MP Board Class 11th Maths Solutions Chapter 8 द्विपद प्रमेय Ex 8.1

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प्रश्न 1 से 5 तक प्रत्येक व्यंजक का प्रसार ज्ञात कीजिए-
प्रश्न 1.
(1 – 2x)5
हल:
MP Board Class 11th Maths Solutions Chapter 8 द्विपद प्रमेय Ex 8.1 img-1

प्रश्न 2.
\(\left(\frac{2}{x}-\frac{x}{2}\right)^{5}\)
हल:
MP Board Class 11th Maths Solutions Chapter 8 द्विपद प्रमेय Ex 8.1 img-2

प्रश्न 3.
\((2 x-3)^{6}\).
हल:
MP Board Class 11th Maths Solutions Chapter 8 द्विपद प्रमेय Ex 8.1 img-3

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प्रश्न 4.
\(\left(\frac{x}{3}+\frac{1}{x}\right)^{5}\).
हल:
MP Board Class 11th Maths Solutions Chapter 8 द्विपद प्रमेय Ex 8.1 img-4

प्रश्न 5.
\(\left(x+\frac{1}{x}\right)^{6}\).
हल:
MP Board Class 11th Maths Solutions Chapter 8 द्विपद प्रमेय Ex 8.1 img-5
MP Board Class 11th Maths Solutions Chapter 8 द्विपद प्रमेय Ex 8.1 img-6

प्रश्न : द्विपद प्रमेय का प्रयोग करके निम्नलिखित का मान ज्ञात कीजिए (प्रश्न 6 से 9 तक)
प्रश्न 6.
(96)3.
हल:
(96)3 = \((100-4)^{3}=(100)^{3}+3 C_{1}(100)^{2} \cdot(-4)+^{3} C_{2}(100)^{1}(-4)^{2}+(-4)^{3}\)
= 1000000 + 3 x 10000 (- 4) + 3 x 100 x 16 – 64
= 1000000 – 120000 + 4800 – 64 = 884736.

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प्रश्न 7.
(102)5.
हल:
(102)5 = (100 + 2)5 = \((100)^{5}+^{5} C_{1}(100)^{4} \times 2+^{5} C_{2}(100)^{3} 2^{2}\) + \(^5 \mathrm{C}_{3}(100)^{2} \times 2^{3}+^{5} \mathrm{C}_{4}(100) \times 2^{4}+2^{5}\)
= 10000000000 + 5 x 100000000 x 2 + 10 x 1000000 x 4 + 10 x 10000 x 8+5 x 100 x 16 + 32
= 10000000000 + 1000000000 + 40000000 + 800000 + 8000 + 32
= 11040808032.

प्रश्न : 8.
(101)4.
हल:
(101)4 = (100 + 1)4 = \((100)^{4}+^{4} C_{1} \times(100)^{3} \times 1+^{4} C_{2} \times(100)^{2} \times 1^{2}\) + \(^{4} C_{3} \times(100) \times 1^{3}+1^{4}\)
= 100000000 + 4 x 1000000 + 6 x 10000 + 400 + 1
= 100000000 + 4000000 + 60000 + 400 + 1
= 104060401.

प्रश्न 9.
(99)5.
हल:
(99)5 = (100 – 1)5 = \((100)^{5}+^{5} C_{1} \times(100)^{4} \times(-1)\) + \(^{5} C_{2} \times(100)^{3} \times(-1)^{2}+^{5} C_{3} \times(100)^{2} \times(-1)^{3}\) + \(^{5} C_{4} \times(100) \times(-1)^{4}+(-1)^{5}\)
= 10000000000 – 5 x 100000000 + 10 x 1000000 – 10 x 10000 + 5 x 100 – 1
= 10000000000 – 500000000 + 10000000 – 100000 + 500 – 1
= 9509900499.

प्रश्न 10.
द्विपद प्रमेय का प्रयोग करते हुए बताइए कौन-सी संख्या बड़ी है-
(1.1)10000 या 1000
हल:
(1.1)10000 = (1 + 0.1)10000
= \(1^{10000}+10000 C_{1} \times 1^{9999}(0.1)^{1}\)
= 1 + 10000 x (0.1) + …. = 1001 +…
स्पष्ट है कि (1.1)10000 संख्या 1000 से बड़ी है।

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प्रश्न 11.
(a + b)4 – (a – b)4 का विस्तार कीजिए। इसका प्रयोग करके \((\sqrt{3}+\sqrt{2})^{4}-(\sqrt{3}-\sqrt{2})^{4}\) का मान ज्ञात कीजिए।
हल:
MP Board Class 11th Maths Solutions Chapter 8 द्विपद प्रमेय Ex 8.1 img-7

प्रश्न 12.
(x + 1)6 + (x – 1)6 का मान ज्ञात कीजिए। इसका प्रयोग करके या अन्यथा \((\sqrt{2}+1)^{6}+(\sqrt{2}-1)^{6}\) का मान ज्ञात कीजिए।
हल:
MP Board Class 11th Maths Solutions Chapter 8 द्विपद प्रमेय Ex 8.1 img-8

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प्रश्न 13.
दिखाइए कि 9n+1 – 8n – 9, 64 से विभाज्य है जहाँ n एक धन पूर्णांक है।
हल:
(1 + x)n + 1 का प्रसार करने पर,
MP Board Class 11th Maths Solutions Chapter 8 द्विपद प्रमेय Ex 8.1 img-9

प्रश्न 14.
सिद्ध कीजिए कि \(\sum_{r=0}^{n} 3^{r} \cdot^{n} C_{r}\) = 4.
हल:
MP Board Class 11th Maths Solutions Chapter 8 द्विपद प्रमेय Ex 8.1 img-10

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MP Board Class 11th Maths Solutions Chapter 7 क्रमचय और संचयं विविध प्रश्नावली

MP Board Class 11th Maths Solutions Chapter 7 क्रमचय और संचयं विविध प्रश्नावली

प्रश्न 1.
DAUGHTER शब्द के अक्षरों से, कितने अर्थपूर्ण या अर्थहीन शब्दों की रचना की जा सकती है, जबकि प्रत्येक शब्द में 2 स्वर तथा 3 व्यंजन हों?
हल:
DAUGHTER शब्द में 8 अक्षर हैं जिसमें 3 स्वर और 5 व्यंजन हैं
3 स्वर में से 2 स्वर चुनने के तरीके = \(^{3} C_{2}\) = 3
5 व्यंजनों में से 3 व्यंजन चुनने के तरीके = \(^{5} C_{3}\) = \(^{5} C_{2}\)
= \(\frac{5 \times 4}{1 \times 2}\) = 10
2 स्वर और 3 व्यंजन चुनने के तरीके = 3 x 10 = 30
प्रत्येक संचय में 5 अक्षर हैं।
उनके क्रमसंचयों की संख्या = 5! = 120
DAUGHTER शब्द के 2 स्वर और 3 व्यंजन लेकर शब्दों की संख्या = 30 x 120 = 3600.

प्रश्न 2.
EQUATION शब्द के अक्षरों से कितने, अर्थपूर्ण या अर्थहीन, शब्दों की रचना की जा सकती है, जबकि स्वर तथा व्यंजन एक साथ रहते हैं?
हल:
EQUATION शब्द में कुल 8 अक्षर हैं जिनमें 5 स्वर और 3 व्यंजन हैं।
स्वर अक्षरों का क्रमसंचय = 5! = 5 x 4 x 3 x 2 x 1 = 120
व्यंजन अक्षरों का क्रमसंचय = 3! = 3 x 2 x 1 = 6
स्वरों और अक्षरों, को 2 तरीकों से लिखा जा सकता है, पहले स्वर ले या व्यंजन लें। EQUATION शब्द के अक्षरों से बनने वाले शब्द जब स्वर तथा व्यंजन एक साथ आएँ
= 120 x 6 x 2 = 1440.

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प्रश्न 3.
9 लड़के और 4 लड़कियों से 7 सदस्यों की एक समिति बनानी है, यह कितने प्रकार से किया सकता है, जबकि समिति में
(i) तथ्यतः 3 लड़कियाँ हैं?
(ii) न्यूनतम 3 लड़कियाँ हैं?
(iii) अधिकतम 3 लड़कियाँ हैं?
हल:
9 लड़के और 4 लड़कियों से 7 सदस्यों की एक समिति बनानी है।
(i) जब उस समिति में 3 लड़कियाँ हों तो उस समिति में 4 लड़के होंगे। 3 लड़कियाँ और 4 लड़के चुनने के तरीके
MP Board Class 11th Maths Solutions Chapter 7 क्रमचय और संचयं विविध प्रश्नावली img-1
(ii) समिति में कम से कम 3 लड़कियाँ है तो समितियाँ निम्न प्रकार बनेंगी :
(a) 3 लड़कियाँ 4 लड़के
(b) 4 लड़कियाँ 3 लड़के
MP Board Class 11th Maths Solutions Chapter 7 क्रमचय और संचयं विविध प्रश्नावली img-2
(iii) यदि समिति में अधिकतम 3 लड़कियाँ लेनी हैं तो समितियाँ निम्न प्रकार बनेगी :
(a) कोई लड़की नहीं और 7 लड़के
(b) 1 लड़की और 6 लड़के
(c) 2 लड़की और 5 लड़के
(d) 3 लड़की और 4 लड़के
MP Board Class 11th Maths Solutions Chapter 7 क्रमचय और संचयं विविध प्रश्नावली img-3
= 36 + 336 + 126 x (6+ 4)
= 372 + 1260
= 1632.

प्रश्न 4.
यदि शब्द EXAMINATION के सभी अक्षरों से बने विभिन्न क्रमचयों को शब्द कोष की तरह सूचीबद्ध किया जाता है, तो E से प्रारम्भ होने वाले प्रथम शब्द से पूर्व कितने शब्द हैं?
हल:
A से प्रारंभ होने वाले शब्दों में 21, 2N और शेष भिन्न अक्षर हैं
ऐसे कुल शब्दों की संख्या = \(\frac{10 !}{2 ! 2 !}\)
= \(\frac{10 \times 9 \times 8 \times 7 \times 6 \times 5 \times 4 \times 3 \times 2 \times 1}{4}\)
= 907200
शब्द कोष के अक्षरों की तरह दिए हुए अक्षरों को क्रमबद्ध करते हुए अगला अक्षर E होगा।
∴ E से पहले बने शब्दों की संख्या = 907200.

प्रश्न 5.
0, 1, 3, 5, 7 तथा 9 अंकों से, 10 से विभाजित होने वाली और बिना पुनरावृत्ति किए कितनी 6 अंकीय संख्याएँ बनाई जा सकती हैं? .
हल:
10 से विभाजित होने वाली वे संख्याएँ हैं जिनमें इकाई के स्थान पर 0 को रखा गया है।
अब हमें 6 अंकीय संख्याएँ बनाने के लिए शेष 5 स्थान और भरने हैं।
5 स्थानों को भरने का क्रमसंचय = 5! = 120
∴ 6 अंकीय संख्याएं जो 10 से विभाजित हो जाएँ उनकी संख्या = 120.

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प्रश्न 6.
अंग्रेजी वर्णमाला में 5 स्वर तथा 21 व्यंजन हैं। इस वर्णमाला में 2 भिन्न स्वरों और 2 भिन्न व्यंजनों वाले कितने शब्दों की रचना की जा सकती है?
हल:
5 स्वरों में से 2 स्वर लेकर संचयों की संख्या = \(^{5} C_{2}\)
21 व्यंजनों में से 2 व्यंजन लेकर संचयों की संख्या = \(^{21} C_{2}\)
2 स्वरों और 2 व्यंजन को चयन करने के तरीके = \(^{5} C_{2} \times^{21} C_{2}\)
2 स्वरों और 2 व्यंजनों का क्रमसंचय = 4!
∴ 2 स्वर और 2 व्यंजन से बनने वाले शब्दों की संख्या = \(^{5} C_{2} \times^{21} C_{2}\) x 4!
= \(\frac{5 \times 4}{1 \times 2} \times \frac{21 \times 20}{1 \times 2}\) × 24
= 10 x 210 x 24
= 50400.

प्रश्न 7.
किसी परीक्षा के एक प्रश्न पत्र में प्रश्न है जो क्रमशः 5 तथा 7 प्रश्नों वाले दो खण्डों में विभक्त हैं अर्थात खंड I और खण्ड II. एक विद्यार्थी का प्रत्येक खंड से न्यूनतम उप्रश्नों का चयन करते हुए कुल 8 प्रश्नों को हल करना है। एक विद्यार्थी कितने प्रकार से प्रश्नों का चयन कर सकता है ?
हल:
एक विद्यार्थी को कुल 8 प्रश्न हल करने हैं।
प्रत्येक खण्ड से कम से कम 3 प्रश्न करने हैं।
भाग I और II से प्रश्नों को इस प्रकार चुनाव करने हैं।
भाग I से चुने जाने वाले प्रश्न 3 4 5 प्रश्नों की कुल संख्या 5
भाग II से चुने जाने वाले प्रश्न 5 4 3 प्रश्नों की कुल संख्या 7
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प्रश्न 8.
52 पत्तों की एक गड्डी में से 5 पत्तों के संचय की संख्या निर्धारित कीजिए, यदि 5 पत्तों के प्रत्येक चयन (संचय) में तथ्यतः एक बादशाह है।
हल:
बादशाह वाले पत्तों की कुल संख्या = 4
इनमें से एक पत्ता चयन करने के तरीके = \(^{4} C_{1}\) = 4
अंब शेष 48 पत्तों में से 4 पत्ते चयन करने के तरीके = \(^{48} C_{4}\)
= \(\frac{48 \times 47 \times 46 \times 45}{1 \times 2 \times 3 \times 4}\)
= 194580
इस प्रकार 52 पत्तों में से 5 पत्ते लेकर (जिनमें से 1 बादशाह है) संचयों की संख्या
= \(^{4} C_{1} \times^{48} C_{4}\) = 4 x 194580 = 778320.

