MP Board Class 10th Social Science Solutions Chapter 11 स्वातंत्र्योत्तर भारत की प्रमुख घटनाएँ

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MP Board Class 10th Social Science Solutions Chapter 11 स्वातंत्र्योत्तर भारत की प्रमुख घटनाएँ

MP Board Class 10th Social Science Chapter 11 पाठान्त अभ्यास

MP Board Class 10th Social Science Chapter 11 वस्तुनिष्ठ प्रश्न

सही विकल्प.चुनकर लिखिए

प्रश्न 1.
भारत और चीन युद्ध कब हुआ था ? (2014)
(i) 11 जुलाई, 1962
(ii) 20 अक्टूबर, 1962
(iii) 20 अगस्त, 1964
(iv) 11 जुलाई, 19651
उत्तर:
(ii) 20 अक्टूबर, 1962

प्रश्न 2.
1965 के भारत-पाकिस्तान युद्ध का कारण क्या था ?
(i) कच्छ का रणक्षेत्र
(ii) आजाद कश्मीर
(iii) राजस्थान का जैसलमेर
(iv) भारत पर जासूसी।
उत्तर:
(i) कच्छ का रणक्षेत्र

प्रश्न 3.
लाखों शरणार्थी भारत में आए
(i) श्रीलंका से
(ii) बांग्लादेश से
(iii) पाकिस्तान से
(iv) चीन से।
उत्तर:
(ii) बांग्लादेश से

रिक्त स्थानों की पूर्ति कीजिए

  1. भारतीय संविधान में अनुच्छेद ……………. के अन्तर्गत जम्मू-कश्मीर को विशेष दर्जा दिया गया है।
  2. चीन और जापान युद्ध सन् ……………. में शुरू हुआ था।
  3. 1971 के भारत-पाक युद्ध के बाद ……………. देश का निर्माण हुआ।
  4. राष्ट्रीय आपातकाल अब तक ……………. बार घोषित हो चुका है।

उत्तर:

  1. 370
  2. 1937
  3. बांग्लादेश
  4. तीन।

सही जोड़ी मिलाइए
MP Board Class 10th Social Science Solutions Chapter 11 स्वातंत्र्योत्तर भारत की प्रमुख घटनाएँ 1
उत्तर:

  1. → (ङ)
  2. → (घ)
  3. → (ख)
  4. → (क)
  5. → (ग)

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MP Board Class 10th Social Science Chapter 11 अति लघु उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 1.
भारत ने जिन प्रक्षेपास्त्रों को बनाया है, उनके नाम लिखें।
उत्तर:
भारत ने जिन प्रमुख प्रक्षेपास्त्रों का विकास किया उनमें प्रमुख हैं – ‘पृथ्वी’, ‘त्रिशूल’, ‘नाग’, ‘आकाश’।

प्रश्न 2.
संयुक्त राष्ट्र संघ की सुरक्षा परिषद् ने कश्मीर समस्या समाधान के लिए किन पाँच देशों का दल बनाया था ? लिखिए।
उत्तर:
संयुक्त राष्ट्र संघ की सुरक्षा परिषद् ने इस समस्या के समाधान के लिए पाँच राष्ट्रों चैकोस्लावाकिया, अर्जेण्टाइना, अमेरिका, कोलम्बिया और बेल्जियम के सदस्यों का एक दल बनाया। इस दल को मौके पर जाकर . स्थिति का अवलोकन करना था और समझौते का मार्ग ढूँढ़ना था।

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MP Board Class 10th Social Science Chapter 11 लघु उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 1.
भारत सरकार ने पाकिस्तान सरकार से कबाइलियों का मार्ग बन्द करने को क्यों कहा था ? लिखिए। (2017)
अथवा
महाराजा हरिसिंह ने भारत सरकार से सहायता कब और क्यों माँगी थी? (2012, 16)
उत्तर:
कश्मीर भारत की उत्तर – पश्चिम सीमा पर स्थित होने के कारण भारत और पाकिस्तान दोनों को जोड़ता है। 22 अक्टूबर, 1947 को उत्तर-पश्चिम सीमा प्रान्त के कबाइलियों और अनेक पाकिस्तानियों ने कश्मीर पर आक्रमण कर दिया। पाकिस्तान कश्मीर को अपने में मिलाना चाहता था। अतः उसने अपनी सीमाओं पर सेना को इकट्ठा कर चार दिनों के भीतर ही हमला कर आक्रमणकारी श्रीनगर से 25 मील दूर बारामूला तक आ पहुँचे। कश्मीर के शासक (राजा हरिसिंह) ने आक्रमणकारियों से अपने राज्य को बचाने के लिए भारत सरकार से सैनिक सहायता माँगी, साथ ही कश्मीर को भारत में सम्मिलित करने की प्रार्थना की।

प्रारम्भ में पाकिस्तान सरकार ने अधिकाधिक रूप से कश्मीर के बारे में कोई मत व्यक्त नहीं किया था। अतः भारत सरकार ने पाकिस्तान सरकार से कबाइलियों का मार्ग बन्द करने को कहा, परन्तु जब इस बात के प्रमाण मिलने लगे कि पाकिस्तान सरकार कबाइलियों की सहायता कर रही है तो गवर्नर जनरल लॉर्ड माउण्टबेटन की सलाह पर जनवरी 1948 में भारत सरकार ने सुरक्षा परिषद् में शिकायत की।

प्रश्न 2.
भारत और चीन युद्ध के क्या परिणाम हुए ? लिखिए। (2009, 10, 11, 14, 15, 18)
उत्तर:
भारत-चीन युद्ध के परिणाम – भारत-चीन युद्ध के निम्नलिखित निकटवर्ती व दूरगामी परिणाम सामने आये

  1. भारत-चीन सम्बन्ध तनावपूर्ण हो गये।
  2. भारत की अन्तर्राष्ट्रीय छवि एवं गुटनिरपेक्ष नीति को धक्का लगा।
  3. भारत के भू-भाग का एक बड़ा भाग चीन के कब्जे में चला गया।
  4. चीन-पाकिस्तान में नवीन सम्बन्ध स्थापित हुए।
  5. भारतीय विदेशी नीति में आदर्शवाद के स्थान पर व्यावहारिकता और यथार्थवाद को स्थान मिला।
  6. भारत-अमेरिका के सम्बन्धों में सुधार हुआ।

प्रश्न 3.
ताशकन्द समझौते की शर्ते लिखिए। (2009, 11, 14, 15)
अथवा
ताशकन्द समझौता क्या है ? इसकी शर्तों का उल्लेख कीजिए। (2010,17)
उत्तर:
ताशकन्द समझौता – सन् 1965 के भारत-पाक युद्ध विराम के बावजूद युद्ध क्षेत्रों में झड़पें बन्द नहीं हुई थीं। इस स्थिति को समाप्त करने के लिए सोवियत संघ ने विशेष रुचि ली सोवियत संघ ने दोनों पक्षों को वार्ता के लिए ताशकन्द आमन्त्रित किया। 4 जनवरी, 1966 को पाकिस्तान के राष्ट्रपति अयूब खाँ तथा भारत के प्रधानमन्त्री लालबहादुर शास्त्री के मध्य ताशकन्द में वार्ता आरम्भ हुई। अन्तत: 10 जनवरी, 1966 को ऐतिहासिक ताशकन्द समझौते पर दोनों पक्षों ने हस्ताक्षर किये।

ताशकन्द समझौते की शर्ते

इस समझौते की महत्त्वपूर्ण शर्ते निम्नलिखित थीं –

  1. दोनों पक्षों ने अच्छे पड़ोसियों जैसे सम्बन्ध निर्माण करने पर सहमति व्यक्त की।
  2. दोनों पक्षों ने यह सहमति व्यक्त की कि वे 5 अगस्त, 1965 के पूर्व जिस स्थिति में थे वहाँ अपनी सेनाओं को वापस बुला लेंगे। दोनों पक्ष युद्धविराम की शर्तों का पालन करेंगे।
  3. दोनों पक्षों ने एक-दूसरे के आन्तरिक मामलों में हस्तक्षेप न करने, एक-दूसरे के विरुद्ध प्रचार को रोकने तथा पुनः राजनयिक सम्बन्धों की स्थापना का निर्णय लिया।

इसके अन्तर्गत आर्थिक, व्यापारिक, सांस्कृतिक सम्बन्धों को मधुर बनाने पर भी सहमति व्यक्त की गयी।

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MP Board Class 10th Social Science Chapter 11 दीर्घ उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 1.
भारत-चीन युद्ध में एकतरफा युद्धविराम की घोषणा चीन ने क्यों की ? वर्णन कीजिए। (2011, 13, 16)
उत्तर:
चीन के साथ भारत के अत्यन्त प्राचीन सम्बन्ध रहे हैं। भारत और चीन के मध्य तिब्बत को लेकर की स्थिति उत्पन्न हुई। भारत तिब्बत पर चीन के अधिकार को स्वीकार करने को तैयार था परन्तु वहाँ एक स्वायत्त शासन स्थापित करने का पक्षधर भी था। चीन ने भारत की मंशा को अनदेखा करते हुए 25 अक्टूबर, 1950 को तिब्बत पर सैनिक कार्यवाही शुरू कर दी। भारत ने चीन की इस कार्यवाही का विरोध किया। मार्च 1958 में तिब्बत में चीन के विरुद्ध विद्रोह शुरू हो गया। विद्रोहियों को दलाईलामा का समर्थन प्राप्त था। जब चीन ने विद्रोह को कुचलने का प्रयास किया तो दलाईनामा को तिब्बत छोड़कर भागना पड़ा। दलाईनामा को भारत ने शरण दी जिससे दोनों राष्ट्रों के मध्य ‘शीत युद्ध’ शुरू हो गया। इसक साथ ही चीन ने सीमा विवाद शुरू कर दिया। सन् 1960 में भारत और चीन के प्रधानमनी दिल्ली में सीमा विवाद पर बात करने के लिए मिले लेकिन 8 सितम्बर, 1962 को चीन ने भारत-चीन सीमा के पूर्वी क्षेत्र अर्थात् भारतीय ने नेफा क्षेत्र पर आक्रमण कर दिया। चीनी फौजों ने 20 अक्टूबर, 1962 को भारत-चीन सीमा पर तैनात भारतीय फौजों पर आक्रमण कर दिया।

अक्टूबर 1962 का युद्ध कोई आकस्मिक घटनाक्रम नहीं था। यह सब उन घटनाओं की चरम परिणति. थी जो तिब्बत संकट को देखने के बाद आईं। चीन द्वारा मैकमोहन रेखा को अस्वीकार किया गया और यह आक्रमण लद्दाख के अक्साई चीन और पूर्व में नेफा (वर्तमान में अरुणाचल प्रदेश) में व्यापक पैमाने पर हुआ। इस दौरान युद्ध-विराम के सुझाव अवश्य सामने आए किन्तु कोई समझौता नहीं हो सका। चीन ने एकतरफा युद्ध-विराम की घोषणा की।

चीन द्वारा एकतरफा युद्ध-विराम की घोषणा के कारण

भारत – चीन युद्ध की पृष्ठभूमि का अध्ययन करने पर कुछ बातें सामने आती हैं। जैसे— चीन द्वारा भारत पर अचानक आक्रमण क्यों किया गया ? युद्ध में भारत को पराजय क्यों मिली ? और चीन द्वारा एकतरफा युद्ध-विराम की घोषणा क्यों की गई ? विद्वानों ने उक्त घटनाओं पर विचारमंथन करने के बाद निम्न विचार प्रस्तुत किये –

  1. चीन अपनी शक्ति का प्रदर्शन करना चाहता था।
  2. चीन भारत को अपमानित करना चाहता था।
  3. चीन की नीति विस्तारवादी थी।
  4. चीन विश्व में अपनी आर्थिक व राजनैतिक सर्वोच्चता दर्शाना चाहता था।
  5. चीन भारतीय गुटनिरपेक्षता की नीति को गलत साबित करना चाहता था।
  6. युद्धविराम की घोषणा करके चीन विश्व समुदाय का समर्थन प्राप्त करना चाहता था।

प्रश्न 2.
कश्मीर समस्या क्या है ? विस्तार से समझाइए। (2009, 10, 14, 18)
उत्तर:
कश्मीर समस्या

कश्मीर की समस्या भारत और पाकिस्तान के मध्य सबसे जटिल समस्या है। स्वतन्त्रता के पश्चात् दो नये राज्य बने, तो देशी रियासतों को स्वतन्त्रता प्रदान की गई कि वह अपनी इच्छानुसार भारत या पाकिस्तान में विलय हो सकती हैं या स्वतन्त्र रह सकती हैं। अधिकांश रियासतें भारत या पाकिस्तान में मिल गईं।

कश्मीर के राजा हरीसिंह ने अपनी रियासत जम्मू-कश्मीर को स्वतन्त्र रखने का निर्णय लिया। राजा हरीसिंह का विचार था कि कश्मीर यदि पाकिस्तान में मिलता है तो जम्मू की हिन्दू जनता और लद्दाख की बौद्ध जनता के साथ अन्याय होगा और यदि वह भारत में मिलता है तो मुस्लिम जनता के साथ अन्याय होगा। अत: उसने यथास्थिति बनाये रखी और विलय के विषय पर तत्काल कोई निर्णय नहीं लिया।

संयुक्त राष्ट्र संघ के प्रयास – संयुक्त राष्ट्र संघ की सुरक्षा परिषद ने इस समस्या के समाधान के लिए पाँच राष्ट्रों चेकोस्लावाकिया, अर्जेण्टाइना, अमेरिका, कोलम्बिया और बेल्जियम के सदस्यों का एक दल बनाया, इस दल को मौके पर जाकर स्थित का अवलोकन करना था और समझौते का मार्ग ढूँढ़ना था। दल ने मौके पर जाकर स्थिति का अध्ययन किया तथा अपनी रिपोर्ट में निम्न बातों का उल्लेख किया

  1. पाकिस्तान अपनी सेनाएँ कश्मीर से हटाए तथा कबाइलियों और ऐसे लोगों को जो कश्मीर के निवासी नहीं हैं, वहाँ से हटाने का प्रयास करें।
  2. जब पाकिस्तान उपर्युक्त शर्तों को पूर्ण कर लेगा तब आयोग के निर्देशों पर भारत भी अपनी सेनाओं का अधिकांश भाग वहाँ से हटा ले।
  3. अन्तिम समझौता होने तक युद्धविराम की स्थिति रहेगी और भारत कश्मीर में स्थानीय अधिकारियों के सहयोग के लिए उतनी ही सेनाएँ रखेगा जितनी कानून और व्यवस्था बनाए रखने के लिए आवश्यक होगा।

जनमत संग्रह के प्रयास – रिपोर्ट के आधार पर दोनों पक्षों में लम्बी वार्ता के बाद 1 जनवरी, 1949 को युद्धविराम के लिए सहमत हो गए। कश्मीर के विलय का निर्णय जनमत संग्रह के आधार पर होना था। संयुक्त राष्ट्र संघ ने जनमत संग्रह की शर्तों को पूर्ण करने के लिए एक अमेरिका अधिकारी को प्रशासक के रूप में नियुक्त किया। प्रशासक ने भारत एवं पाकिस्तान से जनमत संग्रह के आधार पर चर्चा की परन्तु उसका कोई परिणाम नहीं निकला अतः उसने अपने पद से त्यागपत्र दे दिया।

पाकिस्तान की अमेरिका से सन्धि – पाकिस्तान कश्मीर को छोड़ना नहीं चाहता था बल्कि उसका दावा भारत के नियन्त्रण में स्थित कश्मीर पर भी था। अत: उसने अपनी सैनिक शक्ति में वृद्धि की तथा शक्तिशाली राष्ट्र अमेरिका से सन्धि कर अपना पक्ष मजबूत बनाने का प्रयास किया। पाकिस्तान ने सन् 1954 में अमेरिका से सन्धि की और सन् 1955 में वह ‘सेण्टो’ नामक संगठन का सदस्य भी बन गया। इसका सदस्य बनने से उसे अमेरिका की सहानुभूति प्राप्त हुई। इसके बदले उसे कुछ सामरिक अड्डे भी प्राप्त हुए। इन परिस्थितियों में पं. नेहरू ने कश्मीर नीति में परिवर्तन किया। उन्होंने जब तक पाकिस्तान अपनी सेना नहीं हटा लेता तब तक जनमत संग्रह से मना किया। कश्मीर के प्रश्न पर सोवियत संघ ने भारत का समर्थन किया। इस समर्थन से भारत की स्थिति मजबूत हो गयी।

भारत द्वारा जम्मू – कश्मीर को विशेष दर्जा-6 फरवरी, 1954 को कश्मीर की विधानसभा ने एक प्रस्ताव पारित कर जम्मू-कश्मीर राज्य का विलय भारत में करने की सहमति प्रदान की। भारत सरकार ने 14 मई, 1954 को संविधान में संशोधन कर अनुच्छेद 370 के अन्तर्गत जम्मू-कश्मीर को विशेष दर्जा प्रदान किया। 26 जनवरी, 1957 को जम्मू-कश्मीर का संविधान लागू हो गया। इसके साथ ही जम्मू-कश्मीर भारतीय संघ का एक अभिन्न अंग बन गया।

इसके बाद पाकिस्तान निरन्तर कश्मीर का प्रश्न उठाकर वहाँ राजनीतिक अस्थिरता पैदा करने का प्रयास करता रहा है। पाकिस्तान ने इस मामले को सुरक्षा परिषद् में उठाकर जनमत संग्रह की माँग की। पाकिस्तान को इस प्रश्न पर अमेरिका, ब्रिटेन और फ्रांस का समर्थन प्राप्त रहा परन्तु भारत ने इसका विरोध किया। भारत की मित्रता सोवियत संघ के साथ भी थी। अतः सोवियत संघ ने विशेषाधिकार का प्रयोग कर मामले को ठण्डा किया। सन् 1962 में पाकिस्तान ने कश्मीर में पुन: जनमत संग्रह की माँग उठायी परन्तु पुनः सोवियत संघ ने अपने विशेषाधिकार का उपयोग किया।

पाकिस्तान में जितनी सरकारें आयी हैं वे कश्मीर के मुद्दे को जीवन्त रखने का प्रयास करती हैं जबकि भारत के लिए यह मुद्दा उसकी अखण्डता एवं सम्मान का प्रश्न है।

प्रश्न 3.
सन् 1965 के भारत-पाकिस्तान युद्ध के परिणाम लिखिए। (2009, 11, 12, 13, 15, 17)
उत्तर:
भारत में पाकिस्तानी घुसपैठियों को रोकने के लिए 25 अगस्त, 1965 से दोनों पक्षों की सेनाओं में सीधी लड़ाई आरम्भ हुई। छम्ब-जूरिया क्षेत्र से पाकिस्तान आसानी से आक्रमण कर सकता था। अतः पाकिस्तानी सेनाओं ने आक्रमण किया और अखनूर पर कब्जा कर लिया। पाकिस्तान ने वायुसेना से अमृतसर पर हमला किया। अतः भारतीय सेनाओं ने पाकिस्तानी सेना के दबाव को कम करने के लिए पाकिस्तान के पंजाब प्रदेश पर तीन तरफ से आक्रमण किया। भारतीय सेनाएँ लाहौर की ओर बढ़ीं। यह एक ऐसा अघोषित युद्ध था जिसमें दोनों पक्ष पूर्वी सीमान्त पर पूरी शक्ति के साथ लड़े।

23 सितम्बर, 1965 को संयुक्त राष्ट्र संघ के हस्तक्षेप से युद्ध हुआ। भारतीय सेना युद्धविराम के समय तक पाकिस्तान के 740 वर्गमील क्षेत्र पर अधिकार कर चुकी थी और पाकिस्तान के कब्जे में 240 वर्गमील के लगभग भारतीय क्षेत्र था।

युद्ध के परिणाम – सन् 1965 के युद्ध में भारत को पाकिस्तान पर विजय प्राप्त हुई थी। इस युद्ध के अंग्रलिखित परिणाम हुए –

  1. पाकिस्तान कश्मीर समस्या का समाधान युद्ध द्वारा करना चाहता था। उसने युद्ध का मार्ग अपनाया परन्तु उसकी मनोकामना पूरी नहीं हुई।
  2. पाकिस्तान यह सोचता था कि कश्मीर की मुस्लिम जनता उसका साथ देगी, परन्तु ऐसा नहीं हुआ। भारत ने यह सिद्ध किया कि भारतीय धर्मनिरपेक्षता का आधार अत्यन्त मजबूत है।
  3. पाकिस्तान इस भ्रम में था कि युद्ध के समय चीन उसका साथ देगा, परन्तु ऐसा नहीं हुआ।
  4. युद्ध के दौरान भारतीय जनता तथा सैनिकों का मनोबल ऊँचा रहा। भारतीय सेना के अधिकांश हथियार स्वदेशी थे।
  5. भारत-पाकिस्तान के युद्ध में संयुक्त राष्ट्र संघ की महत्त्वपूर्ण भूमिका थी। संयुक्त राष्ट्र संघ को सफलता इसलिए मिली क्योंकि सोवियत संघ और संयुक्त राज्य अमेरिका ने अपूर्व सहयोग दिया था।
  6. पाकिस्तान के लिए यह युद्ध घातक सिद्ध हुआ। युद्ध में पराजय ने उसकी सैनिक तानाशाही के खोखलेपन को सिद्ध कर दिया।

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MP Board Class 10th Social Science Chapter 11 अन्य परीक्षोपयोगी प्रश्न

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बहु-विकल्पीय प्रश्न

प्रश्न 1.
जम्मू-कश्मीर का संविधान लागू हुआ
(i) 15 अगस्त, 1947
(ii) 15 अगस्त, 1949
(iii) 26 जनवरी, 1957
(iv) 26 जनवरी, 19581
उत्तर:
(iii) 26 जनवरी, 1957

प्रश्न 2.
ताशकन्द समझौते के समय भारत के प्रधानमन्त्री थे
(i) जवाहरलाल नेहरू
(ii) लालबहादुर शास्त्री
(iii) इन्दिरा गांधी
(iv) राजीव गांधी
उत्तर:
(ii) लालबहादुर शास्त्री

प्रश्न 3.
भारत में आपातकाल लागू हुआ था
(i) 25 जून, 1975
(ii) 25 जून, 1972
(iii) 30 जून, 1977
(iv) 30 जून, 1978
उत्तर:
(i) 25 जून, 1975

रिक्त स्थानों की पूर्ति कीजिए

  1. कश्मीर के राजा ………. ने अपनी रियासत जम्मू-कश्मीर को स्वतन्त्र रखने का निर्णय लिया।
  2. दलाईलामा को भारत सरकार ने शरण दी जिससे दोनों देशों के मध्य ………. शुरू हो गया।
  3. 1971 का युद्ध भारत और पाकिस्तान के मध्य ………. दिन तक चला।

उत्तर:

  1. हरीसिंह
  2. शीत युद्ध
  3. 14

सत्य/असत्य

प्रश्न 1.
कश्मीर भारत की उत्तर-पश्चिम सीमा पर स्थित है।
उत्तर:
सत्य

प्रश्न 2.
ताशकन्द समझौता भारत और चीन के मध्य हुआ था। (2016)
उत्तर:
असत्य

प्रश्न 3.
सन् 1931 में जापान द्वारा मंचूरिया पर आक्रमण किया गया।
उत्तर:
सत्य

प्रश्न 4.
परमाणु ऊर्जा रेडियोधर्मी तत्वों के विखण्डन से प्राप्त होती है।
उत्तर:
सत्य

प्रश्न 5.
परमाणु प्रसार को रोकने के लिए अन्तर्राष्ट्रीय स्तर पर पाँच संगठनों की स्थापना की गई है।
उत्तर:
असत्य

जोड़ी मिलाइए
MP Board Class 10th Social Science Solutions Chapter 11 स्वातंत्र्योत्तर भारत की प्रमुख घटनाएँ 2
उत्तर:

  1. → (ख)
  2. → (ग)
  3. → (क)

एक शब्द/वाक्य में उत्तर

प्रश्न 1.
भारत और पाकिस्तान के मध्य सबसे अधिक उलझी हुई समस्या है।
उत्तर:
कश्मीर समस्या

प्रश्न 2.
4 जनवरी, 1966 को राष्ट्रपति अयूब खाँ तथा लालबहादुर शास्त्री के मध्य कौन-सी वार्ता आरम्भ हुई ?
उत्तर:
ताशकन्द वार्ता

प्रश्न 3.
वित्तीय संकट के कारण भारत में आपातकाल कितनी बार लगाया गया है ?
उत्तर:
कभी नहीं

प्रश्न 4.
तारापुर परमाणु शक्ति केन्द्र की स्थापना किस वर्ष में की गई ?
उत्तर:
वर्ष 1969 में

प्रश्न 5.
जम्मू-कश्मीर को किस अनुच्छेद के अन्तर्गत विशेष राज्य का दर्जा दिया गया है ? (2017)
उत्तर:
अनुच्छेद 370

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प्रश्न 1.
जम्मू-कश्मीर भारतीय संघ का एक अभिन्न अंग किस प्रकार बना ?
उत्तर:
6 फरवरी, 1954 को कश्मीर विधानसभा ने एक प्रस्ताव पारित कर जम्मू-कश्मीर-राज्य का विलय भारत में करने की सहमति प्रदान की। भारत सरकार ने 14 मई, 1954 को संविधान में संशोधन कर अनुच्छेद 370 के अन्तर्गत जम्मू-कश्मीर को विशेष दर्जा प्रदान किया। 26 जनवरी, 1957 को जम्मू-कश्मीर का संविधान लागू हो गया। इसके साथ ही जम्मू-कश्मीर भारतीय संघ का एक अभिन्न अंग बन गया।

प्रश्न 2.
सी. टी. बी. टी. क्या है ?
उत्तर:
सी. टी. बी. टी. अर्थात् ‘परमाणु परीक्षण निषेध सन्धि’, विश्व भर में किये जाने वाले सभी प्रकार के परमाणु परीक्षणों पर रोक लगाने के उद्देश्य से लायी गयी सन्धि या समझौता है।

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प्रश्न 1.
भारत की विदेशी नीति की प्रमुख विशेषताएँ बताइए।
उत्तर:
भारत की विदेश नीति की प्रमुख विशेषताएँ- भारत की विदेशी नीति की प्रमुख विशेषताएँ निम्नलिखित हैं –

  1. भारत ने शान्तिपूर्ण सहअस्तित्व के सिद्धान्त में विश्वास करते हुए विश्वशान्ति बनाये रखने के लिए हर सम्भव सहयोग देने की नीति का पालन किया है।
  2. भारत साम्राज्यीय एवं प्रजातीय विभेद का विरोध करता है और पिछड़े राष्ट्रों की सहायता करने को तत्पर रहता है।
  3. भारत संयुक्त राष्ट्र संघ तथा उससे सम्बन्धित अन्य संस्थाओं का समर्थन करता है तथा उनसे सहयोग करता है।

प्रश्न 2.
सन् 1971 के युद्ध में पाकिस्तान की पराजय के प्रमुख बताइए। (2009)
अथवा
सन् 1971 में हुए भारत-पाक युद्ध में पाकिस्तान की पराजय के कारण लिखिए। (2009, 14)
उत्तर:
सन् 1971 के युद्ध में पाकिस्तान की पराजय के प्रमुख कारण-पाकिस्तान की पराजय के प्रमुख कारण अग्रलिखित थे –

  1. पाकिस्तान सैनिक दृष्टि से भारत से कमजोर था।
  2. पाकिस्तान का नैतिक पक्ष दुर्बल था। पाकिस्तान ने पूर्वी पाकिस्तान के साथ जो भेदभावपूर्ण नीति अपनायी थी, उसके परिणामस्वरूप वहाँ जन-आन्दोलन आरम्भ हुआ। बंगाली अपनी स्वतन्त्रता के लिए युद्ध लड़ रहे थे।
  3. पाकिस्तान की सैनिक तानाशाही लोकतान्त्रिक प्रणाली की उपेक्षा कर रही थी। यह उपेक्षा उसके लिए हानिकारक साबित हुई।
  4. पूर्वी और पश्चिमी पाकिस्तान के मध्य दूरी के कारण पाकिस्तान पूर्वी पाकिस्तान तक सहजता से नहीं पहुँच सकता था। समुद्री मार्ग की भारतीय नौसेना ने घेराबन्दी कर ली थी अत: उसकी सेना को आपूर्ति बन्द हो गयी।
  5. पाकिस्तान के अत्याचारों से पीड़ित होकर लाखों की संख्या में शरणार्थी भारत आये। इस कारण भारत को पाकिस्तान के मामले में हस्तक्षेप का अवसर मिला।

प्रश्न 3.
आपातकाल क्या है ? स्पष्ट कीजिए।
उत्तर:
स्वतन्त्रता प्राप्ति के पश्चात् भारत को उसके समक्ष मौजूद अनेक समस्याओं का सामना युद्धस्तर पर करना पड़ा। इसी बात को ध्यान में रखकर संविधान निर्माताओं ने केन्द्र सरकार को इस प्रकार की शक्तियाँ प्रदान की जिसमें वह संकटकाल में उत्पन्न स्थितियों का सामना प्रभावशाली ढंग से कर सके। देश की सुरक्षा, एकता तथा अखण्डता को बनाए रखने के लिए भारत के संविधान में कुछ आपातकालीन प्रावधान किये गये हैं। भारत के संविधान में भारत के राष्ट्रपति की आपातकालीन (संकटकालीन) स्थितियों से निपटने के लिए विशेष शक्तियाँ प्रदान की गई हैं।

प्रश्न 4.
भारत में आपातकाल की घोषणा कौन करता है तथा वह कितने प्रकार की होती है ? (2012, 15)
उत्तर:
सामान्यतः आपातकालीन तीन प्रकार के होते हैं जिनकी घोषणा राष्ट्रपति केन्द्रीय मन्त्रिमण्डल के लिखित परामर्श पर कर सकता है –
(1) राष्ट्रीय आपातकाल – भारत के राष्ट्रपति यदि सन्तुष्ट हो जाये कि स्थिति बहुत कठिन है तथा भारत या उसके किसी भाग की सुरक्षा खतरे में है। युद्ध या बाहरी आक्रमण या क्षेत्र के अन्तर्गत सशस्त्र विद्रोह के कारण विकट समस्या हो सकती है। तब ऐसी स्थिति उत्पन्न होने पर राष्ट्रपति मन्त्रिमण्डल की लिखित अनुशंसा पर आपातकाल की घोषणा कर सकता है।

(2) राज्य में संवैधानिकतन्त्र की विफलता से उत्पन्न आपातकाल – राष्ट्रपति किसी राज्य के राज्यपाल की रिपोर्ट पर या किसी अन्य प्रकार से सन्तुष्ट हो जाए कि वहाँ राज्य का शासन विधिपूर्वक चलाया नहीं जा सकता है। ऐसी स्थिति में राष्ट्रपति आपातकाल की घोषणा कर संवैधानिक तन्त्र की विफलता को रोकने का प्रयास करता है। आम बोलचाल की भाषा में इसे राष्ट्रपति शासन कहते हैं।

(3) वित्तीय संकट – यदि राष्ट्रपति सन्तुष्ट हो जाए कि भारत या इसके किसी भाग की वित्तीय स्थिति या साख को खतरा है तो वित्तीय संकट की घोषणा कर सकता है।

प्रश्न 5.
भारत में आपातकाल कब और कितनी बार घोषित किया गया ? (2018)
उत्तर:
आपातकाल की घोषणाएँ-राष्ट्रीय आपातकाल भारत में अब तक तीन बार घोषित किया गया है –

  1. चीन द्वारा आक्रमण करने पर 26 अक्टूबर, 1962 से 10 जनवरी 1968 तक।
  2. पाकिस्तान द्वारा आक्रमण के कारण 3 दिसम्बर, 1971 से 21 मार्च, 1977 तक तथा आन्तरिक उपद्रव की आशंका के आधार पर 25 जून, 1975 को भारत में आपातकाल घोषित किया गया।
  3. राज्य में संवैधानिक तन्त्र की विफलता से उत्पन्न आपातकाल की घोषणा का प्रयोग अनेक बार हुआ है।

वित्तीय संकट के कारण भारत में अभी तक कभी भी आपातकाल नहीं लगाया गया है।

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MP Board Class 10th Social Science Chapter 11 दीर्घ उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 1.
सन् 1971 के भारत-पाकिस्तान युद्ध के परिणाम लिखिए। (2016, 18)
अथवा
सन् 1971 के भारत-पाकिस्तान युद्ध का वर्णन कीजिए। (2013)
उत्तर:
सन् 1971 का भारत-पाकिस्तान युद्ध चौदह दिन तक चला। पाकिस्तान के लिए यह युद्ध बड़ा मँहगा सिद्ध हुआ। उसे अपने देश के एक विशाल अंग पूर्वी पाकिस्तान से हाथ धोना पड़ा। पूर्वी पाकिस्तान अब बांग्लादेश के रूप में एक स्वतन्त्र राष्ट्र के रूप में प्रतिष्ठित हो चुका था। सन् 1971 के भारत-पाक युद्ध के महत्त्वपूर्ण परिणाम निम्नलिखित रहे –

  1. बांग्लादेश का निर्माण हुआ।
  2. पाकिस्तान की जनसंख्या शक्ति और क्षेत्रफल कम हुआ।
  3. सन् 1965 के पश्चात् सन् 1971 में पुनः हार ने पाकिस्तान का मनोबल तोड़ दिया।
  4. इस युद्ध ने पाकिस्तान से सहानुभूति रखने वाले राष्ट्र अमेरिका और चीन के हौसलों और महत्वाकांक्षा की पराजय हुई।
  5. भारत को यह समझ में आ गया कि अमेरिका उसका शुभचिन्तक नहीं है। अतः भारत ने सोवियत संघ के साथ मित्रता बढ़ाई।
  6. भारत-पाकिस्तान युद्ध के समय देश के विभिन्न राजनीतिक दलों ने अपने सारे मतभेद भुला दिये। बांग्लादेश की स्वतन्त्रता एक राष्ट्रीय प्रश्न बन गया था।
  7. इन बातों का पाकिस्तान की आन्तरिक राजनीति पर बहुत गहरा प्रभाव पड़ा। जनता ने राष्ट्रपति याहियाँ खाँ से त्यागपत्र की माँग की। पराजय के कारण पाकिस्तान में प्रदर्शन हुए। याहियाँ खाँ को त्यागपत्र देना पड़ा। उनके स्थान पर जुल्फिकार अली भुट्टो ने पद ग्रहण किया, जिन्हें विरासत में कई समस्याएँ मिलीं। विभक्त जनमत, विभक्त मनोस्थिति और विभाजित नेतृत्व वाला पाकिस्तान नियति के चक्र में बुरी तरह फंस गया।

प्रश्न 2.
भारत-बांग्लादेश सम्बन्धों पर एक विस्तृत लेख लिखिए। (2009, 17)
उत्तर:
भारत – बांग्लादेश सम्बन्ध

सन् 1971 के भारत-पाकिस्तान युद्ध की परिणति के रूप में बांग्लादेश का उदय हुआ। जब पूर्वी बंगाल और पाकिस्तानी शासक के विरुद्ध विद्रोह हुआ तब भारत की सहानुभूति बांग्ला स्वतन्त्रता सेनानियों के प्रति रही। पाकिस्तान के सैनिक तानाशाह ने जब इन विद्रोहियों का क्रूरता के साथ दमन किया तब भारत ने इसका कड़ा विरोध किया। पाकिस्तान द्वारा किये गये नरसंहार से भयभीत होकर पूर्वी बंगाल के अनेक शरणार्थी भारत में आ गये। भारत ने इनके भोजन-आवास की व्यवस्था की और साथ ही बांग्लादेश की मक्ति वाहिनी के जक को प्रशिक्षित किया। इससे बांग्ला शरणार्थियों का आजादी प्राप्त करने के लिए उत्साह बढ़ा।

