MP Board Class 12th Chemistry Solutions Chapter 8 d एवं f-ब्लॉक के तत्त्व

MP Board Class 12th Chemistry Solutions Chapter 8 d एवं f-ब्लॉक के तत्त्व

d एवं f-ब्लॉक के तत्त्व NCERT पाठ्यनिहित प्रश्नोत्तर

प्रश्न 1.
आद्य अवस्था में सिल्वर परमाणु में पूर्ण भरे d-कक्षक (4d10) होते हैं। इसे आप कैसे कह सकते हैं कि यह संक्रमण तत्व है?
उत्तर
सिल्वर +2 ऑक्सीकरण अवस्था रखता है। 4d-उपकक्ष में नौ इलेक्ट्रॉन होते हैं, जैसे 4dकक्षकों का एक कक्ष आंशिक भरा होता है। अतः इसे संक्रमण तत्व नहीं मान सकते।

प्रश्न 2.
श्रेणी Sc(Z = 21) से Zn(Z = 30) में, Zn की परमाणुकरण की एन्थैल्पी कम होती है, 126 kJmol-1 क्यों?
उत्तर
जिंक में 3d-इलेक्ट्रॉन धात्विक बन्ध में भाग नहीं लेते क्योंकि d10 विन्यास होता है। दुर्बल धात्विक बंध के कारण जिंक की परमाणुकरण की एन्थैल्पी निम्न होती है।

प्रश्न 3.
संक्रमण धातुओं की 3d श्रेणी में किसकी अधिकतम संख्या में ऑक्सीकरण अवस्था होती है एवं क्यों ?
उत्तर
Mn(Z = 25) अधिक संख्या में ऑक्सीकरण अवस्थायें रखते हैं, क्योंकि इसमें अधिकतम संख्या में अयुग्मित इलेक्ट्रॉन होते हैं। अत: यह +2 से +7 तक ऑक्सीकरण अवस्थायें दर्शाता है।

प्रश्न 4.
E°(M2+/M) का मान कॉपर के लिए धनात्मक (+034V) है। इसका संभावित कारण क्या है ? (संकेत : इसकी उच्च ΔaH एवं निम्न ΔhydH मानने पर) –
उत्तर
किसी धातु की E° (M2+/M) पूर्ण परमाणुकरण की एन्थैल्पी, आयनन एन्थैल्पी एवं जलयोजन एन्थैल्पी पर निर्भर होती है। कॉपर की उच्च परमाणुकरण एन्थैल्पी एवं निम्न आयनन एन्थैल्पी होती है। अतः E° (Cu2+ /Cu) धनात्मक है।

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प्रशन 5.
संक्रमण तत्वों की प्रथम श्रेणी में (प्रथम एवं द्वितीय) आयनन एन्थैल्पियों में अनियमित क्रमिकता को किस प्रकार देखते हो? ।
उत्तर
आयनन एन्थैल्पी में अनियमित क्रम (प्रथम एवं द्वितीय) का कारण मुख्यतः विभिन्न 3dविन्यासों के भिन्न स्थायित्व की मात्रा के कारण होता है। d0, d5 एवं d10 विन्यास अतिरिक्त स्थायित्व रखता है एवं ऐसे प्रकरणों में आयनन एन्थैल्पी के मान सामान्यत: उच्च होते हैं। उदाहरण, Cr के प्रथम आयनन एन्थैल्पी के नाम निम्न होते हैं, क्योंकि 4s- कक्षक से इलेक्ट्रॉन को निकाला जा सकता है, किन्तु द्वितीय आयनन एन्थैल्पी अति उच्च होती है, अत: Cr+ में स्थायी d5 विन्यास होता है। Zn की प्रथम आयनन एन्थैल्पी अति उच्च होती है, क्योंकि स्थायी विन्यास 3d10,4s2 से इलेक्ट्रॉन हटाया जाता है।

प्रश्न 6.
धातु अपने उच्चतम ऑक्सीकरण अवस्था में केवल ऑक्साइड अथवा फ्लोराइड में रहते हैं, क्यों?
उत्तर
क्योंकि ऑक्सीजन एवं फ्लुओरीन का आकार छोटा एवं ऋण-विद्युतता उच्च होती है, इस प्रकार ये सरलता से धातु को उसकी उच्च ऑक्सीकरण अवस्था में ऑक्सीकृत करता है।

प्रश्न 7.
Cr2+ अथवा Fe2+ में से कौन-सा प्रबल अपचायक अभिकर्मक है एवं क्यों ?
उत्तर
Fe2+ से Cr2+ प्रबल अपचायक अभिकर्मक है। इसका कारण है कि Cr2+ का विन्यास d4 ‘से d3 एवं d3 विन्यास में परिवर्तित होता है, जो स्थायी t32(g)(138) अर्द्धपूर्ण t2) स्तर है।

प्रश्न 8.
M2+(aq) आयन (Z = 27) के लिए ‘चक्रण खेल’ चुम्बकीय आघूर्ण की गणना कीजिए।
उत्तर
M2+(aq) आयन (Z = 27) का इलेक्ट्रॉनिक विन्यास है :
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इस प्रकार तीन अयुग्मित इलेक्ट्रॉन हैं। ‘चक्रण केवल’ चुम्बकीय आघूर्ण
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प्रश्न 9.
Cu+ आयन जलीय विलयनों में क्यों स्थायी नहीं हैं, समझाइये?
उत्तर
Cu+(aq) जलीय विलयन में स्थायी नहीं है, क्योंकि इसकी Cu+(aq) की तुलना में निम्न ऋणात्मक जलयोजन एन्थैल्पी है।

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प्रश्न 10.
लैन्थेनॉइड संकुचन की तुलना में तत्वों से तत्वों में एक्टीनॉइड संकुचन अधिक है, क्यों ?
उत्तर
लैन्थेनॉयड के 4f इलेक्ट्रॉनों की तुलना में एक्टीनॉयड्स में 5f इलेक्ट्रॉनों का कमजोर परिरक्षण प्रभाव के कारण होता है।

d एवं f-ब्लॉक के तत्त्व NCERT पाठ्य-पुस्तक प्रश्नोत्तर

प्रश्न 1.
इलेक्ट्रॉनिक विन्यास लिखिए –
(i) Cr3+
(ii) Cu+
(i) CO2+
(iv) Mn2+
(v) Pm3+
(vi) Ce4+
(vii) Lu2+
(viii) Th4+
उत्तर
(i) Cr+3 : [Ar]3d3
(ii) Cu+1 : [Ar]3d10
(iii) CO+2 : [Ar]3d7
(iv) Mn+2 : [Ar]3d5
(v) Pm+3 : [Xe]4f4
(vi) Ce+4 : [Xe]54 .
(vii) Lu+2 : [Xe]4 f145d1
(vii) Th+4: [Rn].

प्रश्न 2.
+3 अवस्था में Mn+2 यौगिक Fe+2 से ऑक्सीकरण में अधिक स्थायी है, क्यों?
उत्तर
Mn+2 का स्थायी इलेक्ट्रॉनिक विन्यास [Ar]4s0,3d5 होता हैं एवं यह सरलता से Mn+3 में परिवर्तित नहीं होता, Fe+2[Ar] 4s0,3d6 ऑक्सीकरण पर Fe+3[Ar] 4s0,3d5 बनाता है जो अधिक स्थायी विन्यास है।

प्रश्न 3.
परमाणु क्रमांक में वृद्धि से संक्रमण तत्वों के प्रथम श्रेणी के पहले आधे की +2 अवस्था अधिक एवं अधिक स्थायी होती हैं, विस्तृत विवेचना कीजिए।
उत्तर
स्कैण्डियम (जो +3 ऑक्सीकरण अवस्था दर्शाता है) को छोड़कर, प्रथम श्रेणी के सभी संक्रमण तत्व +2 ऑक्सीकरण अवस्था दर्शाते हैं । यह 4s के दो इलेक्ट्रॉनों के त्यागने के कारण होता है। प्रथम चरण में, जब हम Ti+2 से Mn+2 की तरफ चलते हैं, तो इलेक्ट्रॉनिक विन्यास 3d2 से 3d5 में परिवर्तित होता है, जिसका अर्थ है अधिक-से-अधिक d-कक्षकों का अर्द्धपूर्ण भरना है, जो +2 अवस्था को अधिक स्थायित्व प्रदान करते हैं।

प्रश्न 4.
संक्रमण तत्वों की प्रथम श्रेणी में ऑक्सीकरण अवस्थाओं के स्थायित्व का निर्धारण इलेक्ट्रॉनिक विन्यासों से कितना किया जा सकता है ? अपने उत्तर को उदाहरण सहित समझाइए।
उत्तर
संक्रमण श्रेणी में, ऑक्सीकरण अवस्थायें अर्द्धपूर्ण अथवा पूर्ण भरे हुए d-कक्षक अधिक स्थायी है। उदाहरण के लिए, Fe(Z = 26) का इलेक्ट्रॉनिक विन्यास [Ar]3d64s2 है। यह दर्शाता है कि विभिन्न ऑक्सीकरण अवस्थाओं में Fe(III) अधिक स्थायी है, क्योंकि यह विन्यास [Ar]3d5 रखता है।

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प्रश्न 5.
संक्रमण तत्व के स्थायी ऑक्सीकरण अवस्था, आद्य अवस्था में इनके परमाणुओं के d इलेक्ट्रॉन विन्यासों : 3d3,3d5,3d8 एवं 3d4 में से क्या होगी? ।
उत्तर
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3d4 आद्य अवस्था में कोई d4 विन्यास नहीं होता।

प्रश्न 6.
प्रथम श्रेणी के संक्रमण धातुओं के ऑक्सो धातु ऋणायनों के नाम बताइये, जिसमें धातु की ऑक्सीकरण अवस्था समूह संख्या के बराबर होती है।
उत्तर
CrO2-7 एवं CrO2-4 (समूह संख्या = Cr की ऑक्सीकरण अवस्था = 6) MnO4 (समूह संख्या = Mn की ऑक्सीकरण अवस्था = 7)

प्रश्न 7.
लैन्थेनॉयड संकुचन क्या है ? लैन्थेनॉयड संकुचन के प्रभाव क्या होंगे?
उत्तर
लैन्थेनाइड संकुचन-लैन्थेनाइडों के परमाणु क्रमांक बढ़ने के साथ-साथ उनके परमाणुओं एवं आयनों के आकार में कमी होती है, इसे लैन्थेनाइड संकुचन कहते हैं।।
कारण-लैन्थेनाइडों में आने वाला नया इलेक्ट्रॉन बाह्यतम कक्ष में न जाकर (n-2)f- उपकोश में प्रवेश करता है, फलतः इलेक्ट्रॉन और नाभिक के मध्य आकर्षण बल में वृद्धि होती है, जिससे परमाणु अथवा आयन संकुचित हो जाता है।

लैन्थेनाइड संकुचन का प्रभाव :
(i) लैन्थेनाइडों के गुणों में परिवर्तन-लैन्थेनाइड संकुचन के कारण इनके रासायनिक गुणों में बहुत कम परिवर्तन होता है। अतः इन्हें शुद्ध अवस्था में प्राप्त करना अत्यन्त कठिन होता है।
(ii) अन्य तत्वों के गुणों पर प्रभाव-लैन्थेनाइड संकुचन का लैन्थेनाइडों से पूर्व आने वाले तथा इनके बाद आने वाले तत्वों के आपेक्षिक गुणों पर बहुत महत्वपूर्ण प्रभाव पड़ता है। उदाहरण के लिए, Ti और Zr के गुणों में भिन्नता होती है, जबकि Zr और Hf गुणों में काफी समानता रखते हैं।

प्रश्न 8.
संक्रमण तत्वों के अभिलक्षण क्या हैं एवं इन्हें संक्रमण तत्व क्यों कहते हैं ? कौन से dब्लॉक तत्वों को संक्रमण तत्व नहीं माना जा सकता?
उत्तर
संक्रमण तत्व वे तत्व हैं जिसके अणुओं में (स्थायी ऑक्सीकरण अवस्था में) आंशिक रूप से पूर्ण d-ऑर्बिटल विद्यमान होते हैं। इन तत्वों को d-ब्लॉक के तत्व भी कहते हैं, ये 5-ब्लॉक तथा p-ब्लॉक के तत्वों के गुणों में संक्रमण प्रदर्शित करते हैं। इसलिए इन्हें संक्रमण तत्व कहा जाता है। Zn, Cd एवं Hg जैसे तत्वों को संक्रमण तत्वों की श्रेणी में नहीं रखा जा सकता क्योंकि इनमें पूर्ण पूरित d-उपकक्षक पाये जाते हैं।

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प्रश्न 9.
नॉन-संक्रमण तत्वों से संक्रमण तत्वों के इलेक्ट्रॉनिक विन्यास किस प्रकार भिन्न हैं ?
उत्तर
संक्रमण तत्वों में d-कक्षकों को भरते हैं, जबकि प्रतिनिधि तत्वों में 5-एवं p-कक्षकों को भरते हैं। संक्रमण तत्वों के सामान्य इलेक्ट्रॉनिक विन्यास (n-1)d1-10ns1-2 है, जबकि प्रतिनिधि तत्वों का सामान्य इलेक्ट्रॉनिक विन्यास ns1-2 अथवा ns2np1-6 होता है। प्रतिनिधि तत्वों में केवल अंतिम कक्ष अपूर्ण होता है जबकि संक्रमण तत्वों में उपात्य कक्ष अपूर्ण होता है।

प्रश्न 10.
लैन्थेनॉयड्स कौन-सी विभिन्न ऑक्सीकरण अवस्थायें रखते हैं ?
उत्तर
लैन्थेनॉयड्स का मुख्य ऑक्सीकरण अवस्था + 3 है। इसके अतिरिक्त ये + 2 एवं + 4 ऑक्सीकरण अवस्थायें रखते हैं।

प्रश्न 11.
कारण सहित समझाइए-
(i) संक्रमण धातुओं एवं इनके अनेक यौगिक अनुचुम्बकीय व्यवहार दर्शाते हैं।
(ii) संक्रमण धातुओं के परमाण्वीयकरण की एन्थैल्पी उच्च होती है।
(iii) संक्रमण धातुएँ सामान्यतः रंगीन यौगिक बनाते हैं।
(iv) संक्रमण धातुएँ एवं इसके अनेक यौगिक अच्छे उत्प्रेरक होते हैं।
उत्तर
(i) जब किसी यौगिक को चुम्बकीय क्षेत्र में रखा जाता है तो यौगिक के भीतर का चुम्बकत्व बाहरी चुम्बकीय क्षेत्र से प्रभावित होता है। यदि भीतर का चुम्बकत्व बाहरी चुम्बकीय क्षेत्र का साथ देता है तो उसे अनुचुम्बकीय गुण कहते हैं। यदि यौगिक में अयुग्मित इलेक्ट्रॉन हो तो अनुचुम्बकत्व प्रबल हो जाता है अर्थात् किसी यौगिक के अनुचुम्बकत्व की मात्रा उसमें उपस्थित अयुग्मित इलेक्ट्रॉनों पर निर्भर होती है। संक्रमण तत्वों में अयुग्मित इलेक्ट्रॉन होते हैं, अतः वे अनुचुम्बकीय होते हैं। .

(ii) संक्रमण धातुओं में उच्च प्रभावी न्यूक्लियर आवेश तथा संयोजी इलेक्ट्रॉनों की अधिक संख्या होती है इसलिए ये बहुत मजबूत धात्विक बंध बनाते हैं। परिणामस्वरूप संक्रमण धातुओं के परमाण्विकरण की एन्थैल्पी उच्च होती है।

(iii) संक्रमण धातु आयनों का रंग अपूर्ण रूप से भरे हुए (n-1)d कक्षकों के कारण होता है। संक्रमण धातु आयनों में जिनमें अयुग्मित d-इलेक्ट्रॉन हैं, इस इलेक्ट्रॉन का एक d-कक्षक से दूसरे d-कक्षक में संक्रमण होता है। इस संक्रमण के समय वे दृश्य प्रकाश के कुछ विकिरणों का अवशोषण करते हैं तथा शेष विकिरणों को रंगीन प्रकाश के रूप में उत्सर्जित कर देते हैं। अत: आयन का रंग उसके द्वारा अवशोषित रंग का पूरक (Complementary) होता है। उदाहरणार्थ, [Cu(H2O)6]+2 आयन नीला दिखता है, क्योंकि यह दृश्य प्रकाश के लाल रंग को इलेक्ट्रॉन के उत्तेजना के लिए अवशोषित करता है तथा उसके पूरक (नीले) रंग को उत्सर्जित कर देता है।

कुछ आयनों के रंग –
Cr4+ नीला : Cr3+ बैंगनी
Mn2+ बैंगनी : Mn3+ गुलाबी
Fe2+ हरा : Fe3+ पीला

(iv) संक्रमण तत्व परिवर्ती संयोजकता प्रदर्शित करते हैं, क्योंकि (n-1)d-कक्षक तथा ns-कक्षक के इलेक्ट्रॉनों की ऊर्जा में बहुत अधिक अन्तर नहीं होता है, जिससे d-कक्षक के इलेक्ट्रॉन भी संयोजी इलेक्ट्रॉन का कार्य करते हैं। इन तत्वों में Mn अधिकतम परिवर्ती संयोजकता प्रदर्शित करता है।

प्रश्न 12.
अन्तराकाशी यौगिक क्या है ? संक्रमण धातुओं के ऐसे यौगिक क्यों ज्ञात हैं ?
उत्तर
अधिकांश संक्रमण तत्व उच्च ताप पर अधात्विक तत्वों के परमाणुओं जैसे-H, B,C, Ni, Si आदि के साथ अन्तराकाशी यौगिक बनाते हैं। संक्रमण धातु के क्रिस्टल जालक के अन्तराकाशी रिक्तियों में ये अधात्विक तत्वों के छोटे परमाणु ठीक-ठीक फिट हो जाते हैं। ये अन्तराकाशी यौगिक कहलाते हैं।

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प्रश्न 13.
नॉन-संक्रमण धातुओं से संक्रमण धातुओं की परिवर्ती ऑक्सीकरण अवस्थायें भिन्न कैसे होती हैं ? उदाहरण देकर समझाइए।
उत्तर
संक्रमण तत्वों में उत्तरोत्तर ऑक्सीकरण अवस्थाओं में इकाई का अन्तर आता है। उदाहरण के लिए, Mn सभी ऑक्सीकरण अवस्थायें +2 से +7 दर्शाता है। जबकि नॉन-संक्रमण धातुएँ परिवर्ती ऑक्सीकरण अवस्थाएँ रखती हैं, जिनमें दो इकाई का अन्तर होता है, उदाहरण के लिए Pb(II), Pb(IV), Sn(II), Sn(IV).

प्रश्न 14.
आयरन क्रोमाइट अयस्क से पोटैशियम डाइक्रोमेट के बनाने की विधि का वर्णन कीजिए। पोटैशियम डाइक्रोमेट विलयन की pH बढ़ाने पर क्या प्रभाव होगा?
उत्तर
बनाने की विधि-

बनाने की विधि-K2Cr2O7 को क्रोमाइट अयस्क (Fe2Cr2O4) या क्रोम आयरन (FeO.Cr203) से बनाया जाता है, जो निम्नलिखित पदों में होते हैं।

(1) क्रोमाइट अयस्क का सोडियम क्रोमेट में परिवर्तन-क्रोमाइट अयस्क को NaOH या Na2CO3 के साथ वायु की उपस्थिति में एक परावर्तनी भट्टी में गर्म करने पर सोडियम क्रोमेट (पीला रंग) बनता है।
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पदार्थ को छिद्रमय रखने हेतु कुछ मात्रा में शुष्क चूने को मिलाते हैं । जल के साथ निष्कर्षण करने पर Na2Cr2O3 विलयन में चला जाता है। जबकि Fe2O3 रह जाता है जिसे छानकर पृथक् कर लेते हैं।

(2) सोडियम क्रोमेट (Na2CrO4) का सोडियम डाइक्रोमेट (Na2Cr2O7) में परिवर्तन-सोडियम क्रोमेट विलयन सान्द्र H2SO4 के साथ अपचयित करके सोडियम डाइक्रोमेट बनाते हैं।
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2Na2CrO4 कम विलेय होता है जिसका वाष्पन करने पर Na2SO410H2O के रूप में क्रिस्टलीकृत हो जाता है जिसे पृथक् कर लिया जाता है।

(3) Na2Cr2O7 का K2Cr2O7 में परिवर्तन-सोडियम डाइक्रोमेट के जलीय विलयन का उपचार KCI के साथ किये जाने पर पोटैशियम डाइ क्रोमेट प्राप्त होता है। K2Cr2O7 के अल्प विलेय प्रकृति के कारण इसके क्रिस्टल ठण्डे में प्राप्त किये जाते हैं।

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K2Cr2O7 की निम्न के साथ होने वाली रासायनिक अभिक्रिया –

(1) अम्लीय फेरस सल्फेट के साथ-K2Cr207 अम्लीय माध्यम में यह फेरस सल्फेट को फेरिक सल्फेट में ऑक्सीकृत कर देता है। K2Cr2O7 पहले H2SO4 से क्रिया करके नवजात ऑक्सीजन का तीन परमाणु देता है जो Fe2+ को Fe3+ आयन में ऑक्सीकृत कर देता है।
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pH बढ़ाने पर प्रभाव-पोटैशियम क्लोराइड सोडियम क्लोराइड से कम विलेयशील होता है। ये ऑरेंज क्रिस्टल के रूप में प्राप्त होते है तथा इन्हें फिल्ट्रेशन से हटाया जा सकता है। pH 4 पर डाइक्रोमेट आयन (CrO72-) क्रोमेट आयन CrO4 2-के रूप में उपस्थित होते हैं । ये pH के मान में परिवर्तन के अनुसार एक-दूसरे में परिवर्तनशील होते हैं।
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प्रश्न 15.
पोटैशियम डाइक्रोमेट की ऑक्सीकरण क्रियायें समझाइये एवं इनकी निम्न के साथ आयनिक अभिक्रियायें लिखिए
(i) आयोडाइड, (ii) आयरन (II) विलयन एवं (ii) H2S.
उत्तर
दीर्घ उत्तरीय प्रश्न 2 (K2Cr2O7 की निम्न के साथ होने वाली रासायनिक अभिक्रिया) देखें।

प्रश्न 16.
पोटैशियम परमैंगनेट के बनाने की विधि का वर्णन कीजिए।अम्लीकृत परमैंगनेट विलयन निम्न से कैसे क्रिया करता है
(i) आयरन (II) आयनों से, (ii) SO2 एवं (ii) ऑक्सेलिक अम्ल ? अभिक्रियाओं की आयनिक समीकरणों को लिखिए।
उत्तर
KMnO4, पायरोलुसाइट से बनाया जा सकता है, अयस्क को KOH के साथ वायुमण्डलीय ऑक्सीजन या ऑक्सीकृत एजेन्ट जैसे- KNO3 या KClO4 की उपस्थिति में क्रिया कराकर K2MnO4 प्राप्त किया जाता है।
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प्राप्त 2K2MnO4 (ग्रीन) को जल द्वारा छाना जा सकता है। फिर विद्युत्-अपघटन या क्लोरीन/ओजोन को विलयन मे प्रवाहित कर ऑक्सीकृत किया जाता है।

विद्युत्-अपघटनी ऑक्सीकरण –
2K2MnO4 ⇌ 2K+ + MnO42-
H2O → H+ + OH
एनोड में मैंग्नेट आयन, पर मैंग्नेट आयन में ऑक्सीकृत होता है।
MnO42- → MnO4 + e

क्लोरीन द्वारा ऑक्सीकरण –
2K2MnO4 + Cl2 → 2KMnO4 + 2KCl
2MnO42- + Cl2 → 2MnO4 + 2Cl

ओजोन द्वारा ऑक्सीकरण –
2K2MnO4 + O3 + H4O → 2KMnO4 + 2KOH + O2
2MnO42- + O3 +H2O → 2MnO42- + 2OH + O2
अम्लीकृत KMnO4 विलयन Fe(II) आयन को Fe(III) आयन में ऑक्सीकृत करना है अर्थात् फेरस आयन से फेरिक आयन
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अम्लीकृत पोटैशियम परमैंग्नेट SO2 को H2SO4 में ऑक्सीकृत करता है।
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अम्लीकृत पोटैशियम परमैंग्नेट ऑक्सेलिक अम्ल को कार्बन डाइ-ऑक्साइड में ऑक्सीकृत करता है।
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प्रश्न 17.
M22+M एवं M3+/M2+ तंत्रों के लिए कुछ धातुओं के E° मान निम्न है –
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उपर्युक्त आँकड़ों का उपयोग कर निम्न पर टिप्पणी कीजिए –
(i) Cr3+ अथवा Mn3+ की तुलना में Fe3+ का अम्लीय विलयन में स्थायित्व एवं
(ii) वो कौन-सी स्थितियाँ हैं, जहाँ आयरन, समान विधियों में क्रोमियम अथवा मैंगनीज धातु की तुलना में ऑक्सीकृत होता है।
उत्तर
(i) जैसे- \(\mathrm{E}_{\mathrm{Cr}}^{\circ} / \mathrm{Cr}^{+2}\) ऋणात्मक (-04V) है, जिसका अर्थ है cr+3 आयन विलयन में सरलता से Cr+2 में अपचयित नहीं होता, अत: Cr+3 आयन अधिक स्थायी है। इसी प्रकार \(\mathrm{E}^{\circ}_{\mathrm{Mn}^{+} 3} / \mathrm{Mn}^{+2}\) धनात्मक (+1:5V) है, Mn+3 आयन सरलता से Mn+2 आयन में Fe+3 आयन की तुलना में अपचयित होता है अत: इन आयनों की आपेक्षिक स्थायित्व निम्न है –
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(ii) दिए गए जोड़ों का ऑक्सीकरण विभव +09V, +1-2V एवं 0-4V है। अत: इनके ऑक्सीकरण का क्रम निम्न है –

Mn>Cr>Fe

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प्रश्न 18.
पहचानिए, निम्न में कौन जलीय विलयन में रंग देते हैं? Ti3+,V3+, Cu+,Sc3+,Mn2+, Fe3+ एवं CO2+ प्रत्येक का कारण दीजिए।
उत्तर
ऐसे आयन जिनमें एक या अधिक अयुग्मित इलेक्ट्रॉन होते हैं, जलीय विलयन में d – d संक्रमण के कारण रंगीन होते हैं।
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प्रश्न 19.
प्रथम संक्रमण श्रेणी के तत्वों की +2 ऑक्सीकरण अवस्था को स्थायित्व की तुलना कीजिए।
उत्तर
Mn एवं Zn को छोड़कर + 2 अवस्था का स्थायित्व बायें से दायें चलने पर घटता है। मानव अपचयन विभव के ऋणात्मक मान के घटने के कारण दाँयी तरफ स्थायित्व घटता है। कुल ∆1H1 + ∆1H2 (प्रथम एवं द्वितीय आयनन एन्थैल्पी में वृद्धि के कारण E° के ऋणात्मक मान कम होते हैं।)

प्रश्न 20.
निम्न को ध्यान में रखकर एक्टीनॉयड्स के रसायन की तुलना लैन्थेनॉयड्स के साथ कीजिए
(i) इलेक्ट्रॉनिक विन्यास
(ii) परमाणु एवं आयनिक आकार एवं
(iii) ऑक्सीकरण अवस्था
(iv) रासायनिक क्रियाशीलता।
उत्तर
लैंथेनाइडों एवं एक्टिनाइडों के मध्य भिन्नताएँ
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प्रश्न 21.
निम्न से क्या समझते हो –
(i) d4 श्रेणी में, Cr2+ प्रबल अपचायक है जबकि मैंगनीज (III) प्रबल ऑक्सीकारक है।
(ii) कोबाल्ट (II) जलीय विलयन में स्थायी है, जबकि जटिल अभिकर्मकों की उपस्थिति में यह आसानी से ऑक्सीकृत हो जाता है।
(iii) आयनों में d विन्यास अत्यधिक अस्थायी है।
उत्तर
(i) Cr2+ अपचायक प्रकृति का है, इसका विन्यास d4 से d3 (अर्द्धपूर्ण t.कक्षकों का स्थायी विन्यास) परिवर्तन होता है। अन्य शब्दों में Mn3+ ऑक्सीकारक प्रकृति का है, जिसका विन्यास d4 से d5 (अर्द्धपूर्ण t2g से 2g कक्षकों के स्थायी विन्यास) में परिवर्तन होता है।
(ii) प्रबल लिगेण्ड कोबाल्ट (II) को बल द्वारा 3d- उपकक्ष से एक अथवा अधिक इलेक्ट्रॉन को हटाता है, जिससे d2sp3 संकरण होता है।
(iii) d1-विन्यास वाला आयन प्रयास करता है कि d-उपकक्ष से एक इलेक्ट्रॉन निकालकर स्थायी अकिय गैस विन्यास प्राप्त कर लेवें।।

प्रश्न 22.
विषमसमानुपाती से क्या तात्पर्य है ? जलीय विलयन में विषमसमानुपाती अभिक्रिया के दो उदाहरण दीजिए।
उत्तर
विषमसमानुपाती अभिक्रियायें वे होती हैं, जिनमें समान पदार्थ ऑक्सीकृत एवं अपचयित होता है। उदाहरण के लिए –
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प्रश्न 23.
संक्रमण धातुओं की प्रथम श्रेणी की कौन-सी धातु सामान्य +1 ऑक्सीकरण अवस्था रखते हैं एवं क्यों ?
उत्तर
कॉपर का इलेक्ट्रॉनिक विन्यास [Ar]3d104s1 है। जो एक इलेक्ट्रॉन (4s1) सरलता से त्याग कर स्थायी विन्यास 3d10 देता है।

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प्रश्न 24.
निम्न गैसीय आयनों में अयुग्मित इलेक्ट्रॉनों की गणना कीजिए- Mn3+, Cr3+,v3+ एवं Ti3+ इनमें से कोई एक जलीय विलयन में अधिक स्थायी है ?
उत्तर
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Cr2+ अत्यधिक स्थायी है, इसमें अर्द्धपूर्ण t2gस्तर होते हैं।

प्रश्न 25.
संक्रमण धातु रसायन के निम्न के उदाहरण एवं कारणों को दीजिए –
(i) संक्रमण धातु के निम्न ऑक्साइड क्षारीय हैं, उच्च उभयधर्मी/अम्लीय हैं।
(ii) संक्रमण धातु ऑक्साइडों एवं फ्लुओराइडों में उच्च ऑक्सीकरण अवस्था रखते हैं।
(iii) धातु ऑक्सो ऋणायनों में उच्च ऑक्सीकरण अवस्था होती है।
उत्तर
(i) संक्रमण तत्व के निम्न ऑक्साइड क्षारीय होते हैं, क्योंकि धातु परमाणुओं की निम्न
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धातु की निम्न ऑक्सीकरण अवस्था में, धातु परमाणु के कुछ संयोजी इलेक्ट्रॉन बन्धन में भाग नहीं लेते। अत: ये इलेक्ट्रॉन को दानकर क्षार की भाँति व्यवहार करते हैं। उच्च ऑक्सीकरण अवस्था में, संयोजी इलेक्ट्रॉन बन्धन में भाग लेते हैं एवं जो उपलब्ध नहीं होते। इसके अतिरिक्त प्रभावी नाभिकीय आवेश अधिक होने पर यह इलेक्ट्रॉन स्वीकार करता है एवं अम्ल की भाँति व्यवहार दर्शाते हैं।

(ii) संक्रमण धातु ऑक्साइडों एवं फ्लुओराइडों में उच्च ऑक्सीकरण अवस्थायें रखते हैं, क्योंकि ऑक्सीजन एवं फ्लुओरीन का आकार छोटा एवं उच्च ऋणविद्युतता है एवं ये धातुओं को सरलता से ऑक्सीकृत करते हैं। उदाहरण के लिए- O5F6 [O5(VI)],V2O5 [v(v)] .

(iii) धातुओं के ऑक्सो ऋणायन उच्च ऑक्सीकरण अवस्थायें रखते हैं। उदाहरण के लिए, Cr2O72- में Cr की ऑक्सी-करण अवस्था + 6 है, जबकि MnO4 में Mn की ऑक्सी-करण अवस्था +7 है। क्योंकि ऑक्सीजन की उच्च ऋणविद्युतता एवं उच्च ऑक्सीकारक गुण है।

प्रश्न 26.
बनाने के पदों को दर्शाइये –
(i) क्रोमाइट अयस्क से K2Cr2O7
(ii) पायरोलुसाइट अयस्क से KMnO4.
उत्तर
दीर्घ उत्तरीय प्रश्न क्र. 2 एवं 4 देखें।

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प्रश्न 27.
मिश्रधातुएँ क्या हैं ? प्रमुख मिश्रधातु के नाम लिखते हुए उसके उपयोग लिखिए, जिनमें कुछ लैन्थेनॉयड्स धातुएँ होती हैं।
उत्तर
दो अथवा अधिक धातुओं अथवा धातुओं एवं अधातुओं के समांगी मिश्रण मिश्रधातु है । प्रमुख मिश्रधातु जिसमें लैन्थेनॉयड होता है, मिश्रधातु है, जिसमें 95% लैन्थेनॉयड धातुएँ एवं 5% आयरन के साथ थोड़ी मात्रा में S, C, Ca एवं Al होते हैं । इसका उपयोग Mg-आधारित मिश्रधातु में करते हैं। जो गोली के आवरण एवं लाइटर में उपयोग होती है।

प्रश्न 28.
अन्तर संक्रमण तत्व क्या हैं ? दिए गए निम्न परमाणु संख्याओं में से अन्तर संक्रमण तत्वों की परमाणु संख्याओं का निर्धारण कीजिए- 29,59, 74, 95, 102, 104.
उत्तर
f-ब्लॉक तत्वों में, अन्तिम इलेक्ट्रॉन अन्तर उपात्यकक्ष – उपकक्ष में प्रवेश करते हैं, अतः इन्हें अन्तर संक्रमण तत्व कहते हैं। इनमें लैन्थेनॉयड्स (58-71) एवं एक्टीनॉयड्स (90-103) होते हैं । अतः परमाणु क्रमांक 59, 95 एवं 102 वाले तत्व अन्तर संक्रमण तत्व हैं।

प्रश्न 29.
लैन्थेनॉयड्स की तुलना में एक्टीनॉयड्स तत्वों का रसायन अधिक सरल नहीं है। इस वाक्य को इन तत्वों की ऑक्सीकरण अवस्था के कुछ उदाहरणों द्वारा न्यायोचित सिद्ध कीजिए।
उतर
लैन्थेनॉयड्स निश्चित संख्या में ऑक्सीकरण अवस्थायें दर्शाते हैं, जैसे +2, +3 एवं +4 (+3 मुख्य ऑक्सीकरण अवस्था है)। क्योंकि 5d एवं 4f उपकक्षों के मध्य अधिक ऊर्जा अन्तर होता है। एक्टीनॉयड्स भी प्रमुख ऑक्सीकरण अवस्था +3 दर्शाते हैं, किन्तु अन्य ऑक्सीकरण अवस्था भी दर्शाते हैं । उदाहरण के लिए, यूरेनियम (Z= 92) +3, +4, +5, +6 ऑक्सीकरण अवस्थायें रखता है, एवं नेप्चूनियम (Z= 94) +3, +4, +5, +6 एवं +7 ऑक्सीकरण अवस्थायें दर्शाता है। क्योंकि 4f एवं 6d कक्षकों के मध्य ऊर्जा अन्तर कम होता है।

प्रश्न 30.
एक्टीनॉयड्स श्रेणी का अंतिम तत्व कौन-सा है ? इस तत्व का इलेक्ट्रॉनिक विन्यास लिखिए। इस तत्व की संभावित ऑक्सीकरण अवस्था पर टिप्पणी कीजिए।
उत्तर
एक्टीनॉयड श्रेणी का अंतिम तत्व= लॉरेन्सियम (Z = 103)
इलेक्ट्रॉनिक विन्यास = [Rn]5f146d17s2
संभावित ऑक्सीकरण अवस्था = +3

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प्रश्न 31.
हुण्ड नियम का उपयोग करते हुए Ce* आयन का इलेक्ट्रॉनिक विन्यास लिखिए एवं ‘चक्रण केवल’ सूत्र के आधार पर इसके चुम्बकीय आघूर्ण की गणना कीजिए।
उत्तर
सीरियम का इलेक्ट्रॉनिक विन्यास = [Xe] 4f15d16s2
Ce3+ 344 = [Xe]4f1
जिसका अर्थ है कि एक अयुग्मित इलेक्ट्रॉन उपस्थित है।
MP Board Class 12th Chemistry Solutions Chapter 8 d एवं f-ब्लॉक के तत्त्व - 21

प्रश्न 32.
लैन्थेनॉयड श्रेणी के उन सदस्यों के नाम दीजिए, जो +4 ऑक्सीकरण अवस्था में एवं +2 ऑक्सीकरण अवस्थायें रखते हैं। इस प्रकार के व्यवहार को इन तत्वों के इलेक्ट्रॉनिक विन्यासों से संबंध स्थापित कीजिए।
उत्तर
+4= 58Ce, 59Pr, 60Nd, 65Tb, 66Dy
+2 = 60Nd, 62Sm, 63Eu, 69Tm, 70Yb
+4 ऑक्सीकरण अवस्था दर्शाती है, जब विन्यास बाँयी तरफ के समीप 4f° (अर्थात् 4f04f14f2) अथवा 4f7 के समीप (अर्थात् 4f7 अथवा 4f8) होता है।
+2 ऑक्सीकरण अवस्था दर्शाती है, जब विन्यास 5d0 6s2 है तथा दो इलेक्ट्रॉन सरलता से त्याग देता है।

प्रश्न 33.
निम्न के सापेक्ष एक्टीनॉयड्स एवं लैन्थेनॉयड्स के रसायन की तुलना कीजिए –
(i) इलेक्ट्रॉनिक विन्यास
(ii) ऑक्सीकरण अवस्थाएँ
(iii) आयनन एन्थैल्पी एवं
(iv) परमाण्विक आकार।
उत्तर
लैंथेनाइडों एवं एक्टिनाइडों के मध्य भिन्नताएँ
MP Board Class 12th Chemistry Solutions Chapter 8 d एवं f-ब्लॉक के तत्त्व - 22

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प्रश्न 34.
परमाणु क्रमांक 61,91, 101 एवं 109 वाले तत्वों के इलेक्ट्रॉनिक विन्यास लिखिए।
(i) z = 61: [Xe]4f5f506s2
(ii) Z = 91: [Rn]5f26d17s2
(iii) Z = 101: [Rn]5f136d07s2
(iv) Z = 109: [Rn]5f146d7s2

प्रश्न 35.
ऊर्ध्वाधर कॉलम के सापेक्ष प्रथम संक्रमण धातुओं की श्रेणी के सामान्य गुणों की तुलना द्वितीय एवं तृतीय श्रेणी के धातुओं से कीजिए। निम्न बिन्दुओं को विशिष्टता प्रदान कीजिए –
(i) इलेक्ट्रॉनिक विन्यास,
(ii) ऑक्सीकरण अवस्थायें
(iii) आयनन एन्थैल्पी एवं
(iv) परमाण्विक आकार।
उत्तर
प्रथम संक्रमण धातुओं की श्रेणी के सामान्य गुणों की तुलना –
MP Board Class 12th Chemistry Solutions Chapter 8 d एवं f-ब्लॉक के तत्त्व - 23

प्रश्न 36.
निम्न आयनों में प्रत्येक के 3d इलेक्ट्रॉनों की संख्या लिखिए –
Ti2+,v2+, Cr3+,Mn2+, Fe2+, Fe3+,Co2+,Ni2+ एवं Cu2+ दर्शाइये कि पाँच 31 कक्षकों को इन हाइड्रेट आयनों (अष्टफलकीय) द्वारा भरा जा सकता है।
उत्तर
MP Board Class 12th Chemistry Solutions Chapter 8 d एवं f-ब्लॉक के तत्त्व - 24

प्रश्न 37.
इस वाक्य पर टिप्पणी कीजिए कि प्रथम संक्रमण श्रेणी के तत्वों में अनेक गुण भारी संक्रमण तत्वों से भिन्न होते हैं।
उत्तर
MP Board Class 12th Chemistry Solutions Chapter 8 d एवं f-ब्लॉक के तत्त्व - 25

प्रश्न 38.
निम्न संकुल स्पीशीज के चुम्बकीय आघूर्ण के मानों से क्या दर्शाया जाता है ?
MP Board Class 12th Chemistry Solutions Chapter 8 d एवं f-ब्लॉक के तत्त्व - 26
MP Board Class 12th Chemistry Solutions Chapter 8 d एवं f-ब्लॉक के तत्त्व - 27
उत्तर
K4[Mn(CN)6]
Mn+2 . 3d5 , चुम्बकीय आघूर्ण 2.2 दर्शाता है कि इसमें एक अयुग्मित इलेक्ट्रॉन है एवं अन्तर कक्षक संकुल अथवा निम्न चक्रण संकुल बनाता है। इसका विन्यास है –
t22g[Fe(H2 O)6 ]2+

Fe+2: 3d6 चुम्बकीय आघूर्ण का मान 4 अयुग्मित इलेक्ट्रॉनों के समीप है, अत: यह बाह्य कक्षक संकुल अथवा उच्च चक्रण संकुल बनाता है। इसका विन्यास है  – t42g e2g K2[MnCl4]

Mn+2 : 3d5 चुम्बकीय आघूर्ण का मान 5 अयुग्मित इलेक्ट्रॉनों के सापेक्ष है। d-कक्षक प्रभावित नहीं होते। अतः यह चतुष्फलकीय संकुल बनाता है। इसका विन्यास है – t32g e2g

d एवं f-ब्लॉक के तत्त्व अन्य महत्वपूर्ण प्रश्नोत्तर

d एवं f-ब्लॉक के तत्त्व वस्तुनिष्ठ प्रश्न

1. सही विकल्प चुनकर लिखिए-

प्रश्न 1.
मैंगनीज किसमें उच्चतम ऑक्सीकरण अवस्था प्रदर्शित करता है
(a) K2MnO4
(b) KMnO4
(c) MnO2
(d) MngO4
उत्तर
(b) KMnO4
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प्रश्न 2.
कौन अन्तराली यौगिक बनाता है
(a) Fe
(b) Ca
(c) Ni
(d) सभी।
उत्तर
(b) Ca

प्रश्न 3.
जब KMnO4 को उदासीन माध्यम में प्रयुक्त करते हैं, तब उनका तुल्यांक भार होगा –
(a) M
(b) M/2
(c) M/3
(d) M/5.
उत्तर
(c) M/3

प्रश्न 4.
कौन-सी लैन्थेनाइड सर्वाधिक प्रयुक्त की जाती है –
(a) लैन्थेनम
(b) नोबेलियम
(c) थोरियम
(d) सीरियम।
उत्तर
(d) सीरियम।

प्रश्न 5.
गैडोलिनियम का इलेक्ट्रॉनिक विन्यास है –
(a) [Xc]4f65d9,6s2
(b) [Xe]4f7,5d1,6s2
(C) [Xe] f3,5d5,6s2
(d) [Xe]4f6,5d2,6s2.
उत्तर
(b) [Xe]4f7,5d1,6s2

प्रश्न 6.
लैन्थेनाइड संकुचन निम्न कारक के लिए उत्तरदायी होता है –
(a) Zr एवं Y की त्रिज्या लगभग समान होती है
(b) Zr एवं Nb की ऑक्सीकरण अवस्था समान होती है
(c) Zr एवं Hf की त्रिज्या लगभग समान होती है
(d)zr एवं Zn की ऑक्सीकरण अवस्था समान होती है।
उत्तर
(c) Zr एवं Hf की त्रिज्या लगभग समान होती है

प्रश्न 7.
3d श्रेणी में उच्चतम ऑक्सीकरण अवस्था किसके द्वारा प्रदर्शित की जाती है –
(a) Mn
(b) Fe2+
(c) Ni
(d) Cr
उत्तर
(a) Mn

प्रश्न 8.
कौन-सा संक्रमण धातु आयन रंगीन है –
(a) Cu+
(b) v2+
(c) Sc+3
(d) Ti+4
उत्तर
(b) v2+

प्रश्न 9.
एक संक्रमण धातु जो +3 ऑक्सीकरण अवस्था में हरा किन्तु +6 ऑक्सीकरण अवस्था में नारंगी होता है –
(a) Mn.
(b) Cr
(c) Os
(d) Fe.
उत्तर
(b) Cr

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प्रश्न 10.
लैन्थेनाइड श्रेणी में, लैन्थेनाइड हाइड्रॉक्साइडों की क्षारकता –
(a) बढ़ती है
(b) घटती है
(c) पहले बढ़ती है फिर घटती है
(d) पहले घटती है और फिर बढ़ती है।
उत्तर
(b) घटती है

प्रश्न 11.
Fe, Co, Ni किस प्रकार के चुम्बकीय पदार्थ हैं –
(a) अनुचुम्बकीय
(b) लौह चुम्बकीय
(c) प्रति चुम्बकीय
(d) प्रति लौह चुम्बकीय।
उत्तर
(b) लौह चुम्बकीय

प्रश्न 12.
Fe+2 आयन के अयुग्मित इलेक्ट्रॉन की संख्या है –
(a) 0
(b) 4
(c) 6
(d) 3.
उत्तर
(b) 4

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2. रिक्त स्थानों की पूर्ति कीजिए – 

  1. Fe, Co, Ni धातुओं को …………. कहते हैं।
  2. परमाणु क्रमांक में वृद्धि के साथ त्रिसंयोजी धनायनों का आकार क्रमशः….,.. जाता है।
  3. निम्नतर ऑक्सीकरण अवस्था प्रदर्शित करने वाले संक्रमण धातु …….. प्रकृति के होते हैं।
  4. K2Cr207 एक प्रबल ……….. है जो केवल अम्लीय माध्यम में नवजात ऑक्सीजन का ……… परमाणु मुक्त करता है।
  5. Zn केवल …………. ऑक्सीकरण अवस्था प्रदर्शित करता है।
  6. f-ब्लॉक तत्व …………. तत्व कहलाते हैं।
  7. संक्रमण तत्व और उनके यौगिक ……….. का कार्य करते हैं।
  8. अंतः संक्रमण तत्वों का सामान्य इलेक्ट्रॉनिक विन्यास …………..
  9. पोटैशियम मैंगनेट का रासायनिक सूत्र ……….. है।
  10. d-ब्लॉक तत्वों को …………. भी कहा जाता है।

उत्तर

  1. फेरस धातुएँ
  2.  घटता
  3. क्षारीय
  4. ऑक्सीकारक, तीन
  5. +2
  6. आन्तर संक्रमण
  7. उत्प्रेरक
  8. (n-2)f1-14, (n-1)d1-2,ns2
  9. K2MnO4,
  10. संक्रमण तत्व।

3. सत्य/असत्य बताइए –

  1. पारा द्रव अवस्था में होता है तथा इसकी ऑक्सीकरण अवस्था +1 व + 2 होती है।
  2. संक्रमण धातुओं की उच्चतम ऑक्सीकरण अवस्था अम्लीय प्रकृति की होती है।
  3. लैन्थेनाइड और एक्टीनाइड दोनों संक्रमण तत्व कहलाते हैं।
  4. सभी संक्रमण तत्वों में +2 ऑक्सीकरण अवस्था सामान्यत: अधिक पायी जाती है अथवा सामान्य होती है।
  5. Zn, Cd एवं Hg परिवर्ती संयोजकता प्रदर्शित करती है।
  6. Cu+2 आयन रंगहीन और प्रतिचुम्बकीय होता है।
  7. प्लूटोनियम का उपयोग परमाणु बम बनाने में तथा परमाणु रियेक्टर में ईंधन के रूप में किया जाता है।
  8. संक्रमण तत्व अन्तराली यौगिक बनाते हैं।

उत्तर

  1. सत्य,
  2. सत्य,
  3. असत्य,
  4. सत्य,
  5. असत्य,
  6. असत्य,
  7. सत्य,
  8. सत्य।

4. उचित संबंध जोडिए –
I.
MP Board Class 12th Chemistry Solutions Chapter 8 d एवं f-ब्लॉक के तत्त्व - 28
उत्तर
1. (1), 2. (g), 3. (e), 4. (c), 5. (b), 6, (d), 7. (a).

5. एक शब्द/वाक्य में उत्तर दीजिए – 

  1. Cu+ तथा Cu2+ में कौन-सा आयन रंगहीन है ?
  2. एक अभिक्रिया में KMnO4 को K2MnO4 में परिवर्तित किया जाता है तो Mn की ऑक्सी
    करण संख्या में कितना परिवर्तन होगा?
  3. लैन्थेनाइड और एक्टीनाइड में कौन-सी श्रेणी उच्च ऑक्सीकरण अवस्था दर्शाती है ?
  4. लैन्थेनम की कौन-सी ऑक्सीकरण अवस्था अधिक स्थायी होती है ?
  5. K3Cr3O7 का अम्लीय विलयन में तुल्यांकी भार कितना होता है ?
  6. Fe+3 में अयुग्मित इलेक्ट्रॉनों की अधिकतम संख्या होती है।
  7. क्रोमिलं क्लोराइड परीक्षण में प्रयुक्त ऑक्सीकरण का नाम लिखिए।
  8. d- ब्लॉक के तत्वों में Zn परिवर्तित संयोजकता प्रदर्शित नहीं करता, क्योंकि।
  9. Cu की सर्वाधिक महत्वपूर्ण ऑक्सीकरण अवस्था है।
  10. f- ब्लॉक के तत्वों को कितने श्रेणी में बाँटा गया है ?
  11. लूनर कॉस्टिक किसे कहते हैं ?
  12. d-ब्लॉक के तत्वों में Zn परिवर्ती ऑक्सीकरण संख्या नहीं दर्शाता है, क्यों ?
  13. HgCl2 तथा KI का क्षारीय विलयन क्या कहलाता है ?

