MP Board Class 12th Physics Solutions Chapter 3 विद्युत धारा

MP Board Class 12th Physics Solutions Chapter 3 विद्युत धारा

विद्युत धारा NCERT पाठ्यपुस्तक के अध्याय में पाठ्यनिहित प्रश्न एवं उनके उत्तर

प्रश्न 1.
किसी कार की संचायक बैटरी का वैद्युत वाहक बल 12 वोल्ट है। यदि बैटरी का आन्तरिक प्रतिरोध 0.42 हो तो बैटरी से ली जाने वाली अधिकतम धारा का मान क्या होगा?
हल :
दिया है : E = 12 वोल्ट, r = 0.4Ω, imax = ?
सूत्र \(i=\frac{E}{r+R}\) से,
धारा महत्तम होगी यदि R = 0
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प्रश्न 2.
10 वोल्ट वैद्युत वाहक बल वाली बैटरी जिसका आन्तरिक प्रतिरोध 3Ω है, किसी प्रतिरोधक से संयोजित है। यदि परिपथ में धारा का मान 0.5 ऐम्पियर हो तो प्रतिरोधक का प्रतिरोध क्या है? जब परिपथ बन्द है तो सेल की टर्मिनल वोल्टता क्या होगी?
हल :
दिया है : E = 10 वोल्ट, r = 3Ω, i = 0.5 ऐम्पियर, बाह्य प्रतिरोध R = ?
परिषथ बन्द होने पर टर्मिनल वोल्टता V = ?
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∴ बाह्य प्रतिरोध R = 20-r = 20- 3 = 17Ω .
सेल की टर्मिनल वोल्टता V = iR = 0.5 ऐम्पियर x 17Ω = 8.5 वोल्ट।

प्रश्न 3.
(a) 1Ω, 2Ω और 3Ω के तीन प्रतिरोधक श्रेणी में संयोजित हैं। प्रतिरोधकों के संयोजन का कुल प्रतिरोध क्या है?
(b) यदि प्रतिरोधकों का संयोजन किसी 12 वोल्ट की बैटरी जिसका आन्तरिक प्रतिरोध नगण्य है, से सम्बद्ध है तो प्रत्येक प्रतिरोधक के सिरों पर वोल्टतापात ज्ञात कीजिए।
हल :
(a) दिया है : R1 = 1Ω, R2 = 2Ω, R3 = 3Ω
श्रेणी संयोजन का प्रतिरोध R = R1 + R2 + R3 = 1+ 2 + 3 = 6Ω
(b) E = 12 वोल्ट, R = 62, r = 0, प्रत्येक प्रतिरोधक के सिरों पर वोल्टतापात = ?
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यही धारा प्रत्येक प्रतिरोधक में प्रवाहित होगी। .
∴ प्रतिरोधकों की अलग-अलग वोल्टतापात V1 = iR1 = 2 ऐम्पियर x 12 = 2 वोल्ट।
V2 = iR2 = 2 ऐम्पियर x 2Ω = 4 वोल्ट। .
V3 = iR3 = 2 ऐम्पियर x 3Ω = 6 वोल्ट।

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प्रश्न 4.
(a) 2Ω, 4Ω और 5Ω के तीन प्रतिरोधक पार्श्व में संयोजित हैं। संयोजन का कुल प्रतिरोध क्या होगा?
(b) यदि संयोजन को 20 वोल्ट के वैद्युत वाहक बल की बैटरी जिसका आन्तरिक प्रतिरोध नगण्य है, से सम्बद्ध किया जाता है तो प्रत्येक प्रतिरोधक से प्रवाहित होने वाली धारा तथा बैटरी से ली गई कुल धारा का मान ज्ञात कीजिए।
हल :
(a) दिया है : R1 = 2Ω, R2 = 4Ω, . R3 = 5Ω
यदि पार्श्व क्रम संयोजन का प्रतिरोध R है तो.
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(b) दिया है, E = 20 वोल्ट, r = 0, प्रत्येक प्रतिरोधक द्वारा ली गई धारा = ?
बैटरी से ली गई कुल धारा = ? ,
∵ प्रतिरोधक पार्श्व क्रम में संयोजित हैं, अत: प्रत्येक के सिरों का विभवान्तर समान (वै० वा० बल के बराबर) होगा।
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बैटरी से ली गई कुल धारा i = i1 +i2+i3 = 10 + 5 + 4 = 19 ऐम्पियर।

प्रश्न 5.
कमरे के ताप (27.0°C) पर किसी तापन-अवयव का प्रतिरोध 100Ω है। यदि तापन-अवयव का प्रतिरोध 117Ω हो तो अवयव का ताप क्या होगा? प्रतिरोधक के पदार्थ का ताप-गुणांक 1.70x 10-4°C-1 है।
हल :
दिया है : 27.0° C ताप पर प्रतिरोध R1 = 100Ω, t1 = 27°C
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प्रश्न 6.
15 मीटर लम्बे एवं 6.0 x 10-7 मीटर2 अनुप्रस्थ काट वाले तार से उपेक्षणीय धारा प्रवाहित की गई है और इसका प्रतिरोध 5.0Ω मापा गया है। प्रायोगिक ताप पर तार के पदार्थ की प्रतिरोधकता क्या होगी?
हल :
दिया है : तार की लम्बाई l = 15 मीटर, अनुप्रस्थ क्षेत्रफल A = 6.0 x 10-7मीटर2
तार का प्रतिरोध R = 5.0Ω, p= ?
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प्रश्न 7.
सिल्वर के किसी तार का 27.5°C पर प्रतिरोध 2.1Ω और 100°C पर प्रतिरोध 2.7Ω है सिल्वर का प्रतिरोधकता ताप-गुणांक ज्ञात कीजिए।
हल :
t1 = 27.5°C पर प्रतिरोध R1 = 2.1Ω,
t2 – t1 = 100 – 27.5 = ∆t = 72.5°C
t2 = 100°C पर प्रतिरोध R2 = 2.7Ω, a = ?

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प्रश्न 8.
नाइक्रोम का एक तापन-अवयव 230 वोल्ट की सप्लाई से संयोजित है और 3.2 ऐम्पियर की प्रारम्भिक धारा लेता है जो कुछ सेकण्ड में 2.8 ऐम्पियर पर स्थायी हो जाती है। यदि कमरे का ताप 27.0° C है तो तापन-अवयव का स्थायी ताप क्या होगा? दिए गए ताप-परिसर में नाइक्रोम का औसत प्रतिरोध का ताप-गुणांक 1.70 x 10-4°C-1 है।
हल :
दिया है : V = 230 वोल्ट, i1 = 3.2 ऐम्पियर तथा अन्त में i2 = 2.8 ऐम्पियर
कमरे का ताप t1 = 27.0°C का स्थायी ताप t2 = ?, α = 1.70 x 10-4°C-1
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प्रश्न 9.
चित्र 3.1 में दर्शाए नेटवर्क की प्रत्येक शाखा में प्रवाहित धारा ज्ञात कीजिए।
हल :
पाश ABDA पर किरचॉफ का नियम लगाने पर,
10i1 + 5i3 – 5i2 = 0 या 2i1 – i2 + i3 = 0 …(1)

तथा पाश BCDB से, 5(i1 – i3)- 10 (i2 + i3)- 5i3= 0

या 5i1 – 10i2 – 20i3 = 0 या i1– 2i2 – 4i3 = 0 …(2)
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पाश ABCGHA से,
10i1 + 5 (i1 – i3)+10 i = 10
या 10i + 15i1 – 5i3 = 10
या 2i + 3i1 – i3 = 2……………(3)

तथा बिन्दु A पर सन्धि के नियम से, .
i1+ i1 = i ………………(4)

समी० (4) से i का मान समी० (3) में रखने पर,
5i1 + 2i2 – i3= 2 ………………..(5)

समी० (5) व (1) को जोड़ने पर,
7i1 + i2 = 2 ……………..(6)
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समी० (1) को 4 से गुणा करके समी० (2) में जोड़ने पर,
9i1 – 6i2 = 0 ⇒ \(i_{2}=\frac{3}{2} i_{1}\)………….(7)
समी० (6) में मान रखने पर, 7i1 + \(\frac{3}{2}\)i1 = 2
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प्रश्न 10.
(a) किसी मीटर-सेतु में जब प्रतिरोधक S = 12.5Ω हो तो सन्तुलन बिन्दु, सिरे A से 39.5 सेमी की लम्बाई पर प्राप्त होता है। R का प्रतिरोध ज्ञात कीजिए। व्हीटस्टोन सेतु या मीटर सेतु में प्रतिरोधकों के संयोजन के लिए मोटी कॉपर की पत्तियाँ क्यों प्रयोग में लाते हैं?
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(b) R तथा S को अन्तर्बदल करने पर उपर्युक्त सेतु का सन्तुलन बिन्दु ज्ञात कीजिए।
(c) यदि सेतु के सन्तुलन की अवस्था में गैल्वेनोमीटर और सेल का अन्तर्बदल कर दिया जाए तब क्या गैल्वेनोमीटर कोई धारा दर्शाएगा?
हल :
(a) मीटर सेतु के लिए दिया है : S = 12.5Ω, l = 39.5 सेमी, R = ?
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मोटी कॉपर पत्तियों का प्रयोग उनके प्रतिरोध को न्यूनतम रखने के लिए किया जाता है क्योंकि सूत्र की स्थापना में इनके प्रतिरोध पर विचार नहीं किया गया है।

(b) R व S को परस्पर बदलने पर,
\(\frac{l}{100-l}=\frac{S}{R}\) Rl = 100S-lS
\(l=\frac{100 S}{R+S}=\frac{100 \times 12.5}{8.2+12.5}=60.38\) सेमी या 60.4 सेमी
अतः अब शून्य विक्षेप बिन्दु 60.38 सेमी पर प्राप्त होगा।

(c) नहीं, इस स्थिति में गैल्वेनोमीटर कोई विक्षेप नहीं दर्शाएगा।

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प्रश्न 11.
8 वोल्ट वैद्युत वाहक बल की एक संचायक बैटरी जिसका आन्तरिक प्रतिरोध 0.5 2 है, को श्रेणीक्रम में 15.5Ω के प्रतिरोधक का उपयोग करके 120 वोल्ट के D.C. स्रोत द्वारा चार्ज किया जाता है। चार्ज होते समय बैटरी की टर्मिनल वोल्टता क्या है? चार्जकारी परिपथ में प्रतिरोधक को श्रेणीक्रम में सम्बद्ध करने का क्या उद्देश्य है?
हल :
दिया है : बैटरी का वै० वा० बल E = 8 वोल्ट, आन्तरिक प्रतिरोध r = 0.5Ω
आवेशन स्रोत का वै० वा० बल Eex = 120 वोल्ट, बाह्य प्रतिरोध R = 15.5Ω
चार्जिंग के समय बैटरी की वोल्टता V = ?
चार्जिंग के समय बैटरी की टर्मिनल वोल्टता V = E + ir
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∴ टर्मिनल वोल्टता V = 8+ 7 x 0.5 = 11.5 वोल्ट।
बाह्य प्रतिरोध को जोड़ने का उद्देश्य, चार्जिंग धारा को कम रखना है। उच्च चार्जिंग धारा के कारण बैटरी के क्षतिग्रस्त होने की सम्भावना है।

प्रश्न 12.
किसी पोटेंशियोमीटर व्यवस्था में, 1.25 वोल्ट वैद्युत वाहक बल से एक सेल का सन्तुलन बिन्दु तार के 35.0 सेमी लम्बाई पर प्राप्त होता है। यदि इस सेल को किसी अन्य सेल द्वारा प्रतिस्थापित कर दिया जाए तो सन्तुलन बिन्दु 63.0 सेमी पर स्थानान्तरित हो जाता है। दूसरे सेल का वैद्युत वाहक बल क्या है?
हल :
दिया है : सेल E1 = 1.25 वोल्ट के लिए अविक्षेप बिन्दु की दूरी l1 = 35.0 सेमी
E2 = ?, जबकि l2 = 63.0 सेमी
विभवमापी के लिए, E ∝ l
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अत: दूसरे सेल का वै० वा० बल E2 = 2.25 वोल्ट।

प्रश्न 13.
किसी ताँबे के चालक में मुक्त इलेक्ट्रॉनों का संख्या घनत्व 8.5 x 1028 मीटर3 आकलित किया गया है। 3 मीटर लम्बे तार के एक सिरे से दूसरे सिरे तक अपवाह करने में इलेक्ट्रॉन कितना समय लेता है? तार की अनुप्रस्थ-काट 2.0 x 10-6 मीटर2 है और इसमें 3.0 ऐम्पियर धारा प्रवाहित हो रही है।
हल :
ताँबे के लिए, n = 8.5 x 1028 मीटर3 तार की लम्बाई l = 3 मीटर
तार का अनु० क्षे० A = 2.0 x 10-6 मीटर2 = 3.0 ऐम्पियर
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प्रश्न 14.
पृथ्वी के पृष्ठ पर ऋणात्मक पृष्ठ-आवेश घनत्व 10-9 कूलॉम-सेमी-2 है। वायुमण्डल के ऊपरी भाग और पृथ्वी के पृष्ठ के बीच 400 किलोवोल्ट विभवान्तर (नीचे के वायुमण्डल की कम चालकता के कारण) के परिणामतः समूची पृथ्वी पर केवल 1800 ऐम्पियर की धारा है। यदि वायुमण्डलीय वैद्युत क्षेत्र बनाए रखने हेतु कोई प्रक्रिया न हो तो पृथ्वी के पृष्ठ को उदासीन करने हेतु (लगभग) कितना समय लगेगा? (व्यावहारिक रूप में यह कभी नहीं होता है क्योंकि वैद्युत आवेशों की पुनः पूर्ति की एक प्रक्रिया है; यथा-पृथ्वी के विभिन्न भागों में लगातार तड़ित झंझा एवं तड़ित का होना)। (पृथ्वी की त्रिज्या = 6.37 x 106 मीटर)।
हल :
पृथ्वी की त्रिज्या RE = 6.37 x 106 मीटर,
पृष्ठीय-आवेश घनत्व σ = 10-9 कूलॉम-सेमी-2 = 10-5 कूलॉम-मीटर-2
वायुमण्डल से पृथ्वी पर धारा i = 1800 ऐम्पियर
पृथ्वी के निरावेशन में लगा समय t = ?
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प्रश्न 15.
(a) छह लेड एसिड संचायक सेलों, जिनमें प्रत्येक का वैद्युत वाहक बल 2 वोल्ट तथा आन्तरिक प्रतिरोध 0.015Ω है, के संयोजन से एक बैटरी बनाई जाती है। इस बैटरी का उपयोग 8.5Ω प्रतिरोधक जो इसके साथ श्रेणी सम्बद्ध है, में धारा की आपूर्ति के लिए किया जाता है। बैटरी से कितनी धारा ली गई है एवं इसकी टर्मिनल वोल्टता क्या है?
(b) एक लम्बे समय तक उपयोग में लाए गए संचायक सेल का वैद्युत वाहक बल 1.9 वोल्ट और विशाल आन्तरिक प्रतिरोध 380Ω है। सेल से कितनी अधिकतम धारा ली जा सकती है? क्या सेल से प्राप्त यह धारा किसी कार की प्रवर्तक-मोटर को स्टार्ट करने में सक्षम होगी?
हल :
(a) प्रत्येक सेल का. वै० वा० बल = 2 वोल्ट, आ० प्रतिरोध = 0.015Ω
सेलों की संख्या = 6, बाह्य प्रतिरोध R = 8.5Ω, बैटरी से ली गई धारा = ?, टर्मिनल वोल्टता = ?
∵ बैटरी में सेल श्रेणीक्रम में जुड़े हैं।
∴ बैटरी का वै० वा० बल E = 6 x 2 = 12 वोल्ट
बैटरी का आ० प्रतिरोध r = 6 x 0.015 = 0.09Ω
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बैटरी की टर्मिनल वोल्टता V = iR = 1.4 ऐम्पियर x 8.5Ω = 11.9 वोल्ट।

(b) सेल का वै० वा० बल E = 1.9 वोल्ट तथा आ० प्रतिरोध r = 380Ω
E सेल से अधिकतम धारा imax = \(\frac{E}{r}=\frac{1.9}{380}\) = 0.005 ऐम्पियर।
नहीं, यह धारा किसी कार की मोटर स्टार्ट नहीं कर सकती।

प्रश्न 16.
दो समान लम्बाई की तारों में एक ऐलुमिनियम का और दूसरा कॉपर का बना है। इनके प्रतिरोध समान हैं। दोनों तारों में से कौन-सा हल्का है? अतः समझाइए कि ऊपर से जाने वाली बिजली केबिलों में ऐलुमिनियम के तारों को क्यों पसन्द किया जाता है? (ρAl = 2.63 x 10-8 ओम-मीटर, ρCu = 1.72 x 10-8 ओम-मीटर, Al का आपेक्षिक घनत्व = 2.7, कॉपर का आपेक्षिक घनत्व = 8.9)
हल :
दिया है : ρAl = 2.63 x 10-8 ओम-मीटर, Pa = 1.72 x 10-8 ओम-मीटर
dAl = 2.7 तथा dCu = 8.9
माना इन तारों के अनुप्रस्थ परिच्छेद क्रमश: AAl तथा ACu हैं।
∵ तारों के प्रतिरोध समान हैं।
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स्पष्ट है कि ऐलुमिनियम के तार का द्रव्यमान, कॉपर के तार के द्रव्यमान का आधा है अर्थात् ऐलुमिनियम का तार हल्का है। यही कारण है कि ऊपर से जाने वाले बिजली के केबिलों में ऐलुमिनियम के तारों का प्रयोग किया जाता है। यदि कॉपर के तारों का प्रयोग किया जाए तो खम्भे और अधिक मजबूत बनाने होंगे।

प्रश्न 17.
मिश्रधातु मैंगनिन के बने प्रतिरोधक पर लिए गए निम्नलिखित प्रेक्षणों से आप क्या निष्कर्ष निकाल सकते हैं?
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धारा ऐम्पियर वोल्टता वोल्
हल :
दी गई सारणी के प्रत्येक प्रेक्षण से स्पष्ट है कि \(\frac{V}{i} \approx 19.7 \Omega\)
इससे स्पष्ट है कि मैंगनिन का प्रतिरोधक लगभग पूरे वोल्टेज परिसर में ओम के नियम का पालन करता है, अर्थात् मैंगनिन की प्रतिरोधकता पर ताप का बहुत कम प्रभाव पड़ता है। –

प्रश्न 18.
निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर दीजिए –
(a) किसी असमान अनुप्रस्थ काट वाले धात्विक चालक से एकसमान धारा प्रवाहित होती है। निम्नलिखित में से चालक में कौन-सी अचर रहती है—धारा, धारा घनत्व, वैद्युत क्षेत्र, अपवाह चाल।
(b) क्या सभी परिपथीय अवयवों के लिए ओम का नियम सार्वत्रिक रूप से लागू होता है? यदि नहीं, तो उन अवयवों के उदाहरण दीजिए जो ओम के नियम का पालन नहीं करते।
(c) किसी निम्न वोल्टता संभरण जिससे उच्च धारा देनी होती है, का आन्तरिक प्रतिरोध बहुत कम होना चाहिए, क्यों?
(d) किसी उच्च विभव (H.T.) संभरण, मान लीजिए 6 किलोवाट का आन्तरिक प्रतिरोध अत्यधिक होना चाहिए, क्यों?
हल :
(a) केवल धारा अचर रहती है, जैसा कि दिया गया है।
अन्य राशियाँ अनुप्रस्थ क्षेत्रफल के व्युत्क्रमानुपाती हैं।
(b) नहीं, ओम का नियम सभी परिपथीय अवयवों पर लागू नहीं होता।
निर्वात नलिकाएँ, (डायोड वाल्व, ट्रायोड वाल्व) अर्द्धचालक युक्तियाँ (सन्धि डायोड तथा ट्रांजिस्टर) इसी प्रकार की युक्तियाँ हैं।
(c) किसी संभरण से प्राप्त महत्तम धारा \(i_{\max }=\frac{E}{r}\)
∵ वै० वा० बल कम है, अत: पर्याप्त धारा प्राप्त करने के लिए आन्तरिक प्रतिरोध का कम होना आवश्यक है। इसके अतिरिक्त आन्तरिक प्रतिरोध के अधिक होने से सेल द्वारा दी गई ऊर्जा का अधिकांश भाग सेल के भीतर ही व्यय हो जाता है।
(d) यदि आन्तरिक प्रतिरोध बहुत कम है तो किसी कारणवश लघुपथित होने की दशा में संभरण से अति उच्च धारा प्रवाहित होगी और संभरण के क्षतिग्रस्त होने की संभावना उत्पन्न हो जाएगी।

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प्रश्न 19.
सही विकल्प छाँटिए-
(a) धातुओं की मिश्रधातुओं की प्रतिरोधकता प्रायः उनकी अवयव धातुओं की अपेक्षा (अधिक/कम) होती
(b) आमतौर पर मिश्रधातुओं के प्रतिरोध का ताप-गुणांक, शुद्ध धातुओं के प्रतिरोध के ताप-गुणांक से बहुत (कम/अधिक) होता है?
(c) मिश्रधातु मैंगनिन की प्रतिरोधकता ताप में वृद्धि के साथ लगभग (स्वतन्त्र है/तेजी से बढ़ती है)।
(d) किसी प्रारूपी विद्युतरोधी (उदाहरणार्थ, अम्बर) की प्रतिरोधकता किसी धातु की प्रतिरोधकता की तुलना में (1022 / 1023) कोटि के गुणक से बड़ी होती है?
हल :
(a) अधिक।
(b) कम।
(c) स्वतन्त्र है।
(d) 1022

प्रश्न 20.
(a) आपको R प्रतिरोध वाले n प्रतिरोधक दिए गए हैं। (i) अधिकतम, (ii) न्यूनतम प्रभावी प्रतिरोध प्राप्त करने के लिए आप इन्हें किस प्रकार संयोजित करेंगे? अधिकतम और न्यूनतम प्रतिरोधों का अनुपात क्या होगा?
(b) यदि 1Ω, 2Ω, 3Ω के तीन प्रतिरोध दिए गए हों तो उनको आप किस प्रकार संयोजित करेंगे कि प्राप्त
तुल्य प्रतिरोध हों :
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(c) चित्र 3.4 में दिखाए गए नेटवर्कों का तुल्य प्रतिरोध प्राप्त कीजिए।
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हल :
(a) (i) अधिकतम प्रतिरोध के लिए उन्हें श्रेणीक्रम में जोड़ना होगा।
श्रेणीक्रम में तुल्य प्रतिरोध RS = R+ R + R+…. n पद = nR
(ii) न्यूनतम प्रतिरोध प्राप्त करने के लिए इन्हें पार्श्व क्रम में जोड़ना होगा।
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(b) यहाँ R1 = 1Ω, R2 = 2Ω, R3 = 3Ω
(i) \(\frac{11}{3}\)Ω का प्रतिरोध प्राप्त करने के लिए R1, R2 को पार्यक्रम में व R3 को श्रेणीक्रम में जोड़ना होगा।
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(ii) \(\frac{11}{5}\) का प्रतिरोध प्राप्त करने के लिए R2, R3 को पार्यक्रम में तथा R1 के श्रेणीक्रम में जोड़ना होगा।
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(iii) 6Ω का प्रतिरोध प्राप्त करने के लिए तीनों को श्रेणीक्रम मे जोड़ना होगा।
तब Req = R1 + R2 + R3 = 1+2+ 3 = 6Ω

(iv) \(\frac{6}{11}\) का प्रतिरोध प्राप्त करने के लिए तीनों को पार्श्वक्रम में जोड़ना होगा।

(c) (a) प्रत्येक पाश में 1Ω -1Ω श्रेणीक्रम में तथा 2Ω – 2Ω श्रेणीक्रम में हैं।
इन शाखाओं के अलग-अलग प्रतिरोध 1+ 1 = 2Ω व 2 + 2 = 4Ω
अब ये दो शाखाएँ समान्तर क्रम में जुड़ी हैं।
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(b) RΩ के 5 प्रतिरोध श्रेणीक्रम में जुड़े हैं,
∴ नेटवर्क का प्रतिरोध Req = R+ R+ R+ R+ R = 5 R

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प्रश्न 21.
किसी 0.5Ω आन्तरिक प्रतिरोध वाले 12 वोल्ट के एक संभरण (Supply) से चित्र 3.7 में दर्शाए गए अनन्त नेटवर्क द्वारा ली गई धारा का मान ज्ञात कीजिए। प्रत्येक प्रतिरोध का मान 1Ω है।
हल :
माना नेटवर्क का प्रतिरोध R है। यदि इस नेटवर्क में तीन . प्रतिरोध (प्रत्येक 1Ω) चित्रानुसार जोड़ दिए जाएँ तो नेटवर्क के प्रतिरोध में कोई परिवर्तन नहीं होगा। (∵ यह अनन्त नेटवर्क है।)
यहाँ R व 1Ω पार्श्वक्रम में हैं तथा 1Ω, 1Ω श्रेणीक्रम में हैं।
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प्रश्न 22.
चित्र 3.9 में एक पोटेंशियोमीटर दर्शाया गया है जिसमें एक 2.0 वोल्ट और आन्तरिक प्रतिरोध 0.40Ω का कोई सेल, पोटेंशियोमीटर के प्रतिरोधक तार AB पर वोल्टतापात बनाए रखता है। कोई मानक सेल जो 1.02 वोल्ट का अचर वैद्युत वाहक बल बनाए रखता है (कुछ मिलीऐम्पियर की बहुत सामान्य धाराओं के लिए) तार की 67.3 सेमी लम्बाई पर सन्तुलन बिन्दु देता है। मानक सेल से अति न्यून धारा लेना सुनिश्चित करने के लिए इसके साथ परिपथ में श्रेणी 600 किलोओम का एक अति उच्च प्रतिरोध इसके साथ सम्बद्ध किया जाता है, जिसे सन्तुलन बिन्दु प्राप्त होने के निकट लघुपथित (shorted) कर दिया जाता है। इसके बाद मानक सेल को किसी अज्ञात वैद्युत वाहक बल के सेल से प्रतिस्थापित कर दिया जाता है जिससे सन्तुलन बिन्दु तार की 82.3 सेमी लम्बाई पर प्राप्त होता है।
(a) ε का मान क्या है?
(b) 600 किलोओम के उच्च प्रतिरोध का क्या प्रयोजन है?
(c) क्या इस उच्च प्रतिरोध से सन्तुलन बिन्दु प्रभावित होता है?
(d) क्या परिचालक सेल के आन्तरिक प्रतिरोध से सन्तुलन बिन्दु प्रभावित होता है?
(e) उपर्युक्त स्थिति में यदि पोटेंशियोमीटर के परिचालक सेल का वैद्यत वाहक बल 2.0 वोल्ट के स्थान पर 1.0 वोल्ट हो तो क्या यह विधि फिर भी सफल रहेगी?
(f) क्या यह परिपथ कुछ mV की कोटि के अत्यल्प वैद्युत वाहक बलों (जैसे कि किसी प्रारूपी तापविद्युत युग्म का वैद्युत वाहक बल) के निर्धारण में सफल होगी? यदि नहीं, तो आप इसमें किस प्रकार संशोधन करेंगे?
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हल :
(a) दिया है : E1 = 1.02 वोल्ट के लिए l1 = 67.3 सेमी, E2= ε के लिए l2 = 82.3 सेमी, ε ?
सूत्र E ∝ l से,
\(\frac{E_{2}}{E_{1}}=\frac{l_{2}}{l_{1}}\)
\(E_{2}=\frac{l_{2}}{l_{1}} \times E_{1}\) या \(\varepsilon=\frac{82.3}{67.3} \times 1.02\)वोल्ट = 1.25 वोल्ट

(b) 600 किलोओम का उच्च प्रतिरोध, गैल्वेनोमीटर को असन्तुलित अवस्था में प्रवाहित होने वाली उच्च धारा से बचाता है।
(c) नहीं, क्योंकि शून्य विक्षेप बिन्दु के समीप पहुँचने पर इस उच्च प्रतिरोध को लघुपथित कर दिया जाता है।
(d) नहीं
(e) नहीं, इस विधि के फल होने के लिए परिचालक सेल का वै० वा० बल मापे जाने वाले वै० वा० बल से अधिक होना आवश्यक है।
(f) नहीं, यह परिपथ कुछ मिलीवोल्ट की कोटि के अत्यल्प वै० वा० बल के मापन के लिए उपयुक्त नहीं है क्योंकि इस स्थिति में शून्य विक्षेप बिन्दु लगभग तार के A सिरे के साथ सम्पाती होगा।
मिलीवोल्ट की कोटि के वै० वा० बल के मापन हेतु तार AB पर वोल्टतापात (विभव प्रवणता) को अत्यन्त कम करना होगा। इसके लिए परिचालक सेल के श्रेणीक्रम में एक उच्च प्रतिरोध जोड़ना होगा।

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प्रश्न 23.
चित्र 3.10 दो प्रतिरोधों की तुलना के लिए विभवमापी परिपथ दर्शाता है। मानक प्रतिरोधक R = 10.0Ω के साथ सन्तुलन बिन्दु 58.3 सेमी पर तथा अज्ञात प्रतिरोध x के साथ 68.5 सेमी पर प्राप्त होता है। x का मान ज्ञात कीजिए। यदि आप दिए गए सेल से सन्तुलन बिन्दु प्राप्त करने में असफल रहते हैं तो आप क्या करेंगे?
हल :
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सन्तुलन बिन्दु प्राप्त करने में असफल रहने पर, प्रतिरोधकों R व X के सिरों के बीच विभवपात कम करना होगा। इसके लिए सेल ε के श्रेणीक्रम में उच्च प्रतिरोधक जोड़ना होगा।

प्रश्न 24.
चित्र 3.11 में किसी 1.5 वोल्ट के सेल का आन्तरिक
2.0 वोल्ट प्रतिरोध मापने के लिए एक 2.0 वोल्ट का पोटेंशियोमीटर दर्शाया गया है। खुले परिपथ में सेल का सन्तुलन बिन्दु 76.3 सेमी पर मिलता है। सेल के बाह्य परिपथ में 9.52 प्रतिरोध का एक प्रतिरोधक संयोजित करने पर A सन्तुलन बिन्दु पोटेंशियोमीटर के तार की 64.8 सेमी लम्बाई पर पहुँच जाता | 1.5 वोल्ट है। सेल के आन्तरिक प्रतिरोध का मान ज्ञात कीजिए।
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हल :
जब सेल खुले परपिथ पर है, तब l1 = 76.3 सेमी
जब सेल से R = 9.5Ω का प्रतिरोधक जुड़ा है, तब l1= 64.8 सेमी
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विद्युत धारा NCERT भौतिक विज्ञान प्रश्न प्रदर्शिका (Physics Exemplar Problems) पुस्तक से चयनित महत्त्वपूर्ण प्रश्नों के हल

विद्युत धारा बहुविकल्पीय प्रश्नोत्तर

प्रश्न 1.
दो बैटरियाँ जिनमें emf E1 तथा E2 [E2 > E1] तथा आन्तरिक प्रतिरोध r1 क्रमशः तथा r2 हैं, चित्र में दर्शाए अनुसार पार्श्व क्रम में संयोजित हैं
(a) दोनों सेलों का तुल्य emf Eतुल्य , E1 तथा E2 के बीच अर्थात् E1 < Eतुल्य < E2 है
(b) तुल्य emf Eतुल्य , E1 से कम है
(c) सदैव Eतुल्य = E1 + E2 होता है
(d) Eतुल्य आन्तरिक प्रतिरोधों r1 तथा r2 पर निर्भर नहीं है।
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प्रश्न 2.
इलेक्ट्रॉनों का कौन-सा अभिलक्षण चालक में धारा के प्रवाह को निर्धारित करता है –
(a) केवल अपवाह वेग
(b) केवल तापीय वेग
(c) अपवाह वेग तथा तापीय वेग दोनों
(d) न तो अपवाह और न तापीय वेग।

प्रश्न 3.
आयताकार अनुप्रस्थ काट 1 सेमी x \(\frac{1}{2}\) सेमी तथा 10 सेमी लम्बाई की कोई धातु की छड़ विपरीत फलकों पर किसी बैटरी से संयोजित है। इसका प्रतिरोध –
(a) तब अधिकतम होगा जब बैटरी 1 सेमी x \(\frac{1}{2}\) सेमी फलकों के बीच संयोजित है
(b) तब अधिकतम होगा जब बैटरी 10 सेमी x 1 सेमी फलकों के बीच संयोजित है
(c) तब अधिकतम होगा जब बैटरी 10 सेमी x \(\frac{1}{2}\) सेमी फलकों के बीच संयोजित है
(d) समान रहेगा चाहे तीनों फलकों में से किसी के बीच भी बैटरी को संयोजित करें।

प्रश्न 4.
5 वोल्ट तथा 10 वोल्ट सन्निकट emf के दो सेलों की तुलना परिशुद्ध रूप से 400 सेमी लम्बाई के विभवमापी द्वारा की जानी है
(a) विभवमापी में उपयोग होने वाली बैटरी की वोल्टता 8 वोल्ट होनी चाहिए। .
(b) विभवमापी की वोल्टता 15 वोल्ट हो सकती है तथा R को इस प्रकार समायोजित कर सकते हैं कि तार के
सिरों पर विभवपात 10 वोल्ट से थोड़ा अधिक हो।
(c) स्वयं तार के पहले 50 सेमी भाग पर विभवपात 10 वोल्ट होना चाहिए।
(d) विभवमापी का उपयोग प्रायः प्रतिरोधों की तुलना के लिए किया जाता है, विभवों के लिए नहीं।

विद्युत धारा अति लघु उत्तरीय प्रश्नोत्तर

प्रश्न 1.
क्या किसी विद्युत नेटवर्क में किसी सन्धि के पार गति में, आवेश का संवेग संरक्षित रहता है?
उत्तर :
नहीं, सन्धि के पार गति में, आवेश का संवेग संरक्षित नहीं रहता है। जब कोई इलेक्ट्रॉन किसी सन्धि की ओर गति करता है तब वहाँ कार्यरत एकसमान वैद्युत क्षेत्र के अतिरिक्त सन्धि के तारों के पृष्ठ पर संचित आवेश के कारण भी वैद्युत क्षेत्र उत्पन्न होता है जोकि आवेश के संवेग की दिशा परिवर्तित कर देता है।

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प्रश्न 2.
विभवमापी में तारों को संयोजित करने के लिए धातु की मोटी पट्टियों को उपयोग करने का क्या लाभ
उत्तर :
धातु की मोटी पट्टियों का प्रतिरोध नगण्य होने के कारण शून्य विक्षेप स्थिति में इनकी लम्बाई को विभवमापी के तार की लम्बाई में सम्मिलित करने की आवश्यकता नहीं होती है। अतः हमें केवल विभवमापी के सीधे तारों की लम्बाई ज्ञात करनी होती है जिसे मीटर पैमाने से सरलता से ज्ञात किया जा सकता है।

प्रश्न 3.
घरों में विद्युत के लिए ताँबे (Cu) अथवा ऐलुमिनियम (Al) के तारों का उपयोग किया जाता है। ऐसा करने के पीछे किन-किन विचारों को ध्यान में रखा जाता है?
उत्तर :
घरों में विद्युत के लिए ताँबे अथवा ऐलुमिनियम के तारों का उपयोग करते समय निम्न बातों का ध्यान रखा जाता है
(i) धातु का मूल्य कम होना चाहिए।
(ii) धातु की चालकता अधिक होनी चाहिए।

विद्युत धारा लघु उत्तरीय प्रश्नोत्तर

प्रश्न 1.
दो चालक समान पदार्थ के बने हैं तथा इनकी लम्बाई भी समान है। चालक A, 1 मिमी व्यास का ठोस तार है। चालक B, 2 मिमी बाह्य व्यास तथा 1 मिमी आन्तरिक व्यास की खोखली नलिका है। प्रतिरोधों RA तथा RB का अनुपात ज्ञात कीजिए।
हल : दिया है,
rA = \(\frac{1}{2}\) मिमी = 0.5 मिमी
rB = \(\frac{2}{2}\) मिमी = 1 मिमी,
rB = \(\frac{1}{2}\) मिमी = 0.5 मिमी
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विद्युत धारा आंकिक प्रश्नोत्तर

प्रश्न 1.
पहले R प्रतिरोध के n समान प्रतिरोधकों के समुच्चय को श्रेणीक्रम में emf E तथा आन्तरिक प्रतिरोध R की बैटरी से संयोजित किया गया है। परिपथ में धारा I प्रवाहित होती है तत्पश्चात् । प्रतिरोधकों को उसी बैटरी से पार्श्वक्रम में संयोजित किया गया है। यह पाया गया कि धारा 10 गुना बढ़ गई है। ‘n’ का क्या मान है?
हल :
MP Board Class 12th Physics Solutions Chapter 3 विद्युत धारा img 42

प्रश्न 2.
चित्र में दर्शाए परिपथ में दो सेल एक-दूसरे के साथ प्रतिकूलता से, संयोजित हैं। सेल E1 का emf 6 वोल्ट तथा आन्तरिक प्रतिरोध 2Ω और सेल E2 का emf 4 वोल्ट तथा आन्तरिक प्रतिरोध 8Ω है। बिन्दु A तथा B के बीच विभवान्तर ज्ञात कीजिए।
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हल :
सेलों का परिणामी emf, E = E1 – E2 = 6 – 4 = 2 वोल्ट
सेलों का कुल आन्तरिक प्रतिरोध (r) = r1 + r2 = 2+ 8 = 10Ω
∴ परिपथ में धारा, \(I=\frac{E}{r}=\frac{2}{10}=0.2\) ऐम्पियर
बिन्दु A व B के बीच विभवान्तर = सेल E2 के सिरों पर विभवान्तर = E2 + Ir2
= 4 + 0.2 x 8 = 5.6 वोल्ट।
अत: VAB = 5.6 वोल्ट तथा बिन्दु B, बिन्दु A से उच्च विभव पर है।

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EXTRA SHOTS

  • दोनों सेल प्रतिकूलता से संयोजित हैं, अत: सेलों का परिणामी वि०वा० बल, दोनों सेलों के वि०वा० बलों के
    अन्तर के बराबर होगा, अर्थात् E = E1 – E2
  • सेल E1 का विवा० बल, सेल E2 के वि०वा० बल से अधिक है। अतः परिपथ में धारा की दिशा सेल E1 के अनुसार निर्धारित होगी।
    सेल E2 के धन टर्मिनल से धारा प्रवेश कर रही है, अत: सेल E2 यहाँ आवेशित होगा। अत: उसके सिरों पर विभवान्तर V2 = E2 + Ir2 होगा।

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MP Board Class 12th Physics Solutions Chapter 14 अर्द्धचालक इलेक्ट्रॉनिकी : पदार्थ, युक्तियाँ तथा सरल परिपथ

MP Board Class 12th Physics Solutions Chapter 14 अर्द्धचालक इलेक्ट्रॉनिकी : पदार्थ, युक्तियाँ तथा सरल परिपथ

अर्द्धचालक इलेक्ट्रॉनिकी : पदार्थ, युक्तियाँ तथा सरल परिपथ NCERT पाठ्यपुस्तक के अध्याय में पाठ्यनिहित प्रश्न एवं उनके उत्तर

प्रश्न 1.
किसी n-प्रकार के सिलिकॉन में निम्नलिखित में से कौन-सा प्रकथन सत्य है?
(a) इलेक्ट्रॉन बहुसंख्यक वाहक हैं और त्रिसंयोजी परमाणु अपमिश्रक हैं ।
(b) इलेक्ट्रॉन अल्पसंख्यक वाहक हैं और पंचसंयोजी परमाणु अपमिश्रक हैं
(c) होल (विवर) अल्पसंख्यक वाहक हैं और पंचसंयोजी परमाणु अपमिश्रक हैं
(d) होल (विवर) बहुसंख्यक वाहक हैं और त्रिसंयोजी परमाणु अपमिश्रक हैं।
उत्तर
(c) प्रकथन सत्य है।

प्रश्न 2.
प्रश्न 1 में दिए गए कथनों में से कौन-सा प्रकार के अर्द्धचालकों के लिए सत्य है?
उत्तर :
(d) प्रकथन सत्य है।

प्रश्न 3.
कार्बन, सिलिकॉन और जर्मेनियम, प्रत्येक में चार संयोजक इलेक्ट्रॉन हैं। इनकी विशेषता ऊर्जा बैण्ड अन्तराल द्वारा पृथक्कृत संयोजकता और चालन बैण्ड द्वारा दी गई हैं, जो क्रमशः (Eg)c, (Eg)si तथा (Eg)Ge के बराबर हैं। निम्नलिखित में से कौन-सा प्रकथन सत्य है?
(a) (Eg)si < (Eg)Ge < (Eg)c
(b) (Eg)c < (E g)Ge > (Eg)si
(c) (Eg)c > (Eg)si > (Eg)Ge .
(d) (Eg)c = (Eg)si = (Eg)Ge
उत्तर
चालन बैण्ड तथा संयोजकता बैण्ड के बीच ऊर्जा अन्तराल कार्बन के लिए सबसे अधिक, सिलिकॉन के लिए उससे कम तथा जर्मेनियम के लिए सबसे कम होता है, अत: (c) प्रकथन सत्य है।

प्रश्न 4.
बिना बायस p-n सन्धि में, होल क्षेत्र में n-क्षेत्र की ओर विसरित होते हैं, क्योंकि
(a) n-क्षेत्र में मुक्त इलेक्ट्रॉन उन्हें आकर्षित करते हैं
(b) ये विभवान्तर के कारण सन्धि के पार गति करते हैं।
(c) P-क्षेत्र में होल-सान्द्रता, n-क्षेत्र में उनकी सान्द्रता से अधिक है
(d) उपर्युक्त सभी।
उत्तर
(c) प्रकथन सत्य है।

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प्रश्न 5.
जब p-n सन्धि पर अग्रदिशिक बायस अनुप्रयुक्त किया जाता है, तब यह
(a) विभव रोधक बढ़ाता है
(b) बहुसंख्यक वाहक धारा को शून्य कर देता है
(c) विभव रोधक को कम कर देता है
(d) उपर्युक्त में से कोई नहीं।
उत्तर
(c) प्रकथन सत्य है।

प्रश्न 6.
ट्रांजिस्टर की क्रिया हेतु निम्नलिखित में से कौन-से कथन सही हैं
(a) आधार, उत्सर्जक और संग्राहक क्षेत्रों की आमाप और अपमिश्रण सान्द्रता समान होनी चाहिए
(b) आधार क्षेत्र बहुत बारीक और कम अपमिश्रित होना चाहिए
(c) उत्सर्जक सन्धि अग्रदिशिक बायस है और संग्राहक सन्धि पश्चदिशिक बायस है
(d) उत्सर्जक सन्धि संग्राहक सन्धि दोनों ही अग्रदिशिक बायस हैं।
उत्तर
(b) तथा (c) प्रकथन सही है।

प्रश्न 7.
किसी ट्रांजिस्टर प्रवर्धक के लिए वोल्टता लब्धि
(a) सभी आवृत्तियों के लिए समान रहती है
(b) उच्च और निम्न आवृत्तियों पर उच्च होती है तथा मध्य आवृत्ति परिसर में अचर रहती है ।
(c) उच्च और निम्न आवृत्तियों पर कम होती है और मध्य आवृत्तियों पर अचर रहती है
(d) उपर्युक्त में से कोई नहीं।
उत्तर
(c) प्रकथन सत्य है।

प्रश्न 8.
अर्द्ध तरंग दिष्टकरण में, यदि निवेश आवृत्ति 50 हर्ट है तो निर्गम आवृत्ति क्या है? समान निवेश आवृत्ति हेतु पूर्ण तरंग दिष्टकारी की निर्गम आवृत्ति क्या है?
उत्तर
अर्द्ध तरंग दिष्टकारी के लिए निर्गम आवृत्ति 50 हर्ट्स ही रहेगी परन्तु पूर्ण तरंग दिष्टकारी के लिए निर्गम आवृत्ति दोगुनी अर्थात् 100 हर्ट्स होगी।

प्रश्न 9.
उभयनिष्ठ उत्सर्जक (CE-ट्रांजिस्टर) प्रवर्धक हेतु, 2kΩ के संग्राहक प्रतिरोध के सिरों पर ध्वनि वोल्टता 2 वोल्ट है। मान लीजिए कि ट्रांजिस्टर का धारा प्रवर्धन गुणक 100 है। यदि आधार प्रतिरोध 1kΩ है तो निवेश संकेत (signal) वोल्टता और आधार धारा परिकलित कीजिए।
हल
दिया है, CE – प्रवर्धक हेतु, धारा प्रवर्धन गुणांक β = 100
निवेशी प्रतिरोध Ri = 1kΩ= 103
निर्गम प्रतिरोध Ro = 2kΩ = 2 × 103
निर्गम वोल्टता Vo = 2 वोल्ट
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प्रश्न 10.
एक के पश्चात् एक श्रेणीक्रम सोपानित में दो प्रवर्धक संयोजित किए गए हैं। प्रथम प्रवर्धक की वोल्टता लब्धि 10 और द्वितीय की वोल्टता लब्धि 20 है। यदि निवेश संकेत 0.01 वोल्ट है तो निर्गम प्रत्यावर्ती संकेत का परिकलन कीजिए।
हल
निवेश संकेत वोल्टता Vi = 0.01 वोल्ट
प्रथम प्रवर्धक की वोल्टता लब्धि = 10
द्वितीय प्रवर्धक की वोल्टता लब्धि = 20.
श्रेणी संयोजन की कुल वोल्टता लब्धि \(\frac{V_{o}}{V_{i}}\) = 20 × 10= 200
निर्गम वोल्टता Vo = 200Vi = 200 × 0.01 = 2 वोल्ट।

प्रश्न 11.
कोई p-n फोटो डायोड 2.8 इलेक्ट्रॉन-वोल्ट बैण्ड अन्तराल वाले अर्द्धचालक से संविरचित है। क्या यह 6000 नैनोमीटर की तरंगदैर्घ्य का संसूचन कर सकता है?
हल
बैण्ड अन्तराल Eg = 2.8 इलेक्ट्रॉन-वोल्ट
प्रकाश की तरंगदैर्घ्य λ = 6000 नैनोमीटर = 6000×10-9 मीटर
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∵ आपतित प्रकाश के फोटॉन की ऊर्जा, बैण्ड अन्तराल से कम है, अत: फोटो डायोड इस प्रकाश का संसूचन नहीं कर पाएगा।

प्रश्न 12.
सिलिकॉन परमाणुओं की संख्या 5x 1028 प्रति मीटर है। यह साथ ही साथ आर्सेनिक के 5×1022 परमाणु प्रति मीटर3 और इंडियम के 5×1020 परमाणु प्रति मीटर3 से अपमिश्रित किया गया है। इलेक्ट्रॉन और होल की संख्या का परिकलन कीजिए। दिया. है कि ni = 1.5 × 1016 प्रति मीटर3 । दिया गया पदार्थ n-प्रकार का है या p-प्रकार का?
हल
यहाँ दाता परमाणुओं की सान्द्रता ND = 5 ×1022 परमाणु प्रति मीटर3
ग्राही परमाणुओं की सान्द्रता NA = 5 ×1020 परमाणु प्रति मीटर3
= 0.05 x 1022 परमाणु प्रति मीटर3
नैज वाहक सान्द्रता ni = 1.5 × 1016 प्रति मीटर3
नैज परमाणु सान्द्रता N= 5 × 1028 प्रति मीटर3 .
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प्रश्न 13.
किसी नैज अर्द्धचालक में ऊर्जा अन्तराल Eg का मान 1.2 इलेक्ट्रॉन-वोल्ट है। इसकी होल गतिशीलता इलेक्ट्रॉन गतिशीलता की तुलना में काफी कम है तथा ताप पर निर्भर नहीं है। इसकी 600 K तथा 300 K पर चालकताओं का क्या अनुपात है? यह मानिए की नैज वाहक सान्द्रता ni की ताप निर्भरता इस प्रकार व्यक्त होती है- \(\boldsymbol{n}_{\boldsymbol{i}}=\boldsymbol{n}_{0} \exp \left(-\frac{\boldsymbol{E}_{\boldsymbol{g}}}{\boldsymbol{2} \boldsymbol{k}_{\boldsymbol{B}} \boldsymbol{T}}\right)\)
जहाँ n0 एक स्थिरांक है।
हल
नैज अर्द्धचालक का ऊर्जा अन्तराल Eg = 1.2 इलेक्ट्रॉन-वोल्ट
तथा परम ताप T1 = 600K व T2 = 300K
माना उक्त तापों पर अर्द्धचालक की चालकताएँ क्रमश: σ1व σ2 हैं।
अर्द्धचालक की चालकता निम्नलिखित सूत्र द्वारा प्राप्त होती है-
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प्रश्न 14.
किसी p-n सन्धि डायोड में धारा I को इस प्रकार व्यक्त किया जा सकता है
I=Io\(\left[\exp \left(\frac{e V}{2 k_{B} T}\right)-1\right]\)
जहाँ I0 को उत्क्रमित संतृप्त धारा कहते हैं, V डायोड के सिरों पर वोल्टता है तथा यह अग्रदिशिक बायस के लिए धनात्मक तथा पश्चदिशिक बायस के लिए ऋणात्मक है। I डायोड से प्रवाहित धारा है, kB बोल्ट्समान नियतांक (8.6x 10-5 इलेक्ट्रॉन-वोल्ट-K-1) है तथा T परम ताप है। यदि किसी दिए गए डायोड के लिए I0 = 5x 10-12 ऐम्पियर तथा T= 300K है, तब
(a) 0.6 वोल्ट अग्रदिशिक वोल्टता के लिए अग्रदिशिकधारा क्या होगी?
(b) यदि डायोड के सिरों पर वोल्टता को बढ़ाकर 0.7 वोल्ट कर दें तो धारा में कितनी वृद्धि हो जाएगी?
(c) गतिक प्रतिरोध कितना है?
(d) यदि पश्चदिशिक वोल्टता को 1 वोल्ट से 2 वोल्ट कर दें तो धारा का मान क्या होगा?
हल
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(b) माना अग्र बायस वोल्टता को V = + 0.7 वोल्ट करने पर धारा
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(c) डायोड का गतिक प्रतिरोध Rd =\(\frac{\Delta V}{\Delta I}\) = \(\frac { 0.7-0.6 }{ 2.957 }\) =0.033Ω

(d) पश्चदिशिक वोल्टता 1V (V = -1V) के लिए
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इसी प्रकार V = – 2 वोल्ट हेतु, I = -5×10-12 ऐम्पियर।
अत: उत्क्रम वोल्टता के लिए धारा उत्क्रमित. संतृप्त धारा के बराबर बनी रहती है।
इससे ज्ञात होता है कि पश्चदिशिक बायस के लिए डायोड का गतिक प्रतिरोध अनन्त होता है।

प्रश्न 15.
आपको चित्र-14.1 में दो परिपथ दिए गए हैं। यह दर्शाइए कि परिपथ
(a) OR गेट की भाँति व्यवहार करता है जबकि परिपथ
(b) AND गेट की भाँति कार्य करता है।
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हल
(a) दिया गया परिपथ NOR गेट तथा NOT गेट का श्रेणी संयोजन है। .
माना NOR गेट का निर्गम 1 है जो कि NOT गेट का निवेश है।
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स्पष्ट है कि Y, OR गेट के निर्गम के समान है, अत: दिया गया परिपथ एक OR गेट की भाँति व्यवहार करता है। इसी तथ्य को इस गेट की सत्यमान सारणी से भी सत्यापित किया जा सकता है जो कि निम्नवत् हैA .
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इस सारणी से स्पष्ट है कि हम देख सकते हैं कि इस परिपथ् का निर्गम केवल तभी निम्न है जबकि दोनों निवेश निम्न हैं, अन्यथा निर्गम उच्च है। यही OR गेट की भी विशेषता है। अतः दिया गया परिपथ एक OR गेट की भाँति व्यवहार करता है।

(b) दिए गए परिपथ में NOR गेट के दो निवेश दो NOT गेटों के निर्गमों से प्राप्त किए गए हैं। माना NOR गेट के ये दो निवेश क्रमश: y1 तथा y2 हैं।
MP Board Class 12th Physics Solutions Chapter 14 अर्द्धचालक इलेक्ट्रॉनिकी पदार्थ, युक्तियाँ तथा सरल परिपथ img 12
परन्तु यह एक AND गेट का निर्गम हैं, अत: इससे स्पष्ट है कि दिया गया परिपथ एक AND गेट की भाँति व्यवहार करता है। इस तथ्य को परिपथ की सत्यमान सारणी से भी सत्यापित किया जा सकता है जो कि निम्नवत है
MP Board Class 12th Physics Solutions Chapter 14 अर्द्धचालक इलेक्ट्रॉनिकी पदार्थ, युक्तियाँ तथा सरल परिपथ img 13
सारणी से स्पष्ट है कि इस परिपथ का निर्गम तभी उच्च है जबकि इसके दोनों निवेश उच्च हैं। अन्यथा निर्गम निम्न है। यही AND गेट की विशेषता है।
अतः यह परिपथ एक AND गेट की भाँति व्यवहार करता है।

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प्रश्न 16.
नीचे दिए गए चित्र-14.2 में संयोजित NAND गेट संयोजित परिपथ.. की सत्यमान सारणी बनाइए।
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अतः इस परिपथ द्वारा की जाने वाली यथार्थ तर्क संक्रिया का अभिनिर्धारण चित्र-14.2 कीजिए।
हल
चित्र-14.2 में प्रदर्शित गेट एक NAND गेट है जिसके दोनों निवेशों को लघुपथित (short circuit) करके एक कर दिया गया है।
इस परिपथ की सत्यमान सारणी निम्नवत् है
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∵ दोनों निवेश एक ही हैं, अतः उक्त सारणी को निम्नवत् बनाया जा सकता है
MP Board Class 12th Physics Solutions Chapter 14 अर्द्धचालक इलेक्ट्रॉनिकी पदार्थ, युक्तियाँ तथा सरल परिपथ img 16
इस सारणी से स्पष्ट है कि यह परिपथ NOT गेट की भाँति व्यवहार करता है।
इसकी तर्क संक्रिया निम्नलिखित है- \(Y=\bar{A}\)

प्रश्न 17.
आपको निम्न चित्र-14.3 में दर्शाए अनुसार परिपथ दिए गए हैं जिनमें NAND गेट जुड़े हैं। इन दोनों परिपथों द्वारा की जाने वाली तर्क संक्रियाओं का अभिनिर्धारण कीजिए।
MP Board Class 12th Physics Solutions Chapter 14 अर्द्धचालक इलेक्ट्रॉनिकी पदार्थ, युक्तियाँ तथा सरल परिपथ img 17
हल
(a) माना पहले NAND गेट का निर्गम Y1 है, तब
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पहले NAND गेट का निर्गम Y1 दूसरे NAND गेट का निवेश है। अत:
पूर्ण परिपथ का निर्गम
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अतः दिया गया परिपथ AND गेट की भाँति व्यवहार करेगा।
इसकी तर्क संक्रिया Y = A AND B या A. B है।

(b) माना प्रथम दो NAND गेटों के निर्गम क्रमश: Y1 तथा Y2 हैं तथा ये दोनों निर्गम अन्तिम NAND. गेट के निवेश हैं।
MP Board Class 12th Physics Solutions Chapter 14 अर्द्धचालक इलेक्ट्रॉनिकी पदार्थ, युक्तियाँ तथा सरल परिपथ img 20
यही इस परिपथ की तर्क संक्रिया है। इससे स्पष्ट है कि यह परिपथ एक OR गेट की भाँति व्यवहार करेगा।

प्रश्न 18.
चित्र-14.4 में दिए गए NOR गेट युक्त परिपथ की सत्यमान सारणी लिखिए और इस परिपथ द्वारा अनुपालित तर्क संक्रियाओं (OR, AND, NOT) को अभिनिर्धारित कीजिए।
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हल
माना प्रथम NOR गेट का निर्गम 71 है तब यह निर्गम Y, दूसरे NOR गेट के लिए निवेश है।
तब \(y_{1}=\overline{A+B}\) तथा पूर्ण परिपथ का निर्गम Y = \(\overline{y_{1}}\)
इस परिपथ की सत्यमान सारणी निम्नलिखित है
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सारणी से स्पष्ट है कि इस परिपथ का निर्गम केवल तभी निम्न है जबकि इसके दोनों निवेश निम्न हैं, अत: यह परिपथ एक OR गेट की भाँति व्यवहार करता है।
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प्रश्न 19.
चित्र-14.5 में दर्शाए गए केवल NOR गेटों से बने परिपथ की सत्यमान सारणी बनाइए। दोनों परिपथों द्वारा अनुपालित तर्क संक्रियाओं (OR, AND, NOT) को अभिनिर्धारित कीजिए।
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(a) दिया गया परिपथ एक NOR गेट को प्रदर्शित करता है जिसके दो निवेशों को लघुपथित कर दिया गया है।
इस परिपथ का निर्गम निम्नलिखित है Y = \(\bar{A}\)= NOTA
इसकी सत्यमान सारणी निम्नलिखित है
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स्पष्ट है कि यह परिपथ एक NOT गेट की भाँति व्यवहार करता है जिसकी तर्क संक्रिया Y = \(\bar{A}\) है।

(b) दिए गए परिपथ में दो NOR गेटों के निर्गम \(\bar{A}\) तथा \(\bar{B}\) तीसरे NOR गेट के निवेश हैं।
एक NOR. गेट का निर्गम केवल तभी उच्च होता है जबकि उसके सभी निवेश निम्न हों अन्यथा निर्गम निम्न होता है। उक्त परिपथ की सत्यमान सारणी निम्नवत् है
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इस परिपथ का निर्गम है \(Y=\overline{\bar{A}+\bar{B}}=\overline{\bar{A}} \cdot \overline{\bar{B}}\) (डि-मोर्गन नियम से)
⇒ Y = A. B
यही इस परिपथ की तर्क संक्रिया है। तर्क संक्रिया से स्पष्ट है कि यह परिपथ एक AND गेट की भाँति व्यवहार करता है।

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अर्द्धचालक इलेक्ट्रॉनिकी : पदार्थ, युक्तियाँ तथा सरल परिपथ NCERT भौतिक विज्ञान प्रश्न प्रदर्शिका (Physics Exemplar LQ Problems) पुस्तक से चयनित महत्त्वपूर्ण प्रश्नों के हल

अर्द्धचालक इलेक्ट्रॉनिकी : पदार्थ, युक्तियाँ तथा सरल परिपथ बहुविकल्पीय प्रश्नोत्तर

प्रश्न 1.
ताप में वृद्धि से किसी अर्द्धचालक की चालकता में वृद्धि का कारण यह है कि मुक्त धारावाहकों का
(a) संख्या घनत्व बढ़ जाता है ।
(b) विश्रांति काल बढ़ जाता है
(c) संख्या घनत्व तथा विश्रांति काल दोनों बढ़ जाते हैं
(d) संख्या घनत्व बढ़ जाता है और विश्रांति काल घट जाता है।
उत्तर
(d) संख्या घनत्व बढ़ जाता है और विश्रांति काल घट जाता है।

प्रश्न 2.
चित्र-14.6 में किसी सन्धि डायोड के लिए सन्धि केन्द्र से दूर जाने पर दूरी के साथ सन्धि के सिरों पर विभव प्राचीर में अन्तर को दर्शाया गया है। इसमें V. सन्धि के सिरों पर वह विभव प्राचीर है जो तब प्रभावी होती है जब सन्धि के सिरों के बीच कोई बैटरी न जुड़ी 1 हो
(a) 1 तथा 3 दोनों अग्र बायसित सन्धि के संगत हैं
(b) 3 अग्र बायसित सन्धि के संगत और 1 पश्च बायसित सन्धि के संगत है
(c) 1 अग्र बायसित सन्धि के संगत और 3 पश्च बायसित सन्धि के संगत है
(d) 3 तथा 1 दोनों पश्च बायसित सन्धि के संगत हैं।
MP Board Class 12th Physics Solutions Chapter 14 अर्द्धचालक इलेक्ट्रॉनिकी पदार्थ, युक्तियाँ तथा सरल परिपथ img 27
उत्तर
(b) 3 अग्र बायसित सन्धि के संगत और 1 पश्च बायसित सन्धि के संगत है

प्रश्न 3.
चित्र-14.7 में डायोडों को आदर्श मानें तो
(a) D1 अग्र बायसित है और D2 अतः धारा A से B की ओर प्रवाहित होती है
(b) D2 अग्र. बायसित और D1 पश्च बायसित है, अत: B से A की ओर अथवा A से B की ओर कोई धारा प्रवाहित नहीं होती
(c) D1 तथा D2 दोनों अग्र बायसित हैं, अतः धारा A से B की ओर अथवा B से की ओर प्रवाहित होती है .
(d) D1 तथा D2 दोनों पश्च बायसित हैं, अत: A से B की ओर अथवा B से A की ओर कोई धारा प्रवाहित नहीं होती।
MP Board Class 12th Physics Solutions Chapter 14 अर्द्धचालक इलेक्ट्रॉनिकी पदार्थ, युक्तियाँ तथा सरल परिपथ img 28
उत्तर
(b) D2 अग्र. बायसित और D1 पश्च बायसित है, अत: B से A की ओर अथवा A से B की ओर कोई धारा प्रवाहित नहीं होती

प्रश्न 4.
220 V ac विद्युत प्रदाय बिन्दुओं A और B के बीच जुड़ा है (चित्र-14.8) A_ संधारित्र के सिरों पर विभवान्तर V कितना होगा
(a) 220V
(b) 110V
(c) शून्य
(d) 220/2V.
MP Board Class 12th Physics Solutions Chapter 14 अर्द्धचालक इलेक्ट्रॉनिकी पदार्थ, युक्तियाँ तथा सरल परिपथ img 29
उत्तर
(d) 220/2V.

प्रश्न 5.
होल होता है
(a) इलेक्ट्रॉन का प्रतिकण
(b) सहसंयोजी आबन्ध से एक इलेक्ट्रॉन दूर छिटक जाने पर उत्पन्न रिक्ति
(c) मुक्त इलेक्ट्रॉनों की अनुपस्थिति
(d) कृत्रिम रूप से सृजित कोई कण।
उत्तर
(b) सहसंयोजी आबन्ध से एक इलेक्ट्रॉन दूर छिटक जाने पर उत्पन्न रिक्ति

प्रश्न 6.
चित्र-14.9 में दिए गए परिपथ का निर्गम होगा
(a) हर समय शून्य
(b) किसी अर्द्ध तरंग दिष्टकारी की भाँति निर्गम में धनात्मक अर्द्ध चक्र होंगे
(c) किसी अर्द्ध तरंग दिष्टकारी की भाँति निर्गम में ऋणात्मक अर्द्ध चक्र होंगे
(d) किसी पूर्ण तरंग दिष्टकारी के निर्गम जैसा।
MP Board Class 12th Physics Solutions Chapter 14 अर्द्धचालक इलेक्ट्रॉनिकी पदार्थ, युक्तियाँ तथा सरल परिपथ img 30
उत्तर
(c) किसी अर्द्ध तरंग दिष्टकारी की भाँति निर्गम में ऋणात्मक अर्द्ध चक्र होंगे

प्रश्न 7.
चित्र-14.10 में दर्शाए परिपथ में यदि डायोड का अग्रदिश वोल्टता-पात 0.3V है, तो A एवं B के बीच विभवान्तर है
(a) 1.3V
(b) 2.3V
(c) शून्य
(d) 0.5V.
MP Board Class 12th Physics Solutions Chapter 14 अर्द्धचालक इलेक्ट्रॉनिकी पदार्थ, युक्तियाँ तथा सरल परिपथ img 31
उत्तर
(b) 2.3V

प्रश्न 8.
दिए गए परिपथ (चित्र-14.11) के लिए सत्यापन सारणी है
MP Board Class 12th Physics Solutions Chapter 14 अर्द्धचालक इलेक्ट्रॉनिकी पदार्थ, युक्तियाँ तथा सरल परिपथ img 32
MP Board Class 12th Physics Solutions Chapter 14 अर्द्धचालक इलेक्ट्रॉनिकी पदार्थ, युक्तियाँ तथा सरल परिपथ img 33
MP Board Class 12th Physics Solutions Chapter 14 अर्द्धचालक इलेक्ट्रॉनिकी पदार्थ, युक्तियाँ तथा सरल परिपथ img 34
MP Board Class 12th Physics Solutions Chapter 14 अर्द्धचालक इलेक्ट्रॉनिकी पदार्थ, युक्तियाँ तथा सरल परिपथ img 37
MP Board Class 12th Physics Solutions Chapter 14 अर्द्धचालक इलेक्ट्रॉनिकी पदार्थ, युक्तियाँ तथा सरल परिपथ img 35
उत्तर
MP Board Class 12th Physics Solutions Chapter 14 अर्द्धचालक इलेक्ट्रॉनिकी पदार्थ, युक्तियाँ तथा सरल परिपथ img 37

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अर्द्धचालक इलेक्ट्रॉनिकी : पदार्थ, युक्तियाँ तथा सरल परिपथ अति लघु उत्तरीय प्रश्नोत्तर

प्रश्न 1.
सिलिकन या जर्मेनियम के मादन के लिए तात्विक मादकों का चयन प्रायः या तो समूह XIII अथवा समूह ‘xv के तत्वों में से ही क्यों किया जाता है?
उत्तर
सिलिकन या जर्मेनियम के मादन के लिए XIII अथवा XV समूह के तत्वों का चयन इसलिए किया जाता है क्योंकि इन तत्वों के परमाणुओं का आकार ऐसा होता है कि ये अर्द्धचालक क्रिस्टल जालक की संरचना को विकृत किए बिना ही सिलिकन या जर्मेनियम के साथ सहसंयोजी बन्ध बनाकर एक आवेश वाहक का क्रिस्टल में योगदान कर देते हैं।

प्रश्न 2.
Sn, C तथा Ge, Si सभी समूह XIV के तत्व हैं। फिर भी Sn चालक है, C विद्युतरोधी है जबकि Si एवं Ge अर्द्धचालक हैं। ऐसा क्यों है?
उत्तर
परमाणु आकार के अनुसार Sn के लिए ऊर्जा अन्तराल 0 eV,C के लिए 5.4eV, Si के लिए 1.1eV तथा Ge के लिए 0.7eV होता है। अत: Sn चालक, C विद्युतरोधी जबकि Si व Ge अर्द्धचालक हैं।

प्रश्न 3.
क्या p-n सन्धि के सिरों पर विभव प्राचीर की माप केवल सन्धि पर वोल्टतामापी जोड़ कर की जा सकती है?
उत्तर
नहीं, p-n सन्धि के सिरों पर वोल्टतामापी जोड़कर विभव प्राचीर की माप नहीं की जा सकती है। क्योंकि इसके लिए सन्धि प्रतिरोध की तुलना में वोल्टतामापी का प्रतिरोध बहुत अधिक होना चाहिए जबकि सन्धि प्रतिरोध लगभग अनन्त होता है।

प्रश्न 4.
प्रवर्धकों X, Y एवं Z को श्रेणीक्रम में जोड़ा गया है। यदि x, Y एवं Z की वोल्टता लब्धि क्रमश: 10, 20 एवं 30 और निवेश सिग्नल का शिखर मान 1 मिलीवोल्ट है, तो निर्गत सिग्नल वोल्टता का शिखर मान क्या होगा, जबकि

  1. dc प्रदान वोल्टता 10 वोल्ट है?
  2. dc प्रदाय वोल्टता 5 वोल्ट है?

