MP Board Class 9th Hindi Vasanti Solutions Chapter 13 बालिका का परिचय (सुभद्रा कुमारी चौहान)

बालिका का परिचय अभ्यास-प्रश्न

बालिका का परिचय लघु उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 1.
इस कविता में जीवन-ज्योति का क्या आशय है? स्पष्ट करें।
उत्तर
इस कविता में जीवन-ज्योति का आशय है-जीवन का आधार । बिटिया के प्रति माँ का वात्सल्य प्रेम अनन्य होता है। वह उसके लिए अतुल्य होता है।

प्रश्न 2.
‘बेटी अंधकार में दीप-शिखा की तरह है’ यह भाव किस पंक्ति में है? चुनकर लिखिये।
उत्तर
‘बेटी अंधकार में दीप-शिखा की तरह है। यह भाव निम्नलिखित पंक्ति में हैं-‘दीपशिखा है अंधकार की।’

बालिका का परिचय सही उत्तर चुनिये

प्रश्न 1.
बेटी का परिचय कौन सबसे अच्छा दे सकता है?
(क) पिता
(ख) माता
(ग) दादा
उत्तर
(ख) माता।

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प्रश्न 2.
इस कविता में कौन-सा भाव है?
(क) श्रृंगार
(ख) वीरता
(ग) वात्सल्य
उत्तर
(ग) वात्सल्य।

बालिका का परिचय दीर्घ उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 1.
बालिका परिचय कविता का सारांश लिखिये।
उत्तर
देखें-‘कविता का सारांश’।

प्रश्न 2.
कवयित्री ने बालिका को गोदी की शोभा क्यों कहा है स्पष्ट कीजिये।
उत्तर
कवयित्री ने बालिका को गोदी की शोभा कहा है। यह इसलिए कि किसी भी माँ की गोद में उसकी बालिका का मचलना एक न केवल अपूर्व आनन्द देता है, अपितु मन को मोह भी लेता है। इससे माँ का हृदय बाग-बाग हो उठता है। उस समय की शोभा देखते ही बनती है।

प्रश्न 3.
बाल-सुलभ क्रियाओं को हँसती हुई नाटिका मानने का क्या आशय है?
उत्तर
बाल-सुलभ क्रियाओं को हँसती हुई नाटिका मानने का आशय है-बाल-सुलभ क्रियाएँ मन को भाने वाली और गुदगुदाने वाली होती है। अतएव उसे देखकर सभी आनन्द से झूम उठते हैं।

प्रश्न 4.
निम्न पंक्तियों का भावार्थ लिखो।
(क) मेरा मन्दिर …………………….. मेरी।
उत्तर
उपर्युक्त पंक्तियों का भावार्थ यह है कि किसी माँ के लिए उसकी बालिका सब कुछ होती है। माँ अपनी बालिका को किसी मन्दिर, मस्जिद, काबा, काशी, पूजा-पाठ, ध्यान, जप-तप से कम नहीं समझती है। इस प्रकार वह अपने हृदय में बसाए रहती है।

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(ख) प्रभु ईशा ………………………….. पास ॥
उत्तर
(ख) उपर्युक्त पंक्तियों का भावार्थ यह है कि बालिका में महान आत्माओं के गुण होते हैं। उसमें ईसामसीह की क्षमाशीलता, नबी-मुहम्मद का विश्वास और महावीर स्वामी और महात्मा गौतम बुद्ध के जीव-दया के भाव भरे होते हैं।

प्रश्न 5.
वही जान सकता है इसको
माता का दिल है जिसका ॥
इन पंक्तियों का भाव स्पष्ट कीजिये।
उत्तर
इन पंक्तियों का भाव यह है कि बालिका के महान और उच्च गुणों का वर्णन करना सम्भव नहीं है। दूसरे शब्दों में यह कि बालिका की महानता और श्रेष्ठता को कह-सुनकर नहीं, अपितु अनुभव करके ही जाना-समझा जा सकता है।

प्रश्न 6.
बेटी की तुलना किस-किस से की गई है?
उत्तर
बेटी की तुलना राम, कृष्ण, ईसामसीह, नबी, मुहम्मद, महावीर स्वामी और महात्मा गौतम बुद्ध से की गई है।