उत्तर-

  1. Cu+
  2. 1,
  3. एक्टीनाइड,
  4. +3,
  5. 49,
  6. 5,
  7. K2Cr2O7,
  8. पूर्ण-पूरित d-कक्षक,
  9. +2,
  10. दो,
  11. AgNO3,
  12. d-कक्षक के पूर्ण भरे होने की वजह से,
  13. नेसलर अभिकर्मक।

d एवं f-ब्लॉक के तत्त्व लघु उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 1.
सिल्वर परमाणु की मूल अवस्था में पूर्ण-पूरित d-कक्षक है।आप कैसे कह सकते हैं कि यह एक संक्रमण तत्व है ?
उत्तर
सिल्वर +1 ऑक्सीकरण अवस्था में 4d10 5s0 इलेक्ट्रॉनिक विन्यास दर्शाता है। परन्तु कुछ यौगिकों में यह +2 ऑक्सीकरण अवस्था दर्शाता है। इस अवस्था में यह 4d95s0 इलेक्ट्रॉनिक विन्यास दर्शाता है। अतः 4d- से कक्षक के अपूर्ण होने के कारण इसे संक्रमण तत्व माना गया है।

प्रश्न 2.
संक्रमण तत्व किसे कहते हैं ? इनका इलेक्ट्रॉनिक विन्यास लिखिए। ये धात्विक गुण प्रदर्शित करते हैं, क्यों?
उत्तर
वे तत्व, जिनके परमाणु अथवा साधारण आयनों के इलेक्ट्रॉनिक विन्यास में भीतरी d-कक्षक अपूर्ण रूप से भरे होते हैं, संक्रमण तत्व कहलाते हैं । ये समूह 2 और 13 के मध्य स्थित होते हैं।
उदाहरण-Fe, Ni, Co आदि। इलेक्ट्रॉनिक विन्यास-(n-1)1-10,ns1-2 है।
किसी तत्व द्वारा अपने परमाणु में से एक अथवा अधिक इलेक्ट्रॉन त्यागकर धनायन बनाने की क्षमता पर उसका धात्विक गुण निर्भर करता है, सभी संक्रमण तत्व धातुएँ हैं, क्योंकि इनकी बाह्यतम कक्षा में एक या दो इलेक्ट्रॉन होते हैं, जो कि आसानी से त्यागे जा सकते हैं, क्योंकि इनकी आयनन ऊर्जा निम्न होती है। अतः ये धात्विक प्रकृति के होते हैं।

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प्रश्न 3.
संक्रमण तत्व परिवर्ती संयोजकता प्रदर्शित करते हैं, क्यों?
उत्तर-
संक्रमण तत्व परिवर्ती संयोजकता प्रदर्शित करते हैं, क्योंकि (n-1)d-कक्षक तथा ns-कक्षक के इलेक्ट्रॉनों की ऊर्जा में बहुत अधिक अन्तर नहीं होता है, जिससे d-कक्षक के इलेक्ट्रॉन भी संयोजी इलेक्ट्रॉन का कार्य करते हैं । इन तत्वों में Mn अधिकतम परिवर्ती संयोजकता प्रदर्शित करता है।

प्रश्न 4.
संक्रमण धातुएँ आसानी से मिश्र धातुएँ क्यों बना लेती हैं ?
उत्तर
संक्रमण धातुएँ पिघली हुई अवस्था में एक-दूसरे में मिश्रणीय हैं तथा विभिन्न संक्रमण धातुओं के मिश्रण को ठण्डा करने पर मिश्र धातुएँ बनती हैं । संक्रमण धातुओं का आकार लगभग समान होता है, अतः क्रिस्टल जालक में एक धातु परमाणु को दूसरे धातु परमाणु से आसानी से विस्थापित किया जा सकता है, इस प्रकार मिश्रधातुएँ बनती हैं । जैसे-Cr को Ni में विलेय कर Cr-Ni मिश्रधातु बनाया जाता है। मिश्र धातुएँ अपनी जनक धातुओं की तुलना में अधिक कठोर, उच्च गलनांक वाली तथा अधिक संक्षारण प्रतिरोधी होती हैं।

प्रश्न 5.
संक्रमण धातुओं के चुम्बकीय गुणों को उसके इलेक्ट्रॉनिक विन्यास के आधार पर बताइए।
अथवा, अनुचुम्बकत्व और प्रतिचुम्बकत्व को समझाइए।
उत्तर
चुम्बकीय गुण-संक्रमण धातुएँ चुम्बकीय गुण प्रदर्शित करती हैं।
(a) प्रतिचुम्बकत्व-जब किसी पदार्थ में उपस्थित सभी इलेक्ट्रॉन युग्मित हों तो वह प्रतिचुम्बकत्व दर्शाता है। Zn एक प्रतिचुम्बकीय धातु है।
(b) अनुचुम्बकत्व-यह गुण पदार्थ में उपस्थित अयुग्मित इलेक्ट्रॉनों की संख्या पर निर्भर करता है। अयुग्मित इलेक्ट्रॉन युक्त पदार्थ अनुचुम्बकीय होता है । अयुग्मित इलेक्ट्रॉनों की संख्या बढ़ने से चुम्बकीय गुण भी बढ़ता है।
Fe, Co तथा Ni फेरोचुम्बकीय होते हैं, क्योंकि इन्हें चुम्बकित भी किया जा सकता है । अनुचुम्बकत्व को निम्न सूत्र से दर्शाते हैं –
MP Board Class 12th Chemistry Solutions Chapter 8 d एवं f-ब्लॉक के तत्त्व - 29
जिसमें μ = चुम्बकीय आघूर्ण, n = अयुग्मित इलेक्ट्रॉनों की संख्या।

प्रश्न 6.
संक्रमण तत्वों की प्रवृत्ति अक्रिय होती है, क्यों? उत्तर
संक्रमण तत्वों की अक्रिय प्रवृत्ति या कम क्रियाशीलता निम्नलिखित कारणों से होती हैं –

(i) इनके मानक इलेक्ट्रोड विभव का मान कम होता है ।
(ii) इनकी आयनन ऊर्जा उच्च होती है ।
(iii) इनकी वाष्पन या कणिकरण ऊर्जा (Sublimation of Atomization energy) का मान उच्च होता है।
(iv) इनके आयनों की जल योजन ऊर्जा का मान कम होता है ।

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प्रश्न 7.
संक्रमण तत्वों की विशेषताएँ लिखिए।
उत्तर
संक्रमण तत्वों की विशेषताएँ-

  • इनकी प्रकृति धात्विक होती है जिनका धन विद्युतीय गुण सीमित (Ti) से उत्कृष्ट (Cu) तक होता है।
  • ये कठोर होते हैं तथा ऊष्मा और विद्युत् के सुचालक हैं।
  • इनके b.p. तथा m.p. उच्च होते हैं ।
  • ये परिवर्ती ऑक्सीकरण अवस्था प्रदर्शित करते हैं ।
  • ये रंगीन आयन बनाते हैं ।
  • ये समन्वयन यौगिक बनाते हैं।
  • ये सामान्यत: अनुचुम्बकीय होते हैं ।
  • ये अच्छे उत्प्रेरक होते हैं।
  • ये मिश्रधातु बनाते हैं।
  • ये अधातुओं के साथ अन्तराकाशीय यौगिक बनाते हैं।
  • इनमें कार्बधात्विक यौगिक, समाकृतिक यौगिक तथा नॉन-स्टॉइकियोमीट्रिक यौगिक भी पाये जाते हैं। __

प्रश्न 8.
d और f-ब्लॉक तत्वों में कोई पाँच प्रमुख अन्तर दीजिए।
उत्तर
d और ब्लिॉक तत्वों में अन्तर –
MP Board Class 12th Chemistry Solutions Chapter 8 d एवं f-ब्लॉक के तत्त्व - 30
प्रश्न 9.
आन्तरिक संक्रमण तत्व क्या होते हैं ?
उत्तर
वे तत्व जिनमें तीनों बाह्यतम कोश अपूर्ण भरे होते हैं अन्तर संक्रमण तत्व कहलाते हैं। संक्रमण तत्वों के भीतर वर्ग 3 व 4 के मध्य 14-14 तत्व f-ब्लॉक में आते हैं। अतः संक्रमण तत्वों के मध्य स्थित होने के कारण इन्हें अन्तर संक्रमण तत्व कहते हैं। चूँकि इनमें अंतिम इलेक्ट्रॉन बाह्यतम कोश से दो अन्दर के कोश उपउपान्त्य कोश अर्थात् (n-2)f-ऑर्बिटल में प्रवेश करते हैं। अत: इन तत्वों को f-ब्लॉक तत्व भी कहते हैं। (n-2)f1-14(n-12)d1-10ns2 इन्हें दो श्रेणियों में बाँटा गया है –

(1) लैन्थेनाइड श्रेणी-लैन्थेनम के बाद (La57) आने वाले 14 तत्व (Ce58-Lu71) लैन्थेनाइड कहलाते हैं।
(2) ऐक्टिनाइड श्रेणी-ऐक्टिनम के बाद आने वाले 14 तत्व ऐक्टिनाइड्स कहलाते हैं।

प्रश्न 10.
समूह- 12 के सदस्यों के नाम लिखिए। वे सामान्यतः संक्रमण तत्व क्यों नहीं माने जाते हैं ?
उत्तर
समूह- 12 के सदस्यों के नाम Zn, Cd, Hg हैं जिन्हें संक्रमण तत्वों में शामिल नहीं किया गया है, क्योंकि इनकी परमाणु अवस्था तथा द्विसंयोजी आयन अवस्था दोनों में इलेक्ट्रॉनिक संरचना (n-1)d10 होती है अर्थात् इनके d- कक्षक पूर्णतः भरे होते हैं। इस कारण इन्हें संक्रमण तत्व नहीं माना जाता।

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प्रश्न 11.
लैन्थेनाइडों की पाँच विशेषताएँ लिखिए। उत्तर-लैन्थेनाइडों की विशेषताएँ –
(a) ये f-ब्लॉक के तत्व हैं ।
(b) ये चाँदी के समान चमकदार धातुएँ हैं ।
(c) ये ऊष्मा तथा विद्युत् के अच्छे चालक हैं ।
(d) इनका गलनांक तथा घनत्व उच्च होता है ।
(e) La से Lu तक इनकी परमाणु त्रिज्या में लगातार कमी होती है, इसे लैन्थेनाइड संकुचन कहते हैं ।

प्रश्न 12.
क्या कारण है कि 5d श्रेणी के तत्वों की आयनन ऊर्जा का मान 4d श्रेणी से अधिक होता है?
उत्तर
किसी समूह में ऊपर से नीचे जाने पर आयनन ऊर्जा का मान घटता है, लेकिन अपेक्षा के विरुद्ध 5d श्रेणी के संक्रमण तत्वों की आयनन ऊर्जा का मान 4d श्रेणी के तत्वों के मान से अधिक होता है, जिसका कारण इन दोनों श्रेणियों के बीच आने वाले 14 लैन्थेनाइड तत्वों का रहना तथा उनके आकार में अपेक्षित वृद्धि नहीं हो पाना है। अतः नाभिक का आकर्षण बल बाह्यतम कक्षा के इलेक्ट्रॉन के लिए अधिक हो जाता है यही उनके अधिक आयनन विभव का कारण है।

प्रश्न 13.
(i) संक्रमण धातुओं में संकुल यौगिक बनाने की प्रवृत्ति होती है। समझाइए।
(ii) Zn, Cd एवं Hg संक्रमण तत्व का गुण व्यक्त क्यों नहीं करते हैं ?
(iii) Ti को आश्चर्यजनक धातु क्यों कहते हैं ?
उत्तर
(i) संक्रमण तत्वों के संकुल यौगिक बन्गने के कारण –
1. इन तत्वों के आयनों का आकार कम तथा नाभिकीय आवेश उच्च होता है, जिसके कारण ये आयन या अणु (लिगण्ड) को अपनी ओर आकर्षित करते हैं।
2. लिगैण्ड द्वारा दिये जाने वाले इलेक्ट्रॉन युग्म को ग्रहण करने के लिए इन तत्वों के आयनों में रिक्त ऑर्बिटल होते हैं।

(ii) ऐसे तत्व जिनमें (n-1)d- उपकोश आंशिक (Partially) रूप से भरे रहते हैं, उन्हें संक्रपण तत्व कहते हैं।
जबकि Zn में [3d104s2], Cd में [4d10 5s2] एवं Hg में [5d10s2] अवस्था पायी जाती है। इसलिए इन्हें संक्रमण तत्व नहीं मानते हैं।
(iii) Ti को आश्चर्यजनक धातु कहते हैं क्योंकि – (1) यह कठोर व उच्च गलनांक वाली धातु है। (2) यह ऊष्मा व विद्युत् की सुचालक होती है। (3) संक्षारण प्रतिरोधी होती है।(4) इसका उपयोग टैंक, तोप, बन्दूक व रक्षात्मक कवच बनाने में किया जाता है।

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प्रश्न 14.
Fe2+ आयन की त्रिज्या Mn2+ आयन की त्रिज्या से कम होती है, क्यों?
उत्तर
Fe का परमाणु क्रमांक (26) Mn के परमाणु क्रमांक (25) से अधिक है। अधिक परमाणुक्रमांक होने से नाभिक में प्रोटॉन की संख्या अधिक होती है, फलतः नाभिक और बाह्य कोश के इलेक्ट्रॉन के बीच कार्य करने वाला आकर्षण बल उतना ही प्रबल होता है। प्रबल आकर्षण बल इलेक्ट्रॉन बल इलेक्ट्रान मेघ को भीतर की ओर खींचता है, जिससे आकार में कमी होती है, इसीलिए Fe+ आयन की त्रिज्या Mn2+ आयन से कम होती है।

प्रश्न 15.
लैन्थेनाइड समूह को पृथक् करना क्यों कठिन है ? समझाइए।
उत्तर
लैन्थेनाइड समूह (Ce58 से – 71Lu) तक तत्वों में लैन्थेनाइड संकुचन के कारण रासायनिक गुणों में अत्यधिक समानता होती है। अत: इन्हें शुद्ध अवस्था में प्राप्त करना अत्यधिक कठिन होता है। इन्हें आयन विनिमय विधि द्वारा पृथक् किया जाता है।

प्रश्न 16.
(i) TiO2 श्वेत है, जबकि TiCl3 बैंगनी है। क्यों?
(ii) संक्रमण धातुओं की प्रथम पंक्ति में Cr तक अनुचुम्बकत्व बढ़ता है और फिर घटने लगता है, क्यों?
उत्तर
(i) TiO2 में Ti4+ अवस्था में है जिसका इलेक्ट्रॉनिक विन्यास 3d0 है अतःd-इलेक्ट्रॉन के अभाव में d-d संक्रमण नहीं हो पाने के कारण TiO2 श्वेत है। जबकि TiCl3 में Ti3+ अवस्था में है जिसका विन्यास 3d1 है। अतः अयुग्मित d-इलेक्ट्रॉन की उपस्थिति के कारण TiCl3 बैंगनी रंग का होता है।
(ii) संक्रमण धातुओं की प्रथम पंक्ति में Cr (3d5) तक अयुग्मित d-इलेक्ट्रॉनों के संख्या में वृद्धि होती है तथा फिर युग्मन प्रारम्भ होने के कारण इनकी संख्या घटती जाती है। अत: इसी के अनुसार पहले Cr तक अनुचुम्बकत्व बढ़ता है और फिर घटने लगता है।

प्रश्न 17.
किन्हीं पाँच बिन्दुओं पर लैन्थेनाइड और ऐक्टिनाइड की तुलना कीजिए।
उत्तर-लैन्थेनाइडों एवं ऐक्टिनाइडों की तुलना –
MP Board Class 12th Chemistry Solutions Chapter 8 d एवं f-ब्लॉक के तत्त्व - 31

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प्रश्न 18.
क्रोमिल क्लोराइड परीक्षण समीकरण सहित लिखिए।
उत्तर
जब किसी धातु क्लोराइड को ठोस पोटैशियम डाइक्रोमेट एवं सांद्र H,SO के साथ गर्म किया जाता है तब क्रोमिल क्लोराइड का नारंगी वाष्प बनता है।
MP Board Class 12th Chemistry Solutions Chapter 8 d एवं f-ब्लॉक के तत्त्व - 32
प्राप्त वाष्प को NaOH विलयन में प्रवाहित करने पर सोडियम क्रोमेट का पीले रंग का विलयन प्राप्त होता है, जो CH3COOH की उपस्थिति में लेड ऐसीटेट मिलाने पर, लेड क्रोमेट का पीला अवक्षेप देता है।
MP Board Class 12th Chemistry Solutions Chapter 8 d एवं f-ब्लॉक के तत्त्व - 33

प्रश्न 19.
प्रथम संक्रमण श्रेणी में उपस्थित तत्वों के नाम, संकेत तथा इलेक्ट्रॉनिक विन्यास लिखिए।
उत्तर
प्रथम संक्रमण श्रेणी में उपस्थित तत्वों के नाम, संकेत तथा इलेक्ट्रॉनिक विन्यास –
MP Board Class 12th Chemistry Solutions Chapter 8 d एवं f-ब्लॉक के तत्त्व - 34

प्रश्न 20.
f-ब्लॉक तत्वों का सामान्य इलेक्ट्रॉनिक विन्यास लिखिए। लैन्थेमाइड्स के कोई दो उपयोग लिखिए। ऐक्टिनाइड्स के कोई तीन उपयोग लिखिए।
उत्तर
ब्लॉक तत्वों का सामान्य विन्यास –
(n-2)f1-14, (n-1) s2p6 d0-1,ns2 होता है।
लैन्थेनाइड्स के दो उपयोग –

(i) ज्वलनशील मिश्रधातु बनाने में
(ii) धूप के चश्मों में
(iii) रंगीन काँच व फिल्टर बनाने में।

ऐक्टिनाइड्स के उपयोग –

(i) नाभिकीय रिएक्टर में
(ii) कैंसर के उपचार में थोरियम का उपयोग
(iii) प्लूटोनियम का उपयोग परमाणु बम, परमाणु भट्ठी में होता है।

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प्रश्न 21.
K2Cr2O7 एवं KMnO4 के उपयोग बताइए। .
उत्तर
K2Cr2O7 के उपयोग- (i) ऑक्सीकारक के रूप में, (ii) रंगाई व छपाई में, (iii) आयतनमितीय विश्लेषण में, (iv) क्रोमेटेजिंग में।
KMnO4 के उपयोग-(i) ऑक्सीकारक के रूप में, (ii) आयतनात्मक विश्लेषण में, (iii) कार्बनिक यौगिकों के निर्माण में, (iv) संक्रमणरोधी के रूप में।

प्रश्न 22.
अप्रारूपी संक्रमण तत्व एवं प्रारूपी संक्रमण तत्व किसे कहते हैं ?
उत्तर
Zn, Cd तथा Hg के परमाणुओं में (n-1)d उपकक्ष पूर्ण होते है। अत: इन तत्वों को d- समुदाय तत्व नहीं मानना चाहिए। इसी प्रकार ये तत्व d- समुदाय के तत्वों से गुणों के आधार पर बहुत कम समानता रखते हैं। परन्तु फिर भी ये तत्व d- समुदाय के तत्व कहलाते हैं । अत: Zn, Cd तथा Hg को अप्रारूपी संक्रमण तत्व कहा जाता है। जबकि अन्य संक्रमण तत्वों को प्रारूपी संक्रमण तत्व कहा जाता है।

प्रश्न 23.
Cu+ रंगहीन है परन्तु Cu2+ रंगीन होता है, क्यों?
उत्तर
Cu+ का उपकोश पूर्ण भरा होता है। इस प्रकार इनका d – d संक्रमण नहीं होता और वह सफेद अथवा रंगहीन रहता है। जबकि Cu2+ में अयुग्मित 3d इलेक्ट्रॉन होने के कारण एवं d-d संक्रमण सम्भव होने के कारण वह रंगीन होता है।

प्रश्न 24.
संक्रमण तत्व क्या है ? इन्हें कितनी श्रेणियों में विभाजित किया गया है ?
उत्तर
वे तत्व जिनमें परमाण्विक अवस्था में d-कक्षक आंशिक रूप से भरे हुए हों, संक्रमण तत्व कहलाते हैं, इन्हें 4 श्रेणियों में वर्गीकृत किया जा सकता है –

1. प्रथम संक्रमण श्रेणी (3d- Series)- इसमें चतुर्थ आवर्त के Sc21 स्कैंडियम से जिंक (Zn = 30) तक 10 तत्व हैं।
2. द्वितीय संक्रमण श्रेणी (4d- Series)- इसमें पंचम आवर्त के इट्रियम Y39 से कैडमियम Cd48 तक 10 तत्व हैं।
3. तृतीय संक्रमण श्रेणी (5d- Series)- इसमें छठे आवर्त के लैन्थेनम (La = 57) तथा (Hf =72) से मर्करी (Hg = 80) तक के 10 तत्व हैं।
4. चतुर्थ संक्रमण श्रेणी(6d- Series)- इसमें सातवें आवर्त ऐक्टीनियम (Ac=89) तथा रदरफोर्डियम (Rf =72) तथा हाड्रियम (Ha = 105) हैं ये श्रेणी अभी अपूर्ण है।

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प्रश्न 25.
संक्षेप में स्पष्ट कीजिए कि प्रथम संक्रमण श्रेणी के प्रथम अर्द्धभाग में बढ़ते हुए परमाणु क्रमांक के साथ +2 ऑक्सीकरण अवस्था कैसे अधिक स्थायी होती जाती है?
उत्तर
(IE1 + IE2) आयनन ऊर्जा का मान बढ़ता है। परिमाणस्वरुप मानक अपचयन विभव E0 कम होता जाता है। अत: M+2 आयन बनने की क्षमता घटती है। Mn+2 के लिए उच्च क्षमता अर्द्धपूर्ण इलेक्ट्रॉनिक विन्यास के कारण है। इसलिए प्रथम सदस्य के लिए इलेक्ट्रॉनिक विन्यास 3d14s2 है, जिनमें तीन इलेक्ट्रॉन दान करने की क्षमता होती है। अतः +2 ऑक्सीकरण अवस्था की तुलना में +3 ऑक्सीकरण अवस्था की प्रबलता अधिक है।

d एवं f-ब्लॉक के तत्त्व दीर्घ उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 1.
लैन्थेनाइड का इलेक्ट्रॉनिक विन्यास देते हुए इसके ऑक्सीकरण अवस्था को समझाइए।
उत्तर
अन्तर संक्रमण तत्त्वों की दो श्रेणियों में एक है लैन्थेनाइड या 4fश्रेणी । इस श्रेणी के तत्त्वों में 4fकक्षक में क्रमशः इलेक्ट्रॉन भरते हैं । इनका सामान्य इलेक्ट्रॉनिक विन्यास [Xe] 4f1-145d1-26s2 होता है। इनकी कुल संख्या 14 है जो सीरियम (परमाणु क्रमांक 58) से प्रारम्भ होकर ल्यूटीशियम (परमाणु क्रमांक 71) पर समाप्त होती है ।

ऑक्सीकरण अवस्था – लैन्थेनाइड तत्त्वों की सर्वाधिक ऑक्सीकरण अवस्था (+3) होती है। यह लैन्थेनम से दो और एक d-कक्षक के इलेक्ट्रॉन के खोने से बनती है। La3+ का विन्यास जेनॉन (Xe = 54) जैसा होता है जो कि अत्यधिक स्थायी होता है। कुछ तत्व (+ 2) और (+4) ऑक्सीकरण भी प्रदर्शित करते हैं क्योंकि ये तत्व 2 या 4 इलेक्ट्रॉन खोने के बाद स्थायी f7 या f14 विन्यास प्राप्त करते हैं।

उदाहरणार्थ – Ce4+(4f°), Tb+ (4f7),Eu2+ (4f7), Yb2+ (4f14), परन्तु Sm2+, Tm2+ इसके अपवाद हैं।
सामान्यतः लैन्थेनाइड में +4 ऑक्सीकरण अवस्था प्रबल ऑक्सीकरण का कार्य करती है, जैसे Ce+4 आयन जलीय विलयन का अच्छा ऑक्सीकरक है जो +4 से +3 में परिवर्तित हो जाता है तथा दूसरी ओर लैन्थेनाइड में +2 ऑक्सीकरण अवस्था प्रबल अपचायक की तरह कार्य करती है। जैसे-Sm+2, Eu+2 और Yb+2 आयन अच्छा अपचायक है जो जलीय विलयन में +2 से +3 में ऑक्सीकृत हो जाता है।

प्रश्न 2.
क्रोमाइट अयस्क से K2Cr2O7 बनाने की विधि लिखिए तथा K2Cr2O7 की अम्लीय FeSO4 KI एवं H2S के मध्य अभिक्रिया के लिए संतुलित समीकरण लिखिए।
उत्तर
बनाने की विधि-K2Cr2O7 को क्रोमाइट अयस्क (Fe2Cr2O4) या क्रोम आयरन (FeO.Cr203) से बनाया जाता है, जो निम्नलिखित पदों में होते हैं।

(1) क्रोमाइट अयस्क का सोडियम क्रोमेट में परिवर्तन-क्रोमाइट अयस्क को NaOH या Na2CO3 के साथ वायु की उपस्थिति में एक परावर्तनी भट्टी में गर्म करने पर सोडियम क्रोमेट (पीला रंग) बनता है।
MP Board Class 12th Chemistry Solutions Chapter 8 d एवं f-ब्लॉक के तत्त्व - 35

पदार्थ को छिद्रमय रखने हेतु कुछ मात्रा में शुष्क चूने को मिलाते हैं । जल के साथ निष्कर्षण करने पर Na2Cr2O3 विलयन में चला जाता है। जबकि Fe2O3 रह जाता है जिसे छानकर पृथक् कर लेते हैं।

(2) सोडियम क्रोमेट (Na2CrO4) का सोडियम डाइक्रोमेट (Na2Cr2O7) में परिवर्तन-सोडियम क्रोमेट विलयन सान्द्र H2SO4 के साथ अपचयित करके सोडियम डाइक्रोमेट बनाते हैं।
MP Board Class 12th Chemistry Solutions Chapter 8 d एवं f-ब्लॉक के तत्त्व - 36
2Na2CrO4 कम विलेय होता है जिसका वाष्पन करने पर Na2SO410H2O के रूप में क्रिस्टलीकृत हो जाता है जिसे पृथक् कर लिया जाता है।

(3) Na2Cr2O7 का K2Cr2O7 में परिवर्तन-सोडियम डाइक्रोमेट के जलीय विलयन का उपचार KCI के साथ किये जाने पर पोटैशियम डाइ क्रोमेट प्राप्त होता है। K2Cr207 के अल्प विलेय प्रकृति के कारण इसके क्रिस्टल ठण्डे में प्राप्त किये जाते हैं।

MP Board Class 12th Chemistry Solutions Chapter 8 d एवं f-ब्लॉक के तत्त्व - 37

K2Cr2O7 की निम्न के साथ होने वाली रासायनिक अभिक्रिया –

(1) अम्लीय फेरस सल्फेट के साथ-K2Cr207 अम्लीय माध्यम में यह फेरस सल्फेट को फेरिक सल्फेट में ऑक्सीकृत कर देता है। K2Cr2O7 पहले H2SO4 से क्रिया करके नवजात ऑक्सीजन का तीन परमाणु देता है जो Fe2+ को Fe3+ आयन में ऑक्सीकृत कर देता है।
MP Board Class 12th Chemistry Solutions Chapter 8 d एवं f-ब्लॉक के तत्त्व - 38

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प्रश्न 3.
अम्लीय, क्षारीय तथा उदासीन माध्यम में KMnO के ऑक्सीकारक गुण को दो-दो उदाहरण द्वारा समझाइए।
अथवा, पोटैशियम परमैंगनेट के अम्लीय माध्यम में कोई ऑक्सीकारक गुणों को समीकरण द्वारा समझाइए।
उत्तर
KMnO4 का विलयन उदासीन हो, क्षारीय हो या अम्लीय हो, प्रत्येक परिस्थिति में यह तीव्र ऑक्सीकारक का कार्य करता है।
(1) अम्लीय माध्यम में-तनु H2SO4 की उपस्थिति में KMnO4 अपचयित हो जाता है तथा इसके दो अणुओं से ऑक्सीजन के पाँच परमाणु प्राप्त होते हैं।
2KMnO4 + 3H2SO4→K2SO4 + 2MnSO4 + 3H2O + 5[0]

उदाहरण – (i) फेरस लवण का फेरिक लवण में ऑक्सीकरण –
अम्लीय KMnO4 से प्राप्त नवजात ऑक्सीजन फेरस लवण को फेरिक लवण में ऑक्सीकृत करता है।
MP Board Class 12th Chemistry Solutions Chapter 8 d एवं f-ब्लॉक के तत्त्व - 39

(ii) ऑक्जेलिक अम्ल का ऑक्सीकरण-अम्लीय माध्यम में KMnO4 ऑक्जेलिक अम्ल को CO2 में ऑक्सीकृत कर देता है।
MP Board Class 12th Chemistry Solutions Chapter 8 d एवं f-ब्लॉक के तत्त्व - 40

(iii) आयोडाइड आयन का आयोडीन में परिवर्तन
MP Board Class 12th Chemistry Solutions Chapter 8 d एवं f-ब्लॉक के तत्त्व - 41

(iv) नाइट्राइट का नाइट्रेट में ऑक्सीकरण
MP Board Class 12th Chemistry Solutions Chapter 8 d एवं f-ब्लॉक के तत्त्व - 42

(2) क्षारीय माध्यम में-क्षारीय माध्यम में KMnOa, MnO, में अपचयित होता है तथा 3 नवजात ऑक्सीजन देता है।
MP Board Class 12th Chemistry Solutions Chapter 8 d एवं f-ब्लॉक के तत्त्व - 43
उदाहरण-(i) आयोडाइड का आयोडेट में ऑक्सीकरणक्षारीय माध्यम में KI का आयोडेट में ऑक्सीकरण होता है।
2KMnO4 + H2O +KI→KIO3 +2MnO2 + 2KOH

(ii) एथिलीन का ग्लाइकॉल में ऑक्सीकरण –
क्षारीय KMnO4 एथिलीन का एथिलीन ग्लाइकॉल में ऑक्सीकरण करता है।
MP Board Class 12th Chemistry Solutions Chapter 8 d एवं f-ब्लॉक के तत्त्व - 44

(3) उदासीन माध्यम में-उदासीन माध्यम में भी KMnO4 ऑक्सीकारक की तरह कार्य करता है। अभिक्रिया में बना KOH विलयन को क्षारीय बना देता है। KMnO4, MnO2 में अपचयित हो जाता है एवं 2 मोल KMnO4 से 2 मोल नवजात ऑक्सीजन मुक्त होते हैं।
MP Board Class 12th Chemistry Solutions Chapter 8 d एवं f-ब्लॉक के तत्त्व - 45

प्रश्न 4.
पायरोलुसाइट से KMnO4 बनाने की विधि लिखिए तथा KMnO4 की अम्लीय, क्षारीय तथा उदासीन माध्यम में ऑक्सीकारक गुणों को एक-एक उदाहरण देकर समझाइए।
उत्तर
पायरोलुसाइट से KMnO4 का निर्माण
1. पायरोलुसाइट का KMnO4 (हरे पदार्थ) में परिवर्तन-पायरोलुसाइट को वायुमण्डलीय O2 में KOH या K2CO3 के साथ गलित करने पर पोटैशियम मैंगनेट का हरा पदार्थ बनता है।
MP Board Class 12th Chemistry Solutions Chapter 8 d एवं f-ब्लॉक के तत्त्व - 46

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2. K2MnO4 का KMnO4 में परिवर्तन-K2MnO4 के हरे पदार्थ को जल के साथ निष्कासित करके रासायनिक ऑक्सीकरण या विद्युत्-अपघटनी ऑक्सीकरण द्वारा KMnO4 में ऑक्सीकृत करते हैं।
(a) रासायनिक ऑक्सीकरण-KMnO4 के हरे विलयन का उपचार Cl2, O2 या CO2 की धारा में प्रवाहित करके KMnO में ऑक्सीकृत किया गया है।
MP Board Class 12th Chemistry Solutions Chapter 8 d एवं f-ब्लॉक के तत्त्व - 47

(b) विद्युत्-अपघटनी ऑक्सीकरण-इस विधि में आयरन कैथोड एवं निकिल ऐनोड के मध्य K2MnO4 विलयन का विद्युत्-अपघटन किया जाता है, तो मैंगनेट आयन का ऐनोड पर परमैंगनेट आयन (MnO4) में ऑक्सीकरण हो जाता है तथा कैथोड पर H, मुक्त होती है।
MP Board Class 12th Chemistry Solutions Chapter 8 d एवं f-ब्लॉक के तत्त्व - 49
अम्लीय, क्षारीय तथा उदासीन माध्यम में ऑक्सीकारक गुणों के उदाहरण-दीर्घ उत्तरीय प्रश्न क्र. 3 देखिए।

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MP Board Class 12th Chemistry Solutions Chapter 6 तत्त्वों के निष्कर्षण के सिद्धान्त एवं प्रक्रम

MP Board Class 12th Chemistry Solutions Chapter 6 तत्त्वों के निष्कर्षण के सिद्धान्त एवं प्रक्रम

तत्त्वों के निष्कर्षण के सिद्धान्त एवं प्रक्रम NCERT पाठ्यनिहित प्रश्नोत्तर

प्रश्न 1.
सारणी 6.1 में दर्शाए गए अयस्कों में से किसका सान्द्रण चुम्बकीय पृथक्करण विधि द्वारा करते हैं ?
उत्तर
नोट-सारणी के लिए NCERT पाठ्य-पुस्तक देखें।
चुम्बकीय अयस्क को अचुम्बकीय अशुद्धियों से पृथक् चुम्बकीय पृथक्करण विधि द्वारा करते हैं। उदाहरण के लिए-मैग्नेटाइट को अचुम्बकीय सिलिका एवं अन्य अशुद्धियों से पृथक् इस विधि द्वारा करते हैं।

प्रश्न 2.
ऐल्युमिनियम के निष्कर्षण में प्रक्षालन का महत्व क्या है?
उत्तर
ऐल्युमिनियम का मुख्य अयस्क बॉक्साइट (Al2O3xH2O) है। इसमें अशुद्धियों के रूप में SiO2, FeO एवं टाइटेनियम ऑक्साइड (TiO2) होती है। इस अशुद्धियों को प्रक्षालन द्वारा पृथक् करते हैं। बॉक्साइट से शुद्ध एलुमिना बनाने में प्रक्षालन का महत्व है। बॉक्साइट चूर्ण को NaOH विलयन के साथ 473 – 523 K पर गर्म करते हैं । एलुमिना घुलकर सोडियम मेटा ऐलुमिनेट बनाता है, जबकि अशुद्धियाँ आयरन एवं टाइटेनियम शेष रह जाती है।
MP Board Class 12th Chemistry Solutions Chapter 6 तत्त्वों के निष्कर्षण के सिद्धान्त एवं प्रक्रम - 1
अशुद्धियों को छानकर अलग कर लेते हैं। छनित में CO2 प्रवाहित कर उदासीन करते हैं । ऐल्युमिनियम हाइड्रॉक्साइड को पृथक् कर लेते हैं, जबकि सोडियम सिलिकेट विलयन में शेष रह जाता है। ऐल्युमिनियम हाइड्रॉक्साइड को गर्म कर शुद्ध ऐलुमिना प्राप्त होता है।
MP Board Class 12th Chemistry Solutions Chapter 6 तत्त्वों के निष्कर्षण के सिद्धान्त एवं प्रक्रम - 2
ऐलुमिना के वैद्युत-अपघटन से ऐल्युमिनियम प्राप्त होता है।

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प्रश्न 3.
Cr2O3 + 2Al → Al2O3 +2Cr; (∆G° = -421kJ)
गिब्स ऊर्जा मान से स्पष्ट है कि उपरोक्त अभिक्रिया संभव है। यह कमरे के तापक्रम पर क्यों नहीं होती?
उत्तर
कमरे के ताप पर सभी अभिकारक एवं उत्पाद ठोस हैं। इसलिए कमरे के ताप पर अभिक्रिया नहीं होती। उच्च ताप पर अभि-कारक पिघलकर क्रिया करते हैं।

प्रश्न 4.
यह सत्य है कि कुछ विशिष्ट परिस्थितियों में, Mg, SiO2 को अपचयित करता है एवं Si, MgO को अपचयित करता है। ये उपरोक्त परिस्थितियाँ क्या हैं ?
उत्तर
मैग्नीशियम 1693 K पर अथवा कम पर SiO2 को अपचयित करते हैं । सिलिकॉन 1693 K के ऊपर Mgo को अपचयित करते हैं।
MP Board Class 12th Chemistry Solutions Chapter 6 तत्त्वों के निष्कर्षण के सिद्धान्त एवं प्रक्रम - 3

तत्त्वों के निष्कर्षण के सिद्धान्त एवं प्रक्रम NCERT पाठ्य-पुस्तक प्रश्नोत्तर

प्रश्न 1.
कॉपर का निष्कर्षण हाइड्रो धातुकर्म द्वारा किया जाता है, परन्तु जिंक का नहीं। व्याख्या कीजिए।
उत्तर
कॉपर तुलनात्मक कम क्रियाशील धातु है, इसका अपचयन विभव E° (Cu2+/Cu) उच्च है (+0.34V)। यह Cu2+ आयनों के विलयन से अधिक क्रियाशील धातुओं, जिनके E° मान कॉपर से कम होते हैं, द्वारा विस्थापित हो जाता है। उदाहरण के लिए, जिंक का E° (Zn2+/zn) – 0.76 है, जिंक कॉपर से Cu2+आयनों के विलयन से विस्थापित करता है। इसके विपरीत Zn2+ आयनों के विलयन से Zn को अधिक क्रियाशील धातु जैसे-Na, K, Mg, Ca आदि द्वारा विस्थापित किया जाता है। परन्तु ये अधिक क्रियाशील धातुएँ जल से क्रिया कर अपने आयनों को बनाकर हाइड्रोजन गैस निकालती हैं।
[2Na + 2H2O → 2NaOH + H2] इस प्रकार Zn2+ आयनों के विलयन से Zn को विस्थापित करना कठिन है। अत: कॉपर को हाइड्रोधातुकर्म द्वारा निष्कर्षित किया जाता है, जिंक को नहीं।

प्रश्न 2.
फेन प्लवन विधि में अवनमक (Depressant) की क्या भूमिका है?
उत्तर
दो सल्फाइड अयस्कों को पृथक् करने के लिए फेन प्लवन विधि में अवनमक (Depressant) का उपयोग किया जाता है। इसके लिए जल में तेल का भाग समायोजित करते हैं। यदि अयस्क में ZnS एवं Pbs है, तो अवसाद या अवनमक के रूप में NaCN का उपयोग करते हैं। NaCN, Pbs को झाग के रूप में ऊपर आने देता है, जबकि ZnS को झाग की बनी परत जिंक संकुल Na2[Zn(CN)6] के रूंप में रोकता है।

प्रश्न 3.
अपचयन द्वारा ऑक्साइड अयस्कों की अपेक्षा पाइराइट से ताँबे का निष्कर्षण अधिक कठिन है ?
उत्तर
H2S एवं CS2 से Cu2S की निर्माण की मानक मुक्त ऊर्जा (ΔfG°) अधिक ऋणात्मक है। उसी प्रकार Cu2S को कार्बन या H2 द्वारा अपचयित नहीं किया जा सकता। निम्न दो अभिक्रिया समान नहीं होतीं। इन अभिक्रियाओं की ΔrG° धनात्मक है।

Cu2S + H2 → 2Cu + H2S
2Cu2S + C → 4Cu + CS2

इसके विपरीत Cu2O की ΔfG°, CO से कम ऋणात्मक है एवं कार्बन सरलता से Cu2O को Cu में अपचयित करता है।

Cu2O(s) +Cs → 2Cu + CO(g)

इस कारण से पाइराइट अयस्क से कॉपर का निष्कर्षण, इसके ऑक्साइड से कठिन है।

प्रश्न 4.
व्याख्या कीजिए –
(i) मंडल परिष्करण (Zone refining)
(ii) स्तंभ वर्णलेखिकी (Column chromatography)।
उत्तर
(i) मंडल परिष्करण या प्रभाजी क्रिस्टलीकरण (Zone refining or Fractional crystallisation) विशिष्ट उपयोगों हेतु शुद्धतम धातु प्राप्त करने हेतु इस विधि का उपयोग किया जाता है। उदाहरण के लिये, अर्द्धचालक (Semiconductors) के रूप में उपयोग के लिये सिलिकॉन व जर्मेनियम को इसी विधि द्वारा प्राप्त किया जाता है। यह विधि इस तथ्य पर आधारित है कि अशुद्ध धातु के ठोस अवस्था की तुलना में द्रव में अधिक विलेय होती हैं तथा अशुद्धियाँ होने पर उसका गलनांक शुद्ध धातु से कम होता है।

इस विधि में अशुद्ध धातु के छड़ के एक सिरे में गोलाकार चलित हीटर फिट कर दिया जाता है। हीटर को छड़ में धीरे-धीरे विस्थापित किया जाता है। हीटर के आसपास धातु पिघलती है। जैसे-जैसे हीटर आगे बढता है शुद्ध धातु क्रिस्टलीकृत होता जाता है तथा अशुद्धियाँ पिघले क्षेत्र में चली जाती हैं । यह प्रक्रिया तब तक दोहरायी जाती है जब तक पूरी अशुद्धियाँ छड़ के एक सिरे पर नहीं आ जाती जिसे बाद में अलग कर दिया जाता है। यह विधि प्रभाजी क्रिस्टलीकरण (Fractional crystallisation) भी कहलाती है।
MP Board Class 12th Chemistry Solutions Chapter 6 तत्त्वों के निष्कर्षण के सिद्धान्त एवं प्रक्रम - 4

(ii) स्तम्भ वर्णप्रक्रम या अधिशोषण स्तम्भ वर्णप्रक्रम (Column chromatography or Adsorption column chromatography)- यह विधि काँच नली में बंद (Packed) अधिशोषक के स्तम्भ पर मिश्रण के पृथक्करण से संबंधित है। स्तम्भ के निचले सिरे पर स्टॉप कॉक (Stop cock) लगा होता है। अधिशोषक पर अधिशोषित होने वाले मिश्रण को अधिशोषक स्तम्भ के ऊपर रखा जाता है। अब एक अन्य द्रव मिश्रण, जो वाहक (Eluant) का कार्य करता है, स्तम्भ में नीचे की ओर बहने दिया जाता है। यह वाहक मिश्रण अपने साथ धीरे-धीरे पूर्व अधिशोषित पदार्थों को बहाकर ले जाता है। मिश्रण के विभिन्न अवयव स्तम्भ के विभिन्न भागों में अधिशोषित हो जाते हैं।

वह अवयव जो अधिक प्रबलता से अधिशोषित होता है, स्तम्भ के ऊपरी भाग में रहता है और पट्टी बनाता है। अधिशोषित यौगिकों को विभिन्न घोलकों में घुलाकर एक-एक करके पृथक् कर लिया जाता है। इस प्रक्रिया को निक्षालन (Elution) कहते हैं। निक्षालन की क्रिया के लिए प्रायः जल, ऐल्कोहॉल, ऐसीटोन, पेट्रोलियम, ईथर आदि घोलकों का उपयोग होता है। अधिशोषक के रूप में प्राय: एलुमिना, मैग्नीशियम
ऑक्साइड, सिलिका जेल, कैल्सियम कार्बोनेट आदि का व्यवहार होता है। इस विधि में साधारणतः एक भाग यौगिक के लिए चालीस भाग अधिशोषक प्रयुक्त होता है।

कभी-कभी नली से अधिशोषित स्तम्भ को बाहर निकालकर प्रत्येक रंगीन बैण्ड को काट लिया जाता है। इन रंगीन बैण्डों से अधिशोषित यौगिकों को घोलक द्वारा निष्कर्षित (Extract) कर रवाकरण की क्रिया द्वारा शुद्ध अवयव प्राप्त किये जाते हैं।

इस विधि द्वारा किसी मिश्रण से रंगहीन (Colourless) अवयवों का पृथक्करण तभी संभव है जब वे पराबैंगनी प्रकाश (Ultra-violet light) में विभिन्न प्रतिदीप्त (Fluorescence) प्रदर्शित करते हों। यदि वे प्रतिदीप्ति प्रदर्शित नहीं करते तो अधिशोषक को ही प्रतिदीप्तिशील पदार्थ (Fluorescent material) में डुबोया जाता है। मिश्रण के विभिन्न अवयवों को अधिशोषित करने वाले क्षेत्र पराबैंगनी प्रकाश में गहरे रंग (Dark colour) के दिखाई पड़ने लगते हैं जिससे अवयवों के पृथक्करण में सुविधा होती है। प्रयोग शीशे की नली की जगह क्वार्ट्स (Quartz) की नली में किया जाता है।
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प्रश्न 5.
673 K ताप पर C तथा CO में से कौन-सा अच्छा अपचायक है ?
उत्तर
जब कार्बन, डाइऑक्सीजन से क्रिया करता है, दो अभिक्रियाएँ संभावित हैं।
C(s) + O2(g) → CO2(g) …………..(i)
2C(s) + O2(g) → 2CO(g) …………..(ii)

यदि CO अपचायक अभिकर्मक के रूप में उपयोग होती है, तब यह CO2 में ऑक्सीकृत होती है।

2CO + O2 → 2CO2…………..(iii)

एलिन्गम आरेख से स्पष्ट है कि 673 K पर CO से CO2 में ऑक्सीकरण पर ΔG° अभिक्रिया (i) एवं अभिक्रिया (ii) से अधिक ऋणात्मक है। इस प्रकार C से CO अच्छा अपचायक अभिकर्मक है। इस बात की पुष्टि अभिक्रिया (iii) का ग्राफ 673 K पर अभिक्रिया (i) एवं (ii) से नीचे है, से होती है। एलिन्गम आरेख में जो तत्व नीचे हैं, अन्य धातुओं के ऑक्साइड इससे ऊपर होते हैं।

प्रश्न 6.
कॉपर के वैद्युत अपघटन शोधन में ऐनोड पंक (Anode mud) में उपस्थित सामान्य तत्वों के नाम दीजिए। वे कहाँ कैसे उपस्थित होते है ?
उत्तर
ऐनोड पंक में उपस्थित सामान्य तत्वों Ag, Au, Pt, Sb, Se आदि हैं। ये तत्व कम क्रियाशील होते हैं एवं CuSO4 एवं H2SO4 विलयन से अप्रभावित रहते हैं, एवं इस प्रकार ये ऐनोड के नीचे ऐनोड पंक (Anode mud) के रूप में बैठ जाते हैं।

प्रश्न 7.
आयरन (लोहे) के निष्कर्षण के दौरान वात्या भट्टी के विभिन्न क्षेत्रों में होने वाली रासायनिक अभिक्रियाओं को लिखिए।
उत्तर
वात्या-भट्ठी में होने वाली क्रियाएँ –
(i) कोक वायु की उपस्थिति में जलकर CO2 बनाता है, जो कोक की अधिक मात्रा से रासायनिक संयोग करके CO बनाता है।
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(ii) CO ऊपर की ओर उठकर 600°C पर हेमेटाइट अयस्क (Fe2O3) को फेरस ऑक्साइड (FeO) में अपचयित कर देता है।
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(iii) लगभग 750°C पर CO द्वारा FeO को आयरन (Fe) में अपचयित कर देता है।

FeO + CO —> Fe+ CO2

इस प्रकार प्राप्त लोहे को स्पंजी आयरन कहते हैं। स्पंजी लोहा नीचे जाते-जाते ताप बढ़ने के कारण पिघल जाता है तथा अपने में कुछ C, S, Mn को घोल लेता है।
(iv) चूना पत्थर 1100°C ताप पर CaO और CO2 में अपघटित हो जाता है।
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(v) CaO अयस्क उपस्थित सिलिका (SiO2) से क्रिया करके धातुमल (Slag) बना लेता है।
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ये धातुमल पिघले लोहे के ऊपर तैरता रहता है, जिसे ऊपरी छिद्र से बाहर निकाल लेते हैं। वात्या-भट्ठी का नामांकित रेखाचित्र –
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प्रश्न 8.
जिंक ब्लैण्ड से जिंक के निष्कर्षण में होने वाली रासायनिक अभिक्रियाओं को लिखिए।
उत्तर
जस्ते के अयस्क – (i) जिंक ब्लैण्ड ZnS, (ii) कैलामाइन ZnCO3, (iii) विलैमाइट ZnSiO4.
धातु निष्कर्षण की आधुनिक विधि-जिंक ब्लैण्ड तथा कैलामाइन अयस्कों से प्रायः धातु का निष्कर्षण किया जाता है।
1. सान्द्रण-जिंक ब्लैण्ड अयस्क का सान्द्रण झाग उत्प्लावन विधि से करते हैं।
2. भर्जन-सान्द्रित अयस्क को वायु की अधिकता में भर्जित करने से अयस्क ZnO में परिवर्तित हो जाता है। कुछ ZnS, ZnSO4 में परिवर्तित होते हैं, जो ZnO में अपघटित हो जाता है।

2ZnS + 3O2 → 2ZnO + 2SO2(g)
ZnS + 2O2 → ZnSO4
2ZnSo4 → 2ZnO + 2SO2(g) + O2(g)

कैलामाइन अयस्क केवल निस्तापन से ही ZnO बनाता है।
ZnCO3 → ZnO + CO2(g)

3. अपचयन- भर्जित या निस्तापित अयस्क को कोक से साथ ऊर्ध्वाधर रिटॉर्ट में रखकर प्रोड्यूसर गैस द्वारा 140°C तक गर्म किया जाता है, जिससे ZnO का Zn में अपचयन हो जाता है। प्राप्त Zn वाष्प को संघनित्र में एकत्रित करते हैं। इस प्रकार प्राप्त Zn को स्पेल्टर कहते हैं। इसमें Pb, As, Fe, Si, Cd और C की अशुद्धियाँ होती हैं और शेष 97.8% Zn होता है।
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4. शोधन-अतिशुद्ध Zn विद्युत्-अपघटनी विधि द्वारा प्राप्त किया जाता है। इसमें अम्लीय ZnSO4 विलयन विद्युत्-अपघटन का कार्य करता है। प्राप्त अशुद्ध Zn ऐनोड तथा शुद्ध Zn छड़ कैथोड का कार्य करता है। विद्युत् धारा प्रवाहित करने पर शुद्ध Zn कैथोड पर एकत्रित होता है। यह लगभग 99.98% शुद्ध होता है।

प्रश्न 9.
कॉपर के धातुकर्म में सिलिका की भूमिका समझाइए।
उत्तर
सिलिका अम्लीय गालक के रूप में प्रयुक्त होता है, जो आयरन ऑक्साइड की क्षारीय अशुद्धि को हटाता है।
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प्रश्न 10.
‘वर्णलेखिकी’ पद का क्या अर्थ है ?
उत्तर
पृथक्करण एवं शोधन के लिए वर्णलेखिकी एक तकनीक है, जो धातु एवं इसकी अशुद्धियों की उपयुक्त अधिशोषक द्वारा अधिशोषण क्षमताओं में अंतर पर आधारित है। यह इस सिद्धांत पर आधारित है, कि मिश्रण के विभिन्न यौगिक अधिशोषक द्वारा भिन्न-भिन्न अधिशोषित होता है। यह पद मुलतः ग्रीक शब्द ‘क्रोमा’ का अर्थ रंग एवं ग्राफी लिखते हैं, इस आधार पर इस विधि का नाम क्रोमेटोग्राफी रखा गया, जिसका अर्थ होता है, वर्णलेखन (Colour writing) जिसका सर्वप्रथम उपयोग पौधों के रंगीन वर्णकों के लिए किया गया।

प्रश्न 11.
वर्णलेखिकी में स्थिर प्रावस्था के चयन में क्या मापदंड अपनाए जाते हैं ?
उत्तर
अचल या स्थिर (Stationary phase) प्रावस्था का चयन इस प्रकार करते हैं कि जिन तत्वों का शोधन करना होता है, उनकी तुलना में अशुद्धियों को अधिक शक्ति से अधिशोषित करें। इन परिस्थितियों में, अशुद्धियाँ अचल या स्थिर प्रावस्था द्वारा रोक ली जाती हैं, जिसका अर्थ है, इन्हें सरलता से हटाया नहीं जा सकता, जबकि शुद्ध अवयव दुर्बल अधि-शोषित होते हैं, अतः सरलता से हटाए जा सकते हैं।

प्रश्न 12.
निकिल शोधन की विधि समझाइए।
उत्तर
(i) मंडल परिष्करण (Zone refining)- मंडल परिष्करण या प्रभाजी क्रिस्टलीकरण (Zone refining or Fractional crystallisation) विशिष्ट उपयोगों हेतु शुद्धतम धातु प्राप्त करने हेतु इस विधि का उपयोग किया जाता है। उदाहरण के लिये, अर्द्धचालक (Semiconductors) के रूप में उपयोग के लिये सिलिकॉन व जर्मेनियम को इसी विधि द्वारा प्राप्त किया जाता है। यह विधि इस तथ्य पर आधारित है कि अशुद्ध धातु के ठोस अवस्था की तुलना में द्रव में अधिक विलेय होती हैं तथा अशुद्धियाँ होने पर उसका गलनांक शुद्ध धातु से कम होता है।

इस विधि में अशुद्ध धातु के छड़ के एक सिरे में गोलाकार चलित हीटर फिट कर दिया जाता है। हीटर को छड़ में धीरे-धीरे विस्थापित किया जाता है। हीटर के आसपास धातु पिघलती है। जैसे-जैसे हीटर आगे बढता है शुद्ध धातु क्रिस्टलीकृत होता जाता है तथा अशुद्धियाँ पिघले क्षेत्र में चली जाती हैं । यह प्रक्रिया तब तक दोहरायी जाती है जब तक पूरी अशुद्धियाँ छड़ के एक सिरे पर नहीं आ जाती जिसे बाद में अलग कर दिया जाता है। यह विधि प्रभाजी क्रिस्टलीकरण (Fractional crystallisation) भी कहलाती है।
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(ii) स्तम्भ वर्णप्रक्रम या अधिशोषण स्तम्भ वर्णप्रक्रम (Column chromatography or Adsorption column chromatography)- यह विधि काँच नली में बंद (Packed) अधिशोषक के स्तम्भ पर मिश्रण के पृथक्करण से संबंधित है। स्तम्भ के निचले सिरे पर स्टॉप कॉक (Stop cock) लगा होता है। अधिशोषक पर अधिशोषित होने वाले मिश्रण को अधिशोषक स्तम्भ के ऊपर रखा जाता है। अब एक अन्य द्रव मिश्रण, जो वाहक (Eluant) का कार्य करता है, स्तम्भ में नीचे की ओर बहने दिया जाता है। यह वाहक मिश्रण अपने साथ धीरे-धीरे पूर्व अधिशोषित पदार्थों को बहाकर ले जाता है। मिश्रण के विभिन्न अवयव स्तम्भ के विभिन्न भागों में अधिशोषित हो जाते हैं।

वह अवयव जो अधिक प्रबलता से अधिशोषित होता है, स्तम्भ के ऊपरी भाग में रहता है और पट्टी बनाता है। अधिशोषित यौगिकों को विभिन्न घोलकों में घुलाकर एक-एक करके पृथक् कर लिया जाता है। इस प्रक्रिया को निक्षालन (Elution) कहते हैं। निक्षालन की क्रिया के लिए प्रायः जल, ऐल्कोहॉल, ऐसीटोन, पेट्रोलियम, ईथर आदि घोलकों का उपयोग होता है। अधिशोषक के रूप में प्राय: एलुमिना, मैग्नीशियम
ऑक्साइड, सिलिका जेल, कैल्सियम कार्बोनेट आदि का व्यवहार होता है। इस विधि में साधारणतः एक भाग यौगिक के लिए चालीस भाग अधिशोषक प्रयुक्त होता है।

कभी-कभी नली से अधिशोषित स्तम्भ को बाहर निकालकर प्रत्येक रंगीन बैण्ड को काट लिया जाता है। इन रंगीन बैण्डों से अधिशोषित यौगिकों को घोलक द्वारा निष्कर्षित (Extract) कर रवाकरण की क्रिया द्वारा शुद्ध अवयव प्राप्त किये जाते हैं।

