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MP Board Class 10th Hindi Vasanti Solutions Chapter 13 समय नहीं मिला (श्रीमन्नारायण अग्रवाल)

समय नहीं मिला पाठ्य-पुस्तक के प्रश्नोत्तर

समय नहीं मिला लघु-उत्तरीय प्रश्नोत्तर

प्रश्न 1.
समय न मिलने का बहाना कैसे लोग करते हैं?
उत्तर
समय न मिलने का बहाना ज्यादातर वे लोग करते हैं, जो कछ नहीं करते हैं और उनकी टालमटोल करने की आदत पड़ जाती है।

प्रश्न 2.
समय के संबंध में अंग्रेजी की मशहूर कहावत कौन-सी है?
उत्तर
समय के संबंध में अंग्रेजी की मशहूर कहावत ‘समय धन’ है।

प्रश्न 3.
मालवीय जी द्वारा आयोजित सम्मेलन सफल क्यों न हो सका?
उत्तर
मालवीय जी द्वारा आयोजित सम्मेलन सफल न हो सका। उसका खास कारण तो ब्रिटिश सरकार के राजनैतिक दाँवपेंच ही थे। पर एक बात की ओर भी हमारा ध्यान गए बिना न रहा। सम्मेलन में शरीक होने के लिए नेता निश्चित समय पर ही आया करते थे, पर मालवीय जी की अनुपस्थिति के कारण वे थोड़ी देर राह देखकर तितर-बितर हो जाते थे। उन्हें खबर मिलती कि अभी मालवीय जी के आने में दो घण्टे की देर है। समय की इस गैर-पाबंदी के कारण मैंने कई नेताओं को हताश व परेशान होते देखा। कई लोग तो निराश होकर बीच ही में सम्मेलन का कार्य छोड़ कर चले गए।

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प्रश्न 4.
लेखक ने किन लोगों को मुबारकबाद देना चाहा है?
उत्तर
लेखक ने उन लोगों को मुबारकबाद देना चाहा है, जो अपने समय का पूरा फायदा उठाते हैं और एक मिनट भी बरबाद नहीं करते हैं।

प्रश्न 5.
सुबह जल्दी उठने से क्या लाभ होता है?
उत्तर
सुबह जल्दी उठने से अनेक लाभ होते हैं। इससे समय की काफी बचत होती है। दिन भर स्फूर्ति का अनुभव होता रहता है।

प्रश्न 6.
लेखक ने बड़ा व्यक्ति किसे कहा है?
उत्तर
लेखक ने बहुत व्यस्त रहने वाले व्यक्ति को बड़ा व्यक्ति कहा है।

समय नहीं मिला दीर्य-उत्तरीय प्रश्नोत्तर

प्रश्न 1.
‘वक्त सबके लिए बराबर है’ पंक्ति को लेखक ने किन उदाहरणों से समझाया है?
उत्तर
‘वक्त सबके लिए बराबर है’ पंक्ति को लेखक ने बैंक और शेयर बाजार के उदाहरणों से समझाया है। वह इस तरह अगर बैंक जवाब दे दें तो एक करोड़पति मिनटों में गरीब और भिखमँगा भी बन सकता है, लेकिन कुदरत का इन्तजाम नहीं बिगड़ता। समय के सागर में शेयर बाजार की तरह दिन में कितने ही बार ज्वार-भाटा नहीं आता। धन की दुनिया में अमीर-गरीब बादशाह-कंगाल का फ़र्क है। पर खुशकिस्मती से समय के साम्राज्य में ऊँच-नीच का भेदभाव नहीं है।

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प्रश्न 2.
सभा-सम्मेलनों में समय के संबंध में क्या देखा जाता है?
उत्तर
समय की तत्परता के संबंध में सभी सूबों की कहानी करीब एक-सी है। मीटिंग का समय पर शुरू होना हमेशा अपवाद रहा करता है, नियम नहीं। उड़ीसा में तो कई जगह मुकर्रर किए गए वक्त से दो घण्टे बाद मीटिंग शुरू करने का रिवाज ही पड़ गया है। वक्त बताते हुए भी मीटिंग बुलाने वाले, मीटिंग में आने वाले सभी सज्जन यही मानकर चलते हैं कि अगर चार बजे का समय दिया है तो मीटिंग छः बजे शुरू होगी। उसके बाद भले ही हो. पर छः के पहले नहीं।