बालिका का परिचय भाषा-अध्ययन/काव्य-सौन्दर्य

क. कविता में अनुप्रास अलंकार की छटा दर्शनीय है। जैसे जीवन-ज्योति नष्ट नयनों की पंक्ति में ‘ज’ वर्ण की पुनरावृत्ति हुई है। कविता में से अनुप्रास अलंकार छाँटकर लिखिए।
ख. निम्नलिखित उदाहरण में ‘पतझड़ के साथ हरियाली का प्रयोग कर काव्य में विरोधाभास के सौन्दर्य को प्रस्तुत किया गया है। कविता में से इस प्रकार की अन्य पंक्तियाँ छाँटिए।
उदाहरण-
है पतझड़ की हरियाली
पतझड़ की हरियाली है।
उत्तर-(क) ‘सुख-सुहाग, शाही शान, मनोकामना मतवाली, घनी घटा. मस्ती मगन. मेरा मन्दिर, मेरी मस्जिद, काबा-काशी, पूजा-पाठ, जप-तप, अपने आँगन और मात्र मोदे।

1. शाहीशान भिखारिन की है।
भिखारिन की शाही शान है।

2. दीपशिखा है अंधकार की।
अंधकार की दीपशिखा है

3. सुधा-धार यह नीरस दिल की।
नीरस दिल की यह सुधा-धार।

बालिका का परिचय योग्यता-विस्तार

प्रश्न
1. भारतीय संस्कृति में ‘कन्या’ के महत्त्व को स्पष्ट करते हुए दो अनुच्छेद लिखिए।
2. धर्म अनेक परन्तु सन्देश एक है। हिन्दू, मुसलमान, और ईसाई, धर्मों के मूल आदर्श जानिए, उनकी और शिक्षाओं और मूल्यों के चार्ट तैयार कीजिए।
उत्तर
उपर्युक्त प्रश्नों को छात्र/छात्रा अपने अध्यापक/अध्यापिका की सहायता से हल करें।

बालिका का परिचय परीक्षोपयोग अन्य महत्त्वपूर्ण प्रश्नोत्तर

लघूत्तरीय प्रश्नोत्तर

प्रश्न 1.
‘सुधा-धार यह नीरस दिल की’ का क्या आशय है? स्पष्ट कीजिए।
उत्तर
‘सुधा-धार यह नीरस दिल की’ का आशय है-बालिका का अद्भुत प्रभाव। किसी माँ के लिए उसकी बालिका अमृत की धारा के समान होती है। अर्थात् बालिका अपनी माँ के सूनेपन को दूर कर उसमें चंचलता और सजीवता ला देती है।

प्रश्न 2.
इस कविता में किसके परस्पर संबंध को चित्रित किया गया है?
उत्तर
इस कविता में माँ और बेटी के परस्पर संबंध को चित्रित किया गया है।

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प्रश्न 3.
इस कविता में कवयित्री की कौन-सी भावना प्रकट हुई है?
उत्तर
इस कविता में कवयित्री की ‘बेटी माँ के भविष्य की निर्मात्री है’ यह भावना प्रकट हुई है।

बालिका का परिचय दीर्घ उत्तरीय प्रश्नोत्तर

प्रश्न 1.
इस कविता में रूपक अलंकार की छटा है। आप उन्हें छाँटकर लिखिए।
उत्तर
सुख-सुहाग की लाली, सुधा-धार और जीवन-ज्योति।

प्रश्न 2.
कवयित्री ने बालिका के लिए कौन-कौन से उदाहरण प्रस्तुत किए हैं?
उत्तर
कवयित्री ने बालिका के लिए.अँधेरे में दीपक, घटा का उजाला, आँखों की ज्योति. ईशामसीह की क्षमा, नबी मुहम्मद का विश्वास, महावीर स्वामी और महात्मा गौतम बुद्ध की दया को उदाहरण के रूप में प्रस्तुत किया है।

