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MP Board Class 10th Hindi Vasanti Solutions Chapter 7 वह देश कौन-सा है? (पंडित रामनरेश त्रिपाठी)

वह देश कौन-सा है? पाठ्य-पुस्तक के प्रश्नोत्तर

वह देश कौन-सा है? लघु-उत्तरीय प्रश्नोत्तर

प्रश्न 1.
कवि ने देश का मकट हिमालय को क्यों कहा है?
उत्तर-
कवि ने देश का मुकुट हिमालय को कहा है। यह इसलिए कि वह सर्वाधिक ऊँचा होकर मस्तक स्वरूप दिखाई देता है।

प्रश्न 2.
राष्ट्र की सहायता को उजागर करने वाले पौराणिक महानायकों का उल्लेख कीजिए। .
उत्तर-
राष्ट्र की सहायता को उजागर करने वाले पौराणिक महानायक हैं-श्री राम, लक्ष्मण, भरत आदि हैं।

प्रश्न 3.
भारत के प्राकृतिक सौंदर्य को कवि ने स्वर्ग के सदृश्य क्यों कहा है?
उत्तर-
भारत के प्राकृतिक सौंदर्य को कवि ने स्वर्ग के सदृश्य कहा है। यह इसलिए कि इसकी प्राकृतिक सुंदरता में स्वर्ग की सुंदरता, सुख और आनंद का रोचक अनुमान हो रहा है।

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प्रश्न 4.
कवि ने भारत की कौन-कौन-सी विशेषताएँ बताई हैं?
उत्तर-
कवि ने भारत देश की निम्नलिखित विशेषताएँ बताई हैं-

  1. भारत देश में सुख स्वर्ग के समान है।
  2. हिमालय भारत देश का मुकुट है।
  3. भारत देश की नदियाँ अमृत की धारा बहा रही हैं।
  4. भारत देश की धरती अनंत धन से लदी-भरी पड़ी है।
  5. भारत ने ही संसार के लोगों को सबसे पहले ज्ञान दिया।

प्रश्न 5.
‘जिसका चरण निरंतर रत्नेश धो रहा है, से कवि का क्या आशय है?
उत्तर-
‘जिसका चरण निरंतर रत्नेश धो रहा है’ से कवि का आशय है-भारत देश विश्व का ऐसा महान् देश है, जिसकी महानता को प्रकृति भी स्वीकारती है। उसको मानप्रतिष्ठा देने के लिए ही समुद्र बार-बार उसके चरणों को स्पर्श कर फूले नहीं समाता है।

वह देश कौन-सा है? दीर्घ-उत्तरीय प्रश्नोत्तर

प्रश्न 1.
कविता के आधार पर भारत के प्राकृतिक सौंदर्य का वर्णन अपने शब्दों में कीजिए।
उत्तर-
देखें कविता का सारांश।

प्रश्न 2.
प्रकृति ने हमें क्या-क्या प्रदान किया है? बताइए।
उत्तर-
प्रकृति ने हमें स्वर्ग के समान-सुख, निरंतर चरण धोने वाला समुद्र, मुकुट-स्वरूप हिमालय अमृत की धारा बहाने वाली नदियाँ, बड़े रसीले, फल-कंद, नाज-मेवे, दिन-रात हँस रहे सुंदर और सुगंधित फूल, मैदानों-पहाड़ों और वनों में लहकती हई हरियालियाँ और अनंत धन से लदी-भरी हुई धरती प्रदान किया है।

प्रश्न 3.
‘कवि ने भारत को संसार का शिरोमणि कहा है।’ स्पष्ट कीजिए।
उत्तर-
‘कवि ने भारत को संसार का शिरोमणि कहा है।’ यह इसलिए कि भारत की जो विशेषताएँ हैं, वह संसार के और किसी देश की नहीं हैं।

प्रश्न 4.
‘वह देश कौन-सा है’ कविता का सार अपने शब्दों में लिखिए।
उत्तर-
देखिए कविता का सारांश।

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प्रश्न 5.
निम्नलिखित पंक्तियों की सप्रसंग व्याख्या कीजिए
(क) जिसके सुगंधवाले ………………….. कौन-सा है?
(ख) निष्पक्ष न्यायकारी ………………….. कौन-सा है?
(ग) जिसके अनंत ………………….. कौन-सा है?
उत्तर-
देखें व्याख्या भाग।