प्रश्न 3.
किसी भी बैठक का समय पर आरंभ हो जाना अपवाद क्यों रहा है?
उत्तर
किसी भी बैठक का समय पर आरंभ हो जाना अपवाद ही रहा है। यह इसलिए कि देर से बैठक शुरू करने का रिवाज ही पड़ गया है।

प्रश्न 4.
लेखक ने विदेशों में समय की बरबादी के क्या उदाहरण दिए हैं?
उत्तर
इंग्लैण्ड व यूरोप के दूसरे देशों में भी समय की बरबादी दिल खोलकर की जाती है। वहाँ की सभाएँ वक्त पर होती हैं और लोग समय के पाबंद भी हैं। लेकिन अगर सिनेमा व थियेटर के टिकट लेने के लिए लंबी-लंबी कतारों का दृश्य आप देखें तो हैरान होंगे कि जो लोग इतने व्यस्त दिखते हैं और सड़कों पर भी दौड़-दौड़ कर चलते हैं, वे इन कतारों में दो-दो, तीन-तीन घण्टे लगातार किस तरह खड़े रहते हैं और केवल यही राह देखते रहते हैं कि कब टिकट घर की खिड़की खुले। इन , कतारों में जवान, बूढ़े, स्त्री, पुरुष सभी रहते हैं, कभी-कभी तीन घण्टे खड़े रहने के बाद भी थियेटर में जगह न रहने के कारण कुछ लोगों का वापस जाना पड़ता है।

प्रश्न 5.
जीवन में समय की पाबंदी के साथ-साथ कुछ लचक रखना भी जरूरी क्यों हैं?
उत्तर
जीवन में समय की पाबंदी के साथ-साथ कुछ लचक रखना भी जरूरी है। यह इसलिए कि इसके बिना कोई भी व्यक्ति अपना और अपने घरवालों का जीवन सुखी नहीं बना सकेगा। इससे वह चिड़चिड़ा और नाराज रहने लगेगा।

समय नहीं मिला भाषा-अनुशीलन

प्रश्न 1.
संधि-विच्छेद कर संघि का नाम लिखिए।
सज्जन, सदुपयोग, सम्मेलन, विद्यार्थी, मनोविकार।
उत्तर
MP Board Class 10th Hindi Vasanti Solutions Chapter 13 समय नहीं मिला img-1

प्रश्न 2.
समास-विग्रह कर प्रकार लिखिए
यवा-समय, अस्त-व्यस्त, ऊँच-नीच, अर्वव्यवस्था, पंचतंत्र, गजानन।
उत्तर
MP Board Class 10th Hindi Vasanti Solutions Chapter 13 समय नहीं मिला img-2

प्रश्न 3.
ख्याल, सिनेमा जैसे अनेक आगत शब्द इस पाठ में आए हैं। ऐसे अन्य आगत शब्दों को छाँटकर लिखिए।
उत्तर
उत्तर, अक्सर, काफी, बेशुमार, फैशन, डाकघर, बहाना, मशहूर, मुकाबला, लालसा आदि।

प्रश्न 4.
निम्नलिखित शब्दों के पर्यायवाची लिखिए
देश, आदमी, सुबह, लालसा, राह।
उत्तर
देश – वतन, राष्ट्र
आदमी – मनुष्य, मानव
सुबह – सबेरा, प्रातः
लालसा – अभिलाषा, इच्छा
राह – मार्ग, रास्ता।

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प्रश्न 5.
वाक्यों में प्रयोग कीजिए
टाल मटोल करना, तितर-बितर होना, राह देखना, मशीन बन जाना।
उत्तर
मुहावरे – वाक्य-प्रयोग
टालमटोल – आलसी मनुष्य टालमटोल करते रहते हैं।
तितर-बितर होना – घबड़ाहट में सारा सामान तितर-बितर हो गया।
राह देखना – वह देर तक अपने साथी की राह देखता रहा।
मशीन बन जाना – आज विज्ञान के युग में मनुष्य का मशीन बन जाना कोई आश्चर्य नहीं है।

प्रश्न 6.
निम्नलिखित वाक्य को निर्देशानुसार परिवर्तित कीजिए
गोपाल कल आएगा।
(क) निषेधवाचक
(ख) प्रश्नवाचक
(ग) विस्मयादिवाचक
(घ) संदेहवाचक।
उत्तर
गोपाल कल आएगा।
(क) निषेधवाचक – गोपाल कल नहीं आएगा।
(ख) प्रश्नवाचक – क्या गोपाल कल आएगा?
(ग) विस्मयादिवाचक – अहा! गोपाल कल आएगा!
(घ) संदेहवाचक – शायद गोपाल कल आएगा।