हल
1. परिणामी वोल्टता लब्धि = 10x20x 30 = 6000 .
∴ निर्गत सिग्नल वोल्टता का शिखर मान (V0) = 6000×1 मिलीवोल्ट = 6000×10-3 वोल्ट = 6 वोल्ट।

2. यहाँ dc प्रदाय वोल्टता 5 वोल्ट है तो निर्गत सिग्नल वोल्टता का शिखर मान. भी 5 वोल्ट से अधिक नहीं हो सकता।
∴ V0 = 5 वोल्ट।

प्रश्न 5.
किसी उभयनिष्ठ उत्सर्जक ट्रांजिस्टर प्रवर्धक परिपथ से कोई धारा और वोल्टता लब्धि सम्बद्ध है। दसरे शब्दों में, कोई शक्ति-लब्धि होती है? शक्ति को ऊर्जा की माप मानते हुए क्या इस परिपथ में ऊर्जा संरक्षण का उल्लंघन होता है?
उत्तर
नहीं, इस परिपथ में ऊर्जा संरक्षण का उल्लंघन नहीं हुआ है। इस प्रक्रिया में आवश्यक अतिरिक्त शक्ति प्रयुक्त D.C. स्रोत द्वारा प्रदान की जाती है।

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अर्द्धचालक इलेक्ट्रॉनिकी : पदार्थ, युक्तियाँ तथा सरल परिपथ लघु उत्तरीय प्रश्नोत्तर

प्रश्न 1.
(i) उस डायोड के प्रकार का नाम लिखिए जिसके अभिलक्षणिक uil चित्र-14.12
(a) एवं
(b) में दर्शाए गए हैं।
(ii) चित्र-14.12 (a) में बिन्दु P क्या निरूपित करता है?
(iii) चित्र-14.12 (b) में बिन्दु P एवं Q क्या निरूपित करते हैं?
MP Board Class 12th Physics Solutions Chapter 14 अर्द्धचालक इलेक्ट्रॉनिकी पदार्थ, युक्तियाँ तथा सरल परिपथ img 38
उत्तर

  1. चित्र-14.12 (a) जेनर डायोड के व चित्र-14.12 (5) सौर सेल के अभिलक्षिक वक्र को प्रदर्शित करता है।
  2. चित्र-14.12 (a) में बिन्दु P, जेनर भंजक वोल्टता को निरूपित करता है।
  3. चित्र-14.12 (b) में बिन्दु P, खुले परिपथ की वोल्टता को तथा बिन्दु Q, लघु पथन धारा को निरूपित करता है।

प्रश्न 2.
तीन फोटो डायोड D1, D2 एवं D3 ऐसे अर्द्धचालकों से बनाया गए हैं जिनके बैण्ड अन्तराल क्रमशः 2.5eV;2eV एवं 3eV हैं। इनमें से कौन-सा डायोड 6000 A तरंगदैर्घ्य के प्रकाश का संसूचन करने योग्य होगा?
उत्तर
6000A तरंगदैर्घ्य के प्रकाश फोटॉन की कर्ज (E) = \(\frac { hc }{ λ }\) = \(\frac{6.6 \times 10^{-34} \times 3 \times 10^{8}}{6 \times 10^{-7}}\)
=\(\frac{3.3 \times 10^{-19}}{1.6 \times 10^{-19}}\) eV = 2.06eV
किसी फोटो डायोड द्वारा विकिरण के संसूचन के लिए आवश्यक है कि विकिरण फोटॉनों की ऊर्जा, बैण्ड अन्तराल से अधिक हो। यह शर्त केवल फोटो डायोड D2 के लिए पूरी होती है। अत: फोटो डायोड D2 ही आपतित विकिरण को संसूचित करेगा।

प्रश्न 3.
यदि प्रतिरोध R1 बढ़ाया जाता है (चित्र-14.13) तो अमीटर तथा वोल्टमीटर के पाठ्यांकों में क्या परिवर्तन होंगे?
उत्तर
प्रतिरोध R1 का मान बढ़ाने पर आधार धारा IB\(\left(I_{B}=\frac{V_{B B}-V_{B E}}{R_{1}}\right)\) का मान कम होगा, जिसके परिणामस्वरूप संग्राहक काम धारा Ic का मान भी कम होगा। अत: अमीटर तथा वोल्टमीटर का पाठ्यांक कम होगा।
MP Board Class 12th Physics Solutions Chapter 14 अर्द्धचालक इलेक्ट्रॉनिकी पदार्थ, युक्तियाँ तथा सरल परिपथ img 39

प्रश्न 4.
स्पष्ट कीजिए कि तात्विक अर्द्धचालकों का उपयोग दृश्य LEDs बनाने में क्यों नहीं किया जा सकता?
उत्तर
तात्विक अर्द्धचालकों का उपयोग दृश्य LED बनाने में नहीं किया जा सकता क्योंकि तात्विक अर्द्धचालकों के ऊर्जा-अन्तराल इस प्रकार के होते हैं कि उनसे उत्सर्जन अवरक्त क्षेत्र में होता है।

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अर्द्धचालक इलेक्ट्रॉनिकी : पदार्थ, युक्तियाँ तथा सरल परिपथ आंकिक प्रश्नोत्तर

प्रश्न 1.
यदि चित्र-14.14 में दर्शाए गए प्रत्येक डायोड का अग्र बायस प्रतिरोध _ 252 तथा पश्च बायस प्रतिरोध अनन्त हो, तो धारा 11, 12, I एवं I के मान क्या । होंगे?
हल
C व D के बीच लगा डायोड पश्च बायस है।
अतः I3 = 0
शाखा AB व EF का समान प्रतिरोध = 25+ 125 = 150Ω
शाखा AB व EF का तुल्य प्रतिरोध R’= \(\frac { 150 }{ 2 }\) = 750Ω
परिपथ का कुल प्रतिरोष्ट R = 75+ 25 = 100Ω
परिपथ में धारा I1= \(\frac { V }{ R }\) = \(\frac { 5 }{ 100 }\) = 0.05 ऐम्पियर
तथा धारा I2 = I4 = \(\frac { 0.05 }{ 2 }\)= 0.025 ऐम्पियर।

प्रश्न 2.
चित्र-14.15 में द्वारों के दिए गए संयोजनों के निर्गम सिग्नलों C एवं C को आरेखित कीजिए।
MP Board Class 12th Physics Solutions Chapter 14 अर्द्धचालक इलेक्ट्रॉनिकी पदार्थ, युक्तियाँ तथा सरल परिपथ img 40
हल
NAND गेटों से पहला प्राप्त संयोजन NOR गेट की भाँति कार्य करेगा [चित्र-14.15 (b)]|
NOR गेटों से प्राप्त दूसरा संयोजन AND गेट की भाँति कार्य करेगा [चित्र-14.15 (c)]।
C1 व C2 निर्गम सिग्नलों को चित्र-14.16 में दर्शाया गया है।
MP Board Class 12th Physics Solutions Chapter 14 अर्द्धचालक इलेक्ट्रॉनिकी पदार्थ, युक्तियाँ तथा सरल परिपथ img 41

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MP Board Class 12th Physics Solutions Chapter 2 स्थिरवैद्युत विभव तथा धारिता

MP Board Class 12th Physics Solutions Chapter 2 स्थिरवैद्युत विभव तथा धारिता

स्थिरवैद्युत विभव तथा धारिता NCERT पाठ्यपुस्तक के अध्याय में पाठ्यनिहित प्रश्न एवं उनके उत्तर

प्रश्न 1.
5 × 10-8 कूलॉम तथा – 3× 10-8 कूलॉम के दो आवेश 16 सेमी दूरी पर स्थित हैं। दोनों आवेशों को मिलाने वाली रेखा के किस बिन्दु पर विद्युत विभव शून्य होगा? अनन्त पर विभव शून्य लीजिए।

COMMON ERRORS

दो विपरीत प्रकृति के आवेशों के कारण वैद्युत विभव केवल एक बिन्दु पर शून्य न होकर दो बिन्दुओं पर शून्य
होता है। पहला बिन्दु दोनों आवेशों के बीच में होगा तथा दूसरा बिन्दु आवेशों से बाहर छोटे परिमाण के आवेश के निकट होगा।

हल :
प्रथम दशा : माना बिन्दु आवेश qA = 5 × 10-8 कूलॉम से दूसरे आवेश की ओर दूरी पर 0 बिन्दु पर विद्युत विभव शून्य है,
MP Board Class 12th Physics Solutions Chapter 2 स्थिरवैद्युत विभव तथा धारिता img 1

अत: प्रथम आवेश से दूसरे आवेश की ओर 10 सेमी दूरी पर विद्युत विभव शून्य है।
द्वितीय दशा : माना प्रथम आवेश से दूसरे आवेश की ओर r दूरी पर (दूसरे आवेश से बाहर r > 0.16 मीटर) विद्युत विभव शून्य है।
MP Board Class 12th Physics Solutions Chapter 2 स्थिरवैद्युत विभव तथा धारिता img 2

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प्रश्न 2.
10 सेमी भुजा वाले एक सम-षट्भुज के प्रत्येक शीर्ष पर 5 माइक्रोकूलॉम का आवेश है। षट्भुज के केन्द्र पर विभव परिकलित कीजिए।
हल :
प्रत्येक आवेश q = 5 माइक्रोकूलॉम
प्रत्येक आवेश की केन्द्र O से दूरी r = 0.1 मीटर
∴ केन्द्र O पर परिणामी विभव V =\(\frac{1}{4 \pi \varepsilon_{0}}\) = 9 × 109 × 6 × \(\frac{q}{r}\)
= 9 × 109 × 6 × \(\frac{5 \times 10^{-6}}{0.1}\)
= 2.7 × 106 वोल्ट।
MP Board Class 12th Physics Solutions Chapter 2 स्थिरवैद्युत विभव तथा धारिता img 3

प्रश्न 3.
6 सेमी की दूरी पर अवस्थित दो बिन्दुओं A एवं B पर दो आवेश 2 माइक्रोकूलॉम तथा – 2माइक्रोकूलॉम रखे हैं।
(a) निकाय के सम विभव पृष्ठ की पहचान कीजिए।
(b) इस पृष्ठ के प्रत्येक बिन्दु पर विद्युत क्षेत्र की दिशा क्या है?
हल :
(a) चूँकि दोनों वेश समान परिमाण के परन्तु विपरीत चिह्न के हैं। अतः समविभव पृष्ठ दोना आवेशों को मिलाने वाली रेखा AB के लम्बवत् होगा तथा उसके मध्य-बिन्दु से जाएगा।
(b) विद्युत क्षेत्र की दिशा समविभव पृष्ठ के लम्बवत् धनावेश से ऋणावेश की ओर (AB की दिशा में) होगी।

प्रश्न 4.
12 सेमी त्रिज्या वाले एक गोलीय चालक के पृष्ठ पर 1.6 × 10-7कूलॉम पर आवेश एकसमान रूप से वितरित है।
(a) गोले के अन्दर
(b) गोले के ठीक बाहर
(c) गोले के केन्द्र से 18 सेमी पर अवस्थित, किसी बिन्दु पर विद्युत क्षेत्र क्या होगा?
हल :
(a) ∵ आवेश चालक के पृष्ठ पर वितरित है; अतः गोले के भीतर विद्युत क्षेत्र शून्य होगा।

(b) दिया है : गोले की त्रिज्या R= 0.12 मीटर
गोले. पर आवेश q= 1.6 × 10-7 कूलॉम
∴ गोले के पृष्ठ के ठीक बाहर विद्यत क्षेत्र \(E=\frac{1}{4 \pi \varepsilon_{0}} \frac{q}{R^{2}}=9 \times 10^{9} \times \frac{1.6 \times 10^{-7}}{0.12 \times 0.12}\)
= 105 न्यूटन कूलॉम-1

(c) बिन्दु की गोले के केन्द्र से दूरी r = 0.18 मीटर
∵ r > R; अतः बिन्दु गोले के पृष्ठ के बाहर है।
MP Board Class 12th Physics Solutions Chapter 2 स्थिरवैद्युत विभव तथा धारिता img 4

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प्रश्न 5.
एक समान्तर पट्टिका संधारित्र, जिसकी पट्टिकाओं के बीच वायु है, की धारिता 8 pF (1 pF = 10-12 फैरड) है। यदि पट्टिकाओं के बीच की दूरी को आधा कर दिया जाए और इनके बीच के स्थान में 6 पराविद्युतांक का एक पदार्थ भर दिया जाए तो इसकी धारिता क्या होगी?
हल :
दिया है : वायु संधारित्र की धारिता Co = 8 pF = \(\frac{\varepsilon_{0} A}{d}\)
पदार्थ का पराविद्युतांक K = 6
∴ पराविद्युत पदार्थ भरने पर संधारित्र की धारिता
MP Board Class 12th Physics Solutions Chapter 2 स्थिरवैद्युत विभव तथा धारिता img 5

प्रश्न 6.
9 pF धारिता वाले तीन संधारित्रों को श्रेणीक्रम में जोड़ा गया है।
(a) संयोजन की कुल धारिता क्या है?
(b) यदि संयोजन को 120 वोल्ट के संभरण (सप्लाई) से जोड़ दिया जाए, तो प्रत्येक संधारित्र पर क्या विभवान्तर होगा?
स्थिर वैद्युत विभव तथा धारिता । 69
हल :
दिया है : C1 = C2 = C3 = 9 pF
श्रेणी संयोजन का विभवान्तर V = 120 वोल्ट
कुल धारिता = ?
प्रत्येक संधारित्र का विभवान्तर = ?
(a) श्रेणी संयोजन के सूत्र से,
MP Board Class 12th Physics Solutions Chapter 2 स्थिरवैद्युत विभव तथा धारिता img 6

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(b) संयोजन पर कुल आवेश q = CV = 3 × 10-12 × 120 = 360 × 10-12 कूलॉम
श्रेणी संयोजन में प्रत्येक संधारित्र पर इतना ही आवेश होगा।
∴ प्रत्येक संधारित्र का विभवान्तर V1 = V2 = V3 = \(\frac{q}{C_{1}}\)
(∵ सब की धारिताएँ समान हैं)
=\(\frac{360 \times 10^{-12}}{9 \times 10^{-12}}\) = 40 वोल्ट।

अन्य विधि : माना तीनों के विभवान्तर क्रमश: V1, V2 व V3 हैं।
तब, V1+ V2 + V3 = 120
∵ श्रेणी संयोजन में विभवान्तर धारिताओं के व्युत्क्रमानुपाती होते हैं।
∵ तीनों की धारिताएँ समान हैं। अत: विभवान्तर भी समान होंगे।
V3 = V2 = V1
अतः
3V1= 120 ⇒ V1 = 40 वोल्ट
अतः प्रत्येक संधारित्र का विभवान्तर 40 वोल्ट है।

प्रश्न 7.
2 pF, 3 pF और 4 pF धारिता वाले तीन संधारित्र पार्श्वक्रम में जोड़े गए हैं।
(a) संयोजन की कुल धारिता क्या है?
(b) यदि संयोजन को 100 वोल्ट के संभरण से जोड़ दें तो प्रत्येक संधारित्र पर आवेश ज्ञात कीजिए।
हल :
दिया है : C1 = 2 pF, C2 = 3 pF, C3 = 4 pF
पार्श्वक्रम का विभवान्तर V = 100 वोल्ट
कुल धारिता = ?, प्रत्येक संधारित्र पर आवेश = ?
(a) पार्श्वक्रम में कुल धारिता C = C1 + C2 + C3 = 2+ 3+ 4 = 9 pF
(b) पार्श्वक्रम में सभी का विभवान्तर संयोजन के विभवान्तर के बराबर होता है।
∴ V1 = V2 = V3 = 100 वोल्ट
प्रथम संधारित्र पर आवेश q1 = C1V1 = 2 × 10-12 × 100 = 2 × 10-10 कूलॉम।
दूसरे संधारित्र पर आवेश q2 = C2V2 = 3 × 10-12 × 100 = 3 × 10-10 कूलॉम।
तीसरे संधारित्र पर आवेश q3 = C3V3 = 4 × 10-12 × 100 = 4 × 10-10 कूलॉम।

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प्रश्न 8.
पट्टिकाओं के बीच वायु वाले समान्तर पट्टिका संधारित्र की प्रत्येक पट्टिका का क्षेत्रफल 6x 10-3 मीटर तथा उनके बीच की दूरी 3 मिमी है। संधारित्र की धारिता को परिकलित कीजिए। यदि इस संधारित्र को 100 वोल्ट के संभरण से जोड़ दिया जाए तो संधारित्र की प्रत्येक पट्टिका पर कितना आवेश होगा?
हल :
दिया है : प्लेट क्षेत्रफल A = 6 × 10-3 मीटर2, V = 100 वोल्ट,
बीच की दूरी d = 3 मिमी = 3 × 10-3 मीटर
धारिता C = ?, प्रत्येक पट्टी पर आवेश = ?
MP Board Class 12th Physics Solutions Chapter 2 स्थिरवैद्युत विभव तथा धारिता img 7
संधारित्र पर आवेश q = CV = 17.7 × 10-12 x 100 = 17.7 × 10-10 कूलॉम
∴ एक पट्टी पर आवेश = + 17.7 × 10-10 कूलॉम।
दूसरी पट्टी पर आवेश = – 17.7 × 10-10 कूलॉम।

प्रश्न 9.
प्रश्न 8 में दिए गए संधारित्र की पट्टिकाओं के बीच यदि 3 मिमी मोटी अभ्रक की एक शीट (पत्तर) (पराविद्युतांक = 6) रख दी जाती है तो स्पष्ट कीजिए कि क्या होगा जब
(a) विभव (वोल्टेज) संभरण जुड़ा ही रहेगा?
(b) संभरण को हटा लिया जाएगा?
हल :
प्रश्न 8 के परिणाम से, V = 100 वोल्ट, q = 18 × 10-10 कूलॉम ।
अब माध्यम का पराविद्युतांक K = 6
पराविद्युत की मोटाई t = 3 मिमी = 3 × 10-3 मीटर
t= d; अतः संधारित्र पूर्णतः परावैद्युत द्वारा भरा है।

EXTRA SHOTS

  • संधारित्र के आवेशित हो जाने के बाद, उसे आवेशित करने वाली बैटरी हटा लेने पर उसकी प्लेटों पर आवेश अपरिवर्तित रहता है।
  • संधारित्र के आवेशित हो जाने के बाद भी बैटरी, संधारित्र से जुड़ी रहे तब उसकी प्लेटों के बीच विभवान्तर नियत रहता है।

∴ संधारित्र की नई धारिता C = KC = 6 × 18 pF [∵ Co = 18pF]
= 108pF

(a) ∵ विभव संभरण जुड़ा हुआ है। अत: संधारित्र का विभवान्तर नियत अर्थात् 100 वोल्ट रहेगा।
संधारित्र पर नया आवेश q = CV = 108 × 10-12 × 100
= 1.08 × 10-8 कूलॉम
अतः इस स्थिति में, C = 108 pF, V = 100 वोल्ट,
q= 1.08 × 10-8 कूलॉम ।

(b) ∵ विभव संभरण हटा लिया गया है। अत: संधारित्र पर आवेश q= 18 × 10-10 कूलॉम नियत रहेगा।
MP Board Class 12th Physics Solutions Chapter 2 स्थिरवैद्युत विभव तथा धारिता img 8
अतः C = 108 pF, \(V=\frac{50}{3}\) वोल्ट = 16.6 वोल्ट,
q= 1.8 × 10-9 कूलॉम।।

प्रश्न 10.
12 pF का एक संधारित्र 50 वोल्ट की बैटरी से जुड़ा है। संधारित्र में कितनी स्थिर विद्युत ऊर्जा . संचित होगी?
हल :
MP Board Class 12th Physics Solutions Chapter 2 स्थिरवैद्युत विभव तथा धारिता img 9

प्रश्न 11.
200 वोल्ट संभरण (सप्लाई) से एक 600 pF से संधारित्र को आवेशित किया जाता है। फिर इसको संभरण से वियोजित कर देते हैं तथा एक अन्य 600 pF वाले अनावेशित संधारित्र से जोड़ देते हैं। इस प्रक्रिया में कितनी ऊर्जा का ह्रास होता है?
हल :
दिया है : धारिताएँ C1 = 600 × 10-12F, C2 = 600 × 10-12F
विभवान्तर V1 = 200 वोल्ट, V2 = 0 वोल्ट
प्रक्रिया में ऊर्जा का ह्रास ∆U = ?
∵ आवेश के बाद संभरण को हटा दिया जाता है; अत: निकाय पर कुल आवेश नियत रहेगा।(Note)
माना संधारित्रों को जोड़ने पर उनका उभयनिष्ठ विभव V है,.
q= C1V1+ C2V2 = (C1 + C2)V
600 × 10-12 × 200 + 0 = [600+ 600] × 10-12 × v
∴ \(V=\frac{600 \times 200}{1200}\) वोल्ट
MP Board Class 12th Physics Solutions Chapter 2 स्थिरवैद्युत विभव तथा धारिता img 10

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प्रश्न 12.
मूलबिन्दु पर एक 8 माइक्रोकूलॉम का आवेश अवस्थित है। – 2x 10-9 कूलॉम के एक छोटे से आवेश को बिन्दु P(0, 0, 3 सेमी) से, बिन्दु R (0, 6 सेमी, 9 सेमी) से होकर, बिन्दु Q (0, 4 सेमी, 0) तक ले जाने में किया गया कार्य परिकलित कीजिए।
हल :
मूलबिन्दु पर आवेश Q = 8 × 10-3 कूलॉम
MP Board Class 12th Physics Solutions Chapter 2 स्थिरवैद्युत विभव तथा धारिता img 11
दूसरा आवेश q= – 2 × 10-9 कूलॉम
∵ स्थिर विद्युत क्षेत्र में किसी आवेश को एक बिन्दु से दूसरी बिन्दु तक ले जाने में | किया जाने वाला कार्य मार्ग के स्थान पर अन्त्य बिन्दुओं पर निर्भर करता है।
∴ आवेश q को बिन्दु P से Q तक ले जाने में किया गया कार्य
w = q (VQO – VP)
यहाँ बिन्दु Q की मूलबिन्दु से दूरी rQ = OQ = 0.04 मीटर
Q(0,4,0) तथा बिन्दु P की मूलबिन्दु से दूरी rP = OP = 0.03 मीटर
∴ मूलबिन्दु पर स्थित आवेश Q के कारण Q व P के बीच विभवान्तर
MP Board Class 12th Physics Solutions Chapter 2 स्थिरवैद्युत विभव तथा धारिता img 12

प्रश्न 13.
b भुजा वाले एक घन के प्रत्येक शीर्ष पर 4 आवेश है। इस आवेश विन्यास के कारण घन के केन्द्र पर विद्युत विभव तथा विद्युत क्षेत्र ज्ञात कीजिए।
हल :
MP Board Class 12th Physics Solutions Chapter 2 स्थिरवैद्युत विभव तथा धारिता img 14
(b) ∵ सभी शीर्षों पर आवेश समान हैं। अत: विपरीत शीर्षों के कारण केन्द्र पर उत्पन्न विद्युत क्षेत्र परिमाण में बराबर तथा दिशा में विपरीत होंगे।
अतः केन्द्र पर नैट विद्युत क्षेत्र शून्य होगा।

प्रश्न 14.
1.5 माइक्रोकूलॉम और 2.5 माइक्रोकूलॉम आवेश वाले दो सूक्ष्म गोले 30 सेमी दूर स्थित हैं। (a) दोनों आवेशों को मिलाने वाली रेखा के मध्य-बिन्दु पर और
(b) मध्य-बिन्दु से होकर जाने वाली रेखा के अभिलम्ब तल में मध्य बिन्दु से 10 सेमी दूर स्थित किसी बिन्दु पर विभव और विद्युत क्षेत्र ज्ञात कीजिए।
हल :
(a) मध्य-बिन्दु की प्रत्येक आवेश से दूरी rA = rB = 0.15 मीटर
MP Board Class 12th Physics Solutions Chapter 2 स्थिरवैद्युत विभव तथा धारिता img 15
MP Board Class 12th Physics Solutions Chapter 2 स्थिरवैद्युत विभव तथा धारिता img 63
MP Board Class 12th Physics Solutions Chapter 2 स्थिरवैद्युत विभव तथा धारिता img 16
प्रश्न 15.
आन्तरिक त्रिज्या r1 तथा बाह्य त्रिज्या r2 वाले एक गोलीय चालक खोल (कोश) पर Q आवेश है।
(a) खोल के केन्द्र पर एक आवेश q रखा जाता है। खोल के भीतरी और बाहरी पृष्ठों पर पृष्ठ आवेश घनत्व क्या है?
(b) क्या किसी कोटर (जो आवेशविहीन है) में विद्युत क्षेत्र शून्य होता है, चाहे खोल गोलीय न होकर किसी भी अनियमित आकार का हो? स्पष्ट कीजिए।
हल :
(a) जब चालक को केवल Q आवेश दिया गया है तो यह पूर्णत: चालक के बाह्य पृष्ठ पर रहता है।
हम जानते हैं कि एक चालक के भीतर नैट आवेश शून्य रहता है। अत: खोल के केन्द्र पर 4 आवेश रखने पर, q खोल की भीतरी सतह पर – q आवेश प्रेरित हो जाता है तथा बाहरी सतह पर अतिरिक्त + q आवेश आ जाता है।
अतः भीतरी सतह पर आवेश = – q
बाहरी सतह पर आवेश = Q+q
MP Board Class 12th Physics Solutions Chapter 2 स्थिरवैद्युत विभव तथा धारिता img 17

(b) हाँ, यदि कोटर आवेशविहीन है तो उसके अन्दर विद्युत क्षेत्र शून्य होगा।
इसके विपरीत कल्पना करें कि किसी चालक के भीतर एक अनियमित आकृति का आवेशविहीन कोटर है जिसके भीतर विद्युत क्षेत्र शून्य नहीं है। अब एक ऐसे बन्द लूप पर विचार करें जिसका कुछ भाग कोटर के भीतर क्षेत्र रेखाओं के समान्तर है तथा शेष भाग कोटर से बाहर परन्तु चालक के भीतर है। चूँकि चालक के भीतर विद्युत-क्षेत्र शून्य है। अत: यदि एकांक आवेश को इस बन्द लूप के अनुदिश ले जाया जाए तो क्षेत्र द्वारा किया गया नैट कार्य प्राप्त होगा। परन्तु यह स्थिति स्थिर विद्युत क्षेत्र के लिए सत्य नहीं है (बन्द लूप पर नैट कार्य शून्य होता है)। अत: हमारी परिकल्पना कि कोटर के भीतर विद्युत क्षेत्र शून्य नहीं है, गलत है।
अर्थात् चालक के भीतर आवेशविहीन कोटर के भीतर विद्युत क्षेत्र शून्य होगा।

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प्रश्न 16.
(a) दर्शाइए कि आवेशित पृष्ठ के एक पार्श्व से दूसरे पार्श्व पर स्थिर विद्युत क्षेत्र के अभिलम्ब घटक में असांतत्य होता है, जिसे \(\left(\overrightarrow{\mathrm{E}}_{2}-\overrightarrow{\mathrm{E}}_{1}\right) \cdot \hat{\mathrm{n}}=\frac{\sigma}{\varepsilon_{0}}\) द्वारा व्यक्त किया जाता है। जहाँ \(\hat{\mathbf{n}}\) एक बिन्दु पर पृष्ठ के
अभिलम्ब एकांक सदिश है तथा σ उस बिन्दु पर पृष्ठ आवेश घनत्व है \(\hat{\mathbf{n}}\) की दिशा पार्श्व 1 से पार्श्व 2 की ओर
है)। अतः दर्शाइए कि चालक के ठीक बाहर विद्युत क्षेत्र \(\frac{\sigma \hat{\mathbf{n}}}{\varepsilon_{0}}\) है।
(b) दर्शाइए कि आवेशित पृष्ठ के एक पार्श्व से दूसरे पार्श्व पर स्थिर विद्युत क्षेत्र का स्पर्शीय घटक संतत है।
उत्तर :
(a) माना AB एक आवेशित पृष्ठ है जिस पर पृष्ठीय आवेश घनत्व σ है। पृष्ठ के समीप प्रत्येक बिन्दु पर विद्युत क्षेत्र \(\overrightarrow{\mathrm{E}}\) समान तथा पृष्ठ के लम्बवत् बाहर की ओर है।
MP Board Class 12th Physics Solutions Chapter 2 स्थिरवैद्युत विभव तथा धारिता img 18
चित्र में एक बेलनाकार गाउसीय पृष्ठ को प्रदर्शित किया गया है। इस पृष्ठ 2 के वृत्ताकार परिच्छेदों पर अभिलम्ब सदिश \(\hat{\mathbf{n}}_{1} व 1\hat{\mathbf{n}}_{2}\) क्रमशः क्षेत्रों \(\overrightarrow{\mathrm{E}}_{1}\) व \(\overrightarrow{\mathrm{E}}_{2}\) के समदिश हैं जबकि वक्र पृष्ठ पर अभिलम्ब संगत क्षेत्र \(\overrightarrow{\mathrm{E}}_{3}\) के लम्बवत् हैं। ..
माना प्रत्येक वृत्तीय परिच्छेद का क्षेत्रफल Δ A है तब गाउसीय पृष्ठ से -गुजरने वाला विद्युत फ्लक्स

MP Board Class 12th Physics Solutions Chapter 2 स्थिरवैद्युत विभव तथा धारिता img 19
MP Board Class 12th Physics Solutions Chapter 2 स्थिरवैद्युत विभव तथा धारिता img 64
उपर्युक्त समीकरण (2) किसी आवेशित सतह के दोनों ओर स्थित विद्युत क्षेत्रों के बीच सम्बन्ध को व्यक्त करता है।
MP Board Class 12th Physics Solutions Chapter 2 स्थिरवैद्युत विभव तथा धारिता img 20
अब संलग्न चित्र में प्रदर्शित अनियमित आकृति के आवेशित चालक पर विचार के कीजिए। चालक का सम्पूर्ण आवेश उसकी बाह्य सतह पर फैला है। अत: चालक की। बाह्य सतह एक समविभव पृष्ठ है। आइए हम समीकरण (2) को इस चालक के बाहर विद्युत-क्षेत्र ज्ञात करने के लिए प्रयुक्त करते हैं।
MP Board Class 12th Physics Solutions Chapter 2 स्थिरवैद्युत विभव तथा धारिता img 21

(b) आवेशित पृष्ठ के एक ओर से दूसरी ओर जाने पर स्थिर विद्युत क्षेत्र का स्पर्श रेखीय घटक सतत (सर्वथा शून्य) होता है, अन्यथा पृष्ठ के विभिन्न बिन्दु अलग-अलग विभवों पर होंगे तथा धनावेश पृष्ठ के अनुदिश उच्च विभव से निम्न विभव के बिन्दुओं की ओर गति करता रहेगा।

प्रश्न 17.
रैखिक आवेश घनत्व λ वाला एक लम्बा आवेशित बेलन एक खोखले समाक्षीय चालक बेलन द्वारा घिरा है। दोनों बेलनों के बीच के स्थान में विद्युत क्षेत्र कितना है?
हल :
दोनों बेलनों के बीच r त्रिज्या तथा l लम्बाई के समाक्षीय बेलनाकार गाउसीय पृष्ठ पर विचार कीजिए।
MP Board Class 12th Physics Solutions Chapter 2 स्थिरवैद्युत विभव तथा धारिता img 22
सममिति के कारण इस बेलन के वक्र पृष्ठ के प्रत्येक बिन्दु पर विद्युत क्षेत्र \(\overrightarrow{\mathrm{E}}\) सर्वत्र । समान तथा पृष्ठीय अल्पांश \(d \overrightarrow{\mathrm{A}}\) के समान्तर है जबकि वृत्तीय पृष्ठों पर \(\overrightarrow{\mathrm{E}}\) अल्पांश \(d \overrightarrow{\mathrm{A}}\) के लम्बवत् है। अतः
गाउसीय पृष्ठ से गुजरने वाला विद्युत फ्लक्स
MP Board Class 12th Physics Solutions Chapter 2 स्थिरवैद्युत विभव तथा धारिता img 23

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प्रश्न 18.
एक हाइड्रोजन परमाणु में इलेक्ट्रॉन तथा प्रोटॉन लगभग 0.53 Å दूरी पर परिबद्ध हैं :
(a) निकाय की स्थितिज ऊर्जा का ev में परिकलन कीजिए, जबकि प्रोटॉन व इलेक्ट्रॉन के मध्य से अनन्त दूरी पर स्थितिज ऊर्जा को शून्य माना गया है।
(b) इलेक्ट्रॉन को स्वतन्त्र करने में कितना न्यूनतम कार्य करना पड़ेगा, यदि यह दिया गया है कि इसकी कक्षा में गतिज ऊर्जा (a) में प्राप्त स्थितिज ऊर्जा के परिमाण की आधी है?
(c) यदि स्थितिज ऊर्जा को 1.06 Å पृथक्करण पर शून्य ले लिया जाए तो, उपर्युक्त (a) और (b) के उत्तर
क्या होंगे?
हल : यहाँ q1 = – 1.6 x 10-19 कूलॉम,
q2= + 1.6 x 10-19 कूलॉम
r = 0.53Å = 5.3 x 10-11 मीटर
(a) इलेक्ट्रॉन-प्रोटॉन के निकाय की विद्युत स्थितिज ऊर्जा
MP Board Class 12th Physics Solutions Chapter 2 स्थिरवैद्युत विभव तथा धारिता img 24

(b) इलेक्ट्रॉन की स्थितिज ऊर्जा U = – 27.17 ev
MP Board Class 12th Physics Solutions Chapter 2 स्थिरवैद्युत विभव तथा धारिता img 25
U’ को शून्य मानने पर r = 0.53 Å दूरी पर स्थितिज ऊर्जा
U” = U – U’ = – 27.2 + 13.6 = – 13.6 ev
जबकि K = 13.6ev
∴ हाइड्रोजन परमाणु में इलेक्ट्रॉन की कुल ऊर्जा
E= K +U” = 0
अतः इलेक्ट्रॉन को मुक्त करने के लिए आवश्यक कार्य
W = E – U’ = 0- (- 13.6) = 13.6 ev

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प्रश्न 19.
यदि H2 अणु के दो में से एक इलेक्ट्रॉन को हटा दिया जाए तो हमें हाइड्रोजन आण्विक आयन : (H2+) प्राप्त होगा। (H2+) की निम्नतम अवस्था (ground state) में दो प्रोटॉन के बीच दूरी लगभग 1.5A है
और इलेक्ट्रॉन प्रत्येक प्रोटॉन से लगभग 1Å की दूरी पर है। निकाय की स्थितिज ऊर्जा ज्ञात कीजिए। स्थितिज ऊर्जा की शून्य स्थिति के चयन का उल्लेख कीजिए।
हल :
प्रत्येक प्रोटॉन का आवेश q1 = q2 = + 1.6 x 10-19 कूलॉम
दोनों के बीच की दूरी r12 = 1.5 Å = 1.5 x 10-10 मीटर
इलेक्ट्रॉन का आवेश q3 = – 1.6 x 10-19 कूलॉम ।
r23 = r31 = 1A = 10-10 मीटर,
MP Board Class 12th Physics Solutions Chapter 2 स्थिरवैद्युत विभव तथा धारिता img 26
MP Board Class 12th Physics Solutions Chapter 2 स्थिरवैद्युत विभव तथा धारिता img 27
स्थितिज ऊर्जा का शून्य अनन्त पर लिया गया है।

प्रश्न 20.
a और । त्रिज्याओं वाले दो आवेशित चालक गोले एक तार द्वारा एक-दूसरे से जोड़े गए हैं। दोनों गोलों के पृष्ठों पर विद्युत क्षेत्रों में क्या अनुपात है? प्राप्त परिणाम को, यह समझाने में प्रयुक्त कीजिए कि किसी चालक के तीक्ष्ण और नुकीले सिरों पर आवेश घनत्व, चपटे भागों की अपेक्षा अधिक क्यों होता है?
हल :
माना इन गोलों पर आवेश क्रमशः 41 तथा 42 हैं।
:: दोनों गोले चालक तार द्वारा जुड़े हैं। अत: दोनों के पृष्ठीय विभव बराबर होंगे।
MP Board Class 12th Physics Solutions Chapter 2 स्थिरवैद्युत विभव तथा धारिता img 28
माना किसी आवेशित चालक के दो अलग-अलग भागों की वक्रता त्रिज्याएँ a तथा b हैं। माना चालक का प्रथम भाग दूसरे की तुलना में अधिक नुकीला है तब a यदि इन भागों पर q1 व q2 आवेश संचित हैं तो
MP Board Class 12th Physics Solutions Chapter 2 स्थिरवैद्युत विभव तथा धारिता img 29
अर्थात् कम वक्रता त्रिज्या वाले भाग (नुकीले भाग) का पृष्ठीय घनत्व अधिक वक्रता त्रिज्या वाले भाग की तुलना में अधिक होगा।

प्रश्न 21.
बिन्दु (0, 0, – a) तथा (0, 0, a) पर दो आवेश क्रमशः -q और +q स्थित हैं।
(a) बिन्दुओं (0, 0, z) और (x, y, 0) पर स्थिर विद्युत विभव क्या है?
(b) मूल बिन्दु से किसी बिन्दु की दूरी r पर विभव की निर्भरता ज्ञात कीजिए, जबकि \(\frac{r}{a}\) >> 1 है।
(c) X-अक्ष पर बिन्दु (5, 0, 0) से बिन्दु (- 7, 0,0) तक एक परीक्षण आवेश को ले जाने में कितना कार्य । करना होगा? यदि परीक्षण आवेश को उन्हीं बिन्दुओं के बीच X-अक्ष से होकर न ले जाएँ तो क्या उत्तर बदल जाएगा?
हल :
दिए गए बिन्दु आवेश एक विद्युत द्विध्रुव बनाते हैं।
आवेशों के बीच की दूरी = 2a
∴ विद्युत द्विध्रुव आघूर्ण \(\overrightarrow{\mathrm{p}}=q \times 2 \overrightarrow{\mathrm{a}}=2 q \overrightarrow{\mathrm{a}}\)
(a) बिन्दु (0, 0, z) द्विध्रुव की अक्ष पर स्थित है,
∴ इस बिन्दु पर विद्युत विभव \(V=\pm \frac{1}{4 \pi \varepsilon_{0}} \cdot \frac{p}{\left(z^{2}-a^{2}\right)}\)
बिन्दु (x, y, 0) द्विध्रुव के विषुवत तल में स्थित है; अतः इस बिन्दु पर विद्युत विभव शून्य होगा।

(b) द्विध्रुव के कारण किसी बिन्दु पर विद्युत विभव :
माना कोई बिन्दु P, द्विध्रुव के केन्द्र (मूल बिन्दु) से 7 दूरी पर स्थित है। इस बिन्दु की बिन्दु आवेशों +q तथा । q से दूरियाँ क्रमश: r1 तथा r2 हैं।
MP Board Class 12th Physics Solutions Chapter 2 स्थिरवैद्युत विभव तथा धारिता img 30
तब बिन्दु P पर द्विध्रुव के कारण विद्युत विभव
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MP Board Class 12th Physics Solutions Chapter 2 स्थिरवैद्युत विभव तथा धारिता img 32

(c) बिन्दु P(5, 0, 0) तथा Q(- 7, 0, 0) द्विध्रुव के विषुवत तल में स्थित हैं। अत: इन दोनों बिन्दुओं पर विभव शून्य होगा।
∴ परीक्षण आवेश qo को बिन्दु P से Q तक ले जाने में किया गया कार्य
W = qo [V (Q)- V (P)] = 0 [∵ V (P) = V(Q)= 0]
विद्युत-क्षेत्र एक संरक्षी क्षेत्र है जिसमें किया गया कार्य केवल अन्त्य बिन्दुओं पर निर्भर करता है, न कि मार्ग पर। (Note)
अतः उत्तर में कोई परिवर्तन नहीं आएगा।

प्रश्न 22.
नीचे दिए गए चित्र-2.12 में एक आवेश विन्यास जिसे विद्युत चतुर्युवी कहा जाता है, दर्शाया गया है। चतुर्भुवी के अक्ष पर स्थित किसी बिन्दु के लिए r पर विभव की. a a . निर्भरता प्राप्त कीजिए जहाँ \(\frac{r}{a}\)>>11 अपने परिणाम की तुलना एक विद्युत द्विध्रुव व विद्युत एकल ध्रुव (अर्थात् किसी एकल आवेश) के लिए प्राप्त परिणामों से कीजिए।
हल :
माना P की विभिन्न आवेशों से दूरियाँ निम्नलिखित हैं –
r-a, r, r+a
MP Board Class 12th Physics Solutions Chapter 2 स्थिरवैद्युत विभव तथा धारिता img 65
MP Board Class 12th Physics Solutions Chapter 2 स्थिरवैद्युत विभव तथा धारिता img 34
विद्युत द्विध्रुव के कारण अक्ष पर विभव दूरी के वर्ग के व्युत्क्रमानुपाती (\(V \propto \frac{1}{r^{2}}\) ) होता है। एकल ध्रुव के कारण यह दूरी के व्युत्क्रमानुपाती (\(V \propto \frac{1}{r}\) ) होता है। अतः चतुर्भुवी के कारण विभव, विद्युत द्विध्रुव तथा एकल ध्रुव की तुलना में अधिक तेजी से घटता है।

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प्रश्न 23.
एक विद्युत टैक्नीशियन को 1 किलोवोल्ट विभवान्तर के परिपथ में 2 μF संधारित्र की आवश्यकता है। 1 μF के संधारित्र उसे प्रचुर संख्या में उपलब्ध हैं जो 400 वोल्ट से अधिक का विभवान्तर वहन नहीं कर सकते। कोई सम्भव विन्यास सुझाइए जिसमें न्यूनतम संधारित्रों की आवश्यकता हो।
हल :
माना हम प्रत्येक पंक्ति में n संधारित्र जोड़ते हैं तथा ऐसी m पंक्तियों को समान्तर क्रम में जोड़ते हैं। श्रेणीक्रम में, 1 kV = 1000 वोल्ट का विभवान्तर n संधारित्रों में बराबर बॅट जाएगा।
MP Board Class 12th Physics Solutions Chapter 2 स्थिरवैद्युत विभव तथा धारिता img 35
∵ n न्यूनतम पूर्णांक है। अत: n = 3
प्रत्येक पंक्ति की धारिता = \(\frac{1}{n}\) माइक्रोफैरड होगी।
समान्तर क्रम में जुड़ी ऐसी m पंक्तियों की धारिता
\(\frac{1}{n} +\frac{1}{n} + \frac{1}{n}\) + m पद – = 2μF
⇒ \(\frac{m}{n}\) = 2μF
⇒ m = 2n = 2×3 = 6 ,

∵ हमें 3-3 संधारित्रों को श्रेणीक्रम में जोड़कर इस प्रकार की 6 पंक्तियाँ बनानी होंगी। अब इन 6 पंक्तियों को समान्तर क्रम में जोड़ना होगा।

प्रश्न 24.
2F वाले एक समान्तर पट्टिका संधारित्र की पट्टिका का क्षेत्रफल क्या है, जबकि पट्टिकाओं का पृथकन 0.5 सेमी है?
हल :
दिया है : d = 0.5 सेमी = 5 x 10 -3मीटर, C = 2F, A = ?
MP Board Class 12th Physics Solutions Chapter 2 स्थिरवैद्युत विभव तथा धारिता img 36
∴ पट्टिका का क्षेत्रफल 1.13x 10° मीटर’ या 1130 किमी है।

प्रश्न 25.
चित्र 2.13 के नेटवर्क (जाल) की तुल्य धारिता प्राप्त कीजिए। 300 वोल्ट संभरण (सप्लाई) के साथ प्रत्येक संधारित्र का आवेश व उसकी वोल्टता ज्ञात कीजिए।
हल :
दिए गए नेटवर्क को चित्र 2.14 की भाँति व्यवस्थित किया जा सकता है

MP Board Class 12th Physics Solutions Chapter 2 स्थिरवैद्युत विभव तथा धारिता img 37
सर्वप्रथम C2 व C3 श्रेणीक्रम में जुड़े हैं, इनकी तुल्य धारिता
MP Board Class 12th Physics Solutions Chapter 2 स्थिरवैद्युत विभव तथा धारिता img 66
अब यह 100 pF की धारिता C1 के साथ समान्तर क्रम में जुड़ी है,
अतः तुल्य धारिता = 100 + 100 = 200 pF
पुन: यह 200 pF, C4 के साथ श्रेणीक्रम में जुड़ा है।
MP Board Class 12th Physics Solutions Chapter 2 स्थिरवैद्युत विभव तथा धारिता img 39
∵ C4 शेष संयोजन (धारिता 200 pF) के साथ श्रेणीक्रम में जुड़ा है,
अत: C4तथा शेष संयोजन, दोनों पर यही आवेश होगा।
MP Board Class 12th Physics Solutions Chapter 2 स्थिरवैद्युत विभव तथा धारिता img 40
∴ शेष संयोजन का विभवान्तर V = 300 वोल्ट – 200 वोल्ट = 100 वोल्ट
∵ C1,C2 व C3 के श्रेणी संयोजन से समान्तर क्रम में जुड़ा है,
∴ C1 का विभवान्तर = 100 वोल्ट
तथा C2 व C3 के श्रेणी संयोजन का विभवान्तर = 100 वोल्ट
C1 पर आवेश q1 = C1V1= 100 x 10-12 फैरड x100 वोल्ट
= 10-8 कूलॉम.
∴ C = C3; अतः कुल विभवान्तर 100 V इन पर बराबर-बराबर बंटेगा।
प्रत्येक का विभवान्तर = 50 वोल्ट
प्रत्येक पर आवेश q2 = C2V2= 200 x 10-12
F x 50 वोल्ट = 10-8c

अतः संयोजन की धारिता \(C=\frac{200}{3}\) pF
C1 का विभवान्तर = 100 वोल्ट।
तथा आवेश = 10-8 कूलॉम
C2 का विभवान्तर = 50 वोल्ट ।
तथा आवेश = 10-8 कूलॉम
C3 का विभवान्तर = 50वोल्ट
तथा आवेश = 10-8 कूलॉम
C4 का विभवान्तर = 200 वोल्ट
तथा आवेश = 2 x 10-8 कूलॉम

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प्रश्न 26.
किसी समान्तर पट्टिका संधारित्र की प्रत्येक पट्टिका का क्षेत्रफल 90 सेमी2 है और उनके बीच पृथक्न 2.5 मिमी है। 400 वोल्ट संभरण से संधारित्र को आवेशित किया गया है।
(a) संधारित्र कितना स्थिर विद्युत ऊर्जा संचित करता है?
(b) इस ऊर्जा को पट्टिकाओं के बीच स्थिर विद्युत क्षेत्र में संचित समझकर प्रति एकांक आयतन ऊर्जा u ज्ञात कीजिए। इस प्रकार, पट्टिकाओं के बीच विद्युत क्षेत्र E के परिमाण और u में सम्बन्ध स्थापित कीजिए।
हल :
दिया है : A = 90 सेमी2 = 9 x 10-3 मीटर2, d = 2.5 मिमी = 2.5 x 10-3 मीटर V= 400 वोल्ट, U = ?, एकांक आयतन में ऊर्जा u = ?
u व E के बीच सम्बन्ध = ?
(a)
MP Board Class 12th Physics Solutions Chapter 2 स्थिरवैद्युत विभव तथा धारिता img 41
(b)
MP Board Class 12th Physics Solutions Chapter 2 स्थिरवैद्युत विभव तथा धारिता img 42

प्रश्न 27.
एक 4 माइक्रोफैरड के संधारित्र को 200 वोल्ट संभरण (सप्लाई) से आवेशित किया गया है। फिर संभरण से हटाकर इसे एक अन्य अनावेशित 2 माइक्रोफैरड के संधारित्र से जोड़ा जाता है। पहले संधारित्र की कितनी स्थिर विद्युत ऊर्जा का ऊष्मा और विद्युत चुम्बकीय विकिरण के रूप में ह्रास होता है ?
हल :
दिया है : C1 = 4 x 10-6 फैरड, V1 = 200 वोल्ट,
C2= 2 x 10-6 फैरड, V2 = 0 वोल्ट
माना जोड़ने के पश्चात् दोनों का उभयनिष्ठ विभव V है।
∵ जोड़ने से पूर्व संभरण को हटा लिया गया है। अत: कुल आवेश स्थिर रहेगा।
MP Board Class 12th Physics Solutions Chapter 2 स्थिरवैद्युत विभव तथा धारिता img 43
MP Board Class 12th Physics Solutions Chapter 2 स्थिरवैद्युत विभव तथा धारिता img 44

प्रश्न 28.
दर्शाइए कि एक समान्तर पट्टिका संधारित्र की प्रत्येक पट्टिका पर बल का परिमाण \(\frac{1}{2}\)QE है, जहाँ Q.संधारित्र पर आवेश है और E पट्टिकाओं के बीच विद्युत क्षेत्र का परिमाण है। घटक 1/2 के मूल को समझाइए।
हल :
माना दोनों पट्टिकाओं के बीच लगने वाला पारस्परिक आकर्षण बल F है तथा प्लेटों के बीच की दूरी x है। दूरी x में dx की वृद्धि करने पर आकर्षण बल F के विरुद्ध कृत कार्य
dW = F dx         ………………….(1)
∵ प्लेटों के बीच विद्युत क्षेत्र E है। अत: संधारित्र के एकांक आयतन में संचित ऊर्जा
MP Board Class 12th Physics Solutions Chapter 2 स्थिरवैद्युत विभव तथा धारिता img 45
∵ प्लेटों का क्षेत्रफल A व बीच की दूरी x है। अत: संधारित्र की कुल ऊर्जा
MP Board Class 12th Physics Solutions Chapter 2 स्थिरवैद्युत विभव तथा धारिता img 46
∵ दूरी x में dx की वृद्धि करने पर ऊर्जा में वृद्धि
MP Board Class 12th Physics Solutions Chapter 2 स्थिरवैद्युत विभव तथा धारिता img 47

घटक \(\frac{1}{2}\) का मूल इस तथ्य में निहित है कि चालक प्लेट के बाहर विद्युत क्षेत्र E तथा प्लेट के भीतर शून्य होता है। अत: औसत विद्युत क्षेत्र \(\frac{E}{2}\) होता है, जिसके विरुद्ध प्लेट को खिसकाया जाता है।

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प्रश्न 29.
दो संकेन्द्री गोलीय चालकों जिनको उपयुक्त विद्युतरोधी आवेश (+q) आलम्बों से उनकी स्थिति में रोका गया है, से मिलकर एक गोलीय संधारित्र बना है (चित्र 2.15)। दर्शाइए कि गोलीय संधारित्र की धारिता C इस प्रकार व्यक्त की जाती है :
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यहाँ r1 और r2 क्रमशः बाहरी तथा भीतरी गोलों की त्रिज्याएँ हैं।
हल :
गोलीय अथवा गोलाकार संधारित्र की धारिता (Capacitance . of Spherical Capacitor) का व्यंजक-माजा गोलीय संधारित्र धातु के आवेश (-q) दो समकेन्द्रीय खोखले गोलों A व B का बना है, जो एक-दूसरे को कहीं भी स्पर्श नहीं करते (चित्र 2.15)। जब गोले A को -q आवेश दिया जाता है तो प्रेरण द्वारा गोले B पर +q आवेश उत्पन्न हो जाता है। चूंकि गोले B का बाहरी तल पृथ्वी से जुड़ा है; अत: गोले B के बाहरी तल पर उत्पन्न -q आवेश पृथ्वी से आने वाले इलेक्ट्रॉनों से निरावेशित हो जाता है। इस प्रकार गोले B के आन्तरिक पृष्ठ पर + q आवेश रह जाता है। माना गोले A की त्रिज्या r2 तथा गोले B की त्रिज्या r1 है।
MP Board Class 12th Physics Solutions Chapter 2 स्थिरवैद्युत विभव तथा धारिता img 49
चूँकि गोले के भीतर प्रत्येक बिन्दु पर वही विभव होता है जो कि उसके पृष्ठ पर होता है।
अत: गोले B के अन्दर, +q आवेश के कारण विभव
MP Board Class 12th Physics Solutions Chapter 2 स्थिरवैद्युत विभव तथा धारिता img 50
चूँकि विभव अदिश राशि है; अत: गोले A पर परिणामी विभव
MP Board Class 12th Physics Solutions Chapter 2 स्थिरवैद्युत विभव तथा धारिता img 51
गोला B पृथ्वी से जुड़ा होने के कारण इस पर विभव शून्य है। अत: गोले A व B के बीच विभवान्तर
MP Board Class 12th Physics Solutions Chapter 2 स्थिरवैद्युत विभव तथा धारिता img 52

प्रश्न 30.
एक गोलीय संधारित्र के भीतरी गोले की त्रिज्या 12 सेमी है तथा बाहरी गोले की त्रिज्या 13 सेमी है। बाहरी गोला भू-सम्पर्कित है तथा भीतरी गोले पर 2.5 माइक्रोकूलॉम का आवेश दिया गया है। संकेन्द्री गोलों के बीच के स्थान में 32 पराविधुतांक का द्रव भरा है।
(a) संधारित्र की धारिता ज्ञात कीजिए।
(b) भीतरी गोले का विभव क्या है?
(c) इस संधारित्र की धारिता की तुलना एक 12 सेमी त्रिज्या वाले किसी वियुक्त गोले की धारिता से कीजिए। व्याख्या कीजिए कि गोले की धारिता इतनी कम क्यों है?
हल :
दिया है : r1 = 13 सेमी = 0.13 मीटर, r2 = 12 सेमी = 0.12 मीटर, K = 32, Q = 2.5x 10-6 कूलॉम
MP Board Class 12th Physics Solutions Chapter 2 स्थिरवैद्युत विभव तथा धारिता img 53

अर्थात् गोलीय संधारित्र की धारिता एकल गोले की धारिता से 416 गुनी अधिक है। इससे यह निष्कर्ष प्राप्त होता है कि एकल चालक के समीप एक अन्य भू-सम्पर्कित चालक रखकर उनके बीच के स्थान में पराविद्युत भरने से धारिता बहुत अधिक बढ़ जाती है।

प्रश्न 31.
सावधानीपूर्वक उत्तर दीजिए :
(a) दो बड़े चालक गोले जिन पर आवेश Q1 और Q2 हैं, एक-दूसरे के समीप लाए जाते हैं। क्या इनके बीच स्थिर विद्युत बल का परिमाण तथ्यत –
MP Board Class 12th Physics Solutions Chapter 2 स्थिरवैद्युत विभव तथा धारिता img 54
द्वारा दर्शाया जाता है, जहाँ r इनके केन्द्रों के बीच की दूरी है।
(b) यदि कूलॉम के नियम में \(\frac{1}{r^{3}}\) निर्भरता का समावेश (1/r2 के स्थान पर) हो तो क्या गाउस का नियम अभी भी सत्य होगा?
(c) स्थिर विद्युत क्षेत्र विन्यास में एक छोटा परीक्षण आवेश किसी बिन्दु पर विराम में छोड़ा जाता है। क्या यह उस बिन्दु से होकर जाने वाली क्षेत्र रेखा के अनुदिश चलेगा?
(d) इलेक्ट्रॉन द्वारा एक वृत्तीय कक्षा पूरी करने में नाभिक के क्षेत्र द्वारा कितना कार्य किया जाता है? यदि कक्षा दीर्घवृत्ताकार हो तो क्या होगा?
(e) हमें ज्ञात है कि एक आवेशित चालक के पृष्ठ के आर-पार विद्युत क्षेत्र असंतत होता है। क्या वहाँ विद्युत विभव भी असंतत होगा?
(f) किसी एकल चालक की धारिता से आपका क्या अभिप्राय है?
(g) एक सम्भावित उत्तर की कल्पना कीजिए कि पानी का पराविद्युतांक (= 80), अभ्रक के पराविद्युतांक (= 6) से अधिक क्यों होता है?
हल :
(a) यदि दोनों गोले एक-दूसरे से बहुत अधिक दूरी पर होंगे तभी वे बिन्दु आवेशों की भाँति कार्य करेंगे। कूलॉम का नियम केवल बिन्दु आवेशों के लिए सत्य है। अत: गोलों को समीप लाने पर कूलॉम का नियम लागू नहीं होगा।
(b) नहीं, गाउस का नियम केवल तभी तक सत्य है जब तक कि कूलॉम के नियम में निर्भरता (\(\frac{1}{r^{2}}\)) है; अतः कूलॉम के नियम में निर्भरता (\frac{1}{r^{3}}) होने पर गाउस का नियम लागू नहीं होगा।
(c) नहीं, यदि क्षेत्र रेखा एक सरल रेखा है, केवल तभी परीक्षण आवेश क्षेत्र रेखा के अनुदिश चलेगा।
(d) शून्य, स्थिर विद्युत क्षेत्र में बिन्दु आवेश के बन्द वक्र पर चलाने में किया गया कार्य शून्य होता है। यदि वक्र दीर्घवृत्ताकार है तो भी कार्य शून्य होगा।
(e) नहीं, चालकं की पूरी सतह पर विद्युत विभव सतत होता है। (1) एकल चालक की धारिता एक ऐसे संधारित्र की धारिता है, जिसकी दूसरी प्लेट अनन्त पर है।
(g) जल के अणुओं का अपना स्थायी द्विध्रुव आघूर्ण होता है। अत: जल का पराविद्युतांक उच्च होता है, इसके विपरीत अभ्रक के अणुओं का द्विध्रुव आघूर्ण शून्य होता है; अत: इसका पराविद्युतांक निम्न होता है।

प्रश्न 32.
एक बेलनाकार संधारित्र में 15 सेमी लम्बाई एवं त्रिज्याएँ 1.5 सेमी तथा 1.4 सेमी के दो समाक्ष बेलन हैं। बाहरी बेलन भू-सम्पर्कित है और भीतरी बेलन को 3.5 माइक्रोकूलॉम का आवेश दिया गया है। निकाय की धारिता और भीतरी बेलन का विभव ज्ञात कीजिए। अन्त्य प्रभाव (अर्थात् सिरों पर क्षेत्र रेखाओं का मुड़ना) की उपेक्षा कर सकते हैं।
हल :
MP Board Class 12th Physics Solutions Chapter 2 स्थिरवैद्युत विभव तथा धारिता img 55

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प्रश्न 33.
पराविधुतांक तथा 107 वोल्ट मीटर-1 की पराविद्युत सामर्थ्य वाले एक पदार्थ से 1 किलोवोल्ट वोल्टता अनुमतांक के समान्तर पट्टिका संधारित्र की अभिकल्पना करनी है। [पराविद्युत सामर्थ्य वह अधिकतम विद्युत क्षेत्र है जिसे कोई पदार्थ बिना भंग हुए अर्थात् आंशिक आयनन द्वारा बिना विद्युत संचरण आरम्भ किए सहन कर सकता है। सुरक्षा की दृष्टि से क्षेत्र को कभी भी पराविद्युत सामर्थ्य के 10% से अधिक नहीं होना चाहिए।] 50pF धारिता के लिए पट्टिकाओं का कितना न्यूनतम क्षेत्रफल होना चाहिए?
हल :
दिया है : K = 3, पराविद्युत सामर्थ्य = 107 वोल्ट/मीटर,
C = 50 pF, न्यूनतम क्षेत्रफल A = ? V = 1000 वोल्ट
प्लेटों के बीच अधिकतम क्षेत्र Emax = पराविद्युत सामर्थ्य का 10%
MP Board Class 12th Physics Solutions Chapter 2 स्थिरवैद्युत विभव तथा धारिता img 56

प्रश्न 34.
व्यवस्थात्मकतः निम्नलिखित में संगत समविभव पृष्ठ का वर्णन कीजिए :
(a) Z-दिशा में अचर विद्युत क्षेत्र
(b) एक क्षेत्र जो एकसमान रूप से बढ़ता है, परन्तु एक ही दिशा (मान लीजिए 2-दिशा) में रहता है।
(c) मूलबिन्दु पर कोई एकल धनावेश और
(d) एक समतल में समान दूरी पर समान्तर लम्बे आवेशित तारों से बने एकसमान जाल।
उत्तर :
(a) x-y समतल के समान्तर समतल।
(b) समविभव पृष्ठ x-y समतल के समान्तर होंगे, परन्तु बढ़ते क्षेत्र के साथ, भिन्न-भिन्न नियत विभव वाले समतल एक-दूसरे के समीप होते जाएँगे।
(c) संकेन्द्रीय गोले जिनके केन्द्र मूलबिन्दु पर हैं।
(d) ग्रिड के समीप, समविभव पृष्ठों की आकृति समय के साथ बदलेगी परन्तु ग्रिड से दूर जाने पर समविभव . पृष्ठ ग्रिड (जाल) के अधिकाधिक समान्तर होते जाएँगे।

प्रश्न 35.
किसी वान डे ग्राफ प्रकार के जनित्र में एक गोलीय धातु कोश 15 x 106 वोल्ट का एक इलेक्ट्रोड बनाना है। इलेक्ट्रोड के परिवेश की गैस की पराविद्युत सामर्थ्य 5 x 107 वोल्ट मीटर-1 है। गोलीय कोश की आवश्यक न्यूनतम त्रिज्या क्या है?
हल :
दिया है : गोलीय कोश का विभव V = 15 x 106 वोल्ट
गैस की पराविद्युत सामर्थ्य Emax = 5 x 107 वोल्ट मीटर-1
माना कोश की न्यूनतम त्रिज्या r है, तब
MP Board Class 12th Physics Solutions Chapter 2 स्थिरवैद्युत विभव तथा धारिता img 57

प्रश्न 36.
r1 त्रिज्या तथा q1 आवेश वाला एक छोटा गोला r2 त्रिज्या और q2 आवेश के गोलीय खोल (कोश) से घिरा है। दर्शाइए यदि q1 धनात्मक है तो (जब दोनों को एक तार द्वारा जोड़ दिया जाता है) आवश्यक रूप से आवेश, गोले से खोल की तरफ ही प्रवाहित होगा, चाहे खोल पर आवेश q2 कुछ भी हो।
हल :
हम जानते हैं कि किसी चालक का सम्पूर्ण आवेश उसके बाह्य पृष्ठ पर रहता है; अत: जैसे ही दोनों गोलों को चालक तार द्वारा जोड़ा जाएगा वैसे ही अन्दर वाले छोटे गोले का सम्पूर्ण आवेश तार से होकर बाहरी खोल की ओर प्रवाहित हो जाएगा, चाहे खोल पर आवेश q2 कुछ भी क्यों न हो।

प्रश्न 37.
निम्न का उत्तर दीजिए :
(a) पृथ्वी के पृष्ठ के सापेक्ष वायुमण्डल की ऊपर परत लगभग 400 किलोवोल्ट पर है, जिसके संगत विद्युतक्षेत्र ऊँचाई बढ़ने के साथ कम होता है। पृथ्वी के पृष्ठ के सापेक्ष विद्युत क्षेत्र लगभग 100 वोल्ट मीटर-1 है। तब फिर जब हम घर से बाहर खुले में जाते हैं तो हमें विद्युत आघात क्यों नहीं लगता? (घर को लोहे का पिंजरा मान लीजिए; अतः उसके अन्दर कोई विद्युत क्षेत्र नहीं है।)
(b) एक व्यक्ति शाम के समय अपने घर के बाहर 2 मीटर ऊँचा अवरोधी पट्ट रखता है जिसके शिखर पर एक 1 मीटर क्षेत्रफल की बड़ी ऐलुमिनियम की चादर है। अगली सुबह वह यदि धातु की चादर को छूता है तो क्या उसे विद्युत आघात लगेगा?
(c) वायु की थोड़ी-सी चालकता के कारण सारे संसार में औसतन वायुमण्डल में विसर्जन धारा 1800 ऐम्पियर मानी जाती है। तब यथासमय वातावरण स्वयं पूर्णतः निरावेशित होकर विद्युत उदासीन क्यों नहीं हो जाता? दूसरे शब्दों में, वातावरण को कौन आवेशित रखता है?
(d) तड़ित के दौरान वातावरण की विद्युत ऊर्जा, ऊर्जा के किन रूपों में क्षयित होती है?
हल :
(a) हमारा शरीर तथा पृथ्वी के समान विभव पर रहने के कारण हमारे शरीर से होकर कोई विद्युत धारा प्रवाहित नहीं होती इसीलिए हमें कोई विद्युत आघात नहीं लगता।
(b) हाँ, पृथ्वी तथा ऐलुमिनियम की चादर मिलकर एक संधारित्र बनाती हैं तथा अवरोधी पट्ट पराविद्युत का कार्य करता है। ऐलुमिनियम की चादर वायुमण्डलीय आवेश के लगातार गिरते रहने से आवेशित होती रहती है और उच्च विभव प्राप्त कर लेती है; अतः जब व्यक्ति इस चादर को छूता है तो उसके शरीर से होकर एक विद्युत धारा प्रवाहित होती है और इस कारण उस व्यक्ति को विद्युत आघात लगेगा।
(c) यद्यपि वायुमण्डल 1800 ऐम्पियर की औसत विसर्जन धारा के कारण लगातार निरावेशित होता रहता है परन्तु साथ ही यह तड़ित तथा झंझावात के कारण यह लगातार आवेशित भी होता रहता है और इन दोनों के बीच एक सन्तुलन बना रहता है जिससे कि वायुमण्डल कभी भी पूर्णत: निरावेशित नहीं हो पाता।
(d) तड़ित के दौरान वातावरण की विद्युत ऊर्जा, प्रकाश उर्जा, ध्वनि ऊर्जा तथा ऊष्मीय ऊर्जा के रूप में क्षयित होती है।

NCERT भौतिक विज्ञान प्रश्न प्रदर्शिका (Physics Exemplar LQ Problems) पुस्तक से चयनित महत्त्वपूर्ण प्रश्नों के हल

स्थिरवैद्युत विभव तथा धारिता बहुविकल्पीय प्रश्नोत्तर

प्रश्न 1.
चित्र में दर्शाए अनुसार परिपथ में 4 μF का संधारित्र संयोजित है। बैटरी का आन्तरिक प्रतिरोध 0.5Ω है। संधारित्र की प्लेटों पर आवेश की मात्रा होगी –
MP Board Class 12th Physics Solutions Chapter 2 स्थिरवैद्युत विभव तथा धारिता img 58
(a) 0
(b) 4 μc
(c) 16 μc
(d) 8 μc
उत्तर :
(d) 8 μc

प्रश्न 2.
किसी एक समान विद्युत क्षेत्र में किसी धनावेशित कण को मुक्त किया जाता है। आवेश की वैद्युत स्थितिज ऊर्जा
(a) नियत रहती है क्योंकि विद्युत क्षेत्र एकसमान है
(b) बढ़ जाती है क्योंकि आवेश विद्युत क्षेत्र के अनुदिश गति करता है
(c) घट जाती है क्योंकि आवेश विद्युत क्षेत्र के अनुदिश गति करता है
(d) घट जाती है क्योंकि आवेश विद्युत क्षेत्र के विपरीत गति करता है।
उत्तर :
(c) घट जाती है क्योंकि आवेश विद्युत क्षेत्र के अनुदिश गति करता है

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प्रश्न 3.
कुछ आवेशों के एक समूह का कुल योग शून्य नहीं है। इससे अधिक दूरी पर बनने वाले समविभव पृष्ठ होंगे –
(a) गोले
(b) समतल
(c) परवलयज
(d) दीर्घवृत्तज।
MP Board Class 12th Physics Solutions Chapter 2 स्थिरवैद्युत विभव तथा धारिता img 59
उत्तर :
(a) गोले

प्रश्न 4.
कोई समान्तर पट्टिका संधारित्र दो श्रेणीबद्ध परावैद्युत गुटकों से बना है। इनमें चित्र में दर्शाए अनुसार एक गुटके की मोटाई d1 तथा परावैद्युतांक K1 तथा दूसरे गुटके की मोटाई d25 तथा परावैद्युतांक K2 है।* इस व्यवस्था को एक ऐसा परावैद्युत गुटका माना जा सकता है जिसकी d) मोटाई d = (d1 + d2) तथा प्रभावी परावैद्युतांक K है। तब K का मान है –
(a)\(\frac{K_{1} d_{1}+K_{2} d_{2}}{d_{1}+d_{2}}\)
(b)\(\frac{K_{1} d_{1}+K_{2} d_{2}}{K_{1}+K_{2}}\)
(c)\(\frac{K_{1} K_{2}\left(d_{1}+d_{2}\right)}{\left(K_{1} d_{2}+K_{2} d_{1}\right)}\)
(d)\(\frac{2 K_{1} K_{2}}{\left(K_{1}+K_{2}\right)}\)
उत्तर :
(c)\(\frac{K_{1} K_{2}\left(d_{1}+d_{2}\right)}{\left(K_{1} d_{2}+K_{2} d_{1}\right)}\)

स्थिरवैद्युत विभव तथा धारिता अति लघु उत्तरीय प्रश्नोत्तर

प्रश्न 1.
R1 तथा R2 त्रिज्याओं (R1 > R2) के दो चालक गोलों पर विचार कीजिए। यदि दोनों गोले समान विभव पर हैं तो छोटे गोले की अपेक्षा बड़े गोले पर अधिक आवेश होता है। उल्लेख कीजिए, छोटे गोले का आवेश घनत्व बड़े गोले की तुलना में अधिक होगा अथवा कम?
उत्तर :
दोनों गोले समान विभव पर हैं। अत: V1 = V2 अथवा
MP Board Class 12th Physics Solutions Chapter 2 स्थिरवैद्युत विभव तथा धारिता img 60
अत: छोटे गोले (R2 त्रिज्या का) का आवेश पृष्ठ घनत्व, बड़े गोले की तुलना में अधिक होगा।

प्रश्न 2.
मुक्त इलेक्ट्रॉन उच्च विभव के क्षेत्र की ओर गमन करते हैं अथवा निम्न विभव के क्षेत्र की ओर?
उत्तर :
मुक्त इलेक्ट्रॉन उच्च विभव के क्षेत्र की ओर गमन करते हैं। .

प्रश्न 3.
समान आवेश वाले दो निकटवर्ती चालकों के बीच क्या कोई विभवान्तर हो सकता है?
उत्तर :
हाँ, यदि चालकों का आमाप भिन्न-भिन्न हों तब समान आवेश होते हुए भी उनके बीच विभवान्तर हो सकता है।

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प्रश्न 4.
कोई परीक्षण आवेश q किसी बिन्दु आवेश Q के विद्युत क्षेत्र में दो भिन्न बन्द पथों पर गमन करता है (चित्रानुसार )। पहला पथ विद्युत क्षेत्र की रेखाओं के अनुदिश तथा लम्बवत् कोई भाग है। दूसरा पथ एक आयताकार पाश है जिसका क्षेत्रफल पहले पाश के बराबर है। इन दोनों प्रकरणों में किए गए कार्य की तुलना कीजिए।
उत्तर :
वैद्युत बल एक संरक्षी बल है, अत: इसके अन्तर्गत बन्द पथ में किया है गया कार्य दोनों स्थितियों में शून्य होगा।
MP Board Class 12th Physics Solutions Chapter 2 स्थिरवैद्युत विभव तथा धारिता img 61

स्थिरवैद्युत विभव तथा धारिता लघु उत्तरीय प्रश्नोत्तर

प्रश्न 1.
किसी संधारित्र की पट्टिकाओं के बीच कोई परावैद्युत है तथा यह संधारित्र किसी दिष्ट स्रोत से संयोजित है। अब बैटरी को हटाया जाता है और फिर परावैद्युत को हटा दिया जाता है। यह उल्लेख कीजिए कि ऐसा करने पर संधारित्र की धारिता उसमें संचित ऊर्जा, विद्युत क्षेत्र, संचित आवेश तथा वोल्टता में वृद्धि होगी, कमी होगी अथवा नियत रहेगी?
उत्तर :
संधारित्र की पट्टिकाओं से संयोजित दिष्ट स्रोत (बैटरी) को हटा लेने पर संधारित्र की प्लेटों पर आवेश नियत रहेगा।
संधारित्र की प्लेटों के बीच से परावैद्युत को हटा लेने पर उसकी धारिता कम हो जाएगी।
संधारित्र में संचित ऊर्जा \(E=\frac{\sigma}{\varepsilon_{0} K}\), धारिता C घट जाने के कारण अधिक हो जाएगी।
प्लेटों के बीच वैद्युत क्षेत्र \(V=\frac{q}{C}\), परावैद्युत हटा लेने पर बढ़ जाएगा।
प्लेटों के बीच वोल्टता \(V=\frac{q}{C}\), धारिता कम हो जाने के कारण (या V = E.d के अनुसार) बढ़ जाएगी।

स्थिरवैद्युत विभव तथा धारिता विस्तृत उत्तरीय प्रश्नोत्तर

प्रश्न 1.
R तथा 2R त्रिज्याओं के दो धातु के गोलों के पृष्ठीय आवेश घनत्व समान हैं। इन्हें सम्पर्क में लाकर पृथक कर दिया जाता है। इन दोनों पर नए पृष्ठीय आवेश घनत्व क्या होंगे?
हल :
धातु के गोलों पर आवेश q1 = σ 4πR2 तथा
q2 = σ4π(2R2)
4(σ4πR2) = 4q1
MP Board Class 12th Physics Solutions Chapter 2 स्थिरवैद्युत विभव तथा धारिता img 62
चालकों को परस्पर सम्पर्क में रखने पर, उन पर आवेशों का पुनर्वितरण उनकी धारिताओं के अनुपात में होता है। अतः

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MP Board Class 12th Physics Solutions Chapter 15 संचार व्यवस्था

MP Board Class 12th Physics Solutions Chapter 15 संचार व्यवस्था

 संचार व्यवस्था  NCERT पाठ्यपुस्तक के अध्याय में पाठ्यनिहित प्रश्न एवं उनके उत्तर

प्रश्न 1.
व्योम तरंगों के उपयोग द्वारा क्षितिज के पार संचार के लिए निम्नलिखित आवृत्तियों में से कौन-सी आवृत्ति उपयुक्त रहेगी?
(a) 10 किलोहर्ट्स
(b) 10 मेगाहर्ट्स
(c) 1 गीगाहर्ट्स
(d) 1000 गीगाहर्ट्स।
उत्तर
(b) 10 मेगाहर्ट्स।
3 मेगाहर्ट्स से 30 मेगाहर्ट्स आवृत्ति तक की तरंगें व्योम तरंगों की श्रेणी में आती हैं। इससे उच्च आवृत्ति की तरंगें (जैसे-1 गीगाहर्ट्स, 1000 गीगाहर्ट्स) आयन-मण्डल को भेदकर पार निकल जाती हैं, जबकि 10 किलोहर्ट्स आवृत्ति की तरंगें ऐन्टिना की ऊँचाई अधिक होने के कारण उपयोगी नहीं हैं।

प्रश्न 2.
UHF परिसर की आवृत्तियों का प्रसारण प्रायः किसके द्वारा होता है?
(a) भू-तरंगें
(b) व्योम तरंगें
(c) पृष्ठीय तरंगें
(d) आकाश तरंगें।
उत्तर
(d) आकाश तरंगें।
UHF परिसर में प्रसारण आकाश तरंगों द्वारा ही होता है।

प्रश्न 3.
अंकीय सिग्नल :
(i) मानों का संतत समुच्चय प्रदान नहीं करते
(ii) मानों को विविक्त चरणों के रूप में निरूपित करते हैं
(iii) द्विआधारी पद्धति का उपयोग करते हैं ।
(iv) दशमलव के साथ द्विआधारी पद्धति का भी उपयोग करते हैं।
उपर्युक्त प्रकथनों में कौन-से सत्य हैं?
(a) केवल (i) तथा (ii)
(b) केवल (ii) तथा (iii)
(c) (i), (ii) तथा (iii) परन्तु (iv) नहीं
(d) (i), (ii), (iii) तथा (iv) सभी।
उत्तर
(c).
अंकीय सिग्नल द्विआधारी पद्धति (अंकों 0 तथा 1) का उपयोग करते हैं। अत: मानों का सतत समुच्चय प्रदान करने के स्थान पर उन्हें विविक्त चरणों में निरूपित करते हैं।

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प्रश्न 4.
दृष्टिरेखीय संचार के लिए क्या यह आवश्यक है कि प्रेषक ऐन्टीना की ऊँचाई अभिग्राही ऐन्टीना की ऊँचाई के बराबर हो? कोई TV प्रेषक ऐन्टीना 81 मीटर ऊँचा है। यदि अभिग्राही ऐन्टिना भूस्तर पर है तो यह कितने क्षेत्र में सेवाएँ प्रदान करेगा?
उत्तर
नहीं, दृष्टिरेखीय संचार हेतु प्रेषक ऐन्टिना की ऊँचाई अभिग्राही ऐन्टिना की ऊँचाई के बराबर होना आवश्यक नहीं है। दिया है,
प्रेषक ऐन्टिना की ऊँचाई hT = 81 मीटर .
अभिग्राही ऐन्टिना की ऊँचाई hR = 0
पृथ्वी की त्रिज्या R= 6.4×106 मीटर
माना इस ऐन्टिना से d त्रिज्या के वृत्त में सेवाएँ प्राप्त की जा सकती हैं, तब
d = \(d=\sqrt{2 h_{T} R}+\sqrt{2 h_{R} R}=\sqrt{2 \times 81 \times 6.4 \times 10^{6}}+0\)
यदि ऐन्टिना A क्षेत्रफल में सेवाएँ प्रदान कर सकता है तो
A= πd2 = 3.14 × 2 x 81 × 6.4 × 106 मीटर 2
= 3255.55 किमी2

प्रश्न 5.
12 वोल्ट शिखर वोल्टता की वाहक तरंग का उपयोग किसी संदेश सिग्नल के प्रेषण के लिए किया गया है। मॉडुलन सूचकांक 75% के लिए मॉडुलक सिग्नल की शिखर वोल्टता कितनी होनी चाहिए?
हल :
वाहक तरंग की शिखर वोल्टता Ec = 12 वोल्ट
मॉडुलन सूचकांक μ = 75%
यदि मॉडुलक सिग्नल की शिखर वोल्टता Em है तो
मॉडुलन सूचकांक \(\frac{E_{m}}{E_{c}}\) x 100 = 75
Em = \(\frac { 75 }{ 100 }\)xEc = \(\frac { 3 }{ 4 }\) x 12 = 9 वोल्ट
अत: मॉडुलक सिग्नल की शिखर वोल्टता = 9 वोल्ट।

प्रश्न 6.
चित्र-15.1 में दर्शाए अनुसार कोई मॉडुलक सिग्नलं वर्ग तरंग है। .
MP Board Class 12th Physics Solutions Chapter 15 संचार व्यवस्था img 1
दिया गया है कि वाहक तरंग c(t) = 2sin (8 π t) वोल्ट

  1. आयाम मॉडुलित तरंग रूप आलेखित कीजिए।
  2. मॉडुलन सूचकांक क्या है?

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हल
1. चित्र से स्पष्ट है कि 0 ≤ t ≤ 0.5 सेकण्ड
m(t) = 1 वोल्ट
cm(t) = [Ac + m(t)] sin (8 π t)= 3 sin 8 π t [∵Ac = 2 वोल्ट]
0.5 सेकण्ड ≤ t ≤ 1.0 सेकण्ड
m(t) = – 1 वोल्ट
cm (t) = [Ac + m (t)] sin (8 π t) = 1 sin (8 π t)
1.0 सेकण्ड ≤ t ≤ 1.5 सेकण्ड
m(t) = 1
cm (t) = [Ac + m(t)] sin(8 π t)= 3 sin (8 π t)
तथा इसी प्रकार 1.5 सेकण्ड ≤ t ≤ 2.0 सेकण्ड
cm (t) = 1 sin (8 π t)
अत: मॉडुलित तरंग को निम्न प्रकार से लिखा जा सकता है
MP Board Class 12th Physics Solutions Chapter 15 संचार व्यवस्था img 2
वाहक तरंग की कोणीय आवृत्ति ωc= 8π
∵ \(T_{c}=\frac{2 \pi}{\omega_{c}}=\frac{1}{4}\) 1 सेकण्ड
∵ 1 सेकण्ड में वाहक तरंग के चार दोलन पूरे होंगे।
इनमें से प्रथम 2 दोलन (t= 0 से t = 0.5 सेकण्ड तक) तरंग cm (t) = 3 sin 8 π t के होंगे तथा अगले दो दोलन Cm (t) = 1 sin 8 π t के होंगे।
इसी प्रकार के दोलन अगले 1 सेकण्ड में होंगे।

इस आधार पर मॉडुलित तरंग रूप निम्नलिखित है
MP Board Class 12th Physics Solutions Chapter 15 संचार व्यवस्था img 3

2. वाहक तरंग की शिखर वोल्टता Ec = 2 वोल्ट
मॉडुलक तरंग की शिखर वोल्टता Em = 1 वोल्ट
मॉडुलन सूचकांक μ = \(\frac { Em }{ Em }\) = \(\frac { 1 }{ 2 }\) = 0.5
अथवा
μ = \(\frac { Em }{ Em }\) x 100% = 0.5 x 100% = 50%

प्रश्न 7.
किसी मॉडुलित तरंग का अधिकतम आयाम 10 वोल्ट तथा न्यूनतम आयाम 2 वोल्ट पाया जाता है। मॉडुलन । सूचकांक u का मान निश्चित कीजिए।
यदि न्यूनतम आयाम शून्य वोल्ट हो तो मॉडुलन सूचकांक क्या होगा?
हल :
दिया है, मॉडुलित तरंग का अधिकतम आयाम Emax = 10 वोल्ट, न्यूनतम आयाम Emin = 2 वोल्ट
यदि वाहक तरंग तथा मॉडुलक तरंग के आयाम क्रमश: Ec व Em हैं तो
MP Board Class 12th Physics Solutions Chapter 15 संचार व्यवस्था img 4

प्रश्न 8.
आर्थिक कारणों से किसी AM तरंग का केवल ऊपरी पार्श्व बैण्ड ही प्रेषित किया जाता है, परन्तु ग्राही स्टेशन पर वाहक तरंग उत्पन्न करने की सुविधा होती है। यह दर्शाइए कि यदि कोई ऐसी युक्ति उपलब्ध हो जो दो सिग्नलों की गुणा कर सके तो ग्राही स्टेशन पर मॉडुलक सिग्नल की पुनःप्राप्ति सम्भव है।
उत्तर
माना उच्च आवृत्ति वाहक तरंग निम्नलिखित है
c(t)= Ac cos ωct
माना आयाम मॉडुलित तरंग का केवल उच्च पार्श्व बैण्ड ही प्रेषित किया जाता है तब संसूचन के बाद अभिग्राही पर उपलब्ध सिग्नल
m(t) = A1 cos (ωc + ωm)t
उक्त दोनों की गुणा करने पर,
cm (t) = AcA1 cos ωc t cos (ωc + ωm)t
= \(\frac{A_{c} A_{1}}{2}\) [cos (2ωc + ωm) t+ cos ωmt]

इस सिग्नल को निम्न आवृत्ति फिल्टर से पास करने पर यह फिल्टर उच्च आवृत्ति घटक = \(\frac{A_{c} A_{1}}{2}\) cos (2ωc + ωm) t को रोक देगा तथा निम्न आवृत्ति घटक \(\frac{A_{c} A_{1}}{2}\) cosωmt को गुजरने देगा। इस प्रकार हमें मॉडुलक सिग्नल पुनः प्राप्त हो जाएगा।

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संचार व्यवस्था बहुविकल्पीय प्रश्नोत्तर

प्रश्न 1.
तीन तरंगें A, B और C जिनकी आवृत्तियाँ क्रमशः 1600 किलोहर्ट्स, 5 मेगाहर्ट्स और 60 मेगाहर्ट्स हैं, एक स्थान से दूसरे स्थान पर भेजी जानी हैं। निम्न में से कौन-सा संचार का सर्वोपयुक्त ढंग है
(a) A को आकाश तरंग के रूप में तथा B और C को व्योम तरंगों के रूप में भेजा जाए
(b) A को भू तरंग, B को व्योम तरंग तथा C को आकाश तरंग के रूप में भेजा जाए
(c) B और C को भू तरंग, तथा A को व्योम तरंग के रूप में भेजा जाए
(d) B को भू तरंग तथा A और C को आकाश तरंग के रूप में भेजा जाए।
उत्तर
(b) A को भू तरंग, B को व्योम तरंग तथा C को आकाश तरंग के रूप में भेजा जाए

प्रश्न 2.
एक 100 मीटर लम्बा एन्टेना 500 मीटर ऊँची इमारत पर लगा है। यह संयोजन 2 तरंगदैर्घ्य की तरंगों के लिए एक संचरण टावर (transmission tower) बन जाएगा जहाँ 2 है
(a) ~ 400 मीटर
(b) ~ 25 मीटर
(c) ~150 मीटर
(d) ~ 2400 मीटर।
उत्तर
(a) ~ 400 मीटर

प्रश्न 3.
3 किलोहर्ट्स आवृत्ति का एक वाक् सिग्नल, 1 मेगाहर्ट्स आवृत्ति के एक वाहक सिग्नल को आयाम मॉडुलीकरण द्वारा मॉडुलित करने के लिए प्रयुक्त किया गया है। पार्श्व बैण्डों की आवृत्तियाँ होंगी
(a) 1.003 मेगाहर्ट्स व 0:997 मेगाहर्ट्स
(b) 3001 किलोहर्ट्स व 2997 किलोह
(c) 1003 किलोहर्ट्स व 1000 किलोहर्ट्स
(d) 1 मेगाहर्ट्स व 0.997 मेगाहर्ट्स।
उत्तर
(a) 1.003 मेगाहर्ट्स व 0:997 मेगाहर्ट्स

प्रश्न 4.
cm आवृत्ति के एक सन्देश सिग्नल को, आयाम मॉडुलित (AM) तरंग प्राप्त करने के लिए, आवृत्ति की एक वाहक तरंग पर आरोपित (superposed) किया गया है। AM तरंग की आवृत्ति होगी
(a) ωm
(b) ωc
(c) \(\frac{\omega_{c}+\omega_{m}}{2}\)
(d) \(\frac{\omega_{c}-\omega_{m}}{2}\)
उत्तर
(b) ωc

प्रश्न 5.
एक पुरुष की वाणी, मॉडुलीकरण व प्रेषण के पश्चात्, ग्राही को महिला की वाणी की भाँति सुनाई देती (प्रतीत होती) …… है। इसका कारण है
(a) अनुपयुक्त मॉडुलन सूचकांक का चुनाव(0 < m < 1 चुना गया)
(b) आवर्धकों के लिए अनुपयुक्त बैण्ड-चौड़ाई का चुनाव
(c) वाहक तरंगों की आवृत्ति का अनुपयुक्त चुनाव
(d) संचरण में ऊर्जा ह्रास।
उत्तर
(b) आवर्धकों के लिए अनुपयुक्त बैण्ड-चौड़ाई का चुनाव

प्रश्न 6.
एक मूल संचार प्रक्रम में होता है
(A) प्रेषक
(B) सूचना स्रोत
(C) सूचना का उपयोग करने वाला
(D) चैनल
(E) ग्राही।
निम्नलिखित में कौन वह सही क्रम प्रदान करता है जिसमें ये एक मूल संचार प्रक्रम में व्यवस्थित होते हैं
(a) ABCDE
(b) BADEC
(c) BDACE
(d) BEADC.
उत्तर
(b) BADEC .

प्रश्न 7.
आयाम मॉडुलित तरंगों के गणितीय व्यंजक की पहचान कीजिए
(a) Ac sin [{ωc + k1Vm (t)} t + Φ]
(b) Ac sin {ωct + Φ + k2Vm (t)}
(c) { Ac + k2Vm (t)} sin (ωct+Φ)
(d) AcVm(t) sin (ωct+Φ).
उत्तर
(c) { Ac + k2Vm (t)} sin (ωct+Φ)

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संचार व्यवस्था अति लघु उत्तरीय प्रश्नोत्तर

प्रश्न 1.
निम्नलिखित में किसमें अनुरूप (analog) सिग्नल तथा किसमें अंकीय (digital) सिग्नल उत्पन्न होते हैं?

