभाज्य है या विषम है।
(ii) समस्त (सभी) पूर्णांक धन या ऋण हैं।
(iii) संख्या 100 संख्याओं 3, 11 और 5 से भाज्य हैं।
हल:
(i) p : संख्या 3 अभाज्य है। यह कथन सत्य है।
q : संख्या 3 विषम संख्या है। यह कथन सत्य है।
(ii) p : सभी पूर्णांक धन हैं। यह कथन सत्य है।
q : सभी पूर्णांक ऋण हैं। यह कथन सत्य है।
(iii) p : 100, 3 से भाज्य है। यह कथन असत्य है।
q : 100, 11 से भाज्य है। यह कथन असत्य है।
r : 100, 5 से भाज्य है। यह कथन सत्य है।

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MP Board Class 11th Maths Solutions Chapter 14 गणितीय विवेचन Ex 14.1

MP Board Class 11th Maths Solutions Chapter 14 गणितीय विवेचन Ex 14.1

प्रश्न 1.
निम्नलिखित वाक्यों में से कौन से कथन हैं ? अपने उत्तर के लिए कारण भी बतलाइए।
(i) एक महीने में 35 दिन होते हैं।
(ii) गणित एक कठिन विषय है।
(iii) 5 और 7 का योगफल 10 से अधिक होता है।
(iv) किसी संख्या का वर्ग एक सम संख्या होती है।
(v) किसी चतुर्भुज की भुजाएँ बराबर (समान) लंबाई की होती हैं।
(vi) इस प्रश्न का उत्तर दीजिए।
(vii) – 1 और 8 का गुणनफल 8 है।
(viii) किसी त्रिभुज के सभी अंतः कोणों का योगफल 180° होता है।
(ix) आज एक तूफानी दिन है।
(x) सभी वास्तविक संख्याएँ सम्मिश्र संख्याएँ होती हैं।
हल:
(i) कथन : यह असत्य है क्योंकि महीने में 35 दिन नहीं होते।
(ii) वाक्य : गणित एक कठिन विषय है। इसकी कोई परिभाषा नहीं है। किसी एक के लिए सरल और दूसरे के लिए कठिन विषय हो सकता है।
(iii) कथन : यह कथन सत्य है।
(iv) कथन : यह असत्य है क्योंकि वर्ग संख्या विषम भी हो सकती है। जैसे 9, 25…..
(v) कथन : यह कथन असत्य है क्योंकि किसी चतुर्भुज की लंबाई असमान भी होती है।
(vi) वाक्य : यह एक आदेश है, इसलिए यह एक कथन नहीं है।
(vii) कथन : यह कथन असत्य है, ∵ – 1 × 8 = – 8 ≠ 8.
(viii) कथन : यह कथन सत्य है। त्रिभुज के तीनों अंत: कोणों का योग 180° होता है।
(ix) वाक्य : यह स्पष्ट नहीं है कि कौन-सा दिन तूफानी है?
(x) कथन : यह सत्य कथन है।

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प्रश्न 2.
वाक्यों में तीन ऐसे उदाहरण दीजिए जो कथन नहीं हैं। उत्तर के लिए कारण भी बताइए।
हल:
तीन उदाहरण इस प्रकार हो सकते हैं :
(i) इस कमरे में उपस्थित प्रत्येक व्यक्ति निडर है। यह एक कथन नहीं है, क्योंकि संदर्भ से स्पष्ट नहीं है कि यहाँ पर किस कमरे के बारे में कहा जा रहा है और निडर शब्द भी स्पष्ट रूप से परिभाषित नहीं है।
(ii) वह अभियान्त्रिकी की छात्रा है। यह भी एक कथन नहीं है क्योंकि यह स्पष्ट नहीं है कि ‘वह’ वह कौन
(iii) “cos2θ का मान सदैव 1 / 2″ से अधिक होता है। जब तक हमें यह ज्ञात न हो कि θ क्या है हम यह नहीं कह सकते कि वाक्य सत्य है या नहीं।

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MP Board Class 11th Maths Solutions Chapter 13 सीमा और अवकलज विविध प्रश्नावली

MP Board Class 11th Maths Solutions Chapter 13 सीमा और अवकलज विविध प्रश्नावली

प्रश्न 1.
प्रथम सिद्धांत से निम्नलिखित फलनों का अवकलज ज्ञात कीजिए :
(i) – x.
हल:
MP Board Class 11th Maths Solutions Chapter 13 सीमा और अवकलज विविध प्रश्नावली img-1

(ii) (- x)– 1.
हल:
मान लीजिए
f(x) = (- x)– 1 = – \(\frac{1}{x}\)
∴ f(x + h)= – \(\frac{1}{x+h}\)
MP Board Class 11th Maths Solutions Chapter 13 सीमा और अवकलज विविध प्रश्नावली img-2

(iii) sin (x + 1).
हल:
मान f(x) = sin (x + 1)
∴ f(x + h) = sin (x + h + 1)
या f(x + h) – f(x) = sin (x + h +1) – sin (x + 1)
MP Board Class 11th Maths Solutions Chapter 13 सीमा और अवकलज विविध प्रश्नावली img-3

(iv) cos\(\left(x-\frac{\pi}{8}\right)\)
हल:
MP Board Class 11th Maths Solutions Chapter 13 सीमा और अवकलज विविध प्रश्नावली img-5
MP Board Class 11th Maths Solutions Chapter 13 सीमा और अवकलज विविध प्रश्नावली img-6

निम्नलिखित फलनों के अवकलज ज्ञात कीजिए (यह समझा जाए कि a, b, c, p, 4, r और s निश्चित शून्येत्तर अचर हैं और m तथा n पूर्णांक हैं।)
प्रश्न 2.
(x + a).
हल:
\(\frac{d}{d x}\)(x + a) = \(\frac{d}{d x}\)(x) + \(\frac{d}{d x}\)(a) = 1 + 0 = 1.

प्रश्न 3.
(px + q) (\(\frac{r}{x}\) + s)
हल:
माना f(x) = (px + q) (\(\frac{r}{x}\) + s)
MP Board Class 11th Maths Solutions Chapter 13 सीमा और अवकलज विविध प्रश्नावली img-7

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प्रश्न 4.
(ax + b) (cx + d)2.
हल:
माना, f(x) = (ax + b)(cx + d)2
MP Board Class 11th Maths Solutions Chapter 13 सीमा और अवकलज विविध प्रश्नावली img-8
= a. (cx + a)2 + (ax + b). 2c (cx + d)
= 2c(ax + b) (cx + d) + a(cx + d)2.

प्रश्न 5.
\(\frac{a x+b}{c x+d}\)
हल:
माना f(x) = \(\frac{a x+b}{c x+d}\)
MP Board Class 11th Maths Solutions Chapter 13 सीमा और अवकलज विविध प्रश्नावली img-9

प्रश्न 6.
\(\frac{1+\frac{1}{x}}{1-\frac{1}{x}}\).
हल:
MP Board Class 11th Maths Solutions Chapter 13 सीमा और अवकलज विविध प्रश्नावली img-10

प्रश्न 7.
\(\frac{1}{a x^{2}+b x+c}\).
हल:
माना f(x) = \(\frac{1}{a x^{2}+b x+c}\)
MP Board Class 11th Maths Solutions Chapter 13 सीमा और अवकलज विविध प्रश्नावली img-11

प्रश्न 8.
\(\frac{a x+b}{p x^{2}+q x+r}\).
हल:
MP Board Class 11th Maths Solutions Chapter 13 सीमा और अवकलज विविध प्रश्नावली img-12

प्रश्न 9.
\(\frac{\mu x^{2}+q x+r}{a x+b}\)
हल:
MP Board Class 11th Maths Solutions Chapter 13 सीमा और अवकलज विविध प्रश्नावली img-13

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प्रश्न 10.
\(\frac{a}{x^{4}}-\frac{b}{x^{2}}\) + cos x
हल:
MP Board Class 11th Maths Solutions Chapter 13 सीमा और अवकलज विविध प्रश्नावली img-14

प्रश्न 11.
4\(\sqrt{x}\) – 2.
हल:
MP Board Class 11th Maths Solutions Chapter 13 सीमा और अवकलज विविध प्रश्नावली img-15

प्रश्न 12.
(ax + b)n.
हल:
माना f(x) = (ax + b)n
x के आपेक्ष अवकलन करने पर
f'(x) = n(ax + b)n – 1 \(\frac{d}{d x}\)(ax + b)
= n(ax + b)n – 1 . a
= na(ax + b)n – 1.

प्रश्न 13.
(ax + b)n (cx + d)m .
हल:
माना, fx= (ax + b)n (cx + d)m
MP Board Class 11th Maths Solutions Chapter 13 सीमा और अवकलज विविध प्रश्नावली img-16

प्रश्न 14.
sin (x + a).
हल:
माना f(x) = sin (x + a)
x + a को u रखने पर
f(x) = sin u
x के सापेक्ष अवकलन करने पर
f'(x) = \(\frac{d}{d x}(\sin u)=\frac{d}{d u}(\sin u) \frac{d u}{d x}\)
= cos u. \(\frac{d}{d x}\) (x + a) = cos (x + a) 1
∴ \(\frac{d}{d x}\) sin (x + a)= cos (x + a).

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प्रश्न 15.
cosec x cot x.
हल:
माना f(x) = cosec x cot x
∵ (uv)’ = u’v + uv’
∴ f'(x) = (\(\frac{d}{d x}\) cosec x) cot x + cosec x \(\frac{d}{d x}\) (cot x)
= (- cosec x cot x) cot x + cosec x (- cosec2 x)
= – cosec3 x – cosec x cot2 x.

प्रश्न 16.
\(\frac{\cos x}{1+\sin x}\)
हल:
माना
MP Board Class 11th Maths Solutions Chapter 13 सीमा और अवकलज विविध प्रश्नावली img-17
= \(\frac{-(1+\sin x)}{(1+\sin x)^{2}}\)
= – \(\frac{1}{1+\sin x}\).

प्रश्न 17.
\(\frac{\sin x+\cos x}{\sin x-\cos x}\)
हल:
MP Board Class 11th Maths Solutions Chapter 13 सीमा और अवकलज विविध प्रश्नावली img-18

प्रश्न 18.
\(\frac{\sec x-1}{\sec x+1}\)
हल:
माना
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प्रश्न 19.
sinnx
हल:
MP Board Class 11th Maths Solutions Chapter 13 सीमा और अवकलज विविध प्रश्नावली img-20

प्रश्न 20.
\(\frac{a+b \sin x}{c+d \cos x}\)
हल:
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प्रश्न 21.
\(\frac{\sin (x+a)}{\cos x}\).
हल:
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प्रश्न 22.
x4(5 sin x – 3cos x)
हल:
MP Board Class 11th Maths Solutions Chapter 13 सीमा और अवकलज विविध प्रश्नावली img-24

प्रश्न 23.
(x2 + 1)cosx.
हल:
MP Board Class 11th Maths Solutions Chapter 13 सीमा और अवकलज विविध प्रश्नावली img-25

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प्रश्न 24.
(ax2 + sinx)(p + q cosx).
हल:
MP Board Class 11th Maths Solutions Chapter 13 सीमा और अवकलज विविध प्रश्नावली img-26

प्रश्न 25.
(x + cos x)(x – tan x).
हल:
MP Board Class 11th Maths Solutions Chapter 13 सीमा और अवकलज विविध प्रश्नावली img-27
= (1 – sin x)(x – tan x) + (x + cos x)(1 – sec2 x)
= (1 – sin x)(x – tan x) – (x + cos x) tan2x.

प्रश्न 26.
\(\frac{4 x+5 \sin x}{3 x+7 \cos x}\).
हल:
MP Board Class 11th Maths Solutions Chapter 13 सीमा और अवकलज विविध प्रश्नावली img-28

प्रश्न 27.
\(\frac{x^{2} \cos \left(\frac{\pi}{4}\right)}{\sin x}\).
हल:
MP Board Class 11th Maths Solutions Chapter 13 सीमा और अवकलज विविध प्रश्नावली img-29
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प्रश्न 28.
\(\frac{x}{1+\tan x}\).
हल:
MP Board Class 11th Maths Solutions Chapter 13 सीमा और अवकलज विविध प्रश्नावली img-31

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प्रश्न 29.
(x + sec x) (x – tan x).
हल:
MP Board Class 11th Maths Solutions Chapter 13 सीमा और अवकलज विविध प्रश्नावली img-32

प्रश्न 30.
\(\frac{x}{\sin ^{n} x}\).
हल:
माना
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MP Board Class 12th Biology Solutions Chapter 11 जैव प्रौद्योगिकी-सिद्धान्त व प्रक्रम

MP Board Class 12th Biology Solutions Chapter 11 जैव प्रौद्योगिकी-सिद्धान्त व प्रक्रम

जैव प्रौद्योगिकी-सिद्धान्त व प्रक्रम NCERT प्रश्नोत्तर

प्रश्न 1.
क्या आप दस पुनर्योगज प्रोटीन के बारे में बता सकते हैं जो चिकित्सीय व्यवहार के काम में लाये जाते हैं ?
उत्तर
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प्रश्न 2.
एक सचित्र चार्ट (आरेखित निरुपण के साथ) बनाइए जो प्रतिबंध एंजाइम के (जिस क्रियाधार DNA पर यह कार्य करता है उसे ) उन स्थलों को जहाँ यह DNA को काटता है व इनसे उत्पन्न उत्पाद को दर्शाता है ?
उत्तर
यहाँ ई. कोलाई से प्राप्त EcoRI नामक प्रतिबंधन एन्जाइम (Restriction Enzyme) का उदाहरण दिया जा रहा है
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प्रश्न 3.
कक्षा ग्यारहवीं में जो आप पढ़ चुके हैं उसके आधार पर क्या आप बता सकते हैं कि आणविक आकार के आधार पर एंजाइम बड़े हैं या डी.एन.ए.। आप इसके बारे में कैसे पता लगायेंगे ?
उत्तर
प्रोटीन अमीनो अम्लों से बनी है। प्रोटीन 20 प्रकार के अमीनो अम्लों से बनी है जो पेप्टाइड आबंधों के द्वारा जुड़ी होती है। प्रोटीन में कुल अमीनो अम्लों की संख्या, उनके प्रकार, उनके लगने के क्रम आदि के कारण अनन्त प्रकार की प्रोटीने संभव हैं। प्रोटीनों की औसत लंबाई चारों ओर 300 है जो कि अमीनो अम्लों का बचा-खुचा पदार्थ है। इनमें से कुछ एक्टिन फिलामेंट हैं जो कि हजारों एक्टिन अणुओं से बने हैं।