(1) स्वतन्त्र बांग्लादेश की घोषणा – 26 मार्च, 1971 को शेख मुजीब के नेतृत्व में स्वतन्त्र बांग्लादेश की घोषणा गुप्त रेडियो से की गई। इसके साथ ही पश्चिमी पाकिस्तान का दमनचक्र शुरू हुआ। अन्ततः 17 अप्रैल, 1971 को बांग्लादेश में स्वतन्त्र प्रभुसत्ता सम्पन्न गणतन्त्र की घोषणा की गई और विश्व की सरकारों से मान्यता प्रदान करने का आग्रह किया। मुक्ति संघर्ष के दौरान लगभग एक करोड़ बांग्लादेशी शरणार्थी भारत में आ गये थे। इसका सीधा प्रभाव भारत की सुरक्षा व एकता-अखण्डता पर पड़ रहा था। बांग्लादेश की समस्या के समाधान के लिए भारत की तत्कालीन प्रधानमन्त्री श्रीमती इन्दिरा गांधी ने कई पश्चिमी राष्ट्रों की यात्रा की किन्तु उन्हें पूर्णतः सफलता नहीं मिली। अन्ततः 3 दिसम्बर, 1971 को भारत-पाकिस्तान के मध्य युद्ध शुरू हो गया।

(2) बांग्लादेश को मान्यता – बांग्लादेश के तात्कालिक विदेशी मन्त्री के अनुरोध पर भारत ने 6 दिसम्बर, 1971 को बांग्लादेश को मान्यता प्रदान कर दी। 8 दिसम्बर, 1971 को ही बांग्लादेश ने हुसैन अली को भारत में अपना प्रथम राजदूत नियुक्त कर दिया।

(3) भारत-बांग्लादेश की प्रथम सन्धि-10 दिसम्बर, 1971 को भारत के साथ बांग्लादेश की प्रथम सन्धि हुई। इस सन्धि में भारत सैनिक और आर्थिक आधार पर स्वतन्त्र बांग्लादेश के पुनर्निर्माण के लिए तैयार हुआ। सन् 1971 के युद्ध में पाकिस्तान के पराजित होते ही बांग्लादेश की सरकार ढाका में स्थापित की गई। भारत और अन्तर्राष्ट्रीय जनमत के समक्ष घुटने टेकते हुए पाकिस्तान को 8 जनवरी, 1971 को अवामी लीग नेता शेख मुजीबुर्रहमान को रिहा करने पर बाध्य होना पड़ा। रिहाई के बाद शेख ने भारत के प्रति अपना आभार व्यक्त किया।

(4) भारत-बांग्लादेश की द्वितीय सन्धि – बांग्लादेश को एक स्वतन्त्र राष्ट्र के रूप में स्थापित करने के उद्देश्य से भारत-बांग्लादेश की द्वितीय सन्धि हुई। भारत ने बांग्लादेश की आर्थिक, आन्तरिक व बाह्य समस्याओं के समाधान की जिम्मेदारी ली। भारत और भूटान के बाद एक स्वतन्त्र राष्ट्र के रूप में बांग्लादेश के पूर्वी जर्मनी, नेपाल, बर्मा (म्यांमार), पश्चिमी यूरोपीय देश, मलेशिया, इण्डोनेशिया आदि देशों ने भी मान्यता दे दी। जनवरी 1972 में काहिरा में अफ्रेशियाई देशों का एकता सम्मेलन हुआ जिसमें बांग्लादेश को स्थायी सदस्य बनवाने में एक बार फिर भारत ने अपना बड़प्पन दिखाया। भारत ने बांग्लादेश के साथ व्यापार और सांस्कृतिक समझौते भी किये। 9 अगस्त, 1972 को भारत ने बांग्लादेश को संयुक्त राष्ट्र संघ के सदस्य राष्ट्र के रूप में मान्यता दिये जाने को समर्थन किया परन्तु चीन द्वारा वीटो पावर से इस कार्य में भारत को सफलता नहीं मिली।

प्रश्न 3.
भारत का आणविक शक्ति के रूप में विकास किस प्रकार हुआ? वर्णन कीजिए। (2013, 16)
अथवा
भारत की परमाणु नीति के सिद्धान्तों को समझाइए। (2009)
अथवा
आणविक शक्ति की पाँच उपयोगिताएँ एवं एक महत्व लिखिए। (2012)
[संकेत : ‘परमाणु ऊर्जा के उपयोग’ शीर्षक देखें।]
उत्तर:
भारत की आणविक शक्ति

(1) परमाणु ऊर्जा की प्राप्ति-परमाणु ऊर्जा रेडियोधर्मी तत्वों के विखण्डन से प्राप्त की जाती है। इस ऊर्जा से विद्युत बनायी जाती है। यूरेनियम, यूरियम, प्लूटोनियम आदि प्रमुख रेडियोधर्मी तत्व हैं। इन तत्वों में भारी मात्रा में ऊर्जा छिपी है। एक अनुमान के अनुसार, एक किलो यूरेनियम से जितनी ऊर्जा प्राप्त होती है उतनी 27,000 टन कोयले से प्राप्त की जाती है। यूरेनियम बहुत मूल्यवान तत्व है।

(2) परमाणु ऊर्जा के प्रमुख केन्द्र-परमाणु ऊर्जा के विकास के क्षेत्र में टाटा संस्थान-1945 तथा भाभा परमाणु ऊर्जा केन्द्र सन् 1957 की स्थापना से परमाणु तकनीकी का विकास हुआ। सन् 1956 में अप्सरा शोध रिएक्टर की स्थापना हुई और सन् 1969 में तारापुर परमाणु शक्ति केन्द्र की स्थापना के बाद यह भारत का पहला व्यावसायिक रियेक्टर केन्द्र बना। भारत ने तारापुर (महाराष्ट्र), कोटा (राजस्थान), कलपक्कम (तमिलनाडु), नरौरा (उत्तर प्रदेश), काकरपारा (गुजरात) एवं गा में परमाणु ऊर्जा केन्द्र स्थापित किए हैं।

परमाणु ऊर्जा के उपयोग – परमाणु ऊर्जा का उपयोग शान्तिपूर्ण एवं विकास कार्यों के लिए वरदान स्वरूप है। कृषि, चिकित्सा, उद्योग आदि क्षेत्रों में इसका उपयोग हो रहा है। नहरों, बाँधों तथा खानों के निर्माण के लिए परमाणु विस्फोटों का प्रयोग किया जा रहा है। साथ ही इसका उपयोग विध्वंसक, शस्त्रों के निर्माण में भी किया जाता है जो कि अनुचित है।

पारम्परिक ऊर्जा स्रोतों की कमी से निपटने के लिए परमाणु ऊर्जा संयंत्रों की बड़ी भूमिका है। मुम्बई में विद्युत उत्पादन परमाणु रिएक्टरों के माध्यम से किया जा रहा है।

भारत की परमाणु नीति – भारत की परमाणु नीति को उसकी विदेशी नीति के मूल सिद्धान्तों के सन्दर्भ में समझा जा सकता है। भारत की विदेशी नीति के तीन मूलभूत सिद्धान्त हैं-राष्ट्रीय सुरक्षा, आर्थिक विकास और विश्व व्यवस्था। इसके अतिरिक्त भारत उपनिवेशवाद, साम्राज्यवाद, रंगभेद का विरोध करते हुए परस्पर सहअस्तित्व, सभी राष्ट्रों से मित्रता एवं अन्तर्राष्ट्रीय शान्ति और सद्भाव की नीति में विश्वास रखता है। भारत की परमाणु नीति का लक्ष्य अपनी सुरक्षा एवं विकास को सुनिश्चित करना है और यह भी ध्यान में रखना है कि एक ऐसे विश्व की स्थापना हो, जो सहयोग, सद्भाव और शान्ति पर आधारित हो। भारत के प्रधानमन्त्री पं. जवाहरलाल नेहरू ने परमाणु बम न बनाने के संकल्प को अनेक अवसरों पर दोहराया। श्रीमती इन्दिरा गांधी ने देश की रक्षा को अति महत्त्वपूर्ण विषय मानते हुए परमाणु नीति पर पुनर्विचार की बात कही। 1974 में इन्दिरा गांधी ने पोखरण (राजस्थान) में ‘शान्तिपूर्ण परमाणु परीक्षण किया।

सन् 1980 के दशक के परमाणु नीति-सन् 1980 के दशक से प्रक्षेपास्त्रों के विकास के कारण भारत की परमाणु नीति में प्रमुख परिवर्तन आया। इस सन्दर्भ में सन् 1983 में प्रारम्भ की गयी ‘एकीकृत निर्देशित प्रक्षेपास्त्र योजना’ अति महत्त्वपूर्ण है। प्रसिद्ध वैज्ञानिक ए. पी. जे. अब्दुल कलाम इस योजना के अध्यक्ष बनाये गये। इस कार्यक्रम के अन्तर्गत भारत ने जिन प्रक्षेपास्त्रों का विकास किया वे ‘पृथ्वी’, ‘त्रिशूल’, ‘नाग’ तथा ‘आकाश’ हैं।

परमाणु प्रसार रोकने के लिए अन्तर्राष्ट्रीय स्तर पर तीन संगठनों की स्थापना हुई-आंशिक मास्को परमाणु परीक्षण निषेध सन्धि (पी. टी. बी. टी.) 1963, परमाणु अप्रसार संधि (एन. पी. टी.) 1968 तथा व्यापक परमाणु परीक्षण निषेध सन्धि (सी. टी. बी. टी.)1996।

सन् 1990 के दशक के परमाणु नीति-सन् 1990 के दशक से भारत की परमाणु नीति में मोड़ आया क्योंकि विश्वस्त सूत्रों से ज्ञात हुआ कि पाकिस्तान ने परमाणु बम तैयार कर लिया है। अपनी रक्षा को मजबूत बनाने, उसमें आत्मनिर्भरता प्राप्त करने के लिए तथा अन्तर्राष्ट्रीय परिवेश के दबावों से बचने के लिए परमाणु परीक्षण किये जाने पर विचार किया गया। 11 मई, 1998 को भारत ने तीन भूमिगत परमाणु परीक्षण लगातार एक के बाद एक पोखरण में किये। परमाणु परीक्षण सम्पन्न हो जाने के पश्चात् प्रधानमन्त्री अटल बिहारी बाजपेयी ने घोषित किया कि “हम एक बड़े बम की क्षमता वाले” राष्ट्र बन गये हैं। परन्तु प्रधानमंत्री ने आश्वासन दिया कि परमाणु हथियारों का उपयोग हम किसी देश के विरुद्ध नहीं करेंगे वरन् अपनी आत्मरक्षा के लिए करेंगे।

वास्तव में भारत ने आणविक परीक्षण इसलिए किये क्योंकि भारत की सीमाओं के निकट परमाणु अस्त्र क्षमता एवं प्रक्षेपास्त्रों की मौजूदगी थी। अत: भारत को अपनी सुरक्षा मजबूत बनाने के लिए तथा अन्तर्राष्ट्रीय परिस्थितियों में राजनैतिक एवं कूटनीतिक रूप से दबाव बढ़ाना आवश्यक था परन्तु भारत आरम्भ से ही शान्तिदूत रहा है और उसने आणविक शक्ति दूसरों पर अपनी प्रभुता स्थापित करने तथा दूसरे राष्ट्रों के मामलों में हस्तक्षेप प्राप्त करने के लिए नहीं की है।

MP Board Class 10th Hindi Vasanti Solutions Chapter 19 सन्नाटा

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MP Board Class 10th Hindi Vasanti Solutions Chapter 19 सन्नाटा (उषाराज सक्सेना)

सन्नाटा पाठ्य-पुस्तक के प्रश्नोत्तर

सन्नाटा लघु-उत्तरीय प्रश्नोत्तर

प्रश्न- 1.
कवियित्री को परदेश में कैसा अनुभव होता है?
उत्तर
कवियित्री को परदेश में अकेलेपन का अनुभव होता है।

प्रश्न 2.
जलता हुआ बल्ब सन्नाटे में कैसा लग रहा है?
उत्तर
जलता हुआ बल्ब आँखों में ठहरा हुआ आँसू जैसे पलकों पर लटक गया है।

प्रश्न 3.
‘तुम्हारी विरासत’ कवियित्री के पास क्या शेष बचा है?
उत्तर
‘तुम्हारी विरासत’ कविता में कवियित्री के पास बची हुई जिंदगी का एक टुकड़ा शेष बचा है।

प्रश्न 4.
स्मृतियों की आहट से क्या अनुभव होता है?
उत्तर
‘स्मृतियों की आहट से’ हमें नई जिंदगी जीने की सुबह का अनुभव होता है।

सन्नाटा दीर्य-उत्तरीय प्रश्नोत्तर

प्रश्न 1.
‘शब्द समूह खो गया है।’ पंक्ति का भाव स्पष्ट कीजिए।
उत्तर
‘शब्द-समूह खो गया है। पंक्ति का भाव यह है कि आज अकेलापन चारों ओर फैल गया है।

प्रश्न 2.
जलता हुआ प्रश्न चिह्न किसे कहा गया है? और क्यों?
उत्तर
‘जलता हुआ प्रश्न चिह्न’ अकेलापन और उदासीपन को कहा गया है।

प्रश्न 3.
‘सन्नाटा’ कविता का सारांश अपने शब्दों में लिखिए।
उत्तर
देखिए सन्नाटा का सारांश।

प्रश्न 4.
कवियित्री अँधेरे से क्या छीन कर लाई हैं?
उत्तर
कवियित्री अँधेरे से बची हुई जिंदगी का एक टुकड़ा छीन कर लाई हैं।

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प्रश्न 5.
‘कवयित्री सन्नाटा से बिलकुल भयभीत नहीं है।’ स्पष्ट कीजिए।
उत्तर
कवियित्री सन्नाटे से बिलकुल भयभीत नहीं है। यह इसलिए कि उसे सुबह की नई किरणों से जिंदगी में नए आहट आने की पूरी आशा है।

प्रश्न 6.
‘तुम्हारी विरासत’ कविता हमें क्या सन्देश देती है?
उत्तर
‘तुम्हारी विरासत’ कविता का संदेश है-‘निराशा के घोर अंधकार अपने भीतर आशा की एक किरण अवश्य प्रकाशित कर लेना चाहिए।

प्रश्न 7.
कवियित्री ने अपनी तुलना जले हए कोयले से क्यों की है?
उत्तर
कवियित्री ने अपनी तुलना जले हुए कोयले से की है। यह इसलिए कि उसकी राख में एक नन्हीं-सी सुर्ख चिंगारी तिड़कने का खामोशी से इंतजार कर रही है।

सन्नाटा भाषा-अनुशीलन

प्रश्न 1.
भाव सौंदर्य लिखिए
‘आँख में ठहरा हुआ आँसू
पलकों पर लटक गया है।’
उत्तर
उपर्युक्त पद्यांश की भाव-योजना बिंबात्मक है। आँखों में ठहरा हुआ आँसू पलकों पर लटक गया है द्विविधा और अनजान की स्थिति को उजगार करने में अधिक रोचक लग रहा है।

प्रश्न 2.
आशय स्पष्ट कीजिए
(क) बची हुई जिंदगी का एक टुकड़ा
(ख) स्मृतियों के पद चाप।
उत्तर
(क) उपर्युक्त पद्यांश का आशय है-जिंदगी में कुछ नहीं है, फिर भी जो कुछ थोड़ा है, वही बहुत है।
(ख) उपुर्यक्त पद्यांश का आशय है-यादों के लौट आने के प्रति आशावान बनकर एकाकी जिंदगी को खुशहाल बनाया जा सकता है।

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प्रश्न 1.
शुद्ध वर्तनी कीजिए
मुरख, खमोसी, आँख, स्मृतियाँ, खिड़कियाँ, बल्व ।
उत्तर
अशुद्ध वर्तनी – शुद्ध वर्तनी
मुरख – मूर्ख
खमोसी – खामोसी
आंख – आँख
खिड़कीयाँ – खिड़कियाँ
बल्ब – बल्ब।

प्रश्न 4.
निम्नलिखित शब्दों के विलोम शब्द लिखिए
अँधेरा, स्मृति, आदि, आस्था।
उत्तर
शब्द – विलोम शब्द
अँधेरा – उजाला
स्मृति – विस्मृति
आदि – अंत
आस्था – अनास्था।

सन्नाटा योग्यता-विस्तार

प्रश्न 1. जीवन के प्रति आशावादी दृष्टिकोण वाली अन्य कविताएँ खोज कर पढ़िए।
प्रश्न 2. इन कविताओं को पढ़कर आपको क्या प्रेरणा मिलती है? अपने शब्दों में लिखिए।
उत्तर
उपर्युक्त प्रश्नों को छात्र/छात्रा अपने अध्यापक/अध्यापिका की सहायता से हल करें।

सन्नाटा परीक्षोपयोगी अतिरिक्त प्रश्नोत्तर

अर्वग्रहण संबंधी प्रश्नोत्तर

प्रश्न 1.
‘सन्नाटा’ कविता का प्रतिपाद्य स्पष्ट कीजिए।
उत्तर
प्रस्तुत कविता प्रवासी कवियित्री उषाराज सक्सेना की एक महत्त्वपूर्ण कविता है। इस कविता में कवियित्री उषाराज सक्सेना बड़ी ही सावधानीपूर्वक परदेश में रहने की आत्मपीड़ा की हैरानी का उल्लेख किया है। कवियित्री का मानना है कि परदेश का भाव किसी से जुड़ा हुआ नहीं है, मन का निर्वासन भी कभी-कभी परदेश में रहने का अनुभव दे जाता है। जब मन में यह निर्वासन आता है, तब चारों ओर निस्तब्धता छायी ज्ञात होने लगती है। इस निर्वासन में अपने प्रति जगाई गई आस्था में भी दरार आने लगती है, अपनी शक्तियों पर भी कभी-कभी अविश्वास जागने लगता है। कविता के अंत में अपनी आत्मशक्तियों की चिंगारी का अनुभव कवियित्री को होता है, किंतु इसमें भी उसे संदेह है कि कहीं यह चिंगारी बुझ न जाए। कविता समकालीन जीवन में चारों ओर व्याप्त रहे एकाकीपन को ध्यान में रख करके रची गई है।

प्रश्न 2.
‘तुम्हारी विरासत’ कविता उषा वर्मा की एक अत्यधिक चर्चित कविता है?
उत्तर
कविता को पढ़ने से यह सुस्पष्ट हो जाता है कि कविता का काव्य स्वर आस्थावादी है। कवियित्री ने प्रस्तुत कविता में स्पष्ट किया है कि भले ही निराशा का गहरा अँधेरा हो, किंतु इस अँधेरे में भी हमें अवश्य ही एक किरण अपने भीतर प्रकाशित कर लेना चाहिए। सन्नाटे के भीतर किसी के आने की पदचाप सनने की ललक हमें जीवन-बोध से भरे रहती है। सुबह का इंतजार जीवन की ऊष्मा से संपन्न होकर ही किया जा सकता है, हमें अपनी भीतर यह ऊष्मा बचाए रखना है।

प्रश्न 3.
दिए गए कथनों के लिए दिए गए विकल्पों में से सही विकल्प चयन कीजिए।
1. परदेश में नहीं खटकता है
1. काँटा
2. बुर
3. साँकल
4. आवाज।
उत्तर
(3) साँकल

2. शब्द-समूह है
1. खो गया
2. आ गया
3. भा गया
4. बिगड़।
उत्तर
(1) खो गया

3. हवा हो गई है
1. तेज
2. बहरी
3. गूंगी
4. हल्की ।
उत्तर
(2) बहरी

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4. आकाश हो गया है
1. साफ
2. बहरा
3. धुंधला
4. नीला।
उत्तर
(2) बहरा

5. दीवारें हो गई हैं
1. दीली
2. कमजोर
3. ठोस
4. बड़ी।
उत्तर
(3) ठोस

प्रश्न 4.
रिक्त स्थानों की पूर्ति दिए गए विकल्पों में से उचित शब्दों के चयन से कीजिए।
1. खिड़कियाँ …………….है। (खुली, बंद)
2. आँखों का ठहरा हुआ आँसू ……………… लटक गया है। (गालों पर, पलकों पर)
3. छत से अकेला ………………रहा है। (पंखा, बल्च)
4. एक जलता हुआ ……………… लगता है। (प्रश्न चिहून, अभाव चिहन)
5. बची हुई जिंदगी का ……………… है। (एक टुकड़ा, एक रूप)
उत्तर

  1. बंद
  2. पलकों पर
  3. बल्व
  4. प्रश्न चिह्न
  5. एक टुकड़ा।

प्रश्न 4.
सही जोड़ी का मिलान कीजिए
सरस्वती – दुष्यंत कुमार
विनयपत्रिका – डॉ. प्रेम भारती
सेगाँव का संत – महावीर प्रसाद द्विवेदी
वीरांगना दुर्गावती – तुलसीदास
छोटे-छोटे सवाल – श्रीमन्नारायण अग्रवाल
उत्तर
सरस्वती – महावीर प्रसाद द्विवेदी
विनयपत्रिका – तुलसीदास
सेगाँव का संत – श्रीमन्नारायण अग्रवाल
वीरांगना दुर्गावती – डॉ. प्रेम भारती
छोटे-छोटे सवाल – दुष्यंत कुमार।

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प्रश्न 3.
निम्नलिखित वाक्य सत्य हैं या असत्य? वाक्य के आगे लिखिए।
1. साँकल खटकता है।
2. सब कुछ जमा हुआ-सा लगता है।
3. हवा बहरी हो गई है।
4. आकाश गूंगा हो गया है।
5. स्मृतियों के पदपाच अपनी आहट से हमें जगा देते हैं।
उत्तर

  1. असत्य
  2. सत्य
  3. असत्य
  4. असत्य
  5. सत्य।

प्रश्न 6.
निम्नलिखित कथनों का उत्तर एक शब्द में दीजिए।
1. ‘सन्नाटा’ कविता में किसका उल्लेख है?
2. ‘तुम्हारी विरासत’ कविता का मुख्य स्वर क्या है?
3. एक नन्हीं-सी चिंगारी तिड़कने का खामोशी से क्या कर रही है?
4. कवियित्री के पास बची हुई जिन्दगी का क्या है?
5. मुस्कराती कोयलों से कौन-सी किरण फूटेंगी।
उत्तर

  1. आत्मपीड़ा का
  2. आस्थावादी
  3. इंतजार
  4. टुकड़ा
  5. सुबह की।

सन्नाटा लघु उत्तरीय प्रश्नोत्तर

प्रश्न 1.
‘सन्नाटा’ कविता में किसका अनुभव है? उत्तर-‘सन्नाटा’ कविता में परदेश का अनुभव है।

प्रश्न 2.
अंगीठी में जलते हुए क्या हैं?
उत्तर
अंगीठी में जलते हुए अंगारे हैं।

प्रश्न 3.
कवियित्री बची हुई जिंदगी एक टुकड़ा कहाँ से लाई है?
उत्तर
कवियित्री बची हुई जिंदगी का एक टुकड़ा अंधेरे से छीन कर लाई है।

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सन्नाटा कविता का सारांश

प्रस्तुत कविता ‘सन्नाटा’ में आत्मपीड़ा और आत्मकंठा को व्यक्त किया गया है। कवियित्री ने परदेश का भाव किसी से न जड़कर अलग है, इसे सामने लाने का प्रयास किया है इसलिए ऐसा लगता है कि एक पूरा-का-पूरा शब्द-समूह खो गया है। हवा बेजुबान हो गई है। आकाश बहरा हो गया है। आँखों में ठहरा हुआ आँसू पलकों पर लटक गया है।

सन्नाटा संदर्भ-प्रसंग सहित व्याख्या

1. चुप-सी लगी है,
सब-कुछ जमा हुआ-सा लगता है
मन के अंदर उग आए परदेश में,
कहीं कोई झिझकते हुए भी साँकल नहीं खटखटाता।

शब्दार्थ-झिझकते-संकोच करते। साँकल-दरवाजे की सिकड़ी।

संदर्भ-प्रस्तुत पद्यांश हमारी पाठ्य-पुस्तक हिंदी सामान्य’ 10वीं में संकलित कवियित्री उषाराज सक्सेना विरचित कविता ‘सन्नाटा’ से है।

प्रसंग-प्रस्तुत पद्यांश में कवियित्री ने परदेश में हने के अनुभव का चित्रण प्रस्तुत करते हुए कहा है। कि

व्याख्या-यहाँ की जिन्दगी चुप-चुप-सी लगती है। सब कुछ शान्त और ठहरा हुआ-सा अनुभव होता है। मन के अन्दर कोई भाव अगर नए होकर आते हैं तो वे झिझकते हुए आते हैं। चारों ओर सूनापन है। कहीं किसी दिरवाजे के खलने की आवाज नहीं होती है।

विशेष-

  1. परदेश के अनुभव को प्रस्तुत किया गया है।
  2. भाव सजीव है।

सौंदर्य-बोध पर आधारित प्रश्नोत्तर भाव-सौंदर्य

प्रश्न
उपर्युक्त पयांश का भाव-सौंदर्य लिखिए।
उत्तर
उपर्युक्त पद्यांश की भाव-योजना स्वाभाविक है। परदेश के अनुभव को एकदम सटीक और यथार्थ रूप में प्रस्तुत किया गया है। इसलिए यह रोचक रूप में है। शिल्प-सौंदर्य

प्रश्न
उपर्युक्त पयांश के शिल्प-सौंदर्य पर प्रकाश डालिए।
उत्तर
उपर्युक्त पद्यांश की शिल्प-योजना सरल शब्दों की है। कथ्य को रोचक और प्रभावशाली बनाने के लिए उपमा अलंकार मुख्य रूप से है।

विषय-वस्तु पर आधारित प्रश्नोत्तर

प्रश्न 1.
उपर्युक्त पद्यांश का आशय लिखिए।
उत्तर
उपर्युक्त पद्यांश में विदेशी जिन्दगी के उदासीपन को बखूबी रेखांकित करने का प्रयास किया है। विदेशी जिन्दगी का सूनापन उसके भौतिक सुख-स्वरूप को बौना बना देता है। इसे भी सुस्पष्ट किया गया है।

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2. लगता है एक पूरा-का-पूरा
शब्द समूह खो गया है।
हवा गूंगी हो गई है।
आकाश बहरा हो गया है।
दीवारें कुछ और ठोस हो गई हैं।
खिड़कियाँ भी बंद हैं।
छत से लटकता, अकेला बल्ब
आँखें मिचमिचाते मेरे होने और न होने पर
एक जलता हुआ प्रश्न-चिह्न लगाता है।
आँख में ठहरा हुआ
आँसू पलकों पर लटक गया है।

शब्दार्थ-गूंगी-बेजुबान।

संदर्भ-पूर्ववत्।

प्रसंग-पूर्ववत्।

व्याख्या-प्रवासी अनुभव यह है कि चारों ओर सनापन बिखर गया है। ऐसा लगता है मानो सारा शब्द-समूह कहीं खो गया है। हवा में किसी प्रकार की अभिव्यक्ति कोई हलचल नहीं है। यही हाल आकाश का है कि मानो वह कुछ सुन-समझ नहीं पा रहा है। दीवारों की कठोरता बढ़ गई है तो खिड़कियों से किसी प्रकार हरकत नहीं हो पा रही है। इस प्रकार मेरे अस्तित्व का नकारापन जलता-भुनता हुआ मात्र एक प्रश्न चिहन के समान लग रहा है। इन्हीं विडंबनाओं से दुखी मेरी आखों का आँसू न बंद हो रहा है और न बह रहा है। वह तो पलकों पर आकर लटक गया है।

विशेष-

  1. बिंब और प्रतीक यथास्थान हैं।
  2. करुण रस का संचार है।

सौंदर्य-बोध पर आधारित प्रश्नोत्तर भाव-सौंदर्य

प्रश्न 1.
उपर्युक्त पयांश के भाव-सौंदर्य पर प्रकाश डालिए।
उत्तर
उपर्युक्त पद्यांश की भाव-धारा मार्मिक और हृदयस्पर्शी है। प्रवासी अनुभव न केवल बेजान एकाकी और दुखी होता है, अपितु बेगाना और अनजान भी होता है। इस तथ्य को कवियित्री ने बड़ी गहराई से व्यक्त करने का प्रवाह किया है।

शिल्प-सौंदर्य

प्रश्न 1.
उपर्युक्त पयांश के शिल्प-सौंदर्य पर प्रकाश डालिए।
उत्तर
उपर्युक्त पद्यांश का शिल्प-सौंदर्य सरल शब्दों से निर्मित भाषा का है। शैली महावरेदार है। मानवीकरण अलंकार और प्रतीकों की सजीवता से यह अंश अधिक प्रभावशाली बन गया है। भाव और अर्थ परस्पर अनुकूल हैं।

विषय-वस्तु पर आधारित प्रश्नोत्तर
प्रश्न 1.
उपर्युक्त पद्यांश का मुख्य भाव लिखिए।
उत्तर
उपर्युक्त पद्यांश के द्वारा कवियित्री ने अपने प्रवासी अनुभव को मार्मिक रूप में व्यक्त किया है। उसके द्वारा उसने यह प्रस्तुत करना चाहा है कि प्रवासी अनुभव अपने अकेलेपन के कारण नीरस और दुखद होते हैं।

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3. अँगाठी में जलते हुए, लाल
अंगारों से पूछती हूँ,
कहीं मैं भी तो
जला हुआ कोयला नहीं
जिसकी राख में
एक नन्हीं-सी सुर्ख चिंगारी
तिड़कने का खामोशी से
इंतजार कर रही है?

शब्दार्व-सुर्ख-लाल । तिड़कने-जलते समय कोयला या लकड़ी का चिटचिटाना। खामोशी-चुप्पी।

संदर्भ-पूर्ववत्।

प्रसंग-पूर्ववत् ।

व्याख्या-अंगीठी जल रही है। अपनी बात करना चाहती हैं परंतु वहाँ तो उस जलती हुई अंगीठी के सिवाय और कोई नहीं है। उसमें जलते हुए लाल अंगारों से पूछ रही हूँ। कहीं मैं भी तो जलता हुआ कोयला नहीं हैं। जिसकी बूझती हूँ राख में बहुत ही छोटी-सी लाल चिंगारी के चिट्चिटाने की चुप्पी के समान प्रतीक्षा कर रही हूँ।

विशेष-

  1. प्रवासी अनुभव के दुखद पक्ष को चित्रित किया गया है।
  2. शब्द-चयन प्रभावशाली हैं।

सौंदर्य-बोध पर आधारित प्रश्नोत्तर भाव-सौंदर्य

प्रश्न 1.
उपर्युक्त पद्यांश के भाव-सौंदर्य को लिखिए।
उत्तर
उपर्युक्त पद्यांश का भाव-स्वरूप नई काव्य-धारा के अनुकूल है। प्रवासी अनुभव के दर्दभय स्वरूप को चित्रित किया गया है। इसे सहज भावाभिव्यक्ति के द्वारा प्रस्तुत करके हदय बनाने का प्रयास प्रशंसनीय रूप में है।

शिल्प-सौंदर्य

प्रश्न 1.
उपर्युक्त पयांश के शिल्प-सौंदर्य पर प्रकाश डालिए।
उत्तर
उपर्युक्त पद्यांश का शिल्प सौन्दर्य चित्रमयी शैली में प्रस्तुत है। भाषा की शब्दावली प्रतीकात्मक बिंब और योजना की व्यवस्था अच्छी दशा में है। इसलिए यह पद्यांश प्रभावशाली बन गया है। करुण रस और उपमा अलंकार के आकर्षण अधिक और प्रशंसनीय हैं।

विषय-वस्तु पर आधारित प्रश्नोत्तर

प्रश्न 1.
उपर्युक्त पयांश का प्रतिपाय स्पष्ट कीजिए।
उत्तर
उपर्युक्त पद्यांश के कवियित्री ने प्रवासी अनुभव के दुखद पक्ष को बड़े मार्मिक रूप में प्रस्तुत किया है। यह प्रस्तुतीकरण कवियित्री का स्वयं होकर भी सार्वजनिक बन गया है। यही कवियित्री का यहाँ मुख्योदेश्य सिद्ध हो रहा है।

तुम्हारी विरासत

सन्नाटा कविता का सारांश

प्रस्तुत कविता कवियित्री उषा वर्मा विरचित है। इसमें आस्था के भावों को पिरोने का प्रयास किया गया है। इसमें निराशा के क्षणों में आशा को चमकाने का प्रयास नहीं छोड़ने का भाव भरने की भी कोशिश की गई है। सन्नाटे के भीतर भी किसी के आने की ललक नहीं खोनी चाहिए।

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सन्नाटा संदर्भ-प्रसंग सहित व्याख्या

1. बची हुई जिंदगी का
एक टुकड़ा है
मेरे पास।
इसे मैं अन्धेरे से
छीन कर लाई हूँ।
देर तो हो गई है,
सन्नाटा कितना ही
भयानक हो
उसमें भटकते
स्मृतियों के पदचाप,
अपनी आहट से
हमें जगा देते हैं।
इसमें फूटेंगी सुबह की किरणें।
मुस्कराती कोपलों से।

शब्दार्थ-स्मृतियों-यादों। सन्नाटा-शान्त।

संदर्भ-प्रस्तुत पद्यांश हमारी पाठ्य-पुस्तक ‘हिंदी सामान्य’ 10वीं में संकलित कवियित्री उषा वर्मा विरचित कविता ‘सन्नाटा’ से है।

प्रसंग-प्रस्तुत पद्यांश में कवियित्री ने निराशाएं भी आशा की ज्योति जलाने का भाव जगाते हुए अपने अनुभव को इस प्रकार कहा है कि

व्याख्या-मेरे पास और कुछ नहीं है। केवल जिंदगी का एक टुकड़ा ही बचा हुआ है। इस अभावमयी जिंदगी के अन्धेरे से इसे मैं छीनकर ले तो आई हूँ, मगर कुछ देर हो गई है। कवियित्री का पुनः कहना कि सन्नाटा चाहे कितना भी डराता, हो, उसे इधर-उधर मँडराते हुए बीती यादों के स्वर हमें सचेत कर देते हैं कि इसमें ही सुबह की नई किरणें फूटेंगी। वे किरणें बुझी हुई जिंदगी रूपी कोयलों से मुस्कुराती होंगी।

विशेष-

  1. भाषा लाक्षणिक है।
  2. शैली चित्रमयी है।

सौंदर्य-बोध पर आधारित प्रश्नोत्तर भाव-सौंदर्य

प्रश्न
उपर्युक्त पयांश के भार-सौंदर्य पर प्रकाश डालिए।
उत्तर
उपर्युक्त पद्यांश की भाव योजना सरल शब्दों की है। भावाभिव्यक्ति सपाट है। कवियित्री का आत्म अनुभव सामान्यजन के अनुभव कहा जा सकता है। इससे यह पद्यांश हृदय को अधिक छू रहा है।

शिल्प-सौंदर्य

प्रश्न
उपर्युक्त पयांश के शिल्प-सौंदर्य पर प्रकाश डालिए।
उत्तर
उपर्युक्त पद्यांश का शिल्प-सौंदर्य लाक्षणिक भाषा-शैली का है। त्रासदमयी जिंदगी के एक दुखद पक्ष को सामने लाने के सटीक बिम्बों, प्रतीकों और योजनाओं को प्रस्तुत करने की कवियित्री की कोशिश अधिक प्रभावशाली है।

विषय-वस्तु पर आधारित प्रश्नोत्तर

प्रश्न
उपर्युक्त पद्यांश के भाव को स्पष्ट कीजिए!
उत्तर
उपर्युक्त पद्यांश में कवियित्री सन्नाटे के भीतर किसी के होने की आशा को विश्वास के साथ प्रस्तुत किया है। यही जीवन-बोध होना चाहिए। सुबह की प्रतीक्षा से ही जीवन की उष्मा को संपन्न किया जा सकता है।

MP Board Class 10th Social Science Solutions Chapter 18 अर्थव्यवस्था : सेवा क्षेत्र एवं अधोसंरचना

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MP Board Class 10th Social Science Solutions Chapter 18 अर्थव्यवस्था : सेवा क्षेत्र एवं अधोसंरचना

MP Board Class 10th Social Science Chapter 18 पाठान्त अभ्यास

MP Board Class 10th Social Science Chapter 18 वास्तानिष्ट प्रश्न

सही विकल्प चुनकर लिखिए

प्रश्न 1.
जैसे-जैसे अर्थव्यवस्था विकसित होती है, राष्ट्रीय आय में तृतीयक क्षेत्र का अंश
(i) बढ़ता जाता है
(ii) घटता जाता है
(iii) बढ़ता है तत्पश्चात् घटता है
(iv) घटता है तत्पश्चात् बढ़ता है।
उत्तर:
(i) बढ़ता जाता है