समय नहीं मिला योग्यता-विस्तार

प्रश्न 1.
समय का पालन करने वाले जिन महापुरुषों के नाम आप जानते हैं, उनकी सूची बनाइए।

प्रश्न 2.
समय का दुरुपयोग करने वाले लोगों को क्या-क्या दुष्परिणाम भोगने पड़ते हैं? संक्षिप्त लेख लिखिए।

प्रश्न 3.
समय की नियमितता से संबंधित अनुभवों को अपने शब्दों में लिखिए।
उत्तर
उपर्युक्त प्रश्नों को छात्र/छात्रा अपने अध्यापक/अध्यापिका की सहायता से हल करें।

समय नहीं मिला परीक्षोपयोगी अतिरिक्त प्रश्नोत्तर

अर्थग्रहण संबंधी प्रश्नोत्तर

प्रश्न 1.
‘समय नहीं मिला’ निबंध का प्रतिपाय स्पष्ट कीजिए।
उत्तर
लेखक ने इस व्यंग्यात्मक लेख में समय का महत्त्व समझाने का प्रयास किया है। लेखक का मानना है कि समय के साथ चलना. जीवन को नियमित बनाना. हर कार्य को गंभीरता से समझना, उसे भली-भाँति पूरा करना आदि बातें जीवन की सफलता के लिए बहुत आवश्यक हैं। इन्हें लेखक ने विविध उदाहरणों द्वारा स्पष्ट किया है। लेखक ने यह भी बताने का प्रयास किया है कि समय का महत्त्व न समझने वाले बहुत पीछे रह जाते हैं। समाज में उनका सम्मान भी सुरक्षित नहीं रहता। समयाभाव का बहाना बनाने वाले जीवन लक्ष्य तक नहीं पहुँचते। प्रस्तुत पाठ में लेखक ने दिनचर्या की अनियमितता और बहाना बनाने की आदत से बचने का संदेश दिया है।

प्रश्न 2.
समय पर किसी का जवाब न मिलने पर लेखक क्या समझ लेता है?
उत्तर
समय पर किसी का जवाब न मिलने पर लेखक यह समझ लेता है कि शायद डाकघर की कुछ गलती से पत्र ही देर से पहुँचा या न भी पहुँचा हो। या फिर महाशयजी का जीवन ही अस्त-व्यस्त और ढीला होगा। वे पत्र पढ़कर कहीं इधर-उधर डाल देते होंगे और या फिर उन्हें जवाब देने का ख्याल अक्सर नहीं रहता होगा या उत्तर देने के वक्त पत्र ही नहीं मिलता होगा।

प्रश्न 3.
समय धन से कहीं अधिक अहम् चीज है कैसे?
उत्तर
समय धन से कहीं अधिक अहम चीज़ है। यह इसलिए कि हम अधिकसे-अधिक मेहनत करके बहुत धन कमा सकते हैं। लेकिन हजार परिश्रम करने पर भी हम चौबीस घण्टों में एक भी मिनट नहीं बढ़ा सकते हैं। इस प्रकार की बहुमूल्य चीज का सामना धन से नहीं किया जा सकता है।

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प्रश्न 4.
निम्नलिखित कथनों के लिए दिए गए विकल्पों में से सही विकल्प का चयन कीजिए।
1. श्रीमन्नारायण अग्रवाल आर्थिक सिद्धान्तों के विशेषज्ञ थे।
1. समाजवादी
2. गाँधीवादी
3. राजनीतिक
4. आध्यात्मिक।
उत्तर
2. गाँधीवादी

2. श्रीमन्नारायण अग्रवाल की रचना है
1. मानव
2. मानव और दानव
3. अभिनव मानव
4. आदि मानव
उत्तर
1. मानव

3. श्रीमन्नारायण का जन्म कहाँ हुआ था
1. वाराणसी में
2. इलाहाबाद में
3. मैनपुरी में
4. उन्नाव में।
उत्तर
3. मैनपुरी में

4. श्रीमन्नारायण का जन्म किस सन में हुआ था
1. 1900 में
2. 1901 में
3. 1910 में
4. 1912 में।
उत्तर
4. 1912 में।