  1. एक कम्पित स्वरित्र द्विभुज
  2. सितार के कम्पित तार की सुस्वर ध्वनि
  3. प्रकाश स्पन्द
  4. NAND गेट (द्वार) का निर्गत।

उत्तर

  1. अनुरूप (analog)
  2. अनुरूप (analog)
  3. अंकीय (digital)
  4. अंकीय (digital)।

प्रश्न 2.
क्या व्योम तरंगें, 60 मेगाहर्ट्स आवृत्ति के (टी०वी०) सिग्नलों को प्रेषित करने के लिए उपयुक्त होंगी?
उत्तर
नहीं, क्योंकि 30 मेगाह से अधिक आवृत्ति की तरंगें, आयनमण्डल द्वारा परावर्तित न होकर पारगमित हो जाती हैं।

प्रश्न 3.
दो तरंगें तथा B जिनकी आवृत्तियाँ 2 मेगाहर्ट्स और 3 मेगाहर्ट हैं, एक ही दिशा में, व्योम तरंग के द्वारा संचरित करने के लिए विकीर्णित की जाती हैं। इनमें से कौन-सी आयनमण्डल से पूर्ण आन्तरिक परावर्तन के पूर्व अधिक दूरी तय कर सकती है?
उत्तर
3 मेगाहर्ट्स की अधिक आवृत्ति की तरंग के लिए वायुमण्डल का अपवर्तनांक अधिक होता है। अत: अधिक आवृत्ति की तरंग के लिए अपवर्तन कोण कम होगा अर्थात् यह तरंग अपने मार्ग से कम मुड़ेगी और पूर्ण आन्तरिक परावर्तन से पूर्व अधिक दूरी तय करेगी।

प्रश्न 4.
आयाम मॉडुलन हेतु, 1 मेगाहर्ट्स आवृत्ति की वाहक तरंगों का उत्पादन करने के लिए आवश्यक, एक समस्वरित आवर्धक परिपथ के LC गुणनफल की गणना कीजिए। · हल :
समस्वरित आवर्धक परिपथ के लिए f= \(\frac{1}{2 \pi \sqrt{L C}}\)
\(\begin{aligned} 1 \times 10^{6} &=\frac{1}{2 \pi \sqrt{L C}} \\ \sqrt{L C} &=\frac{1}{2 \pi \times 10^{6}} \end{aligned}\)
\(L C=\frac{1}{4 \pi^{2} \times 10^{12}}\)

प्रश्न 5.
किसी चैनल से संचरण पर, आयाम मॉडुलित (AM) सिग्नल में, आवृत्ति मॉडुलित सिग्नल (FM) से अधिक रव क्यों होता है?
उत्तर
आयाम मॉडुलन में, वाहक तरंगों के तात्कालिक विभव मान में मॉडुलक तरंग विभव के अनुरूप परिवर्तन किया जाता है। सम्प्रेषण में नॉयज सिग्नल (रव) भी जुड़ जाते हैं तथा ग्राही के लिए मॉडुलेटिंग सिग्नल के एक भाग की भाँति ही कार्य करता है। आवृत्ति मॉडुलन में वाहक तरंगों की आवृत्ति में मॉडुलक तरंग विभव के तात्कालिक मान के अनुरूप परिवर्तन किया जाता है। यह प्रक्रम केवल मॉडुलन स्तर पर होता है; सिग्नल के संचरण के समय नहीं। अत: आवृत्ति मॉडुलित सिग्नल में अधिक नॉयज सिग्नल (रव) नहीं होता है।

संचार व्यवस्था आंकिक प्रश्नोत्तर

प्रश्न 1.
एक दूरदर्शन संचरण टावर ऐन्टिना 20 मीटर की ऊँचाई पर है। इससे कितने क्षेत्र में संकेत प्राप्त हो सकेंगेयदिग्राही एन्टिना

  1. भूतल पर ही,
  2. भूतल से 25 मीटर ऊँचाई पर हो
  3. प्रथम स्थिति के सापेक्ष द्वितीय स्थिति में इसमें होने वाली प्रतिशत वृद्धि का परिकलन कीजिए।

हल
1. h = 20 मीटर
संकेत प्राप्त करने वाले क्षेत्र की त्रिज्या
MP Board Class 12th Physics Solutions Chapter 15 संचार व्यवस्था img 5
संकेत से आच्छादित क्षेत्रफल (A) = πd2
= 3.14x (16)2 किमी2= 3.14×256
= 803.84 किमी2

2.

MP Board Class 12th Physics Solutions Chapter 15 संचार व्यवस्था img 6
= (16+17.9) किमी  33.9 किमी
संकेत से आच्छादित क्षेत्रफल (A’) = πd2= 3.14 × (33.9)2 किमी2
= 3608.52 किमी2

3.  क्षेत्रफल में % वृद्धि = \(\frac { A’ – A }{ A }\)x100%
\(\frac { 3608.52 – 803.84 }{ 803.84 }\) x100 = 348.9%

प्रश्न 2.
आयनमण्डल की एक विशेष परत से परिवर्तित होने वाली व्योम तरंगों की अधिकतम आवृत्ति fmax = 9(Nmax)1/2 पायी जाती है, जहाँ Nmax उस आयनमण्डल की परत में अधिकतम इलेक्ट्रॉन घनत्व है। किसी दिन यह प्रेक्षण किया गया 5 मेगाहर्ट्स से अधिक आवृत्ति के सिग्नल आयनमण्डल को F, परत से परावर्तित होकर प्राप्त नहीं होते हैं जबकि 8 मेगाहर्ट्स से अधिक आवृत्ति के सिग्नल आयनमण्डल को F2 परत से परावर्तन के द्वारा प्राप्त नहीं होते हैं। उस दिन F1 तथा Fपरतों के अधिकतम इलेक्ट्रॉन घनत्व की गणना कीजिए।
हल :
MP Board Class 12th Physics Solutions Chapter 15 संचार व्यवस्था img 7

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MP Board Class 12th Physics Solutions Chapter 1 वैद्युत आवेश तथा क्षेत्र

MP Board Class 12th Physics Solutions Chapter 1 वैद्युत आवेश तथा क्षेत्र

वैद्युत आवेश तथा क्षेत्र NCERT पाठ्यपुस्तक के अध्याय में पाठ्यनिहित प्रश्न एवं उनके उत्तर

प्रश्न 1.
वायु में एक-दूसरे से 30 सेमी दूरी पर रखे दो छोटे आवेशित गोलों पर क्रमशः 2 × 10-7 कूलॉम तथा 3 × 10-7 कूलॉम आवेश हैं। उनके बीच कितना बल है?
हल :
दिया है, गोलों पर आवेश q1 = 2 × 10-7 कूलॉम, q2 = 3 × 10-7 कूलॉम
तथा दूरी r = 30 सेमी = 0.3 मीटर
कूलॉम के नियम से,
गोलों के बीच कार्यरत वैद्यत बल F = \(\frac{1}{4 \pi \varepsilon_{0}} \frac{q_{1} q_{2}}{r^{2}}=9 \times 10^{9} \times \frac{2 \times 10^{2} \times 8 \times 10^{7}}{(0.3)^{2}}\)
= 6 × 10-3 न्यूटन।

प्रश्न 2.
0.4माइक्रोकूलॉम आवेश के किसी छोटे गोले पर अन्य छोटे आवेशित गोले के कारण वायु में 0.2 न्यूटन बल लगता है। यदि दूसरे गोले पर 0.8माइक्रोकूलॉम आवेश हो तो
(a) दोनों गोलों के बीच कितनी दूरी है?
(b) दूसरे गोले पर पहले गोले के कारण कितना बल लगता है?
हल :
(a) दिया है, गोलों पर आवेश q1 = 0.4 माइक्रोकूलॉम = 4 × 10-7 कूलॉम,
q2 = 0.8 माइक्रोकूलॉम = 8 × 10-7 कूलॉम
पहले गोले पर दूसरे गोले के कारण बल F12 = 0.2 न्यूटन
MP Board Class 12th Physics Solutions Chapter 1 वैद्युत आवेश तथा क्षेत्र img 1
⇒ r = 3 x 4 x 10-2 मीटर = 12 सेमी ·
∴ गोलों के बीच दूरी = 12 सेमी।

(b) क्रिया-प्रतिक्रिया के नियम से, दूसरे गोले पर पहले के कारण बल F21 = F12 = 0.2 न्यूटन।

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प्रश्न 3.
जाँच द्वारा सुनिश्चित कीजिए कि \(\frac{k e^{2}}{G m_{e} m_{p}}\) विमाहीन है। भौतिक नियतांकों की सारणी देखकर इस अनुपात का मान ज्ञात कीजिए। यह अनुपात क्या बताता है?
हल :
k की विमाएँ = [ML3A-2T-4] तथा G की विमाएँ = [M-1L3T-2]
MP Board Class 12th Physics Solutions Chapter 1 वैद्युत आवेश तथा क्षेत्र img 2
अतः राशि \(\frac{k e^{2}}{G m_{e} m_{p}}\) विमाहीन है।

आंकिक भाग का हल :
k = 9 x 109 न्यूटन-मीटर 2 /कूलॉम2
e = 1.6 x 10-19 कूलॉम
G = 6.67 x 10-11 न्यूटन-मीटर/किग्रा,
me = 9.1 x 10-31 किग्रा तथा mp = 1.66 x 10-27 किग्रा
MP Board Class 12th Physics Solutions Chapter 1 वैद्युत आवेश तथा क्षेत्र img 3
अत: यह राशि एक इलेक्ट्रॉन तथा एक प्रोटॉन के बीच लगने वाले स्थिर विद्युत बल तथा गुरुत्वीय बल के अनुपात को प्रदर्शित करती है। ___यह अनुपात बताता है कि इलेक्ट्रॉन व प्रोटॉन के बीच विद्युत बल गुरुत्वाकर्षण बल की तुलना में अधिक शक्तिशाली है।

प्रश्न 4.
(a) “किसी वस्तु का विद्युत आवेश क्वाण्टीकृत है।” इस प्रकथन से क्या तात्पर्य है?
(b) स्थूल अथवा बड़े पैमाने पर विद्युत आवेशों से व्यवहार करते समय हम विद्युत आवेश के क्वाण्टमीकरण की उपेक्षा कैसे कर सकते हैं?
उत्तर :
(a) किसी वस्तु का आवेश क्वाण्टीकृत है, इस कथन का तात्पर्य यह है कि हम किसी वस्तु पर आवेश एक न्यूनतम आवेश (इलेक्ट्रॉनिक आवेश e) के सरल गुणक के रूप में ही हो सकता है। अत: किसी आवेशित वस्तु पर आवेश
q= ± ne
जहाँ n = 1, 2, 3, ……….. तथा e = 1.6x 10-19 कूलॉम

(b) स्थूल अथवा बड़े पैमाने पर आवेशों से व्यवहार करते समय आवेश के क्वाण्टीकरण का कोई महत्त्व नहीं होता और इसकी उपेक्षा की जा सकती है। इसका कारण यह है कि बड़े पैमाने पर व्यवहार में आने वाले आवेश मूल आवेश की तुलना में बहुत बड़े होते हैं। उदाहरण के लिए, 1 माइक्रोकूलॉम आवेश में लगभग 1013 मूल आवेश सम्मिलित हैं। ऐसी अवस्था में आवेश को सतत मानकर व्यवहार किया जा सकता है।

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प्रश्न 5.
जब काँच की छड़ को रेशम के टुकड़े से रगड़ते हैं तो दोनों पर आवेश आ जाता है। इसी प्रकार की परिघटना का वस्तुओं के अन्य युग्मों में भी प्रेक्षण किया जाता है। स्पष्ट कीजिए कि यह प्रेक्षण आवेश संरक्षण नियम से किस प्रकार सामंजस्य रखता है?
उत्तर :
घर्षण द्वारा आवेशन की घटनाएँ आवेश संरक्षण नियम के साथ पूर्ण सामंजस्य रखती हैं। जब इस प्रकार की किसी घटना में दो उदासीन वस्तुओं को रगड़ा जाता है तो दोनों वस्तुएँ आवेशित हो जाती हैं। घर्षण से पूर्व दोनों वस्तुएँ उदासीन होती हैं अर्थात् उनका कुल आवेश शून्य होता है। इस प्रकार के सभी प्रेक्षणों में सदैव यह पाया गया है कि एक वस्तु पर जितना धनावेश आता है, दूसरी वस्तु पर उतना ही ऋणावेश आता है। इस प्रकार घर्षण द्वारा आवेशन के बाद भी दोनों वस्तुओं का नेट आवेश शून्य ही बना रहता है।

प्रश्न 6.
चार बिन्दु आवेश qA = 2 माइक्रोकूलॉम, qB = – 5 माइक्रोकूलॉम, qC = 2 माइक्रोकूलॉम तथा qD = – 5माइक्रोकूलॉम, 10 सेमी भुजा के किसी वर्ग ABCD के शीर्षों पर अवस्थित हैं। वर्ग के केन्द्र पर रखे 1 माइक्रोकूलॉम आवेश पर लगने वाला बल कितना है?
हल :
MP Board Class 12th Physics Solutions Chapter 1 वैद्युत आवेश तथा क्षेत्र img 4
शीर्षों A व C पर रखे आवेश बराबर तथा सजातीय हैं अतः इनके कारण केन्द्र पर रखे आवेश पर लगे
बल \(\overrightarrow{\mathrm{F}}_{O A}\) व \(\overrightarrow{\mathrm{F}}_{O C}\) परिमाण में बराबर व दिशा में विपरीत हैं। अत: एक-दूसरे को निरस्त करेंगे।
अर्थात् \(\overrightarrow{\mathrm{F}}_{O A}+\overrightarrow{\mathrm{F}}_{O C}=0\)

इसी प्रकार शीर्षों B व D पर रखे आवेश बराबर व सजातीय हैं। अत: +2 माइक्रो इनके कारण केन्द्र पर रखे आवेश पर बल \(\overrightarrow{\mathrm{F}}_{O B}\) तथा \(\overrightarrow{\mathrm{F}}_{O D}\) परिमाण में कलाम बराबर व दिशा में विपरीत हैं। अत: ये भी एक-दूसरे को निरस्त करेंगे।
MP Board Class 12th Physics Solutions Chapter 1 वैद्युत आवेश तथा क्षेत्र img 5
अर्थात् परिणामी बल शून्य है।

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प्रश्न 7.
(a) स्थिर विद्युत क्षेत्र रेखा एक सतत वक्र होती है अर्थात् कोई क्षेत्र रेखा एकाएक नहीं टूट सकती। क्यों?
(b) स्पष्ट कीजिए कि दो क्षेत्र रेखाएँ कभी-भी एक-दूसरे का प्रतिच्छेदन क्यों नहीं करतीं?
उत्तर :
(a) विद्युत क्षेत्र रेखा वह वक्र है जिसके प्रत्येक बिन्दु पर खींची गई स्पर्श रेखा उस बिन्दु पर विद्युत क्षेत्र की दिशा को प्रदर्शित करती है। ये क्षेत्र रेखाएँ सतत वक्र होती हैं अर्थात् किसी बिन्दु पर एकाएक नहीं टूट सकतीं, अन्यथा उस बिन्दु पर विद्युत क्षेत्र की कोई दिशा ही नहीं होगी, जो असम्भव है।
(b) दो विद्युत क्षेत्र रेखाएँ एक-दूसरे को प्रतिच्छेदित नहीं कर सकतीं; क्योंकि इस स्थिति में कटान बिन्दु पर दो स्पर्श रेखाएँ खींची जाएँगी जो उस बिन्दु पर विद्युत क्षेत्र की दो दिशाएँ प्रदर्शित करेंगी जो असम्भव है।

प्रश्न 8.
दो बिन्दु आवेश qA = 3 माइक्रोकूलॉम तथा qB = -3 माइक्रोकूलॉम निर्वात में एक-दूसरे से 20 सेमी दूरी पर स्थित हैं।
(a) दोनों आवेशों को मिलाने वाली रेखा AB के मध्य-बिन्दु O पर विद्युत क्षेत्र कितना है?
(b) यदि 1.5 ×10-9 कूलॉम परिमाण का कोई ऋणात्मक परीक्षण आवेश इस बिन्दु पर रखा जाए तो यह परीक्षण आवेश कितने बल का अनुभव करेगा?
हल :
(a) आवेश qA धनात्मक तथा qB ऋणात्मक है; अत: मध्य-बिन्दु O पर qA व qB दोनों के कारण विद्युत क्षेत्र की दिशा O से B की ओर होगी।
अत: मध्य-बिन्दु पर विद्युत-क्षेत्र की तीव्रता
E = EA + EB = 9 × 109 × \(\frac{q}{(O A)^{2}}\)
+ 9 × 109 × \(\frac{q}{(O B)^{2}}\) [जहाँ q = | qA| = | qB|]
= 9 × 109 \(\left[\frac{3 \times 10^{-6}}{0.1}+\frac{3 \times 10^{-6}}{0.1}\right]\)
= 5.4 × 105 न्यूटन/कूलॉम। (AB दिशा में)
MP Board Class 12th Physics Solutions Chapter 1 वैद्युत आवेश तथा क्षेत्र img 6

(b) मध्य-बिन्दु O पर रखे गए Q = – 1.5 × 10-9 कूलॉम के आवेश पर बल
F = QE = 1.5 × 10-9 × 5.4 × 10-9
= 8.1- 10-4 न्यूटन। (OA दिशा में)

प्रश्न 9.
किसी निकाय में दो आवेश qA = 2.5 x 10-7 कूलॉम तथा qB = – 2.5 x 10-7 कूलॉम क्रमशः दो बिन्दुओं A (0, 0, – 15 सेमी) तथा B (0, 0, + 15 सेमी) पर अवस्थित हैं। निकाय का कुल आवेश तथा विद्युत द्विध्रुव आघूर्ण क्या है?
हल :
निकाय का कुल आवेश
q = qA + qB = 0
MP Board Class 12th Physics Solutions Chapter 1 वैद्युत आवेश तथा क्षेत्र img 7
(∴ दोनों आवेश परिमाण में बराबर व विपरीत चिह्न के हैं)
आवेशों के बीच की दूरी 2 a = AB = \(\sqrt{\left[(0-0)^{2}+(0-0)^{2}+(15+15)^{2}\right]}\)= 30 सेमी
ya  2a = 0.3 मीटर
∴ विद्युत द्विध्रुव आघूर्ण p= qA × 2 a = 2.5 × 10-7Cx 0.3 मीटर
= 7.5 × 10-8 कूलॉम-मीटर।
इसकी दिशा बिन्दु B से A की ओर है।

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प्रश्न 10.
4 × 10-9 कूलॉम-मीटर द्विध्रुव आघूर्ण का कोई विद्युत द्विध्रुव 5 × 104 न्यूटन कूलॉम-1 परिमाण के किसी एकसमान विद्युत क्षेत्र की दिशा से 30° पर संरेखित है। द्विध्रुव पर कार्यरत बल आघूर्ण का परिमाण परिकलित कीजिए।
हल :
दिया है, द्विध्रुव आघूर्ण p = 4 × 10-9 कूलॉम-मीटर, विद्युत क्षेत्र E= 5 × 104 न्यूटन कूलॉम-1, θ = 30° द्विध्रुव पर कार्यरत बल आघूर्ण t = pE sin θ = 4 × 10-9 × 5 × 104 × \(\frac{1}{2}\) = = 10-4 न्यूटन-मीटर।

प्रश्न 11.
ऊन से रगड़े जाने पर कोई पॉलीथीन का टुकड़ा 3 × 10-7 कूलॉम के ऋणावेश से आवेशित पाया
गया।
(a) स्थानान्तरित (किस पदार्थ से किस पदार्थ में ) इलेक्ट्रॉनों की संख्या आकलित कीजिए। (b) क्या ऊन से पॉलीथीन में संहति का स्थानान्तरण भी होता है?
हल :
(a) टुकड़े पर आवेश q = 3 × 10-7 कूलॉम
q = ne से,
n = \(\frac{q}{e}=\frac{3 \times 10^{-7}}{1.6 \times 10^{-19}} \)
= 1.875 × 1012
∵ पॉलीथीन का टुकड़ा ऋणावेशित है। अत: 1.875 × 1012 इलेक्ट्रॉन ऊन से पॉलीथीन पर स्थानान्तरित हुए हैं।

(b) हाँ, संहति का भी स्थानान्तरण होता है।
∵ एक इलेक्ट्रॉन का द्रव्यमान me = 9.1 × 10-31 किग्रा
∴ ऊन से पॉलीथीन में स्थानान्तरित संहति m = nme = 1.875 × 1012 × 9.1 × 10-31
= 1.7 × 10-18 किग्रा।

प्रश्न 12.
(a) दो विद्युतरोधी आवेशित ताँबे के गोलों A तथा B के केन्द्रों के बीच की दूरी 50 सेमी है। यदि दोनों गोलों पर पृथक्-पृथक् आवेश 6.5 × 10-7कूलॉम हैं तो इनमें पारस्परिक स्थिर विद्युत प्रतिकर्षण बल कितना है? गोलों के बीच की दूरी की तुलना में गोलों A तथा B की त्रिज्याएँ नगण्य हैं।
(b) यदि प्रत्येक गोले पर आवेश की मात्रा दो गुनी तथा गोलों के बीच की दूरी आधी कर दी जाए तो प्रत्येक गोले पर कितना बल लगेगा?
हल :
(a) दिया है, गोलों पर आवेश q1 = q2 = 6.5 x 10-7 कूलॉम
∵ बीच की दूरी r = 50 सेमी = 0.5 मीटर
∴ बीच की दूरी की तुलना में गोलों की त्रिज्याएँ नगण्य हैं। अत: गोले बिन्दु आवेश की भाँति व्यवहार करेंगे।
गोलों के बीच प्रतिकर्षण बल F = \(\frac{1}{4 \pi \varepsilon_{0}} \frac{q_{1} q_{2}}{r^{2}}\)
= 9 × 109 × \(\frac{6.5 \times 10^{-7} \times 6.5 \times 10^{-7}}{(0.5)^{2}}\)
= 1.521 × 10-2 न्यूटन।

(b)
MP Board Class 12th Physics Solutions Chapter 1 वैद्युत आवेश तथा क्षेत्र img 8
अतः प्रत्येक गोले पर बल = 16 × 1.521 × 10-2
= 0.24 न्यूटन।

प्रश्न 13.
मान लीजिए प्रश्न 12 में गोले A तथा B साइज में सर्वसम हैं तथा इसी साइज का कोई तीसरा अनावेशित गोला पहले तो पहले गोले के सम्पर्क, तत्पश्चात् दूसरे गोले के सम्पर्क में लाकर, अन्त में दोनों से ही हटा लिया जाता है। अब A तथा B के बीच नया प्रतिकर्षण बल कितना है?
हल :
माना प्रारम्भ में प्रत्येक गोले ‘A’ व ‘B’ पर अलग-अलग q आवेश है। (q = 6.5 × 10-7 कूलॉम)
माना तीसरा अनावेशित गोला C है।
∵ गोले A व C समान आकार के हैं। अतः परस्पर स्पर्श कराने पर ये कुल आवेश (qA + qC = q+ 0) को आधा-आधा बाँट लेंगे।
MP Board Class 12th Physics Solutions Chapter 1 वैद्युत आवेश तथा क्षेत्र img 9

प्रश्न 14.
चित्र 1.4 में किसी ,एकसमान स्थिर विद्युत क्षेत्र में तीन आवेशित कणों के पथचिह्न (tracks) दर्शाए गए हैं। तीनों आवेशों के चिह्न लिखिए। इनमें से किस कण का आवेश-संहति अनुपात (\(\frac{\boldsymbol{q}}{m}\)) अधिकतम है?
MP Board Class 12th Physics Solutions Chapter 1 वैद्युत आवेश तथा क्षेत्र img 10
उत्तर :
किसी विद्युत क्षेत्र में क्षेत्र के लम्बवत् गतिमान आवेशित कण का पाश्विक विस्थापन
MP Board Class 12th Physics Solutions Chapter 1 वैद्युत आवेश तथा क्षेत्र img 11
जहाँ x कणों द्वारा विद्युत क्षेत्र के लम्ब दिशा में तय दूरी तथा Vx, X-अक्ष की दिशा में वेग है। यदि सभी कण विद्युत क्षेत्र में समान वेग Vx से प्रवेश करते हैं तो
y ∝ \(\frac{\boldsymbol{q}}{m}\)
(∵ विद्युत क्षेत्र की लम्बाई x सबके लिए समान है)
∵कण (3) का विक्षेप सर्वाधिक है। अत: इसके लिए \(\frac{\boldsymbol{q}}{m}\) का मान सर्वाधिक होगा।

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प्रश्न 15.
एकसमान विद्युत क्षेत्र \(\overrightarrow{\mathbf{E}}=3 \times 10^{3} \hat{\mathbf{i}}\) न्यूटन कूलॉम पर विचार कीजिए।
(a) इस क्षेत्र का 10 सेमी भुजा के वर्ग के उस पार्श्व से जिसका तल y-z तल के समान्तर है, गुजरने वाला फ्लक्स क्या है?
(b) इसी वर्ग से गुजरने वाला फ्लक्स कितना है यदि इसके तल का अभिलम्ब X-अक्ष से 60° का कोण बनाता है?
हल :
दिया है, \(\overrightarrow{\mathbf{E}}=3 \times 10^{3} \hat{\mathbf{i}}\) न्यूटन/कूलॉम
(a) वर्ग की भुजा = 10 सेमी = 0.1 मीटर
∴ वर्ग का क्षेत्रफल ΔS = (0.1)2 मीटर2 ⇒ ∆S = 0.01 मीटर2
∵ वर्ग का तल Y-z समतल के समान्तर है।
अत: इस पर अभिलम्ब इकाई सदिश \(\hat{n}=\hat{i}\) होगा।
∴ \(\Delta \overrightarrow{\mathrm{S}}=0.01 \hat{\mathrm{i}}\) मीटर 2
∴ वर्ग के फलक से गुजरने वाला फ्लक्स \(\phi_{E}=\overrightarrow{\mathrm{E}} \cdot \Delta \overrightarrow{\mathrm{S}}=\left(3 \times 10^{3} \hat{\mathrm{i}}\right) \cdot(0.01 \hat{\mathrm{i}})\)
= 30 न्यूटन-मीटर/कूलॉम।
MP Board Class 12th Physics Solutions Chapter 1 वैद्युत आवेश तथा क्षेत्र img 12

(b) ∵ विद्युत-क्षेत्र X-अक्ष के अनुदिश है तथा वर्ग पर अभिलम्ब X-अक्ष से 60° का कोण बनाता है,
∴ \(\overrightarrow{\mathrm{E}}\) व \(\overrightarrow{\mathrm{n}}\) के बीच का कोण 60° होगा।
∴ वर्ग से गुजरने वाला फ्लक्स \(\phi_{E}=\overrightarrow{\mathrm{E}} \cdot \Delta \overrightarrow{\mathrm{S}}=E \Delta S \cos 60^{\circ}\)
= (3 x 103न्यूटन/कूलॉम) × (0.01 मीटर) × \(\frac{1}{2}\)
= 15 न्यूटन-मीटर2 / कूलॉम।

प्रश्न 16.
प्रश्न 15 में दिए गए एकसमान विद्युत क्षेत्र का 20 सेमी भुजा के किसी घन से (जो इस प्रकार अभिविन्यासित है कि उसके फलक निर्देशांक तलों के समान्तर हैं) कितना नेट फ्लक्स गुजरेगा?
हल :
एक घन के 6 फलक होंगे। इनमें से दो फलक Y-Z समतल के, दो Z-X समतल के तथा दो X-Y समतल के समान्तर होंगे।
∵ विद्युत क्षेत्र \(\overrightarrow{\mathrm{E}}=3 \times 10^{3} \hat{\mathrm{i}}\) न्यूटन/कूलॉम X-अक्ष के अनुदिश है। अतः यह Z-X तथा X-Y समतलों के समान्तर फलकों के समान्तर होगा।
∴ इन चारों फलकों से गुजरने वाला फ्लक्स शून्य होगा।
∴ विद्युत क्षेत्र एकसमान है। अत: Y-Z समतल के समान्तर फलकों में से जितना फ्लक्स एक फलक से अन्दर प्रविष्ट होगा उतना ही फ्लक्स दूसरे फलक से बाहर आएगा।
अत: घन से गुजरने वाला नेट फ्लक्स शून्य होगा।

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प्रश्न 17.
किसी काले बॉक्स के पृष्ठ पर विद्युत क्षेत्र की सावधानीपूर्वक ली गई माप यह संकेत देती है कि बॉक्स के पृष्ठ से गुजरने वाला नेट फ्लक्स 8.0 x 103 न्यूटन-मीटर2/कूलॉम है।
(a) बॉक्स के भीतर नेट आवेश कितना है?
(b) यदि बॉक्स के पृष्ठ से नेट बहिर्मुखी फ्लक्स शून्य है तो आप यह निष्कर्ष निकालेंगे कि बॉक्स के भीतर . कोई आवेश नहीं है? क्यों अथवा क्यों नहीं?
हल :
(a) गाउस प्रमेय से, \(\phi_{E}=\frac{q}{\varepsilon_{0}}\)
∴ \(q=\varepsilon_{0} \phi_{E}\) = 8.854 x 10-12 x 8.0 x 103 = 7.08 x 10-8 कूलॉम
∴ बॉक्स के भीतर स्थित आवेश 0.071 माइक्रोकूलॉम है।

(b) गाउस प्रमेय से, \(\phi_{E}=\frac{q}{\varepsilon_{0}}\)
⇒ \(q=\varepsilon_{0} \phi_{E}\)
∵ \(\phi_{E}=0\) (∴ बॉक्स के भीतर नेट आवेश q= 0)
अतः इससे यह निष्कर्ष निकलता है कि बॉक्स के भीतर नेट आवेश शून्य है यद्यपि उसके भीतर विभिन्न आवेश हो सकते हैं।

प्रश्न 18.
चित्र 1.6 में दर्शाए अनुसार 10 सेमी भुजा के किसी वर्ग के केन्द्र से ठीक 5 सेमी ऊँचाई पर कोई + 10 माइक्रोकूलॉम का आवेश रखा है। इस वर्ग से गुजरने वाले 5 सेमी विद्युत फ्लक्स का परिमाण क्या है?
हल :
एक ऐसे घन की कल्पना कीजिए, जिसका केन्द्र वह बिन्दु है, जिस पर आवेश रखा है तथा जिसका एक फलक. दिया गया वर्ग है।
गाउस के प्रमेय से,
घन के पृष्ठ से गुजरने वाला फ्लक्स
= \(\frac{1}{\varepsilon_{0}}\) x घन के भीतर कुल आवेश = \(\frac{q}{\varepsilon_{0}}\)
∵ घन के सभी 6 फलक केन्द्र के सापेक्ष समान स्थिति में हैं,
∴ प्रत्येक फलक से गुजरने वाला फ्लक्स
ΦE = \(\frac{1}{6} \times \frac{q}{\varepsilon_{0}}=\frac{10 \times 10^{-6}}{6 \times 8.854 \times 10^{-12}}\)
= 1.88 x 105 न्यूटन-मीटर2/कलॉम।
MP Board Class 12th Physics Solutions Chapter 1 वैद्युत आवेश तथा क्षेत्र img 13

प्रश्न 19.
2.0 माइक्रोकूलॉम का कोई बिन्दु आवेश किसी किनारे पर 9.0 सेमी किनारे वाले किसी घनीय गाउसीय पृष्ठ के केन्द्र पर स्थित है। पृष्ठ से गुजरने वाला नेट फ्लक्स क्या है?
हल :
गाउस के प्रमेय से,
घन के पृष्ठ से गुजरने वाला फ्लक्स ΦE= \(\frac{1}{\varepsilon_{0}}\) घन के भीतर स्थित कुल आवेश
∵ यहाँ घन के भीतर स्थित आवेश q = 2.0 माइक्रोकूलॉम
ΦE = \(\frac{1}{8.854 \times 10^{-12}} \) x 2.0 x 10-6
= 2. 26 x 105 न्यूटन-मीटर2 / कूलॉम।

प्रश्न 20.
किसी बिन्दु आवेश के कारण, उस बिन्दु को केन्द्र मानकर खींचे गए 10 सेमी त्रिज्या के गोलीय गाउसीय पृष्ठ पर विद्युत फ्लक्स -1.0 x 103 न्यूटन-मीटर2/कूलॉम है। (a) यदि गाउसीय पृष्ठ की त्रिज्या दो गुनी कर दी जाए तो पृष्ठ से कितना फ्लक्स गुजरेगा? (b) बिन्दु आवेश का मान क्या है?
हल : (a) गाउस प्रमेय के अनुसार किसी बन्द पृष्ठ से गुजरने वाला फ्लक्स, पृष्ठ के भीतर स्थित नेट आवेश पर निर्भर करता है न कि पृष्ठ के आकार पर।
∵ त्रिज्या दोगुनी करने पर भी पृष्ठ के भीतर स्थित नेट आवेश वही बना रहता है। अतः पृष्ठ से अभी भी उतना ही फ्लक्स – 1.0 x 103 न्यूटन मीटर2/कूलॉम गुजरेगा।

(b) सूत्र \(\phi_{E}=\frac{q}{\varepsilon_{0}} \) से,
गोलीय पृष्ठ के केन्द्र पर रखा बिन्दु आवेश \(q=\varepsilon_{0} \phi_{E}\)
= 8.854 x 10-12 x (-1.0 x 103)
= – 8.854 x 10-9 कूलॉम।

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प्रश्न 21.
10 सेमी त्रिज्या के चालक गोले पर अज्ञात परिमाण का आवेश है। यदि गोले के केन्द्र से 20 सेमी दूरी पर विद्युत क्षेत्र 1.5 × 103 न्यूटन/कूलॉम त्रिज्यतः अन्तर्मुखी (radially inward) है तो गोले पर नेट आवेश कितना है?
हल :
गोले के केन्द्र को केन्द्र मानते हुए 20 सेमी त्रिज्या का गाउसीय गोलीय पृष्ठ खींचा। इस पृष्ठ के प्रत्येक बिन्दु पर विद्युत क्षेत्र E = 1.5 × 103 न्यूटन/कूलॉम (अन्तर्मुखी है)

MP Board Class 12th Physics Solutions Chapter 1 वैद्युत आवेश तथा क्षेत्र img 14
माना इस पृष्ठ के किसी बिन्दु पर एक सूक्ष्म अल्पांश \(\overrightarrow{d \mathrm{A}}=d A \hat{\mathrm{n}} \) लिया।
तब \(\overrightarrow{\mathrm{E}} \cdot d \overrightarrow{\mathrm{A}}\) = E.dA cos 180° = – E.dA
∴ पृष्ठ से गुजरने वाला कुल फ्लक्स
\(\phi_{E}=\oint_{A} \overrightarrow{\mathrm{E}} \cdot d \overrightarrow{\mathrm{A}}=-\oint_{A} E \cdot d A=-E \oint_{A} d A\)
= – EA = – E [4π × (0.2)2] [∵ A = 4 πr2]
परन्तु गाउस प्रमेय से, कई = \(\phi_{E}=\frac{q}{\varepsilon_{0}}\)
जहाँ q = गाउसीय पृष्ठ के भीतर नेट आवेश = चालक गोले पर कुल आवेश
∴ \(\frac{q}{\varepsilon_{0}}\) = – E [4 π × (0.2)2]
∴ चालक गोले पर आवेश q = – ε0E × 4π × (0.2)2
= – 8.854 × 10-12 × 1.5×103 × 4 × 3.14 × (0.2)2
= – 6.67 × 10-9 कूलॉम
= – 6.67 नैनोकूलॉम।

प्रश्न, 22.
2.4 मीटर व्यास के एकसमान आवेशित चालक गोले का पृष्ठीय आवेश घनत्व 80.0 माइक्रोकूलॉम/मीटर है।
(a) गोले पर आवेश ज्ञात कीजिए।
(b) गोले के पृष्ठ से निर्गत कुल विद्युत फ्लक्स क्या है?
हल :
(a) ∵ गोला एकसमान रूप से आवेशित है,
MP Board Class 12th Physics Solutions Chapter 1 वैद्युत आवेश तथा क्षेत्र img 15
∴ गोले पर आवेश q = 4πr2σ
= 4 × 3.14 × (1.2 मीटर)2 × 80.0 माइक्रो कूलॉम/मीटर2
= 1447 माइक्रोकूलॉम
= 1.45 × 10-3 कूलॉम।

(b) गोले के पृष्ठ से निर्गत फ्लक्स
\(\phi_{E}=\frac{q}{\varepsilon_{0}}=\frac{1.45 \times 10^{-3}}{8.854 \times 10^{-12}}\)
= 1.6 × 108 न्यूटन-मीटर2/कूलॉम।

प्रश्न 23.
कोई अनन्त रैखिक आवेश 2 सेमी दूरी पर 9 × 104 न्यूटन/कूलॉम विद्युत क्षेत्र उत्पन्न करता है। रैखिक आवेश घनत्व ज्ञात कीजिए।
हल :
रैखिक आवेश घनत्व 2 के कारण दूरी पर विद्युत क्षेत्र की तीव्रता
\(E=\frac{\lambda}{2 \pi \varepsilon_{0} r}\) [∴= 2πε0rE]
यहाँ r = 2 सेमी = 2 × 10-2 मीटर, E = 9 × 104 न्यूटन/कूलॉम
∴ रेखीय आवेश घनत्व λ= 2 × \(\frac{22}{7}\) × 8.854 × 10-12 × 2 × 10-2 × 9 × 104
= 1.0 × 10-7 कूलॉम-मीटर-1
= 10 माइक्रोकुलॉम/मीटर।

प्रश्न 24.
दो बड़ी, पतली धातु की प्लेटें एक-दूसरे के समानान्तर एवं निकट हैं। इनके भीतरी फलकों पर, प्लेटों के पृष्ठीय आवेश घनत्वों के चिह्न विपरीत हैं तथा इनका परिमाण 17.0 × 10-22 कूलॉम/मीटर है। (a) पहली प्लेट के बाह्य क्षेत्र में, (b) दूसरी प्लेट के बाह्य क्षेत्र में तथा (e) प्लेटों के बीच में विद्युत क्षेत्र \(\overrightarrow{\mathbf{E}}\) का परिमाण परिकलित कीजिए।
हल :
दिया है, प्रत्येक प्लेट पर पृष्ठीय आवेश घनत्व
σ = 17.0x 10-22 कूलॉम/मीटर2
प्रत्येक एकल प्लेट के कारण प्लेट के समीप किसी बिन्दु पर क्षेत्र E = E2 =
(a) व (b) प्लेटों के बाह्य क्षेत्रों में E1 व E2 परस्पर विपरीत हैं (देखें चित्र)। अत: बाह्य क्षेत्रों में नेट विद्युत-क्षेत्र की तीव्रता E = E1 – E2 = 0 शून्य होगी।
(c) प्लेटों के बीच के स्थान में E1 व E2 दोनों एक ही दिशा में होंगे।
MP Board Class 12th Physics Solutions Chapter 1 वैद्युत आवेश तथा क्षेत्र img 16
∴ नेट विद्युत क्षेत्र की तीव्रता E = E1 + E2 = \(\frac{\sigma}{2 \varepsilon_{0}}+\frac{\sigma}{2 \varepsilon_{0}}\)
E = \(\frac{\sigma}{\varepsilon_{0}}=\frac{17.0 \times 10^{-22}}{8.854 \times 10^{-12}}\)
= 1.92 x 10-10 न्यूटन/कूलॉम।
विद्युत क्षेत्र की दिशा प्लेटों के लम्बवत् धन से ऋण प्लेट की ओर होगी।

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प्रश्न 25.
मिलिकन तेल बूंद प्रयोग में 2.55 x 104 न्यूटन/कूलॉम के नियत विद्युत क्षेत्र के प्रभाव में 12 इलेक्ट्रॉन ‘ आधिक्य की कोई तेल बूंद स्थिर रखी जाती है। तेल का घनत्व 1. 26 ग्राम सेमी-3 है। बूँद की त्रिज्या का आकलन कीजिए। (g= 9.81 मीटर सेकण्ड-2,e = 1.6 x 10-19 कूलॉम)।
हल :
माना बूंद की त्रिज्या r है, तब
बूंद का द्रव्यमान \(m=\frac{4}{3} \pi r^{3} \rho\)
तथा बूंद पर आवेश q = ne
सन्तुलन की अवस्था में, द का भार (mg) = विद्युत बल (qE)
या \(\frac{4}{3} \pi r^{3} \rho \times g=n e E\)
∴ \(r^{3}=\frac{3 n e E}{4 \pi \rho g}\)
यहाँ n = 12,p = 1.26 ग्राम सेमी-3 = 1.26 x 103 किग्रा-मीटर-3, e = 1.6 x 10-19 कूलॉम
E = 2.55 x 104 न्यूटन/कूलॉम, g = 9.81 मीटर/सेकण्ड2
∴ \(r^{3}=\frac{3 \times 12 \times 1.6 \times 10^{-19} \times 2.55 \times 10^{4}}{4 \times 3.14 \times 1.26 \times 10^{3} \times 9.81}\)
= 946 x 10 -21मीटर3
∴ बूंद की त्रिज्या r = (946 x 10-21 मीटर 3)1/3 = 9.81 x 10-7 मीटर = 9.81 x 10-4 मिमी।

प्रश्न 26.
चित्र-1.9 में दर्शाए गए वक्रों में से कौन सम्भावित स्थिर विद्युत क्षेत्र रेखाएँ निरूपित नहीं करते?
MP Board Class 12th Physics Solutions Chapter 1 वैद्युत आवेश तथा क्षेत्र img 17
उत्तर :
केवल चित्र (c) सम्भावित स्थिर विद्युत क्षेत्र रेखाएँ निरूपित करता है।
(a) विद्युत क्षेत्र रेखाएँ सदैव चालक पृष्ठ के लम्बवत् होती हैं, इस चित्र में रेखाएँ चालक पृष्ठ के लम्बवत् नहीं
(b) क्षेत्र रेखाओं को ऋणावेश से धनावेश की ओर जाते दिखाया गया है जो कि सही नहीं है।
(d) क्षेत्र रेखाएँ एक-दूसरे को काट रही हैं जो कि सही नहीं है।
(e) क्षेत्र रेखाएँ बन्द वक्रों के रूप में प्रदर्शित की गई हैं जो कि सही नहीं है।

EXTRA SHOTS

  • वैद्युत बल रेखाएँ किसी चालक के पृष्ठ के प्रत्येक बिन्दु पर लम्बवत् होती हैं।
  • वैद्युत बल रेखाएँ धनावेश से प्रारम्भ होकर ऋणावेश पर समाप्त होती हैं। |
  • वैद्युत बल रेखाएँ कभी बन्द वक्र नहीं बनाती हैं।

प्रश्न 27.
दिकस्थान के किसी क्षेत्र में, विद्युत क्षेत्र सभी जगह Zदिशा के अनुदिश है। परन्तु विद्युत क्षेत्र का परिमाण नियत नहीं है, इसमें एकसमान रूप से Z-दिशा के अनुदिश 105 न्यूटन कूलॉम-1 प्रति मीटर की दर से वृद्धि होती है। वह निकाय जिसका ऋणात्मक Z-दिशा में कुल द्विध्रुव आघूर्ण 10-7 कूलॉम-मीटर के बराबर है, कितना बल तथा बल-आघूर्ण अनुभव करता है?
हल :
प्रश्नानुसार, द्विध्रुव-Z-अक्ष के अनुदिश संरेखित है;
अतः
Px = 0, Py = 0, pz = – 10-7 कूलॉम-मीटर
\(\frac{\partial E}{\partial x}\)=0,\(\frac{\partial E}{\partial y}\)= 0,\(\frac{\partial E}{\partial z}\)=105न्यूटन कूलॉम-1 मीटर-1
MP Board Class 12th Physics Solutions Chapter 1 वैद्युत आवेश तथा क्षेत्र img 18
= 0+ 0+ (-10-7) x 105
→ F = – 0.01 न्यूटन।  (ऋण Z-अक्ष की दिशा में)
∵ विद्युत क्षेत्र Z-अक्ष के अनुदिश है तथा \(\overrightarrow{\mathrm{p}}\), -Z-अक्ष के अनुदिश है; अत: θ = 180°
∴ बल-आघूर्ण t = pE sin 180° = 0

प्रश्न 28.
(a) किसी चालक A, जिसमें चित्र 1.10 (a) में दर्शाए अनुसार कोई कोटर/गुहा (Cavity) है, को Q आवेश दिया गया है। यह दर्शाइए कि समस्त आवेश चालक के बाह्य पृष्ठ पर प्रतीत होना चाहिए।
(b) कोई अन्य चालक B जिस पर आवेश q है, को कोटर/गुहा (Cavity) में इस प्रकार धंसा दिया जाता है कि चालक B चालक A से विद्युतरोधी रहे। यह दर्शाइए कि चालक A के बाह्य पृष्ठ पर कुल आवेश Q+ q है चित्र-1.10 है [चित्र 1.10 (b)]।
MP Board Class 12th Physics Solutions Chapter 1 वैद्युत आवेश तथा क्षेत्र img 19
(c) किसी सुग्राही उपकरण को उसके पर्यावरण के प्रबल स्थिर विद्युत क्षेत्रों से परिरक्षित किया जाना है। सम्भावित उपाय लिखिए।
उत्तर :
(a) हम एक ऐसी गाउसीय सतह की कल्पना करते हैं जो पूर्णतया चालक के भीतर स्थित है तथा चालक के बाह्य पृष्ठ के अत्यन्त समीप है।
∵ चालक के भीतर विद्युत क्षेत्र शून्य होता है; अत: इस गाउसीय सतह से गुजरने वाला नेट विद्युत फ्लक्स शून्य होगा।
तब गाउस प्रमेय से, q= ६0Φ = ६00 = 0
अर्थात् सतह के भीतर आवेश शून्य होगा।
अतः चालक का सम्पूर्ण आवेश उसके बाह्य पृष्ठ पर होगा।

(b) दिया है, चालक A पर कुल आवेश = Q
चालक B पर कुल आवेश = q
माना चालक A में बनी कोटर के पृष्ठ पर q1 आवेश है तथा चालक A के बाह्य पृष्ठ पर Q1 आवेश है। अब चालक A पर कुल आवेश
Q1 + q1 = Q……………….(1)
पुनः एक ऐसे गाउसीय पृष्ठ की कल्पना कीजिए जो पूर्णतः चालक ‘A’ के भीतर स्थित है परन्तु इसके बाह्य पृष्ठ . अत्यन्त समीप है।
∵ चालक के भीतर विद्युत-क्षेत्र शून्य होता है; अत: इस पृष्ठ से गुजरने वाला कुल फ्लक्स शून्य होगा। अत: इस गाउसीय पृष्ठ के भीतर कुल आवेश = 0
अर्थात्
q1 + q = 0 ⇒ q1 = – q
∴ समीकरण (1) से, Q1 – q= Q
∴ चालक A के बाह्य पृष्ठ पर कुल आवेश Q1 = Q + q होगा।

(c) खोखले बन्द चालक के भीतर विद्युत-क्षेत्र शून्य होता है। अत: किसी सुग्राही उपकरण को पर्यावरण के प्रबल स्थिर विद्युत-क्षेत्रों से परिरक्षित करने के लिए उसे खोखले बन्द चालक के भीतर रखना चाहिए।

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प्रश्न 29.
किसी खोखले आवेशित चालक में उसके पृष्ठ पर कोई छिद्र बनाया गया है। यह दर्शाइए कि छिद्र में विद्युत क्षेत्र \(\left(\frac{\sigma}{2 \varepsilon_{0}}\right) \hat{\mathbf{n}}\) है, जहाँ \(\hat{\mathbf{n}}\) अभिलम्बवत् दिशा में बहिर्मुखी एकांक सदिश है तथा छिद्र के निकट पृष्ठीय आवेश घनत्व है।
उत्तर :
माना किसी खोखले चालक को कुछ धनावेश दिया गया है, जो तुरन्त ही उसके पृष्ठ पर समान रूप से वितरित हो जाता है। माना आवेश का पृष्ठ घनत्व σ है।
चालक के पृष्ठ के किसी अवयव dA पर विचार कीजिए। स्पष्ट है कि इस क्षेत्रफल अवयव पर उपस्थित आवेश की मात्रा q = σdA होगी। माना इस क्षेत्रफल अवयव के अत्यन्त समीप चालक के पृष्ठ के बाहर तथा अन्दर दो बिन्दु क्रमशः P तथा Q हैं। चूँकि बिन्दु P पृष्ठ के समीप है; अत: चालक के कारण बिन्दु P पर विद्युत क्षेत्र की तीव्रता E = \(\frac{\sigma}{\varepsilon_{0}}\) पृष्ठ के लम्बवत् बाहर की ओर होगी। माना बिन्दु P पर अवयव dA तथा शेष चालक के कारण विद्युत-क्षेत्र की तीव्रताएँ क्रमश: E1 व E2 हैं, तब स्पष्टतया E1 व E2 दोनों पृष्ठ के लम्बवत् बाहर की ओर होंगी तथा परिणामी तीव्रता E, E1 व E2 के योग के बराबर होगी।
अतः E1 + E2 = \(\frac{\sigma}{\varepsilon_{0}}\)

चूँकि बिन्दु Q क्षेत्रफल अवयव dA के अत्यन्त समीप परन्तु P के विपरीत ओर है; अत: इस अवयव के कारण बिन्दु Q पर क्षेत्र की तीव्रता E1 के बराबर परन्तु दिशा में विपरीत होगी, जबकि शेष चालक के कारण Q पर विद्युत क्षेत्र की तीव्रता E2 के बराबर तथा उसी की दिशा में होगी। चूँकि बिन्दु Q चालक के अन्दर है; अतः बिन्दु Q पर परिणामी तीव्रता शून्य होगी।

अतः बिन्दु Q पर परिणामी तीव्रता E2 – E1 = 0 अथवा E1 = E2 [∵ बिन्दु Q पर E1 व E2 के विपरीत हैं।
समीकरण (1) से,
E1 = E2 = \(\frac{\sigma}{2 \varepsilon_{0}}\)
अतः शेष चालक के कारण बिन्दु P पर विद्युत क्षेत्र की तीव्रता
E2 = \(\frac{\sigma}{2 \varepsilon_{0}}\)

अब यदि बिन्दु P पर एक छिद्र (Hole) कर दिया जाए तो क्षेत्र अवयव dA तथा इसके कारण आन्तरिक बिन्दु Q पर विद्युत क्षेत्र E1 दोनों समाप्त हो जाएंगे।
तब विद्युत क्षेत्र E2 छिद्र के किसी बिन्दु पर केवल शेष चालक के कारण शेष रहेगा।
अतः छिद्र पर विद्युत क्षेत्र की तीव्रता
\(\overrightarrow{\mathrm{E}}=\frac{\sigma}{2 \varepsilon_{0}} \hat{\mathrm{n}}\)
जहाँ \(\hat{\mathbf{n}}\) छिद्र पर बहिर्मुखी दिशा में एकांक सदिश है।
MP Board Class 12th Physics Solutions Chapter 1 वैद्युत आवेश तथा क्षेत्र img 20

प्रश्न 30.
गाउस नियम का उपयोग किए बिना किसी एकसमान रैखिक आवेश घनत्व 2 के लम्बे पतले तार के कारण विद्युत क्षेत्र के लिए सूत्र प्राप्त कीजिए।
उत्तर :
एकसमान रैखिक आवेश घनत्व वाले लम्बे पतले तार के कारण विद्युत क्षेत्र — माना एक लम्बे सीधे धनावेशित तार का एकसमान रैखिक आवेश घनत्व λ है। हमें इस तार के कारण किसी बिन्दु P पर विद्युत क्षेत्र की तीव्रता ज्ञात करनी है।
MP Board Class 12th Physics Solutions Chapter 1 वैद्युत आवेश तथा क्षेत्र img 21
बिन्दु P से तार पर लम्ब PO खींचा। तार पर बिन्दु O से x दूरी पर एक O सूक्ष्म अवयव AB= dx लिया।
∵ रैखिक आवेश घनत्व = λ
∴ अवयव dx पर आवेश की मात्रा dq = λdx
इस अवयव dx के कारण बिन्दु P पर
विद्युत क्षेत्र की तीव्रता dE =\(\frac{1}{4 \pi \varepsilon_{0}} \cdot \frac{d q}{(A P)^{2}}\) (AP दिशा में)
माना ∠OPA = θ तथा OP=r
विद्युत क्षेत्र dE को OP के अनुदिश तथा OP के लम्बवत् दिशा में वियोजित करने पर,
OP के लम्बवत् दिशा में वियोजित घटक = dE sin θ व OP के अनुदिश दिशा में वियोजित घटक = dE cos θ
∴ तार लम्बा है तथा बिन्दु 0 के दोनों ओर जाता है। अतः एक ओर के प्रत्येक अवयव dx के संगत दूसरी ओर भी एक अन्य अवयव dx अवश्य ही ऐसा होगा कि इन दोनों के कारण OP के लम्ब दिशा में विद्युत-क्षेत्र के वियोजित घटक परस्पर निरस्त करेंगे जबकि OP की दिशा में वियोजित घटक परस्पर जुड़ जाएंगे।

अतः पूरे तार के कारण बिन्दु P पर विद्युत क्षेत्र की तीव्रता
E = Σ dE cos θ
परन्तु cos θ = \(\frac{O P}{A P}\)
तथा AP2 = OP2 + 0A2
⇒ AP = (r2 + x2)1/2
MP Board Class 12th Physics Solutions Chapter 1 वैद्युत आवेश तथा क्षेत्र img 22

x= r tan θ रखने पर,
dx = r. sec2 θ dθ
x = -∞ ⇒ θ = \(-\frac{\pi}{2}\)
व x = +∞ ⇒ θ = \(\frac{\pi}{2}\)
MP Board Class 12th Physics Solutions Chapter 1 वैद्युत आवेश तथा क्षेत्र img 23

क्षेत्र की दिशा तार के लम्बवत् तथा तार से परे होगी। यदि तार ऋणावेशित है तो क्षेत्र की दिशा तार की ओर होगी।

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प्रश्न 31.
अब ऐसा विश्वास किया जाता है कि स्वयं प्रोटॉन एवं न्यूट्रॉन (जो सामान्य द्रव्य के नाभिकों का निर्माण करते हैं) और अधिक मूल इकाइयों जिन्हें क्वार्क कहते हैं, के बने हैं। प्रत्येक प्रोटॉन तथा न्यूट्रॉन तीन क्वार्को से मिलकर बनता है। दो प्रकार के क्वार्क होते हैं : ‘अप’ क्वार्क (u द्वारा निर्दिष्ट) जिन पर (+\(\frac{2}{3}\)) e आवेश तथा ‘डाउन’ क्वार्क (d द्वारा निर्दिष्ट) जिन पर (-\(\frac{1}{3}\)) आवेश होता है, इलेक्ट्रॉन से मिलकर सामान्य द्रव्य बनाते हैं। (कुछ अन्य प्रकार के क्वार्क भी पाए गए हैं जो भिन्न असामान्य प्रकार का द्रव्य बनाते हैं।) प्रोटॉन तथा न्यूट्रॉन के सम्भावित क्वार्क संघटन सुझाइए।
उत्तर :
दिया है, u = +\(\frac{2}{3}\)e तथा d =-\(\frac{1}{3}\)e
∵ प्रोटॉन पर आवेश = +e
⇒+\(\frac{2}{3}\)e + \(\frac{2}{3}\)e – \(\frac{1}{e}\)= +e
या u + u + d = +e
अतः प्रोटॉन 2u क्वार्क तथा 1d क्वार्क से मिलकर बना है।

COMMON ERRORS

• आवेश के क्वाण्टीकरण के अनुसार किसी वस्तु पर न्यूनतम आवेश इलेक्ट्रॉनिक आवेश (e) है। परन्तु प्रोटॉन एवं न्यूट्रॉन; क्वार्क से मिलकर बने होते हैं। अत: यह स्पष्ट समझ लेना आवश्यक है कि क्वार्क स्वतन्त्र रूप में नहीं पाया जाता है। अत: किसी वस्तु पर न्यूनतम आवेश में ही हो सकता है।

∵ न्यूट्रॉन पर आवेश = 0
⇒ +\(\frac{2}{3}\)e+\(\frac{1}{3}\)e-\(\frac{1}{3}\)e = 0
या u+u+d = 0
अत: न्यूट्रॉन एक u क्वार्क तथा 2d क्वार्क से मिलकर बना है।

प्रश्न 32.
(a) किसी यादृच्छिक स्थिर विद्युत क्षेत्र विन्यास पर विचार कीजिए। इस विन्यास की किसी शून्य-विक्षेप स्थिति (null-point अर्थात् जहाँ \(\overrightarrow{\mathbf{E}}=0\)) पर कोई छोटा परीक्षण आवेश रखा गया है। यह दर्शाइए कि परीक्षण आवेश का सन्तुलन आवश्यक रूप से अस्थायी है।
(b) इस परिणाम का समान परिमाण तथा चिह्नों के दो आवेशों (जो एक-दूसरे से किसी दूरी पर रखे हैं) के सरल विन्यास के लिए सत्यापन कीजिए।
उत्तर :
(a) माना शून्य विक्षेप स्थिति में रखे परीक्षण आवेश का सन्तुलन स्थायी है। अब यदि परीक्षण आवेश को सन्तुलन की स्थिति से थोड़ा-सा विस्थापित किया जाए तो आवेश पर एक प्रत्यानयन बल लगना चाहिए जो आवेश को वापस सन्तुलन की ओर ले जाए। इसका यह अर्थ हुआ कि उस स्थान पर शून्य विक्षेप बिन्दु की ओर जाने वाली क्षेत्र रेखाएँ होनी चाहिए। जबकि स्थिर विद्युत क्षेत्र रेखाएँ कभी भी शून्य विक्षेप बिन्दु तक नहीं पहुँचतीं। अत: हमारी यह परिकल्पना कि परीक्षण आवेश का सन्तुलन स्थायी है, गलत है। यह निश्चित रूप से अस्थायी सन्तुलन है।

(b) माना दो बिन्दु आवेश (प्रत्येक + q) परस्पर 2a दूरी पर रखे हैं। एक बिन्दु आवेश – Q इनके मध्य-बिन्दु पर रखा है।
बिन्दु आवेशों + q,+q के कारण – Q पर कार्यरत बल बराबर तथा विपरीत होने के कारण बिन्दु आवेश – Q सन्तुलन की स्थिति में रहेगा।
MP Board Class 12th Physics Solutions Chapter 1 वैद्युत आवेश तथा क्षेत्र img 24
अब यदि – Q आवेश को x दूरी B की ओर विस्थापित कर दें तो इस पर कार्यरत बल
MP Board Class 12th Physics Solutions Chapter 1 वैद्युत आवेश तथा क्षेत्र img 25

स्पष्ट है कि FPB > FPA अतः कण पर नेट बल PB दिशा में लगेगा जो कण को सन्तुलन की स्थिति से दूर ले जाएगा। अतः कण का मध्य-बिन्दु C पर सन्तुलन अस्थायी है।

प्रश्न 33.
प्रारम्भ में X-अक्ष के अनुदिश υx चाल से गति करता हुआ, दो आवेशित प्लेटों के मध्य क्षेत्र में m द्रव्यमान तथा -q आवेश का एक कण प्रवेश करता है (चित्र-1.14 में कण 1 के समान)। प्लेटों की लम्बाई L है। इन दोनों प्लेटों के बीच एकसमान विद्युत क्षेत्र E बनाए रखा जाता है। दर्शाइए कि प्लेट के अन्तिम किनारे पर कण का ऊर्ध्वाधर विक्षेप \(\frac{q E L^{2}}{\left(2 m v_{x}^{2}\right)}\) है।
अथवा एक आवेशित कण किसी एकसमान विद्युत क्षेत्र में, क्षेत्र के लम्बवत् दिशा में गति करता हुआ प्रवेश करता है। दिखाइए कि क्षेत्र के भीतर इस कण का गमन पथ परवलयाकार होगा।
उत्तर :
एकसमान विद्युत क्षेत्र में आवेशित कण (इलेक्ट्रॉन) का गमन-पथ-जब कण का प्रारम्भिक वेग विद्युत क्षेत्र की दिशा के लम्बवत् है-माना धातु की दो समान्तर प्लेटें जिन पर विपरीत आवेश हैं, एक-दूसरे से कुछ दूरी पर स्थित हैं। इन प्लेटों के बीच के स्थान में विद्युत-क्षेत्र एकसमान है। माना ऊपरी प्लेट धनावेशित है, जबकि नीचे की ।। प्लेट ऋणावेशित है। अतः विद्युत क्षेत्र E कागज के तल में नीचे की ओर दिष्ट होगा [चित्र-1.14]।
MP Board Class 12th Physics Solutions Chapter 1 वैद्युत आवेश तथा क्षेत्र img 26
माना कोई कण जिस पर आवेश -q है तथा जो X-अक्ष के अनुदिश गतिमान है, υx वेग से विद्युत क्षेत्र E में प्रवेश करता है। चूँकि विद्युत क्षेत्र Y-अक्ष की ऋणात्मक दिशा में नीचे की ओर है। अतः कण पर Y-अक्ष के अनुदिश लगने वाला बल Fy= qE
कण पर X-अक्ष के अनुदिश कोई बल कार्य नहीं करेगा।
माना कण का द्रव्यमान m है, तब इस बल के कारण कण की गति में उत्पन्न त्वरण \(a_{y}=\frac{F_{y}}{m}=\frac{q E}{m}\)
चूँकि कण का X-अक्ष के अनुदिश प्रारम्भिक वेग υx तथा त्वरण शून्य है। अत: X-अक्ष के अनुदिश t सेकण्ड में चली गई दूरी
x = υxt ………….(1)
चूँकि कण का Y-अक्ष के अनुदिश प्रारम्भिक वेग शून्य तथा त्वरण ay है। अत: Y-अक्ष के अनुदिश t सेकण्ड में चली गई दूरी
MP Board Class 12th Physics Solutions Chapter 1 वैद्युत आवेश तथा क्षेत्र img 27
यह समीकरण y = cx2 के समरूप है तथा परवलय को प्रकट करती है। अत: विद्युत क्षेत्र में अभिलम्बवत् प्रवेश करने वाले आवेशित कण का गमन-पथ परवलयाकार होता है।
माना कण प्लेटों के बीच के क्षेत्र को बिन्दु A(x, y) पर छोड़ता है, तब
बिन्दु A के लिए x = L (∵ प्लेटों की लम्बाई = L)
पथ के समीकरण में मान रखने पर,
MP Board Class 12th Physics Solutions Chapter 1 वैद्युत आवेश तथा क्षेत्र img 28

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प्रश्न 34.
प्रश्न 33 में वर्णित कण की इलेक्ट्रॉन के रूप में कल्पना कीजिए जिसको υx = 2.0 x 106 मीटर सेकण्ड-1 के साथ प्रक्षेपित किया गया है। यदि 0.5 सेमी की दूरी पर रखी प्लेटों के बीच विद्युत क्षेत्र E का मान 9.1x 102 न्यूटन/कूलॉम हो तो ऊपरी प्लेट पर इलेक्ट्रॉन कहाँ टकराएगा?
(|e|= 1.6 x 10-19 कूलॉम, me = 9.1 x 10-31 किग्रा)
हल :
सूत्र y = \(\frac{q E}{2 m v_{x}^{2}})\)x2 से, x2 =(\(\frac{2 m v_{x}^{2}}{q E})\)y
यहाँ E = 9.1 x 102 न्यूटन/कूलॉम, q = e = 1.6x 10-19 कूलॉम,
m= me = 9.1 x 10-31 किग्रा
υx = 2.0 x 106 मीटर सेकण्ड-1
तथा y = \(\frac{0.5}{2}\) सेमी =\(\frac{0.005}{2}\) मीटर
मान रखने पर,
MP Board Class 12th Physics Solutions Chapter 1 वैद्युत आवेश तथा क्षेत्र img 29
∴ x = 1.12 x 10-2 मीटर = 1.12 सेमी
अत: इलेक्ट्रॉन ऊपरी प्लेट से 1.12 सेमी दूरी पर टकराएगा।
यहाँ यह माना गया है कि इलेक्ट्रॉन प्लेटों के बीच के स्थान में ठीक बीच में प्रवेश करता है। अतः प्लेट से टकराते समय इसका ऊर्ध्वाधर विक्षेप y = \(\frac{0.5}{2}\) सेमी लिया गया है।

वैद्युत आवेश तथा क्षेत्र NCERT भौतिक विज्ञान प्रश्न प्रदर्शिका (Physics Exemplar LQ Problems) पुस्तक से चयनित महत्त्वपूर्ण प्रश्नों के हल

वैद्युत आवेश तथा क्षेत्र  बहुविकल्पीय प्रश्नोत्तर

1. एक बिन्दु आवेश +q किसी वियुक्तं चालक तल से d दूरी पर स्थित है। तल के दूसरी ओर के बिन्दु P पर क्षेत्र की दिशा –
(a) तल के लम्बवत् तथा तल से दूर की ओर है
(b) तल के लम्बवत् परन्तु तल की ओर है
(c) बिन्दु आवेश से दूर की ओर दिष्ट है ।
(d) अरीयतः बिन्दु आवेश की ओर है।
उत्तर :
(a) तल के लम्बवत् तथा तल से दूर की ओर है

2. कोई अर्धगोला एकसमान धनावेशित है। गोले के केन्द्र से परे इसके किसी व्यास पर स्थित बिन्दु पर जो केन्द्र से दूर है, विद्युत क्षेत्र की दिशा –
(a) इस व्यास के लम्बवत् है
(b) इस व्यास के समान्तर है
(c) इस व्यास की ओर किसी कोण पर झुकी है
(d) इस व्यास से दूर किसी कोण पर झुकी है।
उत्तर :
(a) इस व्यास के लम्बवत् है

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3. चित्र में विद्यत क्षेत्र रेखाएँ दर्शायी गई हैं जिनमें एक वैद्युत द्विध्रुव P चित्र में दर्शाए अनुसार रखा है। निम्नलिखित प्रकथनों में कौन-सा सही है –
(a) द्विध्रुव किसी बल का अनुभव नहीं करेगा
(b) द्विध्रुव दायीं ओर किसी बल का अनुभव करेगा
(c) द्विध्रुव बायीं ओर किसी बल का अनुभव करेगा
(d) द्विध्रुव ऊपर की ओर किसी बल का अनुभव करेगा।
MP Board Class 12th Physics Solutions Chapter 1 वैद्युत आवेश तथा क्षेत्र img 30
उत्तर :
(c) द्विध्रुव बायीं ओर किसी बल का अनुभव करेगा

4. नीचे दिए गए चित्रों में पृष्ठ से गुजरने वाला विद्युत फ्लक्स –
MP Board Class 12th Physics Solutions Chapter 1 वैद्युत आवेश तथा क्षेत्र img 31

(a) चित्र (iv) में सर्वाधिक है
(b) चित्र (iii) में सर्वाधिक है
(c) चित्र (ii) में चित्र (iii) के समान है, परन्तु चित्र (iv) से कम है
(d) सभी चित्रों में समान है।
उत्तर :
(d) सभी चित्रों में समान है।

वैद्युत आवेश तथा क्षेत्र लघु उत्तरीय प्रश्नोत्तर

प्रश्न 1.
किसी यादृच्छिक पृष्ठ में कोई द्विध्रुव परिबद्ध है। इस पृष्ठ से गुजरने वाला विद्युत फ्लक्स कितना है?
उत्तर :
यादृच्छिक पृष्ठ द्वारा घिरा कुल आवेश (Σq) = q + (-q) = 0, अत: पृष्ठ से गुजरने वाला विद्युत फलक्स + Φ = \(\frac{1}{\varepsilon_{0}} \Sigma q\) = 0

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प्रश्न 2.
किसी धातु के गोलीय खोल की भीतरी त्रिज्या R, तथा बाहरी त्रिज्या R, है। इस खोल की गोलीय गुहिका के केन्द्र पर कोई आवेश Q रखा है। खोल के (i) भीतरी पृष्ठ तथा (ii) बाहरी पृष्ठ पर, पृष्ठीय आवेश-घनत्व क्या होगा?
उत्तर :
गोलीय गुहिका के केन्द्र पर रखे आवेश Q के कारण गोलीय खोल के भीतरी पृष्ठ पर – Q आवेश तथा बाहरी पृष्ठ पर +Q आवेश प्रेरित होगा।
(i) भीतरी पृष्ठ पर पृष्ठीय आवेश घनत्व = –\(\frac{Q}{4 \pi R_{1}^{2}}\)
(ii) बाहरी पृष्ठ पर पृष्ठीय आवेश घनत्व = +\(\frac{Q}{4 \pi R_{2}^{2}}\)
MP Board Class 12th Physics Solutions Chapter 1 वैद्युत आवेश तथा क्षेत्र img 32

प्रश्न 3.
किसी एकसमान आवेशित खोखले सिलिण्डर के लिए विद्युत क्षेत्र रेखाएँ खींचिए।
MP Board Class 12th Physics Solutions Chapter 1 वैद्युत आवेश तथा क्षेत्र img 33
उत्तर :
MP Board Class 12th Physics Solutions Chapter 1 वैद्युत आवेश तथा क्षेत्र img 34

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प्रश्न 4.
किसी a लम्बाई के घन के फलकों से गुजरने वाला फ्लक्स कितना होगा यदि आवेश स्थित हो –
MP Board Class 12th Physics Solutions Chapter 1 वैद्युत आवेश तथा क्षेत्र img 35
(a) A पर जो घन का एक कोना है।
(b) B पर जो किसी कोर का मध्य-बिन्दु है।
(c) C पर जो धन के किसी फलक का केन्द्र है।।
(d) D पर जो B तथा C का मध्य-बिन्दु है।
उत्तर :
(a) यदि 4-4 घन के ब्लॉक ऊपर नीचे रखे हों तथा आवेश q उनके मध्य शीर्ष A पर हो तब दिए गए घन के फलकों से गुजरने वाला वैद्युत फ्लक्स = \(\phi_{E}=\frac{1}{8} \cdot \frac{q}{\varepsilon_{0}}\)

(b) बिन्दु B, चार घनों के ब्लॉक में सममित रूप से स्थित होगा। अतः दिए गए घन के फलकों से गुजरने वाला वैद्युत फ्लक्स \(\phi_{E}=\frac{1}{4} \cdot \frac{q}{\varepsilon_{0}}\)

(c) बिन्दु C, दो घनों के ब्लॉक में सममित रूप से स्थित होगा। अतः दिए गए घन के फलकों से गुजरने वाला
फ्लक्स = \(\phi_{E}=\frac{1}{2} \cdot \frac{q}{\varepsilon_{0}}\)

(d) बिन्दु D भी दो घनों के ब्लॉक में सममित रूप से स्थित होगा अतः दिए गए घन के फलकों से गुजरने वाला वैद्युत फ्लक्स = \(\phi_{E}=\frac{1}{2} \cdot \frac{q}{\varepsilon_{0}}\)

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वैद्युत आवेश तथा क्षेत्र आंकिक प्रश्नोत्तर

प्रश्न 1.
दो आवेशों q तथा -3q को X-अक्ष पर ‘d’ दूरी के पृथकन के साथ रखा गया है। तीसरे आवेश 2q को कहाँ रखा जाए ताकि यह कोई बल अनुभव न करे?
हल : माना 2q आवेश को X-अक्ष पर q आवेश से x दूरी पर, आवेशों से बाहर रखने पर वह कोई बल अनुभव नहीं करता है।
MP Board Class 12th Physics Solutions Chapter 1 वैद्युत आवेश तथा क्षेत्र img 36
अत: 2q आवेश के लिए,
MP Board Class 12th Physics Solutions Chapter 1 वैद्युत आवेश तथा क्षेत्र img 37

प्रश्न 2.
पाँच आवेश, जिनमें प्रत्येक q है, ‘a’ भुजा के किसी नियमित पंचभुज के कोनों पर रखे गए हैं –
(a) इस पंचभुज के केन्द्र O पर विद्युत क्षेत्र कितना होगा?
(b) यदि किसी एक कोने (जैसे A) से आवेश को हटा दिया जाए तो O पर विद्युत क्षेत्र कितना होगा?
(c) यदि A पर आवेश को – १ द्वारा प्रतिस्थापित कर दिया जाए तो O पर विद्युत क्षेत्र कितना होगा?
MP Board Class 12th Physics Solutions Chapter 1 वैद्युत आवेश तथा क्षेत्र img 38
उत्तर :
(a) सममिति के कारण पंचभुज के केन्द्र O पर परिणामी विद्युत क्षेत्र शून्य होगा।

(b) केन्द्र 0 पर परिणामी विद्युत क्षेत्र E = 0
∴ कोने A पर स्थित आवेश q के कारण विद्युत क्षेत्र + शेष चार कोनों पर स्थित आवेशों के कारण विद्युत क्षेत्र = 0
अथवा शेष चार कोनों पर स्थित आवेशों के कारण विद्युत क्षेत्र = – (कोने A पर स्थित आवेश q के कारण विद्युत क्षेत्र)
MP Board Class 12th Physics Solutions Chapter 1 वैद्युत आवेश तथा क्षेत्र img 39

(c) बिन्दु A पर आवेश को – q द्वारा प्रतिस्थापित कर देने पर केन्द्र O पर विद्युत क्षेत्र = (-q आवेश के कारण केन्द्र 0 पर विद्युत क्षेत्र) + (शेष चार कोनों पर स्थित आवेशों के कारण केन्द्र O पर विद्युत क्षेत्र)
MP Board Class 12th Physics Solutions Chapter 1 वैद्युत आवेश तथा क्षेत्र img 40

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MP Board Class 12th Chemistry Solutions Chapter 11 ऐल्कोहॉल, फीनॉल तथा ईथर

MP Board Class 12th Chemistry Solutions Chapter 11 ऐल्कोहॉल, फीनॉल तथा ईथर

ऐल्कोहॉल, फीनॉल तथा ईथर NCERT पाठ्यनिहित प्रश्नोत्तर

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प्रश्न 1.
निम्न को प्राथमिक, द्वितीयक व तृतीयक एल्कोहॉल में वर्गीकृत कीजिये
MP Board Class 12th Chemistry Solutions Chapter 11 ऐल्कोहॉल, फीनॉल तथा ईथर - 1
उत्तर-

  1. 3°.