डी.एन.ए. पॉलीमरेज न्यूक्लियोटाइडों से बने होते हैं। वे चार न्यूक्लियोटाइड होते हैं जो कि एक-दूसरे के साथ फॉस्फोडाइएस्टर आबंधों से जुड़े हुए होते हैं । DNA पॉलीमरेज न्यूक्लियोटाइडों के लाखों बड़े अणुओं को अपने अंदर रख सकते हैं। उदाहरण के लिए, सबसे बड़ा मानव गुणसूत्र 220 मिलियन बेस पेयर लंबा है। इस प्रकार DNA एंजाइम से बड़े हैं।

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प्रश्न 4.
मानव की एक कोशिका में DNA की मोलर सन्द्रिता क्या होगी ? अपने अध्यापक से परामर्श कीजिए।
उत्तर
मोलर सांद्रता (Molar concentration)-किसी पदार्थ की सांद्रता प्रति इकाई आयतन में उसकी मात्रा की माप होती है। इसे सामान्यतया मोलरता (Molarity) के पदों में व्यक्त किया जाता है। किसी पदार्थ की मोलरता एक लीटर आयतन में उपस्थित उसके अणुओं की संख्या होती है। अणुओं के सांद्रता की गणना निम्न सूत्र से की जा सकती है
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DNA अणु जटिल जैविक वृहदाणु होते हैं। इनका अणुभार 106 से 109 डाल्टन तक होता है । हमारे शरीर में DNA के न्यूक्लियोटाइड का औसत आण्विक द्रव्यमान 130.86 होता है। अत: मानव DNA अणु का आण्विक द्रव्यमान 6×109 न्यूक्लियोटाइड (मानव जीनोम प्रोजेक्ट के अनुसार) x 130.86 = 784.56 x 10° g/mol. होगा।

प्रश्न 5.
क्या सुकेन्द्रकी कोशिकाओं में प्रतिबंधन एण्डोन्यूक्लिएज नहीं मिलते हैं ? अपने उत्तर को सही सिद्ध कीजिए।
उत्तर
नहीं, सुकेन्द्रकी कोशिकाओं में प्रतिबन्धन एण्डोन्यूक्लिऐज नहीं मिलते हैं। ये कुछ जीवाणुओं में उपस्थित रहते हैं। सन् 1963 में ई. कोलाई (E.coli) से दो एन्जाइम पृथक् किये गये थे। ये जीवाणुभोजी की वृद्धि को रोक देते हैं। इनमें एक एन्जाइम DNA मेथिल समूह को जोड़ता है, जबकि दूसरा एन्जाइम DNA को काटता है। दूसरे एन्जाइम को प्रतिबन्धन एण्डोन्यूक्लिएज (Restriction endonuclease) कहते हैं। प्रतिबन्धन एण्डोन्यूक्लिऐजका उपयोग आनुवंशिक इंजीनियरिंग में DNA के पुनर्योगज अणु (Recombinant molecules of DNA) बनाने में किया जाता है जिसका निर्माण विभिन्न जीनोमों से प्राप्त DNA से मिलकर होता है।

प्रश्न 6.
अच्छी हवा व मिश्रण विशेषता के अतिरिक्त विलोडन हौज बायोरिऐक्टर में कौन-सी अन्य कम्पन्न फ्लास्क सुविधाएँ हैं ?
उत्तर
सभी पुनर्योगज प्रौद्योगिकियों का अंतिम उद्देश्य वांछित प्रोटीन का उत्पादन करना होता है। इसके लिये पुनर्योगज DNA के अभिव्यक्त होने की आवश्यकता होती है। बाहरी जीन उपयुक्त परिस्थितियों में अभिव्यक्त होती है। वांछित जीन को क्लोन करने पर लक्ष्य प्रोटीन की अभिव्यक्ति को प्रेरित करने वाली परिस्थितियों को अनुकूलतम बनाने के बाद इनका व्यापक स्तर पर उत्पादन किया जाता है।

उत्पादों की अधिक मात्रा में उत्पादन हेतु बायोरियेक्टर (Bioreactor) की सहायता ली जाती है। बायोरिएक्टर वांछित उत्पादन हेतु अनुकूलतम परिस्थितियाँ उपलब्ध कराती है। अनुकूलतम परिस्थितियों में तापमान, pH, क्रियाधार, लवण, विटामिन, ऑक्सीजन आदि आते हैं। विलोडन हौज बायोरिएक्टर में प्रक्षोभक तंत्र (Agitator system), O2, प्रदाय तंत्र, झाग नियंत्रण तंत्र, तापक्रम तंत्र, पी.एच नियंत्रण तंत्र व प्रतिचयन प्रहार (Sampling ports) लगा होता है जिससे संवर्धन की थोड़ी मात्रा समय-समय पर निकाली जा सकती है।

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प्रश्न 7.
शिक्षक से परामर्श कर पाँच पैलिंड्रोमिक अनुप्रयास करना होगा कि क्षार युग्मक नियमों का पालन करते हुए पैलिंड्रोमिक अनुक्रम बनाने के उदाहरण का पता लगाइए।”
उत्तर
प्रत्येक सीमाकारी एन्जाइम, DNA स्ट्रेण्ड के विशिष्ट 4 से 6 न्यूक्लियोटाइड क्षार अनुक्रम को पहचानता है। इस क्रम को अभिज्ञेय स्थल (Recognition site) या पैलिन्ड्रोम (Palindrome) कहते हैं। पैलिन्ड्रोम वे शब्द होते हैं जिन्हे बांये से दांये अथवा दांये से बांये पढ़ने पर एक समान नजर आते हैं जैसे
MOM, BOB, MADAM, MALAYALAM

परन्तु शब्द पैलिन्ड्रोम और DNA पैलिन्ड्रोम में अंतर है। DNA में पैलिन्ड्रोम क्षारक युग्मों का एक ऐसा अनुक्रम होता है जो पढ़ने के अभिविन्यास को समान रखने पर दोनों लड़ियों में एक जैसा पढ़ा जाता है। उदाहरणार्थ-निम्न अनुक्रमों को 5’→ 3′ दिशा में पढ़ने पर दोनों लड़ियों में एक जैसा पढ़ा जायेगा। यदि इसे 3′ → 5′ दिशा में पढ़ा जाए तब भी यह बात सही बैठती है|

5′-GAATTC -3′
3′ – CTTAAG -5′

प्रतिबंधन एन्जाइम DNA लड़ी को पैलिन्ड्रोम स्थल के केन्द्र से कुछ दूरी पर परन्तु विपरीत लड़ियों में दो समान क्षारकों के बीच काटते हैं । यहाँ पांच पैलिन्ड्रोम क्षारकों के क्रम का उदाहरण दिया जा रहा है-
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प्रश्न 8.
अर्धसूत्री विभाजन को ध्यान में रखते हुए क्या आप बता सकते हैं कि पुनर्योगज DNA किस अवस्था में बनते हैं ?
उत्तर
प्रथम अर्धसूत्री विभाजन की प्रथम पूर्वावस्था (Ist prophase) की उप-अवस्था जाइगोटीन (Zygotene) में समजात गुणसूत्र जोड़े बनते हैं। इसे सूत्र युग्मक (Synapsis) कहते हैं । पैकिटीन (Pachytene) उप-अवस्था में सूत्रयुग्मक सम्मिश्र (Synaptonemal complex) में एक या अधिक स्थानों पर गोल सूक्ष्म घुण्डियां दिखाई देने लगती हैं, इन्हें पुनर्संयोजन घुण्डियां (Recombination nodule) कहते हैं। समजात गुणसूत्रों के परस्पर जुड़े क्रोमेटिड्स (Chromatids) के मध्य एक या अधिक खण्डों की पारस्परिक अदला बदली को पारगमन कहते हैं। इससे ही समजात पुनर्संयोजित DNA(Recombinant DNA) बन जाता है। पुनर्संयोजन घुण्डियां उन स्थानों पर बनती हैं जहाँ पर पारगमन हेतु क्रोमेटिड्स के टुकड़े टूट कर पुन: जुड़ते हैं।

प्रश्न 9.
क्या आप बता सकते हैं कि प्रतिवेदक (रिपोर्टर) एन्जाइम को वरणयोग्य चिन्ह की उपस्थिति में बाहरी DNA को परपोषी कोशिकाओं में स्थानान्तरण के लिये मॉनीटर करने के लिये किस प्रकार उपयोग में लाया जा सकता है ? ।
उत्तर
DNA द्वारा आदाता (ग्राही) कोशिका में प्रवेश करने का कार्य तभी किया जाता है जब आदाता कोशिका अपने चारों ओर स्थित DNA को धारण करने में सक्षम हो जाती है। यह कार्य अनेक विधियों के द्वारा किया जाता है । यदि पुनर्योगज DNA को जिसमें प्रतिजैविक, जैसे-ऐम्पिसिलिन के प्रति प्रतिरोधी जीन स्थित होती है, ई. कोलाई (E.coli) कोशिकाओं में स्थानान्तरित किया जाए तो परपोषी कोशिकाएँ प्रतिरोधी कोशिकाओं में रूपान्तरित हो जाती है।

यदि रूपान्तरित कोशिकाओं को अगार युक्त प्लेट पर फैलाया जाता है तो केवल कुछ रूपान्तरित कोशिकाएँ ही विकसित हो पाती है, जबकि अरूपान्तरित आदाता कोशिकाओं की मृत्यु हो जाती है। प्रतिरोधी जीन के कारण कोई भी ऐम्पिसिलिन की उपस्थिति में रूपान्तरित कोशिका का चयन कर सकता है। ऐसे प्रक्रम में प्रतिरोधी जीन को वरणयोग्य चिन्हक कहते हैं।

प्रश्न 10.
निम्नलिखित का संक्षिप्त वर्णन कीजिए
(क) प्रतिकृतियन का उद्भव
(ख) बायोरिएक्टर
(ग) अनुप्रवाह संसाधन।
उत्तर
(क) प्रतिकृतियन का उद्भव-यह वह अनुक्रम है जहाँ से प्रतिकृतियन की शुरूआत होती है और जब कोई डी.एन.ए. का कोई खंड इस अनुक्रम से जुड़ जाता है तब परपोषी कोशिकाओं के अंदर – प्रतिकृति कर सकता है। यह अनुक्रम जोड़े गए डी.एन.ए. के प्रतिरूपों की संख्या के नियंत्रण के लिए भी उत्तरदायी है। इसलिए यदि कोई लक्ष्य डी.एन.ए. की काफी संख्या प्राप्त करना चाहता है तो इसे ऐसे संवाहक में क्लोन करना चाहिए जिसका मूल (Ori) अत्यधिक प्रतिरूप बनाने में सहयोग करता है।

(ख) बायोरिएक्टर-बायोरिएक्टर एक बर्तन के समान है, जिसमें सूक्ष्मजीवों, पौधों, जंतुओं व मानव कोशिकाओं का उपयोग करते हुए कच्चे माल को जैव रूप से विशिष्ट उत्पादों व्यष्टि एंजाइम आदि में परिवर्तित किया जाता है। बायोरिएक्टर वांछित उत्पाद पाने के लिए, अनुकूलतम परिस्थितियाँ उपलब्ध करता है । वृद्धि के लिए ये अनुकूलतम परिस्थितियाँ हैं तापमान, pH, क्रियाधार, लवण, विटामिन, ऑक्सीजन । जो बायोरिएक्टर में सामान्यतया सर्वाधिक उपयोग में लार,ता है वह विलोडन (स्टिरिंग) प्रकार का है जिसे चित्र में दर्शाया गया है।

विलोडित हौज रिएक्टर सामान्यतया बेलनाकार होते हैं या जिनके आधार घुमावदार होने से रिएक्टर के अंदर अंतर्वस्तु के मिश्रण में सहायता मिलती है। विलोडक बायोरिएक्टर में ऑक्सीजन उपलब्धता व उसके मिश्रण का काम करते हैं । विकल्पतः हवा बुलबुले के रूप में बायोरिएक्टर में भेजी जा सकती है। रिएक्टर में एक प्रक्षोभक यंत्र (एजिटेटर सिस्टम), ऑक्सीजन प्रदाय तंत्र, झाग नियंत्रण तंत्र, तापक्रम नियंत्रण तंत्र, पीएच नियंत्रण तंत्र व प्रति चयन प्रद्वार लगा होता है जिससे संवर्धन की थोड़ी मात्रा समय-समय पर निकाली जा सकती है।
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(ग) अनुप्रवाह संसाधन-जैव संश्लेषित अवस्था के पूर्ण होने के बाद परिष्कृत तैयार होने व विपणन के लिए भेजे जाने से पहले कई प्रक्रमों से होकर गुजरता है। इन प्रक्रमों में पृथक्करण कशोधन सम्मिलित है और इसे सामूहिक रूप से अनुप्रवाह संसाधन कहते हैं । उत्पाद को उचित परिरक्षक के साथ संरूपित करते हैं औषधि के मामले में ऐसे संरूपण (फॉर्मुलेशन) की चिकित्सीय परीक्षण से गुजारते है। प्रत्येक उत्पाद के लिए सुनिश्चित गुणवत्ता नियंत्रण परीक्षण की भी आवश्यकता होती है। अनुप्रवाह संसाधन व गुणवत्ता नियंत्रण परीक्षण प्रत्येक उत्पाद के लिए भिन्न-भिन्न होती है।

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प्रश्न 11.
संक्षेप में बताइए
(क) पी.सी.आर.,
(ख) प्रतिबंधन एंजाइम और डी.एन.ए.,
(ग) काइटिनेज।
उत्तर
(क) पी.सी.आर.- पी.सी.आर. का अर्थ पॉलिमरेज चेन रिऐक्शन (पॉलिमरेज शृंखला अभिक्रिया) है। इस अभिक्रिया में उपक्रमकों (प्राइमर्स-छोटे रासायनिक संश्लेषित अल्प न्यूक्लियोटाइड जो डी.एन.ए. क्षेत्र के पूरक होते हैं) के दो समुच्चयों (सेट्स) व डी.एन.ए. पॉलिमरेज एंजाइम का उपयोग करते हुए पात्रे (इन विट्रो) विधि द्वारा उपयोगी जीन के कई प्रतिकृतियों का संश्लेषण होता है। यह एंजाइम जिनोमिक डी.एन.ए. को टेंपलेट के रूप में लेकर अभिक्रिया से मिलने वाले न्यूक्लियोटाइडों का उपयोग करते हुए उपक्रमकों को विस्तृत कर देता है। यदि डीएनए प्रतिकृतयेन प्रक्रम कई बार दोहराया जाता है तब डीएनए खंड को लगभग एक अरब गुना प्रवर्धित किया जा सकता है।