प्रश्न 9.
5 पुरुषों और 4 महिलाओं को एक पंक्ति में इस प्रकार बैठाया जाता है कि महिलाएँ सम स्थानों पर बैठती हैं। इस प्रकार कितने विन्यास संभव हैं ?
हल:
4 महिलाओं का 4 सम स्थानों पर बैठाने के विन्यास = 4! = 24
5 पुरुषों को 5 विषम स्थानों पर बैठाना के तरीके = 5! = 120
4 महिलाओं को सम स्थानों पर और 5 पुरुषों को विषम स्थानों पर बैठाने के विन्यास
= 4! x 5!
= 24 x 120
= 2880.

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प्रश्न 10.
25 विद्यार्थियों की एक कक्षा से 10 का चयन एक भ्रमण दल के लिए किया जाता है। तीन विद्यार्थी ऐसे हैं, जिन्होंने यह निर्णय लिया है कि या तो वे तीनों दल में शामिल होंगे या उनमें से कोई भी दल में शामिल नहीं होगा। भ्रमण दल का चयन कितने प्रकार से किया जा सकता है?
हल:
25 विद्यार्थियों में से 10 विद्यार्थियों को भ्रमण दल में शामिल करना है। परन्तु 10 विद्यार्थियों में से 3 ऐसे हैं
(i) जब तीनों भ्रमण दल में शामिल होते हैं या
(ii) तीनों नहीं होते है।
(i) जब तीनों विद्यार्थी टीम में शामिल होते हैं तो भ्रमण दल का चयन करने के तरीके
= \(^{22} C_{7}\)
(ii) जब तीनों विद्यार्थी भ्रमण दल में शामिल नहीं होते हैं तो चयन करने के तरीके
= \(^{22} C_{10}\)
दोनो दशाओं में भ्रमण दल का चयन करने के तरीके = \(^{22} C_{7}\) + \(^{22} C_{10}\)

प्रश्न 11.
ASSASSINATION शब्द के अक्षरों के कितने विन्यास बनाए जा सकते हैं जबकि सभी एक साथ रहें?
हल:
ASSASSINATION में कुल 13 अक्षर हैं जिसमें A तीन बार, S चार बार, I दो बार तथा N दो बार प्रयुक्त हो रहे हैं।
4 – S को एक साथ रहना है। अतः उसे एक अक्षर मान लिया। इस प्रकार इसमें 10 अक्षर रह गए जिसमें 3 – A, 2 – 1 और 2 – N समान हैं।
∴ इस शब्द के अक्षरों का विन्यास जब S एक साथ रहते हो
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MP Board Class 11th Maths Solutions Chapter 7 क्रमचय और संचयं Ex 7.4

MP Board Class 11th Maths Solutions Chapter 7 क्रमचय और संचयं Ex 7.4

प्रश्न 1.
यदि \(^{n} C_{8}=^{n} C_{2}\), तो nC2 ज्ञात कीजिए।
हल:
MP Board Class 11th Maths Solutions Chapter 7 क्रमचय और संचयं Ex 7.4 img-1
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प्रश्न 2.
n का मान निकालिए, यदि
(i) \(^{2 n} C_{3}:^{n} C_{2}\) = 12 : 1
(ii) \(^{2 n} C_{3}:^{n} C_{2}\) = 11 : 1
हल :
MP Board Class 11th Maths Solutions Chapter 7 क्रमचय और संचयं Ex 7.4 img-2
MP Board Class 11th Maths Solutions Chapter 7 क्रमचय और संचयं Ex 7.4 img-3

प्रश्न 3.
किसी वृत्त पर स्थित 21 बिन्दुओं से होकर जाने वाली कितनी जीवाएँ खींची जा सकती हैं?
हल:
21 बिन्दुओं में कोई 2 बिन्दु मिलाने से एक जीवा प्राप्त होती है।
जीवाओं की संख्या = \(^{21} C_{2}=\frac{21 \times 20}{1 \times 2}=210\).

प्रश्न 4.
5 लड़के और 4 लड़कियों में से 3 लड़के और 3 लड़कियों की टीमें बनाने के कितने तरीके हैं?
हल:
5 लड़कों में से 3 लड़कों के चुनने के तरीके = \(^{5} C_{3}\)
4 लड़कियों में से 3 लड़कियाँ चुनने के तरीके = \(^{4} C_{3}\)
∴ 5 लड़कों और 4 लड़कियों में से 3 लड़के और 3 लड़कियों की टीमों की संख्या
MP Board Class 11th Maths Solutions Chapter 7 क्रमचय और संचयं Ex 7.4 img-4

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प्रश्न 5.
6 लाल रंग की, 5 सफेद रंग की और 5 नीले रंग की गेंदों में से 9 गेंदों के चुनने के तरीकों की संख्या कीजिए, यदि प्रत्येक संग्रह में प्रत्येक रंग की 3 गेंदें हैं।
हल:
6 लाल रंग की गेंदों में से 3 गेंदें चुनने के तरीके = \(^6 C_{3}\)
5 सफेद रंग की गेंदों में से 3 गेंदें चुनने के तरीके = \(^5 C_{3}\)
5 नीले रंग की गेंदों में से 3 गेंदें चुनने के तरीके = \(^5 C_{3}\)
इस प्रकार 6 लाल, 5 सफेद तथा 5 नीले रंग की गेंदों में से प्रत्येक रंग की 3 गेंदों के चुनने के तरीके.
MP Board Class 11th Maths Solutions Chapter 7 क्रमचय और संचयं Ex 7.4 img-5
= \(\frac{6.5 .4}{1.2 .3} \times \frac{5.4}{1.2} \times \frac{5.4}{1.2}\)
= 20 x 10 x 10
= 2000.

प्रश्न 6.
52 पत्तों की एक गड्डी में से 5 पत्तों को लेकर बनने वाले संचयों की संख्या निर्धारित कीजिए, यदि प्रत्येक संचय में तथ्यतः एक इक्का हो।
हल:
ताश का गड्डी में 4 इक्के होते हैं।
∴ 4 में से 1 इक्का चुनने के तरीके = \(^{4} C_{1}\)
इक्का छोड़कर शेष पत्ते = 52 – 4 = 48
48 पत्तों में से कोई 4 अन्य पत्ते चुनने के तरीके = \(^{48} C_{4}\)
∴ ताश की गड्डी में 1 इक्का और 4 अन्य पत्ते चुनने के तरीके
MP Board Class 11th Maths Solutions Chapter 7 क्रमचय और संचयं Ex 7.4 img-6

प्रश्न 7.
17 खिलाड़ियों में से, जिनमें केवल 5 गेंदबाजी कर सकते हैं, एक क्रिकेट टीम के 11 खिलाड़ियों का चयन कितने प्रकार से किया जा सकता है, यदि प्रत्येक टीम में तथ्यतः 4 गेंदबाज हैं?
हल:
5 गेंदबाज में 4 गेंदबाज चुनने के तरीके = \(^{5} C_{4}\)
शेष खिलाड़ी = 17 – 5 = 12
शेष चुने जाने वाले खिलाड़ी = 11 – 4 = 7
∴ 12 खिलाड़ियों में से 7 खिलाड़ी चुनने के तरीके = \(^{12} C_{7}\)
MP Board Class 11th Maths Solutions Chapter 7 क्रमचय और संचयं Ex 7.4 img-7

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प्रश्न 8.
एक थैली में 5 काली तथा 6 लाल गेंदें हैं। 2 काली तथा 3 लाल गेंदों के चयन के तरीकों की संख्या निर्धारित कीजिए।
हल:
5 काली गेंदों में से 2 गेंदें चुनने के तरीके = \(^{5} C_{2}\)
6 लाल गेंदों में से 3 गेंदें चुनने के तरीके = \(^6 C_{3}\)
5 काली व 6 लाल गेंदों में से 2 काली और 3 लाल गेंदें चुनने के कुल तरीके
MP Board Class 11th Maths Solutions Chapter 7 क्रमचय और संचयं Ex 7.4 img-8

प्रश्न 9.
9 उपलब्ध पाठ्यक्रमों में से, एक विद्यार्थी 5 पाठ्यक्रमों का चयन कितने प्रकार से कर सकता है, यदि प्रत्येक विद्यार्थी के लिए 2 विशिष्ट पाठ्यक्रम अनिवार्य हैं?
हल:
दो पाठ्यक्रम अनिवार्य हों, तब शेष पाठ्यक्रम = 9 – 2 = 7 .
7 पाठ्यक्रमों में से 3 पाठ्यक्रम चुनने के तरीके = \(^{7} \mathrm{C}_{3}\)
अत: 9 में से 5 पाठ्यक्रम चुनने के तरीके = \(^{7} C_{3}=\frac{7 \times 6 \times 5}{1 \times 2 \times 3}\) = 35

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MP Board Class 11th Maths Solutions Chapter 7 क्रमचय और संचयं Ex 7.3

MP Board Class 11th Maths Solutions Chapter 7 क्रमचय और संचयं Ex 7.3

प्रश्न 1.
1 से 9 तक के अंकों को प्रयोग करके कितनी 3 अंकीय संख्याएं बनाई जा सकती हैं, यदि किसी भी अंक को दोहराया नहीं गया है?
हल:
3 अंकीय संख्या में तीन स्थान होते हैं : इकाई, दहाई और सैकड़ा। इकाई के स्थान को 9 तरीकों से, दहाई के स्थान को 8 तरीकों से और सैकड़े के स्थान को 7 तरीकों से भरा जा सकता है।
∴ 3 अंकीय संख्याओं की संख्या = 9 x 8 x 7 = 504.

प्रश्न 2.
किसी भी अंक को दोहराए बिना कितनी 4 अंकीय संख्याएँ होती हैं?
हल:
0 से 9 तक कुल 10 अंक हैं।
10 में से 4 अंक लेकर संख्याओं की संख्या = \(10 p_{4}\)
= 10 x 9 x 8 x 7 = 5040
इनमें वे संख्याएं सम्मिलित हैं जिनमें हजार के स्थान पर 0 है।
0 को हजार के स्थान पर रखने पर और शेष स्थानों पर कोई तीन अंक रखने पर कुल संख्याओं की संख्या = \(^{9} P_{3}\)
= 9 x 8 x 7 = 504
चार अंकीय संख्याओं की संख्या = 5040 – 504 = 4536.

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प्रश्न 3.
अंक 1, 2, 3, 4, 6, 7 को प्रयुक्त करने से कितनी 3 अंकीय सम संख्याएँ बनाई जा सकती हैं, यदि कोई भी अंक दोहराया नहीं गया है?
हल:
2, 4, 6 में से किसी एक को इकाई के स्थान पर रखने से सम संख्या बनती है।
∴ इकाई का स्थान 3 तरीकों से भरा जा सकता है।
दहाई के स्थान को 5 तरीकों से और सैकड़े के स्थान को 4 तरीकों से भरा जा सकता है।
∴ 3 अंकीय सम संख्याओं की संख्या = 3 x 5 x 4 = 60.

प्रश्न 4.
अंक 1, 2, 3, 4, 5 के उपयोग द्वारा कितनी 4 अंकीय संख्याएँ बनाई जा सकती हैं, यदि कोई भी अंक दोहराया नहीं गया है? इनमें से कितनी सम संख्याएँ होंगी ?
हल:
(i) 5 में से 4 अंक लेकर संख्याओं की संख्या = \(^{5} P_{4}\)
= 5 x 4 x 3 x 2 = 120
(ii) इकाई के स्थान पर 2 या 4 रखने से संख्या सम बनती है।
इस प्रकार इकाई का स्थान 2 तरीकों से, दहाई का स्थान 4 तरीकों से, सैकड़े का स्थान 3 तरीकों से और हजार का स्थान 2 तरीकों से भरा जा सकता है।
∴ 4 अंकीय सम संख्याओं की संख्या = 2 x 4 x 3 x 2 = 48.

प्रश्न 5.
8 व्यक्तियों की समिति में, हम कितने प्रकार से एक अध्यक्ष और एक उपाध्यक्ष चुन सकते हैं, यह मानते हुए कि एक व्यक्ति एक से अधिक पद पर नहीं रह सकता है?
हल:
8 व्यक्तियों में से एक को अध्यक्ष चुनने के तरीके = 8
अध्यक्ष चुनने के बाद 7 व्यक्तियों में से एक उपाध्यक्ष चुना जाना है।
उपाध्यक्ष चुनने के तरीके = 7
∴ एक अध्यक्ष और एक उपाध्यक्ष को 8 x 7 = 56 तरीकों से चुना जा सकता है।

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प्रश्न 6.
यदि \(^{n-1} P_{3}:^{n} P_{4}\) = 1 : 9 तो n ज्ञात कीजिए।
हल:
हम जानते हैं कि
MP Board Class 11th Maths Solutions Chapter 7 क्रमचय और संचयं Ex 7.3 img-1

प्रश्न 7.
ज्ञात कीजिए यदि
(i) \(^{5} P_{r}=2^{6} P_{r-1}\)
(ii) \(^{5} P_{r}=^{6} P_{r-1}\)
हल:
MP Board Class 11th Maths Solutions Chapter 7 क्रमचय और संचयं Ex 7.3 img-2
r संख्या 5 से अधिक नहीं हो सकती
MP Board Class 11th Maths Solutions Chapter 7 क्रमचय और संचयं Ex 7.3 img-3
∴ r2 – 13r + 36 = 0 या (r – 9)(r – 4) = 0
∴ r = 9, 4
r ≠ 9 क्योंकि यह 5 से बड़ा है
अतः r = 4.

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प्रश्न 8.
EQUATION शब्द के अक्षरों में से प्रत्येक को तथ्यतः केवल एक बार उपयोग करके कितने अर्थपूर्ण या अर्थहीन शब्द बन सकते हैं?
हल:
शब्द EQUATION में कुल 8 अक्षर हैं।
इन अक्षरों से बनने वाले शब्दों ( जो अर्थपूर्ण या अर्थहीन हैं) की संख्या = \(\frac{8 !}{(8-8) !}\) = 8!
= 8 x 7 x 6 x 5 x 4 x 3 x 2 x 1
= 40320.

