MP Board Class 7th Maths Solutions Chapter 10 Practical Geometry Ex 10.2

MP Board Class 7th Maths Solutions Chapter 10 Practical Geometry Ex 10.2

Question 1.
Construct ∆XYZ in which XY = 4.5 cm, YZ = 5 cm and ZX = 6 cm.
Solution:
MP Board Class 7th Maths Solutions Chapter 10 Practical Geometry Ex 10.2 1
Steps of Construction :
1. Draw a line segment YZ = 5 cm.
2. With centre Y and radius 4.5 cm, draw Y an arc.
3. With centre Z and radius 6 cm draw another arc intersecting the previous arc at X.
4. Join YX and ZX. Then, XYZ is the required triangle.

Question 2.
Construct an equilateral triangle of side 5.5 cm.
Solution:
Steps of Construction :
MP Board Class 7th Maths Solutions Chapter 10 Practical Geometry Ex 10.2 2
1. Draw a line segment BC = 5.5 cm.
2. With B as centre and radius equal to 5.5 cm (= BA), draw an arc.
3. With C as centre and radius equal to 5.5 cm (= CA), draw another arc intersecting the previous arc at A.
4. Join AB and AC.
Then, ABC is the required equilateral triangle.

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Question 3.
Draw ∆PQR with PQ = 4 cm, QR = 3.5 What type of triangle is this?
Solution:
Steps of Construction :
MP Board Class 7th Maths Solutions Chapter 10 Practical Geometry Ex 10.2 3
1. Draw a line segment QR = 3.5 cm.
2. With Q as centre and radius equal to 4.0 cm (= QP), draw another arc intersecting the previous arc at P.
3. With R as centre and radius equal to 4.0 cm (= PR), draw another arc intersecting the previous arc at P.
4. Join PQ and PR
Then, PQR is the required triangle.
From above construction, ∆PQR is an isosceles triangle.

Question 4.
Construct ∆ABC such that AB = 2.5 cm, BC = 6 cm and AC = 6.5 cm. Measure ∠B.
Solution:
Steps of Construction :
MP Board Class 7th Maths Solutions Chapter 10 Practical Geometry Ex 10.2 4
1. Draw a line segment BC = 6 cm.
2. With B as centre and radius equal to 2.5 cm. (AB) draw an arc.
3. With C as centre and radius equal to 6.5 cm (AC), draw another arc intersecting the
4. Join AB and AC.
Then, ABC is the required triangle.
On measuring, we find that ∠B = 90°.

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MP Board Class 7th Maths Solutions Chapter 10 Practical Geometry Ex 10.1

MP Board Class 7th Maths Solutions Chapter 10 Practical Geometry Ex 10.1

Question 1.
Draw a line, say AB, take a point C outside it. Through C, draw a line parallel to AB using ruler and compasses only.
Solution:
Step of Construction :
MP Board Class 7th Maths Solutions Chapter 10 Practical Geometry Ex 10.1 1
1. Take any point P on line AB.
2. Take any point C (Given) outside AB and join PC.
3. With P as centre and a convenient radius, draw an arc cutting line AB at R and PC at S.
4. Now with C as centre and the same radius as in Step 3, draw an arc intersecting PC at T.
5. With T as centre and radius equal to R draw an arc intersecting the previous arc at N.
6. Now, join CN and produce it on both sides to form a line EF.
Thus, EF is the required line parallel to AB and passing through the given point C.

Question 2.
Draw a line l. Draw a perpendicular to l at a xy n point on l. On this perpendicular choose a point X, 4 cm away from l. Through X, draw a line m parallel to l.
Solution:
Steps of Constructions :
MP Board Class 7th Maths Solutions Chapter 10 Practical Geometry Ex 10.1 2
1. Draw a line l and take any point P on it.
2. With P as centre and any suitable radius draw an arc intersecting line l at A and B.
3. With A as centre and radius equal to more than AP draw an arc.
4. Again with B as centre and same radius as in Step 3 draw another arc to intersects the previous arc at C.
5. Join PC and produce it to Q.
Then PQ is the required perpendicular.
6. Now with P as centre and radius equal to 4 cm, draw an arc to intersect PQ at X, such that PX = 4 cm.
7. With X as centre and a convenient radius draw an arc intersecting PQ at D.
8. Again with D as centre and same radius as in Step 7 draw an arc to intersect the previous arc at E.
9. Join XE and produce if to form a line m.
Thus, m is the required line.

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Question 3.
Let l be a line and P be a point not on l. Through P, draw a line m parallel to l. Now join P to any point Q on l. Choose any other point R on m. Through R, draw a line parallel to PQ. Let this meet l at S. What shape do the two sets of parallel lines enclose?
Solution:
Steps of Construction :
MP Board Class 7th Maths Solutions Chapter 10 Practical Geometry Ex 10.1 3
1. Draw a line l and take any point P outside it.
2. Take any point Q on line l
3. Join QP.
4. With Q as centre and any suitable radius, draw an arc intersecting line l and QP at A and B respectively.
5. Now with P as centre and same radius as in Step 4, draw an arc on the opposite side of PQ to intersect PQ at C.
6. Again with C as centre and radius equal to AB, draw an arc to intersect the previous arc at D.
7. Join PD and produce it in both directions to obtain the required line m.
8. Further take any point R on m.
9. Through R, draw a line RS || PQ by following the steps explained above.
The shape of the figure enclosed by these lines is a parallelogram QPRS.

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MP Board Class 6th Special Hindi व्याकरण

MP Board Class 6th Special Hindi व्याकरण

संज्ञा

परिभाषा-किसी व्यक्ति, जाति, वस्तु, स्थान, गुण एवं भाव के नाम को संज्ञा कहते हैं। जैसे- रजनीकान्त (व्यक्ति), घोड़ा (जाति), कुर्सी (वस्तु), आगरा (स्थान), पवित्रता (गुण)।

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संज्ञा के भेद-संज्ञा के निम्नलिखित तीन भेद होते हैं-

  1. जातिवाचक-जिस संज्ञा से एक जाति के प्राणियों या पदार्थों का बोध होता है, उसे जातिवाचक संज्ञा कहते हैं। यथा- नदी, नगर, नहर, भोज, फूल आदि। जातिवाचक संज्ञा के अन्तर्गत दो संज्ञाएँ और मानी जाती हैं जो क्रमशः समुदायवाचक एवं द्रव्यवाचक संज्ञाएँ कहलाती हैं।
    • समुदायवाचक-एक प्रकार की वस्तुओं के समूह का बोध कराने वाली संज्ञा समुदायवाचक संज्ञा कहलाती है। यथा-सभा, सोना, कक्षा आदि।
    • द्रव्यवाचक-धातुओं के नाम को द्रव्यवाचक कहा जाता है, यथा-मिट्टी, चाँदी, सोना, ताँबा, लोहा आदि।
  2. व्यक्तिवाचक-जिस संज्ञा से किसी खास व्यक्ति, वस्तु या स्थान का बोध होता है। उसे हम व्यक्तिवाचक संज्ञा कहते हैं, यथा-हिमालय, गंगा, आगरा, निष्ठा, अक्षय कुमार आदि।
  3. भाववाचक-जिस संज्ञा से किसी गुण, दशा, स्वभाव अथवा व्यापार का बोध होता है, उसे भाववाचक संज्ञा कहते हैं, यथा-भलाई, अहिंसा, पवित्रता, शत्रुता, बालकपन।

सर्वनाम

परिभाषा-जो शब्द संज्ञा के स्थान पर प्रयोग में लाये जाते हैं, उन्हें हम सर्वनाम कहते हैं।

सर्वनाम के भेद-सर्वनाम के निम्नलिखित छः भेद होते-

  1. पुरुषवाचक सर्वनाम-वह सर्वनाम जो किसी व्यक्ति के लिए प्रयुक्त होता है, पुरुषवाचक सर्वनाम कहलाता है। जैसे-मैं, तू, तुम, यह, वह। पुरुषवाचक सर्वनाम तीन प्रकार के होते हैं-
    • उत्तम पुरुष-बोलने वाला या लिखने वाला अपने नाम के बदले जिस सर्वनाम का प्रयोग करता है, उसे उत्तम पुरुष कहते हैं। जैसे- मैं, हम।
    • मध्यम पुरुष-जिससे बात की जाए अथवा जिसे सम्बोधित किया जाए, उसके नाम के बदले प्रयुक्त सर्वनाम को मध्यम पुरुष कहते हैं। जैसे-तू, तुम, आप।
    • अन्य पुरुष-जिसके बारे में बात करते हैं या लिखते हैं उसके नाम के बदले प्रयुक्त सर्वनाम को अन्य पुरुष सर्वनाम कहते हैं। जैसे- यह, ये, वह, वे। ‘यह’ और ‘ये’ समीपस्थ अन्य पुरुष सर्वनाम हैं। तथा ‘वह’ और ‘वे’ दूरस्थ अन्य पुरुष सर्वनाम हैं।
  2. निश्चय वाचक सर्वनाम-वे सर्वनाम हैं जो किसी निश्चित व्यक्ति या वस्तु की ओर संकेत करते हैं। जैसे- यह, वह।
  3. अनिश्चय वाचक सर्वनाम-वे सर्वनाम जो किसी अनिश्चित व्यक्ति या वस्तु के लिए प्रयुक्त होते हैं। जैसे-कोई, कुछ।
  4. प्रश्नवाचक सर्वनाम-वे सर्वनाम जिनका प्रयोग किसी व्यक्ति या वस्तु के सम्बन्ध में प्रश्न पूछने के लिए होता है। जैसे-कौन, क्या।
  5. निजवाचक सर्वनाम-जो सर्वनाम कर्ता के साथ अपनापन (निजत्व) बनाने के लिए आता है, उसे निजवाचक सर्वनाम कहा जाता है। जैसे-आप, खुद, स्वयं।
  6. सम्बन्धवाचक सर्वनाम-जो सर्वनाम साथ में आए किसी अन्य उपवाक्य में प्रयुक्त संज्ञा या सर्वनाम से सम्बन्ध बताने के लिए प्रयोग किए जाते हैं, सम्बन्ध सूचक सर्वनाम कहलाते हैं। जैसे- जो, वे, जो-वह, जो-सो।

कारक एवं विभक्ति जिस शब्द द्वारा संज्ञा या सर्वनाम का सम्बन्ध सिद्ध होता है उसे कारक कहते हैं। जिस चिन्ह को कारक द्वारा ज्ञात किया जाता है उसमें उसी प्रकार की विभक्ति का प्रयोग होता है। जैसे-कर्ता ‘ने’ प्रथमा विभक्ति, कर्म’को’ द्वितीया विभक्ति आदि। उदाहरण के लिए-राम ने रावण को मारा। रामः रावण हतवान ‘ने’, ‘को’ और ‘से’ तीन विभक्तियाँ हैं तथा इन्हीं से वाक्य के कारकों का निर्धारण होता है।

हिन्दी में कारकों की संख्या आठ मानी गई है-

  1. कर्ता कारक-वाक्य में करने वाले को कर्ता कारक कहा जाता है। इसका चिन्ह ‘ने’ होता है।
  2. कर्म कारक-जिस वस्तु पर क्रिया के व्यापार का फल पड़े, उसे हम कर्म कारक कहते हैं। इसका चिन्ह “को’ है, यथा-तुमने कुत्ते को मारा। (विभक्ति को’)
  3. करण कारक-कर्ता जिसकी सहायता से कोई व्यापार पूर्ण करता है, उसे हम करण कारक कहते हैं। जैसे-राम ने रावण को बाण से मारा। (विभक्ति-से)
  4. सम्प्रदान कारक-कर्ता जिसके लिए कोई कार्य करता है, उसे हम सम्प्रदान कारक कहते हैं। यथा-कनिष्ठ पल्लव के लिए पेड़े लाता है। (विभक्ति-को, के, लिए)
  5. अपादान कारक-जिसका अलग होना व्यक्त हो।। जैसे-यह बालक छत से गिरता है। (विभक्ति-से)
  6. सम्बन्ध कारक-जिसके द्वारा संज्ञा का सम्बन्ध या अधिकार स्थापित किया जाता है। उसे हम सम्बन्ध कारक कहते हैं। यथा-नरेन्द्र कुमार का घर है। (विभक्ति-का, की, के)
  7. अधिकरण कारक-संज्ञा के जिस रूप से क्रिया के आधार का ज्ञान हो उसे अधिकरण कारक कहते हैं। जैसे कोयल आम की डाली पर बैठी है। (विभक्ति-मैं, पै, पर)
  8. सम्बोधन कारक-जिसके द्वारा किसी को बुलाया या सचेत किया जाता है वहाँ पर सम्बोधन कारक होता है। यथा-हे अक्षय उठो। (विभक्ति-हे, अरे, अहो)

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विशेषण

परिभाषा-जो शब्द संज्ञा या सर्वनाम की विशेषता बतलाते हैं, उन्हें हम विशेषण कहते हैं, यथा-नीला पैन, अच्छी पुस्तक। यहाँ पर ‘नीला’ और ‘अच्छी’ क्रमशः पैन और पुस्तक संज्ञा की विशेषता प्रकट कर रहे हैं, अतः ये दोनों विशेषण हैं।

विशेष्य-जिन शब्दों की विशेषता बताई जाती है, वे शब्द विशेष्य होते हैं, जैसे सफेद गाय। ‘गाय’ शब्द विशेष्य है।

विशेषण के भेद-विशेषण निम्नलिखित छः प्रकार के होते हैं-

  1. गुण वाचक-जिन शब्दों से संज्ञा या सर्वनाम के गुणों का बोध हो उन्हें हम गुण वाचक विशेषण कहते हैं। यथा-यह तस्वीर सुन्दर है। इस वाक्य में ‘सुन्दर तस्वीर संज्ञा का गुण बता रहा है। अत: यहाँ गुण वाचक विशेषण हुआ। यथा-मोटा आदमी, पतला लड़का, पीली गाय, लाल बकरी।
  2. संख्या वाचक-जो शब्द संज्ञा की संख्या का ज्ञान कराता है, उसे हम संख्या वाचक विशेषण कहते हैं, जैसे-दस आदमी, चार पुस्तक आदि।
  3. परिमाण वाचक-जिस शब्द से किसी वस्तु के परिमाण का बोध होता है, उसे हम परिमाण वाचक विशेषण कहते हैं, यथा-तुम्हारे पास कितने रुपये हैं, थोड़ा पानी पिओ। जरा, काफी, बहुत, थोड़ा आदि परिमाण वाचक विशेषण हैं।
  4. संकेत वाचक-जो शब्द संज्ञा की ओर संकेत करें, उन्हें हम संकेत वाचक विशेषण कहते हैं, यथा-आप इस पुस्तक को अवश्य पढ़ें। इस वाक्य में इस’ शब्द ‘पुस्तक’ संज्ञा की ओर संकेत करता है, अतः यहाँ संकेत वाचक विशेषण हुआ।
  5. व्यक्ति वाचक-जिन विशेषणों का निर्माण व्यक्ति वाचक संज्ञाओं से होता है, उन्हें हम व्यक्ति वाचक विशेषण कहते हैं यथा-इलाहाबादी अमरूद, कश्मीरी सेव।
  6. विभाग वाचक-जिन विशेषणों के माध्यम से पृथकता का बोध हो, उन्हें विभाग वाचक विशेषण कहते हैं; यथा-प्रत्येक छात्र को पारितोषक दो। इस वाक्य में ‘प्रत्येक’ शब्द से अलग-अलग छात्रों का बोध होता है, अतः यहाँ विभाग वाचक विशेषण हुआ।

क्रिया विशेषण

परिभाषा-जिन शब्दों से क्रिया के अर्थ में विशेषता आती है, उन्हें हम क्रिया विशेषण कहते हैं, यथा-कम खेलो, जल्दी जाओ-में कम और जल्दी दोनों ही क्रिया विशेषण हैं।