वह देश कौन-सा है? भाषा-अनुशीलन

प्रश्न 1.
‘नदियाँ जहाँ सुधा की धारा बहा रही है’ इस पंक्ति का भाव स्पष्ट कीजिए।
उत्तर-
उपर्युक्त पंक्ति के द्वारा यह भाव स्पष्ट करने का प्रयास किया गया है कि भारत देश संसार का अनोखा देश है। वह संसार का शिरोमणि है। वह अमृतमय जीवन है।

प्रश्न 2.
निम्नलिखित शब्दों के तत्सम शब्द लिखिए :
अँगने, रात, भाई, दिन, सपूत, धरती।
उत्तर-
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वह देश कौन-सा है? योग्यता-विस्तार

प्रश्न 1.
लक्ष्मण और भरत के भात-प्रेम की चर्चा कक्षा में कीजिए।

प्रश्न 2.
भारत के मानचित्र में पर्वत और नदियाँ अनुरेखित कीजिए।

प्रश्न 3.
भारत में शिक्षा के केंद्र कौन-कौन से थे? जानकारी एकत्र कीजिए।
उत्तर-
उपर्युक्त प्रश्नों को छात्र/छात्रा अपने अध्यापक/अध्यापिका की सहायता से हल करें।

वह देश कौन-सा है? परीक्षोपयोगी अतिरिक्त प्रश्नोत्तर

वह देश कौन-सा है? अर्थग्रहण संबंधी प्रश्नोत्तर

प्रश्न 1.
‘वह देश कौन-सा है?’ कविता का प्रतिपाद्य स्पष्ट कीजिए।
उत्तर-
प्रस्तुत कविता में कवि ने भारत देश के अतीत का गौरव गान किया है। कवि ने इस देश की गरिमा और वैभव का प्रभावशील शब्दों में वर्णन किया है। कदि के अनुसार उत्तर में हिमालय इसका मुकुट है तो दक्षिण में समुद्र इसके चरणों को धो रहा है। इसकी नदियाँ, इसके कंदमूल-फल, अनाज, मैदान, पहाड़ सभी आकर्षक हैं। यह देश सम्पूर्ण संसार को अपने आचरण से शिक्षा देने वाला पहला देश रहा है। यह विभिन्न आदर्शों की प्रतिष्ठा का देश है। श्रीराम की पितृभक्ति, त्याग-भावना तथा लक्ष्मण और भरत के भ्रातृत्व ने उच्चादर्शों की धूम रही है। देश की प्रकृति-देश की भौतिक समृद्धि और देश की आचरणशील गरिमा का उल्लेख कवि ने इस कविता में प्रश्नात्मक शैली में किया है। प्रश्न और उत्तर की समन्वित शैली इस कविता के शिल्प-सौंदर्य को बढ़ा देती है।

प्रश्न 2.
कवि ने किन पंक्तियों के द्वारा भारत देश को विश्व का शिरोमणि और पहला देश कहा है?
उत्तर-
कवि ने निम्नलिखित पंक्तियों के द्वारा भारत देश को विश्व को शिरोमणि और पहला देश कहा है जिसके अनंत धन से धरती भरी पड़ी है, संसार का शिरोमणि, वह देश कौन-सा है? पृथ्वी निवासियों को जिसने प्रथम जगाया शिक्षित किया सुधारा, वह देश कौन-सा है?

प्रश्न 3.
भारत देश के त्यागशील वीर चरित्रों का संक्षिप्त उल्लेख कीजिए।
उत्तर-
भारत देश के त्यागशील वीर चरित्र हैं-राम, लक्षण, भरत आदि। राम ने अपने पिता का आदेश पाते ही अपने विशाल साम्राज्य को तिनके के समान त्याग दिया। लक्ष्मण-भरत के त्यागशील चरित्र बिलकुल निःस्वार्थ भाव से भरे हुए थे। वे वास्तव में शुद्ध और प्रेम भाई थे। उनके समान और कोई हुआ ही नहीं।