प्रश्न 9.
MONDAY शब्द के अक्षरों से कितने अर्थपूर्ण या अर्थहीन शब्द बन सकते हैं, यह मानते हुए कि किसी भी अक्षर की पुनरावृत्ति नहीं की जाती है,
(i) एक समय में 4 अक्षर लिए जाते हैं?
(ii) एक समय में सभी अक्षर लिए जाते हैं?
(iii) सभी अक्षरों का प्रयोग किया जाता है, किन्तु प्रथम अक्षर एक स्वर है?
हल:
(i) MONDAY शब्द में कुल 6 अक्षर हैं।
6 अक्षरों में से 4 अक्षर एक समय पर लेकर कुल शब्दों की संख्या
= \(^6 P_{4}\) = 6 x 5 x 4 x 3 = 360
जबकि शब्द अर्थपूर्ण या अर्थहीन हो सकते हैं।
(ii) सभी अक्षरों को एक साथ लेकर शब्दों की संख्या = 6! = 6 x 5 x 4 x 3 x 2 x 1 = 720.
(iii) पहले स्थान पर A या O रखना है। यह दो तरीकों से हो सकता है।
शेष 5 स्थान 5! = 120 तरीकों से भरे जा सकते हैं।
उन शब्दों की संख्या जो स्वर से प्रारम्भ होते हैं = 2 x 120 = 240.

प्रश्न 10.
MISSISSIPPI शब्द के अक्षरों से बने भिन्न-भिन्न क्रमचयों में से कितनों में चारों I एक साथ नहीं आते हैं?
हल:
शब्द MISSISSIPPI में कुल 11 अक्षर हैं जिसमें M, एक बार; I चार बार; S चार बार, तथा P दो बार प्रयुक्त हो रहे हैं।
इन अक्षरों से बने शब्दों की संख्या = \(\frac{11 !}{4 ! 4 ! 2}\)
मान लीजिए के 4 – I एक साथ हों, तब
कुल अक्षर = 8
इन अक्षरों से बनने वाले शब्दों की संख्या = \(\frac{8 !}{4 ! 2 !}\)
उन शब्दों का संख्या जब 4, I एक साथ नहीं है
MP Board Class 11th Maths Solutions Chapter 7 क्रमचय और संचयं Ex 7.3 img-4

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प्रश्न 11.
PERMUTATIONS शब्द के अक्षरों को कितने तरीकों से व्यवस्थित किया जा सकता है, यदि
(i) चयनित शब्द का प्रारंभ P से तथा अंत S से होता है।
(ii) चयनित शब्द में सभी स्वर एक साथ हैं।
(iii) चयनित शब्द में P तथा S के मध्य सदैव 4 अक्षर हों?
हल:
PERMUTATIONS शब्द में कुल 12 अक्षर हैं जिनमें T – 2 है, शेष सब भिन्न हैं।
(i) P और S के स्थान स्थिर कर दिए गए हैं।
शेष अक्षरों से बने शब्दों की संख्या = \(\frac{10 !}{2 !}\)
= 1814400.
(ii) सभी स्वरों को एक साथ कर दिया गया है (EUAIO)PRMTTNS जिनमें 2T हैं।
उन शब्दों की संख्या जब स्वर एक साथ है
= \(\frac{8 !}{2 !} \times 5 !=\frac{40320 \times 120}{2}\)
= 2419200.
(iii) P तथा S के बीच चार अक्षर होने चाहिए।
मान लीजिए 12 अक्षरों के स्थानों का नाम 1, 2, 3….. 12 रख दिया है।
1 2 3 4 5 6 7 8 9 10 11 12
इस प्रकार P को स्थान 1, 2, 3, 4, 5, 6, 7 पर रखा जा सकता है तो S को स्थान 6, 7, 8, 9, 10, 11, 12 पर रखा जा सकता है।
⇒ P और S को 7 स्थानों पर रखा जा सकता है।
इसी प्रकार S और P को 7 स्थानों पर रखा जा सकता है।
P और S या S और P को 7 + 7 = 14 तरीकों से रखा जा सकता
शेष 10 अक्षरों को \(\frac{10 !}{2 !}\) तरीकों से व्यवस्थित किया जा सकता है।
∴ उन शब्दों की संख्या जब P और S के बीच में 4 अक्षर हों
= \(\frac{10 !}{2 !}\) x 14 = 10! x 7
= 25401600.

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MP Board Class 11th Maths Solutions Chapter 7 क्रमचय और संचयं Ex 7.2

MP Board Class 11th Maths Solutions Chapter 7 क्रमचय और संचयं Ex 7.2

प्रश्न 1.
मान निकालिए :
(i) 8!
(ii) 4! – 3!
हल:
(i) 8! = 8 x 7 x 6 x 5 x 4 x 3 x 2 x 1 = 40320.
(ii) 4! – 3! = 4 x 3 x 2 x 1 – 3 x 2 x 1
= 24 – 6 = 18.

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प्रश्न 2.
क्या 3! + 4! = 7!?
हल:
बायाँ पक्ष = 3! + 4!
= 3 x 2 x 1 + 4 x 3 x 2 x 1
= 6 + 24 = 30
दायाँ पक्ष = 7! = 7 x 6 x 5 x 4 x 3 x 2 x 1
= 5040
अतः 3! + 4! ≠ 7!.

प्रश्न 3.
\(\frac{8 !}{6 ! \times 2 !}\) का परिकलन कीजिए ।
हल:
MP Board Class 11th Maths Solutions Chapter 7 क्रमचय और संचयं Ex 7.2 img-1

प्रश्न 4.
यदि \(\frac{1}{6 !}+\frac{1}{7 !}=\frac{x}{8 !}\), तो x का मान ज्ञात कीजिए ।
हल:
\(\frac{x}{8 !}=\frac{1}{6 !}+\frac{1}{7 !}\)
MP Board Class 11th Maths Solutions Chapter 7 क्रमचय और संचयं Ex 7.2 img-2

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प्रश्न 5.
\(\frac{n !}{(n-r) !}\) का मान निकालिए जबकि
(i) n = 6, r = 2
(ii) n = 9, r = 5
हल:
MP Board Class 11th Maths Solutions Chapter 7 क्रमचय और संचयं Ex 7.2 img-3

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MP Board Class 9th Special Hindi कविता का स्वरूप एवं पद्य साहित्य का विकास

MP Board Class 9th Special Hindi कविता का स्वरूप एवं पद्य साहित्य का विकास

प्रश्न 1.
कविता के बाह्य स्वरूप के तत्वों को स्पष्ट कीजिए।
उत्तर-
कविता के बाह्य स्वरूप में निम्नलिखित तत्व सम्मिलित हैं

  1. लय-भाषा के प्रवाह में उतार-चढ़ाव (आरोह-अवरोह) तथा विराम के योग से लय की उत्पत्ति होती है।
  2. तुक-कविता की पंक्ति का अन्तिम वर्ण एवं ध्वनि में समानता का पाया जाना ही तुक कहा जाता है। इससे कविता में गेयता और संगीतात्मकता की सरसता और सहजता भर जाती है।
  3. छन्द-छन्द ही कविता में लय, तुक तथा गति देता है। प्रत्येक छन्द में मात्राओं और वर्णों का क्रम निश्चित होता है।
  4. शब्द-योजना-काव्य सौन्दर्य के लिए शब्द-योजना की जाती है जिससे काव्य में विशेष अर्थ की अभिव्यंजना सम्भव होती है।
  5. भाषा की चित्रात्मकता-भाषा की चित्रात्मकता से भाव की अभिव्यक्ति होती है।
  6. अलंकार-कवि के कथन में सौन्दर्य और अर्थ-गौरव के लिए अलंकार प्रयुक्त होते हैं। अलंकारों का अनावश्यक प्रयोग कविता के सौन्दर्य को बाधित करता है।

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प्रश्न 2.
कविता के आन्तरिक स्वरूप के तत्वों पर टिप्पणी कीजिए।
उत्तर-
कविता के आन्तरिक स्वरूप के तत्व अग्रलिखित

  • रसात्मकता,
  • अनुभूति की तीव्रता,
  • मर्मस्पर्शिता।

रसपूर्ण वाक्य ही काव्य कहा जाता है। शब्द और अर्थ काव्य का शरीर होता है तथा ‘रस’ ही उस शरीर का प्राण होता है। गद्य का सम्बन्ध बुद्धि से और कविता का सम्बन्ध हृदय से होता है। ‘वियोगी जन के हृदय’ से उत्पन्न कविता श्रोताओं या पाठकों के हृदय को स्पर्श करती है।

प्रश्न 3.
हिन्दी पद्य साहित्य को कितने कालों में विभाजित किया गया है ? इस काल-विभाजन की समय-सीमा भी निर्धारित कीजिए।
उत्तर-
आचार्य रामचन्द्र शुक्ल ने हिन्दी साहित्य के विकास क्रम को संवत् 1050 वि. से शुरू हुआ माना है। आचार्य शुक्ल का यह मत ही प्रामाणिक माना गया है। इस साहित्यिक विकास-क्रम को निम्नलिखित चार कालों में विभाजित हुआ माना गया है-
काल-विभाजन – समय सीमा

  1. आदिकाल या वीरगाथाकाल – सन् 993 ई. से सन् 1318 ई. तक।
  2. भक्तिकाल (पूर्व मध्यकाल) – सन् 1318 ई. से सन् 1643 ई. तक।
  3. रीतिकाल (उत्तर मध्यकाल) – सन् 1643 ई. से सन् 1843 ई. तक।
  4. आधुनिक काल सन् 1843 – ई. से निरन्तर।

प्रश्न 4.
भक्तिकाल की प्रमुख विशेषताओं का उल्लेख कीजिए।
उत्तर-
भक्तिकाल की प्रमुख विशेषताएँ निम्न प्रकार हैं

  • भक्ति भावना की प्रधानता।
  • किसी भी राजा के दरबार में आश्रय प्राप्त न करना।
  • काव्य सृजन का उद्देश्य केवल स्वान्तः सुखाया ही था।
  • धर्म, जाति साहित्यिक विधाओं एवं काव्य स्वरूप में समन्वय की भावना।
  • काव्य सौन्दर्य के कला एवं भाव पक्ष दोनों का सफलतापूर्वक निर्वाह।
  • जीवन को आदर्श प्रधान यथार्थता से जोड़ा गया।
  • कवि द्वारा अपने इष्ट के प्रति पूर्ण समर्पण के भाव की अभिव्यक्ति।

प्रश्न 5.
सगुण भक्तिधारा के दो प्रमुख कवियों के नाम उनकी एक-एक रचना सहित लिखिए।
उत्तर-

  1. तुलसीदास-रामचरितमानस,
  2. सूरदास-सूरसागर।

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प्रश्न 6.
कृष्णभक्ति काव्य की प्रमुख विशेषताओं का उल्लेख कीजिए।
उत्तर-

  • कृष्ण को ईश्वर का अवतार माना गया।
  • उनकी विशेष पूजा पर बल दिया।
  • कृष्ण के लोकरंजक स्वरूप का चिन्तन व वर्णन किया जाना।
  • सखाभाव की भक्ति की अवतारणा।
  • ज्ञान से बढ़कर प्रेम को अधिक महत्त्व दिया जाना।
  • मुक्तक शैली के गेय पदों की रचना।
  • प्रायः कृष्णभक्ति काव्य की रचना ब्रजभाषा में की गई है जिनमें कृष्ण की बाल-लीलाओं का वर्णन किया गया है।

महत्त्वपूर्ण वस्तुनिष्ठ प्रश्न
रिक्त स्थानों की पूर्ति
1. भाषा के प्रवाह में उतार-चढ़ाव तथा विराम के योग से ………………………….. उत्पत्ति होती है। (लय/ताल)
2. अलंकारों का अनावश्यक प्रयोग कविता के सौन्दर्य को ………………………….. करता है। (वृद्धि/बाधित)
3. भाषा की चित्रात्मकता से ………………………….. अभिव्यक्ति होती है। (भाव की/आलंकारिकता की)
4. काव्य में विशेष अर्थ की अभिव्यंजना ………………………….. सम्भव है। (शब्द-योजना से/अलंकार प्रयोग से)
5. शब्द और अर्थ ………………………….. होता है। (काव्य का शरीर/काव्य की आत्मा)
उत्तर-
1. लय,
2. बाधित,
3. भाव की,
4. शब्द योजना से,
5. काव्य का शरीर।

सही विकल्प चुनिए-

1. आचार्य रामचन्द्र शुक्ल ने हिन्दी साहित्य के विकास-क्रम ‘ को शुरू हुआ माना है
(क) संवत् 1050 वि. से
(ख) संवत् 1150 वि. से
(ग) संवत् 940 वि. से
(घ) संवत् 1260 वि. से।
उत्तर-
(क) संवत् 1050 वि. से

2. वीरगाथा काल की समय-सीमा निर्धारित की है
(क) सन् 993 ई. से सन् 1318 ई. तक
(ख) सन् 1050 ई. से सन् 1210 ई. तक
(ग) सन् 715 ई. से सन् 1310 ई. तक
(घ) सन् 810 ई. से सन् 1250 ई. तक।
उत्तर-
(क) सन् 993 ई. से सन् 1318 ई. तक

3. रीतिकाल की समय-सीमा निर्धारित की गई है
(क) सन् 1643 ई. से सन् 1843 ई. तक
(ख) सन् 1540 ई. से सन् 1750 ई. तक
(ग) सन् 1610 ई. से सन् 1840 ई. तक
(घ) सन् 1460 ई. से सन् 1560 ई. तक।
उत्तर-
(क) सन् 1643 ई. से सन् 1843 ई. तक

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4. कविता का सम्बन्ध होता है-
(क) हृदय से
(ख) बुद्धि से
(ग) मौन से
(घ) पाठक से।
उत्तर-
(क) हृदय से

सही जोड़ी मिलाइए-
MP Board Class 9th Special Hindi कविता का स्वरूप एवं पद्य साहित्य का विकास 1
उत्तर-
(i) → (ङ),
(ii) → (ग),
(iii) → (घ),
(iv) → (ख),
(v) → (क)।