(ख) प्रतिबंधन एंजाइम और डी.एन.ए.-आणविक कैंची कहे जाने वाले प्रतिबंधन एंजाइम (रिस्ट्रिक्शन एंजाइम) की खोज से डी.एन.ए. को विशिष्ट जगहों पर काटना संभव हो सका। कटे हुए डी.एन.ए. का भाग प्लाज्मिड डी.एन.ए. से जोड़ा जाता है। यह प्लाज्मिड डी.एन.ए. संवाहक (वेक्टर) की तरह कार्य करता है जो इससे जुड़े डी.एन.ए. को स्थानांतरित करता है। प्रतिजैविक प्रतिरोधी जीन को संवाहक के साथ जोड़ने का काम एंजाइम डीएनए लाइगेज के द्वारा होता है जो डी.एन.ए. अणु के कटे हुए भाग पर कार्य कर उसके किनारों को जोड़ने का काम करता है ।

इस संयोजन से पात्रे (इन विट्रो) नये गोलाकार स्वतः प्रतिकृति बनाने वाले डी.एन.ए. का निर्माण होता है जिसे पुनर्योगज डी.एन.ए. कहते हैं। जब यह डी.एन.ए. इंश्चिरिचिया कोलाई में स्थानांतरित किया जाता है तो यह नए परपोषी के डी.एन.ए. पॉलिमरेज एंजाइम का उपयोग कर अनेक प्रतिकृतियाँ बना लेता है। प्रतिजैविक प्रतिरोधी जीन की प्रति का ई. कोलाई का गुणन, ई. कोलाई में प्रतिजैविक प्रतिरोधी जीन की क्लोनिंग कहलाती है।

(ग) काइटिनेज-काइटिनेज एक प्रकार का एंजाइम है।

प्रश्न 12.
अपने अध्यापक से चर्चा करके पता लगाइए कि निम्नलिखित के बीच कैसे भेद करेंगे

(क) प्लाज्मिड DNA और गुणसूत्रीय DNA
(ख) RNA और DNA
(ग) एक्सोन्यूक्लिएज और एंडोन्यूक्लिएज।
उत्तर
(क) प्लाज्मिड DNA और गुणसूत्रीय DNA (Plasmid DNA and Chromosomal DNA)
प्लाज्मिड अतिरिक्त गुणसूत्रीय रचनाएँ होती हैं जो जीवाणुओं के अन्दर स्वतः गुणित होती रहती है। इनका DNA दो सूत्रों का बना, प्रायः गोलाकार (Circular) होता है। इन पर अन्य जीनों के अतिरिक्त प्लाज्मिड की प्रतिकृति करने वाले जीन भी पाये जाते हैं। पुनर्योगज DNA तकनीक में प्रयुक्त प्लाज्मिड में प्रतिजैविक रोधिता वाले जीन भी होते हैं जिनसे पुनर्योगज DNA अणुओं की पहचान सम्भव हो पाती है।

गुणसूत्रों में उपस्थित DNA गुणसूत्रीय DNA होता है। यह भी दो सूत्रों का होता है परन्तु गोलाकार नहीं होता तथा कोशिका के केन्द्रक में होता है। इसमें प्रतिजैविक रोधिता वाले जीन नहीं होते हैं । यह प्लाज्मिड DNA की तुलना में अधिक लम्बा तथा अधिक न्यूक्लियोटाइड युक्त होता है।

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(ख) DNA तथा RNA में अन्तरDNA
MP Board Class 12th Biology Solutions Chapter 11 जैव प्रौद्योगिकी-सिद्धान्त व प्रक्रम 6

(ग) एक्सोन्यूक्लिएज और एंडोन्यूक्लिएज (Exonuclease and Endonuclease)एक्सोन्यूक्लिएज-ये DNA के सिरे से न्यूक्लियोटाइड को अलग करते हैं। एन्डोन्यूक्लिएज-ये DNA के भीतर विशिष्ट स्थलों पर काटते हैं। प्रत्येक प्रतिबंधन एन्डोन्यूक्लिऐज DNA अनुक्रम की लम्बाई के निरीक्षण पश्चात् कार्य करता है । जब यह अपना विशिष्ट पहचान अनुक्रम पा जाता है तब यह DNA से जुड़ता है तथा द्विकुंडलिनी की दोनों लड़ियों को शर्करा-फॉस्फेट आधार स्तम्भों के विशिष्ट केन्द्रों पर काटता है।

जैव प्रौद्योगिकी-सिद्धान्त व प्रक्रम अन्य महत्वपूर्ण प्रश्नोत्तर

जैव प्रौद्योगिकी-सिद्धान्त व प्रक्रम वस्तुनिष्ठ प्रश्न

1. सही विकल्प चुनकर लिखिए

प्रश्न 1.
कृत्रिम रूप से जीन की प्रकृति में परिवर्तन करना कहलाता है
(a) जीन परिचालन
(b) जीन हेर-फेर
(c) (a) एवं (b) दोनों
(d) इनमें से कोई नहीं।
उत्तर
(c) (a) एवं (b) दोनों

प्रश्न 2.
D.N.A. पुनर्योगज तकनीक का आविष्कार कब किया गया
(a) सन् 1971
(b) सन् 1972
(c) सन् 1973
(d) सन् 1974.
उत्तर
(b) सन् 1972

प्रश्न 3.
एच. हैरिस व जे. एफ. वाटकिन्स द्वारा D.N.A. पुनर्योजन की कौन-सी विधि दी गयी थी
(a) रूपान्तरण
(b) पराक्रमण
(c) क्लोनिंग
(d) प्रोटोप्लास्ट संलयन।
उत्तर
(d) प्रोटोप्लास्ट संलयन।

प्रश्न 4.
कैलिफोर्निया के वैज्ञानिकों ने एक कृत्रिम जीन बनाया जिसकी क्षमता थी
(a) कृत्रिम इन्सुलिन बनाने की
(b) कृत्रिम जीन पैदा करने की
(c) कीड़ों का प्रकोप नहीं होने की
(d) पोषक खाद्य उत्पादन करने की।
उत्तर
(a) कृत्रिम इन्सुलिन बनाने की

प्रश्न 5.
विशिष्ट जीन के समान जीन प्राप्त करना कहलाता है
(a) जीव क्लोनिंग
(b) जीन क्लोनिंग
(c) D.N.A. क्लोनिंग
(d) R.N.A. क्लोनिंग।
उत्तर
(b) जीन क्लोनिंग

प्रश्न 6.
पादपों में कायिक संवर्धन द्वारा उत्पादित संततियों को कहते हैं
(a) कैलस
(b) अंडाणु
(c) क्लोन
(d) इनमें से कोई नहीं।
उत्तर
(c) क्लोन

प्रश्न 7.
आनुवंशिक अभियांत्रिकी में ‘आण्विक कैंची’ की तरह उपयोग किया जाता है
(a) DNA पॉलीमरेज
(b) DNA लाइगेज
(c) हेलिकेज
(d) रेस्ट्रिक्शन एण्डोन्यूक्लिएज।
उत्तर
(d) रेस्ट्रिक्शन एण्डोन्यूक्लिएज।

प्रश्न 8.
लक्ष्य ऊतक (Target tissue) में ट्रांसजीन की ट्रांसजेनिक अभिव्यक्ति निर्धारित होती है
(a) इन्हान्स द्वारा
(b) रिपोर्टर द्वारा
(c) प्रमोटर द्वारा
(d) ट्रांसजीन द्वारा।
उत्तर
(b) रिपोर्टर द्वारा

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प्रश्न 9.
प्रथम प्रतिबंधन एण्डोन्यूक्लिएज निम्न में कौन-सा पहचाना गया
(a) EcoRI
(b)Hind II
(c) Hind III
(d) TaqI
उत्तर
(b)Hind II

प्रश्न 10.
pBR322 वाहक में किसके प्रति प्रतिरोधी जीन होती है
(a) एम्पीसिलिन
(b) टेट्रासाइक्लिन
(c) उपर्युक्त दोनों
(d) इनमें से कोई नहीं।
उत्तर
(c) उपर्युक्त दोनों

प्रश्न 11.
एग्रोबैक्टीरियम ट्यूमीफेसिएंस का DNA खण्ड (t-DNA) सामान्य पौधों की कोशिकाओं में क्या रोग उत्पन्न करता है
(a) कैंसर
(b) अपघटन
(c) अर्बुद
(d) इनमें से कोई नहीं।
उत्तर
(c) अर्बुद

2.  रिक्त स्थानों की पूर्ति कीजिए

1. D.N.A. में संचित सूचना के संचरण तथा फिर से प्रकट होने एवं लक्षणों के बनने को ………….
कहते हैं।
2. ……………. मानव निर्मित इन्सुलिन है।
3. क्लोनिंग से …………….. वाले जीन भी उत्पन्न हो जाने की संभावना होती है।
4. वाहक का …………….. एवं …………….. आसान होना चाहिए।
5. आनुवंशिक इंजीनियरिंग से ऐसे जीव भी उत्पादित किये जा सकते हैं जिनका …………. सर्वथा नया हो।
6. …… जीन वाहक का कार्य करता है।
उत्तर

  1. भावाकृति
  2. ह्यूम्यूलिन
  3. अवांछित गुणों
  4. विलगन, शुद्धिकरण
  5. जीन प्रारूप
  6. Ti प्लाज्मिड।

3. सही जोड़ी बनाइए

‘A’ -‘B’

1. इन्सुलिन – (a) डी.एन.ए. में सकारात्मक परिवर्तन
2. जीन बैंक – (b) मानव जीनोम प्रायोजना
3. जीन अभियांत्रिकी – (c) जीन अभियांत्रिकी
4. जीनोमिकी – (d) ज्ञात D.N.A. संरक्षण
उत्तर
1. (c), 2. (d), 3. (a), 4. (b).

4. एक शब्द में उत्तर दीजिए

1. उस पादप का नाम बताइये जिसके DNA में न्यूक्लियोटाइड्स का क्रम सर्वप्रथम पढ़ा गया।
2. किसी जीनोम का संरचनात्मक तथा क्रियात्मक पक्ष का अध्ययन ।
3. उस वैज्ञानिक का नाम बताइये जिन्होंने DNA फिंगरप्रिंटिंग की आधारशिला रखी।
4. समान न्यूक्लियोटाइड क्रम के खण्डों वाला DNA
5. ऐसा जीव जिसमें दूसरे स्रोत (जीव) के जीन को प्रवेशित कराया गया है।
6. CCMB कहाँ स्थित है ?
7. प्रथम जन्तु क्लोन का नाम बताइये।
8. वह चिकित्सा पद्धति जिसके द्वारा किसी जीव में गड़बड़ी वाले जीन को सही जीन द्वारा प्रतिस्थापित किया जाता है।
9. विषाणुओं को नष्ट करने वाला जैव अणु जो मनुष्य में विषाणु प्रतिरोधकता उत्पन्न करता है।
10. Ti प्लाज्मिड का स्रोत।
उत्तर

  1. एरेबिडोप्सिस
  2. जीनोमिक्स
  3. एलेक जेफरी
  4. रिपिटीटिव DNA
  5. ट्रांसजेनिक
  6. हैदराबाद
  7. डॉली (भेड़)
  8. जीन थेरैपी
  9. इन्टरफेरॉन
  10. एग्रोबैक्टीरियम ट्यूमिफेसिएन्स।

जैव प्रौद्योगिकी-सिद्धान्त व प्रक्रम अति लघु उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 1.
लक्ष्य जीन को पृथक करने के लिए कौन-से एन्जाइम की आवश्यकता होती है ?
उत्तर
लक्ष्य जीन को पृथक् करने के लिए प्रतिबन्धन एण्डोन्यूक्लिएज एन्जाइम की आवश्यकता होती है।

प्रश्न 2.
कौन-सा DNA पॉलीमरेज उच्च ताप पर भी सक्रिय रहता है ?
उत्तर
टेक (Taq) DNA पॉलीमरेज उच्च ताप पर भी सक्रिय रहता है।

प्रश्न 3.
किन्ही तीन प्रतिबंधन एण्डोन्यूक्लिएज एन्जाइमों के नाम लिखिए।
उत्तर

  • EcoRI
  • Hind II
  • Hind III.

प्रश्न 4.
PCR का पूर्ण नाम लिखिए। इसमें कौन-सा एन्जाइम प्रयुक्त होता है ?
उत्तर
पॉलिमरेज श्रृंखला अभिक्रिया (Polymerase Chain Reaction) इसमें टेक (Taq) DNA पॉलमरेज एन्जाइम प्रयुक्त होता है।

प्रश्न 5.
जीवाणुभोजी (Bacteriophage) किसे कहते हैं ?
उत्तर
जीवाणुओं को संक्रमित करने वाले विषाणु को जीवाणुभोजी कहते हैं।

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प्रश्न 6.
प्रथम पुनर्योगज DNA का निर्माण किसमें हुआ था ?
उत्तर
जीवाणु सालमोनेला टाइफीयूरिम में।

प्रश्न 7.
आण्विक कैंची किसे कहते हैं ?
उत्तर
प्रतिबंधन एन्जाइम (Restriction Enzyme) को आण्विक कैंची कहते हैं।

प्रश्न 8.
हिंड II (Hind II) DNA अणु को कहाँ से काटता है ?
उत्तर
हिंड II, DNA अणु को उस विशेष बिन्दु पर काटते हैं जहाँ पर छ: क्षारक युग्मों (Base pairs) का विशेष अनुक्रम होता है।

प्रश्न 9.
चिपचिपे सिरे किस एन्जाइम के कार्य में सहायता करते हैं ?
उत्तर
एन्जाइम DNA लाइगेज के कार्य में सहायता प्रदान करता है।

प्रश्न 10.
DNA खण्ड किस प्रकार के आवेशित अणु होते हैं ?
उत्तर
ऋणात्मक आवेशित (Charged) होते हैं।

प्रश्न 11.
इलेक्ट्रोफोरेसिस में DNA को देखने के लिये किससे अभिरंजित किया जाता है ?
उत्तर
इथीडियम ब्रोमाइड नामक यौगिक से अभिरंजित करते हैं।

प्रश्न 12.
इलेक्ट्रोफोरेसिस में क्या होता है ?
उत्तर
DNA खण्ड का पृथक्करण एवं विलगन।

प्रश्न 13.
जीवाणु कोशिका में मिलने वाले वर्तुल DNA का प्रमुख कार्य बताइये।
उत्तर
यह संवाहक (वेक्टर) की तरह कार्य करता है।

प्रश्न 14.
उस तकनीक का नाम लिखिए, जिसके द्वारा DNA खण्डों को अलग कर सकते हैं ?
उत्तर
जैव वैद्युत कण संचलन (Electrophoresis)।

प्रश्न 15.
प्लाज्मिड pBR322 में पाये जाने वाले दो प्रतिजैविक प्रतिरोधी जीन के नाम लिखिये ?
उत्तर
एम्पिसिलिन व टेट्रासाइक्लीन ।

