MP Board Class 12th Biology Solutions Chapter 12 जैव प्रौद्योगिकी एवं उसके उपयोग

MP Board Class 12th Biology Solutions Chapter 12 जैव प्रौद्योगिकी एवं उसके उपयोग

जैव प्रौद्योगिकी एवं उसके उपयोग NCERT प्रश्नोत्तर

प्रश्न 1.
बीटी (Bt) आविष के रवे कुछ जीवाणुओं द्वारा बनाये जाते हैं, लेकिन जीवाणु स्वयं को नहीं मारते क्योंकि
(क) जीवाणु आविष के प्रति प्रतिरोधी होते हैं
(ख) आविष अपरिपक्व हैं।
(ग) आविष (Toxin) निष्क्रिय होता है
(घ) आविष जीवाणु की विशेषथैली में मिलता है।
उत्तर
(ग) आविष (Toxin) निष्क्रिय होता है।

प्रश्न 2.
पारजीनी जीवाणु क्या है ? किसी ऐक उदाहरण द्वारा सचित्र वर्णन कीजिए।
उत्तर
पारजीनी जीवाणु (Transgenic Bacteria)-ऐसे बैक्टीरिया (जीवाणु) जिनके डी.एन.ए. में परिचालन द्वारा एक अतिरिक्त (बाहरी) जीन व्यवस्थित होता है जो अपना लक्षण व्यक्त करता है, इसे पारजीनी जीवाणु कहते हैं।

उदाहरण-ई. कोलाई (E.coli) बैक्टीरिया एक पारजीनी जीवाणु है जो मधुमेह (डायबिटीज) रोग के निदान के लिए इन्सुलिन (Insulin) को उत्पन्न करता है। इन्सुलिन अणु दो पॉलीपेप्टाइड श्रृंखलाओं का बना होता है-A श्रृंखला (A chain) तथा B श्रृंखला (B chain) जो आपस में डाइ-सल्फाइड बंधों द्वारा जुड़ी होती हैं। इन्सुलिन की दोनों शृंखलाओं का जैव संश्लेषण (Biosynthesis) एकल पॉलीपेप्टाइड श्रृंखलाओं प्राक्इन्सुलिन (Proinsulin) के रूप में होता है।

मानव सहित स्तनधारियों में इन्सुलिन प्राक् -हॉर्मोन (Pro-hormone) संश्लेषित होता है जिसमें एक अतिरिक्त फैलाव होता है जिसे पेप्टाइड C(Peptide-C) कहते हैं । यह ‘सी’ पेप्टाइड परिपक्व इन्सुलिन में नहीं होता है, जो परिपक्वता के दौरान इन्सुलिन से अलग हो जाता है। सन् 1983 में एली लिली नामक एक अमेरिकी कम्पनी ने दो DNAअनुक्रमों को तैयार किया जो मानव इन्सुलिन की श्रृंखला A और B के अनुरूप होते हैं, जिसे इश्चेरिचिया कोलाई (E.coli) के प्लास्मिड में प्रवेश कराकर इन्सुलिन का उत्पादन किया। इन अलग-अलग निर्मित श्रृंखलाओं में A और B को निकालकर डाइसल्फाइड बन्ध बनाकर आपस में संयोजित कर मानव इन्सुलिन का निर्माण किया जाता है।

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प्रश्न 3.
आनुवंशिक रूपान्तरित फसलों के उत्पादन के लाभ व हानि का तुलनात्मक विभेद कीजिये ?
उत्तर
आनुवंशिक रूपान्तरित फसलों के उत्पादन के लाभ (Advantages of Production of Genetically Modified (GM) crops)
जैव प्रौद्योगिकी का प्रयोग करके कई पादपों में लाभप्रद गुणों का निवेश किया जाता है। जैव प्रौद्योगिकी से विकसित आनुवंशिकता रूपान्तरित फसलों के लाभप्रद गुण अग्रलिखित हैं

  • इस प्रकार के फसलों में पोषण गुणवत्ता में सुधार (Improvement in Nutritional Quality) हुआ है, जैसे-अधिक उत्पादन, अच्छे प्रोटीन : टक तथा अच्छे आवश्यक गुणों जैसे-गेहूँ की अच्छी बेकिंग गुणवत्ता तथा जौ की अच्छी माल्टिंग गुणवत्ता आदि का विकास इस प्रकार की फसलों में हुआ है।
  • लवण एवं सूखा सहिष्णुता-इस प्रकार की फसलें अजैव प्रतिबलों (Abiotic stresses) जैसे– ठण्डा, सूखा, लवण, ताप आदि के प्रति अधिक सहिष्णु (Tolerant) होते हैं।
  • इस प्रकार की फसलें रासायनिक पीड़क नाशकों पर कम निर्भर करती है।
  • इस प्रकार की फसलें कटाई के पश्चात् होने वाले नुकसान को कम करती है।
  • इस प्रकार की फसलें ऐसे पादपों के विकास में सहायक है जिनसे वैकल्पिक पदार्थों (Pharmaceuticals) की आपूर्ति भी की जाती है।

आनुवंशिक रूपान्तरित फसलों के उत्पादन से हानि (Disadvantages of Production of Genetically Modified Crops) आनुवंशिक रूपान्तरित फसलों से कुछ हानियाँ भी होती है जो निम्न हैं

  • इस प्रकार की कुछ फसलों में बीज उत्पन्न करने की शक्ति नहीं होती जिससे प्रत्येक वर्ष किसान को नये बीज खरीदने पड़ते हैं।
  • छोटे किसान प्रत्येक बार इन फसलों को नहीं उगा सकते क्योंकि ये फसलें बहुत महँगी पड़ती है।
  • इस प्रकार की फसलों से लोगों में एलर्जी उत्पन्न होने की सम्भावना रहती है।

प्रश्न 4.
क्राई प्रोटीन्स क्या है ? उस जीव का नाम बताइए जो इसे पैदा करता है ? मनुष्य अपने फायदे के लिये इस प्रोटीन को कैसे उपयोग में लाते हैं ?
उत्तर
जीव विष जिस जीन द्वारा कूटबद्ध होते हैं, उसे क्राई (Cry) कहते हैं। क्राई प्रोटीन क्रिस्टलीय प्रोटीन्स (Crystalline proteins) का एक वर्ग है। बैसीलस थूरीनजिएन्सिस जीवाणु की कुछ प्रजातियाँ क्राई प्रोटीन्स का निर्माण करती है। यह प्रोटीन फसल पादपों को कीट पीड़कों (Insect pests) के प्रति प्रतिरोधी बनाती है। ये कई प्रकार की होती है। उदाहरण के लिये, जो प्रोटीन्स जीन क्राई I ए सी (Cry I AC) व क्राई II ए बी (Cry II A B) द्वारा कूटबद्ध होते हैं वे कपास के मुकुल कृमि (Bud worm) को नियंत्रित करते हैं। जबकि क्राई I ए बी (Cry IA B) मक्का छेदक (Maize borer) को नियंत्रित करता है। ये प्रोटीन कई प्रकार के कीटों की प्रजातियों के लिये विष (Toxic) है लेकिन मनुष्य के लिये हानिकारक नहीं है।

प्रश्न 5.
जीन चिकित्सा क्या है ? एडीनोसिन डिएमिनेज (ए. डी. ए.) की कमी का उदाहरण देते हुए इसका सचित्र वर्णन कीजिए।
उत्तर
जीन चिकित्सा (Gene Therapy)-जीन चिकित्सा में उन विधियों का सहयोग लिया जाता है जिनके द्वारा किसी बच्चे या भ्रूण में चिन्हित किये गये जीन दोषों का सुधार किया जाता है। उसमें रोग के उपचार के लिये जीनों को व्यक्ति की कोशिकाओं या ऊतकों में प्रवेश कराया जाता है। आनुवंशिक दोष वाली कोशिकाओं के उपचार के लिये सामान्य जीन को व्यक्ति या भ्रूण में स्थानान्तरित करते हैं जो निष्क्रिय जीन की क्षतिपूर्ति कर उसके कार्यों को सम्पन्न करते हैं।

जीन चिकित्सा का सर्वप्रथम प्रयोग सन् 1990 में एक चार वर्षीय बालिका में एडीनोसिन डिएमिनेज (Adenosine deaminase) की कमी को दूर करने के लिये किया गया था। यह एन्जाइम प्रतिरक्षा तंत्र के कार्य के लिए अति आवश्यक होता है। एडीनोसिन डिएमिनेज (ADA) से संबंधित जीन में गड़बड़ी होने के कारण घातक सम्बद्ध प्रतिरक्षा न्यूनता (Severe combined Immuno Deficiency SCID) रोग उत्पन्न होता है ।। इस प्रकार के रोगी में अक्रियाशील T- लिम्फोसाइट्स होती है। इसके कारण प्रतिरक्षा तंत्र रोगजनकों से लड़ने की क्षमता नहीं होती है।

जीन चिकित्सा में सर्वप्रथम रोगी के शरीर के रक्त से लसीकाणु को निकालकर शरीर के बाहर संवर्धित किया जाता है। सक्रिय ADA का CDNA लसीकाणु में प्रवेश कराकर अन्त में रोगी के शरीर में समाकलित कर दिया जाता है। ये कोशिकाएं मृतप्राय होती है इसलिये आनुवंशिकत: निर्मित लसीकाणुओं को समय-समय पर रोगी के शरीर से अलग करने की आवश्यकता होती है। यदि मज्जा कोशिकाओं से विलगित
अच्छे जीनों को प्रारंभिक भ्रूणीय अवस्था की कोशिकाओं से उत्पादित ADA में प्रवेश करा दिया जाये तो यह एक स्थाई उपचार हो सकता है।

प्रश्न 6.
ई. कोलाई जैसे जीवाणु में मानव जीन की क्लोनिंग एवं अभिव्यक्ति के प्रायोगिक चरणों का आरेखीय निरूपण प्रस्तुत कीजिए
उत्तर
पुनर्योगज डीएनए तकनीक (Re combinant DNA Technology)-

पुनर्योगज DNA प्राप्त करने के लिए तीन विधियाँ प्रयुक्त की
(अ) DNA की दो श्रृंखलाओं के अंतिम छोर पर नई DNA श्रृंखलाएँ जोड़कर-यदि हम एक DNA के सिरे पर कुछ क्षारक (जैसे – TTTTT) जोड़ दें, तथा दूसरे DNA के सिरे पर इसके संयुग्मी क्षारक (AAAAAA) जोड़ दें और फिर इन दोनों प्रकार के DNA को मिलायें, तो नई लड़ियाँ आपस में H-bond बनाकर दो भिन्न DNA अणुओं को संयुक्त कर देंगी। इस कार्य के लिए विशेष एंजाइम का उपयोग किया जाता है जिसे डी.एन.ए. ‘ए’ DNA ‘A’ टर्मिनल ट्रांसफरेज (Terminal Transferase) कहते हैं। अनजुड़े स्थानों को डी.एन.ए. लाइगेज (DNA Ligase) नामक एंजाइम द्वारा भर देते हैं।

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(ब) नियंत्रण एंजाइमों की सहायता से (With the help of Restriction Enzymes) –
इस विधि में संयुग्मी क्षारकों के बीच हाइड्रोजन बंध बनाकर संकरित DNA का निर्माण करते हैं। परन्तु इस विधि में एक विशेष एंजाइम, नियंत्रण एंजाइम (Restriction Enzymes) का उपयोग करते हैं। इस प्रकार के लगभग 100 एंजाइम अब उपलब्ध है। ये एंजाइम चाकू की तरह कार्य करते हैं तथा DNA श्रृंखला को विशिष्ट स्थानों पर इस प्रकार से काट देते हैं कि वांछित जीनों वाले खंड प्राप्त हो सकते हैं। उदाहरण के लिए, ई. कोलाई से ईको आर.आई. (Eco RI) नामक नियंत्रण एंजाइम पृथक् किया गया है। यह DNA अणु में क्षारकों के निम्न क्रम को पहचान कर उसे G तथा A के मध्य काट देता है|
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भिन्न-भिन्न स्रोतों से प्राप्त दो DNA के टुकड़ों को मिला दिया जाये तो संयुग्मी बेस आपस में हाइड्रोजन आबंध बनाकर द्विकुंडलित रचना बना लेते हैं। जो स्थान बिना जुड़े रहते हैं, उन्हें DNA लाइगेज की सहायता से जोड़ लिया जाता है, जैसा कि पहली विधि में किया गया था। स्पष्ट है कि Eco तथा DNA Ligase की सहायता से विभिन्न जीवों के जीनों को संयुक्त कराके संकरित जीन तैयार किये जा सकते हैं। संकरित जीन में दोनों ही जीवों के गुण उपस्थित होंगे। यहाँ तक कि ऐसे जीव, जिनमें कोई समानता नहीं है (हाथी और मनुष्य, चूहा और बंदर, टमाटर और आम) इत्यादि। यही नहीं पौधों और जंतुओं के बीच भी संकरण की संभावना बढ़ गई है।

(स) क्लोनिंग (Cloning)—
यह विधि सबसे अधिक सरल तथा उपयोगी सिद्ध हुई है। आप जानते हैं कि कोशिकाओं में DNA का प्रतिकृतिकरण होता रहता है। परन्तु यह भी तभी होता है, जब स्वयं जीन इसका आदेश देता है। कोशिका में इन ‘प्रतिकृतिकरण जीनों’ की संख्या बहुत कम होती है। जैसे, कुछ जीवाणुओं के गुणसूत्र में 300-500 तक जीन होते हैं, परन्तु ‘प्रतिकृतिकरण जीन’ केवल एक ही होता है। इस जीन की एक विशेषता यह भी है कि यदि इसे मूल DNA से अलग करके किसी दूसरे DNA के साथ जोड़ दिया जाये तो यह उसकी प्रतिकृति करने लगता है। जीवाणुओं के प्लाज्मिड (Plasmid) में भी यह जीन उपस्थित होता है। यही कारण है कि जिस जीवाणु कोशिकाओं में प्लाज्मिड होता है, वे तेजी से गुणन करती है।
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शरीर में प्रत्येक पदार्थ के संश्लेषण के लिए कोई निश्चित जीन उत्तरदायी होता है। यदि इस विशिष्ट जीन के साथ प्लाज्मिड के साथ पहले बताई विधियों द्वारा संकरित करा दिया जाये और इस संकरित DNA को पुनः जीवाणु की कोशिका में स्थापित करके उपयुक्त संवर्धन माध्यम में उगने दिया जाये, तो जीवाणु में वह जीन उसी पदार्थ का संश्लेषण करता है जो कि वह मूल शरीर में करता था। इस समस्त प्रक्रिया को क्लोनिंग (Cloning) कहते हैं। पोषी जीवाणु के लिए ई. कोलाई का उपयोग किया जाता है।

प्रश्न 7.
तेल के रसायनशास्त्र तथाr-DNA तकनीक जिसके बारे में आपको जितना भी ज्ञान प्राप्त है, उसके आधार पर बीजों से तेल हाइड्रोकार्बन हटाने की कोई एक विधि सुझाझा ?
उत्तर
बीजों से तेल हटाने के लिए जैव प्रौद्योगिकी की आण्विक जैव तकनीक का प्रयोग किया जाता है।

प्रश्न 8.
इन्टरनेट से पता लगाइए कि गोल्डन राइस (गोल्डन धान ) क्या है ?
उत्तर
“गोल्डन राइस” चावल (ओराइजा सटाइवा) की एक किस्म है जो जैव प्रौद्योगिकी द्वारा विकसित की गई है।

प्रश्न 9.
क्या हमारे रुधिर में प्रोटिओजेज तथा न्यूक्लिएजेज है ?
उत्तर
नहीं।

प्रश्न 10.
इन्टरनेट से पता लगाइए कि मुखीय सक्रिय औषध प्रोटीन को किस प्रकार बनायेंगे ? इस कार्य में आने वाली प्रमख समस्याओं का वर्णन कीजिये।
उत्तर
प्रोटीन की संरचना तथा कार्यों के अध्ययन के लिए मास-स्पेक्ट्रोस्कोपी तकनीक पर आधारित पेप्टाइड-एमाइड-ड्यूटीरियम परिवर्तन तकनीक का अध्ययन किया जाता है तथा प्रोब उप-अणुक प्रोटीन संचालक की क्षमता का अध्ययन किया जाता है। यह विधि अत्यधिक श्रम व समय लेने वाली है। इस विधि में एमाइड के पृथक्करण का अध्ययन किया जाता है। ड्यूटीरियम एक्सचेंज मास स्पेक्ट्रोस्कोपी (DXMS) के द्वारा बन्ध का पूर्ण होना एवं एकल एमाइड (अमीनो अम्ल) पृथक्करण तीव्रता से सिद्ध होता है।

उपर्युक्त तकनीक से अत्यन्त कम मात्रा में उपस्थित पदार्थ में तथा लम्बे प्रोटीन पर सरलतापूर्वक कार्य किया जाता है। रिसेप्टर-लिगेन्ड युग्म पर जो जीवित कोशिका के अन्दर या कोशिका पर उपस्थित होते हैं, को शुद्धता के बिना अध्ययन किया जा सकता है। प्रोटीन रिसेप्टर की झिल्लियों का इन विट्रो विश्लेषण किया जाता है। इसकी मुख्य कठिनाई यह है कि इसके द्वारा कैंसर रोग हो जाता है।

जैव प्रौद्योगिकी एवं उसके उपयोग अन्य महत्वपूर्ण प्रश्नोत्तर

जैव प्रौद्योगिकी एवं उसके उपयोग वस्तुनिष्ठ प्रश्न

1. सही विकल्प चुनकर लिखिए

प्रश्न 1.
गेहूँ है एक
(a) फल
(b) बीज
(c) भ्रूण
(d) ग्लूम।
उत्तर
(b) बीज

प्रश्न 2.
कॉल्चीसीन निम्न में से कौन-सा प्रभाव डालता है
(a) D.N.A. द्विगुणन
(b) गुणसूत्रों का द्विगुणन
(c) स्पिण्डिल तन्तुओं का बनना
(d) मध्य पटलिका के बनने में अवरोधन
उत्तर
(b) गुणसूत्रों का द्विगुणन

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प्रश्न 3.
वह पौधा जिसमें बीज बनता है फिर भी वर्धी प्रजनन द्वारा उगाया जाता है
(a) आलू
(b) नीम
(c) आम
(d) सेवन्ती।
उत्तर
(a) आलू

प्रश्न 4.
मानव निर्मित अन्न है
(a) ट्रिटिकम
(b) ट्रिटिकेल
(c) पाइसम
(d) गन्ना।
उत्तर
(b) ट्रिटिकेल

प्रश्न 5.
सोनेरा 64 और लारोजा 64A किस पादप की प्रजातियाँ हैं
(a) गेहूँ
(b) धान
(c) मटर
(d) मक्का
उत्तर
(a) गेहूँ

प्रश्न 6.
अगुणित नर पौधे किसके संवर्धन से तैयार किये जा सकते हैं
(a) पुतन्तु
(b) परागकण
(c) पुंकेसर
(d) पुमंग।
उत्तर
(b) परागकण

प्रश्न 7.
संकरण के समय फूल की कली से पुंकेसरों को हटाने की क्रिया कहलाती है
(a) कृप्स करवाना
(b) स्वनिषेचन
(c) विपुंसन
(d) टोपपिन
उत्तर
(c) विपुंसन

प्रश्न 8.
बीज बुआई निर्भर करती है
(a) तापमान पर
(b) प्रकाश अवधि पर
(c) भूमि की नमी पर
(d) उपर्युक्त सभी पर।
उत्तर
(d) उपर्युक्त सभी पर।

प्रश्न 9.
संकर ज्यादातर जनक से ओजस्वी होते हैं क्योंकि
(a) समयुग्मजता
(b) संकर ओज
(c) जनक ज्यादातर कमजोर होते हैं
(d) इनमें से कोई नहीं।
उत्तर
(b) संकर ओज

प्रश्न 10.
Ti प्लाज्मिड जो आनुवंशिक इंजीनियरिंग में प्रयुक्त होता है, प्राप्त होता है
(a) इश्चेरिचिया कोलाई से
(b) बैसीलस थूरिनजिएन्सिस से
(c) एग्रोबैक्टीरियम राइजोजीन्स से
(d) एग्रोबैक्टीरियम ट्यूमीफेसिएन्स से।
उत्तर
(d) एग्रोबैक्टीरियम ट्यूमीफेसिएन्स से।

प्रश्न 11.
Bt टॉक्सिन है
(a) अंत: कोशिकीय लिपिड
(b) अंत: कोशिकीय क्रिस्टलित प्रोटीन
(c) बाह्य कोशिकीय क्रिस्टलित प्रोटीन
(d) लिपिड।
उत्तर
(c) बाह्य कोशिकीय क्रिस्टलित प्रोटीन

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प्रश्न 12.
बैसीलस थूरिनजिएन्सिस (Bt) विभेद अपूर्व कार्य के लिए प्रयोग किया जाता है
(a) बायोमेटलर्जिक तकनीक
(b) बायोइन्सेक्टिसाइड्स पौधे
(c) जैव उर्वरक
(d) बायोमिनरेलाइजेशन प्रक्रम।
उत्तर
(b) बायोइन्सेक्टिसाइड्स पौधे

प्रश्न 13.
भारतीय पौधों में विदेशी DNA स्थानान्तरण में सामान्यतः प्रयोग की जाती है
(a) ट्राइकोडर्मा हार्जीएनम
(b) मेलोइडोगॉन इन्काग्नीटा
(c) एग्रोबैक्टीरियम ट्यूमीफेसिएन्स
(d) पेनीसिलीयम एक्सपेन्सम
उत्तर
(c) एग्रोबैक्टीरियम ट्यूमीफेसिएन्स

प्रश्न 14.
बायोपाइरेसी सम्बन्धित है
(a) जैव अणु तथा जीन्स की खोज से
(b) परम्परागत ज्ञान से
(c) जैव अनुसंधान से
(d) उपरोक्त सभी से।
उत्तर
(c) एग्रोबैक्टीरियम ट्यूमीफेसिएन्स

प्रश्न 15.
सुनहरे चावल में कौन-सा विटामिन प्रचुर होता है
(a) विटामिन A
(b) विटामिन B
(c) विटामिन C
(d) विटामिन
उत्तर
(a) विटामिन A

2.  रिक्त स्थानों की पूर्ति कीजिए

1. देश के जैव संसाधनों की चोरी, डकैती तथा गैर कानूनी दोहन को ………….. कहते हैं।
2. जैविक पदार्थों के प्रयोग के लिए……………. एक प्रशासकीय आज्ञापत्र (Official licence) है।
3. जीवित जीवधारियों द्वारा उत्पन्न यौगिक ………….. है।
4. ……………. मानकों का एक समूह है जिसका प्रयोग हमारे कार्यों तथा जैविक संसार के बीच संबंधों को नियंत्रित करने में होता है।
5. उत्पाद की पुनर्घाप्ति, इसका शोधन तथा क्रियाविधि ………….. क्रिया कहलाती है।
उत्तर

  1. बायोपाइरेसी
  2. जैव एकाधिकार (बायोपेटेंट)
  3. जैव अणु
  4. जैव आचार संहिता
  5. डाउन स्ट्रीम।

3. सही जोड़ी बनाइए

‘A’ – ‘B’

1. एण्टीबायोटिक्स – (a) प्रति विषाणु प्रोटीन
2 ह्यूमूलिन – (b) जैव अणु तथा जीन की खोज
3. बायोपाइरेसी – (c) एस. वाक्समेन
4. इन्टरफेरॉन – (d) मानव इंसुलिन।
उत्तर
1. (c), 2. (d), 3. (b), 4. (a)

4. एक शब्द में उत्तर दीजिए

1. प्रथम ट्रांसजेनिक फसल का नाम लिखिए।
2. Bt-कपास में स्थानान्तरित कीटरोधी प्रोटीन का नाम क्या है ?
3. मानवनिर्मित इन्सुलिन का नाम क्या है ?
4. Nif जीन किस सूक्ष्मजीव में पाए जाते हैं ?
उत्तर

  1. तम्बाकू
  2. Cry प्रोटीन
  3. ह्यूम्यूलिन
  4. राइजोबियम।

जैव प्रौद्योगिकी एवं उसके उपयोग अति लघु उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 1.
वे जीन जिनके जीन्स हस्तकौशल द्वारा परिवर्तित किये जा चुके हैं, उन्हें क्या कहते हैं ?
उत्तर
आनुवंशिकतः रूपान्तरित जीव (Genetically modified organisms = GMO)

प्रश्न 2.
जैव प्रौद्योगिकी के सहयोग से तैयार की गई पीड़क फसलों के नाम लिखिए। उत्तर-बी.टी. कपास, बी.टी मक्का, धान, टमाटर, आलू व सोयाबीन। प्रश्न 3. बी.टी. विष (Bt toxin) प्रोटीन किसके द्वारा उत्पन्न
होता है ?
उत्तर
बैसीलस थूरीनजिएंसिस (Bacillus thuringiensis) द्वारा।

प्रश्न 4.
बी.टी. विष किस जीन द्वारा कूटबद्ध होता है ?
उत्तर
बी.टी. विष क्राई (Cry) जीन्स द्वारा कूटबद्ध होता है।

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प्रश्न 5.
RNi का पूर्ण नाम लिखिए।
उत्तर
आर एन ए अंतरक्षेप (RNA interference)!

प्रश्न 6.
आनुवंशिक रोग से ग्रसित शिशु के रोगोपचार के लिये उपयुक्त चिकित्सा व्यवस्था का नाम लिखिए।
उत्तर
जीन चिकित्सा।

प्रश्न 7.
उस जीवाणु का वैज्ञानिक नाम लिखिये, जिसमें Bt जीव विष निर्मित होता है।
उत्तर
बैसीलस थूरीनजिएंसिस।

जैव प्रौद्योगिकी एवं उसके उपयोग लघु उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 1.
GM खाद्य क्या है ?
अथवा
जी.एम. फसल को संक्षेप में समझाइए।
उत्तर
आनुवंशिक रूप से रूपान्तरित फसलों से उत्पादित खाद्य पदार्थों को GM खाद्य कहते हैं। यह GM

  • GM खाद्य पदार्थों में प्रति जैविक प्रतिरोधी जीन पाये जाते हैं।
  • इनमें ट्रांसजीवों (Transgenes) द्वारा उत्पादित प्रोटीन पाई जाती है। उदा. Cry-प्रोटीन । यह प्रोटीन कीट प्रतिरोधी किस्मों में पाई जाती है।
  • इन खाद्य पदार्थों में प्रतिजैविक प्रतिरोधी जीनों के द्वारा उत्पादित एन्जाइम पाये जाते हैं जो कि पुनर्योजन DNA तकनीक में जीन ट्रांसफर के समय काम आते हैं।

प्रमुख GM फसल, खाद्य एवं फल

  • मक्का (Maize)-आनुवंशिक रूप से रूपांतरित जीनों का समावेश किया गया है जिनमें पीड़कों (Pests) एवं रोगों के लिए प्रतिरोधकता पायी जाती है।
  • फ्लौर-सौर टमाटर (Flaur Saur Tomato)-यह प्रथम GM खाद्य है । इन टमाटरों में कैनामाइसिन (Kanamycin) जैसे प्रतिजैविक के लिए प्रतिरोधकता पाई जाती है।
  • रेप ऑयल सीड (Rape Oil Seed)–यह एक नया पादप है जिनमें बास्टा (Basta) नाम खरपतवारनाशी के प्रति प्रतिरोधकता पाई जाती है।

प्रश्न 2.
GM फसलों के लाभ लिखिए।
उत्तर
GM फसलों के लाभ

  • GM फसलें, फसली पौधों में वांछित फिनोटाइपिक लक्षण उत्पन्न करती हैं।
  • Transgenesis द्वारा GM पौधों में विशिष्ट प्रकार की प्रोटीन उत्पन्न करने वाले जीवों को प्रविष्ट कराया जाता है। ये फसलें बाद में उस प्रोटीन का उत्पादन करती हैं।
  • इनमें विशिष्ट जैव-रासायनिक पथ वाले पौधों का संश्लेषण होता है।
  • इन फसलों में पूर्व से उपस्थित जीन की अभिव्यक्ति को रोकने में सहायता मिलती है।

प्रश्न 3.
आनुवंशिक रूप से रूपांतरित खाद्य क्या है ? कोई दो उदाहरण दीजिए।
उत्तर
ऐसी फसलें जिनमें अन्य प्रजातियों के उपयोगी जीन पाये जाते हैं तथा जिन्हें आनुवंशिक अभियांत्रिकी की सहायता से दूसरे में प्रविष्ट कराया जाता है उसे आनुवंशिक रूप से रूपांतरित (Genetically modified) या ट्रांसजेनिक फसलें कहते हैं । इन फसलों को ट्रांसजिनेसिस विधि द्वारा पुनर्योगज DNA तकनीक की सहायता से तैयार किया जाता है।
उदाहरण-

  • फ्लौर सौर टमाटर-यह प्रथम GM खाद्य है। इनमें कैनामाइसिन जैसे प्रतिजैविक के लिए प्रतिरोधकता पायी जाती है।
  • रेप ऑयल सीड-यह नया GM पादप है जिनमें बास्टा नामक खरपतवारनाशी के प्रति प्रतिरोधकता होती है।

प्रश्न 4.
दोषमुक्त कृषि किसे कहते हैं ?
उत्तर
कृषि की वह विधि जो कि दीर्घकालीन, टिकाऊ एवं हानि रहित होती है उसे दोषमुक्त कृषि कहते हैं । हरित क्रांति एवं उसके बाद के दौर में अधिक उत्पादन हेतु नई किस्मों के उपयोग, सिंचित क्षेत्र में वृद्धि, उर्वरकों के अति उपयोग, कीटनाशकों तथा शाकनाशी रसायनों के अंधाधुंध उपयोग से फसल उत्पादन में तो अत्यधिक वृद्धि हुई, परन्तु भूमि की गिरती उर्वरता, खाद्य व जल में प्रदूषण, विभिन्न रोगों व विकृतियों के रूप में सामने आ रही है।

पौधों व मनुष्य में रोगों से लड़ने की प्रतिरोधी क्षमता धीरे-धीरे कम होती जा रही है। खाद्य व जल जनित बीमारियाँ मानव एवं पशु स्वास्थ्य को प्रभावित कर रही हैं । यह सब आधुनिक व्यावसायिक खेती के कारण हो रहा है, अतः एक ऐसी कृषि प्रणाली को विकसित करने की आवश्यकता हो गई है जो उपर्युक्त दोषों से मुक्त हों। ऐसी कृषि को दोषमुक्त या दीर्घकालीन कृषि कहा जाता है । दोषमुक्त कृषि का सबसे अच्छा उदाहरण कार्बनिक खेती (Organic agriculture) है।