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प्रश्न 2.
रिक्त स्थानों की पूर्ति दिए गए विकल्पों में से उचित शब्दों के चयन से कीजिए।
1. भारत प्रकृति की ……………….. में बसा है। (कोख, गोद)
2. हिमालय ……………….. का मुकुट है। (भारत, संसार)
3. भारत संसार का ……………….. देश है। (सर्वश्रेष्ठ, शिरोमणि)
4. भारत संसार का ……………….. है। (गुरु, अग्रदूत)
5. श्रीराम सर्वश्रेष्ठ ……………… थे। (मातृभक्त, पितृभक्त)
उत्तर-
1. गोद,
2. भारत,
3. शिरोमणि,
4. गुरु,
5. पितृभक्त।

प्रश्न 3.
दिए गए कथनों के लिए सही विकल्प चुनकर लिखिए :
1. पंडित रामनरेश त्रिपाठी का जन्म हुआ था-
1. 1890 में,
2. 1891 में,
3. 1889 में,
4. 1892 में।
उत्तर-
(3) 1889 में,

2. पंडित रामनरेश त्रिपाठी की प्रमुख रचना है-
1. कौमुदी,
2. पथिक,
3. स्वप्न,
4. आदर्श।
उत्तर-
(2) पथिक,

3. पंडित रामनरेश त्रिपाठी का निधन हुआ था-
1. 1962 में,
2. 1960 में,
3. 1961 में,
4. 1959 में।
उत्तर-
(1) 1962 में,

4. रामनरेश त्रिपाठी हैं
1. प्रेमचंद युग के,
2. द्विवेदी युग के,
3. भारतेंदु युग के,
4. आधुनिक युग के।
उत्तर-
(2) द्विवेदी युग के,

5. वह देश कौन-सा है? कविता में है-
1. सौंदर्य चित्रण,
2. प्रेम चित्रण,
3. राष्ट्र-प्रेम,
4. समाज-चित्रण।
उत्तर-
(3) राष्ट्र-प्रेम।

प्रश्न 4.
सही जोड़े मिलाइए।
MP Board Class 10th Hindi Vasanti Solutions Chapter 7 वह देश कौन-सा है img-2
उत्तर-
MP Board Class 10th Hindi Vasanti Solutions Chapter 7 वह देश कौन-सा है img-3

प्रश्न 5.
निम्नलिखित वाक्य सत्य हैं या असत्य? वाक्य के आगे लिखिए।
1. भारत की नदियाँ अमृत की धारा बहाती हैं।
2. उत्तर में समुद्र भारत के चरणों को धो रहा है।
3. भारत ने ही संसार को सबसे पहले ज्ञान दिया।
4. लक्ष्मण-भरत निःस्वार्थ शुद्ध प्रेमी भाई थे।
5. भारत के सिवाय और भी देश हैं।
उत्तर-
1. सत्य,
2. असत्य,
3. सत्य,
4. सत्य,
5. असत्य।

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प्रश्न 6.
निम्नलिखित कथनों का उत्तर एक शब्द में दीजिए।
1. मनमोहन प्रकृति की गोद में कौन बसा है?
2. भारत मुकुट कौन है?।
3. भारत के मैदानों, पहाड़ों और जंगलों में क्या लहकती हैं?
4. भारत की धरती किस धन से भरी पड़ी है?
5. भारत देश की महानता को कौन बता सकेंगे?
उत्तर-
1. भारत,
2. हिमालय,
3. हरियालियाँ,
4. अनंत,
5. शिक्षित।

वह देश कौन-सा है? लघु उत्तरीय प्रश्नोत्तर

प्रश्न 1.
भारत में सुख किसके समान है?
उत्तर-
भारत में सुख स्वर्ग के समान है।

प्रश्न 2.
भारत में दिन-रात कौन हँसते रहते हैं?
उत्तर-
भारत में दिन-रात सुगंधित, सुंदर और प्यारे फूल हँसते रहते हैं।

प्रश्न 3.
किसने क्या परित्याग किया?
उत्तर-
श्री राम ने अपने पिता के आदेश से विशाल साम्राज्य का तिनके के समान परित्याग किया।

प्रश्न 4.
लक्ष्मण-भरत किस प्रकार के भाई थे?
उत्तर-
लक्ष्मण-भरत निःस्वार्थ शुद्ध प्रेमी भाई थे।

