MP Board Class 7th Hindi Bhasha Bharti Solutions Chapter 7 नीति के दोहे

MP Board Class 7th Hindi Bhasha Bharti Solutions Chapter 7 नीति के दोहे

MP Board Class 7th Hindi Bhasha Bharti Chapter 7 पाठ का अभ्यास

नीति के दोहे बोध प्रश्न

Niti Ke Dohe Class 7th MP Board प्रश्न 1.
निम्नांकित प्रश्नों के उत्तर लिखिए
(क) कवि के अनुसार अति कहाँ-कहाँ वर्जित है ?
उत्तर
कवि के अनुसार अति हर जगह वर्जित है।

(ख) कबीर के अनुसार निन्दक को निकट रखने से क्या लाभ हैं?
उत्तर
कबीर के अनुसार निन्दक को पास रखने से हमारे सभी दोष दूर हो जाते हैं।

(ग) ‘एकै साधे सब सधे से क्या तात्पर्य है ?
उत्तर
‘एकै साधे सब सधे’ से तात्पर्य है कि किसी एक की मानने से सभी मन जाते हैं अर्थात् किसी आधार को साधकर रखने से सभी आधार स्वयं ही सध जाते हैं।

(घ) कवि तुलसीदास ने ‘काया’ और ‘मन’ की तुलना किससे की है?
उत्तर
कवि तुलसीदास ने ‘काया’ की तुलना खेत से और ‘मन’ की तुलना किसान से की है ?

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(ङ) ‘संत हंस गुन गहहि पय’ से कवि का क्या आशय
उत्तर
उपर्युक्त सुक्ति में कवि यह बताना चाहता है कि संत उस हंस के समान है जो जल (दोष) को छोड़कर दूध (गुण) को ग्रहण कर लेता है।

(च) कवि वृन्द ने सज्जन पुरुष के स्वभाव की क्या विशेषता बताई है ?
उत्तर
कवि वृन्द के अनुसार सज्जन पुरुष कभी भी, किन्हीं भी परिस्थितियों में अपनी सज्जनता का त्याग नहीं करते

(छ) भरपूर वर्षा कब होती है?
उत्तर
जब कलसे (कलश) का पानी गर्म हो, चिड़िया धूल में नहाए तथा चींटी अण्डा लेकर चले तो भरपूर वर्षा होने की सम्भावना होती है।

(ज) चने की अच्छी खेती किस प्रकार की मिट्टी में होती है ?
उत्तर
चने की अच्छी खेती ढेलेदार मिट्टी में होती है।

Niti Ke Dohe In Hindi Class 7 MP Board प्रश्न 2.
नीचे लिखे चार-चार विकल्पों में से सही विकल्प को छाँटकर रिक्त स्थान की पूर्ति कीजिए
(क) कवि के अनुसार कुल्हाड़ी को ……. सुगन्धित करता है।
(1) फूल
(2) चन्दन
(3) हवा
(4) भौरा।
उत्तर
(2) चन्दन

(ख) रहिमन ……. कब कहै, लाख टका मेरो मोल।
(1) चाँदी
(2) लोहा
(3) सोना
(4) हीरा।
उत्तर
(4) हीरा।

(ग) तुलसीदास ने सन्त को….. के समान कहा है।
(1) कौआ
(2) हंस
(3) बगुला
(4) कोयल।
उत्तर
(2) हंस

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(घ) कवि के अनुसार …….. बिना साबुन के स्वभाव को साफ करता है।
(1) रिश्तेदार
(2) पड़ोसी
(3) मित्र
(4) निंदक।
उत्तर
(4) निंदक

(ङ) घाघ और भड्डरी की कहावतों के अनुसार धूल में ………. नहाती है।
(1) चिड़िया
(2) मोरनी
(3) कोयल
(4) मुर्गी।
उत्तर
(1) चिड़िया

(च) गेहूँ की अच्छी खेती ……… होती है।
(1) पीली मिट्टी में
(2) काली मिट्टी में
(3) ढेले वाली मिट्टी में
(4) मैदे के समान बारीक मिट्टी में।
उत्तर
(4) मैदे के समान बारीक मिट्टी में।

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Niti Ke Dohe Class 7 MP Board प्रश्न 3.
निम्नांकित पंक्तियों का भाव स्पष्ट कीजिए
(क) करता था सो क्यों किया, अब करि क्यों पछताय।
बोया पेड़ बबूल का, अम्ब कहाँ से खाय॥

(ख) करत-करत अभ्यास के, जड़मति होत सुजान।
रसरी आवत-जात तें, सिल पर परत निसान।
उत्तर
‘परीक्षोपयोगी पद्यांशों की व्याख्या’ नामक शीर्षक देखें।

भाषा भारती कक्षा 7 पाठ 7 MP Board प्रश्न 4.
निम्नांकित भावों के लिए दोहों में से उचित पंक्ति छाँटकर लिखिए
(क) महान पुरुष अपनी प्रशंसा स्वयं नहीं करते।
उत्तर
बड़े बड़ाई ना करें, बड़े न बोलें बोल॥

(ख) अधिक बोलना व अधिक चुप रहना अच्छा नहीं होता।
उत्तर
अति का भला न बोलना अति की भली न चूप॥

भाषा अध्ययन

नीति के दोहे Class 7 MP Board प्रश्न 1.
निम्नलिखित शब्दों के तत्सम रूप लिखिए
पछताय, सुभाय, चूप, काज, पोहिये, मोल, आस, नास, पौन, रसरी, निसान, सजनता, बरखा, घर, खेत।
उत्तर
शब्द
Niti Ke Dohe Class 7th MP Board

नीति के दोहे प्रश्न उत्तर MP Board प्रश्न 2.
निम्नलिखित के दो-दो पर्यायवाची शब्द लखिए
पेड़, पवन, पानी, सरोवर, फूल, नदी, पक्षी।
उत्तर
Niti Ke Dohe In Hindi Class 7 MP Board

Mp Board Class 7th Hindi Chapter 7 प्रश्न 3.
निम्नलिखित शब्दों के सामने दिए गए उनके अर्थ मिलाइए
Niti Ke Dohe Class 7 MP Board
उत्तर
(1)→ (घ), (2)→ (ङ), (3)→ (क), (4)→ (ख), (5)→ (ग)

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नीति के दोहे कबीर

1. यह ऐसा संसार है, जैसा सेमल फूल।
दिन दस के ब्यौहार को, झूठे रंगि न भूल॥

शब्दार्थ-व्यौहार = व्यवहार; रंगि = रंग।

सन्दर्भ-प्रस्तुत दोहा हमारी पाठ्य-पुस्तक ‘भाषा-भारती’ के ‘नीति के दोहे’ नामक पाठ से लिया गया है। इसके रचयिता कबीर हैं।

प्रसंग-प्रस्तुत दोहे में कबीर ने मनुष्य को नाशवान संसार से सावधान किया है।

व्याख्या-कबीर मनुष्य को समझाते हुए कहते हैं कि यह संसार सेमल के फूल के समान क्षणिक है। जिस प्रकार सेमल का फूल देखने में तो सुन्दर लगता है, किन्तु सारहीन होता है, शीघ्र ही नष्ट हो जाता है; उसी प्रकार यह संसार सुहावना लगता है, किन्तु उसका यह आकर्षक रूप क्षणिक है। इसलिए मनुष्य को संसार के थोड़े दिन के इस चमत्कार की चकाचौंध के भ्रम से बचना चाहिए।

2. करता था सो क्यों किया, अब करि क्यों पछताय।
बोया पेड़ बबूल का, अम्ब कहाँ से खाय।।

शब्दार्थ-पछताय- पछताना; अम्ब-आम। सन्दर्भ-पूर्व की तरह।

प्रसंग-प्रस्तुत दोहे में कबीर ने करने से पूर्व सोचने के लिए कहा है।

व्याख्या-कबीर कहते हैं कि मनुष्य को किसी के प्रति कोई भी काम करने से पहले अच्छी तरह विचार कर लेना चाहिए। गलत काम करने पर प्राप्त परिणाम को देखकर बाद में पछताना मूर्खता है। वे कहते हैं कि यदि तुम कड़वा बबूल बोओगे तो बदले में कड़वा फल ही पैदा होगा। आम की कल्पना अथवा उम्मीद भी करना बेमानी है। अर्थात् प्रत्येक मनुष्य अपनी करनी के अनुसार ही फल प्राप्त करता है।

3. निन्दक नियरे राखिए, आँगन कुटी छबाय।
बिन पानी साबुन बिना, निर्मल करै सुभाय॥

शब्दार्थ-निन्दक- निन्दा करने वाला; नियरे = पास में; कुटी = कुटिया; निर्मल = साफ, स्वच्छ; सुभाय = स्वभाव।

वृन्द के दोहे Class 7 MP Board सन्दर्भ-पूर्व की तरह।

प्रसंग-प्रस्तुत दोहे में निन्दा करने वाले को मित्र बनाने की बात कही गई है।

व्याख्या-कबीर कहते हैं कि मनुष्य को सदैव अपनी निन्दा करने वाले का स्वागत करना चाहिए और उसे अपने पास रखना चाहिए। वास्तव में, निन्दा करने वाला व्यक्ति बिना पानी और साबुन के तुम्हारे व्यवहार में से तुम्हारे दोषों को दूर कर तुम्हारे स्वभाव को स्वच्छ और कोमल बना सकता है।

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4. अति का भला न बरसना, अति की भली न धूप।
अति का भला न बोलना, अति की भली न चूप।

शब्दार्थ-अति = अधिक; चूप = चुप।। सन्दर्भ-पूर्व की तरह।

प्रसंग-प्रस्तुत दोहे में कबीर ने किसी भी चीज की अति को गलत बताया है।

व्याख्या-कबीर कहते हैं कि मनुष्य को सामान्य एवं सन्तुलित व्यवहार करना चाहिए। जिस प्रकार पानी की आवश्यकता प्रत्येक जीवधारी को होती है, किन्तु आवश्यकता से अधिक अथवा अत्यधिक वर्षा से प्रलयकारी बाढ़ आ जाती है, जरूरत से ज्यादा धूप भी मनुष्य और पेड़-पौधों को झुलसाने लगती है, ज्यादा बोलना भी मूर्खता की निशानी माना जाता है तथा समय पर न बोलना अर्थात् अत्यधिक चुप्पी भी नुकसानदेह होती है। ठीक इसी प्रकार मनुष्य को किसी भी कार्य में ‘अति’ से बचना चाहिए।

नीति के दोहे रहीम

1. तरुवर फल नहीं खात हैं, सरवर पियहिन पान।
कहि रहीम परकाज हित, सम्पत्ति संचहि सुजान।॥

शब्दार्थ-तरुवर = वृक्ष; सरवर = तालाब; पान = जल; परकाज-दूसरों का कार्य संचहि- इकट्ठा करना।

सन्दर्भ-प्रस्तुत दोहा हमारी पाठ्य पुस्तक ‘भाषा-भारती’ के ‘नीति के दोहे’ नामक पाठ से लिया गया है। इसके रचयिता रहीम हैं।

प्रसंग-प्रस्तुत दोहे में रहीम ने सज्जन पुरुषों की तुलना । वृक्ष व तालाब से की है।

व्याख्या-रहीम कहते हैं कि असंख्य मीठे व सरस फलों से लदे वृक्ष अपने फल को स्वयं नहीं खाते हैं और न ही अथाह जल को स्वयं में समेटे तालाब अपना पानी स्वयं पीता है। वे सदैव औरों का ही भला करते हैं। ठीक उसी प्रकार, सज्जन लोग दूसरों के कार्यों को पूरा करने के लिए अर्थात् परोपकार हेतु धन एकत्रित करते हैं।

2. एकै साधे सब सधै, सब साधे सब जाय।
रहिमन मूलहिं सीचिबो फूले फलै अघाय॥

शब्दार्थ-मूलहिं – जड़ को; सींचिबो = सींचना।

Niti Ke Dohe Question Answer MP Board  सन्दर्भ-पूर्व की तरह।

प्रसंग-प्रस्तुत दोहे में रहीम ने ‘मूल’ की महत्ता पर प्रकाश डाला है।

व्याख्या-रहीम कहते हैं कि जिस प्रकार वृक्ष के मात्र एक स्थान-मूल (जड़) को सींचने से पूरा पेड़ फलता-फूलता है, ठीक उसी प्रकार मनुष्य को किसी एक मूल (आधार) को साधना चाहिए। एक मूल के साधने पर सब अपने आप ही सध जाते हैं अर्थात् सब कुछ प्राप्त हो जाता है। इसके विपरीत सबको साधने की हालत में सब कुछ चला जाता है अर्थात् कोई भी कार्य नहीं बनता।

3. बड़े बड़ाई ना करें, बड़े न बोलैं बोल।
रहिमन हीरा कब कहैं, लाख टका मेरो मोल॥

शब्दार्थ-बडाई प्रशंसा: टका-मद्रा। सन्दर्भ-पूर्व की तरह। ।

प्रसंग-प्रस्तुत दोहे में रहीम ने मनुष्य को बड़बोलेपन से बचने की सलाह दी है।

व्याख्या-रहीम कहते हैं कि जिस प्रकार हीरा अमूल्य रल होते हुए भी अपने मूल्य का आकलन स्वयं नहीं करता, बल्कि सामान्य पत्थरों की भाँति पड़ा रहता है, ठीक उसी प्रकार महान् व्यक्ति भी कभी भी ऊँचे बोल नहीं बोलता और न ही स्वयं ही अपनी प्रशंसा में ऊँची-ऊँची बातें बनाता है।

नीति के दोहे तुलसीदास

1. तुलसी काया खेत है, मनसा भयो किसान।
पाप, पुण्य दोऊ बीज हैं, बुवै सो लुनै निदान॥

शब्दार्थ-काया = शरीर; दोऊ = दोनों।

सन्दर्थ-प्रस्तुत दोहा हमारी पाठ्य-पुस्तक ‘भाषा भारती’ के ‘नीति के दोहे’ नामक पाठ से लिया गया है। इसके रचयिता तुलसीदास हैं।

प्रसंग-प्रस्तुत दोहे में तुलसीदास ने ‘जैसा बोओगे वैसा काटोंगे’ कहावत पर बल दिया है।

व्याख्या-तुलसीदास जी कहते हैं कि मानव का शरीर किसान की उपजाऊ भूमि अर्थात् खेत के समान है तथा उसका मन स्वयं एक मेहनतकश किसान है। पाप और पुण्य दो बीज है जिन्हें अपने विवेक के अनुसार किसान को अपने खेत में बोना । है। यदि वह पाप का बीज बोयेगा तो प्राप्त होने वाली फसल
अनिष्टकारी होगी किन्तु यदि वह पुण्य के बीज अपने खेत में बोयेगा तो कड़े परिश्रम से प्राप्त फसल अत्यन्त शुभकारी होगी। अब यह मनुष्य के स्वयं के हाथ में है कि वह कैसा फल प्राप्त करना चाहता है।

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2. मिथ्या माहुर सज्जनहि, खलहि गरल सम साँच।
तुलसी छुअत पराइ ज्यों, पारद पावक आँच॥

शब्दार्थ-मिथ्या = असत्य; माहुर = विष, गरल = विष; पारद = पारा।

Neeti Ke Dohe Class 7 MP Board सन्दर्भ-पूर्व की तरह।

प्रसंग-प्रस्तुत दोहे में तुलसीदास जी ने सज्जन और दर्जन ‘ के स्वभाव का वर्णन किया है।

व्याख्या-तुलसीदास जी कहते हैं कि सज्जन लोगों के लिए असत्य विष के समान है, जबकि दुर्जन व्यक्ति के लिए । सत्य विष के समान कष्टदायक है। ये दोनों इनके स्पर्श मात्र से ठीक वैसे ही दूर हो जाते हैं जिस प्रकार आग की ऊष्मा पाकर | पारा हो जाता है। कहने का ताल्पर्य यह है कि सज्जन से झूठ और
दुर्जन से सत्य सदैव दूर ही रहते हैं।

3. जड़ चेतन गुन दोष मय, बिस्व कीन्ह करतार।
संत हंस गुन गहहिं पय, परिहरि वारि विकार।

शब्दार्थ-गुन = गुण। पय = दूध।

सन्दर्भ-पूर्व की तरह।

प्रसंग-प्रस्तुत दोहे में तुलसीदास जी ने भगवान द्वारा रचित संसार को गुणों और दोषों से युक्त बताया है।

व्याख्या-तुलसीदास जी कहते हैं कि ईश्वर द्वारा रचित इस संसार में गुण और दोष समान रूप से व्याप्त हैं। यहाँ के जड़ और चेतन जीव गुणों और दोषों दोनों से युक्त हैं, परन्तु सज्जन – लोग हंस की तरह जलरूपी बुराई को छोड़कर, दूध (गुण) को ग्रहण कर लेते हैं।

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नीति के दोहे वृनीति के दोहे

1. विद्या-धन उद्यम बिना, कहाँ जु पावै कौन।
बिना डुलाए ना मिले, ज्यों पंखा को पौन॥

शब्दार्थ-उद्यम – परिश्रम; पौन – पवन।

सन्दर्भ-प्रस्तुत दोहा हमारी पाठ्य पुस्तक ‘भाषा-भारती’ के ‘नीति के दोहे’ नामक पाठ से लिया गया है। इसके रचयिता कविवर वृन्द हैं।

प्रसंग-प्रस्तुत दोहे में परिश्रम के महत्त्व पर प्रकाश डाला गया है।

व्याख्या-वृन्द कहते हैं कि जिस प्रकार गर्मी के समय में बिना पंखे को घुमाये (परिश्रम किए) उसकी हवा का आनन्द नहीं लिया जा सकता है, ठीक उसी प्रकार विद्या रूपी धन को बिना परिश्रम किये प्राप्त नहीं किया जा सकता है। अर्थात् प्रत्येक मनुष्य को अभीष्ट की प्राप्ति हेतु अथक मेहनत करनी चाहिए।

2. करत-करत अभ्यास के, जड़मति होत सुजान।
रंसरी आवत-जात तें, सिल पर परत निसान।।

शब्दार्थ-जड़मति = मूर्ख; सुजान = चतुर; रसरी = रस्सी; सिल- पत्थर।
सन्दर्भ-पूर्व की तरह।

प्रसंग-प्रस्तुत दोहे में कवि ने निरन्तर अभ्यास के चमत्कारिक परिणामों के बारे में बताया है।

व्याख्या-कविवर वृन्द कहते हैं कि जिस प्रकार मामूली रस्सी के कुएँ के पत्थर पर निरन्तर आने-जाने (ऊपर-नीचे होने) से पत्थर तक घिसने लगता है अर्थात् उस पर निशान पड़ जाते हैं, ठीक उसी प्रकार लगातार अभ्यास करने से मूर्ख से मूर्ख मनुष्य भी चतुर व गुणी बन सकता है। अतः मनुष्य को किसी भी कार्य में वांछित सफलता की प्राप्ति के लिए सतत् प्रयास और निरन्तर अभ्यास करते रहना चाहिए।

3. सज्जन तजत न सजनता, कीन्हेषु दोष अपार।
ज्यों चन्दन छेदै तऊ सुरभित करै कुठार॥

शब्दार्थ-तजत = छोड़ना; कुठार = कुल्हाड़ी।

सन्दर्भ- पूर्व की तरह।

प्रसंग-प्रस्तुत दोहे में कवि ने सज्जन लोगों के सज्जनता न छोड़ने के गुण का वर्णन किया है।

व्याख्या-कविवर वृन्द कहते हैं कि सज्जन लोग कभी भी अपनी सज्जनता नहीं त्यागते चाहे उनके प्रति कैसा भी कठोरतम् व्यवहार ही क्यूँ न किया जाए। ऐसे लोगों का स्वभाव चन्दन के उस वृक्ष के समान होता है जो उसको काटने वाली कुल्हाड़ी के दोषों को क्षमा करके उसे भी अपनी सुगन्ध से सुगन्धित कर देता है।

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नीति के दोहे घाघ और भड्डरी
(मौसम और कृषि सम्बन्धी कहावतें)

1. कलसे पानी गरम हो, चिड़िया न्हावें धूर।
अण्डा लै चींटी चले, तो बरखा भरपूर॥

शब्दार्थ-कलसे = पानी भरने का पात्र, कलशा; न्हावै – नहाना; धूर-धूल;, बरखा – वर्षा।

सन्दर्भ-प्रस्तुत कहावत हमारी पाठ्य-पुस्तक ‘भाषा-भारती’ के ‘नीति के दोहे’ नामक पाठ से ली गई है। इसके रचयिता घाघ और भड्डरी हैं।

प्रसंग-प्रस्तुत पंक्तियों में प्रकृति में होने वाले परिवर्तनों को भौंपकर भविष्य के मौसम की सम्भावना को आंका जा सकता है।

व्याख्या-प्रस्तुत कहावत में कहा गया है कि जब कल्से का पानी गरम हो, चिड़िया धूल में नहाए और चीटी अण्डा लेकर चले तो भरपूर वर्षा होने की सम्भावना रहती है।

2. मैदे गेहूँ, ढेले चना।

शब्दार्थ-ठेले – ढेलेदार मिट्टी।

सन्दर्भ-पूर्व की तरह।

प्रसंग-किस प्रकार की मिट्टी में कौन-सी फसल बोई जाए, इसका वर्णन अत्यन्त सरल शब्दों में किया गया है।

व्याख्या-इस कहावत में कहा गया है कि मैदे की तरह बारीक मिट्टी में गेहूँ और ढेलेदार मिट्टी में चने की फसल बोने से पैदावार अच्छी होती है।

नीति के दोहे शब्दकोश

मिथ्या = झूठा, असत्य; करि = करना; अति = अधिक, ज्यादा; निंदक = बुराई करने वाला; निर्मल = स्वच्छ, साफ; तरुवर = पेड़; सरवर = सरोवर, तालाब; पान = पीना, एक विशेष प्रकार का पत्ता या बेल; पर दूसरा, पंख; संचहि – इकट्ठा करना; पोहिए = पिरोना; सुजान = समझदार, सज्जन, सयाना; गरल = विष, जहर; वशीकरण = वश में करना; तज – त्यागना; पातक = पाप, अपराध; पौन = पवन, तीन-चौथाई; उद्यम = उद्योग, परिश्रम; डुलाए = झूला झुलाना; जड़मति = मूर्ख, बुद्धिहीन; सिल = पत्थर; सुरभित – सुगन्धित; कुठार = कुल्हाड़ी; वारि = जल; पय = दूध; गहहिं = ग्रहण करना।

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MP Board Class 10th Hindi Vasanti Solutions Chapter 13 समय नहीं मिला

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MP Board Class 10th Hindi Vasanti Solutions Chapter 13 समय नहीं मिला (श्रीमन्नारायण अग्रवाल)

समय नहीं मिला पाठ्य-पुस्तक के प्रश्नोत्तर

समय नहीं मिला लघु-उत्तरीय प्रश्नोत्तर

Mp Board Class 10th Hindi Chapter 13 प्रश्न 1.
समय न मिलने का बहाना कैसे लोग करते हैं?
उत्तर
समय न मिलने का बहाना ज्यादातर वे लोग करते हैं, जो कछ नहीं करते हैं और उनकी टालमटोल करने की आदत पड़ जाती है।