प्रश्न 5.
कार्बनिक खेती क्या है ? इसका क्या आधार होता है ?
उत्तर
कार्बनिक खेती (Organic agriculture)-खेती कृषि उत्पादन की वह पद्धति है जिसमें संश्लेषित उर्वरक, कीटनाशक, निंदानाशक, पौध वृद्धि नियामक, पशुजनित पदार्थ, आनुवंशिक रूप से रूपान्तरित जीवाणु का उपयोग नहीं किया जाता है। इस विधि में भूमि की उर्वरता तथा उत्पादकता बढ़ाने के लिए जैविक खाद, फसल चक्र तथा कीटों तथा खरपतवारों को नष्ट करने के लिए जैव पीड़क नाशकों का उपयोग किया जाता
है। इसके अन्तर्गत पर्यावरण को क्षति पहुँचाये बिना उर्वरकों एवं कृषि रसायनों का कम-से-कम प्रयोग करते हुए जैविक आधारित उर्वरकों, खादों एवं जैव पीड़कनाशकों का अधिकाधिक उपयोग करके उत्पादन में वृद्धि की जाती है।

खेती के आधार (Basic of organic agriculture)-

  • कार्बनिक खेती भूमि, पौधे, पशु व मानव तथा वैश्विक परिस्थितियों को सुधारने व उसे टिकाऊ बनाने पर आधारित है।
  • कार्बनिक उन खेती उन जैव पारिस्थितिक तंत्रों एवं जैव चक्रों पर आधारित है जिसमें उन्हीं जैव तंत्रों व जैव पारिस्थितिक तंत्रों का उपयोग किया जाता है तथा उन्हें बढ़ाया जाता है।
  • कार्बनिक खेती वातावरण एवं जीवन की संभावनाओं को प्रदूषण मुक्त बनाने पर आधारित है।
  • कार्बनिक खेती वर्तमान एवं भविष्य की पीढ़ियों के स्वास्थ्य एवं वातावरण को बचाने के लिए वांछित सावधानियों एवं आवश्यक उपायों पर आधारित है।

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प्रश्न 6.
जीन मैनीपुलेशन या जेनेटिक इन्जीनियरिंग को समझाइए।
अथवा
आनुवंशिक अभियांत्रिकी किसे कहते हैं ? उसका मानव जीवन में महत्व लिखिए।
उत्तर
वैज्ञानिकों द्वारा DNA या आनुवंशिक पदार्थ की संरचना में आवश्यकतानुसार हेर-फेर करने को जीन मैनीपुलेशन या जेनेटिक इन्जीनियरिंग कहते हैं । आनुवंशिक पदार्थ का कृत्रिम संश्लेषण दो अलग-अलग जीनों के DNA खण्डों को जोड़कर नया DNA बनाना, DNA की मरम्मत, DNA से कुछ न्यूक्लियोटाइड को हटाकर या जोड़कर या विस्थापित करके इच्छित संरचना वाले नये DNA अणुओं का संश्लेषण करके जीन क्रिया का नियन्त्रण करना तथा जीवधारियों में इच्छित गुणों का समावेश करना जेनेटिक इन्जीनियरिंग का मुख्य उद्देश्य है। आनुवंशिकी की यह शाखा अभी अपने शैशव काल में है।

उम्मीद की जाती है कि इस विधि के द्वारा आनुवंशिक वैज्ञानिक जीन की संरचना में सुधार करके अथवा विकृत जीन को सामान्य जीन द्वारा विस्थापित करके आनुवंशिक रोगों से मानव जाति को मुक्ति दिला सकेंगे अथवा मानव द्वारा उपयोग में आने वाले पादपों व जन्तुओं की नस्लों का सुधार कर सकेंगे। आनुवंशिक पदार्थ के संगठन में हेर-फेर, DNA की संरचना का ज्ञान एक अत्याधुनिक तकनीक के विकास के कारण सम्भव हो सकता है। इनको रिकॉम्बिनेन्ट DNA तकनीकी कहते हैं।

आनुवंशिक अभियांत्रिकी का मानव जीवन में महत्व

1. औद्योगिक उपयोग-उच्च वर्गों के जीवों के विटामिन प्रतिजैविक या हॉर्मोन के जीन को कोड करके तथा इनके संश्लेषित DNA को जीवाणुओं में पुनः स्थापित करके विटामिन्स, हॉर्मोन्स आदि यौगिकों का औद्योगिक स्तर पर संश्लेषण किया जाना सम्भव हुआ है। इस विधि से मानव इन्सुलिन का Humulin नाम से जैव-संश्लेषण किया गया है।

2.चिकित्सीय उपयोग-नयी दवाइयों का जैवस्तर पर संश्लेषण तथा जीन चिकित्सा द्वारा हीमोफीलिया, फिनाइल कीटोन्यूरिया आदि वंशागत रोगों का उपचार किया जाना सम्भव हुआ है।

3. कृषि क्षेत्र में उपयोग-

  • जीवाणु अथवा नीले-हरे शैवाल से नाइट्रोजन यौगिकीकरण करने वाले जीनों का अनाज वाली फसलों में स्थानान्तरण करने हेतु प्रयोग जारी है, जिससे हमारी फसलें पर्यावरण से नाइट्रोजन का सीधा प्रयोग कर सकेंगी और हमें कृषि में कृत्रिम उर्वरक के उपयोग की आवश्यकता नहीं रहेगी।
  • आनुवंशिक अभियांत्रिकी के द्वारा पौधों की नई एवं उच्च उत्पादन वाली प्रजातियों का विकास किया जाता है।
  • इसकी सहायता से उच्च गुणवत्ता एवं प्रोटीन युक्त पौधे विकसित किये जा सकते हैं।

4. जीन संरचना अभिव्यक्ति में परिवर्तन-इस तकनीक द्वारा इच्छानुसार नये-नये प्रकार के जीवों तथा वनस्पतियों का निर्माण सम्भव हो सकेगा।

प्रश्न 7.
जीन लाइब्रेरी या जीन बैंक क्या हैं ? इसे तैयार करने की विधि लिखिये ।
उत्तर
जीनोमिक लाइब्रेरी या जीन बैंक के अन्दर जीनोम खण्डों अथवा पूर्ण जीनोम को संरक्षित किया जाता है। जीनोमिक लाइब्रेरी तैयार करने के लिए कई क्रियाएँ चरण के रूप में सम्पन्न कराई जाती हैं

Isolation of m-RNA from tissue

Reverse transcriptase

c-DNA copies

Removal of m-RNA by alkali treatment

Single-stranded c-DNA

Double-stranded c-DNA with DNA polymerase forming hairpin loops

Removal of hairpin loops with Si nuclease

Double-stranded c-DNA

Insertion in vector to make library
चित्र-जीनोमिक लाइब्रेरी का निर्माण

(1) DNA खण्डों का उत्पादन।
(2) DNA खण्डों का वाहक क्लोन (प्लाज्मिड, कास्मिड या विषाणु) में प्रवेश।
(3) क्लोन्ड DNA का पोषक जीवाणु में प्रवेश। इस प्रकार प्राप्त पोषक जीवाणु जिसमें इच्छित DNA संरक्षित रहता है, को संवर्धन माध्यम में विकसित करते हैं। ऐसा करने पर जीवाणुओं की कॉलोनियाँ प्राप्त होती हैं। इन जीवाणुओं से एन्जाइम की सहायता से DNA को प्राप्त कर इन खण्डों को जीनोमिक लाइब्रेरी में संरक्षित किया जाता है।

जैव प्रौद्योगिकी एवं उसके उपयोग दीर्घ उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 1.
आनुवंशिक इन्जीनियरिंग की अनुप्रयोज्यता का वर्णन कीजिए।
उत्तर
अनुप्रयोज्यता की दृष्टि से आनुवंशिक इन्जीनियरिंग हमें निम्नलिखित लाभदायक तथा हानिकारक परिणाम देती है
(A) लाभदायक प्रभाव

  • औद्योगिक उपयोग-उच्च वर्गों के जीवों के विटामिन प्रतिजैविक या हॉर्मोन के जीन का कोड करके तथा संश्लेषित DNA को जीवाणुओं में पुन:स्थापित करके विटामिन्स, हॉर्मोन्स आदि यौगिकों को औद्योगिक स्तर पर संश्लेषण किया जाना सम्भव हुआ है। इस विधि से मानव इन्सुलिन का Humulin नाम से जैव-संश्लेषण किया गया है।
  • चिकित्सीय उपयोग-नयी दवाइयों का जैव स्तर पर संश्लेषण तथा जीन चिकित्सा द्वारा हीमोफीलिया, फीनाइलकीटोन्यूरिया आदि वंशागत रोगों का उपचार किया जाना सम्भव हुआ है।
  • कृषि क्षेत्र में उपयोग-जीवाणु अथवा नीले-हरे शैवाल से नाइट्रोजन यौगिकीकरण करने वाले जीनों का अनाज वाली फसलों में स्थानान्तरण करने हेतु प्रयोग जारी है, जिससे हमारी फसलें पर्यावरण से नाइट्रोजन का सीधा प्रयोग कर सकेंगी और हमें कृषि में कृत्रिम उर्वरक के उपयोग की आवश्यकता नहीं रहेगी।
  • जीन संरचना अभिव्यक्ति में परिवर्तन-इस तकनीक द्वारा इच्छानुसार नये-नये प्रकार के जीवों तथा वनस्पतियों का निर्माण सम्भव हो सकेगा।

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(B) हानिकारक प्रभाव

  • रोगाणु ऐन्टीबायोटिक्स के प्रति प्रतिरोधी हो सकते हैं।
  • आन्त्र में पाये जाने वाले जीवाणु कैन्सर कारक हो सकते हैं।
  • सामान्य वाइरस से अत्यधिक खतरनाक वाइरस का निर्माण हो सकता है।

प्रश्न 2.
फोरेंसिक विज्ञान क्या है ? फोरेंसिक विज्ञान में DNA फिंगर प्रिंटिंग की विधि समझाइए।
उत्तर
फोरेंसिक विज्ञान-फोरेंसिक विज्ञान के अन्तर्गत अपराधों की विवेचना की जाती है। आज जैव तकनीकी ने अपराधिक प्रकरणों के निपटारे में नये आयाम खोल दिये हैं। इनमें से DNA फिंगर प्रिंटिंग

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MP Board Class 11th Maths Solutions Chapter 14 गणितीय विवेचन Ex 14.4

MP Board Class 11th Maths Solutions Chapter 14 गणितीय विवेचन Ex 14.4

प्रश्न 1.
निम्नलिखित कथन को वाक्यांश “यदि- तो” का प्रयोग करते हुए पाँच विभिन्न रूप में इस प्रकार लिखिए कि उनके अर्थ समान हों।
“यदि एक प्राकृत संख्या विषम है तो उसका वर्ग भी विषम है।
हल:
(i) यदि एक प्राकृत संख्या विषम है तो अंर्तभाव है उसका वर्ग भी विषम है।
(ii) कोई प्राकृत संख्या विषम संख्या है केवल यदि उसका वर्ग विषम है।
(iii) यदि प्राकृत संख्या का वर्ग विषम नहीं है तो वह प्राकृत संख्या भी विषम नहीं होगी।
(iv) एक प्राकृत संख्या विषम है, इसके लिए यह अनिवार्य है कि उनका वर्ग भी विषम होगा।
(v) एक प्राकृत संख्या का वर्ग विषम है, इसके लिए यह पर्याप्त होगा कि वह संख्या विषम है।

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प्रश्न 2.
निम्नलिखित कथनों के प्रतिधनात्मक और विलोम कथन लिखिए :
(i) यदि x एक अभाज्य संख्या है, तो x एक विषम है।
हल:
प्रतिधनात्मक कथन : यदि एक संख्या x विषम नहीं है तो x एक अभाज्य संख्या नहीं है। विलोम कथन : यदि एक संख्या x विषम है तो x एक अभाज्य संख्या है।

(ii) यदि दो रेखाएँ समांतर हैं तो वे एक दूसरे को एक समतल में नहीं काटती हैं।
हल:
तिधनात्मक कथन : यदि दो रेखाएँ एक दूसरे को समतल में काटती हैं तो रेखाएँ समांतर नहीं हैं। विलोम कथन : यदि दो रेखाएँ एक दूसरे को एक ही समतल में नही काटती हैं तो रेखाएँ समांतर हैं।

(iii) किसी वस्तु के ठंडे होने का तात्पर्य (अंतर्भाव) है कि उसका तापक्रम कम है।
हल:
प्रतिधनात्मक कथन : यदि किसी वस्तु का तापमान कम नहीं है तो वह वस्तु ठंडी नहीं है।
विलोम कथन : यदि किसी वस्तु का तापमान कम है तो वह वस्तु ठंडी है।

(iv) आप ज्यामिति विषय को आत्मसात नहीं कर सकते यदि आपको यह ज्ञान नहीं है कि निगमनात्मक विवेचन किस प्रकार किया जाता है।
हल:
प्रतिधनात्मक कथन : यदि आपको यह ज्ञात है कि निगमनात्मक विवेचन किस प्रकार किया है तो आप ज्यामिति विषय को आत्मसात कर सकते हैं।
विलोम कथन : यदि आपको यह ज्ञात नहीं है कि निगमनात्मक विवेचन किस प्रकार किया जाता है तो आप ज्यामिति विषय को आत्मसात नहीं कर सकते हैं।

(v) “x एक सम संख्या है” से तात्पर्य (अंतर्भाव) है कि संख्या 4 से भाज्य है।
हल:
प्रतिधनात्मक कथन : यदि x संख्या 4 से भाज्य नहीं है तो x एक सम संख्या नहीं है।
विलोम कथन : यदि संख्या x, 4 से भाज्य है तो यह एक सम संख्या है।

प्रश्न 3.
निम्नलिखित कथनों में से प्रत्येक को ‘यदि-तो’ रूप में लिखिए :
(i) आपको नौकरी (काम) मिलने का तात्पर्य (अंतर्भाव) है कि आपकी विश्वसनियता अच्छी है।
हल:
यदि आपको नौकरी मिल गई है तो आपकी विश्वसनियता अच्छी है।

(ii) केले का पेड़ फूलेगा यदि वह एक माह तक गरम बना रहे।
हल:
यदि केले का पेड़ एक माह तक गरम बना रहे तो केले का पेड़ फूलेगा।

(iii) एक चतुर्भुज समांतर चतुर्भुज है यदि उसके विकर्ण एक-दूसरे को समद्विभाजित करे।
हल:
यदि किसी चतुर्भुज के विकर्ण एक दूसरे को समद्विभाजित करते हैं तो वह एक समांतर चतुर्भुज है।

(iv) कक्षा में ग्रेड A पाने के लिए यह अनिवार्य है कि आप पुस्तक के सभी प्रश्नों को सरल कर लेते है।
हल:
यदि आप कक्षा में A ग्रेड पाते हैं, तो आप पुस्तक के सभी प्रश्न हल कर लेते हैं।

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प्रश्न 4.
नीचे (a) और (b) में प्रदत्त कथनों में से प्रत्येक के (i) में दिए कथन का प्रतिधनात्मक और विलोम कथन पहचानिए।
(a) यदि आप दिल्ली में रहते हैं तो आपके पास जाड़े के कपड़े हैं।
(i) यदि आपके पास जाड़े के कपड़े नहीं हैं, तो आप दिल्ली में नहीं रहते हैं।
हल:
प्रतिधनात्मक।

(ii) यदि आपके पास जाड़े के कपड़े हैं, तो आप दिल्ली में रहते हैं।
हल:
विलोम

(b) यदि एक चतुर्भुज समांतर चतुर्भुज है, तो उसके विकर्ण एक दूसरे को समद्विभाजित करते हैं।
(i) यदि किसी चतुर्भुज के विकर्ण एक दूसरे को समद्विभाजित नहीं करते हैं तो चतुर्भुज एक समांतर चतुर्भुज नहीं है।
हल:
प्रतिधनात्मक।

(ii) यदि चतुर्भुज के विकर्ण एक दूसरे को समद्विभाजित करते हैं तो वह समांतर चतुर्भुज है।
हल:
विलोम।

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MP Board Class 11th Maths Solutions Chapter 14 गणितीय विवेचन Ex 14.3

MP Board Class 11th Maths Solutions Chapter 14 गणितीय विवेचन Ex 14.3

प्रश्न 1.
निम्नलिखित मिश्र कथनों में पहले संयोजक शब्दों को पहचानिए और फिर उनको घटक कथनों में विघटित कीजिए :
(i) सभी परिमेय संख्याएँ वास्तविक संख्याएँ होती हैं और सभी वास्तविक संख्याएँ सम्मिश्र संख्याएँ नहीं होती हैं।
हल:
संयोजक शब्द ‘और’
घटक p : सभी परिमेय संख्याएँ वास्तविक संख्याएँ होती हैं।
q: सभी वास्तविक संख्याएँ सम्मिश्र संख्याएँ नहीं होती हैं।

(ii) किसी पूर्णांक का वर्ग धन या ऋण होता है।
हल:
संयोजक शब्द ‘या’
घटक p : किसी पूर्णांक का वर्ग धन होता है।
q : किसी पूर्णाक का वर्ग ऋण होता है।

(iii) रेत (बालू) घूप में शीघ्र गर्म हो जाती है और रात्रि में शीघ्र ठंडी नहीं होती है।
हल:
संयोजक शब्द ‘और’
घटक p : रेत (बालू) धूप में शीघ्र गर्म हो जाती है।
q : रेत (बालू) रात्रि में शीघ्र ठंडी नहीं होती।

(iv) x = 2 और x = 3, समीकरण 3x2 – x – 10 = 0 के मूल हैं।
हल:
संयोजक शब्द ‘और’
घटक p: x = 2, समीकरण 3x2 – x – 10 = 0 का मूल है।
q: x = 3 समीकरण 3x2 – x – 10 = 0 का मूल है।

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प्रश्न 2.
निम्नलिखित कथनों में परिमाण वाचक वाक्यांश पहचानिए और कथनों के निषेधन लिखिए :
(i) एक ऐसी संख्या का अस्तित्व है, जो अपने वर्ग के बराबर है।
हल:
परिमाणवाचक वाक्यांश : एक ऐसी संख्या का अस्तित्व है।
कथन का निषेधन : ऐसी संख्या का अस्तित्व नहीं है जो अपने वर्ग के बराबर हो।

(ii) प्रत्येक वास्तविक संख्या x के लिए x, (x + 1) से कम होता है।
हल:
परिमाणवाचक वाक्यांश : “प्रत्येक के लिए”
p : प्रत्येक वास्तविक संख्या x के लिए x, x + 1 से कम होता है।
p का निषेधन = ~ p = कम से कम एक वास्तविक संख्या x ऐसी है जो x + 1 से कम नहीं है।

(iii) भारत के हर एक राज्य/प्रदेश के लिए एक राजधानी का अस्तित्व है।
हल:
परिमाणवाचक वाक्यांश : एक ऐसे का अस्तित्व है।
कथन p : भारत के हर एक राज्य/प्रदेश के लिए एक राजधानी का अस्तित्व है।
p का निषेधन : ~p = भारत के हर एक राज्य/ प्रदेश के लिए एक राजधानी का अस्तित्व नहीं है।

प्रश्न 3.
जाँचिए कि क्या नीचे लिखे कथनों के जोड़े (युग्म) एक दूसरे के निषेधन हैं। अपने उत्तर के लिए कारण भी बतलाइए।
(i) प्रत्येक वास्तविक संख्याओं x और y के लिए x + y = y + x सत्य है।
(ii) ऐसी वास्तविक संख्याओं x और y का अस्तित्व है जिनके लिए x + y = y + x सत्य है।
हल:
कथन (i) और (ii) एक दूसरे के निषेधन नहीं है।

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प्रश्न 4.
बतलाइए कि निम्नलिखित कथनों में प्रयुक्त ‘या’ ‘अपवर्जित है’ अथवा ‘अंतर्विष्ट’ है। अपने उत्तर के लिए कारण भी बतलाइए।
(i) सूर्य उदय होता है या चन्द्रमा अस्त होता है।
हल:
(i) अपवर्जित : सूर्य उदय होता है और चन्द्रमा अस्त होता है। एक समय पर सूर्य उदय होगा या चन्द्रमा।

(ii) ड्राइविंग लाइसेंस के आवेदन हेतु आपके पास राशन कार्ड या पासपोर्ट होना चाहिए।
हल:
अंतर्विष्ट : ड्राइविंग लाइसेंस के आवेदन हेतु राशन कार्ड या पास पोर्ट या दोनों मान्य है।

(iii) सभी पूर्णांक धन या ऋण होते है।
हल:
अपवर्जित : सभी पूर्णांक धन या ऋण होते हैं। परन्तु धन या ऋण दोनों नहीं हो सकते ।

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MP Board Class 11th Maths Solutions Chapter 14 गणितीय विवेचन Ex 14.2

MP Board Class 11th Maths Solutions Chapter 14 गणितीय विवेचन Ex 14.2

प्रश्न 1.
निम्नलिखित कथन का निषेधन लिखिए :
(i) चैन्नई, तमिलनाडु की राजधानी है।
(ii) \(\sqrt{2}\) एक सम्मिश्र संख्या नहीं है।
(iii) सभी त्रिभुज समबाहु त्रिभुज नहीं होते हैं।
(iv) संख्या 2 संख्या 7 से अधिक है।
(v) प्रत्येक प्राकृत संख्या एक पूर्णांक होती है।
हल:
(i) चैन्नई, तमिलनाडु की राजधानी नहीं है।
(ii) \(\sqrt{2}\) एक सम्मिश्र संख्या है।
(iii) सभी त्रिभुज समबाहु त्रिभुज हैं।
(iv) संख्या 2 संख्या 7 से बड़ी नहीं है।
(v) प्रत्येक प्राकृत संख्या एक पूर्णांक नहीं है।

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प्रश्न 2.
क्या निम्नलिखित कथन युग्म (कथन के जोड़े) एक दूसरे के निषेधन हैं?
(i) संख्या x एक परिमेय संख्या नहीं है।
संख्या x एक अपरिमेय संख्या नहीं है।
हल:
कथन ” संख्या : एक परिमेय संख्या नहीं है।” का निषेधन संख्या x एक परिमेय संख्या है। या x एक अपरिमेय संख्या नहीं है। यही दूसरा कथन है। अतः दिए गए कथन एक दूसरे के निषेधन हैं।

(ii) संख्या x एक परिमेय संख्या है।
संख्या x एक अपरिमेय संख्या है।
हल:
कथन “संख्या x एक परिमेय संख्या है।” का निषेधन संख्या x एक अपरिमेय संख्या है। जो कि दूसरे कथन के समान है।
अतः यह कथन एक दूसरे के निषेधन हैं।

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प्रश्न 3.
निम्नलिखित मिश्र कथन के घटक कथन ज्ञात कीजिए और जाँचिए कि वे सत्य हैं या असत्य हैं।
(i) संख्या 3 अभाज्य है या विषम है।
(ii) समस्त (सभी) पूर्णांक धन या ऋण हैं।
(iii) संख्या 100 संख्याओं 3, 11 और 5 से भाज्य हैं।
हल:
(i) p : संख्या 3 अभाज्य है। यह कथन सत्य है।
q : संख्या 3 विषम संख्या है। यह कथन सत्य है।
(ii) p : सभी पूर्णांक धन हैं। यह कथन सत्य है।
q : सभी पूर्णांक ऋण हैं। यह कथन सत्य है।
(iii) p : 100, 3 से भाज्य है। यह कथन असत्य है।
q : 100, 11 से भाज्य है। यह कथन असत्य है।
r : 100, 5 से भाज्य है। यह कथन सत्य है।

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MP Board Class 11th Maths Solutions Chapter 14 गणितीय विवेचन Ex 14.1

MP Board Class 11th Maths Solutions Chapter 14 गणितीय विवेचन Ex 14.1

प्रश्न 1.
निम्नलिखित वाक्यों में से कौन से कथन हैं ? अपने उत्तर के लिए कारण भी बतलाइए।
(i) एक महीने में 35 दिन होते हैं।
(ii) गणित एक कठिन विषय है।
(iii) 5 और 7 का योगफल 10 से अधिक होता है।
(iv) किसी संख्या का वर्ग एक सम संख्या होती है।
(v) किसी चतुर्भुज की भुजाएँ बराबर (समान) लंबाई की होती हैं।
(vi) इस प्रश्न का उत्तर दीजिए।
(vii) – 1 और 8 का गुणनफल 8 है।
(viii) किसी त्रिभुज के सभी अंतः कोणों का योगफल 180° होता है।
(ix) आज एक तूफानी दिन है।
(x) सभी वास्तविक संख्याएँ सम्मिश्र संख्याएँ होती हैं।
हल:
(i) कथन : यह असत्य है क्योंकि महीने में 35 दिन नहीं होते।
(ii) वाक्य : गणित एक कठिन विषय है। इसकी कोई परिभाषा नहीं है। किसी एक के लिए सरल और दूसरे के लिए कठिन विषय हो सकता है।
(iii) कथन : यह कथन सत्य है।
(iv) कथन : यह असत्य है क्योंकि वर्ग संख्या विषम भी हो सकती है। जैसे 9, 25…..
(v) कथन : यह कथन असत्य है क्योंकि किसी चतुर्भुज की लंबाई असमान भी होती है।
(vi) वाक्य : यह एक आदेश है, इसलिए यह एक कथन नहीं है।
(vii) कथन : यह कथन असत्य है, ∵ – 1 × 8 = – 8 ≠ 8.
(viii) कथन : यह कथन सत्य है। त्रिभुज के तीनों अंत: कोणों का योग 180° होता है।
(ix) वाक्य : यह स्पष्ट नहीं है कि कौन-सा दिन तूफानी है?
(x) कथन : यह सत्य कथन है।

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प्रश्न 2.
वाक्यों में तीन ऐसे उदाहरण दीजिए जो कथन नहीं हैं। उत्तर के लिए कारण भी बताइए।
हल:
तीन उदाहरण इस प्रकार हो सकते हैं :
(i) इस कमरे में उपस्थित प्रत्येक व्यक्ति निडर है। यह एक कथन नहीं है, क्योंकि संदर्भ से स्पष्ट नहीं है कि यहाँ पर किस कमरे के बारे में कहा जा रहा है और निडर शब्द भी स्पष्ट रूप से परिभाषित नहीं है।
(ii) वह अभियान्त्रिकी की छात्रा है। यह भी एक कथन नहीं है क्योंकि यह स्पष्ट नहीं है कि ‘वह’ वह कौन
(iii) “cos2θ का मान सदैव 1 / 2″ से अधिक होता है। जब तक हमें यह ज्ञात न हो कि θ क्या है हम यह नहीं कह सकते कि वाक्य सत्य है या नहीं।

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MP Board Class 11th Maths Solutions Chapter 13 सीमा और अवकलज विविध प्रश्नावली

MP Board Class 11th Maths Solutions Chapter 13 सीमा और अवकलज विविध प्रश्नावली

प्रश्न 1.
प्रथम सिद्धांत से निम्नलिखित फलनों का अवकलज ज्ञात कीजिए :
(i) – x.
हल:
MP Board Class 11th Maths Solutions Chapter 13 सीमा और अवकलज विविध प्रश्नावली img-1

(ii) (- x)– 1.
हल:
मान लीजिए
f(x) = (- x)– 1 = – \(\frac{1}{x}\)
∴ f(x + h)= – \(\frac{1}{x+h}\)
MP Board Class 11th Maths Solutions Chapter 13 सीमा और अवकलज विविध प्रश्नावली img-2

(iii) sin (x + 1).
हल:
मान f(x) = sin (x + 1)
∴ f(x + h) = sin (x + h + 1)
या f(x + h) – f(x) = sin (x + h +1) – sin (x + 1)
MP Board Class 11th Maths Solutions Chapter 13 सीमा और अवकलज विविध प्रश्नावली img-3

(iv) cos\(\left(x-\frac{\pi}{8}\right)\)
हल:
MP Board Class 11th Maths Solutions Chapter 13 सीमा और अवकलज विविध प्रश्नावली img-5
MP Board Class 11th Maths Solutions Chapter 13 सीमा और अवकलज विविध प्रश्नावली img-6

निम्नलिखित फलनों के अवकलज ज्ञात कीजिए (यह समझा जाए कि a, b, c, p, 4, r और s निश्चित शून्येत्तर अचर हैं और m तथा n पूर्णांक हैं।)
प्रश्न 2.
(x + a).
हल:
\(\frac{d}{d x}\)(x + a) = \(\frac{d}{d x}\)(x) + \(\frac{d}{d x}\)(a) = 1 + 0 = 1.

प्रश्न 3.
(px + q) (\(\frac{r}{x}\) + s)
हल:
माना f(x) = (px + q) (\(\frac{r}{x}\) + s)
MP Board Class 11th Maths Solutions Chapter 13 सीमा और अवकलज विविध प्रश्नावली img-7

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प्रश्न 4.
(ax + b) (cx + d)2.
हल:
माना, f(x) = (ax + b)(cx + d)2
MP Board Class 11th Maths Solutions Chapter 13 सीमा और अवकलज विविध प्रश्नावली img-8
= a. (cx + a)2 + (ax + b). 2c (cx + d)
= 2c(ax + b) (cx + d) + a(cx + d)2.

प्रश्न 5.
\(\frac{a x+b}{c x+d}\)
हल:
माना f(x) = \(\frac{a x+b}{c x+d}\)
MP Board Class 11th Maths Solutions Chapter 13 सीमा और अवकलज विविध प्रश्नावली img-9

प्रश्न 6.
\(\frac{1+\frac{1}{x}}{1-\frac{1}{x}}\).
हल:
MP Board Class 11th Maths Solutions Chapter 13 सीमा और अवकलज विविध प्रश्नावली img-10

प्रश्न 7.
\(\frac{1}{a x^{2}+b x+c}\).
हल:
माना f(x) = \(\frac{1}{a x^{2}+b x+c}\)
MP Board Class 11th Maths Solutions Chapter 13 सीमा और अवकलज विविध प्रश्नावली img-11

प्रश्न 8.
\(\frac{a x+b}{p x^{2}+q x+r}\).
हल:
MP Board Class 11th Maths Solutions Chapter 13 सीमा और अवकलज विविध प्रश्नावली img-12

प्रश्न 9.
\(\frac{\mu x^{2}+q x+r}{a x+b}\)
हल:
MP Board Class 11th Maths Solutions Chapter 13 सीमा और अवकलज विविध प्रश्नावली img-13

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प्रश्न 10.
\(\frac{a}{x^{4}}-\frac{b}{x^{2}}\) + cos x
हल:
MP Board Class 11th Maths Solutions Chapter 13 सीमा और अवकलज विविध प्रश्नावली img-14

प्रश्न 11.
4\(\sqrt{x}\) – 2.
हल:
MP Board Class 11th Maths Solutions Chapter 13 सीमा और अवकलज विविध प्रश्नावली img-15

प्रश्न 12.
(ax + b)n.
हल:
माना f(x) = (ax + b)n
x के आपेक्ष अवकलन करने पर
f'(x) = n(ax + b)n – 1 \(\frac{d}{d x}\)(ax + b)
= n(ax + b)n – 1 . a
= na(ax + b)n – 1.