वह देश कौन-सा है? कवि-परिचय

जीवन-परिचय-रामनरेश त्रिपाठी द्विवेदी युग की राष्ट्रीय सांस्कृतिक काव्य-धारा के प्रमुख कवियों में से हैं। उनका जन्म उत्तर प्रदेश के कोइरीपुर गाँव में सन् 1881 में हुआ था। इनके पिता रामायण प्रेमी थे। उनका गहरा प्रभाव इन पर पड़ा।

त्रिपाठी जी ने हिंदी, बंगला और अंग्रेजी का अच्छा ज्ञान प्राप्त किया और सामाजिक तथा राष्ट्रीय कार्यों में योग देने लगे। इन्हें भ्रमण में बहुत रुचि थी। भारतीय रियासतों के अनेक राजा-महाराजाओं से इनकी मित्रता थी। उन्हीं के साथ ही वे भी भ्रमण के लिए जाया करते थे। उन्होंने 20 हजार किलोमीटर पैदल यात्रा भी की थी। इस यात्रा के दौरान उन्होंने हज़ारों ग्राम-गीतों का संकलन किया था। उनका सन् 1962 में निधन हो गया।

रचनाएं-त्रिपाठी जी की रचनाएं हैं-पथिक, मिलन और स्वप्न (खंड काव्य), मानसी (स्फुट कविता संग्रह), कविता-कौमुदी, गाम्यगीत (सम्पादित), गोस्वामी तुलसीदास और उनकी कविता (आलोचना)। इनकी रचनाओं में नवीन आदर्श और नवयुग का संकेत है।

भाव पक्ष-कविवर रामनरेश त्रिपाठी का भाव पक्ष सरस किंतु प्रेरक है। उसमें सजीवता है। प्रवाहमयता है, तो प्रभावमयता भी है। रामनरेश त्रिपाठी प्रकृति के चितेरे हैं। इसलिए उनकी कविताओं के भाव स्वस्थ और सुंदर हैं।

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कला पक्ष-वे अपनी रचनाओं में देशभक्ति की भावनाओं का समावेश बड़ी कुशलता से करते हैं। उनकी भाषा सहज-सरल खड़ी बोली है पर वे शुद्ध संस्कृत शब्दों के प्रति आग्रही नहीं हैं। उर्दू शैली के प्रचलित शब्दों का भी उन्होंने खुलकर प्रयोग किया है।

साहित्य में स्थान-साहित्य के क्षेत्र में त्रिपाठी जी ने विविध रूपों में महत्त्वपूर्ण कार्य किया। उन्होंने हिंदी, उर्दू, संस्कृत और बँगला के प्रतिनिधि काव्य-संकलनों का संपादन किया। बाल कथा कहानी के नाम से उन्होंने रोचक और शिक्षाप्रद कहानियों के कई संग्रह बच्चों के लिए तैयार किए। उन्हें हिंदी बाल-साहित्य का जनक कहना गलत न होगा।

वह देश कौन-सा है? कविता का सारांश

प्रस्तुत कविता ‘वह देश कौन-सा है?’ पंडित रामनरेश त्रिपाठी की देश-भक्ति के ऊँचे स्वर को जगाने वाली सरस कविता है। इस कविता में भारत देश की प्राकृतिक संपदा, सम्पन्नता, सुंदरता और रोचकता का भरपूर दर्शन और ज्ञान देने का सार्थक प्रयास किया गया है। कवि के अनुसार भारत देश मनमोहिनी प्रकृति की गोद में स्वर्ग के समान सुखों को फैलाए हुए है। समुद्र उसके चरण को धोता रहता है। हिमालय उसका मुकुट है। उसकी नदियाँ अमृत की धारा बहाती हैं। उनकी वनस्पतियाँ रस भरे फल-कंद से लदी हुई हैं। रात-दिन खिलते हुए मुसकराते रहते हैं। चारों ओर हरियाली है और आनंद उमड़ रहा है। उसकी धरती अनंत धन से भरी पड़ी है। वह संसार का शिरोमणि है। उसने सारे संसार के लोगों को जगाकर शिक्षित किया और सुधारा भी। इस देश में ही राम जैसे आदर्श पुरुष हुए। जिन्होंने अपने पिता के आदेश से तृण के समान स्वराज्य छोड़ दिया। इस देश में ही लक्ष्मण-भरत जैसे शुद्ध प्रेमी भाई थे। इस प्रकार भारत देश के सिवाय और कोई देश महान् और श्रेष्ठ नहीं है।

वह देश कौन-सा है? संदर्भ-प्रसंग सहित व्याख्या

(1) मन-मोहिनी प्रकृति की जो गोद में बसा है,
सुख स्वर्ग सा जहाँ है, वह देश कौन-सा है,
जिसका चरण निरंतर रत्नेश धो रहा है,
जिसका मुकुट हिमालय, वह देश कौन-सा है?
नदियाँ जहाँ सुधा की धारा बहा रही हैं,
सींचा हुआ सालोना, वह देश कौन-सा है?