सत्य/असत्य-

1. लय की उत्पत्ति होती है भाषा के प्रभाव में उतार-चढ़ाव से।
2. शब्द योजना से काव्य सौन्दर्य असम्भव है।
3. अलंकारों का अनावश्यक प्रयोग कविता के सौन्दर्य को बाधित करता है।
4. रसपूर्ण वाक्य काव्य नहीं हो सकता।
5. प्रत्येक छन्द में मात्राओं और वर्णों का क्रम निश्चित होता है।
उत्तर-
1. सत्य,
2. असत्य,
3. सत्य,
4. असत्य,
5. सत्य।

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एक शब्द/वाक्य में उत्तर-

1. मात्राओं और वर्णों का क्रम किसमें निश्चित होता है ?
उत्तर-
छन्द में।

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MP Board Class 11th Maths Solutions Chapter 7 क्रमचय और संचयं Ex 7.1

MP Board Class 11th Maths Solutions Chapter 7 क्रमचय और संचयं Ex 7.1

प्रश्न 1.
अंक 1, 2, 3, 4 और 5 से कितनी 3 अंकीय संख्याएँ बनाई जा सकती हैं, यदि
(i) अंकों की पुनरावृत्ति की अनुमति हो।
(ii) अंकों की पुनरावृत्ति की अनुमति नहीं हो।
हल:
3 अंकीय संख्या में 3 स्थान होते हैं : इकाई, दहाई और सैकड़ा।
(i) इकाई का स्थान 5 तरीकों से भरा जा सकता है क्योंकि 1, 2, 3, 4, 5 में से कोई भी एक अंक लिया जा सकता है। दहाई का स्थान भी 5 तरीकों से भरा जा सकता है क्योंकि पुनरावृत्ति की अनुमति है। 1, 2, 3, 4, 5 में से कोई भी अंक लिया जा सकता है।
इसी प्रकार सैकड़े का स्थान भी 5 तरीकों से भरा जा सकता है।
∴ 3 अंकीय संख्याओं की संख्या = 5 x 5 x 5 = 125.
(ii) इकाई का स्थान 1, 2, 3, 4, 5 में से कोई-से एक अंक को लेकर 5 तरीकों से भरा जा सकता है।
दहाई का स्थान 4 तरीकों से भरा जा सकता है क्योंकि एक अंक पहले ही चयनित कर लिया गया। पुनरावृत्ति की अनुमति नहीं है। .
सैकड़े का स्थान 3 तरीकों से भरा जा सकता है क्योंकि 2 अंक पहले ही चयनित कर लिए गए हैं। .
∴ 3 अंकीय संख्याओं की संख्या = 5 x 4 x 3 = 60.

प्रश्न 2.
अंक 1, 2, 3, 4, 5, 6 से कितनी 3 अंकीय सम संख्याएँ बनाई जा सकती हैं, यदि अंकों की पुनरावृत्ति की जा सकती है?
हल:
इकाई का स्थान 2, 4, 6 में से एक को लेकर 3 तरीकों से भरा जा सकता है।
क्योंकि पुनरावृत्ति की जा सकती है, दहाई का स्थान 6 तरीकों से भरा जा सकता है।
इसी प्रकार सैकड़े का स्थान भी 6 तरीकों से ही भरा जा सकता है।
∴ 3 अंकीय संख्याओं की संख्या = 6 x 6 x 3 = 108.

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प्रश्न 3.
अंग्रेजी वर्णमाला के प्रथम 10 अक्षरों से कितने 4 अक्षरों के कोड बनाए जा सकते हैं, यदि किसी भी अक्षर की पुनरावृत्ति नहीं की जा सकती?
हल:
4 अक्षरों वाले कोड में 4 स्थान हैं। प्रत्येक अक्षर के लिए एक स्थान चाहिए।
पहले स्थान को 10 तरीकों से, दूसरे स्थान को 9 तरीकों से, तीसरे स्थान को 8 तरीकों से और चौथे स्थान को 7 तरीकों से भर सकते हैं क्योंकि पुनरावृत्ति की अनुमति नहीं है। एक अक्षर दुबारा नहीं लिखा जा सकता।
∴ चार अक्षर वाले कोडों की संख्या = 10 x 9 x 8 x 7 = 5040.

प्रश्न 4.
0 से 9 तक के अंकों का प्रयोग करके कितने 5 अंकीय टेलीफोन नम्बर बनाए जा सकते हैं, यदि प्रत्येक नम्बर 67 से आरम्भ होता है और कोई अंक एक बार से अधिक नहीं आता है?
हल:
पांच अंकीय नम्बर में 5 स्थान हैं जिसमें पहले और दूसरे को I और II से निरूपित किया गया है। I और II स्थान पर 6 और 7 को रखा गया है।
शेष 8 अंकों में से एक-एक अंक लेकर III, IV और V स्थान को भरना है। स्थान III को 8 तरीकों से, स्थान IV को 7 तरीकों से तथा स्थान V को 6 तरीकों से भर सकते है।
∴ 5 अंकीय टेलीफोन नम्बरों की संख्या = 8 x 7 x 6 = 336

प्रश्न 5.
एक सिक्का तीन बार उछाला जाता है और परिणाम अंकित कर लिए जाते हैं। परिणामों की संभव संख्या क्या है?
हल:
एक बार सिक्का उछालने से दो में से एक भाग ऊपर आता है अर्थात T या H जबकि H चित्त और T पट को निरूपित करते हैं।
∴ एक बार सिक्का उछालने से दो परिणाम होते हैं। तीन बार सिक्का उछालने से 2 x 2 x 2 = 8 परिणाम होंगे। ये परिणाम इस प्रकार है :
TTT, TTH, THT, HTT, HHT, HTH, THH, HHH

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प्रश्न 6.
भिन्न-भिन्न रंगों के 5 झंडे दिए हुए हैं। इससे कितने विभिन्न संकेत बनाए जा सकते हैं, यदि प्रत्येक संकेत में 2 झंडों, एक के नीचे दूसरे के प्रयोग की आवश्यक पड़ती है?
हल:
झंडे के ऊपर का स्थान भरने के 5 तरीके हैं। एक झंडा प्रयोग होने के बाद 4 झंडे रह जाते हैं। नीचे का दूसरा स्थान 4 तरीकों से भरा जा सकता है।
कुल संकेतों की संख्या = 5 x 4 = 20.

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MP Board Class 9th Special Hindi गद्य साहित्य का स्वरूप एवं विधाएँ

MP Board Class 9th Special Hindi गद्य साहित्य का स्वरूप एवं विधाएँ

प्रश्न 1.
गद्य किसे कहते हैं?
अथवा
गद्य के स्वरूप को स्पष्ट करते हुए इसके महत्व को बताइए।
उत्तर-
गद्य हमारी स्वाभाविक अभिव्यक्ति है। गद्य के माध्यम से ही हम अपने दैनिक जीवन में सभी कार्यों को सम्पन्न करते हैं। निजी जीवन में पत्र, डायरी आदि साहित्य में कहानी, उपन्यास, निबन्ध, नाटक, जीवनी आदि लेखन का माध्यम गद्य ही होता है। गद्य का क्रमिक विकास हिन्दी के आधुनिक काल के आरम्भ से हुआ। गद्य का प्रयोग व्याख्या, तर्क, वर्णन एवं कथा के लिए होता है। गद्य में किसी कथ्य को सहजता से, सरलता से एवं स्पष्टता से व्याख्या करने की क्षमता है। व्याकरण के नियमों का प्रयोग भी आसानी से ग्रहण किया जा सकता है।

गद्य प्रयोग और प्रयोजन की दृष्टि से तीन प्रकार की होती है-

  • दैनिक कार्यकलाप की भाषा,
  • शास्त्र या तर्क भाषा,
  • साहित्यिक भाषा।

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प्रश्न 2.
हिन्दी गद्य कितने रूपों में उपलब्ध है?
अथवा
हिन्दी गद्य की विधाओं का उल्लेखं कीजिए।
उत्तर-
हिन्दी गद्य की अनेक विधाएँ (रूप) हैं।

जो निम्नलिखित हैं-

  • निबन्ध,
  • नाटक,
  • एकांकी,
  • उपन्यास,
  • कहानी,
  • जीवनी,
  • आत्मकथा,
  • संस्मरण,
  • रेखाचित्र,
  • रिपोर्ताज,
  • गद्यकाव्य,
  • आलोचना,
  • यात्रावृत्त,
  • डायरी,
  • पत्र,
  • भेंटवार्ता आदि।

प्रश्न 3.
निबन्ध किसे कहते हैं? इसके कितने प्रकार होते हैं?
उत्तर-
निबन्ध उस गद्य रचना को कहते हैं जिसमें सीमित आकार के भीतर किसी विषय का वर्णन या प्रतिपादन एक विशेष निजीपन, स्वच्छन्दता, सौष्ठव और सजीवता तथा आवश्यक संगति और सम्बद्धता के साथ किया गया हो।

निबन्ध के निम्न प्रकार हैं-

  • कथात्मक,
  • वर्णनात्मक,
  • विचारात्मक,
  • भावात्मक।

कथात्मक निबन्धों में काल्पनिक वृत्त, आत्मचरित्रात्मक एवं पौराणिक आख्यानों का प्रयोग किया जाता है। वर्णनात्मक निबन्धों में प्रकृति या मनुष्य जीवन की घटनाओं का वर्णन होता है। विचारात्मक निबन्धों में अपने विचारों को सुसम्बद्धता से व्यक्त किया जाता है। भावात्मक निबन्धों में लेखक के हृदय से निकले भावों को एक वैचारिक सूत्र में नियन्त्रित करके लिखा जाता है।

प्रश्न 4.
नाटक किसे कहते हैं? नाटक के तत्व भी बताइए।
उत्तर-
रंगमंच पर प्रस्तुत करने के लिए किसी कथा को जब केवल पात्रों के संवादों के माध्यम से प्रस्तुत किया जाता है, तो वह रचना नाटक कहलाती है।

नाटक के छः तत्व माने जाते हैं-

  • कथावस्तु,
  • पात्र,
  • कथोपकथन (संवाद),
  • देशकाल,
  • उद्देश्य,
  • शैली।

प्रश्न 5.
हिन्दी के प्रसिद्ध नाटककारों के नाम बताइए।
उत्तर-
भारतेन्दु हरिश्चन्द्र, जयशंकर प्रसाद, हरिकृष्ण, ‘प्रेमी’, उदयशंकर भट्ट, सेठ गोविन्ददास, रामकुमार वर्मा, लक्ष्मीनारायण मिश्र, लक्ष्मीनारायण लाल, उपेन्द्रनाथ ‘अश्क’, विष्णु प्रभाकर, जगदीशचन्द्र माथुर, धर्मवीर ‘भारती’ आदि ने इस नाटक विधा को आगे बढ़ाया।

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प्रश्न 6.
एकांकी किसे कहते हैं?
उत्तर-
एकांकी नाटक का ही एक प्रकार है, इसे दृश्यकाव्य कहते हैं। एकांकी में जीवन का एक खण्ड दृश्य अंकित किया जाता है। यह स्वयं में पूर्ण होता है। एकांकी का प्रभाव मन के ऊपर बहुत ही सजीव और गम्भीर होता है। एकांकी एक ही उद्देश्य को व्यक्त करता है। इसका एक भाव या विचार होता है। इस भाव को एकांकी दर्शकों तक पहुँचाता है।

एकांकी में एक अंक होता है। यह अंक दृश्यों में विभाजित हो सकता है। कम से कम समय में अधिक-से-अधिक प्रभाव एकांकी का लक्ष्य हुआ करता है।

प्रश्न 7.
एकांकी के तत्व कितने बताये गये हैं?
उत्तर-
एकांकी के तत्व निम्नलिखित बताये गये हैं

  • कथावस्तु,
  • कथोपकथन या संवाद,
  • पात्र या चरित्र-चित्रण,
  • देशकाल-वातावरण,
  • भाषा-शैली,
  • रंगमंचीयता।

प्रश्न 8.
उपन्यास किसे कहते हैं? प्रसिद्ध उपन्यासकारों के नाम लिखिए।
उत्तर-
उपन्यास कथा का वह रूप है जिसमें जीवन का विशद् चित्रण होता है। पात्रों के जीवन की विविधरूपिणी झाँकी देकर उपन्यासकार एक ओर तो मानव चरित्र को व्यक्त करता है और दूसरी ओर वह युग की प्रवृत्तियों का चित्रण करते हुए हमें कुछ सोचने पर विवश कर देता है।

उपन्यास तीन प्रकार के होते हैं-

  • ऐतिहासिक,
  • सामाजिक,
  • मनोवैज्ञानिक।

हिन्दी के उपन्यासों की परम्परा तो भारतेन्दु युग से ही आरम्भ हो गई थी। परन्तु आरम्भ के उपन्यास कपोल-कल्पित और चमत्कार प्रधान ही होते थे। जयशंकर प्रसाद और प्रेमचन्द ने उपन्यास में मानव जीवन का यथार्थ चित्रण आरम्भ किया। प्रेमचन्द तो उपन्यास-सम्राट की उपाधि से विभूषित ही हैं। उनके बाद विशम्भरनाथ शर्मा ‘कौशिक’, आचार्य चतुरसेन, जैनेन्द्र, अज्ञेय, इलाचन्द जोशी, भगवतीचरण वर्मा, वृन्दावनलाल वर्मा, यशपाल, उपेन्द्रनाथ ‘अश्क’, रांगेय राघव, फणीश्वरनाथ ‘रेणु’, धर्मवीर भारती, कमलेश्वर, राजेन्द्र यादव, मन्नू भण्डारी, शिवानी आदि ने हिन्दी उपन्यास को समृद्ध किया है।

प्रश्न 9.
कहानी किसे कहते हैं?
अथवा
कहानी की कहानी लिखो। प्रसिद्ध कहानीकारों के नाम लिखिए।
उत्तर-
कहानी एक कलात्मक छोटी रचना है। यह किसी घटना, भाव, संवेदना आदि की मार्मिक व्यंजना करती है। इसका आरम्भ और अन्त बहुत कलात्मक तथा प्रभावपूर्ण होता है। घटनाएँ परस्पर सम्बद्ध होती हैं। हर घटना लक्ष्य की ओर उन्मुख होती है। लक्ष्य पर पहुँचकर कहानी अपना विशिष्ट प्रभाव छोड़ती हुई समाप्त हो जाती है।