प्रश्न 2.
बाजार के विस्तार में सहायक होते हैं
(i) परिवहन के साधन
(ii) संचार के साधन
(iii) बैंक एवं वित्तीय संस्थाएँ
(iv) उक्त सभी।
उत्तर:
(iv) उक्त सभी।

प्रश्न 3.
कृषि क्षेत्र निम्न में सम्मिलित है – (2009, 15)
(i) प्राथमिक
(ii) द्वितीयक
(iii) तृतीयक
(iv) द्वितीयक एवं तृतीयक दोनों।
उत्तर:
(i) प्राथमिक

प्रश्न 4.
सेवा क्षेत्र रोजगार प्रदान करता है –
(i) प्रत्यक्ष रूप से
(ii) अप्रत्यक्ष रूप से
(iii) प्रत्यक्ष एवं अप्रत्यक्ष दोनों रूप से
(iv) इनमें में से कोई नहीं।
उत्तर:
(iii) प्रत्यक्ष एवं अप्रत्यक्ष दोनों रूप से

प्रश्न 5.
सेवा क्षेत्र के निरन्तर विकास का कारण है –
(i) सरकारी हस्तक्षेप
(ii) कृषि एवं उद्योगों का विकास
(iii) सोच में परिवर्तन
(iv) उक्त सभी।
उत्तर:
(iv) उक्त सभी।

रिक्त स्थानों की पूर्ति कीजिए

  1. अर्थव्यवस्था का ……………… क्षेत्रों में विभाजन किया गया है। (2009, 13)
  2. सेवा क्षेत्र अर्थव्यवस्था का ……………… क्षेत्र होता है। (2010)
  3. वर्ष 2005-06 में सकल घरेलू उत्पाद में सेवा क्षेत्र का योगदान ……………… प्रतिशत था।
  4. शिक्षा एवं स्वास्थ्य ……………… अधोसंरचना के अंग हैं। (2009, 14, 16, 18)
  5. ऊर्जा आयोग का गठन मार्च ……………… में किया गया।

उत्तर:

  1. तीन
  2. तृतीयक
  3. 52.4
  4. सामाजिक
  5. 1981

सही जोड़ी बनाइए
MP Board Class 10th Social Science Solutions Chapter 18 अर्थव्यवस्था : सेवा क्षेत्र एवं अधोसंरचना
उत्तर:

  1. → (ख)
  2. → (ग)
  3. → (क)
  4. → (ङ)
  5. → (घ)

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MP Board Class 10th Social Science Chapter 18 अति लघु उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 1.
देश की कुल जनसंख्या का वह भाग; जो प्रत्यक्ष रूप से उत्पादक क्रियाओं में सहयोग करता है, क्या कहलाता है ?
उत्तर:
द्वितीयक क्षेत्र।

प्रश्न 2.
कार्यशील जनसंख्या का व्यावसायिक वितरण का प्रतिशत किस प्रकार का रहता है ?
उत्तर:
कार्यशील जनसंख्या का व्यावसायिक वितरण का प्रतिशत बढ़ता रहता है।

प्रश्न 3.
अर्थव्यवस्था के उस क्षेत्र का नाम बताइए जो कृषि एवं उद्योग के संचालन में सहायता पहुँचाता है। (2018)
उत्तर:
तृतीयक क्षेत्र कृषि एवं उद्योग के संचालन में सहायता पहुँचाता है।

प्रश्न 4.
डॉक्टर, शिक्षक, नाई, धोबी, वकील आदि की सेवाएँ किस प्रकार के कार्यक्षेत्र में आती हैं? (2009)
उत्तर:
डॉक्टर, शिक्षक, नाई, धोबी, वकील आदि की सेवाएँ तृतीयक क्षेत्र के अन्तर्गत आती हैं।

प्रश्न 5.
सेवा क्षेत्र क्या है ? (2015, 17)
उत्तर:
तृतीयक क्षेत्र की गतिविधियों से वस्तुओं के स्थान पर सेवाओं का सृजन होता है। अत: इसे सेवा ‘क्षेत्र भी कहा जाता है।

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MP Board Class 10th Social Science Chapter 18 लघु उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 1.
अर्थव्यवस्था के क्षेत्र एवं राष्ट्रीय आय में क्या सम्बन्ध है ? लिखिए।
उत्तर:
अर्थव्यवस्था के क्षेत्र एवं राष्ट्रीय आय में सम्बन्ध-एक राष्ट्र की राष्ट्रीय आय या सकल घरेलू उत्पाद (जी. डी. पी.) की गणना के लिए उस राष्ट्र के प्राथमिक, द्वितीयक एवं तृतीयक क्षेत्रों को आधार माना जाता है। इसके लिए सबसे पहले इन तीनों क्षेत्रों से प्राप्त उत्पादन के मौद्रिक मूल्य की गणना की जाती है। तदुपरान्त इन अलग-अलग क्षेत्रों से प्राप्त मौद्रिक मूल्य को जोड़ा जाता है। इस प्रकार देश का सकल घरेलू उत्पाद (जी. डी. पी.) या राष्ट्रीय आय के आँकड़े प्राप्त हो जाते हैं।

अनुभव यह बताता है कि आर्थिक विकास के साथ-साथ जहाँ प्राथमिक, द्वितीयक एवं तृतीयक क्षेत्रों से प्राप्त आय में वृद्धि होती है, वहीं इनके तुलनात्मक योगदान में भी परिवर्तन होता है। यह देखा गया है कि जैसे-जैसे किसी राष्ट्र में आर्थिक विकास होता है; वैसे-वैसे कुल राष्ट्रीय आय में प्राथमिक क्षेत्र का योगदान क्रमशः कम होता जाता है तथा तृतीयक या सेवा क्षेत्र का योगदान बढ़ता जाता है।

प्रश्न 2.
अर्थव्यवस्था के प्राथमिक एवं द्वितीयक क्षेत्र को उदाहरण की सहायता से समझाइए।
अथवा
प्राथमिक क्षेत्र को उदाहरण देकर समझाइए। (2015)
अथवा
अर्थव्यवस्था के द्वितीयक क्षेत्र को उदाहरण की सहायता से समझाइए। (2014, 16, 18)
उत्तर:
प्राथमिक क्षेत्र – प्राकृतिक संसाधनों पर प्रत्यक्ष रूप से आधारित गतिविधियों को प्राथमिक क्षेत्र कहा जाता है। उदाहरण के लिए कृषि को लिया जा सकता है। फसलों के उत्पादन के लिए मुख्यतः प्राकृतिक कारकों; जैसे-मृदा, वर्षा, सूर्य का प्रकाश, वायु आदि पर निर्भर रहना पड़ता है। अतः कृषि उपज एक प्राकृतिक उत्पाद है। इसी प्रकार वन, पशुपालन, खनिज आदि को भी प्राथमिक क्षेत्र के अन्तर्गत लिया जाता है।

द्वितीयक क्षेत्र – इस क्षेत्र की गतिविधियों के अन्तर्गत प्राकृतिक उत्पादों को विनिर्माण प्रणाली के माध्यम से अन्य रूपों में परिवर्तित किया जाता है। उदाहरण के लिए लोहे से मशीन बनाना या कपास से कपड़ा बनाना आदि यह प्राथमिक गतिविधियों के बाद अगला कदम है। इस क्षेत्र में वस्तुएँ सीधे प्रकृति से उत्पादित नहीं होती हैं, वरन् उन्हें मानवीय क्रियाओं के द्वारा निर्मित किया जाता है। ये क्रियाएँ किसी कारखाने या घर में हो सकती हैं। चूँकि यह क्षेत्र क्रमशः सम्बन्धित विभिन्न प्रकार के उद्योगों से जुड़ा हुआ है इसीलिए इसे औद्योगिक क्षेत्र भी कहा जाता है।

प्रश्न 3.
सेवा क्षेत्र के कृषि एवं राष्ट्रीय आय में योगदान की विवेचना कीजिए।
उत्तर:
सेवा क्षेत्र का कषि में योगदान – किसानों की प्राकतिक आपदाओं से बचाने का कार्य भी सेवा क्षेत्र द्वारा किया जाता है। वर्षा बीमा योजना, फसल बीमा योजना, कृषि आय बीमा योजना तथा राष्ट्रीय कृषि बीमा योजना आदि के द्वारा कृषि उपज की अनिश्चितता एवं जोखिक को दूर किया जाता है। साथ ही सेवा क्षेत्र किसानों को उन्नत खाद, बीज आदि के क्रय हेतु पूँजी प्रदान कर उत्पादन बढ़ाने में सहायक होता है। इस प्रकार सेवा क्षेत्र कृषि उत्पादकता को बढ़ाने में सहयोग करता है।

राष्ट्रीय आय में योगदान – आज शहरी क्षेत्र हो या ग्रामीण सभी में सेवा क्षेत्र का महत्वपूर्ण योगदान है। यही कारण है कि राष्ट्रीय आय का आधे से अधिक भाग अब सेवा क्षेत्र से प्राप्त हो रहा है। राष्ट्र के आर्थिक विकास के साथ सेवा क्षेत्र की गतिविधियाँ तेजी से बढ़ रही हैं, इसीलिए राष्ट्रीय आय में सेवा क्षेत्र का योगदान निरन्तर बढ़ रहा है।

प्रश्न 4.
भारत में सेवा क्षेत्र के विकास के कोई चार कारण स्पष्ट कीजिए।
उत्तर:
भारत में सेवा क्षेत्र के विकास के कारण भारत में सेवा क्षेत्र के विकास के प्रमुख कारण निम्नलिखित हैं –
(1) सेवाओं का विस्तार – स्वतन्त्रता प्राप्ति के बाद देश में पंचवर्षीय योजनाओं का क्रियान्वयन किया गया। इससे देश में अनेक सेवाएँ; जैसे-चिकित्सालय, शैक्षणिक संस्थाएँ, डाक एवं तार, परिवहन, बैंक, बीमा कम्पनी, स्थानीय संस्थाएँ, सुरक्षा सेवाएँ, न्याय व्यवस्था आदि का विस्तार हुआ। परिणामस्वरूप अर्थव्यवस्था में इनकी भागीदारी तेजी से बढ़ी है।

(2) प्राथमिक एवं द्वितीयक क्षेत्रों का विस्तार – देश में प्राथमिक एवं द्वितीयक क्षेत्रों का पिछले वर्षों में तेजी से विस्तार हुआ है। औद्योगिक क्रान्ति के साथ-साथ देश में कृषि क्षेत्र में हरित क्रान्ति सफल रही। इससे परिवहन, व्यापार, भण्डारण, बैंकिंग जैसी सेवाओं की माँग में वृद्धि हुई है। परिणामस्वरूप देश में इन सेवाओं का तेजी से विस्तार हुआ।

(3) उपभोग में वृद्धि – आय में वृद्धि के साथ-साथ उपभोग में भी वृद्धि होने लगती है। आय में वृद्धि होने पर व्यक्ति निजी अस्पताल, महँगे स्कूल, वाहनों का प्रयोग एवं आधुनिक नई-नई वस्तुओं को खरीदने पर अधिक खर्च करने लगता है। फलतः देश में सेवा क्षेत्र की भागीदारी में तीव्रता से वृद्धि हुई है।

(4) सूचना एवं संचार प्रौद्योगिकी पर आधारित वस्तुओं का प्रयोग – पिछले कुछ वर्षों में सूचना एवं संचार प्रौद्योगिकी पर आधारित अनेक नई-नई सेवाएँ जीवन के लिए आवश्यक बन गयी हैं। ट्यूबलाइट, टेलीविजन, केबिल कनेक्शन, मोबाइल फोन, मोटर गाड़ियाँ, स्कूटर, मोटर साइकिल, कम्प्यूटर, इण्टरनेट, कालसेण्टर आदि ने भारत में उपभोक्ता वस्तुओं के बाजार को बहुत विस्तृत कर दिया है। फलतः सेवा क्षेत्र की भागीदारी बढ़ी है।

(5) वैश्वीकरण का प्रभाव – वैश्वीकरण के परिणामस्वरूप भारतीयों पर पश्चिमी देशों का प्रभाव पड़ा है और उनकी सोच में परिवर्तन आया है। हर व्यक्ति सारी सुख-सुविधाएँ प्राप्त करना चाहता है। अतः बैंक, बीमा, पर्यटन, परिवहन, होटल आदि सभी प्रकार की सेवाओं की माँग बहुत बढ़ गई है। परिणामस्वरूप सेवा क्षेत्र के योगदान में तेजी से वृद्धि हुई है।

प्रश्न 5.
अधोसंरचना के प्रकारों का वर्णन कीजिए। (2014, 16, 18)
उत्तर:
अधोसंरचना से आशय उन सुविधाओं, क्रियाओं तथा सेवाओं से है, जो उत्पादन के अन्य क्षेत्रों के संचालन तथा विकास एवं दैनिक जीवन में सहायक होती हैं।

अधोसंरचना के प्रकार – अधोसंरचना को दो भागों में बाँटा गया है –

(1) आर्थिक अधोसंरचना – अधोसंरचना जो मुख्यतः शक्ति, यातायात एवं दूर संचार से सम्बन्धित होती है, को आर्थिक संरचना कहा जाता है। रेल, सड़क, बन्दरगाह, हवाई अड्डे, बाँध, विद्युत केन्द्र आदि को आर्थिक संरचना के अन्तर्गत रखा जाता है। आर्थिक विकास में इनका महत्वपूर्ण स्थान होता है। इसीलिए इन्हें बुनियादी आर्थिक सुविधाएँ भी कहा जाता है।

(2) सामाजिक अधोसंरचना – सामाजिक अधोसंरचना मानव संसाधन का विकास करने एवं मानव पूँजी निर्माण करने में सहायक होती है। शिक्षा, स्वास्थ्य, चिकित्सा आदि इसके अंग होते हैं। इनसे समाज को कुशल, निपुण एवं स्वस्थ जनशक्ति प्राप्त होती है। इससे कार्यक्षमता बढ़ती है जिससे प्राथमिक एवं द्वितीयक क्षेत्र में उत्पादन तेजी से बढ़ता है। परिणामस्वरूप अर्थव्यवस्था का तेजी से विकास होता है।

प्रश्न 6.
भारतीय सेवाओं का विश्व में क्या योगदान है ? लिखिए।
उत्तर:
भारतीय सेवाओं का विश्व में योगदान – भारतीय अर्थव्यवस्था में सेवा क्षेत्र के विकास का यह परिणाम है कि आज भारत विश्व के विभिन्न राष्ट्रों को कई प्रकार की सेवाएँ उपलब्ध करा रहा है। भारतीय सेवाओं के विश्व में योगदान को सरलता से अग्रलिखित तथ्यों द्वारा समझा जा सकता है –

(1) कम्प्यूटर सॉफ्टवेयर सेवाएँ – भारत ने पिछले कुछ वर्षों में कम्प्यूटर के क्षेत्र में काफी प्रगति की है। बंगलुरु, हैदराबाद, पूना एवं मुम्बई कम्प्यूटर के प्रमुख केन्द्र हैं जहाँ निर्यात हेतु बड़ी संख्या में सॉफ्टवेयर तैयार किए जाते हैं। भारत से सॉफ्टवेयर का निर्यात विश्व के अनेक राष्ट्रों में किया जाता है। अमेरिका, फ्रांस, जर्मनी जैसे विकसित राष्ट्रों में भारतीय कम्प्यूटर सॉफ्टवेयर विशेष लोकप्रिय है।

(2) संचार सेवाएँ – संचार सेवाओं के क्षेत्र में भी भारत विकसित राष्ट्रों के समकक्ष है और दूरसंचार सेवाओं का निर्यात करके विदेशी मुद्रा अर्जित कर रहा है। भारत अनेक राष्ट्रों को दूर संचार सेवाओं के विकास हेतु सहयोग दे रहा है। मालदीप के डिजिटल चा का भारत द्वारा आधुनिकीकरण किया गया है तथा एक दूर संवेदी इकाई की स्थापना की गई है। नेपाल में दूरसंचार सेवाओं के लिए “यूनाइटेड टेलीकॉम” के नाम से संयुक्त कम्पनी का गठन किया गया है।

(3) बैंकिंग एवं वित्तीय सेवाएँ – 30 जून, 2010 तक भारत के सार्वजनिक क्षेत्र के 16 एवं निजी क्षेत्र की 6 बैकों ने 52 राष्ट्रों में अपनी शाखाएँ खोली हैं। इनमें स्टेट बैंक ऑफ इण्डिया, बैंक ऑफ बड़ौदा एवं बैंक ऑफ इण्डिया प्रमुख हैं। इस प्रकार बैंकिंग एवं वित्तीय सेवाओं से भी लाभ हो रहा है।

(4) तकनीकी एवं परामर्श सेवाएँ –  भारत ने अनेक क्षेत्रों में तकनीकी एवं प्रबन्धकीय कुशलता भी प्राप्त की है। फलत: भारत अनेक विकासशील एवं पिछड़े राष्ट्रों को रेलवे लाइन के निर्माण, सड़क निर्माण, कारखानों के निर्माण में तकनीकी एवं परामर्श सेवाएँ दे रहा है।

प्रश्न 7.
ऊर्जा एवं परिवहन के महत्व की संक्षेप में व्याख्या कीजिए।
उत्तर:
ऊर्जा का महत्व – किसी भी राष्ट्र का आर्थिक विकास उपलब्ध ऊर्जा के साधनों पर निर्भर करता है। कारण यह है कि कृषि, उद्योग, खनिज, परिवहन आदि सभी क्षेत्रों में ऊर्जा की आवश्यकता होती है। ऊर्जा के विभिन्न स्रोत हैं-विद्युत, कोयला, प्राकृतिक तेल एवं गैस आदि। इन सभी में सबसे अधिक महत्व विद्युत का है।

परिवहन का महत्व – परिवहन के सभी साधनों ने मिलकर सामाजिक, आर्थिक एवं राजनैतिक क्रान्ति पैदा की है। इन साधनों का जीवन के हर क्षेत्र में विशेष महत्व है।

  1. इन साधनों से हम आसानी से कम समय में एक स्थान से दूसरे स्थान पर जा सकते हैं।
  2. औद्योगिक कच्चे माल को उनके प्राप्ति स्थल से औद्योगिक केन्द्रों तक तथा औद्योगिक केन्द्रों से तैयार माल को बाजारों और उपभोक्ताओं तक पहुँचाते हैं।
  3. इन साधनों के द्वारा उपभोक्ता वस्तुएँ बाजारों तथा उपभोक्ताओं तक शीघ्रता से पहुँचाई जाती हैं।
  4. देश के विभिन्न क्षेत्रों में अशान्ति, सूखा, बाढ़, महामारियों आदि की स्थिति उत्पन्न होने पर तत्काल सहायता पहुँचाने में यातायात के साधन मददगार होते हैं।
  5. यातायात के साधनों के विकास से देश के विभिन्न भागों के बीच भाईचारा व प्रेम बढ़ा है। इससे राष्ट्रीय एकता मजबूत होती है तथा आर्थिक स्थिति सुदृढ़ होती है।

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MP Board Class 10th Social Science Chapter 18 दीर्घ उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 1.
अर्थव्यवस्था को क्षेत्रों में बाँटने की आवश्यकता क्यों होती है ? अर्थव्यवस्था के क्षेत्रों का वर्णन कीजिए।
उत्तर:
अर्थव्यवस्था के क्षेत्र किसी भी राष्ट्र की जनशक्ति अपने जीवन-यापन हेतु विभिन्न प्रकार की गतिविधियों में लगी रहती है। कोई खेती करता है तो कोई कारखाने में लगा रहता है या व्यापार करता है। इन गतिविधियों से ही उसे आय प्राप्त होती है। अतः अर्थव्यवस्था को भली-भाँति समझने के लिए यह आवश्यक है कि उन क्षेत्रों का अध्ययन किया जाए जिनमें देश की जनशक्ति कार्यरत् है।

किसी भी अर्थव्यवस्था को ठीक से समझने के लिए उसे तीन क्षेत्रों में बाँटा जाता है। इन क्षेत्रों का विस्तृत विवरण अग्र प्रकार है –

(1) प्राथमिक क्षेत्र-प्राकृतिक संसाधनों पर प्रत्यक्ष रूप से आधारित गतिविधियों को प्राथमिक क्षेत्र कहा जाता है। उदाहरण के लिए कृषि को लिया जा सकता है। फसलों को उत्पादित करने के लिए मुख्यतः प्राकृतिक कारकों; जैसे-मृदा, वर्षा, सूर्य प्रकाश, वायु आदि पर निर्भर रहना पड़ता है। अतः कृषि उपज एक प्राकृतिक उत्पाद है। इसी प्रकार वन, पशुपालन, खनिज आदि को भी प्राथमिक क्षेत्र के अन्तर्गत लिया जाता है।

यहाँ यह प्रश्न उठता है कि इन गतिविधियों को प्राथमिक क्यों कहा जाता है ? कारण यह है कि प्राथमिक क्षेत्र उन सभी उत्पादों का आधार है, जिन्हें हम बाद में निर्मित करते हैं। उदाहरण के लिए, कच्चे लोहे का उपयोग इस्पात कारखाने में होता है और उससे विभिन्न प्रकार की मशीनों का निर्माण होता है। अधिकांश प्राकृतिक उत्पाद कृषि, पशुपालन, मछली पालन, वन एवं खनिज से प्राप्त होते हैं, अतः इस क्षेत्र को कृषि एवं सहायक क्षेत्र भी कहते हैं। संक्षेप में कहा जा सकता है कि जब हम प्राकृतिक संसाधनों का उपयोग करके किसी वस्तु का उत्पादन करते हैं तो इसे प्राथमिक क्षेत्र की गतिविधियाँ कहा जाता है।

(2) द्वितीयक क्षेत्र – इस क्षेत्र की गतिविधियों के अन्तर्गत प्राकृतिक उत्पादों को विनिर्माण प्रणाली के माध्यम से अन्य रूपों में परिवर्तित किया जाता है। उदाहरण के लिए लोहे से मशीन बनाना या कपास से कपड़ा बनाना आदि यह प्राथमिक गतिविधियों के बाद अगला कदम है। इस क्षेत्र में वस्तुएँ सीधे प्रकृति से उत्पादित नहीं होती हैं, वरन् उन्हें मानवीय क्रियाओं के द्वारा निर्मित किया जाता है। ये क्रियाएँ किसी कारखाने या घर में हो सकती हैं। चूँकि यह क्षेत्र क्रमशः सम्बन्धित विभिन्न प्रकार के उद्योगों से जुड़ा हुआ है इसीलिए इसे औद्योगिक क्षेत्र भी कहा जाता है।

(3) तृतीयक या सेवा क्षेत्र – इस क्षेत्र की गतिविधियाँ प्राथमिक एवं द्वितीयक क्षेत्र से भिन्न होती हैं। तृतीयक क्षेत्र की गतिविधियाँ स्वत: वस्तुओं का उत्पादन नहीं करती, वरन् उत्पादन प्रक्रिया में सहयोग करती हैं। उदाहरण के लिए प्राथमिक और द्वितीयक क्षेत्रों द्वारा उत्पादित वस्तुओं को थोक एवं फुटकर बाजारों में बेचने के लिए रेल या ट्रक द्वारा परिवहन की आवश्यकता पड़ती है। प्राथमिक एवं द्वितीयक क्षेत्रों में उत्पादन करने के लिए बैंकों से ऋण लेने की आवश्यकता होती है। उत्पादन एवं व्यापार में सुविधा के लिए टेलीफोन, इण्टरनेट, पोस्ट ऑफिस, कोरियर आदि की आवश्यकता होती है।

इस प्रकार परिवहन, भण्डारण, संचार, बैंक व्यापार आदि से सम्बन्धित गतिविधियाँ तृतीयक क्षेत्र में आती हैं। चूँकि, तृतीयक क्षेत्र की गतिविधियों से वस्तुओं के स्थान पर सेवाओं का सृजन होता है, अतः इसे सेवा क्षेत्र भी कहा जाता है।

प्रश्न 2.
एक आय घटक के रूप में सेवा क्षेत्र का महत्व स्पष्ट कीजिए।
उत्तर:
सेवा क्षेत्र का महत्व-आय के घटक के रूप में

उत्पादन के तीनों क्षेत्र राष्ट्रीय आय के सृजन में योगदान करते हैं। पहले सेवा क्षेत्र का योगदान बहुत कम था किन्तु आय एवं रोजगार दोनों ही दृष्टिकोणों से आज परिस्थितियाँ बदल गई हैं, आर्थिक विकास के साथ-साथ ही सेवा क्षेत्र का महत्व भी बढ़ गया है। जहाँ सन् 1951 में सेवा क्षेत्र का योगदान 28 प्रतिशत था जो वर्ष 2014-15 में 58.3 प्रतिशत हो गया।”

रोजगार और आय के घटक के रूप में इस क्षेत्र का महत्व निम्न प्रकार समझा जा सकता है –

(1) रोजगार के अवसर-सेवा क्षेत्र लोगों को प्रत्यक्ष एवं अप्रत्यक्ष दोनों रूपों में रोजगार प्रदान करता है। उदाहरण के लिये, “भारतीय रेलवे में कुल 14 लाख कर्मचारी नियोजित हैं।” 2 यह संख्या देश में किसी भी अन्य उपक्रम की तुलना में अधिक है। रोजगार के अवसर जुटाने में परिवहन, सूचना एवं संचार प्रौद्योगिकी बैंक, शैक्षणिक संस्थाएँ, स्वास्थ्य सेवाएँ, पर्यटन एवं होटल व्यवसाय का योगदान बहुत अधिक है। इस प्रकार सेवा क्षेत्र बेरोजगारी दूर करने एवं लोगों की आय बढ़ाने में सहायक होता है।

(2) उत्पादन में वृद्धि-सेवा क्षेत्र कम लागत पर एवं कम समय में अधिक उत्पादन करने एवं गुणवत्ता में वृद्धि करने में भी सहायक होता है। यह क्षेत्र दो प्रकार से सहायता पहुँचाता है-एक तो कुशल प्रशिक्षण एवं स्वस्थ श्रमिक उपलब्ध कराकर उत्पादन की गुणवत्ता बढ़ाता है। दूसरा, कुशलता एवं कार्यक्षमता में वृद्धि से उत्पादन एवं आय में वृद्धि करता है।

(3) औद्योगिक विकास में सहायक-बैंक एवं अन्य वित्तीय संस्थाएँ साख का सृजन करती हैं और सभी प्रकार के उद्योगों के लिए पूँजी की पूर्ति करती हैं, फिर चाहे वित्त की अल्पकालिक आवश्यकता हो या मध्यकालिक या दीर्घकालिक उद्योगों की स्थापना से लेकर बाजार तक वस्तुएँ पहुँचाने एवं विज्ञापन करने हेतु

  • आर्थिक समीक्षा 2015-16; पृष्ठ 156.
  • आर्थिक समीक्षा 2007-08, पृष्ठ 218.

सभी व्यवस्थाएँ सेवा क्षेत्र द्वारा की जाती है। संक्षेप में, सेवा क्षेत्र पूँजी सम्बन्धी आवश्यकताओं की पूर्ति कर औद्योगिक विकास में सहायक होता है।

(4) बाजार के विस्तार में सहायक – सेवा क्षेत्र प्राथमिक एवं द्वितीयक क्षेत्र के उत्पादों के बाजार का विस्तार करने में सहायक होता है। परिवहन की सुविधा से माल एवं यात्रियों को एक स्थान से दूसरे स्थान तक ले जाया जाता है। संचार के साधनों द्वारा व्यापारिक सौदे तय किये जाते हैं या होटल बुक किया जाता है। इससे सभी प्रकार की गतिविधियाँ सरल हो जाती हैं।

(5) कृषि के विकास में सहायक – किसानों की प्राकतिक आपदाओं से बचाने का कार्य भी सेवा क्षेत्र द्वारा किया जाता है। वर्षा बीमा योजना, फसल बीमा योजना, कृषि आय बीमा योजना तथा राष्ट्रीय कृषि बीमा योजना आदि के द्वारा कृषि उपज की अनिश्चितता एवं जोखिक को दूर किया जाता है। साथ ही सेवा क्षेत्र किसानों को उन्नत खाद, बीज आदि के क्रय हेतु पूँजी प्रदान कर उत्पादन बढ़ाने में सहायक होता है। इस प्रकार सेवा क्षेत्र कृषि उत्पादकता को बढ़ाने में सहयोग करता है।

(6) राष्ट्रीय आय में योगदान – आज शहरी क्षेत्र हो या ग्रामीण सभी में सेवा क्षेत्र का महत्वपूर्ण योगदान है। यही कारण है कि राष्ट्रीय आय का आधे से अधिक भाग अब सेवा क्षेत्र से प्राप्त हो रहा है। राष्ट्र के आर्थिक विकास के साथ सेवा क्षेत्र की गतिविधियाँ तेजी से बढ़ रही हैं, इसीलिए राष्ट्रीय आय में सेवा क्षेत्र का योगदान निरन्तर बढ़ रहा है।

(7) विदेशी मुद्रा का अर्जन-पिछले कुछ वर्षों से सेवाओं के निर्यात से भी बड़ी मात्रा में विदेशी मुद्रा की प्राप्ति हो रही है। जहाजरानी एवं हवाई सेवाओं के साथ-साथ पर्यटन एवं वित्तीय सेवाओं से भी हमें विदेशी मुद्रा प्राप्त होती है। हाल ही के वर्षों में कम्प्यूटर सॉफ्टवेयर, कॉल सेन्टर, शिक्षा एवं स्वास्थ्य के क्षेत्रों में भी काफी विकास हुआ और अब इन सेवाओं से भी विदेशी मुद्रा प्राप्त हो रही है।

प्रश्न 3.
सेवा क्षेत्र का आशय स्पष्ट कीजिए तथा सेवा क्षेत्र के महत्व की व्याख्या कीजिए।
उत्तर:
सेवा क्षेत्र का आशय

सेवा क्षेत्र या तृतीयक क्षेत्र की गतिविधियाँ प्राथमिक एवं द्वितीयक क्षेत्र से भिन्न होती हैं। सेवा क्षेत्र की गतिविधियाँ स्वतः वस्तुओं का उत्पादन नहीं करतीं, वरन् उत्पादन प्रक्रिया में सहयोग करती हैं। उदाहरणार्थ, प्राथमिक और द्वितीयक क्षेत्रों द्वारा उत्पादित वस्तुओं को थोक एवं फुटकर बाजारों में बेचने के लिए रेल या ट्रक द्वारा परिवहन करने की आवश्यकता पड़ती है। उद्योगों से बने हुए माल को रखने के लिए गोदामों की आवश्यकता होती है। प्राथमिक एवं द्वितीयक क्षेत्रों में उत्पादन करने के लिए बैंकों से ऋण लेने की आवश्यकता होती है।

इस प्रकार परिवहन, भण्डारण, संचार, बैंक, व्यापार आदि से सम्बन्धित गतिविधियाँ तृतीयक क्षेत्र में आती हैं। इन गतिविधियों के विस्तार से ही आर्थिक विकास को गति मिलती है। चूँकि तृतीयक क्षेत्र की गतिविधियों से वस्तुओं के स्थान पर सेवाओं का सृजन होता है, अतः इसे सेवा क्षेत्र भी कहा जाता है।

अर्थव्यवस्था में कुछ ऐसी सेवाएँ भी होती हैं जो वस्तुओं के उत्पादन में प्रत्यक्ष योगदान न देकर अप्रत्यक्ष रूप से सहायता करती हैं। उदाहरण के लिए शिक्षक, डॉक्टर, वकील, लेखाकर्मी, प्रशासनिक आदि की सेवाओं को लिया जा सकता है। धोबी, नाई एवं मोची की सेवाएँ भी महत्वपूर्ण होती हैं। वर्तमान समय में सूचना प्रौद्योगिकी पर आधारित सेवाएँ जैसे इण्टरनेट, कैफे, ए. टी. एम. बूथ, कॉल सेन्टर, सॉफ्टवेयर निर्माण आदि
का भी उत्पादन की गतिविधियों में महत्वपूर्ण स्थान है।

सेवा क्षेत्र के महत्व – उत्पादन के तीनों क्षेत्र राष्ट्रीय आय के सृजन में योगदान करते हैं। पहले सेवा क्षेत्र का योगदान बहुत कम था किन्तु आय एवं रोजगार दोनों ही दृष्टिकोणों से आज परिस्थितियाँ बदल गई हैं, आर्थिक विकास के साथ-साथ ही सेवा क्षेत्र का महत्व भी बढ़ गया है। जहाँ सन् 1951 में सेवा क्षेत्र का योगदान 28 प्रतिशत था जो वर्ष 2014-15 में 58.3 प्रतिशत हो गया।”

प्रश्न 4.
अधोसंरचना का अर्थ स्पष्ट करते हुए उसके अंगों के विषय में संक्षेप में लिखिए।
उत्तर:
अधोसंरचना का अर्थ

अधोसंरचना या आधारभूत संरचना, जैसा कि इसका नाम है, यह उत्पादन के प्राथमिक एवं द्वितीयक क्षेत्रों के विकास हेतु आधार प्रदान करती है। किसी भी राष्ट्र की प्रगति कृषि एवं उद्योगों के विकास पर निर्भर है किन्तु स्वयं कृषि उत्पादन के लिए ऊर्जा, वित्त, परिवहन आदि साधनों की आवश्यकता होती है। इसी प्रकार उद्योगों में उत्पादन के लिए मशीनरी, प्रबन्ध, ऊर्जा, बैंक, बीमा, परिवहन आदि साधनों की आवश्यकता होती है। ये सभी सुविधाएँ एवं सेवाएँ सम्मिलित रूप से आधारभूत संरचना कहलाती हैं। इस प्रकार अधोसंरचना से आशय उन सुविधाओं, क्रियाओं तथा सेवाओं से है, जो उत्पादन के अन्य क्षेत्रों के संचालन तथा विकास एवं दैनिक जीवन में सहायक होती हैं।

अधोसंरचना के अंग

अधोसंरचना के प्रमुख अंग निम्न प्रकार हैं –

(1) ऊर्जा – किसी भी राष्ट्र के आर्थिक विकास के लिए ऊर्जा के साधनों की आवश्यकता होती है। उद्योग एवं कारखानों ऊर्जा द्वारा ही संचालित होते हैं। ऊर्जा की आवश्यकता परिवहन के क्षेत्र में भी होती है। आधुनिक औद्योगिक युग में शक्ति के साधन ही किसी देश की आर्थिक प्रगति का सूचक होते हैं।

ऊर्जा के विभिन्न स्रोत हैं; जैसे-विद्युत, कोयला, प्राकृतिक तेल एवं गैस आदि। इन सभी स्रोतों में सबसे अधिक महत्त्वपूर्ण विद्युत का है। विद्युत का उत्पादन तीन प्रमुख स्रोतों से होता है; यथा-जल विद्युत, तापीय विद्युत एवं अणु विद्युत। जल विद्युत के अन्तर्गत नदियों पर बाँध बनाकर विद्युत का उत्पादन किया जाता है। तापीय विद्युत में कोयले का उपयोग होता है। अणु विद्युत में यूरेनियम एवं थोरियम का प्रयोग होता है।

भारत में लगभग 80 प्रतिशत विद्युत का उत्पादन ताप विद्युत से होता है जो मुख्यतः कोयले पर आधारित है। भारत में अनुमानत: 21 करोड़ टन कोयले के भण्डार हैं किन्तु यहाँ के कोयले में राख की मात्रा अधिक होती है। अतः अच्छे किस्म के कोयले का आयात ऑस्ट्रेलिया से किया जाता है। कायले का उपयोग विद्युत उत्पादन के अलावा इस्पात कारखानों, रेलवे एवं ईंटों को पकाने में होता है। प्राकृतिक तेल एवं गैस का भी उर्जा में महत्त्वपूर्ण स्थान है। किन्तु भारत को कुल आवश्यकता का लगभग 80 प्रतिशत प्राकृतिक तेल एवं पेट्रोल का आयात करना पड़ता है।

(2) परिवहन – किसी भी देश की अर्थव्यवस्था में परिवहन का महत्त्वपूर्ण स्थान होता है। परिवहन का महत्त्व आर्थिक एवं सामाजिक दोनों दृष्टिकोणों से होता है। भारत में परिवहन का विकास मुख्य रूप से व्यापारिक एवं प्रशासनिक सुविधाओं के दृष्टिकोण से किया गया था किन्तु स्वतन्त्रता के बाद पंचवर्षीय योजनाओं के दौरान परिवहन का विस्तार सम्पूर्ण आर्थिक विकास को ध्यान में रखकर किया गया है। देश में परिवहन के साधनों के विकास को निम्न प्रकार से स्पष्ट कर सकते हैं

  1. रेल परिवहन
  2. सड़क परिवहन

(3) संचार – भारत में संचार व्यवस्था विश्व में सबसे बड़ी है। सर्वप्रथम देश में संचार सेवा की शुरूआत सन् 1837 में हुई किन्तु इन सेवाओं का विस्तार स्वतन्त्रता के बाद ही हुआ है। वर्ष 1991 से प्रारम्भ हुए आर्थिक सुधारों ने दूरसंचार सेवाओं में क्रान्तिकारी परिवर्तन किए। निजी क्षेत्र की भागीदारी ने इस क्षेत्र को अभूतपूर्व विस्तार दिया। जून 2015 तक देश में टेलीफोनों की संख्या 1007.4 मिलियन हो गई। मोबाइल सेट्स अब शहरी क्षेत्रों के साथ-साथ ग्रामीण क्षेत्रों में भी बहुत लोकप्रिय हो गये हैं।

दूरसंचार सेवाओं के विस्तार के परिणामस्वरूप भारत अब ज्ञान आधारित समाज की ओर तेजी से बढ़ रहा है। इण्टरनेट एवं ब्रॉडबैण्ड ग्राहकों की संख्या में तेजी से वृद्धि हो रही है। कम्प्यूटरों एवं संचार प्रौद्योगिकी के प्रचार-प्रसार ने डाक प्रणाली को भी आधुनिक बना दिया है। भारत ने उपग्रह प्रणाली विकसित कर ली है। इसका प्रयोग दूरसंचार के साथ-साथ मौसम की जानकारी, दूरदर्शन, आकाशवाणी आदि कार्यों में किया जाता है।

(4) बैंकिंग, बीमा एवं वित्त – तीव्र आर्थिक विकास के लिए बैंकिंग, बीमा एवं अन्य वित्तीय संस्थाओं का महत्त्वपूर्ण स्थान है। वर्ष 1969 में प्रमुख बैंकों के राष्ट्रीयकरण के बाद से ही देश में व्यापारिक बैंकों ने अभूतपूर्व प्रगति की है। वर्ष 2015 तक सभी सार्वजनिक क्षेत्र की बैंकों की शाखाएँ बढ़कर लगभग 1,31,750 हजार हो गई हैं। इसके साथ ही देश में निजी क्षेत्र में भी अनेक व्यापारिक बैंक एवं वित्तीय संस्थाएँ कार्यरत् हैं। ये संस्थाएँ उद्योग एवं व्यापार के साथ-साथ घरेलू उपयोग हेतु व्यक्तिगत ऋण उपलब्ध कराती हैं। देश में सहकारी बैंकिंग व्यवस्था का भी तेजी से विस्तार हुआ है। ग्रामीण क्षेत्रों में सहकारी साख समितियाँ कृषि विकास हेतु ऋण उपलब्ध कराती हैं।

(5) शिक्षा एवं स्वास्थ्य – विकसित देशों का अनुभव यह दर्शाता है कि शिक्षा एवं स्वास्थ्य जैसी सामाजिक अधोसंरचना के अभाव में आर्थिक विकास सम्भव नहीं है। पिछड़े एवं विकासशील देशों में संसाधनों के अभाव के कारण शिक्षा, प्रशिक्षण एवं स्वास्थ्य आदि पर पर्याप्त ध्यान नहीं दिया जाता है। भारत में भी इन सुविधाओं का विस्तार स्वतन्त्रता के बाद पंचवर्षीय योजनाओं के दौरान हुआ है। भारत में प्रारम्भ से ही ‘सभी के लिए शिक्षा’ को केन्द्र में रखकर शिक्षा के विस्तार के विभिन्न कार्यक्रमों का क्रियान्वयन किया गया है। स्वतन्त्रता के बाद से ही सभी स्तर की शैक्षणिक संस्थाओं का तीव्र गति से विस्तार हुआ है। वर्तमान में देश में कुल 8.47 लाख प्राथमिक शालाएँ, 4.25 लाख माध्यमिक शालाएँ एवं 1.93 लाख उच्चतर माध्यमिक विद्यालय हैं। इसके साथ देश में 3,694 व्यावसायिक शिक्षा संस्थान एवं 757 विश्वविद्यालय हैं। देश में शैक्षणिक संस्थाओं के विस्तार के कारण साक्षरता दर 2011 में 74 प्रतिशत हो गई जो 1951 में 18.33 प्रतिशत थी।
1 भारत 2016, पृष्ठ 222.