Chapter 13 Hindi Class 10 Mp Board प्रश्न 2.
समय के संबंध में अंग्रेजी की मशहूर कहावत कौन-सी है?
उत्तर
समय के संबंध में अंग्रेजी की मशहूर कहावत ‘समय धन’ है।

Vasanti Hindi Book Class 10 MP Board प्रश्न 3.
मालवीय जी द्वारा आयोजित सम्मेलन सफल क्यों न हो सका?
उत्तर
मालवीय जी द्वारा आयोजित सम्मेलन सफल न हो सका। उसका खास कारण तो ब्रिटिश सरकार के राजनैतिक दाँवपेंच ही थे। पर एक बात की ओर भी हमारा ध्यान गए बिना न रहा। सम्मेलन में शरीक होने के लिए नेता निश्चित समय पर ही आया करते थे, पर मालवीय जी की अनुपस्थिति के कारण वे थोड़ी देर राह देखकर तितर-बितर हो जाते थे। उन्हें खबर मिलती कि अभी मालवीय जी के आने में दो घण्टे की देर है। समय की इस गैर-पाबंदी के कारण मैंने कई नेताओं को हताश व परेशान होते देखा। कई लोग तो निराश होकर बीच ही में सम्मेलन का कार्य छोड़ कर चले गए।

Class 10 Hindi Chapter 13 Mp Board प्रश्न 4.
लेखक ने किन लोगों को मुबारकबाद देना चाहा है?
उत्तर
लेखक ने उन लोगों को मुबारकबाद देना चाहा है, जो अपने समय का पूरा फायदा उठाते हैं और एक मिनट भी बरबाद नहीं करते हैं।

Vasanti Hindi Book Class 10 Solutions Mp Board प्रश्न 5.
सुबह जल्दी उठने से क्या लाभ होता है?
उत्तर
सुबह जल्दी उठने से अनेक लाभ होते हैं। इससे समय की काफी बचत होती है। दिन भर स्फूर्ति का अनुभव होता रहता है।

Class 10th Hindi Vasanti MP Board प्रश्न 6.
लेखक ने बड़ा व्यक्ति किसे कहा है?
उत्तर
लेखक ने बहुत व्यस्त रहने वाले व्यक्ति को बड़ा व्यक्ति कहा है।

समय नहीं मिला दीर्य-उत्तरीय प्रश्नोत्तर

Class 10 Hindi Book Vasanti MP Board प्रश्न 1.
‘वक्त सबके लिए बराबर है’ पंक्ति को लेखक ने किन उदाहरणों से समझाया है?
उत्तर
‘वक्त सबके लिए बराबर है’ पंक्ति को लेखक ने बैंक और शेयर बाजार के उदाहरणों से समझाया है। वह इस तरह अगर बैंक जवाब दे दें तो एक करोड़पति मिनटों में गरीब और भिखमँगा भी बन सकता है, लेकिन कुदरत का इन्तजाम नहीं बिगड़ता। समय के सागर में शेयर बाजार की तरह दिन में कितने ही बार ज्वार-भाटा नहीं आता। धन की दुनिया में अमीर-गरीब बादशाह-कंगाल का फ़र्क है। पर खुशकिस्मती से समय के साम्राज्य में ऊँच-नीच का भेदभाव नहीं है।

 

Mp Board Solution Class 10 Hindi प्रश्न 2.
सभा-सम्मेलनों में समय के संबंध में क्या देखा जाता है?
उत्तर
समय की तत्परता के संबंध में सभी सूबों की कहानी करीब एक-सी है। मीटिंग का समय पर शुरू होना हमेशा अपवाद रहा करता है, नियम नहीं। उड़ीसा में तो कई जगह मुकर्रर किए गए वक्त से दो घण्टे बाद मीटिंग शुरू करने का रिवाज ही पड़ गया है। वक्त बताते हुए भी मीटिंग बुलाने वाले, मीटिंग में आने वाले सभी सज्जन यही मानकर चलते हैं कि अगर चार बजे का समय दिया है तो मीटिंग छः बजे शुरू होगी। उसके बाद भले ही हो. पर छः के पहले नहीं।

Class 10 Hindi Vasanti MP Board प्रश्न 3.
किसी भी बैठक का समय पर आरंभ हो जाना अपवाद क्यों रहा है?
उत्तर
किसी भी बैठक का समय पर आरंभ हो जाना अपवाद ही रहा है। यह इसलिए कि देर से बैठक शुरू करने का रिवाज ही पड़ गया है।

Hindi Class 10 Mp Board प्रश्न 4.
लेखक ने विदेशों में समय की बरबादी के क्या उदाहरण दिए हैं?
उत्तर
इंग्लैण्ड व यूरोप के दूसरे देशों में भी समय की बरबादी दिल खोलकर की जाती है। वहाँ की सभाएँ वक्त पर होती हैं और लोग समय के पाबंद भी हैं। लेकिन अगर सिनेमा व थियेटर के टिकट लेने के लिए लंबी-लंबी कतारों का दृश्य आप देखें तो हैरान होंगे कि जो लोग इतने व्यस्त दिखते हैं और सड़कों पर भी दौड़-दौड़ कर चलते हैं, वे इन कतारों में दो-दो, तीन-तीन घण्टे लगातार किस तरह खड़े रहते हैं और केवल यही राह देखते रहते हैं कि कब टिकट घर की खिड़की खुले। इन , कतारों में जवान, बूढ़े, स्त्री, पुरुष सभी रहते हैं, कभी-कभी तीन घण्टे खड़े रहने के बाद भी थियेटर में जगह न रहने के कारण कुछ लोगों का वापस जाना पड़ता है।

Class 10 Hindi Mp Board प्रश्न 5.
जीवन में समय की पाबंदी के साथ-साथ कुछ लचक रखना भी जरूरी क्यों हैं?
उत्तर
जीवन में समय की पाबंदी के साथ-साथ कुछ लचक रखना भी जरूरी है। यह इसलिए कि इसके बिना कोई भी व्यक्ति अपना और अपने घरवालों का जीवन सुखी नहीं बना सकेगा। इससे वह चिड़चिड़ा और नाराज रहने लगेगा।

समय नहीं मिला भाषा-अनुशीलन

Class 10th Hindi Mp Board Solution प्रश्न 1.
संधि-विच्छेद कर संघि का नाम लिखिए।
सज्जन, सदुपयोग, सम्मेलन, विद्यार्थी, मनोविकार।
उत्तर
Mp Board Class 10th Hindi Chapter 13

प्रश्न 2.
समास-विग्रह कर प्रकार लिखिए
यवा-समय, अस्त-व्यस्त, ऊँच-नीच, अर्वव्यवस्था, पंचतंत्र, गजानन।
उत्तर
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प्रश्न 3.
ख्याल, सिनेमा जैसे अनेक आगत शब्द इस पाठ में आए हैं। ऐसे अन्य आगत शब्दों को छाँटकर लिखिए।
उत्तर
उत्तर, अक्सर, काफी, बेशुमार, फैशन, डाकघर, बहाना, मशहूर, मुकाबला, लालसा आदि।

प्रश्न 4.
निम्नलिखित शब्दों के पर्यायवाची लिखिए
देश, आदमी, सुबह, लालसा, राह।
उत्तर
देश – वतन, राष्ट्र
आदमी – मनुष्य, मानव
सुबह – सबेरा, प्रातः
लालसा – अभिलाषा, इच्छा
राह – मार्ग, रास्ता।

प्रश्न 5.
वाक्यों में प्रयोग कीजिए
टाल मटोल करना, तितर-बितर होना, राह देखना, मशीन बन जाना।
उत्तर
मुहावरे – वाक्य-प्रयोग
टालमटोल – आलसी मनुष्य टालमटोल करते रहते हैं।
तितर-बितर होना – घबड़ाहट में सारा सामान तितर-बितर हो गया।
राह देखना – वह देर तक अपने साथी की राह देखता रहा।
मशीन बन जाना – आज विज्ञान के युग में मनुष्य का मशीन बन जाना कोई आश्चर्य नहीं है।

प्रश्न 6.
निम्नलिखित वाक्य को निर्देशानुसार परिवर्तित कीजिए
गोपाल कल आएगा।
(क) निषेधवाचक
(ख) प्रश्नवाचक
(ग) विस्मयादिवाचक
(घ) संदेहवाचक।
उत्तर
गोपाल कल आएगा।
(क) निषेधवाचक – गोपाल कल नहीं आएगा।
(ख) प्रश्नवाचक – क्या गोपाल कल आएगा?
(ग) विस्मयादिवाचक – अहा! गोपाल कल आएगा!
(घ) संदेहवाचक – शायद गोपाल कल आएगा।

समय नहीं मिला योग्यता-विस्तार

प्रश्न 1.
समय का पालन करने वाले जिन महापुरुषों के नाम आप जानते हैं, उनकी सूची बनाइए।

प्रश्न 2.
समय का दुरुपयोग करने वाले लोगों को क्या-क्या दुष्परिणाम भोगने पड़ते हैं? संक्षिप्त लेख लिखिए।

प्रश्न 3.
समय की नियमितता से संबंधित अनुभवों को अपने शब्दों में लिखिए।
उत्तर
उपर्युक्त प्रश्नों को छात्र/छात्रा अपने अध्यापक/अध्यापिका की सहायता से हल करें।

समय नहीं मिला परीक्षोपयोगी अतिरिक्त प्रश्नोत्तर

अर्थग्रहण संबंधी प्रश्नोत्तर

प्रश्न 1.
‘समय नहीं मिला’ निबंध का प्रतिपाय स्पष्ट कीजिए।
उत्तर
लेखक ने इस व्यंग्यात्मक लेख में समय का महत्त्व समझाने का प्रयास किया है। लेखक का मानना है कि समय के साथ चलना. जीवन को नियमित बनाना. हर कार्य को गंभीरता से समझना, उसे भली-भाँति पूरा करना आदि बातें जीवन की सफलता के लिए बहुत आवश्यक हैं। इन्हें लेखक ने विविध उदाहरणों द्वारा स्पष्ट किया है। लेखक ने यह भी बताने का प्रयास किया है कि समय का महत्त्व न समझने वाले बहुत पीछे रह जाते हैं। समाज में उनका सम्मान भी सुरक्षित नहीं रहता। समयाभाव का बहाना बनाने वाले जीवन लक्ष्य तक नहीं पहुँचते। प्रस्तुत पाठ में लेखक ने दिनचर्या की अनियमितता और बहाना बनाने की आदत से बचने का संदेश दिया है।

प्रश्न 2.
समय पर किसी का जवाब न मिलने पर लेखक क्या समझ लेता है?
उत्तर
समय पर किसी का जवाब न मिलने पर लेखक यह समझ लेता है कि शायद डाकघर की कुछ गलती से पत्र ही देर से पहुँचा या न भी पहुँचा हो। या फिर महाशयजी का जीवन ही अस्त-व्यस्त और ढीला होगा। वे पत्र पढ़कर कहीं इधर-उधर डाल देते होंगे और या फिर उन्हें जवाब देने का ख्याल अक्सर नहीं रहता होगा या उत्तर देने के वक्त पत्र ही नहीं मिलता होगा।

प्रश्न 3.
समय धन से कहीं अधिक अहम् चीज है कैसे?
उत्तर
समय धन से कहीं अधिक अहम चीज़ है। यह इसलिए कि हम अधिकसे-अधिक मेहनत करके बहुत धन कमा सकते हैं। लेकिन हजार परिश्रम करने पर भी हम चौबीस घण्टों में एक भी मिनट नहीं बढ़ा सकते हैं। इस प्रकार की बहुमूल्य चीज का सामना धन से नहीं किया जा सकता है।

प्रश्न 4.
निम्नलिखित कथनों के लिए दिए गए विकल्पों में से सही विकल्प का चयन कीजिए।
1. श्रीमन्नारायण अग्रवाल आर्थिक सिद्धान्तों के विशेषज्ञ थे।
1. समाजवादी
2. गाँधीवादी
3. राजनीतिक
4. आध्यात्मिक।
उत्तर
2. गाँधीवादी

2. श्रीमन्नारायण अग्रवाल की रचना है
1. मानव
2. मानव और दानव
3. अभिनव मानव
4. आदि मानव
उत्तर
1. मानव

3. श्रीमन्नारायण का जन्म कहाँ हुआ था
1. वाराणसी में
2. इलाहाबाद में
3. मैनपुरी में
4. उन्नाव में।
उत्तर
3. मैनपुरी में

4. श्रीमन्नारायण का जन्म किस सन में हुआ था
1. 1900 में
2. 1901 में
3. 1910 में
4. 1912 में।
उत्तर
4. 1912 में।

5. श्रीमन्नारायण सम्पादक थे।
1. सबकी बोली के
2. सरस्वती के
3. राष्ट्रभाषा प्रचार के
4. सबकी बोली’ और ‘राष्ट्रभाषा प्रचार’ के।
उत्तर
4. सबकी बोली’ और ‘राष्ट्रभाषा प्रचार’ के।

प्रश्न 5.
रिक्त स्थानों की पूर्ति दिए गए विकल्पों में से उचित शब्दों के चयन से कीजिए
1. ज्यादातर लोगों की ………….. आदत ही पड़ जाती है। (बहाना बनाने की, टालमटोल करने की)
2. बड़े लोगों का व्यवहार भी बहुत ………….. रहता है। (व्यस्त, व्यवस्थित)
3. समय न मिलने का बहाना अक्सर अपनी …………… को ढाँकने के लिए किया जाता है। (मजबूरी, कमजोरी)
4. अंग्रेजी की मशहूर कहावत है-‘समय …………… है’। (बलवान, धन)
5. धन से कहीं अधिक अहम् चीज है। (बुद्धि, समय)
उत्तर

  1. टालमटोल
  2. व्यवस्थित
  3. कमजोरी
  4. धन
  5. समय

प्रश्न 6.
सही जोड़ी का मिलान किजिए
छोटे-छोटे सवाल – रामचंद्र शुक्ल
उत्साह – मीराबाई
रोटी का राग – तुलसीदास
वर्षा गीत – श्रीमन्नारायण अग्रवाल
विनय पत्रिका – दुष्यंत कुमार।
उत्तर
छोटे-छोटे सवाल – दुष्यंत कुमार
उत्साह – रामचंद्र शुक्ल
रोटी का राग – श्रीमन्नारायण अग्रवाल
वर्षा गीत – मीराबाई
विनय पत्रिका – तुलसीदास।

प्रश्न 7.
निम्नलिखित वाक्य सत्य हैं या असत्य? वाक्य के आगे लिखिए।
1. बड़े लोगों का जीवन नियमित रहता है।
2. जो व्यक्ति खतों का जवाब देरी से देता है, वह इसी कारण बड़ा हो जाता है।
3. वक्त के लिए सब बराबर हैं।
4. ज्यादातर लोग कुछ नहीं करते हैं।
5. 1930 में मालवीय जी ने प्रयाग में ‘एकता सम्मेलन’ बुलाया था।
उत्तर

  1. सत्य
  2. असत्य
  3. सत्य
  4. सत्य
  5. असत्य

प्रश्न 8.
निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर एक शब्द में दीजिए
1. अधिकांश लोग क्या करते हैं?
2. अपनी कमजोरी को ढाँकने के लिए क्या न मिलने का बहाना किया जाता है?
3. किसका अपमान करके कोई बड़ा आदमी न बन सका है और न बन सकेगा?
4. मालवीय जी ने ‘एकता सम्मेलन’ कब बुलाया था?
5. सुबह जल्दी उठकर हम दिनभर क्या महसूस करेगे?
उत्तर

  1. टालमटोल
  2. समय
  3. समय का
  4. 1932 में
  5. स्फूर्ति ।

समय नहीं मिला लघु-उत्तरीय प्रश्नोत्तर

प्रश्न 1.
किस तरह की बातें लोगों को सुननी पड़ती हैं?
उत्तर
‘मुझे आपका काम याद था, पर क्या करूँ, बिल्कुल समय ही नहीं मिला। क्षमा करें।…कल इसी वक्त आ जाइये। समय निकालने की जरूर कोशिश करूँगा।’ कुछ इसी तरह की बातें लोगों को सननी पड़ती हैं।

प्रश्न 2.
लेखक का बड़े लोगों के बारे में क्या अनुभव है?
उत्तर
लेखक का बड़े लोगों के बारे में अनुभव है कि जो लोग सचमुच बड़े हैं और बहुत व्यस्त रहते हैं उनका पत्र-व्यवहार भी बहुत व्यवस्थित रहता है। उनका जीवन नियमित रहता है और वे रोज का काम उसी समय निपटा देते हैं।

प्रश्न 3.
लेखक किसकी तारीफ़ करता है?
उत्तर
लेखक उन लोगों की तारीफ़ करता है, जो खुशदिल रहकर दूसरों को भी खुशदिल रखें। उससे वह अपने-आप समय का जितना उपयोग कर सकें, उतना ही वह काबिलेतारीफ़ है।

प्रश्न 4.
लेखक के मुबारकबाद का पात्र कौन है?
उत्तर
लेखक के मुबारकबाद का पात्र वह है, जो अपने-आप समय का पूरा फायदा उठाता है और एक मिनट भी बरबाद नहीं करता है।

समय नहीं मिला लेखक-परिचय

जीवन-परिचय-श्रीमन्नारायण अग्रवाल गाँधीवादी चिंतकों-विचारकों में प्रमुख हैं। आपका जन्म उत्तर-प्रदेश के मैनपुरी जिलान्तर्गत हआ था। आपकी आरंभिक शिक्षा कलकत्ता में हुई। इसके बाद आपने अपनी उच्च शिक्षा के लिए प्रयाग विश्वविद्यालय में प्रवेश लिया। वहीं से आपने उच्च शिक्षा प्राप्त करके आजीविका के लिए नौकरी कर ली। इस दृष्टि से आप ‘सबकी बोली’ और ‘राष्ट्र-भाषा-प्रचार’ के भी संपादक रहे। यही नहीं, आप लगातार अनेक वर्षों तक राष्ट्र भाषा-प्रचार समिति, वर्धा के प्रधानमंत्री के रूप में अपनी अहं भूमिका निभाते थे। रचनाएँ-श्रीमन्नारायण अग्रवाल का गद्य और पद्य दोनों पर अधिकार रहा है। उनकी रचनाएँ इस प्रकार हैं

काव्य-संग्रह-‘सेगाँव का संत’, ‘रोटी का राग’ तथा ‘मानव’

भाषा-शैली-श्रीमन्नारायण अग्रवाल की साहित्यिक धारा अधिक सरल और सपाट शब्दों की है। उसमें बहुप्रचलित शब्दों की भरमार है। इस प्रकार के शब्दों से निर्मित भाषा के अर्थ सहज रूप से प्रकट हो जाते हैं। इनसे बने हुए वाक्य बोधगम्य हैं। श्रीमन्नारायण अग्रवाल की शैली में विविधता है। कहीं तो वह पत्रकारिता के छाँव तले पनपती है और कहीं तो अध्यापन के अधीन होकर सरकती है। इस प्रकार आपकी शैली एक पत्रकार की शैली के साथ-साथ एक अध्यापक आचार्य की शैली है। इस प्रकार की शैलियों से विषय-वस्तु का प्रतिपादन अच्छी तरह से हुआ है।

साहित्य में स्थान-श्रीमन्नारायण का हिन्दी गद्य-पद्य दोनों ही विधाओं के रचनाकारों में उल्लेखनीय स्थान है। यह सर्वविदित है कि साहित्य के प्रति इनका अनुराग शुरू से ही रहा है। गाँधीवादी दृष्टिकोण को रेखांकित करने वाले प्रमुख साहित्यकारों में से आप एक हैं।

समय नहीं मिला निबंध का सारांश

प्रस्तुत निबंध ‘समय नहीं मिला’ एक व्यंग्यात्मक निबंध है। इसमें लेखक ने समय को समझाने का प्रयास किया है। लेखक के अनुसार अधिकांश लोग समय पर न मिलने का प्रयत्न करते हैं। अपनी टालमटोल आदत से व्यस्तता का बहाना बनाकर करते हैं। इसी प्रकार पत्रों का उत्तर देने में भी अधिकांश लोग अपनी व्यस्तता का बहाना बनाकर अपनी टालमटोल की आदत से बाज नहीं आते हैं, जो हो, समय न मिलने का बहाना प्रायः अपनी कमजोरी और अनियमितता को ढाँकने के लिए किया जाता है। लेकिन समय का अपमान करके आज तक न कोई बड़ा बन सका है और न कोई बन सकेगा। समय धन है। यों तो हम अधिक मेहनत करके अधिक-से-अधिक धन तो कमा सकते हैं लेकिन वक्त को न तो बढ़ा सकते हैं और न घटा ही सकते हैं। धन की दुनिया में अमीर-गरीब बादशाह-कंगाल का फर्क है लेकिन समय के साम्राज्य में ऊँच-नीच का भेदभाव नहीं है। समय के लिए सब बराबर हैं। फिर भी हम समय का महत्त्व नहीं समझ पाते।

लेखक समय की पूरी-पूरी पाबंदी करने वालों को मुबारक बाद देते हुए यह सलाह दे रहा है कि अगर आप केवल सुबह ही जल्दी उठना शुरू कर दें, तो आप काफी समय बचा लेंगे। फिर दिन भर आप स्फूर्ति का अनुभव करेंगे। लेकिन ध्यान रहे कि आप कहीं मशीन की तरह न बन जाएँ। घड़ी के ठोके के साथ अपनी जिंदगी की ताल न बैठा लें। अगर आपने अपने कार्यक्रम में जरा भी लचक न रखी। उसमें भिन्नता की गुंजाइश न रही हो तो भी आप अपना और अपने घरवालों का जीवन सुखी न बना सकेंगे। फलस्वरूप आपका मिजाज भी चिड़चिड़ा हो जाएगा। अपना समय बर्बाद करने वालों पर आप नाराज होना शुरू कर देंगे। अंततः यह कहना है कि खुशदिल रहकर और दूसरों को भी निभाकर आप अपने समय का जितना अधिक और अच्छा उपयोग कर सकें, उतनी आपकी प्रशंसा है। और कृपया आज से किसी से न कहें ‘मुझे समय नहीं मिला।

समय नहीं मिला संदर्भ-प्रसंग सहित व्याख्या

(1) जहाँ वक्त बढ़ाया नहीं जा सकता, वहाँ लाख कोशिश करने पर वह घटाया भी नहीं जा सकता। आजकल की विचित्र अर्थव्यवस्था में हमारे धन की कीमत रोज घट बढ़ सकती है। अगर बैंक जवाब दे दें तो एक करोड़पति मिनटों में गरीब और भिखमंगा भी बन सकता है, किंतु कुदरत का इन्तजाम नहीं बिगड़ता। समय के सागर में शेयर बाजार की तरह दिन में कितने ही बार ज्वार-भाटा नहीं आता। धन की दुनिया में अमीर-गरीब बादशाह-कंगाल का फर्क है। पर खुशकिस्मती से समय के साम्राज्य में ऊँच-नीच का भेद-भाव नहीं है। वक्त के लिए सब बराबर हैं, उसमें आदर्श लोकतंत्र है। फिर भी हम उसका महत्त्व नहीं समझते।

