MP Board Class 12th General Hindi व्याकरण वाक्य अशुद्धि संशोधन

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भावों की अभिव्यक्ति प्रायः दो प्रकार से होती है, एक-वाणी के द्वारा हम अपने विचारों को बोलकर प्रकट करते हैं तथा दूसरे-लेखनी द्वारा हम अपनी भावनाओं को लिपिबद्ध करते हैं। भावों को लिपिबद्ध करने के लिए आवश्यक है कि भाषा पर हमारा पूर्ण अधिकार हो अन्यथा अस्पष्ट, अशुद्ध भाषा के माध्यम से भावों का अर्थ स्पष्ट नहीं हो पाता।

भाषा को परिमार्जित, सशक्त और आकर्षक बनाने के लिए यह आवश्यक है कि हम प्रत्येक शब्द की आत्मा को समझें और उस पर अधिकार कर अपनी अभिव्यक्ति का सशक्त माध्यम बना लें। मनुष्य मन के भावों को व्यक्त करने के लिए वाक्यों में शब्दों का उपयुक्त और क्रमबद्ध प्रयोग अत्यधिक आवश्यक है। उचित और अनुरूप शब्दों का चयन तथा उनका व्यवस्थित नियोजन सही और सुन्दर वाक्य रचना के मुख्य उपकरण हैं।

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संक्षेप में शुद्ध लेखन से आशय ऐसे लेखन से है जिसमें सार्थक और उपयुक्त शब्दावली का उपयोग हो। अलंकार, मुहावरों-लोकोक्तियों का विषय के अनुरूप उचित . प्रयोग हो। भाषा अस्वाभाविकता से दूषित न हो। वर्तनी व्याकरण के नियमों के अनुकूल हो और अभिव्यक्ति अपने आप में पूर्ण हो।

वाक्य अशुद्धि

1. क्रम दोष-वाक्य में प्रत्येक शब्द व्याकरण के नियम के अनुसार सही क्रम में होना चाहिए। कर्ता, क्रिया और कर्म को उपयुक्त स्थान पर रखना अत्यन्त आवश्यक है। मिश्र वाक्य में प्रधान वाक्य तथा उसके अन्य उपवाक्यों को ठीक क्रम में न रखने पर वाक्य अशुद्ध हो जाता है,
जैसे-
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2. पुनरुक्ति दोष-एक ही वाक्य में एक शब्द का एक से अधिक बार प्रयोग अथवा पर्यायवाची शब्द का प्रयोग भी दोषपूर्ण हो जाता है। यह आडम्बर की रुचि दर्शाता है,
जैसे-
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3. संज्ञा संबंधी दोष-अपने कथन को प्रभावशाली बनाने के लिए हम संज्ञा को प्रयुक्त करते समय उसके सही अर्थ से अनभिज्ञ होकर उसका अशुद्ध प्रयोग करते जाते हैं। ऐसे प्रयोग के द्वारा हमारे कथन का सही अर्थ भी स्पष्ट नहीं होता तथा भाषा दोषपूर्ण हो जाती है, जैसे-
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4. लिंग सम्बन्धी दोष-लिंग के प्रयोग में भी सामान्य रूप से अशुद्धि देखने को मिलती हैं, जैसे-
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5. वचन सम्बन्धी अशुद्धियाँ-वचन के प्रयोग में असावधानी बरतने के कारण भी वाक्य में अशुद्धि आ जाती है; जैसे-
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6. सर्वनाम सम्बन्धी अशुद्धियाँ-वाक्य रचना में सर्वनाम सम्बन्धी अनेक अशुद्धियाँ देखने को मिलती हैं। सर्वनाम का यथास्थान प्रयोग न करना, सर्वनाम का अधिक प्रयोग करना या गलत सर्वनामों का प्रयोग करना प्रायः देखा गया है; जैसे-
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7. विशेषण सम्बन्धी अशुद्धियाँ-वाक्यों में विशेषण सम्बन्धी अनेक अशुद्धियाँ देखने में आती हैं। विशेषणों के अनावश्यक अनुपयुक्त तथा अनियमित प्रयोग से वाक्य भद्दा व प्रभावहीन हो जाता है; जैसे-
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8. क्रिया सम्बन्धी अशुद्धियाँ-क्रियाओं सम्बन्धी अनेक अशुद्धियाँ देखने को मिलती हैं। जैसे क्रियापदों का अनावश्यक प्रयोग, आवश्यकता के समय प्रयोग न करना, अनुपयुक्त क्रियापद का प्रयोग, सहायक क्रिया में अशुद्धि तथा क्रियाओं में असंगति के कारण ये अशुद्धियाँ होती हैं।
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9. क्रिया-विशेषण सम्बन्धी अशुद्धियाँ-क्रिया-विशेषण सम्बन्धी अनेक अशुद्धियाँ। उनके अशुद्ध, अनुपयुक्त और अनियमित प्रयोग से दिखाई देती हैं, जैसे
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10. कारकीय परसों की अशुद्धियाँ-शुद्ध रचना के लिए कारकीय परसर्गों का समुचित प्रयोग करना आवश्यक है। सामान्य रूप से ‘ने’, ‘को’, ‘से’, ‘के ‘द्वारा’, ‘में’, ‘पर’, ‘का’, ‘की’, ‘के लिए’ आदि परसर्गों का गलत प्रयोग करने से वाक्य में अशुद्धि आती है। जैसे-
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11. मुहावरे सम्बन्धी अशुद्धियाँ-मुहावरे हमारी भाषा को सुन्दर, समृद्ध व प्रभावशाली बनाते हैं। इनका प्रयोग करते समय यह विशेष ध्यान रखना होता है कि इनका रूप विकृत और हास्यास्पद न हो। जैसे-
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MP Board Class 12th General Hindi व्याकरण भाव पल्लवन

MP Board Class 12th General Hindi व्याकरण भाव पल्लवन

विचारों को अभिव्यक्त करने का माध्यम भाषा है। भाषा और अभिव्यंजना पक्ष पर असाधारण अधिकार रखने वाले व्यक्ति अपने भावों और विचारों को परिष्कृत, सुगठित प्रौढ़ भाषा में संक्षेप में अभिव्यक्त करते हैं। उनके संक्षिप्त कथन में विस्तृत विचारों और गंभीर भावों की अभिव्यक्ति निहित रहती है। उनमें भावों और विचारों की गहराई सूत्र रूप में पिरोई होती है। ये विचार-सूत्र समाज में उक्ति अथवा सूक्ति के रूप में प्रचलित हो जाते हैं। इनमें गागर में सागर भरा होता है। सामान्य जनों को इस प्रकार के गुंथे हुए सूत्रवत एक या एक से अधिक वाक्यों के भाव और विचार स्पष्ट नहीं होते हैं। अब समझने के लिए विचार-सूत्रों के वाक्य अथवा वाक्यों का अर्थ-विस्तार या भाव-विस्तार किया जाता है।

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किसी सुगठित एवं गुम्फित विचार अथवा भाव के विस्तार को पल्लवन कहते हैं।
किसी एक वाक्य या एक से अधिक वाक्यों का पल्लवन करते समय निम्न बातों को ध्यान में रखना चाहिए-

  1. मूल वाक्य या अवतरण को ध्यानपूर्वक पढ़िए।
  2. वाक्य या अवतरण में कोई लोकोक्ति, मुहावरे, अलंकार, रस आदि हो सकते हैं, उन पर ध्यान दीजिए।
  3. पल्लवन काव्य पंक्ति अथवा गद्य पंक्ति किसी का भी किया जा सकता है। उसके केंद्रीय भाव या विचार को समझने का प्रयास कीजिए।
  4. भाव या विस्तार करते समय कथन की पुष्टि हेतु कुछ उदाहरण या तथ्य भी दिए जा सकते हैं।
  5. वाक्य छोटे-छोटे हों और भाषा सरल, स्पष्ट और व्यावहारिक हो।
  6. लेखक या कवि के मूल भाव का ही विस्तार करना उचित है। उसकी आलोचना नहीं करना चाहिए।
  7. पल्लवन हर स्थिति में अन्य पुरुष में कीजिए।
  8. अनावश्यक विस्तार से बचें।
  9. विरामचिह्नों पर ध्यान दें।
  10. पल्लवन हेतु शब्द-चयन सार्थक और प्रभावी है।
  11. पुनरावृत्ति से बचना चाहिए।

उदाहरण
कर्ता से बढ़कर कर्म का स्मारक दूसरा नहीं।

पल्लवन-किसी कर्म का सबसे बड़ा स्मारक उस कर्म को करने वाला अर्थात कर्ता होता है। जब हम किसी कर्म की प्रशंसा करते हैं तो हमारी दृष्टि उस कार्य के कर्ता की ओर जाती है। कर्म को कर्ता से पृथक् करके नहीं देखा जा सकता। जब हमें उसी प्रकार के कार्य करने का सुअवसर प्राप्त होता है तो मार्ग-दर्शन के लिए उसके कर्ता की ओर ध्यान चला जाता है। वह कर्ता हमारा आदर्श बन जाता है। कर्मों द्वारा ही समाज में कर्ता की स्थिति सुदृढ़ और आकर्षक बनती है। भारतीय संस्कृति की पताका विदेशों में फैलाने की चर्चा होती है तो स्वतः ही हमारा ध्यान स्वामी विवेकानंद की ओर आकर्षित हो जाता है। अतः कर्म का स्मारक कर्ता के अतिरिक्त कोई दूसरा नहीं हो सकता है।

अन्य उदाहरण

1. महत्त्वाकांक्षा मनुष्य का असाध्य रोग है।
2. प्रेम में घनत्व अधिक है तो श्रद्धा में विस्तार।
3. आचरण सज्जनता की कसौटी है।
4. सद्भावना टूटे हृदय को जोड़ती है।
5. कर्ता से बढ़कर कर्म का स्मारक दूसरा नहीं।
6. मनुष्य जितना देता है, उतना ही पाता है। प्राण देने से प्राण मिलता है और मन देने से मन मिलता है।
7. आशा उस घास की भाँति है जो ग्रीष्म में ताप से जल जाती है।
8. सत्ता की भूख ज्ञान की वर्तिका को बुझा देती है।
9. लोभ सामान्योन्मुख होता है और प्रेम विशेषोन्मुख।
10. नियम जीवन-वाटिका की रक्षा-परिधि है।
11. बंधन सर्वत्र होते हैं किन्तु जो मनुष्य उन्हें शक्ति मानकर चलता है वही सबल होता है।
12. प्रसिद्धि मनुष्य की शांति की सबसे बड़ी शत्रु है जो उसके हृदय की कोमलता का हनन करती है।
13. विदेशी भाषा का विद्यार्थी होना बुरा नहीं, पर अपनी भाषा सर्वोपरि है।
14. उपकार शील का दर्पण है।
15. प्रेम में घनत्व अधिक है तो श्रद्धा में विस्तार।
16. दुःख की पिछली रजनी बीच, विकसता सुख का नवल प्रभात।
17. दुःख की छाया एक तरह की तपस्या ही है, उससे आत्मा शुद्ध होती है।
18. मंदिर एक उपासना स्थल है, जहाँ मनुष्य अपने आपको ढूँढ़ता है।
19. विश्वासपात्र मित्र जीवन की औषधि है।
20. मन के हारे हार है, मन के जीते जीत।

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21. जिन खोजा तिन पाइयाँ गहरे पानी पैठ।
22. होनहार बिरवान के होत चीकने पात।
23. हिंसा बुरी चीज है, पर दासता उससे भी बुरी है।
24. तेते पाँव पसारिए जेती लांबी सौर।
25. लीक-लीक गाड़ी चले, लीकहिं चले कपूत।
लीक छाँड़ि तीनों चलें, शायर, सिंह, सपूत॥
26. जहाँ न पहुँचे रवि वहाँ पहुँचे कवि।
27. कायर भाग्य की और वीर पुरुषार्थ की बात करते हैं।
28. भाग्यवाद आवरण पाप का और शस्त्र शोषण का।
29. लघुता से प्रभुता मिले प्रभुता से प्रभु दूर।
30. जीवन का नियम स्पर्धा नहीं, सहयोग है।
31. आँखों में हो स्वर्ग लेकिन पाँव पृथ्वी पर टिके हों।
32. महत्त्वाकांक्षा का मोती निष्ठुरता की सीपी में पलता है।
33. भविष्य वर्तमान के द्वारा खरीदा जाता है।
34. जाकी रही भावना जैसी, प्रभु मूरत देखी तिन तैसी।
35. करत-करत अभ्यास के जड़मति होत सुजान।
36. निंदक नियरे राखिए, आँगन कुटी छवाय।
37. हम नदी के द्वीप हैं, धारा नहीं हैं।
हम बहते नहीं, क्योंकि बहना रेत होना है।
38. आनंद के झरने का उद्गम अपने भीतर है, बाहर नहीं।
39. आलस्य जीवित व्यक्ति का कफन है।
40. वाणी का भूषण ही भूषण है।
41. चंदन विष व्यापत नहीं लिपटे रहत भुजंग।
42. खोजी मनुष्य के लिए समुद्र सूख जाता है, पहाड़ झुक जाता है।
43. धर्म और जाति का भेद संकीर्ण विचारों के स्वार्थ की उपज है।
44. धर्म का भूषण वैराग्य है, वैभव नहीं।
45. राष्ट्रभाषा के अभाव से पराधीनता की याद ताजा बनी रहती है।
46. भाषा विचार की पोशाक है।
47. यह सत्य ही है, देवता उसी की सहायता करते हैं, जो परिश्रम करता है।

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48. युद्ध असभ्य लोगों का व्यापार है।
49. जीवन अमरता का शैशवकाल है।

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MP Board Class 12th Physics Solutions Chapter 13 नाभिक

MP Board Class 12th Physics Solutions Chapter 13 नाभिक

नाभिक NCERT पाठ्यपुस्तक के अध्याय में पाठ्यनिहित प्रश्न एवं उनके उत्तर

• अभ्यास के प्रश्न हल करने में निम्नलिखित आँकड़े आपके लिए उपयोगी सिद्ध होंगे :

e = 1.6×10-19 कूलॉम,
N = 6.023x 1023 प्रति मोल,
\(\frac{1}{4 \pi \varepsilon_{0}}\) = 9 x 109 न्यूटन-मीटर2/कूलॉम’2,
k= 1.381 x 1023 जूल/केल्विन,
1 मिलियन इलेक्ट्रॉन-वोल्ट = 1.6 x 10-13 जूल
1u = 931 मिलियन इलेक्ट्रॉन-वोल्ट,
1 year = 3.154 x 107 सेकण्ड,
mp = 1.007825
mH = 1.007823u
mn = 1.008665 u,
m(_{2}^{4} \mathrm{He}) = 4.002603u,
me = 0.000548u.

प्रश्न 1.
(a) लीथियम के दो स्थायी समस्थानिकों को \(_{3}^{6} \mathbf{L i}\) एवं \(_{3}^{7} \mathbf{L i}\) की बहुलता का प्रतिशत क्रमशः 7.5 एवं 92.5 है। इन समस्थानिकों के द्रव्यमान क्रमशः 6.01512 u एवं 7.01600 u हैं। लीथियम का परमाणु द्रव्यमान ज्ञात कीजिए।
(b) बोरॉन के दो स्थायी समस्थानिक \(\begin{array}{c}{10} \\ {5}\end{array}\)B एवं \(\begin{array}{l}{11} \\ {5}\end{array}\)B हैं। उनके द्रव्यमान क्रमशः 10.01294u एवं 11.00931u एवं बोरॉन का परमाणु भार 10.811u है। Bएवं VB की बहुलता ज्ञात कीजिए।
हल
(a) माना लीथियम के किसी नमूने में 100 परमाणु लिए गए हैं, तब इनमें 7.5 परमाणु \(_{3}^{6} \mathbf{L i}\) के तथा 92.5 परमाणु \(_{3}^{7} \mathbf{L i}\) के होंगे। .
∴ 100 परमाणुओं का द्रव्यमान = (7.5 x 6.01512+ 92.5 x 7.01600)u
= (45.1134 + 648.98)u= 694.0934u
∴ लीथियम का औसत परमाणु द्रव्यमान =
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\(\frac { 694.0934 }{ 100 }\) = 6.940934u
≈ 6.941u

(b) माना बोरॉन के दो समस्थानिकों की बहुलता क्रमश: x% तथा y% है, तब
x+ y= 100
यदि बोरॉन के 100 परमाणु लिए जाएँ तो इनमें x परमाणु \(\begin{array}{c}{10} \\ {5}\end{array}\)B के तथा y परमाणु \(\begin{array}{l}{11} \\ {5}\end{array}\)B के होंगे।
∴ बोरॉन का परमाणु द्रव्यमान =
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⇒ 10.811 = \(\frac { x×10.01294 + y × 11.00931 }{ 100 }\)
था 10.811×100 = 10.01294x + 11.00931 (100-x) [∵ x+ y = 100]
⇒ 1081.1-1100.931 = 10.01294x – 11.00931x
⇒  -19.831= – 0.99637x
∴ x = \(\frac { -19.831 }{ -0.99637 }\) = 19.9 .
∴ y = 100-x= 100 – 19.9 = 80.1
अत: बोरॉन में \(\begin{array}{c}{10} \\ {5}\end{array}\)B तथा \(\begin{array}{l}{11} \\ {5}\end{array}\)B समस्थानिकों की बहुलता प्रतिशत क्रमश: 19.9 तथा 80.1 हैं।

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प्रश्न 2.
नियॉन के तीन स्थायी समस्थानिकों की बहुलता क्रमशः 90.51%, 0.27% एवं 9.22% है। इन समस्थानिकों के परमाणु द्रव्यमान क्रमशः 19.99u, 20.99u एवं 21.99u हैं। नियॉन का औसत परमाणु द्रव्यमान ज्ञात कीजिए।
हल
यदि नियॉन के 100 परमाणु लिए जाएँ तो उनमें नियॉन के तीन समस्थानिकों के क्रमश: 90.51 परमाणु, 0.27 परमाणु तथा 9.22 परमाणु होंगे।
∴ नियॉन का औसत परमाणु द्रव्यमान = \(\frac { (90.51 × 19.99 + 0.27 × 20.99+9.22 × 21.99)u }{ 100 }\)
= \(\frac { (1809.2949+ 5.6673+ 202.7478)u }{ 100 }\) = \(\frac { 2017.71 }{ 100 }\)
= 20.177u ≈ 20. 18u

प्रश्न 3.
नाइट्रोजन नाभिक (\(_{7}^{14} \mathrm{N}\)) की बन्धन ऊर्जा मिलियन इलेक्ट्रॉन-ऊर्जा में ज्ञात कीजिए। mr = 14.00307u
हल
दिया है : न्यूट्रॉन का द्रव्यमान mn = 1.00867u, प्रोटॉन का द्रव्यमान mp = 1.00783u
\(_{7}^{14} \mathrm{N}\) नाभिक का द्रव्यमान mN = 14.00307u
∴ \(_{7}^{14} \mathrm{N}\) नाभिक 7 प्रोटॉनों तथा 7 न्यूट्रॉनों से मिलकर बना है।
∴ \(_{7}^{14} \mathrm{N}\) नाभिक में उपस्थित न्यूक्लिऑनों का द्रव्यमान
= 7mp + 7mn
= 7 × 1.00783 + 7 × 1.00867
= 14.1155u
∴ \(_{7}^{14} \mathrm{N}\) की द्रव्यमान क्षति Δ m = न्यूक्लिऑनों का द्रव्यमान — नाभिक का द्रव्यमान
= 14.11550- 14.00307 = 0.11243u
1u = 931 MeV
∴ \(_{7}^{14} \mathrm{N}\) नाभिक की बन्धन ऊर्जा = Δ m × 931 = 0.11243 × 931
= 104.67
≈ 104.7 मिलियन इलेक्ट्रॉन-वोल्ट।

प्रश्न 4.
निम्नलिखित आँकड़ों के आधार पर \(\begin{array}{l}{56} \\ {26}\end{array} \mathbf{F} \mathbf{e}\) एवं \(\begin{array}{l}{209} \\ {83}\end{array}\)Bi नाभिकों की बन्धन ऊर्जा प्रति न्यूक्लिऑन मिलियन इलेक्ट्रॉन-वोल्ट में ज्ञात कीजिए। m (\(\begin{array}{l}{56} \\ {26}\end{array} \mathbf{F} \mathbf{e}\)) = 55.934939u, m (\(\begin{array}{l}{209} \\ {83}\end{array}\)Bi) = 208.980388u.
हल
दिया है, प्रोटॉन का द्रव्यमान mp = 1.007825u
न्यूट्रॉन का द्रव्यमान mn = 1.008665u
(i) \(\begin{array}{l}{56} \\ {26}\end{array} \mathbf{F} \mathbf{e}\) नाभिक का द्रव्यमान mFe = 55.934939u
इस नाभिक में 26 प्रोटॉन तथा (56- 26) = 30 न्यूट्रॉन हैं।
∴ न्यूक्लिऑनों का द्रव्यमान = 26mp + 30mn
= 26 x 1.007825+ 30 x 1.008665
= 26.20345 + 30.25995 = 56.4634u
द्रव्यमान क्षति Δm = न्यूक्लिऑनों का द्रव्यमान – नाभिक का द्रव्यमान
= 56.4634 – 55.934939 = 0.528461u
∴\(\begin{array}{l}{56} \\ {26}\end{array} \mathbf{F} \mathbf{e}\) नाभिक की बन्धन ऊर्जा = Δm x 931
= 0.528461x 931.5 मिलियन इलेक्ट्रॉन-वोल्ट
= 492.26 मिलियन इलेक्ट्रॉन-वोल्ट
∴ बन्धन ऊर्जा प्रति न्यूक्लिऑन = \(\frac { 496.26 }{ 56 }\)
= 8.79 मिलियन इलेक्ट्रॉन-वोल्ट/न्यूक्लिऑन।

(ii) \(\begin{array}{l}{209} \\ {83}\end{array}\)Bi नाभिक का द्रव्यमान mBi = 208.980388u
इस नाभिक में 83 प्रोटॉन तथा 126 न्यूट्रॉन हैं। .
∴ न्यूक्लिऑनों का द्रव्यमान = 83mp + 126mn
= 83×1.007825+ 126×1.008665
= 83.649475+127.091790
= 210.741260 u
∴ नाभिक की द्रव्यमान क्षति Δm = 210.741260 – 208.980388
= 1.760872 u
∴ नाभिक की बन्धन ऊर्जा = Δm x 931.5 मिलियन इलेक्ट्रॉन-वोल्ट
= 1.760872 x 931.5
= 1640.26 मिलियन इलेक्ट्रॉन-वोल्ट
∴ बन्धन ऊर्जा प्रति न्यूक्लिऑन = \(\frac { 1640.26 }{ 209 }\)
= 7.85 मिलियन इलेक्ट्रॉन-वोल्ट/न्यूक्लिऑन।

प्रश्न 5.
एक दिए गए सिक्के का द्रव्यमान 3.0 ग्राम है। उस ऊर्जा की गणना कीजिए जो इस सिक्के के सभी न्यूट्रॉनों एवं प्रोटॉनों को एक-दूसरे से अलग करने के लिए आवश्यक हो। सरलता के लिए मान लीजिए कि सिक्का पूर्णत: \(\begin{array}{l}{63} \\ {29}\end{array} \mathbf{C u}\) परमाणुओं का बना है। ( \(\begin{array}{l}{63} \\ {29}\end{array} \mathbf{C u}\) का द्रव्यमान = 62.9260u)
हल
दिया है, न्यूट्रॉन का द्रव्यमान mn = 1.008665u
प्रोटॉन का द्रव्यमान mp = 1.007825u 68
\(\begin{array}{l}{63} \\ {29}\end{array} \mathbf{C u}\) नाभिक का द्रव्यमान m = 62.9260u
\(\begin{array}{l}{63} \\ {29}\end{array} \mathbf{C u}\) का ग्राम परमाणु द्रव्यमान = 63 ग्राम
∴ 63 ग्राम कॉपर में परमाणुओं की संख्या
N = 6.02 x 1023
∴ 3 ग्राम कॉपर में परमाणुओं की संख्या = \(\frac{6.02 \times 10^{23}}{63}\) × 3
= 2.868x 1022 परमाणु
\(\begin{array}{l}{63} \\ {29}\end{array} \mathbf{C u}\) के एक नाभिक में 29 प्रोटॉन तथा 63-29 = 34 न्यूट्रॉन हैं।
∴ एक नाभिक के न्यूक्लिऑनों का द्रव्यमान = 29mp + 34 mn
= 29 x 1.007825+ 34×1.008665
= 29.226925+ 34.294610
= 63.521535u
∴ एक नाभिक पर द्रव्यमान क्षति = 63.521535 – 62.9260 = 0.595535u
∴ 3 ग्राम कॉपर के लिए कुल द्रव्यमान क्षति
Δm = 0.595635 x 2.868 x 1022
= 1.70x 1022u
∴ 3 ग्राम कॉपर की बन्धन ऊर्जा = Δm x 931.5 मिलियन इलेक्ट्रॉन-वोल्ट
= 1.70 x 1022 x 931.5
= 1583.5 x 1022 मिलियन इलेक्ट्रॉन-वोल्ट
=1.584 x 1025 मिलियन इलेक्ट्रॉन-वोल्ट
अथवा
बन्धन ऊर्जा = 1.584 x 1025 x 1.6 x 10-13 जूल
= 2.535 x 1012 जूल ।
अतः सभी न्यूट्रॉनों एवं प्रोटॉनों को अलग करने के लिए आवश्यक ऊर्जा
= 1.584 x 1025 मिलियन इलेक्ट्रॉन-वोल्ट
= 2.535 x 1012 जूल।

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प्रश्न 6.
निम्नलिखित के लिए नाभिकीय समीकरण लिखिए-
MP Board Class 12th Physics Solutions Chapter 13 नाभिक img 3
उत्तर
दी गई अभिक्रियाओं के लिए नाभिकीय समीकरण निम्नलिखित हैं
MP Board Class 12th Physics Solutions Chapter 13 नाभिक img 4

प्रश्न 7.
एक रेडियोऐक्टिव समस्थानिक की अर्द्ध-आयु T वर्ष है। कितने समय के बाद इसकी ऐक्टिवता, प्रारम्भिक ऐक्टिवता की
(a) 3. 125%, तथा
(b) 1% रह जाएगी? ।
हल
(a) माना समस्थानिक की प्रारम्भिक रेडियोऐक्टिवता = R0
माना समयान्तराल n अर्धायुकालों के पश्चात् शेष रेडियोऐक्टिवता = R
प्रश्नानुसार, R= R0 का 3.125%
⇒ R = \(\frac{3.125}{100} R_{0}\)
MP Board Class 12th Physics Solutions Chapter 13 नाभिक img 5
अभीष्ट समयान्तराल = n × एक अर्द्ध-आयु
= 5T वर्ष।