शब्दार्थ-निरंतर-हमेशा। रत्नेश-समुद्र। सुधा-अमृत। सलोना-सुंदर।

संदर्भ-प्रस्तुत पद्यांश हमारी पाठ्य-पुस्तक ‘हिंदी सामान्य’ में संकलित पंडित रामनरेश त्रिपाठी विरचित कविता ‘वह देश कौन-सा है?’ से है।

प्रसंग-प्रस्तुत कवितांश में भारत देश की सुंदरता और छटा का चित्र खींचते हुए कहा है कि-

व्याख्या-जो मनमोहक प्रकृति की गोद में विराजमान है। जहाँ स्वर्ग के समान सुख फैला हुआ है, वह देश कौन-सा है, अर्थात् वह देश भारत ही है। जिसका चरण हमेशा समुद्र धोता रहता है और जिसका मुकुट हिमालय है, वह देश कौन-सा है; अर्थात् वह देश भारत ही है। जहाँ नदियाँ अमृत की धारा बहा रही हैं और जिसका सलोना सींचा हुआ है, वह देश कौन-सा है? अर्थात् वह देश भारत ही है।

विशेष-
1. भाषा सरल है,
2. विचारात्मक शैली है।

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सौन्दर्य-बोध पर आधारित प्रश्नोत्तर भाव-सौंदर्य

प्रश्न 1.
उपर्युक्त पद्यांश का भाव-सौंदर्य स्पष्ट कीजिए।
उत्तर-
उपर्युक्त पद्यांश में भारत देश की अद्भुत प्राकृतिक छटा का अत्यंत भावपूर्ण चित्रण किया गया है। सम्पूर्ण भाव-चित्रण सरस और रोचक होने के साथ-साथ ज्ञानवर्द्धक और प्रेरक भी है। इस प्रकार इस पद्यांश का भाव-सौंदर्य प्रभावशाली है।

शिल्प-सौंदर्य

प्रश्न 1.
उपर्युक्त पद्यांश का शिल्प-सौंदर्य स्पष्ट कीजिए।
उत्तर-
उपर्युक्त पद्यांश की भाषा-भावों के अनुरूप है। शब्द-चयन सरल और सुबोध है। शैली वर्णनात्मक और चित्रात्मक दोनों ही है। बिम्ब-प्रतीक यथा-स्थान हैं।

विषय-वस्तु पर आधारित प्रश्नोत्तर

प्रश्न 1.
उपर्युक्त पद्यांश का आशय लिखिए।
उत्तर-
उपर्युक्त पद्यांश में कवि ने भारत देश की सुंदरता और सम्पन्नता का चित्रण किया है। इसके द्वारा उसने देशवासियों के सोए हुए देश को जगाने का प्रयास किया है। इससे कवि का स्वदेश प्रेम का आशय स्पष्ट हो रहा है।

(2) जिसके बड़े रसीले फल-कंद नाज मेवे,
सब अंगने सज हैं, वह देश कौन-सा है?
जिसके सुगंधवाले सुंदर प्रसून प्यारे,
दिन-रात हँस रहे हैं, वह देश कौन-सा है?
मैदान-गिरि-वनों में हरिलियाँ लहकतीं,
आनंदमय जहाँ है, वह देश कौन-सा है?