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प्रश्न 3.
श्रीमती सुभद्रा कुमारी चौहान विरचित कविता ‘बालिका का परिचय’ का मुख्य भाव स्पष्ट कीजिए।
उत्तर
प्रस्तुत कविता ‘बालिका का परिचय’ कवयित्री श्रीमती सुभद्राकुमारी चौहान की भाववर्द्धक कविता है। सुभद्राकुमारी चौहान ने इसमें वात्सल्य रस को उड़ेल दिया है। इसे लक्ष्य कर लिखी गई यह रचना ‘बालिका का परिचय’ आज भी मील का पत्थर कही जा सकती है। प्रस्तुत कविता में कवयित्री का मानो उनका मातृ हदय ही साकार हो उठा है। वे नन्हीं बालिका को अधिक प्रभावशाली रूप में अनुभव करती हैं। इसके लिए वे बालिका को अँधेरे में दीपक, घटा का उजाला, नयनों की ज्योति, ईशा की क्षमा, मुहम्मद का विश्वास तथा गौतम की दया जैसे अनेक यशस्वी प्रतीकों के रूप में देखती हैं। इस प्रकार हम यह देखते हैं कि उन्होंने माँ और शिशु के बीच के रागात्मक सम्बन्ध का नैसर्गिक चित्रण किया है। “बेटियाँ भविष्य की निर्माता हैं।” कवयित्री की यही भावना उनकी इस कविता में दिखाई देती है।

बालिका का परिचय कवयित्री-परिचय

प्रश्न
श्रीमती सुभद्रा कुमारी चौहान का संक्षिप्त जीवन-परिचय देते हुए उनके साहित्य के महत्त्व पर प्रकाश डालिए।
उत्तर
श्रीमती सुभद्रा कुमारी चौहान वीर रस की सर्वश्रेष्ठ कवयित्री हैं। जीवन परिचय-श्रीमती सुभद्रा कुमारी चौहान का जन्म सन् 1904 में उत्तर प्रदेश के प्रयाग के निहालपुर महसे में श्री रामनाथ सिक नामक एक सुशिक्षित परिवार में हुआ था। आपके पिता सम्पन्न, ईश्वरभक्त, उदार, विद्यानुरागी एवं राष्ट्रीय-विचारधारा वाले व्यक्ति थे। आपकी प्रतिभा बचपन से ही विलक्षण थी। इससे प्रभावित होकर आपकी शिक्षा की समुचित व्यवस्था हुई थी। आप प्रयाग के क्राइस्ट कालेज में अध्ययन करते समय काव्य-रचना किया करती थीं। उस समय भी आपकी कविताएँ राष्ट्रीय-भावों से ओत-प्रेत हुआ करती थीं। उसमें तत्कालीन राष्ट्रीय-आन्दोलनों की झलक, स्वदेश-प्रेम और राष्ट्रीयता की बलवती भावना मुखरित होती थी। ये ही भावनाएँ आपकी आगामी कविता की प्रेरणा-शक्ति बनकर आयीं। ‘कर्मवीर’ पत्र में प्रकाशित रचनाओं के माध्यम से आपकी ख्याति अमर हो गई। आपका विवाह सन् 1919 में खण्डवा निवासी ठाकुर लक्ष्मणसिंह चौहान से हुआ। पति की स्वीकृति लेकर आपने अपने अध्ययन का क्रम नहीं छोड़ा। बनारस के थियोसोफिकल स्कूल में प्रवेश लेकर अध्ययन जारी रखा। महात्मा गाँधी द्वारा चलाए जा रहे असहयोग आन्दोलन में आपने जमकर भाग लिया। फलतः आपको कई बार जेल जीवन बिताना पड़ा। इस स्थिति में भी आपने अपनी पारिवारिक व्यवस्था को अव्यवस्थित नहीं होने दिया। सन् 1934 ई. में आप विधान-परिषद् की सदस्या बनीं। सन् 1948 ई. में एक मोटर दुर्घटना में आपकी असामयिक मृत्यु हो गई।

कृतियाँ-आपकी रचनाएँ निम्नलिखित हैं

1. काव्य-संग्रह-

  • ‘मुकुल’
  • ‘नक्षत्र’
  • त्रिधारा’

2. कहानी-संग्रह

  • ‘सीधे-साधे चित्र’
  • ‘बिखरे मोती’
  • ‘उन्मादिनी’।

3. बाल-साहित्य-‘सभा के खेल’। भाषा-शैली-श्रीमती सुभद्रा कुमारी चौहान की भाषा सरल और प्रवाहमयी है। वह रोचक और हृदयस्पर्शी है। उसमें ओज और वेग है। वीर रस, करुण रस, वात्सल्य, शान्त रस आदि आपके प्रिय रस हैं। उपमा, अनुप्रास, मानवीकरण, उत्प्रेक्षा आदि आपके रुचिप्रद अलंकार हैं। बिम्बों और प्रतीकों के प्रयोग आपने यथावत् किए हैं। श्रीमती सुभ्रदा कुमारी चौहान की शैली चित्रात्मक, काव्यात्मक और भावात्मक गरसमें प्रवाहमयता और बोधगम्यता नामक शैलीगत विशेषताएँ अधिक रूप में दिखाई देती हैं। मूल रूप से आपकी शैली उपदेशात्मक और प्रेरणादायक है। वह सहज होकर भी कठिन दिखाई देती है।