प्रश्न 13.
(ax + b)n (cx + d)m .
हल:
माना, fx= (ax + b)n (cx + d)m
MP Board Class 11th Maths Solutions Chapter 13 सीमा और अवकलज विविध प्रश्नावली img-16

प्रश्न 14.
sin (x + a).
हल:
माना f(x) = sin (x + a)
x + a को u रखने पर
f(x) = sin u
x के सापेक्ष अवकलन करने पर
f'(x) = \(\frac{d}{d x}(\sin u)=\frac{d}{d u}(\sin u) \frac{d u}{d x}\)
= cos u. \(\frac{d}{d x}\) (x + a) = cos (x + a) 1
∴ \(\frac{d}{d x}\) sin (x + a)= cos (x + a).

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प्रश्न 15.
cosec x cot x.
हल:
माना f(x) = cosec x cot x
∵ (uv)’ = u’v + uv’
∴ f'(x) = (\(\frac{d}{d x}\) cosec x) cot x + cosec x \(\frac{d}{d x}\) (cot x)
= (- cosec x cot x) cot x + cosec x (- cosec2 x)
= – cosec3 x – cosec x cot2 x.

प्रश्न 16.
\(\frac{\cos x}{1+\sin x}\)
हल:
माना
MP Board Class 11th Maths Solutions Chapter 13 सीमा और अवकलज विविध प्रश्नावली img-17
= \(\frac{-(1+\sin x)}{(1+\sin x)^{2}}\)
= – \(\frac{1}{1+\sin x}\).

प्रश्न 17.
\(\frac{\sin x+\cos x}{\sin x-\cos x}\)
हल:
MP Board Class 11th Maths Solutions Chapter 13 सीमा और अवकलज विविध प्रश्नावली img-18

प्रश्न 18.
\(\frac{\sec x-1}{\sec x+1}\)
हल:
माना
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प्रश्न 19.
sinnx
हल:
MP Board Class 11th Maths Solutions Chapter 13 सीमा और अवकलज विविध प्रश्नावली img-20

प्रश्न 20.
\(\frac{a+b \sin x}{c+d \cos x}\)
हल:
MP Board Class 11th Maths Solutions Chapter 13 सीमा और अवकलज विविध प्रश्नावली img-21

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प्रश्न 21.
\(\frac{\sin (x+a)}{\cos x}\).
हल:
MP Board Class 11th Maths Solutions Chapter 13 सीमा और अवकलज विविध प्रश्नावली img-22
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प्रश्न 22.
x4(5 sin x – 3cos x)
हल:
MP Board Class 11th Maths Solutions Chapter 13 सीमा और अवकलज विविध प्रश्नावली img-24

प्रश्न 23.
(x2 + 1)cosx.
हल:
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प्रश्न 24.
(ax2 + sinx)(p + q cosx).
हल:
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प्रश्न 25.
(x + cos x)(x – tan x).
हल:
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= (1 – sin x)(x – tan x) + (x + cos x)(1 – sec2 x)
= (1 – sin x)(x – tan x) – (x + cos x) tan2x.

प्रश्न 26.
\(\frac{4 x+5 \sin x}{3 x+7 \cos x}\).
हल:
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प्रश्न 27.
\(\frac{x^{2} \cos \left(\frac{\pi}{4}\right)}{\sin x}\).
हल:
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प्रश्न 28.
\(\frac{x}{1+\tan x}\).
हल:
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प्रश्न 29.
(x + sec x) (x – tan x).
हल:
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प्रश्न 30.
\(\frac{x}{\sin ^{n} x}\).
हल:
माना
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MP Board Class 12th Biology Solutions Chapter 11 जैव प्रौद्योगिकी-सिद्धान्त व प्रक्रम

MP Board Class 12th Biology Solutions Chapter 11 जैव प्रौद्योगिकी-सिद्धान्त व प्रक्रम

जैव प्रौद्योगिकी-सिद्धान्त व प्रक्रम NCERT प्रश्नोत्तर

प्रश्न 1.
क्या आप दस पुनर्योगज प्रोटीन के बारे में बता सकते हैं जो चिकित्सीय व्यवहार के काम में लाये जाते हैं ?
उत्तर
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प्रश्न 2.
एक सचित्र चार्ट (आरेखित निरुपण के साथ) बनाइए जो प्रतिबंध एंजाइम के (जिस क्रियाधार DNA पर यह कार्य करता है उसे ) उन स्थलों को जहाँ यह DNA को काटता है व इनसे उत्पन्न उत्पाद को दर्शाता है ?
उत्तर
यहाँ ई. कोलाई से प्राप्त EcoRI नामक प्रतिबंधन एन्जाइम (Restriction Enzyme) का उदाहरण दिया जा रहा है
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प्रश्न 3.
कक्षा ग्यारहवीं में जो आप पढ़ चुके हैं उसके आधार पर क्या आप बता सकते हैं कि आणविक आकार के आधार पर एंजाइम बड़े हैं या डी.एन.ए.। आप इसके बारे में कैसे पता लगायेंगे ?
उत्तर
प्रोटीन अमीनो अम्लों से बनी है। प्रोटीन 20 प्रकार के अमीनो अम्लों से बनी है जो पेप्टाइड आबंधों के द्वारा जुड़ी होती है। प्रोटीन में कुल अमीनो अम्लों की संख्या, उनके प्रकार, उनके लगने के क्रम आदि के कारण अनन्त प्रकार की प्रोटीने संभव हैं। प्रोटीनों की औसत लंबाई चारों ओर 300 है जो कि अमीनो अम्लों का बचा-खुचा पदार्थ है। इनमें से कुछ एक्टिन फिलामेंट हैं जो कि हजारों एक्टिन अणुओं से बने हैं।

डी.एन.ए. पॉलीमरेज न्यूक्लियोटाइडों से बने होते हैं। वे चार न्यूक्लियोटाइड होते हैं जो कि एक-दूसरे के साथ फॉस्फोडाइएस्टर आबंधों से जुड़े हुए होते हैं । DNA पॉलीमरेज न्यूक्लियोटाइडों के लाखों बड़े अणुओं को अपने अंदर रख सकते हैं। उदाहरण के लिए, सबसे बड़ा मानव गुणसूत्र 220 मिलियन बेस पेयर लंबा है। इस प्रकार DNA एंजाइम से बड़े हैं।

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प्रश्न 4.
मानव की एक कोशिका में DNA की मोलर सन्द्रिता क्या होगी ? अपने अध्यापक से परामर्श कीजिए।
उत्तर
मोलर सांद्रता (Molar concentration)-किसी पदार्थ की सांद्रता प्रति इकाई आयतन में उसकी मात्रा की माप होती है। इसे सामान्यतया मोलरता (Molarity) के पदों में व्यक्त किया जाता है। किसी पदार्थ की मोलरता एक लीटर आयतन में उपस्थित उसके अणुओं की संख्या होती है। अणुओं के सांद्रता की गणना निम्न सूत्र से की जा सकती है
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DNA अणु जटिल जैविक वृहदाणु होते हैं। इनका अणुभार 106 से 109 डाल्टन तक होता है । हमारे शरीर में DNA के न्यूक्लियोटाइड का औसत आण्विक द्रव्यमान 130.86 होता है। अत: मानव DNA अणु का आण्विक द्रव्यमान 6×109 न्यूक्लियोटाइड (मानव जीनोम प्रोजेक्ट के अनुसार) x 130.86 = 784.56 x 10° g/mol. होगा।

प्रश्न 5.
क्या सुकेन्द्रकी कोशिकाओं में प्रतिबंधन एण्डोन्यूक्लिएज नहीं मिलते हैं ? अपने उत्तर को सही सिद्ध कीजिए।
उत्तर
नहीं, सुकेन्द्रकी कोशिकाओं में प्रतिबन्धन एण्डोन्यूक्लिऐज नहीं मिलते हैं। ये कुछ जीवाणुओं में उपस्थित रहते हैं। सन् 1963 में ई. कोलाई (E.coli) से दो एन्जाइम पृथक् किये गये थे। ये जीवाणुभोजी की वृद्धि को रोक देते हैं। इनमें एक एन्जाइम DNA मेथिल समूह को जोड़ता है, जबकि दूसरा एन्जाइम DNA को काटता है। दूसरे एन्जाइम को प्रतिबन्धन एण्डोन्यूक्लिएज (Restriction endonuclease) कहते हैं। प्रतिबन्धन एण्डोन्यूक्लिऐजका उपयोग आनुवंशिक इंजीनियरिंग में DNA के पुनर्योगज अणु (Recombinant molecules of DNA) बनाने में किया जाता है जिसका निर्माण विभिन्न जीनोमों से प्राप्त DNA से मिलकर होता है।

प्रश्न 6.
अच्छी हवा व मिश्रण विशेषता के अतिरिक्त विलोडन हौज बायोरिऐक्टर में कौन-सी अन्य कम्पन्न फ्लास्क सुविधाएँ हैं ?
उत्तर
सभी पुनर्योगज प्रौद्योगिकियों का अंतिम उद्देश्य वांछित प्रोटीन का उत्पादन करना होता है। इसके लिये पुनर्योगज DNA के अभिव्यक्त होने की आवश्यकता होती है। बाहरी जीन उपयुक्त परिस्थितियों में अभिव्यक्त होती है। वांछित जीन को क्लोन करने पर लक्ष्य प्रोटीन की अभिव्यक्ति को प्रेरित करने वाली परिस्थितियों को अनुकूलतम बनाने के बाद इनका व्यापक स्तर पर उत्पादन किया जाता है।

उत्पादों की अधिक मात्रा में उत्पादन हेतु बायोरियेक्टर (Bioreactor) की सहायता ली जाती है। बायोरिएक्टर वांछित उत्पादन हेतु अनुकूलतम परिस्थितियाँ उपलब्ध कराती है। अनुकूलतम परिस्थितियों में तापमान, pH, क्रियाधार, लवण, विटामिन, ऑक्सीजन आदि आते हैं। विलोडन हौज बायोरिएक्टर में प्रक्षोभक तंत्र (Agitator system), O2, प्रदाय तंत्र, झाग नियंत्रण तंत्र, तापक्रम तंत्र, पी.एच नियंत्रण तंत्र व प्रतिचयन प्रहार (Sampling ports) लगा होता है जिससे संवर्धन की थोड़ी मात्रा समय-समय पर निकाली जा सकती है।

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प्रश्न 7.
शिक्षक से परामर्श कर पाँच पैलिंड्रोमिक अनुप्रयास करना होगा कि क्षार युग्मक नियमों का पालन करते हुए पैलिंड्रोमिक अनुक्रम बनाने के उदाहरण का पता लगाइए।”
उत्तर
प्रत्येक सीमाकारी एन्जाइम, DNA स्ट्रेण्ड के विशिष्ट 4 से 6 न्यूक्लियोटाइड क्षार अनुक्रम को पहचानता है। इस क्रम को अभिज्ञेय स्थल (Recognition site) या पैलिन्ड्रोम (Palindrome) कहते हैं। पैलिन्ड्रोम वे शब्द होते हैं जिन्हे बांये से दांये अथवा दांये से बांये पढ़ने पर एक समान नजर आते हैं जैसे
MOM, BOB, MADAM, MALAYALAM

परन्तु शब्द पैलिन्ड्रोम और DNA पैलिन्ड्रोम में अंतर है। DNA में पैलिन्ड्रोम क्षारक युग्मों का एक ऐसा अनुक्रम होता है जो पढ़ने के अभिविन्यास को समान रखने पर दोनों लड़ियों में एक जैसा पढ़ा जाता है। उदाहरणार्थ-निम्न अनुक्रमों को 5’→ 3′ दिशा में पढ़ने पर दोनों लड़ियों में एक जैसा पढ़ा जायेगा। यदि इसे 3′ → 5′ दिशा में पढ़ा जाए तब भी यह बात सही बैठती है|

5′-GAATTC -3′
3′ – CTTAAG -5′

प्रतिबंधन एन्जाइम DNA लड़ी को पैलिन्ड्रोम स्थल के केन्द्र से कुछ दूरी पर परन्तु विपरीत लड़ियों में दो समान क्षारकों के बीच काटते हैं । यहाँ पांच पैलिन्ड्रोम क्षारकों के क्रम का उदाहरण दिया जा रहा है-
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प्रश्न 8.
अर्धसूत्री विभाजन को ध्यान में रखते हुए क्या आप बता सकते हैं कि पुनर्योगज DNA किस अवस्था में बनते हैं ?
उत्तर
प्रथम अर्धसूत्री विभाजन की प्रथम पूर्वावस्था (Ist prophase) की उप-अवस्था जाइगोटीन (Zygotene) में समजात गुणसूत्र जोड़े बनते हैं। इसे सूत्र युग्मक (Synapsis) कहते हैं । पैकिटीन (Pachytene) उप-अवस्था में सूत्रयुग्मक सम्मिश्र (Synaptonemal complex) में एक या अधिक स्थानों पर गोल सूक्ष्म घुण्डियां दिखाई देने लगती हैं, इन्हें पुनर्संयोजन घुण्डियां (Recombination nodule) कहते हैं। समजात गुणसूत्रों के परस्पर जुड़े क्रोमेटिड्स (Chromatids) के मध्य एक या अधिक खण्डों की पारस्परिक अदला बदली को पारगमन कहते हैं। इससे ही समजात पुनर्संयोजित DNA(Recombinant DNA) बन जाता है। पुनर्संयोजन घुण्डियां उन स्थानों पर बनती हैं जहाँ पर पारगमन हेतु क्रोमेटिड्स के टुकड़े टूट कर पुन: जुड़ते हैं।

प्रश्न 9.
क्या आप बता सकते हैं कि प्रतिवेदक (रिपोर्टर) एन्जाइम को वरणयोग्य चिन्ह की उपस्थिति में बाहरी DNA को परपोषी कोशिकाओं में स्थानान्तरण के लिये मॉनीटर करने के लिये किस प्रकार उपयोग में लाया जा सकता है ? ।
उत्तर
DNA द्वारा आदाता (ग्राही) कोशिका में प्रवेश करने का कार्य तभी किया जाता है जब आदाता कोशिका अपने चारों ओर स्थित DNA को धारण करने में सक्षम हो जाती है। यह कार्य अनेक विधियों के द्वारा किया जाता है । यदि पुनर्योगज DNA को जिसमें प्रतिजैविक, जैसे-ऐम्पिसिलिन के प्रति प्रतिरोधी जीन स्थित होती है, ई. कोलाई (E.coli) कोशिकाओं में स्थानान्तरित किया जाए तो परपोषी कोशिकाएँ प्रतिरोधी कोशिकाओं में रूपान्तरित हो जाती है।

यदि रूपान्तरित कोशिकाओं को अगार युक्त प्लेट पर फैलाया जाता है तो केवल कुछ रूपान्तरित कोशिकाएँ ही विकसित हो पाती है, जबकि अरूपान्तरित आदाता कोशिकाओं की मृत्यु हो जाती है। प्रतिरोधी जीन के कारण कोई भी ऐम्पिसिलिन की उपस्थिति में रूपान्तरित कोशिका का चयन कर सकता है। ऐसे प्रक्रम में प्रतिरोधी जीन को वरणयोग्य चिन्हक कहते हैं।

प्रश्न 10.
निम्नलिखित का संक्षिप्त वर्णन कीजिए
(क) प्रतिकृतियन का उद्भव
(ख) बायोरिएक्टर
(ग) अनुप्रवाह संसाधन।
उत्तर
(क) प्रतिकृतियन का उद्भव-यह वह अनुक्रम है जहाँ से प्रतिकृतियन की शुरूआत होती है और जब कोई डी.एन.ए. का कोई खंड इस अनुक्रम से जुड़ जाता है तब परपोषी कोशिकाओं के अंदर – प्रतिकृति कर सकता है। यह अनुक्रम जोड़े गए डी.एन.ए. के प्रतिरूपों की संख्या के नियंत्रण के लिए भी उत्तरदायी है। इसलिए यदि कोई लक्ष्य डी.एन.ए. की काफी संख्या प्राप्त करना चाहता है तो इसे ऐसे संवाहक में क्लोन करना चाहिए जिसका मूल (Ori) अत्यधिक प्रतिरूप बनाने में सहयोग करता है।

(ख) बायोरिएक्टर-बायोरिएक्टर एक बर्तन के समान है, जिसमें सूक्ष्मजीवों, पौधों, जंतुओं व मानव कोशिकाओं का उपयोग करते हुए कच्चे माल को जैव रूप से विशिष्ट उत्पादों व्यष्टि एंजाइम आदि में परिवर्तित किया जाता है। बायोरिएक्टर वांछित उत्पाद पाने के लिए, अनुकूलतम परिस्थितियाँ उपलब्ध करता है । वृद्धि के लिए ये अनुकूलतम परिस्थितियाँ हैं तापमान, pH, क्रियाधार, लवण, विटामिन, ऑक्सीजन । जो बायोरिएक्टर में सामान्यतया सर्वाधिक उपयोग में लार,ता है वह विलोडन (स्टिरिंग) प्रकार का है जिसे चित्र में दर्शाया गया है।

विलोडित हौज रिएक्टर सामान्यतया बेलनाकार होते हैं या जिनके आधार घुमावदार होने से रिएक्टर के अंदर अंतर्वस्तु के मिश्रण में सहायता मिलती है। विलोडक बायोरिएक्टर में ऑक्सीजन उपलब्धता व उसके मिश्रण का काम करते हैं । विकल्पतः हवा बुलबुले के रूप में बायोरिएक्टर में भेजी जा सकती है। रिएक्टर में एक प्रक्षोभक यंत्र (एजिटेटर सिस्टम), ऑक्सीजन प्रदाय तंत्र, झाग नियंत्रण तंत्र, तापक्रम नियंत्रण तंत्र, पीएच नियंत्रण तंत्र व प्रति चयन प्रद्वार लगा होता है जिससे संवर्धन की थोड़ी मात्रा समय-समय पर निकाली जा सकती है।
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(ग) अनुप्रवाह संसाधन-जैव संश्लेषित अवस्था के पूर्ण होने के बाद परिष्कृत तैयार होने व विपणन के लिए भेजे जाने से पहले कई प्रक्रमों से होकर गुजरता है। इन प्रक्रमों में पृथक्करण कशोधन सम्मिलित है और इसे सामूहिक रूप से अनुप्रवाह संसाधन कहते हैं । उत्पाद को उचित परिरक्षक के साथ संरूपित करते हैं औषधि के मामले में ऐसे संरूपण (फॉर्मुलेशन) की चिकित्सीय परीक्षण से गुजारते है। प्रत्येक उत्पाद के लिए सुनिश्चित गुणवत्ता नियंत्रण परीक्षण की भी आवश्यकता होती है। अनुप्रवाह संसाधन व गुणवत्ता नियंत्रण परीक्षण प्रत्येक उत्पाद के लिए भिन्न-भिन्न होती है।

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प्रश्न 11.
संक्षेप में बताइए
(क) पी.सी.आर.,
(ख) प्रतिबंधन एंजाइम और डी.एन.ए.,
(ग) काइटिनेज।
उत्तर
(क) पी.सी.आर.- पी.सी.आर. का अर्थ पॉलिमरेज चेन रिऐक्शन (पॉलिमरेज शृंखला अभिक्रिया) है। इस अभिक्रिया में उपक्रमकों (प्राइमर्स-छोटे रासायनिक संश्लेषित अल्प न्यूक्लियोटाइड जो डी.एन.ए. क्षेत्र के पूरक होते हैं) के दो समुच्चयों (सेट्स) व डी.एन.ए. पॉलिमरेज एंजाइम का उपयोग करते हुए पात्रे (इन विट्रो) विधि द्वारा उपयोगी जीन के कई प्रतिकृतियों का संश्लेषण होता है। यह एंजाइम जिनोमिक डी.एन.ए. को टेंपलेट के रूप में लेकर अभिक्रिया से मिलने वाले न्यूक्लियोटाइडों का उपयोग करते हुए उपक्रमकों को विस्तृत कर देता है। यदि डीएनए प्रतिकृतयेन प्रक्रम कई बार दोहराया जाता है तब डीएनए खंड को लगभग एक अरब गुना प्रवर्धित किया जा सकता है।

(ख) प्रतिबंधन एंजाइम और डी.एन.ए.-आणविक कैंची कहे जाने वाले प्रतिबंधन एंजाइम (रिस्ट्रिक्शन एंजाइम) की खोज से डी.एन.ए. को विशिष्ट जगहों पर काटना संभव हो सका। कटे हुए डी.एन.ए. का भाग प्लाज्मिड डी.एन.ए. से जोड़ा जाता है। यह प्लाज्मिड डी.एन.ए. संवाहक (वेक्टर) की तरह कार्य करता है जो इससे जुड़े डी.एन.ए. को स्थानांतरित करता है। प्रतिजैविक प्रतिरोधी जीन को संवाहक के साथ जोड़ने का काम एंजाइम डीएनए लाइगेज के द्वारा होता है जो डी.एन.ए. अणु के कटे हुए भाग पर कार्य कर उसके किनारों को जोड़ने का काम करता है ।

इस संयोजन से पात्रे (इन विट्रो) नये गोलाकार स्वतः प्रतिकृति बनाने वाले डी.एन.ए. का निर्माण होता है जिसे पुनर्योगज डी.एन.ए. कहते हैं। जब यह डी.एन.ए. इंश्चिरिचिया कोलाई में स्थानांतरित किया जाता है तो यह नए परपोषी के डी.एन.ए. पॉलिमरेज एंजाइम का उपयोग कर अनेक प्रतिकृतियाँ बना लेता है। प्रतिजैविक प्रतिरोधी जीन की प्रति का ई. कोलाई का गुणन, ई. कोलाई में प्रतिजैविक प्रतिरोधी जीन की क्लोनिंग कहलाती है।

(ग) काइटिनेज-काइटिनेज एक प्रकार का एंजाइम है।

प्रश्न 12.
अपने अध्यापक से चर्चा करके पता लगाइए कि निम्नलिखित के बीच कैसे भेद करेंगे

(क) प्लाज्मिड DNA और गुणसूत्रीय DNA
(ख) RNA और DNA
(ग) एक्सोन्यूक्लिएज और एंडोन्यूक्लिएज।
उत्तर
(क) प्लाज्मिड DNA और गुणसूत्रीय DNA (Plasmid DNA and Chromosomal DNA)
प्लाज्मिड अतिरिक्त गुणसूत्रीय रचनाएँ होती हैं जो जीवाणुओं के अन्दर स्वतः गुणित होती रहती है। इनका DNA दो सूत्रों का बना, प्रायः गोलाकार (Circular) होता है। इन पर अन्य जीनों के अतिरिक्त प्लाज्मिड की प्रतिकृति करने वाले जीन भी पाये जाते हैं। पुनर्योगज DNA तकनीक में प्रयुक्त प्लाज्मिड में प्रतिजैविक रोधिता वाले जीन भी होते हैं जिनसे पुनर्योगज DNA अणुओं की पहचान सम्भव हो पाती है।

गुणसूत्रों में उपस्थित DNA गुणसूत्रीय DNA होता है। यह भी दो सूत्रों का होता है परन्तु गोलाकार नहीं होता तथा कोशिका के केन्द्रक में होता है। इसमें प्रतिजैविक रोधिता वाले जीन नहीं होते हैं । यह प्लाज्मिड DNA की तुलना में अधिक लम्बा तथा अधिक न्यूक्लियोटाइड युक्त होता है।

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(ख) DNA तथा RNA में अन्तरDNA
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(ग) एक्सोन्यूक्लिएज और एंडोन्यूक्लिएज (Exonuclease and Endonuclease)एक्सोन्यूक्लिएज-ये DNA के सिरे से न्यूक्लियोटाइड को अलग करते हैं। एन्डोन्यूक्लिएज-ये DNA के भीतर विशिष्ट स्थलों पर काटते हैं। प्रत्येक प्रतिबंधन एन्डोन्यूक्लिऐज DNA अनुक्रम की लम्बाई के निरीक्षण पश्चात् कार्य करता है । जब यह अपना विशिष्ट पहचान अनुक्रम पा जाता है तब यह DNA से जुड़ता है तथा द्विकुंडलिनी की दोनों लड़ियों को शर्करा-फॉस्फेट आधार स्तम्भों के विशिष्ट केन्द्रों पर काटता है।

जैव प्रौद्योगिकी-सिद्धान्त व प्रक्रम अन्य महत्वपूर्ण प्रश्नोत्तर

जैव प्रौद्योगिकी-सिद्धान्त व प्रक्रम वस्तुनिष्ठ प्रश्न

1. सही विकल्प चुनकर लिखिए

प्रश्न 1.
कृत्रिम रूप से जीन की प्रकृति में परिवर्तन करना कहलाता है
(a) जीन परिचालन
(b) जीन हेर-फेर
(c) (a) एवं (b) दोनों
(d) इनमें से कोई नहीं।
उत्तर
(c) (a) एवं (b) दोनों

प्रश्न 2.
D.N.A. पुनर्योगज तकनीक का आविष्कार कब किया गया
(a) सन् 1971
(b) सन् 1972
(c) सन् 1973
(d) सन् 1974.
उत्तर
(b) सन् 1972

प्रश्न 3.
एच. हैरिस व जे. एफ. वाटकिन्स द्वारा D.N.A. पुनर्योजन की कौन-सी विधि दी गयी थी
(a) रूपान्तरण
(b) पराक्रमण
(c) क्लोनिंग
(d) प्रोटोप्लास्ट संलयन।
उत्तर
(d) प्रोटोप्लास्ट संलयन।

प्रश्न 4.
कैलिफोर्निया के वैज्ञानिकों ने एक कृत्रिम जीन बनाया जिसकी क्षमता थी
(a) कृत्रिम इन्सुलिन बनाने की
(b) कृत्रिम जीन पैदा करने की
(c) कीड़ों का प्रकोप नहीं होने की
(d) पोषक खाद्य उत्पादन करने की।
उत्तर
(a) कृत्रिम इन्सुलिन बनाने की

प्रश्न 5.
विशिष्ट जीन के समान जीन प्राप्त करना कहलाता है
(a) जीव क्लोनिंग
(b) जीन क्लोनिंग
(c) D.N.A. क्लोनिंग
(d) R.N.A. क्लोनिंग।
उत्तर
(b) जीन क्लोनिंग

प्रश्न 6.
पादपों में कायिक संवर्धन द्वारा उत्पादित संततियों को कहते हैं
(a) कैलस
(b) अंडाणु
(c) क्लोन
(d) इनमें से कोई नहीं।
उत्तर
(c) क्लोन

प्रश्न 7.
आनुवंशिक अभियांत्रिकी में ‘आण्विक कैंची’ की तरह उपयोग किया जाता है
(a) DNA पॉलीमरेज
(b) DNA लाइगेज
(c) हेलिकेज
(d) रेस्ट्रिक्शन एण्डोन्यूक्लिएज।
उत्तर
(d) रेस्ट्रिक्शन एण्डोन्यूक्लिएज।

प्रश्न 8.
लक्ष्य ऊतक (Target tissue) में ट्रांसजीन की ट्रांसजेनिक अभिव्यक्ति निर्धारित होती है
(a) इन्हान्स द्वारा
(b) रिपोर्टर द्वारा
(c) प्रमोटर द्वारा
(d) ट्रांसजीन द्वारा।
उत्तर
(b) रिपोर्टर द्वारा

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प्रश्न 9.
प्रथम प्रतिबंधन एण्डोन्यूक्लिएज निम्न में कौन-सा पहचाना गया
(a) EcoRI
(b)Hind II
(c) Hind III
(d) TaqI
उत्तर
(b)Hind II

प्रश्न 10.
pBR322 वाहक में किसके प्रति प्रतिरोधी जीन होती है
(a) एम्पीसिलिन
(b) टेट्रासाइक्लिन
(c) उपर्युक्त दोनों
(d) इनमें से कोई नहीं।
उत्तर
(c) उपर्युक्त दोनों

प्रश्न 11.
एग्रोबैक्टीरियम ट्यूमीफेसिएंस का DNA खण्ड (t-DNA) सामान्य पौधों की कोशिकाओं में क्या रोग उत्पन्न करता है
(a) कैंसर
(b) अपघटन
(c) अर्बुद
(d) इनमें से कोई नहीं।
उत्तर
(c) अर्बुद

2.  रिक्त स्थानों की पूर्ति कीजिए

1. D.N.A. में संचित सूचना के संचरण तथा फिर से प्रकट होने एवं लक्षणों के बनने को ………….
कहते हैं।
2. ……………. मानव निर्मित इन्सुलिन है।
3. क्लोनिंग से …………….. वाले जीन भी उत्पन्न हो जाने की संभावना होती है।
4. वाहक का …………….. एवं …………….. आसान होना चाहिए।
5. आनुवंशिक इंजीनियरिंग से ऐसे जीव भी उत्पादित किये जा सकते हैं जिनका …………. सर्वथा नया हो।
6. …… जीन वाहक का कार्य करता है।
उत्तर

  1. भावाकृति
  2. ह्यूम्यूलिन
  3. अवांछित गुणों
  4. विलगन, शुद्धिकरण
  5. जीन प्रारूप
  6. Ti प्लाज्मिड।

3. सही जोड़ी बनाइए

‘A’ -‘B’

1. इन्सुलिन – (a) डी.एन.ए. में सकारात्मक परिवर्तन
2. जीन बैंक – (b) मानव जीनोम प्रायोजना
3. जीन अभियांत्रिकी – (c) जीन अभियांत्रिकी
4. जीनोमिकी – (d) ज्ञात D.N.A. संरक्षण
उत्तर
1. (c), 2. (d), 3. (a), 4. (b).

