MP Board Class 12th Biology Solutions Chapter 6 वंशागति का आणविक आधार

वंशागति का आणविक आधार NCERT प्रश्नोत्तर

प्रश्न 1.
निम्न को नाइट्रोजनी क्षार व न्यूक्लियोटाइड के रूप में वर्गीकृत कीजिएएडेनीन, साइटीडीन, थाइमीन, ग्वानोसीन, यूरेसील व साइटोसीन।
उत्तर
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नोट-साइटीडीन एक न्यूक्लियोसाइड (Nucleoside) है।

प्रश्न 2.
यदि एक द्विरज्जुक DNA में 20 प्रतिशत साइटोसीन है तो DNA में मिलने वाले ऐडेनीन के प्रतिशत की गणना कीजिए।
उत्तर
इरविन चारगाफ (Erwin Chargaff) ने परीक्षण के आधार पर बताया कि ऐडेनीन व थायमिन तथा ग्वानीन व साइटोसीन के बीच अनुपात स्थिर व एक-दूसरे के बराबर होता है। यदि द्विरज्जुक DNA रज्जुक में नाइट्रोजनी क्षार की संख्या 100 है और इसमें साइसोटीन की मात्रा 20 प्रतिशत है तो ग्वानीन की मात्रा भी 20 प्रतिशत होगी। . साइटोसीन तथा ग्वानीन की कुल मात्रा 20% + 20% = 40% होगी। इसका तात्पर्य यह है कि ऐडेनीन तथा थाइमीन का कुल प्रतिशत 100 – 40 = 60 % होगा। ऐडेनीन तथा थाइमीन की मात्रा बराबर होती है अर्थात् ऐडेनीन 30 प्रतिशत तथा थाइमीन 30 प्रतिशत होगा। अतः उक्त DNA रज्जुक में ऐडेनीन की मात्रा 30 प्रतिशत होगी।

प्रश्न 3.
यदि DNA के एक रज्जुक के अनुक्रम निम्नवत लिखे हैं__5_ATGCATGCATGC ATGCATGCATGCATGC-3′ तो पूरक रज्जुक के अनुक्रमको 5′-3′ दिशा में लिखें।
उत्तर
5′—GCATGCATGCATGCATGCATGCATGCAT-3′

प्रश्न 4.
यदि अनुलेखन इकाई में कूटलेखन रज्जुक के अनुक्रम को निम्नवत लिया गया है. 5′-ATGCATGCATGCATGCATGCATGCATGC-3′ तो दूत RNA के अनुक्रम को लिखें।
उत्तर
यदि कूट लेखन रज्जुक (Coding strand) के अनुक्रम निम्न प्रकार है 5′-ATGCATGCATGCATGCATGCATGCATGC-3′ तो mRNA के अनुक्रम निम्न प्रकार होंगे5′-AUGCAUGCAUGCAUGCAUGCAUGCAUGC-3′

प्रश्न 5.
DNA द्विकुण्डली की कौन-सी विशेषता वाटसन व क्रिक को DNA प्रतिकृति के सेमीकंजर्वेटिव रूप को कल्पित करने में सहयोग किया।
उत्तर
DNA द्विकुण्डली के दोनों रज्जुकों (Strands) का एक-दूसरे के पूरक होना वाटसन व क्रिक को DNA प्रतिकृति के अर्द्ध-संरक्षी (Semi-conservative) स्वरूप को कल्पित करने के लिए महत्वपूर्ण है।

प्रश्न 6.
टेम्पलेट (DNA या RNA) के रासायनिक प्रकृति व इससे (DNA या RNA) संश्लेषित न्यूक्लिक अम्लों की प्रकृति के आधार पर न्यूक्लिक अम्ल पॉलीमरेज के विभिन्न प्रकार की सूची बनाइये।
उत्तर
(1) DNA आधारित DNA पॉलीमरेज एन्जाइम प्रतिकृति के लिए आवश्यक है। यह DNA संश्लेषण के लिए DNA टेम्पलेट (DNA template) का उपयोग करता है।

(2) DNA पर निर्भर RNA पॉलीमरेज (DNA dependent RNA polymerase) जो RNA संश्लेषण के लिए DNA टेम्पलेट का उपयोग करता है। RNA पॉलीमरेज अस्थायी रूप से प्रारम्भन कारक या समापन कारक से जुड़कर अनुलेखन का प्रारंभ व समापने करता है। केन्द्रक में RNA पॉलीमरेज के अतिरिक्त निम्नलिखित तीन प्रकार के पॉलीमरेज मिलते हैं

  • RNA पॉलीमरेज-I यह r-RNA (28 S, 18 S व 5.8S) को अनुलेखित करता है।
  • RNA पॉलीमरेज-II यह t-RNA तथा छोटे केन्द्रकीय RNA का अनुलेखन करता है।
    (स)पॉलीमरेज-III यह m-RNA के पूर्ववर्ती विषमांगी केन्द्रकीय RNA (heterogenous nuclear RNA = hn RNA का अनुलेखन करता है।

प्रश्न 7.
डीएनए आनुवंशिक पदार्थ है, इसे सिद्ध करने हेतु अपने प्रयोग के दौरान हर्षे व चेस ने डीएनए व प्रोटीन के बीच कैसे अंतर स्थापित किया ?
उत्तर
डीएनए आनुवंशिक पदार्थ है इसके बारे में सुस्पष्ट प्रमाण अल्फ्रेड हर्षे व मार्था चेस (1952) के प्रयोगों से प्राप्त हुआ। इन्होंने उन विषाणुओं पर कार्य किया जो जीवाणु को संक्रमित करते हैं जिसे जीवाणुभोजी कहते हैं। जीवाणुभोजी जीवाणु से चिपकते हैं। अपने आनुवंशिक पदार्थ को जीवाणु कोशिका में भेजते हैं। जीवाणु कोशिका विषाणु के आनुवंशिक पदार्थ को अपना समझने लगते हैं जिससे आगे चलकर अधिक विषाणुओं का निर्माण होता है। हर्षे व चेस ने इस बात का पता लगाने के लिए प्रयोग किया कि विषाणु से प्रोटीन या डीएनए ‘निकल कर जीवाणु में प्रवेश करता है।
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उन्होंने कुछ विषाणुओं को ऐसे माध्यम पर पैदा किया जिसमें एक को विकिरण सक्रिय फॉस्फोरस व दूसरे विषाणुओं को विकिरण सक्रिय सल्फर पर वृद्धि किया था। जिस विषाणु को विकिरण सक्रिय फॉस्फोरस की उपस्थिति में पैदा किया उसमें विकिरण सक्रिय डीएनए पाया गया जबकि विकिरण सक्रिय प्रोटीन नहीं था, क्योंकि डीएनए में फॉस्फोरस होता है, प्रोटीन नहीं। ठीक इसी तरह से विषाणु जिसे विकिरण सक्रिय सल्फर की उपस्थिति में पैदा किया गया उनमें विकिरण सक्रिय प्रोटीन पाई गई, डीएनए विकिरण सक्रिय नहीं था, क्योंकि डीएनए में सल्फर नहीं मिलता है।

विकिरण सक्रिय जीवाणुभोजी ई. कोलाई जीवाणु से चिपक जाते है। जैसे संक्रमण आगे बढ़ता है जीवाणु को सम्मिश्रक में हिलाने से विषाणु आवरण अलग हो जाता है। जीवाणुओं को अपकेंद्रकयंत्र में प्रचक्रण कराने से विषाणु कण जीवाणुओं से अलग हो जाते हैं। जो जीवाणु विकिरण सक्रिय डीएनए रखने वाले विषाण से संक्रमित हुए थे, वे विकिरण सक्रिय रहे । इससे स्पष्ट है कि जो पदार्थ विषाणु से जीवाणु में प्रवेश करता है, वह डीएनए है । जो जीवाणु उन विषाणुओं से संक्रमित थे जिनमें विकिरण सक्रिय प्रोटीन था, वे विकिरण सक्रिय नहीं हुए। इससे संकेत मिलता है कि प्रोटीन विषाणु से जीवाणु में प्रवेश नहीं करता है। इस कारण से आनुवंशिक पदार्थ डीएनए ही है जो विषाणु से जीवाणु में जाता है।

प्रश्न 8.
निम्न के बीच अंतर बताइए
(क) पुनरावृत्ति डी.एन.ए. एवं अनुषंगी डी.एन.ए.
(ख) एम.आर.एन.ए. और टी.आर.एन.ए.
(ग) टेम्पलेट रज्जुक और कोडिंग रज्जुक।
उत्तर
(क) पुनरावृत्ति डी.एन.ए. एवं अनुषंगी डी.एन.ए. में अंतर-DNA फिंगर प्रिंटिंग में DNA अनुक्रम में उपस्थित कुछ विशिष्ट स्थानों के बीच भिन्नता का पता लगाते हैं जिसे पुनरावृत्ति DNA कहते हैं। अनुक्रमों में DNA का छोटा भाग कई बार पुनरावृत्ति करता है। इस पुनरावृत्ति DNA को जीनोमिक DNA के ढेर (समूह) से अलग करने के लिए जो शिखर बनाते हैं घनत्व प्रवणता अपकेन्द्रीकरण (Density gradient centrifugation) विधि द्वारा पृथक करते हैं । DNA के ढेर में एक बहुत बड़ा शिखर (Peak) बनता है। जबकि साथ में अन्य छोटे-छोटे शिखर बनते हैं जिसे अनुषंगी डी.एन.ए. (Satellite DNA) कहते हैं।