(b) इस बार R = R0 का 1% = \(\frac { 1 }{ 100 }\) Ro
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प्रश्न 8.
जीवित कार्बनयुक्त द्रव्य की सामान्य ऐक्टिवता, प्रति ग्राम कार्बन के लिए 15 क्षय प्रति मिनट है यह ऐक्टिवता, स्थायी समस्थानिक \(_{6}^{14} \mathbf{c}\) के साथ-साथ अल्प मात्रा में विद्यमान रेडियोऐक्टिव \(_{6}^{12} \mathbf{C}\) के कारण होती है। जीव की मृत्यु होने पर वायुमण्डल के साथ इसकी अन्योन्य क्रिया (जो उपर्युक्त सन्तुलित ऐक्टिवता को बनाए रखती है) समाप्त हो जाती है तथा इसकी ऐक्टिवता कम होनी शुरू हो जाती है। \(_{6}^{14} \mathbf{c}\) की ज्ञात अर्द्ध-आयु (5730 वर्ष) और नमूने की मापी गई ऐक्टिवता के आधार पर इसकी सन्निकट आयु की गणना की जा सकती है। यही पुरातत्व विज्ञान में प्रयुक्त होने वाली \(_{6}^{14} \mathbf{c}\) कालनिर्धारण (dating) पद्धति का सिद्धान्त है। यह मानकर कि मोहनजोदड़ो से प्राप्त किसी नमूने की ऐक्टिवता 9 क्षय प्रति मिनट प्रति ग्राम कार्बन है। सिन्धु घाटी सभ्यता की सन्निकट आयु का आकलन कीजिए।
हल
दिया है, R0 = 15 क्षय प्रति मिनट, R= 9 क्षय प्रति मिनट, T1/2 = 5730 वर्ष
सूत्र R = R0e-λt से, 9= 15e-λt
⇒ \(\frac { 5 }{ 3 }\) eλt या 1.6667 = eλt
दोनों पक्षों का log लेने पर,
loge(1.6667) = λt logee
या 2.303 log10 1.6667 = λt
⇒ λt = 2.3025×0.22185 = 0.5108
MP Board Class 12th Physics Solutions Chapter 13 नाभिक img 8
= 4224 वर्ष।

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प्रश्न 9.
8.0 मिलीक्यूरी सक्रियता का रेडियोऐक्टिव स्रोत प्राप्त करने के लिए \(\begin{array}{l}{60} \\ {27}\end{array}\)Co की कितनी मात्रा की आवश्यकता होगी? \(\begin{array}{l}{60} \\ {27}\end{array}\)Co की अर्द्ध-आयु 5.3 वर्ष है।
हल
दिया है, सक्रियता R= 8.0 मिलीक्यूरी = 8.0×10-3 x 3.7 x 1010 विघटन/सेकण्ड
= 29.6 x 107 विघटन/सेकण्ड
तथा T1/2 = 5.3 वर्ष (∵ 1 क्यूरी = 3.7×1010 विघटन/सेकण्ड)
= 5.3 x 365 x 24 x 60 x 60 सेकण्ड .
सक्रियता R=-\(\frac { dN }{ dt }\) = – \(\frac { d }{ dt }\) (N0e-λt) [:: N = N0e-λt]
MP Board Class 12th Physics Solutions Chapter 13 नाभिक img 9
∴ आवश्यक परमाणुओं की संख्या N= \(\frac{29.6 \times 10^{7} \times 5.3 \times 365 \times 24 \times 60 \times 60}{0.693}\)
= 7.133 x 1016 परमाणु
∵ \(\begin{array}{l}{60} \\ {27}\end{array}\)Co का ग्राम परमाणु द्रव्यमान = 60
∴ 60 ग्राम Co में परमाणुओं की संख्या = NA = 6.02 x 1023
∴ 7.133 x 1016 परमाणु ओं का द्रव्यमान = \(\frac{60}{6.02 \times 10^{23}} \times 7.133 \times 10^{16}\)
= 7.109 x 10-6 ग्राम
= 7.11 माइक्रोग्राम।

प्रश्न 10.
\(\begin{array}{l}{90} \\ {38}\end{array} \mathbf{S} \mathbf{r}\) की अर्द्ध-आयु 28 वर्ष है। इस समस्थानिक के 15 मिलीग्राम की विघटन दर क्या है?
हल
दिया है : पदार्थ का द्रव्यमान = 15 × 10-3 ग्राम तथा
T1/2 = 28 वर्ष
= 28 × 365 × 24 × 60 × 60 सेकण्ड
= 88.3 × 107 सेकण्ड

MP Board Class 12th Physics Solutions Chapter 13 नाभिक img 10
∴ \(\begin{array}{l}{90} \\ {38}\end{array} \mathbf{S} \mathbf{r}\) का ग्राम परमाणु द्रव्यमान = 90 ग्राम ∴ 90 ग्राम Sr में परमाणुओं की संख्या = 6.02 × 1023
∴ 15 × 10-3 ग्राम में परमाणुओं की संख्या .
\(=\frac{6.02 \times 10^{23}}{90} \times 15 \times 10^{-3}\)
= 1.004 × 1020
∴ पदार्थ की विघटन दर (सक्रियता) R= λN (देखें प्रश्न 9)
⇒ \(R=\frac{0.693}{88.3 \times 10^{7}} \times 1.004 \times 10^{20}\)
= 7.879 x 1010 विघटन/सेकण्ड
MP Board Class 12th Physics Solutions Chapter 13 नाभिक img 11
= 2.13 क्यूरी।

प्रश्न 11.
स्वर्ण के समस्थानिक \(\begin{array}{l}{197} \\ {79}\end{array}\)Au एवं रजत के समस्थानिक \(\begin{array}{l}{107} \\ {47}\end{array}\)Ag की नाभिकीय त्रिज्या के अनुपात का सन्निकट मान ज्ञात कीजिए।
हल
किसी नाभिक की त्रिज्या निम्नलिखित सूत्र द्वारा प्राप्त होती है
R= R0A1/3
जहाँ A= परमाणु द्रव्यमान जबकि R0 = नियतांक
यहाँ \(\begin{array}{l}{197} \\ {79}\end{array}\)Au के लिए, A1 = 197
तथा \(\begin{array}{l}{107} \\ {47}\end{array}\)Ag के लिए, A2 = 107
∴\(\frac{R_{1}}{R_{2}}=\frac{\left(A_{1}\right)^{1 / 3}}{\left(A_{2}\right)^{1 / 3}}=\left(\frac{A_{1}}{A_{2}}\right)^{1 / 3}=\left(\frac{197}{107}\right)^{1 / 3}\)
⇒ \(\frac{R_{1}}{R_{2}}=(1.84)^{1 / 3}=1.23\)
∴ त्रिज्याओं का अनुपात R1: R2 = 1. 23 : 1

प्रश्न 12.
(a) \(\begin{array}{l}{226} \\ {88}\end{array}\)Ra एवं
(b) \(\begin{array}{l}{220} \\ {86}\end{array}\)Rn नाभिकों के -क्षय में उत्सर्जित -कणों का Q-मान एवं गतिज ऊर्जा ज्ञात कीजिए। दिया है
MP Board Class 12th Physics Solutions Chapter 13 नाभिक img 12
हल
(a) \(\begin{array}{l}{226} \\ {88}\end{array}\)Ra नाभिक के α-क्षय का समीकरण निम्नलिखित है
MP Board Class 12th Physics Solutions Chapter 13 नाभिक img 13
जहाँ Q अभिक्रिया में उत्पन्न ऊर्जा है।
उक्त अभिक्रिया में द्रव्यमान क्षति Δm = [बाएँ पक्ष का द्रव्यमान – दाएँ पक्ष का द्रव्यमान]
= [226.02540- (222.01750+ 4.002603)]u [दिया है, mα = 4.002603u]
= 0.005297u
∴ अभिक्रिया का Q मान = Δ m × 931.5 मिलियन इलेक्ट्रॉन-वोल्ट
= 0.005297 × 931.5 मिलियन इलेक्ट्रॉन-वोल्ट
= 4.9342 मिलियन इलेक्ट्रॉन-वोल्ट
मूल नाभिक का परमाणु द्रव्यमान Z = 226
Rn का परमाणु द्रव्यमान = Z-4
α – कण का परमाणु द्रव्यमान = 4.
माना विघटन के बाद उक्त कणों के संवेग क्रमश: pR व pα हैं।
तब संवेग संरक्षण से, Pα + PR = 0  (∵ मूल परमाणु का संवेग = 0)
⇒ PR = -Pα
MP Board Class 12th Physics Solutions Chapter 13 नाभिक img 14
Kα= 4.85 मिलियन इलेक्ट्रॉन-वोल्टा.

(b) \(\begin{array}{l}{226} \\ {88}\end{array}\)Ra के -क्षय का समीकरण निम्नलिखित है
MP Board Class 12th Physics Solutions Chapter 13 नाभिक img 15
द्रव्यमान क्षति Δm = [बाएँ पक्ष का द्रव्यमान – दाएँ पक्ष का द्रव्यमान]
= [220.01137- (216.00189+ 4.002603)]u
= 0.006877u
∴ अभिक्रिया का Q मान = Δm × 931.5 मिलियन इलेक्ट्रॉन-वोल्ट
= 0.006877 × 931.5 मिलियन इलेक्ट्रॉन-वोल्ट
= 6.41 मिलियन इलेक्ट्रॉन-वोल्ट।
भाग (a) के अनुसार,
α- कण की गतिज ऊर्जा Kα = \(\frac{m_{P_{0}}}{m_{\alpha}+m_{P_{0}}} Q\)
= \(\frac { Z-4 }{ Z }\) Q = \(\frac { 220-4 }{ 220 }\) × 0.641
Kα= 0.629 मिलियन इलेक्ट्रॉन-वोल्ट।

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प्रश्न 13.
रेडियोन्यूक्लाइड 11c का क्षय निम्नलिखित समीकरण के अनुसार होता है
MP Board Class 12th Physics Solutions Chapter 13 नाभिक img 16
उत्सर्जित पॉजिट्रॉन की अधिकतम ऊर्जा 0.960 मिलियन इलेक्ट्रॉन-वोल्ट है। द्रव्यमानों के निम्नलिखित मान दिए गए हैं
तथा MP Board Class 12th Physics Solutions Chapter 13 नाभिक img 17
Q-मान की गणना कीजिए एवं उत्सर्जित पॉजिट्रॉन की अधिकतम गतिज ऊर्जा के मान से इसकी तुलना कीजिए।
हल
दिया गया समीकरण :
MP Board Class 12th Physics Solutions Chapter 13 नाभिक img 18
∴ Δm
MP Board Class 12th Physics Solutions Chapter 13 नाभिक img 19
= 11.011434 – 11.009305-2 × 0.000548
= 0.001033u
∴ Q=Δm × 931 = 0.001033 × 931
= 0.961मिलियन इलेक्ट्रॉन-वोल्ट।
उत्सर्जित पॉजिट्रॉन की महत्तम गतिज ऊर्जा 0.960 मिलियन इलेक्ट्रॉन-वोल्ट है जो कि Q-मान के तुल्य है।
∴ उत्पाद नाभिक पॉजिट्रॉन की तुलना में अत्यधिक भारी है, अतः इसकी गतिज ऊर्जा लगभग शून्य होगी, पुनः चूँकि पॉजिट्रॉन की अधिकतम गतिज ऊर्जा २-मान के तुल्य है, अत: न्यूट्रिनो भी लगभग शून्य ऊर्जा के साथ उत्सर्जित होगा।

प्रश्न 14.
\(\begin{array}{l}{23} \\ {10}\end{array} \mathrm{Ne}\) का नाभिक, β उत्सर्जन के साथ क्षयित होता है। इस β -क्षय के लिए समीकरण लिखिए और उत्सर्जित इलेक्ट्रॉनों की अधिकतम गतिज ऊर्जा ज्ञात कीजिए।
(m\(\begin{array}{l}{23} \\ {10}\end{array} \mathrm{Ne}\)) = 22.994466u, (m\(\begin{array}{l}{23} \\ {11}\end{array} \mathrm{Na}\)) = 22.989770u
हल
\(\begin{array}{l}{23} \\ {10}\end{array} \mathrm{Ne}\) नाभिक के β-क्षय का समीकरण निम्नलिखित है
MP Board Class 12th Physics Solutions Chapter 13 नाभिक img 20
द्रव्यमान क्षति Δm
MP Board Class 12th Physics Solutions Chapter 13 नाभिक img 21
= [22.994466 – 22.989770] u= 0.004696u
∴ Q-मान = Δm × 931 मिलियन इलेक्ट्रॉन-वोल्ट
= 0.04696×931.5 मिलियन इलेक्ट्रॉन-वोल्ट
Q= 4.37 मिलियन इलेक्ट्रॉन-वोल्ट
∵ \(\begin{array}{l}{23} \\ {10}\end{array} \mathrm{Na}\) नाभिक, \(\begin{array}{c}{0} \\ {-1}\end{array} \beta\) तथा ऐन्टिन्यूट्रिनो की तुलना में अत्यधिक भारी है, अतः इसकी गतिज ऊर्जा लगभग शून्य होगी। β-कण की ऊर्जा अधिकतम होगी यदि ऐन्टिन्यूट्रिनो शून्य ऊर्जा के साथ उत्सर्जित हो। इस दशा में β-कण की ऊर्जा अधिकतम होगी यदि ऐन्टिन्यूट्रिनो शून्य ऊर्जा के साथ उत्सर्जित हो। इस दशा में β-कण की अधिकतम ऊर्जा Q-मान के बराबर अर्थात् 4.37 मिलियन इलेक्ट्रॉन-वोल्ट होगी।

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प्रश्न 15.
किसी नाभिकीय अभिक्रिया A+ b → C+d का Q-मान निम्नलिखित समीकरण द्वारा परिभाषित होता है
MP Board Class 12th Physics Solutions Chapter 13 नाभिक img 22
जहाँ दिए गए द्रव्यमान, नाभिकीय विराम द्रव्यमान (rest mass) हैं। दिए गए आँकड़ों के आधार पर बताइए कि निम्नलिखित अभिक्रियाएँ ऊष्माक्षेपी हैं या ऊष्माशोषी।
MP Board Class 12th Physics Solutions Chapter 13 नाभिक img 23
उत्तर
(i) दी गई अभिक्रिया निम्नलिखित है
\(_{1}^{1} \mathrm{H}+_{1}^{3} \mathrm{H} \longrightarrow_{1}^{2} \mathrm{H}+_{1}^{2} \mathrm{H}\)
इस अभिक्रिया का Q-मान निम्नलिखित है
MP Board Class 12th Physics Solutions Chapter 13 नाभिक img 24
= 1.007825 + 3.016049- 2.014102 – 2.014102
= – 0.004339u
= – 0.004339x 1.66×10-27 किग्रा ।
[∵ m \(\left(_{1}^{1} \mathrm{H}\right)\) = 1.007825u व 1u = 1.66 x 10-27 किग्रा]
Q= – 0.004339×1.66×10-27x (3×108)2 जूल
= – 6.46 x 10-13 जूल
∵ इस अभिक्रिया का Q-मान ऋणात्मक है, अत: यह ऊष्माशोषी अभिक्रिया है।

(ii)
MP Board Class 12th Physics Solutions Chapter 13 नाभिक img 25
= 2 × 12.000000 -19.992439 – 4.002603  [∵ m \(\left(_{2}^{4} \mathrm{He}\right)\) = 4.002603]
= 0.004958u= 0.004958×1.66 × 10-27 किग्रा
∴ Q = 0.004958 × 1.66 x 10-27 × (3 × 108)2 जूल
= 7.41 × 10-13 जूल
∴ Qमान धनात्मक है, अतः यह अभिक्रिया ऊष्माक्षेपी अभिक्रिया है।

प्रश्न 16.
माना कि हम \(\begin{array}{l}{56} \\ {26}\end{array}\)Fe नाभिक के दो समान अवयवों \(\begin{array}{l}{28} \\ {13}\end{array} \mathbf{A} \mathbf{l}\) में विखण्डन पर विचार करें। क्या ऊर्जा की दृष्टि से यह विखण्डन सम्भव है? इस प्रक्रम का Q-मान ज्ञात करके अपना तर्क प्रस्तुत करें।
दिया है : m (\(\begin{array}{l}{56} \\ {26}\end{array}\)Fe) = 55.93494u एवं m(\(\begin{array}{l}{28} \\ {13}\end{array} \mathbf{A} \mathbf{l}\)) = 27.98191u
उत्तर
सम्भावित अभिक्रिया का समीकरण निम्नलिखित है- .
\(\begin{array}{l}{56} \\ {26}\end{array}\)Fe→ m\(\begin{array}{l}{28} \\ {13}\end{array} \mathbf{A} \mathbf{l}\)+ m\(\begin{array}{l}{28} \\ {13}\end{array} \mathbf{A} \mathbf{l}\)+Q
इस अभिक्रिया का Q-मान निम्नलिखित है
Q= [m(\(\begin{array}{l}{56} \\ {26}\end{array}\)Fe)- 2 × m(m(\(\begin{array}{l}{28} \\ {13}\end{array} \mathbf{A} \mathbf{l}\))] × 931.5 मिलियन इलेक्ट्रॉन-वोल्ट
= [55.93494 – 2 × 27.98191] × 931.5 मिलियन इलेक्ट्रॉन-वोल्ट
= – 0.02888×931.5
= – 26.90 मिलियन इलेक्ट्रॉन-वोल्ट।
∵ अभिक्रिया का Q-मान ऋणात्मक है, अतः यह अभिक्रिया सम्भव नहीं है।

प्रश्न 17.
\(\begin{array}{l}{239} \\ {94}\end{array} \mathbf{P} \mathbf{u}\) के विखण्डन गुण बहुत कुछ \(\begin{array}{l}{235} \\ {92}\end{array}\)U से मिलते-जुलते हैं। प्रति विखण्डन विमुक्त औसत ऊर्जा 180 मिलियन इलेक्ट्रॉन-वोल्ट है। यदि 1 किग्रा शुद्ध \(\begin{array}{l}{239} \\ {94}\end{array} \mathbf{P} \mathbf{u}\)के सभी परमाणु विखण्डित हों तो कितनी मिलियन इलेक्ट्रॉन-वोल्ट ऊर्जा विमुक्त होगी? ।
हल
यहाँ \(\begin{array}{l}{239} \\ {94}\end{array} \mathbf{P} \mathbf{u}\) के विखण्डन से मुक्त ऊर्जा = 180 मिलियन इलेक्ट्रॉन-वोल्ट
∵ \(\begin{array}{l}{239} \\ {94}\end{array} \mathbf{P} \mathbf{u}\) का ग्राम परमाणु द्रव्यमान = 239 ग्राम
∴ 239 ग्राम प्लूटोनियम में उपस्थित परमाणुओं की संख्या = 6.02 × 1023
∴ 1 किग्रा (= 1000 ग्राम) में उपस्थित परमाणुओं की संख्या = \(\frac{6.02 \times 10^{23}}{239} \times 1000\)
= 2.52 × 1024
∵ 1 परमाणु के विखण्डन से मुक्त ऊर्जा = 180 मिलियन इलेक्ट्रॉन-वोल्ट
∴ 1 किग्रा अर्थात् 2.52 × 1024 परमाणुओं के विखण्डन से मुक्त ऊर्जा
= 180 × 2.52 × 1024
= 4.536 × 1026 मिलियन इलेक्ट्रॉन-वोल्ट।

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प्रश्न 18.
किसी 1000 मेगावाट विखण्डन रिऐक्टर के आधे ईंधन का 5.00 वर्ष में व्यय हो जाता है। प्रारम्भ में इसमें कितना \(\begin{array}{l}{235} \\ {92}\end{array}\)U था? मान लीजिए कि रिऐक्टर 80% समय कार्यरत रहता है, इसकी सम्पूर्ण ऊर्जा \(\begin{array}{l}{235} \\ {92}\end{array}\)U के विखण्डन से ही उत्पन्न हुई है तथा \(\begin{array}{l}{235} \\ {92}\end{array}\)U न्यूक्लाइड केवल विखण्डन प्रक्रिया में ही व्यय होता है।
हल
रिऐक्टर की शक्ति P= 1000 मिलियन इलेक्ट्रॉन-वोल्ट
= 1000 × 106 जूल/सेकण्ड
= 109 जूल/सेकण्ड
समय t = 5.00 वर्ष
= 5 × 365 × 24x 60 × 60 सेकण्ड = 1.577 × 108 सेकण्ड
∴ 5 वर्ष में रिऐक्टर में उत्पन्न ऊर्जा (जबकि यह 80% समय ही कार्य करता है)
E = 80% t × P
= \(\frac { 80 }{ 100 }\) × 1.577×108 × 109
= 1.2616×1017 जूल
235U के एक परमाणु के विखण्डन से औसतन 200 मिलियन इलेक्ट्रॉन-वोल्ट ऊर्जा उत्पन्न होती है।
∴ 100 मिलियन इलेक्ट्रॉन-वोल्ट ऊर्जा उत्पन्न होती है = 1 परमाणु से
या 200 × 1.6×10-13 जूल ऊर्जा उत्पन्न होती है = 1 परमाणु से
1 जूल ऊर्जा उत्पन्न होगी = \(\frac{1}{200 \times 1.6 \times 10^{-13}}\) परमाणु से
∴ 1.2616 × 1017 जूल ऊर्जा उत्पन्न होगी = \(\frac{1.2616 \times 10^{17}}{200 \times 1.6 \times 10^{-13}}\) परमाणु से
= 3.94 × 1027
∴ 5.0 वर्ष में विखण्डित नाभिकों की संख्या n= 3.94 × 1027 6.0 × 1023 परमाणु उपस्थित हैं
= 235 ग्राम यूरेनियम में ।
∴ 3.94 × 1027 परमाण उपस्थित होंगे = \(\frac{235 \times 3.94 \times 10^{27}}{6.0 \times 10^{23}}\) ग्राम में …
= 1.544 x 106 ग्राम में = 1.544 x 103 किग्रा
= 1544 किग्रा .
∵ 5.0 वर्ष में आधी माग विघटित होती है,
∴ रिऐक्टर में \(\begin{array}{l}{235} \\ {92}\end{array}\)U की प्रारम्भिक मात्रा = 2x 1544 = 3088 किग्रा।

प्रश्न 19.
2.0 किग्रा ड्यूटीरियम के संलयन से एक 100 वाट का विद्युत लैम्प कितनी देर प्रकाशित रखा जा सकता है? संलयन अभिक्रिया निम्नवत् ली जा सकती है
MP Board Class 12th Physics Solutions Chapter 13 नाभिक img 26
हल
लैम्प की शक्ति P = 100W, ड्यूटीरियम का द्रव्यमान m= 2.0 किग्रा
दी गई समीकरण- image 28
इस समीकरण से स्पष्ट है कि इस अभिक्रिया में \(_{1}^{2} \mathrm{H}\) के दो नाभिकों के संलयन से 3.27 मिलियन इलेक्ट्रॉन वोल्ट ऊर्जा उत्पन्न होती है।
∵ 2 ग्राम ड्यूटीरियम में उपस्थित नाभिकों की संख्या = 6.02 × 1023
∴ 2.0 किग्रा (= 2000 ग्राम) में उपस्थित नाभिकों की संख्या \(\begin{array}{l}{=\frac{6.02 \times 10^{23} \times 2000}{2}} \\ {=6.02 \times 10^{26}}\end{array}\)
दो नाभिकों के संलयन से उत्पन्न ऊर्जा = 3.27 मिलियन इलेक्ट्रॉन-वोल्ट
= 3.27 × 1.6 × 10-13 जूल
∴ 2 किग्रा अथवा 6.02 × 1026 नाभिकों के संलयन से उत्पन्न ऊर्जा
= 3.27 ×1.6 × 10-13 × 6.02  × 1026 जल
= 3.27 × 1.6 × 6.02 × 1013 जूल
माना इस ऊर्जा से लैम्प को t सेकण्ड तक प्रकाशित रखा जा सकता है, तब
लैम्प द्वारा व्यय ऊर्जा = 100 वाट × t सेकण्ड
= 100 t जूल
100 t = 3.27 × 1.6 × 6.02 × 1013
t = 3.27 × 1.6 × 6.02 × 1011
MP Board Class 12th Physics Solutions Chapter 13 नाभिक img 27
= 4.9 × 104 वर्ष
अर्थात् लैम्प को 4.9 × 104 वर्ष तक प्रकाशित रखा जा सकता है।

प्रश्न 20.
दो ड्यूट्रॉनों के आमने-सामने की टक्कर के लिए कूलॉम अवरोध की ऊँचाई ज्ञात कीजिए। (संकेत-कूलॉम अवरोध वह न्यूनतम गतिज ऊर्जा है जिसके द्वारा उन्हें एक-दूसरे की ओर भेजे जाने पर वे कूलॉमीय बल के विरुद्ध परस्पर संलयित हो सकें। यह मान सकते हैं कि ड्यूट्रॉन 2.0 फैम्टो मीटर प्रभावी त्रिज्या वाले दृढ़ गोले हैं।)
हल
प्रत्येक ड्यूट्रॉन पर आवेश q1= q2 = + 1.6 × 10-19 कूलॉम
ऊर्जा के पदों में कूलॉम अवरोध (विभव प्राचीर)
माना प्रारम्भ में प्रत्येक ड्यूट्रॉन की गतिज ऊर्जा K है। जब ये दोनों एक-दूसरे के सम्पर्क में आते हैं तो सम्पूर्ण ऊर्जा विद्युत स्थितिज ऊर्जा में बदल जाती है। ∴ ऊर्जा संरक्षण से, U= 2K ⇒ \(\frac{1}{4 \pi \varepsilon_{0}} \cdot \frac{q_{1} q_{2}}{r}=2 K\)
MP Board Class 12th Physics Solutions Chapter 13 नाभिक img 28
= 5.76x 10-14 जुल
MP Board Class 12th Physics Solutions Chapter 13 नाभिक img 29
= 3.6 × 105 इलेक्ट्रॉन-वोल्ट
विभव प्राचीर K = 360 किलो इलेक्ट्रॉन-वोल्ट।

प्रश्न 21.
समीकरण R = \(\boldsymbol{R}_{0} \boldsymbol{A}^{1 / 3}\) के आधार पर, दर्शाइए कि नाभिकीय द्रव्य का घनत्व लगभग अचर है (अर्थात् A पर निर्भर नहीं करता है)। यहाँ R. एक नियतांक है एवं A नाभिक की द्रव्यमान संख्या है।
उत्तर
∵ नाभिक की द्रव्यमान संख्या = A
∴ नाभिक का द्रव्यमान m = Au = A × 1.66 × 10-27 किग्रा
पुन: नाभिक का आयतन V \(\begin{array}{l}{=\frac{4}{3} \pi R^{3}=\frac{4}{3} \pi\left(R_{0} A^{1 / 3}\right)^{3}} \\ {=\frac{4}{3} \pi R_{0}^{3} A}\end{array}\)
∴ नाभिक का घनत्व p \(\begin{aligned}=& \frac{m}{V}=\frac{A \times 1.66 \times 10^{-27}}{\frac{4}{3} \times \pi R_{0}^{3} A} \\=& \frac{3 \times 1.66 \times 10^{-27}}{4 \pi R_{0}^{3}} \end{aligned}\)
∵ यह घनत्व नाभिक की द्रव्यमान संख्या A से मुक्त है, अत: हम कह सकते हैं कि नाभिकीय द्रव्य का घनत्व लगभग अचर है।