4. एक शब्द में उत्तर दीजिए

1. उस पादप का नाम बताइये जिसके DNA में न्यूक्लियोटाइड्स का क्रम सर्वप्रथम पढ़ा गया।
2. किसी जीनोम का संरचनात्मक तथा क्रियात्मक पक्ष का अध्ययन ।
3. उस वैज्ञानिक का नाम बताइये जिन्होंने DNA फिंगरप्रिंटिंग की आधारशिला रखी।
4. समान न्यूक्लियोटाइड क्रम के खण्डों वाला DNA
5. ऐसा जीव जिसमें दूसरे स्रोत (जीव) के जीन को प्रवेशित कराया गया है।
6. CCMB कहाँ स्थित है ?
7. प्रथम जन्तु क्लोन का नाम बताइये।
8. वह चिकित्सा पद्धति जिसके द्वारा किसी जीव में गड़बड़ी वाले जीन को सही जीन द्वारा प्रतिस्थापित किया जाता है।
9. विषाणुओं को नष्ट करने वाला जैव अणु जो मनुष्य में विषाणु प्रतिरोधकता उत्पन्न करता है।
10. Ti प्लाज्मिड का स्रोत।
उत्तर

  1. एरेबिडोप्सिस
  2. जीनोमिक्स
  3. एलेक जेफरी
  4. रिपिटीटिव DNA
  5. ट्रांसजेनिक
  6. हैदराबाद
  7. डॉली (भेड़)
  8. जीन थेरैपी
  9. इन्टरफेरॉन
  10. एग्रोबैक्टीरियम ट्यूमिफेसिएन्स।

जैव प्रौद्योगिकी-सिद्धान्त व प्रक्रम अति लघु उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 1.
लक्ष्य जीन को पृथक करने के लिए कौन-से एन्जाइम की आवश्यकता होती है ?
उत्तर
लक्ष्य जीन को पृथक् करने के लिए प्रतिबन्धन एण्डोन्यूक्लिएज एन्जाइम की आवश्यकता होती है।

प्रश्न 2.
कौन-सा DNA पॉलीमरेज उच्च ताप पर भी सक्रिय रहता है ?
उत्तर
टेक (Taq) DNA पॉलीमरेज उच्च ताप पर भी सक्रिय रहता है।

प्रश्न 3.
किन्ही तीन प्रतिबंधन एण्डोन्यूक्लिएज एन्जाइमों के नाम लिखिए।
उत्तर

  • EcoRI
  • Hind II
  • Hind III.

प्रश्न 4.
PCR का पूर्ण नाम लिखिए। इसमें कौन-सा एन्जाइम प्रयुक्त होता है ?
उत्तर
पॉलिमरेज श्रृंखला अभिक्रिया (Polymerase Chain Reaction) इसमें टेक (Taq) DNA पॉलमरेज एन्जाइम प्रयुक्त होता है।

प्रश्न 5.
जीवाणुभोजी (Bacteriophage) किसे कहते हैं ?
उत्तर
जीवाणुओं को संक्रमित करने वाले विषाणु को जीवाणुभोजी कहते हैं।

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प्रश्न 6.
प्रथम पुनर्योगज DNA का निर्माण किसमें हुआ था ?
उत्तर
जीवाणु सालमोनेला टाइफीयूरिम में।

प्रश्न 7.
आण्विक कैंची किसे कहते हैं ?
उत्तर
प्रतिबंधन एन्जाइम (Restriction Enzyme) को आण्विक कैंची कहते हैं।

प्रश्न 8.
हिंड II (Hind II) DNA अणु को कहाँ से काटता है ?
उत्तर
हिंड II, DNA अणु को उस विशेष बिन्दु पर काटते हैं जहाँ पर छ: क्षारक युग्मों (Base pairs) का विशेष अनुक्रम होता है।

प्रश्न 9.
चिपचिपे सिरे किस एन्जाइम के कार्य में सहायता करते हैं ?
उत्तर
एन्जाइम DNA लाइगेज के कार्य में सहायता प्रदान करता है।

प्रश्न 10.
DNA खण्ड किस प्रकार के आवेशित अणु होते हैं ?
उत्तर
ऋणात्मक आवेशित (Charged) होते हैं।

प्रश्न 11.
इलेक्ट्रोफोरेसिस में DNA को देखने के लिये किससे अभिरंजित किया जाता है ?
उत्तर
इथीडियम ब्रोमाइड नामक यौगिक से अभिरंजित करते हैं।

प्रश्न 12.
इलेक्ट्रोफोरेसिस में क्या होता है ?
उत्तर
DNA खण्ड का पृथक्करण एवं विलगन।

प्रश्न 13.
जीवाणु कोशिका में मिलने वाले वर्तुल DNA का प्रमुख कार्य बताइये।
उत्तर
यह संवाहक (वेक्टर) की तरह कार्य करता है।

प्रश्न 14.
उस तकनीक का नाम लिखिए, जिसके द्वारा DNA खण्डों को अलग कर सकते हैं ?
उत्तर
जैव वैद्युत कण संचलन (Electrophoresis)।

प्रश्न 15.
प्लाज्मिड pBR322 में पाये जाने वाले दो प्रतिजैविक प्रतिरोधी जीन के नाम लिखिये ?
उत्तर
एम्पिसिलिन व टेट्रासाइक्लीन ।

जैव प्रौद्योगिकी-सिद्धान्त व प्रक्रम लघु उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 1.
आनुवंशिक अभियांत्रिकी किसे कहते हैं ?
उत्तर
DNA या आनुवंशिक पदार्थ की संरचना में आवश्यकतानुसार हेर-फेर करने की क्रिया को आनुवंशिक अभियान्त्रिकी कहते हैं।

प्रश्न 2.
आनुवंशिक अभियांत्रिकी के दो उद्देश्य लिखिए।
उत्तर
उद्देश्य-

  • जीन की संरचना में इच्छित परिवर्तन करना।
  • आनुवंशिक विकृतियों को ठीक करना।

प्रश्न 3.
बैक्टीरियोफेज क्या है ?
उत्तर
बैक्टीरियोफेज जीवाणु कोशिकाओं में पाया जाने वाला एक प्रकार का परजीवी विषाणु है, जिसका शरीर दो भागों-सिर एवं पूँछ का बना होता है। इसके सिर में आनुवंशिक पदार्थ के रूप DNA पाया जाता है। आनुवंशिक अभियान्त्रिकी में इसका बहुत अधिक महत्व है।

प्रश्न 4.
रेस्ट्रिक्शन एण्डोन्यूक्लिएज क्या है ?
उत्तर
रेस्ट्रिक्शन एण्डोन्यूक्लिएज, न्यूक्लिएज समूह का एन्जाइम है। यह नाभिकीय अम्लों विशेषकर DNA को विशिष्ट स्थान पर काटने का कार्य करता है।

प्रश्न 5.
वाहक क्या है ?
उत्तर
DNA पुनर्योजन तकनीक में विदेशज जीन (Foreign DNA) को अपने साथ इच्छित स्थल तक लाने वाले DNA खण्ड को वाहक (Vector) कहते हैं।

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प्रश्न 6.
वाहक के चार लक्षण लिखिये।
उत्तर
वाहक के लक्षण-

  • स्व-द्विगुणन की क्षमता होनी चाहिए।
  • इसका विलगन एवं शुद्धिकरण आसान होना चाहिए।
  • अणुभार कम होने चाहिए ताकि इस पर बड़े DNA अथवा जीन को जोड़ा जा सके।
  • पोषक कोशिका (Host Cell) के अन्दर इसका विनिष्टिकरण (Degradation) नहीं होना चाहिए।

प्रश्न 7.
प्लाज्मिड किसे कहते हैं ?
उत्तर
प्लाज्मिड्स बाह्य नाभिकीय (Extra nuclear) स्वत: द्विगुणित होने वाले (Self replicating), सहसंयोजी रूप से बन्द (Covalently Closed), वलयाकार, द्विसूत्री DNA अणु हैं, जो कि प्रायः सभी जीवाणु कोशिकाओं में पाये जाते हैं।

प्रश्न 8.
DNA लाइगेज क्या होता है ?
उत्तर
DNA लाइगेज एक विशिष्ट प्रकार का एन्जाइम होता है, जो दो DNA खण्डों को आपस में या DNA अणु के टूट-फूट वाले स्थल को जोड़ने का कार्य करता है।

प्रश्न 9.
c-DNA किसे कहते हैं ?
उत्तर
जीवन कोशिका में पुनर्योजित DNA का द्विगुणन से प्राप्त प्रतिलिपियों को क्लोन्ड या पुंजीकृत DNA (c-DNA) कहा जाता है।

प्रश्न 10.
Ti प्लाज्मिड क्या है ?
उत्तर
ऐग्रोबैक्टीरियम ट्यूमीफेसिएन्स (Agrobacterium tumifaciens) नामक जीवाणु में पाये जाने वाले विशिष्ट प्लाज्मिड जो कि द्विबीजपत्री पौधों में संक्रमण पश्चात् ट्यूमर निर्माण को अभिप्रेरित करता है, Ti प्लाज्मिड कहलाता है। यह जीन अभियांत्रिकी में वाहक का भी कार्य करता है।

प्रश्न 11.
विश्व के पहले जन्तु क्लोन का नाम बताइए।
उत्तर
विश्व में पहला जन्तु क्लोन भेड़ का उत्पन्न कराया गया, जिसका नाम डॉली रखा गया है।

प्रश्न 12.
कृत्रिम रूप से DNA संश्लेषण की विधि को खोजने वाले वैज्ञानिकों के नाम बताइए।
उत्तर
कृत्रिम रूप से DNA संश्लेषण की विधि के खोज का श्रेय डॉ. हरगोबिन्द खुराना, एम. नीरेनबर्ग एवं आर. हौली को दिया जाता है, जिसके लिए इन तीनों वैज्ञानिकों को एक साथ सन् 1968 में नोबेल पुरस्कार से सम्मानित किया गया।

प्रश्न 13.
जीन मैनीपुलेशन या जेनेटिक इन्जीनियरिंग को समझाइए।
उत्तर
वैज्ञानिक द्वारा DNA या आनुवंशिक पदार्थ की संरचना में आवश्यकतानुसार हेर-फेर करने को जीन मैनीपुलेशन या जेनेटिक इन्जीनियरिंग कहते हैं। आनुवंशिक पदार्थ का कृत्रिम संश्लेषण दो अलग-अलग जीनों के DNA खण्डों को जोड़कर नया DNA बनाना, DNA की मरम्मत, DNA से कुछ न्यूक्लियोटाइड को हटाकर या जोड़कर या विस्थापित करके इच्छित संरचना वाले नये DNA अणुओं का संश्लेषण करके जीन क्रिया का नियन्त्रण करना तथा जीवधारियों में इच्छित गुणों का समावेश करना जेनेटिक इन्जीनियरिंग का मुख्य उद्देश्य है। आनुवंशिकी की यह शाखा अभी अपने शैशव काल में है।

उम्मीद की जाती है कि इस विधि के द्वारा आनुवंशिक वैज्ञानिक जीन की संरचना में सुधार करके अथवा विकृत जीन को सामान्य जीन द्वारा विस्थापित करके आनुवंशिक रोगों से मानव जाति को मुक्ति दिला सकेंगे अथवा मानव द्वारा उपयोग में आने वाले पादपों व जन्तुओं की नस्लों का सुधार कर सकेंगे। आनुवंशिक पदार्थ के संगठन में हेर-फेर, DNA की संरचना का ज्ञान एक अत्याधुनिक तकनीक के विकास के कारण सम्भव हो सकता है। इनको रिकॉम्बिनेन्ट DNA तकनीकी कहते है

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प्रश्न 14.
फसल सुधार में आनुवंशिक इंजीनियरिंग के तीन उपयोग लिखिए।
उत्तर-
फसल सुधार में आनुवंशिक इंजीनियरिंग के उपयोग

  • धान्यों में स्वयं नाइट्रोजन स्थिरीकरण गुण पैदा करने के प्रयास में काफी सफलता मिली है।
  • पौधों की जंगली प्रजातियों से जीनों को प्राप्त कर उन्हें फसली पौधों में स्थानांतरण कर उनमें परजीवियों तथा.कीड़े-मकोड़ों के प्रति प्रतिरोधकता पैदा करने के भी प्रयास किये जा रहे हैं।
  • केन्द्रकीय एवं हरितलवक जीन्स को पुन: समायोजित कर फसली पौधों की प्रकाश-संश्लेषण करने की क्षमता बढ़ाने के प्रयास किये जा रहे हैं। इसके अलावा C3,पौधों को C4 पौधों में परिवर्तित करने के प्रयास में भी इस तकनीक द्वारा आशान्वित सफलता मिली है।

प्रश्न 15.
जीन क्लोनिंग के उपयोग लिखिये।
उत्तर
जीन क्लोनिंग के उपयोग-

  • किसी जीव के इच्छित जीनोटाइप को संरक्षित करने में।
  • उच्च गुणों वाले जीवों को सरलता से प्राप्त करने में।
  • विलुप्त हो रहे पादपों तथा जन्तुओं को संरक्षित करने में।
  • उपयोगी (दूध, प्रोटीन देने वाले) जंतुओं को पैदा करने में।
  • मानव अंग प्रत्यारोपण के लिये आनुवंशिक रूप से परिवर्तित पशुओं को पैदा करने में।

प्रश्न 16.
चिकित्सा के क्षेत्र में आनुवंशिक इंजीनियरिंग के कोई तीन उपयोग लिखिये।
उत्तर
चिकित्सा के क्षेत्र में आनुवंशिक इंजीनियरिंग के उपयोग-

  • गोइडल ने E.coli के D.N.A. में इस हॉर्मोन के जीन को निवेशित कर माध्यम से मनुष्य के वृद्धि हॉर्मोन का संश्लेषण कराया।
  • हिपैटाइटिस B एक संदूषित जीन के कारण होता है, इसे प्रतिस्थापित कर वैज्ञानिकों ने इस रोग का इलाज ढूँढ लिया है।
  • कृत्रिम जीन निर्माण द्वारा (जीन संवर्द्धन तकनीक) मानव इंसुलिन मधुमेह की बीमारी को दूर करने के लिये तैयार करना।

प्रश्न 17.
जीन्स बैंक से आप क्या समझते हैं ? इसका क्या महत्व है ?
उत्तर
जीन्स को जीवों के अथवा संश्लेषित अवस्था में संरक्षित करने वाली संस्था या स्थान को जीन बैंक कहते हैं। इसके अन्तर्गत जीवों की कोशिकाओं में पाये जाने वाले आनुवंशिक पदार्थ (DNA) का संरक्षण किया जाता है। इसका सबसे पहला उपाय यह है कि दुर्लभ जीवों को संरक्षित रखा जाये। दूसरे उपाय के अन्तर्गत जीवों की कोशिकाओं या ऊतकों को सुरक्षित रखा जाता है। महत्व-जीन्स बैंक में जीनों को संरक्षित रखकर इनके द्वारा नयी उन्नतशील जातियों को तैयार किया जाता है तथा उन पर अनेक वैज्ञानिक परीक्षण भी किये जा सकते हैं।

प्रश्न 18.
आनुवंशिक इन्जीनियरिंग की महत्ता एवं उसके तीन उपयोग लिखिए।
उत्तर
मनुष्य को जैव-तकनीक तथा आनुवंशिक इन्जीनियरिंग के द्वारा कई उपयोगी एवं महत्वपूर्ण सफलताएँ प्राप्त हुई हैं। ऐसा लगता है कि इसकी सहायता से सुजननिकी के क्षेत्र में कई विचार जो अब तक कल्पनामयी लगते थे, निकट भविष्य में वास्तविकता में बदल जायेंगे। आनुवंशिक इन्जीनियरिंग के उपयोगअनुप्रयोज्यता की दृष्टि से आनुवंशिक इन्जीनियरिंग हमें निम्नलिखित लाभदायक तथा हानिकारक परिणाम देती है

प्रश्न 19.
जीन क्लोनिंग से क्या समझते हैं ? इसका क्या महत्व है ?
अथवा
जीन क्लोनिंग क्या है ? दो उदाहरण दीजिये।
उत्तर
जीन क्लोनिंग, पुनर्संयोजित DNA खण्डों को प्राप्त करने या तैयार करने की एक विधि है, जिसमें विदलित DNA (Cleaved DNA) अणु को विषाणु DNA या प्लाज्मिड DNA के साथ सम्बन्धित करते हैं और फिर विषाणु अथवा जीवाणु द्विगुणन कराके इससे सम्बन्धित DNA की प्रतिलिपियाँ तैयार करते हैं। इस प्रकार से प्राप्त सम्बन्धित DNA की प्रतियों जो पुनर्संयोजित DNA के गुणन से बनती हैं, क्लोन्ड DNA कहते हैं तथा यह तकनीक जीन क्लोनिंग कहलाती है।

महत्व-

  • इसके द्वारा उपयोगी आनुवंशिक गुणों को प्राप्त किया जा सकता है।
  • इस तकनीक के द्वारा कई बीमारियों से बचा जा सकता है।
  • इस तकनीक के द्वारा कई दवाइयों का संश्लेषण किया जा सकता है।
  • इसका उपयोग सुजननिकी में किया जा सकता है।

जैव प्रौद्योगिकी-सिद्धान्त व प्रक्रम दीर्घ उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 1.
आनुवंशिक इंजीनियरिंग की अनुप्रयोज्यता का वर्णन कीजिए।
अथवा
आनुवंशिक इंजीनियरिंग का औद्योगिक एवं चिकित्सा क्षेत्र में योगदान लिखिए।
अथवा
जीन अभियांत्रिकी के लाभदायक तथा हानिकारक प्रभावों को लिखिये।
अथवा
आनुवंशिक इंजीनियरिंग के तीन महत्व लिखिये।
अथवा
जीन आनुवंशिक अभियांत्रिकी किसे कहते हैं ? औद्योगिक एवं चिकित्सा के क्षेत्र में इसका महत्व लिखिए।
उत्तर
अनुप्रयोज्यता की दृष्टि से आनुवंशिक इन्जीनियरिंग हमें निम्नलिखित लाभदायक तथा हानिकारक परिणाम देती है

(A) लाभदायक प्रभाव

1. औद्योगिक उपयोग-उच्च वर्गों के जीवों के विटामिन प्रतिजैविक या हॉर्मोन्स के जीन का कोड करके तथा इनके संश्लेषित DNA को जीवाणुओं में पुन:स्थापित करके विटामिन्स, हॉर्मोन्स आदि यौगिकों को औद्योगिक स्तर पर संश्लेषण किया जाना सम्भव हुआ है। इस विधि से मानव इन्सुलिन का Humulin नाम से जैव-संश्लेषण किया गया है।

2.चिकित्सीय उपयोग-नयी दवाइयों का जैव स्तर पर संश्लेषण तथा जीन चिकित्सा द्वारा हीमोफीलिया, फीनाइलकीटोन्यूरिया आदि वंशागत रोगों का उपचार किया जाना सम्भव हुआ है।

3. कृषि क्षेत्र में उपयोग-जीवाणु अथवा नीले-हरे शैवाल से नाइट्रोजन यौगिकीकरण करने वाले जीनों का अनाज वाली फसलों में स्थानान्तरण करने हेतु प्रयोग जारी है, जिससे हमारी फसलें पर्यावरण से नाइट्रोजन का सीधा प्रयोग कर सकेंगी और हमें कृषि में कृत्रिम उर्वरक के उपयोग की आवश्यकता नहीं रहेगी।

4. जीन संरचना अभिव्यक्ति में परिवर्तन-इस तकनीक द्वारा इच्छानुसार नये-नये प्रकार के जीवों तथा वनस्पतियों का निर्माण सम्भव हो सकेगा।

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(B) हानिकारक प्रभाव-

  • रोगाणु ऐण्टिबायोटिक्स के प्रति प्रतिरोधी हो सकते हैं।
  • आंत में पाये जाने वाले जीवाणु कैन्सर कारक हो सकते हैं।
  • सामान्य वाइरस से अत्यधिक खतरनाक वाइरस का निर्माण हो सकता है।

प्रश्न 2.
पुनर्संयोजन DNA तकनीक के महत्व एवं उपयोग को लिखिए।
अथवा
आनुवंशिक अभियांत्रिकी की महत्ता एवं अनुप्रयोग लिखिए।
उत्तर
जीन क्लोनिंग या पुनर्योगज DNA तकनीक जैविक विज्ञान (Biological sciences) के सभी क्षेत्रों में अत्यधिक उपयोगी सिद्ध हुआ है। इस तकनीक के प्रमुख महत्व एवं उपयोग निम्नानुसार हैं

  • पुनर्योगज DNA तकनीक या जीन क्लोनिंग के द्वारा हमें वांछित गुणों वाले जीनों को अन्य जन्तु व पौधों में प्रत्यारोपित करके इनकी अच्छी किस्में तैयार करने में सफलता प्राप्त हुई है।
  • इस तकनीक के द्वारा आनुवंशिक रोगों का भ्रूणीय अवस्था में ही पता लगाया जा सकता है।
  • rec-DNA तकनीक की सहायता से DNA/ जीन के क्रमीकरण (Sequencing of DNA/ Gene) में सहायता मिली है।
  • इस तकनीक की सहायता से विभिन्न प्रकार की पुनर्योगज वैक्सीनों (Recombinant vaccine) का विकास किया जाता है। उदाहरण-हिपैटाइटिस-B वैक्सीन।
  • इसकी सहायता से जीन क्रिया नियमन के अध्ययन में सुविधा हुई है।
  • इस तकनीक के द्वारा ही विभिन्न प्रकार की प्रोटीन्स जैसे-इन्सुलिन, हॉर्मोन्स, इण्टरफेरॉन्स एवं विटामिनों का औद्योगिक स्तर पर निर्माण जीवाणुओं द्वारा संभव हुआ है।
  • इस तकनीक के द्वारा उत्कृष्ट किस्म के प्रतिजैविकों का उत्पादन किया जाता है।
  • हीमोफिलिक मनुष्यों में VIII C (ऐण्टिहीमोफिलिक ग्लोब्यूलिन) का अभाव होता है। यह फैक्टर रक्त के थक्का बनाने (Blood clotting) का कार्य करता है। इसके जीन की क्लोनिंग के फलस्वरूप उपयुक्त मात्रा में VIII C कारक का उत्पादन संभव हो गया है।

प्रश्न 3.
पुनर्संयोजन DNA क्या है ? इसके निर्माण के चरणों का उल्लेख कीजिए।
अथवा
जीन मैनीपुलेशन या जेनेटिक इंजीनियरिंग को समझाइये।
अथवा
डी. एन. ए. पुनर्योगज तकनीक क्या है ?
अथवा
रिकॉम्बिनेन्ट D.N.A. तकनीक के विभिन्न चरणों में लिखिये।
अथवा
D.N.A. पुनर्योगज तकनीक क्या है ? इस तकनीक के उपकरण का नाम लिखिये। (कोई चार)
उत्तर
किसी जीव के जीनोम में वांछित लक्षणों वाले जीनों को प्रविष्ट कराकर एक नये प्रकार के DNA को बनाना DNA पुनर्संयोजन तकनीक कहलाती है तथा इस प्रकार बने DNA को पुनर्संयोजन DNA या पुनर्योगज DNA कहते हैं। पुनर्योगज DNA तकनीक का उपयोग करके किसी जीव के आनुवंशिक संगठन में परिवर्तन करने की तकनीक को जीन तकनीक या जीन प्रौद्योगिकी (Gene technology) कहते हैं।

पुनर्योगज या पुनर्संयोजन DNA तकनीक के विभिन्न चरण-पुनर्योगज DNA तकनीक एक जटिल प्रक्रिया है, जो कि निम्नलिखित चरणों में पूर्ण की जाती है

  1. विदेशज (Foreign) या टारगेट DNA का चयन जिसकी क्लोनिंग करनी होती है।
  2. प्लाज्मिड या लैम्डा फेज या कॉस्मिड में से किसी एक का वाहक अर्थात् वेक्टर के रूप में चयन।
  3. फॉरेन DNA को वेक्टर DNA के साथ जोड़ना अर्थात् पुनर्योगज. DNA का निर्माण।
  4. पोषक कोशिका में पुनर्योगज DNA का स्थानान्तरण।
  5. रूपान्तरित कोशिकाओं का चयन। जीन पुनर्संयोजन तकनीक द्वारा इन्सुलिन जीन का जीवाणु में प्रवेश की प्रक्रिया का चित्रात्मक निरूपण द्वारा इसके विभिन्न चरणों को प्रदर्शित किया जा रहा है।

MP Board Class 12th Biology Solutions Chapter 11 जैव प्रौद्योगिकी-सिद्धान्त व प्रक्रम 7
प्रश्न 4.
मानव इन्सुलिन के उत्पादन में आनुवंशिक इन्जीनियरिंग के योगदान का वर्णन कीजिए।
उत्तर
अलरिच तथा उनके सहयोगियों (Ulrich at, 1977) ने चूहे में इन्सुलिन बनाने वाले जीन को निष्कर्षित कर ई. कोलाई जीवाणु में स्थानान्तरित करने में सफलता पायी। इन लोगों ने चूहे से विशुद्ध m-RNA को निकाला तथा उससे रिवर्स ट्रांसक्रिप्टेज एन्जाइम की सक्रियता से DNA का संश्लेषण किया। इस इन्सुलिन संश्लेषण से सम्बन्धित DNA को प्लाज्मिड DNA के साथ एन्डोन्यूक्लिएज तथा लाइगेज के साथ जोड़कर पुनर्योगज DNA का निर्माण किया। इस पुनर्योगज DNA को ई. कोलाई के 1776 विभेद के Ex 2 होस्ट (पोषक) में स्थानान्तरित कर चूहे के इन्सुलिन DNA को क्लोन किया। नये वातावरण में इन जीन के ट्रांसलेशन (अनुलिपिकरण या अनुवादन) से जैविक रूप से सक्रिय इन्सुलिन का उत्पादन होता है।

नोट-बैक्टीरियोफेज जीवाणु कोशिकाओं में पाया जाने वाला एक प्रकार का परजीवी विषाणु है, जिसका शरीर दो भागों-सिर एवं पूँछ का बना होता है। इसके सिर में आनुवंशिक पदार्थ के रूप DNA पाया जाता है। आनुवंशिक अभियान्त्रिकी में इसका बहुत अधिक महत्व है।

प्रश्न 5.
क्लोन किसे कहते हैं ? जीन एवं पादप क्लोन किस प्रकार तैयार किये जाते हैं समझाइये?
उत्तर
अलैंगिक विधि द्वारा उत्पन्न आनुवंशिक रूप से समान जीवों को क्लोन कहते हैं। जीन एवं पादप क्लोन निम्नानुसार तैयार किये जाते हैं

1. जीन क्लोनिंग (Gene cloning)-विशिष्ट जीन के समान जीन प्राप्त करना जीन क्लोनिंग कहलाता है। क्लोन प्राप्त करने वाले DNA खण्ड को पहले वाहक DNA में प्रवेश कराया जाता है। उसके बाद यह वाहक DNA पोषक कोशिका में डाला जाता है जहाँ पर इसके जीन क्लोन प्राप्त होते हैं । जीवाणुओं के माध्यम से जीन क्लोनिंग में निम्न चरण पाये जाते हैं.