जयशंकर प्रसाद, प्रेमचन्द, अज्ञेय, जैनेन्द, भगवतीचरण वर्मा, कमलेश्वर, विष्णु प्रभाकर, धर्मवीर ‘भारती’, मोहन राकेश, शैलेश मटियानी, भीष्म साहनी, निर्मल वर्मा, शिवानी आदि प्रसिद्ध कहानीकार हैं।

प्रश्न 10.
कहानी के कौन-कौन से तत्व होते हैं?
उत्तर-
कहानी के निम्नलिखित तत्व होते हैं-

  1. कथावस्तु-कथावस्तु के विकास की स्थितियाँ चार होती हैं-
    • आरम्भ,
    • आरोह,
    • चरम स्थिति,
    • अवरोह।
  2. चरित्र-चित्रण।
  3. कथोपकथन अथवा संवाद।
  4. देशकाल और वातावरण।
  5. उद्देश्य।
  6. शैली शिल्प।

प्रश्न 11.
कहानी के कितने भेद होते हैं?
उत्तर-
कहानी के निम्न चार भेद होते हैं-

  • घटना प्रधान कहानी,
  • चरित्र प्रधान कहानी,
  • वातावरण प्रधान कहानी,
  • भाव प्रधान कहानी।

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प्रश्न 12.
कहानी के विकास को कितने भागों में बाँटा जा सकता है? समय-सीमा भी बताओ।
उत्तर-
कहानी के विकास को निम्नलिखित प्रकार से विभाजित किया जा सकता है

  • आरम्भ काल सन् 1900 से 1910 ई. तक।
  • विकास काल सन् 1911 से सन् 1946 ई. तक।
  • उत्कर्ष काल सन् 1947 ई. से अब तक।

प्रश्न 13.
जीवनी, आत्मकथा, रेखाचित्र, संस्मरण और यात्रावृत्त की परिभाषा दीजिए।
उत्तर-
जीवनी-किसी महापुरुष या प्रसिद्ध व्यक्ति के जीवन की घटनाओं, उनके कार्य-कलापों आदि का आत्मीयता के साथ वर्णन जिस गद्य विधा में किया जाता है, उसे जीवनी कहते हैं।

आत्मकथा-आत्मकथा में लेखक स्वयं अपनी जीवन-यात्रा पूरी आत्मीयता से व्यवस्थित रूप में पाठक के सम्मुख रखता है।

रेखाचित्र-रेखाचित्र में शब्दों की कलात्मक रेखाओं द्वारा किसी व्यक्ति, वस्तु अथवा घटना के बाह्य और आन्तरिक स्वरूप का शब्दचित्र अंकित किया जाता है।

संस्मरण-संस्मरण में लेखक अपने अनुभव की वस्तु, व्यक्ति अथवा घटना का कलात्मक विवरण अपनी स्मृति के आधार पर प्रस्तुत करता है। यात्रावृत्त-यात्रावृत्त वह विधा है जिसमें लेखक किसी विशेष स्थल की यात्रा का ऐसा सजीव वर्णन करता है कि पाठक पढ़कर ही ऐसा अनुभव करने लगे जैसे वह उसी स्थान के सारे दृश्य स्वयं देख रहा है।

प्रश्न 14.
गद्यकाव्य विधा के बारे में आप क्या जानते हैं?
उत्तर-
यह कवितापूर्ण गद्य रचना होती है। जब किसी गहन भावानुभूति की काव्यमयी भाषा शैली और अतिशय भावुकता के साथ प्रस्तुत की जाती है, तब हम उस रचना को गद्यकाव्य कहते हैं। गहन भावानुभूति, काव्यमयी सुललित भाषा, आलंकारिकता, भावात्मक शैली आदि इसकी विशेषताएँ हैं।

प्रश्न 15.
‘रिपोर्ताज’ विधा का परिचय दीजिए।
उत्तर-
‘रिपोर्ताज’ फ्रांसीसी भाषा का शब्द है। अंग्रेजी शब्द ‘रिपोर्ट’ से इसका निकट का सम्बन्ध है। रिपोर्ट समाचार-पत्र के लिए लिखी जाती है। उसमें साहित्यिक तत्व नहीं होते। रिपोर्ट के कलात्मक और साहित्यिक रूप को ही रिपोर्ताज कहते हैं।

आँखों देखी घटनाओं पर ही रिपोर्ताज लिखा जा सकता है। रिपोर्ताज का विषय कभी कल्पित नहीं होता है। परन्तु तथ्य को रोचकता देने के लिए इसमें कल्पना का सहारा लिया जा सकता है। रिपोर्ताज लेखक को पत्रकार और कलाकार दोनों की ही जिम्मेदारी निभानी पड़ती है।

प्रश्न 16.
‘आलोचना’ की परिभाषा लिखिए।
उत्तर-
‘आलोचना’ विधा के द्वारा किसी साहित्यिक रचना के गुण-दोषों की परख की जाती है जिसमें रसानुभूति की बुद्धि प्रधान व्याख्या की जाती है।

महत्त्वपूर्ण वस्तुनिष्ठ प्रश्न

रिक्त स्थानों की पूर्ति-

1. गद्य का क्रमिक विकास हिन्दी के………………के आरम्भ से हुआ। (भक्तिकाल/आधुनिक काल)
2. गद्य में व्याकरण के नियमों का प्रयोग भी………….ग्रहण किया जा सकता है। (आसानी से/कठिनता से)
3. पात्रों के संवादों से प्रस्तुत रचना…………….कहलाती है। (नाटक/उपन्यास)
4. एकांकी में……………होता है। (एक अंक/कम-से-कम पाँच अंक)
5. गद्यकाव्य काव्यमय………..रचना होती है। (पद्य/गद्य)
उत्तर-
1. आधुनिक काल,
2. आसानी से,
3. नाटक,
4. एक अंक,
5. गद्य।

सही विकल्प चुनिए-

1. गद्य हमारी स्वाभाविक
(क) अभिव्यक्ति है
(ख) रचना है
(ग) पद्य है
(घ) व्याख्या है।
उत्तर-
(क) अभिव्यक्ति है

2. गद्य का प्रयोग होता है
(क) व्याख्या के लिए
(ख) धमकाने के लिए
(ग) भयभीत करने के लिए
(घ) भाव प्रकाशन के लिए।
उत्तर-
(क) व्याख्या के लिए

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3. व्याकरण के नियमों का प्रयोग होता है गद्य में
(क) कठिनता से
(ख) आसानी से
(ग) बाधा से
(घ) अबाधित रूप से।
उत्तर-
(ख) आसानी से

4. एकांकी में अंक होता है
(क) एक ही
(ख) तीन ही
(ग) पाँच ही
(घ) एक भी नहीं।
उत्तर-
(क) एक ही

5. ‘रिपोर्ताज’ शब्द है भाषा का
(क) फ्रांसीसी
(ख) इटेलियन
(ग) रूसी
(घ) जापानी।
उत्तर-
(क) फ्रांसीसी

सही जोड़ी मिलाइए-
MP Board Class 9th Special Hindi गद्य साहित्य का स्वरूप एवं विधाएँ 1
उत्तर-
(i) → (ख),
(ii) →(क),
(iii) → (घ),
(iv) → (ग),
(v) → (ङ)।

सत्य/असत्य-

1. कहानी में किसी घटना, भाव, संवेदना आदि की मार्मिक व्यंजना की जाती है।
2. उपन्यास में जीवन का विशद् चित्रण नहीं होता है।
3. एकांकी का एक ही अंक दृश्यों में विभाजित होता है।
4. गद्यकाव्य कवितापूर्ण गद्य रचना होती है जिसमें गहन भावानुभूति होती है।
5. आलोचना में रसानुभूति की बुद्धि प्रधान व्याख्या की जाती है।
उत्तर-
1. सत्य,
2. असत्य,
3. सत्य,
4. सत्य,
5. सत्य।

एक शब्द/वाक्य में उत्तर-

1. अंग्रेजी शब्द ‘रिपोर्ट’ से किसका निकटता का सम्बन्ध होता है?
उत्तर-
रिपोर्ताज का।

2. आलोचना में किसके गुण-दोषों की परख की जाती है?
उत्तर-
साहित्यिक रचना के।

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3. किसी विशेष स्थल की यात्रा का सजीव वर्णन किस विधा में किया जाता है?
उत्तर-
यात्रावृत्त।

4. रेखाचित्र में घटना के बाह्य और आन्तरिक स्वरूप को किस तरह अंकित किया जाता है?
उत्तर-
कलात्मक रेखाओं द्वारा।

5. जीवन का विशद् चित्रण किस विधा में होता है?
उत्तर-
उपन्यास।

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MP Board Class 9th Hindi Navneet लेखक परिचय

MP Board Class 9th Hindi Navneet लेखक परिचय

1. रामधारीसिंह ‘दिनकर’

जीवन-परिचय-रामधारीसिंह ‘दिनकर’ का जन्म सन् 1908 ई. में बिहार राज्य के मुंगेर जिले के सिमरिया गाँव के एक कृषक परिवार में हुआ था। स्नातक ऑनर्स तक शिक्षा प्राप्त करके 55 रुपये मात्र मासिक के वेतन पर एक विद्यालय में अध्यापन कार्य करने लगे। बाद में बिहार राज्य सेवा के अपर निबन्धक विभाग में उप-निबन्धक विभाग में उपनिदेशक नियुक्त हुए। इसके बाद मुजफ्फरपुर कॉलेज में हिन्दी विभाग के अध्यक्ष बने। सन् 1952 ई. में इन्हें राज्यसभा के लिए मनोनीत किया गया। सन् 1964 ई. में भागलपुर विश्वविद्यालय के कुलपति बनाये गए। आकाशवाणी के निदेशक, हिन्दी सलाहकार समितियों के लिए महत्त्वपूर्ण कार्य किए। सन् 1974 ई. में इनका निधन हो गया।

अपनी ओजस्वी रचनाओं के लिए, भारतीयों में नई स्फूर्ति भरने के लिए सृजित रचनाओं के लिए इन्हें साहित्य अकादमी, ज्ञानपीठ पुरस्कार प्राप्त हुए हैं।

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रचनाएँ
(1) निबन्ध-मिट्टी की ओर, अर्द्धनारीश्वर, रेती के फूल, उजली आग, राष्ट्रभाषा, वेणुवन, राष्ट्रीय एकता।
(2) आलोचना-शुद्ध कविता की खोज, काव्य की भूमिका।
(3) संस्कृति और दर्शन-संस्कृति के चार अध्याय, भारतीय संस्कृति और एकता, चेतना की शिक्षा।
(4) संस्मरण-रेखाचित्र-लोकदेव नेहरू, वट-पीपल। (5) यात्रावृत्त-मेरी यात्राएँ, देश-विदेश।
(6) काव्य-रेणुका, हुंकार, रसवन्ती, कुरुक्षेत्र, रश्मिरथी, उर्वशी, सामधेनी आदि।

भाषा- इनकी भाषा शुद्ध साहित्यिक खड़ी बोली है। भाषा में संस्कृत शब्दावली, कहावतों, मुहावरों का प्रयोग हुआ है। आलंकारिकता और व्यंग्य भाषा के गुण हैं।

शैली-‘दिनकर’ जी ने विवेचना प्रधान, आलोचनात्मक तथा भावात्मक शैलियों को अपनाया है।

साहित्य में स्थान- भारतीयता लिए हुए साहित्यिक समाज का मार्गदर्शन करने वाले ‘दिनकर’ जी पर हिन्दी को गर्व है।

2. विद्यानिवास मिश्र

जीवन-परिचय-ललित निबन्धकार एवं उच्च विचारक विद्यानिवासजी मिश्र का जन्म गोरखपुर (उत्तर प्रदेश) में सन् 1926 ई. को हुआ था। उच्च शिक्षा प्राप्त करके गोरखपुर विश्वविद्यालय में अध्यापन शुरू कर दिया। बाद में के. एम. मुंशी हिन्दी और भाषा विज्ञान विद्यापीठ, आगरा के निदेशक नियुक्त हुए। सम्पूर्णानन्द संस्कृत विश्वविद्यालय और काशी विद्यापीठ, वाराणसी के कुलपति बने। बाद में नवभारत टाइम्स के प्रधान सम्पादक का दायित्व निभाया। भारत सरकार ने इन्हें पद्मभूषण की उपाधि से विभूषित किया। आपका दुःखद निधन सन् 2006 ई. में हो गया।

रचनाएँ-
(1) निबन्ध-‘चितवन की छाँह’, ‘तुम चन्दन हम पानी’, ‘आँगन का पंछी और बनजारा’, ‘मैंने सिल पहुँचाई’, ‘मेरे राम का मुकुट भीग रहा है।
(2) संस्मरण-अमर कंटक की सालती स्मृति।
(3) आलोचना-साहित्य की चेतना, मॉडर्न हिन्दी पोइट्री।

इनके अतिरिक्त हिन्दी की शब्द सम्पदा, रीति-विज्ञान, महाभारत का यथार्थ, भारतीय भाषा दर्शन आपकी अप्रतिम रचनाएँ हैं।

भाषा-मिश्रजी की भाषा शुद्ध, परिमार्जित, साहित्यिक एवं प्रवाहयुक्त है। आपने आंचलिक भाषाओं का भी अपनी कृतियों में यथास्थान प्रयोग किया है। उर्दू, फारसी, अंग्रेजी आदि भाषाओं के शब्दों का प्रयोग किया गया है। मुहावरे एवं सूक्तियों के प्रयोग से भाषा में गति आ गई है। – शैली-मिश्रजी ने विवरणात्मक, आत्माभिव्यंजक, भावात्मक, व्याख्यात्मक शैलियों को अपनाया है और विषयवस्तु को सुबोध बना दिया है।

साहित्य में स्थान-स्वतन्त्रता के पश्चात् के हिन्दी रचनाकारों में विद्यानिवासजी का अति महत्त्वपूर्ण स्थान है।