साहित्यिक महत्त्व-श्रीमती सुभद्रा कुमारी चौहान का साहित्यिक महत्त्व वीर रस काव्य-क्षेत्र में सर्वोच्च है। आपने राजनीति और साहित्य दोनों ही क्षेत्रों में अपनी बहुत बड़ी पहचान बनाई है। यही नहीं आपने ग़द्य-पद्य दोनों ही साहित्यिक विधाओं का सफलतापूर्वक निर्वाह किया है। एक ओर जहाँ ‘झाँसी की रानी’ कविता हर युवक की जबान पर है, वहीं दूसरी ओर बचपन सम्बन्धी कविताएँ प्रत्येक को मधुर बचपन की याद दिलाती हैं। यही नहीं आप एक सफल कहानी लेखिका भी हैं। आपकी कहानियों में नारी-जीवन, शोषित-समाज और पारिवारिक-जीवन का मार्मिक चित्रण है। आपका साहित्यिक-महत्त्व रखने के लिए आपके काव्य-संग्रह ‘मुकुल’ पर सन् 1931 ई. में आपको सेक्सरिया पुरस्कार मिला था।

बालिका का परिचय कविता का सारांश

प्रश्न
श्रीमती सुभद्रा कुमारी चौहान-विरचित कविता ‘बालिका का परिचय’ का सारांश अपने शब्दों में लिखिए।
उत्तर
श्रीमती सुभद्रा कुमारी चौहान-विरचित कविता ‘बालिका का परिचय’ माता के हृदय के भावों को प्रकट करने वाली एक ज्ञानवर्द्धक कविता है। इस कविता का सारांश इस प्रकार है कवयित्री अपनी बेटी के प्रति अपने वात्सल्य भावों को उडेलती हई कह रही है कि वह उनकी गोदी की शोभा और सुख-सुहाग की लालिमा है। वह अंधकार की दीपशिखा, घनी घटाओं की चमक, उषा काल में कमल-भंगों (भौरी) की तरह सुखदायक है,तो पतझड़ की हरियाली है। नीरस और उदास हदय में अमत की धारा बहाने वाली है तो मस्त मगन तपस्वी के समान है। ज्योति खोई आँखों की जीवन-ज्योति और मनस्वी की सच्ची लगन है। बीते हुए बचपन की क्रीड़ामयी वाटिका है। यह तो मेरे लिए मन्दिर-मस्जिद, काबा-काशी के समान है। यह तो मेरी पूजा-पाठ, ध्यान, जप-तप है। उसने अपने आँगन में बालक कृष्ण की क्रीड़ाओं को देखा है। माता कौशल्या की प्रसन्नता को अपने मन के भीतर देखा। आओ सभी ईशामसीह की क्षमाशीलता, नबी मुहम्मद के विश्वास, और गौतम बुद्ध का जीवों के प्रति दया की भावना को बालिका के पास आकर देख लें। अगर कोई उससे परिचय पूछ रहा है, तो वह उसका किस प्रकार परिचय दे सकती है। उसे तो वही अच्छी तरह से जान सकता है, जिसमें माता का दिल है।

बालिका का परिचय संदर्भ-प्रसंग सहित व्याख्या

पद्यांश की सप्रसंग व्याख्या, काव्य-सौन्दर्य व विषय-वस्तु पर आधारित प्रश्नोत्तर

1. यह मेरी गोदी की शोभा,
सुख सुहाग की है लाली।
शाही शान भिखारिन की है,
मनोकामना मतवाली ॥1॥

दीपशिखा है अंधकार की,
घनी घटा की उजियाली।
उषा है यह कमल-भंग की,
है पतझड़ की हरियाली ॥2॥

शब्दार्थ-सुहाग-सौभाग्य। शाही-सम्पन्नता, वैभव। शान-स्वाभिमान। दीप शिखा-दीपक की लौ। भृग-मौंरा।