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(i) जीन का निर्माण (Preparation of the gene)-जीवाणु द्वारा जीन क्लोनिंग के लिए DNA को प्रकिण्व एण्डोन्यूक्लिएज की सहायता से छोटे-छोटे टुकड़ों में बदल लेते हैं। प्रत्येक खण्ड एकहरा शीर्षयुक्त होता है।

(ii) वाहक में प्रवेश कराना (Insertion into vector)—वाहक एक ऐसा प्रतिनिधि (Agent) है जिसका उपयोग DNA को पोषक जीवाणु कोशिका के प्लाज्मिड तक पहुँचाने के लिए किया जाता है। वाहक (Vector) DNA को एण्डोन्यूक्लिएज की सहायता से खोलते हैं। DNA लाइगेज प्रकिण्व की सहायता से DNA खण्ड वेक्टर के प्लाज्मिड या गुणसूत्र (DNA) से जोड़ देते हैं। अब DNA खण्डयुक्त प्लाज्मिड को पुनर्संयोजित प्लाज्मिड कहते हैं।

(iii) पोषक कोशिका का पुनर्निर्माण (Transformation of host cell)—संयुक्त प्लाज्मिड को पोषक जीवाणु कोशिका के अन्दर प्रवेश कराते हैं जहाँ पर जीवाणु कोशिका द्वारा प्लाज्मिड का निर्माण किया जाता है। इन जीवाणुओं को कैल्सियम क्लोराइड के तनु एवं ठण्डे विलयन में रखते हैं। यह विलयन जीवाणु कोशिका द्वारा विदेशी DNA को ग्रहण करने में मदद करता है।

इस प्रकार से DNA के पुनर्निर्माण के लिए E. coli नामक जीवाणु का उपयोग किया जाता है क्योंकि

  • इसका विस्तृत रूप से अध्ययन किया जा चुका है।
  • कैल्सियम क्लोराइड द्वारा उपचारित इस जीवाणु की कोशिका में DNA पुनर्निर्माण तीव्रता से होता है।
  • यह जीवाणु लगभग सभी प्रकार के DNA का अनुलिपिकरण कर सकता है।
    इस प्रकार प्राप्त DNA की अनुकृतियों को जीन बैंक या जीनोमिक लाइब्रेरी में रखा जाता है।

2. पादप क्लोनिंग (Plant cloning)—कायिक प्रवर्धन द्वारा उत्पादित सन्ततियों को क्लोन कहते हैं वर्तमान युग में ऊतक संवर्धन तकनीक द्वारा पौधों के क्लोन तैयार किये जाते हैं। इस कार्य हेतु पौधे के भाग (एक्सप्लाण्ट) का चयन करके उसे एक कृत्रिम संवर्धन माध्यम में उगाया जाता है। संवर्धन माध्यम में सर्वप्रथम कोशिकाओं का एक असंगठित एवं अविभाजित समूह बनता है जिसे कैलस (Callus) कहते हैं । इस कैलस के टुकड़ों को अब हॉर्मोन युक्त अन्य संवर्धन माध्यम में उगाया जाता है जिससे छोटे-छोटे पौधे बनते हैं । इन पौधों को अब खेतों/क्यारियों में रोपित किया जाता है।

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MP Board Class 12th Biology Solutions Chapter 10 मानव कल्याण में सूक्ष्मजीव

MP Board Class 12th Biology Solutions Chapter 10 मानव कल्याण में सूक्ष्मजीव

मानव कल्याण में सूक्ष्मजीव NCERT प्रश्नोत्तर

प्रश्न 1.
जीवाणुओं को नग्न नेत्रों द्वारा नहीं देखा जा सकता, लेकिन सूक्ष्मदर्शी की सहायता से देखा जा सकता है। यदि आपको अपने घर से अपनी जीव विज्ञान प्रयोगशाला तक एक नमूना ले जाना हो . और सूक्ष्मदर्शी की सहायता से इस नमूने से सूक्ष्मदर्शी की उपस्थिति को प्रदर्शित करना हो, तो किस प्रकार का नमूना आप अपने साथ ले जायेंगे और क्यों?
उत्तर
यदि हमको अपने घर से जीव विज्ञान प्रयोगशाला तक सूक्ष्मजीव का नमूना ले जाकर सूक्ष्मदर्शी में अवलोकन करना हो तो हम एक सड़ी (खराब) ब्रेड का टुकड़ा अथवा थोड़ी मात्रा में दही ले जायेंगे। क्योंकि ये दोनों चीजें आसानी से उपलब्ध हैं और इनमें सूक्ष्मजीव आसानी से दिखाई दे जाते हैं। सूक्ष्मजीव लैक्टोबेसीलसया अन्य लैक्टिक एसिड बैक्टीरिया (L.A.B.) दूध में वृद्धि कर उसे दही में परिवर्तित करते हैं। इसी प्रकार ब्रेड पर दिखाई पड़ने वाला हरा रंग कवक (fungi) होता है, इसके बीज (spore) वायु में उपस्थित रहते हैं तथा खाद्य पदार्थ में वृद्धि करते रहते हैं।

प्रश्न 2.
उपापचय के दौरान सूक्ष्मजीव गैसों का निष्कासन करते हैं, उदाहरण द्वारा सिद्ध कीजिए।
उत्तर
डोसा व इडली (Dosa and Idli) निर्माण दाल-चावल के आटे को गीला कर जीवाणु द्वारा किण्वित कराने के उपरांत होता है। किण्वन के कारण आटे में से CO2, निकलती है। इस क्रिया को खमीर उठाना कहा जाता है । इस क्रिया के बाद आटा ढीला व मुलायम तथा फूली हुई आकृति वाला बन जाता है । इस आटे के द्वारा डोसा व इडली बनाया जाता है।

स्विस चीज (Swiss cheese) में पाये जाने वाले बड़े-बड़े छिद्र प्रोपिओनिबैक्टीरियम शारमैनाई नामक जीवाणु द्वारा अधिक मात्रा में उत्पन्न CO2, के कारण होते हैं। रॉक्यूफोर्ट चीज़ एक विशेष प्रकार के कवक पेनीसीलियम रॉक्वीफोर्टी (Penicillium roqueforti) की सहायता से तैयार किया जाता है। इस प्रकार के पनीर में विशिष्ट सुगंध होती है।।

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प्रश्न 3.
किस भोजन (आहार) में लैक्टिक एसिड बैक्टीरिया मिलते हैं ? इनके कुछ लाभप्रद उपयोगों का वर्णन कीजिए।
उत्तर
दही (Curd) इसे दूध में जीवाणुओं के द्वारा किण्वन क्रिया के फलस्वरूप प्राप्त किया जाता है। दूध से दही के निर्माण में भाग लेने वाले जीवाणु लैक्टिक एसिड जीवाणु (Lactic acid bacteria-LAB.) होते हैं।

इन जीवाणुओं में लैक्टोबैसीलस एसीडोफिलस (Lactobacillus acidphilous), लै.लैक्टिस (L. Lactis) व स्ट्रेप्टोकोकस लैक्टिस (Streptococcus lactis) होते हैं। ये जीवाणु लैक्टिक अम्ल का उत्पादन करते हैं जो 45° से कम तापक्रम पर दुग्ध प्रोटीन को स्कंदित तथा आंशिक रूप से बचा देते हैं । आरंभ में दही को थोड़ी मात्रा में जामन (निवेश द्रव्य) के रूप में हल्के गर्म दूध में मिलायी जाती है।

इस जामन में असंख्य लैक्टिक एसिड जीवाणु होते हैं जो उपयुक्त ताप पर कई गुना वृद्धि करते हैं जिसके फलस्वरूप दूध दही में परिवर्तित हो जाता है। यही नहीं इसमें Vit. B12 की मात्रा बढ़ने से पोषण संबंधी गुणवत्ता में भी सुधार आता है।

दध से दही बनते समय लैक्टोबेसीलसलैक्टोज शर्करा को किण्वित कर लैक्टिक अम्ल में बदलते हैं तो स्ट्रेप्टोकोकस कैसीन प्रोटीन (दुग्ध प्रोटीन) को स्कंदित करते हैं। हल्के गर्म दूध में जामन डालने के पश्चात् लगभग 5 घण्टे में दही का निर्माण हो जाता है।

प्रश्न 4.
कुछ पारंपरिक आहार जो गेहूँ, चावल तथा चना (अथवा उनके उत्पाद) से बनते हैं और उनमें सूक्ष्मजीवों का उपयोग शामिल हो, उनके नाम बताइए।
उत्तर
बहुत से पारंपरिक भारतीय आहार है जो गेहूँ, चावल तथा चना से बनते हैं और उनमें सूक्ष्मजीवों का प्रयोग शामिल होता है उनके नाम इस प्रकार हैं दही, पनीर, चीज़, डोसा, इडली, कुछ भारतीय ब्रेड जैसे-भटूरा दक्षिण भारत के कुछ भागों में एक पारंपरिक पेय टोडी है।

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प्रश्न 5.
हानिप्रद जीवाणुओं द्वारा उत्पन्न करने वाले रोगों के नियंत्रण में सूक्ष्मजीव किस प्रकार महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं ?
उत्तर
सबसे पहले प्रतिजैविक पेनिसिलीन (Penicillin) की खोज हुई थी। सन् 1928 में अलेक्जेण्डर फ्लेमिंग (Alexander fleming) ने खोजा था। अलेक्जेण्डर फ्लेमिंग जब स्टेफिलोकोकस(Staphylococcus) नामक जीवाणु पर कार्य कर रहे थे तब उन्होंने देखा कि जिन प्लेटों पर वह कार्य कर रहे थे उनमें एक बिना धुली प्लेट पर मोल्ड (Moulds) उत्पन्न हो गये हैं, इस कारण स्टैफिलोकोकस वृद्धि नहीं कर सका। उन्होंने पाया कि यह प्रभाव मोल्ड द्वारा उत्पन्न एक रसायन पेनिसिलीन द्वारा होता है। क्योंकि पेनिसिलीन पेनिसिलियम नोटेटम (Penicillium notatum) नामक मोल्ड से उत्पन्न होता है। इसी कारण इसका नाम उन्होंने पेनिसिलीन रखा।

पेनिसिलीन की खोज के बाद अनेक प्रतिजैविक जैसे टेट्रासाइक्लिन, कैनामाइसिन, नियोमाइसीन, ल्यूकोमाइसीन आदि को पृथक किया जा चुका है। इनका प्रयोग जीवाणु, कवक, विषाणु तथा अन्य सूक्ष्मजीवों द्वारा उत्पन्न रोगों के उपचार में किया जाता है। प्लेग, काली खाँसी, डिफ्थीरिया (गलघोंटू) लेप्रोसी (कुष्ठ रोग) जैसे भयानक रोग जिनसे संसार के लाखों लोग मरे हैं, इसके उपचार के लिए एंटीबायोटिक ने हमारी क्षमता में वृद्धि किया तथा एक शक्ति के रूप में उभर कर सामने आया है।

प्रश्न 6.
किन्हीं दो कवक प्रजातियों के नाम लिखिए, जिनका प्रयोग प्रतिजैविकों(एंटीबायोटिक्स) के उत्पादन में किया जाता है ?
उत्तर
पेनीसिलिन, पेनीसिलियम नोटेटमसे तथा पेनीसिलीन क्रासोजिनम नामक मोल्ड से उत्पन्न होता है।

प्रश्न 7.
वाहित मल से आप क्या समझते हैं, वाहित मल हमारे लिए किस प्रकार से हानिप्रद है ?
उत्तर
प्रतिदिन नगर एवं शहरों से व्यर्थ-जल की एक बहुत बड़ी मात्रा जनित होती है। इस व्यर्थ जल का प्रमुख घटक मनुष्य का मलमूत्र है। नगर के इस व्यर्थ जल को वाहित मल (सीवेज) भी कहते हैं। इसमें कार्बनिक पदार्थों की बड़ी मात्रा तथा सूक्ष्मजीव पाये जाते हैं जो अधिकांशतः रोगजनकीय होते हैं।

प्रश्न 8.
प्राथमिक तथा द्वितीयक वाहित मल उपचार के बीच पाए जाने वाले मुख्य अंतर कौन से
उत्तर
प्राथमिक तथा द्वितीयक वाहित मल उपचार में अंतर
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प्रश्न 9.
सूक्ष्मजीवों का प्रयोग ऊर्जा के स्रोतों के रूप में भी किया जा सकता है यदि हाँ तो किस प्रकार से ? इस पर विचार कीजिए।
उत्तर
हाँ, सूक्ष्मजीवों का प्रयोग ऊर्जा के स्रोतों के रूप में भी किया जा सकता है। बायो गैस एक प्रकार से गैसों का मिश्रण है जो सूक्ष्मजीवों की सक्रियता द्वारा उत्पन्न होती है। वृद्धि तथा उपापचय के दौरान सूक्ष्मजीव विभिन्न किस्मों के गैसीय उत्पाद उत्पन्न करते हैं। जैसे-मीथेन, हाइड्रोजन सल्फाइड तथा CO2, I ये गैसें बायोगैस का निर्माण करती हैं। चूँकि ये ज्वलनशील होती हैं, इस कारण इनका प्रयोग ऊर्जा के स्रोत के रूप में किया जा सकता है । बायो गैस को सामान्यत: गोबर गैस भी कहते हैं।

प्रश्न 10.
सूक्ष्मजीवों का प्रयोग रसायन उर्वरकों तथा पीड़कनाशियों के प्रयोग को कम करने के लिए भी किया जा सकता है। यह किस प्रकार सम्पन्न होगा ? व्याख्या कीजिये।
उत्तर
सहसंबंध द्वारा (By correlation)-उच्च पौधों की जड़ों तथा कवकों के सह-संबंध को माइकोराइजा (Mycorrhiza) कहते हैं। माइकोराइजा का निर्माण ग्लोमस (glomus) वंश के अनेक सदस्यों द्वारा होता है। कवक मृदा में उपस्थित फॉस्फोरस का अवशोषण करके पादपों को देते हैं तथा पौधे की जड़ इन्हें पनपने का स्थान तथा भोजन प्रदान करती है। इसके उदाहरण ओक (oak), बीच (beech), तथा अनेक पाइन (pines), पादप हैं ।

इस प्रकार के संबंधों से पादप को अनेक लाभ होते हैं जैसे मूलवातोढ़ (root born), रोगजनक के प्रति प्रतिरोधकता, लवणता तथा सूखे के प्रति सहनशीलता एवं विकास प्रदर्शित करते हैं। . सायनोबैक्टीरिया स्वपोषित सूक्ष्मजीव है जो जलीय तथा स्थलीय वायुमण्डल में विस्तृत रूप से पाये जाते हैं। इनमें बहुत-से जीव वायुमण्डलीय नाइट्रोजन को स्थिरीकृत करते हैं, जैसे- एनाबीना, नॉस्टॉक, ऑसिलेटोरिया आदि । नील-हरित शैवाल या सायनोबैक्टीरिया महत्वपूर्ण जैव उर्वरक हैं। ये मृदा में कार्बनिक पदार्थों को बढ़ाते हैं जिससे मृदा की उर्वरता बढ़ती है। वर्तमान में किसान इन्हीं जैव उर्वरकों का भरपूर उपयोग कर रहे हैं।

प्रश्न 11.
जल के तीन नमूने लो-एक नदी का जल, दूसरा अनुपचारित वाहित मल-जल तथा तीसरा वाहित मल उपचार संयंत्र से निकला द्वितीयक बहिःस्राव। इन तीनों नमूनों पर “अ”तथा “ब”, “स” के लेबल लगाओ। इस बारे में प्रयोगशाला कर्मचारी को पता नहीं है कि कौन-सा क्या है ? इन तीनों नमूनों “अ”, “ब” तथा “स” के बी. ओ. डी. का रिकार्ड किया गया जो क्रमश: 20mg/L,8mg/L तथा 400mg/L निकला। इन नमूनों में कौन-सा सबसे अधिक प्रदूषित नमूना है ? इस तथ्य को सामने रखते हुए कि नदी का जल अपेक्षाकृत अधिक स्वच्छ है। क्या आप सही लेबल का प्रयोग कर सकते हैं?
उत्तर
बी. ओ. डी. ऑक्सीजन की उस मात्रा को संदर्भित करता है जो जीवाणु द्वारा एक लीटर पानी में उपस्थित कार्बनिक पदार्थों की खपत कर उन्हें ऑक्सीकृत कर दें। वाहित मल का तब तक उपचार किया जाता है जब तक बी. ओ. डी. घट न जाए । जल के एक नमूने में सूक्ष्मजीवियों द्वारा ऑक्सीजन के उद्ग्रहण की दर का मापन बी. ओ. डी. परीक्षण से किया जाता है, अत: अप्रत्यक्ष रूप से जल में उपस्थित कार्बनिक पदार्थों का मापन ही बी. ओ. डी. है। जब व्यर्थ जल का बी. ओ. डी. अधिक होगा, तब उसकी प्रदूषण क्षमता भी अधिक होगी।

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दिए गए जल के तीन नमूनों में से नदी के जल का बी. ओ. डी. ।

(अ) 20mg/L है, अनुपचारित वाहित मल-जल का बी. ओ. डी.।
(ब) 8mg/L तथा द्वितीयक बहि:स्राव के जल का बी.ओ.डी.।
(स) 400mg/L है।

सही लेबल इस प्रकार है

(अ) नदी का जल (स्वच्छ जल)।
(ब) द्वितीयक बहि:स्राव (उपचारित वाहित मल)।
(स) दूसरा अनुपचारित (वाहित मल-जल)।

प्रश्न 12.
उस सूक्ष्मजीव का नाम बताइए जिसमें साइक्लोस्पोरिन-ए( प्रतिरक्षा निषेधात्मक औषधि) तथा स्टैटिन (रक्त कोलेस्ट्रॉल लघुकरण कारक) को प्राप्त किया जाता है। .
उत्तर
साइक्लोस्पोरिन-ए जिसका प्रयोग अंग प्रतिरोपण में प्रतिरक्षा निरोधक (इम्यूनोसप्रेसिव) के रूप में रोगियों में किया जाता है। इसका उत्पादन ट्राइकोडर्मा पॉलीस्पोरम नामक कवक से किया जाता है। मोनोस्कस परप्यूरीअस यीस्ट से स्टैटिन उत्पन्न किया जाता है । इस स्टैटिन का व्यापारिक स्तर पर उपरोक्त रक्त कोलेस्ट्रॉल को कम करने वाले कारक के रूप में किया जाता है।

प्रश्न 13.
निम्नलिखित में सूक्ष्मजीवियों की भूमिका का पता लगाइए तथा अपने अध्यापक से इनके विषय में विचार-विमर्श कीजिए
(1) एकल कोशिका प्रोटीन (एस.सी.पी.)
(2) मृदा।
उत्तर
(1) एकल कोशिका प्रोटीन (एस.सी.पी.)-पशु तथा मानव पोषण के लिए प्रोटीन के वैकल्पिक स्रोतों में से एक एकल कोशिका प्रोटीन है। सूक्ष्मजीवों को प्रोटीन के अच्छे स्रोत के रूप में बड़े पैमाने पर उत्पादन किया जा रहा है वास्तव में, अधिकांश लोगों द्वारा मशरूम भोजन के रूप में खाए जाने लगे हैं। अत: बड़े पैमाने में मशरूम संवर्धन एक प्रकार से बढ़ता हुआ उद्योग है।

जिससे अब विश्वास होने लगा है कि सूक्ष्मजीव आहार के रूप में स्वीकार्य हो जायेंगे। सूक्ष्मजीवी स्पाइरूलाइना में प्रोटीन, खनिज, वसा, कार्बोहाइड्रेट तथा विटामिन प्रचुर मात्रा में विद्यमान हैं । इसका उपयोग पर्यावरणीय प्रदूषण को भी कम करता है । सूक्ष्मजीव जैसे मिथाइलोफिलस मिथाइलोट्रोपस की वृद्धि तथा बायोमास उत्पादन की उच्च दर से संभावित 25 टन तक प्रोटीन उत्पन्न कर सकते हैं।

(2) मृदा-जैव उर्वरक एक प्रकार के जीव है, जो मृदा की पोषक गुणवत्ता को बढ़ाते हैं । जैव उर्वरकों का मुख्य स्रोत जीवाणु, कवक तथा सायनोबैक्टीरिया होते हैं । लेग्यूमिनस पादपों की जड़ों पर स्थित ग्रंथियों का निर्माण राइजोबियम के सहजीवी संबंध द्वारा होता है। यह जीवाणु वायुमंडलीय नाइट्रोजन को स्थिरीकृत कर कार्बनिक रूप में परिवर्तित कर देते हैं । पादप इसका उपयोग पोषकों के रूप में करते हैं। यह भी वायुमंडलीय नाइट्रोजन को स्थिर कर सकते हैं। इस प्रकार मृदा में नाइट्रोजन अवयव बढ़ जाते हैं।

प्रश्न 14.
निम्नलिखित को घटते क्रम में मानव समाज कल्याण के प्रति उनके महत्व के अनुसार संयोजित करें, महत्वपूर्ण पदार्थ को पहले रखते हुए कारणों सहित अपना उत्तर लिखिए बायो गैस, सिट्रिक एसिड, पेनीसिलिन तथा दही।
उत्तर
दी गई सूची में सबसे महत्वपूर्ण पदार्थ पेनीसिलीन है क्योंकि यह मानव सभ्यता के कल्याण हेतु महत्वपूर्ण है। यह कई जानलेवा बीमारियों को ठीक करता है। इसके बाद सूची में बायोगैस का नंबर आता है क्योंकि यह ईंधन का स्रोत है। इसके बाद दही का स्थान आता है क्योंकि यह हमें पोषक दुग्ध उत्पाद प्रदान करता है। अंत में सिट्रिक एसिड आता है, क्योंकि इसका उपयोग प्रोसेसिंग उद्योग में किया जाता है।

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प्रश्न 15.
जैव उर्वरक किस प्रकार से मृदा की उर्वरता को बढ़ाते हैं ?
उत्तर
जैव उर्वरक एक प्रकार के जीव हैं जो मृदा की पोषक गुणवत्ता को बढ़ाते हैं । जैव उर्वरकों का मुख्य स्रोत कवक, जीवाणु तथा सायनोबैक्टीरिया होते हैं। यह जीवाणु वायुमंडलीय नाइट्रोजन को स्थिरीकृत कर कार्बनिक रूप में परिवर्तित कर देते हैं। दूसरे जीवाणु ऐजोस्पाइरिलम तथा ऐजोबैक्टर भी वायुमण्डलीय नाइट्रोजन को स्थिर कर सकते हैं । धान के खेत में सायनोबैक्टीरिया महत्वपूर्ण जैव उर्वरक की भूमिका निभाते हैं। नील-हरित शैवाल भी मृदा में कार्बनिक पदार्थ बढ़ा देते हैं, जिससे उसकी उर्वरता बढ़ जाती है।
MP Board Class 12th Biology Solutions Chapter 10 मानव कल्याण में सूक्ष्मजीव 2

मानव कल्याण में सूक्ष्मजीव अन्य महत्वपूर्ण प्रश्नोत्तर

मानव कल्याण में सूक्ष्मजीव वस्तुनिष्ठ प्रश्न

1. सही विकल्प चुनकर लिखिए

प्रश्न 1.
मढ़े जैसा एक खट्टा तरल दुग्ध उत्पाद है
(a) पनीर
(b) दही
(c) योगर्ट
(d) इनमें से कोई नहीं।
उत्तर
(c) योगर्ट

प्रश्न 2.
क्लॉस्ट्रिडियम, एजोटोबैक्टर, राइजोबियम भूमि की उर्वरा शक्ति किसके द्वारा बढ़ाते हैं
(a) नाइट्रोजन स्थिरीकरण से
(b) विनाइट्रोजनीकरण से
(c) इमल्सीफिकेशन से
(d) विटामिन से।
उत्तर
(a) नाइट्रोजन स्थिरीकरण से

प्रश्न 3.
टेट्रासाइक्लिन प्राप्त किया जाता है
(a) स्ट्रे. रेमोसस से
(b) स्ट्रे. ऑरियोफैसिएन्स से
(c) स्ट्रे. फ्रेडी से
(d) स्टे. नोडोसमसे।
उत्तर
(b) स्ट्रे. ऑरियोफैसिएन्स से

प्रश्न 4.
स्ट्रेप्टोमाइसेज ओलिवेसियम एवं बैसिलस मेगाथीरियम से प्राप्त किया जाता है
(a) विटामिन C
(b) विटामिन D
(c) विटामिन E
(d) विटामिन B12
उत्तर
(d) विटामिन B12

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प्रश्न 5.
न्यूमोनिया, टी. बी. व कोढ़ के उपचार के लिये उपयोग किया जाता है
(a) जीवाणुभोजियों का
(b) केवल जीवाणु का
(c) केवल विषाणु का
(d) कवकों का।
उत्तर
(a) जीवाणुभोजियों का

प्रश्न 6.
जैव तकनीकी एवं सूक्ष्मजैविकी में विषाणुओं का उपयोग किया जाता है
(a) दवाई के रूप में
(b) वेक्टर के रूप में
(c) जल उपचार में
(d) तीनों क्षेत्र में।
उत्तर
(b) वेक्टर के रूप में

प्रश्न 7.
बेकरी में रोटी, बिस्कुट व अन्य उत्पाद को प्राप्त करने में उपयोगी है
(a) विषाणु
(b) जीवाणु
(c) यीस्ट
(d) प्रोटोजोअन।
उत्तर
(c) यीस्ट

प्रश्न 8.
यीस्ट में कौन-सा विटामिन पाया जाता है
(a) C
(b)D
(c)B complex
(d)A.
उत्तर
(c)B complex

प्रश्न 9.
स्ट्रे. रेमोसस से कौन-सी औषधि प्राप्त करते हैं
(a) टेरामाइसिन
(b) निओमाइसिन
(c) इरिथ्रोमाइसिन
(d) ऐक्टिडीन।
उत्तर
(a) टेरामाइसिन

प्रश्न 10.
नाइट्रोसोमोनास एवं नाइट्रोबैक्टर जीवाणु है
(a) डीनाइट्रीफाइंग
(b) नाइट्रीफाइंग
(c) एसीटोबैक्टर
(d) हॉर्मोन प्रोड्यूसर
उत्तर
(b) नाइट्रीफाइंग

प्रश्न 11.
लैक्टिक एसिड बैक्टीरिया द्वारा दूध से दही में परिवर्तन करने में किस विटामिन की मात्रा में वृद्धि होती है
(a) विटामिन C
(b) विटामिन D
(c) विटामिन B12
(d) विटामिन E
उत्तर
(c) विटामिन B12

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प्रश्न 12.
मीथेनोजेन निम्नलिखित में से किसमें नहीं पाये जाते हैं
(a) मवेशियों के मेन
(b) गोबर गैस संयंत्र
(c) पानी से भरे धान के खेत की तली पर
(d) सक्रियत आपंक में।
उत्तर
(c) पानी से भरे धान के खेत की तली पर

प्रश्न 13.
वाहित मल के प्राथमिक उपचार में जल किससे मुक्त होता है
(a) घुलित अशुद्धियाँ
(b) स्थिर कण
(c) विषैले पदार्थ
(d) हानिकारक जीवाणु।
उत्तर
(b) स्थिर कण

प्रश्न 14.
अपशिष्ट जल की B.O.D. निम्न में से किसकी मात्रा के आंकलन से जानी जाती है
(a) कुल कार्बनिक पदार्थ
(b) जैव अपघटनीय कार्बनिक पदार्थ
(c) ऑक्सीजन की मुक्ति
(d) ऑक्सीजन की खपत।
उत्तर
(d) ऑक्सीजन की खपत।

प्रश्न 15.
भारत में गौवंश के गोबर से बायो गैस उत्पादन की तकनीक प्रमुखतः किसके प्रयासों से विकसित की गई
(a) गैस अथॉरिटी ऑफ इंडिया
(b) तेल एवं प्राकृतिक गैस आयोग
(c) भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान तथा खादी एवं ग्राम उद्योग विभाग
(d) इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन।
उत्तर
(c) भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान तथा खादी एवं ग्राम उद्योग विभाग

प्रश्न 16.
मुक्तजीवी फंगस ट्राइकोडर्मा का प्रयोग किया जा सकता है
(a) कीटों को मारने में
(b) पादप रोगों के जैव नियंत्रण में
(c) बटर फ्लाई के कैटरपिलर के नियंत्रण में
(d) एंटीबायोटिक्स के निर्माण में।
उत्तर
(b) पादप रोगों के जैव नियंत्रण में

प्रश्न 17.
माइकोराइजा पोषक पौधों की किस कार्य में मदद नहीं करता
(a) इसकी फॉस्फोरस ग्रहण करने की क्षमता बढ़ाने में
(b) इसकी शुष्कता ग्रहण करने की क्षमता बढ़ाने में
(c) इसकी जड़ों की रोगजनकों के प्रति प्रतिरोधकता बढ़ाने में
(d) इसकी कीटों के लिए प्रतिरोधकता बढ़ाने में।
उत्तर
(a) इसकी फॉस्फोरस ग्रहण करने की क्षमता बढ़ाने में

2. रिक्त स्थानों की पूर्ति कीजिए

1. जीव विज्ञान की वह शाखा जिसके अंतर्गत सूक्ष्म जीवों (आँखों से न दिखने वाले) का अध्ययन करते हैं, ………… कहलाता है।
2 पनीर बनाने के लिये ……….. वंश के जीवाणु का उपयोग किया जाता है।
3. नाइट्रोसोमोनास, नाइट्रोबैक्टर ………….. जीवाणु है।
4. सिरका उद्योग में ……….. जीवाणु का उपयोग होता है।
5. पेक्टिनेज एंजाइम …………. प्रजाति की सहायता से बनाते हैं।
6. सूक्ष्म जीवाणु का आकार …………. mm से कम होता है।
7. दही …………. जीवाणु की सहायता से बनाया जाता है।
8. दूध से चीज़ बनाते समय फलों की सुगंध डालने से बना पदार्थ …………. कहलाता है। .
9. दूध से सीधे बना छेना …………. छेना होता है।
10. कवकरोधी जीवाण्विक प्रतिरक्षी पदार्थ …………. होता है।
उत्तर

  1. सूक्ष्मजैविकी
  2. लैक्टोबैसिलस
  3. नाइट्रीफाइंग
  4. एसीटोबैक्टर एसीटी
  5. क्लॉस्ट्रिडियम
  6. 0-1
  7. लैक्टोबैसिलस
  8. योगर्ट
  9. कच्चा
  10. पॉलीमिक्सिन।

3. सही जोड़ी बनाइये

I. ‘A’- ‘B’

1. पेनिसिलिन – (a) पे. सिट्रिनम
2 साइट्रिनिन – (b) पे. क्लेविफोर्मी
3. क्लैविसिन – (c) टाइकोडर्मा स्पी
4. ग्लियोटॉक्सिन – (d) पेनिसिलियम नोटेटम।
उत्तर
1.(d), 2. (a), 3. (b), 4. (c)

II. ‘A’ – ‘B’

1. विटामिन प्रोड्यूसर – (a) ऐस्परजिलस
2 प्रतिजैविक उत्पादक – (b) मोनैस्कस
3. हॉर्मोन उत्पादक – (c) यीस्ट
4. एंजाइम उत्पादक – (d) पेनिसिलियम
5. वर्णक उत्पादक – (e) जिबरेला फ्यूजिकोराई।
उत्तर
1.(c), 2. (d), 3.(e), 4. (a), 5. (b).

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III. ‘A’ – ‘B’

1. पेनिसिलिन – (a) स्ट्रेप्टोमाइसिस वेनक्यूली
2. क्लोरेमफिनीकाल – (b) स्ट्रेप्टोमाइसिस राइमोसस
3. टेरामाइसिन – (c) स्ट्रेप्टोमाइसिस ओरियोफेसियन्स
4. टेट्रासाइक्लिन – (d) पेनिसिलियम क्रासोजिनम।
उत्तर
1. (d), 2. (a), 3. (b), 4. (c).