5. श्रीमन्नारायण सम्पादक थे।
1. सबकी बोली के
2. सरस्वती के
3. राष्ट्रभाषा प्रचार के
4. सबकी बोली’ और ‘राष्ट्रभाषा प्रचार’ के।
उत्तर
4. सबकी बोली’ और ‘राष्ट्रभाषा प्रचार’ के।

प्रश्न 5.
रिक्त स्थानों की पूर्ति दिए गए विकल्पों में से उचित शब्दों के चयन से कीजिए
1. ज्यादातर लोगों की ………….. आदत ही पड़ जाती है। (बहाना बनाने की, टालमटोल करने की)
2. बड़े लोगों का व्यवहार भी बहुत ………….. रहता है। (व्यस्त, व्यवस्थित)
3. समय न मिलने का बहाना अक्सर अपनी …………… को ढाँकने के लिए किया जाता है। (मजबूरी, कमजोरी)
4. अंग्रेजी की मशहूर कहावत है-‘समय …………… है’। (बलवान, धन)
5. धन से कहीं अधिक अहम् चीज है। (बुद्धि, समय)
उत्तर

  1. टालमटोल
  2. व्यवस्थित
  3. कमजोरी
  4. धन
  5. समय

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प्रश्न 6.
सही जोड़ी का मिलान किजिए
छोटे-छोटे सवाल – रामचंद्र शुक्ल
उत्साह – मीराबाई
रोटी का राग – तुलसीदास
वर्षा गीत – श्रीमन्नारायण अग्रवाल
विनय पत्रिका – दुष्यंत कुमार।
उत्तर
छोटे-छोटे सवाल – दुष्यंत कुमार
उत्साह – रामचंद्र शुक्ल
रोटी का राग – श्रीमन्नारायण अग्रवाल
वर्षा गीत – मीराबाई
विनय पत्रिका – तुलसीदास।

प्रश्न 7.
निम्नलिखित वाक्य सत्य हैं या असत्य? वाक्य के आगे लिखिए।
1. बड़े लोगों का जीवन नियमित रहता है।
2. जो व्यक्ति खतों का जवाब देरी से देता है, वह इसी कारण बड़ा हो जाता है।
3. वक्त के लिए सब बराबर हैं।
4. ज्यादातर लोग कुछ नहीं करते हैं।
5. 1930 में मालवीय जी ने प्रयाग में ‘एकता सम्मेलन’ बुलाया था।
उत्तर

  1. सत्य
  2. असत्य
  3. सत्य
  4. सत्य
  5. असत्य

प्रश्न 8.
निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर एक शब्द में दीजिए
1. अधिकांश लोग क्या करते हैं?
2. अपनी कमजोरी को ढाँकने के लिए क्या न मिलने का बहाना किया जाता है?
3. किसका अपमान करके कोई बड़ा आदमी न बन सका है और न बन सकेगा?
4. मालवीय जी ने ‘एकता सम्मेलन’ कब बुलाया था?
5. सुबह जल्दी उठकर हम दिनभर क्या महसूस करेगे?
उत्तर

  1. टालमटोल
  2. समय
  3. समय का
  4. 1932 में
  5. स्फूर्ति ।

समय नहीं मिला लघु-उत्तरीय प्रश्नोत्तर

प्रश्न 1.
किस तरह की बातें लोगों को सुननी पड़ती हैं?
उत्तर
‘मुझे आपका काम याद था, पर क्या करूँ, बिल्कुल समय ही नहीं मिला। क्षमा करें।…कल इसी वक्त आ जाइये। समय निकालने की जरूर कोशिश करूँगा।’ कुछ इसी तरह की बातें लोगों को सननी पड़ती हैं।

प्रश्न 2.
लेखक का बड़े लोगों के बारे में क्या अनुभव है?
उत्तर
लेखक का बड़े लोगों के बारे में अनुभव है कि जो लोग सचमुच बड़े हैं और बहुत व्यस्त रहते हैं उनका पत्र-व्यवहार भी बहुत व्यवस्थित रहता है। उनका जीवन नियमित रहता है और वे रोज का काम उसी समय निपटा देते हैं।

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प्रश्न 3.
लेखक किसकी तारीफ़ करता है?
उत्तर
लेखक उन लोगों की तारीफ़ करता है, जो खुशदिल रहकर दूसरों को भी खुशदिल रखें। उससे वह अपने-आप समय का जितना उपयोग कर सकें, उतना ही वह काबिलेतारीफ़ है।