शब्दार्थ-कुदरत-ईश्वर ।ज्वार-भाटा-उतार-चढ़ाव,। खुशकिस्मती-सौभाग्य।

संदर्भ-प्रस्तुत गद्यांश हमारी पाठ्य-पस्तक ‘हिंदी सामान्य’ 10वीं में संकलित लेखक श्रीमन्नारायण अग्रवाल लिखित व्यंग्यात्मक निबंध ‘समय नहीं मिला’ से है।

प्रसंग-प्रस्तुत गद्यांश में लेखक ने ‘समय पर किसी का कोई अधिकार नहीं होता है’ इसे समझाते हुए कहा है कि

व्याख्या-आज के इस विज्ञान युग में भले ही सब कुछ सम्भव हो सकता है, लेकिन समय को न तो बढ़ाया जा सकता है और न घटाया ही जा सकता है। जहाँ तक आज की अर्थव्यवस्था का प्रश्न है तो यह भी कहा जा सकता है कि हम अपने मन की कीमत जब चाहे घटा-बढ़ा सकते हैं। उदाहरण के लिए, यदि कोई बैंक किसी करोड़पति को मदद करना बंद कर दे, तो उसे चंद मिनटों में गरीब और भिखमंगा होने में देर नहीं लगेगी। लेकिन जो ईश्वरीय विधान है, वह इससे अलग है। वह अपना प्रबंध अपने ढंग से बनाए रखता है। इस प्रकार समय का उतार-चढ़ाव ज्वार-भाटा या शेयर बाजार की तरह गिरता-उठता नहीं है। इस प्रकार समय की तुलना धन से नहीं की जा सकती है। यह इसलिए कि धन के संसार में अमीरी-गरीबी का भेदभाव भरा होता है। लेकिन समय का संसार इससे कहीं अलग ही होता है। वहाँ तो किसी प्रकार का कोई भेदभाव होता ही नहीं है। वहाँ तो सब एक समान हैं। वहाँ एक आदर्श लोकतंत्र है। अफ़सोस की बात है कि हम यह सब कुछ जानते हुए समय के महत्त्व नहीं समझ पाते हैं।

विशेष-

  1. समय के महत्त्व को बतलाया गया है।
  2. भाषा-शैली में प्रवाह है।

अर्थग्रहण संबंधी प्रश्नोत्तर

प्रश्न 1.
वक्त की क्या विशेषता है?
उत्तर
वक्त की यह विशेषता होती है कि उसे न तो हम घटा सकते हैं और न बढ़ा ही सकते हैं।

प्रश्न 2.
धन और समय की दुनिया में क्या फर्क है?
उत्तर
धन की दुनिया और समय की दुनिया में बहुत फर्क है। धन की दुनिया में अमीरी-गरीबी का भेद होता है, जबकि समय की दुनिया में सब बराबर होते हैं।

विषय-वस्तु पर आधारित बोध प्रश्नोत्तर :

प्रश्न 1.
उपर्युक्त गद्यांश का मुख्य भाव लिखिए।
उत्तर
उपर्युक्त गद्यांश के द्वारा लेखक ने यह भाव प्रकट करना चाहा है कि समय को घटाया और बढ़ाया नहीं जा सकता है। इसकी तुलना धन से नहीं की जा सकती है। यह इसलिए कि धन की दुनिया में अमीरी-गरीबी का भेदभाव होता है, जबकि समय की दुनिया में सब बराबर होते हैं। अफसोस यह है कि हम समय की कीमत जानते हुए उसके महत्व को नहीं समझते हैं।

2. पर मेहरबानी करके आप कहीं मशीन की तरह भी न बन जाएँ। घड़ी के ठोके के साथ अपनी जिंदगी की ताल न बैठा लें। अगर अपने कार्यक्रम में आपने जरा भी लचक न रखी और उसमें भिन्नता की गुंजाइश न रही हो तो भी आप अपना और अपने घरवालों का जीवन सुखी न बना सकेंगे। फिर तो शायद आपका मिजाज भी चिड़चिड़ा हो जाएगा और आप दूसरों पर, जो अपना समय जरा भी बर्बाद करते हैं, नाराज होना शुरू कर देंगे।

शब्दार्च-ताल-मेल । लचक-सरस। मिजाज़-दिमाग।

संदर्भ-पूर्ववत्।

प्रसंग-प्रस्तुत गद्यांश में लेखक ने समय के सदुपयोग के तरीके पर प्रकाश डालते हुए कहा है कि

व्याख्या-आप समय का सदुपयोग अवश्य करें। लेकिन इससे पहले आप यह जान लें कि यह किस तरह होना चाहिए। आपके लिए यह सुझाव है कि आप कृपया समय का सदुपयोग मशीन की तरह न करें। दूसरे शब्दों में, यह कि आप समय के सदुपयोगी मशीन न बन जाएँ। यही नहीं आप अपनी जिंदगी के ताल घड़ी के ठोके के साथ न बैठा लें। यह ध्यान रहे कि आप अपने कार्यक्रम में लचक रखें। अगर आपने ऐसा नहीं किया और उसमें कोई फर्क की संभावना न रखी तो आप न केवल अपना ही, अपितु अपने घर-परिवार के जीवन को दुखमय ही बनायेंगे। फलस्वरूप आपका मिजाज चिड़चिड़ा हो जाए तो, इसमें कोई आश्चर्य नहीं। इससे जो अपना समय बर्बाद करते हैं, उन पर अपनी नाराजगी दिखाना शरू कर देंगे।

विशेष

  1. समय के सदुपयोग के तौर-तरीके पर प्रकाश डाला गया है।
  2. यह अंश ज्ञानवर्द्धक है।

अर्थग्रहण संबंधी प्रश्नोत्तर

प्रश्न 1.
मशीन की तरह न बनने की क्यों सीख दी गई है?
उत्तर
मशीन की तरह न बनने की सीख दी गई है। यह इसलिए कि इससे अपना और अपने घरवालों का जीवन सुखी नहीं बन सकता है।

विषय-वस्तु पर आधारित बोध प्रश्नोत्तर

प्रश्न 1.
उपर्युक्त गयांश का मुख्य भाव स्पष्ट कीजिए।
उत्तर
उपर्युक्त गद्यांश के द्वारा लेखक का कहना है कि हमें मशीन की तरह बनकर समय का सदुपयोग नहीं करना चाहिए। इसमें लचक न रखने से घर-परिवार का सुख-चैन समाप्त हो जायेगा। मिजाज चिड़चिड़ा हो जाएगा और नाराज होने की आदत पड़ जाती है।

MP Board Class 6th Hindi Sugam Bharti Solutions Chapter 10 कोई नहीं पराया

MP Board Class 6th Hindi Sugam Bharti Solutions Chapter 10 कोई नहीं पराया

वस्तुनिष्ठ प्रश्न

Koi Nahi Paraya Poem Summary In Hindi MP Board Class 6th प्रश्न 1.
(क) सही जोड़ी बनाइए
1. घर – (क) मनुजत्व
2. देश – (ख) पांति
3. जाति – (ग) काल
4. देवत्व – (घ) संसार
उत्तर
1. (घ), 2. (ग), 3. (ख), 4. (क)

कोई नहीं पराया कविता के प्रश्न उत्तर MP Board Class 6th प्रश्न (ख)
दिए गए शब्दों में से उपयुक्त शब्द चुनकर रिक्त स्थानों की पूर्ति कीजिए
1. कहीं रहे कैसे भी मुझको प्यार यह…….है। (इंसान/भगवान)
2. ……..डाल का पीछे पहले उपवन का श्रृंगार है। (शूल/फूल)
3. मेरी धरती सौ-सौ स्वर्गों से ज्यादा…..है। (सुकुमार/कठोर)
4. कोई नहीं पराया……सारा संसार है। (मेरा घर/मेरा परिवार)
उत्तर
1. इंसान
2.फूल
3. सुकुमार
4. मेरा घर।

MP Board Class 6th Hindi Sugam Bharti Chapter 10 अति लघु उत्तरीय प्रश्न

Koi Nahi Paraya Question Answers MP Board Class 6th प्रश्न 2.
निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर एक-एक वाक्य में दीजिए

(क) कवि ने घर किसे कहा है?
उत्तर
कवि ने पूरे संसार को घर कहा है।

(ख) कवि को किस बात का अभिमान है?
उत्तर
कवि को मानवता पर अभिमान है।

(ग) कवि ने अपना आराध्य किसे माना है?
उत्तर
कवि ने आदमी को अपना आराध्य माना है।

(घ) धरती किससे भी ज्यादा सुकुमार है?
उत्तर
धरती स्वर्ग की सुखद कहानियों से भी सुकुमार

(ङ) ‘कोई नहीं पराया’ कविता का मूल भाव क्या है?
उत्तर
‘कोई नहीं पराया’ का मूल भाव है-बसुधैव कुटुम्बकम।

MP Board Class 6th Hindi Sugam Bharti Chapter 10 लघु उत्तरीय प्रश्न

Koi Nahi Paraya Poem Question Answers MP Board Class 6th प्रश्न 3.
निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर तीन-से-पाँच वाक्यों में दीजिए

(क) कवि ने अपने धर्म को स्याही और शब्दों का गुलाम क्यों नहीं माना?
उत्तर
कवि ने अपने धर्म को स्याही और शब्दों का गुलाम इसलिए नहीं माना है क्योंकि वह स्वतंत्र है। वह किसी धर्म या जाति से बंधा हुआ नहीं है। उसका सिर्फ एक ही धर्म है और वह है मानवता का धर्म।

(ख) देशकाल को जंग लगी जंजीर क्यों कहा गया है?
उत्तर
कवि बसुधैव कुटुम्बकम में विश्वास करता है। वह किसी जाति या धर्म से बंधा नहीं है। वह स्वतंत्र है। उसके विचार स्वतंत्र हैं। उसे मानवता से प्यार है।

(ग) घट-घट में राम कहकर कवि कौन-सा भाव व्यक्त करना चाहता है?
उत्तर
कवि के कहने का तात्पर्य है कि प्यार सबसे बड़ी चीज है। उसे लोगों में बांटना श्रेष्टकर है। अगर प्यार है, तो सभी जगह भगवान है। प्यार नहीं तो कुछ भी नहीं।

(घ) ‘जियो और जीने दो’ के लिए कवि क्या बांटने को कहता है?
उत्तर
‘जियो और जीने दो’ का सिद्धांत तभी वास्तविक रूप में परिवर्तित हो सकता है, जब हम सभी मिलकर एक-दूसरे में प्यार बांटेंगे। बिना प्यार के मानवता का कोई अस्तित्व नहीं है।

(ङ) ‘मानवता का मार्ग सर्वश्रेष्ठ है।’ स्पष्ट कीजिए।
उत्तर
मानवता हम इंसानों का परम धर्म है। अगर हम एक दूसरे से मिलकर न रहें, एक-दूसरे के सुख-दुःख में शामिल न हों तो हम आदमी के रूप में जानवर हैं। अतः हमें ऐसा रास्ता अपनाना चाहिए जिस पर चलकर हम सही मायने में मानव बनें।

भाषा की बात

Koi Nahi Paraya Question Answer MP Board Class 6th प्रश्न 4.
निम्नलिखित शब्दों का शुद्ध उच्चारण कीजिए
आराध्य, भीड़, स्वीकार, मंदिर, शृंगार, स्वर्ग, सुकुमार।
उत्तर
छात्र स्वयं करें।

Koi Nahi Paraya Poem Bhavarth MP Board Class 6th प्रश्न 5.
निम्नलिखित शब्दों की शुद्ध वर्तनी लिखिए
सियाही, अभीमान, कहानीया, इनसान, शुल।
उत्तर
स्याही, अभिमान, कहानियाँ, इंसान, शूल

Koi Nahi Paraya Poem Explanation In Hindi MP Board Class 6th प्रश्न 6.
निम्नलिखित शब्दों का वाक्य में प्रयोग कीजिए
जाति-पांति, घट-घट, आराध्य, ऊँची-नीची
उत्तर
जाति-पांति-हमें जाति-पांति में विश्वास नहीं रखना चाहिए।
घट-घट-कहते हैं घट-घट में भगवान वास करते हैं। आराध्य-मीराबाई के आराध्य देव श्री कृष्ण थे
ऊँची-नीची-जीवन में हर ऊँची-नीची बातों का सामंजस्य सीखना चाहिए।

Koi Nahi Paraya Poem MP Board Class 6th प्रश्न 7.
निम्नलिखित शब्दों के विपरीतार्थी शब्द लिखिए
ऊँची, अपना, शूल, स्वीकार, शुभ, न्याय, पूर्ण।
उत्तर
ऊँची – नीची
अपना – पराया
शूल – फूल
स्वीकार – अस्वीकार
शुभ – अशुभ
न्याय – अन्याय
पूर्ण – अपूर्ण

प्रश्न 8.
उचित शब्द लगाकर खाली स्थान भरिए
1. हरीश ने गमलों में……लगवाए। (पौधा/पौधे)
2. सर्दी की…….लम्बी होती हैं। (रात/राते)
3. राजा दशरथ की तीन…….थीं। (रानी/रानियाँ)
4. इस…….में मेरी कहानी छपी है। (पुस्तक पुस्तकों)
उत्तर
1 .पौधे
2. रातें
3. रानियाँ
4. पुस्तकों

प्रश्न 9.
वाक्यों के सामने दिए गए सर्वनामों के उपयुक्त रूप लगाकर वाक्य पूरे कीजिए
1. कल…….तबियत ठीक नहीं थी। (मैं)
2. उन्होंने कहा, “ये सब…..मित्र हैं।” (हम)
3. उसने…….को बुला लिया होगा। (कोई)
4. अनुराग को बुलाओ…….बाजार भेजना है। (वह)
5. दरी को पड़ी रहने दो…….मत उठाओ। (यह)
उत्तर
1. मेरी
2. हमारे
3. किसी
4. उसे
5. उसे।

कोई नहीं पराया प्रसंग सहित व्याख्या

1. कहीं रहे, कैसे भी, मुझको प्यारा यह इंसान है,
मुझको अपनी मानवता पर बहुत-बहुत अभिमान है।
अरे नहीं देवत्व, मुझे तो भाता है मनुजत्व ही,
और छोड़ कर प्यारा नहीं स्वीकार सकल अमरत्व भी।
मुझे सुनाओ तुम न स्वर्ग-सुख की सुकुमार कहानियाँ,
मेरी धरती, सौ-सौ स्वगों से ज्यादा सुकुमार है
कोई नहीं पराया, मेरा घर संसार है।

शब्दार्थ-अभिमान = गर्व । सकल=सम्पूर्ण । सुकुमार = कोमल। पराया = दूसरा।

प्रसंग प्रस्तुत पंक्तियाँ हमारी पाठ्य पुस्तक सुगम भारती-6 में संकलित कविता ‘कोई नहीं पराया’ से ली गई हैं। इसमें कवि ने बताया है कि उसके लिए कोई पराया नहीं है।

व्याख्या-कवि कहता है कि उसे सभी इंसानों से प्यार है। उसे अपनी मानवता पर गर्व है। उसे देवत्व नहीं बल्कि मनुजत्व अच्छा लगता है। उसे केवल प्यार चाहिए। प्यार के अलावा वह किसी चीज की इच्छा नहीं रखता है। उसे स्वर्ग की अच्छी अच्छी कहानियाँ भी नहीं भाती क्योंकि उसकी धरती के आगे सैकड़ों स्वर्ग भी कुछ मायने नहीं रखते।

विशेष

  • कविता में मानवता पर विशेष बल दिया गया है।
  • शब्दों का प्रयोग सुगम और बोधगम्य है।

2. मैं सिखलाता हूँ कि जियो और जीने दो संसार को,
जितना ज्यादा बांट सको तुम, बांटो अपने प्यार को।
हंसो इस तरह, हंसे तुम्हारे साथ दलित यह धूल भी,
चलो इस तरह कुचल न जाए पग से कोई शूल भी।
सुख न तुम्हारा सुख केवल, जग का भी उसमें भाग है,
फूल डाल का पीछे, पहले उपवन का श्रृंगार है।
कोई नहीं पराया, मेरा घर सारा संसार है।

शब्दार्थ- दलित= नीचे गिर हुआ। शूल=कांटा । उपवन=बगीचा। शृंगार=शोभा।

प्रसंग-पूर्ववत्

व्याख्या-कवि कहता है कि प्यार बांटने की चीज होती है। उसे जितना चाहो बांटों। हंसो तो खुलकर ऐसे हंसो कि जमीन की धूल भी तुम्हारे साथ हंस पड़े। ऐसे चलो कि राह में कोई कांटा भी न कुचले तुम्हारे पैरों से। फूल पूरे बगीचे की शोभा बढ़ाता है। कवि के लिए सारी दुनिया ही उसका घर है। उसे सभी से प्यार है।

विशेष

  • कविता का मुख्य बिंदु है-जियो और जीने दो।
  • कविता में जिन शब्दों का प्रयोग हुआ है। वे सभी सुगम और बोधगम्य है।

MP Board Class 6th Hindi Solutions

MP Board Class 10th Hindi Vasanti Solutions Chapter 14 शबरी

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MP Board Class 10th Hindi Vasanti Solutions Chapter 14 शबरी (डॉ. प्रेम भारती)

शबरी  पाठ्य-पुस्तक के प्रश्नोत्तर

शबरी लघु-उत्तरीय प्रश्नोत्तर

Chapter 14 Hindi Class 10 Mp Board प्रश्न 1.
शबरी की कुटिया में कौन आया?
उत्तर
शबरी की कुटिया में राम-लक्ष्मण आये।

Hindi Mp Board Class 10  प्रश्न 2.
स्वागत का सुविधान से क्या आशय है?
उत्तर
स्वागत का सुविधान से आशय है-स्वागतहित हेतु उपयुक्त भौतिक संसाधन का होना।

Hindi Class 10 Mp Board प्रश्न 3.
द्विजगण क्या सुनाते हैं और क्यों?
उत्तर
द्विजगण शाखोच्चार सुनाते हैं क्योंकि उस समय वहाँ राम-लक्ष्मण उपस्थित थे।

Class 10 Hindi Chapter 14 Mp Board प्रश्न 4.
शबरी का किस भाव को देखकर श्रीराम हँस पड़े?
उत्तर
शबरी के मन की विहलता को देखकर श्रीराम हँस पड़े?

वासंती हिंदी सामान्य कक्षा 10 Pdf Mp Board प्रश्न 5.
शबरी ने राम-लक्ष्मण को खाने के लिए क्या दिए?
उत्तर
शबरी ने राम-लक्ष्मण को खाने के लिए मीठे-मीठे बेर दिए।

शबरी  दीर्घ-उत्तरीय प्रश्नोत्तर

Mp Board Class 10th Hindi प्रश्न 1.
प्रस्तुत कविता में श्रीराम की छवि का वर्णन किस रूप में किया गया है?
उत्तर
प्रस्तुत कविता में श्रीराम की सरस, सरल और भक्तवत्सल छवि का वर्णन किया गया है।

Vasanti Hindi Book Class 10 Solutions Mp Board प्रश्न 2.
राम-लक्ष्मण को अपनी कुटिया पर आया हुआ देखकर शबरी की दशा कैसी हो गई?
उत्तर
राम-लक्ष्मण को अपनी कुटिया पर आया हुआ देखकर शबरी की दशा विह्वल (गदगद) हो गई।

Mp Board Solution Class 10 प्रश्न 3.
शबरी ने श्रीराम-लक्ष्मण का सत्कार कैसे किया?
उत्तर
शबरी ने श्रीराम-लक्ष्मण का सत्कार उन्हें मीठे-मीठे बेर खिलाकर किया।

Mp Board Class 10 Hindi Solutions प्रश्न 4.
‘किंतु आज जो तृप्ति…कहा नहीं जाता।’ इस पंक्ति का केंद्रीय भाव लिखिए।
उत्तर
‘किंतु आज जो तृप्ति…कहा नहीं जाता।’
उपर्युक्त पंक्ति के द्वारा कवि ने श्रीराम की भक्तवत्सलता को चित्रित किया है। इसके द्वारा उसने यह सुस्पष्ट करना चाहा है कि श्रीराम दीनबंधु हैं। वे थोडी-सी भी भक्ति से रीझ जाते हैं।

शबरी  भाषा-अनुशीलन

Class 10th Hindi Mp Board प्रश्न 1.
निम्नलिखित शब्दों के समास विग्रह कीजिए
कमल-नयन, जड़-चेतन, कृपा-सिंधु, बनमाली।
उत्तर
शब्द – समास-विग्रह
कमल-नयन – कमल के समान नयन
जड़-चेतन – जड़ और चेतन
कृपा-सिन्धु – कृपा का सिन्धु
वनमाली – वन का माली।

Vasanti Hindi Book Class 10 Mp Board प्रश्न 2.
निम्नलिखित शब्दों के पर्यायवाची शब्द लिखिए
गगन, कमल, जननी, दृग, वसंत।
उत्तर
शब्द – पर्यायवाची शब्द
गगन – आकाश आसमान
कमल – नीरज, जलज
दृग – आँख, नेत्र
वसंत – ऋतुराज, ऋतुपति।

Mp Board Solution Class 10th Hindi प्रश्न 3.
कविता में ‘भोजन-भोजन’, ‘बेर-बेर’ जैसे पुनरुक्त शब्दों का प्रयोग हुआ है। पाठ में आए इसी प्रकार के पुनरुक्त शब्दों को छाँटिए।
उत्तर
‘पुनि-पुनि’, ‘चुन-चुन’, ‘नहीं-नहीं’, ‘युगों-युगों’, ‘खाते-खाते’ और ‘ला-ला’

प्रश्न 4.
“बेर-बेर में इन बेरों की
शबरी करता मृदुल सराह।” इन पंक्ति में बेर शब्द के कौन-कौन से अर्थ निकल रहे हैं? स्पष्ट कीजिए।
उत्तर
उपयुक्त में ‘बेर’ शब्द से दो अर्थ निकल रहे हैं

  1. बेर = एक फल, और
  2. बेर = देर।

शबरी  योग्यता-विस्तार

प्रश्न 1.
श्रीराम अपनी बन-यात्रा में सामाजिक समरसता के भाव को प्रकट करने वाले किन-किन पात्रों से मिले? खोजकर लिखिए।

प्रश्न 2. ‘शबरी-प्रसंग’ का नाट्य रूपांतरण कर विद्यालय के सांस्कृतिक कार्यक्रम में प्रस्तुत कीजिए।
उत्तर
उपर्युक्त प्रश्नों को छात्र/छात्रा अपने अध्यापक/अध्यापिका की सहायता से हल करें।