क्रिया विशेषण के भेद-क्रिया विशेषण निम्नलिखित पाँच प्रकार के होते हैं-

  1. गुण वाचक क्रिया विशेषण-जो क्रियाएँ विशेषण के गुण प्रदर्शित करती हैं, उन्हें गुण वाचक क्रिया विशेषण कहते हैं; जैसे-कोयल बहुत मधुर बोलती है। मोहन जोर से बोलता है। (मधुर, जोर, बहुत)।
  2. परिमाण वाचक क्रिया विशेषण-जिन शब्दों से क्रिया के परिमाण का ज्ञान होता है, वहाँ परिमाण वाचक क्रिया-विशेषण माना जाता है। यथा-‘ज्यादा लिखो’ में ज्यादा’ परिमाण वाचक क्रिया विशेषण है।
  3. स्थान वाचक क्रिया विशेषण-जिन शब्दों के द्वारा क्रिया होने का स्थान ज्ञात हो वहाँ स्थान वाचक क्रिया विशेषण होता है। यथा-‘पल्लव कहाँ रहता है’, में कहीं स्थान वाचक क्रिया विशेषण है।
  4. रीति वाचक क्रिया विशेषण-जिन शब्दों से क्रिया होने की रीति या ढंग का ज्ञान हो वहाँ रीति वाचक क्रिया विशेषण होता है। यथा-अक्षय कुमार सहसा आ गया-में ‘सहसा’ रीति वाचक क्रिया विशेषण है।
  5. काल वाचक क्रिया विशेषण-जिन शब्दों से क्रिया के घटित होने की अवधि का निश्चय हो, यथा-कल यहाँ महात्मा गाँधी आये थे-इस वाक्य में ‘कल’ काल वाचक क्रिया विशेषण है। विशेषण और क्रिया विशेषण में अन्तर विशेषण के द्वारा किसी संज्ञा या सर्वनाम की विशेषता बताई जाती है जबकि क्रिया विशेषण के द्वारा क्रिया के अर्थ में विशेषता को स्पष्ट किया जाता है। जैसे-
    • लाल कमीज, नीला कुर्ता इन शब्दों में लाल और नीला कमीज और कुर्ता की अच्छाई बताते हैं, अत: लाल और नीला शब्द विशेषण हैं।
    • जल्दी लिखो, तेज चलो में जल्दी और तेज-दोनों लिखो और चलो क्रिया के अर्थ की विशेषता बताते हैं। इसलिए जल्दी और तेज दोनों ही क्रिया विशेषण हैं।

क्रिया

परिभाषा-जिन शब्दों से किसी कार्य का करना या होना पाया जाये, उन्हें क्रिया करते हैं। क्रिया के अभाव में कोई कार्य पूर्ण नहीं होता। यथा-कनिष्क खेलता है, पल्लव पुस्तक खरीदता है, आदि वाक्यों में खेलता है, खरीदता है शब्दों से खेलने तथा खरीदने की क्रिया का बोध होता है।

  1. सकर्मक क्रिया-जिस क्रिया के साथ कर्म प्रयुक्त हो। जैसे-पल्लव आम खरीदता है-इस वाक्य में खरीदना क्रिया का फल आम पर पड़ रहा है, अतः खरीदना सकर्मक क्रिया है।
  2. अकर्मक क्रिया-जिस क्रिया का कोई कर्म न हो। जैसे-अक्षय पढ़ता है।

शब्द ज्ञान
प्रयोग के विचार से शब्दों के दो मुख्य भेद हैं-
(क) विकारी,
(ख) अविकारी।

(क) जिन शब्दों के रूप लिंग, वचन और कारक के आधार पर बदल जाते हैं, उन्हें विकारी शब्द कहते हैं; जैसे-लड़का, लड़की, लड़कों। अच्छा, अच्छे, अच्छों, जाता, जाती, जाते, मैं, मुझे, तुम, तुम्हारा, हम, हमें, हमारा आदि।
(ख) जिन शब्दों में लिंग, वचन और कारक के द्वारा कोई परिवर्तन नहीं होता अर्थात् जिनका रूप एक-सा रहता है, उन्हें अविकारी शब्द कहते हैं; जैसे-यहाँ, वहाँ, प्रतिदिन, परन्तु, भी, हो, आज आदि।

अविकारी शब्दों को अव्यय शब्द भी कहते हैं। अविकारी शब्द या अव्यय को मुख्य रूप से चार भेदों में बाँटा गया है। वे भेद हैं-

  1. क्रिया-विशेषण,
  2. सम्बन्ध बोधक,
  3. समुच्चय बोधक
  4. विस्मयादिबोधक।

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(1) क्रिया विशेषण ऊपर पढ़ चुके हैं।
(2) सम्बन्ध बोधक-जो अव्यय संज्ञा या सर्वनाम का सम्बन्ध अन्य शब्दों से जोड़ते हैं, उन्हें सम्बन्ध बोधक कहते हैं।

जैसे-
(क) सुमित बाग में खेल रहा है।
(ख) पेड़ के ऊपर तोते हैं।
(ग) मेज के नीचे बिल्ली है।
(घ) जल के बिना जीवन कठिन है।
(ड.) चिराग तले अँधेरा रहता है।

इन वाक्यों में रेखांकित शब्द सम्बन्धबोधक अव्यय हैं। कुछ अन्य शब्द; जैसे-के लिए, के हेतु, के साथ, के मारे, के बाहर, के अन्दर, के आगे, के पीछे, के बिना, के द्वारा, के विरुद्ध, के अतिरिक्त, के बदले, के विपरीत, के अनुकूल की उपेक्षा भी अव्यय का अविकारी शब्द हैं।
(3) समुच्चय बोधक-दो शब्दों, वाक्यांशों या वाक्यों को आपस में जोड़ने वाले अविकारी शब्दों को समुच्चय बोधक कहते हैं, जैसे
(क) रवि और अशोक मित्र हैं।
(ख) तुम जाते हो या मैं जाऊँ।
(ग) यदि परिश्रम करोगे तो अवश्य सफल होगे। इन वाक्यों में रेखांकित शब्द समुच्चय बोधक अव्यय हैं।

(4) विस्मयादिबोधक-जो अव्यय शब्द विस्मय, हर्ष, शोक, घृणा आदि भावों को प्रकट करते हैं, उन्हें विस्मयादिबोधक
कहते हैं। विस्मयादिबोधक अव्यय के बाद विस्मय चिन्ह (!) लगता है।

जैसे-
(क) बाप रे ! इतना बड़ा साँप!
(ख) अरे ! तुम यहाँ आ गए।
(ग) शाबास ! आगे बढ़ते चलो।
(घ) हाय ! मार डाला।
(ड.) वाह ! तुमने तो कमाल कर दिया। रेखांकित शब्द विस्मयबोधक अव्यय हैं।

शब्द वर्ग के आधार पर हिन्दी भाषा में निम्नलिखित पाँच प्रकार के शब्द हैं-

  1. तत्सम शब्द-संस्कृत भाषा के ऐसे शब्द जो हिन्दी में ज्यों के त्यों प्रचलित हैं, तत्सम शब्द कहलाते हैं। जैसे-दुग्ध, हस्त, स्नेह, सूर्य, चन्द्र, अग्नि। .
  2. तद्भव शब्द-तत्सम शब्दों में विकार आने से जब उनका शब्द परिवर्तित हो जाता है, तो वे तद्भव शब्द कहलाते हैं। जैसे- दूध, हाथ, स्नेह, सूरज, चाँद आदि।
  3. देशज शब्द-ऐसे शब्द जिनकी व्युत्पत्ति का ठीक से पता नहीं है और जो क्षेत्रीय बोलियों से हिन्दी में आ गये हैं, देशज शब्द कहलाते हैं। जैसे- पेड़, खिड़की, गाड़ी, माखन, चिड़िया, जूता, कटोरा, लोटा, पगड़ी।
  4. विदेशी शब्द-अन्य देशों की भाषाओं से हिन्दी में आए शब्द को विदेशी शब्द कहते हैं। जैसे-स्टेशन, स्कूल, पिस्तौल, बोतल, पाजामा, दुकान, तमाशा।
  5. संकर-ऐसे शब्द जो तत्सम, तद्भव, देशज एवं अन्य किसी विदेशी भाषा से मिलकर बनते हैं, संकर शब्द कहलाते हैं। जैसे-डबल रोटी, रेलगाड़ी, अजायबघर।

कुछ प्रमुख तत्सम/तद्भव शब्द
MP Board Class 6th Special Hindi व्याकरण 1
MP Board Class 6th Special Hindi व्याकरण 2

उपसर्ग

परिभाषा-वे शब्द या शब्दांश जो शब्दों के पूर्व (पहले) जुड़कर नये शब्द बनाते हैं, उपसर्ग कहलाते हैं। जैसे-‘अ’ उपसर्ग से अज्ञान, असफल आदि शब्द बनते हैं।

उपसर्ग लगाने से शब्द का अर्थ बदल जाता है। जैसे-डर का अर्थ भय है किन्तु इसके आगे ‘नि’ उपसर्ग लगाकर निडर शब्द बनता है जिसका अर्थ है ‘न’ डरने वाला।

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उपसर्ग से बने हुआ शब्द निमन प्रकार के हैं-
MP Board Class 6th Special Hindi व्याकरण 3

प्रत्यय

परिभाषा-वे शब्द या शब्दांश जो किसी शब्द के अन्त में लगाने से नया शब्द बनाते हैं, प्रत्यय कहलाते हैं। जैसे-गाड़ी शब्द में ‘वान’ प्रत्यय लगाने से ‘गाड़ीवान’ शब्द बना है। प्रत्यय लगाने से शब्द का अर्थ परिवर्तित हो जाता है। जैसे-मोटा में यदि ‘पा’ प्रत्यय लग जाये तो मोटापा हो जाता है। कुछ प्रत्यय निम्नलिखित हैं-
MP Board Class 6th Special Hindi व्याकरण 4

काल

परिभाषा-“क्रिया के जिस रूप से उसके होने अथवा करने का समय ज्ञात होता है, उसे काल कहते हैं।
काल के भेद-मुख्य रूप से काल के निम्नलिखित भेद होते हैं

  1. वर्तमान काल-जिस काल में क्रिया का वर्तमान समय में होना पाया जाता है, उसे वर्तमान काल कहते हैं।
    उदाहरण के लिए-मैं पढ़ रहा हूँ।
  2. भूतकाल-जिस काल में क्रिया का बीते हुए समय में होना पाया जाय, उसे भूतकाल कहते हैं।
    उदाहरण के लिए-मैं पढ़ रहा था।
  3. भविष्य काल-जिस काल में क्रिया का आने वाले समय में होना पाया जाता है,उसे भविष्य काल कहते हैं।
    उदाहरण के लिए-मैं पढ़ रहा हूँगा।

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वाक्य प्रकार

वाक्य विचार
परिभाषा-शब्दों के उस क्रमबद्ध समूह को वाक्य कहते हैं, जिससे अर्थ पूरी तरह से स्पष्ट हो जाए। जैसे-‘गंगातट पर स्थित एक पाठशाला में आचार्य ध्रुवनारायण पढ़ाया करते थे।’

भाव और अर्थ को स्पष्ट करने वाला वाक्य सफल कहा जाता है। सरल और सुन्दर वाक्य में अग्रलिखित गुण होने चाहिए

  1. आकांक्षा,
  2. योग्यता,
  3. आसक्ति या सन्निधि,
  4. पदक्रम,
  5. अन्विति,
  6. सार्थकता।

मुख्य रूप से वाक्य के निम्नलिखित तीन प्रकार होते हैं-

  1. विधिवाचक वाक्य-जिन वाक्यों से किसी बात के होने का बोध होता है, विधिवाचक वाक्य कहलाते हैं।
    उदाहरण के लिए-

    • जुम्मन शेख की एक बूढ़ी खाला थी।
    • मैं आज वहाँ जाऊँगा।
  2. निषेधवाचक वाक्य-जिन वाक्यों में किसी बात के न होने अथवा न करने का बोध होता है, निषेधवाचक वाक्य कहलाते हैं।
    उदाहरण के लिए-

    • मैं स्कूल नहीं जाऊँगा।
    • उसने खाना नहीं खाया।
  3. आज्ञावाचक वाक्य-जिन वाक्यों से किसी भी प्रकार की आज्ञा का बोध होता है, आज्ञावाचक वाक्य कहलाते हैं।
    उदाहरण के लिए-

    1. वहाँ कौन है ?
    2. क्या तुम वहाँ नहीं गये ?

लिंग

परिभाषा-जिस संज्ञा शब्द से किसी स्त्री अथवा पुरुष जाति का ज्ञान होता है, उसे हम लिंग कहते हैं। हिन्दी में लिंग के निम्नलिखित दो भेद हैं

  1. स्त्रीलिंग-जिस संज्ञा शब्द से स्त्री जाति का बोध होता है, उसे हम स्त्रीलिंग कहते हैं। यथा- गाय, लड़की, बिल्ली।
  2. पुल्लिंग-जिस संज्ञा शब्द से पुरुष जाति का बोध होता है। उसे हम पुल्लिंग कहते हैं, यथा-अक्षयकुमार, कनिष्क, कुत्ता, बैल, लड़का।

वचन

परिभाषा-“संज्ञा अथवा सर्वनाम के जिस रूप से वस्तु अथवा प्राणी की संख्या का बोध होता है, उसे वचन कहते हैं।

वचन के भेद-मुख्य रूप से वचन के निम्नलिखित दो भेद होते हैं-

  1. एकवचन-संज्ञा अथवा सर्वनाम का वह रूप जिससे एक ही वस्तु अथवा प्राणी का बोध होता है, एकवचन कहलाता है। जैसे-वायु, पुस्तक, मटका, लड़का आदि।
  2. बहुवचन-संज्ञा अथवा सर्वनाम का वह रूप जिससे एक से अधिक वस्तु अथवा प्राणी का बोध होता है, उसे बहुवचन कहते हैं। – जैसे- गायें, पुस्तकें, मटके, लड़के आदि।

सन्धि
परिभाषा-दो वर्णों के मेल से होने वाले विकार को संधि कहते हैं। यथा–रमेश में = रमा + ईश (आ + इ = ए हो गया)।

सन्धि के भेद-सन्धि के निम्नलिखित तीन भेद होते हैं-
1. स्वर संधि-दो स्वरों के परस्पर मेल से होने वाले विकार को स्वर संधि कहते हैं। यथा-हिमालय में, हिम + आलय = अ + आ = आ हो गया।

उदाहरण-

  1. सूर्य + अस्त (अ + अ = आ) = सूर्यास्त।
  2. कवि + इन्द्र (इ + इ = ई) = कवीन्द्र।
  3. नदी + ईश (ई + ई = ई) = नदीश।
  4. सु + उक्ति (उ + उ = ऊ) = सूक्ति।
  5. लघु + ऊर्मि (उ+ ऊ = ऊ) लघूर्मि।

उपर्युक्त उदाहरणों में दर्शाया गया है कि जब दो सवर्ण (समान वर्ण अर्थात् अ, आ के साथ अ या आ हो) हस्व या दीर्घ स्वर परस्पर निकट होने के कारण मिल जाते हैं, तो दोनों के मिलने पर दीर्घ स्वर हो जाता है।

2. व्यंजन संधि-व्यंजन के साथ स्वर अथवा व्यंजन के मेल को व्यंजन संधि कहते हैं।

  • यथा-सत् + जन = सज्जन।
  • जगत् + नाथ = जगन्नाथ।

3. विसर्ग संधि-विसर्ग के साथ स्वर अथवा व्यंजन के मेल को विसर्ग संधि कहते हैं।
यथा-

  • निः + फल = निष्फल।
  • मनः + हर = मनोहर,
  • तेजः + मय = तेजोमयः,
  • निः + धन = निर्धन।

समास

परिभाषा-दो शब्दों को मिलाकर जो नया पद बनता है वह समास कहलाता है।

जैसे-
राजपुत्र = राजा का पुत्र ।

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समास के भेद-समास के निम्नलिखित छः भेद होते हैं-

1. तत्पुरुष समास-जिस समास में प्रथमा से लेकर सप्तमी तक विभक्ति का लोप हो, वहाँ तत्पुरुष समास होता है।
जैसे-

  • राजमाता = राजा की माता।
  • राज पुत्र = राजा का पुत्र।

2. कर्मधारय समास-विशेषण एवं विशेष्य के योग से बने समास को कर्मधारय कहते हैं,
जैसे-