इस विधि द्वारा किसी मिश्रण से रंगहीन (Colourless) अवयवों का पृथक्करण तभी संभव है जब वे पराबैंगनी प्रकाश (Ultra-violet light) में विभिन्न प्रतिदीप्त (Fluorescence) प्रदर्शित करते हों। यदि वे प्रतिदीप्ति प्रदर्शित नहीं करते तो अधिशोषक को ही प्रतिदीप्तिशील पदार्थ (Fluorescent material) में डुबोया जाता है। मिश्रण के विभिन्न अवयवों को अधिशोषित करने वाले क्षेत्र पराबैंगनी प्रकाश में गहरे रंग (Dark colour) के दिखाई पड़ने लगते हैं जिससे अवयवों के पृथक्करण में सुविधा होती है। प्रयोग शीशे की नली की जगह क्वार्ट्स (Quartz) की नली में किया जाता है।
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(ii) वैद्युत अपघटन परिष्करण (Electrolytic refining) धातुएँ अपने लवण के विलयन का विद्युत्अपघटन करने पर कैथोड पर जमा होती है। एक से अधिक धातुएँ रहने पर अपनी विद्युत् धनात्मक प्रवृत्ति के क्रम पर या बढ़ते ऑक्सीकरण विभव के क्रम में मुक्त होकर कैथोड पर जमा होती हैं । इस विधि में एक उपयुक्त विद्युत्-अपघट्य का चुनाव करके उसे विद्युत्-अपघटन सेल में ले लिया जाता है। शुद्ध धातु को कैथोड बनाकर विद्युत्-अपघटन सेल में लगाया जाता है। अशुद्ध धातु जिसका कि शोधन किया जाना है उसका एक मोटा एनोड बनाया जाता है। विद्युत्-अपघटन सेल में उपयुक्त विभव में जब विद्युत् प्रवाहित की जाती है तो एनोड से शुद्ध धातु विलयन में घुलेती है तथा विलयन से शुद्ध धातु, कैथोड के ऊपर लगातार संग्रहित होता रहता है। इस प्रकार विद्युत्-अपघटन की क्रिया में एनोड निरन्तर पतला होता चला जाता है तथा कैथोड लगातार मोटा होता जाता है। अशुद्धियाँ, एनोड पंक (Anode mud) के रूप में एनोड के नीचे जमा होती है। समय-समय पर आवश्यकतानुसार इलेक्ट्रोड परिवर्तित कर लिये जाते हैं।
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(iii) वाष्प प्रावस्था परिष्करण (Vapour-phase refining)- कच्ची धातु को विशिष्ट अभिकर्मक के साथ गर्म करने पर निम्न ताप पर वाष्पशील यौगिक प्राप्त होता है। इस वाष्पशील यौगिक को उच्च तापक्रम पर गर्म करने से विघटित होकर धातु देता है। इस विधि द्वारा Ni, Ti, Zr आदि का शोधन किया जाता है।
(a) माण्ड प्रक्रम (Mond process)- इस विधि का उपयोग निकिल जैसी धातुओं के शोधन में किया जाता है जो कि वाष्पशील कार्बोनिल यौगिक बनाती है। ये धातु के कार्बोनिल यौगिक उच्च ताप पर विघटित हो जाते हैं तथा कार्बन मोनोऑक्साइड गैस मुक्त करती हैं व शुद्ध धातु शेष रह जाती है।
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(b) वान-अर्केल विधि (Van-Arkel method)-जिर्कोनियम व टाइटेनियम जैसी धातुओं को अतिशुद्ध रूप में प्राप्त करने हेतु इस विधि का उपयोग किया जाता है। इस विधि में अशुद्ध धातु को वाष्पशील अस्थायी यौगिक (मुख्यतः धात्विक आयोडाइड) में परिवर्तित किया जाता है, जो गर्म करने पर विघटित होकर शुद्ध धातु प्रदान करते हैं। जैसे –
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प्रश्न 13.
सिलिका युक्त बॉक्साइट अयस्क में से सिलिका को ऐलुमिना से कैसे अलग करते है ? यदि कोई समीकरण हो तो दीजिए।
उत्तर-
ऐल्युमिनियम का मुख्य अयस्क बॉक्साइट (Al2O3xH2O) है। इसमें अशुद्धियों के रूप में SiO2, FeO एवं टाइटेनियम ऑक्साइड (TiO2) होती है। इस अशुद्धियों को प्रक्षालन द्वारा पृथक् करते हैं। बॉक्साइट से शुद्ध एलुमिना बनाने में प्रक्षालन का महत्व है। बॉक्साइट चूर्ण को NaOH विलयन के साथ 473 – 523 K पर गर्म करते हैं । एलुमिना घुलकर सोडियम मेटा ऐलुमिनेट बनाता है, जबकि अशुद्धियाँ आयरन एवं टाइटेनियम शेष रह जाती है।
MP Board Class 12th Chemistry Solutions Chapter 6 तत्त्वों के निष्कर्षण के सिद्धान्त एवं प्रक्रम - 18
अशुद्धियों को छानकर अलग कर लेते हैं। छनित में CO2 प्रवाहित कर उदासीन करते हैं । ऐल्युमिनियम हाइड्रॉक्साइड को पृथक् कर लेते हैं, जबकि सोडियम सिलिकेट विलयन में शेष रह जाता है। ऐल्युमिनियम हाइड्रॉक्साइड को गर्म कर शुद्ध ऐलुमिना प्राप्त होता है।
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ऐलुमिना के वैद्युत-अपघटन से ऐल्युमिनियम प्राप्त होता है।

प्रश्न 14.
उदाहरण देते हुए भर्जन एवं निस्तापन में अन्तर बताइए।
उत्तर
भर्जन एवं निस्तापन में अन्तर –
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प्रश्न 15.
ढलवाँ लोहा कच्चे लोहे से किस प्रकार भिन्न होता है ?
उत्तर
वात्या भट्टी से प्राप्त लोहे को कच्चा लोहा (Pig iron) कहते हैं। इसमें लगभग 4% कार्बन एवं अन्य अशुद्धियाँ S, P. Si, Mn आदि होती है। इस कच्चे लोहे दो स्क्रेप आयरन एवं कोक में मिलाकर गर्म वायु के झोकों से गर्म करते हैं, कुछ अशुद्धियाँ दूर हो जाती हैं, तब ढलवाँ लोहा (Cast iron) प्राप्त होता है। इसमें 3% कार्बन एवं कुछ अन्य अशुद्धियाँ होती है। यह कठोर एवं भंगुर होता है।

प्रश्न 16.
खनिजों एवं अयस्कों में अन्तर स्पष्ट कीजिए।
उत्तर
खनिज और अयस्क में अन्तर –
MP Board Class 12th Chemistry Solutions Chapter 6 तत्त्वों के निष्कर्षण के सिद्धान्त एवं प्रक्रम - 21

प्रश्न 17.
कॉपरमेट को सिलिका की परत चढ़े हुए परिवर्तन में क्यों रखा जाता है ?
उत्तर
कॉपरमेट में Cu2S एवं Fes होता है। कॉपरमेट को सिलिका के साथ गर्म करने से FeS की अशुद्धि FeSiO3 (धातुमल) के रूप में अलग हो जाती है।
MP Board Class 12th Chemistry Solutions Chapter 6 तत्त्वों के निष्कर्षण के सिद्धान्त एवं प्रक्रम - 22

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प्रश्न 18.
ऐल्युमिनियम के धातुकर्म में क्रायोलाइट की क्या भूमिका है ?
उत्तर
क्रायोलाइट के दो उदेश्य हैं –
(i) यह ऐल्युमिना को विद्युत् का अच्छा सुचालक बनाता है।
(ii) यह वैद्युत अपघट्य के गलन का तापक्रम कम करता है।

प्रश्न 19.
निम्न कोटि के कॉपर अयस्कों के लिए निक्षालन क्रिया को कैसे किया जाता है ?
उत्तर
निम्न कोटि के कॉपर अयस्कों के निक्षालन क्रिया, वायु की उपस्थिति में अम्लों से करते हैं। जब कॉपर विलयन में Cu2+ आयनों के रूप में जाता है, तब
2Cu + 2H2SO4+O2 → 2CuSO4 + 2H2O

प्रश्न 20.
CO का उपयोग करते हुए अपचयन द्वारा जिंक ऑक्साइड से जिंक का निष्कर्षण क्यों नहीं किया जाता?
उत्तर
एलिन्गम आरेख में, CO का CO2 में ऑक्सीकरण का ग्राफ, Zn के ऑक्सीकरण ग्राफ से ऊपर रहता है। इस प्रकार CO,Zno को Zn में अपचयित नहीं करती। अन्य प्रकार से, कार्बन का CO में ऑक्सीकरण का ग्राफ, 1120 K अथवा ऊपर ताप-पर Zn के ऑक्सीकरण ग्राफ से नीचे है। इस प्रकार ‘C’ का उपयोग 1120 K अथवा अधिक ताप पर ZnO के ऑक्सीकरण में करते हैं।

प्रश्न 21.
Cr2O3 के विरचन के लिए ΔfG° का मान – 540kJmol-1 है, तथा Al2O3 के लिए-827 kJmol-1 है, क्या Cr2O3 का अपचयन AI से संभव है।
उत्तर
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प्रश्न 22.
‘C’ एवं ‘Co’ में से Zno के लिए कौन-सा अपचायक अच्छा है?
उत्तर
कार्बन अच्छा अपचायक अभिकर्मक है।
एलिन्गम आरेख में, CO का CO2 में ऑक्सीकरण का ग्राफ, Zn के ऑक्सीकरण ग्राफ से ऊपर रहता है। इस प्रकार CO,Zno को Zn में अपचयित नहीं करती। अन्य प्रकार से, कार्बन का CO में ऑक्सीकरण का ग्राफ, 1120 K अथवा ऊपर ताप-पर Zn के ऑक्सीकरण ग्राफ से नीचे है। इस प्रकार ‘C’ का उपयोग 1120 K अथवा अधिक ताप पर ZnO के ऑक्सीकरण में करते हैं।

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प्रश्न 23.
किसी विशेष स्थिति में अपचायक का चयन ऊष्मागतिकी कारकों पर आधारित है। आप इस कथन से कहाँ तक सहमत हैं ? अपने मत के समर्थन में दो उदाहरण दीजिए।
उत्तर
किसी निश्चित धातु-ऑक्साइड को धातु में अपचयन के लिए उपयुक्त अपचायक अभिकर्मक के चयन के लिए ऊष्मागतिकी कारक के रूप में सहायता करता है। ऑक्साइडों के निर्माण में ΔfG° vs T के बीच ग्राफ के आधार पर तापीय अपचयन की संभावना का अनुमान लगाया जाता है। इसे एलिन्गम आरेख कहते हैं। इस आरेख से यह अनुमान लगाया जाता है कि ऐसी धातु ऑक्साइड, जिनमें ΔfG° ऑक्साइड अधिक ऋणात्मक है, अपचयित की जा सकती है। अन्य शब्दों में एलिन्गम आरेख में अन्य धातुओं के ऑक्साइड ऊपर हैं अपचयित की जा सकती है, क्योंकि संयुक्त रेडॉक्स अभिक्रिया के लिए ΔrG° ऋणात्मक दो धातुएँ, जिनके ΔfG° ऑक्साइड कम ऋणात्मक है, की तुलना में, ऐसी धातु ऑक्साइडों को ΔfG° के अन्तर के बराबर होगा। उदाहरण के लिए, Al, Cr2O3 को अपचयित करता है, जबकि MgO को नहीं। इसी भाँति कार्बन ZnO को Zn में अपचयित करता है, किन्तु CO को नहीं। अतः निश्चित अपचायक अभिकर्मक का चयन ऊष्मागतिकी कारक पर निर्भर करता है।

प्रश्न 24.
उस विधि का नाम लिखिए, जिसमें क्लोरीन सहउत्पाद के रूप में प्राप्त होती है। क्या होगा यदि NaCl के जलीय विलयन का वैद्युत अपघटन किया जाए ?
उत्तर
सोडियम धातु को डाउन प्रक्रम द्वारा बनाया जाता है। NaCl एवं CaCl2 के गलित मिश्रण को 873 K पर यह वैद्युत अपघटन से प्राप्त होता है।
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यदि NaCl के जलीय विलयन का वैद्युत अपघटन किया जाये, तो कैथोड पर H2 निकलती है, जबकि Cl2 एनोड पर प्राप्त होती है। इसका कारण \(\mathrm{E}_{\mathrm{Na}^{+} / \mathrm{Na}}^{\mathrm{o}}\) (-2.71) \(\mathrm{E}_{\mathrm{H}_{2} \mathrm{O} / \mathrm{H}_{2}}^{\circ} (-0.832)\) से अधिक कम है। जल, Na+ आयनों की उपस्थिति में H2 में अपचयित हो जाता है।
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प्रश्न 25.
ऐल्युमिनियम के वैद्युत-धातुकर्म में ग्रेफाइट छड़ की क्या भूमिका है ?
उत्तर
ऐलुमिना के विद्युतीय अपचयन में ग्रेफाइट एनोड वैद्युत अपघटन द्वारा Al2O3 का ऐल्युमिनियम में अपचयन की सुविधा प्रदान करता है। कार्बन ऑक्सीजन से क्रिया कर एनोड पर CO एवं CO2 निकालता है।

एनोड पर – C + O2- → CO + 2e
C + 2O2- → CO2 + 4e
कैथोड पर – Al3+ + 3e → Al.

प्रश्न 26.
निम्नलिखित विधियों द्वारा धातुओं के शोधन के सिद्धांतों की रूपरेखा दीजिए
(i) मंडल परिष्करण (Zone refining); (ii) वैद्युत अपघटन परिष्करण (Electrolytic refining), (ii) वाष्प प्रावस्था परिष्करण (Vapour phase refining)।
उत्तर
(i) मंडल परिष्करण (Zone refining)- मंडल परिष्करण या प्रभाजी क्रिस्टलीकरण (Zone refining or Fractional crystallisation) विशिष्ट उपयोगों हेतु शुद्धतम धातु प्राप्त करने हेतु इस विधि का उपयोग किया जाता है। उदाहरण के लिये, अर्द्धचालक (Semiconductors) के रूप में उपयोग के लिये सिलिकॉन व जर्मेनियम को इसी विधि द्वारा प्राप्त किया जाता है। यह विधि इस तथ्य पर आधारित है कि अशुद्ध धातु के ठोस अवस्था की तुलना में द्रव में अधिक विलेय होती हैं तथा अशुद्धियाँ होने पर उसका गलनांक शुद्ध धातु से कम होता है।

इस विधि में अशुद्ध धातु के छड़ के एक सिरे में गोलाकार चलित हीटर फिट कर दिया जाता है। हीटर को छड़ में धीरे-धीरे विस्थापित किया जाता है। हीटर के आसपास धातु पिघलती है। जैसे-जैसे हीटर आगे बढता है शुद्ध धातु क्रिस्टलीकृत होता जाता है तथा अशुद्धियाँ पिघले क्षेत्र में चली जाती हैं । यह प्रक्रिया तब तक दोहरायी जाती है जब तक पूरी अशुद्धियाँ छड़ के एक सिरे पर नहीं आ जाती जिसे बाद में अलग कर दिया जाता है। यह विधि प्रभाजी क्रिस्टलीकरण (Fractional crystallisation) भी कहलाती है।
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(ii) स्तम्भ वर्णप्रक्रम या अधिशोषण स्तम्भ वर्णप्रक्रम (Column chromatography or Adsorption column chromatography)- यह विधि काँच नली में बंद (Packed) अधिशोषक के स्तम्भ पर मिश्रण के पृथक्करण से संबंधित है। स्तम्भ के निचले सिरे पर स्टॉप कॉक (Stop cock) लगा होता है। अधिशोषक पर अधिशोषित होने वाले मिश्रण को अधिशोषक स्तम्भ के ऊपर रखा जाता है। अब एक अन्य द्रव मिश्रण, जो वाहक (Eluant) का कार्य करता है, स्तम्भ में नीचे की ओर बहने दिया जाता है। यह वाहक मिश्रण अपने साथ धीरे-धीरे पूर्व अधिशोषित पदार्थों को बहाकर ले जाता है। मिश्रण के विभिन्न अवयव स्तम्भ के विभिन्न भागों में अधिशोषित हो जाते हैं।

वह अवयव जो अधिक प्रबलता से अधिशोषित होता है, स्तम्भ के ऊपरी भाग में रहता है और पट्टी बनाता है। अधिशोषित यौगिकों को विभिन्न घोलकों में घुलाकर एक-एक करके पृथक् कर लिया जाता है। इस प्रक्रिया को निक्षालन (Elution) कहते हैं। निक्षालन की क्रिया के लिए प्रायः जल, ऐल्कोहॉल, ऐसीटोन, पेट्रोलियम, ईथर आदि घोलकों का उपयोग होता है। अधिशोषक के रूप में प्राय: एलुमिना, मैग्नीशियम
ऑक्साइड, सिलिका जेल, कैल्सियम कार्बोनेट आदि का व्यवहार होता है। इस विधि में साधारणतः एक भाग यौगिक के लिए चालीस भाग अधिशोषक प्रयुक्त होता है।

कभी-कभी नली से अधिशोषित स्तम्भ को बाहर निकालकर प्रत्येक रंगीन बैण्ड को काट लिया जाता है। इन रंगीन बैण्डों से अधिशोषित यौगिकों को घोलक द्वारा निष्कर्षित (Extract) कर रवाकरण की क्रिया द्वारा शुद्ध अवयव प्राप्त किये जाते हैं।

इस विधि द्वारा किसी मिश्रण से रंगहीन (Colourless) अवयवों का पृथक्करण तभी संभव है जब वे पराबैंगनी प्रकाश (Ultra-violet light) में विभिन्न प्रतिदीप्त (Fluorescence) प्रदर्शित करते हों। यदि वे प्रतिदीप्ति प्रदर्शित नहीं करते तो अधिशोषक को ही प्रतिदीप्तिशील पदार्थ (Fluorescent material) में डुबोया जाता है। मिश्रण के विभिन्न अवयवों को अधिशोषित करने वाले क्षेत्र पराबैंगनी प्रकाश में गहरे रंग (Dark colour) के दिखाई पड़ने लगते हैं जिससे अवयवों के पृथक्करण में सुविधा होती है। प्रयोग शीशे की नली की जगह क्वार्ट्स (Quartz) की नली में किया जाता है।
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(ii) वैद्युत अपघटन परिष्करण (Electrolytic refining) धातुएँ अपने लवण के विलयन का विद्युत्अपघटन करने पर कैथोड पर जमा होती है। एक से अधिक धातुएँ रहने पर अपनी विद्युत् धनात्मक प्रवृत्ति के क्रम पर या बढ़ते ऑक्सीकरण विभव के क्रम में मुक्त होकर कैथोड पर जमा होती हैं । इस विधि में एक उपयुक्त विद्युत्-अपघट्य का चुनाव करके उसे विद्युत्-अपघटन सेल में ले लिया जाता है। शुद्ध धातु को कैथोड बनाकर विद्युत्-अपघटन सेल में लगाया जाता है। अशुद्ध धातु जिसका कि शोधन किया जाना है उसका एक मोटा एनोड बनाया जाता है। विद्युत्-अपघटन सेल में उपयुक्त विभव में जब विद्युत् प्रवाहित की जाती है तो एनोड से शुद्ध धातु विलयन में घुलेती है तथा विलयन से शुद्ध धातु, कैथोड के ऊपर लगातार संग्रहित होता रहता है। इस प्रकार विद्युत्-अपघटन की क्रिया में एनोड निरन्तर पतला होता चला जाता है तथा कैथोड लगातार मोटा होता जाता है। अशुद्धियाँ, एनोड पंक (Anode mud) के रूप में एनोड के नीचे जमा होती है। समय-समय पर आवश्यकतानुसार इलेक्ट्रोड परिवर्तित कर लिये जाते हैं।
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(iii) वाष्प प्रावस्था परिष्करण (Vapour-phase refining)- कच्ची धातु को विशिष्ट अभिकर्मक के साथ गर्म करने पर निम्न ताप पर वाष्पशील यौगिक प्राप्त होता है। इस वाष्पशील यौगिक को उच्च तापक्रम पर गर्म करने से विघटित होकर धातु देता है। इस विधि द्वारा Ni, Ti, Zr आदि का शोधन किया जाता है।
(a) माण्ड प्रक्रम (Mond process)- इस विधि का उपयोग निकिल जैसी धातुओं के शोधन में किया जाता है जो कि वाष्पशील कार्बोनिल यौगिक बनाती है। ये धातु के कार्बोनिल यौगिक उच्च ताप पर विघटित हो जाते हैं तथा कार्बन मोनोऑक्साइड गैस मुक्त करती हैं व शुद्ध धातु शेष रह जाती है।
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(b) वान-अर्केल विधि (Van-Arkel method)-जिर्कोनियम व टाइटेनियम जैसी धातुओं को अतिशुद्ध रूप में प्राप्त करने हेतु इस विधि का उपयोग किया जाता है। इस विधि में अशुद्ध धातु को वाष्पशील अस्थायी यौगिक (मुख्यतः धात्विक आयोडाइड) में परिवर्तित किया जाता है, जो गर्म करने पर विघटित होकर शुद्ध धातु प्रदान करते हैं। जैसे –
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प्रश्न 27.
उन परिस्थितियों का अनुमान लगाइए, जिनमें AI, Mgo को अपचयित कर सकता है।
उत्तर
1623 K के ऊपर, AI, Mgo को Mg में अपचयित करता है।
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Mgo से Al2O, अधिक स्थायी है, अत: Al, 1623 K के ऊपर MgO को अपचयित करता है।

तत्त्वों के निष्कर्षण के सिद्धान्त एवं प्रक्रम अन्य महत्वपूर्ण प्रश्नोत्तर

तत्त्वों के निष्कर्षण के सिद्धान्त एवं प्रक्रम वस्तुनिष्ठ प्रश्न

1. सही विकल्प चुनकर लिखिए

प्रश्न 1.
ऐल्युमिना के वैद्युत-अपघटन में क्रायोलाइट इसलिए मिलाया जाता है
(a) ऐल्युमिना के गलनांक घटाने के लिए
(b) वैद्युत-चालकता घटाने के लिए
(c) ऐल्युमिना की अशुद्धियाँ पृथक् करने के लिए
(d) एनोड प्रभाव को कम करने के लिए।
उत्तर
(a) ऐल्युमिना के गलनांक घटाने के लिए

प्रश्न 2.
कौन-सी धातु अपनी ही ऑक्साइड की परत से रक्षित होती है –
(a) Ag
(b) Fe
(c) Cu
(d) Al.
उत्तर
(d) Al.

प्रश्न 3.
बॉक्साइट से Al के निर्माण में कौन-सी विधि का उपयोग किया जाता है –
(a) मैग्नीशियम द्वारा अपचयन
(b) कोक द्वारा अपचयन
(c) विद्युत्-अपघटनी अपचयन
(d) लोहे द्वारा अपचयन।
उत्तर
(c) विद्युत्-अपघटनी अपचयन

प्रश्न 4.
आयरन ऑक्साइड की अशुद्धियों वाले बॉक्साइट का शोधन किस विधि द्वारा किया जाता है –
(a) हुप की विधि
(b) सर्पक विधि
(c) बेयर विधि
(d) विद्युत्-अपघटनी विधि।
उत्तर
(c) बेयर विधि

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प्रश्न 5.
फफोलेदार ताँबा है –
(a) Cu का अयस्क
(b) Cu की मिश्र-धातु
(c) शुद्ध ताँबा .
(d) 1% अशुद्धियाँ युक्त ताँबा।
उत्तर
(d) 1% अशुद्धियाँ युक्त ताँबा।

प्रश्न 6.
वात्या-भट्टी में आयरन ऑक्साइड अवकृत होता है
(a) SiO2 से
(b) CO से
(c)C से
(d) CaCO3 से।
उत्तर
(b) CO से

प्रश्न 7.
हेमेटाइट से लोहे के निष्कर्षण में चूने का पत्थर का कार्य है –
(a) अपचायक पदार्थ
(b) धातुमल
(c) अधात्री
(d) गालक।
उत्तर
(d) गालक।

प्रश्न 8.
क्यूपेलीकरण इसके धातुकर्म में प्रयुक्त होती है –
(a) Cu
(b) Ag
(c) Al .
(d) Fe.
उत्तर
(b) Ag

प्रश्न 9.
फोटोग्राफी में काम आने वाली प्लेट तथा फिल्मों का यह आवश्यक अवयव है
(a) AgNO3
(b) Ag2S2O3
(c) AgBr
(d) Ag2CO3.
उत्तर
(c) AgBr

प्रश्न 10.
जिंक, कॉस्टिक सोडा विलयन के आधिक्य से क्रिया करके बनाता है
(a) Zn(OH)2
(b) ZnO
(c) Na2ZnO2
(d) ZnH2.
उत्तर
(c) Na2ZnO2

प्रश्न 11.
कैलोमल है
(a) Hg2Cl2
(b) HgCl2
(c) Hg2Cl2 + Hg
(d) Hg + HgCl2.
उत्तर
(a) Hg2Cl2

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प्रश्न 12.
पोटैशियम आयोडाइड घोल को मरक्यूरिक आयोडाइड पर अत्यधिक मात्रा में डालने पर बनाता
(a) Hg2Cl2
(b) K2HgI4
(c) Hg
(d) Hg + KI3
उत्तर
(b) K2HgI4

प्रश्न 13.
HgCI, के विलयन में अधिक मात्रा में KI मिलाने पर प्राप्त होने वाला रंग है –
(a) नारंगी
(b) भूरा
(c) लाल
(d) रंगहीन।
उत्तर
(c) लाल

प्रश्न 14.
निम्न में से कौन-सी धातु अमलगम नहीं बनाती है –
(a) Zn
(b) Cu
(c) Mg
(d) Fe.
उत्तर
(d) Fe.

प्रश्न 15.
निम्नलिखित अयस्क मैलेकाइट है –
(a) Cu2S
(b) CuCO3.Cu(OH)2
(c) Cu2O
(d) CuCO3
उत्तर
(b) CuCO3.Cu(OH)2

प्रश्न 16.
हाइपो में AgBr की विलेयता इसके बनने के कारण है –
(a) Ag2SO3
(b) Ag2S2O3
(c) [Ag(S2O3)]
(d) [Ag(S2O3)2]3-
उत्तर
(c) [Ag(S2O3)]

प्रश्न 17.
AgCI अमोनिया में इसके बनने के कारण विलेय है –
(a) [Ag(NH3)4]+
(b) [Ag(NH3)2]2+
(c) [Ag(NH3)4] 3+
(d) [Ag(NH3)2]+
उत्तर
(d) [Ag(NH3)2]+

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प्रश्न 18.
कॉपर सल्फेट घोल में KI डालने से बनाता है –
(a) CuI2
(b) CuI22+
(c) K2[CuI4]
(d) Cu2F2 + I2.
उत्तर
(d) Cu2F2 + I2.

प्रश्न 19.
CuSO4 विलयन की KCN के साथ क्रिया से बनता है
(a) Cu(CN)2
(b) CuCN
(c) K2[Cu(CN4)]
(d) K3[Cu(CN)4].
उत्तर
(d) K3[Cu(CN)4].

प्रश्न 20.
फोटोग्राफी में निम्न रूप में Na2S2O3,, प्रयुक्त होता है –
(a) अपचयन करने वाला
(b) डेवलेपर
(c) स्थिर करने वाला
(d) टोनिंग करने वाला।
उत्तर
(c) स्थिर करने वाला

2. रिक्त स्थानों की पूर्ति कीजिए

  1. मैलेकाइट ……………. का एक अयस्क है।
  2. स्टेनलेस स्टील में लोहे के साथ ………… एवं ……….. धातु मिश्र-धातु बनाती है।
  3. ………… का उपयोग परगेटिव के रूप में किया जाता है।
  4. …………. का कोलॉइडी विलयन का उपयोग आँख की दवाई बनाने में होता है।
  5. AgNO3 को ………….. कहते हैं।
  6. कोरोसिव सब्लीमेट का रासायनिक सूत्र ……….. है।
  7. झाग उत्प्लावन विधि ………… अयस्कों के लिए प्रयोग की जाती है।
  8. ऐल्युमिनियम द्वारा किसी धातु का अपचयन ………… कहलाता है।
  9. अमोनिया को सुखाने में प्रयुक्त होता है।
  10. ……….. को लूनर कॉस्टिक कहते हैं।
  11. फ्लोरस्पार का सूत्र ………… है।
  12. HgCl2 व KI का क्षारीय विलयन …………… कहलाता है।
  13. रक्त तप्त स्टील को वायु में धीरे-धीरे ठण्डा करने पर वह मृदु इस्पात में परिवर्तित होता है, इसे …………… कहते है।

उत्तर

  1. कॉपर
  2. Cr, Ni
  3. कैलोमल
  4. Ag
  5. लूनर कॉस्टिक,
  6. HgCl2
  7. सल्फाइड
  8. ऐल्युमिनोतापी
  9. CuO
  10. सिल्वर नाइट्रेट
  11. CaF2
  12. नेस्लर अभिकर्मक,
  13. एनीलिंग।

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3. उचित संबंध जोड़िए –

I.
MP Board Class 12th Chemistry Solutions Chapter 6 तत्त्वों के निष्कर्षण के सिद्धान्त एवं प्रक्रम - 33
उत्तर
1. (d), 2. (c), 3. (e), 4. (b), 5. (a), 6. (f), 7. (g).

II.
MP Board Class 12th Chemistry Solutions Chapter 6 तत्त्वों के निष्कर्षण के सिद्धान्त एवं प्रक्रम - 34
उत्तर
1. (d), 2. (a), 3. (b), 4. (e), 5. (c).

III.
MP Board Class 12th Chemistry Solutions Chapter 6 तत्त्वों के निष्कर्षण के सिद्धान्त एवं प्रक्रम - 35
उत्तर
1. (d), 2. (e), 3. (1), 4. (c), 5. (b), 6. (a).

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4. एक शब्द/वाक्य में उत्तर दीजिए –

  1. वात्या-भट्टी से प्राप्त Cu2S तथा FeS का मिश्रण कहलाता है।
  2. प्रदण्डन (Polling) से किस धातु का शोधन किया जाता है ?
  3. डेवलप करने के पश्चात् फोटोग्राफिक फिल्म को स्थिर करने के लिए किस विलयन में डुबाया जाता
  4. दार्शनिक वुल का रासायनिक सूत्र है।
  5. हार्न सिल्वर का रासायनिक सूत्र लिखिए।
  6. फोटोग्राफी में टोनिंग के लिए सामान्यतः किस यौगिक का उपयोग किया जाता है ?
  7. सिक्का धातु किसे कहते हैं ?
  8. कॉपर प्राप्त करने का प्रमुख अयस्क कौन-सा है ?
  9. आयरन प्राप्त करने का प्रमुख अयस्क कौन-सा है ?
  10. तत्वों की ऑक्साइड निर्माण के लिए मानक मुक्त उर्जा परिवर्तन (∆G°) व परमताप आरेख क्या कहलाता है?
  11. ढलवाँ लोहे से अशुद्धि दूर कर जो लोहा प्राप्त होता है, इसका नाम क्या है ?
  12. कठोर इस्पात को गर्म कर धीरे -धीरे ठण्डा करने की विधि क्या कहलाती है ?
  13. कठोर इस्पात को गर्म करने की विधि क्या कहलाती है ?
  14. इस्पात को अमोनिया के वातावरण में गर्म करने की विधि क्या कहलाती है ?
  15. लूनर कॉस्टिक किसे कहते है ?

उत्तर

  1. मैट
  2. कॉपर
  3. हाइपो विलयन (Na2S2O3)
  4. ZnO
  5. AgCl
  6. ऑरिक क्लोराइड
  7. Cu,Ag और Au को
  8. कॉपर पायराइटीज
  9. हेमेटाइट
  10. एलिन्गम आरेख
  11. पिटवाँ लोहा
  12. तापानुशीतन
  13. मृदुकरण
  14. नाइट्राइडीकरण
  15. AgNO3.

तत्त्वों के निष्कर्षण के सिद्धान्त एवं प्रक्रम अति लघु उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 1.
एल्युमिना के विद्युत् अपघटन में AI प्राप्त करते समय क्रायोलाइट मिलाया जाता है। कारण बताइए। .
उत्तर
एल्युमिना का गलनांक अति उच्च है (2050°C) क्रायोलाइट मिलाने पर एल्युमिना का गलनांक कम हो जाता है। साथ ही साथ क्रायोलाइट का विद्युत् अपघटन आसान हो जाता है।

प्रश्न 2.
जब AI को सान्द्र HNO3 के संपर्क में रखा जाता है तो किसी भी अभिक्रिया के होने का पता नहीं लगता है। क्यों?
उत्तर
चूँकि AI को सान्द्र HNO3 से क्रिया करके Al2O3 बनाता है जो AI धातु या एक सुरक्षात्मक आवरण बना लेता है, जिससे अभिक्रिया आगे नहीं बढ़ती।

प्रश्न 3.
AI का कौन-सा यौगिक अच्छा अपचायक है ?
उत्तर
AI का जटिल हाइड्राइड Li(AlH4 ) मुख्यतः कार्बनिक यौगिकों के लिये अच्छा अपचायक है।

प्रश्न 4.
निम्न के रासायनिक सूत्र लिखिए(i) कैलोमल, (ii) फिलॉस्फर वूल, (ii) कोरोसिव सब्लिमेट।
उत्तर
(i) कैलोमल-Hg2Cl2 मरक्यूरस क्लोराइड
(ii) फिलॉस्फर वूल-ZnO
(iii) कोरोसिव सब्लिमेट-HgCl2 मरक्यूरिक क्लोराइड।
उपयोग- (i) एण्टीसेप्टिक के रूप में, (ii) लकड़ी को सुरक्षित करने के लिए, (iii) प्रयोगशाला में अभिकर्मक के रूप में।

प्रश्न 5.
कॉपर के मुख्य अयस्क लिखिए।
उत्तर
कॉपर के मुख्य अयस्क निम्नलिखित हैं –
(1) ऑक्साइड-क्यूप्राइट या रूबी कॉपर (Cu2O)
(2) कार्बोनेट-ऐज्युराइट-2CuCO2.Cu(OH)2
मैलेकाइट-CuCO3.Cu(OH)2 या CuCO3.CuO.H2O
(3) सल्फाइड-कॉपर पायराइटीज या कैल्कोपाइराइट-Cu2S + Fe2S3,या CuFeS2
कॉपर ग्लांस या कैल्कोसाइट – Cu2S

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प्रश्न 6.
लूनर कॉस्टिक का रासायनिक नाम, सूत्र व दो उपयोग लिखिए।
उत्तर
(1) रासायनिक नाम-सिल्वर नाइट्रेट।
(2) सूत्र- AgNO3
(3) उपयोग-(i) दवाइयों में इसका उपयोग क्षार के रूप में
(ii) विशेष प्रकार की स्थायी व हेयर डाई बनाने में।

तत्त्वों के निष्कर्षण के सिद्धान्त एवं प्रक्रम लघु उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 1.
इस्पात के कठोरीकरण, तापानुशीतन, पायनीकरण एवं नाइट्राइडीकरण को समझाइए।
उत्तर-
1. कठोरीकरण-यदि रक्त-तप्त इस्पात को पानी में डालकर एकदम ठण्डा किया जाये तो प्राप्त इस्पात अति कठोर और भंगुर हो जाता है। इस क्रिया को इस्पात का कठोरीकरण कहते हैं।
2. तापानुशीतन-जब रक्त-तप्त इस्पात को धीरे-धीरे ठण्डा किया जाता है तब वह बहुत मुलायम हो जाता है। इस क्रिया को इस्पात का तापानुशीतन कहते हैं।
3. पायनीकरण-जब कठोर एवं भंगुर इस्पात को गर्म करके धीरे-धीरे भिन्न तापों पर ठण्डा किया जाता है। भिन्न-भिन्म तापों पर इस्पात की कठोरता कम होती जाती है और ताप के अनुसार इस्पात अलग-अलग गुण प्रदर्शित करता है। इस क्रिया को इस्पात का पायनीकरण कहते हैं।
4. नाइट्राइडीकरण-इस्पात की सतह का नाइट्रोजन द्वारा संतृप्त होना नाइट्राइडीकरण कहलाता है। इस्पात को 500-600°C ताप पर अमोनिया गैस में गर्म करने पर इस्पात का नाइट्राइडीकरण हो जाता है। आयरन नाइट्राइड की पर्त इस्पात को कठोर बना देती है।

प्रश्न 2.
कॉपर सल्फेट (नीला थोथा) बनाने की विधि व इसके उपयोग लिखिए।
उत्तर
कॉपर सल्फेट बनाने की विधियाँ –
(1) कॉपर को वायु की उपस्थिति में तनु H,SOR के साथ गरम करके

2Cu + 2H2SO4 + O2 → 2CuSO4 + 2H2O .

(2) कॉपर ऑक्साइड, हाइड्रॉक्साइड या कार्बोनेट पर H2SO4 की क्रिया से

CuO + H2SO4 → CuSO4 + H2O
Cu(OH)2 +H2SO4 → CuSO4 + 2H2O
CuCO3 + H2SO4 → CuSO4 + H2O + CO2.

उपयोग-(1) कपड़ों की रंगाई एवं छपाई में। (2) जीवाणुनाशी के रूप में। (3) कीटाणुनाशी के रूप में। (4) विद्युत् सेलों में। .

प्रश्न 3.
कॉपर सल्फेट विलयन की निम्न के साथ होने वाली अभिक्रिया का समीकरण लिखिए(i) NaOH विलयन, (ii) NH4OH, (iii) KI विलयन, (iv) KCN.
उत्तर
(i) कॉपर सल्फेट विलयन में NaOH विलयन मिलाने से हल्के नीले रंग का क्यूप्रिक हाइड्रॉक्साइड का अवक्षेप बनता है।

CuSO4 +2NaOH → Cu(OH)2 + Na2SO4.

(ii) कॉपर सल्फेट विलयन में अमोनियम हाइड्रॉक्साइड आधिक्य में मिलाने पर क्यूप्रिक अमोनियम सल्फेट का विलेय संकर लवण का गहरा नीला रंग प्राप्त होता है।

CuSO4 + 4NH4OH → [Cu(NH3)4]SO4 + 4H2O

(iii) कॉपर सल्फेट के विलयन में KI विलयन मिलाने पर I2 मुक्त होती है।

CuSO4 +2KI → K2SO4 + CuI2
2CuI2 → I2 + Cu2I2.

(iv) कॉपर सल्फेट KCN के आधिक्य में घुलकर पोटैशियम क्यूप्रोसाइनाइड बनाता है।
MP Board Class 12th Chemistry Solutions Chapter 6 तत्त्वों के निष्कर्षण के सिद्धान्त एवं प्रक्रम - 36

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प्रश्न 4.
नीला थोथा क्या है ? इस पर ऊष्मा का प्रभाव लिखिए।
उत्तर
कॉपर सल्फेट का व्यापारिक नाम नीला थोथा है, जिसमें पाँच अणु क्रिस्टलन जल के होते हैं। यह नीले रंग का क्रिस्टलीय ठोस.पदार्थ है जो जल में विलेय है।
ऊष्मा का प्रभाव – CuSO4.5H2O को 100°C ताप पर गर्म करने पर 4 क्रिस्टलन जल के अणु निकल जाते हैं और मोनोहाइड्रेटेड CuSO4 प्राप्त होता है, जो 130°C ताप निर्जल कॉपर सल्फेट देता है तथा 730°C ताप पर वियोजित होकर क्यूप्रिक ऑक्साइड व सल्फर ट्राइऑक्साइड देता है।
MP Board Class 12th Chemistry Solutions Chapter 6 तत्त्वों के निष्कर्षण के सिद्धान्त एवं प्रक्रम - 37
प्रश्न 5.
Al के मुख्य अयस्क कौन-कौन से हैं ? अशुद्ध Al का शोधन किस प्रकार किया जाता है ?
अथवा, ऐल्युमिना के विद्युत्-अपघटनी सेल का नामांकित चित्र बनाइए व इसमें होने वाली रासायनिक अभिक्रियाएँ लिखिए।
उत्तर
Al के मुख्य अयस्क
(1) बॉक्साइट – Al2O3.2H2O
(2) फेल्स्पार – K2O.Al2O3.6H2O
(3) क्रायोलाइट- Na3AIF6
Al का शोधन- Al का शोधन विद्युतीय हूप विधि द्वारा किया जाता है जिससे सेल में तीन स्तर होते हैं
(1) AL, Cu एवं Si की बनी मिश्र धातु की तली पर ऐनोड परत।
(2) क्रायोलाइट एवं बेरियम फ्लुओराइड का गलित मिश्रण मध्य परत।
(3) शुद्ध धातु की ऊपरी के कैथोड परत।
MP Board Class 12th Chemistry Solutions Chapter 6 तत्त्वों के निष्कर्षण के सिद्धान्त एवं प्रक्रम - 38
सेल-कार्बन अस्तर युक्त लोहे का एक बॉक्स होता है। धारा प्रवाहित करने पर मध्य पर्त के ऐल्युमिनियम आयन ऊपरी पर्त की ओर गमन करते हैं तथा शुद्ध Al के रूप में कैथोड पर जाकर अपचयित हो जाते हैं और उतनी ही मात्रा में AI निचली परत (ऐनोड) से मध्य परत में आ जाते हैं और अशुद्धियाँ नीचे रह जाती हैं। इस विधि से 99.9% शुद्ध Al धातु प्राप्त होता है।

समीकरण- 2Al2O3 + 3C → 4Al + 3CO2
कैथोड पर- Al3+(l) + 3e → Al(l)
ऐनोड पर- C + O2 → CO + 2e

प्रश्न 6.
हलवा लोहा, पिटवाँ लोहा और इस्पात के गुणों की तुलना कीजिए।
उत्तर
ढलवाँ लोहा, पिटवाँ लोहा और इस्पात के गुणों की तुलना –
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प्रश्न 7.
निम्नलिखित धातु के दो अयस्कों के रासायनिक नाम व सूत्र लिखिए –
(1) ऐल्युमिनियम
(2) जिंक
(3) लोहा
(4) ताँबा
(5) चाँदी।
उत्तर
अयस्कों के नाम –
MP Board Class 12th Chemistry Solutions Chapter 6 तत्त्वों के निष्कर्षण के सिद्धान्त एवं प्रक्रम - 40

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प्रश्न 8.
ताँबे की नाइट्रिक अम्ल से होने वाली चार विभिन्न रासायनिक अभिक्रिया समीकरण सहित लिखिए।
उत्तर
ताँबे पर नाइट्रिक अम्ल की अभिक्रिया –
(i) तनु और ठण्डे HNO3 के साथ नाइट्रस ऑक्साइड बनाता है।
4Cu + 10HNO3 → 4Cu(NO3)2 + 5H2O+N2O

(ii) तनु और गर्म HNO3 के साथ नाइट्रिक ऑक्साइड बनाता है।
3Cu + 8HNO3 → 3Cu(NO3)2 + 4H20+ 2NO

(iii) सान्द्र और ठण्डे HNO3 के साथ नाइट्रोजन ऑक्साइड बनाता है।
Cu + 4HNO3 → Cu(NO3)2 + 2NO2+2H2O

(iv) सान्द्र और गर्म HNOJ के साथ नाइट्रोजन गैस बनती है।
5Cu+12HNO3 → 5Cu(NO3)2 + 6H2O + N2

प्रश्न 9.
बॉक्साइट से ऐल्युमिनियम के निष्कर्षण हॉल की विधि की रासायनिक समीकरण लिखिए।
उत्तर
हॉल की विधि की रासायनिक समीकरण इस प्रकार है –
MP Board Class 12th Chemistry Solutions Chapter 6 तत्त्वों के निष्कर्षण के सिद्धान्त एवं प्रक्रम - 41

प्रश्न 10.
कॉपर की प्रमुख मिश्र धातु, उनके संघटन एवं उपयोग लिखिए।
उत्तर
कॉपर की प्रमुख मिश्र धातु संघटन एवं उपयोग –
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प्रश्न 11.
Al2O3 से Al के निष्कर्षण में विद्युत् परिपथ के समानान्तर क्रम में बल्ब लगाया जाता है। कारण समझाइए।
उत्तर-ऐल्युमिना सें A1 धातु का निष्कर्षण करते समय विद्युत् परिपथ के समानान्तर क्रम में बल्ब लगा दिया जाता है। इसका कारण यह है कि विद्युत्-अपघटन से जब ऐल्युमिना समाप्त हो जाता है तो विद्युत् प्रतिरोध बढ़ जाता है जिससे विद्युत् धारा बल्ब में से प्रवाहित होने लगती है और बल्ब जलने लगता है बल्ब के जलने पर ऐल्युमिना की और मात्रा मिला देते हैं, जिससे विद्युत्-अपघटन का प्रक्रम लगातार चलते रहता है।

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प्रश्न 12.
बॉक्साइट के शोधन की बेयर विधि को समीकरण सहित लिखिए।
उत्तर
बेयर की विधि (Baeyer’s Process)—यदि बॉक्साइट में Fe2O3 अशुद्धि की मात्रा अधिक हो तो उसका शुद्धिकरण बेयर विधि से किया जाता है। इसमें बॉक्साइट अयस्क को पीसकर NaOH विलयन के साथ 80 वायुमण्डलीय दाब तथा 130°C ताप पर एक ऑटोक्लेव भट्टी में गर्म करते हैं, जिससे बॉक्साइट विलेय होकर सोडियम मेटा ऐल्युमिनेट (NaAlO2) में परिवर्तित हो जाता है तथा अशुद्धियाँ (Fe2O3) अविलेय रहती हैं जो छानकर अलग कर दी जाती हैं।
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प्राप्त सोडियम मेटा ऐल्युमिनेट (NaAlO2) विलयन को जल के साथ तनु करने पर Al(OH)3 का अवक्षेप प्राप्त होता है। इसमें ताजा AI(OH)3 की कुछ मात्रा मिला दी जाती है जो अवक्षेप देने में सहायता करती है, इसे सीडिंग (Seeding) कहते हैं।

NaAlO2 + 2H2O → Al(OH)3 + NaOH

Al(OH)3 को छानकर, धोकर सुखाने के पश्चात् गर्म करने पर शुद्ध Al2O3 प्राप्त होता है।
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प्रश्न 13.
कॉपर पायराइटीज से स्वअपचयन विधि द्वारा शुद्ध कॉपर प्राप्त करने का समीकरण दीजिए।
उत्तर
प्रगलन से प्राप्त द्रवित मैट को बेसेमर परिवर्तक में लेकर रेत और वायु को ट्वीयर के द्वारा पिघले मैट में प्रवाहित कराने पर मैट में उपस्थित FeS, FeO में बदल जाता है जो SiO2 से क्रिया करके धातुमल (FeSiO3) बना लेता है और Cu2S का कुछ भाग Cu2O में ऑक्सीकृत हो जाता है –

2FeS +3O2 → 2FeO + 2SO2
FeO + SiO2 → FeSiO3
2Cu2S+3O2 → 2Cu2O + 2SO2

जो बचे हुए Cu2S से क्रिया कर धात्विक कॉपर में अपचयित हो जाता है इसे स्वअपचयन कहते हैं।

2Cu2O + Cu2S → 6Cu+SO2

प्रश्न 14.
लोहा कितने प्रकार का होता है ? प्रत्येक के नाम और दो-दो विशेषताएँ लिखिए। उत्तर-लोहे के प्रकार व विशेषताएँ –

  • ढलवाँ लोहा – (i) इसमें C की मात्रा 2:2 -4.5% होती है।
    (ii) आघात करने पर भंगुर प्रकृति का होता है।
  • पिटवाँ लोहा – (i) इसमें C की मात्रा 0.10 – 0.25% होती है।
    (ii) आघात करने पर फैलता है।
  • इस्पात – (i) इसमें C की मात्रा 0-25 से 2% होती है।
    (ii) यह आघातवर्धनीय एवं भंगुर होता है।

प्रश्न 15.
बॉक्साइट अयस्क का शोधन किस विधि से किया जाता है, जबकि उसमें सिलिका की मात्रा अधिक होती है ? इस विधि का वर्णन कीजिए।
उत्तर
सर्पक विधि – इस विधि में सिलिकायुक्त बॉक्साइट का शोधन किया जाता है। बारीक पीसे बॉक्साइट अयस्कों को कोक के साथ मिलाकर नाइट्रोजन की धारा में 1800°C तक गर्म किया जाता है, जिससे एल्युमिनियम नाइट्राइड बनता है तथा वाष्पशील सिलिकॉन के रूप में सिलिका से पृथक् हो जाता है। AlN का जल-अपघटन करके AI(OH)3 बना लेते हैं, जिसके निस्तापन द्वारा शुद्ध Al2O3 प्राप्त होता है।
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तत्त्वों के निष्कर्षण के सिद्धान्त एवं प्रक्रम दीर्घ उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 1.
फोटोग्राफी पर संक्षिप्त टिप्पणी लिखिए।
उत्तर
फोटोग्राफी में सिल्वर हैलाइडों (AgX) के अत्यन्त प्रकाश सुग्राहिता का उपयोग करके वस्तुओं के स्थायी चित्र प्राप्त किये जाते हैं। इसे निम्न पदों में समझा जा सकता है –

(1) प्लेट या फिल्म बनाना-फोटोग्राफिक प्लेट या (फोटोरील) AgBr का जिलेटिन में इमल्सन होता है, जो कि प्रकाश में बैंगनी व नीली किरणों के प्रति विशेष सुग्राही होता है। इसे और सुग्राही बनाने हेतु कुछ विशेष रंजक मिला दिये जाते हैं। इसे निम्नांकित प्रकार से बनाया जाता है –

NH4Br + AgNO3 → AgBr↓ + + NH4NO3

(2) चित्र लेना (Exposure) कैमरे के लेंस को वस्तु पर केन्द्रित करके प्रकाश को कुछ क्षण के लिए प्लेट या फिल्म में आने देते हैं। इसके कारण AgBr के उपस्थित होने से वस्तु का उल्टा प्रतिबिम्ब बन जाता है।

(3) डेवलपमेण्ट (Development)-डेवलपर क्विनोल, पाइरोगैलाल, हाइड्रोक्विनोन या एमिडाल का क्षारीय घोल होता है, जो कि AgBr के Ag में अपचयन होने वाली क्रिया को पूर्ण कर देता है। इस प्रक्रिया में काला भाग सफेद व सफेद भाग काला हो जाता है तथा उल्टा चित्र प्राप्त होता है, जिसे निगेटिव कहते हैं।

C6H4 (OH)2 + 2AgBr → C6H4O2 + 2Ag↓ + 2HBr

(4) स्थिरीकरण (Fixation) सोडियम थायोसल्फेट (हाइपो विलयन) का उपयोग निगेटिव के स्थिरीकरण हेतु किया जाता है। अप्रयुक्त AgBr हाइपो में घुलकर अलग हो जाता है।

AgBr + Na2S2O3 → NaAgS2O3 + NaBr
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(5) प्रिंटिंग (Printing)-P.O.P. (Printing out paper) या ब्रोमाइड पेपर पर निगेटिव के द्वारा प्रकाश डालकर कुछ समय के लिए रख दिया जाता है जिससे पेपर पर वस्तु का सही चित्र अंकित हो जाता है। प्रिंटिंग पेपर पर AgCl, जिलेटिन व सिल्वर सिट्रेट का लेप लगा होता है।

(6) रंग-संस्करण (Toning)—काले-सफेद चित्र को चमकीला बनाने हेतु ऑरिक क्लोराइड (AuCl3) या प्लैटिनम क्लोराइड का विलयन उपयोग किया जाता है, जिसे (Toning) कहते हैं।

AuCl3 + 3Ag → 3AgCl + Au

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प्रश्न 2.
फफोलेदार ताँबा क्या है ? इसके शोधन हेतु विद्युत्-अपघटन विधि का नामांकित चित्र सहित वर्णन कीजिए।
उत्तर
बेसेमर परिवर्तक से प्राप्त पिघली हुई कॉपर धातु में बहुत-सी SO2, गैस घुली रहती है, जिसे ठंडा करने: पर SO2 गैस बुलबुलों के रूप में निकलती है। इस प्रकार कॉपर धातु की सतह पर छोटे-छोटे छिद्र हो जाते हैं, यही फफोलेदार ताँबा कहलाता है जिसमें 98% शुद्ध कॉपर प्राप्त होता है।
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कॉपर धातु शोधन की विद्युत्-अपघटन विधि – अति शुद्ध धातु प्राप्त करने के लिए बड़ी टंकी में 15% CusO4 और 5 % H2SO4 विलयन भरकर तथा अशुद्ध Cu धातु की मोटी प्लेटों का एनोड और शुद्ध Cu की पतली प्लेटों का कैथोड लगाकर विद्युत्-अपघटन करते हैं। विद्युत् धारा प्रवाहित करने पर एनोड का अशुद्ध ताँबा धुलकर विलयन में चला जाता है और विलयन में से शुद्ध कॉपर कैथोड पर जमा हो जाता है। एनोड के नीचे अशुद्धियाँ, जिनमें Au, Ag जैसी मूल्यवान धातुएँ भी होती है, एकत्र हो जाती है इन्हें एनोड कीचड़ कहते हैं। इस प्रकार 99.99 % शुद्ध धातु प्राप्त होती है।

प्रश्न 3.
इस्पात निर्माण की सीमेन-मार्टिन विधि का सचित्र वर्णन कीजिए। अथवा, इस्पात को ढलवाँ लोहा से किस प्रकार खुले तल की भट्ठी विधि से प्राप्त किया जाता है ?
उत्तर
सीमेन और मार्टिन की खुले तल वाली भट्ठी से (By Seimen and Martin’s Open Hearth Furnace)—यह इस्पात बनाने की आधुनिक विधि है। इस विधि में अशुद्धियों का ऑक्सीकरण वायु द्वारा न करके फेरिक ऑक्साइड (हेमेटाइट) द्वारा किया जाता है। इस
विधि में एक विशेष प्रकार की भट्ठी होती है, जिसका तल उथला और खुला रहता है। इसके भीतरी भाग में अम्लीय विधि के लिये सिलिका तथा क्षारीय विधि के लिये चूना और मैग्नेशिया का अस्तर लगा रहता है। इस भट्ठी को प्रोड्यूसर गैस (Producer gas) या वायु अंगार गैस द्वारा गर्म करते हैं चूल्हे में आने के पहले प्रोड्यूसर गैस को काफी गर्म कर लेते हैं, वह भट्ठी में जलकर लगभग 1800°C ताप देता है। भट्ठी को गर्म करने के बाद उसके उथले तल पर 70-80% ढलवाँ लोहा, 20-30% लोहे की छीलन (Scrap iron) तथा हेमेटाइट (Fe2O3) डाल देते हैं । ढलवाँ लोहे में उपस्थित कार्बन ऑक्सीकृत होकर CO बनाता है तथा बाहर निकल जाता है। अन्य अशुद्धियाँ जैसे-सल्फर, फॉस्फोरस, सिलिकॉन और मैंगनीज, हेमेटाइट (Fe2O3) द्वारा ऑक्सीकृत हो जाती है।
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Fe2O3 + 3C → 2Fe + 3CO
2Fe2O3 + 3S → 4Fe + 3SO2
10Fe2O3 + 3P4 → 20Fe + 6P2O5
2Fe2O3 + 3Si → 4Fe + 3SiO2
Fe2O3 + 3Mn → 2Fe + 3MnO

इन क्रियाओं से बनने वाली CO और SO2 गैसें बाहर निकल जाती हैं। शेष अशुद्धियाँ भट्ठी के अस्तर से क्रिया करके धातुमल (Slag) बना लेती हैं।
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थोड़ी-थोड़ी देर बाद भट्ठी से इस्पात की कुछ मात्रा निकालकर उसमें कार्बन की मात्रा ज्ञात करते रहते हैं। जब इस्पात में कार्बन की उपयुक्त मात्रा रह जाती है, तो इस्पात को भट्ठी से बाहर निकाल लिया जाता है। आवश्यक हो तो कार्बन स्पीजील के रूप में मिला दिया जाता है।

प्रश्न 4.
सिल्वर के दो मुख्य अयस्कों के नाम एवं सूत्र लिखिए तथा उसमें से किसी भी एक अयस्कों से शुद्ध धातु प्राप्त करने की विधि का समीकरण सहित वर्णन कीजिए।
अथवा, सिल्वर के दो अयस्कों के नाम और सूत्र लिखिए। चाँदी का निष्कर्षण सायनाइड विधि द्वारा किस प्रकार करते हैं ?
उत्तर
चाँदी प्रकृति में मुक्त एवं संयुक्त दोनों रूपों में पायी जाती है। संयुक्त अवस्था में यह प्रायः निम्नलिखित रूपों में पायी जाती है –
सल्फाइड – अर्जेन्टाइट या सिल्वर ग्लास (Ag2S), सिल्वर कॉपर ग्लास (Ag2S.Cu2S) आदि।
हैलाइड – हार्न सिल्वर (AgCl), ब्रोमाइड (AgBr) आदि। मुक्त अवस्था में यह सोने व ताँबा के साथ मिश्रित रहती है।

सायनाइड विधि – इसे मैक आर्थर फारेस्ट विधि भी कहते हैं । यह सिल्वर ग्लांस से सिल्वर प्राप्त करने की उपयुक्त विधि है। सान्द्रित सल्फाइड अयस्क को सोडियम सायनाइड के जलीय विलयन के साथ खूब हिलाकर मिलाया जाता है। इस प्रक्रिया में विलयन में वायु भी प्रवाहित की जाती है। सोडियम सायनाइड के आधिक्य में संकर सोडियम अर्जेण्टो सायनाइड (विलेय) बनता है।
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विलयन में Zn चूर्ण मिलाने पर चाँदी अवक्षेपित हो जाती है।

2Na [Ag(CN)2] + Zn → Na2[Zn(CN)4] + 2Ag↓

गलन मिश्रण के साथ अवक्षेप को गलाने पर चमकदार चाँदी प्राप्त हो जाती है।
उपयोग – (i) सस्ती धातुओं की वस्तुओं पर चाँदी का लेपन करने में।
(ii) कलिल सिल्वर का उपयोग आँख की दवाई बनाने में होता है।

प्रश्न 5.
निम्न की मिश्र धातुओं के संघटन, उपयोग का वर्णन कीजिए –
(1) ऐल्युमिनियम, (2) ताँबा, (3) लोहा।।
उत्तर
मिश्र धातुओं के संघटन तथा उपयोग –
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प्रश्न 6.
कॉपर के प्रमुख अयस्क कौन-से हैं ? कॉपर पायराइट से कॉपर धातु के निष्कर्षण का वर्णन कीजिए।
उत्तर
कॉपर के प्रमुख अयस्क-(i) क्यूप्राइट या रूबी कॉपर Cu2O, (ii) कॉपर पायराइट CuFeS2, या CuS.Fe2S3, (iii) मैलेकाइट CuCO3.Cu(OH)2, (iv) ऐज्युराइट 2CuCo3.Cu(OH)2.