प्रश्न 4.
लेखक के मुबारकबाद का पात्र कौन है?
उत्तर
लेखक के मुबारकबाद का पात्र वह है, जो अपने-आप समय का पूरा फायदा उठाता है और एक मिनट भी बरबाद नहीं करता है।

समय नहीं मिला लेखक-परिचय

जीवन-परिचय-श्रीमन्नारायण अग्रवाल गाँधीवादी चिंतकों-विचारकों में प्रमुख हैं। आपका जन्म उत्तर-प्रदेश के मैनपुरी जिलान्तर्गत हआ था। आपकी आरंभिक शिक्षा कलकत्ता में हुई। इसके बाद आपने अपनी उच्च शिक्षा के लिए प्रयाग विश्वविद्यालय में प्रवेश लिया। वहीं से आपने उच्च शिक्षा प्राप्त करके आजीविका के लिए नौकरी कर ली। इस दृष्टि से आप ‘सबकी बोली’ और ‘राष्ट्र-भाषा-प्रचार’ के भी संपादक रहे। यही नहीं, आप लगातार अनेक वर्षों तक राष्ट्र भाषा-प्रचार समिति, वर्धा के प्रधानमंत्री के रूप में अपनी अहं भूमिका निभाते थे। रचनाएँ-श्रीमन्नारायण अग्रवाल का गद्य और पद्य दोनों पर अधिकार रहा है। उनकी रचनाएँ इस प्रकार हैं

काव्य-संग्रह-‘सेगाँव का संत’, ‘रोटी का राग’ तथा ‘मानव’

भाषा-शैली-श्रीमन्नारायण अग्रवाल की साहित्यिक धारा अधिक सरल और सपाट शब्दों की है। उसमें बहुप्रचलित शब्दों की भरमार है। इस प्रकार के शब्दों से निर्मित भाषा के अर्थ सहज रूप से प्रकट हो जाते हैं। इनसे बने हुए वाक्य बोधगम्य हैं। श्रीमन्नारायण अग्रवाल की शैली में विविधता है। कहीं तो वह पत्रकारिता के छाँव तले पनपती है और कहीं तो अध्यापन के अधीन होकर सरकती है। इस प्रकार आपकी शैली एक पत्रकार की शैली के साथ-साथ एक अध्यापक आचार्य की शैली है। इस प्रकार की शैलियों से विषय-वस्तु का प्रतिपादन अच्छी तरह से हुआ है।

साहित्य में स्थान-श्रीमन्नारायण का हिन्दी गद्य-पद्य दोनों ही विधाओं के रचनाकारों में उल्लेखनीय स्थान है। यह सर्वविदित है कि साहित्य के प्रति इनका अनुराग शुरू से ही रहा है। गाँधीवादी दृष्टिकोण को रेखांकित करने वाले प्रमुख साहित्यकारों में से आप एक हैं।

समय नहीं मिला निबंध का सारांश

प्रस्तुत निबंध ‘समय नहीं मिला’ एक व्यंग्यात्मक निबंध है। इसमें लेखक ने समय को समझाने का प्रयास किया है। लेखक के अनुसार अधिकांश लोग समय पर न मिलने का प्रयत्न करते हैं। अपनी टालमटोल आदत से व्यस्तता का बहाना बनाकर करते हैं। इसी प्रकार पत्रों का उत्तर देने में भी अधिकांश लोग अपनी व्यस्तता का बहाना बनाकर अपनी टालमटोल की आदत से बाज नहीं आते हैं, जो हो, समय न मिलने का बहाना प्रायः अपनी कमजोरी और अनियमितता को ढाँकने के लिए किया जाता है। लेकिन समय का अपमान करके आज तक न कोई बड़ा बन सका है और न कोई बन सकेगा। समय धन है। यों तो हम अधिक मेहनत करके अधिक-से-अधिक धन तो कमा सकते हैं लेकिन वक्त को न तो बढ़ा सकते हैं और न घटा ही सकते हैं। धन की दुनिया में अमीर-गरीब बादशाह-कंगाल का फर्क है लेकिन समय के साम्राज्य में ऊँच-नीच का भेदभाव नहीं है। समय के लिए सब बराबर हैं। फिर भी हम समय का महत्त्व नहीं समझ पाते।