  • नील कमल, काला घोड़ा, लाल गुलाब आदि।

3. द्वन्द्व समास-इसमें दो पदों के बीच और का लोप होता है।
जैसे-

  • राम-सीता = राम और सीता।
  • लाभ-हानि = लाभ और हानि।

4. द्विगु समास-इसमें पहला शब्द संख्यावाचक होता है।
जैसे-

  • नवरत्न = नव रत्नों का समूह;
  • चौराहा = चार राहों का समूह आदि।

5. बहुब्रीहि समास-जिसमें अन्य अर्थ प्रधान हो।
जैसे-

  • दशानन = दश हैं आनन जिसके अर्थात् रावण
  • चन्द्रशेखर = चन्द्रमा है शिखर पर जिसके अर्थात् शंकर जी।

6. अव्ययी भाव समास-जिस पद में प्रथम पद अव्यय हो।
जैसे-

  • यथाशक्ति = शक्ति के अनुसार;
  • प्रतिदिन = दिन-दिन आदि।

मुहावरे

परिभाषा-जब वाक्य में किसी शब्द या शब्द-समूह का सामान्य अर्थ न लेकर उसका अन्य विशेष अर्थ लिया जाता है, तब उसे मुहावरा कहते हैं। जैसे-‘पेट में चूहे कूदना’ का अर्थ है-‘भूख लगना’। इसका वाक्य प्रयोग होगा-‘आज तो मेरे पेट में चूहे कूद रहे हैं।’

कुछ प्रमुख मुहावरे
(अर्थ व प्रयोग सहित)
1. बगुलों में हंस-मूों में बुद्धिमान। आजकल कपट वेषधारी मनुष्यों की वजह से बगुलों में हंस की परख कठिन है।
2. हृदय पर साँप लेटना-जलन से दुःखी होना। कारगिल के मोर्चे पर भारत से परास्त होने पर पाकिस्तान के हृदय पर साँप लोट गया।
3. खून की नदी बहाना-बहुतों को मार गिराना। सम्राट अशोक ने कलिंग के युद्ध में खून की नदी बहा दी।
4. प्राण फूंकना-उत्साहित करना। पूर्व प्रधानमन्त्री लाल बहादुर शास्त्री ने विगत भारत-पाक युद्ध में सैनिकों में नये प्राण फूंक दिए। ‘
5.कलेजा धड़कना-व्याकुल होना। अनहोनी की आशंका से मेरा कलेजा धड़क रहा है।
6. मंत्र मुग्ध-अत्यधिक वश में। रामायण की चौपाइयों को सुनकर लोग मंत्र मुग्ध हो जाते हैं।
7. छाती चौड़ी होना-खुशी या स्वाभिमान का अनुभव होना। भारतीय सैनिकों के शौर्यपूर्ण कारनामों से देशवासियों की छाती चौड़ी हो जाती है।
8. पीठ ठोंकना-शाबासी देना, जोश भरना। अक्षय कुमार परीक्षा में प्रथम श्रेणी के अंक लेकर उत्तीर्ण हुआ है, अत: उसकी पीठ ठोंकनी चाहिए।
9. दस्तक देना-खटखटाना। असमय किसी के घर जाकर दस्तक देना बुरी बात है।
10. गोद सूनी होना-संतान का मरना। भारत-पाक युद्ध में न जाने कितनी माँ-बहिनों की गोद सूनी हो गई।
11. कार्य सिद्ध होना-काम सम्पन्न होना। भगवान की कृपा से ही मेरी पुत्री के विवाह का कार्य सफलतापूर्वक सिद्ध हो गया।
12. जीवन से हाथ धोना-जिन्दगी गँवाना। भीड़ भरी सड़क पर असावधानी से चलने की वजह से कभी-कभी जीवन से हाथ धोना पड़ता है।
13. आँख में खटकना-बुरा लगना। आलसी मनुष्य सबकी आँखों में खटकते हैं।
14. अवस्था ढलना-वृद्ध होना। अवस्था ढलने पर हाथ-पाँव शिथिल हो जाते हैं।
15. साक्षात् चण्डी सी-बहुत अधिक गुस्से में। युद्ध के मैदानी में झाँसी की रानी साक्षात् चण्डी का रूप धारण किए हुए थी।
16. मन मोह लेना-आकर्षित करना। संगीत की मधुर ध्वनि सबका मन मोह लेती है।
17. दम लेना-परिश्रम के बाद सुस्ताना। कठिन श्रम के बाद दम लेना आवश्यक है।
18. माँग का सिन्दूर पोंछना-किसी के पति को मौत के घाट उतारना। कलिंग के युद्ध में अनेक माँ-बहिनों की माँग का सिन्दूर पोंछ दिया गया।
19. भाग्य पर इठलाना-स्वयं पर गर्व करना। ओछे मनुष्य व्यर्थ में ही अपने भाग्य पर इठलाया करते हैं।
20. शीश चढ़ाना-जान कुर्बान करना। आजादी की लड़ाई में जाने कितने देश भक्तों ने अपने शीश चढ़ाकर अपने कर्तव्य का पालन किया।
21. खून में उबाल आना-उमंग का संचार होना। श्री लाल बहादुर के ओजमय भाषण से सैनिकों के खून में उबाल “आने लगा।
22. आँखों में खून उतरना-अत्यधिक क्रोध में भरना। मुगलों की ललकार सुनकर राणा प्रताप की आँखों में खून उतर आया।
23. सिर पर पाँव रखकर भागना-शीघ्रता से भागना। प्रधानाचार्य को आता देखकर शरारती छात्र सिर पर पाँव रखकर भागा।
24.खून पसीना एक करना-अथक परिश्रम करना। राम ने परीक्षा में उत्तीर्ण होने के लिये खून पसीना एक कर दिया।
25. हाथ पैर जवाब देना-अधिक थक जाना। रमेश का घर ढूँढ़ते-ढूँढ़ते मेरे हाथ-पैर जवाब दे गये।
26. चकमा देना-धोखा देना। सीता को चकमा देकर उसका पड़ोसी पाँच सौ रुपये ले गया।
27. ईद का चाँद होना-बहुत समय बाद मिलना। रजनीकान्त बाहर नौकरी करने के कारण आजकल ईद का चाँद हो गया है।
28. हवाई किले बनाना-कल्पित योजनाएँ बनाना। आलसी आदमी बैठे-बैठे हवाई किले बनाता रहता है।
29. छक्के छुड़ाना-हरा देना। हल्दी घाटी के युद्ध में सैनिकों ने मुगल सेना के छक्के छुड़ा दिये।
30. कोल्हू का बैल-दिन-रात मेहनत करना। पिता की मृत्यु के पश्चात् मोहन परिवार का पेट भरने के लिये कोल्हू का बैल बना रहता है।
31. ईंट से ईंट बजाना-पूर्ण रूप से नष्ट कर देना। मराठों ने दुश्मन सेना की ईंट से ईंट बजा दी।
32. उड़ती चिड़िया पहचानना-मन का भाव जानना। ओमप्रकाश इतना चतुर है कि वह उड़ती चिड़िया को पहचान लेता है।
33. मिट्टी में मिलना-नष्ट होना। बाढ़ के कारण सैकड़ों भवन मिट्टी में मिल गये।
34. कुत्ते की मौत मरना-दयनीय दशा में मरना। कोढ़ होने के कारण वह कुत्ते की मौत मरा।
35.घी के दिये जलाना-बहुत अधिक खुशी मनाना। देश के आजाद होने पर लोगों ने घी के दिये जलाये।
36. कंधे डालना-हार स्वीकार करना। कैलाश मेले के अवसर पर अपार जन-समूह को देखकर पुलिस ने कंधे डाल दिये।
37. आग बबूला होना-गुस्सा करना। राम अपने पुत्र को जूआ खेलते देखकर आग बबूला हो गया।
38. कान का कच्चा होना-चुगलखोरों पर भरोसा करना। प्रधानाचार्य कान का कच्चा होने के कारण लिपिक की बात को सत्य मान लेते हैं।
39. आँख का तारा होना-बहुत प्यारा होना। श्रवण कुमार अपने माता-पिता की आँखों का तारा था।
40. आँखें दिखाना-गुस्सा करना। पिता ने जैसे ही आँखें दिखाई, पुत्र चुप हो गया।
41. उल्लू सीधा करना-मतलब पूरा करना। आजकल लोग अपना उल्लू सीधा करने में माहिर हैं।
42. सन्नाटा पसरना-शान्ति छाई रहना। विद्यालय में तो सन्नाटा पसरा हुआ है।
43. गप्पें लड़ाना-व्यर्थ की बातें करना। मुझे गप्पें लड़ाना अच्छा नहीं लगता है।
44. हाथ बँटाना-काम में सहायता करना। अब तो मोहन का पुत्र उसका हाथ बँटाने लगा है।
45. अन्धे की लाठी-एकमात्र सहारा। मोहन तो अपने पिता के लिए अन्धे की लाठी है।
46. अंगूठा दिखाना-इन्कार कर देना। रवि ने सहायता करने के नाम पर अंगूठा दिखा दिया।
47. फूटी आँख न सुहाना-बिल्कुल अच्छा न लगना। लक्ष्मण को राक्षस फूटी आँख भी न सुहाते थे।
48. आग में घी डालना-क्रोध को और भड़काना। लक्ष्मण की तीखी बातों ने परशुराम की आग में घी डाल दिया।
49. एक तो चोरी दूसरे सीना जोरी-अपराधी होकर अकड़ना। राधा ने श्याम की पेंसिल तोड़ दी। उलाहना देते हुए उसने एक तो चोरी की दूसरी सीना जोरी भी की।
50. तू डाल-डाल, मैं पात-पात-तू तो चतुर है, मगर मैं तुझसे भी चतुर हूँ। सही बात के लिए तू डाल-डाल मत डोल, मैं भी फिर पात-पात पर आऊँगा।

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लोकोक्तियाँ
मुहावरे के समान वाक्यों में लोकोक्तियों का प्रयोग भी किया जाता है। लोकोक्ति शब्द ‘लोक’ और ‘उक्ति’ से मिलकर बना है। लोकोक्तियाँ सामाजिक जीवन के अनुभव के आधार पर बनती हैं। हम इनका प्रयोग आवश्यकता के अनुसार करते हैं। कहीं कथन की पुष्टि के लिए तो कहीं उपदेश देने के लिए। लोकोक्तियों का प्रयोग प्रभावकारी सिद्ध होता है। लोकोक्तियाँ मुहावरे की भाँति वाक्य का अंग नहीं होती। ये प्रायः पूर्ण वाक्य होती हैं। इन्हें ‘कहावत’ भी कहते हैं।

लोकोक्तियाँ विशेष सन्दर्भ में प्रयुक्त होती हैं और उनका विशेष अर्थ ही लिया जाता है; जैसे-‘कोयल होय न ऊजरी, सौ मन साबुन लाय। इसमें कोयल’ उसके जन्मजात गुण कालापन को प्रकट करता है, ऊजरी होना’ इस गुण के परिवर्तन को प्रकट करता है और ‘सौ मन साबुन लाय’ विभिन्न उपायों का बोध कराता है। यही विशेष अर्थ है। अतः पूरी लोकोक्ति का अर्थ है, ‘भिन्न-भिन्न उपायों से भी व्यक्ति का जन्मजात गुण या अवगुण बदला नहीं जा सकता।’

मुहावरा और लोकोक्ति में अंतर मुहावरे का प्रयोग वाक्यांश की भाँति किया जाता है जबकि लोकोक्ति का प्रयोग कथन के अंत में, स्वतन्त्र वाक्य के रूप में किया जाता है।

कुछ प्रमुख लोकोक्तियाँ
नीचे कुछ लोकोक्तियाँ व उनके अर्थ दिए गए हैं, इनका वाक्यों में प्रयोग कीजिए

  1. अकेला चना भाड़ नहीं फोड़ सकता-कोई बड़ा काम अकेले नहीं किया जा सकता है।
    राम भला इतने बड़े खेत को एक दिन में कैसे जोत पाता ठीक ही है, अकेला चना भाड़ नहीं फोड़ सकता।
  2. अधजल गगरी छलकत जाए-अल्पज्ञान वाला बहुत बढ़-चढ़कर बोलता है।
    आठवीं फेल राजू बात ऐसी करता है मानो दुनिया में सबसे बड़ा विद्वान वही है। किसी ने ठीक ही कहा है कि अधजल गगरी छलकत जाए।
  3. आम के आम गुठलियों के दाम-एक काम से दो लाभ।
    सरिता छोटे बच्चों को ट्यूशन पढ़ाकर पैसे भी कमा लेती है और उसके ज्ञान में भी वृद्धि होती है। ठीक ही कहा है, आम के आम गुठलियों के दाम।
  4. जिसकी लाठी उसकी भैंस-बलवान की ही जीत होती है।
    गाँव के जमींदार ने गरीब अलगू की भूमि जबरन कब्जा ली। किसी ने ठीक ही कहा है, जिसकी लाठी उसकी भैंस।
  5. होनहार बिरवान के होत चीकने पात-प्रतिभाशाली व्यक्तियों के लक्षण बचपन में ही प्रकट हो जाते हैं।
    प्रसिद्ध भारतीय गणितज्ञ रामानुजम् बचपन से ही गणित विषय में पारंगत थे। शायद ऐसे ही लोगों के लिए कहा जाता है, होनहार बिरवान के होत चीकने पात।
  6. कंगाली में आटा गीला-मुसीबत में मुसीबत आना।
    बड़ी कठिनाई से तो रवि ने अपने पुत्र को पढ़ने भेजा, ऊपर से वह फेल हो गया; तभी तो कहते हैं कंगाली में आटा गीला।

अलंकार

परिभाषा-कविता को सजाने वाले शब्द और अर्थ से युक्त वाक्यों को अलंकार कहते हैं। कुछ प्रमुख अलंकार हैं
यमक-
जहाँ एक शब्द के दो अर्थ होते हैं।

जैसे-
कनक कनक ते सौ गुनी मादकता अधिकाय।
वा खाये बौराय जग या पाये बौराय।

श्लेष-
जिसमें एक शब्द के कई अर्थ हैं,

जैसे-
पानी गये न ऊबरे मोती मानस चून।

यहाँ पानी शब्द के आब, प्रतिष्ठा और जल यह तीन अर्थ हैं।

उपमा-
जब एक वस्तु की दूसरी से तुलना की जाए वहाँ उपमा अलंकार होता है।

जैसे-
तवा समा तपती थी वसुन्धरा।
यहाँ जेठ की तपती धरती को तवे के समान बतलाया गया है।

रूपक-
जहाँ एक वस्तु को दूसरी वस्तु का रूप दिया जाये।

जैसे-
चरण कमल वन्दों हरि-राई।
यहाँ भगवान के चरणों को कमल का रूप दिया गया है।

अनुप्रास-
कविता में जहाँ एक ही वर्ण से प्रारम्भ होने वाले शब्दों का प्रयोग बार-बार किया जाता है, वहाँ अनुप्रास अलंकार होता है।
रघुपति राघव राजा राम। यहाँ ‘र’ वर्ण की आवृत्ति हुई है।

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विराम चिन्ह

विराम का शाब्दिक अर्थ है रुकना, ठहराव या विश्राम। पढ़ते – वक्त शब्दों या वाक्य के आखिर में रुकने के हेतु प्रयोग होने वाले चिन्हों को विराम कहा जाता है।