प्रश्न 4.
एक शब्द में उत्तर दीजिए
1. मिट्टी में पाये जाने वाले दो नाइट्रोजन स्थिरीकारक जीवाणुओं के नाम बताइए।
2 सूक्ष्मजीवों द्वारा कीट / खरपतवार के नियंत्रण को क्या कहते हैं ?
3. सहजीवी एवं असहजीवी नाइट्रोजन स्थिरीकारक जीवाणुओं के नाम बताइए।
4. IPM का पूरा नाम लिखिए।
5. पीड़कनाशी का नाम दीजिए।
6. फसल के साथ उगे अवांछित पौधे को क्या कहते हैं ?
उत्तर

  1. एजोटोबैक्टर, बैसिलस पॉलीमिक्सा
  2. जैविक नियंत्रण
  3. सहजीवी- राइजोबियम, असहजीवी– एजोटोबैक्टर
  4. इन्टीग्रेटेड पेस्ट मैनेजमेंट
  5. एजेडिरेक्टिन
  6. खरपतवार

मानव कल्याण में सूक्ष्मजीव अति लघु उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 1.
प्रमुख उपयोगी सूक्ष्मजीवों के नाम लिखिए।
उत्तर
प्रमुख उपयोगी सूक्ष्मजीवों के नाम जीवाणु, कवक और विषाणु हैं।

प्रश्न 2.
जिबरेलिन नामक हॉर्मोन किस कवक से प्राप्त किया जाता है ?
उत्त
जिबरेलिन नामक हॉर्मोन जिबरेला फ्यूजिकोराई से प्राप्त किया जाता है।

प्रश्न 3.
डेयरी उद्योग में जीवाणु से कौन-कौन-से उत्पाद बनाए जाते हैं ?
उत्तर
डेयरी उद्योग में जीवाणुओं से दही, मक्खन, पनीर, मट्ठा एवं योगर्ट बनाए जाते हैं। इसके लिये लेक्टोबेसीलस स्पी. एवं स्ट्रेप्टोकोकस स्पी. आदि का उपयोग करते हैं।

प्रश्न 4.
प्रतिजैविक किन सूक्ष्मजीवों से प्राप्त करते हैं ?
उत्तर
प्रतिजैविक मुख्यत: जीवाणु एवं कवक द्वारा प्राप्त किया जाता है।

प्रश्न 5.
सूक्ष्म जीव विज्ञान (सूक्ष्मजैविकी) किसे कहते हैं ?
उत्तर
सूक्ष्म जीव विज्ञान जीव विज्ञान की वह शाखा है, जिसके अन्तर्गत सूक्ष्मदर्शी से दिखाई देने वाले सूक्ष्मजीवों का अध्ययन किया जाता है।

प्रश्न 6.
निम्नलिखित उत्पादन करने वाले कवक का नाम बताइए
(1) साइट्रिक अम्ल
(2) विटामिन B2,
उत्तर
उत्पाद का नाम – उत्पादन करने वाले कवक का नाम

  1. साइट्रिक अम्ल -पेनिसिलियम साइट्रियम, पेनिसिलियम ल्यूटियम, म्यूकर पाइरीफार्मिस एवं ऐस्परजिलस नाइगर।
  2. विटामिन B2 – क्लॉस्ट्रीडियम ऐसीटोन्यूटिलिकम, एरीमोथीसियम ऐस्बी।

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प्रश्न 7.
योगर्ट क्या है ?
उत्तर
योगर्ट एक दुग्ध उत्पाद है, जो मढे जैसा खट्टा तरल पदार्थ है।

प्रश्न 8.
बोतल में बंद गंगाजल बहुत अधिक समय तक रखने पर भी नहीं सड़ता। क्यों?
उत्तर
गंगा के जल में वर्षों से मृत शरीर तथा अन्य उत्सर्जी पदार्थों का विसर्जन किया जाता है, लेकिन जीवाणुभोजी की उपस्थिति के कारण यह जल बोतल में बहुत अधिक समय तक रखने पर भी नहीं सड़ता।

प्रश्न 9.
एंटीबायोटिक पेनिसिलिन की खोज किसने की?
उत्तर
एलेक्जेंडर फ्लेमिंग ने।

प्रश्न 10.
पेनिसिलिन किस सूक्ष्मजीव/कवक से प्राप्त होता है ?
उत्तर
पेनिसिलियम नोटेटम (Penicillium notatum) से।

प्रश्न 11.
औद्योगिक रूप से सिट्रिक अम्ल बनाने में किस सूक्ष्मजीव का प्रयोग होता है ?
उत्तर
एस्परजिलस नाइगर (Aspergillus niger)।

प्रश्न 12.
किसी एक मीथेनोजेन जीवाणु का नाम लिखिए।
उत्तर
मीथेनोबैक्टीरियम प्रजाति (Methanobacterium sp.)

प्रश्न 13.
सीवेज ट्रीटमेन्ट में अवायवीय अवपंक (एनएरोबिक स्लज) में कौन से जीवाण पाये जाते हैं ?
उत्तर
मीथेनोजेन्स (Methanogens)

प्रश्न 14.
लेडीबर्ड क्या है ?
उत्तर
एक कीट है जिसको एफिड के नियंत्रण हेतु जैव नियंत्रक के रूप में प्रयोग किया जाता है।

प्रश्न 15.
IPM का पूरा नाम लिखिए।
उत्तर
इंटीग्रेटेड पेस्ट मैनेजमेंट (Integrated Pest Management)।

प्रश्न 16.
एक स्वपोषी नाइट्रोजन स्थिरीकरणकर्ता सूक्ष्मजीव का नाम बताइये।
उत्तर
एनाबीना (Anabaena)

प्रश्न 17.
माइकोराइजा किस विशिष्ट खनिज का अवशोषण कर पौधों की जड़ों को देती है जो पौधा स्वयं अवशोषित नहीं कर पाता।
उत्तर
फॉस्फोरस।

प्रश्न 18.
दूध को दही में परिवर्तित करने वाले सूक्ष्मजीव का नाम बताइये।
उत्तर
लैक्टोबैसीलस प्रजाति (Lactobacillus spe.)

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प्रश्न 19.
जैव वैज्ञानिक नियंत्रण के तहत् कौन-से कवक का उपयोग पादप रोगों के उपचार में किया जाता है।
उत्तर
ट्राइकोडर्मा प्रजाति (Trichoderma spe.)

प्रश्न 20.
स्वीस पनीर बनाने के लिये किस जीवाणु का प्रयोग होता है।
उत्तर
प्रोपिओनीबैक्टीरियम शारमैनाई (Propionibacterium sharmanii)।

प्रश्न 21.
कौन-सा पनीर एक विशिष्ट कवक की वृद्धि से परिपक्व होता है।
उत्तर
रॉक्फोर्ट पनीर (Roquefort cheese)।

प्रश्न 22.
बिना आसवन के बनने वाले दो ऐल्कोहॉलिक पेयों के नाम लिखिए।
उत्तर
बियर (Beer) तथा वाइन (Wine)

प्रश्न 23.
किण्वित रस के आसवन से तैयार होने वाले दो ऐल्कोहॉलिक पेयों के नाम लिखिए।
उत्तर
व्हिस्की (Whisky) तथा रम (Rum)।

प्रश्न 24.
बी. ओ. डी. का पूरा नाम लिखिए।
उत्तर
बायोकैमिकल या बायोलॉजिकल ऑक्सीजन डिमांड (Biochemical or biological Oxygen Demand)

प्रश्न 25.
उस जीवाणु का नाम बताइये जो मिट्टी के भीतर नाइट्रोजन का स्थिरीकरण करता है ?
उत्तर
स्पाइरुलीना।

प्रश्न 26.
किसी ऐसे संक्रमणकारी कारक का नाम बताइये जिसमें न तो डी.एन.ए. होता है और न ही आर. एन. ए.
उत्तर
प्रियॉन (Prion)

मानव कल्याण में सूक्ष्मजीव लघु उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 1.
पनीर क्या है ? इसे किस प्रकार तैयार किया जाता है ?
उत्तर
पनीर एक दुग्ध उत्पाद है, जिसमें 20 से 30% प्रोटीन होती है। दूध को साफ पतले कपड़े में छानकर 60°C पर 30 मिनट तक गर्म कर 15 सेकण्ड तक 75°C गर्म करते हैं। इसके पश्चात् इसे 30°C तापक्रम तक ठंडा करते हैं, इसमें लैक्टिक अम्ल जीवाणु स्ट्रेप्टोकोकस लैक्टिस, स्ट्रे. क्रिमोटिस तथा रेनिन एन्जाइम की थोड़ी सी मात्रा डालते हैं । इससे दूध से वसा एवं कैसीन प्रोटीन हट जाता है। दूध में उपस्थित कैसीन लगभग 45 मिनट में जमकर ठोस हो जाता है। छोटे-छोटे टुकड़े काटकर गर्म पानी में एक घंटा गर्म करते हैं, जब तैरने . लगे तो निकालकर निचोड़ते हैं। फिर नमक पानी में डुबाकर उपचारित कर लेते हैं। पनीर तैयार हो जाता है।

प्रश्न 2.
जीवाणु का कृषि क्षेत्र में क्या उपयोग है ?
उत्तर
जीवाणु का कृषि में उपयोग-कृषि के क्षेत्र में जीवाणु निम्न प्रकार से उपयोगी हैं

  • ये मृत जीवों का अपघटन करके भूमि की उर्वरा शक्ति बढ़ाते हैं।
  • ये भूमि में N2, स्थिरीकरण द्वारा इसकी उपजाऊ शक्ति में वृद्धि करते हैं।
  • नीले-हरे शैवालों का उपयोग उर्वरकों के रूप में किया जाता है।
  • ये पदार्थों के चक्रीयकरण में भाग लेकर भूमि में खनिज लवणों की मात्रा का नियंत्रण करते हैं।

प्रश्न 3.
सिरका उद्योग में किस तरह जीवाणुओं का प्रयोग होता है ?
उत्तर
सिरका उद्योग में शर्करा का किण्वन यीस्ट के द्वारा किया जाता है जिससे शराब तैयार की जाती है इस एथिल ऐल्कोहॉल को अधिक समय तक खुले हवा में छोड़ दें तो वह सिरके में बदल जाता है।
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प्रश्न 4.
प्रतिजैविक प्रदान करने वाले पाँच कवकों के नाम लिखिए।
उत्तर
कवकों के नाम जिनसे प्रतिजैविक औषधियाँ प्राप्त की जाती हैं, निम्नलिखित हैं
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प्रश्न 5.
प्रतिजैविक पैदा करने वाले पाँच जीवाणुओं के नाम लिखिए।
उत्तर
प्रतिजैविक पैदा करने वाले पाँच जीवाणु
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मानव कल्याण में सूक्ष्मजीव दीर्घ उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 1.
जीवाणुओं के विभिन्न क्षेत्रों में उपयोग लिखिये।
उत्तर
जीवाणुओं के विभिन्न क्षेत्रों में उपयोग निम्नानुसार हैं

  • नाइट्रोजन स्थिरीकरण-कुछ जीवाणु जैसे-ऐजोटोबैक्टर तथा क्लॉस्ट्रिडियमनाइट्रोजन स्थिरीकरण द्वारा भूमि की उर्वर शक्ति को बढ़ाते हैं।
  • लैक्टिक अम्ल निर्माण-लैक्टोबैसिलस लैक्टाई जीवाणु दूध के लैक्टोज को लैक्टिक अम्ल (दही) में परिवर्तित कर देते हैं।
  • ऐसीटिक अम्ल निर्माण-ऐसीटोबैक्टर ऐसीटाई जीवाणु सिरका का निर्माण करता है।
  • रेशे की रेटिंग-कुछ जीवाणु जैसे- क्लॉस्ट्रिडियम ब्यूटीरियमपादप रेशों के उत्पादन में सहायता करते हैं।
  • तम्बाकू एवं चाय उद्योग-कुछ जीवाणु जैसे-माइकोकॉकस कॉण्डीसेन्सतम्बाकू एवं चाय की सीजनिंग करते हैं।
  • औषधि निर्माण-कुछ जीवाणु जैसे-स्ट्रेप्टोमाइसिस से प्रतिजैविक औषधियाँ प्राप्त होती हैं।
  • सहजीवी के रूप-कुछ जीवाणु हमारे शरीर में सहजीवी रूप (जैसे-इश्चिरीचिया कोलाई) में रहकर जैविक क्रिया में मदद करते हैं।

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प्रश्न 2.
विषाणु के अनुप्रयोग पर निबंध लिखिए।
उत्तर
विषाणुओं के अनुप्रयोग भिन्न क्षेत्रों में निम्नानुसार हैं

  • जैविक नियंत्रण में-जीवाणुभोजी विषाणुओं के द्वारा हानिकारक जीवाणुओं को नष्ट किया जाता है अर्थात् यह जैव नियंत्रक के काम आता है।
  • रोगों के उपचार में-न्यूमोनिया, टी.बी., कोढ़ आदि के उपचार में जीवाणुभोजियों का उपयोग कर रोगजनक जीवाणुओं का भक्षण करवाया जाता है।
  • अंतरिक्ष सूक्ष्मजीव विज्ञान में-जीवाणुभोजियों के Lysogenic cultures Radiation detector के रूप में उपयोग आते हैं।
  • आनुवंशिकी अभियांत्रिकी में इसमें फेजेस का उपयोग आनुवंशिक पदार्थ को एक कोशिका से दूसरी कोशिका में स्थानांतरित करने में करते हैं।
  • प्रदूषित जल उपचार में-जीवाणुओं एवं अन्य सूक्ष्मजीवों द्वारा प्रदूषित जल के उपचार हेतु जीवाणुभोजी का उपयोग करते हैं। इसके अलावा भूमि की उर्वरता हेतु हानिकारक सूक्ष्मजीवों को नष्ट करने में एवं अनुसंधान हेतु जीवाणुभोजी का प्रयोग वेक्टर के रूप में करते हैं।

प्रश्न 3.
विभिन्न क्षेत्रों में कवकों की उपयोगिता बताइए।
उत्तर
कवकों के विभिन्न क्षेत्रों में उपयोगिता निम्नलिखित हैं
(1) औषधि के रूप में अनेक प्रकार के ऐण्टिबायोटिक कवकों से प्राप्त किये जाते हैं, जैसे-पेनिसिलीन, पेनिसिलियम नोटेटम (Penicillium notatum) से प्राप्त किया जाता है।
(2) भूमि की उर्वरता-कवक कई सड़े-गले पदार्थों का अपघटन करके भूमि की उर्वरा शक्ति को बढ़ाते हैं।
(3) उद्योगों में-

  • बेकरी उद्योग में कुछ यीस्ट तथा दूसरे कवकों को आटा के साथ गूंथकर ब्रेड बनाई जाती है।
  • शराब उद्योग में-यीस्ट तथा दूसरे कवकों में जाइमेज तथा कई ऐसे ही एन्जाइम पाये जाते हैं, जिनकी सहायता से कार्बोहाइड्रेट्स युक्त पदार्थों का किण्वन करके शराब बनाई जाती है।
  • रासायनिक उद्योग में कई प्रकार के अम्लों तथा अन्य रासायनिक वस्तुओं का निर्माण कवकों की सहायता से किया जाता है, जैसे-साइट्रिक अम्ल को ऐस्परजिलस नाइगर (Aspergillus niger) की सहायता से प्राप्त किया जाता है।
  • पनीर उद्योग में-पनीर निर्माण के समय इनका उपयोग किण्वन कारक के रूप में किया जाता है।
  • प्रकीण्व बनाने में-ऐमाइलेज ऐस्परजिलस तथा जाइमेज यीस्ट से प्राप्त किया जाता है।

(4) नाइट्रोजन स्थिरीकरण-कई कवक जैसे-रोडोटुरुला (Rodotounula) नाइट्रोजन स्थिरीकरण द्वारा भूमि की उर्वरा शक्ति को बढ़ाते हैं।
(5) हॉर्मोन निर्माण में-जिबरेलिन नामक हॉर्मोन जिबरेला फ्यूजिकोराई नामक कवक से प्राप्त किया जाता है।
(6) अनुसंधान में-न्यूरोस्पोरा जैसे कई कवकों का उपयोग आनुवंशिकी तथा कई अनुसंधानों में किया जाता है।
(7) वातावरण को शुद्ध करना-कवक अपघटन द्वारा वातावरण को शुद्ध करते हैं।
(8) जैविक नियंत्रण-जब एक जीव द्वारा बना पदार्थ दूसरे जीव को नष्ट कर देता है, तो इसे जैविक नियंत्रण कहते हैं।
(9) वर्णकों का निर्माण-मोनेस्कस द्वारा प्राप्त लाल रंग चावल रंगने के काम आता है।

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प्रश्न 4.
बायो गैस के उत्पादन में सूक्ष्म जीव किस प्रकार महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं? व्याख्या कीजिये।
उत्तर
बायो गैस के उत्पादन में सूक्ष्मजीवों की भूमिका-गोबर गैस एक प्रकार के गैसों का मिश्रण है जिसमें मीथेन भी उपस्थित होती है जो सूक्ष्मजीवी सक्रियता द्वारा उत्पन्न होती है। कुछ बैक्टीरिया जो सेल्यूलोज युक्त पदार्थों पर अवायवीय रूप में उगते हैं वह CO2, तथा H2, के साथ-साथ बड़ी मात्रा में मीथेन (Methane) उत्पन्न करते हैं।

सामूहिक रूप से इन जीवाणुओं को मीथेनोजेन (Methanogens) कहते हैं। इनमें सामान्य जीवाणु मीथेनोबैक्टीरिया है। पशुओं के मल को गोबर कहते हैं। जिसमें ये जीवाणु प्रचुर मात्रा में पाये जाते हैं, जो गोबर गैस (Gobar gas) अथवा बायो गैस (Biogas) का उत्पादन करते हैं।

बायो गैस संयंत्र अथवा गोबर गैस संयंत्र एक बड़ा टैंक होता है जिसकी गहराई 10-15 फीट होती है, इस टैंक में अपशिष्ट संग्रहीत एवं गोबर की स्लरी (Slurry) भरी जाती है। स्लरी के ऊपर एक सचल ढक्कन रखा जाता है। जिसे गैस होल्डर (Gas holder) कहते हैं। सूक्ष्मजीवी सक्रियता के कारण अथवा मीथेनोजेन (Methanogenes) बैक्टीरिया की उपस्थिति में रासायनिक अभिक्रियाओं के फलस्वरूप गैस का निर्माण होता है। जिसके फलस्वरूप ढक्कन अर्थात् गैस होल्डर ऊपर की ओर उठ जाता है।

बायो गैस संयंत्र में एक निकास होता है जिसकी सहायता से पाइप के द्वारा घरों में गैस की पूर्ति की जाती है। उपयोग में ली गई स्लरी दूसरे विकास द्वार से बाहर निकाल दी जाती है। इसका उपयोग उर्वरक के रूप में किया जाता है |

भारत में बायो गैस उत्पादन प्रौद्योगिकी को विकसित करने में निम्न का प्रमुख योगदान रहा है-

  • भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान (Indian Agricultural Research Institute IARI).
  • खादी व ग्रामोद्योग आयोग (Khadi and Village Industries Commission KVIC).

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MP Board Class 11th Maths Solutions Chapter 13 सीमा और अवकलज Ex 13.2

MP Board Class 11th Maths Solutions Chapter 13 सीमा और अवकलज Ex 13.2

प्रश्न 1.
x = 10 पर x2 – 2 का अवकलज ज्ञात कीजिए।
हल:
MP Board Class 11th Maths Solutions Chapter 13 सीमा और अवकलज Ex 13.2 img-1

प्रश्न 2.
x = 100 पर 99x का अवकलज ज्ञात कीजिए।
हल:
MP Board Class 11th Maths Solutions Chapter 13 सीमा और अवकलज Ex 13.2 img-2

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प्रश्न 3.
x = 1 पर x का अवकलज ज्ञात कीजिए।
हल:
MP Board Class 11th Maths Solutions Chapter 13 सीमा और अवकलज Ex 13.2 img-3

प्रश्न 4.
प्रथम सिद्धांत से निम्नलिखित फलनों का अवकलज ज्ञात कीजिए :
(i) x3 – 27.
हल:
दिया है, f(x) = x3 – 27
f(x + h) = (x + h)3 – 27
= x3 + 3x2h + 3xh2 + h3 – 27
f(x + h) – f(x) = (x3 + 3x2h + 3xh2 + h3 – 27) – (x3 – 27)
= 3x2h + 3xh2 + h3
= h(3x2 + 3xh + h2)
MP Board Class 11th Maths Solutions Chapter 13 सीमा और अवकलज Ex 13.2 img-4

(ii) (x – 1)(x – 2).
हल:
f(x) = (x – 1) (x – 2) = x2 – 3x + 2 .
f(x + h) = (x + h)2 – 3(x + h) + 2
∴ f(x + h) – f(x) = (x2 + 2xh + h2) – (3x + 3h) + 2 – (x2 – 3x + 2)
= 2xh + h2 – 3h
= h(2x + h – 3)
MP Board Class 11th Maths Solutions Chapter 13 सीमा और अवकलज Ex 13.2 img-5

(iii) \(\frac{1}{x^{2}}\).
हल:
MP Board Class 11th Maths Solutions Chapter 13 सीमा और अवकलज Ex 13.2 img-6

(iv) \(\frac{x+1}{x-1}\)
हल:
MP Board Class 11th Maths Solutions Chapter 13 सीमा और अवकलज Ex 13.2 img-7

प्रश्न 5.
फलन f (x) = \(\frac{x^{100}}{100}+\frac{x^{99}}{99}+\ldots . .+\frac{x^{2}}{2}\) + x + 1 के लिए सिद्ध कीजिए कि \(f^{\prime}\)(1) = 100\(f^{\prime}\)(0).
हल:
MP Board Class 11th Maths Solutions Chapter 13 सीमा और अवकलज Ex 13.2 img-8
x = 1 पर, \(f^{\prime}\)(1)= 1 + 1 +…+ x + 1
x = 0 पर, \(f^{\prime}\)(0)= 1
बायाँ पक्ष \(f^{\prime}\)(1)= 100,
दायाँ पक्ष = 100 \(f^{\prime}\)(0) = 100 x 1 = 100
अत: बायाँ पक्ष= दायाँ पक्ष।

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प्रश्न 6.
किसी अचर वास्तविक संख्या a के लिए xn + axn – 1 + a2xn – 2 +….+ an – 1 + an का अवकलज ज्ञात कीजिए।
हल:
MP Board Class 11th Maths Solutions Chapter 13 सीमा और अवकलज Ex 13.2 img-9

प्रश्न 7.
किन्हीं अचरों a और b के लिए
(i) (x – a)(x – b) का अवकलज ज्ञात कीजिए।
हल:
माना
f(x) = (x – a) (x – b)
= x2 – (a + b)x + ab
इसका अवकलन करने पर
\(f^{\prime}\)(x) = 2x2 – 1 – (a + b) .1 + 0
= 2x – (a + b).

(ii) (ax2 + b)2 का अवकलज ज्ञात कीजिए।
हल:
माना f(x) = (ax2 + b)2 = a2x4 + 2abx2 + b2
∴ f'(x) = a2 . 4x3 + 2ab . 2x + 0
= 4a2x3 + 4abx
= 4ax(ax2 + b)

(iii) \(\frac{x-a}{x-b}\) का अवकलज ज्ञात कीजिए।
हल:
MP Board Class 11th Maths Solutions Chapter 13 सीमा और अवकलज Ex 13.2 img-10

प्रश्न 8.
किसी अचर a के लिए \(\frac{x^{n}-a^{n}}{x-a}\) का अवकलज ज्ञात कीजिए।
हल:
MP Board Class 11th Maths Solutions Chapter 13 सीमा और अवकलज Ex 13.2 img-11

प्रश्न 9.
निम्नलिखित के अवकलज ज्ञात कीजिए :
(1) 2x – \(\frac{3}{4}\).
हल:
(i) मान लीजिए f(x) = 2x – \(\frac{3}{4}\)
∴ \(f^{\prime}(x)=2 \frac{d}{d x}(x)+\frac{d}{d x}\left(-\frac{3}{4}\right)\)
= 2.1 + 0 = 2.

(ii) (5x3 + 3x – 1) (x – 1).
हल:
माना
MP Board Class 11th Maths Solutions Chapter 13 सीमा और अवकलज Ex 13.2 img-12

(iii) x – 3(5 + 3x).
हल:
माना f(x) = x – 3(5 + 3x)
= 5x – 3 + 3x.x – 3 = 5x – 3 + 3x – 3
अवकलन करने पर
f'(x) = 5 (- 3)x– 3 – 1 + 3 (- 2). x– 2 – 1
= – 15 x – 4 – 6x – 3
= – \(\frac{15}{x^{4}}-\frac{6}{x^{3}}-\frac{3}{x^{4}}\)(5 + 2x).

(iv) x5 (3 – 6x– 9).
हल:
माना f(x) = x5 (3 – 6x– 9)
= 3x5 – 6.x5 – 9 = 3x5 – 6x– 4
∴ f'(x) = 3 . 5x5 – 1 – 6(- 4)x– 4 – 1.
= 15x4 + 24x– 5 = 15x4 + \(\frac{24}{x^{5}}\).

(v) x– 4 (3 – 4x– 5).
हल:
माना f(x) = x– 4 (3 – 4x– 5).
= 3. x– 4 – 4. x– 4 . x– 5 = 3x– 4 – 4x– 9
अवकलज करने पर
\(f^{\prime}(x)\) = 3. (- 4)x– 4 – 1 – 4 × (- 9)x– 9 – 1
= – 12x– 5 + 36x– 10
= – \(\frac{12}{x^{5}}+\frac{36}{x^{10}}\).

(vi) f(x) = \(\frac{2}{x+1}-\frac{x^{2}}{3 x-1}\).
हल:
माना
MP Board Class 11th Maths Solutions Chapter 13 सीमा और अवकलज Ex 13.2 img-13

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प्रश्न 10.
प्रथम सिद्धांत से cos x का अवकलज ज्ञात कीजिए ।
हल:
MP Board Class 11th Maths Solutions Chapter 13 सीमा और अवकलज Ex 13.2 img-14
MP Board Class 11th Maths Solutions Chapter 13 सीमा और अवकलज Ex 13.2 img-15

प्रश्न 11.
निम्नलिखित फलनों के अवकलज ज्ञात कीजिए:
(i) sin x cos x.
हल:
माना
f(x) = sin x cos x
∵ (uv)’ = u’v + uv’
∴ \(\frac{d}{d x}\)(sin x cos x) = \(\left(\frac{d}{d x} \sin x\right)\)cos x + sin x \(\frac{d}{d x}\) (cos x)
= cosx . cos x + sin x (- sin x)
= cos2x – sin2x = cos 2x.

(ii) sec x.
हल:
MP Board Class 11th Maths Solutions Chapter 13 सीमा और अवकलज Ex 13.2 img-16
MP Board Class 11th Maths Solutions Chapter 13 सीमा और अवकलज Ex 13.2 img-17

(iii) 5 sec x + 4 cos x.
हल:
माना f(x)= 5sec x + 4 cos x
∵ \(\frac{d}{d x}\)(sec x)= sec x tan x (भाग (ii) देखिरा)
\(\frac{d}{d x}\)cos x = – sin x
∴ f'(x)=5 \(\frac{d}{d x}\)(sec x) + 4 \(\frac{d}{d x}\)(cos x)
= 5 sec x tan x + 4(- sin x)
= 5 sec x tan x – 4 sin x.

(iv) cosec x.
हल:
माना
f(x)= cosec x
और f(x + h)= cosec (x + h)
f(x + h) – f(x) = cosec (x + h) – cosec x
MP Board Class 11th Maths Solutions Chapter 13 सीमा और अवकलज Ex 13.2 img-18

(v) 3 cot x + 5 cosec x.
हल:
f(x) = cot x
f(x + h) = cot (x + h)
f(x + h) – f(x) = cot (x + h) – cot x
MP Board Class 11th Maths Solutions Chapter 13 सीमा और अवकलज Ex 13.2 img-19
अब f'(x)= 3 \(\frac{d}{d x}\)cotx +5 \(\frac{d}{d x}\)cosec x
= 3(- cosec2 x) + 5 (- cosec x.cot x)
= – 3 cosec2x – 5 cosec x cot x.

(vi) 5 sin x – 6 cos x + 7.
हल:
माना
f(x) = 5 cos x – 6 – sin x) + 7
∴ \(f^{\prime}(x)=5 \frac{d}{d x} \sin x-6 \frac{d}{d x} \cos x+\frac{d}{d x}(7)\)
= 5 cos x + 6 (- sin x) + 0
= 5 cos x + 6sinx.