लेखक समय की पूरी-पूरी पाबंदी करने वालों को मुबारक बाद देते हुए यह सलाह दे रहा है कि अगर आप केवल सुबह ही जल्दी उठना शुरू कर दें, तो आप काफी समय बचा लेंगे। फिर दिन भर आप स्फूर्ति का अनुभव करेंगे। लेकिन ध्यान रहे कि आप कहीं मशीन की तरह न बन जाएँ। घड़ी के ठोके के साथ अपनी जिंदगी की ताल न बैठा लें। अगर आपने अपने कार्यक्रम में जरा भी लचक न रखी। उसमें भिन्नता की गुंजाइश न रही हो तो भी आप अपना और अपने घरवालों का जीवन सुखी न बना सकेंगे। फलस्वरूप आपका मिजाज भी चिड़चिड़ा हो जाएगा। अपना समय बर्बाद करने वालों पर आप नाराज होना शुरू कर देंगे। अंततः यह कहना है कि खुशदिल रहकर और दूसरों को भी निभाकर आप अपने समय का जितना अधिक और अच्छा उपयोग कर सकें, उतनी आपकी प्रशंसा है। और कृपया आज से किसी से न कहें ‘मुझे समय नहीं मिला।

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समय नहीं मिला संदर्भ-प्रसंग सहित व्याख्या

(1) जहाँ वक्त बढ़ाया नहीं जा सकता, वहाँ लाख कोशिश करने पर वह घटाया भी नहीं जा सकता। आजकल की विचित्र अर्थव्यवस्था में हमारे धन की कीमत रोज घट बढ़ सकती है। अगर बैंक जवाब दे दें तो एक करोड़पति मिनटों में गरीब और भिखमंगा भी बन सकता है, किंतु कुदरत का इन्तजाम नहीं बिगड़ता। समय के सागर में शेयर बाजार की तरह दिन में कितने ही बार ज्वार-भाटा नहीं आता। धन की दुनिया में अमीर-गरीब बादशाह-कंगाल का फर्क है। पर खुशकिस्मती से समय के साम्राज्य में ऊँच-नीच का भेद-भाव नहीं है। वक्त के लिए सब बराबर हैं, उसमें आदर्श लोकतंत्र है। फिर भी हम उसका महत्त्व नहीं समझते।

शब्दार्थ-कुदरत-ईश्वर ।ज्वार-भाटा-उतार-चढ़ाव,। खुशकिस्मती-सौभाग्य।

संदर्भ-प्रस्तुत गद्यांश हमारी पाठ्य-पस्तक ‘हिंदी सामान्य’ 10वीं में संकलित लेखक श्रीमन्नारायण अग्रवाल लिखित व्यंग्यात्मक निबंध ‘समय नहीं मिला’ से है।

प्रसंग-प्रस्तुत गद्यांश में लेखक ने ‘समय पर किसी का कोई अधिकार नहीं होता है’ इसे समझाते हुए कहा है कि

व्याख्या-आज के इस विज्ञान युग में भले ही सब कुछ सम्भव हो सकता है, लेकिन समय को न तो बढ़ाया जा सकता है और न घटाया ही जा सकता है। जहाँ तक आज की अर्थव्यवस्था का प्रश्न है तो यह भी कहा जा सकता है कि हम अपने मन की कीमत जब चाहे घटा-बढ़ा सकते हैं। उदाहरण के लिए, यदि कोई बैंक किसी करोड़पति को मदद करना बंद कर दे, तो उसे चंद मिनटों में गरीब और भिखमंगा होने में देर नहीं लगेगी। लेकिन जो ईश्वरीय विधान है, वह इससे अलग है। वह अपना प्रबंध अपने ढंग से बनाए रखता है। इस प्रकार समय का उतार-चढ़ाव ज्वार-भाटा या शेयर बाजार की तरह गिरता-उठता नहीं है। इस प्रकार समय की तुलना धन से नहीं की जा सकती है। यह इसलिए कि धन के संसार में अमीरी-गरीबी का भेदभाव भरा होता है। लेकिन समय का संसार इससे कहीं अलग ही होता है। वहाँ तो किसी प्रकार का कोई भेदभाव होता ही नहीं है। वहाँ तो सब एक समान हैं। वहाँ एक आदर्श लोकतंत्र है। अफ़सोस की बात है कि हम यह सब कुछ जानते हुए समय के महत्त्व नहीं समझ पाते हैं।