  1. पूर्ण विराम-इसका चिन्ह (।) है। इसका प्रयोग वाक्य के अन्त में होता है।
  2. अल्प विराम-इसका चिन्ह (,) है। यह शब्द के पश्चात् थोड़ी देर रुकने के लिए प्रयुक्त होता है। यथा-कनिष्क, पल्लव और अक्षय बाजार गये।
  3. अर्द्ध विराम-इसका चिन्ह (;) है। अर्द्ध विराम का प्रयोग अल्प विराम से कुछ अधिक देर तक रुकने के लिए होता है। यथा-पल्लव साल भर पढ़ा; परन्तु परीक्षा में सफल न हो सका।
  4. संयोजक चिह्न-इसका चिन्ह (-) है। दो या दो से . अधिक शब्दों में सम्बन्ध व्यक्त करने के लिए संयोजक चिन्ह प्रयोग में लाया जाता है। यथा-सुख-दु:ख, धीरे-धीरे।
  5. विस्मयादिबोधक-इनका चिन्ह (!) है। यह विस्मय सूचक शब्द या वाक्य के पश्चात् लगाया जाता है। यथा-हे राम! तुम कहाँ गए ? \
  6. प्रश्नवाचक-इसका चिन्ह (?) है। प्रश्न पूछने की जगह इसका प्रयोग होता है। यथा-तुम कहाँ रहते हो ?
  7. खाली स्थान-इसका चिन्ह (……..) है। इसका प्रयोग रिक्त स्थान के निमित्त होता है।
  8. विवरण चिह्न-किसी बात को स्पष्ट करने के लिए (:) इसका प्रयोग होता है।
  9. कोष्ठक-इसका चिन्ह () है। किसी का विभाजन करते समय कोष्ठकों में रखकर संख्या डालते चलते हैं। यथा-संज्ञा तीन प्रकार की होती है-
    • व्यक्तिवाचक,
    • जातिवाचक,
    • भाववाचक।
  10. हंस पद या त्रुटिसूचक चिह्न (4)-जब वाक्य में लिखते समय कुछ अंश छूट जाता है तब हंस पद (A) का प्रयोग करते हैं।

पर्यायवाची शब्द

परिभाषा-“जिन शब्दों का अर्थ समान हो, उन्हें समानार्थी अथवा पर्यायवाची शब्द कहते हैं।
जैसे- फूल को पुष्प, कुसुम, सुमन, पुहुप आदि भी कहते

  • कुछ प्रमुख पर्यायवाची शब्द
  • अमृत-सोम, अमी, सुधा, पीयूष।
  • अग्नि-आग, अनल, पावक, हुताशन।
  • आकाश-गगन, नभ, अम्बर, व्योम।
  • अश्व-हय, घोटक, तुरंग, सैन्धव।
  • चन्द्रमा-सुधांशु, राकापति, सुधाकर, शशी।
  • गंगा-सुरसरि, भागीरथी, देवनदी, त्रिपथगा।
  • यमुना-अर्कजा, तरणिजा, कालिन्दी, रविसुता।
  • पानी-नीर, अम्बु, वारि, तोय, जल।
  • कमल-नीरज, अम्बुज, वारिज, जलज।
  • मेघ-नीरद, अम्बुद, जलद, वारिद।
  • समुद्र-वारिधि, सागर, पयोधि, नीरधि।
  • असुर-दानव, दैत्य, निशाचर।
  • इन्द्र-सुरपति, शचीपति, देवेन्द्र, शक्र।
  • तालाब-तड़ाग, सरसी, सरोवर, सर।
  • दिन-दिवस, वासर, दिवा, अहन।
  • पवन-वायु, मरुत, समीर, वात।
  • नदी-सरिता, तटिनी, नद, तरंगिणी।
  • पर्वत-भूधर, गिरि, नग, महोदर।
  • पृथ्वी-भू, भूमि, मही, धरा।
  • फल-सुमन, पुष्प, प्रसून।
  • राजा-भूपति, महीपति, नृप, महीप।
  • रात-निशा, रैन, रजनी, रात्रि।
  • सूर्य-भानु, दिनकर, दिवाकर, रवि।
  • सोना-हाटक, स्वर्ण, कंचन।
  • हाथी-गज, नाग, हसती, वारण।
  • जंगल-वन, कानन, अरण्य।
  • पेड़-वृक्ष, पादप, विटप, तरु।
  • आँख-नेत्र, चक्षु, नयन।
  • ईश्वर-परमात्मा, सर्वेश्वर, अन्तर्यामी, प्रभु।
  • पुत्र-सुत, तात, आत्मज, बेटा, तनय।
  • हिमालय-नगराज, पर्वतराज, गिरिराज, हिमगिरि।
  • पुत्री-सुता, तनया, बेटी, आत्मजा।
  • कर-गृह, निकेतन, आवास, निवास।
  • हाथ-कर, भुजाग्र, हस्त। मित्र-सखा, सहचर, सुहृद।

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विलोम शब्द

परिभाषा-“ऐसे शब्द जो किसी शब्द का विपरीत अर्थ बताते हैं, उन्हें विपरीतार्थी अथवा विलोम शब्द कहते हैं। जैसे-ऊँचा का विलोम शब्द नीचा है।

कुछ प्रमुख विलोम शब्द
MP Board Class 6th Special Hindi व्याकरण 5
MP Board Class 6th Special Hindi व्याकरण 6
MP Board Class 6th Special Hindi व्याकरण 7

वाक्यांश के लिए एक शब्द

परिभाषा-“वे शब्द जिन्हें पूरे वाक्य या किसी शब्द समूह के स्थान पर प्रयोग किया जाता है, अनेक शब्दों के लिए एक शब्द कहा जाता है। जैसे- ‘जिसे कोई डर न हो’ को हम शब्द संक्षेप में ‘निडर’लिख सकते हैं।
MP Board Class 6th Special Hindi व्याकरण 8
MP Board Class 6th Special Hindi व्याकरण 9
MP Board Class 6th Special Hindi व्याकरण 10

अव्यय

परिभाषा-वे शब्द जिनके रूप में लिंग, वचन व कारक आदि के कारण कोई परिवर्तन नहीं होता है, उन्हें अव्यय कहते हैं। जैसे-धीरे, दूर, परन्तु, शीघ्र लेकिन आदि।

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अव्यय के भेद-मुख्य रूप से अव्यय के निम्नलिखित चार भेद होते हैं.

  1. क्रिया विशेषण
  2. सम्बन्ध बोधक
  3. समुच्चय बोधक
  4. विस्मयादि बोधक।

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MP Board Class 7th Hindi Bhasha Bharti महत्त्वपूर्ण पाठों के सारांश

MP Board Class 7th Hindi Bhasha Bharti Solutions महत्त्वपूर्ण पाठों के सारांश

मेरी भावना

‘मेरी भावना’ नामक कविता में जुगल किशोर ‘युगवीर’ ने हम सभी को सदुपदेश दिया है कि हमारे अन्दर अभिमान, ईर्ष्या, द्वेष और क्रोध की भावना न रहे। सबके प्रति हमारा व्यवहार सरल और सत्य से परिपूर्ण हो तथा प्रत्येक क्षण दूसरों का उपकार करने की भावना बनी रहे। सभी जीवों के प्रति मैत्री भाव और करुणा का स्रोत हमारे हदयों में बहता रहे। समता का भाव बना रहे। दुर्जनों की संगति से बचे रहें। गुणवान जनों का सम्मान करते रहें। हम सदैव किए गये उपकार को भूले नहीं। द्रोह न करें. दोषों को न देखें। न्याय मार्ग पर चलें,लालच में न फंसे। मृत्यु का भी भय न हो।

अन्त में कवि कामना करता है कि संसार के सभी लोग परस्पर प्रेमपूर्वक रहें। उनमें मोह भाव उत्पन्न हो। किसी से कोई भी कटु वचन बोलने वाला न हो।

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छोटा जादूगर

कार्निवाल के मैदान में मेला लगा था। चारों ओर बिजली की जगमगाहट थी। फब्बारे के पास लेखक खड़ा था। वहीं एक लड़का चुपचाप उन लोगों को देख रहा था जो शरबत पी रहे थे। इस लड़के की उम्र तेरह-चौदह वर्ष की रही होगी। उसका कुर्ता फटा था। उसके गले में एक मोटी-सी सूत की रस्सी पड़ी थी। उसकी जेब में ताश के पत्ते थे। उसके चेहरे से दु:ख टपक रहा था, लेकिन वह धैर्यवान था।

लेखक के पूछने पर उसने बताया कि वह वहाँ के जादूगर से भी अच्छा ताश का खेल दिखा सकता है। लेखक और छोटा जादूगर दोनों शरबत पीते हैं। लेखक ने परिचय पूछा, तो उसने बताया कि उसके परिवार में तीन आदमी है-उसकी माँ और बाप तथा वह स्वयं। उसके पिता देश की आजादी के लिए जेल गये हैं। माँ बीमार है। माँ के बीमार होते हुए भी वह खेल दिखाने के लिए चला आया है। खेल-तमाशा दिखाने से मिले पैसों से माँ की बीमारी का इलाज करता है और अपना पेट भी भरता है, परन्तु इस कमाई से खर्च पूरा नहीं होता है।

लेखक की पत्नी ने कमलिनी की छोटी झील पर उसे एक रुपया खेल दिखाने के लिए दिया। वह उसे लेकर चलने लगा। छोटा जादूगर ने बताया कि सबसे पहले वह पकौड़े खायेगा और फिर सूती चादर खरीदेगा अपनी माँ के लिए। लेखक ने अपनी स्वार्थ भरी आदत पर अचम्भा किया। छोटा जादूगर नमस्कार करके चला गया। लेखक अपने परिवार सहित कुंज देखने चला जाता है। छोटा जादूगर उन्हें वहाँ स्मरण हो आता है।छोटा जादूगर की माँ को अस्पताल से बाहर निकाल दिया गया है। लेखक भी अपनी कार से उतर छोटे जादूगर की झोपड़ी में उसकी बीमार काँपती हुई माँ को देखता है। उसकी दशा दयनीय थी।

छोटा जादूगर अन्य किसी दिन उद्यान में अपना रंगमंच जमाये हुए है। विभिन्न खेल दिखा रहा है। लेखक ने आगे बढ़कर पूछा कि आज तुम्हारा खेल क्यों नहीं जमा है। छोटा जादूगर ने बताया कि “माँ ने कहा था कि आज तुरन्त चले आना। मेरी घड़ी समीप है।” लेखक ने कहा “फिर भी तुम खेल दिखाने चले आये।” लेखक के कहने पर उसने कहा ‘क्यों नहीं आता?’ लेखक ने तुरन्त ही उसका झोला गाड़ी में फेंका, उसे पीछ बैठाया और बताये मार्ग से गाड़ी चला दी।

कुछ क्षण में झोंपड़ी के सामने गाड़ी पहुँची। छोटा जादूगर दौड़कर “माँ, माँ” पुकारता हुआ झोपड़ी में घुसा। उस बीमार स्त्री के मुख से अस्पष्ट शब्द “बे……..” निकलकर रहा गया। छोटा जादूगर उससे लिपटा रो रहा था। लेखक चकित था। चारों ओर धूप फैली हुई थी। संसार सपना सा-एक जादू-सा चारों ओर नाचता-सा लग रहा था।

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हींगवाला 

लगभग पैंतीस वर्ष का एक खान “अम्माँ हींगवाला” कहता हुआ सावित्री के आँगन में मौलश्री के पेड़ के चबूतरे पर आकर बैठ गया। सावित्री के नौ-दस बरस के बच्चे ने कहा कि अभी कुछ नहीं लेना है। खान ने फिर कहा कि वह अपने देश को लौट कर जा रहा है। बहुत दिनों में आयेगा। हींग ले लो। खान की बात सुन सावित्री रसोईघर से बाहर निकलकर आती है। खान कहता है कि वह उसके हाथ से बोहनी करना चाहता है। उसकी हींग, हेरा हींग है। वह धोखे का व्यापार नहीं करता है। सावित्री के न

चाहते हुए भी वह हींग तोलकर देता है जिसकी कीमत सवा छः आने होती है। सावित्री मूल्य देती है। खान चला जाता है। बच्चे अपनी खर्ची मांगने की रट लगाते हैं। सावित्री बच्चों को खाना खाने के लिए कहती है।समय बीता। होली निकली। शहर में दंगा हो गया। खान तो नहीं मर गया। वह हींग वालों की बात करते हुए खान को याद कर बैठती है।

एकदिन ‘खान’ अचानक ही “हींग है हींग” कहता हुआ सावित्री के घर में घुस जाता है। दंगे की बात करने पर खान ने कहा कि लड़ने वाले नासमझ हैं। दशहरे और होली के त्यौहारों पर दंगा हुआ। दशहरे का त्यौहार है। पक्के प्रबन्ध हैं। त्यौहार का जोश है। सावित्री का पति घर पर नहीं है। उसके बच्चे काली के जुलूस को देखने की जिद कर बैठते हैं। उसने घर के नौकर के साथ उन्हें जुलूस में भेज दिया।

थोड़ी देर बाद, सावित्री ने गली में लोगों की भगदड़ सुनी। उसने बाहर निकलकर पूछा कि वे क्यों भागे जा रहे हैं। लोगों ने कहा दंगा हो गया है। सावित्री सालभर के बच्चे सहित घर में अकेली है। जुलूस में गये बच्चों को देखने कैसे जाये। उसे न अन्दर चैन न बाहर। बच्चों को भेजने की अपनी मूर्खता के लिए स्वयं को कोस रही थी। देर रात का समय था। दरवाजे पर ‘खान’ बच्चों को लेकर आता है। घर का नौकर बच्चों को जुलूस में छोड़कर कहीं भाग गया। खान ने कहा “माँ, वक्त अच्छा नहीं। बच्चों को भीड़भाड़ में मत भेजा करो।” बच्चे सावित्री से लिपट जाते है। कहते हैं, ‘खान बहुत अच्छा आदमी है। खान हमारा दोस्त है।’ खान ने कहा, “दोस्त नहीं-भाई है।”

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नरबदी

मैकल पर्वत के घने जंगलों में आठ-दस झोपड़ियों का एक गाँव था। वहाँ एक झोपड़ी में दुग्गन रहता था। उसकी एक पुत्री थी नरबदी। उसकी माँ उसे जन्म देकर मर गयी थी। नरबदी अब बारह बरस की हो गयी थी। वह अपनी बेटी को सदा अपने साथ ही रखता था।

एक दिन झोपड़ी की मरम्मत के लिए वह एक बाँस लेने के लिए मैकल पर्वत पर गया। धूप तेज थी। वे दोनों चढ़ते गये। नरबदी को प्यास लगी। वह पानी की खोज में मैकल के घने वनों में इधर-उधर भटका। नरबदी पेड़ों की घनी छाया में बैठी रही। उसने अनुभव किया कि वह तो यहाँ छौंव में बैठी है। उसका पिता तो धूप और थकावट से बहुत प्यासा होगा। नरबदी देवता को मनाने लगी. “हे बड़े देवता ! तू मेरे बाबा की रक्षा करना।” लौटकर दुग्गन झुरमुट के पास पहुँचा।

नरबदी झुरमुट में नहीं दिखी। वह व्याकुल हो गया। तभी झुरमुट के बीच कल-कल की आवाज करते झरने को सुना। दुग्गन रोता हुआ अपनी पुत्री को पुकार रहा था। नरबदी झरने के रूप में कल-कल कर बहती जा रही थी। नरबदी ने दुग्गन से कहा, “तुम अपनी प्यास बुझा लो, मैं झरने में बदल गयी हूँ। अब इस जंगल में कोई प्यासा नहीं रहेगा।” नरबदी बाँसों के झुरमुटों से बह रही थी, कल-कल करती। वह तब से अमरकण्टक से बह रही है-समुद्र तक। वही नरबदी-नर्मदा के रूप में अमरकण्टक से जीवनरेखा बनकर बहती रहती है।

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MP Board Class 6th Maths Solutions Chapter 3 Playing With Numbers Ex 3.1

MP Board Class 6th Maths Solutions Chapter 3 Playing With Numbers Ex 3.1

Question 1.
Write all the factors of the following numbers:
(a) 24
(b) 15
(c) 21
(d) 27
(e) 12
(f) 20
(g) 18
(h) 23
(i) 36
Solution:
(a) 24 =1 × 24 = 2 × 12 = 3 × 8 = 4 × 6 = 6 × 4
∴ Factors of 24 are 1, 2, 3, 4, 6, 8, 12 and 24
(b) 15 = 1 × 15 = 3 × 5 = 5 × 3
∴ Factors of 15 are 1, 3, 5 and 15
(c) 21 = 1 × 21 = 3 × 7 = 7 × 3
∴ Factors of 21 are 1, 3, 7 and 21
(d) 27 = 1 × 27 = 3 × 9 = 9 × 3
∴ Factors of 27 are 1, 3, 9 and 27
(e) 12 = 1 × 12 = 2 × 6 = 3 × 4 = 4 × 3 = 6 × 2
∴ Factors of 12 are 1, 2, 3, 4, 6 and 12
(f) 20 = 1 × 20 = 2 × 10 = 4 × 5 = 5 × 4
∴ Factors of 20 are 1, 2, 4, 5, 10 and 20
(g) 18 = 1 × 18 = 2 × 9 = 3 × 6 = 6 × 3 = 9 × 2
∴ Factors of 18 are 1, 2, 3, 6, 9 and 18
(h) 23 = 1 × 23
∴ Factors of 23 are 1 and 23,
(i) 36 = 1 × 36 = 2 × 18 = 3 × 12 = 4 × 9 = 6 × 6
∴ Factors of 36 are 1, 2, 3, 4, 6, 9, 12, 18 and 36

MP Board Class 6th Maths Solutions Chapter 3 Playing With Numbers Ex 3.1

Question 2.
Write first five multiples of:
(a) 5
(b) 8
(c) 9
Solution:
(a) 5 × 1 = 5, 5 × 2 = 10, 5 × 3 = 15, 5 × 4 = 20, 5 × 5 = 25
∴ First five multiples of 5 are 5,10,15, 20, 25.
(b) 8 × 1 = 8, 8 × 2 = 16, 8 × 3 = 24, 8 × 4 = 32,
8 × 5 = 40
∴ First five multiples of 8 are 8,16, 24, 32, 40.
(c) 9 × 1 = 9, 9 × 2 = 18, 9 × 3 = 27, 9 × 4 = 36,
9 × 5 = 45
∴ First five multiples of 9 are 9, 18, 27, 36, 45.