जैव प्रौद्योगिकी-सिद्धान्त व प्रक्रम लघु उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 1.
आनुवंशिक अभियांत्रिकी किसे कहते हैं ?
उत्तर
DNA या आनुवंशिक पदार्थ की संरचना में आवश्यकतानुसार हेर-फेर करने की क्रिया को आनुवंशिक अभियान्त्रिकी कहते हैं।

प्रश्न 2.
आनुवंशिक अभियांत्रिकी के दो उद्देश्य लिखिए।
उत्तर
उद्देश्य-

  • जीन की संरचना में इच्छित परिवर्तन करना।
  • आनुवंशिक विकृतियों को ठीक करना।

प्रश्न 3.
बैक्टीरियोफेज क्या है ?
उत्तर
बैक्टीरियोफेज जीवाणु कोशिकाओं में पाया जाने वाला एक प्रकार का परजीवी विषाणु है, जिसका शरीर दो भागों-सिर एवं पूँछ का बना होता है। इसके सिर में आनुवंशिक पदार्थ के रूप DNA पाया जाता है। आनुवंशिक अभियान्त्रिकी में इसका बहुत अधिक महत्व है।

प्रश्न 4.
रेस्ट्रिक्शन एण्डोन्यूक्लिएज क्या है ?
उत्तर
रेस्ट्रिक्शन एण्डोन्यूक्लिएज, न्यूक्लिएज समूह का एन्जाइम है। यह नाभिकीय अम्लों विशेषकर DNA को विशिष्ट स्थान पर काटने का कार्य करता है।

प्रश्न 5.
वाहक क्या है ?
उत्तर
DNA पुनर्योजन तकनीक में विदेशज जीन (Foreign DNA) को अपने साथ इच्छित स्थल तक लाने वाले DNA खण्ड को वाहक (Vector) कहते हैं।

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प्रश्न 6.
वाहक के चार लक्षण लिखिये।
उत्तर
वाहक के लक्षण-

  • स्व-द्विगुणन की क्षमता होनी चाहिए।
  • इसका विलगन एवं शुद्धिकरण आसान होना चाहिए।
  • अणुभार कम होने चाहिए ताकि इस पर बड़े DNA अथवा जीन को जोड़ा जा सके।
  • पोषक कोशिका (Host Cell) के अन्दर इसका विनिष्टिकरण (Degradation) नहीं होना चाहिए।

प्रश्न 7.
प्लाज्मिड किसे कहते हैं ?
उत्तर
प्लाज्मिड्स बाह्य नाभिकीय (Extra nuclear) स्वत: द्विगुणित होने वाले (Self replicating), सहसंयोजी रूप से बन्द (Covalently Closed), वलयाकार, द्विसूत्री DNA अणु हैं, जो कि प्रायः सभी जीवाणु कोशिकाओं में पाये जाते हैं।

प्रश्न 8.
DNA लाइगेज क्या होता है ?
उत्तर
DNA लाइगेज एक विशिष्ट प्रकार का एन्जाइम होता है, जो दो DNA खण्डों को आपस में या DNA अणु के टूट-फूट वाले स्थल को जोड़ने का कार्य करता है।

प्रश्न 9.
c-DNA किसे कहते हैं ?
उत्तर
जीवन कोशिका में पुनर्योजित DNA का द्विगुणन से प्राप्त प्रतिलिपियों को क्लोन्ड या पुंजीकृत DNA (c-DNA) कहा जाता है।

प्रश्न 10.
Ti प्लाज्मिड क्या है ?
उत्तर
ऐग्रोबैक्टीरियम ट्यूमीफेसिएन्स (Agrobacterium tumifaciens) नामक जीवाणु में पाये जाने वाले विशिष्ट प्लाज्मिड जो कि द्विबीजपत्री पौधों में संक्रमण पश्चात् ट्यूमर निर्माण को अभिप्रेरित करता है, Ti प्लाज्मिड कहलाता है। यह जीन अभियांत्रिकी में वाहक का भी कार्य करता है।

प्रश्न 11.
विश्व के पहले जन्तु क्लोन का नाम बताइए।
उत्तर
विश्व में पहला जन्तु क्लोन भेड़ का उत्पन्न कराया गया, जिसका नाम डॉली रखा गया है।

प्रश्न 12.
कृत्रिम रूप से DNA संश्लेषण की विधि को खोजने वाले वैज्ञानिकों के नाम बताइए।
उत्तर
कृत्रिम रूप से DNA संश्लेषण की विधि के खोज का श्रेय डॉ. हरगोबिन्द खुराना, एम. नीरेनबर्ग एवं आर. हौली को दिया जाता है, जिसके लिए इन तीनों वैज्ञानिकों को एक साथ सन् 1968 में नोबेल पुरस्कार से सम्मानित किया गया।

प्रश्न 13.
जीन मैनीपुलेशन या जेनेटिक इन्जीनियरिंग को समझाइए।
उत्तर
वैज्ञानिक द्वारा DNA या आनुवंशिक पदार्थ की संरचना में आवश्यकतानुसार हेर-फेर करने को जीन मैनीपुलेशन या जेनेटिक इन्जीनियरिंग कहते हैं। आनुवंशिक पदार्थ का कृत्रिम संश्लेषण दो अलग-अलग जीनों के DNA खण्डों को जोड़कर नया DNA बनाना, DNA की मरम्मत, DNA से कुछ न्यूक्लियोटाइड को हटाकर या जोड़कर या विस्थापित करके इच्छित संरचना वाले नये DNA अणुओं का संश्लेषण करके जीन क्रिया का नियन्त्रण करना तथा जीवधारियों में इच्छित गुणों का समावेश करना जेनेटिक इन्जीनियरिंग का मुख्य उद्देश्य है। आनुवंशिकी की यह शाखा अभी अपने शैशव काल में है।

उम्मीद की जाती है कि इस विधि के द्वारा आनुवंशिक वैज्ञानिक जीन की संरचना में सुधार करके अथवा विकृत जीन को सामान्य जीन द्वारा विस्थापित करके आनुवंशिक रोगों से मानव जाति को मुक्ति दिला सकेंगे अथवा मानव द्वारा उपयोग में आने वाले पादपों व जन्तुओं की नस्लों का सुधार कर सकेंगे। आनुवंशिक पदार्थ के संगठन में हेर-फेर, DNA की संरचना का ज्ञान एक अत्याधुनिक तकनीक के विकास के कारण सम्भव हो सकता है। इनको रिकॉम्बिनेन्ट DNA तकनीकी कहते है

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प्रश्न 14.
फसल सुधार में आनुवंशिक इंजीनियरिंग के तीन उपयोग लिखिए।
उत्तर-
फसल सुधार में आनुवंशिक इंजीनियरिंग के उपयोग

  • धान्यों में स्वयं नाइट्रोजन स्थिरीकरण गुण पैदा करने के प्रयास में काफी सफलता मिली है।
  • पौधों की जंगली प्रजातियों से जीनों को प्राप्त कर उन्हें फसली पौधों में स्थानांतरण कर उनमें परजीवियों तथा.कीड़े-मकोड़ों के प्रति प्रतिरोधकता पैदा करने के भी प्रयास किये जा रहे हैं।
  • केन्द्रकीय एवं हरितलवक जीन्स को पुन: समायोजित कर फसली पौधों की प्रकाश-संश्लेषण करने की क्षमता बढ़ाने के प्रयास किये जा रहे हैं। इसके अलावा C3,पौधों को C4 पौधों में परिवर्तित करने के प्रयास में भी इस तकनीक द्वारा आशान्वित सफलता मिली है।

प्रश्न 15.
जीन क्लोनिंग के उपयोग लिखिये।
उत्तर
जीन क्लोनिंग के उपयोग-

  • किसी जीव के इच्छित जीनोटाइप को संरक्षित करने में।
  • उच्च गुणों वाले जीवों को सरलता से प्राप्त करने में।
  • विलुप्त हो रहे पादपों तथा जन्तुओं को संरक्षित करने में।
  • उपयोगी (दूध, प्रोटीन देने वाले) जंतुओं को पैदा करने में।
  • मानव अंग प्रत्यारोपण के लिये आनुवंशिक रूप से परिवर्तित पशुओं को पैदा करने में।

प्रश्न 16.
चिकित्सा के क्षेत्र में आनुवंशिक इंजीनियरिंग के कोई तीन उपयोग लिखिये।
उत्तर
चिकित्सा के क्षेत्र में आनुवंशिक इंजीनियरिंग के उपयोग-

  • गोइडल ने E.coli के D.N.A. में इस हॉर्मोन के जीन को निवेशित कर माध्यम से मनुष्य के वृद्धि हॉर्मोन का संश्लेषण कराया।
  • हिपैटाइटिस B एक संदूषित जीन के कारण होता है, इसे प्रतिस्थापित कर वैज्ञानिकों ने इस रोग का इलाज ढूँढ लिया है।
  • कृत्रिम जीन निर्माण द्वारा (जीन संवर्द्धन तकनीक) मानव इंसुलिन मधुमेह की बीमारी को दूर करने के लिये तैयार करना।

प्रश्न 17.
जीन्स बैंक से आप क्या समझते हैं ? इसका क्या महत्व है ?
उत्तर
जीन्स को जीवों के अथवा संश्लेषित अवस्था में संरक्षित करने वाली संस्था या स्थान को जीन बैंक कहते हैं। इसके अन्तर्गत जीवों की कोशिकाओं में पाये जाने वाले आनुवंशिक पदार्थ (DNA) का संरक्षण किया जाता है। इसका सबसे पहला उपाय यह है कि दुर्लभ जीवों को संरक्षित रखा जाये। दूसरे उपाय के अन्तर्गत जीवों की कोशिकाओं या ऊतकों को सुरक्षित रखा जाता है। महत्व-जीन्स बैंक में जीनों को संरक्षित रखकर इनके द्वारा नयी उन्नतशील जातियों को तैयार किया जाता है तथा उन पर अनेक वैज्ञानिक परीक्षण भी किये जा सकते हैं।

प्रश्न 18.
आनुवंशिक इन्जीनियरिंग की महत्ता एवं उसके तीन उपयोग लिखिए।
उत्तर
मनुष्य को जैव-तकनीक तथा आनुवंशिक इन्जीनियरिंग के द्वारा कई उपयोगी एवं महत्वपूर्ण सफलताएँ प्राप्त हुई हैं। ऐसा लगता है कि इसकी सहायता से सुजननिकी के क्षेत्र में कई विचार जो अब तक कल्पनामयी लगते थे, निकट भविष्य में वास्तविकता में बदल जायेंगे। आनुवंशिक इन्जीनियरिंग के उपयोगअनुप्रयोज्यता की दृष्टि से आनुवंशिक इन्जीनियरिंग हमें निम्नलिखित लाभदायक तथा हानिकारक परिणाम देती है

प्रश्न 19.
जीन क्लोनिंग से क्या समझते हैं ? इसका क्या महत्व है ?
अथवा
जीन क्लोनिंग क्या है ? दो उदाहरण दीजिये।
उत्तर
जीन क्लोनिंग, पुनर्संयोजित DNA खण्डों को प्राप्त करने या तैयार करने की एक विधि है, जिसमें विदलित DNA (Cleaved DNA) अणु को विषाणु DNA या प्लाज्मिड DNA के साथ सम्बन्धित करते हैं और फिर विषाणु अथवा जीवाणु द्विगुणन कराके इससे सम्बन्धित DNA की प्रतिलिपियाँ तैयार करते हैं। इस प्रकार से प्राप्त सम्बन्धित DNA की प्रतियों जो पुनर्संयोजित DNA के गुणन से बनती हैं, क्लोन्ड DNA कहते हैं तथा यह तकनीक जीन क्लोनिंग कहलाती है।

महत्व-

  • इसके द्वारा उपयोगी आनुवंशिक गुणों को प्राप्त किया जा सकता है।
  • इस तकनीक के द्वारा कई बीमारियों से बचा जा सकता है।
  • इस तकनीक के द्वारा कई दवाइयों का संश्लेषण किया जा सकता है।
  • इसका उपयोग सुजननिकी में किया जा सकता है।

जैव प्रौद्योगिकी-सिद्धान्त व प्रक्रम दीर्घ उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 1.
आनुवंशिक इंजीनियरिंग की अनुप्रयोज्यता का वर्णन कीजिए।
अथवा
आनुवंशिक इंजीनियरिंग का औद्योगिक एवं चिकित्सा क्षेत्र में योगदान लिखिए।
अथवा
जीन अभियांत्रिकी के लाभदायक तथा हानिकारक प्रभावों को लिखिये।
अथवा
आनुवंशिक इंजीनियरिंग के तीन महत्व लिखिये।
अथवा
जीन आनुवंशिक अभियांत्रिकी किसे कहते हैं ? औद्योगिक एवं चिकित्सा के क्षेत्र में इसका महत्व लिखिए।
उत्तर
अनुप्रयोज्यता की दृष्टि से आनुवंशिक इन्जीनियरिंग हमें निम्नलिखित लाभदायक तथा हानिकारक परिणाम देती है

(A) लाभदायक प्रभाव

1. औद्योगिक उपयोग-उच्च वर्गों के जीवों के विटामिन प्रतिजैविक या हॉर्मोन्स के जीन का कोड करके तथा इनके संश्लेषित DNA को जीवाणुओं में पुन:स्थापित करके विटामिन्स, हॉर्मोन्स आदि यौगिकों को औद्योगिक स्तर पर संश्लेषण किया जाना सम्भव हुआ है। इस विधि से मानव इन्सुलिन का Humulin नाम से जैव-संश्लेषण किया गया है।

2.चिकित्सीय उपयोग-नयी दवाइयों का जैव स्तर पर संश्लेषण तथा जीन चिकित्सा द्वारा हीमोफीलिया, फीनाइलकीटोन्यूरिया आदि वंशागत रोगों का उपचार किया जाना सम्भव हुआ है।

3. कृषि क्षेत्र में उपयोग-जीवाणु अथवा नीले-हरे शैवाल से नाइट्रोजन यौगिकीकरण करने वाले जीनों का अनाज वाली फसलों में स्थानान्तरण करने हेतु प्रयोग जारी है, जिससे हमारी फसलें पर्यावरण से नाइट्रोजन का सीधा प्रयोग कर सकेंगी और हमें कृषि में कृत्रिम उर्वरक के उपयोग की आवश्यकता नहीं रहेगी।

4. जीन संरचना अभिव्यक्ति में परिवर्तन-इस तकनीक द्वारा इच्छानुसार नये-नये प्रकार के जीवों तथा वनस्पतियों का निर्माण सम्भव हो सकेगा।

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(B) हानिकारक प्रभाव-

  • रोगाणु ऐण्टिबायोटिक्स के प्रति प्रतिरोधी हो सकते हैं।
  • आंत में पाये जाने वाले जीवाणु कैन्सर कारक हो सकते हैं।
  • सामान्य वाइरस से अत्यधिक खतरनाक वाइरस का निर्माण हो सकता है।