(ख) एम.आर.एन.ए. तथा टी.आर.एन.ए. में अन्तर-आर.एन.ए. तीन प्रकार के होते हैं उनकी प्रमुख उपयोगिता निम्नानुसार हैं

1. संदेश वाहक आर.एन.ए. (m-RNA)-
ये केन्द्रक में DNA द्विगुणन से बनते हैं तथा इसके सन्देश को न्यूक्लियोटाइडों के विशेष क्रम के रूप में कोशिकाद्रव्य के राइबोसोम तक लाते हैं, जो इन्हीं के अनुसार प्रोटीन का संश्लेषण करता है।

2. स्थानान्तरण आर.एन.ए. (t-RNA)-
ये कोशिकाद्रव्य में पाये जाते हैं तथा m-RNA से छोटे होते हैं। ये कोशिकाद्रव्य से विशिष्ट अमीनो अम्लों को राइबोसोम तक पहुँचाते हैं।

3. राइबोसोमल आर.एन.ए. (r-RNA)-
ये राइबोसोम में पाये जाते हैं, इनका अणुभार बहुत अधिक होता है इसी में m-RNA के अनुसार अमीनो अम्ल जुड़कर प्रोटीन का संश्लेषण राइबोसोम के अन्दर करते हैं।

(ग) टेम्पलेट रज्जुक और कोडिंग रज्जुक में अंतर-DNA द्विकुण्डली रज्जुक होता है। रज्जुक जिसमें ध्रुवत्व 3′ से 5′ (3′ → 5′) की ओर हो यह टेम्पलेट की तरह कार्य करता है इसलिये यह टेम्पलेट रज्जुक कहलाता है। जिस रज्जुक का ध्रुवत्व 5′ से 3′ (5’→ 3′) व अनुक्रम RNA जैसा होता है, अर्थात् थाइमीन के अतिरिक्त इस जगह पर यूरेसील होता है, अनुलेखन के दौरान स्थानांतरित हो जाता है । यह रज्जुक जो किसी भी चीज के लिए कूटलेखन नहीं करता है, कूटलेखन (Coding) रज्जुक कहलाता है। कल्पित टेम्पलेट रज्जुक का अनुक्रम 3′ → ATGCATGCA TGC ATGCATGCATGC—5′ कल्पित कोडिंग रज्जुक अनुक्रम 5’→TAACGTACGTACGTACGTACGTACG-3′

प्रश्न 9.
स्थानान्तरण के दौरान राइबोसोम की दो मुख्य भूमिकाओं की सूची बनाइए।
उत्तर

  • कोशिकीय कारखाना जो प्रोटीन संश्लेषण के लिए आवश्यक है वह राइबोसोम है। अपनी निष्क्रिय अवस्था में यह दो उप-एकको (Sub-unit) से मिलकर बना है। जब छोटा उप-एकक (Sub-unit) मैसेंजर RNA से मिलता है तब मैसेंजर RNA का प्रोटीन में स्थानान्तरण की प्रक्रिया शुरु हो जाती है।
  • पेप्टिक बंध बनने के लिए राइबोसोम उत्प्रेरक का कार्य करता है।

प्रश्न 10.
उस संवर्धन में जहाँ ई. कोलाई वृद्धि कर रहा हो लैक्टोज डालने पर लैक-ओपेरान उत्प्रेरित होता है। तब कभी संवर्धन में लैक्टोज डालने पर लैक ओपेरान कार्य करना क्यों बंद कर देता है ?
उत्तर
लैक्टोज एंजाइम बीट-गैलेक्टोसाइडेज के लिए क्रियाधार का काम करता है जो प्रचालेक की सक्रियता के शुरू या निष्क्रियता समाप्ति को नियमित करता है। इसे प्रेरक कहते हैं। सबसे उपयुक्त कार्बन स्रोतग्लूकोज की अनुपस्थिति में यदि जीवाणु के संवर्धन माध्यम में लैक्टोज डाल दिया जाता है तब परमिएज की क्रिया द्वारा लैक्टोज कोशिका के अंदर अभिगमन करता है। (याद रखो कोशिका में लैक-प्रचालेक की अभिव्यक्ति निम्न स्तर पर हमेशा बनी रहती है अन्यथा लैक्टोज कोशिकाओं के भीतर प्रवेश नहीं कर सकता है)। इसके बाद लैक्टोज प्रचालेक को निम्न ढंग से प्रेरित करता है।
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प्रचालेक का दमनकारी आई (i) जीन द्वारा संश्लेषित (हमेशा उपस्थित रहता है) होता है। दमनकारी प्रोटीन प्रचालेक के प्रचालक स्थल से बंधकर आरएनए पॉलीमरेज को निष्क्रिय कर देता है जिससे प्रचालेक अनुलेखित नहीं हो पाता है। प्रेरक जैसे लैक्टोज (या एलोलैक्टोज) की उपस्थिति में दमनकारी प्रेरक से क्रियाकर निष्क्रियत हो जाता है। इसके फलस्वरूप आर.एन.ए. पॉलीमरेज उन्नायक से बंधकर अनुलेखन की शुरुआत करता है (चित्र) । लैक प्रचालेक के नियमन को इसके क्रियाधार द्वारा एंजाइम के संश्लेषण के रूप में निरूपित किया जा सकता है।

याद रखो लैक-प्रचालेक किए ग्लूकोज या गैलेक्टोज प्रेरक के रूप में कार्य नहीं कर सकता है। दमनकारी m-R.N.A. द्वारा लैक-प्रचालेक के नियमन को ऋणात्मक नियमन (निगेटिव रेगुलेशन) कहते हैं । लैक-प्रचालेक धनात्मक नियमन (पाजिटीव रेगुलेशन) के नियंत्रण में भी होता है।

प्रश्न 11.
निम्न के कार्यों का वर्णन (एक या दो पंक्तियों से) कीजिए
(क) उन्नायक (प्रोमोटर)।
(ख) अंतरण आरएनए (t-RNA)
(ग) एक्जॉन।
उत्तर
(क) उन्नायक (प्रोमोटर)-उन्नायक डीएनए में अनुलेखन ईकाई का एक मुख्य भाग है जो जीन अनुलेखन ईकाई बनाते हैं। संरचनात्मक जीन के 5′- किनारे पर उन्नायक स्थित होता है। अनुलेखन ईकाई में स्थित उन्नायक टेम्पलेट व कूटलेखन रज्जुक का निर्धारण करता है।

(ख) अंतरण आरएनए (t-RNA)-अंतरण आरएनए (t-RNA) अनुलेखन के लिए जिम्मेदार है। अंतरण आरएनए के एक प्रति प्रकूट (एंटीकोडान) फंदा होता है जिसमें कूट के पूरक क्षार मिलते हैं व इसमें एक अमीनों अम्ल स्वीकार्य छोर होता है जिससे यह अमीनो अम्ल से जुड़ जाता है। प्रत्येक अमीनो अम्ल के लिए विशिष्ट अंतरण R.N.A. (t-RNA) होते हैं (चित्र)। प्रारंभन हेतु दूसरा विशिष्ट अंतरण आरएनए होता है जिसे प्रारंभक अंतरण आरएनए कहते हैं। रोध प्रकूट के लिए कोई अंतरण आरएनए नहीं होता है। उपरोक्त चित्र में अंतरण आरएनए की द्वितीयक संरचना दर्शायी गयी है जो तिपतिया (क्लोवर) की पत्ती जैसी दिखाई देती है। वास्तविक संरचना के अनुसार अंतरण आर.एन.ए. सघन अणु है जो उल्टे एल (L) की तरह दिखाई देता है।
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(ग) एक्जॉन-कूटलेखन अनुक्रम या अभिव्यक्त अनुक्रमों को व्यक्तेक (एक्जॉन) कहते हैं। एक्जॉन वे अनुक्रम हैं जो परिपक्व या संसाधित आर एन ए में मिलते हैं। व्यक्तेक, अव्यक्तेक (इंट्रॉन) द्वारा अंतरापित होते हैं। अव्यक्तेक या मध्यवर्ती अनुक्रम परिपक्व या संसाधित आर एन ए में नहीं मिलते हैं।

प्रश्न 12.
मानव जीनोम परियोजना को महापरियोजना क्यों कहा गया ?
उत्तर
मानव जीनोम योजना (एच. जी. पी.) महायोजना (मेगा प्रोजेक्ट) कहलाती है। यदि इस योजना के उद्देश्यों पर ध्यान दें तो इसके विस्तार व आवश्यकता के बारे में कल्पना कर सकते हैं मानव जीनोम में लगभग 3×109 क्षार युग्म मिलते हैं, यदि अनुक्रम जानने के लिए प्रति क्षार तीन अमेरिकन डॉलर (US$3) खर्च होते हैं तो पूरी योजना पर खर्च होने वाली लागत लगभग 9 बिलियन अमेरिकी डॉलर होगा।