पायराइट अयस्क से कॉपर का निष्कर्षण निम्न पदों में किया जाता है –

1. सान्द्रण (Concentration)-अयस्क को महीन पीसकर उसका सान्द्रण फेन उत्प्लावन विधि (Froth floatation process) द्वारा करते हैं।

2. भर्जन क्रिया (Roasting)—सान्द्रित अयस्क को एक उथले तल की परावर्तनी भट्ठी (Reverberatory furnace) में रखकर कम ताप पर (जिससे अयस्क पिघलने न पाए) वायु की धारा में गर्म करते हैं। पायराइट अयस्क का कॉपर, कॉपर सल्फाइड और आयरन सल्फाइड के मिश्रण में परिवर्तित हो जाता है।

2CuFeS2 + O2 → Cu2S + 2Fes + SO2

पायराइट से प्राप्त कॉपर सल्फाइड और आयरन सल्फाइड का कुछ भाग उनके ऑक्साइडों में परिणित हो जाता है।

2FeS + 3O2 → 2FeO + 2SO2
2Cu2S + 3O2 → 2Cu2O + 2SO2

3. प्रमलन (Smelting)-भर्जन क्रिया (Roasting) से प्राप्त अयस्क में रेत और कोक मिलाकर वात्याभट्ठी (Blast furnace) में प्रगलित (विगलित) करते हैं । भट्ठी के ऊपरी भाग में अयस्क डालने के लिए द्वार होता है तथा व्यर्थ गैसों के निकलने के लिए ऊपरी कोने में रास्ता बना होता है। । भट्ठी में उच्च ताप पर भर्जन से प्राप्त Cuho और Fes संयोग करके आयरन ऑक्साइड बनाते हैं।

Cu2O + FeS → Cu2S + Feo

आयरन ऑक्साइड सिलिका (रेत) गालक (flux) से मिलकर आयरन सिलिकेट, धातुमल (Slag) बनाता

FeO + SiO2 → FeSiO3 (धातुमल)

वात्या-भट्ठी के ऊपर की सतह हल्के धातुमल की होती है तथा नीचे की सतह में क्यूप्रस सल्फाइड तथा थोड़ा फेरस सल्फाइड रहता है। इसे मैट (Matte) कहते हैं। ऊपरी सतह पर स्थित हल्की धातुमल बाहर निकाल दी जाती है।

4. बेसेमरीकरण (Bessemerization) – प्रगलन की क्रिया से प्राप्त द्रवित मैट को थोड़ा सिलिका (रेत) मिलाकर बेसेमर परिवर्तक में भर देते हैं। इस भट्ठी के भीतरी सतह पर चूने या मैग्नीशियम ऑक्साइड (MgO) का अस्तर लगा होता है। इसके बाजू में काफी ऊँचाई पर ट्वीयर (tuyer) द्वारा हवा भेजी जाती है।

मैट में उपस्थित FeS, FeO में परिवर्तित हो जाता है। Feo रेत से क्रिया करके धातुमल FeSiO3, बनाता है। यह धातुमल बेसेमर परिवर्तक की ऊपरी सतह पर तैरने लगता है, इसे बाहर निकाल लिया जाता है।
पिघली धातु dirty

2FeS + 3O2 → 2FeO + 2SO2
FeO + SiO2 → FeSiO3 (धातुमल)

क्यूप्रस सल्फाइड का कुछ भाग ऑक्सीकृत होकर क्यूप्रस ऑक्साइड बनाता है, जो बचे हुए Cu2s से क्रिया करके Cu देता है।
2Cu2S + 3O2→ 2Cu2O + 2SO2
Cu2S + 2Cu2O→ 6Cu+ SO2

बेसेमर परिवर्तक को उल्टा कर ताँबे को निकाल लिया जाता है। इस प्रकार प्राप्त पिघली हुई धातु में बहुत-सी SO2 गैस रहती है। जब धातु को ठण्डा किया जाता है तो SO2 गैस बुलबुलों के रूप में निकलती है। इस प्रकार कॉपर धातु की सतह पर छोटे-छोटे छिद्र हो जाते हैं और यह फफोलेदार ताँबा (Blister copper) कहलाता है। इसमें 98% शुद्ध कॉपर होता है। .
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5.शोधन-दो विधियों द्वारा शोधन किया जाता है –
(a) विद्युत्-अपघटनी विधि। (b) प्रदण्डन विधि।
विद्युत्-अपघटनी विधि-अति शुद्ध धातु प्राप्त करने के लिए एक बड़ी टंकी में 15% CuSO4 और 5% H2SO4 विलयन भरकर तथा अशुद्ध Cu धातु की मोटी प्लेटों का ऐनोड और शुद्ध Cu धातु की पतली प्लेटों का कैथोड लगाकर विद्युत्-अपघटन करते हैं। कैथोड पर 99.9% शुद्ध ताँबा प्राप्त होता है।

प्रश्न 7.
जिंक के निष्कर्षण की ऊर्ध्वाधर रिटॉर्ट विधि का नामांकित चित्र बनाइये।
अथवा, जस्ते के प्रमुख अयस्क कौन-कौन से हैं ? किसी अयस्क से जिंक धातु के निष्कर्षण की आधुनिक विधि का वर्णन कीजिए।
उत्तर
जस्ते के अयस्क – (i) जिंक ब्लैण्ड ZnS, (ii) कैलामाइन ZnCO3, (iii) विलैमाइट ZnSiO4.
धातु निष्कर्षण की आधुनिक विधि-जिंक ब्लैण्ड तथा कैलामाइन अयस्कों से प्रायः धातु का निष्कर्षण किया जाता है।
1. सान्द्रण-जिंक ब्लैण्ड अयस्क का सान्द्रण झाग उत्प्लावन विधि से करते हैं।
2. भर्जन-सान्द्रित अयस्क को वायु की अधिकता में भर्जित करने से अयस्क ZnO में परिवर्तित हो जाता है। कुछ ZnS, ZnSO4 में परिवर्तित होते हैं, जो ZnO में अपघटित हो जाता है।

2ZnS + 3O2 → 2ZnO + 2SO2(g)
ZnS + 2O2 → ZnSO4
2ZnSo4 → 2ZnO + 2SO2(g) + O2(g)

कैलामाइन अयस्क केवल निस्तापन से ही ZnO बनाता है।
ZnCO3 → ZnO + CO2(g)

3. अपचयन- भर्जित या निस्तापित अयस्क को कोक से साथ ऊर्ध्वाधर रिटॉर्ट में रखकर प्रोड्यूसर गैस द्वारा 140°C तक गर्म किया जाता है, जिससे ZnO का Zn में अपचयन हो जाता है। प्राप्त Zn वाष्प को संघनित्र में एकत्रित करते हैं। इस प्रकार प्राप्त Zn को स्पेल्टर कहते हैं। इसमें Pb, As, Fe, Si, Cd और C की अशुद्धियाँ होती हैं और शेष 97.8% Zn होता है।
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4. शोधन-अतिशुद्ध Zn विद्युत्-अपघटनी विधि द्वारा प्राप्त किया जाता है। इसमें अम्लीय ZnSO4 विलयन विद्युत्-अपघटन का कार्य करता है। प्राप्त अशुद्ध Zn ऐनोड तथा शुद्ध Zn छड़ कैथोड का कार्य करता है। विद्युत् धारा प्रवाहित करने पर शुद्ध Zn कैथोड पर एकत्रित होता है। यह लगभग 99.98% शुद्ध होता है।

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प्रश्न 8.
क्या होता है जब (केवल समीकरण दीजिए) –
(i) नीले थोथे को गर्म किया जाता है।
(ii) सिल्वर नाइट्रेट के विलयन में अमोनियम हाइड्रॉक्साइड मिलाया जाता है।
(iii) स्टैनस क्लोराइड के विलयन में मरक्यूरिक क्लोराइड मिलाया जाता है।
(iv) ताँबा गर्म व सान्द्र नाइट्रिक अम्ल से क्रिया करता है।
(v) मरक्यूरिक क्लोराइड की KI से अभिक्रिया होती है।
(vi) मरक्यूरिक क्लोराइड पोटैशियम आयोडाइड से किया करता है।
(vii) सिल्वर नाइट्रेट हाइड्रोक्लोरिक अम्ल से क्रिया करता है।
(viii) सिल्वर नाइट्रेट को गर्म किया जाता है।

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प्रश्न 9.
शुद्ध ऐल्युमिनियम धातु प्राप्त करने के विद्युत्-अपघटन विधि का नामांकित चित्र सहित वर्णन कीजिए।
उत्तर
Al धातु प्राप्त करने की विद्युत्-अपघटन विधि-उपयुक्त विधि से प्राप्त शुद्ध Al2O3, का गलनांक 2050°C होता है अत: इसमें थोड़ा-सा क्रायोलाइट (Na3AlF6) तथा कैल्सियम फ्लोराइड (CaF2) के संगलित मिश्रण घोल दिया जाता है जिससे (Al2O3) का गलनांक कम हो जाता है तथा विद्युत् चालकता बढ़ जाती है।

हॉल एवं हैराल्ट द्वारा विकसित विधि में एक खुली लोहे की टंकी जिसके भीतर कार्बन का अस्तर लगा होता है जो कैथोड का कार्य करता है कई कार्बन की छड़ों को विद्युत् अपघटन में लटका दिया जाता है जो एनोड का कार्य करते हैं। विद्युत् धारा प्रवाहित करने पर क्रायोलाइट (Na3AlF6) पिघलकर अपने में (Al2O3) को घोल लेता है विद्युत् धारा के प्रवाह से उत्पन्न ताप 900-950°C पर मिश्रण में घुले हुए Al2O3, Al और ऑक्सीजन में अपघटित हो जाता है। जिसमें Al कैथोड पर तथा O2 एनोड पर मुक्त हो जाता है।
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क्रायोलाइट (Na3AlF6) में उपस्थित फ्लोराइड निम्न प्रकार से आयनित होते हैं


इस प्रकार, ऐल्युमिनियम आयन (Al3+) कैथोड पर AI धातु के रूप में और F आयन एनोड पर फ्लोरीन के रूप में मुक्त होते हैं। एनोड में मुक्त F ,Al2O3 से क्रिया करके AlF3 बनाता है।

इस प्रकार वास्तव में ऐल्युमिना का ही विद्युत्-अपघटन होता है और इस प्रकार एनोड पर मुक्त O2 का कुछ भाग कार्बन एनोड से क्रिया करके CO बनाती है। जिसके कारण कार्बन एनोड को बार-बार बदलना पड़ता है जब Al2O3 की मात्रा एक निश्चित स्तर से गिर जाती है तो सेल का प्रतिरोध बढ़ जाता है, तो समान्तर क्रम में जुड़ा हुआ बल्ब जलने लगता है उस समय Al2O3 की और अधिक मात्रा मिला दी जाती है। कैथोड पर मुक्त हुआ Al पिछली अवस्था में टंकी के तली से एकत्र होता है जिसे निकास द्वार से समय-समय पर निकाल लेते हैं। पिघले हुए क्रायोलाइट और एल्युमिना के मिश्रण के ऊपर कोक का चूर्ण डाल देते हैं जो उसे ठण्डा नहीं होने देता तथा इससे आँखों को चमक भी कम लगती है। इस विधि से 99% शुद्ध Al धातु प्राप्त होता है।

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पृष्ठ रसायन NCERT पाठ्यनिहित प्रश्नोत्तर

प्रश्न 1.
जलीय विलयनों के वैद्युत अपघटन में प्रायः प्लैटिनम एवं पैलेडियम जैसे पदार्थ क्यों प्रयुक्त किये जाते हैं ?
उत्तर
प्लैटिनम एवं पैलेडियम जैसी धातु कम क्रियाशील धातु हैं, इसलिए सामान्यत: ये क्रिया नहीं करती उत्पाद के साथ जब जलीय विलयनों का वैद्युत अपघटन किया जाता है।

प्रश्न 2.
ताप बढ़ने पर भौतिक अधिशोषण क्यों घटता है ?
उत्तर
भैतिक अधिशोषण एक ऊष्मा अपक्षेपी प्रक्रम है तथा यह उत्क्रमणीय भी ठोस + गैस ⇌ अधिशोषण + ऊष्मा भौतिक अधिशोषण कम ताप पर सम्पन्न होता है तथा तापमान बढ़ाने पर यह ली-चेटलियर नियम के अनुसार कम होता है।

प्रश्न 3.
अपने क्रिस्टलीय रूपों की तुलना में चूर्णित पदार्थ अधिक प्रभावी अधिशोषक क्यों होते हैं ?
उत्तर
अधिशोषक के पृष्ठीय क्षेत्रफल बढ़ने के साथ अधिशोषण बढ़ता जाता है। अत: चूर्ण अवस्था में या छिद्र युक्त अवस्था में धातुओं का पृष्ठीय क्षेत्रफल अधिक होता है। इसलिए इन अवस्थाओं में अधिशोषण अधिक होता है।

प्रश्न 4.
अमोनिया प्राप्त करने के लिए हॉबर प्रक्रम में CO को हटाना क्यों आवश्यक है ?
उत्तर
हॉबर प्रक्रम से अमोनिया बनाने के लिए ठोस उत्प्रेरक का प्रयोग होता है। उत्पन्न CO को हटाना इसलिए आवश्यक है क्योंकि CO लोहे से क्रिया कर Fe(CO)5 बनाती है जो कक्ष ताप पर द्रव अवस्था में होता है तथा NH3 उत्पादन में बाधा उत्पन्न करता है क्योंकि उच्च ताप पर CO तथा H2 क्रिया करते हैं जिससे उत्पादन घटता है।

प्रश्न 5.
एस्टर का जल अपघटन प्रारंभ में धीमा एवं कुछ समय पश्चात् तीव्र क्यों हो जाता है ?
उत्तर
एस्टर के जलयोजन के दौरान एक उत्पाद कार्बनिक अम्ल बनता है जो उत्प्रेरक की भाँति व्यवहार करता है तथा अभिक्रिया को सक्रिय बनाता है। अतः एस्टर का जलयोजन आरंभ में मंद व बाद में तीव्र हो जाता है।

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प्रश्न 6.
उत्प्रेरण के प्रक्रम में विअधिशोषण की क्या भूमिका है ?
उत्तर
ठोस उत्प्रेरक द्वारा गैसीय अभिकारकों को अधिशोषित करने के बाद मध्य अवस्था ग्रहण करता है। इसके बाद विअधिशोषण होता है जिसमें अणु अलग होते हैं । अतः ठोस उत्प्रेरकों के पृष्ठ बार-बार उपलब्ध होते रहते हैं।

प्रश्न 7.
आप हार्डी शुल्जे नियम में संशोधन के लिए क्या सुझाव दे सकते हैं ?
उत्तर
हार्डी शुल्जे के नियम को निम्न रूप से वर्णित किया जा सकता है। स्कंदन या अवक्षेपण क्षमता स्कंदन या अवक्षेपण मान के व्युत्क्रमानुपाती होता है। दो वैद्युत अपघट्यों की स्कंदन क्षमता की तुलना निम्न रूप से की जाती है –
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अत: AlCl3, 559 गुना अधिक स्कंदन क्षमता रखता है NaCl की तुलना में।

प्रश्न 8.
अवक्षेप का मात्रात्मक आकलन करने से पूर्व उसे जल से धोना आवश्यक क्यों है ?
उत्तर
गुणात्मक मान ज्ञात करने के लिए यह आवश्यक है कि अवयवों को पहले धो लेना चाहिए ताकि अशुद्धीय कोलॉइड उत्पन्न होने पर अवक्षेप उत्पन्न न करे। हम जानते हैं कि छानक पेपर से कोलॉइड आर-पार हो जाते हैं।

पृष्ठ रसायन NCERT पाठ्य-पुस्तक प्रश्नोत्तर

प्रश्न 1.
अधिशोषण एवं अवशोषण शब्दों (पदों) के तात्पर्य में विभेद कीजिए। प्रत्येक का एक उदाहरण दीजिए।
उत्तर
MP Board Class 12th Chemistry Solutions Chapter 5 पृष्ठ रसायन - 2

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प्रश्न 2.
भौतिक अधिशोषण एवं रासायनिक अधिशोषण में क्या अन्तर है?
उत्तर-
भौतिक अधिशोषण- भौतिक अधिशोषण में अधिशोषित पदार्थ के अणु अधिशोषक की सतह से दुर्बल आकर्षण बल द्वारा बँधे रहते हैं।
रासायनिक अधिशोषण – रासायनिक अधिशोषण में अधिशोषित पदार्थ अधिशोषक से सामान्य रासायनिक बन्धों द्वारा जुड़े रहते हैं।
भौतिक अधिशोषण और रासायनिक अधिशोषण में अन्तर –
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प्रश्न 3.
कारण बताइए कि सूक्ष्म विभाजित पदार्थ अधिक प्रभावी अधिशोषक क्यों होता है ?
उत्तर
चूर्ण अवस्था में पदार्थ का पृष्ठीय क्षेत्रफल अधिक होता है। पृष्ठीय क्षेत्रफल जितना अधिक होगा अधिशोषित गैस का आयतन भी उतना अधिक होगा।
MP Board Class 12th Chemistry Solutions Chapter 5 पृष्ठ रसायन - 4

प्रश्न 4.
किसी ठोस पर गैस के अधिशोषण को प्रभावित करने वाले कारक कौन-से हैं ?
उत्तर
किसी ठोस या गैस के अधिशोषण को प्रभावित करने वाले कारक इस प्रकार है –

  • गैस की प्रकृति
  • अधिशोषक का पृष्ठीय क्षेत्रफल
  • दाब
  • ताप
  • अधिशोषक की सक्रियता।

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प्रश्न 5.
अधिशोषण समतापी वक्र क्या है ? फ्रेण्डलिक अधिशोषण समतापी वक्र का वर्णन कीजिए।
उत्तर
अधिशोषक द्वारा अधिशोषित गैस की मात्रा में स्थिर ताप पर दाब के साथ परिवर्तन एक वक्र के माध्यम से व्यक्त किया जा सकता है, जिसे अधिशोषण समतापी वक्र कहते हैं। अधिशोषण समतापी वक्र दो प्रकार के होते हैं
(i) फ्रॉयन्डलिक समतापी वक्र,
(ii) लैंगमूर समतापी वक्र।

(i) फ्रॉयन्डलिक समतापी वक्र-फ्रॉयन्डलिक ने ठोस अधिशोषक के इकाई द्रव्यमान द्वारा एक निश्चित ताप पर अधिशोषित गैस की मात्रा तथा दाब के मध्य एक प्रयोगाश्रित संबंध दिया। इस संबंध को निम्न समीकरण द्वारा व्यक्त किया जा सकता है –
\(\frac{x}{m}\) = k.p1/n(n>a)………..(1)

जहाँ, x अधिशोषक के m द्रव्यमान द्वारा p दाब पर अधिशोषित गैस का द्रव्यमान है। k एवं n स्थिरांक हैं जो किसी निश्चित ताप पर अधिशोषक एवं गैस की प्रकृति पर निर्भर करते हैं।
ये वक्र इंगित करते हैं कि एक निश्चित दाब पर, ताप बढ़ाने से भौतिक अधिशोषण घटता है। समीकरण (1) का लघुगणक लेने पर

log\(\frac{x}{m}\) = = logk + \(\frac{1}{n}\) log p ………….(2)

जब log\(\frac{x}{m}\) को y-अक्ष तथा log p को x-अक्ष पर लेकर वक्र खींचते हैं, तो एक सीधी रेखा प्राप्त होती
है। यह फ्रॉयन्डलिक समतापी वक्र की वैधता को इंगित करती है।
ढाल = \(\frac{1}{n}\) = और y-अक्ष पर अन्त: खण्ड = log k
गुणक \(\frac{1}{n}\) का मान 0 एवं 1 के मध्य हो सकता है अतः समीकरण (2) दाब के सीमित विस्तार तक ही
लागू होती है।
(i) जब \(\frac{1}{n}\) =0,\(\frac{x}{m}\) = स्थिरांक, तब अधिशोषण दाब से स्वतंत्र होता है।
(ii) जब \(\frac{1}{n}\) =1 \(\frac{x}{m}\) = kp अर्थात , तब अधिशोषण में परिवर्तन दाब के अनुक्रमानुपाती होता है।

प्रश्न 6.
अधिशोषक के सक्रियण से आप क्या समझते हैं ? यह कैसे प्राप्त किया जाता है ?
उत्तर
अधिशोषक के सक्रियण का अर्थ है, अधिशोषक की अधिशोषण क्षमता। अतः अधिशोषक की सक्रियता को बढ़ाने के लिए निम्न क्रियाकलाप किये जाते हैं
(i) धात्विक अधिशोषक को यांत्रिक या रासायनिक विधि द्वारा खुरदरा करके।
(ii) अधिशोषक को छोटे टुकड़ों में तोड़कर।
(iii) कुछ अधिशोषकों की अधिशोषण क्षमता उच्च ताप पर गर्म करके बढ़ाई जा सकती है।

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प्रश्न 7.
विषमांगी उत्प्रेरण में अधिशोषण की क्या भूमिका है ?
उत्तर
सामान्यतः विषमांगी उत्प्रेरण में, अभिक्रिया गैसीय जबकि उत्प्रेरक ठोस अवस्था में होते हैं। अभिक्रियक अणुओं का ठोस उत्प्रेरक के पृष्ठ पर भौतिक या रासायनिक अधिशोषण द्वारा अधिशोषण हो जाता है। अभिक्रियत अणुओं की सान्द्रता बढ़ने से या ठोस उत्प्रेरक के पृष्ठ पर अभिक्रियक अणुओं में टूटकर सक्रिय स्पीशिज बनने से जो कि तीव्रता से अभिक्रिया करती है। अभिक्रिया की गति बढ़ जाती है। उत्पाद अणुओं का विशोषण हो जाता है और अब उत्प्रेरक सतह दोबारा अधिक अभिक्रियक अणुओं को अधिशोषित करने के लिए उपलब्ध हो जाती है। यह सिद्धान्त विषमांगी उत्प्रेरण का अधिशोषण कहलाता है।

प्रश्न 8.
अधिशोषण हमेशा ऊष्माक्षेपी क्यों होता है ?
उत्तर
अधिशोषण से अव्यवस्था कम होती है अर्थात् ΔS = + होता है। प्रक्रम को सम्पन्न करने के लिए ΔG का मान ऋणात्मक होना आवश्यक है। अतः समीकरण ΔG = ΔH – TΔS में ΔG तभी ऋणात्मक होगा, जब ΔH का मान ऋणात्मक होगा अर्थात् ऊष्माक्षेपी। अत: अधिशोषण प्रक्रम ऊष्माक्षेपी होता है।

‘प्रश्न 9.
कोलॉइडी विलयनों को परिक्षिप्त प्रावस्था एवं परिक्षेपण माध्यम की भौतिक अवस्थाओं के आधार पर कैसे वर्गीकृत किया जाता है ?
उत्तर
परिक्षिप्त प्रावस्था तथा परिक्षेपण माध्यम की भौतिक अवस्थाओं (ठोस, द्रव अथवा गैस) के आधार पर निम्नलिखित आठ प्रकार के कोलॉइडी निकाय बनते हैं।
3 परिक्षिप्त प्रावस्था x 3 परिक्षेपण माध्यम -1 = 8 कोलॉइड
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प्रश्न 10.
ठोसों द्वारा गैसों के अधिशोषण पर दाब एवं ताप के प्रभाव की विवेचना कीजिए।
उत्तर
अधिशोष्य गैस का दाब – साम्यावस्था पर अधिशोषक पर अधिशोष्य गैस के दाब का मान बढ़ाने से अधिशोषण बढ़ जाता है। कम ताप पर गैस में वृद्धि करने से अधिशोषण की मात्रा तेजी से बढ़ती है, किन्तु उच्च दाब पर अधिशोषण एक अधिकतम मान प्राप्त कर लेता है।
ताप (Temperature) – अधिशोषण एक ऊष्माक्षेपी प्रक्रम है। अतः लीशातेलिए सिद्धान्त से, ताप बढ़ाने पर अधिशोषण कम हो जाता है।

प्रश्न 11.
द्रवरागी एवं द्रवविरागी सॉल क्या होते हैं ? प्रत्येक का एक-एक उदाहरण दीजिए। द्रवविरोधी सॉल आसानी से स्कंदित क्यों हो जाते हैं ?
उत्तर
द्रवरागी कोलॉइड (द्रव से स्नेह करने वाला) उन कोलॉइडी सॉल को जिन्हें परिक्षिप्त प्रावस्था तथा उचित परिक्षेपण माध्यम को सम्पर्क में लाने मात्र से प्राप्त किया जाता है, द्रवरागी (द्रव-स्नेही) कोलॉइडी सॉल कहते हैं । यह स्थायी होते हैं। इन्हें उत्क्रमणीय कोलॉइडी सॉल भी कहते हैं, क्योंकि कोलॉइडी विलयन में से परिक्षेपण माध्यम को भौतिक विधियों जैसे वाष्पीकरण द्वारा अलग किया जा सकता है।
उदाहरण-गोंद, जिलेटिन, स्टार्च, रबड़ आदि।

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द्रवविरागी कोलॉइड (द्रव से घृणा करने वाला) इस प्रकार के सॉल केवल पदार्थों (परिक्षिप्त प्रावस्था) को परिक्षेपण माध्यम में मिश्रित करने से नहीं बनते है। ये स्थायी नहीं होते है। ऐसे सॉल को वैद्युत-अपघट्य की थोड़ी सी मात्रा मिलाकर, गर्म करके या हिलाकर आसानी से अवक्षेपित या स्कंदित किया जा सकता है। द्रवविरागी सॉल के परिरक्षण के लिए स्थायी कारकों की आवश्यकता होती है। ।
उदाहरण-गोल्ड सॉल, As2O3 सॉल, Fe(OH)3 सॉल आदि।

द्रवविरागी सॉल के स्कंदन का कारण-सॉल के कणों पर उपस्थित आवेश को हटाकर या आवेश को … उदासीन करके दवविरागी सॉल का स्कंदन या अवक्षेपण हो जाता है अर्थात् ये कण एक-दूसरे के समीप आकर पुंजित हो जाते हैं एवं गुरुत्व बल के कारण नीचे बैठ जाते हैं (दूसरे शब्दों में, स्कंदन या अवक्षेपण हो जाते हैं)। वैद्युत-अपघट्य की थोड़ी सी मात्रा मिलाकर ऐसा किया जाता है।

प्रश्न 12.
बहुअणुक एवं वृहदाणुक कोलॉइड में क्या अन्तर है ? प्रत्येक का एक-एक उदाहरण दीजिए। संगुणित या सहचारी कोलॉइड (Micelle) इन दोनों प्रकार के कोलॉइडों से कैसे भिन्न हैं ?
उत्तर
बहुआण्विक, वृहत् आण्विक एवं संगुणित कोलॉइड में अंतर
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प्रश्न 13.
एन्जाइम क्या होते हैं ? एन्जाइम उत्प्रेरण की क्रिया विधि को संक्षेप में लिखिए।
उत्तर
एन्जाइम, जीवित स्पीशीज में पाये जाने वाले नाइट्रोजन युक्त कार्बनिक संकुल यौगिक हैं। एन्जाइम, मानव शरीर में होने वाली बहुत-सी बायो रासायनिक अभिक्रियाओं को उत्प्रेरित करते हैं जैसे पाचन क्रिया। एन्जाइमों को इसी कारण जैव उत्प्रेरक (Bio-catalyst) भी कहा जाता है।
उदाहरणार्थ –
(i) केन सुगर (शर्करा) का व्युत्क्रमण, इन्वर्टेज के द्वारा उत्प्रेरित होता है।
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ग्लूकोज फ्रक्टोज एन्जाइम उत्प्रेरण की क्रियाविधि (Mechanism of enzyme catalysis)-एन्जाइम की सतह पर अभिलाक्षणिक आकृति युक्त विभिन्न कोटर या रिक्तियाँ उपस्थित होती हैं। अभिकारक के अणु (सब्सट्रेट) जिनकी आकृति इनकी पूरक होती हैं, वे इन रिक्तियों या कोटर में व्यवस्थित हो जाते हैं या फिट हो जाते हैं। यह उसी प्रकार से सम्पन्न होता है जैसे उपयुक्त चाबी, ताले में फिट हो जाती है। इस तरह सक्रिय एन्जाइम पदार्थ (सब्सट्रेट) संकुल बन जाता है जो कि बाद में उत्पाद में विघटित हो जाता है। इसमें निम्न पद होते हैं –

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प्रश्न 14.
कोलॉइडी को निम्न आधार पर कैसे वर्गीकृत किया गया है ?
(i) घटकों की भौतिक अवस्था
(ii) परिक्षिप्त प्रावस्था की प्रकृति
(iii) परिक्षिप्त प्रावस्था एवं परिक्षेपण माध्यम के मध्य अन्योन्य क्रिया।
उत्तर
कोलॉइड का वर्गीकरण (Classification of colloid)-कोलॉइड विलयन को निम्न आधारों पर वर्गीकृत किया जा सकता है –

  • परिक्षिप्त प्रावस्था व परिक्षेपण माध्यम की भौतिक अवस्था के आधार पर ।
  • परिक्षेपण माध्यम की प्रकृति के आधार पर।
  • प्रावस्थाओं की अन्तःक्रिया के आधार पर।

1. परिक्षिप्त प्रावस्था व परिक्षेपण माध्यम की भौतिक अवस्था के आधार पर वर्गीकरणपरिक्षिप्त प्रावस्था (Dispersed phase) व परिक्षेपण माध्यम की भौतिक अवस्था जो कि क्रमशः ठोस, द्रव या गैस हो सकते हैं, कुल आठ प्रकार के कोलॉइडी तंत्र सम्भव है। इसके उदाहरण तथा विशिष्ट नाम नीचे तालिका में दिया गया है। यहाँ यह ध्यान देने योग्य है, एक गैस को दूसरी गैस में मिलाने पर पूरी तरह से समांग मिश्रण बनता है अतः यह कोलॉइडी तंत्र नहीं हो सकता।
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विभिन्न प्रकार के कोलॉइडी तंत्र में से सॉल जेल व पायस अधिक महत्वपूर्ण हैं।

2. परिक्षेपण माध्यम की प्रकृति के आधार पर वर्गीकरण-इस प्रकार का वर्गीकरण परिक्षेपण माध्यम पर आधारित होता है जिसमें कोलॉइडी कण धंसे रहते हैं। परिक्षेपण माध्यम के आधार पर कोलॉइडी निकायों को कुछ विशिष्ट नाम प्रदान किये जाते हैं।
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3. परिक्षिप्त प्रावस्था तथा परिक्षेपण माध्यम के बीच अन्तःक्रिया की प्रकृति के आधार पर वर्गीकरण-परिक्षिप्त प्रावस्था तथा परिक्षेपण माध्यम के बीच की क्रिया की प्रकृति के आधार पर कोलॉइडी विलयनों को दो वर्गों में वर्गीकृत किया जा सकता है –

  • द्रवस्नेही (Lyophilic solutions)
  • garanteit (Lyophobic solutions)

(i) द्रवस्नेही कोलॉइड (Lyophilic colloids) – ये इस प्रकार के कोलॉइडी विलयन होते हैं जिसमें परिक्षिप्त प्रावस्था के कणों की परिक्षेपण माध्यम से बन्धुता या लगाव रहता है। ये प्रायः कोलॉइडी विलयन स्थायित्व युक्त होते हैं। ये विलयन दोनों प्रावस्थाओं के बीच प्रबल आकर्षण बलों के कारण स्वयं ही स्थायित्व युक्त होते हैं । इस प्रकार के कोलॉइडी विलयन उत्क्रमणीय प्रकृति के होते हैं । वाष्पन करने के पश्चात् प्राप्त ठोस को सरलतापूर्वक परिक्षेपण माध्यम से मिलाने पर पुनः कोलॉइडी विलयन प्राप्त हो जाता है। उदाहरण-गोंद, जिलेटिन, स्टार्च आदि।

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(ii) द्रवविरोधी कोलॉइड (Lyophobic colloids) – इस प्रकार के कोलॉइडी विलयन में परिक्षिप्त प्रावस्था के कणों की, परिक्षेपण माध्यम के साथ किसी प्रकार की बन्धुता या आकर्षण नहीं होता। इस प्रकार के विलयन कम स्थायी होते हैं तथा आसानी से बनाये भी नहीं जा सकते। इस प्रकार के कोलॉइडी विलयन में अल्प मात्रा में विद्युत्-अपघट्य मिलाने पर या गर्म करने पर आसानी से अवक्षेपण या स्कन्दन हो जाता है। ये अनुत्क्रमणीय प्रकृति के होते हैं। विलयन के वाष्पन के बाद प्राप्त ठोस को पुनः परिक्षेपण माध्यम से मिलाने पर कोलॉइडी विलयन प्राप्त नहीं होता है।
उदाहरण-स्वर्ण, रजत के कोलॉइडी विलयन, Fe(OH)3, As2S3 आदि।

प्रश्न 15.
निम्नलिखित परिस्थितियों में क्या प्रेक्षण होंगे –
(i) जब प्रकाश किरण पुंज कोलॉइडी सॉल में से गमन करता है?
(ii) जलयोजित फेरिक ऑक्साइड सॉल में NaCl वैद्युत अपघट्य मिलाया जाता है।
(iii) कोलॉइडी सॉल में से विद्युत् धारा प्रवाहित की जाती है ?
उत्तर
(i) जब प्रकाश किरण पुंज कोलॉइडी सॉल में गमन करता है तो प्रकाश का प्रकीर्णन होता है और किरण का पथ प्रदीप्त हो जाता है।
(ii) जब जलयोजित फेरिक ऑक्साइड सॉल में NaCl वैद्युत अपघट्य मिलाया जाता है तो फेरिक हाइड्रॉक्साइड सॉल के कणों पर उपस्थित धनावेश Cl आयनों पर उपस्थित ऋणावेश से उदासीन हो जाता है जिससे स्कंदन हो जाता है।
(iii) जब कोलॉइडी सॉल में वैद्युत धारा प्रवाहित की जाती है तो कोलॉइडी कण विपरीत आवेश युक्त इलेक्ट्रोड की ओर गमन करते हैं । यह परिघटना वैद्युत कण संचलन कहलाती है।

प्रश्न 16.
इमल्सन क्या है ? इनके विभिन्न प्रकार क्या हैं ? प्रत्येक प्रकार का उदाहरण दीजिए।
उत्तर
“ऐसा कोलॉइडी तन्त्र जिसमें परिक्षिप्त प्रावस्था तथा परिक्षेपण माध्यम दोनों द्रव हों, पायस कहलाता है।”
पायस दो प्रकार के होते हैं –

  • जल में तेल (O/w) – जब किसी परिक्षेपण माध्यम जल में तेल की छोटी-छोटी कोलॉइडी आकार की बूंदें परिक्षिप्त प्रावस्था के रूप में होती हैं तो इस प्रकार के पायस को जल में तेल प्रकार के पायस कहते हैं। उदाहरण—मक्खन, कोल्ड-क्रीम। .
  • तेल में जल (W/O) – जब जल की थोड़ी-सी मात्रा को तेल की अधिक मात्रा में परिक्षिप्त किया जाता है तो इस प्रकार बनने वाला पायस तेल में जल प्रकार का पायस कहलाता है।
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प्रश्न 17.
पायसीकर्मक पायस को स्थायित्व कैसे देते हैं ? दो पायसीकर्मकों के नाम लिखिए।
उत्तर
पायसीकर्मक पायस-पायस के स्थायित्व के लिये इसमें पायसीकारक मिलाया जाता है। पायसीकारक माध्यम एवं निलंबित कणों के मध्य एक अंतरापृष्ठीय फिल्म बनाता है।
तेल/जल पायस के लिए प्रोटीन, गोंद पायसीकारक है। तथा जल/तेल पायस के लिए वसीय अम्लों के, भारी धातुओं के लवण प्रमुख पायसीकारक हैं।

प्रश्न 18.
“साबुन की क्रिया पायसीकरण एवं मिसेल बनने के कारण होती है,” इस पर टिप्पणी कीजिए।
उत्तर-
साबुन की कार्यविधि (Action of Soap)-साबुन की कार्यविधि उसके मिसेल के समान कार्य करने की प्रवृत्ति पर आधारित है । साबुन में मैले कपड़े को साफ करने की क्षमता है सिर्फ जल यह कार्य नहीं कर सकता। हमारे द्वारा पहने गये कपड़ों के मैले हो जाने का कारण यह है कि हमारे शरीर से जो पसीना निकलता है उसके कारण कपड़ा तेलयुक्त हो जाता है। वायुमण्डल से धूल के कण तेल में चिपक जाते हैं और हमारा कपड़ा मैला हो जाता है। कपड़े को साफ करने के लिए उसे पानी में डुबाकर उसमें साबुन लगाते हैं । जलीय विलयन में साबुन के वियोजन से कार्बोक्सिलेट आयन (RCOO) तथा सोडियम आयन (Na+) प्राप्त होते हैं। कार्बोक्सिलेट आयन के ऐल्किल भाग में लम्बी हाइड्रोकार्बन श्रृंखला रहती है। वह कार्बोक्सिलेट आयन की पूँछ बनाता है जो तेल की बूंद की ओर निर्देशित रहती है। कार्बोक्सिलेट आयन का COO भाग सिर (head) बनाता है जो जल की ओर निर्देशित रहती है। डिटरजेण्ट में So42- भाग सिर बनाता है (चित्र देखिए)

चित्र को देखने से यह स्पष्ट है कि साबुन, तेल का जल में स्थायी पायस बनने में सहायक है। साबुन दोनों के बीच सेतु का कार्य कर रहा है, अत: पायसीकारक है। तेल की बूँद के धूल के कणों सहित कपड़े से निकल जाती है तथा पायस बना लेती है। इस प्रकार कपड़ा धूल के कण से मुक्त हो जाता है।
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प्रश्न 19.
विषमांगी उत्प्रेरण के चार उदाहरण दीजिए।
उत्तर
विषमांग उत्प्रेरण (Heterogeneous catalysis)-यदि अभिकारक व उत्प्रेरक अलग-अलग प्रावस्था में रहते हैं तो इसे विषमांग उत्प्रेरण कहा जाता है।
उदाहरण
(i) N2व H2 के संयोग से अमोनिया बनने की क्रिया (हैबर विधि) में आयरन ठोस उत्प्रेरक के रूप में होते हैं।
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(ii) H2SO4 निर्माण की सम्पर्क विधि में SO2(g) का ऑक्सीकरण SO3 में Pt उत्प्रेरक की उपस्थिति में होता है।
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(iii) प्लेटिनम उत्प्रेरक की उपस्थिति में अमोनिया का नाइट्रिक ऑक्साइड में ऑक्सीकरण। (नाइट्रिक एसिड बनाने की ओस्टवाल्ड विधि)
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(iv) हाइड्रोजनीकरण अभिक्रिया
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प्रश्न 20.
उत्प्रेरक की सक्रियता एवं वरणक्षमता का क्या अर्थ है ?
उत्तर
सक्रियता (Activity)-उत्प्रेरक की सक्रियता का आशय है, रासायनिक अभिक्रिया की गति बढ़ाने की इसकी क्षमता। कुछ उदाहरणों में अभिक्रिया का वेग लगभग 10 गुना तक बढ़ जाता है। उदाहरणार्थ शुद्ध हाइड्रोजन व शुद्ध ऑक्सीजन का आपस का मिश्रण उत्प्रेरक की अनुपस्थिति में आपस में कोई अभिक्रिया नहीं करता । उत्प्रेरक के रूप में प्लैटिनम की उपस्थिति में मिश्रण में अभिक्रिया अत्यन्त तेज गति से सम्पन्न होकर जल बनता है।
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रासायनिक अधिशोषण की मात्रा के ऊपर सक्रियता निर्भर करती है। अधिशोषण को निश्चित रूप से मजबूत होना चाहिए परन्तु इतना भी अधिक सामर्थ्य युक्त न हो कि अधिशोषित पदार्थ की गतिशीलता बिल्कुल समाप्त हो जाये या दूसरे अभिकारक के अधिशोषित होने के लिये स्थान ही उपलब्ध न हो।

(ii) वरणक्षमता या चयनात्मकता (Selectivity)-उत्प्रेरक की चयनात्मकता का अर्थ है अभिक्रिया अन्य को छोड़कर किसी उत्पाद विशेष को बनाने हेतु दिशा प्रदान करना। अर्थात कोई उत्प्रेरक किसी विशेष अभिक्रिया को ही उत्प्रेरित करता है सभी को नहीं।
उदाहरणार्थ –
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प्रश्न 21.
जिओलाइटों द्वारा उत्प्रेरण के कुछ लक्षणों का वर्णन कीजिए।
उत्तर
जिओलाइट महीन छिद्रयुक्त सिलिकेट्स के त्रिविमीय नेटवर्क वाले सूक्ष्म-रन्ध्री ऐलुमिनोसिलीकेट होते हैं। जिओ-लाइट का सामान्य सूत्र –
Mx/n [(AlO2)x (SiO)2y] mH2O
जहाँ n धातु आयन Mn+ की संयोजकता है । त्रिविमीय संरचना के कारण जिओलाइट अत्यधिक छिद्रयुक्त संरचना का होता है। इसमें कुछ सिलिकन परमाणु ऐलुमिनियम के परमाणुओं द्वारा प्रतिस्थापित होकर Al – 0 – Si ढाँचा बनाते हैं।

जिओलाइट पेट्रो रसायन उद्योग में हाइड्रोकार्बनों के भंजन एवं समावयवन में उत्प्रेरक के रूप में व्यापक रूप से प्रयुक्त किये जा रहे हैं। ZMS-5 पेट्रोलियम उद्योग में प्रयुक्त होने वाला एक महत्वपूर्ण जिओलाइट उत्प्रेरक है। यह ऐल्कोहॉल का निर्जलीकरण करके हाइड्रो-कार्बनों का मिश्रण बनाता है और उन्हें सीधे ही गैसोलीन में परिवर्तित कर देता है।

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प्रश्न 22.
आकृति वरणात्मक उत्प्रेरण क्या है ?
उत्तर
आकृति वरणात्मक उत्प्रेरक या जिओलाइट (Shape selective catalysts or Zeolites)उत्प्रेरक की क्रिया अति विशिष्ट होती है। यह अति विशिष्ट प्रकृति उत्प्रेरक की रन्ध्र या छिद्र संरचना तथा अभिकारक एवं उत्पाद के अणुओं के आकार पर निर्भर करती है। इस प्रकार के उत्प्रेरकों को आकृति चयन करने वाला उत्प्रेरक कहा जाता है। जैसे-जिओलाइट। .