प्रश्न 2.
पुनर्संयोजन DNA तकनीक के महत्व एवं उपयोग को लिखिए।
अथवा
आनुवंशिक अभियांत्रिकी की महत्ता एवं अनुप्रयोग लिखिए।
उत्तर
जीन क्लोनिंग या पुनर्योगज DNA तकनीक जैविक विज्ञान (Biological sciences) के सभी क्षेत्रों में अत्यधिक उपयोगी सिद्ध हुआ है। इस तकनीक के प्रमुख महत्व एवं उपयोग निम्नानुसार हैं

  • पुनर्योगज DNA तकनीक या जीन क्लोनिंग के द्वारा हमें वांछित गुणों वाले जीनों को अन्य जन्तु व पौधों में प्रत्यारोपित करके इनकी अच्छी किस्में तैयार करने में सफलता प्राप्त हुई है।
  • इस तकनीक के द्वारा आनुवंशिक रोगों का भ्रूणीय अवस्था में ही पता लगाया जा सकता है।
  • rec-DNA तकनीक की सहायता से DNA/ जीन के क्रमीकरण (Sequencing of DNA/ Gene) में सहायता मिली है।
  • इस तकनीक की सहायता से विभिन्न प्रकार की पुनर्योगज वैक्सीनों (Recombinant vaccine) का विकास किया जाता है। उदाहरण-हिपैटाइटिस-B वैक्सीन।
  • इसकी सहायता से जीन क्रिया नियमन के अध्ययन में सुविधा हुई है।
  • इस तकनीक के द्वारा ही विभिन्न प्रकार की प्रोटीन्स जैसे-इन्सुलिन, हॉर्मोन्स, इण्टरफेरॉन्स एवं विटामिनों का औद्योगिक स्तर पर निर्माण जीवाणुओं द्वारा संभव हुआ है।
  • इस तकनीक के द्वारा उत्कृष्ट किस्म के प्रतिजैविकों का उत्पादन किया जाता है।
  • हीमोफिलिक मनुष्यों में VIII C (ऐण्टिहीमोफिलिक ग्लोब्यूलिन) का अभाव होता है। यह फैक्टर रक्त के थक्का बनाने (Blood clotting) का कार्य करता है। इसके जीन की क्लोनिंग के फलस्वरूप उपयुक्त मात्रा में VIII C कारक का उत्पादन संभव हो गया है।

प्रश्न 3.
पुनर्संयोजन DNA क्या है ? इसके निर्माण के चरणों का उल्लेख कीजिए।
अथवा
जीन मैनीपुलेशन या जेनेटिक इंजीनियरिंग को समझाइये।
अथवा
डी. एन. ए. पुनर्योगज तकनीक क्या है ?
अथवा
रिकॉम्बिनेन्ट D.N.A. तकनीक के विभिन्न चरणों में लिखिये।
अथवा
D.N.A. पुनर्योगज तकनीक क्या है ? इस तकनीक के उपकरण का नाम लिखिये। (कोई चार)
उत्तर
किसी जीव के जीनोम में वांछित लक्षणों वाले जीनों को प्रविष्ट कराकर एक नये प्रकार के DNA को बनाना DNA पुनर्संयोजन तकनीक कहलाती है तथा इस प्रकार बने DNA को पुनर्संयोजन DNA या पुनर्योगज DNA कहते हैं। पुनर्योगज DNA तकनीक का उपयोग करके किसी जीव के आनुवंशिक संगठन में परिवर्तन करने की तकनीक को जीन तकनीक या जीन प्रौद्योगिकी (Gene technology) कहते हैं।

पुनर्योगज या पुनर्संयोजन DNA तकनीक के विभिन्न चरण-पुनर्योगज DNA तकनीक एक जटिल प्रक्रिया है, जो कि निम्नलिखित चरणों में पूर्ण की जाती है

  1. विदेशज (Foreign) या टारगेट DNA का चयन जिसकी क्लोनिंग करनी होती है।
  2. प्लाज्मिड या लैम्डा फेज या कॉस्मिड में से किसी एक का वाहक अर्थात् वेक्टर के रूप में चयन।
  3. फॉरेन DNA को वेक्टर DNA के साथ जोड़ना अर्थात् पुनर्योगज. DNA का निर्माण।
  4. पोषक कोशिका में पुनर्योगज DNA का स्थानान्तरण।
  5. रूपान्तरित कोशिकाओं का चयन। जीन पुनर्संयोजन तकनीक द्वारा इन्सुलिन जीन का जीवाणु में प्रवेश की प्रक्रिया का चित्रात्मक निरूपण द्वारा इसके विभिन्न चरणों को प्रदर्शित किया जा रहा है।

MP Board Class 12th Biology Solutions Chapter 11 जैव प्रौद्योगिकी-सिद्धान्त व प्रक्रम 7
प्रश्न 4.
मानव इन्सुलिन के उत्पादन में आनुवंशिक इन्जीनियरिंग के योगदान का वर्णन कीजिए।
उत्तर
अलरिच तथा उनके सहयोगियों (Ulrich at, 1977) ने चूहे में इन्सुलिन बनाने वाले जीन को निष्कर्षित कर ई. कोलाई जीवाणु में स्थानान्तरित करने में सफलता पायी। इन लोगों ने चूहे से विशुद्ध m-RNA को निकाला तथा उससे रिवर्स ट्रांसक्रिप्टेज एन्जाइम की सक्रियता से DNA का संश्लेषण किया। इस इन्सुलिन संश्लेषण से सम्बन्धित DNA को प्लाज्मिड DNA के साथ एन्डोन्यूक्लिएज तथा लाइगेज के साथ जोड़कर पुनर्योगज DNA का निर्माण किया। इस पुनर्योगज DNA को ई. कोलाई के 1776 विभेद के Ex 2 होस्ट (पोषक) में स्थानान्तरित कर चूहे के इन्सुलिन DNA को क्लोन किया। नये वातावरण में इन जीन के ट्रांसलेशन (अनुलिपिकरण या अनुवादन) से जैविक रूप से सक्रिय इन्सुलिन का उत्पादन होता है।

नोट-बैक्टीरियोफेज जीवाणु कोशिकाओं में पाया जाने वाला एक प्रकार का परजीवी विषाणु है, जिसका शरीर दो भागों-सिर एवं पूँछ का बना होता है। इसके सिर में आनुवंशिक पदार्थ के रूप DNA पाया जाता है। आनुवंशिक अभियान्त्रिकी में इसका बहुत अधिक महत्व है।

प्रश्न 5.
क्लोन किसे कहते हैं ? जीन एवं पादप क्लोन किस प्रकार तैयार किये जाते हैं समझाइये?
उत्तर
अलैंगिक विधि द्वारा उत्पन्न आनुवंशिक रूप से समान जीवों को क्लोन कहते हैं। जीन एवं पादप क्लोन निम्नानुसार तैयार किये जाते हैं

1. जीन क्लोनिंग (Gene cloning)-विशिष्ट जीन के समान जीन प्राप्त करना जीन क्लोनिंग कहलाता है। क्लोन प्राप्त करने वाले DNA खण्ड को पहले वाहक DNA में प्रवेश कराया जाता है। उसके बाद यह वाहक DNA पोषक कोशिका में डाला जाता है जहाँ पर इसके जीन क्लोन प्राप्त होते हैं । जीवाणुओं के माध्यम से जीन क्लोनिंग में निम्न चरण पाये जाते हैं.

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(i) जीन का निर्माण (Preparation of the gene)-जीवाणु द्वारा जीन क्लोनिंग के लिए DNA को प्रकिण्व एण्डोन्यूक्लिएज की सहायता से छोटे-छोटे टुकड़ों में बदल लेते हैं। प्रत्येक खण्ड एकहरा शीर्षयुक्त होता है।

(ii) वाहक में प्रवेश कराना (Insertion into vector)—वाहक एक ऐसा प्रतिनिधि (Agent) है जिसका उपयोग DNA को पोषक जीवाणु कोशिका के प्लाज्मिड तक पहुँचाने के लिए किया जाता है। वाहक (Vector) DNA को एण्डोन्यूक्लिएज की सहायता से खोलते हैं। DNA लाइगेज प्रकिण्व की सहायता से DNA खण्ड वेक्टर के प्लाज्मिड या गुणसूत्र (DNA) से जोड़ देते हैं। अब DNA खण्डयुक्त प्लाज्मिड को पुनर्संयोजित प्लाज्मिड कहते हैं।

(iii) पोषक कोशिका का पुनर्निर्माण (Transformation of host cell)—संयुक्त प्लाज्मिड को पोषक जीवाणु कोशिका के अन्दर प्रवेश कराते हैं जहाँ पर जीवाणु कोशिका द्वारा प्लाज्मिड का निर्माण किया जाता है। इन जीवाणुओं को कैल्सियम क्लोराइड के तनु एवं ठण्डे विलयन में रखते हैं। यह विलयन जीवाणु कोशिका द्वारा विदेशी DNA को ग्रहण करने में मदद करता है।

इस प्रकार से DNA के पुनर्निर्माण के लिए E. coli नामक जीवाणु का उपयोग किया जाता है क्योंकि

  • इसका विस्तृत रूप से अध्ययन किया जा चुका है।
  • कैल्सियम क्लोराइड द्वारा उपचारित इस जीवाणु की कोशिका में DNA पुनर्निर्माण तीव्रता से होता है।
  • यह जीवाणु लगभग सभी प्रकार के DNA का अनुलिपिकरण कर सकता है।
    इस प्रकार प्राप्त DNA की अनुकृतियों को जीन बैंक या जीनोमिक लाइब्रेरी में रखा जाता है।

2. पादप क्लोनिंग (Plant cloning)—कायिक प्रवर्धन द्वारा उत्पादित सन्ततियों को क्लोन कहते हैं वर्तमान युग में ऊतक संवर्धन तकनीक द्वारा पौधों के क्लोन तैयार किये जाते हैं। इस कार्य हेतु पौधे के भाग (एक्सप्लाण्ट) का चयन करके उसे एक कृत्रिम संवर्धन माध्यम में उगाया जाता है। संवर्धन माध्यम में सर्वप्रथम कोशिकाओं का एक असंगठित एवं अविभाजित समूह बनता है जिसे कैलस (Callus) कहते हैं । इस कैलस के टुकड़ों को अब हॉर्मोन युक्त अन्य संवर्धन माध्यम में उगाया जाता है जिससे छोटे-छोटे पौधे बनते हैं । इन पौधों को अब खेतों/क्यारियों में रोपित किया जाता है।

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MP Board Class 12th Biology Solutions Chapter 10 मानव कल्याण में सूक्ष्मजीव

MP Board Class 12th Biology Solutions Chapter 10 मानव कल्याण में सूक्ष्मजीव

मानव कल्याण में सूक्ष्मजीव NCERT प्रश्नोत्तर

प्रश्न 1.
जीवाणुओं को नग्न नेत्रों द्वारा नहीं देखा जा सकता, लेकिन सूक्ष्मदर्शी की सहायता से देखा जा सकता है। यदि आपको अपने घर से अपनी जीव विज्ञान प्रयोगशाला तक एक नमूना ले जाना हो . और सूक्ष्मदर्शी की सहायता से इस नमूने से सूक्ष्मदर्शी की उपस्थिति को प्रदर्शित करना हो, तो किस प्रकार का नमूना आप अपने साथ ले जायेंगे और क्यों?
उत्तर
यदि हमको अपने घर से जीव विज्ञान प्रयोगशाला तक सूक्ष्मजीव का नमूना ले जाकर सूक्ष्मदर्शी में अवलोकन करना हो तो हम एक सड़ी (खराब) ब्रेड का टुकड़ा अथवा थोड़ी मात्रा में दही ले जायेंगे। क्योंकि ये दोनों चीजें आसानी से उपलब्ध हैं और इनमें सूक्ष्मजीव आसानी से दिखाई दे जाते हैं। सूक्ष्मजीव लैक्टोबेसीलसया अन्य लैक्टिक एसिड बैक्टीरिया (L.A.B.) दूध में वृद्धि कर उसे दही में परिवर्तित करते हैं। इसी प्रकार ब्रेड पर दिखाई पड़ने वाला हरा रंग कवक (fungi) होता है, इसके बीज (spore) वायु में उपस्थित रहते हैं तथा खाद्य पदार्थ में वृद्धि करते रहते हैं।

प्रश्न 2.
उपापचय के दौरान सूक्ष्मजीव गैसों का निष्कासन करते हैं, उदाहरण द्वारा सिद्ध कीजिए।
उत्तर
डोसा व इडली (Dosa and Idli) निर्माण दाल-चावल के आटे को गीला कर जीवाणु द्वारा किण्वित कराने के उपरांत होता है। किण्वन के कारण आटे में से CO2, निकलती है। इस क्रिया को खमीर उठाना कहा जाता है । इस क्रिया के बाद आटा ढीला व मुलायम तथा फूली हुई आकृति वाला बन जाता है । इस आटे के द्वारा डोसा व इडली बनाया जाता है।

स्विस चीज (Swiss cheese) में पाये जाने वाले बड़े-बड़े छिद्र प्रोपिओनिबैक्टीरियम शारमैनाई नामक जीवाणु द्वारा अधिक मात्रा में उत्पन्न CO2, के कारण होते हैं। रॉक्यूफोर्ट चीज़ एक विशेष प्रकार के कवक पेनीसीलियम रॉक्वीफोर्टी (Penicillium roqueforti) की सहायता से तैयार किया जाता है। इस प्रकार के पनीर में विशिष्ट सुगंध होती है।।

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प्रश्न 3.
किस भोजन (आहार) में लैक्टिक एसिड बैक्टीरिया मिलते हैं ? इनके कुछ लाभप्रद उपयोगों का वर्णन कीजिए।
उत्तर
दही (Curd) इसे दूध में जीवाणुओं के द्वारा किण्वन क्रिया के फलस्वरूप प्राप्त किया जाता है। दूध से दही के निर्माण में भाग लेने वाले जीवाणु लैक्टिक एसिड जीवाणु (Lactic acid bacteria-LAB.) होते हैं।

इन जीवाणुओं में लैक्टोबैसीलस एसीडोफिलस (Lactobacillus acidphilous), लै.लैक्टिस (L. Lactis) व स्ट्रेप्टोकोकस लैक्टिस (Streptococcus lactis) होते हैं। ये जीवाणु लैक्टिक अम्ल का उत्पादन करते हैं जो 45° से कम तापक्रम पर दुग्ध प्रोटीन को स्कंदित तथा आंशिक रूप से बचा देते हैं । आरंभ में दही को थोड़ी मात्रा में जामन (निवेश द्रव्य) के रूप में हल्के गर्म दूध में मिलायी जाती है।