प्रश्न 22.
किसी नाभिक से β+ (पॉजिट्रॉन) उत्सर्जन की एक अन्य प्रतियोगी प्रक्रिया है जिसे इलेक्ट्रॉन परिग्रहण (Capture) कहते हैं (इसमें परमाणु की आन्तरिक कक्षा, जैसे कि K-कक्षा, से नाभिक एक इलेक्ट्रॉन परिगृहीत कर लेता है और एक न्यूट्रिनो, v उत्सर्जित करता है)।
MP Board Class 12th Physics Solutions Chapter 13 नाभिक img 30
दर्शाइए कि यदि β+ उत्सर्जन ऊर्जा विचार से अनुमत है कि इलेक्ट्रॉन परिग्रहण भी आवश्यक रूप से अनुमत है, परन्तु इसका विलोम अनुमत नहीं है।
उत्तर
पॉजिट्रॉन उत्सर्जन की अभिक्रिया का समीकरण निम्नलिखित है
MP Board Class 12th Physics Solutions Chapter 13 नाभिक img 31
MP Board Class 12th Physics Solutions Chapter 13 नाभिक img 32
समीकरण (3) व (4) से स्पष्ट है कि Q1 < Q2
यदि पॉजिट्रॉन उत्सर्जन [अभिक्रिया (1)] ऊर्जा दृष्टि से अनुमत है तो इस अभिक्रिया का Q-मान अर्थात् Q1 धनात्मक होगा।
अर्थात् Q1>0
∵ Q2>Q1, अतः Q1>0 ⇒ Q2>0
अर्थात् तब अभिक्रिया (2) का Q-मान भी धनात्मक होगा अर्थात् ऊर्जा दृष्टि से इलेक्ट्रॉन परिग्रहण भी अनुमत है। अब इस अभिक्रिया के विलोम पर विचार कीजिए,
स्पष्ट है कि इस अभिक्रिया का Q-मान – Q2 के बराबर होगा।
∴ Q20, अतः Q3 = -Q2 < 0
∵ इस अभिक्रिया का Q-मान ऋणात्मक है, अत: यह अभिक्रिया ऊर्जा दृष्टि से अनुमत नहीं है।

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प्रश्न 23.
आवर्त सारणी में मैग्नीशियम का औसत परमाणु द्रव्यमान 24.312u दिया गया है। यह औसत मान, पृथ्वी पर इसके समस्थानिकों की सापेक्ष बहुलता के आधार पर दिया गया है। मैग्नीशियम के तीनों समस्थानिक तथा उनके द्रव्यमान इस प्रकार हैं –\(\begin{array}{l}{24} \\ {12}\end{array} Mg\)(23. 98504u), \(\begin{array}{l}{25} \\ {12}\end{array} Mg\)(24.98584) एवं \(\begin{array}{l}{26} \\ {12}\end{array} Mg\) (25.98259u)। प्रकृति में प्राप्त मैग्नीशियम में \(\begin{array}{l}{24} \\ {12}\end{array} Mg\) की (द्रव्यमान के अनुसार) बहुलता 78.99% है। अन्य दोनों समस्थानिकों की बहुलता का परिकलन कीजिए।
हल
दिया है, मैग्नीशियम का औसत परमाणु द्रव्यमान = 24.312u
\(\begin{array}{l}{24} \\ {12}\end{array} Mg\) समस्थानिक की बहुलता = 78.99%
माना समस्थानिक \(\begin{array}{l}{25} \\ {12}\end{array} Mg\) की बहुलता α% है।
तब \(\begin{array}{l}{26} \\ {12}\end{array} Mg\) समस्थानिक की बहुलता
= 100 – 78.99 – α = (21.01-a) %
MP Board Class 12th Physics Solutions Chapter 13 नाभिक img 33
तथा 21.01 – a = 21.01- 9.30 = 11.70
अत: \(\begin{array}{l}{25} \\ {12}\end{array} Mg\) की बहुलता 9. 30% तथा \(\begin{array}{l}{26} \\ {12}\end{array} Mg\) की बहुलता 11.70% है।

प्रश्न 24.
न्यूट्रॉन पृथक्करण ऊर्जा (Separation energy), परिभाषा के अनुसार वह ऊर्जा है, जो किसी नाभिक से एक न्यूट्रॉन को निकालने के लिए आवश्यक होती है। नीचे दिए गए आँकड़ों का इस्तेमाल करके \(_{20}^{41} \mathrm{Ca}\) एवं \(_{13}^{27} \mathrm{Al}\) नाभिकों की न्यूट्रॉन पृथक्करण ऊर्जा ज्ञात कीजिए।
m(\(_{20}^{40} \mathrm{Ca}\)) = 39.962591u
m (\(_{20}^{41} \mathrm{Ca}\)) = 40.962278u
(\(\begin{array}{l}{26} \\ {13}\end{array} \mathrm{Al}\)) = 25. 98689
m(\(_{13}^{27} \mathrm{Al}\)) = 26.981541u
हल
(i) \(_{20}^{41} \mathrm{Ca}\) की न्यूट्रॉन पृथक्करण ऊर्जा
न्यूट्रॉन पृथक्करण अभिक्रिया का समीकरण निम्नलिखित है
\(_{20}^{41} \mathrm{Ca} \longrightarrow_{20}^{40} \mathrm{Ca}+_{0}^{1} n+Q\)
Q = [m(\(_{20}^{41} \mathrm{Ca}\))- m(\(_{20}^{40} \mathrm{Ca}\))- mn ] x 931.5 मिलियन इलेक्ट्रॉन-वोल्ट
= [40.962278- 39.962591-1.008665] x 931.5 मिलियन इलेक्ट्रॉन-वोल्ट [∵mn = 1.008665u]
= – 0.008978×931.5
= – 8.36 मिलियन इलेक्ट्रॉन-वोल्ट
∵ Q का मान ऋणात्मक है अर्थात् उक्त अभिक्रिया ऊष्माशोषी है।
∴ न्यूट्रॉन पृथक्करण ऊर्जा 8. 36 मिलियन इलेक्ट्रॉन-वोल्ट है।

(ii) \(_{13}^{27} \mathrm{Al}\) की न्यूट्रॉन पृथक्करण ऊर्जाTAI की न्यूट्रॉन पृथक्करण समीकरण निम्नलिखित है
MP Board Class 12th Physics Solutions Chapter 13 नाभिक img 34
Q = [m(\(_{13}^{27} \mathrm{Al}\)Al) – mn (\(\begin{array}{l}{26} \\ {13}\end{array} \mathrm{Al}\))- mn ] x 931.5 मिलियन इलेक्ट्रॉन-वोल्ट
= [26.981541- 25.986895-1.008665] x 931.5 मिलियन इलेक्ट्रॉन-वोल्ट
= -0.014019 x 931.5 मिलियन इलेक्ट्रॉन-वोल्ट .
= – 13.06 मिलियन इलेक्ट्रॉन-वोल्ट
∵ Q का मान ऋणात्मक है, अतः उक्त अभिक्रिया ऊष्माशोषी है।
∴ \(_{13}^{27} \mathrm{Al}\) की न्यूट्रॉन पृथक्करण ऊर्जा 13.06 मिलियन इलेक्ट्रॉन-वोल्ट है।

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प्रश्न 25.
किसी स्रोत में फॉस्फोरस के दो रेडियो न्यूक्लाइड निहित हैं \(\begin{array}{l}{32}\\{15}\end{array}\)P(T1/2 = 14.3 दिन) एवं \(\begin{array}{l}{32}\\{15}\end{array}\)P(T1/2 = 25.3 दिन)। प्रारम्भ में \(\begin{array}{l}{32}\\{15}\end{array}\)P से 10% क्षय प्राप्त होता है। इससे 90% क्षय प्राप्त करने के लिए कितने समय प्रतीक्षा करनी होगी?
हल
माना प्रारम्भ में \(\begin{array}{l}{33}\\{15}\end{array}\) तथा \(\begin{array}{l}{32}\\{15}\end{array}\) की रेडियोऐक्टिवताएँ R01 व R02 हैं तथा + समय पश्चात् इनकी रेडियोऐक्टिवताएँ R1 व R2 हैं।
तब प्रारम्भ में, पदार्थ की कुल सक्रियता = R01 + R02
परन्तु R01 = 10% प्रारम्भिक सक्रियता = \(\frac { 10 }{100 }\)(R01 + R02)
⇒ 10 R01 = R01 + R02
या 9R01 = R02 ….(1)
पुनः t समय पश्चात् कुल सक्रियता = R1 + R2
परन्तु R1 = 90% कुल सक्रियता = \(\frac { 90 }{100 }\)(R1 + R2)
10R1 = 9R1 + 9R2
R1 = 9R2 ….(2)
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MP Board Class 12th Physics Solutions Chapter 13 नाभिक img 36

प्रश्न 26.
कुछ विशिष्ट परिस्थितियों में एक नाभिक, -कण से अधिक द्रव्यमान वाला एक कण उत्सर्जित करके क्षयित होता है। निम्नलिखित क्षय-प्रक्रियाओं पर विचार कीजिए|
MP Board Class 12th Physics Solutions Chapter 13 नाभिक img 37
इन दोनों क्षय प्रक्रियाओं के लिए Q-मान की गणना कीजिए और दर्शाइए कि दोनों प्रक्रियाएँ ऊर्जा की दृष्टि से सम्भव हैं। \
उत्तर
दी गई पहली समीकरण निम्नलिखित है
MP Board Class 12th Physics Solutions Chapter 13 नाभिक img 38
= [223.01850- 208.98107-14.00324] × 931.5 मिलियन इलेक्ट्रॉन-वोल्ट
= 0.03419 × 931.5
= 31.85 मिलियन इलेक्ट्रॉन-वोल्ट।
दूसरी समीकरण निम्नलिखित है
MP Board Class 12th Physics Solutions Chapter 13 नाभिक img 39
MP Board Class 12th Physics Solutions Chapter 13 नाभिक img 41
= [223.01850- 219.00948- 4.00260] × 931.5 मिलियन इलेक्ट्रॉन-वोल्ट
या Q= 0.00642 × 931.5
= 5.98 मिलियन इलेक्ट्रॉन-वोल्ट।
∵ दोनों अभिक्रियाओं के Q-मान धनात्मक हैं, अत: ऊर्जा दृष्टि से दोनों अभिक्रियाएँ सम्भव हैं।

प्रश्न 27.
तीव्र न्यूट्रॉनों द्वारा \(\begin{array}{c}{238} \\ {92}\end{array} \mathbf{U}\) के विखण्डन पर विचार कीजिए। किसी विखण्डन प्रक्रिया में प्राथमिक अंशों (Primary fragments) के बीटा-क्षय के पश्चात् कोई न्यूट्रॉन उत्सर्जित नहीं होता तथा \(\begin{array}{c}{140} \\ {58}\end{array} \mathbf{C} \mathbf{e}\) तथा । \(\begin{array}{l}{99} \\ {34}\end{array} \mathbf{R} \mathbf{u}\) अन्तिम उत्पाद प्राप्त होते हैं। विखण्डन प्रक्रिया के लिए Q के मान का परिकलन कीजिए। आवश्यक आँकड़े इस प्रकार हैं
m(\(\begin{array}{c}{238} \\ {92}\end{array} \mathbf{U}\)) = 238.05079u
m(\(\begin{array}{c}{140} \\ {58}\end{array} \mathbf{C} \mathbf{e}\)) = 139.90543u
m(\(\begin{array}{l}{99} \\ {34}\end{array} \mathbf{R} \mathbf{u}\)) = 98.90594u
हल
\(\begin{array}{c}{238} \\ {92}\end{array} \mathbf{U}\) की विखण्डन अभिक्रिया का समीकरण निम्नलिखित है
\(_{92}^{238} \mathrm{U}+\frac{1}{0} n \longrightarrow_{58}^{140} \mathrm{Ce}+_{34}^{99} \mathrm{Ru}+Q\)
इस समीकरण का Q-मान निम्नलिखित है
MP Board Class 12th Physics Solutions Chapter 13 नाभिक img 42
= [238.05079+1.00867- 139.90543- 98.90594] x 931.5मिलियन इलेक्ट्रॉन-वोल्ट
= 0.24809 x 931.5
= 231 मिलियन इलेक्ट्रॉन-वोल्ट।

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प्रश्न 28.
D-T अभिक्रिया (ड्यूटीरियम- ट्राइटियम संलयन),\(_{1}^{2} H+_{1}^{3} H \rightarrow \begin{array}{l}{4} \\ {2}\end{array} H e+n\) पर विचार कीजिए। .
(a) नीचे दिए गए आँकड़ों के आधार पर अभिक्रिया में विमुक्त ऊर्जा का मान मिलियन इलेक्ट्रॉन-वोल्ट में ज्ञात कीजिए
MP Board Class 12th Physics Solutions Chapter 13 नाभिक img 43
(b) ड्यूटीरियम एवं ट्राइटियम दोनों की त्रिज्या लगभग 1.5 फैमटोमीटर मान लीजिए। इस अभिक्रिया में, दोनों नाभिकों के मध्य कूलॉम प्रतिकर्षण से पार पाने के लिए कितनी गतिज ऊर्जा की आवश्यकता है? अभिक्रिया प्रारम्भ करने के लिए गैसों (D तथा T गैसें) को किस ताप तक ऊष्मित किया जाना चाहिए?
(संकेत : किसी संलयन क्रिया के लिए आवश्यक गतिज ऊर्जा = संलयन क्रिया में संलग्न कणों की औसत तापीय गतिज ऊर्जा = \(\mathbf{2}\left(\frac{3 \boldsymbol{k} \boldsymbol{T}}{\mathbf{2}}\right) ; \boldsymbol{k}:\) बोल्ट्जमान नियतांक तथा T = परम ताप)
हल
(a) दी गई अभिक्रिया का समीकरण निम्नलिखित है
\(_{1}^{2} \mathrm{H}+_{1}^{3} \mathrm{H} \longrightarrow_{2}^{4} \mathrm{He}+_{0}^{1} n+Q\)
MP Board Class 12th Physics Solutions Chapter 13 नाभिक img 44
= [2.014102 + 3.016049- 4.002603-1.008665] x 931.5
= 0.018883x 931.5
= 17.59 मिलियन इलेक्ट्रॉन-वोल्ट।

(b) ड्यूटीरियम तथा ट्राइटियम प्रत्येक पर आवेश.
q1 + q2 = + 1.6 x 10-19 कूलॉम .
प्रत्येक की त्रिज्या r = 1.5 फैमटोमीटर
= 1.5×10-15 मीटर
दोनों के बीच कूलॉम अवरोध U = निकाय की विद्युत स्थितिज ऊर्जा जबकि दोनों परस्पर सम्पर्क में हैं।
MP Board Class 12th Physics Solutions Chapter 13 नाभिक img 45
माना उक्त कूलॉम अवरोध को पार करने के लिए प्रत्येक कण को K गतिज ऊर्जा की आवश्यकता होती है।
तब K+ K=U
⇒ 2K =U
अतः कुल गतिज ऊर्जा \(=\frac{7.68 \times 10^{-14}}{1: 6 \times 10^{-19}}\) इलेक्ट्रॉन-वोल्ट
= 480.0 किलो इलेक्ट्रॉन-वोल्ट।
परन्तु कण की तापीय गतिज ऊर्जा
K = \(\frac{3}{2} k T\)
\(\frac{3}{2} k T=\frac{1}{2} U \quad \Rightarrow \quad T=\frac{U}{3 k}\)
अभीष्ट परम ताप T = \(\frac{7.68 \times 10^{-14}}{3 \times 1.38 \times 10^{-23}}\)
= 1.85x 109K

प्रश्न 29.
नीचे दी गई क्षय-योजना में, १-क्षयों की विकिरण आवृत्तियाँ एवं -कणों की अधिकतम गतिज ऊर्जाएँ ज्ञात कीजिए। दिया है :
m (198Au) = 197.968233u
m (198Hg) = 197.966760u
हल
चित्र से, E1 = \(\begin{array}{l}{198} \\ {80}\end{array} \mathrm{Hg}\) की निम्नतम अवस्था में ऊर्जा = 0 मिलियन इलेक्ट्रॉन-वोल्ट
E2 = \(\begin{array}{l}{198} \\ {80}\end{array} \mathrm{Hg}\) की प्रथम उत्तेजित अवस्था में ऊर्जा = 0.412 मिलियन इलेक्ट्रॉन-वोल्ट
E3 = \(\begin{array}{l}{198} \\ {80}\end{array} \mathrm{Hg}\) की द्वितीय उत्तेजित अवस्था में ऊर्जा = 1.088 मिलियन इलेक्ट्रॉन-वोल्ट
माना उत्सर्जित γ फोटॉनों (γ12 व γ3) की आवृत्तियाँ क्रमशः ν12 व ν3 हैं। –
MP Board Class 12th Physics Solutions Chapter 13 नाभिक img 46
तब
ν1 = \(\frac { ΔE }{ h }\) = \(\frac{E_{3}-E_{1}}{h}\)
MP Board Class 12th Physics Solutions Chapter 13 नाभिक img 47
= 2.63 x 1020 हर्ट्स।

ν2 = \(\frac{E_{2}-E_{1}}{h}\)
MP Board Class 12th Physics Solutions Chapter 13 नाभिक img 48
= 9.96 x 1019 हर्ट्स।

ν3 = \(\frac{E_{3}-E_{2}}{h}\)
MP Board Class 12th Physics Solutions Chapter 13 नाभिक img 49
6.62x 10-34
= 1.63x 1020 हर्ट्स।

जबकि इन फोटॉनों की ऊर्जाएँ निम्नलिखित हैं –
E(γ1) = E3 – E1
= 1.088 मिलियन इलेक्ट्रॉन-वोल्ट ।

E(γ2)= E2 – E1
= 0.412 मिलियन इलेक्ट्रॉन-वोल्ट

E(γ3) = E3 – E2= 1.088-0.412 .
= 0.676 मिलियन इलेक्ट्रॉन-वोल्ट

\(\begin{array}{l}{198} \\ {79}\end{array} \mathrm{Au}\) के β1-क्षय में Au नाभिक पहले एक β कण उत्सर्जित करता है तत्पश्चात् 11-फोटॉन को उत्सर्जित करके \(\begin{array}{l}{198} \\ {80}\end{array} \mathrm{Hg}\) नाभिक में बदल जाता है, अत: \(\begin{array}{l}{198} \\ {80}\end{array} \mathrm{Au}\) के E(β1) -क्षय का समीकरण निम्नलिखित है
\(_{79}^{198} \mathrm{Au} \longrightarrow_{80}^{198} \mathrm{Hg}+_{-1}^{0} e+\cdot E\left(\beta_{1}^{-}\right)+E\left(y_{1}\right)\)
यहाँ E(β1) तथा E(γ1) इन कणों की ऊर्जाएँ हैं। स्पष्ट है कि E(β1) का मान अधिकतम होमा यदि \(\begin{array}{l}{198} \\ {80}\end{array} \mathrm{Hg}\) की गतिज ऊर्जा शून्य हो। अर्थात् अभिक्रिया की सम्पूर्ण ऊर्जा केवल 8-कण तथा y-फोटॉन की ऊर्जा के रूप में निकले।
β-कण की महत्तम गतिज ऊर्जा
MP Board Class 12th Physics Solutions Chapter 13 नाभिक img 50
\(\begin{array}{l}{198} \\ {79}\end{array} \mathrm{Au}\) के β2-क्षय में Au नाभिक पहले β-कण उत्सर्जित करता है तत्पश्चात् γ2 फोटॉन उत्सर्जित करता हुआ \(\begin{array}{l}{198} \\ {80}\end{array} \mathrm{Hg}\) नाभिक में बदल जाता है।

इस क्षय का समीकरण निम्नलिखित है-
\(_{79}^{198} \mathrm{Au} \longrightarrow_{80}^{198} \mathrm{Hg}+_{-1}^{0} e+E\left(\beta_{2}^{-}\right)+E\left(\gamma_{2}\right)\)
∴ उत्सर्जित β2 -कण की महत्तम गतिज ऊर्जा .
MP Board Class 12th Physics Solutions Chapter 13 नाभिक img 51

प्रश्न 30.
सूर्य के अभ्यन्तर में (a) 1 किग्रा हाइड्रोजन के संलयन के समय विमुक्त ऊर्जा का परिकलन कीजिए। (b) विखण्डन रिऐक्टर में 1.0 किग्रा 235U के विखण्डन में विमुक्त ऊर्जा का परिकलन कीजिए। (c) प्रश्न के खण्ड (a) तथा (b) में विमुक्त ऊर्जाओं की तुलना कीजिए।
हल :
(a) सूर्य के अभ्यन्तर में हाइड्रोजन के 4 परमाणु निम्नलिखित अभिक्रिया के अनुसार संलयित होकर . हीलियम परमाणु का निर्माण करते हैं तथा लगभग 26 मिलियन इलेक्ट्रॉन-वोल्ट ऊर्जा उत्पन्न होती है।
MP Board Class 12th Physics Solutions Chapter 13 नाभिक img 52
∵ हाइड्रोजन का ग्राम परमाणु द्रव्यमान = 1 ग्राम
∴ 1 ग्राम हाइड्रोजन में उपस्थित परमाणुओं की संख्या = 6.02 × 1023
∴ 1 किग्रा (= 1000 ग्राम) में उपस्थित परमाणुओं की संख्या = 6.02 × 1026
∵ हाइड्रोजन के 4 परमाणुओं से उत्पन्न ऊर्जा = 26 मिलियन इलेक्ट्रॉन-वोल्ट
∴ 1 परमाणु से उत्पन्न ऊर्जा = \(\frac { 26 }{4 }\) मिलियन. इलेक्ट्रॉन-वोल्ट
∴ 6.02 × 1026 परमाणुओं से उत्पन्न ऊर्जा = \(\frac{26 \times 6.02 \times 10^{26}}{4}\)
= 39.13 × 1026 मिलियन इलेक्ट्रॉन-वोल्ट
∴ सूर्य के अभ्यन्तर में ‘1 किग्रा हाइड्रोजन के संलयन से उत्पन्न ऊर्जा
.. = 39.13 × 1026 मिलियन इलेक्ट्रॉन-वोल्ट। .

(b) हम जानते हैं कि विखण्डन रिऐक्टर में निम्न अभिक्रिया के अनुसार \(\begin{array}{l}{235} \\ {92}\end{array} \mathrm{u}\) के एक परमाणु के विखण्डन से. लगभग 200 मिलियन इलेक्ट्रॉन-वोल्ट ऊर्जा उत्पन्न होती है।
\(_{92}^{235} \mathrm{U}+_{0}^{1} n \longrightarrow_{56}^{141} \mathrm{Ba}+_{36}^{92} \mathrm{Kr}+3_{0}^{1} n+200\) मिलियन इलेक्ट्रॉन-वोल्ट ऊर्जा
∵ 235 ग्राम यूरेनियम में परमाणुओं की संख्या = 6.02 × 1023
∴ 1 ग्राम यरेनियम में परमाणओं की संख्या = \(\frac{6.02 \times 10^{23}}{235}\)
∴ 1 किग्रा (= 1000 ग्राम) यूरेनियम में परमाणुओं की संख्या = \(\frac{6.02 \times 10^{23} \times 1000}{235}\)
= 25.62 × 1023
1 परमाणु के विखण्डन से प्राप्त ऊर्जा = 200 मिलियन इलेक्ट्रॉन-वोल्ट
∴ 25.62 × 1023 परमाणुओं से प्राप्त ऊर्जा = 200 × 25.62 × 1023
= 5.124 × 1026 मिलियन इलेक्ट्रॉन-वोल्ट
या 1 किग्रा \(\begin{array}{l}{235} \\ {92}\end{array} \mathrm{u}\) के विखण्डन से प्राप्त ऊर्जा = 5.12 × 1026 मिलियन इलेक्ट्रॉन-वोल्ट।

(c)
MP Board Class 12th Physics Solutions Chapter 13 नाभिक img 53
= 7.64≈8
अर्थात् 1 किग्रा हाइड्रोजन के संलयन से प्राप्त ऊर्जा, 1 किग्रा 235U के विखण्डन से प्राप्त ऊर्जा की लगभग 8 गुनी है।

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प्रश्न 31.
मान लीजिए कि भारत का लक्ष्य 2020 तक 200,000 मेगावाट विद्युत शक्ति जनन का है। इसका 10% नाभिकीय शक्ति संयंत्रों से प्राप्त होना है। माना कि रिऐक्टर की औसत उपयोग दक्षता (ऊष्मा को विद्युत में परिवर्तन करने की क्षमता) 25% है। 2020 के अन्त तक हमारे देश को प्रति वर्ष कितने विखण्डनीय यूरेनियम की आवश्यकता होगी? 2350 प्रति विखण्डन उत्सर्जित ऊर्जा 200 मिलियन इलेक्ट्रॉन-वोल्ट है। ..
हल
कुल ऊर्जा लक्ष्य = 200,000 मिलियन/वाट
∴ नाभिकीय संयंत्रों से प्राप्त शक्ति = 10% × 200,000 मेगावाट
= \(\frac { 10 }{100 }\) × 200,000 × 106 वाट = 2 × 1010 वाट
∴ प्रतिवर्ष नाभिकीय संयंत्रों से प्राप्त ऊर्जा
= 2x 1010 जूल/सेकण्ड × 1 × 365 × 24 × 60 × 60 सेकण्ड
= 6.31x 1017 जूल
माना संयंत्रों में विखण्डन हेतु – किग्रा 235U की प्रतिवर्ष आवश्यकता होती है।
∵ 235 ग्राम 235U में परमाणुओं की संख्या = 6.02 × 1023
∴ 1 ग्राम 235U में परमाणुओं की संख्या = \(\frac{6.02 \times 10^{23}}{235}\)
∴ x किग्रा (= x × 1000 ग्राम) यूरेनियम में परमाणुओं की संख्य = \(\frac{6.02 \times 10^{23} \times x \times 10^{3}}{235}\)
= 25.62 x × x 1023
235U के एक परमाणु के विखण्डन से प्राप्त ऊर्जा = 200 मिलियन इलेक्ट्रॉन-वोल्ट
∴ x किग्रा 235U के परमाणुओं के विखण्डन से प्राप्त ऊर्जा
= 25.62 x × x 1023 × 200 मिलियन इलेक्ट्रॉन-वोल्ट
= 51.24 x × x 1025 मिलियन इलेक्ट्रॉन-वोल्ट
= 51.24 x × x 1025 × 1.6 × 10-13 जूल
= 81.98 x × x 1012 जूल
∵ संयंत्रों की दक्षता 25% है, अत: संयंत्रों से प्राप्त उपयोगी ऊर्जा
= η x 81.98 x × x 1012
= \(\frac { 25 }{100 }\) × 81.98 x × x 1012 जूल
∴ \(\frac { 25 }{100 }\) × 81.98 x × x 1012 = 6.31 x 1017
\( x=\frac{6.31 \times 10^{17} \times 100}{25 \times 81.98 \times 10^{12}}\)
= 3.078x 104 किग्रा।

नाभिक NCERT भौतिक विज्ञान प्रश्न प्रदर्शिका (Physics Exemplar LO Problems) पुस्तक से चयनित महत्त्वपूर्ण प्रश्नों के हल

नाभिक बहुविकल्पीय प्रश्नोत्तर

प्रश्न 1.
मान लीजिए हम ऐसे बहुत से पात्रों पर विचार करते हैं जिनमें प्रत्येक में प्रारम्भ में 1 वर्ष अर्द्ध-आयु वाले रेडियोऐक्टिव पदार्थ के 10000 परमाणु हैं। 1 वर्ष के पश्चात्
(a) सभी पात्रों में इस पदार्थ के 5000 परमाणु होंगे ।
(b) सभी पात्रों में इस पदार्थ के परमाणुओं की संख्या समान होगी, परन्तु यह लगभग 5000 होगी
(c) सामान्य तौर पर इन पात्रों में इस पदार्थ के परमाणुओं की संख्या समान होगी, परन्तु इनका औसत 5000 के निकट होगा
(d) किसी भी पात्र में इस पदार्थ के 5000 परमाणुओं से अधिक नहीं होंगे।
उत्तर
(c) सामान्य तौर पर इन पात्रों में इस पदार्थ के परमाणुओं की संख्या समान होगी, परन्तु इनका औसत 5000 के निकट होगा

प्रश्न 2.
किसी हाइड्रोजन परमाणु तथा m द्रव्यमान के किसी अन्य कण के मध्य गुरुत्वीय बल को न्यूटन के नियम द्वारा निरूपित किया जाएगा
\(\boldsymbol{F}=\boldsymbol{G} \frac{\boldsymbol{M} \cdot \boldsymbol{m}}{\boldsymbol{r}^{2}}\) यहाँ r किलोमीटर में है तथा
(a) M = mप्रोटॉन + mइलेक्ट्रॉन
(b) M = mप्रोटॉन + mइलेक्ट्रॉन \(-\frac{B}{c^{2}}\)(B= 18.6ev)
(c) M हाइड्रोजन परमाणु के द्रव्यमान से सम्बन्धित नहीं है
(d) M = mप्रोटॉन + mइलेक्टॉन \(-\frac{|V|}{c^{2}}\) (V = H-परमाणु में इलेक्ट्रॉन की स्थितिज ऊर्जा का परिमाण)।
उत्तर
(b) M = mप्रोटॉन + mइलेक्ट्रॉन \(-\frac{B}{c^{2}}\)(B= 18.6ev)

प्रश्न 3.
जब किसी परमाणु के नाभिक का रेडियोऐक्टिव विघटन होता है तो परमाणु के इलेक्ट्रॉनिक ऊर्जा स्तरों में
(a) किसी भी प्रकार की रेडियोऐक्टिवता के लिए कोई परिवर्तन नहीं होता
(b) α एवं β रेडियोऐक्टिवता के लिए परिवर्तन होते हैं, परन्तु γ रेडियोऐक्टिवता के लिए कोई परिवर्तन नहीं होते .
(c) α रेडियोऐक्टिवता के लिए परिवर्तन होते हैं, परन्तु अन्य के लिए नहीं
(d) β रेडियोऐक्टिवता के लिए परिवर्तन होते हैं, परन्तु अन्य के लिए नहीं।
उत्तर
(b) α एवं β रेडियोऐक्टिवता के लिए परिवर्तन होते हैं, परन्तु γ रेडियोऐक्टिवता के लिए कोई परिवर्तन नहीं होते .