शब्दार्थ-रसीले-रसभरे। प्रसून-फूल। गिरि-पहाड़। संदर्भ-पूर्ववत्।

प्रसंग-पूर्ववत्।

व्याख्या-जिसके फल-कंद और नाज-मेवे बड़े ही रसीले हैं। सब अँगने सजे हैं। वह देश कौन-सा है? अर्थात् वह देश भारत ही है। जिसके सुगंधित और सुंदर फूल बड़े ही प्यारे-प्यारे लगते हैं। इस प्रकार के दिन-रात हँसते रहते हैं। वह ऐसा कौन-सा देश है? अर्थात् वह देश भारत ही है। जिसके मैदान, पहाड़ और वनों में भी हरियाली बिछी हुई दिन-रात लहकती रहती हैं और जहाँ आनंद-ही-आनंद का साम्राज्य है, वह देश कौन-सा है? अर्थात् वह देश भारत ही है।

विशेष-
1. भाव आकर्षक हैं।
2. इससे देश-भक्ति की प्रेरणा मिलती है।

सौंदर्य-बोध पर आधारित प्रश्नोत्तर भाव-सौंदर्य

प्रश्न 1.
उपर्युक्त पद्यांश के भाव-सौंदर्य पर प्रकाश डालिए।
उत्तर-
उपर्युक्त पद्यांश का भाव-सौंदर्य आकर्षक और भावप्रद है। भाव धारा प्रवाह हैं जो देश-भक्ति में डूबने के लिए प्रेरित कर रहे हैं।

शिल्प-सौंदर्य

प्रश्न 1.
उपर्युक्त पद्यांश के शिल्प-सौंदर्य को स्पष्ट कीजिए।
उत्तर-
उपर्युक्त पद्यांश की भाषा, शैली आकर्षक है। तुकान्त शब्द-योजना से लय और संगीत की रूपरेखा देखते ही बनती है। चित्रमयी शैली विधान मन को छू रही है तो शृंगार का प्रवाह अधिक जोर मार रहा है।

विषय-वस्तु पर आधारित प्रश्नोत्तर

प्रश्न 1.
उपर्युक्त पद्यांश का आशय स्पष्ट कीजिए।
उत्तर-
उपर्युक्त पद्यांश के द्वारा कवि ने भारत देश को दुनिया का अधिक संपन्न और सरस देश चित्रित करने का प्रयास किया है। इसकी प्राकृतिक सुंदरता और परिपूर्णता भला किसका मन नहीं मोह लेती है, अर्थात् सबको अपनी ओर खींच लेती है, इस तथ्य को उजागर करने का कवि प्रयास धन्य है।

3. जिसके अनंत धन से धरती भरी पड़ी है,
संसार का शिरोमणि, वह देश कौन-सा है?
पृथ्वी निवासियों को जिसने प्रथम जगाया,
शिक्षित किया सुधारा, वह देश कौन-सा है?
छोड़ा स्वराज्य तृणवत् आदेश से पिता के,
श्रीराम थे जहाँ पर, वह देश कौन-सा है?

शब्दार्थ-अनंत-जिसका अंत न हो। धरती-पृथ्वी। शिरोमणि-सर्वोच्च; सर्वश्रेष्ठ। तृणवत्-तृण के समान।

संदर्भ-पूर्ववत्।

प्रसंग-पूर्ववत्।

व्याख्या-जिसकी धरती अनंत धन से लदी-भरी पड़ी है। जो संसार का शिरोमणि है। वह कौन-सा देश है; अर्थात् वह देश भारत ही है। जिसने सारे संसार को सबसे पहले जगाया; अर्थात् ज्ञान प्रदान किया। जिसने संसार के सभी लोगों का मार्ग-दर्शन किया। वह ऐसा देश कौन-सा है? अर्थात् वह देश भारत ही है। जिसने अपने पिता का आदेश पाते ही तिनके समान विशाल साम्राज्य का परित्याग किया। ऐसे श्री राम जहाँ पर थे, वह ऐसा देश कौन-सा है? अर्थात् वह देश भारत ही है।

विशेष-
1. भाव सजीव है।
2. इससे देश-भक्ति की भावना जग रही है।

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सौन्दर्य-बोध पर आधारित प्रश्नोत्तर भाव-सौंदर्य

प्रश्न 1.
उपर्युक्त पद्यांश का भाव-सौंदर्य स्पष्ट कीजिए।
उत्तर-
उपर्युक्त पद्यांश में कवि ने भारत देश के गौरवपूर्ण स्वरूप का जो चित्रांकन किया है। वह इतना भावपूर्ण और रोचक है कि उसे देखते ही बनता है। भावों की योजना अधिक सरल और सुस्पष्ट होने के कारण सराहनीय है।