प्राप्त अनुक्रमों को टंकणित रूप में किताब में संग्रहित किया जाए तो जिसके प्रत्येक पृष्ठ में 1000 अक्षर हो तो इस प्रकार इस किताब में 1000 पृष्ठ होंगे तब इस तरह से एक मानव कोशिका के डीएनए सूचनाओं को संकलित करने हेतु 3300 किताबों की आवश्यकता होगी। इस प्रकार बड़ी संख्या में आँकड़ों की प्राप्ति के लिए उच्च गतिकीय संगणक साधन की आवश्यकता होती है जिससे आँकड़ों के संग्रह, विश्लेषण व पुन: उपयोग में सहायता मिलती है। एचजीपी के बारे में जानकारी जीव विज्ञान के इस नए क्षेत्र का तेजी से विस्तार से संभव हो पाया जिसे जैव सूचना विज्ञान (बायोइनफार्मेटिक्स) कहते हैं।

एच.जी.पी. के लक्ष्य-

  1. मानव डीएनए में मिलने वाले एच.जी.पी. के कुछ महत्वपूर्ण लक्ष्य निम्नलिखित हैं लगभग 20000- 25000 सभी जीनों के बारे में पता लगाना,
  2. मानव डीएनए को बनाने वाले 3 बिलियन रासायनिक क्षार युग्मों के अनुक्रमों को निर्धारित करना।
  3. उपरोक्त जानकारी को आँकड़ों के रूप में संग्रहित करना
  4. आँकड़ों के विश्लेषण हेतु नयी तकनीक का सुधार करना
  5. योजना द्वारा उठने वाले नैतिक, कानूनी सामाजिक मुद्दों (इ. एल. एस. आई.) के बारे में विचार करना।

मानव जीनोम परियोजना 13 वर्ष की योजना को जिसे अमेरिका ऊर्जा विभाग (यू एस डिपार्टमेंट ऑफ एनर्जी) व राष्ट्रीय स्वास्थ्य संस्थान (नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ हेल्थ) द्वारा सहयोग प्राप्त था। प्रारंभिक वर्षों में वेलकम न्यास (यू.के.) की एचजीपी में भागीदारी थी और बाद में जापान, फ्रांस, जर्मनी, चीन व अन्य देशों द्वारा सहयोग प्रदान किया गया। यह योजना 2003 में पूर्ण हो गई। विभिन्न व्यक्तियों में मिलने वाले डीएनए की विभिन्नता के बारे में प्राप्त जानकारी से मानव में मिलने वाले हजारों अनियमितताओं के बारे में पहचानने, उपचार करने व कुछ हद तक उनके रोकने में सहायता मिली है।

इसके अतिरिक्त, मानव जीव विज्ञान के सुरागों को समझने, अमानवीय जीवों के डीएनए अनुक्रमों की प्राप्त जानकारी के आधार पर उनकी प्राकृतिक क्षमताओं का उपयोग कर स्वास्थ्य सुरक्षा, कृषि, ऊर्जा उत्पादन व पर्यावरण सुधार की दिशा में उठने वाली चुनौतियों को हल किया जा सकता है। कई अमानवीय प्रतिरूप-जीवों जैसे जीवाणु, यीस्ट, केएनोरहेब्डीटीस इलीगेंस (स्वतंत्र अरोगजनक सूत्रकृमि), ड्रॉसोफिला (फलमक्खी), पौधा (धान व एरेबीडाप्सीस) आदि के अनुक्रमों के बारे में जानकारी प्राप्त हुई है।

प्रश्न 13.
DNA अंगुलिछाप (फिंगर प्रिंटिंग) क्या है ? इसकी उपयोगिता पर प्रकाश डालिए।
उत्तर
DNA फिंगर प्रिंटिंग-DNA खण्डों के एन्डोन्यूक्लियेज की सहायता से विदलन द्वारा निश्चित व्यक्ति की पहचान DNA फिंगर प्रिंटिंग कहलाती है। इस तकनीक का आविष्कार एलेक जेफ्रॉय ने 1986 में किया। DNA की संरचना तथा आनुवंशिकता प्रत्येक जीव में विशिष्ट प्रकार की होती है, जो दूसरे व्यक्ति से भिन्नता प्रदर्शित करती है। प्रत्येक जीव का DNA क्रम उसके माता एवं पिता के DNA क्रम का संयोग होता है। इस तकनीक द्वारा किसी व्यक्ति, अपराधी, बलात्कारी और किसी बच्चे के माता-पिता की पहचान की जाती है।

इस तकनीक द्वारा कपड़े पर प्राप्त रक्त के धब्बे भले ही वे वर्षों पुराने हों, की सहायता से अपराधी की पहचान भी की जा सकती है। . भारत वर्ष में इस तकनीक का प्रयोग सर्वप्रथम 1989 में एक विवादास्पद माता-पिता की पहचान के लिए मद्रास में किया गया। DNA फिंगर प्रिंटिंग प्रयोगशाला-Centre for Cell and Molecular Biology (CCMB), हैदराबाद में स्थित है। भारतवर्ष में विवादास्पद जनकों की पहचान एक बहुत बड़ी समस्या है। इनमें से अधिकांश का निपटारा DNA फिंगर प्रिंटिंग द्वारा किया जाता है।

DNA फिंगर प्रिंटिंग तकनीक-

  1. DNA फिंगर प्रिंटिंग के लिए व्यक्ति के शरीर की कोशिका रक्त के धब्बों, बाल की जड़ों एवं वीर्य के धब्बों से DNA को प्राप्त किया जाता है। DNA सैम्पल को एण्डोन्यूक्लियेज प्रकिण्व की सहायता से पचाया जाता है।
  2. इसके बाद DNA को क्षारीय विलयन से उपचारित करके इकहरी श्रृंखला में परिवर्तित किया जाता है।
  3. इसके उपरान्त DNA को बफर संतृप्त फिल्टर-पेपर द्वारा छाना जाता है।
  4. प्राप्त DNA को पेपर टॉवेल के ऊपर रखा जाता है और इसके ऊपर नाइट्रोसेल्युलोज की झिल्ली को रखा जाता है।
  5. इसके ऊपर 0.5 किग्रा. का भार रात भर के लिए रखा जाता है। ऐसा करने से नाइट्रोसेल्युलोज झिल्ली इकहरे DNA अणु को अपने अन्दर बंधित कर लेती है।
  6. नाइट्रोसेल्यूलोज झिल्ली को 8°C पर 2 से 3 घण्टे के लिए रखा जाता है, जिससे DNA झिल्ली पर स्थित हो जाता है। अब इस DNA का रेडियोग्राफ तैयार कर सम्भावित व्यक्ति के DNA के रेडियोग्राफ से मिलाया जाता है और उसकी पहचान की जाती है।

प्रश्न 14.
निम्नलिखित का संक्षिप्त वर्णन कीजिए
(क) अनुलेखन
(ख) बहुरूपता
(ग) स्थानान्तरण
(घ) जैव सूचना विज्ञान।
उत्तर
(क) अनुलेखन (Transcription)–
DNA द्वारा एन्जाइम की उपस्थिति में RNA के संश्लेषण की क्रिया को अनुलेखन कहते हैं। यह क्रिया प्रोटीन संश्लेषण का प्रथम चरण है (दूसरा चरण अनुलिपिकरण होता है।) जो RNA पॉलिमरेज एन्जाइम द्वारा उप्रेरित होता है। अनुलेखन क्रिया निम्नलिखित-पदों में पूरी होती है

(i) DNA समाक्षारों का अनावरण-इस पद में DNA की दोहरी श्रृंखला RNA पॉलिमरेज विकर की उपस्थिति में अकुण्डलित होकर इकहरी होती है, जिससे विशिष्ट स्थान के समाक्षार अनावृत्त हो जाते हैं। अनावृत्त समाक्षारों की श्रृंखला m-RNA के संश्लेषण के लिए साँचे का काम करती है।

(ii) क्षार युग्मन-DNA के खुले विशेष भाग पर राइबोन्यूक्लियोटाइड्स एक निश्चित क्रम में जुड़ने लगते हैं। G के सामने C,C से G,T से A तथा U वाले राइबोन्यूक्लियोटाइडस यथानुसार जुड़ते हैं।

(iii) RNA श्रृंखला का निर्माण-DNA पर नये जुड़े राइबोन्यूक्लियोटाइड्स RNA पॉलिमरेज एन्जाइम .के मदद से आपस में जुड़कर RNA श्रृंखला बना लेते हैं । यह m-RNA, DNA से अलग होकर कोशिकाद्रव्य में पहुँचता है, जहाँ राइबोसोम से जुड़कर विशेष प्रोटीन के निर्माण की क्रिया प्रारम्भ करता है।

(ख) बहुरूपता (Polymorphism)-उत्परिवर्तन के कारण उत्पन्न होती है। किसी व्यक्ति में नये
उत्परिवर्तन उनकी कायिक कोशिकाओं या जनन कोशिकाओं में पैदा होते हैं। विकल्पी अनुक्रम विभिन्नता जिसे परम्परागत रूप से DNA बहुरूपता कहते हैं। मानव जनसंख्या में 0.01 से अधिक आवृत्ति में एक स्थल में असंगति मिलने से होता है। साधारणतया यदि एक वंशागति उत्परिवर्तन जनसंख्या में उच्च आवृत्ति से मिलता है तो इसे DNA बहुरूपता कहते हैं। इस प्रकार की संभावना इन्ट्रान DNA (Intron DNA) अनुक्रम में ज्यादा होती है तथा इन अनुक्रमों में होने वाला उत्परिवर्तन व्यक्ति की प्रजनन क्षमता को प्रभावित नहीं कर पाता है। बहुरूपता विभिन्न प्रकार की होती है। जिसमें एक न्यूक्लियोटाइड में या विस्तृत स्तर पर परिवर्तन होता है। विकास व जाति उद्भवन में उपरोक्त बहुरूपता की बहुत बड़ी भूमिका होती है।