3. शरद जोशी

जीवन-परिचय-व्यंग्यकार शरद जोशी का जन्म उज्जैन (मध्य प्रदेश) में 21 मई, 1937 ई. को हुआ था। स्नातक स्तर तक की शिक्षा होल्कर कॉलेज, इन्दौर में प्राप्त की। बाद में स्वतन्त्र लेखन शुरू कर दिया। आपके लेख समाचार-पत्रों, पत्र-पत्रिकाओं और इसी तरह की पुस्तकों में लगातार छपते रहे हैं। आप नई दुनिया और नवभारत टाइम्स से सम्बद्ध रहे हैं।

रचनाएँ-
(1) व्यंग्य-परिक्रमा, जीप पर सवार इल्लियाँ, किसी बहाने, तिलिस्म, रहा किनारे बैठ, दूसरी सतह, इन दिनों।
(2) नाटक-अन्धों का हाथी, एक था गधा। साहित्य सृजन अभी भी जारी है।

भाषा-व्यावहारिक, सरल सुबोध खड़ी बोली हिन्दी पर , आपका अधिकार है। उर्दू, फारसी और अंग्रेजी के शब्दों का प्रयोग सहज ही भाव को स्पष्ट करने के लिए किया जाता है।

शैली-शरद जोशी ने अपनी कृतियों में व्यंग्य, वर्णनात्मक, संस्मरणात्मक शैलियों का प्रयोग किया है और उन्हें आकर्षक बना दिया है।

साहित्य में स्थान-हिन्दी के व्यंग्यकारों में शरद जोशी का विशेष स्थान है।

4. पं. हजारीप्रसाद द्विवेदी

जीवन-परिचय-पं. हजारीप्रसाद द्विवेदी का जन्म 19 अगस्त, सन् 1907 ई. में उत्तर प्रदेश के बलिया जिले के ‘दुबे का छपरा’ नामक ग्राम में हुआ था। इनके पिता का नाम अनमोल दुबे और माता का नाम ज्योतिकली देवी था। काशी विश्वविद्यालय से साहित्य एवं ज्योतिष में आचार्य परीक्षा उत्तीर्ण की। सन् 1940 ई. में शान्ति निकेतन में हिन्दी और संस्कृत के अध्यापक हो गए। हिन्दी विभाग के अध्यक्ष रहे। ‘विश्वभारती’ पत्रिका का सम्पादन किया। सन् 1949 ई. में लखनऊ विश्वविद्यालय ने डी. लिट. की मानद उपाधि से सम्मानित किया। बाद में काशी हिन्दू विश्वविद्यालय तथा पंजाब विश्वविद्यालय में हिन्दी विभाग के अध्यक्ष रहे। आपको मंगलाप्रसाद पारितोषिक मिला। भारत सरकार ने पद्मभूषण से अलंकृत किया। 19 मई, 1979 ई. को आपका निधन हो गया।

रचनाएँ-
(1) निबन्ध-विचार और वितर्क, अशोक के फूल, कल्पलता, कुटज।
(2) आलोचना-कबीर, सूर, साहित्य, हिन्दी साहित्य।
(3) उपन्यास-चारुचन्द्र लेख, अनामदास का पोथा, बाणभट्ट की आत्मकथा पुनर्नवा।
(4) हिन्दी साहित्य की भूमिका,
(5) हिन्दी साहित्य का उद्भव और विकास।

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भाषा-द्विवेदी जी की भाषा तत्सम तद्भव प्रधान, साहित्यिक एवं व्यावहारिक खड़ी बोली हिन्दी है। उर्दू, अंग्रेजी और संस्कृत के शब्दों का प्रयोग आवश्यकतानुसार हुआ है। मुहावरों ने भाव बोध में सहजता दी है।

शैली-हजारीप्रसाद द्विवेदी जी की शैली भाव प्रधान, आलोचनात्मक, गवेषणात्मक है। इन शैलियों से भाव माधुर्य, व्यंग्य, आलंकारिक एवं चिन्तन को स्पष्टता मिलती है।

साहित्य में स्थान-हिन्दी साहित्य की अभिवृद्धि में हजारीप्रसाद द्विवेदी का योगदान महत्त्वपूर्ण है।

महत्वपूर्ण वस्तुनिष्ठ प्रश्न

रिक्त स्थान पूर्ति
1. रामधारीसिंह ‘दिनकर’ का जन्म सन् ………………………… ई. में हुआ था। (1918/1908)
2. दिनकर जी ने कुल ₹………………………… पर प्रतिमाह अध्यापन कार्य किया। (पचपन/पैसठ)
3. विद्यानिवास मिश्र ………………………… के रूप में जाने जाते हैं। (ललित निबन्धकार/कटु आलोचक)
4. शरद जोशी एक ………………………… के व्यंग्यकार हैं। (निम्नकोटि/उच्चकोटि)
5. पं. हजारीप्रसाद द्विवेदी ने ………………………… पत्रिका का सम्पादन किया। (भारत भारती/विश्व भारती)
उत्तर-
1. 1908,
2. पचपन,
3. ललित निबन्धकार,
4. उच्चकोटि,
5. विश्वभारती।

सही विकल्प चुनिए-

1. रामधारीसिंह ‘दिनकर’ ने शिक्षा प्राप्त की
(क) स्नातक ऑनर्स की
(ख) परास्नातक की
(ग) इण्टरमीडिएट की
(घ) हाईस्कूल की।

2. ‘दिनकर’ हिन्दी विभाग के अध्यक्ष बने
(क) मुजफ्फरपुर कॉलेज में
(ख) आगरा कॉलेज में
(ग) सप्रू कॉलेज में
(घ) शासकीय कॉलेज में।

3. विद्यानिवास मिश्र ने प्रधान सम्पादक का दायित्व निभाया
(क) नवभारत टाइम्स में
(ख) स्वराज्य टाइम्स में
(ग) हिन्दुस्तान टाइम्स में
(घ) हिन्दुस्तान में।

4. शरद जोशी उच्चकोटि के
(क) व्यंग्यकार थे
(ख) निबन्धकार थे
(ग) आलोचक थे
(घ) कवि थे।

5. पं. हजारीप्रसाद द्विवेदी का जन्म हुआ
(क) दुबे का छपरा गाँव में
(ख) हल्दिया गाँव में
(ग) सिमरिया घाट गाँव में
(घ) नैनाना बालसर में।
उत्तर-
1. (क), 2. (क), 3. (क), 4. (क), 5. (क)।

सही जोड़ी मिलाइए-
MP Board Class 9th Hindi Navneet लेखक परिचय 1
उत्तर-
(i) → (ख),
(ii) → (क),
(iii) → (घ),
(iv) → (ङ),
(v) → (ग)।

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सत्य/असत्य-

1. हिन्दी साहित्य की अभिवृत्ति में पं. हजारीप्रसाद द्विवेदी का महत्त्वपूर्ण योगदान है।
2. शरद जोशी अपने स्वतन्त्र लेखन के लिए प्रसिद्ध हैं।
3. विद्यानिवास मिश्र ने हिन्दी भाषा के विकास के लिए कोई सहयोग नहीं दिया।
4. ‘दिनकर’ ने आलोचनात्मक और भावात्मक शैलियों में उच्चकोटि की रचनाएँ प्रस्तुत की।
5. ‘दिनकर’ द्वारा हिन्दी साहित्यकार समिति में रहकर हिन्दी के उत्थान और विकास के लिए किया गया कार्य विस्मरणीय है।
उत्तर-
1. सत्य,
2. सत्य,
3. असत्य,
4. सत्य,
5. असत्य।

एक शब्द/वाक्य में उत्तर-

1. रामधारीसिंह दिनकर को कौन-कौन से पुरस्कार प्राप्तहुए?
उत्तर-
साहित्य अकादमी पुरस्कार और ज्ञानपीठ पुरस्कार।

2. विद्यानिवास मिश्र किस विश्वविद्यालय के कुलपति रहे?
उत्तर
काशी विद्यापीठ, वाराणसी।

3. शरद जोशी द्वारा प्रयुक्त शैलियों के नाम बताइए।
उत्तर-
व्यंग्य, वर्णनात्मक व संस्मरणात्मक शैलियाँ।

4. पं. हजारीप्रसाद द्विवेदी ने किस पत्रिका का सम्पादन किया?
उत्तर-
विश्व भारती।

5. विद्यानिवास मिश्र को भारत सरकार ने किस उपाधि से विभूषित किया?
उत्तर-
पद्मभूषण।

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MP Board Class 9th Hindi Navneet कवि परिचय

MP Board Class 9th Hindi Navneet कवि परिचय

1. मीराबाई

जीवन-परिचय-मीराबाई का जन्म राजस्थान में मेड़ता (जोधपुर) के निकट चौकड़ी गांव में सन् 1498 ई. में हुआ था। इनके पिता रत्नसिंह राजवंश से सम्बन्धित थे। मीरा का पालन-पोषण उनके पितामह राव दूदा जी ने किया। वे कृष्णभक्त थे। अतः मीरा पर भी कृष्ण की भक्ति का प्रभाव पड़ा। उनका विवाह उदयपुर के राणा सांगा के पुत्र राजकुमार भोजराज के साथ हुआ। विवाह के थोड़े ही समय बाद उनके पति की मृत्यु हो गई। मीरा अब अपने आपको अनाथ समझ रही थी और संसार से विरक्त महसूस करने लगी। भगवान कृष्ण की भक्ति में उसने अपना ध्यान लगा दिया। भगवान कृष्ण को ही उसने अपना पति मान लिया और अपना जीवन भक्ति में ही लगा दिया। अन्तिम समय में द्वारिका पहुँचकर “मीरा प्रभु, हरो तुम जनकी पीर’ भजन को गाते-गाते रणछोर जी की मूर्ति में समा गई। यह घटना सन् 1546 ई. की बताई जाती है।

रचनाएँ- मीरा ने राग गोविन्द, गीत गोविन्द की टीका, राग सोरठा के पद तथा नरसीजी को माहेरो आदि की रचनाएँ की।

काव्यगत विशेषताएँ-
(क) भावपक्ष (भाव तथा विचार)-मीरा ने भगवान श्रीकृष्ण को अपना पति एवं स्वामी मानकर अपनी भक्ति के भावों को अभिव्यक्ति दी है। द्रष्टव्य है
‘मेरे तो गिरधर गोपाल दूसरो न कोई, जाके सिर मोर मुकुट मेरो पति सोई।’ मीरा की भक्ति भावना अनन्य भाव की है। उनका जीवन और उनका काव्य कृष्णमय है। साथ ही उनके काव्य में माधुर्य भाव की प्रधानता है। विरह की मार्मिक तीव्रता ने उन्हें भाव विह्वल बना दिया। इस तरह उनके काव्य में श्रृंगार और शान्त दोनों रसों की धारा प्रवाहित हो रही है।

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(ख) कलापक्ष (भाषा शैली)-मीरा के काव्य में राजस्थानी मिश्रित ब्रजभाषा का प्रयोग हुआ है। उनके काव्य में ‘अनगढ़’ कलात्मकता बिखरी पड़ी है। मीरा ने प्रमुख रूप से पद शैली अपनाई है। – साहित्य में स्थान–मीरा भक्त कवयित्री थीं। वे भक्ति के उपवन की साक्षात् शकुन्तला थी और मरुस्थल की मन्दाकिनी थीं। हिन्दी काव्य जगत् में उनका स्थान अति महत्त्वपूर्ण है।

2. रसखान

जीवन-परिचय-रसखान का पूरा नाम सैयद इब्राहीम था। इनका जन्म संवत् 1615 वि. में हुआ था। रसखान कृष्ण के अनन्य भक्त थे। इन्होंने गोस्वामी विट्ठलनाथ (दास) से दीक्षा ली और वैष्णव मत में दीक्षित होकर रात-दिन कृष्णभक्ति में लीन रहने लगे। ये गोवर्द्धन में जाकर रहने लगे। इनकी मृत्यु संवत् 1685 विक्रमी में हो गई।

रचनाएँ-
(1) सुजान रसखान,
(2) प्रेम वाटिका।

काव्यगत विशेषताएँ
(क) भावपक्ष (भाव तथा विचार)-रसखान की कविता में सच्चे प्रेम का प्रत्यक्षीकरण एवं प्रेममग्न हृदय के भावोद्रेक का छलकता स्वरूप विद्यमान है। इनके काव्य में प्रेम और अनुभूति की तीव्रता और कथन की सहजता और सरलता विद्यमान है। अनुभूति की कोमलता द्रष्टव्य है।
(ख) कलापक्ष (भाषा-शैली)-रसखान ने अपनी कविता में ब्रजभाषा के प्रौढ़ परिष्कृत स्वरूप के प्रयोग किए हैं। उनकी भाषा में सहजता, सरलता एवं एक प्रवाह विद्यमान है। अनुप्रास, यमक, उत्प्रेक्षा अलंकारों का प्रयोग किया गया है।

ब्रज क्षेत्र के प्रचलित मुहावरों का प्रयोग भाषा को सजीवता देता है। फुटकर पद शैली में सौन्दर्य निरूपण इनका अप्रतिम कला वैभव है।

साहित्य में स्थान-काव्य एवं पिंगल साहित्य के मर्मज्ञ रसखान का स्थान कृष्णभक्त कवियों में सर्वश्रेष्ठ है। वे अपनी भावुकता, सहृदयता और प्रेम परिपूर्ण व्यवहार के लिए सम्मान प्राप्त कवि हैं।

3. रहीम

जीवन-परिचय-रहीम नाम से प्रसिद्ध अब्दुर्रहीम खानखाना का जन्म सन् 1556 ई. में हुआ था। इनके पिता का नाम सरदार बैरमखाँ खानखाना था। बैरमखाँ अकबर के अभिभावक थे। रहीम अकबर के मनसबदार और दरबार के नवरत्नों में प्रमुख थे। इन्होंने अनेक युद्ध लड़े और जीत पाई। बड़े-बड़े सूबे और किले इन्हें जागीर में दिए गए। अकबर की मृत्यु के बाद जहाँगीर ने इन्हें राजद्रोही ठहराया, बन्दी बनाया, जेल में डाल दिया। इनकी जागीरें जब्त कर ली गईं। सन् 1626 ई. में इनकी मृत्यु हो गई।