प्रश्न 4.
ट्राइटियम हाइड्रोजन का एक समस्थानिक है जिसके नाभिक टाइटॉन में दो न्यूट्रॉन और एक प्रोटॉन है। मुक्त न्यूट्रॉन \(p+\bar{e}+\bar{v}\) में विघटित हो जाते हैं। यदि ट्राइटॉन के दो न्यूट्रॉनों में किसी एक न्यूट्रॉन का विघटन होता है, तो यह He3 नाभिक में रूपान्तरित हो जाता, परन्तु ऐसा नहीं होता क्योंकि
(a) ट्राइटॉन की ऊर्जा He3 नाभिक की ऊर्जा से कम होती है
(b) β-विघटन प्रक्रिया में उत्पन्न इलेक्ट्रॉन नाभिक के भीतर नहीं रह सकता
(c) ट्राइटॉन में दोनों न्यूट्रॉन साथ-साथ विघटित होते हैं, जिसके फलस्वरूप तीन प्रोटॉनों का एक नाभिक बनता है . जो He3 नाभिक नहीं होता
(d) क्योंकि मुक्त न्यूट्रॉन बाह्म क्षोभ के कारण विघटित होते हैं और ट्राइटॉन नाभिक में मुक्त न्यूट्रॉन नहीं होते।
उत्तर
(a) ट्राइटॉन की ऊर्जा He3 नाभिक की ऊर्जा से कम होती है

प्रश्न 5.
स्थायी भारी नाभिकों में न्यूट्रॉनों की संख्या प्रोटॉनों से अधिक होती है। इसका कारण यह है कि
(a) न्यूट्रॉन, प्रोटॉन से अधिक भारी होते हैं।
(b) प्रोटॉनों के बीच स्थिर विद्युत बल प्रतिकर्षणात्मक होता है
(c) β विघटन द्वारा न्यूट्रॉन, प्रोटॉनों में विघटित हो जाते हैं
(d) न्यूट्रॉनों के बीच नाभिकीय बल प्रोटॉन के बीच नाभिकीय बल की अपेक्षा दुर्बल होता है।
उत्तर
(b) प्रोटॉनों के बीच स्थिर विद्युत बल प्रतिकर्षणात्मक होता है

प्रश्न 6.
किसी नाभिकीय रिऐक्टर में अवमन्दक विखण्डन प्रक्रिया में मुक्त न्यूट्रॉनों की गति को मन्द कर देते हैं। अवमन्दक के रूप में हल्के नाभिकों का प्रयोग किया जाता है। भारी नाभिक यह उद्देश्य पूरा नहीं कर सकते, क्योंकि
(a) वे टूट जाएँगे
(b) भारी नाभिकों के साथ न्यूट्रॉनों का प्रत्यास्थ संघट्ट उन्हें धीमा नहीं करेगा
(c) रिऐक्टर का नेट भार अत्यधिक हो जाएगा
(d) भारी नाभिकों वाले पदार्थ कक्ष-ताप पर द्रव अथवा गैसीय अवस्था में नहीं पाए जाते।
उत्तर
(b) भारी नाभिकों के साथ न्यूट्रॉनों का प्रत्यास्थ संघट्ट उन्हें धीमा नहीं करेगा

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नाभिक अति लघु उत्तरीय प्रश्नोत्तर

प्रश्न 1.
\(\begin{array}{l}{3} \\ {2}\end{array} \mathbf{H} \mathbf{e}\) तथा \(\begin{array}{l}{3} \\ {1}\end{array} \mathbf{H} \mathbf{e}\) नाभिकों की द्रव्यमान संख्याएँ समान हैं। क्या इनकी बन्धन ऊर्जाएँ भी समान हैं?
उत्तर
नहीं, \(\begin{array}{l}{3} \\ {2}\end{array} \mathbf{H} \mathbf{e}\) नाभिक की बन्धन ऊर्जाएँ तुलनात्मक रूप में अधिक होंगी।

प्रश्न 2.
सक्रिय नाभिकों की संख्या में परिवर्तन के साथ विघटन की दर में परिवर्तन । दर्शाने वाला ग्राफ खींचिए।
उत्तर :
सक्रिय नाभिकों की संख्या में विघटन की \(\left(-\frac{d N}{d t}\right) \propto N\)
MP Board Class 12th Physics Solutions Chapter 13 नाभिक img 54

प्रश्न 3.
चित्र-13.4 में दर्शाए दो नमूनों A तथा B में किसकी औसत आयु कम
MP Board Class 12th Physics Solutions Chapter 13 नाभिक img 55
उत्तर
नमूने B के विघटन की दर अधिक है, अत: B की औसत आयु A की | तुलना में कम है।

प्रश्न 4.
निम्न में से कौन -विकिरण उत्सर्जित नहीं कर सकता और क्योंउत्तेजित नाभिक, उत्तेजित इलेक्ट्रॉन?
उत्तर
उत्तेजित इलेक्ट्रॉन γ-विकिरण उत्सर्जित नहीं कर सकता है क्योंकि इलेक्ट्रॉनिक ऊर्जा-स्तरों का ऊर्जा परास eV कोटि का होता है जबकि γ-विकिरण की ऊर्जा MeV कोटि की होती है।

प्रश्न 5.
युग्म विलोपन में एक इलेक्ट्रॉन तथा एक पॉजिट्रॉन एक-दूसरे का अस्तित्व समाप्त कर गामा विकिरण उत्पन्न करते हैं। इसमें संवेग संरक्षण कैसे होता है?
उत्तर
युग्म विलोपन में एक इलेक्ट्रॉन तथा एक पॉजिट्रॉन एक-दूसरे का अस्तित्व समाप्त कर दो गामा फोटॉन उत्पन्न करते हैं जो संवेग संरक्षण के लिए परस्पर विपरीत दिशाओं में गति करते हैं।

लघु उत्तरीय प्रश्नोत्तर

प्रश्न 1.
स्थायी नाभिकों में प्रोटॉनों की संख्या न्यूट्रॉनों की संख्या से कदापि अधिक नहीं हो सकती, क्यों?
उत्तर
नाभिक में उपस्थित प्रोटॉनों के बीच वैद्युत प्रतिकर्षण बल कार्य करता है। 10 से अधिक प्रोटॉन वाले नाभिक में यह प्रतिकर्षण बल इतना अधिक हो जाता है कि नाभिक के स्थायित्व के लिए न्यूट्रॉनों की संख्या, प्रोटॉनों की संख्या से अधिक होनी चाहिए।

प्रश्न 2.
यदि Z1 = N2 तथा Z2 = N1 हो तो किसी नाभिक को किसी दूसरे नाभिक का दर्पण समभारिक कहा जाता है।
(a) \(_{11}^{23} \mathrm{Na}\) का दर्पण समभारिक नाभिक क्या है?
(b) दो दर्पण समभारिकों में से किस नाभिक की बन्धन ऊर्जा अधिक है और क्यों? .
उत्तर
(a) \(_{11}^{23} \mathrm{Na}\) का दर्पण समभारिक नाभिक \(_{12}^{23} \mathrm{Na}\) है।
(b) यहाँ Z2 > Z1, अतः Mg नाभिक की बन्धन ऊर्जा Na नाभिक से अधिक है।

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नाभिक आंकिक प्रश्नोत्तर

प्रश्न 1.
किसी प्राचीन इमारत के खण्डहर से प्राप्त लकड़ी के एक टुकड़े में 14C की सक्रियता इसके कार्बन अंश की 12 विघटन प्रति मिनट प्रति ग्राम पायी जाती है। किसी सजीव लकड़ी की 14C की सक्रियता 16 विघटन प्रति मिनट प्रति ग्राम होती है। कितने समय से पूर्व वह वृक्ष जिसकी लकड़ी का यह प्राप्त नमूना है, काटा गया था?
14C की अर्द्ध-आयु 5760 वर्ष है।
हल
दिया है, R= 12 विघटन प्रति मिनट प्रति ग्राम
R0 = 16 विघटन प्रति मिनट प्रति ग्राम .
अर्द्ध-आयु (T) = 5760 वर्ष ।
MP Board Class 12th Physics Solutions Chapter 13 नाभिक img 57

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MP Board Class 12th Physics Solutions Chapter 8 वैद्युत चुम्बकीय तरंगें

MP Board Class 12th Physics Solutions Chapter 8 वैद्युत चुम्बकीय तरंगें

वैद्युत चुम्बकीय तरंगें NCERT पाठ्यपुस्तक के अध्याय में पाठ्यनिहित प्रश्न एवं उनके उत्तर

प्रश्न: 1.
चित्र 8.1 में एक संधारित्र दर्शाया गया है जो 12 सेमी त्रिज्या की दो वृत्ताकार प्लेटों को 5.0 सेमी की दूरी पर रखकर बनाया गया है। संधारित्र को एक बाह्य स्त्रोत (जो चित्र में नहीं दर्शाया गया है) द्वारा आवेशित किया जा रहा है। आवेशकारी धारा नियत है और इसका मान 0.15 ऐम्पियर है।
(a) धारिता एवं प्लेटों के बीच विभवान्तर परिवर्तन की दर का परिकलन कीजिए।
(b) प्लेटों के बीच विस्थापन धारा ज्ञात कीजिए।
(c) क्या किरचॉफ का प्रथम नियम संधारित्र की प्रत्येक प्लेट पर लागू होता है? स्पष्ट कीजिए।
MP Board Class 12th Physics Solutions Chapter 8 वैद्युत चुम्बकीय तरंगें img 1
हल :
दिया है : प्लेट की त्रिज्या r = 0.12 मीटर, बीच की दूरी d = 0.05 मीटर
आवेशन धारा i= 0.15 ऐम्पियर
(a) संधारित्र की धारिता \(C=\frac{\varepsilon_{0} A}{d}\)
[∵ A =πr2 = 3.14 × (0.12)2]
\(=\frac{8.854 \times 10^{-12} \times 3.14 \times(0.12)^{2}}{0.05}\)
= 8.01 × 10-12F= 8.01 pF.
किसी क्षण संधारित्र पर आवेश q= CV ⇒ V=\(\frac { q }{ C }\)
∴\(\frac{d V}{d t}=\frac{1}{C} \frac{d q}{d t}=\frac{1}{C} i\)    ( ∵ \(\frac{d q}{d t}=i\) )
∴ विभवान्तर परिवर्तन की दर \(\frac{d V}{d t}=\frac{0.15}{8.01 \times 10^{-12}}\)
= 1.87 × 1010 वोल्ट सेकण्ड-1.

(b). प्लेटों पर विस्थापन धारा \(i_{D}=\varepsilon_{0} \frac{d \phi_{E}}{d t}\)
जहाँ कै ΦE प्लेटों के बीच स्थित किसी बन्द लूप से गुजरने वाला वैद्युत फ्लक्स है।
∵ प्लेटों के बीच वैद्युत क्षेत्र \(E=\frac{q}{\varepsilon_{0} A}\)
∴ यदि लूप का क्षेत्रफल A है तो
MP Board Class 12th Physics Solutions Chapter 8 वैद्युत चुम्बकीय तरंगें img 2
MP Board Class 12th Physics Solutions Chapter 8 वैद्युत चुम्बकीय तरंगें img 10

(c) हाँ, किरचॉफ का प्रथम नियम संधारित्र की प्रत्येक प्लेट पर भी लागू होता है क्योंकि
प्लेट तक आने वाली चालन धारा = प्लेट से आगे जाने वाली विस्थापन धारा

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प्रश्न 2.
एक समान्तर प्लेट संधारित्र (चित्र 8.2), R = 6.0 सेमी त्रिज्या की दो वृत्ताकार प्लेटों से बना है और इसकी धारिता C = 100 pF है। संधारित्र को 230 वोल्ट, 300 रेडियन सेकण्ड-1 की (कोणीय) आवृत्ति के किसी स्त्रोत से जोड़ा गया है।
(a) चालन धारा का r.m.s. मान क्या है?
(b) क्या चालन धारा विस्थापन धारा के बराबर है?
(c) प्लेटों के बीच, अक्ष से 3.0 सेमी की दूरी पर स्थित बिन्दु पर B का आयाम ज्ञात कीजिए।
MP Board Class 12th Physics Solutions Chapter 8 वैद्युत चुम्बकीय तरंगें img 3
हल :
दिया है : Vrms = 230 वोल्ट, ω = 300 रेडियन सेकण्ड-1, C = 100 × 10-12F. ..
त्रिज्या R = 0.06 मीटर
(a) चालनं धारा का rms मान \(i_{r m s}=\frac{V_{r m s}}{1 / \omega C}=V_{r m s} \omega C\)
= 230 × 300 × 100 × 10-12
= 6.9 × 10-6 ऐम्पियर
= 6.9 माइक्रोऐम्पियर।
(b) हाँ, संधारित्र के लिए सदैव ही चालन धारा विस्थापन धारा के बराबर होती है, भले ही धारा दिष्ट हो अथवा प्रत्यावर्ती।
(c) प्लेटों के बीच r= 0.03 मीटर त्रिज्या के बन्द लूप पर विचार कीजिए जिसका तल प्लेटों के तल के समान्तर है। इस लूप के प्रत्येक बिन्दु पर चुम्बकीय क्षेत्र B का परिमाण समान तथा दिशा स्पर्शरेखीय होगी जबकि वैद्युत क्षेत्र E लूप के तल के प्रत्येक बिन्दु पर समान तथा इसकी दिशा लूप के तल के लम्बवत् होगी।
MP Board Class 12th Physics Solutions Chapter 8 वैद्युत चुम्बकीय तरंगें img 4
MP Board Class 12th Physics Solutions Chapter 8 वैद्युत चुम्बकीय तरंगें img 5

प्रश्न 3.
10-10 मीटर तरंगदैर्घ्य की x-किरणों, 6800 A तरंगदैर्घ्य के प्रकाश तथा 500 मीटर की रेडियो तरंगों के लिए किस भौतिक राशि का मान समान है?
हल :
उक्त तीनों प्रकार की तरंगों की तरंगदैर्घ्य तथा आवृत्तियाँ भिन्न-भिन्न हैं परन्तु ये सभी वैद्युतचुम्बकीय तरंगें हैं, अत: इन सबकी निर्वात में चाल (c = 3 x 108 मीटर सेकण्ड-1) समान है। .

प्रश्न 4.
एक समतल वैद्युतचुम्बकीय तरंग निर्वात में Z-अक्ष के अनुदिश चल रही है। इसके वैद्युत तथा चुम्बकीय क्षेत्रों के सदिश की दिशा के बारे में आप क्या कहेंगे? यदि तरंग की आवृत्ति 30 मेगाहर्ट्स हो तो उसकी तरंगदैर्घ्य कितनी होगी?
हल :
वैद्यत तथा चुम्बकीय क्षेत्रों के सदिशों की दिशाएँ तरंग संचरण की दिशा (Z-अक्ष) के लम्बवत् अर्थात् :समतल के समान्तर होंगी तथा परस्पर भी लम्बवत् होंगी। ::
∵ आवृत्ति υ = 30 × 106 हर्ट्स
तथा चाल c = 3 × 108 मीटर सेकण्ड-1
∴ तरंगदैर्घ्य \(\lambda=\frac{c}{v}=\frac{3 \times 10^{8}}{30 \times 10^{6}}\) = 10 मीटर।

प्रश्न 5.
एक रेडियो 7.5 मेगाहर्ट्स से 12 मेगाहर्ट्स बैण्ड के किसी स्टेशन से समस्वरित हो सकता है। संगत तरंदैर्घ्य बैण्ड क्या होगा?
हल :
दिया है, आवृत्ति बैण्ड υ1 = 7.5 × 106 हर्ट्स से υ2 = 12 × 106 हर्ट्स ।
चाल c = 3 × 108 मीटर सेकण्ड-1
∴ \(\lambda_{1}=\frac{c}{v_{1}}=\frac{3 \times 10^{8}}{7.5 \times 10^{6}}\) = 40 मीटर
तथा \(\lambda_{2}=\frac{c}{v_{2}}=\frac{3 \times 10^{8}}{12 \times 10^{6}}\) = 25 मीटर
∴ संगत तरंगदैर्घ्य बैण्ड 25 मीटर – 40 मीटर होगा।

प्रश्न 6.
एक आवेशित कण अपनी माध्य साम्यावस्था के दोनों ओर 109 हर्ट्स आवृत्ति से दोलन करता है। दोलक द्वारा जनित वैद्युतचुम्बकीय तरंगों की आवृत्ति कितनी है?
हल :
हम जानते हैं कि त्वरित अथवा कम्पित आवेशित कण कम्पित वैद्युत क्षेत्र उत्पन्न करता है। यह वैद्युत क्षेत्र, कम्पित चुम्बकीय क्षेत्र उत्पन्न करता है। ये दोनों क्षेत्र मिलकर वैद्युतचुम्बकीय तरंग उत्पन्न करते हैं; जिसकी आवृत्ति, कम्पित कण के दोलनों की आवृत्ति के बराबर होती है। ..
∴ तरंगों की आवृत्ति υ = 109 हौ।

प्रश्न 7.
निर्वात में एक आवर्त वैद्युतचुम्बकीय तरंग के चुम्बकीय क्षेत्र वाले भाग का आयाम B0 = 510 नैनो टेस्ला है। तरंग के वैद्युत क्षेत्र वाले भाग का आयाम क्या है?
हल :
निर्वात में, B0 = 510 नैनोटेस्ला ।
= 510 × 10-9 टेस्ला
यदि निर्वात में वैद्युत क्षेत्र वाले भाग का आयाम = Eo
तब \(c=\frac{E_{0}}{B_{0}}\) ⇒ Eo = cBo
Eo = 3 × 108 × 510 × 10-9
= 153 वोल्ट मीटर-1

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प्रश्न 8.
कल्पना कीजिए कि एक वैद्युतचुम्बकीय तरंग के वैद्युत क्षेत्र का आयाम E0 = 120 न्यूटन/कूलॉम है तथा इसकी आवृत्ति υ = 50.0 मेगाहर्ट्स है। (a) Bo , ω , k तथा λ ज्ञात कीजिए, (b) E तथा B के लिए व्यंजक प्राप्त कीजिए। .
हल :
दिया है : E0 = 120 न्यूटन कूलॉम-1,
υ = 50.0 × 106 हर्ट्स .
तरंग वेग c= 3 × 108 मीटर सेकण्ड-1
(a) सूत्र \(c=\frac{E_{0}}{B_{0}}\) से,
\(B_{0}=\frac{E_{0}}{c}=\frac{120}{3 \times 10^{8}}\) = 4.0 × 10-7 टेस्ला
= 400 नैनोटेस्ला ।
ω = 2 πυ = 2 × 3.14 × 50 × 106
= 3.14 × 108 रेडियन सेकण्ड-1
Eok= Bo ω से,
\(k=\frac{B_{0} \omega}{E_{0}}=\frac{400 \times 10^{-9} \times 3.14 \times 10^{8}}{120}\)
= 1.05 रेडियन मीटर-1
\(\lambda=\frac{c}{v}=\frac{3 \times 10^{8}}{50 \times 10^{6}}\)= 6 मीटर।

(b) माना तरंग X-अक्ष की दिशा में गतिशील है, तब वैद्युत क्षेत्र तथा चुम्बकीय क्षेत्र क्रमश: Y. तथा Z-अक्ष की दिशाओं में माने जा सकते हैं।
MP Board Class 12th Physics Solutions Chapter 8 वैद्युत चुम्बकीय तरंगें img 6

प्रश्न 9.
वैद्युतचुम्बकीय स्पेक्ट्रम के विभिन्न भागों की पारिभाषिकी पाठ्यपुस्तक में दी गई है। सूत्र E = hυ (विकिरण के एक क्वांटम की ऊर्जा के लिए : फोटॉन) का उपयोग कीजिए तथा em (वैद्युतचुम्बकीय) वर्णक्रम (वैद्युतचुम्बकीय स्पेक्ट्रम) के विभिन्न भागों के लिए इलेक्ट्रॉन वोल्ट (ev) के मात्रक में फोटॉन की ऊर्जा निकालिए। फोटॉन ऊर्जा के जो विभिन्न परिमाण आप पाते हैं वे वैद्युतचुम्बकीय विकिरण के स्रोतों से किस प्रकार सम्बन्धित हैं?
हल :
सूत्र E = hυ जूल = \(\frac{h c}{\lambda}\) जूल = \(\frac{h c}{e \lambda} \mathrm{e} \mathrm{V}\)
∵ h = 6.62 × 10-34 जूल सेकण्ड-1, c= 3 × 108 मीटर सेकण्ड-1
e = 1.6 × 10-19C
∴ \(E=\frac{6.62 \times 10^{-34} \times 3 \times 10^{8}}{1.6 \times 10^{-19} \times \lambda}=\frac{12.41 \times 10^{-7}}{\lambda}\) इलेक्ट्रॉन वोल्ट (ev)

(1) γ-किरणें-इन किरणों का माध्य तरंगदैर्घ्य 10-12 मीटर है। अत:
\(E_{1}=\frac{12.41 \times 10^{-7}}{10^{-12}}=1.24 \times 10^{6} \mathrm{eV}\)
≈ 106 इलेक्ट्रॉन वोल्ट।
अत: γ -किरणों की माध्य ऊर्जा 106 इलेक्ट्रॉन वोल्ट होती है।

(2) x-किरणें-इनकी माध्य तरंगदैर्घ्य 10-9 मीटर है।
∴ \(E=\frac{12.41 \times 10^{-7}}{10^{-9}} \approx 10^{3} \text { setagity alteel }\)
≈ 10 इलेक्ट्रॉन वोल्ट।
इनकी माध्य ऊर्जा 103 इलेक्ट्रॉन वोल्ट होती है।

(3) पराबैंगनी विकिरण–इनकी माध्य तरंगदैर्घ्य 10-8 मीटर होती है।
∴ \(E=\frac{12.41 \times 10^{-7}}{10^{-8}}=1.24 \times 10^{2} \mathrm{eV}\)
≈102 इलेक्ट्रॉन वोल्ट।

(4) दृश्य-प्रकाश–इनकी माध्य तरंगदैर्ध्य 10-6 मीटर होती है।
∴ \(E=\frac{12.41 \times 10^{-7}}{10^{-6}}\)
= 1.24 इलेक्ट्रॉन वोल्ट।

(5) सूक्ष्म तरंगें-इनकी माध्य तरंगदैर्ध्य 10-2 मीटर है जिसके लिए .
\(E=\frac{12.41 \times 10^{-7}}{10^{-2}}\)
= 1.24 × 10-4 इलेक्ट्रॉन वोल्ट।

(6) रेडियो तरंगें—इनकी माध्य तरंगदैर्घ्य 103 मीटर है। .
∴ \(E=\frac{12.41 \times 10^{-7}}{10^{3}}\)
= 1.24 × 10-9 इलेक्ट्रॉन वोल्ट।

उक्त ऊर्जा परिणामों से स्पष्ट होता है कि γ-किरणें नाभिक के संक्रमण से निकलती हैं, X-किरणें पराबैंगनी विकिरण तथा दृश्य प्रकाश परमाणुओं के संक्रमण के कारण उत्सर्जित होते हैं।

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प्रश्न 10.
एक समतल em (वैद्युतचुम्बकीय) तरंग में वैद्युत क्षेत्र, 2.0 × 1010 हर्ट्स आवृत्ति तथा 48 वोल्ट मीटर-1 आयाम से ज्या वक्रीय रूप से दोलन करता है।
(a) तरंग की तरंगदैर्घ्य कितनी है?
(b) दोलनशील चुम्बकीय क्षेत्र का आयाम क्या है?
(c) यह दर्शाइए कि \(\overrightarrow{\mathbf{E}}\) क्षेत्र का औसत ऊर्जा घनत्व, \(\overrightarrow{\mathbf{B}}\) क्षेत्र के औसत ऊर्जा घनत्व के बराबर है। [c= 3 × 108 मीटर सेकण्ड-1]
हल :
दिया है : E0 = 48 वोल्ट मीटर-1, वैद्युत क्षेत्र की आवृत्ति = 2.0 × 1010 हर्ट्स
(a) ∵ तरंग की आवृत्ति υ = वैद्युत क्षेत्र की आवृत्ति = 2 × 1010 हर्ट्स
∴ तरंग की तरंगदैर्घ्य \(\lambda=\frac{c}{v}=\frac{3 \times 10^{8}}{2 \times 10^{10}}\)
= 1.5 × 10-2 मीटर।

(b) \(c=\frac{E_{0}}{B_{0}}\) से, चुम्बकीय क्षेत्र का आयाम \(B_{0}=\frac{E_{0}}{c}=\frac{48}{3 \times 10^{8}}\)
= 1.6 × 10-7 टेस्ला ।

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प्रश्न 11.
कल्पना कीजिए कि निर्वात में एक वैद्युतचुम्बकीय तरंग का वैद्युत क्षेत्र E = {(3.1 न्यूटन/कूलॉम) cos [(1.8 रेडियन मीटर-1) y+ (5.4 × 106 रेडियन सेकण्ड-1)t}}\(\hat{\mathbf{i}}\)
(a) तरंग संचरण की दिशा क्या है?
(b) तरंगदैर्घ्य λ कितनी है?
(c) आवृत्ति υ कितनी है?
(d) तरंग के चुम्बकीय क्षेत्र सदिश का आयाम कितना है?
(e) तरंग के चुम्बकीय क्षेत्र के लिए व्यंजक लिखिए। .
हल’:
दिया है, E = {(3.1) cos [1.8y+ 5.4 × 106 t]}\(\hat{\hat{\mathbf{\imath}}}\).
जहाँ E न्यूटन/कूलॉम में, दूरी मीटर में तथा समय सेकण्ड में है।
इसकी तुलना E = Eo cos (ky + ωt) \(\hat{\hat{\mathbf{\imath}}}\) से करने पर,
k = 1.8 रेडियन मीटर-1, ω = 5.4 × 106 रेडियन सेकण्ड-1
E0 = 3.1 न्यूटन कूलॉम-1
(a) पद ky में गुणांक y से स्पष्ट है कि यह तरंग ऋणात्मक Y-अक्ष के अनुदिश गतिशील है।
(b)
∵ \(k=\frac{2 \pi}{\lambda} \)
∴ \(\lambda=\frac{2 \pi}{k}\)
या  तरगदध्य तरंगदैर्घ्य \lambda=\frac{2 \times 3.14}{1.8}= 3.48 मीटर ≈ 3.5 मीटर।
= 1.8