इस जामन में असंख्य लैक्टिक एसिड जीवाणु होते हैं जो उपयुक्त ताप पर कई गुना वृद्धि करते हैं जिसके फलस्वरूप दूध दही में परिवर्तित हो जाता है। यही नहीं इसमें Vit. B12 की मात्रा बढ़ने से पोषण संबंधी गुणवत्ता में भी सुधार आता है।

दध से दही बनते समय लैक्टोबेसीलसलैक्टोज शर्करा को किण्वित कर लैक्टिक अम्ल में बदलते हैं तो स्ट्रेप्टोकोकस कैसीन प्रोटीन (दुग्ध प्रोटीन) को स्कंदित करते हैं। हल्के गर्म दूध में जामन डालने के पश्चात् लगभग 5 घण्टे में दही का निर्माण हो जाता है।

प्रश्न 4.
कुछ पारंपरिक आहार जो गेहूँ, चावल तथा चना (अथवा उनके उत्पाद) से बनते हैं और उनमें सूक्ष्मजीवों का उपयोग शामिल हो, उनके नाम बताइए।
उत्तर
बहुत से पारंपरिक भारतीय आहार है जो गेहूँ, चावल तथा चना से बनते हैं और उनमें सूक्ष्मजीवों का प्रयोग शामिल होता है उनके नाम इस प्रकार हैं दही, पनीर, चीज़, डोसा, इडली, कुछ भारतीय ब्रेड जैसे-भटूरा दक्षिण भारत के कुछ भागों में एक पारंपरिक पेय टोडी है।

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प्रश्न 5.
हानिप्रद जीवाणुओं द्वारा उत्पन्न करने वाले रोगों के नियंत्रण में सूक्ष्मजीव किस प्रकार महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं ?
उत्तर
सबसे पहले प्रतिजैविक पेनिसिलीन (Penicillin) की खोज हुई थी। सन् 1928 में अलेक्जेण्डर फ्लेमिंग (Alexander fleming) ने खोजा था। अलेक्जेण्डर फ्लेमिंग जब स्टेफिलोकोकस(Staphylococcus) नामक जीवाणु पर कार्य कर रहे थे तब उन्होंने देखा कि जिन प्लेटों पर वह कार्य कर रहे थे उनमें एक बिना धुली प्लेट पर मोल्ड (Moulds) उत्पन्न हो गये हैं, इस कारण स्टैफिलोकोकस वृद्धि नहीं कर सका। उन्होंने पाया कि यह प्रभाव मोल्ड द्वारा उत्पन्न एक रसायन पेनिसिलीन द्वारा होता है। क्योंकि पेनिसिलीन पेनिसिलियम नोटेटम (Penicillium notatum) नामक मोल्ड से उत्पन्न होता है। इसी कारण इसका नाम उन्होंने पेनिसिलीन रखा।

पेनिसिलीन की खोज के बाद अनेक प्रतिजैविक जैसे टेट्रासाइक्लिन, कैनामाइसिन, नियोमाइसीन, ल्यूकोमाइसीन आदि को पृथक किया जा चुका है। इनका प्रयोग जीवाणु, कवक, विषाणु तथा अन्य सूक्ष्मजीवों द्वारा उत्पन्न रोगों के उपचार में किया जाता है। प्लेग, काली खाँसी, डिफ्थीरिया (गलघोंटू) लेप्रोसी (कुष्ठ रोग) जैसे भयानक रोग जिनसे संसार के लाखों लोग मरे हैं, इसके उपचार के लिए एंटीबायोटिक ने हमारी क्षमता में वृद्धि किया तथा एक शक्ति के रूप में उभर कर सामने आया है।

प्रश्न 6.
किन्हीं दो कवक प्रजातियों के नाम लिखिए, जिनका प्रयोग प्रतिजैविकों(एंटीबायोटिक्स) के उत्पादन में किया जाता है ?
उत्तर
पेनीसिलिन, पेनीसिलियम नोटेटमसे तथा पेनीसिलीन क्रासोजिनम नामक मोल्ड से उत्पन्न होता है।

प्रश्न 7.
वाहित मल से आप क्या समझते हैं, वाहित मल हमारे लिए किस प्रकार से हानिप्रद है ?
उत्तर
प्रतिदिन नगर एवं शहरों से व्यर्थ-जल की एक बहुत बड़ी मात्रा जनित होती है। इस व्यर्थ जल का प्रमुख घटक मनुष्य का मलमूत्र है। नगर के इस व्यर्थ जल को वाहित मल (सीवेज) भी कहते हैं। इसमें कार्बनिक पदार्थों की बड़ी मात्रा तथा सूक्ष्मजीव पाये जाते हैं जो अधिकांशतः रोगजनकीय होते हैं।

प्रश्न 8.
प्राथमिक तथा द्वितीयक वाहित मल उपचार के बीच पाए जाने वाले मुख्य अंतर कौन से
उत्तर
प्राथमिक तथा द्वितीयक वाहित मल उपचार में अंतर
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प्रश्न 9.
सूक्ष्मजीवों का प्रयोग ऊर्जा के स्रोतों के रूप में भी किया जा सकता है यदि हाँ तो किस प्रकार से ? इस पर विचार कीजिए।
उत्तर
हाँ, सूक्ष्मजीवों का प्रयोग ऊर्जा के स्रोतों के रूप में भी किया जा सकता है। बायो गैस एक प्रकार से गैसों का मिश्रण है जो सूक्ष्मजीवों की सक्रियता द्वारा उत्पन्न होती है। वृद्धि तथा उपापचय के दौरान सूक्ष्मजीव विभिन्न किस्मों के गैसीय उत्पाद उत्पन्न करते हैं। जैसे-मीथेन, हाइड्रोजन सल्फाइड तथा CO2, I ये गैसें बायोगैस का निर्माण करती हैं। चूँकि ये ज्वलनशील होती हैं, इस कारण इनका प्रयोग ऊर्जा के स्रोत के रूप में किया जा सकता है । बायो गैस को सामान्यत: गोबर गैस भी कहते हैं।

प्रश्न 10.
सूक्ष्मजीवों का प्रयोग रसायन उर्वरकों तथा पीड़कनाशियों के प्रयोग को कम करने के लिए भी किया जा सकता है। यह किस प्रकार सम्पन्न होगा ? व्याख्या कीजिये।
उत्तर
सहसंबंध द्वारा (By correlation)-उच्च पौधों की जड़ों तथा कवकों के सह-संबंध को माइकोराइजा (Mycorrhiza) कहते हैं। माइकोराइजा का निर्माण ग्लोमस (glomus) वंश के अनेक सदस्यों द्वारा होता है। कवक मृदा में उपस्थित फॉस्फोरस का अवशोषण करके पादपों को देते हैं तथा पौधे की जड़ इन्हें पनपने का स्थान तथा भोजन प्रदान करती है। इसके उदाहरण ओक (oak), बीच (beech), तथा अनेक पाइन (pines), पादप हैं ।

इस प्रकार के संबंधों से पादप को अनेक लाभ होते हैं जैसे मूलवातोढ़ (root born), रोगजनक के प्रति प्रतिरोधकता, लवणता तथा सूखे के प्रति सहनशीलता एवं विकास प्रदर्शित करते हैं। . सायनोबैक्टीरिया स्वपोषित सूक्ष्मजीव है जो जलीय तथा स्थलीय वायुमण्डल में विस्तृत रूप से पाये जाते हैं। इनमें बहुत-से जीव वायुमण्डलीय नाइट्रोजन को स्थिरीकृत करते हैं, जैसे- एनाबीना, नॉस्टॉक, ऑसिलेटोरिया आदि । नील-हरित शैवाल या सायनोबैक्टीरिया महत्वपूर्ण जैव उर्वरक हैं। ये मृदा में कार्बनिक पदार्थों को बढ़ाते हैं जिससे मृदा की उर्वरता बढ़ती है। वर्तमान में किसान इन्हीं जैव उर्वरकों का भरपूर उपयोग कर रहे हैं।

प्रश्न 11.
जल के तीन नमूने लो-एक नदी का जल, दूसरा अनुपचारित वाहित मल-जल तथा तीसरा वाहित मल उपचार संयंत्र से निकला द्वितीयक बहिःस्राव। इन तीनों नमूनों पर “अ”तथा “ब”, “स” के लेबल लगाओ। इस बारे में प्रयोगशाला कर्मचारी को पता नहीं है कि कौन-सा क्या है ? इन तीनों नमूनों “अ”, “ब” तथा “स” के बी. ओ. डी. का रिकार्ड किया गया जो क्रमश: 20mg/L,8mg/L तथा 400mg/L निकला। इन नमूनों में कौन-सा सबसे अधिक प्रदूषित नमूना है ? इस तथ्य को सामने रखते हुए कि नदी का जल अपेक्षाकृत अधिक स्वच्छ है। क्या आप सही लेबल का प्रयोग कर सकते हैं?
उत्तर
बी. ओ. डी. ऑक्सीजन की उस मात्रा को संदर्भित करता है जो जीवाणु द्वारा एक लीटर पानी में उपस्थित कार्बनिक पदार्थों की खपत कर उन्हें ऑक्सीकृत कर दें। वाहित मल का तब तक उपचार किया जाता है जब तक बी. ओ. डी. घट न जाए । जल के एक नमूने में सूक्ष्मजीवियों द्वारा ऑक्सीजन के उद्ग्रहण की दर का मापन बी. ओ. डी. परीक्षण से किया जाता है, अत: अप्रत्यक्ष रूप से जल में उपस्थित कार्बनिक पदार्थों का मापन ही बी. ओ. डी. है। जब व्यर्थ जल का बी. ओ. डी. अधिक होगा, तब उसकी प्रदूषण क्षमता भी अधिक होगी।

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दिए गए जल के तीन नमूनों में से नदी के जल का बी. ओ. डी. ।

(अ) 20mg/L है, अनुपचारित वाहित मल-जल का बी. ओ. डी.।
(ब) 8mg/L तथा द्वितीयक बहि:स्राव के जल का बी.ओ.डी.।
(स) 400mg/L है।

सही लेबल इस प्रकार है

(अ) नदी का जल (स्वच्छ जल)।
(ब) द्वितीयक बहि:स्राव (उपचारित वाहित मल)।
(स) दूसरा अनुपचारित (वाहित मल-जल)।

प्रश्न 12.
उस सूक्ष्मजीव का नाम बताइए जिसमें साइक्लोस्पोरिन-ए( प्रतिरक्षा निषेधात्मक औषधि) तथा स्टैटिन (रक्त कोलेस्ट्रॉल लघुकरण कारक) को प्राप्त किया जाता है। .
उत्तर
साइक्लोस्पोरिन-ए जिसका प्रयोग अंग प्रतिरोपण में प्रतिरक्षा निरोधक (इम्यूनोसप्रेसिव) के रूप में रोगियों में किया जाता है। इसका उत्पादन ट्राइकोडर्मा पॉलीस्पोरम नामक कवक से किया जाता है। मोनोस्कस परप्यूरीअस यीस्ट से स्टैटिन उत्पन्न किया जाता है । इस स्टैटिन का व्यापारिक स्तर पर उपरोक्त रक्त कोलेस्ट्रॉल को कम करने वाले कारक के रूप में किया जाता है।

प्रश्न 13.
निम्नलिखित में सूक्ष्मजीवियों की भूमिका का पता लगाइए तथा अपने अध्यापक से इनके विषय में विचार-विमर्श कीजिए
(1) एकल कोशिका प्रोटीन (एस.सी.पी.)
(2) मृदा।
उत्तर
(1) एकल कोशिका प्रोटीन (एस.सी.पी.)-पशु तथा मानव पोषण के लिए प्रोटीन के वैकल्पिक स्रोतों में से एक एकल कोशिका प्रोटीन है। सूक्ष्मजीवों को प्रोटीन के अच्छे स्रोत के रूप में बड़े पैमाने पर उत्पादन किया जा रहा है वास्तव में, अधिकांश लोगों द्वारा मशरूम भोजन के रूप में खाए जाने लगे हैं। अत: बड़े पैमाने में मशरूम संवर्धन एक प्रकार से बढ़ता हुआ उद्योग है।

जिससे अब विश्वास होने लगा है कि सूक्ष्मजीव आहार के रूप में स्वीकार्य हो जायेंगे। सूक्ष्मजीवी स्पाइरूलाइना में प्रोटीन, खनिज, वसा, कार्बोहाइड्रेट तथा विटामिन प्रचुर मात्रा में विद्यमान हैं । इसका उपयोग पर्यावरणीय प्रदूषण को भी कम करता है । सूक्ष्मजीव जैसे मिथाइलोफिलस मिथाइलोट्रोपस की वृद्धि तथा बायोमास उत्पादन की उच्च दर से संभावित 25 टन तक प्रोटीन उत्पन्न कर सकते हैं।

(2) मृदा-जैव उर्वरक एक प्रकार के जीव है, जो मृदा की पोषक गुणवत्ता को बढ़ाते हैं । जैव उर्वरकों का मुख्य स्रोत जीवाणु, कवक तथा सायनोबैक्टीरिया होते हैं । लेग्यूमिनस पादपों की जड़ों पर स्थित ग्रंथियों का निर्माण राइजोबियम के सहजीवी संबंध द्वारा होता है। यह जीवाणु वायुमंडलीय नाइट्रोजन को स्थिरीकृत कर कार्बनिक रूप में परिवर्तित कर देते हैं । पादप इसका उपयोग पोषकों के रूप में करते हैं। यह भी वायुमंडलीय नाइट्रोजन को स्थिर कर सकते हैं। इस प्रकार मृदा में नाइट्रोजन अवयव बढ़ जाते हैं।

प्रश्न 14.
निम्नलिखित को घटते क्रम में मानव समाज कल्याण के प्रति उनके महत्व के अनुसार संयोजित करें, महत्वपूर्ण पदार्थ को पहले रखते हुए कारणों सहित अपना उत्तर लिखिए बायो गैस, सिट्रिक एसिड, पेनीसिलिन तथा दही।
उत्तर
दी गई सूची में सबसे महत्वपूर्ण पदार्थ पेनीसिलीन है क्योंकि यह मानव सभ्यता के कल्याण हेतु महत्वपूर्ण है। यह कई जानलेवा बीमारियों को ठीक करता है। इसके बाद सूची में बायोगैस का नंबर आता है क्योंकि यह ईंधन का स्रोत है। इसके बाद दही का स्थान आता है क्योंकि यह हमें पोषक दुग्ध उत्पाद प्रदान करता है। अंत में सिट्रिक एसिड आता है, क्योंकि इसका उपयोग प्रोसेसिंग उद्योग में किया जाता है।