स्वतन्त्रता के पश्चात् सरकार ने देश में स्वास्थ्य सुविधाओं के विस्तार पर विशेष जोर दिया है। देश में मलेरिया, तपेदिक, कुष्ठ रोग, एड्स, कैंसर और मानसिक विकृतियों जैसी बीमारियों को नियन्त्रित करने के विभिन्न कार्यक्रमों का क्रियान्वयन किया जा रहा है। सन् 1951 में प्राथमिक एवं सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्रों की संख्या केवल 725 थी जो बढ़कर वर्ष 2005 में 1.72 लाख हो गई। आधुनिक पद्धतियों के डॉक्टरों की संख्या इस अवधि में 0.62 लाख से बढ़कर 6.65 लाख हो गई है। देश में स्वास्थ्य सेवाओं के विस्तार से जीवन प्रत्याशा में तीव्रता से वृद्धि हुई है। वर्ष 1951 में पुरुषों व महिलाओं की जीवन प्रत्याशा 32.5 व 31.7 वर्ष थी जो 2012 में बढ़कर 65-4 व 68.8 वर्ष हो गई है।

(6) विदेशी व्यापार – वर्ष 2006 में जारी विश्व बैंक रिपोर्ट के अनुसार, सकल घरेलू उत्पाद के आधार पर भारतीय अर्थव्यवस्था विश्व की 12वीं बड़ी अर्थव्यवस्था हो गई है। अर्थव्यवस्था के विकास में कृषि तथा उद्योगों के साथ-साथ आन्तरिक एवं विदेशी व्यापार का भी विशेष महत्त्व है। पिछले कुछ वर्षों में भारत का विदेशी व्यापार तीव्रता से बढ़ा है। वर्ष 2014-15 में ₹ 27,37,087 करोड़ का आयात एवं ₹ 18,96,348 करोड़ का निर्यात किया गया है। भारत मुख्य रूप से पेट्रोलियम पदार्थ, खाद्य तेल, रासायनिक पदार्थ, मशीनरी आदि का आयात करता है। इसके साथ ही खनिज पदार्थ, रत्न एवं आभूषण, सिले हुए वस्त्र, मछली, कम्प्यूटर सॉफ्टवेयर आदि का निर्यात करता है। भारत का विदेशी व्यापार मुख्यत: अमेरिका, यूनाइटेड किंगडम, जर्मनी एवं रूस से होता है।

प्रश्न 5.
शिक्षा एवं स्वास्थ्य का आर्थिक विकास में क्या योगदान है ? लिखिए।
उत्तर:
शिक्षा का योगदान-शिक्षा मानव के दृष्टिकोण को व्यापक बनाती है। शिक्षा के माध्यम से मनुष्य के नैतिक, बौद्धिक, मानसिक तथा शारीरिक गुणों का विकास किया जाता है। किसी भी अर्थव्यवस्था के विकास में शिक्षा का उल्लेखनीय योगदान होता है। यद्यपि शिक्षा किसी स्थूल वस्तु का उत्पादन नहीं करती, किन्तु यह लोगों को उत्पादन कार्य के लिए अधिक कुशल बनाती है। इससे लोगों के ज्ञान में वृद्धि होती है जिससे उत्पादकता बढ़ती है। अतः शिक्षा पर निवेश से हमें उसी प्रकार के मूर्त आर्थिक परिणाम प्राप्त होते हैं जिस प्रकार एक कारखाने के निर्माण में निवेश करने से प्राप्त होते हैं। विभिन्न ग्रामीण के समाधान, जनसंख्या वृद्धि दर को कम करने, रूढ़ियुक्त होने तथा विश्व को वैज्ञानिक एवं तार्किक दृष्टिकोण से देखने व समझने के लिए भी शिक्षा अनिवार्य है। अतः किसी भी समाज में व्यापक व सूक्ष्म आर्थिक परिवर्तन लाने का सर्वाधिक सशक्त माध्यम शिक्षा है।

स्वास्थ्य का योगदान – स्वास्थ्य और व्यक्ति का विकास किसी भी राष्ट्र के सामाजिक एवं आर्थिक विकास का विभिन्न अंग होता है। स्वास्थ्य से मनुष्य की शारीरिक क्षमता का विकास होता है। स्वास्थ्य का सम्बन्ध मात्र रोग निवारण से न होकर शारीरिक एवं मानसिक सुख तथा कल्याण से है। देश की स्वस्थ जनंसख्या ही उत्पादन कार्य में प्रभावकारी भूमिका निभा सकती है। व्यक्ति की कार्य करने की क्षमता एवं इच्छा पर स्वास्थ्य का प्रभाव पड़ता है और यह उत्पादकता को प्रभावित करती है। श्रमिक जब शारीरिक दृष्टि से कमजोर होगा या स्वस्थ नहीं होगा तब वह उत्पादन कार्य ठीक प्रकार से नहीं कर पायेगा और राष्ट्रीय उत्पादन पर बुरा प्रभाव पड़ेगा। इसलिए स्वास्थ्य सुविधाओं को अनिवार्य माना गया है।

प्रश्न 6.
भारत में सेवा क्षेत्र के विस्तार के कारणों की व्याख्या कीजिए।
उत्तर:
भारत में सेवा क्षेत्र का विस्तार होने के कारण
भारतीय अर्थव्यवस्था के अध्ययन से स्पष्ट होता है कि पिछले छः दशकों में यद्यपि सभी क्षेत्रों के उत्पादन में वृद्धि हुई है लेकिन तृतीयक क्षेत्र या सेवा क्षेत्र की भागीदारी सबसे अधिक रही। अब सेवा क्षेत्र राष्ट्र में सबसे बड़े उत्पादक एवं आय सृजक क्षेत्र के रूप में उभरा है। भारत में सेवा क्षेत्र के योगदान में तेजी से हुई। वृद्धि के प्रमुख कारण निम्नलिखित हैं –

  1. सेवाओं का विस्तार।
  2. प्राथमिक एवं द्वितीयक क्षेत्रों का विस्तार।
  3. उपभोग में वृद्धि।
  4. सूचना एवं संचार प्रौद्योगिकी पर आधारित वस्तुओं का प्रयोग।
  5. वैश्वीकरण का प्रभाव।

[नोट: विस्तृत विवेचन के लिए लघु उत्तरीय प्रश्न 4 का उत्तर देखें।]
1 आर्थिक समीक्षा 2015-16,A-99.

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MP Board Class 10th Social Science Chapter 18 अन्य परीक्षोपयोगी प्रश्न

MP Board Class 10th Social Science Chapter 18 वस्तुनिष्ठ प्रश्न

बहु-विकल्पीय

प्रश्न 1.
‘स्वर्णिम चतुर्भुज’ का सम्बन्ध है –
(i) यातायात से
(ii) विज्ञान से
(iii) कृषि से
(iv) उद्योग से।
उत्तर:
(i) यातायात से

प्रश्न 2. (2012)
प्राथमिक क्षेत्र की गतिविधि है –
(i) गन्ने से शक्कर बनाना
(ii) मकान निर्माण
(iii) बैंकिंग
(iv) मछली पकड़ना।
उत्तर:
(iv) मछली पकड़ना।

प्रश्न 3.
भारत में रेल सेवा आरम्भ हुई (2015)
(i) 1853 ई. में
(ii) 1854 ई. में
(iii) 1856 ई. में
(iv) 1857 ई. में।
उत्तर:
(i) 1853 ई. में

रिक्त स्थानों की पूर्ति कीजिए

  1. ………………. क्षेत्र में प्राकृतिक उत्पादों को विनिर्माण के द्वारा अनेक उपयोगी रूपों में परिवर्तित किया जाता है।
  2. रेल, सड़क और वायु परिवहन ………………. क्षेत्र में आते हैं।
  3. संचार सेवा की शुरुआत सन् ………………. में हुई ।

उत्तर:

  1. द्वितीयक
  2. तृतीयक
  3. 1837

सत्य/असत्य

प्रश्न 1.
अर्थव्यवस्था का तीन क्षेत्रों में विभाजन किया गया है। (2011)
उत्तर:
सत्य

प्रश्न 2.
सेवा क्षेत्र अर्थव्यवस्था का तृतीयक क्षेत्र होता है। (2018)
उत्तर:
सत्य

प्रश्न 3.
वर्ष 2005-06 में सकल घरेलू उत्पाद में सेवा क्षेत्र का योगदान 52.4 प्रतिशत था। (2011)
उत्तर:
सत्य

प्रश्न 4.
शिक्षा एवं स्वास्थ्य सामाजिक अधोरचना के अंग हैं। (2011)
उत्तर:
सत्य

प्रश्न 5.
ऊर्जा आयोग का गठन मार्च, 1985 में किया गया। (2011)
उत्तर:
असत्य

प्रश्न 6.
कृषि प्राथमिक क्षेत्र के अन्तर्गत आती है। (2009, 17)
उत्तर:
सत्य

प्रश्न 7.
विकसित देशों के अधिकांश जनसंख्या प्राथमिक क्षेत्र से जुड़ी रहती है। (2012)
उत्तर:
असत्य

प्रश्न 8.
शिक्षक, डॉक्टर, वकील की सेवाएँ उत्पादन में प्रत्यक्ष रूप से योगदान देती हैं। (2012)
उत्तर:
असत्य

प्रश्न 9.
औद्योगिक क्षेत्र को प्राथमिक क्षेत्र कहा जाता है। (2013)
उत्तर:
असत्य।

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MP Board Class 10th Social Science Chapter 18 अति लघु उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 1.
‘अधोसंरचना’ किसे कहते हैं ? (2017)
उत्तर:
वे सुविधाएँ एवं क्रियाएँ जो उत्पादन के कार्यों में सहायक होती हैं, को अधोसंरचना कहा जाता है; जैसे-ऊर्जा; परिवहन के साधन, बाँध, शिक्षा, स्वास्थ्य सुविधाएँ आदि।

प्रश्न 2.
ज्ञान आधारित समाज किसे कहते हैं ?
उत्तर:
वह समाज जिसमें सभी क्रियाएँ उपलब्ध ज्ञान के आधार पर संरचना होती हैं। दूरसंचार तकनीक के विस्तार से ज्ञान आधारित समाज की धारणा का विकास हुआ है।

प्रश्न 3.
‘दूरसंवेदी इकाई’ से क्या आशय है ?
उत्तर:
उपग्रहों के माध्यम से संचालित संचार सेवाएँ, भू-जल स्तर मापना, खनिज व पेट्रोलियम पदार्थों का पता लगाना, नक्शा तैयार करना, गुप्त जानकारियाँ आदि सेवाओं का क्रियान्वयन दूरसंवेदी इकाई के द्वारा होता है।

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MP Board Class 10th Social Science Chapter 18 लघु उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 1.
सामाजिक आधारिक संरचना व आर्थिक आधारिक संरचना में अन्तर स्पष्ट कीजिए।
उत्तर:
सामाजिक आधारिक संरचना व आर्थिक आधारिक संरचना में अन्तर

सामाजिक आधारिक संरचना

  1. शिक्षा, प्रशिक्षण, शोध, स्वास्थ्य तथा आवास आदि सामाजिक संरचनाओं के घटक हैं।
  2. इन संरचनाओं का उद्देश्य मानव तथा उसके वातावरण को सुधारना है।
  3. ये संरचनाएँ प्रबन्धक, इंजीनियर आदि उपलब्ध कराती हैं।
  4. ये संरचनाएँ अर्थव्यवस्था को अप्रत्यक्ष रूप से प्रभावित करती हैं।
  5. ये आर्थिक संरचनाओं का आधार हैं।

आर्थिक आधारिक संरचना

  1. परिवहन, संचार, ऊर्जा तथा वित्तीय संस्थाएँ आर्थिक संरचना के घटक हैं।
  2. ये संरचनाएँ कृषि तथा औद्योगिक क्षेत्र की उत्पादकता में वृद्धि लाने वाला वातावरण तैयार करती हैं।
  3. ये संरचनाएँ व्यापार तथा उद्योग की बाधाओं को दूर करती हैं।
  4. ये संरचनाएँ अर्थव्यवस्था को प्रत्यक्ष रूप से प्रभावित करती हैं।
  5. ये सामाजिक संरचनाओं को विकसित करती हैं।

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MP Board Class 10th Social Science Chapter 18 दीर्घ उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 1.
रेल परिवहन, सड़क परिवहन एवं जल परिवहन को संक्षेप में समझाइए।
उत्तर:
रेल परिवहन – भारत में माल एवं सवारी की ढुलाई के लिए परिवहन का सबसे सुविधाजनक व सस्ता साधन रेलवे है। रेलवे का शुभारम्भ सन् 1853 में हुआ था जब प्रथम रेल बम्बई (मुम्बई) से थाणे तक चलाई गई। इसके बाद देश में रेलमार्गों का चहुंमुखी विकास हुआ। अब तक देश में कुल 66,030 किलोमीटर रेलमार्ग का निर्माण किया गया। फलतः अब भारतीय रेलवे एशिया की सबसे बड़ी एवं विश्व के दूसरे स्थान की रेल प्रणाली हो गयी है।

सड़क परिवहन – भारत एक गाँवों का देश है। अत: ग्रामीण क्षेत्रों में उत्पादन बढ़ाने तथा रोजगार के अवसरों में वृद्धि करने की दृष्टि से सड़कों का महत्वपूर्ण स्थान है। देश में कुल 52.32 लाख किमी. लम्बी सड़कें हैं। वर्तमान में अनेक महत्वाकांक्षी योजनाएँ क्रियान्वित की जा रही हैं जिनमें स्वर्णिम चतुर्भुज सड़क योजना अत्यधिक महत्वपूर्ण है। सड़कों के तेजी से विस्तार के लिए निजी क्षेत्र को भी अब सड़कों के निर्माण कार्य में शामिल कर लिया गया है।

जल परिवहन – भारत की जल परिवहन प्रणाली दो प्रकार की है-प्रथम. आन्तरिक जल परिवहन व द्वितीय तटीय जल परिवहन आन्तरिक जल परिवहन गहरी नदियों एवं नहरों में होता है। इसमें नाव तथा स्टीमरों का प्रयोग होता है।

भारत का समुद्रतट 7517 किमी लम्बा है और इस पर 13 बड़े एवं 200 छोटे बन्दरगाह हैं। भारत का मुख्य विदेशी व्यापार बड़े बन्दरगाहों द्वारा होता है।
1 भारत 2017, पृष्ठ 735.

MP Board Class 10th Maths Solutions Chapter 1 Real Numbers Ex 1.1

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MP Board Class 10th Maths Solutions Chapter 1 Real Numbers Ex 1.1

Question 1.
Use Euclid’s division algorithm to find the HCF of
(i) 135 and 225
(ii) 196 and 38220
(iii) 867 and 255
Solution:
(i) HCF of 135 and 225
Applying the Euclid’s lemma to 225 and 135, (where 225 > 135), we get
225 = (135 × 1) + 90, since 90 ≠ 0, therefore, applying the Euclid’s lemma to 135 and
90, we get 135 = (90 × 1) + 45
But 45 ≠ 0
∴ Applying Euclid’s lemma to 90 and 45, we get 90 = (45 × 2) + 0
Here, r = 0, so our procedure stops. Since, the divisor at the last step is 45,
∴ HCF of 225 and 135 is 45.

(ii) HCF of 196 and 38220
We start dividing the larger number 38220 by 196, we get
38220 = (196 × 195) + 0
Here, r = 0
∴ HCF of 38220 and 196 is 196.

(iii) HCF of 867 and 255 Here, 867 > 255
∴ Applying Euclid’s Lemma to 867 and 255, we get
867 = (255 × 3) + 102, 102 ≠ 0
∴ Applying Euclid’s Lemma to 255 and 102, we get
255 = (102 × 2) + 51, 51 ≠ 0
∴ Applying Euclid’s Lemma to 102 and 51, we get
102 = (51 × 2) + 0, r = 0
∴ HCF of 867 and 255 is 51.

Question 2.
Show that any positive odd integer is of the form 6q + 1, or 6q + 3, or 6q + 5, where q is some integer.
Solution:
Let us consider a positive odd integer as ‘a’.
On dividing ‘a’ by 6, let q be the quotient and ‘r’ be the remainder.
∴ Using Euclid’s lemma, we get a = 6q + r
where 0 ≤ r < 6 i.e., r = 0, 1, 2, 3, 4 or 5 i.e.,
a = 6q + 0 = 6q or a = 6q + 1
or a = 6q + 2 or a = 6q + 3
or a = 6q + 4 or a = 6q + 5
But, a = 6q, a = 6q + 2, a = 6q + 4 are even values of ‘a’.
[∵ 6q = 2(3q) = 2m1 6q + 2 = 2(3q + 1) = 2m2,
6q + 4 = 2(3 q + 2) = 2m3]
But ‘a’ being an odd integer, we have :
a = 6q + 1, or a = 6q + 3, or a = 6q + 5

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Question 3.
An army contingent of 616 members is to march behind an army band of 32 members in a parade. The two groups are to march in the same number of columns. What is the maximum number of columns in which they can march?
Solution:
Total number of members = 616
∴ The total number of members are to march behind an army band of 32 members is HCF of 616 and 32.
i. e., HCF of 616 and 32 is equal to the maximum number of columns such that the two groups can march in the same number of columns.
∴ Applying Euclid’s lemma to 616 and 32, we get
616 = (32 × 19) + 8, since, 8 ≠ 0
Again, applying Euclid’s lemma to 32 and 8, we get
32 = (8 × 4) + 0, r = 0
∴ HCF of 616 and 32 is 8
Hence, the required number of maximum columns = 8.

Question 4.
Use Euclid’s division lemma to show that the square of any positive integer is either of the form 3m or 3m + 1 for some integer m.
[Hint: Let x be any positive integer then it is of the form 3g, 3q + 1 or 3g + 2. Now square each of these and show that they can be rewritten in the form 3m or 3m +1.]
Solution:
Let us consider an arbitrary positive integer as ‘x’ such that it is of the form
3q, (3q + 1) or (3q + 2)
For x = 3q, we have x2 = (3q)2
⇒ x2 = 9q2 = 3(3q2) = 3m ………. (1)
Putting 3q2 = m, where m is an integer.
For x = 3q + 1,
x2 = (3q + 1)2 = 9q2 + 6q + 1
= 3(3q2 + 2q) + 1 = 3m + 1 ………… (2)
Putting 3q2 + 2q = m, where m is an integer.
For x = 3q + 2,
x2 = (3q + 2)2
= 9q2 + 12q + 4 = (9q2 + 12q + 3) + 1
= 3(3q2 + 4q + 1) + 1 = 3m + 1 ……….. (3)
Putting 3q2 + 4q +1 = m, where m is an integer.
From (1), (2) and (3),
x2 = 3m or 3m + 1
Thus, the square of any positive integer is either of the form 3m or 3m + 1 for some integer m.

MP Board Class 10th Maths Solutions Chapter 1 Real Numbers Ex 1.1

Question 5.
Use Euclid’s division lemma to show that the cube of any positive integer is of the form 9m, 9m + 1 or 9m + 8.
Solution:
Let us consider an arbitrary positive integer x such that it is in the form of 3q, (3q +1) or (3q + 2).
For x = 3q
x3 = (3q)3 = 27q3 = 9(3q3) = 9m ……… (1)
Putting 3q3 = m, where m is an integer.
For x = 3q + 1
x3 = (3 q + 1)3 = 27q3 + 27q2 + 9q + 1
= 9(3q3 + 3q2 + q) + 1 = 9m + 1 ………… (2)
Putting 3q3 + 3q2 + q = m, where m is an integer.
For x = 3q + 2,
x3 = (3q + 2)3 = 27q3 + 54q2 + 36q + 8
= 9(3q3 + 6q2 + 4q) + 8 = 9m + 8 ……………. (3)
Putting 3q3 + 6q2 + 4q = m, where m is an integer.
From (1), (2) and (3), we have
x3 = 9m, (9m + 1) or (9m + 8)
Thus, cube of any positive integer can be in the form 9m, (9m + 1) or (9m + 8) for some integer m.

MP Board Class 10th Hindi Vasanti Solutions Chapter 11 इस नदी की धार में

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MP Board Class 10th Hindi Vasanti Solutions Chapter 11 इस नदी की धार में (दुष्यंत कुमार)

इस नदी की धार में पाठ्य-पुस्तक के प्रश्नोत्तर

प्रश्न 1.
उपर्युक्त ग़जल का आशय लिखिए।
उत्तर
उपर्युक्त गज़ल के माध्यम से ग़जलकार ने जीवन की विसंगतियों पर तीखा प्रहार करते हुए उनसे मुंह न मोड़ने, अपितु उनसे यथाशक्ति साहसपूर्वक सामना करने का हीसला प्रदान किया है। इस दृष्टि से प्रस्तुत मज़ल जीवनान्धकार को चीरने के लिए आशा-विश्वास की दीप-ज्योतिस्वरूप है, इसे नकारा नहीं जा सकता है।

इस नदी की धार में सौंदर्य-बोध पर आधारित प्रश्नोत्तर

लघु-उत्तरीय प्रश्नोत्तर

प्रश्न 1.
नदी की धार और ठंडी हवा से क्या आशय है?
उत्तर
नदी की धार और ठंडी हवा से आशय है-जीवन में उतार-चढ़ाव, दुख-सुख, कठोरता-सरसता आदि।

प्रश्न 2.
कवि को दुख में आशा की किरण कहाँ-कहाँ दिखाई दे रही है?
उत्तर
कवि को दुख में भी आशा की किरण नदी की धार में, चिनगारी में, गूंगी पीर में, साँझ के अंधेरे में, चुपचाप मैदान में लेटी हुई नदी में और आकाश-सी छाती में दिखाई देती है।

प्रश्न 3.
‘एक चिनगारी कहीं से ढूँढ लाओ दोस्तो’ कवि ने इस पंक्ति में कौन-सा भाव व्यक्त किया है?
उत्तर
‘एक चिनगारी कहीं से ढूँढ लाओ दोस्तो कवि ने इस पंक्ति में बाधाओं से पार होने के लिए उत्साह और विश्वास का भाव व्यक्त किया है।

इस नदी की धार में दीर्घ उत्तरीय प्रश्नोत्तर

प्रश्न 1.
‘दुख नहीं ………….. छाती तो है।’ इस पंक्ति का भावार्थ लिखिए।
उत्तर
‘दुख नहीं ………….. छाती तो है।’ पंक्ति का भाव जीवन में मिली हुई हार से निराश न होकर किए गए संघर्षों और आत्मबल के प्रति गर्वित होने का है। फलस्वरूप प्रस्तुत पंक्ति का भाव अधिक उपयोगी और महत्त्वपूर्ण है।

प्रश्न 2.
प्रस्तुत गज़ल का केंद्रीय भाव अपने शब्दों में लिखिए।
उत्तर
प्रस्तुत गजल में जीवन की विडम्बनापूर्ण परिस्थितियों का यथाशक्ति दृढ़तापूर्वक सामना करने का उल्लेख किया गया है। हमारे अंदर जो कुछ बची हुई और मंद पड़ी हुई शक्ति-क्षमता है, वह कम नहीं है। वह बुझे हुए दीपक के समान होने के बावजूद प्रज्वलित हो सकती है, बशर्ते हम आशा और विश्वास का दामन न छोड़ें। इसके लिए कवि ने अलग-अलग प्रतीकों के माध्यम से निराशा और हताशा के अंधकार के बीच आशा और विश्वास की ज्योति जलाए रखने पर जोर दिया है।

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प्रश्न 3.
‘मनुष्य की पीड़ा गूंगी होकर भी गाने में समर्थ है।’ इसका आशय स्पष्ट कीजिए।
उत्तर
‘मनुष्य की पीड़ा लूंगी होकर भी गाने में समर्थ है।’ इसका आशय यह है कि मनुष्य की पीड़ा की भले ही खुले रूप में अभिव्यक्ति न हो पा रही है। फिर भी वह किसी-न-किसी रूप में मुखरित तो अवश्य हो रही है।

प्रश्न 4.
‘आदमी की पीर की तुलना कवि ने किस-किस से की है?
उत्तर
आदमी की पीर की तुलना कवि ने जर्जर नाव से, भीगी हुई बाती से, खंडहर के हृदय से, जंगली फूल से, अँधेरे की सड़क से. निर्वचन मैदान में लेटी हुई नदी से और अनुपलब्धियों से की है।

इस नदी की धार में भाषा-अनुशीलन

प्रश्न 1.
दी गई गजल में से पाँच तत्सम शब्द चुनकर लिखिए।
उत्तर
नदी, हृदय, नगर, निर्वचन, आकाश।

प्रश्न 2.
निम्नलिखित शब्दों के पर्यायवाची शब्द लिखिए
नदी, हवा, अंधेरा, आकाश, भोर।
उत्तर
नदी – सरिता, दरिया
‘हवा – पवन, वरुण
अंधेरा – अंधकार, अंध,
आकाश – नभ, आसमान
भोर – प्रभात, सुबह।

प्रश्न 3.
निम्नलिखित तद्भव शब्दों के तत्सम रूप लिखिए
बाती, फूल, सांझ, पत्थर।
उत्तर
तद्भव शब्द – तत्सम रूप
बाती – बर्तिका
फूल – पुष्प
सांझ – सायं
पत्थर – पाषाण।

इस नदी की धार में योग्यता-विस्तार

प्रश्न 1. इस ग़ज़ल का अन्त्याक्षरी में उपयोग कीजिए।
प्रश्न 2. ‘जीवन में आशावादी दृष्टिकोण हो तो प्रत्येक परिस्थिति में सफलता प्राप्त होती है’ इस विषय पर कक्षा में चर्चा कीजिए।
प्रश्न 3. दुष्यंत कुमार की अन्य ग़ज़लें संकलित कर अपनी डायरी में लिखिए।
प्रश्न 4. वर्तमान समय के ग़ज़लकारों के नाम संकलित कीजिए।
उत्तर
उपर्युक्त प्रश्नों को छात्र/छात्रा अपने अध्यापक/अध्यापिका की सहायता से हल करें।

इस नदी की धार में सौंदर्य-बोध पर आधारित प्रश्नोत्तर

अर्थग्रहण संबंधी प्रश्नोत्तर

प्रश्न 1.
नाव जर्जर होने के बावजूद किससे टकराती है और क्यों?
उत्तर
नाव जर्जर होने के बावजूद लहरों से टकराती है। यह इसलिए उसमें पश्तहिम्मत नहीं है। दूसरे शब्दों में, उसमें अपार दिलेरी और अपनी शक्ति का परिचय देने का उल्लास जोर मार रहा है।

प्रश्न 2.
‘एक खंडहर के हृदय-सी’ और ‘एक जंगली फल-सी’ गजलकार ने किसे कहा है और क्यों?
उत्तर
‘एक खंडहर के हृदय-सी’ और ‘एक जंगली फूल-सी’ गज़लकार ने आदमी की गँगी पीड़ा को कहा है। यह इसलिए कि आज आदमी की पीड़ा खुले तौर पर प्रकट नहीं हो पा रही है।

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प्रश्न 3.
‘दुख नहीं कोई कि अब उपलब्धियों के नाम पर’ गज़लकार के ऐसा कहने का क्या आशय है?
उत्तर
‘दुख नहीं कोई कि अब उपलब्धियों के नाम पर गज़लकार के ऐसा कहने का आशय यह है कि उसने आजीवन संघर्ष किया है। इससे उसको कोई उपलब्धि हासिल नहीं हुई। तो क्या हुआ? इसकी उसे कोई चिंता नहीं है। उसे तो गर्व है कि उसने अपनी हिम्मत और शक्ति का बखुबी परिचय दिया है।

प्रश्न 4.
रिक्त स्थानों की पूर्ति दिए गए विकल्पों में से उचित शब्दों के चयन से कीजिए।
1. नाव …………. में टकराती है। (धार, लहरों)
2. दिए में …………. हुई बाती है। (बुझी, भीगी)
3. जंगली फूल-सी …………. की पीर है। (समाज, आदमी)
4. मैदान में नदी …………. लेटी हुई है। (चंचल, निर्वचन)
5. बाधाओं का सामना करने के लिए …………. सी छाती होनी चाहिए। (पत्थर, आकाश)
उत्तर
1. लहरों
2. भीगी
3. आदमी
4. निर्वचन
5. आकाश।

प्रश्न 5.
दिए गए कथनों के लिए सही विकल्प चुनकर लिखिए।
1. दुष्यंत कुमार का जन्म हुआ था
1. 1930 में
2. 1933 में
3. 1943 में
4. 1952 में।
उत्तर
2. 1933 में

2. दुष्यंत कुमार का सुप्रसिद्ध गज़ल-संग्रह है
1.सूर्यका स्वागत
2.एककंठविषपायी
3. सायेमेंधूप
4. छोटे-छोटे सवाल।
उत्तर
3. सायेमेंधूप

3. दुष्यंत कुमार मुख्य रूप से हैं
1. गयकार
2. आलोचक
3. पत्रकार
4. गज़लकार।
उत्तर
4. गज़लकार

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4. दुष्यंत कुमार का निधन हुआ था
1. 1976 में
2. 1978 में
3. 1967 में
4. 1970 में।
उत्तर
1. 1976 में

5. दुष्यंत कुमार की गजलों में है
1.शांति के स्वर
2. सद्भाव के स्वर
3. व्यवस्था के स्वर
4.क्रांति के स्वर।
उत्तर
(4) क्रांति के स्वर।

प्रश्न 4.
सही जोड़ी मिलाइए
रामचरित मानस – डॉ. एन.ई. विश्वनाथ
अय्यर सेगाँव का संत – डॉ. प्रेम भारती
वीरांगना दुर्गावती – दिवाकर शर्मा
अब तो खामोशी तोड़ो – श्रीमन्नारायण अग्रवाल
शहर सो रहा है – तुलसीदास।
उत्तर
रामचरितमानस – तुलसीदास
सेगाँव का संत – श्रीमन्नारायण अग्रवाल
वीरांगता दुर्गावती – डॉ. प्रेम भारती
अब तो खामोशी तोड़ो – दिवाकर शर्मा
शहर सो रहा है – डॉ. एन.ई. विश्वनाथ अय्यर ।

प्रश्न 5.
निम्नलिखित वाक्य सत्य हैं या असत्य? वाक्य के आगे लिखिए।
1. नाव जर्जर है, इसलिए लहरों से टकराती नहीं है।
2. आज समाज की स्थिति विडम्बनापूर्ण हो गई है।
3. ‘इस नदी की धार में’ गजल ‘साए में धूप’ गज़ल-संग्रह से है।
4. ‘दुष्यंत कुमार’ की गज़लों में निराशा और अविश्वास के स्वर हैं।
5. ‘दुष्यंत कुमार’ की गज़लों के आधार पर लोकप्रियता प्राप्त हुई।
उत्तर

  1. असत्य
  2. सत्य
  3. सत्य
  4. असत्य
  5. सत्य।

प्रश्न 6.
निम्नलिखित कथनों के उत्तर एक शब्द में दीजिए।
1. ‘आँगन में एक वृक्ष’ दुष्यंत कुमार का क्या है?
2. नदी की धार में कौन-सी हवा आती है?
3. दिए में तेल से भीगी हुई क्या है?
4. आदमी की पीर क्या हो गई है?
5. निर्वचन मैदान में लेटी हुई नदी बार-बार क्या करती है?
उत्तर