जिओलाइट उत्प्रेरकों का सर्वाधिक दिलचस्प पहलू इनका आकृति चयनात्मक होना है। उत्प्रेरक की आकृति चयनात्मकता, उत्प्रेरक की कोटर संरचना या छिद्र संरचना पर आधारित होती है। जिओलाइट में कोटर का आकार सामान्यतया 260 pm से 740 pm के मध्य होता है। अभिकारक व उत्पाद में अणुओं के आकार के आधार तथा जिओलाइट के पिंजड़ों (Cage) या कोटर के आकार पर रासायनिक क्रिया विशिष्ट ढंग से सम्पन्न होती है। यह इसलिये महत्वपूर्ण है क्योंकि किसी विशेष आकार व आकृति के अणु ही इन कोटरों में घुसकर अधिशोषित हो पाते हैं। यदि अणु इनके आकार से बड़े होते हैं तो ये छिद्रों में नहीं घुस पाते और यदि ये आकार में छोटे होते हैं तो ये उत्प्रेरक के छेद में से निकल जाते हैं। अभिक्रिया जल के अणुओं के निष्कासन तथा बहुलीकरण के द्वारा आगे बढ़ती है।
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प्रश्न 23.
निम्न पदों (शब्दों) को समझाइए-
(i) वैद्युत कण संचलन
(ii) स्कंदन
(iii) अपोहन
(iv) टिण्डल प्रभाव।
उत्तर
(i) विद्युत् कण संचलन (Electrophoresis)—कोलॉइड कणों पर धन अथवा ऋण विद्युत् आवेश रहता है। अतः जब कोलॉइड विद्युत्-क्षेत्र में रखा जाता है तो ये कण विपरीत आवेश वाले इलेक्ट्रोड की ओर चलने लगते हैं और उन पर पहुँचकर उदासीन होकर अवक्षेपित हो जाते हैं । जैसे-As2S3 के कण जो ऋण आवेशयुक्त होते हैं, ऐनोड की ओर चलकर वहाँ अवक्षेपित हो जाते हैं । कोलॉइड कणों का विद्युत्-प्रभाव से इस प्रकार का अभिगमन विद्युत् कण संचलन कहलाता है।
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(ii) स्कन्दन (Coagulation)—कोलॉइड कण धनात्मक या ऋणात्मक विद्युत् आवेश युक्त होते हैं। यह देखा गया है कि कोलॉइड में उन पर आवेश से विरुद्ध आवेश वाले विद्युत्-अपघट्य उचित मात्रा में मिला दें तो उनका आवेश नष्ट हो जाता है और वे आपस में इकट्ठा होकर अवक्षेप बना देते हैं। कोलॉइडी कणों का विद्युत्-अपघट्यों द्वारा अवक्षेपित हो जाना स्कन्दन कहलाता है।

(iii) अपोहन (Dialysis)—कोलॉइडी विलयन से उसमें उपस्थित घुले हुए पदार्थों (क्रिस्टलाभों) को पार्चमेंट झिल्ली द्वारा निष्कासित करने की विधि अपोहन कहलाती है।

कोलॉइडी विलयन को पार्चमेण्ट पेपर से बने थैले में भरकर आसुत जल में लटका देते हैं। क्रिस्टलीय पदार्थ के कण थैले से बाहर निकलकर जल में वितरित हो जाते हैं, इस क्रिया को अपोहन कहते हैं।

(iv) टिण्डल प्रभाव (Tyndall Effect)—“यदि प्रकाश पुंज को कोलॉइडी विलयन में से गुजारा जाये तो प्रकाश मार्ग . एक चमकते हुए शंकु के रूप में दिखायी देता है। इसका अध्ययन सबसे पहले टिण्डल ने किया था अतः इसे टिण्डल प्रभाव व
कोलॉइडी चमकीले शंकु को टिण्डल शंकु कहते हैं।” टिण्डल ने यह बताया कि कोलॉइडी कण प्रकाश को बिखेर देते हैं जिसके
चित्र-टिण्डल प्रभाव कारण ये चमकने लगते हैं। प्रकाश का यह प्रकीर्णन साधारण प्रकीर्णन से भिन्न होता है। वास्तविक विलयन के कण अति सूक्ष्म आकार के कारण प्रकाश का प्रकीर्णन नहीं करते हैं जिससे उनमें प्रकाश का मार्ग अदृश्य रहता है। कोलॉइडी कण प्रकाश ऊर्जा को अवशोषित करके स्वयं दीप्त हो जाते हैं और फिर अवशोषित प्रकाश छोटी तरंगदैर्घ्य की किरणों के रूप में प्रकीर्णित होने लगता है। चूंकि अधिकतम प्रकीर्णन प्रकाश के मार्ग के लम्बवत् होता है इसलिए प्रकाश के मार्ग को समकोण पर देखने पर एक चमकीला शंकु दिखायी देता है।
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प्रश्न 24.
इमल्सनों (पायस) के चार उपयोग लिखिए।
उत्तर
पायसों के अनुप्रयोग –

  • साबुन तथा अपमार्जकों की क्रियाविधि पायसीकरण पर आधारित है।
  • औषधि के रूप में कॉड लिवर ऑयल, हैली बुट यकृत तेल आदि के रूप में पायस का उपयोग किया जाता है।
  • संक्रमणहारी (Disinfectants) जैसे—फिनाइल, डेटॉल और लाइसॉल जल में मिलाने पर जल में तेल के समान पायस बनाते हैं।
  • धातु अयस्क के सान्द्रण की झाग उत्प्लावन विधि भी पायसीकरण के सिद्धान्त पर आधारित है।
  • वसा का आँतों द्वारा पाचन पायसीकरण के कारण सरलता से होता है।

प्रश्न 25.
मिसेल क्या है ? मिसेल निकाय का एक उदाहरण दीजिए।
उत्तर
बहुआण्विक, वृहत् आण्विक एवं संगुणित कोलॉइड में अंतर –
MP Board Class 12th Chemistry Solutions Chapter 5 पृष्ठ रसायन - 24

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प्रश्न 26.
निम्न पदों को उचित उदाहरण सहित समझाइए –
(i) एल्कोसॉल
(ii) एरोसॉल
(iii) हाइड्रोसॉल।।
उत्तर
(i) एल्कोसॉल-एल्कोसॉल वह कोलॉइडी सॉल होता है जिसमें परिक्षेपण माध्यम ऐल्कोहॉल होता है। जैसे-बहुलक सॉल। .
(ii) ऐरोसॉल-कोलॉइडी का वह प्रक्रम जिसमें परिक्षेपण माध्यम वायु होती है। जैसे-धुआँ, धूल, कोहरा आदि।
(iii) हाइड्रोसॉल-वह कोलॉइडी प्रक्रम जिसमें परिक्षेपण माध्यम जल होता है। जैसे-स्टॉर्च, साबुन झाग आदि।

प्रश्न 27.
“कोलॉइड एक पदार्थ नहीं पदार्थ की एक अवस्था है। इस कथन पर टिप्पणी कीजिए।
उत्तर
दिया गया कथन यह है कि कोलॉइड एक पदार्थ नहीं पदार्थ की अवस्था है सत्य कथन है। क्योंकि कोई पदार्थ कुछ शर्तों पर कोलॉइड अवस्था ग्रहण करता है जबकि अन्य शर्तों पर वह क्रिस्टल के रूप में हो सकता है।
उदाहरण-जल में NaCl क्रिस्टलन की भाँति कार्य करता है और एक वास्तविक विलयन बनाता है, जबकि बेंजीन में कोलॉइड की भाँति व्यवहार करता है। इसी प्रकार साबुन कम सान्द्रता पर क्रिस्टल की भाँति व्यवहार करता है तथा उच्च सान्द्रता पर कोलॉइड की भाँति । अत: यह पदार्थ के आकार पर निर्भर करता है। यदि अवयव का आकार 1 nm से 100 nm के मध्य है तो यह कोलॉइडी अवस्था है। दूसरी ओर यदि अवयव का आकार 100 nm से अधिक है तो अवक्षेप के रूप में और यदि 1 nm से कम हो तब यह वास्तविक विलयन के रूप में व्यवहार करता है। इसलिए हम कह सकते हैं कि कोलॉइडी अवस्था वास्तविक विलयन और अवक्षेप के मध्य की अवस्था है।

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पृष्ठ रसायन वस्तुनिष्ठ प्रश्न

1. सही विकल्प चुनकर लिखिए –

प्रश्न 1.
सक्रिय चारकोल में ऐसीटिक अम्ल की अधिशोषण प्रक्रिया में ऐसीटिक अम्ल है –
(a) ऐडजॉर्बर (अवशोषक)
(b) ऐबजॉर्बर (अवशोष्य)
(c) ऐडजॉर्बेट (अधिशोषक)
(d) ऐडजॉर्बेट (अधिशोष्य)।
उत्तर
(d) ऐडजॉर्बेट (अधिशोष्य)।

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प्रश्न 2.
द्रवविरोधी सॉल के स्थायित्व का कारण होता है –
(a) ब्राउनी गति
(b) टिण्डल प्रभाव
(c) विद्युत् आवेश
(d) ब्राउनी गति तथा विद्युत् आवेश।
उत्तर
(d) ब्राउनी गति तथा विद्युत् आवेश।

प्रश्न 3.
As2S3 कोलॉइडी विलयन को स्कंदित करने में निम्नलिखित में किसका स्कन्दन मान न्यूनतम
होगा
(a) NaCl
(b) KCI
(c) BaCl2
(d) AICI3
उत्तर
(d) AICI3

प्रश्न 4.
अधिशोषण क्रिया है –
(a) ऊष्माशोषी
(b) ऊष्माक्षेपी
(c) ऊष्मा का परिवर्तन नहीं होता
(d) इनमें से कोई नहीं।
उत्तर
(b) ऊष्माक्षेपी

प्रश्न 5.
कोलॉइडी कणों का आकार होता है –
(a) 10-7 – 10-9सेमी के मध्य
(b) 10-7 – 10-11 सेमी के मध्य
(c) 10-5 – 10-7 सेमी के मध्य
(d) 10-2 – 10-3 सेमी के मध्य ।
उत्तर
(c) 10-5 – 10-7 सेमी के मध्य

प्रश्न 6.
निम्न में से किसका प्रयोग द्रवस्नेही कोलॉइड बनाने में नहीं होता है –
(a) स्टार्च
(b) गोन्द
(c) जिलेटिन
(d) धातु सल्फाइड।
उत्तर
(d) धातु सल्फाइड।

प्रश्न 7.
रक्षी कोलॉइड की तरह कार्य करने वाला सॉल है –
(a) AS2S3
(b) जिलेटिन
(c)Au
(d) Fe (OH)3.
उत्तर
(b) जिलेटिन

प्रश्न 8.
कोहरा (Fog) एक कोलॉइडी तंत्र का उदाहरण है –
(a) गैस में परिक्षिप्त द्रव
(b) गैस में गैस का परिक्षेपण
(c) ठोस का गैस में परिक्षेपण
(d) ठोस का द्रव में परिक्षेपण।
उत्तर
(a) गैस में परिक्षिप्त द्रव

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प्रश्न 9.
जिलेटिन का उपयोग बहुधा आइसक्रीम बनाने में होता है क्योंकि यह
(a) कोलॉइडी विलयन बनने से रोकता है
(b) खुशबू बढ़ाता है
(c) क्रिस्टलन होने से रोकता है एवं मिश्रण को स्थायित्व प्रदान करता है
(d) स्वाद बढ़ाता है।
उत्तर
(c) क्रिस्टलन होने से रोकता है एवं मिश्रण को स्थायित्व प्रदान करता है

प्रश्न 10.
अभिक्रिया
MP Board Class 12th Chemistry Solutions Chapter 5 पृष्ठ रसायन - 25
(a) स्व-उत्प्रेरक
(b) विष
(c) ऋणात्मक उत्प्रेरक
(d) धन उत्प्रेरक। .
उत्तर
(b) विष

प्रश्न 11.
कोलॉइडी कणों का अभिगमन विद्युत् क्षेत्र के प्रभाव द्वारा होने का नाम है –
(a) धन-कण संचलन
(b) अपोहन
(c) वैद्युत-कण संचलन
(d) विद्युत् परिक्षेपण।
उत्तर
(c) वैद्युत-कण संचलन

प्रश्न 12.
हार्डी-शूल्जे नियम सम्बन्धित है
(a) विलयन से
(b) स्कन्दन से
(c) ठोसों से
(d) गैसों से।
उत्तर
(b) स्कन्दन से

प्रश्न 13.
कोलॉइडी विलयन में कितनी अवस्थाएँ पायी जाती हैं –
(a) 1
(b) 2
(c) 3
(d) 4.
उत्तर
(b) 2

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प्रश्न 14.
निम्नलिखित में से पायस है –
(a) मक्खन
(b) वायु
(c) लकड़ी
(d) दूध।
उत्तर
(d) दूध।

प्रश्न 15.
मक्खन एक है –
(a) जेल
(b) पायस
(c) सॉल
(d) कोलॉइड।
उत्तर
(a) जेल

प्रश्न 16.
ब्राउनी गति का कारण है –
(a) कोलॉइडी कणों तथा विकिरण माध्यम के अणुओं के बीच आकर्षण बल
(b) संवहन धाराएँ
(c) परिक्षेपण माध्यम के अणुओं का कोलॉइडी कणों पर प्रहार
(d) द्रव अवस्था में ऊष्मा परिवर्तन।
उत्तर
(c) परिक्षेपण माध्यम के अणुओं का कोलॉइडी कणों पर प्रहार

प्रश्न 17.
रक्षी कोलॉइड की तरह कार्य करने वाला सॉल है –
(a) जिलेटिन
(b) Au
(c) Fe(OH)2
(d) As2S3.
उत्तर
(a) जिलेटिन

प्रश्न 18.
निम्नलिखित में से कौन-सा भौतिक अधिशोषण के लिए गलत कथन है
(a) यह एक उत्क्रमणीय प्रक्रम है
(b) इसे कम अधिशोषण की ऊष्मा की आवश्यकता होती है
(c) इसे सक्रियण ऊर्जा की आवश्यकता होती है
(d) यह कम ताप पर होता है।
उत्तर
(c) इसे सक्रियण ऊर्जा की आवश्यकता होती है

प्रश्न 19.
निम्न में से किसमें टिण्डल प्रभाव नहीं है
(a) निलम्बन
(b) पायस
(c) शर्करा विलयन
(d) स्वर्ण सॉल।
उत्तर
(c) शर्करा विलयन

2. रिक्त स्थानों की पूर्ति कीजिए –

  1. भौतिक अधिशोषण की दर ताप बढ़ाने के साथ ………….. है।
  2. As2S3के सॉल के कणों में …………… होता है।
  3. सम्पर्क विधि द्वारा H2SO4 के निर्माण में ………….. Pt उत्प्रेरक के लिए ………..का कार्य करता है।
  4. KMnO4 द्वारा ऑक्जेलिक अम्ल का ऑक्सीकरण …………….का उदाहरण है।
  5. जैविक उत्प्रेरक आवश्यक रूप से …………….. होता है।
  6. वैद्युत क्षेत्र के प्रभाव में कोलॉइडी कणों की गति ……………. कहलाती है।
  7. कोलॉइडी कणों द्वारा प्रकाश का प्रकीर्णन …………… प्रभाव कहलाता है।
  8. माध्यमिक यौगिक सिद्धान्त ……………. उत्प्रेरकों के लिए लागू होता है।
  9. जिस पदार्थ की सतह पर अधिशोषण होता है, उसे … ……… कहते हैं।
  10. दूध एक ……………. का उदाहरण है।
  11. रक्त एक …………… आवेशित सॉल है।
  12. अधिशोषण एक ………….. प्रक्रिया है।
  13. द्रव का ठोस में कोलॉइडी विलयन …………….. कहलाता है।
  14. उत्प्रेरक वर्धक पदार्थ ………………… है।
  15. विद्युत्-अपघट्य मिलाने से कोलॉइडी कणों का अवक्षेपण … कहलाता है।
  16. हार्डी-शुल्जे नियम के अनुसार, आयनों की स्कन्दन क्षमता आयनों की ……………….. पर निर्भर करती है।

उत्तर

  1. घटती
  2. ऋणावेश
  3. As2O3
  4. विष,
  5. स्व-उत्प्रेरण,
  6. ‘एन्जाइम,
  7. धन-कण संचलन,
  8. टिण्डल प्रभाव,
  9. समांगी,
  10. अधिशोषक,
  11. पायस,
  12. ऋणात्मक,
  13. ऊष्माक्षेपी,
  14. जेल,
  15. मॉलिब्डेनम,
  16. स्कंदन,
  17. आवेश संख्या।

3. उचित संबंध जोड़िए –
I.
MP Board Class 12th Chemistry Solutions Chapter 5 पृष्ठ रसायन - 26
उत्तर
1. (1), 2. (d), 3. (a), 4. (c), 5. (g), 6. (e), 7. (b).

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II.
MP Board Class 12th Chemistry Solutions Chapter 5 पृष्ठ रसायन - 27
उत्तर
1. (d), 2. (a), 3. (b), 4. (e), 5. (c), 6. (1), 7. (g).

4. एक शब्द/वाक्य में उत्तर दीजिए –

  1. क्या होता है, जब गोल्ड के कोलॉइडी विलयन में जिलेटिन मिलाया जाता है ?
  2. वे पदार्थ जो उत्प्रेरक के उत्प्रेरण शक्ति को बढ़ा देते हैं लेकिन स्वयं उत्प्रेरक का कार्य नहीं करते वे – कहलाते हैं।
  3. किसी पायस का अपने अवयवी द्रवों में विघटित हो जाना कहलाता है।
  4. तेलों के हाइड्रोजनीकरण में प्रयुक्त किये जाने वाले उत्प्रेरक का नाम लिखिए।
  5. H2O2 के अपघटन में फॉस्फोरिक अम्ल किस प्रकार के उत्प्रेरक का कार्य करता है ?
  6. ग्लूकोज को ऐल्कोहॉल में बदलने के लिए प्रयुक्त किये जाने वाले उत्प्रेरक का नाम लिखिए।
  7. Na+, Ba2+, Al3+, Sn4+ आयनों में से किसकी स्कंदन शक्ति सर्वाधिक होगी?
  8. Cl2 गैस मास्क का उपयोग किस सिद्धांत पर आधारित है ?
  9. किसी अवक्षेप को कोलॉइडी कणों में बदलना क्या कहलाता है ?
  10. साबुन की प्रक्षालन क्रिया किस सिद्धांत पर आधारित है ?
  11. उत्प्रेरण शब्द का प्रथम बार प्रयोग किसने किया था ?
  12. कोलॉइडी कणों का आकार लिखिए।
  13. KMnO4 द्वारा ऑक्जेलिक अम्ल के ऑक्सीकरण में प्रयुक्त उत्प्रेरक की प्रकृति लिखिए।
  14. उत्प्रेरक विष का एक उदाहरण दीजिए।
  15. कोलॉइडी कणों की गति को क्या कहते हैं ?
  16. शर्करा का जल-अपघटन करने के लिए कौन-से उत्प्रेरक का प्रयोग किया जाता है ?

उत्तर

  1. रक्षण
  2. उत्प्रेरक वर्धक
  3. विपायसीकरण
  4. निकिल
  5. ऋणात्मक
  6. जाइमेस
  7. Sn4+
  8. अधिशोषण
  9. पेप्टीकरण
  10. पायसीकरण
  11. वर्जीलिथिम
  12. 10-5 सेमी से 10-7 सेमी, “
  13. स्व-उत्प्रेरक,
  14. H2SO4 बनाने की संपर्क विधि में Al2O3,
  15. ब्राउनी गति,
  16. इन्वर्टेज ।

पृष्ठ रसायन अति लघु उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 1.
कौन-सी अक्रिय गैस चारकोल की सतह पर
(i) सबसे कम मात्रा में
(ii) सबसे ज्यादा मात्रा में अधिशोषित होगी और क्यों ?
उत्तर
(i) हीलियम अपने कम आण्विक द्रव्यमान एवं अणुओं के बीच न्यूनतम वाण्डर वॉल्स बल के कारण चारकोल की सतह पर सबसे कम मात्रा में अधिशोषित होगी।
(ii) जीनॉन अपने उच्च आण्विक द्रव्यमान एवं अणुओं के बीच अधिकतम वाण्डर वॉल्स बल के कारण चारकोल की सतह पर सबसे ज्यादा अधिशोषित होगी।

प्रश्न 2.
आकाश का रंग नीला क्यों दिखाई देता है ?
उत्तर
वायुमण्डल में उपस्थित धूल के कण एक कोलॉइडी विलयन का निर्माण करते हैं । इन धूल के कोलॉइडी कणों द्वारा प्रकाश का प्रकीर्णन (टिण्डल प्रभाव) के कारण आकाश का रंग नीला दिखाई देता है।

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प्रश्न 3.
ऑक्जेलिक अम्ल में KMnO4 मिलाने से उसका रंग पहले धीरे-धीरे विलुप्त होता है किन्तु बाद में तेजी से गायब होने लगता है, क्यों?
उत्तर
ऑक्जेलिक अम्ल में KMnO4 मिलाने पर ऑक्जेलिक अम्ल का ऑक्सीकरण होता है। इस अभिक्रिया में बनने वाला Mn2+ आयन स्व-उत्प्रेरक का कार्य करता है जिससे अभिक्रिया तेजी से होने लगती है और KMnO4 का रंग तेजी से विलुप्त होने लगता है।
2MnO4 +5C2O4 + 16H+ → 2Mn+2 + 10CO2 + 8H2O

प्रश्न 4.
कोलॉइडी विलयन के बारे में लिखिए।
उत्तर
कोलॉइडी विलयन के कणों का आकार वास्तविक विलयन से बड़ा तथा निलंबन से छोटा होता है। यह एक विषमांग मिश्रण है जिसमें परिक्षिप्त प्रावस्था के कणों का आकार 10-5 से 10-7 cm के बीच एवं परिक्षेपण माध्यम के कणों का आकार लगभग 10-7cm होता है। उदाहरण-कोहरा, रक्त, धुंआ।

प्रश्न 5.
अधिशोषक किसे कहते हैं ? दो उदाहरण दीजिए।
उत्तर
अधिशोषक-अधिशोषक ठोस जो गैस, वाष्प या किसी विलयन में विलेय को अधिशोषित करते हैं, अधिशोषक कहलाते हैं।
उदाहरण-जन्तु चारकोल, सिलिका इत्यादि।

प्रश्न 6.
अधिशोष्य क्या है ?
उत्तर
गैस या वाष्प या विलेय के अणु जो ठोस की सतह पर अधिशोषित होते हैं, अधिशोष्य कहलाते हैं।

प्रश्न 7.
नदियों के समुद्र में मिलने से डेल्टा बनता है। समझाइए।।
उत्तर
नदियों के जल में मिट्टी के ऋण आवेशित कण होते हैं, जो समुद्र के जल में उपस्थित Na+ , K+ या Mg+2 आयनों से स्कन्दित हो जाते हैं, जिससे डेल्टा का निर्माण होता है।

प्रश्न 8.
बादलों पर सिल्वर आयोडाइड का स्प्रे करने पर वर्षा का होना कैसे संभव है ?
उत्तर
बादलों की प्रकृति कोलॉइडी होने के कारण इन पर आवेश होता है। सिल्वर आयोडाइड एक वैद्युत-अपघट्य है बादलों पर इसका स्प्रे करने के परिणामस्वरूप स्कंदन होता है, जिससे वर्षा होती है।

प्रश्न 9.
किसी गैस का अधिशोषण क्रान्तिक ताप से किस प्रकार संबंधित है ?
उत्तर
किसी गैस के लिये क्रान्तिक ताप उच्च होने पर उसका द्रवीकरण उतना ही आसान होता है एवं उसके अणुओं के बीच में उच्च वाण्डर वॉल्स आकर्षण बल लगता है। फलस्वरूप ऐसी गैसों का अधिशोषण उच्च मात्रा में होता है।

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प्रश्न 10.
क्या होता है, जब ताजे अवक्षेपित Fe(OH)3 को थोड़े से तनु FeCl3 विलयन के साथ हिलाया जाता है ?
उत्तर
ताजे अवक्षेपित Fe(OH)3 को तनु FeCl3 विलयन के साथ हिलाने पर Fe(OH)3 लाल-भूरे रंग के कोलॉइडी विलयन में परिवर्तित हो जाता है। इस प्रक्रम को पेप्टीकरण कहते हैं। इसमें FeCl3 विलयन से प्राप्त Fe+3 आयन Fe(OH)3 अवक्षेप के कणों पर अधिशोषित होकर धनावेशित कोलॉइडी विलयन बनाते हैं।

पृष्ठ रसायन लघु उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 1.
कोलॉइडी विलयन किसे कहते हैं ? डायलिसिस क्या है ? इसका सामान्य सिद्धान्त क्या है?
उत्तर
वे विलयन जिनमें विलेय के कणों का व्यास 10-4 सेमी से 10-7 सेमी होता है तथा विलायक के कणों का व्यास 10-7 सेमी से 10-8 सेमी होता है, कोलॉइडी विलयन कहलाते हैं। इस प्रकार के विलयन आँख से देखने पर समांग दिखाई देते हैं जबकि सूक्ष्मदर्शी द्वारा देखने पर समांग नहीं दिखायी देते हैं।

प्रश्न 2.
सॉल, जेल और पायस को उदाहरण सहित स्पष्ट कीजिए।
उत्तर
सॉल (Sol)—जब कोई ठोस पदार्थ किसी द्रव में परिक्षिप्त (disperse) होकर कोलॉइडी विलयन बनाता है तो वह सॉल कहलाता है। जैसे—फेरिक हाइड्रॉक्साइड, गोल्ड आदि के जल में बने कोलॉइडी विलयन।
जेल (Gel)—जब कोई द्रव किसी ठोस में परिक्षेपित होकर कोलॉइडी विलयन बनाता है तब इसे जेल कहते हैं। उदाहरणार्थ-जेली, पनीर, मक्खन आदि।
पायस (Emulsion)—जब एक द्रव दूसरे अमिश्रणीय द्रव में परिक्षेपित कोलॉइडी विलयन बनाता है तब इसे पायस कहते हैं। जैसे—क्रीम, दूध आदि।

प्रश्न 3.
समांगी तथा विषमांगी उत्प्रेरण को उदाहरण देकर समझाइए।
उत्तर
समांगी उत्प्रेरण–वे रासायनिक अभिक्रियाएँ जिनमें क्रियाकारक पदार्थ और उत्प्रेरक एक ही प्रावस्था में हों, समांगी उत्प्रेरण अभिक्रियाएँ कहलाती हैं।
MP Board Class 12th Chemistry Solutions Chapter 5 पृष्ठ रसायन - 28
विषमांगी उत्प्रेरण—जब क्रियाकारक पदार्थ और उत्प्रेरक की प्रावस्थाएँ अलग-अलग हों, तो ऐसे उत्प्रेरण विषमांगी उत्प्रेरण कहलाते हैं।
अमोनिया निर्माण की हैबर विधि में,
MP Board Class 12th Chemistry Solutions Chapter 5 पृष्ठ रसायन - 29

प्रश्न 4.
स्वर्ण संख्या किसे कहते हैं ? उदाहरण सहित स्पष्ट कीजिए।
उत्तर
स्वर्ण संख्या-जिगमोण्डी ने आपेक्षिक रक्षण शक्ति ज्ञात करने के लिए एक संख्या निर्धारित की जो स्वर्ण संख्या (Gold Number) कहलाती है। इसके अनुसार
“यह मिलीग्रामों में रक्षी कोलॉइडों की वह मात्रा है, जो दिये हुए स्वर्ण कोलॉइडी विलयन में 10 मिलीलीटर में उपस्थित होने पर उसका एक मिलीलीटर 10% NaCl विलयन द्वारा स्कन्दन होने से रोकती है।” स्वर्ण संख्या अधिक होने पर रक्षण शक्ति कम होती है।
जिलेटिन की रक्षण शक्ति सर्वाधिक एवं डेक्सट्रीन की रक्षण शक्ति सबसे कम होती है।

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प्रश्न 5.
पायसीकरण में पायसीकारक का क्या महत्त्व है ? ।
उत्तर
पायस बनाने की क्रिया पायसीकरण कहलाती है। उपयुक्त द्रवों को मिलाकर तेजी से हिलाने पर पायस बनते हैं परन्तु इस प्रकार से बना हुआ पायस स्थायी नहीं होता। पायस को स्थायी बनाने के लिए एक तीसरे पदार्थ को,मिलाना अनिवार्य है जिसे पायसीकारक कहते हैं। साबुन, गोंद, स्टार्च आदि पायसीकारक का कार्य करते हैं। पायसीकारक की अनुपस्थिति में द्रव की परिक्षिप्त बूंदें आपस में मिल जाने से पायस नष्ट हो जाता है।

प्रश्न 6.
अधिशोषण क्या है ? इसके दो उदाहरण तथा इसकी क्रियाविधि समझाइए।
उत्तर
जब गैस या द्रव के अणु किसी वृहत क्षेत्रफल वाले ठोस के सम्पर्क में आते हैं तो कभी-कभी गैस या द्रव के अणुओं की ठोस की सतह पर सान्द्रता बढ़ जाती है। इस घटना को अधिशोषण कहते हैं।
अधिशोषण के उदाहरण – (i) चीनी उद्योग में जन्तु चारकोल रंगीन पदार्थों का अधिशोषण कर लेता है।
(ii) परम्यूटिट विधि में Ca2+,Mg2+ आयन अधिशोषित हो जाते हैं तथा Na+ आयन मुक्त हो जाते हैं जिससे जल की कठोरता दूर हो जाती है।
अधिशोषण की क्रियाविधि – ठोस के पृष्ठ पर उपस्थित परमाणुओं या अणुओं में मुक्त संयोजकताएँ रहती हैं। ये मुक्त संयोजकताएँ अधिशोष्य अणुओं को अपनी ओर आकर्षित करती हैं।

प्रश्न 7.
विद्युत्-अपोहन पर एक टिप्पणी लिखिए।
उत्तर
विद्युत्-अपोहन (Electro-dialysis) यदि कोलॉइडी विलयन में वैद्युत-अपघटन की अशुद्धियाँ होती हैं तो अपोहन की दर बढ़ाने के लिए द्रोणिका में दो विपरीत आवेश के इलेक्ट्रोड लगाये जाते हैं। आयनिक अशुद्धियाँ विपरीत आवेश के इलेक्ट्रोड की ओर तेजी से गति करती हैं। इस विधि को विद्युत्-अपोहन (Electro-dialysis) कहते हैं।
MP Board Class 12th Chemistry Solutions Chapter 5 पृष्ठ रसायन - 30

प्रश्न 8.
रक्षी कोलॉइड किसे कहते हैं ?
उत्तर
रक्षी कोलॉइड-द्रव-विरोधी कोलॉइडी विलयन में थोड़ा-सा विद्युत्-अपघट्य मिलाने पर उसका स्कन्दन शीघ्र ही हो जाता है, परन्तु यदि विद्युत्-अपघट्य मिलाने से पहले द्रव विरोधी कोलॉइडों में कोई जल-स्नेही कोलॉइड जैसे—जिलेटिन, अगर-अगर, ऐल्ब्यूमिन आदि की थोड़ी-सी मात्रा मिला दी जाय तो विद्युत्-अपघट्य का प्रभाव बहुत कम हो जाता है और स्कन्दन बहुत धीमा हो जाता है या बिल्कुल नहीं होता। इस घटना को कोलॉइडी रक्षण कहते हैं तथा रक्षण के लिए मिलाये गये जल-स्नेही कोलॉइड को रक्षी कोलॉइड (Protective colloid) कहते हैं।
उदाहरण—किसी सोडियम सॉल में थोड़ा जिलेटिन मिला देने पर सोडियम क्लोराइड विलयन द्वारा उसका स्कन्दन नहीं होता।

प्रश्न 9.
फेरिक हाइड्रॉक्साइड एवं सल्फर की जल में कोलॉइडी विलयन बनाने की विधि दीजिए।
उत्तर
फेरिक हाइड्रॉक्साइड का सॉल बनाने के लिए FeCl3 विलयन को उबलते जल में बूंद-बूंद करके हिलाते हुए डालते हैं। FeCI3 की अतिरिक्त मात्रा व HCl को विद्युत्-अपोहन द्वारा पृथक् कर देते हैं जिससे विलयन स्थायी रह सके।
FeCl3 +3H2O → Fe(OH)3 +3HCl
नाइट्रिक अम्ल (ऑक्सीकारक) के विलयन में H,S गैस प्रवाहित करने पर सल्फर कोलॉइडी विलयन बनता है।
2HNO3 +H2S → S+2H2O+2NO2

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प्रश्न 10.
भौतिक अधिशोषण और रासायनिक अधिशोषण को समझाइए।
उत्तर:
यदि अधिशोष्य, अधिशोषक की सतह पर अत्यन्त दुर्बल वाण्डरवाल्स आकर्षण बल द्वारा बँधा रहता है तो उस अधिशोषण प्रक्रम को भौतिक अधिशोषण (Physical Adsorption or Physisorption) कहते हैं । यदि अधिशोष्य को बाँधे रहने वाले बल रासायनिक बन्ध में कार्य करने वाले बल के समान ही प्रबल हों तो इस प्रकार के अधिशोषण को रासायनिक अधिशोषण (Chemical Adsorption or Chemisorption) कहते हैं। रासायनिक अधिशोषण में अधिशोष्य के अणु अधिशोषक के पृष्ठ-तल पर रासायनिक बन्ध द्वारा जुड़े रहते हैं। अधिशोषण प्रक्रम में सामान्यतः ऊर्जा मुक्त होती है अतः यह एक ऊष्माक्षेपी प्रक्रम है।

प्रश्न 11.
अधिशोषण की एन्थैल्पी से आप क्या समझते हैं ?
उत्तर
अधिशोषण की एन्थैल्पी (Enthalpy of Adsorption) या अधिशोषण ऊष्मा (Heat of Adsorption)— “अधिशोषण प्रक्रम में एक मोल अधिशोष्य के अधिशोषक सतह पर अधिशोषण होने पर होने वाला एन्थैल्पी परिवर्तन अधिशोषण की एन्थैल्पी या अधिशोषण ऊष्मा कहलाता है।”

रासायनिक अधिशोषण की अधिशोषण ऊष्मा का मान भौतिक अधिशोषण की अधिशोषण ऊष्मा के मान से अधिक होता है। रासायनिक अधिशोषणों के लिए अधिशोषण ऊष्मा का मान लगभग 400 kJ per mol तथा भौतिक अधिशोषणों के लिए अधिशोषण ऊष्मा का मान लगभग 40 kJ per mol होता है।

प्रश्न 12.
उत्प्रेरण क्या है ? प्रेरित उत्प्रेरण के एक उदाहरण देकर समझाइए।
उत्तर
वह पदार्थ जो अपनी उपस्थिति मात्र से किसी रासायनिक क्रिया के वेग को घटा या बढ़ा देता है और स्वयं क्रिया के अन्त में भार व रासायनिक संघटन की दृष्टि से अपरिवर्तित रहता है, उत्प्रेरक कहलाता है तथा इस प्रकार की क्रिया उत्प्रेरण (Catalysis) कहलाती है।
उदाहरण – H2O2 अपघटित होकर सरलता से H2O व O2 देता है किन्तु फॉस्फोरिक अम्ल की उपस्थिति में अपघटन की क्रिया मन्द हो जाती है। यह वेग को घटाता है।

प्रेरित या उपपादित उत्प्रेरण (Induced catalysis)-जब कोई एक रासायनिक अभिक्रिया दूसरी रासायनिक अभिक्रिया के लिए उत्प्रेरक का कार्य करती है तो पहली अभिक्रिया प्रेरित उत्प्रेरक कहलाती है। इस घटना को प्रेरित उत्प्रेरण कहते हैं।
उदाहरण-सोडियम सल्फाइट वायु में रखने से ऑक्सीकृत हो जाता है परन्तु सोडियम आर्सेनाइट वायु में ऑक्सीकृत नहीं होता। सोडियम सल्फाइट और सोडियम आर्सेनाइट को मिलाकर हवा में रखने पर दोनों का ऑक्सीकरण हो जाता है।

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प्रश्न 13.
धनात्मक एवं ऋणात्मक उत्प्रेरण को उदाहरण देकर स्पष्ट कीजिए।
उत्तर
धनात्मक उत्प्रेरण—जब उत्प्रेरक रासायनिक क्रिया के वेग को बढ़ाता है, तो उसे धनात्मक उत्प्रेरक तथा इस प्रक्रम को धनात्मक उत्प्रेरण कहते हैं।
MP Board Class 12th Chemistry Solutions Chapter 5 पृष्ठ रसायन - 31
यहाँ आयरन चूर्ण एक धनात्मक उत्प्रेरक का कार्य करता है।
ऋणात्मक उत्प्रेरण—जब कोई उत्प्रेरक रासायनिक अभिक्रिया की गति को कम कर देता है, तो उसे ऋणात्मक उत्प्रेरक तथा इस प्रक्रम को ऋणात्मक उत्प्रेरण कहते हैं।
MP Board Class 12th Chemistry Solutions Chapter 5 पृष्ठ रसायन - 32
फॉस्फोरिक अम्ल यहाँ ऋणात्मक उत्प्रेरक का कार्य करता है।

प्रश्न 14.
पेप्टीकरण की क्रिया को सचित्र समझाइए।
उत्तर
पेप्टीकरण (Peptisation)-इस विधि में जिस पदार्थ का कोलॉइडी विलयन बनाना है उसका ताजा अवक्षेप लेते हैं। इस अवक्षेप में एक अन्य उपयुक्त अभिकर्मक मिलाते हैं जो पेप्टीकारक कहलाता है। यह पेप्टीकारक बहुधा समान आयन (common ion) वाले विद्युत्-अपघट्य का तनु विलयन होता है। पेप्टीकरण स्कन्दन । का विपरीत है। उदाहरण—ऐल्युमिनियम हाइड्रॉक्साइड के कोलॉइडी कण के ताजे अवक्षेप को कुछ तनु HCl मिले जल के साथ उबालने से AI(OH)3 का कोलॉइडी विलयन प्राप्त होता है।
MP Board Class 12th Chemistry Solutions Chapter 5 पृष्ठ रसायन - 33
जब किसी ताजे अवक्षेपित पदार्थ में विद्युत्-अपघट्य मिलाते हैं तो अवक्षेप के कण विद्युत्-अपघट्य के किसी एक आयन को वर्णात्मक अधिशोषण (preferential adsorption) करके स्थिर विद्युतीय प्रतिकर्षण (electrostatic repulsion) के कारण कोलॉइडी अवस्था में चले जाते हैं । इसे फेरिक हाइड्रॉक्साइड के अवक्षेप में विद्युत्-अपघट्य फेरिक क्लोराइड मिलाने पर प्राप्त फेरिक हाइड्रॉक्साइड सॉल के द्वारा समझा सकते हैं।

प्रश्न 15.
कोलॉइडी कणों पर विद्युतीय आवेश की उत्पत्ति की विवेचना कीजिए।
उत्तर
कोलॉइडी कणों पर विद्युत्-आवेश होता है। किसी कोलॉइडी विलयन में उपस्थित सभी कोलॉइडी कणों पर समान आवेश होता है। प्रतिकर्षण के कारण समान आवेश कणों को परिक्षिप्त प्रावस्था में रखता है। कोलॉइडी कणों पर विद्युतीय आवेश की उत्पत्ति निम्नलिखित कारणों से होती है –

  • घर्षण द्वारा आवेश की उत्पत्ति—परिक्षेपण माध्यम और परिक्षिप्त प्रावस्था में परस्पर घर्षण के कारण कणों पर आवेश की उत्पत्ति होती है।
  • सतह के समूहों के आयनीकरण द्वारा–कोलॉइडी कणों पर आवेश पृष्ठ पर उपस्थित समूहों के आयनीकरण से उत्पन्न होता है, ये समूह या तो कोलॉइडी पदार्थों के कण हो सकते हैं अथवा स्कंदन रोकने हेतु मिलाया गया कोई विद्युत्-अपघट्य हो सकता है।
  • वैद्युत् द्विपरत सिद्धान्त (Electric Double Layer Theory)—इस धारणा के अनुसार कोलॉइडी कणों पर आवेश की द्वि-स्तर परत होती है। एक परत अधिशोषित आयनों की होती है और दूसरी परत परिक्षेपण माध्यम में विपरीत आवेश वाले आयनों की होती है जिसे विसरित परत (diffused layer) कहते हैं।

प्रश्न 16.
कारण स्पष्ट कीजिए –
(i) दूध में खटाई डालने पर वह फट जाता है।
(ii) जल को साफ करने के लिए फिटकरी मिलाते हैं।
(iii) जहाँ नदी अपना पानी समुद्र में मिलाती है वहाँ डेल्टा बन जाता है।
उत्तर
(i) दूध वसा का जल में पायस है जिसमें ऐल्ब्यूमिन तथा केसिन पायसीकारक हैं, जब इसमें खटाई मिलाई जाती है तो उसका स्कन्दन हो जाता है और थक्का जम जाता है। इस प्रकार दूध में खटाई डालने पर वह फट जाता है।
(ii) अशुद्ध जल में मिट्टी के कण, बैक्टीरिया तथा अन्य विलेय अशुद्धियाँ रहती हैं। उनमें ऋण आवेश रहता है। अशुद्ध जल को टंकियों में लेकर उसमें फिटकरी मिलाते हैं। फिटकरी में Al3+ आयन अशुद्धि के ऋण आवेश को नष्ट कर देते हैं। इससे अशुद्धियाँ स्कन्दित होकर नीचे बैठ जाती हैं।
(iii) नदियों के जल में मिट्टी तथा रेत के ऋणावेशित कोलॉइडी कण पाये जाते हैं । जब नदी का जल समुद्र में मिलता है तो समुद्र के जल में पाये जाने वाले अनेक लवणों की स्कन्दन क्रिया के फलस्वरूप मिट्टी आदि के कण नदी के मुहाने पर नीचे एकत्रित होते रहते हैं तथा डेल्टा का निर्माण धीरे-धीरे हो जाता है।

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प्रश्न.17.
उत्प्रेरकों के पाँच गुणधर्म लिखिए।
उत्तर
उत्प्रेरकों के गुणधर्म –

  • रासायनिक क्रिया के फलस्वरूप उत्प्रेरकों के अन्य मान व रासायनिक संघटन पर कोई प्रभाव नहीं पड़ता केवल भौतिक अवस्था में कुछ परिवर्तन हो सकता है।
  • उत्प्रेरक की रासायनिक अभिक्रिया में सूक्ष्म मात्रा की ही आवश्यकता होती है।
  • उत्प्रेरक किसी अभिक्रिया को प्रारम्भ नहीं करते बल्कि ये अभिक्रिया के वेग को प्रभावित करते हैं।
  • उत्प्रेरक किसी रासायनिक अभिक्रिया के साम्य को प्रभावित नहीं करते क्योंकि ये अग्र व प्रतीप दोनों अभिक्रियाओं को समान ढंग से प्रभावित करते हैं।
  • उत्प्रेरक विशिष्ट स्वभाव युक्त होते हैं। अलग-अलग अभिक्रियाओं के लिये अलग-अलग उत्प्रेरक प्रयुक्त होते हैं । उत्प्रेरक किसी निश्चित अनुकूल ताप पर सर्वाधिक प्रभावी होते हैं । इस ताप से कम तथा अधिक ताप होने पर उत्प्रेरक की क्रियाशीलता प्रभावित होती है।

प्रश्न 18.
रंगीन काँच, धुआँ, दूध, क्रीम, कोहरा, जेली, झाँबा पत्थर, साबुन का झाग, कौन-से कोलॉइडी तन्त्र के उदाहरण हैं, उनके नाम लिखिए।
उत्तर
MP Board Class 12th Chemistry Solutions Chapter 5 पृष्ठ रसायन - 34

प्रश्न 19.
वास्तविक विलयन, कोलॉइडी विलयन एवं निलम्बन में विभेद कीजिए। · उत्तरवास्तविक विलयन (Real Solution), कोलॉइडी विलयन (Colloidal Solution) एवं निलम्बन (Suspension) में विभेद –
MP Board Class 12th Chemistry Solutions Chapter 5 पृष्ठ रसायन - 36

प्रश्न 20.
अधिशोषक के सक्रियण से आप क्या समझते हैं ? यह कैसे प्राप्त किया जाता है ?
उत्तर
अधिशोषक के सक्रियण का अर्थ है, अधिशोषक की अधिशोषण शक्ति को बढ़ाना। यह अधिशोषक के पृष्ठीय क्षेत्रफल को बढ़ाकर किया जा सकता है जिसे निम्न प्रकार प्राप्त किया जा सकता है –

  • अधिशोषित गैसों को हटाकर अर्थात् लकड़ी के चारकोल को निर्वात में या अति उच्च तापीय भाप में 650 K से 1330 K ताप के मध्य गर्म करके सक्रिय किया जा सकता है।
  • अधिशोषक को छोटे टुकड़ों में तोड़कर।
  • अधिशोषक के पृष्ठ को रफ (ऊबड़-खाबड़) बनाकर।

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प्रश्न 21.
विषमांगी उत्प्रेरण में, अधिशोषक की क्या भूमिका है ?
उत्तर
सामान्यतः विषमांगी उत्प्रेरण में, अभिक्रियक गैसीय जबकि उत्प्रेरक ठोस अवस्था में होते हैं। अभिक्रियक अणुओं का ठोस उत्प्रेरक के पृष्ठ पर भौतिक या रासायनिक अधिशोषण द्वारा अधिशोषित हो जाता है। अभिक्रियत अणुओं की सान्द्रता बढ़ने से या ठोस उत्प्रेरक के पृष्ठ पर अभिक्रियक अणुओं के टूटकर स्पीशीज बनने से जोकि तीव्रता से अभिक्रिया करती है, अभिक्रिया की गति बढ़ जाती है। उत्पाद अणुओं का विशोषण हो जाता है और अब उत्प्रेरक सतह दोबारा अधिक अभिक्रियक अणुओं को अधिशोषित करने के लिए उपलब्ध हो जाती है। यह सिद्धान्त विषमांगी उत्प्रेरण का अधिशोषण कहलाता है।

पृष्ठ रसायन दीर्घ उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 1.
निम्नलिखित पर संक्षिप्त टिप्पणियाँ लिखिए – (i) ब्राउनी गति, (ii) स्व-उत्प्रेरण।
उत्तर
(i) ब्राउनी गति (Brownian Movement)-कोलॉइडी विलयन का सूक्ष्मदर्शी से निरीक्षण करने पर ज्ञात होता है कि कोलॉइडी कण सदैव टेढ़े-मेढ़े (Zig-Zag) तरीके से सभी दिशाओं में गति करते रहते हैं। इस प्रकार की गति को सबसे पहले रॉबर्ट ब्राउन ने सन् 1827 में देखा था इसलिए इसे ब्राउनी गति कहते . हैं। इस गति का प्रयोग किसी अँधेरे कमरे में एक छिद्र द्वारा प्रकाश की किरणों को देखने से भी किया जा सकता है। धूल के कण वायु में इधर-उधर घूमते हुए दिखाई पड़ते हैं। वीनर (Weiner) के अनुसार वह गति कोलॉइडी कण के परिक्षेपण माध्यम के अणुओं के साथ असमान रूप से टकराने से उत्पन्न होती है। जैसे-जैसे कणों का आकार बढ़ता जाता है यह गति कम होती जाती है और निलम्बन में पूर्णतः समाप्त हो जाती है।
MP Board Class 12th Chemistry Solutions Chapter 5 पृष्ठ रसायन - 37

(ii) स्व-उत्प्रेरण (Autocatalysis)-जब क्रिया से उत्पन्न पदार्थों में से कोई पदार्थ उत्प्रेरक का कार्य करने लगता है तो वह स्व-उत्प्रेरक कहलाता है तथा अभिक्रिया को स्व-उत्प्रेरण कहते हैं।
उदाहरण-एथिल ऐसीटेट के जल-अपघटन से ऐसीटिक अम्ल बनता है, जो स्व-उत्प्रेरक का कार्य करता है।
MP Board Class 12th Chemistry Solutions Chapter 5 पृष्ठ रसायन - 38

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प्रश्न 2.
द्रव-स्नेही और द्रव-विरोधी कोलॉइड में अन्तर स्पष्ट कीजिए।
उत्तर
द्रव-स्नेही (Lyophillic) व द्रव-विरोधी (Lyophobic) कोलॉइड में अन्तर –
MP Board Class 12th Chemistry Solutions Chapter 5 पृष्ठ रसायन - 39

प्रश्न 3.
हार्डी-शूल्जे का नियम क्या है ?
उत्तर
हार्डी-शूल्जे का नियम-धन आवेश वाले कोलॉइड कण जैसे कोलॉइड Fe(OH), का स्कन्दन SO2-4,PO3-4 आदि आयनों से तथा As2S3 जैसे ऋणावेश वाले कोलॉइड Ba2+, Al3+ आदि आयनों द्वारा स्कन्दित होते हैं। विभिन्न आयनों की स्कन्दन क्षमता हार्डी शूल्जे नियम द्वारा प्रतिपादित की गई है जिसके अनुसार, “किसी आयन की स्कन्दन शक्ति उसकी संयोजकता पर निर्भर है, जितनी अधिक संयोजकता होगी उतनी ही अधिक स्कन्दन शक्ति होगी।”
MP Board Class 12th Chemistry Solutions Chapter 5 पृष्ठ रसायन - 40

प्रश्न 4.
उत्प्रेरक के माध्यमिक यौगिक सिद्धान्त को उदाहरण देकर समझाइए।
उत्तर
माध्यमिक यौगिक सिद्धान्त इस सिद्धान्त के अनुसार उत्प्रेरक किसी एक अभिकारक के साथ संयोग करके एक माध्यमिक यौगिक बनाता है। माध्यमिक यौगिक फिर दूसरे अभिकारक के साथ क्रिया करके अभीष्ट यौगिक बनाता है तथा उत्प्रेरक मुक्त हो जाता है जो उपर्युक्त अनुसार पुनः कार्य करता है। यदि पदार्थ A व B संयोग करके यौगिक AB बनाते हैं तब प्रयुक्त उत्प्रेरक X का कार्य इस सिद्धान्त के अनुसार निम्न प्रकार से समझाया जा सकता है –
A + X → AX माध्यमिक यौगिक
AX + B → AB + X
इस प्रकार मुक्त हुआ उत्प्रेरक बार-बार क्रिया में भाग लेता रहता है। अभिक्रिया में लगा समय, A व B के मध्य सीधी अभिक्रिया में लगने वाले समय से कम होगा।
उदाहरण-सीस-कक्ष विधि द्वारा सल्फ्यूरिक अम्ल (H2SO4) के निर्माण में नाइट्रिक ऑक्साइड (NO) उत्प्रेरक का कार्य करता है। यह पहले ऑक्सीजन से संयोग करके NO2 (नाइट्रोजन परॉक्साइड) (माध्यमिक यौगिक) बनाता है। NO2 फिर सल्फर डाइ-ऑक्साइड (SO2) से क्रिया करके SO3 (सल्फर ट्राइ-ऑक्साइड) बनाता है तथा उत्प्रेरक NO मुक्त हो जाता है, जो अभिक्रिया को श्रृंखला के रूप में बढ़ाता रहता है।
MP Board Class 12th Chemistry Solutions Chapter 5 पृष्ठ रसायन - 41

प्रश्न 5.
एन्जाइम उत्प्रेरक व सामान्य उत्प्रेरक में कोई पाँच अन्तर लिखिए।
उत्तर
एन्जाइम उत्प्रेरक और सामान्य उत्प्रेरक में अन्तर-
MP Board Class 12th Chemistry Solutions Chapter 5 पृष्ठ रसायन - 42

प्रश्न 6.
अधिशोषण क्या है ? इसे प्रभावित करने वाले कारकों का वर्णन कीजिए।
अथवा
(a) ठोसों के द्वारा गैसों की अधिशोषण की मात्रा किन कारकों पर निर्भर करती है ? (छः कारक)
(b) अधिशोषण के पाँच अनुप्रयोग लिखिए।
उत्तर
जब किसी पदार्थ (गैस या द्रव) की किसी ठोस की सतह पर संलग्न सान्द्रता उसके स्थूल (Bulk) में उपस्थित सान्द्रता की अपेक्षा अधिक होती है तब इस घटना को अधिशोषण (Adsorption) कहते हैं। यह एक पृष्ठ घटना है जो कि किसी ठोस की सतह पर असन्तुलित बलों की उपस्थिति के कारण होती है।
(a) किसी गैस का ठोस पर अधिशोषण निम्नलिखित कारकों पर निर्भर करती है –
1. अधिशोषक की प्रकृति-कठोर तथा रन्ध्रहीन (Non-porous) पदार्थों की तुलना में रन्ध्रयुक्त (Porous) तथा महीन चूर्ण के रूप में ठोस पदार्थ जैसे चारकोल आदि में अधिशोषण अधिक होता है। इसी गुण के कारण गैस मॉस्क में चारकोल पाउडर का उपयोग होता है। इसका कारण है, रन्ध्रयुक्त या चूर्ण रूप में होने पर ठोस का पृष्ठ क्षेत्रफल बहुत अधिक बढ़ जाता है।

2. ठोस अधिशोष्य के पृष्ठ का क्षेत्रफल-अधिशोषण का कम या अधिक होना अधिशोष्य के पृष्ठ के क्षेत्रफल पर निर्भर करता है। अधिशोष्य के पृष्ठ का क्षेत्रफल जितना अधिक होगा, अधिशोषण उतना ही अधिक होगा। सूक्ष्म वितरित (Finely divided) ठोस में अधिक अधिशोषण होने का यही कारण है।

3. अधिशोष्य गैस का दाब-साम्यावस्था पर अधिशोषक पर अधिशोष्य गैस के दाब का मान बढ़ाने से अधिशोषण बढ़ जाता है। कम ताप पर गैस में वृद्धि करने से अधिशोषण की मात्रा तेजी से बढ़ती है, किन्तु उच्च दाब पर अधिशोषण एक अधिकतम मान प्राप्त कर लेता है।
4. ताप (Temperature)—अधिशोषण एक ऊष्माक्षेपी प्रक्रम है। अतः लीशातेलिए सिद्धान्त से, ताप बढ़ाने पर अधिशोषण कम हो जाता है।
5.अधिशोषक का सक्रियण-यह किसी अधिशोषक की अधिशोषण शक्ति को बढ़ाने की विधि है, जैसे-अधिशोषक को यान्त्रिक विधियों द्वारा खुरदुरा बनाया जाता है या अधिशोषक को दानेदार बनाकर पृष्ठ क्षेत्रफल में वृद्धि की जाती है।
6.गैस की प्रकृति-अधिशोषक अधिशोषण की प्रवृत्ति वाले गैसों की प्रकृति पर निर्भर करती है। H2, O2, N2, की तुलना में CO2, NH3, Cl2 आदि का अधिशोषण अधिक होता है। .

(b) हमारे दैनिक जीवन में अधिशोषण के अनेक उपयोग हैं, उनमें से कुछ निम्नलिखित हैं –

  • गैस मॉस्क में-विषैली गैसें, जैसे-CO, CH4 आदि को दूर करने के लिए गैस मॉस्क में सक्रियित चारकोल प्रयुक्त होता है, जो वायुमण्डल में उपस्थित विषैली गैसों को अधिशोषित कर लेते हैं। ..
  • चीनी के निर्माण में-चीनी के निर्माण में जन्तु चारकोल का प्रयोग, इसे रंगहीन करने में करते हैं।
  • नमी दूर करने में-सिलिका जेल का उपयोग नमी को दूर करने में किया जाता है।
  • क्रोमैटोग्राफी में-क्रोमैटोग्राफी द्वारा यौगिकों का शुद्धिकरण भी अधिशोषण सिद्धान्त पर आधारित
  • उत्प्रेरण में-विषमांग उत्प्रेरक प्रक्रिया में अधिशोषण प्रक्रम की महत्वपूर्ण भूमिका होती है।

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प्रश्न 7.
कोलॉइड रसायन के कोई पाँच अनुप्रयोग लिखिए। उत्तर-कोलॉइड रसायन के पाँच अनुप्रयोग निम्नलिखित हैं

  • औषधियों में अनेक औषधियों का उपयोग कोलॉइड के रूप में ही होता है, क्योंकि कोलॉइड अवस्था में होने के कारण शरीर द्वारा इनका शोषण एवं पाचन आसानी से हो जाता है। जैसे-कोलॉइडी गोल्ड तथा कैल्सियम बल वर्धक औषधियों के रूप में काम आता है।
  • जल को शुद्ध करना-अशुद्ध जल में धूल, मिट्टी के कण, बैक्टीरिया आदि की अशुद्धियाँ कोलॉइडी रूप में रहती है और इन अशुद्धियों पर ऋण आवेश होता है। जब इस जल में फिटकरी डालते हैं तो उससे AI+ आयन इस ऋणावेशित कणों आदि की अशुद्धियों को उदासीन कर देते हैं तथा अवक्षेप के रूप में नीचे बैठ जाते हैं और शुद्ध जल को निकालकर पृथक् कर लेते हैं।
  • नदियों के डेल्टा बनाने में-नदी के जल में मिट्टी के कण कोलॉइडी अवस्था में होते हैं जिन पर ऋण आवेश होता है। जब नदी समुद्र में गिरती है तो उसमें उपस्थित विद्युत्-अपघट्य इन ऋणावेशित मिट्टी के कणों का स्कन्दन कर देते हैं जो डेल्टा के रूप में बन जाता है।
  • चमड़ा उद्योग में-चमड़े में प्रोटीन कोलॉइडी अवस्था में रहता है। इन कणों पर धनावेश होता है। पेड़ों की छाल से प्राप्त ऋणावेशित टेनिन का कोलॉइडी विलयन चमड़े पर डाले जाते हैं जिससे वे परस्पर स्कंदित हो जाते हैं और चमड़ा कड़ा हो जाता है और सड़ने नहीं पाता।।
  • साबुन की क्रिया में-साबुन पानी के साथ कोलॉइडी विलयन देता है। कोलॉइडी विलयन का गुण अधिशोषण करने का होता है। कपड़ों में उपस्थित धूल के कणों का कोलॉइडी साबुन द्वारा उसकी सतह पर अधिशोषण हो जाता है और सतह से ये धूल के कण पानी द्वारा धोने पर दूर हो जाते हैं।

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MP Board Class 11th Maths Solutions Chapter 16 प्रायिकता विविध प्रश्नावली

MP Board Class 11th Maths Solutions Chapter 16 प्रायिकता विविध प्रश्नावली

प्रश्न 1.
एक डिब्बे में 10 लाल, 20 नीली व 30 हरी गोलियाँ रखी हैं। डिब्बे से 5 गोलियाँ यादृच्छया निकाली जाती हैं। प्रायिकता क्या है कि
(i) सभी गोलियाँ नीली हैं?
(ii) कम से कम एक गोली हरी है ?
हल:
एक डिब्बे में 10 लाल, 20 नीली तथा 30 हरी कुल 60 गोलियाँ हैं।
(i) 60 गोलियों में से 5 गोलियाँ निकालने के तरीके = \(60 \mathrm{C}_{5}\)
∴ n(S) = \(60 \mathrm{C}_{5}\)
20 नीली गोलियाँ हैं इनमें से 5 गोलियाँ चुनने के तरीके = \(20 \mathrm{C}_{5}\)
5 नीली गोलियाँ निकालने की प्रायिकता
MP Board Class 11th Maths Solutions Chapter 16 प्रायिकता विविध प्रश्नावली img-1

प्रश्न 2.
ताश के 52 पत्तों की एक अच्छी तरह फेंटी गई गड्डी से 4 पत्ते निकाले जाते हैं। इस बात की क्या प्रायिकता है कि निकाले गए पत्तों में 3 ईंट और एक हुकुम का पत्ता है ?
हल:
कुल 52 पत्तों की ताश की गड्डी में से 4 पत्ते निकालने के तरीके = \(^{52} C_{4}\)
∴ n(S) = \(^{52} C_{4}\)
3 ईट के पत्ते निकालने के तरीके = \(^{13} C_{3}\)
एक हुकुम का पत्ता निकालने के तरीके = \(^{13} C_{1}\)
3 ईट और 1 हुकुम का पत्ता निकालने के तरीके = \(^{13} C_{3} \times^{13} C_{1}\)
अनुकूल परिणामों की कुल संख्या = \(^{13} C_{3} \times^{13} C_{1}\)
अतः 3 ईंट और एक हुकुम के पत्ते निकालने की प्रायिकता = \(\frac{13 C_{3} \times 13 C_{1}}{^{52} C_{4}}\).

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प्रश्न 3.
एक पासे के दो फलकों में से प्रत्येक पर संख्या 1 अंकित है। तीन फलकों में प्रत्येक पर संख्या 2 अंकित है और एक फलक पर संख्या 3 अंकित है। यदि पासा एक बार फेंका जाता है, तो निम्नलिखित ज्ञात कीजिए :
(i) P(2)
(ii) P(i या 3)
(iii) P(3 – नहीं)
हल:
पासे पर कुल संभावित परिणाम = 6
(i) 2 अंक 3 फलकों पर अंकित है
2 प्राप्त करने के 3 तरीके हैं
P(2) = \(\frac{3}{6}=\frac{1}{2}\)

(ii) दो फलकों पर 1 है।
∴ 1 प्राप्त करने के तरीके, P(1) = \(\frac{2}{6}\)
3 एक फलक पर अंकित है। अत: 3 एक तरीके से मिल सकता है, P(3) = \(\frac{1}{6}\)
∴ P(1 या 3) = \(\frac{2}{6}+\frac{1}{6}=\frac{3}{6}=\frac{1}{2}\)

(iii) 6 फलकों में 3 केवल एक फलक पर है।
अतः 3 प्राप्त न करने के तरीके = 6 – 1 = 5
∴ P(3 – नहीं) = \(\frac{5}{6}\).