(ग) स्थानान्तरण (Translation)-अनुलिपिकरण (प्रोटीन-संश्लेषण)-प्रोटीन-संश्लेषण के समय विभिन्न अमीनो अम्लों के अणु निश्चित संख्या में, एक निश्चित क्रम में विन्यसित होते हैं। DNA को पॉलिन्यूक्लियोटाइड श्रृंखला में न्यूक्लियोटाइडों का क्रम पॉलिपेप्टाइड श्रृंखला में अमीनो अम्ल के अनुक्रम को निर्धारित करता है। DNA के अनुलेखन द्वारा बने m-RNA में स्थित नाइट्रोजीनस क्षारों का अनुक्रम पॉलिपेप्टाइड श्रृंखला के एक विशिष्ट अमीनो अम्ल को कोडित करता है, इसे त्रिक कोड (Triplet code) कहते हैं | m-RNA में न्यूक्लियोटाइडों की श्रृंखला के अमीनो अम्लों की पॉलिपेप्टाइड श्रृंखला में स्थानान्तरण को अनुलिपिकरण कहते हैं।
यह क्रिया निम्नलिखित चरणों में पूरी होती हैं

  • अमीनो अम्लों का कोशिकाद्रव्य में सक्रियण।
  • सक्रिय अमीनो अम्लों का t-RNA से जुड़ना।
  • m-RNA का राइबोसोम से जुड़ना।
  • पॉलिपेप्टाइड श्रृंखला का प्रारम्भन ।
  • पॉलिपेप्टाइड श्रृंखला का दीर्धीकरण अर्थात् प्रोटीन का निर्माण।
  • श्रृंखला समापन।
  • श्रृंखला का रूपान्तरण।

(घ) जैव सूचना विज्ञान (Bio-information)-यह जीवविज्ञान की एक नई शाखा है । इसके अन्तर्गत मानव आनुवंशिक आंकड़ों का संग्रहण एवं विश्लेषण करता है।

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वंशागति का आणविक आधार वस्तुनिष्ठ प्रश्न

1. सही विकल्प चुनकर लिखिए

प्रश्न  1.
मुक्त अमीनो वर्ग तथा कार्बोक्सिलिक वर्ग वाले यौगिक कहलाते हैं
(a) ग्लूकोज
(b) न्यूक्लियोटाइड
(c) अमीनो अम्ल
(d) इनमें से कोई नहीं।
उत्तर
(c) अमीनो अम्ल

प्रश्न 2.
ऊर्जा स्थानान्तरण में भाग लेने वाले न्यूक्लियोटाइड हैं
(a) NAD
(b) FAD
(c) FMN
(d) ATP
उत्तर
(d) ATP

प्रश्न 3.
प्रोटीन की इकाई है
(a) वसीय अम्ल
(b) मोनोसैकेराइड्स
(c) अमीनो अम्ल
(d) ग्लिसरॉल।
उत्तर
(c) अमीनो अम्ल

प्रश्न 4.
न्यूक्लिक अम्ल किसके बहुलक हैं
(a) अमीनो अम्ल
(b) न्यूक्लियोसाइड
(c) न्यूक्लियोटाइड
(d) ग्लोब्यूलीन।
उत्तर
(c) न्यूक्लियोटाइड

प्रश्न 5.
पेप्टाइड बॉण्ड पाये जाते हैं
(a) प्रोटीन में
(b) वसा में
(c) न्यूक्लिक अम्ल में
(d) कार्बोहाइड्रेट में।
उत्तर
(a) प्रोटीन में

प्रश्न 6.
ग्लाइकोसाइडिक बन्ध किसमें पाये जाते हैं
(a) न्यूक्लिक अम्ल में
(b) प्रोटीन में
(c) पॉलीसैकेराइड में
(d) मोनोसैकेराइड में।
उत्तर
(c) पॉलीसैकेराइड में

प्रश्न 7.
आनुवंशिकी का नियन्त्रण किसके द्वारा किया जाता है
(a) DNA GRT
(b) RNA द्वारा
(c) प्रायः सभी में DNA द्वारा, लेकिन कुछ जीवों में RNA द्वारा
(d) इनमें से कोई नहीं।
उत्तर
(c) प्रायः सभी में DNA द्वारा, लेकिन कुछ जीवों में RNA द्वारा

प्रश्न 8.
निम्न में से कौन प्रोटीन नहीं है
(a) मायोसीन
(b) एक्टिन
(c) हीमेटीन
(d) एल्ब्यूमिन।
उत्तर
(c) हीमेटीन

प्रश्न 9.
तत्काल ऊर्जा देने वाला स्रोत है
(a) ग्लूकोज
(b)NADH
(c) ATP
(d) पाइरूविक अम्ल।
उत्तर
(c) ATP

प्रश्न 10.
ATP की खोज किसने की
(a) कार्ल लोमान
(b) लिपमैन
(c) बामैन
(d) ब्लैकमैन।
उत्तर
(a) कार्ल लोमान

प्रश्न 11.
कौन-सा नाइट्रोजीनस क्षार केवल RNA में पाया जाता है
(a) सायटोसीन
(b) एडिनीन
(c) यूरेसिल
(d) ग्वानीन
उत्तर
(c) यूरेसिल

प्रश्न 12.
कोशिका के अन्दर सर्वाधिक भिन्नता प्रदर्शित करने वाले अणु हैं
(a) खनिज लवण
(b) लिपिड्स
(c) प्रोटीन्स
(d) कार्बोहाइड्रेट
उत्तर
(c) प्रोटीन्स

प्रश्न 13.
DNA के डबल हेलिकल संरचना को प्रतिपादित करने वाले वैज्ञानिक थे
(a) नीरेनबर्ग
(b) कोर्नबर्ग
(c) हॉली एवं नीरेनबर्ग
(d) वाट्सन एवं क्रिक।
उत्तर
(d) वाट्सन एवं क्रिक।

प्रश्न 14.
पौधों के लिए खास महत्व नहीं रखने वाला तत्व है.
(a) Ca
(b) Zn
(c) Cu
(d)Na.
उत्तर
(d)Na.

प्रश्न 15.
DNA के एक चक्र में न्यूक्लियोटाइड्स पाये जाते हैं
(a) 9
(b) 10
(c) 11
(d) 12
उत्तर
(b) 10

प्रश्न 16.
निम्न में से कौन-सा सूक्ष्म खनिज होता है
(a)Ca
(b)N
(c)Mg
(d) Mn.
उत्तर
(d) Mn.

प्रश्न 17.
DNA एवं RNA में समानता पायी जाती है
(a) दोनों में एक प्रकार का पिरीमिडीन पाया जाता है
(b) दोनों में थायमिन होता है
(c) दोनों में एक प्रकार की शर्करा पायी जाती है
(d) दोनों न्यूक्लियोटाइड्स के पॉलीमर होते हैं।
उत्तर
(d) दोनों न्यूक्लियोटाइड्स के पॉलीमर होते हैं।

प्रश्न 18.
कोलेस्ट्रॉल है एक
(a) सरल लिपिड्स
(b) जटिल लिपिड्स
(c) व्युत्पन्न लिपिड्स
(d) प्रोटीन।
उत्तर
(c) व्युत्पन्न लिपिड्स

2. रिक्त स्थानों की पूर्ति कीजिए

1. जीन्स या पॉलीन्यूक्लियोटाइड श्रृंखलाओं में काट-छाँट को …………….. कहते हैं।
2. आनुवंशिक अभियांत्रिकी द्वारा …………….. में परिवर्तन किया जा सकता है।
3. U.A.A. U.A.G. एवं U.G.A……………… कोडॉन होते हैं।
4. …………… त्रिक, सार्वजनिक एवं असंदिग्ध होते हैं।
5. D.N.A. की सूचना का अनुलेखन …………….. के रूप में होता है।
6. अनुलेखन में भाग लेने वाले एन्जाइम का नाम …………….. है।
उत्तर

  1. आनुवंशिक अभियांत्रिकी
  2. जीवों के लक्षणों
  3. समापन
  4. कोडॉन
  5. m-R.N.A
  6. RNA पॉलिमरेज।

3. सही जोड़ी बनाइए

I. ‘A’ – ‘B’

1. अनियंत्रित कोशिका विभाजन की प्रेरणा – (a) ट्रांस जीन
2. आवश्यकता पड़ने पर ही अभिव्यक्ति – (b) हाउसकीपिंग जीन
3. कोशिकीय क्रियाशीलता हेतु आवश्यक – (c) आन्कोजीन
4. आनुवंशिक अभियांत्रिकी द्वारा दूसरे – (d) ऑपरेटर जीन जीनोम में प्रविष्टि
5. DNA में संरचनात्मक जीन्स की क्रिया – (e) साइलेंट जीन। शीलता का नियंत्रण
6. एक जीन एक एन्जाइम सिद्धांत – (f) बीडल-टैटम।
उत्तर
1.(c), 2. (e), 3. (b), 4. (a), 5. (d), 6. (f)

II. ‘A’ – ‘B’

1. इंसुलिन – (a) डी. एन. ए. में सकारात्मक परिवर्तन
2 जीन बैंक – (b) मानव जीनोम प्रायोजना
3. जीन अभियांत्रिकी – जीन अभियांत्रिकी
4. जीनोमिकी – (d) ज्ञात D.N.A. संरक्षण।
उत्तर
1.(c), 2. (d), 3.(a), 4. (b).

