MP Board Class 9th Sanskrit व्याकरण अव्ययपरिचयः

सदृशं त्रिषु लिङ्गेषु सर्वासु च विभक्तुिष।
वचनेषु च सर्वेषु यन्नव्येति तदव्ययम्॥

अर्थात् जिन शब्दों में लिंग, कारक और वचन के कारण किसी प्रकार का विकार (परिवर्तन) नहीं होता और जो प्रत्येक दशा में एक समान रहते हैं, उन्हें अव्यय शब्द कहते हैं।

अव्ययों के भेद
अव्ययों के पाँच भेद हैं-

I. उपसर्गः
II. क्रियाविशेषणम्
III. चादिः
IV. समुच्चयबोधकः
V. विस्मयादिबोधकः

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I. उपसर्गः

धातु अथवा धातु से बने अन्य शब्दों (संज्ञा, विशेलण) आदि के पूर्व लगने वाले निम्नलिखित 22 शब्दांशों को उपसर्ग कहते हैं-
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II. क्रियाविशेषणम्

जिन शब्दों से क्रिया के काल, स्थान आदि विशेषताओं का बोध होता है, उन्हें क्रिया-विशेषण कहते हैं। ये अव्यय हैं, इनके रूप नहीं बनते हैं।
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III. चादिः

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IV. समुच्चयबोधकाः

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V. विस्मयादिबोधकाः

अव्ययम् – अर्थः
अहह – शोक या खेद अर्थ में प्रयुक्त
अहो – आश्यर्चसूचक
बत – शोक या खेद अर्थ में प्रयुक्त
हा – कष्टसूचक

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