प्रश्न 4.
एक लाटरी में 10000 टिकट बेचे गए जिनमें दस समान इनाम दिए जाने हैं। कोई भी इनाम न मिलने की प्रायिकता क्या है यदि आप
(a) एक टिकट खरीदते हैं
(b) दो टिकट खरीदते हैं
(c) 10 टिकट खरीदते हैं ?
हल:
टिकटों की संख्या जिन पर इनाम नहीं है
= 10000 – 10 = 9990
∵ कुल टिकटों की संख्या = 10000
(a) एक टिकट जिससे कोई इनाम नहीं मिलेगा ऐसे कुल तरीके
= \(9990 C_{1}\) = 9990
जबकि कुल संभावी परिणाम = 10,000
एक टिकट के साथ इनाम न मिलने की प्रायिकता
= \(\frac{9990}{10000}=\frac{999}{1000}\)

(ii) बिना इनाम वाले 9990 में से 2 टिकट मिलने के तरीके
= \(9990 \mathrm{C}_{2}\)
कुल 10000 टिकट हैं। उनमें से 2 टिकट पाने के तरीके
= \(10000 \mathrm{C}_{2}\)
दो टिकट के साथ इनाम न मिलने की प्रायिकता = \(\frac{9990 C_{2}}{10000 C_{2}}\).

(iii) इसी प्रकार 9990 में बिना इनाम वाले 10 टिकट को पाने के तरीके
= \(9990 \mathrm{C}_{10}\)
10000 में से 10 टिकट पाने के तरीके = \(10000 C_{10}\)
अतः 10 टिकट के साथ इनाम न मिलने की प्रायिकता
= \(\frac{9990 \mathrm{C}_{10}}{10000 \mathrm{C}_{10}}\).

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प्रश्न 5.
100 विद्यार्थियों में से 40 और 60 विद्यार्थियों के दो वर्ग बनाए गए हैं। यदि आप और आपकाएक मित्र 100 विद्यार्थियों में हैं तो प्रायिकता क्या है कि
(a) आप दोनों एक ही वर्ग में हों।
(b) आप दोनों अलग-अलग वर्गों में हों।
हल:
माना दो वर्ग A और B हैं जिनमें क्रमशः 40 और 60 विद्यार्थी हैं।
(i) मान लीजिए दोनों विद्यार्थी वर्ग A में आते हैं।
∴ 98 विद्यार्थियों में से 38 विद्यार्थी चुने जाते हैं।
98 विद्यार्थियों में से 38 विद्यार्थी चुनने के तरीके = \(98 \mathrm{C}_{38}\)
बिना किसी शर्त के, 100 में से 40 विद्याथीं चुनने के तरीके n(S) = \(^{100} C_{40}\)
दोनों विद्यार्थी (वह और उसका मित्र) एक ही वर्ग A में प्रवेश करने की प्रायिकता
MP Board Class 11th Maths Solutions Chapter 16 प्रायिकता विविध प्रश्नावली img-2

(ii) यदि दोनों विद्यार्थी वर्ग B में प्रवेश करते हैं। तब 98 विद्यार्थियों में से 58 विद्यार्थी चुनने के तरीके = \(98 \mathrm{C}_{58}\)
100 विद्यार्थियों में से 60 विद्यार्थी चुनने के तरीके = \(^{100} C_{60}\)
अतः यदि वे विद्यार्थी वर्ग B में प्रवेश पाते हैं तो उसकी प्रायिकता
MP Board Class 11th Maths Solutions Chapter 16 प्रायिकता विविध प्रश्नावली img-3
MP Board Class 11th Maths Solutions Chapter 16 प्रायिकता विविध प्रश्नावली img-4
दोनों विद्यार्थी वर्ग A या वर्ग B में प्रवेश पाते हैं तो उसकी प्रायिकता
= \(\frac{26}{165}+\frac{59}{165}=\frac{85}{165}=\frac{17}{33}\).
(b) दोनों विद्यार्थियों के विभिन्न वर्गों में प्रवेश पाने की प्रायिकता
= 1 – \(\frac{17}{33}=\frac{33-17}{33}=\frac{16}{33}\).

प्रश्न 6.
तीन व्यक्तियों के लिए तीन पत्र लिखवाए गए हैं और प्रत्येक के लिए पता लिखा एक लिफाफा है। पत्रों को लिफाफों में यादृच्छया इस प्रकार डाला गया कि प्रत्येक लिफाफे में एक ही पत्र है। प्रायिकता ज्ञात कीजिए कि कम से कम एक पत्र अपने सही लिफाफे में डाला गया है।
हल:
मान लीजिए लिफाफों को A, B, C और संगत पत्रों को क्रमशः a, b, c से निरूपित किया गया है।
(i) एक पत्र उसके संगत लिफाफे में और दूसरे दो गलत लिफाफे में रखने के तरीके
(Aa, Bc, Cb), (Ac, Bb, Ca), (Ab, Ba, Cc)

(ii) यदि दो पत्र संगत (ठीक) लिफाफों में रखे गए हैं तो तीसरा भी संगत (ठीक) लिफाफे में होगा।

(iii) तीनों पत्र उनके संगत (ठीक) लिफाफों में रखे जाए (Aa, Bb, Cc) एक तरीका है।
पत्र कम से कम एक संगत लिफाफे में रखे जाने के तरीके
3 + 1 = 4
तीन पत्रों को तीन लिफाफा में रखने के कुल तरीके = 3! = 6
∴ कम से कम एक पत्र संगत लिफाफे में रखे जाने की प्रायिकता
= \(\frac{4}{6}=\frac{2}{3}\).

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प्रश्न 7.
A और B दो घटनाएँ इस प्रकार हैं कि P(A) = 0.54, P(B) = 0.69 और P(A ∩ B) = 0.35, ज्ञात कीजिए:
(i) P(A ∪ B)
(ii) P(A’ ∩ B)
(iii) P(A ∩ B’)
(iv) P(B ∩ A’)
हल:
P(A) = 0.54, P(B) = 0.69, P(A ∩ B) = 0.35
P(A ∪ B) = P(A) + P(B) – (A ∩ B)
= 0.54 + 0.69 – 0.35 = 0.88

(ii)P(A’ ∩ B’) = P[(A ∪ B)’] = 1 – P(A ∪ B)
= 1 – 0.88 = 0.12.

(iii) P(A ∩ B’) = P(A) – P(A ∩ B)
= 0.54 – 0.35 = 0.19.

(iv) P(B ∩ A’) = P(B) – P(B ∩ A)
= 0.69 – 0.35 = 0.34.

प्रश्न 8.
एक संस्था के कर्मचारियों में से 5 कर्मचारियों का चयन प्रबन्ध समिति के लिए किया गया है। पाँच कर्मचारियों का ब्यौरा निम्नलिखित है :
MP Board Class 11th Maths Solutions Chapter 16 प्रायिकता विविध प्रश्नावली img-5
इस समूह से प्रवक्ता पद के लिए यादृच्छया एक व्यक्ति का चयन किया गया। प्रवक्ता के पुरुष या 35 वर्ष से अधिक आयु का होने की प्रायिकता क्या है ?
हल:
माना A पुरुष के चयन और B व्यक्ति की आयु 35 वर्ष से अधिक को दर्शाते हैं।
पुरुषों की कुल संख्या = 3
35 वर्ष से अधिक आयु के कुल लोग = 2
35 वर्ष से अधिक आयु का पुरुष 1 है।
MP Board Class 11th Maths Solutions Chapter 16 प्रायिकता विविध प्रश्नावली img-6

प्रश्न 9.
यदि 0, 1, 3, 5 और 7 अंकों द्वारा 5000 से बड़ी चार अंकों की संख्या का यादृच्छया निर्माण किया गया हो तो पाँच से भाज्य संख्या के निर्माण की क्या प्रायिकता है जब :
(i) अंकों की पुनरावृत्ति नहीं की जाए ?
(ii) अंकों की पुनरावृत्ति की जाए ?
हल:
(i) जब अंकों की पुनरावृत्ति नहीं होती।
मान लीजिए अंकों के स्थानों को I, II, III, IV से निरूपित किया गया हैं।
5000 से बड़ी संख्या बनाने के लिए स्थान I पर 5 या 7 रखना होगा अर्थात स्थान I को भरने के तरीके = 2
अब 5 अंक शेष रह जाते हैं।
स्थान II, III और IV को 4, 3 व 2 तरीकों से भर सकते हैं।
∴ 5000 से बड़ी संख्याएँ = 4 x 4 x 3 x 2 = 48 = n(S)
5 से भाज्य संख्याएँ वे हैं जब इकाई (स्थान IV) पर 0 या 5 हो। 5 को स्थान I पर तथा 0 को स्थान IV पर रखने के बाद 3 अंक बचते हैं। स्थान II और III, को 2 x 3 = 6 तरीकों से भरा जा सकता है।
इस प्रकार स्थान I पर जब 5 हो और IV पर 0 हो तो 6 संख्याएँ बनती हैं।
जब स्थान I पर 7 और स्थान IV पर 5 हो तो भी 6 संख्याएँ बनेंगी।
∴ 5000 से बड़ी और 5 से भाज्य संख्याएँ
= 6 + 6 + 6 = 18
अत: 5000 से बड़ी और 5 से भाज्य संख्याओं के बनने की प्रायिकता
= \(\frac{18}{24}=\frac{3}{4}\)

(ii) जब पुनरावृत्ति की जा सकती है।
स्थान [ पर 5 या 7 रख सकते है जिससे संख्या 5000 से बड़ी बन सके।
∴ स्थान I को 2 तरीकों से भर सकते हैं।
क्योंकि पुनरावृत्ति की अनुमति है तो प्रत्येक स्थान II, III, IV को 5 तरीकों से भर सकते हैं।
चारों स्थानों को भरने के तरीके या 5000 से बड़ी संख्याएँ
= 2 × 5 × 5 × 5 = 250 = n(S)
संख्या यदि 5 से भाज्य है तो इकाई (IV) स्थान पर 0 या 5 रखना होगा।
इसलिए इकाई के स्थान को 2 तरीकों से भर सकते हैं।
बीच के स्थान II और III को 5 × 5 तरीकों से भर सकते हैं।
इस प्रकार 5000 से बड़ी और 5 से भाज्य संख्याएँ = 2 × 5 × 5 × 2 = 100
5000 से बड़ी और 5 से भाज्य बनाने वाली संख्याओं की प्रायिकता
= \(\frac{100}{250}=\frac{2}{5}\).

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प्रश्न 10.
किसी अटैची के ताले में चार चक्र लगे हैं। जिनमें प्रत्येक पर 0 से 9 तक 10 अंक अंकित हैं। ताला चार अंकों के एक विशेष क्रम (अंकों की पुनरावृत्ति नहीं) द्वारा ही खुलता है। इस बात की क्या प्रायिकता है कि कोई व्यक्ति अटैची खोलने के लिए सही क्रम का पता लगा ले।
हल:
प्रथम स्थान पर कोई अंक 10 तरीकों से ही लाया जा सकता है। यहाँ 0, 1, 2, …. 9 में से कोई भी अंक ‘हो सकता है।
दूसरे, तीसरे व चौथे स्थान को 9 × 8 × 7 तरीकों से भरा जा सकता है।
इस प्रकार चार अंकों की संख्या (जबकि पुनरावृत्ति नहीं की गई है) बनने के तरीके = 10 × 9 × 8 × 7 = 5040
ताले को खोलने के लिए सही संख्या केवल एक ही है।
∴ अटैची को खोलने का सही क्रम ज्ञात करने की प्रायिकता = \(\frac{1}{5040}\).

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MP Board Class 11th Maths Solutions Chapter 16 प्रायिकता Ex 16.3

MP Board Class 11th Maths Solutions Chapter 16 प्रायिकता Ex 16.3

प्रश्न 1.
प्रतिदर्श समष्टि S = {ω1, ω2, ω3, ω4, ω5, ω6} के परिणामों के लिए निम्नलिखित में से कौन से प्रायिकता निर्धारण वैध नहीं हैं :
MP Board Class 11th Maths Solutions Chapter 16 प्रायिकता Ex 16.3 img-1
हल:
(a) 0.1 + 0.01 + 0.05 + 0.03 + 0.01 + 0.2 + 0.6 = 1.00
घटनाओं की दी गयी प्रायिकता का योगफल 1 है।
अतः निर्धारित प्रायिकता वैध है।
(b) दी गयी प्रायिकताओं का योगफल
= \(\frac{1}{7}+\frac{1}{7}+\frac{1}{7}+\frac{1}{7}+\frac{1}{7}+\frac{1}{7}+\frac{1}{7}=\frac{7}{7}\) = 1
∴ दी गयी प्रायिकता वैध है।
(c) दी हुई प्रायिकताओं का योग
= 0.1 + 0.1 + 0.3 + 0.4 + 0.5 + 0.6 + 0.7
= 2.7
यह एक से अधिक है
अतः दी गयी प्रायिकता वैध नहीं है।
(d) किसी भी घटना की प्रायिकता ऋणात्मक नहीं हो सकती।
यहाँ पर दो प्रायिकताएँ – 0.1 और – 0.2 ऋणात्मक हैं।
अतः दी गयी प्रायिकता वैध नहीं है।
(e) दी गयी प्रायिकताओं का योगफल
MP Board Class 11th Maths Solutions Chapter 16 प्रायिकता Ex 16.3 img-2
जो कि एक से अधिक है
अतः दी गयी प्रायिकता वैध नहीं है।

प्रश्न 2.
एक सिक्का दो बार उछाला जाता है। कम से कम एक पट प्राप्त होने की क्या प्रायिकता है ?
हल:
दिए हुए परीक्षण का प्रतिदर्श समष्टि
S = {HH, HT, TH, TT}
∴ कुल सम्भावित परिणामों की संख्या = 4 कम से कम एक पट प्राप्त करने के तरीके TH, HT, TT = 3
एक सिक्के को दो बार उछालने से कम से कम 1 पट प्राप्त करने की प्रायिकता = \(\frac{3}{4}\).

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प्रश्न 3.
एक पासा फेंका जाता है। निम्नलिखित घटनाओं की प्रायिकता ज्ञात कीजिए :
(i) एक अभाज्य संख्या प्रकट होना।
(ii) 3 या 3 से बड़ी संख्या प्रकट होना।
(iii) 1 या 1 से छोटी संख्या प्रकट होना।
(iv) छः से बड़ी संख्या प्रकट होना।
(v) छः से छोटी संख्या प्रकट होना।
हल:
एक पासे को फेंकने में परीक्षण का प्रतिदर्श समष्टि
S = {1, 2, 3, 4, 5, 6}
अर्थात् कुल सम्भावित परिणाम n (S) = 6
(i) अभाज्य संख्याएँ 2, 3, 5 हैं।
n (A)= 3
अतः एक अभाज्य संख्या प्रकट होने की प्रायिकता
= \(\frac{n(A)}{n(S)}=\frac{3}{6}=\frac{1}{2}\)

(ii) माना घटना 3 या 3 से बड़ी संख्या को B से दर्शाया गया है, 3 या 3 से बड़ी संख्याएँ 3, 4, 5, 6 हैं।
n (B) = 4
अतः प्रायिकता, P(B) = \(\frac{n(B)}{n(S)}=\frac{4}{6}=\frac{2}{3}\).

(iii) माना घटना 1 या 1 से छोटी संख्या को C से दर्शाया गया है।
1 या 1 से छोटी संख्याएँ = 1
∴ n(C) = 1
अतः प्रायिकता, P(C) = \(\frac{1}{6}\).

(iv) एक पासे पर 6 से बड़ी कोई संख्या नहीं होती है, अर्थात् इसकी प्रायिकता
= \(\frac{0}{6}\) = 0

(v) 6 से छोटी संख्याएँ : 1, 2, 3, 4, 5 हैं। यदि इसे E से दर्शाया गया हो, तब
n(E) = 5
अतः प्रायिकता, P(E) = \(\frac{5}{6}\).

प्रश्न 4.
ताश की एक गड्डी के 52 पत्तों में से एक पत्ता यादृच्छया निकाला गया है।
(a) प्रतिदर्श समष्टि में कितने बिन्दु हैं ?
(b) पत्ते का हुकुम का इक्का होने की प्रायिकता क्या है ?
(c) प्रायिकता ज्ञात कीजिए कि पत्ता
(i) इक्का है
(ii) काले रंग का है।
हल:
(a) ताश की गड्डी में कुल 52 पत्ते होते हैं। जब एक पत्ता निकाला जाता है तो इसके प्रतिदर्श समष्टि में 52 बिन्दु होते हैं।
(b) ताश को गड्डी में हुकुम का एक इक्का होता है। यदि एक पत्ता निकालने की घटना को A से दर्शाया जाए तो
n(A) = 1, n(S) = 52
P(A) = P(हुकुम का इक्का) = \(\frac{1}{52}\).
(c) (i) यदि B इक्का निकालने को दर्शाता हो तो
n(B) = 4 [∵ ताश की गड्डी में 4 इक्के होते हैं।]
n(S) = 52
∴ P(B) = \(\frac{1}{13}\).

(ii) C काले रंग हुकुम की पत्ते आने की घटना को दर्शाता है .
n(C) = 26 [∵ ताश की गड्डी में 26 काले पत्ते होते हैं।]
n(s) = 52
∴ P(C) = \(\frac{26}{52}=\frac{1}{2}\)

प्रश्न 5.
एक अनभिनत (unbiased) सिक्का जिसके एक तल पर 1 और दूसरे तल पर 6 अंकित है तथा एक अनभिनत पासा दोनों को उछाला जाता है। प्रायिकता ज्ञात कीजिए कि प्रकट संख्याओं का योग (i) 3 है (ii) 12 है।
हल:
एक पासे पर 1 व 6 अंकित है और दूसरे पर 1, 2, 3, 4, 5, 6.
∴ प्रतिदर्श समष्टि = {(1, 1), (1, 2), (1, 3), (1, 4), (1, 5), (1, 6), (6, 1), (6, 2), (6, 3), (6, 4), (6, 5), (6, 6)}
(i) दी गयी संख्याओं का योग 3 घटना (1, 2) से प्राप्त होता है।
अनुकूल परिणामों की संख्या = 1
∴ प्रायिकता जब प्राप्त संख्याओं का योग 3 है = \(\frac{1}{12}\)

(ii) दी गयी संख्याओं का योग घटना (6, 6) से प्राप्त होता है। यहाँ अनुकूल परिणामों की संख्या = 1
∴ प्रायिकता जब प्राप्त संख्याओं का योग 12 है = \(\frac{1}{12}\)

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प्रश्न 6.
नगर परिषद् में चार पुरुष व छः स्त्रियाँ हैं। यदि एक समिति के लिए यादृच्छया एक परिषद् सदस्य चुना गया है तो एक स्त्री के चुने जाने की कितनी सम्भावना है ?
हल:
नगर परिषद् में चार पुरुष व छः स्त्रियाँ हैं।
उनमें से किसी एक को चुनने के तरीके = \(^{10} C_{1}\)
∴ कुल सम्भावित परिणामों की संख्या = 10
कुल 6 स्त्रियाँ हैं। उनमें से एक स्त्री को चुनने के तरीके = 6
अनुकूल परिणामों की संख्या = 6
एक स्त्री को चुने जाने की प्रायिकता = \(\frac{6}{10}=\frac{3}{5}\).

प्रश्न 7.
एक अनभिनत सिक्के को चार बार उछाला जाता है और एक व्यक्ति प्रत्येक चित्त पर एक रूपया जीतता है और प्रत्येक पट पर 1.50 रू हारता है। इस परीक्षण के प्रतिदर्श समष्टि से ज्ञात कीजिए कि आप चार उछालों में कितनी विभिन्न राशियाँ प्राप्त कर सकते हैं। साथ ही इन राशियों से प्रत्येक की प्रायिकता भी ज्ञात कीजिए।
हल:
सिक्के की उछाल में पाँच तरीकों से चित्त प्राप्त कर सकते हैं। जो निम्न प्रकार हैं।
कुल संभावित परिणाम = {HHHH, HHHT, HHTH, HHTT, HTHH, HTHT, HTTH, HTTT, THHH, THHT, THTH, THTT, TTHH, TTHT, TTTH, TTTT}
(i) कोई भी चित्त प्राप्त नहीं होता या चारों पट प्राप्त होते हैं।
चारों पट् के आने पर हानि = 4 × 1.50 = 6 रू
चार पट प्राप्त करने के तरीके (TTTT) = 1
कुल सम्भावित परिणाम = 16
∴ चार पट प्राप्त करने की प्रायिकता = \(\frac{1}{16}\).

(ii) जब एक चित्त और 3 पट प्राप्त होते हैं।
हानि = 3 × 1.50 – 1 × 1
= 4.50 – 1.00 = 3.50 रू
एक चित्त और 3 पट इस प्रकार आ सकते हैं :
{TTTH, TTHT, THTT, HTTT}
∴ 4 तरीकों से एक चित्त और 3 पट प्राप्त हो सकते हैं।
कुल सम्भावित परिणाम = 16
एक चित्त प्राप्त करने की प्रायिकता = \(\frac{6}{16}=\frac{1}{4}\).

(iii) जब 2 चित्त और 2 पट् प्रकट होते हैं
हानि = 2 × 1.5 – 1 × 2 .
= 3 – 2 = 1 रू
2 चित्त और 2 पट् इस प्रकार प्राप्त हो सकते हैं।
{HHTT, HTHT, HTTH, THHT, THTH, TTHH}
छः तरीकों से 2 चित्त और 2 पट प्राप्त हो सकते हैं।
कुल सम्भावित परिणाम = 16
2 चित्त प्राप्त करने की प्रायिकता = 2.

(iv) जब 3 चित्त और 1 पट् प्रकट होता है, तब
लाभ = 3 × 1 – 1 × 1.5
= 3 – 1.50 = 1.50 रू
3 चित्त प्राप्त करने के तरीके = {HHHT, HHHH, HTHH, THHH}
चार तरीकों से 3 चित्त और 1 पट प्राप्त होता है।
कुल सम्भावित परिणाम = 16
3 चित्त प्राप्त करने की प्रायिकता = \(\frac{4}{16}=\frac{1}{4}\).

(v) चारों चित्त एक तरीके से प्राप्त कर सकते हैं, तब
लाभ = 4 × 1 = 4 रू
कुल सम्भावित परिणाम = 16.
चार चित्त प्राप्त करने की प्रायिकता = \(\frac{4}{16}=\frac{1}{4}\).

प्रश्न 8.
तीन सिक्के एक बार उछाले जाते हैं। निम्नलिखित की प्रायिकता ज्ञात कीजिए :
(i) तीन चित्त प्रकट होना
(ii) 2 चित्त प्रकट होना
(iii) न्यूनतम 2 चित्त प्रकट होना
(iv) अधिकतम 2 चित्त प्रकट होना
(v) एक भी चित्त प्रकट न होना
(vi) 3 पट प्रकट होना
(vii) तथ्यतः 2 पट् प्रकट होना
(viii) कोई भी पट प्रकट न होना
(ix) अधिकतम 2 पट् प्रकट होना
हल:
यदि 3 सिक्के उछाले जाते हैं तो परीक्षण का प्रतिदर्श समष्टि
S = {HHH, HHT, HTH, THH, TTH, THT, HTT, TTT}
कुल सम्भावित परिणाम = 8
(i) तीन चित्त {HHH} एक तरीके से प्रकट होता है।
अतः 3 चित्त प्राप्त करने की प्रायिकता = \(\frac{1}{8}\).

(ii) 2 चित्त या 2 चित्त 1 पट प्राप्त करने के HHT, HTH, THH तीन तरीके हैं।
कुल सम्भावित परिणाम = 8
2 चित्त प्रकट होने की प्रायिकता = \(\frac{3}{8}\)

(iii) न्यूनतम 2 चित्त प्राप्त करने के लिए 2 चित्त 1 पट् या 3 चित्त आएंगे
∴ न्यूनतम 2 चित्त HHT, HTH, THH, HHH, चार तरीकों से प्रकट हो सकते हैं।
अतः न्यूनतम 2 चित्त प्रकट होने की प्रायिकता = \(\frac{4}{3}=\frac{1}{2}\).

(iv) अधिकतम 2 चित्त, इस प्रकार प्रकट होंगे।
(a) कोई चित्त नहीं या तीन पट्
(b) एक चित्त 2 पट्
(c) 2 चित्त 1 पट्
यह {TIT, HTT, THT, TTH, HHT, HTH, THH} सात तरीकों से प्रकट हो सकते हैं।
कुल संभावित परिणाम = 8
∴ अधिकतम 2 चित्त प्रकट होने की प्रायिकता = \(\frac{7}{8}\)

(v) एक भी चित्त न आने का अर्थ है तीन पट प्रकट होना जो (TTT) एक तरीके से हो सकता है।
कुल संभावित परिणाम = 8
अतः एक भी चित्त न आने की प्रायिकता = \(\frac{1}{8}\)

(vi) तीन पट (TIT) एक तरीके से प्रकट हो सकते हैं।
तीन पट् प्रकट होने की प्रायिकता = \(\frac{1}{8}\)

(vii) तथ्यतः 2 पट् (TTH, THT, HTT) तीन तरीकों से प्राप्त हो सकते हैं।
कुल संभावित परिणाम = 8
∴ दो पट् प्रकट होने की प्रायिकता = \(\frac{3}{8}\)

(viii) कोई पट् नहीं का अर्थ है तीनों चित्त प्रकट होते हैं तो (HHH) 1 तरीके से ही हो सकता है।
कुल संभावित परिणाम = 8
कोई पट् प्रकट न होने की प्रायिकता = \(\frac{1}{8}\)

(ix) अधिकतम दो पट् प्रकट होना
⇒ तीनों पट् प्रकट नहीं होते।
तीनों पट् प्रकट होने की प्रायिकता = \(\frac{1}{8}\)
∴ अधिकतम दो पट् प्रकट होने की प्रायिकता = 1 – (तीनों पट् प्रकट होने की प्रायिकता)
= 1 – \(\frac{1}{8}=\frac{7}{8}\).

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प्रश्न 9.
यदि किसी घटना A की प्रायिकता \(\frac{2}{11}\) है तो घटना ‘A – नहीं’ की प्रायिकता ज्ञात कीजिए।
हल:
P(A) = \(\frac{2}{11}\)
P(A – नहीं) = P (A’) = 1 – P(A)
= 1 – \(\frac{2}{11}=\frac{9}{11}\).

प्रश्न 10.
शब्द ‘ASSASSINATION’ से एक अक्षर यादृच्छया चुना जाता है। प्रायिकता ज्ञात कीजिए कि चुना गया अक्षर
(i) एक स्वर (vowel) है
(ii) एक व्यंजन (consonant) है।
हल:
शब्द ASSASSINATION में कुल 13 अक्षर हैं जिसमें (AAAIIO) 6 स्वर और (SSSSNNT) 7 व्यंजन है।
(i) n(S) = 13
स्वरों की संख्या = 6
एक स्वर चुनने की प्रायिकता = \(\frac{6}{13}\).
(ii) व्यंजनों की संख्या = 7
n(S) = 13
एक व्यंजन चुनने की प्रायिकता = \(\frac{7}{13}\)

प्रश्न 11.
एक लाटरी में एक व्यक्ति 1 से 20 तक की संख्याओं में से छः भिन्न-भिन्न संख्याएँ यादृच्छया चुनता है और यदि ये चुनी गई छः संख्याएँ उन छः संख्याओं से मेल खाती हैं जिन्हें लाटरी समिति ने पूर्व निर्धारित कर रखा है, तो वह व्यक्ति इनाम जीत जाता है। लाटरी के खेल में इनाम जीतने की प्रायिकता क्या है ?
हल:
1 से 20 तक की प्राकृत संख्याओं में से 6 संख्या चुनने के तरीके = \(20 \mathrm{C}_{6}\)
= \(\frac{20 \times 19 \times 18 \times 17 \times 16 \times 15}{1 \times 2 \times 3 \times 4 \times 5 \times 6}\)
= 38760
केवल एक ही अनुकूल परिणाम है।
अतः लाटरी जीतने की प्रायिकता = \(\frac{1}{38760}\).

प्रश्न 12.
जाँच कीजिए कि निम्न प्रायिकताएँ P(A) और P(B) युक्ति संगत (consistently) परिभाषित की गई हैं:
(i) P(A) = 0.5, P(B) = 0.7, P(A ∩ B) = 0.6
(ii) P(A) = 0.5, P(B) = 0.4, P(A ∪ B) = 0.8
हल:
(i) दिया है : P(A) = 0.5, P(B) = 0.7, P(A ∩ B) = 0.6
∴ यहाँ P(A ∩ B) = 0.6 > P(A)
अत: P(A) और (B) युक्ति संगत नहीं है।
(ii) यहाँ पर P(A) = 0.5, P(B) = 0.4, P(A ∪ B) = 0.8
अब
P(A ∩ B) = P(A) + P(B) – P(A ∪ B)
= 0.5 + 0.4 – 0.8
∴ P(A ∩ B) = 0.1
अतः P(A) और P(B) युक्ति संगत है।

प्रश्न 13.
निम्नलिखित सारणी में खाली स्थान भरिए :
MP Board Class 11th Maths Solutions Chapter 16 प्रायिकता Ex 16.3 img-3
हल:
(i) P(A) = \(\frac{1}{3}\), P(B) = \(\frac{1}{5}\), P(A ∩ B ) = \(\frac{1}{15}\). P(A∪ B) = ?
P (A ∪ B) = P(A) + P(B) – P(A ∩ B)
= \(\frac{1}{3}+\frac{1}{5}-\frac{1}{15}=\frac{8}{15}-\frac{1}{15}=\frac{7}{15}\).
(ii) P(A ∪ B) = P(A) + P(B) – P(A ∩ B)
0.6 = 0.35 + P(B) – 0.25
या P(B) = 0.6 – 0.35 + 0.25 = 0.5.
(iii) P(A ∪ B) = P(A) + P(B) – P(A ∩ B)
0.7 = 0.5 + 0.35 – P(A ∩ B)
∴ P(A ∪ B) = 0.5 + 0.35 – 0.7 = 0.15.

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प्रश्न 14.
P(A) = \(\frac{3}{5}\) और P(B) = \(\frac{1}{5}\) दिया गया है। यदि A और B परस्पर अपवर्जी घटनाएँ हैं, तो P(A या B) ज्ञात कीजिए।
हल:
A और B परस्पर अपवर्जी घटनाएँ हैं, तब
P(A ∩ B) = 0
P(A) = \(\frac{3}{5}\), P(B) = \(\frac{1}{5}\)
P(A या B) = P(A ∪ B) = P(A) + P(B) – P(A ∩ B)
∴ P(A ∪ B) = \(\frac{3}{5}+\frac{1}{5}-0=\frac{4}{5}\).

प्रश्न 15.
यदि E और F घटनाएँ इस प्रकार की हैं कि P(E) = \(\frac{1}{4}\), P(F) = \(\frac{1}{2}\), और P(E और F) = \(\frac{1}{8}\) तो ज्ञात कीजिए
(i) P(E या F)
(ii) P(E – नहीं और F – नहीं)।
हल:
P(E) = \(\frac{1}{4}\), P(F) = \(\frac{1}{2}\), P(E और F) = P(E ∩ B) = \(\frac{1}{8}\)
(i) P (E) या F) = P(E U F) = P(E) + P(F) – P(E ∩ F)
= \(\frac{1}{4}+\frac{1}{2}-\frac{1}{8}=\frac{2+4-1}{8}=\frac{5}{8}\)
(ii) P(E नहीं और F – नहीं) = P(E ∩ F)
= P[(E ∪ F)’] = 1 – P(E ∪ F)
= 1 – \(\frac{5}{8}=\frac{3}{8}\).

प्रश्न 16.
घटनाएँ E और F इस प्रकार हैं कि P(E – नहीं और F – नहीं) = 0.25, बताइए कि E और F परस्पर अपवर्जी हैं या नहीं।
हल:
P(E – नहीं और F – नहीं) = P(E ∩ F)
= P[(E ∪ F)’]
अर्थात् = 1 – P(E ∪ F) = 0.25
या P(E ∪ F) = 1 – 0.25
= 0.75.
∴ P(E) ∪ F) ≠ 0 इसलिए E और F परस्पर अपवर्जी नहीं है।

प्रश्न 17.
घटनाएँ A और B इस प्रकार हैं कि P(A) = 0.42, P(B) = 0.48 और P(A और B) = 0.16, ज्ञात कीजिए: .
(i) P(A – नहीं)
(ii) P (B – नहीं)
(iii) P(A या B)
हल:
P(A) = 0.42, P(B) = 0.48
P(A और B) = P(A ∩ B) = 0.16
(i) P(A – नहीं) = P(A’) = 1 – P(A) = 1 – 0.42 = 0.58.
(ii) P(B – नहीं) = P(B’) = 1 – P(B) = 1 – 0.48 = 0.52.
(iii) P(A या B) = P (A ∪ B) = P(A) + P(B) – P(A ∩ B)
= 0.42 + 0.48 – 0.16
= 0.90 – 0.16 = 0.74.

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प्रश्न 18.
एक पाठशाला की कक्षा XI के 40% विद्यार्थी गणित पढ़ते हैं और 30% जीव विज्ञान पढ़ते हैं। कक्षा के 10% विद्यार्थी गणित और जीव विज्ञान दोनों पढ़ते हैं । यदि कक्षा का एक विद्यार्थी यादृच्छया चुना जाता है, तो प्रायिकता ज्ञात कीजिए कि वह गणित या जीव विज्ञान पढ़ता होगा।
हल:
एक पाठशाला के 40% विद्यार्थी गणित पढ़ते हैं।
∴ गणित पढ़ने वाले विद्यार्थी की प्रायिकता P(M) = \(\frac{40}{100}\) = 0.4
30% विद्यार्थी जीव विज्ञान पढ़ते हैं।
∴ जीव विज्ञान पढ़ने वाले विद्यार्थी की प्रायिकता P(B) = \(\frac{30}{100}\) = 0.3
∴ 10% विद्यार्थी गणित और जीव विज्ञान दोनों पढ़ते हैं।
∴ गणित और जीव विज्ञान वाले विद्यार्थियों की प्रायिकता, P(M ∩ B)
= \(\frac{10}{100}\)
= 0.1
अब एक विद्यार्थी यादृच्छया चुना गया हो, तब उस विद्यार्थी द्वारा गणित या जीव विज्ञान लिए गए विषय की प्रायिकता
P(M ∪ B) = P(M) + P(B) – P(M ∩ B)
= 0.4 + 0.3 – 0.1
= 0.6

प्रश्न 19.
एक प्रवेश परीक्षा की दो परीक्षणों (Tests) के आधार पर श्रेणीबद्ध किया जाता है। किसी यादृच्छया चुने गए विद्यार्थी की पहले परीक्षण में उत्तीर्ण होने की प्रायिकता 0.8 है और दूसरे परीक्षण में उत्तीर्ण होने की प्रायिकता 0.7 है। दोनों में से कम से कम एक परीक्षण उत्तीर्ण करने की प्रायिकता 0.95 है। दोनों परीक्षणों को उत्तीर्ण करने की प्रायिकता क्या है?
हल:
माना A और B क्रमशः पहले और दूसरे परीक्षण में उत्तीर्ण होने को दर्शाते हैं।
P(A) = 0.8, P(B) = 0.7
कम से कम एक परीक्षण में उत्तीर्ण होने की प्रायिकता
= 1 – P(A’ ∩ B’) = 0.95
⇒ P(A’ ∩ B’) = 1 – 0.95 = 0.05
परन्तु A’ ∩ B’ = (A ∪ B)’ (डी-मोर्गन नियम से)
∴ P(A’ ∩ B’) = P(A ∪ B)’ = 1 – P(A ∪ B) = 0.05
∴ P(A ∪ B) = 1 – 0.05 = 0.95
अब P(A ∪ B) = P(A) + P(B) – P(A ∩ B)
0.95 = 0.8 + 0.7 – P(A ∩ B)
P(A ∩ B) = 1.5 – 0.95 = 0.55
इस प्रकार दोनों परीक्षणों को उत्तीर्ण करने की प्रायिकता = 0.55.

प्रश्न 20.
एक विद्यार्थी के अंतिम परीक्षा के अंग्रेजी और हिन्दी दोनों विषयों को उत्तीर्ण करने की प्रायिकता 0.5 है और दोनों में से कोई भी विषय उत्तीर्ण न करने की प्रायिकता 0.1 है। यदि अंग्रेजी की परीक्षा उत्तीर्ण करने की प्रायिकता 0.75 हो तो हिन्दी की परीक्षा उत्तीर्ण करने की प्रायिकता क्या है?
हल:
माना E और H क्रमशः अंग्रेजी और हिन्दी में पास करने को दर्शाते हैं।
तब अंग्रेजी और हिन्दी दोनों परीक्षा में उत्तीर्ण होने की प्रायिकता
P(E ∩ H) = 0.5
दोनों में से कोई परीक्षा उत्तीर्ण न करने की प्रायिकता
= P(E’ ∩ H’) = 0.1
या P[(E ∪ H)’] = 1 – P(E ∪ H) = 0.1
⇒ P(E ∪ H) = 1 – 0.1 = 0.9
अंग्रेजी परीक्षा में उत्तीर्ण होने की प्रायिकता = P(E) = 0.75
अतः
P(E ∪ H) = 0.9, P(E) = 0.75, P(E ∩ H) = 0.5
P(E ∪ H) = P(E) + P(H) – P(E ∩ H)
0.9 = 0.75 + P(H) – 0.5
P(H) = 0.9 + 0.5 – 0.75
= 1.4 – 0.75 = 0.65
अतः हिन्दी परीक्षा में उत्तीर्ण होने की प्रायिकता = 0.65.

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प्रश्न 21.
एक कक्षा के 60 विद्यार्थियों में से 30 ने एन.सी.सी. (NCC), 32 ने एन.एस.एस. (NSS) और 24 ने दोनों को चुना है। यदि इनमें से एक विद्यार्थी यादृच्छया चुना गया है तो प्रायिकता ज्ञात कीजिए कि
(i) विद्यार्थी ने एन.सी.सी. या एन.एस.एस. को चुना है।
(ii) विद्यार्थी ने न तो एन.सी.सी. और न ही एन.एस.एस. को चुना है।
(iii) विद्यार्थी ने एन.एस.एस. को चुना है किन्तु एन.सी.सी को नहीं चुना है।
हल:
माना A और B क्रमशः एन.सी.सी. और एन.एस.एस. चुनने की घटना को दर्शाते हैं।
विद्यार्थियों की कुल संख्या = 60
एन.सी.सी. चुनने वाले विद्यार्थियों की संख्या = 30
एन.सी.सी. चुनने की प्रायिकता P(A) = \(\frac{30}{60}=\frac{1}{2}\)
एन.एस.एस. चुनने वाले विद्यार्थियों की संख्या = 32
∴ एन.एस.एस. चुने जाने की प्रायिकता P(B) = \(\frac{32}{60}\)
एन.सी.सी. और एन.एस.एस. चुनने वालों की संख्या = 24
एन.सी.सी. और एन.एस.एस. चुनने की प्रायिकता = \(\frac{24}{60}\)
(i) एन.सी.सी. और एन.एस.एस. चुने जाने की प्रायिकता P(A ∪ B) = P(A) + P(B) – P(A ∩ B)
= \(\frac{30}{60}+\frac{32}{60}-\frac{24}{60}=\frac{38}{60}=\frac{19}{30}\).
(ii) एन.सी.सी. और एन.एस.एस. में से कोई भी विषय न चुने जाने की प्रायिकता
P(A’ ∩ B’) = P[(A ∪ B)’]
= 1 – P(A ∪ B)
= 1 – \(\frac{19}{30}=\frac{11}{30}\).
(iii) विद्यार्थी ने एन.एस.एस. को चुना है परन्तु एन.सी.सी. को नहीं
इसकी प्रायिकता = P(A’ ∩ B) = P(B) – P(A ∩ B)
= \(\frac{32}{60}-\frac{24}{60}=\frac{8}{60}=\frac{2}{15}\).

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MP Board Class 11th Maths Solutions Chapter 16 प्रायिकता Ex 16.2

MP Board Class 11th Maths Solutions Chapter 16 प्रायिकता Ex 16.2

प्रश्न 1.
एक पासा फेंका जाता है। मान लीजिए घटना E ‘पासे पर संख्या 4’ दर्शाता है और घटना F ‘पासे पर सम संख्या’ दर्शाता है। क्या E और F परस्पर अपवर्जी हैं?
हल:
पासा फेंकने पर प्रतिदर्श समष्टि
= {1, 2, 3, 4, 5, 6}
E (संख्या 4 दर्शाता है) = {4}
F (सम संख्या ) = {2, 4, 6}
E ∩ F = {4} {2, 4, 6} = {4} ≠ ϕ
अत: E और F परस्पर अपवर्जी नहीं हैं।

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प्रश्न 2.
एक पासा फेंका जाता है। निम्नलिखित घटनाओं का वर्णन कीजिए :
(i) A : संख्या 7 से कम है।
(ii) B : संख्या 7 से बड़ी है।
(iii) C : संख्या 3 का गुणज है।
(iv) D : संख्या 4 से कम है।
(v) E : 4 से बड़ी सम संख्या है।
(vi) F : संख्या 3 से कम नहीं है।
A ∪ B, A ∩ B, B ∪ C, E ∪ F, D ∩ E, A – C, D – E, F’, E ∩ F’ भी ज्ञात कीजिए।
हल:
S = {1, 2, 3, 4, 5, 6}
(i) A : संख्या 7 से कम है = {1, 2, 3, 4, 5, 6}
(ii) B : संख्या 7 से बड़ी है = पासे में कोई संख्या 7 से बड़ी नहीं है
= ϕ
(iii) C : संख्या 3 का गुणज है = {3, 6}
(iv) D : संख्या 4 से कम है = {1, 2, 3}
(v) E : 4 से बड़ी सम संख्या है = {6}
(vi) F = संख्या 3 से कम नहीं है
= {3, 4, 5, 6}
अब A ∪ B = {1, 2, 3, 4, 5, 6} ∪ϕ
= {1, 2, 3, 4, 5, 6}.
A ∩ B= {1, 2, 3, 4, 5, 6} ∩ ϕ
= ϕ
B ∪ C = ϕ ∪ {3, 6} = {3, 6}.
E ∪ F = {6} ∪ {3, 4, 5, 6} = {3, 4, 5, 6}.
D ∩ E = {1, 2, 3} ∩ {6}
A – C= {1, 2, 3, 4, 5, 6} – {3, 6}
= {1, 2, 4, 5}.
F’ = {3, 4, 5, 6}’ = S – {3, 4, 5, 6}
= {1, 2, 3, 4, 5, 6} – {3, 4, 5, 6}
= {1, 2}.
E ∩ F’ = {6} ∩ {3, 4, 5, 6}’
= {6} ∩ {1, 2} = ϕ.

प्रश्न 3.
एक परीक्षण में पासे के एक जोड़े को फेंकते हैं और उन पर प्रकट संख्याओं को लिखते हैं। निम्नलिखित संख्याओं का वर्णन कीजिए।
A : प्राप्त संख्याओं का योग 8 से अधिक है।
B : दोनों पासों पर संख्या 2 प्रकट होती है।
C : प्रकट संख्याओं का योग कम से कम 7 है और 3 का गुणज है।
इन घटनाओं के कौन-कौन से युग्म परस्पर अपवर्जी हैं ?
हल:
जब दो पासे फेंके जाते हैं, तो कुल संभावित परिणामों की संख्या
= 6 × 6 = 36
A= प्राप्त संख्याओं का योग 8 से अधिक है।
= {(3, 6), (4, 5), (5, 4), (6, 3), (4, 6), (5, 5), (6, 4), (5, 6), (6, 5), (6, 6)}
B = कम से कम एक पासे पर संख्या 2 प्रकट होती है
= {(1, 2), (2, 2), (3, 2), (4, 2), (5, 2), (6, 2), (2, 1), (2, 3), (2, 4), (2, 5), (2, 6)}
C = प्रकट संख्याओं का योग कम से कम 7 है और 3 का गुणज है।
= प्रकट संख्याओं का योग 9 और 12 है जो कि 3 का गुणज है।
= {(3, 6), (6, 3), (4, 5), (5, 4), (6, 6)}
A ∩ C = {(3, 6), (4, 5), (5, 4), (6, 3), (4, 6), (5, 5), (6, 4), (5, 6), (6, 5), (6, 6)} ∩ {(3, 6), (6, 3), (5, 4), (6, 6)}
= {(3, 6), (6, 3), (4, 5), (5, 4), (6, 6)}
A ∩ B = {(3, 6), (6, 3), (4, 5), (5, 4), (4, 6), (6, 4), (5, 5), (5, 6), (6, 5), (6, 6) ∩ {(1, 2), (3, 2), (2, 1), (2, 3), (4, 2), (2, 4), (5, 2), (2, 5), (2, 6), (6, 2)}
= ϕ
B ∩ C = {(1, 2), (2, 1), (2, 2), (2, 3), (3, 2), (2, 4), (4, 2), (2, 5), (5, 2), (2, 6), (6, 2)} ∩ {(3, 6), (6, 3), (4,5), (5, 4), (6, 6)}
= ϕ
A ∩ B = ϕ , B ∩ C = ϕ अर्थात् A और B, B और C परस्पर अपवर्जी हैं।
परन्तु A ∩ C ≠ ϕ, अत: A और C परस्पर अपवर्जी नहीं हैं।

प्रश्न 4.
तीन सिक्कों को एक बार उछाला जाता है। मान लीजिए कि घटना “तीन चिल दिखना” को A से, घटना 2 चित्त और 1 पट दिखना’ को B से, घटना “3 पट लिखना’ को C से और घटना ‘पहले सिक्के पर चित्त दिखना’ को D से निरूपित किया गया है। बताइए कि इनमें से कौन-सी घटनाएँ
(i) परस्पर अपवर्जी हैं ?
(ii) सरल हैं
(iii) मिश्र हैं ?
हल:
जब तीन सिक्के उछाले जाते हैं तो प्रतिदर्श समष्टि
S = {HHH, HHT, HTH, THH, TTH, THT, HTT, TIT}
A : तीन चित्त दिखना = {HHH}
B : दो चित्त और एक पट दिखना
= {HHT, HTH, THH}
C : तीन पट दिखना = {TTT}
D : पहले सिक्के पर चित्त दिखना
= {HHH, HHT, HTH, HTT}
(i)A ∩ B = {HHH} ∩ {HHT, HTH, THH}
= ϕ
A ∩ C = {HHH} ∩ {TIT} = ϕ
A ∩ D = {HHH} {HHH, HHT, HTH, HTT}
= {HHH} ≠ ϕ
B ∩ C = {HHT, HTH, THH} ∩ {TTT}
= ϕ
B ∩ D = {HHT, HTH, THH) ∩ {HHH, HHT, HTH, HTT}
= (HHT, HTH} ≠ ϕ
C ∩ D = {TTT} {HHH, HHT, HTH, HTT}
= ϕ
A ∩ B ∩ C = {HHH} ∩ {HHT, HTH, THH} ∩ {TTT)
= ϕ
अतः परस्पर अपवर्जी घटनाएँ
A और B, A और C, B और C, C और D, A, B और C.
(ii) सरल घटनाएँ : A और C
(iii) मिश्र घटनाएँ : B और D.

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प्रश्न 5.
तीन सिक्के एक बार उछाले जाते हैं। वर्णन कीजिए
(i) दो घटनाएँ जो परस्पर अपवर्जी हैं।
(ii) तीन घटनाएँ जो परस्पर अपवर्जी और निःशेष हैं।
(iii) दो घटनाएँ जो परस्पर अपवर्जी नहीं हैं।
(iv) दो घटनाएँ जो परस्पर अपवर्जी हैं किन्तु निःशेष नहीं हैं।
(v) तीन घटनाएँ जो परस्पर अपवर्जी हैं किन्तु निःशेष नहीं हैं।
हल:
(i) दो घटनाएँ जो परस्पर अपवर्जी हैं
A = कम से कम दो चित्त प्राप्त करना
= {HHH, HHT, HTH, THH}
B = कम से कम दो पेर्ट प्राप्त करना
= {TTT, TTH, THT, HTT}

(ii) तीन घटनाएँ A, B, C जो परस्पर अपवर्जी और निःशेष हैं।
A = अधिक से अधिक एक चित्त प्राप्त करना
= {TIT, TTH, THT, HTT}
B = तथ्यत, 2 चित्त प्राप्त करना
= {HHT, HTH, THH}
C = तथ्यतः, 3 चित्त प्राप्त करना = {HHH}

(iii) दो घटनाएँ A और B जो परस्पर अपवर्जी नहीं हैं।
A : अधिकतम 2 पट प्राप्त करना
= {HHH, HHT, HTH, THH, TTH, THT, HTT}
B : तथ्यतः 2 चित्त प्राप्त करना
= {HHT, HTH, THH}
A ∩ B = {HHT, HTH, THH} ≠ ϕ

(iv) दो घटनाएँ A और B जो परस्पर अपवर्जी हैं किन्तु निःशेष नहीं हैं।
A : तथ्यतः एक चित्त प्राप्त करना
= {TTH, THT, HTT}
B : तथ्यतः 2 चित्त प्राप्त करना
{HHT, HTH, THH)

(v) तीन घटनाएँ A, B, C जो परस्पर उपवर्जी हैं किन्तु निःशेष नहीं हैं।
A : तथ्यतः एक पट प्राप्त करना
= {HHT, THT, THH}
B : तथ्यतः 2 पट प्राप्त करना
= {TTH, THT, HTT}
C : तथ्यतः 3 पट प्राप्त करना = {TTT}
[नोट : घटनाएँ भिन्न-भिन्न भी हो सकती हैं।

प्रश्न 6.
दो पासे फेंके जाते हैं। घटनाएँ A, B और C निम्नलिखित प्रकार से हैं :
A : पहले पासे पर सम संख्या प्राप्त होना।
B : पहले पासे पर विषम संख्या प्राप्त होना।
C : पासों पर प्राप्त संख्याओं का योग 55 होना।
निम्नलिखित घटनाओं का वर्णन कीजिए :
(1) A’
(ii) B – नहीं
(iii) A या B
(iv) A और B
(v) A किन्तु C नहीं
(vi) B या C
(vii) B और C
(viii) A ∩ B’ ∩ C’
हल:
दो सिक्के फेंकने पर प्रतिदर्श समष्टि
S = {(1, 1), (1, 2), …(1, 6), (2, 1), (2, 2), … (2, 6), (3, 1), (3, 2), … (3, 6), (4, 1), (4, 2), … (4, 6), (5, 1), (5, 2),… (5, 6), (6, 1), … (6, 6)}
A= पहले पासे पर सम संख्या प्राप्त होगा।
= {(2, 1), (2, 2), (2, 3), (2, 4), (2, 5), (2, 6), (4, 1), (4, 2), (4, 3), (4, 4), (4,5), (4, 6), (6, 1), (6, 2), (6, 3), (6, 4), (6, 5), (6, 6)} = A
B = पहले पासे पर विषम संख्या प्राप्त होना।
= {(1, 1), (1, 2), (1, 3), (1, 4), (1, 5), (1, 6), (3, 1), (3, 2), (3, 3), (3, 4), (3, 5), (3, 6), (5, 1), (5, 2), (5, 3), (5, 4), (5, 5), (5, 6)}
C = पासों पर प्राप्त संख्याओं का योग ≤ 5 होना।
= {(1, 1), (1, 2), (1, 3), (1, 4), (2, 1), (2, 2), (2, 3), (3, 1), (3, 2), (4, 1)}
(i) A’ = S – A
= {(1, 1), (1, 2), (1, 3), (1, 4), (1, 5), (1, 6), (3, 1), (3, 2), (3, 3), (3, 4), (3, 5), (3, 6), (5, 1), (5, 2), (5, 3), (5, 4), (5, 5), (5, 6)}
= B

(ii) B-नहीं = B’ = पहले पासे पर विषम संख्या का न होना
= {(2, 1), (2, 2), (2, 3), (2, 4), (2, 5), (2, 6), (4, 1), (4, 2), (4, 3), (4, 4), (4,5), (4,6), (6, 1), (6, 2), (6, 3), (6, 4), (6, 5), (6, 6)} = A

(iii) A या B= A ∪ B= {x : x पहले पासे पर सम संख्या का होना} ∪ {पहले पासे पर विषम संख्या का होना}
= S

(iv) A और B = A ∩ B
= {x : x पहले पासे पर सम संख्या का होना} ∩ {पहले पासे पर विषम संख्या का होना}
= ϕ

(v) A किन्तु C – नहीं
= {x : x पहले पासे पर सम संख्या का होना} – {पासों पर प्राप्त संख्याओं का योग ≤ 5}
A – C = {(2, 1), (2, 2), …, (2, 6), (4, 1), (4, 2), … (4, 2), … (4, 6), (6, 1), (6, 2), …. (6,6)} – {(1, 1), (1, 2), (1, 3), (1,4), (2, 1), (2, 2), (2, 3), (3, 1), (3, 2), (4, 1)}
= {(2, 4), (2, 5), (2, 6), (4, 2), (4, 3),…(4, 6), (6, 1), (6, 2), … (6, 6)}

(vi) B या C = B ∪ C = {x : x, पहले पासे पर विषम संख्या होगा} ∪ {पासों पर प्राप्त संख्याओं का योग ≤ 5}
= {(1, 1), (1, 2), …, (1, 6), (3, 1), (3, 2), …, (3, 6), (5, 1), (5, 2), … (5, 6)} ∪ (1, 1), (1, 2), (1, 3), (1, 4), (2, 1), (2, 2), (2, 3), (3, 2), (4, 1)}
= {(1, 1), (1, 2), … (1, 6), (2, 1), (2, 2), (2, 3), (3, 1), (3, 2), … (3, 6), (4, 1), (5, 1), (5, 2), (5, 3), … (5, 6).