रचनाएँ-रहीम की प्रमुख कृतियों में रहीम सतसई, शृंगार सतसई, मदनाष्टक, रास पंचाध्यायी, रहीम रत्नावली, बरवै, भाषिक भेदवर्णन इत्यादि शामिल हैं।

काव्यगत विशेषताएँ
(क) भावपक्ष (भाव तथा विचार)-रहीम मध्ययुगीन दरबारी संस्कृति के प्रतिनिधि कवि थे। शृंगार, भक्ति और नीति के लोकप्रिय कवि रहीम कोमल भावनाओं और सहज प्रेम के पक्षधर कवि हैं। कृष्ण के उपासक रहीम के काव्य में जीवन के गहरे अनुभव मिलते हैं। संवेदनशील हृदय में नीति, शृंगार और प्रेम का अनूठा समन्वय व्याप्त है।

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(ख) कलापक्ष (भाषा तथा विचार)-रहीम के काव्य में ब्रज और अवधी भाषा का प्रयोग हुआ है। दोहा, बरवै, कवित्त, सवैया, सोरठा, पद आदि सभी प्रचलित छन्दों में रचनाएँ प्रस्तुत की हैं। छन्द विधान में निपुण रहीम अलंकारों के सहज प्रयोग के पक्षधर थे। शैली की सरलता है। . साहित्य में स्थान-हिन्दी के नीतिकार कवियों में रहीम का स्थान सर्वोपरि है।

4. मैथिलीशरण गुप्त

जीवन-परिचय-मैथिलीशरण गुप्त का जन्म सन् 1886 ई. में चिरगाँव, जिला-झाँसी के सेठ रामचरण गुप्त के घर हुआ था। कक्षा नौ तक शिक्षा प्राप्त मैथिलीशरण ने स्वाध्याय से ज्ञानार्जन किया। महावीर प्रसाद द्विवेदी के सानिध्य में आने पर इनकी प्रतिभा चमक उठी। भारतीय संस्कृति और राष्ट्रप्रेम से परिपूर्ण आत्मा वाले मैथिलीशरण गुप्त गाँधीजी के प्रभाव से भारतीय स्वतन्त्रता आन्दोलन में शामिल हुए और जेल यात्राएँ की। स्वतन्त्रता के बाद राष्ट्रपति ने इन्हें राज्यसभा का सदस्य मनोनीत किया। सन् 1948 ई. में आगरा विश्वविद्यालय ने इन्हें डी. लिट् की उपाधि से विभूषित किया। ‘साकेत’ के लिए इन्हें मंगला प्रसाद पारितोषिक प्राप्त हुआ। सन् 1964 ई. में इनका निधन हो गया।

रचनाएँ-

  • जयभारत,
  • पंचवटी,
  • भारत-भारती,
  • यशोधरा,
  • जयद्रथ वध,
  • सिद्धराज,
  • द्वापर,
  • अनघ,
  • झंकार आदि।

काव्यगत विशेषताएँ
(क) भावपक्ष (भाव तथा विचार)-इनकी कविताओं ने राष्ट्रीय आन्दोलन को प्रेरणा दी, सुधारवादी दृष्टिकोण अपनाया गया। छुआछूत, विधवा विवाह, अनमेल विवाह आदि समस्याओं पर इन कविताओं में प्रकाश डाला है। लोकतन्त्रात्मक शासन व्यवस्था का समर्थन किया है। गुप्तजी का प्रकृति चित्रण अनुपम है। वे वैष्णव भक्ति में आस्था रखते थे। उन्होंने चारित्रिक विकास पर बल दिया। मानवता को देवत्व की जननी बताया। इनके काव्य में विभिन्न रसों की उद्भावना हुई है।

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(ख) कलापक्ष (भाषा शैली)-इनके काव्य में उत्कृष्ट संवाद योजना का संक्षिप्त रूप, पात्र एवं भाव मिलते हैं। इनकी भाषा परिष्कृत खड़ी बोली है। प्रबन्ध, मुक्तक, गीति, नाट्य आदि शैलियों का प्रयोग प्रशंसनीय है। कहीं-कही उपदेशपरक छायावादी शैली मिलती है। अलंकारों की योजना सहज ही हुई है। सभी प्रचलित अलंकारों का प्रयोग हुआ है। गुप्तजी ने तुकान्त, अतुकान्त और गीति छन्दों का प्रयोग किया है।

साहित्य में स्थान-भारतीय संस्कृति और जीवन शैली के प्रतिनिधि कवि मैथिलीशरण युगों-युगों तक हिन्दी काव्य जगत् में सम्मान पाते रहेंगे।

5. सुमित्रानन्दन पन्त

जीवन-परिचय-सुमित्रानन्दन पन्त का जन्म सन् 1900 ई. में कौसानी नामक ग्राम, जिला अल्मोड़ा (कूर्मांचल प्रदेश) में हुआ था। इनकी माँ इन्हें जन्म देने के कुछ ही समय बाद इस दुनिया से चल बसीं। मातृहीन बालक ने प्रकृति माँ की एकान्त ‘गोद में बैठकर घण्टों तक चिन्तन करना सीख लिया। विचार विकसित हुए। अल्मोड़ा के राजकीय विद्यालय से प्रारम्भिक शिक्षा लेकर काशी से मैट्रिक पास की। एफ. ए. में पढ़ाई करते हुए ही गाँधीजी के असहयोग आन्दोलन में सन् 1921 ई. में शामिल हो गए। स्वाध्याय से बंगला, अंग्रेजी एवं संस्कृत का अध्ययन किया। इनका बचपन का नाम गुसाईं दत्त था। अपनी चिर साधना से प्रतिष्ठित कवियों में नाम जुड़ गया। कालाकांकर के नरेश के सहयोगी रहे। ‘रूपाभ’ पत्र का सम्पादन किया। आकाशवाणी में अधिकारी बने। अविवाहित पन्त ने साहित्य साधना में अपना जीवन समर्पित कर दिया। भारत सरकार ने पद्यभूषण से अलंकृत किया। 29 सितम्बर, सन् 1977 ई. में भारती के अमर सपूत ने चिरनिद्रा में आँखें बन्द कर ली।

रचनाएँ-

  • वीणा,
  • पल्लव,
  • गुंजन,
  • युगान्त,
  • युगवाणी,
  • ग्राम्या,
  • स्वर्ण-किरण,
  • स्वर्ण-धूलि,
  • युगपथ,
  • उत्तरा,
  • अतिमा,
  • रजत रश्मि,
  • शिल्पी,
  • कला और बूढ़ा चाँद,
  • चिदम्बरा,
  • रश्मि बन्द। ये सभी काव्य संग्रह हैं।
  • लोकायतन के लिए उत्तर प्रदेश सरकार ने दस हजार रुपये का पुरस्कार दिया।

‘कला और बूढ़ा चाँद’ के लिए साहित्य अकादमी से पाँच हजार रुपये का पुरस्कार मिला। चिदम्बरा के लिए एक लाख रुपये का ज्ञानपीठ पुरस्कार दिया गया।

काव्यगत विशेषताएँ
(क) भावपक्ष (भाव और विचार)-पन्तजी कोमल और सुकुमार स्वभाव के व्यक्ति थे। उनमें भावात्मक तल्लीनता का गुण था। प्रकृति में पन्त ने आलम्बन, उद्दीपन, मानवीकरण एवं एक उपदेशिका का रूप देखा है। प्रकृति के मध्य बैठकर लीन अवस्था में उनका भाव चित्रण अनोखा है।

पंत ने सूक्ष्म भावों को काव्य में चित्रित किया है। संयोग और वियोग की अवस्थाओं का तथा अनुभूतियों का चित्रण बहुत ही भावग्राह्य है। मानवतावादी दृष्टि को अपनाकर नारी के प्रति सहानुभूति प्रकट की गई है। कार्ल मार्क्स का प्रभाव उन पर परिलक्षित है। ईश्वर, आत्मा, जगत् पर पंत ने अपनी कविता में अपने दार्शनिकतावादी दृष्टिकोण को अभिव्यक्त किया है।

(ख) कलापक्ष (भाषा और शैली)-पन्त की भाषा कोमलकान्त पदावली से युक्त है, सहज है, सुकुमार है। भाषा में लालित्य, चित्रोपमा, ध्वन्यात्मकता विद्यमान है। भाव के अनुसार भाषा भयानकता में भी बदल जाती है। छायावादी लाक्षणिक शैली में प्रतीकात्मकता और बिम्ब विधान द्रष्टव्य है। सहज भाव से ही अलंकार प्रयुक्त हुए हैं। उपमा, रूपक, उत्प्रेक्षा, श्लेष, यमक, रूपकातिशयोक्ति अन्योक्ति का प्रयोग मौलिक है। छन्द योजना भी पन्त द्वारा व्यवहारात्मक रूप में तैयार की गई है। तुकान्त और अतुकान्त छन्दों में संगीतात्मकता भी विद्यमान है।

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साहित्य में स्थान-आधुनिक शीर्षस्थ कवियों में पंतजी चिरस्मरणीय हैं।

6. बालकृष्ण शर्मा ‘नवीन’

जीवन-परिचय-बालकृष्ण शर्मा ‘नवीन’ का जन्म सन् 1897 ई. में शाजापुर जिले के भुजालपुर गाँव में हुआ था। इनके पिता पं. यमुनादास साधारण स्थिति के ब्राह्मण थे। ‘नवीन’ अत्यन्त अध्यवसायी थे। आपने भिन्न-भिन्न विद्यालयों से शिक्षा ग्रहण की। राष्ट्रीय आन्दोलनों में भाग लेने के कारण इन्होंने जेल यात्राएँ भी की। गणेशशंकर विद्यार्थी के सम्पर्क में आकर ‘प्रताप’ के सहयोगी सम्पादक रहे। ‘प्रभा’ का भी सम्पादन किया। भारतीय संविधान परिषद् एवं भारतीय संसद के सदस्य भी रहे । सन् 1960 ई. में इनका देहावसान हो गया।

रचनाएँ-

  • उर्मिला (महाकाव्य),
  • प्राणार्पण (खण्डकाव्य),
  • कुंकुम,
  • रश्मिरेखा,
  • अपलक
  • क्वासि,
  • विनोवा स्तवन,
  • नवीन दोहावली,
  • हम विषपायी जनम के,
  • प्रलयंकर,
  • मृत्युधाम आदि।

काव्यगत विशेषताएँ
(क) भावपक्ष (भाव तथा विचार)-‘नवीन’ जी में सहयता, सहिष्णुता, भाषण पटुता एवं मधुरगायकी के गुण विद्यमान थे। उनके काव्य में राष्ट्रीय जागरण और ओजस्वी भाव भरे हैं। उन्होंने काव्य के माध्यम से राष्ट्र-प्रेम, देश-प्रेम एवं मानव-सौन्दर्य का चित्रण किया है। विरह संवेदनाओं को उभारा है। प्रकृति के विविध स्वरूपों का चित्रण किया है। उनके गीतों में क्रान्ति और विद्रोह के स्वर सुनाई देते हैं। उनके काव्य में संगीतात्मकता और माधुर्य विद्यमान है। वीर, रौद्र, श्रृंगार रस का प्रयोग उत्कृष्ट है।

(ख) कलापक्ष (भाषा और शैली)-भाषा सरल, खड़ी बोली है। उसमें माधुर्य और ओज भरा है। तत्सम शब्दों की अधिकता है। भाषा भाव को व्यक्त करने में सक्षम है। कवि ने नये छन्दों का प्रयोग किया है। ओजपूर्ण शैली अपनायी है। मुक्तक गीति शैली भी स्तुत्य है। अनुप्रास, उपमा, रूपक, मानवीकरण का प्रयोग आकर्षक है।

साहित्य में स्थान-राष्ट्रीय काव्यधारा के प्रधान कवियों में ‘नवीन’ जी सदा स्मरण किए जायेंगे।

7. नरोत्तमदास

जीवन-परिचय-नरोत्तमदास का जन्म उत्तर प्रदेश के सीतापुर जिले के बाड़ी ग्राम में सन् 1493 ई. के लगभग हुआ था। ये जाति के कान्यकुब्ज ब्राह्मण थे। खेद का विषय है कि इनके विषय में अधिक जानकारी प्राप्त नहीं हुई है। लेकिन शिवसिंह सरोज के अनुसार ये सवत् 1602 वि. में विद्यमान थे। इसी आधार पर इनकी मृत्यु सन् 1584 ई. में मानी जाती है। पं. रामनरेश त्रिपाठी ने ‘सुदामा चरित’ का रचनाकाल संवत् 1582 विक्रमी माना है। इनके अनुसार इनका जन्म सन् 1493 ई. में और मृत्यु सन् 1548 ई. में मानी गई है।

रचनाएँ-इनकी उपलब्ध रचना ‘सुदामा चरित’ ही है जो ब्रजभाषा में लिखित प्रथम खण्डकाव्य है।

काव्यगत विशेषताएँ
(क) भावपक्ष (भाव तथा विचार)-कृष्णभक्त कवि नरोत्तमदास की भक्ति कहीं सेवक भाव की तो कहीं सखा भाव से प्रकट हुई है। कवि नरोत्तमदास मानवीय संवेदनाओं के सफल पारखी थे। ‘सुदामा चरित’ के माध्यम से दरिद्रता से जूझते हुए संघर्षशील स्वाभिमानी पुरुष तथा अभावों से ग्रसित भारतीय नारी की सन्तोष प्रधान वृत्ति का वर्णन किया है। साथ ही सुदामा चरित की कथावस्तु आदर्श मैत्री का कीर्तिमान है।

हृदयगत भावों की व्यंजना के साथ-साथ पात्रों के चरित्र चित्रण में यथार्थता और सजीवता का अंकन किया गया है। एक मनोवैज्ञानिक की भाँति कवि ने मानव-मन के रहस्यों का प्रकाशन, विशेष परख के बाद किया है। सुदामा चरित में शान्त, हास्य, करूण और अद्भुत रसों की निष्पत्ति हुई है।