प्रश्न 2.
उपरोक्त उदाहरण में एलिलिक एल्कोहॉल की पहचान कीजिये।
उत्तर
एलिलिक एल्कोहॉल,
(ii) तथा (vi) है।

प्रश्न 3.
निम्न यौगिकों के नाम IUPAC पद्धतिनुसार कीजिये
MP Board Class 12th Chemistry Solutions Chapter 11 ऐल्कोहॉल, फीनॉल तथा ईथर - 2
उत्तर

  1. 3-क्लोरोमेथिल-2-आइसोप्रोपिलपेन्टेन-1-ऑल ।
  2. 2, 5-डाइमेथिलहेक्सेन-1, 3-डाइऑल
  3. 3-ब्रोमोसाइक्लोहेक्सन-1-ऑल
  4. हेक्स-1-ईन-3-ऑल
  5. 2-ब्रोमो-3 मेथिलब्यूट-2-ईन-1-ऑल ।

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प्रश्न 4.
दर्शाइए कि किस प्रकार निम्न एल्कोहॉल मेथेनल पर उपयुक्त ग्रिगनार्ड अभिकर्मक की क्रिया द्वारा बनाये जाते हैं –
MP Board Class 12th Chemistry Solutions Chapter 11 ऐल्कोहॉल, फीनॉल तथा ईथर - 3
उत्तर
MP Board Class 12th Chemistry Solutions Chapter 11 ऐल्कोहॉल, फीनॉल तथा ईथर - 4

प्रश्न 5.
निम्न अभिक्रिया के उत्पाद की संरचना बनाइये –
MP Board Class 12th Chemistry Solutions Chapter 11 ऐल्कोहॉल, फीनॉल तथा ईथर - 5
उत्तर
MP Board Class 12th Chemistry Solutions Chapter 11 ऐल्कोहॉल, फीनॉल तथा ईथर - 6
MP Board Class 12th Chemistry Solutions Chapter 11 ऐल्कोहॉल, फीनॉल तथा ईथर - 7

प्रश्न 6.
प्रत्येक संभावित उत्पाद की संरचना दीजिये जब निम्न एल्कोहॉल क्रिया करती है
(a) HCI -ZnCl2
(b) HBr तथा
(c) SOCl2के साथ-

  1. ब्यूटेन-1-ऑल,
  2. 2-मेथिलब्यूटेन-2-ऑल।

उत्तर
(a) HCl + ZnCl2 के साथ (ल्यूकास अभिकर्मक)-ब्यूटेन-1-ऑल (1° एल्कोहॉल) कमरे के ताप पर ल्यूकास अभिकर्मक के साथ क्रिया नहीं करते जबकि गंदलापन उत्पन्न होता है केवल गरम करने पर, परन्तु 2-मिथाइल ब्यूटेन-2-ऑल (3° एल्कोहॉल) ल्यूकास अभिकर्मक के साथ कमरे के ताप पर तुरन्त गंदलापन देता है।
MP Board Class 12th Chemistry Solutions Chapter 11 ऐल्कोहॉल, फीनॉल तथा ईथर - 8

(b) HBr के साथ-दोनों ऐल्कोहॉल HBr के साथ क्रिया द्वारा संगत एल्किल ब्रोमाइड देता है।
MP Board Class 12th Chemistry Solutions Chapter 11 ऐल्कोहॉल, फीनॉल तथा ईथर - 9

(c) SOCl2 के साथ – दोनों ऐल्कोहॉल SOCl2 के साथ क्रिया द्वारा संगत एल्किल क्लोराइड देता है।
MP Board Class 12th Chemistry Solutions Chapter 11 ऐल्कोहॉल, फीनॉल तथा ईथर - 10

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प्रश्न 7.
निम्न की अम्ल उत्प्रेरित निर्जलीकरण पर बनने वाले प्रमुख उत्पाद की भविष्यवाणी कीजिये

  1. 1-मेथिलसाइक्लोहेक्सेनॉल तथा
  2. ब्यूटेन-1-ऑल।

उत्तर
MP Board Class 12th Chemistry Solutions Chapter 11 ऐल्कोहॉल, फीनॉल तथा ईथर - 11

प्रश्न 8.
फिनॉल की तुलना में ऑर्थो तथा पैरानाइट्रोफिनॉल ज्यादा अम्लीय है। संगत् फिनॉक्साइड आयन की अनुनादी संरचनायें बनाइये।
उत्तर
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p-नाइट्रो फिनॉक्साइड आयन की अनुनादी संरचनाएँ
प्रतिस्थापी फिनॉल में इलेक्ट्रॉन निकालने वाले समूह (—R प्रभाव) जैसे – NO2समूह की उपस्थिति के कारण फिनॉल का अम्लीय स्वभाव बढ़ जाता है। आर्थो तथा पैरा-नाइट्रोफिनॉक्साइड आयन ज्यादा स्थायी है (बॉक्स में दिखाई गई अतिरिक्त अनुनादी संरचना के कारण) क्योंकि फिनॉल की तुलना में ऋणात्मक आवेश का फिनॉक्साइड आयन पर प्रभावी विस्थापनीकरण होता है। अतः ०, तथा p-नाइट्रोफिनॉल, फिनॉल से ज्यादा अम्लीय होते हैं।

प्रश्न 9.
निम्न अभिक्रियाओं में शामिल समीकरण लिखिये

  1. रीमर-टीमैन अभिक्रिया,
  2. कोल्बे अभिक्रिया।

उत्तर
1. रीमर-टीमैन अभिक्रिया (Reimer-Tiemann reaction) – क्षार NaOH की उपस्थिति में फीनॉल का उपचार क्लोरोफॉर्म के साथ करके अम्लीकृत किये जाने पर -CHO समूह मुख्यत: ऑर्थो स्थान पर प्रवेश करता है।
MP Board Class 12th Chemistry Solutions Chapter 11 ऐल्कोहॉल, फीनॉल तथा ईथर - 13

2. कोल्बे अभिक्रिया (Kolbe reaction)- जब CO2 प्रवाहित करते हुए सोडियम फिनॉक्साइड को गर्म किया जाता है तब कार्बोक्सीकरण प्रक्रिया होती है। p-हाइड्रॉक्सी बेंजोइक अम्ल की सूक्ष्म मात्रा के साथ मुख्य क्रियाफल के रूप में 0-हाइड्रॉक्सी- बेंजोइक अम्ल (सैलिसिलिक अम्ल) का निर्माण होता है।
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प्रश्न 10.
2-एथॉक्सी-3 मिथाइल पेन्टेन की विलियमसन संश्लेषण क्रिया लिखिये। एथेनॉल तथा 3-मिथाइल पेन्टन-2-ऑल से शुरू करते हुये।।
उत्तर
विलियमसन संश्लेषण में एल्काइल हैलाइड (19) की अभिक्रिया सोडियम एल्कॉक्साइड से कराने पर ईथर Sn2 क्रियाविधि द्वारा प्राप्त होता है। अतः एल्काइल हैलाइड एथेनॉल तथा 3-मिथाइल पेन्टेन-2ऑल के एल्कॉक्साइड आयन से प्राप्त होता है। सम्पूर्ण क्रिया निम्न है
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प्रश्न 11.
1-मिथॉक्सी-4 नाइट्रोबेंजीन को बनाने के लिये निम्न में से कौन-से उपयुक्त अभिकारकों के सेट हैं और क्यों?
MP Board Class 12th Chemistry Solutions Chapter 11 ऐल्कोहॉल, फीनॉल तथा ईथर - 17
उत्तर
रासायनिक रूप से दोनों सेट संभावित हैं। सेट (A) में Br समूह इलेक्ट्रॉन निकालने वाले समूह-NO2 समूह के कारण सक्रिय हो जाते हैं। अत: CH3ONa का नाभिकस्नेही आक्रमण के बाद NaBr का विलोपन होने से इच्छित ईथर प्राप्त होता है।
MP Board Class 12th Chemistry Solutions Chapter 11 ऐल्कोहॉल, फीनॉल तथा ईथर - 18
सेट (B) में मिथाइल ब्रोमाइड पर 4-नाइट्रोफिनॉक्साइड आयन का नाभिकस्नेही आक्रमण जैसा उत्पाद देगा।
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प्रश्न 12.
निम्न अभिक्रिया के उत्पाद की भविष्यवाणी कीजिये
(i) CH3-CH2 – CH2-O-CH3+HBr→
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उत्तर
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ऐल्कोहॉल, फीनॉल तथा ईथर NCERT पाठ्य-पुस्तक प्रश्नोत्तर

प्रश्न 1.
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उत्तर

  1. 2, 2, 4 ट्राइमेथिल पेन्टेन-3-ऑल
  2. 5-एथिलहेप्टेन-2, 4 डाइऑल
  3. ब्यूटेन-2, 3, डाइऑल
  4. प्रोपेन-1, 2, 3 ट्राइऑल
  5. 2-मेथिलफिनॉल
  6. 4-मेथिलफिनॉल
  7. 2, 5-डाइमेथिलफिनॉल
  8. 2, 6-डाइमेथिलफिनॉल
  9. 1-मेथॉक्सी-2-मेथिल-प्रोपेन
  10. एथॉक्सीबेंजीन
  11. 1-फिनॉक्सीहेप्टेन
  12. 2-एथॉक्सीब्यूटेन।

प्रश्न 2.
यौगिकों की संरचना बनाइये जिनके IUPAC नाम निम्न है

  1. 2-मेथिलब्यूटेन-2-ऑल
  2. 1-फिनाइल प्रोपेन-2-ऑल
  3. 3, 5 डाइमेथिलहेक्सेन-1, 3, 5 ट्राइऑल .
  4. 2, 3-डाइएथिलफिनॉल
  5. 1-एथॉक्सीप्रोपेन
  6. 2-एथॉक्सी-3-मेथिलपेन्टेन
  7. साइक्लोहेक्सिल मिथेनॉल
  8. 3-साइक्लोहेक्सिल पेन्टेन-3-ऑल
  9. साइक्लोपेन्ट-3-ईन-1-ऑल
  10. 4-क्लोरो-3-एथिल ब्यूटेन-1-ऑल।

उत्तर
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प्रश्न 3.
अणुसूत्र C5H12O के सभी संभावी समावयवी ऐल्कोहॉलों की संरचना तथा उनके IUPAC नाम बताइये।
उत्तर
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प्रश्न 4.
समझाइये क्यों प्रोपेनॉल का क्वथनांक हाइड्रोकार्बन ब्यूटेन की तुलना में ज्यादा होता है ?
उत्तर
ब्यूटेन में अणु आपस में दुर्बल वाण्डर-वाल्स आकर्षण बल द्वारा जुड़े होते हैं जबकि प्रोपेनॉल में ये आपस में प्रबल अन्तराणुक हाइड्रोजन बंध द्वारा जुड़े होते हैं
MP Board Class 12th Chemistry Solutions Chapter 11 ऐल्कोहॉल, फीनॉल तथा ईथर - 28
अतः प्रोपेनॉल का क्वथनांक ब्यूटेन से ज्यादा होता है।

प्रश्न 5.
ऐल्कोहॉल संगत हाइड्रोकार्बन की तुलना में पानी में ज्यादा घुलनशील होते हैं। समझाइये। क्यों?
उत्तर
ऐल्कोहॉल पानी के साथ हाइड्रोजन बंध बनाता तथा पानी के अणुओं के मध्य उपस्थित H-बंध को तोड़ता है। अतः ये पानी में घुलनशील होते हैं।
MP Board Class 12th Chemistry Solutions Chapter 11 ऐल्कोहॉल, फीनॉल तथा ईथर - 29
दूसरी तरफ हाइड्रोकार्बन पानी के साथ हाइड्रोजन बंध नहीं बनाते इसलिये पानी में अघुलनशील होते हैं।

प्रश्न 6.
हाइड्रोबोरेशन-ऑक्सीकरण अभिक्रिया से क्या समझते हैं ? इसे उदाहरण सहित समझाइये।
उत्तर
डाइबोरेन की एल्कीन से योगात्मक अभिक्रिया द्वारा ट्राइएल्किल बोरेन्स का निर्माण हकोता है जिसका एल्किलाइन हाइड्रोजन परॉक्साइड से ऑक्सीकरण करने पर एल्कोहॉल प्राप्त होता है। इस क्रिया को हाइड्रोबोरेशन-ऑक्सीकरण अभिक्रिया कहते हैं।
MP Board Class 12th Chemistry Solutions Chapter 11 ऐल्कोहॉल, फीनॉल तथा ईथर - 30
इस प्रक्रिया में प्राप्त ऐल्कोहॉल, मार्कोनिकॉफ नियम के विपरीत जल के एल्कीन पर प्रत्यक्ष योग से बनते हैं।

प्रश्न 7.
अणुसूत्र C7H8O के मोनोहाइड्रिक फिनॉल की संरचना व IUPAC नाम दीजिये।
उत्तर
तीन समावयवी हैं
MP Board Class 12th Chemistry Solutions Chapter 11 ऐल्कोहॉल, फीनॉल तथा ईथर - 31

प्रश्न 8.
आर्थो व पैरा-नाइट्रोफिनॉल के मिश्रण का पृथक्करण भाप-आसवन द्वारा करते समय समावयवी का नाम बताइये जो भाप आसवित होगा, उसका कारण दीजिये।
उत्तर
0-नाइट्रोफिनॉल भाप अस्थिर (Steam volatile) होता है जबकि p-नाइट्रोफिनॉल नहीं। 0-नाइट्रोफिनॉल में अन्तरा-आण्विक (Intermolecular) H-बंध पाया जाता है । इस कारण इसका क्वथनांक p-नाइट्रोफिनॉल से कम होता है । इसलिए यह भाप स्थिर होता है तथा इसके अशुओं के बीच अन्तः आण्विक H-बंध पाया जाता है। (संरचना के लिए पाठ्यपुस्तक देखें)।

गलनांक, क्वथनांक एवं विलेयता पर प्रतिस्थापियों का प्रभाव यह होता है कि o-हाइड्रॉक्सी व्युत्पन्नों में, अंत:अणुक (Intramolecular) हाइड्रोजन बंधन के कारण गलनांक एवं क्वथनांक निम्न होते हैं अतः ये जल में अविलेय या बहुत कम विलेय होते हैं।

इस प्रकार p-नाइट्रोफीनॉल की अपेक्षा o-नाइट्रोफीनॉल कम विलेय एवं निम्न गलनांक तथा क्वथनांक वाला होता है।
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p-समावयवी की अपेक्षा o-नाइट्रोफीनॉल के अधिक वाष्पशील होने का भी यही कारण होता है।

प्रश्न 9.
क्यूमीन से फिनॉल बनाने की विधि के लिये समीकरण दीजिये।
उत्तर
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प्रश्न 10.
क्लोरोबेंजीन से फिनॉल बनाने की रसायनिक अभिक्रिया दीजिये।
उत्तर
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प्रश्न 11.
एथीन के जलयोजन से एथेनॉल प्राप्त करने की क्रियाविधि लिखिये.
उत्तर
किसी भी अम्ल की उपस्थित में एथीन पर जल का प्रत्यक्ष योग नहीं होता है। अप्रत्यक्ष रूप से एथीन को पहले सान्द्र H2SO4 में से कमरे के ताप पर गुजारा जाता है तो एथिल हाइड्रोजन सल्फेट का निर्माण होता है, जो जल के साथ गर्म करने पर अपघटित होकर एल्कोहॉल बनाता है।
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पद – I – हाइड्रोनियम आयन (H3O+) के इलेक्ट्रोफिलिक आक्रमण द्वारा एल्कीन के प्रोटीनीकरण से कार्बोकेटायन का निर्माण होता है।
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पद – II – कार्बोकेटायन पर यूक्लियोफिलिक आक्रमण द्वारा प्रोटीनीकृत एल्कोहॉल प्राप्त होता है।
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पद – III- अप्रोटीनीकृत (loss of proton) से एल्कोहॉल का निर्माण होता है। आयन (H3O+) के इलेक्ट्रोफिलिक आक्रमण द्वारा एल्कीन के प्रोटीनीकरण से कार्बोकेटायन का निर्माण होता है।
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प्रश्न 12.
आपको बेंजीन, सान्द्र H2SO4 तथा NaOH दिया गया है। इन अभिकर्मकों से फिनॉल बनाने के लिये समीकरण लिखिये।
उत्तर
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प्रश्न 13.
प्रदर्शित कीजिये किस प्रकार आप संश्लेषित करेंगे

  1. 1-फिनाइल एथेनॉल उपयुक्त एल्कीन से
  2. एक एल्किल हैलाइड का उपयोग करते हुये SN2 अभिक्रिया द्वारा साइक्लोहेक्सिल मेथेनॉल।
  3. उपयुक्त एल्किल हैलाइड के उपयोग द्वारा पेन्ट-1-ऑल।

उत्तर
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प्रश्न 14.
दो अभिक्रिया दीजिये जो फिनॉल का अम्लीय स्वभाव दर्शाये फिनॉल की अम्लीयता की तुलना एथेनॉल से कीजिये।
उत्तर
फिनॉल के अम्लीय स्वभाव को प्रदर्शित करने वाली अभिक्रियाएँ
1. सोडियम के साथ अभिक्रिया- फिनॉल, सोडियम के साथ क्रिया द्वारा H, गैस देता है।
MP Board Class 12th Chemistry Solutions Chapter 11 ऐल्कोहॉल, फीनॉल तथा ईथर - 42

2. NaOH के साथ क्रिया- NaOH में घोलने पर फिनॉल सोडियम फिनॉक्साइड तथा पानी देता है।
MP Board Class 12th Chemistry Solutions Chapter 11 ऐल्कोहॉल, फीनॉल तथा ईथर - 43
फिनॉल एथेनॉल से ज्यादा अम्लीय है इसका कारण यह है कि फिनॉल से एक प्रोटॉन निकलने के बाद बना फिनॉक्साइड आयन अनुनाद द्वारा स्थायित्व प्राप्त कर लेता है (संरचना के लिये फिनॉल का अम्लीय स्वभाव पाठ्यपुस्तक में देखें) जबकि एथेनॉल से एक प्रोटॉन निकलने के बाद बना एथॉक्साइड आयन में ऐसा नहीं होता है।

प्रश्न 15.
समझाइये क्यों ऑर्थो-नाइट्रोफिनॉल आर्थो-मिथॉक्सी-फिनॉल से ज्यादा अम्लीय होता है ?
उत्तर
NO2 समूह पर प्रबल -R तथा -1 प्रभाव के कारण OH बंध में इलेक्ट्रॉन घनत्व घट जाता है। अतः प्रोटॉन का त्यागना आसान हो जाता है।
MP Board Class 12th Chemistry Solutions Chapter 11 ऐल्कोहॉल, फीनॉल तथा ईथर - 44

-1 प्रभाव के कारण –OH बंध पर इलेक्ट्रॉन घनत्व घट जाता है तथा इसके कारण प्रोटॉन का निकलना आसान हो जाता है।
MP Board Class 12th Chemistry Solutions Chapter 11 ऐल्कोहॉल, फीनॉल तथा ईथर - 45

-R प्रभाव के कारण ऑक्सीजन परमाणु पर धनात्मक आवेश आता है, जिससे प्रोट्रॉन को मुक्त करना आसान हो जाता है।
इसके अलावा 0-नाइट्रोफिनॉक्साइड, जो प्रोटॉन के निष्कासन के बाद बनता है तथा अनुनाद द्वारा स्थायी हो जाता है।
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0-नाइट्रोफिनॉक्साइड आयन अनुनाद द्वारा स्थायी हो जाते है । अत: 0-नाइट्रोफिनॉल एक प्रबल अम्ल है। दूसरी तरफ …- OCH3 समूह पर + R प्रभाव के कारण O – H बंध पर इलेक्ट्रॉन घनत्व बढ़ जाता हैं इससे प्रोटॉन का निष्कासन कठिन हो जाता है।
MP Board Class 12th Chemistry Solutions Chapter 11 ऐल्कोहॉल, फीनॉल तथा ईथर - 48
दूसरी संरचनाएँ दो ऋणात्मक आवेश एक-दूसरे को प्रतिकर्षित करते हैं तथा o-मिथॉक्सीफिनॉक्साइड आयन अस्थायी हो जाता है। अत: यह 0-नाइट्रोफिनॉल से कम अम्लीय होता है।

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प्रश्न 16.
समझाइये कि बेंजीन रिंग पर जुड़ी कार्बन पर जुड़ा- OH समूह उसको इलेक्ट्रोस्नेही प्रतिस्थापन के लिये सक्रियित करता है।
उत्तर
इलेक्ट्रोफाइल के आक्रमण के दौरान -OH समूह बेंजीन रिंग पर + प्रभाव उत्पन्न करता है। इस कारण, रिंग पर इलेक्ट्रॉन घनत्व मुख्यतः ऑर्थो तथा पैरा स्थिति पर बढ़ जाता है, जिससे इलेक्ट्रोफिलिक प्रतिस्थापन मुख्यतः आर्थो तथा पैरा स्थिति पर होता है । (अनुनादी संरचना के लिये फिनॉल की अम्लीय स्वभाव NCERT पाठ्य-पुस्तक में देखें)।

प्रश्न 17.
निम्न अभिक्रियाओं पर समीकरण दीजिये

  1. प्रोपेन-1-ऑल का क्षारीय KMnO4 विलयन द्वारा ऑक्सीकरण।
  2. फिनॉल के साथ CS2 एवं Br, में
  3. फिनॉल के तनु HNO3 के साथ
  4. फिनॉल की क्लोरोफॉर्म के साथ जलीय NaOH की उपस्थिति में क्रिया।

उत्तर
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प्रश्न 18.
निम्न को उदाहरण सहित समझाइये –

  1. कोल्बे अभिक्रिया
  2. रीमर-टीमेन अभिक्रिया
  3. विलियमसन-ईथर संश्लेषण
  4. असममित ईथर।

उत्तर-
1. एवं

2.
1. रीमर-टीमैन अभिक्रिया (Reimer-Tiemann reaction) – क्षार NaOH की उपस्थिति में फीनॉल का उपचार क्लोरोफॉर्म के साथ करके अम्लीकृत किये जाने पर -CHO समूह मुख्यत: ऑर्थो स्थान पर प्रवेश करता है।
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2. कोल्बे अभिक्रिया (Kolbe reaction)- जब CO2 प्रवाहित करते हुए सोडियम फिनॉक्साइड को गर्म किया जाता है तब कार्बोक्सीकरण प्रक्रिया होती है। p-हाइड्रॉक्सी बेंजोइक अम्ल की सूक्ष्म मात्रा के साथ मुख्य क्रियाफल के रूप में 0-हाइड्रॉक्सी- बेंजोइक अम्ल (सैलिसिलिक अम्ल) का निर्माण होता है।
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3. विलियमसन-ईथर संश्लेषण-एल्किल हैलाइड तथा सोडियम एल्कॉक्साइड के बीच क्रिया होकर ईथर बनते हैं। यह एक नाभिक-स्नेही अभिक्रिया है जिसमें एल्कॉक्साइड आयन से हैलाइड आयन का विस्थापन होता है।
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4. असममित ईथर (Asymmetric Ether)-असममित ईथर वे ईथर होते हैं जिनमें ऑक्सीजन अणु के दोनों ओर दो अलग-अलग समूह जुड़े होते हैं एवं कार्बन के अणु समान होते हैं।
उदाहरण-एथिल मेथिल ईथर (CH3-0-CH2CH3)|

प्रश्न 19.
एथेनॉल के अम्लीय निर्जलीकरण से एथीन बनाने की क्रियाविधि लिखिये।
उत्तर
एथेन बनाने के लिए एथेनॉल का अम्लीय डीहाइड्रेशन क्रिया के निम्न पद हैं
पद 1- एथिल ऑक्सोनियम आयन के निर्माण के लिए एथेनॉल का प्रोटॉनीकरण
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पद 2-कार्बोकेटायन का निर्माण (दर निर्धारक पद)
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पद 3-एथेन बनाने के लिए प्रोटॉन का निष्कासन (Elimination)
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पद 1 में अवशोषित अम्ल पद 3 में मुक्त होते हैं । एथेन के निर्माण के बाद संतुलन को आगे की दिशा में बदलने के लिए इसे हटा दिया जाता है।

प्रश्न 20.
निम्न परिवर्तन किस प्रकार किये जाते हैं –

  1. प्रोपीन → प्रोपेन-2-ऑल
  2. बेन्जॉइल क्लोराइड → बेन्जॉइल एल्कोहॉल
  3. एथिल मैग्नीशियम क्लोराइड → प्रोपेन-1- ऑल
  4. मिथाइल मैग्नीशियम ब्रोमाइड → 2-मिथाइल प्रोपेन-2-ऑल

उत्तर
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प्रश्न 21.
निम्न अभिक्रिया में प्रयोग किये जाने वाले अभिकर्मक का नाम बताइये –

  • प्राथमिक ऐल्कोहॉल का कार्बोक्सिलिक अम्ल में ऑक्सीकरण
  • प्राथमिक ऐल्कोहॉल का एल्डिहाइड में ऑक्सीकरण
  • फिनॉल का 2, 4, 6 ट्राइब्रोमोफिनॉल में ब्रोमीनीकरण
  • बेन्जॉइल एल्कोहॉल को बेन्जोइक अम्ल में।
  • प्रोपेन-2-ऑल को प्रोपीन में निर्जलीकरण
  • ब्यूटेन-2-ऑन को ब्यूटेन-2-ऑल में।

उत्तर

  • अम्लीकृत K2Cr2O7 या उदासीन, अम्लीय या क्षारीय KMnOA
  • पिरिडिनियम क्लोरोक्रोमेट (PCC)CH2CI2 में या 573K पर Cu
  • ब्रोमीन जल (Br2)H2O
  • अम्लीकृत या क्षारीय KMnO4
  • सान्द्र H2SO4, 443 K पर या 85% फॉस्फोरिक अम्ल, 443K पर
  • Ni / H2 T NaBH4 या LiAlH4.

प्रश्न 22.
एथेनॉल का क्वथनांक मिथॉक्सीमेथेन की तुलना में उच्च होने का कारण दीजिये।
उत्तर
एथेनॉल का क्वथनांक मिथॉक्सीमेथेन की तुलना में उच्च इसलिये होता है क्योंकि एथेनॉल की अणुओं के बीच प्रबल अन्तः आण्विक हाइड्रोजन बंध उपस्थित होने के कारण अणु संगुणित रूप में होते हैं। जबकि मिथॉक्सी ईथर में इस प्रकार का H-बंध नहीं होता है।
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प्रश्न 23.
निम्न ईथर के IUPAC नाम दीजिये
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उत्तर

  1. 1-एथॉक्सी-2-मेथिल प्रोपेन
  2. 2-क्लोरो-1-मेथॉक्सी एथेन
  3. 4-नाइट्रोएनीसॉल
  4. 1-मेथॉक्सी प्रोपेन
  5. 1-एथॉक्सी-4, 4-डाइमेथिल साइक्लोहेक्सेन
  6. एथॉक्सी बेंजीन ।

प्रश्न 24.
विलियमसन संश्लेषण द्वारा निम्न ईथरों को बनाने के लिए अभिकर्मक का नाम तथा समीकरण लिखिये

  1. 1-प्रोपॉक्सीप्रोपेन
  2. एथॉक्सीबेंजीन
  3. 2-मेथॉक्सी-2-मेथिलप्रोपेन
  4. 1-मेथॉक्सीएथेन।

उत्तर
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प्रश्न 25.
निश्चित प्रकार के ईथरों को बनाने की विलियमसन संश्लेषण की सीमाओं को उदाहरण सहित समझाइये।
उत्तर
विलियमसन संश्लेषण विधि की सीमाएँ
1. यदि एल्किल हैलाइड प्राथमिक हो तो अच्छा परिणाम निकलता है। यदि द्वितीयक व तृतीयक हैलाइड हो, तो प्रतिस्थापन की जगह विलोपन होता है । यदि तृतीयक हैलाइड का प्रयोग करें तो केवल एल्कीन ही बनता है ईथर नहीं । उदाहरण-CH3ONa के साथ (CH3)3 C-Br की क्रिया में 2-मेथिल प्रोपीन (आइसोक्यूटीन) बनेगा।
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ऐसा इसलिये होता है क्योंकि ऐल्कॉक्साइड केवल न्यूक्लियो-फाइल ही नहीं अपितु प्रबल क्षार भी होता है। अतः एल्किल हैलाइड की क्रिया द्वारा विलोपन क्रिया करते हैं । अतः एथिल तृतीयक ब्यूटिल ईथर बनाने के लिये हमें एथिल हैलाइड तथा सोडियम तृतीयक ब्यूटॉक्साइड उपयोग करना चाहिये।
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2. एरिल हैलाइड तथा विनाइल ईथर को सबस्टेट की तरह ऐरोमैटिक एलिफैटिक ईथर बनाने में नहीं होता है क्योंकि ऐरिल हैलाइड तथा विनाइल हैलाइड न्यूक्लियोफिलिक प्रतिस्थापन के प्रति कम सक्रिय होते हैं।
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प्रश्न 26.
प्रोपेन-1 ऑल से 1-प्रोपॉक्सीप्रोपेन किस प्रकार बनायेंगे, इस अभिक्रिया की क्रियाविधि लिखिये।
उत्तर
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(b) इसे प्रोपेन-1-ऑल के निर्जलीकरण द्वारा बनाया जाता है।
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प्रश्न 27.
द्वितीयक व तृतीयक एल्कोहॉल के अम्ल-निर्जलीकरण द्वारा ईथर का बनना एक उपयुक्त विधि नहीं है, कारण दीजिये।
उत्तर
1° एल्कोहॉल प्रोटोनीकृत होता है फिर दूसरा अणु उस पर आक्रमण करता है। अभिक्रिया SN2 होती है।
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2° तथा 3° भी प्रोटोनीकृत होता है परन्तु दूसरा एल्कोहॉल अणु त्रिविम बाधा के कारण उस पर आक्रमण नहीं करता है। इसलिये प्रोटोनीकृत एल्कोहॉल पानी का एक अणु निकालकर स्थायी 2′ या 3° कार्बोकेटायन बनाता है, जो एक प्रोटॉन निकालकर एल्कीन बनाने को प्राथमिकता देता है।
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इसी प्रकार, 3° ऐल्कोहॉल आइसोब्यूटीन बनाता है।
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प्रश्न 28.
निम्न के साथ हाइड्रोजन आयोडाइड के अभिक्रिया का समीकरण लिखिये

  1. 1-प्रोपॉक्सीप्रोपेन
  2. मेथॉक्सीबेंजीन तथा
  3. बेन्जॉइल एथिल ईथर।

उत्तर
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प्रश्न 29.
इस कथन को समझाइये कि एरिल-एल्किल ईथर में

  1. एल्कॉक्सी समूह बेंजीन रिंग को इलेक्ट्रॉनस्नेही प्रतिस्थापन के लिये सक्रिय करता है तथा
  2. ये नये आने वाले प्रतिस्थापी को ऑर्थो, पैरा स्थिति पर जाने के लिये निर्देशित करता है।

उत्तर
एरिल एल्किल ईथर में +R-प्रभाव के कारण एल्कॉक्सी समूह में इलेक्ट्रॉन घनत्व बेंजीन रिंग पर बढ़ता है। एल्कॉक्सी समूह ऑर्थो, पैरा दिशात्मक होता है तथा बेंजीन रिंग को इलेक्ट्रॉनस्नेही प्रतिस्थापन के प्रति फीनॉल के समान सक्रिय करता है।
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इन संरचनाओं में 0, p पर इलेक्ट्रॉन घनत्व बढ़ जाता है जिससे नया आने वाला इलेक्ट्रोफाइल (+ आवेश स्पिीशीज) 0, p पर जाता है।

प्रश्न 30.
HI की मेथॉक्सीमेथेन के साथ क्रिया की क्रियाविधि लिखिये।
उत्तर
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प्रोटोनीकृत ईथर पर I आयन द्वारा SN2आक्रमण होता है तथा मेथिल आयोडाइड तथा मेथिल ऐल्कोहॉल का मिश्रण बनता है। परन्तु यदि HI अधिकता में लिया जाता है तो (ii) में बना मेथिल एल्कोहॉल भी निम्न क्रियाविधि द्वारा मेथिल आयोडाइड में बदल जाता है।
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प्रश्न 31.
निम्न अभिक्रियाओं के समीकरण लिखिये –

  1. फ्रीडल-क्राफ्ट अभिक्रिया एनीसॉल एल्किलीकरण।
  2. एनीसॉल का नाइट्रीकरण
  3. एनीसॉल का एथेनोइक अम्ल माध्यम में ब्रोमीनीकरण
  4. एनीसॉल का फ्रीडल-क्रॉफ्ट एसिलीकरण।

उत्तर
1. फ्रीडल-क्रॉफ्ट अभिक्रिया-एनिसॉल में फ्रीडल-क्रॉफ्ट अभिक्रिया अर्थात् एल्किल या एरिल समूह 0, p स्थिति पर एल्किल या एरिल हैलाइड की निर्जल AICI (लूईस अम्ल) एक उत्प्रेरक की उपस्थिति में प्रवेश करता है
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2. एनीसॉल का नाइट्रीकरण-नाइट्रीकरण पर ()-तथा p-नाइट्रो एनिसॉल बनता है। OCH;
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3. एनीसॉल का एथेनोइक अम्ल माध्यम में ब्रोमीनीकरण-एनिसॉल में ब्रोमीनीकरण CH3COOH में बने Br, द्वारा होता (आयरन-III ब्रोमाइड उत्प्रेरक की अनुपस्थिति में) है तथा पैरा-समावयवी 90% बनता है। OCH3
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4. एनीसॉल का फ्रीडल-क्रॉफ्ट एसिलीकरण
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प्रश्न 32.
दर्शाइये कि आप किस प्रकार निम्न ऐल्कोहॉलों का उपयुक्त एल्कीनों से संश्लेषण करेंगे
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उत्तर
1. ऐल्कोहॉल निर्जलीकरण पर एल्कीन देते हैं जो एल्कीन बनते हैं वो जल के ! अणु के योग होने पर अपेक्षित ऐल्कोहॉल देते हैं। पानी का योग मारकोनीकॉफ नियमानुसार होता है। जब एल्कीन के निर्जलीकरण द्वारा दो एल्कीन बनते हैं तो देखना पड़ता है कि कौन-सा एल्कीन अपेक्षित ऐल्कोहॉल देगा।
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दोनों एल्कीन, जल के एक अणु से योग करके अपेक्षित एल्कोहॉल देंगे।
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2. यह दो एल्कीन बनाते हैं। ये जल के एक अणु के योग द्वारा अपेक्षित ऐल्कोहॉल देते हैं।
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3.

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पेन्ट-1 ईन पर जल के अणु का योग अपेक्षित एल्कोहॉल देगा। यहाँ ध्यान देने योग्य बात यह है किOH समूह द्विबंध से जुड़ी उस C परमाणु पर जायेगा जिसमें कम संख्या हाइड्रोजन परमाणु हो । पेन्ट-2-ऑन की स्थिति में दोनों द्विबंध रखने वाले कार्बन पर एक-एक हाइड्रोजन उपस्थित है,। अत: यह एल्कीन पेन्टेन-2-ऑल तथा पेन्टेन-3-ऑल देगा।

4.

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2-मेथिल साइक्लोहेक्सिल ब्यूट-2-ईन पर जल के अणु के योग द्वारा अपेक्षित एल्कोहॉल देगा, -OH समूह द्विबंध से जुड़ी उस कार्बन परमाणु पर जायेगा जिसमें H-परमाणु की संख्या कम है।

प्रश्न 33.
जब 3-मेथिल ब्यूटेन-2-ऑल की क्रिया HBr से करायी जाती है, तो निम्न क्रिया होती है
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(संकेत-पद II में बने द्वितीयक कार्बोकेटायन में पुनर्विन्यास द्वारा ज्यादा स्थायी नृतीयक कार्बोकेटायन हाइड्राइड आयन के 3-कार्बन परमाणु से स्थानान्तरण द्वारा बनते हैं।)
उत्तर
ऐल्कोहॉल पहले प्रोटोनीकृत होता है फिर जल का एक अणु निकलकर कार्बोकेटायन बनाता है
MP Board Class 12th Chemistry Solutions Chapter 11 ऐल्कोहॉल, फीनॉल तथा ईथर - 85
अब 2° कार्बोकेटायन पुनव्यविस्थत होकर ज्यादा स्थायी तृतीयक कार्बोकेटायन Cपर निकटवर्ती कार्बन से एक — H परमाणु के निगमन द्वारा बनता है। इसे 1, 2 विस्थापन (शिफ्ट) कहते हैं। इसके बाद Br का योग होता है
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ऐल्कोहॉल, फीनॉल तथा ईथर अन्य महत्वपूर्ण प्रश्नोत्तर

वस्तुनिष्ठ प्रश्न

1. सही विकल्प चुनकर लिखिए

प्रश्न 1.
सोडियम, ऐल्कोहॉल में सुगमता से विलेय हो जाता है, क्योंकि
(a) ऐल्कोहॉल, जल की अपेक्षा अधिक घनत्व वाला है
(b) ऐल्कोहॉल, जल की अपेक्षा हल्का है
(c) ऐल्कोहॉल उदासीन है
(d) ऐल्कोहॉल उभयधर्मी है।
उत्तर
(d) ऐल्कोहॉल उभयधर्मी है।

प्रश्न 2.
निम्नलिखित चार यौगिकों में सर्वाधिक अम्लीय है
(a) फीनॉल
(b) O- नाइट्रोफीमॉल
(c) p-नाइट्रोफीनॉल
(d) m- नाइट्रोफीनॉल।
उत्तर
(c) p-नाइट्रोफीनॉल

प्रश्न 3.
फीनॉल से सैलिसिल्डिहाइड बनाने के लिए अभिक्रिया है
(a) रोजेनमुण्ड अभिक्रिया
(b) फ्रीडल-क्रॉफ्ट अभिक्रिया
(c) रीमर-टीमैन अभिक्रिया
(d) न्यूक्लियोफिलिक अभिक्रिया।
उत्तर
(c) रीमर-टीमैन अभिक्रिया

प्रश्न 4.
प्रोपेनॉल-2 को प्रोपेनोन में परिवर्तित करने वाला सर्वाधिक प्रभावी अभिकर्मक है
(a) LiAIH4
(b) Cu/300°C
(c) CO2
(d) K2Cr207.
उत्तर
(b) Cu/300°C

प्रश्न 5.
कार्बोलिक अम्ल है
(a) फीनॉल
(b) फेनिल बेंजोएट
(c) फेनिल एसीटेट
(d) मेथिल सैलिसिलेट।
उत्तर
(a) फीनॉल

प्रश्न 6.
कौन-सा यौगिक विन्टर ग्रीन के तेल के रूप में जाना जाता है
(a) फेनिल बेंजोएट
(b) फेनिल सैलिसिलेट
(c) फेनिल एसीटेट
(d) सैलाल।
उत्तर
(d) सैलाल।

प्रश्न 7.
ल्यूकास अभिकर्मक की क्रिया किसके साथ तीव्रतम होती है
(a) (CH3)3-C-OH
(b) (CH3)2CHOH
(c) CH3-(CH2)2OH
(d) CH3-CH2OH.
उत्तर
(a) (CH3)3-C-OH

प्रश्न 8.
कम ताप पर CS2 में, फोनॉल Br2 के साथ क्रिया करके देता है
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MP Board Class 12th Chemistry Solutions Chapter 11 ऐल्कोहॉल, फीनॉल तथा ईथर - 89
MP Board Class 12th Chemistry Solutions Chapter 11 ऐल्कोहॉल, फीनॉल तथा ईथर - 90
उत्तर
MP Board Class 12th Chemistry Solutions Chapter 11 ऐल्कोहॉल, फीनॉल तथा ईथर - 91

प्रश्न 9.
तप्त Al2O3 पर एथेनॉल की वाष्प प्रवाहित करने पर कौन-सा यौगिक प्राप्त होता है
(a) एथिल ईथर
(b) ऐसीटोन
(c) ऐसिटैल्डिहाइड
(d) एथेन।
उत्तर
(a) एथिल ईथर

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प्रश्न 10.
कौन-सा यौगिक एस्प्रिन है
(a) एसिटिल सैलिसिलिक अम्ल
(b) सैलिसिलिक अम्ल
(c) एसिटामाइड
(d) सैलिसिल एमाइड।
उत्तर
(a) एसिटिल सैलिसिलिक अम्ल

प्रश्न 11.
निम्न यौगिक थैलिक अम्ल से क्रिया करके अम्ल क्षार सूचक देता है
(a) क्लोरोबेंजीन
(b) फीनॉल
(c) ऐल्कोहॉल
(d) ईथर ।
उत्तर
(b) फीनॉल

प्रश्न 12.
बैकेलाइट बनता है, जब फीनॉल निम्न के साथ संघनित होता है
(a) HCHO
(b) CH3CHO
(c) C2H5CHO
(d) CH3COCH2.
उत्तर
(a) HCHO

प्रश्न 13.
निश्चेतक के रूप में प्रयुक्त होता है
(a) CH3OH
(b) C2H5OH
(c) CH3-CHO
(d) (C2H5)2O
उत्तर
(d) (C2H5)2O

प्रश्न 14.
ल्यूकास अभिकर्मक है
(a) सान्द्र HCl
(b) सान्द्र H2SO4
(c) निर्जल ZnCl2
(d) सान्द्र HCl और निर्जल ZnCl2 I
उत्तर
(d) सान्द्र HCl और निर्जल ZnCl2 I

प्रश्न 15.
निम्नलिखित द्वारा ईथर तथा ऐल्कोहॉल में विभेद कर सकते हैं
(a) Na के साथ क्रिया
(b) PCl5 से क्रिया
(c) 2, 4 डाइनाइट्रो फेनिल हाइड्रेजीन से क्रिया
(d) इनमें से कोई नहीं।
उत्तर
(a) Na के साथ क्रिया

प्रश्न 16.
शराब को विषैला बनाने के लिये प्रयुक्त किया जाता है
(a) मेथिल एल्काहाल
(b) एथिल ऐल्कोहॉल
(c) ग्लिसरीन
(d) उपर्युक्त सभी।
उत्तर
(a) मेथिल एल्काहाल

प्रश्न 17.
लीबरमैन नाइट्रोसो परीक्षण देता है
(a) C6H5OH
(b) CH3-OH
(c) C2H5-OH
(d) CH3-O-CH3.
उत्तर
(a) C6H5OH

प्रश्न 18.
ल्यूकास अभिकर्मक द्वारा किसका परीक्षण किया जाता है
(a) फीनॉल
(b) ईथर
(c) ऐल्डिहाइड
(d) ऐल्कोहॉल।
उत्तर
(d) ऐल्कोहॉल।

प्रश्न 19.
ऐल्कोहॉल, जल में विलेय होते हैं इसका प्रमुख कारण है
(a) O-H बंध
(b) हाइड्रोजन बन्ध
(c) सहसंयोजक बन्ध
(d) वैद्युत संयोजकता।
उत्तर
(b) हाइड्रोजन बन्ध

प्रश्न 20.
ऐथिल ऐल्कोहॉल को विरंजक चूर्ण के साथ गर्म करने पर बनता है
(a) डाइ-एथिल ईथर
(b) फीनॉल
(c) क्लोरोबेन्जीन
(d) क्लोरोफॉर्म।
उत्तर
(d) क्लोरोफॉर्म।

2. रिक्त स्थानों की पूर्ति कीजिए

  1. ईथर का सामान्य सूत्र ……… है।
  2. फीनॉल की कोल्बे-श्मिट अभिक्रिया का मुख्य उत्पाद ……… है।
  3. फीनॉल का हाइड्रोजनीकरण करने पर ……… देता है।
  4. ऐल्कोहॉल, I2 और क्षार के साथ क्रिया करके ……… का पीला अवक्षेप देता है।
  5. फीनॉल के 2n चूर्ण के साथ गर्म करने पर ……… देता है।
  6. फॉर्मेल्डिहाइड को ……… के साथ गर्म करने पर बैकलाइट बनता है।
  7. डाइएथिल ईथर ……… के रूप में प्रयुक्त होता है।
  8. RX को NaOR के साथ गर्म करने पर ROR बनता है। इस अभिक्रिया का नाम ……… है।
  9. ऐल्कोहॉल ……… है, जबकि फीनॉल ……… प्रकृति का होता है।
  10. ऐल्कोहॉल को सान्द्र H2SO4 के साथ 160-170°C पर गर्म करने पर ……… बनता है।
  11. ऐथिल ऐल्कोहॉल के निर्जलीकरण से ……… तथा ……… प्राप्त किया जाता है।
  12. रेक्टिफाइड स्पिरिट ………% ऐल्कोहॉल तथा ……… जल का मिश्रण होता है।

उत्तर-

  1. CnH2n+2.0
  2. सैलिसिलिक अम्ल
  3. साइक्लो हेक्सेनॉल
  4. आयोडोफॉर्म (CH3J)
  5. बेंजीन
  6. फीनॉल
  7. निश्चेतक
  8. विलियमसन संश्लेषण
  9. उदासीन, अम्लीय
  10. ऐल्कीन
  11. इथिलीन, डाइ एथिल ईथर
  12. 95.5%, 4.5% |

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3. उचित संबंध जोडिए’
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उत्तर-

  1. (f)
  2. (d)
  3. (e)
  4. (g)
  5. (b)
  6. (a)
  7. (j)
  8. (c)
  9. (h)
  10. (i).

4. एक शब्द / वाक्य में उत्तर दीजिए

  1. डाइएथिल ईथर Na से क्रिया नहीं करता, क्यों?
  2. ईथर में लगी आग जल द्वारा नहीं बुझायी जा सकती, क्यों? ।
  3. ईथर को जलाने पर बनता है।
  4. मॉल्टोज को ग्लूकोज में परिवर्तित करने वाले एन्जाइम का नाम लिखिए।
  5. सल्फ्यू रिक ईथर को कहते हैं।
  6. ईथर की HI के साथ अभिक्रिया का उपयोग किसके निर्धारण में होता है ?
  7. CS2 की उपस्थिति में Br2, फीनॉल से क्रिया करके बनाता है।
  8. विक्टर मेयर विधि में 1° ऐल्कोहॉल क्षार के साथ कौन-सा रंग देता है ?
  9. फोनॉल, थैलिक ऐनहाइड्राइड के साथ H2SO4 की उपस्थिति में बनाता है।
  10. किण्वन अभिक्रिया में कौन-सी गैस प्राप्त होती है ?
  11. उस प्राथमिक एल्कोहॉल का नाम बताइए जो आयोडोफॉर्म परीक्षण देता है।
  12. क्षार NaOH की उपस्थिति में फीनॉल की अभिक्रिया क्लोरोफॉर्म के साथ कराने पर सैलिसि ल्डिहाइड प्राप्त होता है, यह अभिक्रिया कहलाती है।

उत्तर

  1. अम्लीय H परमाणु नहीं है,
  2. जल से हल्का और अविलेय,
  3. CO2 और H2O
  4. मॉल्टेज,
  5. डाइएथिल ईथर,
  6. ऐल्कॉक्सी (जीसल),
  7. 0- और p-ब्रोमो फीनॉल,
  8. लाल,
  9. फिनॉल्पथैलीन,
  10. CO2,
  11. C2H5-OH (एथेनॉल),
  12. राइमर-टीमैन अभिक्रिया।

ऐल्कोहॉल, फीनॉल तथा ईथर लघु उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 1.
ईथर की जल में विलेयता साधारण नमक का संतृप्त विलयन मिलाने से कम क्यों हो जाती है ? समझाइए।
उत्तर
ईथर की जल में विलेयता साधारण नमक के संतृप्त विलयन की उपस्थिति में कम होने का प्रमुख कारण ईथर का एक दुर्बल ध्रुवीय (Weak polar) यौगिक होना है।

नमक का संतृप्त विलयन ईथर की ध्रुवीयता को कम करता है तथा Na और Cr आयन जल के अणुओं को अपनी ओर अधिक आकर्षित करते हैं, जिससे ईथर की विलेयता जल के अणुओं के कम सम्पर्क में आने के कारण घट जाती है।
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प्रश्न 2.
परिशुद्ध ऐल्कोहॉल क्या है ? इसे कैसे बनाया जाता है ?
उत्तर
100% एथेनॉल को परिशुद्ध (विशुद्ध) ऐल्कोहॉल कहते हैं। परिशोधित स्पिरिट में बेंजीन मिलाकर प्रभाजी आसवन करते हैं। 64.8% पर जल 7.4%, ऐल्कोहॉल 18.5% और बेंजीन 74.1% का स्थिर क्वथनांकी (Azeotropic) मिश्रण आसवित होता है। जल के दूर हो जाने के बाद 68:2°C पर ऐल्कोहॉल (32-4%) व बेंजीन (67.6%) का द्विअंगी मिश्रण आसवित होता है। जब सम्पूर्ण बेंजीन निकल जाती है तो 78-1°C पर विशुद्ध ऐल्कोहॉल आसवित होता है। इसमें 100% ऐल्कोहॉल होता है।

प्रश्न 3.
स्टार्च से एथिल ऐल्कोहॉल बनाने की विधि का समीकरण दीजिए एवं एन्जाइमों के नाम लिखिए।
उत्तर
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एन्जाइम-

  • डायस्टेज
  • माल्टेज
  • जाइमेज। .

प्रश्न 4.
ल्युकास अभिकर्मक क्या हैं ? इससे प्राथमिक, द्वितीयक एवं तृतीयक ऐल्कोहॉल की पहचान किस प्रकार करेंगे? वर्णन कीजिए।
उत्तर
निर्जल ZnCl2 तथा सान्द्र HCl का मिश्रण ल्युकास अभिकर्मक कहलाता है।
1. तृतीयक ऐल्कोहॉल- सामान्य ताप पर यदि ऐल्कोहॉल में ल्युकास अभिकर्मक मिलाने से तुरंत एल्किल क्लोराइड्स का सफेद तेलीय अवक्षेप बनता है तो ऐल्कोहॉल, तृतीयक ऐल्कोहॉल होगा।

2.द्वितीयक ऐल्कोहॉल- सामान्य ताप पर यदि ऐल्कोहॉल में ल्युकास अभिकर्मक मिलाने से 5 मिनट पश्चात् सफेद तेलीय एल्किल क्लोराइड का अवक्षेप प्राप्त होता है, तो ऐल्कोहॉल द्वितीयक ऐल्कोहॉल होगा।

3. प्राथमिक ऐल्कोहॉल- सामान्य ताप पर यदि ऐल्कोहॉल ल्युकास अभिकर्मक के साथ कोई अभिक्रिया नहीं दर्शाता, तो प्राथमिक ऐल्कोहॉल होगा।

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प्रश्न 5.
ऐल्कोहॉलों के क्वथनांक ईथरों की तुलना में उच्च होते हैं, क्यों?
अथवा, C2H5OH तथा CH3OCH3 दोनों का अणु सूत्र C2H6O है, किन्तु ऐल्कोहॉल का क्वथनांक 78.4°C तथा ईथर का क्वथनांक -240°C है। कारण समझाइए।
उत्तर
एथिल ऐल्कोहॉल में उसके अनेक अणु आपस में H-बन्ध द्वारा संगुणित (जुड़े) रहते हैं। इस प्रकार के अणुओं को वाष्पित करने के लिए अधिक ऊर्जा की आवश्यकता होती है। ईथर के अणु एकल अवस्था में ही रहते हैं। अतः इसका क्वथनांक कम होता है।
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प्रश्न 6.
मेथिलेटेड स्प्रिट या विकृतीकृत ऐल्कोहॉल से आप क्या समझते हैं ?
उत्तर
मेथिलेटेड स्प्रिट (Methylated Spirit)- परिशोधित स्प्रिट में मेथिल ऐल्कोहॉल और अन्य विषैले पदार्थ जैसे- पिरिडीन, रबर, थिनर, पेट्रोलियम, नेफ्था आदि मिलाकर विकृत कर दिया जाता है, तब इसे मेथिलेटेड स्प्रिट या विकृतीकृत ऐल्कोहॉल कहते हैं। इसका उपयोग स्प्रिट वार्निश बनाने के लिए किया जाता हैं। इससे शराब के रूप में एथेनॉल का दुरुपयोग रुक जाता है।

प्रश्न 7.
भाप अंगार गैस से CHJOH का निर्माण किस प्रकार किया जाता है ?
उत्तर
भाप अंगार गैस से मेथिल ऐल्कोहॉल का निर्माण जल-वाष्प के रक्त-तप्त कोयले पर प्रवाहित करने पर कार्बन मोनो-ऑक्साइड और हाइड्रोजन गैस का मिश्रण प्राप्त होता है जिसे (Water gas) भाप अंगार गैस कहते हैं।
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जल गैस में हाइड्रोजन गैस 2 : 1 के अनुपात में मिलाकर मिश्रण को 200 वायुमण्डलीय दाब पर 300°C ताप पर Cu, Zn व Cr के Oxides (उत्प्रेरक) पर प्रवाहित करने पर मेथिल ऐल्कोहॉल प्राप्त होता है।
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प्रश्न 8.
निम्नांकित परिवर्तनों के रासायनिक समीकरण दीजिए

  1. एथेनॉल से डाईएथिल ईथर
  2. डाईएथिल ईथर से एथेनॉल
  3. एथेनॉल से एथिल एसीटेट
  4. ग्लूकोज से एथेनॉल।

उत्तर
1. एथेनॉल से डाईएथिल ईथर-
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2. डाईएथिल ईथर से एथेनॉल
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3. एथेनॉल से एथिल एसीटेट
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4. ग्लूकोज से एथेनॉल
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प्रश्न 9.
फीनॉल और ऐल्कोहॉल में अन्तर स्पष्ट कीजिए।
अथवा, सारिणी बनाकर फीनॉल एवं ऐल्कोहॉल में कोई छः अन्तर कीजिए तथा फीनॉल से सम्बन्धित लीबरमान अभिक्रिया लिखिए।
उत्तर
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लीबरमान क्रिया- फीनॉल में सान्द्र सल्फ्यूरिक अम्ल की कुछ बूंदें और थोड़ा सोडियम नाइट्राइट मिलाने से पहले गहरा नीला रंग उत्पन्न होता है। इसमें जल मिलाने पर रंग लाल हो जाता है तथा क्षारीय करने पर लाल रंग पुनः नीले रंग में बदल जाता है।

प्रश्न 10.
शुद्ध फीनॉलरंगहीन ठोस होता है, परन्तु कुछ समय पश्चात् वह गुलाबी रंग देता है, क्यों ? अथवा, ऑक्सीजन की उपस्थिति में फीनॉल किस रंग का होता है ? अभिक्रिया सहित समझाइए।
उत्तर
फीनॉल वायु के सम्पर्क में आने पर गुलाबी रंग का हो जाता है, क्योंकि वह वायु की 0, से ऑक्सीकृत होकर क्विनोन बनाता है
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यह क्विनोन पुनः फोनॉल के दो अणु के साथ हाइड्रोजन बंध द्वारा जुड़ जाता है जिससे गुलाबी रंग का फिनोक्विनोन बनता है।
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प्रश्न 11.
फीनॉल की फेरिक क्लोराइड से क्रिया बताइए।
उत्तर
फीनॉल की जाँच उदासीन FeCl3 द्वारा भी की जाती है। फीनॉल, उदासीन FeCl3 मिलाने पर एक जटिल लवण का निर्माण करते हुए बैंगनी रंग देता है।
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प्रश्न 12.
ऐल्कोहॉल का क्वथनांक संगत ऐल्केन की अपेक्षा उच्च होता है, क्यों?
उत्तर
लगभग समान अणुभार वाले हाइड्रोकार्बनों की अपेक्षा ऐल्कोहॉलों के क्वथनांक बहुत उच्च होते हैं। यह अंतराणुक हाइड्रोजन बंध के कारण होता है। ऐल्कोहॉल अणु हाइड्रोजन बंधों द्वारा संगुणित होते हैं जिनकी ऊर्जा लगभग 5 से 10 कि. कैलोरी मोल-होती है। अतः इन अणुओं के पृथक्करण हेतु अतिरिक्त ऊर्जा की आवश्यकता होती है, जो क्वथनांक में वृद्धि करते हैं । हाइड्रोकार्बन जो हाइड्रोजन बंध नहीं बनाते हैं उनके क्वथनांक सामान्यतः ऐल्कोहॉलों की अपेक्षा कम होते हैं।

प्रश्न 13.
एथिल ऐल्कोहॉल और फीनॉल दोनों में -OH समूह उपस्थित है ? क्या कारण है कि फीनॉल अम्लीय तथा ऐल्कोहॉल क्षारीय प्रभाव का है ?
अथवा, एथिल ऐल्कोहॉल तथा फीनॉल दोनों में OH समूह उपस्थित रहता है। क्या कारण है कि फीनॉल अम्लीय और ऐल्कोहॉल उदासीन प्रकृति का होता है ?
अथवा, फीनॉल के अम्लीय व्यवहार की व्याख्या कीजिए।
उत्तर
फीनॉल ऐल्कोहॉल की अपेक्षा प्रबल अम्लीय होते हैं, यह सम्भवत: मेसोमेरिक प्रभाव के कारण होता है। फोनॉल अग्रांकित रूपों का अनुनादी संकर है
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अनुनाद के कारण ऑक्सीजन परमाणु धन आवेश प्राप्त कर लेता है, जिससे यह 0-H बन्ध के इलेक्ट्रॉन युग्म को अपनी ओर आकर्षित कर लेता है और प्रोटॉन की मुक्ति सहज हो जाती है।
प्रोटॉन के मुक्त होने के बाद फीनॉक्साइड आयन बनता है, जो कि अनुनाद के कारण स्थायित्व प्राप्त कर लेता है।

चूँकि ऐल्कोहॉल में अनुनाद सम्भव नहीं होता है, इसलिए इसका हाइड्रोजन परमाणु ऑक्सीजन के साथ प्रबलता से जकड़ा रहता है । ऐल्कोहॉल इस कारण लगभग उदासीन यौगिक अथवा एक अत्यन्त दुर्बल अम्ल के समान व्यवहार प्रदर्शित करता है।
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प्रश्न 14.
प्राथमिक, द्वितीयक और तृतीयक ऐल्कोहॉलों में विभिन्नता दर्शाने वाली विक्टर मेयर विधि लिखिए।
उत्तर
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प्रश्न 15.
विलियमसन की अविरल ईथरीकरण विधि क्या है ? क्या यह अविरल विधि है ? कारण दीजिए एवं विधि का नामांकित चित्र बनाइये।
अथवा, डाइएथिल ईथर बनाने की प्रयोगशाला विधि का नामांकित चित्र बनाइए एवं संबन्धित रासायनिक समीकरण लिखिए।
उत्तर
विलियमसन की अविरल ईथरीकरण विधि-एथिल ऐल्कोहॉल और सान्द्र H2SO4 के मिश्रण को 410 K पर गरम करके बनाया जाता है।
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इस अभिक्रिया में (ii) पद में H2SO4 पुनः – ऐल्कोहॉल उत्पन्न हो जाता है, जो C2H5OH से पद (i) के अनुसार क्रिया करके उसे पुनः ईथर में बदलता है। इस प्रकार यह क्रिया आगे चलती रहती है। इस कारण इस विधि को अविरल ईथरीकरण की विधि कहते हैं।
MP Board Class 12th Chemistry Solutions Chapter 11 ऐल्कोहॉल, फीनॉल तथा ईथर - 111
वास्तव में यह विधि निरन्तर नहीं है, क्योंकि H2SO4 का SO4 में विघटन हो जाता है तथा कुछ समय बाद H2SO4 के तनु हो जाने पर अभिक्रिया चित्र-ईथर बनाने की प्रयोगशाला विधि मंद हो जाती है तथा H2SO4 की अधिक मात्रा बाद में मिलानी पड़ती है।

प्रश्न 16.
किण्वन पर एक टिप्पणी लिखिए।
उत्तर
किण्वन-जटिल कार्बनिक यौगिकों का एन्जाइम उत्प्रेरक की उपस्थिति में मन्द गति से सरल कार्बनिक यौगिकों में अपघटित होने की क्रिया को किण्वन कहते हैं । यीस्ट एक अच्छा किण्वक है, यह एक जीवित पदार्थ है, जिसमें एन्जाइम उपस्थित होते हैं। इसमें माल्टेज, जाइमेज, इनवर्टेज़ आदि एन्जाइम पाये जाते हैं।
किण्वन द्वारा ग्लूकोज में यीस्ट मिलाने पर एथिल ऐल्कोहॉल प्राप्त होता है।
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किण्वन की अनुकूल परिस्थितियाँ

  • अनुकूल ताप-25-35°C के बीच होता है।
  • अन्य पदार्थ-कुछ कार्बनिक लवण जैसे-अमोनियम सल्फेट या अमोनियम नाइट्रेट किण्वक के आहार का कार्य करते हैं।
  • सान्द्रण-विलयन तनु हो (सान्द्रता 8-10%)।
  • वायु संचार-यह क्रिया वायु की उपस्थिति में होती है।

प्रश्न 17.

  1. फीनॉल को बेन्जीन डाइऐजोनियम क्लोराइड से किस प्रकार प्राप्त करेंगे?
  2. डाइएथिल ईथर की HI अम्ल के साथ क्या क्रिया होती है ?

उत्तर
1. फीनॉल बेन्जीन डाइऐजोनियम क्लोराइड के जलीय विलयन का भाप आसवन करके बनाया जाता है। N2C1
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2. सान्द्र HI के साथ डाइएथिल ईथर को गर्म करने पर एक अणु एथिल आयोडाइड का तथा एक अणु एथिल एल्कोहॉल बनता है।
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प्रश्न 18.
ऐसी दो अभिक्रियाएँ दीजिए जिनसे फोनॉल की अम्लीय प्रकृति प्रदर्शित होती हो, फीनॉल की अम्लता की तुलना एथेनॉल से कीजिए।
उत्तर
फीनॉल का अम्लीय गुण निम्न अभिक्रियाओं द्वारा दर्शाया जाता है
(क)
1. सक्रिय धातुओं से क्रिया (Na, K, Mg आदि)
हाइड्रोजन गैस का उत्पन्न होना।
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2. जलीय NaOH से क्रियाएँफीनॉल दुर्बल अम्ल की भाँति कार्य करता है जो NaOIl को उदासीन करता है। OH

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(ख) फोनॉल की अम्लता से एथेनॉल के साथ तुलना
C2H5OH + NaOH – कोई क्रिया नहीं
लेकिन फोनॉल NaOH से क्रिया दर्शाता है जो एथेनॉल की तुलना में प्रबल अम्लता दर्शाता है।
एथेनॉल और फीनॉल का आयनीकरण निम्न है
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फीनॉल और फोनॉक्साइड आयन संकरण अवस्था दर्शाता संकरण से फोनॉक्साइड आयन स्थायित्व ग्रहण करता है।

दूसरी ओर एथॉक्साइड आयन व एथेनॉल संकरण अवस्था नहीं दर्शाते अर्थात् एथॉक्साइड आयन में ऑक्सीजन पर ऋणात्मक आवेश उपस्थित रहता है। जबकि फीनॉक्साइड आयन में आवेश विस्थापित होता रहता है।

एथेनॉल का मान PKa मान 15:9 है जबकि फीनॉल के लिए PKa का मान 10.0 है। अतः फोनॉल, एथेनॉल की तुलना में कई गुना अधिक अम्लीय है।

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ऐल्कोहॉल, फीनॉल तथा ईथर दीर्घ उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 1.
ऐल्कोहॉल में निर्जलीकरण की क्रियाविधि समझाइये।
उत्तर
ऐल्कोहाल का निर्जलीकरण-एथिल ऐल्कोहॉल को सान्द्र H2SO4 के आधिक्य में गर्म करने पर ऐल्कोहाल से जल के अणु निकलने से एल्कीन बनता है।
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क्रियाविधि-H2SO4 द्वारा ऐल्कोहाल का प्रोटॉनीकरण
1.
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2. जल का विलोपन
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3. क्षार (बाइसल्फेट आयन) द्वारा प्रोटॉन के रूप में हाइड्रोजन का निकलना
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निर्मित कार्बो केटायन (I) का स्थायित्व निर्जलीकरण की सरलता निर्धारित करता है एवं कार्बो केटायन के स्थायित्व का क्रम निम्न है
CH3 < C2H5 < आइसोप्रोपिल < तृतीयक ब्यूटिल

प्रश्न 2.
शीरे से एथिल ऐल्कोहॉल कैसे प्राप्त करते हैं ? संक्षेप में समझाइए एवं क्रिया का समीकरण दीजिए।
अथवा, शीरा क्या है ? किण्वन विधि द्वारा ऐल्कोहॉल कैसे बनाया जाता है ? समझाइये।
उत्तर
गन्ने के रस से शक्कर के क्रिस्टल पृथक् कर लेने के पश्चात् पीले गाढ़े रंग का चासनी जैसा द्रव बचता है, जिसे शीरा (molasses) कहते हैं। शीरे से ऐल्कोहॉल का निर्माण निम्नलिखित पदों में किया जाता है

1. तनुकरण- शीरे में जल मिलाकर 8-10% तनु करते हैं और इसमें थोड़ी मात्रा में अमोनियम सल्फेट, अमोनियम और फॉस्फेट, सल्फ्यूरिक अम्ल मिला दिये जाते हैं।

2. किण्वन- उक्त विलयन में यीस्ट (लगभग 5%) मिला दिया जाता है। मिश्रण को 2-3 दिन के लिए 25-30°C ताप पर रख देते हैं। कुछ समय पश्चात् वायु प्रवाहित करते हैं । यीस्ट में उपस्थित एन्जाइमों की उत्प्रेरक क्रियाओं द्वारा एथेनॉल बन जाता है।
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प्राप्त किण्वन द्रव को वाश (Wash) कहते हैं, जिसमें 6-10% C2H5OH तथा शेष जल और अन्य अशुद्धियाँ होती हैं।

3. आसवन- वाश का आसवन कॉफे भभके में किया जाता है। इसमें दो स्तम्भ होते हैं-विश्लेषक (analyser) तथा परिशोधक (rectifier) जो एक-दूसरे से जुड़े रहते हैं।

वाश को एक सर्पिलाकार नली द्वारा परिशोधक में से प्रवाहित करते हैं । प्राप्त गर्म वाष्प को विश्लेषक के ऊपरी भाग से मन्द गति से गिराते हैं। विश्लेषक में ऊपर की ओर जा रही भाप नीचे की ओर आ रहे वाश के सम्पर्क मे आती है तथा उसमें ऐल्कोहॉल को वाष्पित करती है । ऐल्काहाल का क्वथनांक 78.3°C ह । अतः यह वाष्प में आगे बढ़ता जाता है। इन वाष्पों को संघनित करने से लगभग 90% ऐल्कोहॉल प्राप्त होता है।
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4. परिशोधन- वाश का परिशोधन प्रभाजी आसवन से करते हैं।

प्रश्न 3.
निम्नलिखित को कैसे परिवर्तित करेंगे

  1. मेथेनॉल से एथेनॉल
  2. एथेनॉल से मेथेनॉल।

उत्तर
1. मेथेनॉल से एथेनॉल
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2. एथेनॉल से मेथेनॉल
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प्रश्न 4.
प्राथमिक, द्वितीयक एवं तृतीयक ऐल्कोहॉल में विभेद की ऑक्सीकरण एवं विहाइड्रोजनीकरण विधि को समझाइये।
उत्तर
1. ऑक्सीकरण विधि-इसे निम्न सारिणी द्वारा दर्शा सकते हैं
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2. विहाइड्रोजनीकरण (Dehydrogenation) परीक्षण-जब ऐल्कोहॉल की वाष्पों को अपचयित एवं गर्म ताँबे पर 300°C पर प्रवाहित किया जाता है तब विभिन्न ऐल्कोहॉल से भिन्न-भिन्न क्रियाफल प्राप्त होते हैं।
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प्रश्न 5.
फीनॉल से निम्न कैसे प्राप्त करोगे-(समीकरण दीजिए)

  1. 2, 4, 6-ट्राइनाइट्रोफीनॉल,
  2. 2, 4, 6-ट्राइब्रोमोफीनॉल,
  3. बेंजीन,
  4. आर्थो एवं पैरा-क्रिसॉल,
  5. ट्राइब्रोमो फीनॉल,
  6. पिक्रिक अम्ल,
  7. ऐनिलीन,
  8. फीनॉल्पथैलीन,
  9. p-क्रिसॉल।

उत्तर
फीनॉल से निम्न को बनाना
1. 2, 4, 6-ट्राइनाइट्रोफीनॉलOH
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2. 2, 4, 6-ट्राइब्रोमोफीनॉल
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3. बेंजीन
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4. 0-एवं p – क्रिसॉल
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5. फीनॉल से ट्राइब्रोमोफीनॉल- फीनॉल की जलीय ब्रोमीन के साथ क्रिया कराने पर ट्राइब्रोमोफोनॉल बनता है।
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6. फीनॉल से पिक्रिक अम्ल
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7. फीनॉल से ऎनिलीन
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8. फीनॉल से फीनॉल्फ्थै लीन-फीनॉल की सान्द्र H2SO4 अम्ल की उपस्थिति में थैलिक ऐनहाइड्राइड के साथ गर्म करने पर फीनॉल्पथैलीन बनती है, जो क्षार के साथ लाल रंग देती है। अत: इसका उपयोग अनुमापन में सूचक (indicator) के रूप में किया जाता है।
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9. फीनॉल से पैरा-क्रिसॉल-फीनॉल की निर्जल AICI3 की उपस्थिति में मेथिल क्लोराइड के साथ अभिक्रिया करने पर p- क्रिसॉल मुख्य उत्पाद के रूप में प्राप्त होता है और अल्प मात्रा में o- क्रिसॉल भी बनता है। इस अभिक्रिया को फ्रीडल-क्राफ्ट अभिक्रिया कहते हैं।
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प्रश्न 6.
निम्नांकित परिवर्तनों के रासायनिक समीकरण दीजिये

  1. ऐथेनॉल से डाइएथिल ईथर,
  2. डाइएथिल ईथरसे ऐथेनॉल,
  3. ऐथेनॉल से एथिल ऐसीटेट,
  4. ग्लूकोज से ऐथेनॉल।

उत्तर
परिवर्तनों के रासायनिक समीकरण
1. ऐथेनॉल से डाइएथिल ईथर –
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2. डाइएथिल ईथर से ऐथेनॉल
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3. ऐथेनॉल से एथिल ऐसीटेट
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4. ग्लूकोज से ऐथेनॉल
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प्रश्न 7.
लकड़ी के भंजक आसवन से मेथिल ऐल्कोहॉल का निर्माण की विधि का वर्णन कीजिए।
उत्तर
लकड़ी का 400°C पर भंजक आसवन (अर्थात् वायु की उपस्थिति में गर्म करने पर) करने पर उत्पन्न होने वाली वाष्पों को संघनित्र में प्रवाहित करते हैं तथा कुछ गैसें द्रवित हो जाती हैं। यह द्रव दो परतें बनाती हैं। नीचे काष्ठ तार (Wood tar) होता है और ऊपर अम्लीय व भूरे रंग की एक परत होती है, जिसे पायरो लिग्नियस अम्ल कहते हैं। इसमें जल के अतिरिक्त ऐसीटिक अम्ल (8-10%), मेथेनॉल (2-4%) और ऐसीटोन (0-5) होता है।

पाइरो लिग्नियस अम्ल से शुद्ध मेथिल ऐल्कोहॉल प्राप्त करना-पाइरो लिग्नियस अम्ल को एक ताँबे के पात्र में गर्म करते हैं और वाष्प को उबलते हुए चूने के पानी में प्रवाहित करते हैं । ऐसीटिक अम्ल अवाष्पशील कैल्सियम ऐसीटेट के रूप में पृथक् हो जाता है। इस पर H2SO4 की क्रिया से CH3COOH प्राप्त करते हैं।
2CH3COOH + Ca(OH)2 →(CH3COO)2 Ca+2H2 O
(CH3COO)2 Ca + H2S04→+2CH3.COOH + CaSO4

बिना शोषित हुए गैसों को संघनित्र के द्वारा द्रवित कर लिया जाता है। इसमें मेथिल ऐल्कोहॉल व ऐसीटोन होता है, जिसका प्रभाजी आसवन करके ऐसीटोन (56°C) व मेथिल ऐल्कोहॉलं (65°C) को अलग-अलग प्राप्त कर लेते हैं।

मेथिल ऐल्कोहॉल का शोधन- अशुद्ध मेथिल ऐल्कोहॉल में निर्जल CaCl2 मिलाते हैं, जिससे CaCl2.4CH3OH सूत्र का एक क्रिस्टलीय यौगिक (कैल्सियम क्लोराइड टेट्रा मेथेनॉल) प्राप्त होता है, इसे पृथक् करके जल के साथ उबालते हैं और आसवन करते हैं। मेथिल ऐल्कोहॉल का जलीय विलयन आसवित होता है। इसे बिना बुझा चूना (CaO) पर सुखाकर पुनः आसवित करने पर 65°C पर शुद्ध मेथिल ऐल्कोहॉल प्राप्त होता है।

प्रश्न 8.
फीनॉल बनाने के तीन विधियों का समीकरण दीजिए।
उत्तर
फीनॉल बनाने की विधियाँ
1. बेंजीन डाइएजोनियम लवणों का जल-अपघटन-एरोमैटिक प्राथमिक एमीन (एनिलीन) को नाइट्रस अम्ल (NaNO2 + HCI) के साथ 0-5°C ताप पर बेंजीन डाइएजोनियम लवण बनता है। इस लवण के जलीय विलयन को उबालने पर फीनॉल प्राप्त होता है।
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2. सोडियम बेंजीन सल्फोनेट के क्षारीय गलन- सोडियम बेंजीन सल्फोनेट को NaOH के साथ संगलित करने पर सोडियम फीनॉक्साइड बनता है जिसे अम्लीकृत करने पर फीनॉल बनता है।
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3. रेशिग विधि- बेंजीन की HCl अम्ल और वायु के मिश्रण के साथ Cu उत्प्ररेक की उपस्थिति में 230°C ताप पर गर्म करने पर क्लोरो बेंजीन बनता है। फिर इसका जल-अपघटन करने पर फीनॉल बनता है।
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हैलोऐल्केन तथा हैलोऐरीन NCERT पाठ्यनिहित प्रश्नोत्तर

प्रश्न 1.
निम्नलिखित यौगिकों की संरचनाएँ लिखिए –
(i) 2 – क्लोरो 3 – मेथिलपेन्टेन
(ii) 1- क्लोरो 4- एथिलसाइक्लोहेक्सेन।
(iii) 4-तृतीयक ब्यूटिल 3 – आयोडोहेप्टेन।
(iv) 1, 4 डाइब्रोमोब्यूट 2 – ईन
(v) 1 – ब्रोमो 4 – द्वितीयक ब्यूटिल 2 – मेथिलबेंजीन
उत्तर
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प्रश्न 2.
एल्कोहॉल तथा KI की अभिक्रिया में सल्फ्यूरिक अम्ल का उपयोग क्यों नहीं करते हैं ?
उत्तर
H2SO4 एक ऑक्सीकारक है। ये HI को I2 में ऑक्सीकृत करता है तथा एल्कोहॉल तथा HI के बीच अभिक्रिया को रोकता है। जिनमें ये एल्काइल आयोडाइड बनाते हैं।
KI + H2SO4 → KHSO4 + HI
2HI + H2SO4 → I2 + 2H2O+ SO2).
इस कठिनाई को दूर करने के लिये अभिकर्मक जो ऑक्सी-कारक न हो जैसे-H3PO4, H2SO4 की जगह उपयोग करते हैं।

प्रश्न 3.
प्रोपेन के विभिन्न डाइ हैलोजन व्युत्पन्नों की संरचना लिखिए।
उत्तर
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प्रश्न 4.
C5H12 अणुसूत्र वाले समावयवी एल्केनों में से उसको पहचानिये जो प्रकाश रासायनिक – क्लोरीनीकरण पर देता है।।
(i) केवल एक मोनोक्लोराइड
(ii) तीन समावयवी मोनोक्लोराईड
(iii) चार समावयवी मोनोक्लोराइड।
उत्तर
(i)
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(ii)
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c हाइड्रोजन के विस्थापन से चार मोनोक्लोराइड समावयवी देगा।

(iii)
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हाइड्रोजन परमाणुओं के विस्थापन से चार समावयवी मोनो-क्लोराइड देता है।

प्रश्न 5.
निम्नलिखित प्रत्येक अभिक्रिया के मुख्य मोनोहैलो उत्पाद की संरचना बनाइए –
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उत्तर
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प्रश्न 6.
निम्नलिखित यौगिकों को उनके क्वथनांकों के बढ़ते क्रम में व्यवस्थित कीजिए –
(i) ब्रोमोमेथेन, ब्रोमोफॉर्म, क्लोरोमेथेन, डाइब्रोमोमेथेन।
(ii) 1-क्लोरोप्रोपेन, आइसोप्रोपिल क्लोराइड, 1-क्लोरो ब्यूटेन।
उत्तर
(a) समान एल्किल समूह के लिये उनके क्वथनांक हैलोजन परमाणु के अणुभार बढ़ने के साथ बढ़ते हैं।
(b) समान हैलोजन के लिये शाखा बढ़ने के साथ क्वथनांक घटते हैं। इस आधार पर निम्न क्रम की भविष्यवाणी की जाती है।
(i) क्लोरोमेथेन < ब्रोमोमेथेन < डाइक्लोरोमेथेन < ब्रोमोफॉर्म
(ii) ऑइसोप्रोपाइल क्लोराइड < 1-क्लोरोप्रोपेन < 1-क्लोरो-ब्यूटेन।

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प्रश्न 7.
निम्नलिखित युग्मों में से आप कौन-से ऐल्किल हैलाइड द्वारा SN2 क्रियाविधि से अधिक तीव्रता से अभिक्रिया करने की अपेक्षा करते हैं ? अपने उत्तर को समझाइए।
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उत्तर
यदि किसी निश्चित सूत्र के विभिन्न समावयवियों में निकलने वाले समूह समान हों, तो समावयवियों की क्रियाशीलता SN2 अभिक्रिया के लिये त्रिविम बाधा के साथ घटती है।
(i) CH3CH2CH2CH2Br एक 1° एल्किल हैलाइड है,
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(ii)
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तेजी से क्रिया करती है क्योंकि 3° एल्किल हैलाइड में ज्यादा त्रिविम बाधा (2° से) होती है।

(iii)
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ये 1° एल्किल हैलाइड है, परन्तु (II) में CH, समूह C, परमाणु पर है जो Br के निकट है (ज्यादा त्रिविम बाधा उत्पन्न करता है) जो C,
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प्रश्न 8.
हैलोजन यौगिकों के निम्नलिखित युग्मों में से कौन-सा यौगिक तीव्रता से SNI अभिक्रिया करेगा –
(i)
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(ii)
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उत्तर
एल्किल हैलाइड की S1 अभिक्रिया की क्रियाशीलता माध्यमिक कार्बोकेटायन के स्थायित्व पर निर्भर करती है – 3°>2° >1°
(i)
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(ii)
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प्रश्न 9.
निम्नलिखित में A, B, C, D, E, R तथा R’ को पहचानिये: –
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चूंकि D उस C परमाणु जिस पर MgBr या Br उपस्थित होता है, से जुड़ा होता है, अतः
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हैलोऐल्केन तथा हैलोऐरीन NCERT पाठ्य-पुस्तक प्रश्नोत्तर

प्रश्न 1.
निम्नलिखित हैलाइडों के नाम आई.यू.पी.ए.सी. पद्धति से लिखिए तथा उनका वर्गीकरण, ऐल्किल ऐलाइलिक, बेन्जाइलिक (प्राथमिक, द्वितीयक एवं तृतीयक) वाइनिल अथवा ऐरिल हैलाइड . के रूप में कीजिए –
(i) (CH3)2CHCH(Cl)CH3
(ii) CH3CH2CH(CH3)CH(C2H5)Cl
(iii) CH3CH2C(CH3)2CH2I
(iv) (CH3)3CCH2CH(Br) C6H5
(v) CH3CH(CH3)CH(Br)CH3
(vi) CH3C(C2H5)2CH2Br
(vii) CH3C(Cl)(C2H5)CH2CH3
(viii) CH3CH = C(Cl)CH2CH(CH3)2
(ix) CH3CH = CHC(Br) (CH3) 2
(x) p-ClC6H4CH2CH(CH3)2
(xi) m-ClCH2C6H4CH2C(CH3)3
(xii) o-Br-C6H4CH(CH3)CH2CH3
उत्तर
(i) 2-क्लोरो 3-मिथाइलब्यूटेन (2° एल्काइल)
(ii) 3-क्लोरो 4-मिथाइलहेक्सेन (2° एल्काइल)
(iii) 1-आयोडो 2, 2-डाइमिथाइलब्यूटेन (1° एल्काइल)
(iv) 1-ब्रोमो 3, 3-डाइमिथाइल 1-फिनाइल ब्यूटेन (2° बेन्जाइलिक)
(v) 2-ब्रोमो 3-मिथाइलब्यूटेन (2° एल्काइल)
(vi) 3-ब्रोमोमिथाइल 3-मिथाइलपेन्टेन (1° एल्काइल)
(vii) 3-क्लोरो 3-मिथाइलपेन्टेन (3° एल्काइल)
(viii) 3-क्लोरो 5-मिथाइल हेक्स -2-ईन (विनाइल)
(ix)4-ब्रोमो 4-मिथाइल पेन्ट -2- ईन (एलाइलिक)
(x) 1-क्लोरो 4-(2 मिथाइल-प्रोपाइल) बेंजीन (एराइल) या p-क्लोरो आइसोब्यूटाइल बेंजीन
(xi) 1-क्लोरोमिथाइल 3-(2’2′ डाइइथाइल प्रोपाइल) बेंजीन (बेन्जाइलिक) या m-नियोपेन्टाइल बेंजाइल क्लोराइड
(xii) 1-ब्रोमो 2-(1 मिथाइल प्रोपाइल) बेंजीन (एराइल)।

प्रश्न 2.
निम्नलिखित यौगिकों के IUPAC नाम दीजिए –
(i) CH3CH(Cl)CH(Br)CH3
(ii) CHF2CBrClF
(iii) ClCH2C ≡ CCH2Br
(iv) (CCl3)3CCl
(v) CH3C(p-CIC6H4)2CH(Br)CH3
(vi) (CH3)3CCH =ClC6H4I-p
उत्तर
(i)2-ब्रोमो 3- क्लोरोब्यूटेन
(ii) 1-ब्रोमो 1-क्लोरो 1, 2, 2 ट्राइफ्लुओरोएथेन
(iii) 1-ब्रोमो 4- क्लोरोब्यूट-2-आइन
(iv) 1, 1, 1, 2, 3, 3, 3 हेप्टाक्लोरो 2-(ट्राइक्लोरोमिथाइल) प्रोपेन
(v) 3-ब्रोमो 2, 2 बिस (4′- क्लोरोफिनाइल) ब्यूटेन
(vi) 1-क्लोरो 1-(4′-आयोडोफिनाइल) 3, 3-डाइमिथाइल ब्यूट -1-ईन।।

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प्रश्न 3.
निम्नलिखित कार्बनिक हैलोजन यौगिकों की संरचना दीजिए(i) 2-क्लोरो 3-मेथिलपेन्टेन ।
(ii)p-ब्रोमो क्लोरोबेन्जीन
(ii) 1-क्लोरो 4-एथिलसाइक्लोहेक्सेन
(iv) 2-(2-क्लोरोफेनिल)-1-आयोडोऑक्टेन
(v) परफ्लुओरोबेन्जीन
(vi) 4-तृतीयक ब्यूटिल 3-आयोडोहेप्टेन
(vii) 1-ब्रोमो 4-द्वितीयक ब्यूटिल 2-मेथिल बेन्जीन
(viii) 1, 4-डाइब्रोमोब्यूट-2-ईन।
उत्तर
(i)
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(ii)
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(iii)
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(iv)
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(v)
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(vi)
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(vii)
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(viii)
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प्रश्न 4.
निम्नलिखित में से किसका द्विध्रुव आघूर्ण सर्वाधिक होगा –
(1) CH2Cl2
(ii) CHCl3
(iii) CCl4
उत्तर
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CCl4 (iii) सममित हैं, तथा परिणामी द्विध्रुव आघूर्ण शून्य है। CHCl3 (ii) में दो C-Cl का परिणामी द्विध्रुव C-H तथा C-Cl बंध के परिणामी द्विध्रुव द्वारा विरोध किया जाता है। इसलिये अन्तिम अनुमानित परिणामी द्विध्रुव पहले से कम होगा, इसलिये CHCl3 में निश्चित द्विध्रुव-आघूर्ण (1.03 D) होगा। CH2Cl2 (j) में दो C-Cl का परिणामी द्विध्रुव आघूर्ण दो C-H द्विध्रुवों के परिणामी द्विध्रुव की अपेक्षा मजबूत होता है। अत: CH2Cl2 (1.62 D) का द्विध्रुव आघूर्ण CHCl3 से ज्यादा होगा।
अर्थात् CH2Cl2 में उच्चतम द्विध्रुव आघूर्ण होगा।