III. ‘A’ – ‘B’

1. म्यूटेशन – (a) लिंग सहलग्नता
2. हीमोफिलिया – (b) होलेन्ड्रिक जीन
3. गंजापन – (c) डी ब्रीज
4. लिंग गुणसूत्र – (d) 44 गुणसूत्र
5. ऑटोसोम – (e) X तथा Y.
उत्तर
1.(c), 2.(a), 3. (b), 4.(e),5. (d)

4. एक शब्द में उत्तर दीजिए

1. जीन्स का वह.खण्ड जो कोडित नहीं होता।
2. उस विषाणुभोजी का नाम बताइये जिसमें जीन्स ओवरलैपिंग होते हैं।
3. ऐसा रोग, जो अनियंत्रित कोशिका विभाजन के कारण होता है।
4. RNA द्वारा DNA बनाने की क्रिया।
5. प्रथमतः प्रयोगशाला में कृत्रिम जीन बनाने वाले वैज्ञानिक का नाम लिखिए।
6. जीन नियमन के संबंध में जैकब तथा मोनोड द्वारा प्रतिपादित मॉडल।
7. DNA के दोनों स्ट्रैण्ड्स के अलग होने की प्रक्रिया।
8. पॉलीपेप्टाइड श्रृंखला का समारम्भन करने वाला अमीनो अम्ल।
9. उस रासायनिक पदार्थ का नाम बतलाइये जिसकी सहायता से आनुवंशिक सूचना
पीढ़ी-दर-पीढ़ी जाती है।
10. रिवर्स ट्रांसक्रिप्शन की खोज करने वाले वैज्ञानिक का नाम लिखिए।
11. वह न्यूक्लिक अम्ल जिसमें राइबोज शुगर पाया जाता है।
12. DNA द्विगुणन के पूर्व बनने वाला RNA का छोटा खण्ड।
13. एक जीन एक एन्जाइम सिद्धान्त का प्रतिपादन किसने किया।
14. ऐसा सूक्ष्मजीव, जो अपनी वृद्धि के लिए एक अथवा एक से अधिक उपापचयी क्रियाएँ नहीं बना सकते।
15. उस वैज्ञानिक का नाम बतलायें जिन्होंने मेंडेलियन कारकों को जीन कहा।
16. DNA का खण्ड जो एक पॉलीपेप्टाइड का संश्लेषण करता है।
17. प्रोटीन संश्लेषण के समय अमीनो अम्लों को ढोने वाला RNA
18. एन्जाइम के समान कार्य करने वाले RNA
19. mRNA पर पाये जाने वाले न्यूक्लियोटाइड्स के त्रियक समूह जो एक अमीनो अम्ल को कोडित करता है।
20. मिथियोनिन को कोडित करने वाला कोडॉन।
उत्तर

  1. इन्ट्रॉन
  2. φ x 174
  3. कैंसर
  4. रिवर्स ट्रांसक्रिप्शन
  5. एच. जी. खुराना
  6. ओपेरॉन मॉडल
  7. डिनेचुरेशन
  8. मिथियोनीन
  9. DNA
  10. टेमिन तथा बाल्टीमोर
  11. RNA
  12. RNA प्राइमर
  13. बीडल एवं टैटम
  14. ऑक्जोट्रॉफ
  15. जोहानसन
  16. सिस्ट्रॉन
  17. tRNA
  18. राइबोजाइम
  19. कोडॉन
  20. AUG.

वंशागति का आणविक आधार अति लघु उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 1.
रेगुलेटर, प्रमोटर, ऑपरेटर तथा संरचनात्मक जीनों को एक साथ क्या कहते हैं ?
उत्तर
ओपेरॉन।

प्रश्न 2.
जब किसी जीव में इच्छित जीन को प्रवेश करा दिया जाता है तो इसे क्या कहते हैं ?
उत्तर
ट्रान्सजीनिक जीव।

प्रश्न 3.
आनुवंशिक रूप से समान कोशिकाओं अथवा जीवों का समूह क्या कहलाता है ?
उत्तर
क्लोन।

प्रश्न 4.
D.N.A. में संचित सूचना के संचरण तथा फिर से प्रकट होने एवं लक्षणों के बनने को क्या कहते हैं?
उत्तर
जीन अभिव्यक्ति।

प्रश्न 5.
RNA के शर्करा का नाम लिखिए।
उत्तर
राइबोज शर्करा।

प्रश्न 6.
AUG कौन-सा कोडॉन है ?
उत्तर
प्रारंभन कोडॉन।

प्रश्न 7.
अनुलेखन में भाग लेने वाले एन्जाइम का क्या नाम है ?
उत्तर
RNA पॉलीमरेज।

प्रश्न 8.
D.N.A. आनुवांशिक पदार्थ है। इसके बारे में सुस्पष्ट प्रमाण किसने दिये ?
उत्तर
अल्फ्रेड हर्षे व मार्था चेस ने।

प्रश्न 9.
D.N.A. में शर्करा एवं फॉस्फोरिक अम्ल के मिलने से कौन-सा बंध बनता है ?
उत्तर
फास्फोडाइएस्टर बंध।

प्रश्न 10.
ऐसे खण्डों का नाम बताइये जो hn RNA से RNA स्प्लाइसिम के द्वारा काटकर अलग कर देते हैं ?
उत्तर
इन्ट्रॉन (Intron)

प्रश्न 11.
उस एंजाइम का नाम बताइये जो अनुलेखन में सहायता करता है।
उत्तर
RNA पॉलीमरेज विकर।

प्रश्न 12.
जीन अभिव्यक्ति के नियमन की ओपेरॉन अवधारणा किन वैज्ञानिकों ने दी ?
उत्तर
जैकब व मोनाड।

प्रश्न 13.
आनुवंशिक कूट में कोमारहित से क्या तात्पर्य है?
उत्तर
दो कोडान के बीच विराम नहीं होता।

प्रश्न 14.
Sn RNP का पूर्ण नाम बताइये।
उत्तर
लघुकेन्द्रकीय राइबोन्यूक्लियो प्रोटीन (Small nuclear ribonucleo protein)।

वंशागति का आणविक आधार लघु उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 1.
जेनेटिक कोड क्या है ? इसकी खोज के बारे में आप क्या जानते हैं ?
उत्तर
m-RNA में उपस्थित तीन न्यूक्लियोटाइडों के अनुक्रम को जो प्रोटीन अणुओं को कोड करते हैं, आनुवंशिक कोड कहते हैं। सन् 1950 में नरेनबर्ग ने सर्वप्रथम जेनेटिक कोड के ट्रिपलेट की खोज की। इन्होंने एक ऐसे RNA का संश्लेषण किया जिसमें ‘U’ बेस था। इसे इन्होंने पॉलियूरेसिल कहा। जब इन्होंने इसको ऐसे सम्वर्धन माध्यम में रखा जिसमें प्रोटीन संश्लेषण के लिए आवश्यक अवयव थे, तब इनसे प्रोटीन अवयव प्राप्त हुए।

प्रश्न 2.
ऑन्कोजीन्स (Oncogenes), साइलेंट जीन्स (Silent genes) व हॉउस कीपिंग जीन्स (House keeping genes) क्या हैं ?
उत्तर
ऑन्कोजीन्स (Oncogenes)-कुछ विषाणुवीय जीन अनियन्त्रित समसूत्री कोशिका विभाजन को प्रेरित करके पोषक कोशिकाओं में कैंसर पैदा करते हैं, जिन्हें ऑन्कोजीन्स कहते हैं।
साइलेण्ट जीन्स (Silent genes)-वे जीन्स हैं, जो अपनी अभिव्यक्ति को प्रदर्शित नहीं करते। इनकी अभिव्यक्ति आवश्यकता पड़ने पर होती है। . हॉउस कीपिंग जीन्स (House keeping genes)-ऐसे जीन्स जिनकी आवश्यकता कोशिकीय उत्पादों के निर्माण में होती है तथा ये कोशिकीय क्रियाशीलता के लिए आवश्यक होते हैं, इन्हें हॉउस कीपिंग जीन्स कहते

प्रश्न 3.
ओकाजाकी खण्ड तथा सतत् श्रृंखला (लीडिंग स्ट्रैण्ड) किसे कहते हैं ?
उत्तर

  • ओकाजाकी खण्ड-
    DNA प्रतिकृतिकरण के क्रम में हमेशा नये DNA अणु का संश्लेषण 5’3′ दिशा में होता है। इसके कारण पैतृक DNA के 3-5′ शृंखला पर बार-बार RNA प्राइमर की मदद से पूरक DNA के छोटे-छोटे खण्ड बनते हैं। इन खण्डों को ओकाजाकी खण्ड कहते हैं।
  • सतत् श्रृंखला-
    DNA के टेम्पलेट का प्रथम स्ट्रैण्ड जिस पर DNA का निर्माण सतत् स्टैण्ड (Continuous strand) के रूप में होता है, इसे लीडिंग स्ट्रैण्ड (Leading strand) कहते हैं, क्योंकि इसका निर्माण निरन्तर रूप से तथा पहले होता है।