(vii) 2 tan x – 7 sec x.
हल:
MP Board Class 11th Maths Solutions Chapter 13 सीमा और अवकलज Ex 13.2 img-20

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MP Board Class 12th Biology Solutions Chapter 9 खाद्य उत्पादन में वृद्धि की कार्यनीति

MP Board Class 12th Biology Solutions Chapter 9 खाद्य उत्पादन में वृद्धि की कार्यनीति

खाद्य उत्पादन में वृद्धि की कार्यनीति NCERT प्रश्नोत्तर

प्रश्न 1.
मानव कल्याण में पशुपालन की भूमिका की संक्षेप में व्याख्यो दीजिए।
उत्तर
पशुपालन, पशुप्रजनन तथा पशुधन वृद्धि की एक कृषि पद्धति है। पशुपालन का संबंध पशुधन जैसे- भैंस, गाय, सूअर, घोड़ा, भेड़, ऊँट, बकरी आदि के प्रजनन तथा उनकी देखभाल से होता है जो मानव के लिए लाभप्रद हैं । इसमें कुक्कुट तथा मत्स्य पालन भी शामिल है। अति प्राचीन काल से मानव द्वारा जैसे-मधुमक्खी, रेशमकीट, झींगा, केकड़ा, मछलियाँ, पक्षी, सूअर, भेड़, ऊँट आदि का प्रयोग उनके उत्पादों जैसे-दूध, अंडे, माँस, ऊन, रेशम, शहद आदि प्राप्त करने के लिए किया जाता रहा है। विश्व की बढ़ती जनसंख्या के साथ खाद्य उत्पादन की वृद्धि एक प्रमुख आवश्यकता है।

पशुपालन खाद्य उत्पादन बढ़ाने के हमारे प्रयासों में मुख्य भूमिका निभाता है। शहद का उच्च पोषक मान तथा इसके औषधीय महत्व को ध्यान में रखते हुए मधुमक्खी पालन अथवा मौन पालन पद्धति में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। डेरी उद्योग से मानव खपत के लिए दुग्ध तथा इसके उत्पाद प्राप्त होते हैं । कुक्कुट का प्रयोग भोजन के लिए अथवा उनके अंडों को प्राप्त करने के लिए किया जाता है। हमारी जनसंख्या का एक बहुत बड़ा भाग आहार के रूप में मछली, मछली उत्पादों तथा अन्य जलीय जन्तुओं पर आश्रित है। हमारे देश की 70 प्रतिशत जनसंख्या पशुपालन उद्योग से किसी-न-किसी रूप में जुड़ी हुई है। पशुपालन हमारी अर्थव्यवस्था का आधार है। अत: मानव कल्याण में पशुपालन की बहुत बड़ी भूमिका है।

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प्रश्न 2.
यदि आपके परिवार के पास एक डेयरी फार्म है तब आप दुग्ध उत्पादन में उसकी गुणवत्ता तथा मात्रा में सुधार लाने के लिए कौन-कौन से उपाय करेंगे ?
उत्तर
डेयरी फार्म वह फार्म है जहाँ दुग्ध उत्पादों को प्राप्त करने के लिए दुग्ध उत्पादन करने वाले पशुओं जैसे-गाय, भैंस, ऊँट तथा बकरी आदि का पालन-पोषण किया जाता है। ऐसे कार्य जहाँ दूध का उत्पादन हो, उसे डेयरी प्रबंधन कहते हैं । डेयरी फार्म प्रबंधन में हम उन संसाधनों तथा तन्त्रों के विषय में अध्ययन करते हैं जिनसे दुग्ध की गुणवत्ता में सुधार तथा उसका उत्पादन बढ़ता है। दुग्ध उत्पादन मूल रूप से फार्म में रहने वाले पशुओं की नस्ल की गुणवत्ता पर निर्भर करता है।

अच्छी नस्ल का चयन तथा उनकी अच्छी उत्पादन क्षमता प्राप्त करने के लिए पशुओं की अच्छी देखभाल जिसमें उसके रहने के लिए अच्छा घर तथा पर्याप्त जल तथा रोगाणु मुक्त वातावरण होना चाहिए। पशुओं को भोजन प्रदान करने का तरीका वैज्ञानिक होना चाहिए। इसमें विशेषकर चारे की गुणवत्ता तथा मात्रा पर बल दिया जाना चाहिए। इसके अलावा दुग्धीकरण, दुग्ध उत्पादों का भण्डारण तथा परिवहन के दौरान सफाई तथा पशु एवं पशुपालकों का कार्य सर्वोपरि है। पशु चिकित्सकों से पशुओं की नियमित जाँच होनी चाहिए जिससे उनकी स्वास्थ्य संबंधी परेशानियाँ दूर कराई जा सकें।

प्रश्न 3.
नस्ल शब्द का क्या अर्थ है ? पशु प्रजनन के क्या उद्देश्य हैं ?
उत्तर
नस्ल (Breed)-जन्तुओं का वह समूह जिसके सदस्य कद-काठी,रंग-रूप व अन्य आकारिकी लक्षणों में समान तथा समान पूर्वज परम्परा के हों, नस्ल कहलाते हैं।
पशु प्रजनन के उद्देश्य-

  • पशु उत्पादन को बढ़ाना
  • पशु उत्पाद के वांछित गुणों में सुधार
  • रोग प्रतिरोधी पशुओं का विकास
  • अधिक व्यापक क्षेत्र हेतु अनुकूलन के लिए।

प्रश्न 4.
पशु प्रजनन में प्रयोग में लायी जाने वाली विधियों के नाम बताइये।आपके अनुसार कौनसी विधि सर्वोत्तम
है ? क्यों?
उत्तर
पशु प्रजनन की विभिन्न विधियाँ हैं-अंत:प्रजनन (inbreeding), बहि-प्रजनन (outbreeding), बहि:संकरण (outcrossing), संकरण (cross breeding) तथा अन्तःप्रजाति संकरण (interspecific Hybridization)। इन सब विधियों में संकरण सर्वोत्तम प्रजनन विधि है । इस विधि में दो भिन्न नस्लों के वांछित गुणों का बनने वाले संकर में संयोजन होता है। इस प्रकार बनने वाला संकर हेटेरोसिस (Heterosis) प्रदर्शित करता है। पशुओं की अनेक उन्नत-नस्लें इस विधि से विकसित की गई है, जैसे-करन स्विस व सुनन्दिनी गाय।

प्रश्न.5.
मौन (मधुमक्खी पालन) से आप क्या समझते हैं ? हमारे जीवन में इसका क्या महत्व है?
उत्तर
मधुमक्खी पालन-शहद के उत्पादन के लिए मधुमक्खियों के छत्तों का रख-रखाव ही मधुमक्खी पालन अथवा मौन पालन है। महत्व-मधुमक्खी पालन का हमारे दैनिक जीवन में महत्वपूर्ण स्थान है

  • शहद उच्च पोषक महत्व का आहार है तथा औषधियों में भी इसका प्रयोग किया जाता है।
  • मधुमक्खियाँ मोम भी पैदा करती हैं जिसका कांतिवर्धक वस्तुओं की तैयारी तथा विभिन्न प्रकार के पॉलिश वाले उद्योगों में प्रयोग किया जाता है।
  • मधुमक्खियाँ हमारे बहुत से फसलों जैसे-सूर्यमुखी, सरसों, सेब तथा नाशपाती के लिए परागणक है। पुष्पीकरण के समय यदि इनके छत्तों को खेतों के बीच रख दिया जाये तो इससे पौधों की परागण क्षमता बढ़ जाती है और इस प्रकार फसल तथा शहद दोनों के उत्पादन में सुधार हो जाता है।

प्रश्न 6.
खाद्य उत्पादन को बढ़ाने में मत्स्यकी की भूमिका की विवेचना कीजिए।
उत्तर
मत्स्यकी एक प्रकार का उद्योग है जिसका संबंध मछली अथवा अन्य जलीय जीवों को पकड़ना, उनका प्रसंस्करण तथा उन्हें बेचने से होता है। हमारी जनसंख्या का एक बहुत बड़ा भाग आहार के रूप में मछली, मछली उत्पादों तथा अन्य जलीय जन्तुओं आदि पर आश्रित है। भारतीय अर्थव्यवस्था में मत्स्यकी का महत्वपूर्ण स्थान है। यह तटीय राज्यों में विशेषकर लाखों मछुआरों तथा किसानों को आय तथा रोजगार प्रदान करती है।

बहुत से लोगों के लिए यही जीविका का एक मात्र साधन है। मत्स्यकी की बढ़ती हुई माँग को देखते हुए इसके उत्पादन को बढ़ाने के लिए विभिन्न प्रकार की तकनीकें अपनाई जा रही हैं। मत्स्यकी उद्योग विकसित हुआ है तथा फला-फूला है, जिससे सामान्यत: देश को तथा विशेषत: किसानों को काफी आमदनी हुई। इसकी प्रगति को देखते हुए अब हम ‘हरित क्रांति’ की भाँति ‘नील क्रांति’ की बात करने लगे हैं।

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प्रश्न 7.
पादप प्रजनन में शामिल विभिन्न चरणों का संक्षेप में वर्णन कीजिये। .
उत्तर
पादप प्रजनन के विभिन्न चरण-विभिन्नताओं का संग्रह (Collection of variability), जनकों का मूल्यांकन तथा चयन (Evaluation and selection of parents), चयनित जनकों के बीच संकरण (cross hybridization among selected parents)। श्रेष्ठ पुनर्योजन का चयन तथा परीक्षण (selection and testing of superior recombinants), नये कृषकों का परीक्षण, नियुक्ति तथा व्यवसायीकरण (testing, release and commercialization of new cultivars)

प्रश्न 8.
जैव प्रबलीकरण का क्या अर्थ है ? व्याख्या कीजिये।
उत्तर
जैव प्रबलीकरण (Biofortification)-पोषक मान (Nutritional valye) बढ़ाने के उद्देश्य को लेकर किया पादप प्रजनन जैव प्रबलीकरण कहलाता है। पोषक मान से यहाँ तात्पर्य सूक्ष्म पोषक तत्व जैसेविटामिन्स या खनिज, अथवा वांछित अमीनो अम्ल अथवा स्वास्थ्यकारी वसा का स्तर है।
खाद्य पदार्थों में इन पोषक पदार्थों का स्तर बढ़ाकर जन स्वास्थ्य को सुधारने का सार्थक प्रयास किया जा सकता है।
पोषक गुणवत्ता के उन्नयन हेतु किया गया पादप प्रजनन निम्नलिखित को सुधारने के उद्देश्य से किया जाता है

  • प्रोटीन की मात्रा व गुणवत्ता (Protein content and quality)
  • तेल की मात्रा व गुणवत्ता (Oil content and quality)
  • विटामिन्स की मात्रा (Vitamin content)
  • सूक्ष्म पोषक व खनिज मात्रा (Micronutrient and mineral content)

सन् 2000 में मक्का की ऐसी संकर किस्म का विकास किया गया जिसमें महत्वपूर्ण अमीनो अम्ल लाइसिन (lysine) व ट्रिप्टोफेन (tryptophan) की मात्रा मक्का के उपलब्ध संकरों में इन अमीनो अम्लों की मात्रा से दोगुनी थी। शक्ति, रतन व प्रोटीन किस्में लाइसिन से भरपूर हैं।

प्रश्न 9.
विषाणु मुक्त पादप तैयार करने के लिए पादपों का कौन-सा भाग सर्वाधिक उपयुक्त है तथा क्यों?
उत्तर
पौधे के शीर्षस्थ व कक्षस्थ विभज्योतक (Apical and axillary meristem) विषाणुरहित होते हैं। अतः पौधों का शीर्षस्थ (apical) भाग विषाणुमुक्त पादप तैयार करने के लिए उपयुक्त है।

प्रश्न 10.
सूक्ष्म प्रवर्धन द्वारा पादप उत्पादन के मुख्य लाभ क्या हैं ?
उत्तर
सूक्ष्म प्रवर्धन (Micropropagation) द्वारा पादप उत्पादन के निम्न लाभ हैं

  • कम समय में बड़ी मात्रा में पौधे-तैयार किये जा सकते हैं।
  • इस प्रकार बने पौधे विषाणु रहित व स्वस्थ होते हैं।
  • पौधे एक वर्ष में तैयार हो जाते हैं। अनुकूल मौसम आने का इंतजार नहीं करना पड़ता।
  • जो पादप बीज बनाने में असमर्थ हैं उनका उत्पादन इस विधि से करना संभव है।

प्रश्न 11.
पत्ती में कौतक पादप के प्रवर्धन में जिस माध्यम का प्रयोग किया गया है, उसमें विभिन्न घटकों का पता लगाओ।
उत्तर
संवर्धन माध्यम के निम्न प्रमुख घटक होते हैं

  • कार्बन स्रोत-सुक्रोज या अन्य शर्करा।
  • अन्य कार्बनिक पदार्थ-अमीनो अम्ल, विटामिन।
  • अकार्बनिक लवण-पोटैशियम, फॉस्फोरस, कैल्सियम, सल्फर आदि के लवण।
  • वृद्धि नियामक (Growth regulator) हॉर्मोन्स-ऑक्सिन तथा साइटोकाइनिन।
  • जल।
  • अगर-अगर-माध्यम को ठोस बनाने हेतु।

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प्रश्न 12.
शस्य पादपों की किन्हीं पाँच संकर किस्मों के नाम बताइए जिनका विकास भारत वर्ष में हुआ है। .
उत्तर

  • धान-IR-36, पूसा, बासमती-1, जया, पदमा, रत्ना।
  • गेहूँ-सोनालिका, कल्यान, सोना, (HD-3090 पूसा अमूल्या 2013 में, (HD-3086 पूसा गौतमी 2013 में)।
  • मक्का -गंगा – 5, रंजीत नवजोत।
  • भिण्डी-पूस आवनी।
  • बैंगन-पूसा बैंगनी, पूसा क्रांति और मुक्तवेशी।

खाद्य उत्पादन में वृद्धि की कार्यनीति अन्य महत्वपूर्ण प्रश्नोत्तर

खाद्य उत्पादन में वृद्धि की कार्यनीति वस्तुनिष्ठ प्रश्न

1. सही विकल्प चुनकर लिखिए

1. पशुओं में गिल्टी रोग या एन्थ्रेक्स फैलता है
(a) जीवाणु द्वारा
(b) फफूंद द्वारा
(c) विषाणु द्वारा
(d) किलनी द्वारा।
उत्तर
(b) फफूंद द्वारा

प्रश्न 2.
गायों के गलघोटू रोग का जनक है
(a) ब्रुसेला एट्सि
(b) बेसीलस प्रजाति
(c) पाश्चुरेला बोवीसेप्टिका
(d) क्लॉस्ट्रीडियम।
उत्तर
(b) बेसीलस प्रजाति

प्रश्न 3.
खुरपका या मुंहपका रोग का रोगजनक जीव है
(a) कवक
(b) जवाणु
(c) विषाणु
(d) माइकोप्लाज्मा।
उत्तर
(a) कवक

प्रश्न 4.
वर्षा ऋतु के पश्चात् पशुओं में फैलने वाला प्रमुख रोग है
(a) काला ज्वर
(b) गलघो
(c) पोकनी
(d) एन्थ्रेक्स।
उत्तर
(b) गलघो

प्रश्न 5.
गलघोटू के टीके लगाये जाते हैं
(a) जनवरी-फरवरी में
(b) मार्च-अप्रैल में
(c) मई-जून में
(d) अक्टूबर-नवम्बर में।
उत्तर
(a) जनवरी-फरवरी में

प्रश्न 6.
पशुओं में प्लेग रोग का कारक है
(a) कवक
(b) जीवाणु
(c) विषाणु
(d) माइकोप्लाज्मा।
उत्तर
(b) जीवाणु

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प्रश्न 7.
धान्य पौधे का उदाहरण है
(a) गेहूँ
(b) धान
(c) मक्का
(d) उपर्युक्त सभी।
उत्तर
(d) उपर्युक्त सभी।

प्रश्न 8.
सामान्य गेहूँ का वानस्पतिक नाम है
(a) ट्रिटिकम एस्टाइवम
(b) ट्रि.वल्गेर
(c) ट्रि.ड्यूरम
(d) ट्रि.मोनोकोक्कम।
उत्तर
(b) ट्रि.वल्गेर

प्रश्न 9.
धान किस कुल का सदस्य है
(a) ग्रैमिनी
(b) पैपिलियोनेसी
(c) यूफोर्बिएसी
(d) कम्पोजिटी।
उत्तर
(a) ग्रैमिनी

प्रश्न 10.
पद्मा एवं जया है
(a) गेहूँ
(b) धान
(c) चना
(d) मूंगफली।
उत्तर
(b) धान

प्रश्न 11.
रतनजोत का वानस्पतिक नाम
(a) पोंगेमिया पिन्नाटा
(b) रिसीनस कम्यूनिस
(c) जैट्रोफा करकस
(d) ब्रेसिका कम्पेस्ट्रिस।
उत्तर
(c) जैट्रोफा करकस

प्रश्न 12.
गेहूँ है एक
(a) फल
(b) बीज
(c) भ्रूण
(d) ग्लूम।
उत्तर
(b) बीज

प्रश्न 13.
कॉल्चीसीन निम्न में से कौन-सा प्रभाव डालता है
(a) D.N.A. द्विगुणन
(b) गुणसूत्रों का द्विगुणन
(c) स्पिण्डिल तन्तुओं का बनना
(d) मध्य पटलिका के बनने में अवरोधन।
उत्तर
(b) गुणसूत्रों का द्विगुणन

प्रश्न 14.
वह पौधा जिसमें बीज बनता है फिर भी वर्धी प्रजनन द्वारा उगाया जाता है
(a) आलू
(b) नीम
(c) आभ
(d) सेवन्ती।
उत्तर
(a) आलू

प्रश्न 15.
मानव निर्मित अन्न है
(a) ट्रिटिकम
(b) ट्रिटिकेल
(c) पाइसम
(d) गन्ना
उत्तर
(b) ट्रिटिकेल

प्रश्न 16.
सोनेरा 64 और लौरोजा 64A किस पादप की प्रजातियाँ हैं
(a) गेहूँ
(b) धान
(c) मटर
(d) मक्का ।
उत्तर
(a) गेहूँ

प्रश्न 17.
अगुणित नर पौधे किसके संवर्धन से तैयार किये जा सकते हैं
(a) पुतन्तु
(b) परागकण
(c) पुंकेसर
(d) पुमंग।
उत्तर
(b) परागकण

प्रश्न 18.
संकरण के समय फूल की कली से पुंकेसरों को हटाने की क्रिया कहलाती है
(a) कृप्स करवाना
(b) स्वनिषेचन
(c) विपुंसन
(d) टोपपिन।
उत्तर
(c) विपुंसन

प्रश्न 19.
बीज बुआई निर्भर करती है
(a) तापमान पर
(b) प्रकाश अवधि पर
(c) भूमि की नमी पर
(d) उपर्युक्त सभी पर।
उत्तर
(d) उपर्युक्त सभी पर।

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प्रश्न 20.
संकर ज्यादातर जनक से ओजस्वी होते हैं क्योंकि
(a) समयुग्मजता
(b) संकर ओज
(c) जनक ज्यादातर कमजोर होते हैं
(d) उपर्युक्त में से कोई भी नहीं ।
उत्तर
उत्तर

2. रिक्त स्थानों की पूर्ति कीजिए-

1. अच्छे गुणों वाले पशुओं को प्रजनन हेतु चुनना ………………. कहलाता है।
2. दो भिन्न आनुवंशिक गुणों वाले पशुओं के मध्य संकरण ……. कहलाता है।
3. मुर्गियों का रानीखेत रोग सर्वप्रथम उ.प्र. के ………………. जिले में देखा गया।
4. पाउल पॉक्स रोग ………………. के द्वारा होता है।
5. पशुओं का खुरपका-मुँहपका रोग ………………. के द्वारा होता है।
6. कोशिकाओं के अविभाजित एवं असंगठित समूहों को ………………. कहते हैं।
7. पुष्पों से पुंकेसर या परागकोषों को हटाना ………………. कहलाता है।
8. ऊतक संवर्धन हेतु चयनित पौधों को ……………… कहते हैं।
9. टोटीपोटेन्सी की खोज ……………… ने की थी।
10. गेहूँ का वानस्पतिक नाम ……………… है।
11. कोशिका की पुनर्जनन क्षमता को ……………… कहते हैं।
12. कैलस कोशिकाओं का अन्य कोशिकाओं में विभेदन …………. कहलाता है।
13. स्केलिंग ………………. युक्त पौधों में वर्धी प्रसारण की महत्वपूर्ण विधि है।
14. ट्रिटिकम वल्गेर में गुणसूत्र की कुल संख्या ……………… होती है।
15. मूंगफली …………….. कुल की सदस्य है।
16. करंज का वानस्पतिक नाम ………………. है।
17. ………………. प्रथम GM फसल है।’
18. ………………. को देश का धान का कटोरा कहते हैं।
19. कोशिका की पुनर्जनन क्षमता को …………….. कहते हैं।
20. कैलस कोशिकाओं का अन्य कोशिकाओं में विभेदन ………………. कहलाता है।
21. निकट संबंधी में प्रजनन ………………. कहलाता है।
22. किसी पादप को प्राकृतिक आवास से निकालकर नई जलवायु वाले आवास में स्थापित करना …………… कहलाता है।
23. विभिन्न नस्ल के शुद्ध जन्तुओं के नर-मादा के मध्य होने वाले सहवास को …………….. कहते हैं ।
उत्तर

  1. वरण या चयन
  2. बहिः प्रजनन
  3. कुमायूँ
  4. विषाणु
  5. विषाणु
  6. कैलस
  7. विपुंसन
  8. एलीट
  9. स्टीवर्ड
  10. ट्रिटिकम वल्गेर
  11. पूर्णशक्तता
  12. कोशिका विभेदन
  13. शल्ककंद
  14. 42
  15. पैपिलिओनेसी
  16. पोंगेमिया पिन्नाटा
  17. फ्लेवर-सेवर टमाटर
  18. छत्तीसगढ़
  19. पूर्णशक्तता
  20. कोशिका विभेदन
  21. समप्रजनन
  22. पुरःस्थापन
  23.  संकरण।

3. सही जोड़ी बनाइये

I. ‘A’ -‘B’

1. विष ज्वर (एन्थ्रेक्स) – (a) विषाणु
2. क्लॉस्ट्रीडियम स्कर्वी – (b) वैसिलरी सफेद दस्त
3. रानीखेत रोग – (c) मुर्गियों का खूनी दस्त
4. कॉक्सीडिया – (d) गाय
5. साल्मोनेला पुलोरम – (e) लंगड़ी ज्वर।
उत्तर
1. (d), 2. (e), 3. (a), 4. (c), 5. (b)

II. ‘A’ – ‘B’

1. ट्रिटिकेल – (a) हेक्साप्लॉइड
2. ऊतक संवर्धन – (b) परागकोषों को हटाना
3. ट्रिटिकम एस्टीवम – (c) एलीट
4. टोटीपोटेन्सी – (d) गेहूँ एवं राई
5. विपुंसन – (e) स्टीवर्ड।
उत्तर
1. (d), 2. (c), 3. (e), 4. (a), 5. (b)

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III. ‘A’ – ‘B’

1. सोनालिका 5308 – (a) जैव ईंधन
2. जिया मेज – (b) जैव पीड़कनाशी
3. जैट्रोफा (रतनजोत) – (c) संवर्धन
4. आक – (d) मक्का
5. अगर – (e) गेहूँ।
उत्तर
1. (e), 2. (d), 3. (a), 4. (b), 5. (c).

4. एक शब्द में उत्तर दीजिए

1. भारतवर्ष में हरित क्रांति का प्रारंभ कब हुआ था ?
2. बल्ब (शल्ककन्द) वाले पौधों में वर्धी प्रसारण को क्या कहते हैं ?
3. किन्हीं दो धान्य के नाम लिखिए।
4. किसी मानवनिर्मित फसल का नाम लिखिए।
5. दो भिन्न जातियों के संकरण से उत्पन्न जीव को क्या कहते हैं ?
6. पुष्प से अपरिपक्व परागकोषों को हटाने को क्या कहते हैं ?
7. संकर प्रोजेनी का अपने जनकों से ओजस्वी होना क्या कहलाता है ?
8. मधुमक्खी पालन को क्या कहते हैं ?
9. मछलीपालन को क्या कहते हैं ?
10. कोशिकाओं के अविभाजित एवं असंगठित समूह को कहते हैं ?
उत्तर

  1. 1960
  2. कृत्रिम पादप प्रसारण
  3. गेहूँ, चावल
  4. ट्रिटिकेल
  5. संकर
  6. विपुंसन
  7. संकर ओज,
  8. एपीकल्चर
  9. फिशरी
  10. कैलस।

खाद्य उत्पादन में वृद्धि की कार्यनीति अति लघु उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 1.
हिसारडैल क्या है ?
उत्तर
हिसारडैल भेड़ की एक नस्ल है।

प्रश्न 2.
पारजीनी गाय रोजी से उत्पन्न दूध की क्या विशेषता है ?
उत्तर
पारजीनी गाय रोजी के दूध में वसा की मात्रा कम तथा प्रोटीन की मात्रा अधिक होती है।

प्रश्न 3.
मधुमक्खी की उस प्रजाति का नाम लिखिए जिन्हें पाला जा सकता है ।
उत्तर
एपिस इंडिका।

प्रश्न 4.
पुष्पीकरण के समय मधुमक्खी के छत्तों को खेत के बीच रखने पर पौधे पर क्या प्रभाव पड़ेगा?
उत्तर
पौधों की परागण क्षमता बढ़ जायेगी।

प्रश्न 5.
अन्तःप्रजनन किसे कहते हैं ?
उत्तर
एक ही नस्ल के पशुओं के मध्य होने वाले प्रजनन को अन्तःप्रजनन कहते हैं।

प्रश्न 6.
पशु प्रजनन का उद्देश्य बताइये।
उत्तर
पशुओं के उत्पादन को बढ़ाना तथा उनके उत्पादों की वांछित गुणवत्ता में सुधार करना है।

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प्रश्न 7.
बर्ड-फ्लू के रोगकारक का नाम लिखिए।
उत्तर
बर्ड-फ्लू के रोगकारक का नाम इन्फ्लूएन्जा-A विषाणु या H,N, विषाणु है।

प्रश्न 8.
आनुवंशिक रूपान्तरित पादपों के कोई दो नाम लिखिये।
उत्तर

  • गोल्डन राइस
  • फ्लेवर सेवर।

प्रश्न 9.
ऐसे दो पौधों के नाम लिखिए, जो कृत्रिम वरण द्वारा उत्पन्न किये गये हैं।
उत्तर

  • कल्याण सोना
  • शाइनिंग मूंग।

प्रश्न 10.
इस जीव का नाम लिखिए जिसका प्रयोग एकल कोशिका प्रोटीन के व्यापारिक उत्पादन में किया जाता है।
उत्तर
स्पाइरुलाइना का प्रयोग एकल प्रोटीन के व्यापारिक उत्पादन में किया जाता है।

प्रश्न 11.
डेयरी उद्योग किसका प्रबंधन है ?
उत्तर
पशु प्रबंधन।

प्रश्न 12.
पशुपालन किसे कहते हैं ?
उत्तर
मानव कल्याण के लिए पशुओं की देखभाल को पशुपालन कहते हैं।

प्रश्न 13.
अर्द्धवामन धान की किस्मों को किससे व्युत्पन्न किया जाता है ?
उत्तर
अर्द्धवामन धान की किस्मों को IR-8 तथा थाइचुंग नेटिव-1 से व्युत्पन्न किया गया।

प्रश्न 14.
पोमैटो का निर्माण कैसे होता है ?
उत्तर
पोमैटो का निर्माण टमाटर के प्रोटोप्लास्ट व आलू के प्रोटोप्लास्ट के युग्मन से होता है।

प्रश्न 15.
पादपों में विषाणु द्वारा उत्पन्न होने वाले किन्हीं दो रोगों के नाम लिखिये।
उत्तर

  • तंबाकू मोजैक
  • शलजम मोजैक।

प्रश्न 16.
एस.टी.पी. का पूरा नाम लिखिए।
उत्तर
“एकल प्रोटीन कोशिका” एस.टी.पी. का शब्द विस्तार है।

प्रश्न 17.
अलवण जल में पाई जाने वाली किन्हीं दो मछलियों के नाम लिखिए।
उत्तर

  • कतला
  • रोहू।

प्रश्न 18.
स्पाइरुलाइना का आर्थिक महत्व क्या है ?
उत्तर
यह प्रोटीन का अच्छा स्रोत है तथा प्रदूषण को कम करता है।

प्रश्न 19.
निकट संबंधी पशुओं के मध्य प्रजनन को कहते हैं।
उत्तर
अंतःप्रजनन।

प्रश्न 20.
गायों के विष ज्वर रोग के रोग कारक का नाम लिखिए।
उत्तर
बैसिलस एन्थ्रेसिस।

प्रश्न 21.
रानीखेत किनका प्रमुख रोग है ?
उत्तर
मुर्गियों का।

प्रश्न 22.
पशुओं में वर्षा ऋतु के पश्चात् होने वाला प्रमुख रोग है।
उत्तर
एन्थ्रेक्स।

प्रश्न 23.
कुत्तों के दो प्रमुख रोगों के नाम लिखो।
उत्तर
डर्मेटाइटिस और रेबीज।

प्रश्न 24.
दो भिन्न जातियों के संकरण से उत्पन्न जीव को क्या कहते हैं?
उत्तर
संकर।

प्रश्न 25.
मानव निर्मित प्रथम फसल का नाम लिखिए।
उत्तर
ट्रिटिकेल।

प्रश्न 26.
मिलेट का एक उदाहरण दीजिए।
उत्तर
राई।

प्रश्न 27.
ऊतक संवर्धन के जनक का नाम बताइये।
उत्तर
हैबरलैंड।

प्रश्न 28.
मूंगफली का वानस्पतिक नाम लिखिए।
उत्तर
अरेकिस हाइपोजिया

प्रश्न 29.
साहीवाल किसकी उन्नत नस्ल है ?
उत्तर
गाय की।

खाद्य उत्पादन में वृद्धि की कार्यनीति लघु उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 1.
स्केलिंग क्या है, इसका क्या महत्व होता है ?
उत्तर
स्केलिंग वर्धी प्रसारण की विधि है, जो कि बल्ब (शल्क कंद) वाले पौधे के लिए उपयोगी है। इस विधि में सभी बल्ब पृथक कर लिये जाते हैं तथा उन्हें ऐसी भूमि में रोपित किया जाता है जहाँ उनकी वृद्धि के लिए सभी आवश्यक परिस्थितियाँ उपस्थित होती हैं। इससे शल्क वृद्धि करके अपने आधार पर छोटे-छोटे बल्ब बना लेता है। 3-5 बल्ब (छोटे-छोटे) विकसित होते हैं। यह लिलियेसी कुल के पौधे जैसे लहसुन, लिलियम के लिए उपयोगी है।

प्रश्न 2.
ऊतक संवर्धन क्या है ? इसके उद्देश्य लिखिए।
उत्तर
ऊतक संवर्धन में अलग की गई कोशिका या ऊतक अथवा अंग जैसे परागकोष या परागकण, भ्रूण या भ्रूणिका आदि से संवर्धन माध्यम पर नियंत्रित तथा अजीकृत अवस्था में अत्यधिक संख्या में पौधे विकसित किये जाते हैं।
उद्देश्य

  • इसके द्वारा फसल किसी भी अवस्था से नये पौधे के लिए विकास को सुनिश्चित करता है।
  • अभूतपूर्व संकर किस्मों को उत्पन्न करना।
  • रोगी पौधों से रोगमुक्त पौधों का विकास करना।
  • अगुणित पौधों का संवर्धन।
  • आर्थिक रूप से महत्वपूर्ण पौधों का कम समय में अत्यधिक संख्या में निर्मित करना।

प्रश्न 3.
कैलस संवर्धन क्या है ? इसकी तकनीक लिखिए।
उत्तर
पादप ऊतक संवर्धन के क्रम में संरोप (Explant) के कोशिकाओं द्वारा ऑक्सिन तथा सायटोकायनिन की उपस्थिति में तथा अजर्म स्थिति के होने पर कोशिकाओं के असंगठित समूह के रूप में कैलस का निर्माण होता है यह प्रक्रिया संवर्धन कहलाती है। तकनीक-सोडियम हाइपोक्लोराइड से विसंक्रमणित करते हैं। विसंक्रमणित पौधे को कई बार आसुत जल से धोते हैं। इसे विसंक्रमणित माध्यम में छोटे-छोटे टुकड़ों में विभक्त कर स्थानान्तरित कर देते हैं। संरोपण पश्चात् संवर्धन माध्यम को नियंत्रित प्रकाश व ताप पर ऊष्मायन (Autoclave) के माध्यम में स्थानान्तरित कर देते हैं। कैलस निर्माण हेतु संवर्धन के लिए पोषण माध्यम में ऑक्सिन तथा सायटोकाइनिन समान अनुपात में मिलाया जाता है।

प्रश्न 4.
ऊतक संवर्धन की प्रक्रिया में वातायन क्यों आवश्यक होता है ?
उत्तर
किसी भी जीवन के लिए श्वसन एक प्रमुख लक्षण है। श्वसन के द्वारा ही जीव अपने सभी प्रकार्यात्मक लक्षणों को सुचारू रूप से चलायमान रख पाता है। श्वसन के लिए वायु (ऑक्सीजन) बहुत जरूरी है। ऊतक संवर्धन की प्रक्रिया में ऊतकों को उपयुक्त वायु प्राप्त होनी चाहिए तभी वे ठीक से विकसित हो पायेंगे। वायु की उपलब्धता हेतु किया गया प्रबंध वातायन कहलाता है, अतः ऊतक संवर्धन की प्रक्रिया की सफलता के लिए वातायन बहुत जरूरी है।

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प्रश्न 5.
अन्तःप्रजनन किसे कहते हैं ? इससे क्या लाभ होते हैं ?
उत्तर
अन्तःप्रजनन (Inbreeding)-निकट सम्बन्धित या समान प्रजातियों के बीच होने वाले प्रजनन को अन्तःप्रजनन कहते हैं। इस तकनीक के द्वारा जन्तु नस्लों में सुधार किया जाता है। इस प्रजनन से शुद्ध नस्लों के जन्तुओं को पैदा किया जाता है। लेकिन इस प्रजनन के कारण विकास की संभावनाएँ कम होती जाती हैं। प्राचीनकाल से ही इस तकनीक का प्रयोग जन्तुओं के सुधार के लिए किया जा रहा है। उदाहरण-स्पेन में उत्तम ऊन प्राप्त करने के लिए मेरिनो भेड़ों में 170 सालों तक अन्तःप्रजनन किया गया। हमारे देश में उन साँड़ों का प्रयोग अन्तःप्रजनन के लिए चरागाहों में किया जाता है जो बोझ ढोने में उत्तम होते हैं, शेष का जनननाशन (Castration) करके उन्हें बैल बना दिया जाता है।

प्रश्न 6.
पशुओं में खुरपका एवं मुंहपका रोग कैसे फैलता है ? रोग के लक्षण व रोग जनक का नाम लिखिए।
उत्तर
पशुओं में खुरपका एवं मुँहपका रोग रोगी पशुओं के पास रहने से संक्रमण से होता है। यह गाय, भैंस, भेड़, बकरी एवं सुअर में होता है।
लक्षण-

  • पशु के शरीर का ताप काफी बढ़ जाता है। वह सुस्त हो जाता है तथा जुगाली करना बंद कर देता है।
  • पशु के मुँह, पैरों के खुरों, अयन व थनों पर छाले बनकर फूट जाते हैं जिसमें घाव बन जाता है।
  • पशु बार-बार जमीन पर पैर को पटकता है और लंगड़ाकर चलता है।

प्रश्न 7.
शहद में उपस्थित पदार्थों को सूचीबद्ध कीजिये।
अथवा
मधुमक्खी की तीन प्रजातियों के नाम तथा शहद का रासायनिक संगठन लिखिए।
अथवा
मधुमक्खी की तीन प्रजातियों के नाम तथा शहद के दो उपयोग लिखिए।
उत्तर
मधुमक्खी की तीन

प्रजाति

  • ऐपिस इण्डिका
  • ट्राइगोना स्पी.
  • मेलिनोपा स्पी.।

शहद के दो उपयोग

  • इसका उपयोग दवा के रूप में किया जाता है।
  • इसका उपयोग पोषक पदार्थ के रूप में किया जाता है।

प्रोटीन

  • शहद का रासायनिक संघटन
  • फ्रक्टोज (41%)
  • प्रोटीन (0.18%)
  • ग्लूकोज (35%)
  • खनिज लवण (3:3%)
  • सुक्रोज (1.9%)
  • जल (17.25%).
  • डेक्सट्रीन (1.5%).