(c) ω = 2 πυ से, \(\nu=\frac{\omega}{2 \pi}\)
∴ आवृत्ति \(v=\frac{5.4 \times 10^{6}}{2 \times 3.14}\)
= 8.6 × 105 हर्ट्स
= 0.86 मेगाहर्ट्स।

(d) ∵ E0 = 3.1 न्यूटन कूलॉम-1, c = 3 × 108 मीटर सेकण्ड-1
∴ \(c=\frac{E_{0}}{B_{0}}\) से, चुम्बकीय क्षेत्र का आयाम \(B_{0}=\frac{E_{0}}{c}=\frac{3.1}{3 \times 10^{8}}\)
= 10 × 10-8 टेस्ला
= 10 नैनोटेस्ला।

(e) ∵ तरंग ऋणात्मक Y-अक्ष की दिशा में गतिशील है तथा वैद्युत क्षेत्र के कम्पन X-अक्ष की दिशा में हैं, अत: चुम्बकीय क्षेत्र के कम्पन Z-अक्ष की दिशा में होंगे। ∴ चुम्बकीय क्षेत्र के लिए व्यंजक ।
B= Bo cos (ky + ωt) \(\hat{\mathbf{k}}\)
= 10 नैनोटेस्ला cos (1. 8 रेडियन मीटर-1 y+ 5.4 x 106 रेडियन सेकण्ड-1t) \(\hat{\mathbf{k}}\)

प्रश्न 12.
100 वाट वैद्युत बल्ब की शक्ति का लगभग 5% दृश्य विकिरण में बदल जाता है।
(a) बल्ब से 1 मीटर की दूरी पर
(b) 10 मीटर की दूरी पर दृश्य विकिरण की औसत तीव्रता कितनी है?
यह मानिए कि विकिरण समदैशिकतः उत्सर्जित होता है और परावर्तन की उपेक्षा कीजिए।
हल:
दृश्य विकिरण में उत्सर्जित शक्ति = \(\frac{5}{100} \times 100\) = 5 वाट
(a)
MP Board Class 12th Physics Solutions Chapter 8 वैद्युत चुम्बकीय तरंगें img 8
\(=\frac{5}{4 \times 3.14 \times 1}\) = 0.4 वाट मीटर2

(b) r = 10 मीटर की दूरी पर औसत शक्ति = \(\frac{5}{4 \times 3.14 \times(10)^{2}}\)
= 0.004 वाट मीटर2

प्रश्न 13.
em वर्णक्रम (वैद्युतचुम्बकीय स्पेक्ट्रम) के विभिन्न भागों के लिए लाक्षणिक ताप परिसरों को ज्ञात करने के लिए λm T= 0.29 सेमी K सूत्र का उपयोग कीजिए। जो संख्याएँ आपको मिलती हैं, वे क्या बतलाती हैं?
हल :
λmT = 0.29 सेमी K सूत्र से स्पष्ट है कि 22 को सेमी में प्रयोग किया गया है,
अतः λm = λm ×10-8Å
∴ λmT = 0.29 सेमी K
⇒ λm x 10-8 × T = 0.29
\(T=\frac{29 \times 10^{6}}{\lambda_{m}(\hat{A})} K\)
(a) λm = 10-12 मीटर = 10-2Å के लिए, (-किरणे)
T = 2.9 × 109 K.
(b) λm = 10-10 मीटर = 1Å के लिए, (x-किरणे)
T = 2.9 × 107 K.
(c) λm = 10-6 मीटर = 104Å के लिए, (दृश्य प्रकाश)
T = 29 × 102 = 2900 K.
(d) λm = 1 मीटर = 1010 Å के लिए,
T = 2.9 × 10-3 K आदि।
उक्त परिणाम स्पेक्ट्रम के विभिन्न तरंगदैर्घ्य परास प्राप्त करने हेतु आवश्यक परम ताप प्रदर्शित करते हैं।

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प्रश्न 14.
वैद्युतचुम्बकीय विकिरण से सम्बन्धित नीचे कुछ प्रसिद्ध अंक, भौतिकी में किसी अन्य प्रसंग में वैद्युतचुम्बकीय दिए गए हैं। स्पेक्ट्रम के उस भाग का उल्लेख कीजिए जिससे इनमें से प्रत्येक सम्बन्धित है।
(a) 21 सेमी (अन्तरातारकीय आकाश में परमाण्वीय हाइड्रोजन द्वारा उत्सर्जित तरंगदैर्ध्य)
(b) 1057 मेगाहर्ट्स (लैंब-विचलन नाम से प्रसिद्ध, हाइड्रोजन में, पास जाने वाले दो समीपस्थ ऊर्जा स्तरों से उत्पन्न विकिरण की आवृत्ति)
(c) 2.7 K (सम्पूर्ण अन्तरिक्ष को भरने वाले समदैशिक विकिरण से सम्बन्धित ताप-ऐसा विचार जो विश्व में बड़े धमाके ‘बिग बैंग’ के उद्भव का अवशेष माना जाता है।)
(d) 5890 Å – 5896 Å (सोडियम की द्विक रेखाएँ) ।
(e) 14.4 keV [57 Fe नाभिक के एक विशिष्ट संक्रमण की ऊर्जा जो प्रसिद्ध उच्च विभेदन की स्पेक्ट्रमी विधि से सम्बन्धित है (मॉसबौर स्पेक्ट्रोस्कॉपी)।
हल :
(a) दी गई तरंगदैर्घ्य 10-2 मीटर क्रम की है, जो लघु रेडियो तरंग क्षेत्र में पड़ती है।
(b) यह आवृत्ति 109 हर्ट्स की कोटि की है, जो लघु रेडियो तरंग क्षेत्र में पड़ती है।
(c) λm T = 0.29 सेमी K से, T= 2.7 कूलॉम के लिए,
MP Board Class 12th Physics Solutions Chapter 8 वैद्युत चुम्बकीय तरंगें img 9
यह तरंगदैर्घ्य माइक्रो तरंगों के क्षेत्र में पड़ती है।
(d) दी गई तरंगदैर्ध्य 10-6 मीटर की कोटि की हैं जो दृश्य विकिरण क्षेत्र में पड़ती हैं।
(e) E = 14.4 kev = 14.4 × 103 eV
परन्तु \(E=\frac{h c}{\lambda e} \mathrm{eV}\)
∴ संगत तरंगदैर्घ्य \(\lambda=\frac{h c}{e E}=\frac{6.62 \times 10^{-34} \times 3 \times 10^{8}}{1.6 \times 10^{-19} \times 14.4 \times 10^{3}}\)
= 8.6 × 10-11 मीटर
⇒ λ≈ 10-10 मीटर = 1 Å
यह तरंगदैर्घ्य x-किरण क्षेत्र में पड़ती है।

प्रश्न 15.
निम्नलिखित प्रश्नों का उत्तर दीजिए
(a) लम्बी दूरी के रेडियो प्रेषित्र लघु-तरंग बैण्ड का उपयोग करते हैं। क्यों?
(b) लम्बी दूरी के TV प्रेषण के लिए उपग्रहों का उपयोग आवश्यक है। क्यों?
(c) प्रकाशीय तथा रेडियो दूरदर्शी पृथ्वी पर निर्मित किए जाते हैं किन्तु x-किरण खगोल विज्ञान का अध्ययन पृथ्वी का परिभ्रमण कर रहे उपग्रहों द्वारा ही सम्भव है। क्यों?
(d) समतापमण्डल के ऊपरी छोर पर छोटी-सी ओजोन की परत मानव जीवन के लिए निर्णायक है। क्यों?
(e) यदि पृथ्वी पर वायुमण्डल नहीं होता तो उसके धरातल का औसत ताप वर्तमान ताप से अधिक होता है या
कम?
(f) कुछ वैज्ञानिकों ने भविष्यवाणी की है कि पृथ्वी पर नाभिकीय विश्व युद्ध के बाद ‘प्रचण्ड नाभिकीय शीतकाल’ होगा जिसका पृथ्वी के जीवों पर विध्वंसकारी प्रभाव पड़ेगा। इस भविष्यवाणी का क्या आधार है?
उत्तर :
(a) ये तरंगें पृथ्वी के आयनमण्डल से परावर्तित होकर वापस पृथ्वी तल की ओर लौट आती हैं और इसी कारण बिना ऊर्जा खोए पृथ्वी पर लम्बी दूरियाँ तय कर पाती हैं।
(b) बहुत लम्बी दूरी के सम्प्रेषण के लिए अति उच्च आवृत्ति की तरंगों की आवश्यकता होती है। आयनमण्डल इन तरंगों को पृथ्वी की ओर परावर्तित नहीं कर पाता। अतः ये तरंगें आयनमण्डल से पार निकल जाती हैं। इन्हें वापस पृथ्वी पर भेजने के लिए उपग्रह की आवश्यकता होती है।
(c) चूँकि पृथ्वी का वायुमण्डल x-किरणों को अवशोषित कर लेता है। अत: x-किरण खगोलविज्ञान का अध्ययन वायुमण्डल से ऊपर उपग्रहों द्वारा ही सम्भव है।
(d) यह ओजोन परत सूर्य से पृथ्वी पर आने वाली मानव जीवन के लिए हानिकारक पराबैंगनी तरंगों को अवशोषित कर लेती है। अतः ओजोन परत, पृथ्वी पर मानव जीवन की सुरक्षा के लिए अति महत्त्वपूर्ण है।
(e) यदि पृथ्वी पर वायुमण्डल नहीं होता तो हरित गृह प्रभाव नहीं होता। इससे पृथ्वी का ताप वर्तमान ताप की तुलना में कम होता।
(f) प्रचण्ड नाभिकीय युद्ध के बाद पृथ्वी धूल तथा गैसों के विशाल बादल से घिर जाएगी जिसके कारण सूर्य की रोशनी पृथ्वी तक नहीं पहुंच पाएगी ओर पृथ्वी बहुत अधिक ठण्डी हो जाएगी।

वैद्युत चुम्बकीय तरंगें NCERT भौतिक विज्ञान प्रश्न प्रदर्शिका (Physics Exemplar Problems) पुस्तक से चयनित महत्त्वपूर्ण प्रश्नों के हल

वैद्युत चुम्बकीय तरंगें बहुविकल्पीय प्रश्नोत्तर

प्रश्न 1.
कार्बन मोनोक्साइड के एक अणु को कार्बन एवं ऑक्सीजन परमाणुओं में विघटित करने के लिए 11 eV ऊर्जा की आवश्यकता होती है। इस विघटन के लिए उपयुक्त वैद्युतचुम्बकीय विकिरण की न्यूनतम आवृत्ति होती है –
(a) दृश्य क्षेत्र में
(b) अवरक्त क्षेत्र में
(c) पराबैंगनी क्षेत्र में
(d) माइक्रोतरंग क्षेत्र में।
उत्तर :
(c) पराबैंगनी क्षेत्र में

प्रश्न 2.
ऊर्जा फ्लक्स 20 W/सेमी2 का प्रकाश एक अपरावर्ती पृष्ठ पर अभिलम्बवत् आपतित होता है। यदि पृष्ठ का क्षेत्रफल 30 सेमी2 हो तो 30 मिनट में (पूर्ण अवशोषण के लिए) प्रदत्त कुल संवेग होगा –
(a) 36 × 10-5 किग्रा मीटर/सेकण्ड
(b) 36 × 10-4 किग्रा मीटर/सेकण्ड
(c) 108 × 104 किग्रा मीटर/सेकण्ड
(d) 1.08 × 107 किग्रा मीटर/सेकण्ड।
उत्तर :
(b) 36 × 10-4 किग्रा मीटर/सेकण्ड

प्रश्न 3.
100 W के बल्ब से 3 मीटर की दूरी पर पहुँचने वाले विकिरणों से उत्पन्न वैद्युत क्षेत्र की तीव्रता E है। उतनी ही दूरी पर 50 W के बल्ब से आने वाले प्रकार के विकिरणों के कारण उत्पन्न वैद्युत क्षेत्र की तीव्रता होगी
(a) \(\frac{E}{2}\)
(b) 2E
(c) \(\frac{E}{\sqrt{2}}\)
(d) √2E
उत्तर :
(d) √2E.

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प्रश्न 4.
यदि E एवं B क्रमशः वैद्युतचुम्बकीय तरंगों के वैद्युत एवं चुम्बकीय क्षेत्र (सदिश) हों तो . वैद्युतचुम्बकीय तरंगों की संचरण दिशा है –
(a) E के अनुदिश
(b) B के अनुदिश
(c) B × E के अनुदिश
(d) E × B के अनुदिश ।
उत्तर :
(d) E × B के अनुदिश ।

प्रश्न 5.
वैद्युतचुम्बकीय तरंग की तीव्रता में वैद्युत एवं चुम्बकीय क्षेत्र घटकों के योगदानों का अनुपात होता है
(a) c : 1
(b) c2 : 1
(c) 1  :1
(d) √c : 1.
उत्तर :
(c) 1 : 1

प्रश्न 6.
एक द्विध्रुव ऐन्टिना से वैद्युत चुम्बकीय तरंगें बाहर की ओर विकिरित होती हैं जिनके वैद्युत क्षेत्र सदिश का आयाम E0 है। वैद्युत क्षेत्र Eo, जो ऊर्जा संचार का प्रमुख वाहक है, स्रोत से दूरी के साथ इसका परिमाण –
(a) \(\frac{1}{r^{3}}\) के अनुसार घटता है …
(b) \(\frac{1}{r^{2}}\) के अनुसार घटता है ..
(c) \(\frac{1}{r}\) के अनुसार घटता है
(d) अचर बना रहता है। [
उत्तर :
(c) \(\frac{1}{r}\) के अनुसार घटता है

वैद्युत चुम्बकीय तरंगें अति लघु उत्तरीय प्रश्नोत्तर

प्रश्न 1.
किसी सुवाह्य रेडियो का प्रसारक स्टेशन के सापेक्ष अभिविन्यास महत्त्वपूर्ण क्यों होता है?
उत्तर :
वैद्युतचुम्बकीय तरंगें समतल ध्रुवित होती हैं, अत: अभिग्राही ऐन्टिना इन तरंगों के वैद्युतचुम्बकीय भाग के समान्तर होना चाहिए।

प्रश्न 2.
माइक्रोवेव ओवन जल अणु युक्त खाद्य पदार्थ का ऊष्मन सर्वाधिक प्रभावी ढंग से क्यों करता है?
उत्तर :
माइक्रोवेव ओवन जल अणुयुक्त खाद्य पदार्थ का ऊष्मन सर्वाधिक प्रभावी ढंग से करता है क्योंकि माइक्रोवेव की आवृत्ति, जल के अणुओं की अनुनाद आवृत्ति के बराबर होती है।

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प्रश्न 3.
किसी समान्तर प्लेट संधारित्र पर आवेश q= qo cos 2πυt के अनुसार परिवर्तित होता है। इसकी प्लेटें बहुत विशाल (क्षेत्रफल = A) हैं और एक-दूसरे के बहुत पास-पास रखी हैं (पृथकन = d)। कोर प्रभावों को नगण्य मानते हुए संधारित्र में विस्थापन धारा की गणना कीजिए।
उत्तर :
संधारित्र में विस्थापन धारा ID = IC = \(\frac{d}{d t}\left(q_{0} \cos 2 \pi v t\right)\)
= qo (- sin 2πυ t) × 2πυ
= -qo 2 πυ.sin 2 πυ t

प्रश्न 4.
परिवर्तनीय आवृत्ति का एक ac स्रोत एक संधारित्र से जुड़ा है। आवृत्ति में कमी करने पर विस्थापन धारा किस प्रकार प्रभावित होगी?
उत्तर :
संधारित्र का धारितीय प्रतिघात \(\left(X_{C}\right)=\frac{1}{\omega C}=\frac{1}{2 \pi f C}\)
आवृत्ति f कम करने पर, धारितीय प्रतिघात XC बढ़ेगा जिसके परिणामस्वरूप चालन धारा (IC) घटेगी। परन्तु IC = ID, अत: विस्थापन धारा कम हो जाएगी।

वैद्युत चुम्बकीय तरंगें लघु उत्तरीय प्रश्नोत्तर

प्रश्न 1.
वैद्युतचुम्बकीय तरंगें जिनकी तरंगदैर्ध्य –
(i) λ1 है, उपग्रह संचार में प्रयुक्त होती हैं। .
(ii) λ2 है, जलशोधित्रों में जीवाणुनाश के लिए प्रयुक्त होती हैं।
(iii) λ3 है, भूमिगत पाइप लाइनों में तेल के रिसाव के संसूचन के लिए उपयोग में लायी जाती हैं।
(iv) λ4 है, धुंध और कोहरे की स्थिति में वायुयान उड़ान पथ पर दृश्यता में सुधार लाने के लिए उपयोग में लायी जाती हैं।
(a) इन वैद्युतचुम्बकीय विकिरणों को पहचानिए और बताइए कि ये वैद्युतचुम्बकीय स्पेक्ट्रम के किस भाग से सम्बन्धित हैं।
(b) इन तरंगदैर्यों को परिमाण के बढ़ते क्रम में व्यवस्थित कीजिए।
(c) प्रत्येक की एक अन्य उपयोगिता लिखिए।
उत्तर :
(a) λ1 → सूक्ष्म तरंगें या माइक्रोवेव
λ2 → पराबैंगनी तरंगें
λ3 → x-किरणें
λ4 → अवरक्त किरणें
(b) λ3 < λ2 < λ4 < λ1
(c) सूक्ष्म तरंगें → रेडार
पराबैंगनी तरंगें → नेत्र शल्यता
x-किरणें → अस्थिभंग क्रमवीक्ष्ण
अवरक्त किरणें → प्रकाशीय संचार

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वैद्युत चुम्बकीय तरंगें आंकिक प्रस्नोत्तर

प्रश्न 1.
आपको एक 2 μF का समान्तर प्लेट संधारित्र दिया गया है। आप इसकी प्लेटों के बीच के अन्तराल में 1 मिलीऐम्पियर की तात्क्षणिक विस्थापन धारा कैसे स्थापित करेंगे?
हल :
दिया हैं, C = 2 μF = 2 × 10-6F, ID = 10-3 मिलीऐम्पियर
विस्थापन धारा (ID) = C \(\frac{d V}{d t}\) × 1 × 10-3 = 2 × 10-6 \(\frac{d V}{d t}\)
∴ \(\frac{d V}{d t}\) = \(\frac{1}{2}\) × 103 = 500 वोल्ट/सेकण्ड
अत: 500 वोल्ट/सेकण्ड की दर से परिवर्तित विभवान्तर लगाकर लक्षित विस्थापन धारा उत्पन्न सकेगी।

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MP Board Class 12th General Hindi व्याकरण अशुद्ध गद्यांश की भाषा का परिमार्जन

MP Board Class 12th General Hindi व्याकरण अशुद्ध गद्यांश की भाषा का परिमार्जन

भाषा का शुद्ध और स्पष्ट लेखन उस समय तक सम्भव नहीं है, जब तक कि शब्दों और उनके अर्थ के विषय में पूर्ण ज्ञान न हो। शुद्ध वाक्य रचना के लिए अशुद्धियों पर ध्यान देना बड़ा आवश्यक है। अशुद्ध वाक्य उतना ही भद्दा और अरुचिपूर्ण लगता है जितना कि बेतरतीब बनाया हुआ भोजन। अतः अशुद्धियों का विवरण नीचे दिया जा रहा है-

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1. लिंग सम्बन्धी अशुद्धियाँ – संज्ञा शब्दों में लिंग – परिवर्तन होता है; जैसे –
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2. वचन सम्बन्धी अशुद्ध याँ
1. वह किसके कलम है – वह किसकी कलम है।
2. उसका भाग्य फूट गया – उसके भाग्य फूट गए।
3. मेरे बटुआ उड़ गया – मेरा बटुआ उड़ गया।
4. क्या तेरा प्राण निकल रहा है क्या तेरे प्राण निकल रहे हैं।

3. समाज सम्बन्धी अशुद्धियाँ
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4. संधि समास अशुद्धियाँ
1. निरस – नीरस (निः + उक्त)।
2. उपरोक्त – उपर्युक्त (उपरि + उक्त)।
3. सदोपदेश – सदुपदेश (सद् + उपदेश)।

5. कर्ता और क्रिया का समान न होना – कर्ता और क्रिया के वचन, लिंग और पुरुष समान होने चाहिए। यदि ऐसा न हुआ तो वाक्य अः शुद्ध हो जाता है। उदाहरण के लिए –
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6. शब्दों को यथा स्थान रखना – वाक्य में कर्ता, कर्म, करण, विशेषण, विशेष्य, क्रिया – विशेषण आदि के स्थान निश्चित होते हैं। यदि वे निश्चित स्थान पर न रखे
गए अथवा उनका स्थान बदल दिया गया तो वाक्य अशुद्ध हो जाता है।
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7. अनावश्यक शब्दों का प्रयोग
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8. वर्ण और मात्रा संबंधी अशुद्धियाँ
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महत्त्वपूर्ण परीक्षोपयोगी प्रश्न

निम्नलिखित वाक्यों के शुद्ध रूप लिखिए
1. इन्दिरा गाँधी की मृत्यु पर भारत में दुःख छा गया।
2. मैं कल आगरा से वापस लौटूंगा।
3. तुमने यह काम करना है।
4. कोप ही दण्ड का एक विधान है।
5, आग में कई लोगों के जल जाने की आशा है।
उत्तर –
1. इन्दिरा गाँधी की मृत्यु पर भारत में शोक छा गया।
2. मैं कल आगरा से लौटूंगा।
3. तुम्हें यह काम करना है।
4. दण्ड ही कोप का एक विधान है।
5. आग में कई लोगों के जल जाने की आशंका है।

निम्नलिखित अशुद्ध शब्दों को शुद्ध कीजिए-
MP Board Class 12th General Hindi व्याकरण अशुद्ध गद्यांश की भाषा का परिमार्जन img-8

अभ्यास के लिए कुछ महत्त्वपूर्ण प्रश्न
(i) अभ्यास के लिए शुद्ध – अशुद्ध वाक्य।

1. संग्रहित
(क) संघरित (ख) संगृहीत (ग) संग्रहीत (घ) संघह्वीत
उत्तर –
(ख) संगृहीत।।

2. प्रथक
(क) पृथक् (ख) पिरथक (ग) परथिक (घ) पिर्थक
उत्तर –
(क) पृथक्।

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3. उज्जवल
(क) उजवल (ख) उज्ज्वल (ग) उजवल्य (घ) उज्जवल
उत्तर –
(ख) उज्ज्वल

4. प्रनाम
(क) पिरणाम (ख) पिरनाम (ग) पृणाम (घ) प्रणाम
उत्तर –
(घ) प्रणाम।।

5. भैंस और बैल खड़े हैं
(क) भैंस खड़ा और बैल खड़ी है। (ख) भैंस और बैल दोनों खड़ी हैं। (ग) भैंस और बैल खड़ा हुआ है। (घ) भैंस और बैल दोनों खड़े हैं।
उत्तर –
(घ) भैंस और बैल दोनों खड़े हैं।

6. आगरा के अन्दर हैजा का जोर है
(क) आगरा के अन्दर हैजा (ख) हैजा का जोर है आगरा में। का प्रकोप है। (ग) हैजा का प्रकोप है आगरा में। (घ) आगरा में प्रकोप है हैजा का।
उत्तर –
(घ) आगरा में प्रकोप है हैजा का।

7. उसे अनुत्तीर्ण होने की आशा है
(क) आशा है उसे अनुत्तीर्ण (ख) अनुत्तीर्ण होने की उसे आशंका होने की। (ग) उसे आशंका है अनुत्तीर्ण (घ) उसे अनुत्तीर्ण होने की आशंका होने की।
उत्तर –
(घ) उसे अनुत्तीर्ण होने की आशंका है।

(ii) शब्दों के क्रम संबंधी अशुद्धियों को शुद्ध कीजिए
अशुद्ध – राम, जो कल भूखा था, ने अभी तक कोई भोजन नहीं किया।
शुद्ध – राम, जो कल भूखा था अभी तक भोजन नहीं किया।
अशुद्ध – राम बाजार से फूलों की माला एक लाई।।
शुद्ध – राम बाजार से एक फूलों की माला लाया।
अशुद्ध – सब लड़कियाँ अपनी किताब और कल से लिख और पढ़ रहे थे।
शुद्ध – सब लड़कियाँ अपनी किताब और कलम से पढ़ ओर लिख रही थीं।

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(iii) प्रत्यय संबंधी अशुद्धियाँ दूर कीजिए
अशुद्ध – राम यह कार्य आवश्यकीय है।
शुद्ध – राम यह कार्य आवश्यक है।
अशुद्ध – आपकी सौजन्यता से मेरे पुत्र को नौकरी मिल गई।
शुद्ध – आपके सौजन्य से मेरे पुत्र को नौकरी मिल गई।
अशुद्ध – साधु के माथे पर रामानन्द तिलक है।
शुद्ध – साधु के माथे पर रामानन्दी तिलक है।

(iv) अनुस्वार एवं चन्द्र बिन्दु संबंधी अशुद्धियाँ शुद्ध कीजिए–
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MP Board Class 12th General Hindi व्याकरण मुहावरे व लोकोक्तियाँ

MP Board Class 12th General Hindi व्याकरण मुहावरे व लोकोक्तियाँ

भाषा को प्राणवान और प्रभावशाली बनाने के लिए आवश्यकतानुसार मुहावरे और कहावतें (लोकोक्तियों) के प्रयोग किए जाते हैं। इनके प्रयोग से भाषा न केवल सार्थक और आकर्षक दिखाई देती है अपितु वह एक अद्भुत शक्ति से परिपूर्ण भी लगने लगती है, जो एक सफल और असाधारण रचना शिल्प व शिल्पकार की अभियोजना और उद्देश्य होता है। इस प्रकार मुहावरों और कहावतों के बिना भाषा प्राणहीन, अशक्त और प्रभावहीन बन जाती है।

मुहावरों और कहावतों से एक विशिष्ट भाषा, संस्कृति, जाति, सभ्यता, लोकजीवन, रहन – सहन, चेतना और भविष्य का पूरा पता लगता है। उसकी छाप सर्वत्र पड़ने लगती है। वह सबको समुन्नत दिशा की ओर अग्रसर करने लगती है।

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मुहावरों और कहावतों से भाषा एक वाक्यांश के रूप में प्रकट होकर एक विलक्षणता और रोचकता के रूप में अपने महान उद्देश्य की ओर रती है और अंततः पाठक – श्रोता वर्ग पर अपनी पूर्व नियोजित छाप छोड़ती है। यही कारण है कि विश्व की सभी भाषाओं में मुहावरों – कहावतों के प्रयोग होते हैं। इस मुहावरों और कहावतों का प्रयोग किसी भी भाषा. के लिए नितान्त आवश्यक है।