प्रश्न 4.
DNA न्यूक्लियोटाइड कौन-से अणुओं से मिलकर बनते हैं ?
उत्तर
DNA के न्यूक्लियोटाइडों के घटक अणु| न्यूक्लियोटाइड
MP Board Class 12th Biology Solutions Chapter 6 वंशागति का आणविक आधार 5

प्रश्न 5.
पेप्टाइड बन्ध किसे कहते हैं ?
उत्तर
एक अमीनो अम्ल का अमीनो समूह दूसरे अमीनो अम्ल के कार्बोक्सिलिक समूह से मिलकर जल एक अणु को विमुक्त करता है तथा एक बन्ध बनाता है, जिसे पेप्टाइड बन्ध कहते हैं। बहुत से अमीनो अम्ल इसी बन्ध के द्वारा जुड़कर पॉलिपेप्टाइड अर्थात् प्रोटीन का संश्लेषण करते हैंMP Board Class 12th Biology Solutions Chapter 6 वंशागति का आणविक आधार 6

प्रश्न 6.
वाटसन एवं क्रिक के DNA मॉडल का विवरण दीजिए।
उत्तर
DNA संरचना की खोज वाटसन एवं क्रिक ने किया था। उनके अनुसार DNA अणु दो कुण्डलित पॉलिन्यूक्लियोटाइड शृंखलाओं का बना होता है। दोनों श्रृंखलाएँ आपस में नाइट्रोजनी क्षारकों द्वारा जुड़ी रहती हैं। कुण्डलित श्रृंखला के स्तम्भ न्यूक्लियोटाइड के शर्करा तथा फॉस्फेट समूहों के बने होते हैं। इसमें दो प्रकार के क्षारक पाये जाते हैं-प्यूरीन तथा पिरिमिडिन तथा दोनों लगभग बराबर मात्रा में होते हैं।
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प्रश्न 7.
आर. एन. ए. प्राइमर क्या है तथा यह DNA के निर्माण । में क्यों आवश्यक है ?
उत्तर
आर. एन. ए. प्राइमर एन्जाइम होता है, जो DNA के निर्माण के समारंभन के लिए आवश्यकत होता है। यह एन्जाइम एक छोटी पॉलिपेप्टाइड श्रृंखला का प्रोटीन अणु होता है। इसका निर्माण DNA टेम्पलेट पर द्विगुणन के प्रारम्भ बिन्दु पर प्राइमेज (Primase) नामक प्रकीण्व की सक्रियता से होता है।

DNA के निर्माण के प्रारम्भ हेतु एक आर. एन. ए. प्राइमर की आवश्यकता पड़ती है। यह समारंभन बिन्दु पर बनता है। RNA प्राइमर के अन्तिम राइबोन्यूक्लियोटाइड से DNA के टेम्पलेट स्ट्रैण्ड पर DNA पॉलिमरेज-III एन्जाइम द्वारा नये-नये सम्पूरक न्यूक्लियोटाइड्स 5′–3′ रेखा में जुड़ते जाते हैं।

प्रश्न 8.
कोडॉन एवं ऐण्टिकोडॉन को परिभाषित कीजिए।
उत्तर
कोडॉन (Codon)-कोडॉन m-RNA में स्थित नाइट्रोजन क्षारकों का एक त्रिक (ट्रिप्लेट) क्रम होता है, जो DNA अणु से प्रतिकृत होता है तथा एक विशिष्ट अमीनो अम्ल को कोड करता है। जैसेm-RNA पर स्थित AUG कोडॉन मिथियोनिन नामक अमीनो अम्ल को कोड करता है।

ऐण्टिकोडॉन (Anticodon)-ट्रांसफर RNA के ऐण्टिकोडॉन लूप पर स्थित तीन नाइट्रोजनी क्षारकों का वह विशिष्ट क्रम, जो प्रोटीन संश्लेषण के क्रम में विशिष्ट अमीनो अम्ल को संश्लेषण स्थल अर्थात् राइबोसोम तक ले जाने वाले t-RNA द्वारा m-RNA के कोडॉन से बन्ध बनाता है । जैस-m-RNA के AUG कोडॉन हेतु मिथियोनिन नामक अमीनो अम्ल वाहक t-RNA के ऐण्टिकोडॉन लूप पर UAC नामक ऐण्टिकोडॉन होता है।

वंशागति का आणविक आधार दीर्घ उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 1.
DNA द्विगुणन को समझाइए।
उत्तर
DNA की श्रृंखला अपने ही समान दूसरी श्रृंखला बना सकती है, DNA की इसी क्रिया को DNA द्विगुणन कहते हैं । वाटसन एवं क्रिक के अनुसार द्विगुणन के समय DNA की दोनों शृंखलाओं के क्षारों के हाइड्रोजन DNA Molecule बन्ध टूट जाते हैं फलतः दोनों श्रृंखलाएँ अलग हो जाती हैं।
MP Board Class 12th Biology Solutions Chapter 6 वंशागति का आणविक आधार 8
प्रत्येक कोशिका के कोशिकाद्रव्य तथा केन्द्रक में स्वतन्त्र न्यूक्लियोटाइड्स पाये जाते हैं, ये New DNA की इकहरी श्रृंखला के न्यूक्लियोटाइड के साथ जोड़ी बना देते हैं, स्वतन्त्र ऐडीनीन न्यूक्लियोटाइड, खुली श्रृंखला के थायमीन न्यूक्लियोटाइड और ग्वानीन, साइटोसिन न्यूक्लियोटाइड से जुड़ते हैं। इसके बाद शर्करा अणु अपने फॉस्फेट घटक से जुड़कर खुली शृंखला के ही समान नई श्रृंखला बना देते हैं। इस प्रकार प्रत्येक खुली श्रृंखला पुनः नया कुण्डलित DNA बना देती है।

प्रश्न 2.
केन्द्रकीय अम्लों के कार्यों की विवेचना कीजिए।
अथवा
केन्द्रकीय अम्लों की उपयोगिता समझाइए।
उत्तर
केन्द्रकीय अम्ल हमारे लिए बहुत अधिक उपयोगी होते हैं, उनके प्रमुख उपयोग निम्नलिखित हैं

  • ये आनुवंशिक गुणों की इकाई की तरह कार्य करते हैं। पादप विषाणुओं में जिनके आनुवंशिक गुणों का वहन RNA द्वारा होता है। शेष का DNA द्वारा होता है।।
  • ये प्रकीण्वों (प्रोटीन) का निर्माण करते हैं।
  • ये प्रोटीन संश्लेषण के द्वारा शरीर की उपापचयी क्रियाओं का नियन्त्रण करते हैं ।
  • ये गुणसूत्रों का निर्माण करते हैं।
  • RNA वृद्धि की तीव्रता को बढ़ाता है।
  • ये जीवों में उत्परिवर्तन तथा जैव-विकास के लिए जिम्मेदार होते हैं।

प्रश्न 3.
आर.एन.ए. की संरचना को समझाइए।
उत्तर
RNA वह नाभिकीय अम्ल है जो पॉलीराइबोन्यूक्लियोटाइड की इकहरी श्रृंखला का बना होता है। राइबोन्यूक्लियोटाइड के निर्माण के समय ऐडीनीन, ग्वानीन, साइटोसिन तथा यूरेसिल में से कोई एक क्षारक राइबोज शर्करा से जुड़कर चार प्रकार के राइबोन्यूक्लियोसाइडों का निर्माण करता है, जो फॉस्फोरिक अम्ल से फॉस्फेट लेकर चार प्रकार के न्यूक्लियोटाइड बनाते हैं। ये न्यूक्लियोटाइड आपस में जुड़कर पॉलीराइबोन्यूक्लियोटाइड श्रृंखला बना देते हैं। यही शृंखला RNA होती है RNA बनने वाले चारों प्रकार के न्यूक्लियोसाइड तथा न्यूक्लियोटाइड निम्नलिखित
MP Board Class 12th Biology Solutions Chapter 6 वंशागति का आणविक आधार 9

प्रश्न 4.
RNA के तीन प्रकारों के नाम एवं उनकी संक्षेप में उपयोगिता लिखिए।
उत्तर
आर.एन.ए. तीन प्रकार के होते हैं उनकी प्रमुख उपयोगिता निम्नानुसार हैं

1. संदेश वाहक आर.एन.ए. (m-RNA)-
ये केन्द्रक में DNA द्विगुणन से बनते हैं तथा इसके सन्देश को न्यूक्लियोटाइडों के विशेष क्रम के रूप में कोशिकाद्रव्य के राइबोसोम तक लाते हैं, जो इन्हीं के अनुसार प्रोटीन का संश्लेषण करता है।

2. स्थानान्तरण आर.एन.ए. (t-RNA)-
ये कोशिकाद्रव्य में पाये जाते हैं तथा m-RNA से छोटे होते हैं। ये कोशिकाद्रव्य से विशिष्ट अमीनो अम्लों को राइबोसोम तक पहुँचाते हैं।

3. राइबोसोमल आर.एन.ए. (r-RNA)-
ये राइबोसोम में पाये जाते हैं, इनका अणुभार बहुत अधिक होता है इसी में m-RNA के अनुसार अमीनो अम्ल जुड़कर प्रोटीन का संश्लेषण राइबोसोम के अन्दर करते हैं।