(ख) कलापक्ष (भाषा तथा शैली)-कवि ने अपने चरित काव्य में ब्रजभाषा में साहित्यिक रूप का प्रयोग किया है। कहीं-कहीं वैसवाड़ी शब्दों का भी प्रयोग हुआ है। नरोत्तमदास ने प्रबन्ध काव्य शैली को अपनाया है। इसमें कथोपकथन शैली प्रशंसनीय है। लाक्षणिकता का प्रयोग सफल हुआ है। मुहावरों और कहावतों के प्रयोग से उनका काव्य प्रभावशाली बन गया है। अलंकारों का स्वाभाविक प्रयोग है। कवित्त, दोहा, सवैया छन्दों का प्रयोग हुआ है। विभावना, रूपक, प्रतीप, यमक व अनुप्रास अलंकारों का प्रयोग मिलता है।

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साहित्य में स्थान-नरोत्तमदास ने सुदामा चरित में भारतीय सामाजिक जीवन का सम्यक् चित्र उभारा है। इसके लिए हिन्दी के साहित्यिक क्षेत्र में इन्हें सदैव स्मरण किया जाएगा।

8. तुलसीदास

जीवन-परिचय-गोस्वामी तुलसीदास का जन्म संवत् 1554 वि. (सन् 1497 ई.) में उत्तर प्रदेश के बाँदा जिले के राजापुर ग्राम में हुआ था। कुछ लोग इनके जन्म का स्थान सोरों | (जिला-एटा, उत्तर प्रदेश) मानते हैं। इनकी माता हुलसी और पिता आत्माराम दुबे थे। इनका पालन-पोषण नरहरिदास ने किया और गुरुमन्त्र भी दिया, रामकथा सुनाई। इन्होंने संस्कृत की शिक्षा प्राप्त की। भारतीय सद्ग्रन्थों का अध्ययन किया। दीनबन्धु पाठक की कन्या रत्नावली से विवाह किया। बाद में तुलसी में वैराग्यवृत्ति उत्पन्न हो गई। तुलसी ने राम के चरित का गायन किया। तुलसी ने रामभक्ति में स्वयं को समर्पित कर दिया। संवत् 1680 वि. (सन् 1623 ई.) में इनका देहावसान हो गया।

रचनाएँ-

  • रामचरितमानस,
  • विनय पत्रिका,
  • कवितावली,
  • गीतावली,
  • बरवै रामायण,
  • रामलला, नहछू,
  • रामाज्ञा प्रश्नावली,
  • वैराग्य संदीपनी,
  • दोहावली,
  • जानकी मंगल,
  • पार्वती मंगल,
  • हनुमान बाहुक,
  • कृष्ण गीतावली।।

काव्यगत विशेषताएँ
(क) भावपक्ष (भाव तथा विचार)-तुलसी ने अपने काव्य कौशल से विभिन्न मतों, सम्प्रदायों और सिद्धान्तों की कटुता को समन्वयवादी दृष्टिकोण से दूर करके उनमें समन्वय स्थापित करने का प्रयास किया है। सामाजिक समरसता, समन्वय की भावना एवं लोक मंगल की भावना तुलसी के साहित्य में भरी पड़ी है। तुलसी ने मानव प्रकृति, जीवन जगत् की सूक्ष्म दृष्टि एवं विस्तृत गहन अनुभव से जीवन के विविध पक्षों को उद्घाटित किया है। तुलसी के काव्य में शृंगार, शान्त तथा वीर रसों की निष्पत्ति हुई है। संयोग और वियोग के हृदयग्राही वर्णन प्रभावशाली हैं। रौद्र, करुण और अद्भुत रसों का सजीव चित्रण किया गया है। ‘विनय पत्रिका’ में भक्ति और विनय का उत्कृष्ट स्वरूप मिलता है।

(ख) कलापक्ष (भाषा और शैली)-तुलसीदास ने अपनी काव्यकृतियों में अवधी और ब्रज भाषाओं का प्रयोग किया है। संस्कृत, फारसी और अरबी शब्दावली का प्रयोग भी उत्कृष्ट कोटि का है। शैली की विविधता द्रष्टव्य है।

भाषा और छन्द के विषय में तुलसी ने समन्वयवादी प्रवृत्ति का परिचय दिया है। उन्होंने दोहा, चौपाई, कवित्त, सवैया आदि सभी छन्दों का प्रयोग किया है। साहित्य में स्थान-तुलसीदास ने लोकहित और लोकजीवन को सुखी बनाने के लिए माता-पिता, गुरु-शिष्य, पुत्र-सेवक, राजा-प्रजा के आदर्श रूप प्रस्तुत किए हैं। इस समग्र साहित्यिक सेवा के लिए उन्हें सदैव स्मरण किया जाता रहेगा।

9. गिरिजाकुमार माथुर

जीवन-परिचय-गिरिजाकुमार माथुर का जन्म सन् 1919 ई. में अशोक नगर, गुना (मध्य प्रदेश) में हुआ था। प्रारम्भिक शिक्षा से लेकर स्नातकोत्तर स्तर तक की शिक्षा-झाँसी, ग्वालियर, लखनऊ से ग्रहण की। आकाशवाणी से कार्य आरम्भ किया और बाद में दूरदर्शन से अवकाश प्राप्त किया।

रचनाएँ-

  • मंजरी,
  • नाश और निर्माण,
  • धूप के धान,
  • शिला पंख चमकीले,
  • भीतरी नदी की यात्रा,
  • जो बंध नहीं सका,
  • जनम कैद (नाटक),
  • नई कविता,
  • सीमा और सम्भावनाएँ (आलोचना)।

काव्यगत विशेषताएँ
(क) भावपक्ष (भाव तथा विचार)-इनके गीतों पर छायावाद का प्रभाव है। सामाजिक समस्याओं को उद्घाटित करके समाधान की दिशा निर्दिष्ट की है। कवि ने अपनी कविता में आनन्द, रोमांस और सन्ताप की तरलता की अनुभूति की है। प्राचीनता को तोड़ा है, नवीनता की भावभूमि को अपनाया गया है।

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(ख) कलापक्ष (भाषा तथा शैली)-इनकी भाषा शुद्ध परिमार्जित तथा चित्र खींचने की क्षमता से युक्त खड़ी बोली हिन्दी है। नये-नये भावों को नई शैली में और नए छन्द विधान द्वारा अभिव्यक्ति दी है। शब्द चयन में तुक, तान और अनुतान की काव्यात्मक झलक ध्वनित होती है। इनकी रचनाओं में मालवा की समृद्ध प्रकृति का स्वरूप अंकित है। आंचलिक शब्दों के प्रयोग की मिठास भी इनकी कविता की श्रीवृद्धि करती है।

साहित्य में स्थान-हिन्दी काव्य के आधुनिक कवियों में इनका विशिष्ट स्थान है।

10. भवानीप्रसाद मिश्र

जीवन-परिचय-भवानीप्रसाद मिश्र का जन्म 23 मार्च, 1913 ई. में होशंगाबाद के पास टिकरिया नामक ग्राम में हुआ था। इन्होंने स्नातक स्तर की शिक्षा नरसिंहपुर, होशंगाबाद और जबलपुर से प्राप्त की। सन् 1942 ई. में भारत छोड़ो आन्दोलन में भाग लिया और सन् 1945 ई. तक नागपुर के कारागार में बन्दी रहे। सन् 1949 ई. तक महात्मा गाँधी द्वारा स्थापित महिला आश्रम, वर्धा में शिक्षण कार्य किया। सन् 1950 में हैदराबाद (आन्ध्र) से प्रकाशित साहित्यिक पत्रिका ‘कल्पना’ के सम्पादक रहे। सन् 1952 से 1954 ई. तक हिन्दी फिल्मों के गीत लेखन का कार्य किया। सन् 1954 से 1958 तक आकाशवाणी के मुम्बई और दिल्ली केन्द्रों में हिन्दी कार्यक्रम के निदेशक रहे। सन् 1959 से 1972 ई. तक ‘सम्पूर्ण गाँधी वाङ्मय’ के प्रकाशन कार्य से सम्बद्ध रहे। सन् 1972 ई. में उन्होंने गाँधी शान्ति प्रतिष्ठान के प्रकाशन विभाग में कार्य प्रारम्भ किया। गगनांचल और गाँधी मार्ग के सम्पादक रहे। – भारत सरकार ने इन्हें पद्मश्री से अलंकृत किया। मध्य प्रदेश सरकार ने अपने सर्वोच्च साहित्यिक पुरस्कार ‘शिखर सम्मान’ से सम्मानित किया। 20 फरवरी, सन् 1985 ई. में नरसिंहपुर में हृदयाघात से आपका निधन हो गया।

रचनाएँ-

  • गीतफरोश,
  • चकित है दुःख,
  • गाँधी पंचशती,
  • अंधेरी कविताएँ,
  • बुनी हुई रस्सी,
  • व्यक्तिगत,
  • खुशबू के शिलालेख,
  • परिवर्तन जिए,
  • त्रिकाल संध्या,
  • अनाम तुम आते हो,
  • इदम् न मम्,
  • शरीर कविता,
  • फसलें और फूल,
  • मानसरोवर दिन,
  • सम्प्रति,
  • नीली रेखा के पास तक,
  • कालजयी (महाकाव्य),
  • तुकों के खेल (बाल साहित्य)।

‘बुनी हुई रस्सी’ के लिए सन् 1972 ई. में साहित्य अकादमी द्वारा पुरस्कृत।

काव्यगत विशेषताएँ
(क) भावपक्ष (भाव तथा विचार)-गाँधी विचारधारा से प्रभावित होने के कारण इन्हें कविता का गाँधी’ कहा जाता है। प्रेमानुभूति, प्रकृति के सौन्दर्य का चित्रण, जन-जन की मंगल कामना निहित इनका काव्य प्रशंसनीय है।

(ख) कलापक्ष (भाषा तथा शैली)-मिश्रजी जन कवि हैं अतः इनकी भाषा जनता की बोलचाल की भाषा है। शब्द चयन फूलों की भाँति भाव-सुगन्ध बिखेरते हैं। तुक और लय प्रधान छन्द मुक्तक शैली पर लिखे गए हैं।

साहित्य में स्थान-प्रयोगवादी कविता के प्रथम कवि यथार्थ चित्रण में कुशल भवानीप्रसाद मिश्र की समानता हिन्दी का अन्य कोई कवि नहीं कर सकता।

महत्त्वपूर्ण वस्तुनिष्ठ प्रश्न

रिक्त स्थान पूर्ति-

1. मीराबाई का जन्म हुआ था सन्………………में। (1498 ई./1518 ई.)
2. रसखान का जन्म संवत्…………..में हुआ था। (1620 वि./1615 वि.)
3. मैथिलीशरण गुप्त के पिताजी का नाम………………था। (रामशरण गुप्त/रामचरण गुप्त)
4. सुमित्रानन्दन पन्त का जन्म……………….में हुआ था। (कौसानी (अल्मोड़ा)/नैनीताल)
5. बालकृष्ण शर्मा ‘नवीन’ ने………………..आन्दोलनों में भाग लिया। (राष्ट्रीय/अन्तर्राष्ट्रीय)
उत्तर-
1. 1498 ई.,
2. 1615 वि.,
3. रामचरण गुप्त,
4. कौसानी (अल्मोड़ा),
5. राष्ट्रीय।

सही विकल्प चुनिए-

1. रहीम मध्ययुगीन प्रतिनिधि कवि थे
(क) दरबारी संस्कृति के
(ख) स्वतन्त्र प्रकृति के
(ग) पराधीन वातावरण के
(घ) नीति-रीति के।
उत्तर-
(क) दरबारी संस्कृति के

2. पंत गाँधीजी के आन्दोलन में शामिल हो गए
(क) सहयोग
(ख) असहयोग
(ग) राष्ट्रीय
(घ) क्षेत्रीय।
उत्तर-
(ख) असहयोग

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3. पंतजी स्वभाव के कवि थे
(क) कोमल
(ख) सुकुमार
(ग) कोमल और सुकुमार
(घ) रहस्य प्रधान।
उत्तर-
(ग) कोमल और सुकुमार

4. नरोत्तमदास की रचना का नाम है
(क) सुदामाचरित
(ख) कृष्णचरित
(ग) रामचरित
(घ) बुद्धचरित।
उत्तर-
(क) सुदामाचरित

5. तुलसीदास महान् कवि थे
(क) आदिकाल के
(ख) रीतिकाल के
(ग) भक्तिकाल के
(घ) आधुनिक काल के।
उत्तर-
(ग) भक्तिकाल के

सही जोड़ी मिलाइए-
MP Board Class 9th Hindi Navneet कवि परिचय img 1
उत्तर-
(i) → (ख),
(ii) → (क),
(iii) → (ङ),
(iv) → (ग),
(v) → (घ)।

सत्य/असत्य-

1. ‘नवीन’ जी भारतीय संविधान परिषद् एवं भारतीय संसद के सदस्य रहे।
2. पंत की भाषा कोमल पदावली से रहित श्रुति कटु है।
3. मैथिलीशरण गुप्त को राष्ट्रपति ने राज्यसभा का सदस्य मनोनीत किया।
4. रहीम के पिता का नाम सरदार बैरमखाँ खानखाना था।
5. रसखान की कविता निश्चय ही रस की खान है।
उत्तर-
1. सत्य,
2. असत्य,
3. सत्य,
4. सत्य,
5. सत्य।

एक शब्द/वाक्य में उत्तर-

1. मीराबाई का जन्म कहाँ हुआ था ?
उत्तर-
मेड़ता के समीप चौकड़ी गाँव में।

2. रसखान किसकी भक्ति में दिन रात लीन हो गए ?
उत्तर-
भगवान श्रीकृष्ण की।

3. नीति, शृंगार और प्रेम किसकी कविता के विषय हैं ?
उत्तर-
रहीम।

4. कक्षा नौ तक शिक्षा प्राप्त करके ही कवि बनने का गौरव किसे प्राप्त है ?
उत्तर-
मैथिलीशरण गुप्त।

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5. पन्त की कविता में कौन-सा दृष्टिकोण अभिव्यक्त हुआ है ?
उत्तर-
दार्शनिकतावादी।

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