मुहावरे
प्रचलित मुहावरे और उनका प्रयोग
1. अपना ही राग अलापना – अपनी बातें ही करते रहना।
प्रयोग – मोहन दूसरे की बात सुनता नहीं है केवल अपना ही राग अलापता रहता है।

2. आँखों का तारा – बहुत प्यारा लगना।
प्रयोग – इकलौता पुत्र अपने माता – पिता की आँखों का तारा होता है।

3. अपना उल्लू सीधा करना – केवल अपना स्वार्थ सिद्ध करना।
प्रयोग – जो मनुष्य स्वार्थी होता है वह अपना ही उल्लू सीधा करता है।

4. अपने मुँह मियाँ मिठू बनना – अपनी प्रशंसा स्वयं करना।
प्रयोग – अभिमानी मनुष्य अपने मुँह मियाँ मिठू बनते हैं।

5. अन्धे को चिराग दिखाना – व्यर्थ का कार्य करना।
प्रयोग – किसी मूर्ख और पागल मनुष्य को उपदेश देना वास्तव में अन्धे को चिराग दिखाना है।

6. अन्धे की लकड़ी – समय पर काम आना।
प्रयोग – वृद्धावस्था में बेटा अन्धे की लकड़ी के समान होता है।

7. अँगूठा दिखाना – अपमानपूर्ण अवज्ञा करना।
प्रयोग – मैंने कल तुमसे पैसा लौटाने के लिए कहा था। आज तुम मुझको अँगूठा दिखा रहे हो।

8. अक्ल पर पत्थर पड़ना – अज्ञानता से काम करना।
प्रयोग – उस समय न जाने क्यों मेरी अक्ल पर पत्थर पड़ गए थे तब मैंने अपने
बड़े भाई को कटु शब्द कहे थे।

9. अपने पाँव पर कुल्हाड़ी मारना – स्वयं अपना नाश करना।
प्रयोग – राकेश ने अपनी जायदाद जुआ में हारकर अपने पैरों पर कुल्हाड़ी मार ली है।

10. आगबबूला होना – अधिक क्रोधित होना।
प्रयोग – जब पिता ने अपने पुत्र को घर में चोरी करते देखा तो वे.आगबबूला हो गए।

11. आसमान टूट पड़ना – अचानक विपत्ति आ जाना।
प्रयोग – मोटर दुर्घटना में अपने पुत्र का समाचार सुनकर माँ के हृदय पर जैसे आसमान टूट पड़ा हो।

12. ईद का चाँद होना – कठिनता से दिखाई देना।
प्रयोग – रमेश ने जब दो महीने बाद अपने मित्र को सामने आता हुआ देखा तो कहा कि आजकल तुम तो ईद के चाँद हो गये हो।

13. ईंट से ईंट बजाना – बिलकुल नष्ट करना।
प्रयोग – महाराज शिवाजी ने मुगल बादशाह की ईंट से ईंट बजा दी।

14. उल्टी गंगा बहाना – नियम के विरुद्ध काम करना।
प्रयोग – आजकल लोग नियमित काम न करके उल्टी गंगा बहा रहे हैं।

15. गाल बजाना – बक – बक करना।
प्रयोग – आजकल के नेता मंचों पर गाल बजाते हैं। ठोस काम करना नहीं जानते

16. गले का हार – प्रिय वस्तु।
प्रयोग – महात्मा तुलसीदास का रामचरितमानस हिन्दुओं के गले का हार है।

17. गड़े मुर्दे उखाड़ना – पुरानी बातें दोहराना।
प्रयोग – वृद्ध मनुष्य सबके सामने गड़े मुर्दे उखाड़कर दूसरों को लज्जित करते रहते हैं।

18. कुत्ते की मौत मरना – बुरी मौत मरना।
प्रयोग – देशद्रोही मनुष्य कुत्ते की मौत मारा जाता है।

19. काम तमाम करना – मार डालना।
प्रयोग – बन्दूक की एक गोली से मैंने डाकू का काम तमाफ कर दिया।

20. छाती पर साँप लोटना – ईर्ष्या होना।
प्रयोग – महेश ने जब से नई मोटर साइकिल खरीदी है, उसके पड़ोसी की छाती पर साँप लोटने लगे हैं।

21. नौ – दो ग्यारह होना – भाग जाना।
प्रयोग – पुलिस (सिपाही) को देखकर चोर नौ – दो ग्यारह हो गए।

22. दाँत खट्टे करना – – पराजित करना।
प्रयोग – भारतीय सेना ने पाकिस्तानी सेना के दाँत खट्टे कर दिए।

23. मुँह में पानी भर आना – ललचाना।
प्रयोग – मिठाई की दुकान को देखकर बालकों के मुँह में पानी भर आता है।

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24. फूला न समाना – बहुत प्रसन्न होना।
प्रयोग – बहुत दिनों से खोये हुए बालक को अचानक देखकर माँ का हृदय फूला न समाया।

25. हाथ – पाँव फूलना – भयभीत हो जाना।
प्रयोग – जंगल में शेर को देखकर मेरे हाथ – पाँव फूल गए।

26. लोहा मानना – प्रभाव स्वीकार करना।
प्रयोग – एशिया के सभी राष्ट्र भारत की शक्ति का लोहा मानते हैं।

27. हक्का – बक्का रह जाना – आश्चर्यचकित होना।
प्रयोग – ताजमहल की सुंदरता को देखकर लोग हक्के – बक्के रह जाते हैं।

28. हवा से बातें करना – बहुत वेग से चलना।
प्रयोग – महाराणा प्रताप का चेतक घोड़ा बुद्ध के मैदान में हवा से बातें करता था।

29. लकीर का फकीर होना – अंधविश्वासी होना।
प्रयोग – आदिवासी लोग लकीर के फकीर होते हैं।

30. सिर नीचा होना – लज्जित होना।
प्रयोग – अयोग्य पुत्र के अनुचित कार्यों को देखकर माता – पिता का सिर लज्जा से नीचा हो गया।

31. टेढ़ी – सीधी सुनना – खरी – खोटी सुनना।
प्रयोग – मेरे विलम्ब से घर पहुंचने पर पिताजी ने मुझे अनेक टेढ़ी – सीधी बातें सुना डालीं।

32. धूल में मिला देना – नष्ट करना।
प्रयोग – मोहन को परीक्षा में नकल करते हुए जब. अध्यापक ने पकड़ लिया तो उसकी सारी इज्जत धूल में मिल गयी।

33. सिर पटक लेना – दहाड़ मारकर रोना।
प्रयोग – अपने भाई की असफलता का समाचार सुनकर राकेश अपना सिर जमीन पर पटककर खूब रोने लगा।

34. त्यौरियाँ चढ़ जाना – क्रोधित होना।
प्रयोग – आजकल जरा – सी बात पर लोग अपनी त्यौरियाँ चढ़ा लेते हैं।

35. आसमान सिर पर उठाना – बहुत कोलाहल करना।
प्रयोग – जिस समय शिक्षक कक्षा में नहीं होता उस समय विद्यार्थी आसमान सिर पर उठा लेते हैं।

36. आस्तीन का साँप होना – विश्वासघात करना।
प्रयोग – चीन के आक्रमण के समय अनेक लोग देश के आस्तीन के साँप बन गए।

37. आठ – आठ आँसू रोना – फूट – फूटकर रोना।
प्रयोग – माँ की मृत्यु के समय राम आठ – आठ आँसू रोया।

38. कसौटी पर कसना – परीक्षा लेना।
प्रयोग – सोने की कसौटी पर कसकर उसके खरे – खोटे की पहचान की जाती है।

39. कंगाली में आटा – गीला होना – कष्ट पर कष्ट आना।
प्रयोग – इधर मोहन के घर में आग लगी, उधर चोरी में सारा सामान चला गया, उसकी कंगाली में आटा गीला हो गया।

40. कान में तेल डालकर सोना – बात सुनने की चेष्टा न करना।
प्रयोग – मैं तुम्हें कब से बुला रहा हूँ और तुम हो कि कान में तेल डालकर बैठे हो।

41. कलई खुलना – भेद खुलना।
प्रयोग – जब मोहन का झगड़ा राकेश से हुआ तो मोहन ने राकेश की सारी कलई खोल दी।

42. गर्दन पर छुरी फेरना – अत्याचार करना।
प्रयोग – ठेकेदार गरीब मजदूरों के पैसे काटकर उनकी गर्दन पर छुरी फेरते हैं।

43. गोबर गणेश – बिलकुल मूर्ख।
प्रयोग – वह कभी परीक्षा पास नहीं कर सकता, वह तो पूरा गोबर गणेश है।

44. घी के चिराग जलाना – खुशियाँ मनाना।
प्रयोग – जब भगवान श्री राम चौदह वर्ष के बाद वनवास से अयोध्या लौटकर
आये तब पूरी प्रजा ने घी के चिराग जलाए।

45. घोड़ा बेचकर सोना – निश्चित रहना।
प्रयोग – जब परीक्षा समाप्त हो जाती है, तो विद्यार्थी घोड़े बेचकर सोते हैं।

46. छप्पर फाड़कर देना – बिना मेहनत के धन मिलना।
प्रयोग – भगवान जब देता है तो छप्पर फाड़कर देता है।

47. टेढ़ी खीर होना – कठिन कार्य होना।
प्रयोग – हिमालय पार करना टेढ़ी खीर है।

48. दाँतकाटी रोटी होना – गहरी दोस्ती होना।
प्रयोग – पहले हम दोनों में दाँतकाटी रोटी थी किंतु जब से झगड़ा हुआ है तब से हम दोनों एक – दूसरे के शत्रु बन गए हैं।

49. कलेजा मुँह को आना – बहुत दुःखी होना।
प्रयोग – अचानक पिता की मृत्यु का समाचार सुनकर कलेजा मुँह को आ गया।

50. चकमा देना – धोखा देना।
प्रयोग – एक लड़का दुकानदार को चकमा देकर सामान लेकर भाग गया।

51. हाँ में हाँ मिलाना – चापलूसी करना।
प्रयोग – छोटे कर्मचारी अपनी पदोन्नति के लिए बड़े अधिकारियों की दिन – रात हाँ में हाँ मिलाते हैं।

52. सिर धुनना – पश्चात्ताप करना।
प्रयोग – हायर सेकेण्ड्री की परीक्षा में अनुत्तीर्ण होने पर मोहन ने अपना सिर धुन लिया।

53. बाल – बाल बचना – बड़ी हानि होने से बचना।
प्रयोग – वह कुएं में गिरने से बाल – बाल बच गया।

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54. कफन सिर पर बाँधना – बलिदान के लिए तैयार रहना।
प्रयोग – वीर सैनिक युद्ध के दौरान कफन सिर पर बाँध लेते हैं।

55. लहू सूखना – शक्तिहीन होना। (म.प्र. 1991)
प्रयोग – साँप को सामने देखते ही उसका लहू सूख गया।

56. बाल बाँका न होना – कुछ भी नुकसान न होना। (म.प्र. 1991)
प्रयोग – प्रहलाद को बार – बार कष्ट देने का प्रयास करके भी हिरण्यकशिपु उसका बाल बाँका न कर सका।

57. काया पलट होना – रूप – परिवर्तन होना। (म.प्र. 1992)
प्रयोग – बड़े – बड़े सिद्ध – पुरुष मनचाही काया पलट कर लेते हैं।

58. मिट्टी में मिलाना – बरबाद करना। (म.प्र. 1992)
प्रयोग – भारत ने पाकिस्तान से युद्ध करके पूर्वी पाकिस्तान को मिट्टी में मिला दिया।

59. नेत्र लाल होना – क्रोधित होना। (म.प्र. 1993)
प्रयोग – छात्र के अशिष्टाचार से अध्यापक के नेत्र लाल हो गए।

60. हाथ के तोते उड़ना – कीमती वस्तु का खो जाना। (म.प्र. 1993)
प्रयोग – परीक्षा में भूल से कुछ प्रश्नों के छूटने पर उसने घर आते ही कहा कि मेरे हाथ के तोते उड़ गए।

61. नोन, तेल, लकड़ी के फेर में पड़ना – रोजी – रोटी के लिए परेशान होना।
प्रयोग – शादी होते ही वह नोन, तेल, लकड़ी के फेर में पड़ गया।

62. टूट जाना – बरबाद होना।। (म.प्र. 1994)
प्रयोग – मजदूर जीवनपर्यंत कड़ी मेहनत करते – करते टूट जाते हैं।

63. मौके की तलाश में रहना – स्वार्थ साधना। (म.प्र. 1994)
प्रयोग – स्वार्थी हरदम मौके की तलाश में रहते हैं।

64. भाषण की दुकान खोलना – बतंगड़ी का अड्डा होना। (म.प्र. 1994)
प्रयोग – आजकल तो जगह – जगह भाषण की दुकानें खुल गई हैं।

65. आँखें खोलना – सजग करना। (म.प्र. 1994)
प्रयोग – निंदक अक्सर आँखें खोल देते हैं।

लोकोक्तियाँ
भाषा को प्रभावशाली एवं सारगर्भित बनाने के लिए मुहावरों की भाँति लोकोक्तियों का प्रयोग किया जाता है। लोकोक्ति पारिभाषिक रूप से ऐसा मुहावरेदार वाक्य होता है जिसे व्यक्ति अपने कथन की पुष्टि में प्रमाण – स्वरूप प्रयोग करता है। लोकोक्ति . अपने में एक संपूर्ण वाक्य है और उसका प्रयोग स्वतंत्र रूप से होता है।

प्रचलित लोकोक्तियाँ और उनका प्रयोग

1. अपना हाथ जगन्नाथ – बड़ी स्वच्छन्दता से किसी वस्तु को ग्रहण करना।
प्रयोग – महावीर को आज भोजन – गृह का मालिक बना दिया है, अब तो उसका अपना हाथ जगन्नाथ है।

2. अपनी ढपली अपना राग – जब सभी लोग मिलकर काम न करें।
प्रयोग – वह संस्था अधिक दिनों तक चल नहीं सकती क्योंकि उसके सभी सदस्य अपनी ढपली अपना राग वाले हैं।

3. ऊँची दुकान फीका पकवान – दुकान तो बड़ी प्रसिद्ध परंतु माल घटिया।
प्रयोग – नगर के सबसे धनाढ्य सेठ की दुकान में घटिया मिष्टान्न देखकर वह बोला – ऊँची दुकान फीका पकवान।

4. एक हाथ से ताली नहीं बजती – कोई भी कार्य में दो पक्षों का होना आवश्यक है।
प्रयोग – मैं यह बात तुम्हारी मान ही नहीं सकता कि तुम्हें पुलिस ने बिना कसूर पीटा है। यह सम्भव नहीं, एक हाथ से ताली नहीं बजती।

5. अंधों में काना राजा – अयोग्य लोगों में अल्पबुद्धि वाला मनुष्य ही योग्य माना जाता है।
प्रयोग – ग्रामों में अधिकतर सभी लोग अशिक्षित होते हैं; किंतु जरा – सा पढ़ा – लिखा व्यक्ति ही उनके लिए अंधों में काना राजा के समान है।

6. काला अक्षर भैंस बराबर – बिलकुल निरक्षर होना।
प्रयोग – अशिक्षित लोग वेद – पुराणों की बातें क्या जाने उनके लिए तो काला अक्षर भैंस बराबर होता है।

7. एक अनार सौ बीमार – वस्तु थोड़ी किंतु माँग अधिक।
प्रयोग कार्यालय में एक स्थान रिक्त है किंतु सौ से भी अधिक आवेदन – प., आने पर अधिकारी कहने लगा कि एक अनार सौ बीमार।

8. घर का भेदी लंका ढाहे – घर का भेद बताने वाला ही सबसे बड़ा शत्रु होता है।
प्रयोग – आजकल देश को बड़ी सावधानी की आवश्यकता है क्योंकि घर का भेदी लंका ढहाना चाहता है।

9. चिकने घड़े पर पानी नहीं ठहरता – निर्लज्ज व्यक्ति पर किसी बात का प्रभा. नहीं पड़ता।
प्रयोग – तुम अपने भाई को चार दिन से समझाते – समझाते थक गए किंत उसने
अपनी आदत सुधारी नहीं; सच है कि चिकने घड़े पर पानी ठहरता नहीं है।

10. दूर के ढोल सुहावने – जितनी प्रसिद्धि सुनी वैसा पाया नहीं।
प्रयोग – लखनऊ के दशहरी आम जब स्वादिष्ट न निकले तो मेरा भाई वो दूर के ढोल सुहावने होते हैं।

11. थाली के बैंगन – अस्थिर बुद्धिवाला।
प्रयोग – मैं तो उसकी मित्रता पर कोई भरोसा नहीं करता। वह तो थाली का बैंगन है, कभी इधर तो कभी उधर।।

12. थोथा चना बाजे घना – आडम्बरयुक्त व्यक्ति सारहीन होता है।
प्रयोग – वह हायर सेकंडरी तक पढ़ा नहीं है लेकिन वह बी.ए. पास होने तक की शेखी बघारता है। सच है – थोथा चना बाजे घना वाली कहावत है।

13. एक पंथ दो काज – एक साथ दो कार्य पूर्ण होना।
प्रयोग – प्रयाग पहुँचने पर गंगा स्नान भी किया और कुम्भ का मेला भी देखा; इस तरह एक पंथ दो काज पूरे हुए।

14. का वर्षा जब कृषि सुखानी – समय निकल जाने पर प्रयत्न करना व्यर्थ है।
प्रयोग – जब शहर में डाकू लोग उपद्रव और लूटपाट करके चले गए तब बहुत देर बाद वहाँ पुलिस पहुंची तो सब लोग बोले, का वर्षा जब कृषि सुखानी।

15. मुख में राम बगल में छुरी – कपटपूर्ण व्यवहार।
प्रयोग – रामनरेश सामने तो खुशामद करता फिरता है पर पाडे से वह सबकी बुराई करता है। उसका व्यवहार मुख में राम बगल में छुरी के समान है।

16. सावन सूखा न भादों हरा – सदा एक समान रहना।
प्रयोग – वीरेन्द्र नाथ को हमने जबसे देखा है वह एक समान दिखाई देता है, सच है वह न सावन सूखा न भादों हरा।

17. बिल्ली के भाग्य से छींका टूटा – अचानक किसी वस्तु का प्राप्त होना।
प्रयोग – एक निर्धन व्यक्ति को अचानक मार्ग में रुपयों का भरा थेला मिल गया, वह बहुत खुश हुआ, उसे ऐसा लगा जैसे बिल्ली के भाग्य से छींका टूटा हो।

18. गेहूँ के साथ घुन भी पिस जाता है – बड़े के साथ में उसके सहारे रहने वाले को भी कष्ट होता है।
प्रयोग – जब बड़े लोग चोरी में पकड़े जाते हों तो उनके साथ नौकर – चाकर भी पुलिस के हाथ पकड़े जाते हैं। सच है – गेहूँ के साथ घुन भी पिस जाता है।

19. धोबी का कुत्ता न घर का न घाट का किसी काम का न होना।
प्रयोग – कोई काम न करूं तो भूखा मरता हूँ और जब काम करता हूँ तो बीमार हो जाता हूँ। इस समय मेरी स्थिति ठीक इस प्रकार है, जैसे – धोबी का कुत्ता न घर का न घाट का।

20. बन्दर क्या जाने अदरक का स्वाद – अयोग्य व्यक्ति ज्ञान की बातें नहीं जानता।
प्रयोग – अशिक्षित लोगों के सामने छायावादी कविता सुनाने से क्या लाभ, बन्दर क्या जाने अदरक का स्वाद

21. हाथ कंगन को आरसी क्या – प्रत्यक्ष के लिए प्रमाण की आवश्यकता नहीं।
प्रयोग – तुमने कल मेरी बात का विश्वास नहीं किया, आज दैनिक समाचार – पत्र में वह घटना प्रकाशित हुई है। अब तो आप विश्वास करेंगे। हाथ कंगन को आरसी क्या?

22. साँच को आँच नहीं – सच्चे व्यक्ति को कोई भय नहीं होता।
प्रयोग – आप चाहे मुझे फाँसी पर चढ़ा दें, मुझे मार डालें लेकिन मैं बात सही – सही कहूँगा। साँच को आँच नहीं।

23. यह मुँह और मसूर की दाल – अपनी स्थिति से अधिक इच्छा करना।
प्रयोग – पास में नहीं है फूटी कौडी भी और चले हैं बाजार में मारुति कार खरीदने। कहावत सही है – यह मुँह और मसूर की दाल।

24. बकरे की माँ कब तक खैर मनाएगी – दुष्ट व्यक्ति को एक – न – एक दिन सजा अवश्य मिलेगी।

प्रयोग – चोर कब तक बचा रहेगा। एक – न – एक दिन पुलिस के हाथों पकड़ा जाएगा। आखिर बकरे की माँ कब तक खैर मनाएगी।

25. नौ सौ चूहे मार के विल्ली हज को चली – जीवनभर पाप किया, मरने के वक्त साधु बन गए।
प्रयोग – जवानी में तो सदा दूसरों को ठगते रहे और जब बुढ़ापा आ गया तब राम – राम का नाम लेने गए। आखिर नौ सौ चूहे मार के बिल्ली हज को चली।

26. अधजल गगरी छलकत जाय – छोटा और ओछा आदमी दिखावा अधिक करता है।
प्रयोग – सुरेश की जबसे लॉटरी खुली है तब से वह घमण्ड में ही रहता है, जैसे अधजल गगरी छलकत जाय।

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27. न रहेगा बाँस न बजेगी बाँसुरी – कारण न होने पर कोई नहीं हो सकता।
प्रयोग – जब से रमेश ने दुकान खोली है तब से घर में झगड़ा ही होता रहता है। अब उसने अपनी दुकान बन्द कर दी, न रहेगा बाँस न बजेगी बाँसुरी।

28. हाथी के दाँत दिखाने के और, और खाने के और – दिखावटी होना।
प्रयोग – महेश का रूप ऐसा है जैसे – हाथी के दाँत खाने के और, और दिखाने के और।

29. नक्कारखाने में तूती की आवाज सुनाई नहीं पड़ती – बड़ों के सामने छोटों की बात नहीं सुनी जाती।
प्रयोग – जब बड़े लोग बोल रहे थे तब मेरी बात तो किसी ने सुनी ही नहीं। नक्कारखाने में तूती की आवाज सुनाई नहीं पड़ती।

30. अकेला चना भाड़ नहीं फोड़ सकता – एक व्यक्ति कोई बड़ा काम नहीं कर सकता।
प्रयोग – मैं अपने घर में अकेला व्यक्ति हूँ, जो बनता है वह करता हूँ। आखिर अकेला चना भाड़ नहीं फोड़ सकता है।

31. मान न मान मैं तेरा मेहमान – जवरदस्ती किसी के गले पड़ना।
प्रयोग – एक अपरिचित व्यक्ति रात के समय घर आकर बोला, में यहाँ ठहरूँगा। मान न मान मैं तेरा मेहमान।

32. अकल बड़ी कि भैंस – शारीरिक शक्ति से मानसिक शक्ति बड़ी होती है।
प्रयोग – उस आदमी ने बुद्धि बल से एक पहलवान को पटक दिया। वास्तव में भैंस से अक्ल बड़ी होती है।

33. खरबूजे को देखकर खरबूजा रंग बदलता है – एक को देखकर दूसरे के विचारों में परिवर्तन होना।
प्रयोग – एक शराबी को नशे में झूमता हुआ देखकर दूसरा शराबी भी झूम – झूमकर नाचने लगा। सच ही है खरबूजे को देखकर खरबूजा रंग बदलता है।

34. आम के आम गुठलियों के दाम – दोनों हाथ में लाभ होना।
प्रयोग – रमेश को सरकारी नौकरी मिली साथ ही अमेरिका जाने का निमंत्रण भी मिला। आम के आम गुठलियों के दाम।

35. खोदा पहाड़ निकली चुहिया – खूब परिश्रम किया लेकिन फल थोड़ा – सा मिला।
प्रयोग – एक व्यक्ति ने पुराना गड़ा हुआ धन मिलने की लालच में सारा घर खोद डाला किंतु उसे केवल पीतल के कुछ पुराने बर्तन ही हाथ लगे; यह तो वही बात हुई, खोदा पहाड़ निकली चुहिया।

36. ऊँट के मुँह में जीरा – अधिक की तो आवश्यकता है और दिया थोड़ा।
प्रयोग – एक व्यक्ति की खुराक दस रोटी है लेकिन जब वह खाने वैटा तो केवल दो रोटी ही दी; यह तो ऊँट के मुंह में जीरे के समान है।

37. सिर मुंड़ाते ओले पड़े – काम शुरू करते ही संकट आ गया।
प्रयोग – रात को दुकान का शुभारम्भ हुआ और सुबह होते ही उसमें आग लग गई, यह तो सिर मुंड़ाते ही ओले पड़ गए।

38. ओखली में सिर दिया फिर मूसर से क्या डरना – जब जान की बाजी लगाना है तो फिर डरना क्या।
प्रयोग – जब युद्ध के मैदान में आ गया तो गोली से क्या डरना। जब ओखली में सिर दिया तो मूसर से क्या डरना।

39. आँखों का अंधा नाम नैनसुख – नाम और गुणों में अंतर।
प्रयोग – नाम तो करोड़ीमल है लेकिन पास में एक पैसा नहीं अर्थात् आँखों का अंधा और नाम नैनसुख।

40. घर की मुर्गी दाल बराबर – गुणवान् की इज्जत घर में नहीं होती है। (म.प्र. 1990)
प्रयोग – अमेरिका में भाषण देने से पहले स्वामी विवेकानंद भारतीयों के लिए घर की मुर्गी दाल बराबर थे।

41. अंधा पीसे कुत्ता खाए – मूर्ख का धन चालाक के हाथ में आना। (म.प्र. 1990)
प्रयोग – मोहन दिन – रात कड़ी मेहनत करता है लेकिन उसके बेटे मौज उड़ाते हैं। सच है अंधा पीसे कुत्ता खाए।

42. पहाड़ खड़ा होना – बड़ी मुसीबत पड़ना। (म.प्र. 1991)
प्रयोग – परीक्षा के समय मोहन को बुखारग्रस्त देखकर मैंने कहा, यार – यह बुखार क्या आया, यह तो तुम्हारे लिए पहाड़ खड़ा हो गया है।

43. बंदर के हाथ में मोतियों की माला होना – अयोग्य के हाथ में मूल्यवान वस्तु का होना। (म.प्र. 1991)
प्रयोग – आजकल तो ऐसे अनेक सरकारी पदाधिकारी हैं जो पद का दुरुपयोग … कर रहे हैं। जिन्हें आए दिन विरोधी बंदर के हाथ में मोतियों की माला होने का उदाहरण देते रहते हैं।

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अभ्यास के लिए मुहावरे व लोकोक्तियाँ
1. हवा खाना।
2. फूंक – फूंककर कदम रखना।
3. पेट में चूहे कूटना।
4. एक थैली के चट्टे – बट्टे होना।
5. अमरौती खा के आना।
6. गट्टा – सी सुना देना।
7. कब्र में पाँव लटकाए होना।
8. चार दिन के पाहुन।
9. टेढ़ी – सीधी सुनाना।
10. सिर पटक लेना।
11. कहाँ राजा भोज कहाँ गंगू तेली।
12. कहे खेत की सुने खलिहान की।
13. लंकाकाण्ड।
14. हजारों हथौड़े सहकर मूर्ति बनती है।
15. देखो ऊँट किस करवट बैठता है।
16. मूंछों पर ताव देना।
17. करवटें बदलना।
18. गाजर – मूली समझना।
19. कान में तेल डालना।
20. आटे – दाल का भाव मालूम होना।
21. कीचड़ उछालना।
22. जिधर बोले बम उधर हम।

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MP Board Class 12th Physics Solutions Chapter 7 प्रत्यावर्ती धारा

MP Board Class 12th Physics Solutions Chapter 7 प्रत्यावर्ती धारा

प्रत्यावर्ती धारा NCERT पाठ्यपुस्तक के अध्याय में पाठ्यनिहित प्रश्न एवं उनके उत्तर

प्रश्न 1.
एक 1000 का प्रतिरोधक 220 वोल्ट, 50 हर्ट्स आपूर्ति से संयोजित है। (a) परिपथ में धारा का rms मान कितना है? (b) एक पूरे चक्र में कितनी नेट शक्ति व्यय होती है?
हल :
दिया है : Vrms = 220 वोल्ट, R= 100 Ω, v = 50 हर्ट्स
(a) परिपथ में धारा का rms मान irms =\(\frac{V_{r m s}}{R}=\frac{220}{100}\) = 2.2 ऐम्पियर
(b) ∵ परिपथ में केवल शुद्ध प्रतिरोध जुड़ा है। अतः
शक्ति-गुणांक cos Φ = cos 0° = 1 [∴ Φ = 0°]
∴ पूरे एक चक्र में नेट शक्ति क्षय P = Vrms × irms × cosΦ .
= 220 × 2.2 × 1 = 484 वाट।

प्रश्न 2.
(a) ac आपूर्ति का शिखर मान 300 वोल्ट है। rms वोल्टता कितनी है?
(b) ac परिपथ में धारा का rms मान 10 ऐम्पियर है। शिखर धारा कितनी है?
हल :
(a) दिया है : Vo = 300 वोल्ट, Vrms = ?
rms वोल्टता Vrms = \(\frac{V_{0}}{\sqrt{2}}=\frac{300}{1.414}\) = 212 वोल्ट।
(b) दिया है : irms = 10 ऐम्पियर, io = ?
धारा का शिखर मान io = irms√2 = 14.14 ऐम्पियर।

प्रश्न 3.
एक 44 मिलीहेनरी का प्रेरित्र 220 वोल्ट, 50 हर्ट्स आपूर्ति से जोड़ा गया है। परिपथ में धारा के rms मान को ज्ञात कीजिए।
हल :
दिया है : L= 44 मिलीहेनरी = 44 × 10-3 हेनरी, v = 50 हर्ट्स, Vrms = 220 वोल्ट
प्रेरित्र में rms धारा irms = \(\frac{V_{r m s}}{X_{L}}\)
प्रेरित्र का प्रेरण प्रतिघात XL = 2πvL = 2 × \(\frac{22}{7}\) × 50 × 44 × 10-3 = 13.83Ω
irms= \(\frac{V_{r m s}}{X_{L}}\) =\(\frac{220}{13.83}[latex] = 15.90 ऐम्पियर।

प्रश्न 4.
एक 60 μF का संधारित्र 110 वोल्ट, 60 हर्ट्स ac आपूर्ति से जोड़ा गया है। परिपथ में धारा के rms मान को ज्ञात कीजिए।
हल :
दिया है : C = 60 μF = 60 × 10-6F, Vrms = 110 वोल्ट, v = 60 हर्ट्स
संधारित्र में rms धारा irms = [latex]\frac{V_{r m s}}{X_{C}}\)
जबकि संधारित्र का धारितीय प्रतिघात
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प्रश्न 5.
प्रश्न 3 व 4 में एक पूरे चक्र की अवधि में प्रत्येक परिपथ में कितनी नेट शक्ति अवशोषित होती है? अपने उत्तर का विवरण दीजिए।
हल :
प्रश्न 3 व 4 दोनों में ही पूरे चक्र में नेट शून्य शक्ति व्यय होती है।
विवरण-शुद्ध प्रेरित्र तथा शुद्ध धारिता दोनों में धारा तथा विभवान्तर के बीच 90° का कलान्तर होता है।
∴ शक्ति गुणांक cos Φ = cos 90° = 0
∴ प्रत्येक में नेट शक्ति व्यय P = Vrms × irms × cos Φ = 0.