(vii) B और C अर्थात् B ∩ C = {(1, 1), … (1, 6), (3, 1), (3, 2),… (3, 6), (5, 1), (5, 2), (5, 3), … (5, 6) ∩ {(1, 1), (1, 2), (1, 3), (1, 4), (2, 1), (2, 2) (2, 3), (3, 1), (3, 2), (4, 1)}.
= {(1, 1), (1, 2), (1, 3), (1, 4), (3, 1), (3, 2)}

(viii) यहाँ B’ = A
∴ A ∩ B’ = A ∩ A = A
∴ A ∩ B’ ∩ C’ = {(2, 1), (2, 2), … (2, 6), (4, 1), (4, 2),…,(4, 6), (6, 1), (6, 2),… (6, 6)} ∩ {(1, 5), (1, 6), (2, 4), (2, 5), (2, 6), (3, 3), (3, 4), (3, 5), (3, 6), (4, 2), (4, 3),…(4, 6), (5, 1), (5, 2),… (5, 6), (6, 1), (6, 2), … (6, 5)}
= {(2, 4), (2, 5), (2, 6), (4, 2), (4, 3), (4, 4), (4, 5), (4, 6), (6, 1), (6, 2), (6, 3), (6, 4), (6, 5), (6, 6)}.

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प्रश्न 7.
उपर्युक्त प्रश्न 6 को देखिए और निम्नलिखित में सत्य या असत्य बताइए (अपने उत्तर का कारण दीजिए :
(i) A और B परस्पर अपवर्जी हैं।
(ii) A और B परस्पर अपवर्जी और निःशेष हैं।
(iii) A = B’
(iv) A और C परस्पर अपवर्जी हैं।
(v) A और B’ परस्पर अपवर्जी हैं।
(vi) A’, B’, C परस्पर अपवर्जी और निःशेष घटनाएँ हैं।
हल:
(i) सत्य A : पहले पासे पर सम संख्या का होना
B : पहले पासे पर विषम संख्या का होना
A और B में कोई भी घटना समान नहीं है।
A ∩ B = ϕ ⇒ A और B परस्पर अपवर्जी घटनाएँ हैं।

(ii) सत्य : A = पहले पासे पर सम संख्या होना
B : पहले पासे पर विषम संख्या होना
A ∪ B = पहले पासे पर सम या विषम कोई भी संख्या हो सकती है, दूसरे पासे पर 1 से 6
तक कोई भी संख्या हो सकती है।
अर्थात् A और B परस्पर अपवर्जी और निःशेष घटनाएँ हैं।

(iii) सत्य : B’ = {पहले पासे पर विषम संख्या होना। .
= पहले पासे पर विषम संख्या न होना
= पहले पासे पर सम संख्या होना
= A
(iv) असत्य A= पहले पासे पर सम संख्या होना
C = {(1, 1), (1, 2), (1, 3), (1, 4), (2, 1), (2, 2), (2, 3), (3, 1), (3, 2), (4, 1}}
A और C में (2, 1), (2, 2), (2, 3), (4, 1) समान घटनाएँ हैं।
∴ A ∩ C ≠ ϕ
अत: A और C परस्पर अपवर्जी नहीं हैं।

(v) असत्य B’= A
∴ A ∩ B’= A ∩ A = A ≠ ϕ
A तथा B’ परस्पर अपवर्जी नहीं हैं।

(vi) असत्य A’ = B, B’ =A
∴ A’ ∩ B’ = B ∩ A = ϕ
परन्तु A’ ∩ C = B ∩ C = {x : x पहले पासे पर विषम संख्या होना} {(1, 1), (1, 2), (1, 3), (1, 4), (2, 1), (2, 2), (2, 3), (3, 1), (3, 2), (4, 1)}
= {(1, 1), (1, 2), (1, 3), (1, 4), (3, 1), (3, 2)} ≠ ϕ
B’ ∩ C = A ∩ C [∵ B’ = A]
= {x : x, पहले पासे पर सम संख्या का होना} ∩ {(1, 1), (1, 2), (1, 3), (1, 4), (2, 1), (2, 2), (2, 3), (3, 1), (3, 2), (4, 1)
(2, 1), (2, 2), (2, 3), (4, 1), A और C दोनों में समान घटनाएँ हैं।
B’ ∩ C ≠ ϕ
अर्थात् A’, B’, और C परस्पर अपवर्जी नहीं हैं और न ही नि:शेष हैं।

MP Board Class 11th Maths Solutions

MP Board Class 11th Maths Solutions Chapter 16 प्रायिकता Ex 16.1

MP Board Class 11th Maths Solutions Chapter 16 प्रायिकता Ex 16.1

निम्नलिखित प्रश्नों 1 से 7 में निर्दिष्ट परीक्षण का प्रतिदर्श समष्टि ज्ञात कीजिए।
प्रश्न 1.
एक सिक्के को तीन बार उछाला गया है।
हल:
एक सिक्के को 3 बार उछालने से प्रतिदर्श समष्टि
S = {HHH, HHT, HTH, THH, TTH, THT, HTT, TIT}

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प्रश्न 2.
एक पासा दो बार फेंका गया है।
हल:
एक पासे को दो बार फेंकने से जो घटनाएं घटी उनका प्रतिदर्श समष्टि :
S = {(1, 1), (1, 2), (1, 3), (1, 4), (1, 5), (1, 6), (2, 1), (2, 2), (2, 3), (2, 4), (2, 5), (2, 6), (3, 1), (3, 2), (3, 3), (3, 4), (3, 5), (3, 6), (4, 1), (4, 2), (4,3), (4, 4), (4,5), (4,6), (5, 1), (5, 2), (5, 3), (5, 4), (5,5), (5, 6), (6, 1), (6, 2), (6, 3), (6, 4), 6, 5), (6, 6)}

प्रश्न 3.
एक सिक्का चार बार उछाला गया है।
हल:
एक सिक्के को 4 बार उछालने से घटनाओं का प्रतिदर्श समष्टि इस प्रकार है
S = {HHHH, HHHT, HHTH, HTHH, HTTH, HTHT, HHTT, HTTT, THHH, THHT, THTH, TTHH, TTTH, TTHT, THTT, TTTT}

प्रश्न 4.
एक सिक्का उछाला गया है और एक पासा फेंका गया है।
हल:
एक सिक्का व एक पासा उछालने पर प्रतिदर्श समष्टि
S = {H1, H2, H3, H4, H5, H6, T1, T2, T3, T4, T5, T6}

प्रश्न 5.
एक सिक्का उछाला गया है और केवल उस दशा में, जब सिक्के पर चित्त प्रकट होता है एक पास फेंका जाता है।
हल:
सिक्के पर चित्त आने से एक पासा फेंका जाता है अन्यथा नहीं की प्रतिदर्श समष्टि
S = {H1, H2, H3, H4, H5, H6, T}

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प्रश्न 6.
X कमरे में 2 लड़के और 2 लड़कियाँ तथा Y कमरे में 1 लड़का और 3 लड़कियाँ हैं। उस परीक्षण का प्रतिदर्श समष्टि ज्ञात कीजिए जिसमें पहले एक कमरा चुना जाता है और फिर एक बच्चा चुना जाता है।
हल:
माना X कमरे के लड़के व लड़कियों को B1, B2, G1, G2, और Y कमरे के लड़के व लड़कियों को B3, G3, G4, G5 से दर्शाया गया है। एक कमरे को चुनना और फिर एक बच्चे को चुने जाने की प्रतिदर्श समष्टि
S = {XB1, XB2, XG1, XG2, YB3, YG3, YG4, YG5} .

प्रश्न 7.
एक पासा लाल रंग का, एक सफेद रंग का और एक अन्य पासा नीले रंग का एक थैले में रखे हैं। एक पासा यादृच्छया चुना गया और उसे फेंका गया है। पासे का रंग और इसके ऊपर के फलक पर प्राप्त संख्या को लिखा गया है। प्रतिदर्श समष्टि का वर्णन कीजिए।
हल:
माना लाल रंग को R से, सफेद रंग को W से तथा नीले रंग को B से दर्शाया गया हो तो पासे को चुन कर अंकों को प्राप्त करने की प्रतिदर्श समष्टि
S = {R1, R2, R3, R4, R5, R6, W1, W2, W3, W4, W5, W6, B1, B2, B3, B4, B5, B6}

प्रश्न 8.
एक परीक्षण में 2 बच्चों वाले परिवारों में से प्रत्येक में लड़के-लड़कियों की संख्या को लिखा जाता है।
(i) यदि हमारी रूचि इस बात को जानने में है कि जन्म के क्रम में बच्चा लड़का है या लड़की है तो प्रतिदर्श समष्टि क्या होगी?
(ii) यदि हमारी रूचि किसी परिवार में लड़कियों की संख्या जानने में है तो प्रतिदर्श समष्टि क्या होगी?
हल:
(i) परिवार में दो बच्चे हैं वे लड़के, लड़की हो सकते हैं। इनकी प्रतिदर्श समष्टि = {BB, BG,GB, GG} है।
(ii) एक परिवार में कोई लड़की न हो या एक या दो लड़कियाँ होगी। अतः प्रतिदर्श समष्टि {0, 1, 2}

प्रश्न 9.
एक डिब्बे में 1 लाल और एक जैसी 3 सफेद गेंद रखी गई हैं। दो गेंद उत्तरोत्तर (In succession) बिना प्रतिस्थापित किए यादृच्छया निकाली जाती है। इस परीक्षण का प्रतिदर्श समष्टि ज्ञात कीजिए।
हल:
डिब्बे में एक लाल व 3 सफेद गेंद हैं।
यदि लाल को R से, सफेद को W से निरूपित किया जाए तो इस प्रशिक्षण का प्रतिदर्श समष्टि
S = {RW, WR, WW}.

प्रश्न 10.
एक परीक्षण में एक सिक्के को उछाला जाता है और यदि उस पर चित्त प्रकट होता है तो उसे पुनः उछाला जाता है। यदि पहली बार उछालने पर पद प्राप्त होता है तो एक पासा फेंका जाता है। प्रतिदर्श समष्टि ज्ञात ‘ कीजिए।
हल:
यदि एक सिक्का उछाला जाता है और चित्त प्रकट होता है तो दुबारा उछालने पर चित्त या पट् आ सकता है। इस प्रकार घटना HH या HT होगी। पट् आने पर पासा फेंका जाता है। पासा फेंकने से संख्या 1, 2, 3, 4, 5, 6 आ सकती है।
∴ प्रतिदर्श समष्टि = {HH, HT, TI, T2, T3, T4, T5, T6}.

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प्रश्न 11.
मान लीजिए कि बल्बों के एक ढेर में से 3 बल्ब यादृच्छया निकाले जाते हैं। प्रत्येक बल्ब को जाँचा जाता है और उसे खराब (D) या ठीक (N) में वर्गीकृत करते हैं। इस परीक्षण का प्रतिदर्श समष्टि ज्ञात कीजिए।
हल:
खराब के लिए D और ठीक बल्ब को N द्वारा निरूपित करते हैं। तीन बल्बों से बना प्रतिदर्श समष्टि इस प्रकार है।
{DDD, DDN, DND, NDD, NND, NDN, DNN, NNN}

प्रश्न 12.
एक सिक्का उछाला जाता है। यदि परिणाम चित्त हो तो एक पासा फेंका जाता है। यदि पासे पर एक सम संख्या प्रकट होती है, तो पासे को पुनः फेंका जाता है। इस परीक्षण का प्रतिदर्श समष्टि ज्ञात कीजिए।
हल:
एक सिक्का उछालने पर यदि चित्त को H से और पट को T से दर्शाया जाए और चित्त आने पर पासा फेंका जाता है H1, H2, H3, H4, H5, H6 की घटनाएं हो सकती हैं। H2, H4, H6 आने की अवस्था में पासा दुबारा फेंका जाता है जिससे प्रत्येक की 1, 2, 3, 4, 5, 6 की छः घटनाएं हो सकती हैं।
इस प्रकार प्रतिदर्श समष्टि है :
{T, H1, H3, H5, H21, H22, H23, H24, H25, H26, H41, H42, H43, 144, H45, H46, H61, H62, H63, H64, H65, H66}

प्रश्न 13.
कागज की चार पर्चियों पर संख्याएँ 1, 2, 3, 4 अलग-अलग लिखी गई हैं। इन पर्चियों को एक डिब्बे में रख कर भली-भाँति मिलाया गया है। एक व्यक्ति डिब्बे में से दो पर्चियाँ एक के बाद दूसरी बिना प्रतिस्थापित किए निकालता है। इस परीक्षण का प्रतिदर्श समष्टि ज्ञात कीजिए।
हल:
एक डिब्बे में चार पर्चियाँ हैं। जिन पर 1, 2, 3, 4 लिखा है। यदि पर्ची सं. 1 पहली पर्ची हो दूसरी पर्ची पर सं. 2, 3, 4 लिखा होगा। इसी प्रकार पहली पर्ची पर 2 लिखा हो तो शेष पर्ची पर 1, 3, 4 लिखा होगा।
इस प्रकार प्रतिदर्श समष्टि है :
{(1, 2), (1, 3), (1, 4), (2, 1), (2, 3), (2, 4), (3, 1), (3, 2), (3, 4), (4, 1), (4, 2), (4,3)}

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प्रश्न 14.
एक परीक्षण में एक पासा फेंका जाता है और यदि पासे पर प्राप्त संख्या सम है तो एक सिक्का एक बार उछाला जाता है। यदि पासे पर प्राप्त संख्या विषम है तो सिक्के को दो बार उछालते हैं। प्रतिदर्श समष्टि लिखिए।
हल:
पासा फेंकने से यदि सम संख्या प्राप्त होती है तो सिक्का उछालने पर H या T की घटना होगी। यदि पासे पर विषम संख्या आती है तो सिक्का दो बार उछाला जाता है जिससे HH, HT, TH, TT घटनाएँ हो सकती हैं। इस प्रकार प्रतिदर्श समष्टि इस प्रकार है-
{2H, 2T, 4H, 4T, 6H, 6T, 1HH, 1HT, 1TH, 1TT, 3HH, 3HT, 3TH, 3TT, 5HH, SHT, 5TH, 5TT}.

प्रश्न 15.
एक सिक्का उछाला गया यदि उस पर पद प्रकट होता है तो एक डिब्बे में से जिसमें 2 लाल और 3 काली गेंदे रखी हैं, एक गेंद निकालते हैं। यदि सिक्के पर चित्त प्रकट होता है तो एक पासा फेंका जाता है। इस परीक्षण का प्रतिदर्श समष्टि लिखिए।
हल:
यदि लाल रंग की गेंद को R1, R2, से तथा काले रंग की गेंद को B1, B2, B3 से दर्शाया जाए तो सिक्का उछालने पर यदि पट् आता है तो R1, R2, B1, B2, B3, में से एक घटना होगी। यदि सिक्के पर चित्त आता है तो पासा फेंकने से 1, 2, 3, 4, 5, 6 आते हैं। तो प्रतिदर्श समष्टि इस प्रकार है :
{TR1, TR2, TB1, TB2, TB3, H1, H2, H3, H4, H5, H6}.

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प्रश्न 16.
एक पासे को बार-बार तब तक फेंका जाता है जब तक उस पर 6 प्रकट न हो जाए। इस परीक्षण का प्रतिदर्श समष्टि क्या है ?
हल:
6 आने पर पासा दुबारा नहीं फेंका जाएगा। यदि 1, 2, 3, 4, 5 में से कोई संख्या प्रकट होती है तो पासा दुबारा नहीं फेंका जाता। इस परीक्षण का प्रतिदर्श समष्टि है :
{6, (1, 6), (2, 6), (3, 6), (4, 6), (5, 6), (1, 1, 6), (1, 2, 6),… (1, 5, 6), (2, 1, 6), (2, 2, 6), …, (2, 5, 6),… (3, 1, 6), (3, 2, 6), …, (3, 5, 6), (4, 1, 6), (4, 2, 6), … (4, 5, 6), (5, 1, 6), (5, 2, 6),…, (5, 5, 6)….}.

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MP Board Class 11th Maths Solutions Chapter 15 सांख्यिकी विविध प्रश्नावली

MP Board Class 11th Maths Solutions Chapter 15 सांख्यिकी विविध प्रश्नावली

प्रश्न 1.
आठ प्रेक्षणों का माध्य तथा प्रसरण क्रमश: 9 और 9.25 है। यदि इनमें से छः प्रेक्षण 6, 7, 10, 12, 12, और 13 हैं, तो शेष दो प्रेक्षण ज्ञात कीजिए।
हल:
मान लीजिए वे दो संख्याएँ x और y हैं।
MP Board Class 11th Maths Solutions Chapter 15 सांख्यिकी विविध प्रश्नावली img-1
= 62 + 72 + 102 + 122 + 122 + 132 + x2 + y2
722 = 36 + 49 + 100 + 144 + 144 + 169 + x2 + y2.
= 642 + x2 + y2
x2 + y2 = 722 – 642 = 80
∴ x2 + y2 = 80 …(2)
समीकरण (1) और (2) से
या x2 + (12 – x)2 = 80
या 2x2 – 24x + 144 = 80
या x2 – 12x + 32 = 0
(x – 4) (x – 8) = 0
∴ x = 4 या 8
∴ y = 8 या 4
अतः वे दो संख्याएँ 4 और 8 हैं।

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प्रश्न 2.
सात प्रेक्षणों का माध्य तथा प्रसरण क्रमशः 8 और 16 हैं। यदि इनमें से पाँच प्रेक्षण 2, 4, 10, 12, 14 हैं तो शेष दो प्रेक्षण ज्ञात कीजिए।
हल:
माना कि वे दो संख्याएँ x और y हैं।
MP Board Class 11th Maths Solutions Chapter 15 सांख्यिकी विविध प्रश्नावली img-2
या 22 + 42 + 102 + 122 + 142 + x2 + y2 = 560
460 + x2 + y2 = 560
x2 + y2 = 560 – 460 = 100 …….(2)
समीकरण (1) और (2) से
x2 + (14 – x)2 = 100
या 2x2 – 28x + 196 – 100 = 0
या x2 – 14x + 48 = 0
∴ (x – 6) (x – 8) = 0
∴ x = 6 या 8
∴ y = 8 या 6
∴ वे दो संख्याएँ 6 और 8 हैं।

प्रश्न 3.
छः प्रेक्षणों का माध्य तथा मानक विचलन क्रमशः 8 तथा 4 हैं। यदि प्रत्येक प्रेक्षण को 3 से गुणा कर दिया जाए तो परिणामी प्रेक्षणों का माध्य व मानक विचलन ज्ञात कीजिए।
हल:
MP Board Class 11th Maths Solutions Chapter 15 सांख्यिकी विविध प्रश्नावली img-3

प्रश्न 4.
यदि n प्रेक्षणों का माध्य \(\bar{x}\) तथा प्रसरण σ2 है तो सिद्ध कीजिए कि प्रेक्षणों ax1, ax2, ax3, …… axn, का माध्य और प्रसरण क्रमशः a\(\bar{x}\) तथा a2σ2 (a ≠ 0) है।
हल:
MP Board Class 11th Maths Solutions Chapter 15 सांख्यिकी विविध प्रश्नावली img-4
MP Board Class 11th Maths Solutions Chapter 15 सांख्यिकी विविध प्रश्नावली img-5

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प्रश्न 5.
बीस प्रेक्षणों का माध्य तथा मानक विचलन क्रमशः 10 तथा 2 हैं। जांच करने पर यह पाया गया कि प्रेक्षण 8 गलत है। निम्न में से प्रत्येक का सही माध्य तथा मानक विचलन ज्ञात कीजिए यदि
(i) गलत प्रेक्षण हटा दिया जाए।
(ii) उसे 12 से बदल दिया जाए।
हल:
MP Board Class 11th Maths Solutions Chapter 15 सांख्यिकी विविध प्रश्नावली img-6
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MP Board Class 11th Maths Solutions Chapter 15 सांख्यिकी विविध प्रश्नावली img-8

प्रश्न 6.
एक कक्षा के पचास छात्रों द्वारा तीन विषयों गणित, भौतिक शास्त्र व रसायन शास्त्र में प्राप्तांकों का माध्य व मानक विचलन नीचे दिए गए हैं :
MP Board Class 11th Maths Solutions Chapter 15 सांख्यिकी विविध प्रश्नावली img-9
किस विषय में सबसे अधिक विचलन है तथा किसमें सबसे कम विचलन है?
हल:
विचरण गुणांक = \(\frac{\sigma}{\bar{x}}\) × 100
गणित विषय में विचरण गुणांक = \(\frac{12}{42}\) × 100 = 28.57
भौतिक विषय में विचरण गुणांक = \(\frac{15}{32}\) × 100 = 46.875
रसायन विषय में विचरण गुणांक =\(\frac{20}{40.9}\) × 100 = 48.9
अतः रसायन विषय में सबसे अधिक विचर तथा गणित में सबसे कम विचलन है।

प्रश्न 7.
100 प्रेक्षणों का माध्य और मानक विचलन क्रमशः 20 और 3 हैं। बाद में यह पाया गया कि तीन प्रेश्च 21, 21 तथा 18 गलत थे। यदि गलत प्रेक्षणों को हटा दिया जाए तो माध्य व मानक विचलन ज्ञात कीजिए।
हल:
\(\bar{x}\) = \(\frac{\Sigma x_{i}}{n}\)
∴ Exi = n\(\bar{x}\)
= 100 × 20 = 2000
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MP Board Class 12th Biology Solutions Chapter 16 पर्यावरण के मुद्दे

MP Board Class 12th Biology Solutions Chapter 16 पर्यावरण के मुद्दे

पर्यावरण के मुद्दे NCERT प्रश्नोत्तर

प्रश्न 1.
घरेलू वाहित मल के विभिन्न घटक क्या हैं ? वाहित मल के नदी में विसर्जन से होने वाले प्रभावों की चर्चा कीजिए।
उत्तर
घरेलू वाहित मल में मुख्यतः जैव निम्नीकरण कार्बनिक पदार्थ होते हैं जिनका अपघटन जीवाणु व अन्य सूक्ष्म जीवों द्वारा होता है। इसके अतिरिक्त वाहित मल में अनेक प्रकार के निलंबित ठोस, रेत व सिल्ट कण, अकार्बनिक एवं कोलाइडी कण, मल, कपड़ा, खाद्य अपशिष्ट, कागज, रेशे आदि एवं घुले हुए पदार्थ (फॉस्फेट, नाइट्रेट, धातु आयन) होते हैं। नदियों में वाहित मल के विसर्जन फलस्वरूप ऑक्सीजन की कमी हो जाती है क्योंकि जैव निम्नीकरण से संबंधित सूक्ष्मजीव ऑक्सीजन की मात्रा का प्रयोग करने लगते हैं। इस कारण वाहित मल विसर्जन स्थल पर अनुप्रवाह जल में घुली O2, की मात्रा में तेजी से गिरावट आती है इसके कारण मछलियाँ तथा अन्य जलीय जीवों की मृत्यु दर में वृद्धि हो जाती है। इसी प्रकार वाहित मल में अनेक रोग-कारक सूक्ष्मजीव होते हैं । इस जल के उपयोग से पेचिश, टाइफाइड, पीलिया, हैजा आदि रोग हो सकते हैं।

प्रश्न 2.
आप अपने घर, विद्यालय या अन्य स्थानों में भ्रमण के दौरान जो अपशिष्ट उत्पन्न करते हैं उनकी सूची बनाइए। क्या आप उन्हें आसानी से कम कर सकते हैं ? कौन-से ऐसे अपशिष्ट हैं जिनको कम करना काठेन या असंभव है ?
उत्तर-
घर, विद्यालय या अन्य स्थानों पर निम्नलिखित अपशिष्ट होते हैं–कागज, प्लास्टिक की थैलियाँ, फलों एवं सब्जियों के छिलके, थर्मोकोल एवं प्लास्टिक धातु के कप-प्लेट, पेंसिल के टुकड़े, लेड, लकड़ी की छिलन, धातुओं के अपशिष्ट पदार्थ, टिन, पैक्स, चाक के टुकड़े, काँच के टुकड़े, फटे वस्त्र, वाहित मल आदि  अपशिष्टो को कम करना कठिन ही नहीं असंभव भी है, वे हैं-प्लास्टिक एवं पॉलीथीन की थैलियाँ, टिन, पैक्स, रिफिल,.प्लास्टिक की बोतल, प्लास्टिक के व्यर्थ सामान आदि।

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प्रश्न 3.
वैश्विक उष्णता (ग्लोबल वार्मिंग) में वृद्धि के कारणों और प्रभावों की चर्चा कीजिए। वैश्विक उष्णता वृद्धि को नियंत्रित करने के क्या उपाय हैं ?
अथवा
ग्रीन हाउस प्रभाव से आप क्या समझते हैं ?
उत्तर
परिभाषा-वायुमंडल में CO2 तथा अन्य हानिकारक गैसों की मात्रा में वृद्धि होने के कारण पृथ्वी की सतह एवं वायुमंडल में होने वाली तापमान वृद्धि को ग्रीन हाउस प्रभाव कहते हैं। मानवीय कारणों से CO2 की मात्रा में वृद्धि तथा इससे तापमान में होने वाली वृद्धि को सर्वप्रथम अमेरिकी वैज्ञानिक रोजर रेवेल 1957 ने ग्रीनहाउस प्रभाव नाम दिया।

पृथ्वी की सतह पर गैसों का आवरण ग्रीन हाउस के शीशे जैसा कार्य करता है अर्थात् यह सौर विकिरण को तो पृथ्वी पर जाने देता है परन्तु लंबी तरंगदैर्घ्य के विकिरण को अवशोषित कर लेता है। प्राकृतिक ग्रीन हाउस प्रभाव पृथ्वी की सतह के तापमान को 15°C पर गर्म करता है ग्रीन हाउस गैसों की अनुपस्थिति में पृथ्वी का तापमान 20°C गिर सकता है। परन्तु औद्योगिक क्रान्ति के बाद वायुमंडलीय CO2, CFC, CH4, हैलोजेन्स और अन्य गैसों की मात्रा में ये अत्यधिक वृद्धि।

ग्लोबल वार्मिंग के मुख्य कारण-

  • वृक्षों के अत्यधिक कटाई से CO2 गैस की वातावरण में वृद्धि होना।
  • जीवाश्म ईंधन (कोयला, पेट्रोलियम) आदि के आरंभिक या पूर्ण दहन से कार्बन मोनोऑक्साइड, कार्बन डाइक्साइड एवं नाइट्रोजन के ऑक्साइडों की मात्रा में वृद्धि।
  • रेफ्रिजिरेटरों एवं एयर कंडीशनरों में एरोसोल का उपयोग अग्निशमन यंत्रों तथा फोम के उपयोग से क्लोरोफ्लोरो कार्बन का वातावरण में एकत्रित होना। .
  • अनेक जैविक प्रक्रियाओं, कृषि कार्यों एवं अपशिष्टों के सड़ने से ग्रीन हाउस गैसों का वातावरण में एकत्रित होना।

ग्लोबल वार्मिंग के विनाशकारी परिणाम-

  • पृथ्वी का तापमान बढ़ने से पानी के वाष्पीकरण की दर बढ़ेगी जिससे उपलब्ध पानी में कमी आयेगी।
  • पृथ्वी का तापमान बढ़ने से ध्रुवों की बर्फ पिघलेगी जिससे समुद्र का जल स्तर बढ़ने से तटीय आबादी को, जीवन का खतरा हो जायेगा।
  • पेड़ पौधों एवं जंतुओं की मृत्यु दर बढ़ जायेगी।
  • जल एवं वायु प्रदूषण में तेजी से वृद्धि होगी।
  • असामयिक वृष्टि, अतिवृष्टि एवं अनावृष्टि एवं बाढ़ की संभावनाएँ बढ़ जायेंगी।

ग्लोबल वार्मिंग से बचने के उपाय-

  • वृक्षों के कटाई को प्रतिबंधित करना चाहिए तथा अधिकाधिक वृक्षारोपण करना चाहिए।
  • जीवाश्म ईंधन को मितव्ययिता से तथा पूर्णदहन हो, ऐसा उपयोग करना चाहिए।
  • क्लोरो फ्लोरो कार्बन को पूर्णतः प्रतिबंधित कर देना चाहिए।
  • रासायनिक खादों के प्रयोग को बंद करके जैविक खादों के प्रयोग को बढ़ावा देना चाहिये।
  • अधिकाधिक वैकल्पिक ऊर्जा स्रोतों का उपयोग करना चाहिए।

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प्रश्न 4.
कॉलम ‘अ’ और ‘ब’ में दिए गए मदों का मिलान कीजिए

कॉलम ‘अ’ – कॉलम ‘ब’

1. उत्प्रेरक परिवर्तक – (a) कणकीय पदार्थ
2. स्थिर वैद्युत अवक्षेपित्र – (b) कार्बन मोनोऑक्साइड और (इलेक्ट्रोस्टैटिक प्रेसिपिटेटर) नाइट्रोजन ऑक्साइड
3. कर्णमफ (इयर मफ्स) – (c) उच्च शोर स्तर
4. लैंडफिल – (d) ठोस अपशिष्ट।
उत्तर
1. (b), 2. (a), 3. (c), 4. (d).

प्रश्न 5.
निम्नलिखित पर आलोचनात्मक टिप्पणी लिखिए
(क) सुपोषण (यूट्रोफिकेशन)
(ख) जैव आवर्धन (बायोलॉजिकल मैग्निफिकेशन)
(ग) भौमजल (भूजल) का अवक्षय और इसकी पुनःपूर्ति के तरीके।
उत्तर
(क) सुपोषण (Eutrophication)-जलाशय, घरेलू अपशिष्ट, फॉस्फेट, नाइट्रेट इत्यादि से या इसके अपघटन से उत्पादों के मिलने से पोषक पदार्थों से समृद्ध हो जाते हैं । इस परिघटना के कारण जलाशय अत्यधिक उत्पादक या सुपोषी हो जाते हैं, जिसे सुपोषण (Eutrophication) कहते हैं। पोषकों के मिलने से जल में शैवाल (Algae) की प्रचुर मात्रा में वृद्धि होती है। इस कारण प्रदूषित जल में शैवालों की मात्रा अत्यधिक हो जाती है और वह जलाशय की सतह पर फैल जाते हैं। शैवालों की अत्यधिक वृद्धि के कारण जल में घुलित ऑक्सीजन की मात्रा कम हो जाती है जिसके फलस्वरूप जीव जंतुओं की मृत्यु दर बढ़ जाती है।

(ख) जैव आवर्धन (बायोलॉजिकल मैग्निफिकेशन)-बायोमैग्नीफिकेशन-कुछ कीटनाशक पदार्थ तथा हानिकारक पदार्थ जल में मिलकर जलीय जीवधारियों के माध्यम से विभिन्न पोषी स्तरों में पहुँचते हैं। प्रत्येक स्तर पर जैविक क्रियाओं से इनकी सान्द्रता में वृद्धि होती जाती है। इस क्रिया को जैविक आवर्धन (Bio magnification) कहते हैं।

(ग) भौमजल (भूजल) का अवक्षय और इसकी पुनःपूर्ति के तरीके (Depletion of under ground water and measures for its Recovery)-वर्षा की कमी, वनोन्मूलन अधिक सिंचाई, तालाब या गड्ढों में अधिक अपशिष्टों के जमा हो जाने तथा औद्योगिक इकाईयों में अत्यधिक जल की माँग के कारण भूजल का स्तर दिन-प्रतिदिन गिरता जा रहा है। इस कारण से कई क्षेत्रों में भू-जल स्तर (Water level) न्यूनतम स्तर पर जा पहुँचा है। जल एक नवीकरणीय प्राकृतिक सम्पदा है, फिर भी इसकी सुचारू रूप से आपूर्ति करना आवश्यक हो गया है। गिरते हुए भू-जल स्तर की पुनः पूर्ति निम्नलिखित तरीकों से की जा सकती है

  • रैनवाटर हार्वेस्टिंग द्वारा वर्षा जल को एकत्र करके उसका उपयोग करना चाहिए।
  • तालाबों तथा गड्ढों में सफाई करके जमा मलबे को हटाना चाहिए।
  • वर्षा के जल को जलाशयों में संगृहित करना चाहिए।
  • कम भू-जल स्तर वाले क्षेत्रों में कम सिंचाई वाली फसलें उगानी चाहिए।

प्रश्न 6.
अन्टार्कटिका के ऊपर ओजोन छिद्र क्यों बनते हैं ? पराबैंगनी विकिरण के बढ़ने से हमारे ऊपर किस प्रकार प्रभाव पड़ेंगे?
अथवा
ओजोन छिद्र क्या है ? इसके प्रभाव लिखिए।
उत्तर
पृथ्वी के ऊपर ध्रुवों पर 6 कि.मी. तथा भूमध्य रेखा पर 17 कि. मी. की ऊँचाई पर समताप मण्डल स्थित है, जहाँ O3, की परत उपस्थित है जो पराबैंगनी किरणों को अवशोषित करती है। अंटार्कटिका में हेली के केन्द्र पर ओजोन परत की मोटाई 33% रह गई है इसे ही ओजोन छिद्र कहते हैं। इस छिद्र के लिए CH4, N2O और CFCs जिम्मेदार हैं। CFCs गैस हैलोकार्बन वर्ग से संबंधित है। इनमें कार्बन और हैलोजन परमाणुओं वाली मानव निर्मित गैसों की श्रृंखला है। CFCs का उपयोग नोदक एयरोसॉल डिब्बों, एयर कंडीशनरों एवं फोम के निर्माण में हो रहा है। वायुमण्डल में CFCs के विघटन से क्लोरीन परमाणु बनते हैं जो O2, के अणुओं को नष्ट करते हैं। O2, की परत का क्षय हो रहा है।
CF2Cl2 —> CF2Cl+Cl
Cl+O3 —> CIO +O2
ClO+O —> Cl+O2
ओजोन छिद्र का प्रभाव-ओजोन परत की अनुपस्थिति में सूर्य से पराबैंगनी किरणें सीधी धरातल पर आ रही हैं जिससे कैंसर, मोतियाबिंद में वृद्धि हो रही है। मानव की प्रतिरोधक क्षमता कम हो रही है और न्यूक्लिक अम्ल भी प्रभावित हो रहा है। ये किरणें पौधों में प्रकाश संश्लेषण को भी प्रभावित करती हैं।

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प्रश्न 7.
वनों के संरक्षण और सुरक्षा में महिलाओं और समुदायों की भूमिका की चर्चा कीजिये।
उत्तर
वन संरक्षण हेतु हिमालय के अनपढ़ जनजातीय महिलाओं ने एक विशेष आन्दोलन दिसंबर, 1972 में प्रारंभ किया जो ‘चिपको आंदोलन’ के नाम में प्रसिद्ध हुआ। यह आन्दोलन उत्तराखण्ड के टिहरी गढ़वाल जिले में आरंभ हुआ। इन महिलाओं ने पेड़ों से चिपककर आंदोलन चलाया जिसके कारण इन्हें 1978 में पुलिस की गोलियों का शिकार होना पड़ा।

देश के अन्य भागों में जनजातियाँ इस आंदोलन से प्रेरित हुई और पेड़ों के विनाश के विरुद्ध आवाजें उठाई। इसी प्रकार सन् 1731 में राजस्थान में जोधपुर के निकट अमृता देवी उनकी तीन बेटियों और विश्नोई परिवार के सैकड़ों लोगों ने वृक्ष की रक्षा के लिए अपने प्राण गँवा दिये। इस प्रकार उन्होंने जंगल एवं जमीन की घरोहर को सुरक्षित रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।

प्रश्न 8.
पर्यावरणीय प्रदूषण को रोकने के लिये एक व्यक्ति के रूप में आप क्या उपाय करेंगे?
उत्तर
पर्यावरणीय प्रदूषण को निम्नलिखित उपायों द्वारा कम किया जा सकता है

  1. हमें प्रत्येक उपलब्ध स्थान पर अधिक से अधिक पेड़-पौधे लगाना चाहिए।
  2. घरों में भोजन बनाने के लिए धुआँ रहित ईंधन, जैसे-LPG, गोबर गैस, सौर ऊर्जा आदि के उपयोग को बढ़ावा देना चाहिए।
  3. वाहनों के धुएँ को रोकने के लिए उसमें फिल्टर का प्रयोग करना चाहिए।
  4. पॉलीथीन की थैलियों के स्थान पर हमें कागज की थैली या कपड़े का थैला उपयोग में लाना चाहिए।
  5. कूड़ा-करकट डस्टबीन में ही डालना चाहिए।
  6. पानी का दुरुपयोग न कर उसका संरक्षण करना चाहिए।
  7. उत्सवों पर आतिशबाजी के प्रयोग पर रोक लगनी चाहिए।
  8. मल पदार्थ, गोबर तथा पौधे के अवशेषों को गड्ढे में डालना चाहिए। जिससे ह्यूमस का निर्माण हो सके।

प्रश्न 9.
निम्नलिखित के बारे में संक्षेप में चर्चा कीजिये-
(क) रेडियो सक्रिय अपशिष्ट,
(ख) पुराने बेकार जहाज और ई. अपशिष्ट
(ग) नगर पालिक के ठोस अपशिष्ट।
उत्तर
(क) रेडियो सक्रिय अपशिष्ट (Radioactive wastages)- प्रदूषण निम्नलिखित प्रकार के होते हैं

(i) जल प्रदूषण-जल स्त्रोतों में होने वाले उन अवांछनीय परिवर्तन को जिससे जल प्रदूषित होता है, जल प्रदूषण कहते हैं। यह प्रदूषण वाहितमल, घरेलू बहिस्राव, औद्योगिक बहिस्राव, कृषि कार्यों, कीटनाशकों के प्रयोगों तथा औद्योगिक गतिविधियों के कारण होता है।

(ii) वायु प्रदूषण-वायुमण्डल में होने वाले ऐसे परिवर्तन जिनसे जीवों का नुकसान हो वायु प्रदूषण कहलाता है। यह मुख्यत: दहन क्रियाओं, औद्योगिक गतिविधियों, कृषि कार्यों में कीटनाशकों के प्रयोगों तथा औद्योगिक गतिविधियों के कारण होता है।

(iii) रेडियोऐक्टिव प्रदूषण-रेडियोऐक्टिव पदार्थों के कारण पैदा होने वाले प्रदूषण को रेडियोऐक्टिव प्रदूषण कहते हैं । परमाणु ऊर्जा के अपशिष्टों के कारण भी रेडियोऐक्टिव प्रदूषण होता है।

(iv)शोर प्रदूषण-अवांछनीय ध्वनि को शोर कहते हैं । वातावरण में फैली ऐसी अनियन्त्रित ध्वनि अथवा शोर को ध्वनि अथवा शोर प्रदूषण कहते हैं । यह प्रदूषण अनियन्त्रित ध्वनि, आतिशबाजी, लाउडस्पीकर, हवाई अड्डा, उद्योग इत्यादि से पैदा हुई ध्वनि के कारण होती है।

(v) मृदा प्रदूषण-मृदा में होने वाले हानिकारक परिवर्तनों को मृदा प्रदूषण कहते हैं । यह कीटनाशकों, खरपतवारनाशियों, उर्वरकों के प्रयोग के कारण होता है।

रेडियोऐक्टिव (विकिरण) प्रदूषण के कारण जीवों के ऊपर निम्नलिखित प्रभाव पड़ते हैं, जो बीमारियों के रूप में दिखाई देते हैं

  • ल्यूकीमिया तथा अस्थि कैंसर-रेडियोऐक्टिव प्रदूषण के कारण मनुष्य, गाय, बैल आदि जीवों में रुधिर तथा अस्थि का कैंसर होता है।
  • असामयिक बुढ़ापा-रेडियोऐक्टिव प्रदूषण के कारण जीवों की प्रजनन क्षमता घट जाती है तथा उनमें असामयिक बुढ़ापा आता है।
  • महामारी-विकिरण प्रदूषण के कारण जीवों में रोगजनकों के प्रति एन्टिटॉक्सिन उत्पादन की या रोग प्रतिरोधक क्षमता घट जाती है, जिसके कारण महामारी तेजी से फैलती है।
  • उत्परिवर्तन-इसके कारण जीवों में अचानक कुछ आनुवंशिक परिवर्तन पैदा हो जाते हैं।
  • तन्त्रिका तन्त्र तथा संवेदी कोशिकाएँ उत्तेजित हो जाती है।
  • बाह्य त्वचा पर घाव बन जाता है एवं आँख, आँत व जनन ऊतक प्रभावित होते हैं। इसके तात्कालिक प्रभाव के रूप में आँखों में जलन, डायरिया, उल्टी इत्यादि लक्षण दिखाई देते हैं। कैंसर होता है।

(ख) पुराने बेकार जहाज (Old useless ships)–पुराने बेकार मरम्मत के योग्य न रहने वाले जहाज, ठोस अपशिष्ट की तरह होते हैं । इन जहाजों को समुद्र तट पर तोड़कर कबाड़ (स्क्रेप) निकाला जाता है। जहाजों के स्क्रेप में अनेक विषाक्त पदार्थ जैसे-एस्बेस्टास, सीसा, पारा आदि निकल कर तटीय क्षेत्रों को प्रदूषित करते हैं।

ई-अपशिष्ट (e-wastes)-कम्प्यूटर व अन्य इलेक्ट्रॉनिक सामान जिन्हें मरम्मत करके ठीक-ठीक नहीं किया जा सकता, ई-अपशिष्ट कहलाते हैं। विकासशील देशों में ई-अपशिष्टों का पुनः चक्रण कर ताँबा, सिलिकॉन, निकिल एवं स्वर्ण धातु प्राप्त किया जाता है। इन देशों में पुनः चक्रण की क्रिया आधुनिक विधियों से करके हाथों द्वारा किया जाता है, जिससे ई-अपशिष्ट में मौजूद विषैले पदार्थ इन कार्य में जुड़े लोगों पर दुष्प्रभाव डालते हैं।

(ग) नगर पालिका के ठोस अपशिष्ट (Solid wastes of municipality)-नगर पालिक के ठोस अपशिष्टों में घरों, कार्यालयों, भंडारों, विद्यालयों आदि से रद्दी में फेंकी गई सभी चीजें आती है जो नगर पालिका द्वारा इकट्ठी की जाती है और इनका निपटान किया जाता है। इन्हें ठोस अपशिष्ट कहते हैं। इनमें आमतौर पर कागज, खाद्य अपशिष्ट, काँच, धातु, रबर, चमड़ा, वस्त्र आदि होते हैं। इनको जलाने से अपशिष्ट के आयतन में कमी आ जाती है, लेकिन यह सामान्यतः पूरी तरह जलता नहीं है और खुले में इसे फेंकने पर यह चूहों और मक्खियों के लिए प्रजनन स्थल का कार्य करता है। सैनेटरी लैंडफिल में अपशिष्ट को संघनन (Compaction) के बाद गड्ढा या खाई में डाला जाता है और प्रतिदिन धूल-मिट्टी (Dirt) से ढंक दिया जाता है।

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प्रश्न 10.
दिल्ली में वाहनों से होने वाले वायु प्रदूषण को कम करने के लिए क्या प्रयास किये गये ? क्या दिल्ली में वायु की गुणवत्ता में सुधार हुआ।
उत्तर
वाहनों की संख्या अधिक होने के कारण दिल्ली में वायु प्रदूषण का स्तर देश में सबसे अधिक है। 41 सर्वाधिक प्रदूषित नगरों में दिल्ली का स्थान चौथा है। इस स्थिति को देखकर भारत के न्यायालय ने भारत सरकार को निश्चित अवधि में प्रदूषण कम करने का उपाय करने बाबत् आदेश दिये कि सभी सरकारी वाहनों में डीजल के स्थान पर संपीड़ित प्राकृतिक गैस (CNG) का प्रयोग किया जाये। वर्ष 2002 के अंत तक सभी बसों को CNG. में परिवर्तित कर दिया गया।

CNG डीजल से बेहतर है, क्योंकि डीजल की तुलना में इसका दहन उच्च होता है तथा यह अन्य पेट्रोलियम पदार्थों से किफायती होता है, साथ ही दिल्ली में वाहन प्रदूषण को कम करने के अन्य उपाय भी किये गये हैं, जैसे-पुरानी गाड़ियों को धीरे-धीरे हटा देना, सीसा रहित पेट्रोल एवं डीजल का प्रयोग, कम गन्धक युक्त पेट्रोल और डीजल का प्रयोग, वाहनों में उत्प्रेरक परिवर्तनों का प्रयोग, वाहनों के लिए कठोर प्रदूषण स्तर लागू करना आदि। दिल्ली में किये गये उक्त प्रयासों के कारण यहाँ की वायु की गुणवत्ता में सुधार हुआ है।

प्रश्न 11.
निम्नलिखित के बारे में संक्षेप में चर्चा कीजिए
(क) ग्रीन हाऊस गैसें
(ख) उत्प्रेरक परिवर्तक
(ग) पराबैंगनी-B
उत्तर
(क) ग्रीन हाऊस गैसें (Green house gases)-वातावरण में उपस्थित कार्बन डाइऑक्साइड (CO2) मीथेन (CH4), कार्बन मोनोऑक्साइड (CO), नाइट्रस ऑक्साइड (N2O), क्लोरोफ्लोरो कार्बन (CFC) गैसें ग्रीनहाऊस गैसें कहलाती हैं। इन गैसों के अत्यधिक उत्सर्जन से पृथ्वी के तापक्रम में वृद्धि होती है।

(ख) उत्प्रेरक परिवर्तक (Catalytic converter)-महानगरों में स्वचालित वाहन वायुमण्डल प्रदूषण के प्रमुख कारण हैं। जैसे-जैसे सड़कों पर वाहनों की संख्या बढ़ती है यह समस्या छोटे शहरों में भी पहुंच रही है। स्वचालित वाहनों का रखरखाव उचित होना चाहिए। उनमें सीसा रहित पेट्रोल या डीजल का प्रयोग होने से उत्सर्जित प्रदूषकों की मात्रा कम हो जाती है। उत्प्रेरक परिवर्तक में कीमती धातु प्लैटिनम-पैलेडियम और रेडियम लगे होते हैं, जो उत्प्रेरक (Catalyst) का कार्य करते हैं। ये परिवर्तन स्वचालित वाहनों में लगे होते हैं जो विषैले गैसों के उत्सर्जन को कम करते हैं।

(ग) पराबैंगनी-बी (Ultraviolet-B)-पराबैंगनी-B(UV-B) विकिरण एक बड़ी तरंगदैर्घ्य वाली किरण है तथा पृथ्वी के वायुमण्डल द्वारा पूरी तरह अवशोषित नहीं हो पाती। ये किरणें जीवधारियों को बड़े पैमाने पर हानि पहुँचाती है। UV-B, DNA को क्षतिग्रस्त करता है जिसके कारण उत्परिवर्तन (Mutation) हो सकता है। त्वचा की कोशिकाएँ क्षतिग्रस्त तथा शरीर में विविध प्रकार के कैंसर उत्पन्न हो सकते हैं। इसके प्रभाव से त्वचा में बुढ़ापे के लक्षण दिखाई देने लगते हैं। हमारी आँखों का कॉर्निया UV-B विकिरण का अवशोषण करता है। इसकी उच्च मात्रा होने पर कार्निया में शोथ होने लगता है, जिसे मोतियाबिंद (Cataract) कहा जाता है। UV-B प्रतिरक्षा तंत्र को भी प्रभावित करता है।

पर्यावरणीय मुद्दे अन्य महत्वपूर्ण प्रश्नोत्तर

वस्तुनिष्ठ प्रश्न

1. सही विकल्प चुनकर लिखिए

प्रश्न 1.
जीवाश्मीय ईंधन का दहन निम्नलिखित का मुख्य कारण है
(a) SO2 प्रदूषण
(b) नाइट्रोजन डाइ-ऑक्साइड
(c) नाइट्रस ऑक्साइड प्रदूषण
(d) नाइट्रिक ऑक्साइड प्रदूषण।
उत्तर
(a) SO2 प्रदूषण

प्रश्न 2.
ग्रीन हाउस प्रभाव का कारण वायुमण्डल में निम्नलिखित की सान्द्रता का बढ़ना है
(a) CO2
(b)CO
(c) O3
(d) नाइट्रोजन ऑक्साइड।
उत्तर
(a) CO2

प्रश्न 3.
वातावरण में O2, की मात्रा में कमी का दायित्व किस रसायन के फलस्वरूप है
(a) CFC
(b) NO2
(c)CO2
(d) SO2
उत्तर
(a) CFC

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प्रश्न 4.
निम्न में से कौन-सा सर्वाधिक भयंकर रेडियोऐक्टिव प्रदूषक है
(a) स्ट्रांशियम-90
(b) फॉस्फोरस-32
(c) सल्फर-35
(d) कैल्सियम-40.
उत्तर
(a) स्ट्रांशियम-90

प्रश्न 5.
अम्लीय वर्षा का कारण है
(a) सल्फर डाइ-ऑक्साइड प्रदूषण
(b) कार्बन मोनो-ऑक्साइड प्रदूषण
(c) पीड़कनाशी प्रदूषण
(d) धूल कण।
उत्तर
(a) सल्फर डाइ-ऑक्साइड प्रदूषण

प्रश्न 6.
कार्बन मोनो-ऑक्साइड एक प्रमुख प्रदूषक है
(a) जल का
(b) हवा का
(c) ध्वनि का
(d) मृदा का।
उत्तर
(b) हवा का

प्रश्न 7.
पौधे हवा के शोधक माने जाते हैं, निम्न क्रिया के कारण
(a) श्वसन
(b) प्रकाश-संश्लेषण
(c) वाष्पोत्सर्जन
(d) शुष्कन।
उत्तर
(b) प्रकाश-संश्लेषण

प्रश्न 8.
ओजोन परत को नुकसान पहुँचाने वाला प्रमुख प्रदूषक है
(a) ओजोन डाइ-ऑक्साइड
(b) कार्बन डाइ-ऑक्साइड
(c) कार्बन मोनो-ऑक्साइड
(d) नाइट्रोजन ऑक्साइड एवं फ्लोरोकार्बन
उत्तर
(d) नाइट्रोजन ऑक्साइड एवं फ्लोरोकार्बन

प्रश्न 9.
भोपाल गैस दुर्घटना में किस गैस का रिसाव हुआ था
(a) मेथिल आइसोसायनेट
(b) पोटैशियम आइसोथायोसायनेट
(c) सोडियम आइसो थायोसायनेट
(d) एथिल आइसोइनेट।
उत्तर
(a) मेथिल आइसोसायनेट

प्रश्न 10.
मिनिमाता रोग किसके कारण उत्पन्न होता है
(a) पेय जल में कार्बनिक प्रदूषक
(b) तेल उत्पन्य
(c) जल में पारद युक्त औद्योगिक कचरा
(d) वायुमंडलीय ऑर्गेनिक।
उत्तर
(c) जल में पारद युक्त औद्योगिक कचरा

प्रश्न 11.
ताजमहल को किससे खतरा है
(a) यमुना में आने वाले बाढ़
(b) तापक्रम द्वारा संगमरमर का वरण
(c) मथुरा रिफाइनरी से उत्पन्न प्रदूषक
(d) उपर्युक्त सभी।
उत्तर
(c) मथुरा रिफाइनरी से उत्पन्न प्रदूषक

प्रश्न 12.
निम्न में से कौन वायुमंडलीय प्रदूषण उत्पन्न नहीं करेगा
(a) SO2
(b)CO2
(c)CO
(d) H2
उत्तर
(d) H2

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प्रश्न 13.
भोपाल गैस दुर्घटना कब हुई
(a) 1982
(b) 1984
(c) 1986
(d) 1988.
उत्तर
(c) 1986

प्रश्न 14.
ग्रीन हाउस प्रभाव में तापन का कारण होता है
(a) पृथ्वी पर आने वाले इन्फ्रारेड किरणें
(b) वायुमंडल की नमी
(c) वायुमंडलीय CO2
(d) वायुमंडलीय ओजोन।
उत्तर
(b) वायुमंडल की नमी

प्रश्न 15.
ग्रीन हाउस गैसें किससे संबंधित हैं–
(a) हरी शैवालों की अति वृद्धि
(b) वैश्विक तापमान में वृद्धि
(c) घरों में सब्जी की खेती
(d) टेरेस गार्डन का विकास।
उत्तर
(a) हरी शैवालों की अति वृद्धि

प्रश्न 16.
ग्रीन हाउस गैसें होती हैं
(a) CO2,CFC,CH2 ,NO2
(b) CO2,O2,N2,NO2,NH3
(c) CH4,N3,CO2,NH3
(d) CFC,CO2,NH3,H2
उत्तर
(d) CFC,CO2,NH3,H2

प्रश्न 17.
जल प्रदूषण किसके कारण होता है
(a) सल्फर डाइ-ऑक्साइड
(b) कार्बन डाइ-ऑक्साइड
(c) ऑक्सीजन
(d) औद्योगिक अपशिष्ट
उत्तर
(d) औद्योगिक अपशिष्ट

प्रश्न 18.
किस खेत से मीथेन गैस का उत्पादन होता है
(a) गेहूँ का खेत
(b) धान का खेत
(c) कपास का खेत
(d) मूंगफली का खेत।
उत्तर
(b) धान का खेत

प्रश्न 19.
प्रदूषित जल का उपचार किससे किया जाता है
(a) लाइकेन
(b) कवक
(c) फर्न
(d) फाइटो प्लैंक्टॉन।
उत्तर
(d) फाइटो प्लैंक्टॉन।

प्रश्न 20.
परिवहन से उत्पन्न गैस जो अचानक श्वास संबंधी रोग उत्पन्न हो सकता है
(a) CO
(b)CH4
(c)NO2
(d) क्लोरीन।
उत्तर
(a) CO

प्रश्न 21.
किस देश के द्वारा ग्रीन हाउस गैस का अधिकतम उत्पादन होता है
(a) भारत
(b) ब्रिटेन
(c) U.S.A.
(d) फ्रांस।
उत्तर
(c) U.S.A.