MP Board Class 6th Maths Solutions Chapter 3 Playing With Numbers Ex 3.1

Question 3.
Match the items in column 1 with the items in column 2.
MP Board Class 6th Maths Solutions Chapter 3 Playing With Numbers Ex 3.1 1
Solution:
(i) ➝
(b) ;
(ii) ➝ (d);
(iii) ➝ (a);
(iv) ➝ (f);
(v) ➝ (c)
(a) Multiples of 8 are 8, 16, 24, 32, 40, ….
(b) Multiples of 7 are 7, 14, 21, 28, 35, …..
(c) Multiples of 70 are 70,140, 210, ……
(d) Factors of 30 are 1, 2, 3, 5, 6, 10,15, 30.
(e) Factors of 50 are 1, 2, 5, 10, 25.
(f) Factors of 20 are 1, 2, 4, 5, 10, 20.

MP Board Class 6th Maths Solutions Chapter 3 Playing With Numbers Ex 3.1

Question 4.
Find all the multiples of 9 upto 100.
Solution:
Multiples of 9 upto 100 are 9, 18, 27, 36, 45, 54, 63, 72, 81, 90, 99

MP Board Class 6th Maths Solutions

MP Board Class 7th Special Hindi पत्र-लेखन

MP Board Class 7th Special Hindi पत्र-लेखन

1. अवकाश के लिए प्रार्थना-पत्र

सेवा में,

श्रीमान् प्रधानाध्यापक महोदय,
शासकीय माध्यमिक विद्यालय,
चाँपा खेड़ा,
मन्दसौर (म. प्र.)

श्रीमान जी,
सविनय निवेदन है कि मेरे बड़े भाई का शुभ विवाह 15 अप्रैल, 20… को होना निश्चित हुआ है। भाई के विवाह में जाने के कारण मैं विद्यालय आने में असमर्थ हूँ। अत: मुझे पाँच दिन का अवकाश दिनांक 14.4.20… से 18.4.20… तक देने का कष्ट करें। आपकी बड़ी कृपा होगी।

दिनांक : 13.04.20…

प्रार्थी
सुमित राठी
कक्षा-7

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2. फीस माफी (शुल्क मुक्ति) केलिए प्रार्थना-पत्र

सेवा में,

श्रीमान् प्रधानाध्यापक महोदय,
शासकीय माध्यमिक विद्यालय,
पीपल्या मंडी,
नीमच, (म. प्र.)

श्रीमान् जी,
सविनय निवेदन है कि मैं आपके विद्यालय की कक्षा 7 का छात्र हूँ। मेरी पढ़ने में अत्यधिक रुचि है और अपनी कक्षा का मॉनीटर भी हूँ। मेरे पिता एक दफ्तर में चतुर्थी श्रेणी के कर्मचारी हैं। घर में पिताजी-माताजी सहित छः सदस्य हैं। सभी भाई-बहन आपके विद्यालय में ही शिक्षा प्राप्त कर रहे हैं। फीस देने में असमर्थ होने के कारण मुझे शुल्क से पूर्ण मुक्ति देने की कृपा करें।

दिनांक : 13.07.20…

विनीत
सावन कुमार
कक्षा-7

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3. पत्र मित्र को (समाचार-पत्र का महत्व बताते हुए)

अहिल्याबाई हॉस्टल
माध्यमिक विद्यालय
हवाई अड्डा मार्ग, इसौर
दिनांक : 15.03.20…

प्रिय मित्र मोहन,
सप्रेम नमस्ते।
मैं अपने सहपाठियों सहित हॉस्टल में कुशल हूँ। आशा | करता हूँ कि तुम भी सकुशल होंगे। अपनी पढ़ाई ठीक तरह कर रहे होंगे। मैंने अपने विद्यालय में होने वाली सामान्य ज्ञान परीक्षा दी। उसमें मैंने सबसे अच्छे अंक प्राप्त किए। इसका कारण था, मेरी वह आदत जिससे में प्रतिदिन समाचार-पत्र पढ़ता हूँ और एकत्रित सूचनाओं के आधार पर ही मैंने परीक्षा दी। मैं तुम्हें समाचार-पत्र पढ़ने के महत्व को बताता हूँ।

समाचार-पत्र पढ़ने से हमें सामाजिक, राजनैतिक, आर्थिक और धार्मिक जीवन के प्रत्येक पहलू से सम्बन्धित जानकारी – मिलती है। विज्ञान के आविष्कारों की जानकारी व लाभों से – अवगत होते हैं। भाषा-साहित्य का प्रचार और प्रसार भी इन्हीं से होता है। दूसरों के दृष्टिकोण की भी जानकारी मिलती है।

व्यापारियों के विज्ञापन भी आते हैं जिससे वस्तुओं की कीमतें आदि की भी जानकारी मिलती है। राष्ट्रीय जागरण व चेतना जगाने में समाचार-पत्रों का बड़ा महत्व है। शासन-प्रशासन की बुराइयों और भलाइयों को भी नागरिकों तक पहुँचाते हैं। सरकार के द्वारा बनाये गये कानून भी समाचार-पत्रों द्वारा जनता में प्रसारित होते हैं। इनसे ही जनता की राय भी जानी जाती है।

इस तरह समाचार-पत्रों का प्रतिदिन पढ़ना एक अच्छे छात्र के लिए बहुत ही लाभकारी है। अतः मैं तुम्हें इस पत्र के द्वारा – यह बताना चाहता हूँ कि तुम अवश्य ही प्रतिदिन समाचार-पत्र पढ़ा करो। इति

तुम्हारा मित्र
रवीन्द्र सहाय
कक्षा-7

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4. जन्मदिन पर बधाई पत्र (मित्र को)

दौलतगंज,
भोपाल (म. प्र.)
दिनांक : 21.06.20…

प्रिय मित्र प्रवीण शर्मा,
जय हिन्द

आज तुम्हारी 13वीं वर्षगाँठ है। इसके लिए मैं तुम्हें बधाई देता हूँ। तुम दीर्घायु हो, स्वस्थ रहो, ऐसी मेरी कामना है। उपहार के रूप में, तुम्हारे लिए अपने छोटे भाई के द्वारा मिठाई और फल भेज रहा हूँ। स्वीकार करें।

तुम्हारी स्नेही
राकेश मोहन

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5. निमंत्रण-पत्र (प्रीतिभोज हेतु) 

प्रिय बन्धु अजय गोपाल,
सादर नमस्ते।
आपको यह जानकर बड़ी प्रसन्नता होगी कि मेरे छोटे भाई का विवाह 10 जून, 20… को सम्पन्न हो रहा है। इस उपलक्ष्य में प्रतिभोज का आयोजन 12 जून, 20… को होगा। प्रीतिभोज का समय 5 बजे सायंकाल है।
अत: निवेदन है कि इस शुभ अवसर पर आप अपने माता-पिता सहित पधार कर आयोजन को सफल बनायें।
दिनांक : 06.06.20…

भवदीय
भुवन प्रकाश मंडी
रामदास, इन्दौर

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6. अवकाश के लिए प्रार्थना-पत्र (मलेरिया से पीड़ित होने पर)

सेवा में,

श्रीमान् प्रधानाध्यापक महोदय,
शासकीय माध्यमिक विद्यालय,
चौपा खेड़ा,
मन्दसौर (म. प्र.)

श्रीमान् जी,
सविनय निवेदन है कि मैं आपके विद्यालय की कक्षा-7 का छात्र हूँ। कल सायंकाल से मुझे ज्वर आ रहा है। सारी रात बेचैन रहा। प्रातः होने पर मैंने वैद्य जी से परामर्श कराया। उन्होंने मेरी नाड़ी जाँच की तो वे इस निष्कर्ष पर पहुँचे कि मैं मलेरिया से पीड़ित हूँ। उनका इलाज निरन्तर जारी है। अत: मैं विद्यालय आकर कक्षा में उपस्थित होने में असमर्थ हूँ। कृपया मुझे दिनांक 12.04.20… से 14.04.20… का अवकाश देने का कष्ट करें। ठीक होने पर वैद्य जी का चिकित्सा प्रमाण-पत्र प्रस्तुत कर दूंगा। पढ़ाई की हानि की भी पूर्ति सहपाठियों से सहायता लेकर कर लूँगा। यह मैं आपको विश्वास दिलाता हूँ।
दिनांक : 13.04.20…

प्रार्थी
स्वतन्त्र कुमार
कक्षा-7

MP Board Class 7th Hindi Solutions

MP Board Class 7th Special Hindi निबन्ध लेखन

MP Board Class 7th Special Hindi निबन्ध लेखन

1. कोई रोचक खेल (फुटबॉल)

प्रस्तावना-शिक्षा के साथ खेल की जरूरत –

शिक्षा से छात्र-छात्राओं का विकास होता है। उधर खेलों से उनके शरीर का विकास होता है। यदि बालक-बालिकाएँ शरीर से स्वस्थ होंगे तो उनका मन भी पढ़ाई में लगेगा। जो बालक शरीर से पुष्ट या स्वस्थ नहीं होते, उनका मानसिक विकास भी नहीं होता। यही कारण है कि बालकों को पढ़ाई के साथ ही खेल की सुविधा भी दी जाती है। विद्यालयों में कई तरह के खेल कराये जाते हैं। परन्तु इनमें से मुझे सबसे अधिक प्रिय लगने वाला खेल .’फुटबॉल’ है।

फुटबॉल खेल के नियम –
यह खेल विदेशी है। इसे पैरों से खेला जाता है। इसमें दो दल होते हैं। प्रत्येक दल में खेलने वालों की संख्या ग्यारह-ग्यारह होती है। फुटबॉल के खेल के मैदान की लम्बाई 115 मीटर और चौड़ाई 75 मीटर होती है। चौड़ाई वाली दिशाओं में आमने-सामने गोल क्षेत्र में खम्भे गाड़ देते हैं। इन खम्भों की लम्बाई दो मीटर होती है। इन खम्भों को आठ मीटर के अन्तर पर गाड़ा जाता है।

दोनों दलों का एक-एक खिलाड़ी विपक्षी खिलाड़ी को गोल में गेंद फेंकने से रोकता है। इसे गोलकीपर कहते हैं। दोनों पक्ष के खिलाड़ी विपक्षी गोल मुख में गेंद लेकर आगे बढ़कर हमला करते हैं। जो दल गोल के खम्बे के बीच से गोल को पार करने में सफल होता है, उसे विजयी घोषित कर दिया जाता है। यह खेल शरद ऋतु में प्रायःखेला जाता है। ठण्डे मुल्कों में यह खेल अधिक पसन्द किया जाता है। हमारे देश में भी यह खेल लोकप्रिय होता जा रहा है। फुटबॉल की

लोकप्रियता के कारण –
इस खेल में पक्षी और विपक्षी दलों के बाईस खिलाड़ियों को खेलने का मौका मिलता है। इस खेल के मैदान भी आसानी से मिल जाते हैं। इस खेल में भाग-दौड़ करने से व्यायाम भी हो जाता है। इस खेल के लिए किसी विशेष वेशभूषा की जरूरत नहीं होती। अमीर-गरीब, छोटे- बड़े सभी बिना भेद के इस खेल में भाग ले सकते हैं। यह साधारण वर्ग की जनता का प्रिय खेल बन गया है।

फुटबॉल खेल के लाभ –

यह खेल बहुत लाभप्रद है। इस खेल को खेलने से शरीर पुष्ट होता है। पूरे शरीर का व्यायाम हो जाता है। पसीने से शरीर के सभी विकार बाहर निकल जाते हैं।

शरीर में तेजी और स्फूर्ति आ जाती है। दिमाग भी ताजा बना रहता है। पढ़ाई करने में मन भी खूब लगता है। खिलाड़ियों में सहयोग और संवेदना जागृत हो जाती है। टीम की भावना जागृत हो जाती है। चरित्र का विकास होता है। खिलाड़ी समय के महत्व को समझने लगते हैं। अनुशासन के महत्त्व को जान लेते हैं।

उपसंहार-फुटबाल का खेल स्फूर्ति और प्रेरणा देता है। इस खेल पर विद्यालयों में उचित धन और समय-सुविधा देनी चाहिए।

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2. प्रदूषण

प्रस्तावना-प्रदूषण का अर्थ-
प्रदूषण के फैलने से चारों ओर का वातावरण बहुत ही दूषित हो जाता है। इसका प्रभाव हमारे शरीर पर उल्टा पड़ता है। प्रदूषण एक अनचाहा परिवर्तन है जो वायु, जल, भोजन, भौतिक, रासायनिक और जैविक गुणों पर विरोधी प्रभाव डालता है। इसलिए जीवधारियों के समग्र विकास के लिए वातावरण शुद्ध बनाए रखना बहुत आवश्यक है। वायु, जल, भोजन आदि तथा सामाजिक परिस्थितियाँ जब असन्तुलित रूप में रहती हैं, अथवा उनकी मात्रा कम या ज्यादा हो जाती है तो वातावरण दूषित हो जाता है। इस तरह का वातावरण जीवधारियों के लिए हानिकारक हो जाता है। इसे ही प्रदूषण कहते हैं।

प्रदूषण के प्रकार
1. वायु प्रदूषण-
वायुमण्डल में गैस एक निश्चित अनुपात में मिली रहती है। जीवधारी अपनी क्रियाओं और साँस लेने से ऑक्सीजन तथा कार्बन डाइऑक्साइड का सन्तुलन बनाए रखते हैं, परन्तु आदमी ने अपनी अज्ञानता के कारण इस सन्तुलन को बिगाड़ दिया है। वह वनों को काटता है, जिससे वातावरण में ऑक्सीजन कम हो रही है। चिमनियों के धुएँ से कार्बन डाईऑक्साइड, सल्फर डाईऑक्साइड का अनुपात वातावरण में बढ़ रहा है। इन सबका प्रभाव मानव शरीर, वस्त्रों, धातुओं, इमारतों पर भी पड़ रहा है। वायु प्रदूषण से फेफड़ों का कैंसर, अस्थमा, नाड़ी मण्डल के रोग, हृदय रोग, आँखों के रोग, एक्जिमा तथा मुंहासे आदि रोग फैल जाते हैं।

2. जल प्रदूषण-
जल का प्रदूषण बढ़ रहा है। जल में खनिज तत्व, कार्बनिक और अकार्बनिक पदार्थ तथा गैसें घुली रहती हैं। इनका अनुपात सही रहता है, तो जल लाभदायक रहता है। मात्रा के अधिक होने पर जल प्रदूषित हो जाता है और हानिकारक हो जाता है। अनेक रोग हो जाते हैं। औद्योगिक संस्थानों के पदार्थों के जल में मिलने पर ऑक्सीजन कम हो जाती है जिससे मछली आदि जल के जन्तु मरने लग जाते हैं। इस प्रदूषित जल से टायफाइड, पेचिस, पीलिया, मलेरिया आदि रोग फैल जाते हैं।