प्रश्न 6.
एक LCR परिपथ की, जिसमें L = 2.0 हेनरी, C = 32 μF तथा R = 10Ω अनुनाद आवृत्ति ωr परिकलित कीजिए। इस परिपथ के लिए Q का क्या मान है?
हल :
दिया है : L= 2.0 हेनरी, C = 32 × 10-6F, R= 10Ω
MP Board Class 12th Physics Solutions Chapter 7 प्रत्यावर्ती धारा img 2

प्रश्न 7.
30 μF का एक आवेशित संधारित्र 27 मिलीहेनरी के प्रेरित्र से जोड़ा गया है। परिपथ के मुक्त दोलनों की कोणीय आवृत्ति कितनी है?
हल :
दिया है : C = 30 × 10-6F, L= 27 × 10-3 हेनरी
मुक्त दोलनों की कोणीय आवृत्ति \(\omega_{r}=\frac{1}{\sqrt{L C}}=\frac{1}{\sqrt{27 \times 10^{-3} \times 30 \times 10^{-6}}}\)
= 1.1 × 103 रेडियन सेकण्ड-1

प्रश्न 8.
कल्पना कीजिए कि प्रश्न 7 में संधारित्र पर प्रारम्भिक आवेश 6 मिलीकूलॉम है। प्रारम्भ में परिपथ में कुल कितनी ऊर्जा संचित होती है। बाद में कुल ऊर्जा कितनी होगी?
हल
दिया है : C= 30 × 10-6F, Qo = 6 × 10-3 कूलॉम
∴ प्रारम्भ में परिपथ में संचित ऊर्जा
E = संधारित्र की ऊर्जा + प्रेरित्र की ऊर्जा
=\(\frac{1}{2} \frac{Q_{0}^{2}}{C}+\frac{1}{2} L i_{0}^{2}=\frac{1}{2} \times \frac{6 \times 10^{-3} \times 6 \times 10^{-3}}{30 \times 10^{-6}}\)
= 0.6 जूल।   [∵io = 0]
∵ परिपथ में कोई प्रतिरोध नहीं जुड़ा है तथा शुद्ध धारिता तथा शुद्ध प्रेरक में ऊर्जा-हानि नहीं होती है। अत: बाद में परिपथ में कुल 0.6 जूल ऊर्जा ही बनी रहेगी।

प्रश्न 9.
एक श्रेणीबद्ध LCR परिपथ को, जिसमें R= 20 Ω, L= 1.5 हेनरी तथा C = 35μF, एक परिवर्ती आवृत्ति को 200 वोल्ट ac आपूर्ति से जोड़ा गया है। जब आपूर्ति की आवृत्ति परिपथ की मूल आवृत्ति के बराबर होती है तो एक पूरे चक्र में परिपथ को स्थानान्तरित की गई माध्य शक्ति कितनी होगी?
हल :
दिया है : R = 20Ω, L = 1.5 हेनरी, C = 35μF, Vrms = 200 वोल्ट
जब आपूर्ति की आवृत्ति, परिपथ की मूल आवृत्ति के बराबर है तो
परिपथ की प्रतिबाधा Z = R = 20Ω (अनुनाद की स्थिति)
∴ परिपथ में धारा irms = \(\frac{V_{r m s}}{Z}=\frac{200}{20}\)= 10 ऐम्पियर
जबकि शक्ति गुणांक cos Φ = cos 0° = 1
∴पूरे चक्र में परिपथ को स्थानान्तरित शक्ति
P= Vrms × irms × cos Φ = 200 × 10 × 1 = 2000 वाट।

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प्रश्न 10.
एक रेडियो को मेगावाट प्रसारण बैण्ड के एक खण्ड के आवृत्ति परास के एक ओर से दूसरी ओर (800 किलोहर्ट्स से 1200 किलोहर्ट्स) तक समस्वरित किया जा सकता है। यदि इसके LC परिपथ का प्रभावकारी प्रेरकत्व 200 माइक्रोहेनरी हो तो उसके परिवर्ती संधारित्र की परास कितनी होनी चाहिए?
हल :
दिया है : प्रसारण बैण्ड की आवृत्ति v = 800 किलोहर्ट्स-1200 किलोहर्ट्स
∴ vmin in = 800 × 103 हर्ट्स, vmax = 1200 × 103 हर्ट्स, L= 200 माइक्रोहेनरी = 200 × 10-6 हेनरी
रेडियो को प्रसारण बैण्ड के साथ समस्वरित करने हेतु LC परिपथ की मूल आवृत्ति, प्रसारण की आवृत्ति के बराबर होनी चाहिए।
MP Board Class 12th Physics Solutions Chapter 7 प्रत्यावर्ती धारा img 3
अतः परिवर्ती संधारित्र की परास 88 pF से 198 pF होनी चाहिए।

प्रश्न 11.
चित्र-7.1 में एक श्रेणीबद्ध LCR परिपथ दिखलाया गया है जिसे परिवर्ती आवृत्ति के 230 वोल्ट के स्त्रोत से जोड़ा गया है। L = 5.0 हेनरी, C = 80 μF, R = 40 Ω
(a) स्रोत की आवृत्ति निकालिए जो परिपथ में अनुनाद उत्पन्न करे।
(b) परिपथ की प्रतिबाधा तथा अनुनादी आवृत्ति पर धारा का आयाम निकालिए।
(c) परिपथ के तीनों अवयवों के सिरों पर विभवपात के rms मानों को निकालिए। दिखलाइए कि अनुनादी आवृत्ति पर LC संयोग के सिरों पर विभवपात शून्य है।
MP Board Class 12th Physics Solutions Chapter 7 प्रत्यावर्ती धारा img 4
हल :
दिया है : L = 5.0 हेनरी, C = 80 × 10-6F, R= 40Ω, Vrms= 230 वोल्ट
(a) अनुनाद के लिए स्रोत की कोणीय आवृत्ति
MP Board Class 12th Physics Solutions Chapter 7 प्रत्यावर्ती धारा img 5
= 50 रेडियन सेकण्ड-1

(b) अनुनाद की स्थिति में XL = Xc
MP Board Class 12th Physics Solutions Chapter 7 प्रत्यावर्ती धारा img 6

(c) R के सिरों का rms विभवपात
VR = irms × R = 5.75 × 40 = 230 वोल्ट।
XL= ωrL = 50 × 5.0 = 250Ω
तथा
∵ XC = XL = 250Ω.
∴ प्रेरक के सिरों पर rms विभवपात
VL = irms × XL
= 5.75 x 250 = 1437.5 वोल्ट।
इसी प्रकार,
VC = irms × XC
= 5.75 × 250 = 1437.5 वोल्ट।
∵ VLतथा VC विपरीत कला में है, अत: LC संयोग के
सिरों पर विभवपात V = VL – VC
= 1437.5-1437.5= 0 वोल्ट।

प्रश्न 12.
किसी LC परिपथ में 20 मिलीहेनरी का एक प्रेरक तथा 50 μF का एक संधारित्र है जिस पर प्रारम्भिक आवेश 10 मिलीकूलॉम है। परिपथ का प्रतिरोध नगण्य है। मान लीजिए कि वह क्षण जिस पर परिपथ बन्द किया जाता है t= 0 है।
(a) प्रारम्भ में कुल कितनी ऊर्जा संचित है? क्या यह LC दोलनों की अवधि में संरक्षित है?
(b) परिपथ की मूल आवृत्ति क्या है?
(c) किसी समय पर संचित ऊर्जा?
(i) पूरी तरह से विद्युत है ( अर्थात् वह संधारित्र में संचित है)?
(ii) पूरी तरह से चुम्बकीय है (अर्थात् प्रेरक में संचित है)?
(d) किन समयों पर सम्पूर्ण ऊर्जा प्रेरक एवं संधारित्र के मध्य समान रूप से विभाजित है?
(e) यदि एक प्रतिरोधक को परिपथ में लगाया जाए तो कितनी ऊर्जा अन्ततः ऊष्मा के रूप में क्षयित होगी?
हल :
दिया है : L = 20 × 10-3 हेनरी, C = 50 × 10-6F, Qo = 10 × 10-3 कूलॉम
(a) प्रारम्भ में कुल संचित ऊर्जा
MP Board Class 12th Physics Solutions Chapter 7 प्रत्यावर्ती धारा img 7
∵ परिपथ में शुद्ध प्रतिरोध नहीं लगा है; अत: परिपथ की कुल ऊर्जा संरक्षित है।

(b) परिपथ की कोणीय आवृत्ति
MP Board Class 12th Physics Solutions Chapter 7 प्रत्यावर्ती धारा img 8

(c) संधारित्र के निरावेशन समीकरण Q= Qo cos ωt से,
आवेश Q महत्तम अर्थात् Qmax = ± Qo होगा, जबकि t = 0, \(\frac{T}{2}\), T,
\(\frac{3T}{2}\),….. आदि। (∵ cos ωt = ± 1)
इन क्षणों पर धारा i शून्य होगी।
इसके विपरीत आवेश Q शून्य होगा, यदि
cos ωt = t = 0, \(\frac{T}{4}\), T,
\(\frac{3T}{4}\), \(\frac{5T}{4}\)…..
इन क्षणों पर धारा i महत्तम होगी।
अत: (i) क्षणों t = 0, \(\frac{T}{2}\), T,
\(\frac{3T}{2}\),….. आदि पर कुल ऊर्जा विद्युतीय होगी अर्थात् संधारित्र में संचित होगी।
(ii) क्षणों t = 0, \(\frac{T}{4}\), T,
\(\frac{3T}{4}\),….. आदि पर कुल ऊर्जा चुम्बकीय होगी अर्थात् प्रेरक में संचित होगी।
जहाँ T = \(\frac{1}{v}\) = \(\frac{1}{159}\)= 0.0063 सेकण्ड।

(d) प्रारम्भ में परिपथ की कुल ऊर्जा E = \(\frac{Q_{0}^{2}}{2 C}\)
यदि किसी समय t पर संधारित्र पर आवेश Q है तथा कुल ऊर्जा संधारित्र व प्रेरक में आधी-आधी बँटी है, तब
इस क्षण संधारित्र की ऊर्जा = \(\frac{1}{2}\)E.
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अतः व्यापक रूप में,
t = 0, \(\frac{T}{8}\), T,
\(\frac{3T}{8}\), \(\frac{5T}{8}\), \(\frac{7T}{8}\),…….. आदि समयों पर कुल ऊर्जा संधारित्र व प्रेरक में बराबर-बराबर बँटी होगी।
(e) यदि परिपथ में प्रतिरोध जोड़ दिया जाए तो धीरे-धीरे परिपथ की सम्पूर्ण ऊर्जा प्रतिरोधक में ऊष्मा के रूप में व्यय हो जाएगी।

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प्रश्न 13.
एक कुंडली को जिसका प्रेरण 0.50 हेनरी तथा प्रतिरोध 1002 है, 240 वोल्ट व 50 हर्ट्स की एक आपूर्ति से जोड़ा गया है।
(a) कुंडली में अधिकतम धारा कितनी है?
(b) वोल्टेज शीर्ष व धारा शीर्ष के बीच समय-पश्चता (time lag) कितनी है?
हल :
दिया है : L= 0.5 हेनरी, R= 100Ω, Vrms = 240 वोल्ट, v = 50 हर्ट्स
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प्रश्न 14.
यदि परिपथ को उच्च आवृत्ति की आपूर्ति (240 वोल्ट, 10 किलोहर्ट्स) से जोड़ा जाता है तो प्रश्न 13 (a) तथा (b) के उत्तर निकालिए। इससे इस कथन की व्याख्या कीजिए कि अति उच्च आवृत्ति पर किसी परिपथ में प्रेरक लगभग खुले परिपथ के तुल्य होता है। स्थिर अवस्था के पश्चात् किसी dc परिपथ में प्रेरक किस प्रकार का व्यवहार करता है?
हल :
दिया है : Vrms = 240 वोल्ट, v = 10 किलोहर्ट्स = 10000 हर्ट्स, L= 0.5 हेनरी, R = 100Ω
(a) प्रेरक का प्रतिघात XL = 2 πVL
= 2 × 3.14 × 10000 × 0.5 = 31400Ω
∴ प्रतिबाधा \(Z=\sqrt{R^{2}+X_{L}^{2}} \approx 31400 \Omega\) [∵ R<<XL]
∴ परिपथ में महत्तम धारा io = \(\frac{V_{r m s} \sqrt{2}}{Z}=\frac{240 \sqrt{2}}{31400} \approx\) ऐम्पियर।
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महत्तम धारा i0 का मान अत्यन्त कम है इससे यह निष्कर्ष प्राप्त होता है कि अति उच्च आवृत्ति की धाराओं के लिए प्रेरक खुले परिपथ की भाँति व्यवहार करता है।
∵ दिष्ट धारा के लिए v = 0.
अत: दिष्ट धारा परिपथ में XL = 2πvL = 0
अत: दिष्ट धारा परिपथ में प्रेरक साधारण चालक की भाँति व्यवहार करता है।

प्रश्न 15.
40Ω प्रतिरोध के श्रेणीक्रम में एक 100 µ F के संधारित्र को 110 वोल्ट, 60 हर्ट्स की आपूर्ति से जोड़ा गया है।
(a) परिपथ में अधिकतम धारा कितनी है?
(b) धारा शीर्ष व वोल्टेज शीर्ष के बीच समय-पश्चता कितनी है?
हल :
दिया है : R = 40Ω, C = 100 × 10-6 F, Vrms = 110 वोल्ट, v = 60 हर्ट्स
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प्रश्न 16.
यदि परिपथ को 110 वोल्ट, 12 किलोहर्ट्स आपूर्ति से जोड़ा जाए तो प्रश्न 15 (a) व (b) का उत्तर निकालिए। इससे इस कथन की व्याख्या कीजिए कि अति उच्च आवृत्तियों पर एक संधारित्र चालक होता है। इसकी तुलना उस व्यवहार से कीजिए जो किसी dc परिपथ में एक संधारित्र प्रदर्शित करता है।
हल :
दिया है : R= 40Ω, C= 100 × 10-6 F, Vrms = 110 वोल्ट, v = 12 × 103 हर्ट्स
(a)
MP Board Class 12th Physics Solutions Chapter 7 प्रत्यावर्ती धारा img 13
भाग (a) के उत्तर से हम निष्कर्ष निकाल सकते हैं कि अति उच्च आवृत्ति की धारा के लिए संधारित्र का प्रतिघात नगण्य होता है, अर्थात् यह एक शुद्ध चालक की भाँति व्यवहार करता है।
स्थायी दिष्ट धारा हेतु v = 0, अत: धारितीय प्रतिघात XC = \(\frac{1}{2 \pi \nu C}\)= ∞
इस दिष्ट धारा के लिए संधारित्र खुले परिपथ की भाँति व्यवहार करता है।

प्रश्न 17.
स्त्रोत की आवृत्ति को एक श्रेणीबद्ध LCR परिपथ की अनुनादी आवृत्ति के बराबर रखते हुए तीन अवयवों L, C तथा R को समान्तर क्रम में लगाते हैं। यह दशाइए कि समान्तर LCR परिपथ में इस आवृत्ति पर कुल धारा न्यूनतम है। इस आवृत्ति के लिए प्रश्न 11 में निर्दिष्ट स्रोत तथा अवयवों के लिए परिपथ की हर शाखा में धारा के rms मान को परिकलित कीजिए।
हल :
समान्तर LCR परिपथ की प्रतिबाधा Z निम्नलिखित सूत्र द्वारा प्राप्त होती है –
MP Board Class 12th Physics Solutions Chapter 7 प्रत्यावर्ती धारा img 14
अनुनादी आवृत्ति के लिए, XC = XC
अत: इस स्थिति में \(\frac { 1 }{ z }\) न्यूनतम होगी अतः प्रतिबाधा Z अधिकतम होगी।
∴ परिपथ में प्रवाहित कुल धारा न्यूनतम होगी।
प्रश्न 11 से, Vrms = 230 वोल्ट, R = 40Ω, L= 5.0 हेनरी, C = 80 × 10-6F, ω = 50 रेडियन सेकण्ड-1
(अनुनादी आवृत्ति)
∵ L, C व R तीनों समान्तर क्रम में जुड़े हैं।
अतः तीनों के सिरों का विभवान्तर समान (प्रत्येक Vrms = 230 वोल्ट) होगा।
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प्रश्न 18.
एक परिपथ को जिसमें 80 मिलीहेनरी का एक प्रेरक तथा 60 uF का संधारित्र श्रेणीक्रम में है 230 वोल्ट, 50 हर्ट्स की आपूर्ति से जोड़ा गया है। परिपथ का प्रतिरोध नगण्य है।
(a) धारा का आयाम तथा rms मानों को निकालिए।
(b) हर अवयव के सिरों पर विभवपात के rms मानों को निकालिए।
(c) प्रेरक में स्थानान्तरित माध्य शक्ति कितनी है?
(d) संधारित्र में स्थानान्तरित माध्य शक्ति कितनी है?
(e) परिपथ द्वारा अवशोषित कुल माध्य शक्ति कितनी है? [माध्य में यह समाविष्ट है कि इसे ‘पूरे चक्र’ के लिए लिया गया है।]
हल :
दिया है : L = 80 × 10-3 हेनरी, C = 60 × 10-6 F, Vrms = 230 वोल्ट, v = 50 हर्ट्स
(a) प्रेरण प्रतिघात XL = 2 πvL = 2 × 3.14 × 50 × 80 × 10-3 = 25.12Ω
धारितीय प्रतिघात XL =\(\frac{1}{2 \pi v C}=\frac{1}{2 \times 3.14 \times 50 \times 60 \times 10^{-6}}=53.07 \Omega\)
∴ परिपथ की प्रतिबाधा Z = XC – XL = 53.07 – 25.12 = 27.95 ≈ 28Ω
∴ परिपथ में धारा irms= \(\frac{V_{r m s}}{Z}=\frac{230}{28}\) = 8.21ऐम्पियर।

धारा का शिखर मान io = irms√2 = 8.21 × 1.414 = 11.60 ऐम्पियर।

(b) प्रेरक के सिरों पर विभवपात VL = irms x XL = 8.21 × 25.12 = 206 वोल्ट।
∴ संधारित्र के सिरों पर विभवपात VC = irms x XC= 8.21 × 53.07 = 436 वोल्ट।

(c) प्रेरक के लिए धारा तथा विभवान्तर के बीच कलान्तर Φ = \(\frac { π }{ 2 }\)
प्रेरक में माध्य शक्ति PL = Vrms × irms × cos \(\frac { π }{ 2 }\) = 0

(d) संधारित्र के लिए धारा तथा विभवान्तर के बीच कलान्तर क Φ = \(\frac { π }{ 2 }\)
∴ संधारित्र में माध्य शक्ति PC = Vrms × irms × cos\(\frac { π }{ 2 }\)
(e) परिपथ द्वारा अवशोषित माध्य शक्ति भी शून्य होगी।

प्रश्न 19.
कल्पना कीजिए कि प्रश्न 18 में प्रतिरोध 15Ω है। परिपथ के हर अवयव को स्थानान्तरित माध्य शक्ति तथा सम्पूर्ण अवशोषित शक्ति को परिकलित कीजिए।
हल :
प्रश्न 18 से,XL = 25.12 2, XC = 53.07Ω तथा
R = 15Ω, Vrms = 230 वोल्ट
MP Board Class 12th Physics Solutions Chapter 7 प्रत्यावर्ती धारा img 16
प्रेरक तथा संधारित्र दोनों को स्थानान्तरित माध्य शक्ति शून्य है।
प्रतिरोध को स्थानान्तरित माध्य शक्ति PR = (irms)2 × R= (7.26)2 × 15 = 791 वाट।
परिपथ द्वारा अवशोषित सम्पूर्ण माध्य शक्ति = 791 वाट।

प्रश्न 20.
एक श्रेणीबद्ध LCR परिपथ को जिसमें L = 0.12 हेनरी, C = 480 µF, R = 23Ω, 230 वोल्ट परिवर्ती आवृत्ति वाले स्रोत से जोड़ा गया है।।
(a) स्त्रोत की वह आवृत्ति कितनी है जिस पर धारा आयाम अधिकतम है। इस अधिकतम मान को निकालिए।
(b) स्रोत की वह आवृत्ति कितनी है जिसके लिए परिपथ द्वारा अवशोषित माध्य शक्ति अधिकतम है।
(c) स्त्रोत की किस आवृत्ति के लिए परिपथ को स्थानान्तरित शक्ति अनुनादी आवृत्ति की शक्ति की आधी है।
(d) दिए गए परिपथ के लिए Q कारक कितना है?
हल :
(a) अधिकतम धारा के लिए XL = XC
MP Board Class 12th Physics Solutions Chapter 7 प्रत्यावर्ती धारा img 17

(b) ∵ प्रेरक व संधारित्र द्वारा अवशोषित माध्य शक्तियाँ शून्य हैं।
∴ परिपथ द्वारा अवशोषित माध्य शक्ति P= i2rms × R ⇒ P ∝ i2rms
स्पष्ट है कि शक्ति P महत्तम होगी यदि प्रवाहित धारा महत्तम हो।
इसके लिए XL = XC
MP Board Class 12th Physics Solutions Chapter 7 प्रत्यावर्ती धारा img 18

प्रश्न 21.
एक श्रेणीबद्ध LCR परिपथ के लिए जिसमें L = 3.0 हेनरी, C = 27 µ F तथा R = 7.4Ω अनुनादी आवृत्ति तथा Q कारक निकालिए। परिपथ के अनुनाद की तीक्ष्णता को सुधारने की इच्छा से “अर्ध उच्चिष्ठ पर पूर्ण चौड़ाई” को 2 गुणक द्वारा घटा दिया जाता है। इसके लिए उचित उपाय सुझाइए।
हल :
MP Board Class 12th Physics Solutions Chapter 7 प्रत्यावर्ती धारा img 19
अर्ध उच्चिष्ठ पर पूर्ण चौड़ाई को आधा करने अथवा समान आवृत्ति के लिए Q को दोगुना करने हेतु प्रतिरोध R का आधा कर देना चाहिए।