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प्रश्न 15.
जैव उर्वरक किस प्रकार से मृदा की उर्वरता को बढ़ाते हैं ?
उत्तर
जैव उर्वरक एक प्रकार के जीव हैं जो मृदा की पोषक गुणवत्ता को बढ़ाते हैं । जैव उर्वरकों का मुख्य स्रोत कवक, जीवाणु तथा सायनोबैक्टीरिया होते हैं। यह जीवाणु वायुमंडलीय नाइट्रोजन को स्थिरीकृत कर कार्बनिक रूप में परिवर्तित कर देते हैं। दूसरे जीवाणु ऐजोस्पाइरिलम तथा ऐजोबैक्टर भी वायुमण्डलीय नाइट्रोजन को स्थिर कर सकते हैं । धान के खेत में सायनोबैक्टीरिया महत्वपूर्ण जैव उर्वरक की भूमिका निभाते हैं। नील-हरित शैवाल भी मृदा में कार्बनिक पदार्थ बढ़ा देते हैं, जिससे उसकी उर्वरता बढ़ जाती है।
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मानव कल्याण में सूक्ष्मजीव अन्य महत्वपूर्ण प्रश्नोत्तर

मानव कल्याण में सूक्ष्मजीव वस्तुनिष्ठ प्रश्न

1. सही विकल्प चुनकर लिखिए

प्रश्न 1.
मढ़े जैसा एक खट्टा तरल दुग्ध उत्पाद है
(a) पनीर
(b) दही
(c) योगर्ट
(d) इनमें से कोई नहीं।
उत्तर
(c) योगर्ट

प्रश्न 2.
क्लॉस्ट्रिडियम, एजोटोबैक्टर, राइजोबियम भूमि की उर्वरा शक्ति किसके द्वारा बढ़ाते हैं
(a) नाइट्रोजन स्थिरीकरण से
(b) विनाइट्रोजनीकरण से
(c) इमल्सीफिकेशन से
(d) विटामिन से।
उत्तर
(a) नाइट्रोजन स्थिरीकरण से

प्रश्न 3.
टेट्रासाइक्लिन प्राप्त किया जाता है
(a) स्ट्रे. रेमोसस से
(b) स्ट्रे. ऑरियोफैसिएन्स से
(c) स्ट्रे. फ्रेडी से
(d) स्टे. नोडोसमसे।
उत्तर
(b) स्ट्रे. ऑरियोफैसिएन्स से

प्रश्न 4.
स्ट्रेप्टोमाइसेज ओलिवेसियम एवं बैसिलस मेगाथीरियम से प्राप्त किया जाता है
(a) विटामिन C
(b) विटामिन D
(c) विटामिन E
(d) विटामिन B12
उत्तर
(d) विटामिन B12

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प्रश्न 5.
न्यूमोनिया, टी. बी. व कोढ़ के उपचार के लिये उपयोग किया जाता है
(a) जीवाणुभोजियों का
(b) केवल जीवाणु का
(c) केवल विषाणु का
(d) कवकों का।
उत्तर
(a) जीवाणुभोजियों का

प्रश्न 6.
जैव तकनीकी एवं सूक्ष्मजैविकी में विषाणुओं का उपयोग किया जाता है
(a) दवाई के रूप में
(b) वेक्टर के रूप में
(c) जल उपचार में
(d) तीनों क्षेत्र में।
उत्तर
(b) वेक्टर के रूप में

प्रश्न 7.
बेकरी में रोटी, बिस्कुट व अन्य उत्पाद को प्राप्त करने में उपयोगी है
(a) विषाणु
(b) जीवाणु
(c) यीस्ट
(d) प्रोटोजोअन।
उत्तर
(c) यीस्ट

प्रश्न 8.
यीस्ट में कौन-सा विटामिन पाया जाता है
(a) C
(b)D
(c)B complex
(d)A.
उत्तर
(c)B complex

प्रश्न 9.
स्ट्रे. रेमोसस से कौन-सी औषधि प्राप्त करते हैं
(a) टेरामाइसिन
(b) निओमाइसिन
(c) इरिथ्रोमाइसिन
(d) ऐक्टिडीन।
उत्तर
(a) टेरामाइसिन

प्रश्न 10.
नाइट्रोसोमोनास एवं नाइट्रोबैक्टर जीवाणु है
(a) डीनाइट्रीफाइंग
(b) नाइट्रीफाइंग
(c) एसीटोबैक्टर
(d) हॉर्मोन प्रोड्यूसर
उत्तर
(b) नाइट्रीफाइंग

प्रश्न 11.
लैक्टिक एसिड बैक्टीरिया द्वारा दूध से दही में परिवर्तन करने में किस विटामिन की मात्रा में वृद्धि होती है
(a) विटामिन C
(b) विटामिन D
(c) विटामिन B12
(d) विटामिन E
उत्तर
(c) विटामिन B12

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प्रश्न 12.
मीथेनोजेन निम्नलिखित में से किसमें नहीं पाये जाते हैं
(a) मवेशियों के मेन
(b) गोबर गैस संयंत्र
(c) पानी से भरे धान के खेत की तली पर
(d) सक्रियत आपंक में।
उत्तर
(c) पानी से भरे धान के खेत की तली पर

प्रश्न 13.
वाहित मल के प्राथमिक उपचार में जल किससे मुक्त होता है
(a) घुलित अशुद्धियाँ
(b) स्थिर कण
(c) विषैले पदार्थ
(d) हानिकारक जीवाणु।
उत्तर
(b) स्थिर कण

प्रश्न 14.
अपशिष्ट जल की B.O.D. निम्न में से किसकी मात्रा के आंकलन से जानी जाती है
(a) कुल कार्बनिक पदार्थ
(b) जैव अपघटनीय कार्बनिक पदार्थ
(c) ऑक्सीजन की मुक्ति
(d) ऑक्सीजन की खपत।
उत्तर
(d) ऑक्सीजन की खपत।

प्रश्न 15.
भारत में गौवंश के गोबर से बायो गैस उत्पादन की तकनीक प्रमुखतः किसके प्रयासों से विकसित की गई
(a) गैस अथॉरिटी ऑफ इंडिया
(b) तेल एवं प्राकृतिक गैस आयोग
(c) भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान तथा खादी एवं ग्राम उद्योग विभाग
(d) इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन।
उत्तर
(c) भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान तथा खादी एवं ग्राम उद्योग विभाग

प्रश्न 16.
मुक्तजीवी फंगस ट्राइकोडर्मा का प्रयोग किया जा सकता है
(a) कीटों को मारने में
(b) पादप रोगों के जैव नियंत्रण में
(c) बटर फ्लाई के कैटरपिलर के नियंत्रण में
(d) एंटीबायोटिक्स के निर्माण में।
उत्तर
(b) पादप रोगों के जैव नियंत्रण में

प्रश्न 17.
माइकोराइजा पोषक पौधों की किस कार्य में मदद नहीं करता
(a) इसकी फॉस्फोरस ग्रहण करने की क्षमता बढ़ाने में
(b) इसकी शुष्कता ग्रहण करने की क्षमता बढ़ाने में
(c) इसकी जड़ों की रोगजनकों के प्रति प्रतिरोधकता बढ़ाने में
(d) इसकी कीटों के लिए प्रतिरोधकता बढ़ाने में।
उत्तर
(a) इसकी फॉस्फोरस ग्रहण करने की क्षमता बढ़ाने में

2. रिक्त स्थानों की पूर्ति कीजिए

1. जीव विज्ञान की वह शाखा जिसके अंतर्गत सूक्ष्म जीवों (आँखों से न दिखने वाले) का अध्ययन करते हैं, ………… कहलाता है।
2 पनीर बनाने के लिये ……….. वंश के जीवाणु का उपयोग किया जाता है।
3. नाइट्रोसोमोनास, नाइट्रोबैक्टर ………….. जीवाणु है।
4. सिरका उद्योग में ……….. जीवाणु का उपयोग होता है।
5. पेक्टिनेज एंजाइम …………. प्रजाति की सहायता से बनाते हैं।
6. सूक्ष्म जीवाणु का आकार …………. mm से कम होता है।
7. दही …………. जीवाणु की सहायता से बनाया जाता है।
8. दूध से चीज़ बनाते समय फलों की सुगंध डालने से बना पदार्थ …………. कहलाता है। .
9. दूध से सीधे बना छेना …………. छेना होता है।
10. कवकरोधी जीवाण्विक प्रतिरक्षी पदार्थ …………. होता है।
उत्तर

  1. सूक्ष्मजैविकी
  2. लैक्टोबैसिलस
  3. नाइट्रीफाइंग
  4. एसीटोबैक्टर एसीटी
  5. क्लॉस्ट्रिडियम
  6. 0-1
  7. लैक्टोबैसिलस
  8. योगर्ट
  9. कच्चा
  10. पॉलीमिक्सिन।

3. सही जोड़ी बनाइये

I. ‘A’- ‘B’

1. पेनिसिलिन – (a) पे. सिट्रिनम
2 साइट्रिनिन – (b) पे. क्लेविफोर्मी
3. क्लैविसिन – (c) टाइकोडर्मा स्पी
4. ग्लियोटॉक्सिन – (d) पेनिसिलियम नोटेटम।
उत्तर
1.(d), 2. (a), 3. (b), 4. (c)

II. ‘A’ – ‘B’

1. विटामिन प्रोड्यूसर – (a) ऐस्परजिलस
2 प्रतिजैविक उत्पादक – (b) मोनैस्कस
3. हॉर्मोन उत्पादक – (c) यीस्ट
4. एंजाइम उत्पादक – (d) पेनिसिलियम
5. वर्णक उत्पादक – (e) जिबरेला फ्यूजिकोराई।
उत्तर
1.(c), 2. (d), 3.(e), 4. (a), 5. (b).

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III. ‘A’ – ‘B’

1. पेनिसिलिन – (a) स्ट्रेप्टोमाइसिस वेनक्यूली
2. क्लोरेमफिनीकाल – (b) स्ट्रेप्टोमाइसिस राइमोसस
3. टेरामाइसिन – (c) स्ट्रेप्टोमाइसिस ओरियोफेसियन्स
4. टेट्रासाइक्लिन – (d) पेनिसिलियम क्रासोजिनम।
उत्तर
1. (d), 2. (a), 3. (b), 4. (c).

प्रश्न 4.
एक शब्द में उत्तर दीजिए
1. मिट्टी में पाये जाने वाले दो नाइट्रोजन स्थिरीकारक जीवाणुओं के नाम बताइए।
2 सूक्ष्मजीवों द्वारा कीट / खरपतवार के नियंत्रण को क्या कहते हैं ?
3. सहजीवी एवं असहजीवी नाइट्रोजन स्थिरीकारक जीवाणुओं के नाम बताइए।
4. IPM का पूरा नाम लिखिए।
5. पीड़कनाशी का नाम दीजिए।
6. फसल के साथ उगे अवांछित पौधे को क्या कहते हैं ?
उत्तर

  1. एजोटोबैक्टर, बैसिलस पॉलीमिक्सा
  2. जैविक नियंत्रण
  3. सहजीवी- राइजोबियम, असहजीवी– एजोटोबैक्टर
  4. इन्टीग्रेटेड पेस्ट मैनेजमेंट
  5. एजेडिरेक्टिन
  6. खरपतवार

मानव कल्याण में सूक्ष्मजीव अति लघु उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 1.
प्रमुख उपयोगी सूक्ष्मजीवों के नाम लिखिए।
उत्तर
प्रमुख उपयोगी सूक्ष्मजीवों के नाम जीवाणु, कवक और विषाणु हैं।

प्रश्न 2.
जिबरेलिन नामक हॉर्मोन किस कवक से प्राप्त किया जाता है ?
उत्त
जिबरेलिन नामक हॉर्मोन जिबरेला फ्यूजिकोराई से प्राप्त किया जाता है।

प्रश्न 3.
डेयरी उद्योग में जीवाणु से कौन-कौन-से उत्पाद बनाए जाते हैं ?
उत्तर
डेयरी उद्योग में जीवाणुओं से दही, मक्खन, पनीर, मट्ठा एवं योगर्ट बनाए जाते हैं। इसके लिये लेक्टोबेसीलस स्पी. एवं स्ट्रेप्टोकोकस स्पी. आदि का उपयोग करते हैं।

प्रश्न 4.
प्रतिजैविक किन सूक्ष्मजीवों से प्राप्त करते हैं ?
उत्तर
प्रतिजैविक मुख्यत: जीवाणु एवं कवक द्वारा प्राप्त किया जाता है।

प्रश्न 5.
सूक्ष्म जीव विज्ञान (सूक्ष्मजैविकी) किसे कहते हैं ?
उत्तर
सूक्ष्म जीव विज्ञान जीव विज्ञान की वह शाखा है, जिसके अन्तर्गत सूक्ष्मदर्शी से दिखाई देने वाले सूक्ष्मजीवों का अध्ययन किया जाता है।

प्रश्न 6.
निम्नलिखित उत्पादन करने वाले कवक का नाम बताइए
(1) साइट्रिक अम्ल
(2) विटामिन B2,
उत्तर
उत्पाद का नाम – उत्पादन करने वाले कवक का नाम

  1. साइट्रिक अम्ल -पेनिसिलियम साइट्रियम, पेनिसिलियम ल्यूटियम, म्यूकर पाइरीफार्मिस एवं ऐस्परजिलस नाइगर।
  2. विटामिन B2 – क्लॉस्ट्रीडियम ऐसीटोन्यूटिलिकम, एरीमोथीसियम ऐस्बी।

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प्रश्न 7.
योगर्ट क्या है ?
उत्तर
योगर्ट एक दुग्ध उत्पाद है, जो मढे जैसा खट्टा तरल पदार्थ है।

प्रश्न 8.
बोतल में बंद गंगाजल बहुत अधिक समय तक रखने पर भी नहीं सड़ता। क्यों?
उत्तर
गंगा के जल में वर्षों से मृत शरीर तथा अन्य उत्सर्जी पदार्थों का विसर्जन किया जाता है, लेकिन जीवाणुभोजी की उपस्थिति के कारण यह जल बोतल में बहुत अधिक समय तक रखने पर भी नहीं सड़ता।

प्रश्न 9.
एंटीबायोटिक पेनिसिलिन की खोज किसने की?
उत्तर
एलेक्जेंडर फ्लेमिंग ने।

प्रश्न 10.
पेनिसिलिन किस सूक्ष्मजीव/कवक से प्राप्त होता है ?
उत्तर
पेनिसिलियम नोटेटम (Penicillium notatum) से।

प्रश्न 11.
औद्योगिक रूप से सिट्रिक अम्ल बनाने में किस सूक्ष्मजीव का प्रयोग होता है ?
उत्तर
एस्परजिलस नाइगर (Aspergillus niger)।

प्रश्न 12.
किसी एक मीथेनोजेन जीवाणु का नाम लिखिए।
उत्तर
मीथेनोबैक्टीरियम प्रजाति (Methanobacterium sp.)