शिल्प-सौंदर्य

प्रश्न 1.
उपर्युक्त पद्यांश के शिल्प-सौंदर्य को स्पष्ट कीजिए।
उत्तर-
उपर्युक्त पद्यांश की भाषा और शैली प्रशंसनीय है। भाषा की शब्दावली बोधगम्य है। लय और संगीत की योजना के लिए आई हुई तुकान्त शब्दावली के प्रयोग आकर्षक रूप में हैं।

विषय-वस्तु पर आधारित प्रश्नोत्तर

प्रश्न 1.
उपर्युक्त पद्यांश का मुख्य भाव लिखिए।
उत्तरं-
उपर्युक्त पद्यांश में कवि ने यह भाव व्यक्त करना चाहा है कि भारत देश महान है। उसका अतीत गौरवपूर्ण है। वह प्रेरक रूप में है। इस प्रकार यह अधिक आकर्षक होने के साथ-ज्ञानवर्द्धक रूप में है, जो कवि का मुख्योद्देश्य है।

(4) निःस्वार्थ शुद्ध प्रेमी, भाई भले जहाँ थे,
लक्ष्मण-भरत सरीखे, वह देश कौन-सा है?
निष्पक्ष न्यायकारी, जन जो पढ़े-लिखे हैं,
वे सब बता सकेंगे, वह देश कौन-सा है?
चालीस कोटि भाइ, सेवक सपूत जिसके,
भारत सिवाय दूजा, वह देश कौन-सा है?

शब्दार्थ-निःस्वार्थ-बिना स्वार्थ के। सरीखे-समान। जन-मनुष्य। कोटि-करोड़। सिवाय-दूसरा।

संदर्भ-पूर्ववत्।

प्रसंग-पूर्ववत्।

व्याख्या-जहाँ पर लक्ष्मण-भरत के समान निःस्वार्थ शुद्ध प्रेमी भाई थे। वह कौन-सा देश है; अर्थात् वह भारत देश ही है। जो लोग निष्पक्ष न्याय करने वाले पढ़े-लिखे हैं, वही यह बता सकते हैं कि वह ऐसा कौन-सा देश है; अर्थात् वह देश भारत ही है। जिस देश के चालीस करोड़ भाई-बंधु-सेवक और सपूत हैं, वह भारत के सिवाय और कौन हो सकता है। अर्थात् वह देश भारत ही हो सकता है। विशेष- 1. आजादी से पहले भारत देश की दशा का चित्रांकन है।

2. भारतीयों में देश-प्रेम की भावना भरने का प्रयास किया गया है। सौन्दर्य-बोध पर आधारित प्रश्नोत्तर भाव-सौंदर्य

प्रश्न 1.
उपर्युक्त पद्यांश का भाव-सौंदर्य लिखिए।
उत्तर-
उपर्युक्त पद्यांश की भावधारा सरल और सपाट है। भारत देश की महानता का विश्वसनीय उल्लेख मन को छू रहा है। संसार के दूसरे देशों से इसके अनूठा होने के भाव अपने-आप प्रकट हो रहे हैं।

शिल्प-सौंदर्य

प्रश्न 1.
उपर्युक्त पद्यांश के शिल्प-सौंदर्य पर प्रकाश डालिए।
उत्तर-
उपर्युक्त पद्यांश की भाव-योजना के अनुसार ही शिल्प-योजना है। भाषा की शब्दावली प्रचलित शब्दों की है जिनमें विविधता और अनेक रूपता है। शैली अलंकृत है। इसके लिए कवि ने अनुप्रास और रूपक अलंकारों का चुनाव किया है। फलस्वरूप पूरा पद्यांश हृदयस्पर्शी बन गया है।

विषय-वस्तु पर आधारित प्रश्नोत्तर

प्रश्न 1.
उपर्युक्त पद्यांश का आशय लिखिए।
उत्तर-
उपर्युक्त पद्यांश के द्वारा कवि ने यह प्रयास किया है कि भारतवासी अपने देश के अतीत को न केवल जाने-समझें अपितु उसके मान-सम्मान के लिए अपना तन-मन सब कुछ समर्पित कर सच्चे देश-भक्त के स्वरूप को प्रस्तुत कर सकें।

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