  1. उपन्यास
  2. ठंडी
  3. बाती
  4. गूंगी
  5. बतियाती है।

इस नदी की धार में लघु-उत्तरीय प्रश्नोत्तर

प्रश्न 1.
नदी की धार की क्या विशेषता है?
उत्तर
नदी की धार की यह विशेषता है कि उसमें ठंडी हवा आती है।

प्रश्न 2.
तेल से भीगी हुई बाती के लिए गज़लकार क्या चाहता है?
उत्तर
तेल से भीगी हुई बाती के लिए गज़लकार एक चिनगारी चाहता है।

प्रश्न 3.
‘इस नदी की धार में’ गज़ल में किस पर बल दिया गया है?
उत्तर
‘इस नदी की धार में’ गज़ल में निराशा और हताशा के अंधकार के बीच आशा और विश्वास का दीप जलाए रखने पर बल दिया गया है।

इस नदी की धार में कवि-परिचय

जीवन-परिचय-कविवर दुष्यंत कुमार का जन्म सन् 1933 ई. में उ.प्र. के बिजनौर जिलान्तर्गत राजपुर नवादा में हुआ था। अपनी आरंभिक शिक्षा स्थानीय विद्यालय से समाप्त कर आपने अपनी उच्च शिक्षा के बल पर जीविका के सरकारी नौकरी कर ली। इसके लिए आपने म.प्र. की राजधानी भोपाल में भाषा-विभाग में सहायक संचालक के पद पर कार्य किया। इस पद पर कार्य करते आपका निधन बड़ी ही छोटी आयु में 30 सितम्बर, 1976 को हो गया।
रचनाएँ-कविवर दुष्यंत कुमार की रचनाएँ हैं

गजल-संग्रह-‘साये में धूप’ (खंड काव्य), ‘एककंठ विषपायी’ (काव्य-संग्रह) ‘सूर्य का स्वागत’, ‘जलते हुए वन का वसंत’,।

उपन्यास-‘छोटे-छोटे सवाल’, ‘आंगन में एक वृक्ष’ आदि।

भावपक्ष-कविवर दुष्यंत कुमार का काव्य-स्वरूप मार्मिक भावों और संवेदनाओं का भंडार है। उससे देश-प्रेम का जहाँ विशाल चित्र फैला हुआ दिखाई देता है. वहीं दूसरी ओर जीवन की कटु सच्चाई के साथ जीवन की अपेक्षाओं के भी रूप-प्रतिरूप उभरते हुए दिखाई देते हैं। सामाजिक कुरीतियों और विसंगतियों के भरपुर चित्र खींचने में कविवर दुष्यंत कुमार पूरी तरह समर्थ दिखाई देते हैं।

कलापक्ष-कविवर दुष्यंत कुमार की कलापक्षीय विशेषताएँ अनूठी हैं। इसका मुख्य कारण है-सरल, सुबोध और सटीक शब्द-चयन से पुष्ट हुई भाषा । जहाँ तक आप की शैलीगत विशेषताओं का प्रश्न है। तो वह पूर्णरूप से भावात्मक और चित्रात्मक है। उसमें बिम्बों और प्रतीकों की सजीवता एवं रसों-अलंकारों की सुंदर योजना अधिक मोहक है।

साहित्य में स्थान-कविवर दुष्यंत कुमार का हिंदी गजल के रचनाकारों में अत्याधिक चर्चित और सम्मानपूर्ण स्थान है। हिंदी गजल के क्षेत्र में आपका योगदान अविस्मरणीय रहेगा। फलस्वरूप आने वाली पीढ़ी उससे मार्गदर्शन प्राप्त करती रहेगी।

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इस नदी की धार में गजल का सारांश

प्रस्तुत गजल में आशा और विश्वास के पूरे जोर-शोर हैं। एक ऐसी आशा जो खण्डित होते-होते बचने की अपनी शक्ति नहीं खो पाती है। इसलिए गजलकार दुष्यंत कुमार का कहना है कि नदी की धार बहुत अधिक तो है लेकिन उससे ठंडी हवा आती रही है। ऐसी तेज धारा में एक जर्जर नाव ऐसी है, जो आने वाली लहरों से मुठभेड़ करने की बार-बार कोशिश कर रही है। एक चिनगारी कहीं से मिल जाए तो इस दिए में तेल से भीगी हुई बत्ती जल उठेगी। खण्डहर-सी उदास और जंगली फूल की तरह आदमी की गूंगी पीर गाती है। एक चादर से ढकी अँधेरे की सड़क भोर तक चली जाती है। चूप पड़ी हुई नदी कभी-कभी पत्थरों से ओट में कुछ कह लेती है। किसी प्रकार की प्राप्ति नहीं हुई, इस बात का तनिक मलाल नहीं है। इस बात का फक्र है कि आकाश की तरह चौड़ी छाती तो है।

इस नदी की धार में संदर्भ, प्रसंग सहित व्याख्या

(1) इस नदी की धार में ठंडी हवा आती तो है,
नाव जर्जर ही सही, लहरों से टकराती तो है।
एक चिनगारी कहीं से ढूँढ लाओ दोस्तो,
इस दिए में तेल से भीगी हुई बाती तो है।
एक खंडहर के हृदय-सी, एक जंगली-फूल-सी,
आदमी की पीर गूंगी ही सही, गाती तो है।

शब्दार्थ-धार-प्रवाह। जर्जर-टूटी-फूटी, पुरानी। ढूँढ-खोज। पीर-पीड़ा। गूंगी-बेजुबान।

संदर्भ-प्रस्तुत गज़ल हमारी पाठ्य-पुस्तक ‘हिंदी सामान्य 10वीं’ में संकलित गज़लकार श्री दुष्यंत कुमार विरचित गज़ल ‘इस नदी की धार में’ शीर्षक से है।

प्रसंग-प्रस्तुत गजल में गजलकार दुष्यंत कुमार ने जर्जर और बिडम्बनापूर्ण-परिस्थितियों में हिम्मत बनाए रखने का प्रोत्साहन देते हुए कहा है कि

व्याख्या-चूँकि नदी की धारा बड़ी तेज है। उसमें बहुत प्रवाह है और अधिक उफान है। फिर भी उससे सुखद और आनंददायक ठंडी-ठंडी हवा तो स्पर्श करती रहती है। इस नदी की ऊँची-ऊची उठती लहरों से टक्कर लेने वाली टूटी-फूटी नाव की हिम्मत काबिलेतारीफ है। गजलकार का पुनः कहना है कि दिए में तेल से भीगी बाती है, यह उम्मीद को रखने वाली बात है। अगर एक चिनगारी कहीं से मिल जाए तो इस दिए की बाती जलकर रोशनी कर सकती है। आज समय ने समाज को इतना

अधिक दुखद और असहाय बना दिया है कि उससे बच पाना बड़ा ही कठिन है। उसका सामना करना तो और ही कठिन है। इससे आज आदमी की पीड़ा बहुत ही, दुखद हो गई है। ऐसी दशा में हर प्रकार से पीड़ित उस आदमी की दाद देनी चाहिए जो गूंगा होकर भी अपनी पीड़ा का बयान करने की हिम्मत नहीं हारता है।

विशेष-

  1. उर्दू शब्दों की प्रधानता है।
  2. शैली मार्मिक है।
  3. वीर रस का प्रवाह है।

सौंदर्य-बोध पर आधारित प्रश्नोत्तर

(क) भाव-सौंदर्य
प्रश्न उपर्युक्त गज़ल के भाव-सौंदर्य पर प्रकाश डालिए।
उत्तर
उपर्युक्त गजल का भाव-सौंदर्य मार्मिक है। जीवन की कठिन और विषम दशा में न केवल हिम्मत बनाए रखना अपितु हिम्मत का प्रदर्शन करने का प्रोत्साहन उपर्युक्त गजल का लक्ष्य है। इसके गज़लकार ने उपयुक्त उपमाएँ दी हैं, जो प्रभावशाली हैं।

(ख) शिल्प-सौंदर्य
प्रश्न उपर्युक्त गज़ल के शिल्प-सौंदर्य पर प्रकाश डालिए।
उत्तर
उपर्युक्त गजल का शिल्प-सौंदर्य हृदयस्पर्शी है। भावों के अनुसार भाषा है। शब्द-चयन में उर्दू को अधिक स्थान दिया गया है। शैली पूरी तरह भावात्मक
और चित्रात्मक है। वीर रस और करुण रस का मिश्रित प्रवाह है।

विषय-वस्तु पर आधारित प्रश्नोत्तर

प्रश्न 1.
उपर्युक्त गज़ल का मुख्य भाव लिखिए।
उत्तर
उपर्युक्त गजल के माध्यम से गज़लकार ने जीवन में आने वाली कठिनाइयों और विडंबनाओं को चुनौती देते हुए उनका यथाशक्ति और यथाविचार के साथ सामना करने का प्रोत्साहन दिया है। इससे टूटी-फूटी जिंदगी के सँवरने के अवसर मिलते हैं। ऐसा विश्वास भरने का गज़लकार का प्रयास प्रशंसनीय कहा जा सकता है।

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2. एक चादर साँझ ने सारे नगर पर डाल दी,
यह अँधेरे की सड़क उस भोर तक जाती तो है।
निर्वचन मैदान में लेटी हुई है जो नदी,
पत्वरों से, ओट में, जा-जाके बतियाती तो है।
दुख नहीं कोई कि अब उपलब्धियों के नाम पर,
और कुछ हो या न हो, आकाश-सी छाती तो है।

शब्दार्थ-भोर-सुबह। निर्वचन-मौन, चुप्पी। बतियाती-बात करती है। उपलब्धियों-प्राप्तियाँ।

संदर्भ-पूर्ववत्।

प्रसंग-प्रस्तुत गद्यांश में गज़लकार दुष्यंत कुमार ने निराशा और हताशा से घिरी जिंदगी में जोश भरते हुए यह कहना चाहा है कि

व्याख्या-जिन्दगी में धीरे-धीरे बिडम्बनाओं और बाधाओं ने अपना प्रवेश करना शुरू कर लिया है, तो इससे हौसला नहीं छोड़ना चाहिए। अगर एक चादर से साँझ ने सारे नगर को ढकने का साहस किया है, तो यह हौसला रखना चाहिए कि सांझे की एक ऐसी सड़क भी है, जो अँधेरे को चीरती हुई भोर तक आगे निकल जाती है। इसी प्रकार सपाट मैदान में जो नदी चुपचाप पड़ी हुई है, वह व्यर्थ नहीं है, अपितु उसमें बड़ी जीवनी शक्ति है। यह इसलिए वह कभी पत्थरों से तो कभी किसी ओट में होकर अपनी बात सुनाती रहती है। गज़लकार का पुनः कहना है कि उसे अपनी उपलब्धियों के नाम इस बात का कोई दुख नहीं है कि वह बहुत कुछ प्राप्त नहीं कर सकता है। उसे तो इस बात का गर्व है कि वह किसी प्रकार के दुखों को सहने के लिए आकाश के समान अपनी छाती फैलाकर रखा है।

विशेष-

  1. भाषा में प्रवाह है।
  2. शैली चित्रमयी है।
  3. वीर रस का संचार है।

सौंदर्य-बोध पर आधारित प्रश्नोत्तर

(क) भाव-सौंदर्य
प्रश्न 1.
उपर्युक्त गज़ल के भाव-सौंदर्य पर प्रकाश डालिए।।
उत्तर
उपर्युक्त गज़ल की भाव-योजना मार्मिक है। जीवन की त्रासदी से उबरने और उसका सामना करने के लिए दिए आधार अधिक रोचक और भावों को जगाने वाले हैं। इससे प्रस्तुत गज़ल आकर्षक है, इसमें कोई संदेह नहीं।

(ख) शिल्प-सौंदर्य
प्रश्न 1.
उपर्युक्त गज़ल के शिल्प-सौंदर्य पर प्रकाश डालिए।
उत्तर
उपर्युक्त गजल का शिल्प-सौंदर्य असाधारण है। इसके प्रमुख आधार हैं-सामान्य और सुपरिचित शब्द-योजना, वीर रस के छींटे, उपमा अलंकार और . रूपक-अलंकार सहित सजीव बिम्बों और प्रतीकों का सुंदर विधान।

MP Board Class 10th Social Science Solutions Chapter 10 स्वतन्त्रता आन्दोलन में मध्य प्रदेश का योगदान

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MP Board Class 10th Social Science Solutions Chapter 10 स्वतन्त्रता आन्दोलन में मध्य प्रदेश का योगदान

MP Board Class 10th Social Science Chapter 10 पाठान्त अभ्यास

MP Board Class 10th Social Science Chapter 10 वस्तुनिष्ठ प्रश्न

सही विकल्प चुनकर लिखिए

प्रश्न 1.
मध्य प्रदेश के किस स्वतन्त्रता सेनानी को राष्ट्रपति बनने का गौरव प्राप्त हुआ है ?
(i) डॉ. शंकरदयाल शर्मा
(ii) पं. सुन्दरलाल
(iii) पं. द्वारिका प्रसाद मिश्र
(iv) पं. शम्भूनाथ शुक्ल
उत्तर:
(i) डॉ. शंकरदयाल शर्मा

प्रश्न 2.
भोपाल के विश्वविद्यालय का नाम किस स्वतन्त्रता सेनानी के नाम पर रखा गया है ?
(i) सेठ गोविन्ददास
(ii) बरकतउल्ला
(iii) हरीसिंह गौड़
(iv) रानी दुर्गावती।
उत्तर:
(ii) बरकतउल्ला

प्रश्न 3.
झण्डा सत्याग्रह मध्य प्रदेश के किस शहर से शुरू हुआ था ?
(i) इन्दौर
(ii) सागर
(iii) जबलपुर
(iv) भोपाल।
उत्तर:
(iii) जबलपुर

रिक्त स्थानों की पूर्ति कीजिए

  1. ग्राम ढीमरपुरा में हरिशंकर ब्रह्मचारी के नाम से ……………….. ने निवास किया था।
  2. रानी अवन्तीबाई ……………….. जिले के रामगढ़ की रानी थीं।
  3. रानी लक्ष्मीबाई ने ……………….. की मदद से ग्वालियर पर अधिकार किया था।

उत्तर:

  1. चन्द्रशेखर आजाद
  2. मण्डला
  3. तात्या टोपे।

सही जोड़ी मिलाइए
MP Board Class 10th Social Science Solutions Chapter 10 स्वतन्त्रता आन्दोलन में मध्य प्रदेश का योगदान 1
उत्तर:

  1. → (घ)
  2. → (क)
  3. → (ख)
  4. → (ग)

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MP Board Class 10th Social Science Chapter 10 अति लघु उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 1.
चन्द्रशेखर आजाद का जन्म कहाँ हुआ था ? उत्तर- चन्द्रशेखर आजाद का जन्म मध्य प्रदेश के अलीराजपुर जिले के भाभरा ग्राम में हुआ। प्रश्न 2. मध्य प्रदेश में स्थापित संस्थाओं के नाम लिखिए।
उत्तर:
राष्ट्रीय आन्दोलन के दौरान अनेक संस्थाओं ने आन्दोलन की गतिविधियों में संलग्न रहते हुए रचनात्मक कार्य भी किये। इनमें प्रमुख थे- ‘गुरुकुल’ 1929 (सतना), ‘हिन्दुस्तानी सेवा दल’ 1931, ‘चरखा संघ’ (रीवा), ‘ग्वालियर राज्य सेवा संघ’ तथा ‘हरिजन सेवक संघ’ 1935 (ग्वालियर), ‘लोक सेवा संघ’ 1939(खरगोन), ‘ग्राम सेवा कुटीर’ 1935(सेंधवा), ‘सेवा समिति’ (बेतूल), सेवामण्डल’ (रतलाम), ‘ज्ञान प्रकाश मण्डल’ (इन्दौर) आदि।

प्रश्न 3.
आजाद हिन्द फौज के किस सेनानी का सम्बन्ध शिवपुरी जिले से था ?
उत्तर:
कर्नल गुरुबक्श सिंह ढिल्लन जिन पर आजाद हिन्द फौज में कार्य करने के कारण अभियोग चला था, मध्य प्रदेश के शिवपुरी जिले के निवासी थे।

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MP Board Class 10th Social Science Chapter 10 लघु उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 1.
मध्य प्रदेश में राष्ट्रीय चेतना की जागृति हेतु प्रकाशित होने वाले समाचार-पत्रों के नाम लिखिए। (2012, 15, 18)
उत्तर:
मध्य प्रदेश में राष्ट्रीय चेतना की वृद्धि के लिए अनेक कारकों का सहयोग रहा, जिसमें समाचार-पत्रों की भूमिका महत्त्वपूर्ण है। उस समय ऐसे अनेक समाचार-पत्र प्रकाशित हुए, जिन्होंने ब्रिटिश शासन की अन्यायी एवं दमनकारी नीति से जनता को आन्दोलन के लिए प्रेरित किया। इनमें प्रमुख थे-‘कर्मवीर’, ‘अंकुश’, ‘सुबोध सिन्धु’ (खण्डवा), न्याय सुधा’ (हरदा), ‘आर्य वैभव’ (बुरहानपुर), ‘लोकमत’ (जबलपुर), ‘प्रजामण्डल पत्रिका’ (इन्दौर), ‘सरस्वती विलास’ (जबलपुर), साप्ताहिक आवाज’ एवं ‘सुबह वतन’ (भोपाल) आदि । ब्रिटिश शासन के प्रतिबन्धों के कारण जब समाचार-पत्र प्रकाशित नहीं हो सके, गुप्त रूप से बुलेटिन एवं परचों ने जनजागृति का कार्य किया।

प्रश्न 2.
असहयोग आन्दोलन में मध्य प्रदेश की जनता ने अपना सहयोग किस प्रकार दिया ? (2016)
उत्तर:
असहयोग आन्दोलन में मध्य प्रदेश की जनता ने शराबबन्दी, तिलक स्वराज्य फण्ड, विदेशी वस्त्रों का बहिष्कार, सरकारी शिक्षण संस्थाओं का त्याग कर राष्ट्रीय शिक्षा संस्थाओं की स्थापना, हथकरघा उद्योग की स्थापना जैसे महत्त्वपूर्ण कार्यों में अपना योगदान दिया। वकीलों ने वकालत त्याग दी। जो वकील न्यायालय जाना चाहते थे, उन्होंने गांधी टोपी पहनकर न्यायालयों में प्रवेश किया। जिला समितियों ने शासकीय आज्ञाओं की अवहेलना कर भवनों पर राष्ट्रीय ध्वज फहराये जिससे लोगों की भय एवं अधीनता की मनोवृत्ति दूर हुई। इस आन्दोलन के समय साम्प्रदायिक सद्भावना की अभूतपूर्व मिसालें यहाँ देखने को मिली।

भोपाल, ग्वालियर, इन्दौर जैसी बड़ी-बड़ी रियासतों के अतिरिक्त छोटी रियासतों में भी असहयोग अन्दोलन के समय उत्साह दिखाई दिया। इस अवसर पर महात्मा गांधी जी ने छिन्दवाड़ा, जबलपुर, खण्डवा, सिवनी का दौरा कर जनता में अभूतपूर्व चेतना का संचार किया।

प्रश्न 3.
जंगल सत्याग्रह क्या था ? लिखिए। (2013)
उत्तर:
जंगल सत्याग्रह-सन् 1930 में जब महात्मा गांधी ने दाण्डी मार्च कर नमक सत्याग्रह शुरू किया था, तब सिवनी के कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने दुर्गाशंकर मेहता के नेतृत्व में जंगल सत्याग्रह चलाया। सिवनी से 9-10 मील दूर सरकारी चन्दन बगीचों के जंगलों में घास काटकर यह सत्याग्रह किया जा रहा था। इसी सिलसिले में 9 अक्टूबर, 1930 की सिवनी जिले के ग्राम दुरिया में सत्याग्रह की तारीख निश्चित हुई। पुलिस दरोगा ओर रेंजर ने सत्याग्रहियों का समर्थन करने आये जनसम्प्रदाय के साथ बहुत अभद्र व्यवहार किया जिससे जनता उत्तेजित हो उठी। सिवनी के डिप्टी कमिश्नर के इस हुक्म पर कि ‘टीच देम ए लेसन’, पुलिस ने गोली चला दी। घटनास्थल पर ही तीन आदिवासी महिलाएँ व एक पुरुष शहीद हो गए। इस घटना से मध्य प्रदेश के गिरिजन समुदाय में भी स्वतन्त्रता की ज्योति प्रज्ज्वलित होने का पुष्ट प्रमाण मिलता है। इन शहीदों के शवों को भी उनके परिवारीजनों को अन्तिम संस्कार के लिए नहीं दिया गया।

प्रश्न 4.
झण्डा सत्याग्रह किस प्रकार हुआ? वर्णन कीजिए। (2016)
अथवा
झण्डा सत्याग्रह को संक्षेप में लिखिए। (2017)
उत्तर:
झण्डा सत्याग्रह-राष्ट्रीय ध्वज किसी राष्ट्र की सम्प्रभुता, अस्मिता और गौरव का प्रतीक होता है। भारतीय स्वतन्त्रता संग्राम के दिनों में चरखायुक्त तिरंगे झण्डे को यह सम्मान प्राप्त रहा है। 1923 में इस ध्वज की आन-बान-शान को लेकर ऐसा प्रसंग आया जिसमें न केवल राष्ट्रीय ध्वज के प्रति सम्पूर्ण राष्ट्र की श्रद्धा में वृद्धि हुई वरन् अंग्रेजी हुकूमत तक को उसे मान्य करने पर विवश होना पड़ा। इतिहास के इस स्वर्णिम अध्याय को ‘झण्डा सत्याग्रह’ के नाम से जाना जाता है। असहयोग आन्दोलन की तैयारी के लिए गठित कांग्रेस की समिति जबलपुर आई, जिसके नेता हकील अजमल खाँ थे। जबलपुर कांग्रेस कमेटी ने तय किया कि खाँ साहब को अभिनन्दन पत्र भेंट किया जायेगा और जबलपुर नगरपालिका भवन पर राष्ट्रीय तिरंगा झण्डा फहराया जायेगा। इससे ब्रिटिश डिप्टी कमिश्नर भड़क उठा। उसने पुलिस को तिरंगे झण्डे को उतारने व पैरों से कुचलने का हुक्म दिया जिसका परिणाम तीव्र जनाक्रोश के रूप में फूटा और आन्दोलन प्रारम्भ हो गया। विदेशी हुकूमत की अपमानजनक कार्यवाही के विरोध में पं. सुन्दरलाल, सुभद्रा कुमारी चौहान, नाथूराम मोदी, नरसिंहदास अग्रवाल आदि स्वयंसेवकों ने झण्डे के साथ जुलूस निकाला। पुलिस द्वारा सभी नेताओं को गिरफ्तार कर लिया गया। झण्डा सत्याग्रहियों की पहली टोली के पश्चात् दूसरी टोली ने जिसमें प्रेमचन्द, सीताराम जाधव, टोडरमल आदि थे, टाउन हॉल पर झण्डा फहरा दिया। यह आन्दोलन नागपुर तथा देश के अन्य भागों में फैला था।

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MP Board Class 10th Social Science Chapter 10 दीर्घ उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 1.
1857 के संग्राम में मध्य प्रदेश क्षेत्र से सम्बन्धित सेनानियों के योगदान का वर्णन कीजिए।
उत्तर:
1957 ई. की क्रान्ति में मध्य प्रदेश के सेनानियों का योगदान-1857 ई. की क्रान्ति का प्रारम्भ मध्य प्रदेश में महाकौशल क्षेत्र से उस समय हुआ जब एक भारतीय सैनिक ने अंग्रेजी सेना के एक अधिकारी पर प्राणघातक हमला किया था। इसके पश्चात् इस क्रान्ति का प्रारम्भ ग्वालियर, इन्दौर, भोपाल, सागर, जबलपुर, होशंगाबाद आदि में भी हुआ। मध्य प्रदेश में 1857 ई. की क्रान्ति में प्रमुख योगदान देने वाले क्रान्तिकारी तात्या टोपे, महारानी लक्ष्मीबाई, अवन्तीबाई, राणा बख्तावर सिंह, शहीद नारायण सिंह तथा ठाकुर रणमत सिंह आदि थे।

1857 ई. के क्रान्तिकारियों में झाँसी की रानी लक्ष्मीबाई तथा तात्या टोपे का नाम विशेष उल्लेखनीय है। रानी लक्ष्मीबाई ने देशभक्त सैनिकों का नेतृत्व करते हुए ब्रिटिश सैनिकों को भयभीत कर दिया। झाँसी हाथ से निकल जाने पर लक्ष्मीबाई अपने साथी तात्या टोपे की सहायता से ग्वालियर पर अधिकार करने में सफल हुईं। उन्होंने बड़े उत्साह से ग्वालियर की जनता को जागृत किया। जब ब्रिटिश सेना ने उनके किले को घेर लिया तो वे बड़े उत्साह से अपनी सेना का संचालन करती हुईं, युद्ध क्षेत्र में उतर पड़ीं, परन्तु ब्रिटिश सेना के आघात से वे घायल हो गईं और उनका स्वर्गवास हो गया। उनके समान ही तात्या टोपे ने भी ब्रिटिश सेनाओं से युद्ध किया परन्तु एक विश्वासघाती षड्यन्त्र के कारण अंग्रेजों ने उन्हें बन्दी बनाकर फाँसी पर लटका दिया।

प्रश्न 2.
सविनय अवज्ञा आन्दोलन व भारत छोड़ो आन्दोलन का मध्य प्रदेश पर क्या प्रभाव पड़ा?
अथवा
सविनय अवज्ञा आन्दोलन का मध्य प्रदेश पर क्या प्रभाव पड़ा ? (2015)
उत्तर:
सविनय अवज्ञा आन्दोलन

अप्रैल 1930 में महात्मा गांधी के नेतृत्व में देश में सविनय अवज्ञा आन्दोलन आरम्भ हुआ। 6 अप्रैल को जिस दिन गांधी जी ने दाण्डी में नमक कानून को तोड़ा, उसी दिन मध्य प्रदेश में आन्दोलन फैल गया। जबलपुर में सेठ गोविन्द दास और द्वारिका प्रसाद मिश्र के नेतृत्व में प्रदर्शन हुए। 8 अप्रैल को सीहोर, मण्डला, कटनी और दमोह में जुलूस निकले। मध्य प्रदेश में ऐसा कोई भी स्थान नहीं था जहाँ जनता ने सत्याग्रह में भाग न लिया हो। मध्य प्रदेश में जंगल कानून की अवज्ञा हुई। जंगल सत्याग्रह में आदिवासियों और ग्रामीण जनता ने तो खुलकर भाग लिया। पुलिस ने जंगल सत्याग्रहियों पर गोली चलायी। रियासतों की जनता ने भी गांधी द्वारा निर्देशित कार्यक्रम के अनुसार कानूनों की अवज्ञा की। नवयुवकों ने शिक्षा संस्थाओं को छोड़ दिया। सरकारी कर्मचारियों ने नौकरियाँ छोड़ दीं। स्त्रियों ने शराब की दुकानों पर धरने दिये। जैसे-जैसे आन्दोलन का विस्तार हुआ, सरकार ने दमन तीव्रता से किया, परन्तु इस आन्दोलन की महत्त्वपूर्ण बात यह थी कि सरकार द्वारा आन्दोलन को दबाने के लिए हर सम्भव प्रयास करने के बावजूद सविनय अवज्ञा आन्दोलन का उत्साह कम नहीं हुआ।

14 जुलाई, 1933 को गांधीजी के निर्देश का सामूहिक सत्याग्रह बन्द हो गया। उसके पश्चात् व्यक्तिगत सत्याग्रह चलता रहा। मध्य प्रदेश के अनेक सेनानी सत्याग्रह करते रहे। आन्दोलन से प्रभावित अन्य स्थानों पर भी सरकार ने अनेक लोगों को बन्दी बनाया, लाठीचार्ज किया और आन्दोलन को कुचलने का प्रयास किया। उसके पश्चात् 1942 तक पूरे मध्य प्रदेश में रचनात्मक कार्य हुए तथा अलग-अलग घटनाओं ने राष्ट्रीय आन्दोलन को प्रभावित किया।

भारत छोड़ो आन्दोलन

अगस्त 1942 में देश के राजनीतिक रंगमंच पर ‘भारत छोड़ो’ नामक ऐतिहासिक आन्दोलन की शुरुआत हुई। 8 अगस्त को भारत छोड़ो प्रस्ताव मुम्बई में होने वाली अखिल भारतीय कांग्रेस समिति ने पारित किया। 9 अगस्त को गांधीजी सहित सारे बड़े नेता बन्दी बनाये जा चुके थे। ऐसी स्थिति में रविशंकर शुक्ल, द्वारिकाप्रसाद मिश्र सहित सारे बड़े दमन के नग्न ताण्डव का सामना करने के लिए अपने प्रदेश वापस लौट आये। सम्पूर्ण मध्य प्रदेश में ब्रिटिश सरकार के विरुद्ध रोष की लहर फैल गयी थी और जनता अंग्रेजी सरकार के विरुद्ध उठ खड़ी हुई। स्कूल-कॉलेज तथा कारखाने हड़तालों के कारण बन्द हो गये। जगह-जगह जुलूस निकाले गये और प्रदर्शन हुए। सरकार ने इस आन्दोलन को दबाने के लिए सख्ती से काम लिया लेकिन जनता का उत्साह ठण्डा नहीं हुआ। उन्होंने ब्रिटिश गुलामी से मुक्ति पाने का संकल्प किया था। अतः आन्दोलन अधिक तीव्र हो गया। कई स्थानों पर पुलिस थाने, डाकखाने व रेलवे स्टेशन जला दिये। टेलीफोन के तार काट डाले गये और रेल की लाइनें उखाड़ दी गयीं। कुछ स्थानों पर आन्दोलनकारियों ने शहरों और कस्बों पर भी अधिकार कर लिया था जिससे अंग्रेजी सत्ता डगमगाने लगी थी।

अंग्रेजी सरकार ने आन्दोलन को दबाने का हरसम्भव प्रयास किया। प्रेस की स्वतन्त्रता समाप्त कर दी गयी, आन्दोलनकारियों से जेलें भर दी गयीं और निहत्थी जनता पर गोलियाँ बरसाई गयीं जिससे हजारों लोग जान से मारे गये। विद्रोही जनता को अनेक प्रकार की यातनाएँ दी गयीं। अन्त में सरकार इस आन्दोलन को दबाने में सफल हो गयी। यह सत्य है कि ब्रिटिश सरकार ने भारत छोड़ो आन्दोलन को निर्ममता से कुचल दिया था परन्तु इस आन्दोलन ने मध्य प्रदेश की जनता में जनजागृति उत्पन्न कर दी थी।

प्रश्न 3.
टिप्पणी लिखिए

(क) बरकतुल्लाह भोपाली
(ख) चन्द्रशेखर आजाद
(ग) कुँवर चैनसिंह
(घ) टंट्या भील
(ङ) वीरांगना अवन्तीबाई
(च) ठाकुर रणमत सिंह।

उत्तर:
(क) बरकतुल्लाह भोपाली
मोहम्मद बरकतुल्लाह भोपाली ने विदेशों में रहकर स्वतन्त्रता के लिए निरन्तर संघर्ष किया। काबुल में स्थापित की गई भारत की अन्तरिम सरकार (सन् 1915) में उन्हें प्रधानमन्त्री नियुक्त किया गया। मोहम्मद बरकतुल्लाह भोपाली ने अपने बेजोड़ साहस, देशभक्ति की अमिट लगन के साथ देश की आजादी के लिए कार्य किये। अमेरिका, जापान, काबुल में आजादी के संघर्ष में उनकी भूमिका उल्लेखनीय रही।

(ख) चन्द्रशेखर आजाद
चन्द्रशेखर आजाद का जन्म मध्य प्रदेश के अलीराजपुर जिले के भाभरा ग्राम में हुआ। वे 14 वर्ष की अल्प में असहयोग आन्दोलन से जुड़े। गिरफ्तार होने पर अदालत में उन्होंने अपना नाम आजाद’, पिता का नाम ‘स्वतन्त्रता’ और घर का पता ‘जेलखाना’ बताया। तभी से चन्द्रशेखर के नाम के साथ ‘आजाद’ जुड़ गया।

क्रान्तिकारी विचारधारा के कारण वे लम्बे समय तक गांधीजी के मार्ग पर नहीं चल सके, वे क्रान्तिकारी श्रीगुप्त के सम्पर्क में आए और तदनन्तर पं. रामप्रसाद बिस्मिल के नेतृत्व में उन्होंने युग की महान क्रान्तिकारी घटना काकोरी काण्ड’ में हिस्सा लिया। जब पुलिस ने आजाद का पीछा किया तो वे बचकर निकल गए।

उत्तर भारत की पुलिस आजाद के पीछे पड़ी हुई थी। दल के साथी विश्वासघात कर चुके थे, जिससे वे चिन्तित और क्षुब्ध थे। आजाद बचते-छिपते इलाहाबाद जा पहुँचे। 27 फरवरी, 1931 को वे अल्फ्रेड पार्क में बैठे हुए थे। दिन के दस बज रहे थे कि पुलिस ने उन्हें घेर लिया। दोनों ओर से गोलियाँ चलने लगीं। आजाद ने पुलिस के छक्के छुड़ा दिए और जब उनकी पिस्तौल में एक गोली बची थी तब उसे अपनी कनपटी पर दागकर शहीद हो गए।

(ग) कुँवर चैनसिंह
नरसिंहगढ़ के राजकुमार चैनसिंह को अंग्रेजों की सीहोर छावनी के पोलिटिकल एजेण्ट मैडाक ने अपमानित किया। इस पर चैनसिंह ने अंग्रेजों के विरुद्ध संघर्ष छेड़ दिया। सीहोर के वर्तमान तहसील चौराहे पर चैनसिंह तथा अंग्रेजों के बीच सन् 1824 में भीषण लड़ाई हुई। अपने मुट्ठीभर वीर साथियों सहित अंग्रेजी सेना से मुकाबला करते हुए चैनसिंह सीहोर के दशहरा बाग वाले मैदान में वीरगति को प्राप्त हुए।

(घ) टंट्या भील
1857 के महासमर के बाद मध्य प्रदेश के पश्चिमी निमाड़ में टंट्या भील ब्रिटिश सरकार के लिए आतंक . का पर्याय था। उसके साथी दोपिया और बिजनिया भी उसकी क्रान्तिकारी गतिविधियों में सहभागी थे। वर्षों तक जनजीवन में घुले-मिले रहकर गुप्त ढंग से क्रान्तिकारी कार्यवाहियों को अन्जाम दिया उन्होंने ब्रिटिश सरकार को हिला दिया था। धोखे और षड्यन्त्रपूर्वक अंग्रेजों ने टंट्या को गिरफ्तार किया और उन्हें फाँसी पर लटका दिया। भीलों के बीच आज भी ट्टया प्रेरणास्वरूप मौजूद हैं।

(ङ) वीरांगना अवन्तीबाई
रानी अवन्तीबाई (राजा लक्ष्मण सिंह की पत्नी) रामगढ़ में एक अत्यन्त योग्य एवं कुशल महिला थीं जो अपने पुत्र के नाम पर राज्य का योग्य प्रबन्धन व संचालन कर सकती थी। लेकिन उस समय अंग्रेजों की हड़प नीति चरम सीमा पर थी। रानी ने अपना विरोध प्रकट करते हुए रामगढ़ से अंग्रेजों द्वारा नियुक्त अधिकारी को निकाल भगाया और अपने राज्य का शासनसूत्र अपने हाथ में ले लिया। साथ ही उन्होंने जिले के ठाकुरों और मालगुजारों से समर्थन हेतु सम्पर्क स्थापित किया। आस-पास के अनेक जमींदारों ने उन्हें सहायता देने का वचन दिया।