प्रश्न 5.
एक हाइड्रोकार्बन C5H10 अंधेरे में क्लोरीन के साथ अभिक्रिया नहीं करता परन्तु सूर्य के तीव्र प्रकाश में केवल एक मोनोक्लोरो यौगिक C5H9Cl देता है। हाइड्रोकार्बन की संरचना क्या है ?
उत्तर
(i) अणुसूत्र यह सुझाव देता है कि यह या तो साइक्लो-एल्केन है या एल्केन। .
(ii) क्योंकि हाइड्रोकार्बन Cl2 के साथ अंधेरे में क्रिया नहीं करते, अतः ये एल्केन नहीं होंगे। ये साइक्लोएल्केन होंगे। .
(iii) हाइड्रोकार्बन Cl2 से तीव्र सूर्य के प्रकाश की उपस्थिति में क्रिया केर एकल मोनोक्लोरो यौगिक C5H9Cl देगा, अतः सभी 10-H परमाणु साइक्लोएल्केन में समतुल्य होंगे।
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प्रश्न 6.
C4H9Br सूत्र वाले यौगिक के सभी समावयवी लिखिए।
उत्तर
C4H9Br के सभी समावयवी उनके साधारण नामों के साथ नीचे दिये गये हैं –
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प्रश्न 7.
निम्नलिखित से 1-आयोडोब्यूटेन प्राप्त करने की समीकरण दीजिए –
(i) 1-ब्यूटेनॉल
(ii) 1-क्लोरोब्यूटेन
(iii) ब्यूट-1-इन
उत्तर
(i)
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(ii)
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(iii)
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प्रश्न 8.
उभयधर्मी न्यूक्लियोफाइल क्या होते हैं ? एक उदाहरण की सहायता से समझाइए।
उत्तर
वे न्यूक्लियोफाइल जिनमें दो न्यूक्लियोफिलिक केन्द्र होते हैं, उभयधर्मी न्यक्लियोफाइल कहलाते हैं । उदाहरण, सायनाइड समूह है क्योंकि यह C या N दोनों तरफ से आक्रमण कर निम्न अनुनादी संरचनाओं के कारण कर सकता है –
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प्रश्न 9.
निम्नलिखित में प्रत्येक युगलों में से कौन-सा यौगिक OF के साथ S2 अभिक्रिया में अधिक तीव्रता से अभिक्रिया करेगा –
(i) CH3Br अथवा CH3I
(ii) (CH3)3CCl अथवा CH3Cl
उत्तर
(i) CH3I, OH के साथ SN2 अभिक्रिया तेजी से करता है। क्योंकि I आयन Br आयन की तुलना में अच्छा निर्मोची या निकलने वाला समूह अपने बड़े आकार के कारण है।
(ii) CH3Cl, (CH3)3CCl में उपस्थित त्रिविम बाधा के कारण इसकी तुलना में तेजी से क्रिया करता है।

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प्रश्न 10.
निम्नलिखित हैलाइडों के एथेनॉल में सोडियम विहाइड्रोहैलोजन के फलस्वरूप बनने वाली सभी ऐल्कीनों की संरचना लिखिए। इसमें से मुख्य ऐल्कीन कौन-सी होगी –
(i) 1-ब्रोमो 1-मेथिलसाइक्लोहेक्सेन
(ii) missing content
उत्तर
(i) 1-ब्रोमो 1-मिथाइलसाइक्लोहेक्सेन में Br परमाणु के दोनों तरफ की β– हाइड्रोजन समतुल्य होती है, अतः केवल 1-एल्कीन बनेगा।
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(ii)
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क्योंकि एल्कीन (A) सेटजैफ नियमानुसार ज्यादा प्रतिस्थापित होगी। अतः यह ज्यादा स्थायी होगी तथा मुख्य उत्पाद होगा।

(iii)
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प्रश्न 11.
निम्नलिखित परिवर्तन आप कैसे करेंगे(i) एथेनॉल से ब्यूट-1-आइन
(ii) एथीन से ब्रोमोएथेन
(ii) प्रोपीन से 1-नाइट्रोप्रोपेन
(iv) टॉलुईन से बेन्जिल ऐल्कोहॉल
(v) प्रोपीन से प्रोपाइन
(vi) एथेनॉल से एथिल फ्लुओराइड
(vii) ब्रोमोमेथेन से प्रोपेनोन
(viii) ब्यूट-1-ईन से ब्यूट-2-ईन
(ix) 1-क्लोरोब्यूटेन से n-ऑक्टेन
(x) बेन्जीन से बाइफेनिल।
उत्तर
(i)
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(ii)
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(iii)
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(iv)
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(v)
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(vi)
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(vii)
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(viii)
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(ix)
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(x)
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प्रश्न 12.
समझाइए क्यों –
(i) क्लोरोबेन्जीन का द्विध्रुव आघूर्ण साइक्लोहेक्सिल क्लोराइड की तुलना में कम होता है ?
(ii) ऐल्किल हैलाइड ध्रुवीय होते हुए भी जल में अमिश्रणीय है ?
(iii) ग्रिगनार्ड अभिकर्मक का विरचन निर्जलीय अवस्थाओं में करना चाहिए?
उत्तर
(i)
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क्लोरोबेंजीन में sp2 संकरित कार्बन होने के कारण, C – परमाणु ज्यादा विद्युत्ऋणात्मक होता है। (ज्यादा-s-लक्षण) जबकि साइक्लोहेक्साइल क्लोराइड, C-परमाणु sp’ संकरित अर्थात् कम विद्युत्ऋणी (कमs-लक्षण) होता है। इसलिये क्लोरोबेंजीन में C-Clबंध की ध्रुवता साइक्लोहेक्साइल क्लोराइड के C-Cl

बंध से कम हो जाती है। इसके अलावा Cl परमाणु के एकाकी इलेक्ट्रॉन युग्म के बेंजीन रिंग पर विस्थापनीकरण के कारण क्लोरोबेंजीन में C-Cl बंध पर आंशिक द्विबंध लक्षण आ जाता है जबकि C-Cl बंध साइक्लोहेक्साइल क्लोराइड पर शुद्ध एकल बंध होता है। अतः क्लोरोबेंजीन में C-Cl बंध साइक्लोहेक्साइल क्लोराइड से कम होता है। द्विध्रुव-आघूर्ण आवेश तथा दूरी का गुणनफल होता है। अतः क्लोरोबेंजीन का द्विध्रुव-आघूर्ण साइक्लोहेक्साइल क्लोराइड से कम होता है।

(ii) पानी के अणु में पर्याप्त प्रबल अन्तरआण्विक हाइड्रोजन बंध होता है जिसे तोड़ना एल्किल हैलाइड के लिये कठिन होता है, जो ध्रुवीय स्वभाव के होते हैं। अतः एल्किल हैलाइड पानी में नहीं घुलते तथा अलग परत बनाते हैं।

(iii) ग्रिगनार्ड अभिकर्मक पानी द्वारा तुरन्त विघटित होकर एल्केन बनाते हैं। इसी कारण इन्हें निर्जलीय दशा में बनाया जाता है। इसके बदले में ईथर से-ग्रिगनार्ड अभिकर्मक बनाते समय विलायक की तरह उपयोग करते हैं।

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प्रश्न 13.
फ्रिऑन-12, DDT, कार्बनटेट्राक्लोराइड तथा आयोडोफॉर्म के उपयोग लिखिए।
उत्तर
फ्रिऑन-12-(i) इसे घरेलू रेफ्रिजरेटर में कूलिंग एजेन्ट के रूप में उपयोग किया जाता है।
(ii) ऐरोसॉल में नोदक के रूप में उपयोग किया जाता है।
डी. डी. टी.-यह एक शक्तिशाली कीटनाशी (Insecticide) और माइटीनाशी है। इसका प्रमुख उपयोग मलेरिया फैलाने वाले मच्छरों को नष्ट करने में होता है। यह स्थायी होता है अंतः वातावरण में बहुत समय तक उपस्थित रहकर प्रदूषण उत्पन्न करता है। मनुष्यों, पक्षियों और मछलियों की कुछ प्रजातियों पर इसका विषैला प्रभाव होता है। आजकल यू.एस.ए. तथा यूरोपीय देशों में इसका प्रयोग प्रतिबन्धित है।

कार्बनटेट्राक्लोराइड – (i) आग बुझाने के लिये पाइरीन के नाम से।
(ii) CHCl तथा फ्रिऑन के औद्योगिक निर्माण में उपयोग किया जाता है।
(iit) तेल, वसा तथा रेजिन के लिये औद्योगिक विलायक के रूप में, इसके इस गुण के कारण ड्राइक्लीनिंग में भी इसका उपयोग होता है।
(iv) हुकवर्म को निकालने के लिए दवाई के रूप में।
आयोडोफॉर्म-इसका उपयोग पहले एंटीसेप्टिक के रूप में किया जाता था, लेकिन इसका यह एंटीसेप्टिक का गुण मुक्त आयोडीन के कारण है, अतः इसकी आपत्तिजनक गंध के कारण भी इसको अन्य रूपों में बदल दिया गया है, जिसमें आयोडीन समाहित हो।

प्रश्न 14.
निम्नलिखित की प्रत्येक अभिक्रिया में बनने वाले मुख्य कार्बनिक उत्पाद की संरचना लिखिए –
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उत्तर
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प्रश्न 15.
निम्नलिखित अभिक्रिया की क्रियाविधि लिखिए –
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उत्तर
KCN जलीय माध्यम में CN न्यूक्लियोफाइल आयन देता है, जो निम्न का अनुनादी संकर होता है –
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चूँकि CN आयन उभयधर्मी न्यूक्लियोफाइल होता है। अतः ये n-ब्यूटाइल ब्रोमाइड के C-Br बंध की C-परमाणु पर दोनों तरफ अर्थात् या तो C-परमाणु या N-परमाणु की तरफ से आक्रमण करता है। अतः दो संभावित उत्पाद क्रमशः सायनाइड व आइसोसायनाइड होंगे।

परन्तु C-C बंध, C-N बंध की तुलना में ज्यादा स्थायी होता है। अतः आक्रमण C-परमाणु की तरफ से होता है अतः प्रमुख्यतः सायनाइड बनते हैं।
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प्रश्न 16.
SN2 प्रतिस्थापन के प्रति अभिक्रियाशीलता के आधार पर इन यौगिकों के समूहों को क्रमबद्ध कीजिए।
(i) 2-ब्रोमो 2-मेथिलब्यूटेन, 1-ब्रोमोपेन्टेन, 2-ब्रोमोपेन्टेन
(ii) 1-ब्रोमो 3-मेथिलब्यूटेन, 2-ब्रोमो 2-मेथिलब्यूटेन, 3-ब्रोमो 2-मेथिलब्यूटेन।
(iii) 1-ब्रोमोब्यूटेन, 1-ब्रोमो 2, 2-डाइमेथिलप्रोपेन, 1-ब्रोमो 2-मेथिलब्यूटेन, 1-ब्रोमो 3-मेथिलब्यूटेन।
उत्तर
SN2 अभिक्रिया की क्रियाशीलता त्रिविम बाधा पर निर्भर करती है। त्रिविम बाधा जितनी ज्यादा होगी क्रियाशीलता उतनी कम होगी। अतः विभिन्न एल्किल हैलाइड की SN2 क्रिया के प्रति क्रियाशीलता होती। 1°>2°>3°.
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प्रश्न 17.
C6H5CH2Cl तथा C6H5CHClC6H5 में से कौन-सा यौगिक जलीय KOH से शीघ्रता से जल-अपघटित होगा?
उत्तर
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अत: SN2 क्रियाविधि में अभिक्रिया की क्रियाशीलता त्रिविम बाधा पर निर्भर करती है। अतः C6H5CH2Cl, C6H5CHClC6H5 की तुलना में SN2 दशा में सरलता से जल-अपघटित होता है।

प्रश्न 18.
p-तथा m-समावयवियों की तुलना में p-डाइक्लोरो-बेन्जीन का गलनांक एवं विलेयता उच्च होती है, विवेचना कीजिए।
उत्तर
p-क्लोरोबेंजीन का गलनांक उसके संगत o-तथा m-समावयवी से ज्यादा उच्च होती है जिसके कारण वह क्रिस्टल जालक में o या m-समावयवी की तुलना में फिट हो जाते हैं । अतः इनमें प्रबल अन्तराआण्विक आकर्षण बल ० तथा m-समावयवी से प्रबल होता है m-समावयवी में o-तथा क्रिस्टल जालक को घोलने या तोड़ने के लिये ज्यादा ऊर्जा की आवश्यकता होती है। दूसरे शब्दों में p-समावयवी का गलनांक उच्च तथा उसकी विलेयता संगत m तथा ०-समावयवी से कम होते हैं।

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प्रश्न 19.
निम्नलिखित परिवर्तन कैसे सम्पन्न किए जा सकते हैं ?
(i) प्रोपीन से प्रोपेन -1- ऑल
(ii) एथेनॉल से ब्यूट -1-आइन
(iii) 1-ब्रोमोप्रोपेन से 2-ब्रोमोप्रोपेन
(iv) टॉलुईन से बेन्जिल ऐल्कोहॉल
(v) बेन्जीन से 4-ब्रोमोनाइट्रोबेन्जीन
(vi) बेन्जिल ऐल्कोहॉल से 2-फेनिल एथेनोइक अम्ल
(vii) एथेनॉल से प्रोपेन नाइट्राइल
(viii) एनिलीन से क्लोरोबेन्जीन
(ix) 2-क्लोरोब्यूटेन से 3, +डाइमेथिलहेक्सेन
(x) 2-मेथिल 1-प्रोपीन से 2-क्लोरो 2-मेथिलप्रोपेन
(xi) एथिल क्लोराइड से प्रोपेनोइक अम्ल
(xii) ब्यूट-1-ईन से n-ब्यूटिल आयोडाइड
(xiii) 2-क्लोरोप्रोपेन से 1-प्रोपेनॉल
(xiv) आइसोप्रोपिल ऐल्कोहॉल से आयोडोफॉर्म
(xv) क्लोरोबेन्जीन से p-नाइट्रोफीनॉल
(xvi) 1-ब्रोमोप्रोपेन से 2-ब्रोमोप्रोपेन
(xvii) क्लोरोएथेन से ब्यूटेन
(xviii) बेन्जीन से डाइफेनिल
(xix) तृतीयक-ब्यूटिले ब्रोमाइड से आइसो-ब्यूटिल ब्रोमाइड
(xx) ऐनिलीन से फेनिलआइसोसायनाइड।
उत्तर
(i)
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(ii)
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(iii)
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(iv)
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(v)
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(vi)
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(vii)
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(viii)
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(ix)
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(x)
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(xi)
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(xii)
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(xiii)
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(xiv)
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(xv)
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(xvi)
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(xvii)
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(xviii)
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(xix)
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(xx)
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प्रश्न 20.
ऐल्किल क्लोराइड की जलीय KOH से अभिक्रिया द्वारा ऐल्कोहॉल बनता है लेकिन ऐल्कोहॉलिक KOH की उपस्थिति में ऐल्कीन मुख्य उत्पाद के रूप में प्राप्त होती है। समझाइए।
उत्तर- पानी की उपस्थिति में KOH पूर्णतः वियोजित होकर OH देता है जो एल्किल हैलाइड में प्रतिस्थापन के लिये प्रबल न्यूक्लियोफाइल का काम करके एल्किल हैलाइड से एल्कोहॉल बनाता है। इसके अलावा जलीय विलयन में OH आयन ज्यादा वियोजित (जलयोजित) होते हैं । ये जलयोजन OH आयन के क्षारीय गुण को कम करता है, जो एल्किल हैलाइड की β-कार्बन से प्रोटॉन का अपोहन कर एल्कीन बनाने में असफल हो जाता है। एल्कोहॉलीय माध्यम में (H2O से कम ध्रुवीय) OH कम जलयोजित होते हैं, अतः प्रबल क्षार की तरह कार्य करते हैं तथा β-कार्बन से प्रोटॉन निकालकर एल्कीन मुख्य उत्पाद (विहाइड्रो-हैलोजनीकरण) बनाता है। इसके अलावा एल्कोहॉलीय विलयन में OH आयन के अलावा एथॉक्साइड आयन C2H5O है जो OH से प्रबल क्षार है, तथा प्रोटॉन त्याग कर एल्कीन बनाता है।

प्रश्न 21.
प्राथमिक से ऐल्किल हैलाइड C4H9Br (A), ऐल्कोहॉलिक KOH से अभिक्रिया द्वारा यौगिक (B) देता है। यौगिक ‘B’ HBr के साथ अभिक्रिया से यौगिक ‘C’ देता है जो कि यौगिक ‘A’ का समावयवी है। जब यौगिक ‘A’ की अभिक्रिया सोडियम धातु से होती है तो यौगिक ‘D’ C8H18 बनाता है, जो कि ब्यूटिलब्रोमाइड की सोडियम से अभिक्रिया द्वारा बने उत्पाद से भिन्न है।यौगिक ‘A’ का संरचना सूत्र दीजिए तथा सभी अभिक्रियाओं की समीकरण दीजिए।
उत्तर
दिये गये C4H9Br 1° एल्किल हैलाइड के संभावित दो समावयवी है।
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प्रश्नानुसार यौगिक A सोडियम के साथ क्रिया द्वारा समान उत्पाद नहीं बनाता है। जो n-ब्यूटिलब्रोमाइड बनाता है। इसलिये A(I) नहीं होगा।
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अतः (II) सही समावयवी होगा।
सम्पूर्ण अभिक्रिया के लिये समीकरण होगा –
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प्रश्न 22.
तब क्या होता है, जब
(i) n-ब्यूटिलक्लोराइड को ऐल्कोहॉलिक KOH के साथ अभिकृत किया जाता है ?
(ii) शुष्क ईथर की उपस्थिति में ब्रोमोबेंजीन की अभिक्रिया मैग्नीशियम से होती है ?
(iii) क्लोरोबेन्जीन का जल-अपघटन किया जाता है ?
(iv) एथिलक्लोराइड की अभिक्रिया जलीय KOH से होती है ?
(v)शुष्क ईथर की उपस्थिति में मेथिलब्रोमाइड की अभिक्रिया सोडियम से होती है ?
(vi) मेथिलक्लोराइड की अभिक्रिया KCN से होती है ?
गर्म
उत्तर
(i)
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(ii)
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(ii)
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(iv)
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(v)
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(vi)
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हैलोऐल्केन तथा हैलोऐरीन अन्य महत्वपूर्ण प्रश्नोत्तर

हैलोऐल्केन तथा हैलोऐरीन वस्तुनिष्ठ प्रश्न

1. सही विकल्प चुनकर लिखिए –

प्रश्न 1.
निम्न में से कौन-सा यौगिक AgNO, विलयन के साथ पीला अवक्षेप देगा-
(a) KIO3
(b) CHI3
(c) KI
(d) CH2I2.
उत्तर
(c) KI

प्रश्न 2.
एथिल ब्रोमाइड की लेड सोडियम मिश्र धातु के साथ क्रिया करने पर बनता है –
(a) टेट्राएथिल लेड
(b) टेट्रा एथिल ब्रोमाइड
(c) दोनों
(d) कोई नहीं।
उत्तर
(a) टेट्राएथिल लेड

प्रश्न 3.
अभिक्रिया CH3Br + OH → CH3 – OH + Br है –
(a) इलेक्ट्रॉन स्नेही प्रतिस्थापन
(b) इलेक्ट्रॉनस्नेही योग
(c) नाभिकस्नेही योग
(d) नाभिकस्नेही प्रतिस्थापन ।
उत्तर
(d) नाभिकस्नेही प्रतिस्थापन ।

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प्रश्न 4.
जब एसीटिलीन HCI के साथ योग करता है तो बनने वाला उत्पाद है –
(a) CH2 = CH – Cl
(b) CH3 – CH – C2.
(c) Cl – CH = CH – Cl
(d) कोई नहीं।
उत्तर
(b) CH3 – CH – C2.

प्रश्न 5.
ऐरिल हैलाइड में हैलोजन परमाणु से जुड़ा कार्बन होता है –
(a) sp संकरित
(b) sp2 संकरित
(c) sp3 संकरित
(d) sp3d संकरित।
उत्तर
(b) sp2 संकरित

प्रश्न 6.
SN1 प्रक्रिया में प्रथम पद में निर्माण होता है –
(a) मुक्त मूलक का
(b) कार्ब ऐनायन
(c) कार्ब धनायन
(d) अंतिम उत्पाद।
उत्तर
(c) कार्ब धनायन

प्रश्न 7.
क्लोरो बेंजीन, SN2 क्लोरल तथा सान्द्र H2SO4 के साथ क्रिया करके बनाता है
(a) P.V.C.
(b) T.N.T.
(c) B.H.U.
(d) D.D.T.
उत्तर
(d) D.D.T.

प्रश्न 8.
CH3OH + OH → CH3.OH + Br है –
(a) SN1
(b) SN2
(c) SE-1
(d) SE-2
उत्तर
(b) SN2

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प्रश्न 9.
निम्न यौगिक रजत चूर्ण के साथ गर्म करने पर ऐसीटिलीन देता है
(a) CH2I2
(b) CH3I
(c) CHI3
(d) Cl4
उत्तर
(c) CHI3

प्रश्न 10.
आग बुझाने के लिए पायरीन का उपयोग निम्न में से किसी एक के द्वारा होता है –
(a) CO2
(b) CH2Cl2
(c) CCl4
(d) CH2 = CHCl.
उत्तर
(c) CCl4

प्रश्न 11.
निम्न में से कौन-सा यौगिक फ्रिऑन के नाम से जाना जाता है –
(a) CHCl3
(b) CCl4
(c) CCl2F2
(d) CF4
उत्तर
(c) CCl2F2

प्रश्न 12.
एथिल आयोडाइड को ऐल्कोहॉलीय KOH के साथ गर्म करने पर प्राप्त होगा –
(a) एथेनॉल
(b) एथेन
(c) एसीटिलीन
(d) एथिलीन।
उत्तर
(d) एथिलीन।

प्रश्न 13.
C2H5-OH को आयोडीन और क्षार के साथ गर्म करने पर बनता है –
(a) CH3I
(b) CHI3
(c) CH3 – CHO
(d) CHCl3.
उत्तर
(b) CHI3

प्रश्न 14.
निम्न में से कौन-सा रासायनिक सूत्र क्लोरो पिक्रिन का है –
(a) CCl3 – CHO
(b) C(NO2)Cl3
(c) CH3-C(NO2)Cl2
(d) CCl3-NH2
उत्तर
(b) C(NO2)Cl3

प्रश्न 15.
CH,I, CH,Br तथा CHICI अणुओं की ध्रुवता का क्रम है –
(a) CH2Br > CH2Cl>CH3I
(b) CH3I > CH3Br > CH2Cl
(c) CH3Cl > CH3Br > CH3I
(d) CH3Cl > CH3I > CH3Br.
उत्तर
(c) CH3Cl > CH3Br > CH3I

प्रश्न 16.
ऐल्किल हैलाइडों की क्रियाशीलता का सही क्रम होगा –
(a) आयोडाइड > ब्रोमाइड > क्लोराइड
(b) आयोडाइड < ब्रोमाइड < क्लोराइड
(c) ब्रोमाइड > आयोडाइड > क्लोराइड
(d) ब्रोमाइड < क्लोराइड > आयोडाइड।
उत्तर
(a) आयोडाइड > ब्रोमाइड > क्लोराइड

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प्रश्न 17.
आयोडोफॉर्म को सिल्वर चूर्ण के साथ गर्म करने पर बनता है –
(a) ऐल्केन
(b) एथिलीन
(c) एसीटिलीन
(d) आइसोसाइनाइड।
उत्तर
(c) एसीटिलीन

प्रश्न 18.
रेशिग विधि निम्न में से किसके निर्माण में प्रयुक्त होती हैं –
(a) क्लोरोबेंजीन
(b) बेंजीन
(c) टालुईन
(d) नाइट्रो बेंजीन।
उत्तर
(a) क्लोरोबेंजीन

2. रिक्त स्थानों की पूर्ति कीजिए –

  1. क्लोरोफॉर्म को खुला छोड़ने पर बनने वाला हानिकारक उत्पाद का सूत्र ………….. है।
  2. ऐल्किल हैलाइड का सामान्य सूत्र ……………… है।
  3. ऐरोमैटिक प्राथमिक एमीन को क्लोरोफॉर्म और ऐल्कोहॉलीय कॉस्टिक पोटॉश के साथ गर्म करने पर एक दुर्गन्ध युक्त गैस ……………… बनता है।
  4. B.H.C. एक कीटनाशी है, जिसका व्यापारिक नाम …………….. है।
  5. क्लोरीटोन उच्च कोटि की ……………… है।।
  6. SN1 अभिक्रिया ……………… पद में होती है।
  7. हैलो एरीन में प्रतिस्थापन अभिक्रियाएँ मुख्यतः……………… होती हैं।
  8. प्रशीतक फ्रिऑन का सूत्र ……………… है।

उत्तर

  1. COCl2
  2. CnH2n+1
  3. फेनिल आइसो सायनाइड
  4. गैमेक्सीन (या लिण्डेन)
  5. निद्राकारी औषधि
  6. दो,
  7. इलेक्ट्रॉनस्नेही
  8. CCl2F2.

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3. उचित सम्बन्ध जोडिए –
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उत्तर

  1. (d)
  2. (e)
  3. (f)
  4. (b)
  5. (c)
  6. (g)
  7. (a).

4. एक शब्द / वाक्य में उत्तर दीजिए –

  1. बेंजीन को मेथिल क्लोराइड के साथ निर्जल AlCl3 की उपस्थिति में क्रिया करने पर टॉलुईन बनता है। इस अभिक्रिया का नाम क्या है ?
  2. ऐल्किल हैलाइड ध्रुवीय प्रकृति का होता है फिर भी जल में अविलेय है।
  3. ऐल्किल हैलाइड के सोडियम धातु के साथ गर्म करने पर बनता है।
  4. बेंजीन डाइएजोनियम लवण को क्युप्रस हैलाइड और उसके संगत अम्ल के साथ गर्म करने पर हैलो ऐरीन बनता है । इस अभिक्रिया का नाम लिखिए।
  5. आयोडो बेंजीन कॉपर चूर्ण के साथ 200°C पर गर्म करने पर प्राप्त होता है।
  6. बेंजीन को सूर्य प्रकाश की उपस्थिति में Cl2 के साथ क्रिया कराने पर बनता है।
  7. क्लोरोबेंजीन बनाने की प्रयोगशाला विधि का नाम लिखिए।
  8. प्राथमिक ऐल्किल हैलाइड में होने वाली नाभिकस्नेही प्रतिस्थापन अभिक्रिया की क्रिया-विधि का नाम लिखिए।

उत्तर

  1. फ्रीडल क्रॉफ्ट अभिक्रिया
  2. हाइड्रोजन बन्ध नहीं बनाने के कारण
  3. ऐल्केन
  4. सैण्डमेयर अभिक्रिया
  5. डाइफेनिल
  6. B.H.C.
  7. रेशिग विधि
  8. द्विअणुक नाभिकस्नेही प्रतिस्थापन अभिक्रिया।

हैलोऐल्केन तथा हैलोऐरीन  लघु उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 1.
(i) आयोडोफॉर्म अभिक्रिया लिखिए।
(ii) AgNO3 विलयन के साथ CHI3 पीला अवक्षेप देता है जबकि क्लोरोफॉर्म नहीं देता, क्यों?
(iii) क्या होता है, जब ऐथिल ब्रोमाइड को ऐल्कोहॉलीय KOH के साथ गर्म किया जाता है ?
उत्तर
(i) एथिल ऐल्कोहॉल या ऐसीटोन को I2 और NaOH के साथ गर्म करने पर पीले रंग का क्रिस्टल बनता है। इसे आयोडोफॉर्म या हैलोफॉर्म अभिक्रिया कहते हैं।
C2H5OH + 4I2 + 6NaOH → 5Nal + HCOONa + 5H2O + CHI3

(ii) आयोडोफॉर्म में C-I बन्ध क्लोरोफॉर्म के C-Cl बन्ध की तुलना में कमजोर होता है। अतः CHI3, AgNO3 के साथ Agl का पीला अवक्षेप बनाता है, किन्तु CHCl3 अवक्षेप AgCl नहीं बनाता।

(iii) एथिल ब्रोमाइड को एल्कोहॉलीय KOH के साथ उबालने पर एथिलीन बनता है।
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प्रश्न 2.
सैण्डमेयर अभिक्रिया को उदाहरण सहित समझाइए।
उत्तर
सैण्डमेयर अभिक्रिया-ऐरोमैटिक प्राथमिक ऐमीन को HNO2 के साथ 0°C से 5°C ताप पर अभिक्रिया कराने पर बेंजीन डाइऐजोनियम लवण बनता है जो क्यूप्रस और उसके संगत हैलोजन अम्ल की उपस्थिति में विघटित होकर हैलोएरीन देते हैं।
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प्रश्न 3.
क्लोरोबेंजीन और क्लोरल की सान्द्र H2SO4 की उपस्थिति में होने वाली अभिक्रिया का समीकरण लिखिए।
अथवा, डी.डी.टी. कैसे बनता है ? इसका एक उपयोग लिखिए।
उत्तर
जब क्लोरल को सान्द्र H2SO4 की उपस्थिति में क्लोरोबेंजीन के साथ संघनित करते हैं, तो डी. डी. टी. अर्थात् डाइक्लोरो डाइफेनिल ट्राइक्लोरोएथेन बनता है।
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उपयोग-यह एक शक्तिशाली कीटनाशी है।

प्रश्न 4.
जैम-डाइहैलाइड और विस-डाइहैलाइड किसे कहते हैं ?
उत्तर
जब हाइड्रोकार्बन के एक ही कार्बन परमाणु पर दोनों हैलोजन परमाणु जुड़े हों तो उसे जैमडाइहैलाइड (Gem-Dihalide) कहते हैं। Gem mean geminal अर्थात् Same position.
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जब दो हैलोजन परमाणु निकटस्थ दो विभिन्न कार्बन परमाणुओं से जुड़े हों, तो उसे विस-डाइहैलाइड (Vis-dihalide) कहते हैं। Vis-means vicinal जिसका अर्थ है- Adjacent position.
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प्रश्न 5.
ल्यूकॉस अभिकर्मक क्या है ? इसका क्या उपयोग है ?
उत्तर
ल्यूकॉस अभिकर्मक-जिंक क्लोराइड का सान्द्र HCl में विलयन ल्यूकॉस अभिकर्मक कहलाता है। उपयोग-इसका उपयोग प्राथमिक, द्वितीयक और तृतीयक ऐल्कोहॉलों में भेद करने के लिए किया जाता है।
ऐल्कोहॉल में ल्यूकॉस अभिकर्मक मिलाने पर यदि तत्काल (20-30 सेकेण्ड में) अवक्षेप या धुंधलापन प्राप्त हो तो वह तृतीयक ऐल्कोहॉल है। यदि लगभग 5 मिनट बाद अवक्षेप बने तो द्वितीयक ऐल्कोहॉल तथा यदि अवक्षेप बिल्कुल न बने तो प्राथमिक ऐल्कोहॉल है।

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प्रश्न 6.
कार्बिल ऐमीन अभिक्रिया को समझाइए एवं उसका एक उपयोग लिखिए।
उत्तर
कार्बिल ऐमीन अभिक्रिया–ऐलिफैटिक या ऐरोमैटिक प्राथमिक ऐमीन को CHCl3 तथा ऐल्कोहॉलीय KOH के साथ गर्म करने से तीव्र दुर्गन्ध युक्त फेनिल आइसोसायनाइड (कार्बिल ऐमीन) बनता है। इसका उपयोग क्लोरोफॉर्म परीक्षण तथा प्राथमिक ऐमीन परीक्षण में किया जाता है।
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प्रश्न 7.
666 क्या है ? इसके बनाने की विधि दीजिए एवं कृषि में इसका उपयोग बताइये।
उत्तर
बेंजीन को Cl2 के साथ सूर्य प्रकाश की उपस्थिति में क्रिया कराने पर B.H.C. बनता है। इसे 666 – या गैमेक्सेन या लिण्डेन या 1, 2, 3, 4, 5, 6, हेक्साक्लोरो साइक्लोहेक्सेन भी कहते हैं।
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उपयोग-यह कृषि में कीटनाशी के रूप में उपयोगी है।

प्रश्न 8.
क्लोरोबेंजीन की निम्न अभिक्रियाओं को समझाइए(a) अंधेरे में FeCl3 की उपस्थिति में क्लोरीन के साथ अभिक्रिया। (b) फिटिग अभिक्रिया।
उत्तर
(a) क्लोरोबेंजीन, क्लोरीन से FeCl3 की उपस्थिति में अंधेरे से क्रिया करके o-डाइक्लोरो बेंजीन तथा p-डाइक्लोरो बेंजीन बनाता है।
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(b) फिटिग (Fittig) अभिक्रिया- जब एरिल हैलाइड के दो अणु Na धातु के साथ शुष्क ईथर की उपस्थिति में क्रिया करते हैं तो डाइफेनिल बनाते हैं, इसे फिटिग अभिक्रिया कहते हैं।
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प्रश्न 9.
क्लोरोफॉर्म से निम्नलिखित को आप किस प्रकार प्राप्त करेंगे, समीकरण लिखिए –
(a) मेथेन, (b) ऐसीटिलीन, (c) कार्बन टेट्राक्लोराइड।
उत्तर
(a) Zn और H2O द्वारा अपचयन से मेथेन बनता है।
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(b) क्लोरोफॉर्म को रजत चूर्ण के साथ गर्म करने पर ऐसीटिलीन बनता है।
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(c) क्लोरोफॉर्म सूर्य के प्रकाश में क्लोरोनीकृत होकर CCIA बनाता है।
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प्रश्न 10.
टिप्पणी लिखिए –
(a) हुन्सडीकर विधि, (b) रेशिग प्रक्रम।
उत्तर
(a) हुन्सडीकर विधि-ऐरोमैटिक कार्बोक्सिलिक अम्ल के सिल्वर लवण को ब्रोमीन के साथ गर्म करने से ऐरिल ब्रोमाइड बनता है।
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(b) रेशिग विधि (औद्योगिक विधि)-बेंजीन वाष्प, वायु एवं HCl गैस मिश्रण को 503K ताप पर उत्प्रेरक CuCl2 पर से प्रभावित करके क्लोरोबेंजीन बनाया जाता है।
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प्रश्न 11.
फ्रीऑन बनाने की विधि, गुण एवं उपयोग दीजिए।
उत्तर
डाईक्लोरो डाईफ्लुओरो मेथेन, SbCls की उपस्थिति में CCl4 एवं SbF3 की अभिक्रिया से फ्रीऑन बनता है।
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इसका क्वथनांक काफी कम होता है जिसे कमरे के ताप पर दाब बढ़ाकर आसानी से द्रवित कर लिया जाता है।
उपयोग – यह एक विषैला, अज्वलनशील तथा अक्रिय पदार्थ है जो रेफ्रिजरेटर में कूलिंग एजेन्ट के रूप में उपयोग किया जाता है। यह एरोसॉल व फोम में नोदक के रूप में भी प्रयुक्त किया जाता है।

प्रश्न 12.
(i) एथिल आयोडाइड का क्वथनांक एथिल ब्रोमाइड से अधिक होता है। कारण लिखिए।
(i) क्या कारण है कि पैराडाइक्लोरो बेंजीन का गलनांक ऑर्थो एवं मेटा समावयवियों से अधिक होता है ?
उत्तर
(i) समान ऐल्किल समूह वाले ऐल्किल हैलाइडों के क्वथनांक उनमें उपस्थित हैलोजन परमाणु के परमाणु भार में वृद्धि के साथ बढ़ते हैं। एथिल आयोडाइड का अणुभार एथिल ब्रोमाइड से अधिक होता है इसलिए एथिल आयोडाइड का क्वथनांक अधिक होता है।
(ii) डाइक्लोरो बेंजीन का पैरा समावयवी ऑर्थो एवं मेटा समावयवियों की तुलना में अधिक सममित होता है तथा क्रिस्टल लैटिस में अच्छी तरह व्यवस्थित होता है, इस कारण पैरा डाइक्लोरोबेंजीन का गलनांक ऑर्थो एवं मेटा समावयवियों से अधिक होता है।

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प्रश्न 13.
ऐल्किल हैलाइडों के प्रमुख न्यूक्लियोफिलिक प्रतिस्थापन अभिक्रियाएँ दीजिए।
उत्तर
न्यूक्लियोफिलिक प्रतिस्थापन अभिक्रियाएँ – (i) जल-अपघटन – OH समूह द्वारा प्रतिस्थापन-ऐल्किल हैलाइड HCI को जल या जलीय KOH के साथ जल-अपघटन कराने पर ऐल्कोहॉल बनता है।
C2H5Br + KOH → C2H5OH + KBr

(ii) -OR समूह द्वारा विस्थापन (ईथर का बनना)-ऐल्किल हैलाइड, सोडियम एल्कॉक्साइड (NaOR) या Ag2O के साथ क्रिया करके हैलोजन परमाणु को-OR समूह द्वारा विस्थापित करके ईथर बनाते हैं।

C2H5Br + NaOC2H5 → (C2H5OC2H5 + NaBr)
2C2H5I + Ag2O → (C2H5)2O + 2AgI

(iii)-CN समूह द्वारा प्रतिस्थापन-ऐल्किल हैलाइड जलीय या एल्कोहॉलीय KCN से क्रिया करके ऐल्किल सायनाइड बनाते हैं।

C2H5Cl + KCN → C2H5CN + KCl

(iv) अभिक्रिया के साथ क्रिया (हॉफमैन विधि)-एल्किल हैलाइड को NH3 के जलीय या ऐल्कोहॉलीय विलयन के साथ बंद नली में 100°C पर गर्म करने पर विभिन्न ऐमीन का मिश्रण प्राप्त होता है। .
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प्रश्न 14.
प्रयोगशाला में क्लोरोबेंजीन बनाने की विधि का समीकरण लिखिए तथा इसकी नाइट्रीकरण और सल्फोनीकरण क्रियाएँ लिखिए।
उत्तर
प्रयोगशाला में लौह चूर्ण या आयोडीन की उपस्थिति में गर्म बेंजीन विलयन में शुष्क क्लोरीन प्रवाहित करके क्लोरोबेंजीन प्राप्त किया जाता है।
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नाइट्रीकरण क्रिया – क्लोरोबेंजीन सान्द्र नाइट्रिक अम्ल के साथ सान्द्र H2SO4 की उपस्थिति में गर्म करने पर ऑर्थो तथा पैरा नाइट्रोक्लोरोबेंजीन का मिश्रण बनाता है।
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सल्फोनीकरण क्रिया – सान्द्र H2SO4 के साथ क्लोरोबेंजीन को गर्म करने पर ऑर्थो तथा पैरा क्लोरोबेंजीन सल्फोनिक अम्लों का मिश्रण प्राप्त होता है।
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प्रश्न 15.
एथिल आयोडाइड की निम्न के साथ होने वाली अभिक्रिया का रासायनिक समीकरण दीजिए
(1) Pb-Na मिश्रधातु
(2) Mg धातु
(3) AgNO2
(4) सोडियम धातु के साथ।
उत्तर
(1) Pb – Na मिश्रधातु के साथ-एथिल आयोडाइड Pb – Na मिश्र धातु के साथ क्रिया करके T.E.L. बनाते हैं।
4C2H5I + 4Pb / Na→(C2H5)4 Pb+3Pb+4NaI

(2) Mg धातु के साथ-एथिल आयोडाइड शुष्क ईथर विलायक की उपस्थिति में Mg धातु से क्रिया करके ग्रिगनार्ड अभिकर्मक बनाता है।
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(3) AgNO2 के साथ-नाइट्रो एथेन मुख्य रूप से बनता है।
C2H5I + AgNO2 → C2H5NO2 + AgI

(4) सोडियम धातु के साथ-एथिल आयोडाइड को Na धातु के साथ ईथर की उपस्थिति में गर्म करते हैं तो ब्यूटेन बनता है।
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प्रश्न 16.
डाइ-क्लोरो एथेन के बनाने की विधि लिखिए। इसके मुख्य गुण तथा उपयोग बताइए।
उत्तर-डाइ-क्लोरोएथेन बनाने की विधि-एथेन के दो H-परमाणुओं को दो हैलोजन परमाणुओं से विस्थापित कराते हैं तो डाइ-क्लोरो एथेन प्राप्त होता है।
(1) एथीन-एथिलीन वाष्प या द्रव में CCl4 में विलेय की हुई क्लोरीन गैस प्रवाहित करने पर 1, 2 डाइ क्लोरो एथेन बनता है।
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(2) ग्लाइकॉल-एथेन डाइ-ऑल और HCl अम्ल के मिश्रण को निर्जल ZnCl, की उपस्थिति में पश्चवाहन करने पर 1, 2 डाइ-क्लोरो एथेन बनता है।
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गुण-(1) जलीय KOH के साथ –
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(2) ऐल्कोहॉलीय पोटैशियम हाइड्रॉक्साइड के साथ-गर्म करने पर पहले वाइनिल क्लोराइड और अन्त में अल्प मात्रा में एथाइन बनता है। .
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इस अभिक्रिया में बनने वाला मुख्य यौगिक वाइनिल एथिल ईथर है। यह वाइनिल क्लोराइड से ऐल्को.. कॉस्टिक पोटॉश की अभिक्रिया से बनता है।

CH2= CHCl + HOC2 → H5 + KOHCH2 == CH – O – C2H5 + KCl + H2O

(3) KCN के साथ-पहले डाइसायनो एथेन बनाता है, जिसके जल-अपघटन से सक्सिनिक अम्ल बनाता है, जिसे गर्म करके सक्सिनिक ऐनहाइड्राइड मिलता है।

MP Board Class 12th Chemistry Solutions Chapter 10 हैलोऐल्केन तथा हैलोऐरीन - 119

(4) जिंक चूर्ण और मेथेनॉल के साथ-जिंक चूर्ण और मेथेनॉल के साथ गर्म करने पर एथिलीन बनता है।

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उपयोग-(1) विलायक के रूप में, (2) अपस्फोटरोधी ईंधन के अवयव के रूप में, (3) पेण्ट को हटाने में।

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प्रश्न 17.
फ्रेंकलैण्ड अभिक्रिया को लिखिए।
उत्तर
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प्रश्न 18.
फ्रीडल-क्रॉफ्ट्स एवं एसिलीकरण अभिक्रिया को समीकरण सहित समझाइए।
उत्तर
फ्रीडल-क्रॉफ्ट्स अभिक्रिया-जब ऐल्किल हैलाइड की अभिक्रिया बेंजीन के साथ निर्जल ऐल्युमिनियम क्लोराइड की उपस्थिति में कराई जाती है तो ऐल्किल बेंजीन प्राप्त होता है।
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एसिलीकरण अभिक्रिया-जब एसीटिल क्लोराइड की अभिक्रिया बेंजीन के साथ निर्जल AICl3, की उपस्थिति में कराते हैं, तो एसीटोफिनोन प्राप्त होता है।
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प्रश्न 19.
निम्न अभिक्रिया में A, B, C, D पहचानिए –
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उत्तर
MP Board Class 12th Chemistry Solutions Chapter 10 हैलोऐल्केन तथा हैलोऐरीन - 125

प्रश्न 20.
एक ऐल्कोहॉल A सान्द्र H2SO4 के साथ गर्म करने पर ऐल्कीन B देता है।B को ब्रोमीन जल मे प्रवाहित करने पर प्राप्त यौगिक का सोडामाइड की अधिकता द्वारा विहाइड्रोजनीकरण करने पर एक नया यौगिक C बनता है। “C” HgSO4 की उपस्थिति मे H2SO2 से क्रिया कर यौगिक D देता है। A, B, C, D यौगिक पहचानिए।
उत्तर
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हैलोऐल्केन तथा हैलोऐरीन दीर्घ उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 1.
टिप्पणी लिखिए
(a) हुन्सडीकर विधि, (b) रेशिग प्रक्रम, (c) कार्बिल-ऐमीन परीक्षण, (d) वेस्ट्रॉन, (e) आयोडोफॉर्म परीक्षण, (f) वु परीक्षण, (g) फ्रेंकलैंड अभिक्रिया, (h) फिटिग अभिक्रिया।
उत्तर
(a) हुन्सडीकर विधि-ऐरोमैटिक कार्बोक्सिलिक अम्ल के सिल्वर लवण को ब्रोमीन के साथ गर्म करने से ऐरिल ब्रोमाइड बनता है।
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(b) रेशिग (Raschig) विधि (औद्योगिक विधि)-बेंजीन वाष्प, वायु एवं HCl गैस मिश्रण को 503K ताफै पर उत्प्रेरक CuCl2 पर से प्रभावित करके क्लोरोबेंजीन बनाया जाता है।
MP Board Class 12th Chemistry Solutions Chapter 10 हैलोऐल्केन तथा हैलोऐरीन - 128

(c) कार्बिल-ऐमीन अभिक्रिया-ऐलिफैटिक या ऐरोमैटिक प्राथमिक ऐमीन को CHCl3 तथा ऐल्कोहॉलीय KOH के साथ गर्म करने से तीव्र दुर्गन्ध युक्त फेनिल आइसोसायनाइड (कार्बिल ऐमीन) बनता है। इसका उपयोग क्लोरोफॉर्म परीक्षण तथा प्राथमिक ऐमीन परीक्षण में किया जाता है।
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(d) वेस्ट्रॉन-सममित टेट्राक्लोरो मेथेन या ऐसीटिलीन टेट्राक्लोराइड (CHCl2—CHCl2) को वेस्ट्रॉन कहते हैं। जिसे ऐसीटिलीन के क्लोरीनीकरण द्वारा बनाया जाता है।
CH ≡ CH + 2Cl2 → CHCl2-CHCl2
यह एक विषैला एवं अज्वलनशील द्रव है, चूने के साथ उबालने पर यह वेस्ट्रॉल बनाता है।

(e) आयोडोफॉर्म-लघु उत्तरीय प्रश्न क्र. 1(i) देखिए।
(f) वु परीक्षण-जब ऐल्किल हैलाइड को सोडियम के साथ शुष्क ईथर की उपस्थिति में गर्म करते हैं तो ऐल्केन बनता है।
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(g) फ्रेंकलैंड अभिक्रिया-जब ऐल्किल हैलाइड को जिंक चूर्ण के साथ गर्म करते हैं तो ऐल्केन बनता है।
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(h) फिटिग (Fittig) अभिक्रिया- जब ऐरिल हैलाइड के दो अणु Na धातु के साथ शुष्क ईथर की उपस्थिति में क्रिया करते हैं तो डाइफेनिल बनाते हैं, इसे फिटिग अभिक्रिया कहते हैं।
MP Board Class 12th Chemistry Solutions Chapter 10 हैलोऐल्केन तथा हैलोऐरीन - 132

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प्रश्न 2.
प्रयोगशाला में क्लोरोफॉर्म किस प्रकार बनाते हैं ? ऐथेनॉल से क्लोरोफॉर्म बनाने की विधि, सिद्धान्त, समीकरण, नामांकित चित्र एवं उपयोग के आधार पर समझाइए।
उत्तर
क्लोरोफॉर्म (CHCl3)-बनाने की प्रयोगशाला विधि-प्रयोगशाला में क्लोरोफॉर्म एथिल ऐल्कोहॉल अथवा ऐसीटोन को विरंजक चूर्ण (Bleaching powder) और जल के साथ अथवा क्लोरीन और NaOH के साथ गर्म करके बनाया जाता है। अभिक्रियाएँ निम्न पदों में होती हैं
सिद्धान्त-(i) विरंजक चूर्ण पर जल की क्रिया से आवश्यक क्लोरीन तथा कैल्सियम हाइड्रॉक्साइड बनता है।
CaOCl2 + H2O → Ca(OH)2 + Cl2

(ii) क्लोरीन ऑक्सीकारक एवं क्लोरीनीकारक दोनों की ही भाँति कार्य करती है। पहले ऐल्कोहॉल का । ऑक्सीकरण होता है फिर क्लोरीनीकरण होता है।
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(iii) प्रथम पद में बना हुआ कैल्सियम हाइड्रॉक्साइड, क्लोरल का जल-अपघटन करके क्लोरोफॉर्म बनाता है।
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एथिल ऐल्कोहॉल के स्थान पर ऐसीटोन प्रयुक्त करने पर पहले ट्राइक्लोरोऐसीटोन बनता है जो चूने के पानी (कैल्सियम हाइड्रॉक्साइड) से जल-अपघटित होकर क्लोरोफॉर्म बनाता है।
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विधि-प्रयोगशाला में क्लोरोफॉर्म बनाने के लिए एक गोल पेंदी वाले फ्लास्क में 100 g विरंजक चूर्ण तथा 200 ml जल से बनी पेस्ट लेते हैं। इसमें 35 ml ऐथेनॉल अथवा ऐसीटोन डालकर चित्रानुसार उपकरण जमाते हैं।

फ्लास्क को बालू ऊष्मक (Sand bath) पर रखकर धीरे-धीरे गर्म करने पर क्लोरोफॉर्म बनता है जो आसवित होकर ग्राहक पात्र में भरे जल के नीचे बैठ जाता है। इस प्रकार प्राप्त क्लोरोफॉर्म को पृथक् करने से पहले कॉस्टिक सोडा के तनु विलयन से धोते हैं फिर कैल्सियम क्लोराइड द्वारा सुखाकर आसवन करते हैं जिससे शुद्ध क्लोरोफॉर्म प्राप्त होता है।
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शुद्ध क्लोरोफॉर्म, क्लोरल हाइड्रेट और सोडियम हाइड्रॉक्साइड के सान्द्र विलयन को गर्म करके बनाया जाता है।
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प्रश्न 3.
क्लोरोफॉर्म के अपचयन से क्या बनता है ? इसकी नाइट्रिक अम्ल तथा ऐसीटोन से क्रिया के समीकरण लिखिए।
उत्तर
क्लोरोफॉर्म का अपचयन-(a) Zn और HCl के साथ गर्म करने से यह अपचयित होकर मेथिलीन क्लोराइड बनता है।
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(b) जिंक चूर्ण व जल के साथ गर्म करने पर मेथेन बनता है।
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क्लोरोफॉर्म की क्रिया
(a) सान्द्र HNO, से क्रिया-नाइट्रोक्लोरोफॉर्म (या क्लोरोपिक्रिन) बनाता है, जिसे युद्ध में विषैली गैस के रूप में प्रयोग किया जाता है।
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(b) ऐसीटोन से क्रिया-क्षार की उपस्थिति में ऐसीटोन के साथ संघनित होकर एक तीव्र निद्राकारी क्लोरीटोन बनाता है।
MP Board Class 12th Chemistry Solutions Chapter 10 हैलोऐल्केन तथा हैलोऐरीन - 141

प्रश्न 4.
क्लोरोफॉर्म की निम्नलिखित क्रियाएँ समीकरण सहित समझाइए
(a) ऑक्सीकरण, (b) कार्बिल-ऐमीन अभिक्रिया, (c) रजत चूर्ण के साथ (d) नाइट्रीकरण, (e) राइमर-टीमैन अभिक्रिया।
अथवा
क्लोरोफॉर्म से आप निम्नलिखित कैसे प्राप्त करेंगे(a) कार्बोनिल क्लोराइड, (b) ऐसीटिलीन, (c) क्लोरोपिक्रिन, (d) फेनिल आइसो सायनाइड।
अथवा
ट्राइक्लोरो मेथेन निम्नलिखित से किस तरह क्रिया करता है
(a) वायु में खुला छोड़ने पर, (b) ऐनिलीन एवं एल्कोहॉली कॉस्टिक पोटाश, (c) रजत चूर्ण के साथ, (d) सान्द्र नाइट्रिक अम्ल के साथ, (e) फीनॉल के साथ।
उत्तर
(a) ऑक्सीकरण (Oxidation)- वायु में खुला छोड़ने पर ऑक्सीकृत होकर विषैली गैस फॉस्जीन (कार्बोनिल) क्लोराइड बनाता है।
MP Board Class 12th Chemistry Solutions Chapter 10 हैलोऐल्केन तथा हैलोऐरीन - 142

फॉस्जीन अति विषैली गैस है, अतः निश्चेतक कार्यों के लिए काम में आने वाले क्लोरोफॉर्म को फॉस्जीन से मुक्त होना चाहिए अर्थात् क्लोरोफॉर्म के उक्त प्रकार के ऑक्सीकरण को रोकना आवश्यक है। इसलिए क्लोरोफॉर्म को नीले या गहरे-भूरे रंग की बोतलों में मुँह तक भरकर रखा जाता है जिससे सक्रिय प्रकाश न पहुँचे
और वायु के लिए स्थान भी न बचे। साथ ही इसमें थोड़ा सा ऐथिल ऐल्कोहॉल भी मिला दिया जाता है यदि अल्प मात्रा में फॉस्जीन बन भी गई हो तो अविषैले ऐथिल कार्बोनेट में बदला जा सके।
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(b) कार्बिल-ऐमीन अभिक्रिया-क्लोरोफॉर्म को प्राथमिक ऐमीन (जैसे ऐनिलीन) तथा ऐल्कोहॉली कॉस्टिक पोटाश के साथ गर्म करने पर एक तीव्र दुर्गन्ध युक्त विषैला पदार्थ फेनिल आइसो सायनाइड बनता है। इसे कार्बिलऐमीन अभिक्रिया कहते हैं ।
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(c) रजत चूर्ण के साथ (विहैलोजनीकरण)-क्लोरोफॉर्म को रजत चूर्ण के साथ उच्च ताप पर गर्म करने पर शुद्ध ऐसीटिलीन गैस बनती है।
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(d) नाइट्रीकरण (Nitration) -क्लोरोफॉर्म सान्द्र HNO, अम्ल से क्रिया करके नाइट्रो क्लोरोफॉर्म (क्लोरोपिक्रिन) नामक विषैली गैस बनाता है, जिसे युद्ध में विषैली गैस के रूप में प्रयुक्त किया जाता है।
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(e) राइमर-टीमैन अभिक्रिया–क्लोरोफॉर्म की सान्द्र NaOH और फीनॉल के साथ 60-70°C तक गर्म करने पर ऑर्थो सैलिसिल ऐल्डिहाइड बनता है।
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प्रश्न 5.
क्लोरोबेंजीन की न्यूक्लियोफिलिक प्रतिस्थापन अभिक्रिया समझाइए।(केवल उदाहरण देकर)
उत्तर
क्लोरोबेंजीन की नाभिकस्नेही प्रतिस्थापन अभिक्रियाएँ-हैलोएरीन्स में हैलोजन परमाणु सीधे बेंजीन नाभिक से अधिक मजबूती से जुड़े होने के कारण इसे न्यूक्लियोफिलिक अभिकर्मकों जैसे-OH, OR, NH2, CN आदि द्वारा सरलता से प्रतिस्थापित नहीं किया जा सकता किन्तु अधिक दाब, ताप तथा उपयुक्त उत्प्रेरक की उपस्थिति में इन समूहों द्वारा हैलोजन परमाणु का प्रतिस्थापन हो जाता है।
(1) – OH समूह द्वारा प्रतिस्थापन क्लोरोबेंजीन को 200 वायुमण्डलीय दाब और 300°C ताप पर NaOH के साथ गर्म करने पर फीनॉल बनता है।
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(2) ऐल्कॉक्सी समूह (-OR) द्वारा प्रतिस्थापन –
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सोडियम ऐल्कॉक्साइड के साथ मिश्रित ईथर बनता है।

(3) ऐमीनो समूहद्वारा प्रतिस्थापन-जलीय अमोनिया के साथ Cu2O की उपस्थिति में 60 वायुमण्डलीय दाब तथा 200°C ताप पर गर्म करने से ऐरोमैटिक ऐमीन बनता है।
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(4) सायनो समूह द्वारा प्रतिस्थापन –
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प्रश्न 6.
ऐल्किल हैलाइडों में नाभिकस्नेही प्रतिस्थापन S.1 और S-2 अभिक्रिया की क्रियाविधि समझाइए।
उत्तर
नाभिकस्नेही प्रतिस्थापन अभिक्रिया–कार्बनिक यौगिक के किसी परमाणु या नाभिकस्नेही का अन्य नाभिकस्नेही समूह के द्वारा प्रतिस्थापन नाभिकस्नेही प्रतिस्थापन अभिक्रिया कहलाती है।

1. SN1 या एक अणुक क्रियाविधि-यह क्रिया दो चरणों में पूर्ण होती है। पहले पद में ऐल्किल हैलाइड (R-X) बंध का विदलन होता है और कार्बोकेटायन बनाता है। यह क्रिया मंद गति से होती है। द्वितीय पद में कार्बोकेटायन न्यूक्लियोफिलिक अभिकर्मक को शीघ्रता से क्रिया करके उत्पाद बनाता है। अभिक्रिया की दर प्रारम्भिक पद पर निर्भर करती है। इस पद पर संक्रमण अवस्था में केवल एक अणु भाग लेता है। इस कारण इसे एक अणुक नाभिकस्नेही प्रतिस्थापन अभिक्रिया कहते हैं।

1. प्रथम पद –
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2. द्वितीय पद –
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2. द्विअणुक क्रियाविधि या SN2 –  इस विधि में नाभिकीय प्रतिस्थापन अभिक्रिया एक ही पद में सम्पन्न होती है। जिसके फलस्वरूप एक संक्रमण अवस्था संरचना बनाती है। जो शीघ्र ही ऐल्कोहॉल में परिवर्तित हो जाती है और हैलाइड आयन मुक्त करती है।
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इस क्रिया में दो अणु भाग लेकर संक्रमण अवस्था का निर्माण करते हैं। इसलिये इसे SN2 द्विअणुक अभिक्रिया कहते हैं। इस प्रकार अभिक्रिया की दर RX और OH आयन दोनों के मोलर सान्द्रण पर निर्भर करती है।

प्रश्न 7.
ऐल्कोहॉल द्वारा आयोडोफॉर्म बनाने की प्रयोगशाला विधि का नामांकित चित्र बनाइए एवं सम्बन्धित रासायनिक समीकरण लिखिए।
उत्तर
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रासायनिक अभिक्रियाएँ –
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प्रश्न 8.
क्लोरोबेंजीन की निम्न अभिक्रियाओं को समझाइए –
(अ) अँधेरे में FeCl3 की उपस्थिति में क्लोरीन के साथ अभिक्रिया
(ब) उल्मान (Ullmann) अभिक्रिया।
उत्तर
(अ) क्लोरोबेंजीन, क्लोरीन से FeCl3 की उपस्थिति में अँधेरे में क्रिया करके ०-डाइक्लोरोबेंजीन तथा p-डाइक्लोरोबेंजीन बनाता है।
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(ब) जब ब्रोमो या आयोडो बेंजीन को 200°C ताप पर Cu के साथ सील बंद नली में गर्म किया जाता है, तो डाइफेनिल बनता है, इसे उल्मान अभिक्रिया कहते हैं।
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प्रश्न 9.
क्लोरोबेंजीन की निम्न क्रियाओं के समीकरण लिखिए –
1. हैलोजनीकरण
2. नाइट्रीकरण
3. सल्फोनीकरण
4. एल्किलीकरण।
उत्तर
1. हैलोजनीकरण –
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2. नाइट्रीकरण –
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3. सल्फोनीकरण –
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4. एल्किलीकरण –
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प्रश्न 10.
क्या कारण है, कि हैलोऐल्केन की तुलना से हैलोएरीन्स केम क्रियाशील होते हैं ? अथवा, एरिल हैलाइड, ऐल्किल हैलाइड की अपेक्षा कम क्रियाशील क्यों होते हैं ?
उत्तर
ऐल्किल हैलाइड की अपेक्षा एरिल हैलाइड में हैलोजन परमाणु नाभिक के साथ दृढ़ता से जुड़ा रहता है इसलिए एरिल हैलाइड का न्यूक्लियोफिलिक अभिकर्मकों द्वारा प्रतिस्थापन सरलता से नहीं होता। ऐरिल हैलाइडों की क्रियाशीलता कम होने के दो कारण हैं –

(i) हैलो ऐल्केन की अपेक्षा हैलो ऐरीन में हैलोजन परमाणु नाभिक के साथ अधिक दृढ़ता के साथ जुड़ा रहता है।
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हैलो ऐरीन … (spसंकरण) हैलो ऐरीन में हैलोजन से जुड़ा हुआ कार्बन परमाणु (C-Cl) sp2 संकरित होता है, जबकि हैलो ऐल्केन में sp3 संकरित रहता है । sp2 हाइब्रिड ऑर्बिटल्स में sp3 ऑर्बिटल्स की तुलना में 5 ऑर्बिटल की प्रवृत्ति अधिक रहती है। अत: इनका आकार छोटा होता है । इलेक्ट्रॉन नाभिक के अधिक निकट रहते हैं तथा नाभिक से अधिक दृढ़ता से बंधे रहते हैं।
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(ii) ऐरिल हैलाइड में हैलोजन परमाणु की कम क्रियाशीलता का दूसरा कारण अनुनाद है। अनुनाद के कारण C_CI बन्ध में द्विबन्ध जैसे गुण आ जाते हैं। C-CI बन्ध की लम्बाई कम हो जाती है अर्थात् CI कार्बन से अधिक दृढ़ता से जुड़ जाता है। अत: C का प्रतिस्थापन कठिन हो जाता है।

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MP Board Class 12th Chemistry Solutions Chapter 12 ऐल्डिहाइड्स, कीटोन्स तथा कार्बोक्सिलिक अम्ल

MP Board Class 12th Chemistry Solutions Chapter 12 ऐल्डिहाइड्स, कीटोन्स तथा कार्बोक्सिलिक अम्ल

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ऐल्डिहाइड्स, कीटोन्स तथा कार्बोक्सिलिक अम्ल NCERT पाठ्यनिहित प्रश्नोत्तर |

प्रश्न 1.
निम्न यौगिकों की संरचना लिखिये

  1. a -मेथॉक्सीप्रोपिऑनैल्डिहाइड
  2. 3-हाइड्रॉक्सीब्यूटेनल
  3. 2-हाइड्रॉक्सीसाइक्लोपेन्टेन का.ल्डिहाइड
  4. 4-ऑक्जोपेन्टेनल
  5. डाइ-द्वितीयक ब्यूटिल कीटोन
  6. 4-फ्लुओरो एसीटोफीनोन

उत्तर
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प्रश्न 2.
निम्न अभिक्रियाओं के उत्पादों की संरचना लिखिये
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MP Board Class 12th Chemistry Solutions Chapter 12 ऐल्डिहाइड्स, कीटोन्स तथा कार्बोक्सिलिक अम्ल - 3
उत्तर
MP Board Class 12th Chemistry Solutions Chapter 12 ऐल्डिहाइड्स, कीटोन्स तथा कार्बोक्सिलिक अम्ल - 4
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प्रश्न 3.
निम्नलिखित यौगिकों को उनके क्वथनांकों के बढ़ते क्रम में व्यवस्थित कीजिये
CH3CHO, CH3CH2OH, CH3ÓCH3, CH3CH2CH3.
उत्तर
CH3CH2CH3 < CH3OCH3 < CH3CHO < CH3CH2OH
इस क्रम की भविष्यवाणी इनके बीच कार्य कर रहे अन्तः आण्विक आकर्षण बल के आधार पर की जा सकती है। जैसा इसमें तुलनात्मक अणुभार होता है। एल्कोहॉल में प्रबल H-बंध होता है। CH3OCH3 तथा CH3CHO में द्विध्रुव-द्विध्रुव अन्त:आण्विक आकर्षण बल होता है। जबकि CH3CHO,CH3OCH3 से ज्यादा ध्रुवीय होता है। इसलिये, इनके क्वथनांक CH3OCH3 से ज्यादा होते हैं। प्रोपेन अध्रुवीय होता है । इसलिये इसमें दुर्बल वाण्डरवाल्स बल कार्य करता है।

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प्रश्न 4.
निम्नलिखित यौगिकों को नाभिकस्नेही योगात्मक अभिक्रियाओं में उनकी बढ़ती हुई अभिक्रियाशीलता के क्रम में व्यवस्थित कीजिये

  1. एथेनल, प्रोपेनल, प्रोपेनोन, ब्यूटेनोन
  2. बेन्जैल्डिहाइड, p-टॉलूऐल्डिहाइड, p-नाइट्रो-बेन्जैल्डिहाइड, एसीटोफिनोन।

उत्तर
1. ब्यूटेनोन < प्रोपेनोन < प्रोपेनल < एथेनल
इस क्रम की भविष्यवाणी दो कारकों के आधार पर की जा सकती है-

  • +I प्रभाव (इलेक्ट्रॉन प्रतिकर्षी प्रभाव) तथा
  • त्रिविम प्रभाव।

2. एसीटोफिनोन <p-टॉलूऐल्डिहाइड < बेन्जैल्डिहाइड <p-नाइट्रो बेन्जैल्डिहाइड
इस क्रम की भविष्यवाणी (पूर्वानुमान) प्रेरणिक प्रभाव अनुनाद तथा अतिसंयुग्मन प्रभाव द्वारा की जा सकती है।

प्रश्न 5.
निम्नलिखित अभिक्रियाओं के उत्पादों को पहचानिये
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उत्तर
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प्रश्न 6.
निम्नलिखित यौगिकों के IUPAC नाम दीजिये- .
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उत्तर

  1. 3-फेनिलप्रोपेनोइक अम्ल
  2. 3-मेंथिलब्यूट-2-ईन-1-ओइक अम्ल
  3. 2-मेथिलसाइक्लोपेन्टेनकार्बोक्सिलिक अम्ल
  4. 2, 4, 6-ट्राइनाइट्रोबेन्जोइक अम्ल या 2, 4, 6-ट्राइनाइ-ट्रोबेन्जीनकार्बोक्सिलिक अम्ल।

प्रश्न 7.
निम्नलिखित यौगिकों को बेन्जोइक अम्ल में कैसे परिवर्तित किया जा सकता है

  1. एथिलबेंजीन
  2. एसीटोफिनोन
  3. ब्रोमोबेन्जीन
  4. फेनिलएथीन (स्टाइरीन)।

उत्तर
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प्रश्न 8.
नीचे प्रदर्शित अम्लों के प्रत्येक युग्म में कौन-सा अम्ल अधिक प्रबल हैं

1. CHCO,H अथवा CH,FCO,H
2. CH,FCO,H अथवा CH,CICO,H
3. CH,FCH,CH,CO,H अथवा CH,CHFCH,COH
4.
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उत्तर
1. FCHCOOH (F को -[ प्रभाव के कारण)
2. FCH,CO,H (F पर CIसे ज्यादा – प्रभाव के कारण)
3. CH, CHFCH,COOH (प्रेरणिक प्रभाव दूरी बढ़ने के साथ घटता है। अर्थात् 3-फ्लुओरोब्यूटेनोइक अम्ल, 4-क्लोरोब्यूटेनोइक अम्ल से ज्यादा प्रबल होगा।
4.
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ऐल्डिहाइड्स, कीटोन्स तथा कार्बोक्सिलिक अम्ल NCERT पाठ्य-पुस्तक प्रश्नोत्तर

प्रश्न 1.
निम्नलिखित पदों (शब्दों) से आप क्या समझते हैं, प्रत्येक का एक उदाहरण दीजिये

  1. सायनोहाइड्रिन
  2. एसीटल
  3. सेमीकार्बेजोन
  4. ऐल्डॉल
  5. हेमीऐसीटल
  6. ऑक्सिम
  7. कीटल
  8. इमीन
  9. 2, 4-DNP व्युत्पन्न
  10. शिफ-क्षारक।

उत्तर
1. सायनोहाइड्रिन-ये कार्बनिक यौगिक हैं, जिसका सूत्र । RR’C(OH)CN होता है, जहाँ R एवं R’ एल्किल समूह हो सकते हैं।
ऐल्डिहाइड और कीटोन, हाइड्रोजन सायनाइड के साथ सोडियम सायनाइड की उपस्थिति में अभिक्रिया करते हैं | NaCN यह एक उत्प्रेरक के रूप में होते हैं। ये अभिक्रियाएँ सायनोहाइड्रीन अभिक्रिया कहलाती है।
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सायनोहाइड्रीन सायनोहाइड्रीन का उपयोग संश्लेषित मध्यवर्ती क्रिया में करते हैं। ,,

2. एसीटल-एसीटल, जेम-डाइ एल्कॉक्सी ऐल्केन है, जिसमें दो एल्कॉक्सी समूह, कार्बन परमाणु के टर्मिनल पर उपस्थित होते हैं। इसके एक बंध एल्किल समूह से जुड़े होते हैं जबकि दूसरा बंध हाइड्रोजन परमाणु से जुड़े होते हैं।
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जब ऐल्डिहाइड, शुष्क HCI गैस की उपस्थिति में मोनोहाइड्रीक एल्कोहॉल OR’ दो समतुल्य के जैसे व्यवहार करते हैं, हेमीएसीटल बनाते हैं। जो आगे एल्कोहॉल के एसीटल की सामान्य संरचना अधिकता के साथ क्रिया करके एसीटल बनाते हैं।
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3. सेमीकार्बेजोन-सेमीकार्बेजोन, ऐल्डिहाइड और कीटोन के व्युत्पन्न है, जो कीटोन या ऐल्डिहाइड और सेमीकार्बेजाइड के मध्य संघनन से बनते हैं।
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4. ऐल्डॉल संघनन-वह अभिक्रिया जिसमें दो समान या विभिन्न कार्बोनिल यौगिकों के अणु जिनमें ‘a-हाइड्रोजन परमाणु उपस्थित हो तनु क्षार जैसे—NaOH, Ba(OH)2 आदि की उपस्थिति में संयुक्त होकर एक नया यौगिक बनाते हैं जो ऐल्कोहॉल और ऐल्डिहाइड या ऐल्कोहॉल और कीटोन दोनों के गुण प्रदर्शित करता है, ऐल्डॉल संघनन कहलाती है।
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तनु सोडियम हाइड्रॉक्साइड पोटैशियम कार्बोनेट की उपस्थिति में । ऐसीटैल्डिहाइड से दो अणु संघनित होकर β-हाइड्रॉक्सी ब्यूटैरेल्डिहाइड (ऐल्डॉल) का एक अणु बनाते हैं।

5. हेमीऐसीटल- ये α-एल्कॉक्सी ऐल्कोहॉल होते हैं। ऐल्डिहाइड्स जब शुष्क HCL गैस की उपस्थिति में मोनोहाइड्रिक / 2 एल्कोहॉल के एक अणु से क्रिया करते हैं, तो हेमीएसीटल बनता है। हेमीऐसीटल की सामान्य संरचना
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6. ऑक्सिम-ऑक्सिम कार्बनिक यौगिकों की ही एक श्रेणी होती है, जिसका सूत्र RR’CNOH होता है, जहाँ R एक कार्बनिक पार्श्व शृंखला होती है तथा R’ मोनोहाइड्रोजन या एक कार्बनिक पार्श्व श्रृंखला – N होती है। यदि R’H है तब यह एल्डोऑक्सिम और यदि R’ एक कार्बनिक पार्श्व श्रृंखला है, तब यह एक कीटोक्सिम के नाम से जाना जाता है।
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हाइड्रोक्सील एमीन की दुर्बल अम्लीय माध्यम में ऐल्डिहाइड या Aldorime कीटोन से क्रिया कराने पर ऑक्सीम का निर्माण होता है।
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7. कीटल-कीटल्स जेम-डाइएल्कॉक्सीएल्केन्स होते हैं, जिनमें दो एल्कॉक्सी समूह समान कार्बन अणु पर श्रृंखला के रूप में उपस्थित होते हैं। कार्बन R-C-OR’ के अन्य दो बंध दो एल्किल समूहों से संबद्ध होते हैं।
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कीटोन, एथिलीन ग्लाइकॉल से शुष्क HCI गैस की उपस्थिति में क्रिया करके कोलकाता चक्रीय उत्पाद बनाता है, जिसे एथिलीन ग्लाइकॉल कोटल कहते है। R CH,OH
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8. इमीन-इमीन वे रासायनिक यौगिक हैं, जिनमें काबन-नाइट्रोजन द्विबंध पाए जाते हैं।
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ये तब प्राप्त किये जाते हैं, जब ऐल्डिहाइड व कीटोनों की क्रिया अमोनिया व उसके व्युत्पन्नों से कराई जाती है।
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9. 2,4-DNP व्युत्पन्न-2,4-डाइनाइट्रोफिनाइल हाइड्राजोन, 2, 4-DNP का व्युत्पन्न है, जो 2,4डाइफिनाइलहाइड्राजीन के साथ ऐल्डिहाइड या कीटोनों के साथ दुर्बल अम्लीय माध्यम में क्रिया से बनते हैं।
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10. शिफ-क्षारक-शिफ क्षार (एजोमेथीन) वह रासायनिक यौगिक है, जिसमें एक कार्बन-नाइट्रोजन द्विबंध पाया जाता है । जहाँ नाइट्रोजन अणु से एक एरील या एल्किल समूह जुड़ा होता है। इसका सामान्य सूत्र R,R,C=NR, है। . N इस प्रकार यह एक इमीन है। इसका नाम ह्यूगो शिफ वैज्ञानिक के नाम पर रखा गया है।
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इसका उपयोग ऐल्डिहाइड व कीटोन में विलेय करने के लिए किया जाता है।
शिफ-क्षार की सामान्य संरचना

प्रश्न 2.
निम्नलिखित यौगिकों के IUPAC नामपद्धति में नाम लिखिए,

  1. CH3CH(CH3)CH2CH2CHO
  2. CH3CH2COCH(C2H5)CH2CH2CI
  3. CH3CH = CHCHO
  4. CH3COCH2COCH3
  5. CH3CH(CH3)CH2C(CH3)2COCH3
  6. (CH3)3CCH2COOH
  7. OHCC6H4CHO-p.

उत्तर

  1. 4-मेथिलपेन्टेनल
  2. 6-क्लोरो-4-एथिलहेक्सेन-3 ऑन
  3. ब्यूट-2-ईन-1-अल
  4. पेन्टेन-2, 4, डाइऑन
  5. 3, 3, 5 ट्राइमेथिलहेक्सेन-2-ओन
  6. 3, 3-डाइमेथिलब्यूटेनोइक अम्ल
  7. बेन्जीन-1, 4-डाइकार्बेल्डिहाइड।

प्रश्न 3.
निम्नलिखित यौगिकों की संरचना बनाइए

  1. 3-मेथिलब्यूटेनल
  2. p-नाइट्रोप्रोपिओफीनोन
  3. p-मेथिलबेन्जैल्डिहाइड
  4. 4-मेथिलपेन्ट-3-ईन-2-ओन
  5. 4-क्लोरोपेन्टेन-2-ओन
  6. 3-ब्रोमो-4-फेनिलपेन्टेनॉइक अम्ल
  7. p,p’-डाइहाइड्रॉक्सीबेन्जोफीनोन
  8. हेक्स-2-ईन-4-इनोइक अम्ल

उत्तर
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प्रश्न 4.
निम्नलिखित ऐल्डिहाइडों एवं कीटोनों के IUPAC नाम लिखिए और जहाँ संभव हो सके साधारण नाम भी दीजिए
1. CH3CO(CH2)4CH3
2. CH3CH2CHBrCH2CH(CH3) CHO
3. CH3(CH2)5CHO
4. Ph-CH = CH-CHO
5.