3. रेडियोधर्मी प्रदूषण-
परमाणु परीक्षणों से जल और वायु तथा पृथ्वी का पर्यावरण प्रदूषित हो जाता है जिससे अनेक रोग फैल जाते हैं।

4. ध्वनि प्रदूषण-
ध्वनि प्रदूषण मनुष्य की सुनने की शक्ति को कम कर रहा है। उसकी नींद बाधित हो रही है। मोटर कार, बस, जैट विमान, ट्रैक्टर, लाउडस्पीकर, बाजे, सायरन तथा धड़धड़ाती मशीनें ध्वनि प्रदूषण कर रही हैं। इससे पदार्थों का प्राकृतिक स्वरूप ही नष्ट हो रहा है।

5. रासायनिक प्रदूषण-
किसान अपनी पैदावार बढ़ाने के लिए रासायनिक खादों का प्रयोग कर रहा है। कीटनाशक और रोगनाशक दवाइयाँ छिड़क रहा है। इससे नदियों, तालाबों, समुद्रों का जल प्रदूषित हो रहा है। इसका घातक प्रभाव सभी जीवों पर पड़ रहा है।

उपसंहार-
प्रदूषण की समस्या का समाधान-
प्रदूषण की समस्या का निदान किया जा रहा है। उद्योगों के प्रदूषण को रोकने की कोशिश हो रही है। जनसंख्या वृद्धि पर रोक लगायी जा रही है। प्रदूषण को बढ़ने से रोकने के लिए अनेक योजनाएँ बनायी गई हैं। वनों का संरक्षण किया जा रहा है। नये पेड़-पौधे लगाये जा रहे हैं।

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3. दर्शनीय स्थल की मेरी रोचक यात्रा

प्रस्तावना-
दिल्ली हमारे देश की राजधानी है। यह अनेक आकर्षणों का केन्द्र है। यहाँ अनेक दर्शनीय स्थल हैं, नित नये कार्यक्रमों का आयोजन होता रहता है। छब्बीस जनवरी (गणतंत्र दिवस) पर आयोजित उत्सव को देखने के लिए मैंने निश्चय किया। मित्रों को अपना विचार बताया। हम चार मित्र दिल्ली जाने के लिए सहमत हो गये।

यात्रा की तैयारी तथा प्रस्थान-
दिल्ली जाने की तैयारी शुरू हो गई। आवश्यक सामान एकत्र किया, बाँधा और सायंकाल तक इस सबसे निवृत हो गये। हम सभी मित्र बल्लियाँ उछल रहे थे। रात्रि का समय जैसे-तैसे काटा। प्रातः हुआ। रेलवे स्टेशन पर छ: बजे से पहले पहुंचे।

टिकट घर का दृश्य-
टिकटघर खचाखच भरा हुआ था। टिकट खरीदना कठिन लग रहा था। राममोहन ने हिम्मत से भीड़ में घुसकर यह काम किया। टिकट लेकर कतार से बाहर निकला। भारतीयों में अनुशासनहीनता है। इससे लोगों को बहुत असुविधा हुई।

रेलवे प्लेटफार्म का दृश्य-
प्लेटफार्म भी स्त्री-पुरुषों से भरा हुआ था। कोई बिस्तरों पर बैठा था तो कोई इधर से उधर चक्कर काट रहा था तो कोई बैंचों पर बैठा था। चारों ओर अजीब, अस्पष्ट शोर था। गाड़ी के आगमन का लोग इन्तजार कर रहे थे।

रेलगाड़ी का आना और डिब्बे में हमारा प्रवेश-
गाड़ी र के आगमन को घण्टी बजी, सभी लोग सावधान हो गये। रुकती-रुकती गाड़ी स्टेशन पर आई। गाड़ी रुकी। लोगों की भागदौड़ शुरू हो गयी। सामान बेचने वाले भी अधिक सामान बेचने की इच्छा से इधर-उधर चहलकदमी कर रहे थे। वे सामान

बेचने के लिए जोर- जोर से चिल्ला रहे थे। बड़ी कठिनाई से हम – चारों मित्रों को जगह मिली, सामान रखा और अपनी सीटों पर – जम गये। जाड़े के दिन में भी पसीना छूट रहा था। हमारे घर के सदस्य हमें डिब्बे में बिठाकर घर लौटे। गाड़ी चली। हम खुश

मार्ग का दृश्य-
भोपाल से चलकर दिल्ली तक का मार्ग प्रसन्नता से पूरा किया। रास्ते के खेत, खड़ी फसल से लहलहा रहे थे। पेड़-पौधों भी दूरी पर हमारे समानान्तर दौड़-सी लगा रहे थे। वातावरण हृदयग्राही था। मार्ग में अनेक स्टेशन मिले, हम प्रत्येक स्टेशन पर उतरे। दिल्ली स्टेशन तक का मार्ग खुशी-खुशी तय किया।

दिल्ली दर्शन-
दिल्ली में 26 जनवरी का आयोजन दूसरे दिन देखा। पूरा दिल्ली शहर जगमगा रहा था। चप्पे-चप्पे पर पुलिस तैनात थी। कहीं पर कोई कमी नहीं आ रही थी। अलग-अलग देशों की झाँकियाँ, राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री की सवारी देखने योग्य थी। पुलिस और फौज के कार्यक्रम अच्छे थे।

स्कूलों और कॉलेजों के छात्र-छात्राएँ इस आयोजन में बढ़-चढ़ क कर भाग ले रहे थे। भारतीय प्रगति का प्रतीक 26 जनवरी अमर रहे। दूसरे दिन वहाँ के दर्शनीय स्थल देखे। लौटकर अपने त्र रिश्तेदारों के घर जाना भी हम नहीं भूले।

उपसंहार-
यात्रा से परस्पर परिचय तथा व्यावहारिक ज्ञान तो बढ़ता है। नई-नई वस्तुएँ देखते हैं। आपसी अनुभव बाँटते हैं। देश और राष्ट्र की एकता बनती है।

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4. विज्ञान और जीवन

प्रस्तावना-
आज का युग विज्ञान का युग है। संसार के कोने-कोने में विज्ञान का बोलबाला है। संसार के सभी देश
खोज की होड़ में लगे हैं। वैज्ञानिक सफलताओं में एक-दूसरे को से पछाड़ने लगे हैं। विज्ञान ने संसार को बदल दिया है।

यात्रा-
काफी पहले तक थोड़ी दूरी की यात्रा पूरी करने 1 में बड़ा वक्त लगता था। वही दूरी बसों, रेलगाड़ियों तथा हवाई जहाज से थोड़ी देर में ही पूरी की जा रही है।

मनोरंजन-
विज्ञान ने मनोरंजन के साधनों से लोगों के जीवन में चमत्कार पैदा कर दिया है। सिनेमा के पर्दे पर नाचते, गाते और बात करते चित्रों को देखकर दाँतों तले अंगुली दबानी पड़ती है। ग्रामोफोन से हृदय को आनन्द मिलता है। रेडियो और. टी. वी. पर गीत सुनाते चित्रों को देख मन मयूर नाचता है।

इलाज-
बीमारियों का इलाज मशीनों से जाँच करके हो रहा है। एक्स-रे मशीन से शरीर के भीतरी अंगों की जाँच करके रोग की पहचान की जा सकती है। सही दवाओं का उपयोग कर प्रायः सभी बीमारियों का इलाज सम्भव हो गया है।

सुख-सुविधाएँ-
बिजली के पंखे, रूमकूलर व हीटरों ने मनुष्य के जीवन को सर्दी-गर्मी के प्रभाव से रहित बना दिया है। लिफ्ट ने ऊँचे भवनों तक पहुँचने में सीढ़ी से उत्पन्न थकान को दूर कर दिया है। कल-कारखाने-अनेक कल-कारखानों में अनेक तरह की मशीनों का उत्पादन हो रहा है। युद्ध विमानों का निर्माण नरसंहार करने में भी पीछे नहीं है। अणु बम का प्रयोग सम्पूर्ण विश्व को निगलने को तैयार है।

अन्तरिक्ष-
आज के वैज्ञानिक अनुसंधानों से निर्मित रॉकेटों से चन्द्रलोक पर विजय प्राप्त की जा चुकी है। इसके अतिरिक्त मनुष्य दूसरे ग्रहों की ओर दौड़ लगाने को तत्पर है।
लोक कल्याण-विज्ञान ने कितने ही साधन मनुष्यों को दे दिये हैं जिससे उसका जीवन देवतुल्य हो चुका है। अनेक सुखों को भोग रहा है। विज्ञान का भविष्य तथा मनुष्य के जीवन की सफलता अब एक-दूसरे का पर्याय बन चुके हैं।

उपसंहार-
वैज्ञानिकों से इस संसार से सभी लोग आशा करते हैं कि मनुष्य जीवन के हित के लिए, परस्पर मैत्री और कल्याण के लिए वे कार्य करते रहेंगे, जिससे मनुष्य जीवन अपनी पूर्णताओं को प्राप्त हो जाये।

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5 राष्ट्रीय उद्यान व अभयारण्य

प्रस्तावना-
राष्ट्रीय उद्यान वनों और वन्य प्राणियों की रक्षा के लिए बनाये गये ऐसे सुरक्षित क्षेत्र हैं, जहाँ जंगल के जीव अपने प्राकृतिक वातावरण में मुक्त रूप से रह सकते हैं।राष्ट्रीय उद्यानों के बनाने का उद्देश्य-इन राष्ट्रीय उद्यानों के बनाने का उद्देश्य यह है कि इनके द्वारा वन-सम्पदा, वनस्पति तथा जंगल के जीवों की रक्षा हो सके। इन वन्य जीवों और पर्यावरण को सुरक्षित रखने तथा उनकी संख्या को बढ़ाने के लिए इन राष्ट्रीय उद्यानों और अभयारण्यों को बनाया जाता है। इन राष्ट्रीय उद्यानों में खेती करना, पालतू जानवर चराना, बस्ती बनाना, शिकार करना, वृक्ष काटना जैसे कामों पर रोक लगा दी गई है।

राष्ट्रीय उद्यान और अभयारण्यों में अन्तर-
अभयारण्यों ‘और राष्ट्रीय उद्यानों की स्थापना करने का एक ही उद्देश्य है।अभयारण्यों में मनुष्य सीमित क्षेत्र में रह सकते हैं। उन पर कुछ प्रतिबन्ध (रोक) लगा रहता है। वे कुछ सीमित क्षेत्र में खेती कर सकते हैं तथा अपने पशुओं को चरा सकते हैं।

राष्ट्रीय उद्यानों और अभयारण्यों के लाभ –
प्राकृतिक सन्तुलन बनाये रखने के लिए वनों का तथा प्राणियों का रहना बहुत जरूरी है। मनुष्य ने अपने स्वार्थ और मनोरंजन के लिए वन के प्राणियों को मार डाला है। उनका शिकार करके उनके वंश को ही मिटाने पर तुला हुआ है। इन पशुओं की नस्लें ही लुप्त हो रही हैं।इन उद्यानों और अभयारण्यों से इन विलुप्त नस्लों का संरक्षण हो रहा है। उनकी संख्या बढ़ रही है। प्राकृतिक पर्यावरण की भी सुरक्षा हुई है। इन उद्यानों और अभयारण्यों के विकास से पर्यटन उद्योग भी विकसित हुआ है।

उपसंहार-
राष्ट्रीय उद्यानों और अभयारण्यों से पर्यावरण सुरक्षित हुआ है एवं प्राकृतिक सौन्दर्य से देश की आकर्षक छटा देखने योग्य हो गई है।

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6. मध्य प्रदेश के राष्ट्रीय उद्यान

प्रस्तावना-
प्राकृतिक सौन्दर्य को बढ़ाने में इन राष्ट्रीय उद्यानों के निर्माण ने बड़ा सहयोग दिया है। इन राष्ट्रीय उद्यानों को बनाने के लिए राष्ट्रीय सरकार तथा प्रादेशिक सरकार दोनों ही मिल-जुलकर कार्य कर रही हैं। मध्य प्रदेश के राष्ट्रीय उद्यानों के विषय में जानकारी देते हैं

1.कान्हा राष्ट्रीय उद्यान-
यह प्रदेश का सबसे पुराना और प्रसिद्ध राष्ट्रीय उद्यान है। इसका विस्तार मंडला और बालाघाट जिले में है। यहाँ की भूमि वृक्षों और घास से ढकी हुई है। इस उद्यान को पर्यटकों के लिए वर्षा ऋतु में जुलाई से अक्टूबर महीने तक बन्द कर दिया जाता है। यहाँ ठहरने की अच्छी व्यवस्था है। यह बाघ आरक्षित क्षेत्र है।

  • पशु-इस राष्ट्रीय उद्यान में बारहसिंगा, चीतल, सांभर, काला मृग, काकड़, जंगली भैंस, गौर, चौसिंगा, बाघ, तेन्दुआ, जंगली सूअर, कुत्ते, नीलगाय मिलते हैं।
  • पक्षी-सोखपर, फाख्ता, मोर, कबूतर, तीतर-बटेर, चील, गरुड़, बगुला और सारस पक्षी मुख्य रूप से देखे जाते हैं।

2.बान्धवगढ़ राष्ट्रीय उद्यान-
बान्धवगढ़ राष्ट्रीय उद्यान भी बाघ आरक्षित क्षेत्र है। यहाँ प्रति वर्ग किमी बाघों का घनत्व अन्य राष्ट्रीय उद्यानों की तुलना में सबसे अधिक है। विश्व प्रसिद्ध सफेद बाघ सबसे पहले यहीं पाया गया था। यहाँ पतझड़ी वन, घास के मैदान और वाँसों के घने झुरमुट हैं। यह उमरिया जिले में स्थित है। यहाँ के लिए उमरिया से, रीवा से, शहडोल से, जबलपुर और कटनी से भी बसें जाती हैं। पशु-बाद्य के अलावा तेन्दुआ, भालू, गौर, सांभर, चौसिंगा, चिंकारा, नीलगाय, जंगली, सूअर, काकड़ भी पाये जाते हैं।

3. माधव राष्ट्रीय उद्यान (शिवपुरी)-
इस उद्यान की दूरी शिवपुरी से कुल छ: किमी है। पशु-यहाँ बाघ, तेंदुआ, भालू, सांभर, चीतल, चौसिंगा, कृष्णमृग, नीलगाय, चिंकारा, जंगली सूअर, लंगूर, मगरमच्छ तथा अजगर विशेष रूप से पाये जाते हैं।

4. सतपुड़ा राष्ट्रीय उद्यान-
यह प्रदेश का प्रसिद्ध उद्यान है। यहाँ से 32 किमी दूर पचमढ़ी मध्य प्रदेश का एकमात्र हिल स्टेशन है। पचमढ़ी को ‘पहाड़ों की रानी’ कहते हैं। ऊपर बताये गये उद्यानों की ही भांति यहाँ पशु मिलते हैं। पक्षियों में धनेश, मोर, तीतर, बटेर, कबूतर और जंगली मुर्गियाँ विशेष रूप से पाई जाती हैं।

5.संजय राष्ट्रीय उद्यान-
यह उद्यान म. प्र. के सीधी जिले से लेकर छत्तीसगढ़ राज्य के सरगुजा जिले तक फैला हुआ है। यहाँ सभी प्रकार के पशु-पक्षी पाये जाते हैं। यह वन पतझड़ी और नम हैं। यहाँ विश्रामगृह बने हुए हैं।

6. इन्दिरा प्रियदर्शिनी पेंच राष्ट्रीय उद्यान-
यह टाइगर रिज़र्व क्षेत्र है। यह महाराष्ट्र राज्य के टाइगर रिजर्व क्षेत्र से लगा हुआ है। इस प्रकार यह अन्तर्राष्ट्रीय टाइगर रिजर्व क्षेत्र है। यह सिवनी जिले में स्थित है। यहाँ से सिवनी 50 किमी दूर है।