रानी सैनिक वस्त्र व तलवार धारण कर स्वयं अपने सैनिकों का रणक्षेत्र में नेतृत्व करती थी। अप्रैल 1858 में अंग्रेजों की सेना ने रामगढ़ पर दोनों ओर से आक्रमण किया, इस कारण रानी अपनी सेना सहित पास के जंगल में चली गई। वहाँ से रानी अंग्रेजों पर निरन्तर आक्रमण करती रहीं, परन्तु इनमें से एक आक्रमण घातक सिद्ध हुआ। जब उन्होंने देखा कि वह घिर गईं और उनका पकड़ा जाना निश्चित है तो उन्होंने वीरांगनाओं की गौरवशाली परम्परा के अनुरूप बन्दी होने की अपेक्षा मृत्यु को श्रेष्ठतर समझा और क्षणमात्र में अपने घोड़े से उतरकर अपने अंगरक्षक के हाथ से तलवार छीनकर उसे अपनी छाती में घोंप कर हँसते-हँसते मातृभूमि के लिए बलिदान दे दिया।

(च) ठाकुर रणमत सिंह
1857 में सतना जिले के मनकहरी गाँव के निवासी ठाकुर रणमत सिंह ने भी अंग्रेजों से जमकर संघर्ष किया। पोलिटिकल एजेण्ट की गतिविधियों से क्षुब्ध होकर ठाकुर रणमत सिंह ने अंग्रेजों के विरुद्ध झण्डा उठाया, उन्होंने अपने साथियों के साथ चित्रकूट के जंगल में सैन्य संगठन का कार्य कर नागौद की अंग्रेज रेजीडेन्सी पर हमला कर दिया। वहाँ के रेजीमेण्ट भाग खड़े हुए। कुछ समय बाद नौगाँव छावनी पर भी धावा बोला एवं बरोधा में अंग्रेज सेना की एक टुकड़ी का सफाया कर डाला। ठाकुर रणमत सिंह पर 2,000 रु. का पुरस्कार घोषित किया गया। लम्बे समय तक अंग्रेजों से संघर्ष करने के पश्चात् जब रणमत सिंह अपने मित्र के घर विश्राम कर रहे थे, तब धोखे से उन्हें गिरफ्तार कर लिया गया और 1859 में फाँसी पर चढ़ा दिया गया।

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MP Board Class 10th Social Science Chapter 10 अन्य परीक्षोपयोगी प्रश्न

MP Board Class 10th Social Science Chapter 10 वस्तुनिष्ठ प्रश्न

बहु-विकल्पीय प्रश्न

प्रश्न 1.
चरणपादुका गोलीकाण्ड हुआ था
(i) 10 जनवरी, 1895
(ii) 14 जनवरी, 1931
(iii) 25 जनवरी, 1934
(iv) 14 फरवरी, 1938
उत्तर:
(ii) 14 जनवरी, 1931

प्रश्न 2.
राज्य प्रजामण्डल का गठन कब किया गया ?
(i) सन् 1943 में
(ii) 1941 में
(iii) सन् 1935 में
(iv) सन् 1932 में
उत्तर:
(i) सन् 1943 में

प्रश्न 3.
गुरिल्ला पद्धलि से अंग्रेजों से युद्ध किया
(i) राजा लक्ष्मन सिंह ने
(ii) बख्तावर सिंह ने
(iii) तात्या टोपे ने
(iv) गंजन सिंह कोरकू ने
उत्तर:
(iii) तात्या टोपे ने

रिक्त स्थानों की पूर्ति कीजिए

  1. मध्य प्रदेश के पश्चिमी निमाड़ में ……………… ब्रिटिश सरकार के लिए आतंक का पर्याय था।
  2. कर्नल गुरुबक्श सिंह ढिल्लन मध्य प्रदेश के ………………. जिले के निवासी थे।

उत्तर:

  1. टंट्या भील
  2. शिवपुरी।

सत्य/असत्य

प्रश्न  1.
रानी लक्ष्मीबाई का शहीद स्थल झाँसी में है।
उत्तर:
असत्य

प्रश्न  2.
राजा बख्तावर को इन्दौर में फाँसी दी गई।
उत्तर:
सत्य

प्रश्न  3.
झण्डा आन्दोलन नागपुर तथा देश के अन्य भागों में फैल गया।
उत्तर:
सत्य

प्रश्न  4.
चरणपादुका गोलीकाण्ड को मध्य प्रदेश का जलियाँवाला बाग के नाम से भी जाना जाता है। (2012)
उत्तर:
सत्य

प्रश्न  5.
टंट्या भील ब्रिटिश सरकार के लिए आतंक का पर्याय था। (2013)
उत्तर:
सत्य

जोड़ी मिलाइए
MP Board Class 10th Social Science Solutions Chapter 10 स्वतन्त्रता आन्दोलन में मध्य प्रदेश का योगदान 2
उत्तर:

  1. → (ख)
  2. → (ग)
  3. → (क)

एक शब्द/वाक्य में उत्तर

प्रश्न 1.
म. प्र. का ‘जलियाँवाला बाग’ किसे कहा जाता है ? (2009)
उत्तर:
चरणपादुका गोलीकाण्ड

प्रश्न 2.
मण्डला जिले के रामगढ़ की रानी का नाम लिखिए। (2009)
उत्तर:
रानी अवन्तीबाई

प्रश्न 3.
ठाकुर रणमत सिंह मध्य प्रदेश के किस जिले से सम्बन्धित थे ?
उत्तर:
सतना

प्रश्न 4.
भीलों के बीच आज भी प्रेरणास्वरूप याद किया जाता है ?
उत्तर:
टंट्या भील

प्रश्न 5.
चन्द्रशेखर आजाद की क्रान्तिकारी गतिविधियों का केन्द्र कौन-सा स्थान था ?
उत्तर:
नगर ओरछा

प्रश्न 6.
चन्द्रशेखर आजाद का जन्म कहाँ हुआ था? (2009, 13)
उत्तर:
मध्य प्रदेश के अलीराजपुर जिले के भाभरा ग्राम में।

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MP Board Class 10th Social Science Chapter 10 अति लघु उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 1.
मध्य प्रदेश में राष्ट्रीय आन्दोलन किन स्थानों में अत्यधिक सक्रिय रहा ?
उत्तर:
मध्य प्रदेश में राष्ट्रीय आन्दोलन इन्दौर, उज्जैन, जबलपुर, ग्वालियर, रतलाम, धार तथा शिवपुरी स्थानों पर अत्यधिक सक्रिय रहा।

प्रश्न 2.
मध्य प्रदेश के राष्ट्रीय आन्दोलन के प्रमुख नेताओं के नाम लिखिए।
उत्तर:
तात्या टोपे, महारानी लक्ष्मीबाई, रानी अवन्तीबाई, राणा बख्ताबर सिंह, वीर नारायण तथा ठाकुर रणमत सिंह मध्य प्रदेश के राष्ट्रीय आन्दोलन के प्रमुख नेता थे।

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MP Board Class 10th Social Science Chapter 10 लघु उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 1.
घोड़ा-डोंगरी का जंगल सत्याग्रह की प्रमुख घटनाएँ बताइए।
उत्तर:
घोड़ा-डोंगरी का जंगल सत्याग्रह-आदिवासी बाहुल्य बैतूल जिला स्वतन्त्रता आन्दोलन का प्रमुख केन्द्र रहा है और यहाँ के वनवासियों ने पराधीनता के विरुद्ध संघर्ष किया। सन् 1930 के जंगल सत्याग्रह के समय बैतूल के आदिवासी समुदाय ने आन्दोलन की मशाल थाम ली। शाहपुर के समीप बंजारी ढाल का गंजन सिंह कोरकू आदिवासियों का नेता था। जब पुलिस गंजन सिंह को गिरफ्तार करने बंजारी ढाल पहुँची तो आदिवासियों ने प्रबल प्रतिरोध खड़ा कर दिया। आदिवासियों पर पुलिस ने गोलियाँ बरसाईं, जिसमें कोमा गोंड घटनास्थल पर ही शहीद हो गया। गंजन सिंह पुलिस का घेरा तोड़कर निकल गया। उधर जम्बाड़ा में पुलिस की गिरफ्त से आदिवासियों को मुक्त कराने के लिए एकजुट भीड़ पर पुलिस के बर्बर बल प्रयोग में राम तथा मकडू गोंड शहीद हो गये।

प्रश्न 2.
चरणपादुका गोलीकाण्ड को बताइए।
उत्तर:
चरणपादुका गोलीकाण्ड-14 जनवरी, 1931 को मकर संक्रान्ति के दिन छतरपुर रियासत में उर्मिल नदी के किनारे चरणपादुका में स्वतन्त्रता सेनानियों की एक विशाल सभा चल रही थी। बड़ी संख्या में लोग इकट्ठे हुए थे। नौगाँव स्थित अंग्रेज पोलिटिकल एजेण्ट के हुक्म पर बिना किसी चेतावनी के भीड़ पर अन्धाधुन्ध गोलियाँ चला दी गई, जिसमें अनेक लोग मारे गये। मध्य प्रदेश का जलियाँवाला बाग कहे जाने वाले इस लोमहर्षक काण्ड में सरकार ने छः स्वतन्त्रता सेनानी-सेठ सुन्दरलाल, धरमदास खिरवा, चिरकू, हलके कुर्मी, रामलाल कुर्मी और रघुराज सिंह का पुलिस गोली से शहीद होना स्वीकारा।।

प्रश्न 3.
राष्ट्रीय आन्दोलन के समय मध्य प्रदेश की शासन व्यवस्था का संक्षिप्त वर्णन कीजिए।
उत्तर:
राष्ट्रीय आन्दोलन के समय मध्य प्रदेश की शासन व्यवस्था-राष्ट्रीय आन्दोलन के समय मध्य प्रदेश दो प्रकार की शासन व्यवस्थाओं से संचालित रहा। जबलपुर, मण्डला, सागर, बैतूल, छिन्दवाड़ा, होशंगाबाद, खण्डवा और इनसे जुड़े हुए क्षेत्र सीधे ब्रिटिश शासन के अन्तर्गत थे। ये क्षेत्र मध्य प्रान्त के अंग थे। ब्रिटिश शासन के अधीन इन क्षेत्रों में जनता अत्यधिक कष्ट में थी और राष्ट्रीय कांग्रेस की स्थापना के बाद इन स्थानों पर इसकी शाखाओं की स्थापना हुई। अतः राष्ट्रीय आन्दोलन में इन स्थानों पर अधिक सक्रियता दिखायी दी। वर्तमान मध्य प्रदेश के शेष भाग में देशी रियासतों का शासन था। इन्दौर, ग्वालियर, रीवा, देवास, भोपाल आदि अनेक स्थानों की देशी रियासतें अंग्रेजों के संरक्षण में थीं। 1857 की क्रान्ति के पश्चात् अंग्रेजों ने देशी रियासतों के शासकों के प्रति नरम नीति अपनायी। इसके अतिरिक्त रियासतों की जनता रियासती शासन व्यवस्था से अपेक्षाकृत सन्तुष्ट थी। अतः रियासतों में राष्ट्रीय आन्दोलन से सम्बन्धित गतिविधियाँ अपेक्षाकृत मन्द गति में रहीं।

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MP Board Class 10th Social Science Chapter 10 दीर्घ उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 1.
मध्य प्रदेश में राष्ट्रीय आन्दोलन किन स्थानों पर अधिक सक्रिय रहा ? एक लेख लिखिए।
उत्तर:
मध्य प्रदेश में राष्ट्रीय आन्दोलन के मुख्य केन्द्र

जबलपुर – स्वाधीनता आन्दोलन में जबलपुर का योगदान महत्त्वपूर्ण रहा। राबर्टसन कॉलेज के छात्र चिदम्बरम् पिल्लई तथा उसके साथियों ने यहाँ क्रान्तिकारी दल का संगठन किया। पिल्लई इतिहास प्रसिद्ध ‘कामा गाटा मारू’ काण्ड से सम्बन्धित थे। सन् 1916 एवं सन् 1917 में लोकमान्य तिलक जबलपुर आये थे। राष्ट्रपिता महात्मा गांधी का भी 1921 में जबलपुर आगमन हुआ। जबलपुर के नागरिकों ने स्वराजनिधि कोष के लिए 20,000 रुपये की धनराशि भेंट की थी। झण्डा सत्याग्रह का प्रारम्भ जबलपुर से ही हुआ था। नमक सत्याग्रह के समय सेठ गोविन्ददास व पण्डित द्वारिका प्रसाद ने जबलपुर में नमक का कानून तोड़ा। सन् 1942 के आन्दोलन में भी जबलपुर में हड़ताल की गई और जुलूस निकाले गए। सन् 1945 में जबलपुर में स्थित भारतीय सिगनल कोर के जवानों ने मुम्बई की रॉयल इण्डियन नेवी के विद्रोह की सहानुभूति के पक्ष में हड़ताल की और अपनी बैरकें छोड़कर बड़ा जुलूस निकाला।

इन्दौर – 20वीं शताब्दी के आरम्भ में राजनीतिक चेतना का नया दौर इन्दौर में शुरू हुआ। 1907 में ज्ञान प्रकाश मण्डल स्थापित किया गया, जिसमें राष्ट्रीय विचारों के प्रचार का काम प्रारम्भ किया। सन् 1918 में हिन्दी साहित्य सम्मेलन का अधिवेशन गांधीजी की अध्यक्षता में इन्दौर में हुआ। गांधीजी की यात्रा से इन्दौर में राष्ट्रीय विचारों को बल मिला। कांग्रेस की शाखा की स्थापना इन्दौर में सन् 1920 में हुई। इन्दौर में स्वदेशी वस्तुओं के प्रयोग का प्रचार हुआ। कन्हैयालाल खादीवाला ने इसमें महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाई।

भारत छोड़ो आन्दोलन में भी इन्दौर की जनता ने पूरे जोश के साथ भाग लिया। बड़ी संख्या में प्रजामण्डल, मजदूर संघ, कांग्रेस तथा महिला संगठनों के देशभक्त जेलों में बन्द रहे। जनता ने उग्र संघर्ष किया। सितम्बर 1947 में इन्दौर में उत्तरदायी शासन स्थापित हुआ।

भोपाल – सन् 1934 में भोपाल में राजनैतिक गतिविधियाँ आरम्भ हुईं। इसी वर्ष शाकिर अली खान ने ‘सुबहे वतन’ उर्दू साप्ताहिक और भोपाल राज्य की हिन्दू सभा ने ‘प्रजा पुकार’ हिन्दी साप्ताहिक निकाले। सन् 1938 में भोपाल के हिन्दू और मुसलमान नेताओं से मिलकर प्रजामण्डल की स्थापना की। सन् 1939 में गांधीजी भोपाल आये थे। सन् 1946 में प्रजामण्डल एवं भोपाल नवाब के बीच समझौता हो गया। सन् 1946 में ही भोपाल नगर में विलीनीकरण के समर्थन में जोर-शोर से आन्दोलन प्रारम्भ हुआ।

मास्टर लाल सिंह, डॉ. शंकरदयाल शर्मा, सूरजमल जैन, प्रेम श्रीवास्तव आदि की गिरफ्तारियाँ हुईं। इस आन्दोलन में महिलाओं ने भी बढ़-चढ़कर भाग लिया। शासन ने भारी यातनाएँ दीं। अत्याचारों के विरोध में 22 दिनों तक बाजारों में पूर्ण हड़ताल रही। बरेली, सीहोर, उदयपुरा आदि तहसीलों में आन्दोलन आग की तरह फैल गया। उदयपुरा तहसील में बोरासघाट में लोमहर्षक गोलीकाण्ड हुआ जिसमें चार वीर नवयुवक शहीद हो गये। इस घटना से तहलका मच गया। मन्त्रिमण्डल को भंग कर दिया गया। नवाब से चार माह वार्ता चलने के पश्चात् 1 जून, 1946 को भोपाल रियासत केन्द्र में विलीन हो गई।

विन्ध्य क्षेत्र – विन्ध्य क्षेत्र में रीवा राज्य राष्ट्रीय आन्दोलन में सबसे आगे रहा। सन् 1920 के कांग्रेस के नागपुर अधिवेशन के पश्चात् बघेल खण्ड में कांग्रेस के संगठन का कार्य शुरू हुआ सविनय अवज्ञा आन्दोलन के समय रीवा के राष्ट्रीय कार्यकर्ताओं पर अत्याचार किये गये। सन् 1943 में राज्य प्रजामण्डल का गठन हुआ और छतरपुर में कार्यालय की स्थापना की गई भारत स्वतन्त्र होने के पश्चात् विन्ध्य क्षेत्र की रियासतों ने केन्द्रीय सरकार में विलीन होने के संकल्प पत्र पर हस्ताक्षर कर दिये।

ग्वालियर – ग्वालियर तो क्रान्तिकारियों का गढ़ था। सन् 1930 में ग्वालियर में विदेशी वस्त्र बहिष्कार संस्था बनायी गयी। विदेशों से हथियार प्राप्त कर क्रान्तिकारियों तक पहुँचाने के सम्बन्ध में सन् 1932 में ग्वालियर-गोवा षड्यन्त्र काण्ड हुआ इसमें बालकृष्ण शर्मा, गिरधारी सिंह, रामचन्द्र सरबटे, स्टीफन जोसेफ को दण्डित किया गया। सन् 1937 में राजनैतिक कारणों के लिए ग्वालियर राज्य सार्वजनिक सभा ने कार्य प्रारम्भ किया। सन् 1942 के भारत छोड़ो आन्दोलन का सार्वजनिक सभा ने समर्थन किया तथा विशाल प्रदर्शनी और हड़तालें कीं।

उपर्युक्त मुख्य स्थानों के अतिरिक्त अनेक छोटे-छोटे नगरों और कस्बों में राष्ट्रीय आन्दोलन तीव्रता से फैला जिनमें प्रमुख निम्न हैं-धमतरी, मण्डला, दमोह, नरसिंहपुर, झाबुआ, धार, मन्दसौर, भानपुर, छिन्दवाड़ा, सागर, ओरछा, रतलाम, विदिशा आदि।

MP Board Class 10th Hindi Vasanti Solutions Chapter 10 मजदूरी और प्रेम

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MP Board Class 10th Hindi Vasanti Solution Chapter 10 मजदूरी और प्रेम (सरदार पूर्ण सिंह)

मजदूरी और प्रेम पाठ्य-पुस्तक के प्रश्नोत्तर

मजदूरी और प्रेम लघु-उत्तरीय प्रश्नोत्तर

प्रश्न 1.
स्वभाव से साधु कौन होते हैं?
उत्तर-
हल चलाने और भेड़ चराने वाले प्रायः स्वभाव से ही साधु होते हैं।

प्रश्न 2.
किसान को ब्रह्मा के समान क्यों माना है?
उत्तर-
किसान अन्न में, फूल में, फल में आहुति-सा दिखाई देता है। यह कहा जाता है कि ब्रह्माहुति से संसार पैदा हुआ है। इसलिए किसान को ब्रह्मा के समान माना है।

प्रश्न 3.
घर आए मेहमान का स्वागत किसान किस प्रकार करता है?
उत्तर-
घर आए मेहमान का स्वागत किसान अपनी मीठी बोली, मीठे जल और अन्न से तृप्त करके करता है।

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प्रश्न 4.
किसी भेड़ के अस्वस्थ होने पर गड़ेरिया कैसा अनुभव करता है?
उत्तर-
किसी भेड़ के अस्वस्थ होने पर गड़ेरिया दुख का अनुभव करता है। यह इसलिए कि भेड़ों की सेवा ही इनकी पूजा है। जरा एक भेड़ बीमार हुई, सब परिवार पर विपत्ति आई। दिन-रात उसके पास बैठे काट देते हैं। उसे अधिक पीड़ा हुई तो इन सब की आँखें शून्य आकाश में किसी को देखने लग गईं। पता नहीं ये किसे बुलाती हैं। हाथ जोड़ने तक की इन्हें फुरसत नहीं। पर हाँ, इन सबकी आँखें किसी के आगे शब्द-रहित संकल्प-रहित मौन प्रार्थना में खुली हैं। दो रातें इसी तरह गुजर गईं। इनकी भेड़ अब अच्छी है। इनके घर मंगल हो रहा है। सारा परिवार मिलकर गा रहा है।

प्रश्न 5.
सच्चा आनंद किसमें छिपा रहता है?
उत्तर-
सच्चा आनंद श्रम में छिपा रहता है।

मजदूरी और प्रेम दीर्घ-उत्तरीय प्रश्नोत्तर

प्रश्न 1.
गुरुनानक ने किसान के संबंध में क्या-क्या कहा है?
उत्तर-
गुरुनानक ने किसान के संबंध में कहा-“भोले भाव मिलें रघुराई” भोले-भाले किसानों को ईश्वर अपने खुले दीदार का दर्शन देता है। उनकी फूस की छतों में से सूर्य और चन्द्रमा छन-छनकर उनके बिस्तरों पर पड़ते हैं। ये प्रकृति के जवान साधु हैं। जब कभी मैं इन बे-मुकुट के गोपालों के दर्शन करता हूँ, मेरा सिर स्वयं ही झुक जाता है। जब मुझे किसी फकीर के दर्शन होते हैं तब मुझे मालूम होता है कि नंगे सिर, नंगे पाँव, एक टोपी सिर पर, एक लँगोटी कमर में, एक काली कमली कंधे पर, एक लंबी लाठी हाथ में लिये हुए गौवों का मित्र, बैलों का हमजोली, पक्षियों का हमराज, महाराजाओं का अन्नदाता, बादशाहों को ताज पहनाने और सिंहासन पर बिठाने वाला, भूखों और नंगों को पालने वाला, समाज के पुष्पोद्यान का माली और खेतों का वाली जा रहा है।”

प्रश्न 2. किसान को हितैषी क्यों कहा गया है?
उत्तर-
दया, वीरता और प्रेम जैसा किसान में दिखाई देता है, वैसा और कहीं नहीं मिलता है। इसलिए किसान को हितैषी कहा गया है।

प्रश्न 3.
गड़रिया आनंद का अनुभव कब करता है?
उत्तर-
गड़रिया आनंद का अनुभव तब करता है, जब उसकी बीमार भेड़. (भेड़ें) अच्छी हो जाती है (है)।

प्रश्न 4.
‘हाथ की बनी चीज में रस भर आता है।’ समझाइए।
उत्तर-
‘हाथ की बनी चीजें सरस होती हैं। यह इसलिए उसमें प्रेम की सच्चाई और हृदय की पवित्रता का योग होता है। इसलिए सच्चा आनंद तो हाथ की बनी हुई चीजों से आता है। यही जीवन का वास्तविक आनंद है। इस आनंद के सामने स्वर्ग-प्राप्ति की इच्छा नहीं रह जाती है।

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प्रश्न 5.
मनुष्य का साधारण जीवन कब श्रेष्ठता प्राप्त कर सकता है?
उत्तर-
मनुष्य का साधारण जीवन तब श्रेष्ठता प्राप्त कर सकता है, जब वह मजदूरी और हाथ के कला-कौशल में लग जाता है।

प्रश्न 6.
निम्नलिखित पंक्तियों का भाव स्पष्ट कीजिए-
(क) हल चलाने वाले अपने जीवन का हवन किया करते हैं।
(ख) ये प्रकृति के जवान साधु हैं।
उत्तर-
(क) हल चलाने वाले अपने जीवन का हवन किया करते हैं।
उपर्युक्त वाक्यांश के द्वारा लेखक ने यह भाव प्रकट करना चाहा है कि हल चलाने वाले किसान घोर परिश्रम करते हैं। वे अपना पूरा जीवन इसी में हवन की तरह करके दूसरों को सुख-आनंद देते रहते हैं।

(ख) ये प्रकृति के जवान साधु हैं।
उपर्युक्त वाक्य के द्वारा लेखक ने यह भाव प्रकट करना चाहा है कि किसान अपने घोर परिश्रम से स्वस्थ और तगड़ा रहता है। वह निरोग रहता है। उससे सरलता और पवित्रता टपकती रहती है।

मजदूरी और प्रेम भाषा-अनुशीलन

प्रश्न 1.
निम्नलिखित शब्दों में से तत्सम, तद्भव, देशज और विदेशी शब्द अलग-अलग लिखिए-
भाती, पृथ्वी, फूल, प्रायः, मिट्टी, दिन, नहाना, दीदार, ताज, संकल्प, नेत्र, आर्ट, टीन, दाम, गऊएं।
उत्तर-
तत्सम शब्द – पृथ्वी, संकल्प, नेत्र,
तद्भव शब्द – फूल, मिट्टी, दिन।
देशज शब्द – भाती, प्रायः नहाना, टीन, गऊएं
विदेशी शब्द – दीदार, आर्ट, दाम

प्रश्न 2.
निम्नलिखित शब्दों की वर्तनी शुद्ध कीजिए-
आहूति, ब्रम्हा, केंद्र, अध्यात्मिक, कौशल, निरजीव, ईश्वर।
उत्तर-
आहुति, ब्रह्मा, केंद्र, आध्यात्मिक, कौशल, निर्जीव, ईश्वर।।

प्रश्न 3.
पाठ में सामासिक पद हरी-भरी आया है, जो द्वंद्व समास है। इसी प्रकार के अन्य सामासिक शब्द पाठ से छाँटकर लिखिए।
उत्तर-
हवनशाला, रग-रग, घास-पात, इर्द-गिर्द, प्रेम-धर्म, आनंद-मंगल।

मजदूरी और प्रेम योग्यता-विस्तार

प्रश्न 1.
किसान और श्रमिक के जीवन में क्या अंतर आया है? लिखिए।

प्रश्न 2.
हाथ से बनी और मशीन से बनी चीजों में श्रेष्ठ कौन-सी है? इस विषय पर वाद-विवद प्रतियोगिता का आयोजन कीजिए।

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प्रश्न 3.
आप अपने घर में कौन-कौन-से स्वदेशी वस्तुओं का उपयोग करते हैं, उसकी सूची बनाइए।
उत्तर-
उपर्युक्त प्रश्नों को छात्र/छात्रा अपने अध्यापक/अध्यापिका की सहायता से हल करें।

मजदूरी और प्रेम परीक्षोपयोगी अतिरिक्त प्रश्नोत्तर

मजदूरी और प्रेम अर्थग्रहण संबंधी प्रश्नोत्तर

प्रश्न 1.
‘मजदूरी और प्रेम’ पाठ में लेखक ने परिश्रम को महत्त्व क्यों दिया है?
उत्तर-
‘मजदूरी और प्रेम’ पाठ में लेखक ने परिश्रम को इसलिए महत्त्व दिया है कि इससे जो रस निकलता है वह मशीनों से नहीं। लेखक को विश्वास है कि जिस चीज में मनुष्य के प्यारे हाथ लग जाते हैं। उसमें उसके हृदय का प्रेम और मन की पवित्रता सूक्ष्म रूप से मिल जाती है। उत्तम-से-उत्तम और नीच-से-नीच काम सब मजदूर ही करते हैं, इस प्रकार लेखक का यह मानना है कि बिना मजदूरी बिना हाथ के कला-कौशल के विचार और चिंतन किसी काम के नहीं हैं। इसलिए मजदूरों को महत्त्व देने वाले ही देश उन्नति करते हैं, यही कारण है कि लेखक ने भविष्य में मजदूरों के ही प्रभाव से सुखद जीवन की आशाएँ की हैं।

प्रश्न 2.
भेड़ों और गड़रियों के परस्पर क्या संबंध हैं?
उत्तर-
भेड़ों और गड़रियों के संबंध बहुत ही घनिष्ठ हैं, गड़रिया भेड़ों की सेवा को ही अपनी पूजा समझता है, थोड़ी-सी भी एक भेड़ बीमार हुई तो मानो सारे परिवार पर एक विपत्ति आ गई है। दिन-रात उनके पास बैठे काट देते हैं। उन्हें अधिक पीड़ा हुई तो इन सबकी आँखें शून्य आकाश में किसी को देखते-देखते गल गईं, पता नहीं ये किसे बुलाती हैं, इन्हें और किसी की चिन्ता तब नहीं रहती है, भेड़ों के अच्छी होने पर वे खुशी से फूले नहीं समाते हैं। इस प्रकार भेड़ें ही इनके तन-मन-धन आदि सब कुछ होती हैं।

प्रश्न 3.
लेखक ने बूढ़े गड़रिये से क्या कहा?
उत्तर-
लेखक ने बूढ़े गड़रिये से कहा-“भाई, अब मुझे भी भेड़ें लेने दो, ऐसे ही मूक-जीवन से मेरा भी कल्याण होगा, विद्या को भूल जाऊँ, तो अच्छा है। मेरी पुस्तकें खो जाएँ तो उत्तम है, ऐसा होने से कदाचित् इस वनवासी परिवार की तरह मेरे दिल के नेत्र खुल जाएँ और मैं ईश्वरीय झलक देख सकूँ। चंद और सूर्य की विस्तृत ज्योति में जो वेदगान हो रहा है, इस गड़रिये की कन्याओं की तरह मैं सुन तो न स. परन्तु कदाचित् प्रत्यक्ष देख सकूँ।

प्रश्न 4.
यंत्रों और मनुष्य के हाथ से बने हुए कामों में लेखक ने क्या भेद बताया है?
उत्तर-
मनुष्य के हाथ से बने हुए कामों में उसकी प्रेममय पवित्र आत्मा की सगंध आती है। राफल आदि से विचित्र चित्रों में उसकी कला-कुशलता को देख इतनी सदियों के बाद भी उनके अंतःकरण के सारे भावों का अनुभव होने लगता है। केवल चित्र का ही दर्शन नहीं, किन्तु साथ ही उसमें छिपी हुई चित्रकार की आत्मा तक के दर्शन हो जाते हैं, परंतु यंत्रों की सहायता से बने हुए फोटो निर्जीव से मालूम पड़ते हैं। उनमें और हाथ के चित्रों में उतना भेद है जितना कि बस्ती और श्मशान में।

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प्रश्न 5.
लेखक ने मनुष्य के हाथ का महत्त्व क्यों बतलाया है?
उत्तर-
लेखक के अनुसार मनुष्य के हाथ ही तो ईश्वर के दर्शन कराने वाले होते हैं, इसीलिए मनुष्य और मनुष्य की मजदूरी का तिरस्कार करना नास्तिकता है, इस प्रकार यह कहा जा सकता है कि बिना. मजदूरी, बिना हाथ के कला-कौशल के विचार और चिंतन किसी काम के नहीं हैं। यही कारण है कि जिन देशों में हाथ और मुँह पर मजदूरी की धूल नहीं पड़ने पाती, वे धर्म और कला-कौशल में कभी उन्नति नहीं कर सकते। इसके विपरीत उन्नति वे ही करते हैं जिनसे जोतने वाले, काटने और मजदूरी का काम लिया जाता है।

प्रश्न 6.
रिक्त स्थानों की पूर्ति दिए गए विकल्पों में से उचित शब्दों के चयन से कीजिए।
1. आचरण की सभ्यता के लेखक हैं-(रामचन्द्र शुक्ल, अध्यापक पूर्णसिंह)
2. हल चलाने वाले स्वभाव से ……………………………… होते हैं। (सीधे, साधु)
3. पशुओं के अज्ञान में गंभीर ………………………… छिपा हुआ है। (ज्ञान, प्राण)
4. आदमियों की तिजारत करना मूों का …………………….. है। (नाम, काम)
5. धन की पूजा करना ……………………………… है।(आस्तिकता, नास्तिकता)
उत्तर-
1. अध्यापक पूर्णसिंह,
2. साधु,
3. ज्ञान,
4. काम,
5. नास्तिकता।

प्रश्न 3.
निम्नलिखित विकल्पों में से सर्वाधिक उपयुक्त विकल्प चुनकर लिखिए?
1. मजदूरी और प्रेम पाठ में स्पष्ट किया गया है
(क) गड़रिये का महत्त्व
(ख) मजदूरी और श्रम का महत्त्व
(ग) लेखक का महत्त्व
(घ) भेड़ों का महत्त्व।
उत्तर-
(ख) मजदूरी और श्रम का महत्त्व,

2. मजदूरी और प्रेम के लेखक हैं
(क) विनोवा भावे
(ख) अध्यापक पूर्णसिंह
(ग) रामधारी सिंह ‘दिनकर’
(घ) प्रताप नारायण मिश्र।
उत्तर-
(ख) अध्यापक पूर्णसिंह,

3. अध्यापक पूर्णसिंह का जन्म हुआ था
(क) सन् 1881 ई. में
(ख) सन् 1890 ई में.
(ग) सन् 1882 ई. में
(घ) सन् 1888 ई. में।
उत्तर-
(क) सन् 1881 ई. में,

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4. अध्यापक पूर्णसिंह का निधन हुआ था
(क) 31. जनवरी, 1931 ई. को
(ख) 31 अक्तूबर 1931. ई. को
(ग) 31 मई, 1931 ई. को
(घ) 31 मार्च, 1931 ई. को।
उत्तर-
(घ) 31 मार्च, 1931 ई. को,

5. ‘मजदूरी और प्रेम’ पाठ है-
(क) कहानी
(ख) संस्मरण
(ग) निबन्ध
(घ) आत्मकथा।
उत्तर-
(ग) निबंध।

प्रश्न 4.
सही जोड़ी मिलाकर लिखिए-
विनय पत्रिका – जैनेन्द्र कुमार
काकी – तुलसीदास
मुक्ति गमन – अध्यापक पूर्णसिंह
मजदूरी और प्रेम – पंडित माखन लाल चतुर्वेदी
विज्ञान और साहित्य – सियाराम शरण गुप्त।
उत्तर-
विनय पत्रिका – तुलसीदास
काकी – सियाराम शरण गुप्त
मुक्ति गमन – पंडित माखन लाल चतुर्वेदी
मजदूरी और प्रेम – अध्यापक पूर्णसिंह
विज्ञान और साहित्य – जैनेन्द्र कुमार।

प्रश्न 5.
निम्नलिखित वाक्य सत्य हैं या असत्य? वाक्य के आगे लिखिए।
1. किसान के खेत उनकी हवनशाला है।
2. वृक्षों की तरह उसका भी जीवन एक प्रकार का मौन जीवन है।
3. मजदूरी करने से हृदय-परिवर्तन होता है।
4. मनुष्य के विकास के लिए फकीरी आवश्यक है।
5. जिस चीज में मनुष्य के प्यारे हाथ लगते हैं, उसमें मुर्दे को जिंदा करने की शक्ति आ जाती है।
उत्तर-
1. सत्य,
2. सत्य,
3. असत्य,
4. असत्य,
5. सत्य।

प्रश्न 6.
निम्नलिखित कथनों का उत्तर एक शब्द में दीजिए
1. लेखक को कौन अन्न में, फूल में, फल में आहुति-सा दिखाई देता है?
2. ‘भोले भाव मिलें रघुराई’ किसने कहा?
3. भेड़ों की सेवा किसकी पूजा है?
4. होटल में बने हुए भोजन कैसे होते हैं?
5. गुरुनानक जिस बढ़ई के पास ठहरे, उसका क्या नाम था?
उत्तर-
1. किसान,
2. गुरुनानक ने,
3. गड़रिये की,
4. नीरस,
5. भाई लालो।

मजदूरी और प्रेम लघु-उत्तरीय प्रश्नोत्तर

प्रश्न 1.
लेखक ने बूढ़े गड़रिये को किस रूप में देखा?
उत्तर-
लेखक ने बूढ़े गड़रिये को हरे-हरे वृक्षों के नीचे देखा, उसकी भेड़ों के ऊन सफेद थे, ये कोमल-कोमल पत्तियों को खा रही थी। गड़रिया बैठा हुआ आकाशवाणी की ओर देख रहा था। वह ऊन कात रहा था। उसके बाल सफेद थे, उसकी प्यारी स्त्री उसके पास रोटी पका रही थी, उसकी दो जवान कन्याएँ उसके साथ जंगल में भेड़ चरा रही थीं।

प्रश्न 2.
गड़रियों के परिवार को कुटी की आवश्यकता क्यों नहीं होती है?
उत्तर-
गड़रियों के परिवार को कुटी की आवश्यकता नहीं होती है, यह इसलिए कि ये जहाँ जाते हैं एक घास की झोपड़ी बना लेते हैं। दिन को सूर्य और रात को तारागण इनके मित्र-साथी होते हैं।

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प्रश्न 3.
श्रम के संबंध में लेखक के क्या विचार हैं?
उत्तर-
श्रम के संबंध में लेखक ने कहा है कि श्रम से ही सच्चे आनंद की प्राप्ति होती हैं। इसी से ईश्वर के दर्शन होते हैं। श्रम का तिरस्कार करना नास्तिकता है। श्रम से ही किसी देश की कला-कौशल की उन्नति होती है।