6. PhCOPh
उत्तर
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प्रश्न 5.
निम्नलिखित व्युत्पन्नों की संरचना बनाइए

  1. बेन्जैल्डिहाइड का 2, 4-डाइनाइट्रोफेनिलहाइड्रेजोन
  2. साइक्लोप्रोपेनोन ऑक्जिम
  3. ऐसीटैल्डिहाइड डाइमेथिल ऐसीटल
  4. साइक्लोब्यूटेनोन का सेमीकार्बेजोन
  5. हेक्सेन-3-ओन का एथिलीन कीटल
  6. फॉर्मेल्डिहाइड का मेथिल हेमीऐसीटेल।

उत्तर
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प्रश्न 6.
साइक्लोहेक्सेनकार्बेल्डिहाइड की निम्नलिखित अभिकर्मकों के साथ अभिक्रिया से बनने वाले उत्पादों को पहचानिए

  1. PhMgBr एवं तत्पश्चात् H3O+
  2. टॉलेन अभिकर्मक
  3. सेमीकार्बेजाइड एवं दुर्बल अम्ल
  4. एथेनॉल का आधिक्य तथा अम्ल
  5. जिंक अमलगम एवं तनु हाइड्रोक्लोरिक अम्ल।

उत्तर
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प्रश्न 7.
निम्नलिखित में से कौन-से यौगिकों में ऐल्डॉल संघनन होगा, किसमें कैनिजारो अभिक्रिया होगी और किसमें उपरोक्त में से कोई क्रिया नहीं होगी? ऐल्डॉल संघनन तथा कैनिजारो अभिक्रिया में संभावित उत्पादों की संरचना लिखिए

  1. मेथेनल
  2. 2-मेथिलपेन्टेनल
  3. बेन्जैल्डिहाइड
  4. बेन्जोफीनोन
  5. साइक्लोहेक्सेनोन
  6. 1-फेनिलप्रोपेनोन
  7. फेनिलऐसीटैल्डिहाइड
  8. ब्यूटेन-1-ऑल
  9. 2, 2-डाइमेथिलब्यूटेनल।

उत्तर
[A] (ii) 2-मेथिल पेन्टेनल, (v) साइक्लोहेक्सेनोन, (vi) 1-फेनिल-प्रोपेनोन, (vii) फेनिलऐसी टैल्डिहाइड।
इनमें एक या एक से ज्यादा a-हाइड्रोजन परमाणु है अतः इनमें एल्डोल संघनन होगा। उदाहरण के लिये
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[B] (i) मेथेनल, (ii) बेन्जैल्डिहाइड, (ix)2, 2 डाइमेथिल-ब्यूटेन में a -हाइड्रोजन नहीं होता है, अतः ये कैनिजारो अभिक्रिया देते हैं।
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[C] (iv) बेन्जोफिनोन एक कीटोन है, इसमें a -H नहीं है।
(viii) ब्यूटेन-1-ऑल एक एल्कोहॉल है।
ये दोनों न तो एल्डोल संघनन देते हैं और न ही कैनिजारो अभिक्रिया देते हैं।

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प्रश्न 8.
एथेनल को निम्नलिखित यौगिकों में कैसे परिवर्तित करेंगे

  1. ब्यूटेन-1, 3-डाइऑल
  2. ब्यूट-2-ईनल,
  3. ब्यूट-2-इनोइक अम्ल

उत्तर
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प्रश्न 9.
प्रोपेनल एवं ब्यूटेनल के एल्डॉल संघनन से बनने वाले चार संभावित उत्पादों के नाम एवं संरचना सूत्र लिखिए। प्रत्येक में बताइए कि कौन-सा ऐल्डिहाइड नाभिकस्नेही और कौन-सा इलेक्ट्रॉनस्नेही होगा?
उत्तर
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प्रश्न 10.
एक कार्बनिक यौगिक जिसका अणुसूत्र C,H100 है 2, 4-DNP व्युत्पन्न बनाता है, टॉलेन अभिकर्मक को अपचयित करता है तथा कैनिजारो अभिक्रिया देता है, प्रबल ऑक्सीकरण पर वह 1,2-बेन्जीनडाइ-कार्बोक्सिलिक अम्ल बनाता है। यौगिक को पहचानिए।
उत्तर
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प्रश्न 11.
एक कार्बनिक यौगिक (AI (आण्विक सूत्र C8H16O2) को तनु सल्फ्यूरिक अम्ल के साथ जल-अपघटित करने के उपरांत एक कार्बोक्सिलिक अम्ल [B] एवं एक ऐल्कोहॉल [C] प्राप्त हुई। C| को क्रोमिक अम्ल के साथ ऑक्सीकृत करने पर [B] उत्पन्न होता है। C|निर्जलीकरण पर ब्यूट1-ईन देता है। अभिक्रियाओं में प्रयुक्त होने वाली सभी रासायनिक समीकरणों को लिखिए।
उत्तर
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प्रश्न 12.
निम्नलिखित यौगिकों को उनसे संबंधित गुणधर्मों के बढ़ते क्रम में व्यवस्थित कीजिए

  1. ऐसीटैल्डिहाइड, ऐसीटोन, डाइ-तृतीयक-ब्यूटिल-कीटोन, मेथिल तृतीयक-ब्यूटिल कीटोन (HCN के प्रति अभिक्रियाशीलता)।
  2. CH3CH2CH(Br)COOH, CH3CH(Br)CH2COOH, (CH3)2CHCOOH, CH3CH2CH2COOH (अम्लता के क्रम में)
  3. वेन्जोइक अम्ल; 4-नाइट्रोबेन्जोइक अम्ल; 3, 4-डाइनाइट्रोबेन्जोइक अम्ल; 4-मेथॉक्सीबेन्जोइक अम्ल (अम्लता की सामर्थ्य के क्रम में)

उत्तर
1. जैसे-जैसे एल्किल समूह का +I प्रभाव बढ़ता है उनकी HCN योग के प्रति क्रियाशीलता घटती जाती है।

डाइ-तृतीयक ब्यूटिल कीटोन < मेथिल तृतीयक-ब्यूटिल कीटोन < एसीटोन < एसीटैल्डिहाइड।

2. -COOH समूह की अम्लीय प्रबलता को +1 प्रभाव घटाता है तथा – प्रभाव को बढ़ाता है। इसके अतिरिक्त -1 प्रभाव दूरी के साथ घटता है
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3. इलेक्ट्रॉन दाता समूह अम्लीय प्रबलता को घटाता है जबकि इलेक्ट्रॉन आकर्षी प्रभाव अम्लीय प्रबलता को बढ़ाता है

4-मेथॉक्सीबेन्जोइक अम्ल < बेन्जोइक अम्ल < 4-नाइट्रो-बेन्जोइक अम्ल < 3, 4-डाइनाइट्रोबेंजोइक अम्ल

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प्रश्न 13.
निम्नलिखित यौगिक युगलों में विभेद करने के लिए सरल रासायनिक परीक्षणों को दीजिए

  1. प्रोपेनल एवं प्रोपेनोन
  2. एसीटोफीनोन एवं बेन्जोफीनोन
  3. फीनॉल एवं बेन्जोइक अम्ल
  4. बेन्जोइक अम्ल एवं एथिल बेन्जोएट
  5. पेन्टेन-2-ओन एवं पेन्टेन-3-ओन
  6. बेन्जैल्डिहाइड एवं एसीटोफीनोन
  7. एथेनल एवं प्रोपेनल।

उत्तर
1. टॉलेन अभिकर्मक मिलाकर प्रोपेनल को गर्म करने पर रजत दर्पण बनाता है जबकि प्रोपेनोन क्रिया नहीं करता है।

वैकल्पिक विधि – I2 तथा NaOH मिलाने पर प्रोपेनोन, आयोडोफॉर्म बनने के कारण पीला अवक्षेप देता है, जबकि प्रोपेनल क्रिया नहीं करता है।

2. I2 तथा NaOH मिलाने पर एसीटोफिनोन CHI3 का पीला अवक्षेप देता है जबकि बेन्जोफिनोन नहीं देता है।

3. दोनों में अलग-अलग उदासीन FeCI3 मिलाने पर फीनॉल बैंगनी रंग देता है, जबकि बेन्जोइक अम्ल की कोई क्रिया नहीं होती है।

वैकल्पिक विधि -दोनों के जलीय विलयन में अलग-अलग NaHCO3 मिलाने पर बेन्जोइक अम्ल तीव्र बुदबुदाहट के साथ CO2 गैस देता है, जबकि फीनॉल की कोई क्रिया नहीं होता है।

4. दोनों में अलग-अलग NaHCO3 विलयन मिलाने पर बेन्जोइक अम्ल CO2 गैस के कारण तीव्र बुदबुदाहट देता है, जबकि एथिल बेन्जोएट कोई क्रिया नहीं करता है।

5. दोनों में अलग-अलग I2 तथा NaOH मिलाने पर पेन्टेन-2-ओन CHI3 का पीला अवक्षेप देता है जबकि पेन्टेन-3-ओन नहीं देता है।

6. टॉलेन अभिकर्मक मिलाने पर बेन्जैल्डिहाइड गर्म करने पर रजत दर्पण देता है जबकि एसीटोफिनोन क्रिया नहीं करता है।

7. I2 तथा NaOH मिलाने पर एथेनल आयोडोफॉर्म का पीला अवक्षेप देता है, जबकि प्रोपेनल क्रिया नहीं करता है।

प्रश्न 14.
बेन्जीन से निम्नलिखित यौगिकों का विरचन आप किस प्रकार करेंगे ? आप कोई भी अकार्बनिक अभिकर्मक एवं ऊर्जा भी कार्बनिक अभिकर्मक, जिसमें एक से अधिक कार्बन न हो, को उपयोग कर सकते हैं।

  1. मेथिल बेन्जोएट
  2. m-नाइट्रोबेन्जोइक अम्ल
  3. p-नाइट्रोबेन्जोइक अम्ल
  4. फेनिल ऐसीटिक अम्ल
  5. p-नाइट्रोबेन्जैल्डिहाइड

उत्तर
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प्रश्न 15.
आप निम्नलिखित रूपांतरणों को अधिकतम दो चरणों में किस प्रकार से सम्पन्न करेंगे

  1. प्रोपेनोन से प्रोपीन
  2. बेन्जोइक अम्ल से बेन्जैल्डिहाइड
  3. ऐथेनॉल से 3-हाइड्रॉक्सीब्यूटेनल
  4. बेन्जीन से m-नाइट्रोऐसीटोफीनोन
  5. बेन्जल्डिहाइड से बेन्जोफीनोन
  6. ब्रोमोबेन्जीन से 1-फेनिलएथेनॉल
  7. बेन्जैल्डिहाइड से ३-फेनिलप्रोपेन-1-ऑल
  8. बेन्जैल्डिहाइड से a – हाइड्रॉक्सीफेनिलऐसीटिक अम्ल
  9. बेन्जोइक अम्ल से m-नाइट्रोबेन्जिल ऐल्कोहॉल।

उत्तर
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प्रश्न 16.
निम्नलिखित पदों (शब्दों) का वर्णन कीजिए

  1. ऐसीटिलीकरण
  2. कैनिजारो अभिक्रिया
  3. क्रॉस ऐल्डॉल संघनन
  4. विकार्बोक्सिलिकरण

उत्तर
1. ऐसीटिलिकरण- किसी कार्बनिक यौगिक के साथ किसी एसीटिल क्रियात्मक-समूह का होना एसीटिलीकरण (Acetylation) कहलाता है। सक्रिय हाइड्रोजन परमाणु के लिए इस विधि में एक एसिटिल समूह का प्रतिस्थापी समाहित होता है। एसीटिलेटिंग एजेण्ट के रूप में सामान्यतः एसीटिल क्लोराइड या एसीटिक एन्हाइड्राइड प्रयुक्त किया जाता है। उदाहरण के रूप में एथेनॉल के एसीटिलीकरण के द्वारा एथिल एसीटेट का निर्माण होता है।
CH3CH2OH + CH3COCI → CH3COOC2H5+ HCI

2. कैनिजारो अभिक्रिया- α-हाइड्रोजन विहीन ऐल्डिहाइडों (जैसे -HCHO, C6H5CHO आदि) पर 50% NaOH विलयन की क्रिया कराने पर ऐल्डिहाइड का एक अणु अम्ल में ऑक्सीकृत होता है और दूसरा अणु ऐल्कोहॉल में अपचयित होता है। इसे कैनिजारो अभिक्रिया कहते हैं।
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3. क्रॉस-ऐल्डॉल संघनन-कार्बोनिल यौगिकों के दो एकसमान अणुओं के बीच संघनन न कराके अलग-अलग अणुओं के बीच संघनन कराया जाए तो उसे मिश्रित या क्रॉस-ऐल्डॉल संघनन कहते हैं। सामान्यतः जब एक अणु -हाइड्रोजन विहीन हो तो ऐसा संघनन महत्त्वपूर्ण होता है। फॉर्मेल्डिहाइड तथा एसिटैल्डिहाइड के बीच
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चूँकि इस यौगिक में अभी भी दो a-हाइड्रोजन परमाणु है अतः पुनः दो फॉर्मेल्डिहाइड अणु से यह क्रिया कर सकता है।
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4. विकार्बोक्सिलीकरण-कार्बोक्सिलिक समूह का निकलना विकार्बोक्सिलीकरण कहलाता है। सोडालाइम के साथ गर्म करने पर अम्ल का विकार्बोक्सिलीकरण होता है तथा ऐल्केन बनता है (ड्यूमा विधि)।
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प्रश्न 17.
निम्नलिखित प्रत्येक संश्लेषण में छूटे हुए प्रारम्भिक पदार्थ, अभिकर्मक अथवा उत्पादों को लिखकर पूर्ण कीजिए
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उत्तर
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प्रश्न 18.
निम्नलिखित के संभावित कारण दीजिए

  1. साइक्लोहेक्सेनोन अच्छी लब्धि में सायनोहाइड्रिन बनाता है परन्तु 2,2, 6-ट्राइमेथिलसाइक्लोहेक्सेनोन ऐसा नहीं करता।
  2. सेमीकार्बेजाइड में दो -NH2 समूह होते हैं, परन्तु केवल एक -NH2 समूह ही सेमीकार्बेजोन विरचन में प्रयुक्त होता है।
  3. कार्बोक्सिलिक अम्ल एवं ऐल्कोहॉल से, अम्ल उत्प्रेरक की उपस्थिति में एस्टर के विरचन के समय जल अथवा एस्टर जैसे ही निर्मित होता है उसको निकाल दिया जाना चाहिए।

उत्तर
1. 2,2, 6-ट्राइमेथिलसाइक्लोहेक्सेनोन में 3-मेथिल समूह की त्रिविम बाधा होती है। इसलिये ये साइक्लोहेक्सेनोन जिसमें त्रिविम बाधा नहीं होती है की तुलना में लब्धि प्रचुर मात्रा में सायनोहाइड्रीन नहीं बनाता है।

2. कार्बोनिल समूह से जुड़े NH, के एकाकी इलेक्ट्रॉन युग्म अनुनाद में शामिल होते हैं, इसलिये दान करने के लिये उपलब्ध नहीं होते हैं।
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3. ऐसा इसलिये किया जाता है जिससे बना हुआ एस्टर जल-अपघटित न हो।

प्रश्न 19.
एक कार्बनिक यौगिक में 69.77% कार्बन, 11-63% हाइड्रोजन तथा शेष ऑक्सीजन है। यौगिक का आण्विक द्रव्यमान 86 है। यह टॉलेन अभिकर्मक को अपचयित नहीं करता परन्तु सोडियम हाइड्रोजन सल्फाइट के साथ योगज यौगिक देता है तथा आयोडोफॉर्म परीक्षण देता है। प्रबल ऑक्सीकरण पर एथेनोइक तथा प्रोपेनोइक अम्ल देता है। यौगिक की संभावित संरचना लिखिए।
उत्तर
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मूलानुपाती सूत्र = C5H10O, मूलानुपाती सूत्रभार = 86
MP Board Class 12th Chemistry Solutions Chapter 12 ऐल्डिहाइड्स, कीटोन्स तथा कार्बोक्सिलिक अम्ल - 59
अणुसूत्र = C5H10O
ये टॉलेन अभिकर्मक से क्रिया नहीं करता है, अत: ये एक ऐल्डिहाइड नहीं है। ये NaHSO, के साथ योगात्मक यौगिक बनाता है इसलिये यह एक कीटोन है, तथा ये आयोडोफॉर्म परीक्षण देता है इसलिये ये एक मेथिल कीटोन है। उपरोक्त आधार पर यौगिक की संभावित संरचना होगी –
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तीव्र ऑक्सीकरण पर ये ऐथेनोइक अम्ल तथा प्रोपेनोइक अम्ल देता है। अतः यौगिक पेन्टेन-2-ओन होगा, 3-मेथिल- ब्यूटेन-2-ओन नहीं होगा।
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प्रश्न 20.
यद्यपि फोनॉक्साइड आयन की अनुनादी संरचनाएँ कार्बोक्सिलेट आयन की तुलना में अधिक है परन्तु कार्बोक्सिलिक अम्ल, फीनॉल की अपेक्षा प्रबल अम्ल है, क्यों ?
उत्तर
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फीनॉक्साइड आयन कार्बोक्सिलेट आयन कार्बोक्सिलेट आयन पर ऋणात्मक आवेश दोनों ऑक्सीजन पर विस्थानीकृत होता है, जो बहत विद्युतऋणी है। जबकि फीनॉक्साइड आयन पर ऋणात्मक आवेश केवल एक ऑक्सीजन परमाणु पर विस्थानीकृत होता है। कार्बोक्सिलेट आयन, फीनॉक्साइड आयन से ज्यादा स्थायी होता है। इसी कारण कार्बोक्सिलिक अम्ल, फीनॉल की तुलना में ज्यादा अम्लीय होता है।

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ऐल्डिहाइड्स, कीटोन्स तथा कार्बोक्सिलिक अम्ल अन्य महत्वपूर्ण प्रश्नोत्तर

वस्तुनिष्ठ प्रश्न

प्रश्न 1.
सही विकल्प चुनकर लिखिए। कीटोन से सायनो हाइड्रिन का बनना एक उदाहरण है
(a) इलेक्ट्रोफिलिक योगात्मक
(b) न्यूक्लियोफिलिक योगात्मक
(c) न्यूक्लियोफिलिक प्रतिस्थापन
(d) इलेक्ट्रोफिलिक प्रतिस्थापन।
उत्तर
(b) न्यूक्लियोफिलिक योगात्मक

प्रश्न 2.
निम्नलिखित में से कौन-सा ऐल्डिहाइड सान्द्र क्षार विलयन के साथ कैनीजारो अभिक्रिया देता
(a) बेंजेल्डिहाइड
(b) ऐसीटेल्डिहाइड
(c) प्रोपेन ऐल्डिहाइड
(d) उपर्युक्त सभी।
उत्तर
(a) बेंजेल्डिहाइड

प्रश्न 3.
ऐल्डिहाइड और कीटोन निम्न में से किस पदार्थ से क्रिया करके ऑक्सीम बनाते हैं
(a) NH3
(b) NH2 – NH2
(c) NH2OH
(4) NH2CONH.NH2
उत्तर
(c) NH2OH

प्रश्न 4.
ऐरोमैटिक ऐल्डिहाइड प्राथमिक एमीन के साथ क्रिया करके देते हैं
(a) यूरिया
(b) ऐमाइड
(c) शिफलेस
(d) ऑक्सीम।
उत्तर
(c) शिफलेस

प्रश्न 5.
क्षारीय माध्यम में ऐसीटेल्डिहाइड जो अभिक्रिया करता है, वह है
(a) बेंजोइन संघनन
(b) एल्डोल संघनने
(c) बहुलीकरण
(d) कैनीजारो अभिक्रिया।
उत्तर
(b) एल्डोल संघनने

प्रश्न 6.
निम्नलिखित में कौन-सा I, तथा NaOH के साथ पीला अवक्षेप नहीं देता है –
(a) C2H5OH
(b) CH3-CHO
(c) CH3-CO-CH3
(d) HCHO.
उत्तर
(d) HCHO.

प्रश्न 7.
Cl3-C-CH2-CHO सूत्र वाले यौगिक का IUPAC नाम है
(a) 3,3,3 ट्राइक्लोरोप्रोपेनॉल
(b) 1,1,1 ट्राइक्लोरोप्रोपेनॉल
(c) 2,2,2 ट्राइक्लोरोप्रोपेनल
(d) क्लोरल।
उत्तर
(a) 3,3,3 ट्राइक्लोरोप्रोपेनॉल

प्रश्न 8.
फेहलिंग विलयन की एथेनल से प्रतिक्रिया स्वरूप निम्नलिखित अवक्षेप प्राप्त होता है-
(a) Cu
(b) CHO
(c) Cu2O
(d) Cu2O+Cu2O3.
उत्तर
(c) Cu2O

प्रश्न 9.
किसकी उपस्थिति में ऐल्डिहाइडों और कीटोन का हाइड्रोकार्बन में अपचयन होता है.
(a) Zn /Hg एवं HCI
(b) Pd / BasO4
(c) निर्जल AlCl3
(d) Ni / Pt.
उत्तर
(a) Zn /Hg एवं HCI

प्रश्न 10.
निम्नलिखित में कौन-सा यौगिक HgCl के साथ सफेद अवक्षेप उत्पन्न करता है
(a) HCOOH
(b) CH3COOH
(c) C2H5COOH
(d) C3H7COOH.
उत्तर
(a) HCOOH

प्रश्न 11.
फॉर्मिक अम्ल
(a) जल के साथ अमिश्रणीय है।
(b) अमोनिकल सिल्वर नाइट्रेट का अपचयन करता है।
(c) एसीटिक अम्ल से साढ़े तीन गुना दुर्बल अम्ल है।
(d) KOH को गर्म करने पर प्राप्त होता है।
उत्तर
(b) अमोनिकल सिल्वर नाइट्रेट का अपचयन करता है।

प्रश्न 12.
अम्ल की प्रबलता का सही क्रम है
(a) CH3COOH > CH2CICOOH > CHCI2-COOH
(b) CHCl2-COOH > CH2CICOOH >CH3-COOH
(c) CHCl2-COOH > CH3-COOH > CH2CICOOH
(d) CH2-CICOOH > CH3-COOH > CHCl2-COOH.
उत्तर
(b) CHCl2-COOH > CH2CICOOH >CH3-COOH

प्रश्न 13.
बेंजेल्डिहाइड को ऐल्कोहॉलीय KCN के साथ गर्म करने पर देता है –
(a) बेंजायन
(b) बेंजील ऐल्कोहॉल
(c) सोडियम बेंजोएट
(d) सिन्नेमिक अम्ल।
उत्तर
(a) बेंजायन

प्रश्न 14.
निम्नलिखित में से कौन-सा अमोनियामय AgNO3 के साथ रजत दर्पण नहीं देता –
(a) HCHO
(b) CH3-CHO
(c) CH3-COOH
(d) HCOOH.
उत्तर
(c) CH3-COOH

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प्रश्न 15.
वह अभिकर्मक यौगिक जो एसीटेल्डिहाइड तथा ऐसीटोन दोनों से आसानी से अभिक्रिया करता
(a) फेहलिंग विलयन
(b) ग्रिगनार्ड अभिकर्मक
(c) शिफ अभिकर्मक
(d) टॉलेन अभिकर्मक।
उत्तर
(b) ग्रिगनार्ड अभिकर्मक

प्रश्न 16.
मेथिल कीटोन की पहचान की जाती है
(a) टॉलेन अभिकर्मक से
(b) आयोडोफार्म परीक्षण से
(c) शिफ परीक्षण से
(d) बेनेडिक्ट विलयन से।
उत्तर
(b) आयोडोफार्म परीक्षण से

प्रश्न 17.
ऐल्डिहाइड तथा कीटोन का विभेद किस अभिकर्मक द्वारा होता है
(a) फेहलिंग विलयन
(b) H2SO4 विलयन
(c) NaHSO.3 विलयन
(d) NH3.
उत्तर
(a) फेहलिंग विलयन

प्रश्न 18.
कौन-सा यौगिक कैनिजारो अभिक्रिया देगा
(a) प्रोपिएनोएल्डिहाइड
(b) बेंजेल्डिहाइड
(c) ब्रोमोबेंजीन .
(d) एसीटैल्डिहाइड।
उत्तर
(b) बेंजेल्डिहाइड

प्रश्न 19.
टॉलेन अभिकर्मक है
(a) अमोनियामय क्यूप्रस क्लोराइड
(b) अमोनियामय क्यूप्रस फ्लुओराइड
(c) अमोनियामय सिल्वर ब्रोमाइड
(d) अमोनियामय सिल्वर नाइट्रेट ।
उत्तर
(d) अमोनियामय सिल्वर नाइट्रेट ।

प्रश्न 20.
फार्मेल्डिहाइड की KOH की क्रिया से मेथेनॉल तथा पोटैशियम फोमेट बनता है इस अभिक्रिया को कहते हैं
(a) पर्किन अभिक्रिया
(b) क्लेज़न अभिक्रिया
(c) कैनिजारो अभिक्रिया
(d) नोवेनजेल अभिक्रिया।
उत्तर
(c) कैनिजारो अभिक्रिया

2. रिक्त स्थानों की पूर्ति कीजिए

  1. पोटैशियम एसीटेट के विद्युत् अपघटन से ………… प्राप्त होता है।
  2. जिंक अमलगम और सान्द्र हाइड्रोक्लोरिक अम्ल का मिश्रण ………… कहलाता है।
  3. बेकेलाइट, फीनॉल और ………… का बहुलक है।
  4. बेंजेल्डिहाइड को ……….. भी कहते हैं।
  5. कीटोन टॉलेन अभिकर्मक को …………नहीं करते हैं।
  6. फॉर्मिक अम्ल का 40% जलीय विलयन …………कहलाता है। .
  7. ऐल्डिहाइड फेहलिंग विलयन के साथ …………अवक्षेप देता है।
  8. ऐसीटिक अम्ल को फॉस्फोरस पेन्टा ऑक्साइड के साथ गर्म करने पर . ………. बनता है।
  9. पैराऐल्डिहाइड का उपयोग ………… औषधि के रूप में किया जाता है।
  10. रोजेन्डमुण्ड अपचयन में BaSOa, Pd के लिए ………… का कार्य करता है और ऐल्डिहाइड को ………… अपचयित होने से रोकता है।
  11. क्रोमिल क्लोराइड द्वारा टालुइन का बेंजेल्डिहाइड में ऑक्सीकरण ……….. क्रिया कहलाता है।
  12. अम्ल क्लोराइड का Pd/Baso, द्वारा अपचयन करने पर ………. यौगिक बनता है।
  13. α हाइड्रोजन युक्त ऐल्डिहाइड की तनु NaOH के साथ क्रिया से ………… बनता है।
  14. कैल्सियम एसीटेट के शुष्क आसवन से ………… प्राप्त होता है।

उत्तर

  1. एथेन
  2. क्लीमेन्शन अपचयन
  3. HCHO
  4. कड़वे बादाम का तेल
  5. अपचयित
  6. फॉर्मेलीन
  7. लाल
  8. ऐसीटिक एनहाइड्राइड
  9. निद्राकारी
  10. विष ऐल्कोहॉल
  11. इटार्ड अभिक्रिया
  12. ऐल्डिहाइड
  13. एल्डॉल
  14. एसीटोन।

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3. उचित संबंध जोडिए

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उत्तर

  1. (e)
  2. (a)
  3. (c)
  4. (b)
  5. (d).

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उत्तर

  1. (c)
  2. (d)
  3. (e)
  4. (b)
  5. (a).

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उत्तर

  1. (e)
  2. (c)
  3. (a)
  4. (b)
  5. (d).

4. एक शब्द / वाक्य में उत्तर दीजिए

  1. शिफ अभिकर्मक बेंजेल्डिहाइड के साथ कौन-सा रंग देता है ?
  2. ग्लैशियल ऐसीटिक अम्ल का IUPAC नाम लिखिए।
  3. सोडियम पोटैशियम टाटरेट से संकुलित क्षारीय कॉपर सल्फेट का विलयन कहलाता है।
  4. कार्बोक्सिलिक अम्ल चक्रीय द्विलक के रूप में क्यों होते हैं ?
  5. एरोमैटिक ऐल्डिहाइड को सोडियम कार्बोक्सिलेट की उपस्थिति में एसिड एनहाइड्राइड के साथ गर्म करने पर कौन-सा यौगिक प्राप्त होगा?
  6. बेन्जेल्डिहाइड में KCN मिलाकर संघनन की क्रिया का नाम लिखिए।
  7. फॉर्मिक अम्ल के निर्जलीकरण से कौन-सी गैस प्राप्त होती है ?
  8. उस अभिकर्मक का नाम बताइए जो बिना एल्कोहॉल के प्रयोग से अम्ल को एस्टर में परिवर्तित कर देता

उत्तर

  1. गुलाबी,
  2. एथेनोइक अम्ल,
  3. फेहलिंग विलयन,
  4. अन्तर आण्विक हाइड्रोजन बन्ध के कारण,
  5. असंतृप्त एरोमैटिक कार्बोक्सिलिक अम्ल (सिन्नेमिक अम्ल),
  6. बेन्जोइन संघनन,
  7. कार्बन मोनोऑक्साइड,
  8. 8. CH2N2.

ऐल्डिहाइड्स, कीटोन्स तथा कार्बोक्सिलिक अम्ल लघु उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 1.
निम्नलिखित अम्लों को बढ़ती हुई प्रबलता के क्रम में व्यवस्थित कीजिए
1. HCOOH, CH3-COOH, C6H5COOH.
2.
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3. HCOH CHCHO और CH, COCH को बढ़ती हुई क्रियाशीलता के क्रम में लिखिए।
उत्तर
1. बढ़ती प्रबलता का क्रम
CH3-COOH < C6H5COOH < HCOOH

2. IUPAC नाम-2 मेथिल, प्रोपेनल ।
प्रचलित नाम-आइसो प्रोपिल ऐल्डिहाइड।

3. बढ़ती हुई क्रियाशीलता का क्रम
CH3-COCH3 < CH3-CHO < HCHO.

प्रश्न 2.

  1. हेल-वोल्हाड़ जेलेन्स्की (HVZ) अभिक्रिया क्या है ?
  2. फॉर्मिक अम्ल को गर्म करने पर क्या होता है ?

उत्तर
1. कार्बोक्सिलिक अम्लों की फॉस्फोरस की उपस्थिति में क्लोरीन या ब्रोमीन की अभिक्रिया से a हैलोजनीकृत अम्ल प्राप्त होते हैं यह अभिक्रिया हेल-वोल्हार्ड जेलेन्स्की अभिक्रिया कहलाती है।
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2. फॉर्मिक अम्ल को 160°C तक गर्म करने पर Co और H2O बनता है।
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प्रश्न 3.

  1. कीटोन ऐल्डिहाइड से कम क्रियाशील होते हैं, क्यों?
  2. बेन्जेल्डिहाइड, ऐसीटेल्डिहाइड से कम क्रियाशील है, क्यों?

उत्तर
1. कीटोन की ऐल्डिहाइड की तुलना में, कम क्रियाशीलता उसमें उपस्थित दो ऐल्किल समूह द्वारा उत्पन्न धनात्मक प्रेरणिक प्रभाव (+I) के कारण होती है जो कार्बोनिल कार्बन के धन आवेश में कमी कर देती है; फलतः इसकी नाभिकस्नेही अभिकर्मक के प्रति सुग्राहिता घट जाती है।
ऐल्डिहाइड में केवल एक ऐल्किल समूह होता है। अतः ये कीटोन की अपेक्षा अधिक क्रियाशील होते हैं।

2. बेंजेल्डिहाइड का – CHO समूह के बेंजीन चक्र में साथ अनुनाद द्वारा स्थायी हो जाता है जबकि ऐसीटेल्डिहाइड में अनुनाद नहीं पाया जाता है। बेंजेल्डिहाइड एरोमेटिक होता है व ऐल्डिहाइड एलीफैटिक होता है।

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प्रश्न 4.
फॉर्मेल्डिहाइड से यूरोट्रोपीन कैसे प्राप्त करोगें ? यूरोट्रोपीन का संरचना सूत्र लिखिये।
उत्तर
फॉर्मऐल्डिहाइड और अमोनिया की क्रिया से यूरोट्रोपीन बनता है।
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प्रश्न 5.
यद्यपि फीनॉक्साइड आयन की अनुनादी संरचनाएँ कार्बोक्सिलेट आयन की तुलना में अधिक है। परन्तु कार्बोक्सिलिक अम्ल CH, फीनॉल की तुलना में प्रबल अम्ल हैं। क्यों ?
यूरोट्रोपीन का संरचना सूत्र
उत्तर
कार्बोक्सिलेट आयन तथा फीनॉक्साइड आयन दोनों अनुनाद द्वारा स्थायित्व प्राप्त करते है। किन्तु कार्बोक्सिलेट आयन फीनॉक्साइड आयन की तुलना में अधिक स्थायित्व प्राप्त करता है। क्योंकि इसमे ऋणावेश दो अधिक विद्युत ऋणात्मक आक्सीजन परमाणुओं पर विस्थानीकृत होता है जबकि फोनॉक्साइड आयन की संरचना II, III तथा IV में ऋणावेश का विस्थापन कम विद्युत ऋणात्मक कार्बन पर होता है। इस कारण कार्बोक्सिलिक अम्ल फोनॉल से अधिक अम्लीय होता है।
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प्रश्न 6.
टॉलेन अभिक्रिया पर संक्षिप्त टिप्पणी लिखिए। अथवा, टॉलेन अभिकर्मक क्या है ? इसकी ऐसिटैल्डिहाइड के साथ अभिक्रिया लिखिए।
उत्तर
टॉलेन अभिक्रिया-अमोनियामय सिल्वर नाइट्रेट का विलयन टॉलेन अभिकर्मक कहलाता है। जब टॉलेन अभिकर्मक को ऐल्डिहाइड के साथ गरम किया जाता है, तो ऐल्डिहाइड Ag+ आयन को Ag में ‘अपचयित कर देता है और परखनली की दीवार पर चमकदार रजत दर्पण बनाता है।
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प्रश्न 7.
कार्बोक्सिलिक अम्लों के क्वथनांक समान अणुभार वाले ऐल्कोहॉलों की अपेक्षा ऊँचे होते हैं। क्यों?
उत्तर
कार्बोक्सिलिक अम्ल चक्रीय द्वितीयाणु (Cyclic dimer) के रूप में होते हैं। यह अणुओं के मध्य अन्तराण्विक हाइड्रोजन बन्ध बनने के कारण होता है।
अम्लों के हाइड्रोजन बन्ध ऐल्कोहॉलों के हाइड्रोजन बन्ध की तुलना में अधिक प्रबल होते हैं, इसी कारण कार्बोक्सिलिक अम्लों के क्वथनांक समान अणुभार के ऐल्कोहॉलों से उच्च होते हैं।
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प्रश्न 8.
फेहलिंग अभिक्रिया को समीकरण सहित समझाइये।
उत्तर
फेहलिंग अभिक्रिया-सोडियम पोटैशियम टाटरेट से संकुलित क्षारीय Cuso4 का विलयन फेहलिंग विलयन कहलाता है। जब ऐल्डिहाइड को फेहलिंग विलयन के साथ गर्म करते हैं, तो ऐल्डिहाइड का ऑक्सीकरण हो जाता है तथा क्यूप्रस ऑक्साइड का लाल अवक्षेप प्राप्त होता है। यह फेहलिंग परीक्षण कहलाता
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प्रश्न 9.
कीटोन का क्वथनांक संगत समावयवी ऐल्डिहाइड की अपेक्षा कुछ अधिक क्यों होता है ?
उत्तर
कीटोन अपने संगत समावयवी ऐल्डिहाइड की तुलना में अधिक ध्रुवीय होते हैं, क्योंकि कीटोन में > C = 0 समूह के पास दो इलेक्ट्रॉन प्रतिकर्षी ऐल्किल समूह उपस्थित होते हैं। अतः कीटोन में द्विध्रुव आकर्षण बल ऐल्डिहाइड की अपेक्षा अधिक होता है। यही कारण है कि कीटोन का क्वथनांक संगत समावयवी ऐल्डिहाइडों की तुलना में अधिक होता है।

प्रश्न 10.
फॉर्मेल्डिहाइड, ऐसीटैल्डिहाइड और ऐसीटोन में से कौन-सा यौगिक सबसे अधिक क्रियाशील है और क्यों?
उत्तर
HCHO, CH3CHO और CH3COCH3 की क्रियाशीलता का निर्धारण कार्बोनिल समूहों के साथ जुड़े हुए समूहों की प्रकृति के आधार पर होता है। कार्बोनिल समूहों के कार्बन परमाणु पर इलेक्ट्रॉन की कमी होने के कारण यौगिक अत्यधिक क्रियाशील होते हैं। यदि>c= 0 समूह के साथ इलेक्ट्रॉन आकर्षित करने वाले– प्रभाव वाले समूह जुड़े होंगे तो वे कार्बोनिल समूह वाले कार्बन की इलेक्ट्रॉन न्यूनता को और बढ़ा देंगे जिससे यौगिक बहुत अधिक क्रियाशील हो जायेगा। इसके विपरीत यदि कार्बोनिल समूह के साथ इलेक्ट्रॉन देने वाले (+ I प्रभाव वाले) समूह जुड़े हों तो वे कार्बोनिल समूह की क्रियाशीलता को कम कर देंगे।CH, समूह का +I प्रभाव होता है। अतः उपर्युक्त तीन यौगिकों की क्रियाशीलता का क्रम नीचे दिये अनुसार होगा
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प्रश्न 11.
एसीटिक अम्ल, फॉर्मिक अम्ल तथा क्लोरोऐसीटिक अम्ल की अम्लीय शक्ति की तुलना कीजिए।
उत्तर
एसीटिक अम्ल में उपस्थित एक ऐल्किल समूह के धनात्मक प्रेरणिक प्रभाव के कारण हाइड्रॉक्सिल ऑक्सीजन पर इलेक्ट्रॉन घनत्व बढ़ता है, जो अम्ल की प्रबलता को कम करता है। फॉर्मिक अम्ल में एक भी ऐल्किल समूह नहीं होता। फॉर्मिक अम्ल में ऑक्सीजन पर धन आवेश होने के कारण O-H बंध का इलेक्ट्रॉन युग्म ऑक्सीजन की ओर विस्थापित होता जाता है, फलस्वरूप O-H बंध का हाइड्रोजन प्रोटॉन के रूप में सरलता से अलग हो जाता है और फॉर्मिक अम्ल एक अम्ल के समान कार्य करता है, जबकि क्लोरोऐसीटिक अम्ल में उपस्थित क्लोरीन परमाणु प्रबल ऋणात्मक प्रेरणिक प्रभाव प्रदर्शित करता है, जिससे अम्ल में 0-H बंध बनाने वाले इलेक्ट्रॉन ऑक्सीजन की ओर सरलता से विस्थापित हो जाते हैं, जिससे सरलता से H* आयन मुक्त होता है। अतः क्लोरोऐसीटिक अम्ल फॉर्मिक अम्ल और ऐसीटिक अम्ल से अधिक प्रबल होता है।

प्रश्न 12.
निम्नलिखित अभिक्रिया में A, B तथा C यौगिकों को पहचानिए
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उत्तर
MP Board Class 12th Chemistry Solutions Chapter 12 ऐल्डिहाइड्स, कीटोन्स तथा कार्बोक्सिलिक अम्ल - 77

प्रश्न 13.
निम्नलिखित क्रियाओं के रासायनिक समीकरण लिखिये
(a) ऐसीटैल्डिहाइड की 0°C पर H3SO4 से क्रिया। ।
(b) फॉर्मेल्डिहाइड की अमोनियामय AgNO3 से क्रिया।
(c) एसीटिक ऐसिड को P2O5 के साथ गर्म करने पर।
उत्तर
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प्रश्न 14.
ऐसीटैल्डिहाइड के बहुलीकरण का संक्षेप में वर्णन कीजिए।
उत्तर
1.साधारण ताप पर ऐसीटैल्डिहाइड सान्द्र H2SO4 की कुछ बूंदों के साथ अभिकृत किये जाने पर पैराऐल्डिहाइड में बहुलीकृत हो जाता हैं। जिसका उपयोग निद्राकारी औषधि के रूप में होता हैं।
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2. 0°C पर ऐसीटैल्डिहाइड में HCI गैस प्रवाहित करने पर मेटा ऐल्डिहाइड प्राप्त होता है।
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प्रश्न 15
निम्नलिखित बिन्दुओं के अन्तर्गत फॉर्मिक अम्ल और ऐसीटिक अम्ल में अन्तर लिखिए

  1. गर्म करने पर ,
  2. अम्लीय KMnO4 से क्रिया,
  3. Ca लवण का आसवन करने पर,
  4. अमोनियामय AgNO3 विलयन के साथ क्रिया,
  5. PCL5 से क्रिया।

उत्तर
फॉर्मिक एसिड और ऐसिटिक एसिड में अंतर|
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प्रश्न 16.
स्टीफन अभिक्रिया और बेंजोइन संघनन के उदाहरण एवं समीकरण द्वारा समझाइए।
उत्तर
स्टीफन अभिक्रिया-ऐल्किल सायनाइड को ईथर या एथिल ऐसीटेट में विलेय कर उसका SnCl2 व HCl द्वारा अपचयन करके भाप आसवन करने पर ऐल्डिहाइड प्राप्त होता है। यह स्टीफन अभिक्रिया कहलाती है।
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प्रश्न 17.

  1. पर्किन अभिक्रिया पर संक्षिप्त टिप्पणी लिखिए।
  2. क्या होता है जब ऐसीटोन को H2SO, के साथ गर्म करते हैं ?

उत्तर
1. पर्किन अभिक्रिया-ऐरोमैटिक ऐल्डिहाइड को किसी ऐलिफैटिक अम्ल के सोडियम लवण की उपस्थिति में उस अम्ल के ऐनहाइड्राइड के साथ गर्म करते हैं तो a,B असन्तृप्त अम्ल बनता है। जैसे
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2. H2SO4 की उपस्थिति में ऐसीटोन के तीन अणु संघनित होकर मेसिटिलीन बनाते हैं।

प्रश्न 18.
सिरका किसे कहते हैं ? इसके दो उपयोग लिखिये। (अति महत्वपूर्ण)
उत्तर
एसीटिक एसिड का 6 से 10% जलीय विलयन सिरका कहलाता है।
उपयोग-

  1. अचार, चटनी, मुरब्बा के परिरक्षण में।
  2. बेसिक कॉपर एसीटेट बनाने में।

प्रश्न 19.
फार्मेलीन किसे कहते हैं ? इसके दो उपयोग लिखिए।
उत्तर
फार्मेलीन-ऐल्डिहाइड (H-CHO) को 40%, जलीय विलयन फार्मेलीन कहलाता है।
उपयोग-

  1. रोगियों के कमरे धोने में।
  2. मृत शरीरों के परिरक्षण में।

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प्रश्न 20.
क्या होता है जब (केवल समीकरण दीजिए)

  1. कैल्सियम फॉर्मेट को अकेले गर्म करते हैं।
  2. कैल्सियम बेंजोएट को अकेले गर्म करते हैं।
  3. कैल्सियम फार्मेट को कैल्सियम एसीटेट के साथ गर्म करते हैं।
  4. कैल्सियम बेंजोएट को कैल्सियम फार्मेट का मिश्रण का शुष्क आसवन करते हैं।

उत्तर
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प्रश्न 21.
क्या होता है जब (केवल समीकरण दीजिए)

  1. फॉर्मेल्डिहाइड अमोनिया के साथ क्रिया करता है।
  2. कैल्सियम फॉर्मेट को कैल्सियम एसीटेट के साथ गर्म करते हैं ?
  3. एसीटोन निगनार्ड अभिकर्मक से क्रिया करता है।
  4. एसीटिलीन जल साथ Hgso4 व H2SO4 की उपस्थिति में क्रिया करता है।

उत्तर
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प्रश्न 22.
ऐल्डिहाइड और कीटोन समूहों के यौगिक में प्रमुख अन्तर लिखिए।
उत्तर
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प्रश्न 23.
एक कार्बनिक यौगिक A (अणुसूत्र C8H80), धनात्मक 2,4-DNP परीक्षण देता है। यह आयोडीन तथा सोडियम हाइड्रॉक्साइड विलयन के साथ क्रिया कराने पर यौगिक Bका एक पीला अवक्षेप देता है। यौगिक A टॉलेन अथवा फेहलिंग परीक्षण नहीं देता है। पोटैशियम परमैंगनेट के साथ प्रबल ऑक्सीकरण कराने पर यह एक कार्बोक्सिलिक अम्ल C (अणुसूत्र C7H6O2) बनाता है जो उपरोक्त अभिक्रिया में पीले यौगिक के साथ भी बनता है। A, B तथा C को पहचानिए तथा सम्बन्धित सभी अभिक्रियाओं को लिखिए।
उत्तर
यौगिक A टॉलेन अथवा फेहलिंग परीक्षण नहीं देता है। अंत: यह एक कीटोन है, ऐल्डिहाइड नहीं।
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प्रश्न 24.
ट्राइ क्लोरो ऐसीटिक अम्ल अकार्बनिक अम्लों की भाँति प्रबल क्यों है ? बेंजोइक अम्ल ठोस है जबकि प्रारम्भिक ऐलीफैटिक अम्ल द्रव है। कारण दीजिए।
उत्तर
ट्राइ क्लोरो ऐसीटिक अम्ल में Cl परमाणु एक शक्तिशाली ऋणात्मक प्रेरणिक प्रभाव (-I प्रभाव) डालते हैं। इसके कारण O-H बंध का इलेक्ट्रॉन जोड़ा ऑक्सीजन की ओर विस्थापित हो जाता है। इस अणु में हाइड्रोजन परमाणु ऑक्सीजन के साथ शिथिलता से जुड़ा रहता है तथा उसका आयनन सरलता से हो जाता है। अतः ट्राइक्लोरो ऐसीटिक अम्ल अकार्बनिक अम्ल की भाँति प्रबल है।
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बेंजोइक अम्ल अपनी ध्रुवीय प्रकृति एवं उच्च आण्विक द्रव्यमान के कारण ठोस है जबकि निम्न
ऐलिफैटिक अम्ल उनमें उपस्थित MP Board Class 12th Chemistry Solutions Chapter 9 उपसहसंयोजन यौगिक Q24समूह के कारण आपस में अन्तर आण्विक हाइड्रोजन बंध द्वारा संगुणित होकर द्विलकीकृत हो जाते हैं। इस कारण ये द्रव अवस्था में पाये जाते हैं।
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प्रश्न 25.
बहुलीकरण एवं संघनन में क्या अन्तर है ? (कोई चार)
उत्तर
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प्रश्न 26.
ऐसीटिक अम्ल का फॉर्मिक अम्ल में और फॉर्मिक अम्ल का ऐसीटिक अम्ल में परिवर्तन की क्रियाएँ लिखिए।
उत्तर
1. एसीटिक अम्ल का फॉर्मिक अम्ल में परिवर्तन
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2. फॉर्मिक अम्ल का ऐसीटिक अम्ल में परिवर्तन
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प्रश्न 27.
निम्न को कैसे प्राप्त करेंगे

  1. एसीटिल क्लोराइड से ऐसीटैल्डिहाइड
  2. कैल्सियम ऐसीटेट से ऐसीटोन
  3. एथिल ऐसीटेट से एसीटिक अम्ल।

उत्तर
1. एसीटिल क्लोराइड में Pd युक्त BaSO4 की उपस्थिति H2 गैस प्रवाहित करने पर ऐसीटैल्डिहाइड बनता है।
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2. कैल्सियम ऐसीटेट का शुष्क आसवन करने पर एसीटोन बनता है।
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3. एथिल एसीटेट से एसीटिक अम्ल प्राप्त करने हेतु अम्लीय माध्यम में जल अपघटन किया जाता है।
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प्रश्न 28.
जब द्रव A की एक ताजे बने हुए अमोनियामय सिल्वर नाइट्रेट विलयन के साथ क्रिया करते हैं, तो यह चमकदार रजत दर्पण देता है। यह द्रव सोडियम हाइड्रोजन सल्फाइट के साथ अभिकृत करने पर एक सफेद क्रिस्टलीय ठोस बनाता है। द्रव B भी सोडियम हाइड्रोजन सल्फाइट के साथ एक सफेद क्रिस्टलीय ठोस बनाता है किन्तु यह अमोनियामय सिल्वर नाइट्रेट के साथ परीक्षण नहीं देता है। दोनों द्रवों में से कौन-सा ऐल्डिहाइड है ? इन अभिक्रियाओं की रासायनिक समीकरणे लिखिए।
उत्तर
चूँकि द्रव A अमोनियामय सिल्वर नाइट्रेट (टॉलेन अभिकर्मक) को अपचयित करता है, अतः, A ऐल्डिहाइड है।
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प्रश्न 29.
प्रयोगशाला में फॉर्मिक अम्ल बनाने की विधि और दो उपयोग बताइये।
उत्तर
प्रयोगशाला में फॉर्मिक अम्ल बनाने के लिए 100-110°C पर ऑक्सेलिक अम्ल तथा ग्लिसरॉल की अभिक्रिया करायी जाती है। अभिक्रिया इस प्रकार है
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उपयोग-

  1. सूती तथा ऊनी कपड़ों की रंगाई में,
  2. चमड़ा तथा रबर उद्योग में,
  3. विद्युत् लेपन में,
  4. फलों के रसों के परिरक्षण में।

ऐल्डिहाइड्स, कीटोन्स तथा कार्बोक्सिलिक अम्ल दीर्घ उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 1.
प्रयोगशाला में ऐसीटोन बनाने की विधि का वर्णन कीजिए। नामांकित चित्र एवं रासायनिक समीकरण भी दीजिए।
उत्तर
ऐसीटोन बनाने की प्रयोगशाला विधि (Laboratory Method)-प्रयोगशाला में ऐसीटोन निर्जल कैल्सियम ऐसीटेट के शुष्क आसवन से बनाया जाता है।
MP Board Class 12th Chemistry Solutions Chapter 12 ऐल्डिहाइड्स, कीटोन्स तथा कार्बोक्सिलिक अम्ल - 99
चित्रानुसार उपकरण तैयार करके काँच या धातु के रिटॉर्ट में निर्जल कैल्सियम ऐसीटेट लेकर गर्म करते हैं। ऐसीटोन की वाष्प बनती है, जो संघनित्र में संघनित होकर ग्राही में एकत्रित हो जाती है। यह ऐसीटोन अशुद्ध होता है। इसे सन्तृप्त NaHSO3 विलयन के साथ हिलाकर 4-5 घण्टे के लिए रख देते हैं, जिससे ऐसीटोन सोडियम बाइसल्फाइट के क्रिस्टल बनते हैं। इन्हें पृथक् करके Na2CO3 विलयन के साथ मिलाकर आसवन करते हैं। शुद्ध ऐसीटोन प्राप्त होता है। इसमें थोड़ा जल अभी भी होता है। इसलिए इसे निर्जल CaCl2 से सुखाकर पुनः आसवन करते हैं। 56°C पर शुष्क ऐसीटोन आसवित होता है।
(CH3)2C=0+ NaHSO3→(CH3)2C(OH)SO3Na
2(CH3)2C(OH)SO3Na+ Na2CO3→2(CH3)2C=0+2Na2SO3 + H2O + CO2

प्रश्न 2.
निम्नलिखित अभिक्रियाओं को उदाहरण देकर समीकरण सहित लिखिए

  1. आयोडोफॉर्म अभिक्रिया,
  2. टिशेन्को अभिक्रिया,
  3. गाटरमानकोच अभिक्रिया,
  4. रोजेनमुण्ड अभिक्रिया।

उत्तर
1. आयोडोफॉर्म (हैलोफॉर्म) अभिक्रिया-ऐसीटैल्डिहाइड या मेथिल कीटोन को आयोडीन तथा क्षार के साथ अभिक्रिया कराने पर पीले रंग का आयोडोफॉर्म (CHI3) का अवक्षेप आता है, इसे आयोडोफॉर्म परीक्षण कहते हैं।
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सम्पूर्ण अभिक्रियाएँ
CH3-CO-CH3+ 312 + 4NaOH →CHI3+ CH3COONa + 3Nal + 3H20

2. टिशेन्को अभिक्रिया (Tischencko reaction)-CH3-CHO या C6H5CHO को ऐल्युमिनियम आइसो प्रोपॉक्साइड और निर्जल AICI3 या ZnCI2 के साथ गर्म करने से एस्टर बनते हैं।
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3. गाटरमैन कोच ऐल्डिहाइड संश्लेषण-CO और HCI के मिश्रण को निर्जल AICI3 और CuCl (अल्प भाग) की उपस्थिति में उच्च दाब पर बेंजीन ईथर विलयन में प्रवाहित करने पर C6H5CHO बनता है।
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4. रोजेनमुण्ड अभिक्रिया–ऐसिड क्लोराइड के उबले जाइलीन में बने विलयन का पैलेडियमयुक्त बेरियम सल्फेट की उपस्थिति में हाइड्रोजन द्वारा अपचयन करने पर ऐल्डिहाइड बनता है। यह अभिक्रिया रोजेनमुण्ड अभिक्रिया कहलाती है ।
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BaSO5 अभिक्रिया में Pd उत्प्रेरक के लिए विष का कार्य करता है। इसकी उपस्थिति ऐल्डिहाइड का ऐल्कोहॉल में अपचयन रोकती है।

प्रश्न 3.
शीघ्र सिरका विधि से ऐसीटिक अम्ल कैसे बनाते हैं? ऐसीटिक अम्ल की क्लोरीन तथा फॉस्फोरस पेन्टाक्लोराइड से अभिक्रिया रासायनिक समीकरण देकर समझाइये।
अथवा, ऐसीटिक अम्ल बनाने की शीघ्र सिरका विधि को सचित्र समझाइये। इसके दो प्रमुख गुण और उपयोग बताइये।
उत्तर
शीघ्र सिरका विधि- इस विधि में ऐल्कोहॉल के तनु विलयन का ऑक्सीकरण वायु के द्वारा माइकोडर्मा ऐसीटी बैक्टीरिया की उपस्थिति में किया जाता है।
MP Board Class 12th Chemistry Solutions Chapter 12 ऐल्डिहाइड्स, कीटोन्स तथा कार्बोक्सिलिक अम्ल - 105
इस विधि में एक बाल्टीनुमा पात्र में जिसके निचले भाग में कई छेद हों पुराने सिरके से भीगी लकड़ी की छीलन भरकर ऊपर से एथिल ऐल्कोहॉल का 10% विलयन (जिसमें थोड़ा अमोनियम सल्फेट मिला हो) धीरेधीरे नीचे गिराते हैं। इसमें अमोनियम सल्फेट बैक्टीरिया के भोजन के रूप में कार्य करता है। तब नीचे तनु ऐसीटिक अम्ल या सिरका एकत्रित हो जाता है। इस तरह प्राप्त अम्ल को तब तक कई बार ऊपर से डालते हैं जब तक ऐल्कोहॉल का ऑक्सीकरण पूर्ण न हो जाये। इस प्रकार ऐसीटिक अम्ल का सान्द्रण भी हो जाता है।
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रासायनिक गुण-
1. Cl2 से क्रिया-ऐसीटिक अम्ल क्लोरीन, सूर्य प्रकाश या उच्च ताप पर लाल फॉस्फोरस की उपस्थिति में क्रिया करके मोनो, डाइ एवं ट्राइक्लोरो ऐसीटिक अम्ल बनाते हैं।
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2. PCI से क्रिया
CH3COOH + PCl5 → CH3COCI+ POCl3 + HCI

उपयोग-

  • प्रयोगशाला में अभिकर्मक व विलायक के रूप में।
  • सिरके के रूप में अचार, चटनी आदि बनाने में।
  • मेथिल ऐसीटेट, एथिल ऐसीटेट तथा अन्य एस्टर बनाने में।

प्रश्न 4.
निम्नलिखित पर संक्षिप्त टिप्पणी लिखिए

  1. क्लेजन संघनन,
  2. बेंजोइन संघनन।

उत्तर
1. क्लेजन संघनन—ऐरोमैटिक ऐल्डिहाइड, तनु क्षार की उपस्थिति में जब α -हाइड्रोजन युक्त ऐलिफैटिक ऐल्डिहाइड अथवा कीटोन के साथ संघनित होता है तो α , β असंतृप्त ऐल्डिहाइड या कीटोन बनाता
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2. बेंजोइन संघनन–बेंजैल्डिहाइड को जब ऐल्कोहॉली पोटैशियम सायनाइड के साथ गर्म किया जाता है, तो इसके दो अणु संघनित होकर बेंजोइक (a – हाइड्रॉक्सी कीटोन) बनाते हैं।
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प्रश्न 5.
ऐसीटिक अम्ल से आप निम्नलिखित कैसे प्राप्त करोगे ? (केवल समीकरण दीजिए)

  1. ऐसीटेमाइड,
  2. एथिल ऐसीटेट,
  3. ऐसीटिक ऐनहाइड्राइड,
  4. ट्राइक्लोरो ऐसीटिक अम्ल।

उत्तर
1. ऐसीटेमाइड
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2. एथिल ऐसीटेट
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3. ऐसीटिक ऐनहाइड्राइड
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4. ट्राइक्लोरो ऐसीटिक अम्ल-
CH3 – COOH +3Cl2 →CCl3COOH+3HCI.

प्रश्न 6.
क्या होता है जब (केवल समीकरण दीजिए)

  1. एसीटोन की क्लोरोफर्म से क्रिया,
  2. बेन्जैल्डिहाइड की ऐसीटिक ऐनहाइड्राइड से क्रिया।

उत्तर
1. ऐसीटोन की क्लोरोफॉर्म से क्रिया-
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2. बेन्जेल्डिहाइड की एसीटिक एनहाइड्राइड से क्रिया-
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प्रश्न 7.
निम्नलिखित अभिक्रिया पर टिप्पणी लिखिए

  1. स्टीफन अभिक्रिया
  2. नोवेनजेल अभिक्रिया
  3. इटार्ड अभिक्रिया।

उत्तर
1. स्टीफन अभिक्रिया- स्टीफन अभिक्रिया-ऐल्किल सायनाइड को ईथर या एथिल ऐसीटेट में विलेय कर उसका SnCl2 व HCl द्वारा अपचयन करके भाप आसवन करने पर ऐल्डिहाइड प्राप्त होता है। यह स्टीफन अभिक्रिया कहलाती है।
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2. नोवेनजेल अभिक्रिया- जब बेंजैल्डिहाइड को पिरीडीन या ग्लेश्यिल ऐसीटिक अम्ल की उपस्थिति में डाइ एथिल मैलोनेट (मैलोनिक एस्टर) से क्रिया करके α,β अंसतृप्त एरोमैटिक कार्बोक्सिलिक अम्ल बनाता है।
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3. इटार्ड अभिक्रिया- कार्बन टेट्रा क्लोराइड में विलेय टालुईन को क्रोमिल क्लोराइड के साथ क्रिया कराने पर जटिल यौगिक बनता है जो जल-अपघटन पर बेंजेएल्डिहाइड देता है।
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प्रश्न 8.
क्या होता है जब (केवल समीकरण)

  1. ऐसीटोन को ग्रिगनार्ड अभिकर्मक के साथ अभिक्रिया कराने पर
  2. ऐसीटोन को KOH की उपस्थिति में क्लोरोफार्म के साथ
  3. बेंजेल्डिहाइड को एनिलीन के साथ ।
  4. कार्बोक्सिलिक अम्ल के सोडियम लवण को सोडा लाइम के साथ गर्म करने पर
  5. बेंजीन को एसीटिल क्लोराइड के साथ निर्जल AlCl3 की उपस्थिति में।

उत्तर
1. ऐसीटोन को ग्रिगनार्ड अभिकर्मक के साथ अभिक्रिया
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2. ऐसीटोन की CHCI3 के साथ अभिक्रिया
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3. बेंजेल्डिहाइड की एनिलीन के साथ अभिक्रिया
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4. कार्बोक्सिलिक अम्ल के सोडियम लवण (शिफ क्षार) से सोडा लाइम के साथ
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5. बेंजीन की CH3COCI के साथ अभिक्रिया
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प्रश्न 9.
कैसे प्राप्त करोगे
(a) ऐसीटिलीन से ऐसीटेल्डिहाइड
(b) प्रोपाइन से प्रोपेनोन।
उत्तर
(a) ऐसीटिलीन से ऐसीटेल्डिहाइड
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प्रश्न 10.
ऐसीटिक अम्ल से निम्न कैसे प्राप्त करोगे
(a) एथिल ऐल्कोहॉल,
(b) एथिल ऐसीटेट,
(c) मेथिल ब्रोमाइड,
(d) ऐसीटोन
(e) ऐसीटेमाइड,
(f) एसीटिक एनहाइड्राइड,
(g) ट्राईक्लोरो ऐसीटिक अम्ल।
उत्तर
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प्रश्न 11.
कैसे प्राप्त करोगे (समीकरण दीजिए)
(a) टॉलुईन से बेन्जोइक अम्ल,
(b) प्रोपेनोइक अम्ल से ऐसीटिक अम्ल,
(c) प्रोपेनोइक अम्ल से प्रोपेनॉल,
(d) ऐसीटिक अम्ल से फॉर्मिक अम्ल।
उत्तर
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प्रश्न 12.
कैसे परिवर्तित करोगे

  1. फॉर्मेल्डिहाइड से ऐसीटेल्डिहाइड ( मेथेनल से एथेनल)
  2. ऐसीटेल्डिहाइड से फॉर्मेल्डिहाइड (एथेनल से मेथेनल)
  3. फॉर्मिक अम्ल से ऐसीटिक अम्ल।

उत्तर
1. फॉर्मेल्डिहाइड से ऐसीटेल्डिहाइड
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2. ऐसीटेल्डिहाइड से फॉर्मेल्डिहाइड
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3. फॉर्मिक अम्ल से ऐसीटिक अम्ल
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प्रश्न 13.
निम्नलिखित की ग्रिगनार्ड अभिकर्मक से अभिक्रिया का समीकरण दीजिए
(a) CO
(b) HCN
(c) HCOOC2H5
d) CH3CN.
उत्तर
MP Board Class 12th Chemistry Solutions Chapter 12 ऐल्डिहाइड्स, कीटोन्स तथा कार्बोक्सिलिक अम्ल - 129

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प्रश्न 14.
क्या होता है जब (केवल समीकरण दीजिए)

  1. एसीटिक अम्ल की एथिल एल्कोहॉल से क्रिया
  2. एसीटिक अम्ल की अमोनिया से क्रिया
  3. एसीटोन की क्लोरोफॉर्म से क्रिया
  4. बेन्जैल्डिहाइड की एसीटिक एनहाइड्राइड से क्रिया।

उत्तर
1. एसीटिक अम्ल की एथिल एल्कोहॉल से क्रिया
MP Board Class 12th Chemistry Solutions Chapter 12 ऐल्डिहाइड्स, कीटोन्स तथा कार्बोक्सिलिक अम्ल - 130

2. एसीटिक अम्ल की अमोनिया से क्रिया
MP Board Class 12th Chemistry Solutions Chapter 12 ऐल्डिहाइड्स, कीटोन्स तथा कार्बोक्सिलिक अम्ल - 131

3. एसीटोन की क्लोरोफॉर्म से क्रिया
MP Board Class 12th Chemistry Solutions Chapter 12 ऐल्डिहाइड्स, कीटोन्स तथा कार्बोक्सिलिक अम्ल - 132

4. बेन्जेल्डिहाइड की एसीटिक एनहाइड्राइड से क्रिया
MP Board Class 12th Chemistry Solutions Chapter 12 ऐल्डिहाइड्स, कीटोन्स तथा कार्बोक्सिलिक अम्ल - 133

प्रश्न 15.
समझाइए

  1. ऐल्डिहाइड और कीटोन के क्वथनांक संगत ऐल्कोहॉल व अम्ल से भिन्न होते हैं।
  2. अम्लों के क्वथनांक उतने ही अणु भार वाले ऐल्कोहॉलों से उच्च होते हैं।

उत्तर
1. ऐल्डिहाइड एवं कीटोन ध्रुवीय यौगिक हैं इसलिए इनके क्वथनांक अध्रुवीं हाइड्रोकार्बन से अधिक होते हैं जबकि इनके क्वथनांक समान अणुभार वाले ऐल्कोहॉलों और कार्बोक्सिलिक अम्लों की तुलना में कम होते हैं । इसका कारण यह है कि ऐल्कोहॉल एवं कार्बोक्सिलिक अम्ल अन्तर-अणुक (intermolecular) H-बन्ध बनाकर संगुणित अणु बनाते हैं। ऐल्डिहाइड एवं कीटोन में हाइड्रोजन बन्ध बनाना सम्भव नहीं है, क्योंकि अम्ल एवं ऐल्कोहॉल की तरह H-परमाणु; विद्युत् ऋणात्मक ऑक्सीजन परमाणु से आबन्धित नहीं होता है। इस प्रकार हाइड्रोजन बन्ध के कारण ऐल्कोहॉल एवं अम्ल के क्वथनांक उच्च होते हैं।

2. कार्बोक्सिलिक अम्लों के क्वथनांक लगभग समान अणुभार वाले ऐल्कोहॉलों से अधिक होते हैं, क्योंकि अम्लों में ऐल्कोहॉलों की तुलना में प्रबल हाइड्रोजन बन्ध होता है। परिणामस्वरूप कार्बोक्सिलिक अम्ल के अणु आपस में दो हाइड्रोजन बन्ध से जुड़े होते हैं और अधिक आकर्षण बल होता है जिससे इनके क्वथनांक उच्च होते हैं।
MP Board Class 12th Chemistry Solutions Chapter 12 ऐल्डिहाइड्स, कीटोन्स तथा कार्बोक्सिलिक अम्ल - 134

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MP Board Class 12th Chemistry Solutions Chapter 9 उपसहसंयोजन यौगिक

MP Board Class 12th Chemistry Solutions Chapter 9 उपसहसंयोजन यौगिक

उपसहसंयोजन यौगिक NCERT पाठ्यनिहित प्रश्नोत्तर

प्रश्न 1.
निम्न समन्वयन यौगिकों के सूत्र लिखिए –
(i) टेट्राएमीन डाइएक्वा कोबाल्ट (III) क्लोराइड
(ii) पोटैशियम टेट्रासायनो निकिलेट (II)
(iii) ट्रिस (एथेन-1,2-डाइएमीन), क्रोमियम (III) क्लोराइड
(iv) एमीनब्रोमीडोक्लोरीडोनाइट्रीटो-N-प्लेटिनेट(II)
(v) डाइक्लोरिडो बिस (एथेन-1,2-डाइएमीन) प्लैटिनम
(iv) नाइट्रेट (vi) आयरन (III) हेक्सा सायनो फेरेट (II)।
उत्तर
(i) [Co(NH3)4(H2O)2]Cl3
(ii) K2[Ni(CN)4]
(iii) [Cr(en)3]Cl3
(iv) [Pt(NH3)BrCl NO2]
(v) [PtCl2(en)2](NO3)2
(vi) Fe4[Fe(CN)6]3.

प्रश्न 2.
निम्न समन्वयन यौगिकों के IUPAC नाम लिखिए –
(i) [CO(NH3) Cl3
(ii) [Co(NH3)5Cl]Cl2
(iii) K3[Fe(CN)6]
(iv) K3[Fe(C2O4)3]
(v) K2[PdCl4]
(vi) [Pt(NH3)2Cl(NH2CH3)]Cl.
उत्तर
(i) हेक्साएमीन कोबाल्ट (III) क्लोराइड
(ii) पेण्टाएमीनक्लोरीडो कोबाल्ट (III) क्लोराइड
(iii) पोटैशियम हेक्सा सायनोफेरेट (III)
(iv) पोटैशियम ट्राइऑक्सेलेटो फेरेट (III)
(v) पोटैशियम टेट्राक्लोरीडो पेलेडेट (II)
(vi) डाइएमीनक्लोरीडो (मेथेनामीन)प्लैटिनम (II) क्लोराइड।।

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प्रश्न 3.
निम्न संकुलों में किस प्रकार की समावयवता पायी जाती है, दर्शाइये एवं इन समावयवियों की संरचना बनाइये –
(i) K[Cr(H2O)2(C2O4)2]
(ii) [Co(en)3]Cl3
(iii) [Co(NH3)5(NO2)](NO3)2
(iv) Pt(NH3)(H3O)Cl2
उत्तर
(i) K[Cr(H2O)2(C2O4)2] ज्यामितीय समावयवता दर्शाते हैं।
MP Board Class 12th Chemistry Solutions Chapter 9 उपसहसंयोजन यौगिक - 1

(ii) [Co(en)3]Cl3 प्रकाशीय समावयवता दर्शाते हैं।
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(iii) [Co(NH3)5(NO2)](NO3)2] आयनन समावयवता दर्शाते हैं –
[CO(NH3) 5NO2](NO3)2 एवं [CO(NH3)5NO3] (NO2)(NO3). ये लिंकेज समावयवता भी दर्शाते हैं। [CO(NH3)5NO2] (NO3)2 एवं [CO(NH3)5 (ONO)] NO3.

(iv) [Pt(NH3)(H2O)Cl2] ज्यामितीय समावयवता दर्शाते हैं
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प्रश्न 4.
[CO(NH3)5Cl]SO4 एवं [CO(NH3)5SO4]Cl आयनन समावयवी हैं, प्रमाण दीजिए।
उत्तर
आयनन समावयवियों को जब जल में घोला जाता है, तो विभिन्न आयनों का परीक्षण किया जा सकता है।
MP Board Class 12th Chemistry Solutions Chapter 9 उपसहसंयोजन यौगिक Q4
AgCl का सफेद अवक्षेप दर्शाता है कि समावयवी में Cl आयन है, जो समन्वयन मण्डल के बाहर स्थित है।
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BaSO4 का सफेद अवक्षेप दर्शाता है कि समावयवी में SO42- आयन है, जो समन्वयन मण्डल के बाहर स्थित है।

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प्रश्न 5.
संयोजकता बंध सिद्धांत के आधार पर व्याख्या कीजिए कि [Ni(CN4)2-आयन की वर्गसमतलीय संरचना होती है एवं प्रतिचुम्बकीय है तथा [Ni(CN4)2- आयन चतुष्फलकीय ज्यामितीय वाली अनुचुम्बकीय है।
उत्तर
[Ni(CN4)2- संकुल में Ni की ऑक्सीकरण अवस्था +2 है। इसका इलेक्ट्रॉनिक विन्यास [Ar]3d8 है। इसमें dsp2 संकरण होता है, चूँकि CN प्रबल क्षेत्र लिगैण्ड है, जिससे इलेक्ट्रॉनों का युग्मन होता है। कोई अयुग्मित इलेक्ट्रॉन नहीं होता है, इसलिए यह प्रति-चुम्बकीय प्रकृति का है।
MP Board Class 12th Chemistry Solutions Chapter 9 उपसहसंयोजन यौगिक - 6
[NiCl4]2- संकुल में Ni की ऑक्सीकरण अवस्था +2 है। इसका इलेक्ट्रॉनिक विन्यास [Ar]3d8 है। इसमें sp3 संकरण होता है। चूंकि CI दुर्बल क्षेत्र लिगैण्ड है, इसलिए इलेक्ट्रॉनों का युग्मन नहीं होता है।
MP Board Class 12th Chemistry Solutions Chapter 9 उपसहसंयोजन यौगिक - 7
संकरण संकुल आयन में दो अयुग्मित इलेक्ट्रॉन उपस्थित हैं, अतः यह अनुचुम्बकीय प्रकृति का है।

प्रश्न 6.
[NiCl4]2- अनुचुम्बकीय है जबकि [Ni(CO)4] प्रतिचुम्बकीय है, जबकि दोनों चतुष्फलकीय हैं, क्यों?
उत्तर
[NiCl4]2- में दो अयुग्मित इलेक्ट्रॉन है, अतः यह अनुचुम्बकीय है। (विस्तृत रूप में उपर्युक्त प्रश्न क्र. 5 का उत्तर देखिए) जैसे- CN , CO प्रबल क्षेत्र लिगैण्ड है, समान रूप से CO के कारण इलेक्ट्रॉनों का युग्मन होता है। कोई अयुग्मित इलेक्ट्रॉन शेष नहीं होते हैं, अतः यह प्रतिचुम्बकीय है।।

प्रश्न 7.
[Fe(H2O)6]3+ प्रबल अनुचुम्बकीय है,जबकि [Fe (CN)6]3- दुर्बल अनुचुम्बकीय है, व्याख्या कीजिए।
उत्तर
दोनों संकुलों में Fe की +3 ऑक्सीकरण अवस्था है, जिसका विन्यास d5 है। CN प्रबल क्षेत्र लिगैण्ड है, इसकी उपस्थिति से 3d इलेक्ट्रॉनों का युग्मन होता है, केवल एक अयुग्मित इलेक्ट्रॉन शेष रहता है। अतः संकरण d2sp3 के कारण अन्तर कक्षक संकुल बनते हैं। H2O दुर्बल क्षेत्र लिगैण्ड है। इसकी उपस्थिति से 3d इलेक्ट्रॉनों का युग्मन नहीं होता। संकरण sp3d2 से बाह्य कक्षक संकुल बनते हैं, जिसमें पाँच अयुग्मित इलेक्ट्रॉन होते हैं, अत: यह प्रबल अनु-चुम्बकीय है।

प्रश्न 8.
[COL(NH3)]3+ आंतरिक कक्षक संकुल है, जबकि [Ni(NH3)2+ बाह्य कक्षक संकुल है, व्याख्या कीजिए।
उत्तर
[CO(NH3)]3+ में Co, +3 ऑक्सीकरण अवस्था में 3d6 विन्यास होता है । NH3 की उपस्थिति से 3d इलेक्ट्रॉनों का युग्मन होकर दो d कक्षक खाली रहते हैं । अतः d2sp3 संकरण होकर अन्तर कक्षक संकुल बनाते हैं।

[Ni(NH3)6]2+ में Ni, +2 ऑक्सीकरण अवस्था में 3d6 विन्यास होता है। NH3 की उपस्थिति से 3d इलेक्ट्रॉनों का युग्मन नहीं होता। अतः sp3d2 संकरण होकर बाह्य कक्षक संकुल बनाते हैं।

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प्रश्न 9.
वर्गसमतलीय [Pt(CN)4]2- आयन में अयुग्मित इलेक्ट्रॉनों की संख्या बताइये।
उत्तर
प्लैटिनम परमाणु का आद्य अवस्था में इलेक्ट्रॉनिक विन्यास 5d96s1 होता है। संकुल में Pt की ऑक्सीकरण अवस्था +2 है एवं इलेक्ट्रॉनिक विन्यास 5d8 है। इसकी ज्यामितीय वर्ग समतलीय है, एक 5d कक्षक रिक्त है एवं शेष अन्य चार कक्षकों में इलेक्ट्रॉन युग्मन में रहते हैं। इस प्रकार dsp2 संकरण होकर प्रतिचुम्बकीय है।
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प्रश्न 10.
हेक्साएक्वा मैंगनीज (II) आयन में पाँच अयुग्मित इलेक्ट्रॉन होते हैं, जबकि हेक्सासायनो आयन में केवल एक अयुग्मित इलेक्ट्रॉन होता है। क्रिस्टल क्षेत्र सिद्धांत का उपयोग करते हुए व्याख्या कीजिए।
उत्तर
Mn, +2 ऑक्सीकरण अवस्था में 3d5 इलेक्ट्रॉनिक विन्यास में है। H2O दुर्बल लिगैण्ड है। H2O अणुओं की उपस्थिति में, इलेक्ट्रॉनों का वितरण t32ge2g में होता है, सभी इलेक्ट्रॉन अयुग्मित हैं।
MP Board Class 12th Chemistry Solutions Chapter 9 उपसहसंयोजन यौगिक - 9

CN प्रबल लिगैण्ड है। इसकी उपस्थिति में, इलेक्ट्रॉनों का वितरण t52ge0g है, जिसमें एक अयुग्मित इलेक्ट्रॉन उपस्थित है। ..

प्रश्न 11.
[Cu(NH3)4]4+ आयन का सम्पूर्ण संकुल वियोजन साम्य स्थिरांक की गणना कीजिए। इस संकुल के लिए β4 = 2.1 × 1013 दिया गया है।
हल
सम्पूर्ण संकुल वियोजन साम्य स्थिरांक, संपूर्ण स्थायित्व स्थिरांक का व्युत्क्रमानुपाती होता है।
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NCERT पाठ्य-पुस्तक प्रश्नोत्तर

प्रश्न 1.
वर्नर के पदों के क्रम में समन्वयन यौगिकों में बंधन को समझाइए।
उत्तर
वर्नर का उप-सहसंयोजकता सिद्धान्त (Werner’s Co-ordination Theory)—अल्फ्रेड वर्नर ने उप-सहसंयोजकता का प्रतिपादन 1893 ई. में किया। इस सिद्धान्त के अभिगृहीत (Postulates) निम्नलिखित हैं –

(1) धातुओं की दो प्रकार की संयोजकताएँ होती हैं(a) प्राथमिक संयोजकता (Primary or Principal or Ionic Valency) (-)
(b) द्वितीयक संयोजकता (Secondary or Auxiliary or Non-ionic Valency) (….)
प्राथमिक संयोजकता आयनित हो सकती है और इसे ठोस (पूर्ण) रेखा से प्रदर्शित करते हैं, जबकि द्वितीयक संयोजकता आयनित नहीं हो सकती, इसे बिन्दुकित या टूटी रेखा से प्रदर्शित करते हैं।

(2) प्रत्येक धातु परमाणु अपनी प्राथमिक और द्वितीयक दोनों संयोजकताओं को संतृप्त या सन्तुष्ट करना चाहतें हैं।
प्राथमिक संयोजकता सर्वदा ऋणायन से सन्तुष्ट (सन्तृप्त) होती है, जबकि द्वितीयक संयोजकता ऋणायन से या उदासीन अणुओं से (कभी-कभी धनायन से भी) सन्तुष्ट होती है। ऋणायन बहुधा प्राथमिक और द्वितीयक दोनों संयोजकताएँ सन्तुष्ट करता है।

(3) प्रत्येक धातु आयन की द्वितीयक संयोजकताएँ (उप-सहसंयोजी संख्या) निश्चित होती हैं।
जैसे-Pt (IV), Fe (II), Fe (II) तथा Cr (III) की उप-सहसंयोजन संख्या 6 है तथा Pt (II), Cu (II) और Pd (II) की उप-सहसंयोजन (उप-सहसंयोजकता) संख्या 4 है।

(4) द्वितीयक संयोजकताएँ त्रिविम में निश्चित दिशाओं में स्थित होती हैं अर्थात् इनकी निश्चित ज्यामितीय व्यवस्था होती है।
जैसे – निकिल की द्वितीयक संयोजकता 4 होती है और यह चतुष्फलकीय (Tetrahedrally) रूप से व्यवस्थित होती है।
वर्नर की विधि में प्राथमिक संयोजकता को पूर्ण रेखा (Complete line) से तथा द्वितीयक संयोजकता को टूटी रेखाओं (Dotted lines) से दर्शाते हुए उक्त यौगिकों को निम्नांकित विधि से चित्रित किया गया –
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प्रश्न 2.
FeSO4 विलयन को 1:1 मोलर अनुपात में (NH4)2SO4 विलयन में मिलाने पर Fe2+ आयन का परीक्षण देता है, किन्तु CuSO4 विलयन को 1 : 4 मोलर अनुपात में जलीय अमोनिया में मिलाने पर Cu2+ आयन का परीक्षण नहीं देता है, क्यों ? व्याख्या कीजिए।
उत्तर-
FeSO4 विलयन को 1 : 1 मोलर अनुपात में (NH4)2SO4 विलयन में मिलाने पर द्विक लवण, FeSO4(NH4)2SO4.6H2O (मोहर लवण) बनाते हैं, जो विलयन में आयनी-कृत होकर Fe2+ आयन देता है, जो Fe2+ आयन का परीक्षण देता है।
CuSO4 विलयन को 1 : 4 मोलर अनुपात में जलीय अमोनिया में मिलाने पर संकुल यौगिक देते हैं।
CuSO4 + 4NH3 → [Cu(NH3)4]SO4
जटिल आयन [Cu(NH3)4]2+ आयनीकृत नहीं होता है तथा Cu2+ आयन नहीं देता है, अतः यह Cu2+ आयनों का परीक्षण नहीं देता।

प्रश्न 3.
निम्न में से प्रत्येक के दो उदाहरण देकर समझाइए –
समन्वयन मण्डल, लिगैण्ड, समन्वयन संख्या, समन्वयन पॉलिहाइड्रॉन, होमोलेप्टिक एवंहेटरोलेप्टिक।
उत्तर-उप-सहसंयोजन मण्डल या समन्वय मण्डल-केन्द्रीय धातु परमाणु अथवा आयन से किसी एक निश्चित संख्या में आबन्धित आयन अथवा अणु मिलकर एक उप-सहसंयोजन सत्ता का निर्माण करते है;
जैसे – [COCl3(NH3)3], [Ni(CO) [Pt Cl2(NH3)2], [Fe(CN)6]4- आदि।

लिगैण्ड-उप-सहसंयोजन सत्ता में केन्द्रीय परमाणु / आयन से परिबद्ध आयन अथवा अणु लिगैण्ड कहलाते हैं। ये सामान्य आयन हो सकते है या छोटे अणु हो सकते है। जैसे-H2O या NH3 उदाहरण [CO(CN)6]3- में CO+3 में केन्द्रीय धातु आयन CN लिगैण्ड।

उप-सहसंयोजन संख्या-एक संकुलन धातु आयन की उप-सहसंयोजन संख्या (CN) उससे आबन्धित लिगैण्डों के उन दाता परमाणुओं की संख्या के बराबर होती है जो सीधे धातु आयन से जुड़े हों। .