प्रश्न 22.
अम्लीय वर्षा से कौन अप्रभावित रहता है
(a) लिथोस्फीयर
(b) पौधे
(c) ओजोन परत.
(d) जन्तु।
उत्तर
(c) ओजोन परत.

प्रश्न 23.
ओजोन परत के छिद्र के कारण उत्पन्न होता है
(a) वैश्विक तापन
(b) प्रकाश संश्लेषण की दर में कमी
(c) अधिक UV किरणों का पृथ्वी पर आना
(d) उपर्युक्त सभी।
उत्तर
(d) उपर्युक्त सभी।

प्रश्न 24.
भारत वर्ष में सबसे अधिक प्रदूषित नदी है
(a) गंगा
(b) यमुना
(c) गोमती
(d) गोदावरी।
उत्तर
(b) यमुना

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2. रिक्त स्थानों की पूर्ति कीजिए

1. चारों ओर फैले परिवेश को ………….कहते हैं।
2. पर्यावरण अध्ययन की प्रकृति …………… होती है।
3. …………. पृथ्वी पर जीवों का सर्वाधिक उच्च स्तर है।
4. …………….स्थान विशेष में पाये जाने वाले विभिन्न प्रकार के प्राणियों, जीवाणुओं तथा कवकों का समूह है।
5. भू-पटल के ऊपर पाये जाने वाले वायु के विस्तार को ………….. कहते हैं।
6. विद्युत् चुम्बकीय स्पेक्ट्रम के दृश्य रेंज को ………….. कहा जाता है।
7. मृदा की ऊर्ध्वाकार स्तरीय संरचना को ………….. कहते हैं।
8. …………. जल पौधों को सर्वाधिक रूप से उपलब्ध होता है।
9. ………….. मृदा में पाये जाने वाले जीवों के श्वसन के लिए आवश्यक होता है।
10. पृथ्वी पर जीवों के अस्तित्व के लिए मृत्यु एक ………….. घटना है।
11. जीवित रहने के लिए ………….. गैस आवश्यक है।
12. ……………. मछली, मच्छर के अण्डों एवं लार्वा का भक्षण करती है।
13. वनीकरण द्वारा वातावरणीय CO2, की मात्रा को …………… किया जा सकता है।
14. मृदा प्रदूषण ……………. के द्वारा होता है।
15. ओजोन परत सूर्य की …………. को अवशोषित करती है।
उत्तर

  1. पर्यावरण
  2. बहुविषयक
  3. जैवमंडल
  4. जैव-समुदाय
  5. वायुमंडल
  6. प्रकाश
  7. मृदा-परिच्छेदिका,
  8. केशिका
  9. ऑक्सीजन
  10. आवश्यक
  11. ऑक्सीजन
  12. गैम्बूशिया
  13. नियंत्रित,
  14. रासायनिक उर्वरकों,
  15. पराबैंगनी किरणों।

3. सही जोड़ी बनाइए

I. ‘A’ – ‘B’

1. अम्लीय वर्षा का कारण – (a)CO2
2. ग्रीन हाउस प्रभाव का कारण  – (b) SO2 प्रदूषण
3. वातावरण में O3 की मात्रा की कमी का कारण – (c) SO2 + NO2
4. जीवाश्मीय दहन का मुख्य कारण – (d) C.F.C.
उत्तर
1.(c), 2. (a), 3. (d), 4. (b)

II. ‘A’ – ‘B’

1. मच्छर नियंत्रण – (a) 1972 अधिनियम
2. शिकार पर रोक – (b) वनस्पति हानि
3. पेन (PAN) – (c) स्मॉग
4. ओजोन विघटन – (d) गैसों की स्क्रबिंग।
उत्तर
1. (c), 2.(a), 3. (b), 4. (d)

4. एक शब्द में उत्तर दीजिए

1. प्रभावकारी दशाओं का वह संपूर्ण योग जिसमें जीव पाये जाते हैं।
2 परस्पर प्रजनन करने वाले जीवों का समूह ।
3. किसी स्थान विशेष में पाये जाने वाले जीवों तथा निर्जीव कारकों के मध्य होने वाली अंतक्रिया से विकसित होने वाला तंत्र।
4. वायुमंडल का वह निचला हिस्सा जिसमें 90% से अधिक गैसें पायी जाती हैं।
5. बैंगनी रंग के प्रकाश से कम तरंगदैर्घ्य वाले प्रकाश की किरणें।
6. पौधे में पुष्पन क्रिया पर प्रकाश का प्रभाव।
7. मृदा में पाये जाने वाले सबसे छोटे आकार के कण।
8. गुरुत्वाकर्षण बल के कारण मृदा कणों के बीच रिसकर नीचे चले जाने वाला कण।
9. शुष्क स्थिति टालने के लिए कुछ ही समय में जीवन चक्र करने वाले पौधे।
10. लवणीय पर्यावरण में पाये जाने वाले पौधे।।
11. सुरक्षा के लिए एक जीव का दूसरे जीव का स्वरूप ग्रहण करना।
12. B.O.D. का पूरा नाम लिखिए।
13. वायु प्रदूषण करने वाली दो प्रमुख गैसों के नाम लिखिए।
14. मनुष्य की श्रवण क्षमता कितनी होती है ?
15. भारत की सबसे अधिक प्रदूषित नदी कौन-सी है ?
16 वातावरण में CO2 की सान्द्रता में वृद्धि होने से वातावरण के ताप में वृद्धि को क्या कहते हैं ?
17. D.D T. का पूरा नाम लिखिये।
18. पर्यावरण में CO2, की मात्रा कितनी होती है ?
19. किसके कारण धुएँ से आँखों में जलन पैदा होती है ?
20. विश्व-पर्यावरण दिवस कब मनाया जाता है ?
21. PAN का पूरा नाम लिखिए।
22. CFCs का पूरा नाम क्या है ?
23. भू-मण्डलीय तापन में CO2 का कितने प्रतिशत योगदान है ?
उत्तर

  1. पर्यावरण
  2. जाति
  3. पारिस्थितिक तंत्र
  4. क्षोभमंडल
  5. पराबैंगनी किरणें
  6. प्रकाश कालिता
  7. क्ले
  8. गुरुत्वाकर्षण जल
  9. इफिमीरल
  10. लवणोद्भिद
  11. अनुहरण
  12. Biological Oxygen Demand
  13. SO2, एवं CO2
  14. 10-12 डेसीबल
  15. गंगा
  16. ग्रीन हाऊस प्रभाव
  17. डाइक्लोरो डाइफिनाइल ट्राइक्लोरो एथेन,
  18. 0.03%,
  19. NO2
  20. 5 जून
  21. परॉक्सिल एसिटाइल नाइट्रेट,
  22. क्लोरो फ्लोरो कार्बन, 23.60%.

पर्यावरण के मुद्दे लघु उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 1.
प्रदूषण की परिभाषा लिखिए।
उत्तर
“वायु, जल एवं मृदा के भौतिक, रासायनिक तथा जैविक गुणों में होने वाला ऐसा अवांछित परिवर्तन जो मनुष्य के साथ ही सम्पूर्ण परिवेश के प्राकृतिक एवं सांस्कृतिक तत्वों को हानि पहुँचाता है उसे प्रदूषण कहते हैं।”

प्रश्न 2.
वायु प्रदूषण के कारण स्पष्ट कीजिए।
उत्तर

  1. प्राकृतिक स्रोतों में ज्वालामुखी, दावाग्नि, अपशिष्ट आदि प्रमुख हैं।
  2. मानव निर्मित स्रोत परिवहन, घरेलू कार्यों में दहन, ताप बिजली घर, उद्योग, कृषि कार्य, पेंट, वार्निश, खनन, रेडियोधर्मिता दुर्घटनाएँ, आतिशबाजी, गुलाल, धूम्रपान वायु प्रदूषण उत्पन्न करती हैं।
  3. कालिख, धुआँ, धूल, एस्बेस्टॉस तन्तु, कीटनाशक पौधे के परागण, कवकों एवं जीवाणुओं के स्पोर्स वायु प्रदूषण आदि के उदाहरण हैं।
  4. जीवाश्म के अपूर्ण दहन से CO2 का निर्माण होता है।

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प्रश्न 3.
अम्ल वर्षा क्या है ? मनुष्य में इसके दो प्रभाव लिखिए।
उत्तर
जीवाश्मीय ईधनों के जलने पर ऑक्सीकरण के द्वारा सल्फर के ऑक्साइड (SO2और SO3) पैदा होती हैं । ये दोनों गैसें पानी से क्रिया करके सल्फ्यूरस एवं सल्फ्यूरिक अम्ल (H2SO4) बनाती हैं । वर्षा के दिनों में जीवाश्मीय ईंधन के जलने से बनी SO2, और SO3 वर्षा की बूंदों के साथ अम्लों के रूप में पृथ्वी पर गिरती हैं, इसे ही अम्ल वर्षा कहते हैं। मानव पर इसके दो

प्रभाव

  • त्वचा में जलन होती है तथा फफोले बन जाते हैं।
  • इसके कारण इन्फ्लुएंजा, ब्रोंकॉइटिस तथा न्यूमोनिया रोग होते हैं।

प्रश्न 4.
वायु प्रदूषण का पौधों पर प्रभाव लिखिए।
उत्तर
वायु प्रदूषण का पौधों पर प्रभाव-

  • वायु प्रदूषण मुख्यत: SO2 की सान्द्रता बढ़ने के कारण पौधों की पत्तियाँ पीली पड़ने लगती हैं।
  • इनकी पत्तियों की कोशिकाएँ तथा क्लोरोफिल अपघटित होने लगती हैं अन्त में पत्तियाँ गिरती हैं और पौधे की मृत्यु हो जाती है।
  • पौधों की कायिक एवं जनन वृद्धि रुक जाती है, जिससे उत्पादन प्रभावित होता है।
  • पौधे का विकास अवरुद्ध हो जाता है।

प्रश्न 5.
दहन क्रियाओं से होने वाले वायु प्रदूषण पर संक्षिप्त टिप्पणी लिखिए।
उत्तर
दहन क्रियाओं से अनेक प्रकार के प्रदूषण होते हैं । घरेलू कार्यों में दहन क्रियाओं से जहाँ एक ओर CO2,CO, SO2, जैसे गैसें उत्पन्न होती हैं वही, इस क्रिया में वायुमण्डल की ऑक्सीजन उपयोग में ली जाती है। इससे वातावरण में ऑक्सीजन की कमी होती है। इसी प्रकार अनेक विद्युत्-गृहों में पत्थर का कोयला जलाने से अन्य गैसें तथा धुआँ उत्पन्न होता है। कोयले की राख व्यर्थ पदार्थ के रूप में उड़कर वायुमण्डल में मिलती है। दहन क्रियाओं से होने वाले प्रदूषण में सर्वाधिक बढ़ोत्तरी वाहनों में जलने वाले ईंधन से होती है। डीजल वाहनों के धुएँ में अनेक हाइड्रोकार्बन, सल्फर तथा नाइट्रोजन के ऑक्साइड आदि होते हैं। पेट्रोल से चलने वाले वाहनों के धुएँ में CO2 के अलावा सीसा भी होता है।

प्रश्न 6.
वायु प्रदूषण की रोकथाम हेतु उपाय लिखिए।
उत्तर
वायु प्रदूषण की रोकथाम हेतु उपाय-वायु प्रदूषण निम्नलिखित उपायों द्वारा रोका जा सकता

  • कल कारखानों को आबादी से दूर करके तथा इनमें शोधन यन्त्रों को लगाना।
  • नये वनों को लगाना तथा वनों की कटाई पर रोक लगाना।
  • अधिक धुआँ देने वाले वाहनों तथा संयन्त्रों पर प्रतिबंध लगाना।
  • बड़े नगरों में बगीचों, उद्यानों का विकास करना।
  • फैक्ट्रियों की चिमनियों को ऊँचा करना।
  • बस अड्डों तथा मोटर गैराजों को शहर से दूर करना।
  • वायु शोषक पादपों का वृक्षारोपण करना।
  • वायु प्रदूषण सम्बन्धी नियमों को बनाकर तथा उनका पालन करवाकर ।

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प्रश्न 7.
हरित गृह प्रभाव के नियंत्रण के कोई चार उपाय लिखिये।
उत्तर
हरित गृह प्रभाव के नियंत्रण के उपाय निम्नलिखित हैं

  • जीवाश्म ईंधनों के उपयोग में कमी लाई जाये।
  • वनों का विनाश रोका जाये तथा नये वन विकसित किये जायें।
  • हरित गृह गैसों के विसर्जन रोकने हेतु वित्तीय सहायता के साथ तकनीकी जानकारी दी जानी चाहिए।
  • ऊर्जा के परंपरागत स्रोतों पर निर्भरता कम की जाये। नये ऊर्जा स्रोतों का विकास किया जाये।

प्रश्न 8.
निम्नलिखित पर संक्षिप्त टिप्पणी लिखिए
1. बायोमैग्नीफिकेशन,
2.UV-किरणें,
3. बायोडिग्रेडेबल प्रदूषक
4. नॉन-बायोडिग्रेडेबल प्रदूषक।
उत्तर-
1. बायोमैग्नीफिकेशन-कुछ कीटनाशक पदार्थ तथा हानिकारक पदार्थ जल में मिलकर जलीय जीवधारियों के माध्यम से विभिन्न पोषी स्तरों में पहुँचते हैं। प्रत्येक स्तर पर जैविक क्रियाओं से इनकी सान्द्रता में वृद्धि होती जाती है। इस क्रिया को जैविक आवर्धन (Bio magnification) कहते हैं।

2. पराबैंगनी किरणें या UV- किरणें-UV- किरणें वे प्रकाश कि हैं जिनकी तरंगदैर्ध्य 200 से 300 nm के बीच होता है। इन्हें हम सामान्य आँख से नहीं देख सकते हैं।

3. बायोडिग्रेडेबल प्रदूषक या निम्नीकरणीय प्रदूषक-जिन प्रदूषकों का सूक्ष्म जीवों की प्राकृतिक क्रियाओं द्वारा अहानिकारक पदार्थों में अपघटन किया जा सके, उन्हें जैव निम्नीकरणीय प्रदूषक कहते हैं। ये कम हानिकारक होते हैं । मल-मूत्र , कूड़ा-करकट इसी श्रेणी में आते हैं।

4.नॉन-बायोडिग्रेडेबल या जैव अनिम्नीकरणीय प्रदूषक-जिन प्रदूषकों का सूक्ष्म जीवों की प्राकृतिक क्रियाओं द्वारा अपघटन न किया जा सके उन्हें अनिम्नीकरणीय प्रदूषक कहते हैं। ये अपेक्षाकृत अधिक नुकसानदेह होते हैं। इनका प्रकृति में पुनर्चक्रण नहीं हो पाता। ऐल्युमिनियम, काँच, प्लास्टिक इसी श्रेणी में आते हैं।

प्रश्न 9.
SO2 का वातावरण पर क्या प्रभाव पड़ेगा?
उत्तर
MP Board Class 12th Biology Solutions Chapter 16 पर्यावरण के मुद्दे 1

प्रश्न 10.
जल अथवा वायु प्रदूषण के स्रोतों के केवल नाम लिखिए।
उत्तर
जल प्रदूषण के स्रोत-जल प्रदूषण के प्रमुख स्रोत निम्नानुसार हैं

(A) मानवीय स्रोत

  • वाहित मल
  • घरेलू बहिस्राव
  • कृषि बहिस्राव
  • औद्योगिक बहिस्राव
  • तैलीय प्रदूषण।

(B) प्राकृतिक स्रोत-कुछ लवण तथा तत्व प्राकृतिक रूप से जल में मिलकर प्रदूषण फैलाते हैं जैसेसीसा, आर्सेनिक, पारा, निकिल आदि। वायु प्रदूषण के स्रोत-वायु प्रदूषण के स्रोतों को सामान्यत: दो भागों में बाँटते हैं

(A) प्राकृतिक स्रोत-ज्वालामुखी का लावा, धूल, वन की आग के धुएँ तथा दलदल भूमि की CH4

(B) कृत्रिम स्रोत या मानवीय स्रोत–मानवीय स्रोत निम्नानुसार हैं दहन क्रियाएँ, औद्योगिक गतिविधियाँ, कृषि कार्य, कीटनाशकों का प्रयोग तक परमाणु ऊर्जा सम्बन्धी गतिविधियाँ।

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प्रश्न 11.
जलीय जीवों पर जल प्रदूषण के प्रभावों का वर्णन कीजिए।
उत्तर
जलीय पादपों पर जल प्रदूषण के प्रभाव-

  • N2 तथा P की उपस्थिति के कारण जल सतह पर काई जम जाती है, जिससे सूर्य प्रकाश गहराई तक नहीं जाता है।
  • प्रदूषित जल में सूक्ष्म जीवों की संख्या बढ़ जाती है।
  • जल में गाद जमती है।
  • जलीय तापमान बढ़ता है तथा O2, का अनुपात कम होता है।

जलीय जन्तुओं पर जल प्रदूषण का प्रभाव-जलीय वनस्पति पर ही जन्तु जीवन निर्भर रहता है। जलीय जन्तु जल प्रदूषण से निम्नलिखित प्रकार से प्रभावित होते हैं

  • B.O. D. की कमी के कारण जन्तु संख्या कम होते हैं।
  • स्वच्छ जल में पाये जाने वाले जन्तु समाप्त हो जाते हैं।
  • जन्तु विविधता कम होती है तथा मछलियों में तरह-तरह की बीमारियाँ होती हैं।
    जल से बाहर रहने वाले जीव भी प्रदूषित जल के उपयोग के कारण प्रभावित होते हैं।

प्रश्न 12.
जल प्रदूषण की रोकथाम एवं नियंत्रण के उपाय बताइए।
उत्तर
जल प्रदूषण की रोकथाम एवं नियंत्रण के लिए निम्नलिखित उपाय किए जा सकते हैं

  • प्रत्येक घर में सेप्टिक टैंक होना चाहिए।
  • जल स्रोतों में पशुओं को नहीं धोना चाहिए।
  • लोगों को नदी, तालाब, झील में स्नान नहीं करना चाहिए।
  • कीटनाशियों, कवकनाशियों इत्यादि के रूप में निम्नीकरण योग्य पदार्थों का प्रयोग करना चाहिए।
  • खतरनाक कीटनाशियों के उपयोग पर प्रतिबंध लगाना चाहिए। इन जल स्रोतों में पशुओं को भी नहीं धोना चाहिए।
  • जल स्रोतों के जल के शोधन पर विशिष्ट ध्यान देना चाहिए। बड़ी-बड़ी फैक्ट्रियों में जल शोधन संयन्त्रों को लगाना चाहिए।

प्रश्न 13.
औद्योगिक कारणों से होने वाले वायु प्रदूषण का संक्षिप्त विवरण दीजिए।
उत्तर
वायु प्रदूषण मुख्यतः उद्योगों से निकले धुएँ एवं अपशिष्ट पदार्थों से ही होता है। कपड़ा उद्योगों, रासायनिक उद्योग, तेल शोधक कारखाने, गत्ता उद्योग एवं शक्कर उद्योग वायु प्रदूषण के मुख्य स्त्रोत हैं और H4S, SO2,CO2,CO, धूल, सीसा, ऐम्बेस्टॉस आर्सेनिक फ्लुओराइड, बेरिलियम तथा अनेक हाइड्रोकार्बन इन उद्योगों से निकले प्रमुख वायु प्रदूषक हैं । औद्योगिक क्षेत्रों के आस-पास के धुआँ को देखकर उद्योगों से होने वाले प्रदूषण को समझा जा सकता है। उद्योगों के कारण भारत के औद्योगिक शहर बहुत अधिक प्रदूषित हैं।

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प्रश्न 14.
ध्वनि प्रदूषण के स्रोत क्या हैं ? ध्वनि प्रदूषण के कोई चार प्रभाव लिखिए।
उत्तर
ध्वनि प्रदूषण के स्रोत (Sources of Noise Pollution)- ध्वनि प्रदूषण का स्रोत ध्वनि, शोर या आवाज ही है चाहे वह किसी भी प्रकार से पैदा हुई हो। टी. वी., रेडियों, कूलर, स्कूटर, कार, बस, ट्रेन, जहाज, रॉकेट, घरेलू उपकरण, वाशिंग मशीन, लाउड स्पीकर, स्टीरियो, टैंक, तोप तथा दूसरे सुरक्षात्मक उपकरणों के अलावा सभी प्रकार की आवाज करने वाले साधन उपकरण या कारक ध्वनि प्रदूषण स्रोत होते हैं।

ध्वनि प्रदूषण के प्रभाव-ध्वनि प्रदूषण के प्रमुख प्रभाव निम्नानुसार हैं

  • सतत् शोर के कारण सुनने की क्षमता में कमी आती है।
  • ज्यादा शोर होने पर त्वचा में उत्तेजना पैदा होती है, जठर पेशियाँ संकीर्ण होती हैं और क्रोध तथा स्वभाव में उत्तेजना पैदा होती है।
  • शोर के कारण हृदय की धड़कन तथा रक्त दाब बढ़ता है और सिर दर्द, थकान, अनिद्रा आदि रोग होते हैं।
  • अधिक शोर के कारण ऐड्रीनल हॉर्मोनों का स्राव अधिक होता है।
  • यह कई उपापचयी क्रियाओं को प्रभावित करने के अलावा संवेदी तथा तन्त्रिका-तन्त्र को कमजोर बनाता है।

प्रश्न 15.
ध्वनि प्रदूषण से बचने के उपायों को लिखिए।
उत्तर
ध्वनि प्रदूषण से बचने के उपाय-ध्वनि प्रदूषण से निम्नलिखित उपायों द्वारा बचा जा सकता

  • ऐसे उपकरणों का निर्माण करना जो शोर या ध्वनि की तीव्रता को कम करें।
  • ध्वनि अवशोषकों का प्रयोग करना चाहिए।
  • मशीनों के साथ काम करने वाले व्यक्तियों को ध्वनि अवशोषक वस्त्रों को देना चाहिए।
  • पौधों को उगाकर भी ध्वनि प्रदूषण को कम किया जा सकता है।
  • अनावश्यक शोर नहीं करना चाहिए। ध्वनि उत्पादक उपकरणों का आवश्यतानुसार ही प्रयोग करना चाहिए।
  • अनावश्यक ध्वनि पैदा करने वालों के खिलाफ कानून बनाकर उसका कड़ाई से पालन करवाना चाहिए।

प्रश्न 16.
प्रदूषण कितने प्रकार के होते हैं ? प्रत्येक का संक्षिप्त विवरण दीजिए।
उत्तर
प्रदूषण निम्नलिखित प्रकार के होते हैं

(i) जल प्रदूषण-जल स्त्रोतों में होने वाले उन अवांछनीय परिवर्तन को जिससे जल प्रदूषित होता है, जल प्रदूषण कहते हैं। यह प्रदूषण वाहितमल, घरेलू बहिस्राव, औद्योगिक बहिस्राव, कृषि कार्यों, कीटनाशकों के प्रयोगों तथा औद्योगिक गतिविधियों के कारण होता है।

(ii) वायु प्रदूषण-वायुमण्डल में होने वाले ऐसे परिवर्तन जिनसे जीवों का नुकसान हो वायु प्रदूषण कहलाता है। यह मुख्यत: दहन क्रियाओं, औद्योगिक गतिविधियों, कृषि कार्यों में कीटनाशकों के प्रयोगों तथा औद्योगिक गतिविधियों के कारण होता है।

(iii) रेडियोऐक्टिव प्रदूषण-रेडियोऐक्टिव पदार्थों के कारण पैदा होने वाले प्रदूषण को रेडियोऐक्टिव प्रदूषण कहते हैं । परमाणु ऊर्जा के अपशिष्टों के कारण भी रेडियोऐक्टिव प्रदूषण होता है।

(iv)शोर प्रदूषण-अवांछनीय ध्वनि को शोर कहते हैं । वातावरण में फैली ऐसी अनियन्त्रित ध्वनि अथवा शोर को ध्वनि अथवा शोर प्रदूषण कहते हैं । यह प्रदूषण अनियन्त्रित ध्वनि, आतिशबाजी, लाउडस्पीकर, हवाई अड्डा, उद्योग इत्यादि से पैदा हुई ध्वनि के कारण होती है।

(v) मृदा प्रदूषण-मृदा में होने वाले हानिकारक परिवर्तनों को मृदा प्रदूषण कहते हैं । यह कीटनाशकों, खरपतवारनाशियों, उर्वरकों के प्रयोग के कारण होता है।

पर्यावरण के मुद्दे दीर्घ उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 1.
रेडियोऐक्टिव प्रदूषण से होने वाली बीमारियों का वर्णन कीजिए।
उत्तर
रेडियोऐक्टिव (विकिरण) प्रदूषण के कारण जीवों के ऊपर निम्नलिखित प्रभाव पड़ते हैं, जो बीमारियों के रूप में दिखाई देते हैं

  • ल्यूकीमिया तथा अस्थि कैंसर-रेडियोऐक्टिव प्रदूषण के कारण मनुष्य, गाय, बैल आदि जीवों में रुधिर तथा अस्थि का कैंसर होता है।
  • असामयिक बुढ़ापा-रेडियोऐक्टिव प्रदूषण के कारण जीवों की प्रजनन क्षमता घट जाती है तथा उनमें असामयिक बुढ़ापा आता है।
  • महामारी-विकिरण प्रदूषण के कारण जीवों में रोगजनकों के प्रति एन्टिटॉक्सिन उत्पादन की या रोग प्रतिरोधक क्षमता घट जाती है, जिसके कारण महामारी तेजी से फैलती है।
  • उत्परिवर्तन-इसके कारण जीवों में अचानक कुछ आनुवंशिक परिवर्तन पैदा हो जाते हैं।
  • तन्त्रिका तन्त्र तथा संवेदी कोशिकाएँ उत्तेजित हो जाती है।
  • बाह्य त्वचा पर घाव बन जाता है एवं आँख, आँत व जनन ऊतक प्रभावित होते हैं। इसके तात्कालिक प्रभाव के रूप में आँखों में जलन, डायरिया, उल्टी इत्यादि लक्षण दिखाई देते हैं। कैंसर होता है।

प्रश्न 2.
आतिशबाजी से पर्यावरण में किस प्रकार का प्रदूषण फैलता है ? समझाइए।
उत्तर
आतिशबाजी का अर्थ विभिन्न उत्सवों के दौरान पटाखों तथा बारूद का अत्यधिक उपयोग से है। वैसे हम इसे खुशी के मौकों पर प्रयोग करते हैं, लेकिन हम यह भूल जाते हैं कि यह हमें भविष्य में दुःख ही देगा। आतिशबाजी के कारण पर्यावरण में निम्न प्रकार से प्रदूषण फैलता है

  • वायु प्रदूषण-आतिशबाजो में प्रयुक्त विस्फोटकों से निकली हानिकारक गैसें जैसे-CO2,CO, SO2, इत्यादि वायु को प्रदूषित करती हैं, जिससे अनेक प्रकार की श्वास सम्बन्धी बीमारियाँ हो सकती हैं।
  • ध्वनि प्रदूषण-आतिशबाजी के कारण पैदा हुई ध्वनि, ध्वनि प्रदूषण पैदा करती है।
  • जल प्रदूषण-आतिशबाजी के कारण पैदा हुआ कचरा नालियों में मिलकर जल को प्रदूषित करता है। इसके फलस्वरूप कई विषैले पदार्थ भी पैदा होते हैं।

आतिशबाजी सबसे अधिक वायु प्रदूषण पैदा करती है। इसके कारण बहुत अधिक मात्रा में धुआँ पैदा होता है, जो सीधे वायुमण्डल में मिल जाता है । इसके अलावा इसके प्रभाव से बहुत अधिक मात्रा में धूल, वायु में कणीय प्रदूषक के रूप में मिल जाती है, जिसके साथ कुछ बारूद तथा दूसरे हानिकारक पदार्थों के कण भी होते हैं, जो भूमि पर गिरकर प्रदूषण पैदा करते हैं। आतिशबाजी की आवाज से व्यक्ति बहरा हो सकता है। उसका रक्त-दाब बढ़ सकता है तथा उसमें हृदयाघात व तन्त्रिकीय विकृति पैदा हो सकती है।

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प्रश्न 3.
‘वायु प्रदूषण’ पर एक निबंध लिखिए।
उत्तर
वायु प्रदूषणा-वायुमण्डल मे होने वाले ऐसे परिवर्तन जिनसे जीवों का नुकसान हो वायु प्रदूषण कहलाता है। यह मुख्यत: दहन क्रियाओं, औद्योगिक गतिविधियों, कृषि कार्यों में कीटनाशकों के प्रयोगों तथा औद्योगिक गतिविधियों के कारण होता है।

उत्तर.
वाय प्रदूषण के प्रभात्र-वायु प्रदूषण हमारे शरीर में तरह-तरह की विकृतियाँ पैदा करता है। इसके कुछ हानिकारक प्रभाव निम्नलिखित हैं

1. कारखानों की चिमनियों से निकलने वाली So,श्वास नली में जलन पैदा करती है तथा फेफड़ों को हानि पहुँचाती है। यह विभिन्न प्रकार के पौधों को क्षतिग्रस्त कर देती है। कुछ अधिपादप एवं लाइकेन SO2, से स्वतंत्र माध्यम में वहत तीव्रता से बढ़ते हैं। जन्तुओं में इसका प्रभाव श्वसन क्रिया पर सबसे अधिक पड़ता है।

2. नाइट्रस ऑक्साइड से फेफड़ों, आँखों व हृदय के रोग तथा ओजोन से आँख के रोग, खाँसी एवं सीने में दर्द होने लगता है। यह कई पौधों में वाष्पोत्सर्जन की दर बढ़ाकर भी उन्हें नुकसान पहुंचाती है।

3.P.A.N. प्रकाश प्रतिक्रिया में प्रकाशीय जल-अपघटन को रोककर, परितन्त्र का उत्पादन कम कर देती है। यह आँखों में जलन पैदा करके फेफड़ों को क्षति पहुँचाती है।

प्रश्न 4.
मुख्य वायु प्रदूषकों के नाम तथा उनके प्रभावों का पृथक्-पृथक् विवरण दीजिए।
उत्तर
मुख्य वायु प्रदूषक-मुख्य वायु प्रदूषकों के नाम तथा उनके प्रभाव निम्नानुसार हैं

  • कार्बन मोनोऑक्साइड-ये रुधिर के हीमोग्लोबीन से संयुक्त होकर उसकी ), सम्वहन क्षमता को प्रभावित करते हैं, जिसके कारण सिरदर्द, सुस्ती, कमजोरी, भाराल्पता इत्यादि की शिकायत होती है।
  • सल्फर डाइऑक्साइड-इसके कारण जन्तुओं में श्वास की बीमारी, श्लैष्मिक ज्वर (influenza) और न्यूमोनिया तथा अम्ल वर्षा के कारण त्वचीय रोग होते हैं। पौधों में इसकी कमी से पत्तियाँ सबसे अधिक प्रभावित होती हैं तथा उत्पादकता कम हो जाती है।
  • हाइड्रोजन सल्फाइड-इसके कारण पौधों में पतझड़ तथा जन्तुओं की आँख में जलन, गले में खराश तथा उल्टी आती है।
  • नाइट्रोजन के ऑक्साइड-इसके कारण पत्तियों में हरिमहीनता, पत्तियों में सड़न, पुष्प तथा फल का पतन होता है। मनुष्य तथा जन्तुओं में इसके कारण श्वसन सम्बन्धी बीमारियाँ होती हैं।
  • ऐरोसोल्स-ऐरोसोल्स ओजोन परत को प्रभावित करने वाले रसायन हैं, जिसके कारण अल्ट्रावायलेट किरणें पृथ्वी पर आकर जन्तु तथा पादपों को नुकसान पहुँचाती हैं।
  • अमोनिया-यह पौधों के बीजों के अंकुरण, जड़ एवं प्ररोह वृद्धि और पौधों में हरितलवक अपघटन को पैदा करती है। जन्तुओं में यह श्वास में कठिनाई पैदा करती है।
  • हाइड्रीजन क्लोराइड-इसके कारण पौधों की पत्तियाँ तथा जन्तुओं की आँख व श्वसन अंग प्रभावित होते हैं।
  • हाइड्रोकार्बन-इसके कारण पौधों में पीलेपन, पत्तियों की सड़न, कलिका का सूखना, पत्तों का छोटापन इत्यादि समस्याएँ पैदा होती हैं। जन्तुओं में इनके कारण आँख एवं नाक की म्यूकस ग्रन्थियाँ उत्तेजित हो जाती हैं। इसके कारण फेफड़ों का कैंसर भी होता है। उपर्युक्त के अलावा भी वायु में कई प्रदूषक और पाये जाते हैं, जो जीवों को किसी न किसी रूप में प्रभावित करते हैं।

प्रश्न 5.
मृदा प्रदूषण को नियन्त्रित करने वाले उपायों को लिखिए।
उत्तर
निम्नलिखित उपायों को अमल में लाकर मृदा प्रदूषण के दर को काफी हद तक कम कर नियन्त्रित किया जा सकता है

  • ठोस तथा अनिम्नीकरण योग्य पदार्थों जैसे-लोहा, ताँबा, काँच, पॉलिथीन को मिट्टी में नहीं दबाना चाहिए।
  • रासायनिक उर्वरकों, कीटनाशियों, शाकनाशियों आदि के प्रयोग को कम-से-कम करना चाहिए।
  • रासायनिक कीटनाशियों के स्थान पर जैव कीटनाशियों का प्रयोग करना चाहिए।
  • ठोस अपशिष्टों को मृदा में मिलाने के बजाय उनको गलाकर इनके चक्रीकरण पर विशेष ध्यान देना चाहिए।
  • अपशिष्ट पदार्थों को खुले में छोडने के बदले खोखले, बन्द स्थानों में संग्रहीत करना चाहिए।
  • मृदा-क्षरण (Soil erosion) को रोकने का तरीका अपनाना चाहिए साथ ही भूमि में भरपूर जल संचयन हो इसका ध्यान रखा जाना चाहिए।
  • जैव उर्वरकों के प्रयोग को प्रोत्साहित करना चाहिए।
  • गोबर, कार्बनिक अपशिष्ट तथा मानव मल-मूत्र से जैव गैस उत्पादन पर ज्यादा बल देना चाहिए।
  • एकीकृत भूमि प्रबन्धन तकनीक को अपनाना चाहिए ताकि भूमि प्रदूषण के प्रत्येक पहलू पर समुचित ध्यान देकर भूमि प्रदूषण को रोका जा सके।

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प्रश्न 6.
भूमि प्रदूषण के प्रमुख स्रोतों का वर्णन कीजिए।
उत्तर
भूमि प्रदूषण के प्रमुख स्रोत निम्नलिखित हैं

  1. अम्ल वर्षा के घटक मृदा को प्रदूषित करते हैं।
  2. अवांछित कूड़ा-करकट जैसे-घरेलू अपमार्जक, पॉलिथीन आदि मृदा को प्रदूषित करते हैं।
  3. मृदा की लवणता, अनियन्त्रित फसल उत्पादन, अनियन्त्रित मल विसर्जन, अनियन्त्रित चराई इत्यादि कार्य मृदा को प्रदूषित करते हैं।
  4. उर्वरकों, कीटनाशियों, शाकनाशियों का अन्धाधुन्ध उपयोग मृदा की प्राकृतिक संरचना को परिवर्तित करता है।
  5. औद्योगिक अपशिष्ट निकिल, आर्सेनिक, कैडमियम मृदा प्रदूषण पैदा कर जीव-जन्तुओं को प्रभावित करते हैं।
  6. मलेरिया उन्मूलन में DDT का अत्यधिक उपयोग भी मृदा प्रदूषण का सबसे बड़ा कारण बना है, क्योंकि यह खाद्य श्रृंखला द्वारा मनुष्य के शरीर में पहुँच कर अल्सर, कैंसर जैसे खतरनाक रोगों को पैदा करता है।

प्रश्न 7.
विजिबल स्पेक्ट्रम से क्या तात्पर्य है ? सूर्य प्रकाश के विभिन्न स्पेक्ट्रम पर संक्षिप्त टिप्पणी लिखते हुए, UV किरणों का जैविक प्रणालियों पर प्रभाव लिखिए।
उत्तर
दृश्य स्पेक्ट्रम (वर्णक्रम)-सूर्य द्वारा उत्सर्जित विकिरण के 390 nm से 760 nm की तरंगदैर्ध्य की प्रकाश किरणों को मनुष्य की आँखें देख सकती हैं, इसे दृश्य स्पेक्ट्रम कहते हैं।
सूर्य प्रकाश के विभिन्न स्पेक्ट्रम-सूर्य के प्रकाश से निकलने वाले विकिरण अथवा प्रकाश को तीन भागों में बाँटते हैं

  • अल्ट्रावायलेट स्पेक्ट्रम-सूर्य प्रकाश के 200 से 390 nm तरंगदैर्ध्य वाले प्रकाश किरण पुंज को अल्ट्रावायलेट स्पेक्ट्रम कहते हैं। इसे हमारी आँखें नहीं देख सकतीं।
  • दृश्य स्पेक्ट्रम-390 से 760 nm तरंगदैर्ध्य की प्रकाश किरणों को दृश्य वर्णक्रम (visible spectrum) कहते हैं।
  • अवरक्त स्पेक्ट्रम या वर्णक्रम-सूर्य प्रकाश के 760 nm से अधिक तरंगदैर्ध्य की प्रकाश किरणों को अवरक्त वर्णक्रम (Infrared spectrum) कहते हैं । इसे भी हमारी आँखें नहीं देख सकती।

UV किरणों का जैविक प्रणालियों पर प्रभाव-UV किरणें कोशिकाओं के DNA को विकृत कर देती हैं, जिससे कोशिकाओं में DNA द्विगुणन एवं प्रोटीन संश्लेषण की क्रिया रुक जाती है। इसके अलावा जन्तुओं में इनके प्रभाव से कैंसर, ट्यूमर, महामारी, आनुवंशिक विकृति जैसी समस्याएँ भी पैदा होती हैं।
पौधों में UV किरणों के प्रभाव से कई विषैले प्रकाश उत्पादों का संश्लेषण होता है, जिसके कारण इनकी मृत्यु हो जाती है।

यदि UV किरणों से प्रभावित जीव को कुछ देर तक सामान्य सूर्य के प्रकाश में रखा जाये तो इसका प्रभाव कुछ कम हो जाता है। UV किरणे काँच को पार नहीं कर पाती अर्थात् इसका प्रयोग करके हानिकारक प्रभाव से बचा जा सकता है।

प्रश्न 8.
आयोनाइजिंग एवं नॉन-आयोनाइजिंग रेडियोधर्मिता में अन्तर स्पष्ट कीजिए। इनके स्रोत तथा प्रभावों का वर्णन कीजिए।
उत्तर
आयोनाइजिंग एवं नॉन-आयोनाइजिंग रेडियोधर्मिता में अन्तर-आयोनाइजिंग एवं नॉनआयोनाइजिंग विकिरण में निम्नलिखित अन्तर हैं

  • आयोनाइजिंग रेडियोधर्मिता रेडियोधर्मी पदार्थों के कारण पैदा होती है, जबकि नॉन-आयोनाइजिंग सूर्य की किरणों के कारण पैदा होती है।
  • आयोनाइजिंग विकिरण a,B, Y किरणों का बना होता है, जबकि नानआयोनाइजिंग विकिरण 200 से 390nm तक की तरंगदैर्घ्य वाली किरणों का बना होता है।
  • आयोनाइजिंग विकिरण जीव समुदाय के लिए बहुत अधिक हानिकारक होता है, जबकि नॉन-आयोनाइजिंग विकिरण अपेक्षाकृत कम हानिकारक होता है।
  • आयोनाइजिंग विकिरण का प्रभाव दीर्घगामी होता है, जबकि नॉन-आयोनाइजिंग विकिरण का प्रभाव जल्दी दिखाई देता है।

स्रोत-आयोनाइजिंग रेडियाधर्मिता के स्रोत प्रकृति में पाये जाने वाले रेडियोधर्मी पदार्थ होते हैं अर्थात् इनमें अल्फा, बीटा एवं गामा किरणें ही रेडियोधर्मिता पैदा करती हैं। नॉन-आयोनाइजिंग रेडियोधर्मिता का स्रोत सूर्य होता है।

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प्रश्न 9.
ध्वनि प्रदूषण के कारण और जीवधारियों पर इसके चार प्रभाव लिखिए।
उत्तर
ध्वनि प्रदूषण के कारण (स्रोत)-ध्वनि प्रदूषण का स्रोत ध्वनि, शोर या आवाज ही है, चाहे वह किसी भी प्रकार से पैदा हुई हो । टी.वी., रेडियो, कूलर प्कूटर, कार, बस, ट्रेन, प्लेन, रॉकेट, घरेलू उपकरण, वाशिंग मशीन, लाउडस्पीकर, स्टीरियो, टैंक, तोप तथा दूसरे सुरक्षात्मक उपकरणों के अलावा आवाज उत्पन्न करने वाले सभी प्रकार के साधन, उपकरण या कारक ध्वनि प्रदूषण के स्रोत होते हैं । उद्योग, कल-कारखाने तथा यान व हवाई अड्डे ध्वनि प्रदूषण के प्रमुख स्रोत हैं।
ध्वनि प्रदूषण का जीवधारियों पर प्रभाव-इसके प्रमुख प्रभाव निम्नलिखित हैं

  • सतत् शोर के कारण सुनने की क्षमता में कमी आती है तथा आदमी के बहरा होने की सम्भावना बढ़ती है।
  • ज्यादा शोर होने पर त्वचा में उत्तेजना (Irritation) पैदा होती है, जठर पेशियाँ (Gastric muscles) संकीर्ण होती हैं और क्रोध तथा स्वभाव में उत्तेजना पैदा होती है।
  • शोर के कारण हृदय की धड़कन (Heart beating) तथा रक्त दाब (Blood pressure) बढ़ता है।
  • ध्वनि प्रदूषण के कारण सिर दर्द, थकान, अनिद्रा आदि रोग होते हैं ।
  • अधिक शोर के कारण ऐड्रीनल हॉर्मोन (Adrenal hormones) का स्राव अधिक होता है।
  • यह कई उपापचयी क्रियाओं को प्रभावित करने के अलावा संवेदी (Sensory) तथा तन्त्रिका तन्त्र (Nervous system) को कमजोर बनाता है।
  • अवांछित ध्वनि (शोर) के कारण मस्तिष्क का तनाव बढ़ता है, जिससे व्यक्ति चिड़चिड़ा हो जाता है।
  • तीव्र शोर के कारण हमारा पाचन तंत्र (Digestive system) प्रभावित होता है और पाचन (Digestion) क्रिया अनियमित हो जाती है। शोर के कारण अल्सर (Ulcer) की सम्भावना भी बढ़ती है।
  • ध्वनि प्रदूषण के कारण धमनियों में कोलेस्ट्रॉल का जमाव बढ़ता है, जिसके परिणामस्वरूप रक्तचाप (Blood pressure) भी बढ़ता है।
  • शोर के कारण हमारे शरीर का पूरा अन्तःस्रावी तन्त्र (Endocrine system) उत्तेजित हो जाता है।
  • शोर में लगातार रहने पर बुढ़ापा (Ageing) जल्दी आता है।

प्रश्न 10.
हरित गृह प्रभाव क्या है ? इनके चार प्रभावों का वर्णन कीजिये।
उत्तर
“मानव द्वारा निर्मित CO2 के कारण उत्पन्न कम्बल जैसे प्रभाव (Blanketing effect) के कारण पृथ्वी की सतह के तापमान में होने वाली क्रमिक वृद्धि को ही हरित गृह प्रभाव (Greenhouse effect) कहते हैं।
हरित गृह (ग्रीन हाउस) प्रभाव के दुष्परिणाम (प्रभाव)

(1) पृथ्वी की जलवायु पर प्रभाव (Efféct on global climate)-कार्बन-डाइऑक्साइड के अवरक्त लाल विकिरणों (Infrared radiations) के अवशोषक गुण के कारण ही CO2 को पृथ्वी का ताप निर्धारित करने वाला प्रमुख कारक माना गया है। ग्रीन हाउस गैसों (Green house gases) की मात्रा में वृद्धि के साथसाथ पृथ्वी के सभी भागों के तापमान में वृद्धि एकसमान (Uniform) नहीं होती है। तापमान में होने वाली वृद्धि ध्रुवों (Poles) में सर्वाधिक तथा कटिबंधों (Tropics) में सबसे कम होती है, अत: आइसलैण्ड (Iceland), ग्रीनलैण्ड (Green-land), स्वीडन (Sweden), नार्वे (Norway), फिनलैण्ड (Finland), अलास्का (Alaska) एवं साइबेरिया (Siberia) इससे सर्वाधिक प्रभावित हैं तथा ध्रुवों पर जमी बर्फ पिघलने लगी है।

(2) वनों पर हरित गृह प्रभाव का प्रभाव (Effect of Green house Effect on forests)-वायुमण्डलीय तापमान में वृद्धि होने के कारण केवल वही पेड़-पौधे जीवित रह पायेंगे जो कि इस उच्च तापमान को सहन कर सकेंगे। इसके साथ नये प्रकार की वनस्पतियों की उत्पत्ति होगी। शाकीय (Herbaceous) पौधे इस बढ़ते हुए तापमान में जीवित नहीं रह पायेंगे। कठोर काष्ठ (Hard wood) वाले पौधों का तेजी से विकास होगा। एक अनुमान के अनुसार वायुमण्डल में CO2 की मात्रा दुगुनी हो जाने पर हरित जैव भार (Green biomass) में अत्यधिक कमी आ जायेगी।

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(3) फसलों पर प्रभाव (Effect on crops)-हरित गृह प्रभाव के कारण वातावरण के तापमान में वृद्धि होने पर पौधों से होने वाले वाष्पोत्सर्जन (Transpiration) एवं वाष्पीकरण (Evaporation) की दर में अत्यधिक वृद्धि होगी, अतः ऐसे पौधे जिनके लिये अधिक मात्रा में पानी की आवश्यकता होती है, उनके लिये जल कमी की समस्या उत्पन्न हो जायेगी। इसके साथ-साथ ऐसी फसलें, जिन्हें एक निश्चित तापमान की आवश्यकता होती है, वे अधिक तापमान के कारण नष्ट हो जायेंगी। अधिक तापमान के कारण पौधों पर रोगों एवं कीटों का प्रकोप बढ़ जायेगा, फलतः उत्पादन में कमी आयेगी।

(4) ओजोन परत पर प्रभाव (Effect on ozone layer)-डॉ. इवान्स (Dr. Evans) के अनुसार, पिछले 12 वर्षों में हरित गृह प्रभाव के द्वारा पृथ्वी पर वापस आने वाले ऊष्मीय विकिरणों (Heat radiations) की मात्रा CFC (क्लोरोफ्लुओरो-कार्बन) की मात्रा में वृद्धि के साथ-साथ दुगुनी हो गयी है। CFC वायुमण्डल में उपस्थित ओजोन स्तर को अत्यधिक हानि पहुँचाती है। CFC के प्रकाश अपघटनी विघटन (Photolytic dissociation) के कारण क्लोरीन (Chlorine) गैस मुक्त होती है, जो कि ओजोन, (Ozone) के साथ क्रिया करके आण्विक ऑक्सीजन (Molecular oxygen) एवं क्लोरीन मोनोऑक्साइड (Chlorine Mono-oxide) का निर्माण करती है। यह क्लोरीन मोनोऑक्साइड वातावरण में उपस्थित आण्विक ऑक्सीजन के साथ क्रिया करके ऑक्सीजन (O2) के अणुओं का निर्माण करके पुनः क्लोरीन (Cl) गैस मुक्त करती है।
नियंत्रण के उपाय

  • स्वचालित वाहनों से होने वाले वायु प्रदूषण को उत्प्रेरक संपरिवर्तकों के प्रयोग द्वारा ही नियंत्रित किया जा सकता है।
  • रेडियोधर्मी विकिरण के प्रभाव से बचने के लिए परमाणु विस्फोटों पर नियंत्रण स्थापित करना चाहिए तथा परमाणु संयंत्रों में सुरक्षा हेतु विशेष प्रबंध करने चाहिए।

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MP Board Class 11th Maths Solutions Chapter 15 सांख्यिकी Ex 15.3

MP Board Class 11th Maths Solutions Chapter 15 सांख्यिकी Ex 15.3

प्रश्न 1.
निम्नलिखित आँकड़ों से बताइए कि A या B में से किसमें अधिक बिखराव है :
MP Board Class 11th Maths Solutions Chapter 15 सांख्यिकी Ex 15.3 img-1
हल:
माना कल्पित माध्य A = 45, h = 10.
yi = \(\frac{x_{i}-45}{h}\)
MP Board Class 11th Maths Solutions Chapter 15 सांख्यिकी Ex 15.3 img-2
सूमह A के लिए:
MP Board Class 11th Maths Solutions Chapter 15 सांख्यिकी Ex 15.3 img-3
सूमह B के लिए:
MP Board Class 11th Maths Solutions Chapter 15 सांख्यिकी Ex 15.3 img-4
∴ σ = 15.62
विचरण गुणांक, C.V. = \(\frac{\sigma}{\bar{x}}\) = × 100
= \(\frac{1562}{44.6}\) = 35.02
समूह B का विचरण गुणांक समूह A के विचरण गुणांक से अधिक है।
अतः समूह B में अंकों का बिखराव सूमह A के अंकों से अधिक है।

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प्रश्न 2.
शेयरों X और Y के नीचे दिए गए मूल्यों से बताइए कि किसके मूल्यों में अधिक स्थिरता है ?
MP Board Class 11th Maths Solutions Chapter 15 सांख्यिकी Ex 15.3 img-5
हल:
माना शेयर X के आँकड़ों में कल्पित माध्य = 52
और शेयर Y के आँकड़ों में कल्पित माध्य = 105
MP Board Class 11th Maths Solutions Chapter 15 सांख्यिकी Ex 15.3 img-6
MP Board Class 11th Maths Solutions Chapter 15 सांख्यिकी Ex 15.3 img-7
विचरण गुणांक Y शेयर में x शेयर की तुलना में कम है।
अतः शेयर Y में, शेयर X की तुलना में अधिक स्थिरता है।

प्रश्न 3.
एक कारखाने की दो फर्मों A और B के कर्मचारियों को दिए मासिक वेतन के विश्लेषण का निम्नलिखित परिणाम है :
MP Board Class 11th Maths Solutions Chapter 15 सांख्यिकी Ex 15.3 img-8
(i) A और B में से कौन सी फर्म अपने कर्मचारियों को वेतन के रूप में अधिक राशि देती है?
(ii) व्यक्तिगत वेतनों में किस फर्म A या B में अधिक विचरण है ?
हल:
फर्म के लिए: वेतन पाने वाले कर्मचारियों की संख्या = 586
मासिक वेतन की माध्य = 5253 रू
फर्म A द्वारा दिया गया कुल वेतन = 5253 x 586
= 3078258 रू
वेतन बंटन का प्रसरण = 100
मानक विचलन = 10
विचरण गुणांक = \(\frac{\sigma}{\bar{x}}\) × 100
= \(\frac{10}{5253}\) × 100
= \(\frac{1000}{5253}\) = 0.19
फर्म B के लिए:
वेतन पाने वाले कर्मचारियों की संख्या = 648
मासिक वेतन का संख्या = 5253 रू
फर्म B द्वारा गया कुल वेतन = 5253 x 648 रू
= 3403944 रू
वेतन बंटन का प्रसरण = 121
∴ मानक विचलन = 11
विचरण गुणांक = \(\frac{\sigma}{\bar{x}}\) × 100
\(\frac{11}{5253}\) × 100 = 0.21
(i) फर्म A द्वारा दिया गया कुल मासिक वेतन = 3078258 रू
फर्म B द्वारा दिया गया कुल मासिक वेतन = 3403944 रू
अतः फर्म B फर्म A की तुलना में अधिक मासिक वेतन देती है।

(ii) फर्म A के वेतन बंटन का विचरण गुणांक = 0.19 और
फर्म A के वेतन बंटन का विचरण गुणांक = 0.21
अतः फर्म B के वेतन बंटन में अधिक बिखराव है।

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प्रश्न 4.
टीम A द्वारा एक सत्र में खेले गए फुटबॉल मैचों के आँकड़े नीचे दिए गए हैं :
MP Board Class 11th Maths Solutions Chapter 15 सांख्यिकी Ex 15.3 img-9
टीम B द्वारा खेले गए मैचों में बनाए गए गोलों का माध्य 2 प्रति मैच और गोलों का मानक विचलन 1.25 था। किस टीम को अधिक संगत (consistent) समझा जाना चाहिए ?
हल:
MP Board Class 11th Maths Solutions Chapter 15 सांख्यिकी Ex 15.3 img-10
= 54.75
फर्म B के लिए :
माध्य \(\bar{x}\) = 2
मानक विचलन = 1.25
विचरण गुणांक = \(\frac{\sigma}{\bar{x}}\) × 100
= \(\frac{1.25}{2}\) × 100 = 62.5
टीम A का टीम B की तुलना में विचरण गुणांक कम है।
अतः टीम A में टीम B से अधिक स्थिरता है।

प्रश्न 5.
पचास वनस्पति उत्पादों की लंबाई x (सेमी में) और भार y (ग्राम में) के योग और वर्गों के योग नीचे दिए गए हैं :
MP Board Class 11th Maths Solutions Chapter 15 सांख्यिकी Ex 15.3 img-11
लंबाई या भार में किसमें अधिक विचरण है ?
हल:
लंबाई के लिए :
MP Board Class 11th Maths Solutions Chapter 15 सांख्यिकी Ex 15.3 img-12
MP Board Class 11th Maths Solutions Chapter 15 सांख्यिकी Ex 15.3 img-13
भार के लिए:
MP Board Class 11th Maths Solutions Chapter 15 सांख्यिकी Ex 15.3 img-14
भार का विचरण गुणांक, लंबाई के विचरण गुणांक से अधिक है।
अतः भार के बंटन में अधिक विचरण है।

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