शबरी  परीक्षोपयोगी अतिरिक्त प्रश्नोत्तर अर्थग्रहण संबंधी प्रश्नोत्तर

प्रश्न 1.
‘शबरी’ कविता में कवि ने किन नयी उदभावनाओं को प्रकट किया है?
उत्तर
‘शवरी’ कविता में कविवर डॉ. प्रेम भारती की लोकप्रिय कृति ‘शबरी’ से उद्धृत है। ‘शबरी’ के प्रख्यात पौराणिक प्रसंग में कवि ने कतिपय मौलिक और एकदम नयी उद्भावनाओं को प्रकट किया है। शबरी का हृदय श्रीराम के स्वागत हेतु प्रफुल्लता से परिपूर्ण हो उठता है। कवि ने शबरी के हृदय की उदारता और वात्सल्यता को संपूर्ण वन-प्रांतर तक विस्तारित कर दिया है। उन्होंने शबरी के भीतर जागते द्वंद्व का चित्रण करते हुए उसकी स्वाभाविक आत्म-गरिमा का एक साथ चित्रण किया है।

प्रश्न 2.
शबरी का मन विहल (आत्म-विभोर) क्यों हो गया?
उत्तर
शबरी का मन विह्वल (आत्म-विभोर) हो गया। यह इसलिए उसकी कुटिया पर स्वयं राम अपने भाई लक्ष्मण के साथ आए थे। दूसरी बात यह है कि श्रीराम का रूप-सौंदर्य अनोखा था। वे साँवले थे। सोने के समान उनका शरीर चमक रहा था। उनकी आँखें कमल के समान थीं। उनके सिर पर सुंदर जटा-मुकुट था। वे धनुष-बाण और तरकश लिये हुए थे। इस प्रकार अपनी शारीरिक सुंदरता से अत्यधिक मन को मोह रहे थे।

प्रश्न 3.
‘शबरी’ कविता के माध्यम से कवि ने कौन-सा संदेश प्रकट किया है?
उत्तर
‘शबरी’ कविता के माध्यम से कवि ने यह संदेश प्रकट करना चाहा है कि यद्यपि श्रीराम के स्वागतहित शबरी के पास उपयुक्त भौतिक संसाधन नहीं है, किंतु प्रेम से भरा हृदय तो है। कवि ने इस प्रसंग में राम की आँखों में आँसुओं की छलछलाहट लाकर उसे एक नाम स्मृति विधान प्रदान किया है। श्रीराम के आह्लाद उनकी तृप्ति और प्रेम प्रबलता को कवि ने प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत किया है। इस प्रकार कवि ने प्रस्तुत कविता में शबरी और राम के मिलन के माध्यम से कवि ने वनवासी बंधुओं के साथ राम की अनुरक्ति का चित्रण कर सामाजिक समरसता के संदेश को प्रकट किया है।

प्रश्न 4.
रिक्त स्थानों की पूर्ति दिए गए विकल्पों में से उचित शब्दों के चयन से कीजिए।
1. राम ………….. से पता लगाते हुए शबरी की कुटिया पर आए। . (वनवासियों, मुनियों)
2. स्वागत के ………….. वहाँ था। (सुविधान, अविधान)
3. सूर्य आकाश का …………… लिए हुए खड़ा था। (दीप, प्रकाश)
4. द्विजगण …………… सुना रहे थे। (वेदोच्चार, शोस्त्रोच्चार)
5. श्रीराम के सिर पर …………… मुकुट थे। (स्वर्ण, जटा)
उत्तर
1. मुनियों
2. सुविधान
3. दीप
4. शाखोच्चार
5. जटा

प्रश्न 5.
दिए गए कथनों के लिए सही विकल्प का चयन कीजिए।
1. डॉ. प्रेम भारती का जन्म हुआ था
1. उत्तर-प्रदेश में
2. आन्ध्र-प्रदेश में
3. मध्य-प्रदेश में
4. हिमाचल प्रदेश में।
उत्तर
3. मध्य-प्रदेश में

2. डॉ. प्रेम भारती ने पी-एच. डी. की
1. लघु पत्रिकाओं पर
2. कहानियों पर
3. उपन्यासों पर
4. कविताओं पर।
उत्तर
1. लघु पत्रिकाओं पर

3. डॉ. प्रेम भारती इस समय सदस्य हैं
1. मध्य-प्रदेश शिक्षा मण्डल के
2. राज्य स्तरीय साधारण सभा के
3.कार्यकारिणी मध्य-प्रदेश सर्वशिक्षा अभियान के
4. उपर्युक्त दोनों के।
उत्तर
4. उपर्युक्त दोनों के।

4. डॉ. प्रेम भारती पैदा हुए थे.
1.1930 में
2. 1932 में
3. 1933 में
4. 1931 में।
उत्तर
3. 1933 में

5. डॉ. प्रेम भारती की कृतियों में स्वर है
1. समाजवादी
2. अध्यात्मवादी
3. व्यक्तिवादी
4. मानवतावादी
उत्तर

प्रश्न 6.
सही जोड़ी का मिलान किजिए।
जलते हुए वन का वंसत – आचार्य महावीर प्रसाद द्विवेदी
भगवान महावीर – तुलसीदास
साहित्य लहरी – दुष्यंत कुमार
कवितावली – डॉ. प्रेम भारती
कालिदास की समालोचना – सूरदास।
उत्तर
जलते हुए वन का वंसत – दुष्यंत कुमार
भगवान महावीर – डॉ. प्रेम भारती
साहित्य लहरी – सूरदास
कवितावली – तुलसीदास
कालिदास की समालोचना – आचार्य महावीर प्रसाद द्विवेदी

प्रश्न 7.
निम्नलिखित वाक्य सत्य हैं या असत्य? वाक्य के आगे लिखिए।
1. शबरी राम की अकचक देख रही थी।
2. राम ने शबरी के द्वारा दिए हुए राजभोग को खाया।
3. शबरी की कुटिया पर राम आये।
4. शबरी के प्रति राम की भक्तवत्सल धारा बहने लगी थी।
5. राम ने कहा कि वे इस कुटिया पर आकर आयोध्या को भूल गए हैं।
उत्तर

  1. सत्य
  2. असत्य
  3. असत्य
  4. सत्य
  5. सत्य।

प्रश्न 6.
एक शब्द में उत्तर दीजिए।
1. श्रीराम के रूप-सौंदर्य को देखकर कौन सब भूल गया था?
2. किसके फूल अलक्षित थे?
3. शबरी की कुटिया कहाँ थी?
4. राम को कुटिया का वातावरण कैसा लगा?
5. राम शबरी की बेर खाकर क्या हो गए?
उत्तर

  1. जड़-चेतन
  2. तारों के
  3. दण्डकवन में
  4. घर-सा
  5. अघा गए।

शबरी  लघु उत्तरीय प्रश्नोत्तर

प्रश्न 1.
राम शबरी की कुटिया तक कैसे आए?
उत्तर
राम शबरी की कुटिया तक मुनियों से पता लगाकर आए।’

प्रश्न 2.
शबरी को आत्मविभोर हुए देखकर राम ने क्या किया?
उत्तर
शबरी को आत्मविभोर हुए देखकर राम हँस दिए।

प्रश्न 3.
शबरी ने किस पर क्या रखी।
उत्तर
शबरी ने बेल-पत्र पर राम-लक्ष्मण के लिए थोड़े बेर रखे।

प्रश्न 4.
अन्त में श्रीराम ने शबरी से क्या कहा?
उत्तर
अंत में श्रीराम ने शबरी से कहा कि आज सचमुच में इस कुटिया पर मनुष्य के सभी प्रकार के विषाद मिट गए।

शबरी  कवि-परिचय

जीवन-परिचय-मध्य-प्रदेश के हिन्दी रचनाकारों में डॉ. प्रेम भारती अत्यधिक प्रसिद्ध हैं। आपका जन्म 14 मार्च, 1933 को मध्य-प्रदेश के (राजगढ़-व्यावरा) के खुजनेर कस्बे में हुआ था। आपने अपनी आरंभिक शिक्षा समाप्ति के बाद विक्रम विश्वविद्यालय से हिन्दी, और अर्थशास्त्र में एम.ए. और एम.एड. करने के बाद लघु पत्रिकाओं पर केंद्रित विषय पर पीएच.डी. किया है।

रचनाएँ-डॉ. प्रेम भारती की रचनाएँ निम्नलिखित हैं

‘शबरी’, ‘तुलसी के राम’, ‘वीरांगना दुर्गावती’, ‘भगवान महावीर’, ‘बालकृष्ण शर्मा ‘नवीन’ और समास भारत के आधार स्तंभ।
भावपक्ष-डॉ. प्रेमभारती का साहित्य में भावपक्ष और कलापक्ष दोनों ही समान रूप से अलंकृत-मण्डित है। जहाँ तक आपके भावपक्ष का प्रश्न है, वहाँ तक आपका साहित्य अधिक सरस और रोचक है। इस दृष्टि से आपके काव्य का भावपक्षीय विशेषताओं में मानवतावादी स्वर की प्रधानता, सामाजिक समरसता और निश्छल कर्म की चेतना है। यही नहीं उसमें राष्ट्रीय गौरव की सुंदर झाँकी दिखाई देती है।

कलापक्ष-डॉ. भारती का कलापक्ष में उनकी आत्माभिव्यक्ति को प्रस्तुत करने वाली सटीक, संयत और अनुकूल भाषा-शैली है। अपनी सहज, सरल और आत्मकथन में काव्य-मूल्यों की रक्षा करते हुए डॉ. भारती ने साहित्य के शिल्प-सौंदर्य को हृदयस्पर्शी रूप में प्रस्तुत किया है। शिल्प-सौंदर्य को पुष्ट और प्रभावशाली बनाने के लिए आए हुए बिंब, प्रतीक-योजना बहुत ही सटीक और आकर्षक हैं।

साहित्य में स्थान-डॉ. प्रेम भारती का हिंदी साहित्य के महान रचनाकारों में चर्चित स्थान है। आपके लेखन में भारतीय मूल्य तत्त्वों का समावेश है। अध्यात्म, शिक्षा तथा साहित्य के अनेक आयामों को अभिव्यक्त करने वाले डॉ. भारती ने अपने साहित्य में भारतीय संस्कृति और इतिहास के उज्ज्वल चरित्रों को अपने काव्य में प्रस्तुत किया है।

शबरी  कविता का सारांश

प्रस्तुत कविता ‘शबरी’ डॉ. प्रेम भारती की चर्चित काव्य-रचना ‘शबरी’ से ली गई है। इसमें शबरी को पौराणिक संदर्भ में प्रस्तुत करते हुए उसे नये भाव-चित्रों के माध्यम से प्रस्तुत किया गया है। कवि के अनुसार मुनियों से पता लगाते हुए श्री राय शबरी की कुटिया पर आए तो शबरी के पास उनके स्वागत के लिए उपयुक्त भौतिक साधन मौजूद नहीं थे। श्री राय के रूप-सौंदर्य को देखकर जड़-चेतन उसी में खो गए थे। सूर्य, तारे आदि उनकी आरती उतार रहे थे। द्विजगण शाखोच्चार सुना रहे थे। शबरी उन्हें चकित होकर देख रही थी। वह घबड़ा गई कि वह श्रीराम के लिए वंदना गीत क्या सुनाए। उसे इस तरह देखकर राम-लक्ष्मण हँसने लगे। फिर उसने श्रीराम के चरण को पकड़कर उन्हें बार-बार देखने लगी।

इसके बाद वह राम और लक्ष्मण को मीठे बेरों को चुन-चुनकर प्रेमपूर्वक उन्हें खाने के लिए देने लगी। फिर वह श्रीराम से कहने लगी-भगवन्! अनजाने में जो अपराध हुआ उसे क्षमा करें। आपको बेर भेंट करने की मेरी साध तो युगों-युगों से थी। श्रीराम को बेर चखने में राजभोग की तरह आनंद आ रहा था। इसलिए वे बार-बार उससे खाने के लिए बेर माँगने लगे थे। इस प्रकार राम-लक्ष्मण ने अमृत के समान शबरी के बेर को चखे। श्रीराम ने शबरी से कहा कि आज मुझे यहाँ पर बहुत बड़ीतृप्ति मिली है। इसलिए मैं यह कह रहा हूँ कि इस कुटिया पर मनुष्य को होने वाले सभी प्रकार के विषाद मिट जाएं।

शबरी  संदर्भ, प्रसंग सहित व्याख्या

1. और सत्य ही राम वहाँ पर,
पता लगाते मुनिगण से।
शबरी की कुटिया तक आये,
प्रेम रूप के मधुवन से॥

स्वागत का सुविधान वहाँ था,
स्वयं प्रकृति का उपमागार।
जड़ चेतन सब भूल गया था,
देख प्रभु का रूप-प्रसार॥

पीत पाँबड़े पड़े हुए थे,
वृक्ष के मधु बंदनवार ।
उससे चल कर ही कौशल-सुत,
आये. वे कुटिया के द्वार।

खड़ा गगन का दीपं स्वयं ही,
लिये सूर्य की ज्योति महान।
ताराओं के पुष्प अलक्षित,
धूप-आरती का भगवान।।

द्विजगण शाखोच्चार, सुनाते,
शुभागमन में रघुवर के।
शबरी अकचक देख रही थी,
आज उन्हें जी भर-भर के।

शब्दार्च-मधुवन-उद्यान, बगीचा। सुविधान-संदर व्यवस्था। उपमागार-समानता या तुलना का भण्डार । पीत-पाँवड़े, पीले पैर । कौशल-सुत-दशरथ-पुत्र । अलक्षित-अक्षात, अदृश्य।

संदर्भ-प्रस्तुत पयांश हमारी पाठ्य-पुस्तक ‘हिन्दी सामान्य 10वीं में संकलित कवि डॉ. प्रेम भारती विरचित कविता ‘शबरी’ से है।

प्रसंग-प्रस्तुत पद्यांश में कवि ने शबरी की कटिया पर श्रीराम के पहँचने और वहाँ के वातावरण का चित्र खींचते हुए कहा है कि

व्याख्या-मुनिगण से पता लगाते हुए श्रीराम शबरी की कुटिया पर आ गए। यों तो वहाँ पर उनके स्वागत की अच्छी व्यवस्था नहीं थी, फिर भी आकाश सूर्य की ज्योति को लिए हुए दीपक के समान स्वयं खड़ा था। तारों के अदृश्य फूल खिले हुए थे। धूप आरती स्वरूप थी। द्विजगण उस समय शाखोच्चार सुना रहे थे। यह सब कुछ शबरी चकित होकर देख रही थी।

विशेष-

  1. शबरी की कुटिया के आस-पास का प्रकृति-चित्रण है।
  2. सारा चित्रण मनमोहक है।

सौंदर्य-बोध पर आधारित प्रश्नोत्तर
(क) भाव-सौंदर्य

प्रश्न 1.
उपर्युक्त पयांश के भाव-सौंदर्य को स्पष्ट कीजिए।
उत्तर
उपर्युक्त पद्यांश की भाव-योजना सरल किंतु स्वाभाविक है। वन-प्रदेश के वातावरण को सटीक और अनुकूल रूप में ढालने का प्रयास प्रशंसनीय है। इस प्रकार मूल पद्यांश का भाव-सौंदर्य आकर्षक और रोचक बन गया है।

(ख) शिल्प-सौंदर्य

प्रश्न 1.
उपर्युक्त पयांश के शिल्प-सौंदर्य पर प्रकाश डालिए।
उत्तर
उपर्युक्त पद्यांश की शिल्प-योजना भावों पर आधारित है। भाषा की शब्दावली तत्सम, तद्भव और देशज शब्दों से पुष्ट हुई है। शैली वर्णनात्मक, भावात्मक और चित्रात्मक तीनों ही है। प्रतीकों का यथास्थान होना आकर्षक बन गया है।

विषय-वस्तु पर आधारित प्रश्नोत्तर

प्रश्न 1.
उपर्युक्त पद्यांश का मुख्य भाव स्पष्ट कीजिए।
उत्तर
उपर्युक्त पद्यांश के द्वारा कवि ने शबरी की कुटिया पर श्रीराम के पहुँचने के उल्लेख से भक्त, भक्ति और भगवान के.विषय में प्रकाश डालना चाहा है। इससे भगवान राम की कृपालुता को उजागर कर कवि ने अपनी भक्ति-भावना प्रकट की है।

2. स्याम स्वर्ण तन कमल नयन थे,
जटा-मुकुट सिर पर अभिराम।
धनुष-बाण तरकश को धारे,
सुंदरता के कोटि ललाम।

दीर्घ नेत्र, कर सुभाग सलोने,
हाँ ये ही हैं अवध-भुवाल ।
लेशमात्र संदेह नहीं है,
आज हुई मैं अरे निहाल।

बंदन में क्या गीत सुनाऊँ,
कहाँ आरती का सामान।
उसकी मन विहलता पा कर,
हँसे तभी सानुज भगवान।

वाणी थी अवरुद्ध प्रेम में,
परम शांत थी हर्ष विभोर।
चरण पकड़ कर निरख रही थी,
पुनि-पुनि कृपा सिंधु की ओर।।

मृगच्छला का आसन देती,
शुद्ध स्वच्छ तब दोनों को,
और भोग हित बेर भेंट को,
लगी देखने कोनों को।

शब्दार्थ-स्याम-साँवला । स्वर्ण-सोना। तन-शरीर । नयन-आँख । अभिराम-सुंदर। कोटि-करोड़। दीर्घ नेत्र-बड़ी आँखें। सुभग-सुंदर। कर-हाथ । अवध-भुवाल-अयोध्या के राजकुमार। लेशमात्र-थोड़ा-सा। विहलता-व्याकुलता। अवरुद्ध-बंद। पुनि-पुनि-फिर-फिर।

संदर्भ-पूर्ववत्।

प्रसंग-प्रस्तुत पद्यांश में कवि ने श्रीराम के अद्भुत रूप-सौंदर्य का चित्रांकन करते हुए कहा है कि

व्याख्या-श्रीराम का शरीर सोने के समान और साँवला था। उनकी आँखें कमल सी थीं, उनके सिर पर जटाओं का मुकुट शोभा दे रहा था। वे धनुष-बाण और तरकश को लिये करोड़ों सुंदरता को लजा रहे थे। उनकी आँखें बड़ी-बड़ी थीं। वे ही अयोध्या के राजकुमार हैं। उस समय शबरी यह नहीं समझ पा रही थी कि श्रीराम के स्वागत में कौन-सा गीत सुनाए। कहाँ आरती उतारे। उसे व्याकुल देखकर श्रीराम हँसने लगे। शबरी कुछ नहीं बोल पा रही थी। वह तो केवल श्रीराम के चरणों को निरख रही थी। वह उन्हें मृगछाला का आसन देकर राम और लक्ष्मण को बेर भेंट करने लगी थी।

विशेष

  1. भाषा में गति है।
  2. शैली वर्णनात्मक है।

सौंदर्य-बोध पर आधारित प्रश्नोत्तर

(क) भाव-सौंदर्य
प्रश्न 1.
उपर्युक्त पद्यांश के भाव-सौंदर्य पर प्रकाश डालिए।
उत्तर
उपर्युक्त पद्यांश की भावधारा सरस और प्रवाहयुक्त है। उसमें ओज, प्रभाव, गति, और क्रम है। श्रीराम के रूप-सौंदर्य का चित्रण आकर्षक है, तो शबरी की भक्ति की स्थिरता कम सराहनीय नहीं है।

(ख) शिल्प-सौंदर्य
प्रश्न 1.
उपर्युक्त पद्यांश का शिल्प-सौंदर्य स्पष्ट कीजिए।
उत्तर
उपर्युक्त पद्यांश की शिल्प-योजना सटीक भाषा और शैली की है। भाषा की शब्दावली में एकरूपता नहीं है, अपितु विविधता है। दूसरे शब्दों में भाषा के लिए प्रयुक्त हुए शब्द स्वरूप तत्सम, तद्भव और देशज तीनों ही हैं। शैली वर्णनात्मक और चित्रात्मक दोनों ही है।

विषय-वस्तु पर आधारित प्रश्नोत्तर

प्रश्न 1.
उपर्युक्त पद्यांश का आशय स्पष्ट कीजिए।
उत्तर
उपर्युक्त पद्यांश में कवि ने एक ओर श्रीराम की शारीरिक संदरता के अद्भुत पक्ष को रखा है, तो दूसरी ओर शबरी की उनके प्रति भक्ति-भावना को दर्शाया है। ये दोनों ही पक्ष बड़े ही सटीक और उपयुक्त रूप में हैं। यही कवि का लक्ष्य है, जिसमें उसे सफलता मिली है।

3. उनसे चुन चुन कर जो मीठे
बेर नित्य वह लाई थी,
बड़े प्रेम से उनकों देने,
मन ही मन ललचाई थी।

कभी सोचती राज-भोग को,
किंतु अरे लेते हैं वे ।
नहीं-नहीं बनवासी होकर,
कंद मूल लेते हैं वे॥

अरे बेर में बेर न होवे,
स्वामी को थोड़ा अवकाश।
शीघ्र चलूँ मैं कुटिया में से,
आतुरता में देखे पास।

कहने लगी-‘क्षमा हो भगवान,
हुआ आगम में जो अपराध।
बेर भेंट को भोजन लाई,
युगों-युगों से मेरी साध’।

केल-पत्र पर दोनों को ही,
थोड़े उसने बेर रखे।
भक्त बछल ने खूब प्रेम से,
तभी उन्हें सानंद चखे॥

शब्दार्व-नित्य-रोज। आतुरता-उत्सुकता संदर्भ-पूर्ववत्।

प्रसंग-प्रस्तुत पद्यांश में कवि ने शबरी की श्रीराम के प्रति प्रदर्शित भक्ति-भावना का चित्र खींचते हुए कहा है कि

व्याख्या-शबरी ने चुन-चुनकर मीठी-मीठी बेर श्रीराम को देने के लिए मन-ही-मन खुश होने लगी। वह यह सोचती और प्रयास करती कि श्रीराम राज-भोग को लेते रहे हैं तो वनवासी होकर कंदमूल को भी ले लेते हैं। इसलिए उन्हें बेर मिलने में कोई देर नहीं होनी चाहिए। यही सोच-समझकर वह अपनी कुटिया में आकर श्री राम से कहने लगी-भगवन् ! मुझसे अनजाने में जो अपराध हुआ है, उसे आप क्षमा कर दें। मैंने अपने युगों की साध को पूरा करने के लिए आपको ये बेर भेंट की। इस प्रकार कहकर शबरी ने केले के पत्ते पर राम-लक्ष्मण को थोड़ी-सी बेर रख दी। भक्तवत्सल भगवान् राम ने उन्हें बड़े आनंद के साथ खाया।

विशेष-

  1. शबरी की भक्ति भावना पर सीधा प्रकाश है।
  2. श्रीराम की भक्तवत्सलता को सामने लाया गया है।

सौंदर्य-बोध पर आधारित प्रश्नोत्तर

(क) भाव-सौंदर्य
प्रश्न 1.
उपर्युक्त पद्यांश के भाव-सौंदर्य पर प्रकाश डालिए।
उत्तर
उपर्युक्त पद्यांश की भावधारा सरस और स्वाभाविक है। शबरी की भक्तिभावना को इस दृष्टि से देखा जा सकता है। संपूर्ण मन को छू लेने वाले हैं, तो हृदय को जगा देने वाले भी हैं।