प्रश्न 4.
प्रेम शरीर के कौन-कौन से अंग हैं?
उत्तर-
लकड़ी, ईंट और पत्थर को मूर्तिमान करने वाले लुहार, बढ़ई, चमार तथा किसान आदि वैसे ही पुरुष हैं। जैसे कि कवि, महात्मा और योगी उत्तम-से-उत्तग और नीच-से-नीच काम, सबके सब प्रेम-शरीर के अंग हैं।

प्रश्न 5.
मजदूरों की यथार्थ पूजा होने पर क्या होगा?
उत्तर-
मजदूरों की यथार्थ पूजा होने पर कला-रूपी धर्म की वृद्धि होगी, तभी नए कवि पैदा होंगे, तभी नये औलियों का उदय होगा, ये सबके सब मजदूरों के दूध से पलेंगे। धर्म, योग, शुद्धाचरण, सभ्यता और कविता आदि के फूल इन्हीं मजदूर ऋषियों के उद्यान में खिलेंगे।

प्रश्न 6.
गड़रिये का सखा कौन है और उसका जीवन कैसे बीतता है?
उत्तर-
गड़रिये का सच्चा सखा उसकी भेड़ें ही हैं। गड़रिये का जीवन अपनी भेड़ों को चराने और उनकी सेवा करने में बीतता है। वह उनकी सेवा में ही अपनी पूरी जिंदगी काट लेते हैं भेड़ों का सुख-दुख ही इनकी जिंदगी का समूचा सुख-दुःख है। इस प्रकार गड़रिये की एक-एक जिंदगी बीत जाती है।

मजदूरी और प्रेम लिखक-परिचय

सरदार ‘पूर्णसिंह’ का भारतेन्दु युगीन गद्य लेखकों में विशिष्ट स्थान है। विचारात्मक निबंधकारों में आपका स्थान अत्यधिक चर्चित और सम्मानित है।

जीवन-परिचय- अध्यापक ‘पूर्णसिंह’ का जन्म सन् 1881 ई. में उत्तर-प्रदेश के एबटाबाद जिले के एक गाँव में हुआ था। आपकी प्रारंभिक शिक्षा रावलपिंडी में हुई। आप इंटरमीडिएट परीक्षा उत्तीर्ण करने के बाद उच्च-शिक्षा प्राप्त करने के लिए जापान गए; जहाँ आपने, व्यावहारिक रसायनशास्त्र की उच्च शिक्षा प्राप्त की। यहीं पर आपातकालीन महान् संत व दार्शनिक स्वामी रामतीर्थ से आपकी भेंट हुई। फलतः आप इनके विचारों से तुरंत ही प्रभावित हुए और इसके परिणामस्वरूप आप उनके शिष्य होकर सुप्रसिद्ध वेदांती बन गए। जापान से लौटकर आप देहरादून के इम्पीरियल फारेस्ट इन्स्टीट्यूट (फारेस्ट रिसर्च इन्स्टीट्यूट) में इम्पीरियल केमिस्ट के पद पर कार्य करने लगे। कुछ समय के बाद विभागीय अधिकारियों से अनबन और मतभेद होने के कारण आपने यहाँ से इस्तीफा दे दिया।

रचनाएँ-अध्यापक ‘पूर्णसिंह’ गद्य-क्षेत्र में अत्यंत महत्त्वपूर्ण स्थान रखते हैं। आपके द्वारा लिखे हुए केवल पाँच ही लेख मिलते हैं। आपके लेख भारतीय संस्कृति और सभ्यता के पोषक और प्रतीक हैं। ‘मजदूरी और प्रेम’ आपका लोकप्रिय लेख है।

भाषा-शैली-अध्यापक ‘पूर्णसिंह’ की भाषा मुख्य रूप से हिंदी है। आपकी मातृभाषा पंजाबी का इस पर अधिक प्रभाव है। हिंदी की प्रकृति की आपको सही पहचान थी। इसकी अभिव्यक्ति को आपने जिस कुशलता और क्षमता के द्वारा प्रकट किया है, वह अन्यत्र दुर्लभ है। आपकी शैली प्रौढ़ और सजीव होते हुए अत्यंत प्रभावशाली है। आपकी भाषा में उर्दू और अंग्रेजी के शब्दों की प्रमुखता है।

साहित्यिक महत्त्व-अध्यापक पूर्णसिंह जी का हिंदी-साहित्य में अत्यंत महत्त्वपूर्ण स्थान है। आप भारतीय संस्कृति और सभ्यता के कुशल चित्रकार होने के कारण अपने साहित्यिक-व्यक्तित्व के द्वारा अत्यंत लोकप्रिय हैं। आपके विचारोत्तेजक साहित्य आपके व्यक्तित्व की पूरी पहचान प्रस्तुत करते हैं।

मजदूरी और प्रेम निबंध का सारांश

‘मजदूरी और प्रेम’ अध्यापक ‘पूर्णसिंह’ द्वारा लिखित एक विचारात्मक निबंध है। इस निबंध के द्वारा अध्यापक पूर्णसिंह ने मानवीय-श्रम और उसके महत्त्व को स्पष्ट किया है।

लेखक कह रहा है कि उसने जिस गड़रिये को श्रम करते हुए देखा है, उससे उसकी श्रमशक्ति का महत्त्व स्पष्ट होता है। वह ऊन कातता हुआ प्रेम-भरी आँखों से अपनी निरोगता का परिचय देते हुए दिखाई देता है। उसकी प्यारी स्त्री उसके पास ही रोटी पका रही है। उसकी दो जवान कन्याएँ जंगल-जंगल भेड़ चरा रही हैं। इस दिव्य-परिवार को किसी की जरूरत नहीं। सर्य और तारे ही उसके साथी हैं भेडों की सेवा ही उसकी एकमात्र सेवा है। भेड़ों की बीमारी से पूरा परिवार विपत्ति में पड़ जाता है। अपनी मौन भाषा के द्वारा ही ये इसके लिए प्रार्थना करते हैं। भेड़ों के अच्छा होने पर पूरा परिवार मंगलगान गाने लगता है। वर्षा के बादल के रिमझिम बरसने और पिता की खुशी से दोनों कन्याएँ खुशी से झूम उठती हैं। वे फूले नहीं समाती हैं।

इस दृश्य को देखकर लेखक अपने पास में खड़े अपने भाई से भेड़ें खरीदने के लिए कहता है कि ऐसे ही सुखी जीवन से उसका कल्याण होगा। इसी से उसके दिल के नेत्र खुल जाएँगे और सूर्य और चंद्रमा की विस्तृत ज्योति के वेदगान को इस गड़रिये की कन्याओं की तरह वह सुन तो न सकेगा परंतु कदाचित् देख सकेगा। इन लोगों के जीवन में अद्भुत आत्मानुभव का भाव भरा हुआ है। वास्तव में गड़रिये की प्रेम-मजदूरी के जीवन में अद्भुत आत्मानुभव का भाव भरा हुआ है। वास्तव में गडरिये की प्रेम-मजदूरी का मूल्य कौन दे सकता है? लेखक मानता है कि उसे मानव के हाथ से बने हुए कामों में उसकी प्रेममय पवित्र आत्मा की सुगंध आती है। यंत्रों से बने हुए फोटो निर्जीव प्रतीत होते हैं। अपने हाथों के चित्रों में उतना ही भेद है, जितना कि बस्ती और श्मशान में। हाथों की चीजों में लोहों की चीजों से अधिक रसानंद प्राप्त होता है। होटल के बने हुए भोजन से कहीं अधिक रसानंद अपनी प्रियतम के हाथों से बने हुए रूखे-सूखे भोजन में प्राप्त होता है। सोने और चाँदी की प्राप्ति से उतना सुखानंद नहीं व्याप्त होता है, जितना अपने काम से मिलता है। मनुष्य की पूजा ही ईश्वर की पूजा है; क्योंकि मनुष्य के हाथ तो ईश्वर के दर्शन कराने वाले होते हैं। इसलिए धर्म और कला-कौशल से किसी देश की उन्नति नहीं होती है अपितु मजदूरों की मजदूरी से ही होती है।

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संसार में जो नया साहित्य निकलेगा, वह मजदूरों के हृदय से निकलेगा। जब ये हाथ में कुल्हाड़ी, सिर पर टोकरी, नंगे सिर और नंगे पाँव धूल से लिपटे और कीचड़ से रंगे हुए जंगल में लकड़ी काटेंगे, तब उनके शब्द वायुयान पर चढ़े हुए चारों दिशाओं में भविष्य के कलाकारों को महान् प्रेरणा देंगे। तब मजदूरों की ही वास्तविक पूजा होगी। तभी धर्म, योग, शुद्धाचरण, सभ्यता, कविता आदि सब कुछ इन्हीं मजदूरों के उद्यान में खिल उठेंगे।

मजदूरी और प्रेम संदर्भ-प्रसंग सहित व्याख्या

हाथ की मेहनत से चीज में जो रस भर जाता है वह भला लोहे के द्वारा बनाई हुई चीज में कहाँ! जिस आलू को मैं स्वयं बोता हूँ, मैं स्वयं पानी देता हूँ, जिसके इर्द-गिर्द की घास-पात खोदकर मैं साफ करता हूँ, उस आलू में जो रस मुझे आता है वह टीन में बंद किए हुए अचार मुरब्बे में नहीं आता। मेरा विश्वास है कि जिस चीज में मनुष्य के प्यारे हाथ लगते हैं, उसमें उसके हृदय का प्रेम और मन की पवित्रता सूक्ष्म रूप से मिल जाती है और उसमें मुर्दे को जिंदा करने की शक्ति आ जाती है। होटल में बने हुए भोजन यहाँ नीरस होते हैं क्योंकि वहाँ मनुष्य मशीन बना दिया जाता है।

शब्दार्थ-इर्द-गिर्द-आस-पास। मुर्दे-निर्जीव।

संदर्भ-प्रस्तुत गद्यांश हमारी पाठ्य-पुस्तक ‘हिंदी सामान्य’ में संकलित लेखक सरदार पूर्ण सिंह लिखित निबंध ‘मजदूरी और प्रेम’ से है।

प्रसंग-प्रस्तुत गद्यांश में लेखक ने हाथ से बनी हुई चीजों के महत्त्व पर प्रकाश डालते हुए कहा है कि

व्याख्या-जो वस्तुएँ हाथ से तैयार होती हैं, उनमें अत्यंत जीवन-रस प्राप्त होता है। इसलिए हाथ के अतिरिक्त लोहे से बनी हुई वस्तुओं में ऐसा आनंद नहीं मिलता है। इसको स्पष्ट करने के लिए लेखक एक उदाहरण देकर कह रहा है कि वह जिस आलू को तैयार करता है और जिसे पानी, निराई और जरूरी बातों से अच्छे रूप में तैयार करता है, उसको खाने में उसे जो अत्यंत आनंद प्राप्त होता है, टीन में बंद किए हुए आचार-मुरब्बे में वह आनंद नहीं मिलता है। लेखक का विश्वास है कि उसमें जिस वस्तु को तैयार करने में मनुष्य अपने हाथों को प्रेमपूर्वक लगा देता है उससे उसके हृदय का प्रेम और मन की पवित्रता झलकती है। यही कारण है कि होटल के बने हुए भोजन नीरस होते हैं। क्योंकि उसमें मनुष्य के हाथ स्वतंत्र काम नहीं करते हैं, अपितु उसे तो एक मशीन की तरह लगा देते हैं। लेकिन जब किसी की प्रियतमा के द्वारा कोई रूखा-सूखा भी भोजन बना दिया जाता है, तब उसमें अत्यधिक आनंद-रस प्राप्त होता है।

विशेष-
1. हाथ की बनी हुई वस्तुओं में मशीन से बनी वस्तुओं से अधिक आनंद रस की प्राप्ति होती है।
2. सम्पूर्ण कथन को सरस और भाषा-शैली के द्वारा प्रस्तुत किया गया है।

अर्थग्रहण संबंधी प्रश्नोत्तर

प्रश्न 1.
हाथ की मेहनत से बनी वस्तु को क्यों महत्त्व दिया है?
उत्तर-
हाथ की मेहनत से बनी वस्तु का महत्त्व है। इसलिए कि वह सरस होती है। उसमें स्वयं की मेहनत होती है। उसमें किसी प्रकार का बेगानापन नहीं होता है।

प्रश्न 2. मनुष्य कहाँ मशीन बना दिया जाता है और क्यों?
उत्तर-
मनुष्य वहाँ मशीन बना दिया जाता है, वह स्वयं अपने-आप कोई काम नहीं कर पाता है। उसे नियंत्रित करके काम कराया जाता है। यह इसलिए उसमें प्रेम और मन की पवित्रता नहीं रह जाता है।

विषय-वस्तु पर आधारित बोध प्रश्नोत्तर

प्रश्न 1.
उपर्युक्त गद्यांश का आशय स्पष्ट कीजिए।
उत्तर-
उपर्युक्त गद्यांश में लेखक ने हाथ से बनी हुई चीजों का महत्त्व मशीन से बनी हुई चीजों से बढ़कर दिया है। यह इसलिए हाथ से बनी हुई चीजों में प्रेम. और पवित्रता होती है। सरसता और अपनापन होता है। उसमें मुर्दे को जिंदा करने की शक्ति आ जाती है। इसके विपरीत मशीन से बनी हुई चीजें नीरस होती हैं।

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2. आदमियों की तिजारत करना मूखों का काम है। सोने और लोहे के बदले मनुष्य को बेचना मना है। आजकल भाप की कलों का दाम तो हजारों रुपया है, परंतु मनुष्य कौड़ी के सौ-सौ बिकते हैं! सोने और चाँदी की प्राप्ति से जीवन का आनंद नहीं मिल सकता। सच्चा आनंद तो मुझे मेरे काम से मिलता है। मुझे अपना काम मिल जाए तो फिर स्वर्ग-प्राप्ति की इच्छा नहीं, मनुष्य-पूजा ही सच्ची ईश्वर-पूजा है।

शब्दार्थ-तिजारत-मूर्खतापूर्ण या व्यर्थपूर्ण बातें।

संदर्भ-पूर्ववत्।

प्रसंग-प्रस्तुत गद्यांश में लेखक ने मनुष्य के महत्त्व को समझने के लिए प्रकाश डालते हुए कहा है कि

व्याख्या-मनुष्यों के विषय में व्यर्थ की बातें करना मूर्खता की पहचान है। सोना और लोहे के बदले मनुष्य की कीमत नहीं आँकनी चाहिए अर्थात् सोना और लोहे जैसी कोई भी धातु मनुष्य का महत्त्व नहीं रख सकती है, लेकिन इसे लोग भूल चुके हैं। सोने चाँदी तो बहुमूल्य धातुएँ अवश्य हैं। लेकिन यही मनुष्यता नहीं है। इसलिए इस मनुष्य को मोल नहीं मिल सकता। आजकल समय बहुत बदल गया है। अब तो आपकी कलाओं का दाम हजारों रुपए हो गए हैं लेकिन मनुष्य की कीमत तो एक-एक कौड़ी में सौ-सौ हो गई है। अतएव सोना, चाँदी, पैसे, रुपये, कौड़ी आदि से सच्चा जीवनानंद नहीं मिल सकता है। मनुष्य को जीवन का सच्चा आनंद तो केवल इसके अपने काम से ही मिलता है। लेखक भी इसे स्वयं का अनुभव मानते हुए इसे ही सच्ची ईश्वर-पूजा स्वीकार है।

विशेष-
1. मनुष्य का महत्त्व मनुष्यता से ही है, जो उसके अपने कामों से संभव है। यही ईश्वर-पूजा भी है।
2. भाषा-शैली में प्रवाह है।

अर्थग्रहण संबंधी प्रश्नोत्तर

प्रश्न 1.
आदमियों की तिजारत करना क्यों मूों का काम है?
उत्तर-
आदमियों की तिजारत करना मूरों का काम है। यह इसलिए कि इससे किसी प्रकार की समझदारी प्रकट नहीं होती है।

प्रश्न 2. सच्चा आनंद किससे मिलता है?
उत्तर-
सच्चा आनंद अपने काम से मिलता है। इसके सामने स्वर्ग-प्राप्ति की भी इच्छा नहीं रह जाती है।

विषय-वस्तु पर आधारित बोध प्रश्नोत्तर

प्रश्न 1.
उपर्युक्त गद्यांश का आशय स्पष्ट कीजिए।
उत्तर-
उपर्युक्त गद्यांश में लेखक ने मानवता का महत्त्वांकन करते हुए मनुष्य कौड़ी के सौ-सौ बिकते हुए इसका विरोध किया है। उसका यह मानना है कि सोना-चाँदी से नहीं, अपितु अपने काम से ही जीवन का सच्चा आनंद मिलता है। इस प्रकार मनुष्य मनुष्य की पूजा करे तो यह उसके लिए ईश्वरीय पूजा से कम नहीं है।

3. मजदूरी और फकीरी का महत्त्व थोड़ा नहीं। मजदूरी और फकीरी मनुष्य के विकास के लिए परमावश्यक है। बिना मजदूरी किये फकीरी का उच्च भाव शिथिल हो जाता है, फकीरी भी अपने आसन से गिर जाती है, बुद्धि बासी पड़ जाती है। बासी चीजें अच्छी नहीं होती। कितने ही, उम्र भर बासी बुद्धि और बासी फकीरी में मग्न रहते हैं, परंतु इस तरह मग्न होना किस काम का? हवा चल रही है, जल बह रहा है, बादल बरस रहा है, पक्षी नहा रहे हैं, फूल खिल रहे हैं, घास नई, पेड़ · नये, पत्ते नये-मनुष्य की बुद्धि और फकीरी ही बासी! ऐसा दृश्य तभी तक रहता है जब तक बिस्तर पर पड़े-पड़े मनुष्य प्रभात का आलस्य सुख मनाता है।

शब्दार्थ-शिथिल-ढीला। प्रभात-सबेरा। अंतःकरण-हृदय

संदर्भ-पूर्ववत।

प्रसंग-प्रस्तुत गद्यांश में लेखक ने मजदूरी और फकीरी का महत्त्वांकन करते हुए कहा है कि

व्याख्या-मजदूरी और फकीरी का महत्त्व सर्वाधिक है। अगर मनुष्य अपना परम विकास करना है, तो उसे मजदूरी-फकीरी करनी ही पड़ेगी। यहाँ यह ध्यान देना आवश्यक है कि फकीरी की ऊँचाई मजदूरी की नींव पर ही खड़ी होती है। इस प्रकार मजदूरी के बिना फकीरी का कोई महत्त्व नहीं है। उसके बिना बुद्धि भी मंद पड़ जाती है, जो किसी प्रकार सुखद नहीं है। बासी फकीरी का बने रहना बिल्कुल ही निरर्थक है। चारों ओर से प्रकृति आनंदमग्न हो रही है। हवा मचल रही है, जलतरंगित हो रहा है। पक्षी जल में डूबकी लगा रहे हैं। बादल गरज-बरस रहे हैं। फूल हँस रहे हैं। नई-नई घास लहलहा रही है। पेड़-पौधे नए-नए पत्तों से लद रहे हैं। इसके बावजूद केवल फकीरी ही मंद हो, तो यह चिंता की बात है। इस प्रकार की चिंता की बात तभी होती है, जब मनुष्य बिस्तर पर पड़े-पड़े सवेरे का सुख आलस्य में बीता देता है।

विशेष-
1. मजदूरी और फकीरी के महत्त्व को समझाया गया है।
2. शैली चित्रात्मक है।

अर्थग्रहण संबंधी प्रश्नोत्तर

प्रश्न 1.
मजदूरी और फकीरी का महत्त्व क्यों है?
उत्तर-
मजदूरी और फकीरी का महत्त्व है। यह इसलिए कि इसके बिना मनुष्य का पूरा विकास नहीं हो सकता है।

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प्रश्न 2. मजदूरी और फकीरी में श्रेष्ठ कौन है और क्यों?
उत्तर-
मजदूरी और फकीरी में मजदूरी श्रेष्ठ है। यह इसलिए कि बिना मजदूरी किए फकीरी का उच्च भाव शिथिल हो जाता है। फकीरी अपने आसन से गिर जाती है। बुद्धि बासी पड़ जाती हैं।

प्रश्न 3.
बासी बुद्धि का क्या कुपरिणाम होता है?
उत्तर-
बासी बुद्धि का यह कुपरिणाम होता है कि उससे बिस्तर पड़ा हुआ मनुष्य प्रभात का आलस्य सुख मनाता है।

विषय-वस्तु पर आधारित प्रश्नोत्तर
प्रश्न 1.
उपर्युक्त गद्यांश का आशय स्पष्ट कीजिए।
उत्तर-
उपर्युक्त गद्यांश में लेखक ने मजदूरी और फकीरी को मानव जीवन के विकास के लिए परमावश्यक बतलाया है। इन दोनों में मजदूरी को फकीरी से बेहतर माना है। इसलिए कि मजदूरी की बुनियाद पर ही फकीरी का झंडा लहराता है। दूसरी बात यह कि बिना मजदूरी के फकीरी अपने आसन से गिर जाती है। उसकी बुद्धि बासी पड़ जाती है। फिर बासी बुद्धि बिस्तर पर पड़े-पड़े प्रभात का सुख अपने आलस्य के कारण नहीं मना पाती है।

MP Board Class 10th Hindi Vasanti Solutions Chapter 18 विद्या की शोभा विनम्रता

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MP Board Class 10th Hindi Vasanti Solutions Chapter 18 विद्या की शोभा विनम्रता (संकलित)

विद्या की शोभा विनम्रता पाठ्य-पुस्तक के प्रश्नोत्तर

विद्या की शोभा विनम्रता लघु-उत्तरीय प्रश्नोत्तर

प्रश्न 1.
महाकवि माघ को किस बात का अभिमान था?
उत्तर
महाकवि माघ को अपनी विद्वता का अभिमान था।

प्रश्न 2.
धन और जीवन को क्षणभंगुर क्यों कहा गया है?
उत्तर
धन और जीवन क्षण भंगुर हैं क्योंकि ये दोनों कब नष्ट हो जाएंगे, कहा नहीं जा सकता।

प्रश्न 3.
उद्योगपति ने अनेक कारखाने कैसे स्थापित किए थे?
उत्तर
उद्योगपति ने अनेक कारखाने कुछ तकनीकी और प्रगतिशील विचारों के कारण स्थापित किए।

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प्रश्न 4.
कर्ज लेने वाला व्यक्ति जीवन से हार क्यों जाता है?
उत्तर
कर्ज लेने वाला व्यक्ति जीवन से हार जाता है क्योंकि उसका अपना कुछ नहीं होता है।

प्रश्न 5.
भूमि-पूजन का आयोजन क्यों किया गया था?
उत्तर
भूमि-पूजन का आयोजन एक नए कारखाने के आरंभ के लिए किया गया था।

प्रश्न 6.
हम प्रकृति का मान किन-किन रूपों में कर सकते हैं?
उत्तर
हम प्रकृति का मान वृक्षारोपण और पर्यावरण संरक्षण के रूप में कर सकते हैं।

प्रश्न 7.
शास्त्रों ने किन दो को राजा माना है?
उत्तर
शास्त्रों ने यम और इन्द्र को राजा माना है।

विद्या की शोभा विनम्रता दीर्घ-उत्तरीय प्रश्नोत्तर

प्रश्न 1.
विद्वता की शोभा अहंकार नहीं विनम्रता है’ इस पंक्ति का आशय स्पष्ट कीजिए।
उत्तर
विद्वता की शोभा अहंकार नहीं, विनम्रता है; क्योंकि अहंकार से विनम्रता कभी नहीं प्रकट होती है।

प्रश्न 2.
पृथ्वी और नारी को क्षमाशील क्यों कहा गया है?
उत्तर
पृथ्वी और नारी को क्षमाशील कहा गया है; क्योंकि इन दोनों को बोझ नहीं मालूम पड़ती है।

प्रश्न 3.
कवि माघ को वृद्धा के सामने लज्जित क्यों होना पड़ा?
उत्तर
कवि माघ को वृद्धा के सामने लज्जित होना पड़ा क्योंकि उसके तर्क के उत्तर उनके पास नहीं थे।

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प्रश्न 4.
प्रकृति को पूजनीय रूप में देखना क्यों जरूरी है?
उत्तर
प्रकृति को पूजनीय रूप में देखने से सम्मान मिलता है।

प्रश्न 4.
प्रकृति को किसका भार अधिक लगता है और क्यों?
उत्तर
प्रकृति को उसके नियमों के विपरीत चलने वालों का भार अधिक लगता है। क्योंकि उसे यह असह्य होता है।

प्रश्न 5.
‘प्रकृति परमात्मा का ही एक रूप है’, इस कवन को स्पष्ट कीजिए।
उत्तर
‘प्रकृति परमात्मा का ही एक रूप है। इस कथन का आशय यह है कि परमात्मा की तरह प्रकृति भी परोपकारी है। वह स्वयं के लिए नहीं, अपितु दूसरों के सुख और आनंद के लिए ही अपना स्वरूप धारण किए हुए है।

विद्या की शोभा विनम्रता भाषा-अनुशीलन

प्रश्न 1.
निम्नलिखित शब्दों के विलोम शब्द लिखिए
सज्जन, आरंभ, प्रसन्न, प्रश्न।
उत्तर
शब्द – विलोम शब्द
सज्जन – दुर्जन
आरंभ – अंत
प्रसन्न – अप्रसन्न
प्रश्न – उत्तर।

प्रश्न 2.
निम्नलिखित शब्दों के पर्यायवाची शब्द लिखिए
सूर्य, मनुष्य, पुष्प, पहाड़, पृथ्वी, भू, इन्द्र।
उत्तर
सूर्य – रवि, दिनकर
मनुष्य – मानव, मनुज
पहाड़ – पर्वत, शैल
पृथ्वी – भू, धरती
भू – भूमि, जमीन
इन्द्र – सुरेश, देवराज।

प्रश्न 3.
निम्नलिखित वाक्यों को शुद्ध कीजिए
(क) प्रकृति को मान दें तो वह आपको सम्मान देगा।
(ख) गाय और बैल घास चर रही हैं।
(ग) कृपया राह बताने की कृपा करें।
(घ) पृथ्वी जड़ नहीं चैतन्य होता है।
उत्तर
(क) प्रकृति को मान दें, तो वह आपको सम्मान देगी।
(ख) गाय और बैल घास चर रहे हैं।
(ग) राह बताने की कृपा करें।
(घ) पृथ्वी जड़ नहीं चैतन्य होती है।

विद्या की शोभा विनम्रता योग्यता-विस्तार

प्रश्न 1. उज्जयिनी के कुछ प्रसिद्ध धार्मिक स्थलों के नाम लिखिए।
प्रश्न 2. ‘पर्यावरण प्रदूषण और हमारा दायित्व’ विषय पर कक्षा में एक परिचर्चा का अयोजन कीजिए।
प्रश्न 3. पर्यावरण दिवस पर अपनी शाला में पौधे लगाइए और बारी-बारी से उसकी सुरक्षा की जिम्मेदारी लीजिए।
उत्तर
उपर्युक्त प्रश्नों को छात्रा/छात्र अपने अध्यापक/अध्यापिका की सहायता से हल करें।

विद्या की शोभा विनम्रता परीक्षोपयोगी अतिरिक्त प्रश्नोत्तर

अर्थग्रहण संबंधी प्रश्नोत्तर

प्रश्न 1.
‘विद्वता की शोभा-विनम्रता’ प्रसंग का प्रतिपाय स्पष्ट कीजिए।
उत्तर
‘विद्वता की शोभा-विनम्रता’ प्रसंग एक प्रेरक और भाववर्द्धक प्रसंग है। लेखक ने इस प्रसंग के द्वारा उज्जयिनी के महाकवि माघ के चरित्र और आचरण को चित्रित किया है। राजा भोज के साथ महाकवि माघ का राह चलते एक वृद्धा से वार्तालाप कवि की विद्वता को चुनौती देता है। वृद्धा कवि माघ के अभिमानयुक्त पांडित्य को अस्वीकृत करते हुए उन्हें विनम्र और शालीन बनने की सीख देती है। व्यक्ति की विनयशीलता, विनम्र और शालीन आचरण उसकी विशिष्ट पहचान होती है। अपने धन और ज्ञान-वैभव में भी अभिमान रहित रहने वाले लोग संसार में महान बनते हैं।

प्रश्न 2.
‘प्रकृति परमात्मा का स्वरूप’ प्रसंग का प्रतिपाय स्पष्ट कीजिए।
उत्तर
‘प्रकृति परमात्मा का स्वरूप’ प्रसंग में प्रकृति के महत्त्व को सामने लाने का प्रयास किया गया है। इस प्रसंग के द्वारा प्रकृति को ईश्वर का ही दूसरा स्वरूप कहा गया है। मनुष्य सृष्टि का ही एक अंश है और जब मनुष्य सृष्टि के जड़-चेतन से अपनी तादात्म्य स्थापित कर लेता है तब उसका जीवन सार्थक होता है। यदि मानव अहंकार या घमंड में चूर होकर अपने ज्ञान को ही सर्वश्रेष्ठ मानकर व्यवहार करने लगता है तो वह अपना ही अहित करता है। विद्या तो विनयशीलता से ही सुशोभित होती है। मानव-जीवन प्रकृति प्रदत्त निःशुल्क वरदानों से ही सुखी और संपन्न है। अतः इनके प्रति आदर भाव मानव मात्र का सहज और स्वाभाविक कर्तव्य है।

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प्रश्न 3.
निम्नलिखित कथनों के लिए दिए गए विकल्पों में से सही विकल्पों के चयन कीजिए
1. महाकवि माप थे
1. नालंदा के
2. उज्जयिनी के
3. पाटिलपुत्र के
4. कपिलवस्तु के।
उत्तर
(2) उज्जयिनी के

2. महाकवि माय समयकालीन थे
1. राजा भोज के
2. राजा विक्रमादित्य के
3. सम्राट अशोक के
4. राजा नल के।
उत्तर
(1) राजा भोज के

3. माय को अभिमान था
1. विनम्रता का
2. घन का
3. सौदर्य का
4. पाण्डित्य का।
उत्तर
(4) पाण्डित्य को

4. अतिथि होते हैं
1. चार
2. दो
3. तीन
4. पाँच।
उत्तर
(2) दो
5. हारने वाले लोग होते हैं
1. तीन तरह के
2. दो तरह के
3. चार तरह के
4. सात तरह के।
उत्तर
(2) दो तरह के

प्रश्न 2.
रिक्त स्थानों की पूर्ति दिए गए विकल्पों में से उचित शब्दों के चयन से कीजिए। .
1. माघ को अपने पाण्डित्य का बड़ा ……………….. था। (अभिमान, ध्यान)
2. माघ ……………….. के साथ वन-विहार से लौट रहे थे। (मंत्री, राजा भोज)
3. शास्त्रों ने तो यम और इन्द्र को ही……………….. माना है। (शासक, राजा)
4. माष ने कहा, “माँ! हम ……………….. गए। (जान, हार)
5. विद्वता की शोभा अहंकार नहीं ……………….. है। (विनम्रता, पाण्डित्य)
उत्तर
1. अभिमान
2. राजा भोज
3. राजा
4. हार
5. विनम्रता।

प्रश्न 4.
सही जोड़ी का मिलान कीजिए
क्रोध – राम नरेश त्रिपार्टी
उर्वशी – रमानाथ अवस्थी
प्रवासी के गीत – रामधारी सिंह ‘दिनकर’
आग और पराग – रामचन्द्र शुक्ल
मिलन और स्वप्न – नरेन्द्र शर्मा।
उत्तर
क्रोध- रामचन्द्र शुक्ल
उर्वशी – रामधारी सिंह ‘दिनकर’
प्रवासी के गीत – नरेंद्र शर्मा
आग और पराग – रामनाथ अवस्थी
मिलन और स्वप्न – राम नरेश त्रिपाठी।

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प्रश्न 5.
निम्नलिखित वाक्य सत्य हैं या असत्य? वाक्य के आगे लिखिए।
1. माघ को अपने पाण्डित्य का बड़ा अभिमान था।
2. यात्री तो सूर्य और चन्द्रमा दो ही हैं।
3. पृथ्वी जड़ है, चैतन्य नहीं।
4. भूमि-पूजन एक कर्मकांड है।
5. प्रकृति परमात्मा का ही एक रूप है।
उत्तर

  1. सत्य
  2. सत्य
  3. असत्य
  4. असत्य
  5. सत्य।

प्रश्न 6.
निम्नलिखित कथनों का उत्तर एक शब्द में दीजिए।
1. किसको छेड़ने का किसी को साहस न होता?
2. किस पर आदमी आया-जाया करते हैं?
3. सूर्य और चन्द्रमा क्या हैं?
4. धन और यौवन क्या हैं?
5. विद्वता की शोभा क्या है?
उत्तर

  1. माघ को
  2. रास्ता पर
  3. यात्री
  4. अतिथि
  5. विनम्रता।

विद्या की शोभा विनम्रता लघु-उत्तरीय प्रश्नोत्तर

प्रश्न 1.
वृद्धा ने माघ को समझाते हुए क्या कहा?
उत्तर
वृद्धा ने माघ को समझाते हुए कहा-“महापंडित, मैं जानती हूँ कि आप माघ हैं, आप महाविद्वान हैं, पर विद्वता की शोभा अहंकार नहीं, विनम्रता है।

प्रश्न 2.
पृथ्वी ने स्वयं क्या कहा है?
उत्तर
पृथ्वी ने स्वयं कहा है कि मुझे पहाड़, तालाब नदियाँ, समुद्र आदि का बोझ नहीं मालूम पड़ता, किंतु जब मेरे ऊपर परद्रोही यानी मेरे नियमों के विपरीत चलने वाला पैर होता है तो मुझे उसका भार अत्यधिक मालूम पड़ता है। भूमिपूजन मात्र एक कर्मकांड नहीं यह सतत चलते रहना चाहिए।

प्रश्न 3.
पर्यावरण और प्रदूषण को सही रूप में समझने के लिए क्या आवश्यक है?
उत्तर
पर्यावरण और प्रदूषण को सही रूप में समझने के लिए आवश्यक है कि हम पहले प्रकृति को पूजनीय रूप में देखें।

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विद्या की शोभा विनम्रता प्रसंग का सारांश

उज्जयिनी के महाकवि माघ को अपनी विद्वता का बड़ा अभिमान था। एक बार राजा भोज के साथ कहीं जा रहे थे तो एक वृद्धा ने उनकी विद्वता को चुनीती देते हुए कई प्रकार से उन्हें संशय में डाल दिया। अंत में उन्होंने विनयपूर्वक कहा, “माँ हम हार गए! वृद्धा ने कहा, “महानुभाव! संसार में कर्ज लेने वाला या अपना चरित्रबल खो देने वाला ही पराजित होता है। मैं जानती हूँ कि आप माघ हैं और महाविद्वान हैं, लेकिन विद्वता की शोभा अहंकार नहीं विनम्रता है। इसे सुनकर माय लज्जित होकर आगे चल दिए।

संदर्भ-प्रसंग सहित व्याख्या

महानुभाव! संसार में जो किसी से कर्ज़ लेता है या अपना चरित्र खो देता है, बस हारने वाले दो कोटि के लोग होते हैं।

शब्दार्व-कोटि-श्रेणी।

संदर्भ-प्रस्तुत गद्यांश हमारी पाठ्य-पुस्तक ‘हिंदी सामान्य’ 10वीं में संकलित ‘विद्या की शोभा विनम्रता’ से है।

प्रसंग-प्रस्तुत गद्यांश में लेखक ने एक वृद्धा के माध्यम से संसार के दो निम्नकोटि के लोगों के बारे में बतलाने का प्रयास किया है। इसके लिए लेखक ने एक
प्रसंग का उल्लेख करते हुए कहा कि

व्याख्या-एक बार महापंडित माघ राजा भोज के साथ कहीं जा रहे थे। उन्होंने एक बुढ़िया को देखकर पूछा कि यह रास्ता कहाँ जाता है? उस बुढ़िया ने उनसे उनका परिचय पूछा। उन्होंने अपना जो कुछ परिचय दिया, उस बुढ़िया ने अपनी तर्क बुद्धि से गलत सिद्ध कर दिया। फिर उसने उन्हें समझाया-महाशय! जो व्यक्ति इस संसार में दूसरे से जो कुछ लेता है या अपने चरित्र-बल को बचा नहीं पाता है, ये दोनों ही जीवन में हार का मुँह देखते हैं।

विशेष-1.
उपर्युक्त गद्यांश प्रेरक और ज्ञानवर्द्धक है।

अर्थ-ग्रहण संबंधी प्रश्नोत्तर
प्रश्न
संसार में हारने वाले कौन होते हैं?
उत्तर
संसार में हारने वाले दो ही होते हैं

  1. कर्ज लेने वाले या
  2. अपना चरित्र-बल खोने वाले!