प्रसंग-यह पद्यांश हमारी पाठ्य-पुस्तक ‘वासंती-हिन्दी सामान्य’ में संकलित तथा श्रीमती सुभद्रा कुमारी विरचित कविता ‘बालिका का परिचय’ से है। इसमें कवयित्री ने अपनी बेटी को अपनी गोद की शोभा और सुख-सौभाग्य की लालिमा मानते हुए कहा है कि

व्याख्या-यह मेरी बिटिया मेरी गोद की शोभा और मेरे सुख-सौभाग्य की लालिमा है। यह मेरे लिए भिखारिन की शाही शान और मेरी स्वच्छन्द मनोकामना को पूरी करने के लिए मानो मतवाली बनी रहती है। यह मेरे दुख-अभाव रूपी अंधकार की दीपशिखा और कठिनाइयों की उमड़ती घटाओं के बीच उत्पन्न आशा रूपी उजियाली है। यही नहीं, यह तो मेरे लिए वैसे ही सुखकर और आनन्द है, जैसे उषा के होने पर कमलों-भौरों को आनन्द और सुख मिलता है। इसी प्रकार यह मेरे जीवन में आए पतझड़ के लिए हरियाली स्वरूप है। कहने का भाव यह कि मेरी बिटिया मेरे जीवन के लिए हर प्रकार से सुखद और आनन्ददायक है।

विशेष-

  1. कवयित्री का वात्सल्य भाव सच्चे रूप में है।
  2. वात्सल्य रस का संचार है।
  3. भाषा सरल और सुबोध है।
  4. रूपक अलंकार है।

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1. पद्यांश पर आधारित काव्य-सौन्दर्य सम्बन्धी प्रश्नोत्तर

प्रश्न
(i) प्रस्तुत पद्यांश का काव्य-सौन्दर्य स्पष्ट कीजिए।
(ii) प्रस्तुत पयांश का भाव-सौन्दर्य स्पष्ट कीजिए।
उत्तर-
(i) प्रस्तुत पद्यांश का काव्य-विधान वात्सल्य रस से लबालब है। उसे रूपक अलंकार से आकर्षक बनाकर सरल और सुबोध शब्दावली से रोचक बनाने का प्रयास सचमुच में सराहनीय है।
(ii) प्रस्तुत पद्यांश की भाव-योजना में सरलता और स्वाभाविकता है, तो रोचकता और प्रवाहमयता भी है। इस तरह यह पद्यांश भाववर्द्धक रूप में है। यह कहा जा सकता है।

2. पयांश पर आधारित विषय-वस्त से सम्बन्धित प्रश्नोत्तर

प्रश्न
(i) उपर्युक्त पद्यांश में कवयित्री ने क्या किया है?
(ii) बालिका का चरित्र कैसा है?
उत्तर
(i) उपर्युक्त पद्यांश में कवयित्री ने बालिका का परिचय दिया है।
(ii) बालिका का चरित्र अत्यधिक विशुद्ध और स्वाभाविक है।

2. सुपा-धार यह नीरस दिल की मस्ती मगन तपस्वी की।
जीवन ज्योति नष्ट नयनों की सच्ची लगन मनस्वी की॥3॥

बीते हुए बालपन की यह क्रीड़ा पूर्ण वाटिका है।
वही मचलना, वही किलकना हँसती हुई नाटिका है।।4।।

शब्दार्च
सुधा-धार-अमृत की धार। नयनों-आँखों। मनस्वी-बुद्धिमान। बालपन-बचपन। नाटिका-नाटक करने वाली।

प्रसंग-पूर्ववत । इसमें कवयित्री ने अपनी बिटिया को नीरस दिल में अमृत धारा प्रवाहित करने वाली मानते हुए कहा है।

व्याख्या-मेरी बिटिया मेरे नीरस हृदय के लिए अमृत की धारा है। इसकी मस्ती और प्रसन्नता किसी तपस्वी से कम नहीं है। आँखों की गयी हुई रोशनी को वापस लाने वाली यह जीवन की ज्योति के समान है। इसमें बुद्धिमानों की तरह सच्ची लगन है। यह मेरे बीते हुए बचपन को लौटाने वाली क्रीड़ामयी वाटिका की तरह है। इसका मचलना और किलकना किसी हँसती हुई नाटिका से किसी प्रकार कम नहीं है।