(ख) शिल्प-सौंदर्य
प्रश्न 1.
उपर्युक्त पयांश का शिल्प-सौंदर्य स्पष्ट कीजिए।
उत्तर
उपर्युक्त पद्यांश का शिल्प-सौंदर्य सहज बिंबों, प्रतीकों व योजनाओं पर आधारित होने का फलस्वरूप मन को छू रहा है। भक्ति रस का सुंदर संचार है जिसे तुकांत शब्दावली से पुष्ट करने का प्रयास किया गया है।

विषय-वस्तु पर आधारित प्रश्नोत्तर

प्रश्न 1.
उपर्युक्त पयांश का प्रतिपाय लिखिए।
उत्तर
उपर्युक्त पद्यांश में शबरी की भक्तिभावना को कवि ने समर्पित रूप में चित्रित किया है। दूसरे श्रीराम की भक्त-वत्सलता को आदर्शस्वरूप में अंकित किया गया है। कवि के ये दोनों प्रयास प्रेरक रूप में हैं, जो कवि का मुख्य अभिप्राय कहा जा सकता है।

4. आज उन्हें कुछ वर्ष बाद पुनि,
माता की सुधि घिर आई।
प्रेममयी जननी ही मानों,
भोजन ले कानन आई।

परम स्वाद आनंद उन्हें जो
राज-भोग में मिलता था।
उससे भी बढ़कर बेरों में,
स्वयं रसाम्बुज खिलता था।

स्मृति-बादल प्रेम अश्रु में,
प्रकट हुए दृग में आ कर!
शबरी काँप उठी यह देख
पूछ उसी हो भय बाहर।

‘क्या अच्छा हे नाथ न लगता,
बेर आप को यह वन का।’
‘चिंतित मत हो माता शबरी,
यह तो है जीवन तन का॥

‘फिर क्यों नाथ अश्रु को लाये,’
हँस कर कहते रघुराई।
‘तेरे बेरों के सुस्वादु से,
याद मुझे माँ की आई।

शब्दार्य-सुधि-याद। जननी-माता। कानन-जंगल। स्मृति-याद । दृग-आँख। अश्रु-आँसू।

संदर्भ-पूर्ववत्।

प्रसंग-प्रस्तुत पद्यांश में कवि ने श्रीराम का शबरी द्वारा दी गई बेर को आनंदपूर्वक खाने का उल्लेख करते हुए कहा है कि

व्याख्या-श्रीराम को कुछ वर्षों बाद अपनी माता की याद ताजी हो आई। उस प्रेममयी माँ की ही याद ने मानो भोजन लेकर जंगल में आ गई। शबरी द्वारा दी गई बेरों को खाते हुए श्रीराम को राज-भोग के समान सुख और आनंद आ रहा था। इससे उनके प्रेमाश्रु छलकने लगे थे। उन्हें देखकर शबरी भयभीत हो गई थी। उसने श्रीराम से कहा कि क्या यह अच्छा होता कि आपका वनवास जल्दी ही समाप्त हो जाता। इसे सुनकर श्रीराम ने उसे संतुष्ट और निश्चिंत करते हुए कहा कि यह चिंतित न होवे; क्योंकि यही जीवन तन की स्थिति होती है। फिर उन्होंने कहा कि उसके सुस्वादिष्ट बेरों को खाने से उन्हें अपनी माता द्वारा राजभोग खिलाने की याद ताजी हो आई।

विशेष-

  1. श्रीराम के सहज और मधुर स्वभाव का चित्रण है।
  2. भाषा-शैली बोधगम्य है।

सौंदर्य-बोध पर आधारित प्रश्नोत्तर

(क) भाव-सौंदर्य
प्रश्न 1.
उपर्युक्त पयांश के भाव-सौंदर्य को स्पष्ट कीजिए।
उत्तर
उपर्युक्त पद्यांश की भाव-रूपरेखा सहज और बोधगम्य है। भाव-धारा में न केवल गति है, अपितु क्रमबद्धता भी है। ये भाव स्वाभाविक हैं। इसके साथ ही चित्ताकर्षक और मन को मोह लेने वाले हैं।

(ख) शिल्प-सौंदर्य
प्रश्न 1.
उपर्युक्त पयांश का शिल्प-सौंदर्य पर प्रकाश डालिए।
उत्तर
उपर्युक्त पद्यांश में प्रयुक्त हुई भाषा अधिक सरल और सपाट है। सामाजिक और अलंकृत शब्दावली इसके विशेष आकर्षण हैं। लय और संगीत का पुट देकर भक्तिरस में प्रवाहित करने का कवि प्रयास प्रशंसनीय है।

विषय-वस्तु पर आधारित प्रश्नोत्तर

प्रश्न 1.
उपर्युक्त पयांश का आशय स्पष्ट कीजिए।
उत्तर
उपर्युक्त पद्यांश के द्वारा कवि ने श्रीराम के सहज स्वभाव का चित्रण आकर्षक रूप में किया है। उनके स्वभाव को कवि ने विश्वसनीय रूप में प्रस्तुत किया है। इसके साथ ही कवि ने शबरी की भक्ति-भावना को भी कवि ने सहज ही रूप दिया है। शबरी की अनन्य भक्ति-भावना से श्रीराम की भक्तवत्सलता को छलकाना मुख्य रूप से कवि का यह प्रयास सफल कहा जा सकता है।

5. भोजन-भोजन सभी एक है,
किंतु वही है वर भोजन।
जहाँ प्रेम की धारा बहती,
और शांति का आयोजन।।

बेर-बेर मैं इन बेरों की,
शबरी करता मृदुल सराह।
और बेर मुझको दो सत्वर,
खाते-खाते बढ़ती चाह॥

इस कुटिया के द्वारा सभी में,
राज मार्ग को भूला हूँ।
गृह-सा वातावरण देखकर,
नववसंत सा फूला हूँ॥

बेर-बेर देती है शबरी,
बेर-बेर ही उनको बेर।
तो भी रघुवर बेर-बेर ही,
कहते हैं लाने को बेर॥

वह भी राघव को ला-ला कर,
खिला रही थी उन्हें हुलास ।
वन माली की सेवा करती,
पूर्ण भक्ति का पा विश्वास।

शब्दार्थ-वर-श्रेष्ठ। आयोजन-प्रबंध। मृदुल-कोमल। सराह-सराहना। सत्वर-निरंतर। चाह-इच्छा। राघव-श्रीराम।

संदर्भ-पूर्ववत्।

प्रसंग-प्रस्तुत पद्यांश में कवि ने शबरी द्वारा श्रीराम को किस प्रकार बेर खिलायी जा रही थी, इसका चित्र इस प्रकार खींचते हुए कहा है कि

व्याख्या-यों तो भोजन तो भोजन होता है। लेकिन कौन-सा भोजन श्रेष्ठ है। इसे यों कहा जा सकता है कि जिस भोजन में प्रेम की धारा बहती है और जहाँ शांति का आयोजन होता है। वही भोजन श्रेष्ठ है। इसलिए शबरी द्वारा दी जा रही प्रेमरसीले बेरों को प्रशंसा करते श्रीराम चख रहे थे। उन्हें खाने से उनकी चाह बढ़ रही थी। वे इस प्रकार शबरी की कुटिया के द्वार के सामने सभी राजमार्ग को भूल चुके थे। उन्हें तो वहाँ का वातावरण घर के वातावरण की तरह ही नए वसंत के समान मन को छूने वाला लग रहा था। उन्हें इस प्रकार देखकर शबरी बार-बार बेर चखने के लिए दे रही थी। उधर श्रीराम उन्हें बहुत जल्दी-जल्दी चख-चखकर और बेर लाने के लिए कहने लगे थे। उनके आदेश के अनुसार शबरी उन्हें बड़े ही प्रेमपूर्वक बेर लाकर खिला रही थी। इस प्रकार वह श्रीराम के प्रति अपनी सच्ची भक्ति-भावना समर्पित कर रही थी।

विशेष

  1. श्रीराम की भक्तवत्सलता का स्पष्ट चित्रण है।
  2. भाषा-शैली वर्णनात्मक और चित्रात्मक दोनों ही है।

सौंदर्य-बोध पर आधारित प्रश्नोत्तर

(क) भाव-सौंदर्य

प्रश्न 1.
उपर्युक्त पयांश के भाव-सौंदर्य पर प्रकाश डालिए।
उत्तर
उपर्युक्त पद्यांश की भाव-धारा सहज रूप में है। श्रीराम की भक्त-वत्सलता का जहाँ निखरा हुआ रूप यहाँ प्रस्तुत हुआ है। वहीं शबरी की अनन्य और समर्पित भक्तिधारा पूरे प्रवाह में है। इस प्रकार ये दोनों चित्र मन को गदगद कर रहे हैं।

(ख) शिल्प-सौंदर्य

प्रश्न 1.
उपर्युक्त पयांश का शिल्प-सौंदर्य को स्पष्ट कीजिए।
उत्तर
उपर्युक्त पद्यांश का शिल्प-सौंदर्य तत्सम, तद्भव और देशज शब्दों से निर्मित भाषा और भावात्मक-चित्रण शैली से मण्डित है। पुनरुक्ति प्रकाश अलंकार और उपमा अलंकार के योग आकर्षक हैं। भक्ति रस से पूरा पद्यांश उमड़ रहा है।

विषय-वस्तु पर आधारित प्रश्नोत्तर

प्रश्न 1.
उपर्युक्त पद्यांश का मुख्य भाव स्पष्ट कीजिए।
उत्तर
उपर्युक्त पद्यांश का मुख्य भाव श्रीराम की भक्तवत्सलता और शबरी की समर्पित भक्ति-भावना को प्रकट करने का है। इसे कवि ने अपनी विशेषता का परिचय देते हुए प्रस्तुत किया है। कवि की यह प्रस्तुति प्रेरक रूप में है।

6. तभी लखन से बोले भ्राता,
“लेहु बेर यह मीठा चाख ।
लो यह है उससे भी अच्छा,”
पुनः बन्यु को देते, भाख॥

दोनों ने ही सुधा समाने,
खाये बेर उदर भर के।
रामचंद्र तब शबरी से यों,
बोले मुदित बदन करके।।

“मुनियों के आश्रम होता मैं,
दण्डक वन में आया हूँ।
अमित भाँति के सत्कारों से,
मैं परितृप्त अपाया हूँ”।

किंतु आज जो तृप्ति यहाँ पर,
मुझे मिली है, हे! माता।
नयन मौन हैं, कण्ठ अलेखा,
कुछ भी कहा नहीं जाता।

देकर उसे प्रेरक बनाने का प्रयास किया है। इसके लिए कवि ने भाव और शिल्प के सौंदर्य को ऊँचाई देना उपयुक्त समझा है। हम देखते हैं कि कवि का यह प्रयास सफल और प्रभावशाली है।

MP Board Class 8th Hindi Sugam Bharti Solutions Chapter 16 साँची

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MP Board Class 8th Hindi Sugam Bharti Solution Chapter 16 साँची

प्रश्न अभ्यास
अनुभव विस्तार

Class 8 Hindi Chapter 16 Mp Board प्रश्न 1.
वस्तुनिष्ठ प्रश्न
(क) सही जोड़ी बनाइए
सुगम भारती क्लास 8 MP Board
उत्तर
(अ) 4, (ब) 1, (स) 2, (द) 3

(ख) सही विकल्प चुनकर रिक्त स्थान की पूर्ति कीजिए
(अ) साँची अपने ……………….के लिए विश्व प्रसिद्ध है। (आश्रम, बौद्ध स्तूप)
(ब) साँची ……………….जिले में स्थित है।(भोपाल, रायसेन)
(स) स्तूप क्रमांक 3 में भगवान बुद्ध के प्रमुख शिष्यों के अवशेष रखे गए थे। (दो, चार)
(द) साँची के निकट का सुविधा एक प्रमुख रेलवे स्टेशन ……………है। (इटारसी, विदिशा)
उत्तर
(अ) बौद्ध,
(ब) रायसेन
(स) दो
(द) विदिशा।

अति लघु उत्तरीय प्रश्नोत्तर

Mp Board Class 8 Hindi Chapter 16 प्रश्न 2.
(क) साँची कहाँ पर स्थित है?
(ब) बौद्ध धर्म के प्रवर्तक कौन हैं?
(स) साँची के स्तूप का आकार किस प्रकार का है? ।
(द) बौद्ध धर्म विश्व के किन-किन देशों में प्रचलित है?
(ई) साँची क्यों प्रसिद्ध है?
उत्तर
(अ) साँची मध्य-प्रदेश के रायसेन जिला में स्थित है।
(ब) बौद्ध धर्म के प्रर्वत्तक महात्मा बुद्ध हैं।
(स) साँची के स्तूप का आकार गुम्बदनुमा है।
(द) बौद्ध धर्म भारत, चीन, जापान, मंगोलिया, तिब्बत, म्यांमार, कम्बोडिया आदि देशों में प्रचलित है।
(इ) साँची अपने स्तूपों, विहारों, मंदिरों और तोरणद्वारों के लिए प्रसिद्ध है।

लघु उत्तरीय प्रश्नोत्तर

Sugam Bharti Class 8 MP Board प्रश्न 3.
(अ)
साँची के स्तूपों का मुख्य आकर्षण क्या
उत्तर
साँची के स्तूपों का मुख्य आकर्षण है कि यह एक विशाल अर्द्ध गोलाकार गुम्बद है। इसके चारों ओर अलंकृत परिक्रमा पथ है जिसमें प्रवेश के लिए चार तोरण द्वार बनाए गए हैं। ये तोरण द्वार कला और स्थापत्य के उत्कृष्ट नमूने हैं। इन पर भगवान बुद्ध के जीवन को जीवन को प्रतीक रूप में उत्कीर्ण किया गया है। इसके अलावा कई जातक कथाएँ भी उत्कीर्ण हैं।

(ब)
साँची के संग्रहालय में क्या संग्रहीत हैं?
उत्तर
संग्रहालय में अनेक पुरातत्त्व महत्त्व की वस्तुएँ प्रदर्शित की गई हैं। जो साँची तथा इसके आस-पास के स्थानों की खुदाई में मिली हैं। यहाँ अनेक मूर्तियों तथा मंदिरों के भग्नावशेष व कलाकृतियाँ हैं। इनमें अशोक स्तंभ का सिंह चिन तथा बौद्ध भिक्षुओं द्वारा उपयोग किये जाने वाले पात्र देखते ही बनते हैं। यह साँची के उत्खनन में प्राप्त हुए हैं। संग्रहालय में साँची और उसके पास स्थित सतधारा की खुदाई और खोज के समय के कई चित्र लगे हैं। इनसे पता चलता है कि इन स्तूपों को संरक्षित रखने में कितना परिश्रम और कौशल लगा है।

(स)
स्तूप क्रमांक 1 की क्या विशेषताएँ हैं?
उत्तर
स्तूप क्रमांक 1 विश्व प्रसिद्ध स्तूप है। इसमें प्रवेश के लिए जो चार तोरण द्वार बनाए गए हैं, वे कला और स्थापस्थ के श्रेष्ठ उदाहरण हैं। यही नहीं इसके चारों ओर अलंकृत परिक्रमा-पथ है।

(द)
साँची के इतिहास से जुड़ी प्रसिद्ध किंवदंतियाँ कौन-कौन-सी हैं?
उत्तर
साँची के इतिहास से जुड़ी प्रसिद्ध किंवदंतियाँ दो हैं

  • युवराज वसंतारा ने धर्म और दया के लिए अपना सर्वस्व दान कर दिया था।
  • भगवान बुद्ध ने अपने पूर्व जन्म में वानरराज के रूप में अपने दल की रक्षा के लिए अपने प्राणों का बलिदान कर दिया था।

(ई)
साँची के स्तूप का संक्षेप में वर्णन कीजिए।
उत्तर
साँची का स्तूप विश्व प्रसिद्ध है। यह विश्व के धरोहरों में से एक है। यह अपने स्तूपों, विहारों, भंदिरों, स्तंभों तथा तोरणद्वारों के लिए प्रसिद्ध है।

भाषा की बात

Mp Board Solution Class 8 Hindi Chapter 16 प्रश्न 1.
बोलिए और लिखिएकम्बोडिया, संग्रहालय, भग्नावशेष, कलाकृतियाँ, उत्खनन,
मंजूषा।
उत्तर
कम्बोडिया, संग्रहालय, भग्नावशेष, कलाकृतियाँ, उत्खनन, मंजूषा।

Class 8 Hindi Sugam Bharti MP Board प्रश्न 2.
निम्नलिखित में से सही शब्द पहचानकर खाली स्थान में लिखिए
पर्यटक, पयर्टक, परयटक ……..
मंजूसा, मंजुशा, मंजूषा ……………
विहार, बिहार, बीहार ………………
उत्कीरन, उत्कीर्ण, उतकिर्ण ………….
उत्तर-
पर्यटक, मंजूषा, विहार, उत्कीर्ण।

Hindi Sugam Bharti Class 8 Solutions MP Board प्रश्न 3.
‘सतधारा’ शब्द में ‘सत’ के साथ ‘धारा’ लगाकर नया शब्द ‘सतधारा’ बना है। इसी प्रकार ‘धारा’ लगाकर निम्नलिखित शब्दों से नए शब्द बनाइए
Hindi Class 8 Sugam Bharti MP Board
उत्तर

Mp Board Class 8th Hindi Solution

प्रमुख गणेशों की संदर्भ-प्रसंग सहित व्याख्याएँ

1. बौद्ध धर्म भारत का ही नहीं बल्कि संसार के अनेक देशों चीन, जापान, मंगोलिया, तिब्बत, नेपाल, म्यांमार, कम्बोडिया आदि का प्रमुख धर्म है। साँची का बौद्ध स्तूप विश्व धरोहरों में से एक है। बौद्धधर्म के प्रवक भगवान गौतम बुद्ध हैं। साँची प्राचीन काल में बौद्ध धर्म का प्रमुख केन्द्र था। साँची अपने स्तूपों, बिहारों, मंदिरों, स्तंभों तथा तोरणद्वारों के लिए प्रसिद्ध

शब्दार्थ
स्तूप-शिखर ।

प्रवर्तक
स्थापक। तोरणद्वारों-किसी घर या नगर का बाहरी द्वार, जिस पर सजावट की गई हो।

संदर्भ – प्रस्तुत पंक्तियाँ हमारी पाठ्य-पुस्तक ‘सुगम भारती’ (हिंदी सामान्य) भाग-8 के पाठ-16 ‘साँची’ से ली गई हैं।

प्रसंग – एस्तुत पंक्तियों में लेखक ने बौद्ध धर्म का महत्त्व बतलाते हुए कहा है कि

Sugam Bharti Class 8 Hindi MP Board व्याख्या
बौद्ध धर्म न केवल हमारे ही देश का एक महान और प्रमुख धर्म है, अपितु यह तो संसार के कई देशों का भी एक प्रमुख और बड़ा धर्म है। इस प्रकार के देश चीन, जापान, मंगालिया, तिब्बत, नेपाल, म्यांमार, कम्बोडिया आदि अधिक उल्लेखनीय हैं। संसार के बौद्ध स्तूपों में साँची का बौद्ध स्तूप भी बहुत प्रसिद्ध है। यह हम सभी जानते हैं कि महात्मा गौतम युद्ध ही बौद्ध धर्म के प्रर्वत्तक हैं। साँची बहुत पुराने सार से की बोद्ध धर्म में सुख बंन्द्रों में से एक था। वह अपने शिखरों, हारों, मंदिरों ओर स्तम्भों एवं तोरण द्वारा के लिए प्रसिद्ध है।

MP Board Class 10th Sanskrit निबन्ध-लेखन प्रकरण

MP Board Class 10th Sanskrit निबन्ध-लेखन प्रकरण

१. सदाचारः
(आचारः परमो धर्म:/आचारस्य महत्त्वम्)

अस्माकं भारतीया संस्कृतिः आचार-प्रधाना अस्ति। आचारः द्विविधः भवति-दुराचारः सदाचारः च। सताम् आचारः सदाचारः इत्युच्यते। सज्जनाः विद्वांसो च यथा आचरन्ति तथैव आचरणं। सदाचारो भवति। सज्जनाः स्वकीयानि इन्द्रियाणि वशे कृत्वा सर्वैः सह शिष्टतापूर्वकं व्यवहारं कुर्वन्ति। ते सत्यं वदन्ति, मातुः पितुः गुरुजनां वृद्धानां ज्येष्ठानां च आदरं कुर्वन्ति, तेषाम् आज्ञां पालयन्ति, सत्कर्मणि प्रवृत्ता भवन्ति।

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जनस्य समाजस्य राष्ट्रस्य च उन्नत्यै सदाचारस्य महती आवश्यकता वर्तते। सदाचारस्याभ्यासो बाल्यकालादेव भवति। सदाचारेण बुद्धिः वर्तते नरः धार्मिकः, शिष्टो, विनीतो, बुद्धिमान् च भवति। संसारे सदाचारस्यैव महत्त्वं दृश्यते। ये सदाचारिणः भवन्ति, ते एव सर्वत्र आदरं लभन्ते। यस्मिन् देशे जनाः सदाचारिणो भवन्ति तस्यैव सर्वतः उन्नतिर्भवति। अतएव महार्षिभिः “आचारः परमो धर्मः” इत्युच्यते। सदाचारी जनः परदारेषुमातृवत् परधनेषु लोष्ठवत्, सर्वभूतेषु च आत्मवत् पश्यति। सदाचारीजनस्य शीलम् एव परमं भूषणम् अस्ति। हिन्दी अनुवाद- सदाचार (आचार परम धर्म है/आचार का महत्व) हमारी भारतीय संस्कृति आचार (व्यवहार) प्रधान है। आचार दो प्रकार का होता है-दुराचार और सदाचार। सज्जनों का आचार, सदाचार’ कहा जाता है। सज्जन और विद्वान जैसा व्यवहार करते हैं वैसा ही आचरण सदाचार होता है। सज्जन अपनी इन्द्रियों को वश में करके सभी के साथ शिष्टतापूर्वक व्यवहार करते हैं। वे सत्य बोलते हैं, माता, पिता, गुरुजन, वृद्धों और बड़ों का आदर करते हैं, उनकी आज्ञा का पालन करते हैं, अच्छे कार्यों में लगते हैं। – व्यक्ति, समाज और राष्ट्र की उन्नति के लिए सदाचार की बहुत आवश्यकता है। सदाचार की आदत बचपन से ही होती है। सदाचार से बुद्धि बढ़ती है, मनुष्य धार्मिक, सभ्य, नम्र और बुद्धिमान होता है। संसार में सदाचार का ही महत्व दिखाई देता है। जो सदाचारी होते हैं, वे ही सब जगह सम्मान पाते हैं। जिस देश में लोग सदाचारी होते हैं उसकी ही सब प्रकार से उन्नति होती है। इसलिए ही महर्षियों के द्वारा “आचार परम धर्म है” यह कहा गया है। सदाचारी व्यक्ति दूसरे की स्त्रियों को माता के समान, दूसरे के धन को मिट्टी के ढेले के समान और सभी प्राणियों को अपने समान देखता है। सदाचारी व्यक्ति का व्यवहार ही सबसे बड़ा आभूषण होता है।

Sanskrit Nibandh 10th Class MP Board २. महाकवि कालिदासः
(मम प्रियः कविः)