उदाहरण-संकुल आयनों [PtCl6]2- तथा [Ni(NH3)4]+2 में Pt तथा Ni3 पर संयोजकता 6 तथा 4 है।
समन्वय बहुफलक-केन्द्रीय परमाणु / आयन से सीधे जुड़े लिगैण्ड परमाणु की दिक् स्थान व्यवस्था को समन्वय बहुफलक कहते है। इनमें अष्टफलकीय व समतलीय तथा चतुष्फलकीय मुख्य है।
जैसे – [CO(NH3)6]3+अष्टफलकीय, [Ni(CO)4] चतुष्फलकीय तथा [PtCl4] वर्ग समतलीय है।
MP Board Class 12th Chemistry Solutions Chapter 9 उपसहसंयोजन यौगिक - 13

होमोलेप्टिक तथा हेट्रोलेप्टिक संकुल-संकुल जिनमें धातु परमाणु केवल एक प्रकार के दाता समूह से जुड़ा रहता है, उदाहरण [Co(NH3)6]3+ होमोलेप्टिक संकुल कहलाते हैं।
वे संकुल जिनमें धातु परमाणु एक से अधिक प्रकार के दाता समूहों से जुड़ा रहता है। जैसे [CO(NH3)4Cl2]+ हेट्रोलेप्टिक संकुल कहलाते हैं।

प्रश्न 4.
एकदन्तुर, द्विदन्तुर एवं उभयदन्ती (बहुदन्तुर) लिगैण्डों का क्या अर्थ है ? प्रत्येक के दो उदाहरण दीजिए।
उत्तर
एकदन्तुर लिगैण्ड-जब एक लिगैण्ड, धातु आयन से एक दाता परमाणु द्वारा परिबद्ध होता है जैसे-Cl, H2O या NH3 तो लिगैण्ड एकदन्तुर कहलाता है।
द्विदन्तुर लिगैण्ड-जब लिगैण्ड दो दाता परमाणुओं द्वारा परिबद्ध होता है, ऐसा लिगैण्ड द्विदन्तुर कहलाता है। जैसे-H2NCH2CH2NH2 या C2O4-2
बहुदन्तुर लिगैण्ड-जब लिगैण्ड एक से अधिक परमाणु इलेक्ट्रॉन त्यागकर उपसहसंयोजी आबन्ध बनाये तो यह लिगैण्ड बहुदन्तुर कहलाता है। जैसे- E.D.T.A. आदि।

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प्रश्न 5.
निम्न समन्वयन मण्डलों में धातुओं की ऑक्सीकरण संख्याओं को दर्शाइए –
(i) [CO(H2O)(CN)(en)2]2+
(ii) [COBr2(en)2]+
(iiii) [PtCl4]2-
(iv) K3[Fe(CN)6]
(v) [Cr(NH3)3Cl3].
उत्तर
(i) x + (-1) = +2, x = +3
(ii) x +4 (-1) =-2, x = +2
(iii)x + 3 (-1) = 0, x = +3
(iv)x + 2 (-1) = +1,x = +3
(v) x + 6 (-1)= -3, x = +3.

प्रश्न 6.
IUPAC नियमों का उपयोग करते हुए निम्न के सूत्र लिखिए –
(i) देट्राहाइड्रोक्सो जिंकेट (II)
(ii) पोटैशियमटेट्राक्लोरीडो पेलेडेट (II)
(iii) डाइएमीन डाइक्लोरीडो प्लैटिनम (II)
(iv) पोटैशियम टेट्रासायनो निकिलेट (II)
(v) पेण्टाएमीन नाइट्रिटो-0-कोबाल्ट (III)
(vi) हेक्साएमीन कोबाल्ट (III) सल्फेट
(vii) पोटैशियम ट्राई (ऑक्सेलेटो) क्रोमेट (III)
(viii) हेक्साएमीन प्लैटिनम (IV)
(ix) टेट्राब्रोमीडो क्यूप्रेट (II)
(x) पेण्टाएमीन नाइट्रीटो -N- कोबाल्ट (III)।
उत्तर
(i) [Zn(OH)4]2-
(ii) K2[PdCl4]
(iii) [Pt(NH3)2Cl2]
(iv) K2[Ni(CN)4]
(v) [CO(NH3)5(ONO)]2+
(vi) [CO(NH3)6]2 (SO4)3
(vii) K3[Cr(C2CO4)3]
(viii) [Pt(NH3)6]4+
(ix) [Cu(Br)4] 2-
(x) [CO(NH3)5(NO2)]2+

प्रश्न 7.
IUPAC नियमों का उपयोग करते हुए निम्न के सही नाम लिखिए –
(i) [CO(NH3)4]Cl3
(ii) [Pt(NH3)2CH(NH2CH3)]Cl
(iii) [Ti(H2O)6]3+
(iv) [CO(NH3)4Cl(NO2)]Cl
(v) [Mn(H2O)6]2+
(vi) [NiCl4]2-
(vii) [Ni(NH3)6]Cl2
(viii) [CO(en)3]3+
(ix) [Ni(CO)4].
उत्तर-
(i) हेक्साएमीनोकोबाल्ट (III) क्लोराइड
(ii) डाइएमीन क्लोरीडो (मेथिल एमीन) प्लैटिनम (II) क्लोराइड
(iii) हेक्साएक्वा टाइटेनियम (III) आयन।
(iv) टेट्राएमीनक्लोरीडोनाइट्रिटो-N-कोबाल्ट (III) क्लोराइड
(v) हेक्साएक्वा मैंगनीज (II) आयन
(vi) टेट्राक्लोरीडोनिकलेट (III) आयन
(vii) हेक्साएमीन निकिल (II) क्लोराइड
(viii) ट्रिस (एथेन-1, 2-डाइएमीन) कोबाल्ट (III) आयन
(ix) टेट्राकार्बोनिल निकिल (0).

प्रश्न 8.
समन्वयन यौगिकों में संभावित विभिन्न प्रकार की समावयवता को प्रत्येक के उदाहरण देकर सूची बनाइए।
उत्तर
समन्वयन यौगिकों में समावयवता- जिन यौगिकों के रासायनिक सूत्र समान होते हैं परन्तु संरचना या अंतरिक्ष में विन्यास अलग होता है वे समावयवी (Isomers) कहलाते हैं। उपसहसंयोजी यौगिकों में विभिन्न प्रकार के बन्ध व आकृतियाँ (Shapes) सम्भव हैं, अतः विभिन्न प्रकार के समावयवी पाये जाते हैं।
संकुल या समन्वयन यौगिकों में भी दो प्रकार की समावयवता संभव है –
1. संरचनात्मक समावयवता (Structural isomerism),
2. त्रिविम समावयवता (Stereo isomerism)।
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1.संरचनात्मक समावयवता (Structural Isomerism)
केन्द्रीय धातु परमाणु के चारों ओर लिगैण्ड की जमावट (Arrangement) की भिन्नता के कारण उत्पन्न समावयवता को संरचनात्मक समावयवता कहते हैं। अब हम उनके प्रकारों पर विचार करेंगे।
(i) आयनन समावयवता-अन्य महत्वपूर्ण प्रश्न में ल. उ. प्र. क्र. 28 देखें।
(ii) बन्धन समावयवता-अन्य महत्वपूर्ण प्रश्न में ल. उ. प्र. क्र. 20 देखें।
(iii) हाइड्रेट समावयवता-अन्य महत्वपूर्ण प्रश्न में ल. उ. प्र. क्र. 28 देखें।
(iv) उपसहसंयोजी समावयवता-यह समावयवता उन यौगिकों में पायी जाती हैं, जिनमें धनायन तथा ऋणायन दोनों ही संकुल आयन हो। धनायन संकुल के लिगैण्ड तथा ऋणायन संकुल के लिगैण्ड, अपने केन्द्रीय धातु परमाणु के साथ परस्पर परिवर्तन से समावयवी प्राप्त होते हैं।
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2. त्रिविम समावयवता (Stereo Isomerism) . ऐसे दो यौगिक जिनके अणुसूत्र एकसमान हो, उपस्थित सभी समूह समान हो, उनके बंधों का प्रकार भी समान हो, केवल समूहों (लिगैण्ड) का केन्द्रीय धातु आयन के चारों ओर अभिविन्यास अलग-अलग हो, त्रिविम समावयवी कहलाते हैं, क्योंकि ऐसे समावयवियों का अंतरिक्ष (Space) से संबंध होता है।
अभिविन्यास अलग होने से उनमें ज्यामितीय समावयवता भी हो सकती है अथवा अणु समग्र रूप से असममित (Dissymmetric) भी हो सकता है, जिससे प्रकाशकीय समावयवता संभव हो जाती है, अतः त्रिविम समावयवता दो प्रकार की होती है –

(A) ज्यामितीय समावयवता, (B) प्रकाशकीय समावयवता। –
(i) ज्यामितीय समावयवता-अन्य महत्वपूर्ण प्रश्न में लघु उ. प्र. क्र. 8 देखें।
(ii) प्रकाशकीय समावयवता-अन्य महत्वपूर्ण प्रश्न में दीर्घ उ. प्र. क्र. 5 देखें।

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प्रश्न 9.
निम्न समन्वयन मण्डलों में कितने संभावित ज्यामितीय समावयवी होंगे –
(i) [Cr(C2O4)3]3-तथा
(ii) [Co(NH3)3Cl3].
उत्तर
(i) शून्य
(ii) दो (fac एवं mer)।

प्रश्न 10.
निम्न की प्रकाशिक समावयवियों की संरचना बनाइए
(i) [Cr(C2O4)3]3-
(ii) [PtCl2(en)2]2+.
(iii) [Cr(NH3)2Cl2(en)]+.
उत्तर
(i)
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(ii)
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(iii)
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प्रश्न 11.
निम्न की सभी समावयवियों (ज्यामितीय एवं प्रकाशीय) की संरचना बनाइए –
(i) [COCl2(en)2]+
(ii) [CO(NH3)Cl(en)2]2+
(iii) [CO(NH3)2Cl2(en)]+
उत्तर-
(i)
MP Board Class 12th Chemistry Solutions Chapter 9 उपसहसंयोजन यौगिक - 19
(ii)
MP Board Class 12th Chemistry Solutions Chapter 9 उपसहसंयोजन यौगिक - 20
(iii)
MP Board Class 12th Chemistry Solutions Chapter 9 उपसहसंयोजन यौगिक - 21

प्रश्न 12.
[Pt(NH3)(Br) (Cl)(py)] के सभी ज्यामितीय समाव-यवियों को लिखिए एवं इनमें से कितने प्रकाशीय समावयवी रखते हैं ?
उत्तर
तीन समावयवी
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इस प्रकार के समावयवी प्रकाशीय समावयवता नहीं दर्शाते। वर्ग समतलीय संकुलों में प्रकाशीय समावयवता केवल असममित कीलेट लिगेण्ड रखने वालों में पायी जाती है।

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प्रश्न 13.
जलीय कॉपर सल्फेट विलयन (नीले रंग का) देता है –
(i) जलीय पोटैशियम फ्लुओराइड के साथ हरा अवक्षेप, एवं
(ii) जलीय पोटैशियम क्लोराइड के साथ चमकीला हरा विलयन देता है। इन प्रयोगों के परिणामों की व्याख्या कीजिए।
उत्तर
जलीय कॉपर सल्फेट [Cu(H2O)4]SO4 के रूप में रहता है, इसका नीला रंग [Cu(H2O)4]2+ आयनों के कारण होता है।

(a) जब KF मिलाते हैं, तब दुर्बल जल (H2O) लिगेण्ड F लिगैण्ड द्वारा प्रतिस्थापित होकर [CuF4]2- आयन बनाता है, जो हरा अवक्षेप देता है।
[Cu(H2O)4]SO4 + 4F → [CuF4]2- + 4H2O

(b) जब KCI मिलाते हैं, तब दुर्बल जल (H2O) लिगैण्ड Cl आयनों द्वारा प्रतिस्थापित होकर [CuCl4]2- बनाता है, जो चमकदार हरे रंग का होता है। … [Cu(H2O)]SO4 + 4KCl → [CuCl4]2- + 4H2O.

प्रश्न 14.
जब जलीय KCN को जलीय कॉपर सल्फेट विलयन में आधिक्य में मिलाया जाता है, तो बनने वाला समन्वयन मण्डल क्या होगा? जब इस विलयन में H2S(g) प्रवाहित करते हैं, तो बनने वाले कॉपर सल्फाइड का अवक्षेप क्यों प्राप्त नहीं होता ?
उत्तर
यदि आधिक्य में जलीय KCN को जलीय CuSO4 विलयन में मिलाएँ, तो पोटैशियम टेट्रासायनोक्यूप्रेट (II) बनता है।
[Cu(H2O)4]2+ + 4CN → [Cu(CN)4]2-+ 4H2O.
यदि H2S(g) को उपरोक्त विलयन में प्रवाहित करते हैं, कॉपर सल्फाइड का कोई अवक्षेप प्राप्त नहीं होता है, क्योंकि CN आयन प्रबल लिगैण्ड हैं, इसलिए संकुल [Cu(CN)4]2- अत्यधिक स्थायी है। इस प्रकार, Cu2+ आयन उपलब्ध न होने के कारण CuS का अवक्षेप नहीं बनता।

प्रश्न 15.
संयोजकता बन्ध सिद्धांत के आधार पर निम्न समन्वयन मण्डलों में बंधों की प्रकृति की व्याख्या कीजिए –
(i) [Fe(CN)6]4-
(ii) [FeF6]3-
(iii) [CO(C2O4)3] 3-
(iv) [COF6]3-
उत्तर
(i) [Fe(CN)6]4- – d2sp3, अष्टफलकीय, प्रतिचुम्बकीय (NCERT पाठ्य-पुस्तक देखिए)।
(ii) [FeF6]3- – sp3d2 अष्टफलकीय, अनुचुम्बकीय (NCERT पाठ्य-पुस्तक देखिए) CoF के समान।
(iii) [CO(C2O4)3] 3- – d2sp3, अष्टफलकीय, अनुचुम्बकीय ([Fe(CN)614 के समान)।
(iv) [COF6]3- – sp3d2 अष्टफलकीय, अनुचुम्बकीय (NCERT पाठ्य-पुस्तक देखिए)।

प्रश्न 16.
अष्टफलकीय क्रिस्टल क्षेत्र की d-कक्षकों के विपाटन को चित्र बनाकर दर्शाइए।
उत्तर
CFSE की गणना निम्न प्रकार से कर सकते हैं –
CFSE = [-0-4x + 0.6y]Δ0
जहाँ, Δ0 = अष्टफलकीय संकुल में CFSE
x = t2g कक्षकों में इलेक्ट्रॉनों की संख्या
y = eg कक्षकों में अयुग्मित इलेक्ट्रॉनों की संख्या
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प्रश्न 17.
स्पेक्ट्रोकेमिकल श्रेणी क्या है ? दुर्बल क्षेत्र लिगैण्ड एवं प्रबल क्षेत्र लिगैण्ड में अन्तर को समझाइए।
उत्तर
स्पेक्ट्रोकेमिकल श्रेणी–लिगण्डों को उसके क्षेत्र शक्ति के बढ़ते क्रम में व्यवस्थित करने अर्थात् क्रिस्टल क्षेत्र विपाटन ऊर्जा (CFSE) के बढ़ते मानों को स्पेक्ट्रोकेमिकल श्रेणी कहते हैं।
दुर्बल क्षेत्र लिगैण्ड एवं प्रबल क्षेत्र लिगैण्ड में अन्तर ऐसे लिगैण्ड जिनका CFSE (Δ0) का मान कम होता है, उन्हें दुर्बल क्षेत्र लिगैण्ड कहते हैं, जबकि जिन लिगैण्डों का उच्च CFSE मान होता है, उन्हें प्रबल क्षेत्र लिगैण्ड कहते हैं।

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प्रश्न 18.
क्रिस्टल क्षेत्र विपाटन ऊर्जा क्या है ? समन्वयन मण्डल में वास्तविक d- कक्षकों के विन्यास को Δ0 का परिमाण कैसे निर्धारित करेगी।
उत्तर
जब लिगेण्ड संक्रमण धातु आयन के पास आते हैं, तब d-कक्षक दो सेटों में, कम ऊर्जा एवं उच्च ऊर्जा में विभक्त हो जाते हैं । कक्षकों के दो सेटों के बीच की ऊर्जा अन्तर को क्रिस्टल क्षेत्र विपाटन ऊर्जा (CFSE) कहते हैं, जैसे-अष्टफलकीय क्षेत्र के लिए Δ0 ।
उदाहरण के लिए, d तंत्र का निम्न विन्यास । पर निर्भर है।
(i) यदि Δ0 < P (युग्मन ऊर्जा), चौथा e eg कक्षक में से एक में प्रवेश कर t32g e1g विन्यास देता है।
(ii) यदि Δ0 > P, चौथा e t2g कक्षक में से एक में युग्मन होकर tA2g e0gविन्यास देता है।

प्रश्न 19.
[Cr(NH3 )6)]3+ अनुचुम्बकीय है, जबकि [Ni(CN)4]2- प्रतिचुम्बकीय है, क्यों ? समझाइए।
उत्तर
[Cr(NH3 )6)]3+ अनुचुम्बकीय है जबकि [Ni(CN)4]2+ प्रतिचुम्बकीय है।
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छ: NH3 लिगैण्ड इलेक्ट्रॉन युग्म त्यागकर d2sp3 संकरण कक्षक का निर्माण करते है क्योंकि 3d उपकक्षक में तीन अयुग्मित इलेक्ट्रॉन है। अतः [Cr(NH3)6]3+ आयन अनुचुम्बकीय है।
Ni= 28
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CN आयन प्रबल लिगैण्ड है।
इसलिए यह इलेक्ट्रॉन धकेलकर 3d उपकक्षक को इलेक्ट्रॉन रिक्त करता है, जो संकरण में भाग लेते हैं। एक 4s, दो 4p व एक 4d उपकक्षक मिलकर dsp2 संकरण कक्षक का निर्माण करते हैं।
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उप-सहसंयोजन यौगिक में कोई इलेक्ट्रॉन अयुग्मित नहीं है। अतः यह प्रतिचुम्बकीय है।

प्रश्न 20.
[Ni(H2O)6]2+का विलयन हरा है, जबकि [Ni(CN)4]2+ रंगहीन है, समझाइए।
उत्तर
H2O दुर्बल लिगैण्ड है, [Ni(H2O)6]2+ बाह्य कक्षक संकुल है। संकुल में दो अयुग्मित इलेक्ट्रॉन होते हैं, यहाँ did संक्रमण संभव है। यह लाल प्रकाश को अवशोषित करता है एवं पूरक हरा प्रकाश उत्सर्जित होता है।
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CN प्रबल लिगैण्ड है, अयुग्मित इलेक्ट्रॉन युग्मित हो जाते हैं। केन्द्रीय परमाणु dsp2 संकरण दर्शाते हैं, वर्ग समतलीय संकुल बनते हैं। कोई अयुग्मित इलेक्ट्रॉन उपस्थित नहीं होते हैं, जिससे d-d संक्रमण संभव नहीं है, जिसके फलस्वरूप संकुल रंगहीन है।

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प्रश्न 21.
[Fe(CN)6]4- एवं [Fe(H2O6)]2+ तनु विलयनों में विभिन्न रंग के होते हैं, क्यों ?
उत्तर-
दोनों संकुलों में, Fe, +2 अवस्था में 3d6 विन्यास में है एवं इसमें चार अयुग्मित इलेक्ट्रॉन होते हैं। लिगैण्ड H2O एवं CN दोनों की भिन्न क्रिस्टल क्षेत्र विपाटन ऊर्जा (Δ0) होती है, ये दृश्य प्रकाश (VIBGYOR) के विभिन्न अवयवों का अवशोषण d-d संक्रमण के लिए होता है जिससे विवर्तित रंग भिन्न होते

प्रश्न 22.
धातु कार्बोनिलों में बंधों की प्रकृति की व्याख्या कीजिए।
उत्तर
धातु कार्बोनिलों में पाए जाने वाले धात्विक कार्बन में s एवं p दोनों प्रकार के लक्षण विद्यमान होते हैं। धातु के रिक्त कक्षक में कार्बोनिल कार्बन पर एकाकी इलेक्ट्रॉन युग्म के दान द्वारा M-C σ-बंध का निर्माण होता है। इसी प्रकार M-C π-बंध का निर्माण पूर्ण पूरित d-कक्षक वाले धातु के इलेक्ट्रॉन युग्म के कार्बन मोनोक्साइडे रिक्त प्रतिबंधीय π कक्षक में दान द्वारा होता है। इसे कार्बोनिल समूह की बैक बॉण्डिंग भी कहते हैं।

प्रश्न 23.
निम्न संकुलों में केन्द्रीय धातु आयन की ऑक्सीकरण अवस्था, d-कक्षकों का भरना एवं समन्वयन संख्या दीजिए
(i) K3[CO(C2O4)3]
(ii) cis-[Cr(en)2Cl2]Cl
(iii) (NH4)2[CoF4]
(iv) [Mn(H2O)6]SO4
उत्तर
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प्रश्न 24.
निम्न संकुलों के IUPAC नाम लिखिए एवं ऑक्सीकरण अवस्था, इलेक्ट्रॉनिक विन्यास एवं समन्वयन संख्या दर्शाइये। संकुल की त्रिविम रसायन एवं चुम्बकीय आघूर्ण दीजिए
(i) K[Cr(H2O)2(C2O4)2].3H2O
(ii) [CO(NH3)5Cl]Cl2
(iii) CrCl3(py)3
(iv) Cs[FeCl4]
(v) K4[Mn(CN)6].
उत्तर
(i) पोटैशियम डाइएक्वा डाइऑक्सेलेटो क्रोमेट (III) हाइड्रेट
(ii) पेण्टाएमीनक्लोरीडो कोबाल्ट (III) क्लोराइड
(iii) ट्राईक्लोरीडोट्राईपिरीडीन क्रोमियम (III)
(iv) सीजियम टेट्राक्लोरीडो फेरेट (III)
(v) पोटैशियम हेक्सासायनोमैंगनेट (II)।
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प्रश्न 25.
विलयन में समन्वयन यौगिक के स्थायित्व का क्या अर्थ है ? संकुलों के स्थायित्व को प्रभावित करने वाले कारकों को लिखिए। .
उत्तर
संकुलों में स्थायित्व दो प्रकार से प्रतिपादित किया जा सकता है
1. ऊष्मागतिकीय स्थायित्व (Thermodynamic stability)–इस प्रकार के स्थायित्व से धातु-लिगैण्ड बंधन ऊर्जा, स्थायित्व स्थिरांक आदि के बारे में विचार किया जाता है।
2. गतिक स्थायित्व (Kinetic stability)—यह स्थायित्व संकुल निर्माण की दर से संबंधित है। वास्तव में हमें यह विचार करना होता है कि संकुल निर्माण में साम्यावस्था कितनी जल्दी अथवा कितनी देर से आती है। इस दृष्टि से संकुलों को दो भागों में बाँटा गया है-पहला अक्रिय (Inert) तथा दूसरा सक्रिय (Labile) जिस संकुल में एक लिगैण्ड का दूसरे लिगैण्ड से विस्थापन शीघ्रता से होता है उसे सक्रिय (Labile) संकुल कहते हैं तथा इसमें विस्थापन बहुत धीरे होता है उसे अक्रिय (Inert) संकुल कहते हैं।

कोई भी संकुल धातु परमाणु अथवा धातु आयन तथा लिगैण्ड के बीच उपसहसंयोजकता स्थापित होने से बनता है। सामान्यत: यह समन्वयन प्रबल होता है क्योंकि धातु आयन को अपने निकटतम अगले अक्रिय तत्व का इलेक्ट्रॉनिक विन्यास प्राप्त करने के लिए इलेक्ट्रॉन-युग्मों की आवश्यकता होती है, जो उसे लिगैण्ड द्वारा दी जाती है।
फिर भी संकुल के जलीय विलयन में संकुल के वियोजन को नकारा नहीं जा सकता। वस्तुतः संकुल तथा उसके वियोजित स्पीशीज के बीच एक साम्यावस्था होती है।
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यह साम्यावस्था जितनी अधिक बायीं ओर झुकी होगी, संकुल उतना ही स्थायी होगा।
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जहाँ, साम्य स्थिरांक K को वियोजन स्थिरांक या अस्थिरता स्थिरांक कहते हैं जो समीकरण (ii) से प्राप्त होता है। K का मान कम होने पर संकुल का स्थायित्व अधिक होता है, आदि।
संकुलों के स्थायित्व को प्रभावित करने वाले प्रमुख कारक –
(1) धातु आयन की प्रकृति-(i) धातु आयन का आवेश व आकार-उच्च आवेश एवं छोटे आकार वाले धातु आयन स्थायी संकुल बनाते हैं।
(ii) धातु आयन की विद्युत्-ऋणात्मकता-उच्च विद्युत्-ऋणात्मकता वाले केन्द्रीय आयन अधिक स्थायी संकुल बनाते हैं।
(2) लिगैण्ड की प्रकृति –
(i) लिगैण्ड का आकार छोटा एवं आवेश उच्च होने पर संकुल अधिक स्थायी बनता है।
(ii) लिंगैण्ड की क्षारकता जितनी अधिक होती है, संकुल का स्थायित्व उतना ही अधिक होता है।
(iii) कीलेट संकुल, सामान्य संकुलों से अधिक स्थायी होते हैं।
(3) माध्यम या विलायक की प्रकृति-ऐसे विलायक जिनका परावैद्युतांक स्थिरांक और द्विध्रुव-आघूर्ण कम होता है, उसमें धातु व लिगैण्ड की अभिक्रिया कराने पर संकुलों का स्थायित्व बढ़ता है।

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प्रश्न 26.
कीलेट प्रभाव का क्या अर्थ है ? एक उदाहरण दीजिए।
उत्तर
द्विदंतुर, त्रिदंतुर आदि लिगैण्ड धातु आयन के साथ कीलेट बनाकर संकुल को स्थायित्व प्रदान करते हैं। कीलेट के कारण स्थायित्व पर पड़ने वाले इस प्रभाव को कीलेट प्रभाव कहते हैं । जैसे-[Ni(NH3)]2+ तथा [Ni(en)3]2+ कीलेट प्रभाव के कारण अधिक स्थायी संकुल है।

प्रश्न 27.
समन्वयन यौगिकों का निम्न के प्रकरणों में उदाहरण देकर योगदान समझाइए
(i) जैविक तंत्र
(ii) वैश्लेषिक रसायन
(iii) दवा रसायनों एवं
(iv) धातुओं के निष्कर्षण | धातुकर्म।
उत्तर-
(i) जैविक तंत्र में-पौधों के विकास में कई धातुओं का महत्वपूर्ण स्थान है। उनकी कमी से पौधों की वृद्धि स्वस्थ रूप से नहीं होती। जैसे-आयरन की कमी से पत्तियाँ पीली पड़ने लगती हैं किन्तु आयरन का ऑक्साइड जो मिट्टी में होता है, अविलेय होने के कारण पौधों द्वारा ग्रहण नहीं किया जा सकता। इसके लिए Fe-EDTA संकुल को मिट्टी में मिलाया जाता है। यह विलेय होने के कारण पौधों द्वारा अवशोषित कर लिया जाता है।

(ii) वैश्लेषिक रसायन में –
(a) गुणात्मक विश्लेषण में -अकार्बनिक क्षारीय मूलकों के परीक्षण में, मूलकों के पृथक्करण में, आयनों का संकुल बनाया जाता है।
प्रथम समूह में यदि Ag+ तथा Hg22+ आयन दोनों उपस्थित हों, तो उन्हें पृथक् करने के लिए NH4OH का विलयन मिलाया जाता है जिससे Ag+ आयन NH3 के साथ विलेयशील संकुल बना लेता है अब इसे छानकर अलग कर दिया जाता है।
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द्वितीय समूह में यदि Cu2+ तथा Cd2+ दोनों उपस्थित हों तो HCl माध्यम में H2S गैस प्रवाहित करने पर दोनों आयन CuS तथा CdS

के रूप में अवक्षेपित हो जाते हैं। यदि हम केवल Cd2+ को Cds के रूप में अवक्षेपित कराना चाहें तो इसमें KCN विलयन मिलाया जाता है। ऐसा करने पर Cu2+ आयन स्थायी विलेयशील . संकुल बना लेता है जिससे यह H2S द्वारा Cus के रूप में अवक्षेपित नहीं हो पाता।
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(b) परिमाणात्मक विश्लेषण में-धातु आयनों का संकुल बनाकर दिये गये अज्ञात नमूने में धातु की प्रतिशत मात्रा ज्ञात कर सकते हैं।
जैसे-निकिल का भारात्मक निर्धारण करने के लिए Ni2+ आयनों को डाइमेथिलग्लाइऑक्जाइड के साथ संकुल बनाकर अवक्षेपित कर लिया जाता है।

कठोर जल में Ca2+ तथा Mg2+ आयनों का आयतनात्मक आकलन करने के लिए इन आयनों का EDTA के साथ विलेयशील संकुल बना लिया जाता है तथा आयतनमिति से आकलन किया जाता है।

(iii) दवा रसायनों में-प्लेटिनम के संकुल cis- प्लैटिन cis[PtCl2(NH3)2s] का उपयोग एण्टीकार्सिनोजेन के रूप में किया जाता है।
Ca-EDTA संकुल का उपयोग लेड प्वॉइजनिंग (Lead poisoning) में किया जाता है। Pb-EDTA के रूप में बना संकुल पेशाब द्वारा बाहर निकल जाता है।

(iv) धातुओं के निष्कर्षण / धातुकर्म में -रजत को रजत के अयस्क से तथा स्वर्ण को स्वर्ण के अयस्क से निष्कर्षित करने के लिये इन धातुओं का संकुल निर्मित किया जाता है –
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प्रश्न 28.
संकुल [CO(NH3)6 Cl2.O] विलयन में कितने आयन देते हैं –
(i) 6.
(ii)4
(iii)3
(iv) 2.
उत्तर
(iii)
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प्रश्न 29.
निम्न आयनों में से किसी एक के चुम्बकीय आघूर्ण का मान अधिकतम है –
(i) [Cr(H2O)6]3+
(ii) [Fe(H2O)6]2+ .
(iii) [Zn(H2O)6]2+ .
उत्तर
(ii) [Fe(H2O)6]2+ का चुम्बकीय आघूर्ण उच्च है, क्योंकि Fe2+ आयन में अधिकतम 4 अयुग्मित इलेक्ट्रॉन होते हैं।

प्रश्न 30.
K[CO(CO)4 में कोबाल्ट की ऑक्सीकरण संख्या है –
(i) +1
(ii) +3
(iii)-1
(iv)-3.
उत्तर
(iii) K[CO(CO)4]
1 +x+4 (0) = 0
x = -1.

प्रश्न 31.
निम्न में से सर्वाधिक स्थायी संकुल है –
(i) [Fe(H2O)6]3+
(ii) [Fe(NH3)6]3+
(iii) [Fe(C2O4)3]3-
(iv) [FeCl6]3-
उत्तर-
(iii) [Fe(C2O4)3]3- सर्वाधिक स्थायी संकुल है चूँकि यह कीलेट लिगैण्ड संकुल है।

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प्रश्न 32.
निम्नलिखित में से दृश्यक्षेत्र में अवशोषण के तरंगदैर्घ्य का सही क्रम क्या होगा[Ni(NO2)] , [Ni(NHz)*, [Ni(H,0)]t.
उत्तर
सभी तीनों संकुलों में केन्द्रीय धातु आयन समान हैं, इस प्रकार, स्पेक्ट्रोकेमिकल श्रेणी में लिगैण्ड की क्षेत्र प्रबलता का बढ़ता क्रम है –
H2O < NH3 < NO2
अतः उत्तेजित होने के लिए अवशोषित ऊर्जा का क्रम होगा
[Ni(H2O)6] 2+ < [Ni(NH3)6] 2+ < [Ni(NO2)6]4-
∴ \(E=\frac{h c}{\lambda}\) , इस प्रकार, अवशोषित तरंगदैर्घ्य विपरीत क्रम में होगा।

उपसहसंयोजन यौगिक अन्य महत्वपूर्ण प्रश्न

उपसहसंयोजन यौगिक वस्तुनिष्ठ प्रश्न

1. सही विकल्प चुनकर लिखिए-

प्रश्न 1.
जीसे लवण (Zeise’s salt) का सही सूत्र है –
(a) K+[PtCl3(C2H4) ]
(b) K+[PtCl3-n2(C2H4)] Cl
(c) K+[PtCl3-n2-C2H4]
(d) K+[PtClz-n2-(C2H4) ].
उत्तर
(d) K+[PtClz-n2-(C2H4) ].

प्रश्न 2.
निम्नलिखित में से कौन ओलिफिनिक कार्ब-धात्विक नहीं हैं –
(a) C4H4Fe(CO)3
(b) (C2H4PtCl3)2
(c) Be(CH2)2
(d) K[C2H4PtCl3]3H2O.
उत्तर
(c) Be(CH2)2

प्रश्न 3.
K3[Al(C2O4)3] का IUPAC NAME HI
(a) पोटैशियम एल्युमिनो ऑक्जेलेट
(b) पोटैशियम ट्राइऑक्जेलेटो ऐल्युमिनेट (III)
(c) पोटैशियम ऐल्युमिनियम (III) आक्जेलेट
(d) पोटैशियम ट्राइऑक्जेलेटो ऐल्युमिनेट (IV)।
उत्तर
(b) पोटैशियम ट्राइऑक्जेलेटो ऐल्युमिनेट (III)

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प्रश्न 4.
निम्नलिखित के बनने के कारण AgCL जलीय अमोनिया में विलेय है –
(a) [Ag(NH3)4]2+
(b) [Ag(NH4)2]+
(c) [Ag(NH3)4]+
(d) [Ag(NH3)32]+
उत्तर
(d) [Ag(NH3)32]+

प्रश्न 5.
निम्नलिखित में से कौन जलीय विलयन में सिल्वर नाइट्रेट के साथ सफेद अवक्षेप देगा –
(a) [Cs(NH3) Cl](NO2)2
(b) [Pt(NH3)2Cl2]
(c) [Pt(CN)Cl2]
(d) [Pt(NH3)]Cl2.
उत्तर
(d) [Pt(NH3)]Cl2.

प्रश्न 6.
Fe4[Fe(CN)6]3 का सही नामकरण है –
(a) फेरेसो फेरिक सायनाइड
(b) फेरिक फेरस हेक्सा सायनेट
(c) आयरन (III) हेक्सा सायनो फेरेट (II)
(d) हेक्सा सायनो फेरेट (III-II)।
उत्तर
(c) आयरन (III) हेक्सा सायनो फेरेट (II)

प्रश्न 7.
[Pt(NH3),Cl2] ज्यामितीय समावयवियों की संख्या होगी –
(a) दो
(b) एक
(c) तीन
(d) चार।
उत्तर
(a) दो

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प्रश्न 8.
को-ऑर्डिनेशन यौगिकों में किसी धातु का को-ऑर्डिनेशन नम्बर है
(a) प्राथमिक संयोजकता के समान
(b) प्राथमिक एवं द्वितीयक संयोजकता का योग
(c) द्वितीयक संयोजकता के समान
(d) उपर्युक्त में से कोई नहीं।
उत्तर
(c) द्वितीयक संयोजकता के समान

प्रश्न 9.
निम्नलिखित में से कौन-से संकुल में धातु की ऑक्सीकरण अवस्था शून्य है –
(a) [Pt(NH3)2Cl2]
(b) [Cr(CO)6]
(c) [Cr(NH3)3Cl3]
(d) [Cr(CN)2Cl2].
उत्तर
(b) [Cr(CO)6]

प्रश्न 10.
निम्नलिखित में कौन-सा कार्ब-धात्विक यौगिक नहीं है –
(a) एथिल मैग्नीशियम ब्रोमाइड
(b) टेट्राऐथिल लेड
(c) सोडियम एथॉक्साइड
(d) टेट्रामेथिल ऐल्युमिनियम।
उत्तर
(c) सोडियम एथॉक्साइड

प्रश्न 11.
संकुल [Fe(CN)6]3- , [Fe(CN)6]3- तथा [Fe(Cl)4]T में Fe की उपसहसंयोजन संख्या . क्रमशः होगी –
(a) 2, 2, 3
(b) 6, 6, 4
(c) 6, 3,3
(d) 6, 4, 6.
उत्तर
(b) 6, 6, 4

प्रश्न 12.
dsp संकरण का उदाहरण है
(a) [Fe(CN)6]3-
(b) [Ni(CN)4]2-
(c) [Zn(NH3)4]2+
(d) [FeF6]3-.
उत्तर
(b) [Ni(CN)4]2-

प्रश्न 13.
निम्न में से किस संकुल का एंटी कैंसर एजेन्ट के रूप में उपयोग किया जाता है –
(a) trans[Co(NH3)3Cl3]
(b) cis[Pt(NH3)2Cl2]
(c) cis-K2[PtCl2Br2]
(d) Na2CO3.
उत्तर
(b) cis[Pt(NH3)2Cl2]

प्रश्न 14.
NH3.[PtCl4]2- PCl5 एवं BCl3 में केन्द्रीय परमाणुओं के संकरण का सही क्रम है –
(a) dsp2, dsp3, sp2 और sp3
(b) sp3, sp3, sp3d और sp2
(c) dsp2, sp2, sp3 और dsp3
(d) dsp2, sp3, sp2 और dsp3.
उत्तर
(b) sp3, sp3, sp3d और sp2

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प्रश्न 15.
[Fe(CO)5] संकुल में Fe की ऑक्सीकरण अवस्था है –
(a)-1
(b) +2
(c) +4
(d) शून्य।
उत्तर
(d) शून्य।

प्रश्न 16.
ग्रिगनार्ड अभिकर्मक है –
(a) कार्ब-धात्विक यौगिक
(b) संकुल यौगिक
(c) द्विक लवण
(d) उदासीन यौगिक।
उत्तर
(a) कार्ब-धात्विक यौगिक

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प्रश्न 17.
संकुल लवणों की संरचना का प्रतिपादन किया –
(a) बर्जीलियस ने
(b) वर्नर ने
(c) राउल्ट ने
(d) फैराडे ने।
उत्तर
(b) वर्नर ने

प्रश्न 18.
मोहर लवण है –
(a) द्विक लवण
(b) संकुल लवण
(c) उदासीन लवण
(d) अभिकर्मक।
उत्तर
(a) द्विक लवण

प्रश्न 19.
सोडियम नाइट्रोप्रुसाइड का सूत्र है –
(a) Na4[Fe(CN)5NOS]
(b) Na2[Fe(CN)5NO]
(c) NaFe[Fe(CN)6]
(d) Na2[Fe(CN)5NO2].
उत्तर
(b) Na2[Fe(CN)5NO]

प्रश्न 20.
निम्न में से कौन-सा यौगिक भिन्न है –
(a) पोटैशियम फेरोसायनाइड
(b) फेरस अमोनियम सल्फेट
(c) पोटैशियम फेरीसायनाइड
(d) ट्रेटाऐमीन कॉपर (II) सल्फेट ।
उत्तर
(b) फेरस अमोनियम सल्फेट

2. रिक्त स्थानों की पूर्ति कीजिए –

  1. cis[Pt(NH3),Cl2] संकुल का …………. एजेन्ट के रूप में उपयोग किया जाता है।
  2. हीमोग्लोबिन आयरन का ………… यौगिक है।
  3. ज्यामितीय समावयवता …………. तथा ………….. संकुलों दोनों में पायी जाती है।
  4. डाइएथिल जिंक एक ……….. यौगिक है।
  5. [Ni(CO)4] संकुल में Ni की ऑक्सीकरण अवस्था ………….. है।
  6. K4[Fe(CN)6] का सही IUPAC नाम ………………… है।
  7. [CO(EDTA)] में कोबाल्ट की ऑक्सीकरण संख्या ….
  8. cis-डाइब्रोमो क्लोरो ट्राइएक्वोक्रोमियम का संरचना सूत्र ……………….. है।
  9. प्रस्फुटनरोधी कार्ब-धात्विक यौगिक का सूत्र ……
  10. [COF6]3- एक ………………. चक्रण संकुल है।
  11. EDTA ………………. लिगैण्ड है।
  12. षट्दन्तुर लिगैण्ट का उदाहरण ………………. है।

उत्तर

  1. एन्टी-कैंसर
  2. संकर
  3. चतुष्फलकीय, अष्टफलकीय
  4. कार्ब-धात्विक
  5. शून्य
  6. पोटैशियमहेक्सा – सायनोफेरेट (II)
  7. +3
  8. [Cr(H2O)3ClBr2]
  9. (C2H5)4Pb
  10. उच्च
  11. षट्दन्तुर
  12. E.D.T.A.

3. एक शब्द/वाक्य में उत्तर दीजिए

  1. [Co(NH3)5Br]SO4 तथा [CO(NH3)5SO4]Br में किस प्रकार की समावयवता पाया जाती है ?
  2. उस कार्ब-धात्विक यौगिक का नाम लिखिए, जिसका उपयोग पेट्रोल में अपस्फुटनरोधी यौगिक के
    रूप में किया जाता है।
  3. कैल्सियम के E.D.T. A. के साथ बने संकुलों का उपयोग किस धातु के विषैलेपन को दूर करने में
    किया जाता है ?
  4. डाई बेंजीन क्रोमियम की संरचना कैसी होती है ?
  5. Ni(CO)4 में किस प्रकार का संकरण होता है ?
  6. [Cr(H2O)5 SCN]2+ और [Cr(H2O)5NCS)2+ में कौन-सी समावयवता को प्रदर्शित करती है ?

उत्तर

  1. आयनन समावयवता,
  2. टेट्राएथिल लेड,
  3. लेड,
  4. सैंडविच,
  5. sp3
  6. बन्ध समावयवता।

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4. उचित संबंध जोडिए –
MP Board Class 12th Chemistry Solutions Chapter 9 उपसहसंयोजन यौगिक - 36
उत्तर
1. (h), 2. (g), 3. (1), 4. (e), 5. (b), 6. (d), 7. (a), 8. (c), 9. (i).

उपसहसंयोजन यौगिक लघु उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 1.
द्विक-लवण एवं संकुल-लवण को समझाइए। प्रत्येक का एक-एक उदाहरण दीजिए।
उत्तर
द्विक-लवण (Double Salt)—ये योगशील यौगिक होते हैं जो जलीय विलयन बनाने पर अपने संघटक आयनों में टूट जाते हैं । द्विक लवण के सभी संघटक आयन अपनी स्वतन्त्र पहचान रखते हैं तथा आयनीकरण होने पर अपने परीक्षण देते हैं ।
जैसे-फेरस अमोनियम सल्फेट – FeSO4. (NH4)2SO4.H2O.
पोटाश एलम-K2SO4.Al2(SO4)3.24H2O.

संकर-लवण या संकुल यौगिक (Complex compound)—इन यौगिकों में लिगैण्ड किसी धातु परमाणु या आयन से उप-सहसंयोजी बन्ध द्वारा जुड़े रहते हैं। धातु व लिगैण्ड मिलकर संकुल आयन बनाते हैं। जलीय विलयन में संकुल आयन अकेला आयन, जैसा व्यवहार करता है तथा संकुल आयन में लिगैण्ड के रूप में जुड़े आयन अपनी पहचान खो देते हैं, जैसे—K,[Fe(CN)6].

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प्रश्न 2.
ऐम्बीडेन्टेट लिगैण्ड को उदाहरण सहित समझाकर लिखिए।
उत्तर
संकुलों, जिसमें एकदन्ती लिगैण्ड एक से अधिक परमाणु केन्द्रीय धातु आयन को इलेक्ट्रॉन प्रदान कर उससे उप-सहसंयोजक बंध बनाते हैं, ऐम्बीडेन्टेट लिगैण्ड कहलाते हैं।
उदाहरण – NO2 आयन लिगैण्ड केन्द्रीय धातु आयन से या तो N या O द्वारा उप-सहसंयोजित हो सकता है।
MP Board Class 12th Chemistry Solutions Chapter 9 उपसहसंयोजन यौगिक - 37

प्रश्न 3.
लिगैण्ड से आप क्या समझते हैं ? उदाहरण देकर समझाइए।
उत्तर
लिगैण्ड (Ligand)—कोई भी परमाणु, आयन या अणु जो कि केन्द्रीय आयन को इलेक्ट्रॉन युग्म देकर उप-सहसंयोजी बन्ध बनाने में समर्थ होता है, संलग्नी या लिगैण्ड कहलाता है। उदाहरण-K4[Fe(CN)6] में CN लिगैण्ड है।

लिगैण्ड में वह विशिष्ट परमाणु जो वस्तुतः इलेक्ट्रॉन-युग्म देता है, दाता परमाणु (Donor atom) कहलाता है । किसी लिगैण्ड में एक से अधिक दाता परमाणु हों तो जुड़ने वाले परमाणुओं की संख्या एक, दो, तीन आदि के आधार पर उन्हें क्रमशः एकदन्तुर (Monodentate), द्विदन्तुर (Bidentate), त्रिदन्तुर (Tridentate), बहुदन्तुर (Polydentate) आदि कहा जाता है । इस प्रकार के कुछ लिगैण्ड अग्र दिये गये हैं –
MP Board Class 12th Chemistry Solutions Chapter 9 उपसहसंयोजन यौगिक - 38
(लिगैण्ड में तारांकित परमाणु दाता परमाणु है।)

प्रश्न 4.
संकुल आयन क्या है ?
उत्तर
संकुल या जटिल आयन (Complex ion)—संकुल आयन वह आवेशित मूलक है, जो एक सरल धातु आयन और दो या अधिक उदासीन अणुओं या लिगैण्ड के उप-सहसंयोजक बन्ध द्वारा संयोजन से बना होता है। जैसे [Fe(CN)6]4- आयन । इसे बड़े कोष्ठक में लिखा जाता है। यह कोष्ठक उप-सहसंयोजी मण्डल (Co-ordination Sphere) कहलाता है।
MP Board Class 12th Chemistry Solutions Chapter 9 उपसहसंयोजन यौगिक - 39

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प्रश्न 5.
द्विदन्तुर तथा षट्दन्तुर लिगैण्ड के एक-एक उदाहरण दीजिए।
उत्तर
द्विदन्तुर लिगैण्डए –
MP Board Class 12th Chemistry Solutions Chapter 9 उपसहसंयोजन यौगिक - 40

प्रश्न 6.
उप-सहसंयोजन संख्या क्या है ? दो उदाहरण दीजिए।
उत्तर
केन्द्रीय धातु या धातु आयन से उप-सहसंयोजक बन्ध द्वारा सीधे ही जुड़े हुए लिगैण्डों की संख्या को केन्द्रीय धातु आयन की उप-सहसंयोजन संख्या कहते हैं।
उदाहरण-[CO(NH3)6]3+ में CO3+ की उप-सहसंयोजन संख्या 6 है।
[Ag(CN)2] में Ag की उप-सहसंयोजन संख्या 2 है।

प्रश्न 7.
कार्ब-धात्विक यौगिक किसे कहते हैं ? कार्बधात्विक यौगिकों के कोई दो उपयोग लिखिए।
उत्तर
ऐसे यौगिक जिनमें कार्बनिक समूह का कार्बन परमाणु धातु परमाणु से आबन्धित होता है, कार्बधात्विक यौगिक कहलाते हैं।
कार्ब-धात्विक यौगिकों के उपयोग –
(i) टेट्राएथिल लेड (TE.L.) का उपयोग अपस्फुटनरोधी यौगिक के रूप में किया जाता है।।
(ii) जिग्लर-नाटा उत्प्रेरक का उपयोग एथिलीन व अन्य ऐल्कीन की बहुलीकरण क्रियाओं में किया जाता है।
(iii) एथिल मरक्यूरिक क्लोराइड (C2H5HgCl) का उपयोग कृषि में कीटनाशी के रूप में किया जाता है।
(iv) विल्किन्सन उत्प्रेरक का उपयोग कुछ ऐल्कीनों के हाइड्रोजनीकरण में किया जाता है।

प्रश्न 8.
ज्यामितीय समावयवता को एक उदाहरण देते हुए समझाइए।
उत्तर
ज्यामितीय समावयवता-इसे सिस-ट्रांस समावयवता भी कहते हैं। जब केन्द्रीय धातु आयन के चारों ओर दो समान लिगैण्ड एक-दूसरे के निकटवर्ती अर्थात् 90° पर होते हैं, तो उसे सिस-समावयवी एवं जब विकर्णवत् विपरीत अर्थात् 180° पर रहते हैं तो उन्हें ट्रांस-समावयवी कहते हैं।
इस प्रकार की समावयवता प्राय: वर्गसमतलीय [CN = 4] तथा अष्टफलकीय [CN = 6] संकुल यौगिकों में पायी जाती हैं।
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प्रश्न 9.
K4[Fe(CN)6] संकुल यौगिक का उदाहरण देते हुए वर्नर के सिद्धान्त को समझाइए।
उत्तर-
MP Board Class 12th Chemistry Solutions Chapter 9 उपसहसंयोजन यौगिक - 42
(i) जब इसे जल में विलेय किया जाता है तो यह अपने अवयवी आयनों K+, Fe2+, CN में विभक्त नहीं होता बल्कि K+ एवं एक संकुल आयन [Fe(CN)6]4- देता है।
(ii) संकुल यौगिक का नाम-पोटैशियम हेक्सासायनोफेरेट (II)
(iii) K4[Fe(CN)6] का जलीय विलयन में आयनन –
K4[Fe(CN)6] ⇌ 4K+ + [FeII(CN)6]4-
वर्नर सिद्धान्त के अनुसार इस संकुल में केन्द्रीय धातु परमाणु Fe है, जिसकी ऑक्सीकरण संख्या 2 (प्राथमिक संयोजकता) तथा उप-सहसंयोजन संख्या (द्वितीयक संयोजकता) 6 है।

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प्रश्न 10.
संयोजकता बन्ध सिद्धांत के आधार पर [Ni(CN)4]2- की रचना को समझाइए। .
उत्तर
[Ni(CN)4]2- की संरचना  – [Ni(CN)4]2- आयन में Ni2+ आयन के रूप में है जिसका बाह्य इलेक्ट्रॉनिक विन्यास 3d8 है। [Ni(CN)4]2- आयन में Ni2+ की उप-सहसंयोजन संख्या 4 है तथा प्रायोगिक मापनों से ज्ञात है कि आयन प्रतिचुम्बकीय होता है। यह तभी सम्भव है जब Ni2- आयन में कोई अयुग्मित इलेक्ट्रॉन न हो अर्थात् 3dz2 अपना इलेक्ट्रॉन \(3 d_{x^{2}-y^{2}}\) को देकर युग्मित कर दे।
MP Board Class 12th Chemistry Solutions Chapter 9 उपसहसंयोजन यौगिक - 43
अब 3dz2, 4s, 4p, और 4py कक्षक संकरित होकर NC चार नवीन dsp2 संकरित कक्षक बनाते हैं, जो वर्ग समतलीय रूप से व्यवस्थित होते हैं जो चार CN आयनों के 4 एकाकी इलेक्ट्रॉन युग्म को ग्रहण करते हैं तथा σ – बन्ध बनाते हैं । अब इसमें एक भी अयुग्मित इलेक्ट्रॉन नहीं है । अत: [Ni(CN)4]2- प्रतिचुम्बकीय होता है।
MP Board Class 12th Chemistry Solutions Chapter 9 उपसहसंयोजन यौगिक - 44

प्रश्न 11.
प्रभावी परमाणु संख्या (EAN) क्या है ? एक उदाहरण देकर समझाइए।
उत्तर
उप-सहसंयोजक यौगिक के केन्द्रीय धातु परमाणु में उपस्थित इलेक्ट्रॉनों की संख्या तथा बन्ध के बनने से प्राप्त इलेक्ट्रॉनों की संख्या के योग को प्रभावी परमाणु संख्या (EAN) कहते हैं। प्रभावी परमाणु संख्या = परमाणु संख्या – आयन बनने में लुप्त इलेक्ट्रॉन + लिगैण्ड द्वारा प्रदत्त इलेक्ट्रॉन युग्मों की संख्या
K4[Fe(CN)6] में Fe के लिए EAN = 26 – 2 + 12 = 36.

प्रश्न 12.
(1) निम्नलिखित यौगिकों के IUPAC नाम लिखिए –
(अ) [HgI4]2-
(ब) [Ag(CN)2],
(स) [Fe(C5H5)2],
(द) K [Ag (CN)2].
(2) जीसे सॉल्ट एवं फेरोसीन क्या है ? संरचना सहित समझाइए।
उत्तर
(1) यौगिकों के IUPAC नाम –
(अ) टेट्राआयोडोमरक्यूरेट (II) आयन
(ब) डाइसाइनोअर्जेण्टेट (I) आयन ।
(स) बिस (साइक्लोपेण्टाडाइनिल) आयरन (II)
चित्र-जीसे लवण (द) पोटैशियम डाइसाइनोअर्जेण्टेट (I)
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(2) (i) जीसे लवण (Zeise’s Salt) K[PtCl32 – C2H4)] –
इस यौगिक की खोज डेनमार्क के भेषजज्ञ (Danish Pharmacist) जायसे (Zeise) ने सन् 1830 में की थी। यह संक्रमण धातुओं के प्रथम प्राप्त यौगिकों में से एक है। इसमें एथिलीन अणु का तल (Plane) तथा C =C अक्ष केन्द्रीय परमाणु के प्रत्याशित बन्ध-दिशा के लम्बवत् होता है।
MP Board Class 12th Chemistry Solutions Chapter 9 उपसहसंयोजन यौगिक - 46
यह नारंगी-पीले रंग का यौगिक होता है, इसकी खोज सन् 1951 ई. में कीली और पाउसन (Kealy and Pauson) तथा मिलर एवं उनके सहयोगियों (Miller and Co-worker) ने की। इसकी सैंडविच संरचना (Sandwitch structure) होती है, जिसमें दो साइक्लोपेण्टाडाइनिल रिंग (Cyclopentadienyl rings) के बीच आयरन परमाणु होता है।

प्रश्न 13.
कीलेट (Chelate) किसे कहते हैं ? उदाहरण व महत्व लिखिए।
उत्तर
धातु या धातु आयन के साथ संयोजन कर जब कोई बहुदन्तुर लिगैण्ड चक्रीय संरचना वाला अणु बना लेता है, तो यह यौगिक कीलेट कहलाता है।
MP Board Class 12th Chemistry Solutions Chapter 9 उपसहसंयोजन यौगिक - 47
जैसे-निकिल डाइमेथिल ग्लाइऑक्जीम
महत्व – (i) आन्तरिक संक्रमण तत्वों के पृथक्करण में
(ii) कठोर जल के मृदुकरण में
(iii) गुणात्मक विश्लेषण में, कुछ धातु आयनों की पहचान में।

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प्रश्न 14.
प्राथमिक तथा द्वितीयक संयोजकताओं में क्या अन्तर है ? उदाहरण दीजिए।
उत्तर
प्राथमिक संयोजकता आयनित हो सकती है, जबकि द्वितीयक संयोजकता आयनित नहीं हो सकती। प्राथमिक संयोजकता को ठोस (पूर्ण) रेखा ” से तथा द्वितीयक संयोजकता को बिन्दुकित या टूटी रेखा से प्रदर्शित करते हैं।
उदाहरण – [Co(NH3)6]Cl3 में प्राथमिक संयोजकता 3 तथा द्वितीयक
संयोजकता 6 है।
Co = केन्द्रीय धातु, NH3, Cl3 = लिगैण्ड।
MP Board Class 12th Chemistry Solutions Chapter 9 उपसहसंयोजन यौगिक - 48

प्रश्न 15.
धातुओं के निष्कर्षण में उप-सहसंयोजक यौगिकों का क्या महत्व है ?
उत्तर
धातुकर्म में-धातुकर्म में गोल्ड, सिल्वर जैसे धातुओं का निष्कर्षण भी संकुलों के माध्यम से ही किया जाता है। धातुओं के अयस्कों की तनु सायनाइड विलयन के साथ क्रिया कराने पर विलेयशील सायनाइड संकुल बनते हैं । जिनकी क्रिया जिंक जैसे अधिक धन-विद्युती धातुओं के साथ कराने पर ये धातुएँ मुक्त होकर अवक्षेपित हो जाती हैं।
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प्रश्न 16.
निम्नलिखित संकुल यौगिकों के IUPAC नाम लिखिए –
(a) [Cu(NH3)4]SO4
(b) [Cr(H2O)6]Cl3
(c)[Ni(CO)4]
(d) K2[HgI4].
उत्तर
(a) ट्रेटाएमीनकॉपर (II) सल्फेट
(b) हेक्साएक्वाक्रोमियम (III) क्लोराइड
(c) ट्रेटाकार्बोनिलनिकिल (0)
(d) पोटैशियम ट्रेटाआयोडोमरक्यूरेट (II)।

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प्रश्न 17.
द्विक-लवण और संकुल-लवण में अंतर स्पष्ट कीजिए।
उत्तर
द्विक-लवण और संकुल-लवण में अन्तर –
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MP Board Class 12th Chemistry Solutions Chapter 9 उपसहसंयोजन यौगिक - 51

प्रश्न 18.
निम्नलिखित उप-सहसंयोजी यौगिकों के रासायनिक सूत्र लिखिए –
(a) ट्राइनाइट्राइटों ट्राइऐमीन कोबाल्ट (III)
(b) ट्रिस (एथिलीनडाइऐमीन) क्रोमियम (III) क्लोराइड
(c) पेण्टा कार्बोनिल आयरन (0)
(d) टेट्रा क्लोरो प्लेटिनेट (II) आयन।
उत्तर-
(a) [CO(NH3)3(ONO)3]
(b) [Cr(en)3]Cl3
(c) [Fe(CO)5]
(d) [Pt Cl4]-2

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प्रश्न 19.
निम्नलिखित के IUPAC नाम लिखिए –
(i) K4Ni(CN)4]
(ii) H2[CuCl4]
(iii) [Ag(NH3)2]Cl
(iv) [Ni(CO)4].
उत्तर
(i) पोटैशियम टेट्रासायनोनिकलेट (0) आयन
(ii) हाइड्रोजन टेट्राक्लोरोक्यूप्रेट (II) आयन
(iii) डाइ एमीन सिल्वर (I) क्लोराइड
(iv) टेट्राकार्बोनिल निकिल (0) आयन।

प्रश्न 20.
उप-सहसंयोजी यौगिक में बंधन समावयवता व आयनीकरण समावयवता को उदाहरण सहित समझाइए।
उत्तर
बन्धन समावयवता-जब केन्द्रीय धातु आयन से एक ही लिगैण्ड भिन्न परमाणु द्वारा जुड़ता है तो प्राप्त संरचना भिन्न होती है, जो एक-दूसरे के समावयवी होते हैं । इस घटना को बन्ध समावयवता कहते हैं। इस प्रकार के लिगैण्ड को ऐम्बीडेण्टेड लिगैण्ड कहते हैं, जैसे –
MP Board Class 12th Chemistry Solutions Chapter 9 उपसहसंयोजन यौगिक - 52
संरचना-I में Ni2+ से थायोसायनेट सल्फर द्वारा और संरचना-II में नाइट्रोजन परमाणु द्वारा जुड़ा है।
आयनीकरण समावयवता – ऐसे यौगिक जिनका मूलानुपाती सूत्र एक ही होता है किन्तु जो विलयन में आयनन के पश्चात् भिन्न-भिन्न आयन देते हैं, आयनन समावयवी कहलाते हैं तथा यह समावयवता आयनन समावयवता कहलाती है। यह उप-सहसंयोजी मण्डल के अन्दर तथा बाहर के लिगैण्ड के विनिमय के कारण उत्पन्न होती है।
उदा.- [Co(NH3)5 Br]SO4 यह SO2-4 आयन देता है
[Co(NH3)5 SO4] Br यह Br आयन देता है।

प्रश्न 21.
(i)
MP Board Class 12th Chemistry Solutions Chapter 9 उपसहसंयोजन यौगिक - 53
का IUPAC नाम बताइए।
(ii) यौगिक [Cr(NH3)4(ONO)Cl]NO3 में लिगैण्ड तथा उप-सहसंयोजन संख्या लिखिए। (iii) कार्बोनेटो पेन्टाऐमीनकोबाल्ट (III) क्लोराइड का रासायनिक सूत्र लिखिए।
उत्तर
(i)”μ – ऐमीडो, μ – हाइड्रॉक्सी बिस [टेट्रा ऐमीन कोबाल्ट (III) आयन]
(ii) लिगैण्ड (a) NH3, (b) ONO, (c) Cl अर्थात् लिगैण्ड की कुल संख्या 3 एवं उप-सहसंयोजन संख्या = 6 है।
(iii) [Co(NH3)5CO3]Cl.

प्रश्न 22.
निम्नलिखित उप-सहसंयोजी यौगिकों के IUPAC नाम लिखिए –
(i) NH4(Cr(NH3)2(NCS)4]
(ii) K2(PtCl6)
(iii) (CoCl(en)2NH3)++
(iv) K[Pt (NH3)Cl5]
(v) [Fe(CO)5].
उत्तर
(i) अमोनियम टेट्राआइसोथायोसायनेटो डाइऐमीनक्रोमेट (III) आयन
(ii) पोटैशियम हेक्साक्लोरोप्लेटिनेट (IV) आयन
(iii) क्लोरोबिस (एथिलीन डाइऐमीन), ऐमीन कोबाल्ट (III) आयन
(iv) पोटैशियम पेन्टाक्लोरोऐमीनप्लेटिनेट (IV) आयन
(v) पेन्टाकार्बोनिल आयरन।

प्रश्न 23.
निम्नलिखित यौगिकों के IUPAC नाम लिखिए –
(i) Li(AlH4)
(ii) [Cr(NH3)6 (NH3]NO3)3
(iii) [Cr(H2O)6]Cl3
(iv) K3[Fe(CN)6].
उत्तर
(i) लीथियम टेट्राहाइड्रिडोऐल्यूमिनेट (III)
(ii) हेक्साएमीन क्रोमियम (III) नाइट्रेट
(iii) हेक्साऐक्वाक्रोमियम (III) क्लोराइड
(iv) पोटैशियम हेक्सासायनोफेरेट (III)।

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प्रश्न 24.
उप-सहसंयोजी यौगिकों द्वारा प्रदर्शित प्रकाशिक समावयवता को उदाहरण सहित समझाइए।
उत्तर
प्रकाशिक समावयवता-इस प्रकार की समावयवता ऐसे दो समान यौगिकों में पायी जाती है, जो एक-दूसरे के दर्पण प्रतिबिम्ब होते हैं, जिन्हें एक-दूसरे पर अध्यारोपित नहीं किया जा सकता, ऐसी समावयवता असममिति के कारण उत्पन्न होती है।
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प्रश्न 25.
कार्ब-धात्विक यौगिकों के चार महत्वपूर्ण अनुप्रयोगों का वर्णन कीजिए।
उत्तर
कार्ब-धात्विक यौगिकों के महत्त्वपूर्ण अनुप्रयोग निम्नलिखित हैं –
(1) औषधि में मरक्यूरोक्रोम, मर्करीहाइड्रिन, टिंचर पूतिरोधी (Antiseptic) औषधियों में प्रयुक्त मरकरी के कार्ब-धात्विक यौगिक हैं।
(2) कृषि में अनेक कार्ब-मरकरी यौगिक जैसे-एथिल मरकरी क्लोराइड या फॉस्फेट से बीज अभिकृत किये जाते हैं।
(3) अपस्फोटरोधी (Antiknock) ट्रेटाएथिल लेड एक महत्त्वपूर्ण अपस्फोटरोधी है।
(4) उत्प्रेरक-संक्रमण धातुओं के विलेयशील कार्ब-धात्विक संकर समांग उत्प्रेरक का कार्य करते हैं। जैसे—विल्किन्सन उत्प्रेरक (Ph,P), RhCl का उपयोग द्वि-बन्धों के हाइड्रोजनीकरण में किया जाता है।
(5) उद्योगों में कार्ब-लीथियम तथा कार्ब-ऐल्युमिनियम यौगिक उत्प्रेरक के रूप में प्रयुक्त होते हैं। कार्बधात्विक यौगिकों के उत्प्रेरक के रूप में प्रयोग द्वारा अनेक रंजक (Dyes) तथा रसायनों का निर्माण सम्भव है।
(6) रासायनिक संश्लेषण में ग्रिगनार्ड अभिकर्मक एवं अन्य लीथियम यौगिक कार्बनिक संश्लेषण में बहुउपयोगी हैं।

प्रश्न 26.
निम्नलिखित के IUPAC पद्धति में नाम लिखिए
(i) [Cr(H2O)6]Cl3
(ii) [Ag (NH3)2]Cl,
(iii) H2[CuCl4],
(iv) [CO(NH3)6]Cl3,
(v) K2[PtCl6],
(vi) [Pt Cl4(NH3)2].
उत्तर
(i) हेक्साऐक्वाक्रोमियम (III) क्लोराइड
(ii) डाइएमीन सिल्वर (I) क्लोराइड
(iii) हाइड्रोजन टेट्राक्लोरोक्यूप्रेट (II)
(iv) हेक्साएमीन कोबाल्ट (III) क्लोराइड
(v) पोटैशियम हेक्साक्लोरोप्लैटिनम (IV)
(vi) डाइएमीनटेट्रा-क्लोरोप्लैटिनम (IV)।

प्रश्न 27.
निम्न उपसहसंयोजी यौगिकों के IUPAC नाम लिखिए –
(i) K[Ag(CN)2],
(ii) K4[Fe(CN)6],
(ii) [Ag(NH3)2]Cl,
(iv) [Cr(NH3)6]Cl3.
उत्तर
(i) पोटैशियम डाइसायनोअर्जेन्टेट (I)
(ii) पोटैशियम हेक्सासायनोफेरेट (II)
(iii) डाइएमीनसिल्वर (I) क्लोराइड
(iv) हेक्साएमीनक्रोमियम (III) क्लोराइड।

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प्रश्न 28.
उप-सहसंयोजी यौगिकों में आयनन समावयवता और हाइड्रेट समावयवता को उदाहरण सहित समझाइए।
उत्तर
आयनन समावयवता – समावयवियों का स्टॉकियोमीट्री संघटन एक ही होता है, परन्तु विलयन . में उनसे प्राप्त होने वाले आयन भिन्न प्रकार के होते हैं, ऐसे समावयवी आयनन समावयवी कहलाते हैं।
उदाहरणार्थ – [Co(NH3)5Br]SO4 (गहरा बैंगनी)-यह विलयन में SO42- आयन देता है, जबकि [CO(NH3 )5SO4]Br (लाल)-यह विलयन में Br आयन देता है। ये दोनों आयनन समावयवी हैं।
हाइड्रेट समावयवता-जब किसी संकुल के उप-सहसंयोजक मण्डलं के भीतर और बाहर जल के अणुओं की संख्या में भिन्नता होती है, तब हाइड्रेट समावयवता उत्पन्न होती है।
उदाहरणार् थ- CrCl6.6H2O के तीन हाइड्रेट समावयवी निम्नलिखित हैं –
(i) [Cr(H2O)6]Cl3-बैंगनी,
(ii) [Cr(H2O)5 Cl]Cl2.H2O—हरा,
(iii) [Cr(H2O)4Cl2]Cl.2H2O—गहरा हरा।

प्रश्न 29.
निम्नलिखित उप-सहसंयोजी यौगिकों के रासायनिक सूत्र लिखिए –
(a) हेक्साऐमीन कोबाल्ट (III) क्लोराइड
(b) टेट्राऐमीन कॉपर (II) सल्फेट
(c) टेट्राऐमीन प्लैटिनम (II) क्लोराइड
(d) पोटैशियम हेक्सासायनो फैरेट (II)।
उत्तर
(a) [Co(NH3)6]Cl3
(b) [Cu(NH3)4]SO4
(c)[Pt(NH3)4]Cl2
(d) K4[FeII(CN)6].

प्रश्न 30.
निम्नलिखित उप-सहसंयोजी यौगिकों के रासायनिक सूत्र लिखिए –
(a) क्लोरो पेंटाऐमीन कोबाल्ट (II) क्लोराइड
(b) पोटैशियम डाइसायनो अर्जेण्टेट (I)
(c) हेक्साएक्वा क्रोमियम (III) क्लोराइड
(d) टेट्रासायनो निकिलेट (I)।
उत्तर
(a) [Co(NH3)5Cl]Cl2
(b) K[Ag(CN)2]
(c) [Cr(H2O)6]Cl3
(d) [Ni(CN)4]2-

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प्रश्न 31.
निम्नलिखित उप-सहसंयोजी यौगिकों के रासायनिक सूत्र लिखिए –
(a) हेक्सा ऐमीन प्लैटिनम (IV) क्लोराइड
(b) पोटैशियम हेक्सासायनो फेरेट (III)
(c) डाइक्लोरो डाइएमीनो प्लैटिनम (II)
(d) सोडियम पेन्टासायनो नाइट्रोसिल फेरेट (III)।
उत्तर
(a) [Pt(NH3)6]Cl4
(b) K3[FeIII(CN)6]
(c) [Pt(NH3)2Cl2]
(d) Na2[Fe(CN)5NO].

प्रश्न 32.
निम्न के I.U.P.A.C पद्धति में नाम लिखिए –
(a) [Pt(NH3)2Cl2]
(b) K3[Fe(CN)6]
(c) [CO(NH3)6]Cl3
(d) Pt[(NH3)6]Cl4
(e) CuCl42-.
उत्तर
(a) डाइक्लोरो डाइऐमीन प्लैटिनम (II)
(b) पोटैशियम हेक्सासायनो फेरेट (III)
(c) हेक्साऐमीन कोबाल्ट (III) क्लोराइड
(d) हेक्साऐमीन प्लैटिनम (IV) क्लोराइड
(e) ट्रेटाक्लोरो क्यूप्रेट (II)।

प्रश्न 33.
निम्नलिखित के I.U.P.A.C.पद्धति में नाम लिखिए –
(a) K4[Fe(CN)6]
(b) [Cr(NH3)6(NO2)3]
(c) [Ni(CN)3]Cl3
(d) K2[Pt(Cl)6]
(e) Ni (CO)4.
उत्तर
(a) पोटैशियम हेक्सासायनो फेरेट (II), (b) ट्राइनाइट्रो हेक्साऐमीन क्रोमियम (III), (c) ट्राइसायनो निकिल (III) क्लोराइड, (d) पोटैशियम हेक्साक्लोराइड प्लैटिनम, (e) टेट्राकार्बोनिल निकिल (0)।

प्रश्न 34.
Ni(CO)4 एवं [NiCl4]2- दोनों में sp3 संकरण होता है फिर भी Ni(CO)4 प्रतिचुम्बकीय है जबकि [NiCl4]2- अनुचुम्बकीय, क्यों ?
उत्तर
Ni(CO)4 में CO प्रबल लिगैण्ड होने के कारण d- ऑर्बिटल में इलेक्ट्रॉनों का युग्मन हो जाता है जबकि [NiCl4]2- में Cl दुर्बल लिगैण्ड है जिसके कारण 3d ऑर्बिटल में इलेक्ट्रॉनों का युग्मन संभव नहीं है। अतः (NiCl4)2- में 3d- ऑर्बिटल में दो इलेक्ट्रॉन अयुग्मित रहते हैं इसलिए दोनों संकुल में sp3 संकरण होने पर भी Ni(CO)4 प्रतिचुम्बकीय और [NiCI4] अनुचुम्बकीय है।

प्रश्न 35.
[Co(NH3)5Br]SO4 एवं [Co(NH3)5SO4]Br में कैसे विभेद करेंगे? .
उत्तर
ये दोनों संकुल आयनन समावयवी हैं। पहला BaCl2 के साथ सफेद अवक्षेप (BaSO4) देगा, दूसरा BaCl2 से कोई अवक्षेप नहीं देगा। इसी प्रकार दूसरा संकुल [Co(NH3)5SO4]Br, AgNO3 के साथ पीला अवक्षेप देगा जबकि पहला कोई अवक्षेप नहीं देगा।

उपसहसंयोजन यौगिक दीर्घ उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 1.
निम्नलिखित उप-सहसंयोजी यौगिकों के केन्द्रीय धातु आयन की ऑक्सीकरण संख्या ज्ञात कीजिए।
(a) [Pt(NH3)Cl3]
(b) [Zn(H2O)3OH]+
(c) Na4[Ni(CN)4]
(d) K2[Zn(OH)4]
उत्तर
(a) [Pt(NH3)Cl3]
1(x) + 3(0) + 3(-1) = -1
x + 0 – 3= -1
x = +2.

(b) [Zn(H2O)3OH]+
1(x) + 3(0) + 1(-1) = +1
x + 0 – 1 = +1
x= +2.

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(c) Na4[Ni(CN)4]
4(+1) + 1(x)+ 4(-1)= 0
4 + x – 4 = 0
x = 0
30.

(d) K2[Zn(OH)4]
2(+1) + 1(x) + 4(-1) = 0
2 + x – 4 = 0
x = +2.

प्रश्न 2.
निम्नलिखित के बनाने की एक-एक विधि दीजिए
(a) टेट्राब्यूटिल टिन, (b) टेट्राएथिल लेड, (c) n-ब्यूटिल लीथियम, (d) फैरोसीन, (e) निकिल टेट्राकार्बोनिल, (f) जीसे लवण।
उत्तर
बनाने की विधियाँ –

(a) टेट्राब्यूटिल टिन –
MP Board Class 12th Chemistry Solutions Chapter 9 उपसहसंयोजन यौगिक - 55

b) टेट्राएथिल लेड –
MP Board Class 12th Chemistry Solutions Chapter 9 उपसहसंयोजन यौगिक - 56

(c) n-ब्यूटिल लीथियम –
MP Board Class 12th Chemistry Solutions Chapter 9 उपसहसंयोजन यौगिक - 57

(d) फैरोसीन—साइक्लोपेण्टाडाइनिल मैग्नीशियम ब्रोमाइड और FeCl2 की अभिक्रिया से फैरोसीन बनता है।
MP Board Class 12th Chemistry Solutions Chapter 9 उपसहसंयोजन यौगिक - 58

(e) निकिल ट्रेटाकार्बोनिल—सूक्ष्म विभाजित Ni पर 353 K ताप पर CO गैस प्रवाहित करने पर बनता है ।
MP Board Class 12th Chemistry Solutions Chapter 9 उपसहसंयोजन यौगिक - 59

(f) जीसे लवण –
MP Board Class 12th Chemistry Solutions Chapter 9 उपसहसंयोजन यौगिक - 60

प्रश्न 3.
संयोजकता बन्ध सिद्धान्त के आधार पर [Ni(CO) की रचना समझाइए।
उत्तर-
[Ni(CO) की संरचना निकिल टेट्राकार्बोनिल में निकिल परमाणु की ऑक्सीकरण अवस्था शून्य (0) होती है I Ni का इलेक्ट्रॉनिक विन्यास 4s23d8 या 3d10 होता है । sp3d संकरण के फलस्वरूप चार चतुष्फलकीय रूप में sp3 कक्षक बनते हैं जो रिक्त होते हैं । इनसे चार CO अणु जुड़ जाते है, फलस्वरूप चतुष्फलकीय निकिल टेट्राकार्बोनिल अणु बनता है।
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प्रश्न 4.
संयोजकता बंध सिद्धान्त के आधार पर [Zn(NH3)4]2+ की रचना को समझाइए।
उत्तर
[Zn(NH3)4]2+ की संरचना –
Zn (30) : 1s2, 2s2p6, 3s2p6d10, 4s2p0
Zn++ (28) : KL 3s2p6
MP Board Class 12th Chemistry Solutions Chapter 9 उपसहसंयोजन यौगिक - 62
उपर्युक्त विन्यास से स्पष्ट है कि 3d- कक्षकों में 10 इलेक्ट्रॉन होने से ये पूर्णतया सन्तृप्त होते हैं और ये संकरण में भाग नहीं लेंगे ।4s और 4p- कक्षकों में sp3 संकरण होता है, जिससे 4 संकर ऑर्बिटल बनते हैं जो कि चतुष्फलक के चार कोनों की ओर उन्मुख होते हैं । चार NH3 अणुओं के एकाकी इलेक्ट्रॉन युग्म sp-सिग्मा कक्षक Zn2+ के चार sp3 संकरित कक्षकों से अतिव्यापन करके चार σ-बन्ध बनाते हैं।
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प्रश्न 5.
चतुष्फलकीय तथा अष्टफलकीय उप-सहसंयोजक यौगिकों द्वारा प्रदर्शित प्रकाशिक समावयवता को एक-एक उदाहरण देकर समझाइए ।
उत्तर
प्रकाशिक समावयवता—इस प्रकार की समावयवता ऐसे दो समान यौगिकों में पायी जाती है, जो एक-दूसरे के दर्पण प्रतिबिम्ब होते हैं, जिन्हें एक-दूसरे पर अध्यारोपित नहीं किया जा सकता, ऐसी समावयवता असममिति के कारण उत्पन्न होती है ।

वे यौगिक जो समतल ध्रुवित प्रकाश को दायीं ओर घुमाते हैं, दक्षिण ध्रुवण घूर्णक या d-समावयवी तथा जो बायीं ओर घुमाते हैं उन्हें वाम ध्रुवण घूर्णक या l-समावयवी कहते हैं । इस प्रकार की समावयवता सामान्यतः चतुष्फलकीय संकुलों [CN = 4] तथा अष्टफलकीय संकुलों [CN = 6] द्वारा प्रदर्शित होती हैं ।
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प्रश्न 6.
धातुओं के निष्कर्षण तथा धातु आयनों के आकलन में संकुल यौगिकों के अनुप्रयोग लिखिए।
उत्तर
धातुओं के निष्कर्षण तथा धातु आयनों के आकलन में संकुल यौगिकों के अनुप्रयोग –
1. धातु निष्कर्षण में सिल्वर और गोल्ड का उनके अयस्कों से निष्कर्षण करने के लिए सोडियम सायनाइड विलयन से अभिकृत करते हैं, इसमें संकुल बनता है –

(i) सिल्वर ग्लान्स अयस्क NaCN विलयन में विलेय होकर Na[Ag(CN)2] जटिल यौगिक बनाता है जिसमें Zn चूर्ण डालकर Ag को अवक्षेपित कर लेते हैं।

Ag2S + 4NaCN → 2Na[Ag(CN)2] + Na2S.
2Na[Ag(CN)2] +Zn → Na2[Zn(CN)4] + 2Ag↓

Au मुक्त अवस्था में मिलता है। अयस्क चूर्ण को NaCN या KCN विलयन में लेकर 12 से 24 घण्टे रखे रहने पर Au विलेय जटिल यौगिक बनाता है।

4Au+ 8KCN + 2H2O +O2 (वायु से)- 4K[Au(CN)4] + 4KOH

प्राप्त विलयन में Zn छीलन डालने पर Au का अवक्षेपण हो जाता है।

2K[Au(CN)2] + Zn → K2[Zn(CN)4] + 2Au

2. धातु आयनों के आकलन में-धातु आयनों के गुणात्मक विश्लेषण और मात्रात्मक आकलन में संकुल यौगिकों के अनुप्रयोग हैं, जैसे-Ni2+ की पहचान और आकलन डाइमेथिल ग्लाइऑक्जिम (D.M.G.) के साथ लाल रंग का संकुल बनाकर किया जाता है।
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प्रश्न 7.
क्रिस्टल क्षेत्र सिद्धान्त को समझाइए।
उत्तर
यह सिद्धान्त बेथे एवं वान ब्लेक द्वारा प्रतिपादित किया गया। इसके अनुसार, केन्द्रीय धातु आयन एवं इनके लिगैण्ड के बीच बन्धन विशुद्ध वैद्युत् आकर्षण से उत्पन्न होता है। यदि लिगैण्ड ऋणायन है, तो धनायन की तरफ का आकर्षणं उसी प्रकार का होता है जिस प्रकार किन्हीं विपरीत आवेशित कणों के बीच आकर्षण पाया जाता है। यदि लिगैण्ड उदासीन अणु है, तो इस द्विध्रुव का ऋणायन सिरा केन्द्रीय धनात्मक आयन की ओर आकर्षित होता है। अतः इनके बीच बन्धन आयन-आयन आकर्षण या आयन द्विध्रुव आकर्षण के कारण होता है।

क्रिस्टल क्षेत्र सिद्धान्त में धातु आयन की ओर निर्देशित लिगैण्ड के कारण d-कक्षकों का विभिन्न ऊर्जा स्तरों में विपाटन हो जाता है। विपाटन की मात्रा (जो कि धातु आयन तथा लिगैण्ड की प्रकृति पर निर्भर होता है) के आधार पर संकुल की संरचना व गुणों की व्याख्या होती है। संक्रमण धातु संकुलों में रंग, दृश्य प्रकाश के अवशोषण के कारण होता है जिसके कारण इलेक्ट्रॉन एक d- कक्षक से दूसरे d- कक्षक में उत्तेजित (d-d संक्रमण) होते हैं।

इस प्रकार यह सिद्धान्त सरल है तथा संकुलों के अधिकांश गुणों की सफलतापूर्वक व्याख्या इसकी सहायता से की जा सकती है।
MP Board Class 12th Chemistry Solutions Chapter 9 उपसहसंयोजन यौगिक - 66

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MP Board Class 12th Chemistry Solutions Chapter 13 ऐमीन

MP Board Class 12th Chemistry Solutions Chapter 13 ऐमीन

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ऐमीन NCERT पाठ्यनिहित प्रश्नोत्तर

प्रश्न 1.
निम्नलिखित एमीनों को प्राथमिक, द्वितीयक व तृतीयक एमीनों में वर्गीकृत कीजिये

1.
MP Board Class 12th Chemistry Solutions Chapter 13 ऐमीन - 1

2.
MP Board Class 12th Chemistry Solutions Chapter 13 ऐमीन - 2
3. (C2H5)2CHNH2
4. (C2H5)2NH.
उत्तर

  1. प्राथमिक (1°)
  2. तृतीयक (3°)
  3. प्राथमिक (1°)
  4. द्वितीयक (2°).