  • पशु-बाघ, तेन्दुआ, जंगली सूअर, भेड़िया, सोनकुत्ता, भालू, गौर तथा हिरणों की अनेक प्रजातियाँ यहाँ मिलती हैं।
  • पक्षी-वनमर्गी, सारस, धनेश, चील, किलकिला, मैना, तीतर, बटेर पक्षी भी बड़ी संख्या में पाए जाते हैं। जाड़े में यहाँ प्रवासी पक्षी भी आ जाते हैं।

7. पन्ना राष्ट्रीय उद्यान टाइगर रिजर्व क्षेत्र-
यह पन्ना और छतरपुर जिलों में फैला हुआ है। विश्व प्रसिद्ध पर्यटन स्थल खजुराहो यहाँ से 20 किमी दूर है। यहाँ से होकर केन नदी बहती है। इसमें मगर और घड़ियाल पाए जाते हैं। यहीं हीरों की खान
पशु-बाघ, तेन्दुआ, भेड़िया, सांभर, भालू, नीलगाय और हिरण यहाँ पाये जाते हैं। केन नदी का स्वच्छतम पानी है।

8. वन विहार राष्ट्रीय उद्यान-
यह क्षेत्रफल में सबसे छोटा उद्यान है। भोपाल के समीप ही है।
पशु-यहाँ बाघ, भालू, बिज्जू, लकड़बग्घा, सांभर कृष्णमृग, मगर, कछुए आसानी से देखे जा सकते हैं। यहाँ सफेद बाघ भी हैं।

9. जीवाश्म राष्ट्रीय उद्यान-
यह अन्य उद्यानों से अलग ही तरह का है। इसमें वनस्पतिक जीवाश्मों को संरक्षित किया गया है। .
उपसंहार-इन राष्ट्रीय उद्यानों में स्वतंत्र रूप से कोई भी नहीं घूम सकता। इस काम के लिए जीप-कार, प्रशिक्षित हाथी मिलते हैं। पैदन घूमना खतरे से भरा है। निश्चित मार्गों से ही घूमना चाहिए।

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7. वृक्षारोपण (वन महोत्सव)

प्रस्तावना-
वृक्षारोपण (वन महोत्सव) का तात्पर्य वृक्ष लगाने से है। भारत कृषि प्रधान देश है। वर्षा पर ही यहाँ खेती निर्भर है। यहाँ सिंचाई के कृत्रिम साधन अच्छे नहीं है। वर्षा वनों पर ही निर्भर है। यहाँ पर वर्षा मानसूनी हवाओं से होती है।प्रायः मानूसनी हवाएँ जुलाई से वर्षा करती हैं। अत: वृक्षारोपण कार्य जुलाई से करना चाहिये। वृक्ष लगाना बहुत महत्वपूर्ण कार्य है।

महत्व-
हमारे देश में अनादिकाल से ही वृक्षों की पूजा की जाती है। ये वृक्ष आश्रयदाता के रूप में जाने जाते हैं। हिंसक पशुओं से व्यक्ति वृक्षों के सहारे अपनी सुरक्षा कर लेते हैं। प्रत्येक वृक्ष में देवता का निवास होता है। प्राचीन काल से ही पीपल, बरगद, नीम, आँवले, केला और तुलसी की पूजा की जाती रही है। वृक्ष का सम्बन्ध मानव सभ्यता और मानवता से सदैव जुड़ा रहा है। वृक्ष हमारे सहायक, मित्र तथा शिक्षक रहे हैं।

वन और वृक्षों की वर्तमान स्थिति-
वन महोत्सव का प्रारम्भ सन् 1950 से हुआ है। उस समय कन्हैयालाल माणिकलाल मुंशी जो केन्द्र सरकार में खाद्य मंत्री थे, ने सबसे पहले तीस करोड़ वृक्ष लगाने की योजना बनाई। यह भी घोषणा कर दी कि जब तक पेड़ सूख न जाएँ, तब तक उसे काटा नहीं जाना चाहिए। बिना अनुमति के जो वृक्ष काटेगा, वह दण्ड का भागी होगा। पुराने वृक्षों की रक्षा भी करनी पड़ेगी। प्रत्येक व्यक्ति का यह कर्त्तव्य है कि वह वृक्षों को नहीं काटे। अपने कर्तव्य का पालन वृक्ष की रक्षा करके ही हो सकेगा।

लाभ-
वन महोत्सव से धार्मिक और भौतिक दो तरह के लाभ मिल सकते हैं। पुराणों में वर्णन आता है कि जो व्यक्ति पाँच वृक्ष लगाता है, उसे स्वर्ग की प्राप्ति होती है। भौतिक लाभों में वृक्ष वायु को शुद्ध करते हैं। वे कार्बन डाइऑक्साइड लेते हैं और ऑक्सीजन निकालते हैं। मानव स्वास्थ्य के लिए वृक्ष वरदान हैं। अनेक रोगों की औषधियाँ मिलती हैं। वर्षा कराने में वृक्ष लाभकारी हैं।

उपसंहार-
वृक्षारोपण में सबको सहयोग से यह पर्व के रूप में मनाना चाहिए। सरकार भी इस ओर कर्तव्यपालन कर रही है।

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8. कम्प्यूटर

प्रस्तावना-
देश का कम्प्यूटरीकरण किया जा रहा है। यहाँ उद्योग-धन्धे, बैंक आदि सभी संस्थानों में कम्प्यूटर लगाने का दौर चल पड़ा है।

कम्प्यूटर क्या है?-
कम्प्यूटर में यांत्रिक मस्तिष्क लगा हुआ है जो कम-से-कम समय में बिना किसी गलती के ज्यादा से ज्यादा गणना कर सकता है। कम्प्यूटर सर्वाधिक तीव्र, शुद्ध और उपयोगी गणना करने में सक्षम है। चार्ल्स बेबेज (Charles Babbage) ने 19वी शताब्दी के आरम्भ में पहला कम्प्यूटर बनाया।

कम्प्यूटर के उपयोग-
आज कम्प्यूटर का व्यापक रूप से प्रयोग हो रहा है। प्रत्येक क्षेत्र में कम्प्यूटर फिट है।
बैंकिंग के क्षेत्र में-बैंकों में कम्प्यूटर पर लेन-देन का व्यवहार बड़ी आसानी से किया जा रहा है।

प्रकाशन का काम-
समाचार और पुस्तकों के क्षेत्र में कम्प्यूटर से छपाई और प्रकाशन का काम किया जा रहा है।। सूचना और समाचार भेजने के क्षेत्र में-दूरसंचार की दृष्टि से कम्प्यूटर अति महत्त्वपूर्ण है।

डिजाइनिंग के क्षेत्र-
कम्प्यूटरों से कारों, जहाजों, भवनों, बसों आदि के डिजाइन तैयार किये जा रहे हैं। कला के क्षेत्र में, वैज्ञानिक खोजों के क्षेत्र में, औद्योगिक क्षेत्र में, युद्ध क्षेत्र में कम्प्यूटर मानव मस्तिष्क की त कार्य कर रहे हैं।

उपसंहार-
कम्प्यूटर ने मनुष्य के जीवन व संसा को ही बदल दिया है।

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9. पर्यावरण, वन्य पशु तथा मनुष्य की पारस्परिक निर्भरता ।

प्रस्तावना-
पर्यावरण, वन्य पशु तथा मनुष्य की पारस्परिक निर्भरता सर्वविदित है। युगों-युगों से मनुष्य अपने पर्यावरण एवं वन्य पशुओं से सामंजस्य स्थापित कर सफलतापूर्वक स्वस्थ एवं दीर्घ जीवन व्यतीत करता आया है, किन्तु वर्तमान मशीनी युग में विकास के नाम पर मनुष्य ने जाने-अनजाने प्रकृति से छेड़छाड़ कर अपने और अपनी संतति के भविष्य पर एक बड़ा प्रश्नचिह्न लगा दिया है।

जैव मण्डल क्या है ?-
हमारे ग्रह पर जीवन है। इस पर जीवन किससे सधा हुआ है ? वायु की और जल की एक पतली पर्त है जिसे पृथ्वी के चारों ओर जैवमण्डल के रूप में जाना जाता है। इस जैवमण्डल के बिना हमारी पृथ्वी जीवन से रहित हो जायेगी, उस जीवन से रहित हो जायेगी जो अन्तरिक्ष में घुला-मिला है।

एक पूर्ण वृत्त (घेरा)-
जैवमण्डल ऑक्सीजन, नाइट्रोजन, कार्बन डाइऑक्साइड, आर्गन तथा जल वाष्प का मिश्रण है। इस सन्तुलन को ग्रहों के वृत्त के द्वारा, प्राणियों के द्वारा तथा बैक्टीरिया के द्वारा बनाया हुआ है। पौधों के प्रकाश संश्लेषण (फोटो-सिन्थेसिस) की क्रिया के बिना मानव अथवा अन्य प्राणियों के जीवन रहने के लिए ऑक्सीजन नहीं रहेगी।

वानस्पतिक सन्तुलन के रुकावट (अवरोध)-
जब कभी हम हवा, पानी, भोजन और औद्योगिक कच्चे माल की समाप्ति के विषय में सोचते हैं जिससे यह पृथ्वी बनी है, वस्तुतः जिसे हमने उन्नति के रूप में देखा है, वही वानस्पतिक सन्तुलन के लिए रुकावट है। वही अन्तत: इस ग्रहण पर जीवन को पुष्ट करने का जो तरीका है, उसी में गड़बड़ी हो जायेगी।

प्रदूषण के रूप-
प्रदूषण से मानव जीवन तथा प्राकृतिक जीवन बहुत अधिक प्रभावित होता है। यह प्रदूषण-वायु, पानी, मिट्टी, ध्वनि के रूप में हो रहा है। वायु प्रदूषण से फेफड़ों की बीमारी होती है। जल प्रदूषण से हैजा फैलता है। मिट्टी के प्रदूषण से हमारी सब्जियाँ जहरीली हो जाती हैं। ध्वनि प्रदूषण इंजनों और तेज ध्वनियों को करने से होता है और वह हमारे भौतिक तथा मानसिक स्वास्थ्य के लिए हानि पहुंचाता है।

उपसंहार-
पर्यावरणीय प्रदूषण एक विश्व समस्या है। विकासशील देश ही इसके लिए दोषी नहीं है। हमें इस तरह की योजनाएँ बनानी चाहिए जिससे मानवीय पर्यावरण नष्ट न हो। विश्व के राष्ट्रों को उपाय ढूँढने चाहिए और इस समस्या के समाधान के साधन हूँढ़ने चाहिए।

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10. दीपावली

प्रस्तावना-
हमारे देश भारतवर्ष में अनेक त्यौहार मनाये जाते हैं जिनमें कुछ राष्ट्रीय हैं, तो कुछ धार्मिक तथा सामाजिक। सामाजिक त्यौहारों में हिन्दुओं के मुख्य चार त्यौहार होते हैं। होली, दशहरा, रक्षाबन्धन तथा दीपावली। इनमें से दीपावली के त्यौहार को बड़ी धूमधाम, श्रद्धा और प्रेम से मनाते हैं। यह त्यौहार कार्तिक मास की अमावस्या को मनाया जाता है।

मनाने का कारण-
कहते हैं कि श्री रामचन्द्रजी लंका के राजा रावण को मारकर तथा लंका पर विजय प्राप्त करके सीता के साथ अयोध्या इसी अमावस्या के दिन लौटे थे। उनके लौटने की खुशी में सभी अयोध्यावासियों ने घर-घर में खुशियाँ मनाई और अपने घरों, मन्दिरों में दीपक जलाए। पंक्ति में जलाये गये दीपक उनकी खुशी को प्रकट कर रहे थे। उसी की यादगार में यह त्यौहार आज भी मनाया जाता है।

दीपावली का महत्त्व-
महावीर स्वामी का निर्वाण दिवस दीपावली का दिन था। सभी जैन समुदाय इस दिन खुशियाँ मनाता है। स्वामी दयानन्द के निर्वाण का दिवस भी दीपावली होने के कारण सभी हिन्दू हर्ष और उल्लास के साथ इस त्यौहार को मनाते हैं।

तैयारी-
इस त्यौहार को मनाने की तैयारी क्वार (अश्विन) महीने से ही शुरू हो जाती है। वर्षा समाप्त हो जाती है। रास्तों की कीचड़ सूख जाती है। नदियों, तालाबों का पानी स्वच्छ हो जाता है। घरों की मरम्मत होने लगती है, पुताई की जाती है। इस तरह दीपावली के आने की खुशी में वातावरण उल्लासमय दिखाई पड़ता है। दुकानें और बाजार सज जाते हैं।

त्यौहारों का वर्णन-
अमावस्या के पूर्व धनतेरस का त्यौहार होता है। बाजार और दुकानें सजा दी जाती हैं। बर्तनों की दुकानें विशेष रूप से सजाई जाती हैं। इस दिन प्रत्येक घर में कोई-न-कोई नया बर्तन खरीदा जाता है। अगले दिन छोटी दीपावली होती है। इसे नरक चौदस भी कहते हैं। इस दिन आटे का दीपक घरों पर जलाते हैं। अमावस्या के दिन बड़ी दीवाली होती है। बच्चे, जवान, बूढ़े सभी प्रसन्न दिखते हैं। हलवाई लोग मिठाइयों की दुकान सजाते हैं। घर-घर पकवान बनते हैं। नये वस्त्र पहनकर रात्रि को लक्ष्मीपूजन होता है। दीपक जलाये जाते हैं। आतिशबाजी होती है।

इसके अगले दिन गोवर्धन की पूजा होती है। उसके अगले – दिन भाई दौज का त्यौहार मनाया जाता है। बहन-भाई को तिलक करती है और भाई के दीर्घायु होने की कामना करती है।

उपसंहार-
लोग जुआ खेल कर, शराब पीकर इस त्यौहार की शुद्धता को समाप्त कर देते हैं। इस पवित्र त्यौहार को दूषित होने से बचाना हमारा धर्म है।

MP Board Class 7th Hindi Solutions

MP Board Class 6th Maths Solutions Chapter 14 Practical Geometry Ex 14.6

MP Board Class 6th Maths Solutions Chapter 14 Practical Geometry Ex 14.6

Question 1.
Draw ∠POQ of measure 75° and find its line of symmetry.
Solution:
Steps of construction :
MP Board Class 6th Maths Solutions Chapter 14 Practical Geometry Ex 14.6 1
(i) Draw a line l and mark a point O on it.
(ii) Place the pointer of the compasses at O and draw an arc of any radius which intersects the line l at Q.
(iii) Taking same radius, with centre Q, draw an arc which cuts the previous arc at B.
(iv) Join OB, then ∠BOQ = 60°.
(v) Taking same radius, with centre B, draw an arc which cuts the arc drawn in step
(ii) at C.
(vi) Draw bisector of ∠BOC which cuts the \(\widehat{B C}\) at D. Thus, ∠DOQ = 90°.
(vii) Draw OP as bisector of ∠DOB. Thus, ∠POQ = 75°.

Question 2.
Draw an angle of measure 147° and construct its bisector.
Solution:
Steps of construction :
MP Board Class 6th Maths Solutions Chapter 14 Practical Geometry Ex 14.6 2
(i) Draw OA.
(ii) With the help of protractor, draw ∠AOB = 147°.
(iii) Taking centre O and any convenient radius, draw an arc which intersects \(\overline{O A}\) and \(\overline{O B}\) at P and Q respectively.
(iv) Taking P as centre and radius more than half of PQ, draw an arc.
(v) Taking Q as centre and with the same radius, draw another arc which intersects the previous arc at R.
(vi) Join OR and produce it.
Thus, \(\overline{O R}\) is the required bisector of ∠AOB.

Question 3.
Draw a right angle and construct its bisector.
Solution:
Steps of construction :
MP Board Class 6th Maths Solutions Chapter 14 Practical Geometry Ex 14.6 3
(i) Draw \(\overline{O Q}\).
(ii) With the help of protractor draw ∠QOP = 90°
(iii) Taking O as centre and any convenient radius, draw an arc which intersect the \(\overline{O P}\) and \(\overline{O Q}\) at A and B respectively.
(iv) Taking B and A as centre and radius more than half of BA, draw two arcs which intersect each other at the point D.
(v) Join OD. Thus, \(\overline{O D}\) is the required bisector of ∠QOP.