प्रश्न 5.
न्यूक्लियोटाइडों की संरचना का वर्णन कीजिए।
उत्तर
ये एक छोटे एवं जटिल अणुओं के समूह हैं, जो कोशिका में सूचना स्थानान्तरण प्रक्रिया का महत्वपूर्ण कार्य करते हैं । ये नाभिकीय अम्ल की मूल इकाई है। ये कार्बन, हाइड्रोजन, ऑक्सीजन, नाइट्रोजन एवं फॉस्फोरस से मिलकर बने होते हैं। प्रत्येक न्यूक्लियोटाइड में एक अणु नाइट्रोजन युक्त विषम चक्रीय क्षार, एक पेण्टोज शर्करा तथा एक से तीन फॉस्फेट समूह के बने होते हैं।
न्यूक्लियोटाइड में पाये जाने वाले नाइट्रोजन युक्त क्षार दो प्रकार के होते हैं

  • प्यूरीन-दो रिंग वाले जैसे-ऐडीनीन तथा ग्वानीन (Adenine and Guanine)
  • पिरिमिडीन-एक रिंग वाले जैसे-साइटोसीन, थायमीन तथा यूरेसिल (Cytocine, Thymine and Uracil)

न्यूक्लियोटाइड के पेण्टोज शर्करा भी दो प्रकार के होते हैं

  • राइबोज शर्करा-CH2OH.(CHOH)2CHOH.CHO
  • डी-ऑक्सीराइबोज शर्करा-CH2OH.(CHOH)2CH CHO

न्यूक्लियोटाइड निर्माण के समय पाँच प्रकार के नाइट्रोजनी क्षार, राइबोज या डी-ऑक्सीराइबोज शर्करा से मिलकर न्यूक्लियोटाइड बनाते हैं। न्यूक्लियोटाइड से फॉस्फोरस अम्ल के अणु मिलकर न्यूक्लियोटाइड बना देते हैं। पाँच प्रकार के नाइट्रोजनी क्षारों के आधार पर बने न्यूक्लियोसाइड तथा न्यूक्लियोटाइड निम्नानुसार हैं
MP Board Class 12th Biology Solutions Chapter 6 वंशागति का आणविक आधार 10
राइबोज तथा डी-ऑक्सीराइबोज शर्करा के आधार पर इनमें नाम जोड़ देते हैं । इस प्रकार कुल चार प्रकार के न्यूक्लियोटाइड राइबोज शर्करा वाले तथा चार प्रकार के डी-ऑक्सीराइबोज शर्करा बाले बनते हैं।

प्रश्न 6.
न्यूक्लियोटाइडों के कार्य लिखिए।
उत्तर
न्यूक्लियोटाइडों के कार्य-

  • विभिन्न प्रकार के न्यूक्लियोटाइड बहुलीकरण द्वारा नाभिकीय अम्लों (RNA एवं DNA) का निर्माण करते हैं, जो आनुवंशिक पदार्थ के रूप में कार्य करते हैं।
  • न्यूक्लियोटाइड विशेष क्रम (कोडॉन) के रूप में प्रोटीन संश्लेषण की सूचना का संचरण करते हैं।
  • ये फॉस्फेट बन्ध (ATP) के रूप में ऊर्जा का संचय तथा संवहन करते हैं।
  • कुछ न्यूक्लियोटाइड सह-एन्जाइम जैसे-NAD, NADP, FMN, FAD इत्यादि के रूप में कार्य करते हैं।
  • कुछ न्यूक्लियोटाइड विटामिन (जैसे-राइबोफ्लेविन)के रूप में कार्य करते हैं।
  • कुछ न्यूक्लियोटाइड कोशिकाओं जैसे-राइबोसोम, माइटोकॉण्ड्रिया, हरितलवक आदि के निर्माण में भाग लेते हैं।
  • न्यूक्लियोटाइड हमारे शरीर की विविध क्रियाओं का नियन्त्रण करते हैं।

प्रश्न 7.
जेनेटिक कोड के प्रमुख लक्षण लिखिए।
उत्तर
जेनेटिक कोड के प्रमुख लक्षण निम्नलिखित हैं

  1. ट्रिपलेट कोड-प्रत्येक आनुवंशिक कोड तीन नाइट्रोजीनस क्षारकों के समूह का बना होता है अतः प्रत्येक अमीनो अम्ल के लिए क्षार समूह का बना एक कोड आवश्यक होता है।
  2. प्रारंभिक सिगनल-पॉलिपेप्टाइड श्रृंखला के निर्माण का प्रारंभ m-RNA पर पाये जाने वाले AUG या ‘GUG कोडॉन में होता है ये क्रमश: मिथियोनिन तथा वैलिन अमीनो अम्लों को कोड करते हैं।
  3. रूकावट सिगनल-प्रत्येक पॉलिपेप्टाइड श्रृंखला की लंबाई निश्चित होती है, अतः शृंखला का निर्माण के बाद की क्रिया का समापन आवश्यक होता है | m-RNA पर पाये जाने वाले तीन कोडॉन UAA, UAG तथा UGA किसी भी अमीनो अम्ल को कोड नहीं करते। ये श्रृंखला निर्माण की क्रिया को रोकते हैं । अत: उन्हें मैनरिंग कोडॉन कहते हैं।
  4. एक कोडॉन हमेशा एक ही अमीनो अम्ल को कोड करता है दूसरे को नहीं।

प्रश्न 8.
जेनेटिक कोड की विशेषताएँ लिखिए।
उत्तर
जेनेटिक कोड m-RNA में स्थित नाइट्रोजनी बेस का ट्रिपलेट हैं, जो DNA अणु से प्रतिकृत होता है एवं विशिष्ट अमीनो अम्ल को कोड करता है। यह प्रोटीन अणुओं के संश्लेषण के दौरान अमीनो अम्लों को जोड़ने की सूचना को निहित रखता है।

(Special Features of Genetic Code)
(1) यह ट्रिपलेट कोड है-कोडॉन विशिष्ट क्रम में व्यवस्थित m-RNA के तीन नाइट्रोजनी बेस क्रम का होता है।

(2) कोड कोमाविहीन होता है-दो कोडॉन के बीच विराम नहीं होता है या दो संलग्न कोडॉन के बीच कोई रिक्त स्थान नहीं होता है।

(3) कोड अपह्रासित होता है-कोड तथा अमीनो अम्ल के बीच आनुपातिक सम्बन्ध होता है, यह जेनेटिक कोड अपह्रास (Degeneracy of code) कहलाता है। यह अपह्रास 3 सिरे पर उपस्थित नाइट्रोजन बेस में होता है। एक अमीनो अम्ल के लिए एक से अधिक कोड होते हैं। जैसे-सिरीन के लिए तीन कोड UCU, UCA, AGU

(4) कोड सार्वत्रिक होता है-जन्तु, पादप, जीवाणु, वाइरस सभी में एक ही प्रकार का जेनेटिक कोड होता है। यदि सिरीन के लिए UCU कोड है, तो सभी जीवों में सिरीन के लिए UCU ही कोड होगा।

(5) कोड संदिग्धता-कोशिकीय माध्यम में आनुवंशिक कोड की स्थिति असंदिग्ध होती है, क्योंकि एक विशिष्ट कोडॉन हमेशा एक अमीनो अम्ल को कोड करता है, किन्तु असामान्य परिस्थितियों में कुछ कोडॉन अलग-अलग अमीनो अम्लों को कोड करते हैं।

(6) प्रारम्भन कोडॉन एवं समापन कोडॉन-कुछ कोडॉन पॉलिपेप्टाइड श्रृंखला का प्रारम्भन तथा कुछ समापन करते हैं । इन्हें क्रमशः प्रारम्भन तथा समापन कोडॉन कहते हैं । सामान्यत: AUG ही प्रारम्भन कोडॉन के रूप में होता है, जबकि UAA, UGA तथा UAG समापन कोडॉन का कार्य करते हैं।

प्रश्न 9.
जीन संकल्पना की प्रमुख पाँच विशेषताएँ लिखिए।
उत्तर
जीन संकल्पना को सटन (Sutton), ब्रिजेस (Bridges), मुलर (Muller) तथा मार्गन (Morgan) ने प्रतिपादित किया था, जिनके अनुसार जीन्स में निम्न विशेषताएँ होती हैं

  • ये गुणसूत्रों में स्थित होते हैं।
  • ये जीवों के फिजियोलॉजिकल लक्षणे का निर्धारण करते हैं
  • ये विशिष्ट लक्षणों (Specific characters) वाली क्रियात्मक इकाई (Functional units) कहलाते हैं।
  • इनमें स्वयं के अनुलिपीकरण (Self transcription) करने की क्षमता होती है।
  • इनमें उत्परिवर्तन (Mutation) होता है।
  • ये एक पीढ़ी से दूसरी पीढ़ी में जनकों द्वारा पहुँचती है।

प्रश्न 10.
जीन अभिव्यक्ति किसे कहते हैं ? जीवाणुओं में जीन अभिव्यक्ति की दो विधियाँ लिखिए।
उत्तर
आनुवंशिकता के दौरान DNA में संचित सूचना के एक पीढ़ी से दूसरे पीढ़ी में संचरित होने तथा फिर से प्रकट होने एवं पैतृक लक्षणों के पुनः बनने को जीन अभिव्यक्ति या जीन भावाभिव्यक्ति कहते हैं।
जीवाणु में जीन अभिव्यक्ति की दो प्रमुख विधियाँ निम्नानुसार हैं