प्रश्न 22.
निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर दीजिए –
(a) क्या किसी ae परिपथ में प्रयुक्त ताक्षणिक वोल्टता परिपथ में श्रेणीक्रम में जोड़े गए अवयवों के सिरों पर तात्क्षणिक वोल्टताओं के बीजगणितीय योग के बराबर होता है? क्या यही बात rms वोल्टताओं में भी लागू होती है?
(b) प्रेरण कुंडली के प्राथमिक परिपथ में एक संधारित्र का उपयोग करते हैं।
(c) एक प्रयुक्त वोल्टता संकेत एक dc वोल्टता तथ उच्च आवृत्ति के एक ac वोल्टता के अध्यारोपण से निर्मित है। परिपथ एक श्रेणीबद्ध प्रेरक तथा संधारित्र से निर्मित है। दर्शाइए कि dc संकेत C तथा ac संकेत के सिरे पर प्रकट होगा।
(d) एक लैम्प में श्रेणीक्रम में जुड़ी चोक को एक dc लाइन से जोड़ा गया है। लैम्प तेजी से चमकता है। चोक में लोहे के क्रोड को प्रवेश कराने पर लैम्प की दीप्ति में कोई अन्तर नहीं पड़ता है। यदि एक ac लाइन से लैम्प का संयोजन किया जाए तो तद्नुसार प्रेक्षणों की प्रागुक्ति कीजिए।
(e) ac मेंस के साथ कार्य करने वाली फ्लोरोसेंट ट्यूब में प्रयुक्त चोक कुंडली की आवश्यकता क्यों होती है? चोक कुंडली के स्थान पर सामान्य प्रतिरोधक का उपयोग क्यों नहीं होता?
उत्तर :
(a) हाँ, परन्तु यह तथ्य rms वोल्टताओं के लिए सत्य नहीं है क्योंकि विभिन्न अवयवों की rms वोल्टताएँ समान कला में नहीं होती।
(b) संधारित्र को जोड़ने से, परिपथ को तोड़ते समय चिनगारी देने वाली धारा संधारित्र को आवेशित करती है, अत: चिनगारी नहीं निकल पाती।
(c) संधारित्र dc सिग्नल को रोक देता है, अत: dc सिग्नल वोल्टता संधारित्र के सिरों पर प्रकट होगा जबकि ac सिग्नल प्रेरक के सिरों पर प्रकट होगा।
(d) dc लाइन के लिए v = 0.
अत: चोक की प्रतिबाधा XL = 2πvL = 0
अतः चोक दिष्ट धारा के मार्ग में कोई रुकावट नहीं डालती, इससे लैम्प तेज चमकता है।
ac लाइन में चोक उच्च प्रतिघात उत्पन्न करती है (L का मान अधिक होने के कारण), अत: लैम्प में धारा घट जाती है और उसकी चमक मद्धिम पड़ जाती है।
(e) चोक कुंडली एक प्रेरक का कार्य करती है और बिना शक्ति खर्च किए ही धारा को कम कर देती है। यदि चोक के स्थान पर प्रतिरोधक का प्रयोग करें तो वह धारा को कम तो कर देगा परन्तु इसमें वैद्युत शक्ति ऊष्मा के रूप में व्यय होती रहेगी।

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प्रश्न 23.
एक शक्ति संप्रेषण लाइन अपचायी ट्रांसफॉर्मर में जिसकी प्राथमिक कुंडली में 4000 फेरे हैं, 2300 वोल्ट पर शक्ति निवेशित करती है। 230 वोल्ट की निर्गत शक्ति प्राप्त करने के लिए द्वितीयक में कितने फेरे होने चाहिए?
हल :
दिया है : Np = 4000, VP = 2300 वोल्ट, VS = 230 वोल्ट, NS = ?
सूत्र \(\frac{V_{S}}{V_{P}}=\frac{N_{S}}{N_{P}}\) से.
द्वितीयक कुंडली में फेरों की संख्या \(N_{S}=\frac{V_{S}}{V_{P}} \times N_{P}=\frac{230}{2300} \times 4000=400\)

प्रश्न 24.
एक जल विद्युत शक्ति संयंत्र में जल दाब शीर्ष 300 मीटर की ऊँचाई पर है तथा उपलब्ध जल प्रवाह 100 मीटर3 सेकण्ड -1 है। यदि टरबाइन जनित्र की दक्षता 60% हो तो संयंत्र से उपलब्ध विद्युत शक्ति का आकलन कीजिए, g= 9.8 मीटर सेकण्ड-2.
हल :
दिया है : h = 300 मीटर, g= 9.8 मीटर/सेकण्ड2, जल का आयतन V = 100 मीटर3,
समय t = 1 सेकण्ड, जनित्र की दक्षता = 60%
जल विद्युत शक्ति = जल-स्तम्भ का दाब × प्रति सेकण्ड प्रवाहित जल का आयतन
. = hρg × V = 300 x 103 × 9.8 × 100 = 29.4 x 107 वाट
∴ जनित्र द्वारा उत्पन्न वैद्युत शक्ति = कुल शक्ति × दक्षता
= 29.4 × 107 × \(\frac { 60 }{ 100 }\) = 176.4 × 106 वाट = 176. 4 मेगावाट।

प्रश्न 25.
440 वोल्ट पर शक्ति उत्पादन करने वाले किसी विद्युत संयंत्र से 15 किलोमीटर दूर स्थित एक छोटे से कस्बे में 220 वोल्ट पर 800 किलोवाट शक्ति की आवश्यकता है। वैद्युत शक्ति ले जाने वाली दोनों तार की लाइनों का प्रतिरोध 0.5Ω प्रति किलोमीटर है। कस्बे को उप-स्टेशन में लगे 4000-220 वोल्ट अपचायी ट्रांसफॉर्मर से लाइन द्वारा शक्ति पहुँचती है।
(a) ऊष्मा के रूप में लाइन से होने वाली शक्ति के क्षय का आकलन कीजिए।
(b) संयंत्र से कितनी शक्ति की आपूर्ति की जानी चाहिए, यदि क्षरण द्वारा शक्ति का क्षय नगण्य है।
(c) संयंत्र के उच्चायी ट्रांसफॉर्मर की विशेषता बताइए।
हल :
(a) तार की लाइनों का प्रतिरोध R= 30 किमी × 0.5 ओम किमी-1 = 150
उप-स्टेशन पर लगे ट्रांसफॉर्मर के लिए VP = 4000 वोल्ट, VS = 220 वोल्ट
माना प्राथमिक परिपथ में धारा = ip व द्वितीयक परिपथ में धारा = is
ट्रांसफॉर्मर द्वारा द्वितीयक परिपथ में दी गई शक्ति
VS × iS = 800 किलोवाट = 800 × 103 वाट
VP × iP = VS × iS से,
MP Board Class 12th Physics Solutions Chapter 7 प्रत्यावर्ती धारा img 20
यह धारा सप्लाई लाइन से होकर गुजरती है।
∴ लाइन में होने वाला शक्ति क्षय
P= i2p × R= (200)2 × 15 वाट = 600 किलोवाट।

(b) संयंत्र द्वारा आपूर्ति की जाने वाली शक्ति
= 800 किलोवाट + 600 किलोवाट = 1400 किलोवाट।

(c) सप्लाई लाइन पर विभवपात ।
V= ip × R = 200 × 15 = 3000 वोल्ट
∴ उप-स्टेशन पर लगा अपचायी ट्रांसफॉर्मर 4000 वोल्ट-220 वोल्ट प्रकार का है, अतः इस ट्रांसफॉर्मर की प्राथमिक कुंडली पर विभवपात = 4000 वोल्ट
∴ संयंत्र पर लगे उच्चायी ट्रांसफॉर्मर द्वारा प्रदान की जाने वाली वोल्टता = 3000 + 4000 = 7000 वोल्ट
अत: यह ट्रांसफॉर्मर 440 V – 7000 V प्रकार का होना चाहिए।
MP Board Class 12th Physics Solutions Chapter 7 प्रत्यावर्ती धारा img 21

प्रश्न 26.
प्रश्न 25 को पुनः कीजिए। इसमें पहले के ट्रांसफॉर्मर के स्थान पर 40000-220 वोल्ट की अपचायी ट्रांसफॉर्मर है। [पूर्व की भाँति क्षरण के कारण हानियों को नगण्य मानिए। यद्यपि अब यह सन्निकटन उचित नहीं है । क्योंकि इसमें उच्च वोल्टता पर संप्रेषण होता है। अतः समझाइए कि क्यों उच्च वोल्टता संप्रेषण अधिक वरीय है।
हल :
(a) पूर्व प्रश्न की भाँति
VS × iS = 800 × 103
∴\(i_{P}=\frac{V_{S} \times i_{S}}{V_{P}}=\frac{800 \times 10^{3}}{40000}\) = 20 ऐम्पियर [∵ इस बार Vp= 40000 वोल्ट]
∴ लाइन में होने वाला शक्ति व्यय P = i2 S × R
P = (20)2 × 15 = 6000 वाट = 6 किलोवाट।

(b) ∴ संयंत्र द्वारा प्रदान की जाने वाली शक्ति = 800 किलावाट + 6 किलावाट = 806 किलावाट।

(c) सप्लाई लाइन पर विभवपात V = Ip × R
= 20 × 15 = 300 वोल्ट ::
∵ उप-स्टेशन पर लगा ट्रांसफॉर्मर 40000 वोल्ट – 220 वोल्ट प्रकार का है, अत: इसकी
प्राथमिक कुंडली पर विभवपात = 40000 वोल्ट.
∴ संयंत्र पर लगे उच्चायी ट्रांसफॉर्मर द्वारा प्रदान की जाने वाली वोल्टता = 40000 वोल्ट + 300 वोल्ट
= 40300 वोल्ट
∴ संयंत्र पर लगा ट्रांसफॉर्मर 440 वोल्ट – 40300 वोल्ट प्रकार का होना चाहिए।
सप्लाई लाइन में प्रतिशत शक्ति क्षय = \(\frac{6}{806} \times 100\) = 0.74%

प्रश्न 25 व 26 के हलों से स्पष्ट है कि वैद्युत शक्ति उच्च वोल्टता पर सम्प्रेषित करने से सप्लाई लाइन में होने वाला शक्ति क्षय बहुत घट जाता है। यही कारण है कि वैद्युत उत्पादन संयंत्रों से वैद्युत शक्ति का सम्प्रेषण उच्च वोल्टता पर किया जाता है।

प्रत्यावर्ती धारा NCERT भौतिक विज्ञान प्रश्न प्रदर्शिका (Physics Exemplar Problems) पुस्तक से चयनित महत्त्वपूर्ण प्रश्नों के हल

प्रत्यावर्ती धारा बहुविकल्पीय प्रश्नोत्तर

प्रश्न 1.
किसी वोल्टता मापक युक्ति को ac मेंस से जोड़ने पर यह युक्ति 220V स्थिर निवेश वोल्टता दर्शाती है। इसका अर्थ
यह है कि
(a) निवेश वोल्टता ac वोल्टता नहीं हो सकती, परन्तु यह dc वोल्टता है
(b) अधिकतम निवेश वोल्टता 220V है
(c) मापक युक्ति υ का पाठ्यांक नहीं देती अपितु < υ2 > का पाठ्यांक देती है और इसका अंशांकन \(\sqrt{<v^{2}>}\) का पाठ्यांक लेने के लिए किया गया है
(d) किसी यान्त्रिक दोष के कारण मापक युक्ति का संकेतक अटक जाता है।
उत्तर :
(c) मापक युक्ति υ का पाठ्यांक नहीं देती अपितु < υ2 > का पाठ्यांक देती है और इसका अंशांकन \(\sqrt{<v^{2}>}\) का पाठ्यांक लेने के लिए किया गया है

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प्रश्न 2.
किसी जनित्र से श्रेणीक्रम से जुड़े LCR परिपथ की अनुनादी आवृत्ति कम करने के लिए –
(a) जनित्र की आवृत्ति कम करनी चाहिए।
(b) परिपथ में लगे संधारित्र के पार्श्व क्रम में एक अन्य संधारित्र जोड़ना चाहिए।
(c) प्रेरक के लोह-क्रोड को हटा देना चाहिए
(d) संधारित्र के परावैद्युत को हटा देना चाहिए।
उत्तर :
(b) परिपथ में लगे संधारित्र के पार्श्व क्रम में एक अन्य संधारित्र जोड़ना चाहिए।

प्रश्न 3.
संचार में प्रयुक्त LCR परिपथ के अधिक अच्छे समस्वरण के लिए निम्नलिखित में किस संयोजन का चयन करना
चाहिए?
(a) R = 20 Ω, L = 1.5 H, C = 35μF
(b) R = 25 Ω, L= 2.5 H, C = 45μF
(c) R = 15 Ω, L= 3.5 H, C = 30μF
(d) R = 25 Ω, L= 1.5 H, C = 45μF.
उत्तर :
(c) R = 15 Ω, L= 3.5 H, C = 30μF

प्रश्न 4.
1Ω प्रतिबाधा के किसी प्रेरक तथा 2Ω प्रतिरोध के किसी प्रतिरोधक को 6 V (rms) के ac स्रोत से श्रेणीक्रम में जोड़ा गया है। परिपथ में क्षयित शक्ति का मान है
(a) 8w
(b) 12w
(c) 14.4W
(d) 18 W.
उत्तर :
(c) 14.4W

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प्रश्न 5.
किसी अपचायी ट्रांसफार्मर का निर्गम 12W के प्रकाश बल्ब को संयोजित करने पर 24V मापा जाता है। शिखर धारा का मान है –
(a) \(\frac{1}{\sqrt{2}} \mathrm{A}\)
(b) √2 A
(c) 2 A
(d) 2√2 A.
उत्तर :
(a) \(\frac{1}{\sqrt{2}} \mathrm{A}\)

प्रत्यावर्ती धारा अति लघु उत्तरीय प्रश्नोत्तर

प्रश्न 1.
यदि किसी LC परिपथ को आवर्ती दोलनकारी स्प्रिंग-ब्लॉक प्रणाली के तुल्य समझा जाता है तब इस LC परिपथ की कौन-सी ऊर्जा स्थितिज ऊर्जा के और कौन-सी गतिज ऊर्जा के तुल्य होगी?
उत्तर :
LC परिपथ की चुम्बकीय ऊर्जा, गतिज ऊर्जा के तुल्य एवं वैद्युत ऊर्जा, स्थितिज ऊर्जा के तुल्य होगी।

प्रश्न 2.
अत्युच्च आवृत्ति पर चित्र 7.2 में दर्शाए गए परिपथ का प्रभावी तुल्य परिपथ बनाइए और इसकी प्रभावी प्रतिबाधा ज्ञात कीजिए।
MP Board Class 12th Physics Solutions Chapter 7 प्रत्यावर्ती धारा img 22
उत्तर :
अति उच्च आवृत्ति पर संधारित्र का प्रतिघात (\(X_{c}=\frac{1}{\omega_{C}}=\frac{1}{2.7 f c}\)) बहुत निम्न होगा तथा प्रेरक का प्रतिघात (XL = ωL = 2 πfL) बहुत उच्च होगा। अतः प्रेरक खुले प्रतिरोध की भाँति कार्य करेगा।
अत: दिए गए परिपथ का प्रभावी तुल्य परिपथ, चित्र में दर्शाया गया है।
MP Board Class 12th Physics Solutions Chapter 7 प्रत्यावर्ती धारा img 23
इस परिपथ की प्रभावी प्रतिबाधा (Z) = R1 + R3

प्रश्न 3.
चित्र 7.4 (a) एवं (b) में दर्शाए गए परिपथों का अध्ययन कीजिए और निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर दीजिए
(a) किन दशाओं में दोनों परिपथों में rms धारा समान होगी?
(b) क्या परिपथ (a) से परिपथ (b) में rms धारा अधिक हो सकती है?
MP Board Class 12th Physics Solutions Chapter 7 प्रत्यावर्ती धारा img 24
उत्तर :
(a) यदि दोनों परिपथों में लगाए गए प्रत्यावर्ती स्रोत की rms वोल्टता समान है तब अनुनाद की स्थिति में LCR परिपथ में rms धारा, केवल R वाले परिपथ में rms धारा के बराबर होगी।
(b) नहीं, परिपथ (b) में rms धारा परिपथ (a) में rms धारा से अधिक नहीं हो सकती है क्योंकि LCR परिपथ की प्रतिबाधा Z ≥ R, अतः Ia ≥ Ib.

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प्रश्न 4.
कोई युक्ति र किसी ac स्रोत से जुड़ी है। एक पूर्ण चक्र में वोल्टता, धारा एवं शक्ति के परिवर्तन चित्र 7.5 में दर्शाए गए हैं –
(a) कौन-सा वक्र एक पूर्ण वक्र में शक्ति-क्षय दर्शाता है?
(b) एक पूर्ण चक्र में औसत उपमुक्त शक्ति कितनी है?
(c) युक्ति ‘X’ की पहचान कीजिए।
MP Board Class 12th Physics Solutions Chapter 7 प्रत्यावर्ती धारा img 25
उत्तर :
(a) वक्र A शक्ति-क्षय दर्शाता है।
(b) एक पूर्ण चक्र में औसत उपमुक्त शक्ति शून्य है।
(c) युक्ति ‘X’, L अथवा C अथवा LC है।

प्रश्न 5.
स्पष्ट कीजिए कि संधारित्र द्वारा प्रदत्त प्रतिघात प्रत्यावर्ती धारा की आवृत्ति में वृद्धि करने पर कम क्यों हो जाता है?
उत्तर :
संधारित्र द्वारा प्रदत्त प्रतिघात \(\left(X_{C}\right)=\frac{1}{\omega_{C}}=\frac{1}{2 \pi f C}\)
अतः संधारित्र द्वारा प्रदत्त प्रतिघात, प्रत्यावर्ती धारा की आवृत्ति में वृद्धि करने पर कम हो जाता है।

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प्रश्न 6.
स्पष्ट कीजिए कि किसी प्रेरक द्वारा प्रदत्त प्रतिघात प्रत्यावर्ती वोल्टता की आवृत्ति में वृद्धि करने पर क्यों बढ़ता है?
उत्तर :
प्रेरक द्वारा प्रदत्त प्रतिघात (XL) = ωL= 2 πfL
अर्थात् XL∝ f
अतः प्रेरक द्वारा प्रतिघात, प्रत्यावर्ती धारा की आवृत्ति में वृद्धि करने पर बढ़ता है।

प्रत्यावर्ती धारा आंकिक प्रश्नोत्तर

प्रश्न 1.
0.01 हेनरी प्रेरकत्व तथा 1 ओम प्रतिरोध की कोई कुंडली 200 वोल्ट, 50 हर्ट्स के ac शक्ति प्रदाय से जोड़ी गई है। परिपथ की प्रतिबाधा तथा अधिकतम प्रत्यावर्ती वोल्टता एवं धारा के बीच काल-पश्चता परिकलित कीजिए।
हल :
दिया है, L= 0.01 हेनरी, R = 1 ओम, Vrms = 200 वोल्ट, f = 50 हर्ट्स।
प्रेरण प्रतिघात XL = ωL = 2πfL = 2 x 3.14 x 50 x 0.01= 3.14Ω
MP Board Class 12th Physics Solutions Chapter 7 प्रत्यावर्ती धारा img 26

प्रश्न 2.
किसी शक्ति केन्द्र से 1 MW शक्ति 10 किमी दूर स्थित किसी शहर को प्रदान की जानी है। कोई व्यक्ति इस उद्देश्य के लिए 0.5 सेमी त्रिज्या के ताँबे के तारों के जोड़े का उपयोग करता है। संचरित शक्ति की ओमीय क्षति के अंश का परिकलन कीजिए जबकि –
(i) शक्ति प्रेषण 220 वोल्ट पर किया जाता है। इस स्थिति की व्यवहार्यता पर टिप्पणी कीजिए।
(ii) किसी उच्चायी ट्रांसफॉर्मर द्वारा वोल्टता 11000 वोल्ट तक बढ़ाकर शक्ति संचरण किया जाता है और फिर अपचायी ट्रांसफॉर्मर द्वारा वोल्टता को 220 वोल्ट किया जाता है।
(ρcu = 1.7 × 10-8 SI)
उत्तर :
दिया है, शक्ति (P) = 1 MW = 106 वाट
r = 0.5 सेमी = 0.5 × 10-2 मीटर
l = 10 किमी = 10000 मीटर .
(i)
MP Board Class 12th Physics Solutions Chapter 7 प्रत्यावर्ती धारा img 27
अत: 220 वोल्ट पर शक्ति प्रेषण पर समस्त ऊर्जा दूर स्थित शहर तक पहुँचने से पहले ही ऊष्मा के रूप में क्षय हो जाएगी। अत: यह विधि शक्ति प्रेषण के लिए उपयुक्त नहीं है।

(ii) उच्चायी ट्रांसफॉर्मर द्वारा वोल्टता बढ़ाने पर,
MP Board Class 12th Physics Solutions Chapter 7 प्रत्यावर्ती धारा img 28
इस प्रकार शक्ति प्रेषण में केवल 3.3% ऊर्जा क्षय हो रहा है। अत: यह विधि शक्ति प्रेषण के लिए उपयुक्त है।

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MP Board Class 12th General Hindi व्याकरण अनेक शब्दों के लिए एक शब्द

MP Board Class 12th General Hindi व्याकरण अनेक शब्दों के लिए एक शब्द

परीक्षा में कभी–कभी वाक्यांश देकर उनके लिए एक शब्द पूछे जाते हैं। कुछ शब्द तथा अर्थ नीचे दिए जा रहे हैं–
1. जो क्षमा न किया जा सके – अक्षम्य
2. जहाँ पहुँचा न जा सके – अगम्य
3. जिसे पहले गिनना उचित हो – अग्रगण्य
4. जिसका जन्म न हो। – अजन्मा
5. ऐसी वस्तु जिसका कोई मूल्य न हो – अमूल्य
6. जो दूर की बात सोचे। – दूरदर्शी
7. जो दूर की बात न सोचे – अदूरदर्शी
8. जिसका पार न हो – अपार
9. जो दिखाई न दे। – अदृश्य
10. जिसके समान कोई न हो – अद्वितीय

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11. जिसका पता न हो – अज्ञात
12. जो थोड़ा जानता हो। – अल्पज्ञ
13. जो सब कुछ जानता हो – सर्वज्ञ
14. जो सब कुछ नहीं जानता हो – अज्ञ
15. जो कभी बूढ़ा न हो – अजर
16. जो वेतन पर काम करे – वैतनिक
17. जो ऊपर कहा गया हो – उपर्युक्त
18. जो आशा से कहीं बढ़कर हो – आशातीत
19. जिसका कोई आधार न हो – निराधार
20. जो नष्ट न हो सके – अक्षय
21. चारों ओर चक्कर काटना – परिक्रमा
22. जो उचित समय पर न हो – असामयिक
23. जिसका पति मर चुका हो – विधवा
24. जिसकी पत्नी मर चुकी हो – विधुर
25. काँसे का बर्तन बनाने वाला – कसेरा
26. जिसे कर्त्तव्य नहीं सूझ रहा हो – किंकर्तव्यविमूढ़
27. जो उपकार को माने – कृतज्ञ
28. जो उपकार को न माने – कृतघ्न
29. जो आँखों के सामने हो – प्रत्यक्ष
30. जो आँखों के सामने न हो – परोक्ष.

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MP Board Class 12th General Hindi व्याकरण अनेकार्थक शब्द

MP Board Class 12th General Hindi व्याकरण अनेकार्थक शब्द

प्रश्न 1.
अनेकार्थक शब्द की परिभाषा सोदाहरण दीजिए।
उत्तर –
प्रसंगानुसार भिन्न अर्थों में प्रयुक्त होने वाले अनेकार्थक शब्द कहलाते हैं;

जैसे –
काम – कामदेव, इच्छा, कार्य।
अम्बर – आकाश, वस्त्र।
उत्तर – हल, उत्तर दिशा, जवाब, बाद में।

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महत्त्वपूर्ण अनेकार्थ शब्द

1. अंक – गोद, चिह्न, नाटक का अंक, संध्या, पुण्य, अध्याय।
2. अंग – भाग, एक देश, शरीर का होई हिस्सा।
3. अनंत – अंतहीन, आकाश, विष्णु।
4. अर्क – सूर्य, काढ़ा या तत्त्व, आक का पौधा।
5. अर्थ – धन, मतलब, कारण, लिए, प्रयोजन।
6. अक्ष – आँख, सर्प, शान, धुरी, रथ, आत्मा, कील, मण्डल।
7. अज – बकरा, मेष राशि, दशरथ के पिता, ब्रह्मा, शिव, जीव।
8. अहि – सूर्य, साँप, कष्ट।
9. अक्षर – ब्रह्मा, विष्णु ‘अ’ आदि अक्षर, शिव, धर्म, मोक्ष ।
10. अच्युत – अविनाशी, स्थिर, कृष्ण, विष्णु।
11. आम – आम का फल, सर्वसाधारण, सामान्य।
12. अंतर – अवधि, आकाश, अवसर, मध्य, छिद्र।
13. अरुण – लाल, सूर्य, सूर्य का सारथि, सिन्दूर, वृक्ष, संध्या, राग।
14. अमृत – जल, दूध, अन्न, पारा।
15. अतिथि – मेहमान, साधु, यात्री, अपरिचित, राम का पोता या कुश का बेटा।
16. अपवाद – नियम के विरुद्ध, कलंक।
17. आपत्ति – मुसीबत, एतराज।
18. अलि – भौ .., पंक्ति, सखी।
19. अशोक – शोकरहित, एक प्रसिद्ध राजा, एक वृक्ष ।
20. अयन – घर, मार्ग, स्थान, आधा वर्ष ।
21. आराम – बाग, विश्राम, शांति।
22. आली – पंक्ति, सखी।
23. अर्थी – इच्छुक, मुर्दा रखने का तख्ता, याचक
24. अचल – पर्वत, स्थिर।
25. अवस्था – आयु, दशा।
26. ईश्वर – मालिक, धनी, परमात्मा।
27. इन्दु – चन्द्र, कपूर, नाम।
28. उत्तर – एक दिशा, जवाब, हल।
29. कंद – मिश्री, वह जड़ जो गुद्देदार और बिना रेशे के हो।
30. कनक – धतूरा, सोना।

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31. कला – किसी कार्य को करने की कुलशता, अंश, चन्द्र का सोलहवाँ भाग, शिल्प आदि विद्या।
32. कटाक्ष – तिरछी नजर, व्यथा, आक्षेप।
33. कसरत – व्यायाम, अधिकता।
34. काम – कामदेव, इच्छा, कार्य।
35. केतु – पताका या ध्वजा, एक ग्रह, पुच्छल तारा।
36. कृष्ण – काला, भगवान कृष्ण, वेद व्यास।
37. केवल – एकमात्र, विशुद्ध नाम।
38. कर – हाथ, लँड, किरण, टैक्स, करने की आज्ञा।
39. कोट – किला, पहनने का कोट ।
40. कोटि – करोड़, धनुष का सिरा, श्रेणी।
41. कषाय – कसैला, गेरू के रंग का।
42. कौरव – गीदड़, धृतराष्ट्र।
43. कुशल – खैरियत, चतुर ।
44. कबंध – एक राक्षस विशेष, पेटी (कमरबंध), राहु, धड़।
45. कल – कल आने वाला, दूसरा दिन, बीता हुआ दूसरा दिन, मशीन, सुंदर, चैन, ध्वनि।
46. काल – समय मृत्यु, यम, शिव, अकाल ।
47. केश – बाल, बादल, शुण्ड, बृहस्पति का बेटा।
48. कुम्भ – हाथी का मस्तक, राक्षस का नाम, तीर्थस्थल।
49. खर – गधा, दुष्ट, तीक्ष्ण, तिनका।
50. खल – दुष्ट, धतूरा, दवा आदि कूटने का खल।
51. गुण – रस्सी, विशेषता, तमोगुण, रजोगुण और सतोगुण।
52. गौ – भूमि, दिशा, वाणी, नेत्र, स्वर्ग, आकाश, शब्द

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53. गुरु – आचार्य, बड़ा, भारी, दो मात्राओं का अक्षर, देवताओं के गुरु बृहस्पति।
54. गण – समूह, भूत – प्रेतादि, शिव के सेवक।
55. गति – चाल, हालत, मोक्ष।

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MP Board Class 12th General Hindi व्याकरण विलोम शब्द

MP Board Class 12th General Hindi व्याकरण विलोम शब्द

प्रश्न 1.
विलोम शब्द की परिभाषा सोदाहरण दीजिए।
उत्तर-
एक-दूसरे के विपरीत या उल्टा, अर्थ बतलाने वाले शब्द विलोम शब्द कहलाते हैं। यह ध्यान दिया जाना चाहिए कि संज्ञा शब्द का विलोम या विपरीत शब्द संज्ञा ही होगा और विशेषण शब्द का विलोम शब्द विशेषण शब्द ही होगा;

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जैसे-
अनुराग = विराग,
आकाश = पाताल,
आज = कल आदि।

महत्त्वपूर्ण विलोम शब्द
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