महाकविः कालिदासः मम प्रियः कविः अस्ति। सः संस्कृत भाषायाः श्रेष्ठतमः कविः अस्ति। यादृशः रस-प्रवाहः कालिदासस्य काव्येषु विद्यते तादृशः अन्यत्र नास्ति। सः कविकुलशिरोमणिः अस्ति। कालिदासेन त्राणीनाटकानि, (मालविकाग्निमित्रम्, विक्रमोर्वशीयम्, अभिज्ञानशाकुन्तलम् च) द्वे महाकाव्ये (रघुवंशम् कुमारसम्भव च) द्वि गीतिकाव्ये (मेघदूतम् ऋतुसंहारम् च) च रचितानि।

कालिदासस्य लोकप्रियतायाः कारणं तस्य प्रसादगुणयुक्ता ललिता शैली अस्ति। कालिदासस्य प्रकृतिचित्रणं अतीवरम्यम् अस्ति। चरित्रचित्रणे कालिदासः अतीव पटुः अस्ति।

कालिदासः महाराजविक्रमादित्यस्य सभाकविः आसीत्। अनुमीयते यत्तस्य जन्मभूमिः उज्जीयनी आसीत्। मेघदूते उज्जयिन्याः भव्यं वर्णनं विद्यते। कालिदासस्य कृतिषु कृत्रिमतायाः अभावः अस्ति। कालिदासस्य उपमा प्रयोगः अपूर्वः अतः साधूच्यते-‘उपमा कालिदासस्य।’ हिन्दी अनुवाद- महाकवि कालिदास (मेरा प्रिय कवि) महाकवि कालिदास मेरे प्रिय कवि हैं। वह संस्कृत भाषा के श्रेष्ठतम् कवि हैं। जैसा रस का प्रवाह कालिदास के काव्यों में है वैसा दूसरे स्थान पर नहीं है। यह कवियों के कुल के शिरोमणि हैं। कालिदास ने तीन नाटक (मालविकाग्निमित्र, विक्रमोर्वशीय और अभिज्ञानशाकुन्तलम्) दो महाकाव्य (रघुवंश और कुमारसम्भव) और दो गीतिकाव्य रचे हैं। ___कालिदास की लोकप्रियता का कारण उनकी प्रसादगुण युक्त ललित शैली है। कालिदास का प्रकृति चित्रण बहुत सुन्दर है। चरित्र-चित्रण में कालिदास बहुत चतुर हैं। .. … कालिदास महाराज विक्रमादित्य के सभाकवि थे। माना जाता है कि इनकी जन्मभूमि उज्जयिनी थी। मेघदूत में उज्जयिनी का भव्य वर्णन है। कालिदास की रचनाओं में कृत्रिमता का अभाव है। कालिदास की उपमा का प्रयोग अनोखा है। इसलिए ठीक ही कहा गया है कि-“उपमा कालिदास की (सर्वश्रेष्ठ है)।”

मम प्रिय कवि कालिदास संस्कृत निबंध MP Board ३. विद्या-महिमा
(विद्याधनं सर्वधन-प्रधानम्/विद्या ददाति विनयम्/विद्या विहीनः – पशुः/विद्या सर्वस्य भूषणम्)

कस्यापि विषयस्य सम्यग् ज्ञानं यया भवति या विद्या कथ्यते।

अतः विद्यया एव मनुष्यः सत्य-असत्यं च जानाति। विद्या विनयं ददाति। पुरुषः विनयात् पात्रताम् आयाति। पात्रतया सः धनं प्राप्नोति, धनेन धर्म, धर्मेण च सुखं लभते। एतेन कारणेन सुखस्य आधारः विद्या एव अस्ति। . विद्या धनंव्यये कृते वृद्धिमायाति परन्तु संचये कृते क्षयमायाति। अतः विद्या अपूर्वं धनमस्ति। इदम् धनं चौरः हत्तुं न शक्नोति भ्राता विभाजयितुं न समर्थोऽअस्ति। विद्यावान् पुरुषः सर्वत्र उच्च स्थान प्राप्नोति। राजा केवलं स्वदेशेपूज्यते परन्तु विद्वान् सर्वत्र पूज्यते। विद्या अज्ञानस्य तिमिरं दूरीकरोति ज्ञानस्य प्रकाशं प्रसारयति च।

विद्या एव जगति मनुष्यस्य उन्नतिं करोति। विद्या एव कीर्तिं धनं च ददाति। विद्या वस्तुतः कल्पलता इव विद्यते। विदेशगमने विद्या परमसहायिका भवति। यस्य समीपे विद्या नास्ति सः नेत्रयुक्तः अपि अन्धः एव। विद्या माता इव रक्षति पिता इव हिते नियुङ्क्ते। हिन्दी अनुवाद- विद्या-महिमा (विद्या धन सभी धनों में प्रधान है/विद्या विनय देती है/विद्यो से विहीन पशु है/विद्या सभी का आभूषण है) – किसी भी विषय का उचित ज्ञान विद्या से होता है। अतः विद्या से ही मनुष्य सत्य और असत्य को जानता है। विद्या विनय देती है। पुरुष में विनय से पात्रता आती है। पात्रता से वह धन पाता है, धन से धर्म और धर्म से सुख प्राप्त करता है। इस कारण से सुख का आधार विद्या ही है। – विद्या धन व्यय करने पर वृद्धि को प्राप्त होता है किन्तु संचय करने पर कम होता जाता है। इसलिए विद्या धन अद्भुत धन है। इस धन को चोर चुरा नहीं सकता और भाई विभाजित नहीं कर सकता। विद्यावान् पुरुष सर्वत्र ऊँचा स्थान प्राप्त करता है। राजा केवल अपने देश में ही पूजा जाता है, किन्तु विद्वान् की पूजा (आदर) सर्वत्र होती है। विद्या अज्ञान के अन्धकार को दूर करती है तथा ज्ञान का प्रकाश. फैलाती है।

विद्या ही संसार में मनुष्य की उन्नति करती है। विद्या ही कीर्ति और धन देती है। विद्या वास्तव में कल्पलता के समान है। विदेश जाने पर विद्या परम सहायिका है। जिसके पास विद्या नहीं है वह आँखों वाला होता हुआ भी अन्धा ही है। विद्या माता के समान रक्षा करती है और पिता के समान हित के कार्यों में लगाती है।

मम प्रिय कवी संस्कृत निबंध MP Board ४. दीपावलिः

भारतवर्षे अनेके उत्सवाः भवन्ति। तेषु उत्सवेषु दीपावलिः एकः मुख्यः धार्मिकः उत्सवः अस्ति। दीपावलिः कार्तिकमासे कृष्णपक्षे अमावस्यायां भवति। मनुष्याः गृहाणि सुधया अङ्गनं च गोमयेन लिम्पन्ति। जनाः रात्रौ तैलैः वर्तिकाभिः च पूर्णान् दीपान् प्रज्वालयन्ति। ते धनदेव्याः लक्ष्म्याः पूजनं कुर्वन्ति। दीपैः नगरं प्रकाशितं भवति। बालाः बहुप्रकारकैः सफोटकैः मनोविनोदयन्ति। दीपावलीसमये वणिजोऽपि स्वान् आपणान् बहुविधं सज्जयन्ति। विद्युद्दीपकानां प्रकाशः आपणेषु नितरां शोभते। नानाविधानि वस्तूनि क्रयविक्रयार्थं प्रसारितानि भवन्ति। अयं कालः नात्युष्णो नाप्यतिशीतो भवति। तेन मोदन्तेऽस्मिन् महोत्सवे नराः नार्यश्च।

Anuched Lekhan In Sanskrit For Class 10 MP Board हिन्दी अनुवाद- दीपावली
भारतवर्ष में अनेकों उत्सव होते हैं। उन उत्सवों में दीपावली एक मुख्य धार्मिक उत्सव है। दीपावली कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष में अमावस्या को होती है। मनुष्य घरों को सफेदी से और आँगन को गोबर से लीपते हैं। लोग रात में तेल और बत्तियों से भरे दीपकों को जलाते हैं। वे धन की देवी लक्ष्मी का पूजन करते हैं। दीपकों के द्वारा नगर प्रकाशित होता है। बच्चे अनेक प्रकार पटाखों से मनोरंजन करते हैं। दीपावली के समय व्यापारी भी अपनी दुकानों को अनेक प्रकार से सजाते हैं। बिजली के बल्बों की रोशनी बाजारों में बहुत शोभित होती है। अनेकों प्रकार की वस्तुएँ क्रय-विक्रय के लिए सजी होती हैं। यह समय न अधिक गर्म और न अधिक ठण्डा होता है। उससे स्त्री-पुरुष इस उत्सव में प्रसन्न होते हैं।

Sanskrit Nibandh Class 10th MP Board ५. अस्माकं देशः

भारतवर्षः अस्माकं देशः अस्ति। अस्य भूमिः विविधरत्नानां जननी अस्ति। अस्य प्राकृतिकी शोभा अनुपमा अस्ति। हिमालयः अस्य प्रहरी अस्ति। एषः उत्तरे मुकुटमणिः इव शोभते। सागरः। अस्य चरणौ प्रक्षालयति। अनेकाः पवित्रतमाः नद्यः अत्र वहन्ति। गङ्गा, गोदावरी, सरस्वती, यमुना प्रभृतयः नद्यः अस्य शोभां वर्द्धयति। अथं देशः सर्वासां विद्यानां केन्द्रम् अस्ति। अयं अनेकप्रदेशेषु विभक्त। अत्र विविधधर्मावलम्बिनः सम्प्रदायिनः जनाः निवसन्ति। अस्य संस्कृतिः धर्मपरम्परा च श्रेष्ठा अस्ति। अयं भू-स्वर्गः अपि वर्तते। ईश्वरस्य अवताराः अस्मिन् देशे सञ्जाताः। सङ्कटकाले वयं क्षुद्रभेदान् परित्यज्य देशहितं चिन्तयामः।

विशालं भूमण्डलं व्याप्य अयं देशः एशियामहाद्वीपस्य अन्यतमः राष्ट्रः सञ्जताः।
वयं सदा स्वराष्ट्रस्य रक्षां कर्तुम् उद्यताः स्याम।
कथितमस्ति-“जननी जन्मभूमिश्च स्वर्गादपि गरीयसी।”

हिन्दी अनुवाद- हमारा देश
भारतवर्ष हमारा देश है। इसकी भूमि विभिन्न रत्नों की जननी है। इसकी प्राकृतिक शोभा अनुपम है। हिमालय इसका प्रहरी है। यह उत्तर में मुकुटमणि के समान सुशोभित होता है। सागर इसके चरणों को धोता है। अनेको पवित्र नदियाँ यहाँ बहती हैं। गंगा, गोदावरी, सरस्वती तथा यमुना नदियाँ इसकी शोभा बढ़ाती हैं। यह देश सभी विद्याओं का केन्द्र है। यह अनेक प्रदेशों में विभक्त है। यहाँ अनेक धर्मों तथा सम्प्रदाय के लोग निवास करते हैं। इसकी संस्कृति और धर्म, परम्परा श्रेष्ठ है। यह पृथ्वी का स्वर्ग भी है। ईश्वर के अवतार इसी देश में हुए। संकट के समय हम छोटी-छोटी बातों को छोड़कर देश का हित सोचें। विशाल भूमि से परिपूर्ण यह देश एशिया महाद्वीप का एक राष्ट्र हो गया है। हम सदा अपने राष्ट्र की रक्षा करने के लिए तैयार हों। कहा गया है-“जननी और जन्मभूमि स्वर्ग से भी बढ़कर है।”

मम प्रिय कवि In Sanskrit MP Board ६. विद्यार्थी जीवनम्

छात्रजीवनमेव मानवजीवनस्य प्रभातवेला आधारशिला च वर्तते। समस्तजीवनस्य विकासस्य हासस्य वा कारणम् एतज्जीवनमेवास्ति। वस्तुतः विद्यार्थिजीवनं साधनामयं जीवनम्। अध्ययनं परमं तप उच्यते।

छात्रजीवने परिश्रमस्य महती आवश्यकता वर्तते। यः छात्रः आलस्यं त्यक्त्वा परिश्रमेण विद्याध्ययन करोति स एव साफल्यं लभते। अतएव छात्रैः प्रातःकाले ब्रह्ममुहूर्ते एव उत्थातव्यम्। कस्मैचित् कालाय भ्रमणाये अनिवार्यम्। ततः प्रतिनिवृत्य स्नानसन्ध्योपासनादिकं विधाय अध्ययनं कर्त्तव्यम्। तदान्तरं च लघुसात्विक भोजनं दुग्ध च महीत्वा विद्यालयं गन्तव्यम्। तत्र गत्वा गुरून् नत्वा अध्ययनं कर्त्तव्यम्। छात्रैः असत्यवादं न कदापि कर्त्तव्यम्।

छात्रजीवनं पूर्णतः अनुशासनबद्धं भवति। विद्यार्थिजीवने एव समस्तानां मानवोचितगुणानां विकास भवति। छात्र एव राष्ट्रस्ययानुपमा निधिरस्ति। अतः छात्राणां शारीरिकं चारित्रिकंच विकासं अत्यन्तानिवार्यम् विद्यार्थिजीवनमेव सम्पूर्णााँमिजीवनस्य आधारशिला। अतः तेषां सम्यक् रक्षणं, पोषणम् च कर्त्तव्यम्।

हिन्दी अनुवाद- विद्यार्थी जीवन
छात्र जीवन ही मानव की प्रभातवेला और आधारशिला है। समस्त जीवन के विकास या ह्रास का कारण यही जीवन है। वास्तव में विद्यार्थी जीवन साधनामय जीवन है। अध्ययन सबसे बड़ा तप कहा गया है।

छात्र जीवन में परिश्रम की बहुत आवश्यकता है। जो छात्र आलस्य को छोड़कर परिश्रम से विद्या का अध्ययन करता है वह ही सफलता पाता है। इसलिए ही छात्रों को प्रात:काल ब्रह्ममुहूर्त। में ही उठना चाहिए। कुछ समय के लिए घूमना भी अनिवार्य है।

वहाँ से लौटकर स्नान, सन्ध्या उपासना आदि करके अध्ययन करना चाहिए। उसके बाद थोड़ा-सा भोजन और दूध पीकर विद्यालय जाना चाहिए। वहाँ जाकर गुरुजनों को प्रणाम करके अध्ययन करना चाहिए। छात्रों को झूठ कभी नहीं बोलना चाहिए।

अत्र जीवन पूर्णरूप से अनुशासनबद्ध होता है। विद्यार्थी जीवन में ही समस्त मानवोचित गुणों का विकास होता है। छात्र ही राष्ट्र की अनुपम निधि है। इसलिए छात्रों का शारीरिक और चारित्रिक विकास अत्यन्त आवश्यक है। विद्यार्थी जीवन ही सम्पूर्ण आगे के जीवन की आधारशिला है। इसलिए उनकी अच्छी तरह से रक्षा और पोषण करना चाहिए।

Kalidas Nibandh In Sanskrit For Class 10 MP Board ७. सत्सङ्गति।

ये मनसा सद् विचारयन्ति, वचसा सद् वदन्ति वपुषा च सद् आचरन्ति ते सज्जनाः कथ्यन्ते। सतां सज्जनानां सङ्गतिः ‘सत्सङ्गतिः’ कथ्यते। ये सज्जनाः साधवः पवित्र-आत्मानाः सन्ति, तेषां संगत्या मनुष्यः, सज्जनः साधुः शिष्टश्व भवति। ये दुर्जनाः सन्ति तेषां संगत्या मनुष्यो दुर्जनो भवति, पतनं विनाशं च प्राप्नोति। मनुष्यस्योपरि सङ्गतेः महान् प्रभावो भवति। यादृशैः पुरुषैः सह सः निवसति, तादृशः एव स भवति। तथा चोक्तम्

“संसर्गजा दोषगुणा भवन्ति।”
सज्जानानां संगत्या मनुष्य उन्नतिं प्राप्नोति। तस्य विद्या कीर्तिश्च वर्धते। सङ्गत्याः प्रबलः प्रभावो वर्तते। बालकस्य कोमलं शरीरम् अपरिपक्वं च मस्तिष्कं भवति। सः यादृशैः बालकैः सह पठति, क्रीडति, गच्छति तादृशः एव जायते। अत एव विद्यायशोबलसुखवृद्धये सत्सङ्गः करणीयः।

Essay On Madhya Pradesh In Sanskrit MP Board हिन्दी अनुवाद- सत्संगति
जो मन से अच्छा सोचते हैं, वाणी से अच्छा बोलते हैं और शरीर से अच्छा आचरण करते हैं, वे सज्जन कहे जाते हैं। सज्जनों की संगति सत्संगति’ कही जाती है। जो सज्जन, साधु और पवित्र आत्मा वाले होते हैं, उनकी संगति से मनुष्य सज्जन, साधु और शिष्ट होता है। जो दुर्जन हैं उनकी संगति से मनुष्य दुर्ग होता है और उसका पतन और विनाश होता है। मनुष्य के ऊपर संगति का बड़ा प्रभाव होता है। जैसे मनुष्यों के साथ वह रहता है, वैसा ही हो जाता है। कहा गया है

“दोष और गुण साथ में रहने से होते हैं।”
सज्जनों की संगति से मनुष्य उन्नति प्राप्त करता है। उसकी विद्या और कीर्ति बढ़ती है। संगति का बहुत प्रभाव होता है। बालक का कोमल शरीर और कच्चा मस्तिष्क होता है। वह जैसे बालकों के साथ पढ़ता है, खेलता है, जाता है, वैसा ही हो जाता है। इसलिए ही विद्या, यश, बल और सुख की वृद्धि के लिए सत्संग करना चाहिए।

MP Board Class 10th Sanskrit Solutions

MP Board Class 10th English The Rainbow Solutions Chapter 4 To the Cuckoo

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MP Board Class 10th English The Rainbow Solutions Chapter 4 To the Cuckoo (William Wordsworth)

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To the Cuckoo Textbook Exercises

To the Cuckoo Vocabulary

I. Note down the exact meaning of the following words:
wander, stride, stamp, creep, lotter, limp, stroll, rove.
Answer:
Word : Meaning
Wander: To walk slowly around without any direction or purpose.
Stride : To walk with long steps. Stamp : To crash by putting down the foot with force.
Creep : To crawl, sweeping the ground with the belly.
Loiter : To linger about in a public place usually with no obvious reason. To go with a lame gait.
Limp: To walk lamely Stroll To ramble (saunter from place to place).
Rove : To travel from one place to another, often with no definite purpose.

II. Match the words given under A with the meanings given under B.
To The Cuckoo Poem Questions And Answers MP BoardMp Board Class 10 English Chapter 4
Answer:
Class 10 English Chapter 4 Mp Board

III. Use the following words in your own sentences.
wood, woods, sweet, sweets, blind, blinds issue, issues, spring, springs.
Answer:
Word : Usage
Wood : Our doors are made of wood.
Woods : Beasts live in the woods.
Sweet : She has a very sweet nature.
Sweets : A patient of diabetes should avoid eating sweets.
Blind : The old man has gone blind.
Blinds : Draw/lower the blinds on the curtain.
Issue : The Principal issued me the character certificate.
Issues : Alas! the old man has no issues.
Spring : Spring is the king of seasons.
Springs : Springs gush out of the mountains.

iv . Say the following words correctly,
though, thou, thee
Answer:
To The Cuckoo Poem Questions And Answers Mp Board

To the Cuckoo Comprehension

A. Answer the following questions in about 25 words.

To The Cuckoo Poem Questions And Answers MP Board Question 1.
How does the poet address the cuckoo in the beginning of the poem and why does he do so?
Answer:
The poet, William Wordsworth, addresses the cuckoo as the Blithe Newcomer’ in the beginning of the poem. He calls it a newcomer because its song captivates and moves him to supreme spiritual joy.

Mp Board Class 10 English Chapter 4  Question 2.
Why does the poet choose to call the cuckoo a wandering voice?
Answer:
The poet is lying on the grass. He hears the cuckoo’s two fold shout. Sometimes it goes far off. At other times, it comes too near. He calls the cuckoo a wandering voice because it wanders from hill to hill.

Class 10 English Chapter 4 Mp Board Question 3.
What does the cuckoo bring to the poet?
Answer:
The cuckoo sings in the sunny and flowery valley. It moves the poet to supreme spiritual joy. It transports him to a land of bliss. It revives the memory of a visionary tale in him.

To The Cuckoo Poem Questions And Answers Mp Board Question 4.
What did the cuckoo make the poet do during his school days?
Answer:
The poet used to listen to the cuckoo’s song during his school days. The cuckoo’s cry enchanted his heart. It urged him to see the invisible bird. Therefore, he wandered through woods and plains to seek her.

To The Cuckoo Poem Questions And Answers Pdf MP Board Question 5.
How does the earth appear to the poet after hearing the cuckoo’s voice?
Answer:
The earth appears substantial and physical to the poet. His attitude towards earth has changed after hearing the cuckoo’s voice. Now the earth appears unreal like the fairyland. (It shows that Wordsworth’s attitude to nature was ever-changing).

B. Answer the following questions in about 50 words.

To The Cuckoo Poem Summary In Hindi MP Board Question 1.
What does the poet seek to convey in the following stanza:

Thrice welcome, darling of the Spring!
Even yet thou art to me.
No bird but an invisible thing,
A voice, a mystery.
Answer:
The poet calls the cuckoo as the darling of spring. Its song is sweeter than the song of other birds. Even the spring season is proud of her. The poet welcomes her again and again. He considers the cuckoo like an invisible thing (fairy) whose voice is a mystery. He treats the cuckoo as a divine bird and not an earthly bird.

To The Cuckoo Poem In Hindi MP Board Question 2.
Describe the various ways in which the poet addresses the cuckoo in the poem.
Answer:
The poet addresses the cuckoo in various ways. In the first stanza he calls it as a ‘Blithe Newcomer’ and ‘a wandering voice.” Then he calls it as ‘Darling of the Spring’, ‘an invisible thing’, ‘a voice’, ‘a mystery.’ Last of all he calls it ‘a blessed bird’.

Speaking Skill 

A. Speak aloud the following rhyming words
To The Cuckoo Poem Questions And Answers Pdf MP Board
Answer:
To The Cuckoo Poem Summary In Hindi MP Board

B. You must have learnt a lot about the various habits and behaviour patterns of different kinds of birds.
Tell your classmates about your favourite bird and its appearance.
Answer:
Some birds sing more than necessary. Many birds like gulls live in flocks. Some birds do not sing in the usual manner but make loud noises which serves the purpose of a song. A male grey heron gives a loud cry every half minute so long as it is unmatched. The woodpecker drums to attract the females.

My favourite bird is a male nightingale. While it sings it looks continuously round in all directions. It usually sings every morning from the same place. It stops singing when a female arrives. It becomes silent after it has mated. The nightingale is larger than the cuckoo.