विशेष-

  1. भाषा की शब्दावली सरल और सुबोध है।
  2. शैली चित्रात्मक है।
  3. रूपक अलंकार है।
  4. वात्सल्य रस का संचार है।

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1. पद्यांश पर आधारित काव्य-सौन्दर्य सम्बन्धी प्रश्नोत्तर

प्रश्न(i) प्रस्तुत पद्यांश के काव्य-सौन्दर्य पर प्रकाश डालिए।
(ii) प्रस्तुत पयांश के भाव-सौन्दर्य को स्पष्ट कीजिए।
उत्तर
(i) प्रस्तुत पद्यांश का काव्य-स्वरूप सरल और सुबोध शब्दावली से होकर वात्सल्य रस में प्रवाहित हुआ है। इसमें चमत्कार लाने के लिए किया गया रूपक अलंकार का प्रयोग मन को और लुभा रहा है।
(ii) प्रस्तुत पयांश की भाव-योजना हृदय को बड़ी आसानी से छू रही है। बालिका के प्रति वात्सल्य भावना की सच्चाई की रोचकता निश्चर्य ही आकर्षक है।

2. पद्यांश पर आधारित विषय-वस्त से सम्बन्धी प्रश्नोत्तर

प्रश्न-
(i) बालिका को किन-किन रूपों में प्रस्तुत किया गया है?
(ii) बालिका के चरित्रोल्लेख से क्या अनुभूति होती है?
उत्तर
(i) बालिका को अमृत की धारा, मस्त मगन तपस्वी, जीवन-ज्योति, मनस्वी की सच्ची लगन, क्रीड़ामयी वाटिका और हँसती हुई नाटिका के रूप में प्रस्तुत किया गया है।
(ii) बालिका के चरित्रोल्लेख से बीते हुए बचपन की अनुभूति होती है।

3. मेरा मन्दिर, मेरी मस्जिद
काबा-काशी यह मेरी।
पूजा-पाठ, ध्यान-जप-तप है
घट-घट वासी यह मेरी ॥5॥

कृष्णचन्द्र की क्रीड़ाओं को
अपने आँगन में देखो।
कौशल्या के मात्र-मोदे को।
अपने ही मन में लेखो ॥6॥

शब्दार्थ-काबा-मुसलमानों का धार्मिक स्थान । घट-घट बासी-अन्दर निवास करने वाला परमात्मा। कृष्णचन्द्र-बालक श्रीकृष्ण। लेखो-देखो।

प्रसंग-पूर्ववत् । इसमें कवयित्री ने बालिका को धर्मस्वरूप मानते हुए कहा है कि

व्याख्या-मेरे लिए यह मेरी बेटी मन्दिर-मस्जिद, काबा, काशी के समान अत्यन्त पवित्र है। यह मेरे लिए पूजा-पाठ और ध्यान, जप-तप के समान है। यह मेरे घट-घट में निवास करती है। इस प्रकार मैंने अपनी बालिका को अपने आँगन में अनेक प्रकार के खेल-खेलते हुए देखा, तो मुझे ऐसा लगा मानो बालक श्रीकृष्ण ही मेरे ऑगन में बाल-क्रीड़ा कर रहे हैं। इसे आप लोग भी अपनी-अपनी बालिकाओं में देख सकते हैं। इस प्रकार माता कौशल्या के आनन्द को अपने मन में अनुभव कर सकते हैं।

विशेष-

  1.  भाषा में सजीवता है।
  2. शैली भावात्मक है।
  3. वात्सल्य रस का प्रवाह है।
  4. सामाजिक शब्दावली है।

1. पद्यांश पर आधारित काव्य-सौन्दर्य सम्बन्धी प्रश्नोत्तर

प्रश्न
(i) उपर्युक्त पद्यांश के काव्य-सौन्दर्य पर प्रकाश डालिए।
(ii) उपर्युक्त पयांश का भाव-सौन्दर्य लिखिए।
उत्तर
(i) उपर्युक्त पद्यांश वात्सल्य रस की सहज धारा से प्रवाहित है, जो सरल शब्दावली से पुष्ट हुआ है। अनुप्रास अलंकार (कृष्णचन्द्र की क्रीड़ाओं की, अपने आँगन, मात्र मोदे और मन में) के आकर्षक प्रयोग से यह पद्यांश प्रभावशाली बन गया है।
(ii) उपर्युक्त पद्यांश का भाव-सौन्दर्य सरल, स्वाभाविक और भाववर्द्धक है। यह पूरी तरह से बोधगम्य और हृदय को छू लेने वाला है। बालक के चरित्र की पवित्रता का उल्लेख सचमुच में बड़ा ही अनूठा है।

2. पद्यांश पर आधारित विषय-वस्त से सम्बन्धी प्रश्नोत्तर प्रश्न-10 बालिका की पवित्रता कैसी है?