विशेष-

  1. समय के महत्त्व को बतलाया गया है।
  2. भाषा-शैली में प्रवाह है।

अर्थग्रहण संबंधी प्रश्नोत्तर

प्रश्न 1.
वक्त की क्या विशेषता है?
उत्तर
वक्त की यह विशेषता होती है कि उसे न तो हम घटा सकते हैं और न बढ़ा ही सकते हैं।

प्रश्न 2.
धन और समय की दुनिया में क्या फर्क है?
उत्तर
धन की दुनिया और समय की दुनिया में बहुत फर्क है। धन की दुनिया में अमीरी-गरीबी का भेद होता है, जबकि समय की दुनिया में सब बराबर होते हैं।

विषय-वस्तु पर आधारित बोध प्रश्नोत्तर :

प्रश्न 1.
उपर्युक्त गद्यांश का मुख्य भाव लिखिए।
उत्तर
उपर्युक्त गद्यांश के द्वारा लेखक ने यह भाव प्रकट करना चाहा है कि समय को घटाया और बढ़ाया नहीं जा सकता है। इसकी तुलना धन से नहीं की जा सकती है। यह इसलिए कि धन की दुनिया में अमीरी-गरीबी का भेदभाव होता है, जबकि समय की दुनिया में सब बराबर होते हैं। अफसोस यह है कि हम समय की कीमत जानते हुए उसके महत्व को नहीं समझते हैं।

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2. पर मेहरबानी करके आप कहीं मशीन की तरह भी न बन जाएँ। घड़ी के ठोके के साथ अपनी जिंदगी की ताल न बैठा लें। अगर अपने कार्यक्रम में आपने जरा भी लचक न रखी और उसमें भिन्नता की गुंजाइश न रही हो तो भी आप अपना और अपने घरवालों का जीवन सुखी न बना सकेंगे। फिर तो शायद आपका मिजाज भी चिड़चिड़ा हो जाएगा और आप दूसरों पर, जो अपना समय जरा भी बर्बाद करते हैं, नाराज होना शुरू कर देंगे।

शब्दार्च-ताल-मेल । लचक-सरस। मिजाज़-दिमाग।

संदर्भ-पूर्ववत्।

प्रसंग-प्रस्तुत गद्यांश में लेखक ने समय के सदुपयोग के तरीके पर प्रकाश डालते हुए कहा है कि

व्याख्या-आप समय का सदुपयोग अवश्य करें। लेकिन इससे पहले आप यह जान लें कि यह किस तरह होना चाहिए। आपके लिए यह सुझाव है कि आप कृपया समय का सदुपयोग मशीन की तरह न करें। दूसरे शब्दों में, यह कि आप समय के सदुपयोगी मशीन न बन जाएँ। यही नहीं आप अपनी जिंदगी के ताल घड़ी के ठोके के साथ न बैठा लें। यह ध्यान रहे कि आप अपने कार्यक्रम में लचक रखें। अगर आपने ऐसा नहीं किया और उसमें कोई फर्क की संभावना न रखी तो आप न केवल अपना ही, अपितु अपने घर-परिवार के जीवन को दुखमय ही बनायेंगे। फलस्वरूप आपका मिजाज चिड़चिड़ा हो जाए तो, इसमें कोई आश्चर्य नहीं। इससे जो अपना समय बर्बाद करते हैं, उन पर अपनी नाराजगी दिखाना शरू कर देंगे।

विशेष

  1. समय के सदुपयोग के तौर-तरीके पर प्रकाश डाला गया है।
  2. यह अंश ज्ञानवर्द्धक है।

अर्थग्रहण संबंधी प्रश्नोत्तर

प्रश्न 1.
मशीन की तरह न बनने की क्यों सीख दी गई है?
उत्तर
मशीन की तरह न बनने की सीख दी गई है। यह इसलिए कि इससे अपना और अपने घरवालों का जीवन सुखी नहीं बन सकता है।

विषय-वस्तु पर आधारित बोध प्रश्नोत्तर

प्रश्न 1.
उपर्युक्त गयांश का मुख्य भाव स्पष्ट कीजिए।
उत्तर
उपर्युक्त गद्यांश के द्वारा लेखक का कहना है कि हमें मशीन की तरह बनकर समय का सदुपयोग नहीं करना चाहिए। इसमें लचक न रखने से घर-परिवार का सुख-चैन समाप्त हो जायेगा। मिजाज चिड़चिड़ा हो जाएगा और नाराज होने की आदत पड़ जाती है।

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