Writing Skill

Mp Board Class 10 English Workbook Solutions Chapter 4 Question 1.
‘Nature is a great teacher,’ Elaborate the thought. (50 words)
Answer:
Wordsworth felt that nature leads one from joy to joy. He believed that nature was a living being. For him, nature was a supreme spirit. Its sole purpose was to delight and teach human beings. There is a mystic bond between nature and man. Nature reflects his own mood. He also saw hearing power in nature. Nature to Wordsworth was everything. Nature is ready to guide anyone who would care to be guided by her. Nature can teach about morals, evil and of good more than the sages. Nature never betrays the heart that loves it.

Chapter 4 English Class 10 Mp Board Question 2.
‘God’s grandeur is reflected in the beauty of nature,’ Expand the idea. (150 words)
Answer:
Nature is the creation of.’God. Nature in all phases is beautiful. The barren deserts, the icy and windy hills are beauties of nature. The sight of springing leaves and flowers and other plants in the spring season are charming sights. We can enjoy the beauty of daffodils in April. The songs of,the flowers and old songs of the sea are equally enchanting. The sunrise and sunset, the warmth of spring season and the waving flowers gladden one’s heart. The arched white sails of the ship, the songs of the blossom and the rhythmic sweet tone of the sea are all enchanting. Nature is at its youth in spring season. Winter ends and trees are laden with beautiful flowers and fruits. The sight of hills, mountains, valleys, chasms, rivers, streams, springs and ravines are soothing to eyes. It seems that God’s grandeur is reflected in the beauty of nature.

Think It Over

To The Cuckoo Summary In Hindi MP Board Question 1.
Seeing beautiful things brings happiness. Thinking of them brings equal happiness. Does it mean happiness lies with in? Ponder and pen your thought.
Answer:
The tourists go from place to place in search of beautiful things. They are happy when they see beautiful things with their own eyes. They enjoy their beauty and feel happiness. The sight of new things in the lap of nature fills one’s heart with over flowing joy. Sometimes we do not virtually see the beautiful things but think of them. That too brings us equal happiness. The thought of going on a tour, seeing nature’s beauty, attending a marriage party or meeting some close relative fills our heart with immense pleasure. It shows that happiness is within one’s heart. A grieved heart does not find any happiness even in the garden of Eden.

Mp Board Class 10 English Book Solution Chapter 4 Question 2.
Happiness in heart, peace in mind, a healthy body, nature in the eyes and a song on the lips. What else is the life? Think and give your thought the wings of words.
Answer:
Happiness in heart, peace in mind, a healthy body, nature in the eyes and a song on the lips cover a major portion of life. They form the better part of life. Life would be perfect if we have a trusted friend, a full purse and freedom of movement also. There should be somebody with us to share our happiness and woes.

Things To Do

Go to the library and find poems written on birds, such as: the skylark, the eagle, the peacock, the nightingale etc. Keep a collection of such poems in your project book.
Answer:
For self-attempt.

To the Cuckoo Additional Important Questions

A. Read the stanzas and answer questions that follow:

1. O Blithe newcomer ! I have heard,
I hear thee and rejoice:
O Cuckoo! shall call thee Bird,
or but a wandering Voice? (Page 23)

Questions:
(i) Name the poem and the poet.
(ii) Whom does the poet hear? How does he feel?
(iii) What does the poet mean by the expression “wandering voice”?
Answers:
(i) ‘To the Cuckoo’; William Wordsworth.
(ii) The poet hears the Cuckoo. He simply rejoices.
(iii) The “wandering voice” signifies that the Cuckoo wanders from one place to another and so does his cheerful and lively voice.

2. While l am lying on the grass
The two fold shout I hear;
From hill to hill it seems to pass
At once far off and near. (Page 23) (M.P. Board 2016)

Questions:
(a) The poet of these lines is:
(i) William Cowper
(ii) William Wordsworth
(iii) Robert Allen Dromgoole
Answers:
(ii) William Wordsworth

(b) The one word used for ‘sounding at high pitch’ in the above stanza is.
(i) shout
(ii) whisper
(iii) sing
(iv) weep
Answers:
(i) shout

(c) What seems to pass from hill to hill?
(i) The cuckoo’s twofold shout seems to pass from till to hill.
(ii) The nightingale’s sweet voice.
(iii) The shouting of the children.
Answers:
(c) The cuckoo’s twofold shout seems to pass from hill to hill.

3. Of visionary hours.
Thrice welcome, darling of the Spring!
Even yet thou art to me
No bird, but an invisible thing.
A voice, a mystery; (Page 24)

Questions:
(a) The above lines occur in the poem
(i) Good Will
(ii) To the Cuckoo
(iii) If
(iv) All the Words is a Stage
Answers:
(i) To the Cuckoo

(b) The one word used for ‘loved one’ in the above stanza is
(i) visionary
(ii) darling
(iii) spring
(iv) invisible
Answers:
(ii) Darling

(c) Who is referred to as ‘darling of the spring’?
(i) The little girl
(ii) The nightingale
(iii) The Cuckoo
(iv) The sparrow
Answers:
(iii) The Cuckoo

I. Match the following:

1. Cuckoo – (a) shout
2. Twofold – (b) darling of the spring
3. Vale – (c) voice
4. Invisible – (d) wandering voice
5. Thrice welcome – (e) of sunshine and of flowers.
Answer:
1. (d), 2. (a), 3. (e), 4. (c), 5. (b).

II. Pick up the correct choice:

A. I hear thee and ……………… (merry/rejoice)
B. Shall I call thee bird or a ………….. (strolling/wandering)
C. While I am lying on the (sand/grass), the two fold (shout/voice) I hear.
D. Though (bubbling/babbling) only to the Vale.
Answer:
A. rejoice
B. wandering
C. grass; shout
D. babbling.

III. Write ‘True’ or ‘False’.

1. The poet hears threefold shout of the Cuckoo.
2. The Cuckoos shout seems to pass from hill to hill.
3. The Cuckoo babbles only to the vale of sunshine and flowers.
4. The poet calls the cuckoo the bringer of the spring.
5. The poet often roved through woods and on the green to seek the Cuckoo.
Answer:
1. False, 2. True, 3. True, 4. False, 5. True.

IV. Fill in the following blanks:

1. I ________ thee and rejoice.
2. From ________ the cuckoos shout passes.
3. Thou bringest unto me a tale of ___ hours.
4. To seek thee did I often …
5. And thou were still a ., a love.
Answer:

  1. hear
  2. hill to hill
  3. visionary
  4. rove
  5. hope.

V. Fill in the following blanks:

1. …………… (Twice/Thrice) welcome, darling of the Spring!
2. The same in my …………… (childhood/schoolboy) days.
3. And I can listen to ………….. (you/thee) yet.
4. And listen, till I do ……………… (get/beget) that golden time again.
Answer:

  1. Thrice
  2. school boy
  3. thee
  4. beget.

B. Short Answer Type Questions (In about 25 words)

Question 1.
Give a brief sketch of William Wordsworth.
Answer:
William Wordsworth was a great admirer and a sincere lover of nature. He treated nature as his guide, guardian and soul of his moral being. He was a devoted worshipper of nature. He composed many of his poems on natural objects.

Question 2.
When and where did the poet see the Cuckoo?
Answer:
It was the spring season. The poet, Wordsworth, was lying on the grass in a valley, full of flowers. The valley was surrounded by hills. It was an enjoyable season both for the poet and the Cuckoo. The poet saw the Cuckoo flying from hill to hill.

Question 3.
Why did Wordsworth rove through the woods and on the green during his schoolboy days?
Answer:
Wordsworth was a lover and worshipper of nature ever since his school days. He used to listen to the Cuckoo’s voice. He found it quite charming. Then he looked around in bushes, trees and sky. As he could not find the Cuckoo anywhere he tried to seek it through woods and on the green.

Question 4.
How does the poet feel indebted to the Cuckoo?
Answer:
The poet calls the Cuckoo a God’s gifted creature. She spreads gladness all around the poet. She brings harmony to nature. She is like an enigma that cannot be explained. The poet feels indebted to the cuckoo for filling his heart and the environment with joy and happiness. She soothes his soul and calms his nerves. Her song sends a wave of contentment to him. He wonders whether the voice is of a bird or a human.

C. Long Answer Type Questions (In about 50 words)

Question 1.
Describe Wordsworth as the poet of nature.
Answer:
Wordsworth was a great priest of nature. Nature to him was everything. His political frustration increased his interest in nature. His passion mingled itself with the landscape. Wordsworth’s attitude towards nature continued changing throughout his life. It started with animal and sensuous pleasures and ended on a mystic night. God and nature became one for him. He accepted nature as his spiritual guide and teacher. It led him from sheer joy to joy. Nature for him was like a nurse who healed his wounds.

Question 2.
Compare Wordsworth with Coleridge.
Answer:
Coleridge’s attitude to nature in his early phase of poetic career was similar to Wordsworth’s. Both of them felt disillusioned with the consequences of the French Revolution. Both sought solace in nature. Both felt nature to be a guiding spirit and teacher. Once Coleridge made his weeping infant smile by treating him to the beauty of the moon. In the beginning Coleridge believed along with Wordsworth that ’Nature never betrays the heart that loves her. It leads one from shees joy to joy.’

Question 3.
Contrast Coleridge with Wordsworth.
Answer:
With the passage of time Coleridge realised that joy cames from within, not from external nature. He also failed to find the same healing power in nature as Wordsworth did. He also called nature as something essentially external, which only mirrors a man’s mood, be it of joy or sorrow’. He called passion and life as internal, having nothing to do with nature or anything external. But for Wordsworth nature was everything. It gave him real pleasure.

To the Cuckoo Introduction

The poet welcomes the cuckoo as a ‘Blithe Newcomer’. The bird’s song gives him immense joy. It moves him to supreme spiritual joy.

To the Cuckoo Summary in English

William Wordsworth welcomes the cuckoo as a ‘Blithe Newcomer’. Its song captivates him. The cuckoo wanders from hill to hill. Sometimes the poet hears its voice as if it is very close to him. At other times it, goes far. The poet calls her ‘darling of the spring’ and ‘a mysterious voice’.As a school boy, the poet heard the cuckoo’s voice. He loved the voice but never saw the cuckoo. He longs for the return of the old golden times. He calls the bird ‘blessed’. She has turned the ‘unreal’ earth into a fairy place.

To the Cuckoo Summary in Hindi

विलियम वर्ड्सवर्थ कोयल का ‘प्रसन्न नवागन्तुक’ के रूप में स्वागत करता है। उसका गीत उसे मन्त्रमुग्ध कर देता है। कोयल पहाड़ियों के ऊपर उड़ती रहती है। कई बार उसकी आवाज नजदीक से आती लगती है, दूसरे समय वह दूर चली जाती है। कवि उसे ‘वसन्त की प्रेमिका’ और ‘रहस्यमयी आवाज’ कहकर पुकारता है। स्कूली छात्र के रूप में कवि ने कोयल की आवाज सुनी थी। उसे उसकी आवाज से अनुराग हो गया, परन्तु उसने कोयल कभी नहीं देखी। वह इच्छा करता है कि वह पुराना स्वर्णिम समय लौट आए। वह पक्षी को ‘धन्य’ कहता है। उसने ‘असार’ पृथ्वी को परियों का काल्पनिक स्थान बना दिया है।

To the Cuckoo Word-Meanings

MP Board Class 10th English The Rainbow Solutions Chapter 4 To the Cuckoo 7
MP Board Class 10th English The Rainbow Solutions Chapter 4 To the Cuckoo 8

Some Important Pronunciations

MP Board Class 10th English The Rainbow Solutions Chapter 4 To the Cuckoo 9

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MP Board Class 8th Hindi Sugam Bharti Solutions Chapter 12 समय पर मिलने वाले

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MP Board Class 8th Hindi Sugam Bharti Solutions Chapter 12 समय पर मिलने वाले

प्रश्न अभ्यास
अनुभव विस्तार

(क) सही जोड़ी बनाइए

Mp Board Class 8 Hindi Chapter 12 प्रश्न 1.
वस्तुनिष्ठ प्रश्न
Mp Board Class 8 Hindi Chapter 12
उत्तर
(अ) 4, (ब) 1, (स) 2, (द) 3

(ख)
सही शब्द चुनकर रिक्त स्थानों की पूर्ति कीजिए

(अ) इसके बाद कुछ मुट्ठी भर ……………… बचते हैं, जो समय पर मिलते हैं। (जीवधारी/चक्रधारी)
(ब) मित्र की भावुकता और ………………… के सामने मैं भी गाफिल हो गया। (आत्मीयता/धृष्टता)
(स) इस बार आत्मा ने मनुष्य का ………… लिया है। (चोला, झोला)
(द) हमारा चेहरा ………………… हो जाता है। (नीला, लाल)
उत्तर
(अ) जीवधारी
(ब) आत्मीयता
(स) चोला
(द) लाल।

Class 8 Hindi Chapter 12 Mp Board प्रश्न 2.
अति लघु उत्तरीय प्रश्न
(अ) परसाई जी के अनुसार मनुष्य कितने प्रकार के होते
(ब) लेखक ने ‘टाइमपीस’ किन मनुष्यों को कहा है?
(स) समाज में किन मनुष्यों की निंदा की जाती है?
(द) समय पर न मिलने वाले यदि समय पर मिल जाएँ तो कैसा लगता है?
उत्तर
(अ) परसाई जी के अनुसार मनुष्य तीन प्रकार के होते हैं

  • समय पर न मिलने वाले
  • समय पर किसी के घर न जाने वाले और
  • न समय पर पर मिलने वाले और न समय पर किसी के घर जाने वाले।

(ब) लेखक ने ‘टाइमपीस’ उन मनुष्यों को कहा है जो समय पर घर मिलते हैं और समय पर दूसरों के घर भी जाते हैं।
(स) समाज में उन मनुष्यों की निंदा की जाती है, जो समय का ख्याल नहीं रखते और अपना तथा दूसरों का समय खराव करते हैं।
(द) समय पर न मिलने वाले यदि समय पर मिल जाएँ तो लगता है भगवान को पा लिया।

Samay Par Milne Wale Summary In Hindi MP Board प्रश्न 3.
लघु उत्तरीय प्रश्न
(अ) समय निर्धारित कर समय पर न मिलने वालों से क्या कठिनाई होती है?
उत्तर
समय निर्धारित कर समय पर न मिलने वालों से अनेक कठिनाई होती है। उनका लम्बे समय तक इंतजार करना पड़ता है। उनका बार-बार चक्कर लगाना पड़ता है। इससे जी ऊब जाता है। दूसरों की नज़र में गिर जाना पड़ता है।

(ब)
समय पर न मिलने वाले की प्रतीक्षा करने में कैसा अनुभव होता है?
उत्तर
समय पर न मिलने वाले की प्रतीक्षा करने में कठिन और दुखद अनुभव होता है। हर क्षण मन उनकी ओर लगा रहता है। आँखें फाटक पर बिछी रहती हैं।

(स)
लड़का पूछने से पहले क्या उत्तर देता है?
उत्तर
लड़का पूछने से पहले उत्तर देता है-“वे घर में नहीं हैं।”

(द)
लेखक ने कई अनुभवों के बाद क्या किया?
उत्तर
लेखक ने कई अनुभवों के बाद तय किया कि वह जिसे इस जन्म में नहीं पूरा कर पाया, उसे अगले जन्म में पूरा कर लेगा।

भाषा की बात

8th Class Ke Prashn Uttar प्रश्न 1.
बोलिए एवं लिखिएमट्ठर
औपचारिकता, स्वतंत्रता, अवहेलना।
उत्तर
मट्ठर, औपचारिकता, स्वतंत्रता, अवहेलना।

Hindi Class 8 Mp Board Solution प्रश्न 2.
निम्नलिखित शब्दों की शुद्ध वर्तनी पर गोला
Class 8 Hindi Chapter 12 Mp Board
उत्तर
शिष्टता, अनिश्चित, अवमानना, अनुभव।

Class 8 Hindi Mp Board प्रश्न 3.
निम्नलिखित शब्दों का वाक्यों में प्रयोग कीजिए
जीवधारी, बैठक, अभ्यास, विश्वास, विज्ञापन।
उत्तर
शब्द   – वाक्य-प्रयोग
जीवधारी – मनुष्य सर्वश्रेष्ठ जीवधारी है।
वैठक – बैठक में तेज बहस हो रही थी।
अभ्यास – अभ्यास से कठिन काम आसान हो जाता है।
विश्वास – हमें सब पर विश्वास नहीं करना चाहिए।
विज्ञापन – अखबार में रोज ही विज्ञापन निकलते हैं।

Mp Board Class 8 Hindi प्रश्न 4.
निम्नलिखित शब्दों में से उर्दू, अंग्रेजी और हिन्दी शब्द छाँटकर लिखिए
शिष्टता, अखवार, किताव, स्वतंत्रता, टाइमपीस, अफसोस, अनुचित, ऐजेन्ट, निंदा, कमेटी, तवादला, निमंत्रण, आत्मा, ऑफिस, दिलचस्पी, टेबिल।
उत्तर
उर्दू शब्द- अखवार, किताव, अफ़सोस, तवादला, दिलचस्पी।
अंग्रेजी शब्द- टाइमपीस, एजेन्ट, कमेटी, ऑफिस, टेबिल ।
हिन्दी शब्द- शिष्टता, स्वतंत्रता, अनुचित, निंदा, निमंत्रण, आत्मा।

Mp Board Class 8th Hindi Solution प्रश्न 5.
‘भव’ में ‘अनु’ उपसर्ग लगाकर अनुभव शब्द बना है। निम्नलिखित शब्दों में इसी प्रकार ‘अनु’ उपसर्ग लगाकर नए शब्द बनाइए- .
कूल, सार, करण, मोदन, मति, मान।
उत्तर
Samay Par Milne Wale Summary In Hindi MP Board
प्रमुख गद्यांशों की संदर्भ-प्रसंग सहित व्याख्याएँ

1. इसके बाद कुछ मुट्ठी भर जीवधारी बचते हैं जो समय पर घर मिलते हैं और समय पर दूसरे के घर भी जाते हैं। सज्जनतावश हम इन्हें भी ‘आदमी’ कह देते हैं। ये असल में टाइमपीस हैं। ये घर रहेंगे तो टाइमपीस देखते रहेंगे और बाहर होंगे तो हाथ की घड़ी देखते रहेंगे। इन्हें हम बर्दाश्त कर लेते हैं। मगर इनकी चर्चा करना व्यर्थ है।।

शब्दार्थ
मुट्ठी भर-बहुत कम। जीवधारी-आदमी। सज्जनतावश-सज्जनता के कारण। टाइमपीस-घड़ी।

संदर्भ – प्रस्तुत पंक्तियाँ हमारी पाठ्य-पुस्तक ‘सुगम भारती’ . (हिन्दी-सामान्य) ‘भाग-8’ के पाठ-12 ‘समय पर मिलने वाले’ से ली गई हैं। इन पंक्तियों के लेखक श्री हरिशंकर परसाई

प्रसंग – प्रस्तुत पंक्तियों में लेखक ने समय की पाबंदी रखने वाले व्यक्तियों के बारे में बतलाते हुए कहा है कि

Sugam Bharti Class 8 MP Board व्याख्या
अधिकांश लोग ऐसे होते हैं जो न स्वयं किसी के यहाँ समय पर जाते हैं और न किसी को समय पर मिलते हैं। किंतु कुछ लोग ऐसे होते हैं जो समय पर घर मिलते हैं और समय पर दूसरे के घर जाते हैं। ऐसे लोगों को लेखक ने टाइमपीस कहा है; अर्थात् यह हमेशा घड़ी देखकर ही कार्य करते हैं। ऐसे लोग घर पर रहते हैं तो टाईमपीस देखते रहते हैं। और बाहर जाते हैं तो अपनी हाथ घड़ी देखते रहते हैं।इस प्रकार के व्यक्तियों को हम बहुत कठिनाई से झेल पाते हैं। भाव यह कि ऐसे व्यक्तियों से हमारा समय नष्ट होता है। इससे हमें दुःख पहुँचता है। इस प्रकार इनकी चर्चा हमें व्यर्थ ही सिद्ध होती है।

विशेष

  • समय के पाबंद व्यक्तियों की विशेषता को प्रकट किया गया है।
  • भाषा चटपटी और सरल है।
  • व्यंग्य प्रधान शैली है।

2. ऐसे लोगों की निंदा भी होती है कि वे समय का कोई ख्याल नहीं रखते और अपना तथा दूसरे का वक्त खराब करते हैं। पर मेरा मत दूसरा है, ऐसे लोग ज्ञानी हैं। वे जानते हैं कि काम अनन्त हैं और आत्मा अमर है। जल्दी वे करें और समय का ख्याल वे रखें, जिनकी उम्र 50-60 साल होती है। हमारी उम्र तो करोड़ों साल है क्योंकि आत्मा कभी मरती नहीं। जो काम इस जन्म से पूरे नहीं हुए, उन्हें अगले जन्म में पूरे कर लेंगे या उसके बाद वाले में। इस बार आत्मा ने मनुष्य… का चोला लिया है। अगली बार वह मेंढक का चोला भी ले सकती है। तब मेंढक के रूप में हम वे काम पूरे कर लेंगे, जो आदमी के रूप में नहीं हो पाये। जल्दी क्या है?