प्रश्न 2.

  1. अणुसूत्र C4H11N से प्राप्त विभिन्न समावयवी एमीनों की संरचना लिखिए।
  2. सभी समावयवी के IUPAC नाम लिखिए। .
  3. विभिन्न युग्मों द्वारा किस प्रकार की समावयवता प्रदर्शित होती है ?

उत्तर
MP Board Class 12th Chemistry Solutions Chapter 13 ऐमीन - 3
MP Board Class 12th Chemistry Solutions Chapter 13 ऐमीन - 4

समावयवता-
(i)-(iv) तथा (vi)-(vii) स्थान समा-वयवता, (v)-(vi) तथा (v)-(vii) मध्यावयवता। (i), (ii), (iii), (iv) तथा (i)-(iii) श्रृंखला समावयवता दर्शाते हैं।

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प्रश्न 3.
आप निम्नलिखित परिवर्तन कैसे करेंगे

  1. बेंजीन से एनिलीन
  2. बेंजीन से N, N डाइमेथिल एनिलीन
  3. Cl-(CH2)4-CI से हेक्सेन 1, – 6 डाइएमीन।

उत्तर
MP Board Class 12th Chemistry Solutions Chapter 13 ऐमीन - 5

प्रश्न 4.
निम्नलिखित को उनकी बढ़ती क्षारीयता के क्रम में लिखिये

  1. C2H5NH2,C6H5NH2,NH3, C6H5CH2 NH2 तथा (C2H5)2NH
  2. C2H5NH2, (C2H5)2NH, (C2H5)3N, C6H5NH2
  3. CH3NH2, (CH3)2NH, (CH3)3N, C6H5NH2, C6H5CH2NH2

उत्तर

  1. C6H5NH2 < NH3 < C6H5CH2NH2 < C2H5NH2< (C2H5)2NH
  2. C6H5NH2< C2H5NH2 < (C2H5)3N < (C2H5)2NH
  3. C6H5NH2< C6H5CH2NH2 < (CH3)3N < CH3NH2< (CH3)2NH

प्रश्न 5.
निम्नलिखित अम्ल-क्षार अभिक्रिया को पूर्ण कीजिये तथा उत्पादों के नाम लिखिये

  1. CH3CH2CH2NH2 + HCl →
  2. (C2H5)N + HCI →

उत्तर
MP Board Class 12th Chemistry Solutions Chapter 13 ऐमीन - 6

प्रश्न 6.
सोडियम कार्बोनेट विलयन की उपस्थिति में मेथिल आयोडाइड के आधिक्य द्वारा ऐनिलीन के ऐल्किली-करण में उत्पन्न होने वाले उत्पादों के लिये अभिक्रिया लिखिये।
उत्तर
MP Board Class 12th Chemistry Solutions Chapter 13 ऐमीन - 7

प्रश्न 7.
एनिलीन की बेन्जॉयल क्लोराइड के साथ रासायनिक अभिक्रिया द्वारा उत्पन्न उत्पादों के नाम लिखिए।
उत्तर
MP Board Class 12th Chemistry Solutions Chapter 13 ऐमीन - 8

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प्रश्न 8.
अणुसूत्र C3H9N से प्राप्त विभिन्न समावयवों की संरचना लिखिये। उन समावयवों के IUPAC नाम लिखिए, जो नाइट्स अम्ल के साथ नाइट्रोजन गैस मुक्त करते हैं।
उत्तर
(a)C3H9N के चार संरचना समावयवी हैं, ये हैं-
MP Board Class 12th Chemistry Solutions Chapter 13 ऐमीन - 9

प्रश्न 9.
निम्नलिखित परिवर्तन कीजिये”

  1. 3-मेथिल एनिलीन से-3-नाइट्रोटॉलुईन
  2. एनिलीन से 1, 3, 5 ट्राइब्रोमोबेंजीन।।

उत्तर
MP Board Class 12th Chemistry Solutions Chapter 13 ऐमीन - 10

ऐमीन पाठ्य-पुस्तक प्रश्नोत्तर

प्रश्न 1.
निम्नलिखित यौगिकों को प्राथमिक, द्वितीयक व तृतीयक एमीनों में वर्गीकृत कीजिये तथा इनके IUPAC नाम लिखिये

  1. (CH3)2CHNH2
  2. CH3(CH2)2NH2
  3. CH3NHCH(CH3)2
  4. (CH3)3CNH2
  5. C6H5NH-CH3
  6. (CH3CH2)2NCH3
  7. m-BrC6H4NH2

उत्तर

  1. प्रोपेन-2-एमीन (1°)
  2. प्रोपेन-1-एमीन (1°)
  3. N-मेथिलप्रोपेन-2-एमीन (2°)
  4. 2-मेथिल प्रोपेन-2-एमीन (3°)
  5. N-मेथिलबेन्जेनामीन या N-मेथिलएनिलीन (2°)
  6. N-एथिल-N-मेथिलऐथनामीन (3°)
  7. 3-ब्रोमोबेन्जेनामीन या 3-ब्रोमोएनिलीन (1°)

प्रश्न 2.
निम्नलिखित युगलों के यौगिकों में विभेद के लिये एक रासायनिक परीक्षण दीजिये मेथिल एमीन एवं डाइमेथिल एमीन

  1. द्वितीयक व तृतीयक एमीन
  2. एथिल एमीन एवं ऐनिलीन
  3. ऐनिलीन व बेन्जिलएमीन
  4. एनिलीन व N-मेथिल एनिलीन।

उत्तर
1. कार्बिल एमीन परीक्षण द्वारा- मेथिलएमीन एक प्राथमिक एमीन है। अतः ये कार्बिल एमीन परीक्षण देंगे। इसके विपरीत डाइमेथिल एमीन एक द्वितीयक एमीन है, अतः ये परीक्षण नहीं देगा।
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2. लिबरमैन नाइट्रोसोएमीन परीक्षण द्वारा- 2° एमीन HNO2 (जो HCI तथा NaNO2 की क्रिया द्वारा उत्पन्न होता है) के साथ क्रिया द्वारा पीले रंग का तैलीय N-नाइट्रोसोएमीन देता है। उदाहरण
MP Board Class 12th Chemistry Solutions Chapter 13 ऐमीन - 12
N-नाइट्रोसोडाइएथिल एमीन फिनॉल तथा सान्द्र H2SO4 के साथ गर्म किये जाने पर हरा विलयन देता है जिसे जलीय NaOH से क्षारीय करने पर गहरे नीले रंग में तथा तनुकरण पर लाल रंग में बदलता है। तृतीयक एमीन में परीक्षण नहीं देता है।

3. ऐजोरंजक परीक्षण द्वारा-किसी भी प्राथमिक एरोमैटिक एमीन की क्रिया HNO2(NaNO2+ dil. HCI) से 273-278 K पर β-नेपथॉल के क्षारीय विलयन से क्रिया कराने पर तीव्र पीला, नारंगी या लाल रंग का रंजक बनाता है।
MP Board Class 12th Chemistry Solutions Chapter 13 ऐमीन - 13

ऐलिफैटिक प्राथमिक एमीन इस दशा में तीव्रता से N, गैस के साथ प्राथमिक एल्कोहॉल बनाता है। अर्थात् विलयन रंगहीन रहता है।
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4. एनिलीन [(iii) में देखिये] रंजक परीक्षण देती है। बेन्जाइल एमीन नाइट्रस अम्ल के साथ क्रिया करके बेन्जॉयल एल्कोहॉल तथा बुलबुले के रूप में N, गैस देती है।
C6H5CH2NH2 + HNO2 → C6H5CH2OH + N2+ H2O

5. ये कार्बिल एमीन परीक्षण द्वारा विभेदित की जाती है। एनिलीन प्राथमिक एमीन है इसलिये कार्बिल एमीन परीक्षण देती है। अर्थात् जब KOH के एल्कोहॉलिक विलयन CHCl3 के साथ गर्म करने पर फेनिल आइसोसायनाइड की दुर्गंध देता है।
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मेथिल एनिलीन (1° एमीन) नाइट्रस अम्ल के साथ क्रिया द्वारा नाइट्रोसोएमीन (पीला तैलीय द्रव) बनाता है जो कि कमरे के ताप पर स्थायी होता है। अतः ईथर में HCI तथा एल्कोहॉल के साथ क्रिया पर नाइट्रोसो (-NO) समूह पैरा स्थिति पर चला जाता है।
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प्रश्न 3.
निम्नलिखित के कारण बताइये

  1. ऐनिलीन का pKa मेथिल ऐमीन की तुलना में अधिक होता है।
  2. ऐथिल ऐमीन जल में विलेय है जबकि ऐनिलीन नहीं।
  3. मेथिल ऐमीन फेरिक क्लोराइड के साथ जल में अभिक्रिया करने पर जलयोजित फेरिक ऑक्साइड का अवक्षेप देता है।
  4. यद्यपि ऐमीनों समूह इलेक्ट्रॉनरागी प्रतिस्थापन अभिक्रियाओं में ऑर्थों एवं पैरा निर्देशक होता है फिर भी ऐनिलीन नाइट्रीकरण द्वारा यथेष्ट मात्रा में मेटानाइट्रो- ऐनिलीन देती है।
  5. ऐनिलीन फ्रीडल-क्राफ्ट्स अभिक्रिया प्रदर्शित नहीं करती।
  6. ऐरोमैटिक ऐमीनों के डाइऐजोनियम लवण ऐलि-फैटिक ऐमीनों से प्राप्त लवण से अधिक स्थायी होते हैं।
  7. प्राथमिक ऐमीन के संश्लेषण में गैब्रियल थैलि-माइड संश्लेषण को प्राथमिकता दी जाती है।

उत्तर
1. एनिलीन में नाइट्रोजन के एकाकी इलेक्ट्रॉन युग्म बेंजीन रिंग पर विस्थापनीकृत होने से नाइट्रोजन पर इलेक्ट्रॉन घनत्व को कम करते हैं।
इसके विपरीत CH3NH2 में CH3 समूह का + प्रभाव नाइट्रोजन पर इलेक्ट्रॉन घनत्व बढ़ाता है। इसलिये एनिलीन मेथिल ऐमीन से दुर्बल क्षार है। अतः एनिलीन का pKa मान मेथिल एमीन से ज्यादा होता है।

2. अन्तराआण्विक हाइड्रोजन बंध के कारण एथिल ऐमीन पानी में घुलनशील होता है। एनिलीन में बड़ा जलविरोधी भाग (हाइड्रोफोबिक) हाइड्रोजन बंध के विस्तार को घटाता है। अतः एनिलीन जल में अघुलनशील होता है।

3. मेथिल ऐमीन जल से ज्यादा क्षारीय होता है तथा पानी से एक प्रोटॉन ग्रहण कर OH आयन मुक्त करता है।
MP Board Class 12th Chemistry Solutions Chapter 13 ऐमीन - 17
ये OH आयन जल में उपस्थित Fe+3 आयन से संयुक्त होकर जलीयकृत फेरिक ऑक्साइड का भूरा अवक्षेप बनाता है।
FeCl3 → Fe+3+3Cl
2Fe+3+ 6OH → 2Fe(OH)3 या Fe2O3,.3H2O
जलीय फेरिक ऑक्साइड (भूरा अवक्षेप)

4. प्रबल अम्लीय माध्यम (सान्द्र HNO3/ सान्द्र H2SO4) में एनिलीन बहुतायत में प्रोटॉनीकृत होकर एनि-लीनियम आयन MP Board Class 12th Chemistry Solutions Chapter 13 ऐमीन - 18 बनाता है जो m-दिशात्मक व निष्क्रियात्मक समूह होता है जबकि एनिलीन का – NH2 (एमीन) 0-, p-दिशात्मक तथा सक्रियात्मक समूह है। इसी कारण o-, p-व्युत्पन्न के साथ व्यापक मात्रा में m-व्युत्पन्न भी बनते हैं।
MP Board Class 12th Chemistry Solutions Chapter 13 ऐमीन - 19

5. एनिलीन लुईस क्षार होता है, अतः लुईस अम्ल AICI3 के साथ लवण बनाता है।
MP Board Class 12th Chemistry Solutions Chapter 13 ऐमीन - 20
अतः एनिलीन के नाइट्रोजन पर धनावेश होने के कारण यह इलेक्ट्रोफिलिक प्रतिस्थापन के लिये प्रबल निष्क्रियात्मक समूह का कार्य करता है। इस कारण एनिलीन फ्रीडल-क्रॉफ्ट्स अभिक्रिया नहीं देता है।

6. एरोमैटिक एमीन के डाइएजोनियम लवण एलिफैटिक एमीन की तुलना में अधिक स्थायी होते हैं, क्योंकि इसमें धनावेश बेंजीन रिंग पर विस्थापनीकृत रहता है।
MP Board Class 12th Chemistry Solutions Chapter 13 ऐमीन - 21
7. गेब्रियल थैलिमाइड अभिक्रिया शुद्ध प्राथमिक एमीन बिना 2° तथा 3° एमीन के मिलावट के देता है। इसलिये 1 एमीन संश्लेषण में इसे प्राथमिकता दी जाती है।

प्रश्न 4.
निम्नलिखित को क्रम में लिखिए
1. pKb मान के घटते क्रम में-
C2H5NH2, C6H5NHCH3, (C2H5)2NH एवं C6H5NH2

2. क्षारीय प्राबल्य के घटते क्रम में –
C6H5NH2, C6H5N(CH3)2, (C2H5)2NH2एवं CH3 NH3

3. क्षारीय प्राबल्य के बढ़ते क्रम में –
(क) ऐनिलीन, पैरा-नाइट्रोऐनिलीन एवं पैरा-टॉल्यु-डीन
(ख) C6H5NH2, C6H5)NHCH3 C6H5CH2NH2

4. गैस अवस्था में घटते हुए क्षारीय प्राबल्य के क्रम में-
C2H5NH2, (C2H5)NH, (C2H5)3N एवं NH3

(v) क्वथनांक के बढ़ते क्रम में-
C2H5OH, (CH3))2NH, C2H5NH2

(vi) जल में विलेयता के बढ़ते क्रम में
C6H5NH2, (C2H5)NH, C2H5NH2
उत्तर –
1. नाइट्रोजन परमाणु के एकाकी इलेक्ट्रॉन युग्म के बेंजीन रिंग पर विस्थापनीकरण के कारण C6H5NH2, तथा C6H5NHCH3, C2H5NH2 तथा (C2H5)2NH की तुलना में कम क्षारीय होंगे। इसी प्रकार

-CH3 समूह के +I प्रभाव के कारण C6H5NHCH3, C6H5NH2 की तुलना में थोड़ा अधिक क्षारीय होगा।

C2H5NH2 तथा (C2H5)2NH में (C2H5)2NH, C2H5NH2 की तुलना में कम क्षारीय होगा। दो –
C2H5 समूह के +I प्रभाव के कारण होगा। सभी प्रभावों को मिलाकर इन चारों एमीन की घटती आपेक्षिक क्षारीय प्रबलता का क्रम होगा
(C2H5)NH > C2H5NH2 > C,6H5NHCH3> C6H5NH2
चूंकि प्रबलतम क्षार का pK, मान कम होता है। अतः इनके PK. मान विपरीत क्रम में घटते हैं।
C6H5NH2> C6H5NHCH3 > C6H5NH2> (C6H5)NH

2. उत्तर (i) के अनुसार एमीनों की आपेक्षिक क्षारीयता का घटता क्रम हैं
(C2H5)2NH > C2H5NHCH3 > C5H5NH2
CH3NH2 तथा (C2H5)2NH में से दो -C2H5 समूह के ज्यादा +I प्रभाव के कारण (C2H5)2NH, CH3NH2 से अधिक क्षारीय होता है। अत: चारों एमीन की क्षारीय प्रबलता का घटता क्रम हैं
(C2H5)2NH> CH3NH2 >C6H5N(CH3)2>C6H5NH2

3. (क) इलेक्ट्रॉन- दान करने वाले समूह एमीन की क्षारीय प्रबलता को बढ़ाते हैं जबकि इलेक्ट्रॉन ग्रहण करने वाले (इलेक्ट्रॉन आकर्षी समूह) क्षारीय प्रबलता को घटाते हैं। अतः क्षारीयता का बढ़ता क्रम होगा
p- नाइट्रोएनिलीन < एनिलीन

(ख) C6H5NH2 तथा C6H5NHCH3 में N बेंजीन रिंग से सीधे जुड़ा होता है तथा N-परमाणु के एकाकी इलेक्ट्रॉन युग्म बेंजीन रिंग पर विस्थापनीकृत रहते हैं। अत: C6H5NH2 तथा C6H5NHCH3 दोनों C6H5CH2NH2से दुर्बल क्षार है। आगे-CH3 समूह के +I प्रभाव के कारण C6H5NHCH3, C6H5NH2से प्रबल क्षार होता है। क्षारीय प्रबलता का बढ़ता क्रम है
C6H5NH2 < C6H5NHCH3 < C6H5CH2NH2

4. विलायक प्रभाव – गैस प्रावस्था में H-बंध के कारण संयुग्मी अम्लों का स्थायित्व का बढ़ना नहीं पाया जाता है। गैसीय प्रावस्था में क्षारीय प्रबलता मुख्यतः एल्किल समूहों के +I प्रभाव पर निर्भर करती है। अतः गैसीय प्रावस्था में क्षारीय प्रबलता का घटता क्रम है
(C2H5)N > (C2H5)2)NH > C2H5NH2> NH3

5. चूँकि O की विद्युत्-ऋणात्मकता N से ज्यादा होती है, अतः एल्कोहॉल एमीन से प्रबल H-बंध बनाते हैं । इसके अलावा H-बंध का विस्तार N-परमाणु पर उपस्थित H-परमाणुओं की संख्या पर निर्भर करता है। अतः अन्तरा-आण्विक बल का क्रम होगा
C2H5OH > C2H5NH2> (CH3)2NH
अतः दिये गये तीन यौगिकों के क्वथनांक का बढ़ता क्रम हैं
(CH3)2NH < C2H5NH2< C2H5OH

6. विलेयता घटती है –

  1. जलविरोधी हाइड्रोकार्बन भाग के आकार के बढ़ने के कारण एमीन का आण्विक भार बढ़ना।
  2. N-परमाणु जो H-बंध से गुजरते हैं। उन पर उपस्थित H-परमाणुओं की संख्या का घटना।
    दिये गये यौगिकों में से उच्चतम (अधिकतम) आण्विक भार 93,C6H5NH2 का इसके बाद (C2H5)2NH का 73 होता है जबकि C2H5NH2 का निम्नतम आण्विक भार 45 होता है। अतः विलेयता आण्विक भार घटने के साथ बढ़ती है। अतः
    C6H5NH2 < (C2H5)2NH2 < C2H5NH2

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प्रश्न 5.
इन्हें आप कैसे परिवर्तित करेंगे

  1. एथेनोइक अम्ल को मेथेनामीन में
  2. हेक्सेननाइट्राइल को 1-ऐमीनोपेन्टेन में
  3. मेथेनॉल को एथेनोइक अम्ल में ।
  4. एथेनामीन को मेथेनामीन में
  5. एथेनोइक अम्ल को प्रोपेनोइक अम्ल में
  6. मेथेनामीन को ऐथेनामीन में
  7. नाइट्रोमेथेन को डाइमेथिलऐमीन में
  8. प्रोपेनोइक अम्ल को ऐथेनोइक अम्ल में ?

उत्तर
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प्रश्न 6.
प्राथमिक, द्वितीयक एवं तृतीयक ऐमीनों की पहचान की विधि का वर्णन कीजिए। इन अभिक्रियाओं के रासायनिक समीकरण भी लिखिए।
उत्तर
हिंसबर्ग परीक्षण – यह प्राथमिक, द्वितीयक, तृतीयक एमीन में विभेद के लिये एक उत्तम परीक्षण है। एपीन की बेंजीन सल्फोनिल क्लोराइड (हिंसबर्ग अभिकर्मक) के साथ क्रिया जलीय पोटैशियम हाइड्रॉक्साइड विलयन की अधिकता में की जाती है।

प्रश्न 7.
निम्न पर लघु टिप्पणी लिखिए

  1. कार्बिल ऐमीन अभिक्रिया
  2. डाइऐजोटीकरण
  3. हॉफमैन ब्रोमामाइड अभिक्रिया
  4. युग्मन अभिक्रिया
  5. अमोनी-अपघटन
  6. ऐसीलिकरण
  7. गैब्रियल थैलिमाइड संश्लेषण।

उत्तर
1. कार्बिल ऐमीन अभिक्रिया- जब प्राथमिक ऐमीन को क्लोरोफार्म तथा ऐल्कोहॉली कॉस्टिक क्षार के साथ गर्म किया जाता है, जो कार्बिल ऐमीन (आइसोसायनाइड) की अरुचिकर गन्ध आती है। यह अभिक्रिया केवल प्राथमिक ऐमीनों द्वारा ही सम्पन्न होती है, इसे कार्बिल ऐमीन परीक्षण कहते हैं।
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2. डाइऐजोटीकरण- ऐनिलीन के हाइड्रोक्लोरिक अम्ल के विलयन को हिम मिश्रण द्वारा 5°C तक ठण्डा करके उसमें सोडियम नाइट्राइट का हिमशीत विलयन मिलाने पर बेंजीन डाइऐजोनियम क्लोराइड बनता है। इस प्रकार ऐमीन समूह (-NH2) का डाइऐजो समूह (-N2X) द्वारा विस्थापन को डाइऐजोटीकरण कहते हैं।
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3. हॉफमैन ब्रोमामाइड अभिक्रिया- इस अभिक्रिया को हॉफमैन ब्रोमामाइड अभिक्रिया कहते हैं, क्योंकि क्रिया के दौरान बनने वाला एक उत्पाद ब्रोमामाइड है, इसे हॉफमैन पुनर्विन्यास भी कहते हैं, क्योंकि अभिक्रिया के एक पद में पुनर्विन्यास होता है। इसी अभिक्रिया को हॉफमैन डिग्रेडेशन भी कहते हैं क्योंकि अंतिम उत्पाद में कार्बन परमाणु कम हो जाता है।
जब कोई एमाइड क्षार की उपस्थिति में ब्रोमीन से अभिक्रिया करता है तो एक कार्बन परमाणु कम होकर प्राथमिक एमीन बनाता है

R-CONH2+Br2 +3NaOH →RNH2 +2NaBr+ NaHCO3 + H2O
जैसे- एसीटामाइड से मेथिलामीन तथा बेंजामाइड से एनिलीन बनता है।
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4. युग्मन अभिक्रिया-हिमताप पर जब एनिलीन की क्रिया बेंजीन डाइएजोनियम लवण से कराई जाती है तो एक पीला पदार्थ प्राप्त होता है, जिसे हल्का गर्म करने पर चमकदार नारंगी-लाल रंजक बनता है।
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5. अमोनी-अपघटन (Ammonolysis)- यह वह क्रिया है जिसमें या तो एल्किल (या एरिल हैलाइड) के हैलोजन अणु में या एल्कोहॉल (या फिनॉल) के हाइड्रॉक्सिल समूह का विस्थापन एमीनों समूह के द्वारा होता है। इस क्रिया में एल्कोहॉलीय अमोनिया अभिकर्मक प्रयुक्त होता है। सामान्यतः प्राथमिक, द्वितीयक या तृतीयक एमीन बनते हैं।
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6. एसीटिलीकरण – एलिफैटिक तथा एरोमैटिक प्राथमिक तथा द्वितीयक एमीन अम्ल क्लोराइड, ऐनहाइड्राइड तथा एस्टर के साथ नाभिकस्नेही प्रतिस्थापन अभिक्रिया देते हैं । इस अभिक्रिया में -NH2 या> NH समूह की परमाणु एसिल समूह द्वारा प्रतिस्थापित होते हैं तथा इस अभिक्रिया को एसीटिलीकरण या एसीलीकरण कहते हैं।

अभिक्रिया एमीन से प्रबल क्षार की उपस्थिति में होती है, जैसे – पिरिडीन, जो बने हुए HCl को निष्कासित करके साम्यावस्था को दायीं तरफ विस्थापित करती है तथा एसीटिलीकरण द्वारा बना उत्पाद एमाइड कहलाता है।
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7. गैब्रियल थैलिमाइड संश्लेषण-इस अभिक्रिया में थैलिमाइड KOH से क्रिया करके पोटैशियम थैलिमाइड बनाता है, जो ऐल्किल हैलाइड से अभिक्रिया कर N-ऐल्किल थैलिमाइड देता है, जिसके जल अपघटन से प्राथमिक ऐमीन प्राप्त होते हैं।
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प्रश्न 8.
निम्न परिवर्तन निष्पादित कीजिए

  1. नाइट्रोबेन्जीन से बेन्जोइक अम्ल
  2. बेन्जीन से m-ब्रोमोफीनॉल
  3. बेन्जोइक अम्ल से ऐनिलीन
  4. ऐनिलीन से 2, 4, 6-ट्राइब्रोमोफ्लुओरोबेन्जीन
  5. बेन्जिल क्लोराइड से 2-फेनिलएथेनामीन
  6. क्लोरोबेन्जीन से p-क्लोरोऐनिलीन
  7. ऐनिलीन से p-ब्रोमोऐनिलीन
  8. बेन्जेनामाइड से टॉलूईन
  9. ऐनिलीन से बेन्जॉइल ऐल्कोहॉल। NO,

उत्तर
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MP Board Class 12th Chemistry Solutions Chapter 13 ऐमीन - 33
MP Board Class 12th Chemistry Solutions Chapter 13 ऐमीन - 34
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प्रश्न 9.
निम्न अभिक्रियाओं में A, B तथा C की संरचना दीजिए –
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उत्तर
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प्रश्न 10.
एक ऐरोमैटिक यौगिक ‘A’ जलीय अमोनिया के साथ गर्म करने पर यौगिक ‘B’ बनाता है जो Br, एवं KOH के साथ गर्म करने पर अणु सूत्र C6H5N वाला यौगिक ‘C’ बनाता है। A, B एवं cयौगिकों की संरचना एवं इनके IUPAC नाम लिखिए।
उत्तर
यौगिक ‘B’ तथा ‘C’ की संरचनाएँ
1. चूँकि ‘C’, ‘B’ से बना है, उसकी Br2 + KOH के साथ क्रिया द्वारा (i.e. हॉफमैन ब्रोमामाइड अभिक्रिया)। अत: ‘B’ एक एमाइड तथा ‘C’ एक एमीन होगा। अणुसूत्र C6H5NH2 वाला ही एमीन (बेंजामीन या एनिलीन) होगा।

2. चूँकि ‘C’ एनिलीन है तथा इससे बनने वाले एमाइड बेन्जामाइड (C6H5CONH2) होगा। अतः यौगिक ‘B’ बेन्जामाइड होगा।
‘B’ से ‘C’ में परिवर्तन का रासायनिक समीकरण है
MP Board Class 12th Chemistry Solutions Chapter 13 ऐमीन - 50
यौगिक A की संरचना – चूँकि ‘A’ को जलीय अमोनिया के साथ गर्म करने पर बेंजामाइड बनाता है। अत: ‘A’ बेन्जोइक अम्ल होगा।
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प्रश्न 11.
निम्नलिखित अभिक्रियाओं को पूर्ण कीजिए

1. C6H5NH2 + CHCl3 + KOH (ऐल्कोहॉली) →
2. C2H5N2CI+ H3PO2 + H2O →
3.  C6H5NH2 + H2SO4 (सान्द्र) →
4.  C6H5N2CI+C2H5OH →
5.  C6H5NH2+ Br2(aq) →
6.  C6H5NH2+ (CH3CO)2O →

7.
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उत्तर
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प्रश्न 12.
ऐरोमैटिक प्राथमिक ऐमीन को गैब्रियल थैलिमाइड संश्लेषण से क्यों नहीं बनाया जा सकता?
उत्तर
MP Board Class 12th Chemistry Solutions Chapter 13 ऐमीन - 54
चूँकि ऐरिल हैलाइड न्यूक्लियोफिलिक प्रतिस्थापन अभिक्रिया सरलता से नहीं करता है। इसलिये ऐरोमैटिक प्राथमिक एमीन गैब्रियल थैलिमाइड अभिक्रिया द्वारा नहीं बनाये जाते हैं।

प्रश्न 13.
ऐलिफैटिक एवं ऐरोमैटिक प्राथमिक ऐमीनों की नाइट्रस अम्ल से अभिक्रिया लिखिए।
उत्तर
एरोमैटिक प्राथमिक एमीन HNO2 के साथ 273-278K पर क्रिया करके ऐरोमैटिक डाइएजोनियम लवण बनाते हैं
MP Board Class 12th Chemistry Solutions Chapter 13 ऐमीन - 55
एनिलीन ऐलिफैटिक प्राथमिक एमीन HNO2 के साथ 273-278 K पर भी क्रिया करके ऐलिफैटिक डाइएजोनियम लवण बनाते हैं। परन्तु ये कम ताप पर भी अस्थायी होते हैं। अतः सरलता ये विघटित होकर यौगिकों की मिश्रण जिसमें एल्किल क्लोराइड, एल्कीन तथा एल्कोहॉल होता है बनाते हैं जिनमें से एल्कोहॉल प्रमुखता से बनता है।
MP Board Class 12th Chemistry Solutions Chapter 13 ऐमीन - 56

प्रश्न 14.
निम्नलिखित में प्रत्येक का संभावित कारण बताइए

  1. समतुल्य अणु द्रव्यमान वाले ऐमीनों की अम्लता ऐल्कोहॉलों से कम होती है।
  2. प्राथमिक ऐमीनों का क्वथनांक तृतीयक एमीनों से अधिक होता है।
  3. ऐरोमैटिक ऐमीनों की तुलना में ऐलिफैटिक ऐमीनों प्रबल क्षारक होते हैं।

उत्तर
1. एमीन एक प्रोटॉन को त्यागकर एक ऐमाइल आयन बनाते हैं जबकि एल्कोहॉल एक प्रोटॉन त्यागकर एल्कॉक्-साइड आयन देते हैं
MP Board Class 12th Chemistry Solutions Chapter 13 ऐमीन - 57
चूँकि ‘O’,N तथा MP Board Class 12th Chemistry Solutions Chapter 13 ऐमीन - 60 से ज्यादा विद्युत्-ऋणात्मक होता है, इसलिये ऋण आवेश को MP Board Class 12th Chemistry Solutions Chapter 13 ऐमीन - 59 आयन की तुलना में ज्यादा सरलता से (अनुकूलतम) से ग्रहण किये रहता है।
दूसरे शब्दों में MP Board Class 12th Chemistry Solutions Chapter 13 ऐमीन - 58, MP Board Class 12th Chemistry Solutions Chapter 13 ऐमीन - 59 से ज्यादा स्थायी होता है। अतः एल्कोहॉल एमीन से ज्यादा अम्लीय या एमीन एल्को-हॉल से कम अम्लीय होते हैं।

2. प्राथमिक एमीन (R – NH2) पर दो हाइड्रोजन परमाणु N परमाणु पर होते हैं। अतः ये विस्तारित अन्तःआण्विक हाइड्रोजन बंध में भाग लेते हैं।
MP Board Class 12th Chemistry Solutions Chapter 13 ऐमीन - 62
तृतीयक एमीन (RN) में हाइड्रोजन परमाणु, N परमाणु पर नहीं होता है, अतः इसमें H-बंध नहीं होता है। परिणामतः प्राथमिक एमीन का क्वथनांक संगत अणुभार वाले तृतीयक एमीन से ज्यादा होते हैं। उदाहरण
n-ब्यूटाइल एमीन का क्वथनांक (351K) तृतीयक ब्यूटाइल एमीन (b.p. 319 K) से ज्यादा उच्च होता है।

3. एरोमैटिक एमीन में नाइट्रोजन के एकाकी इलेक्ट्रॉन युग्म बेंजीन के साथ संयुग्मन में शामिल हो जाते हैं। जिससे नाइट्रोजन पर धनावेश आ जाता है तथा एकाकी इलेक्ट्रॉन युग्म नाइट्रोजन पर दान करने के लिये उपलब्ध नहीं होते हैं। जबकि ऐलिफैटिक एमीन में मेथिल समूह पर +I प्रभाव होने से नाइट्रोजन पर इलेक्ट्रॉन घनत्व बढ़ जाता है इसलिये ये प्रबल क्षारक होते हैं।

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ऐमीन अन्य महत्वपूर्ण प्रश्नोत्तर

ऐमीन वस्तुनिष्ठ प्रश्न

1. सही विकल्प चुनकर लिखिए

प्रश्न 1.
एनिलीन ठण्डे में नाइट्रस अम्ल (NaNO, + HCI) में अभिकृत करने पर देती है-
(a) C6H5OH
(b) C6H5N2Cl
(c) C6H5NO2
(d) C6H5Cl.
उत्तर
(b) C6H5N2Cl

प्रश्न 2.
एक नाइट्रोजनयुक्त कार्बनिक यौगिक, क्लोरोफार्म व ऐल्कोहॉली KOH के साथ गर्म करने पर अति दुर्गन्धयुक्त वाष्प देता है। यह यौगिक हो सकता है-
(a) नाइट्रो बेंजीन
(b) बेंजेन्एमाइड
(c) N – N डाइमेथिल एनिलीन
(d) एनिलीन।
उत्तर
(d) एनिलीन।

प्रश्न 3.
एथिल एमीन नाइट्रस अम्ल से क्रिया करके बनाता है-
(a) अमोनिया
(b) नाइट्रस ऑक्साइड
(c) एथेन
(d) नाइट्रोजन ।
उत्तर
(d) नाइट्रोजन ।

प्रश्न 4.
कम तापक्रम पर नाइट्रस अम्ल प्रतिक्रिया स्वरूप तेलीय नाइट्रोसैमीन देने वाली यौगिक है-
(a) मेथिल एमीन
(b) डाइमेथिल एमीन
(c) ट्राइमेथिल एमीन
(d) ट्राइएथिल एमीन।
उत्तर
(b) डाइमेथिल एमीन

प्रश्न 5.
निम्नलिखित में से कौन सर्वाधिक क्षारीय है-
(a) C6H5NH2
(b) (CH3)2 NH
(C) (CH3)3N
(d) NH3.
उत्तर
(b) (CH3)2 NH

प्रश्न 6.
बेंजीन डाइएजोनियम क्लोराइड के जल-अपघटन से प्राप्त होता है
(a) क्लोरोबेंजीन
(b) फीनॉल
(c) ऐल्कोहॉल
(d) बेंजीन।
उत्तर
(b) फीनॉल

प्रश्न 7.
अभिक्रिया C6H5CHO + C6H5NH3 →C6H5N=CHC6H5+H20 में C6H5N =CHC6H5 कहलाता है-
(a) एल्डॉल
(b) शिफ अभिकर्मक
(c) शिफ बेस
(d बेनेडिक्ट अभिकर्मक।
उत्तर
(c) शिफ बेस

प्रश्न 8.
नाइट्रो बेंजीन निम्न में से किसके द्वारा N- फेनिल हाइड्रॉक्सिल ऐमीन देता है
(a) Sn/HCI
(b) C6H5CH2NH-CH3
(c) Zn / NaOH
(d) Zn/ NH4Cl.
उत्तर
(c) Zn / NaOH

प्रश्न 9.
कार्बिल एमीन अभिक्रिया ऐल्कोहॉली KOH को इनके मिश्रण के साथ गर्म करके की जाती
(a) क्लोरोफार्म और रजत पूर्ण
(b) ट्राइहैलोजनीकृत मेथेन तथा एक प्राथमिक एमीन
(c) एल्किल हैलाइड और प्राथमिक एमीन
(d) एक एल्किल सायनाइड तथा प्राथमिक एमीन।
उत्तर
(b) ट्राइहैलोजनीकृत मेथेन तथा एक प्राथमिक एमीन

प्रश्न 10.
सन् 1984 में भोपाल त्रासदी में रिसने वाली गैस थी|
(a) MP Board Class 12th Chemistry Solutions Chapter 13 ऐमीन - 63
(b)CH3-C=N=S
(c) CHCl3
(d) C6H5COCl.
उत्तर
(a) MP Board Class 12th Chemistry Solutions Chapter 13 ऐमीन - 64

प्रश्न 11.
मीरबेन का तेल है
(a) ऐनिलीन
(b) नाइट्रोबेन्जीन
(c) p-नाइट्रोऐनिलीन
(d) p-ऐमीनो ऐजोबेन्जीन।
उत्तर
(b) नाइट्रोबेन्जीन

प्रश्न 12.
मस्टर्ड तेल अभिक्रिया का उत्पाद है
(a) ऐल्किल आइसो थायोसायनेट
(b) डाइथायो कार्बेमाइड
(c) डाइथायो एथिल ऐसीटेट
(d) p-नाइट्रो फीनॉल।
उत्तर
(c) डाइथायो एथिल ऐसीटेट

प्रश्न 13.
ऐनिलीन का शुद्धिकरण करते हैं
(a) वाष्प आसवन से
(b) निर्वात आसवन से
(c) साधारण आसवन से
(d) विलायक निष्कर्षण से।
उत्तर
(a) वाष्प आसवन से

प्रश्न 14.
जो ऐमीन ऐसीटिल क्लोराइड से क्रिया नहीं करेगा, वह है
(a) CH3NH2
(b) (CH3)2NH
(c) (CH3)2N
(d) इनमें से कोई नहीं।
उत्तर
(a) CH3NH2

प्रश्न 15.
MP Board Class 12th Chemistry Solutions Chapter 13 ऐमीन - 65 अभिक्रिया है
(a) गाटरमैन
(b) सेण्डमेयर
(c) वुर्ट्ज
(d) फ्रेंकलेंड।
उत्तर
(b) सेण्डमेयर

 

2. रिक्त स्थानों की पूर्ति कीजिए

  1. एरोमैटिक एमीन जल में ………… होते हैं।
  2. NaOH की उपस्थिति में एमीन का बेंजाइलीकरण किया जाता है यह ………… अभिक्रिया __कहलाती है।
  3. नाइट्रस अम्ल से क्रिया करके 1° एमीन ऐल्कोहॉल 2° एमीन ……….. बनाते हैं।
  4. 20 एमीन की नाइट्स अम्ल से क्रिया …………को प्रदर्शित करती है।
  5. एनिलीन सान्द्र सल्फ्यूरिक अम्ल के साथ ….. सल्फोनीकरण करने पर …….. बनता है।
  6. धातु (संक्रमण धातुएँ) आयनों के साथ एमीन उपसहसंयोजकता ……… स्थापित कर ….. बनाते हैं।
  7. अपचयन द्वारा सायनाइड ………… तथा आइसो सायनाइड ………… बनाते हैं।
  8. बेंजोइक अम्ल, हाइड्रेजोइक अम्ल से क्रिया करके ………… बनाता है।
  9. सभी ऐलीफैटिक एमीन अमोनिया से अधिक ……….. प्रकृति होते हैं।
  10. 1° और 2° एमीन ग्रिगनार्ड अभिकर्मक से क्रिया करके ……….बनाते हैं।
  11. एमीन की क्षारीय प्रवृत्ति नाइट्रोजन परमाणु पर …… के कारण होती है।
  12. प्राथमिक एमीन को ……… व……. के साथ गर्म करने पर एल्किल आइसोसाइनाइड प्राप्त होता है।
  13. C6H5 COOH+ ………→ +C6H6-NH2 + N2 + CO2
  14. T.N.T तथा अमोनियम नाइट्रेट का मिश्रण …………….. कहलाता है।
  15. एनिलीन की अभिक्रिया 0°C ताप या HCL तथा NaNO2 से कराने पर बेंजीन डाई-एजोनियम क्लोराइड बनाता है। यह …………. अभिक्रिया कहलाती है।
  16. एथिल एमीन अमोनिया की तुलना में ………….. क्षारीय होता है।
  17. ट्राईनाइट्रो टालुईन एक ………. यौगिक है।
  18. एल्किल आइसोसायनाइड को 250° पर गर्म करने पर …….. बनता है।

उत्तर

  1. अविलेय
  2. शॉटन-बामन
  3. नाइट्रोसैमीन
  4. लीबरमान नाइट्रोसो परीक्षण
  5. सल्फोनिलिक अम्ल
  6. संकुल आयन
  7. प्राथमिक एमीन, द्वितीयक एमीन
  8. एनिलीन
  9. क्षारीय
  10. एल्केन
  11. एकांकी CIयुग्म
  12. क्लोरोफार्म व कास्टिक क्षार
  13. N3H
  14. एमेटॉल
  15. डाइएजोटाइजेशन
  16. प्रबल
  17. विस्फोटक
  18. एल्किल सायनाइड ।

3. उचित सम्बन्ध जोडिएI

MP Board Class 12th Chemistry Solutions Chapter 13 ऐमीन - 66
उत्तर

  1. (e)
  2. (d)
  3. (b)
  4. (c)
  5. (a)
  6. (g)
  7. (1).

MP Board Class 12th Chemistry Solutions Chapter 13 ऐमीन - 67
उत्तर

  1. (e)
  2. (d)
  3. (a)
  4. (c)
  5. (b).

MP Board Class 12th Chemistry Solutions Chapter 13 ऐमीन - 68
उत्तर

  1. (d)
  2. (e)
  3. (a)
  4. (c)
  5. (1)
  6. (b).

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4. एक शब्द / वाक्य में उत्तर दीजिए

  1. हवा में खुला छोड़ने पर एनिलीन काला भूरा पड़ जाता है।
  2. तृतीयक एमीन का एसीटिलीकरण नहीं होता क्यों ?
  3. C3H7N का कौन-सा समावयवी सबसे कम क्षारीय तथा सबसे कम क्वथनांक वाला होगा।
  4. कौन-सा एमीन डाइएजोटीकरण क्रिया देता है।
  5. प्राथमिक ऐरोमैटिक एमीन को ट्राइक्लोरो मेथेन और ऐल्कोहॉली कास्टिक पोटाश के साथ गर्म करने पर प्राप्त होता है।
  6. द्वितीयक एमीन की पहचान की जा सकती है।
  7. नाइट्रीकरण मिश्रण किसे कहते हैं।
  8. नाइट्रोबेन्जीन कहलाता है।
  9. MP Board Class 12th Chemistry Solutions Chapter 13 ऐमीन - 69 अभिक्रिया का नाम है। 0-5°C
  10. प्राथमिक नाइट्रोऐल्केन नाइट्रस अम्ल से क्रिया करके कौन-सा यौगिक बनाते हैं ?
  11. ऐमीन की प्रकृति लिखिए।
  12.  प्राथमिक, द्वितीयक तथा तृतीयक एमीन के पृथक्करण हेतु प्रयुक्त अभिकर्मक है।
  13. 11° व 2° एमीन फास्जीन से क्रिया करके क्या बनाते हैं।
  14. MP Board Class 12th Chemistry Solutions Chapter 13 ऐमीन - 70 उक्त अभिक्रिया का नाम लिखिए।
  15. एमीनों की CHCl3 के साथ अभिक्रिया कराने पर क्या प्राप्त होता है।
  16. एमीनों का उपयोग कार्बनिक संश्लेषण में किस रूप में प्रयोग होता है।
  17. KMnO4 की उपस्थिति में ऑक्सीकरण करने पर एथिल ऐमीन क्या बनाता है।
  18. C6H5NH2 के जलीय विलयन में Br2 जल मिलाने पर किसके अवक्षेप मिलते हैं।
  19. सायनाइड का Pt या Ni की उपस्थिति में अपचयन करने पर कौन-सा एमीन बनता है।
  20. MP Board Class 12th Chemistry Solutions Chapter 13 ऐमीन - 71 में x उत्पाद का सूत्र लिखिए।
  21. MP Board Class 12th Chemistry Solutions Chapter 13 ऐमीन - 72 अभिक्रिया का नाम लिखिये।
  22. मेथिल आइसो साइनाइड बनाने की क्रिया का क्या नाम है ?

उत्तर-

  1. एनिलीन वायु द्वारा ऑक्सीकृत हो जाता है
  2. सक्रिय H परमाणु नहीं होता
  3. तृतीयक एमीन
  4. सभी प्राथमिक ऐरोमैटिक एमीन
  5. फेनिल आइसो सायनाइड
  6. लीबरमान परीक्षण से
  7. सान्द्र HNO3 तथा सान्द्र H2SO4
  8. मीरबेन का तेल
  9. डाइ ऐजोटाइजेशन
  10. नाइट्रोलिक अम्ल
  11. क्षारीय
  12. हिन्सबर्ग अभिकर्मक
  13. प्रतिस्थापित यूरिया
  14. कार्बिल एमीन अभिक्रिया
  15. एल्किल आइसोसायनायड
  16. अभिकर्मक एल्केन
  17. ऐल्डिहाइड
  18. सममित ट्राइब्रोमोंएनीलीन
  19. 1° एमीन
  20. C6H5NH2, (एनिलीन)
  21. श्मिट अभिक्रिया
  22. कार्बिल एमीन अभिक्रिया।

ऐमीन लघु उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 1.
ऐनिलीन जल में अविलेय है, लेकिन HCI में विलेयशील है, क्यों?
उत्तर
ऐनिलीन की क्षारीय प्रकृति के कारण यह HCI जैसे प्रबल अम्लों के साथ विलेयशील लवण बनाती है जबकि जल के साथ ऐसा लवण नहीं बनता। अत: यह HCI में विलेय एवं जल में अविलेय है।
MP Board Class 12th Chemistry Solutions Chapter 13 ऐमीन - 73

प्रश्न 2.
शॉटन-बॉमन अभिक्रिया पर संक्षिप्त टिप्पणी लिखिये।
उत्तर
शॉटन-बॉमन अभिक्रिया (Schotten-Buamann Reaction)-किसी ऐरोमैटिक ऐमीन की बेन्जॉयल क्लोराइड के साथ बेन्जॉयलीकरण की क्रिया को शॉटन-बॉमन अभिक्रिया कहते हैं।
MP Board Class 12th Chemistry Solutions Chapter 13 ऐमीन - 74

प्रश्न 3.

  1. ऐल्किल सायनाइडों के क्वथनांक लगभग समान अणुभार वाले ऐल्किल हैलाइडों की तुलना में अधिक होते हैं, क्यों?
  2. आइसोसायनाइड यौगिकों में अपने समावयवी सायनाइड यौमिकों की अपेक्षा क्वथनांक एवं गलनांक कम क्यों होते हैं ?

उत्तर
1. सायनाइड समूह MP Board Class 12th Chemistry Solutions Chapter 13 ऐमीन - 75 ध्रुवीय होता है। अतः ऐल्किल सायनाइडों का द्विध्रुव आघूर्ण उच्च होता है, जिसके कारण इनके मध्य अन्तराण्विक आकर्षण बल उच्च होता है, फलस्वरूप ऐल्किल सायनाइडों का क्वथनांक लगभग समान अणुभार वाले ऐल्किल हैलाइडों से उच्च होता है।

2. आइसोसायनाइड यौगिक अपने समावयवी सायनाइडों की अपेक्षा कम ध्रुवीय होते हैं। अतः क्वथनांक एवं गलनांक भी संगत सायनाइड की अपेक्षा कम होते हैं।

प्रश्न 4.
समीकरणों को पूर्ण कीजिए
(a) C2H5I+H2NC2H5
(b) CH3NH2 + (NaNO2 + HCI) →
उत्तर
(a) सभी ऐमीन एल्किल हैलाइड (जैसे- C2H5I) से क्रिया करके चतुष्क (quatermary) अमोनियम लवण बनाते हैं। यह क्रिया ऐल्किलीकरण (alkylation) कहलाती है।
MP Board Class 12th Chemistry Solutions Chapter 13 ऐमीन - 76

(b) CH3NH2 +OHNO →CH3OH + N2 + H3O
NaNO2 + HCI से नाइट्रस अम्ल (OHNO) प्राप्त होता है।

प्रश्न 5.
एथिल ऐमीन अमोनिया की अपेक्षा अधिक क्षारीय होता है, क्यों?
उत्तर
मेथिल ऐमीन या एथिल ऐमीन का वियोजन स्थिरांक K b = 4.5×10-4 है, जबकि अमोनिया का वियोजन स्थिरांक 1.8×10-5है। अतः स्पष्ट है कि C2H5NH2अमोनिया की तुलना में अधिक क्षारीय है। ऐथिल ऐमीन में एथिल समूह के + I प्रेरणिक प्रभाव के कारण नाइट्रोजन परमाणु पर एकाकी इलेक्ट्रॉन युग्म की उपलब्धता बढ़ जाती है और वे प्रोटॉन को अपेक्षाकृत और अधिक शीघ्रता से ग्रहण कर लेते हैं । इसलिए एथिल ऐमीन अमोनिया की अपेक्षा अधिक क्षारीय होता है।

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प्रश्न 6.
संक्षिप्त टिप्पणी लिखिए

  1. श्मिट अभिक्रिया,
  2. मस्टर्ड ऑयल अभिक्रिया।

उत्तर
1. श्मिट अभिक्रिया- जब CHCI3 या C6H6 में विलेय हाइड्रोजोइक अम्ल की मोनोकार्बोक्सिलिक .. अम्ल पर
MP Board Class 12th Chemistry Solutions Chapter 13 ऐमीन - 77

2. मस्टर्ड ऑयल अभिक्रिया-ऐलिफैटिक प्राथमिक ऐमीन को -CS2 तथा HgCI2 के साथ गर्म करने पर सरसों के तेल जैसी गन्धयुक्त मेथिल आइसोथायोसायनेट बनता है। इसलिए इस अभिक्रिया को मस्टर्ड ऑयल अभिक्रिया कहते हैं।
MP Board Class 12th Chemistry Solutions Chapter 13 ऐमीन - 78

प्रश्न 7.
प्राथमिक, द्वितीयक एवं तृतीयक एमीन का हिन्सबर्ग परीक्षण लिखिए।
उत्तर
हिन्सबर्ग परीक्षण-यह परीक्षण प्राथमिक, द्वितीयक एवं तृतीयक एमीन में विभेद करता है। इस परीक्षण में क्षार की अधिकता में एमीन को बेंजीन सल्फोनिल क्लोराइड (हिन्सबर्ग अभिकर्मक) के साथ गर्म करने पर विभिन्न एमीन अलग-अलग अवलोकन प्रदर्शित करते हैं।

1. प्राथमिक एमीन- सल्फोनैमाइड बनाते हैं जो KOH में विलेय है।
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2. द्वितीयक एमीन- ये भी सल्फोनैमाइड बनाते हैं जो KOH में अविलेय है।
MP Board Class 12th Chemistry Solutions Chapter 13 ऐमीन - 80

3. तृतीयक एमीन- ये कोई अभिक्रिया नहीं देते।।
C6H5SO2Cl+R3N → कोई अभिक्रिया नहीं।

प्रश्न 8.
ऐल्किल नाइट्राइट और नाइट्रो ऐल्केन में क्या अन्तर है ?
उत्तर
नाइट्रस अम्ल दो समावयवी रूपों में पाया जाता है।
MP Board Class 12th Chemistry Solutions Chapter 13 ऐमीन - 81
अतः नाइट्रस अम्ल के दो ऐल्किल व्युत्पन्न बनते हैं।
MP Board Class 12th Chemistry Solutions Chapter 13 ऐमीन - 82
अतः स्पष्ट है कि नाइट्रोऐल्केन में ऐल्किल मूलक नाइट्रोजन परमाणु से जुड़ा होता है, जबकि ऐल्किल . नाइट्राइट में ऐल्किल मूलक ऑक्सीजन परमाणु से जुड़ा होता है। ऐल्किल नाइट्राइट एस्टर है, जबकि नाइट्रो ऐल्केन पैराफिन का व्युत्पन्न है।

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प्रश्न 9.
निम्नलिखित परिवर्तनों के केवल समीकरण लिखिए।

  1. मेथिल सायनाइड का C2H5 NH2 में परिवर्तन।
  2. C6H5NH2 का क्लोरोबेंजीन में परिवर्तन।

उत्तर
MP Board Class 12th Chemistry Solutions Chapter 13 ऐमीन - 83

प्रश्न 10.
प्राथमिक, द्वितीयक और तृतीयक नाइट्रोऐल्केन में विभेद स्पष्ट करने की विधि का वर्णन कीजिए।
उत्तर
प्राथमिक, द्वितीयक और तृतीयक नाइट्रोऐल्केन में नाइट्रस अम्ल की क्रिया द्वारा अन्तर स्पष्ट कर सकते हैं।

1. प्राथमिक नाइट्रोऐल्केन नाइट्रस अम्ल से अभिक्रिया कर नाइट्रोलिक अम्ल बनाते हैं, जो क्षार के साथ लाल रंग उत्पन्न करते हैं ।
MP Board Class 12th Chemistry Solutions Chapter 13 ऐमीन - 85

2. द्वितीयक नाइट्रो यौगिक नाइट्रस अम्ल के साथ क्रिस्टलीय स्यूडोनाइट्रोल (Pseudonitrols) देते हैं, जो क्षार में घुलकर नीला रंग उत्पन्न करते हैं, किन्तु लवण निर्माण नहीं होता ।
MP Board Class 12th Chemistry Solutions Chapter 13 ऐमीन - 86

3. तृतीयक नाइट्रोऐल्केन नाइट्रस अम्ल से अभिक्रिया नहीं करते, क्योंकि α – हाइड्रोजन परमाणु नहीं होता ।

प्रश्न 11.
एथिल ऐमीन तथा ऐनिलीन में अन्तर स्पष्ट कीजिए।
उत्तर
एथिल ऐमीन तथा ऐनिलीन में अन्तर –
MP Board Class 12th Chemistry Solutions Chapter 13 ऐमीन - 87

प्रश्न 12.
एथिल नाइट्राइट और नाइट्रो एथेन में अन्तर के कोई चार बिन्दु लिखिए।
उत्तर
नाइट्रो एथेन और एथिल नाइट्राइट में अन्तर
1. संरचना- MP Board Class 12th Chemistry Solutions Chapter 13 ऐमीन - 88
2. क्वथनांक- नाइट्रो एथेन का क्वथनांक एथिल नाइट्रेट से उच्च होता है।
3. अपचयन- नाइट्रो एथेन प्राथमिक एमीन तथा एथिल नाइट्राइट अमोनिया बनाता है
MP Board Class 12th Chemistry Solutions Chapter 13 ऐमीन - 89
4. जल अपघटन-नाइट्रो एथेन NaOH के साथ ऐल्कोहॉल नहीं बनाता जबकि एथिल नाइट्राइट NaOH के साथ ऐल्कोहॉल बनाता है|
C2H5-O-N= O+NaOH→C2H5OH+NaNO2.

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प्रश्न 13.
मेण्डियस अभिक्रिया क्या है ?
उत्तर
ऐल्किल सायनाइड (RCN) का अपचयन सोडियम तथा ऐल्कोहॉल द्वारा करने पर प्राथमिक ऐमीन प्राप्त होता है । जैसे- मेथिल सायनाइड के अपचयन से एथिल ऐमीन बनता है । यह अभिक्रिया मेण्डियस अभिक्रिया कहलाती है ।
MP Board Class 12th Chemistry Solutions Chapter 13 ऐमीन - 90

प्रश्न 14.
कैसे प्राप्त करेंगे
(a) मेथिल सायनाइड से एथिल ऐमीन
(b) ऐसीटामाइड से मेथिल ऐमीन ।
(c) एथिल ऐल्कोहॉल से एथिल ऐमीन
(d) मेथिल ऐमीन से एथिल ऐमीन ।
उत्तर
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MP Board Class 12th Chemistry Solutions Chapter 13 ऐमीन - 92

प्रश्न 15.
सायनाइड और आइसोसायनाइड के बीच कोई चार अन्तर लिखिये । अथवा एथिल सायनाइड और एथिल आइसोसायनाइड में अन्तर लिखिये ।
उत्तर
एथिल सायनाइड और एथिल आइसोसायनाइड में अन्तर –
MP Board Class 12th Chemistry Solutions Chapter 13 ऐमीन - 93

प्रश्न 16.
एथिल ऐमीन किस प्रकार क्रिया करता है
(a) HNO2 से,
(b) CH3COCI से
(c) CS2 से ।
उत्तर
(a) C2H5NH2 + OHNO → C2H5OH + N2 + H2O

(b)
MP Board Class 12th Chemistry Solutions Chapter 13 ऐमीन - 94

(c)
MP Board Class 12th Chemistry Solutions Chapter 13 ऐमीन - 95

प्रश्न 17.
एथिल ऐमीन, ऐनिलीन से अधिक क्षारीय है, क्यों? अथवा ऐनिलीन, एथिल ऐमीन से कम क्षारीय होता है, क्यों?
उत्तर
ऐनिलीन एथिल ऐमीन की अपेक्षा कम क्षारीय होता है, क्योंकि बेंजीन नाभिक में अनुनाद के कारण नाइट्रोजन परमाणु का एकाकी इलेक्ट्रॉन युग्म नाभिक की ओर आकर्षित होकर समस्त रिंग में विस्थापित हो जाता है।

इस कारण यह इलेक्ट्रॉन युग्म एथिल ऐमीन के इलेक्ट्रॉन युग्म की अपेक्षा कठिनाई से त्यागा जाता है, जिससे ऐनिलीन का क्षारीय गुण अपेक्षाकृत कम हो जाता है । ऐनिलीन में इलेक्ट्रॉनों का विस्थापन निम्नलिखित प्रकार से प्रदर्शित किया जा सकता हैr
MP Board Class 12th Chemistry Solutions Chapter 13 ऐमीन - 96

प्रश्न 18.
ऐमीनों के क्वथनांक संगत आण्विक द्रव्यमान के हाइड्रोकार्बनों की अपेक्षा उच्च होते हैं; परन्तु संगत ऐल्कोहॉलों एवं कार्बोक्सिलिक अम्लों से निम्न होते हैं । इस कथन का स्पष्टीकरण दीजिए ।
उत्तर
प्राथमिक ऐमीन ध्रुवीय होते हैं तथा इनमें द्विध्रुवीय MP Board Class 12th Chemistry Solutions Chapter 13 ऐमीन - 97 बन्ध उपस्थित होते हैं, जिससे ऐमीन में हाइड्रोजन बन्ध द्वारा अणुओं का संगुणन हो जाता है । इसी कारण इनका क्वथनांक समतुल्य अणुभार वाले ऐल्केन से अधिक होता है।
MP Board Class 12th Chemistry Solutions Chapter 13 ऐमीन - 98
नाइट्रोजन की विद्युत्ऋणता का मान ऑक्सीजन से कम होने के कारण ऐल्कोहॉल एवं कार्बोक्सिलिक अम्लों में प्रबल H-बन्ध द्वारा संगुणन हो जाता है, जबकि ऐमीनों में दुर्बल H-बन्ध द्वारा संगुणन होता है । इसलिये ऐमीनों का क्वथनांक एवं गलनांक संगत ऐल्कोहॉलों एवं कार्बोक्सिलिक अम्लों से निम्न होता है।

प्रश्न 19.
ऐनिलीन के नाइट्रीकरण को स्पष्ट कीजिए।
उत्तर
ऐनिलीन का सीधा नाइट्रीकरण सम्भव नहीं है, क्योंकि -NH2 समूह HNO3 द्वारा ऑक्सीकृत हो जाता है, परन्तु नियंत्रित परिस्थितियों में नाइट्रीकरण कराने पर o- वp- के स्थान पर m-नाइट्रो व्युत्पन्न बनता है। अम्लीय माध्यम में – NH2 समूह का प्रोटोनीकरण हो जाने के कारण बने —N+ H3 समूह की इलेक्ट्रॉन आकर्षित करने की प्रवृत्ति बढ़ जाती है, जिससे ऐनिलीन o- वp-निर्देशक के स्थान पर m-निर्देशक की तरह कार्य करने लगता है ।

प्रश्न 20.
ऐनिलीन के नाइट्रीकरण से पूर्व उसका ऐसीटिलीकरण क्यों किया जाता है ? आवश्यक समीकरण भी दीजिए।
MP Board Class 12th Chemistry Solutions Chapter 13 ऐमीन - 99
उत्तर
एनिलीन का सीधा नाइट्रीकरण सम्भव नहीं है, क्योंकि ऐनिलीन का ऐमीनो समूह नाइट्रिक अम्ल से ऑक्सीकृत हो जाता है । ऐनिलीन का नाइट्रीकरण करने के लिए पहले -NH, समूह को ऐसीटिलीकरण द्वारा सुरक्षित करते हैं। फिर नाइट्रीकरण करते हैं।
MP Board Class 12th Chemistry Solutions Chapter 13 ऐमीन - 100

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प्रश्न 21.
कैसे प्राप्त करेंगे केवल समीकरण लिखिए
(a) एथिल ऐमीन से मेथिल ऐमीन
(b) ऐनिलीन से फीनॉल
(c) मेथिल ऐमीन से एथिल ऐमीन ।
उत्तर
MP Board Class 12th Chemistry Solutions Chapter 13 ऐमीन - 101
MP Board Class 12th Chemistry Solutions Chapter 13 ऐमीन - 102

प्रश्न 22.
निम्न को समझाइए-
(a) ऐल्किल हैलाइड के अमोनी अपघटन से शुद्ध ऐमीन बनना कठिन है ।
(b) मेथिल ऐमीन जलं में FeCl, से क्रिया करके फेरिक हाइड्रॉक्साइड का अवक्षेप देता है ।
(c) AgCI मेथिल ऐमीन में विलेय है।
उत्तर
(a) ऐल्किल हैलाइड के अमोनीकरण से प्राथमिक, द्वितीयक एवं तृतीयक ऐमीनों का मिश्रण प्राप्त होता है।
MP Board Class 12th Chemistry Solutions Chapter 13 ऐमीन - 103
इन ऐमीनों का पृथक्करण बहुत कठिन है, इस कारण ऐल्किल हैलाइड के अमोनी अपघटन से शुद्ध ऐमीन बनना कठिन है।

(b) मेथिल ऐमीन जल में OH आयन देता है, जो FeCl3 से निम्न प्रकार क्रिया करके Fe(OH)3 का अवक्षेप देता है।
MP Board Class 12th Chemistry Solutions Chapter 13 ऐमीन - 104

(c) मेथिल ऐमीन AgCl के साथ एक विलेय संकुल बनाता है और इस प्रकार AgCl मेथिल ऐमीन में विलेय हो जाता है।
MP Board Class 12th Chemistry Solutions Chapter 13 ऐमीन - 105

ऐमीन दीर्घ उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 1.
नाइट्रोबेंजीन के अम्लीय, उदासीन एवं क्षारीय माध्यम में अपचयन अभिक्रिया लिखिये।
उत्तर
(a) अम्लीय माध्यम में अपचयन-नाइट्रोबेंजीन अम्लीय माध्यम में (Sn + HCI, Zn + HCI या SnCl2+ HCI) अपचयित होकर ऐनिलीन बनाता है।
MP Board Class 12th Chemistry Solutions Chapter 13 ऐमीन - 106

(b) उदासीन माध्यम में अपचयन-ऐल्युमिनियम मरकरी युग्म या जिंक रज तथा अमोनियम क्लोराइड के साथ अपचयित होकर फेनिल हाइड्रॉक्सिल ऐमीन बनाता है।
MP Board Class 12th Chemistry Solutions Chapter 13 ऐमीन - 107

(c) क्षारीय माध्यम में अपचयन–
1. क्षारीय सोडियम आर्सेनाइट द्वारा अपचयन करने पर ऐजॉक्सीबेंजीन बनता है।
MP Board Class 12th Chemistry Solutions Chapter 13 ऐमीन - 108

2. CH3 OH में बने Zn रज व NaOHविलयन द्वारा अपचयन करने पर ऐजोबेंजीन बनता है।
MP Board Class 12th Chemistry Solutions Chapter 13 ऐमीन - 109

3. जिंक रज व कॉस्टिक सोडा द्वारा अपचयन करने पर हाइड्रोऐजोबेंजीन बनता है ।
2C6H5NO2+10[H] →C6H5NH-NH-C6H5+4H2O

प्रश्न 2.
आप ऐनिलीन से निम्नलिखित कैसे प्राप्त करेंगे? केवल समीकरण दीजिए।
(a) फीनॉल
(b) मेथेन
(c) ट्राइब्रोमो ऐनिलीन
(d) फेनिल आइसोसायनाइड ।
उत्तर
(a) फीनॉल
MP Board Class 12th Chemistry Solutions Chapter 13 ऐमीन - 110

(b) मेथेन

(c) ट्राइबोमो ऐनिलीन
MP Board Class 12th Chemistry Solutions Chapter 13 ऐमीन - 133

(d) फेनिल आइसोसायनाइड-
MP Board Class 12th Chemistry Solutions Chapter 13 ऐमीन - 112

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प्रश्न 3.
एक कार्बनिक यौगिक
(A) जिसका अणुसूत्र C,HO,N है, अपचयन पर
(B) यौगिक देता है, जो HNO, से क्रिया करके यौगिक
(C) बनाता है । यौगिक (B) क्लोरोफॉर्म और ऐल्कोहॉलिक KOH के साथ दुर्गन्धयुक्त यौगिक
(D) बनाता है, जो अपचयन पर यौगिक
(E) ऐमीन बनाता है ।आप यौगिक (A), (B), (C), (D) तथा
(E) के क्या सूत्र निरूपित करेंगे ? क्रियाएँ समझाइये ।
उत्तर
MP Board Class 12th Chemistry Solutions Chapter 13 ऐमीन - 113

प्रश्न 4.
निम्नलिखित को कैसे प्राप्त करेंगे”

  1. ऐनिलीन से सल्फैनिलिक अम्ल
  2. ऐनिलीन से p-ऐमीनो ऐजो बेंजीन

उत्तर
MP Board Class 12th Chemistry Solutions Chapter 13 ऐमीन - 114

प्रश्न 5.
क्या होता है, जब
(a) अमोनियम ऐसीटेट की ऐलुमिना से 500°C पर क्रिया कराते हैं।
(b) मेथिल सायनाइड का क्षारीय जल-अपघटन कराते हैं।
(c) बेंजेमाइड की P2O2 से क्रिया कराते हैं।
(d) Ni की उपस्थिति में फेनिल आइसोसायनाइड पर H, गैस प्रवाहित करते हैं।
(e) मेथिल आइसोसायनाइड को 250°C पर गर्म करते हैं।
उत्तर
MP Board Class 12th Chemistry Solutions Chapter 13 ऐमीन - 115
MP Board Class 12th Chemistry Solutions Chapter 13 ऐमीन - 116

प्रश्न 6.

  1. नाइट्रोऐल्केन से प्राथमिक ऐमीन कैसे प्राप्त करेंगे ? समीकरण दीजिए।
  2. प्राथमिक ऐमीन से प्राथमिक ऐल्कोहॉल कैसे प्राप्त किया जाता है ? समीकरण दीजिए।
  3. N-प्रोपिल ऐमीन और आइसोप्रोपिल ऐमीन में कौन-सा अधिक क्षारीय होगा?

उत्तर
1. नाइट्रोऐल्केन का LiAIH4 द्वारा या Ni या Pt की उपस्थिति में H2 द्वारा अपचयन करने से प्राथमिक ऐमीन बनते हैं।
MP Board Class 12th Chemistry Solutions Chapter 13 ऐमीन - 117

2. प्राथमिक ऐलिफैटिक ऐमीन नाइट्रस अम्ल से अभिक्रिया करके प्राथमिक ऐल्कोहॉल बनाते हैं।
C2H5NH2+ HONO→C2H5OH+N2+H2O

3. नॉर्मल प्रोपिल ऐमीन अधिक क्षारीय होगा।

प्रश्न 7.
निम्नलिखित को कैसे प्राप्त करेंगे (केवल समीकरण दीजिए)
(a) नाइट्रोएथेन से एथिल ऐमीन
(b) नाइट्रोऐथेन से N-एथिल हाइड्रॉक्सिल ऐमीन
(c) नाइट्रोमेथेन से क्लोरोपिक्रिन
(d) बेंजीन डाइऐजोनियम क्लोराइड से नाइट्रोबेंजीन
(e) नाइट्रोबेंजीन से ट्राइनाइट्रोबेंजीन (T.N.B.) ।
उत्तर
MP Board Class 12th Chemistry Solutions Chapter 13 ऐमीन - 118
MP Board Class 12th Chemistry Solutions Chapter 13 ऐमीन - 119

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प्रश्न 8.
एथिल ऐमीन बनाने की प्रयोगशाला विधिका निम्न बिन्दुओं के आधार पर वर्णन कीजिए(a) विधि, (b) अभिक्रिया का समीकरण, (c) चित्र, (d) भौतिक गुण ।
उत्तर-
एथिल ऐमीन (Ethyl Amine), C,H,NH, बनाने की प्रयोगशाला विधि- प्रयोगशाला में एथिल ऐमीन हॉफमैन ब्रोमाइड अभिक्रिया द्वारा बनायी जाती है । इस अभिक्रिया में प्रोपिओनैमाइड की ब्रोमीन एवं कास्टिक पोटॉश विलयन से अभिक्रिया होती है । अभिक्रिया अग्र पदों में पूरी होती है
C2H5CONH2 + Br2 → C2H5CONHBr + HBr
KOH + HBr→KBr + H2O
C2H5CONHBr +KOH →C2H5NCO+KBr + H2O
C2H5NCO+2KOH→C2H5NH2+K2CO3
C2H5CONH2+ Br2 +4KOH → C2H5NH2+ 2KBr+K2CO3+2H2O

विधि- गोल पेंदी के एक आसवन फ्लास्क में ब्रोमीन तथा प्रोपिओनैमाइड की तुल्य मात्राएँ लेकर उसमें 10% KOH विलयन तब तक डालते हैं जब तक की ब्रोमीन का लाल रंग लुप्त न हो जाए। इस विलयन में सान्द्र (50%) KOH विलयन अधिक मात्रा में डालते हैं और उसको जल-ऊष्मक पर ब्रोमो-प्रोपिओनैमाइड 57.67°C तक गर्म करते हैं । फ्लास्क का विलयन जब रंगहीन हो जाता है, तब एथिल ऐमीन आसंवित होने लगती है, जिसे तनु HCI पर अवशोषित कर लिया जाता है।
MP Board Class 12th Chemistry Solutions Chapter 13 ऐमीन - 120
भौतिक गुण-यह रंगहीन, अमोनिया जैसी गंध वाला तनु  द्रव है, जो जल एवं कार्बनिक विलायकों में विलेय है । यह ‘ ज्वलनशील पदार्थ है। इसका क्वथनांक 19°C है।

प्रश्न 9.
प्रयोगशाला में ऐनिलीन बनाने की विधि का सचित्र वर्णन कीजिए।
उत्तर
ऐनिलीन, ऐमीनो बेंजीन अथवा फेनिल ऐमीन (C6H5NH2) प्रयोगशाला में बनानाप्रयोग-शाला में ऐनिलीन नाइट्रोबेंजीन को टिन और हाइड्रोक्लोरिक अम्ल द्वारा उत्पन्न नवजात हाइड्रोजन से अपचयित कर प्राप्त किया जाता है।
MP Board Class 12th Chemistry Solutions Chapter 13 ऐमीन - 121
विधि (Procedure)-एक गोल पेंदे के फ्लास्क में 30g नाइट्रोबेंजीन सान्द्र HCI (4 भाग) व 60 g जिंक लेकर उसमें 150 ml सान्द्र HCI वायु संघनित्र द्वारा डालते हैं
पश्चवाही संघनित्र ।थोड़ा-थोड़ा HCI डालकर हिलाते जाते हैं और फ्लास्क को नल से ठण्डा नाइट्रोबेंजीन (1 भाग) करते जाते हैं । समस्त अम्ल डालने के बाद उसे जल-ऊष्मक पर तब तक गर्म ! करते हैं, जब तक कि नाइट्रोबेंजीन की तेलीय बूंदें गायब न हो जायें । इस प्रक्रम Y -टिन (2 भाग) में बने हुए ऐनिलीन व SnCl4, HCl की उपस्थिति में परस्पर संयुक्त | होकर लवण (C6H5 NH3), SnCl6 बना लेते हैं । इसे विघटित करने के + लिए इस मिश्रण में 40% कॉस्टिक सोडा विलयन धीरे-धीरे करके तब तक डालते हैं जब तक कि बना हुआ अवक्षेप पुनः घुल न जाय आर _योगाला में विलीन बनाना विलयन उदासीन न हो जाये
MP Board Class 12th Chemistry Solutions Chapter 13 ऐमीन - 122
(C2H5NH3)2SnCl6+8NaOH → 2C6H5NH2+ 6NaCl + Na2SnO3 +5H2O
इस मिश्रण के वाष्प-आवसन से एनिलीन प्राप्त हो जाती है।

प्रश्न 10.
प्राथमिक, द्वितीयक एवं तृतीयक ऐमीनों में किन्हीं पाँच बिंदुओं में विभेद कीजिये।
उत्तर
MP Board Class 12th Chemistry Solutions Chapter 13 ऐमीन - 123

प्रश्न 11.
नाइट्रोबेंजीन बनाने की प्रयोगशाला विधि का समीकरण दीजिए एवं नाइट्रो-बेंजीन द्वारा होने वाली निम्नलिखित की रासायनिक अभिक्रिया दीजिए
(1) नाइट्रीकरण
(2) सल्फोनीकरण।
उत्तर
प्रयोगशाला में नाइट्रोबेंजीन बनाना-प्रयोगशाला में नाइट्रोबेंजीन सान्द्र नाइट्रिक अम्ल और सान्द्र सल्फ्यूरिक अम्ल के मिश्रण द्वारा 60°C से कम ताप पर बेंजीन का नाइट्रीकरण करने से बनता है।
MP Board Class 12th Chemistry Solutions Chapter 13 ऐमीन - 124

नाइट्रोबेंजीन की निम्न के साथ क्रिया
1. नाइट्रीकरण- नाइट्रोबेंजीन को सधूम HNO3 के साथ सान्द्र H2SO4 की उपस्थिति में गर्म करने पर m-डाइ नाइट्रोबेंजीन बनती है।
MP Board Class 12th Chemistry Solutions Chapter 13 ऐमीन - 125
m-डाइ नाइट्रोबेंजीन का नाइट्रीकरण करने पर 1, 3, 5-ट्राइ नाइट्रोबेंजीन (T.N.B.) बनती है।
MP Board Class 12th Chemistry Solutions Chapter 13 ऐमीन - 126
2. सल्फोनीकरण-नाइट्रोबेंजीन को सधूम H2SO4 के साथ गर्म करने पर m-नाइट्रोबेंजीन सल्फोनिक अम्ल बनता है।
MP Board Class 12th Chemistry Solutions Chapter 13 ऐमीन - 127

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प्रश्न 12.
C4H11N के संभव समावयवी लिखिए।
उत्तर
1. स्थान समावयवी
CH3-CH2-CH2-CH2-NH2Butane-1 amine
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2. श्रृंखला समावयवी
MP Board Class 12th Chemistry Solutions Chapter 13 ऐमीन - 129

3. मध्यावयवी
MP Board Class 12th Chemistry Solutions Chapter 13 ऐमीन - 130

प्रश्न 13.
C3H9N के संभव समावयवी लिखिए एवं समावयवता का प्रकार लिखिए।
उत्तर
1. क्रियात्मक समूह समावयवता-
MP Board Class 12th Chemistry Solutions Chapter 13 ऐमीन - 131

2. स्थान समावयवता-
MP Board Class 12th Chemistry Solutions Chapter 13 ऐमीन - 132

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