थोड़ी मात्रायें विटामिन B1, B6, कोलीन, विटामिन C और D होता है।

प्रश्न 8.
अण्डजोत्पत्ति में कौन-कौन-सी सावधानियाँ रखनी चाहिए? उत्तर-मुर्गियों में अण्डजोत्पत्ति 21 दिन में होती है इसके लिए निम्नलिखित सावधानियाँ रखनी चाहिए

  • अण्डजोत्पत्ति के लिए उत्तम किस्म के अण्डों का चयन करना चाहिए।
  • मध्यम माप वाले अण्डे होने चाहिए।
  • चयनित अण्डे का रंग सफेद होना चाहिए।
  • अण्डों को जल से धोना चाहिए ।
  • अण्डों को अधिक हिलाना नहीं चाहिए।
  • गर्मियों में अण्डों को तीन दिन से अधिक नहीं रखना चाहिए।
  • अण्डों का सेचन देशी मुर्गी से कराना चाहिए।
  • रात्रि में मुर्गी को अण्डों पर बैठाने से पहले अच्छा भोजन एवं जल देना चाहिए।

प्रश्न 9.
मुर्गीपालन के चार महत्व लिखिए।
उत्तर
महत्व-

  • इससे हमें मांस तथा अण्डे प्राप्त होते हैं।
  • इस व्यवसाय से कम समय में ही आय होने लगती है।
  • इस व्यवसाय में कम पूँजी लगती है इस कारण यह बेरोजगारी की समस्या का समाधान करता है।

प्रश्न 10.
अण्डे देने वाली कुक्कुट नस्लों की विशेषताएँ बताइए तथा दो उदाहरण दीजिए।
उत्तर
अण्डे देने वाली कुक्कुट नस्लों में निम्नलिखित विशेषताएँ पायी जाती हैं-

  • अण्डे देने वाली कुक्कुटों की त्वचा कोमल होती है और प्यूबिक अस्थि तथा कील के बीच 3-4 उँगलियों का स्थान होता है।
  • अण्डे देने वाले कुक्कुटों का शरीर बड़ा तथा भारी भरकम होता है ।
  • जो कुक्कुट नर के समान दिखाई देते हैं वे अधिक अण्डे नहीं देते ।
  • अण्डे देने वाले कुक्कुटों का निकास (vent) कोमल तथा भीगा हुआ होता है।
  • अण्डे देने वाले कुक्कुटों की कलगी पूर्ण विकसित, उष्ण, गहरे लाल रंग की व मुलायम होती है।

अण्डे देने वाली मुर्गियों के उदाहरण-

  • लेगहार्न
  • मिनोरका
  • एनकोना
  • कैम्पियन

प्रश्न 11.
मांस प्रदान करने वाली कुक्कुट नस्लों की विशेषताएँ बताइए तथा चार उदाहरण दीजिए।
उत्तर
मांस प्रदान करने वाली कुक्कुटों के निम्नलिखित लक्षण होते हैं

  • आकार में बड़ी होती हैं
  • ये आहार अधिक मात्रा में ग्रहण करती हैं।
  • इनके पंख ढीले होते हैं, जिससे ये गोलाकार दिखाई देती हैं।
  • इनकी वृद्धि दर धीमी होती है।
    उदाहरण-असील, ससैक्स, आस्ट्रोलोप्स, कड़कनाथ।

प्रश्न 12.
मीठे जल एवं खारे जल में पाई जाने वाली तीन-तीन मछलियों के नाम लिखिए।
अथवा
निम्नलिखित के वैज्ञानिक नाम लिखकर उनका उपयोग लिखिए।
1. रोहू
2. कतला
3. सिंधारा
4. मृगल।
उत्तर
(a) मीठे जल में पाई जाने वाली मछलियाँ

1. रोहू-लेबियो रोहिता (Labeo rohita)
उपयोग-रोहू के मस्तिष्क में फॉस्फो-प्रोटीन की पर्याप्त मात्रा रहने के कारण इसके सेवन से आँख की रोशनी बढ़ती है।

2. कतला-कतला कतला (Catla catla)
उपयोग-कंतला के मस्तिष्क में फॉस्फो-प्रोटीन की पर्याप्त मात्रा रहने के कारण इसके सेवन से आँख की रोशनी बढ़ती है।

3. सिंधारा-मिस्ट्रिस सिन्धाला (Mystrus seenghala)
उपयोग-सिंघारा मछली में लोहे व ताँबे की काफी मात्रा रहने के कारण रक्त संबंधी विकार में महत्वपूर्ण भूमिका अदा करता है।

4. मृगल-सिरेहीनस मृगल (Cirrhinus mrigala)।
उपयोग-मृगल मछली में लोहे व ताँबे की काफी मात्रा रहने के कारण रक्त संबंधी विकार में महत्वपूर्ण भूमिका अदा करता है।

(b) खारे जल में पाई जाने वाली मछलियाँ

  • हिल्सा-इलिसा जाति (Ilisa species)
  • पामहर्ट-स्ट्रोमेटस (Stromatus)
  • बाम्बेडक-हार्पोडान (Harpodon)

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प्रश्न 13.
मछली का मांस अन्य जन्तुओं के मांस की तुलना में सर्वोत्तम क्यों होता है ?
उत्तर

  • मछली का मांस सर्वोत्तम माना जाता है, क्योंकि इसमें प्रोटीन की पर्याप्त मात्रा पायी जाती है।
  • इसमें आयोडीन पाया जाता है जो ग्वायटर रोग से बचाव करता है ।
  • इसमें वसा की मात्रा कम होती है, जिससे हृदय संबंधी बीमारी नहीं होती।
  • इसमें वसा में विलेय विटामिन A एवं D की पर्याप्त मात्रा पायी जाती है।
  • इसे आसानी से पचाया जा सकता है। इस कारण यह बच्चों का अच्छा भोजन है।

प्रश्न 14.
गाय एवं भैंस की उन्नत किस्मों के नाम लिखिए।गाय की तुलना में भैंस का दूध सर्वोत्तम क्यों है ?
उत्तर
(a) गाय की उन्नत किस्म-

  • होल्सटीन फ्रीसियन
  • जर्सी
  • आयर शायर
  • ब्रॉउन स्विस।

(b) भैंस की उन्नत किस्म-

  • मुर्रा
  • सूरती
  • भदावरी
  • नागपुरी।

गाय की तुलना में भैंस का दूध सर्वोत्तम है, क्योंकि

  • गाय की तुलना में भैंस के दूध की मात्रा तिगुनी होती है।
  • भैंस के दूध में वसा की मात्रा अधिक होती है।
  • भैंस का दूध गाय की तुलना में अधिक रोग प्रतिरोधी होता है।

प्रश्न 15.
भेड़ एवं बकरी का महत्वपूर्ण उपयोग क्या होता है ? प्रत्येक के तीन-तीन भारतीय प्रजातियों के नाम लिखिए।
उत्तर
भेड़ का जन्तु वैज्ञानिक नाम क्विस एरीस (Quis aries) है। इसे ऊन, मांस एवं चमड़े के लिए पाला जाता है। भेड़ की महत्वपूर्ण तीन प्रजातियाँ निम्नलिखित हैं

  • लोही-उच्च श्रेणी का ऊन प्राप्त होता है।
  • भाकरावल
  • पटनावड़ी।

बकरी का जन्तु वैज्ञानिक नाम काप्राहिरकस (Caprahircus) है। इसका पालन दूध एवं मांस दोनों के लिए किया जाता है। बकरी की महत्वपूर्ण तीन प्रजातियाँ निम्नलिखित हैं

  • कश्मीरी बकरी
  • कच्छी
  • सिरोही।

प्रश्न 16.
उत्तम किस्म की पाँच मुर्गी प्रजातियों के नाम लिखिए।
उत्तर

  • रोड आइसलैण्ड रेड (Rhode Island Red)
  • न्यू हैम्पशायर (New Hampshires)
  • लाइट ससैक्स (Light Sussex)
  • आस्ट्रेलोप्स (Australops)
  • व्हाइट लैगहान (White Laghorn)

प्रश्न 17.
मुर्गियों में होने वाले पाँच संक्रामक रोगों के नाम लिखिए।
उत्तर
MP Board Class 12th Biology Solutions Chapter 9 खाद्य उत्पादन में वृद्धि की कार्यनीति 1

प्रश्न 18.
एकल कोशिका संवर्धन क्या है ? इसकी पेपर राफ्ट तकनीक तथा उसके महत्व लिखिए।
उत्तर
नियंत्रित वातावरण में अजीकृत, पृथक्कृत एक कोशिका को उचित पोषण माध्यम पर परिवर्धित कराये जाने की प्रक्रिया एकल कोशिका संवर्धन
(Single Cell Culture) कहलाती है।
(1) सर्वप्रथम माइक्रोपिपेट या माइक्रोस्पेचुला की सहायता से अजीकृत पौधे के भाग से अलग किये, एकल कोशिका को लिया जाता है या सस्पेंशन कल्चर से एक कोशिका को पृथक्कृत किया जाता है।

(2) पोषण माध्यम पर एक पुराने कैलस को रखा जाता है, जिसके ऊपर 8 mm x 8 mm साइज के फिल्टर पेपर को कुछ दिनों तक रखकर नम तथा पोषक पदार्थ-युक्त बना लेते हैं, जिसे पेपर राफ्ट कहा जाता है।

(3) अलग किये गये एकल कोशिका को अजीकृत अवस्था में पेपर राफ्ट पर स्थानान्तरित कर दिया जाता है।

(4) समस्त पोषण माध्यम युक्त कोशिका, अर्थात् संवर्धन को 16 घण्टे तक 25°C अंधकार में या श्वेत प्रकाश (3,000 लक्स) में ऊष्मायित (Incubate) कराया जाता है।

(5) पृथक्कृत कोशिका (Isolated cell) क्रमिक विभाजन के फलस्वरूप कोशिका समूह में परिणित हो जाता है, जिसे नये पोषक माध्यम पर स्थानान्तरित कर दिया जाता है, जहाँ इससे कैलस विकसित होता है।

(6) कैलस से सामान्य ऊतक संवर्धन विधि से नये पौधे का तथा अन्ततः विकसित पौधे का परिवर्धन होता
इसकी दूसरी विधि कोशिका सस्पेंशन तकनीक के बारे में भी इसे शोध के आधार पर जानकारी प्राप्त हुई, इससे हर पौधे के छोटे हिस्से से भी एक पूर्ण विकसित पौधे प्राप्त कर सकते हैं।

खाद्य उत्पादन में वृद्धि की कार्यनीति दीर्घ उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 1.
कुक्कुटों के रानीखेत रोग के लक्षण, रोकथाम व उपचार लिखिए।
उत्तर
रानीखेत रोग वाइरस से होता है। इसके निम्न लक्षण हैं

  • श्वास लेने में तकलीफ होती है, इसलिये मुर्गियों का मुँह खुला होता है।
  • मुर्गियों को दस्त लग जाते हैं।
  • सिर, गर्दन तथा टाँगों को लकवा मार जाता है।
  • मुर्गी को भूख नहीं लगती एवं कमजोर हो जाती है।
  • पहले उनका तापक्रम बढ़ता है एवं कुछ समय पश्चात् सामान्य से भी कम हो जाता है।
  • मुँह एवं नासिका रन्ध्रों में से एक लसलसा पदार्थ निकलता है।
  • मुर्गकेश का रंग गहरा बैंगनी हो जाता है।
  • अण्डा देने वाली मुर्गियों में अण्डा तेजी से फटने लगता है एवं रोगी मुर्गी अण्डा देना बिल्कुल बन्द : कर देती है।इस रोग के लक्षण पाचन संस्थान, श्वसन-संस्थान एवं रक्त परिवहन संस्थान पर स्पष्ट दिखायी देने लगते हैं।

रोकथाम एवं उपचार (Control and treatment)

  • रोगी मुर्गियों को तुरंत ही स्वस्थ मुर्गियों से अलग बाड़े में रखना चाहिए।
  • रोग से मरी हुई मुर्गियों को गाड़ देना चाहिए अथवा जला देना चाहिए।
  • पानी में कीटाणुनाशक घोल तैयार करना चाहिए।
  • बीमार मुर्गियों के बर्तन फिनाइल से साफ करके रखना चाहिए।
  • 6 से 8 सप्ताह के बच्चों को रानीखेत का टीका लगवाना चाहिए।
  • रोग से मरी मुर्गी की तिल्ली को थर्मस में (बर्फ के साथ ग्लिसरीन एवं नमक 111 के घोल में) सुरक्षित रखकर प्रयोगशाला में परीक्षण के लिए भेजना चाहिए।

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प्रश्न 2.
कृत्रिम गर्भाधान क्या है ? उसका महत्व समझाइए।
उत्तर
संकरण या बहि:प्रजनन दो भिन्न आनुवंशिक गुणों वाले जीवों को जनन की दृष्टि से संयोग कराके नयी संतानों को प्राप्त करने के ढंग को संकरण कहते हैं। जन्तुओं में संकरण कराना पादपों की अपेक्षा थोड़ा कठिन होता है। जन्तुओं के गुणों में सुधार के लिए दो प्रकार का संकरण होता है

1. प्राकृतिक संकरण (Natural hybridization)-इस संकरण में नर तथा मादा प्राकृतिक रूप से आपस में संयोग करते हैं । यह दो भिन्न प्रजातियों में होता है। भारत में दुग्ध उत्पादन बढ़ाने के लिए गाय की कई प्रजातियाँ जैसे-जर्सी (इंग्लैण्ड), ब्राउनस्विस (स्विटजरलैण्ड), होल्स्टीन प्रिंसियन (हॉलैण्ड) विदेशों से मँगायी गयी हैं। इन प्रजातियों तथा देशी प्रजातियों के संकरण से करनस्विस और सुनन्दिनी नामक गाय की प्रजातियाँ क्रमशः राष्ट्रीय दुग्ध अनुसंधान संस्थान करनाल और केरल में विकसित की गयी है। कई दूसरे जन्तुओं की भी अति उत्पादक जातियाँ प्राकृतिक संकरण के द्वारा तैयार की गयी हैं।

2. कृत्रिम संकरण या कृत्रिम गर्भाधान (Artificial hybridization)-कृत्रिम संकरण, संकरण की वह विधि है जिसमें नर के शुक्राणुओं को एकत्र करके मादा के जनन मार्ग में पहुँचा दिया जाता है जो निषेचन करके नयी सन्तति को बनाता है। इस संकरण में निम्न चरण होते हैं

(1) जनकों का चुनाव (Selection of parents)-यह संकरण का पहला चरण है जिसमें इच्छित गुणों वाले नर तथा मादा का चुनाव किया जाता है। इसके लिए स्वस्थ तथा उच्च गुणों वाले जनकों का चुनाव किया जाता है।

(2) वीर्य को एकत्र करना (Collection of semen)-इस चरण में यान्त्रिक या विद्युतीय आवेश द्वारा नर को उत्तेजित किया जाता है और स्खलित होने वाले वीर्य को एकत्र कर लिया जाता है।

(3) वीर्य का संरक्षण (Preservation of semen)-वीर्य को तनु बनाकर फ्रिजों में या विशिष्ट रसायनों के द्वारा परिरक्षित करके जीवित अवस्था में ही रखा जाता है।

(4) वीर्य का जनन मार्ग में प्रवेश (Introduction of semen)-इस चरण में अनुरक्षित वीर्य को मादा पशु के गर्म होने पर उसके योनि मार्ग में डाला जाता है। इस तकनीक का सर्वप्रथम प्रयोग स्प्लैन्जेनी(Spallanzani) ने 1970 में कुत्तों के ऊपर किया। भारत में इसका सर्वप्रथम उपयोग सन् 1944 में पशु अनुसंधान संस्थान एटा नगर, उत्तर प्रदेश में किया गया। आज की लगभग 10%-70% उपयोगी जन्तु प्रजातियों का आविष्कार इसी विधि के द्वारा किया गया है। इस संकरण के समय निम्न सावधानियों को ध्यान में रखना चाहिए

  • वीर्य का मादा में प्रवेश उपर्युक्त समय पर करवाना चाहिए।
  • उच्च कोटि के नर के वीर्य को ही लेना चाहिए।
  • वीर्य प्रवेश के लिए सही तकनीक का प्रयोग करना चाहिए।
  • मादा का स्वास्थ्य वीर्गीकरण के समय ठीक होना चाहिए। कृत्रिम संकरण के लाभ

(महत्व)-

  • स्वस्थ नर के थोड़े से वीर्यन से बहुत अधिक मादाओं में निषेचन कराया जा सकता है।
  • वीर्यन को एम्पुलों में दूर तक बिना किसी असुविधा के ले जाया जाता है।
  • नर की उपलब्धता की कठिनाइयाँ दूर हो जाती हैं और हर जगह अच्छे नर के वीर्य का प्रयोग किया जा सकता है।
  • इच्छित गुणों वाले पशुओं को प्राप्त किया जा सकता है।

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प्रश्न 3.
एक्वाकल्चर किसे कहते हैं ? एक्वाकल्चर में उपयोग की जाने वाली प्रक्रियाओं का वर्णन कीजिए।
उत्तर
उपयोगी जलीय पौधे एवं अन्य प्राणियों के उत्पादन को एक्वाकल्चर कहते हैं। एक्वाकल्चर में मछलियों के अतिरिक्त झींगा एवं समुद्री केकड़ा का भी उत्पादन किया जाता है। एक्वाकल्चर के विभिन्न चरण
(Steps Involved in Aquaculture)

  • मत्स्य पालन केन्द्रों से मत्स्य बीज एवं अण्डों को प्राप्त किया जाता है। मछलियों के पीयूष ग्रन्थि से हॉर्मोन्स निकालकर अण्डे देने वाली मछलियों में इन्जेक्शन द्वारा प्रविष्ट कराने से अण्डोत्सर्ग शीघ्र होता है। पीयूष हॉर्मोन को ऐल्कोहॉल में संरक्षित किया जाता है।
  • अण्डों को हेचरी या नर्सरी में डाल दिया जाता है। इसका तापक्रम 27°C से 31°C होता है। 15-18 घण्टे पश्चात् शिशु निकलते हैं, जिसे हैचलिंग कहते हैं।
  • है चलिंग को पानी में रखा जाता है जिससे 4-5 दिनों के बाद यह छोटी मछली में रूपान्तरित हो जाता है, जिसे फ्राई (Fry) कहते हैं।
  • फ्राई 12-14 दिनों में 20-25 cm की हो जाती है इसे फिंगरलिंग कहते हैं।
  • फिंगरलिंग को पोषक तालाबों में स्थानान्तरित किया जाता है। यह फाइटोप्लैंक्टॉन को खाता है।
  • अन्त में इसे उत्पादक तालाबों या जलाशयों में स्थानान्तरित किया जाता है, जहाँ पर इनका वजन बढ़ता है।
  • पूर्ण विकसित मछली का वजन 5-6 किलोग्राम हो जाता है एवं 4 वर्ष के पश्चात् अण्डे देने लगती है।
  • मत्स्याखेट द्वारा इन्हें निकालकर निर्यात किया जाता है। इसका शीत भण्डारण किया जाता है, क्योंकि इसका मांस शीघ्र सड़ जाता है।

प्रश्न 4.
मुर्गीपालन के लिए आप आदर्श आवास का प्रबंध कैसे करेंगे?
उत्तर
मुर्गीपालन व्यवसाय में कुक्कुट भवनों (आवासों) का अपना अलग-अलग महत्व होता है। कुक्कुट भवन आधुनिक एवं महत्वपूर्ण आवश्यकताओं की पूर्ति करने वाले होने चाहिए। अच्छे भवन, वही समझे जाते हैं, जिनमें निम्न महत्वपूर्ण बातें हों, जैसे-

  1. सुरक्षा
  2. पर्याप्त स्थान
  3. उचित सुविधा
  4. सस्ते एवं आरामदायक
  5. स्वच्छ
  6. पानी एवं रोशनी का प्रबन्ध
  7. बाजार की निकटता तथा
  8. परजीवी व अन्य कीड़ों से सुरक्षा।

आवासों (भवनों) को बनाते समय इस बात का ध्यान रखें कि ये कम लागत में तैयार किये जायें और जिनमें निम्नलिखित बातों का होना भी अनिवार्य है-

  1. आवासों में नमी न रहे तथा इनसे पानी निकास की उत्तम व्यवस्था हो
  2. आवास ऐसे स्थानों पर हो जहाँ सूर्य की रोशनी दिन भर पड़ती रहे क्योंकि वह सूक्ष्म जीवों के विकास को रोकती है।
  3. वायु संचार की पर्याप्त व्यवस्था हो, क्योंकि मुर्गियों में पसीने की ग्रन्थियाँ नहीं पायी जाती इस कारण ये श्वास द्वारा ही नमी को निकालती हैं।
  4. आवास के सफाई की पर्याप्त व्यवस्था होनी चाहिए।
  5. मुर्गी एक कमजोर पक्षी है, जिसके बहुत अधिक शत्रु हैं इस कारण इसकी सुरक्षा व्यवस्था अच्छी होनी चाहिए।

प्रश्न 5.
छत्तीसगढ़ के ग्रामीण क्षेत्रों में जलीय संवर्धन के माध्यम से उन्नति के अवसर हैं। विवेचना कीजिए।
उत्तर
छत्तीसगढ़ में जल संवर्धन हेतु ग्रामीण क्षेत्रों में तालाबों, डबरों के निर्माण की परम्परा रही है तथा आज भी समस्त ग्रामों एवं इसके विकसित शहरों में चप्पे-चप्पे पर तालाब देखे जा सकते हैं । विकास के आयामों में नहर, बाँध तथा अन्य जल संग्रहण क्षेत्र विकसित हुए हैं। इन सभी जल संग्रहण क्षेत्रों को वैज्ञानिक तकनीक से प्रबंधित किए जल संवर्धन क्षेत्र में उपयोग किया जाये तो ये उन्नति के द्वार खोलने वाले हैं तथा इसमें छत्तीसगढ़ के विकास के अवसर सन्निहित हैं।

उपयोगी जलीय जीवों को उत्पादित करने की विधि को जलीय संवर्धन कहते हैं । जलीय संवर्धन में कई उपयोगी शैवालों के अलावा जलीय जन्तुओं जैसे—मछली, झींगा, केकड़ा, मोलस्का (खाने वाले और मोती वाले) इत्यादि को पालते या संवर्धित करते हैं । वैसे तो कई जलीय जन्तुओं का संवर्धन किया जाता है, लेकिन इनमें से मत्स्य संवर्धन (Pisciculture), प्रॉन संवर्धन (Prawn culture) तथा मोती संवर्धन (Pearl culture) प्रमुख हैं । मत्स्य संवर्धन में मछलियों का, प्रॉन संवर्धन में झींगों को भोजन के लिए तथा मोती संवर्धन में मुक्ता सीपियों (Pearl oyster) को मोतियों के लिए संवर्धित किया जाता है।

प्रश्न 6.
पादपों में रोग प्रतिरोधकता से आप क्या समझते हैं ? पादपों की कुछ प्रमुख रोग प्रतिरोधी प्रजातियों के नाम बताइये। इसे किस प्रकार उत्पन्न किया जाता है ?
उत्तर
अनेक प्रकार के रोगकारक जैसे-कवक, जीवाणु तथा विषाणु उष्णकटिबन्धीय जलवायु की फसल जातियों को व्यापक रूप से प्रभावित करते हैं । इन कारकों के कारण फसलों को 20-30% तक हानि या कभी-कभी पूर्ण हानि भी हो जाती है। ऐसी परिस्थितियों में रोग के प्रति प्रतिरोधी खेतिहर जातियों में प्रजनन एवं विकास से खाद्य उत्पादन को बढ़ाया जा सकता है। इन्हें उगाने से जीवाणु एवं कवकनाशी पदार्थों का प्रयोग भी कम हो जाता है तथा उन पर निर्भरता भी कम हो जाती है। पोषी पदार्थों की प्रतिरोधकता उसकी रोगजनकों को रोग उत्पन्न करने से रोकने की क्षमता है तथा इसका निर्धारण पोषी पादप के आनुवंशिक ढाँचे द्वारा किया जाता है। प्रजनन की क्रिया अपनाने से पहले रोगकारक जीव के बारे में जानकारी तथा उसके प्रसार की क्रियाविधि की जानकारी महत्वपूर्ण है।

कवकों द्वारा उत्पन्न कुछ रोग हैं-गेहूँ का भूरा किट्ट, गन्ने का रेड रोट रोग तथा आलू में पछेती अंगमारी। विषाणु तथा जीवाणु द्वारा उत्पन्न होने वाले रोग हैं-तम्बाकू मोजैक, शलजम मोजैक, टमाटर का पर्ण बेलन, तथा जीवाणु द्वारा उत्पन्न रोग सिट्रस कैंकर, चावल का किट्ट ।

रोग प्रतिरोधकता के लिए प्रजनन विधियाँ (Methods of Breeding for Disease Resistance)
रोग प्रतिरोधकता उत्पन्न करने की परम्परागत विधियाँ निम्न हैं

  • संकर (Hybridization)
  • चयन (Selection)

इसके अन्तर्गत निम्न पदों को अपनाते हैं

  • प्रतिरोधकता स्रोतों के जनन द्रव्य को छानना।
  • चयनित जनकों का संकरण।
  • संकरों का चयन।
  • मूल्यांकन।
  • नयी किस्मों का परीक्षण तथा उसका उत्पादन।

संकरण तथा चयन द्वारा प्रजनित कुछ शस्य कवकों, जीवाणुओं तथा विषाणुओं के प्रति रोग प्रतिरोधकता होती है। ये शस्य प्रजाति नीचे तालिका में दी गई हैं
तालिका-प्रमुख फसलों की रोग प्रतिरोधक प्रजातियाँ
MP Board Class 12th Biology Solutions Chapter 9 खाद्य उत्पादन में वृद्धि की कार्यनीति 2
रोग प्रतिरोधी जीन जो विभिन्न फसलों की प्रजातियों अथवा उनकी जंग प्रजातियों में उपलब्ध रहती है। लेकिन इनकी सीमित संख्या में उपलब्धि के कारण पारम्परिक प्रजनन प्रायः निरुद्ध होता है। पादपों में विभिन्न प्रक्रियाओं द्वारा उत्परिवर्तन (Mutation) को प्रेरित किया जाता है तथा बाद में प्रतिरोधकता के लिए पादप पदार्थों की स्क्रीनिंग द्वारा वांछनीय जीन की पहचान की जाती है। वांछनीय लक्षण वाले पौधों को सीधे ही गुणित किया जाता है अतः इसका प्रयोग प्रजनन के लिए किया जाता है।

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प्रश्न 7.
पीड़कों (नाशी कीट) के प्रति प्रतिरोधकता के विकास के लिए पादप प्रजनन किस प्रकार सहायक है ? व्याख्या कीजिये।
उत्तर
पीड़कों के प्रति प्रतिरोधकता के विकास के लिए पादप प्रजनन (Plant breeding for the development of resistance to insect pests)
पोषी पादप फसलों से कीट प्रतिरोधकता, आकारिकी जैव रसायन या शरीर क्रियात्मक अभिलक्षणों के कारण होती है। अधिकांश पादपों में रोमिल पत्तियाँ पीड़कों के प्रति प्रतिरोधकता से सम्बन्ध रखती है। जैसे कपास में जैसिड तथा गेहूँ में धान्य पर्ण शृंग। इसी प्रकार गेहूँ के विशेष प्रकार के तने के कारण

स्टेमसॉफ्लाई उनके पास नहीं आती तथा चिकनी पत्तियों वाली तथा मकरंद विहीन कपास की प्रजातियाँ बालवर्म को अपनी ओर आकर्षित नहीं करती। उच्च एस्पार्टिक अम्ल, कम नाइट्रोजन तथा शर्करा अंश मक्का में तना छेदक के प्रति प्रतिरोधकता उत्पन्न करते हैं। पीड़क प्रतिरोधकता के लिए प्रजनन विधियों के वही क्रम लागू होते हैं, जो अन्य शस्य संबंधी विशेषकों में पाये जाते हैं । जैसे उत्पादन, गुणवत्ता आदि जिनका वर्णन ऊपर किया जा चुका है। कृषि तथा इसकी जंगली प्रजातियों के प्रतिरोधक जीन का स्रोत कृषक किस्में तथा जनन द्रव्य संग्रहण है।

नाशी कीटों के प्रति प्रतिरोधकता विकसित करने के लिए संकरण तथा चयन द्वारा प्रजनित फसलों की कुछ विमुक्त प्रजातियाँ इस प्रकार हैं
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