शब्दार्थ
ख्याल-ध्यान। वक्त-समय। मत-विचार। चोला-शरीर।

संदर्भ – पूर्ववत्

प्रसंग – प्रस्तुत पंक्तियों में लेखक ने समय की पाबंदी न करने वाले व्यक्तियों पर व्यंग्य कसते हुए कहा है कि

Mp Board Class 8 Hindi Book Solution व्याख्या
जो समय का ध्यान नहीं रखते तथा अपना और दूसरों का समय नष्ट करते हैं, ऐसे लोगों की लोग निंदा करते हैं किंतु लेखक उन्हें ज्ञानी कहता है। लेखक कहते हैं कि लोग समझते हैं कि काम का कोई अंत नहीं है और आत्मा अमर है। वह कभी मरती नहीं है तो जल्दी किस बात की है। काम इस जन्म में पूरे नहीं हुए तो अगले जन्म में हो जायेंगे।

लेखक का पुनः कहना है कि इस प्रकार के लोगों की यह आम धारणा होती है कि अगर इस जन्म में आत्मा ने मनुष्य का रूप धारण किया है तो अगले जन्म में इसका कुछ भी पता नहीं कि यह कौन-सा रूप धारण करेगा। हो सकता है कि यह मेंढक का ही रूप धारण कर ले। इस रूप में ही सही हम पहले जन्म के अधूरे काम को पूरा कर लेंगे। फिर इस तरह अधूरे काम को पूरा करने के लिए किसी प्रकार जल्दीबाजी की कोई आवश्यकता नहीं दिखाई देती है।

Mp Board Class 8 Hindi Book विशेष

  • भाषा में प्रवाह है।
  • शैली व्यंग्यपूर्ण है।
  • सामान्य शब्दावली है।

MP Board Class 8th Hindi Sugam Bharti Solutions Chapter 15 शहीद की माँ

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MP Board Class 8th Hindi Sugam Bharti Solutions Chapter 15 शहीद की माँ

प्रश्न अभ्यास
अनुभव विस्तार

Mp Board Class 8 Hindi Chapter 15 प्रश्न 1.
वस्तुनिष्ठ प्रश्न
Mp Board Class 8 Hindi Chapter 15
उत्तर
(अ) 2, (ब) 3, (स) 4, (द) 1

(ख) सही शब्द चुनकर रिक्त स्थान की पूर्ति कीजिए
(अ) बिस्मिल को ……………….की मजा हुई थी। (फाँसी/उम्रकैद)
(ब) जेलर ………………था। (अंग्रेज/भारतीय)
(स) बिस्मिल की माँ अपने ……………….के लिए बेसन के लड्डू लाई थी। (बेटे/जेलर)
(द) बिस्मिल ने माँ से कहा “माँ, तुमने अपने बेटे को. ……………..की गोद में डाल दिया है” (भारत माँ/अंग्रेज सरकार)
उत्तर
रिक्त स्थानों की पूर्ति
(अ) फाँसी
(ब) भारतीय
(स) बेटे
(द) भारत माँ। अति लघु उत्तरीय प्रश्नोत्तर

Class 8 Hindi Chapter 15 Mp Board प्रश्न 1.
(अ) रामप्रसाद बिस्मिल से जेल में कौन मिलने आया था?
(ब) माँ ने बिस्मिल को कौन-सा पाठ पढ़ाया था?
(स) विस्मिल ने अपनी माँ के सामने कौन-सी इच्छा प्रकट की?
(द) बिदा होते समय बिस्मिल से माँ ने क्या कहा?
(ई) जेलर किस स्वभाव का व्यक्ति था?
उत्तर
(अ) रामप्रसाद बिस्मिल से जेल में उनकी माँ मिलने आयी थी।
(ब) माँ ने बिस्मिल को जन्मभूमि पर न्यौछावर होने का पाठ पढ़ाया था।
(स) बिस्मिल ने अपनी माँ के सामने यह इच्छा प्रकट की कि अगले जन्म में भी वही उसकी माँ बने।
(द) विदा होते समय बिस्मिल की माँ ने कहा कि वह अपनी भारत माँ की अच्छी तरह सेवा करे। कोई चक न करे।
(ई) जेलर सरल और उदार स्वभाव का था। लघु उत्तरीय प्रश्नोत्तर

Sugam Bharti Class 8 Mp Board प्रश्न 1.
(अ)
बिस्मिल अपनी माँ से क्यों नहीं मिलना चाहते थे?
उत्तर
बिस्मिल अपनी माँ से नहीं मिलना चाहते थे। यह इसलिए कि उन्हें डर था कि उनकी माँ को उनकी एक दिन की जिंदगी को देखकर अपार दुख होगा। उन्हें यह भी डर था कि माँ की भींगी आँखें कहीं उनके कदमों को न डगमगा दें। उनकी मौत के लिए उसे अफ़सोस न होने लगे।

(ब)
बिस्मिल ने अपनी तस्वीर सबके सामने रखने से मना क्यों किया?
उत्तर
बिस्मिल ने अपनी तस्वीर सबके सामने रखने से मना कर दिया। यह इसलिए कि उनकी तस्वीर को देखकर लोगों को उनकी याद आ जायेगी। उनकी आँखें गीली हो जायेंगी। उनके देश को आजादी मिले और उनके देशवासी उस दिन आँसू बहाएं, यह उन्हें सहन नहीं होग।

(स)
बिस्मिल आजादी का जश्न किस रूप में देखना चाहते थे?
उत्तर
बिस्मिल आजादी का जश्न अपनी तस्वीर के माध्यम से देखना चाहते थे। वे अपनी तस्वीर को ऐसी जगह रखवाकर आजादी का जश्न उसके माध्यम से देखना चाहते थे, जहाँ से उसे कोई न देख सके।

(द)
माँ को किस बात से गौरब अनुभव हो रहा था?
उत्तर
माँ को इस बात से गर्व का अनुभव हो रहा था कि वह पाल-पोसकर अपने बेटे को अपने ही हाथों से देश लिए कुर्बान कर देने में खुश हो रही है।

भाषा की बात

Mp Board Class 8th Hindi Solution प्रश्न 1.
बोलिए और लिखिए
क्रांतिकारी, खजाना, सराबोर, वार्तालाप, अफसोस, लहलहाती, स्वीकृति, न्यौछावर, अमुक।
उत्तर
क्रांतिकारी, खजाना, सराबोर, वार्तालाप, अफ़सोस, लहलहाती, स्वीकृति, न्यौछावर, अमुक।

प्रश्न 2.
सही वर्तनी वाले शब्द को कोष्ठक में लिखिए
उत्तर
MP Board Class 8th Hindi Sugam Bharti Solutions Chapter 15 शहीद की माँ 2
उत्तर
भाँति, वेश भूषा, स्वीकृति, हृदय।

प्रश्न 3.
नीचे लिखे सरल, संयुक्त और मिश्र वाक्य पहचानकर उनके आगे लिखिए- .
1. माँ से मेरी ओर से क्षमा माँगना, मैं उनसे न मिल सकूँगा।
2. मैं अपनी माँ से नहीं मिलूँगा।
3. मेरी इच्छा है कि तू मातृभूमि की रक्षा करे।
4. मेरे देश को आजादी मिले और मेरे देशवासी उस दिन आँसू बहाएं।
5. जन्मभूमि पर न्यौछावर होने वाले बहादुर इस तरह की बातें नहीं करते हैं।
उत्तर
1. सरल वाक्य
2. सरल वाक्य
3. मिश्रवाक्य
4. संयुक्त वाक्य
5. सरल वाक्य।

प्रश्न 4.
समानार्थी शब्दों को रेखा खींचकर मिलाइए
उत्तर
MP Board Class 8th Hindi Sugam Bharti Solutions Chapter 15 शहीद की माँ 3

प्रश्न 5.
नीचे दिए गए शब्दों में यथास्थान ता, ई त्व, इय प्रत्यय लगाकर भाववाचक संज्ञाएँ बनाइए
उत्तर
MP Board Class 8th Hindi Sugam Bharti Solutions Chapter 15 शहीद की माँ 4

प्रश्न 6.
नीचे लिखे मुहावरों का अर्थ लिखकर याक्यों में प्रयोग कीजिए
आँखें बिछाना, अपने पैरों पर खड़े होना, फूला न समाना, नौ दो ग्यारह होना, कदम डगमगाना, कमर सीधी करना, पत्थर की लकीर होना।
उत्तर
मुहावरे  – अर्थ
आँखें बिछाना = प्रतीक्षा करना
वाक्य-प्रयोग – हर कोई अपने प्रिय के लिए आँखें बिछाए रहता है।
अपने पैरों पर खड़ा होना = आत्मनिर्भर होना
वाक्य-प्रयोग – अपने पैरों पर खड़ा होने से ही सफलता मिलती है।
फूला समाना = अत्यधिक प्रसन्न होनः
वाक्य-प्रयोग – परीक्षा में प्रथम आने पर परीक्षार्थी फूले नहीं समाते हैं।
नौ दो ग्यारह होना = भाग जाना
वाक्य-प्रयोग – चोर पुलिस को देखकर नौ दो ग्यारह हो गए।
कदम डगमगाना = डर जाना
वाक्य-प्रयोग- बुजदिलों के कदम डगमगाते रहते हैं।
पत्थर की लकीर होना = अमिट होना
वाक्य-प्रयोग – महात्मा बुद्ध के एक-एक वाक्य पत्थर की लकीर

प्रमुख गद्यांशों की संदर्भ-प्रसंग सहित व्याख्याएँ

1. विस्मिल अपनी माँ से मिलना नहीं चाहते थे। उन्हें भय था कि कहीं उनसे मिलकर माँ का हृदय द्रवित न हो जाए किन्तु क्रांति वीर बिस्मिल की माँ का हृदय तो चट्टान की भाँति कठोर था। उन्हें गर्व था कि उनका बेटा भारत माँ को स्वतंत्र कराने के प्रयास में फाँसी पर झूलने जा रहा है। देशभक्ति से सराबोर उस त्यागमयी माँ ने अपने लाल को भारत-माता की बलिवेदी पर बलिदान कर दिया।

शब्दार्थ
भय-डर । द्रवित-पिघल । भाँति-तरह, समान। गर्व-स्वाभिमान। सरोवर- भरा हुआ। लाल-बेटा।

संदर्भ – प्रस्तुत पंक्तियाँ हमारी पाठ्य-पुस्तक ‘सुगम भारती’ (हिंदी सामान्य) भाग-8 के पाठ 15-‘शहीद की माँ’ से ली गई हैं। इसके लेखक श्री योगेशचन्द्र शर्मा हैं।

प्रसंग – प्रस्तुत पंक्तियों में लेखक ने अमर शहीद बिस्मिल का अपनी माँ के प्रति भावना कैसी थी, इस ओर प्रकाश डालते हुए कहा है कि

व्याख्या
‘जेल में बंद फाँसी की सजा पाने वाले अमर शहीद बिस्मिल अपनी माँ के अपार प्रेम को भलीभाँति समझ रहे थे। इसलिए वे अपनी माँ से नहीं मिलना चाहते थे। यह इसलिए कि वे इस कारण से डरते थे कि उनकी माँ का हृदय पिघल जाएगा तो फिर वे भी पिघल जायेंगे। लेकिन वे तो क्रांति वीर थे। उनका हृदय दृढ़ था। उनकी माँ को यह गर्व था कि उनका बेटा देश की आजादी के लिए ही फाँसी पर झूलने जा रहा है। इस सोच-समझ से भरी-पूरी उस निस्वार्थमयी और त्यागमयी माँ ने अपने सुपुत्र को भारत माँ के लिए गर्व के साथ बलिदान कर दिया।

विशेष

  • बिस्मिल की माँ की महानता का चित्रण है
  • यह अंश ज्ञानवर्द्धक और प्रेरक है।

2. मैं सोच भी नहीं सकती बेटा कि तुझसे अपनी माँ को पहचानने में भूल हो सकती है! कैसे भूल गया कि मैं रामप्रसाद बिस्मिल की माँ हूँ। जिस भारत माँ के लिए तू कुर्बान हो रहा है, वह अकेले तेरी ही माँ नहीं, वह तो मेरी भी माँ है, तेरे बुजुर्गों की माँ है, इस सारे देश की माँ है।

शब्दार्थ – कुर्बान-बलिदान बुर्जुर्गो-पूर्वजों।

संदर्भ- पूर्ववत।

प्रसंग – प्रस्तुत पंक्तियों में लेखक ने अमर शहीद रामप्रसाद बिस्मिल की ममतामयी भावना को बतलाते हुए कहा कि

व्याख्या
जेल में अपने बेटा अमर शहीद रामप्रसाद बिस्मिल को समझाते हुए माँ ने कहा कि वह अपनी माँ को पहचानने में अब क्यों भूल कर रहा है। वह किन भावों में बहकर अपनी माँ को याद नहीं कर पा रहा है। उसे यह बात अच्छी तरह से समझ लेनी चाहिए कि वह जिस भारत के लिए अपना तन-मन न्यौछावर कर रहा है, वह केवल उसी की ही माँ नहीं है, अपितु वह तो पूर्वजों की माँ है। यही नहीं वह पूरे देश-प्रेमियों की भी माँ है।

विशेष

  • भारत माँ की महिमा का उल्लेख है।
  • यह अंश भावों को जगाने वाला है।

MP Board Class 6th Hindi Sugam Bharti Solutions Chapter 1 मैं ढूँढ़ता तुझे था

MP Board Class 6th Hindi Sugam Bharti Solutions Chapter 1 मैं ढूँढ़ता तुझे था

MP Board Class 6th Hindi Sugam Bharti Chapter 1 प्रश्न-अभ्यास

वस्तुनिष्ठ प्रश्न

मैं ढूंढता तुझे था कविता का अर्थ MP Board Class 6th प्रश्न 1.
(क) सही जोड़ी बनाइए

1. दीन के – (क) विरक्त
2. कर्म में – (ख) वतन
3. अधीर – (ग) मगन
4. जग से – (घ) मन
उत्तर
1. (ख), 2. (ग), 3. (घ), 4. (क)

Mp Board Solution Class 6 Hindi प्रश्न (ख)
दिए गए शब्दों में से उपयुक्त शब्द छांटकर रिक्त स्थानों की पूर्ति कीजिए
1. मैं…..तुझे था अब कुंज और वन में। (खोजता/ढूंढ़ता)
2. आँखें……..मेरी तब मान और धन में। (लगी थी/खुली थी)
3. हे दीनबंधु! ऐसी…….प्रदान कर तू। (प्रतिमा प्रतिभा)
4. ऐसा प्रभा भर दे मेरे……..मन में। (अशांत/अधीर)
उत्तर
1. ढूँढ़ता
2. लगीं थी
3. प्रतिभा
4. अधीर

MP Board Class 6th Hindi Sugam Bharti Chapter 1 अतिलघु उत्तरीय प्रश्न

Mp Board Class 6 Hindi Chapter 1 प्रश्न 2.
निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर एक-एक वाक्य में दीजिए

(क) कवि ने ईश्वर को दीनबंधु क्यों कहा है?
उत्तर
कवि ने ईश्वर को दीनबंधु इसलिए कहा है क्योंकि ईश्वर दीन-दुखियों की सेवा में लगा रहता है।

(ख) अधीर मन की अधीरता किस प्रकार दूर हो सकती है?
उत्तर
अधीर मन की अधीरता तब दूर हो सकती है जब कवि ईश्वर को पा लेगा।

(ग) ‘जग की अनित्यता’ का क्या अर्थ है?
उत्तर
इसका अर्थ है-संसार की क्षणभंगुरता।

(घ) कवि किस स्थिति में हार नहीं मानता?
उत्तर
कवि दुख में हार नहीं मानता।

(ङ) “किरन’, ‘सुमन’, ‘पवन’, और ‘गगन’ किसके स्वरूप हैं?
उत्तर
ये सभी ईश्वर के स्वरूप हैं।

(च) कविता में ‘मैं’ और ‘तू’ शब्दों का प्रयोग किसके लिए किया गया है?
उत्तर
‘मैं’ का प्रयोग कवि के लिए और ‘तू’ का प्रयोग ईश्वर के लिए किया गया है।

MP Board Class 6th Hindi Sugam Bharti Chapter 1 लघुत्तरीय प्रश्न

Sugam Bharti Class 6 MP Board प्रश्न 3.
निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर तीन से पाँच वाक्यों में दीजिए

(क) केवल संगीत और भजन में ईश्वर को न ढूँढकर और कहाँ-कहाँ ढूँढना चाहिए?
उत्तर
ईश्वर को संगीत और भजन के माध्यम से पाना मुश्किल है। अगर ईश्वर को सही मायने में पाना
तो दीन-दुखियों के बीच जाना पड़ेगा, उनकी सेवा करनी पड़ेगी ईश्वर दीन-दुखियों में निवास करता है।

(ख) “कर्म में मगन और कवन में व्यस्त” इस पंक्ति “भाव स्पष्ट कीजिए।
उत्तर
ईश्वर परोपकार के काम में लगा था जबकि कवि केवल व्यर्थ बोलने में लगा हुआ था। ईश्वर हमेशा बिना किसी के दबाव के अपना काम करता जाता है। मनुष्य झूठी दुनियादारी में खोया रहता है। मनुष्य के कथनी और करनी में हमेशा अंतर रहता है जबकि ईश्वर कुछ कहता नहीं है, सिर्फ सत्कर्म में लगा रहता है।

(ग) कवि और ईश्वर की उपस्थिति के पाँच-पाँच स्थान बताइए।
उत्तर
कवि-बगीचा, जंगल, मंदिर, चमन, भजन
ईश्वर-दीन-दुखियों के बीच, किरण में, फूलों में, पवन में, आकाश में।।

(घ) ‘मान और धन की अपेक्षा ईश्वर दीन-दुखियों के आँसू में निवास करता है।’ समझाइए।
उत्तर
मानव संसार की चकाचौंध में खोया रहता है। उसे अपने मान-सम्मान और धन-दौलत की ज्यादा चिंता रहती है। इसके विपरीत ईश्वर दीन-दुखियों के आँसू | पोंछने में व्यस्त रहता है। वह गिरे हुए को उठाने में लगा रहता है।

(ङ) ‘दुख में न हार मानूं सुख में तुझे न भूलूं’ पंक्ति में निहित भाव बताइए।
उत्तर
कवि ईश्वर से प्रार्थना करता है कि वह उसमें इतनी क्षमता दे कि वह दुख में हार नहीं माने साथ ही सुख के क्षणों में उसे (ईश्वर को) भूले नहीं।

भाषा की बात

Mp Board Class 6 Hindi प्रश्न 4.
निम्नलिखित शब्दों का शुद्ध उच्चारण कीजिए
कुंज, संगीत, संगठन, विरक्त, समर्थ।
उत्तर
छात्र स्वयं करें।

Mp Board Class 6 Hindi Solution प्रश्न 5.
निम्नलिखित शब्दों की शुद्ध वर्तनी लिखिएदुआर, उतथान, आँख, स्वरग, कठनाई, सूयश, सोन्दर्य
उत्तर
द्वार, उत्थान, आँख, स्वर्ग, कठिनाई, सुयश, सौन्दर्य।

Mp Board Solution Class 6th Hindi प्रश्न 6.
निम्नलिखित शब्दों का वाक्यों में प्रयोग कीजिए
बाट, आँसू, पतित, संगठन, अनित्यता।
उत्तर

बाट-माँ कब से बेटे की बाट देख रही है।
आँसू-हमें किसी भी हाल में आँसू नहीं बहाना चाहिए।
पतित-ईश्वर पतितों का उद्धार करता है।
संगठन-हमें किसी संगठन की तरह काम करना चाहिए।
अनित्यता-हमें इस संसार की अनित्यता में खो नहीं जाना चाहिए।

सुगम भारती कक्षा 6 MP Board प्रश्न 7.
निम्नलिखित के विलोम शब्द लिखएि
स्वर्ग, धीर, नित्य, हार, सुख।
उत्तर
नरक, अधीर, अनित्य, जीत, दुःख।

Mp Board Class 6th Hindi प्रश्न 8.
निम्नलिखित वाक्यों को बहुवचन में बदलिए
(क) महिला भजन गा रही है।
(ख) दुखी की सहायता करो।
(ग) तुम अपनी कठिनाई बताओ।
(घ) अपनी पुस्तक को संभालकर रखना चाहिए।
(ड) चिड़िया आकाश में उड़ रही है।
उत्तर
(क) महिलाएँ भजन गा रही हैं।
(ख) दुखियों की सहायता करो।
(ग) तुम अपनी कठिनाईयाँ बताओ।
(घ) अपनी पुस्तकों को संभालकर रखना चाहिए।
(ङ) चिड़िया आकाश में उड़ रही है।

Mp Board Class 6th Hindi Solution प्रश्न 9.
निम्नलिखित शब्दों के पर्यायवाची शब्द छांटकर लिखिए
(क) आंख – दृग, आग, नयन, हर्ष, लोचन।
(ख) आकाश – पानी, गगन, बिजली, नभ, अम्बर ।
(ग) हवा -वायु, सुधा, पवन, समीर, सखा।
(घ) फूल -चिड़िया, सुमन, बादल, प्रसून, पुष्प।
उत्तर
(क) आँख – दृग, नयन, लोचन।
(ख) आकाश – गगन, नभ, अम्बर।
(ग) हवा – वायु, पवन, समीर।
(घ) फूल – सुमन, प्रसून, पुष्प।

मैं ढूँढ़ता तुझे था प्रसंग सहित व्याख्या

1. मेरे लिए खड़ा था दुखियों के द्वार पर तू,
मैं बाट जोहता था तेरी किसी चमन में।
बनकर किसी के आँसू मेरे लिए बहा तू,
आँखें लगी थी मेरी मान और धन में।
बाजे बजा बजाकर मैं था तुझे रिझाता,
तब तू लगा हुआ था पतितों के संगठन में।
मैं था विरक्त जग से इसकी अनित्यता पर।
उत्थान भर रहा था तब तू किसी पतन में।

शब्दार्थ – बाट जोहना=प्रतीक्षा करना । चमन=बागबगीचा । मान=सम्मान । रिझाना=आकर्षित करना । पतित =गिरे हुए। विरल=उदासीन । जग=संसार । अनित्यता=अनियमित। उत्थान=उपर उठाना।

प्रसंग-प्रस्तुत पद्यांश हमारी पाठ्य-पुस्तक सुगम भारती-6 में संकलित कविता ‘मैं ढूंढ़ता तुझे था’ से लिया गया है। इसके कवि हैं-रामनरेश त्रिपाठी। इसमें उन्होंने ईश्वर की महिमा का गुणगान किया है।

व्याख्या-मानव ईश्वर को बाग-बगीचे में ढूंढ़ता है किन्तु वह तो दीन-दुखियों के द्वार पर खड़ा होता है। ईश्वर किसी की आह बनकर मानव को पुकारता है किंतु लोग अपनी दुनिया में मस्त रहते हैं। वे सोचते हैं कि संगीत और भजन गाने से ईश्वर खुश होगा और उसकी पुकार सुन लेगा लेकिन ऐसा होता नहीं है। क्योंकि ईश्वर तो गिरे हुए को उठाने में लगा होता है। लोग संसार से उदासीन होकर ईश्वर को खोजते हैं परंतु वह किसी के पतन को उत्थान में बदल रहा होता है।

विशेष

  • ईश्वर की महिमा का गुणगान है।
  • अनुप्रास अलंकार का प्रयोग किया गया है।
  • कविता लयात्मक और संगीतात्मक है।

2. तू रूप है किरन में, सौंदर्य है सुमन में,
तू प्राण है पवन में, विस्तार है गगन में।
हे दीनबंधु! ऐसी प्रतिभा प्रदान कर तू,
देखू तुझे दृगो में, मन में तथा वचन में।
कठिनाईयों, दुखों का इतिहास ही सुयश है।
तुझको समर्थ कर तू बस कष्ट के सहन में।
दुख में न हार मानूं, सुख में तुझे न भूलूं,
ऐसा प्रभाव भर दे, मेरे अधीर मन में।

शब्दार्थ-किरन=रौशनी। सौंदर्य =सुंदरता। सुमन= फूल । गगन=आकाश । दीनबंधु=भगवान ।
सुयश=प्रसिद्धि। ‘अधीर=व्याकुल।

प्रसंग-पूर्ववत्

व्याख्या-कवि ईश्वर की महिमा का गुणगान करते हुए कहता है कि वह किरण में रूप है, पुष्प में सौंदर्य है। पवन में प्राण हैं और गगन में विस्तार है। कवि प्रार्थना करता है कि ईश्वर उसमें प्रतिभा प्रदान करें ताकि वह उसे (ईश्वर को) आँखों में, मन में, और वचन में देख सके। कठिनाईयों और दुःखों का इतिहास गौरवशाली होता है। कवि ईश्वर से प्रार्थना कर रहा है कि वह उसमें कष्ट सहने की क्षमता दे ताकि वह दुःख में हार नहीं माने और साथ ही सुख के क्षणों में ईश्वर को भूले नहीं।

विशेष

  • ईश्वर की महिमा का गुणगान।
  • अनुप्रास अलंकार का प्रयोग किया गया है।
  • कविता लयात्मक और संगीतात्मक है।

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