  • ट्रान्सडक्शन-इस विधि में जीवाणु DNA जीवाणुभोजी द्वारा स्थानान्तरित होकर सन्ततियों में पहुँचता है और अपनी अभिव्यक्ति करता है।
  • ट्रान्सफॉर्मेशन-इस विधि में एक जीवाणु DNA, दूसरे जीवाणु DNA को अपने अन्दर सम्मिलित कर इसे सन्ततियों में स्थानान्तरित करता है।

प्रश्न 11.
DNA प्रतिकृतिकरण में प्रूफ रीडिंग एवं मरम्मत की विधि का वर्णन कीजिए।
उत्तर
DNA का क्षारक युग्मन विशिष्ट प्रकार का होता है, जिसमें ऐडीनीन (A) हमेशा थायमीन (T) के साथ तथा सायटोसीन (C) हमेशा ग्वानीन (G) के साथ युग्मन करता है। कभी-कभी DNA के द्विगुणन के समय गलत क्षारकों में युग्मन हो जाता है, तब ऐसी स्थिति में DNA पॉलिमरेज- III एन्जाइम प्रूफ रीडिंग (Proof reading) का कार्य करता है। इस क्रिया के समय DNA पॉलिमरेज III एन्जाइम टेम्पलेट DNA पर 5′-73 दिशा में नये न्यूक्लियोटाइड्स बनाने के पूर्व पहले से निर्मित किए गए न्यूक्लियोटाइड्स पर वापस आकर उसमें उपस्थित गलत क्षारक को अलग करके उसके स्थान पर सही क्षारक को फिट कर देता है।

प्रश्न 12.
DNA तथा RNA में क्या अन्तर है ? (कोई चार)
उत्तर
DNA तथा RNA में अन्तरDNA
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प्रश्न 13.
DNA द्विगुणन से सम्बन्धित आवश्यक प्रकोण्वों के नाम तथा उनके कार्यों को लिखिए।
उत्तर
DNA द्विगुणन से सम्बन्धित आवश्यक प्रकोण्व तथा उसके कार्य निम्नलिखित हैं

  • न्यूक्लियेजेस (Nucleases)-ये एन्जाइम DNA के दोनों कुण्डलियों का अकुण्डलीकरण करता है, इसके क्रम में DNA श्रृंखला में उपस्थित हाइड्रोजन बन्धों का जल-अपघटन होता है।
  • RNA प्राइमेज या RNA पॉलिमरेज-इस इन्जाइम की सहायता से DNA टेम्पलेट पर RNA प्राइमर का संश्लेषण समारंभन बिन्दु पर होता है।
  • DNA पॉलिमरेजेज-ये ऐसे प्रकीण्व होते हैं जो DNA साँचे पर द्वि-ऑक्सी राइबोन्यूक्लियोटाइडों का बहुलीकरण करते हैं।
  • लाइगेजेज-यह एन्जाइम पॉलिन्यूक्लियोटाइड श्रृंखला को जोड़ने और DNA की मरम्मत का कार्य करता है।

प्रश्न 14.
अनुलेखन क्या है ? इसकी प्रक्रिया समझाइए।
अथवा
अनुलेखन (ट्रान्सक्रिप्शन ) किसे कहते हैं ? समझाइए। यह किस एन्जाइम द्वारा उत्प्रेरित होता है ?
उत्तर
DNA द्वारा एन्जाइम की उपस्थिति में RNA के संश्लेषण की क्रिया को अनुलेखन कहते हैं। यह क्रिया प्रोटीन संश्लेषण का प्रथम चरण है (दूसरा चरण अनुलिपिकरण होता है।) जो RNA पॉलिमरेज एन्जाइम द्वारा उप्रेरित होता है। अनुलेखन क्रिया निम्नलिखित-पदों में पूरी होती है

(i) DNA समाक्षारों का अनावरण-इस पद में DNA की दोहरी श्रृंखला RNA पॉलिमरेज विकर की उपस्थिति में अकुण्डलित होकर इकहरी होती है, जिससे विशिष्ट स्थान के समाक्षार अनावृत्त हो जाते हैं। अनावृत्त समाक्षारों की श्रृंखला m-RNA के संश्लेषण के लिए साँचे का काम करती है।

(ii) क्षार युग्मन-DNA के खुले विशेष भाग पर राइबोन्यूक्लियोटाइड्स एक निश्चित क्रम में जुड़ने लगते हैं। G के सामने C,C से G,T से A तथा U वाले राइबोन्यूक्लियोटाइडस यथानुसार जुड़ते हैं।

(iii) RNA श्रृंखला का निर्माण-DNA पर नये जुड़े राइबोन्यूक्लियोटाइड्स RNA पॉलिमरेज एन्जाइम .के मदद से आपस में जुड़कर RNA श्रृंखला बना लेते हैं । यह m-RNA, DNA से अलग होकर कोशिकाद्रव्य में पहुँचता है, जहाँ राइबोसोम से जुड़कर विशेष प्रोटीन के निर्माण की क्रिया प्रारम्भ करता है।

प्रश्न 15.
DNA द्विगुणन की अर्द्धसंरक्षी प्रक्रिया का वर्णन कीजिए।
उत्तर
DNA द्विगुणन की अर्द्धसंरक्षी प्रक्रिया का वर्णन वाटसन एवं क्रिक ने किया था। मेसेल्सन एवं स्टॉल ने इसकी प्रायोगिक पुष्टि की। DNA द्विगुणन की इस विधि में सर्वप्रथम पैतृक DNA के दोनों स्टैण्ड्स एक-दूसरे से पृथक् हो जाते हैं और दोनों स्टैण्ड्स टेम्पलेट की भाँति कार्य करके अपने सम्पूरक स्टैण्ड का निर्माण करते हैं ।
MP Board Class 12th Biology Solutions Chapter 6 वंशागति का आणविक आधार 12
इस प्रकार नवनिर्मित DNA के दोनों स्ट्रैण्ड्स में एक-एक पुराना एवं दूसरा नवनिर्मित स्ट्रैण्ड (Newly formed) होता है । इसे ही अर्द्धसंरक्षी DNA द्विगुणन कहते हैं।

प्रश्न 16.
अनुलिपिकरण किसे कहते हैं ? बताइए।
उत्तर
अनुलिपिकरण (प्रोटीन-संश्लेषण)-प्रोटीन-संश्लेषण के समय विभिन्न अमीनो अम्लों के अणु निश्चित संख्या में, एक निश्चित क्रम में विन्यसित होते हैं। DNA को पॉलिन्यूक्लियोटाइड श्रृंखला में न्यूक्लियोटाइडों का क्रम पॉलिपेप्टाइड श्रृंखला में अमीनो अम्ल के अनुक्रम को निर्धारित करता है। DNA के अनुलेखन द्वारा बने m-RNA में स्थित नाइट्रोजीनस क्षारों का अनुक्रम पॉलिपेप्टाइड श्रृंखला के एक विशिष्ट अमीनो अम्ल को कोडित करता है, इसे त्रिक कोड (Triplet code) कहते हैं | m-RNA में न्यूक्लियोटाइडों की श्रृंखला के अमीनो अम्लों की पॉलिपेप्टाइड श्रृंखला में स्थानान्तरण को अनुलिपिकरण कहते हैं।
यह क्रिया निम्नलिखित चरणों में पूरी होती हैं

  • अमीनो अम्लों का कोशिकाद्रव्य में सक्रियण।
  • सक्रिय अमीनो अम्लों का t-RNA से जुड़ना।
  • m-RNA का राइबोसोम से जुड़ना।
  • पॉलिपेप्टाइड श्रृंखला का प्रारम्भन ।
  • पॉलिपेप्टाइड श्रृंखला का दीर्धीकरण अर्थात् प्रोटीन का निर्माण।
  • श्रृंखला समापन।
  • श्रृंखला का रूपान्तरण।

प्रश्न 17.
DNA ही आनुवंशिक पदार्थ है, ग्रिफिथ ने इसके पक्ष में क्या प्रमाण दिया ? रेखाचित्र सहित समझाइए।
उत्तर
ग्रिफिथ (1920) ने चूहे पर किये गये प्रयोगों के आधार पर बताया कि DNA ही आनुवंशिक पदार्थ है। उन्होंने निमोनिया पैदा करने वाले डिप्लोकोकस न्यूमोनी के उग्रविभेद (S-II) को चूहे के अन्दर प्रवेश कराया तो, उसे निमोनिया हुआ लेकिन जब इसके निमोनिया न पैदा करने वाले अनुग्र विभेद (R-II) को चूहे में प्रवेश कराया तो उसे निमोनिया नहीं हुआ।
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अब इन्होंने तीसरे प्रयोग में अनुग्र विभेद के जीवित सदस्यों और उग्र विभेद (S-II) के सत्व के मिश्रण को चूहे में प्रवेश कराया तो उसे निमोनिया हो गया। जब इन चूहों का विश्लेषण किया गया तो इनमें दोनों विभेद पाये गये। यह इस बात को प्रमाणित करता है कि S-II के सत्व में कोई ऐसा पदार्थ था जिसने R-II को S-III में बदल दिया। अध्ययनों से ज्ञात हुआ कि यह पदार्थ DNA था। इस प्रयोग से यह प्रमाणित होता है कि DNA ही आनुवंशिक पदार्थ के रूप में कार्य करता है।

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