प्रश्न 13.
सीवेज ट्रीटमेन्ट में अवायवीय अवपंक (एनएरोबिक स्लज) में कौन से जीवाण पाये जाते हैं ?
उत्तर
मीथेनोजेन्स (Methanogens)

प्रश्न 14.
लेडीबर्ड क्या है ?
उत्तर
एक कीट है जिसको एफिड के नियंत्रण हेतु जैव नियंत्रक के रूप में प्रयोग किया जाता है।

प्रश्न 15.
IPM का पूरा नाम लिखिए।
उत्तर
इंटीग्रेटेड पेस्ट मैनेजमेंट (Integrated Pest Management)।

प्रश्न 16.
एक स्वपोषी नाइट्रोजन स्थिरीकरणकर्ता सूक्ष्मजीव का नाम बताइये।
उत्तर
एनाबीना (Anabaena)

प्रश्न 17.
माइकोराइजा किस विशिष्ट खनिज का अवशोषण कर पौधों की जड़ों को देती है जो पौधा स्वयं अवशोषित नहीं कर पाता।
उत्तर
फॉस्फोरस।

प्रश्न 18.
दूध को दही में परिवर्तित करने वाले सूक्ष्मजीव का नाम बताइये।
उत्तर
लैक्टोबैसीलस प्रजाति (Lactobacillus spe.)

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प्रश्न 19.
जैव वैज्ञानिक नियंत्रण के तहत् कौन-से कवक का उपयोग पादप रोगों के उपचार में किया जाता है।
उत्तर
ट्राइकोडर्मा प्रजाति (Trichoderma spe.)

प्रश्न 20.
स्वीस पनीर बनाने के लिये किस जीवाणु का प्रयोग होता है।
उत्तर
प्रोपिओनीबैक्टीरियम शारमैनाई (Propionibacterium sharmanii)।

प्रश्न 21.
कौन-सा पनीर एक विशिष्ट कवक की वृद्धि से परिपक्व होता है।
उत्तर
रॉक्फोर्ट पनीर (Roquefort cheese)।

प्रश्न 22.
बिना आसवन के बनने वाले दो ऐल्कोहॉलिक पेयों के नाम लिखिए।
उत्तर
बियर (Beer) तथा वाइन (Wine)

प्रश्न 23.
किण्वित रस के आसवन से तैयार होने वाले दो ऐल्कोहॉलिक पेयों के नाम लिखिए।
उत्तर
व्हिस्की (Whisky) तथा रम (Rum)।

प्रश्न 24.
बी. ओ. डी. का पूरा नाम लिखिए।
उत्तर
बायोकैमिकल या बायोलॉजिकल ऑक्सीजन डिमांड (Biochemical or biological Oxygen Demand)

प्रश्न 25.
उस जीवाणु का नाम बताइये जो मिट्टी के भीतर नाइट्रोजन का स्थिरीकरण करता है ?
उत्तर
स्पाइरुलीना।

प्रश्न 26.
किसी ऐसे संक्रमणकारी कारक का नाम बताइये जिसमें न तो डी.एन.ए. होता है और न ही आर. एन. ए.
उत्तर
प्रियॉन (Prion)

मानव कल्याण में सूक्ष्मजीव लघु उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 1.
पनीर क्या है ? इसे किस प्रकार तैयार किया जाता है ?
उत्तर
पनीर एक दुग्ध उत्पाद है, जिसमें 20 से 30% प्रोटीन होती है। दूध को साफ पतले कपड़े में छानकर 60°C पर 30 मिनट तक गर्म कर 15 सेकण्ड तक 75°C गर्म करते हैं। इसके पश्चात् इसे 30°C तापक्रम तक ठंडा करते हैं, इसमें लैक्टिक अम्ल जीवाणु स्ट्रेप्टोकोकस लैक्टिस, स्ट्रे. क्रिमोटिस तथा रेनिन एन्जाइम की थोड़ी सी मात्रा डालते हैं । इससे दूध से वसा एवं कैसीन प्रोटीन हट जाता है। दूध में उपस्थित कैसीन लगभग 45 मिनट में जमकर ठोस हो जाता है। छोटे-छोटे टुकड़े काटकर गर्म पानी में एक घंटा गर्म करते हैं, जब तैरने . लगे तो निकालकर निचोड़ते हैं। फिर नमक पानी में डुबाकर उपचारित कर लेते हैं। पनीर तैयार हो जाता है।

प्रश्न 2.
जीवाणु का कृषि क्षेत्र में क्या उपयोग है ?
उत्तर
जीवाणु का कृषि में उपयोग-कृषि के क्षेत्र में जीवाणु निम्न प्रकार से उपयोगी हैं

  • ये मृत जीवों का अपघटन करके भूमि की उर्वरा शक्ति बढ़ाते हैं।
  • ये भूमि में N2, स्थिरीकरण द्वारा इसकी उपजाऊ शक्ति में वृद्धि करते हैं।
  • नीले-हरे शैवालों का उपयोग उर्वरकों के रूप में किया जाता है।
  • ये पदार्थों के चक्रीयकरण में भाग लेकर भूमि में खनिज लवणों की मात्रा का नियंत्रण करते हैं।

प्रश्न 3.
सिरका उद्योग में किस तरह जीवाणुओं का प्रयोग होता है ?
उत्तर
सिरका उद्योग में शर्करा का किण्वन यीस्ट के द्वारा किया जाता है जिससे शराब तैयार की जाती है इस एथिल ऐल्कोहॉल को अधिक समय तक खुले हवा में छोड़ दें तो वह सिरके में बदल जाता है।
MP Board Class 12th Biology Solutions Chapter 10 मानव कल्याण में सूक्ष्मजीव 3

प्रश्न 4.
प्रतिजैविक प्रदान करने वाले पाँच कवकों के नाम लिखिए।
उत्तर
कवकों के नाम जिनसे प्रतिजैविक औषधियाँ प्राप्त की जाती हैं, निम्नलिखित हैं
MP Board Class 12th Biology Solutions Chapter 10 मानव कल्याण में सूक्ष्मजीव 4

प्रश्न 5.
प्रतिजैविक पैदा करने वाले पाँच जीवाणुओं के नाम लिखिए।
उत्तर
प्रतिजैविक पैदा करने वाले पाँच जीवाणु
MP Board Class 12th Biology Solutions Chapter 10 मानव कल्याण में सूक्ष्मजीव 5

मानव कल्याण में सूक्ष्मजीव दीर्घ उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 1.
जीवाणुओं के विभिन्न क्षेत्रों में उपयोग लिखिये।
उत्तर
जीवाणुओं के विभिन्न क्षेत्रों में उपयोग निम्नानुसार हैं

  • नाइट्रोजन स्थिरीकरण-कुछ जीवाणु जैसे-ऐजोटोबैक्टर तथा क्लॉस्ट्रिडियमनाइट्रोजन स्थिरीकरण द्वारा भूमि की उर्वर शक्ति को बढ़ाते हैं।
  • लैक्टिक अम्ल निर्माण-लैक्टोबैसिलस लैक्टाई जीवाणु दूध के लैक्टोज को लैक्टिक अम्ल (दही) में परिवर्तित कर देते हैं।
  • ऐसीटिक अम्ल निर्माण-ऐसीटोबैक्टर ऐसीटाई जीवाणु सिरका का निर्माण करता है।
  • रेशे की रेटिंग-कुछ जीवाणु जैसे- क्लॉस्ट्रिडियम ब्यूटीरियमपादप रेशों के उत्पादन में सहायता करते हैं।
  • तम्बाकू एवं चाय उद्योग-कुछ जीवाणु जैसे-माइकोकॉकस कॉण्डीसेन्सतम्बाकू एवं चाय की सीजनिंग करते हैं।
  • औषधि निर्माण-कुछ जीवाणु जैसे-स्ट्रेप्टोमाइसिस से प्रतिजैविक औषधियाँ प्राप्त होती हैं।
  • सहजीवी के रूप-कुछ जीवाणु हमारे शरीर में सहजीवी रूप (जैसे-इश्चिरीचिया कोलाई) में रहकर जैविक क्रिया में मदद करते हैं।

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प्रश्न 2.
विषाणु के अनुप्रयोग पर निबंध लिखिए।
उत्तर
विषाणुओं के अनुप्रयोग भिन्न क्षेत्रों में निम्नानुसार हैं

  • जैविक नियंत्रण में-जीवाणुभोजी विषाणुओं के द्वारा हानिकारक जीवाणुओं को नष्ट किया जाता है अर्थात् यह जैव नियंत्रक के काम आता है।
  • रोगों के उपचार में-न्यूमोनिया, टी.बी., कोढ़ आदि के उपचार में जीवाणुभोजियों का उपयोग कर रोगजनक जीवाणुओं का भक्षण करवाया जाता है।
  • अंतरिक्ष सूक्ष्मजीव विज्ञान में-जीवाणुभोजियों के Lysogenic cultures Radiation detector के रूप में उपयोग आते हैं।
  • आनुवंशिकी अभियांत्रिकी में इसमें फेजेस का उपयोग आनुवंशिक पदार्थ को एक कोशिका से दूसरी कोशिका में स्थानांतरित करने में करते हैं।
  • प्रदूषित जल उपचार में-जीवाणुओं एवं अन्य सूक्ष्मजीवों द्वारा प्रदूषित जल के उपचार हेतु जीवाणुभोजी का उपयोग करते हैं। इसके अलावा भूमि की उर्वरता हेतु हानिकारक सूक्ष्मजीवों को नष्ट करने में एवं अनुसंधान हेतु जीवाणुभोजी का प्रयोग वेक्टर के रूप में करते हैं।

प्रश्न 3.
विभिन्न क्षेत्रों में कवकों की उपयोगिता बताइए।
उत्तर
कवकों के विभिन्न क्षेत्रों में उपयोगिता निम्नलिखित हैं
(1) औषधि के रूप में अनेक प्रकार के ऐण्टिबायोटिक कवकों से प्राप्त किये जाते हैं, जैसे-पेनिसिलीन, पेनिसिलियम नोटेटम (Penicillium notatum) से प्राप्त किया जाता है।
(2) भूमि की उर्वरता-कवक कई सड़े-गले पदार्थों का अपघटन करके भूमि की उर्वरा शक्ति को बढ़ाते हैं।
(3) उद्योगों में-

  • बेकरी उद्योग में कुछ यीस्ट तथा दूसरे कवकों को आटा के साथ गूंथकर ब्रेड बनाई जाती है।
  • शराब उद्योग में-यीस्ट तथा दूसरे कवकों में जाइमेज तथा कई ऐसे ही एन्जाइम पाये जाते हैं, जिनकी सहायता से कार्बोहाइड्रेट्स युक्त पदार्थों का किण्वन करके शराब बनाई जाती है।
  • रासायनिक उद्योग में कई प्रकार के अम्लों तथा अन्य रासायनिक वस्तुओं का निर्माण कवकों की सहायता से किया जाता है, जैसे-साइट्रिक अम्ल को ऐस्परजिलस नाइगर (Aspergillus niger) की सहायता से प्राप्त किया जाता है।
  • पनीर उद्योग में-पनीर निर्माण के समय इनका उपयोग किण्वन कारक के रूप में किया जाता है।
  • प्रकीण्व बनाने में-ऐमाइलेज ऐस्परजिलस तथा जाइमेज यीस्ट से प्राप्त किया जाता है।

(4) नाइट्रोजन स्थिरीकरण-कई कवक जैसे-रोडोटुरुला (Rodotounula) नाइट्रोजन स्थिरीकरण द्वारा भूमि की उर्वरा शक्ति को बढ़ाते हैं।
(5) हॉर्मोन निर्माण में-जिबरेलिन नामक हॉर्मोन जिबरेला फ्यूजिकोराई नामक कवक से प्राप्त किया जाता है।
(6) अनुसंधान में-न्यूरोस्पोरा जैसे कई कवकों का उपयोग आनुवंशिकी तथा कई अनुसंधानों में किया जाता है।
(7) वातावरण को शुद्ध करना-कवक अपघटन द्वारा वातावरण को शुद्ध करते हैं।
(8) जैविक नियंत्रण-जब एक जीव द्वारा बना पदार्थ दूसरे जीव को नष्ट कर देता है, तो इसे जैविक नियंत्रण कहते हैं।
(9) वर्णकों का निर्माण-मोनेस्कस द्वारा प्राप्त लाल रंग चावल रंगने के काम आता है।

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प्रश्न 4.
बायो गैस के उत्पादन में सूक्ष्म जीव किस प्रकार महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं? व्याख्या कीजिये।
उत्तर
बायो गैस के उत्पादन में सूक्ष्मजीवों की भूमिका-गोबर गैस एक प्रकार के गैसों का मिश्रण है जिसमें मीथेन भी उपस्थित होती है जो सूक्ष्मजीवी सक्रियता द्वारा उत्पन्न होती है। कुछ बैक्टीरिया जो सेल्यूलोज युक्त पदार्थों पर अवायवीय रूप में उगते हैं वह CO2, तथा H2, के साथ-साथ बड़ी मात्रा में मीथेन (Methane) उत्पन्न करते हैं।

सामूहिक रूप से इन जीवाणुओं को मीथेनोजेन (Methanogens) कहते हैं। इनमें सामान्य जीवाणु मीथेनोबैक्टीरिया है। पशुओं के मल को गोबर कहते हैं। जिसमें ये जीवाणु प्रचुर मात्रा में पाये जाते हैं, जो गोबर गैस (Gobar gas) अथवा बायो गैस (Biogas) का उत्पादन करते हैं।

बायो गैस संयंत्र अथवा गोबर गैस संयंत्र एक बड़ा टैंक होता है जिसकी गहराई 10-15 फीट होती है, इस टैंक में अपशिष्ट संग्रहीत एवं गोबर की स्लरी (Slurry) भरी जाती है। स्लरी के ऊपर एक सचल ढक्कन रखा जाता है। जिसे गैस होल्डर (Gas holder) कहते हैं। सूक्ष्मजीवी सक्रियता के कारण अथवा मीथेनोजेन (Methanogenes) बैक्टीरिया की उपस्थिति में रासायनिक अभिक्रियाओं के फलस्वरूप गैस का निर्माण होता है। जिसके फलस्वरूप ढक्कन अर्थात् गैस होल्डर ऊपर की ओर उठ जाता है।

बायो गैस संयंत्र में एक निकास होता है जिसकी सहायता से पाइप के द्वारा घरों में गैस की पूर्ति की जाती है। उपयोग में ली गई स्लरी दूसरे विकास द्वार से बाहर निकाल दी जाती है। इसका उपयोग उर्वरक के रूप में किया जाता है |

भारत में बायो गैस उत्पादन प्रौद्योगिकी को विकसित करने में निम्न का प्रमुख योगदान रहा है-

  • भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान (Indian Agricultural Research Institute IARI).
  • खादी व ग्रामोद्योग आयोग (Khadi and Village Industries Commission KVIC).

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