MP Board Class 6th Maths Solutions Chapter 14 Practical Geometry Ex 14.6

Question 4.
Draw an angle of measure 153° and divide it into four equal parts.
Solution:
Steps of construction :
MP Board Class 6th Maths Solutions Chapter 14 Practical Geometry Ex 14.6 4
(i) Draw \(\overline{O A}\).
(ii) At O, with the help of a protractor, draw ∠AOB = 153°.
(iii) Draw \(\overline{O C}\) as the bisector of ∠AOB.
(iv) Again, draw \(\overline{O D}\) as the bisector of ∠AOC.
(v) Again, draw \(\overline{O E}\) as the bisector of ∠BOC.
(vi) Thus; \(\overline{O C}\), \(\overline{O D}\) and \(\overline{O E}\) divide ∠AOB in four equal parts.

Question 5.
Construct with ruler and compasses, angles of following measures:
(a) 60°
(b) 30°
(c) 90°
(d) 120°
(e) 45°
(f) 135°
Solution:
Steps of construction:
(a) 60°
MP Board Class 6th Maths Solutions Chapter 14 Practical Geometry Ex 14.6 5
(i) Draw \(\overline{O A}\)
(ii) Taking O as- centre and convenient radius, draw an arc, which intersects \(\overline{O A}\) at P.
(iii) Taking P as centre and same radius, draw an arc which cut the previous arc at Q.
(iv) Join OQ and produce it to B. Thus, ∠BOA is the required angle of 60°.

(b) 30°
MP Board Class 6th Maths Solutions Chapter 14 Practical Geometry Ex 14.6 6
(i) Draw \(\overline{O A}\).
(ii) Taking O as centre and convenient radius, draw an arc, which intersects \(\overline{O A}\) at P.
(iii) Taking P as centre and same radius, draw an arc which cut the previous arc at Q.
(iv) Join OQ and produce it to B. Thus, ∠BOA is the angle of 60°.
(v) Taking P as centre and radius more than half of PQ, draw an arc.
(vi) Taking Q as centre and with same radius, draw an arc which cut the previous arc at C.
(vii) Join OC. Thus ∠COA is the required angle of 30°.

(c) 90°
MP Board Class 6th Maths Solutions Chapter 14 Practical Geometry Ex 14.6 7
(i) Draw \(\overline{O A}\).
(ii) Taking O as centre and convenient radius, draw an arc, which intersects \(\overline{O A}\) at X.
(iii) Taking X as centre and same radius, draw an arc which cut the previous arc at Y.
(iv) Taking Y as centre and same radius, draw another arc intersecting the arc drawn in step (ii) at ∠.
(v) Taking Y and ∠ as centres and same radius, draw two arcs intersecting each other at S.
(vi) Join OS and produce it to form a ray OB. Thus, ∠BOA is required angle of 90°.

(d) 120°
MP Board Class 6th Maths Solutions Chapter 14 Practical Geometry Ex 14.6 8
(i) Draw \(\overline{O A}\).
(ii) Taking O as centre and convenient radius, draw an arc, which intersects \(\overline{O A}\) at P.
(iii) Taking P as centre and same radius, draw an arc which cut the previous arc at Q.
(iv) Taking Q as centre and same radius draw another arc intersecting the arc drawn in step (ii) at S.
(v) Join OS and produce it to D.
Thus, ∠AOD is the required angle of 120°.

(e) 45°
MP Board Class 6th Maths Solutions Chapter 14 Practical Geometry Ex 14.6 9
(i) Draw \(\overline{O A}\).
(ii) Taking O as centre and convenient radius, draw an arc, which intersects \(\overline{O A}\) at X. .
(iii) Taking X as centre and same radius, draw an arc which cut the previous arc at Y.
(iv) Taking Y as centre and same radius, draw another arc intersecting the arc drawn in step (ii) at Z.
(v) Taking Y and Z as centres and same radius, draw two arcs intersecting each other at S.
(vi) Join OS and produce it to B. Thus, ∠BOA is the angle of 90°.
(vii) Draw OM the bisector of ∠BOA.
Thus, ∠MOA is the required angle of 45°.

(f) 135°
MP Board Class 6th Maths Solutions Chapter 14 Practical Geometry Ex 14.6 10
(i) Draw \(\overline{P Q}\) and take a point O on it.
(ii) Taking O as centre and convenient radius, draw an arc, which intersects \(\overline{P Q}\) at A and B.
(iii) Taking A and B as centres and radius more than half of AB, draw two arcs intersecting each other at R.
(iv) Join OR. Thus, ∠QOR = ∠POR = 90°.
(v) Draw \(\overline{O D}\) the bisector of ∠POR.
Thus, ∠QOD is the required angle of 135°.

Question 6.
Draw an angle of measure 45° and bisect it.
Solution:
Steps of construction :
MP Board Class 6th Maths Solutions Chapter 14 Practical Geometry Ex 14.6 11
(i) Draw a line PQ and take a point O on it.
(ii) Taking O as centre and a convenient radius, draw an arc which intersects \(\overline{P Q}\) at two points A and B.
(iii) Taking A and B as centres and radius more than half of AB, draw two arcs which intersect each other at C.
(iv) Join OC. Then ∠COQ is an angle of 90°.
(v) Draw \(\overline{O E}\) as the bisector of ∠COQ. Thus ∠QOE = 45°.
(vi) Again draw \(\overline{O G}\) as the bisector of ∠QOE.
Thus, ∠QOG = ∠EOG = \(22 \frac{1}{2}^{\circ}\).

MP Board Class 6th Maths Solutions Chapter 14 Practical Geometry Ex 14.6

Question 7.
Draw an angle of measure 135° and bisect it.
Solution:
Steps of construction :
MP Board Class 6th Maths Solutions Chapter 14 Practical Geometry Ex 14.6 12
(i) Draw a line \(\overline{P Q}\) and take a point O on it.
(ii) Taking O as centre and convenient radius, draw an arc, which intersects \(\overline{P Q}\) at A and B.
(iii) Taking A. and B as centres and radius more than half of AB, draw two arcs intersecting each other at R.
(iv) Join OR. Thus, ∠QOR = ∠POR = 90°.
(v) Draw \(\overline{O D}\) the bisector of ∠POR. Thus, ∠QOD is the required angle of 135°.
(vi) Now, draw \(\overline{O E}\) as the bisector of ∠QOD.
Thus, ∠QOE = ∠DOE = \(67 \frac{1}{2}^{\circ}\) .

Question 8.
Draw an angle of 70°. Make a copy of it using only a straight edge and compasses.
Solution:
Steps of construction:
MP Board Class 6th Maths Solutions Chapter 14 Practical Geometry Ex 14.6 13
(i) Draw an angle of 70° with the help of protractor, i.e., ∠POQ = 70°.
(ii) Draw \(\overline{A B}\).
(iii) Place the compasses at O and draw an arc to cut the rays of ∠POQ at L and M.
(iv) Use the same compasses setting to draw an arc with A as centre, cutting AB at X.
(v) Set your compasses setting to the length LM with the same radius.
(vi) Place the compasses pointer at X and draw the arc to cut the arc drawn earlier at Y.
(vii) Join AY.
Thus, ∠YAX = 70°.

Question 9.
Draw an angle of 40°. Copy its supplementary angle.
Solution:
Steps of construction :
MP Board Class 6th Maths Solutions Chapter 14 Practical Geometry Ex 14.6 14
(i) Draw an angle of 40° with the help of protractor, i.e., ∠AOB = 40°.
(ii) Draw a line \(\overline{P Q}\).
(iii) Take any point M on PQ.
(iv) Place the compasses at O and draw an arc to cut the rays of ∠AOB at L and N.
(v) Use the same compasses setting to draw an arc M as centre, cutting MQ at X.
(vi) Set your compasses to length LN with the same radius.
(vii) Place the compasses at X and draw the arc to cut the arc drawn earlier at Y.
(viii) Join MY.
(ix) Thus, ∠QMY = 40° and ∠PMY is supplementary of it.

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MP Board Class 6th Maths Solutions Chapter 2 Whole Numbers Ex 2.3

MP Board Class 6th Maths Solutions Chapter 2 Whole Numbers Ex 2.3

Question 1.
Which of the following will not represent zero:
(a) 1 + 0
(b) 0 × 0
(c) \(\frac{0}{2}\)
(d) \(\frac{10-10}{2}\)
Solution:
(a) 1 + 0 = 1
(b) 0 × 0 = 0
(c) \(\frac{0}{2}\) = 0
(d) \(\frac{10-10}{2}\) = \(\frac{0}{2}\) = 0
Thus, (a) does not represent zero.

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Question 2.
If the product of two whole numbers is zero, can we say that one or both of them will be zero? Justify through examples.
Solution:
Yes, if we multiply any number with zero, then the product will be zero.
i. e., 2 × 0 = 0, 5 × 0 = 0, 9 × 0 = 0
If both numbers are zero, then the product will also be zero, i.e., 0 × 0 = 0

Question 3.
If the product of two whole numbers is 1, can we say that one or both of them will be 1? Justify through examples.
Solution:
No, if only one number be 1, then the product cannot be 1.
i.e., 5 × 1 = 5, 4 × 1 = 4, 8 × 1 = 8
If both numbers are 1, then the product is 1
i.e., 1 × 1 = 1

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Question 4.
Find using distributive property:
(a) 728 × 101
(b) 5437 × 1001
(c) 824 × 25
(d) 4275 × 125
(e) 504 × 35
Solution:
(a) 728 × 101
= 728 × (100 + 1)
= 728 × 100 + 728 × 1
= 72800 + 728
= 73528

(b) 5437 × 1001
= 5437 × (1000 + 1)
= 5437 × 1000 + 5437 × 1
= 5437000 + 5437
= 5442437

(c) 824 × 25
= 824 × (20 + 5)
= 824 × 20 + 824 × 5
= 16480 + 4120
= 20600

(d) 4275 × 125
= 4275 × (100 + 20 + 5)
= 4275 × 100 + 4275 × 20 + 4275 × 5
= 427500 + 85500 + 21375
= 534375

(e) 504 × 35
= (500 + 4) × 35
= 500 × 35 + 4 × 35
= 17500 + 140
= 17640

MP Board Class 6th Maths Solutions Chapter 2 Whole Numbers Ex 2.3

Question 5.
Study the pattern :
1 × 8 + 1 = 9
12 × 8 + 2 = 98
123 × 8 + 3 = 987
1234 × 8 + 4 = 9876
12345 × 8 + 5 = 98765
Write the next two steps. Can you say how the pattern works?
(Hint: 12345 = 11111 + 1111 + 111 + 11 + 1).
Solution:
The next two steps are :
123456 × 8 + 6 = 987654
1234567 × 8 + 7 = 9876543
Pattern works like this :
1 × 8 + 1 = 9
12 × 8 + 2 = 98
123 × 8 + 3 = 987
1234 × 8 + 4 = 9876
12345 × 8 + 5 = 98765
123456 × 8 + 6 = 987654
1234567 × 8 + 7 = 9876543

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MP Board Class 6th Maths Solutions Chapter 2 Whole Numbers Ex 2.2

MP Board Class 6th Maths Solutions Chapter 2 Whole Numbers Ex 2.2

Question 1.
Find the sum by suitable rearrangement:
(a) 837 + 208 + 363
(b) 1962 + 453 + 1538 + 647
Solution:
(a) 837 + 208 + 363
= (837 + 363) + 208
= 1200 + 208 = 1408

(b) 1962 + 453 + 1538 + 647
= (1962 + 1538) + (453 + 647)
= 3500 + 1100 = 4600

MP Board Class 6th Maths Solutions Chapter 2 Whole Numbers Ex 2.2

Question 2.
Find the product by suitable rearrangement:
(a) 2 × 1768 × 50
(b) 4 × 166 × 25
(c) 8 × 291 × 125
(d) 625 × 279 × 16
(e) 285 × 5 × 60
(f) 125 × 40 × 8 × 25
Solution:
(a) 2 × 1768 × 50
= (2 × 50) × 1768 – 100 × 1768
= 176800

(b) 4 × 166 × 25
= (4 × 25) × 166
= 100 × 166
= 16600

(c) 8 × 291 × 125
= (8 × 125) × 291
= 1000 × 291
= 291000

(d) 625 × 279 × 16
= (625 × 16) × 279
= 10000 × 279
= 2790000

(e) 285 × 5 × 60
= 285 × (5 × 60)
= 285 × 300
= 85500

(f) 125 × 40 × 8 × 25
= (125 × 8) × (40 × 25)
= 1000 × 1000
= 1000000

Question 3.
Find the value of the following:
(a) 297 × 17 + 297 × 3
(b) 54279 × 92 + 8 × 54279
(c) 81265 × 169 – 81265 × 69
(d) 3845 × 5 × 782 + 769 × 25 × 218
Solution:
(a) 297 × 17 + 297 × 3
= 297 × (17 + 3)
= 297 × 20
= 5940

(b) 54279 × 92 + 8 × 54279
= 54279 × (92 + 8)
= 54279 × 100
= 5427900

(c) 81265 × 169 – 81265 × 69
= 81265 × (169 – 69)
= 81265 × 100
= 8126500

(d) 3845 × 5 × 782 + 769 × 25 × 218
= 3845 × 5 × 782 + 769 × 5 × 5 × 218
= 3845 × 5 × 782 + 3845 × 5 × 218
= 3845 × 5 × (782 + 218)
= 19225 × 1000
= 19225000

MP Board Class 6th Maths Solutions Chapter 2 Whole Numbers Ex 2.2

Question 4.
Find the product using suitable properties.
(a) 738 × 103
(b) 854 × 102
(c) 258 × 1008
(d) 1005 × 168
Solution:
By using distributive property of multiplication over addition, we get
(a) 738 × 103
= 738 × (100 + 3)
= 738 × 100 + 738 × 3
= 73800 + 2214 = 76014

(b) 854 × 102
= 854 × (100 + 2)
= 854 × 100 + 854 × 2
= 85400 + 1708
= 87108

(c) 258 × 1008
= 258 × (1000+ 8)
= 258 × 1000 + 258 × 8
= 258000 + 2064
= 260064

(d) 1005 × 168
= (1000 + 5) × 168
= 1000 × 168 + 5 × 168
= 168000 + 840
= 168840

MP Board Class 6th Maths Solutions Chapter 2 Whole Numbers Ex 2.2

Question 5.
A taxidriver filled his car petrol tank with 40 litres of petrol on Monday. The next day, he filled the tank with 50 litres of petrol. If the petrol costs ₹ 44 per litre, how much did he spend in all on petrol?
Solution:
Petrol filled on Monday = 40 litres Petrol filled on next day = 50 litres
Total petrol filled = (40 + 50) litres = 90 litres
Now, cost of 1 litre of petrol = ₹ 44
Cost of 90 litres of petrol = ₹ (44 × 90)
= ₹ 3960
Therefore, the taxidriver spent ₹ 3960 on petrol.

Question 6.
A vendor supplies 32 litres of milk to a hotel in the morning and 68 litres of milk in the evening. If the milk costs ₹ 15 per litre, how much money is due to the vendor per day?
Solution:
Supply of milk in the morning = 32 litres
Supply of milk in the evening = 68 litres
Total supply of milk = (32 + 68) litres
= 100 litres
Now, cost of 1 litre milk = ₹ 15
Cost of 100 litres milk = ₹ (15 × 100)
= ₹ 1500
Therefore, ₹ 1500 is due to the vendor per day.

MP Board Class 6th Maths Solutions Chapter 2 Whole Numbers Ex 2.2

Question 7.
MP Board Class 6th Maths Solutions Chapter 2 Whole Numbers Ex 2.2 1
Solution:
(i) 425 × 136 = 425 × (6 + 30 + 100)
This is the principle of distributivity of multiplication over addition.

(ii) 2 × 49 × 50 = 2 × 50 × 49
This is the principle of commutativity under multiplication.

(iii) 80 + 2005 + 20 = 80 + 20 + 2005
This is the principle of commutativity under addition.

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