(i) बालिका की बाल-लीला कैसी होती है? उत्तर-0 बालिका की पवित्रता मन्दिर, मस्जिद, काबा और काशी जैसी है।
(ii) बालिका की बाललीला बालक राम-कृष्ण जैसी होती है।

4. प्रभु ईशा की क्षमाशीलता
नवी मुहम्मद का विश्वास।
जीव दया जिनवर गौतम की
आओ देखो इसके पास ॥7॥

परिचय पूछ रहे हो मुझसे
कैसे परिचय हूँ इसका।
वहीं जान सकता है इसको
माता का दिल है जिसका ॥8॥

शब्दार्थ-ईशा-ईशामसीह। नबी-इस्लाम धर्म के महापुरुष। जिनवर-तीर्थकर/ महावीर स्वीमी।

प्रसंग-पूर्ववत्। उसमें कवयित्री ने बालिका को संसार के महापुरुष के समान बतलाने का प्रयास किया है। इसके लिए कवयित्री का कहना है कि

व्याख्या-चूँकि बालिका का तन-मन स्वच्छंद और पवित्र भावों से भरा होता है।

इसलिए उसमें ईशामसीह की क्षमाशीलता और नबी-मुहम्मद के अटूट विश्वास को समझा जा सकता है। यही नहीं, उसमें महावीर स्वामी और महात्मा गौतम बुद्ध के जीवों के प्रति अपार दया की भावना जैसे अद्भुत और अनोखे उच्च गुणों को देखा-परखा जा सकता है। कवयित्री का पुनः कहना है कि अगर कोई उससे बालिका का परिचय पूछे तो वह क्या दे सकती है। उसका तो यही कहना है कि बालिका को एक माता का दिल ही सचमुच में जान सकता है।

विशेष-

  1. बालिका के उदार और विशाल हृदय को अत्यधिक श्रेष्ठ कहा गया है।
  2. ईशामसीह, नबी, मुहम्मद, महावीर स्वामी और महात्मा गौतम बुद्ध से बालिका की तुलना की गई है। इसलिए इसमें उपमा अलंकार है।
  3. उदाहरण शैली है।
  4. सम्पूर्ण कथन अत्यधिक रोचक है।

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1. पद्यांश पर आधारित काव्य-सौन्दर्य सम्बन्धी प्रश्नोत्तर

प्रश्न
(i) उपर्युक्त पद्यांश के काव्य-सौन्दर्य को स्पष्ट कीजिए।
(ii) उपर्युक्त पयांश का भाव-सौन्दर्य लिखिए।
उत्तर
(i) उपर्युक्त पद्यांश को उपमा अलंकार की झड़ी लगाकर अधिक आकर्षक बनाने का प्रयास सचमुच में प्रशंसनीय है। इसे और रोचक बनाने के लिए भाषा को धारदार बनाकर कथन की सच्चाई का सामने लाया गया है।
(ii) उपर्युक्त पद्यांश का भाव-विधान स्वाभाविक, यथार्थपूर्ण, विश्वसनीय और हदयस्पर्शी है। बालिका की अद्भुत विशेषता को महानतम रूप में लाने का कवयित्री का प्रयास न केवल अनूठा है, अपितु प्रेरक भी है।

2. पयांश पर आधारित विषय-वस्तु से सम्बन्धी प्रश्नोत्तर

प्रश्न
(i) बालिका के असाधारण गुण कौन-कौन से हैं?
(ii) बालिका की सच्चाई को कौन बता सकता है?
उत्तर
(i) बालिका के असाधारण गुण हैं-ईशामसीह की क्षमाशीलता, नवी-मुहम्मद का विश्वास, महावीर स्वामी और महात्मा गौतम बुद्ध के जीवों के प्रति दया-भावना।
(ii) बालिका की सच्चाई माता ही बता सकती है।

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