विषय-वस्त पर आधारित प्रश्नोत्तर
प्रश्न 1.
उपर्युक्त गयांश का भाव लिखिए।
उत्तर
उपर्युक्त गद्यांश में लेखक ने दूसरों पर निर्भर न होकर चरित्र बल बनाए रखने की सीख दी है।

विद्या की शोभा विनम्रता  प्रकृतिक परमात्मा का स्वरूप

विद्या की शोभा विनम्रता प्रसंग का सारांश

उज्जयिनी के महाकवि माघ को अपनी विद्वता का बड़ा अभिमान था। एक बार राजा भोज के साथ कहीं जा रहे थे तो एक वृद्धा ने उनकी विद्वता को चुनीती देते हुए नास्तिकता प्रकट की। उसके दादा ने उसे समझाया कि धरती का निरादर करके वह प्रसन्न नहीं रह सकता। भूमि-पूजन केवल एक कर्मकांड नहीं। इसे हमेशा चलते रहना चाहिए। पर्यावरण और प्रदूषण को सही रूप में समझने के लिए पहले प्रकृति को पूजनीय रूप में देखना पड़ेगा।

MP Board Class 10th Maths Solutions Chapter 15 प्रायिकता Ex 15.2

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MP Board Class 10th Maths Solutions Chapter 15 प्रायिकता Ex 15.2

(नोट : यह प्रश्नावली परीक्षा की दृष्टि से नहीं है।)

प्रश्न 1.
दो ग्राहक श्याम और एकता एक विशेष दुकान पर ही एक सप्ताह में जा रहे हैं (मंगलवार से शनिवार तक)। प्रत्येक द्वारा दुकान पर किसी दिन या किसी अन्य दिन जाने के परिणाम समप्रायिक हैं। इसकी क्या प्रायिकता है कि दोनों उस दुकान पर
(i) एक ही दिन जाएँगे?
(ii) क्रमागत दिनों में जाएँगे?
(iii) भिन्न दिनों में जाएँगे?
हल :
कुल दिनों की संख्या = 5 (मंगलवार से शनिवार) श्याम दुकान पर 5 तरह से जा सकता है तथा इसी प्रकार एकता भी दुकान पर 5 प्रकार से जा सकती है।
∴ कुल सम्भाव्य स्थितियाँ = n(S) = 5 x 5 = 25
(i) एक ही दिन जाने की अनुकूल स्थितियाँ = (मंगल, मंगल), (बुध, बुध), (बृह., बृह.) (शुक्र, शुक), (शनि, नि)
MP Board Class 10th Maths Solutions Chapter 15 प्रायिकता Ex 15.2 1

(ii) वे दोनों क्रमागत दिनों में निम्न 8 प्रकार से जा सकते हैं : (मं., बु.), (बु., बृ.), (बृ., शु.), (शु., श.), (बु., मं.), (बृ., बु.), (शु., बृ.), (श., शु.)
∴ क्रमागत दिनों में जाने की अनूकूलता
MP Board Class 10th Maths Solutions Chapter 15 प्रायिकता Ex 15.2 2

(iii) भिन्न-भिन्न दिनों में जाएँगे = एक ही दिन नहीं जाएँगे
MP Board Class 10th Maths Solutions Chapter 15 प्रायिकता Ex 15.2 3
अतः अभीष्ट प्रायिकताएँ : (i) \(\frac { 1 }{ 5 }\), (ii) \(\frac { 8 }{ 25 }\), (iii) \(\frac { 4 }{ 5 }\) है।

प्रश्न 2.
एक पासे के फलकों पर संख्याएँ 1, 2, 2, 3, 3 और 6 लिखी हुई हैं। इसे दो बार फेंका जाता है तथा दोनों बार प्राप्त हुई संख्याओं के योग लिख लिए जाते हैं। दोनों बार फेंकने के बाद प्राप्त योग के सम्भावित कुछ मान निम्नलिखित सारणी में दिए हैं। इस सारणी को पूरा कीजिए :
MP Board Class 10th Maths Solutions Chapter 15 प्रायिकता Ex 15.2 4
इसकी क्या प्रायिकता है कि कुल योग
(i) एक सम संख्या होगा?
(ii) 6 है?
(iii) कम-से-कम 6 है?
हल :
सारणी को पूरा करने पर अभीष्ट सारणी है :
(i) योग सम संख्या के अनुकूल परिणाम
MP Board Class 10th Maths Solutions Chapter 15 प्रायिकता Ex 15.2 5

(ii) योग 6 के अनुकूल परिणामों की संख्या
MP Board Class 10th Maths Solutions Chapter 15 प्रायिकता Ex 15.2 6

(iii) योग कम-से-कम 6 के अनुकूल परिणामों की संख्या
MP Board Class 10th Maths Solutions Chapter 15 प्रायिकता Ex 15.2 7
अतः अभीष्ट प्रायिकताएँ : (i) \(\frac { 1 }{ 2 }\), (ii) \(\frac { 1 }{ 9 }\) एवं \(\frac { 5 }{ 12 }\) हैं।

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प्रश्न 3.
एक थैले में 5 लाल गेंद और कुछ नीली गेंदें हैं। यदि इस थैले में से नीली गेंद निकालने की प्रायिकता लाल गेंद निकालने की प्रायिकता की दुगनी है, तो थैले में नीली गेंदों की संख्या ज्ञात कीजिए।
हल :
मान लीजिए थैले में नीली गेंदो की संख्या = x है।
चूँकि लाल गेंदों के अनुकूल परिणामों की संख्या
= n(ER) = 5
एवं नीली गेंदों के अनुकूल परिणामों की संख्या
= n(EB) = x है।
तो प्रश्नानुसार,
नीली गेंद निकालने की प्रायिकता P(EB) = 2 x लाल गेंद निकालने की प्रायिकता P(EB)
MP Board Class 10th Maths Solutions Chapter 15 प्रायिकता Ex 15.2 8
अतः नीली गेंदों की अभीष्ट संख्या = 10 है।

प्रश्न 4.
एक पेटी में 12 गेंदें हैं, जिनमें से x गेंदें काली हैं। यदि इनमें से एक गेंद यादृच्छया निकाली जाती है, तो इसकी प्रायिकता ज्ञात कीजिए कि यह काली है। यदि इस पेटी में 6 काली गेंदें और डाल दी जायें, तो काली गेंद निकालने की प्रायिकता पहली प्रायिकता की दुगनी हो जाती है। x का मान ज्ञात कीजिए।
हल :
कुल सम्भावित घटनाओं के परिणामों की संख्या = n(S) = 12.
काली गेंदें निकलने की अनुकूल परिणामों की संख्या n(E) = x.
⇒ \(P\left(E_{1}\right)=\frac{n\left(E_{1}\right)}{n(S)}=\frac{x}{12}\) ….(i)
6 काली गेंदें और मिलाने पर कुल सम्भावित घटनाओं के परिणामों की संख्या = n(S) = 12 + 6 = 18.
अब काली गेंद निकलने के अनुकूल परिणामों की नयी संख्या = n(E) = x + 6.
⇒ \(P\left(E_{2}\right)=\frac{n\left(E_{2}\right)}{n\left(S_{2}\right)}=\frac{x+6}{18}\) …(ii)
प्रश्नानुसार,
⇒ P(E2) = 2 x P(E1)
⇒ \(\frac{x+6}{18}=2 \times \frac{x}{12}\)
⇒ 36x = 12x + 72
⇒ 36x – 12x = 72
⇒ 24x = 72
⇒ x = \(\frac { 72 }{ 24 }\) = 3
अतः, x का अभीष्ट मान = 3 है।

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प्रश्न 5.
एक जार में 24 कंचे हैं जिनमें कुछ हरे हैं और शेष नीले हैं। यदि इस जार में से यादृच्छया एक कंचा निकाला जाता है, तो इस कंचे के हरा होने की प्रायिकता \(\frac { 2 }{ 3 }\) है। जार में नीले कंचों की संख्या ज्ञात कीजिए।
हल :
मान लीजिए कि नीले कंचों की संख्या x है
हरे कंचों की संख्या = (24 – x)
हरे कंचे के निकलने के अनुकूल परिणामों की संख्या = n(E) = (24 – x)
एवं कुल सम्भावित परिणामों की संख्या n(S) = 24
MP Board Class 10th Maths Solutions Chapter 15 प्रायिकता Ex 15.2 9
⇒ 48 = 72 – 3x
⇒ 3x = 72 – 48 = 24
⇒ x = \(\frac { 24 }{ 3 }\) = 8
अतः, नीले कंचों की अभीष्ट संख्या = 8 है।

MP Board Class 10th Maths Solutions Chapter 14 सांख्यिकी Additional Questions

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MP Board Class 10th Maths Solutions Chapter 14 सांख्यिकी Additional Questions

MP Board Class 10th Maths Chapter 14 अतिरिक्त परीक्षोपयोगी प्रश्न

MP Board Class 10th Maths Chapter 14 दीर्घ उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 1.
निम्न वितरण से विद्यार्थियों के अंकों का माध्य ज्ञात कीजिए
MP Board Class 10th Maths Solutions Chapter 14 सांख्यिकी Additional Questions 1
हल :
वर्ग अन्तराल एवं बारम्बारता सारणी प्राप्त करने पर
MP Board Class 10th Maths Solutions Chapter 14 सांख्यिकी Additional Questions 2
अतः, अभीष्ट माध्य अंक = 51.75 है।

प्रश्न 2.
निम्न वितरण का माध्य ज्ञात कीजिए
MP Board Class 10th Maths Solutions Chapter 14 सांख्यिकी Additional Questions 3
हल :
वर्ग अन्तराल एवं बारम्बारता सारणी प्राप्त करने पर
MP Board Class 10th Maths Solutions Chapter 14 सांख्यिकी Additional Questions 4
अतः, अभीष्ट माध्य अंक = 48.41.

प्रश्न 3.
निम्न बारम्बारता बंटन का माध्य 50 है। लेकिन वर्ग (20-40) एवं (60-80) की बारम्बारताएँ क्रमशः f1 एवं f2 अज्ञात हैं। इन बारम्बारताओं को ज्ञात कीजिए यदि सभी बारम्बारताओं का योग 120 है।
MP Board Class 10th Maths Solutions Chapter 14 सांख्यिकी Additional Questions 5
हल :
MP Board Class 10th Maths Solutions Chapter 14 सांख्यिकी Additional Questions 6
अतः, एवं के अभीष्ट मान हैं क्रमशः 28 एवं 24 हैं।

प्रश्न 4.
निम्न आँकड़ों का माध्यक 50 है। p एवं q के मान ज्ञात कीजिए यदि सभी बारम्बारताओं का योग 90 है।
MP Board Class 10th Maths Solutions Chapter 14 सांख्यिकी Additional Questions 7
हल :
संचयी बारम्बारता सारणी बनाने पर
MP Board Class 10th Maths Solutions Chapter 14 सांख्यिकी Additional Questions 8
चूँकि बारम्बारताओं का योग n = 90 दिया है।
MP Board Class 10th Maths Solutions Chapter 14 सांख्यिकी Additional Questions 9
30 – p = 25 ⇒ p= 30 – 25 = 5 …(1)
⇒ ∑fi = p + q + 78 = n = 90 (दिया है)
⇒ p + q = 90 – 78 = 12 ….(2)
समीकरण (1) से p = 5 का मान समीकरण (2) में रखने पर,
⇒ 5 + q = 12
⇒ q = 12 – 5 = 7
अतः, p एवं q के अभीष्ट मान क्रमशः 5 एवं 7 हैं।

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प्रश्न 5.
96 बच्चों की ऊँचाई (cm में) का वितरण निम्न प्रकार दिया है:
MP Board Class 10th Maths Solutions Chapter 14 सांख्यिकी Additional Questions 10
इन आँकड़ों के लिए से कम प्रकार का संचयी बारम्बारता वक्र खींचिए और इसका प्रयोग बच्चों के माध्यक ऊँचाई ज्ञात करने में कीजिए।
हल :
‘से कम प्रकार’ का संचयी बारम्बारता वक्र खींचने के लिए हम सर्वप्रथम से कम प्रकार की संचयी बारम्बारता सारणी तैयार करते हैं
MP Board Class 10th Maths Solutions Chapter 14 सांख्यिकी Additional Questions 11 MP Board Class 10th Maths Solutions Chapter 14 सांख्यिकी Additional Questions 12
से कम से कम प्रकार का संचयी बारम्बारता वक्र :
MP Board Class 10th Maths Solutions Chapter 14 सांख्यिकी Additional Questions 13
अतः उपर्युक्त वक्र अभीष्ट से कम प्रकार का संचयी बारम्बारता वक्र’ है तथा इसके प्रयोग से ज्ञात की गयी माध्यम ऊँचाई = 139 cm है।

प्रश्न 6.
एक शहर का 66 दिन के लिए हुई वार्षिक वर्षा के आँकड़े निम्न तालिका (सारणी) में दिए गए हैं:
MP Board Class 10th Maths Solutions Chapter 14 सांख्यिकी Additional Questions 14
दिए आँकड़ों से ‘से कम प्रकार’ का एवं से अधिक प्रकार’ का तोरण खींचकर माध्यक वर्षा का परिकलन कीजिए।
हल :
‘से कम’ प्रकार की संचयी बारम्बारता सारणी तैयार करने पर
MP Board Class 10th Maths Solutions Chapter 14 सांख्यिकी Additional Questions 15
‘के बराबर या से अधिक प्रकार की संचयी बारम्बारता सारणी बनाने पर,
MP Board Class 10th Maths Solutions Chapter 14 सांख्यिकी Additional Questions 16
से कम प्रकार का तोरण एवं से अधिक प्रकार का तोरण :
MP Board Class 10th Maths Solutions Chapter 14 सांख्यिकी Additional Questions 17
दोनों तोरणों का प्रतिच्छेद बिन्दु (21,33) है।
अतः, अभीष्ट माध्य 21 (लगभग) है।

प्रश्न 7.
भाला फेंक (Javelin throw) स्पर्धा में 50 छात्रों ने भाग लिया। उनके द्वारा फेंके गए भाले द्वारा तय की गयी दूरी (m में) निम्न प्रकार प्रेक्षित की गयी
MP Board Class 10th Maths Solutions Chapter 14 सांख्यिकी Additional Questions 18
(i) एक संचयी बारम्बारता सारणी का निर्माण कीजिए।
(ii) ‘से कम’ प्रकार का संचयी बारम्बारता वक्र (तोरण) खींचिए एवं फेंकी गयी माध्यक दूरी का परिकल्पना कीजिए।
(iii) सूत्र का प्रयोग करके माध्यक दूरी का परिकलन कीजिए।
(iv) क्या चरण (ii) एंव (iii) में ज्ञात की गयी माध्यक दूरियाँ समान हैं।
हल :
(i) संचयी बारम्बारता सारणी :
MP Board Class 10th Maths Solutions Chapter 14 सांख्यिकी Additional Questions 19

(ii) से कम’ प्रकार का संचयी बारम्बारता वक्र (तोरण) :
MP Board Class 10th Maths Solutions Chapter 14 सांख्यिकी Additional Questions 20
अभीष्ट माध्यक दूरी = 49.4 m (लगभग) (तोरण द्वारा) है।

(iii) सूत्र के प्रयोग द्वारा माध्यक दूरी का परिकलन :
MP Board Class 10th Maths Solutions Chapter 14 सांख्यिकी Additional Questions 21
अतः, सूत्र के प्रयोग द्वारा ज्ञात की गयी अभीष्ट माध्यक दूरी = 49.41 m है।

(iv) चरण (ii) एवं (iii) में ज्ञात की गयी माध्यक दूरियाँ मापन की सीमा के अन्तर्गत लगभग समान हैं।

MP Board Class 10th Maths Chapter 14 लघु उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 1.
निम्न बंटन (वितरण) का माध्य ज्ञात कीजिए :
MP Board Class 10th Maths Solutions Chapter 14 सांख्यिकी Additional Questions 22
हल:
MP Board Class 10th Maths Solutions Chapter 14 सांख्यिकी Additional Questions 23
अतः, बंटन (वितरण) का अभीष्ट माध्य = 5.5.

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प्रश्न 2.
20 छात्रों के गणित परीक्षा में प्राप्त अंकों का माध्य ज्ञात कीजिए :
MP Board Class 10th Maths Solutions Chapter 14 सांख्यिकी Additional Questions 24
हल:
MP Board Class 10th Maths Solutions Chapter 14 सांख्यिकी Additional Questions 25
अतः, अभीष्ट माध्य अंक = 35.

प्रश्न 3.
दिए गए आँकड़ों में समान्तर माध्य ज्ञात कीजिए : (2019)
MP Board Class 10th Maths Solutions Chapter 14 सांख्यिकी Additional Questions 26
हल :
[निर्देशः उपर्युक्त प्रश्न की तरह हल करें।]
उत्तर : अभीष्ट माध्य = 62.47]

प्रश्न 4.
निम्नलिखित तालिका (सारणी) में अपनी पुस्तक को 30 दिन में पूरा करने के लिखे गए पृष्ठों की संख्या दी गयी है:
MP Board Class 10th Maths Solutions Chapter 14 सांख्यिकी Additional Questions 27
प्रतिदिन लिखे गए पृष्ठों की माध्य संख्या ज्ञात कीजिए।
हल:
MP Board Class 10th Maths Solutions Chapter 14 सांख्यिकी Additional Questions 28
अतः प्रतिदिन लिखे गए पृष्ठों की अभीष्ट माध्य संख्या 26 है।

प्रश्न 5.
निम्न वितरण 40 व्यक्तियों के भारों (kg में) की स्थिति है :
MP Board Class 10th Maths Solutions Chapter 14 सांख्यिकी Additional Questions 29
‘से कम’ प्रकार की संचयी बारम्बारता सारणी बनाइए।
हल :
से कम प्रकार की संचयी बारम्बारता सारणी:
MP Board Class 10th Maths Solutions Chapter 14 सांख्यिकी Additional Questions 31
अतः उपरोक्त सारणी अभीष्ट सारणी है।

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प्रश्न 6.
निम्न सारणी संचयी बारम्बारता बंटन है, जो 800 छात्रों द्वारा एक परीक्षा में अर्जित अंकों को दर्शाती है:
MP Board Class 10th Maths Solutions Chapter 14 सांख्यिकी Additional Questions 32
उपरोक्त आँकड़ों के लिए बारम्बारता वितरण सारणी बनाइए।
हल:
बारम्बारता सारणी वितरण :
MP Board Class 10th Maths Solutions Chapter 14 सांख्यिकी Additional Questions 33
अतः उपरोक्त सारणी अभीष्ट बारम्बारता वितरण सारणी है।

प्रश्न 7.
निम्न आँकड़ों से बारम्बारता वितरण सारणी का निर्माण कीजिए :
MP Board Class 10th Maths Solutions Chapter 14 सांख्यिकी Additional Questions 34
हल :
बारम्बारता वितरण सारणी :
MP Board Class 10th Maths Solutions Chapter 14 सांख्यिकी Additional Questions 35
अतः उपरोक्त सारणी अभीष्ट बारम्बारता वितरण सारणी है।

प्रश्न 8.
600 परिवारों की साप्ताहिक आय निम्न सारणी में दी गयी है:
MP Board Class 10th Maths Solutions Chapter 14 सांख्यिकी Additional Questions 36
माध्यक आय का परिकलन कीजिए।
हल:
MP Board Class 10th Maths Solutions Chapter 14 सांख्यिकी Additional Questions 37
माध्यक = \(\frac { n }{ 2 }\) वाँ पद = \(\frac { 600 }{ 2 }\) = 300वाँ पद जो वर्ग (1,000 – 2,000) में आता है जिसमें
l = 1,000, cf = 250, f = 190, h = 1,000
MP Board Class 10th Maths Solutions Chapter 14 सांख्यिकी Additional Questions 38
= 1,000 + 263.16
= Rs 1,263.16
अत: अभीष्ट माध्यक आय = Rs 1,263.16 है।

प्रश्न 9.
एक क्रिकेट कोचिंग केन्द्र के 33 खिलाड़यों की गेंदबाजी की चाल (km/h) निम्न सारणी में दी है:
MP Board Class 10th Maths Solutions Chapter 14 सांख्यिकी Additional Questions 39
गेंदबाजी की माध्यक चाल का परिकलन कीजिए।
हल:
MP Board Class 10th Maths Solutions Chapter 14 सांख्यिकी Additional Questions 40
माध्यक चाल = \(\frac { 33 }{ 2 }\) = 16.5वाँ पद जो वर्ग (100 – 115) में है।
जहाँ l = 100, cf = 11, f = 9, h = 115 – 100 = 15 .
सूत्र : माध्यक चाल = \(l+\left(\frac{\frac{n}{2}-c f}{f}\right) \times h\)
MP Board Class 10th Maths Solutions Chapter 14 सांख्यिकी Additional Questions 41
अतः अभीष्ट माध्यक चाल = 109.17 (km/h) है।

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प्रश्न 10.
100 परिवारों की मासिक आय निम्न तालिका (सारणी) में दी गयी है :
MP Board Class 10th Maths Solutions Chapter 14 सांख्यिकी Additional Questions 42
बहुलक आय ज्ञात कीजिए।
हल :
बहुलक वर्ग सर्वाधिक बारम्बारता 41 वाला वर्ग (10,000 – 15,000) है जहाँ l = 10,000,
f1 = 41, f0 = 26, f2 = 16 एवं h = 15,000 – 10,000 = 5,000 है।
MP Board Class 10th Maths Solutions Chapter 14 सांख्यिकी Additional Questions 43
अतः अभीष्ट बहुलक आय = Rs 11,875 है।

प्रश्न 11.
70 पैकिटों में रखी कॉफी का भार निम्न सारणी में दिया गया है:
MP Board Class 10th Maths Solutions Chapter 14 सांख्यिकी Additional Questions 44
बहुलक भार की गणना कीजिए।
हल :
अधिकतम बारम्बारता 26 वाला वर्ग (201 – 202) बहुलक वर्ग है, जहाँ l = 201, f1 = 26, f0 = 12, f2 = 20 एवं h = 202 – 201 = 1
MP Board Class 10th Maths Solutions Chapter 14 सांख्यिकी Additional Questions 45
अतः अभीष्ट बहुलक भार = 201.7g है।

MP Board Class 10th Maths Chapter 14 अति लघु उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 1.
अवर्गीकृत आँकड़ों से निकाले गए माध्यक एवं उन आँकड़ों को वर्गीकृत करके निकाले गए माध्यक का मान सदैव समान रहता है। क्या आप भी यह सोचते हैं कि उक्त कथन सत्य है? कारण दीजिए।
हल :
उक्त कथन सदैव सत्य नहीं होता, क्योंकि वर्गीकृत आँकड़ों से माध्यक ज्ञात करने में प्रयुक्त सूत्र इस धारणा पर आधारित है कि वर्ग में प्रेक्षण समान रूप में बराबर-बराबर वितरित हैं।

प्रश्न 2.
एक वर्गीकृत आँकड़े समान माप के वर्गों में वर्गीकृत किए गए हों, तो माध्य के परिकलन के लिए निम्न सूत्र का प्रयोग कर सकते हैं।
\(\overline{x}=a+\frac{\Sigma f_{i} d_{i}}{\Sigma f_{i}}\)
जहाँ a एक कल्पित माध्य है। a किसी वर्ग का मध्य-बिन्दु होना चाहिए। क्या अन्तिम कथन सत्य है? अपने उत्तर का औचित्य दीजिए।
हल :
आवश्यक नहीं, क्योंकि किन्हीं आँकड़ों का माध्य कल्पित माध्य के चयन पर निर्भर नहीं करता है।

प्रश्न 3.
क्या यह कहना सत्य है कि वर्गीकृत आँकड़ों के माध्य, माध्यक व बहुलक सदैव भिन्न-भिन्न होंगे? अपने उत्तर का औचित्य दीजिए।
हल :
यह सदैव सत्य नहीं है, क्योंकि ये तीनों मान किसी विशेष आँकड़ों के लिए बराबर भी हो सकते हैं क्योंकि यह उन आँकड़ों पर निर्भर करता है।

प्रश्न 4.
क्या वर्गीकृत आँकड़ों के लिए माध्यक वर्ग एवं बहुलक वर्ग सदैव भिन्न-भिन्न होंगे? अपने उत्तर का औचित्य दीजिए।
हल :
यह सदैव सत्य नहीं है, क्योंकि यह बात आँकड़ों पर निर्भर करती है।

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प्रश्न 5.
क्या अवर्गीकृत आँकड़ों का माध्य और उन आँकड़ों को वर्गीकृत करके निकाले गए माध्य सदैव समान होते हैं? अपने उत्तर का औचित्य दीजिए।
हल :
यह कथन सदैव सत्य नहीं है, क्योंकि जब हम वर्गीकृत आँकड़ों से माध्य ज्ञात करते हैं, तो यह मानकर चलते हैं कि बारम्बारता सम्पूर्ण वर्ग में समान रूप से वितरित होता है।

प्रश्न 6.
क्या यह कहना सत्य है कि तोरण बारम्बारता बंटन का ग्राफीय निरूपण है। अपने उत्तर का कारण दीजिए।
हल :
नहीं, क्योंकि बारम्बारता बंटन का ग्राफीय निरूपण तोरण नहीं, बल्कि आयत चित्र, बारम्बारता बहुभुज एवं बारम्बारता वक्र हो सकता है और तोरण संचयी बारम्बारता बंटन का ग्राफीय निरूपण होता है।

MP Board Class 10th Maths Chapter 14 वस्तुनिष्ठ प्रश्न

MP Board Class 10th Maths Chapter 14 बहु-विकल्पीय प्रश्न

प्रश्न 1.
संचयी बारम्बारता सारणी बनाना निम्न के परिकलन में उपयोगी है
(a) माध्य
(b) माध्यक
(c) बहुलक
(d) ये सभी।
उत्तर:
(b) माध्यक

प्रश्न 2.
निम्न वितरण में :
MP Board Class 10th Maths Solutions Chapter 14 सांख्यिकी Additional Questions 46
आय सीमा Rs 16,000 – 19,000 रखने वाले परिवारों की संख्या होगी :
(a) 15
(b) 16
(c) 17
(d) 19.
उत्तर:
(d) 19.

प्रश्न 3.
एक कक्षा के 60 विद्यार्थियों की ऊँचाईयों के निम्न बारम्बारता बंटन का अवलोकन कीजिए :
MP Board Class 10th Maths Solutions Chapter 14 सांख्यिकी Additional Questions 47
बहुलक वर्ग की निम्न सीमा एवं माध्यक वर्ग की उच्च सीमा का योग होगा :
(a) 310
(b) 315
(c) 320
(d) 330.
उत्तर:
(b) 315

प्रश्न 4.
\(\frac{\Sigma f_{i} x_{i}}{\Sigma f_{i}}\) सूत्र है:
(a) माध्य का
(b) माध्यक का
(c) बहुलक का
(d) सूचकांक का।
उत्तर:
(a) माध्य का

प्रश्न 5.
\(a+\frac{\Sigma f_{i} d_{i}}{\Sigma f_{i}}\) सूत्र है.
(a) माध्य का
(b) माध्यक का
(c) बहुलक का
(d) सूचकांक का।
उत्तर:
(a) माध्य का

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प्रश्न 6.
\(a+\frac{\Sigma f_{i} u_{i}}{\Sigma f_{i}} \times h\) सूत्र है :
(a) माध्य का
(b) माध्यक का
(c) बहुलक का
(d) सूचकांक का।
उत्तर:
(a) माध्य का

प्रश्न 7.
\(l_{1}+\left(\frac{\frac{n}{2}-c f}{f}\right) \times h\) सूत्र है:
(a) माध्य का
(b) माध्यक का
(c) बहुलक का
(d) सूचकांक का।
उत्तर:
(b) माध्यक का

प्रश्न 8.
\(l_{1}+\left(\frac{f_{1}-f_{0}}{2 f_{1}-f_{0}-f_{2}}\right) \times h\) सूत्र है:
(a) माध्य का
(b) माध्यक का
(c) बहुलक का
(d) सूचकांक का।
उत्तर:
(c) बहुलक का

प्रश्न 9.
सूत्र \(\overline{x}=a+\frac{\Sigma f_{i} d_{i}}{\Sigma f_{i}}\) में d विचलन है a से निम्न वर्ग :
(a) वर्गों की निम्न सीमाओं का
(b) वर्गों की उच्च सीमाओं का
(c) वर्गों के.मध्य-बिन्दुओं का
(d) वर्ग चिन्हों की बारम्बारताओं का।
उत्तर:
(c) वर्गों के.मध्य-बिन्दुओं का

प्रश्न 10.
जब वर्गीकृत आँकड़ों का माध्य ज्ञात किया जाता है, तो हम यह कल्पना करते हैं कि बारम्बारताएँ
(a) सम्पूर्ण वर्गों में समान रूप से वितरित होती हैं
(b) वर्ग चिह्नों पर केन्द्रीकृत होती हैं
(c) उच्च वर्ग सीमाओं पर केन्द्रित होती हैं
(d) निम्न वर्ग सीमाओं पर केन्द्रित होती हैं
उत्तर:
(b) वर्ग चिह्नों पर केन्द्रीकृत होती हैं

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प्रश्न 11.
यदि xi वर्ग अन्तरालों के मध्य-बिन्दु हों, fi संगत बारम्बारताएँ एवं \(\overline{x}\) माध्य हो, तब \(\frac{\Sigma f_{i} x_{i}}{n}-\overline{x}\) बराबर होगा:
(a) 0
(b) -1
(c) 1
(d) 2.
उत्तर:
(a) 0

प्रश्न 12.
वर्गीकृत बारम्बारता बटन में प्रयुक्त सूत्र \(\overline{x}=a+h\left(\frac{\Sigma f_{i} u_{i}}{\Sigma f_{i}}\right)\) में u; बराबर होगा :
MP Board Class 10th Maths Solutions Chapter 14 सांख्यिकी Additional Questions 48
उत्तर:
(c) \(\frac{x_{i}-a}{h}\)

प्रश्न 13.
‘से कम’ प्रकार के एवं ‘से अधिक’ प्रकार के संचयी बारम्बारता वक्रों के प्रतिच्छेद बिन्दु का गुण होगा:
(a) माध्य
(b) माध्यक
(c) बहुलक
(d) ये सभी।
उत्तर:
(b) माध्यक

प्रश्न 14.
निम्न वितरण :
MP Board Class 10th Maths Solutions Chapter 14 सांख्यिकी Additional Questions 49
में माध्यक वर्ग एवं बहुलक वर्ग की निम्न सीमाओं का योग होगा :
(a) 15
(b) 25
(c) 30
(d) 35.
उत्तर:
(c) 30

प्रश्न 15.
निम्न बारम्बारता बंटन (वितरण) का अवलोकन कीजिए :
MP Board Class 10th Maths Solutions Chapter 14 सांख्यिकी Additional Questions 50
माध्यक वर्ग की उच्च सीमा है:
(a) 17
(b) 17.5
(c) 18
(d) 18.5.
उत्तर:
(b) 17.5

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प्रश्न 16.
निम्न वितरण के लिए:
MP Board Class 10th Maths Solutions Chapter 14 सांख्यिकी Additional Questions 51
बहुलक का वर्ग है:
(a) 10-20
(b) 20-30
(c) 30-40
(d) 50-60.
उत्तर:
(c) 30-40

प्रश्न 17.
निम्न प्रेक्षणों का अवलोकन कीजिए :
MP Board Class 10th Maths Solutions Chapter 14 सांख्यिकी Additional Questions 52
माध्यक वर्ग की उच्च सीमा एवं बहलक वर्ग की निम्न सीमा का अन्तर है
(a) 0
(b) 19
(c) 20
(d) 38.
उत्तर:
(c) 20

प्रश्न 18.
150 धावकों द्वारा 110 m हर्डल दौड़ में लिए गए सेकण्ड में समयों को निम्न प्रकार सारणीकृत किया गया है:
MP Board Class 10th Maths Solutions Chapter 14 सांख्यिकी Additional Questions 53
14.6 सेकण्ड से कम समय में अपनी दौड़ सम्पन्न करने वाले धावकों की संख्या है
(a) 11
(b) 71
(c) 82
(d) 130.
उत्तर:
(c) 82

प्रश्न 19.
निम्न वितरण का अवलोकन कीजिए :
MP Board Class 10th Maths Solutions Chapter 14 सांख्यिकी Additional Questions 54
वर्ग 30-40 की बारम्बारता है:
(a) 3
(b) 4
(c) 48
(d) 57
उत्तर:
(a) 3

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रिक्त स्थानों की पूर्ति

1. …………….. = 3 x माध्यक – 2 x माध्य।
2. सूत्र \(\overline{x}=a+\frac{\Sigma f_{i} d_{i}}{\Sigma f_{i}}\) में a ………………… कहलाता है।
3. माध्यक = \(l+\left(\frac{\frac{n}{2}-c f_{i}}{f}\right) h\) में l ……. होती है।
4. बहुलक = \(l+\left(\frac{f_{1}-f_{0}}{2 f_{1}-f_{0}-f_{2}}\right) \times h\) में h …………… होता है।
5. सूत्र \(\overline{x}=a+\left(\frac{\sum f_{i} u_{i}}{\Sigma f_{i}}\right) \times h\) में ui = ………. होगा।
उत्तर-
1. बहुलक,
2. कल्पित माध्य,
3. माध्यक वर्ग की निम्न सीमा,
4. बहुलक वर्ग की वर्ग माप,
5. \(\frac{x_{i}-a}{h}\)

जोड़ी मिलाना

MP Board Class 10th Maths Solutions Chapter 14 सांख्यिकी Additional Questions 55
उत्तर-
1.→(c),
2.→(d),
3.→(e),
4.→(a),
5. →(b).

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सत्य/असत्य कथन

1. समान प्रेक्षणों के वर्गीकृत एवं अवर्गीकृत आँकड़ों से निकाले गए माध्यमों का मान सदैव समान होता है।
2. सूत्रों द्वारा केन्द्रीय मापों के परिकलन में वर्गों का सतत होना आवश्यक है।
3. समान प्रेक्षणों के वर्गीकृत एवं अवर्गीकृत आँकड़ों से निकाले गए बहलकों का मान सदैव समान होता है।
4. संचयी बारम्बारता सारणी की आवश्यकता माध्यक का परिकलन करने में होती है।
5. बारम्बारता वक्र तोरण कहलाता है।
उत्तर-
1. असत्य,
2. सत्य
3. असत्य,
4. सत्य,
5. असत्य।

एक शब्द/वाक्य में उत्तर

1. केन्द्रीय प्रवृत्ति की मापों माध्य, माध्यक एवं बहुलक में से कोई भी दो मापें दी हैं, तो तीसरी माप कैसे , ज्ञात करेंगे?
2. संचयी बारम्बारता वक्र को क्या कहते हैं?
3. सर्वाधिक बारम्बारता वाला वर्ग क्या कहलाता है?
4. सम्पूर्ण वितरण को दो बराबर भागों में बाँटने वाला अंक जिस वर्ग अन्तराल में होता है उस वर्ग को क्या कहते हैं?
5. तोरण कितने प्रकार के होते हैं?
6. 1, 2, 3, 4, 5 समान्तर माध्य क्या होगा? (2019)
7. माध्यिका का सूत्र लिखिए। (2019)
उत्तर-
1. बहुलक = 3 x माध्यक – 2 x माध्य सूत्र का प्रयोग करके,
2. तोरण,
3. बहुलक वर्ग,
4. माध्यक वर्ग.
5. दो प्रकार के,
6. 3 (तीन).
7. माध्यिका = \(l+\left(\frac{n / 2-c f}{f}\right) \times h\)